Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Recent Political Developments In The State Of Uttar ... on 26 November, 2002
NT> 16.02 hrs. Title: Discussion regarding recent political developments in the state of Uttar Pradesh.
MR. DEPUTY-SPEAKER: The House will now take up Item No.17. Shri Mulayam Singh Yadav.
श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल):उपाध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश की स्थिति गंभीर है। गठबंधन की सरकार सत्ता में बने रहने के लिए हर स्तर पर उतरने को तैयार है। लोकतंत्र, राजनीतिक शिष्टाचार, संविधान सबको ताक पर रखकर उ. प्र. में अल्पमत की सरकार लूट-खसोट, दमन, अत्याचार में लिप्त है।े आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अधिकारियों के स्थानांतरणों की नीलामी करके स्थानांतरण किये गये हैं और किये जा रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों का औसत कार्यकाल क्रमश: १५ व २० दिन रहा। दो-दो दर्जन, तीन-तीन दर्जन अधिकारियों के स्थानांतरण कभी तीन दिन, कभी दो दिन और कभी-कभी दो घंटे के अंदर चार-चार जगहों पर किये गये हैं। हम सोचते थे कि राज्यपाल जी संविधान के संरक्षक हैं। लेकिन राज्यपाल जी इस सरकार के कुकृत्यों को आंख मूंदकर देखते रहे और देख रहे हैं और पूरी तरह से सरकार के पहरेदार बन गये हैं। सरकारिया आयोग की रिपोर्ट थी कि सक्रिय राजनीति में काम करने वाले किसी व्यक्ति की राज्यपाल के पद पर नियुक्ति न की जाए। लेकिन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के निर्वाचन क्षेत्र से राज्य सभा में चुने गये थे और उनका निवास स्थान सरकारी कागजातों में दर्ज है - भारतीय जनता पार्टी के विधान मंडल दल के नेता का निवास स्थान। अब आप विचार कर सकते हैं, पूरा सदन विचार कर सकता है कि जब भारतीय जनता पार्टी के विधान मंडल दल के नेता के घर में जो निवास करते हैं, उनसे विपक्ष में या सरकार विरोधी कोई काम करने वालों तथा उ. प्र. की जनता को कभी इंसाफ या न्याय नहीं मिल सकता। यह आज उत्तर प्रदेश की दुर्दशा है। वह पूरी तरह से संविधान संरक्षक की बजाय सरकार के पहरेदार बने हुए हैं और सरकार के स्तर से चल रहे हैं ।यह काम उन्होंने शुरू से ही कर दिया है। जब उत्तर प्रदेश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जनादेश दिया और सबसे बड़े दल के रूप में समाजवादी पार्टी उभरकर आई और समाजवादी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए था और यही संवैधानिक परंपरा है। वर्तमान प्रधान मंत्री जी का बहुमत न होते हुए भी बड़े दल के रूप में तत्कालीन राष्ट्रपति जी माननीय स्वर्गीय शंकर दयाल शर्मा जी ने उनको सरकार बनाने का अवसर दिया। वह अलग बात है कि १३ दिन बाद सरकार गिरी क्योंकि सदन में बहुमत सिद्ध नहीं हो पाया लेकिन उन्होंने संविधान का पालन किया। हम लोगों ने सहर्ष स्वीकार किया। उसके बाद जो चुनी हुई विधान सभा थी उसको काम नहीं करने दिया और दो महीने के लिए राष्ट्रपति शासन की संस्तुति कर उत्तर प्रदेश की जनता के जनादेश को ठुकराकर राष्ट्रपति शासन लाद दिया गया । उसी बीच में स्वयं राज्यपाल जी ने सरकार बनाने के लिए विधायकों से संपर्क किया और समाजवादी पार्टी से कहा गया कि बहुमत सिद्ध करो। ऐसे कई विचार आपके सामने आ चुके हैं उच्चतम न्यायलय से और कई कमीशनों के कई संविधान विशेषज्ञों के कि बहुमत-अल्पमत राजभवन में नहीं हो सकता, वह विधान सभा में ही हो सकता है। यह समाजवादी पार्टी कहती रही है, लेकिन उ. प्र. के राज्यपाल जी ने केन्द्र सरकार के इशारे पर पार्टी को सरकार बनाने का अवसर नहीं दिया और सिद्धांतहीन अवसरवादी गठबंधन ने, दूसरों पर जो आरोप लगाए थे, उसी ने खरीद-फरोख्त करके, लालच देकर सरकार बनाई। सरकार बनते ही लूट-खसोट का काम शुरू हो गया, जबकि प्रदेश में आज अकाल की स्थिति है, सूखा है, और ऐसी स्थिति में भी अरबों रुपया बरबाद किया गया। भारतीय जनता पार्टी के ही जो विधायक हैं जिन्होंने जनसंघ के समय से पार्टी में माननीय गृह मंत्री और प्रधान मंत्री जी के साथ काम किया है, वह हैं श्री गंगा भक्त सिंह । वह वर्तमान सरकार के कामों से असंतुष्ट हुए। रामाशीष राय जैसे नेता नौजवान जिन्होंने संघ परिवार की सेवा से लेकर भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की सेवा की और वह स्वयं बड़े पदों पर रहे, ज्यादा हमें नहीं कहना है, सब जानते हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष रह चुके हैं। मुझे खबर है कि ऐसे लोगों ने राज्यपाल जी से और अपने नेताओं से शिकायतें कीं कि सरकार को चलाने का यह तरीका ठीक नहीं है। इस तरह से हमारी पार्टी का जनसमर्थन घट रहा है, भारतीय जनता पार्टी की छवि खराब हो रही है। इन सवालों को लेकर उन्होंने असंतोष जाहिर किया परंतु उनके असंतोष को ठुकरा दिया गया तो उन्होंने कहा कि इस सरकार को हम नहीं चाहते हैं। इसी तरह से निर्दलीय सात विधायकों ने राज्यपाल जी को लिखकर दे दिया कि हमने इस सरकार से समर्थन वापस ले लिया है, राज्यपाल जी से कहा कि अल्पमत में सरकार है, तो राज्यपाल जी ने खुद प्रवक्ता के रूप में कहा कि अभी २१० विधायकों का समर्थन प्राप्त है, अभी बहुमत में सरकार है। ये भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता या प्रवक्ता का बयान होता तो बात अलग थी लेकिन राज्यपाल जी ने राजभवन से बयान दिया। और फिर १२ विधायकों ने जो राज्यपाल जी कहते हैं कि समर्थन वापस नहीं लिया है, मैं आपके सामने पढ़कर सुना दूँ, जो उन्होंने ज्ञापन में राज्यपाल जी को लिखा है।
माननीय सदन सोचना चाहिये कि यह समर्थन वापस नहीं तो क्या है ?मैं आपको बताना चाहता हूं की भारतीय जनता पार्टी के १२ विधायक हैं जिन्होंने राज्यपाल को लिखकर दिया कि -
"वदित हो क हम विधायकगण, जो वर्तमान सरकार को पूर्व में विश्वास व्यक्त करते हुए समर्थन दिया था, अब इस सरकार ने अलोकतांत्रिक, अमर्यादित और असंवैधानिक कार्य-प्रणाली तथा गैर-जिम्मेदाराना एवं गैर-जवाबदेह कार्यशैली से काम करना शुरू कर दिया है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि लोकतांत्रिक परम्पराओं एवं सांवैधानिक व्यवस्थाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने एवं उठाए गए बिन्दुओं पर सरकार स्पष्टीकरण और पुन: विश्वास मत प्राप्त करने हेतु विधान सभा की बैठक यथाशीघ्र बुलाई जाए।"महोदय, यह १२ विधायकों ने लिखकर दिया है। अब उन्होंने स्वयं कहा कि अल्पमत में सरकार है। जो उन्होंने कहा उसको इलैक्ट्रौनिक मीडिया पर पूरे हिन्दुस्तान ने सुना, बी.बी.सी. पर कहा गया कि उ. प्र में अल्पमत सरकार है। सरकार को असैम्बली बुलाकर अपना बहुमत साबित करना चाहिए, लेकिन असैम्बली बुलाने की बजाय उत्पीड़न शुरू कर दिया और उत्पीड़न भी महोदय, ऐसा जैसा हमने कभी किसी लोकतांत्रिक सरकार में नहीं देखा।
उपाध्यक्ष महोदय, यहां इतने नेता और माननीय सांसद बैठे हैं, उन्होंने सुना भी नहीं होगा। माननीय प्रधान मंत्री जी ने भी नहीं सुना होगा। श्रीरघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, उ. प्र विधान सभा के निर्दलीय विधायक हैं, उन्पूहें राजा भैया के नाम से पूरे उत्तर प्रदेश में जाना जाता है और जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार चलाने में पांच साल योगदान दिया, वे कैबीनेट मंत्री रहे हैं, उनके ऊपर मनगढंत, झूठे आरोप लगाकर, उन्हें जेल भेज दिया। पहले फतेहगढ़ और फिर बाद में फतेहगढ़ से बांदा जेल भेज दिया गया। बांदा जेल में डालकर उनसे मुलाकात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। इस प्रकार से उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया। जिस प्रकार से कोई देश्द्रोही, जैसे उग्रवादी कश्मीर से पकड़ कर यहां लाया गया हो। वैसा ही व्यवहार उनके साथ किया जा रहा रहा है। वैसा ही व्यवहार उनके साथी धनंजय सिंह, विधायक के साथ, श्री अक्षय प्रताप सिंह और राम नाथ सरोज, जो भू.पू. सैनिक हैं, जिन्होंने सीमा पर देश की सेवा की, जो वहां विधायक हैं। उन दोनों पर गैंग्स्टर का फर्जी मुकदमा लगा कर उनको जेल भेज दिया।
राजा भैया राजमहल में रहते हैं। राजा हैं। पुलिस ने छापा मारा। जब छापा मारने पर भी वे नहीं मिले, जब उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका और उन्होंने उच्च न्यायालय में जाकर गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया। मैं एक परिवार के बारे में बता रहा हूं। उनके सैक़ड़ों एक़ड़ में मछलियों से भरे तालाब हैं। उनका पूरा पानी बहा दिया। पूरा पानी प्रदूषित कर दिया। इससे सिंचाई का संकट पैदा हो गया और पूरा का पूरा पानी गन्दा हो गया। यह हालत आज उत्तर प्रदेश की सरकार कर रही है। उ. प्र सरकार की ऐसी अलोकतांत्रिक कार्रवाई का उत्तर प्रदेश के राज्यपाल आंख मूंद कर समर्थन कर रहे हैं। राज्यपाल कहते हैं कि सरकार बहुमत में है।
महोदय, मैंने उस दिन भी कहा, आज भी कह रहा हूं, प्रधान मंत्री जी ने कहा कि हमारी पार्टी पर संकट है, हमारी पार्टी की यही स्थिति रही, जो एक खास पार्टी की तरह काम कर रही है, मैं उसका नाम नहीं लेना चाहता हूं, वैसी ही दुर्दशा होगी। मैं उनकी सराहना करता हूं । उन्होंने इस बात को स्वीकार किया और इस बारे में कहा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी पार्टी सुख, सुविधा और सत्ता की तरफ भाग रही है। यह बात सीधे न कहकर बिलकुल स्पष्ट कह दी। उन्होंने कह दिया कि सरकार अल्पमत में चली गई है और हमारी पार्टी में विद्रोह है। हम बार-बार कहते रहे। यहां मैं सदन के अंदर स्पष्ट करना चाहता हूं कि समाजवादी पार्टी ने सरकार को गिराने का कोई प्रयास नहीं किया। यह सही है कि यहां पर मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं, जो विपक्ष में बैठे हैं और सत्ता पक्ष की तरफ भी बैठे हैं उन्होंने स्वयं मुझसे कहा कि हमारी पार्टी खत्म हो रही है, मुलायम सिंह जी निष्क्रिय क्यों हो, उदास क्यों हो, कुछ करते क्यों नहीं, मिलकर सरकार चलाओ, हमें कोई आपत्ति नहीं है।
लेकिन जब पार्टी के अंदर अन्तर्विरोधों के कारण, उस सरकार के गलत कारनामों के कारण, भ्रष्टाचार के कारण, दमन के कारण, अत्याचारों के कारण स्वयं विद्रोह हुआ, उसके बाद उन पर जुल्म हुए। जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए समाजवादी पार्टी का सिद्धांत है, चाहे वह बी.जे.पी. के विधायकों पर ही जुल्म क्यों न हों या और किसी पर भी जुल्म हो, समाजवादी पार्टी हमेशा जुल्म के खिलाफ खडी हुई है और इस जुल्म के खिलाफ भी हम खड़े हैं, हमारी पार्टी खड़ी है।
बी.एस.पी. के विधायक श्री जयप्रकाश यादव ने जब सरकार से समर्थन विदड्रा किया तो उनको अपराधी घोषित कर दिया गया और यह कहा कि जो भी इनको गिरफ्तार करेगा या गिरफ्तार कराने में मदद करेगा, उसको दस हजार रुपये का इनाम दिया जायेगा। आठ दिन तक लगातार गोरखपुर जनपद में चार जीपों से मुनादी की गई कि जो श्री जयप्रकाश यादव को गिरफ्तार करेगा या गिरफ्तार कराने में सहयोग करेगा, उसे दस हजार रुपया इनाम में दिया जायेगा। क्या कभी ऐसा सुना है कि जनप्रतनधियों के साथ दरोगा या सिपाही ऐसा व्यवहार करेंगे ? क्या राज्यपाल जी को यह जानकारी भी नहीं है ?इसके खिलाफ ११ नवम्बर, २००२ को समाजवादी पार्टी द्वारा विरोध दिवस मनाया जा रहा था तथा ११ तारीख को ही राज्य सभा के होने वाले चुनाव के लिए स्क्रूटिनी होनी थी, समाजवादी पार्टी के नेता, राज्य सभा के सदस्य, समाजवादी पार्टी के महासचिव, प्रवक्ता श्री अमर सिंह जैसे ही जहाज से उतरकर हवाई अड्डे से बहार निकल कर अपनी गाड़ी में बैठने लगे, तभी उनकी गर्दन पकड़कर उन्हें घूंसा मारकर बाहर निकाला गया। इसके साथ-साथ उनकी गाड़ी की चाबी भी छीन ली गई। दूसरे उम्मीदवार श्री अबू आजमी, जो कि उनके पीछे थे, उनको पकड़कर गिरफ्तार करके पता नहीं कहां ले जाया गया। बाद में उन्हें सात बजे छोड़ा गया। इन दोनों को अपनी स्क्रूटिनी में भी शामिल नहीं होने दिया गया। श्री भगवती सिंह, जिनको दिल की बीमारी है, उनका आपरेशन भी हुआ है। वे तीन बार मंत्री रह चुके हैं, वरिष्ठ नेता हैं तथा विधान परिषद के सदस्य हैं , उनको भी घसीट-घसीट कर मारा गया। श्री शीशपाल सिंह विधायक भी हैं, वे समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश शाखा के महामंत्री भी हैं, उनको खुले आम चौराहे पर घसीट कर पुलिस ने उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया। एक तरह से उत्तर प्रदेश के अंदर अघोषित इमर्जेंसी है। यह हालत वहां पैदा है। इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि हमारी केवल यही मांग है कि विधान सभा बुलाई जाये। अब भी तीन-चार दिन पहले राज्यपाल ने बयान दिया है कि समाजवादी पार्टी बहुमत सिद्ध करे। तो मुझे कहना पड़ा कि क्या हम उनके बैडरूम में बहुमत सिद्ध करें। अब यह तर्क देंगे कि सरकार से असंतुष्ट भाजपा विधायकों ने विदड्रा नहीं किया। है यहां गृह मंत्री जी या प्रधान मंत्री जी जवाब दे सकते हैं। प्रधान मंत्री जी से मैं निवेदन करूंगा कि जब वे जवाब दें तो उ. प्र सरकार और राज्यपाल के कारनामे देखकर दें। सुप्रीम कोर्ट ने एस.आर. बोम्मई केस में स्पष्ट कहा है, मैं वे सारी बातें नहीं कहना चाहता क्योंकि जब भ्रम पैदा हो जाये तो फिर अल्पमत या बहुमत का सवाल नहीं है। तत्काल विधान सभा बुलाकर उसमें बहुमत सिद्ध करना चाहिए जिससे भ्रम खत्म हो। यह बाकायदा सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय है। अब यह कहना कि बहुमत नहीं है,, आज भी बहुमत है, इतनी संख्या है, हमारे विधायकों ने विरोध प्रकट किया है, समर्थन वापिस नहीं लिया है लेकिन भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जब भ्रम की स्थिति पैदा हो तो उच्चतम न्यायालय का बाकायदा बोम्मई केस में स्पष्ट निर्णय है कि ऐसी परिस्थिति में बहुमत सिद्ध करने हेतु विधान सभा का सत्र तुरंत बुलाना चाहिये । उसी प्रकार इस वक्त उत्तर प्रदेश विधान सभा का सत्र बुलाकर इस भ्रम को दूर करना चाहिए, यह हमारी मांग है लेकिन इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
उपाध्यक्ष महोदय, जहां तक अपरीधाकरण की बात है हम कहते हैं कि कानून से अपराधीकरण नहीं रूकेगा। यदि ऐसा कोई कानून बनेगा, तो उसका दुरूपयोग निश्चित रूप से होगा।
अगर यह कानून बनेगा तो जितने अपराधी हैं, वे सब चुनाव लड़ेंगे और हम लोगों में से बहुत से चुनाव नहीं लड पायेंगे। यह मेरा आरोप है लेकिन प्रधान मंत्री जी जब जवाब दें तो इस को स्पष्ट करें। मैं सरकार को चुनौती नहीं दे रहा क्यों कि हम चुनौती कभी नहीं देते। पूवार्ंचल के पुलिस रिकार्ड में सबसे बड़ा माफिया उ. प्र. की वर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री है। अगर वह नहीं है और आप यह अपना जवाब देते समय सिद्ध कर दें तो हम आपकी सराहना करेंगे. आपकी तारीफ करेंगे। इसके अतरिक्त आपके तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने एक मंत्री को हटाया था ,उसके घर से व्यापारी का अपत पुत्र मिला था।
उस मंत्री को श्री राजनाथ सिंह ने तत्काल बरखास्त किया, मुकदमा दर्ज किया और जेल भेजा।…( व्यवधान)अपहरण करेंगे खुद और कहेंगे कि विधायकों का अपहरण हुआ। ललितपुर में क्या-क्या हो रहा है, पता लगा लीजिए। ऐसे लोग आज मंत्री हैं। इस सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के जितने नेता थे, विधायक थे, जो अच्छे लोग थे, जो जीवन में कुछ लक्ष्य रख कर चले थे, उन्होंने विरोध किया। जब उन्होंने विरोध किया तो सरकार अल्पमत में आ गई। फिर आप उन्हें जेल भेज रहे हैं। आज यह हालत है। अब यहां तक स्थिति है कि २६ नवम्बर, मुख्य मंत्री मायावती ने कहा कि राजा भैया माफी मांगे, प्रायश्चित करें और बसपा की लाइन पर चलने का वायदा करें तो उनको अपनाने के मामले में सोचा जा सकता है। यह क्या है ? …( व्यवधान)राजा भैया एक बडे राजपरिवार से संबंध रखते है। उनके पिता जो ७२ वर्ष की उम्र के हैं, उनका क्या दोष था। उनके घर में छापा क्यों मारा गया। पुलिस ने उनको कैसे खदेड़ा ? वे पीछे के दरवाजे से निकले। उनकी गिरफ्तारी हेतु भी दस हजार रुपये का इनाम है जो गिरफ्तारी करवा दे या पकड़ कर दिखा दे। आज यह हालत है। यही नहीं, क्या प्रधान मंत्री जी व उप प्रधान मंत्री जी को पता नहीं है। उप प्रधान मंत्री जी आप गृह मंत्री भी हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता ब्रहमदत्त द्विवेदी की हत्या का मुख्य अभियुक्त जो अब विधायक है. आज उसे एक दर्जन से अधिक सुरक्षा कर्मी प्राप्त हैं तथा आज उसे स्टेट मनिस्टर का दर्जा दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी किस निम्न स्तर पर पहुंची है। अपने नेता के हत्यारे को किस तरह से बाकायदा सम्मानित किया गया है। आज यह हालत है तो आप खुद सोचें। इसलिए हम सदन से कहना चाहते हैं यह केवल समाजवादी पार्टी के लिये ही स्थिति नहीं है बल्कि यह स्थिति सबके साथ आ सकती है। आज जिस तरह पुलिस बल को जन-प्रतनधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्यपाल जी कहते हैं कि बहुमत सिद्ध करो। बहुमत तो सिद्ध हो गया। भले ही विधान परिषद का चुनाव था। विधान परिषद के चुनाव में जितने छापे मारे जा सकते हैं। श्री नंद किशोर रूंगटा की हत्या के मुल्जिम पर जितने मुकदमे थे, वोट की खातिर, समर्थन की खातिर, बहुमत बनाने की खातिर सभी केस वापस लिए जा रहे हैं। बीजेपी अपराधीकरण के खिलाफ बोलती है, लेकिन हमने तो फैसला किया है कि अपराधी छवि के किसी आदमी को टिकट नहीं देंगे और न हमने दिया। मुझे फख्र है कि एक भी टिकट अपराधी छवि वाले व्यक्ति को नहीं दिया। और आपके सामने ही देखिये, आपकी पार्टी की दुर्दशा तो होगी ही। हम भी चुप रहें, तब भी नहीं रूकेगी। हिन्दुस्तान की आम जनता इतनी चतुर एवं जागरूक है कि इमरजेंसी में हम परिणाम देख चुके हैं । अमेरिका की एक मैगजीन ने लिखा था कि भारत की जनता गरीब हैं, निरक्षर हैं, लेकिन भारत के निरक्षर, अशक्षित और गरीब लोग प्रजातंत्र का निर्णय लेना जानते हैं। तब भी सही वक्त पर निर्णय लिया था, अब भी सही वक्त पर निर्णय लिया जायेगा, जनता लेगी, चाहे जितने गठबन्धन आप बना लें। चाहे जितने ऐरे-गैरे अपराधियों को इकट्ठा करके, आतंकित करके आप सरकार चलायें। सरकार चलाना अलग बात है, वह सहज होता है, हम जानते हैं कि सरकार के कितने लम्बे हाथ होते हैं। आज जिस तरह से सच्ची बात कहने वाले विधायकों का दमन सरकार में हो रहा है, संवैधानिक अधिकार छीने गये हैं और मनगढ़न्त फर्जी मुकदमे उन पर लगाये जा रहे हैं, यह हालत उ.प्र. में है। यह सब आंख मूंदकर राज्यपाल जी देख ही नहीं रहे, बल्कि उनका समर्थन भी कर रहे हैं। नेता विपक्ष मौ. आजम खां जो उ.प्र. में नेता विरोधी दल के हैं, उन्हें कैबिनेट का दर्जा प्राप्त है। उन्हें तकिया और चादरा वैसे ही मिल जायेगा। उन्हें पता ही नहीं चला, उन्हें तब पता चला, जब तीसरे दिन टी.वी. पर आ गया, तब पता चला कि मेरे खिलाफ मुकदमा है। मौ. आजम खां, नेता विरोधी दल, विधान सभा, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता हैं। ये राज्य सभा के मैम्बर थे, अब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। उन्हें तकिया और चादरा नहीं दिया, इसलिए इन्होंने झगड़ा कर दिया।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please take it seriously. Do not laugh like this.
