State Consumer Disputes Redressal Commission
Gawn Sabha vs Ramendra Mohan Lal on 14 May, 2019
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 Revision Petition No. RP/156/2018 ( Date of Filing : 23 Oct 2018 ) (Arisen out of Order Dated 27/04/2017 in Case No. Ex/59/2016 of District Faizabad) 1. Gawn Sabha To Gawan Pradhan Gawn SAbha Dadera Pargana Habeli Awadh Tehsil and Distt. Faizabad ...........Appellant(s) Versus 1. Ramendra Mohan Lal S/O Sri SAnt Sharan Lal Niwasi Gram Dadera Pargana Habeli Awadh Teh. and Distt. Faizabad ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT For the Petitioner: For the Respondent: Dated : 14 May 2019 Final Order / Judgement
मौखिक पुनरीक्षण संख्या-156/2018 गॉंव सभा द्वारा प्रधान गॉंव सभा ददेरा बनाम रमेन्द्र मोहन लाल आदि 14.05.2019 अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री इस्तेखार हसन उपस्थित आये। प्रत्यर्थीगण संख्या-1 ता 1/5 की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री ओ0पी0 श्रीवास्तव उपस्थित आये और वकालतनामा प्रस्तुत किया।
विपक्षीगण संख्या-2 और 3 की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। विपक्षीगण संख्या-2 और 3 को नोटिस रजिस्टर्ड डाक से दिनांक 15.11.2018 को प्रेषित की गयी है, जो अदम तामील वापस प्राप्त नहीं हुई है। अत: विपक्षीगण संख्या-2 और 3 पर नोटिस का तामीला पर्याप्त माना जाता है।
उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना गया।
इजरा वाद संख्या-59/2016 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड, फैजाबाद व दो अन्य में जिला फोरम, फैजाबाद द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.04.2017 के विरूद्ध यह पुनरीक्षण याचिका धारा-17 (1) (बी) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
उपरोक्त इजरा वाद, परिवाद संख्या-271/99 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड फैजाबाद व दो अन्य में जिला फोरम, फैजाबाद द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 24.08.2006 के अनुपालन हेतु पंजीकृत किया गया है और विपक्षीगण अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड, फैजाबाद, राज्य सरकार और गांव सभा के विरूद्ध डिक्रीसुदा धनराशि हेतु वसूली वारण्ट जारी किया गया है।
पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि परिवाद संख्या-271/99 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड फैजाबाद व दो अन्य में जिला फोरम, फैजाबाद द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 24.08.2006 के निष्पादन हेतु परिवादीगण के प्रार्थना पत्र पर इजरा वाद संख्या-44/2007 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड फैजाबाद व दो अन्य जिला फोरम, फैजाबाद में पंजीकृत किया गया है और उक्त इजरा वाद में जिला फोरम ने आदेश दिनांक 07.12.2016 के द्वारा परिवाद में पारित उपरोक्त निष्पादन अधीन निर्णय और आदेश को विधि विरूद्ध और Void मानते हुए इजरा वाद खारिज कर दिया है। अत: पुन: उपरोक्त परिवाद में पारित निष्पादन अधीन निर्णय और आदेश के निष्पादन हेतु जिला फोरम ने परिवादी/डिक्रीदारगण के आवेदन पत्र पर जो इजरा वाद संख्या-59/2016 पंजीकृत करने के लिए आदेश पारित किया है, वह जिला फोरम के अधिकार क्षेत्र से परे है क्योंकि जिला फोरम को अपने पूर्व पारित आदेश पर पुनर्विचार .................................2 -2- करने अथवा उसे रिकाल करने का अधिकार नहीं है। जैसा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजीव हितेन्द्र पाठक व अन्य बनाम अच्युत कशीनाथ कारेकर व अन्य IV (2011) सी0पी0जे0 35 (एस0सी0) के निर्णय में स्पष्ट मत व्यक्त किया गया है।
विपक्षी/परिवादीगण के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि विपक्षी/परिवादीगण ने नया इजरा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है अत: ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने जो आक्षेपित आदेश दिनांक 27.04.2017 पारित किया है, वह उचित और युक्तिसंगत है।
मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।
निर्विवाद रूप से इजरा वाद संख्या-44/2007 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड फैजाबाद व दो अन्य, उपरोक्त परिवाद संख्या-271/99 रमेन्द्र मोहन लाल आदि बनाम अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड फैजाबाद व दो अन्य में जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 24.08.2006 के निष्पादन हेतु पंजीकृत किया गया है और उक्त इजरा वाद में आदेश दिनांक 07.12.2016 पारित कर परिवाद में पारित जिला फोरम के निर्णय को जिला फोरम ने विधि विरूद्ध और Void मानते हुए इजरा वाद खारिज किया है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम द्वारा परिवाद में पारित उसी निर्णय के आधार पर परिवादीगण, जो वर्तमान पुनरीक्षण याचिका में विपक्षीगण हैं, के प्रार्थना पत्र पर नया इजरा वाद पंजीकृत कर आक्षेपित आदेश दिनांक 27.04.2017 पारित किया जाना विधि के अनुकूल नहीं है क्योंकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजीव हितेन्द्र पाठक व अन्य बनाम अच्युत कशीनाथ कारेकर व अन्य IV (2011) सी0पी0जे0 35 (एस0सी0) के निर्णय में प्रतिपादित सिद्धान्त के आधार पर जिला फोरम को अपने पूर्व पारित आदेश पर पुनर्विचार करने अथवा उसे रिकाल करने का क्षेत्राधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने जो इजरा वाद संख्या-59/2016 पंजीकृत कर पूर्व इजरा वाद संख्या-44/2007 में पारित आदेश दिनांक 07.12.2016 के विपरीत आक्षेपित आदेश दिनांक 27.04.2017 पारित किया है, वह अधिकार रहित और विधि विरूद्ध है। अत: पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की जाती है और आक्षेपित आदेश दिनांक 27.04.2017 विपक्षी/परिवादीगण को इस छूट के साथ अपास्त किया जाता है कि वे इजरा वाद संख्या-44/2007 में जिला फोरम द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.12.2016 के विरूद्ध विधि के अनुसार पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत करने या अन्य कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र हैं।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) अध्यक्ष जितेन्द्र आशु0 कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT