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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Motion For The Consideration Of The Sixth Schedule To ... on 28 December, 2018

Sixteenth Loksabha pan> Title: Further discussion on the motion for the consideration of the Sixth Schedule to the Constituion (Amendment) Bill, 2015, moved by Shri Vincent H. Pala on the 5th August, 2016 (Bill Withdrawn).

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HOME AFFAIRS (SHRI KIREN RIJIJU): Thank you, Deputy Speaker, Sir. First of all, I would like to express my gratefulness to the hon. Member, and my friend, Shri Vincent Pala ji,  for introducing and moving this important Constitutional (Amendment) Bill. I also  thank all the hon. Members who had taken part in the  entire discussion.

16 26  hrs                      (Shri Kalraj Mishra in the Chair) सर, आप कुर्सी पर आ गए हैं, मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे संसदीय इतिहास में यह किसी बिल पर चलने वाली सबसे लंबी चर्चा है। एक तरह से रिकॉर्ड है कि सन् 2015 का संविधान संशोधन विधेयक, विन्सेंट पाला जी के बिल पर चर्चा चल रही है और आज इसका अंतिम जवाब देने का मौका मुझे मिला है। हमारे माननीय सदस्यों ने बहुत सारी बातें बताई हैं, क्योंकि इसमें इतने सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया है, मैं सबका नाम नहीं लेना चाहता हॅूं और सबका इश्यु भी इतने व्यापक रूप से हुआ है कि अगर मैं एक-एक बात का जवाब दूंगा तो बहस बहुत लंबी हो जाएगी और जवाब बहुत लंबा हो जाएगा। मैं 20-25 मिनट में समेट कर इसको खत्म करना चाहता हॅूं। सर, इसका जो मुख्य ऑब्जेक्टिव है, वह मैं फिर से सदन के सामने दोहराना चाहता हॅूं। ऑटोनॉमस काउंसिल्स देश में बनी हुई हैं और पूर्वोत्तर राज्यों में कुल मिला कर दस ऑटोनॉमस काउंसिल्स बनी हुई हैं। उसमें माननीय सदस्य का मानना है कि जो ऑटोनॉमस काउंसिल बनी हुई हैं, उनसे लोगों की आशाएं और आकाक्षाएं पूरी नहीं हो रही हैं, इसलिए और अधिकार मिलने चाहिए। यह माननीय सदस्य का कहना है। If I sum up the entire objective of the Constitutional (Amendment) Bill, I can categorise in three parts. One is the demand to increase the number of members in the District Council from 30 to 40 as originally envisaged in the Constitution of India. Second is to bring traditional occupation of tribals relating to mines and minerals under the legislative competence of  the District Council. Third is to protect the customary practices and interest of the tribals. These are the three broad demands made by the hon. Member.

          Now, let me first of all admit that merely creation of Autonomous Councils do not meet the entire aspiration of the people. सर, आपने तो देखा है, आप तो वरिष्ठ हैं, आपने पूर्वोत्तर में भी बहुत दौरे किए हैं। आपने देखा है कि वहां की जितनी भी ऑटोनॉमस काउंसिल्स हैं, वहां पर बहुत सारे इश्यूज़ होते हैं। उनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। हम लोग जब से सरकार में आए हैं, कोई हिसाब नहीं है, मैं खुद हर ऑटोनॉमस काउंसिल के डेलिगेशन से लगातार मिल रहा हॅूं और मैं आपके माध्यम से इस सदन को एक अच्छी खबर देना चाहता हॅूं ‍कि ऑटोनॉमस काउंसिल्स में जो भी कमियां हैं, उनको पूरा करने के लिए कैबिनेट नोट भी तैयार हो गया है और मैं इस सदन को आश्वासन देता हॅूं ‍कि जितनी जल्दी हो सके, ऑटोनॉमस काउंसिल्स का जो अमेंडमेंड प्रपोजल है, उसको ले कर हम सदन में आएंगे।

