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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Statutory Resolution Regarding Disapproval Of Passing ... on 10 March, 2021

Seventeenth Loksabha an> Title: Combined discussion on Statutory Resolution regarding disapproval of passing of the National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second (Amendment) Ordinance, 2021 and National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second (Amendment) Bill, 2021 (as passed by Rajya Sabha) (Statutory Resolution not moved and bill passed).

 

माननीय सभापति : आइटम नंबर 15 और 16.

श्री अधीर रंजन चौधरी जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री मनीष तिवारी जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री विनायक भाउराव राऊत जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री जसबीर सिंह गिल जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री कोडिकुन्नील सुरेश जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : एडवोकेट डीन कुरियाकोस जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : डॉ. कलानिधि वीरास्वामी जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : डॉ. अमर सिंह जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : एडवोकेट ए. एम. आरिफ जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री बैन्नी बेहनन जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री टी. एन. प्रथापन जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री पी. आर. नटराजन जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : श्री एस. वेंकटेशन जी ।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : माननीय मंत्री जी ।

…( व्यवधान)

THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF HOUSING AND URBAN AFFAIRS, MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF CIVIL AVIATION AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF COMMERCE AND INDUSTRY (SHRI HARDEEP SINGH PURI): Sir, I beg to move:

