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State Consumer Disputes Redressal Commission

Mohd Kasim vs Nia on 14 July, 2017

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/292/2015  (Arisen out of Order Dated 16/01/2015 in Case No. C/17/2014 of District Muradabad-I)             1. Mohd Kasim  Sambhal ...........Appellant(s)   Versus      1. NIA  Muradabad ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT          For the Appellant:  For the Respondent:    Dated : 14 Jul 2017    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ अपील सं0-   292/2015                                    (सुरक्षित)   Mohd. Kasim, S/o Iqbal Hussain, R/o Mohd. Kawaza kha, Sarai nagar, District- Sambhal.                                                    

                                             .........Appellant.

Versus New India Assurance Co. Ltd, through, Divisional Manager, Divisional office, Arya samaj building, station road, Moradabad.

Branch Manager, New India Assurance Co. Ltd. Branch office-Krishana market, Sambhal.

                                                                                 .......... Respondents.

एवं अपील सं0- 321/2015 New India Assurance Co. Ltd,  Divisional office, Arya samaj building, station road, Moradabad through its Deputy Manager Mohd. Khalid posted at its legal cell, 94 M.G. marg, Lucknow.

Versus Mohd. Qasim, S/o Sri Iqbal Hussain, R/o Mohalla Khwaja khan, Sarai, Sambhal Distt.- Sambhal.

  

समक्ष:-

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।
परिवादी की ओर से उपस्थित : श्री  सत्‍य प्रकाश पाण्‍डेय , विद्वान                              अधिवक्‍ता।  
विपक्षी की ओर से उपस्थित : श्री टी0जे0एस0 मक्‍क्‍र, विद्वान                            अधिवक्‍ता।
दिनांक:- 17.08.2017   माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान , अध्‍यक्ष  द्वारा उद्घोषित                                                       निर्णय       परिवाद सं0- 17/2014 मोहम्‍मद कासिम बनाम न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0लि0 व अन्‍य जिला फोरम, सम्‍भल ने आदेश दि0 16.01.2015 के द्वारा अंशत: स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-
  ''परिवाद आंशिक रूप से विपक्षीगण के विरूद्ध स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेश दिया जाता है कि वह प्रश्‍नगत ट्रक नं0- यू0पी0 21एन0-9590 की बीमा धनराशि 13,55,000/-रू0 तथा 20,000/-रू0 क्षतिपूर्ति कुल तेरह लाख पिचहत्‍तर हजार रूपया मय 09 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दौरान मुकदमा ता वसूली और 2500/-रू0 वाद व्‍यय परिवादी को अदा करें''। 
  जिला फोरम के उपरोक्‍त निर्णय और आदेश से क्षुब्‍ध होकर उभयपक्ष ने वर्तमान दो अपीलें प्रस्‍तुत की हैं। अपील सं0- 292/2015 मो0 कासिम बनाम न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0 लि0, परिवादी की ओर से और अपील सं0- 321/2015 न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0लि0 बनाम मो0 कासिम, विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गई है।
  परिवादी की ओर से प्रस्‍तुत उपरोक्‍त अपील में जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश को संशोधित करते हुए परिवाद में याचित सम्‍पूर्ण अनुतोष प्रदान करने का निवेदन किया गया है जब कि विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से प्रस्‍तुत उपरोक्‍त अपील में जिला फोरम द्वारा पारित आक्ष्‍ोपित निर्णय और आदेश अपास्‍त किये जाने की याचना की गई है।
      