कुछ बातें हैं, मैं आपको अभी बताना चाहूँगा। इसमें सबसे पहले उन्होंने जो कहा है कि नम्बर्स बढ़ना चाहिए। ऑटोनॉमस काउंसिल में जो इलेक्टेड मैम्बर्स होते हैं, उस संख्या में इजाफा होना चाहिए। खासकर मेघालय और असम, इन दो राज्यों में इसकी डिमांड भी चल रही है। मैं बताना चाहूँगा कि मैं पूरे फिगर्स यहाँ सदन में नहीं बता सकता हूँ क्योंकि कैबिनेट नोट तैयार हो गया है, उसका अभी फाइनल डिसिजन नहीं हुआ है। जब तक कैबिनेट का फैसला नहीं होता है, तब तक मैं संख्या बता नहीं सकता हूँ, लेकिन मैं इतना बता सकता हूँ कि असम के अंदर दो ऑटोनॉमस काउंसिल है। एक है- कार्बी एंग्लोंग ऑटोनॉमस काउंसिल। दूसरा है- दीमा हसो ऑटोनॉमस टैरिटोरियल काउंसिल, इन दोनों का नम्बर इंक्रीज करने के लिए हमने एग्री किया है। इसको जल्दी से जल्दी हम फिर से पार्लियामेंट में लाएँगे।

दूसरा, मेघालय से हमारे सदस्य आते हैं। मेघालय में गारो हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल है, खासी हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल है, जैंतिया हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल है, तीनों के प्रस्ताव को हमने मंजूरी दी है और तीनों ऑटोनॉमस काउंसिल्स में भी मैम्बर्स को बढ़ा करके पार्लियामेंट में इसका कॉस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट बिल लेकर आने वाले हैं।

सर, दूसरा इम्पोर्टेंट बिल उन्होंने कहा है कि जो माइन्स एंड मिनरल्स है, उनका कहना है कि माइन्स एंड मिनरल्स की जो अरेंजमेंट अथॉरिटी है, वह ऑटोनॉमस बॉडी को देनी चाहिए। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि संविधान में स्टेट लिस्ट, सेंट्रल लिस्ट और कनकरंट लिस्ट बनी हुई हैं। माइन्स एंड मिनरल्स को अगर हम ऑटोनॉमस काउंसिल को दे देंगे तो यह संविधान का उल्लंघन हो जाएगा। संविधान का जो मुख्य ढांचा है, उससे हम छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं। आप सूची देखेंगे, जो छोटे-छोटे रिसोर्सेज हैं, फोरेस्ट प्रोड्यूसेज वगैरह उसकी अथॉरिटी आपके पास है, लेकिन जैसे कोयला हो गया, पेट्रोलियम प्रोडक्ट हो गया, ये बड़े-बड़े जो आइटम्स हैं, जिनको देश के बहुत बड़े रिसोर्सेज मानते हैं, वह संविधान के मुताबिक उनको ऑटोनॉमस काउंसिल को नहीं दिया जा सकता है। मैंने माननीय सदस्य से अलग से भी बात की है कि कुछ चीज़ है, हम नहीं मान सकते हैं क्योंकि हमको संवैधानिक प्रक्रिया को मानना पड़ेगा।

