Lok Sabha Debates
Further Discussion On Motion Of Thanks To The Presidents Address Moved By Shri ... on 4 February, 2020
Seventeenth Loksabha an> Title: Further discussion on Motion of thanks to the Presidents address moved by Shri Parvesh Sahib Singh Verma and seconded by Shri Ram Kripal Yadav on 3rd February 2020(Discussion not concluded).
श्री दिलीप घोष (मेदिनीपुर):माननीय अध्यक्षजी, महामहिमराष्ट्रपति जीका जो अभिभाषणहुआ है, मैंउसके समर्थनमें बोलने केलिए उपस्थितहुआ हूं । कलसे बहुत माननीयसदस्यों ने इसविषय पर अपनेविचार व्यक्तकिए हैं, आगे भी करेंगे । इस शुभ अवसरपर महामहिम नेऐतिहासिक भाषणदिया है, उन्होंने सरकारकी सराहना कीऔर उपलब्धियोंको सामने रखा,सबको प्रेरितकिया है, पूरे देश कोप्रेरित कियाहै ।
अब जो सरकारचल रही है,देश के यशस्वीप्रधान मंत्रीमाननीय मोदीजी उसका नेतृत्वकर रहे हैं ।उनके नेतृत्वमें जल, स्थल,अंतरिक्ष औरहर जगह दुनियामें देश काप्रभाव बढ़ रहाहै । पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण हर जगह भारतीयों का सम्मान बढ़ रहा है, भारत का सम्मान बढ़ रहा है । देश में आर्थिक, औद्योगिक,शिक्षा, चिकित्सा हर क्षेत्र में देश की प्रगति हो रही है और देश के लोग खुश हैं । इसीलिए, इस सरकार का आगे का जो काम है, वह ठीक से चले । माननीय प्रधान मंत्री जी का नेतृत्व हमारे लिए गौरवजनक है । इस प्रकार का नेता दुनिया में शायद ही किसी देश में कभी मिलता है । हमें इस प्रकार के नेता मिले हैं और उनके हाथ पकड़कर देश आगे बढ़ रहा है । हमारे प्रधान मंत्री जी ने इस देश के समाज को बहुत कुछ दिया है । खाने-पीने, रहने,खाना पकाने,शौचालय से लेकर मिसाइल तक सब कुछ दिया है, इसलिए देश खुश है ।
लेकिन, मैं बंगाल से आता हूं । यह एक सीमावर्ती प्रदेश है । सीमा असुरक्षित होने के कारण सबसे ज्यादा समस्या अभी बंगाल में ही है । 2225 कि.मी. की सीमा में से अभी 1000 कि.मी. में न कहीं बाड़ है, न कहीं बेड़ा है । इसलिए पार्श्ववर्ती देशों से आकर लोग हमारे देश में उत्पात मचाते हैं । वहां की सरकार नहीं चाहती है कि यह देश और यह राज्य सुरक्षित हो । …(व्यवधान)इसीलिए, मेरा कहना है कि हमारे प्रधान मंत्री जी की जो उपलब्धि है, वह काबिल ए तारीफ है । यह हमारे लिए गर्व की बात है । हमारे प्रधान मंत्री जी ने समाज को बहुत कुछ दिया है । बंगाल में लोगों के लिए जो सबसे बड़ी बात है, वह नाकरिकता कानून है । महोदय,हजारों-लाखों परिवार विस्थापित होकर, प्रताड़ित होकर अपनी मां-बहनों के सम्मान और धर्म रक्षा के लिए बांग्लादेश तथा पाकिस्तान से यहां आए हैं ।
अध्यक्ष महोदय,हमारे देश के पूर्वजों ने,महापुरुषों ने महात्मा गांधी से लेकर, पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह,हर पार्टी के,हर विचार के,हर सरकार के मुखिया लोग इन लोगों को नागरिकता देने के लिए वादा किया था, लेकिन किसी ने नहीं निभाया है । हमारी पार्टी के प्रतिष्ठाता डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी जो बंगाल से आते हैं, उन्होंने इस देश की अखंडता के लिए अपना बलिदान दिया और इन शरणार्थियों की जिन्दगी भर सेवा की । इन्हीं लोगों के अधिकार के लिए उन्होंने इस देश की पहला मंत्रिमंडल जो पंडित नेहरू जी के नेतृत्व में था, से अपना उद्योग मंत्री का पद छोड़ दिया,क्योंकि उनके सामने इन शरणार्थियों का सम्मान और सुरक्षा सर्वोपरि थी । उन्हीं लक्ष्यों को पूरा करते हुए माननीय मोदी जी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है । जो परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस नागरिकता कानून और नागरिकता के लिए राह देख रहे थे, उनके सपनों को उन्होंने पूरा किया है । ये लोग बांग्लादेश या पाकिस्तान छोड़कर इस देश में दो रुपये का चावल या दो रुपये का आटा खाने के लिए नहीं आए हैं और न ही आवास योजना,शौचालय या गैस के लिए आए हैं । इन लोगों ने अपने परिवार के लोगों को देश की स्वतंत्रता के लिए, बलिदान के लिए भेजा था । इस परिवार के लोग स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए, गोली खाई,फांसी पर चढ़ गए, इसलिए यह देश स्वतंत्र हुआ । आज हम आजादी का आनंद ले रहे हैं । इसलिए, इन लोगों को नागरिकता देना इस देश की,इस राष्ट्र की जिम्मेदारी थी । इस जिम्मेदारी को हमारे नेता माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने निभाया है । इसलिए, लोग रास्ते में उतरकर उनका अभिनन्दन करना चाहते हैं । मोदी जी ने बहुत कुछ दिया, लेकिन उनका सबसे बड़ा दान है, इन शरणार्थियों को नागरिकता देना । यह एक ऐतिहासिक कदम है । इसीलिए,ये लाखों परिवार युगों तक पीढ़ी दर पीढ़ी मोदी जी को याद करेंगे । इस ऐतिहासिक कदम के कारण जो लाखों लोग दुनिया के किसी भी देश के नागरिक नहीं थे, न बंग्लादेश,न पाकिस्तान,न अफगानिस्तान और न भारत, फिर भी इस देश में रह रहे थे, लेकिन उनको इस देश की नागरिकता का अधिकार नहीं था, उनको सम्मान नहीं था,वे शरणार्थी का स्टीकर लगाकर घूम रहे थे, पीढ़ी दर पीढ़ी अपमानित जीवन जी रहे थे, उनको एक सम्मानित नागरिकता मोदी जी दे रहे हैं । लेकिन, दुर्भाग्य से इसमें कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है । जब जम्मू-कश्मीर में हिन्दू पर अत्याचार होता है तो बंगाल में कोई रैली नहीं निकलती है, कोई धरना नहीं होता है । जब बंग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार होता है तो कोई रैली नहीं होती है । जब पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार होता है तो कोई शाहीन बाग नहीं होता है और न बांग्लादेश में हिन्दुओं के ऊपर अत्याचार होने से पार्क सर्कस में कोई जमावड़ा या सर्कस होता है, जो आज हम देख रहे हैं । विदेशी पैसे से विदेशी बिरयानी आ रहा है, उसमें मस्ती कर रहे हैं और फोटो खिंचवा रहे हैं । ऐसे बहुत से लोग देश में हैं, जो घोर निंदनीय हैं । इस देश के स्वाभिमान और अस्मिता के ऊपर चोट है । यह जो नाटक चल रहा है, इस नाटक का हम विरोध कर रहे हैं । यह नहीं चलना चाहिए । इसलिए, जिन लोगों ने कोलकाता के रास्ते में जुलूस निकालकर हाय-हाय सीएए और गो-बैक सीएए कर रहे हैं, मैं उनके बारे में बोलना चाहता हूं कि जब लाखों परिवार रात के अंधरे में बांग्लादेश से यहां आ रहे थे,तब आपने जुलूस क्यों नहीं निकाला,उनकी नागरिकता के लिए जुलूस क्यों नहीं निकाला?
आपने उन पर अत्याचार बंद करने के लिए जुलूस क्यों नहीं निकाले? इस संविधान ने जो अधिकार दिए हैं,उनका आधार लेकर आप संविधान का अपमान कर रहे हैं । इसलिए लाखों परिवार के लोगों के लिए जो यह ऐतिहासिक कानून बना है,यह उनके लिए राहत की सांस लेने जैसा है । इसलिए हम सरकार का अभिनंदन करने के लिए वहां पर रैली निकाल रहे हैं । अध्यक्ष महोदय, हमें रैली निकालने की,सभा करने की,प्रधान मंत्री का अभिनंदन करने की और कार्यक्रम करने की अनुमति ही नहीं है । हम जहां पर भी घोषणा करते हैं, वहां पर पुलिस मना कर देती है बल्कि वहां पर धारा 144 भी लागू कर देती है, जिससे हम कार्यक्रम न कर पाएं । हम जहां पर भी जाते हैं,वहां हमें अधिकारों को जताने के लिए और प्रधान मंत्री जी का अभिनंदन करने के लिए कानूनों का उल्लंघन करना पड़ता है । यहां पर कितनी विडम्बना है । हमारे पास समाज है, लेकिन हमें कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं है । जिनके पास कार्यक्रम करने के लिए लोग नहीं हैं, समर्थन नहीं है, जिनके पास कार्यकर्ता नहीं है, वे लोग रैली कर रहे हैं । आपस में झगड़ा कर रहे हैं । मारपीट कर रहे हैं । यह कितनी विड़म्बना है । देखिए यह तो ऐसा ही है जैसे घोड़े को ना मिले घास और गधे खा रहे हैं च्यवनप्राश । देश में यह स्थिति हो गई है । हमें बोलने में बड़ा दुख: होता है । हमें यहां पर जो डेमोक्रेसी सिखा रहे थे, मैं उनको बोलना चाहता हूं कि हमारे वहां पर डेमोक्रेसी क्या होती है । वहां पर दूसरा सबसे बड़ा दल हमारे पास है । हमें दो करोड़ तीस लाख लोगों ने वोट दिया है,लेकिन हमें कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं है । हमें रास्ते में उतरने की अनुमति नहीं है । हमें सभा करने की अनुमति नहीं है और जिसको कोई जानता भी नहीं है, जिसके साथ चार आदमी भी नहीं हैं, उसको अनुमति है । हमारी चीफ मिनिस्टर पूरे देश में घूमकर-घूमकर सभा कर रही हैं । वह विरोध कर रही हैं । जहां पर चार आदमी भी नहीं हैं, वहां पर भी कर रही हैं । वहां पर किसी ने भी मना नहीं किया, वहां उन्हें किसी ने भी नहीं रोका और हमें रोका जा रहा है । हमें नागरिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है ।
अध्यक्ष महोदय,यह बहुत ही दयनीय स्थिति है । यहां पर वे सदस्य हैं,जिनके सामने यह कानून पारित हुआ है । उन्होंने इस कानून की चर्चा में भाग लिया था । महामहिम राष्ट्रपति जी के दस्तखत के कारण यह कानून आज संविधान का एक हिस्सा बन गया है । यहां पर वे शपथ लेते हैं और कलकत्ता के चौराहों पर हाथ ऊपर करके शपथ लेते है कि वे कानून लागू नहीं होने देंगे । वे कानून को नहीं मानेंगे तो ऐसा कैसे हो सकता है । संवैधानिक पद्धति से जीतकर आया हुआ व्यक्ति ही इस संविधान की आलोचना करता है । वहां पर विधान सभा में संवैधानिक कानून के ऊपर निंदा प्रस्ताव लाया जाता है । यह सरासर संविधान का उल्लंघन है । इसकी निंदा होनी चाहिए । इस देश में संवैधानिक तौर पर यह किसी को भी अधिकार नहीं है । वे हमें डेमोक्रेसी को बचाने का पोस्टरदिखा रहे थे तो मैं उनको बोलना चाहता हूं कि संविधान को बेइज्जत किसने किया है? कांग्रेस ने तो इसको कागज का पुलिंदा बनाकर रख दिया है । संविधान का सम्मान कहां पर है? उन्होंने 72 सालों से संविधान को जैसा चाहे वैसे यूज़ किया है । वामपथिंयों और कम्यूनिस्टों ने कभी इसका सम्मान नहीं किया है । वे संविधान नहीं चाहते हैं बल्कि अराजकता चाहते हैं । आज भी देश में जहां पर कम्यूनिस्ट है, वहां पर अराजकता है । जहां पर अराजकता है तो वहां कम्यूनिस्ट है । विदेशी विचार,विदेशी प्रोत्साहन और विदेशी पैसा लेकर देश में उत्पात मचाना इनका धर्म हो गया है । हमारे वहां पर टीएमसी पार्टी कहां पर है और संविधान कहां पर है । उनका दूर-दूर तक संविधान के साथ कोई संबंध नहीं है । हमारे वहां पर संवैधानिक प्रमुख महामहिम राज्यपाल है, उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है । उनको रास्ते में खड़ा करके काला झंडा दिखाया जाता है । गर्वनर गोबैक बोला जाता है । सत्ताधारी पार्टी के लोग रास्ते में गवर्नर को काला झंड़ा दिखाते हैं । गाड़ी पर थप्पड़ मारते हैं, उनका अपमान करते हैं । उनको मुख्य मंत्री अपशब्द बोलते हैं । वे यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं । आप समझ सकते हैं कि चांसलर को वहां पर दीक्षांत समारोह में निमंत्रण नहीं है । यह हिन्दुस्तान में हो रहा है । अगर वे जाते हैं तो उनको गोबैक स्लोगन और काला झंड़ा दिखाया जाता है । यह हमारी डेमोक्रेसी में कहां पर है?क्या संविधान ने यह अधिकार किसी को दिया है? यह हमें देखना पड़ेगा । यह कलकत्ता यूनिवर्सिटी की रोज की घटना है । उनको पुरानी और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में एंट्री नहीं है । जब वे दीक्षांत समारोह में गए तो सभी विद्यार्थियों को उनके पीछे लगा दिया गया । वहां पर एक घंटे तक नारेबाजी हुई, काला झंडा दिखाया गया । उनको मजबूरन शांति के लिए वापस आना पड़ा । यह वहां की डेमोक्रेसी है । यह संविधान का सम्मान है ।
अध्यक्ष महोदय,हम सांसद है । हमें सात लाख लोगों ने वोट दिया है, लेकिन वहां की डीएम हमसे नहीं मिलती है । हमें अपॉइंटमेंट नहीं देती है । मेरे साथ बैठे हुए सदस्यों को पूछिए, वहां के एसपी और डीएम हमसे नहीं मिलते हैं । यह अधिकार उनको किसने दिया है? संविधान और लोकतंत्र ने हमें अधिकार दिया है । हम जनता के प्रतिनिधि बनकर यहां पर आए हैं और हमसे वहां के सरकारी ऑफिसर्स नहीं मिलते हैं । हमसे बात नहीं करते हैं । वहां पर डीएम “दिशा”कमेटी नहीं बनाते हैं । वहां पर “दिशा” कमेटी की मीटिंग नहीं होती है । समाज ने जिसको सम्मान दिया है, जिसको चुना है क्या आप उसको अधिकार नहीं देंगे? मैं विधायक रहते समय दो हॉस्पिटल और रोगी सहायता समिति का चैयरमेन था । वहां पर मैंने दो तीन बार मीटिंग ली और मैंने वहां का डाटा लेकर हैल्थ मिशन को बताया कि यह होना चाहिए तो दूसरे ही दिन मुझे दोनों कमेटीज से हटा दिया गया ।
मुझे दोनों कमेटीज से हटा दिया गया । उसके पहले एमएलए वहां चेयरमैन होते थे, लेकिन मेरे आते ही सारा कानून बदल गया । हम एक जनप्रतिनिधि हैं,लेकिन हमें कहीं भी सर्किट हाउस नहीं दिया जाता है, सरकारी गेस्ट हाउस में हमें रहने के लिए जगह नहीं दी जाती है । हम लोगों – चाहे एमएलए हों या एमपी, को किसी सरकारी अनुष्ठान में नहीं बुलाया जाता है । इन लोगों को यह अधिकार किसने दिया है?
महोदय, एक और मजेदार बात है, आप सुनेंगे तो आपको तरस आएगी । एक ग्रामीण मेला का उद्घाटन कार्यक्रम था, उसे चलाने वाले टीएमसी के लोग थे । वहां के वरिष्ठ विधायक और वहां के प्रमुख कार्यकर्ता उसके संरक्षक थे और चुनाव जीतने के बाद मुझे वहां का चीफ पैट्रन बनाया गया । मैंने गलती कर दी और मैं उद्घाटन में पहुंच गया । वहां के विधायक वहां बैठे थे,मेरे बगल में बैठे थे, सीनियर और सज्जन व्यक्ति हैं, इसलिए मैंने नमस्ते किया,थोड़ी सी बातचीत की । हमारी कोई राजनीतिक बात नहीं हुई, प्रोग्राम खत्म होने पर,मैं वहां से निकलकर दूसरे स्कूल के प्रोग्राम में चला गया । एक घण्टे के बाद मेरे पास खबर आई कि उस विधायक को टीएमसी ने शो-कॉज नोटिस दे दिया । इसका कारण क्या है? उसने दिलीप घोष के साथ बात क्यों की,एक लाइन में क्यों बैठा, क्यों मंच साझा किया? आप समझ सकते हैं कि यह इनकी राजनीति है,ये लोग हमें डेमोक्रेसी सिखाते हैं, संविधान दिखाते हैं । इस अस्पृश्यता की, अनटचेबिल्टी की हमारे देश की राजनीति में कोई जगह नहीं है, लेकिन आज बंगाल में यही राजनीति चल रही है । मुझे बड़े दुख के साथ बोलना पड़ रहा है कि आज यही स्थिति वहां पर है ।
महोदय, आपको आश्चर्य होगा,अभी माननीय प्रधान मंत्री जी का बंगाल में प्रवास रहा । वे जिस रास्ते से जाने वाले थे,वहां जगह-जगह पर लोग काले झण्डे लेकर खड़े हो गए – प्राइम मिनिस्टर गो बैक । आप समझ सकते हैं कि देश के सबसे यशस्वी और सबसे पॉपुलर प्राइम मिनिस्टर, जिनका पूरी दुनिया में सम्मान है, जिस मोदी जी का स्वागत करने के लिए बड़े-बड़े नेता और बड़े-बड़े देश रेड कार्पेट बिछाकर खड़े रहते हैं, उनको ‘गो बैक’ उस बंगाल में कहा जाता है, जहां से वन्दे मातरम और जय हिन्द आए । वहां पाकिस्तान जिन्दाबाद और आज़ादी की बात हो सकती है, लेकिन अगर वहां प्राइम मिनिस्टर उद्घाटन कार्यक्रम में जाएंगे तो उनको काला झण्डा दिखाया जाएगा, ‘गो बैक’ बोला जाएगा । क्या यही प्रधान मंत्री का सम्मान है?
महोदय, एक और मजेदार बात है, वहां रोहिंग्या आते हैं म्यांमार से, उनको कोई ‘गो बैक’ नहीं बोलता है । बांग्लादेश से घुसपैठिए आते हैं, उनको ‘गो बैक’ नहीं बोला जाता है,उनको वेलकम बोला जाता है, क्योंकि वे वोटर्स हैं,लेकिन प्राइम मिनिस्टर को और गवर्नर को ‘गो बैक’ बोला जाता है । आज बंगाल की यही स्थिति है । मुझे बहुत दुख के साथ बोलना पड़ रहा है, वहां यह स्थिति चल रही है । कॉलेज में,स्कूल में बच्चों को सिखाया जाता है कि देश का विरोध कैसे करना है,देश विरोधी कैसे बनना है । वहां लोग जगह-जगह पर बैठकर धरना दे रहे हैं । चार-छ:-दस लोग बैठकर आज़ादी का गाना गाते हैं, लेकिन मुसीबत तब आई जब चीफ मिनिस्टर उनको उकसा रही थीं कि ऐसा करो और गलती से उन बेचारों ने चीफ मिनिस्टर को भी ‘गो बैक’बोल दिया । यह भी हम लोगों को देखना पड़ा । वे बड़ी दुखी हो गईं । अरे भाई, ऐसा एक दिन तो होना ही था, जल्दी हो गया, अच्छा है, कम से कम आपको ज्ञान आएगा । यही स्थिति वहां है ।
महोदय, यहां जो कानून पास हुआ,जब मैं वापस कोलकाता गया,तो देखा कि वहां पूरे प्रदेश में आग जल रही है । रेल की पटरियों को उखाड़कर फेंका गया,ट्रेनों को फूंका गया, बसों को फूंका गया, स्टेशनों को फूंका गया । पूरे देश में जितना नुकसान हुआ - 500 करोड़ रुपये या 600 करोड़ रुपये,उसमें सबसे ज्यादा नुकसान बंगाल में हुआ है । सबसे ज्यादा राष्ट्रीय सम्पत्ति का नुकसान बंगाल में हुआ है, लेकिन दुर्भाग्य है कि इन… * की सरकार है वहां । पुलिस खड़ी रह गई, न एक डण्डा चलाया, न एक एफआईआर दर्ज हुई,गोली मारना तो बहुत दूर की बात है । हमने इसका विरोध किया तो हमें बदनाम किया जा रहा है । हमने इसका विरोध किया । हम एक देशभक्त हैं, हमारे पैसे से ट्रेन-बस खरीदी जाती है, लाइन बनती है, स्टेशन बनता है, हम अपने पैसे को बर्बाद होते नहीं देख सकते हैं, इसलिए हमने विरोध किया और हमारी भाषा को लेकर, हमारी बात को लेकर वहां बवंडर खड़ा किया गया, हमारे ऊपर एफआईआर दर्ज की जा रही है । अरे,आप लोगों की हिम्मत ही नहीं देश विरोधियों से लड़ने की और हम वे लोग हैं कि हमारे पूर्वज, हमारे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस देश के शत्रुओं के खिलाफ लड़े हैं । उन्होंने देश की अखण्डता के लिए बलिदान दिया है । आप केवल सत्ता का उपभोग कर रहे हैं, सत्ता की रबड़ी खा रहे हैं । हम अपने खून से इस देश को सींचने वाले हैं, इस देश की आज़ादी को सींचने वाले लोग हैं । जब बंगाल और पाकिस्तान में आग जल रही थी, किसी की हिम्मत नहीं हुई, श्यामा प्रसाद मुखर्जी वहां गए । जब कश्मीर में आग जल रही थी,लोगों के मना करने के बाद भी हथेली पर जान लेकर वहां गए और देखते-देखते अपनी जान गंवा दी, वहां शहीद हो गए । इसीलिए आज कश्मीर भारत के साथ है, जो चीजें बची हुई थीं, उनको आज मोदी जी ने पूरा कर दिया, अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर पूरे देश के साथ विलय कर दिया ।
महोदय, आज हम एक ऐसे राज्य में रह रहे हैं,जहां लगता है कि हम देश में हैं,लेकिन हम देश में नहीं है । बंगाल में हर चीज अनोखी होती है - संविधान से बाहर, डेमोक्रेसी से बाहर और परम्परा से बाहर होती है । वहां से लोग जाकर देश में कहीं भी हंगामा कर सकते हैं, लेकिन आप वहां किसी भी प्रकार से विरोध नहीं जता सकते हैं । आप यह बात नहीं कर सकते हैं । अभी विधान सभा में सीएए के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव आया । हमने डिवीजन मांगा । … * …(व्यवधान) यह घोर निन्दनीय है । …(व्यवधान)इसलिए …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय दिलीप जी, किसी भी विधान सभा के अध्यक्ष के बारे में यहां वक्तव्य नहीं देते हैं । उसको कार्यवाही से हटा दें ।
…(व्यवधान)
श्री दिलीप घोष : माननीयअध्यक्ष जी,यहां महामहिमराष्ट्रपति जीका ऐतिहासिकभाषण हुआ । प्रेरणादायीभाषण हुआ । हमबैठे-बैठेटेबल थपथपा रहेथे, सुन रहेथे, प्रेरितहो रहे थे औरकुछ लोग वहांसे आकर हाथमें प्लेकार्डलेकर दिखा रहेथे- “नो सीएए,”अरे, नोटीएमसी, नोकांग्रेस, नो सीपीएम ।कल का भारतऐसा होगा किलोग बोलेंगेकि नो कांग्रेस,नो टीएमसी,नो सीपीएम । इसलिए आज हमवहां की आवाजयहां पहुंचातेहैं । जिस देशसे ‘वंदेमातरम्’की आवाज आईथी, जिस देशसे ‘जयहिन्द’का नारा लगाथा, जिस देशसे सैकड़ों-हजारों नौजवानोंने आज़ादी केलिए अपनी जानदी थी, आजवहां फिर आज़ादीमांगी जा रहीहै । किस बातकी आप आज़ादीमांगते हैं?इसीलिए जिनलोगों ने एकदिन इन लोगोंको धोखा दिया,जो लोग राष्ट्रभावसे प्रेरित होकरकांग्रेस कोलाए थे, आजकांग्रेस कीदुर्दशा है किदो ही सीटेंमिली हैं । जोकम्युनिस्ट हैं,परिवर्तन कानारा लगाकर लोगोंके अधिकार कोसुरक्षित करनेका वायदा कियाथा, उन्होंनेधोखा किया तोएक समय की 36सीट से आजये फिगर ज़ीरोहो गई है । बाकीका अभी शुरूहुआ है, हाफहुआ है, अगलेचुनाव में साफकरेंगे । इन्हींशब्दों के साथसभी को धन्यवादकरते हुए मैंअपनी बात समाप्तकरता हूं ।
SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Thank you, Hon. Speaker, Sir, for giving this opportunity to speak on Motion of Thanks on President’s Address.
14.22 hrs (Dr. Kakoli Ghosh Dastidar in the Chair) मैडम, प्रेसीडेंट एड्रैस का जो डाइरेक्शन होता है, सरकार ने अभी तक क्या किया है, आने वाले समय में सरकार क्या करेगी, प्रेसीडेंट एड्रैस में उसी का डाइरेक्शन होता है । इसके पहले पेज के तीसरे पैरा में स्पष्ट रूप से प्रिय बाबू जी के ड्रीम ग्राम स्वराज्य के बारे में बात की गई है,बाबा साहेब अम्बेडकर के सोशल जस्टिस के बारे में बात की गई है और नेहरू जी के मॉडर्न इंडिया के बारे में बात की गई है । इसके अलावा और भी नेता लोगों के बारे में प्रेसीडेंट एड्रैस में मेंशन किया गया है । यूपीए सरकार को गए हुए 6 साल हो गए हैं । लगभग उसी समय से हमारी टीआरएस सरकार भी तेलंगाना में है । हमारी तेलंगाना सरकार का 6 साल का समय है, नया राज्य है । उस नए राज्य में जिस तरीके से ग्राम स्वराज्य के बारे में सरकार ने जो बात कही है,उसके बारे में मैं इस सदन के माध्यम से देश और सदन दोनों को बताना चाहता हूं कि हमारे देश की आज़ादी के 72 साल बाद भी आज की स्थिति में गांवों का विकास नहीं हुआ है । हमारे नेता केसीआर साहब ने तेलंगाना में ‘पल्ले प्रगति विलेज डेवलपमेंट’के नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है । पार्टी लाइन से ऊपर उठकर इस बात को सुनने की जरूरत है । जो पल्ले प्रगति हम लोगों ने टेक-अप किया है, स्वतंत्रता आने के बाद भी आज भी गांवों में, जब आदमी मरता है तो उसको जलाने के लिए बहुत से गांवों में क्रीमेशन ग्राउंड्स भी नहीं हैं । बहुत दुख की बात है । कुछ कुछ गांवों में अभी भी हम देखते हैं कि जब कोई गरीब लोग मरते हैं तो रोड की बगल में उनको जला देते हैं । गांधी जी का जो सपना था,उस सपने को पूरा करने के लिए हमारे नेता ने कदम उठाया है । उसमें पहले तो पूरे गांव में,हरेक गांव में,वैकुंठधामम् के नाम से क्रीमेशन ग्राउंड की पूरी पक्की बिल्डिंग्स बनाई हैं । उसके साथ-साथ हरेक गांव में, अभी तक हम लोगों ने हरेक गांव में ग्राम पंचायत के लिए एक-एक ट्रैक्टर 10500 रुपये का खरीदकर दिया है । अभी तक 6017 ट्रैक्टर्स ऑलरेडी आ गए हैं । अभी चार हजार ट्रैक्टर्स आने हैं । यदि किसी गरीब के घर में शादी होती है,पानी की जरूरत है या कोई और दिक्कत है, तो इन कामों में ट्रैक्टर काम में आता है । गाँवों का डेवलपमेंट करने के लिए यह कदम उठाया गया है । हरेक गाँव में एक नर्सरी डेवलप की गई है । अभी तक 12,751 गाँवों में नर्सरी डेवलप की गई है । इसके साथ-साथ, गाँवों के अंदर रोड्स के बगल में 10.78 करोड़ रुपये का प्लांटेशन किया गया है ।
माननीय प्रेसिडेंट साहब ने जो एड्रेस किया है, उसमें उन्होंने गांधी जी का नाम लिया है, इसलिए हम पहले गाँवों के बारे में बात करना चाहते हैं,बाद में दूसरे इश्यूज को टेक-अप करना चाहते हैं । अगर हम गाँव में जाते हैं,तो सड़क के दोनों ओर ‘हरिथा हरम’नाम से प्लांटेशन रहता है । आज भी पेपर में आया है,जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक बात बताई है कि अगर पुराने बोरवेल में पानी नहीं मिलता है, देश में बहुत दफा बोरवेल्स में बच्चे बच्चे गिर जाते हैं,जिसे मीडिया के माध्यम से हम देखते हैं । हम लोगों ने हरेक गाँवों में इस तरह के बोरवेल्स को आइडेंटिफाई किया है और 9,954 बोरवेल्स को बंद कर दिया गया है ।
जितने भी पुराने घर हैं, जो गिरने वाले हैं, उनको भी तोड़ दिया गया है । इस तरह से हम लोग 30-35 पॉइंट्स को लेकर विलेज डेवलपमेंट के लिए हमारे नेता केसीआर साहब ने काम किया है । हमारे स्टेट की उम्र बहुत ही कम है । इसे हम लोग छ: साल में कर पाए हैं ।
आपके माध्यम से हम हाउस के मेम्बर्स से रिक्वेस्ट करना चाहते हैं कि आप लोग एक दफा हमारे यहाँ आइए और हमारे यहाँ के गाँवों का डेवलपमेंट देख लीजिए । इस तरह से हम लोगों ने गाँवों के डेवलपमेंट के लिए काफी कुछ किया है ।
पेज नम्बर 6 पर पैरा 25 में प्रेसिडेंट साहब ने एक बात बताई है, जिसमें लिखा गया है कि 15 करोड़ हाउसेज के लिए पानी नहीं है । सेन्ट्रल गवर्नमेंट उनको पानी देने के लिए कदम उठा रही है,ऐसा लिखा गया है । इसका मतलब है कि अगर एक-एक घर में चार आदमी हैं, तो अभी तक 60 करोड़ लोगों के लिए पीने का पानी नहीं है । उसी की वजह से हमारे नेता ने ‘मिशन भागीरथ’के माध्यम से पिछले चार साल में हरेक गाँव के हरेक घर में पानी पहुँचा दिया है । हमने उसका उद्घाटन ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर साहब से करवाया है । इसे देखने के बाद ही ‘हर घर में जल’ के लिए कदम उठाया गया है । यह सारा काम हमने चार साल में किया है । इसे आप लोग भी ‘जल जीवन मिशन’ के नाम से कर रहे हैं, यह अच्छी बात है ।
दूसरे पॉइंट पर आपने डेवलपमेंट के बारे में बात की है । इसमें 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लिए वर्ष 2024 का लक्ष्य रखा गया है । हम लोगों ने रीसेन्टली फाइनेंस के बजट में भी देखा है । एज़-ऑन-डेट हमने 2.93 ट्रिलियन यूएसडी अचीव किया है । हम लोगों को 2021-2022, 2022-2023, 2023-2024 तक पांच ट्रिलियन यूएसडी अचीव करने के लिए करीब-करीब 15-16 परसेंट ग्रोथ-रेट की रिक्वायरमेंट है । आज तक कभी भी हम लोग यह ग्रोथ-रेट अचीव नहीं कर पाए हैं । हम यह ग्रोथ-रेट अचीव नहीं कर पाए हैं, लेकिन इन्डीविजुअली हमारे स्टेट में हमने पिछले दो-तीन सालों में 15 परसेंट तक जीडीपी अचीव की है । हमने वह ग्रोथ अचीव की है । अभी भी ऑनरेबल फाइनेंस मिनिस्टर ने बताया कि नॉर्मल ग्रोथ-रेट 10 परसेंट है । अगर नॉर्मल ग्रोथ-रेट 10 परसेंट है तो फूड इन्फ्लेशन,जो पांच परसेंट है, उसे माइनस करें तो केवल 5 परसेंट की ग्रोथ-रेट है । फाइव ट्रिलियन यूएसडी इकोनॉमी को अचीव करने के लिए 16 परसेंट की कन्टिन्यूअस ग्रोथ रेट नेक्स्ट फोर इयर्स तक अचीव करनी पड़ेगी । यह कैसे होगा? इसका रोडमैप क्या है? स्टेट्स के साथ आप लोग क्या-क्या कर रहे हैं?यह सब भी देखना पड़ेगा ।
इसके साथ-साथ आपने फार्मर्स की इनकम डबल करने के बारे में बताया । मैं इस हाउस में एक बात बोलना चाहता हूं । फार्मर्स के बारे में पहली बार हमारे नेता केसीआर साहब ने सोचा है । सोचने के बाद हर एकड़ के लिए दस हज़ार रुपये की ‘रायतु बंधु’स्कीम दी है । दस हज़ार रुपये हर एकड़ के लिए,फार्मर को प्रोटेक्ट करने के लिए हमने दिया है । हम लोग इसे दो बार, पांच हजार रुपये के रूप में देते हैं । इसे देखने के बाद आपने भी अच्छा किया है,दो-दो हज़ार रुपये तीन बार देना शुरू कर दिया है । इसे भी तेलंगाना के स्टार्ट करने के बाद आपने स्टार्ट कर दिया है ।
वहां जितना भी धान होता है, उसे हमारा स्टेट पूरा परचेज़ कर रहा है । इसके लिए हमें सेंट्रल गवर्नमेंट के सपोर्ट की काफी जरूरत है । अगर आपका विज़न चार सालों में पांच ट्रिलियन इकोनॉमी को अचीव करना है तो गांव डेवलप करने हैं, फार्मर्स डेवलप करने हैं । इस डेवलपमेंट की बहुत ही जरूरत है । इसके ऊपर भी ध्यान देना चाहिए । इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है ।
इसके साथ-साथ प्रेसिडेंशियल एड्रेस में 112 एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स के बारे में बताया गया है । हम लोग हाउस में इस बारे में डिस्कस कर रहे हैं । इसके लिए जितने फंड्स देने चाहिए, वह भी नहीं दे पा रहे हैं । इसकी वजह से हमारे यहां डेवलपमेंट पर इफेक्ट पड़ रहा है । इसके साथ-साथ इसी प्रेसिडेंशियल एड्रेस में पेज नंबर-19 के पैरा-70में ‘वन नेशन,वन टैक्स’ के बारे में बताया गया है । उस समय हम सबने यह सोचा कि ‘वन नेशन,वन टैक्स’ के लिए हम गवर्नमेंट को फ्री-हैण्ड दे दें । सब स्टेट्स ने इस पर एग्री किया है । ‘वन नेशन, वन टैक्स’से जो भी टैक्स कम होगा, उस पर सेंट्रल गवर्नमेंट बहुत क्लियरली स्टेट्स को सपोर्ट करेगी, यह बताया गया है । स्टेट्स को यह सपोर्ट नहीं मिल रहा है । इस सबसे इकोनॉमी के ऊपर इफेक्ट पड़ रहा है । इसीलिए,मुझे इतना बोलने की जरूरत है ।
इसके साथ-साथ अगर15वें फाइनेंस कमीशन को देखें तो उसमें पूरे साउथ इंडिया के साथ अन्याय हो रहा है । साउथ इंडिया के सभी स्टेट्स के, हमारे स्टेट को इन्क्लूड कर के, काफी फंड्स कम कर दिए गए हैं । ईस्ट इंडिया में भी यह हुआ है । इससे साउथ इंडिया और ईस्ट इंडिया में काफी इफेक्ट पड़ा है । इसकी वजह से इस कमीशन के बारे में आप सोचें । जिस तरह से आपने कैल्कुलेशन्स की हैं, उन कैल्कुलेशन्स से हम लोग एग्री नहीं कर रहे हैं । पहले से जो देना है, वह सब भी आप इस प्रोजेक्ट के साथ दें, ऐसा हम लोग बोल रहे हैं ।
अम्बेडकर जी का एस.सी./एस.टी. और ओ.बी.सी. के लिए सपना था, इसलिए हमारे स्टेट में 700 रेजिडेंशियल स्कूल्स हमारे नेता ने खोले हैं,जिससे हर गरीब का बच्चा अच्छे रेजिडेंशियल स्कूल में पढ़े और आगे बढ़े । सबसे जरूरी बात है, लेकिन ऑनरेबल स्पीकर साहब अभी नहीं हैं । मैं यहां दो-तीन इश्यू मेंशन करना चाहता हूं । ए.पी.रीऑर्गेनाइजेशन के अनुसार बहुत इश्यूज पेण्डिंग हैं । वह बिल इसी हाउस में पास हुआ था और स्टेट डिवाइड हो गया है । यह लिस्ट बहुत बड़ी है, लेकिन उतना मेरे पास टाइम नहीं है । मैं मांग कर रहा हूं कि आपने हमें जो प्रॉमिस की है, वह लिस्ट तो बड़ी है, लेकिन आप वे सब चीजें हमारी स्टेट को दें । जब भी देश का इश्यू आता है तो हमने इस सरकार को सपोर्ट किया है । जब 370 का बिल आया तो हमने 370 पर सपोर्ट किया था । हम लोगों ने जमकर सपोर्ट किया था । सब लोग बोल रहे थे कि यह काला दिन है, लेकिन हम लोगों ने कहा कि यह काला दिन नहीं, यह क्रांति का दिन है । जब सी.ए.ए. आया है तो हम लोगों ने उसका अपोज किया है । इसके लिए हमारे नेता ने हम लोगों से 4 घण्टे बात की । उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने के बाद देश में दिक्कत आ जाएगी । उन लोगों की मेजोरिटी है,लेकिन जहां तक हमारी बात है,हम सब लोग भाई-भाई हैं और सभी को मिलकर रहना है । हमने इस बिल का अपोज किया है ।
एक इश्यू यूरोपियन पार्लियामेंट प्रिसिडेंट का है । आप सब लोग जानते हैं । इस कंट्री में हम सब एक हैं । जब 370 का मामला आया तो हम लोगों ने मिलकर काम किया । अगर हमारे देश के बारे में कोई बाहर का बोलता है तो हम लोगों को भी तकलीफ होती है । यूरोपियन यूनियन में जिस तरह से लोग रिजलूशन पास करना चाहते थे, उसे हम लोगों के स्पीकर साहब के इंटरवेंशन ने रोका । इसलिए हम चाहते हैं कि जिस तरह से 71 पैरा में फेडरल कंट्री,जैसे, इण्डिया के बारे में मेंशन किया है, इस फेडरल कंट्री में हमारा स्टेट,जो यंग स्टेट है, वह काफी अच्छा डेवलपमेंट कर रहा है । इस डेवलपमेंट के लिए आप भी मदद करें । अगर हर स्टेट का विकास होगा,तभी देश का विकास होगा । धन्यवाद ।
श्री राजीव रंजन सिंह'ललन’ (मुंगेर):महोदया, हम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कर रहे हैं । राष्ट्रपति का जो अभिभाषण होता है, वह सरकार के पिछले कामों का लेखा-जोखा और आने वाले वर्षों में हम क्या करने वाले हैं, इसका पूर्ण विवरण और दर्शन होता है । इस बार राष्ट्रपति के अभिभाषण में एक विशेष चर्चा रही । हम माननीय अध्यक्ष, लोक सभा को बधाई देना चाहते हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण की कंडिका 6 में उन्होंने पिछले 7 महीने में लोक सभा का जो सत्र चला, उसकी उन्होंने प्रशंसा की है । इसका श्रेय माननीय अध्यक्ष जी को है और हम उनका अभिनन्दन करना चाहते हैं । श्रेय तो पूरे सदन का है और माननीय अध्यक्ष जी भी बार-बार कहते हैं कि सदन को इसका श्रेय मिलना चाहिए,लेकिन सदन का श्रेय तो है ही,परंतु इसके माध्यम तो माननीय अध्यक्ष महोदय हैं । इसलिए हम माननीय अध्यक्ष महोदय का अभिनन्दन करना चाहते हैं ।
महोदया, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में चर्चा है कि पिछली सरकार ने हर क्षेत्र में जो किया है, सर्वांगीण विकास की दिशा में सरकार बढ़ी है और बढ़ी भी है । चाहे वह पेयजल का क्षेत्र हो,झुग्गी-झोपड़ी का क्षेत्र हो,गंदी बस्तियों को इंदिरा आवास का क्षेत्र हो,सड़क का क्षेत्र हो, हर क्षेत्र में सरकार ने काम किया है । उपलब्धि तो हुई है और आगे भी करने का लक्ष्य और अपनी मंशा सरकार ने राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में स्पष्ट दिखाई है । लेकिन सिर्फ इसकी चर्चा करना कि हर क्षेत्र में हम विकास कर रहे हैं, इससे विकास नहीं होगा । महोदया, हर क्षेत्र का मतलब होता है- प्रदेश । यह संघीय ढांचे वाला देश है । हमारा फेडरल स्ट्रक्चर है । देश कोई राज्य नहीं है । देश अलग-अलग राज्यों को मिलाकर बना है और जब तक आप अलग-अलग राज्यों को विकसित नहीं करेंगे, वहां आप इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट नहीं करेंगे,तब तक आप विकसित राष्ट्र की कल्पना नहीं कर सकते हैं । अब ऐसे कई राज्य हैं । पिछली सरकार यूपीए की थी । यूपीए की सरकार ने रघुराम राजन कमेटी बनाई थी । रघुराम राजन कमेटी ने चिह्नित किया था और चिह्नित करके कई पिछड़े राज्यों के बारे में बताया था कि ये राज्य हैं,जो पिछड़े राज्य हैं और जब तक इन राज्यों को विकसित नहीं किया जाएगा तब तक आप विकसित राष्ट्र की कल्पना नहीं कर सकते हैं । मैं समझता हूं कि आप अगर हर क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं तो हर क्षेत्र का विकास करने के लिए जो पिछड़े राज्य हैं,जिनको चिह्नित किया गया है, उसमें बिहार भी है, उसमें ओडिशा भी है, उसमें झारखण्ड भी है, उसमें कई राज्य हैं जिनकी विभिन्न पैरामीटर्स पर रंगराजन कमेटी ने भी अनुशंसा की है । आप उनको भी जरा देखिए और देखकर जो पिछड़े राज्य हैं, जो पिछड़े प्रदेश हैं, उनको विकसित करने के लिए उन पर विशेष ध्यान केन्द्रित कीजिए,तभी आप विकसित राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं । मैं इसके तहत मांग करूंगा और बिहार की विधान सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव करके केन्द्र को भेजा है कि बिहार को विशेष पैकेज मिलना चाहिए, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए । इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और इस दिशा में कार्रवाई होनी चाहिए ।
महोदया, सरकार का मूल मंत्र है- सबका साथ,सबका विकास,सबका विश्वास । सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास आप कैसे अर्जित करेंगे?जब तक आप नीति नहीं बनाएंगे और उस नीति के आधार पर जो सबसे निचले पायदान पर खड़ा है अगर उसको आप प्रोत्साहित नहीं करेंगे, उसको आगे बढ़ाने के लिए आप अपनी नीति नहीं बनाएंगे तो कहां सबका साथ, सबका विकास होगा? वर्ष 1931 में इस देश में जनगणना हुई थी । वह जनगणना जातीय आधारित जनगणना थी । उसके बाद से आज तक जातीय आधारित जनगणना नहीं हुई है । आप जब जनगणना करते हैं तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को चिह्नित करते हैं । जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को चिह्नित करते हैं तो उसके अनुरूप, उसके पिछड़ेपन को देखते हुए नीति बनाते हैं । लेकिन आज की तारीख में इस देश में जितनी जातियां हैं,धर्म के आधार पर तो आप जनगणना कर लेते हैं, धर्म के आधार पर आप बांट देते हैं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को बांट देते हैं । लेकिन जो अन्य जाति के लोग हैं,अगर उनके दावों को जोड़ दिया जाए,जितने दावे आज अलग-अलग जाति के लोग कर रहे हैं,अगर उन सभी को जोड़ दिया जाए तो इस देश की जो वास्तविक जनगणना है, उससे तीन-चार गुना ज्यादा हो जाएगी । एक बार यह साफ तो होना चाहिए कि इस देश में जो जातीय आधार पर लोग दावा कर रहे हैं उसकी वास्तविक स्थिति क्या है?जब वास्तविक स्थिति सरकार जानेगी तो आपको नीति बनाने में सुविधा होगी । आपको पता चलेगा कि किस समाज के,किस जाति के कितने लोग हैं?
जब मंडल कमीशन में आरक्षण आया था, जब वह मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में गया था, तब मंडल कमीशन ने वर्ष 1931 की जो जातीय जनगणना थी, उसी को आधार माना था । आरक्षण की मांग होती रहती है । आज इस बात की भी आवश्यकता है कि अगर जातीय जनगणना हो जाए और आरक्षण की जो निर्धारित समय-सीमा है,अगर उसको बढ़ाना भी पड़े, तो आप संविधान में संशोधन करके बढ़ा दीजिए,ताकि समाज के हर तबके और हर लोगों को न्याय मिल सके । आप तभी सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास के सपने को साकार कर पाएंगे ।
महोदया, इस देश का माहौल पिछले शीत कालीन सत्र के बाद बहुत खराब हुआ है । इस देश के माहौल में ऐसा लग रहा है कि जैसे हम सभी लोग उसमें शामिल हैं और देश के माहौल को खराब कर रहे हैं । हमारा जो देश है, उसमें अलग-अलग संस्कृति है, उसमें अलग-अलग भाषा के लोग रहते हैं । हमारे देश की खूबी ही एकता में अनेकता है । संविधान का मूल मंत्र देश की एकता और अखंडता है । बहुत से लोग संविधान के मूल मंत्र की बात कर रहे हैं । सीएए के बारे में पूरे देश में जो भ्रम फैलाया जा रहा है, आज तक किसी ने नहीं कहा है,हमने नहीं देखा है । जब उस पर सदन में भी चर्चा हो रही थी, तब हम सभी लोगों ने उसका समर्थन किया था । तब भी किसी ने यह नहीं कहा था कि इस सिटिज़न अमेंडमेंड बिल के किस बिन्दु पर, किस धारा का विरोध होना चाहिए । वह कभी-भी कोई नहीं कहता है । इसलिए कि उसमें कुछ नहीं है । उसमें कुछ भी नहीं है । लेकिन उसको आधार बनाकर देश का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है । चुनाव लड़ना है,हर आदमी चुनाव लड़ता है । राजनीतिक दल हैं । हम कोई दातव्य औषधालय नहीं चलाते हैं । हम कोई हिमालय पर्वत पर जाकर आश्रम नहीं चलाते हैं । हम सभी लोग राजनीति करते हैं । राजनीति करते हैं, तो राजनीति करें । हमको चुनाव लड़ना है, तो हम चुनाव लडें । लेकिन हम चुनाव लड़ने के नाम पर अपने फायदे के लिए देश की एकता और देश की अखंडता के साथ खिलवाड़ करें, मैं यह नहीं समझता हूं कि वह उचित है । इसलिए, देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए,लेकिन ऐसा हो रहा है ।
आज भी इस सदन में चर्चा हो रही है । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है । सीएए की किसी भी धारा का, मेरा भी ज्ञानवर्धन हो जाएगा, अगर मैंने सीएए का समर्थन कर दिया है, तो यह हो सकता है कि मैंने उसका समर्थन अज्ञानता में कर दिया हो । लेकिन कोई ज़रा यह तो बताए कि आप सिटिज़न अमेंडमेंट एक्ट के किस बिन्दु का विरोध कर रहे हैं?…(व्यवधान)अभी जो गर्भ में भी नहीं है,एनआरसी, उसको उससे जोड़ रहे हैं । अरे, वाह भाई । अरे, जब गर्भ में आएगा, एनआरसी आएगा, तब हम सभी लोग देखेंगे कि एनआरसी क्या है । अगर एनआरसी आएगा, हम एनआरसी को देखेंगे, तो करेंगे ।…(व्यवधान)
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): What is your party’s stand? आप सपोर्ट करते हैं, या नहीं करते हैं?…(व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह'ललन': आपबैठ जाइए ।…(व्यवधान) आपको तो चुनावलड़ना है, इसलिए आप ड्रामाकर रहे हैं ।…(व्यवधान) सौगत राय जी,देश का कौन-सा संविधान है?आप बता दीजिए,आप बड़े वकील हैं । आप कानून की किताब लेकर हर समय खड़े हो जाते हैं । सौगत राय जी, आप बता दीजिए कि देश का कौन-सा संविधान और कौन-सा कानून है, जो राज्य सरकारें कहती हैं कि मेरे यहां सीएए नहीं लागू होगा,उनको कौन-सा कानून यह अधिकार देता है?…(व्यवधान)आप राजनीति करते हैं । राजनीति मत कीजिए ।…(व्यवधान) राजनीति कीजिएगा,तो श्रिंक कर रहे हैं ।…(व्यवधान)अरे, आप बैठ जाइए । हम केरल भी देख चुके हैं ।…(व्यवधान)राजनीति करते-करते…(व्यवधान)आप अपना देख लीजिए कि आप कहां थे और कहां पहुंच गए हैं, तो सिकुड़ते जाइएगा और सिकुड़ते जाएइगा । आप सिकुड़ के कहां चले जाएंगे,उसका पता-ठिकाना भी नहीं चलेगा ।…(व्यवधान)सभापति महोदय,इसलिए हम आपको यह बताना चाह रहे हैं कि देश का माहौल नहीं खराब होना चाहिए । राजनीति कीजिए । हम सब लोग राजनीतिक दलों के लोग हैं । अपनी-अपनी राजनीति करते हैं । राजनीति करने के लिए हम लोग स्वतंत्र हैं । लेकिन देश के माहौल को खराब नहीं करना चाहिए । …(व्यवधान)
महोदया, इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की स्थिति है । जम्मू-कश्मीर में धारा-370हटा दी गई, कानून बन गया,हमने उसका विरोध किया था । हमने अनुच्छेद 335ए का भी विरोध किया था । लेकिन आज वह कानून है । कानून बन गया । महोदया, जम्मू-कश्मीर भी इस देश का अंग है । अगर यह इस देश का ही अंग है तो आज आवश्यकता इस बात की है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतिए । सरकार को यह चाहिए कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा जीते,विश्वास जीते । यह तभी संभव होगा,जब जम्मू-कश्मीर में आप विकास की एक लंबी लकीर खींचेंगे । जब विकास की लंबी लकीर खींचेंगे तो जम्मू-कश्मीर के लोगों का विश्वास बढ़ेगा, भरोसा बढ़ेगा, वहां रोजगार पैदा होगा । आज जम्मू-कश्मीर में गरीबी बहुत है । मुझे भी कई बार जम्मू-कश्मीर जाने का मौका मिला है,विभिन्न कमेटियों के दौरों के क्रम में । जम्मू-कश्मीर का जो विकास है, आप श्रीनगर से पहलगाम चले जाइए, श्रीनगर से गुलमर्ग चले जाइए, वहां रोड की स्थिति इतनी खराब है कि जो टूरिस्ट स्पॉट्स में सबसे बेहत टूरिस्ट स्पॉट है, जब वहां विकास नहीं हुआ है तो पूरे जम्मू-कश्मीर में क्या विकास हुआ होगा । सबसे बड़ा कारण है, जम्मू-कश्मीर के लोगों में जो अविश्वास है, उनमें जो भरोसे की कमी हुई है, उसका कारण है कि वहां विकास नहीं हुआ है । आज जरूरत है कि वहां रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं । वहां विश्वास पैदा किया जाए । वहां भरोसा पैदा किया जाए । तभी जम्मू-कश्मीर के लोगों में भरोसा पैदा होगा ।
पूर्वोत्तर के इलाकों के लिए केन्द्र सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है । इनको नहीं समझ में आएगा । लेकिन नहीं समझ में आएगा, तो उनके नहीं समझने की चीज़ है । जो उनको नहीं समझना चाहते हैं,वे नहीं समझते हैं । लेकिन पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकार ने जो काम किया है, अभी ब्रूह जनजाति के लोगों के लिए,जो मिजोरम-त्रिपुरा और केन्द्र सरकार का जो समझौता हुआ है, वह बहुत ऐतिहासिक समझौता हुआ है । वह दशकों पुरानी समस्या थी । मिजोरम के ब्रूह जनजाति के लोग त्रिपुरा में शरण ले कर रह रहे थे । त्रिपुरा में एक बड़े हॉल में सौ-सौ,डेढ़-डेढ़ सौ,दो-दो सौ परिवार रहे रहे थे और वर्षों तथा दशकों से रह रहे थे । उस समस्या का समाधान केन्द्र सरकार ने किया है । हम इस काम के लिए आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और आदरणीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी को बधाई देते हैं । सरकार ने बोडो समस्या का समाधान किया है । सीएए के बाद सबसे ज्यादा माहौल खराब हुआ तो वहीं खराब करने का प्रयास किया गया । सबसे ज्यादा प्रयास हुआ । लेकिन इस केन्द्र की सरकार ने और आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और अमित शाह जी की सरकार ने जो वहां बोडो समस्या का समाधान किया, इस समस्या के कारण चार हजार से ज्यादा लोग मरे । उस समस्या का समाधान सरकार ने बैठ कर, समझौता करा कर, हस्ताक्षर करा कर निकाल दिया । पूर्वोत्तर राज्य के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है । आज जरूरत इस बात की है कि हमारे जो सीमावर्ती राज्य हैं, उन सीमावर्ती राज्यों में देश के साथ और देश की एकता और अखंडता के साथ उनका विश्वास बढ़ाया जाए और उसके साथ जोड़ा जाए । इस दिशा में केन्द्र सरकार ने बहुत ही बेहतर काम किया है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने वृद्धावस्था पेंशन की चर्चा अपने अभिभाषण में की है । वृद्धावस्था पेंशन तो आप दे रहे हैं । जो साठ साल से ज्यादा की उम्र के लोग हैं, जो वृद्ध हो जाते हैं, सीनियर सिटिजन हैं, उनको आप पेंशन दे रहे हैं । जरूर देना चाहिए । लेकिन उसकी सीमा को सीमिति नहीं रखना चाहिए । लेकिन उसकी सीमा को सीमित नहीं रखना चाहिए,क्योंकि सीमा अगर आप सीमित रखेंगे तो लोगों को लगता है कि उनको मिल रहा है, हमको नहीं मिल रहा है । हमारे राज्य में बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने यह किया है । बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने वहाँ एक नई योजना चलाई और उन्होंने मुख्य मंत्री वृद्ध जन पेंशन योजना चलाई । जितना केन्द्र सरकार देती है,देती है उसके अलावा उन्होंने,इस देश का पहला राज्य है- बिहार,जहाँ उन्होंने 60 साल से ऊपर के प्रत्येक परिवार को चाहे वह गरीब,अमीर है, दलित है, महा दलित है, पिछड़ा है, अति पिछड़ा है, धनी है,कोई भी है, ऊँची जाति का हो, कोई भी वृद्ध जो 60 साल की उम्र पार कर गया है,उसके लिए 400 रुपये महीना पेंशन की योजना शुरू की है । यह योजना उन्होंने शुरू की है और एक एक्सपेरिमेंट है । इस देश का बिहार पहला राज्य है,जिसने इसको किया है । हम चाहेंगे कि केन्द्र सरकार इसका भी थोड़ा और विस्तार करे और जो वृद्ध पेंशन के हकदार हैं,उनको वृद्ध पेंशन मिलनी चाहिए । वे बड़े निरीह हो जाते हैं । 60 साल की उम्र के बाद कोई काम के लायक नहीं रहते । बेटा अगर कमाने वाला नहीं है,तो सब उनको जरा हेय दृष्टि से देखते हैं । अगर 400 रुपये पॉकेट में रहेंगे तो सब थोड़ी-थोड़ी उनकी खुशामद करेंगे,सम्मान करेंगे । घर में सम्मान रहेगा । इसका विस्तार होना चाहिए ताकि वृद्धों की हम सेवा कर सकें ।
महोदया, इसके अलावा सबसे बड़ी जो चीज है,आज इस देश के सामने नहीं, बल्कि पूरे विश्व के सामने है । आज समस्या है- पर्यावरण की । पर्यावरण के लिए पूरा विश्व चिंतित है । पर्यावरण के लिए पूरी दुनिया में लोग सम्मेलन कर रहे हैं । जलवायु परिवर्तन के लिए काफी लोग चिंतित हैं । आज जरूरत है, इस बात की । केन्द्र सरकार ने भी जल जीवन मिशन शुरू किया है । राज्य की सरकार ने भी, हमारे बिहार में माननीय मुख्य मंत्री जी ने जल जीवन हरियाली शुरू किया है । हमारी हरियाली उसके साथ जुड़ी है, इसलिए कि बिहार और झारखंड का जब वर्ष 2000 में बंटवारा हुआ तो हमारे बिहार का जो हरित क्षेत्र था, जिसको आप ग्रीन फील्ड कहते हैं, हरित क्षेत्र का प्रतिशत 9 था । आज हम 9 से 15 प्रतिशत पर पहुँचे हैं और हमारे मुख्य मंत्री का लक्ष्य है कि हम उसको 18 परसेंट, 19 परसेंट पर हरित क्षेत्र का लक्ष्य बढ़ाएं । जब तक हरियाली नहीं होगी, जब तक यह नहीं होगा, तब तक जलवायु परिवर्तन को आप नियंत्रित नहीं कर सकते हैं । इसलिए आज बिहार में जल जीवन हरियाली शुरू हुई है । जितनी वाटर बॉडीज़ हैं,बिहार में बहुत समस्या है, पीने के पानी की समस्या हो गई थी । इस साल गंगा के उत्तर भाग में है, उत्तर भाग में कभी पानी की कमी नहीं होती थी और इस बार पहली बार महसूस किया गया कि गंगा के उत्तर भाग में भी पीने के पानी का जो भूभर्ग जल है, वह नीचे जा रहा है । चापाकल फेल हो रहे हैं,कुएं फेल हो रहे हैं, बोरिंग फेल हो रही है,उस स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसके विजन को उन्होंने आगे पाँच साल के बाद क्या समस्या होगी,उस समस्या को उन्होंने किया । उन्होंने वहाँ चिह्नित करके 24 हजार करोड़ रुपये की पाँच वर्ष की योजना बनाई है । जितने वाटर बॉडीज़ हैं, चाहे वह आहर हो, पईन हो, पोखर हो,कुआं हो, उनको एनक्रॉचमेंट फ्री कराकर, फिर से उसकी उड़ाही करके उसको ऑरिजनल शेप में लाना है । आज हम समझते हैं कि केन्द्र सरकार जो जल जीवन मिशन का काम चल रही है,उसका भी विस्तार थोड़ा आगे करना चाहिए, क्योंकि हमारा जो पर्यावरण है और जलवायु परिवर्तन है, यह आज हमारे लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए भी चिंता का विषय है ।
अभी बिल गेट्स बिहार गए थे और जब बिल गेट्स बिहार गए थे तो वे बिहार के मुख्य मंत्री से मिले थे । मुख्य मंत्री जी ने उनको डेढ़ घंटा जो जल जीवन हरियाली है, उसका प्रेजेंटेशन दिखाया । जब उन्होंने प्रेजेंटेशन दिखाया तो बिल गेट्स ने आकर यहाँ शायद उनकी नीति आयोग में या कहीं बैठक थी, उस बैठक में उन्होंने कहा कि मुझको आश्चर्य है कि जो काम फ्रांस को करना चाहिए,जो यूरोप के देशों को करना चाहिए, वह आज बिहार प्रदेश कर रहा है । वह अच्छा काम है और हम समझते हैं कि केन्द्र की सरकार को भी जो जल जीवन मिशन है, उसका और विस्तार करना चाहिए । उसका विस्तार करके उसको आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर आज दिल्ली में क्या होता है?
15.00 hrs महोदया, हम रोज टहलने वाले आदमी हैं, लेकिन हम चार महीने से टहले नहीं हैं । हम यहाँ इसलिए नहीं टहल रहे हैं कि कहीं टहलने से होने वाले फायदे की जगह प्रदूषण से नुकसान न हो जाए । इसलिए आज समस्या है और उस समस्या से निजात पाने की दिशा में आगे कार्रवाई होनी चाहिए ।
महोदया, आपने हमें बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आपके प्रति आभार । धन्यवाद ।
DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): Thank you, Madam Chairperson.
The annual Address by the hon. President has traditionally offered both the Houses of Parliament an opportunity to listen to the accomplishments of the Government of the day and serves as a report card on the work that has been achieved in the previous year.
15.01 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) What do we expect from any Government? It is security, development, conditions to promote growth and the well-being of the people and to fulfil the aspirations of our young society. All of us in this House waited eagerly for an honest and a comprehensive account of the challenges and successes of this Government in the last year. But we were sadly given an exercise in which facts gave way to fiction. An Address whose soaring rhetoric was completely divorced from the abject reality of our country’s social and economic situation, a concerted effort to mask the failures of the much-advertised flagship schemes of the present Government and an Address where grandstanding and propaganda were deployed effectively to mask the way in which this present Government has embraced failure, mediocrity and a dearth of solutions and ideas to take India forward. But beyond all of these aspects that we are now used to from this Government, the fact that the Address failed to even speak of the constitutional and political crisis that our country is facing in the face of nationwide protests was not just disappointing, but an abdication of any moral responsibility by the ruling dispensation.
There were, of course, the usual mentions and the expected omissions. There was a mention of India’s progress on the Ease of Doing Business Index. And, of course, no mention of our alarming and shameful fall in the Democracy Index, Global Competitiveness Index, Global Peace Index, and even in the Press Freedom Index.
There were ample mentions of the illusionary promise of a five trillion-dollar economy by 2024, but there was no mention of our lowest growth rates in four decades, alarming fall in the private consumption, rising inflation that is affecting all of us when we go to market, record unemployment, plummeting investments, or agricultural distress. You know that according to every economist, a five trillion-dollar economy requires 12 per cent growth a year. I am sure that Rashtrapati Ji should have been informed about it. Even our hon. Finance Minister only claimed nominal growth of 10 per cent in the future, from which you have to subtract inflation. The consumer price index in December, 2019 was at 6.7 per cent. Ten minus 6.7 per cent is 3.3 per cent. This 3.3 per cent was our growth last month. You compare that to 12 per cent and you realise that a five trillion-dollar economy is a pipe dream.
Of course, there was the usual lip service paid to Skill India, Digital India, and Startup India, but there was no mention of Standup India since you are so busy banning standup comedians! And there was no admission that your Government’s schemes should really be renamed, Sit Down India, Shut Down India, and Shut Up India. I would like to take just one example. This Government holds the world record for the largest number of internet shutdowns and in Jammu and Kashmir, the longest communications blockade and internet suspensions on any country in the world.
Now, frankly, the hon. President was required to make extravagant claims about various Government schemes in health, women's security, manufacturing, agriculture, and fisheries, etc., which are belied by the available official facts and figures. There was absolutely no acknowledgement of the failure to achieve targets. There was no acknowledgement of the 27 protesters killed by the police, the mounting Non-Performing Assets, the record pollution levels in our air and water, the increasing assaults on women, and the complete neglect of fisherfolk and coastal communities. Frankly, they are the people who are devastated by natural calamities such as hurricanes, floods, coastal erosion, and, of course, depleting fish stocks, and the Government just randomly announces a target that has no relation to reality and makes the hon. President utter it.
Then there is the prolonged detention of political leaders in Jammu and Kashmir that has not been mentioned . There is dramatic increase in the number of infiltrations across the LoC since the 5th of August. The Government figures have not been mentioned by the President. The fact is that everything from the decrease in defence allocation we had from the Finance Minister which is not even enough to match the rate of inflation, there are so many examples of poor governance by this Government in the last year that it is very clear that their clarion call recently quoted by an ally of theirs of ‘सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास ।’, honestly reminds me of what a Napoleon said about the holy Roman empire that it was neither holy, nor Roman and nor an empire. न सबका साथ है,न विकास है,न विश्वास है । All of these aspects pale in comparison with the larger crisis that is holding hostage the future of the India we cherish.
In these last few months, under this Government, we have witnessed a fundamental assault on the democratic, secular and constitutional fabric of India. That our forefathers – giants like Mahatma Gandhi Ji, Pandit Jawaharlal Nehru, Sardar Vallabhbhai Patel, Dr. Ambedkar, Maulana Azad and so many other giants of the Independence movement gave their lives for. Even as they have driven the economy into the doldrums, the present ruling dispensation has become a tukde-tukde gang. They are dividing this country into tukde – Hindu versus Muslims, देशद्रोही वर्सेज देशभक्त,रामजादे वर्सेज..मैं बोलूंगा नहीं, Hindi speakers versus non-Hindi speakers, and us versus them. In 1947, we had a partition of the Indian soil. In 2020, this Government is giving us a partition of the Indian soul.
Just starting with what has happened within the walls of this House, with the passing of far-reaching legislation such as disembowelling of the RTI Act, the UAPA Bill with its draconian measures, Jammu and Kashmir Re-organisation Bill, the CAA plus the declared intention by the Home Minister to launch a nation-wide NRC, and of course, the statements made by the Ruling Party Members outside the House (which I will not quote because they would demean the dignity of this House), we are facing an existential threat to the future of our democracy and the freedoms that we have taken for granted since our Independence from colonial rule over 75 years ago. To you, that is the old India and you want to replace it with a hollow façade that you have dubbed the new India.
In the old India, fought for by the blood of our forefathers and birthed in the crucible of our national struggle, the fundamental premise that was ultimately forged was that of access to a historically inalienable set of rights and freedoms. Prime was the freedom to choose what government you wanted, the freedom to choose what set of convictions to have, the freedom to choose what to wear, what to eat, what to drink and to speak, the freedom to move freely within the sovereign borders of our Republic, and the freedom to choose how and in what manner you would bow your head before your understanding of the force that guides the cosmos. All of these were freedoms enshrined in our Constitution and embedded not just in the letter of the law but in the spirit of the Constitution and in the lived experience of India and its people.
It is lamentable that those who followed us in government have not had the capacity, the vision, or the inclination to uphold this timeless legacy. Instead, in today’s times, that vision of India is questioned by rising intolerance, in which the forces unleashed by our present rulers have appropriated the tools of the State to marginalise and exclude. Though their language is modern, they seek to take India backward, not forward. For, after all, they made no sacrifices to shape India’s destiny, and for them our country is a plaything for the satisfaction of personal glories, for their narrow-minded ideology, and their communal prejudices. Their modern jargon conceals pre-modern beliefs and it is our duty in the opposition to pull away the hypocrisy and reveal the darkness lurking beneath.
It was appalling and distressing to see this Government actually make the President selectively quote the Father of our Nation, Mahatma Gandhi Ji, whose ideas they have wilfully disregarded in an attempt to legitimise the desecration of the very national unity that Mahatma Gandhi gave his life for.
The President’s Address quoted that the Mahatma said: “Hindus and Sikhs of Pakistan, who do not wish to live there, can come to India. It is the duty of the Government of India to ensure a normal life for them.” No one disagrees with that; Congress Party supports that fully, but this quote was then used to make the absurd claim that the draconian Citizenship Amendment Bill was a fulfilment of the Mahatma’s wishes. Now merely reproducing a line without its context, not only has the Government misled the Rahstrapati about the Rashtrapita, but has attempted yet another affront to a man who spent his lifetime advocating Hindu-Muslim unity, a man who fought till the very end to resist the idea that religion should determine nationhood which is sadly the idea they have embraced. Frankly, the President should have continued to quote Mahatma Gandhi Ji’s words. He has said at the same time: “to drive every Muslim from India would mean war and eternal ruin for the country. If such a suicidal policy is followed, it would spell the ruin of Hinduism in the Union. Good alone can beget good. Love breeds love. As for revenge, it behooves man to leave the evil-doer in God’s hands. The idea that India should only belong to Hindus is wrong. That way lies destruction.” Destruction is the path you want to take us on. Sir, I am anguished as I say these words.
Guided by the Mahatma ,we, in the Congress Party, have historically committed ourselves to sustaining an idea of India that is fundamentally different from the thinking of those who rule us today. In keeping with that heritage of which we are proud to be descendants of, let me remind my friends and colleagues in the House that amidst these sobering times it is easy to forget the value of ideas and our responsibility to commit ourselves to the power of ideas. But ideas are powerful. Ideas speak truth to power, they challenge the status quo and ultimately ideas have been responsible for taking our country out of darkness before and to a position of pride and greatness in the world which is now sadly eroding under your rule.
In these times, let us remember that our first Prime Minister, Pandit Jawaharlal Nehru, once memorably noted: “Failure comes only when we forget our ideals and objectives and principles.” This is why, we in the Congress have always believed in an idea of India where the first and the last voice, the ones that resonate loudly and the ones that have been marginalized and discriminated against, are both equally important in determining the future of the country. We are the only party that has historically championed the principle that India is a land that belongs to all Indians, irrespective of caste, religion, region, language, or socio-economic status. For us, ‘inclusive India’ is more than just a slogan; it is an aspiration, an objective, and a commitment.
After all, as Nehru Ji also wrote: “Idealism is tomorrow’s realism.”, It is our duty, even in the darkest hour, to keep alive the flame of our national idealism. If we accept without scrutiny, without question, and without challenge the fallacies and follies of today’s short-sighted and narrow minded leaders, we will leave for our children a land of injustice, a legacy of trauma, and a country divided and broken. We have daunting battles to fight against poverty, against malnutrition, against bigotry, against patriarchy, against illiteracy and against discrimination, but we must prevail in this greater struggle for the soul and the spirit of our nation.
If the Government continues down this very slippery slope, no matter how many leaders from history they borrow or whose name they seek to hijack, they will be exposed and history will see them for what they really are – men of straw with limited vision, unable to comprehend the great, diverse, united society they are meant to govern, not to divide and break up.
What we want in India is unity, they want uniformity. We believe in an India that unites our people, they seek to divide us. We seek to promote consensus, they demand conformity. Our ideology binds the people of India together, theirs separates one Indian from another. What we need in our new India is the strengthening of democracy and democratic institutions at all levels. We need transparency and accountability of this Government enforced through the Right to Information Act which they have hollowed out, and an active Parliament, a courageous Parliament. They seek to weaken these institutions, to hollow out RTI, to disregard Parliament which has become a …* for the BJP and to promote one-man or two-man rule.
Our new India must derive its support and strength from all sections of our diverse society. Your new India speaks of one faith and reduces others to second class status.
The choice is clear, my dear colleagues. We can either have a new India that belongs to all of us, led by a Government that works for all of us, or we can have a new India that belongs to some and serves the interests of a few. You can choose a new India that embodies hope or one that promotes fear. You can support a new India united in striving or an India divided by hatred.
What we need is an India whose progress takes place in an open society, in a rich and diverse and plural civilisation, in one that is open to the contention of ideas and interests within it, which is unafraid of the prowess or the products of the outside world, but which is wedded to the democratic pluralism that is India’s greatest strength, and determined to liberate and fulfil the creative energies of its people.
The President’s Address sadly fails to live up to these national aspirations and therefore, I regret that we must reject this Motion of Thanks.
Jai Hind.
THE MINISTER OF LAW AND JUSTICE, MINISTER OF COMMUNICATIONS AND MINISTER OF ELECTRONICS AND INFORMATION TECHNOLOGY (SHRI RAVI SHANKAR PRASAD): Sir, I only want to bring one fact to your kind notice. Our esteemed friends from the Opposition can criticise us that what they are doing is right but to criticise the Parliament as a … * which he just said..…(Interruptions) Secondly, we are using Parliament to pass laws. Obviously, they can criticise us. But kindly check it up, Sir. Parliament as an institution needs to be respected. That is all I want to say.
HON. CHAIRPERSON : I will check it up.
