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Lok Sabha Debates

Discussion On Points Arising Out Of The Answer Given By Minister Of Tourism On 25 ... on 23 March, 2011

> Title: Discussion on points arising out of the answer given by Minister of Tourism on 25 February, 2011 to Starred Question No. 61 regarding Tourism Policy.

श्री राजू शेट्टी (हातकंगले):सभापति महोदय, 25 फरवरी को जो मंत्री महोदय ने मौखिक उत्तर दिया था, उसी पर मैंने हाफ एन ऑवर डिस्कशन मांगा था। मैंने यह जो डिस्कशन मांगा है, यह इसलिए कि पर्यटन के बारे में उस दिन उतनी बहस नहीं हो सकी तो अध्यक्ष महोदया ने सुझाव दिया कि इसकी आप हाफ एन ऑवर में डिमांड करो।

          खास कर के मुझे पश्चिमी घाट के टूरिज्म पैकेज के बारे में कई मुद्दे यहां उपस्थित करने थे, इसलिए मैंने यहां यह डिस्कशन मांगा था। रत्नागिरि, रायगढ़, कोल्हापुर, सांगली और सतारा, ये वैस्टर्न घाट में 5-6 जिले आते हैं। यह इलाका छत्रपति शिवाजी महाराज की कर्मभूमि है। 16वीं और 17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज ने यहां कई पहाड़ी किले बनवाये, जो यहां के पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण है। विदेशी पर्यटक भी यहां बहुत सारे बाहर से आते हैं। यहां वैस्टर्न घाट की हरियाली है, यहां हिल स्टेशंस हैं, पहाड़ी हैं, गोवा यहां से बहुत ही नजदीक है, लेकिन पूरा पश्चिमी घाट हरा-भरा होने के बावजूद इस हरे पहलू के पीछे दुख-दर्द और गरीबी छिपी है। यहां रहने वाले आदिवासी, गरीब किसान, मजदूरी करने के लिए मुम्बई जाते हैं और उन्हें वहां होटल में वेटर का काम करना पड़ता है।

  18.37 hrs.                     (Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair)            पश्चिमी घाट में बहुत सारी वनौषधियां, वनस्पतियां हैं, इसलिए इस इलाके को सरकार ने ईको सेंसिटिव जोन बनाने का विचार किया है। अगर हमारे यहां ईको सेंसिटिव जोन डिक्लेयर होता है तो वहां जो किसान खेती करते हैं, उस खेती पर पाबन्दी लग सकती है, वहां जो फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री बढ़ रही है, उस पर भी पाबन्दी लग सकती है। यहां दो रिजर्व फोरैस्ट हैं और बहुत सारे हाथी और शेर जैसे वन्य जीव भी यहां पश्चिमी घाट में हैं, इसलिए खेती करना दिन-ब-दिन मुश्किल हो रहा है। यहां के आदिवासी, वन्य लोगों के लिए रोजगार निर्माण करने के लिए एक पैकेज इस पश्चिमी घाट के लोगों को देने की नितान्त आवश्यकता है, इसलिए मंत्री महोदय ने उस दिन आश्वासन दिया था। उस चर्चा के अनुरूप मैं पश्चिमी घाट के लिए एक टूरिज्म पैकेज की मांग करता हूं।

          जैव विविधता के कारण यहां ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। ईको टूरिज्म के बारे में महाराष्ट्र बहुत पिछड़ रहा है। ईको टूरिज्म के अलावा, दिल्ली के अतिरिक्त वैस्टर्न घाट मैडीकल टूरिज्म विकसित करने के लिए बहुत अच्छी जगह है, जहां का टैम्परेचर कभी 35 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा नहीं होता और 20 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे कभी नहीं जाता। यहां का पानी बहुत अच्छा है, इसलिए मेडीकल टूरिज्म, ऐतिहासिक पर्यटनस्थल विकसित करने के लिए, शिवाजी महाराज के किलों की मरम्मत के लिए पूंजी निवेश, वन्य पर्यटकों के लिए सड़क का निर्माण और टूरिज्म हट के निर्माण की आवश्यकता है। पश्चिमी घाट में रहने वाले मूल निवासी, जो आदिवासी किसान हैं, इनको प्रशिक्षित करने की नितान्त आवश्यकता है।

          हस्तकला प्रदर्शन और राष्ट्रीय बांबू मिशन के तहत रोजगार निर्माण करने की आवश्यकता है।  खासकर कोल्हापुर, जिसे दक्षिणकाशी कहा जाता है, यहां बहुत सारे पुराने जीर्ण-शीर्ण क्षेत्र हैं, उनका पुननिर्माण करने की आवश्यकता है।  वेस्टर्न-डेक्कन ओडिसी कोल्हापुर तक आती है।  घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु डेक्कन ओडिसी के किराये में कटौती करने की आवश्यकता है।  पश्चिम घाट में बाक्साइट की माइनिंग में खनन होता है।  वहां जो अवैध रूप में खनन होता है, उस पर रोक लगाने की आवश्यकता है, क्योंकि पर्यटन में वह बहुत बाधा डाल रहे हैं।  राष्ट्रीय बांबू मिशन के तहत रोजगार निर्माण करने की बहुत सारे अवसर यहां हो सकते हैं।  इसलिए एक पूरा पैकेज पश्चिम घाट के विकास के लिए देने की आवश्यकता है।  वन औषधि, वनस्पति के साथ-साथ मेडिकल-टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वन प्रांगण देखने के लिए आए हुए पर्यटकों के टूरिज्म को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। 

          महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से विनती करता हूं कि वह एक अध्यावत पैकेज पश्चिम घाट विकास के लिए दे दें, धन्यवाद।

 

श्री सतपाल महाराज (गढ़वाल):सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।  मैं उत्तराखंड से आता हूं।  प्रकृति की गोद में बसा उत्तराखंड, जहां एक तरफ बहुत ही पवित्र स्थल हरिद्वार और दूसरी तरफ हिमालय की गगनचुंबी चोटियां हैं।  बड़े विशाल आकार में फैला उत्तराखंड प्रकृति के सौंदर्य को अपने आप में संजोए हुए है। यह ऐसा स्थान है, जहां अनेक ऋषियों ने तपस्या की, अनेक मनीषियों ने चिंतन किया और धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं से उत्तराखंड भरा हुआ है।  आजकल लोग मात्र गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ यात्रा करते हैं।  अगर हम स्कन्द पुराण के केदार खंड का अवलोकन करें, तो वहां पंच प्रयागों को, पंच केदारों का और पंच बद्री का उल्लेख आता है।  जो प्रसिद्ध धाम हैं, उनके अलावा अगर हम और धामों को विकसित करें, उनके इतिहास को जनता को बतायें, तो उत्तराखंड के अंदर पर्यटन की संभावनायें और अधिक बढ़ जाएंगी।  

          देश में विशेषकर उत्तराखंड राज्य के विभिन्न जिलों में पर्यटन को और विशेषकर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चमोली जिले के देवाल में स्थित लाटू देवता, टिहरी जिले के देवप्रयाग के लोस्तूपट्टी में घंटाकरण देवता, मां चन्द्रबदनी, पौड़ी जिले में डांडा नागराजा और ज्वालपा, रूद्रप्रयाग जिले में कालीमठ और स्वामी कार्तिकेय आदि धामों को अगर हम धामों के रूप में विकसित करें, तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सभापति महोदय : कृपया आप प्रश्न पूछिए।

श्री सतपाल महाराज :मैं पूछना चाहता हूं कि मंत्री महोदय, धार्मिक पर्यटन के लिए और इन धामों को विकसित करने के लिए क्या उपाय करेंगे और क्या कार्यक्रम या योजना बनायेंगे?  मेरा यह मानना है कि सोच बदलो, सितारे बदल जाएंगे, नजर बदलो, नजारे बदल जाएंगे, किश्तियां बदलने से क्या होता है यारो, दिशा बदलो किनारे बदल जाएंगे।  अतः मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि धामों को विकसित करने की योजना के बारे में बतायें।

श्री जयंत चौधरी (मथुरा):सभापति महोदय, तारांकित प्रश्न से दिए गए जवाब से उत्पन्न कुछ सवाल हैं, जिन पर आज यह सदन अमल करेगा।  यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है।  किसी भी सरकारी नीति को आप देखते हैं, तो अलग-अलग मापदंड हो सकते हैं कि वह सफल नीति है या नहीं।  पर्यटन नीति को अगर हम देखें, मंत्री जी ने जवाब में जानकारी दी कि वर्ष 2002 से पर्यटन की एक नीति है, उन्होंने यह भी आंकड़े दिखाए कि पर्यटक विदेशी स्तर पर और हमारे देश के जो लोग पर्यटन पर निकल रहे हैं, उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।      

          यह अच्छे संकेत हैं, लेकिन सिर्फ यह मानक नहीं हो सकता है। पर्यटन की विचित्र स्थिति यह है कि जब आप आर्थिक निर्भर हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर की जो गतिविधियां हैं उन पर जब आर्थिक प्रगति होती है तो लोग पर्यटन पर निकलते हैं और हमारे देश में जब मंदी होती है जब दुख और संकट होता है तब लोग सोचते हैं चलो वैष्णो देवी चलो, चलो वृंदावन चलो, वहां हमें शांति मिलेगी। इसका कोई सीधा हिसाब नहीं है। इसे आर्थिक प्रगति का संकेत मत मानिए कि हमारे पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन आप मानक क्या मानेंगे? कैसे हम सोचें, विचार करें कि हमारी नीति कुशल नीति है या नहीं है? मैं अपनी ओर से सुझाव देना चाहता हूं।