सर, तीसरा प्वाइंट जो उन्होंने कहा है कि Customary practices and interests of tribals. इसकी लगभग हमने मंजूरी दी हुई है कि जो कस्टमरी लॉस है, कस्टमरी प्रेक्टिसेस हैं, जो कई सालों से पूर्वोत्तर के लोगों का, आदिवासी लोगों का अपना जीने का तरीका है, उससे सरकार ज़्यादा छेड़छाड़ नहीं करती है। उसके लिए छूट दी हुई है और जैसे जीना चाहे अपने तरीके से वे जी सकते हैं। इससे सरकार कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है। जो मुख्य बिंदु है, कॉन्स्टीट्यूशन को अमेंडमेंट करने का हमारा प्रस्ताव है, मैं दो-तीन बातें आपको बताऊँगा। एक जितनी ऑटोनॉमस काउंसिल्स हैं, उसमें महिलाओं के प्रतिनिधि को सुरक्षित करने के लिए हमने कुछ प्रावधान रखने का निर्णय किया है। There are certain reservations. You will come to know about it. We are going to keep reservation for the women in nomination. जहाँ इलेक्शन होता है, उसमें कोई भी चुन कर आ सकते हैं, लेकिन जहाँ सरकार की ओर से नॉमिनेट करते हैं, उस नॉमिनेशन में there is provision for women’s reservation. We want that women should be properly represented in the Council. उसके बाद में जो विलेज काउंसिल का प्रोविजन होगा, म्यूनिसिपल काउंसिल का है, दोनों में रिजर्वेशन का प्रोविजन रखा गया है। जब हम इसको पारित करेंगे तो ऑटोनॉमस काउंसिल का जो चुनाव होगा, वह स्टेट इलेक्शन कमीशन के माध्यम से होगा। अभी तक जो हो रहे थे, डिप्टी कमिश्नर की देख-रेख में चलते थे। अब हम इसको प्रोपर संवैधानिक दर्जा देने जा रहे हैं। कुछ नाम चेंज का भी इश्यू है, वह आपको मैं बाद में बता दूँगा। अभी बताने की आवश्यकता नहीं है। स्टेबिलिटी को ठीक करने के लिए हमने डिसक्वालिफिकेशन के प्रोविजन को रखा है कि आज आपने ऑटोनॉमस काउंसिल का गठन किया, कल को आपने उसी को गिरा दिया। हॉर्स ट्रेडिंग वगैरह होती है, उसको रोकने के लिए हमने डिसक्वालिफिकेशन का प्रोविजन प्रपोज्ड कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट में रखा है।

अब मैं सबसे महत्वपूर्ण बात बताना चाहता हूँ और मैं मानता हूँ कि उससे माननीय सदस्यगण को संतुष्टि मिलेगी। वह महत्वपूर्ण बात स्पेशल फाइनेन्शियल प्रोविजन है। अभी तक ऐसा होता है कि अगर स्टेट गवर्नमेंट नहीं चाहती है तो वह आपका फंड रोक देती है। कोई-कोई ऑटोनोमस काउन्सिल पूरी मरी पड़ी है, उसके पास पैसा नहीं है। स्टेट गवर्नमेंट उसे टाइम से फंड रिलीज नहीं करती है। वे अपने स्टॉफ की सैलरी भी नहीं दे पाते हैं। उनके विकास के कई प्रोजेक्ट्स रूक जाते हैं। उसे ठीक करने के लिए अभी हम जो अमेंडमेंट ला रहे हैं, वह भारत के संविधान का आर्टिकल 280 है। There was a provision of special budgetary allocation for the Autonomous Council. The State Finance Commission will indicate how much money should be allocated to the District Autonomous Council. जैसे पंचायत को, म्युनिसिपल बॉडीज को फंड देते हैं, अब ऑटोनोमस काउन्सिल्स को भी फंड दिया जायेगा। यह उसमें मेंशन है।

माननीय सदस्यों ने काफी बातें उठायी थीं, मैं संक्षेप में उनका जवाब देना चाहता हूँ। आपने हमारी सरकार से बहुत सारी चीजों की डिमांड की है। आपने हमारी सरकार से कहा कि पूर्वोत्तर में बहुत सारी चीजें होनी चाहिए। अगर हम सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो मैं नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज़्म एरियाज को आज इंडिया के तीन बड़े चैलेंजिंग एरियाज मानता हूँ। ये तीन एरिया आज हमारे हिन्दुस्तान के लिए सबसे बड़े सिक्युरिटी चैलेंज हैं। हिन्दुस्तान की अखण्डता को बनाये रखने के लिए इन तीन चैलेंज को हमें सही तरह से हैंडिल करना होगा। आज हम नॉर्थ-ईस्ट की बात करते हैं, मुझे अच्छा लगा कि कम से कम हमारी इस 16वीं लोक सभा में बहुत से लोग नॉर्थ-ईस्ट की चर्चा कर रहे हैं।