डॉ. सत्यपाल सिंह (बागपत): सभापतिमहोदय, धन्यवाद ।
Sir, before saying my thoughts on the limited portion of the hon. President’s Address, I must congratulate Dr. Shashi Tharoor for his eloquent speech which is mostly devoid of facts.…(Interruptions)
मैं देश के आदरणीय राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों को दिए गए अभिभाषण पर, सरकार को जो उनका मार्गदर्शन हुआ और देश के स्वर्णिम भविष्य के लिए उन्होंने जो रूप-रेखा तय की, उसके लिए मैं उनका अभिवादन भी करता हूं, अभिनन्दन भी करता हूं और उनकी सभी बातों का अनुमोदन भी करता हूं ।
राष्ट्रपति महोदय ने कुछ बातें कहकर गागर में सागर भर दिया । उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे पवित्र होता है लोगों से मिला जनादेश । देश की जनता ने वर्तमान सरकार को जो अद्भुत विशाल जनादेश दिया है, वह एक नए भारत के निर्माण के लिए दिया है । यह नया भारत कैसा,एक ऐसा नया भारत,जिसमें हमारी पुरानी संस्कृति का गौरव हो और जो 21वीं सदी के विश्व को अपने ज्ञान की शक्ति से समृद्ध करे । एक ऐसा नया भारत जिसमें पुरानी समस्याओं के समाधान के साथ ही विकास के नए अध्याय लिखे जाएं । यही सपना,डॉ. शशि थरूर जी अभी महात्मा गांधी जी का जिक्र कर रहे थे, उन्होंने भी यह सपना देखा था कि आजाद भारत के अंदर एक रामराज होगा और रामराज का अर्थ एक स्वराज हो, धर्मराज होगा, लोकराज होगा, जिसमें गरीबी, निरक्षरता और विषमता खत्म होगी । लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जिस पार्टी ने इस देश के अंदर लगभग 55 वर्षों तक राज किया, महात्मा गांधी के नाम से राज किया, उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को कभी भी धरती पर उतारने का प्रयत्न नहीं किया । महात्मा गांधी को अपने अंतिम समय में इस बात का आभास हो गया था । इसलिए 27 जनवरी, 1948 को उन्होंने लिखा कि “Congress in its present form has outlived its utility. It should be disbanded into the Lok Sevak Sangh.” यह दुर्भाग्य की बात है, महात्मा गांधी जी कांग्रेस को पहले ही डिसबैंड कर देते, जिसको मोदी जी आने के बाद किया, वह पहले ही हो जाता । हम सब लोग भारत भूमि में जन्मे,पले-बढ़े और बड़े हुए । हमारे पूर्वजों और मनीषियों ने भारत भूमि को ऋषियों की भूमि कहा, हम लोग बड़े गर्व से कहते हैं कि हम ऋषियों की संतान हैं । हमें इस देश पर गर्व है । हजारों लाखों वर्षों से इस देश की गरिमा,इस देश की महिमा,इस देश का वैभव,इस देश की विद्वता के कारण, हजारों-लाखों वर्षों से इस देश में सैकड़ों नहीं हजारों लोग दुनिया भर से इस देश में आए, सीखने के लिए आए, देखने के लिए आए । कुछ लोग इसके धन-दौलत को लूटने के लिए भी आए । इंग्लैंड,अमेरिका और यूरोप में जब वहां के लोग सभ्यता से कोसों दूर थे,उस समय भारत में बहुत विकसित सभ्यता थी, एक विकसित संस्कृति थी । विष्णु पुराण में आता है, बहुत सारे लोगों ने पढ़ा होगा, विष्णु पुराण में आता है-
“गायन्ति देवा: क्लि गीतकार्न, धान्यास्तु ये भारतभूमिभागे ।
स्वर्गायवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूय:पुरुषा: सुरत्वात् ॥ स्वर्ग के देवता भी यहां जन्म लेने के लिए लालयित रहते थे । क्या यह धरती थी । कुछ लोगों को सुनकर शायद अच्छा लगेगा । मैं इसीलिए यह बताना चाहता हूं ।
इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद पैगम्बर ने कहा था कि अगर धरती पर कहीं जन्नत है तो हिन्द के अंदर है । मुझे पूरब से, हिन्द से एक नई तरह की खुशबू आती है । आज के अंग्रेजी पढ़े-लिखे लोग हैं, जो लोग वेस्ट को ज्यादा मानते हैं, उनको भी शायद अच्छा लगेगा,प्रोफेसर मैक्समूलर ने इस देश को जानने की कोशिश की, प्रोफेसर मैक्समूलर ने एक किताब लिखी ‘India: What can it teach us?’ भारत हमको क्या सीखा सकता है । उन्होंने कहा कि इस देश की भूमि पर इसके अद्भुत ज्ञान-विज्ञान और परंपरा पर दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं, जिसके ऊपर गर्व किया जा सके, जिससे कुछ सीखा जा सके ।
महोदय, धन-दौलत, विद्वता,वीरता और वैभव में इस देश दुनिया में कोई सानी नहीं था । इस देश में जब ऋषि दयानन्द ने लिखा था, जब वेद आदि शास्त्रों का पठन-पाठन बंद हो गया, आलस्य प्रमाद और आपसी फूट के कारण विदेशों के आक्रमण देश में आरंभ हुए और दुर्भाग्य से विश्वगुरू भारत शताब्दियों तक विदेशियों का गुलाम रहा ।
मैं राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहता हूं, उन्होंने हमें याद दिलाया कि हमारी पुरातन संस्कृति पर हम गौरव कर सकते हैं । जिन लोगों ने भारतीय संस्कृति को नहीं माना,हमारे बहुत सारे मित्रों को यह बात मालूम होगी,जो राम को नहीं मानते, कुछ लोग रावण को मानते हैं, उसका जिक्र हमारे कॉलेज और स्कूलों में नहीं था । उसको नहीं माना, कभी स्कूल और कॉलेज में नहीं पढ़ाया कि भगवान राम इस धरती पर हुए । हमारी संस्कृति और सभ्यता के उन्नायक जिनके बारे में कल प्रवेश वर्मा जी भारत का संविधान दिखा रहे थे,भारत के संविधान में चित्र नंद लाल बोस ने बनाए थे, हमारे कन्स्टी्यूट असेम्बली के सभी सदस्यों ने इस पर दस्तख्त किए थे, हमने संस्कृति के उन उन्नायकों को भूला दिया । जिन्होंने उन्नायकों को भूला दिया, “If you forget your past, the future will forget you.” अगर आप भूतकाल को भूल जाएंगे तो आगे आने वाला भविष्य भी आपको भूल जाएगा । जिन लोगों ने अपने देश की संस्कृति के साथ ऐसा किया,उनका हश्र यह होना ही था, जो आज हमारे सामने दिखाई दे रहा है । आज सबसे बड़ी जरूरत है, जैसा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने याद दिलाया था कि भारत के पुरातन ज्ञान-विज्ञान को आज के युगानुकूल करने की जरूरत है । हम कह सकते हैं कि किसी भी देश का ज्ञान के ऊपर उसकी बपौती नहीं होती, उसका अधिकार नहीं हो सकता । अगर बाहर देश का ज्ञान-विज्ञान हमसे अच्छा है,उसको लेकर देश के अनुकूल बनाना हमारा कर्तव्य है । यही बात माननीय राष्ट्रपति जी ने हमें याद दिलायी है । यह बात जरूर है कि हजारों साल पुराना ज्ञान-विज्ञान, हम यह नहीं कह सकते कि महाभारत के जमाने और रामायणकालीन ज्ञान-विज्ञान इतना ही जरूरी है, इतना ही अनुरूप है, यह नहीं हो सकता ।
हम यह नहीं कह सकते कि महाभारत के जमाने का या रामायण कालीन ज्ञान विज्ञान आज भी उतना ही जरूरी है, अनुरूप है । यह नहीं हो सकता है । रामायण और महाभारत के अनुसार हम अपनी सेना को हथियारों से लैस नहीं कर सकते हैं । हम पुराने जमाने की तरह सिंचाई के लिए रहट नहीं चला सकते हैं । हम गुड़ बनाने के लिए कोल्हू नहीं रख सकते हैं । हम इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए हाथ का बुना कपड़ा, दवाई या जूता तैयार नहीं कर सकते हैं,इसलिए आज हमें टेक्नोलॉजी की जरूरत है, तकनीक की जरूरत है ।
एक बड़े आधुनिक लेखक रोबिन शर्मा हैं, शायद कुछ लोगों ने इनकी किताब पढ़ी हो । उन्होंने कहा था - “Stop being the prisoner of your past. Become the architect of your future”. हमें भूतकाल का कैदी नहीं बनना है, हमें भविष्य का निर्माता बनना है, शिल्पकार बनना है । आप शिल्पकार कैसे बनेंगे?इसके लिए जरूरी है कि जो पुरानी बातें अच्छी हैं,हमें उनको अपनाना पड़ेगा । हमें ऋषियों के ज्ञान-विज्ञान पर गर्व करना पड़ेगा और नई बातों को सीखना पड़ेगा । आज से लगभग 2000 वर्ष पहले कालिदास जी ने बहुत अच्छा नाटक लिखा था,उस नाटक का नाम मालविकाअग्निमित्रम् है । उन्होंने संस्कृत में बहुत बढ़िया बात कही थी । उन्होंने कहा था – पुराणमित्येव न साधु सर्वं न चापि काव्यं नवमित्यवद्यम ।
सन्त: परीक्ष्यान्यभ्दजन्ते मूढ: परप्रत्ययनेयबुद्धि॥ ।
यह कहना गलत है, जो पुराना है वही सब ठीक है । यह कहना भी उतना ही गलत है, जो कुछ नया है वही बिल्कुल ठीक है । जो विद्वान लोग होते हैं, परीक्षा के बाद भी, इम्तिहान के बाद भी जो अच्छा है उसे स्वीकार करते हैं और जो गलत है, उसे दूर कर देते हैं । हम राष्ट्र भक्ति के नाम पर दकियानूसी नहीं हो सकते हैं । भारत इसलिए गुलाम हुआ था, जब हम दुनिया के साथ कदम के साथ कदम मिलाकर ज्ञान-विज्ञान में नहीं चल सके, जब हम लोगों ने अपने ज्ञान के दरवाजे बंद कर लिए थे ।
देश में वैयक्तिक और समाज की कुछ प्रमुख समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए हम इस बात को स्वीकार करेंगे कि यह आधुनिक विज्ञान और तकनीक के पास नहीं है । आज व्यक्तिगत तनाव बढ़ता जा रहा है । बहुत लोग मिलते हैं, बहुत स्ट्रैस है, बड़ा टेंशन है, परिवार टूट रहे हैं । दिल्ली हो, मुम्बई हो या कोलकाता हो, बड़े शहरों में जितनी हत्याएं हो रही हैं, मर्डर हो रहे हैं, उससे छ:गुना ज्यादा आत्महत्याएं होती हैं । हम अपने बच्चों को यह नहीं सिखा पाए कि मानव जन्म की कितनी कीमत है, कितना महत्व है ।
आज अपराध बढ़ रहे हैं, महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं । हमने पार्लियामेंट में कितने सत्रों में कितनी बार चर्चा की कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को कैसे घटाया जाए । केवल मात्र कानून बनाने से बात नहीं बनेगी,केवल मात्र फांसी की सजा का प्रावधान करने से बात नहीं बनेगी, 90 परसेंट से ज्यादा रेप केस जान-पहचान वाले लोग करते हैं । यह बात संस्कारों से बनेगी, उनको संस्कृति देनी पड़ेगी, संस्कार देना पड़ेगा ।
देश में हजारों-लाखों वर्षों से जो हम ज्ञान विज्ञान सीखते आए हैं, उस पर भरोसा करना पड़ेगा । जातिवाद का रूप बढ़ रहा है । सब लोग कहते हैं कि जातिवाद के ज़हर को खत्म करना चाहिए । मुझे इस बात पर बहुत दुख होता है कि जो लोग इस बात को कहते हैं, मंच पर चिल्लाते हैं कि जातिवाद का ज़हर खत्म होना चाहिए, वही लोग मंच पर खड़े होकर जाति के नाम पर आरक्षण मांगते हैं । यह कैसे संभव है? एक तरफ जातिवाद खत्म करना चाहते हैं और दूसरी तरफ जाति के नाम पर आरक्षण भी मांगते हैं । देश में धर्म और सम्प्रदाय के नाम पर साम्प्रदायिकता बंट रही है । इस नागरिकता संशोधन कानून में, जिन लोगों का इस देश के नागरिकों से कोई संबंध नहीं है, उसमें भी सियासत होती है,हिंसा होती है । सरकारी सम्पत्ति का नुकसान किया जाता है । देश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम होता है । इन समस्याओं का समाधान आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के पास नहीं है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा कि हमें पुरातन गौरव और संस्कृति के पास जाना होगा । हम सारी दुनिया को योग और अध्यात्म के माध्यम से सुख,शांति व समृद्धि का पाठ पढ़ा सकते हैं ।
आज से लगभग 200 वर्ष पहले की बात मुझे याद आती है, गुजरात में महामानव पैदा हुए थे, महर्षि दयानंद । उन्होंने इस देश को पुन:आत्म गौरव दिया और विश्व गुरु बनाने का रास्ता बताया । उन्होंने सबसे पहले स्वराज का मंत्र दिया । सब लोगों को मालूम होगा, जिस कांग्रेस की हम बात करते हैं, उस कांग्रेस ने सबसे पहले 1929 में पूर्ण स्वराज्य का नारा दिया था ।
बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1916 में ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया था । लेकिन,वर्ष 1874 में सबसे पहले महर्षि दयानन्द ने कहा था- ‘जो सर्वोपरि राज्य होता है,वह तो अपना राज्य होता है ।’ विदेशियों का राज्य कितना भी अच्छा हो, चाहे माता-पिता के समान कृपा करने वाला हो, मत-मतान्तर या किसी प्रकार का भेदभाव न करने वाला हो तो भी वह उत्तम नहीं हो सकता है । अगर सर्वोपरि राज्य हो सकता है तो वह स्वराज का राज्य हो सकता है । महर्षि दयानन्द,जिन्होंने दलितों,शोषितों, उन्होंने उनको हरिजन नहीं बनाया,उन्होंने उनको आर्य बनाया, उनको मुख्य धारा में लाने के लिए काम किया । महर्षि दयानन्द जिन्होंने लड़के-लड़कियों के लिए अनिवार्य शिक्षा की घोषणा की । वह ऋषि जिसने राजपुत्र हो या गरीब की संतान सबके लिए समान शिक्षा व्यवस्था हो, सबके लिए समान खान-पान की व्यवस्था की बात हो, उन महर्षि दयानन्द ने नारी जाति को पुराना गौरव दिया । मैं अपने मित्रों को बताना चाहता हूं । महर्षि दयानन्द जी ने कहा था- भारतवर्ष का धर्म उसके पुत्रों से नहीं, सुपुत्रियों के प्रताप व त्याग से ही स्थिर है । भारत के देवियों ने यदि अपना धर्म छोड़ दिया होता तो देश कब का नष्ट हो गया होता । उसी गुजरात की धरती में पुन:नरेन्द्र मोदी के रूप में इस देश का एक खोया हुआ परम गुरु लौटाने के लिए एक महामानव पैदा हुआ । पुन:इस देश को विश्व गुरु बनाने का जिसका संकल्प है और हम सब जानते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है ।’ लगभग सवा सौ वर्ष पहले बंगाल की क्रांतिकारी भूमि में एक नरेन्द्र पैदा हुआ । मैं स्वामी विवेकानन्द की बात कोट करना चाहता हूं । स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था- ‘आने वाले पचास वर्ष आप लोग स्वर्गादपि गरीयसी जन्मभूमि की अराधना करो । दूसरे देवताओं को कुछ साल के लिए भूल भी गए तो चलेगा । आज केवल तुम्हारा देवता भारत राष्ट्र है । आप लोग निष्फल,अदृश्य देवताओं को खोजने में लगे हैं, परन्तु तुम्हारे सामने,तुम्हारे चारों ओर जो देवता दिखता है, उस विराट पुरुष राष्ट्र की तुम उपासना नहीं करते । ये सब जन तुम्हारे ईश्वर हैं । आप देशवासियों के प्रथम उपास्य हैं ।’ आज पुन: एक नरेन्द्र इस देश को मिला है । जैसे किसी शायर ने कहा है । अधीर रंजन जी आप मेरे मित्र हैं ।
“हजारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा ।” “मोदी जी उठे और सियासत बदल दी, उन्हें जो मिली, वह विरासत बदल दी ।” इस देश के सौभाग्य से एक ऐसा तपस्वी,एक ऐसा तेजस्वी,एक ऐसा ओजस्वी प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के रूप में इस देश को मिला है,जो इस देश के करोड़ों देशवासियों को गरीबी से मुक्ति दिलवाना चाहता है, गन्दगी से मुक्ति दिलवाना चाहता है, अपराध से मुक्ति दिलवाना चाहता है, आतंकवाद से मुक्ति दिलवाना चाहता है, जातिवाद से मुक्ति दिलवाना चाहता है, सम्प्रदायवाद से मुक्ति दिलवाना चाहता है । इसीलिए,यह केवल हमारा देश नहीं है । सर्वमान्यत:दुनिया ने माना है, छ: देशों ने, उनमें से पांच तो मुस्लिम देश हैं । जो सीएए का नाम लेकर हल्ला मचा रहे हैं, उनको यह मालूम होना चाहिए कि जिन देशों ने अपना हाइएस्ट सिविलियन अवार्ड हमारे देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को दिया है,इस देश की 130 करोड़ जनता का सम्मान किया है,उनमें रूस,अफगानिस्तान,संयुक्त अरब अमीरात, मालदीव,फिलिस्तीन और सऊदी अरब हैं । यह उनके विश्व समुदाय की गहरी पैठ और उनके नेतृत्व को सलाम है ।
सभापति महोदय,मैं अंत में यह कहना चाहता हूं कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने एक विश्वास व्यक्त किया था कि आने वाले समय में हम सभी मिलकर अपने देश के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और अपने प्रयासों में सफल भी होंगे ।
सभापति महोदय, मैं इस देश के और इस सदन के सम्मानित सदस्यों से एक अपील जरूर करूंगा । आप आइए और इस देश के करोड़ों लोगों की गरीबी दूर करने के लिए, इस देश के करोड़ों लोगों को रोजगार देने के लिए और इस देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए अपनी पार्टी के स्वार्थों को भूल जाइए । देश को पुन: विश्व गुरू बनाने के लिए हम सभी लोग मिलकर के काम करेंगे । भारत की भूमि पुकार रही है और पुकार कर के कहती है कि संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । हम सभी लोग मिलकर चलें, सभी लोग एक ही आवाज में बोलें और सभी लोगों का मन एक हो, ताकि यह भारत भूमि पुन: दुनिया की विश्व गुरू बन सके ।
इतनी बात कहकर मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूं । धन्यवाद ।
श्री अखिलेश यादव (आजमगढ़): आदरणीय सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका मिला है । मैं सबसे पहले महामहिम राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने सरकार के बारे में दोनों सदनों को जानकारी दी है ।
सभापति महोदय, मेरे बोलने से पहले भारतीय जनता पार्टी के माननीय सांसद धर्म की कुछ अच्छी बातें बता रहे थे । मैं अपनी बात वहां से शुरू नहीं करूंगा, क्योंकि बात उन्होंने शुरू की है । वह किताब बहुत बड़ी होगी,जहां से पढ़कर के आपने सदन में सुनाया है । हो सकता है कि मेरी जानकारी कम हो,लेकिन उन्होंने जो आखिरी शेर पढ़ा कि हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है । मैं माननीय सांसद से केवल यही जानना चाहता हूं कि यह कौन से शायर का शेर था? अगर आप बताना चाहें तो बता सकते हैं । …(व्यवधान)
सभापति महोदय, भारतीय जनता पार्टी के लोगों में यही कमी है । मैं जानना चाहता हूं कि आपने जो अपने नेता के बारे में इतना शानदार शेर पढ़ा है, यह शेर लिखा किसने है, यह आप नहीं जानते?अगर इन्होंने लिखा होता तो यमुना पर लिखते, मुम्बई पर लिखते । यह सही बात है कि ये मुम्बई में बहुत दिनों तक रहे हैं । यह जिसने भी लिखा है, चूंकि इन्होंने वह पन्ना नहीं पलटा, जिस पन्ने से देश में संदेश जाता । शायद किसी पन्ने में यह भी लिखा था कि ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा’ । वह हिन्दुस्तान,जिसमें हम और आप रह रहे हैं उसके बाद इन्होंने कुछ बहुत लम्बी बातें बताई हैं । मैं उन की बात को कोट करना चाहता हूं,जो बातें भारतीय जनता पार्टी के सदस्य अपने भाषण में ही नहीं, बल्कि अक्सर सरकार के लोग भी कहते हैं । वर्ष 1893 की विश्वधर्म संसद में स्वामी विवेकानंद जी ने चौथे दिन भाषण दिया था । वह सबसे छोटा भाषण था जो 20 सितम्बर को दिया गया था । उन्होंने संसद में कहा था,जिसे मैं कोट करना चाहता हूं:-
“पूरब की दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत धर्म से जुड़ी हुई नहीं है । उनके पास धर्म की कमी नहीं है,लेकिन भारत की लाखों पीड़ित जनता अपने सूखे हुए गले से जिस चीज के लिए बार-बार गुहार लगा रही है, वह है रोटी । वे हमसे रोटी मांगते हैं,लेकिन हम उन्हें पत्थर पकड़ा देते हैं । भूख से मरती जनता को धर्म का उपदेश देना उसका अपमान है । भूखे व्यक्ति को तत्वमिमांसा की शिक्षा देना उसका अपमान है । ” देखिए अगर आप बोलेंगे तो लम्बा हो जाएगा । स्वामी विवेकानंद जी ने जो धर्म संसद की बात कही है, वह उस तरफ से आई थी तो इसलिए मैंने अपनी बात को बढ़ा दिया ।
माननीय सभापति: अखिलेश जी,ध्यान मत बंटाइए ।
श्री अखिलेश यादव : अच्छाहै, इनसेदिल लगा रहेगा,क्योंकि कुछविकास की बातेंहम भी बोलेंगे ।
महोदय,जब मैं अभिभाषणपढ़ रहा था,राष्ट्रपितामहात्मा गांधीजी की बात कहीगई, उन्हेंयाद किया गया । जब राष्ट्रपितामहात्मा गांधीजी को याद कियाजाए, गुजरातसे चलकर, न केवल भारतमें, पूरीदुनिया में उन्होंनेसत्य और अहिंसाका सिद्धान्तदिया । आप सोचिएकि आज हमेंक्या संदेश दियाजा रहा है –सत्य खत्महो गया, अगरकोई चीज साबितकरनी है तोहिंसा का सहारा लो । मैंनेअपने करीब सेदेखा कि कैसेहिंसा का सहारालिया जाता हैअपनी बात मनवानेके लिए । राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणमें मेरी सरकारकहकर के लोहियाजी को भी यादकिया गया हैऔर लोहिया जीके समता समाजके दर्शन कोयाद किया गया ।
सभापति महोदय,भारतीय जनतापार्टी डॉक्टरराम मनोहर लोहियाजी का सिद्धान्तयाद कर रहीहै, इससेअच्छा कुछ नहींहै । लेकिन अगरआप डॉक्टर राममनोहर लोहियाजी को मानतेहैं, अगरइतने महत्वपूर्णदस्तावेज मेंउनका नाम लिखदिया तो कमसे कम उन्होंनेजो एक किताबलिखी थी, जिसमें उन्होंनेकहा कि हमारेसमाज में क्याहै, हमारेसमाज का दर्शनक्या है, शायद उस किताबको आपने कभीउठाकर नहीं देखाहोगा ।
सभापति महोदय,इस सदन मेंहम लोग उस किताबको देखें यान देखें, लेकिन कम सेकम भारतीय जनतापार्टी के हमारेसाथी उस किताबको पढ़ें औरदेखें कि क्यालिखा है । अगरपूरी किताब पढ़लेंगे तो शायदसमझ में आ जाएगा । मैं पूरी किताबनहीं पढ़ सकताहूं क्योंकिमेरे पास उतनासमय नहीं होगा,लेकिन मैंउनकी बात को,पहले पैराग्राफको कोट करनाचाहता हूं औरवही हमारे समाजकी सच्चाई है । उन्होंने इसकिताब के पहलेपैराग्राफ मेंलिखा है :
“भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई, हिन्दू धर्म में उदारवाद और कट्टरता की लड़ाई, पिछले 5000 सालों से भी अधिक समय से चल रही है और उसका अन्त अभी भी दिखाई नहीं पड़ता । इस बात की कोशिश नहीं की गई, जो होनी चाहिए थी, कि इस लड़ाई को नजर में रखकर हिन्दुस्तान के इतिहास को देखा जाए, उसे बुना जाए । लेकिन देश में जो कुछ होता है, उसका बहुत बड़ा हिस्सा इसी के कारण होता है । सभी धर्मों में किसी न किसी समय उदारवादियों और कट्टरपन्थियों की लड़ाई हुई है,लेकिन हिन्दू धर्म के अलावा,वे बंट गए । अक्सर उनमें रक्तपात हुआ और थोड़े या बहुत दिनों की लड़ाई के बाद वे झगड़े पर काबू पाने में कामयाब हो गए । हिन्दू धर्म में लगातार उदारवादियों और कट्टरतावादियों का झगड़ा चला आ रहा है, जिसमें कभी एक की जीत होती है, कभी दूसरे की । खुला रक्तपात तो कभी नहीं हुआ,लेकिन झगड़ा आज तक हल नहीं हुआ और झगड़े के सवालों पर एक धुन्ध छा गई है ।” यहपैराग्राफ डॉक्टरराम मनोहर लोहियाजी ने लिखाहै । उनकी किताबहै – हिन्दूबनाम हिन्दू । अगर इतने बड़ेदस्तावेज मेंउनका नाम आजाए और वह क्याचाहते थे, वह नहीं आएऔर जहां समाजवादीरास्ता दिखानेकी आपने बातकही है, जोआपका नारा है– सबका साथ,सबका विकासऔर सबका विश्वास । इन्होंनेन सबका साथलिया, न सबकाविकास किया औरलोगों के अन्दर,समाज के अन्दरशक पैदा करदिया ।
मैं उत्तरप्रदेश से आताहूं, महामहिमराष्ट्रपति जीवहां से हैं,हमारे प्रधानमंत्री जी वहांसे हैं, मैंजानना चाहताहूं कि सबकासाथ, सबकाविकास उत्तरप्रदेश में कितनाहो रहा है औरआपने कितना विश्वासपैदा किया है?आप एक्सपर्टहैं, जो अंग्रेजोंने किया, जो अंग्रेजकरते रहे किबांटकर राज करो,आपने बांटाऔर राज किया । कभी हिन्दूऔर मुसलमान कोबांट दिया,कभी बांट दियाहमें और हमारेभाइयों को ।जनगणना होनेजा रही है,जनगणना होतेसमय अगर हमेंयह न पता लगेकि हम कितनेहैं तो यह बेईमानीहोगी । अभी कुछसमय पहले एकमाननीय सदस्यकह रहे थे किएक समय पर हुईथी जाति कीजनगणना । वर्ष 1931 में कभी हुई थी । उसके बाद कभी नहीं हुई थी । मैं भारतीय जनता पार्टी के साथियों से कहूंगा कि एक बार कांग्रेस ने भी कोशिश की थी । हम,नेता जी और सब लोगों ने इसी सदन में मांग की थी कि जाति के आधार पर गिनती हो जाए । कांग्रेस ने भी मांग नहीं मानी और मुझे लगता है कि इसको भारतीय जनता पार्टी भी नहीं मानेगी क्योंकि हमारी वह सच्चाई है । हम उन चीजों को क्यों छिपाना चाहते हैं? हम इसलिए छिपाना चाहते हैं कि अभी जैसे हमारे साथी कह रहे थे कि 300 आ गए । वह हमें बताएं कि प्रमुख सचिव, जो ज्वाइंट सैक्रेटरी के लैवल पर आते हैं, भारत सरकार में एपाइंट हो गए । आपके कितने एपाइंट हो गए, हमें यह बता दो । …(व्यवधान) क्या आप नहीं देख रहे हैं कि कौन आपका हिस्सा ले रहा है? अगर डॉ. लोहिया जी को आप लिख रहे हैं तो क्या लोहिया जी ने नहीं कहा था कि- “पिछड़ों ने बांधी गांठ,सौ में पा गए पिछड़े साठ ।” हमारे लोग जानते हैं, सब जानते हैं । आप कहां रास्ता भूल गए हैं?
जो आप विकास की बात कर रहे हैं,मैं सदन के सामने कहता हूं कि इस समाजवादी सरकार में देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रैस-वे बना । मैं उस समय भी कहता हूं और आज भी कहता हूं,हमारे सांसद उस पर चले हैं । जो चलता है, वह बिना तारीफ के आगे बढ़ नहीं सकता । मैं जानना चाहता हूं कि आप लोग देश के दूसरे हिस्से में इसे मुमकिन क्यों नहीं कर पाए? मुझे याद है, उस समय के सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर माननीय गडकरी जी मुझसे मिले थे । उन्होंने कहा था कि हम भी बनाने जा रहे हैं । मुझे याद है,हमारे नेता जी यहां सदन में बैठे हैं कि जिस समय मैं शिलान्यास कर रहा था, इन्होंने कहा कि हम शिलान्यास तो करते हैं, मगर उद्घाटन की तारीख भी बताते हैं । उस समय जब शिलान्यास किया तो आपने शर्त रखी कि इसका उद्घाटन भी 24 महीने के अंदर होना चाहिए ।
माननीय सभापति जी, देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रैस-वे 23 महीने में बनाकर खड़ा कर दिया और जब उसका उद्घाटन हुआ तो नेता जी थे और सुखोई और मिराज उस पर उतारकर दिखा दिए । देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रैस-वे और वह केवल सड़क नहीं थी । हमने किसानों के लिए उसके आसपास मंडी दी थीं क्योंकि मैं जहां शहरों को जोड़ रहा था,वहीं उससे खेती कैसे जुड़ जाए,इसका मैंने एक मॉडल तैयार किया था । मुझे नहीं पता कि आपका कौन सा गुजरात मॉडल था? गुजरात मॉडल तो हमें सड़क पर दिख रहा है कि गुजरात मॉडल क्या था ।…(व्यवधान)
मैडम, मैं तो आपसे कहता हूं कि अगर एक्सप्रैस-वे पर ये चल देंगी तो ये भी समाजवादी पार्टी को वोट देंगी । मैंने मंडियां बनाना शुरू किया । आलू की मंडी बनाई लेकिन जो सरकार आई, उसने बंद कर दी । मैं हारा क्यों,यह मैं जानता हूं और जो हार जान जाता है, वह जीतता भी है । मैं कहता हूं कि पहली आम की मंडी बन रही थी और प्रधान मंत्री जी खुद लखनऊ में आए । उन्होंने कहा कि मलिहाबाद का आम अच्छा होता है । मलिहाबाद का आम दुनिया में जा सकता है लेकिन हमारे बाबा मुख्य मंत्री जी ने वह मंडी का काम रोक दिया । एक बार आलू की मंडी बनती तो आगे सौ एकड़ में आलू का प्रोसेसिंग प्लांट लगता । आईटीसी के उस समय के लोग हमसे आकर मिले । हमसे कहा कि हम यहां पर एक प्लांट लगाएंगे लेकिन वहां उस मंडी का काम रोक दिया । मैनपुरी में जाकर हमने अनाज की मंडी बनाई । वह काम रोक दिया । ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ी मंडी बनाई, उसका काम रोक दिया । उसके बाद परफ्यूमरी-हमारा क्षेत्र कन्नौज, जहां का इत्र दुनिया में जाना जाता है, वह परफ्यूमरी का पहला प्लांट लगाने जा रहे थे,वह भी बंद कर दिया । जो और इंवेस्टमेंट मीट हुई, 3 लाख के एमओयू साइन हो गये लेकिन ज़मीन पर कुछ भी नहीं आया । अभी तक कोई इंवेस्टमेंट नहीं आ पाया है ।
आज जब मैं फ्लाइट में अखबार के पन्ने पलट रहा था, अरे गांधी के प्रदेश के रहने वाले आप लोग कह रहे हैं कि ‘Four Expressways that cover the entire State’ अरे, मैं तो यू.पी. का ही नहीं रहने वाला हूं,ऐसा लगता है । कहां पर आप लोगों ने 4 एक्सप्रैस वे बनाए हैं? डिफेंस एक्सपो में आप कह रहे हैं कि चार एक्सप्रैस वे बनाए और मैं यकीन दिलाता हूं कि ये सब वही हैं जो समाजवादी सरकार में शुरू हुए थे या दूसरे हमारे साथियों ने शुरू किये थे । आपका बनाया हुआ कुछ भी नहीं है और जिस रिवर फ्रंट पर आप अमरीका के राष्ट्रपति जी को ला रहे हैं,एक बार चीन के राष्ट्रपति जी को आप लाए थे ।
माननीय सभापति: I know. श्री सौगत राय जी, मुझे सब बातें पता हैं ।
श्री अखिलेश यादव: चीनके राष्ट्रपतिआए थे और एकरिवर फ्रंट परझूला झूल रहेथे । उसके बादसुना कि कोईऔर भी आ रहाहै । लेकिन मैंयकीन दिला सकताहूँ, जो लखनऊमें गोमती पररिवर फ्रंट बनाहुआ है, उसकेसामने वह रिवरफ्रंट कुछ भीनहीं है । मैंनेवह देखा औरमेरा मन अहमदाबादमें उतरने कानहीं हुआ । मैंनेसोचा कि मैंइस पर क्याउतरूँ ।
मैं कहनाचाहता हूँ,सबसे महत्त्वपूर्णबात गंगा कीहै । इस दस्तावेजमें गंगा कानाम ही नहींहै । गंगा माँका नाम न हो,शायद वह इसलिएनाराज होंगे,क्योंकि गंगामाँ ने इस बारआशीर्वाद नहीं दिया ।मेरे लिए बहुत-सी माएँ हैं,धरती माँ,भारत माँ,गंगा माँ हैं । हम गाँव मेंपैदा हुए, गाँव में बढ़े,मैंने बुजुर्गोंको देखा है,जब वे चारपाईसे उठते थे,तो वे पहलेजमीन को हाथलगाते थे । वेपहले धरती पूजतेथे । आपने गंगामाँ के नामपर क्या नहींकहा? गंगामाँ के नामपर इस दस्तावेजमें कुछ भीनहीं है । क्याआप गंगा माँसे नाराज हैं,यह बताइए ।मैं कहता हूँकि आप गंगामइया को तबसाफ कर पाएंगे,जब आप यमुनाको साफ कर लेंगे । आप बताइए कियमुना कब साफहोगी, बताइएकाली नदी कबसाफ होगी? केवल गंगा माँही नहीं, बल्कि भारतकी अन्य नदियाँकब साफ होंगी?आप सेल्फीलेने गए थे,लेकिन वहाँकूड़े के ढेरलगे हैं । लोगकूड़ों पर सेल्फीले रहे हैं,नालों पर सेल्फीले रहे हैं ।
माननीय सभापति: कृपयासमाप्त कीजिए ।
श्री अखिलेश यादव : आपसोचिए, उसकेअंदर गंदे नालेजा रहे हैं ।हमारे यहाँ लोगोंने नाले केसाथ सेल्फी लेली, अब नालेखत्म हो गए,अब नाले नहींहैं । इसलिएजिन लोगों नेगंगा माँ कोभुला दिया,जिन्होंनेगंगा माँ कोधोखा दिया…(व्यवधान) ये तो गन्ना क्षेत्र के ही हैं, आप गन्ने को भूल गए । आप भगवान विष्णु को पढ़ते रह गए । भगवान विष्णु को मिठाई नहीं खिलाओगे,तो कुछ नहीं होने वाला है । इन्होंने गन्ना के बारे में कुछ नहीं किया, धान नहीं खरीदी । खेतों में मटर पैदा होकर पड़े हैं, उसके लिए आपका क्या सहयोग है? इसलिए मैं राष्ट्रपति जी का स्वागत करता हूँ, लेकिन यह दस्तावेज जनता के लिए… * का बहुत बड़ा हिसाब-किताब है । यह सत्य का हिसाब-किताब नहीं है ।
मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ ।
SHRI HASNAIN MASOODI (ANANTNAG): Sir, the President’s Address summarises the achievements made by the Government. It also maps out the future course of action. In the present case, the President’s Address counts abrogation of Special Status of Jammu and Kashmir as one of the achievements.
Sir, I maintain that abrogation of Special Status of the State, abrogation of Article 370 and division of Jammu and Kashmir has been a historical blunder. It is not anything less than a misadventure.
The Address does not mention that the abrogation of special status and revocation of Article 370 in the first place goes against the fundamental values of Indian polity, the values that have been cherished by the country for thousands of years. Every day the sitting of Parliament is begun with the slogan of Jai Shree Ram. Everybody knows that Shree Ram was known as Maryada Purushottam. He was the embodiment of morality and truth. The basic value of truthfulness was murdered in case of abrogation of Article 370 and Special Status of Jammu & Kashmir.
The decision of the 5th August, 2019 not only makes an assault on the fundamental values but also amounts to unilateral breach of the commitments made to the people of Jammu and Kashmir. In the first place, it was 1947 when the commitments were made. They were upgraded and given the status of constitutional guarantees. What is Article 370 except the constitutional guarantees that were agreed upon by the Government of India and the Constituent Assembly? The breach of these commitments was committed unilaterally. The second time commitments were made in 1952 when the Indian Parliament approved them on 5th August, 1952. The third time commitments were made in 1975 when the Kashmir Accord was signed. Most of the Members, who are senior Members and are part of this Parliament, must have been in this Parliament when Kashmir Accord was entered into between great Sheikh Mohammad Abdullah and Madam Indira Gandhi. That Kashmir Accord gave a promise and a guarantee that relations between Jammu and Kashmir and the country will be governed by Article 370. Now, you have unilaterally committed breach of all these commitments made. Is that not opposed to the basic principles of federalism which are in the nature of the basic structure of the Constitution as laid down by the Supreme Court.
Having committed the unilateral breach of these commitments, how can you give any kind of confidence to Bodo people with whom you are entering into an agreement? You are also holding negotiations with the Nagas and you will go for an agreement with them. What guarantee do they have that such an agreement will be respected, when you have unilaterally committed breach of all the three commitments made in the Constituent Assembly, in the Parliament in 1952 and thereafter?
Sir, the narrative build-up to market the decision of 5th August, 2019 was a fake narrative. Just two months back, you had told the entire world that Jammu and Kashmir was the best State in the country. After two months, you said that it lagged behind in development. All the human development indices are in favour of Jammu and Kashmir where we are much ahead of 15 States in the country. There has been no starvation death; there has been no farmer suicide; and there is no one without a roof on his head. There has been no starvation death, as we saw in the case of Muzaffarpur. There has been no lynching death. There has been nothing like that. We were ahead of 15 States. This shows that it was a false narrative that Article 370 stands between development and Jammu and Kashmir. There are 10 States which are much below Jammu and Kashmir. There was no Article 370 in respect of them. Why did they not usher in an era of development?
Now, this false narrative is belied by the day in and day out assurances they make to the North-East. All those were given to Kashmir or were present in the case of Kashmir. They are now being promised to the North-East. Even the inner line permit system, domicile rights, land rights and employment are being guaranteed to them. Does that not belie the false narrative that you build up to market your 5th August, 2019 decision?
Sir, it is not only that Jammu and Kashmir was denuded of its identity, denuded of its autonomy and stripped of its territorial integrity, but it was also in gross violation of the Constitution. Once the Supreme Court admits the petitions, the least that was expected was that the Government will put its decision on hold.
Sir, our Finance Minister quoted a couplet of Dinanath Kaul ‘Nadim’. He was the one who loved Kashmir and whose every song was for Kashmir. He was the greatest patriot. Had he been alive today he would have felt so discomforting pain to see that his couplet was used to legitimise something that was an assault on his motherland. His first book was Maej Kashir – Mother Kashmir. What did he write? It appears as if he envisioned what the plight of his Kashmir will be in 2019.
16.00 hrs What did he say?
“Tche kaem wanay Tchekh baibas tea Baihet varnan manz Kaer nam reth”.
Who told you my mother Kashmir is supportless, that she is without any support and that she is helpless? I am with you. Who told you that nightingale there does not sing or that he has just stopped singing for you? Mother Kashmir does not know the Finance Minister. As if he knew as to what is going to happen to Kashmir, he said:
“बर्बाद ए वतन का किस्सा मैं क्या सुनाऊं, इफलास की कहानी किस-किस को जा सुनाऊं, रह-रहकर मेरे दिल पर छुरियां सी चल रही हैं, आंखों से मेरे आंसू की नदियां बह रही हैं” ।
It is from his book, Mother Kashmir, Maej Kashir.
रह-रहकर मेरे दिल पर छुरियां सी चल रही हैं, आंखों से मेरे आंसू की नदियां बह रही हैं” ।
What have we achieved? Let us see it in a dispassionate manner. What did we achieve? Does the Kashmir dispute cease to be there? What prompted you to take the European Parliamentarians and a delegation of foreign Ambassadors on a guided tour? Has it ceased to exist? It is still there. …(Interruptions) The Kashmir dispute continues to be there to stare you in your face. The militancy has reached new levels. See what kind of inroads the militancy has made. You have a senior most police officer apprehended. It was alleged that he was hand in glove with the militants. He was the senior officer to whom you have entrusted the security of the Ambassador of the United States.
A few days back you arrested a police officer from Kupwara again on the same allegation. A day before that, you raided a leader of the Party in power in Shopian. Is there any kind of relief from the militancy? Everyday the incidents of militancy are growing. With every passing day, it is increasing. My appeal would be to please acknowledge that it is unconstitutional, it is unilateral and it is a breach of commitment. So, please undo what you have done on 5th August last year because you have not achieved anything. Rather it has widened the gap between the people of Jammu and Kashmir and the people of Ladakh.
The President’s Address did not make any mention about the longest blockade in the history of and about the arrest of Dr. Farooq Abdullah, Shri Omar Abdullah, Smt. Mehbooba Mufti and other senior leaders. So, I appeal to you to please give it a second look as you have not achieved anything and you are not going to achieve anything. The matter is there and the problem is there.
श्री सुनील कुमार पिंटू (सीतामढ़ी): सभापतिमहोदय, आपनेमुझे राष्ट्रपतिके अभिभाषण परधन्यवाद प्रस्तावपर चर्चा मेंभाग लेने काअवसर दिया है,इसके लिए मैंआपके प्रति आभारप्रकट करता हूं । माननीय प्रधानमंत्री जी कोदेश की महानजनता ने स्वच्छएवं पारदर्शीसरकार चलानेका मौका दियाहै । राष्ट्रपतिजी का अभिभाषणसरकार के किएगए कार्यों कालेखा-जोखाऔर सरकार केद्वारा अगलेवित्तीय वर्षमें और समाजका वह तबका,जो आज विकाससे वंचित रहगया है, उसव्यक्ति तक माननीयप्रधान मंत्रीजी के विजनसे कैसे विकासपहुंचे, इसकालेखा-जोखामाननीय महामहिमने रखने काकाम किया है ।
महोदय,आज यह कहनेकी जरूरत नहींहै कि सरकारकी उपलब्धि में‘सबका साथ,सबका विकास’नारे के साथलगातार देश कीजनता के बीचउन्होंने सेवाकरने का कामकिया है । उनकेइस नारे परमुहर लगाकर जनताने भी उनकेप्रति अपना विश्वासप्रकट किया है । आज इस देशके अंदर सबसेबड़ी समस्या जलकी आ रही है । माननीय राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणमें जिक्र हैकि आज भी कुछगांव ऐसे हैं,जहां पीनेके लिए स्वच्छजल नहीं है ।वहां रहने वालेलोगों को जलके बिना बहुतकठिनाइयां आरही हैं । इसेदेखते हुए माननीयप्रधान मंत्रीजी ने जल जीवनमिशन की शुरुआतकरने का कामकिया है औरजल जीवन मिशनके तहत सभीके घर तक नलके द्वारा पानीपहुंचाने कासंकल्प लियाहै ।
उस संकल्प को हमारे नेता और बिहार के माननीय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने भी बिहार में पहले से लागू कर रखा है । यह कहने की बात नहीं है कि माननीय प्रधान मंत्री जी के सहयोग से हमारे माननीय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने लगातार 15साल बिहार के अंदर विकास का एक आयाम विकसित करने का काम किया है, एक माइलस्टोन बनाने का काम किया है । हमारे मुख्य मंत्री जी का विजन है- जल, जीवन और हरियाली । उसी को भारत सरकार ने जल जीवन मिशन के रूप में लेने का काम किया है । आज बिहार के घर-घर तक नल से जल पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है । वहां पेड़ लगाए जा रहे हैं और हर तरह से जल संग्रह करने की व्यवस्था की जा रही है ।
सभापति महोदय,सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करना एक ऐतिहासिक कदम है । इस धारा को खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की गंगा बहाने का कार्य, जो कि भारत सरकार का संकल्प है,माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में इसको दोहराया है । सरकार की सभी योजनाओं को वहां जमीन पर उतराने का जो संकल्प है,उसको करने का काम सरकार ने किया है ।
महोदय, अभी पिछले सत्र में सीएए कानून को इस सदन ने पास किया है । इसके बारे में पूरे देश में एक भ्रम फैलाया जा रहा है, इसके बारे में अफवाहें फैलायी जा रही हैं । जब सीएए इस सदन से पास हुआ था तो सभी माननीय सदस्यों ने उस पर चर्चा की थी और उसके अंदर है कि बांग्लादेश,अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लोग, जिनका धार्मिक उत्पीड़न किया गया है और जो इस देश में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं, उनको नागरिकता देने का काम किया गया है, न कि देश में पहले से बसे किसी व्यक्ति की नागरिकता को छीनने की बात है । परंतु विपक्ष के पास कोई मुद्दा न होने के कारण और अपनी नाकामी को छिपाने के लिए आज पूरे देश में चंद लोगों द्वारा आंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है ।
सभापति महोदय,भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में गरीबों के लिए काफी कार्य हो रहे हैं । आयुष्मान योजना के द्वारा देश की लगभग आधी आबादी को सुविधाएं मिलने लगी हैं । जो गरीब व्यक्ति अपना इलाज नहीं करवा सकता था,आज वह अच्छे से अच्छे अस्पताल में जाकर अपना इलाज करवा सकता है । इसमें सरकार के द्वारा जो कदम उठाया गया है कि 75 मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, 16 हजार नई एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी और 4 हजार पीजी के लिए कोटा देकर हम अपने देश के नौजवानों को डॉक्टरी पढ़ने का मौका देने जा रहे हैं । बिहार जैसे पिछड़े राज्य में माननीय प्रधान मंत्री जी ने दूसरे एम्स की स्वीकृति दी है, इसके लिए मैं उनके प्रति आभार प्रकट करता हूं । बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों से सबसे ज्यादा दिल्ली के एम्स में मरीज आते हैं और बिहार को उन्होंने दूसरा एम्स देने का काम किया है ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से यह कहना चाहता हूं कि देश तभी विश्व गुरु बन सकता है और देश को दुनिया में तभी आगे ले जाकर खड़ा कर सकते हैं,जब आपके सारे राज्य आपके साथ-साथ विकसित हों । आज बिहार जैसे पिछड़े राज्य को विकसित करने की बहुत जरूरत है । केन्द्र की सहायता नहीं मिलने से,हमारा पिछड़ा बिहार अपने आपको देश और दुनिया में पीछे महसूस करता है । इसलिए हमारे सदन ने जो पारित करके भेजा है कि बिहार को स्पेशल स्टेट का दर्जा मिलना चाहिए,मेरी मांग है कि वह दिया जाए ।
महोदय, आज देश के अंदर उद्योग के रूप में टूरिज्म पर बहुत काम हो सकता है । टूरिज्म देश में ही नहीं,बिहार में अनेकों स्थान हैं, जहां टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है । सभापति महोदय, मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, वह सीतामढ़ी है । जहां जगत जननी सीता जी ने धरती से प्रकट होने का काम किया था । मैं उसके लिए यह चाहता हूं कि उसको भारत सरकार अपने टूरिज्म सेक्टर में जोड़े और जो 100 नए एयरपोर्ट्स बनने वाले हैं,उसमें भी सीतामढ़ी को सम्मिलित किया जाए, ताकि वहां पर देश-विदेश से आने वाले लोगों को सुविधाएं मिल सकें । राम जी की जन्मस्थली अयोध्या है, जितना उसका महत्व है, उतना ही सीता जी की जन्मस्थली का भी महत्व है,क्योंकि राम जी बिना सीता जी के नहीं जाने जाते हैं । दुनिया राम जी को सीता-राम के नाम से जानती है, राम जी के नाम से नहीं जानती है । बिना सीता जी के राम जी अधूरे हैं । इसलिए, मैं यह चाहूंगा कि सीतामढ़ी को भी नए एयरपोर्ट्स में शामिल किया जाए ।…(व्यवधान)सभापति महोदय,मैं बस दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर दूंगा ।…(व्यवधान)
सभापति महोदय,मैं देश के किसानों के हितों के बारे में यह कहना चाहूंगा कि भारत सरकार ने उनके लिए बहुत सारी योजनाएं चलाई हैं । उसमें सबसे बड़ी जरूरत यह है कि दलहन और तिहलन की फसलों से जितनी भी पैदावार होती है, हम उसको खरीद सकें । हम सिर्फ धान और गेहूं की फसल को ही न खरीदें,बल्कि हम दलहन और तिलहन की भी खरीदारी करते हैं और जो सरकारी दर है, अगर हम किसानों को वह दर देने में सफल होते हैं,तो हम सही में उन किसानों की आमदनी को दोगुना कर सकते हैं । हम उनको लाभ पहुंचा सकते हैं ।
महोदय, मुझे आपने बोलने के लिए समय दिया है, मैं उसके लिए आपका आभार प्रकट करता हूं । मैं आखिरी में यह कहते हुए अपनी बात को समाप्त करना चाहता हूं कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में हम सब मिलकर अपने देश के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए मिलकर देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयास करेंगे,तभी हमारा देश विश्व गुरु बन सकेगा ।
DR. THOL THIRUMAAVALAVAN (CHIDAMBARAM): Hon. Chairman Sir, Vanakkam. I wholeheartedly thank you for this opportunity. I want to register here with a cause of concern that Hon. President’s Address can be neither welcomed nor praised. Never ever in the last 70 years, particularly during the rule of the present Government, Hon. President, in his Address, has praised the Government a lot for bringing several revolutionary laws during last Session. Hon. President has even praised the Government for withdrawing the special status accorded to Jammu and Kashmir. Hon. President has also praised the Government for extending citizenship rights and protection to the minority people living in the neighbouring countries, by amending the Citizenship Amendment Bill. This Government is so communal which is connected to Sanatana principles. Since the day this Government came to power, there is no protection for minorities, Dalit and tribal people. Women, particularly girls are not having protection in this country. They face atrocities every day. Particularly after enactment of the Citizenship Amendment Act, there were incidents of violence throughout the country, and several persons were killed in firing incidents. There was an agitated atmosphere in the country. In such a violent atmosphere devoid of peace, Hon. President has praised the present Government, which is painful and … ** 16.14 hrs (Shri Bhartruhari Mahtab in the Chair) The Citizenship Amendment Act is an Act which is against the people and constitution of our country. Some people consider that this Act is legislated targeting against the Muslims. But the country is aware of the fact that the Citizenship Amendment Act is against the principles enshrined in the Constitution framed by Dr. Baba Saheb Ambedkar. Hon. President, in his Address, while mentioning the principles and policies of great leaders like Mahatma Gandhi, Revolutionist Dr. Ambedkar, Pandit Jawharlal Nehru, Dr. Ram Manohar Lohia said that this Government is committed to fulfil their vision. This is untrue. Therefore I am sorry to state that the Hon. President’s Address is just aimed to felicitate the present Government and not concerned in protecting the interests of the people or the country.
It should not the thought that only Muslims are agitating against the Citizenship Amendment Act. Hon. Home Minister and Hon. Prime Minister have time and again categorically stated that they will not go back from their original stand as regards Citizenship Amendment Act even though there are several protests against this Act. This law is not only against Muslims. This law is against the country. This is legislated as a result of a conspiracy to divide the people on the basis of religion. Religion cannot be considered as a criterion. World countries have Refugees Act in order to accept refugees as citizens. But we don’t have a separate Act for refugees. In order to accept refugees as citizens we should not have religion as an criterion but on humanitarian basis. This is the practice being followed across the world. But this Government, the Sanatana Government has passed the Citizenship Amendment Act on the basis of religion. This is not defaming Muslims but defaming the Revolutionist Dr. Ambedkar and the Constitution framed by him. What is the reply by the Hon. Prime Minister who took oath of Office and Secrecy to bear true faith and allegiance to the Constitution?. Hon. Home Minister says something and Hon. Prime Minister says some other thing. Both contradict each other.
Hon. Prime Minister while talking outside Parliament said that the Government will not implement National Register of Citizens (NRC). But while speaking on the floor of Lok Sabha in Parliament, the Home Minister said that NRC would be implemented soon. Thus Home Minister is contradicting with the views expressed by Hon. Prime Minister. NPR is a big danger. Place of birth and date of birth of father and mother are to be disclosed. If it is not mentioned then it will be marked blank. Then that will be marked as D, which stands for Doubtful Citizen. Where will it lead to? This has instilled fear in the minds of the people. Therefore, the people of this country, all sections of people including the non-Muslims, social service organisations, groups not affiliated to parties, democratic institutions, college students, youth and others are on the streets protesting against the Citizenship Amendment Act. NPR will affect the people of the country, besides having a negative impact on our social and religious harmonies. This is so dangerous. Through the Chair, I request the Government to completely give up NPR. The provision under Section 13 of the NPR is too dangerous. It is creating fear. This should be withdrawn.
Citizenship Amendment Act should also be withdrawn. NPR and NRC have created fear in the minds of the people and both should be withdrawn. Our Constitution should be protected. They are adding disgrace to Mahatma Gandhi and the Constitution of India. They claim … * to be patriotic. This is a matter of concern as to where the country is heading towards? Muslims are feeling insecurity and continuing with their agitations. The Government claims to give protection to the minorities living in foreign countries. But I want to state that minorities in the country are feeling insecure. Thank you for this opportunity.