  दोनों अपील में परिवादी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री सत्‍य प्रकाश पाण्‍डेय और विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री टी0जे0एस0 मक्‍कर उपस्थित आये हैं।
  मैंने उभयपक्ष के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
  अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी मो0 कासिम ने उपरोक्‍त परिवाद विपक्षी न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0लि0 के विरूद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि वह वाहन सं0- यू0पी0 21एन0-9590 का पंजीकृत स्‍वामी है। उसका यह वाहन विपक्षी बीमा कम्‍पनी से बीमाकृत रहा है और बीमा अवधि में दि0 28.11.2011 को उसका यह वाहन 10:00 बजे रात के समय जीप सं0- यू0पी0 21डी0-6650 से टकरा कर दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया और पूर्णत: नष्‍ट हो गया। परिवाद पत्र के अनुसार परिवादी ने घटना की तुरंत सूचना सम्‍बन्धित थाना वजीरगंज, जिला बदायूं को दी और विपक्षी बीमा कम्‍पनी के कार्यालय को भी सूचना सर्वे करने हेतु दिया। तदोपरांत विपक्षी बीमा कम्‍पनी द्वारा औपचारिकतायें पूरी करने के पश्‍चात उसका दावा बीमा पंजीकृत किया गया, परन्‍तु उसे लम्बित रखते हुए विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से प्रत्‍यर्थी/परिवादी को दि0 05.12.2012 को पत्र इस आशय का भेजा गया कि दुर्घटना के समय वाहन ड्राइवर शमीम पुत्र मुन्‍ना चला रहा था जिसका वैध एवं प्रभावी लाइसेंस प्रस्‍तुत नहीं किया गया है और सही तथ्‍य को छिपाया गया है। अत: उसका बीमा दावा इस आधार पर निरस्‍त कर दिया गया है कि दुर्घटना के समय वाहन चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना था और उसका विधिक वैध एवं प्रभावी लाइसेंस प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। दुर्घटना के समय मो0 अली को चालक गलत बताया है।
       परिवाद पत्र के अनुसार परिवादी का कथन है कि घटना के समय चालक मो0 अली था, शमीम पुत्र मुन्‍ना चालक नहीं था। परिवादी ने बीमा कम्‍पनी को इस तथ्‍य से दि0 03.01.2013 को मिलकर अवगत कराया और यह भी अवगत कराया कि मो0 अली का ड्रा‍इविंग लाइसेंस उपलब्‍ध करा दिया गया है। अत: बीमा दावा गलत तरीके पर निरस्‍त किया गया है, परन्‍तु विपक्षी बीमा कम्‍पनी ने कोई सुनवाई नहीं की। अत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।
       विपक्षीगण बीमा कम्‍पनी की ओर से लिखित कथन जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया है और कथन किया गया है कि घटना दि0 28.11.2011 की है, परन्‍तु घटना की सूचना समयावधि में बीमा पालिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कम्‍पनी को नहीं दी गई है।
       लिखित कथन में विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से कहा गया है कि बीमा कम्‍पनी के जांचकर्ता रायल एसोसिएट्स द्वारा घटना के सम्‍बन्‍ध में पूर्ण जांच की गई तो यह तथ्‍य प्रकाश में आया कि शमीम उर्फ मुन्‍ना ग्राम रूस्‍तमपुर नगर सहसपुर, तहसील बिलारी, जिला मुरादाबाद घटना के समय वाहन चला रहा था, तभी यह घटना घटित हुई है, परन्‍तु उक्‍त चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना के पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। अत: बीमा कम्‍पनी प्रतिकर की अदायगी हेतु उत्‍तरदायी नहीं है। अत: बीमा कम्‍पनी ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी का बीमा दावा निरस्‍त कर त्रुटि नहीं की है। लिखित कथन में विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने परिवाद में चालक मो0 अली को गलत तौर पर दर्शित किया है जब कि घटना के समय वाहन चालक मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था।