          महोदय, आपको मालूम है कि एक समय ऐसा था, जब हम नये-नये चुनकर आये थे, यहाँ के बहुत सारे एमपीज को 8 नॉर्थ-ईस्ट स्टेट्स का नाम तक मालूम नहीं था। देश भर में, हिन्दुस्तान के अंदर कितने नॉर्थ-ईस्ट स्टेट्स हैं, कितने केन्द्र शासित प्रदेश हैं, बहुत से लोगों को इन राज्यों का नाम तक भी पता नहीं है। उस समय ऐसी नौबत थी। आज उत्तर प्रदेश का सांसद, दक्षिण भारत का सांसद भी यहाँ उठकर कह रहे हैं कि पूर्वोत्तर पर ध्यान देना चाहिए। यह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। देश में अगर मैं कश्मीर की बात करता हूँ, गोवा की बात करता हूँ तो केरल वाला एम.पी. भी असम की बात कर सकता है, क्योंकि हम एक देश के नागरिक हैं और इस देश की संसद में हम सब सदस्य हैं तो एक-दूसरे के प्रति जानकारी प्राप्त करना जरूरी है। जब नॉर्थ-ईस्ट के बारे में बात करते हैं तो मैं यह बताना चाहता हूँ कि पूर्वोत्तर के अंदर जितनी मिलिटेंट ऑर्गेनाइजेशंस हैं, दुनिया में इतनी मिलिटेंट ऑर्गेनाइजेशंस कहीं नहीं हैं। आज भी वहाँ लोग पीड़ित हैं। वहाँ सिक्युरिटी का बहुत बड़ा चैलेंज है। एक-एक राज्य में बहुत सारे मिलिटेंट ग्रुप ऑर्गनाइजेशंस हैं। 16-17 साल के बच्चे हथियार लेकर जंगल चले जाते हैं। उन्हें स्कूल, कॉलेज जाना चाहिए, लेकिन वे बन्दूक लेकर, बम लेकर, ए.के.47 लेकर जंगल में घूम रहे हैं। ऐसी नौबत क्यों आयी? जिस माननीय सदस्य ने इसे मूव किया है, वे कांग्रेस के सदस्य हैं। मैं बताना चाहता हूँ कि इसका इतिहास है। ऐसा नहीं है कि वर्ष 2014 से सारी समस्या खड़ी हो गई। नॉर्थ-ईस्ट में मैं खुद बहुत साल से राजनीति कर रहा हूँ। मैं आज भी ऐसी-ऐसी जगह जाता हूँ, जहाँ मुझे पता चलता है कि वहाँ से लोग अपनी बात कहने के लिए दिल्ली आते हैं। सरकार के दरवाजे उसके लिए खुले नहीं हैं।

महोदय, मैं पिछले 4.5 साल की बात आपको बताना चाहता हूँ। वहाँ ऐसे-ऐसे समुदाय हैं, जिनकी संख्या 10 हजार, 15 हजार, एक लाख या दो लाख होती है। वहाँ ऐसे हजारों समुदाय हैं। वे दिल्ली आकर भटकते रहते हैं। होम मिनिस्ट्री इतना बड़ा मंत्रालय है, हमारे यहाँ ज्वाइंट सेक्रेटरी से मिलने के लिए भी वे महीनों भटकते रहते हैं, लेकिन उन्हें अपाइंटमेंट नहीं मिलता है। वे वापस जाकर हथियार उठा लेते हैं। लोगों को इसे समझना चाहिए। समस्या की जड़ कहाँ है, समस्या क्यों पैदा होती है? हमारे यहाँ एक-एक समुदाय पूरा अंडरग्राउंड क्यों चले गये? इसका कारण है? क्या दिल्ली में उन लोगों के दर्द को सुनने के लिए किसी के पास समय है? इस हालत में देश चल रहा था। वर्ष 2014 में पहली बार जब हमारी सरकार बनी और प्रधान मंत्री जी ने मुझे गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री का दर्जा दिया, मैंने पहले दिन से ही यह सुनिश्चित किया कि पूर्वोत्तर का कोई एक भी आदमी हो या कोई संगठन हो, अगर वह दिल्ली आयेगा तो वह सरकार के प्रतिनिधि से बिना मिले वापस नहीं जाएगा। हमने यह निर्णय किया। हम ऐसा करके लोगों के दिलों को जोड़ते हैं। अब नॉर्थ-ईस्ट में अधिकारी लोग भी जाते हैं। प्रधान मंत्री जी से लेकर सारे सीनियर मिनिस्टर, जूनियर मिनिस्टर सभी लोग लगातार नॉर्थ-ईस्ट जा रहे हैं।