श्री अब्दुल खालेक (बारपेटा): सभापतिमहोदय, राष्ट्रपतिजी का अभिभाषणसरकार की दिशाहोता है । राष्ट्रपतिजी ने जो अभिभाषणदिया है, जब हम लोग चुनकर यहां आएथे, तब जूनमें राष्ट्रपतिजी ने जो अभिभाषणदिया था, क्योंकि देखिएयहां एनआरसीकी और एनपीएकी चर्चा होरही है । अभीसरकार बोल रहीहै कि एनआरसीका कोई इरादानहीं है । लेकिनअगर हम देखेंकि जून मेंराष्ट्रपति जीने जो अभिभाषणदिया था, उसमें पेज नंबर20 पर उल्लेखकिया था । In page 20, “My Government has decided to implement the process of National Register of Citizens on priority basis in areas affected by infiltration.
आज नामा नागेश्वर राव जी का एक प्रश्न था, उसके जवाब में सरकार ने बोला कि कोई प्लानिंग नहीं है । जब इस सरकार को फायदा होता है, तब वह वही बात बोलती है । यह सरकार,सत्ता पक्ष स्वामी विवेकानंद जी की चर्चा करती है,जिक्र करती है । आज स्वामी जी की चर्चा हुई,स्वामी जी ने शिकागो स्पीच में बोला था- “I am proud to belong to a nation which has sheltered the persecuted and the refugees of all religions and of all nations on the earth.” यह स्वामी जी ने शिकागो स्पीच में बोला था । स्वामी जी की मेन फिलोस्फी क्या थी- ‘यत्र जीव: तत्र शिव:’जहाँ जीव है,वहीं शिव है । आज सत्ता पक्ष के लोग, भाजपा के लोग बोलना चाहते हैं कि इस जहां की बात नहीं है,सिर्फ इस देश में जो मुसलमान हैं, वह मनुष्य नहीं, उनके बीच में शिव कहाँ रहेगा । नागरिकता संशोधन कानून के बारे में सत्ता पक्ष वाले बोलते हैं कि यह नागरिकता लेने के लिए नहीं है । लेकिन असम में जब एनआरसी हुआ, असम का एनआरसी सत्ता पक्ष वाले वहाँ एनआरसी नहीं मानते हैं,यहाँ एनआरसी की बात करते हैं । जब असम के पास आते हैं, तब वहाँ के बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं कि यह एनआरसी को हम नहीं मानते हैं । कौन से एनआरसी को नहीं मानते हैं, जो एनआरसी सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग में हुआ है, उस एनआरसी को नहीं मानते हैं । क्यों नहीं मानते हैं, क्योंकि हमारे गृह मंत्री जी ने पहले बोला था कि असम में 40 लाख घुसपैठिये निकलेंगे । जब सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग में यह फाइनल एनआरसी आया, 19 लाख लोगों का नाम ड्रॉप हुआ और इन 19 लाख लोगों के नाम के अंदर,ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिनकी फैमिली के कुछ मैम्बर्स के नाम आए, कुछ मैम्बर्स के नाम नहीं आए । मेरी माँ, उनकी उम्र है 75, मेरी माँ का नाम जो 1951 का एनआरसी है, उसमें है । 1951 से अभी तक सारे चुनाव में वोट डाले हैं,लेकिन वहाँ जो ऑब्जेक्शन है,वहाँ पर ढाई लाख लोगों के खिलाफ ऑब्जेक्शन डाला था । मेरी माँ भी हियरिंग में गई । जब हियरिंग में गई, मैं साथ गया था, मैंने सोचा था कि जब ऑब्जेक्टर आएगा और क्या ऑब्जेक्शन है, क्या कसूर है, क्या राँग है, बोल देगा । ऑब्जेक्टर नहीं आया । वह भारतीय नागरिक को एनआरसी के नाम से हैरसमेंट करते हैं । जब सारे देश में होगा तो ऐसे ही होगा । आज सत्ता पक्ष क्या कानून लेकर आया,यहाँ 2014 तक जो Non-Muslim लोग आए हैं, उनको नागरिकता मिलेगी । ये लोग रिलीजियस परसीक्यूशन की बात बोल रहे हैं, लेकिन जो मेन कानून है,मेन कानून यह है, गृह मंत्री जब हाउस में बोले तो क्या बोला है?गृह मंत्री जी ने बोला है कि कोई पेपर की जरूरत नहीं है । यह है क्या? मैंने स्वामी विवेकानंद का जो क्वोट किया,उसके पूरे खिलाफ है । इसलिए ये सत्ता पक्ष जो बोलते हैं, वह करते नहीं हैं ।
माननीय सभापति महोदय, असम में अभी बोडो समझौता हुआ । ये बोल रहे हैं हिस्टोरिक समझौता है, लेकिन यह बोडो समझौता पहली दफा नहीं हुआ है । बोडो समझौता तीसरी दफा हुआ है । हमारे स्व. राजेश पायलट जी सदन के सदस्य रहे हैं,राजेश पायलट जी के इनिशिएटिव में पहला समझौता हुआ था । दोबारा अशांति हुई तो असम में तरुण गोगोई जी मुख्य मंत्री थे और वाजपेयी जी की सरकार थी,उस सरकार ने दूसरी दफा यह बोडो समझौता किया । आज अभी तीसरी दफा किया । तीसरी दफा के बाद क्या होगा,कोई पता नहीं । मैं शांति की उम्मीद करता हूँ,लेकिन क्या होगा,कोई पता नहीं । अभी वहाँ भी इतने सारे नॉन बोडो विलेजेज हैं,जहाँ पर 51 परसेंट को छोड़ दीजिए, जहाँ पर 10 परसेंट भी बोडो पॉपुलेशन नहीं है, जिसके साथ जियोग्राफिकल कन्टीग्यूटी भी नहीं है, वे सारे विलेजेज हैं । हम लोग चाहते हैं कि बोडो कम्युनिटी का जरूर डेवलपमेंट हो, बोडो कम्युनिटी को ज्यादा फैसीलिटीज़ मिले, लेकिन वह जो एरिया है,उस एरिया में लगभग 70 परसेंट नॉन बोडो कम्युनिटी है, उनको भी इंसाफ मिले, उनको भी जो-जो फैसीलिटीज़ हैं, लैंड राइट्स हैं, वे सब मिलें ।
सभापति महोदय, असम में एम्स का जिक्र किया । हम लोग चाहते हैं कि तुरंत एम्स होना चाहिए । नुमालीगढ़ की बात हुई, नुमालीगढ़ में बायो-रिफाइनरी होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ ये बोलते हैं, दिलीप घोष जी अभी हाउस में नहीं है, दिलीप घोष जी ने बंगाल में क्या बोला था कि गोली मार दो, 50 लाख मुसलमानों को निकाल दो । ये शाहीन बाग की बात करते हैं,लेकिन असम में जो प्रदर्शन हुए थे, अगर सत्ता पक्ष खबर लेगी तो असम का प्रदर्शन मुसलमान ने नहीं किया । असम के हर धर्म के, असम के हर मजहब के,असम के हर वर्ग के लोग निकल आए थे । सत्ता पक्ष एक देश एक कानून बोलती है, लेकिन क्या है, यह जो ‘का’ सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट है, असम के एक हिस्से में यह कानून लागू होगा,दूसरे हिस्से में नहीं होगा । मेघालय के एक हिस्से में यह कानून लागू होगा,दूसरे हिस्से में नहीं होगा । त्रिपुरा के एक हिस्से में यह कानून लागू होगा, दूसरे हिस्से में नहीं होगा ।
महोदय, असम में 5 नौजवान शहीद हुए । उनका कसूर क्या था?ईश्वर नायक,सैम स्टैफोर्ड,अब्दुल हलीम, Panging, Deepanjali जैसे नौजवानों का क्या कसूर था,उन्होंने सिर्फ एक कानून का विरोध किया था । कानून का विरोध करना देशद्रोह नहीं होता है । असम के आज के जो मुख्य मंत्री है, पार्लियामेंट ने यह आईएमडीटी एक्ट बनाया था,उसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट गए थे । अगर यह इन नौजवानों का देशद्रोह है तो सर्बानंद सोनोवाल का भी देशद्रोह होगा । इसलिए एक कानून का विरोध करने का पूरा अधिकार है । हम लोग चाहते हैं कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के एक सिटिंग जज से इसकी जूडिशियल इनक्वायरी होनी चाहिए । ये पाँच बच्चे मारे गए हैं, पाँच नौजवान मारे गए हैं, इनके परिवार को पूरा मुआवजा मिलना चाहिए,इनके परिवार को नौकरी मिलनी चाहिए । यह सरकार यह जो ध्रुवीकरण करती है, देश को, देश की जनता को धर्म के नाम पर बांटना चाहते हैं, ये देश की जनता को धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं, यह बंद होना चाहिए । ये लोग राष्ट्रवाद की बात बोलते हैं । राष्ट्रवाद कैसे मजबूत होगा? राष्ट्र तभी मजबूत होगा, जब राष्ट्र का हर नागरिक यह सोचेगा कि यह राष्ट्र मेरा है, इस राष्ट्र पर मेरा अधिकार भी है और इस राष्ट्र के प्रति मेरा कर्तव्य भी है । ये लोग राष्ट्रवाद बोलते हैं और ये लोग हमेशा इस देश के मुसलमान को अलग करना चाहते हैं । बाबू बसंत कुमार दास असम असेम्बली के पहले स्पीकर रहे हैं । वे पार्टिशन के बाद पाकिस्तान चले गए । अगर उनका कोई आएगा, वह दूसरी बात है । ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान भी गांधी जी के शिष्य रहे हैं । ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान पार्टिशन के खिलाफ रहे हैं । आज अगर ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान के डायनेस्टी का कोई वहाँ पर्सीक्यूशन होगा, उनको यहाँ नागरिकता मिलेगी या नहीं मिलेगी ।…(व्यवधान)जोगेन्द्र मंडल मुस्लिम लीग में था, जोगेन्द्र मंडल ने जिन्ना का साथ दिया था । अगर जोगेन्द्र मंडल का कोई आएगा,क्या उनको सिर्फ हिन्दू होने के कारण नागरिकता मिलनी चाहिए?
महोदय, मैं असम से आता हूँ । असम समझौता हुआ था, राजीव जी ने वह समझौता किया था और असम की जनता चाहती है कि वर्ष1971 का 25 मार्च के बाद जो हिन्दू हो, मुसलमान हो, जो आया उनको जाना होगा, जो आया उनको जाना होगा । ये लोग असम सूक्ति बोलते हैं असम समझौते को । वे लोग इम्प्लीमेंट कैसे करेंगे,वर्ष 2014 तक जो आया, उनको नागरिकता देकर ।
महोदय, ये लोग हिन्दू की बात बोलते हैं । ये लोग वर्ष 2015 में दो ऑर्डिनेंस लेकर आए । असम में दुलाल पाल, सुब्रत डे हिन्दू डिटेंशन कैम्प में रहे हैं, उन लोगों का वहाँ देहांत हुआ । पोना मुंडा का देहांत हुआ । उनका क्रीमेशन बांग्लादेश में नहीं हुआ, उनका क्रीमेशन पाकिस्तान में नहीं हुआ,उनका क्रीमेशन असम की धरती पर हुआ, उनका क्रीमेशन भारत की धरती पर हुआ । अगर ये विदेशी हैं तो उनका क्रीमेशन विदेश में क्यों नहीं किया?
प्रधान मंत्री जी कोलकाता गए थे । प्रधान मंत्री जी कोलकाता में रामकृष्ण मिशन में गए थे, मैंने उनका भाषण ध्यान से सुना था । प्रधान मंत्री जी ने बोला पाकिस्तान में अत्याचार हुआ । ठीक है ।…(व्यवधान)सौगत दा, आप एक सेकेंड मेरी बात सुनिए ।…(व्यवधान)मैंने उनका भाषण ध्यान से सुना,लेकिन एक बार भी प्रधान मंत्री जी ने जिक्र नहीं किया कि बांग्लादेश में भी हिन्दुओं के ऊपर अत्याचार हुआ । अगर अत्याचार हुआ है, तो जिक्र करना चाहिए था । बांग्लादेश हमारा दोस्त कंट्री है । अफगानिस्तान हमारा दोस्ट कंट्री है । अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई साहब ने क्या बोला,बीजेपी के एक मेंबर ने उस बारे में बोला है ।
हामिद करजई ने बोला कि अफगानिस्तान में सिर्फ हिन्दुओं के ऊपर नहीं, वहाँ के मुसलमानों के ऊपर भी अत्याचार हुआ । इसलिए यह धर्म के आधार पर जो नागरिकता है,यह नहीं होना चाहिए । फिजी में महेन्द्र चौधरी को वहाँ से हटा दिया था । अगर फिजी का हिन्दू कभी महसूस करेगा,कभी फिजी के हिन्दुओं को लगेगा कि हम लोग यहाँ सेफ नहीं हैं,तो उन लोगों का क्या होगा । इसलिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ और यह जो राष्ट्रपति जी का अभिभाषण है, इसमें एक देश-एक कानून की बात बोली गई थी, एक देश-एक पोल की बात बोली गई थी । अभी झारखंड और हरियाणा के चुनाव हुए,उनमें दो महीने का भी फर्क नहीं था । क्या यह दिशा है?
महोदय, इसलिए सरकार जो बोलती है, वह उसे करना चाहिए । ये टुकड़े-टुकड़े गैंग बोलते हैं, ऐसा कौन कर रहा है, यह सरकार कर रही है । यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए । सरकार को जिससे वोट मिला,सरकार सिर्फ उनकी नहीं है । मोदी जी मेरे भी प्रधान मंत्री हैं, इस देश के प्रधान मंत्री हैं । इसलिए प्रधान मंत्री से, सरकार से सारे नागरिक जिम्मेदारी की आशा करते हैं,उम्मीद करते हैं ।
महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपको धन्यवाद देता हूं और मैं अपनी पार्टी को भी धन्यवाद देता हूं ।
जय असम, जय हिन्द ।
माननीय सभापति : आपको भी धन्यवाद ।
श्री निहाल चन्द ।
श्री निहाल चन्द चौहान(गंगानगर): माननीय सभापति महोदय, सबसे पहले मैं यह बताना चाहूंगा कि मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हूं ।
सभापति महोदय,किसी शायर ने कहा था-
“मंजिल यूं ही नहीं मिलती दोस्त, एक जुनून जगाना पड़ता है, पूछा चिड़िया से, घोंसला कैसे बनता है, चिड़िया बोली, तिनका-तिनका उठाना पड़ता है ।” महोदय, मैं धन्यवाद देना चाहूंगा देश के प्रधान मंत्री जी को,जिन्होंने एक-एक तिनके से इस देश को बनाने का काम किया है । वर्ष 2014 से पहले यह देश एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था । विश्व के अन्दर भारत की कैसी साख थी,यह मुझे कहने की जरूरत नहीं है । विश्व गुरू कहलाने वाले भारत का तमाशा पूरा विश्व देख रहा था । जिस तरीके से इस देश में घोटाले हुए और जिस तरीके से इस देश को लूटा गया, इसके बारे में मुझे कहने की जरूरत नहीं है । लेकिन, पिछले छ: वर्षों के अन्दर केन्द्र में नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’करके दिखाया और भारत को विकास की मुख्य तर्ज पर लाने का काम किया । आज फिर से भारत विश्व गुरु बनने जा रहा है । पहले कभी भारत विश्व गुरु था और फिर से भारत आज विश्व गुरु बनने जा रहा है तो आने वाली पीढ़ियों में और उनके संस्कारों से जुड़ा हुआ यह देश किस तरीके से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है,यह मुझे कहने की जरूरत नहीं है । आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में एक नए भारत का निर्माण हो रहा है । एक नया विजन, कड़े कदम,साहसिक कार्य,बड़े डिसीजंस,जो देशहित में होने चाहिए थे,उसे देश के प्रधान मंत्री जी ने किया है ।
महोदय, मैं इसका जिक्र करना चाहूंगा कि देश के प्रधान मंत्री जी ने हम सबके लिए करतारपुर कॉरिडोर का एक रास्ता बनाया है । उसे गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर हम सब लोगों को,राष्ट्र को समर्पित किया । हमारे पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का जो जन्म स्थान है, उसके दर्शन करने का आज हमें मौका मिल रहा है । मैं देश के प्रधान मंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूंगा कि इतना बड़ा काम,जो वर्ष 1947 में हो सकता था,वह काम वर्ष 1947 से लेकर आज तक नहीं हो पाया था,उसे उन्होंने किया । करतारपुर में गुरु नानक देव जी की जन्म स्थली के दर्शन करने का अगर किसी ने हमें मौका दिया है तो वह देश के प्रधान मंत्री जी ने दिया है ।
महोदय, गुरु नानक देव जी ने कहा था-
“जेती सिरठि उपाई वेखा, विणु करमा कि मिलै लई ।” * [माननीय सदस्य, आप यह अच्छे से जानते होंगे, मैं आपसे निवेदन करूंगा कि आप अधीर साहब को बताएं कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल भोगना पड़ता है ।]* एक वक्त होता है और वक्त के आधार पर इंसान को उसके कर्मों का फल भोगना पड़ता है । काँग्रेस पार्टी ने जो कर्म किए, उसी वजह से आज काँग्रेस पार्टी उधर बैठी है और मुझे यह कहते हुए कोई शंका नहीं है कि गुरु नानक देव जी ने यह भी कहा था – “अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बन्दे, एक नूर से सब जग उपजया, कौन भले कौन मन्दे ।” गुरु नानक देव जी का यह श्लोक आज आदरणीय प्रधान मंत्री जी पर लागू होता है क्योंकि वैसे तो हम सब लोग ईश्वर की सन्तान हैं, लेकिन धार्मिक एकता और एक मजबूत राष्ट्र की पहचान अगर किसी ने विश्व को दी है तो वह देश के प्रधान मंत्री जी ने दी है ।
महोदय, देश के प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में विश्व किस तरीके से आगे बढ़ा है, यह मुझे कहने की जरूरत नहीं है । आज हिन्दुस्तान के गांवों का विकास हो रहा है । हिन्दुस्तान के खेतों और खलिहानों का विकास हो रहा है । आज़ादी के बाद के 70 सालों के इतिहास में आपने 55 सालों तक राज किया, लेकिन इन 70 सालों के इतिहास में अगर पहली बार किसी ने गांवों की पंचायतों को सीधे पैसे देने का काम किया, तो उसे देश के प्रधान मंत्री जी ने किया है । आज 14वें और 15वें वित्त आयोग का पैसा सीधा गांवों की ग्राम पंचायतों को मिल रहा है । राज्य वित्त आयोग का पैसा सीधा गांवों की ग्राम पंचायतों को मिल रहा है । मैं कहना चाहूंगा कि आज एक-एक ग्राम पंचायत इंडिपेंडेंट हुई है । 30 लाख रुपये से लेकर एक-एक करोड़ रुपये तक पैसे एक-एक ग्राम पंचायत में जा रहे हैं । अगर इसका सबसे बड़ा श्रेय किसी को दिया जाना चाहिए, वह देश के प्रधान मंत्री जी को दिया जाना चाहिए ।
सभापति जी,पंचायती राज संस्थानों के विकास के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । यह कोई छोटी बात नहीं है । मेरे से पहले काफी सदस्यों ने अपनी बात रखी है । जिस तरीके से इस देश में शौचालय बने हैं, जो क्षेत्र ओडीएफ हुए हैं, उनका 100 प्रतिशत काम हुआ है । दो करोड़ गरीबों के लिए मकान बने हैं । उनके लिए उज्ज्वला योजना की शुरुआत हुई है । 24 करोड़ लोगों का बीमा हुआ है । गरीबों के लिए पेंशन तथा मनरेगा योजना के बारे में सभी सदस्यों ने बात कही है । मैं उन सभी योजनाओं के बारे में नहीं जाना चाहूंगा । मैं गांव से आता हूं और एक किसान का बेटा हूं । इस सरकार ने किसानों के लिए जितना काम किया है, वह भी आप सभी के सामने है ।
महोदय, हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने पहली बार सोचा कि हमारी धरती माँ भी बीमार हो सकती है । पहली बार मेरी कंस्टिटूएन्सी श्रीगंगानगर में प्रधान मंत्री जी ने सॉइल हेल्थ कार्ड की शुरुआत की । आज देश के अंदर 10 करोड़ से ज्यादा किसानों ने सॉइल हेल्थ कार्ड लिया है । इससे उनकी जमीन खराब नहीं होगी । हमारी जो जीवनदायनी माँ है, वह हमें अन्न उपजा कर खिलाती है और हम सभी को बड़ा करती है । उसकी तबीयत खराब नहीं हो, इसके लिए सॉइल हेल्थ कार्ड की शुरुआत की गई है । मेरी कंस्टिटूएन्सी में ही 2.5 लाख से ज्यादा किसानों ने सॉइल हेल्थ कार्ड बनाए हैं । अगर इसके लिए हम सबसे ज्यादा किसी को धन्यवाद देना चाहें तो हम देश के प्रधान मंत्री जी को इसका धन्यवाद दे सकते हैं ।
महोदय, हमने पहली बार राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में देखा कि 100 जिलों में सिंचाई हेतु पर्याप्त जल मुहैया कराने की व्यवस्था की गई है । 20 लाख से ज्यादा किसानों को सोलर पंप देने के लिए व्यवस्था की गई है । अटल भूजल योजना सहित सारी की सारी योजना अगर किसी ने दी है तो केन्द्र की सरकार और देश के प्रधान मंत्री जी ने दी है । हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने यह घोषणा की थी कि देश के किसानों के लिए ‘किसान सम्मान निधि योजना’लागू की जाएगी । इस देश के 8 करोड़ से ज्यादा किसानों को कुल 3,073 करोड़ रुपये की ‘प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत सहायता दी गई है ।
महोदय, किसानों को मुख्यधारा में लाने का अगर किसी ने प्रयास किया है तो देश के प्रधान मंत्री जी ने किया है । मैं कहना चाहूंगा कि देश के प्रधान मंत्री जी ने किसानों के हित में काम किया है । चाहे वह रबी की फसल हो,चाहे वह खरीफ की फसल हो, इनका प्रीमियम देना केन्द्र सरकार ने तय किया है । पहली बार 1.5 प्रतिशत से लेकर 2 प्रतिशत तक सरकार प्रीमियम देती है और किसान को इसका मुआवजा मिलता है । मैं यहां एक बात क्वोट करना चाहूंगा । राजस्थान में विधान सभा का चुनाव था । इनके मुख्य नेता श्री राहुल गांधी जी राजस्थान गए थे । उन्होंने घोषणा की थी कि मैं राजस्थान का संपूर्ण कर्जा माफ करूंगा । राजस्थान का चुनाव हुए डेढ़ साल हो गया, लेकिन आज तक किसी भी किसान का एक रुपये का कर्जा माफ नहीं हुआ । वह जो घोषणा करते हैं, उस घोषणा को पूरा करने के बारे में इन्होंने कभी सोचा भी नहीं था । इन्होंने यह भी कहा था कि हम युवा बेरोजगारों को 3,500 रुपये प्रति महीने का बेरोजगारी भत्ता देंगे,लेकिन यह आज तक लागू नहीं हुआ है ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहूंगा । मैं राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र से आता हूं । आजकल राजस्थान में टिड्डी की बहुत मारामारी है । सीमावर्ती देश से टिड्डी आ रही है और वहां के 12 जिलों में टिड्डी की भरमार है । इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है । करोड़ों की तदाद में टिड्डी आती है । अगर एक टिड्डी जहां पर आ कर बैठ गई, एक टिड्डी की 100 दिन की उम्र है । एक टिड्डी अपने 100 दिन के कार्यकाल में 240 बच्चे पैदा करती है । आप इसका अंदाजा लगाइए कि किस तरीके से टिड्डियां बढ़ती जा रही हैं । मैं आपसे आग्रह करूंगा कि केन्द्र सरकार राजस्थान सरकार को डायरेक्शन दे और वहां के किसानों को मुआवजा दे । …(व्यवधान)
सभापति महोदय,अभी तो मैंने शुरुआत की है । मुझे 15 मिनट बोलने के लिए कहा गया था । मैं अपने आप ही बात को खत्म कर दूंगा ।
माननीय सभापति : आपके10मिनट हो चुकेहैं । सभी सदस्योंको 5-5 मिनटबोलने के लिएबताया गया है ।
श्री निहाल चन्द चौहान: सभापतिमहोदय, मैंदेश के प्रधानमंत्री जी कोइसलिए धन्यवाददेना चाहूंगाकि उन्होंनेपूरे देश कीसीमाओं को सड़कसे जोड़ा है ।मैं सीमावर्तीक्षेत्र से आताहूं । अगर प्रधानमंत्री ग्रामसड़क योजना कीशुरुआत हुई तोअटल जी के राजमें हुई । अगर भारतमालाकी शुरुआत हुईहै तो भारतीयजनता पार्टीके राज मेंहुई है । अगरदेश में ग्रीन कॉरिडोर कीशुरुआत हुई हैतो भारतीय जनतापार्टी के राजमें हुई है ।
सभापतिमहोदय, पहलीबार एक ग्रीनकॉरिडोर बननाहै । उस पर 25,000हजार करोड़रुपये खर्च होरहे हैं । यहकॉरिडोर भटिंडासे भावनगर तकहै । यह चारराज्यों को जोड़ताहै । पहली बारइतनी लंबी सड़कबन रही है,जिसकी हम लोगकल्पना नहींकर सकते हैं । अगर यह हुआ है,तो भारतीय जनता पार्टी के राज में हुआ है । सभापति महोदय, मैं राजस्थान से आता हूं । हम लोग अगर सिंचाई की बात करें, तो जब मैं पिछली बार सांसद था, तो केंद्र सरकार ने राजस्थान को बजट दिया, सभी स्टेट्स को बजट दिया । कुल 53 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई योजनाएं थी, अबकी बार 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये सिंचाई के लिए आबंटित हुए हैं । मेरे यहां तीन कैनाल हैं । एक तो एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी राजस्थान कैनाल है, उसमें 2,300 करोड़ रुपये सरकार ने दिए,भाखड़ा परियोजना में 786 करोड़ दिए और गंग कैनाल में 590 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने जारी किए । इसके काम की शुरुआत राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय हुई,लेकिन सरकार जाने के बाद सारा का सारा काम ठप पड़ा है । मेरा केंद्र सरकार से आपके माध्यम से आग्रह है कि वह राजस्थान सरकार को डायरेक्शन दे कि केंद्र सरकार ने जो पैसा दिया था, किसान के खेत में पानी पहुंचाने का अगर किसी ने संकल्प लिया,तो वह देश के प्रधान मंत्री जी ने लिया, लेकिन पूरा पानी तब पहुंचेगा,जब सारी नहरें पक्की होंगी,सारे खाले पक्के होंगे ।
मैं निवेदन करना चाहूंगा कि हम लोग राजस्थान में रहते हैं और पंजाब से गंदा पानी भी आ रहा है । वैसे तो यह राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का एक अंग है, लेकिन मैं इससे हटकर एक बात करूंगा कि कैमिकल युक्त गंदा पानी जो पंजाब से आ रहा है, उससे राजस्थान,पंजाब और हरियाणा के लोगों को कैंसर हो रहा है । मैं समझता हूं कि उनको उस कैमिकल युक्त गंदे पानी को बंद करना चाहिए । अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी ने पानी को लेकर रिसर्च की । उसने कहा कि दिल्ली, हिमाचल,हरियाणा, पंजाब, राजस्थान,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,जो नार्दर्न इंडिया है, इसमें जितना भी गंदा पानी आ रहा है, उसमें 30 माइक्रोग्राम अशुद्धि मिली हुई है । मैं निवेदन करना चाहूंगा कि ऐसे कई देश हैं,जहां पानी अगर 5 प्रतिशत भी गंदा हो जाए, तो वहां की सरकारें उस पानी के लिए सोचती हैं, लेकिन हमारे यहां सारा का सारा पानी गंदा चल रहा है । मैं आपसे आग्रह करूंगा कि केंद्र सरकार राज्यों को डायरेक्शन दे कि उसको भी साफ-सुथरा करने की जरूरत है ।
सभापति महोदय, स्वास्थ्य के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने करीब 70 करोड़ रुपये जारी किए हैं । मैं राजस्थान की तरफ से देश के प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि राजस्थान में उन्होंने 15 मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए हैं । मैं श्रीगंगानगर,हनुमानगढ़ से आता हूं । वहां दो मेडिकल कॉलेज,श्रीगंगानगर में मेडिकल कॉलेज और हनुमानगढ़ में मेडिकल कॉलेज,दोनों जगह मेडिकल कॉलेज केंद्र सरकार ने दिए हैं । मैं अपनी तरफ से, अपने जिले की तरफ से, अपने लोक सभा क्षेत्र की तरफ से देश के प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने इतना बड़ा काम किया है ।
सभापति महोदय, राजस्थान में हमारी सरकार नहीं है । सरकार किसी की भी हो,लेकिन वह सरकार आम लोगों के लिए होती है । देश के प्रधान मंत्री जी ने ‘आयुष्मान भारत’ की शुरुआत की है । इससे पांच लाख रुपये का सीधा बेनीफिट गांव के गरीब को मिलता है । मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि राजस्थान में अभी तक यह लागू नहीं है । जब केंद्र सरकार पैसा दे रही है, तो राजस्थान सरकार को तुरंत राजस्थान का डेटा केंद्र सरकार को भिजवाना चाहिए था कि स्कीम को लागू करने के लिए वह डेटा आपके पास आ गया है, केंद्र सरकार उसमें पैसे दे, लेकिन आज तक राजस्थान में ‘आयुष्मान भारत’की शुरुआत नहीं हुई है । आप सब लोग यहां बैठे हुए हैं । मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप राजस्थान सरकार के मुखिया को समझाइए कि वे ‘आयुष्मान भारत’ योजना की शुरुआत करें,ताकि राजस्थान के लोगों को बेनिफिट मिल सके ।…(व्यवधान)आप उनको समझाइए ।
मैं अपनी बात को समाप्त कर रहा हूं । मुझे पता है कि टाइम हो रहा है । मैं एक शेर कहकर अपनी बात को समाप्त करूंगा । किसी शायर ने कहा था, “नया चेहरा हो हंसता गाता, हर चेहरे पर हो मुस्कान नया गगन,पंख नए हों और नए सपने, नई उड़ान ।
नई सोच हो, नई कल्पना हो, नए नीड़ का नवनिर्माण सपने हों साकार सभी के,सब बोलें - जय-जय हिंदुस्तान ।” हम सब लोग नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पर विश्वास रखते हैं और देश के राष्ट्रपति जी ने जो अभिभाषण दिया था, हम लोग उनका समर्थन करते हैं । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । जय हिंद, जय भारत ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : निहाल चन्दजी आपने 15 मिनटकहा था, लेकिन15 मिनट सेपहले आपने खत्मकर दिया, इसके लिए आपकोबहुत-बहुतधन्यवाद ।
DR. G. RANJITH REDDY (CHEVELLA): Hon. Chairperson, thank you very much for giving me this opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address.
I would like to comment on two or three issues. In his Address, the hon. President has not mentioned about Telangana, a State which is developing and which has come up with so many welfare and developmental schemes. I really do not want to politicise the issue whether the hon. President addresses the developmental issue or not. What I want is that all the Parliamentarians should talk among each other as to what are the development measures the States are taking. Let us learn from each other. I believe that it is a right way for the development of the country.
As far as my State is concerned, when my hon. Chief Minister, Shri K. Chandrashekar Rao taken up the reins in 2014, his only vision was that no State will flourish if its farmers are in tears. So, his whole attention was on farmers. That is why, he has started the world’s biggest lift irrigation scheme called the ‘Kaleshwaram Project’ by investing Rs. 80,000 crore on that. About 60,000 labourers worked daily for three years. This is a record time wherein such a big project was completed. With this, 47 lakh acres of land has come under cultivation, 16 TMC of drinking water has been supplied in the rural areas, 30 TMC of drinking water has been supplied in Hyderabad, and 10 TMC of drinking water has been supplied to industries.
Along with this Kaleshwaram Project, KCR Sir has come up with a new scheme called ‘Rythu Bandhu’, wherein he has given Rs. 10,000 for each acre for two crops for every year. With this scheme, farmers are very happy. They are getting investment for crops. Under this scheme, about Rs. 5 lakh was given as insurance. Investment was encouraged. Free water and power were given. Shri K. Chandrashekar Rao has a very big heart. He was taking all the produce with the Minimum Support Price.
In addition to these, KCR Sir has come up with one more project by the name ‘Mission Bhagiratha’. He has invested Rs. 40,000 crore to supply drinking water to each and every household. I really appreciate the hon. Prime Minister also. When he had come to my State of Telangana, he appreciated both the projects, that is, ‘Mission Bhagiratha’ and ‘Rythu Bandhu’ and he has copied both the schemes and he is trying to implement it at the Centre.
Now, I come to ‘Mission Kakatiya’. My hon. Chief Minister, Shri K. Chandrashekar Rao, has invested Rs. 30,000 crore to restore all the tanks. He has restored more than 6000 tanks in my area for the development of agriculture-based income. It is because of this scheme the water level has come up by five metres in my State.
In addition to these, about six kilograms of rice per head is being given under Food Security Programme. A subsidy of Rs. 24 is being given on every kilogram of rice. About 85,53,157 ration card holders have been benefitted.
Now, I would like to talk about the Kalyana Lakshmi and Shaadi Mubarak Schemes. Whenever a girl child is born, most of the people feel that it is a burden. But my hon. Chief Minister, Shri K. Chandrashekar Rao, has come out as a big brother to the mother and as a maternal uncle to the child. He has started giving financial assistance of Rs. 1,00,116 for every marriage. With this Kalyana Lakshmi scheme, about 4,44,136 people have been benefitted and with the Shaadi Mubarak scheme, about 1,34,209 people have been benefitted. Along with these schemes, under the Aasara Pensions, pensions were given to all the old-aged people, physically handicapped, widows, and toddy tappers in the State. About 12,75,444 old age people, about 4,97,819 disabled people, about 14,50,000 widows, about 62,000 toddy tappers and about 17,000 weavers, about 33,000 AIDS patients, about 4,00,000 bidi rollers, about 1,34,990 single women, and about 417 old age artists, have been benefitted by this scheme.
Along with these, fine rice was given for the students. The State Government is supplying fine rice to the welfare hostels for implementing mid-day meals scheme. Under the scheme, about 44.61 lakh students were getting benefitted. In addition to this, Rs. 5 lakh ex-gratia was given for the victims of natural calamities. Along with this, Rs. 6 lakh ex-gratia was given for the victims of lightening.
The Economic Support Scheme was launched for the self-employed unemployed youth. About three acres of cultivable land is being distributed to all the Dalits. So far, 6,194 SCs have been benefitted with this scheme. There is also this Telangana Pride Scheme. The Government is implementing Telangana State Programme for rapid incubation of Dalit entrepreneurs. Along with this, a financial assistance of Rs.6 lakh is given to families of farmers who have committed suicide. As regards education, 700 good welfare schools were started for SCs/STs. These schools are at par with the private schools. Along with this, minority schools have also been started for BCs. Free technical education is also being given.
As far as health is concerned, KCR gives free kits to all newly born children. We have started Kanti Velugu which is eye testing camp. The world’s biggest eye testing camp was organised in the State of Telangana.
As far as Haritha Haram is concerned, we have about 67 lakh acres as a forest area in Telangana which comes to about 24 per cent. The green cover which was 24 per cent in Telangana has gone up to 33 per cent. I feel that increasing green cover is one of the parameters for the Centre to sanction our share of taxes. In spite of doing all these things, the State is deprived and our share of taxes was cut short by 12 per cent, which comes to Rs.2400 crore. What wrong did we do? Even after coming up with so many projects, the State is deprived of its share of taxes.
As far as Haritha Haram is concerned, it is the world’s biggest green cover. The first one was taken up in China where people have undertaken plantation on a stretch of 4500 kilometres. The second biggest plantation has happened in Brazil. After that, this is the world’s biggest Haritha Haram project which is coming up in India. Coming from Telangana, I am definitely proud of all the beneficial schemes which are being implemented by our hon. Chief Minister along with our dynamic working President, KTR. Not only the people of Telangana, all the Indians have to be proud of all the schemes which are being taken up in Telangana. We have become a role model for the country. I would request everyone to also take these measures.
HON. CHAIRPERSON : Continue to be the role model.
श्री असादुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद): सर,मैं सदर-ए-जम्हूरियाके इस खुत्बेमें जो मोशनमूव किया गयाहै, इसकीहज्बे आदत औरमुखालिफ़त करनेके लिए खड़ाहुआ हूं । मौजूदावतन-ए-अज़ीज़का जो माहौलहै, जो पुरआशुबदौर है, उसपर किसी शायरने बड़ा खूबकहा है, इसेमैं पहले मिसरेमें तरमीम करकेकहना चाहता हूं-
“हुक्मरान होगए बहरे औरअंधे लोग, खाक में मिलगए नगीने लोग ।
हरमुहिबे वतन ज़लीलहुआ,रात का फासलातवील हुआ ।
आमिरोंके गीत जो गातेरहे,वही नाम औरदाद पाते रहे ।
रहज़नोंने रहज़नी कीथी,रहबरों नेभी क्या कमीकी थी ।” जनाब चेयरमैनसाहब, सदर-ए-जम्हूरियाके खुत्बे मेंखारिजा पालिसीके बारे मेंकहा गया किनेबरहुड फर्स्ट । इसकी नाकामीका अंदाजा इसबात से लगायाजा सकता हैकि नेपाल एकमुल्क है जिसकेबहुत करीबी ताल्लुकातभारत से रहेहैं । आज नेपालनरेन्द्र मोदीजी की सरकारको कह रहा हैकि मिस्टर मोदीअगर आप चाहेंतो हम इन्टरलॉक्युटरबनकर आपको औरपाकिस्तान कोबिठाकर बात करादेते हैं । अबआप बताएं किइन लोगों कीकितनी कामयाबीहै?