सभापति महोदयः कृपा कर प्रश्न पूछिए।

श्री जयंत चौधरी :  सबसे पहले तो जो हमारी बुनियादी एवं आधारभूत सुविधाएं हैं, जो पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं वहां हमने क्या किया? आप किसी भी पर्यटन क्षेत्र में जा कर देखेंगे, वहां न सड़क है, न शौचालय है, न पीने के पानी की व्यवस्था, न विद्युत की व्यवस्था है, न वहां कोई प्रशिक्षित गाइड होते हैं जो उस क्षेत्र के इतिहास के जानकार हों ताकि जो पर्यटक वहां आएं उनको कुछ जानकारी दे सकें। एक तो बुनियादी स्थिति है। दूसरा बहुत बड़ा सवाल यह है कि हमारे देश में मानसिकता, जो हमारे देश के पर्यटक जाते हैं उनको तो हम पराया मानते हैं और जो विदेश से पर्यटक आते हैं उनको हम लूटना चाहते हैं। इस मानसिकता को परिवर्तित करने में क्या हमारी जो नीति है वह सफल हुई या नहीं हुई? सबसे बड़ा जो बुनियादी सवाल बनता है, वह सिर्फ संख्या मत देखिए, हर साल हजार पर्यटक बढ़ गए, आठ प्रतिशत की प्रगति दर है, तो अच्छा है। सर, वह मानक नहीं है। बुनियादी सवाल यह बनता है पर्यटन की दृष्टि से देखें कि संभावनाओं का सागर है। हमारे देश के किसी भी कोने में आप देख लिजिए, अभी हमारे उतराखण्ड के सम्मानीय सदस्य थे, वह बता रहे थे कि हर कोने में ऐसी आपको विशेषताएं मिल जाएंगी, ऐसा इतिहास मिल जाएगा। अगर हम पर्यटन स्थल की तरह विकसित करेंगे तो लोग आएंगे। हम संभावनाओं की सागर की ओर देख रहे हैं और गांव के तालाब को देखकर हमें संतोष नहीं करना चाहिए। बहुत बड़ी-बड़ी संभावनाएं हैं उन संभावनाओं का जिक्र जो मेरे कॉन्स्टिचूएन्सी में आती हैं, उनका जरूर वर्णन करना चाहूंगा। मैं बृज क्षेत्र से सांसद हूं। हमारे बृज को आप देखें, सिर्फ एक जिला में नहीं, तीन प्रदेशों का वह सम्मिलित क्षेत्र माना जाता है। दुनिया भर से पर्यटक उस क्षेत्र में आते हें। वहां एक सड़क है। होली के त्योहार को हम सभी मेम्बरों ने मनाया होगा, नंदगांव बरसाना में जो होली मनाई जाती है, वह प्रसिद्ध है। कोसी से नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन जो सड़क है, वह 48 किलोमीटर की सड़क है। मैंने  पिछले साल केन्द्रीय सड़क फंड से इसका प्रस्ताव रखा था लेकिन वह नहीं हो पाया। 48 किलोमीटर की पद यात्रा दो दिन में मैंने की। ताकि सरकार का ध्यान आकर्षित हो और प्रशासन के नजर में यह बात आए। मैं चाहता हूं कि मंत्री जी उसको टेक-अप करें क्योंकि आज वही लोग हाइवे से गुजरते हैं, बहुत टूटी सड़क है, अगर आप उसे पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से कुछ संरक्षण प्रदान करेंगे तो सड़क जल्दी बन जाएगी और यह पर्यटन स्थल है, बहुत महत्वपूर्ण स्थल है, इनको जोड़ने का काम यह सड़क करती है। हम अगर मथुरा जनपद की बात करें तो यहां यमुना नदी बहती है। यमुना नदी के तट पर जो घाट हैं उनमें जब प्रदेश सरकार में हमारी भागीदारी थी, हमने उनको बनवाया था, लेकिन आज भी उसमें बहुत कमियां हैं। उस तरफ भी आप ध्यान दें। रसखान जो हमारे देश में एक बेमिसाल धार्मिक सदभावना का प्रतीक है, जिन्होंने कृष्ण जी का वर्णण अपने कला के माध्यम से किया। आज उनके मजार के हालत को देखिए। उनके लिए हम विशेष महोत्सव कर सकते हैं। यमुना के ऊपर हम विशेष महोत्सवों का आयोजन कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण में सुझाव देना चाहूंगा कि हमारे देश में जो कुटीर उद्योग हैं, जो परंपरागत उद्योग हैं, मुरादाबाद में पीतल का काम होता है जो प्रसिद्ध है वहां हम क्यों नहीं पर्यटन की दृष्टि से उसको विकसित करें ताकि दुनियां के लोग आकर उसे देखें। जो लोग हाथ से काम करते हैं, आगरा में जो लेदर का काम होता है, मेरे यहां सराफा बाजार है, जो चांदी का काम करते हैं। वहां आप जा कर देखें।

