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Lok Sabha Debates

Regarding Prime Minister’S Reported Statement On Poto. on 3 December, 2001

Title: Regarding Prime Minister’s reported statement on POTO.

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, स्थगन प्रस्ताव तो कभी भी दे सकते हैं। आपने कहा कि नहीं बोलिये तो हम नहीं बोले। असलियत यही है कि आप खड़े होंगे तो हम बैठ जाएंगे। हम आपको पूरा आदर देते हैं।

मैं जो पूछने जा रहा हूं वह गंभीर और महत्वपूर्ण सवाल है। कल हैदराबाद में एक बड़ी सभा में माननीय प्रधान मंत्री जी ने तीन बातें कही। देश की एकता के लिए, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो खतरे हैं उनसे लड़ने के लिए सभी को विश्वास में लेकर और पूरे देश को एक होकर लड़ना चाहिए। लेकिन प्रधान मंत्री जी ने स्वयं ऐसा वक्तव्य दिया है जिससे ऐसा आभास होता है कि हिंदुस्तान के लोगों पर और विशेषकर मुसलमानों पर और विपक्षी दलों पर आरोप आता है। …( व्यवधान)

पहली बात तो उन्होंने यह कही कि आतंकवाद से लड़ने के लिए पोटो पर जो विपक्ष है वह सरकार से सहयोग नहीं कर रहा है।…( व्यवधान)मुझे पता है कि मेरे खड़े होने पर बीजेपी को परेशानी होती है और होती रहेगी।

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): मुलायम सिंह जी, आप सहयोग कीजिए तो कोई परेशानी नहीं होगी।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :अध्यक्ष जी, आतंकवाद से लड़ने के लिए पूरा का पूरा देश और विपक्ष खड़ा है। लेकिन सरकार इतनी कमजोर और इतनी अक्षम है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ ही नहीं सकती।…( व्यवधान)इन्होंने पहली बात यह कही है कि पोटो के सवाल पर विपक्ष राजनीति कर रहा है। दूसरी बात इन्होंने कही है कि सरकार आतंकवाद से लड़ रही है और विपक्ष सहयोग नहीं दे रहा है और तीसरी बात जो इंडियन एक्सप्रेस में में छपी है वह यह है क "The Centre, Atal Bihari Vajpayee said, was firm on introducing the POTO Bill in Parliament as a section of the people is trying to create unrest in India with the help of a neighbouring country."

 

 इससे साफ है कि पड़ोसी देश के इशारे पर या विदेशी देश की सहायता से एक वर्ग आतंकवादियों को मदद कर रहा है। यह माननीय प्रधान मंत्री जी का आरोप है। इससे पूरे के पूरे के मुसलमानों को शक की द्ृष्टि से देखा गया है।…( व्यवधान)मेरी राय में तो यही इसका मतलब है।…( व्यवधान)

श्री साहिब सिंह (बाहरी दिल्ली) : चोर की दाढ़ी में तिनके वाली बात हुई। हमने तो ऐसा नहीं कहा।

श्री मुलायम सिंह यादव : जब-जब देश पर संकट आया है तो देश के मुसलमानों ने लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। हमारी सेना में दो प्रतिशत से अधिक मुसलमान नहीं हैं लेकिन अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी के हिसाब से कारगिल की लड़ाई में १४ से १६ प्रतिशत मुसलमान शहीद हुए हैं। इससे पहले भी सभी जानते हैं कि अब्दुल हमीद जैसे और अशफाक़-उल्ला-खां जैसे देशभक्त लोग रहे हैं। इसलिए मुसलमानों पर शक करने से मामला खतरनाक हो जायेगा। प्यार-मौहब्बत से उनको आप देखेंगे और कश्मीर की जनता को विश्वास में ले लेंगे, तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि कश्मीर की जनता ही आतंकवाद को खत्म कर देगी।

दूसरा, आपका यह कहना कि हम राजनीति कर रहे हैं। मेरा कहना है कि राजनीति सरकार कर रही है, राजनीति भारतीय जनता पार्टी कर रही है।

अभी अमृतसर में एक बैठक हुई। उसमें भारत के गृह मंत्री कहते हैं कि पोटो पास हो जाएगा तो हमें राजनीतिक लाभ मिलेगा और अगर पास नहीं होगा तो भी हमें राजनीतिक लाभ होगा। राजनीति कौन कर रहा है? जब अयोध्या में मस्जिद शहीद हो गई तो उसके बाद चीनी कौन बांट रहा था? जब पत्रकारों ने कहा कि हमारी रक्षा करो, हिफाजत करो, तब चीनी कौन बांट रहा था? उस समय आप कह रहे थे कि इससे बड़ा दिन कोई नहीं हो सकता, चीनी खाइए, सवाल छोड़िए। राजनीति कौन कर रहा है? भारतीय जनता पार्टी राजनीति कर रही है। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: मुलायम सिंह जी, यह जीरो आवर है।