इनकी दूसरीकामयाबी या नाकामीदेख लीजिए ।भारत की नहींबल्कि इनकी सरकारकी नाकामी हैकि अमेरिका कीकांग्रेस मेंऔर सेनेटर्सने हमारे मुल्कपर कई हियरिंग्सकीं, कई रिमार्क्सकिए और कई मोशन्सपास किए । इतनावजीर-ए-आज़म ट्रम्पसे बगलगीर हुए,पिछली बारऐसा लग रहाथा कि शायदबकरीद और रमज़ानकी ईद के गलेमिल रहे हैं । इसके बावजूदभी अमेरिका केकांग्रेस औरसेनेटर्स भारतकी पालिसी परतनकीह पर तनकीहकर रहे हैं,इससे आपकीकामयाबी का अंदाजाहोता है ।
तीसरी बात,यूरोपियन पार्लियामेंट में भारत केखिलाफ रिजाल्युशनमूव हो गया,यह आपकी कामयाबीया नाकामयाबीहै, आप खुदअंदाजा लगा लीजिए । कश्मीर कीपालिसी के बारेमें बड़ा अफसोसहोता है औरमैं समझता हूंकि ऐवान कीतौहीन भी हुकूमतकर रही है किगोरी चमड़ी केडिप्लोमैट्सको लेकर कश्मीरजाते हैं, मगर भारत केअवाम ने जिसेमुन्तखिब किया,उनको नहींलेकर जाते हैं । आखिर आप क्योंडरते हैं डिप्लोमैट्ससे, फॉरेनकन्ट्रीज़ से?क्यों इनकीखुशामद कर रहेहैं? क्योंउनके पैरों परगिरकर बता रहेहैं कि चलिएकश्मीर और हमजाना चाहते हैंतो नहीं जासकते? यह आपकी और एक खारिजा पॉलिसी की नाकामी है । मैं एफएटीएफ की एक मिसाल दे रहा हूं । एफएटीएफ में जापान मुल्क,जो हमारा दोस्त रहा है, उसने पाकिस्तान के हक में वोट दे दिया,अमेरिका ने भी दे दिया । अब पाकिस्तान पर से एफएटीएफ खत्म हो जाएगा और वह ग्रे लिस्ट से निकल जाएगा । यह इनकी खारिजा पॉलिसी रही है । अफगानिस्तान में तालिबान आ रहा है । अमेरिका कह रहा है कि चाबहार पोर्ट में भारत पोर्ट नहीं बना सकता है । कल तालिबान वहां पर आ जाएगा तो फिर हम क्या करेंगे? आपके पास इसका कोई अंदाजा नहीं है ।
हज सब्सिडी को निकाला गया था । 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी निकाली गई । मैंने खुद कहा था, कहां गए वे पैसे? 700 करोड़ रुपये से आपने कितनी मुस्लिम महिलाओं के लिए स्कूल खोले? जीरो । मैं हर साल स्कॉलरशिप की डिमांड करता हूं कि आप माइनोरिटीज के लिए डिमांड ड्रिवेन स्कॉलरशिप कीजिए, आप नहीं करते हैं । नहीं करने की वजह से हर साल कम से कम 20 लाख मुस्लिम लड़के और लड़कियां स्कॉलरशिप से महरूम होते हैं ।
वर्ष 2018-19 में जो पैसे दिए गए थे, उसमें से आपने 170 करोड़ रुपये नहीं दिए । वर्ष 2019-20 में आपने नवम्बर तक केवल 27 फीसदी पैसे रिलीज किए,फिर आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं ।
सदरे जम्हूरिया ने हुनर हाट का जिक्र किया था । इसमें भी … * है । सभापति महोदय, आप … * का अंदाजा लगा सकते हैं कि मैने खुद गवर्नमेंट का आर.टी.आई एप्लीकेशन डाला, जिसमें कहा गया कि वर्ष 2018-19 में केवल 1227 आर्टिजन्स को हुनर हाट में ट्रेनिंग दी गई । आप कहते हैं हजारों लोगों को दी गई । ये आर.टी.आई के जवाब हैं ।
मैं तीसरी बात थ्योरी ऑफ सेपरेशन ऑफ पावर्स का जिक्र करना चाहता हूं । यह हमारे हर जम्हूरियत के लिए बुनियाद होती है । मगर, साढ़े पांच सालों में थ्योरी ऑफ सेपरेशन ऑफ पावर्स की धज्जियां नहीं,बल्कि उसको नेस्त-व-नाबूद कर दिया गया । आज कोई चीज आजाद नहीं है । थ्योरी ऑफ सेपरेशन ऑफ पावर्स खत्म होकर यहां पर सेंट्रलाइजेशन ऑफ पावर्स बन चुका है । एक ही शख्स के हाथ में पूरी पावर आ चुकी है । अब लगता है कि एक ही फर्क में ये तमाम चीजें समा चुकी हैं,जो हमारी जम्हूरियत के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो रहा है ।
चौथी बात, जिसका जिक्र मैं आपके सामने करना चाहता हूं कि सरकार बार-बार सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट के बारे में कहती है । इस पार्लियामेंट की तारीख में यह पहला कानून बनाया गया, जिसमें हिन्दू, मुसलमान,बौद्ध, ईसाई,पारसी मजहब का नाम लिया गया । पिछले 70 सालों में पार्लियामेंट में कभी भी इस तरह का कानून नहीं बना है । यह बदनुमा दाग का एहसास आपको हासिल है कि आपने मजहब के नाम पर कानून बनाया ।
एनपीआर, एनआरसी के बारे में आज एक सवाल के जवाब में हुकूमत ने कहा till now, no decision on NRC has been taken. Till now का मतलब क्या है? …(व्यवधान)आज और कल होगा,परसों होगा ।
माननीय सभापति : उसमेंलिखा है,अभी तक ।
श्री असादुद्दीन ओवैसी: कबतक कहीं नहींलिखा हुआ है । मैं आपके जरिएसरकार से कहरहा हूं । …(व्यवधान) मैं थम्ब्स-अप हूं, आप शेक्सपियर पढ़े हैं, मुझे मालूम है । सभापति महोदय,मैं अभी हलवा और पोहा खाकर आया हूं, इसलिए अच्छा बोल रहा हूं । मैं एनपीआर और एनआरसी पर जिम्मेदारी के साथ अर्ज कर रहा हूं । प्रधान मंत्री जी जब जवाब देंगे, बल्कि मैं प्रधान मंत्री जी को हिम्मत करके कह रहा हूं, मैं प्रधान मंत्री जी को चैलेंज कर रहा हूं- आप यह बता दीजिए कि क्या एनपीआर और एनआरसी एक सिक्के के दो रुख नही हैं?क्या एनपीआर और एनआरसी 14 ए के तहत सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के रूल्स में नहीं हैं । अगर एनपीआर होगा तो एनआरसी होगा, इसीलिए आपने तीन हजार नौ सौ करोड़ एनपीआर को दिए हैं । …(व्यवधान) इन तमाम लोगों से पूछिए कि 2003 के रूल्स में कितनी बार नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर लिखा गया है, कितनी दफा नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियंस इसमें लिखा गया है? इनको पता ही नहीं है । मैं आपके सामने कह रहा हूं कि एनपीआर होगा तो एनआरसी होगा क्योंकि सेंसस अलग है । सेंसस अलग है, एनपीआर अलग है । …(व्यवधान)आप जब एनपीआर करेंगे तो आप उसमें आठ नए सवालात क्यों डाल रहे हैं कि एनआरसी नहीं करेंगे । …(व्यवधान)आप बोलना चाहते हैं तो मैं बैठ जाता हूं ।
17.00 hrs सर, प्रधान मंत्री जी सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के लिए कहते हैं कि यह नागरिकता देता है, लेता नहीं है । यह देता भी है और लेता भी है, उसकी मिसाल असम है । क्या असम में पांच लाख मुसलमानों के नाम नहीं आए?वे बंगाली जुबान बोलते हैं । असम में पांच लाख बंगाली जुबान वाले हिंदू हैं । आप बंगाली हिंदुओं को सिटीजनशिप देना चाहते हैं,लेकिन असम के पांच लाख मुसलमानों को नहीं देना चाहते हैं । क्या आपकी सरकार ने असम की असेंबली में यह नहीं कहा? यह सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट है । …(व्यवधान)मैं घुसपैठिया नहीं, घुसपैठियों का बाप हूं । सर,एनपीआर होगा तो एनआरसी होगा । असम में जो घुसपैठियें हैं, वे मुसलमान घुसपैठिये हैं । बंगाली हिंदू नहीं है । …(व्यवधान)सर, मैं दो मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं ।
सर, एनपीआर और एनआरसी में कुछ भी फर्क नहीं है । एनपीआर और एनआरसी एक ही है । एनपीआर होगा तो एनआरसी भी होगा । प्रधान मंत्री जी यह बता दें कि असम के पांच लाख बंगाली हिंदुओं को सीएए के तहत सिटीजनशिप नहीं मिलेगी । सर, मैं आपको आखिरी में बताना चाहूंगा कि यह जो मुल्क में माहौल है,प्रधान मंत्री जी और सरकार कह रही है कि यह एहतजाजक्यों हो रहा है । प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि मैं मुस्लिम महिलाओं का भाई हूं । अगर आज मुस्लिम महिलाएं उनके खिलाफ खड़ी हैं तो भाई को नाराजगी क्यों हो रही है?एहतजाज क्यों हो रहा है । सर,यह लड़ाई हमारे वजूद और बक़ा की लड़ाई है । अगर हम इसमें नाकाम हो जाते हैं तो हम खत्म हो जाएंगे । इसीलिए हम आपसे कह रहे हैं कि आप कैटेगेरली खड़े रहिए । सर, मौजूदा वतन में जो माहौल है वह ऐसा है कि जैसे सन् 1933 में जर्मनी का माहौल हो या जैसे सन् 1938 के जर्मनी का माहौल हो । जैसे सन् 1938 के … * का माहौल हो । सर, आपको मालूम है कि अब बाकी क्या रह गया है? … * ने भी सेंसस किया था, उसके बाद यहूदियों को … * में डाल दिया गया था । … * ने भी सन् 1938 में सेंसस किया था, उसके बाद रोमा और यहूदियों की पूरी जायदाद छीन ली गई थी । अब वही हाल यहां पर मुसलमानों के साथ होने वाला है ।…(व्यवधान) सर, वही हाल होने वाला है । ये वही हाल करने वाले हैं । इनका मकसद ही यही है । …(व्यवधान)सर, मैं खत्म कर रहा हूं । दिल्ली में क्या हो रहा है? इतने पावरफुल होम मिनिस्टर है कि तीन-तीन गोलियां चलती हैं । क्या यह आपका लॉ एण्ड आर्डर है ।…(व्यवधान)देश की राजधानी में तीन-तीन गोलियां चलती हैं । गोली मारो देश के गद्दारों को । मारो मुझे । …(व्यवधान) आपमें हिम्मत है तो मुझे मारो । मैं मरने के लिए तैयार हूं ।…(व्यवधान) सर, यह बुजदिल हैं ।…(व्यवधान)ये संविधान को खत्म करना चाहते हैं । भारत को … * का मुल्क बनाना चाहते हैं । इसलिए मैं इसकी मुख़ालफत करता हूं । धन्यवाद । …(व्यवधान)
جناب اسدالدین اویسی (حیدرآباد): جناب میں صدرِ جمہوریہ کے اس خطبہ میں جو موشن موو کیا گیا ہے ، اس کی حذبِ عادت اور روایت مخالفت کرنے کے لئے کھڑا ہوا ہوں۔ موجودہ وطنِ عزیز کا جو ماحول ہے، جو پُر آشوب دور ہے اس پر کسی شاعر نے بڑا خوب کہا ، اسے میں پہلے مصرعہ میں ترمیم کرکے کہنا چاہتا ہوں۔ حکمراں ہو گئے بہرے اور اندھے لوگ، خاک میں مل گئے نگینے لوگ ہر محبِّ وطن ذلیل ہوا، رات کا فاصلہ طویل ہوا عامروں کے گیت جو گاتے رہے ، وہی داد اور نام پاتے رہے رہزنوں نے رہزنی کی تھی، رہبروں نے بھی کیا کمی کی تھی جناب، چیرمین صاحب، صدرِ جمہوریہ کے خطبہ میں خارجہ پالیسی کے بارے میں کہا گہا کہ نیبر ہوڈ فرسٹ۔ اس کی ناکامی کا انداذہ اس بات سے لگایا جا سکتا ہے کہ نیپال ایک ملک ہےجس کے بہت قریبی تعلقات بھارت سے رہے ہیں۔ آج نیپال مودی جی کی سرکار کو کہہ رہا ہے کہ مسٹر مودی اگرآپ چاہیں تو ہم انٹر لوکیوٹر بن کر آپ کو اور پاکستان کو بیٹھا کر بات کرا دیتے ہیں۔ اب آپ بتائیے کہ ان لوگوں کی کتنی کامیابی ہے؟ ان کی دوسری کامیابی یا نا کامیابی دیکھ لیجئے۔ بھارت کی نہیں بلکہ اب کی سرکار کی ناکامی ہےکہ امریکہ کی کانگریس میں اور سینیٹرس نے ہمارے ملک پر کئی ہیرنگس کیں، کئی ریمارکس کئیے اور کئی موشن پاس کئیے۔ اتنا وزیرِ اعظم ٹرمپ سے بغلگیر ہوئے، پچھلی بار ایسا لگ رہا تھا کہ شاید بقرعید اور رمضان کی عید کے گلے مل رہے ہیں۔ اس کے با وجود بھی امریکہ کی کانگریس اور سینیٹرس بھارت کی پالیسی پر تنقید پر تنقید کر رہے ہیں، اس سے آپ کی کامیابی کا انداذہ ہوتا ہے۔ تیسری بات، یوروپین پارلیمنٹ میں بھارت کے خلاف ریزولیوشن موو ہو گیا، یہ آپ کی کامیابی یا نا کامیابی ہے، آپ خود اندازہ لگا لیجیئے۔ کشمیر کی پالیسی کے بارے میں بڑا افسوس ہوتا ہے اور میں سمجھتا ہوں کہ ایوان کی توہین بھی حکومت کر رہی ہےکہ گوری چمڑی کے ڈپلومیٹس کو لے کر کشمیر جاتے ہیں، مگر بھارت کی عوام نے جسے منتخب کیا، ان کو نہیں لے کر جاتے ہیں۔ آخر آپ کیوں ڈرتے ہیں ڈِپلومیٹس سے، فورن کنٹریز سے؟ کیوں ان کی خوش آمد کر رہے ہیں؟ کیوں ان کے پیروں پر گِر کر بتا رہے ہیں کہ چلئیے کشمیر اور ہم جانا چاہتے ہیں تو نہیں جا سکتے ؟ یہ آپ کی ایک اور خارجہ پالیسی کی ناکامی ہے۔ میں ایف۔اے۔ٹی۔ایف۔ کی ایک مثال دے رہا ہوں۔ ایف۔اے۔ٹی۔ایف۔ میں جاپان ملک، جو ہمارا دوست رہا ہے، اس نے پاکستان کے حق میں ووٹ دے دیا، امریکہ نے بے دے دیا۔ اب پاکستان پر سے ایف۔اے۔ٹی۔ایف۔ ختم ہو جائے گا اور وہ گرے لِسٹ سے نکل جائے گا۔ یہ ان کی خارجہ پالیسی رہی ہے۔ افغانستان میں طالبان آ رہا ہے۔ امریکہ کہہ رہا ہے کہ چاہ بہار پورٹ میں بھارت پورٹ نہیں بنا سکتاہے۔ کل طالبان وہاں پر آجائے گا تو پھر ہم کیا کریں گے؟ آپ کے پاس اس کا کوئی اندازہ نہیں ہے۔ حج سبسڈی کو نکالا گیا تھا۔ 700 کروڑ کی سبسڈی نکالی گئی۔ میں نے خود کہا تھا، کہاں گئے وہ پیسے؟ 700 کروڑ روپئیے سےآپ نے کتنے مسلم خواتین کے لئے اسکول کھولے؟ زیرو۔ میں ہر سال اسکالرشِپ کی ڈیمانڈ کرتا ہوں کہ آپ اقلیتوں کے لئے ڈیمانڈ ڈریوین اسکالرشِپ کیجیئے۔ آپ نہیں کرتے ہیں۔ نہیں کرنے کی وجہ سے ہر سال کم سے کم 20 لاکھ مسلم لڑکے اور لڑکیاں اسکالرشِپ سے محروم ہوتے ہیں۔ سال 19-2018 میں جو پیسے دئے گئے تھے، اس میں سے آپ نے 170 کروڑ روپئےنہیں دئیے۔ سال 20-2019 میں آپ نے نومبر تک صرف 27 فیصدی پیسے ریلیز کئے۔ پھر آپ بڑی بڑی باتیں کرتے ہیں۔ صدرِ جمہوریہ نے ہُنر ہاٹ کا ذکر کیا تھا۔ اس میں بھی (کاروائی میں شامل نہیں ) ہے محترم چیرمین صاحب، آپ (کاروائی میں شامل نہیں ) کا اندازہ لگا سکتے ہیں کہ میں نے خود گورنمنٹ کا آر۔ٹی۔آئی۔ ایپلیکیشن ڈالا ہے، جس میں کہا گیا کہ سال 19-2018 میں صرف 1227 آرٹیزنس کو ہُنرہاٹ میں ٹریننگ دی گئی، آپ کہتے ہیں ہزاروں لوگوں کو دی گئی۔ یہ آر۔ٹی۔آئی۔ کے جواب ہیں۔ میں تیسری بات تھیوری آف سیپریشن آف پاورس کا ذکر کرنا چاہتا ہوں۔ یہ ہمارے ہر جمہوریت کے لئے بنیاد ہوتی ہے۔ مگر، ساڑے پانچ سالوں میں تھیوری آف سیپریشن آف پاورس کی دھجّیاں نہیں بلکہ اس کو نیست و نابود کر دیا گیا۔ آج کوئی چیز آزاد نہیں ہے۔ تھیوری آف سیپریشن آف پاورس ختم ہو کر یہاں پر سینٹرلائیزیشن آف پاورس بن چکا ہے۔ ایک ہی شخص کے ہاتھ میں میں پورا پاور آچکا ہے، اب لگتا ہے کہ ایک ہی فرق میں یہ تمام چیزیں سما چُکی ہیں، جو ہماری جمہوریت کے لئے بہت ہی بڑا خطرہ ثابت ہو رہا ہے۔ چوتھی بات، جس کا ذکر میں آپ کے سامنے کرنا چاہتا ہوں کہ سرکار بار بار سٹیزن شِپ امینڈمینٹ ایکٹ ۔ اس پارلیمنٹ کی تاریخ میں یہ پہلا قانون بنایا گیا، جس میں ہندو مسلمان، بودھ، عیسائی، پارسی مذہب کا نام لیا گیا۔ پچھلے 70 سالوں میں پارلیمنٹ میں کبھی بھی اس طرح کا قانون نہیں بنایا گیاہے۔ یہ بدنُما داغ کا احساس آپ کو حاصل ہےکہ آپ نے مذہب کے نام پر قانون بنایا۔ این۔پی۔آر۔ اور این۔آر۔سی۔ کے بارے میں آج ایک سوال کے جواب میں حکومت نے کہا Till now, no decision on NRC has been taken. Till now کا کیا مطلب ہے؟ (مداخلت)۔۔ آج اور کل ہوگا، پرسو ہوگا۔ کب تک کہیں نہیں لکھا ہے۔ میں آپ کے ذریعہ سرکار سے کہہ رہا ہوں (مداخلت)۔۔ میں تھمبس اپ ہوں، آپ شیکسپئر پڑھیں، مجھے معلوم ہے۔ چیرمین صاحب، میں ابھی حلوہ اور پوہا کھا کر آیا ہوں، اس لئے اچھا بول رہا ہوں۔ میں این۔پی۔آر۔ اوراین۔آر۔سی۔ کا ذمہ داری کے ساتھ عرض کر رہا ہوں۔ وزیرِ اعظم جب جواب دیں گے، بلکہ میں وزیرِ اعظم صاحب کو ہمت کرکے کہہ رہا ہوں، میں وزیرِ اعظم صاحب کہ چیلینج کر رہا ہوں۔ آپ یہ بتا دیجئے کہ کیا این۔پی۔آر۔ اور این۔آر۔سی۔ ایک ہی سکّے کے دو رُخ نہیں ہیں؟ کیا این۔پی۔آر۔ اور این۔آر۔سی۔ 14 اے کے تحت سٹیزن شِپ امینڈمینٹ ایکٹ کے رولز میں نہیں ہے۔ اگر این۔پی۔آر۔ ہوگا تو این۔آر۔سی۔ ہوگا، اس لئے آپ نے تین ہزار نو سو کروڑ این۔پی۔آر۔ کو دئیے ہیں۔ (مداخلت)۔۔ ان تمام لوگوں سے پوچھئیےکہ 2003 کے رولز میں کتنی بار نیشنل پاپولیشن رجسٹر لکھا گیا ہے، کتنی بار نیشنل رجسٹر آف انڈینس اس میں لکھا گیا ہے؟ ان کو پتہ ہی نہیں ہے۔ میں آپ کے سامنے کہہ رہا ہوں کہ این۔پی۔آر۔ ہوگا تو این۔آر۔سی۔ ہوگا کیونکہ سینسس الگ ہے ، این۔پی۔آر۔ الگ ہے (مداخلت)۔۔۔ آپ جب این۔پی۔آر۔ کریں گے تو آپ اس میں آٹھ نئے سوالات کویں ڈال رہے ہیں کہ این۔آر۔سی۔ نہیں کریں گے (مداخلت)۔۔۔ آپ بولنا چاہتے ہیں تو میں بیٹھ جاتا ہوں۔ سر، وزیرِ اعظم سٹیزن شِپ امینڈمینٹ ایکٹ کے لئے کہتے ہیں کہ یہ ناگرِکتا دیتا ہے، لیتا نہیں ہے۔ یہ دیتا بھی ہے اور لیتا بھی ہے، اس کی مثال آسام ہے۔ کیا آسام میں پانچ لاکھ مسلمانوں کے نام نہیں آئے ؟ وہ بنگالی زبان بولتے ہیں۔ آسام میں پانچ لاکھ بنگالی زبان بولنے والے ہندو ہیں۔ آپ بنگالی ہندووں کو شہریت دینا چاہتے ہیں، لیکن آسام کے پانچ لاکھ مسلمانوں کو نہیں دینا چاہتے ہیں۔ کیا آپ کی سرکار نے آسام کی اسمبلی میں یہ نہیں کہا ؟ یہ سٹیزن شِپ امینڈمینٹ ایکٹ ہے (مداخلت)۔ میں گھُس پیٹھیا نہیں، گھُس پیٹھیوں کا باپ ہوں۔ سر، این۔پی۔آر۔ ہوگا تو این۔آر۔سی۔ ہوگا۔ آسام میں جو گھُس پیٹھئیں ہیں وہ مسلمان گھُس پیٹھئیں ہیں۔ بنگالی ہندو نہیں ہیں ۔۔ (مداخلت)۔۔ سر میں دو منٹ میں اپنی بات ختم کر رہا ہوں۔ جناب، این۔پی۔آر۔ اور این۔سی۔آر۔ میں کچھ بھی فرق نہیں ہے۔ این۔پی۔آر۔ اور این۔سی۔آر۔ ایک ہی ہے۔ این۔پی۔آر۔ ہوگا تو این۔آر۔سی۔ بھی ہوگا۔ وزیرِ اعظم صاحب بھی یہ بتا دیں کہ آسام کے پانچ لاکھ بنگالی ہندووں کو سی۔اے۔اے۔ کے تحت شہریت نہیں ملے گی۔ سر میں آپ کو آخری میں بتانا چاہوں گا کہ یہ جو ملک میں ماحول ہے، وزیرِ اعظم اور سرکار کہہ رہی ہے کہ یہ احتجاج کیوں ہو رہا ہے۔ وزیرِ اعظم صاحب نے کہا تھا کہ میں مسلم خواتین کا بھائی ہوں۔ اگر آج مسلم خواتین ان کے خلاف کھڑی ہیں تو بھائی کو ناراضگی کیوں ہو رہی ہے؟ احتجاج کیوں ہو رہا ہے۔ سر یہ لڑائی ہمارے وجود اور بقاء کی لڑائی ہے۔ اگر ہم اس میں ناکام ہوتے ہیں تو ہم ختم ہو جائیں گے۔ اس لئے ہم آپ سے کہہ رہے ہیں کہ آپ کیٹیگیرلی کھڑے رہئیے۔ سر، موجودہ وطن میں جو ماحول ہے وہ ایسا ہے کہ جیسے سن 1933 میں جرمنی کا ماحول ہو یا جیسے 1938 میں جرمنی کا ماحول تھا۔ جیسے سن 1938 کے (کاروائی میں شامل نہیں)۔ کو ماحول ہو۔ سر، آپ کو معلوم ہے کہ اب باقی کیا رہ گیا ہے؟ (کاروائی میں شامل نہیں) نے بھی سینسیس کیا تھا، اس کے بعد یہودیوں کو (کاروائی میں شامل نہیں) میں ڈال دیا گیا تھا۔ (کاروائی میں شامل نہیں) نے بھی 1938 میں سینسس کیا تھا اس کےبعد رومن اور یہودیوں کی پوری جائیداد چھین لی گئی تھی۔ اب وہی حال یہاں پر مسلمانوں کے ساتھ ہونے والا ہے ۔ (مداخلت)۔۔ سر، وہی حال ہونے والا ہے، یہ وہی حال کرنے والے ہیں۔ ان کا مقصد ہی یہی ہے۔ (مداخلت)۔ جناب، میں ختم کر رہا ہوں، دہلی میں کیا ہو رہا ہے؟ اتنے پاورفُل ہوم منسٹر ہیں کہ تین۔تین گولیاں چلتی ہیں۔ کیا یہ آپ کا لاء اینڈ آرڈر ہے۔ (مداخلت)۔۔ ملک کی راجدھانی میں تین۔تین۔ گولیاں چلتی ہیں۔ گولی ماروں دیش کےغدّاروں کو ۔ مارو مجھے۔ (مداخلت)۔۔ آپ میں ہمت ہے تو مجھے مارو۔ میں مرنے کے لئے تیار ہوں (مداخلت)۔۔ سر یہ بُزدل ہیں (مداخلت)۔۔ یہ آئین کو ختم کرنا چاہتے ہیں۔ بھارت کو (کاروائی میں شامل نہیں) کا ملک بنانا چاہتے ہیں۔ اس لئے میں اس کی مخالفت کرتا ہوں ۔۔ شکریہ ۔۔ (ختم شد) THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS, MINISTER OF COAL AND MINISTER OF MINES (SHRI PRALHAD JOSHI): Sir, whatever he has said about Muslims, that Muslims are to be put in the … * has to be expunged. …(Interruptions) He has talked very unconstitutionally and he has totally violated the decorum of the House.
HON. CHAIRPERSON: Whatever is objectionable will be looked into. No objectionable part would be in the record.
Shri N.K. Premachandran may speak now.
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record.
…(Interruptions) … * HON. CHAIRPERSON: Before Shri Premachandran speaks, I want to make an announcement. Hon. Members, those who want to lay their written speeches on the Table may do so and they will be taken as part of the proceedings.
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, I thank you very much for affording this opportunity to take part in the discussion on the Motion of Thanks to the President’s Address to the Joint Session of the Parliament.
Sir, first of all, I would like to say that the President’s Address to the Joint Session of the Parliament is deeply disappointing and most of the observations of the hon. President are contrary to the facts and ground realities. I will substantiate it.
The hon. President is making the Address before the Joint Session of the Parliament under article 87 of the Constitution. Sir, it is the constitutional responsibility of the President to make a speech and address before the Joint Session of the Parliament by virtue of article 87 of the Constitution. Hon. President has to give the cause of his summons on why the House is being summoned.
On 18th May, 1949, a discussion did take place on Article 87. In that, Dr. Ambedkar had rightly stated that it is the constitutional responsibility of the President to inform the House regarding the state of affairs of the Union, the financial position of the country, and also regarding the policy issues of the country.
This is the statement made by Dr. Babasaheb Ambedkar in the year 1948 regarding Article 87, which provides for the President’s Address to the Joint Session of the House.
Sir, after 70 years of Independence, the country has never experienced such an economic recession or an economic slowdown, as stated by the hon. Finance Minister. But if you go through the President’s Speech, there is not even a single observation about the financial crisis being faced by the country. It is a glaring omission on the part of the President’s Speech in which the financial crisis or the economic slowdown is not mentioned. It is quite unfortunate. That is my first point which I would like to make.
Sir, this year’s President’s Speech begins with the dreams of our late giant leaders or the leaders of the freedom movement, like Bapuji’s dream of Gram Swaraj, Babasaheb Ambedkar’s dream of Social Justice, Nehru’s dream of Modern India, Sardar Vallabhbhai Patel’s dream of Ek Bharat Shrestha Bharat, Lohia’s vision of Social Equality, and Deen Dayal Upadhyaya’s goal of Antyodaya. But unfortunately, the programmes and policies of the NDA Government are against the will and dreams of our late national leaders.
Sir, the programmes and policies of this Government are anti-people, anti-labour, and anti-secular. By pursuing those policies, how is the Government going to achieve or make the dreams of the great giant leaders into reality? That is the second question which I would like to pose, which is regarding Para 3.
Coming to Para 4 of the hon. President’s Speech, that is, regarding the respect and commitment to the Constitution, Sir, you may kindly see the commitment to the Constitution. The hon. President is saying that we have adopted the Constitution on November 26th, 1949, and we have completed 70 years of adoption of the Constitution. But unfortunately, his Excellency the President of India ignored the 70 years of the Republic of the country. The country has got 70 years of Republic. We have adopted it. The Constitution of India starts with the Preamble ‘We, the people of India’. Sir, if you examine, on January 26th, the 70th year of the Republic of India, without any direction or compulsion, crores and crores of people in the country had read out the Preamble of the Constitution, and the people in the country had taken a pledge that we will protect and preserve the Constitutional Principles of the country. The secular fabric of the country will be protected. The hon. President is saying that 12 crores of people have taken the pledge on 26th November, 2019. But it is without any compulsion because the people in the country are secular and they are committed to the principles of the Constitution. That is why, the youth in the country, the students in the country and the mass in the country are now in the streets so as to protect and preserve the values and basic principles of our Constitution, especially the goals which are being enunciated in the Preamble of the Constitution.
Hon. Chairperson Sir, you may kindly see that one of the founding principles of our Constitution is secular democracy. The secular fabric of the country and the democratic character of the country are under big threat. Most of the people are now in the streets, fighting for preserving the Constitutional Principles. The secular democracy of the country is under threat. That is why, the students, the youth, and the mass of the country are against the CAA, against the NPR, and against the NRC. The people are now fighting so as to protect the secular fabric of the country.
Sir, coming to Paras 5,6,7 and 8, the hon. President is congratulating the Members of both Houses of Parliament in fulfilling the constitutional responsibility in the legislative process, especially having set a record in the first Session of the 17th Lok Sabha. That is in Paras 5,6,7 and 8 of the hon. President’s Speech.
Sir, the Government claims that all laws are passed keeping the natural interest paramount. Sir, if you examine, during the first Session of the Parliament, that is, the 17th Lok Sabha, in 36 days of the Session, 35 major legislations have been passed without complying with procedural formalities, without complying with Constitutional provisions, without complying with precedence and conventions, and even without having a close scrutiny by the Parliamentary Standing Committee. In 36 days, 35 major legislations have been passed. As rightly said by the hon. President in his Address, the Human Rights (Amendment) Act, the Right to Information (Amendment) Act, Unlawful Activities Prevention (Amendment) Act, Triple Talaq Act, Jammu and Kashmir Reorganisation Act, Amendment to Article 370 etc. have been passed.
Sir, we remember that on one fine morning, on 5th August, 2019, the hon. Home Minister came to the Parliament with a Presidential Notification amending Article 367 saying that the Constituent Assembly of Jammu and Kashmir means the Legislative Assembly of Jammu and Kashmir, so the Parliament is empowered to amend Article 370 and by that way, Article 370 had been removed. My simple question to the Government is this. Is the President empowered or is he having the authority to amend the Constitution so as to give a new interpretation to the Constituent Assembly of Jammu and Kashmir? That is the specific question I would like to ask.
Therefore, legislations were made in such a way that the Parliament has been taken for granted. It is not the quantity or the number of legislations which is important, but the quality of legislations is paramount. That has to be taken into consideration. Further, if you see most of the legislations especially during the tenure of the BJP Government in office, almost all the time the parliamentary supremacy has been taken away because the Parliament is giving authority to the Government to make laws. That is what is happening.
With regard to the CAA, paragraph 35 of the hon. President’s Address makes a mention. Yesterday also, Shri Jagdambika Pal was having a discussion in the Lok Sabha Television with me and he was asking me as to why we are objecting to the CAA. We are objecting to the CAA, we are objecting to the NRC because the basic principle is India is having a secular Constitution and, therefore, religion shall not be a criterion for giving or providing citizenship and religion shall not be a criterion for denying citizenship. That is our basic political opposition because India is a secular country. So, we can never allow providing citizenship on the basis of religion. Therefore, I would like to say that it may be the political strategy of the BJP Government at the Centre because they want to polarize the country on communal lines. It may be for electoral gains. But by creating unrest and insecurity among the people, they can never make the dreams of our great leaders of the country. The ultimate result will be the destruction of the secular, democratic character of the country.
So, we take a pledge and we say that we would fight against the anti-people, anti-secular, and anti-democratic programmes and policies of the Government till the last breath. With these words, I conclude.
*श्री राकेश सिंह : (जबलपुर) माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कहा है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों में इस दशक को भारत का दशक और इस सदी को भारत की सदी बनाने की मजबूत नींव रखी जा चुकी है | इस देश में आज़ादी के बाद पूर्ववर्ती सरकारों और शासकों द्वारा जो उलझने और समस्या दशको से चली आ रही थी उसे इस सरकार ने बिना किसी हिंसक प्रदर्शनों के खत्म करने का काम किया है | चाहे पूज्य बापू का ग्राम स्वराज का सपना हो, बाबा साहेब अम्बेडकर की सामाजिक न्याय की नीति हो, सरदार पटेल जी का एक भारत- श्रेष्ठ भारत का संकल्पहो, दीन दयाल उपाध्याय जी का अन्त्योदय का लक्ष्य हो या लोहिया का समता समाज का दर्शन| माननीय मोदी जी की सरकार उक्त सभी संकल्पनाओं को पूरा करने “सबका साथ, सबका विकास और सबके विश्वास के आधार पर पूरा किये जाने हेतु प्रतिबद्ध है | इस देश में कांग्रेस की सरकारों ने धर्मनिरपेक्षता का चोला पहनकर दशकों तक मुस्लिम समाज और अल्पसंख्यकों को ठगने का काम किया है | उन्हें लगातार अँधेरे में रखकर केवल अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए अल्पसंख्यकों को उपयोग करने का काम किया | किन्तु केंद्र में माननीय मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के साथ ही मुस्लिम महिलाओं को न्याय और अधिकार देने का काम किया है| तीन तलाक जैसे गंभीर कानूनों से मुस्लिम माताओं और बहनों को राहत देने के लिए हमारी सरकार द्वारा तीन तलाक पर प्रतिबन्ध लगाया गया ।
माननीय मोदी जी के नेतृत्व में देशवासियों को नये अधिकार देने वाला उपभोक्ता संरक्षण कानून, गरीबों की बचत की रक्षा करने वाला अनियमित जमा योजना प्रतिबन्ध कानून, गरीबों को चिटफण्ड स्कीमों के धोखे से बचाने वाला चिटफण्ड कानून, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की सजा सख्त करने वाला कानून, सड़क हादसों में कमी लाने के लिये मोटर वाहन संशोधन कानून और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षण देने वाला कानून जैसे अनेकों ऐतिहासिक कानून बनाये गए हैं ।
मैं अध्यक्ष जी को भी शुभकामनायें देता हूँ क्योंकि पिछले सात महीनों में इस सदन के द्वारा कई कीर्तिमान स्थापित किये गए हैं, कई ऐतिहासिक और राष्ट्रहित में फैसले भी सरकार द्वारा लिए गए हैं | आपके नेतृत्व में इस सदन का कार्य निष्पादन पिछले सात दशकों में एक नया रिकार्ड रहा है ।
हिन्दुओ के आस्था का केंद्र अयोध्या रामजन्म भूमि जो कई वर्षों से देश के उच्चतम न्यायलय में विचाराधीन रहा, पर माननीय मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पारस्परिक चर्चा की और ठोस सबूत पेश किये, जिससे सालों पुराने इस विवाद को सुलझाने में सुप्रीम कोर्ट को मदद मिली | पिछली सरकारों में इस विवाद को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जाती रही और उसके कारण कई बार देश में अराजकता की स्थिति पैदा हुई | किन्तु, केंद्र सरकार की सूझ-बूझ और संवाद के कारण सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसलें से दोनों पक्ष संतुष्ट रहे और देश में किसी भी प्रकार की अराजकता की स्थिति पैदा नहीं हुई ।
आज से सात महीने पहले जब लोक सभा का चुनाव होना था, तब कुछ राजनैतिक पंडितों ने इस देश में एक अनावश्यक वातावरण बनाने का प्रयास किया | अनावश्यक ख़बरों के माध्यम से सरकार के खिलाफ एक माहौल बनाने का प्रयास किया किन्तु जब चुनाव हुए और उसके नतीज़े निकले तो उन राजनैतिक पंडितों के पास कोई जवाब नहीं था | कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सभी दलों को देश की जनता ने मुंहतोड़ जवाब दिया और केवल भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर 2014 के लोकसभा चुनाव से भी अधिक सीटें जीतकर 2019 में लोकसभा में अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति और वापिसी दर्ज कराई ।
वर्ष2019के चुनाव और उसके नतीजों से देश की जनता ने देश और दुनिया को यह जतलाने का प्रयास किया कि यह देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नये भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है | यह जनादेश भारत को अपनी पुरातन संस्कृति के गौरव को मजबूत करने और 21वी शताब्दी में विश्व को अपने ज्ञान की शक्ति से समृद्ध करने का जनादेश था |इस जनादेश से पुरानी समस्यायों के समाधान के साथ ही विकास के नये अध्याय लिखे जाने थे | प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में जनता के दवारा मिले जनादेश में देश के करोड़ों गरीबों, दलितों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुविधा दिलाने और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अन्तोदय के सपने को पूरा करने की प्रतिबद्धता है ।
माननीय मोदी जी के नेतृत्व में देश में वर्ल्ड बैंक की Ease of doing business की रैंकिंग में लगातार भारत की स्थिति सुधर रही हैं । आज विश्व के कई देश हमारी ओर देख रहे हैं | -अलगअलग क्षेत्रों में ये सुधार अन्तर्राष्ट्रीय जगत को भी एक आह्वान है कि भारत ने पिछले5-6 वर्षों में अपनी बुनियाद मजबूत की है और भारत के लोग कैसे नये भारत के निर्माण के लिए उत्साहित हैं ।
माननीय मोदी जी के नेतृत्व में सरकार पिछले साढ़े पांच वर्षों के कम अन्तराल से “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास " के मन्त्र पर चलते हुए, पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रही है| सरकार देश की जनता के सभी सपनों को आकार देने और उसे पूरा करने की प्रतिबद्धता पर काम करने का प्रयास कर रही है | हमारी सरकार ने 8 करोड़ गरीब माताओं-बहनों को मुफ्त गैस कनेक्शन, 2 करोड़ गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान, प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से पहली बार 38करोड़ लोगों के बैंक खाते खुलवाये, 50 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के माध्यम से 5 लाख तक के उपचार की सुविधा,24 करोड़ लोगों को बीमा सुरक्षा कवच, 2.5 लाख लोगों को प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के माध्यम से मुफ्त विद्युत कनेक्शन दिया गया । उक्त सभी योजनाओं का लाभ हमारी सरकार द्वारा बिना किसी भेदभाव करें पूरी पारदर्शिता से योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है | पिछले सात महीनों में हमारी सरकार द्वारा अभूतपूर्व फैसले लिए गए हैं| वर्षों पुरानी जम्मू एवं कश्मीर से धारा370 और35A को हटाने के साथ ही लेह और लद्दाख को केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की उनकी पुरानी मांग को पूरा करने का काम हमारी सरकार द्वारा किया गया है | संसद के दोनों सदनों द्वारा दो तिहाई बहुमत से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को हटाया जाना, न सिर्फ ऐतिहासिक बल्कि इससे जम्मू कश्मीर और लद्दाख के सामान विकास का भी मार्ग प्रशस्त हुआ है | इन सभी ऐतिहासिक फैसलों के बाबजूद भी कश्मीर में किसी प्रकार के तनाव की स्थिति निर्मित न होना, यह हमारी सरकार की सूझ-बूझ का परिचायक है और यह सदन और पूरा देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के इस साहसिक कदम पर उन्हें बधाई देता है ।
हमारी सरकार द्वारा पिछले संसद सत्र के दौरानCitizen Amendment Act को पूर्ण बहुमत से संसद के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया है जिसमे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर भारत आये हिन्दु, जैन, बुद्ध, सिन्धी, सिख, ईसाईयों को भारत की नागरिकता देना शामिल है| किन्तु, इसमें भी कुछ राजनैतिक विपक्षी दलों के द्वारा एक धर्म विशेष को भड़काकर उन्हें प्रदर्शन और आन्दोलन करने पर विवश किया गया| कांग्रेस द्वारा उस विशेष धर्म के लोगों को हथियार बनाकर सरकार के इस फैसले का विरोध करने के लिए उनमे अनावश्यक प्रोपोगेन्डा फैलाया जा रहा है | अध्यक्ष जी, माननीय प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी एवं सरकार के जिम्मेदार लोगों द्वारा विभिन्न माध्यमों से देश की जनता और मुस्लिम समाज को यह सन्देश फैलाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कानून में (Citizen Amendment Act) किसी की नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का प्रावधान है । किन्तु, देश का मुस्लिम समाज विपक्ष के द्वारा भड़काए जाने के कारण कई जगह धरने पर बैठे हैं और कई जगह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों दवारा अपनी राजनैतिक रोटी सेंकने की दिशा में हिंसा कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है | मोदी जी के नेतृत्व में देश के अन्नदाता को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से देश के 8 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 43 हज़ार करोड़ रूपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराई गई है । पिछले महीने के 2 जनवरी को एक साथ 6 करोड़ किसानों के खाते में 12 हज़ार करोड़ रुपये की राशि जमा की गई है | हमारी सरकार द्वारा वर्ष2022 तक देश के प्रत्येक किसान की आय दोगुनी करने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी अटल है । किसानों को समृद्ध करने की दिशा में हमारी सरकार खेती के वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रही हैं जिसमे बागवानी, आर्गेनिक फार्मिंग, शहद उत्पादन, मत्स्यपालन जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं | प्राकृतिक आपदा से किसानों को राहत दिलाने के लिये हमारी सरकार किसानों के साथ मिलकर संवेदनशीलता से काम कर रही है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत औसतन प्रतिवर्ष साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा किसान बहुत कम प्रीमियम पर अपनी फसलों का बीमा करा रहे हैं| इस योजना के तहत बीते तीन वर्षों में किसानों को लगभग57 हज़ार करोड़ रुपये की क्लेम राशि का भुगतान भी किया गया है | हमारी सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य कर रही है, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर एवं क्युरेटिव हेल्थकेयर, हर स्तर पर गंभीर प्रयास हो रहे हैं | आयुष्मान योजना का व्यापक असर देश के स्वास्थ्य केन्द्रों में देखने को मिल रहा है | प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना के माध्यम से अब तक 75 लाख गरीब अपना मुफ्त इलाज करा चुके हैं इसके साथ ही27 हज़ार से अधिक हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर भी पूरे देश में तैयार हो चुके हैं । पिछले दिनों मेरे संसदीय क्षेत्र जबलपुर में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों से उनको मिले उपचार के फीडबैक प्राप्त करने हेतु एक बैठक आयोजित की गई थी । सैकड़ों की संख्या में लाभार्थियों ने उस बैठक में अपने बहुमूल्य फीडबैक दिए, साथ ही माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रति धन्यवाद भी दिया कि पहली बार किसी सरकार ने इस प्रकार की योजनाओं के माध्यम से गरीब तबकों के उपचार पर होने वाले मोटे व्यय से राहत दिलाने का कार्य किया है । आज निःसंदेह उन्ही करोड़ लोगों की दुआओं और आशीर्वादों के दम पर माननीय मोदी जी को इतना बड़ा जनादेश मिला है ।
21वीं शताब्दी को ज्ञान की सदी कहा जाता है और सरकार की प्राथमिकता इस क्षेत्र में युवा लीडरशिप तैयार करने की भी है । इस दशक में रिसर्च, इनोवेशन, इन्क्यू बेशन, और स्टार्टअप के क्षेत्र का नेतृत्व हमारे देश के युवा ही करेंगे । माननीय मोदी जी के नेतृत्व में भारत लगातार प्रगति कर रहा है उनकी सरकार के नीतिगत निर्णयों का लाभ युवा क्ति को निरंतर मिल रहाश- है । आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको-सिस्टम भारत में है | स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत देश में27 हजार नये स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है साथ हमारी सरकार देश के महत्वपूर्ण सेक्टर्स में Foreign Direct Investment को लाकर उन सेक्टर्स को मजबूती प्रदान करने का कार्य कर रही है ।
हमारी सरकार लगातार देश के लोगों को सामान्य बनाने और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का कार्य कर रही है । हमारी सरकार द्वारा लगभग59 कानूनों को समाप्त करने का कार्य भी किया गया है जिसकी आवश्यकता नहीं थी । देश की सुरक्षा और संरक्षा को लेकर भी सरकार कई नीतिगत फैसले लेकर देश को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है | ऐसे ही नीतिगत फैसलों में देश में पहली बार तीनों सेनाओं में बुनियादी बदलाव करते हुए CDS (Chief of Defense Staff) की नियुक्ति किया जाना एवं Department of Military Affairs का गठन इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है | इससे तीनों सेनाओं में समन्वय भी बढेगा और सेनाओं के आधुनिकीकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया भी तेज होगी | हमारी सरकार आतंकवाद के खतरे से देश को बाहर निकालने के लिए पूरे सामर्थ्य और दृढ़ता से काम कर रही है । पूर्ववर्ती सरकारों में प्रतिदिन समाचार पत्रों में आतंकवादी घटनाओं और सेना के शहादत की खबरें आती थी । किंतु, 2014 में माननीय मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार के बनने के बाद से लेकर अब तक ऐसी छुटपुट घटनाओं पर विराम लगा है । एक बार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सरपरस्ती में आतंकियों द्वारा पुलवामा में आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था किंतु बालाकोट जैसे एयर स्ट्राइक के मुंहतोड़ जवाब से आज भी पाकिस्तान संभल नहीं पाया है । सरकार का अपनी सेना के प्रति ऐसा जवाब कभी पूर्ववर्ती सरकारों में देखने को नहीं मिलता था । आज आतंकी गिरोहों और सरगनाओं को ज्ञात है कि भारत सरकार उनके किसी भी नापाक इरादे को बर्दाशत नहीं करेगी ।
मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं और आपने मुझे इतने महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार रखने का अवसर दिया उसके लिए आपका सहृदय धन्यवाद देता हूं ।
*श्री नारणभाई काछड़िया(अमरेली) :जैसा कि महामहिम ने अपने अभिभाषण में कहा है कि यह दशक हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है, निश्चित ही यह दशक हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी सरकार के अथक प्रयासों से हमारा देश विकास के पथ पर अग्रसर है और इस दशक में अनेकों विकास के कार्य हमें करने हैं | हमें पूज्य बापू के ग्राम स्वराज का सपना पूर्ण करना है | भारत का संविधान इन सपनों को पूरा करने में हम सभी का मार्गदर्शक है | हमारा संविधान देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा के साथ ही देश के नागरिकों को उनके कर्तव्यों का बोध भी कराता है, और अब देश का प्रत्येक नागरिक संविधान के प्रति और सजग दिखने लगा है । इसके अतिरिक्त हमारी सरकार की दृढ इच्छा शक्ति के कारण मुस्लिम महिलाओं को न्याय और अधिकार देने वाला तीन तलाक विरोधी कानून, देश वासियों को नए अधिकार देने वाला उपभोक्ता संरक्षण कानून, गरीबों की बचत की रक्षा करने वाला अनियमित जमा योजना प्रतिबन्ध कानून, सड़क हादसों में कमी लाने के लिए मोटर वाहन संशोधन कानून जैसे अनेक कानून हमारी सरकार द्वारा बनाये गए हैं | सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि पर फैसले के बाद देशवासियों द्वारा जिस प्रकार से सरकार का समर्थन किया गया है वह भी अपने आप में एतिहासिक है । हमारी सरकार का स्पष्ट मत है कि पारस्परिक चर्चा परिचर्चा तथा वाद विवाद देश को और मजबूत और सशक्त बनाते हैं ।
जैसा की महामहिम ने अपने अभिभाषण में कहा है लोकतंत्र में सबसे पवित्र होता है जनादेश| हमारी सरकार ने इस जनादेश का पूरा सम्मान किया और परिणाम स्वरुप इस देश को विकास के पथ पर और तेजी से ले जाने का कार्य किया है । हमें एक ऐसा नया भारत बनाना है जिसमें हमारी संस्कृति तो समृद्ध हो साथ ही जिसमे गरीबों, दलितों, महिलाओं, युवा आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुविधा मिले और साथ ही इन सभी को आगे बढ़ने के अवसर भी दिए जाएँ | सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही एक नए भारत का निर्माण संभव है । ऐसे नए भारत के लिए तथा लोगों की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए ही हमारी सरकार हर क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए सराहनीय गति और निर्णय क्षमता दिखाते हए काम कर रही है| सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों में जमीनी स्तर पर किये गए सुधारों का परिणाम है कि अनेक क्षेत्रों में भारत की अंतर्राष्ट्रीय रेंकिंग में अभूतपूर्व सुधार आया है | अलग- अलग क्षेत्रों में ये सुधार अंतर्राष्ट्रीय जगत को भी एक आह्वान है कि भारत ने पिछले5-6 वर्षों में किस तरह अपनी बुनियाद मजबूत की है और भारत के लोग कैसे नए भारत के निर्माण के लिए उत्साहित हैं । हमारी सरकार माननीय प्रधानमंत्री जी की सोच सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र पर चलते हुए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रही है | 8 करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन, 2 करोड़ गरीबों को घर, लगभग38 करोड़ गरीबों के बैंक खाते, 50 करोड़ लोगों को पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा, 24 करोड़ लोगों को बीमा सुरक्षा कवच, 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त बिजली कनेक्शन पूरी पारदर्शिता के साथ दिया गया है | हमारी सरकार की योजनाओं ने हर धर्म और हर क्षेत्र के गरीबों के हित में समानता के साथ सहायता व सुविधाएँ पहुंचाई हैं ।
राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में जम्मू कश्मीर से धारा 370 तथा 35 A को न सिर्फ हटाये जाने का जिक्र किया, बल्कि इस फैसले को ऐतिहासिक भी बताया । यहाँ यह बतलाया जाना उचित ही होगा कि जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के लोगों को वही अधिकार मिले हैं जो बाकी देशवासियों को पहले से प्राप्त थे | जम्मू कश्मीर और लद्दाख का तेज विकास, वहां की संस्कृति और परम्पराओं की रक्षा, पारदर्शी व ईमानदार प्रशासन और लोकतंत्र का सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है ।
इसके अतिरिक्त देश के किसानो, खेतिहर मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों तथा छोटे व्यापारियों की अपेक्षा थी कि वृद्धावस्था में उनकी सहायता के लिए पेंशन शुरू हो । हमारी सरकार ने न सिर्फ उनकी इच्छाओं को पूरा किया है बल्कि अब तक इन पेंशन योजनाओं से करीब60 लाख लाभार्थी जुड़ चुके हैं । पिछले2 अक्टूबर को गाँधी जी की150 वीं जयंती पर देश के ग्रामीण इलाकों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करके राष्ट्रपिता के प्रति सच्ची श्रद्धा व्यक्त की है । जैसा कि महामहिम ने कहा कि हमारी सरकार देश के सभी वर्गों का ख्याल रख कर कार्य करती है इसी क्रम में देश के गांवों में हर घर तक पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल पहुंचे, इसके लिए हमारी सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया है । केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और और स्वयंसेवी संस्थाएं मिलकर इस अभियान को जन आन्दोलन में बदल रही हैं । इस योजना पर आने वाले समय में 3 लाख60 हजार करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे । हमारी सरकार ने देश के सबसे संकटग्रस्त ऐसे सात राज्यों की पहचान की है जहाँ भूजल का स्तर तेजी से घट रहा है । इन राज्यों में विशेष तौर पर अटल भूजल योजना शुरू की गई है जो कि अपने आप में सराहनीय एवं ऐतिहासिक है ।
हमारी सरकार में दिव्यांगजनों के लिए किये जा रहे कार्यों का भी महामहिम ने अपने भाषण में जिक्र किया और यह बताया कि दिव्यांगजनों की आशाओं तथा अपेक्षाओं के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम किया जा रहा है | बीते पांच वर्षों में हजारों कैम्प लगाकर दिव्यांगजनों को लगभग 900 करोड़ रूपये के उपकरण उपलब्ध कराये जा चुके हैं, इससे दिव्यांगजनों में सशक्तता आएगी ।
हमारी सरकार यह पुनः स्पष्ट करती है कि नागरिकता कानून से उन लोगों को नागरिकता मिलेगी जो भारत में आस्था रखते हैं तथा उनके देश में उनको प्रताड़ित किया जा रहा है । यह कानून सिर्फ शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है ।
इस अभिभाषण में व्यक्ति के स्वास्थ्य का प्रभाव परिवार और देश दोनों के विकास पर पड़ता है, का भी उल्लेख किया गया है । हमारी सरकार स्वास्थ्य को लेकर समग्रता के साथ कार्य कर रही है । स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन , पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक योजनायें हैं जो देशवासियों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक हो रही हैं ।
अंत में, मै यह कहना चाहूँगा कि महामहिम ने अपने अभिभाषण में सरकार द्वारा हर क्षेत्र में किये गए अथवा किये जा रहे कार्यों को बतलाया है और देश की संसद एवं जनता को यह भरोसा दिलाया है कि यह सरकार देश के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रख कर कार्य कर रही है ।
*m17 SHRIMATI APARUPA PODDAR (ARAMBAGH) : India is a secular country having space for people from every religion. The Indian culture is all inclusive that accepted the diversity and included people from all religions and has always upheld its values.
The widespread protest throughout the country against the Citizenship (Amendment) Act 2019 & NRC there is an apprehension and fear in the mind of the minority community and the common citizen of the country regarding NRC & CAA. Shaheen Bagh has been the epicentre of protest against the country’s new citizenship law in the national Capital. The Government have brutally behaved with students at Jamia Milia Islamia. Students have lost their eyes. They were beaten by police. There was a demoralising effect on the students due to police actions in the Institute of higher learning.
The people of Jammu & Kashmir endured hardship, the curtailment of their Fundamental Rights due to imposition of the longest internet shutdown in the history of any democratic State & loss of economy of the State. The Constitution guarantees freedom of expression, but harassment and violence against journalists have increased under the administration of PM Narendra Modi. The rate of unemployment being highest in 45 years in India. Common People are dealing with unemployment, poverty, agricultural distress, price hike of essential commodities, women insecurity, uncontrolled price hike of petroleum products & natural gas for domestic purpose. But on government papers, India is becoming cleaner, cities are becoming smart, India is becoming better place to do business and becoming digital.
But in reality, picture is different! India is nowhere getting clean, cities still don’t have many basic amenities. Has India seen any big industries in recent years? The condition of banking system of India is another big concern.
India is losing its true essence of democracy. The situation is getting worst day by day. My Parliamentary Constituency Arambagh is rural and Agricultural belt, at the same time flood prone zone. Every year people & farmers face problem during flood. There is a need of total survey of my constituency and construction of check dams on river for irrigation is needed urgently. Development of tourism in Tarakeshwar, Kumarpukur, Raja Ram Mohan Roy’s birth place & Narajole Rajbari is needed which can boost the rural economy & provide employment to the locals.
श्री नायब सिंह सैनी ((कुरूक्षेत्र: जैसा कि माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि "मेरी सरकार के प्रयासों से पिछले पांच वर्षों में इस दशक को भारत का दशक और इस सदी को भारत की सदी बनाने की मजबूत नींव रखी जा चुकी है ।"इसमें कोई संदेह नहीं है । माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से आज हमारे देश की एक मजबूत छवि पूरे विश्व पटल पर उभर कर आयी है । आज सम्पूर्ण विश्व हमारी तरफ आशा और उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा अपने अभिभाषण में अपने देश के विशेष और महत्वपूर्ण व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है जिनकी इस देश के निर्माण में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है । वैसे भी "बात" उन्हीं की होती है जिनमें कोई "बात" होती है । जैसा कि हम सभी जानते हैं- महापुरुषों की पहचान उनके द्वारा किए गए कार्यों से समाज में आने वाले परिवर्तनों से ही की जाती है । मामूली इतिहास पढ़ने पर मालूम होता है कि 19वीं शताब्दी में स्वामी विवेकानंद ईश्वरीय अवतार और सदी के महापुरुष हैं । दुनिया में फैले विचारों के चलते इतिहास 20वीं शताब्दी के महापुरुष के तौर पर महात्मा गांधी जी को जानता और मानता है । भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, मंगल पांडेय, लाल बहादुर शास्त्री, सरदार पटेल सहित कई वीर योद्धाओं को देखा नहीं लेकिन पढ़ने का थोड़ा बहुत अवसर अवश्य मिला, इस आधार पर कह सकते हैं कि इन सब लोगों में "राष्ट्र प्रथम " की भावना थी ।
20 सदी में मेरा जन्म हुआ, देश को आजाद हुए कई साल हो चुके थे लेकिन कई समस्याएं छोटी सी फुंसी की जगह बड़े से फोड़े के रूप में आ चुकी थीं । मोदी जी ने पहले साफ- सुथरे तरीके से गुजरात को समृद्ध बनाया और फिर 2014 से देश का मान बढ़ाने का काम कर रहे हैं । आज पूरा दुनिया में भारत का डंका बज रहा है । हाल के दिनों में कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जो देश के विकास में बड़े बाधक थे । 2014में पीएम बनने के बाद से लेकर अबतक के फैसलों के आधार पर हम कह सकते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी "राष्ट्र प्रथम" की भावना झलकती है । बाकी जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में ये भी कहा कि "पिछले 7 महीनों में संसद ने काम करने के नए कीर्तिमान स्थापित किए है ।" संसद के साथ - साथ सरकार ने भी काम करने के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं । चाहे वो जम्मू- कश्मीर से अनुच्छेद 370, 35A हटाने की बात हो या फिर मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक जैसी कुरीतियों से छुटकारा दिलाने की बात हो या अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विभिन्न वैश्विक सूचकांको जैसे कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में बढ़त सरकार की उपलब्धियां हैं ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा कि "लोकतंत्र में सबसे पवित्र होता है लोगों से मिला जनादेश । देश की जनता ने मेरी सरकार को ये जनादेश, नए भारत के निर्माण के लिए दिया है ।" ये सच है कि देश की जनता ने 2019 के लोक सभा चुनावों में, भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को भारी जनादेश के साथ सत्ता में वापसी दी । देश की जनता ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार में विश्वास जताया और देश की जनता ने देश का नेतृत्व एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के हाथों में दिया ताकि नए भारत का निर्माण मजबूती से हो सके ।
आज देश की जनता ने नए भारत के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दिखाया है । इस प्रतिबद्धता को कायम रखने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं जो देश में बहुत लंबे समय बाद किए गए जो पहले की सरकारों में भी किए जा सकते थे जैसे- दिल्ली के 40 लाख से ज्यादा लोगों, जिसमें बड़ी संख्या में यहां पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोग हैं, उन्हें उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता से हमारी सरकार ने मुक्त किया है । जिन लोगों ने सोचा नहीं था कि वो अपने जीवन में कभी अपने घर की रजिस्ट्री करा सकेंगे, अब वो अपने घर का सपना सच होते हुए देख रहे हैं । 70 साल बाद अर्टिकल 370 से मुक्ति मिली । 70 साल बाद रामजन्मभूमि पर फैसला आया । 70 साल बाद करतारपुर साहब कॉरिडोर बना ।70 साल बाद भारत बांग्लादेश सीमा विवाद का हल हुआ । CAA से हिंदुओं-सिखों-इसाइयों को नागरिकता का अधिकार 70 साल बाद मिला । शहीद जवानों के लिए देश में नेशनल वॉर मेमोरियल50-60 साल बाद बना । शत्रु सम्पत्ति कानून50 साल बाद लागू हुआ । बोडो आंदोलन का समाधान करने वाला समझौता 50 साल बाद हुआ । पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ 40 साल बाद मिला । शहीद पुलिसकर्मियों के लिए नेशनल पुलिस मेमोरियल 50-60 साल बाद बना । 84 के सिख नरसंहार में दोषियों को सजा 34 साल बाद मिली । वायुसेना को नेक्स्ट जनरेशन लड़ाकू विमान 35 साल बाद मिला । बेनामी संपत्ति कानून28 साल बाद लागू हुआ । त्रिपुरा में ब्रू शरणार्थियों का समझौता 23 साल बाद हुआ । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का गठन 23 साल बाद हुआ । देश मेंGST 17 साल बाद लागू हुआ ।
आज देश आगे बढ़ चला है । आज देश में अटके और लटके विवादों और विषयों का समाधान तो हो ही रहा है, कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जो पहली बार हुए हैं । जैसे- पहली बार, लाल बत्ती के रौब से भारतीयों को मुक्ति मिली । पहली बार, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का अधिकार मिला । पहली बार, 5 लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स ज़ीरो हुआ । पहली बार, काले धन की हेरा-फेरी करने वाली साढ़े3 लाख संदिग्ध कंपनियों को ताला लगा । पहली बार, उद्यमियों को बिजनेस से सम्मानजनकExit का मार्ग देने वालाIBC कानून बना । पहली बार, देश के हर किसान परिवार के बैंक खाते में सीधी मदद मिली । पहली बार, किसानों, मज़दूरों, छोटे व्यापारियों को पेंशन की सुविधा मिली । पहली बार, 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली, पहली बार 10 करोड़ गरीब परिवारों तक टॉयलट की सुविधा पहुंची, पहली बार 8 करोड़ गरीब बहनों की रसोई में गैस का मुफ्त कनेक्शन पहुचा । पहली बार, 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों के घर में बिजली कनेक्शन पहुंचा, पहली बार नाबालिगों से रेप के केस में फांसी की सज़ा का प्रावधान हुआ । पहली बार, देश को लोकपाल भी मिला ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने ये भी कहा कि"हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी भी विचारधारा के नेता या समर्थक होने से पहले हम देश के नागरिक हैं । हमारे देश की प्रतिष्ठा हमारी दलीय प्रतिबद्धताओं से कहीं बढ़कर है ।"मैं सभी लोगों से निवेदन करता हूं कि हम सब माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव को सफल बनायें ।
*m19 डॉ. सुभाष रामराव भामरे (धुले): मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण का समर्थन करता हूं । 2014 के पहले पूरे देश में जो माहौल था, सभी जगह पर भ्रष्टाचार और बहुत सारे स्कैम्स से जनता तंग आ चुकी थी । तभी जनता को श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में आशाओं की किरण नजर आयी और पहली बार गैर कांग्रेसी पार्टी को संपूर्ण बहुमत मिला और श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधान मंत्री बने । प्रधान मंत्री श्री मोदी जी ने संसद के द्वार पर माथा टेका और जनता को कहा कि मैं प्रधान सेवक हूं और मेरी सरकार गरीबों के प्रति समर्पित है और पांच साल समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू की और भ्रष्टाचार पे करारा प्रहार करके, भ्रष्टाचार के सभी मार्ग बंद किये, डाइरेक्ट बेनिफीट ट्रांसफर योजना के तहत लाभार्थी के अकाउंट में पैसे जाने लगे,इसी प्रकार 90,000 करोड़ रूपये गरीबों के बचाये । मोदी-सरकार की सबसे बड़ा उपलब्धि यह है कि पांच साल में विरोधियों द्वारा, मोदी जी के खिलाफ और उनके मंत्रिमंडल के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा सके ।
पूरी दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा और मोदी जी,दुनिया के ताकतवर नेता के रूप में जाने जाने लगे । सर्जिकल स्ट्राईक हो और जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जो कार्रवाइ्र की गयी, आज जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद लगभग खत्म होने के कगार पर है । बालाकोट के स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के खिलाफ जो एक्शन लिया गया उसे पूरी दुनिया को पता चल गया कि भारत की सेना दुनिया में किसी से कम नहीं है । इस पांच साल के सभी कामों का नतीजा यह हुआ कि 2019 के चुनाव में लोगों ने मोदी जी को फिर से भारी बहुमत से जीता दिया । बीजेपी के 303 और एनडीए के 350 से ज्यादा सांसद चुन कर आए इस जनादेश के माध्यम से धारा 370 और 35-ए को हटाकर भारत की जनता का जो सपना था वो पूरा किया गया और पार्टी का भी अखण्ड भारत का सपना पूरा हुआ बहुत दिनों से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जो इस्लामिक देश हैं वहां के अल्पसंख्यक,हिंदू, सिख,जैन, बुद्ध,पारसी और इसाई जो धर्म की वजह से प्रताड़ित थे,उनको भारतीय नागरिकता देने के लिए सीएए पास करके उनको न्याय देने की शुरूआत की है ।
*ADV. ADOOR PRAKASH (ATTINGAL) : The President address to the Joint Session of the Parliament on 31st January, 2020 has no mention about the real issues the nation facing today. The President Address emphasizes the paramount need to work together to make this decade as India’s decade. Hon’ble President in his address said that Government is of the firm view that mutual discussions and debates strengthen democracy. But unfortunately things are happening just against that view.
The President Address again underlined the mantra of ‘Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas’. We have celebrated 70th year of our Constitution just a few weeks ago. But today we are facing a sad situation that divisive politics are weakening our Constitution.
The nation is witnessing the biggest protest in recent years against the Citizenship Amendment Act. The neglecting attitude and silence of the Government reflected in the President Address as there was no mention about it. There was not a single word to address the fear and concerns of protesting people.
Prestigious higher educational institutions in the country are witnessing unrest and student agitation. The Government is not even ready to discuss the issues with the agitating students.
Hon’ble President in his Address said that strong foundation has been laid in the last five years, to make this decade India’s decade and this century India’s century. If so, what is the purpose of disinvesting the profit making Public Sector Undertakings? The reality is that country today facing recession and huge employment loss. Every sector of the economy is in crisis. Unemployment rate is highest in the last 45 years.
It is said that Government is committed to attaining the goal of making India a USD 5 trillion economy. But we cannot see any creative measures from the Government to achieve this goal.
The claim is that Government is making special efforts to improve the health of women. But there is no mention about hundreds of infant deaths reported recently.
Everyone knows that agriculture is the backbone of our economy. Around 70% of rural households in the country depend on agriculture and allied activities. They are in utter distress after demonetization and majority of them are in debt today. Government aims to double farmer’s income by the year 2022 but there is no clarity on this promise. Same is the case of doubling the fishermen’s income and fish production.
The corporate have enjoyed the patronage and support of this Government. Neither the farmer, nor worker, nor youth, nor women or deprived section is happy about the Government.
*श्रीमती रमा देवी ( (शिवहर: राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में देश की दशा एवं दिशा का उल्लेख है। महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा दिए गए अभिभाषण से यह स्पष्ट है कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों से देश को विकास के रास्ते पर लाया गया है और देश नये भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।
चाहे पूज्य बापू के ग्राम स्वराज का सपना हो, बाबासाहब अम्बेडकर की सामाजिक न्याय की नीति हो, सरदार पटेल का "एक भारतश्रेष्ठ भारत-" का संकल्प हो, पं.दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का लक्ष्य हो या लोहिया जी का समता समाज का दर्शन हो, इन सपनों को पूरा करने हेतु राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है।2019 के आम चुनाव में देश के मतदाताओं ने “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास " के साथ काम करने के लिए प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को प्रचंड बहुमत से दुबारा समर्थन दिया है। हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि पिछले 7 महीनों में सदन द्वारा काम करने तथा उसके निष्पादन के मामले में पिछले सात दशकों में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। यह सरकार की दृढ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि जहां एक ओर इन सात महीनों में सदन में मुस्लिम महिलाओं को न्याय और अधिकार देने वाला तीन तलाक विरोधी कानून, देशवासियों को नए अधिकार देने वाला उपभोक्ता संरक्षण कानून, गरीबों को चिटफंड स्कीमों के धोखे से बचाने वाला चिटफंड संशोधन कानून, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की सजा सख्त करने वाला कानून, सड़क हादसों में कमी लाने वाला मोटर वाहन संशोधन कानून और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षण देने वाला कानून जैसे अनेक ऐतिहासिक कानून बनाये गये है। वहीं दूसरी ओर एक ऐसे नये भारत का निर्माण हो रहा है, जिसमें गरीबों, दलितों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुविधाए और आगे बढ़ने के नए अवसर भी मिल रहें है। जिससे देश विकास के नए अध्याय लिख रहा है।
आदरणीय मोदी जी के कुशल नेतृत्व वाली यह एनडीए सरकार हर क्षेत्र में सुधार लाने के लिए सराहनीय निर्णय एंव दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुये निरंतर काम कर रही है। सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों में जमीनी स्तर पर किए गए सुधारों की ही देन है कि अनेक क्षेत्रों में भारत की अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
हमारा देश एक कृषि प्रधान देश रहा है और हम सब हमारे अन्नदाता किसान भाईयों के ऋणी है, जिनके परिश्रम से हम खाद्यान्न में आत्मनिर्भर है। परन्तु, पिछले कुछ दशकों से किसानों की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हुई है। मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं जो कि किसानों को अत्यधिक सशक्त करने एवं उनकी आय को दोगुणा करने के लिए संकल्पित है। खरीफ और रबी की फसलों के लिए समर्थन मूल्य में लगातार की गई वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है। सरकार के प्रयासों से दलहन और तिलहन की खरीद में 20 गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी तरफ "प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि” के तहत 8 करोड से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में 43 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि जमा कराई जा चुकी है। यह सरकार "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के मंत्र पर चलते हुये पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रही है।8 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन, 2 करोड़ गरीबों को घर, 38 करोड़ गरीबों के बैंक खाते, 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रूपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा, 24 करोड़ लोगों को बीमा सुरक्षा कवच, ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त बिजली कनेक्शन पूरी पारदर्शिता और बिना किसी भेदभाव के दिया गया है। यह सब सरकार की प्रतिबद्धता एंव कार्यकुशलता से ही सम्भव हो पाया है।
मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने देश के किसानों, खेतिहर मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों तथा छोटे व्यापरियों की चिंता करते हुये वृद्धावस्था में उनकी सहायता के लिए पेंशन योजना चालू की है तथा इस योजना से लगभग60 लाख लोग जुड़ चुके हैं ।
पहले किसी गरीब व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य को कोई बीमारी लग जाये तो उस परिवार की कमर इलाज खर्च में ही टूट जाती थी। माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता एंव सेवा भावना का परिणाम है कि उन्होंने गरीबों की इस तकलीफ को समझा और इसके निवारण के लिए "आयुष्मान भारत योजना " के तहत लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिये जाने के लिए 5 लाख रुपये तक फ्री इलाज की व्यवस्था की । हमारी केंद्र सरकार की इस जन कल्याणकारी योजना की ही देन है कि आज गरीब व्यक्ति भी अपना मुफ्त उपचार देश के किसी बड़े सरकारी या निजी अस्पताल में करा सकता है। इस योजना के तहत अब तक 75 लाख गरीब लोग अपना इलाज करवा चुके है। इसके साथ ही अब तक देश में 27 हजार से अधिक "हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर" भी तैयार हो चुके हैं । इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान जैसी अनेक योजनाएं लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इसी वर्ष देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज बनाने की स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त22 नये एम्स का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
आज सरकार अपनी कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। जिससे निश्चित रूप से देश की महिलाएं लाभान्वित एंव आत्मनिर्भर बन रही है। सरकार ने महिला स्वास्थ्य के लिए "प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना " के तहत देश की 1 करोड़, 20 लाख महिलाओं को लगभग 5 हजार करोड़ रूपए सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं । यह सरकार गरीब महिलाओं की छोटी से छोटी समस्या के निराकरण के लिए गम्भीर है। जैसे कि सरकार ने सिर्फ एक रूपए में “सुविधा” नामक सैनिटरी नैपकीन देने की शुरूआत कर एक मिसाल कायम की है। सरकार के प्रयासों से महिला उद्यमशीलता और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप अभियान से अभी तक 6 करोड़60 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही है तथा देश के निर्माण में काफी मजबूती से अपना योगदान दे रही है। महिला सुरक्षा की दृष्टि से देश में 6 सौ से अधिक "वन स्टॉप सेंटर" बनाए जा चुके है। देश में "बेटी बचाओं, बेटी पढाओ अभियान" से भ्रूण हत्या में काफी कमी आई है।
आज देश में कुछ लोगों द्वारा “नागरिकता संशोधन कानून" के बारे में आम लोगों को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। जबकि, संसद के दोनों सदनों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून को काफी चर्चा के बाद पास किया गया है। सदन में उपस्थित सभी साथी इस बात से अवगत होंगे कि भारत ने हमेशा सर्वपंथ समभाव पर विश्वास किया है। लेकिन विभाजन के समय सबसे ज्यादा प्रहार भारत और भारतवासियों के इसी विश्वास पर किया गया। हम सभी इस बात के साक्षी रहे हैं कि समय के साथ पाकिस्तान एंव बांग्लादेश में वहां के अल्पसंख्यकों पर होने वाला अत्याचार और बढ़ा है। हाल ही में ननकाना साहिब में जो हुआ, उसे हम सभी ने देखा है और उस दर्द को महसूस किया है जो वहां के अल्पसंख्यकों के साथ हो रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था कि- "यदि पाकिस्तान के हिन्दू और सिख, जो वहां नहीं रहना चाहते.वे भारत आ सकते हैं । उन्हें सामान्य जीवन मुहैया कराना भारत सरकार का कर्तव्य है।" इनको मौका मिला तो इन्होने कुछ नही किया परन्तु, जब आज हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने बापू के 150वीं जयन्ती पर उनकी भावना को सर्वोपरि रखते हुये वहां के अल्पसंख्यकों को नया जीवन देने का काम कर रहे हैं तो कुछ तथाकथित गांधीवादियों के पेट में दर्द हो रहा है और देश में मुस्लिम समुदाय के बीच तरहतरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही- हैं ।
मोदी सरकार मुस्लिम वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। आज देश में "हुनर हाट"के जरिए अल्पसंख्यक वर्ग के 2 लाख 65 हजार हुनरमंद कारीगरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये हैं। भारत सरकार के आग्रह पर सउदी अरब ने हज कोटा में अभूतपूर्व वृद्धि दी थी जिस वजह से इस बार रिकॉर्ड2 लाख भारतीय मुसलमानों ने हज में इबादत की।
सरकार द्वारा दिव्यांगजनों की आशाओं प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम अपेक्षाओं के - किया जा रहा है। आरक्षण में वृद्धि, कानूनी अधिकार में वृद्धि के साथ ही सरकार ने एक हजार से ज्यादा सरकारी भवनों और700 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों को सुगम्य बनाया गया है। पिछले5 वर्षों में हजारों कैंप लगाकर दिव्यांगजनों के बीच लगभग 900 करोड़ रूपए के कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराये गये हैं।
दुनियाभर से आने वाली चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है। हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 450 बिलियन डॉलर से भी ऊपर के ऐतिहासिक स्तर पर है। सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में ग्रामीण सडकों का बहुत बड़ा योगदान है। "प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना' के जरिए देश के कोने-कोने तक ग्रामीण सड़कों का विस्तार हुआ है।
आज पूरा विश्व आतंकवाद एंव कट्टरवाद से ग्रस्त है। एक भारतीय होने के नाते हम सभी का सीना गर्व से चौड़ा होना चाहिए क्योंकि हमारी सरकार आतंकवाद के खतरे से देश को बाहर निकालने के लिए पूरे सामर्थ्य और दृढ़ता से काम कर रही है जो बात जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में आई कमी से भी पता चलता है। यह एक मजबूत सरकार के मजबूत निर्णय का ही नतीजा है कि आतंकवाद फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई के लिए सुरक्षाबलों को पूरी छूट प्राप्त है।
रक्षा मामले में पहले की सरकारें सिर्फ खानापूर्ति ही करती थी। परन्तु, आज भारत की सेनाओं और सुरक्षाबलों के पास पर्याप्त हथियार, आधुनिक सुरक्षा उपकरण तथा बुलेट प्रूफ जैकेट हो, इसपर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए रक्षा बजट में वृद्धि की गई है। हाल ही में जब तेजस के नेविल प्रोटोटाईप ने आई.एन.एस. विक्रमादित्य पर लैंडिंग की और उड़ान भरी तो प्रत्येक भारतीय का सीना से चौड़ा हुआ था गर्व । ए-सैट के सफल परीक्षण से भारत अंतरिक्ष में विशेष मारक क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है ।
माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में कल्याणकारी एवं ऐतिहासिक कार्य हुए हैं और लोगों को फायदा पहुंचा है, मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जारी इस धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करती हूं ।
*श्री गणेश सिंह (सतना) :महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार के कार्यों का प्रतिबिम्ब होता है, आइना होता है । महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा दिये गये अभिभाषण में सरकार के नव भारत निर्माण की स्पष्ट दिशा का उल्लेख किया गया है ।
वर्ष 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार जब बनी तो देश एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक नया भारत बनाने का संकल्प लिया । एक ऐसा नया भारत जहां व्यवस्थाओं में अधूरापन और अकर्मण्यता न हो, जहां भ्रष्टाचार न हो, जहां अस्वच्छता के लिए कोई स्थान न हो । पहले दिन से ही मोदी सरकार का दृढ़ संकल्प था कि सभी देशवासियों का जीवन सुधरे, कुशासन से पैदा हुई उनकी मुसीबतें दूर हों और समाज के आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक जनसुविधाएं पहुंचे ।
चाहे पूज्य बापू का ग्राम स्वराज का सपना हो, बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की सामाजिक न्याय की नीति हो, सरदार पटेल का "एक भारत- श्रेष्ठ भारत "का संकल्प हो, पं. दीन दयाल उपाध्याय का अंत्योदय का लक्ष्य हो या लोहिया जी का समता समाज का दर्शन हो, आज वह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पूरा होता दिखायी पड़ रहा है ।
वो गरीब मां जो लकड़ी के धुएं में खाना बनाती था, वो बेबस बहन जो पैसे की चिंता में गंभीर बीमारी के बावजूद अपना इलाज टालती थी, वो बेटी जो शौच जाने के लिए सूरज ढलने का इंतजार करती थी, वो बच्चा जो बिजली के अभाव में पढ़ाई के लिए सूरज की रोशनी का इंतज़ार करता था, वो किसान जो ओले से फसल बर्बाद होते देखकर कर्ज चुकाने की चिंता में घिर जाता था, वो युवा जो कर्ज न मिल पाने के कारण अपना रोजगार शुरू नहीं कर पाता था, ऐसे ही असंख्य असहाय चेहरों ने मोदी सरकार के लक्ष्य तय किए और इसी सोच ने हमारी सरकार की योजनाओं को आधार दिया ।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि देश के खजाने पर पहला हक गरीब का, दूसरा हक किसान का, तीसरा हक युवाओं का, इसके बाद सबका बराबर बराबर हक है । आज उनकी कही गयी बातें चरितार्थ हो रही हैं ।
केन्द्रीय बजट 2020-21,देश की आशाओं, आकांक्षाओं और जनता के विश्वास को परिलक्षित करता है । इस बजट में तीन विषयों, पहला उम्मीदों का भारत, दूसरा इकॉनोमिक डेवलपमेंट और तीसरा केयरिंग समाज पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है । यह बजट गरीब, वंचित, शोषित, किसानों, महिलाओं और युवाओं को समर्पित बजट है । यह बजट विकास को गति देने और रोजगार का सृजन करने वाला बजट है जिसमें हर सेक्टर के डेवलपमेंट को ध्यान में रखा गया है ।
मेरे लोक सभा क्षेत्र सतना के गरीब, बुजुर्ग और विकलांगजनों ने भारत सरकार की विभिन्न स्कीमों और अन्य योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया है । अभी तक सतना जिले के दिव्यांगजनों को 6194 उपकरण वितरित किये गये हैं, जिसमें मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल, व्हील चेयर, बैशाखी, कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र आदि हैं ।
सामाजिक दायित्व निधि से संचालित सांसद चलित अस्पताल निःशुल्क के द्वारा अगस्त, 2019 से 31 जनवरी, 2020 तक सतना जिले में 78356 पुरूष और 87375 महिला मरीजों (कुल 165731 मरीज) का गांव- गांव जाकर स्वास्थ्य परीक्षण एवं इलाज कर निःशुल्क दवायें वितरित की गई हैं । अभी हाल में दिनांक18 जनवरी2020 को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत मैंने रोजगार मेले का आयोजन किया था जिसमें कुल 48 कम्पनियों ने हिस्सा लिया था । रोजगार मेले में लगभग 10 हजार से अधिक युवा शामिल हुए और 5788 रजिस्ट्रेशन किये गये, उनका इन्टरव्यू भी वहीं पर लिया गया, जिसमें से 3261 युवाओं को चयनित किया गया उनमें से 621 युवाओं को ऑफर लेटर भी उसी दिन दे दिया गया ।
इस बजट में किसानों का विशेष ख्याल रखा गया है । इस बजट में किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के लिए सरकार ने 16 सूत्रीय फॉर्मूले का ऐलान किया है । कृषि क्षेत्र के लिए1.2 लाख करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास के लिए 1.89 लाख करोड़ रुपये, जल जीवन मिशन के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपये, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए100 लाख करोड़ रुपये, परिवहन संरचना फंड के लिए 1.7लाख करोड़ रुपये आबंटित किये गये है ।
शिक्षा के लिए 99,300करोड़ रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए69000 करोड़ रुपये, आयुष्मान भारत के लिए 6400 करोड़ रूपये, अनुसूचित जाति और ओबीसी के विकास के लिए 85,000 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए 53,000 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं जो दर्शाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार, सामाजिक और आर्थिक विकास के दौर में पीछे रह गए निचले तबके को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए किस तरह समर्पित और प्रयत्नशील है ।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मेरे लोक सभा क्षेत्र सतना में गरीबों को लाखों मकान दिये हैं । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी बधाई के पात्र हैं जिनकी सरकार ने देश के इतिहास में पहली बार क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम के माध्यम से घर खरीद रहे व्यक्ति को 2.67 लाख रुपये की सब्सिडी देना तय किया है, जिससे मध्यम आय वर्ग के लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी । आम बजट 2020 व्यक्तिगत करदाताओं के लिए विशेष राहत देने वाला है । पांच लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय वाले व्यक्ति को अब कोई टैक्स नहीं देना होगा जो एक सराहनीय कदम है । मोदी सरकार द्वारा इस आम बजट में बैंकों में पैसा जमा कराने वालों के लिए इंश्योरेंस कवर 1 लाख रुपये से बढ़ाकर5 लाख रुपये कर दिया गया है जिससे जमाकर्ता को अब पांच लाख रुपये तक की गारंटी मिलेगी । यह मध्यम वर्ग के लिए बहुत राहत भरा कदम है । आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर भारत 2022में जी-20 की मेजबानी करेगा । यह अपने आप में देश को गौरवान्वित करने वाली एक ऐतिहासिक पहल है । रामजन्मभूमि विवाद का समाधान भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुआ ।
डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लोकसभा में कहा था कि- “एक लोकतांत्रिक संघीय राज्य में, एक इकाई के नागरिकों के मौलिक अधिकार किसी अन्य इकाई के नागरिकों से अलग नहीं हो सकते । क्या जम्मू-कश्मीर के लोग उन मूलभूत अधिकारों के हकदार नहीं हैं, जो हमने शेष भारत के लोगों को दिए हैं?
सात दशक बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के दौरान डॉक्टर मुखर्जी समेत करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों का सपना साकार हुआ है और जम्मू – कश्मीर एवं लद्दाख के लोगों को, वहां के दलितों और महिलाओं को भी वही अधिकार मिले हैं, जो बाकी देशवासियों को प्राप्त हैं । संविधान के अनुच्छेद370 और अनुच्छेद 35 ए को हटाया जाना, न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि इससे जम्मू – कश्मीर और लद्दाख के समान विकास का भी मार्ग प्रशस्त हुआ है ।
आयुष्मान भारत योजना का व्यापक असर देश के हेल्थ सेक्टर पर देखने को मिल रहा है । प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 75 लाख गरीब अपना मुफ्त इलाज करा चुके हैं । इसके साथ ही 27 हज़ार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी तैयार हो चुके हैं ।
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के टीयर 2 और टीयर 3 शहर, एक नई भूमिका के साथ उभर रहे हैं । स्वच्छता हो, सुविधाएं हो, स्टार्ट अप हों या फिर दूसरा कारोबार, छोटे शहरों की प्रगति उत्साहवर्धक है । साल 2014के बाद से ही छोटे शहरों में स्टार्ट-अप्स की 45 से 50 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई है । इसी तरह उड़ान योजना के तहत करीब 35 लाख लोग अब तक हवाई यात्रा कर चुके हैं । पिछले वर्ष 335नए हवाई मार्गों की अनुमति दी गयी है । अनुमान है कि आने वाले वर्षों में, देश का आधे से ज्यादा डिजिटल लेन-देन इन्हीं टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में होगा ।
वायु और जल प्रदूषण से निपटने के लिए, देश के 102 शहरों में सरकार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम भी लागू करने जा रही है । स्वच्छ हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिए 4,000 करोड़ रुपये का खर्च किये जाने का निर्णय शुद्ध पर्यावरण की दिशा में उठाया गया एक बेहतर कदम है ।
सतना जिले को सीमेंट सिटी भी कहा जाता है । सीमेंट उद्योग की वजह से वहां प्रदूषण ज्यादा है । मेरी मांग है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत वायु और जल प्रदूषण से निपटने के लिए सतना जिले को शामिल किया जाय ।
सरकार 'नमामि गंगे` योजना के तहत गंगा नदी में गिरने वाले गंदे नालों को बंद करने के अभियान में तेजी लाया है । गंगा की तरह ही कावेरी, पेरियार, नर्मदा, यमुना, महानदी और गोदावरी जैसी अन्य नदियों को भी प्रदूषण से मुक्त किया जाए । मेरे लोक सभा क्षेत्र सतना की मंदाकिनी, टमस नदी, सेमरावल एवं केन बेतवा नदियों को 'नमामि गंगे` योजना के तहत शामिल किया जाय ।
*SHRI SAPTAGIRI ULAKA (KORAPUT): The Motion of Address by Hon’ble President is deeply disturbing and unsatisfactory. There is no single observance on the economic slowdown, high unemployment, agrarian crisis, price rise and the fact that the ones in power are trying to divide the country on the basis of religion. Also, in the Address of President, many needs and requirements of Odisha and particularly Koraput Parliament are ignored. Regret that there is no mention about need for establishment of Government Medical College at Rayagada attached to District Headquarter Hospital. Regret that there is no mention in the Address about the need to include Jhodia community from Kashipur, Odisha in the list of Scheduled Tribes. Regret that there is no mention in the Address about the need to expedite on Gunupur-Therubali Railway line project via Padmapur, Bissam Cuttack. Regret that there is no mention in the Address about the need to expedite construction of bypass in Rayagada on NH 326 and Koraput on NH 26 respectively in Odisha. Regret that there is no mention in the address about the need to expedite construction of Rail cum Road bridge over Kolob reservoir between Suku and Koraput under Kothalavalasa-Kirandul Railway line in Odisha. Regret that there is no mention in the Address about the need to establish High Court Bench in undivided Koraput District. Regret that there is no mention in the Address about the need to ensure inclusion of Rayagada and Koraput districts inn Odisha in Rural/Tribal tourist circuits under Swadesh Darshan Schemes.
Regret that there is no mention in the Address about the need to run a new day time train from Jeypore/Koraput to Bhubaneswar via Rayagada. Regret that there is no mention in the address about the need to establish a new Kendriya Vidyalaya at Jeypore, Odisha. Regret that there is no mention in the address about the need to allocate funds to Central University of Odisha, Koraput for building infrastructure through Higher Education Financing Agency (HEFA). Regret that there is no mention to declare Puri as iconic tourist site and including some place in Odisha in the list of Archaeological sites. Regret that there is no mention to establish National Tribal Museum in Odisha. Odisha is regularly impacted by natural calamities and it is important that the Central Government provide required assistance and provide special package to Odisha. Also, KBK-K region is one of the most backward regions in the country and need special financial assistance/package for all round development.