सभापति महोदयः आप प्रश्न पूछिए।

 श्री जयंत चौधरी : टर्की की ब्लू पॉट्री प्रसिद्ध है इसलिए वहां पर टूरिज्म पर कोऑपरेटिव बनाए गए हैं। वहां के जो लोग हैं जो अपने हाथों की कलाओं से काम करते हैं।  उनको कोआपॅरेटिव में जोड़ा गया है। दुनिया से पर्यटक वहां जाते हैं, सिर्फ उस काम को देखने के लिए। हमारे यहां ऐसे कितने परंपरागत उद्योग हैं जिनको कोई पूछने वाला नहीं है, उनके लिए मार्केटिंग की भी सुविधा हो जाएगी। इसलिए हमारे जो ऐसे छोटे-छोटे परंपरागत उद्योग है उनके लिए भी आप विशेष ध्यान दीजिए। आखिरी सवाल मेरा यह है कि हमने राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के लिए एक नीति बनाई लेकिन क्या हमने कोई मैपिंग की है। मेरे बृज में ही ऐसे हजारों स्थान हैं जिनका अनोखा इतिहास है लेकिन कोई जानता नहीं है। कैसे हम उनको नीति में जोड़ पा रहे हैं? हमें माइक्रो प्लानिंग करने की आवश्यकता है। उस योजना को बनाने में हमारे जो सांसद है उनकी भूमिका होनी चाहिए, जो समाजिक संस्था है  उनकी भूमिका होनी चाहिए जो हमारे विभिन्न शास्त्र के विद्वान हैं, उनकी भूमिका होनी चाहिए, एनजीओज होने चाहिए, उद्योग के लोग होने चाहिए। सिर्फ अवसर न हों और आप ऐसी सलाहकार समितियों का गठन करेंगे तो मैं उनका स्वागत करता हूं।

          आप हजार नहीं, दो हजार नहीं, सिर्फ सौ स्थान चिन्हित कर लीजिए कि पूरे देश में सौ स्थान ऐसे हैं जो आज भी टूरिज़्म कलैंडर में नहीं हैं और हम उन्हें जोड़ना चाहते हैं। शुक्रताल, हस्तिनापुर, गढ़गंगा के मेले का आयोजन होता है, इतने लोग आते हैं कि गिने नहीं जाते। मेरे वृंदावन में अर्धकुंभ मेले में लाखों लोग थे। मैंने प्रदेश सरकार से मांग की थी, लेकिन कुछ सुविधा नहीं मिल पाई थी। ऐसे जो आयोजन होते हैं, आप कलैंडर बनाकर तथागत उनकी रैंकिंग करें और लोगों को बताएं कि हमारे देश में ऐसे-ऐसे स्थान हैं।

          आप एक ग्रामीण पर्यटन की योजना भी चला रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो जिले थे - रायबरेली और मेया, मथुरा में एक गांव है, जहां आपने ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत कार्य करवाया है।...( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपकी बात पूरी हो गई है। आपको सिर्फ प्रश्न पूछना है।

…( व्यवधान)

श्री जयंत चौधरी : सभापति महोदय, बहुत महत्वपूर्ण आखिरी बात है।...( व्यवधान) मेरी कौन्सटीटूंसी के गांव में काम हो रहा है। मैं बताना चाहता हूं कि काम अच्छा हुआ, अच्छी सड़कें बनीं। जो सामान्य लूट होती है, वह हुई है, लेकिन अच्छा काम हुआ है। आप गांव में जाकर समीक्षा कीजिए। गांव के लोगों को मालूम नहीं है कि उनके गांव में पर्यटन की योजना चल रही है। ग्रामीण पर्यटन की योजना के पीछे अच्छी सोच है। कुशल नीति बनाने के लिए मैं चाहता हूं कि मंत्री जी उसमें समीक्षा करें, दखल करें। धन्यवाद।

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे कुछ सवाल पूछने का अवसर दिया है।...( व्यवधान)

सभापति महोदय : नियम के मुताबिक एक ही सवाल पूछना है।

…( व्यवधान)

   

श्री जगदम्बिका पाल : आपकी बड़ी कृपा होगी। आपने जिस तरह जयंत जी को एक सवाल पूछने की अनुमति दी, उस हिसाब से मैं आधा सवाल ही पूछूंगा।...( व्यवधान)

          सभापति महोदय, आज बहुत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है क्योंकि जिस तरह अभी जयंत जी ने कहा कि नेशनल टूरिज़्म पॉलिसी पर एक राष्ट्रीय पर्यटन नीति वर्ष 2002 में बनी थी। माननीय मंत्री जी को यह नया विभाग मिला है। मैं चाहूंगा कि वर्ष 2002 में जो राष्ट्रीय पर्यटन नीति बनी थी, क्या आज के परिवेश में दुनिया के बदलते हुए टूरिज़्म मैप में उसे बदलने का कुछ प्रयास करेंगे या नई नीति संशोधित करने पर विचार करेंगे?