इससे एक ब्रिज बनता है, आपस में तालमेल बनता है। इसकी वजह से ही आज पूर्वोत्तर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रति विश्वास पैदा हुआ है। वह ऐसे नहीं हुआ है। यह कोई जादू की छड़ी नहीं है। इसके लिए हमने ठोस कदम उठाया है और वहां के लोगों का दिल जीता है। वहां जो विकास की धारा बह रही है, वह निरंतर आगे बहती रहेगी, ऐसा मैं मानता हूं।

          मैं मंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही पूर्वोत्तर में गया। पहली बार मैंने पूर्वोत्तर के लोगों से कहा कि आपने हथियार उठाया है, लेकिन किसी जमाने में उठाया है। पहले की केंद्र सरकार ने आपकी उपेक्षा की है, आपकी तरफ ध्यान नहीं दिया गया है। आपने हमारी गलती से हथियार नहीं उठाया, बल्कि किसी और सरकार की वजह से हथियार उठाया। हम आपसे बातचीत करने के लिए तैयार हैं। हमने बातचीत करने की प्रक्रिया के दायरे को और बढ़ाया है। हम सभी से बात कर रहे हैं, चाहे वह छोटा गुट हो या बड़ा गुट हो। हमने दोनों तरीके अपनाये हैं, पहला यह है कि हम सभी से बात करेंगे और खुले दिल से बात करेंगे। दूसरे, खुले दिल तथा सही तरीके से बात करने के बावजूद भी अगर कोई देश के खिलाफ काम करता है, तो हम ठोस कदम भी उठाएंगे।

          हम अंग्रेजी में कहते हैं कि ‘iron fist in a velvet glove.’ हम शॉफ्ट एप्रोच भी अपनाते हैं और हार्ड एप्रोच भी अपनाते हैं। जहां ऑपरेशन करना है, जहां इनोसेंट लोगों को मारा जाएगा, संवैधानिक पद पर बैठे हुए लोग अगर कार्रवाई नहीं करते हैं, हम इसकी निगरानी कर रहे हैं।…(व्यवधान) इसका नतीजा अभी मिल रहा है। श्री भर्तृहरि महताब जी ने जो कहा, वह सही है। हम लोग आपस में मिलते-जुलते रहते हैं। वह मेरी मन की बात को जानते हैं, इसलिए उन्होंने पहले ही कह दिया।

          हम लोग जोर से कदम उठाने की बात नहीं कहते हैं। हम पहले मौका देते हैं, इसके बावजूद भी यदि कोई बाहरी ताकतें हैं, जो देश के खिलाफ काम करती हैं और उनके साथ जो मिले-जुले लोग हैं, हम उनको नहीं छोड़ेंगे। इसीलिए हमने सही तरीके से काम करना शुरू किया।

          महोदय, मैं आपको एक और बात बताना चाहता हूं, नॉर्थ-ईस्ट के अंदर इतनी डायवर्सिटी है, यहां बहुत लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। हमारे गृह मंत्रालय में जो नॉर्थ-ईस्ट डिवीजन है, वहां हमारे जो भी अधिकारी है, हम सभी सेंसिटाइज़ किए हुए लोग हैं। पूरे नॉर्थ-ईस्ट के बारे में सब को मालूम है कि क्या करना चाहिए और वहां के लोग क्या चाहते हैं। जिनके पास ज्ञान है, वही अधिकारी हमारे यहां काम कर रहे हैं।

          महोदय, मैं आपको यह भी बताना चाहता हूं कि पहले की सरकार ने अपनी पॉलिसी में कुछ गलतियां की हैं, मैं ऐसा मानता हूं। हमारी ड्यूटी है कि जो गलतियां पहले हुई है, उनको कैसे सुधारा जाए? यह हमारा दायित्व है। वहां क्या नई चीज जुड़ सकती है, उसे भी हम कर सकते हैं।

          जैसे कि अभी नॉर्थ-ईस्ट में आठ राज्य हैं। देश में हमारी जो मेन लेन है, उसके साथ दो परसेंट लोग जुड़े हुए हैं और 98 परसेंट पड़ोसी देशों से जुड़े हुए हैं। हमारे पूर्वोत्तर के लोगों को अच्छा काम मिले, उनको अच्छी तरह से मदद मिले, उनके विकास के लिए सही कदम उठाना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री जी ने ‘Look East Policy’ को बदल कर ‘Act East Policy’ बनायी है।  ‘Act East Policy’ बनाने के बाद जो कार्य शुरू किया गया है, अभी प्रधानमंत्री जी लगातार नॉर्थ-ईस्ट जा रहे हैं। हमारे जितने भी मंत्रीगण हैं, वे लगातार वहां जा रहे हैं। अभी वहां सभी कोनों से लोगों को जोड़ने का काम शुरू हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में पिछले साढ़े चार सालों में जो काम हुआ है, अगर वह 70 या 80 के दशक में हो जाता, तो वहां जो भी उग्रवादी घटनाएं तथा गड़बड़ी हो रही हैं, वे बंद हो जाती। अब जाकर यह धीरे-धीरे कम हुआ है।

          महोदय, आपको मालूम है और जब आप पिछले साल की रिपोर्ट देखेंगे, हमने पार्लियामेंट के सामने रिपोर्ट रखी है। वहां जितनी भी घटनाएं हुईं हैं, जिनमें सिक्योरिटी फोर्सेस तथा सिविलियन का मारा जाना भी शामिल है। इनकी संख्या में लगभग 75 परसेंट की कमी आई है। यह कोई मामूली बात नहीं है।

          हमारे आर्मी चीफ जनरल (सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह बैठे हैं। जब वह थल सेना अध्यक्ष थे, उनको सारी चीजें पता है। आप उनसे पूछिए। नॉर्थ-ईस्ट में आर्मी तथा सिक्योरिटी फोर्सेस के सिर्फ ऑपरेशन होते रहते थे। वहां विकास की तो कोई बात ही नहीं करता था। अब हमने अपने सिक्योरिटी फोर्सेस से कहा है, होम मिनिस्ट्री की जो पैरा मिलिट्री फोर्सेस होती हैं, वहां इंडियन आर्मी के भी लोग हैं। अब वे बैरक में हैं और देश को डिफेंड करने के लिए बैठे हुए हैं। हम लोग विकास को प्राथमिकता से आगे रखकर चल रहे हैं।

एक समय नार्थ-ईस्ट जाने के लिए लोग हमसे पूछते थे कि मैं नार्थ-ईस्ट जा रहा हूं, वहां सेफ है क्या, वहां जाने पर कोई मारेंगे नहीं, पीटेंगे नहीं, कोई बम नहीं फटेगा, कोई गोली नहीं चलेगी, जाना सही है क्या? लोग ऐसे डरते थे। आज टूरिज्म के सैक्टर में लोग भर-भर कर जा रहे हैं, कितना इजाफा हुआ है। पूरे माहौल में परिवर्तन हुआ है।

कांग्रेस के दोस्तों को मैं कहना चाहता हूं कि हम राजनीत‍ि की दृष्टि से ये सब चीजें नहीं देखते हैं। आपने जितनी बातें कहीं, मैं आपको सिर्फ उनका जवाब दे रहा हूं। हमारे काफी मेंबर्स ने, बीजेपी के भी काफी मेंबर्स ने इस चर्चा में भाग लिया, कम्युनिस्ट के सदस्यों ने, कांग्रेस के सदस्यों ने, सब ने इसमें अच्‍छे-अच्छे सुझाव दिए हैं। इन सुझावों को हम गवर्नमेंट की पॉलिसी में इंक्ल्यूड करेंगे। मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि हमारी सरकार ने जो किया है, पुरानी कांग्रेस सरकार के जमाने में जो गलतियां हुई हैं, उसमें सुधार करते हुए हम आगे चल रहे हैं।