*SHRI TALARI RANGAIAH (ANANTAPUR) : We are very thankful to the Honourable President for reminding us that the Constitution is the guiding light to fulfil the dreams of people of India. It is historic that more than 12 crores citizens of the country publicly read out the preamble of the Constitution and renewed their commitment to the Constitution. The principles of social justice, the vision of social equality, dream of creating a modern India, proclaimed by Babasaheb Ambdkar, Nehruji and Lohiyaji and the resolution of Ek Bharat-Shreshtha Bharat by Sardar Patel makes India an inclusive and strong nation in the world.
It is really heartening to note that India is progressing and competing in the world rankings in ‘ease of doing business’ from 79th to 63rd position ranked by World Bank. Similarly from 108th to 52nd position in resolving in solvency, improving 10 points in the logistic performance index and moving from 52nd to 34th position in world economic forum’s travel and tourism competitiveness rankings.
However, as mentioned in the speech of President 15 crore houses are without piped water in rural areas. This number may be higher than this. It is also sad to note that water table is depleting rapidly in seven states of the country. The Hon’ble President informed in his speech that Atal Bhujal Yojana scheme is in progress to meet the demand. But it is a long way to go.
We welcome the opening of 400 Ekalavya Model Residential Schools in the country. But budgetary allocations to provide infrastructure, teaching staff and other support staff need to be taken care of. Sufficient budget allocation is the need of the programme to achieve its success. We also appreciate the government for providing scholarships to minority community children to enhance their artisans’ skills. The scholarship scheme need to be enhanced and worked towards saturation mode. Divyangjan facilities should be taken on priority basis. Data suggests that there are seven crore population in the country who are Divyangjans. The initiatives taken up by the Government are really appreciable. Safety of women becoming increasingly a challenge in the present society. 600 one stop centers, 1000 fast-track courts are not enough. We request the government to multiply the numbers based on the need with immediate effect.
It is noteworthy the efforts of the government has achieved with girls admitted in higher education has exceeded that of boys in the country. Coming from the state of Andhra Pradesh which is affected by the bifurcation in 2014, we are consistently urging the government to provide special category status for the state to overcome the problems inherited. However, in the Hon’ble President speech, the sanction of the special category status is missing. Similarly, the supports promised in the AP Bifurcation Act 2014 are also no proclaimed in the speech of the Hon’ble President.
We whole heartedly thank the President for the commitments towards education, health, creation of water resources, employment and farmers welfare.
*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर): सर्वप्रथम महामहिम राष्ट्रपति जी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगी उन्होंने अपने अभिभाषण में जिस नये उन्नतशील तथा प्रगतिशील भारत का विजन प्रस्तुत किया है, आशा करती हूं उसमें हम सभी मिलकर नई ऊर्जा के साथ नए भारत के निर्माण को गति देने का काम करेंगे और साथ ही साथ उनके विजन “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" को मूर्त रूप प्रदान करेंगे| जिससे कि सभी भारतीय चाहे वह शहरों में रहने वाले नागरिक हों या गांव में रहने वाले हमारे ग्रामीण कृषक भाई हों या जंगलों में निवास करने वाले हमारे आदिवासी भाई-बहन सभी को विकास की नई धारा से जोड़कर नए भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सके, जिससे चाहे पूज्य बापू जी का ग्राम स्वराज का सपना हो, बाबासाहब अंबेडकर जी की सामाजिक न्याय की नीति हो, नेहरू जी का आधुनिक भारत बनाने का स्वप्न हो, सरदार पटेल जी का एक भारत- श्रेष्ठ भारत, का संकल्प हो, दीन दयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय का लक्ष्य हो या लोहिया जी का समता समाज का दर्शन हो, हम सभी लोग मिलकर इन सपनों को पूरा करेंगे । साथ ही साथ विश्व पटल पर नई शक्ति के रूप में भारत को उभारने का जो विजन आदरणीय राष्ट्रपति जी ने हमारे समक्ष अपने भाषण में प्रस्तुत किया है उनके प्रति सहृदय पूर्वक धन्यवाद व्यक्त करती हूँ| मैं सरकार को आगामी कार्यकाल के लिए बधाई देना चाहती हूं आशा करती हूँ कि जिस तरह पूर्व कार्यकाल में सत्य, निष्ठा और राजनीतिक इच्छाशक्ति, पूर्ण ईमानदारी के साथ कार्य किया उसी प्रकार हम इसे आगे भी जारी रखेंगे| हमारी सरकार देश के आदिवासी भाईबहनों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए संकल्पबद्ध हैं । पहली बार किसी सरकार द्वारा वन उत्पादों परMSP का लाभ दिया गया है । हमारी सरकार का विशेष ज़ोर आदिवासियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर है । सरकार द्वारा देश में 400 से ज्यादा एकलव्य मॉडल रेज़िडेंशियल स्कूल खोलने का अभियान शुरू किया गया है । जिससे अनुसूचित जाति के युवाओं को अच्छी शिक्षा प्राप्त होगी और इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभा में मिलने वाला आरक्षण भी, अगले दस वर्षों के लिए बढ़ाया गया है ।
हमारी सरकार की दृढ इच्छाशक्ति के कारण मुस्लिम महिलाओं को न्याय और अधिकार देने वाला तीन तलाक विरोधी कानून हो, देशवासियों को नए अधिकार देने वाला उपभोक्ता संरक्षण कानून हो, गरीबों की बचत की रक्षा करने वाला अनियमित जमा योजना प्रतिबंध कानून हो, गरीबों को चिटफंड स्कीमों के धोखे से बचाने वाला चिटफंट संशोधन कानून हो, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की सज़ा सख्त करने वाला कानून हो, सड़क हादसों में कमी लाने के लिए मोटर वाहन संशोधन कानून हो या ट्रांसजेडर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षण देने वाला कानून हो, जैसे अनेक ऐतिहासिक कानून बनाए गए हैं ।
हमारी सरकार अल्पसंख्यक वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक प्रगति के लिए भी निरंतर प्रयासरत है । हुनर हाट के जरिए अल्पसंख्यक वर्ग के 2 लाख65 हजार हुनरमंद कारीगरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं । मुस्लिम छात्र-छात्राओं की शिक्षा निर्बाध जारी रहे, इसके लिए बड़ी तादाद में स्कॉलरशिप दी गयी है ।
आज सात दशक बाद पूरे देश में इस बात की खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी समेत करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों का सपना साकार हुआ है और जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को तथा लद्दाख के लोगों को, वहां के दलितों और महिलाओं को भी वही अधिकार मिले हैं, जो बाकी देशवासियों को प्राप्त हैं । संसद के दोनों सदनों द्वारा दो तिहाई बहुमत से संविधान के अनुच्छेद ए 35 और अनुच्छेद 370 को हटाया जाना, न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि इससे जम्मू –कश्मीर और लद्दाख के समान विकास का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है । साथ ही अब वहां के लोगों को स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, उजाला योजना, DBT तथा खाद्य सब्सिडी का पारदर्शी तरीके से पूरा लाभ मिल पा रहा है ।
हमारी सरकार एक ऐसे नये भारत निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें हमारी पुरातन संस्कृति का गौरव हो या जो21वीं सदी के विश्व को अपने ज्ञान की शक्ति से समृद्ध करता हो या एक ऐसा नया भारत, जिसमें पुरानी समस्याओं के समाधान के साथ ही विकास के नए अध्याय लिखे जाएं । एक ऐसा नया भारत, जिसमें गरीबों, दलितों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुविधा मिले और आगे बढ़ने के नए अवसर भी । एक ऐसा नया भारत, जिसका हर क्षेत्र विकास करे, कोई क्षेत्र पिछड़ा न रह जाए, जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ समाज के आखिरी छोर तक पहुंचे, तथा एक ऐसा नया भारत, जो चौथी औद्योगिक क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाए और विश्व मंच में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे ।
मैं नए सुधारों तथा योजनाओं के साथ आई हमारी नई स्वास्थ नीति की सफलताओं की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूंगी । आयुष्मान भारत योजना का व्यापक असर देश के हेल्थ सेक्टर पर देखने को मिल रहा है तथा वह आर्थिक रूप से और कमजोर होने से बच गए हैं, व्यक्ति के स्वास्थ्य का प्रभाव परिवार और देश, दोनों के विकास पर पड़ता है । हमारी सरकार स्वास्थ को लेकर समग्रता के साथ काम कर रही है । प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और क्यूरेटिव हेल्थकेयर, हर स्तर पर गंभीर प्रयास हो रहे हैं । स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन, पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान, आयुष्मान भारत योजना, ऐसी अनेक योजनाएं देशवासियों के स्वास्थ में सुधार लाने में सहायक हो रही है । आयुष्मान भारत योजना का व्यापक असर देश के हेल्थ सेक्टर पर देखने को मिल रहा है । प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 75 लाख गरीबों को लाभ मिल चुका है । इसके साथ ही 27 हज़ार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी तैयार हो चुके हैं ।
जैसा कि हम सब जानते हैं जल है तो कल है की महत्ता को समझते हुए सरकार ने न केवल नए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है अपितु हर गांव हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए इस बाजार में प्रतिबद्धता भी दिखाई है साथ ही आगामी वर्ष में गंगा नदी पर कार्गो की आवाजाही भी सुनिश्चित की है जिससे न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि महंगाई पर भी लगाम लगेगी, यह पर्यावरण के प्रति भी एक सकारात्मक कदम होगा| हमारी सरकार द्वारा नदी जल मार्गों का विकास भी किया जा रहा है । दिसंबर2019 में पहली बार नेशनल वाटर वे -2 के जरिए असम के पांडू तक कार्गो कंटेनर पहुंचा है । इस वर्ष जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट के जरिए गंगा नदी पर हल्दिया में मल्टीमोडल टर्मिनल और फरक्का पर नैविगेशन लॉक पूरा कर लिया जाएगा । हमारा प्रयास - है कि अगले वर्ष तक गंगा नदी पर बड़े ट्रांसपोर्ट कार्गो भी चलाये जा सकें ।
हम आज भी अपने नारे जय जवान जय किसान जय विज्ञान की महत्ता को समझते हुए अपने सरहद की निगरानी करने वाले जवानों के बच्चों के लिए नेशनल डिफेंस फंड के तहत मिलने वाली राशि में वृद्धि तथा उनके राज्य पुलिस के बच्चों को भी शामिल किया गया है । जवानों की शहादत को सलाम करने के लिए इंडिया गेट पर एक वॉर मेमोरियल का निर्माण भी किया गया है । निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करने वाले किसानों की जिंदगी बदले, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हो, ये मेरी सरकार की प्राथमिकता है । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आने वाले वर्षों में सरकार25 लाख करोड रुपए की राशि खर्च करने जा रही है ।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 8 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में43 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई जा चुकी है । इसी महीने 2 जनवरी को, एक साथ 6 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 12 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर करके मेरी सरकार ने रिकॉर्ड बनाया है । साथ ही हमारी सरकार खेती के वैकल्पिक उपायों पर भी जोर दे रही है, क्लस्टर आधारित बागवानी के साथ हर आर्गेनिक खेती के प्रचार और प्रसार पर भी काम कर रही है । शहद उत्पादन को लेकर किए गए सरकार के प्रयासों से शहद उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है । शहद का निर्यात भी दोगुने से अधिक हो गया है । इसी उपलब्धि को और बढ़ाने के लिए नेशनल बी- कीपिंग एंड हनी मिशन को स्वीकृति दी गई है ।
“यत्र नार्यस्तु पूज्यते तत्र रमंते देवता"
अपने गौरवशाली प्राचीन सभ्यता का अनुसरण करते हुए महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए एक तरफ जहां शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तथा स्वास्थ्य संबंधी अन्य बीमारियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार द्वारा आरंभ की गई उज्ज्वला योजना काफी कारगर सिद्ध हुई है । हमारी सरकार के प्रयासों से, महिला उद्यमशीलता और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप अभियान से अभी तक इन महिलाओं को कम ब्याज पर6 करोड़60 लाख से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है । अंडर ग्राउंड माइन्स में कार्य के समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जुड़ चुकी महिलाओं को रात में ओपन कास्ट माइन्स में भी काम करने की अनुमति दी गई है । समानता के इसी उद्देश्य के साथ पहली बार सैनिक स्कूलों में बेटियों के दाखिले को स्वीकृति दी गई है । मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की नियुक्ति का काम भी जारी है । भारतीय वायुसेना ने पहली बार फाइटर स्ट्रीम और डिफेंस अटैची के रूप में भी उन्हें नया अवसर दिया है ।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है । महिला सुरक्षा की दृष्टि से देश में 6 सौ से अधिक वन स्टॉप सेंटर बनाए जा चुके हैं । महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है । ऐसे मामलों में न्याय तेज़ी से मिले, इसके लिए देशभर में1 हजार से ज्यादा फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट बनाए जाएंगे । यह भी तय किया गया है कि Women Help Desk का विस्तार, देश के हर पुलिस स्टेशन में किया जाए । बच्चों के यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों में सरकार ने फांसी तक की सज़ा का प्रावधान किया है ।
हमारी सरकार की ही पहल तथा योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के कारण एक ओर जहां बालिका भ्रूण हत्या में कमी आई है वहीं बालिकाओं के सम्मान तथा शिक्षा के अवसर भी प्राप्त हए हैं । साथ ही महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है और उन्हें मुद्रा योजना के तहत लोन भी मुहैया कराए जा रहे हैं ।
हमारी सरकार, 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र पर चलते हुए, पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रही है । 8 करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन, 2 करोड़ गरीबों को घर, लगभग38 करोड गरीबों के बैंक खाते, 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा, 24 करोड़ लोगों को बीमा सुरक्षा कवच, 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त बिजली कनेक्शन पूरी पारदर्शिता के साथ और बिना भेदभाव के दिया गया है । हमारी सरकार की योजनाओं ने हर धर्म, हर क्षेत्र के गरीबों के हित में, समानता के साथ, सहायता व सुविधाएं पहुंचाई हैं और इसलिए देश के लोगों का विश्वास भी अर्जित किया है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी के प्रति आभार व्यक्त करती हूँ, उन्होंने अपने अभिभाषण में जिस नये उन्नतशील तथा प्रगतिशील भारत का विजन प्रस्तुत किया है, आशा करती हूं, हम सभी मिलकर नई ऊर्जा के साथ नए भारत के निर्माण में गति देने का काम करेंगे और साथ ही साथ उनके विजन “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" को मूर्त रूप प्रदान करेंगे । जो कि आने वाले दशक वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति तय करेगा । इसी दशक में दुनिया को न्यू इंडिया का समावेशी, समृद्ध, समर्थ और सशक्त स्वरूप दिखाई देगा । इसलिए, प्रत्येक सदस्य का तथा हर देशवासी का यह कर्तव्य है कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रयास करें और अपने-अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें ।
जय हिन्द ! जय भारत ! *श्रीमती रंजनबेन भट्ट (वडोदरा): मैं महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण का पूर्णतया समर्थन करती हूं क्योंकि महामहिम के अभिभाषण में जहां पुरानी समस्याओं के समाधान की बात कही गई है वहीं विकास के नए अध्याय लिखने की भी बात कही गई है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने भविष्य में बनने वाले नए भारत की रूपरेखा को रेखांकित किया है । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में राष्ट्रपति महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, बाबा साहेब अम्बेडकर के सामाजिक न्याय, पंडित जवाहर लाल नेहरू के आधुनिक भारत, सरदार पटेल के एक भारत- श्रेष्ठ भारत और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय का लक्ष्य और डा. राम मनोहर लोहिया के समता समाज का उल्लेख समाहित है । विभाजन के पश्चात् बने माहौल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बात का उल्लेख भी किया कि पाकिस्तान के हिंदू और सिख जो वहां नहीं रहना चाहते, वे भारत आ सकते हैं । उन्हें सामान्य जीवन मुहैया कराना भारत सरकार का कर्त्तव्य है । आज भी हमारी सरकार उनकी तब कही बातों का सम्मान कर रही है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में देश की जनता को यह कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है । देश में विदेशी मुद्रा का सुरक्षित भंडार 450 अरब डालर से अधिक है । प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी निरंतर बढ़ रहा है । देश के जनमानस को आश्वस्त किया है । किसानों की तारीफ करते हुए देश के जनमानस को बताया कि खाद्यान्न के मामले में भी देश आत्मनिर्भर है । इसके अतिरिक्त अभिभाषण में महिला सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार महिला अपराध से जुड़े मामले तेजी से निपटाने के लिए एक हजार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएगी 1600 वन स्टॉप सेंटर बने हैं जहां से महिलाएं सहायता ले सकती हैं । महिला उद्यमशीलता के बारे में उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह अभियान से 6 करोड़ 60 लाख महिलाएं जुड़ी हैं इन्हें कम ब्याज पर कर्ज दिया जा रहा है । सैनिक स्कूलों में बेटियों को दाखिले की स्वीकृति पहले ही दे दी गई है ।
उन्होंने बताया कि मजदूर पेंशन योजना से संगठित क्षेत्र के 60 लाख मजदूरों व छोटे व्यापारियों को जोड़ा गया है, अगले 5 साल में 10 करोड़ श्रमिकों को जोड़ा जाएगा । अल्पसंख्यकों के विषय में उन्होंने उल्लेख किया कि हुनर हाट के जरिये अल्पसंख्यक वर्ग के 2 लाख 65 हजार कारीगरों को रोजगार मिला है और बड़ी तादात में छात्रवृत्ति भी दी गई । दिव्यांग लोगों के विषय में उन्होंने कहा कि एक हजार गैर सरकारी भवनो। 100 रेलवे स्टेशन दिव्यांगों के लिए सुगम्य बनाये गए तथा 100 करोड़ के उपकरण बांटे गए । उन्होंने स्टार्ट अप का उल्लेख करते हुए कहा कि मुद्रा योजना के तहत 5.54 करोड़ से ज्यादा उद्यमियों ने ऋण लिया है । 110 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज दिया गया । खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि "खेलो इंडिया " जैसी योजनाओं से युवा प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है । इस बार 80 नए राष्ट्रीय रिकार्ड बने हैं ।
महामहिम जी ने अपने अभिभाषण के दौरान देश के जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकारों से यह आह्वान किया कि देश में बने उत्पाद खरीदने के बारे में एक आंदोलन चलाने की आवश्यकता है ताकि देश में 5 हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बन सके । इसके लिए सबको मिलकर काम करना होगा ।
अंत में एक बार पुनः मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं ।
*डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़) : राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सृजन और विजन दोनों ही देखने को मिले । सरकार के द्वारा पिछले 5 वर्षों में सड़क,शिक्षा स्वास्थ्य कार्य किए गए हैं,उससे भारत का मान समूचे विश्व में गौरवान्वित हुआ है । मुझसे पूर्व अनेक वक्ताओं ने इसके संबंध में सहमति, असहमति संबंधी विचार रखे । हमारा देश लोकतांत्रिक देश है । विचारों की मत भिन्नता हो सकती है किंतु देश सशक्त बने,सामर्थ्यवान बने, स्वाभिमानी बने इसके लिए सबको कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए ।
सड़कों, रेल,उद्योग, शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाएं देश के विकास का मापदंड तय करती है । इसके साथ ही साथ देश के गरीब आवासहीन लोगों को जब तक आवास उपलब्ध नहीं हो जाते,गीली लकड़ी के धुएं में भोजन बनाने वाले लोगों को जब तक गैस के कनेक्शन उपलब्ध नहीं हो जाते, इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना तथा विद्युत विहीन घरों में जब तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंच जाती तब तक विकास अधूरा है । पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने समाज के अंतिम छोर पर रहने वाले अंतिम व्यक्ति के लिए ही अंत्योदय की अवधारणा की बात कही थी । देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के सपनों को साकार करने के लिए देश के 8 करोड़ गरीब लोगों को समय सीमा से पहले उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया । प्रधानमंत्री अवास योजना से 2 करोड़ गरीबों को अपने घर का सपना पूरा कराया । आयुष्मान भारत योजना से 75 करोड़ लोगों को 5 लाख रु.तक के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई । अब कोई गरीब पैसों के अभाव में किडनी,कैंसर व हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा से वंचित नहीं रह पाएगा । देश के लगभग 38 करोड़ गरीब व्यक्तियों के जन-धन खाते खुलवाये गए । आजादी के इतने लंबे समय के उपरांत भी लगभग ढाई करोड़ लोग रह गए थे, जिनके घरों में बिजली नहीं पहुंची थी, ऐसे घरों में बिजली उपलब्ध कराई गई ।
महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती पर माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा की गई पहल से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में,अनेक गांवों में शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौच से गांव को मुक्त कराया है । आज देश में ग्रामीण क्षेत्रों में 15 करोड़ घर ऐसे हैं जहां पाइप से पानी उपलब्ध नहीं होता था,जल जीवन मिशन की शुरूआत करके ऐसे घरों में पानी पहुंचाने की पहल की गई । देश के 112 जिलों को आकांक्षी जिलों की श्रेणी में शामिल किया है और उनके योजनाबद्ध विकास के लिए केन्द्र व राज्यों के द्वारा किए गए समन्वित प्रयास से वहां अब विकास दृष्टिगोचर होता है । देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाने हैं,जिनमें इन आकांक्षी जिलों को भी शामिल किया गया है । संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने से जम्मू कश्मीर और लद्दाख का दृश्य काफी बदला हुआ है । देश के लिए बनाए जाने वाली सभी कानूनों का अब वहां पालन होगा, जिससे महिलाओं, छात्रों और मजदूरों को उनके हक मिल सकेंगे । किंतु सिर्फ वोट बैंक की खातिर ऐसे निर्णयों का विरोध करना क्या देश की एकता और अखंडता के हित में होगा ।
क्या `वंदेमातरम`के गान से दूर रहने वाले देश के विकास मॉडल में अपना योगदान दे सकेंगे । क्या देश के `जन गण मन` राष्ट्रगान की अपत्ति करने वाले देश की एकता के प्रतीक होंगे । क्या शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन हमें सोचने पर विवश नहीं करेंगे । हमारी विचारधारा अलग हो सकती है किंतु `भारत माता`, हम सबकी माता है । हम सब उनकी संतान हैं । आजाद भारत में आजादी की मांग करने वाले "भारत माता "के कौन से बेटे होंगे । टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करने वाले कैसे देश की एकता के पक्षधर होंगे । आजादी के नाम पर 144 धारा का उल्लंघन करके भी सड़कों पर आकर विरोध करने वाले लोग क्या देश की एकता के पक्षधर होंगे तथा "भारत माता "की जय व "वंदेमातरम " का तिरंगा लेकर नारे लगाने वालों पर डंडे बरसाने और चांटे मारने वाले क्या देश से ऊपर हो जाएंगे । हमारा किसी संगठन या विचारधारा के साथ जुड़ाव हो सकता है लेकिन हम पहले देश के नागरिक हैं । देश की अखंडता के लिए कर्त्तव्य भाव को स्मरण करना हम सबकी जिम्मेदारी है ।
*SHRI S.R. PARTHIBAN (SALEM) : The Hon’ble President addressed the joint Session of both the Houses of Parliament on 31st January, 2020. I wish to lay some of my views on Motion of thanks on the President’s Address. I and my DMK party are totally opposing the CAA and insisting to include the Muslim communities in the list religions and include Sri Lanka in the list of countries in CAA. The violence against the protesters of CAA in various parts of the country should be stopped. It’s the fundamental right to the public to do protest against the Government policies.
In his address, he mentioned a lot about the Farmers development but there are no points about the waiver of Farmers Loan. Currently, unemployment is the big problems in the country. But he failed to address the steps taken to generate new employment. The Nation’s GDP is falling down rapidly, but there are no views about the steps taken. Price rising one side and the buying capacity of the people is declining one side. There are no views about this in his address. Government making proposal for disinvestment of PSU’s instead of establishing new PSU’s.
Whole Tamil Nadu is protesting against Hydrocarbon project, My party DMK also against this project and insisting to get the local public views and permission before the implementation. But he fails to mention this in his address. BSNL is facing a critical financial problem and a large number of workers quitting their jobs by getting VRS because of not getting remuneration. This Government wowing corporate companies loans and interest but fails to woe the interest and Loan of Students Educational loan taken for their studies. I am submitting the above-said points in this august house on Motion of thanks on the President’s Address.
*DR. D. RAVIKUMAR (VILUPPURAM): Hon. Chairman Sir, Vanakkam. Thank you for this opportunity. I am thankful to the Hon. President for mentioning in his Address that the Constitution remains as the guiding light. The Constitution ensures us the equality, democracy and freedom. On the basis of this Law, we have acquired all the rights including the citizenship rights.
Hon. President has mentioned in detail about different sections of the society in his Address. He has also highlighted the achievements of this Government. But only a few lines appear about SC and ST people who constitute 25 per cent of the population of this country. Particularly, there is no information in the Hon. President’s Address about the Scheduled Caste people other than the mention about extension of reservation to SCs and STs for another 10 year period.
Some days ago, our Government released the report of the National Crime Records Bureau for the year 2018. The Statistics relating to the atrocities against the Scheduled caste people throughout the country have been provided in that Report. This Government cannot take pride in expressing the real status as regards the economic development of the Scheduled caste people of this country. They cannot also take pride in mentioning the educational status of Dalit people in this country. That’s why these details have not become part of the Hon. President’s Address.
Atrocities against SCs have been on the rise. This has been mentioned in the Report of NCRB. In the year 2016, 40,801 violent attacks took place against Scheduled Caste people of the country. This has risen to 42,793 violent incidents in the year 2018. During the year 2018, as many as 821 Dalit people have been killed. Also 1283 Dalit people have been grievously injured. The Dalit women do not have protection in this country. As many as 1530 women's modesty have been outraged in this country. As many as 2957 women have been raped. Dalit girls also do not have protection. As many as 871 Dalit girls have been raped in the year 2018. I want to ask whether the Hon. President is not aware or concerned of these atrocities against Scheduled Castes in the country?
17.14 hrs (Shri N. K. Premachandran in the Chair) If Dalit people are considered as Hindus in this country, there will not be complete silence after witnessing so many killings of Dalit people. This deafening silence indicates that Dalit people are not considered as Hindus as they are targeted time and again. Although we have so many laws to bring down the number of these atrocities against SCs, they are not being implemented properly which has resulted in an increase of such atrocities. If violence takes place in the name of a religion, the National Investigation Agency takes up the issue as a terrorist act and starts investigating the matter. The culprits are punished immediately. Capital punishment is maximum punishment given to those who involved in such terrorist activities. But even though 821 Dalit persons are killed in one year, it is not considered as a terrorist act. If the crimes based on religion are considered as terrorist acts and why the crimes based on Castes are not considered in those lines. The killings that are listed under the Prevention of atrocities against SCs and STs Act, should be considered as terrorist crimes. And NIA should come forward to investigate these cases. Only then the number of such violent incidents against SCs can be reduced.
Now the Citizenship Amendment Law has been passed and the National Population Register is being prepared. These things remind me of British rule. When census method was introduced during the British rule in India, only after that the Dalit people became landless. In Madras Presidency, 100 years before the introduction of Census, a person named Mr Bernard did a survey in 1900 villages in the year 1772. As per the survey undertaken in Chengalpattu district, there were Dalit people who were large in numbers having lots of land in their names. When British rule insisted to get the land ownership rights on the basis of documents, all these Dalit people became landless. Those who gave fake manuscripts and copper plates showing the ownership rights to British rulers became land owners. Today also we face a similar situation. If it is said that one should ascertain his citizenship on the basis of the documents he possess, this will lead to a dangerous situation where 90 per cent of Dalit people will be loosing their citizenship rights in this country. I strongly accuse that NPR is aimed to take away the citizenship rights from the Dalit people adding disregard to the Constitution framed by Revolutionist Dr. Ambedkar.
While introducing the Constitution of India revolutionist Dr. Ambedkar said those who consider their religious beliefs above the interests of the country, come to power, our freedom will face severe crisis. He also gave a caution that if we loose our freedom we can never get it back. There is such a pathetic situation prevailing in this country. We have to ensure protection of freedom in the country. We all have the duty to protect the Constitution of our country. I request that the people in the Government should also come forward to fulfil such duties. Thank you so much.
श्री दिलीप शइकीया (मंगलदाई): सभापति महोदय, नमस्कार ।
मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण की चर्चा पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया । मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के समर्थन में कुछ विषय संसद के समक्ष बोलना चाहता हूं ।
सभापति महोदय,मैं देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने सामाजिक समरसता और अंत्योदय के सिद्धांतों को प्रतिपादित करते हुए असम सहित पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को अष्ट लक्ष्मी करार देते हुए ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी को ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी में बदला है । आज देश की तीन परसेंट पूर्वोत्तर भारत की है और पूरे भारत का दस परसेंट भूभाग पूर्वोत्तर का है । हमारे प्रधान मंत्री जी की प्राथमिकता में हमेशा पूर्वोत्तर रहा है । पिछले 55 वर्षों में भारत में कांग्रेस ने शासन किया,लेकिन इन 55 वर्षों में कांग्रेस ने जिस तरह पूर्वोत्तर भारत के लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को उपेक्षित किया,जिस तरह युवक-युवतियों को हाथ में अस्त्र-शस्त्र लेने को बाध्य किया,उसके विपरीत मोदी जी के पांच सालों में आज पूरे पूर्वोत्तर में शांति का वातावरण बनकर एक बहुत अच्छा माहौल बन रहा है ।
सभापति महोदय,आप सब जानते हैं कि असम में जो विकास के कार्य हैं, पूरे पूर्वोत्तर में जो विकास के कार्य हैं, वे पिछले पांच सालों से तेजी से चल रहे हैं । कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पूरे पूर्वोत्तर में मोदी जी के नेतृत्व में,आज चाहे रोडवेज़ हो, रेलवेज़ हो, एयरवेज़ हो, वॉटरवेज़ हो या हाईवेज़ हो,इन सभी दिशाओं में विकास का एक नया परिदृश्य देखने को मिल रहा है । पहले हम लोग मीटर-गेज रेलवेज़ में चलते थे, लेकिन आज पूरे नॉर्थ-ईस्ट में, असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों को आज ब्रॉड-गेज में कन्वर्ट किया गया है । कांग्रेस ने 55 सालों तक पूरे असम का, पूरे नॉर्थ-ईस्ट का बहुत बुरा हाल कर के रखा था । हमारे यहां के युवक-युवती अनएम्प्लॉयमेंट से पूरी तरह से तंग आ चुके थे,वे हताश हो गए थे । आज वही नॉर्थ-ईस्ट, वही असम आज मोदी जी के नेतृत्व में,हमारे मुख्य मंत्री सर्बानंद सोनोवाल जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है ।
मैं असम के बारे में बोलना चाहता हूं । जो बोडो समझौता हुआ है, कुछ लोगों ने उसका उल्लेख किया है । जो बोडो संप्रदाय है, वह हाथ में शस्त्र लेने के लिए बाध्य हुआ था । आज वही बोडो कम्युनिटी शांति के पथ पर आई है । उन्होंने बोडो लैण्ड पर दावा किया था, उन्होंने भारत में अलग राज्य बनाने का दावा किया था, आज उस बोडो लैण्ड का दावा छोड़ते हुए वे बीटीआर – बोडो लैण्ड टैरिटोरियल रीजन में संतुष्ट हुए हैं । इससे बोडो लैण्ड में बोडो भाई-बहनों में खुशहाली आएगी । इसके साथ-साथ वहां रहने वाले अन्य जाति के लोगों में भी खुशहाली आने की संभावना है । वहां के लिए 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है । पिछले 50 सालों में बोडो लैण्ड में करीब चार हजार लोग मारे गए थे । आज बोडो लैण्ड शांति की कगार पर है ।
सभापति महोदय,पूरे नार्थ-ईस्ट में कुछ दिन पहले माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में ब्रू समझौता हुआ है । ब्रू जनजाति25 सालों से त्रिपुरा में शरणार्थी के जैसे रहती थी । आज ब्रू जनजाति को त्रिपुरा में सामाजिक सुरक्षा देने का काम किया गया है । उनको घर मिला है, उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य,आवास, सभी सुविधाएं देने का आश्वासन माननीय प्रधान मंत्री जी ने दिया है । ब्रू पीस एग्रीमेंट से नॉर्थ-ईस्ट में शान्ति का वातावरण बन रहा है । कुछ सालों से नागा शान्ति वार्ता चल रही है । नागा शान्ति वार्ता में भी एक अच्छी खबर आने की संभावना है । कई साल नागा लोगों ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है और अब उस लड़ाई का भी अंत होने जा रहा है ।
सभापति महोदय,यहां गौरव गोगोई जी बैठे हैं । कल उन्होंने सीना तानकर भाषण दिया है । देश के विरुद्ध नारा लगाने वाला देशद्रोही नहीं हैं, देश की शत्रु पॉवर्टी है, देश का शत्रु अनइंप्लॉयमेंट है । देश में कांग्रेस के जमाने में 37 परसेंट पॉवर्टी रही है, लेकिन आज मोदी जी नेतृत्व में यह कम होकर 31 परसेंट हो गई है । देश में अनइंप्लॉयमेंट है । हर साल करीब डेढ़-दो करोड़ यूथ को इम्प्लॉयमेंट देने का काम मोदी जी ने किया है । आप जानते हैं कि पूरा नॉर्थ-ईस्ट अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से भरा हुआ है । अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए अगर किसी सरकार ने अच्छे कदम उठाए हैं, तो वह मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने उठाए हैं ।
आज कुछ देर पहले ओवैसी जी, एन.आर.सी. पर बोल रहे थे । वह एन.आर.सी. का विरोध करते हैं । वह एन.आर.सी. का विरोध क्यों करते हैं? हम लोग भी असम में एन.आर.सी.की मांग कर रहे थे । उस वक्त राजीव गांधी प्रधान मंत्री थे । उन्होंने असम एकॉर्ड साइन किया था । आज कांग्रेस वाले बोल रहे हैं कि एन.आर.सी. नहीं चाहिए । असम एकॉर्ड के मुताबिक असम में एन.आर.सी.हुआ है । आज कांग्रेस वाले बोल रहे हैं, यह उनका डबल स्टैण्डर्ड है । उनको समझ में आना चाहिए कि एन.आर.सी. से देश टूटेगा नहीं, एन.आर.सी. से देश मजबूत होगा । देश को तोड़ने वाले लोगों के साथ ये लोग हमेशा दिखाई देते हैं । आप शाहीन बाग में जाइए कि वहां कितने लोग उनका समर्थन कर रहे हैं । असम में एन.आर.सी.हुआ, ठीक है हम एन.आर.सी. से खुश नहीं हैं, क्योंकि जो रिजल्ट एन.आर.सी. से मिलना चाहिए,वह रिजल्ट हमको नहीं मिला है । जो घुसपैठिए यहां आए हैं, उन घुसपैठियों को यहां से खदेड़ने का काम मोदी जी ने शुरू किया है,क्योंकि एन.आर.सी. के माध्यम से ही घुसपैठियों की शिनाख्त होगी,उनका वोटर लिस्ट से नाम डिलीट होगा,जिससे उनको देश से बाहर कर सकते हैं ।
कांग्रेस के जमाने में मणिपुर में क्या हुआ था,नागालैंड में क्या हुआ था? वहां 40-40 दिन, 50-50 दिन ब्लॉकेज करके रखा था । आज मणिपुर उस ब्लॉकेज से मुक्त हुआ है । मणिपुर शान्ति के पथ पर आया है,मणिपुर विकास के पथ पर आया है,असम, नार्थ-ईस्ट विकास के पथ पर आया है । इतना होने के बाद भी मेरे कांग्रेस बंधु समझते नहीं है, क्योंकि उनको एन.आर.सी. से डर है । यहां से काफी इल्लीगल माइग्रेंट्स को निकाला जाएगा,एन.आर.सी. से उनका वोट बैंक चला जाएगा,उन्हें इसका डर है । ये लोग वोट बैंक के डर से एन.आर.सी. का विरोध कर रहे हैं । मैं उनको एक बार फिर से बोलना चाहता हूं कि राजीव गांधी ने असम एकॉर्ड किया था, राजीव गांधी ने घुसपैठियों को भगाने का भाषण दिया था, लेकिन आज ये लोग विरोध कर रहे हैं ।
माननीय सभापति: अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री दिलीप शइकीया : सभापतिमहोदय, मैंअपनी बात अभीसमाप्त करताहूं । मैं एकविषय पर औरबोलना चाहताहूं । आज येलोग नागरिकतासंशोधन कानूनका विरोध कररहे हैं । इसनागरिकता संशोधनकानून का हमसपोर्ट कर रहेहैं, पूरेदिल से सपोर्टकर रहे हैंऔर असमवासी भीसपोर्ट कर रहेहैं, क्योंकिअसम भारत काअंग है । यहकानून असम केलिए ही नहींहै, यह कानूनपूरे भारत केलिए है । असममें गौरव गोगोईजी के पिताजीतीन कार्यकालके लिए मुख्यमंत्री रहे थे । वह चुनाव केपहले बराक वैलीमें बोलकर आएथे कि हम हिन्दूबंग्लादेशी कोसिटीजनशिप देंगे,लेकिन ये लोगयहां आकर संसदके अंदर इसकाविरोध करते हैं,कांग्रेस वालेइसका विरोध करतेहैं । मैं सभीसे अपील करताहूं कि एन.आर.सी. को सपोर्ट कीजिएऔर नार्थ-ईस्ट में विकासका काम मोदीजी के नेतृत्वमें जोरदार चलरहा है, उसकोआगे बढ़ाने कीकोशिश कीजिए । धन्यवाद ।
कुंवर दानिश अली (अमरोहा): धन्यवादसभापति महोदय, आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया है ।