श्री मुलायम सिंह यादव :यह एक कमजोर सरकार है। पोटो की कोई आवश्यकता नहीं है। दासमुंशी जी, पोटो सबसे ज्यादा खतरनाक कानून है। इससे ज्यादा खतरनाक कानून हिन्दुस्तान में कभी नहीं आया। कांग्रेस पार्टी ने हमें और आपको २०-२० महीने जेल में रखा। हमें उससे सबक लेना चाहिए। कांग्रेस को गाली देने से काम नहीं चलेगा। हमें और आपको उससे सबक लेना चाहिए। यह कहना कि रिव्यू होगा। रिव्यू बोर्ड वही था जिस ने कहा कि मुलायम सिंह जी थाने में किताबें जला रहे थे, रेल की पटरियां उखाड़ रहे थे। वही रिव्यू करने वाला बोर्ड है जिस ने हमें और आपको २०-२० महीने जेल में रखा। अगर कांग्रेस ने गलती की है तो वही गलती आप मत करिए। आप बहुत जल्दी इधर आ जाएंगे। आप राजनीति मत करो। आप आतंकवाद के खिलाफ लड़ना नहीं चाहते। मौलाना अजहर महमूद को कौन ले गया? मैं मानता हूं कि उस समय नागरिकों को बचाना था लेकिन प्रधान मंत्री जी, विदेश मंत्री को उनके साथ जाने की क्या जरूरत थी? यह कमजोर सरकार प्रचलित कानूनों को दोषी कह कर खतरनाक और फासिस्ट कानून ला रही है। वह इस तरह के फासिस्ट कानूनों को लाकर हम लोगों की जुबान को नहीं रोक सकती।

जहां तक आतंकवाद का सवाल है, हम आतंकवाद के सबसे ज्यादा खिलाफ हैं। आप आतंकवाद के खिलाफ लड़ नहीं रहे हैं। आतंकवाद को खत्म करना है तो मैंने डेढ़ साल पहले कहा था कि आप मुसलमानों पर हमला करते हो, जाइए और देखिए जिन ट्रेनिंग कैम्स में आतंकवादी ट्रेनिंग ले रहे हैं, अगर हिम्मत है तो वहां हमला करिए। आप बार-बार पाकिस्तान से कहते हैं कि हमारा धीरज समाप्त हो रहा है। आप धीरज समाप्त क्यों कर रहे हैं? यदि पूरे दक्षिण एशिया में शांति चाहते हैं तो अवैध रूप से जिस कश्मीर पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है, वह वापस लिया जाए।…( व्यवधान) मुशर्रफ साहब से कहिए वह उसे वापस करे। आप इसका मजबूती से विरोध करिए। …( व्यवधान)यह मामूली बात नहीं है। क्या हमारी देशभक्ति पर यह सवाल उठाएंगे? आपको आजादी की लड़ाई में लड़ने का मौका नहीं मिला। आप हमारी देशभक्ति पर उंगली उठाते हैं। इसलिए हम प्रधान मंत्री जी के इस बयान की निन्दा करते हैं और उसका विरोध करते हैं। प्रधान मंत्री जी का बयान पूरी दुनिया में जाता है और घर-घर में पढ़ा जाता है। प्रधान मंत्री इस तरह का संदेश देकर देश की एकता को खतरा पहुंचा रहे हैं। …( व्यवधान)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अगर ऐसे डिबेट हो रही है तो चार लोगों को उधर से बुलाएंगे तो चार इधर से भी बुलाएं।

अध्यक्ष महोदय: मल्होत्रा जी, आपको बोलने के लिए बुलाएंगे।

SHRI S. JAIPAL REDDY (MIRYALGUDA): Sir, I am of the considered view that the Prime Minister was guilty of grave impropriety when he made adverse comments in the context of POTO legislation. I would like to put the record straight. The POTO was promulgated just a few hours before the notification for the Winter Session was issued. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except what Shri Jaipal Reddy is saying.(Interruptions) …* SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, the code of conduct should not be made applicable unilaterally. It should be made applicable bilaterally. It should be made applicable to both the sides…… (Interruptions)

* Not Recorded अध्यक्ष महोदय : आप सब को बुलायेंगे। रघुनाथ झा जी, आपको बुलायेंगे। आप बैठ जायें, प्लीज।… (Interruptions)

MR. SPEAKER: You have to understand the anxiety of other Members also. They are coming at 10 o’clock and giving notices. But their names are not being called. So, you have to understand their anxiety also. Shri Raghunath Jha, please take your seat.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Chaubey, please take your seat. … (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय :आप सब को बुलायेंगे। इतनी गड़बड़ी क्यों हो रही है?

SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, it is very clear that the Government promulgated the Ordinance with narrow political motives. I may further say that the NDA itself was not consulted even before the Ordinance was promulgated. We, as political parties, expressed grave reservations about the draconian features of POTO. In spite of that, the Government went ahead with the Ordinance. In fact, we tendered a public advice to the Government not to go in for the Ordinance. The Government wanted to confront the country with a fait accompli. It is very clear that the Government was politically motivated. Now, the NDA was consulted after the Ordinance was promulgated. Just when? It was when the Prime Minister offered to consult the Opposition Parties. There was no need for the Prime Minister to have made all those comments. It is in poor taste and reflection on the Office which he is holding..… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Somnath Chatterjee.… (Interruptions)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, क्या हम लोगों को नहीं बुलायेंगे?