       लिखित कथन में विपक्षी की ओर से यह भी कथन किया गया है कि परिवाद कालबाधित है।
       जिला फोरम ने उभयपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत यह निष्‍कर्ष निकाला है कि प्रश्‍नगत दुर्घटना के समय वाहन परिवादी द्वारा कथित चालक मो0 अली चला रहा था जिसके पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस था। जिला फोरम ने यह भी निष्‍कर्ष निकाला है कि विपक्षी बीमा कम्‍पनी का यह कथन मान्‍यता प्रदान किये जाने योग्‍य नहीं है कि घटना के समय वाहन चालक मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था।
       उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर जिला फोरम ने यह माना है कि परिवादी बीमित धनराशि 13,55,000/-रू0 तथा 20,000/-रू0 क्षतिपूर्ति और 2500/-रू0 वाद व्‍यय पाने का अधिकारी है। तदनुसार जिला फोरम ने परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए आक्षेपित निर्णय और आदेश उपरोक्‍त प्रकार से पारित किया है।
       अपीलकर्ता/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि परिवादी ने 50,000/-रू0 की क्षतिपूर्ति मांगी थी, परन्‍तु जिला फोरम ने मात्र 20,000/-रू0 की क्षतिपूर्ति प्रदान की है जो उचित नहीं है। अत: परिवादी द्वारा याचित क्षतिपूर्ति की धनराशि प्रदान की जाए।
       अपीलार्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि उपलब्‍ध साक्ष्‍यों के आधार पर कदापि यह मानने हेतु उचित आधार नहीं है कि घटना के समय वाहन चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना था जैसा कि बीमा कम्‍पनी द्वारा कहा जा रहा है।
       अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी का तर्क है कि उपलब्‍ध साक्ष्‍यों से यह प्रमाणित है कि घटना के समय वाहन चालक मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था मो0 अली चालक नहीं था। जिला फोरम ने इस संदर्भ में जो निष्‍कर्ष निकाला है वह साक्ष्‍य के विरूद्ध है। अत: जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश त्रुटिपूर्ण है और निरस्‍त होने योग्‍य है।
       मैंने उभयपक्ष के तर्क पर विचार किया है।
       प्रश्‍नगत वाहन का पंजीकृत स्‍वामी परिवादी मो0 कासिम है और प्रश्‍नगत वाहन दुर्घटना के समय न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0लि0 से बीमाकृत था तथा वाहन का बीमित मूल्‍य 13,55,000/-रू0 था यह तथ्‍य निर्विवाद है।
       निर्विवाद रूप से विपक्षी बीमा कम्‍पनी ने परिवादी का बीमा दावा इस आधार पर निरस्‍त किया है कि रायल एसोसिएट्स के द्वारा की गई जांच में यह तथ्‍य प्रकाश में आया है कि दुर्घटना के समय वाहन शमीम पुत्र मुन्‍ना चला रहा था जिसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और परिवादी ने यह तथ्‍य छिपाते हुए दुर्घटना के समय मो0 अली को चालक गलत तौर पर बताया है। अत: उभयपक्ष के अभिकथन के आधार पर मुख्‍य विचारणीय बिन्‍दु यह है कि क्‍या प्रश्‍नगत दुर्घटना के समय वाहन चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना था जैसा कि बीमा कम्‍पनी द्वारा कहा गया है या मो0 अली था जैसा कि परिवादी द्वारा कहा गया है?
       जिला फोरम के समक्ष बीमा कम्‍पनी की ओर से प्रस्‍तुत लिखित कथन के प्रस्‍तर 13 में कहा गया है कि दि0 28.11.2011 को जिस प्रकार जीप द्वारा टक्‍कर मारना अंकित कर घटना होना बताया गया है और दि0 19.11.2011 को ही समझौता करके उसकी सूचना थाने पर दी गई है। उस कथित सूचना/समझौते में भी जानबूझकर परिवादी द्वारा चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना और क्‍लीनर राशिद का उल्‍लेख नहीं किया गया है और न ही कथित दुर्घटना में चालक मो0 शमीम एवं क्‍लीनर राशिद की चोटों का कोई उल्‍लेख किया गया है।
