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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Compulsory Voting Bill, 2019 Moved By Shri Janardan ... on 22 November, 2019

Seventeenth Loksabha > Title: Further discussion on the Compulsory Voting Bill, 2019 moved by Shri Janardan Singh Sigriwal on 12-07-2019 (Discussion not concluded).

HON. CHAIRPERSON: We will move to Item No. 57, resuming discussion on the Bill to provide for compulsory voting by the electorate in the country and for matters connected therewith.

       Shri Dushyant Singh may please continue.

 

SHRI DUSHYANT SINGH (JHALAWAR-BARAN): Hon. Chairperson, Sir, I thank you.

       When I was speaking last time, I was talking about the happiness factor. Elections are always a happiness factor and this time, in 2019 एक खुशी का माहौल पूरे देश में था । यह माहौल देश में इसलिए था, क्योंकि एक बार फिर से देश के आदरणीय प्रधान मंत्री जी को 282 से 303 सीटें मिलीं । इस बार वोटिंग का पर्सेंटेज भी बढ़ा । वोटिंग का पर्सेंटेज देश में लगभग 65 पर्सेंट से 70 पर्सेंट तक गया । कश्मीर में वोटिंग का पर्सेंटेज थोड़ा कम था । इस पर हमें आगे ध्यान रखना चाहिए । यह लगभग 4 पर्सेंट से कम था । वोटिंग का पर्सेंटेज क्यों बढ़ा, क्योंकि हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने अच्छे काम किए हैं । अच्छे काम क्या किए हैं? He has given impetus to the panchayati raj and the panchayati raj institutions,उसमें जो पैसे मिलते थे, वे बहुत बढ़े हैं । चौदहवें वित्त आयोग के बाद केंद्र का पैसा सीधा पंचायत तक पहुंच रहा है,विकास पंचायत तक हो रहा है । यह विकास इसलिए हो रहा है, क्योंकि हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने सोच रखा है कि गांव,गरीब, किसान,मजदूर, आखिरी व्यक्ति तक हमें यह राशि देनी है । 

   

पहले भी सरकारें होती थीं, लेकिन कभी भी पैसा अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचा । मोदी जी की सरकार आने के बाद मनरेगा में हमने अच्छा काम किया । मनरेगा के काम में प्रति दिन की राशि को बढ़ाया और बजट राशि भी बढ़ाने का काम किया है । आज हम भारत में डिजिटल इंडिया की बात कह रहे हैं, जिसमें गांव और अंतिम छोर के आदमी तक हम कैसे पहुंचे? भारत नेट द्वारा इसे करने का प्रयास कर रहे हैं । भारत नेट ई-कॉमर्स को बढ़ावा देगा । इससे हमारे नौजवानों का आर्थिक विकास होगा । किसान का उत्पादन मंडी तक पहुंचे और किसान को उसका सही दाम मिले, इसका प्रयास हमने किया है । आज भारत एक यंग इंडिया है । यंग इंडिया में अगर आप मतदाता को देखें तो 33 से कम उम्र के मतदाता ने अच्छा मत दिया और भाजपा को दिया, इसकी वजह से हम 303 सीट जीत कर आए हैं । अगर आप विश्व में देखते हैं In Greece, there was an autocratic rule first in the 6th century BC.  It was under the rule of Draco, in 621 BC, the prevailing oral laws were changed to written code. It was enforced by a court of law. It was only when Solon came to power in 6th century BC, he diluted his own powers and established a 400-member Council and set the political agenda. यह ग्रीस में हो रहा है । अगर आप यूएस को देखें, वह मोस्ट फॉवर्ड लुकिंग कंट्री है । वर्ष 1798 में जो लोग प्रोपर्टी खरीदते थे और टैक्स देते थे उनको वोटिंग का राइट था । वर्ष1792में 1856 तक अबोलिशन ऑफ प्रोपर्टी टैक्स का क्वालिफिकेशन हुआ । कैंटकी और नार्थ कलेना में किया । वर्ष  1924 तक हरेक व्यक्ति को अमेरिका में वोटिंग का राइट मिला ।

हमें अपने देश के निर्माताओं को भी धन्यवाद देना चाहिए । जब हम उनकी ओर देखते हैं और उनकी बातें करते हैं । आदरणीय अय्यर साहब, आदरणीय एन. गोपालस्वामी,आदरणीय के.एम.मुंशी,आदरणीय मोहम्मद सैय्यद सद्दुल्ला,आदरणीय बी.सी.मित्तल,आदरणीय डी.पी.खेतान और चेयरमैन डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी इत्यादि ने देश के हरेक वासी को सुविधा दी । आप किसी भी सेक्स,कास्ट, क्रीड,रिलीजन और सोशियो इकोनॉमिक बैकग्राउंड या किसी कम्युनिटी से आते हैं, आपको मतदान का हक दिया । ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदरणीय सरदार पटेल जी,जिन्हें आयरन मैन के नाम से जाना जाता हैं उन्होंने पांच सौ पचास राजाओं और महाराजाओं को देश में जोड़ने का काम किया । हम आदरणीय पटेल जी और आदरणीय भीमराव अम्बेडकर जी की वजह से कर पाए ।

16.00 hrs भारत यंग इंडिया है । गरीब किसान, गरीब मजदूर और हर व्यक्ति चाहता है कि उसका बच्चा पढ़ लिखकर आगे बढ़े । 50-60 साल एक पार्टी जरूर रही, एक पार्टी ने राज किया । एजुकेशन के नाम पर उन्होंने  जरूर काम किया होगा, लेकिन जो काम एनडीए सरकार ने किया है और जो परिवर्तन पूर्व प्रधान मंत्री आदरणीय वाजपेयी जी और वर्तमान प्रधान मंत्री माननीय मोदी जी ने किया है, इससे लोग प्रभावित होकर विदेश से यहां आ रहे हैं, प्रवासी भारतीय देश में आ रहे हैं । अभी हाल ही में टेक्सेस में जो कार्यक्रम हुआ था, उसमें देखने को मिला कि माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी की पहचान सिर्फ देश में ही नहीं विदेश में भी है । हम ये सब एजुकेशन, इंटरनेट की वजह से कर पा रहे हैं ।

      अब देखने को मिल रहा है कि स्टेट में डेवलपमेंट हो रहा है । हम वोट क्यों देते हैं ? क्योंकि नेता हाउस में आएं, पंचायत में पहुंचें, विधान सभा में पहुंचें और क्षेत्र का कार्य हो सके । हम सबके बीच में बैठकर, सबके साथ गोष्ठी करके काम कराने का प्रयास कर रहे हैं । मुझे किसी प्रांत का नाम नहीं लेना है, हम देख रहे हैं कि शहरों में मतदान कम होता है और गांवों में ज्यादा होता है । गांव में हमारा दिल है, देश का दिल है । हमें खलिहान के लिए काम करना है, किसानों के लिए काम करना  है, किसानों के खेत तक पानी पहुंचाना है, हर हाथ को काम देना है, स्किल लेबर बनानी है, इंडिया को सुपर पावर बनाना है, यह हम  तभी कर सकते हैं जब सब मिलकर एक साथ काम करेंगे ।

     

जब मतदान होता है तो सबको आना चाहिए । आप बेल्जियम में देखिए, आप मतदान करें या न करें, आपको मतदान केन्द्र पर बुलाया जाता है । इसका मतलब यह नहीं है कि आपको मतदान करने की जरूरत है, लेकिन वहां बैठने की जरूरत है । मतदान किसी से करा नहीं सकते, लेकिन हम कोशिश कर सकते हैं ताकि सबका पार्टिसिपेशन हो । यह तभी होगा जब हम सब साथ रहेंगे । कोई व्यक्ति बीमार है या उम्र में बड़ा है, तो क्या हम ओल्ड एज़ होम्स में पोस्टल बैलेट द्वारा मतदान नहीं करा सकते हैं ? क्या हम इसमें प्रवासी भारतीयों के मतदान की बात रख सकते हैं ? अस्पतालों में जो लोग मतदान वाले दिन मतदान नहीं कर सकते, क्या हम उनकी मदद कर सकते हैं? क्या उनको मतदान पत्र दूरदराज क्षेत्रों में, ओल्ड एज़ होम में दे सकते हैं ? यह सब सरकार पर निर्भर है ।   

       मुझे यही कहना है कि हमारा बड़ा परिवार है । हमें बड़े परिवार में सबको जोड़कर काम करना है । यह तभी हो सकता है जब सब लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें । आदरणीय प्रधान मंत्री वाजपेयी जी ने कहा था और मैंने शुरुआत में भी कहा था – पार्टियां आएंगी और जाएंगी,सरकारें बनेंगी और बिगड़ेंगी,लेकिन देश में लोकतंत्र रहना चाहिए । आज हमारा देश हमारी मां है । आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने यह भी कहा था । हमारी मां है । हमारी मां को हम आगे ले जाएं । यह तभी हो सकता है जब केवल हम नहीं संपूर्ण भारत में सभी 130 करोड़ भारतवासी का इसमें योगदान मिले । आजकल चर्चा होती है कि मैं इस प्रान्त का व्यक्ति हूं,हमें सभी छत्तीस कौम को जोड़कर,प्यार के बंधन में बीनकर, हमें सभी लोगों को साथ में लेकर चलना है । जब हम प्रान्तों को साथ लेकर चलेंगे,प्यार और सद्भावना के साथ चलेंगे तो मुझे पूरा विश्वास है, मोदी जी को देखते हुए और उनके अच्छे काम को देखते हुए देश में हम आगे बढ़ेंगे । मैं आखिरी में यह कहूंगा कि मतदान देना हमारा एक राइट है । आप एक व्यक्ति को यह नहीं कह सकते कि आप उस व्यक्ति को मतदान दीजिए या मतदान कराइए । ये राइट इंडिविजुअल की है, ये राइट कांस्टिट्यूशन फादर ने हमें दिया था । यह राइट हरेक व्यक्ति का है,हरेक व्यक्ति के दिल का है ।

       आखिरी में मुझे यह कहना है कि जो भी अच्छा करना है, हम सबको साथ में लेकर काम करना है । इस देश की विजय होगी जब हम सबको साथ में लेकर देश को आगे बढाएंगे । जय हिन्द,जय भारत ।

DR. SATYA PAL SINGH (BAGHPAT): Thank you, Sir. कम्पलसरी वोटिंग के बारे में जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं तो लोकतंत्र की जो एसेंस है, लोकतंत्र की जो आत्मा है, वह यह मानती है कि आदमी को यह अधिकार दिया जाए, यह च्वाइस दी जाए कि वह क्या करना चाहता है, क्या नहीं करना चाहता है, क्या बोलना चाहता है, क्या नहीं बोलना चाहता है । अगर हम यह कहते हैं और इस प्रकार कानून बनाते हैं कि सबको कम्पलसरी वोटिंग करना चाहिए,इसका मतलब सबसे पहले लोकतंत्र पर यह एक बहुत बड़ी चोट है । इससे लोकतंत्र की आत्मा को खतरा है । जब हमें यह अधिकार ही नहीं रहा कि हम वोट देंगे,नहीं देंगे,किसको दें,क्या करें या न दें । To start with, I am not in favour of compulsory voting. This is number one. लेकिन,वोट करना चाहिए या नहीं करना चाहिए,इसके बारे में हमारे संविधान के निर्माताओं ने इस पर काफी डिस्कशन किया । जब भारतीय संविधान लिखा गया तब डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स आए,फंडामेंटल राइट्स आए । It is their right to get registered as a voter. वर्ष 1976 में भारतीय संविधान का संशोधन हुआ,उसके अंदर हम लोगों ने फंडामेंटल ड्यूटिज इनकॉर्पोरेट किए, उस समय भी इस पर काफी डिस्कशन हुआ और यह तय किया गया कि वोट करने का जो अधिकार है उसको एज ए ड्यूटी नहीं होना चाहिए । इसका मतलब It is a right, but it is not a duty, which means it is not compulsory and it should not be compulsory. वर्ष 2004 और वर्ष 2009 के अंदर दो बार प्राइवेट मेम्बर्स लेजिस्लेशन इसी सदन के अंदर इंट्रोड्यूश किए गए कि लोगों के लिए कम्पलसरी वोटिंग होना चाहिए । कई बार लोग सोचते हैं कि कम्पलसरी वोटिंग अगर होगी,वोटिंग कहीं ज्यादा-कम हो सकता है । जैसे जम्मू-कश्मीर की बात है, कई बार हमें इलेक्शन में फार्स नजर आता है, जब 7 परसेंट वोटिंग, 9 परसेंट वोटिंग हो रहा है और लोग सांसद बन रहे हैं,विधायक बन रहे हैं । वहां ऐसा लगता था कि वास्तव में हम ऐसी जगह सोच सकते हैं । लेकिन, जहां हम लोगों की परिस्थिति ऐसी है कि लोगों को वोट डालने के लिए स्वतंत्रता से, आजादी से,अपनी इच्छा से अगर हम वोट नहीं डाल सकते, लोक डर की वजह से वोट करते हैं तो कम्पलसरी वोटिंग करेंगे तो हम कैसे करेंगे?जिस देश के अंदर 90 करोड़ वोटर्स हों, क्या उस देश के अंदर हम इस बात की अनिवार्यता को तय कर सकते हैं?   इसलिए 14-15 देशों में जहां पर वोटिंग करने को अनिवार्य किया गया, क्या वहां कम्पलसरी करने से वोट प्रतिशत बढ़ गया? उन देशों में जहां पर वोटिंग का अधिकार कम्पलसरी नहीं है, वहां पर जब तुलना की गई तो वहां पर प्रतिशतता का अंतर अंदाजन 7 प्रतिशत था । इसका मतलब यह नहीं कह सकते कि अगर कम्पलसरी वोटिंग हम लोग करेंगे तो उससे देश के सभी नागरिक वोट करेंगे ।