अध्यक्ष महोदय : आपको श्री सोमनाथ चटर्जी के बाद बुलायेंगे।

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, आपने कहा था कि श्री मुलायम सिंह यादव के बाद बुलायेंगे और अब आप कह रहे हैं कि श्री सोमनाथ जी के बाद बुलायेंगे।

अध्यक्ष महोदय : आपको भी बुलायेंगे।

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, आप तीन आदमी यहां से भी बुलाइये।… (Interruptions)

श्री नागमणि (चतरा) : अध्यक्ष जी, हमारा महत्वपूर्ण मामला है। झारखण्ड के पुलिस महानिदेशक को बिहार पुलिस परेशान कर रही है...

अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जायें। आपको भी बुलायेंगे।… (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Sir, I have no doubt that all of us sitting on this side of the House are greatly concerned with the terrorist activities that are going on in this country. But the Prime Minister wishes to make it a partisan issue. Apart from promulgating the Ordinance for which no justification has been shown till today, only on one occasion it has been utilised, that is, in Kashmir and within 12 hours, that order has been withdrawn. What was the urgency? ..… (Interruptions)आप कुछ पढ़ो, सीखो, तब बोलो। Do not interrupt others. You have never seen that thing. आपको मंत्री बना दिया, माथा गर्म हो गया।

Mr. Speaker, Sir, that Ordinance was passed even without consulting the NDA allies. It appears there are already murmurs in different political parties which are allying with them. I do not know why they are allying with them.

So far as the Opposition was concerned, we found that Home Minister tried to impute motives on the Opposition parties by saying that they were helping the terrorists and making them happy by their opposition. Then, there was a discussion in the Consultative Committee for two days. We were definitely told that Prime Minister is going to call a meeting and that before that it would not be done. The Prime Minister has no patience to call a meeting. We have been waiting for that. Now, he goes to Hyderabad. In the presence of Shri Chandrababu Naidu, with 29 MPs supporting this, suddenly he became so encouraged, he starts abusing the Opposition and accusing the minorities. What is this? What is going on in this country? We strongly object to this. Of course, what is the meaning of this? It has come in quotation in the newspaper. I quote:

"Which is this section of people who are trying to create unrest in India?"  

 Which is that section of the people that he has in mind? … (Interruptions) Not only that, he says that a section of the people is creating unrest with the help of a neighbouring country. Is he referring to the Opposition parties that we are taking the help of the neighbouring country to create unrest? I would like to know as to which is this section of people that he has mentioned. Is it not the minority that he is referring to? The Prime Minister of India makes such aspersions against a section of the people without producing any evidence and without keeping his assurance to discuss it with the Opposition parties. The Home Minister has committed that. We cannot but strongly protest against this deliberate attempt to trying to create an atmosphere in this country that only they are patriots and we are not patriots. We can never accept this position. We strongly object to this. Let it be known, once for all, that POTO will be opposed. There is no doubt about that. … (Interruptions)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, बहुत दिनों से यह परम्परा बन गई है कि जीरो ऑवर में बिना नोटिस दिये किसी भी सवाल को खड़ा करें तो सब अपोजीशन के लोग खड़े हो जाएं । पोटो के सवाल पर …( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : पिछले दिनों बंग्लादेश के सवाल पर जब आप चर्चा कर रहे थे तो सदन का ५० मिनट का समय बरबाद हो गया था । उस दिन आपने यह ऑब्जेक्शन नहीं किया। आज आप इतने गम्भीर सवाल पर यह ऑब्जेक्शन कर रहे हैं ।…( व्यवधान)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैंने नोटिस दिया था, उस पर परमीशन ली थी और परमीशन लेने के बाद मैं बोला था…( व्यवधान)अध्यक्ष जी, पोटो के मामले पर इस सदन में पूरी बहस होने वाली है। पोटो के आर्डीनेन्स को पास किया जायेगा उसके लिए पोटो बिल यहां रखा जायेगा…( व्यवधान)उस समय उस पर पूरी बहस के अंदर सब बातें पूरी तरह से यहां रखी जायेंगी । पहले दो कन्सल्टेटिव कमेटीज की मीटिंग्स हुईं, प्रधान मंत्री जी मीटिंग बुलाने वाले हैं, उसमें यह सारी बातचीत होने वाली है…( व्यवधान)

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): हम इंतजार कर रहे हैं …( व्यवधान)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: परन्तु इस बीच में आज क्या बातें कही जा रही हैं…( व्यवधान)अगर उनका जिक्र हो, मुलायम सिंह जी के भाषण बाहर क्या, सोनिया गांधी जी के भाषण बाहर क्या, सोनिया गांधी जी ने यह कहा कि पोटो पर कोई मीटिंग हो जाए या कुछ भी हो जाए, यह ड्रेकोनियन बिल है, हम इसका विरोध करते चले जायेंगे । ये यह सब करेंगे…( व्यवधान)प्रधान मंत्री जी ने क्या बात कही …( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : क्या गलत किया, क्या हम लोग नहीं बोलेंगे? ।हमारी जिम्मेदारी और प्रधान मंत्री जी की जिम्मेदारी में फर्क है …( व्यवधान)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: आपकी जिम्मेदारी और प्रधान मंत्री जी की जिम्मेदारी में बहुत फर्क है ।