महोदय, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में महात्मा गांधी जी का नाम कई बार लिया गया । जैसा कि यह सरकार हमेशा करती है, जितने गलत और खराब काम करने हों, तो उनको गांधी जी के नाम से जोड़ दो । सीएए यह सरकार लेकर आयी, जिसको आज देश की जनता काले कानून के रूप में देख रही है । यह 27 तारीख का इंडियन एक्सप्रेस अखबार है, जिसमें लिखा है ‘Betrayal of Gandhi – the CAA does not carry out the Mahatma’s wishes.’ This is written by none other than the grandson of Mahatma Gandhi, Shri Rajmohan Gandhi. आप गांधी जी का नाम लेकर कहते हैं कि हमने उनकी विश पूरी की है । मुझे अफसोस होता है माननीय सभापति महोदय, जब देश के आदरणीय प्रधान मंत्री कल किसी रैली में जामिया का नाम लेते हैं और कहते हैं कि वहां बैठे हुए लोग जो आंदोलन कर रहे हैं, वे राष्ट्र के सौहार्द को खंडित करने का इरादा रखते हैं । मैं चाहूंगा कि जब वे इसका रिप्लाई दें तो इस सदन से ही नहीं बल्कि पूरे देश से भी माफी मांगने का काम करें । जामिया मिलिया इस्लामिया की बुनियाद ही महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से हुई थी । मैं सैल्यूट करता हूं जामिया के उन छात्र-छात्राओं को जिन्होंने उस स्प्रिट को बरकरार रखा है कि ऐसे काले कानून के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ रखा है । मेरी पार्टी बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा बहन कुमारी मायावती ने पहले दिन ही कह दिया था कि यह कानून विभाजनकारी साबित होगा । यह कानून भारतीय संविधान की मूल रचना के खिलाफ है, यह प्रिएम्बल के खिलाफ है ।
मैं कहना चाहता हूं सभापति महोदय कि आप इस देश में क्या करना चाहते हैं? जामिया के अंदर जो आंदोलन हो रहा है, मैं आपको कहना चाहता हूं कि सरकार के मंत्री गोली मारने का आइडिया देते हैं । मैं कहना चाहता हूं कि जब इनके आइडियोलॉजिकल पुरखे अंग्रेजों की दलाली कर रहे थे, उस वक्त खिलाफत आंदोलन में, नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में जामिया की बुनियाद रखी जा रही थी । मैं यह जानता हूं कि यह सरकार इस देश के छात्रों को पूर्ण शिक्षित नहीं होने देना चाहती है, इसीलिए बार-बार जामिया,जेएनयू, एएमयू या और शिक्षण संस्थानों में गड़बड़ी कराते हैं । ऐसा कहीं नहीं हुआ होगा माननीय सभापति जी, दिल्ली के अंदर जिस तरीके से दिल्ली पुलिस ने लाइब्रेरी में घुसकर छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया है, लाठी चलाई है, उनका उत्पीड़न किया है,शायद दुनिया के किसी भी डेमोक्रेटिक और सिविलाइज्ड कंट्री में ऐसा नहीं हुआ होगा । हम जानते हैं । एएमयू के अंदर घुसकर छात्रों की आंखें फोड़ दी जाती हैं । आप अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाएंगे,अपने बच्चों को अच्छा टैलेंट देंगे । ऐसा टैलेंट देंगे कि सरकार में बैठे हुए मंत्री अगर कोई कम्पनी खोल लें तो एक साल में कम्पनी का टर्नओवर 16 हजार गुना कर लेते हैं । मैं चाहता हूं कि हर एक, जिनकी ये बात करते हैं,ऐसे हर नौजवान का टैलेंट ऐसा होना चाहिए कि वह भी अपनी कम्पनी का टर्नओवर 16 हजार गुना एक साल में कर लें । मैं बधाई देना चाहता हूं । आप अपने बच्चों को तो ऐसा टैलेंट देंगे लेकिन दूसरे के बच्चों के हाथ में तमंचा थमाएंगे और कहेंगे कि गोली मारो । यह कौन सा कल्चर इस देश में आप लाना चाहते हैं । माननीय सभापति महोदय, इस देश में एनपीआर की बात हो रही है । पूछते हैं कि आप अपने बाप का बर्थ प्लेस और डेट ऑफ बर्थ बताइए । यह देखने में आया है कि उसमें ऐसा फॉरमेट आ रहा है । अरे, जिस देश में यूनिवर्सिटिज़ 40 साल पुरानी डिग्री और सर्टिफिकेट्स का रिकार्ड ने दे पाएं, आप ऐसे वंचित समाज के लोगों से, लाखों लोग जो हर साल बाढ़ की वजह से पलायन कर जाते हैं, जो ठेला-रिक्शा चलाने के लिए हजारों किलोमीटर दूर चले जाते हैं, आप उनसे उनके बाप-दादाओं का डेट ऑफ बर्थ पूछेंगे । उनके घर का एड्रेस पूछेंगे । सभापति महोदय, मुझे बड़ा अफसोस हो रहा है ।
इसी सदन में वर्ष 2007 में इसी तरफ कहीं पर खड़े हुए एक सदस्य सुबक-सुबक कर रो रहे थे । यहां इसी चेयर पर सोमनाथ दादा बैठे हुए थे । वह सदस्य यह कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश की पुलिस मेरे ऊपर इतना अत्याचार कर रही है । मुझे… * मुकदमों में फंसा रही है । मुझे गलत मुकदमों में फंसाकर जेल भेज रही है । बद्किस्मती से आज वही सदस्य… * जो लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे,… * अकेले उत्तर प्रदेश के अंदर दो दर्जन से ज्यादा निर्मम लोगों की हत्या पुलिस की गोली से की गई है । आप ऐसी पुलिस बनाना चाहते हैं । उत्तर प्रदेश की पुलिस हो, या दिल्ली की पुलिस हो, पुलिस अच्छी होती है, लेकिन उसके जो राजनैतिक आक़ा होते हैं,उसको उनका आर्डर मानना पड़ता है ।
यही दिल्ली पुलिस प्रोफेशनल हो जाती है, जब दूसरी सरकार होती है । वही उत्तर प्रदेश की पुलिस बहुत प्रोफेशनल हो जाती है, जब बहन कुमारी मायावती जी उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री होती हैं । कहीं कोई परिंदा पर नहीं मारता है । मेरठ के अंदर पुलिस का एक अधिकारी उन आंदोलनकारियों,जो शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, उनसे यह कहता है कि… * मैं ऐसे अधिकारियों और ऐसी सोच रखने वालों से यह कहना चाहता हूं कि आप जिनसे यह कह रहे हैं कि पाकिस्तान में जाकर आंदोलन करो, मैं यह कहना चाहता हूं कि जब इस मुल्क का बंटवारा हो रहा था, तब उनके पुरखों ने मज़हब की बुनियाद पर बनने वाले मुल्क को अपना मुल्क नहीं माना था । उनके पुरखों ने जो सेक्युलरिज्म में विश्वास रखते हैं, जो महात्मा गांधी जी को अपना लीडर मानते हैं,जो अंबेडकर जी को अपना लीडर मानते हैं, जो मौलाना आज़ाद को अपना लीडर मानते हैं, उन्होंने उनको अपना लीडर माना था । इस मिट्टी को अपना वतन माना था । आप उनकी देशभक्ति पर सवालिया निशान नहीं लगा सकते हैं ।
माननीय सभापति महोदय, मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि वे लोग यहां पर बाई च्वाइस हैं, बाई कम्पल्शन नहीं हैं । उनको उस वक्त यह च्वाइस दी जा रही थी कि आप मज़हब के आधार पर बनने वाले मुल्क में रहना पसंद करेंगे, या सेक्युलर मुल्क में रहना पसंद करेंगे, तो हमारे पुरखों ने सेक्युलर मुल्क में और मिली-जुली संस्कृति वाले मुल्क में रहना पसंद किया था । उन्होंने मज़हब के आधार पर बनने वाले मुल्क में रहना पसंद नहीं किया था ।
उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री यह कहते हैं कि आज़ादी के नारे लगेंगे, तो देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होगा । मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं यहां भी आज़ादी का नारा लगाना चाहता हूं । आज़ादी चाहिए,भूख से आज़ादी चाहिए, बेरोजगारी से आज़ादी चाहिए,सरकार की दमनकारी नीतियों से आज़ादी चाहिए । मान्यवर,कोई परमानेंट नहीं होता है । आज जो साहिब-ए-मसनद हैं,वे कल नहीं होंगे । चौकीदार हैं,कोई ज़ाती मकान थोड़े है । ऐसा नहीं है कि आप परमानेंट आए हैं । आपको तो आपकी भी हिस्ट्री मालूम नहीं है । ये अपने नेताओं की भी हिस्ट्री नहीं जानते हैं । अभी पिछले दिनों यह चर्चा हो रही थी ।…(व्यवधान)महोदय, मैं बस दो मिनट में अपनी बात खत्म करूंगा ।
आज देश भर में जितने भी आंदोलन हो रहे हैं, वहां पर एक क्रांतिकारी नज़म पढ़ी जाती है । वह नज़म जिस शायर ने लिखी थी,स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी उनके बहुत बड़े फैन थे । वह फै़ज़ अहमद फै़ज़ के फैन थे ।
हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे, वो दिन कि जिसका वादा है, जो लोह-ए-अज़ल में लिखा है, जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां, रुई की तरह उड़ जाएंगे, हम महकूमों के पांव तले, ये धरती धड़-धड़ धड़केगी, और अहल-ए-हकम के सर ऊपर, जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी ।
यह वह फै़ज़ अहमद फै़ज़ की नज़म है, जब माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी पहली बार विदेश मंत्री बनकर पाकिस्तान गए थे, तब वह प्रोटोकाल तोड़कर फै़ज़ अहमद फै़ज़ से मिलकर आए थे । वहीं इनके मुख्य मंत्री, इनके नेता कहते हैं कि अगर यह नज़्म पढ़ोगे तो आपके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो जाएगा ।
माननीय सभापति जी, मैं अपनी बात को खत्म कर रहा हॅूं । कर्नाटक के बीदर के अंदर जिस तरीके से एक नाटक मंचन पर, चौथी क्लास के बच्चों को बुला कर रात भर थाने में बिठाया गया,उन बच्चों की माँओं को, उन बच्चों की टीचर को, थाने में बुलाया गया । वे सिर्फ एक नाटक प्ले कर रहे थे,उनके ऊपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा लगा कर जेल भेजने का काम कर्नाटक की सरकार ने किया है । …(व्यवधान)यह ऐसा देश हम नहीं चाहते हैं । …(व्यवधान)मैं इन्ही शब्दों के साथ अपनी बात खत्म करता हॅूं कि एनपीआर के साथ,असहयोग आंदोलन जारी रहेगा । …(व्यवधान) हम न सीएए मानेंगे,न एनपीआर मानेंगे । …(व्यवधान)
کنور دانش علی (امروہہ): محترم،چیرمین صاحب، آپ نے مجھے صدرِ جمہوریہ کے خطبہ پر بولنے کا موقع دیا اس کے لئے آپ کا بہت بہت شکریہ۔ جناب، صدرِ جمہوریہ کے خطبہ کے دوران مہاتما گاندھی جی کا نام کئی بار لیا گیا۔ جیسا کہ یہ سرکار ہمیشہ کرتی ہے، جتنے غلط اور خراب کام کرنے ہوں تو ان کو گاندھی جی کے نام سے جوڑ دو۔ سی۔اے۔اے۔ یہ سرکار لے کر آئی، جس کو ملک کی عوام آج کالے قانون کی شکل میں دیکھ رہی ہے۔ یہ 27 تاریخ کا انڈین ایکسپریس اخبار ہے، جس میں لکھا ہے ‘Betrayal of Gandhi – the CAA does not carry out the Mahatma’s wishes’. This is written by none other than the grandson of Mahatma Gandhi, Shri Ramohan Gandhi. آپ گاندھی جی کا نام لے کر کہتے ہیں کہ ہم نے ان کی وِش پوری کی ہے۔ مجھے افسوس ہوتا ہے۔ محترم چیرمین صاحب، جن ملک کے وزیرِ اعظم صاحب، کل کسی ریلی میں جامعہ کا نام لیتے ہیں اور کہتے ہیں کہ وہاں بیٹھے ہوئے لوگ جو آندولن کر رہے ہیں، وہ ملک کی ہم آہنگی کو توڑنے کا اردہ رکھتے ہیں۔ میں چاہوں گا کہ جب وہ اس کا جواب دیں تو اس ایوان سے ہی نہیں بلکہ پورے ملک سے بھی معافی مانگنے کا کام کریں۔ جامعہ ملیہ اسلامیہ کی بنیاد ہی مہاتما گاندھی کے عدم تعاون کی تحریک سے شروع ہوئی تھی۔ میں سیلیوٹ کرتا ہوں جامعہ کے ان طلباء اور طالبات کو جنہوں نے اس اسپرِٹ کو برقرار رکھا ہے کہ ایسے کالے قانون کے خلاف عدم تعاون کی تحریک کو چھیڑ رکھا ہے۔ میری پارٹی بہوجن سماج پارٹی کی صدر بہن کماری مایا وتی نے پہلے دن ہی کہہ دیا تھا کہ یہ قانون تقسیم کرنے والا ثابت ہوگا۔ یہ قانون ہندوستان کے آئین کی بنیادی رچنا کے خلاف ہے، یہ پریمبل کے خلاف ہے ۔ محترم چیرمین صاحب، میں کہنا چاہتا ہوں کہ آپ ملک میں کیا کرنا چاہتے ہیں؟ جامعہ کے اندر جو تحریک چل رہی ہے، میں آپ کو کہنا چاہتا ہوں کہ سرکار کے منتری گولی مارنے کا آئیڈیا دیتے ہیں۔ میں کہنا چاہتا ہوں کہ جب ان کے آئڈیولوجیکل پُرکھےانگریزوں کی دلالی کر رہے تھے اس وقت خلافتِ تحریک میں، عدم تعاون کی تحریک میں جامعہ کی بنیاد رکھی جا رہی تھی۔ میں یہ جانتا ہوں کہ یہ سرکار اس ملک کے طلباء کو پوری طرح تعلیم یافتہ ہونے نہیں دینا چاہتی ہے، اس لئے بار بارجامعہ، جے۔این۔یو۔، اے۔ایم۔یو، اور دوسرے تعلیمی اداروں میں گڑبڑی کراتے ہیں۔ ایسا کہیں نہیں ہوا ہوگا محترم چیرمین صاحب، دہلی کے اندر جس طریقے سے دہلی پولس نے لائبریری میں گھُس کر طلبہ اور طالب علم کے ساتھ غلط برتاوُ کیا ہے، لاتھی چلائی ہے، شاید دنیا کے کسی بھی ڈیموکریٹک اور سِویلائزڈ ملک میں ایسا نہیں ہوا ہوگا۔ ہم جانتے ہیں۔ اے۔ایم۔یو۔ کے اندر طلباء کی آنکھ پھوڑی جاتی ہے۔ آپ اپنے بچوں کو اچھے اسکول میں پڑھائیں گے، اپنے بچوں کو اچھا ٹیلینٹ دیں گے۔ ایسا ٹیلینٹ دیں گے کہ سرکار میں بیٹھے ہوئے منتری اگر کوئی کمپنی کھول لیں تو ایک سال میں کمپنی کا ٹرن اوور16 ہزار گُنا کر لیتے ہیں۔ میں جانتا ہوں کہ ہر ایک جنکی یہ بات کرتے ہیں، ایسے ہر نوجوان کا ٹیلینٹ ایسا ہی ہونا چاہئیے کہ وہ بھی اپنی کمپنی کا ٹرن اوور 16 ہزار گُنا ایک سال میں کر لے۔ میں بدھائی دینا چاہتا ہوں۔ آپ اپنے بچوں کو توایسا ٹیلینٹ دیں گے، لیکن دوسرے کے بچوں کے ہاتھ میں طمنچہ تھمائیں گے اور کہیں گے کہ گولی مارو۔ یہ کون سا کلچر آپ اس ملک میں لانا چاہتے ہیں۔ محترم چیرمین صاحب، اس ملک میں این۔پی۔آر۔ کی بات ہو رہی ہے۔ پوچھتے ہیں کہ آپ اپنے باپ کا برتھ پلیس اور ڈیٹ آف برتھ بتائیے۔ یہ دیکھنے میں آیا ہے کہ اس میں ایسا فارمیٹ آرہا ہے۔ ارے جس ملک میں یونیورسٹیز 40 سال پرانی ڈگری اور سرٹیفیکیٹ کا ریکارڈ نہ دے پائے، آپ ایسے ونچِت سماج سماج کے لوگوں سے، لاکھوں لوگ جو ہر سال باڑھ کی وجہ سے پلاین کر جاتے ہیں، جو ٹھیلا رِکشہ چلانے کے لئے ہزاروں کلو میٹر دور چلے جاتے ہیں، آپ ان سے ان کے باپ دادا کا ڈیٹ آف برتھ پوچھیں گے۔ ان کے گھر کا ایڈریس پوچھیں گے۔ چیرمین صاحب، مجھے بہت افسوس ہو رہا ہے۔ اسی ایوان میں سال 2007 میں اسی طرف کہیں پر کھڑے ہوئے ایک ممبر سُبک سُبک کر رو رہے تھے، یہاں اسی چیر پر سومناتھ دادا بیٹھے ہوئے تھے۔ وہ کہہ رہے تھے کہ اتر پردیش کی پولس میرے اوپر اتنا اتیار چار کر رہی ہے۔ مجھے (کاروائی میں شامل نہیں) مقدموں میں پھنسا رہی ہے، مجھے غلط مقدموں میں پنسا کر جیل بھیج رہی ہے۔ بد قسمتی سے آج وہی ممبر (کاروائی میں شامل نہیں) جو لوگ پُر امن طریقے سے تحریک چلا رہے تھے ۔ (کاروائی میں شامل نہیں) اکیلے اتر پردیش کے اندر دو درجن سے زیادہ نِرمام لوگوں کی ہتیائیں پولس کی گولی سے کی گئیں ہیں۔ آپ ایسی پولس بنانا چاہتے ہیں۔ اتر پردیش کی پولس ہو یا دہلی کی پولس ہو، پولس اچھی ہوتی ہے، اس کے جو سیاسی آقا ہوتے ہیں، اس کو ان کا آرڈر ماننا پڑتا ہے۔ یہی دہلی پولس پروفیشنل ہو جاتی ہے ، جب دوسری سرکار ہوتی ہے، وہی اتر پردیش کی پولس بہت پروفیشنل ہو جاتی ہے جب بہن کماری مایاوتی جی اتر پردیش کی وزیرِ اعلیٰ ہوتی تھیں۔ کہیں کوئی پرندہ پر نہیں مارتا تھا۔ میرٹھ کے اندر ایک پولس افسر ان آندولن کاریوں جو کہ پُر امن آندولن کر رہے تھے، ان سے یہ کہتا ہے کہ (کاروائی میں شامل نہیں)۔ میں ایسے افسران اور ایسی سوچ رکھنے والوں سے یہ کہنا چاہتا ہوں کہ آپ جن سے یہ کہہ رہے ہیں کہ پاکستان میں جاکر آندولن کرو، میں یہ کہنا چاہتا ہوں کہ جب اس ملک کا بٹوارا ہو رہا تھا تب ان کے پرکھوں نے مذہب کی بنیاد پر بننے والے ملک کو اپنا ملک نہیں مانا تھا ۔ ان کے پرکھوں نے جو سیکیولرزم میں یقین رکھتے ہیں، جو مہاتما گاندھی کو اپنا لیڈر مانتے ہیں، جو امبیڈکر جی کہ اپنا لیڈر مانتے ہیں، جو مولانا آزاد صاحب کو اپنا لیڈر مانتے ہیں، انہوں نے ان کو اپنا لیڈر مانا تھا۔ اس مٹّی کو اپنا وطن مانا تھا۔ آپ ان کی دیش بھکتی پر سوالیہ نشان نہیں لگا سکتے ہیں۔ محترم چیرمین صاحب، میں صرف اتنا ہی کہنا چاہتا ہوں کہ وہ لوگ یہاں پر بائی چوائس ہیں، بائی کمپلشن نہیں ہیں۔ ان کو اُس وقت یہ چوائس دی جا رہی تھی کہ آپ مذہب کی بنیاد پر بننے والے ملک میں رہنا پسند کریں گے، یا سیکولر ملک میں رہنا پسند کریں گے، تو ہمارے پرکھوں نے سیکولر ملک میں اور ملی جلی تہذیب والے ملک میں رہنا پسند کیا تھا۔ انہوں نے مذہب کی بنیاد پر بننے والے ملک میں رہنا پسند نہیں کیا تھا۔ اتر پردیش کے وزیرِ اعلیٰ یہ کہتے ہیں کہ آزادی کے نعرے لگیں گے، تو دیش دروہ کا مقدمہ درج ہوگا۔ میں یہ کہنا چاہتا ہوں کہ میں یہاں بھی آزادی کا نعرہ لگانا چاہتا ہوں۔ آزادی چاہئیے، بھوک سے آزادی چاہئیے، بے روزگاری سے آزادی چاہئیے، سرکار کی دمن کاری نیتیوں سے آزادی چاہئیے۔ جناب، کوئی پرمانینٹ نہیں ہوتا ہے۔ آج جو صاحب مسند ہیں وہ کل نہیں ہوں گے، چوکیدار ہیں ذاتی مکان تھوڑے ہی ہے۔ ایسا نہیں ہے کہ آپ پرمانینٹ آئے ہیں۔ آپ کو تو آپ کی بھی تاریخ معلوم نہیں ہے۔ یہ اپنے نیتاوُں کی بھی تاریخ نہیں جانتے ہیں۔ ابھی پچھلے دنوں یہ چرچا ہو رہی تھی کہ (مداخلت)۔۔ جناب، میں بس دو منٹ میں اپنی بات ختم کروں گا۔ آج پورے ملک میں جتنی بھی تحریک چل رہی ہیں، وہاں پر ایک کرانتِکاری نظم پڑھی جاتی ہے۔ وہ نظم جس شاعر نے لکھی تھی، مرحوم اٹل بہاری باجپئی جی ان کے بہت بڑے فین تھے۔ وہ فیض احمد فیض کے فین تھے۔ ہم دیکھیں گے لاظم ہے کہ ہم بھی دیکھیں گے وہ دن کہ جس کا وعدہ ہے جو لوحِ ازل میں لکھا ہے جب ظلم و ستم کے کوہ گراں روئی کی طرح اُڑ جائیں گے ہم محکوموں کے پاوُں تلے جب دھرتی دھڑ۔دھڑ دھڑکےگی اور اہلِ حکم کے سر اوپر جب بجلی کڑ۔کڑ کڑکے گی یہ وہ فیض احمد فیض کی نظم ہے، جب محترم اٹل بہاری باجپئی جی پہلی بار وزیرِ خارجہ بن کر پاکستان گئے تھے، تب وہ پروٹوکول توڑ کر فیض احمد فیض سے مل کر آئے تھے۔ وہی ان کے وزیرِ اعلیٰ، ان کے نیتا کہتے ہیں کہ اگر یہ نظم پڑھو گے تو آپ کے اوپر دیش دروہ کو مقدمہ درج ہو جائے گا۔ محترم چیرمین صاحب، میں اپنی بات کو ختم کر رہا ہوں۔ کرناٹک کے اندر جس طریقے سے ایک ناٹک منچ پر چوتھی کلاس کے بچوں کو بُلا کر رات بھر تھانے میں بیٹھایا گیا، ان بچوں کی ماووُں کو ، ان بچوں کی ٹیچر کو، تھانے میں بلایا گیا۔ وہ صرف ایک ناٹک پلے کر رہے تھےان کے اوپر راشٹر دروہ کو مقدمہ لگا کر جیل بھیجنے کا کام کرناٹک کی سرکار نے کیا ہے (مداخلت)۔ یہ ایسا ملک ہم نہیں چاہتے ہیں۔ (مداخلت)۔۔ میں انہیں الفاظ کے ساتھ اپنی بات ختم کرتا ہوں کہ این۔پی۔آر۔ کے ساتھ، اسہیوگ آندولن جاری رہے گا۔۔۔ (مداخلت) ہم نہ سی۔اے۔اے۔ مانیں گے، نہ این۔پی۔آر۔ مانیں گے۔ (مداخلت)۔ شکریہ۔۔۔ (ختم شد) HON. CHAIRPERSON: Since the time allocated for discussion is more or less over, the hon. Speaker has directed all the Members to conclude within five minutes.
… (व्यवधान)
श्री सुरेश सी. अंगड़ी (बेलगाम): सर, कर्नाटक के उस मदरसे में एंटी नैशनल टीचिंग करते थे । इसलिए उसके ऊपर कार्रवाई की गई है । देशद्रोह का केस लगाया गया है । मासूम बच्चे हमेशा सच बोलते हैं । …(व्यवधान)ये गलत बोल रहे हैं । …(व्यवधान)ये … * बोल रहे हैं । …(व्यवधान) यह … * बोलना बंद करें । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: If there is anything objectionable, we will delete it from the records.
Shri K. Navaskani.
*SHRI K. NAVASKANI (RAMANATHAPURAM): Hon. Chairman Sir, Vanakkam. I thank you for allowing me to speak on the Motion of Thanks to the Hon. President’s Address. Hon. President’s Address is completely contradictory to the real situation prevailing in the country. India is slowly losing its identity as the largest democracy in the comity of nations with secular and diverse credentials. This Government has affected the peaceful atmosphere that prevailed in the country by passing the Citizenship Amendment Act on the basis of religion during the last Session of Parliament. This is for the first time that India’s image has been shattered after passage of a Bill providing Citizenship rights on the basis of religion. The Citizenship Amendment Law, and the human rights violations of the Indian Government in Kashmir have been discussed critically in the European Parliament. This is a shameful incident to the Indian community affecting the image of India. After coming to power for the second time, this Government has taken steps to hide its failures, particularly on the economic front. We have unemployment problem in a larger scale. The small and medium level traders have been affected. Besides there is economic slowdown in the field of small, micro and medium enterprises. At a time when small and middle level traders who have not recovered from the impact of demonetisation and GST related issues, this Government, hiding its failures, have been legislating several laws against the minorities of our country. By legislating several laws like the Citizenship Amendment Law, National Register of Citizens, Law to ban Triple Talaq, Abrogation of special status accorded to Jammu and Kashmir, etc., this Government is waging a war against the minorities of this country. All the sections of the society are agitating against the Government for withdrawing the Citizenship Amendment Law, the National Register of Citizens and the National Population Register. Not only Muslims are opposing this Law. Those who have strong belief in the democratic credentials of our country are all agitating against the Government insisting to withdraw Citizenship Amendment Act. Muslims love the country so much.
In order to protect the democracy, sovereignty, secularism and diversity of our country, Muslims are ready to sacrifice anything. Muslims who love this country very much are even ready to sacrifice their lives. Muslims are now at the receiving end who contributed much to the freedom struggle of our country by giving monetary support and sacrificing a lot beyond their capacities in terms of their number and percentage. Those who are in the present Government who did nothing to the freedom struggle are given an opportunity to rule this country. That is why they are snatching away the rights particularly the citizenship rights of Muslims. The Citizenship Amendment Act should be withdrawn keeping in view the larger perspective. The Government has announced that the National Register of Citizens will not implemented immediately. But I say that the NRC should never be implemented. National Population Register should have the old procedures to be followed and not any new procedure. Besides additional information will not be sought. The Union Government has the responsibility of withdrawing the Citizenship Amendment Act and ensuring peace in the country. The Government is trying to control the protestors who agitate in peaceful means by engaging in police firing against them. It is not known that what is taking place in Kashmir. Not only common people, public representatives, MPs, opposition leaders etc. are unable to visit the territory. The public representatives and political leaders have been arrested in the Union Territory and their condition seems to be pathetic and untraceable. There is complete dictatorship in that territory. I therefore urge upon the Union Government to withdraw the Citizenship Amendment Act, NPR and NRC so as to restore peace in the country. Thank you.
SHRI M. SELVARAJ (NAGAPATTINAM): Mr. Chairman, Sir, thank you for giving me this opportunity to participate in the discussion on the Motion of Thanks to the President’s Address.
The hon. President in his speech has highlighted the aspirations and dreams of our great leaders of India and wished that we, the people of India together will make their dreams a reality. However, in real sense India is still far behind to fulfil their dreams.
Hon. President, in his Address, has praised this Government for enacting several important legislation. However, many political parties and public in many States are still agitating and protesting against these laws and have not accepted these laws. Laws are enacted basically for the betterment of people of India and if there is a huge apprehension and agitation among the people of various States against these legislation, and if they think that the Government goes against the principles of secularist and democracy, then the Government should come forward to consider their demands.
Hon. President has stated that this Government mantra of Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas is working with full commitment and sincerity. However, I personally found that many of the poor households are not getting free LPG cylinders regularly.
After the abrogation of articles 370 and 35 (A) of the Constitution, hon. President during his Address has stated that this has paved the way for equitable development of Jammu and Kashmir and Ladakh. But in reality, the whereabouts of even the political leaders of Jammu and Kashmir is not clearly known. What is the impact? The Government did a mistake in abrogating article 370 in Jammu and Kashmir.
It was stated in his Address that over 1,700 colonies of Delhi have been regularised by the Union Government. But in reality, it seems to have happened only on paper and so far no real commitment of regularisation has happened from the Government of NCR. Sir, the Government clarified that the procedures have existed for people from all faiths of the world to obtain Indian citizenship. However, CAA reflects just the opposite. Not only the minority Muslim but also all the people of the society and students are agitating and protesting against the CAA in various parts of the country. So, I urge that the Government should withdraw the CAA and NRC.
Sir, the Government has stated that it would transfer Rs.12,000 crore to six crore farmers under the Pradhan Mantri Krishi Samman Nidhi Yojana on 02.01.2020. But, actually, no clear beneficiary data is available.
Sir, Hon. President has highlighted that Government has appointed about 7,000 teachers in Kendriya Vidyalaya but has not mentioned how much SC/ST teachers among them have been appointed.
It was stated in his speech that women are being provided credit at low interest rates for Self-Help Groups. But, in reality, genuine Self-Help Groups’ loan requests are denied due to discrimination of religion and caste and, thus, equal opportunities are not being provided.
Sir, this Government has stated that under Mudra Scheme, more than 5.54 lakh entrepreneurs have availed loans. But in my constituency, I have seen that without collateral security, Mudra loans are not being provided by the banks to the entrepreneurs.
This Government talks about increase in seat for MBBS. But the students of poor family are losing the opportunity for NEET examination.
Sir, the Government has stated that it is working to provide relief to farmers from natural calamities under the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana. The private insurance companies are reluctant to release the claims of farmers which leads to hardships to genuine farmers. Thank you.
डॉ. राजदीप राय (सिल्चर): महोदय,आपने मुझेबोलने का अवसरदिया, इसकेलिए आपका धन्यवाद ।
राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणपर राष्ट्रपतिजी को धन्यवाददेते हुए मैंसंसद में कुछबातें रखना चाहताहूँ । पहली बातयह है कि सिटिजनशिपअमेंडमेंट बिलको लेकर दोमहीने से देशमें घमासान मचाहुआ है । मैंउस प्रदेश सेआता हूँ जहाँसिटिजनशिप अमेंडमेंटबिल का सबसेबड़ा असर हुआ है । I am probably one of the direct beneficiaries of Citizenship Amendment Act.
महोदय,जब हमारा देशस्वाधीन हुआथा, जब 15अगस्त, 1947 को देश में,सेन्ट्रल हॉलमें स्वाधीनतादिवस का जश्नमनाया जा रहाथा, तब महात्मागांधी जी यहाँपर नहीं थे,दिल्ली मेंनहीं थे । वे यहाँसे करीब तीनहजार किलोमीटरदूर नोआखालीमें थे । वेवहाँ पर किसकारण गए थे,कारण उनकोदिल से पताथा कि देश काजो पार्टिशनहुआ है, वहआम आदमी लोगोंने नहीं माँगा था । जो हमारेजैसे लोग हैं,जिन्होंनेदेश की स्वाधीनताके लिए आन्दोलनकिया था, हम लोगों नेउसे नहीं माँगाथा, लेकिनउसे हमारे ऊपरथोपा गया था । जिसके कारणइन लोगों केऊपर अन्याय हुआथा, ऐसा बोलकरमहात्मा गांधीजी वहाँ परगए थे । वहाँनोआखाली मेंराइट हो रहाथा,पूरे देशमें कत्लेआमहो रहा था, पंजाबको डिवाइड कियागया, बंगालको डिवाइड कियागया । वहाँ परसूरमा वैली है, सूरमावैली की एकनदी बंग्लादेशमें चली गई, बराकवैली इंडियामें आ गई । महात्माजी को पता थाऔर उन्होंनेबाद में बोलाभी था कि अगरकोई किसी भीसमय वहाँ सेहमारे देश मेंआना चाहता हैफॉर ए कम्फर्टेबललिविंग, हम लोगइनको स्वाधीनताभी देंगे औरबाद में नागरिकताभी देंगे । उन्होंनेकोई कट ऑफ डेटनहीं बोला था । नेहरू जी नेभी इसी लाइनपर बात की थी, सरदारजी ने भी कीथी, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीने भी की थी, सुचेताकृपलानी ने भीकी थी । यह पार्लियामेंटमें,यहाँ पर, इस सदनमें बात हुईथी । बाद मेंगुलजारी लालनंदा से लेकरलाल बहादुर शास्त्रीजी की भी इसीमुद्दे पर, इसी लाइनपर बात हुईथी । डॉ. मनमोहनसिंह,जो बाद मेंभारत के प्रधानमंत्री बने, वर्ष2003 मेंऐज राज्य सभाअपोजिशन लीडरउन्होंने भीयही बात बोलीथी ।
महोदय, मैं आपकाध्यान आकर्षितकरना चाहता हूँकि कुछ लोगोंने बोला हैकि यह सेक्युलरबिल नहीं है । मैं सेक्युलरिज्मकी बात पर दोलाइन बोलना चाहताहूँ । यह बिलसेक्युलर किसकारण से नहींहै? वर्ष 2003-04 में, जब अटल जी सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)एक्ट लाए थे,जिसमें पाकिस्तान से आने वाले सिर्फ सिख और हिन्दुओं के लिए भारतवर्ष में आईन बना था,उस सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)एक्ट को, जब वर्ष 2004 में मनमोहन जी प्रधान मंत्री बने, उन्होंने वर्ष 2005 में उसे एक साल के लिए एक्सटेंशन दिया था । वर्ष 2006 में उसे दो सालों के लिए एक्सटेंशन दिया था । The Citizenship (Amendment) Act, 2004 was meant only for Hindus and Sikhs.
17.56 hrs (Hon. Speaker in the Chair) मेरा ऑपोजीशन वालों से प्रश्न यह है कि क्या तब इसमें कम्युनल एंगल नहीं था, जब उसमें ‘सिर्फ हिन्दू और सिख’ लिखा हुआ था? अभी का जो सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)एक्ट है, वह हमारे सेक्युलर फैब्रिक को दर्शाता है । अगर हम कम्युनल होते तो सिर्फ हिन्दुओं के लिए आईन बनता । लेकिन,अभी इसमें हमने क्या-क्या इन्क्लूड किया, किसे-किसे इन्क्लूड किया? हिन्दुओं के सिवाय उसमें हमने सिख, ईसाई,बौद्ध, जैन,पारसी, इन सभी को किया । हमने जिसे इन्क्लूड नहीं किया, अगर उसके कारण देश में इतना बवाल मच रहा है तो इन्हें यह बोलना जरूरी है कि equality can be only for equals, and equality cannot be for unequals. पाकिस्तान और बांग्लादेश में जो मेजॉरिटी है, जो इस्लाम धर्म मानने वाले हैं, उनके और बाकी लोगों के बीच में कोई equality नहीं है । हमने नेहरू-लियाक़त एक्ट का भरपूर पालन किया है,जिसके कारण हमारे देश में डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम,डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद और डॉ.मनमोहन सिंह जैसे लोग हमारे देश के सबसे बड़े पद पर बैठ चुके हैं, लेकिन आप एक निदर्शन दीजिए, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश में वहां के माइनॉरिटी का कोई व्यक्ति उस देश का राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री या आर्मी का अफसर बना हो? आप एक ऐसा निदर्शन दिखा दीजिए । हमारा देश सेक्युलर है । इन 70 सालों से हम जो कर रहे हैं, उसे देश के लोग सपोर्ट कर रहे हैं, जिसके कारण आज आप पीछे जाकर बैठे हैं । 55 सालों तक आपने राज किया,विशेष कर एक परिवार का कम से कम 38 सालों तक राज था ।
महोदय, मेरे दोस्त गौरव गोगोई जी यहां बैठे हुए हैं । उनके पिताजी तीन टर्म्स के लिए मुख्य मंत्री रहे हैं । पिछले तीस सालों में करीब बीस सालों तक काँग्रेस के हाथ में राज था ।
भाइयो और बहनो… माननीय अध्यक्ष: ‘भाइयों और बहनों’नहीं, ‘माननीय सदस्यगण’ कहिए ।
डॉ. राजदीप राय: माननीय अध्यक्ष जी, हिन्दी में कभी-कभी गलती हो जाती है । माफ कर दीजिएगा ।
काँग्रेस के लोगों ने असम में रिजॉल्यूशन लिया है । मैं डॉक्टर हूं, मैं काँग्रेस की बीमारी को अच्छी तरह से जानता हूं । Congress suffers from selective amnesia. इन्हें जब पता होता है कि यह हमारे फेवर में है, तब इन्हें याद आता है । जब इन्हें लगता है कि ये इनके फेवर में नहीं है, तब ये लोग भूल जाते हैं । सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)बिल के लिए ये लोग बापू जी को भूल गए, नेहरू जी को भूल गए, सरदार पटेल को भूल गए । इनके अपने नेता तरुण गोगोई जी ने वर्ष 2011 में क्या कहा था, उसे भी ये भूल गए । आज ये कुछ राज्यों में पिछले दरवाजे से पावर में आने की कोशिश कर रहे हैं । तरुण गोगोई जी ने कुछ दिनों पहले यह बोला है कि जरूरत पड़ने पर हम नई पार्टी बनाएंगे । हमने कहा कि ठीक है कि आप नई पार्टी बनाएंगे । अभी आप असम में थर्ड पोजीशन में हैं तो कुछ दिनों बाद आप फिफ्थ पोजीशन पर चले जाएंगे,चिंता करने की जरूरत नहीं है । आज के दिन असम के लोगों ने सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)एक्ट का बहुत बड़े तरीके से स्वागत किया है । पहले,लोगों को समझाने में, हमारे ऑपोजीशन के कुछ दोस्त थे, इन्होंने … *बोला और ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे ।’ जो मन में आया, वह इन्होंने किया और देश की कानून-व्यवस्था को लोग बिगाड़ने लगे, तोड़-फोड़ करने लगे और जब हम, लोगों के तोड़-फोड़ करने पर कार्रवाई करने लगे, तब सब आंदोलन ठंडा पड़ गया और आज के दिन में नॉर्थ-ईस्ट में शांति का वातावरण है ।
आज वहां ब्रू की समस्याओं का समाधान हो रहा है, बोडो की समस्या का समाधान हो रहा है । नागा लोग टॉक्स पर आए हुए हैं और उल्फा का जो सुपर है,वह भी विदेश में बैठा हुआ है और विदेश में बैठे हुए हर रोज पत्रिकाओं में स्टेटमेंट देते रहते हैं । आने वाले दिनों में भारतवर्ष की जो सरकार है,नॉर्थ-ईस्ट के लिए जो परमानेंट सॉल्यूशन है,उसे वह करने का काम करेगी ।
मोदी जी ने जो ‘एक्ट ईस्ट’पॉलिसी की है,उसमें हम आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में गुवाहाटी से पूरे एशियाई देशों तक जाने का रास्ता खुल जाएगा । इसमें सिर्फ रोडवेज ही नहीं खुलेगा,बल्कि रेलवे भी खुलेगा और हम गुवाहाटी से आगे दूसरे एशियाई देश जा सकेंगे ।
महोदय, माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव के ऊपर मैं एक बात और बोलकर अपनी बात खत्म करना चाहता हूं । हालांकि मैं एक डॉक्टर हूं,आज देश में स्वास्थ्य व्यवस्था किस कगार पर आकर खड़ी है,उसके बारे में मुझे बोलना चाहिए । सिटीजेनशिप (अमेंडमेंट)एक्ट के लिए ये लोग कुछ-कुछ असेम्बलियों में डिसीजन ले लेते हैं ।
18.00 hrs यह स्टेट का सब्जेक्ट नहीं है । It is not even a subject in the Concurrent List. You do not have the power to discuss the issue of citizenship. जब यह सिटीजनशिप कंस्टि्चूअन्ट असेम्बली में डिस्कस हुआ था तो डॉ. अंबेडकर ने बोला था कि यह ऐड हाक सिस्टम है । जब कभी भी हम सिटीजनशिप के बारे में बात करेंगे, it will be empowered. The decision can only be taken in Parliament. अभी आयुष्मान भारत की बात हो रही है । यह एक युगांतकारी सिद्धांत है,जिसका निर्णय मोदी जी ने लिया है । इससे 10 करोड़ फैमिली के 50 करोड़ लोगों के ऊपर असर पड़ेगा । इसके माध्यम से लोगों को चिकित्सा व्यवस्था के लिए पांच लाख रुपये मिलेंगे ।
महोदय, मैं थोड़ा और समय लूंगा । आज के दिन कुछ स्टेट्स ऐसे हैं,जैसे वैस्ट बंगाल,केरल, दिल्ली,तेलंगाना है । आप लोग आयुष्मान भारत को क्यों लागू नहीं कर रहे हैं? इसमें क्या खराबी है?यह गरीब लोगों के लिए हो रहा है । हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि 75 नए मेडिकल कॉलेज खुलने वाले हैं, 22 एम्स खुलने वाले हैं । इनके आधार पर करीब 16,000 एमबीबीएस सीट्स और 4,000 सुपर स्पेशलिस्ट की सीट्स आने वाले दिनों में बढ़ने वाली हैं ।
महोदय, मैं यह बोलना चाहता हूं कि आज के दिन हमारे देश में एक डॉक्टर के अगेन्स्ट 1655 पेशेन्ट्स हैं । हालांकि डब्ल्यू.एच.ओ. का रेकमेन्डेशन है कि एक डॉक्टर के अगेन्स्ट 1000 पेशेन्ट्स होने चाहिए । इसे फुलफिल करने के लिए हमारी देश की जो नीति है,अभी नया नेशनल मेडिकल काउंसिल कमीशन लागू हुआ है । हम आशा करते हैं कि It is a game changer. आज हमारे देश के डॉक्टर्स और पैरामेडिक्स यू.के., यू.एस. सहित हर जगह जाकर उनके देश के मेडिकल सिस्टम को बहुत बड़ा करते हैं । हम आशा करते हैं कि आज के दिन में हमारी सरकार राइट पाथ पर है । आने वाले दिन में हमारा देश पृथ्वी का सर्वश्रेष्ठ देश होने के कगार पर खड़ा हुआ है । आइए हम सभी मिलकर हाथ बँटाएं और अपने देश को आगे ले जाएं । इन्हीं बातों को कहते हुए मैं अपनी बात को विराम देता हूं । धन्यवाद माननीय अध्यक्ष: श्रीसुरेश नारायण धानोरकर जी के भाषण के लिए तीन मिनट तक सदन का समय आगे बढ़ाया जाता है ।
श्री बालूभाऊ उर्फ सुरेश नारायण धानोरकर (चन्द्रपुर):अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर लाए गए प्रस्ताव पर बोलने का मौका दिया, उसके लिए मैं धन्यवाद करता हूं ।
महोदय, मैंने पूरा अभिभाषण सुना और बाद में पढ़ा भी । मुझे ऐसा लगा कि कहीं गलती से प्रधान मंत्री मोदी जी का भाषण माननीय राष्ट्रपति जी को तो नहीं दे दिया गया । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और आने वाले वर्ष की योजनाओं का अनिवार्य रूप से उल्लेख होता है । अभिभाषण सरकार के एजेंडा और दिशा को व्यापक फ्रेमवर्क प्रदान करता है । यह सरकार की गलत नीतियों का प्रचार करना नहीं होता है, जैसा कि इस अभिभाषण में किया गया ।
महोदय, अभिभाषण में कई महत्वपूर्ण बातें जैसे महंगाई,आर्थिक मंदी,अर्थव्यवस्था,जीडीपी और रुपये के गिरने की समस्या,रोजगार सृजन,छात्रों पर हो रही हिंसा आदि के बारे में कुछ नहीं बोला गया । महोदय, ऐसी स्थिति में जब पूरा देश संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रहा है तो ऐसे हालात में अफसोस की बात है कि इस कानून को राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार ने अपनी उपलब्धि बताया । यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा करके सरकार ने राष्ट्रपति पद की गरिमा गिराई ।
महोदय, मुझे कुछ ज्यादा नहीं बोलना है, केवल दो-तीन बातों पर बोलना है । In the President’s Address, World Bank’s Ease of Doing Business ranking, the Resolving Insolvency rankings, Global Innovation rankings, the Logistics Performance Index, the World Economic Forum’s Travel and Tourism Competitiveness rankings have been referred to. But the Democracy Index, the Global Gender Index, the Environment Performance Index, the Press Freedom Index, the Global Hunger Index, the World Happiness Index, the Global Competitiveness Index, the Global Peace Index, the World Passport Index were not referred to. इन सभी में भारत की रैंकिंग गिर गई है । इसका जिक्र नहीं किया गया ।
अध्यक्ष महोदय,अभी मेरे पास एक मिनट का टाइम है । किसानों के बारे में बताया गया है कि पी.एम. किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 8 करोड़ एकाउंट्स में 43,000 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं । लेकिन एक आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार 75 प्रतिशत किसानों को पूरी तीन किस्तें नहीं मिली हैं और लाभार्थियों की संख्या घट रही है । कृषि मंत्रालय की ‘पी.एम.किसान’ वेबसाइट के अनुसार, योजना के तहत चिह्नित 8.80 करोड़ लाभार्थियों में से 8.35 करोड़ छोटे किसानों को पहली किस्त के रूप में दो-दो हजार रुपये की राशि दी गई, वहीं दूसरी किस्त में लाभार्थियों की संख्या घटकर 7.51 करोड़, तीसरी किस्त में 6.12 करोड़ और चौथी किस्त में (29 जनवरी तक) केवल 3.01 करोड़ रह गई है ।
महोदय, इसलिए मैं एक बार फिर कहूंगा कि इस बार राष्ट्रपति अभिभाषण में ऐसा कुछ नहीं है, जिसकी तारीफ की जाए । जय हिंद ।
माननीय अध्यक्ष : सभा की कार्यवाहीबुधवार, दिनांक 5 फरवरी, 2020 कोसुबह 11 बजेतक के लिए स्थगितकी जाती है ।
18.05 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, February 5, 2020/Magha,16, 1941 (Saka) * Not recorded.
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* ....* Hindi translation of this part of the speech originally delivered in Punjabi.
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* Not recorded.
* Not recorded.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech laid on the Table * English translation of the speech originally delivered in Tamil.
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* Not recorded.
* English translation of the speech originally delivered in Tamil.
* Not recorded.