       हमारे संविधान के अंदर जब भी संशोधन हुआ, इस बात पर जोर दिया गया कि ज्यादा से ज्यादा लोग वोट करें । लेकिन यह अधिकार भी लोगों को दिया गया कि अगर कोई वोट नहीं करना चाहता तो उस पर जबर्दस्ती नहीं की जाएगी । जहां भी जबर्दस्ती का फैक्टर सामने आएगा,लगता है उस समय हम लोग लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं । यह आदमी की इच्छा होनी चाहिए,कई बार होता है । पिछली बार यह बात चर्चा में आई थी । मैं किसी राज्य का नाम नहीं लेना चाहता हूं । कई बार ऐसा होता है कि जिस केंडीडेट को टिकट दिया गया,बहुत लोग ऐसे होंगे जो उसको वोट नहीं देना चाहते हैं । अगर हम जबर्दस्ती करते हैं कि वोट देना है, कौन केंडीडेट है, किसको वोट देना है । कौन उम्मीदवार है, कौन केंडीडेट योग्य है कि नहीं है, क्या इस बात की हमें लोगों को आज़ादी नहीं देनी चाहिए?

       आजकल प्रोटैस्ट करने का यह एक लोकतांत्रिक तरीका है कि लोग वोट नहीं डाल रहे हैं । उनको यह अधिकार है कि अगर वे वोट नहीं डाल रहे हैं तो वे एक तरह से अपना प्रोटैस्ट कर रहे  हैं । मेरा ऐसा मानना है कि वोट के अधिकार को लेकर हम सब लोगों को इस सदन के अंदर जरुर इस बात पर चर्चा करनी चाहिए और हम सब लोगों ने इस बात को महसूस किया होगा । कई बार ऐसा लगता है कि जिन लोगों से हमको वोट डालने के लिए निवेदन नहीं करना चाहिए,उनसे भी हमें जाकर निवेदन करना पड़ता है ।

       इस देश के अंदर दुर्भाग्य से लोकतंत्र के नाम पर एक दुष्ट,गुंडे आदमी के वोट की कीमत भी उतनी है जितनी एक पढ़े-लिखे आदमी या सांसद या विधायक के वोट की है  । क्या उन दोनों को बराबर रखना चाहिए?

मैं इस बात को बराबर कहता हूं, जैसे हम लोग कई बार न्याय करते हैं, अगर  कोई बकरी किसी किसान का खेत चर जाए, दूसरी तरफ हाथी खेत चर जाए और उनको रोकने के लिए हमारे पास एक डंडा है । अगर दोनों को एक-एक डंडा मारा जाए तो बकरी की टांग टूट सकती है, उसकी कमर भी टूट सकती है,लेकिन डंडा मारने से हाथी पर कोई असर नहीं होने वाला है । हम इस तरह के न्याय की बात करते हैं कि सबको वोटिंग के लिए इस प्रकार से कहा जाए । मेरे विचार से यह ठीक नहीं होगा । इसलिए सदन में चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि जो अच्छे पढ़े-लिखे आदमी हैं, उनके वोट की कितनी कीमत होगी? उसको कितना वेटेज दिया जाए और जो गुंडे लोग हैं, ठीक है, उनको हमारे संविधान में वोट का अधिकार दिया गया है, उनके वोट की कीमत कितनी होनी चाहिए?

मैं तो कई बार सोचता हूं कि एक अच्छे पढ़े-लिखे आदमी के वोट की कीमत दस गुना होनी चाहिए । दस गुना होगी तो हमारे जैसे जो सीधे-साधे लोग हैं, उनको,जो गुंडे लोग हैं, समाज के अंदर गलत काम करते हैं, उन लोगों के पास हमको नहीं जाना पड़ेगा । इसलिए हमें इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि किसको वोट देने का अधिकार है और किसको नहीं है और किसके वोट की कीमत कितनी होनी चाहिए । लेकिन इसको कम्पलसरी करना ठीक नहीं है, क्योंकि मैंने कई बार देखा है, बहुत लोगों ने देखा होगा । हम लोग बोलते हैं कि डैमोक्रेसी क्या चीज है? “It is for the people, of the people, by the people.”  इस बात को हम डैमोक्रेसी कहते हैं । कई बार मुझे लगता है कि यह डैमोक्रेसी नहीं है, मोबोक्रेसी है । जिसके पास ज्यादा वोट हैं,वही आता है । हम लोगों ने देखा है कि दिल्ली,मुम्बई जैसे बड़े-बड़े शहरों में जो अच्छे पढ़े-लिखे लोग हैं,वे ज्यादातर वोट ही नहीं डालते हैं । अच्छे पढ़े-लिखे लोग वोट डालने के लिए कम निकलते हैं । जितना ज्यादा एडवांस्ड शहर है, वहां लोग वोट कम डालते हैं और हमारे झोंपड़पट्टी में रहने वाले गरीब लोग ज्यादा वोट डालते हैं । वे क्यों वोट डालते हैं, बहुत लोगों को यह बात मालूम होगी । मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूं ।

       मैं एक शहर का पुलिस कमिश्नर था । वहां मैंने देखा कि एक बड़ी झोंपड़पट्टी थी । साढ़े चार बजे तक कोई वोट डालने के लिए नहीं आया । पांच बजे तक का वोट डालने का समय था । मैंने पता करवाया कि इसका क्या कारण है,तो पता चला कि साहब, अभी तक मामला नैगोशिएट हो रहा था । ये लोग 500 रुपये पर वोट मांग रहे थे और जो केंडीडेट के लोग थे, वे 300 रुपये दे रहे थे । अभी जाकर उनका समझौता  400 रुपये में हुआ है । इसलिए अभी लोग निकल रहे हैं और वोट कर रहे हैं । कौन लोग वोट कर रहे हैं? हम तय करेंगे कि इस प्रकार के लोग वोट करेंगे । देश मेरिट पर आगे बढ़ना चाहिए । देश क्वालिटी पर आगे बढ़ना चाहिए । आज सवेरे बच्चों के पोषण की बात की जा रही थी कि बच्चों को कुपोषण से बचाया जाए । उसमें यह बताया गया कि केवल नौ प्रतिशत बच्चे ठीक से सुपोषित हैं । अच्छे परिवारों के बच्चे भी ठीक से पोषित नहीं हैं । हम लोगों को किस प्रकार की जानकारी देते हैं, उसको कैसे आगे बढ़ाएं? ठीक इसी तरह से हम वोट की बात करते हैं, अपने क्षेत्र को आगे बढ़ाने की बात करते हैं,हम गुणवत्ता के आधार पर देश को आगे लेकर जाएं । रिप्रजेंटेटिव ऑफ पीपल्स एक्ट में भी उसके अधिकार को अनिवार्य इसलिए नहीं किया गया कि देश को गुणवत्ता,मेरिट के आधार पर आगे ले जाने की जरूरत है । इसका मतलब यह नहीं हैकि कोई कैसा भी हो, सभी लोगों को वोट डालना चाहिए । अगर सभी लोग इस प्रकार से वोट डालने लगेंगे तो मुश्किल हो जाएगा । हमें लगता हैकि कुछ लोग वोट न डालें तो अच्छा है । इसलिए वोट को कम्पलसरी न करके, लोगों को स्वतंत्रता का अधिकार दिया जाए । लोकतंत्र का अर्थ है किआदमी को आजादी होनी चाहिए । वह वोट डालना चाहता है या नहीं, यह बात सुप्रीम कोर्ट में भी आई,तारकुंडे समिति बनी, लॉ कमीशन ने इस पर लंबी चर्चा की । चीफ इलेक्शन कमिशनर कुरैशी साहब थे, उन्होंने इस विषय में कहा कि अगर हम  80 करोड़ लोगों के लिए यह कम्पलसरी करेंगे कि सभी लोग अनिवार्य वोटिंग करेंगे,मान लीजिए कि 80 करोड़ लोगों में से आठ करोड़ लोगों ने वोट नहीं डाली, तो हम उनको दंड देना चाहते हैं तो उनको सजा कैसे देंगे?इसके लिए सभी को नोटिस भेजना पड़ेगा, उसके लिए कितनी मशिनरी लगेंगी, उसके लिए कितना पैसा खर्च होगा, क्या इतना पैसा खर्च करने के बाद यह देश के लिए उपयोगी हो सकता है? उसमें इतना पैसा खर्च करेंगे,इससे अच्छा हैकि हम स्कूल बना दें, कहीं अस्पताल बना दें,हम अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए दूसरा काम करें । हम लोगों को क्वालिटी ऑफ वोटिंग की बातें करनी चाहिए । कम्पलसरी वोटिंग न करके,देश को आगे बढ़ाने के लिए गुणवत्ता के आधार पर आगे बढ़ाना  चाहिए । मैं इसके समर्थन में नहीं हूं कि अनिवार्य वोटिंग करना चाहिए, कम्पलसरी वोटिंग करना चाहिए ।

       सभापति महोदय,आपने मुझे बोलने का अवसर दिया,इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।

*m0 श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर): सभापति महोदय, मैं कम्पलसरी वोटिंग के प्रस्ताव पर अपना विचार प्रकट करना चाहता हूं । सतपाल जी का भाषण सुनने के बाद में,मैं जो भाषण करने वाला था,उसमें थोड़ा मत परिवर्तन हो गया है । मैं इस मत से सहमत हूं कि हमारे पूर्वजों ने कहा है कि  यह सभागृह डिबेट एंड डिस्‍कशन के लिए है । इस सभागृह में जितनी देर तक बैठेंगे, उतना ज्यादा सीखने और समझने के लिए मिलेगा । भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग किस प्रकार से अपनी बातों को रखते हैं । कुल मिला कर इस सभागृह में ज्यादा से ज्यादा समय देना,अपनी नॉलेज को बढ़ाने के लिए लाभदायक है । मुझे कारपोरेशन से लेकर लोक सभा तक जितना भी पार्टी और मतदान क्षेत्र के लोगों ने मौका दिया है, मैंने उसका पूरा उपयोग करने का प्रयास किया है । सतपाल सिंह जी का भाषण सुनने के बाद,उसकी गहराई में जाने की बहुत आवश्यकता है । मैं इस बात से सहमत हूं कि  कम्पलसरी वोटिंग अगर न भी होता हो तो भारत देश में ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान करें, इसके लिए हम लोगों को प्रयास करने की आवश्यकता है । मैं देश के प्रधान मंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगा कि वर्ष 2014 के बाद से देश के वातावरण में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है । खास कर हमारी युवा पीढ़ी बड़े पैमाने पर मतदान के लिए बाहर आती है । निश्चित रूप से वोटिंग का हायर परसेंटेज होना, देश के लिए लाभदायक है और समाज में जागृति लाने के लिए भी लाभदायक है, मैं ऐसा मानता हूं ।

       एक समय ऐसा था कि 30-40 पर्सेंट से ज्यादा लोग वोट नहीं डालते थे । लेकिन आज हम लोग देख रहे हैं कि 70-80 पर्सेंट तक वोटिंग हो रही है । बदलाव की बात करते हुए, आज मैं टी.एन.सेशन साहब को भी याद करूँगा,जिन्होंने इलेक्टोरल रिफॉर्म में एक बहुत बड़ा योगदान दिया । भारत जैसे देश में लोगों को कायदे के साथ किस तरह से पेश आना चाहिए, कायदे का किस तरह से सम्मान करना चाहिए, इसके बारे में एक बहुत बड़ी दिशा देने का काम टी.एन. शेषन साहब ने किया । उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया में बहुत बड़े बदलाव भी आए हैं । देखते-देखते हम लोग ईवीएम के प्रोसेस में गए । किसी को वोट नहीं देना हो, तो नोटा का भी एक प्रोसेस आ गया है । इन दिनों महाराष्ट्र में चुनाव के दौरान दस-बीस हजार लोगों ने नोटा का उपयोग किया । इससे जीतने वाले लोगों के मन में भी बदलाव आ रहा है कि इतना अच्छा काम करने के बाद भी मेरे विरोध में बीस हजार लोग कैसे चले गये,मेरे विरोध में दस हजार लोग कैसे चले गये । इससे एक बहुत बड़ा बदलाव भी आएगा । इसलिए मैं मानता हूँ कि पर्सेंटेज ऑफ वोटिंग को बढ़ाने की आवश्यकता है,जिससे लोकप्रतिनिधि जागरूकता से काम करेंगे ।

       हमारे देश में जाति प्रणाली के आधार पर भी वोटिंग होती है । मेरे समाज के इतने लोग हैं, इसलिए मैं काम करूँ तो भी ठीक है, न करूँ तो भी ठीक है, मुझे तो लोग वोट देने ही वाले हैं । लेकिन इसके साथ-साथ पर्सेंटेज ऑफ वोटिंग हाई करने की बात होगी, तो उसके मन में कहीं-न-कहीं डर होगा कि मेरे समाज के लोग 30 पर्सेंट हैं, लेकिन उसके अलावा भी 70 पर्सेंट अन्य समाज के लोग हैं । अगर वे बड़े पैमाने पर निकलकर वोट डालेंगे, तो मैं जीत नहीं पाऊँगा । ऐसी बातों से जनप्रतिनिधियों को डर लगेगा, तो वे ज्यादा-से-जयादा काम करके अन्य समाज के लोगों को भी जोड़ने का प्रयास करेंगे । इससे हम एक हेल्दी डेमोक्रेसी की ओर आगे बढ़ेंगे । जातिवाद से निकलकर एक अच्छा सिस्टम डेवलप करते हुए,देश को एक अलग दिशा में ले जाने के लिए इससे एक बहुत बड़ा लाभ होगा । इसके लिए मैक्सिमम वोट करने की दिशा में हमें काम करना होगा ।

