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State Consumer Disputes Redressal Commission

Somin Bajaj vs G B Singh on 4 January, 2018

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2012/1914  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. Somin Bajaj  a ...........Appellant(s)   Versus      1. G B Singh  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER    HON'BLE MRS. Smt Balkumari MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:    Dated : 04 Jan 2018    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(सुरक्षित)                                                                                   अपील संख्‍या:-1914/2012 (जिला उपभोक्‍ता फोरम, दितीय लखनऊ द्धारा परिवाद सं0-932/2010 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 18.7.2012 के विरूद्ध) Somin Bajaj, Managing Director, Bright 4 Wheel Sales Pvt. Ltd., 11/CP-6, Vikas Nagar, Ring Road, Lucknow.

                                                 ........... Appellant/ Opp. Party Versus     G.B. Singh, Advocate, S/o Late Sri B. Singh, R/o 3/36, Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow.

                       ............ Respondent/ Complainant       समक्ष :-

मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्‍य अपीलार्थी के अधिवक्‍ता    :    श्री संदीप कुमार प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता     :    श्री विशाल सिंह डंग दिनांक : 09-02-2018 मा0 श्री रामचरन चौधरी , पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित निर्णय    मौजूदा अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम, दितीय लखनऊ द्धारा परिवाद सं0-932/2010 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 18.7.2012 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया है:-
"परिवादी का परिवाद विपक्षी के विरूद्ध निर्णीत किया जाता है और आदेश दिया जाता है कि विपक्षी परिवादी को निर्णय से दो माह के भीतर 10,000.00 रू0 मानसिक कष्‍ट व 2,000.00 रू0 वाद व्‍यय के अदा करेंगे।"

संक्षेप में इस केस के तथ्‍य इस प्रकार है कि परिवादी ने Maruti Wagon R. CNG Model Wrccsi कार प्रतिवादी के यहॉ से 4,11,800.00 रू0 दिनांक 29.8.2010 को अदा करके खरीदी और -2- प्रतिवादी ने परिवादी की Maruti Esteem Car True Value 65,000.00 रू0 में ली और परिवादी को यह बताया गया था कि यह सीएनजी सर्टीफाइड कार है, प्रतिवादी ने गाडी का रजिस्‍ट्रेशन कराने के लिए भी पैसा लिया गया था, चूंकि प्रतिवादी के पास सीएनजी सर्टीफिकेट नहीं था, इसलिए उन्‍होंने एक सप्‍ताह तक गाड़ी का रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराया। सीएनजी सर्टीफिकेट न होने के कारण प्रारम्‍भ में वाहन का रजिस्‍ट्रेशन पेट्रोल गाडी के लिए हुआ और 10 सितम्‍बर, 2010 तक प्रतिवादी के पास कोई सीएनजी सर्टीफिकेट नहीं था। परिवादी ने प्रतिवादी को नोटिस भेजा और प्रतिवादी ने कोई विवरण 65,000.00 रू0 का नहीं दिया और उन्‍होंने केवल 55,000.00 रू0 दिये। परिवादी से पूछा गया कि उसे कोई बोनस मिला तो परिवादी ने बताया कि कोई एक्‍सेस बोनस नहीं मिला है। परिवादी कार से संतुष्‍ट नहीं है, अत: परिवादी ने प्रतिवादी से क्षतिपूर्ति का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्‍तुत किया है।