          मैं ज्यादा समय नहीं लेते हुए विनसेंट एच. पाला जी से अनुरोध करता हूं कि आपने जो-जो डिमांड्स की हैं, लगभग हमने उनको एग्री किया है। हमारा कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट बिल तैयार है, कैबिनेट नोट बन चुका है, हम उसे लेकर यहां आने वाले हैं। आपके दिल में कोई संशय होने या आपको चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि आपका जो प्राइवेट मेंबर बिल है, कांस्टीट्यूशनल अमेंडममेंट बिल है, आप उसको वापस ले लीजिए। हम सब मिलकर नार्थ-ईस्ट को हिंदुस्तान की मुख्यधारा में जोड़ें और आप भी इसमें हमारा साथ दीजिए। हो सके तो आप कांग्रेस छोड़ दीजिए, हमारे साथ आइए। यही हमारा फ्यूचर है।

     

SHRI VINCENT H. PALA (SHILLONG): Thank you, Sir.

          Thank you, hon. Minister, for giving such an excellent reply. I express my gratefulness to all the Members who have participated. I am proud to say on behalf of my people that this is the longest ever discussion on a Private Member’s Bill. I have collected nine CDs showing who have supported and who have opposed the Bill.

HON. CHAIRPERSON : You have made history! SHRI VINCENT H. PALA : Thank you for helping me make history!           I am grateful to the Minister. He has said that the Cabinet Note has been prepared and most of the proposals which we have given – not only by me but by many other Members who have spoken including Shri Bhartruhari Mahtab who has spoken a lot – will be incorporated. I do not know when the Bill would be brought but the people of Meghalaya expect the Bill to be brought in this Session. The election for the Council has been announced and will be conducted in February. If we pass the Bill in this Session, the election can be fought on the basis of the new law in which so many things will be incorporated.

          First of all, I want to stress that in the Sixth Schedule, on the issue of mines, there is a bit of a clash because of the land tenure system. The land belongs to the tribal people. It cannot be purchased or auctioned by the Government. This being the case, when you bring the Bill for amendment, that has to be taken care. Under the present land tenure system, all the major minerals, coal, limestone, and uranium have to be auctioned by the Government. The land belongs to the tribal people as per the latest Supreme Court ruling and so the mines also belong to the tribal people. Therefore, the law has to be made in such a way that there is no clash. This has to be examined properly.

          Secondly, the hon. Minister has spoken about the customary laws. For example, most of the tribal people from Khasi and Jaintia communities are good at handicrafts and efficient in the textile industry. I would suggest that the Government should set up an autonomous research centre here instead of setting up such centres in Kolkata or Mumbai where people from the North-East would go and work. If they set up a textile industry research centre in the North-East, the people there could be employed. If this is also included in the new law, either in the Bill or in the rules, the people of the North-East will be greatly benefited.

          Sir, as 90 per cent of the Northeast is surrounded by the international border, Land Custom Stations along the border can be worked out.  All the Land Custom Stations which have already been under construction have been delayed because of different reasons.  For example, we had laid the foundation stone for Dawki Land Custom Station but the work on it is very slow.   I am told that the company has gone into bankruptcy.  I think the Home Ministry should review it and see if something could be done.  Special care has to be taken with regard to this so that not one or two stations are made functional but a way is made for many more to follow so that the tribal and the landlock areas can be developed.

          Our Constitution clearly says that Para 12 (a)(b) is just like a Constitution within the Constitution which empowers the Government to recommend to the President of India to give notification in favour of the District Council.   I think this Para 12 (a)(b) can be implemented for mines and other regulations also.

          I am happy with all the answers you have given.  Most of the Members who spoke, especially from BJP, have supported the Bill and have given some suggestions also.  As you have given an assurance that we are going to pass this Bill, I do not have any problem in withdrawing the Bill.

I beg to move for leave to withdraw the Bill further to amend the Sixth Schedule to the Constitution of India in its application to constitution of District Councils and powers of the District Councils and Regional Councils.

HON. CHAIRPERSON : The question is:

“That leave be granted to withdraw the Bill further to amend the Sixth Schedule to the Constitution of India in its application to constitution of District Councils and powers of the District Councils and Regional Councils.”   The motion was adopted.
SHRI VINCENT H. PALA : I withdraw the Bill.
   
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, President’s recommendation for consideration has not been received on Item Nos. 175 and 176.  So, the House will now take up Item No.177.