Lok Sabha Debates
Regarding Issue Of Flooding And Inter-Linking Of Rivers In Bihar on 22 March, 2021
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श्री प्रिंस राज (समस्तीपुर) : मैडम,आपने मुझे आज बोलने का मौका दिया,इसके लिए धन्यवाद । आज बिहार दिवस है और मैं सभी बिहारवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं । बिहार की कई विशेषताएं हैं और हमारा काफी गौरवशाली इतिहास रहा है । यहां की धरती भगवान गौतम बुद्ध जी की धरती है, भगवान महावीर जी की धरती है, बिहार की धरती माता सीता जी की धरती है, गुरू गोविंद सिंह जी की धरती है, यह धरती सम्राट अशोक और सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की धरती है । जब पूरे देश में आजादी का बिगुल छेड़ा गया तो चम्पारण सत्याग्रह से ही छेड़ा गया था । जब स्वतंत्र भारत का निर्माण हुआ तो हमारे प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी बिहार से थे । हम लोगों का इतना गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन दुख तब होता है, जब इतने सालों बाद भी बिहार कहीं न कहीं पिछड़ जाता है । हमारे बिहार में कई नदिया हैं, इनमें पुनपुन,कोसी,गंगा,गंडक नदियां हैं । अभी भी आधा बिहार सुखार में रहता है और आधा बिहार बाढ़ में रहता है ।
मैडम,आप भी बिहार से आती हैं और आप बखूबी इस बात को जानती हैं । क्यों न इन नदियों को आपस में जोड़ दिया जाए, ताकि जहां बाढ़ का पानी है, उसे सुखार तक पहुंचाया जाए । यदि ये एक दूसरे से मिल जाएं तो यह समस्या दूर हो जाएगी । झारखण्ड के बिहार से अलग होने से और जितने भी खनिज बाहुल्य क्षेत्र हैं, उनके झारखण्ड में जाने की वजह से बिहार में ज्यादातर कृषि भूमि बच गई है । बिहार ज्यादातर बाढ़ पीड़ित क्षेत्र हैं, इसी वजह से यहां उद्योग भी कम लगे हैं । …(व्यवधान) मैं एक मिनट और लूंगा ।
मैडम, मैं आग्रह करूंगा और मैंने पहले भी सदन में यह बात उठाई थी । मैं समस्तीपुर से आता हूं । वहां पर कई उद्योग थे । वहां चीनी मिल, जूट मिल और अशोक पेपर मिल थी । हम ने जूट मिल का मामला पहले भी उठाया था । अशोक पेपर मिल की बहुत बड़ी जमीन का कोई यूज नहीं हो रहा है, उसका कोई उपयोग नहीं है । हम ने पहले भी केन्द्र सरकार से आग्रह किया था और दोबारा आग्रह करता हूं कि वहां पर कुछ न कुछ व्यवस्था की जाए, ताकि वहां पर रोजगार की संभावना बढ़ सके । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : शून्य काल में एक ही विषय उठाया जाता है ।