       जब हम कमपल्सरी वोटिंग की बात करते हैं, तो निश्चित रूप से लोगों के मन में यह बात भी आएगी,जब इसके बारे में डिबेट होगी,चर्चा होगी,तो मैं चाहूँगा कि ज्यादा-से-ज्यादा देर तक चर्चा चले । ऐसा मैं श्री मेघवाल जी से कहूँगा,इस सभा के मैक्सिमम लोग इस बिल पर चर्चा कर सकें, इसका प्रयास होना चाहिए । पार्लियामेंट में कमपल्सरी वोटिंग पर इतने घंटे बहस हुई और उसमें इतने लोगों ने भाग लिया,जब यह मैसेज देश में जाएगा,तो मतदाता के मन में निश्चित रूप से एक अलग परिणाम आएगा और वह सोचेगा कि मुझे मतदान ज़रूर करना चाहिए । किसको करना चाहिए,यह उसके विचार पर है । लेकिन मुझे मतदान करना चाहिए,यदि इस दिशा में वह जाता है,तो एक बहुत बड़ी उपलब्धि हम सबकी होगी, मैं ऐसा मानता हूँ ।

       हम लोग डेमोक्रेसी को और हेल्दी तथा सुदृढ़ करने के लिए इतने बड़े पैमाने पर पैसे खर्च करते हैं, हम लोग इतनी मशीनरियों का उपयोग करते हैं, इतने मैन पावर का उपयोग करते हैं, इतना करने के बाद भी अगर 30-40 पर्सेंट वोटिंग पर कोई जनप्रतिनिधि जीतकर आता है, तो सिस्टम को ऐसे ही चलने देना चाहिए या इस सिस्टम में और बदलाव की आवश्यकता है, यह भी सोचने की जरूरत है ।

       श्री सत्यपाल सिंह साहब के भाषण से मुझे एक बात सीखने को मिली । हो सकता है कि मैं इसे मूव करूँ,लेकिन इसको आप ही मूव कीजिए,क्योंकि आपके मन में ऐसा विचार आया है ।

       अच्छे-बुरे का डेफिनिशन कम-से-कम हम तो कर नहीं पाएंगे । उसकी सूची लम्बी हो जाएगी । लेकिन क्रिमिनल लोगों के बारे में यह निश्चित करना चाहिए कि उनके वोट का क्या वैल्यू हो,इसे हम लोगों को निश्चित करना पड़ेगा ।

       एक आदमी गुंडा है, एक आदमी बदमाश है, एक ने दो आदमियों का मर्डर किया है, वह जेल में बैठा है और वहाँ बैठकर वह चुनाव का फॉर्म भरता है और वह जीत जाता है । यह हमारी लोकशाही के लिए अच्छी बात नहीं है । इसके लिए हमें उसके वोट की वैल्यू तय करनी होगी । किसी के ऊपर तीन केसेज हैं, तो उसके वोट की वैल्यू इतनी होगी,किसी के ऊपर चार केसेज हैं,तो उसके वोट की वैल्यू इतनी होगी, किसी के ऊपर पाँच केसेज हैं, तो उसके वोट की वैल्यू इतनी होगी । यदि उसको हम 50 पर्सेंट पर भी लाकर रख दें,तो ऐसे लोगों का जीतना मुश्किल हो  जाएगा । यह एक अच्छी बात आपके भाषण से मुझे सीखने को मिली । मैं चाहूँगा कि आप ही इससे संबंधित एक प्राइवेट मेम्बर बिल मूव कीजिए । जिस दिन आपका बिल लगेगा, उस दिन मैं आपका समर्थन करने के लिए यहाँ पर साढ़े तीन बजे के बाद भी बैठूँगा ।

       आप एक अच्छी सोच लाए हैं । जो क्रिमिनल किस्म के लोग हैं,उनके वोट की वैल्यू कितनी होगी,इसके बारे में आने वाले दिनों में हमें सोचना ही पड़ेगा ताकि दुनिया भर के लोग इस बात की चर्चा करें कि भारत में क्रिमिनल लोगों की जगह क्या है और उनकी क्या वैल्यू है । आपने यह बहुत अच्छी बात बताई ।

       एक बहुत ही अच्छा और ईमानदार आदमी है । वह चुनाव लड़ता है और जीत नहीं पाता   है । क्रिमिनल लोग जीत जाते हैं और जीतने के बाद भी वह जेल में ही रहता है, तो उसके मतदान क्षेत्र के अच्छे लोग सोचेंगे कि मेरा सांसद जेल में है, मेरा विधायक जेल में है, मेरा पार्षद जेल में है । इसके बारे में मैं कहूंगा कि हमें कोई न कोई बदलाव करने की आवश्यकता है । साथ ही साथ मैं मानता हूं कि यह डिबेट और डिस्कशन होने से देश में एक बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा । जो पढ़े-लिखे बच्चे हैं,वे तो वोटिंग में भाग लेते ही हैं । पहले का समय चला गया । एक समय ऐसा था कि लोग बहुत बड़े पैमाने पर वोटिंग करते थे । पढ़े-लिखे,कम पढ़े-लिखे और अनपढ़ लोगों के बारे में अगर हम बात करें तो जब लोग कम पढ़े-लिखे थे या अनपढ़ थे, तब बड़े पैमाने पर वोटिंग होती थी । उन दिनों में वोटिंग करने का मतलब अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करना होता था । तब लोगों की ऐसी मानसिकता थी । मैं जब बहुत छोटा था, तब घर में खाने-पीने के भी वांदे थे, लेकिन जब वोटिंग होती थी, तो मेरे माता-पिता वोट करने जरूर जाते थे । उनके मन में कभी यह नहीं आता था कि हमारे देश ने हमें क्या दिया, दो वक्त की रोटी भी नहीं मिलती है तो फिर हम क्यों धूप में खड़े होकर वोटिंग करें । लेकिन,जैसे-जैसे समय बदलता गया,हम सक्षम होते गए, हम बुद्धिमान होते गए, हम पैसे वाले होते गए, तो हमें लगा कि वोट देने से भी क्या फर्क पड़ता है और नहीं देने से भी क्या फर्क पड़ता है । यह देश तो ऐसे ही चलेगा । यह सिस्टम तो ऐसे ही चलेगा । जो भी बदलाव लाना है, वह हमें अपने बलबूते ही लाना पड़ेगा । इस प्रकार की मानसिकता विकसित हो गई है ।