प्रतिवादी की ओर से जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत कर यह कथन किया गया है कि परिवादी ने मैसर्स मारूति सुजूकि इण्डिया लिमिटेड को पक्षकार नहीं बनाया है तथा सीएनजी मॉडल की Maruti Wagon R. कार वर्ष 2010 में लखनऊ में आई। परिवादी ने उक्‍त कार खरीदने के लिए प्रतिवादी से सम्‍पर्क किया और पहली लाट में उसे सीएनजी मॉडल की Maruti Wagon R. कार दी गई। कुछ प्रक्रिया सम्‍बन्‍धी कमियों के कारण गाडी के विक्रेता के यहॉ प्राप्‍त होने  के समय सीएनजी सर्टीफिकेट प्राप्‍त नहीं हो पाया था और प्रतिवादी द्वारा परिवादी को यह बता दिया गया था कि सीएनजी सर्टीफिकेट शीघ्र ही उसे उपलब्‍ध करा दिया जायेगा। सीएनजी सर्टीफिकेट आते ही रोड टैक्‍स और पैसे प्रतिवादी ने आर0टी0ओ0 आफिस में जमा किया जहॉ से रजिस्‍ट्रेशन जारी हुआ, लेकिन आर0टी0ओ0 आफिस की गलती से सर्टीफिकेट में सीएनजी अंकित नहीं -3- था, जिसे सूचना मिलने पर सही कराया गया। परिवादी की नोटिस पर मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटा लिया गया था और परिवादी ने यह लिखकर दिया था कि एक दिन में रजिस्‍ट्रेशन मिल जाता है तो उन्‍हें कोई आपत्ति नहीं है और एक दिन बाद रजिस्‍ट्रेशन दिया गया और यह भी कहा गया कि बोनस प्राप्‍त करने का प्रमाणपत्र परिवादी ने प्रतिवादी को दिया है।परिवादी के नोटिस के जवाब में पुरानी गाड़ी के मूल्‍य की गणना का विवरण स्‍पष्‍ट रूप से अंकित किया गया है। गाड़ी में कोई कमी नहीं है। परिवादी को 15,000.00 रू0 बोनस दिया गया है। परिवादी का यह कथन गलत है कि उसके पुराने वाहन का मूल्‍य केवल 55,000.00 रू0 लगाया गया। परिवादी के परिवाद में कोई बल नहीं है, उसका यह भी कहना गलत है कि उसे पुरानी डैमो कार बेची गयी, बल्कि उसे पहली लाट में प्राप्‍त होने वाली सीएनजी कार दी गयी थी। परिवादी का परिवाद खारिज होने योग्‍य है।

इस सम्‍बन्‍ध में जिला उपभोक्‍ता फोरम के प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 18.7.2012 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री संदीप कुमार तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री विशाल सिंह उपस्थित आये। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण की बहस सुनी तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध अभिलेखों एवं लिखित बहस का भी अवलोकन किया गया है।

अपीलार्थी की ओर से कागज सं0-57 की ओर पीठ का ध्‍यान दिलाया गया है, जिसमें गाडी मालिक श्री जी0बी0 सिंह द्वारा कोई आपत्ति उन्‍हें इस बात की नहीं की गई है कि यदि रजिस्‍ट्रेशन नंबर दिनांक 09.9.2010 से एक दिन के अन्‍दर जारी कर दिया जाता है। यह कागज सं0-57 अपील के साथ संलग्‍नक-1 के रूप में दाखिल है। कागज सं0-60 M/s Bright 4 Wheel Pvt. की ओर से दाखिल है, जिसमें श्री विशाल सिंह अधिवक्‍ता को पत्र लिखा गया है और उसमें सारी स्थिति को स्‍पष्‍ट किया गया है और उसमें गाडी के रजिस्‍ट्रेशन के -4- बारे में उल्‍लेख किया गया है और यह भी उल्‍लेख किया गया है पुरानी गाडी के बारे में क्‍या-क्‍या तय हुआ था। कागज सं0-61 में भी पुरानी गाडी का कैसे समयोजन किया गया है, उसके बारे में उल्‍लेख किया गया है। कागज सं0-64 में उपभोक्‍ता की ओर से हस्‍ताक्षर करके दिया गया है और 15,000.00 रू0 उनको Exchange Transaction में समायोजित किया गया है और कागज सं0-58 आर0सी0 की प्रति दाखिल की गई है।

केस के तथ्‍यों व परिस्थितियों को देखते हुए हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा जो निर्णय/आदेश पारित किया गया है, वह सारे साक्ष्‍यों व अभिलेखों का विस्‍तृत वर्णत करते हुए पारित किया गया है, जो कि विधि सम्‍मत और तर्क पूर्ण है और उसमें किसी प्रकार के हस्‍तक्षेप की कोई गुनजाइश नहीं है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील खारिज किए जाने योग्‍य है।

आदेश अपीलार्थी की अपील खारिज की जाती है।

उभय पक्ष अपीलीय व्‍यय भार स्‍वयं वहन करेगें।

 
     (रामचरन चौधरी)                   (बाल कुमारी)

 

     पीठासीन सदस्‍य                       सदस्‍य

 

हरीश आशु.,

 

कोर्ट सं0-5             [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MRS. Smt Balkumari]  MEMBER