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except Dr. Vijay Kumar Malhotra’s speech.(Interruptions) …* डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, प्रधान मंत्री जी ने ये जो बात कही…( व्यवधान)

संसदीय कार्य मंत्री, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री तथा संचार मंत्री (श्री प्रमोद महाजन): प्रधान मंत्री जी को जिम्मेदार होना चाहिए, आपके लिए जरूरी नहीं है।…( व्यवधान)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: कोई जरूरी नहीं है, वह यही बात कह रहे हैं ।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except the speech of Dr. Vijay Kumar Malhotra.(Interruptions) …* * Not Recorded डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, जो समाचार-पत्र में लिखा है कि जो हमारा पड़ोसी देश है, उसके आई.एस.आई. के कितने एजेन्ट हिन्दुस्तान में पकड़े गए हैं। सैकड़ों की तादाद में रोज़ आई.एस.आई. के एजेन्ट पकड़े जा रहे हैं। उन सबके पकड़े जाने पर वे लोग मिलकर देश में अनरैस्ट कर रहे हैं। क्या आई.एस.आई. एजेन्ट के लिए भी आप लोग खड़े होंगे कि उनको न पकड़ें और आई.एस.आई. देश में अनरैस्ट फैला रहे हैं, यह बात क्या प्रधान मंत्री को नहीं कहनी चाहिए।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: This will not go on record.(Interruptions) … * डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: आज प्रधान मंत्री जी को जो बात कहनी है, वे आपसे राय करेंगे और उन क्लॉजेज़ में क्या है जिससे उनको निकालने की बात की जा रही है, वह देखेंगे। पर कल ऊधमपुर में एक बारात पर हमला करके सात आदमियों को गोली से मार दिया गया।

श्री मुलायम सिंह यादव :हम उसकी घोर निन्दा करते हैं।

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: ऊधमपुर में पिछले ५० दिनों में ५० आदमी मारे गए। दो लोग जो सरकार के साथ चल रहे थे, मुस्लिम थे, उनके माँ-बाप को मार डाला गया। आंध्रा प्रदेश में मनिस्टरों के घर उड़ाए जा रहे हैं। क्या देश में आतंकवाद को रोकने की ज़रूरत नहीं है? और आपको उनके मानवाधिकारों का ध्यान है, उनके हयूमन राइट्स आप देख रहे हैं?…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: This will not go on record.(Interruptions) …* डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैं सोमनाथ जी से कम समय लूँगा और मुलायम सिंह जी ने जितना समय लिया, उसका एक तिहाई समय ही लूँगा। जब अमेरिका में यह बिल आया तो किसी अपोजीशन के आदमी ने उसका विरोध नहीं किया, जब इंग्लैन्ड में इस पर बिल आया तो किसी ने उसका विरोध नहीं किया। जब ये आतंकवाद का बिल लाए तो हमने अपोजीशन में रहकर पूरा साथ दिया। हमें आशा नहीं थी कि जब हम इधर आएंगे तो अपोजीशन उन हत्यारों और आतंकवाद फैलाने वालों के हयूमन राइट्स का सवाल खड़ा करेगा।…( व्यवधान)अपोजीशन राजनीति कर रही है और यूपी का इलेक्शन जब तक रहेगा, ये राजनीति करते रहेंगे।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: This will not go on record.(Interruptions) …* * Not Recorded डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, प्रधान मंत्री जी जब बैठक बुलाएँ तो अपोजीशन जो कंस्ट्रक्टिव सुझाव देना चाहती है, वह दे परंतु सुझाव देना नहीं है, कुछ भी हो जाए, आपने विरोध ही करना है। अगर ये कहेंगे कि हमें बिल का अपोज़ करना है तो भी बात समझ में आती है।…( व्यवधान)

सोमनाथ जी ने बहुत बात कही है क्यों वहां आर्डिनेन्स तैयार किया हुआ था, क्यों वहां पर भट्टाचार्य ने ऑर्डिनेन्स बनाया हुआ था, क्यों कर्नाटक में बिल बनाया हुआ था, क्यों महाराष्ट्र में बिल बनाया हुआ है। उससे कहीं नरम बिल यह है और उससे भी कम करने को हम तैयार हैं। यह दो तरह की नीति नहीं चलेगी। एक तरफ अपने यहां बिल बनाएंगे और दूसरी तरफ यहाँ विरोध करेंगे, यह नहीं चलेगा। हम आपसे आशा करते हैं कि सरकार को सहयोग दें कि आतंकवाद को रोकें। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष जी, हैदराबाद में प्रधान मंत्री जी के भाषण पर मुलायम सिंह जी ने सवाल उठाए और मुख्यत: दो सवाल पूछे जिनमें से एक का संबंध पोटो से है जो आतंकवाद को रोकने से संबंधित कानून बनाने की बात चल रही और दूसरा पड़ौसी देश से जो घटनाएं घटवाई जा रही हैं, उनसे है। लेकिन मेरे मन में एक संदेह है और जिस तरह से विपक्ष हल्ला कर रहा है और चिल्ला रहा था, उससे मेरे मन के संदेह की पुष्टि होती जा रही है। पुष्टि इस बात की होती जा रही है कि पोटो कानून बनाने की जो बात चल रही है और जिस तरह से देश के हर प्रान्त में आतंकवाद की घटनाएं घटी हैं, .*………..* अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, आप समाप्त करिए।...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, इतना शोर हो रहा है, मैं अपनी बात कैसे बोलूं…( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: मान्यवर, माननीय सदस्य ने बहुत गंभीर आरोप लगाया है। इस प्रकार से यह सदन नहीं चलेगा। माननीय सदस्य अपने आरोप को सिद्ध करें या माफी मांगें।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, आप बैठिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, आप बैठिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, आप समाप्त करिए।...( व्यवधान)

*…….* Expunged as ordered by the Chair अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, आप बैठिए।...( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: नहीं, मान्यवर, इस प्रकार से सदन नहीं चल सकता। प्रधान मंत्री जी यहां बैठे हैं और प्रधान मंत्री जी मूकदर्शक बन कर देख रहे हैं। यह बहुत गंभीर आरोप है। इन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनकी पुष्टि करें।…( व्यवधान) … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please go to your seat, Kunwar Akhilesh Singh.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: If it is objectionable, it would be withdrawn.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please conclude, Shri Prabhunath Singh.… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। आप क्या कर रहे हैं? ...( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: मान्यवर, यह बिलकुल गलत आरोप है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, आप बैठिए।...( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: ये माफी मांगें। इस प्रकार से गलत आरोप नहीं लगा सकते।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record.(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, you have to speak very carefully.

… (Interruptions)

* Not Recorded अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। आप क्या कर रहे हैं?…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I have asked Shri Prabhunath Singh to speak carefully. It is an allegation. If it is objectionable, it would be withdrawn.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, you have to speak very carefully. What are you doing?… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Kunwar Akhilesh Singh, please go to your seat. (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, please conclude now.… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव :प्रधान मंत्री जी बैठे हुए हैं। यह हमें बताएं।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, whatever you speak, you have to speak very carefully.… (Interruptions)

श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी (देवरिया) :प्रधान मंत्री देश का विभाजन कर रहे हैं, यह आपने कहा है।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: If it is objectionable, it would be withdrawn.… (Interruptions)

श्री बृज भूषण शरण सिंह (गोण्डा) :इन्होंने कहा है कि प्रधान मंत्री देश का विभाजन करना चाहते हैं।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I think, he has made an allegation. If it is objectionable, it would be removed from the records. What is this.… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, हमारी बातों से लोगों को काफी तकलीफ हुई है।…( व्यवधान)इसी सदन में कहा गया कि प्रधान मंत्री जी देश का विभाजन करना चाहते हैं। क्या यह कोई आपत्तिजनक बात नहीं थी? जब हमने कहा तो आपत्तिजनक बात हो गई।…( व्यवधान) *.…………* ( व्यवधान)इसकी जांच करवा ली जाए।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record.(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, please conclude.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Allegations can be removed from the recrds.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Kumari Mayawati.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : It is being said on the floor of the House that we are terrorists. The Leader of the House is present in the House. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have told you that allegations can be removed from the records.… (Interruptions)

SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, you are setting bad precedent.

MR. SPEAKER: No, no; I have already said that the words can be removed from the records. Now, Kumari Mayawati.… (Interruptions)

कुमारी मायावती (अकबरपुर) :माननीय अध्यक्ष जी, आतंकवाद का मामला बहुत गम्भीर है और यह देश के हित में ठीक नहीं है।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: You are also not allowing him to reply.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: He is going to reply. You are not allowing him to speak.… (Interruptions)

*………* Expunged as ordered by the Chair * Not Recorded MR. SPEAKER: Shri Banatwalla, the Chair has already asked the Member to withdraw those words. Now, Kumari Mayawati.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record.(Interruptions) …* कुमारी मायावती: हमें दो मिनट बोलने दीजिए। हमारी पार्टी आतंकवाद के खिलाफ है। एन.डी.ए. की सरकार को आतंकवाद के खिलाफ यदि कोई भी कानून बनाना है, जैसे पोटो के नाम से नया कानून बनाया गया है, हालांकि आतंकवाद से निपटने के लिए पहले ही बहुत से कानून बने हुए हैं, इस कानून की जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी एन.डी.ए. की सरकार ने पोटो के नाम से एक नया कानून बनाया है। इस कानून को बनाने से पहले ऑल पार्टीज को कॉन्फीडेंस फेथ में लेना बहुत जरूरी था, लेकिन ऑल पार्टीज के लीडर्स को कॉन्फीडेंस में नहीं लिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इस अध्यादेश के पीछे हमें एन.डी.ए. की राजनीति नजर आती है। इसका सबसे बड़ा प्रूफ यह है कि आज से कुछ दिन पहले इस देश के गृह मंत्री श्री एल.के. आडवाणी ने कहा कि पोटो के नाम से जो अध्यादेश जारी किया गया है, यह पार्लियामेंट के अन्दर पास हो या न हो, हमारी पार्टी को इसका जो लाभ मिलना था, वह मिल गया है। इसका मतलब यह है कि इस अध्यादेश के पीछे हमें एन.डी.ए. की राजनीति नजर आती है। मैं समझती हूं कि आतंकवाद से निपटने के लिए आप यदि कोई कानून बनायें और उसमें भी राजनीति करें तो बहुजन समाज पार्टी इसमें राजनीति नहीं करने देगी। इसकी आड़ में यदि आप राजनीति करें तो यह अच्छी बात नहीं है। हम लोग यह चाहते हैं कि आतंकवाद से निपटने के लिए आप कानून बनायें, लेकिन ऑल पार्टीज को गुड फेथ में लेकर बनायें, हम हर मामले में आपको सपोर्ट करेंगे, लेकिन आप लोग इसकी आड़ में कोई राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे तो मैं समझती हूं कि यह ठीक नहीं है। यह जो पोटो कानून बनाया गया है, यह जो अध्यादेश लाया गया है, यह जल्दबाजी में लाया गया है, हम इसका विरोध करते हैं, लेकिन हम आतंकवाद के समर्थक नहीं है, हम इसके विरोधी हैं। आतंकवाद की आड़ में यदि कोई राजनीति की जाती है या इसकी आड़ में यदि सरकारी आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है या इसकी आड़ में साम्प्रदायिक ताकतों को बढ़ावा दिया जाता है तो मैं समझती हूं कि यह इस देश के हित में नहीं है। इसलिए, माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से रिक्वैस्ट करती हूं कि आपको जो भी कानून बनाना है, ऑल पार्टीज को कॉन्फीडेंस में लेकर बनाना चाहिए।

एन.डी.ए. के जो वभिन्न घटक दल हैं, उन पर भी थोड़ी ब्रेक लगाने की जरूरत है। वे भी कहते हैं कि सारे विपक्षी दल जो पोटो का विरोध कर रहे हैं, यह देशहित में नहीं है। यदि सारे विरोधी दल इसका विरोध करते हैं तो इसका मतलब है कि हम सब देशद्रोही हो गए? इसी किस्म की बात उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भी कही है कि जो पोटो का विरोध करेगा, वह राष्ट्रद्रोही है, जबकि वहां पर कोई आतंकवाद नहीं है, सरकारी आतंकवाद है। आतंकवाद है तो वह जम्मू-कश्मीर के अंदर है। हमारी पार्टी हर मामले में सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार है, लेकिन इसकी आड़ में कोई राजनीति की जाएगी, हमें देशद्रोही कहा जाएगा, तो यह कोई अच्छी बात नहीं है। इसलिए सरकार को कोई भी फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।

SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, Shri Somnath Chatterjee has mentioned about TDP MPs and our Chief Minister. I want to say something.

Sir, everybody knows terrorism is a main challenge for our country. Since 50 years, India has been facing this challenge. The world has now realised about terrorism. My Party and I studied this POTO and MCOCA, Maharashtra Government laws. Even the Government of Karnataka also wants to legislate some laws and everything. So, my Party’s stand is very clear. In the Chief Minister’s Conference, our Chief Minister has stated categorically that we are supporting the POTO, but we have some reservations. Previous laws were misused by the official authority. We have to make some safeguards. We have to combat terrorism in this country. So, that is our main motto.

For that, we have to discuss this in Parliament. If any safeguards are required, we have to suggest them. But the Government is also willing. Even the State Minister for Home categorically said, ‘we are ready to change, we are ready to make any amendment.’ So, in the interest of our country, if any safeguards are required by any section of our people, we will suggest. But I am asking this. Even some Acts are legislated by the State Governments whose Parties are in the Opposition here. I read the statement of your Chief Minister. Even recently, his State Government also wants to legislate an Act to control the organised criminals in Kolkata.… (Interruptions) So, in this context, in the presence of Chief Minister, our hon. Prime Minister made a statement. Already, our Chief Minister, in the Chief Minister’s Conference, supported this POTO with some reservations. At the time of discussion, we have to suggest some way.

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :कई बार सुना कि प्रधान मंत्री जी सभी दलों की बैठक बुला रहे हैं, लेकिन वह स्थगित ही होती रही…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: This is not a discussion. This is ‘Zero Hour’. Please understand this.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have called the Prime Minister.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have called the Prime Minister.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: You are raising matters but you are not listening anything even from the Prime Minister.… (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): I thank the Prime Minister for yielding and giving me the opportunity.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Banatwalla, this is not a debate. This is ‘Zero Hour’. How can I call all the Members in the ‘Zero Hour’?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Our Party objects to the statement made on behalf of the Government.… (Interruptions)

श्री नागमणि: अध्यक्ष महोदय, हमने भी नोटिस दिया है।

अध्यक्ष महोदय : आपका झारखंड के बारे में नोटिस है। आपको चांस मिलेगा।

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : The statement indicates that we are opposed to the actions taken against the terrorist movement. Nobody has suffered as much as this Party has suffered at the hands of the torrorists. This should not be forgotten. If any Member says that we are opposing the Ordinance and we are supporting the terrorists, that is a wrong interpretation. That kind of interpretation cannot help. If any Member on the floor of the House gets up and says that you are with terrorists, Sir, simply expunging this remark from the record is not sufficient. He should have been told that this is not the kind of thing which is to be done here. What is coming out and what has happened with respect to POTO is politics.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have already told the Member to speak carefully.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Shivraj Patil, the hon. Prime Minister has yielded to you. Please conclude now.… (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Sir, I am thankful to the Prime Minister; and I am thankful to you also.

What I am saying is that if we consider what happened with respect to the POTO, one fact is coming very clearly. That fact is that a lot of politics is connected with this POTO and it is because of this that people have apprehensions in their minds.

If somebody is saying that double-talk is being made here, we could quote the speeches made by Members of the Treasury Benches who opposed the TADA. That is why we would like that a matter like this should be dealt with in a very careful manner.

प्रधान मंत्री (श्री अटल बिहारी वाजपेयी): अध्यक्ष महोदय, चर्चा स्थगन प्रस्ताव को लेकर आरम्भ हुई थी। उसमें यह आरोप लगाया गया था कि मैंने कल हैदराबाद में अपने भाषण में एक वर्ग की भावनाओं को आहत किया है। चर्चा में इस बात को और साफ तौर से कहने की कोशिश की गई है। यह कहा गया है कि मैंने मुसलमानों की देशभक्ति पर संदेह व्यक्त किया है। यह गलत है। इस तरह की भाषा सदन में बोलना देश की स्थिति में कोई समरसता पैदा करने वाली बात नहीं है। किसी वर्ग की देशभक्ति पर संदेह करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। मैंने कल हैदराबाद में अपने भाषण में यह कहा था कि इस संदर्भ में अल्पसंख्यकों के मन में कोई आशंका है तो वह नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह उनके खिलाफ नहीं है, यह उनके विरुद्ध प्रयुक्त नहीं होगा। उसका निशाना वे नहीं हैं, आतंक करने वाले हैं। क्या यह कहना आपत्तिजनक है? …( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :हां है। इसकी व्याख्या दरोगा करेंगे।…( व्यवधान)

श्री अटल बिहारी वाजपेयी: मैंने अपने भाषण में यह भी कहा कि सरकार इस सवाल पर सबको साथ लेकर चलना चाहती है और मैंने प्रतिपक्ष से अपील की, आग्रह किया कि वह अपने रवैये पर विचार करे, पुनर्विचार करे और सरकार को सहयोग दे - क्या यह करना भी गलत है?क्या यह सही नहीं है कि अभी भी प्रतिपक्ष सहयोग नहीं दे रहा है? …( व्यवधान)प्रतिपक्ष को क्या आपत्तियां हैं, प्रतिपक्ष ने अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, यह आप क्या कर रहे हैं?…( व्यवधान)

श्री अटल बिहारी वाजपेयी: लोक तंत्र में बहस होगी। बहुमत अपनी बात कहेगा। जो अल्पमत में हैं, वे जरा जोरदार तरीके से अपनी बात कहना चाहेंगे। यह आरोप मेरी समझ में नहीं आता कि राजनीति की जा रही है। यह कहना क्या गलत है? हम यहां राजनीति करने के लिए आए हैं।…( व्यवधान)किसलिए आए हैं?…( व्यवधान)

इसमें राजनीति नहीं की जानी चाहिए। इसके पीछे भाव यह है कि देश हित को ताक पर रखकर दलगत राजनीति के अनुसार नहीं चलना चाहिए। क्या पोटो राजनीतिक उद्देश्य के लिए लाया गया है? आप कह सकते हैं कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। आप जब सरकार में थे और हम जब प्रतिपक्ष में थे, तो हम भी यही बात कहा करते थे। लेकिन उसके कारण हमने कभी देश में ऐसा वातावरण पैदा नहीं किया कि पोटो जैसे प्रस्तावित कानून का विरोध इस सीमा तक चला जाएगा, यह देखा नहीं जाएगा। लेकिन विरोध हो रहा है, उसका उत्तर दिया जा रहा है। …( व्यवधान)अब अगर सदन मेरे ऊपर प्रतिबन्ध लगाना चाहता है कि मैं भाषण न करूं …( व्यवधान)अगर प्रतिपक्ष बोल सकता है, प्रतिपक्ष की नेत्री बोल सकती हैं, तो मैं क्यों नहीं बोल सकता। लेकिन मैं बोलूं, तो आपत्ति है। मैं अगर बोलूं, तो प्रोप्रायटी का सवाल खड़ा किया जाता है …( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी: आप जब भड़काते हैं, तो आपत्ति है। …( व्यवधान)

श्री अटल बिहारी वाजपेयी: लोग मेरा भाषण सुनते हैं, भड़काने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। कल जब मैं भाषण कर रहा था, तो मैंने उल्लेख किया था कि तेलगू देशम के नेता ने, मुख्यमंत्रियों की बैठक में, यह बात कही कि हम इस विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन इसमें सन्देह है, हमारी कुछ शंकायें हैं, जिन्हें हम चाहेंगे कि देखा जाए और आवश्यक संशोधन लाए जायें। सरकार इसके लिए तैयार है। हम चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी भी इसी तरह से क्या आपत्तियां हैं, उनको स्पष्ट करे । विधेयक में क्या कमियां है? अगर कोई कमी है, तो बताएं। देश में ऐसा कहने वाले भी लोग हैं, अनुभव करने वाले देश में लोग हैं, जो कहते हैं कि विधेयक जितना तगड़ा होना चाहिए था, मजबूत होना चाहिए था, उतना नहीं है। क्या इस राय को कहने का इस देश में अधिकार नहीं होगा। लोग ईमानदारी से विश्वास करते हैं। आज जिस तरह के आतंकवाद ने हमें घेरा है, वैसी परिस्थिति स्वतन्त्र भारत के इतिहास में कभी पैदा नहीं हुई। इसलिए यह कहने से बात नहीं बनेगी कि पहले भी हुआ था। ऐसी परिस्थिति तो नहीं हुई। अच्छा होता, अगर सरकार आर्डिंनेंस निकालने से पहले प्रतिपक्ष से बातचीत कर लेती, लेकिन आर्डिनेंस निकालने के अधिकार को चुनौती तो नहीं दी जा सकती है। वह विरोध का मुद्दा हो सकता है। भाषण के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है, मगर उसके आधार पर पूरे विधेयक का विरोध किया जाए - क्या देश में आतंकवाद के खिलाफ कोई कानून नहीं होना चाहिए?कानून किस तरह का होना चाहिए, आप बताइए …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि बहस को हम जरा उच्च स्तर पर रखें। आज सवेरे प्रश्नकाल में राजनीति नहीं की गई, तो क्या किया गया। आपने सभी सासंदों से मिलकर, मुख्यमंत्रियों को साथ लेकर यह फैसला किया था कि प्रश्नकाल में कोई आपत्ति नहीं की जाएगी, प्रश्नकाल में कोई संकट पैदा नहीं किया जाएगा - क्या मुलायमसिंह जी उस निर्णय से बंधे हैं या नहीं हैं? अगर ११ बजे के बजाए १२ बजे यह सवाल खड़ा करते, तो कोई आसमान टूटने वाला नहीं था। क्योंकि उनको राजनीति करनी है और वे यह दिखाना चाहते हैं कि प्रतिपक्ष में भी सबसे ज्यादा अगर कोई विरोधी है, तो हम हैं।

श्री मुलायम सिंह यादव : यह सही है।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी: अगर यह राजनीति नहीं है, तो क्या समाज-सेवा है।

13.00 hrs. अध्यक्ष महोदय, मुझे सवेरे अच्छा नहीं लगा।…( व्यवधान)

आपने बड़ी मुश्किल से प्रयास करके, सब के सहयोग से एक आचार संहिता बनाने की कोशिश की है - "प्रथमग्रासे मक्षिकापात:।"प्रश्न-काल न हो - क्यों न हो? यहां हमारे पूर्व लोक सभा अध्यक्ष बैठे हुए हैं। हम जब प्रतिपक्ष में थे तब भी इस बात पर बल देते थे कि प्रश्न-काल को विपत्ति में नहीं डाला जाना चाहिए, प्रश्न-काल में बाधा उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए, लेकिन राजनीति है। लेकिन अगर राजनीति एकतरफा होगी तो फिर वह दोतरफा हो जाएगी।…( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी: आपने पहले एकतरफा चालू की थी।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी: अध्यक्ष महोदय, हम पहले से विचार-विमर्श करने के पक्ष में रहे हैं। हम प्रतिपक्ष के नेताओं को आमंत्रित कर रहे हैं, यह सुझाव आया था। कल शाम को साढ़े छ: बजे बैठक होने वाली है और वह बैठक प्रतिपक्षी नेताओं की होगी। उसमें हम पूरी तरह से विचार-वनिमय करेंगे। मुझे विश्वास है कि एक आम राय प्रकट होगी और उस आम राय के अंतर्गत व्यक्ति की स्वाधीनता भी सुरक्षित होगी। हर वर्ग को कष्ट न हो, उनके मन में आशंका भी उत्पन्न न हो और आतंकवादियों से निबटने का हमारा जो राष्ट्रीय संकल्प है वह भी पूरा हो सके।

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MR. SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 2 p.m. 13.01 hrs.   The Lok Sabha then adjourned for Lunch till Fourteen of the Clock.

 

14.04 hrs.   The Lok Sabha re-assembled after Lunch at four minutes past Fourteen of the Clock.

(Shrimati Margaret Alva in the Chair)   MR. CHAIRMAN: Matters under Rule 377 listed for the day are to be laid on the Table since business of Discussion under Rule 193 at 2 o’clock has already been listed on the Order Paper. So, they will be taken as laid on the Table of the House.