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State Consumer Disputes Redressal Commission

Saini Video And Elecetronic vs Vijay Gopal Bhatt on 13 March, 2023

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1056/2019  ( Date of Filing : 03 Sep 2019 )  (Arisen out of Order Dated 14/11/2018 in Case No. C/61/2009 of District Barabanki)             1. Saini Video  and Elecetronic  Munshiganj Paragana and Tehsil navabganj Distt. Barabanki ...........Appellant(s)   Versus      1. Vijay Gopal Bhatt  S/o Late Shukdev Sharma R/O Village Bhatpurva Tehsil Nawabganj Distt. Barabanki ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT    HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER            PRESENT:      Dated : 13 Mar 2023    	     Final Order / Judgement    

                                  (मौखिक)

 

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग ,  उ0प्र0 ,  लखनऊ

 

 

 

 अपील सं0- 1 056 /20 19

 

सैनी वीडियो एण्‍ड इलेक्‍ट्रॉनिक, मुंशीगंज परगना व तहसील नवाबगंज, जिला बाराबंकी। 

 

                                                     ..........अपीलार्थी

 

बनाम

 

1.

विजय गोपाल भट्ट पुत्र स्‍व0 सुखदेव शर्मा, निवासी ग्राम- भटपुरवा, तहसील नवाबगंज, जिला बाराबंकी।

2. एक्‍साईड इंडस्‍ट्रीज लि0, 6 मिल रोड, ऐशबाग, लखनऊ।

                                                     .......प्रत्‍यर्थीगण   समक्ष:-

   माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष।
   माननीय श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य।
 
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित    : श्री अदील अहमद, विद्वान अधिवक्‍ता।  

 

प्रत्‍यर्थीगण की ओर से उपस्थित   : कोई नहीं।

 

                                                     

 

दिनांक:- 13.03.2023

 

 माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार ,  अध्‍यक्ष द्वारा उद्घोषित

 

 

 

 निर्णय      

 

