State Consumer Disputes Redressal Commission
Jila Abkari Adhikari vs Raj Kumar on 6 August, 2015
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2003/2143 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Jila Abkari Adhikari A ...........Appellant(s) Versus 1. Raj Kumar A ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Jugul Kishor MEMBER For the Appellant: For the Respondent: ORDER राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ। मौखिक अपील संख्या-2143/2003 (जिला उपभोक्ता फोरम, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद संख्या-593/2002 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 26.12.2002 के विरूद्ध) 1.
जिला आबकारी अधिकारी, बुलन्दशहर।
2. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिलाधिकारी, बुलन्दशहर।
अपीलार्थीगण@विपक्षीगण बनाम् राजकुमार पुत्र श्री रोहिताश सिंह, निवासी ग्राम व पोस्ट गिनौरा नगली, थाना खानपुर, तहसील स्याना, जिला बुलन्दशहर।
प्रत्यर्थी/परिवादी समक्ष:-
1. माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2. माननीय श्री जुगुल किशोर, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : काई नहीं। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। दिनांक 06.08.2015 माननीय श्री जुगुल किशोर, सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
यह अपील, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद संख्या-593/2002 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 26.12.2002 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है, जिसके अन्तर्गत जिला फोरम द्वारा परिवाद विपक्षी संख्या-1 के विरूद्ध एक पक्षीय रूप से स्वीकार करते हुए विपक्षी संख्या-1 को आदेशित किया गया कि वह परिवादी को 45000/- पर दिनांक 27.02.2001 से दिनांक 04.09.2002 तक रू0 35000/- पर दिनांक 16.04.2001 से दिनांक 04.09.2002 तक तथा रू0 10000/- पर दिनांक 20.04.2001 से दिनांक 04.09.2002 तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 45 दिन के अन्दर भुगतान करें और साथ ही परिवाद व्यय हेतु रू0 500/- का भी भुगतान करें।
अपीलार्थीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं है, जबकि अपीलार्थीगण को विगत कई तिथियों से लिखित तर्क योजित करने हेतु समय दिया जा रहा है। पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि पीठ द्वारा दिनांक 02.04.2013 को इस आशय का आदेश पारित किया गया था कि विवादित आदेश के क्रियान्वयन को दिनांक 21.08.2003 को अपील की सुनवाई के दौरान स्थगित कर दिया गया था और स्थगन आदेश प्राप्त करने के पश्चात से अपील के निस्तारण में अपीलार्थीगण की कोई रूचि नहीं रही है, इसलिए पीठ द्वारा स्थगन आदेश को समाप्त कर दिया गया। स्थगन आदेश समाप्त किये जाने के बावजूद भी अपीलार्थीगण की ओर से विगत कई तिथियों से कोई उपस्थित नहीं आ रहा है। अत: हमारे द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का स्वंय परिशीलन किया गया और समीचीन पाया गया कि प्रस्तुत अपील का निस्तारण कर दिया जाये।
-2-संक्षेप में, केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी/प्रत्यर्थी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की आबकारी निति के आधार पर आबकारी लाईसेन्स हेतु आवेदन पत्र दिया गया और उसे दुकान शेखपुरगढ़वा का लाईसेन्स आंबटित कर दिया गया। परिवादी/प्रत्यर्थी को लाईसेन्स फीस रू0 2,00,000/- और प्रतिभूति की धनराशि का आधा भाग रू0 45,000/- दिनांक 27.03.2001 तक जमा करने का आदेश दिया गया था और शेष प्रतिभूति रू0 45,000/- को 20 दिन के अन्दर जमा करने हेतु आदेश दिया गया था। आदेश के अनुपालन में परिवादी/प्रत्यर्थी ने दिनांक 27.03.2001 को रू0 45,000/- तथा दिनांक 16.04.2001 को रू0 35,000/- और रू0 10000/- परिवादी द्वारा पहले ही जमा कर दिया गया था। इस प्रकार परिवादी द्वारा लाइसेन्स फीस रू0 2,00,000/- तथा प्रतिभूति की धनराशि रू0 90,000/- जमा कर दी गयी थी। परिवादी द्वारा प्रतिभूति की धनराशि रू0 90,000/- दिनांक 31.03.2002 तक ही जमा करायी गयी थी, जिसे लौटाने की मांग परिवादी द्वारा की गयी, लेकिन उक्त प्रतिभूति की धनराशि परिवादी को नहीं लौटायी गयी, जिससे क्षुब्ध होकर प्रश्नगत परिवाद जिला फोरम में योजित किया गया।
विपक्षीगण जिला फोरम के समक्ष तामीला होने बावजूद भी उपस्थित नहीं हुए और न ही प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया, इसलिए जिला फोरम द्वारा विपक्षीगण के विरूद्ध परिवाद एक पक्षीय रूप से सुनवाई करते हुए उपरोक्त निरस्त एवं आदेश पारित किया गया।
अपीलार्थीगण की ओर से उपरोक्त आदेश के विरूद्ध अपील योजित की गयी। अपीलार्थीगण द्वारा विवादित आदेश को स्थगित कराने के पश्चात से विगत कई तिथियों से कोई उपस्थित नहीं आ रहा है। पीठ द्वारा स्थगन आदेश को समाप्त करने के बावजूद भी अपीलार्थीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, इससे प्रतीत होता है कि अपीलार्थीगण को इस अपील की सुनवाई में कोई रूचि नहीं है। अत: केस के तथ्यों व परिस्थतियों को देखते हुए हम यह पाते हैं कि अपीलार्थी को इस अपील की सुनवाई में कोई रूचि नहीं है। पीठ द्वारा जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश का भी परिशीलन किया गया, जो विधिक तथ्यों पर आधारित है, जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यक्ता प्रतीत नहीं होती है। तदनुसार अपील निरस्त होने योग्य है।
आदेश अपील निरस्त की जाती है।
(राम चरन चौधरी) (जुगुल किशोर) पीठासीन सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0 कोर्ट-5 [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Jugul Kishor] MEMBER