“That the Bill further to amend the National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second Act, 2011, as passed by Rajya Sabha, be taken into consideration.” माननीय सभापति : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :
“कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र विधि (विशेष उपबंध) दूसरा अधिनियम, 2011 का और संशोधन करने वाले विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथा पारित, पर विचार किया जाए ।” …( व्यवधान)
माननीय सभापति : श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी ।
…( व्यवधान)
श्रीमती मीनाक्षी लेखी (नई दिल्ली) : सभापति महोदय जी, आपका धन्यवाद ।…(व्यवधान)
सभापति महोदय जी, जब मैं इस विषय के ऊपर रिसर्च कर रही थी, तो मैं वर्ष 2017 का अपना ही भाषण पढ़ रही थी और उसमें मैंने पाया कि वर्ष 2017 में जब इस मामले पर बहस हुई थी, तो इस प्रकार का जो माहौल है, वह संसद में पहले भी बनाकर रखा गया था ।…(व्यवधान) अब विपक्ष की हालत यह हो गई है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के रास्ते में जितने भी चुनाव हैं, उसमें लगातार भारतीय जनता पार्टी अच्छा काम कर रही है और ये लोग लगातार अपनी इन हरकतों की वजह से ही पिछड़ रहे हैं ।…(व्यवधान)
आज मैं जिस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रख रही हूं, उसके दो पक्ष हैं । पहला पक्ष तो यह है कि दिल्ली के मुख्य मंत्री जी ने अपने उप मुख्य मंत्री के द्वारा कल ही एक घोषणा की है कि वह दिल्ली को वर्ष 2047 से पहले सिंगापुर बनाना चाहते हैं ।…(व्यवधान) जब सिंगापुर बनाने की बात आई है, तो मैंने कहा कि ज़रा हिसाब-किताब देख लिया जाए, तो पता चला कि वर्ष 2011, 2017 और जब चुनाव की बारी आती है, तो वे इसी तरीके की बात कर रहे होते हैं ।…(व्यवधान) इसका कारण यही है कि जो इनके हिस्से का काम है, जिसमें सर्वे करना था, मुआयना करवाना था, इन्होंने वह आज तक किया नहीं है, जिसके चलते बार-बार इस कानून की नियमितता को हमें बढ़ाना पड़ रहा है । …(व्यवधान) वर्ष 2006 से पहले इसे दिल्ली लॉज़ के नाम से जाना जाता था । वर्ष 2006 के बाद वर्ष 2008, 2009 और 2011 में इसको एनसीटी ऑफ दिल्ली अमेंडमेंट लॉ के नाम से जाना जा रहा है । …(व्यवधान)
जब वर्ष 2014 में हमारी सरकार आई थी, तो उसमें अनियमितता को दूर करने के लिए वर्ष 2002 के बाद जो भी कंस्ट्रक्शंस हुए हैं, दिल्ली में जो कुछ बना है, उसको नियमित करने के लिए यह नियम लाया गया है ।…(व्यवधान) लेकिन जहां भी दिल्ली सरकार के काम की बात आती है, तो उन्होंने कोई काम नहीं किया है ।…(व्यवधान) जब यह मसला कोर्ट के अंदर पहुंचा, जब पूर्व की सरकार ने वर्ष 2008 में इस प्रॉब्लम को रेगुलराइज़ेशन करने की कोशिश की तो उसमें बेईमानी थी, उसमें घोटाले थे ।…(व्यवधान) उसी के चलते कॉमन कॉज़ ने यह पिटिशन कोर्ट में डाली और उसके बाद इस पर रोक लग गई ।…(व्यवधान) लेकिन रोक भी नहीं लगी, तब एक भूरेलाल कमेटी बना दी गई थी । वह भूरेलाल कमेटी तब से बनी हुई है और दिल्ली में कोई भी कंस्ट्रक्शन नहीं रुका है । …(व्यवधान) इसका कारण सिर्फ छोटा-सा है । अगर रोज़ी-रोटी की मज़बूरी नहीं होती, तो कौन गांव छोड़कर दिल्ली पहुंचता । असलियत में रोज़ी-रोटी की मज़बूरी रही और लोगों को गांव छोड़ने पर मज़बूर होकर दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में जाना पड़ा है ।…(व्यवधान)
      यहाँ की हालत यह थी कि शहर को आगे बढ़ाने के लिए सस्ती लेबर और तमाम तरह के लोगों की जरूरत थी, लेकिन जिस तरह से उनको सुविधाएं देने के लिए काम करना चाहिए था या प्लानिंग से शहरीकरण होना चाहिए था, उस तरह का काम पूर्व की सरकारों ने नहीं किया । मुझे इस बात की खुशी है कि हमारी सरकार ने, दिल्ली की चाहे कठपुतली कॉलोनी हो, चाहे आर.के.पुरम की कई झुग्गी बस्तियां हों या नई दिल्ली की अन्य झुग्गी बस्तियां हों, उनको हटाकर रिलोकेट करने का काम किया और नियमित करने का भी काम किया ।…(व्यवधान) अगर हम दिल्ली की समस्या की बात करें तो दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी, रेहड़ी-पटरी, गोदाम, रिलीजियस स्ट्रक्चर्स, कल्चरल सेक्टर्स, गांव की आबादी, लाल डोरा की आबादी जैसी समस्याएं और विविध प्रकार के नियम-कानून हैं । वर्ष 2008 में इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए कोर्ट ने फैसला किया कि आपको डेवलेपमेंटल एक्टिविटीज के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है, यानी जो बेसिक मानवीय अधिकार है, जिसमें पानी, सड़क, नाली, सीवरेज, टॉयलेट्स आदि आते हैं, उनके डेवलेपमेंट के लिए किसी की परमिशन की आवश्यकता नहीं है । यह दिल्ली सरकार प्रोवाइड कर सकती है ।…(व्यवधान)
       दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (डुसिब) नाम की एक संस्था बनाई गई, लेकिन हालत यह है कि उन्होंने आज तक कोई सही काम नहीं किया । अगर मैं आँकड़ा पढूं तो आप हैरान होंगे । कॉलोनीज की कुल संख्या 1700 से ऊपर हैं । लगभग 1800 के आस-पास हैं । उनकी अपनी साइट पर जो रिकॉर्ड्स हैं, उसमें उन्होंने कहा है कि हमने 893 कॉलोनीज में से 461 कॉलोनीज को सोशल एमेनिटीज प्रोवाइड कर दी हैं । 461 का मतलब 1800 में से 461, यानी कि 25 प्रतिशत भी नहीं है । 25 प्रतिशत से कम काम किया है ।…(व्यवधान) इसके अलावा कंप्लीटेड वर्क की डेफिनेशन क्या होती है? जो-जो काम पूरा किया, उसमें क्या आना चाहिए? उसमें सड़क आनी चाहिए, सीवरेज आना चाहिए? क्या-क्या काम किया, उसकी भी कहीं पर कोई डेफिनेशन उपलब्ध नहीं की गई है  …(व्यवधान) हमने जब गहराई से इसके बारे में पता करने का प्रयास किया तो पता चला कि 895 में से 65 यानी 7 प्रतिशत ऐसी कॉलोनीज़ हैं, ऐसी बस्तियां हैं, जहाँ पर कोई एग्जीक्यूटिंग एजेंसी ही नहीं है । कोई एजेंसी तो होगी, लेकिन एजेंसी नहीं है । 895 में से 172 के लिए वर्क इन प्रोग्रेस कहा गया है, यानी 19 प्रतिशत के लिए कहा गया है । इसके ऊपर 631 करोड़ रुपये खर्च होने थे, जिसमें से 542 करोड़ रुपये का हिसाब है, बाकी का कोई हिसाब नहीं है ।…(व्यवधान)
       सभापति महोदय, इन झुग्गियों में जो रहने वाले लोग हैं, उनकी बात की जाए तो उन्होंने बड़ी मेहनत की कमाई से इन इलाकों के पट्टों को लिया है । वे अनियमित हैं, लेकिन इनका जो पैसा खर्च हुआ है, वह इनका असली पैसा है ।…(व्यवधान) मैं बार-बार इस बारे में सोच रही थी । अभी कुछ दिन पहले मैं केरल के एक ट्राइबल क्षेत्र में थी, जहां पर लोग कह रहे थे कि हमें भी अगर ‘स्वामित्व स्कीम’ के तहत पट्टा मिल जाता तो हमारे जीवन में सुधार आ जाता । मैं माननीय प्रधान मंत्री जी की स्वामित्व की नीति के बारे में सोच रही थी । ठीक उसी प्रकार से दिल्ली के अन्दर भी जिसे अनऑथराइज्ड कॉलोनी कहा जाता है, वह भले ही अनऑथराइज्ड कॉलोनी है, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों का उसमें ऑथराइज्ड पैसा खर्च हुआ है । इतनी अधिक संख्या में इतने लंबे समय तक लोग इसमें बसे रहे और लगातार तकलीफ में रहे, यह किसी भी सरकार के लिए अशोभनीय है । जिस प्रकार से हमारी सरकार ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वामित्व के तहत पट्टा देने का काम किया, ठीक उसी प्रकार से दिल्ली में झुग्गियों में रहने वाले लोगों को भी अपनी जमीन पर मालिकाना अधिकार प्राप्त हो, उसके लिए यह नियम बनाया गया है ।…(व्यवधान) प्रॉपर्टी रिलेटेड प्रॉपर्टी राइट एक्ट को वर्ष 2019 में लाया गया । इसके तीन लाभ है । पहला यह है कि जो भी लोग इन क्षेत्रों में रहते हैं, उनको उस जमीन का अधिकार मिलेगा ।…(व्यवधान) दूसरा यह है कि प्रॉपर्टी उनके नाम पर होने की वजह से बैंक आदि के अंदर नियमानुसार उस पर लोन लेना या आधिकारिक रूप से उस पर काम करना मुनासिब होगा ।
13.00 hrs तीसरी चीज, जो सर्विसेज हैं, जैसे सड़क, बिजली, पानी, नालियां आदि सभी आने की वजह से उनकी ईज़ ऑफ लिविंग बेहतर होगी । यही कारण है कि हमारी सरकार लगातार इस पर काम करना चाह रही है । इस पर रजिस्ट्रेशन का काम भी शुरू हो चुका है और कई हजार लोगों को इसकी स्लिप भी मिल चुकी है । पहले की सरकारों ने वर्ष 2008 में… * देकर रजिस्ट्रेशन के सर्टिफिकेट्स बांटे थे । उन्होंने वह सरासर …* का काम किया था । लेकिन अब धोखे के काम से हटाकर, असलियत में लोगों को उनका अधिकार मिले, इसके लिए काम किया जा रहा है । इसके तहत, अगर रीलोकेशन पॉसिबल होगा, चाहे जो मार्केट एसोसिएशन्स हैं, जिनके पैसे कम करने का काम सरकार ने किया है । मैं सरकार और माननीय मंत्री जी की प्रशंसा करना चाहती हूं कि इतने लम्बे इतिहास को सुलझाकर, इन्होंने यह काम किया है । आगे भी ऐसे काम होते रहें और जो दो-चार कॉलोनीज बची हुई हैं, उन पर भी काम   हो ।

      सभापति जी, आपने मुझे इस बिल पर बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए आपको धन्यवाद  देती हूं ।

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): सभापति जी, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे ऐसे विषय पर बोलने का मौका दिया । आज शहरी विकास मंत्री श्री हरदीप पुरी जी जो बिल लेकर आए हैं, वह दिल्ली के लगभग 60 लाख लोगों के जीवन का सवाल है । जो लोग दिल्ली में रोजी-रोटी के लिए आए थे, उनके खून-पसीने की कमाई है, जहां 1951 से लेकर 2014 तक एक ही खानदान ने राज किया था, उन 60 लाख लोगों की चिन्ता नहीं की गई । आज भी अगर यहां यह बिल उनको मालिकाना हक देने के लिए पास किया जा रहा है, इनको …* आनी चाहिए कि यहां पर लोग शोर मचा रहे हैं । इनको दिल्ली के उन 60 लाख लोगों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए ।

       सर, 1977 में पहली बार 567 कॉलोनीज पास हुई थीं, तब जनता पार्टी का शासन था । 1973 से लेकर 1993 तक केवल 560 कॉलोनीज पास हुई थीं । मैं  इसके पीछे की भूमिका बता देना चाहता हूं । दिल्ली में लोग रोजी-रोटी के लिए आते थे, उनके पास रहने के लिए आवास नहीं थे । दिल्ली विकास प्राधिकरण नाम की एक संस्था बनाई गई । वह संस्था केवल …* के डी.एन.ए. के आधार पर केवल भ्रष्टाचार में डूबी रही । वह गरीब लोगों को मकान देने में सफल नहीं हो पाई । गांव के किसानों की जमीन कौड़ियों के दाम पर एक्वायर की जाती रही और डीडीए ने भी बिल्डर का काम शुरू कर दिया । अंत में, मजबूरी में आकर उन गरीब लोगों ने किसानों की खेती की जमीन में छोटे-छोटे प्लॉट लेकर रहना शुरू कर दिया । जो बहुत ही गरीब लोग थे, दिल्ली में खाली जमीनें पड़ी थी, वहां आशियाना बनाकर वे झुग्गी-झोपड़ी के रूप में रहने लगे । आज देश की आज़ादी के 75 साल होने जा रहे हैं और वे आज भी नारकीय जीवन जी रहे हैं । इसके पीछे बार-बार राजनीति होती रही, केवल प्रॉविजनल सर्टिफिकेट्स बांटे जाते रहे, उनको आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन इन कॉलोनियों को पास करने के लिए, उन लोगों की खून-पसीने की कमाई से बने घरों का मालिकाना हक देने की बात कभी नहीं सोची गई । लोग वोट बैंक की राजनीति करते रहे, जैसे …* वहां पर वोट बैंक के माध्यम से कर रही हैं ।

       सर, आज मंत्री जी जो बिल लेकर आए हैं – दिल्ली लॉज (स्पेशल प्रॉविजन्स) सेकण्ड (अमेंडमेंट) बिल, यह 60 लाख लोगों के भविष्य से जुड़ा हुआ है । …(व्यवधान) मुझे कृपया पांच मिनट समय और दे दीजिए । मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इसके बैकग्राउण्ड में जाकर, इन लोगों को तुरंत मालिकाना हक मिले । इसके लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने प्रयास किया था । मैं इसकी बैकग्राउण्ड में जाना चाहता हूं कि इन कॉलोनियों की बाउण्ड्री लाइन बन गई है । इन लोगों ने नक्शे 2011 में जमा करा दिए । अब अधिकारी लोग जिस तरह से काम करते हैं, एक सांसद को अधिकारियों के कारण आत्महत्या करनी पड़ गई, ये अधिकारी लोग दफ्तरों में बैठकर बाउण्ड्री लाइन निर्धारित करते हैं । कुछ लेफ्ट आउट पोर्शन्स, जो छूट गए हैं, उनकी भी रजिस्ट्री की जाए । मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उन लोगों की कॉलोनी में जाकर, उसका सर्वे करवाकर, उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाए और उनकी कॉलोनियों में कैम्प लगाकर उनको रजिस्ट्री दी जाए । ‘आपकी सरकार आपके द्वार’ – जैसे देश के प्रधानमंत्री जी ने लोगों को इस चीज से बाहर निकालकर आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ाने का प्रयास किया है । इसीलिए उन लोगों का जो जीवनयापन है, वे लोग आज भी त्रस्त हैं, आज वे लोग रजिस्ट्रेशन कराने को तैयार हैं, लेकिन कभी सर्वे के बहाने से, कभी उनके कागजों को ठीक न बताने के बहाने से इस काम में डिले की जा रही है ।

मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि जिन लोगों की जमीन एक्वायर हो गई, उनको ऑल्टरनेटिव प्लॉट दिए जाते थे । अब कुछ लोगों की जमीन एक्वायर हो गई, लेकिन उनको ऑल्टरनेटिव प्लॉट 40 किलोमीटर दूर दिए जा रहे हैं । वे लोग शहर में आकर, उसके आस-पास बसकर अपनी रोजी-रोटी प्राप्त कर रहे हैं, वहीं पर उनको ऑल्टरनेटिव दिए जाएं । इसके बारे में भी माननीय मंत्री जी चिन्ता करें ।

मैं एक लास्ट लाइन कहकर अपनी बात को समाप्त करूंगा । मैं इस बिल के माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि दिल्ली के अंदर जो दिल्ली लैण्ड रिफॉर्म्स एक्ट है, उसमें धारा 81 के अंदर जो किसान अपनी जमीन पर घर बना लेते हैं, परिवार बंट गए हैं, उनको ग्राम सभा में वैस्ट करके, वहां पर लूट-खसोट की जा रही है । …(व्यवधान) वहां गरीब लोगों को परेशान किया जा रहा   है । उन जमीनों को ग्राम सभा में वैस्ट किया जा रहा है । यह दिल्ली सरकार का इश्यू है । दिल्ली सरकार इसको भेजने वाली नहीं है । केन्द्र सरकार उन पर इस बात के लिए दबाव बनाए कि धारा 81, जो अंग्रेजों के जमाने की है, उसको अबोलिश किया जाए । …(व्यवधान)

       सर, इन कॉलोनियों से जुड़ा हुआ एक और पॉइंट है । इन कालोनियों में रहने वाले जो लोग थे, वर्ष 1996 के अंदर के रिज का प्रोविजन फॉरेस्ट एक्ट के अंदर लाया गया, लेकिन लोग 30 साल से बसे हुए हैं, 40 साल से बसे हुए हैं, उन अधिकारियों ने वहीं बैठकर बॉउण्ड्री कर दी । जो लोग 40 साल से बसे हुए हैं, मोदी साहब की सरकार ने वर्ष 2016 में एक प्रोविजन किया है । मोदी साहब की सरकार ने एक रिज मैनेजमेंट बोर्ड का हर राज्य को अधिकार दिया है ।…(व्यवधान) उस रिज मैनेजमेंट से उस जमीन को बाहर निकाला जाए और ग्राम सभा की जो जमीन है, उसको इसमें डिक्लेयर किया जाए । जो गरीब लोग 40 साल से बसे हैं, उन पर तलवार लटक रही है, उनको उससे छूट दी जाए, उनको रिज के नाम से उजाड़ा न जाए । …(व्यवधान)

माननीय सभापति: मेरा सभी से पुन: अनुरोध है कि कृपया अपनी सीट पर वापस जाएं । Please cooperate.

श्री रमेश बिधूड़ी  : मैं पुन: माननीय शहरी विकास मंत्री जी को धन्यवाद करता हूं  कि उन्होंने दिल्ली के 60 लाख लोगों की चिंता की है ।…(व्यवधान)

SHRIMATI CHINTA ANURADHA (AMALAPURAM): Mr. Chairman, Sir, thank you for allowing me to speak on the National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second (Amendment) Bill, 2021. The provisions of this Bill are significant for the protection of the housing rights of the people living in the Capital Territory which is the most important necessity, which is a basic human right, and an integral factor for the enjoyment of other economic, social, and cultural rights.

       On behalf of my Party, I support this Bill.

डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज) : सभापति महोदय, धन्यवाद । आपने मुझे The National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second (Amendment) Bill, 2020 पर अपनी बात रखने का मौका दिया । …(व्यवधान) यह अपील पिछले 30 दिसम्बर को लागू ऑर्डिनेंस, 2020 को रिप्लेस करने के साथ The National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Second Act, 2011 के प्रोविजन को तीन साल के लिए एक्सटेंशन, यानी 1 जनवरी, 2021 से 31 दिसम्बर, 2023 तक लागू रखने के लिए लाया जा रहा है । जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पिछले कई वर्षों से हर क्षेत्र में वृद्धि एवं विकास के कारण दिल्ली में इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिसोर्सेज के विकास के लिए काफी दबाव बढ़ा है । …(व्यवधान) डिमाण्ड फॉर हाउसिंग एवं कॉमर्शियल स्पेस के साथ-साथ सभी एमेनिटीज की भी जरूरत पड़ी है । पब्लिक लैण्ड्स का एन्क्रोचमेंट, स्लम्स अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शंस, रेजिडेंशियल एरियाज़ से कॉमर्शियल एरियाज़ की समस्याएं सामने आई हैं ।…(व्यवधान)

माननीय सभापति: अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए । 

डॉ. आलोक कुमार सुमन : सर, प्लीज दो मिनट का समय और दे दीजिए । इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली लॉ स्पेशल प्रोविजन एक्ट केवल एक साल के लिए लाया गया, फिर भी अनऑथराइज्ड कंसट्रक्शन बढ़ता रहा । …(व्यवधान)

SHRI HARDEEP SINGH PURI: Sir, I would like to start by thanking the hon. Members who have spoken. My two colleagues from the BJP, Shrimati Meenakshi Lekhi ji and Shri Ramesh Bidhuri ji, in particular, have made some valuable points.

       I would like to remind those of my colleagues in the House that there is a public perception that the issue of unauthorised colonies has been delayed by some political parties when they were in office. I can tell you that this is a problem that pre-dates the Modi Government coming into office in 2014. In fact, as long back as 1961, the problem of unauthorised colonies in Delhi was there and 103 colonies were regularised in 1962. The Government of India had also issued a Regularisation Notice Order on 16th February 1977 for 567 unauthorised colonies. These were regularised between 1979 and 1993. Then, again in 2001, a similar Order was issued. But the history of the problem of unauthorised colonies in the National Capital Territory of Delhi has been that prior to this no Government took this issue up with any degree of seriousness.

       Sir, the problems of Delhi are very well-known. Some of these problems are understood, but let me try and point out the demographics. …(Interruptions) In 1947,जब हम ने आजादी पाई, तो उस समय भारत की जनसंख्या के 17 प्रतिशत लोग शहरों में रहते थे । वर्ष 1947 में दिल्ली की आबादी आठ लाख थी, क्योंकि पाकिस्तान से शरणार्थी यहां आए थे ।…(व्यवधान) हमारा पहला सेनसस वर्ष 1951 का है, उसके अनुसार दिल्ली की आबादी 22 लाख हो गई ।…(व्यवधान) इस समय हमारे पास जो लेटेस्ट सेनसस है, that is 2011, उसके तहत दिल्ली की आबादी 1.6 करोड़ है ।

      सर, इस साल, वर्ष 2021 में एक और सेनसस होगा and I expect that the population of Delhi in the 2021 Census will be close to two crore, if not higher. …(Interruptions). I would like to point out to the hon. Members that all political parties, especially those who have delayed the process of regularization and especially those whose neglect of Delhi borders on the criminal should now be cooperating and helping the Government to take those measures necessary to bring relief to the citizens of Delhi.  …(Interruptions). When I used words like neglecting the problems of Delhi, let me also draw your attention with a sense of responsibility to what has been happening so far. …(Interruptions). I will start with an extraordinary Gazette Notification which was issued in 2008 and I draw your attention to paragraph 7.3 of this Gazette Notification. It says, the entire process of regularization is to be co-ordinated and supervised by the GNCTD, the Government of the National Capital Territory of Delhi which may give wide publicity to the revised guidelines of 2007 and the regulation. …(Interruptions).   It is a matter of public record and it is a matter of great shame that between 2006 when the process started and 2014, all the Governments which were in power in the city of Delhi did nothing. …(Interruptions).   It is a matter of great regret and I would say this borders on criminal neglect. What happened after 2014? I will read out a letter exchanged with the Government. …(Interruptions) This is a letter addressed by the Government of the National Capital Territory of Delhi to the Additional Secretary in the Delhi Division of the Ministry of Urban Development. …(Interruptions). It is a letter dated 18th August, 2017.  The operative part of this letter is, and this letter has already been placed on the record of this House, the Government of NCT of Delhi would require a time period of two years from 1st August 2017 to 31st July, 2019 to complete the survey of the unauthorized colonies. …(Interruptions).  The very people who today are becoming the champions of people living in unauthorized colonies asked for two years in 2017. …(Interruptions)

       Finally, I would like to quote a letter dated 29th January, 2019. This is a letter from the Department of Revenue of the Government of NCT, Delhi. This letter says that it is expected that the whole exercise will be undertaken and they wanted two years in 2019. …(Interruptions).  When it became obvious to me and to my Ministry that in 2019 they wanted another two years, it became clear that the criminal neglect between 2006 and 2014 was now being compounded, that was when we brought this law in 2017, and we would have completed the work of unauthorized colonies had it not been for the pandemic. …(Interruptions). I commend this Bill for adoption by this House, so that protection from sealing etc. will be available till 31st December, 2023. I commend the Bill for adoption. …(Interruptions)

माननीय सभापति: प्रश्न यह है :

“कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र विधि (विशेष उपबंध) दूसरा अधिनियम, 2011 का और संशोधन करने वाले विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथा पारित, पर विचार किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय सभापति: अब सभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।
खंड 2 माननीय सभापति: प्रश्न यह है :
“कि खंड 2 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड 2 विधेयक में जोड़ दिया गया ।
खंड 3 से 7 माननीय सभापति : श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन जी ।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन जी ने इस विधेयक पर कई संशोधनों की सूचना दी है । चूंकि वह अपने संशोधन प्रस्तुत करने के लिए सदन में उपस्थित नहीं हैं, इसलिए मैं संशोधन के सभी खंडों को एक साथ सभा के समक्ष निर्णय के लिए रखूंगा ।
…( व्यवधान)
 
माननीय सभापति: प्रश्न यह है :
“कि खंड 3 से 7 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड 3 से 7 विधेयक में जोड़ दिए गए ।
खंड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।
माननीय सभापति: माननीय मंत्री जी, अब आप प्रस्ताव करें कि विधेयक पारित किया जाए ।
…( व्यवधान)
SHRI HARDEEP SINGH PURI: I beg to move:
       “That the Bill be passed.” … (Interruptions)
माननीय सभापति: प्रश्न यह है:
“कि विधेयक पारित किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
________     माननीय सभापति: सभा की कार्यवाही 2 बजकर 30 मिनट तक के लिए स्थगित की जाती है ।
13.18 hrs The Lok Sabha then adjourned till Thirty Minutes past Fourteen of the Clock.

_______   14.33 hrs The Lok Sabha reassembled at Thirty Three Minutes past Fourteen of the Clock.

(Shrimati Meenakshi Lekhi in the Chair) …( व्यवधान)

14.33 ½ hrs At this stage, Shri Gurjeet Singh Aujla, Shri Ravneet Singh and some other Hon. Members came and stood on the floor near the Table.

______ …( व्यवधान)