  अत: यह स्‍पष्‍ट है कि घटना के तुरंत बाद दोनों ही वाहन द्वारा जो समझौतानामा स्‍थानीय थाने की पुलिस के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया है उसमें चालक शमीम पुत्र मुन्‍ना को दर्शित नहीं किया गया है। घटना के तुरंत बाद थाने में दी गई सूचना बहुत ही संगत और महत्‍वपूर्ण है। बीमा कम्‍पनी के अनुसार उसके सर्वेयर ने दि0 04.07.2012 को कथित रूप से शमीम पुत्र मुन्‍ना का बयान अंकित किया है जिसकी फोटो प्रति अपील सं0- 321/2015 की पत्रावली के पृष्‍ठ 39 और 40 पर संलग्‍न है, परन्‍तु उक्‍त शमीम पुत्र मुन्‍ना ने जिला फोरम के समक्ष शपथ पत्र प्रस्‍तुत कर इस बात का खण्‍डन किया है कि वह कथित घटना के समय ट्रक चला रहा था। उसने अपने सशपथ बयान में यह भी कहा है कि सर्वेयर ने उसका कोई बयान नहीं लिया था। सर्वेयर ने उसके और मो0 आसिम के हस्‍ताक्षर सादे कागज पर करवाये थे। उपरोक्‍त अपील के पृष्‍ठ 39 एवं 40 पर जो शमीम पुत्र मुन्‍ना और मो0 आसिम का बयान है उसके प्रथम पृष्‍ठ पर किसी का हस्‍ताक्षर नहीं है। दूसरे पृष्‍ठ पर मो0 आसिम और शमीम के दो बार हस्‍ताक्षर कराये गये हैं। दोनों का पहला हस्‍ताक्षर शमीम के कथित बयान के अंत में और पुन: दोनों का दूसरा हस्‍ताक्षर मो0 आसिम के कथित बयान के अंत में है। बयान किसके द्वारा अंकित किया गया है यह स्‍पष्‍ट नहीं है और दोनों के बयान के अंत में अंकित बयान को पढ़कर एवं सुनाकर तस्‍दीक किये जाने का प्रमाण नहीं है, न ही बयान अंकित करने वाले का हस्‍ताक्षर है? रायल एसोसिएट्स के जांचकर्ता का शपथ पत्र प्रस्‍तुत कर मो0 शमीम व मो0 आसिम के बयानों को प्रमाणित भी नहीं किया गया है कि मो0 शमीम और मो0 आसिम दोनों के बताने के अनुसार बयान अंकित किया गया है। अत: जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना के शपथ पत्र एवं उपरोक्‍त तथ्‍यों पर विचार करने के उपरांत यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि जांचकर्ता द्वारा मो0 शमीम का अंकित बयान प्रमाणित नहीं है और साक्ष्‍य में पढ़े जाने योग्‍य नहीं है। बीमा कम्‍पनी के जांचकर्ता द्वारा यह निष्‍कर्ष कि घटना के समय वाहन चालक मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था, मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना व मो0 आसिम के बयानों के आधार पर ही निकाला गया है, परन्‍तु उनके बयानों को जिला फोरम के समक्ष विधि के अनुसार प्रमाणित नहीं किया गया है। इसके विपरीत मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना ने जिला फोरम के समक्ष शपथ पत्र प्रस्‍तुत कर इस बयान का खण्‍डन किया है और इस तथ्‍य का ख्‍ाण्‍डन किया है कि कथित दुर्घटना के समय वह वाहन का चालक था। अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत मैं इस मत का हूँ कि यह मानने हेतु उचित और युक्ति संगत आधार नहीं है कि घटना के समय वाहन चालक मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था। बीमा कम्‍पनी ने परिवादी का दावा इसी आधार पर निरस्‍त किया है कि घटना के समय चालक‍ मो0 शमीम पुत्र मुन्‍ना था। अत: यह साबित करने का भार बीमा कम्‍पनी पर है, परन्‍तु बीमा कम्‍पनी यह साबित करने में असफल रही है। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी का दावा निरस्‍त करने हेतु बीमा कम्‍पनी द्वारा दर्शित आधार मान्‍यता प्रदान किये जाने योग्‍य नहीं है और यह मानने हेतु उचित और युक्ति संगत आधार है कि बीमा कम्‍पनी ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी का दावा बिना उचित आधार के अस्‍वीकार किया है जो सेवा में कमी है।