श्री मुलायम सिंह यादव :उपाध्यक्ष महोदय, आप देखें। हम तो यह कहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी के जिन विधायकों ने सरकार के विरोध में अपनी आवाज बुलन्द की है, उन्होंने देश की सेवा की है। उ. प्र. सरकार द्वारा खुल्लम-खुल्ला इस तरह का भ्रष्टाचार किया जा रहा है, अरबों रुपये का दुरुपयोग हो रहा है। आप भी हमें धिक्कारने चले गये और उप प्रधानमंत्री जी भी हमें धिक्कारने लखनऊ चले गये, जबकि उन दिनं हम तो विदेश (पोलैंड) में थे। यह सच है कि नाम पढ़कर हमने सोचा था कि आप लोग हमें धिक्कारने नहीं जाएंगे, क्योंकि हम जानते थे कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर का हमने कितना सम्मान किया है, आज उत्तर प्रदेश में जो डॉ. अम्बेडकर गांव है, हमने ही चिन्हित किये थे। तब बी.एस.पी. का नामोनिशान नहीं था, १९९० में इसे हमने ही चलाया था। हमारी सरकार ने ही सारा बजट का प्रावधान किया था। हमने ही उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने इतना बड़ा बंगला देकर उनकी मूर्ति भी लगवाई और उनके विचारों को फैलाने के लिए पुस्तकालय खोला तथा आर्थिक सहायता दी थी। हमने पं. नारायण दत्त तिवारी जी के कार्यकाल में अम्बेडकर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास कराया था। हमने ही जा जाकर, धूप में खड़े होकर काम करने का काम किया था। उसमें आम जनता के लिए, आम लोगों के लिए और पिछड़ों के लिए जो संशोधन करना था, उसमें हमने संशोधन करने का प्रयास किया था।
हमारी आपत्ति इतनी ही है, मैंने कहा कि ये जो अरबों रुपये पार्क के नाम पर खर्च हो रहे हैं, उसके स्थान पर अम्बेडकर साहब के नाम से कोष खोला जाये और बजट में २०-२५ करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष प्रावधान कर दिया जाये, ताकि जो गरीब बच्चे हैं, उससे उनकी पढ़ाई-लिखाई का इन्तजाम किया जाये। गरीब मेधावी विधार्थी जो विदेश नहीं जा सकते तो उन्हें आर्थिक सहायता देकर विदेश भेजा जाये। हमने यह भी कहा कि शानो- शौकत और फिजूलखर्ची के लिए तमाम ऐसे ३४ गैस्ट हाउस बन रहे हैं, जहां गरीब और दलित नहीं रह सकते।, इसे रोका जाना चाहिये। एक लाख करोड़ रुपये का कर्जा उत्तर प्रदेश के खजाने पर है। एक लाख करोड़ रुपया। सड़कें टूटी पड़ी हैं। हमने टूटी सडकों की मरम्मत के बारे कहा तो पी डब्ल्यू डी मंत्री कहते हैं कि मेरे पास मरम्मत के लिए पैसा नहीं है। यह हालत है। अब पैसा केवल पार्कों के लिए ही है। परिवर्तन चौक पहले बना, फिर तोड़ा और फिर रुपया खर्च हो रहा है। उसके बाद धिक्कार रैली हुई। धिक्कार रैली समाजवादी पार्टी के खिलाफ नहीं है बल्कि मुलायम सिंह यादव के खिलाफ धिक्कार रैली है आयोजित की है। धिक्कार रैली में भाग लेने कौन गये ? उपप्रधान मंत्री गये। माननीय प्रधानमंत्री जी आपके वरिष्ठ साथी हैं, वरिष्ठ मंत्री हैं। उन्होंने अम्बेडकर साहब के खिलाफ एक किताब लिखी है। हमने पढ़ी है। जब उसका विमोचन हुआ था तब बीजेपी के वरिष्ठ नेता उसमें शामिल हुए थे। शायद आप शामिल नहीं हुए थे। उसमें लिखा है डा. भीमराव अम्बेडकर अंग्रेजों के दलाल थे। गांधी जी को गाली देने के लिए, उच्च जाति को गाली देने के लिए अंग्रेजों से प्रतिमाह लाखों रुपये लेते थे। वह आजादी के खिलाफ थे, वह गांधी जी के खिलाफ थे और उस किताब का नाम है-- "झूठे भगवान की पूजा " और धिक्कार हमें करने गये। धिक्कार किसको करना चाहिए था? धिक्कार मुख्य मंत्री को करना चाहिए था। अब जिन्होंने लिखा है, वर्तमान में मंत्री हैं, वरिष्ठ मंत्री हैं। आपके साथी हैं, आपके प्रिय हैं और आपने सोचा ही नहीं कि मुलायम सिंह को धिक्कार करने चले गये। आपसे उम्मीद नहीं थी, कोई और जा सकता था। माननीय विनय कटियार जा सकते थे। कोई बात नहीं है, वह उ. प्र. भाजपा के अध्यक्ष थे। कभी-कभी हम छोटा भाई भी उनको कह देते हैं। लेकिन डिप्टी पी.एम. साहब गए। जो आज पी.एम. हैं। आज पूरी नौकरशाही जिनके हाथों में है, बीजेपी का संगठन उनके हाथों में है। सब कुछ आप ही हैं और आप ही हमें गाली देने के लिए चले गए। गाली दी गई, इसके टेप उपलब्ध हैं। कभी मिलेंगे तो पी.एम. जी से कहेंगे कि गाली आप भी मेरे बारे में ऐसी सुनते रहे। विदेश में भी चला गया। वह बताया नहीं जा सकता है। वह अलग चीज है लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि उ.प्र. की यह असंवैधानिक सरकार है और उ. प्र. के राज्यपाल जी का आचरण संविधान विरोधी है। आज राज्यपाल जी प्रवक्ता बने हुए हैं, सरकार के पहरेदार बने हुए हैं, सरकार बचाने में लगे हुए हैं। इसलिए केवल मांग की गई है कि विधान सभा बुलाई जाए । विधान परिषद चुनाव में भाजपा - बासपा समर्थित प्रत्याशी को १९४ वोट मिले। राजनाथ सिंह जी ने इस्तीफा दे दिया तो सिर्फ १९३ बचे। १८३ वोट उ. प्र, गठबंधन की सरकार के खिलाफ मिले। २३ वोट कांग्रेस पार्टी ने नहीं डाले। उन्होनें बहिष्कार किया। एक विधायक अपना दल के एक विधायक अतीक अहमद जेल में होने की वजह से वोट नहीं डाल पाए। २४ वोट यदि शामिल किये जायें तो कुल २०७ वोट हुए और हम पूछना चाहते हैं कि किस आधार पर इसे बहुमत कहेंगे?आप अगर यह कहें कि १२ विधायकों ने समर्थन विदड्रॉ नहीं किया तो हम कहना चाहते हैं कि बोम्मई केस में सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय को याद कीजिये जिसमें स्पष्ट है कि जब सरकार के बारे में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो सरकार को तुरंत विधान सभा में जाकर भ्रम खत्म कर लेना चाहिए और अपना बहुमत विधान सभा में सिद्ध करना चाहिए और इसीलिए हमने आपके सामने पूर्ण तथ्य रखा है कि वहां संविधान विरोधी काम हो रहा है। इस संविधान विरोधी काम से लोकतंत्र को एक बहुत बड़ा खतरा है। जनप्रतनधियों की आगे क्या स्थिति होगी, इस पर भी आपको गंभीरता से विचार करना होगा और आज जिस तरह से सरकारी खजाने की लूट हो रही है, सरकार ने आंख मूंदी हुई है जबकि राज्यपाल जी का काम सरकार को निर्देश देना और गलत कामों को करने से रोकने के लिए प्रयास करना होता है। उन्हें मुख्यमंत्री को बुलाना चाहिये था।हम भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राज्यपाल को कभी भ्रम होता था तो हमें बुला लेते थे और उनको संतुष्ट करके उनके भ्रम को हम दूर कर देते थे या उनकी जो सही राय होती थी उसको हम मानते थे। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में धन की जो लूट हो रही है और उत्तर प्रदेश पिछड़ रहा है। हमें लगता है कि आज बिहार से भी पीछे आप उत्तर प्रदेश को कर देंगे। माननीय उप-प्रधान मंत्री जी, अगर उत्तर प्रदेश बिहार से दो-तीन साल बाद पीछे हो जाएगा तो उसकी सारी जिम्मेदारी आपकी होगी क्योंकि आपकी सहमति के बिना उत्तर प्रदेश की आपकी भारतीय जनता पार्टी में पत्ता भी नहीं हिल सकता। वहां पर आप ही सब कुछ हैं। कुछ बातों को लेकर हम आपका आदर करते हैं इसलिए कोई ऐसी बात नहीं कहना चाहते हैं। इसलिए. उप-प्रधान मंत्री जी, हमारा आपसे आग्रह है कि दलीय की भावना से ऊपर उठकर संसदीय दल की एक कमेटी बनाई जाए और राज्यपाल को तत्काल वहां से हटाया जाए। हमारा यह भी आग्रह है कि वहां विधान सभा आमंत्रित की जाए और जो आज उत्तर प्रदेश के अंदर भ्रम की स्थिति है उसको दूर किया जाए। अगर सरकार का बहुमत सिद्ध होता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन आप तत्काल विधान सभा बुलाइये। माननीय उप-प्रधान मंत्री जी, आप गृह मंत्री जी भी हैं और अगर आप राज्यपाल के पद की गरिमा चाहते हैं तो ऐसे राज्यपाल को तत्काल आप बर्खास्त कीजिए, उनको वापस बुलाइये। उपाध्यक्ष महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूं।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी (जौनपुर):माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं पहले तो आपका आभार प्रकट करता हूं कि उत्तर प्रदेश की राजनैतिक स्थिति पर इस चर्चा में मुझे भी अवसर दिया। मैं उत्तर प्रदेश का जो वर्तमान घटनाक्रम है, उस पर माननीय मुलायम सिंह जी को, जो इस सदन के सम्माननीय नेता है और उत्तर प्रदेश में दो बार मुख्यमंत्री भी रहे हैं को धैर्यपूर्वक सुना है और मुझे उम्मीद हे कि वे और उनके दल के लोग भी मुझे धैर्य से सुनेंगे। उत्तर प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता का दौर वर्ष १९८९ से शुरू हुआ। इसकी शुरूआत भी माननीय मुलायम सिंह जी के मुख्यमंत्रित्वकाल से ही शुरु हुई। आप ५ दिसम्बर सन १९८९ को पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें थे और संयोग से उस सरकार का समर्थन हमारा दल भी कर रहा था।
श्री मुलायम सिंह यादव : नहीं। हमने लोक सभा में जरूर समझौता कर लिया था लेकिन विधान सभा में कोई समझौता नहीं था। हमने उत्तर प्रदेश की विधान सभा में कहा था कि न मैंने समर्थन आपका मांगा है और न हमें समर्थन चाहिए। हमारे पास उस वक्त भी आपको निकाल कर मय निर्दलीयों के २५७ सीटों का बहुमत था।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : इनके स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि हमने तो समर्थन दिया था लेकिन इन्होंने ही स्वीकार नहीं किया था। बात इतनी ही है। हम साथ-साथ चुनाव लड़े थे, इसलिए उम्मीद थी कि चुनाव लड़ने के बाद भी साथ रहेंगे। लेकिन ये चुनाव लड़ते किसी के साथ हैं, रहते किसी के साथ हैं। इसलिए आपनी आदतों के मुताबिक इन्होंने उस समय हमें छोड़ दिया था, इंकार कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि इनका कार्यकाल डेढ़ वर्ष ही रहा। उसके बाद वह सरकार चली गयी। उसके बाद फिर चुनाव हुआ और चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया, माननीय कल्याण सिंह जी मुख्यमंत्री बने। डेढ़ वर्ष से कुछ ज्यादा वह सरकार चली और अयोध्या के प्रकरण में वह सरकार बर्खास्त हुई। उसके बाद वहां राष्ट्रपति शासन रहा और फिर जो चुनाव हुआ उसमें जिनसे आज ये बहुत नाराज हैं उन्हीं के समर्थन से दूसरी बार फिर इनके पांव में हल्दी लगी और ये मुख्यमंत्री बने।
महोदय, डेढ़ साल से फिर आगे वह सरकार नहीं चल पायी। डेढ़ साल में वह परिवार बिखर गया, समझौता बिखर गया और उस सरकार का अंत बहुत दुखद हुआ। उसमें कई कारनामे हुए। उसमें रामपुर तिराहा का धिनौना कांड भी हुआ। उसके बाद सुश्री मायावती जो आज मुख्यमंत्री हैं, उनके साथ क्या बीता वह सदन में कई बार दोहराया जा चुका है। उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। इस आदत को यह पार्टी अब भी बरकरार रखे है। इन्होंने इसमें अभी कोई सुधार नहीं किया है। उस दलित महिला के ऊपर जो हमला हुआ, उसे सारा देश जानता है लेकिन यहां एक दलित मुस्लिम सांसद भी नहीं बचा उसके ऊपर भी हमला हुआ, सदन में हमला हुआ। उसके साक्षी हम सभी लोग हैं और वह भी दलित अल्पसंख्यक था, जिस पर हमला हुआ।
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : आप दलित अल्पसंख्यक को स्वीकार कर रहे हैं।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : अखिलेश जी. यही मुश्किल है कि आप सुनते नहीं हैं। हमारी बात सुना करो।
उपाध्यक्ष महोदय: आप उनको मत सुनाइए। इधर सुनाइए।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : अभी मुलायम सिंह जी ने ब्रहमदत्त द्विवेदी जी के प्रति बड़ी सहानूभूति व्यक्त की। यह वही ब्रहमदत्त द्विवेदी हैं जिन्होंने मायावती जी की उस समय रक्षा की थी, बचाव किया था।
उपाध्यक्ष महोदय, १३ बरसों में १४ बार उत्तर प्रदेश में सरकारें हिलीं और व्यवस्था परिवर्तन हुआ। कभी यह मुख्यमंत्री और कभी वह मुख्यमंत्री बना। कुछ गिने-चुने घूम-फिर कर मुख्यमंत्री बनते रहे। कुछ एक-आध नए लोग भी आ गए। एक स्थिति ऐसी आई जिस की कल्पना संविधान निर्मताओं ने भी नहीं की थी। उन्होंने सोचा था कि ६ महीने का राष्ट्रपति शासन होता होगा। उसके अलावा ६ महीने और बढ़ाया जा सकता है लेकिन एक साल से ज्यादा वह अवधि बढ़ गई और एक संवैधानिक संकट पैदा हो गया। इन्हीं १३ बरसों में एक घटना हुई। एक घटना और मजेदार हुई। एक बार विधान सभा में दो मुख्यमंत्री साथ-साथ बैठे। कौन असली मुख्यमंत्री है यह सदन पर छोड़ दिया गया। खैर, सदन ने तय कर दिया था कि कौन मुख्यमंत्री है? वह बेचारे जो दो-ढ़ाई दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे, वह अपने को पूर्व मुख्यमंत्री कहलवाने के लिए कोर्ट की तरफ दौड़ रहे हैं लेकिन कोई सुन नहीं रहा है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री थे या नहीं? मेरे कहने का एक ही आशय है कि इन १३ बरसों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को सड़कों का खेल बना दिया गया, सब्जी मंडी का खेल बना दिया गया और राजनीतिक अस्थिरता उत्तर प्रदेश का स्थायी सत्य बन गया। माननीय मुलायम सिंह जी जो कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश बिहार से भी पीछे चला जाएगा, इनसे भी पीछे चला जाएगा, वह सच कहते हैं। जब राजनीतिक अस्थिरता होती है, तब उसकी कीमत नेताओं को नहीं चुकानी पड़ती हैं। उसकी कीमत मुख्यमंत्री और मंत्री बनने वालों की नहीं चुकानी पड़ती है। उसकी कीमत उस आदमी को चुकानी पड़ती है जो रोज अपनी मजदूरी कमाता है और खाता है। अगर एक दिन की उसे मजदूरी नहीं मिलती है तो वह भूखा मरता है। उत्तर प्रदेश की स्थिति और जिन सड़कों का रोना माननीय मुलायम सिंह जी रो रहे हैं, उन सड़कों की स्थिति अगर आज ऐसी बनी है तो उसके पीछे केवल एक ही कारण था और वह राजनीतिक अस्थिरता है। इस देश का यह इतिहास रहा है कि मिली-जुली सरकारों को चलने नहीं दिया गया। ऐसी सरकारों को हमेशा हिलाने और गिराने की कोशिश की गई। मैं तो कहता हूं कि एक पक्ष यह बैठा है और एक पक्ष वह बैठा है। सरकार गिराने में दोनों की सहमति हो जाती है। एक वोट से यहां केन्द्र की एक सरकार भी गिर गई थी उस समय दोनों मिल गए थे। यही उम्मीद इस बार माननीय मुलायम सिंह जी को भी थी। उन्होंने सोचा कि पिछली बार दिल्ली की सरकार गिराने में हमने इनकी मदद की थी, उत्तरप्रदेश की सरकार गिराने में यह हमारी मदद करेंगे लेकिन चूंकि सरकार गिरा कर लाभ नहीं हुआ इसलिए उनको समझदारी आई और उन्होंने इनका साथ नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि न सरकार बनाने में इनकी मंशा पूरी हुई। राज्यपाल को दोष देने का मतलब मेरी समझ में नहीं आता कि कि राज्यपाल को दोष क्यों दिया जा रहा है?
अगर बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल महोदय को श्री मुलायम सिंह यादव को आमंत्रित करना था तो उसी तरह बड़ी पार्टी होने के नाते माननीय़ कल्याण सिंह जी को तत्कालीन राज्यपाल श्री रोमेश भंडारी को आमंत्रित करना था लेकिन उस समय यह नीति अपनाई नहीं गई। श्री मुलायम सिंह जी उनके बड़े अच्छे सलाहकार थे, उनके करीब थे। तब श्री कल्याण सिंह जी को बुला लेते। उसके पश्चात् जो निर्धारित मानदंड थे, उनके अनुसार महामहिम राज्यपाल के सामने संख्या देनी पड़ी और वह संख्या देने के बाद विधानसभा की बैठक बुलाई गई, जहां बहुमत सिद्ध हुआ।
उपाध्यक्ष महोदय, 1996के चुनाव के बाद छ : महीने तक उत्तर प्रदेश में कोई सरकार नहीं थी। विधायक चुने हुये थे लेकिन शपथ नहीं ले पाये थे। उनकी स्थिति कुछ ऐसी थी जैसे मंगनी तो हो गई लेकिन सगाई नहीं हो पाई । सब लोग लगभग छ : महीने तक डिलेमा में रहे। कोई भी उन्हें विधायक मानने को तैयार नहीं था। यह परिस्थिति किस ने पैदा की, क्या तब संवैधानिक संकट नहीं आया था? तब राज्यपाल महोदय की गरिमा कायम थी और आज वही गरिमा खतरे में पड़ गई है।
किस के घर में कौन रहता है, यह राज्यपाल बनने के लिये योग्यता अथना अयोग्यता नहीं होती। हम जानते हैं कि एक ही घर में से तमाम लोग निकलते हैं, कोई पार्टी का नेता बनकर निकलता है, कोई पार्टी का महामंत्री बनता है, कोई भावी मुख्यमंत्री या भावी उत्तराधिकारी बनकर निकलता है। अगर एक हीं घर से राज्यपाल और विधानमंडल का नेता निकला तो सांवैधानिक संकट पेदा नहीं हुआ। मैं कहना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महामहिम श्री विष्णुकांत शास्त्री न केवल राजनैतिक जीवन में, न केवल सांवैधानिक पद पर बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन में उनकी पवित्रता पर कोई आंच आ सकती है, ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता। उनका जीवन प्रामाणिक है। शायद ही उस आदमी ने कभी झूठ बोला हो।
उपाध्यक्ष महोदय, सुश्री मायावती के साथ २१७ विधायक थे जिन्होंने विधानसभा में उनके पक्ष में मतदान किया था। उन में से केवल सात विधायकों ने इस्तीफा दिया है। आज भी २१० विधायकों की संख्या दिखाई दे रही है। माननीय मुलायम सिंह जी से २०४ की संख्या मांगी गई थी। लेकिन उस संख्या तक वह नहीं पहुंच पाये। इसी बीच विधान परिषद् के चुनाव की बात आ गई। मैं उनसे कहना चाहूंगा कि यदि आपके पक्ष में २०४ विधायक आये होते तो निश्चित रूप से माननीय राज्यपाल महोदय ने इनकी बात को गंभीरता से लिया होता, लेकिन इनकी संख्या १८३ पर आकर ठहर गई, आगे नहीं बढ़ पायी। अगर विधान परिषद् के चुनाव में कांग्रेस इनका समर्थन नहीं कर रही थी और विधान सभा में इनको समर्थन देगी, यह गलतफहमी इन्होंने कहां से पाल ली? इन्होंने स्वयं लखनऊ में कहा है कि अगर कांग्रेस साथ दे तो २४ घंटे के अंदर हमारी सरकार बनसकती है। इनका तो यह कहना था कि हम कांग्रेस की वजह से हार कर जा रहे हैं और अब सरकार गिराने की कोशिश नहीं करेंगे। अखबारों ने असंतुष्ट विधायकों के बारे में लिखा है कि क्या ये लोग लोकतंत्र के लिये या लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिये राज्यपाल महोदय से मिलने गये थे,- किस लिये गये थे? ये सब बातें अखबार कह रहे हैं, मैं नहीं कह रहा हूं। असंतोष तो भाजपा में हो या राष्ट्रीय लोक दल में हो अथवा निर्दलीय विधायकों के छोड़ देने से हो, इस सबका कारण पदलिप्सा है। आम जनता इस बात को अच्छी तरह से समझ रही है कि असली कारण लाल बत्ती की भूख है, जिसे पाने के लिये यह दुराचरण किया गया है। मैं निवेदन करूंगा कि मिली-जुली सरकारें चलती हैं। बंगाल और केरल के लोगों को धन्यवाद देना चाहूंगा और विशेषकर दादा सोमनाथ जी को धन्यवाद दूंगा क्योकि वे अपने बंगाल में मिली-जुली सरकार चला रहे हैं। लेकिन मिली-जुली सरकारें चलती हैं उसमें जरूरत के मुताबिक जिम्मेदारी बंट जाती है। यह प्रधानमंत्री और मुख्य मंत्री का अधिकार क्षेत्र है कि कौन मंत्री बनाया जाये। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश में मंत्री बनाने या बनने के लिये जो स्थिति निर्मित हो रही है, वह अच्छी नहीं है। उस समय श्री राजनाथ सिंह के लिये माननीय मुलायम सिंह जी ने कहा था कि यह जुम्बो मंत्रिमंडल है, सभी मंत्री बना दिये गये हैं।
उस बड़े मंत्रिमंडल की आलोचना हुई थी। इस सरकार में माननीय प्रधान मंत्री जी ने सुश्री मायावती से अपेक्षा की थी कि कोई बड़ा मंत्रिमंडल नहीं होना चाहिए। प्रदेश की राजनैतिक परिस्थिति और आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक संतुलित मंत्रिमंडल होना चाहिए। मंत्रिंमंडल में जो लोग नहीं आये, उनके असंतोष को भड़काना कोई अच्छी बात नहीं थी। किसी की भी बारी आ सकती है, इसलिए इस खेल में हाथ डालना उचित नहीं था। माननीय मुलायम सिंह यादव जी जैसे एक राष्ट्रीय नेता की सोच उदार होनी चाहिए जब कभी कहीं आंतरिक राजनीतिक संकट उत्पन्न हो तो उसमें हाथ डालना या घुस करके उस खेल को सड़क पर लाने की कोशिश उनके सम्मान, मर्यादा और स्टेटस के विरुद्ध है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। श्री अमर सिंह जी ने वहां जाकर बाकायदा कैम्प किया और भाजपा के विधायकों के बीच में गये। क्या यही नैतिकता है कि हम एक-दूसरे का घर तोड़ें, घर में घुसकर फूट डालें। ये सब अच्छी चीजें नहीं हैं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि ये सब अच्छा नहीं हो रहा है। मैं आज भी दावे के साथ कह सकता हूं कि जब भी विधान मंडल दल की बैठक होगी तो उसमें माननीय मुलायम सिंह यादव जी का जो कहना है, उसमें मुझे संदेह है। मायावती जी फिर बहुमत प्राप्त करेंगी। उनके बहुमत प्राप्त करने में हमें कोई संदेह नहीं है।…( व्यवधान)मैं निवेदन कर रहा हूं कि उत्तर प्रदेश आर्थिक द्ृष्टि से पिछड़ रहा है, जहन्नुम में जा रहा है, यह आरोप लगाये गये हैं। छ: महीने के अंदर उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने जो अचीवमैन्ट्स हासिल किये हैं, मैं थोड़ी सी उनकी चर्चा करना चाहता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं फाइनैन्स की बात करता हूं। चालू वित्तीय वर्ष की छमाही में ३० सितम्बर तक मुख्य राजस्व प्राप्तियों में १७.४ प्रतिशत की वृद्धि हुई। पर्यटन राजस्व में चालू वित्तीय वर्ष के छ: महीनों में १२.४ प्रतिशत की वृद्धि हुई। ३० सितम्बर तक ६२८.४३ करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि ठीक इसके पहले पिछले साल में यह राजस्व ५५९ करोड़ रुपये थे। स्टाम्प विभाग में गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष की प्रथम छमाही में २२१ करोड़ रुपये अधिक की राजस्व की वसूली हुई। इसी तरह से समेकित नधि में घाटा कम हुआ। यह घाटा १८६८.६३ करोड़ रुपये कम हुआ। ग्रामीण विकास पर माननीया मायावती जी ने २१३२.२४ करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई। प्रदेश में राष्ट्रीय बचत योजनाओं के माध्यम से ३१ अगस्त तक १८०३.५५ करोड़ रुपये छ: महीने में आये। जबकि पिछले वर्ष इन्हीं छ: महीनों में केवल १८२.८९ करोड़ रुपये आये थे। …( व्यवधान)किसी की सरकार रही हो, टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं है। उत्तरोत्तर विकास होता है और हम उत्तरोत्तर विकास की बात कर रहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा हम आगे बढ़े हैं। इसी तरह ३० सितम्बर तक व्यापार कर से ३२०३.८२ करोड़ की प्राप्ति हुई। जबकि पिछली इसी छमाही में ३५४ करोड़ रुपये प्राप्त हुई थे। मैं औद्योगिक विकास की बात करना चाहता हूं। वर्ष २००२ के मध्य में ४५१ करोड़ रुपये के ९९ उद्योग स्थापना संबंधी प्रस्ताव दाखिल किये गये। फलस्वरूप ११ हजार लोगों को इसके माध्यम से काम देने का अवसर मिला। प्राप्त प्रस्तावों में ४४९ करोड़ रुपये के ९८ उद्यम के इच्छा पत्र और दो करोड़ रुपये का आशय पत्र भी शामिल किया गया। दसवीं पंचवर्षीय योजना में उद्योग क्षेत्र में १२.३६ प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मैं कहना चाहूँगा कि गौतम बुद्ध की अहिंसा को इस देश ने स्वीकार किया था - अहिंसा परमोधर्म:। गौतम बुद्ध के धर्मचक्र से चक्र प्राप्त करके ये चक्र स्थापित हुए थे लेकिन महात्मा बुद्ध को हमने अपने देश में जो सम्मान देना चाहिए था, अब तक नहीं दे पाए लेकिन सुश्री मायावती जी ने तीन अरब रुपये की लागत से नौएडा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना करके उस अहिंसा के पुजारी को, अहिंसा के संस्थापक को जो श्रद्धांजलि दी है, उसकी कोई मिसाल नहीं है।
निर्यात क्षेत्र में १० करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली इकाइयों को विशेष छूट दी गई है। ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले छ: महीने में २७६०.४३ करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई। इसी तरह से गांवों में विद्युत आपूर्ति ८ घंटे सुनिश्चित करने के लिए जो व्यवस्था की गई है उसका अनुपालन हो रहा है। मैं निवेदन करना चाहूँगा विद्युत उत्पादन मई से अगस्त के बीच में ७२३८.६८ मलियन यूनिट का रिकार्ड उत्पादन बिजली का हुआ है। पारिच्छा में ४२० मैगावाट विद्युत उत्पादन केन्द्र निर्मित हुआ। इसी तरह से विश्व बैंक के सहयोग से सिंचाई सुविधाओं को सुद्ृढ़ करने के लिए काम किया गया। मैं ज्यादा बात नहीं बढ़ाना चाहता हूँ लेकिन यह ज़रूर निवेदन करना चाहता हूँ कि आज शिक्षा के क्षेत्र में जहां विद्यालयों की मान्यता के लिए १७०० प्रकरण लंबित पड़े थे, उनको निस्तारित किया। इसी तरह से २० प्रतिशत से कम परीक्षाफल देने वाले १७४७ विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आपके यहां पढ़ाई ठीक क्यों नहीं हो रही है। …( व्यवधान)
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, I am on a point of order. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, he is not yielding.
… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I am on a point of order.
… (Interruptions)
श्री शीशराम सिंह रवि (बिजनौर):एक दलित की प्रशंसा नहीं सुनी जा रही है? …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Chinmayanand Swami, he is on a point of order.
… (Interruptions)
श्री बसुदेव आचार्य : हमारा पॉइंट ऑफ ऑर्डर यह है कि जब कभी कोई सदस्य किसी किताब या डॉक्यूमेंट से कुछ पढ़ेगा तो वह किस किताब से पढ़ रहा है वह बताना चाहिए, किस किताब से वह क्वोट कर रहे हैं वह बताना चाहिए।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : उपाध्यक्ष जी, मैं भाषण नहीं दे रहा हूँ और पुस्तक से उद्धरण देने का अधिकार हमें है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Chinmayanand Swami, please mention the Book’s name.
… (Interruptions)
श्री चिन्मयानन्द स्वामी :इस पुस्तक का नाम है - ‘उत्तर प्रदेश प्रगति एवं समृद्धि के छ: माह - सूचना एवं प्रसारण विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ।’इसको मैं उद्धृत कर रहा हूँ।
प्रदेश के गन्ना क्षेत्र में ५३ प्रतिशत की वृद्धि हुई और पिछले सत्र की पेराई में कुल ५२.४९ लाख हुई और सभी गन्ना किसानों के एक-एक पैसे का भुगतान किया गया कुछ को छोड़कर। इन्हीं शब्दों के साथ मैं सड़कों के बारे में कुछ निवेदन करके अपनी बात समाप्त करना चाहूँगा।…( व्यवधान)आज प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना में प्रदेश का प्रत्येक गांव पक्की सडक से जुड रहा है।
मैं दो बातें और कहकर समाप्त करना चाहता हूँ। उत्पीड़न की बात रह गई है। उत्पीड़न को अगर किसी ने ठीक से समझा है तो हम लोगों ने १९८९ में जब इनकी सरकार बनी थी ।
17.00 hrs. मैं स्वयं जेल में था। मैं पूछना चाहता हूं कि मैंने क्या किया था जिसके कारण आपने मुझे जेल में डाला था और महीनों जेल में रखा था। मेरा क्या अपराध था। मैं कहना चाहता हूँ कि १९८९ में इस देश का कोई शंकराचार्य बाकी नहीं बचा था जो जेल में न गया हो, इस देश का कोई महामंडलेश्वर बाकी नहीं बचा था जो जेल में न गया हो। राजा भैया या जिनके साथ जो कुछ हो रहा है, वह कानून के विपरीत अगर हो रहा है तो वह गलत है, निन्दनीय है, नहीं होना चाहिए। ऐसी स्थिति में जहां तक अपराधीकरण का सवाल है, सभी जानते हैं कि उमाकान्त यादव ने शाहगंज स्टेशन पर गोली चलाकर लोगों को भून दिया था। वे यदि सबसे पहले विधायक बने, तो वे आपकी पार्टी के टिकट पर बने थे। …( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह: मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि उमाकान्त जी समाजवादी पार्टी से विधायक नहीं बने।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठिए। वे यील्ड नहीं कर रहे हैं।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : माननीय डी.पी.यादव उस समय १९८९ में आपकी सरकार में मंत्री रहे हैं। पहली बार अपराधियों को मंत्री बनाया, सांसद बनाया, तो आपने बनाया। राजनीति में यदि अपराधीकरण हुआ, तो उसका श्रीगणेण समाजवादी पार्टी ने किया। इसलिए यदि प्रदेश का अपराधीकरण रोकना है, तो मायावती के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है, उसे चलाना होगा अन्यथा जब भी नेतृत्व उनके हाथों में जाएगा, तो यहां संसद में भी लोग सुरक्षित नहीं रहेंगे। इससे अधिक मुझे कुछ नहीं कहना है।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने नियम १९३ में चर्चा पर मुझे बोलना का अवसर प्रदान किया। उत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा प्रदेश है, जहां देश की सबसे ज्यादा आबादी रहती है। जो प्रदेश हमारे युगनिर्माता पं.जवाहर लाल नेहरू का जन्मस्थान है, जो प्रदेश हमारे देश की महान नेता श्रीमती इंदिरा गांधी की कर्मभूमि है, जो प्रदेश हमारे सम्माननीय नेता राजीव गांधी जी का प्रदेश रहा है, जो प्रदेश डा. राम मनोहर लोहिया जी का प्रदेश रहा है, जो प्रदेश आचार्य नरेन्द्र देव की भूमि रही है, जो प्रदेश सी.बी. गुप्ता का प्रदेश रहा है, जो प्रदेश बनारसीदास गुप्ता का प्रदेश रहा है, जो प्रदेश कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नन्दन बहुगुणा का प्रदेश रहा है, आज उस प्रदेश की बहुत दुर्गति है। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : टाइम कंस्ट्रेन बहुत है, इसलिए थोड़ा सुनने की कृपा करें।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: ऐसे प्रदेश पर जब यहां चर्चा प्रारंभ हुई है, उस पर आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। उत्तर प्रदेश की दुर्गति की कहानी १९८९ से प्रारंभ होती है। जिस उत्तर प्रदेश को ४० वर्षों के कांग्रेस शासन में रोजगार से पाट दिया था, जिस उत्तर प्रदेश को कांग्रेस शासन ने तमाम सरकारी मिलों से पाट दिया था, जिस उत्तर प्रदेश को कांग्रेस शासन में रोजगार की व्यवस्था कर के धीरे-धीरे कर बेरोजगारी की समस्या को दूर करने की कोशिश की, जिस उत्तर प्रदेश को कांग्रेस शासन ने हिन्दुस्तान के नौवें नंबर का प्रदेश बना दिया था, आज वही उत्तर प्रदेश १३ वर्षों में धीरे-धीरे कर के हिन्दुस्तान में १८ वें, १९ वें नंबर पर पहंच चुका है। यह दुर्भाग्य केवल इसलिए संभव हुआ कि १९८९ के बाद से उत्तर प्रदेश में किसी स्थाई राजनीतिक दल का शासन नहीं रहा।
जैसा हमारे पूर्व वक्ता ने कहा कि १३ वर्षों में १४ बार तंत्र बदला और ४० वर्षों के कांग्रेस के राज में केवल १३ बार तन्त्र बदला। इस बात से ही सिद्ध होता है कि १३ वर्षो में जिस ढंग से उत्तर प्रदेश में शासन करने की कोशिश की गई, जिस तरह से सपा, बसपा, भाजपा या अन्य राजनीतिक दलों ने उत्तर प्रदेश में सत्ता को अपना लक्ष्य बनाया, सत्ता को अपना अभिष्ट बनाया, वोट बैंक बनाने की कोशिश की गई और जनता का कल्याण करने की कोशिश नहीं की, जनता के लिए रोजगार के अवसर ढूंढने की कोशिश नहीं की, यह उसी का ही परिणाम है।
माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि हिन्दुस्तान में वे एक करोड़ लोगों को प्रति वर्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध करायेंगे। अगर आबादी के अऩुपात में उत्तर प्रदेश को बांटा जाये तो माननीय उप प्रधान मंत्री जी को उत्तर प्रदेश में कम से कम १० लाख लोगों को प्रति वर्ष रोजगार देना होगा। आज १० लाख लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा, बल्कि पांच से लेकर १० लाख लोग उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष बेरोजगार हो रहे हैं। लगभग सात वर्षों से वहां आपका शासन है। आपने चाहे जिसको भी मुख्यमंत्री बनाया हो, चाहे कैसा भी मंत्रिमंडल बनाया हो लेकिन आज उत्तर प्रदेश को इस दुर्गति में पहुंचाने के लिए अगर नेतृत्व का सेहरा किसी को जायेगा, तो वह भारतीय जनता पार्टी को जायेगा। आज उत्तर प्रदेश की सारी औद्योगिक इकाइयां जो सरकारी क्षेत्र में थीं, लगभग बंद हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की सारी कताई मिलें बंद हो चुकी हैं। सरकारी क्षेत्र की आधे से ज्यादा चीनी मिलें उत्तर प्रदेश की बंद हो चुकी हैं। आज गन्ना किसान रो रहे हैं। वे आत्महत्या कर रहे हैं। गेहूं की फसल में गेहूं की खरीद होती है। सारा का सारा गेहूं बिचौलियों के माध्यम से बेची जाती है। धान की फसल में धान की खरीद होती है। सारा का सारा धान बिचौलियों के माध्यम से जाता है। किसानों को केवल ६५ से लेकर ७५ परसेंट तक की धान की कीमत मिलती है, बाकी बिचौलिये खा जाते हैं। धीरे-धीरे करके आज उत्तर प्रदेश की यह दुर्गति हो चुकी है। अभी हमारे माननीय पूर्वक्ता पता नहीं कौन सी किताब से या कौन से पुराण से निकालकर बता रहे थे। …( व्यवधान)
श्री चिन्मयानन्द स्वामी :यह सरकारी किताब है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Prahlad Singh Patel, please resume your seat.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb now. We are already short of time.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please resume your seat.
… (Interruptions)
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:उत्तर प्रदेश सरकार की सरकारी किताब भी किसी पुराण से कम नहीं है। अब उस पुराण को आप किस एंगल से देखते हैं और हम किस एंगल से देखते हैं, इसमें बस इतना ही फर्क है। लेकिन किसी पुराण से कम नहीं है। १३ वर्षों में एक भी यूनिट बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ाया गया है। १३ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक भी बिजली उत्पादन की कोई इकाई स्थापित नहीं की गई है। पिछले १३ वर्षों में विद्युत की मांग उत्तर प्रदेश में दुगुनी हो गई है। कैसे वहां विद्युत की आपूर्ति होगी, कैसे कल-कारखाने चलेंगे, कैसे औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा? …( व्यवधान)अगर ऐसे ही होगा तो उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य तभी तक है जब तक कांग्रेस नहीं आती है। जिस दिन कांग्रेस आ जायेगी, उस जिन उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जायेगा।…( व्यवधान)
श्री रामानन्द सिंह (सतना):अगर आप ही यू.पी. का भविष्य बनाना है तो आप शर्म करिये। वह बनने वाला नहीं है। …( व्यवधान)
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:उपाध्यक्षजी, अगरआप कहेंगे तो हम बोलेंगे, नहीं तो हम नहीं बोलेंगे।
आज पिछले १३ वर्षों में विद्युत का उत्पादन न होने के कारण, औद्योगिक माहौल न होने के कारण सरकारी क्षेत्र तो पूरी तरह से धोखा दे चुका है, इसके साथ-साथ निजी क्षेत्र का एक भी संयंत्र उत्तर प्रदेश में नहीं लगाया गया है ।ऐसे प्रदेश में, जिसकी आबादी १३ करोड़ है, सरकार अपने संयंत्रों को बंद करती जा रही है, एक-एक करके एन.टी.सी. की सारी मिलें बंद हो गईं, बी.आई.सी. की सारी मिलें बंद हो गईं। सरकार न एन.टी.सी. की मिलों को चलाना चाहती है, न बी.आई.सी. की मिलों को चलाना चाहती है। निजी क्षेत्र का कोई उद्योगपति उत्तर प्रदेश में कलकारखाना नहीं लगाना चाहता। मल्टी नैशनल की कोई कम्पनी उत्तर प्रदेश में किसी तरह का उद्योग लगाने को तैयार नहीं होती। इस प्रदेश में केवल एक ही उद्योग चल रहा है और वह उद्योग राजनीति का है। राजनीति के चमचे और राजनीतिक स्थितियों से उद्योग में बढ़ोत्तरी हो रही है। जो नौजवान बेरोजगारी में भटकते हैं, जो नौजवान बेरोजगारी से भागते हैं, वे राजनेताओं के चरणों में जाकर शरण लेते हैं, राजनेताओं के चेले बनते हैं। वे राजनेता उन चेलों को, चाहे जिला आपूर्ति कार्यालय में हो, चाहे थानों में हों, चाहे एस.एस.पी. के बंगलों में हो, चाहे जिलाधिकारी के बंगले में हों, वहां दलाली के माध्यम से कमाई करने के लिए और अपने बच्चों का पेट पालने के लिए फिट कर देते हैं। उसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में उस दुर्गति को प्राप्त हो गया है, जिस दुर्गति को प्राप्त होने की कल्पना कभी उत्तर प्रदेश जैसे प्रान्त के लिए हिन्दुस्तान का कोई व्यक्ति नहीं कर सकता था। इसका सबसे बड़ा सेहरा अगर किसी को जाता है तो भारतीय जनता पार्टी को जाता है, भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं को जाता है जिन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता को धर्म के नाम पर बरगला कर सत्ता प्राप्त की और जब से धर्म के नाम पर बरगलाने की कोशिश की गई तब से उत्तर प्रदेश की जनता के मन-मस्तिष्क पर ऐसा भ्रम उत्पन्न हो गया कि आज तक उत्तर प्रदेश की गाड़ी राजनीति की पटरी पर नहीं लाई जा सकी। मैं इस बात को इसलिए कह रहा हूं कि उत्तर प्रदेश जैसे प्रान्त की अगर विकास की गाड़ी पटरी से उतर गई है तो उसका सबसे ज्यादा दर्द कांग्रेस को है। कांग्रेस को वह दर्द इसलिए है कि कांग्रेस ने केवल इस देश को आजाद नहीं करवाया था बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे प्रान्त को औद्योगिक उत्पादन के शिखर पर पहुंचाने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया। जब तक कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में शासित थी, तब तक वहां की कानून और व्यवस्था की स्थित…( व्यवधान)इसलिए राजनीतिक मुवाहसे में हम सबसे ज्यादा महत्व उत्तर प्रदेश के विकास को देते हैं, उत्तर प्रदेश की प्रगति को देते हैं, उत्तर प्रदेश के उस राजनैतिक पराभव को देते हैं जो तेरह वर्षों में उस प्रदेश का हुआ है।
मैं अब आपको पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश में जो घटनाक्रम घटे हैं, जिसके लिए हमारे मित्र हमको इंगित कर रहे हैं कि जल्दी से उस घटनाक्रम पर आ जाओ, उनके बारे में बताना चाहता हूं। कुछ बसपा के विधायक, कुछ भाजपा के विधायक और कुछ निर्दलीय विधायकों ने सुश्री मायावती जी की सरकार से समर्थन वापिस ले लिया, बाकायदा पत्र लिख कर राज्यपाल को दिया गया कि हम इस सरकार से समर्थन वापिस लेते हैं। कांग्रेस ने उस समय भी उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से यह मांग की कि मान्यवर, राजभवन में बैठ कर यह सर्टीफिकेट देना कि किस सरकार का बहुमत है, किस सरकार का बहुमत नहीं है, कोई उचित परम्परा नहीं है। सरकार बहुमत में है या अल्पमत में है, यह हाउस के फ्लोर में तय होना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधान सभा का अधिवेशन आहूत किया जाना चाहिए और उस अधिवेशन में तय होना चाहिए कि वास्तव में वर्तमान सरकार बहुमत में है या अल्पमत में है। लेकिन माननीय राज्यपाल महोदय प्रत्येक सप्ताह एक बुलेटिन जारी करते थे कि उत्तर प्रदेश सरकार अल्पमत में नहीं है।
इस तरीके के बुलेटिन जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, इस तरीके के सर्टफिकेट जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। हद तो तब हो गई, जब विधान परिषद के उप-चुनाव में सत्तारूढ़ दल को १९३ वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी और बसपा के ये नेता कहते हैं कि हमारा प्रत्याशी तो जीत गया। आपका प्रत्याशी जीत गया, कौन कहता है कि नहीं जीता, लेकिन आपकी सरकार, जिसके पास केवल १९३ वोट हैं, कैसे बहुमत में बनी रह सकती है? …( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज):आपने वोट क्यों नहीं दिया, बताइये। आप क्यों एबसेंट थे, यह हाउस में बताइये।…( व्यवधान)
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:हम माननीय उपाध्यक्ष जी को बता देंगे कि हमने वोट क्यों नहीं दिया और कब वोट देंगे, यह भी बता देंगे। कांग्रेस वोट देने से कतराती नहीं है और समय से पहले कभी कदम नहीं उठाती है और समय से कभी देर नहीं करती है। ४०२ सीटों वाली विधानसभा में जिस सरकार को १९३ वोट मिले हों…( व्यवधान) कटियार जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। इसका मतलब आप स्वीकार कर रहे हैं कि हां, वास्तव में गलती है। कांग्रेस से स्पष्ट रूप से यह बात कही थी कि महामहिम जी को विधानसभा का सत्र बुलाकर वर्तमान मुख्यमंत्री को अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए निर्देशित करना चाहिए। लेकिन हमारे महामहिम की मैं आलोचना नहीं कर रहा हूं, मैं उनके चरित्र की आलोचना नहीं कर रहा हूं, मैं उनकी योग्यता पर कोई उंगली नहीं उठा रहा हूं, लेकिन जिस पद पर वे बैठाये गये हैं, उस पद की गरिमा और मर्यादा की अगर वे रक्षा नहीं करेंगे, संविधान की रक्षा नहीं करेंगे तो हम लोगों के द्वारा उंगली उठाने और हम लोगों की आलोचना का पात्र बनना तो सुनिश्चित है। हम केवल यही कह रहे हैं।
हम उनसे यह मांग करते हैं कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाना चाहिए। सबसे दुर्भाग्य की बात पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश में जो घटनाक्रम घटे हैं, जिस विधायक ने वर्तमान सरकार को समर्थन दिया, वह चाहे कितने ही गम्भीर आरोप का आरोपी रहा हो, उसे आरोपमुक्त कर दिया गया है और जिस विधायक ने इस सरकार के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलन्द किया, उस विधायक को जेलों में डाल दिया गया। मैं किसी विधायक को सर्टफिकेट नहीं देना चाहता कि यह आरोपी है या नहीं है। कौन विधायक अपराधी है, कौन विधायक अपराधी नहीं है, मैं इस बात का सर्टफिकेट देने के लिए खड़ा नहीं हुआ हूं, लेकिन अगर कोई विधायक आज अपराधी है, जब आपके खिलाफ वह बगावत कर रहा है, वह तो आपके साथ ५-५, ६-६ साल तक कभी विधायक रहा और कभी मंत्री रहा, तब आपने उसे टिकट दिया, तब वह अपराधी नहीं था और अगर वह अपराधी थी तो आपने उसे टिकट क्यों दिया, तब आपने उसे मंत्री क्यों बनाया और अगर वह आपके खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलन्द करता है तो वह अपराधी हो जाता है। इसी तरीके से ऐसे विधायक, जिन्हें आपने गम्भीर आरोपों से मुक्त कर दिया तो क्या जब वे बन्द किये गये थे, जब उनके ऊपर आरोप लगाये गये थे, तब वे अपराधी नहीं थे और आज जब वे आपका समर्थन कर रहे हैं, इसीलिए वे आरोपमुक्त हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश का सचिवालय इस समय एक गंदे थाने की तरह अपना दुरुपयोग कर रहा है। जैसे एक गंदे थाने का गंदा थानेदार जिसे चाहता है, उसे उठाकर थाने के लॉक अप के अन्दर कर देता है और जिसे चाहता है, थाने के लॉक अप से बाहर कर देता है। आज वही स्थिति उत्तर प्रदेश की सरकार कर रही है। आज उत्तर प्रदेश में १७ करोड़ नागरिक सरकार की इस ओछी और नंगी हरकत को अपनी आंखों से देख रहे हैं।
लोग चर्चा करते हैं कि यह कैसी सरकार है, यह कैसी मुख्य मंत्री है कि जिसको चाहे अंदर कर दे, जिसे चाहे बाहर कर दे, जिससे चाहे जबर्दस्ती समर्थन ले ले, जिसको चाहे जबर्दस्ती बंद कर दे। इस दुर्गति को आज यू.पी. प्राप्त है। मैं आपके माध्यम से केवल इतना अनुरोध करना चाहता हूं कि आज यू.पी.…( व्यवधान)
श्री रामानन्द सिंह : इंदिरा जी की इमर्जेंसी,…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : जब आपका नम्बर आए तब आप बोलिएगा।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: इस सरकार से और कोई उम्मीद तो नहीं करते थे लेकिन यह उम्मीद तो जरूर करते थे कि दलित मुख्य मंत्री है, कम से कम यू.पी. में दलितों की अस्मिता को बचाने का काम यह मुख्य मंत्री जरूर करेंगी। लेकिन दलित उत्पीड़न के जितने भी केसेज पिछले छ महीनों में यू.पी. में हुए हैं और आज यू.पी. में दलितों की जो स्थिति है, हमारी युवा नेता सुश्री प्रियंका गांधी अभी अमेठी गई थी। वह लोगों का हालचाल जानने गई थी। वहां सैकड़ों की तादाद में दलितों ने बताया कि ताकतवर लोगों ने उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया है। उनकी जमीन छीन ली औऱ वर्तमान दलित मुख्य मंत्री उनके बचाव में कुछ भी नही कर रही है। जब उन्होंने संघर्ष को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो उत्तर प्रदेश के सारे आला पुलिस ऑफिसर्स अमेठी रवाना कर दिये गये कि कहीं ऐसा न हो कि उनके पापों का खुलासा अमेठी में हो जाए। यह तो अमेठी में केवल उदाहरण दे रहा हूं। जो स्थिति अमेठी की है, यू.पी. के सभी विधान संसदीय क्षेत्रों की स्थिति यही है। हर जगह दलितों के मकान व उनकी भूमि छीनी जा रही है। दलितों पर घोर अत्याचार हो रहा है और वर्तमान मुख्य मंत्री सुश्री मायावती अपने को बचाने के लिए, केवल अपनी कुर्सी को सुरक्षित रखने के लिए, भारतीय जनता पार्टी जैसी सामप्रदायिक पार्टी का समर्थन प्राप्त करने के लिए दलितों पर उत्पीड़न की ओर से आंखें बंद किए हुए हैं। विधान सभा के चुनाव के समय इन्हीं माननीय मुख्य मंत्री जी ने यू.पी. में विधान सभा के चुनाव के कैम्पेन के दौरान प्रदेश के कोने-कोने में घूम-घूमकर कहा था कि जिस अधिसूचना के लिए माननीय आडवाणी जी, माननीय जोशी जी, उमा भारती जी तीनों मंत्रियों के खिलाफ जिस अधिसूचना में टैक्नीकल कमी होने के कारण हाइकोर्ट ने मुकदमा चलाने से इंकार कर दिया था, मायावती जी ने यू.पी. के कोने-कोने में घूमकर यह बात कही थी कि जैसे ही उनकी सरकार आएगी, अधिसूचना में संशोधन किया जाएगा और उसकी टैक्नीकल कमी को दूर किया जाएगा तथा मुकदमा फिर से इन तीनों लोगों पर चलाया जाएगा लेकिन यू.पी. का मुख्य मंत्री बनने के बाद, भारतीय जनता पार्टी का समर्थन लेने के बाद, इन तीनों माननीय मंत्रियों का आशीर्वाद प्राप्त कर लेने के बाद बहन मायावती जी कहती हैं कि इस वक्त मुकदमे को चलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अधिसूचना में संशोधन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जब सब कुछ केवल सत्ता के लिए हो रहा हो, सब कुछ केवल कुर्सी के लिए हो रहा हो, हमारी सरकार लम्बे समय तक कैसे चले, केवल इस बात की चिंता वहां की सरकार को है। उत्तर प्रदेश की जनता के कल्याण की उसको कोई चिंता नहीं है। एक सूत्रीय कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में चल रहा है कि हमारी सरकार हर कीमत पर चलनी चाहिए। हमारा मंत्रीमंडल हर कीमत पर चलना चाहिए। पूरे प्रदेश में खरीद-फरोख्त हर कीमत पर होती रहनी चाहिए। इसी कार्यक्रम के तहत आज उत्तर प्रदेश में सरकार चल रही है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए विधान सभा को फेस करने से कतरा रही हैं।
मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि आप केन्द्र सरकार को निर्देशित करें, क्योंकि हम बहुत साधारण मांग कर रहे हैं, हम उत्तर प्रदेश की सरकार को बर्खास्त करने की मांग या मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की मांग नहीं कर रहे हैं। हमारी सबसे साधारण मांग है कि लोकतांत्रित प्रक्रिया में जो अधिकार हमें प्राप्त है कि अगर कोई मुख्यमंत्री, कोई राज्य सरकार अल्पमत में आती दिखाई दे तो उसे बहुमत सिद्ध करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए - यही राज्यपाल का दायित्व है और हमारे उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल अपने इस दायित्व का निर्वहन करें, ऐसा निर्देश केन्द्र सरकार की ओर से जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधान सभा आहूत की जानी चाहिए और अगर यह सरकार बहुमत प्राप्त कर लेती है तो किसको एतराज हो सकता है कि ये सरकार न चलाएं। ये सरकार चलाएं, मंत्री और बनाएं, और मलाईदार विभाग अपने लोगों को दें - हमको कोई एतराज नहीं है। लेकिन अगर यह सरकार अल्पमत में है तो उसे अपना बहुमत विधान सभा के फ्लोर पर सिद्ध करना चाहिए।
१७.२६ hrs.(Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair) हमारा अनुरोध है कि आप उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को ऐसा निर्देश भिजवाएं। इसी के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करता हूं।
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Chairman, Sir, I rise to participate in this discussion with some sorrow because ordinarily we should not discuss the affairs of the State in Parliament. But it seems that we cannot help discuss this issue. Therefore, I am not surprised that we are called upon to take part in a discussion like this.
Under the present dispensation, it now appears that every aspect of our national life, particularly political life, as well as educational and cultural seems to have been polluted, and the Indian political ethos has reached its nadir. I cannot think of its going down further. This sordid state of our democratic polity is because of the opportunistic alliances that we are having these days.
Swamy Chinmayanandji was kind enough to refer to the Left Front in West Bengal and Kerala. The Front is there because there are some principles behind it. You may agree with us or you may not agree with us, but we have come together on the basis of certain ideologies, certain principles and certain objectives.
I would like to know what is the principle behind their alliance either in the present Government ruling this country or the one that has been now formed and is ruling Uttar Pradesh. Sir, ideology has been jettisoned openly by no less a person than our most respected Deputy Prime Minister. He said that in a coalition, ideology has become irrelevant. It suits his purpose.
Sir, they have been gloating that from two seats and they became 86 because their party had adopted certain policies. And through Rath Yatra of Advaniji, they have come to power. I admire Advaniji. I have known him for the last 31 plus years. I had the privilege of working with him and with Vajpayeeji in that Election Committee when we first came in 1971. Those were the great moments of the Indian Parliament.
However, since then any and every ally is permitted. Shri Advani has very clearly said that because of Rath Yatra they are in power. I believe that he said it somewhere in Punjab. I appreciate his candour. But what is happening to the country – the policies and programmes of the country? You proclaimed yourself to be a party with a difference. Difference in what? So far, trying to grab power, to remain in power by any and every means, seems to be the only differentiating factor.
Now, I would like to know from my friends here, who are supporting this Government, what is it that is keeping them together, except power. I do not know what is the common factor between the BSP and the BJP or even BJD and the BJP. I do not know which branch of BJD that hon. Member is now.
SHRI PRASANNA ACHARYA (SAMBALPUR): I am in the real one.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Is it? Good. But you are still with them.
I would like to know this with all sincerity. This is not to try to score a political point. What is it that is keeping you together, except that you want to share the spoils of power? The inevitable result is this. We knew that when this musical chair system of six-monthly Chief Ministership in UP earlier was developed, that was one of the most shameful days of Indian politics. We are trying to divide it, the Chief Ministership to remain in power, every three months or six months.
Then, they separated and became the sworn enemies. I remember that Shri Vajpayee’s Government fell and became minority when Kumari Mayawati voted openly against it . She said so. I am sure that Shri Rashid Alvi was also there and he also voted against the Government, the Government that failed. Then why again similar combinations are being developed in one State or the other? What is this combination looking up to?
We had been blamed by Shri Advani times without number that we are pseudo-secular. Of course, the circle has turned around and he is now pseudo-secular, according to the VHP. Probably, he may choose some other phrase for us, at least not pseudo-secular, which has become very stale. … (Interruptions) That is what I am saying. I do not know whether we are in good company or they are in good company.
During the elections, the BJP and BSP fought like Kilkenny cats - no holds barred. Shri Jaiswal has reminded us how she had promised to rectify the wrong in that notification regarding the trial of three of the most eminent Ministers of the Cabinet.
Now, after a few months, when no combination could come, suddenly we find this thing happened. Fourteen votes are very important here, I know. Therefore, Shri Vajpayee could not resist the temptation of 14 BSP votes here. Therefore, somehow or the other, he ingratiated himself.
SHRI RASHID ALVI (AMROHA): It is not 14. We are 16 now; two have joined us.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Very good. I wish you well. Get some more from BJP also.
Then, for so many months, nobody was called. There must be some basis of calling a party to form the Government after fresh elections. The present Governor of UP is a very dear personal friend of mine. He is from my State; he was in my class in the University.
श्री मुलायम सिंह यादव :इसमें संशोधन करिए। वह राज्य सभा के मैम्बर उत्तर प्रदेश से हैं और मतदाता सूची में भी वह उत्तर प्रदेश से हैं। आपके यहां से कैसे हो गए?
श्री सोमनाथ चटर्जी : यह होता है। ऐसा ही इस देश में चलता है।
I have been opposing this but we are in a minority. Congress is also supporting that. The Samajwadi Party – whether you like him or not; we know very well you do not like him – became the largest single Party. Who is to decide? The Constitutional position is no longer res integra. This Constitutional position is no longer uncertain or unsettled. The position is settled now. I need not rely only on the decision of Dr. Shankar Dayal Sharma who applied that formula, although we had reservations at that time, that the largest single majority Party should be called. We had said that Shri Vajpayee should not have any political or moral right to come and occupy this seat because at no point of time he had majority or had any hope of acquiring majority. It was proved after 13 days that he had no majority. Therefore, for 13 days, maybe, according to political connotation there was unauthorised or immoral occupation of that important Chair, but Constitutionally he was entitled because the President of India had called him and given him the opportunity to form the Government. He formed the Government. It was one of the acts of shame the last action of that Government was to permit Enron guarantee knowing that they were going to lose the Office. However, this is a different story. Why they should not have been called? If they could not have proved majority, they could have gone out of it. You cannot allow horse trading to go on. You cannot allow any and every combination or juxtaposition of forces. If it suits the Party you support, then we shall be very happy. This is precisely what has happened. I am sorry to say that my friend in Raj Bhavan has not clothed himself in glory. He has not maintained the spirit of the Constitution of India. Bommai case has no relevance to him. We all swear by the Supreme Court. What was his advice? What was the basis on which he took this decision?
Our grievance is, you cannot take ad hoc postures on the basis of your personal or political considerations. It has to be in public interest. Like the formation of Governments in the Centre and the State, you cannot take ad hoc postures or ad hoc decisions and only time-serving attitude. This is taking us lower and lower down. That is why we hear all sorts of complaints about the persons who though not properly elected are being elevated to the Ministerships. We do not know many of them. We hear about them.
This is the unique thing which is going on in Uttar Pradesh - ‘If you side with me, you are a good man and if you oppose me you will be in jail’. Is this becoming the Indian politics today? How dirty it will become? We have not much presence now in Uttar Pradesh. We are not the deciding factor but certain basic formulations, basic postulates should be there which should govern the Indian politics. We rightly say that this is a country with great traditions, a country with immense resources and the finest pool of talent. Every country in the world says, ‘well, India has immense future’. But today the greatest agony is that Indian politics is being hated by young people. Politicians are becoming laughing stocks. We have become embodiment of corruption.
Now-a-days, we have to prove that we are honest and that we are not dishonest. We were invited to attend a television show before the last General Elections to meet a gathering of young boys and girls who had become first time voters. A question was asked to them as to what they hated the most. They replied that they hated politicians the most. This is the impression of young people of this country about politicians. We are treated as crooks and corrupt people. Sir, that is why a time has come for us to think. Where is this attitude for immediate loaf of power taking the country? Shall we compromise with every principle and every constitutional norm just for the purpose of getting into power by hook or crook and more by crook than by hook. Together, we had been fighting against Shri Sukh Ram. But lo and behold, we find he becomes your biggest ally! He has become the Deputy Chief Minister in a State which you are governing. Even this new Democratic Forum has been formed with one of the hon. Members who is mostly in jail. You have openly invited them and included them in the NDA. Thomas is not present here. I sympathise with him. Somebody who is a Member of Parliament fled from a Nursing Home and the police is searching him. They are your coveted allies. How can you teach people about morality, political probity, and honesty?
Sir, my friends from Tamil Nadu are there. DMK and AIADMK keep fighting all the time. Let them fight. I have no particular choice. But now both of them are together. One is getting the benefit of power and the other is getting the benefit otherwise to be with the power because she has to be exonerated, and poor Shri Vaiko has become the victim. This type of chicanery is going on in this country. We are denuding ourselves. We are setting examples for the future generations. What will they aspire and strive for? That is why, they say that let us remain outside politics. Let us go, if possible, outside the country and try to save us.
Therefore, I demand that even at this late hour, it is the incumbent duty of the Governor of Uttar Pradesh to immediately give an opportunity to the Members to decide on the floor of the House where they really belong to. Raj Bhawan is not their place of activity. They should be given an opportunity to express their views inside the House. The result of the Council election provides more than ample and objective material to show that per se it is not enjoying the majority support. It should not be allowed to continue in this fashion unless they get the support of the majority of the House.
Mr. Chairman, Sir, longer this uncertainty continues, longer will be the agony of not only of Uttar Pradesh but also of Indian politics. We are all proud of Uttar Pradesh. It is one of the finest States in India not only in size but also in number of people. It has produced giants in various fields like politics, literature, history, science, etc. It has produced legal luminaries like Tej Bahadur Sapru.
Most eminent historians have come from Uttar Pradesh, apart from, of course, so many Prime Ministers that the State has given to this country. Therefore, this uncertainty should not continue and the agony which has been expressed by my friends here should be removed.
17.45 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) I have got a newspaper publication where it has been stated as to what is the state of economy in Uttar Pradesh. Therefore, sooner this uncertainty goes, the better it is. In all humility I request my friend in the Raj Bhawan of Uttar Pradesh that he should immediately think for himself and not be guided by his mentors in RSS.
This is the misfortune of this country. They have not only saffronised the textbooks, they have also saffronised Raj Bhawans, apart from the entire cultural milieu of this country. This country has been pauperised. The great concept of India’s unity and integrity has been trivialised. Indian politics has become commercialised because now it is the policy of give and take - ‘quid pro quo’. This policy is becoming the greatest handicap for India’s development. This Government has glamourised corruption. We have now become a land of scams.
Last but not least, even the media has not been spared. Even a section of the media which has the courage to stand up is being terrorised. We must come out of this. I appeal to all sections of the House to please do not treat everything on the basis of one’s immediate partisan interest. There is nothing greater than this country, which is India, and there is nothing greater for this country than the democratic polity. Therefore, I request everybody to uphold the democracy in its true letter and spirit.
श्री श्याम बिहारी मिश्र (बिल्हौर) :माननीय अध्यक्ष जी, सबसे पहले मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने उत्तर प्रदेश की चर्चा के मध्य में मुझे बोलने का अवसर दिया।
उत्तर प्रदेश की चर्चा के मध्य अभी समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह जी ने राज्यपाल के आचरण को संदिग्ध बताया, राज्यपाल जी के ऊपर कई कटाक्ष किए और कहा कि हम बड़े दल के रूप में थे, हमें सरकार बनाने के लिए बुलाया नहीं गया। फिर यह कहा कि अभी हमारी बात नहीं सुनी गई और दूसरी तमाम बातें कहीं।
हमारे स्वामी जी ने ठीक कहा था कि उत्तर प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता है और इसे प्रारंभ करने का श्रेय सन् १९८९ से श्री मुलायम सिंह जी को है। अब इस अस्थिरता के अंतर्गत बार-बार जब भी भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से एक दलित बहिन को उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री बनाया गया, यह तीसरी बार है, तब-तब इन्होंने उनकी सरकार को गिराने के लिए पूरे प्रयास किये, पूरे हाथ-पैर फैलाए। वहाँ जो चुनाव हुआ, उस चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और यह ठीक है कि समाजवादी पार्टी एक बड़े दल के रूप में उभरकर आई। दो महीने तक बड़े दल को मौका दिया गया कि आप अपनी सूची दे दीजिए। आप अगर बहुमत में हैं तो आप बता दीजिए, लेकिन वे नहीं बता पाए तब जाकर मायावती जी ने २११ सदस्यों की एक सूची राज्यपाल जी के पास दाखिल की।
महोदय, उस समय आपने कहा और अन्य लोगों ने भी कहा कि यह सरकार स्वत: गिर जाएगी, हमको गिराने की आवश्यकता नहीं है। यहां तक कहा गया, जैसा आप कह रहे हैं कि भ्रम फैला है, भ्रम का निवारण हो जाए। मैं कहना चाहता हूं कि भ्रम तो आपने फैलाया है कि इन्हे २११ सदस्यों का बहुमत प्राप्त नहीं होगा, लेकिन जब १७ मई को विधान सभा में विश्वास मत हासिल हुआ, तो हमें २११ की जगह २१७ सदस्यों का बहुमत मिला और २१७ के बहुमत से सरकार चली।
आज जो सरकार बन गई है, उसको उत्तर प्रदेश की जनता का बहुमत प्राप्त है। आम जनता का भी आशीर्वाद प्राप्त है। उप चुनाव में जो दो सीटें मायावती के पास थीं, वे तो उन्होंने जीती हीं, लेकिन आपके पास जो बहेड़ी की सीट थी, उस पर भी मायावती का प्रत्याशी जीता और इस प्रकार उत्तर प्रदेश की आम जनता ने भी उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और सभी का आशीर्वाद पाकर वे आगे बढ़ीं।
आपने उसी समय, एक ओर प्रदेश में साम्प्रदायिक माहौल बनाने का प्रयास किया और यह कहना शुरू कर दिया कि चूंकि ब.स.पा. ने साम्प्रदायिक ताकतों से हाथ मिला लिया है इसलिए ब.स.पा. के जो अल्प संख्यक विधायक हैं, वे उसका साथ नहीं देंगे। आपका यह भ्रम भी दूर हो गया जब बहेड़ी में अल्पसंख्य समुदाय की विधान सभा वाली सीट वहां मायावती को मिली और वहां की जनता ने एक अल्पसंख्यक प्रत्याशी को जिताया और आपकी जो सीट थी, उसे आप हार गए। आपने फिर भ्रम फैलाने का काम किया और उसके अन्तर्गत आपने तमाम बातें कहीं। अभी हमारे स्वामी जी ने कहा कि जब आपकी सरकार बनी थी, तो आपने बहिन मायावती जी का सहयोग लिया था, लेकिन आपके आचरण के विरुद्ध उन्होंने आपसे हाथ खींचा। इसी प्रकार अक्तूबर में कांग्रेस ने भी आपसे हाथ खींचा। क्योंकि उन्होंने भी आपका सहयोग किया और उसका नतीजा जब उन्होंने देखा, तो उन्होंने आपका साथ नहीं दिया। क्योंकि आपका आचरण न केवल मायावती जी ने पहचान लिया बल्कि कांग्रेस ने भी पहचान लिया। १९८९ में और १९९४ में जब आपकी सरकार बनी, तब आपका क्या आचरण प्रदेश के लोगों के साथ रहा, इस बात को पूरा प्रदेश जानता है।
मान्यवर, बार-बार यहां कहा जा रहा है कि बहुमत नहीं है जबकि सरकार के पास २१७ सदस्यों का बहुमत था, जिसमें से केवल सात निर्दलियों ने अपना समर्थन वापस लिया - यानी २१० सदस्यों का बहुमत अभी भी है। अभी आपने इस हाउस में १२ विधायकों का एक पत्र पढ़ा। उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा है कि हम लोग वर्तमान सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहे हैं। आप लोग राज्यपाल पर दोषारोपण कर रहे हैं। राज्यपाल के सामने जो रिकॉर्ड है वह पहले २११ सदस्यों का था, फिर २१७ सदस्यों का हुआ, जिसमें से सात निर्दलियों ने समर्थन वापस ले लिया, तो भी २१० सदस्यों के समर्थन का रिकार्ड उनके पास है।
आप बार-बार कह रहे हैं कि विधान परिषद् के चुनाव हो जाने दीजिए, बहुमत का पता चल जाएगा। आपको विधान परिषद् के चुनावों में केवल १९३ वोट मिले। उत्तर प्रदेश के सारे समाचार पत्र रंगे थे। आपके महासचिव के बयान हैं, जिनमें कहा गया गया है कि कांग्रेस हमारा साथ न देना चाहे, तो न दे, परन्तु हमारे साथ २०४ विधायक हैं, लेकिन जब विधान परिषद् के चुनाव हुए, तो आपका वह भ्रम भी दूर हो गया और आपको केवल १९३ वोट मिले। इस प्रकार से देखें तो आपको कहां से बहुमत मिल गया?फिर आप बार-बार यह कह रहे हैं कि विधान सभा का सत्र बुलाकर बहुमत हासिल किया जाए।
जैसे आपके अभी तक के सारे भ्रम दूर हुए हैं. राज्यपाल के दिमाग में कोई भ्रम नहीं है। सत्ता में जो लोग बैठे हैं, उनके दिमाग में कोई भ्रम नहीं है। आपके दिमाग में जो भ्रम है, जब समय पर विधान सभा बुलाई जायेगी तब आपका यह भी भ्रम दूर हो जायेगा कि सरकार अल्पमत में है या बहुमत में है। अगर राज्यपाल के आदेश पर आप लिखवाकर भिजवा देते तो राज्यपाल का निर्णय कुछ और होता परन्तु आप दिलवा नहीं पाये। फिर भी बार-बार आप यहां कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार अल्पमत में है।
मान्यवर, मैं तो एक बात कहना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी पर आप साम्प्रदायिक आदि अन्य बातों का आरोप लगाते हैं। कभी-कभी यह भी कहते हैं कि यह ऊंची जात की पार्टी है। जब-जब बहन मायावती मुख्यमंत्री बनीं, तब-तब आपने रोड़ा लगाने का काम किया और कोशिश की कि किसी तरह से दलित बहन को मुख्यमंत्री न बने रहने दिया जाये, उन्हें हटाया जाये। वही काम आज आप भी कर रहे हैं।…( व्यवधान)जब २११ वोटों की जगह २१७ वोट पडें, उसके पहले जब विधान सभा के चुनाव हुए और विधान सभा में पूर्ण आशीर्वाद इस वर्तमान सरकार को मिला, तब आपको सोचना होगा कि अब सरकार के ऊपर किसी प्रकार के आरोप हम न लगायें। हम बस एक बात और कहना चाहता हूं क्योंकि बहुत कुछ कहा गया है, हमारे कांग्रेस के भाई ने भी कहा है कि १३ वर्षों में उत्तर प्रदेश पीछे चला गया है। १३ वर्षों में राज्य पीछे गया या ४० सालों में पीछे गया लेकिन यह पीछे जाने का ट्रेंड किसने शुरू किया?
अभी आपने कहा कि ४० साल में बड़े-बड़े उद्योग लगाये गये और वे बंद हो गये। मैं कहना चाहता हूं कि जो उद्योग लगे थे, वे पुराने थे जो बंद हो गये हैं। आपके शासन काल में उत्तर प्रदेश में कौन से बड़े-बड़े उद्योग लगाये गये - जो आपने एन.टी,सी का नाम लिया है, बी.आई.सी. का नाम लिया है - ये सब अंग्रेजों के जमाने में लगे हुए उद्योग थे। कांग्रेस के जमाने में लगे हुए उद्योग नहीं थे। अभी मुलायम सिंह जी ने यह भी कहा कि पार्क न बनवाकर स्कूल बनना चाहिए। आपका पहले कांग्रेस के जमाने में एक नियम बना था, उसके बाद जब आप मुख्यमंत्री बने तब भी वही नियम था कि एक ग्राम सभा में एक प्राईमरी स्कूल होना चाहिए तथा दूसरा स्कूल डेढ़ किलोमीटर दूर होना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी ने हर ३०० की आबादी वाले गांव में प्राइमरी स्कूल को खोलने का काम किया।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:अभी तक कोई स्कूल नहीं खुला है।…( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र:अखिलेश सिंह जी, वहां काम चालू है। लगभग ८० परसेंट गांव में स्कूल खुल चुके हैं। एक साथ स्कूल नहीं खुल सकते। हमें केवल १४ साल ही मिले हैं, ज्यादा नहीं मिले हैं।
कुंवर अखिलेश सिंह: आदरणीय मिश्र जी, आपकी इस बात का हम प्रतिवाद कर रहे हैं कि ३०० की आबादी पर कहीं भी कोई स्कूल नहीं खुला है। …( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र:यदि हम आपको आंकड़े दिखायेंगे तो कोई कहेगा कि कौन से पुराण से पढ़ रहे हैं तो कोई कहेगा कि क्या कह रहे हैं। मैं एक बात पूछना चाहता हूं कि आप कौन से पुराण के द्वारा बता रहे हैं कि ३०० की आबादी वाले गांव में स्कूल नहीं खुले हैं। …( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:अगर ३०० की आबादी पर स्कूल खुलने की बात साबित हो जायेगी तो मैं संसद सदस्य के पद से इस्तीफा दे दूंगा।…( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र:मुझे आपका चैलेंज स्वीकार है। हम आपको आंकड़ें दे देंगे। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मिश्र जी, आप चेयर की तरफ देखकर बात करिये।
...( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र: उत्तर प्रदेश के ८० परसेंट गांवों में ३०० की आबादी वाले गांव में प्राइमरी स्कूल खोलने का काम हो चुका है और यह अभियान अभी चालू है। बहन मायावती ने इसको बंद नहीं किया है। एक, दो या चार साल में सारे गांवों में एक साथ स्कूल नहीं खुल सकते। क्या यह बात असत्य है कि पहले एक न्याय पंचायत में जूनियर हाई स्कूल होता था ? भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में यह व्यवस्था की गई कि दो हजार आबादी वाले गांव में एक जूनियर हाई स्कूल होगा। अब भी वह स्कीम चालू है। आप कहेंगे कि इस गांव में नहीं हुआ है परन्तु स्कीम चालू है। क्या आप इससे इंकार कर सकते हैं ?
18.00 hrs. क्या भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में यह कार्य प्रारंभ नहीं हुआ कि एक ब्लॉक में दो कन्या इंटरमीडिएट कालेज खुले? चालीस वर्षों में जो काम नहीं हो पाया, उसे वहां की सरकार कर रही है। हमारे मुलायम सिंह जी शिक्षक रहे हैं, आपके दो मर्तबा के मुख्य मंत्रित्वकाल में जो काम नहीं हो पाया, वह उत्तर प्रदेश में बहुत थोड़े समय में भारतीय जनता पार्टी ने कर दिखाया।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:प्रत्येक ब्लॉक में कन्या विद्यालय हमारे कार्यकाल में शुरू हुआ था।
श्री मुलायम सिंह यादव : हम बीच में टोकना नहीं चाहते. यह मत बोलिए, हमने ही शुरू किया था।…( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र:आपने प्रस्ताव पारित करके छोड़ दिया था।…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :अध्यक्ष महोदय, इसे सुधारें। १२० ब्लॉक में हमने खुद एक साल के अंदर कन्या इंटर कालेज शुरू किए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: The House was supposed to be adjourned at Six of the Clock. I am extending the time till this debate is over. There are about 15 speakers to speak. No more names will be taken.
कुंवर अखिलेश सिंह:अध्यक्ष महोदय, यह महत्वपूर्ण चर्चा है। इस पर सदन जितना समय चाहे, दे दें।
श्री श्याम बिहारी मिश्र: क्योंकि यह चर्चा की गई, यह चर्चा का विषय नहीं था लेकिन उधर से भी कहा गया और इधर से भी कहा गया कि तेरह साल में उत्तर प्रदेश पीछे चला गया, इसलिए बोलना पड़ रहा है। क्या यह बात सही नहीं है कि जिन गांवों में सड़कें नहीं थीं और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने और जिसे आज हमारी बहन मायावती जी ने भी लागू किया हुआ है कि हम गांवों में सड़कें बनवा रहे हैं? अभी हम पांच सौ तक नहीं पहुंचे हैं लेकिन यह लक्ष्य है कि पांच सौ तक की आबादी वाले गांव को सड़कों से जोड़ा जाएगा। इसका रुपया हर जिले में पहुंचाया गया है। अभी हम पन्द्रह सौ पर पहुंचे हैं, फिर एक हजार तक जाएंगे और इसके बाद पांच सौ पर आएंगे। प्रधान मंत्री ग्राम सड़क विकास योजना से हम बनाएंगे, लेकिन प्रदेश सरकार ने भी इसके लिए अपना धन आवंटित किया। आपने कहा, मैं उस पर नहीं जाना चाहता, वैसे यह आज का विषय भी नहीं है, लेकिन क्योंकि उधर से भी आरोप लगाए गए और इधर से भी आरोप लगाए गए, इसलिए कुछ बातें कहना आवश्यक था।
हम केवल एक ही बात कहना चाहते हैं कि राज्यपाल के ऊपर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता का आरोप लगाना, एक ऐसे राज्यपाल के लिए, जिनका अपना एक चरित्र है, यहां कहा गया कि राज्यपाल भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। अगर राज्यपाल कह रहे हैं कि आप अपनी कोई सूची नहीं दे पाए, आप अपने २०४ सदस्यों का बहुमत साबित नहीं कर पाए और भारतीय जनता पार्टी ने २११ का लिख कर २१७ का बहुमत साबित कर दिया तो किस तरह वे भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में जो वर्तमान सरकार चल रही है, वह पूरे बहुमत में है। उसे तोड़ने का प्रयास किया गया, समाजवादी पार्टी के महामंत्री अटैची लेकर लखनऊ में डेरा डाले रहे पर एक भी विधायक से यह नहीं लिखवा पाए कि हम समर्थन वापिस ले रहे हैं। पड़े रहे, डेरा डाले रहे। उसके बाद भी राज्यपाल के ऊपर आरोप लगा रहे हैं। आपके महासचिव का जो डेरा लखनऊ में पड़ा था, सारे अखबारों ने लिखा था, वे एक से भी नहीं लिखवा पाए यानी विधायक के ईमान को डिगवाने का काम भी नहीं करा पाए।
उसके बाद भी बार-बार राज्यपाल जी के ऊपर आरोप लगाये जा रहे हैं, जो उचित प्रतीत नहीं होता है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जो सरकार उत्तर प्रदेश में चल रही है, वह पूर्ण बहुमत में है और पूर्ण बहुमत के साथ, जो वहां पर राज्यपाल इस समय काम कर रहे हैं, अगर इनके पास कोई लखित सबूत हों तो उन्होंने कई बार मांगे हैं, ये अभी भी दें। वह तो ये देते नहीं हैं, केवल भाषण में यह बात कह रहे हैं। इसलिए हम जो यहां प्रस्ताव आया है, जिसमें कहा गया है कि राज्यपाल को हटाया जाये, इसका विरोध करते हैं। राज्यपाल वहां पर सुचारू रूप से, संवैधानिक रूप से और नियम के अनुसार काम कर रहे हैं। हां, यह बात जरूर है कि धींगामुश्ती वाला काम नहीं कर रहे हैं। हम उसे बार-बार नहीं कहेंगे, हमारे स्वामी जी ने कहा था कि संसद में भी धींगामुश्ती हो गई, अल्वी जी बैठे हैं।
आप वहां से अभी कह रहे थे, मुझे याद है, जब १९९५ में इनका शासन था तो एक बार इन्होंने प्रदेश बन्द करवाया। इनका शासन था, ये मुख्यमंत्री थे और इन्होंने प्रदेश बन्द करने का आहवान किया। उसमें आवाज दी गई,"खुली दुकान हमारी, बन्द दुकान तुम्हारी।"आपके द्वारा यह नारा दिया गया था, इन्होंने बन्द का आहवान किया था, ये मुख्यमंत्री थे। क्या हल्ला बोल कार्यक्रम आपने नहीं किया?
श्री धर्म राज सिंह पटेल (फूलपुर) : यह बिल्कुल गलत बोल रहे हैं।
श्री श्याम बिहारी मिश्र: मैं व्यापारी हूं। हल्ला बोल कार्यक्रम के अन्तर्गत आपने नारा दिया, मैं आपको नारा दिखाऊंगा।"खुली दुकान हमारी, बन्द दुकान तुम्हारी।"आपने पत्रकारों को पीटा, अदालत को पीटा, आपने क्या नहीं किया। आपके इन्हीं कारनामों को कांग्रेस ने पहचाना और इसीलिए वे आपका साथ नहीं दे रहे हैं। आपके इन्हीं कारनामों को पहचाना और इसीलिए बसपा ने आपसे समर्थन वापस लिया था और आप ये सब बातें कर रहे हैं तो हम क्या बतायें।
अध्यक्ष महोदय : आपका समय पूरा हो गया, कन्क्लूड कीजिए।
श्री श्याम बिहारी मिश्र: एक कहावत है कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटता है। सत्ता पक्ष में अपराध करने का काम माननीय मुलायम सिंह जी ने प्रारम्भ किया था। अपराधीकरण का काम माननीय मुलायम सिंह जी ने शुरू किया था और अब दोषारोपण दूसरे के ऊपर किया जा रहा है, यह न्यायसंगत नहीं है। मायावती बहन जी के शासनकाल में प्रदेश में पिछले सालों में सरकार अच्छी चली और इस समय भी अच्छी चल रही है। अभी भी कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ। मुलायम सिंह जी, आप दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, आपने प्रदेश का माहौल बिगाड़ा, तब सबसे ज्यादा दंगे हुए। वर्तमान में मायावती जी के शासनकाल में कोई दंगा नहीं हुआ। इस प्रकार की कोई घटना नहीं हुई।…( व्यवधान) आप ठीक बात कह रहे हैं, कोई घटना रामपुर तिराहे की तरह मायावती जी के शासनकाल में नहीं हुई है।
अध्यक्ष महोदय : आप भाषण समाप्त करिये। देखिये, मैं सभी को ज्यादा समय नहीं दे सकता हूं। आप कन्क्लूड कीजिए।
श्री श्याम बिहारी मिश्र: मैं अपनी बात को समाप्त कर रहा हूं। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल संवैधानिक रूप से कार्य कर रहे हैं, उन्हें यथावत् कार्य करने से बार-बार डिमोरेलाइज करने का काम नहीं किया जाना चाहिए। एक भले आदमी के ऊपर बार-बार आरोप लगाकर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश की वर्तमान मायावती सरकार, जो सुचारू रूप से शान्तिपूर्वक उत्तर प्रदेश में शासन चला रही है और उत्तर प्रदेश के विकास को आगे बढ़ा रही है, उसमें व्यवधान उत्पन्न करने का काम नहीं किया जाना चाहिए।
श्री राशिद अलवी (अमरोहा):अध्यक्ष जी, समय कम है, सारे भाषण मैंने सुने, जिनमें गुंडागर्दी से लेकर करप्शन तक की बात कही गई है। वक्त कम है और मैं बड़े तसद्दुद में मुब्तिला हूं कि अपनी बात शुरू करूं तो कहां से शुरू करूं। अगर १९७७ से शुरू करूं जब सारे लोग बी.जे.पी. के साथ मिलकर देश में राज कर रहे थे तो बात बहुत लम्बी हो जायेगी। अगर उसके बाद अपनी बात शुरू करूं तो १९८९-९० में एक बार फिर बी.जे.पी. के साथ मिलकर राज चल रहा था तो भी बात लम्बी हो जायेगी। अगर मैं अपनी बात उस वक्त से शुरू करूं जब यू.पी. में गवर्नर भंडारी साहब थे और ६ महीने तक यू.पी. के अंदर गवर्नर राज था तो भी मेरी बात लम्बी हो जाएगी। मैं इस पक्ष में भी नहीं हूं कि किसी राज्यपाल के आचरण के लिए लोक सभा के अंदर बहस की जाए। किसी भी राज्यपाल के आचरण पर लोक सभा के अंदर अगर बहस करेंगे तो लोक सभा की गरिमा भी कम होगी और हिन्दुस्तान की जम्हूरियत की भी गरिमा कम होगी।…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार (फैज़ाबाद):संविधान लिखने के वक्त तो आप ही थे।…( व्यवधान)
श्री राशिद अलवी :संविधान लिखने के वक्त तो नहीं था लेकिन संविधान को समझना जानता हूं और यह भी जानता हूं कि कब आप इधर की जुबान बोलने लगते हैं और कब उधर की जुबान बोलने लगते हैं। यह सिर्फ आप ही समझ सकते हैं।…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : जो सही होगा, वही बोलेंगे चाहे आपको अच्छा लगे चाहे इनको अच्छा लगे।…( व्यवधान)
श्री राशिद अलवी :संविधान के अंदर आर्टिकल १७४ और १७५ के अंदर गवर्नर के राइट्स और कर्तव्यों के बारे में लिखा हुआ है। मैं इसे पढ़कर समय खराब नहीं करना चाहता हूं। फिर कहेंगे कि संविधान के वक्त आप मौजूद थे, लेकिन आज संविधान है और मैं आपसे भी कहूंगा कि अगर आपने आर्टिकल १७४ न पढ़ा हो तो उसे पढ़ लें।…( व्यवधान)लेकिन मैं अपनी बात इस चुनाव से शुरू करता हूं जो अभी असैम्बली का चुनाव हुआ था, जो ८-१० महीने पहले यू.पी. में चुनाव हुआ था। जम्हूरियत के अंदर जिसके पास ज्यादा वोट होते हैं, वह जीतने वाला कहलाता है। अल्लामा इक़बाल ने कहा है कि जम्हूरियत वह तरज़े-हकूमत है कि जिसमें इंसान को गिना जाता है, तौला नहीं जाता है। जिसके पास अकसरियत होती है, वह राज करता है। बड़े से बड़े और छोटे से छोटे आदमी का एक वोट होता है। जिसके पास ताकत होती है, वह सरकार बनाता है। यू.पी. के अंदर भी महीने भर से ज्यादा प्रेसीडेंट रूल रहा। वे तमाम राजनीतिक दल जो यू.पी. में राज करना चाहते थे, उनके पास पूरा मौका था कि वे बहुमत साबित करते और राज्यपाल के सामने जाते। राज्यपाल के सामने जाकर कहते कि हमारे पास इतने एमएलएज की अकसरियत है, हम यू.पी. में सरकार बनाएंगे लेकिन किसी ने नहीं कहा। हम भी इंतजार करते रहे। बहुजन समाज पार्टी भी इंतजार करती रही कि वे तमाम सैकुलर ताकतें जो पूरे हिन्दुस्तान के अंदर सैकुलर की दुहाई देती हैं, वे आगे बढ़ेंगी और कहेंगी कि तुम आगे बढ़ो और यू.पी. में राज चलाओ और तुम यू.पी. की सरकार बनाओ। लेकिन ऐसा नहीं हुआ जबकि सारा हिन्दुस्तान जानता है कि उस दलित की बेटी ने दूसरों को मौका दिया था कि यू.पी. का राज चलाओ। उस दलित की बेटी का इतना बड़ा दिल था कि उसने कहा था कि यू.पी. में तुम मुख्य मंत्री बनो, राज करो और राज चलाओ। हम इंतजार करते रहे। कोई सैकुलर पार्टी आगे नहीं बढ़ी। कोई सैकुलर तनज़ीम आगे नहीं बढ़ी जिसने उनसे कहा हो कि यू.पी. के हालात खराब हैं, हम आपका साथ देंगे। एक महीने से ज्यादा वक्त गुजर गया। तब भाजपा आगे बढ़ी और दलित की गरीब बेटी को मौका दिया कि यू.पी. की मुख्य मंत्री बनो और इस ६ महीने के वक्त के अंदर उस दलित की बेटी ने जिसके ऊपर तरह-तरह के इल्ज़ामात लोक सभा में लगाए जा रहे थे, यह गर्व के साथ कह सकता हूं कि यू.पी. में एक भी कम्युनल रायट नहीं हुआ है। एक भी फिरकावारान फसाद नहीं हुआ है जबकि उससे पिछली सरकारों के अंदर फिरकावाराना फसाद बड़ी संख्या में हुए थे। मुलायम सिंह यादव जी यहां बैठे हैं। मैंने उनकी तकरीर को गौर से सुना है लेकिन यू.पी. के मुस्लिमों ने हमेशा बड़ी तादाद में आपका साथ दिया। इसमें कोई चोरी की बात नहीं है। वे आपके साथ रहे हैं। उन्होंने आपको नेता माना।
जब उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार थी, उस समय उत्तर प्रदेश में जो कम्युनल रायट्स हुए थे, उसकी सच्चाई आप मुझ से ज्यादा जानते हैं। मैं बिजनौर का रहने वाला हूं और अमरोहा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की मैं नुमाइन्दगी करता हूं। अमरोहा जिला ऐसा जिला है, जिस जिले के अन्दर तारीख गवाह है कि हिन्दुस्तान के अन्दर इससे ज्यादा सैक्युलर जिला दूसरा कोई नहीं है। आजादी से पहले एक तारीखी चुनाव हुआ था, जिसमें हाफिज़ मोहम्मद साहब कांग्रेस से चुनाव लड़े थे और मुस्लिम लीग से कोई शमीर साहब थे। उस चुनाव के अन्दर हिन्दुस्तान के तमाम लीडर बिजनौर गए थे। उस वक्त पाकिस्तान के नारे बुलन्द हो रहे थे। जवाहरलाल नेहरू जी से लेकर जिन्नाह तक अनेक लोग बिजनौर की सरजमीन पर गए। उस चुनाव में, आज भी तारीख के पन्नों के अन्दर लिखा हुआ है, मुस्लिम लीग नहीं जीती थी, कांग्रेस के हाफिज मोहम्मद साहब जीते थे, जबकि वहां मुसलमानों की आबादी थी और उस वक्त वे बड़ी तादाद में थे। उन्होंने साबित किया था कि बीजनौर का जिला सैक्युलर जिला है और सैक्युलर रहना चाहता है। उसी बिजनौर के अन्दर मुलायम सिंह जी के जमाने में जब आप मुख्यमंत्री थे और मुसलमानों के कन्धों पर चढ़कर मुख्यमंत्री बने थे, तब बिजनौर के मुसलमानों के साथ जो सलूक हुआ, वह मैं बयान नहीं कर सकता हूं। मैं वह फोटोग्राफ लाना भूल गया, जिसे मैंने अपने आफिस से निकाला था। उसमें दिखाया गया था कि लाश खेतों के अन्दर पड़ी हुई है और सूअर सूंघने का काम करे हैं। मैं आपसे पूछता हूं, आप यहां मौजूद हैं और मुझे आपसे पूछने का मौका मिला है, यह मेरे दिल का दर्द है और मैं बिजनौर के मुसलमानों की तरफ से, उत्तर प्रदेश के अकलियतों की तरफ से पूछना चाहता हूं, क्या बिजनौर के अन्दर जो फसाद हुए, उसमें आपने किसी एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की? …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :उनकी हत्या करने वाला कौन था और आप किनके साथ बैठे थे।…( व्यवधान)
श्री राशिद अलवी : मुलायम सिंह जी, मेरा सवाल था - क्या उस समय आपकी सरकार ने किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की? …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :हां, एसपी के खिलाफ कार्रवाई की थी …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप अपनी बात बाद में कह लीजिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : यह आरोप है। वहां अयोध्या को लेकर, रथ यात्रा को लेकर एक स्थिति थी। लेकिन अगर उन बातों में जायेंगे, तो पता चलेगा कि क्यों हो रहा था और किन परिस्थितियों के अन्दर हमने नकेल डाल दी थी।
अध्यक्ष महोदय : आप अपना भाषण जारी रख सकते हैं।
श्री राशिद अलवी : महोदय, मैं एक बात कहना चाहता हूं - "जिन्हें तुम सुन नहीं सकते, जिन्हें हम कह नहीं सकते, वही कहने की बातें हैं और वही सुनने की बातें है।"एक एडीएम जो इसमें शामिल था, उसे आपने प्रमोट करके बरेली भेज दिया। हम कहते रहे गए कि इसको ससपैंड करिए, क्योंकि उसने अपनी गोलियों से मुसलमानों को भूनने का काम किया था । हम आपको अपना सीना चीरकर नहीं दिखा सकते हैं। जो हमारे दुश्मन हैं, उन्हें हमारी गर्दनें इसलिए चाहिए कि वे हमारे दुश्मन हैं और जो हमारे दोस्त हैं, उन्हें हमारी गर्दनें इसलिए चाहिए कि वे हमारे दोस्त हैं।
महोदय, मैं लम्बी बात नहीं कहना चाहता हूं. लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश के अन्दर आज जो स्थिति है और जैसा कहा जा रहा है कि वह अक्सरियत की सरकार नहीं, मैजोरिटी की सरकार नहीं, माइनोरिटी की सरकार है। इस बात को किसी भी तरह साबित नहीं कर सकते हैं। किसी काउन्सिल के चुनाव की जीत और हार इस बात को साबित नहीं कर सकती है। मैंने मुलायम सिंह जी की तकरीर को बहुत गौर से सुना है। आपकी तकरीर को एक जुमले में कहा जाए, तो स्थिति यह है कि आपको उत्तर प्रदेश की सरकार पर यह भ्रम है कि वह मैजोरिटी में नहीं है और माइनोरिटी में है। मैं पूछना चाहता हूं, कांग्रेस के मित्र भी यहां बैठे हुए हैं, एक बार यह क्यों नहीं कह देते कि समाजवादी पार्टी सरकार बनाए, हम साथ हैं। आपने गवर्नर के सामने भ्रम की बात ही नहीं की, आपने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के अन्दर हमारे पास मैजोरिटी है और २०४ विधायकों की लिस्ट गवर्नर को पेश की। मैं आपसे पूछता हूं, अगर आपको गवर्नर बना दिया जाए, तो क्या आप यह नहीं देखेंगे कि २०४ विधायकों के नाम क्या हैं, पते क्या हैं और उनके दस्तखत मौजूद हैं या नहीं और आपको सपोर्ट करते हैं या नहीं करते हैं। आपने कोई लिस्ट नहीं दी। आपने कोई नाम भी नहीं दिए और आपने दस्तखत भी नहीं दिए। पूरी दुनिया में इस बात को कौन यकीन करेगी कि वे २०४ लोग आपके साथ हैं। काउन्सिल के चुनाव के अन्दर आपको १८३ वोट पड़े और रूलिंग पार्टी के उम्मीदवार १९४ वोट लेकर जीता । कांग्रेस एब्स्टेन कर गई। मैं आपसे लीगली बात करता हूं कि कांग्रेस भी यह साबित नहीं कर सकती कि उन्होंने एब्स्टेन किया। किस एमएलए ने एब्स्टेन किया, किस ने वोट दिया और किस ने नहीं दिया, इसका कोई सबूत किसी के पास नहीं हो सकता। यह मुमकिन ही नहीं है कि इस बात को आप साबित करें। आप अखबारात के जरिए कर सकते हैं, इलैक्शन कमीशन के रिकार्ड के हिसाब से नहीं कर सकते।…( व्यवधान)यह सिक्रेट बैलेट है।…( व्यवधान)
SHRI SONTOSH MOHAN DEV (SILCHAR): When you take a ballot, you have to sign. … (Interruptions)
श्री राशिद अलवी : यह पता नहीं चलेगा कि किस ने किसे वोट दिया, सिर्फ यह पता चलेगा कि किस ने वोट नहीं दिया। इसलिए किसी भी इलैक्शन से यह साबित नहीं कर सकते कि सरकार मेजोरिटी में है या माइनोरिटी में है। किस ने किसे वोट दिया, किसे नहीं दिया, इसका कोई सबूत किसी के पास नहीं हो सकता है।
महोदय, उत्तर प्रदेश में आज भी सरकार मेजोरिटी में है। आपने गुंडागर्दी की बात की है, मैं बहुत अदब के साथ कहना चाहता हूं, हाउस का वक्त खराब करना नहीं चाहता, लेकिन मेरे पास लिस्ट मौजूद है, जो समाजवादी पार्टी के नेताओं की है। मेरे पास रिकार्ड है, लेकिन मैं किसी का नाम लेकर किसी की तोहीन नहीं करना चाहता। इस लिस्ट में मौजूद है कि किस के खिलाफ कितने क्रमिनल केसेस हैं। राशिद अल्वी दुनिया का आखिरी आदमी होगा, जो किसी बेईमान या क्रमिनल आदमी का साथ देगा। वह किसी भी पार्टी का हो, वह कांग्रेस, मेरी या आपकी पार्टी का हो। मैं किसी बेईमान या क्रमिनल आदमी के साथ नहीं जा सकता, लेकिन मेरे पास आपकी पार्टी की भी लिस्ट मौजूद है। मैं एक-एक करके सब नाम पढ़ सकता हूं, लेकिन मैं पढ़ना नहीं चाहता। मेरी गुजारिश यह है कि हिन्दुस्तान की राजनीति को अगर आप क्रमिलाइजेशन से अलग नहीं करेंगे तो हिन्दुस्तान की राजनीति, जम्हूरियत खराब हो जाएगी - चाहे वह कोई भी राजनैतिक दल हो। जब तक क्रमिनल लोगों से दूर नहीं रहेंगे तब तक लम्बी राजनीति भी नहीं कर सकते। अगर राजनीतिक दलों में गुंडे और क्रमिनल्स आएंगे तो फिर न उनकी राजनीति लम्बी हो सकती है और ने नेताओं की हो सकती है।
महोदय, जिस तरह का वाक्या लोक सभा के अंदर हुआ, मैं आपसे शिकायत नहीं करता कि आपने उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की, लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि इस लोक सभा की क्या गरिमा पूरे हिन्दुस्तान की अंदर रही। अखबारात के अंदर भी यह बात आई। उस समय यहां फॉरेन डेलीगेशन बैठा हुआ था, किस तरीके का वाक्या यहां पेश आया।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने उसी समय कहा था कि यह बात अच्छी नहीं है। मैंने इस विषय में निर्णय लिया और आप जानते हैं कि मैंने उसी समय यह भी कहा कि आज के बाद ऐसी बात न हो। इसलिए उस विषय को आप छोड़ दीजिए।
श्री राशिद अलवी : आप कह रहे हैं तो मैं उसकी चर्चा नहीं करता। यहां एक बात राजाभैया के बारे में कही गई। मैं कतई किसी को डिफेंड नहीं करना चाहता, यह भी मैं इस हाउस की गरिमा के खिलाफ समझता हूं कि उत्तर प्रदेश के अंदर किसी क्रमिनल को डिफेंड किया जाए या उसकी इस लोक सभा में चर्चा भी की जाए, लेकिन उत्तर प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह कानून के मुताबिक हो रहा है।
महोदय, मुझे याद है कि जब असेम्बली का चुनाव हुआ था तो समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं ने मेरी कांस्टीटयूएंसी में भारतीय जनता पार्टी पर इल्जाम लगाया था कि राजाभैया जैसे अपराधी भाजपा की मनिस्ट्री में शामिल हैं। आज अगर उनके खिलाफ मायावती ने कोई कार्यवाही की है तो मैं बहन मायावती को मुबारकबाद देता हूं। आपने जिस तालाब का जिक्र किया, मेरी मायावती जी से उसके बारे में बात हुई थी। मैं जानता था कि यह मसला उठ सकता है। उत्तर प्रदेश के चीफ मनिस्टर ने मुझे बताया कि वह तालाब, जो सैंकड़ों एकड़ में मौजूद है, उसकी लोगों ने एफआईआर की है कि हमारी जमीन जबरदस्ती कब्जा ली है। ग्रामसभा की जमीन, उस पर अगर चीफ मनिस्टर ने फैसला किया है तो ठीक किया है। इससे उत्तर प्रदेश को गुंडागर्दी से, जिस तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री निपट रही हैं, ऐसी मिसाल उत्तर प्रदेश में नहीं मिल सकती। उत्तर प्रदेश में अपराधों के अंदर ४७ फीसदी की कमी पिछले छ: महीनों में आई है, जो ५० प्रतिशत हिस्ट्री शीटर्स आउटस्टैंडिंग क्रमिनल्स हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश की सरकार ने गिरफ्तार करने का काम किया है।
बलात्कार में २२ प्रतिशत कमी आई, क्राइम्स में २७ प्रतिशत कमी आई। बहुत सारे काम जो उत्तर प्रदेश सरकार ने किये हैं वे आपने भी गिनाए हैं। मानवाधिकार आयोग उत्तर प्रदेश के अंदर आज तक गठित नहीं हुआ था, बहन मायावती की सरकार ने उसे गठित करने का कार्य किया है। उत्तर प्रदेश में जो खजाना खाली था, आर्थिक स्थिति खराब थी, आज करीब-करीब एक हजार करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश की सरकार ने पैदा करने का काम किया है। ऊर्जा निगम का जो २२५ करोड़ रुपया बिजली विभाग पर पड़ा हुआ था वह रेवेन्यू बढ़ाने का कार्य उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है। यही नहीं, आज गरीब आदमी, साधारण आदमी से कह दिया गया है कि दो घंटे रोजाना, उत्तर प्रदेश के हर जिले के अंदर डीएसपी सीधा आपकी समस्याओं को सुनेगा।
जहां तक तबादलों का ताल्लुक है, अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं और शासन के अंदर तबादले करना कोई गलत बात नहीं है। कोई सांसद महोदय कह रहे थे कि सांसदों की कमेटी बनाई जाए लेकिन मायावती सरकार ने यह काम किया है कि आज जितना खौफ अधिकारियों के अंदर है उतना पहले कभी नहीं था। जिसका नतीजा यह है कि कोई भी अधिकारी अपने काम के प्रति लापरवाह नहीं हो सकता।…( व्यवधान)उत्तर प्रदेश सरकार ने निश्चय किया है कि क्रिमनल्स के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी। इसके अलावा मेरे साथियों ने दलितों के बारे में कहा था। मेरा कहना यह है कि दलितों की पट्टे की भूमि पर कजो गैर-कानूनी कब्जा था उसको हटाने का कार्य उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है और दो लाख हैक्टेयर भूमि दलितों को वापस दिलाई है। पांच प्रतिशत मुसलमानों के लिए थाने के इंचार्ज का पद जरूरी किया है, बीस प्रतिशत थाना इंचार्ज के पद शैडयूल्ड कास्ट के लिए होंगे ताकि शैडयूल्ड कास्ट के लोगों के साथ ज्यादती न हो सके। बैकवर्ड क्लास के लोगों के लिए २७ प्रतिशत रिजर्वेशन किया गया है।
आखिर में मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि राजनीति में जिसके पास बहुमत होता है वही हुकूमत करता है और जिस दिन भी असैम्बली का सैशन बुलाया जाएगा, उस दिन बहुजन समाज पार्टी की सरकार अपना बहुमत साबित कर देगी और दुनिया देखेगी कि वही बात सही हुई जो हम कह रहे हैं। आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद।
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF COAL AND MINES AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF LAW AND JUSTICE (SHRI RAVI SHANKAR PRASAD): Mr. Speaker, Sir, I am extremely grateful that you have given me an opportunity to speak on an issue of such importance.
Sir, let us realise certain basic facts. When the elections of Vidhan Sabha were held, no Party got the majority. This is the age of coalition.
कुंवर अखिलेश सिंह:प्रसाद जी, आप तो बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं, आप हिंदी में बोलिये।
श्री रवि शंकर प्रसाद :अभी अंग्रेजी में बोलने दीजिए, फिर हिंदी में भी बोलूंगा। कुछ कानूनी विषयों पर बात करूंगा, इसलिए अंग्रेजी चलने दीजिए।
अध्यक्ष महोदय : हिंदी मिक्स करके बोलिये।
श्री रवि शंकर प्रसाद :मैं तो वही करने वाला था अध्यक्ष जी लेकिन ये चाहते हैं तो मैं हिंदी में बोलता हूं।
आदरणीय अध्यक्ष जी, अगर किसी चुनाव के पश्चात किसी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो ऐसे में देश की राजनीति को क्या करना है, यह देश की जनता हमसे अपेक्षा करती है। इसके रास्ते दो हैं। एक तो ईमानदारी से कोलिशन बनाइये या बैक-स्टैबिंग करिये। एनडीए की सरकार बनी। हमारे साथ सहयोगी पार्टियां थीं। हमारे रिश्ते ईमानदारी और प्रमाणिकता के हैं। बीस से अधिक पार्टियों के साथ हम केन्द्र में सरकार चला रहे हैं और हमने एक कॉमन एजेंडा बनाया है। ये सारी पार्टियां हमसे अलग भी रही हैं और हम इस तथ्य से इंकार नहीं करते हैं। But we have tried to live up to the real culture of a coalition politics. दिल्ली में पहले भी हुआ था। याद करिये कि युनाइटेड फ्रंट की सरकार बनी थी।
तब आठ महीने एक प्रधान मंत्री को चलने दिया गया। फिर कांग्रेस पार्टी ने विदड्रा कर लिया। फिर दूसरे प्रधान मंत्री आए, फिर उनको विदड्रा कर लिया गया। क्या यह प्रामाणिकता नहीं है? लखनऊ में सपा और बीएसपी की एक सरकार बनी थी। उसके बारे में मैं टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।
Shri Somnath Chatterjee, for whom I have great regard and reverence has mentioned about the degeneration of politics and the quest for power. मायावती जी के साथ लखनऊ के गैस्ट हाउस में जो हुआ था, वह हिन्दुस्तान की राजनीति का सबसे शर्मनाक दिन था। जब दूरी बढ़ी थी डिफरेंसिज पॉलटिक्स में होंगे, वे अलग होंगे लेकिन अलग होने में एक ईमानदारी होनी चाहिए। मायावती जी के अलग होने के बाद उन पर लखनऊ में जो हमला हुआ, वह हिन्दुस्तान के पॉलटिक्स का सबसे शर्मनाक दिन था। अगर किसी को सत्ता नहीं मिलेगी तो क्या विकल्प होगा, संविधान ने इसकी व्यवस्था की है।
सोमनाथ बाबू ने अच्छा कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बोम्मई केस में एक दिशा निर्देश दिया था। आदरणीय सोमनाथ बाबू बड़े वरिष्ठ सांसद हैं और उससे बड़े वकील भी हैं। मैं उम्मीद करता था कि वह संविधान की सही व्याख्या करेंगे। उन्हें इसका काफी लम्बा अनुभव है। इससे इतर राज्यपाल जी के बारे में यहां अनर्गल बातें कहीं गईं जिन पर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी, क्या राज्यपाल को सिर्फ बटन दबाना है या उनका कुछ विवेक है? मैं यहां पर एक बात कहना चाहता हूं। सरकारिया कमीशन की बात कही जाती है। जब सरकारिया कमीशन बना था, उस समय हम सत्ता में नहीं थे लेकिन आज सरकारिया कमीशन की सिफारिशों को बड़े सम्मान से देखते हैं। मैं सरकारिया कमीशन की रिकमंडेशन ४.१६.१३ सदन के सामने पढ़ रहा हूं :
"(a) When the Legislative Assembly is in Session the question of majority should be decided on the floor of the House.
(b) If during the period when the Assembly remains prorogued and the Governor receives reliable evidence that the Council of Ministers has lost majority, he should not, as a matter of constitutional propriety, dismiss the Council unless the Assembly has expressed on the floor of the House its want of confidence in it. He should advise the Chief Minister to summon the Assembly as early as possible so that the ‘majority’ could be decided."
जो इंटर स्टेट काउंसिल की मीटिंग हुई थी, उसने इस बात को स्वीकार किया:
"When the Assembly is not in Session and the Governor receives reliable evidence … "
What does this mean? This means that the Governor has got the power to scrutinise; the Governor has got the power to be satisfied; and the Governor has got the power to objectively apply his mind.
अब अगर आप उत्तर प्रदेश की सरकार के मामले में देखना चाहें, तो जब यह रिजल्ट आया कि किसी को बहुमत नहीं मिला तो पहले ८ मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उसके बाद सपा के लोग राज्यपाल के पास गए और आग्रह किया। कांग्रेस से वोट की बात हुई, सपोर्ट की बात हुई. चटि्ठयां देने की बात हुई लेकिन कुछ रिस्पौंस आया नहीं। ३-५-२००२ को श्रद्धामना मायावती जी को मुख्यमंत्री की शपथ दिलायी गई और कहा गया कि २१ दिन में बहुमत साबित करिए। १७.५.२००२ से पूर्व ही उन्होंने २१७ वोट लाकर बहुमत साबित किया। यह एक तथ्य की बात है। कहा जा रहा था कि लार्जेस्ट पार्टी को इसमें इनवाल्व करना चाहिए।
The Bommai judgement has laid down the rules of the game. I have my very respectful disagreement with the manner in which sweeping comments are sought to be made about the Bommai judgement. Therefore, I seek your very kind indulgence to quote before you the Bommai judgement.यह एआईआर १९९४ सुप्रीम कोर्ट के पृष्ठ २०९८ पर बोम्मई केस का जजमैंट है। मैं उसके पैराग्राफ ३२८ को रखने की कृपापूर्वक अनुमति चाहता हूं।
"We make it clear that what we have said above is confined to a situation where the incumbent Chief Minister is alleged to have lost the majority support or the confidence of the House. It is not relevant to a situation arising after a general election where the Governor has to invite the leader of the party commanding majority in the House or the single largest party … "यह शब्दावली बहुत महत्वपूर्ण है। यह कहा गया कि सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को पहले बुलाइए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है : ‘What is important is which group commands the majority of the House and the confidence of the House.’ अध्यक्ष महोदय, मैं इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस.आर. बोम्मई केस में एक दूसरा पैरा ३२३, पृष्ठ २०९७ का उल्लेख करना चाहता हूं :
"The Constitution does not create an obligation that the political party forming the ministry should necessarily have a majority in the Legislature. Minority governments are not unknown. What is necessary is that that government should enjoy the confidence of the House. "अगर एस.आर.बोम्मई केस में जजमेंट स्पष्ट रुप से दिया गया है तो उससे राज्यपाल को विवेक का अधिकार मिलता है कि उनके सामने सिंगल लारजैस्ट पार्टी है, उनका एक ग्रुप है जो बहुमत का दावा करता है। क्या यह सच्चाई नहीं है कि जब बसपा ने अपना दावा पेश किया तो बीजेपी ने अपने नेताओं के साथ जाकर राज्यपाल महोदय को लखित रूप से पत्र दिया कि वे बसपा का समर्थन करने के लिये तैयार हैं। उस समय बसपा-भाजपा के सभी विधायकों की संख्या सपा के विधायकों की संख्या से काफी ज्यादा थी। अगर यह स्थिति बनती है तो बहुमत सिद्ध करने के लिये २१ दिन का समय दिया जाये।to prove the majority and when Kumari Mayawati proved the majority by more than magic number of 217 ऐसे में यह टीका-टिप्पणी करना कि राजभवन का भगवाकरण हो गया है, इस निर्णय पर चर्चा करने का अधिकार इस सदन को है लेकिन संविधान में यह लिखा हुआ है कि सांवैधानिक पदों पर बैठे हुये लोगों के संबंध में चर्चा के समय गरिमा का ध्यान रखा जायेगा। अगर यह तथ्य है तो आज तक जो कहा गया, क्या हम सिर्फ पॉवर पौलटिक्स के लिये कर रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या कांग्रेस पार्टी की समाजवादी पार्टी के साथ लड़ाई नहीं हुई थी? उसके बावजूद क्या कांग्रेस पार्टी से विनम्रतापूर्वक विनती नहीं की गई थी? क्या यह बात सच नहीं कि उस विनती के बावजूद उनकी इस बात पर कोई विचार नहीं किया गया और राजभवन में कांग्रेस की चिट्ठी नहीं गई? those who blame us of indulging into naked power pursuit need to reflect on their own house. Yes, I see Shri Somnath Chatterjee’s real concern यह सही है कि आज राजनीति में गिरावट आई है। अगर आज सहभागिता, सांझेदारी की राजनीति का कालखंड आया है तो इसकी प्रमाणिकता तब तक मानी जायेगी जब तक कोआलीशन गवनमेंट में ईमानदारी है। इसके अलावा साथ साथ चलने का संकल्प किया जाये। आज बसपा-भाजपा के साथ अजीत सिंह पार्टी, जेडी(यू) और निर्दलीय हैं। अगर वे ऐसी कार्यवाही कर रहे हैं और अभी तक लखित रूप से उन्होंने प्रमाण नहीं दिया है तो जैसा अभी श्री श्याम बिहारी मिश्रा ने जिक्र किया कि एम.एल.सी. के चुनाव के समय सही अवसर था। समाजवादी पार्टी २०४ सदस्यों का बहुमत लेकर आती , उसके पास प्रमाणित करने का एक अवसर था। इसलिये संविधान की व्याख्या स्पष्ट है कि सिंगल लारजैस्ट पार्टी होना जरूरी नहीं है। अगर यह दो या तीन पार्टियों का बहुमत राजभवन के सामने प्रदर्शित होता है यहां सुश्री मायावती को बुलाया गया जोकि एक उचित निर्णय था, वह एक प्रामाणिक निर्णय था, वधिसम्मत निर्णय था। मुझे लगता है कि इस वधिसम्मत निर्णय के संबंध में राजनीति की बातें हुई। यहां बात उत्तर प्रदेश की हो रही है लेकिन दिल्ली की सरकार पर चली आई। दिल्ली की सरकार तक नहीं बल्कि शिक्षा के भगवाकरण पर बात चली गई। श्री सोमनाथ बाबू बोल रहे थे। वे देश के बहुत बड़े कानूनविद् हैं। क्या यह सही है कि सुप्रीम कोर्ट ने उस पूरे विवाद पर अपना निर्णय दिया लेकिन उस अंतिम निर्णय के बाद उसको बार-बार उठाया जायेगा। ठीक है, राजनीति होती है लेकिन कहीं न कहीं ..(व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य : क्या दिया है?
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: The Supreme Court has already said that on the ground of saffronisation it was found to be untenable and rejected. This is what the ruling of the Supreme Court.
कुंवर अखिलेश सिंह:मैं आपके संज्ञान में यह बात लाना चाहता हूं कि रामपुर तिराहा कांड के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय दिया, तब आपकी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय को नजरअंदाज कर दिया और सदन के पटल पर गलत बयान दिया।
SHRI BASU DEB ACHARIA : The Supreme Court’s judgement was not on the saffronisation of education. … (Interruptions)
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: I do not think that we are discussing it here, but the chapter ended there and they could not show अगर शिक्षा के नाम पर एक चिंतन को जो आज तक तीस साल से चलाया गया, अगर शिक्षा के नाम पर…( व्यवधान)
Please allow me to speak. I did not disturb you.
MR. SPEAKER: You may please continue.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: Yes, sir. शिक्षा के नाम पर अगर जाटों को, शिक्षा के नाम पर अगर सिखों के साथ दुर्भावना से तथ्यों से इतर टिप्पणी करते हुए एक प्रकार का विचार दिया जायेगा तो Certainly the Government has got the right to review objectively and fairly. सुप्रीम कोर्ट ने उसे अपहोल्ड किया है।
कुंवर अखिलेश सिंह: यह चीज सब पर लागू होती है।
श्री रवि शंकर प्रसाद :जी हां, सब पर लागू होती है। अखिलेश जी, मैंने यह सोमनाथ बाबू के संबंध में कहा है। इसलिए अंत में मैं बहुत विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने जो निर्णय दिया है वह वधिसम्मत निर्णय है। वह सरकारिया आयोग के निर्देशों के अनुसार है, वह इंटर-स्टेट काउंसिल की अनुशंसाओं के अनुसार है और सुप्रीम कोर्ट ने जो बोम्मई केस में निर्णय दिया है, मैं उसका एक और पैराग्राफ पढ़कर अपनी बात समाप्त करूंगा। इसके पैराग्राफ १९८ में जस्टिस रामास्वामी ने एक बात कही है, जो मैं आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। बार-बार यहां फ्लोर टैस्ट की बात कही जा रही है।
"The floor test, may be one consideration which the Governor may keep in view. But whether or not to resort to it would depend on prevailing situation. The possibility of horse trading also to be kept in view having regard to the prevailing political situation. It is not possible to formulate or comprehend a set of rules for the exercise of the power by the Governor conduct floor test. The Governor should be left free to deal with the situation according to his best judgement keeping in view the Constitution and the conventions of the Parliamentary system of Government."अगर इतने अधिकार उन्हें बोम्मई जजमैन्ट से दिये गये हैं और इन अधिकारों का विचार करते हुए जो जमीनी सच्चाई थी, जो राजनीतिक वास्तविकता थी और एक प्रामाणिक कोएलीशन बनाकर वे उनके सामने गये, उन्हें बुलाया गया तो यह वधिसम्मत है, इस पर वैधानिक रूप से जो टीका-टिप्पणी की जा रही है, वह वधिसम्मत नहीं है। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि आज अगर कोएलीशन का युग है तो यह कोएलीशन प्रामाणिकता से चले और उत्तर प्रदेश में मायावती जी के नेतृत्व में यह कोएलीशन बहुत ही प्रामाणिकता से चल रहा है।
*m08 श्री सईदुज्जमा (मुजफ्फ़रनगर):माननीय स्पीकर साहब, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने का मौका दिया। आज उत्तर प्रदेश की जो हालत है, उससे पूरा देश भली-भांति वाकिफ है। इस प्रदेश की जो गरिमा थी, जिसने पूरे हिंदुस्तान को रास्ता दिखाया, नेतृत्व किया, आज उसके बारे में क्या-क्या चर्चाएं हो रही हैं। मैं देख रहा हूं कि चर्चा मुद्दे से हटकर हो रही है। चर्चा का बिन्दु क्या होना चाहिए, वह बिन्दु न होकर मायावती ने यह किया, फलां ने यह किया। आज चर्चा का बिंदु यह है कि इस वक्त प्रदेश की क्या हालत है। आज प्रदेश में अविश्वास का वातावरण है, आज प्रदेश संकट की स्थिति में है। आज आप देख रहे हैं कि इस अविश्वास के वातावरण के कारण तमाम काश्तकार परेशान हैं। मिलें नहीं चल रही हैं। तमाम गन्ने को किसान जला रहे हैं और आत्महत्या करने की पोजीशन में है। बेरोजगारी की क्या हालत है। बिजली की क्या हालत है। आज तमाम तरह की वहां गंभीर समस्याएं हैं। उन मुद्दों पर आप क्या-क्या बातें कर रहे हैं। लेकिन असली हालत पर आने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, आज मायावती जी की तारीफों के क्या-क्या पुल बांधे गये१ मायावती जी ने सेक्युलर हालात बनाने के नाम पर वोट मांगे और यह कहा कि हम फिरकापरस्ती के खिलाफ लड़ेंगे। लेकिन आज वह उन्हीं फिरकापरस्तों की गोद में जाकर बैठ गई हैं। आज आप कोएलीशन की बात करते हैं, मान्यताओं की बात करते हैं, पालिसी की बात करते हैं, वैल्यूज की बात करते हैं। आप वैल्यूज की बात पर न जाइये। आज सब वैल्यूज पायेमान हो गई हैं। १३ वर्षों तक उत्तर प्रदेश की जो हालत वहां की सरकारों ने बिगाड़ी है, उसे पूरा हिंदुस्तान देख रहा है। वह हालत किसी से छिपी नहीं है। आज तमाम लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इन लोगों के हाथ में सत्ता देकर हमने बड़ा गलत काम किया है। उनके सामने आज सारे प्रमाण आ रहे हैं। हम उन पर नहीं जाना चाहते। वहां कांग्रेस पार्टी ने जो किया, पूरे प्रदेश के लिए जो काम किया, वह आज किसी से छिपा नहीं है। आज कितनी गन्ना मिलें इस सरकार के द्वारा बंद की गई हैं। आज वहां बिजली का कितना उत्पादन हो रहा है। वहां बिजली उत्पादन के दो केन्द्र ऊंचाहार और टांडा इन सरकार ने बंद कर दिये और उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों ने कर्जे में दे दिये। लेकिन सवाल इस बात का है कि आज सरकार अपना विश्वास खो चुकी है। आज पूरे प्रदेश में एक असहजता की स्थिति बनी हुई है। वहां एक ऐसी स्थिति बनी है कि जिसमें सरकार विश्वास खो चुकी है।
आज हमारा यह नैतिक फर्ज़ है और मायावती जी का भी नैतिक फर्ज़ है कि विधान सभा बुलाएं। महामहिम का हम आदर करते हैं लेकिन उन्हें संविधान की मूल आत्मा की रक्षा करनी चाहिए। आज हमारा दायित्व है कि हम कुर्सी पर बैठते हैं तो ईमानदारी से निर्णय लें। जब स्पीकर की कुर्सी पर बैठ जाएं, गवर्नर की कुर्सी पर बैठ जाएं तो ईमानदारी से निर्णय लें। तमाम इतिहास उसका साक्षी रहता है। जब कुर्सी से कोई ऐसा कार्य होता है तो उसको हमेशा याद रखा जाता है। आज भाजपा के कुछ विधायकों ने एक सही बात करने की कोशिश की तो उनको बागी करार दे दिया। आप कानून के तहत क्या कार्रवाई कर सकते हैं, डायरैक्शन और व्हिप में अन्तर होता है?…( व्यवधान)हमारे स्पीकर जो हैं विधान सभा के केसरीनाथ जी, वह काबिले-तारीफ हैं। वह कानून का ऐसा विश्लेषण करते हैं और* लेकिन कानून की परिभाषा को स्पष्ट करने में उनकी बड़ी मान्यता रही है, वह विद्वान हैं। मैं देख रहा हूँ कि किसी भी हालत में जो बागी विधायक हैं, उन पर ऐसी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते, आपने उन पर दमन नीति की कार्रवाई की है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : विधान सभा अध्यक्ष का अपमान करेंगे तो मैं रिकार्ड से निकाल दूँगा। विधान सभा के अध्यक्ष पर जो आरोप आप लगा रहे हैं, वह रिकार्ड में नहीं रहेंगे।
श्री सईदुज्जमा: मैंने आरोप नहीं लगाए हैं, मैं तारीफ कर रहा हूँ। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : देखिये, मैंने वह आरोप रेकार्ड से निकाल दिये हैं।
श्री सईदुज्जमा: मैं कह रहा था कि आज ज़बर्दस्ती कानून का दुरूपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। आज सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं,सत्ता के लालच में विधायकों के खिलाफ दमन की कार्रवाई कर रहे हैं और उन्हें झूठे केसों में फंसा रहे हैं। तारीख इस बात की गवाह रहेगी कि आपके ज़माने में आपने राजनीतिज्ञों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, उसका जवाब आने वाली पीढि़यों के सामने नहीं दे सकते। आप सत्ता की भूख में सब कुछ भूल गए, अपनी मान्यताएं और वैल्यूज़ सब आपने खो दिये हैं और पूरी संवैधानिक स्थिति को आपने पायेमान कर दिया है, कानून की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। आज ऐसे मौके पर आपका फर्ज़ हो जाता है कि जब ऐसी स्थिति पैदा हो गई तो सत्र बुलाएं। विधान परिषद् के इलेक्शन में तस्वीर उभरकर आई तो आपके सामने कोई जवाब नहीं है। आप ज़बर्दस्ती उसे इधर-उधर की बातों में उलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय : कृपया समाप्त करें।
श्री सईदुज्जमा: मायावती जी आपके संरक्षण में हैं, उन्हें क्या डर है - जब सैंया भये कोतवाल तो काहे का डर? जब मायावती जी वहां बैठी हैं और आपकी यहां बैठी हैं सरकार - तो कानून की कोई डर नहीं है। जिस हद तक राजनीति में गिरावट आती जा रही है, वह हमारे लिए तकलीफ़देह है और आने वाले समय के लिए बहुत शर्मनाक तस्वीरें आ रही हैं।
* Expunged as ordered by the Chair.
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज):मायावती जी से मिलकर आप चुनाव लड़े थे या नहीं?
श्री सईदुज्जमा: मैं बिल्कुल मायावती जी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा। मेरी अपनी ज़ाती बात है, मैं कभी नहीं लड़ा और मैं सिवाय कांग्रेस के कहीं नहीं गया हूँ। आप लोग सत्ता के लिए पार्टियां बदलते रहते हैं। …( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : कांग्रेस पार्टी ने मायावती जी के साथ मिलकर दो बार चुनाव लड़े हैं।
अध्यक्ष महोदय : सभी को यह बात मालूम है।
श्री सईदुज्जमा: सत्ता के लोभ में जो आपने पार्टियों में परिवर्तन किये हैं, वह सदन जानता है। लेकिन इस वक्त हमारा नैतिक फर्ज़ हो जाता है कि हमारी मान्यताओं और वैल्यूज़ को ज़िन्दा रखा जाए और देखना है कि सामने क्या तस्वीर आ रही है। आप सत्ता में पड़े हैं लेकिन आप विश्वास खो चुके हैं। पूरे प्रदेश में एक अजीब स्थिति बनी हुई है। कोई अधिकारी आपकी बात मानने को तैयार नहीं है। आज पूरे प्रदेश के लोग संकट की स्थिति से गुज़र रहे हैं। ऐसे में मानव धर्म हो जाता है कि आप उसका अहसास करें लेकिन आप लोग ज़बर्दस्ती नाजायज़ तरीके से, गैर-कानूनी तरीके से प्रदेश की सरकार पर कब्ज़ा किये बैठे हैं।
अध्यक्ष महोदय, जिन मान्यताओं को मानकर वे सत्ता में बैठीं, तारीख भी गवाह है, हमेशा याद रहेगा कि उन्हीं मान्यताओं को तोड़ा। मेरा आपसे निवेदन है कि आज इस मौके पर पूरी स्थिति को स्पष्ट करें …( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : आप बोलिए कि हम मुलायम सिंह का समर्थन करेंगे। यहीं पर बोलिए।…( व्यवधान)
श्री सईदुज्जमा:जब इसका मौका आएगा, तो इसका भी जवाब देंगे। आप बताइए कि आप क्यों फिरकापरस्ती के हाथों में खेल रहे हैं, आप जातिवादिता के हाथों में क्यों खेल रहे हैं। आप हिन्दुस्तान को क्यों बर्बाद करना चाहते हैं। आपने इंदिरा जी प्रतिष्ठान की जमीन पर कब्जा कर लिया। इंदिरा जी एक ऐसी हस्ती हैं जिनकी शख्सियत न केवल हिन्दुस्तान में बल्कि दुनियां में जानी जाती है। आपने अपनों पर विश्वास नहीं किया। जिन्होंने आपके विश्वास में आकर वोट दिया था उनका आपने साथ नहीं दिया। आप फिरकापरस्तों के साथ जाकर बैठ गए।
अध्यक्ष महोदय, आज देश और प्रदेश में क्या हाल है, उसे पूरी दुनिया देख रही है। इन बातों को देखकर उत्तर प्रदेश की असैम्बली का हाउस बुलाइए। आपकी स्थिति पूरे प्रदेश में बिगड़ी है। आप उत्तर प्रदेश में अल्पमत में हैं। इसलिए आज उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का और भारत सरकार का फर्ज बनता है कि वह उत्तर प्रदेश की एसैम्बली के हाउस को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करे और निर्णय करे कि आप बहुमत में हैं या अल्पमत में हैं।
अध्यक्ष महोदय, इन्हें सदन को बुलाकर बहुमत प्राप्त करने में दिक्कत क्या है ?मुझे मालूम है कि आपको यह जानकारी है कि आपकी हार निश्चित है। इसीलिए आप हाउस बुलाना नहीं चाहते हैं। आप हाउस से क्यों भाग रहे हैं। जब तमाम प्रदेश आपसे इस बात की दख्र्वास्त कर रहा है, पूरे हिन्दुस्तान में इस बात की चर्चा है, पूरा प्रदेश इस बात से चिन्तित है, आप पूरे प्रदेश की चिन्ता क्यों नहीं करते हैं ?आप हाउस बुलाइए और हाउस बुलाकर आप बहुमत हासिल कीजिए। इससे स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
अध्यक्ष महोदय, इस मौके पर, आज के जो हालात वहां हैं, उस पर ये यहां हंस रहे हैं। मैं तो कहना चाहता हूं कि वहां के जो हालात आज हैं उन पर रोना चाहिए क्योंकि पूरे देश में आपने नफरत पैदा कर दी है और धर्म के नाम पर देश को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। आपने तमाम मान्यताओं और वैल्यूज को कुर्बान कर दिया। ऐसी हालत में यह जरूरी है कि हाउस बुलाया जाए और स्थिति स्पष्ट की जाए।
MR. SPEAKER: There are several Members who want to speak and, therefore, the debate will continue. I want the debate to be completed today, but the reply by the hon. Deputy Prime Minister will be given tomorrow. Now, the next speaker is Shri Prabhunath Singh.
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष जी, आज सदन में चर्चा चल रही है कि उत्तर प्रदेश में जो ब.स.पा. और भा.ज.पा. के गठबंधन की सरकार है, वह बहुमत में है या अल्पमत में है। इस बारे में उत्तर प्रदेश विधान सभा का सदन बुलाकर बहुमत साबित कराया जाए।
अध्यक्षजी, बहुत कम ही दिन, चुनाव होकर समाप्त हुए हैं। पहले उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव हुए थे और चुनाव के बाद विधान सभा की स्थिति त्रिशंकु की बन गई। स्पष्ट बहुमत किसी दल को नहीं मिला। चर्चा उस समय चल रही थी कि मुलायम सिंह जी को कांग्रेस समर्थन दे रही है या नहीं दे रही है और इन चर्चाओं के कारण एक महीन से ज्यादा समय गुजर चुका और बाध्य होकर भारतीय जनता पार्टी को वैसे मित्र से समर्थन लेना पड़ा जो मित्र १२वीं लोक सभा का सदस्या रहा था।
आपको मालूम होगा कि मायावती जी १२ वीं लोक सभा की सदस्य थीं और यहीं तीसरी बैंच पर उन्होंने खड़े होकर बहुत लम्बा भाषण दिया था और उसके बाद जब प्रधान मंत्री जी ने बहुमत साबित करने के लिए अपील की और जब वोट का समय आया, तो मायावती जी ने खिलाफ वोट दिया था।उनसे रिश्ता जोङकर मजबूरी में वहां सरकार बनाई गयी। इन सब बातों से एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। रवि शंकर जी, आप गठबंधन की राजनीति की चर्चा कर रहे थे। यहां यह प्रमाणित हो चुका है कि मायावती जी के साथ कभी आप रिश्ता बनाते हैं, कभी कांग्रेस वासे रिश्ता बनाते हैं। मुलायम सिंह जी के भी रिश्ते बने हैं, यानी राजनीति में सत्ता में काबिज होने के लिए न कोई नीति है और न कोई सिद्धांत है। हम भाषण सिर्फ नीति और सिद्धांत का देते हैं लेकिन काम सारे लोग बेइमानी का करते हैं। यह बात प्रमाणित हो चुकी है।
अभी अल्वी जी कह रहे थे कि कभी आप इधर की बात बोल देते हैं तो कभी उधर की बात बोल देते हैं। अल्वी जी को मालूम नहीं है क्योंकि वह तो मायावती जी के बंधुआ मजदूरी करने के लिए आये हैं। अगर सत्य बोलेंगे तो कान पकड़कर बाहर निकाल देंगे। हम इसलिए इस सदन में हैं कि कभी असत्य नहीं बोलेंगे। जब बोलेंगे तो सत्य वही बोलेंगे जो मेरे जेहन में आयेगा।
रवि शंकर जी, आप कानून का लंबा भाषण दे रहे थे। आप हमारे मित्र हैं। आपने कानून के तीन सवाल खड़े किये हैं। हम सबसे पहले आपसे ही बोनी करना चाहते हैं। आपने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर यहां चर्चा होती। क्या आप कानूनविद् रहे हैं ? आप कानूनविद नहीं हैं। अगर आप कानूनविद होते तो आपके कानून मंत्री रहते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को हम लोगों ने इस लोक सभा में पलट दिया है। …( व्यवधान)चाहे जिस केस में हो, हम लोगों ने पलटा है। जब आरक्षण के सवाल पर सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति के संबंध में निर्णय दिया था तो हम लोगों ने उसे पलट दिया था। जब हमको यह अधिकार है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को हम पलट सकते हैं तो सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर चर्चा भी हम नहीं कर सकते--किस कानून से आप पढ़ा रहे थे, जरा आप फिर से वह गीता पढि़येगा ।
अभी आप बता रहे थे कि राज्यपाल जी ने मायावती जी को बुलाया है, उन्होंने गलत नहीं किया है। किसी ने भी अपने भाषण में यह नहीं कहा कि गलत किया है। आप इस बात को सही कहां साबित कर रहे थे ? क्या किसी ने आरोप लगाया था ? उस दिन मुलायम सिंह जी ने प्रयास किया था लेकिन उनको पूरा पढ़ा नहीं। आपने समर्थन दिया तो मायावती जी की वहां सरकार बनी। किसी ने नहीं कहा कि राज्यपाल जी ने मायावती को बुलाकर कुछ गलत किया है। हम भी नहीं कहते कि उस दिन राज्यपाल जी ने उनको बुलाकर कुछ गलत किया।
मेरा कहना है कि यहां चर्चा यह चल रही है कि आज सरकार अल्पमत में है। आप सदन बुलाइये और उसमें बहुमत साबित कराइये। जिस तरह १२वीं लोक सभा में माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस सदन में बहुमत साबित करने का प्रयास किया था। सवाल वही है। इसमें आप बैचेन क्यों हैं ? आपने कहा कि गठबंधन का जमाना आ चुका है। हमारा कहना है कि यह है ही गठबंधन का जमाना। अभी जो सरकार चल रही है, गठबंधन वालों की मियाद किस तरह से ठंडा करते हैं, वह सब लोगों को पता है। वहां मायावती जी जो कर रही हैं, मैं कोई लंबा भाषण देना नहीं चाहता लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में जो भी हो रहा है, उचित नहीं हो रहा है। मायावती जी जिनके मेनिफेस्टो में था कि "तिलक, तराजू और तलवार को मारो जूते चार।" आज वही नारे वाले लोग जिनको जूते चारे मारे जा रहे थे, समर्थन दे रहे हैं। टीका वाले पंडित जी बहुत लंबा चौड़ा भाषण दे रहे थे। यही तिलक वाले हैं। …( व्यवधान)श्री जायसवाल जी कहां चले गये ? उन्हीं की कृपा से मायावती जी की सरकार चली जा रही है। वह तराजू वाले डंडी मार रहे हैं। तलवार वालों की दशा आप सुनियेगा, उनकी पीड़ा सुनियेगा तो आप तरस खाइयेगा। मायावती जी की सरकार बनते समय एक साथी बोल रहे थे कि हमने इतने परसेंट पद मुसलमान लोगों को दिये हैं और थाना अध्यक्ष का पद दिया है। इतने परसेंट हमने अति पिछड़े लोगों को दिये है, लेकिन जिस थाने में मुसलमान और अति पिछड़े नहीं रहते, उस थाने में उन लोगों की कौन सुरक्षा करता है , हम यह जानना चाहते हैं। इस तरह से थाने नहीं चलते हैं। वहां जातीय नंगा नाच हो रहा है। एक जाति इस देश में ऐसी है जो कभी सत्ता नहीं पाती। यदि पाती है तो कभी धोखाधड़ी से पाती है।
19.00 hrs. लेकिन जिसके साथ वह रहती है, उसकी ताकत की बदौलत देश और प्रदेश में लोग सत्ता में बैठते हैं। उस जाति को उत्तर प्रदेश में जिस ढंग से तंग और तबाह किया जा रहा है, थाने से हटाया गया, जिले से हटाया गया और उत्तर प्रदेश में जो विधायक, राजा भैया की चर्चा इधर के लोग भी कर रहे थे और उधर के लोग भी कर रहे थे, वे भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री रहे, बहुत अच्छे और नेक इंसान बन कर रहे। अभी तक मायावती सरकार को समर्थन देते रहे तो बहुत नेक इंसान बन कर रहे, लेकिन जब उन्होंने मायावती सरकार की खिलाफत की तो वे उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े अपराधी बन गए। सिर्फ वे ही नहीं, उनके ८० वर्ष के वृद्ध पिता पर भी मुकदमा चलाया गया। यह कैसी सरकार है? क्या इस तरह दमन की ताकत से कोई सरकार चलती है? सत्ता कभी शाश्वत नहीं होती, यह धर्म है। हम भारतीय जनता पार्टी के लोगों से निवेदन करेंगे कि जान-बूझकर उस जाति को मुलायम सिंह जी की झोली में डालने का प्रयास मत कीजिए। जिस दिन आपके गुप्ता जी मुख्य मंत्री थे, आपकी नाव डूब चुकी थी, खाता खुलने की स्थिति नहीं थी तो आपने मजबूरी में राजनाथ सिंह जी को इसलिए भेजा कि इस जाति के लोग डंडा लेकर आपको वोट दे सकें और आपके साथ रह सकें। वही कारण हुआ कि आप तीसरे स्थान पर आए नहीं तो आप ज़ीरो पर पहुंच जाते। आज उन लोगों को वहां आपके समर्थन पर जिस तरह से परेशान किया जाता है, हम कहते हैं कि ज़हन में जो बैठ रहा है, जात-पात की बात नहीं कहनी चाहिए, हालांकि लोक सभा में मुसलमान और हरिजन की रोज चर्चा चलती है, एक बार राजपूत कहने में कोई अपराध नहीं है, अगर उत्तर प्रदेश में अहीर और राजपूत दोनों की लाठी एक साथ मिल गई तो बाकी लोगों को बूथ पर वोट देना भी मुश्किल हो जाएगा।…( व्यवधान)
श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अशोक प्रधान) : +ÉÉ{ÉBÉEÉä ªÉcÉÆ ªÉc ¤ÉÉiÉ xÉcÉÓ BÉEcxÉÉÒ SÉÉÉÊcA*…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : राजपूतों को तंग किया जाता है, राजपूतों को परेशान किया जाता है। इस देश में दलितों से भी बदतर स्थिति आज राजपूतों की बनी हुई है, जिसकी सत्ता होती है, वही दबा लेता है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष जी, हम आपकी तरफ मुखातिब होकर बोल रहे हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : आप इस तरफ देखिए। उस तरफ मत देखिए, वहां हल्ला हो रहा है।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अशोक जी मित्र हैं, उन्होंने टोक दिया था।
उपाध्यक्ष महोदय : इधर भी मित्रता दिखाइए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : जो विधायक असंतुष्ट हुए, उसके कुछ खास कारण हैं। विकास और राज्य पीछे जा रहा है, हम इसकी चर्चा नहीं करना चाहते क्योंकि सवाल बहुमत और बहुमत नहीं का है, बहुत विकास हो गया इसलिए अल्पमत की सरकार चलेगी और विकास नहीं हुआ इसलिए बहुमत की सरकार नहीं चलेगी, सवाल इस बात का नहीं है, सवाल सिर्फ यह है कि सरकार बहुमत में है, लोग मुख्य मंत्री से क्यों नाखुश हैं। मुख्य मंत्री महारानी की तरह भूमिका करती हैं। कोई विधायक उनके पास समय लेकर जाता है, अगर पैर छूकर प्रणाम नहीं करता तो मुख्य मंत्री नाखुश हो जाती हैं। कई विधायक साथी जो हमारे रिश्तेदार हैं, उन्होंने मिल कर बताया कि हमने वहां आना-जाना ही बंद कर दिया क्योंकि अगर पैर नहीं छुएंगे तो जो काम होने वाला होगा, वह भी खत्म हो जाएगा। पैर नहीं छूने के कारण इस तरह की जो दमनात्मक कार्यवाही विधायकों के परिवार और उनके सहयोगियों पर की जा रही है, वह इस देश के इतिहास में एक कलंक साबित होगी।…( व्यवधान)
हम एक निवेदन करना चाहते हैं कि बहुमत है, नहीं है, अल्पमत है, नहीं है लेकिन राज्यपाल का बयान, उन्होंने कहा था कि मायावती की सरकार बहुमत में है। लोग कहते हैं कि मुलायम सिंह जी या दूसरे पक्ष के लोगों ने बहुमत नहीं दिखाया। जिस दिन राज्यपाल ने बयान दिया, क्या उस दिन मायावती के समर्थकों ने २०४ सदस्यों का बहुमत दिखाया था? अगर उन्होंने बहुमत नहीं दिखाया था तो राज्यपाल को इस सवाल पर चुप रहना चाहिए था। इस तरह का बयान देना मुनासिब नहीं था। यदि उत्तर प्रदेश की जनता, उत्तर प्रदेश के विधायक जो सदन के सदस्य हैं, चाहते हैं कि सदन बुलाया जाए तो सदन को बुला कर मायावती सरकार को अपना बहुमत साबित करना चाहिए। अगर बहुमत सही है तो उनको सरकार चलानी चाहिए। इतना कह कर हम अपनी बात समाप्त करते हैं।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : उपाध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है और आबादी के हिसाब से आकलन करने से दुनिया में पांच ही देश उससे ज्यादा आबादी के हैं। प्रदेश के साथ छठा देश भी उसे कह सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनैतिक परिस्थिति पर चर्चा है तो बहुत पहले से, राजनीति में जाने से बड़ा समय लगेगा, इसलिए संक्षेप में तात्कालिक राजनैतिक परिस्थिति का मैं विश्लेषण करना चाहता हूं। हमें याद है कि इस हाउस में मायावती जी उस समय सदस्या थीं और भाषण में उन्होंने कहा कि हम न्यूट्रल रहेंगे, लेकिन वोट के समय में जब वोट हुआ तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के खिलाफ जो हम लोगों ने वोट किया तो हम लोगों का साथ देकर उन्होंने सरकारी पार्टी का हिसाब बिगाड़ दिया और सरकार गिर गई। यहां भी वे भाषण में मनुवादी मनुवादी बोलती थीं, लेकिन राजनीति के लिहाज से प्रभुनाथ सिंह जी ने ठीक कहा कि सत्ता में जाने के लिए सब नीति, सिद्धान्त, पहले का दिया हुआ बयान कहां चला जाता है, पता नहीं। मनुवादी की गोद में जब बैठीं तो हम लोगों को भी लगा था, डॉ. लोहिया हमेशा कहा करते थे कि वंचित, दबा हुए आदमी शासन में जाये तो कुछ सत्ता परिवर्तन हो, देश में कुछ सोशल, सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन होगा तो देश आगे बढ़ेगा। यह हम लोगों को पढ़ाया गया था, ट्रेनिंग दी गई थी। उसके हिसाब से हम लोगों को भी लगता था कि मायावती जी दलित और उसमें भी महिला हैं तो जरूर शासन में आने से दबे हुए लोगों का मनोबल बढ़ेगा और शासन ठीक चलेगा, ऐसा हम लोग अनुमान लगाते थे, लेकिन मनुवादी कहते-कहते मनुवादी के साथ हो जाना एक बड़ा भारी खतरा हम लोगों को लगता है।
फिर वहां पर जब वोट हुआ तो वोट में भाजपा के खिलाफ वोट मांगे, सब लोगों ने जो भाजपा के खिलाफ लोग जीते। भाजपा के लोगों ने काफी दंगे का कार्यक्रम वहां चलाया। विश्व हिन्दू परिषद वाले ठीक चुनाव के चार दिन पहले शिलादान का कार्यक्रम लेकर आये। धन दान, गाय दान, सब दान हुआ, लेकिन शिलादान वाला कार्यक्रम भी वहां ठीक चुनाव के पहले हुआ। यह हम लोगों ने नया सुना, मतलब पूरी कोशिश की गई कि कम्युनल लाइन और दंगा भड़काकर वोट लिया जाये, लेकिन फिर भी राजनाथ सिंह जी की कृपा से भाजपा का तीसरा स्थान हो गया। लेकिन इनके तीन मंत्री जो मस्जिद ढहाने वाले मामले में एक्यूज्ड थे, उन्हें राजनाथ सिंह जी नहीं कर सके, वे भाजपा के थे।
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : वह मस्जिद नहीं थी, उसे आप विवादित ढांचा कहिये।
उपाध्यक्ष महोदय : स्वामी आदित्यनाथ, वे यील्ड नहीं करते हैं। रघुवंश प्रसाद सिंह जी आपको यील्ड नहीं करते हैं, इसलिए आपकी कोई बात भी कार्यवाही में नहीं जायेगी। आप बेकार बात करते हैं। यह रिकार्ड में नहीं आ रहा है।
...( व्यवधान)* डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :क्या कहेंगे? जो भी आदित्यनाथ जी कहते हैं, हम कहें कि मंदिर ढहा दिया तो ये कहेंगे कि हम कट्टर हिन्दू हैं, मुसलमान के दुश्मन हैं। यदि मंदिर मानकर ढहा दी तो आप हिन्दुओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं, यह साबित हो गया है। यदि मंदिर मान रहे हैं, तो उसको ढहाकर आप मुसलमानों के तो दुश्मन थे ही, अब हिन्दुओं के ही नहीं, इस देश के भी सबसे बड़े दुश्मन हो गए हैं, जो देश के अमन-चैन को खतरे में डाल रहे हैं।
उपाध्यक्ष महोदय, इसमें तीन मंत्री एक्यूस्ड थे। यदि राजनाथ सिंह जी सूचना में सुधार करके जारी करना चाहते थे, वे नहीं कर सके, क्योंकि भाजपा के लोग थे इसलिए नहीं कर सके। जो राजनाथ सिंह जी नहीं कर सके, उसको मायावती जी ने कर दिया। उन्होंने कहा कि सुधार की कोई जरूरत नहीं है। लगता है इसमें सत्ता में बने रहने की डील हुई है। इतना बड़ा विश्वासघात देश के साथ पहले कभी नहीं हुआ था। यह सभी धर्मनिरपेक्ष लोगों के साथ विश्वासघात हुआ है। प्रभुनाथ सिंह जी कहते हैं कि सत्ता के लिए सब कुछ होता है।
वहां का उदाहरण देकर बताया जा रहा है कि जिन्होंने खिलाफत की, उनके साथ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। यह घोर अन्यायपूर्ण है, यह नहीं होना चाहिए और इसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यहां जितनी भी चर्चा हुई है, उससे यह साबित हुआ है कि वहां साधारण दमन नहीं चल रहा है। यह ठीक है कि वे बागी हो सकते हैं। टैंथ शिडयूल को आप सभी जानते हैं। दल-बदल को रोकने के लिए इस कानून को संसद ने पास किया था। यह कहा जा रहा है कि व्हिप का उल्लंघन किया है इसलिए दल बदल की कार्रवाई होगी। लेकिन उन लोगों ने कहा है कि हमने सिर्फ खिलाफ बोला है और इसी बात पर दल बदल का नोटिस दे दिया है, कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। टैंथ शिडयूल में तीन प्रावधानों पर सदस्यता समाप्त की जा सकती है। एक तो यह है कि पार्टी से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दें, दूसरा है कि वन थर्ड से कम हों और तीसरा है कि व्हिप का उल्लंघन करें, तब कार्रवाई होगी, लेकिन वे तो केवल खिलाफ ही बोले हैं। उन्होंने इतना ही कहा है कि सरकार से असंतुष्ट हैं, सरकार के साथ नहीं हैं। इसी बात पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है और उन्हें फर्जी केसों में फंसाया जा रहा है। सरकार इन लोगों के साथ जघन्य काम कर रही है, जिससे हर हाल में उसका बहुमत बना रहे।
अभी वधि मंत्रालय में राज्य मंत्री जी ने अपनी बात कही। वे किताब पढ़कर बता रहे थे कि वहां जो कुछ हो रहा है, ठीक हो रहा है। लेकिन वे यह बताएं कि कानून, संविधान या कौन से सुप्रीम कोर्ट के * Not Recorded आर्डर में लिखा है कि अल्पमत की सरकार रहेगी। यह सब जानते हैं कि अल्पमत और बहुमत किसी के कहने पर साबित नहीं होगा, सदन में तय होगा। जो लोग दावा करते हैं कि हमारा बहुमत है तो वे सदन बुलाकर अपनी बात को साबित कर दें। हमने राज्यपाल जी का बयान सुना है। राज्यपाल जी संविधान के संरक्षक के रूप में बहाल होते हैं। लेकिन वहां हम उनको इस रूप में नहीं देख रहे हैं। हम देख रहे हैं कि केन्द्र सरकार के इशारे पर वे कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। जैसे ही यहां से डोर खींची जाती है, वैसा ही वे काम करते हैं। उनको संविधान को देखना चाहिए। वे राष्ट्रपति के प्रतनधि के रूप में और संवैधानिक प्रतनधि के रूप में मौजूद हैं। उन पर सब कुछ देखने का दायित्व है। इसलिए उनको निष्पक्ष रहना चाहिए और संविधान तथा परम्पराओं को भी देखना चाहिए। इसलिए जैसे उन्होंने पहले सरकार को शपथ ग्रहण कराकर कहा था कि इतने दिनों के अंदर अपना बहुमत साबित करे, वैसा ही अब निर्देश देना चाहिए। अभी हमने मीडिया में देखा और पढ़ा भी है कि कितने विधायकों ने उनको ज्ञापन दिया था। उसमें किसके हस्ताक्षर हैं या नहीं, यह मीडिया में रोज आ रहा है। यह भी आ रहा है कि कितने विधायक सरकार के खिलाफ हैं। यह सब देश और दुनिया ने देखा है। इससे साबित होता है कि वहां की सरकार का बहुमत डाउटफुल हो गया है, सरकार अल्पमत में चली गई है। फिर यह २१७ जहां पर था, वहां २०२ कम से कम होना चाहिए। उसमें उनका घट गया, इस हिसाब से जोड़ने से समझ में आता है। १९३ तो काउंसिल वाला वोट में बताया है। १९३ जो काउंसिल का वोट हुआ, उसमें कांग्रेस पार्टी ने बहिष्कार किया और १९३ में भी संविधान की बात होती है कि वह अल्पमत में है। इसीलिए अल्पमत की सरकार चलने देना और चलाना यह कोई कानून, बोम्मई और रमई कानून में नहीं लिखा है। कानून में लिखा है कि लोकतंत्र यानि बहुमत का राज होना, यानि बहुमत जिसका होगा, उसका राज होना चाहिए लेकिन जब बहुमत संदेहात्मक हो गया और लोगों के सामने प्रकट हो गया तो बहुमत साबित करने में देर नहीं करना चाहिए। यही हॉर्स-ट्रेडिंग, खरीद-फरोख्त का काम लोक तंत्र का नाश कर देगा। पैसे के लालच से हॉर्स-ट्रेडिंग का मौका ढ़ूंढ़ा जा रहा है कि हमें मौका मिले। इसीलिए बहुमत साबित करने के लिए तुरंत हाउस बुलाया जाना चाहिए। राज्यपाल यदि हाउस नहीं बुलाते हैं तो केन्द्र सरकार यदि जिम्मेदार सरकार है तो राज्यपाल को वापस बुलाना चाहिए। यही मैं अंतिम बात कहना चाहता हूं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: The Hon. Speaker had announced in the House a short while ago that the debate on U.P. will be completed today and hon. Deputy Prime Minister will reply tomorrow. Hon. Speaker has now desired that the reply of Deputy Prime Minister will not be on tomorrow but on day after tomorrow, that is on 28th November, 2002.
श्री मुलायम सिंह यादव :हम सहमत हैं।…( व्यवधान)
श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण मध्य) :आदरणीय मुलायम सिंह जी जो प्रस्ताव यहां लाए हैं, शिव सेना की तरफ से मैं उसका विरोध करता हूं। अभी दलित मुख्य मंत्री मायावती बनी हैं। यहा दलितों के बारे में हर बार प्यार मोहब्बत की बात बताई जाती है। क्यों विरोध करते हैं? मुझे पता नहीं है। इसी सदन में मैंने देखा है।…( व्यवधान)इस सदन में जब इस पद पर बालयोगी जी दलित समाज के थे और जब अध्यक्ष बनने के लिए जा रहे थे तो दलितों के बारे में जो सद्भाव की बात उन्होंने बताई लेकिन उस समय भी आप लोगों ने विरोध किया था। यू.पी. के बारे में मैं सबकी चर्चा सुन रहा हूं। हम महाराष्ट्र के हैं लेकिन हम सुन रहे हैं। हमें पता है कि यू.पी. में जब मुलायम सिंह यादव की सरकार थी तो हमारे राम भक्तों को भी चुन-चुनकर मारा गया था।…( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य :महाराष्ट्र से किसलिए उनको वहां भेजा था?…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :अपने नेता को पूछिए जब लखनऊ गये थे तो आज भी मेरे पीछे तारीफ करते हैं कि मुलायम सिंह ने मेरे साथ कैसा व्यवहार किया।…( व्यवधान)
श्री मोहन रावले : आप तो हमारे पिताजी समान हैं। मैं यहां भी बोलता हूं। लेकिन राजनीति अलग होती है।…( व्यवधान)आप राजनीति करते हैं, वह अलग है।
उपाध्यक्ष महोदय : आप चेयर की तरफ देखकर भाषण करिए तभी आपकी कंटीनुइटी बनी रहेगी।
श्री मोहन रावले : इस पर प्रैस में ९३ में हल्ला बोलकर नारा लगाया गया था। हाइकोर्ट में घुसे थे, न्यायाधीशों को मारा गया था, वकीलों को मारा गया था। किसलिए मारा गया था?…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :किसने बताया? आपकी प्रैस काउंसिल ने यहां पर तीन बार वरिष्ठ पत्रकार भेजे। तीनों ने मेरे पक्ष में रिपोर्ट दी। …( व्यवधान)
श्री मोहन रावले : किस लिए मारा गया, पता नहीं था। …( व्यवधान)मैंने ऐसा नहीं कहा है कि आपने मारा है। …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :‘हल्ला-बोल’ दो अखबारों के खिलाफ नारा था। उसके बाद दोनों अखबार वालों ने रियलाइज किया। मुझसे मिले और तीन मैम्बर्स समति में जिसमें नवभारत टाइम्स के एडीटर, श्री राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में जांच हुई और रिपोर्ट मेरे पक्ष में दी। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कन्ट्रोवर्शियल न हो, तो स्मूथ चलेगा।
श्री मोहन रावले : महिलाओं के बारे में बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं और कांग्रेस की तरफ से ज्यादा करते हैं। आज भी इस संबंध में बात उठाई गई । मुझ से पूर्व कहा गया था कि हिन्दुस्तान की राजनीति में यह शर्मनाक बात है। …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :मैं बार-बार नहीं बोलना चाहता हूं। निचली कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है। हाईकोर्ट में लोग गए, लेकिन निचली कोर्ट ने सिद्ध कर दिया कि मैं निर्दोष था। सारी जानकारी रखिए। हम पर कोई मुकद्दमा नहीं चलेगा और चलने लायक ही नहीं है।
श्री मोहन रावले : जब मायावती जी पर कठिनाई आई, हमला हुआ था । क्या हुआ, कैसे हुआ, अगर कोर्ट में जाएगा, तो कोर्ट न्याय देगी। मैं बताना चाहता हूं, हमारे महाराष्ट्र में भूतपूर्व मुख्यमंत्री, श्री नारायण राणे जी, जो अब विपक्ष के नेता हैं, उनके घर पर २२ तारीख की रात को और २३ तारीख की सुबर आग लगाई गई। उनके घर पर हमला हुआ और घर जलाया गया। भूतपूर्व मुख्यमंत्री का घर पर महाराष्ट्र में आग लगाई गई और आज कांग्रेस वाले बोल रहे हैं। मायावती के बारे में यहां एक समति का गठन हुआ था और यहां जब चर्चा चली थी, तो सबने उसको कन्डैम किया था और आज विपक्ष के नेता का घर जलाया जाता है, तो एक शब्द भी नहीं कहा गया। हमने यह बात कल उठाई थी। उन्होंने गृह मंत्री को फोन किया…( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): Sir, this is not relevant and if he is allowed to speak like this, I should also be allowed to speak.
श्री मोहन रावले : विपक्ष के नेता का घर जलाया गया और उस स्थिति के बारे में आप सोच सकते हैं। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप सब्जैक्ट मैटर पर बोलिए।
श्री मोहन रावले : यहां हमने देखा है कि चर्चा को कहां-कहां ले जाया जाता है। मैं रिलैवेंट बात कह रहा हूं। महाराष्ट्र में इनकी सरकार है और वहां हमला किया गया। आज राजनीति में किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। जब हमला किया गया, तो उन्होंने रात को महाराष्ट्र के गृह मंत्री को फोन किया, लेकिन फोन को उठाया नहीं गया। कांग्रेस स्पांसर्ड लोगों ने हमला किया और हमला कनकौली में किया गया। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप शुरु से ही ऐसा बोल रहे हैं। आप सब्जैक्ट मैटर पर बोलिए।
श्री मोहन रावले : महोदय, वहां इतना जुल्म हो रहा है, इनकी जुल्मी सरकार वहां है। इन्होंने जुल्म के बारे में बताया। अभी किसी माननीय सदस्य ने उत्तर प्रदेश में जुल्म के बारे में बताया, वैसे महाराष्ट्र में एक आंदोलन शुरू हुआ।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : उत्तर प्रदेश के जुल्म के लिए ही इन्होंने कहा।
…( व्यवधान)श्री मोहन रावले : मैं वही बता रहा हूं। महोदय, महाराष्ट्र में हमने जो अच्छा काम किया। जब हमारे मुख्य मंत्री वहां थे तो उन्होंने वहां फ्लाईओवर बनाए। गांव-गांव में जहां पानी एवं शौचालय नहीं थे, वहां वे बनवाए। गरीब लोगों के लिए जुनका बाकर केन्द्र खोले थे, कांग्रेस सरकार ने उन्हें बंद किया। उनके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार कुछ नहीं कर रही। इसलिए आज वे निराश हो रहे हैं और निराश होकर उन्होंने महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्य मंत्री के ऊपर हमला किया। ये बोल रहे हैं कि मायावती ने क्या जुल्म किए और उनका जुल्म बताने के लिए ये राजी नहीं हैं। अपने घर में क्या चल रहा है, यह इन्हें पता नहीं और किस के घर जला रहे हैं।
महोदय, महाराष्ट्र में किसी कार्यकर्ता या नेता का जीवन सुरक्षित नहीं है। जब भारतीय जनता पार्टी का राज था, जिस तरह इन्होंने राज किया, उसका ये लोग कुछ नहीं कर पाए। आज गांव-गांव में उनका चलना मुश्किल हो रहा है। इन्हें पैसे दिए लेकिन इन्होंने वह विदेश जाने पर खर्च किए। रोजगार के करोड़ों रुपए इन्होंने शुगर कारखानों को दिए, ऐसा उत्तर प्रदेश में नहीं हुआ।…( व्यवधान)
आचार्य जी यहां बैठे हुए हैं, सोमनाथ जी भी बोल रहे थे, वह यहां इस समय उपस्थित नहीं है। उनका प्रजेंस वहां नहीं है, उनका प्रजेंस आपके पड़ौस में जो समाजवादी पार्टी के बैठे हैं, उन्होंने आपका प्रजेंस खत्म किया।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: There are two more speakers. Please be serious.
श्री मोहन रावले : महोदय, ये लोग हंस रहे हैं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप खुद हंस रहे हैं।
…( व्यवधान)श्री मोहन रावले : महोदय, वहां अच्छी तरह सरकार चल रही है। मायावती जी हमारी बड़ी बहन हैं, हम उनका आदर करते हैं और सदन को भी उनका आदर करना चाहिए। उन्हें हटाने की साजिश हो रही है। ये जो प्रस्ताव लाए हैं, उसका मैं विरोध करता हूं। महाराष्ट्र में जो जुल्म हो रहा है और जिस तरह हो रहा है, इस कारण से महाराष्ट्र की सरकार को बर्खास्त करना चाहिए।…( व्यवधान)जब महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता के ऊपर हमला हुआ था तो चर्चा हुई थी। आज वहां घर जलाए जा रहे हैं।…( व्यवधान)जब भूतपूर्व मुख्य मंत्री जी का घर जलाया जा रहा था तो यहां कोई नहीं रो रहा था, किसी को दुख नहीं हो रहा था, यह दुर्भाग्य है। चाहे वह किसी भी पक्ष का हो, जब किसी के ऊपर हमला होता है, हमने उस वक्त भी समर्थन नहीं किया था, जब किसी के ऊपर हमला हुआ था। उत्तर प्रदेश की सरकार चले, उसका हम समर्थन करते हैं, लेकिन मुलायम सिंह जी जो प्रस्ताव लाए हैं, उसका हम विरोध करते हैं और महाराष्ट्र सरकार की बर्खास्तगी की मांग करते हैं।
श्री शिवराज वि.पाटील: हमारे साथी रावले साहब ने जो महाराष्ट्र के बारे में बोला है, यह ऐसा विषय है, जिसके संबंध में मैं कुछ न बोलूं और वह बोलते रहें, उसका जवाब न दूं तो गलतफहमी हो सकती है।…( व्यवधान)
श्री मोहन रावले : आप चर्चा के लिए तैयार हो जाओ, हम तैयार हैं।
श्री शिवराज वि.पाटील: मैं इतना ही कहूंगा कि दुर्ग में महाराष्ट्र के एक एनसीपी के सदस्य की हत्या हुई और वहां पूर्व मुख्य मंत्री का घर लोगों ने जलाया। हम यह कहना चाहेंगे कि हत्या करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए और जिन्होंने घर जलाया, उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री (श्री राम नाईक) : किसने घर जलाया है?
श्री शिवराज वि.पाटील: जिसने भी घर जलाया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
श्री मोहन रावले : पुलिस के सामने घर जलाया गया और सरकार को उसका समर्थन था।…( व्यवधान)वे कहते थे कि हत्या हुई है इसलिए यह रिएक्शन हुआ है।…( व्यवधान)आप हंस रहे हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : अगर आप सब्जैक्ट पर बोलते तो यह नौबत नहीं आती।
श्री शिवराज वि.पाटील: मैं इतना ही कहूंगा कि जो भी उसमें अपराधी है, गुनाहगार है, उस पर कार्रवाई हो। लेकिन ये वहां का सब्जैक्ट यहां पर बोल रहे हैं लेकिन हमारे पास कोई इंफोर्मेशन नहीं है।
श्री मोहन रावले : आपके पास घर जलाने की सूचना तो है न।…( व्यवधान)
उसको गांव वालों ने मार डाला है, उस पर बलात्कार का केस है…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record now.
(Interruptions) * *NotRecorded श्री भान सिंह भौरा (भटिंडा) : उपाध्यक्ष जी, जिन बातों पर बहस हो रही है उसमें से बहुत सारी बातें इधर से या उधर से विषय से बाहर हो गयी हैं। जब यूपी पर बहस हो रही है तो सवाल यह है कि क्या मायावती जी की सरकार अल्पमत में है या बहुमत में है या यह कि गवर्नर ने ठीक काम किया या गलत काम किया है। जब चुनाव हुए तो हमने और सबने देखा कि राज्यपाल महोदय का क्या रोल था। उनको चाहिए था कि जो पार्टी एक नम्बर है वे उसे बुलाते और कहते कि सरकार बनाइये। अगर वे नहीं बना पाते तो जो दूसरे नम्बर पर पार्टी थी उसको सरकार बनाने के लिए बुलाते। लेकिन राज्यपाल महोदय ने अपने आप फैसला कर लिया और असैम्बली को सस्पैंड कर दिया। बीजेपी के साथ बात हुई और मायावती जी की सरकार बना दी। मैं पूछना चाहता हूं कि यह किस गवर्नर का काम है? गवर्नर संविधान का रक्षक होता है और उसे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी। अगर उन्हें ऐसा करना है तो वे बीजेपी में रहें। जब राष्ट्रपति जी ने उन्हें गवर्नर बनाया है तो उन्हें संविधान का सम्मान करना चाहिए। मेरे हिसाब से गवर्नर साहब ने गलत काम किया है। उन्होंने अपने आप ही कह दिया कि बहुमत है, बहुमत है। यह काम कैसे गवर्नर का हो गया कि देखते फिरे कि वह बहुमत में है या अल्पमत में है। सरकारिया कमीशन ने साफ कहा है कि अल्पमत या बहुमत देखना है तो विधान सभा में देखा जाएगा। एक माननीय सदस्य संविधान में से पढ़ रहे थे कि संविधान में यह है वह है। हम सभी को पता है कि सरकारिया कमीशन ने साफ कहा है कि विधान सभा में अल्पमत या बहुमत देखा जाए। मायावती जी सरकार चलाना चाहती हैं। यहां पर बहुजन समाज पार्टी के लोग दलितों की बात करते हैं। मायावती जी यहां पर कुछ कहती थीं, दलितों की बात करती थीं लेकिन उन्होंने दोस्ती सरमायेदारों की पार्टी से पाली। यह उनका कैसा जोड़ है? वे सिर्फ राज करने के लिए जोड़-तोड़ कर रही हैं। इन लोगों को भी डर है कि राज चला जाएगा तो पता नहीं क्या हो जाएगा। इसी डर से ये लोग भी मायावती जी की मदद कर रहे हैं। मायावती जी को चाहिए कि जब वे अल्पमत में हैं तो अपने आप उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था। वह इस्तीफा देकर विधान सभा में आ जाएं। यदि उनके पास बहुमत है तो वह दोबारा मुख्यमंत्री बन जाएंगी। ऐसे में कोई तूफान नहीं आ जाएगा। मैं बीजेपी से कहूंगा कि वह अपनी इतनी बदनामी मत करवाए और वह उनसे कहे कि वह इस्तीफा देकर विधान सभा में बहुमत साबित करें। वहां के गवर्नर से कहिए कि हिन्दुस्तान में जो उनकी बदनामी हो रही है, वह उसे न करावाएं। चुपचाप विधान सभा में अल्पमत या बहुमत साबित होना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं मुलायम सिंह जी द्वारा पेश प्रस्ताव का समर्थन करता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय: अभी लिस्ट में तीन मैम्बर्स श्री विनय कटियार, कुंवर अखिलेश सिंह, और श्री बसुदेव आचार्य के नाम हैं। I would request them to be short because their party Members have already exhausted the time allotted for their parties.
श्री विनय कटियार (फैज़ाबाद):उपाध्यक्ष महोदय, मुलायम सिंह जी द्वारा राज्य का विषय यहां लाया गया है इसलिए मैं इसका विरोध करता हूं। यह राज्य का विषय है और राज्य के अन्दर इसकी चर्चा होनी चाहिए थी। अभी लगभग दो महीने पहले वहां का बजट सत्र समाप्त हुआ। उस समय भी इसी प्रकार की चर्चा थी कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और बजट पास नहीं होगा, सरकार गिर जाएगी। वहां तमाम प्रकार की अफवाहें, दुष्प्रचार ये सब किया जाता रहा लेकिन इतना लम्बा सत्र चला कि एक बार भी ऐसी नौबत नहीं आई कि सरकार कहीं अल्पमत में दिखाई दे। जब बजट आया तो उस पर सामान्यत: बहस के बाद मतदान होता है लेकिन समाजवादी पार्टी ने उस वित्त विधेयक पर न कोई वोटिंग करायी, न हिस्सा लिया। उन्होंने वाकआउट किया। वे कम से कम मतदान में हिस्सा लेते तो पता लग जाता कि सरकार कहां है लेकिन आपने उस समय ऐसा काम नहीं किया। आपने कुछ विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। जातिवाद की चर्चा की लेकिन मैं इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहता हूं। जिस ठाकुरवाद की चर्चा की, जिस छतरी की चर्चा की, हम से ज्यादा कौन इसका समर्थक हो सकता है? भगवान राम के मंदिर के लिए न जाने हमने कितना संघर्ष किया? आपने गोली चलवायी, हमें कोई आपत्ति नहीं है। आप कुर्सी पर थे। आपको जो फर्ज लगा आपने किया। हमें जो फर्ज लगा हमने किया, हमें कोई शिकायत नहीं है लेकिन कम से कम इस सदन के अन्दर जातिवाद का नारा देकर देश को बांटने का काम नहीं होना चाहिए। आज लोक सभा में यह स्थिति पैदा हो गई जिस की अपेक्षा नहीं थी। जब हम बैठते हैं तो एक साथ चलने की बात करते हैं लेकिन आज यह बात टूटती हुई नजर आ रही है। जब कभी दलितों की चर्चा होती है तो इसमें भी राजनीति आती है।
यह बात ठीक है कि हमने तीन बार मायावती जी को मुख्यमंत्री बनाया। सत्यता को स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं कि दो बार हमारा गठबंधन टूटा। इसके जो भी कारण रहे हों फिर भी मुख्यमंत्री बनाया तो हमने बनाया। ६ महीने हो गए हैं। वहां की सरकार अच्छा काम कर रही है। सरकार कैसा काम कर रही है, मैं उसमें जाना नहीं चाहता और सदन का समय बरबाद नहीं करना चाहता हूं लेकिन आपका अखबार में एक समाचार छपा। जब सारा विवाद खत्म होकर शांति की ओर दिखायी दिया तो आपने स्वीकार किया कि गलत समय पर निर्णय लिया। यदि आपने मान लिया कि गलत समय में निर्णय लिया तो क्या आपको नहीं लगता कि गलत समय पर आपने लोक सभा में बहस करा कर इस मामले को गलत समय में उठाया। …( व्यवधान)आपका"टाइम्स ऑफ इंडिया"में बयान छपा।
इस समय जो मुहीम चली, वह ठीक थी या समाचार-पत्र में गलत छपा था? जो भी हो लेकिन छपा था।
श्री मुलायम सिंह यादव : कांग्रेस पार्टी ने किया था।
श्री विनय कटियार : आप कांग्रेस की बात करते हैं। उस पर मैं बाद में आऊंगा। लेकिन उस समय आप बहुमत की बात करते थे कि कांग्रेस पार्टी ने बात कही। लेकिन कांग्रेस किस मुंह से बात करती? मेरी समझ में यह नहीं आया कि कांग्रेस ने जब अधिकृत रूप से श्री नीलम संजीव रेड्डी को उम्मीदवार बनाया लेकिन श्री वी.वी.गिरी जीत गये। क्या उस समय श्रीमती गांधी ने त्याग-पत्र दिया था? किस नैतिकता के आधार पर कांग्रेस बोलती है, यह मेरी समझ में नहीं आता। वे कहते हैं कि अपराधीकरण कांग्रेस के बाद शुरु हुआ लेकिन उन्हें यह बात समझ लेनी होगी कि उ.प्र. में दीवान अपहरण कांड किस ने कराया? अपराधीकरण की जड़ दीवान अपहरण कांड से शुरु हुई और वह कांग्रेस के काल से हुआ।
इन्होंने विकास की बात कर डाली। मैं कानपुर में रह चुका हूं। श्री जायसवाल अभी कह रहे थे। स्वदेशी कॉटन मिल किसके कार्यकाल में बंद हुई, लाल इमली मिल, मयूर मिल इलगिन मिल- सब कांग्रेस के काल में बंद हुईं। चमङे का उद्योग इन्होंने बंद कराया। जितने काल तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस रही, सब फैक्टरियां उसने बंद कराई। यहां तक कि सीमेंट की फैक्टरी को बेचा गया। उसका जो भी कारण रहा हो, उसे आगे नहीं चला पाये। केवल राजनीति होती रही और निर्णय बदलते रहे। काग्रेस ने उत्तर प्रदेश में कौन सी नई फैक्टरी डाली जिसकी कांग्रेस वकालत करे।
यहां पर इन्होंने जुल्म की चर्चा कर डाली। कांग्रेस किस जुल्म की चर्चा करती है? आपातकाल के दौरान किसे बंद नहीं किया गया, इसके बहुत सारे लोग भुक्तभोगी हैं। राजनैतिक द्ृष्टि से चाहे कुछ बात कहें लेकिन जब कांग्रेस ऐसी बात करती है तो बहुत अफसोस होता है। कांग्रेस ने आज तक के सब रिकार्ड तोड़ डाले जो आज तक नहीं टूटे और न टूटने वाले हैं। वह कांग्रेस का काला इतिहास है और ये लोग संविधान की रक्षा की बात करते हैं। अपनी कुर्सी बचाने के लिये इन्होंने संविधान को बदल डाला। प्रधान मंत्री की कुर्सी बनी रहे, इसलिये सब कुछ कर डाला और आज कहते हैं कि यदि उ.प्र. में एम.एल.सी. के चुनाव में वोट डालते तो वह हार जाता। फिर इन्होंने यह अवसर क्यों छोड़ दिया?
श्री शिवराज वि.पाटील: यह किस ने बोला है?
श्री विनय कटियार : यह आपकी पार्टी के श्री जायसवाल ने कहा है।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : This is a House where there should be some relevance when he speaks. I am sitting here. He is going on and on saying all the irrelevant things. If I do not object to it, then they will say that we have not said anything at all about it. Shri Katiyar, is this the way you want to have a discussion on the floor of the House? Now, you are the President of your party there. … (Interruptions) It is because of your attitude that this is happening. It is because of your attitude and that of your party that this is happening there.
श्री विनय कटियार : अगर मैं गलत कहता हूं तो आप चैलेंज कर दीजिये। क्या आपने आपातकाल नहीं लगाया, क्या राजनैतिक बंदियों को बिना मुकदमा चलाये जेल के अंदर बंद नहीं किया, मैं खुद इसका भुक्तभोगी हूं। आपने कानून की बात की है आपने अपराधीकरण की चर्चा की है ।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Who has said all these things? Our Members have not said it. Otherwise, we should be allowed to reply to this debate.
श्री विनय कटियार : आपने कहा कि अपराधीकरण कांग्रेस के बाद शुरु हुआ।
श्री शिवराज वि.पाटील: आपने सुना नहीं क्योंकि आप उस समय नहीं थे।
श्री विनय कटियार : आपकी पार्टी के सांसद बोल रहे थे, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व पार्टी प्रेजीडेंट रहे हैं। उन्होंने अपराधीकरण की बात कही है कि कांग्रेस के बाद अपराधीकरण शुरु हुआ। अब आप दूसरे दलों को कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं। दीवान अपहरण कांड - आप करते हैं, यह कैसे चलेगा?
श्री शिवराज वि.पाटील: जो आप कह रहे हैं, वह ठीक नहीं लगता है।
श्री विनय कटियार : लेकिन जो आपने किया, वह ठीक लगता है। अगर ठीक नहीं लगता है तो मत करिये।
श्री शिवराज वि.पाटील: आयोध्या में क्या किया है, उन्होंने देखा है, हमने देखा है।
श्री विनय कटियार : मैं गर्व के साथ कहता हूं कि आन्दोलन चलाया है, उसमें क्या आपति है?
श्री बसुदेव आचार्य : बाबरी मस्जिद तोड़ी है।
श्री विनय कटियार : इसमें बाबरी मस्जिद का सवाल नहीं है। डा. राम मनोहर लोहिया ने लिखा है कि औरंगजेब और बाबर विदेशी आक्रांता थे। आप कह दें कि नहीं लिखा है।
श्री बसुदेव आचार्य : क्या लिखा है?
श्री विनय कटियार : उनकी अपनी डायरी में कोटेशन मिलता है। मैं उस विवाद में नहीं जाना चाहता लेकिन यह चर्चा हुई है। कांग्रेस को कम से कम यह बात नहीं कहनी चाहिये थी। अपराधीकरण की बात कांग्रेस ने कही है। साथ ही विकास की चर्चा कर डाली। आप वहां मुख्य मंत्री रहे, उसके पहले कांग्रेस रही, उत्तर प्रदेश में कितने पुल बनते थे। भाजपा की सरकार बनी, उसके बाद उत्तर प्रदेश में रोज एक पुल बनकर तैयार होता है। विकास की गंगा में ऐसा नहीं है कि किसी ने विकास का प्रयास नहीं किया होगा, कुर्सी पर बैठा होगा, सबने अपने-अपने ढंग से प्रयास किया होगा। कोई कम कर पाया होगा, किसी को कम समय मिला होगा, किसी को ज्यादा समय मिला होगा, लेकिन काम सबने किया।
उपाध्यक्ष महोदय, आज वहां बिजली की समस्या है। यह समस्या पूरे देश में हैं, केवल उत्तर प्रदेश में नहीं है। क्या इनके बंगाल में नहीं है। आज वहां वेतन देने के लिए पैसा नहीं है।…( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य : वहां कोई समस्या नहीं है।
श्री विनय कटियार : आपकी समस्या तो डंडे के बल पर चलती है। मैं उस पर चर्चा नहीं करूंगा, नहीं तो उपाध्यक्ष महोदय कहेंगे कि आप बंगाल पर चले गये।
श्री बसुदेव आचार्य : डंडे के बल पर बंगाल में नहीं चलती है। डंडे के बल पर आप चला रहे हो, यह हमारे यहां नहीं चलता है। आप विषय पर बोलो…( व्यवधान)आज सारे इंडस्ट्रीज वाले बंगाल में जा रहे हैं।
श्री विनय कटियार : आपके यहां पूरा चलता है, वहां कोई रिपोर्ट नहीं है, जब तक आपका कार्यालय न चाहे, तब तक रिपोर्ट नहीं हो सकती …( व्यवधान)
श्री श्याम बिहारी मिश्र: वहां से सारे उद्योगपति भाग गये हैं।…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : मैं उसी पर बोल रहा हूं।
श्री बसुदेव आचार्य : आप विषय पर बोलो, कहां महाराष्ट्र, बंगाल में जा रहे हो। उत्तर प्रदेश के बारे में बोलो, विधान सभा और राज्यपाल के बारे में बोलो।…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : आप क्यों परेशान हो रहे हो, आपने इसमें नाम दिया है। आपका नाम भी इसमें है। माननीय मुलायम सिंह यादव के साथ आपका भी नाम है। इसलिए मैं आपको क्यों छोड़ूं।
उपाध्यक्ष महोदय : आचार्य जी, आपका चान्स इनके बाद आयेगा, आप तब बोलिये। अभी आपका चांस नहीं है। अभी कटियार जी आप इस तरफ देखकर बोलिये और जल्दी अपनी स्पीच खत्म करिये।
श्री विनय कटियार : आप कहें तो मैं आधा मिनट में खत्म कर दूंगा। लेकिन जिस बहुमत की यह बात करते हैं।…( व्यवधान) मैं इसलिए बोल रहा हूं कि मुलायम सिंह जैसे सम्मानित नेता को मैंने इतना झुकते हुए कभी नहीं देखा, जितना इस बार आपने उन्हें झुकाया। मैं नहीं जानता कि इनके किसी…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील:वह झुकने वालों में से नहीं हैं और हम उन्हें झुकाने वाले नहीं हैं।
श्री विनय कटियार : उन्हें इतना झुकाया, मैं सही बात बोल रहा हूं, श्री मुलायम सिंह यादव जी का स्वभाव पूरा उत्तर प्रदेश ही नहीं, सारा देश जानता है कि वह किसी के आगे झुकने वाले नहीं है। लेकिन वाह री सत्ता, ऐसी सत्ता हो गई कि आपने उन्हें घंटों प्रतीक्षा कराई…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :देश को बचाने के लिए हम बीस बार झुकेंगे, देश की खातिर हम बीस बार झुकेंगे। आप देश और उत्तर प्रदेश को बरबाद कर रहे हैं।
श्री विनय कटियार : इसलिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि जो आदमी रत्ती भर भी नरम होना नहीं जानता था, उसे आप साष्टांग प्रणाम करा रहे हो।
श्री शिवराज वि.पाटील: इससे आपका कुछ फायदा होने वाला नहीं है, इससे कुछ मिलने वाला नहीं है। इसी वजह से आपकी परिस्थिति बिगड़ने वाली है और दूसरों की परिस्थिति अच्छी होने वाली है।
श्री विनय कटियार : आपको ऐसा लग रहा है, अगर यही परिस्थिति थी, अभी मेरा विषयांतर हो जायेगा।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप चेयर की तरफ एड्रैस करेंगे तो ये सारा अवॉइड कर सकते हैं।
श्री मुलायम सिंह यादव : असैम्बली बुलाइये, पता चल जायेगा कहां हैं।
श्री विनय कटियार : उपाध्यक्ष महोदय, यह जो कहते हैं कि बहुमत खो दिया। हमने बहुमत कहां खो दिया। आपने २०४ की सूची दी, आपके राष्ट्रीय महामंत्री वहां गये और दावे के साथ कह कर आये और उसमें बता दिया कि भाजपा के भी ३७ विधायक सम्मिलित हैं। चुनाव हुए, १८३ आपने पाये। अगर कांग्रेस उसमें भाग लेती तो इनकी भी क्रास-वोटिंग हो जाती। क्योंकि कांग्रेस ने अपनी लाज बचाई, अपनी पार्टी को बचाया है, इसके लिए मैं उसे धन्यवाद देता हूं कि कम से कम आपने अपनी पार्टी बचा ली। नहीं तो वहां टूटने वाले थे, इतने ग्रुप्स थे। इसलिए क्रास-वोटिंग के आधार पर यह सरकार अल्पमत में हैं या बहुमत में है, इसका निर्णय नहीं हो सकता। वह सदन का बहुमत नहीं है, वह बाहर का बहुमत है। सदन का बहुमत सदन के अंदर होगा। अभी डेढ़-दो महीने पहले वहां हाउस चला, लम्बा हाउस चला। उसके कारण यह बात हुई, अब फिर हाउस चलने वाला है। आप तैयारी करिये, वहां फिर हाउस चलने वाला है, आप अपने बहुमत को सिद्ध करिये। आपको लगता है कि आप बहुमत में आयेंगे तो आप वहां अपनी सरकार बनाइये, हम आपका स्वागत करेंगे, हम आपको बधाई देने जरूर आयेंगे। लेकिन किसी को मुख्य मंत्री बनाना है, किसी को उप-मुख्य मंत्री बनाना है, किसी को मनिस्टर बनाना है, यह लालच देकर कम से कम पार्टी न तोड़िये। यह जो आप कर रहे हैं।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : इसकी शुरूआत आपने की है।
श्री विनय कटियार : चलो मान लेते हैं कि शुरूआत हमने की है, लेकिन आप उसका अंत क्यों कर रहे हो।
कुंवर अखिलेश सिंह: नहीं कर रहे हैं।
श्री विनय कटियार : कम से कम यह काम मत करिये।
मान्यवर, राज्यपाल जी के संबंध में जो टीका-टिप्पणी की गई, यह तो किसी प्रकार से उचित नहीं है। राज्यपाल तो तीन प्रकार से ज़िम्मेदार होता है। अगर राष्ट्रपति शासन है तो राज्य की जनता के प्रति वह सीधा जवाबदेह होता है। अगर वहां की चुनी हुई सरकार है तो उसके प्रति है और तीसरा नंबर वह आता है कि अगर चुनी हुई सरकार है और चुनी हुई सरकार का मुखिया अगर शिकायत करता है कि राज्यपाल हमारी बात नहीं सुन रहा है, हमारे काम में हस्तक्षेप कर रहा है, तब तो वह तीसरा प्रकार हो सकता है। राज्यपाल ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसमें इन तीनों प्रकारों में से किसी की अवहेलना होती हो। आज यहां पर केवल एक शब्द को बदलकर पूरे राज्यपाल पर माननीय मुलायम सिंह जी ने चर्चा कर डाली। यह बात साफ-साफ कही गई थी, आपके चेयर से भी इस पर आया था कि राज्यपालों के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत जारी करने के बारे में राज्यपालों की एक समति बनी हुई थी। उस मामले पर समति आहूत की गई थी, उस पर विचार हुआ था, और उसमें राज्यपाल को अपने मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करना होता है क्योंकि मंत्रिमंडल ही विधानमंडल के सत्र के लिए एजेन्डा तय करता है। मुझे आश्चर्य है कि आज यहां उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पर चर्चा हो रही है और इस सदन में किसी भी राज्यपाल के संबंध में चर्चा नहीं होनी चाहिए, राज्यपाल के विषय में भी चर्चा नहीं होनी चाहिए। इन तीनों कामों के अलावा अगर कोई आचरण करता हो तब तो लोक सभा में चर्चा हो सकती है अन्यथा राज्यपाल का नाम नहीं आना चाहिए था, यह आपकी चेयर से व्यवस्थी दी गई थी। लेकिन आज यहां उल्टा हो रहा है। राज्यपाल पर, महामहिम पर चर्चा हो रही है। जब संविधान का निर्माण हो रहा था तो डॉ.भीमराव अंबेडकर ने एक बात कही थी जिसको मैं क्वोट करना चाहता हूँ। यह संविधान सभी के वाद-विवाद खंड १० के पेज संख्या २८७२-२८७३ पर है। उसमें कहा था :-
" आरंभ में ब्रटिश संविधान में उपनिवेशकों के सासन के संबंध में आदेशपत्र राज्यों के प्रधानों को इस संबंध में आदेश देने के लिए रखा गया था कि उन्हें स्वविवेक से प्रयोग करने के लिए जो शक्तियां प्रदान की गईं, उन्हें कैसे प्रयोग करें। गवर्नर अथवा वाइसराय जिन्हें आदेश दिये जाते थे, भारत मंत्री के अधीन होते थे। यदि कोई गंभीर मामला उठ खड़ा होता था जैसा कि यदि कोई गवर्नर आदेश पत्र द्वारा उसे दिये हुए आदेशों कि बराबर उपेक्षा करता था तो भारत मंत्री से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को उसके स्थान पर नियुक्त कर सकता था और इस प्रकार आदेशपत्र को प्रयोग में ला सकता था। जहां तक हमारे संविधान का संबंध है, हमने उसमें किसी ऐसे प्राधिकारी के संबंध में उपबंध नहीं रखे जो राज्यपालों को आदेशपत्र के आदेशों का वफादारी से अनुसरण करने के लिए बाध्य करे। "य़ह संविधान सभा वाद-विवाद खंड १० में ११ अक्तूबर १९४९ में है कि राज्यपाल को कैसे विवश किया जाएगा, किस प्रकार से चर्चा होगी। यह केवल एक विषय दूसरा दे दिया गया और राज्यपाल को कटघरे में खड़ा करने की बात कही गई। मैं इस सदन में कहना चाहता हूँ कि ये संख्या जुटाएं और राज्यपाल को विश्वास दिलाएं। अगर राज्यपाल को विश्वास हो जाएगा तो मेरा ऐसा मत है और मुझे विश्वास है कि राज्यपाल ज़रूर हाउस को बुलाएंगे।
माननीय मुलायम सिंह जी ने जो बात कही, मैं कहना चाहता हूँ कि उन्होंने बड़े अपराधियों के उदाहरण दिये। मैं उस विषय पर नहीं जाना चाहता हूँ क्योंकि उम्र में वे बहुत बड़े हैं, कहीं इनको कोई बात चुभ जाए और फिर हमको टोकें यह अच्छा नहीं है। जो सत्ता में रहता है, कुछ ऐसा खेल चल रहा है और यह बड़ा दुर्भाग्य का खेल है।
आज जिस प्रकार से राजनीति का अपराधीकरण हो रहा है, वह सबको मालूम है। इस हाउस के अंदर जिस प्रकार से सरकार और लोग बोलते हैं, सभी दलों के लोग बोलते हैं कि राजनीति का अपराधीकरण नहीं होना चाहिए, लेकिन बाहर जाकर व्यवहार में इसका उल्टा हो रहा है। आप जब मुख्य मंत्री थे, तब सदन के अंदर उपदेश सिंह चौहान ने केवल एक शब्द कहा था कि आपकी सरकार का समर्थन हम नहीं करते। तब आपने बाहर जाकर उसका क्या किया, क्या-क्या कार्रवाई कराई, उससे आप परचित हैं। …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :आपने मेरा नाम लिया है, तो आप मेरी भी सुन लीजिए। आप जो जानकारी दे रहे हैं। वह ठीक नहीं है। वे हमारी पार्टी के विधायक थे, लेकिन वे डग्गामारी की बसें चलाते थे। बिना परमिट के बसें चलाते थे। जब हमने बिना परमिट के उनकी बसें नहीं चलने दीं, तो वे नाराज होकर आपकी पार्टी में चले गए। …( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : अब आप कहते हैं कि वे आपके विधायक थे और जब उन्होंने कहा कि वे आपकी पार्टी का समर्थन नहीं करते हैं, तो आपने उनकी बसें बन्द करा दीं, तो क्या आपको पहले से डग्गामारी से चल रही बसें याद नहीं आईं।…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :आप मेरी बात सुन लीजिए। उन्होंने इसीलिए हमारी पार्टी छोड़ी। हमने उन्हें बहुत समझाया कि डग्गामारी की बसें न चलाई जाएं। हमारी और हमारी पार्टी की बदनामी हो रही है, सरकार की छवि खराब हो रही है, लेकिन जब वे नहीं माने, तो वे पार्टी से अलग हो गए। …( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : बड़े-बड़े समाचार पत्रों में मैनपुरी में और आसपास के सारे जिलों में लोग इस बात से परचित हैं। वैसे सफाई देनी हो, तो किसी प्रकार से की जा सकती है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : अब कृपया आप कन्क्लूड कीजिए।
श्री विनय कटियार : इससे सब परचित हैं। इसलिए मैं आपसे और सबसे आग्रह करूंगा कि राजनीति का अपराधीकरण बन्द होना चाहिए। एक समय वह था कि अपराधी नेता से बहुत दूर खड़ा रहता था, लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि नेता उसके पास खड़े रहते हैं। इस स्थिति में, पूरा सदन सहमत हो, इस पर एक योजना बने, नहीं तो बारी-बारी से सबकी दुर्गति होने वाली है।
माननीय मुलायम सिंह जी ने जो प्रस्ताव रखा है, उसका मैं विरोध करता हूं। आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए मैं आपके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, आज उत्तर प्रदेश के अंदर जो सांवैधानिक शून्यता उत्पन्न हो गई है, उस पर यह संपूर्ण सदन चर्चा कर रहा है। अभी विनय कटियार जी ने यह कहा कि महामहिम राज्यपाल को विवाद के घेरे में नहीं लाना चाहिए, बहस में नहीं लाना चाहिए। हम इस सदन के माध्यम से उनसे कहना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने महामहिम राज्यपाल का सदैव आदर किया और कभी भी राज्यपाल को विवाद के घेरे में लाने की समाजवादी पार्टी की कोई मंशा नहीं रही।
यह विवाद कब पैदा हुआ, कैसे पैदा हुआ, इस पर जब हम चर्चा करेंगे, तो इस सदन के माध्यम से मैं बताना चाहता हूं कि जब उत्तर प्रदेश में १४वीं विधान सभा के चुनाव परिणाण आए, तो उस समय समाजवादी पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उत्तर प्रदेश में उभर कर आई। इससे पूर्व हम आपको ले चलना चाहते हैं जब १३वीं विधान सभा के चुनाव परिणाम आए, तो उस समय भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उत्तर प्रदेश में उभर कर सामने आई थी। तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी जी ने जब भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का आमंत्रण नहीं दिया था, तो उस समय लोक सभा में विपक्ष के नेता माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने राज्यपाल के उस कदम के विरोध में प्रधान मंत्री आवास के समक्ष भूख हड़ताल करने का काम किया था और उस समय राज्यपाल रोमेश भंडारी के आचरण की निन्दा की थी। इसी सदन में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी जी की निन्दा की थी। मैं सरकार चलाने वालों से जानना चाहता हूं कि उस समय रोमेश भंडारी जी ने जो निर्णय लिया था वह सही था या नेता विपक्ष की हैसियत से देश के प्रधान मंत्री के आवास के समक्ष माननीय विरोधी दल के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जो भूख हड़ताल की थी, वह सही थी?…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : उस समय भी एक मुख्य मंत्री को बिना हाउस में बुलाकर, बहुमत प्राप्त किए हुए मुख्य मंत्री को बर्खास्त कर देना और दूसरे मुख्य मंत्री को शपथ दिला देना, जिसका सदन के अंदर कोई बहुमत नहीं था, उसे शपथ दिलाकर मुख्य मंत्री बना देना, क्या उचित था, आप किस आचरण की बात कर रहे हैं ? …( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:नहीं, ऐसा नहीं है। मैं विनय कटियार जी से कहना चाहता हूं कि जरा वे अपने ज्ञान में वृद्धि करें, उस समय कोई मुख्य मंत्री बर्खास्त नहीं किया गया था। १३वीं विधान सभा के चुनाव परिणाम आने के बाद, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश राज्यपाल श्री रोमेश भंडारी जी ने की थी और राज्यपाल के उस निर्णय के विरोध में प्रधान मंत्री आवास के समक्ष आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी ने भूख हड़ताल की थी और जब १४वीं विधान सभा के उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाण आए, तो समाजवादी पार्टी जब सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आई, तो उस समय मैं सरकार चलाने वालों को याद दिलाना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया था।
20.00 hrs. उस समय जो परिस्थिति थी, बोम्मई केस का जो उदाहरण यहां प्रस्तुत किया जा रहा था, उसके संबंध में मैं कहना चाहता हूं कि केवल समाजवादी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया था। राज्यपाल समाजवादी पार्टी के उस दावे से सहमत नहीं हुए और उन्होंने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
मैं जानना चाहता हूं कि जब १४वीं विधान सभा में महामहिम राज्यपाल श्री विष्णु कांत शास्त्री जी ने …( व्यवधान)आदरणीय कटियार जी, आपके नेता ने, आपके राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह तय किया था कि जनता ने हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है इसलिए हम विपक्ष में बैठने का काम करेंगे। यह समाजवादी पार्टी ने नहीं कहा था। उस समय आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने नेता सदन की हैसियत से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी देने का काम किया था। दो महीने बाद उनकी और बहुजन समाजवादी पार्टी के बीच सौदेबाजी चलती रही तब जाकर उत्तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी , भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन की सरकार पदारूढ़ हुई।
हम आपके माध्यम से सरकार चलाने वाले लोगों से जानना चाहते हैं कि जब १९९६ में प्रधान मंत्री जी ने नेता विपक्ष की हैसियत से जो निर्णय लिया था वह सही था या २००२ में नेता सदन की हैसियत से जो निर्णय लिया था, वह सही था। अगर तब का उनका कदम गलत था तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए और अगर उनका आज का कदम गलत है तो उन्हें देश के प्रधान मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। हम सरकार चलाने वाले लोगों से जानना चाहते हैं कि यह विवाद समाजवादी पार्टी ने पैदा किया है या आपको समर्थन देने वाले विधायकों ने पैदा किया है ? सर्वप्रथम आठ निर्दलीय विधायकों ने सरकार से अपना समर्थन वापिस लिया। उस समर्थन वापिसी के बाद महामहिम राज्यपाल का जो वक्तव्य आया जिस वक्तव्य को हमने मीडिया में सुनने का काम किया। उन्होंने कहा कि वस्तुत: सात निर्दलीय एम.एल.एज. ने ही सरकार से समर्थन वापिस लिया है और एक एम.एल.ए. पहले ही सरकार के विरोध में था। इस सीमा तक जाकर उन्होंने आगे कहा कि आज भी उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार को २१० का समर्थन प्राप्त है। यह हमने नहीं कहा, आपके नेता श्री लाल जी टंडन ने भारतीय जनता पार्टी के दस सदस्यों की सदस्यता को समाप्त करने के लिए विधान सभा के समक्ष याचिका दायर की। यह हमने नहीं, आपकी नेता सुश्री मायावती जी ने एक एम.एल.ए. श्री जयप्रकाश यादव की सदस्यता को समाप्त करने के लिए विधान सभा के अध्यक्ष के सामने याचिका दायर की है। आपने ही उन विधायकों का समर्थन खो दिया है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, आपके द्वारा प्रस्तुत याचिका.…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : मेरा इतना ही कहना है कि अगर पार्टी के अंदर कहीं कोई विद्रोह करता है …( व्यवधान)आपके यहां हुआ तो आपने भी अपने सांसदों पर कार्यवाही की। आपने अपने विधायकों को कहा …( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:हमने अपने संसंद सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के लिए कोई याचिका दायर नहीं की।…( व्यवधान)
श्री विनय कटियार : सबके अलग-अलग कदम हो सकते हैं। …( व्यवधान)अगर मैं समाप्त कर रहा हूं तो आपको क्या आपत्ति है ? …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप यील्ड कर रहे हैं तभी उनका रिकार्ड में जायेगा, नहीं तो नहीं जायेगा। दोनों का एक साथ नहीं जा सकता।
...( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह: मेरे कथन है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने दस सदस्यों की सदस्यता को समाप्त करने के लिए विधान सभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका प्रस्तुत की। बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपने एक एम.एल.ए. की सदस्यता को समाप्त करने के लिए याचिका प्रस्तुत की। इन ११ सदस्यों के अलावा सदन के अंदर उनको केवल १९९ सदस्यों का ही समर्थन प्राप्त है और बहुमत चलाने के लिए २०२ की संख्या चाहिए। आप यह बताइये कि इनके पास २०२ की संख्या कहां है ? सरकार बनाने का दावा समाजवादी पार्टी राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर रही है, समाजवादी पार्टी राज्यपाल के समक्ष यह दावा प्रस्तुत कर रही है कि वर्तमान हुकूमत उत्तर प्रदेश की विधान सभा में अपना बहुमत खो चुकी है। मैं अपने इस प्रमाण तर्क के आधार पर कहना चाहता हूं कि तर्क के आधार पर, कानून के आधार पर उत्तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार आज अल्पमत में आ चुकी है। कटियार साहब, अगर आपका बहुमत है तो आप क्यों नहीं विधान सभा को बुलाते हैं। अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
मैं बड़े अदब के साथ कहना चाहता हूं कि आपने विधान सभा के जिस उपचुनाव का उल्लेख किया है और कहा है कि कांग्रेस पार्टी के लोग अगर वोट दे देते तो यह कह रहे थे कि चार मार्च तक पता नहीं क्या होगा। …( व्यवधान)आप सुनते रहिए। अगर आप यही करते रहेंगे तो इस देश से लोकतंत्र को समाप्त कर देंगे। मैं कहना चाहता हूं कि उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के कोटे के उम्मीदवार को केवल १८३ वोट मिले थे। अगर कांग्रेस पार्टी के लोग वोट डालते तो वहां पर क्रॉस वोटिंग हो जाती। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अगर कांग्रेस पार्टी वोट डालती तो २२० से २२५ मत समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जसवंतसिंह जी को प्राप्त होते। मैं कहना चाहता हूं कि अगर कांग्रेस पार्टी पर आपको भरोसा है तो क्यों नहीं विधान सभा का सत्र बुला रहे हैं। अगर आप समझ रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी उसमें ऐबस्टेन करेगी, मैं समझता हूं कि उत्तर प्रदेश में जब भी विधान सभा का सत्र बुलाया जाएगा, कांग्रेस पार्टी अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वहन करने का काम करेगी। कांग्रेस पार्टी के विधान मंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी जी ने कांग्रेस पार्टी के विधायक के साथ महामहिम राज्यपाल के समक्ष यह कहा कि यह सरकार बहुमत खो चुकी है। १८३ संख्या समाजवादी पार्टी के ग्रुप के सदस्यों की और २३ की संख्या इनकी है, विनय कटियार जी, २०६ का समर्थन प्राप्त है, २०४ का नहीं। आज उत्तर प्रदेश की विधान सभा में आपकी सरकार के विरुद्ध २०६ का समर्थन हमको प्राप्त है। शब्द याद रखिए, आपकी सरकार के विरुद्ध।…( व्यवधान)
श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल (हमीरपुर, उ.प्र.) : अगर आपके पास २०६ सदस्यों की सूची है, नाम ले लीजिए, हम सदन बुला लेते हैं।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह:आप कौन होते हैं। आपकी हैसियत नहीं है। जब आपकी हैसियत होगी तो बता दीजिए।
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Kunwar Akhilesh Singh.
(Interruptions)* कुंवर अखिलेश सिंह:कभी आएंगे तो फिर आपके सामने सूची प्रस्तुत की जाएगी।…( व्यवधान)
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: You do not talk. Unless you get permission from me, you cannot talk like that. Either he should yield to you or you should get my permission.
* Not Recorded कुंवर अखिलेश सिंह:ये हमारे साथ विधान सभा में साथी रहे हैं, हमारे मित्र हैं।
आदरणीय उपाध्यक्ष जी, मैं इस सदन के माध्यम से कहना चाहता हूं कि आज भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन की सरकार उत्तर प्रदेश में अपनी अंतिम सांसे गिन रही है। आज संविधान की धज्जियां उड़ा कर, संविधान की मर्यादा का उल्लंघन करके उत्तर प्रदेश में जिस तरह बेशर्मी से हुकुमत चलाई जा रही है, जिस तरह चुने हुए विधायकों के ऊपर आरोप लगा कर उन्हें जेलों के अंदर बंद किया जा रहा है, अभी भाई राशिद अल्वी बोल रहे थे कि जो अपराधी होगा, उसे जेल के अंदर डाला जाएगा। भाई राशिद अल्वी जी, अगर मायावती जी दो-तीन महीने तक किसी तरह उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री की कुर्सी पर बैठी रहेंगी तो विपक्ष का कोई भी विधायक नहीं बचेगा जो अपराधी की श्रेणी में न आ जाए, सारे विधायक अपराधी की श्रेणी में होंगे और सारे लोग जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
मैं आपसे कहना चाहता हूं कि १९७७ को याद करो जब सम्पूर्ण राष्ट्रीय नेतृत्व जेल के अंदर था। १९७७ में जब चुनाव हुए थे तो चुनाव परिणाम क्या निकल कर आए थे। इतिहास से सबक लेने की कोशिश कीजिए। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, जिनके खिलाफ यह मुकदमा कायम किया गया है, एक दिन तक, दो दिन तक नहीं, पांच साल तक उत्तर प्रदेश में केबिनेट मनिस्टर की कुर्सी पर थे। जब पांच साल तक वे केबिनेट मनिस्टर की कुर्सी पर थे तब वे उनकी नजरों में अच्छे व्यक्ति थे लेकिन जैसे ही उन्होंने सरकार का विरोध करना शुरू किया, केवल उन्हें ही नहीं, उनके ७० वर्षीय बूढ़े पिता, जो एक संयासी का जीवन जीने का काम कर रहे थे, उनके खिलाफ भी फर्जी मुकदमा कायम करने का काम किया गया। यही नहीं, एक दलित विधायक जो रघुनाथ प्रताप सिंह के समर्थन से जीत कर आए थे, अभी तीन दिन पहले उनके खिलाफ भी मुकदमा कायम कर उन्हें जेल में डाला गया है। यही नहीं, विधान परिषद के सदस्य अक्षेय गोपाल सिंह को भी गिरफ्तार करके जेल में डालने का काम किया गया है। कब तक जेल में डालने का काम करेंगे।
मिश्रा जी, मैं आपसे कहना चाहता हूं, आपने रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख किया। आदरणीय चिन्म्यानंद जी, आपने रामपुर तिराह कांड का उल्लेख किया है। रामपुर तिराहा कांड की टिप्पणी को देख लीजिए। उसके बाद यह साबित हो गया कि गोएबैल्स के रास्ते पर चलने वाले लोगों का असत्य बेनकाब हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को उठा कर पढ़ने का काम कीजिए। रामपुर तिराहा कांड के बाद जो घटना हुई थी, मुलायम सिंह जी ने मुख्य मंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश की विधान सभा में खेद व्यक्त किया था, माफी मांगने का काम किया था। उसके बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जब मामला गया तो सर्वोच्च न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी करने का काम किया।
अभी आप ब्रहमदत्त द्विवेदी के हत्यारे का उल्लेख कर रहे थे। आपने कहा, द्विवेदी जी ने मायावती जी को बचाने का काम किया। एक भाई, ब्रहमदत्त द्विवेदी, जिन्होंने मायावती जी को बचाने का काम किया, वह कितनी क्रूर बहन थी जिसने ब्रहमदत्त द्विवेदी के हत्यारे को खुला समर्थन प्रदान करने का काम किया। यह चरित्र आपका है, यह चरित्र हमारा नहीं है। विश्व हिन्दू परिषद के नेता नंदकिशोर रूंगटा की जिस निर्ममतापूर्वक हत्या की गई, विनय कटियार जी, उस अपराधी को जिस तरह गले लगाने का काम किया गया है, जिसके विषय में कुछ दिन पहले बयान दिया गया था कि इससे हमारी जान को खतरा है, उसे भी गले लगाने का काम किया गया है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जरा इन चीजों पर आप नजर डालने का काम कीजिए।
आदरणीय मुलायम सिंह जी यहां बैठे हुए हैं। समाजवादी पार्टी की भी फ्रंटल आर्गनाईजेशन है लेकिन समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह जी भी अगर फ्रंटल आर्गनाईजेशन के किसी राष्ट्रीय नेता का कोई अपहरण करेगा, हत्या करने का काम करेगा तो समाजवादी पार्टी ऐसे दुदार्ंत अपराधी को कभी भी लेने का काम नहीं करेगी।
मैं कहना चाहता हूं, उत्तर प्रदेश में विकास की बड़ी लम्बी-चौड़ी चर्चा हुई है। अगर इतना ही धन है तो आज गन्ना किसानों की क्या दुर्दशा हो रही है, आज धान के किसानों की क्या दुर्दशा हो रही है, आज गन्ना किसानों का बकाया मूल्य क्यों नहीं अदा किया जा रहा है। आज गन्ना किसान अपने गन्ने को जलाने को क्यों मजबूर हो रहे हैं। आज धान का समर्थन मूल्य ५५० रुपये प्रति क्िंवटल मिलना चाहिए और उन्हें ३७५, ३८० और ३९० रुपये मिल रहा है और वह अपना धान बेचने को मजबूर हो रहा है। इतना ही नहीं, आप संसद सदस्य हैं, एम.पी.लेड में कलैक्टर लोग आज अपना कमीशन लिए बिना प्रस्ताव स्वीकृत नहीं कर रहे हैं, कह रहे हैं कि हमें थैली पहुंचानी है। वह थैली कहां जा रही है?…( व्यवधान)मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि ऐसा हो रहा है। संसद की एक संयुक्त संसदीय टीम चले और सत्यता उजागर न हो जाये तो आप जो कहेंगे, वह सजा मैं भुगतने के लिए तैयार रहूंगा।
आपने अभी यह कहा है कि उत्तर प्रदेश में विकास की बड़ी लम्बी-चौड़ी बात हुई है। मैं कहना चाहता हूं कि मुलायम सिंह यादव जी एक बार नहीं, दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पहली दफा जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने गन्ने का २५ प्रतिशत रिकार्ड मूल्य बढ़ाने का काम किया और दूसरी दफा जब मुख्यमंत्री बने तो गन्ने का दाम, जो ४४ रुपये पर १९९२ में भारतीय जनता पार्टी छोड़कर गई थी, उसे ६६ रुपये क्िंवटल तक ले जाने का काम किया था। यह हमारी सरकार थी, जिसने मूल्य बढ़ाने का काम किया। मिश्रा जी, १९९५ का रिकार्ड आप उठाकर देख लीजिए, १९९५ में हमारी सरकार ने गन्ने का मूल्य ६६ रुपये प्रति क्िंवटल निर्धारित किया था और समय से गन्ना मिलें चली थीं, समय से गन्ने की पिराई शुरू हुई थी और समय से किसानों को गन्ने के मूल्य का भुगतान हुआ था। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि आज उत्तर प्रदेश के अन्दर बहुजन समाज पार्टी-भारतीय जनता पार्टी के गठबन्धन की सरकार लोगों का विश्वास खो चुकी है।
मायावती जी की सरकार ने बिजली के सवाल पर भी कहा कि बहुत धन इकट्ठा कर लिया है, फिर बिजली के क्षेत्र में यह दुर्दशा क्यों हो रही है। विनय कटियार जी, आप तो फैजाबाद क्षेत्र को ही बिलोंग करते हैं। अभी पिछले दिनों बिजली की अनापूर्ति के सवाल को लेकर फैजाबाद में जब आन्दोलन हुआ तो एक नौजवान के ऊपर पुलिस ने लाठियां चलाईं और पुलिस की लाठियों से वह नौजवान मौत के घाट उतर गया था। आज स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी है कि जो किसान अपने बकाया गन्ना मूल्य को मांगने के लिए जब थानों के अन्दर धरना दे रहे हैं, तहसीलों के अन्दर धरना दे रहे हैं तो उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं, यह उत्तर प्रदेश की स्थिति है।
मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि आज उत्तर प्रदेश में मानवता कराह रही है। आज मैं यह कहना चाहता हूं कि जिस तरह से संवैधानिक उच्च पदों पर बैठे हुए लोग सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं, अगर उस दुरुपयोग को आपने रोकने का काम नहीं किया तो लोकतंत्र से लोगों का विश्वास उठ जायेगा। आज अगर रघुराज प्रताप सिंह के ७० वर्षीय बूढ़े बाप को फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जायेगी और लोगों को लगेगा कि लोकतंत्र में उच्च पदों पर बैठे हुए लोग लोकतंत्र को अपनी रखैल बनाकर जिस तरह से चाहेंगे, उस तरह से इस्तेमाल करेंगे तो मुझे कहने में तनिक भी संदेह नहीं है कि उत्तर प्रदेश का नौजवान, उत्तर प्रदेश का बूढ़ा अपने हाथों में हथियार लेगा और सीधे संघर्ष के लिए बाध्य हो जायेगा। फिर जो पूर्वोत्तर भारत में जो स्थिति देश को भुगतनी पर रही है, उस स्थिति का सामना करने के लिए आपको आगे आना पड़ेगा।
इसलिए मैं विनम्रता से कहना चाहता हूं, विनतीपूर्वक करना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश के लोकतंत्र का गला मत घोंटिये। अगर आपको विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी-बहुजन समाज पार्टी के गठबन्धन की सरकार को बहुमत प्राप्त है तो आप विधान सभा का सत्र आहूत करिये। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि पिछले दिनों जब अनुशासन और शालीनता के सवाल पर सैण्ट्रल हॉल में एक राष्ट्रीय सेमीनार बुलाया गया था तो उस सेमीनार में यह तय हुआ था कि जो बड़े राज्य होंगे, वे कम से कम साल भर में ९० दिन के लिए और लोक सभा १२०, १२५ दिन अपनी बैठकों को आहूत करने का काम करेंगे। आज उस मर्यादा का भी पालन नहीं किया जा रहा है। सारे सबूत इनके खिलाफ हैं, उसके बाद भी ये कहते हैं कि हमें बहुमत प्राप्त है।
उपाध्यक्ष महोदय : अब तो समाप्त कीजिए।
कुंवर अखिलेश सिंह: मैं इतनी ही विनती करना चाहता हूं कि यह लोकतंत्र की आत्मा है, यह देश का सर्वोच्च सदन है। मैं इस सर्वोच्च सदन से अपील करता हूं कि उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र की जो हत्या की जा रही है, उस लोकतंत्र की हत्या को तत्काल बन्द कराया जाये। हम यह नहीं कहते कि मायावती की सरकार को बर्खास्त कर दिया जाये, हम यह नहीं कहते कि हमारी सरकार का पदारोहन कर दिया जाये। हम केवल इतनी विनती करते हैं कि तत्काल उत्तर प्रदेश की विधान सभा का सत्र आहूत करके विधान सभा के पटल पर बहुमत और अल्पमत का परीक्षण किया जाये।
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, it appears that the developments in Uttar Pradesh are most probably going to be the BJP’s waterloo and are going to herald the beginning of the end of that party’s fortunes not only in Uttar Pradesh but all over the country.
We had not raised this question when the BSP and BJP Government was installed in the month of May this year. Why are we raising this question and why the action of the Governor is being questioned also? Is it not a fact that the action of the Governor has been discussed on the floor of this House? … (Interruptions)
श्री विनय कटियार : आपको उत्तर प्रदेश के बारे में क्या मालूम है ?
श्री बसुदेव आचार्य : हमें सब मालूम है।
उपाध्यक्ष महोदय : कटियार जी, आप वरिष्ठ सदस्य हैं, इस तरह बैठे हुए कमेंट्री न करें।
श्री विनय कटियार : अभी हम बंगाल पर गए, तो इन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पर बोलें।
श्री बसुदेव आचार्य : चर्चा उत्तर प्रदेश के बारे में है और आप बंगाल की चर्चा कर रहे थे। हमने भी मुलायम सिंह जी के साथ इस विषय पर नोटिस दिया था।
श्री विनय कटियार : मुलायम सिंह जी ने कोई समझौता नहीं किया। तीसरा मोर्चा आपने बनाया, उसमें शामिल नहीं हुए और वहां के चुनाव में आपको एक भी सीट नहीं दी।
श्री बसुदेव आचार्य : समझौता फिर होगा। हम लोग फिर एकजुट होंगे, बी.जे.पी. के खिलाफ और कांग्रेस को भी आना होगा। साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ हमें एकजुट होकर लड़ना है। यह काम शुरू हो गया है।
Sir, when the BJP was in the Opposition and when there was such a situation in Uttar Pradesh, the Adjournment Motion, which was admitted, was moved by no less than a person then the Leader of the Opposition, Shri Atal Bihari Vajpayee. That Adjournment Motion was defeated. The role of the then Governor of Uttar Pradesh was discussed here on the floor of this House. We are questioning the role of the Governor.
Sir, the Sarkaria Commission has very clearly stated in para 4.6.09 that a Governor should be a person from outside the State. But the present Governor was elected from Uttar Pradesh to Rajya Sabha. I quote:-
" He should be a detached figure, not too intimately connected with local politics of the State."But he was elected from Uttar Pradesh to the Rajya Sabha. I further quote:
"He should be a person who has not taken too great a part in politics generally and particularly in the recent past. "He resigned his Rajya Sabha seat, became the Governor of Himachal Pradesh and then transferred to Uttar Pradesh. So, all the guidelines of Sarkaria Commission are blatantly violated by the NDA Government while appointing Governors in various States.
Sir, what happened in 1996? After the General Elections when BJP became the largest party, the Leader of the largest party was called to form the Government. In 1989 General Elections, the Congress was defeated, but the Congress was the largest party in Lok Sabha. The Leader of Congress Party, Shri Rajiv Gandhi, was invited to form the Government. However. He refused to form the Government. Then, Shri Vishwanath Pratap Singh was invited to form the Government and the National Front Government was formed and installed.
Sir, we raised this question after the last election in Uttar Pradesh. हमने इसी सदन में सवाल किया था और प्रधान मंत्री जी मौजूद थे। Why should there be a double standard – one standard for the Bhartiya Janata Party and the other for others? You became the Prime Minister. You knew fully well that you had no majority. Knowing it fully well, you remained as a Prime Minister for 13 days. In Uttar Pradesh, after the last Assembly election, the Samajwadi Party became the largest Party. The Samajwadi Party got 145 seats. Why was the Samajwadi Party not called by the Governor to form the Government? We question the action of the Governor. The Governor waited for more than two months. The election was over in the month of February. The BJP-BSP Government was installed in the first week of May. Why was it so? The Governor waited for two months. He waited for a compromise between the BJP and the BSP. So, this question was raised.
The Babri Masjid was demolished on 6th December, 1992. The affidavit in respect of three Ministers, who are still accused, was rejected on technical grounds and the court asked the Government of Uttar Pradesh to file fresh affidavit. Before the election, Kumari Mayawati, in all her election meetings in Uttar Pradesh, during campaigning, assured the people of Uttar Pradesh that if she becomes the Chief Minister she would see that the affidavit is filed. उसके बाद क्या हुआ, सब जानते हैं, क्या कारण बताए, क्यों किया। यह जो सरकार बनीं, दोनों के मत भिन्न थे। बीजीपे एक थ्यिक्रेटिक स्टेट के पक्ष में है।
श्री राम नाईक : किसने कहा है ?
श्री बसुदेव आचार्य : एक मायावती हैं और दूसरे कहते हैं, वे लोग दलित हैं, दोनों कैसे मिल गए।
SHRI RAM NAIK: Shri Basu Deb Acharia, just a minute. The BJP has never said that we believe in theocratic State. I just want to rectify it. … (Interruptions)
श्री बसुदेव आचार्य : दोनों कैसे मिल गए ? They had the experience. When there was an arrangement in 1996, for the first time in our country,ऐसा कभी नहीं हुआIt was that one would be the Chief Minister for six months and then, after six months another would be the Chief Minister. That Government fell after six months.उसके बाद बीजेपी ने क्या किया, पावर में रहने के लिए To remain in power, the BJP engineered defections in the Congress and the Loktantrik Congress Party was formed. The BJP engineered defections in the BSP and another party was formed. Then the BJP continued in the Government. पांच साल चलाया और उसके बादwhen the BJP was defeated and rejected by the people, they openly announced and declared that the BJP would not form the Government. हम विपक्ष में रहेंगे। क्या इस बात को नहीं कहा था। ऐसा परिवर्तन कैसे हुआ?क्यों कम्प्रोमाइज़ हुआ और फिर मिल गए। क्या सौदेबाजी हुई, सबको मालूम है।
श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अशोक प्रधान) : कोई सौदेबाजी नहीं हुई। …( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य :आप क्यों बोल रहे थे कि हम चुनाव के बाद सत्ता में नहीं जाएंगे, हमें रिजेक्ट कर दिया।…( व्यवधान) What was the mandate of the people of Uttar Pradesh? Shri Ram Naik, please tell us whether the mandate was against the Bharatiya Janata Party or not. The mandate was against the BJP. उसके बावजूद भी आप सत्ता में चले गए।…( व्यवधान)
श्री अशोक प्रधान : वहां जो एमएलए थे, वे जनता से चुन कर आए थे, कहीं बाहर से नहीं आए थे। इसलिए मिली-जुली सरकार बनी है और यह जनादेश उत्तर प्रदेश की जनता ने दिया था।
SHRI BASU DEB ACHARIA : What moral values does BJP have? … (Interruptions) Your party is a party of difference. What is the difference? What moral values do you have? You have sacrificed everything to remain in power. … (Interruptions) The hon. Minister of State referred to the judgement in S.R. Bommai case here. What has been said in the judgement? Sir, it has been said :
"The principle of democracy underlying our Constitution necessarily means that any such question should be decided on the floor of the House "Here, `any such question’ means whether any Government has majority or not. It further says:
"The House is the place where the democracy is in action. It is not for the Governor to determine said question on his own or on his verification. This is not a matter within his subjective satisfaction. It is an objective fact capable of being established on the floor of the House. "अभी कहा जा रहा था कि कैसे अल्पमत में आ गए हैं, क्या यह प्रमाणित हो गया है। इस सवाल को हम लोगों ने नहीं उठाया।We have not raised this question for the last four or five months. Why are we raising this question now? It is because there has been dissension. A number of MLAs defected. They expressed their dissension. A number of independent MLAs were supporting the BSP-BJP Government. Now, they have withdrawn their support and it has been proved. When there was election of Legislative Council, though the Congress abstained from voting, how many votes did this coalition get? इन्होंने बोला कि वह बाहर का है, अंदर का नहीं है, इसलिए हम अंदर का चाहते हैं। It is not outside. The election was held inside the Assembly. यह चुनाव अंदर हुआ था, उसमें क्या हुआ? How many votes did they get? They got 194 votes. How many votes are required for getting majority? The number of votes required for getting majority is 202 or 203. आपके दस कम हो गए।When the question has been raised, our Governor … (Interruptions)
श्री श्याम बिहारी मिश्र:एमएलसी के वोट बहुमत में कैसे जोड़ेंगे?…( व्यवधान)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Shri Mishra, this is your argument.
उपाध्यक्ष महोदय : आचार्य जी, आप दो मिनट में खत्म कीजिए।
श्री बसुदेव आचार्य : महोदय, दो मिनट में खत्म नहीं होगा, थोड़ा समय लगेगा। आप हमें थोड़ा समय दीजिए।
उपाध्यक्ष महोदय : आपकी पार्टी के एक माननीय सदस्य ने सारा समय ले लिया है। आप मेरी तरफ देख कर बात करेंगे तो जल्दी खत्म हो सकता है।
श्री बसुदेव आचार्य : महोदय, ठीक है।
When it has been proved that the Government in Uttar Pradesh has become a minority, it is surprising to see the statement issued by the Governor -- I have not seen any Governor issuing such statements -- that the Government has majority. He asked Shri Mulayam Singh Yadav to prove his majority, to come with his list and then he would summon the Assembly. अरे, वे कैसे करेंगे, आप असैम्बली बुलाओ।Why are you afraid of summoning the Assembly? Shri Mishra, why are you afraid of facing the Assembly?
श्री अशोक प्रधान : BÉE® ãÉåMÉä, xÉÉä |ÉÉì¤ãÉàÉ* gÉÉÒ ¶ªÉÉàÉ ÉʤÉcÉ®ÉÒ ÉÊàÉgÉ:असैम्बली बुलाई जाएगी, उसमें इस सवाल को फेस किया जाएग, तब आपका भ्रम दूर हो जाएगा।
SHRI BASU DEB ACHARIA : Who will decide? Will the Governor decide on his own? Why is the Governor not summoning the Assembly? We are not demanding to remove this Government as it has become a minority Government. We are not asking for that. Our simple demand is to summon the Assembly, and Kumari Mayawati’s Government should be asked to prove its majority not in Raj Bhawan but in the Assembly. This has been clearly stated in the Bommai case. Why is the Governor not asking the Mayawati Government to prove her majority? What prevents him from asking her to prove her majority? Shri Ram Naik, when it happened in Maharashtra, the Chief Minister was asked by the Governor to prove his majority in the Assembly. Why should there be another standard for Uttar Pradesh? The Chief Minister of Maharashtra proved his majority, when the Governor summoned the Assembly.
आप तो सिर हिला रहे हैं। आपने बहुत कोशिश की थी लेकिन सरकार को गिरा नहीं सके।
श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : आप देखते रहिये, वहां हमारी सरकार आयेगी।
श्री बसुदेव आचार्य : आसानी से नहीं आयेगी।
उपाध्यक्ष महोदय : मिस्टर खैरे, हम बहुत मुश्किल से इन्हें संभाल रहे हैं, आप बीच में न बोलें। इन्हें अपना भाषण करने दें।
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I support the Motion moved by Shri Mulayam Singh Yadav. I demand that Governor of Uttar Pradesh should summon the Assembly; he should ask Kumari Mayawati to prove her majority by summoning the Assembly. विधान सभा का अधिवेशन जल्दी से जल्दी बुलाकर अपने बहुमत को प्रमाणित करें। कांग्रेस ने भी राज्यपाल महोदय से मिलकर मांग की है कि अधिवेशन बुलाओ। कांग्रेस ने भी बोला है कि सरकार अल्पमत में आ गयी है तो गवर्नर का दायित्व है कि विधान सभा का सत्र बुलाकर बहुमत प्रमाणित किया जाए और यही हमारी भी मांग है। जब गृह मंत्री जी चर्चा का जवाब देंगे तो इस बारे में जरूर बताएंगे और गवर्नर को वे यहां से निर्देश भेजेंगे कि वह विधान सभा का अधिवेशन बुलाकर बहुमत प्रमाणित करवाए।
MR. DEPUTY-SPEAKER: The list of speakers is exhausted. The reply of the hon. Deputy Prime Minister will be on 28th November, 2002.
Now, the House stands adjourned to meet again tomorrow at 11 a.m. 20.35 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, November 27, 2002/Agrahayana 6, 1924 (Saka).
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