          अगर पर्यटन की दृष्टि से इस देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण कुछ है, मैं उस फिगर में नहीं जाना चाहता कि पिछले साल कितने टूरिस्ट्स आए। जीडीपी में क्या है? मैं मानता हूं कि बुद्धिस्ट सर्किट से ज्यादा महत्वपूर्ण कोई नहीं है। आज जापान, चीन, इंडोनेशिया, बैंकाक, श्रीलंका, मलेशिया, क्वालालामपुर तमाम साउथ ईस्ट एशिया इलाके के लोग गौतम बुद्ध को भगवान मानते हैं। आप भी गए होंगे। सबकी दुकानों और घरों में गौतम बुद्ध की मूर्ति होती है। उनके यहां देवी-देवता के नाम पर एक गौतम बुद्ध ही है। उनके लिए पवित्र स्थल है कि वे बोधगया की पत्ती लेकर जाते हैं। सिद्धार्थनगर में कपिलवस्तु की मिट्टी लेकर जाते हैं। दुनिया के तमाम बुद्धिस्ट्स, बुद्ध धर्म को मानने वाले लोग वहां आते हैं, जहां गौतम बुद्ध पैदा हुए। आज कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर, वाराणसी, सारनाथ या श्रावस्ती आदि उस बुद्धिस्ट सर्किट की सड़कों की क्या कंडीशन है? आज रेल की क्या कनैक्टिविटी है, एयर की क्या कनैक्टिविटी है? क्या माननीय मंत्री जी कोई इंटिग्रेटेड ऐफर्ट्स करने का प्रयास करेंगे? मंत्री जी, आज ऐसा नहीं है कि पर्यटन और डिपार्टमैंट ऑफ आर्कियोलॉजी की कोई साख हो, ज्वाइंट ऐफर्ट हो। मैं दो साल से प्रयास कर रहा हूं कि गौतम बुद्ध की पैदाइश पिपरहवा गांव में हुई। नेपाल क्लेम करता है कि वे लुम्बिनी में पैदा हुए। मैं जब हिस्टोरियन, डिपार्टमैंट के अधिकारी से बात करता हूं तो वे यह मानते हैं कि जब उनकी मां मायके से जा रही थी, तो  वे रास्ते में बैलगाड़ी में पैदा हुए। वह जगह पिपरहवा है। हम यह तय नहीं कर पा रहे हैं जबकि खुदाई में सिद्धार्थनगर के पिपरहवा में जो चीजें मिली हैं, वे कोलकाता के नेशनल म्युज़ियम में रखी हैं। मैं धन्यवाद दूंगा, उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल एक बिल्डिंग दी कि कम से कम एक नेशनल म्युज़ियम बनाया जाए, जो चीजें खुदाई में मिलीं, उसकी रैपलिका बनाई जाए। मैं लगातार प्रयास कर रहा हूं लेकिन इसके बावजूद अभी तक जो बिल्डिंग हैंडओवर हुई है, जब टूरिज़्म से बात करते हैं तो कहते हैं कि आर्कियोलॉजी में है, आर्कियोलॉजी से बात करते हैं तो कहते हैं टूरिज़्म में है। क्या पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डिपार्टमैंट ऑफ आर्कियोलॉजी या टूरिज़्म डिपार्टमैंट मिलकर इंटिग्रेटेड कोई ऐफर्ट करेंगे? मैं समझता हूं कि क्यों न एक आथॉरिटी बना दी जाए, क्योंकि कह देंगे कि स्टेट गवर्नमैंट ने प्रस्ताव नहीं भेजा। ये मेगा प्रोजैक्ट बनाते हैं। आज अगर ये 5 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजैक्ट स्वीकृत करते हैं, अभी तक पूरे देश में 38 मेगा प्रोजैक्ट हैं जिनमें से इन्होंने 28 स्वीकृत किए।

 बुद्धिस्ट सर्किट पर एक भी मेगा प्रौजेक्ट स्वीकृत नहीं हुआ। मैं मंत्री जी से केवल सवाल पूछना चाहता हूं कि अगर बुद्धिस्ट सर्किट की प्रॉयरिटी है, तो भारत के जो विभिन्न 28 मेगा प्रौजेक्ट स्वीकृत हुए हैं, उनका भी महत्व है, मैं उनकी इम्पोर्टेंस पर मैं कहीं असहमति नहीं व्यक्त कर रहा हूं। लेकिन  लोग इस बात पर भी इतफाक करेंगे कि बुद्धिस्ट सर्किट का  महत्व न केवल देश में, बल्कि दुनिया के अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर है, तो उस महत्व को देखते हुए आखिर उस मेगा प्रौजेक्ट के लिए आप क्या करेंगे? आज मीटरगेज से ब्रॉडगेज का कन्वर्जन हो रहा है, उस पर पिछले दस वर्षों से लगातार अभी तक कनेक्टिविटी नहीं हुई है। बोधगया में एक इंटरनैशनल एयरपोर्ट हो गया, तो वहां बैंकॉक से सप्ताह में दो बार फ्लाइट आती है। क्या गोरखपुर को इंटरनैशनल नहीं बना सकते, क्योंकि बुद्धिस्ट सर्किट का हब बन सकता है।  ...( व्यवधान)

सभापति महोदय :  जगदम्बिका पाल जी, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल :  सारनाथ, खुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती को इस तरह से अगर बनायें, तो शायद पूरी दुनिया के पर्यटकों को हम  आकर्षित कर सकते हैं। इस संबंध में मैं माननीय मंत्री जी के विचार जानना चाहूंगा कि क्या वे आगे आने वाले दिनों में बुद्धिस्ट सर्किट को प्रॉयरिटी देंगे? आप जैन धर्म, सूफी धर्म आदि सभी चीजों को करें, लेकिन मैं समझता हूं कि बुद्धिस्ट सर्किट के महत्व को रेखांकित करते हुए आज वे अपनी नीति को स्पष्ट करेंगे।

SHRI K. BAPIRAJU (NARSAPURAM): I will be very brief. No doubt, I follow the rules of the House.

          A very, very important tourism policy is going on in India. The hon. Speaker at the instance or at the request of the Members allowed this particular Half-an-Hour Discussion. It is a very useful one.

          What I would like to say is that it is the contribution of the great people of our country. Anciently, they have contributed to the tourism sector. We are unable to exploit what our ancestors have given to our nation. I am telling this House that we have a lake called Kolleru Lake in my constituency. It is 348 square miles water spread area. It is a natural lake. It is an international wetland. It is identified in the world map. But we could hardly do anything to it. I am just quoting, for instance, Jaipur. We call it ‘Pink City’. You know, Jai Singh had created this city.

          Just now the hon. Member was telling about Buddhism and Jainism. For instance, Bihar is such a place which we cannot miss it. Anybody who is born would like to visit Gaya, before he dies. गया जाने का मौका है।

          Sir, you have newly taken over the Ministry of Tourism. It is the greatest opportunity given by the hon. Prime Minister and Sonia Ji to you. You have to meet the other States. For instance, Andhra Pradesh has come to number one position today. Rajasthan is supposed to be number one but now it has gone to third or fourth place. Something is going wrong in the coordination between the Centre and the States. … (Interruptions)

          I say my ancestors are from Rajasthan. Hundred years back, our ancestors were from Rajasthan. Why are you coming in my way?

          What I am trying to tell the Minister is that the Government of India has to coordinate with the State Governments before they go in for the enactment of the new Act. Please coordinate with all the States. Have a number of meetings before you are going to finally pass the Bill tomorrow.

          Sir, you have been very kind to me.

 

I want to tell the hon. Minister that our nation is attracted for tourism, not from now, but since thousands of years.  So, we have to only exploit it. We have small drains going to the sea, for instance, Bay of Bengal. For instance, in America, they make a tourism centre at every place where the drain joins the sea. They run boats and have bungalows over there. We are having so many places unidentified. So, I would request the hon. Minister to tour a lot. Before you do something, you tour the entire nation. You see the seas, go to different countries and form a good beautiful tourism policy. Moreover, we have our culture. To develop the mutual culture of the different countries in the entire world, you take this as an advantage for tourism. Thank you very much.

19.00 hrs. सभापति महोदय : नियमानुसार केवल चार माननीय सदस्य प्रश्न पूछ सकते हैं। पहले ही चार माननीय सदस्य इस पर प्रश्न पूछ चुके हैं।

पर्यटन मंत्री (श्री सुबोध कांत सहाय):  सभापति महोदय, माननीय सदस्य श्री राजू शेट्टी जी ने पिछली बार भी सवाल पूछा था और उनका जो मेन कंसर्न है कि पूरा कोंकण इलाका, कोल्हापुर से लेकर आगे तक, पर्यटन की दृष्टिकोण से ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का माना जाता है, उसे कैसे हम इंटीग्रेटेड वे में डेवलप करें। मैं आपको विश्वास दिला सकता हूं कि यह पूरा रीजन, जिसे हम वेस्टर्न सर्किट कह रहे हैं, हमारे लिए प्राथमिकता का विषय बना हुआ है। हमने वहां पर कुछ काम शुरू भी किए हैं, जैसे कोल्हापुर में पन्हाला फोर्ट के लिए हमने अलग से व्यवस्था की है। इंटीग्रेटेड कोल्हापुर सर्किट के लिए हमने अलग से पैसा दिया है और एक बड़े प्रोजेक्ट के रूप में यह काम किया जा रहा है, जिसे कोंकण रिवर सर्किट के नाम से वर्ष 2004 से ही हम लोगों ने शुरू किया है। फिर वही सवाल उठता है, मैं कहना नहीं चाहता हूं क्योंकि सरकारें सब जगह अपनी भी हैं, दूसरी भी हैं, लेकिन राज्य सरकारों के लिए दुर्भाग्य से यह बहुत प्राथमिकता नहीं बन पाई है। हमारी बहुत योजनाएं वर्ष 2004, 2005, 2006, 2007, 2008, 2009 से पड़ी हुई हैं और पूरी नहीं हुई हैं। इसलिए माननीय सदस्यों को उसकी झलक देखने को नहीं मिल पा रही है कि यह काम हुआ या नहीं। मैंने अपने मंत्रालय के लोगों को कहा है, जैसे माननीय सदस्य राजू शेट्टी जी ने राज्य सरकार के साथ कोआर्डिनेशन हो, उनके द्वारा प्रोजेक्ट का जो प्रायरटाइजेशन किया जाता है, उसी प्राथमिकता पर हम लेते हैं। उसके बाद भी अगर काम आगे नहीं बढ़ रहा है, तो हर राज्य में हमारे पदाधिकारी जाएंगे, रीजनल कांफ्रेंस करेंगे, मैं खुद जाऊंगा। माननीय सदस्य ने सलाह दी है कि मैं पूरे देश का भ्रमण करूं। मैं 30-35 साल से घूम ही रहा हूं, लेकिन आपकी सलाह अच्छी है। इससे एक मंत्री को चीजों को समझने में मदद मिलेगी।

श्री जय प्रकाश अग्रवाल (उत्तर पूर्व दिल्ली):इसमें माननीय सदस्यों को भी साथ ले जाएं।

श्री सुबोध कांत सहाय: कुछ किया जाएगा, जिससे माननीय सदस्यों को भी ले जाएं। माननीय सदस्यों को ले जाना इसलिए भी जरूरी है कि जब तक यह पोलिटिकल एजेंडा नहीं, क्योंकि सैर-सपाटे का एजेंडा नहीं है, यह पूरे देश के परिवेश में हैं। आज दुनिया के बहुत से देश टूरिज्म की बदौलत ही जाने जाते हैं। बिहार, जहां से मैं आता हूं, जिसके लिए बुद्धिष्ट सर्किट की बात कही जा रही है, पूरा इलाका तीन-चार धर्मों का उत्पत्ति स्थल है, इसलिए दुनिया के सामने इसको लाना जरूरी है। इसलिए माननीय सदस्यों को साथ लेकर चले बिना यह काम अधूरा रहेगा। आपके जाने से राज्य सरकार भी साथ चलेगी। यह बात मैं मानता हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपने जो उस पूरे इलाके के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट की बात कही है, उसके लिए बहुत से प्रोजेक्ट्स हमने इंडीविजुअली लिए हैं, इंटीग्रेटेड एप्रोच के साथ हमारे लोग वर्ष 2011-12 का प्रोजेक्ट जब राज्य सरकार के साथ तय करेंगे, तो मुझे लगता है कि हम इस विजन को पूरी तरह से उसमें शामिल करने का प्रयास करेंगे।

          माननीय सदस्य जयंत चौधरी जी से मैं कहना चाहता हूं कि पहले से ही हमने बृज के इलाके, मथुरा, वृन्दावन के इलाके के लिए काफी पैसे दिए हैं। वर्ष 2011-12 में भी इसे लेने जा रहे हैं और हम इसका भी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट करने जा रहे हैं।   रहा सवाल रोड का, तो हम लास्ट माइल बनाने का फैसला करते हैं, अगर डैस्टीनेशन से लास्ट माइल का रोड खराब है तो टय़ूरिज्म डिपार्टमेंट उसके लिए अलग से पैसा देता है। लेकिन अगर पूरे इलाके की बात हो, तो मैं समझता हूं कि वह हमारी परिधि के बाहर है। उसे राज्य सरकार या नेशनल हाईवे देखते हैं। अगर कोई लास्ट माइल में पर्यटन स्थल की रोड है, कोई स्टेट आगे नहीं आती है, तो आप हमें दीजिए, हम उसे बनाने की कोशिश करेंगे।

श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): जयंत चौधरी जी ने जो बात कही है गाइड इंस्टीटय़ूट की तो वह काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई पर्यटक स्थलों पर गाइड्स की कमी है।

श्री सुबोध कांत सहाय: जब यहां पर कॉमन वैल्थ गेम्स हुए थे, तो बड़े पैमाने पर गाइड्स को, टैक्सी ड्राइवर्स आदि को पूरा ओरिएंटेशन कोर्स कराया गया था। मैं मानता हूं कि गाइड प्रॉपरली ट्रेंड होने चाहिए और उन्हें पर्टिकुलर प्लेस की जानकारी अच्छी तरह से होनी चाहिए। इसकी जानकारी हमें मिली है और हम कोशिश करेंगे कि गाइड्स का स्केल कैसे रिवाइज किया जा सकता है, जिससे वे परफेक्ट गाइड बन सकें।

          मैं बौद्ध सर्कट के बारे में कुछ कहना चाहता हूं। बौद्ध सर्कट की बात जब हम करते हैं तो यह कम से कम दस राज्यों को जोड़ता है। बिहार, यूपी से लेकर उड़ीसा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सिक्किम, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश तक को जोड़ता है। बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश के सारनाथ और कुशी नगर का पूरा इलाका देखें, तो इसमें हमने बहुत काम किया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे प्रोपोगेट करने के लिए come to India walk with the Buddha जैसे कार्यक्रम चलाए हैं। इनका साउथ-ईस्ट एशिया में काफी बड़े पैमाने पर कम्पेनिंग किया है। मंत्रालय यह भी सोच रहा है कि दो साल में एक बार बुद्ध काँक्लेव कराया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी मिले।

           जहां तक इंफ्रास्ट्रक्चर का मामला है, तो उत्तर प्रदेश के सारनाथ से लेकर कुशी नगर और श्रावस्ती आदि जो तमाम इलाके हैं, हाटा से लेकर कोहली रोड, जो नेपाल बॉर्डर तक बौद्ध सर्कट है, उसके लिए 300 करोड़ रुपए जापानी बैंक के साथ मिलकर देना तय किया है। इस पर तकरीबन 2011-2012 के बाद काम शुरू हो जाएगा। यह पैसा मुख्यतः इसी क्षेत्र को विकसित करने के लिए है।

          बिहार में बौद्ध गया में कैसे और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि यह एक बिजनेस माडल भी है। यहां दुनिया भर से लोग ही नहीं आते, बल्कि हमें विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है और बिजनेस भी होता है। यह एक ऐसा सेक्टर है, मैं पहले फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में काम कर रहा था और समझता था कि यह सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला महकमा है, लेकिन इस सेक्टर में अगर कोई 10 लाख रुपया लगाए तो 80 लोगों को रोजगार मिलने की सम्भावना है। चाहे वह रिक्शा वाला हो, खोमचे वाला हो या ठेले वाला हो। कुल मिलाकर मैं यह कह सकता हूं कि इसमें बहुत ज्यादा रोजगार की सम्भावना है। इसलिए हमने हुनर से लेकर रोजगार तक की योजना को बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग के अभियान के तौर पर चलाया है। इस सेक्टर में निवेश हो, प्राइवेट पार्टीज का निवेश हो, राज्य सरकार की भूमिका बने, उनके लिए यह प्राथमिकता बने। राज्य सरकार के पास इस सेक्टर के लिए बजट हो, वह इसके लिए एलोकेट करे। इसके अलावा हमसे जितना होता है, हम वह दे रहे हैं और इसकी मैं मैपिंग करा रहा हूं। वह मैपिंग मैं आज के दृष्टिकोण से करा रहा हूं। पहले जो हमारे सेक्टर थे, अब और ज्यादा नए सेक्टर बने हैं और बनने की सम्भावना भी है। हम इसकी भी मैपिंग करा रही हैं।

श्री गणेश सिंह (सतना): आप भले ही मैपिंग करा लें, लेकिन राज्य सरकार उसे फालो नहीं करतीं। माननीय सदस्य का जो प्रपोजल था, वह भी इसी के तहत था।

श्री सुबोध कांत सहाय: मैंने पहले भी कहा था कि जो माननीय सदस्य मुझे लिखकर देंगे, मैं राज्य सरकार से अनुरोध करके उसे प्राथमिकता में शामिल कराने की कोशिश करूंगा, इसमें कोई दो राय नहीं हैं।

श्री जयंत चौधरी : मेरा यह निवेदन था कि इस बारे में समितियां बनाई जाएं और उसमें वहां के स्थानीय सांसदों को जरूर रखें।

श्री सुबोध कांत सहाय:  मैं समझता हूं कि आपकी इस भावना का भी उसमें सम्मान होगा। माननीय सदस्यों को उसमें शामिल करके, उनकी राय ली जाएगी क्योंकि कैम्पेन मोड पर ही इस क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है। चाहे राष्ट्रीय भावना हो, स्थानीय हो या अंतर्राष्ट्रीय भावना हो। इसलिए आपकी भूमिका को भी मैं उतना ही महत्वपूर्ण मानता हूं।

श्री जयंत चौधरी :  इसमें परम्परागत भूमिका का भी ध्यान रखा जाए।

श्री सुबोध कांत सहाय:  परम्परागत भूमिका के बारे में जैसा मैंने कहा कि जब यह हुनर से रोजगार और रुरल टूरिज्म बहुत बड़ा सेक्टर होगा जिसमें वहां के कल्चर और जो दुनिया के लोग आते हैं, वह कोई लॉस-वेगास ढूंढने यहां नहीं आते हैं, यहां का जो आध्यात्मिक टूरिज्म है, यहां का जो कल्चरल हैरिटेज है, उसे देखने आते हैं।

एक माननीय सदस्य  :  इसमें कोस्टल टूरिज्म का भी ध्यान रखा जाए।

श्री सुबोध कांत सहाय  :  कोस्टल टूरिज्म के लिए हमारे पास बहुत इलाका है। महाराष्ट्र में ही बहुत सारा वर्जिन इलाका है जो अभी तक डैवलेप नहीं हुआ है। कोस्टल टूरिज्म बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्दियों के दिनों में जब पूरा यूरोप बर्फ से ढक जाता है तब लोग यहां आते हैं। इसलिए गोवा बहुत बड़ा टूरिस्ट स्थान बना हुआ है।  

          माननीय महाराज जी ने चारों धाम की बात की है। उत्तराखंड के साथ ही चारों धाम भी प्रीओरिटी पर हैं। इन्हें हम उस सर्किट में कवर करेंगे और मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि राज्य सरकार पर अपना जोर लगाकर प्रपोजल भिजवाएं, ये मैं महाराज जी से अनुरोध करुंगा। टूरिज्म पॉलिटिकल एजेंडा होना चाहिए - क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए, दुनिया के लोग जो आएं, वे कल के यहां के निवेशक बनकर जाएं। अगर 8वीं और 10वीं पास बच्चे का थोड़ा सा हुनर डैवलेप कर दिया जाए तो होटल में वह हाउस-कीपिंग की नौकरी कर सकता है।

          सभापति जी, अभी हम केवल आधी दुनिया को इस ओर आकर्षित कर पाए हैं। इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जितने लोग बाहर से यहां आ रहे हैं दोगुने लोग टूरिज्म के लिए बाहर जा रहे हैं।  अगर हम एक परसेंट लोगों को भी आकर्षित कर पाए तो कम से कम पांच लाख नये होटलों की व्यवस्था हमें करनी पड़ेगी। अगर पांच लाख नये होटल स्थापित होंगे तो आप समझ सकते हैं कि कितने लोगों को रोजगार की संभावना हो सकती है।

          मैं माननीय सदस्यों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इस पर गंभीरता से बहस की और जो भी साथी हमसे सहयोग चाहेंगे, उसके लिए हमें बहुत खुशी होगी। बहुत-बहुत धन्यवाद।