  बीमा कम्‍पनी ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी का दावा पत्र दि0 05.12.2012 के द्वारा अस्‍वीकार किया है और प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने उसके दो साल के अन्‍दर परिवाद प्रस्‍तुत किया है। अत: यह कहना उचित नहीं है कि परिवाद में मियाद बाधक है।
  अपील सं0- 321/2015 के पृष्‍ठ 44-49 पर सर्वेयर ए0के0 माथुर की रिपोर्ट संलग्‍न है, जिन्‍होंने कुल क्षति का आकलन 13,55,000/-रू0 का किया है। अत: आई0डी0बी0 के मूल्‍य के अनुसार वाहन पूर्ण क्षतिग्रस्‍त की श्रेणी में आता है। सर्वेयर ने साल्‍वेज का मूल्‍य घटाकर क्षतिपूर्ति 8,03,500/-रू0 निर्धारित की है। जिला फोरम ने वाहन की पूर्ण क्षति मानते हुए सम्‍पूर्ण बीमित धनराशि 13,55,000/-रू0 बीमा कम्‍पनी को प्रदान किये जाने का आदेश दिया है। ऐसी स्थिति में वाहन बीमा कम्‍पनी को समर्पित किया जाना आवश्‍यक था, परन्‍तु जिला फोरम ने क्षतिग्रस्‍त वाहन बीमा कम्‍पनी को समर्पित किये जाने का आदेश प्रत्‍यर्थी/परिवादी को नहीं दिया है। अत: जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश इस आधार पर त्रुटिपूर्ण है और संशोधित किये जाने योग्‍य है। अत: जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश इस प्रकार संशोधित किया जाना आवश्‍यक है कि बीमा कम्‍पनी प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रश्‍नगत वाहन की बीमित धनराशि 13,55,000/-रू0 इस शर्त पर तब प्रदान करेगी कि परिवादी प्रश्‍नगत ट्रक बीमा कम्‍पनी को अभिलेख सहित समर्पित करेगा। यदि परिवादी द्वारा प्रश्‍नगत ट्रक बीमा कम्‍पनी को समर्पित नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में बीमित धनराशि 13,55,000/-रू0 से सर्वेयर द्वारा निर्धारित साल्‍वेज की धनराशि घटाकर शेष धनराशि 8,03,500/-रू0 ही परिवादी को अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी द्वारा अदा की जायेगी।
  प्रश्‍नगत ट्रक का साल्‍वेज ट्रक के पंजीयन प्रमाण पत्र सहित बीमा कम्‍पनी को प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा समर्पित किया जाना उपलब्‍ध साक्ष्‍यों से जाहिर नहीं होता है। अत: ट्रक का साल्‍वेज उपलब्‍ध कराने के बाद ही प्रत्‍यर्थी/परिवादी बीमित धनराशि पाने का अधिकारी है। अत: जिला फोरम ने जो बीमित धनराशि पर 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्‍याज दिया है वह उचित नहीं है। जिला फोरम ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी को जो 20,000/-रू0 मानसिक व शारीरिक कष्‍ट हेतु क्षतिपूर्ति दी है वह भी वाद की परिस्थितियों में उचित नहीं प्रतीत होता है।
  जिला फोरम ने जो 2500/-रू0 वाद व्‍यय दिया है वह उचित प्रतीत होता है। इसमें किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है।
  बहस के दौरान अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी की ओर से एक तर्क यह भी किया गया है कि प्रश्‍नगत वाहन ट्रक था और वाणिज्यिक उद्देश्‍य से लिया गया था। अत: परिवादी धारा 2(1)डी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्‍ता नहीं है और उसके द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद ग्राह्य नहीं है।
  बीमा कम्‍पनी की ओर से उसके विद्वान अधिवक्‍ता ने मा0 राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा पारित निम्‍न निर्णयों की नजीरें प्रस्‍तुत की हैं:-
  1. United India Insurance Co. Ltd. V/s Kishore Sharma I(2015) CPJ        760 (N.C.)

   2. Jagrut Nagrik & Anr. V/s Cargo Motors Pvt. Ltd. & Anr. III      (2015) CPJ 1 (NC)        परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि परिवादी ने ट्रक अपने जीविकोपार्जन हेतु स्‍वनियोजन के उद्देश्‍य से लिया है। अत: परिवादी धारा 2(1)डी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के स्‍पष्‍टीकरण के अनुसार उपभोक्‍ता है। परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का यह भी तर्क है कि जिला फोरम के समक्ष बीमा कम्‍पनी ने प्रश्‍नगत वाहन वाणिज्यिक होने के आधार पर परिवाद की ग्राह्यता के सम्‍बन्‍ध में कोई आपत्ति नहीं उठायी है। अत: इस स्‍तर पर वह यह बिन्‍दु उठाने से कानूनन वर्जित है।

       मैंने उभयपक्ष के तर्क पर विचार किया है।

       यह सही है कि जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी की ओर से लिखित कथन में यह कथन नहीं किया गया है कि प्रश्‍नगत वाहन वाणिज्यिक वाहन है। अत: धारा 2(1)डी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत परिवादी उपभोक्‍ता नहीं है और परिवाद ग्राह्य नहीं है। परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता के अनुसार धारा 2(1)डी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के स्‍पष्‍टीकरण के अनुसार परिवादी उपभोक्‍ता है। उसने वाहन अपने जीविकोपार्जन हेतु स्‍वनियोजन के उद्देश्‍य से लिया है। बीमा कम्‍पनी ने जिला फोरम के समक्ष इस आधार पर परिवाद की ग्राह्यता के सम्‍बन्‍ध में कोई आपत्ति नहीं की है। अत: जिला फोरम ने धारा 2(1)डी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के स्‍पष्‍टीकरण को दृष्टिगत रखते हुए परिवाद की कार्यवाही सुनिश्चित की है। ऐसी स्थिति में अब इस स्‍तर पर नया बिन्‍दु अपील में उठाया जाना उचित नहीं है। अत: इस संदर्भ में अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा प्रस्‍तुत तर्क स्‍वीकार किये जाने योग्‍य नहीं है।

       उपरोक्‍त विवेचना एवं ऊपर निकाले गये निष्‍कर्ष के आधार पर मैं इस मत का हूँ कि बीमा कम्‍पनी द्वारा प्रस्‍तुत अपील सं0- 321/2015 आंशिक रूप से स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है जब कि परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत अपील सं0- 292/2015 निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश      बीमा कम्‍पनी द्वारा प्रस्‍तुत अपील सं0- 321/2015 न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कम्‍पनी लि0 बनाम मो0 कासिम आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश संशोधित करते हुए अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रश्‍नगत ट्रक नं0- यू0पी0 21एन0-9590 की बीमित धनराशि 13,55,000/-रू0 प्रत्‍यर्थी/परिवादी को उक्‍त ट्रक पंजीयन प्रमाण पत्र व अन्‍य आवश्‍यक अभिलेख सहित समर्पित किये जाने पर अदा करे।

  यदि इस निर्णय की तिथि से 2 महीने के अन्‍दर परिवादी ट्रक के साल्‍वेज कागजात सहित बीमा कम्‍पनी को समर्पित नहीं करता है तो अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी सर्वेयर द्वारा निर्धारित साल्‍वेज की धनराशि घटाकर शेष बीमित धनराशि 8,03,500/-रू0 प्रत्‍यर्थी/परिवादी को अदा करेगी। उपरोक्‍त के अतिरिक्‍त अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी जिला फोरम द्वारा प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रदान की गई वाद व्‍यय की धनराशि रू0 2500/- भी अदा करेगी।

       जिला फोरम ने अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी को जो 20,000/-रू0 क्षतिपूर्ति प्रत्‍यर्थी/परिवादी को अदा करने हेतु आदेश दिया है एवं 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से परिवाद प्रस्‍तुत करने की तिथि से अदायगी की तिथि तक ब्‍याज देने का आदेश दिया है उसे अपास्‍त किया जाता है, परन्‍तु यह आदेशित किया जाता है कि यदि अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी इस निर्णय की तिथि से तीन मास के अन्‍दर उपरोक्‍त प्रकार से सम्‍पूर्ण देय धनराशि का भुगतान नहीं करती है तब वह प्रत्‍यर्थी/परिवादी को उपरोक्‍त प्रकार से देय सम्‍पूर्ण धनराशि पर जिला फोरम के निर्णय की तिथि दि0 16.01.2015 से अदायगी की तिथि तक 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्‍याज भी अदा करेगी।   

       अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी द्वारा धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जमा धनराशि 25,000/-रू0 जिला फोरम को ब्‍याज सहित इस निर्णय के अनुसार निस्‍तारित करने हेतु प्रेषित की जायेगी।

       परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत उपरोक्‍त अपील 292/2015 मो0 कासिम बनाम न्‍यू इंडिया एश्‍योरेंस कं0लि0 निरस्‍त की जाती है।

       उभयपक्ष अपील में अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

       इस निर्णय/आदेश की एक प्रमाणित प्रतिलिपि अपील सं0- 321/2015 में भी रखी जाए।  

 

   (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                                                                                       अध्‍यक्ष शेर सिंह आशु0, कोर्ट नं0-1   ​         [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT