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Lok Sabha Debates

Need To Include Dhangad/Dhangar Caste In The List Of Scheduled Castes In The ... on 17 August, 2006

> Title: Need to include Dhangad/Dhangar caste in the list of Scheduled Castes in the country.

श्री मुंशी राम (बिजनौर) : ={ÉÉvªÉFÉ àÉcÉänªÉ, vÉxªÉ´ÉÉn* £ÉÉ®iÉ´É­ÉÇ àÉå 1931 BÉEÉÒ VÉxÉMÉhÉxÉÉ BÉEä ºÉàÉªÉ ÉÊb|Éèºb BÉDãÉÉºÉ BÉEÉÒ {ÉcSÉÉxÉ BÉE®BÉEä =ºÉä 1936 àÉå ºÉÚSÉÉÒ¤Ér ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ lÉÉ* ºÉxÉ 1950 àÉå <ºÉÉÒ ÉÊb|Éèºb BÉDãÉÉºÉ BÉEÉä +ÉÉÉÌ]BÉEãÉ 341 BÉEä +ÉÆiÉMÉÇiÉ +ÉxÉÖºÉÚÉÊSÉiÉ VÉÉÉÊiɪÉÉå BÉEä °ô{É àÉå xÉÉäÉÊ]{ÉEÉ<b ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ* =BÉDiÉ BªÉ´ÉºlÉÉ BÉEä +ÉÆiÉMÉÇiÉ ¶Éè{ÉEbÇºÉ vÉxÉMÉ® ={ÉVÉÉÉÊiÉ BÉEÉä ºÉà{ÉÚhÉÇ =kÉ® |Énä¶É, VÉÉä ÉÊBÉE +ÉÉVÉ =kÉ® |Énä¶É A´ÉÆ =kɮɯSÉãÉ |Énä¶É cè, +ÉxÉÖºÉÚÉÊSÉiÉ VÉÉÉÊiÉ BÉEÉÒ gÉähÉÉÒ àÉå ªÉlÉÉ´ÉiÉ cè* ®ÉVɺ´É ÉÊ´É£ÉÉMÉ BÉEä BÉEàÉÇSÉÉ®ÉÒ, +ÉÉÊvÉBÉEÉ®ÉÒ §ÉàÉ´É¶É +ÉlÉ´ÉÉ ºÉÆ´ÉèvÉÉÉÊxÉBÉE +ɺÉàÉÉxÉiÉÉ vÉxÉMÉ® BÉEÉä +ÉxÉÖºÉÚÉÊSÉiÉ VÉÉÉÊiÉ BÉEÉÒ ¤ÉVÉÉA, =ºÉBÉEÉÒ àÉÖJªÉ VÉÉÉÊiÉ MÉbÉÊ®ªÉÉå BÉEä ºÉÉlÉ VÉÉä½ BÉE® ÉÊ{ÉU½ÉÒ VÉÉÉÊiÉ àÉÉxÉiÉä cé, VÉÉäÉÊBÉE +ÉÉÉÌ]BÉEãÉ 341 BÉEÉ =ããÉÆPÉxÉ cè, VÉ¤É ÉÊBÉE vÉxÉMÉ®/धंगड़ गड़िया समाज की वह उपजाति है, जो कामगार भेड़ की ऊन से उसे कात कर कम्बल बुनने का मुख्य रूप से कार्य करती है, जिसे भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा मान्य विबलोग्राफी ऑन एस.सी./ एस.टी. एंड मार्जिनल कम्युनिटी १९६१ व १९८२ में उल्लेखित समाज शास्त्रियों ने धनगर समाज को अमनुसूचित जाति में बताया, जोकि विबलोग्राफी ऑन एस.सी./ एस.टी. के पृष्ठ संख्या २९४ पर अंकित धंगड़/ धनगर के बिहार, उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के संदर्भ में अनुसूचित जाति में बताया गया। इसी प्रकार श्री लिस्टस ने अपनी पुस्तक कास्ट एंड ट्राइब्स आफ स्वर्ण इंडिया मद्रास १९०९ वोल्यूम II  के पृष्ठ १६७ तथा जे.एस. हटन ने अपनी पुस्तक कास्ट इन इंडिया बॉम्बे १९५, पृष्ठ संख्या २७८ एवं एम.ए. सैरिंग ने अपनी पुस्तक हिन्दू ट्राइब्स एंड कास्ट के पृष्ठ संख्या १९० पर धनगर/ धंगड़ की शैफहर्ड गोटहर्ड कास्ट बताया, जिसकी सहमति श्री आर.सी. शर्मा ने सैनसस ऑफ इंडिया, १९६, वोल्यूम १५, पार्ट VII के हैंडीक्राफ्ट सर्वे के मोनोग्राफ १ के चैप्टर II में गडरियों की धनगर उपजाति बताया एवं धनगर के घर खाना वैश्य एवं ब्राहम्ण नहीं खाते।

भारत सरकार द्वारा २७-७-१९७७ को किस प्रकार धनगर अनुसूचित जाति को सूची में से निकाला गया एवं धनगर जाति को किस श्रेणी में माना गया। इससे प्रतीत होता है कि पूर्व की सरकारों द्वारा अनुसूचित जाति की जाति धनगर के लोगों के साथ धोखा किया गया cè[R88] ।

  महोदय, ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे इस समाज का उत्थान न हो सके। अत: मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि धंगड़/धनगर समाज को पूरे भारत में अनुसूचित जाति का लाभ दिया जाए।