            परिवाद सं0- 61/2009 विजय गोपाल भट्ट बनाम सैनी वीडियोज एण्‍ड इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स व एक अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता आयोग, बाराबंकी द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 14.11.2018 के विरुद्ध यह अपील योजित की गई है।
            जिला उपभोक्‍ता आयोग ने परिवाद एकपक्षीय आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए निम्‍नलिखित आदेश पारित किया है:-
            ''परिवादी का परिवाद विपक्षी सं0- 1 के विरुद्ध एकपक्षीय आंशिक  स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी सं0- 1 को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को पुरानी एक्‍साईड बैट्री के एवज में नई एक्‍साईड बैट्री आज से तीस दिन में प्रदान करें। तीस दिन में बैट्री न प्रदान करने की दशा में परिवादी, विपक्षी सं0- 1 से बैट्री का मूल्‍य रू0 7800.00 (रूपये सात हजार आठ सौ मात्र) तथा उस पर परिवाद प्रस्‍तुत करने की तिथि 10.06.2009 से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज पाने का अधिकारी होगा। परिवादी को विपक्षी सं0- 1 क्षतिपूर्ति के रूप में रू0 2,000.00 (रूपये दो हजार मात्र) तथा वाद व्‍यय के रूप में रू0 2,000.00 (रूपये दो हजार मात्र) भी तीस दिन में अदा करेंगे। विपक्षी सं0- 2 के विरुद्ध परिवाद निरस्‍त किया जाता है।''             प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी का परिवाद पत्र में कथन इस प्रकार है कि उसने एक एक्‍साईड बैट्री अपने व्‍यक्तिगत प्रयोग हेतु दि0 26.08.2007 को रू0 7800/-रू0 देकर अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 के यहां से क्रय किया था जिसकी 18 माह की वारण्‍टी थी। प्रश्‍नगत बैट्री प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 द्वारा निर्मित थी। वारण्‍टी अवधि में ही बैट्री ने कार्य करना बन्‍द कर दिया। प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने उक्‍त बैट्री को अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 के यहां जमा कर दिया, जिसे उसने सर्विस सेंटर में जमा करवा दिया। बैट्री जमा करने के दो दिन बाद जब प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी, अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 के यहां गया तो उसने बताया कि बैट्री गलत तरीके से चार्ज की गई है, अत: बदली नहीं जायेगी। इस सम्‍बन्‍ध में प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 को रजिस्‍टर्ड नोटिस बैट्री बदलने के बावत दि0 07.02.2009 को दिया। तदोपरांत अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने आश्‍वासन दिया कि प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 के यहां बैट्री पुन: जांच के लिए भेजी गई है बदलकर शीघ्र उपलब्‍ध करा दी जायेगी। पुन: प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने दि0 04.06.2009 को बैट्री के सम्‍बन्‍ध में विपक्षी से वार्ता की तो उन्‍होंने कहा कि बैट्री अभी तक नहीं आयी है। बैट्री न होने के कारण प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिससे व्‍यथित होकर प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने परिवाद प्रस्‍तुत किया है।
            जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 को नोटिस प्रेषित की गई थी और पर्याप्‍त समय दिये जाने के बावजूद भी उनके द्वारा उत्‍तर पत्र दाखिल नहीं किया गया, अत: उनके विरुद्ध परिवाद एकपक्षीय रूप से अग्रसारित किया गया।
            प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 द्वारा उत्‍तर पत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने परिवाद पत्र में बैट्री का नम्‍बर, माडल व खराब होने की तिथि का उल्‍लेख नहीं किया है। प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी द्वारा बैट्री का वारण्‍टी कार्ड तथा सर्विस कार्ड दाखिल नहीं किया गया है। प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी के अनुसार उसने एक्‍साईड बैट्री नं0- आई एन 1500 प्‍लस क्रम संख्‍या- 12657 अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 से दि0 26.08.2007 को क्रय किया था जो अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 द्वारा जारी रसीद से प्रमाणित है। अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने उक्‍त बैट्री पी0सी0 भट्ट को विक्रय किया था। प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी द्वारा फर्जी विक्रय रसीद तैयार कर यह वाद प्रस्‍तुत किया गया है। प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 ने उक्‍त बैट्री की जांच कर उसे अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 को वापस कर दिया था। प्रश्‍नगत बैट्री प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी के नाम से नहीं खरीदी गई थी, इसलिए प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी उपभोक्‍ता नहीं है। उक्‍त बैट्री मेसर्स श्री ट्रेडर्स द्वारा व्‍यावसायिक उद्देश्‍य के प्रयोगार्थ क्रय की गई थी, अत: प्रत्‍यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 के विरुद्ध परिवाद निरस्‍त किये जाने याचना की गई है।         
            अपील में मुख्‍य रूप से यह आधार लिया गया है कि प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी की ओर से जिला उपभोक्‍ता आयोग को गलत तथ्‍य दर्शाये गए हैं। प्रश्‍नगत आदेश एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है। अपील में मुख्‍य आधार यह भी लिया गया है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी को कभी प्रश्‍नगत बैट्री नहीं बेची थी, बल्कि यह बैट्री किसी पी0सी0 भट्ट नामक व्‍यक्ति को बेची गई है। इसके अतिरिक्‍त अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 एक्‍साईड बैट्री के सब डीलर हैं एवं प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी ने बैट्री के निर्माता को पक्षकार नहीं बनाया है। इन आधारों पर परिवाद निरस्‍त किये जाने की मांग की गई है।
            हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री अदील अहमद को सुना। प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध अभिलेखों का सम्‍यक परिशीलन किया। प्रत्‍यर्थीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।  
            अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 का मुख्‍य कथन यह है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने पी0सी0 भट्ट नामक व्‍यक्ति को प्रश्‍नगत बैट्री बेची थी तथा विजय गोपाल भट्ट अर्थात वी0जी0 भट्ट को यह बैट्री नहीं बेची थी, किन्‍तु अपील के संलग्‍नक 04 के रूप में उक्‍त ''सैनी वीडियोज एण्‍ड इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स'' द्वारा निर्गत रसीद सं0- 116 दि0 26.08.2007 की प्रतिलिपि प्रस्‍तुत की गई है जिसमें प्रश्‍नगत बैट्री जिसका नम्‍बर इस पर अंकित है तथा जिसकी कीमत रू0 7800/- दर्शायी गई है एवं क्रेता का नाम वी0जी0 भट्ट, भटपुरवा, बाराबंकी अंकित है जो हिन्‍दी में ''वी0जी0 भट्ट, भटपुरवा, बाराबंकी'' प्रथम दृष्‍टया देखने से प्रतीत होता है। संलग्‍नक 02 के रूप में डीलर क्‍लेम फार्म में पी0सी0 भट्ट अंकित है, जिससे स्‍पष्‍ट होता है कि स्‍वयं अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 डीलर द्वारा बाद में इसका नाम गलत अंकित किया गया है जब कि मूल रसीद में उपभोक्‍ता विजय गोपाल भट्ट के एब्रीबिएशन के रूप में वी0जी0 भट्ट, भटपुरवा, बाराबंकी ही अंकित है। अत: अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 का यह तर्क चलने योग्‍य नहीं है कि उसके द्वारा प्रत्‍यर्थी सं0- 1/परिवादी को बैट्री नहीं बेची गई थी, अतएव अपील में बल प्रतीत नहीं होता है। तदनुसार अपील अंगीकरण के बिन्‍दु पर ही निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।                    
आदेश             अपील निरस्‍त की जाती है। जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश की पुष्टि की जाती है।  
            अपील में उभयपक्ष अपना-अपना व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।
            अपील में धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपीलार्थी द्वारा जमा धनराशि अर्जित ब्‍याज सहित इस निर्णय एवं आदेश के अनुसार जिला उपभोक्‍ता आयोग को निस्‍तारण हेतु प्रेषित की जाए। 
            आशुलिपि‍क से अपेक्षा की जाती है कि‍ वह इस निर्णय एवं आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
 
      (न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)                       (विकास सक्‍सेना)

 

               अध्‍यक्ष                                 सदस्‍य

 

 

 

शेर सिंह, आशु0,

 

कोर्ट नं0- 1             [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]  PRESIDENT 
        [HON'BLE MR. Vikas Saxena]  JUDICIAL MEMBER