महोदय, हमारे देश के लोगों की एक अच्छी बात भी है कि भारत जैसे देश में जिन लोगों ने अंधाधुंध ढंग से देश को चलाने का प्रयास किया,देश में गड़बड़ी होने लगी, घोटाले होने लगे, तो देश के युवा वर्ग ने अपना रोल तय कर लिया कि हमको इस सारे सिस्टम को बदलना पड़ेगा । इस प्रकार सही समय पर एक अच्छा नेतृत्व देश को मिल गया । देश के युवा वर्ग ने बड़े पैमाने पर आकर वोट देना प्रारम्भ किया । इन पांच-छ: सालों में देश में जो बदलाव देखने को हमें मिल रहा है, उसके लिए निश्चित रूप से हमें युवा वर्ग को क्रेडिट देना पड़ेगा इतने बड़े पैमाने पर आकर उन्होंने हमें वोट दिया । मुझे कभी-कभी यह भी लगता है कि अगर देश का युवा वर्ग भटक जाएगा तो हम इस देश को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे, क्योंकि एजुकेशन का जो लाभ इस समय के बच्चों को मिल रहा है, वही आने वाले समय में हमारे देश को आगे ले जाएंगे । अगर ये युवा वोटिंग से वंचित रहेंगे,वोटिंग में भाग नहीं लेंगे तो वापस बिना पढ़े-लिखे लोग इस सिस्टम में आ जाएंगे और वे इस देश को चलाएंगे । इस तरह फिर से एक बहुत बड़ा बवंडर देश में आ जाएगा । इसलिए मैक्सिमम लोगों को वोटिंग करनी चाहिए । मैं इसका समर्थन करूंगा ।

महोदय, खासकर इस बिल पर बात करते हुए मैं इस बात को भी यहां पर उजागर करना चाहूंगा कि हम लोग इतने बड़े सिस्टम को चलाते हैं । हम चाहते हैं कि 100 परसेंट कम्पल्सरी वोटिंग हो और यह होनी चाहिए । साथ ही साथ यह भी बताना चाहूंगा कि गवर्नमेंट के कई लोग वोटिंग में भाग नहीं लेते हैं । आप तो पुलिस डिपार्टमेंट से आए हैं । पुलिस डिपार्टमेंट के लोग बड़े पैमाने पर वोटिंग नहीं करते हैं । कॉरपोरेशन में काम करने वाले लोग बड़े पैमाने पर वोटिंग नहीं करते हैं । जो लोग इलेक्शन ड्यूटी पर रहते हैं, उनके वोट कास्टिंग की व्यवस्था है,लेकिन वे भी वोटिंग नहीं करते हैं । इस बिल के विषय पर चर्चा करते समय कम से कम हमें यह पहल जरूर करनी चाहिए कि आने वाले समय में गवर्नमेंट के लोग वोटिंग करें । आप ड्यूटी पर हैं तो, आपको वोटिंग करने की व्यवस्था अलग से करके रखनी चाहिए । आपको उसमें भाग लेना ही चाहिए । गवर्नमेंट वोटिंग करवाती है और गवर्नमेंट के लोग ही इसमें भाग नहीं लेंगे तो काम कैसे चलेगा? 

महोदय, हमें कम से कम यहां से इसका प्रारम्भ करना चाहिए और गवर्नमेंट में काम करने वाले सारे के सारे लोग वोटिंग में भाग लें, इसका हमें प्रयास करना चाहिए । इस तरह की शुरुआत करने से मैं मानता हूं कि इस देश में एक दिन ऐसा समय आ जाएगा कि कोई बिल पास करने की आवश्यकता नहीं होगी । लगभग 90 प्रतिशत से ऊपर लोग स्वयं ही वोटिंग करने के लिए तैयार हो जाएंगे । इस प्रकार से हम लोगों में यह मानसिकता विकसित कर सकते हैं । वह समय अभी बहुत दूर नहीं है । वह समय आएगा,क्योंकि एजुकेशन लोगों को ऐसा करने के लिए मजबूर करेगी । मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे देश में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है । इन दिनों पॉलिटिकल परिपक्वता भी देश के लोगों में देखने को मिल रही है । अच्छे लोगों को चुनना लोगों ने प्रारम्भ किया है । अच्छे-बुरे लोगों की समझ भी लोगों में आई है । सरकार क्या है, सरकार के दायित्व क्या हैं और सरकार के दायित्वों को कौन अच्छी तरह निभा सकता है,यह भी लोगों को समझ में आ गया है । सोशल मीडिया ने भी बहुत बड़ा रोल अपनाने का काम किया है । इसके माध्यम से देश में होने वाली दैनन्दिन गतिविधियां लोगों के पास समय पर पहुंच जाती हैं । इसका भी एक बहुत बड़ा लाभ आने वाले दिनों में हमारे सिस्टम को मिलने वाला है । कुल मिलाकर इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए,लोकशाही प्रणाली वाले हमारे देश में सारा पॉलिटिकल सिस्टम वोट के आधार पर चलता है । इसलिए लोगों को वोट देना चाहिए,इसके लिए हम लोगों को प्रयास करने की बहुत आवश्यकता है । मैक्सिमम लोग वोट करें और साथ ही साथ सभी वोटरों का नाम वोटर्स लिस्ट में दर्ज हो, यह सबसे बड़ी बात है । जिनका नाम वोटर्स लिस्ट में नहीं है और जो वोटिंग नहीं करते हैं,हम लोग उनकी चिंता करते हैं । हर चुनाव में यह देखा जाता है कि बड़े पैमाने पर लोगों का वोटर्स लिस्ट में नाम ही नहीं होता है । ऑनलाइन सिस्टम के आने के बाद से हम लोगों को बहुत बड़ा बदलाव इसमें देखने को मिल रहा है । जिन्होंने 36 घंटे ऑनलाइन अपना नाम दर्ज किया था, ऐसे बहुत सारे लोगों को वोटिंग करने का मौका मिला है । सिस्टम में खामियां हैं, लेकिन सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त करने का काम करने में सरकार और सरकार के लोग लगे हुए हैं । इन सारी चीजों को करते हुए हमें लोगों के मन में विश्वास का वातातरण निर्माण करने की बहुत आवश्यकता है । 5-6 साल में थोड़ा बहुत बदलाव इसमें देखने को मिला है, लेकिन अभी-भी बहुत काम करने की आवश्यकता है । लोगों में सरकार के प्रति विश्वास का निर्माण किस प्रकार से हो, उस दिशा में हम लोगों को आगे बढ़ने की आवश्यकता है । जब हम यह काम करेंगे तो वोटर्स को भी लगेगा कि मैं जो वोट देता हूं, वह वोट काम कर रहा है । जब मैं अपने क्षेत्र में घूमता-फिरता हूं, परेशान होता हूं, पसीना निकलता है, तो वोटर कभी-कभी मजाक में कह देता है कि मेरा वोट काम कर रहा है । आपको घूमना-फिरना पड़ता है तो लोगों को खुशी होती है कि मैं पांच साल में एक बार वोट देता हूं और गोपाल शेट्टी जी इन पांच सालों में कितना परेशान होते हैं । उनको इसमें एक मज़ा आता है । वोटर का लोकशाही में एक स्थान है,अपनी एक ताकत है और उसी ताकत के आधार पर ही भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को इतने अच्छे ढंग से हम चला पाते हैं । हमारे अनेक राज्य हैं और अनेक प्रकार की भाषाएं होने के बावजूद भी देश का यह सिस्टम चल रहा है, यह पॉलिटिकल सिस्टम चल रहा है, एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम चल रहा है । एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम पर चलने के कारण ही हम इस लोकशाही के मंदिर में बैठकर सबकी सहमति से कायदा पास करते हैं और उसको लोगों के बीच ले जाने का प्रयास करते हैं । इसलिए कम्प्लसरी वोटिंग के विषय पर अपनी बात को यहां रखते हुए मैं यही चाहूंगा कि मतदाता के मन में वोट करना चाहिए,इस प्रकार के भाव का निर्माण करना चाहिए । मैं इस बात से भी सहमत हूं कि कम्प्लसरी वोटिंग करना या नहीं करना, इसके पहलू पर भी हम लोगों को चर्चा करनी होगी । अगर कोई बाहर गया है तो उसका क्या होगा, कोई बीमार हो गया है तो उसका क्या होगा? अनेक मुद्दे इसमें से बाहर आ सकते हैं । एक समय ऐसा भी आएगा,जब लोग कहेंगे कि सौ परसेंट नहीं तो 95 परसेंट तक वोटिंग होनी ही चाहिए । अगर 95 है तो 90 क्यों नहीं होनी चाहिए?इन सभी मुद्दों पर बातचीत हो सकती है । मैं आपके मत से भी सहमत हूं कि कम्प्लसरी वोटिंग करने से क्या यह लोगों के गले उतरेगा?क्या हम इसको अमल में ला पाएंगे?इस बारे में भी डिसकशन हो सकता है, लेकिन मैं एक बार फिर इस बात को कहूंगा कि मैक्सिमम लोग वोटिंग में भाग लें, इस तरह के प्रयासों को हमें आगे बढ़ाना  होगा । इससे हमारी लोकशाही और सुदृढ़ होगी । 30, 40 या 50 परसेंट वोट लेकर लोग जीतकर आते हैं । उसमें से भी 50 परसेंट ने वोट ही नहीं दिया है । हम इस बात का फिर कैसे दावा कर सकते हैं कि मैं बहुत लोकप्रिय हूं? वह लोकप्रिय तभी हो सकता है,जब वह 75 परसेंट वोट लेकर जीतेगा । वही लोकप्रिय हो सकता है । 20,30या 40 परसेंट वोट लेने वाला सौ परसेंट लोगों का कैसे प्रतिनिधित्व कर पाएगा? यह चर्चा का विषय हो सकता है । इसलिए मैं अपनी बात को समाप्त करते हुए फिर से यही कहूंगा कि मैक्सिमम लोगों को वोट करने की मानसिकता में लाने की आवश्यकता है । कम्प्लसरी वोटिंग के बारे में भी जब यह सारा सदन और मैक्सिमम लोग इस पर चर्चा करेंगे तो अधिकतम लोगों का मत बनेगा और जब अधिकतम लोगों का मत बनता है कि compulsory voting is must, तो फिर उसके आगे मकेनिज्म को तय करने में भी हम लोगों जगह मिलेगी । हमें निश्चित ही इस दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है । अंत में मैं फिर एक बार अपनी बात को समाप्त करते हुए सत्यपाल सिंह जी की उस बात को सपोर्ट करना चाहूंगा कि जो क्रिमिनल लोग हैं,जो गुंडे हैं,जो बदमाश हैं,जिनके ऊपर केस चल रहे हैं, उनके वोट की वैल्यू और भारत देश के एक अच्छे और सच्चे नागरिक के वोट की वैल्यू कितनी होनी चाहिए?

माननीय सभापति :गोपाल शेट्टी जी, इस बिल का समर्थन करते हैं या नहीं करते हैं?

…(व्यवधान)

श्री गोपाल शेट्टी :सर, कम्पलसरी वोटिंग बिल का मैं समर्थन करता हॅूं लेकिन इसके बारे में हमें बहुत ही गहराई से चर्चा करनी चाहिए । …(व्यवधान)

संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल): गोपाल जी, यह बिल जनार्दन सिंह सीग्रीवाल साहब का है । उनके बिल को आप समर्थन कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं, चेयरमैन साहब यह पूछ रहे हैं ।…(व्यवधान)

श्री गोपाल शेट्टी :सर, मैंने अपनी भावना बताई है कि आखिर डिस्कस करना चाहिए । …(व्यवधान)

जल शक्ति मंत्री (श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत): ये पूछ रहे हैं कि आप कम्पलसरी वोटिंग सब्जेक्ट को सपोर्ट कर रहे हैं? चाहे कोई भी लाए । …(व्यवधान)

श्री गोपाल शेट्टी :जी सर, चाहे कोई भी लाए, मैं समर्थन करता हॅूं । …(व्यवधान)

माननीय सभापति:कोई भी प्रॉब्लम नहीं है । यह गवर्मेंट का मामला नहीं है । This is absolutely a Private Member’s Bill. So, you can either oppose it or support it. There is no problem.

SHRI GOPAL SHETTY : Yes, Sir. I know that. इसलिए मैं कह रहा हॅूं । …(व्यवधान)

श्री अर्जुन राम मेघवाल : सर, एक विषय जो इन्होंने उठाया तो मुझे भी लगा कि कुछ इंटरवीन करना चाहिए । इन्होंने कहा कि जो वोट नहीं देंगे तो क्या करेंगे? क्या उनको सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है? ऐसा भी कई सदस्यों ने सुझाव दिया है । जैसे राशन है, सरकारी अस्पताल है, लेकिन आपको लगता नहीं है, जैसा सत्यपाल सिंह जी ने कहा कि लोग 9-10 पर्सेंट से जीत कर आ जाते हैं,तो क्या होना चाहिए । कम्पलसरी वोटिंग नहीं हो तो क्या ऑप्शन हो? और कम्पलसरी वोटिंग हो, सजा भी नहीं मिले और फिर भी इम्पिलिमेंट हो जाए, ये सुझाव आने चाहिए । आप तो बहुत माननीय और वरिष्ठ हैं,तो इस पर कुछ सुझाव रखिए । …(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: I think, Constitutional Amendment is required in order to have compulsory voting.

श्री गोपाल शेट्टी :सभापति जी,इसलिए मैंने कहा कि इस बारे में अभी दूसरा-तीसरा भाषण ही मैंने सुना है और हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने इसके ऊपर प्रकाश डाला कि कम्पलसरी वोटिंग होनी चाहिए । कम्पलसरी वोटिंग होते समय फिर एक बार मैंने कहा कि मैक्सिमम लोगों का क्या मत हो सकता है और लोग अपने विचार किस प्रकार से प्रकट करते हैं । कम्पलसरी वोटिंग हो सकती है, क्यों नहीं हो सकती है । अगर मैं मुंबई के बाहर हॅूं तो मुंबई के बाहर से भी मैं वोटिंग कर सकता हॅूं, इस प्रकार की व्यवस्था भी है । इसी पार्लियामेंट ने एनआरआई लोगों के वोटिंग करने की क्या व्यवस्था है, वह बिल भी हमने पास किया है तो कम्पलसरी वोटिंग लागू करने में बहुत ज्यादा कोई दिक्कत आएगी,ऐसा मुझे लगता नहीं है । सभापति जी, मैं अपनी बात को समाप्त करते हुए, मैं इस मत से सहमत हॅूं कि जब मैं यह कह रहा हॅूं कि मैक्सिमम लोगों को वोटिंग करनी चाहिए तो कम्पलसरी वोटिंग का मैं आने वाले दिनों में समर्थन करता हॅूं । 

       धन्यवाद *m0 श्री रवि किशन (गोरखपुर) : सभापति महोदय, आपने मुझे कम्पलसरी वोटिंग पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हॅूं ।

       महोदय, मैं इस कम्पलसरी वोटिंग के समर्थन में हॅूं । कारण यह है कि कई ऐसे यूपोपियन देश हैं, जहां पर लोग वोट के अधिकार के लिए लड़ते हैं । They want to vote and they fight कि हमारी एक आइडेंटिटी रहती है । वहीं हमारे हिन्दुस्तान में एक लोकतंत्र है,आजाद हिन्दुस्तान है, तो इसके बहुत सारे गलत फायदे भी होते हैं, जैसे माननीय सदस्य सत्यपाल जी और गोपाल जी ने बहुत अच्छी बात कही कि बहुत सारे क्रिमिनल्स भी जीत जाते हैं,बहुत सारे गलत लोग भी जीत जाते हैं जिन्होंने देश के लिए गलत किया, इस मातृभूमि के लिए गलत किया,इस ज़मीन के लिए गलत किया । और वे जेल में रह कर जीत जाते हैं और हमें पता है कि वे क्रिमिनल है । पता है कि यह आदमी गुंडा है,यह बदमाश है,यह बाहूबली है,यह अपने बल पर जीतता है । हम लोग उनको जिता देते हैं । लोकतंत्र में यह बहुत गलत हो रहा था । जब मैं सिनेमा में आया । महोदय, मैं कलाकार हॅूं । When I was doing movies, I used to get all the scripts earlier. From Drama School, I joined the movie industry. So, I used to get such scripts जहां पर सारी कहानियों में भ्रष्ट नेता, भ्रष्टाचार,अन्याय, भ्रष्ट पुलिस, शराब के ठेकेदार, जमीन को हथियालेने वाले लोग, these kinds of scripts used to come more. If you remember, in 1990s, उस दौरान जहां पर 70 साल एक राज चला और बहुत सारे भ्रष्टाचार हुए और बहुत कुछ हुआ तो सिनेमा समाज का आइना है । सिनेमाकार या लेखक वही लिखता है जो उसको माहौल में दिखता है या अखबार के फ्रंट पेज पर पढ़ता है । वैसे फिल्में हम करते थे और उन फिल्मों में मैं नायक रहा, जहां पर भ्रष्टाचार है, एक विलन है, वोटिंग के दौरान बूथ कैप्चरिंग हो रही है, और अचानक आपने देखा कि सन् 2014 के बाद एक अद्भुत नेता के रूप में श्रद्धेय प्रधान मंत्री जी आते हैं और यह देश जो इतने सालों से त्रस्त था,यह देश इतने सालों से कुंठित था, उसने तय किया कि एक तो व्यक्ति कोई आए, कोई तो मसीहा आए, कोई तो ऐसा आदमी जाए, जो हमको जगाए, जिससे उम्मीदें हो,जो हमने सपने सोचे हैं । भारत एक सोने की चिड़िया हुआ करता था, जो किस्से-कहानियों में था । हमारे लोक सभा चुनावों में लोगों ने देखा जम कर वोटिंग हुई । लोग घर से निकले,लोगों ने वोट किया और एक नई सरकार आई ।

16.40 hrs                     (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) उस सरकार ने वह सारा काम शुरू किया । जो इस देश का युवा चाहता था, इस देश का एक बूढ़ा व्यक्ति चाहता था, देश का किसान चाहता था, देश की महिला चाहती थी कि मेरा भारत ऐसा होना चाहिए । मेरा हिन्दुस्तान ऐसा होना चाहिए और वह वोटिंग के बल पर हुआ । एक सरकार गिर गई, एक सरकार खत्म हो गई, एक पार्टी खत्म हो गई और एक नई पार्टी आई, जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी, सिर्फ वोटिंग के बल पर । इस लोकतंत्र में एक भाव आया कि वोटिंग करना है । एक नए नेता को प्रधान मंत्री के रूप में देखना है,गरीब इंसान को प्रधान मंत्री बनाना है । वह प्रधान मंत्री आए और देश आज जागरूक हुआ । आज 65 प्रतिशत युवा-पीढी है । We have the largest number of young people, nearly 65 per cent, in this country. उनके बहुत सपने हैं, जब मैं घूमता रहता हूँ, सिनेमा के दौरान या मिलते हैं, फैंस हैं तो हमसे बातें करते हैं और अधिकार भी चाहते हैं । मैं उन सब को आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि जब आप अधिकार चाहते हो, आप देश को यूएस की तरह देखना चाहते हो या ब्रिटेन की तरह क्लीन रोड्स हों और प्रोपर आर्गेनाइज्ड कंट्री । आपको वोट करना जरूरी है । आपको आपके अधिकार चाहिए,आपके पास एक ताकत है, आप यह बोल नहीं सकते कि मेरी कोई सुनता नहीं, मैं गरीब हूँ, मेरे पास पावर नहीं है,आपके पास सबसे बड़ा पावर है । आपने नरेन्द्र मोदी जी को प्रधान मंत्री के रूप में लाकर बता दिया कि येस,बदलाव हो सकता है । यह देश बदल सकता है । रवि किशन को इतने लाख ऐतिहासिक वोट्स से जिता कर इस मंदिर में भेज दिया । मैं तो उनको हीरो था,लेकिन उन्होंने सोचा कि भइया को जिताना है । भइया का जिता कर मंदिर में भेजा जाएगा । अब भइया पर्दे की शूटिंग छोड़ कर सेवा करेंगे और मैं भी गोरखपुर की सेवा में लग गया, क्योंकि इतने वोट्स दे दिए, हम पागला गए, रात को नींद नहीं आती है । रात को लगता है कि अब क्या करें । यहां से निकलो, क्षेत्र में जाओ, गाँव में जाओ, इसको देखो, इसका अस्पताल, इसका ट्रेन का टिकट बुक करवाओ, इनके ट्रांसफार्मर्स जल गए हैं, इनके इलैक्ट्रिक के बोर्ड जल गए हैं,इसको यहां एम्स में भर्ती करवाओ । पगला दिए, इतने लाख वोट्स नहीं देते तो हम इतना बौराते नहीं । मैं तो अपनी ज़िन्दगी में मस्त था ।

माननीय सभापति:अभी भी खूब मस्त हैं ।

श्री रवि किशन : नहीं,नहीं अभी बौराए हुए हैं । यह 65 परसेंट जो यंगर जनरेशन है, the compulsory voting is must. हमारे अद्‌भुत प्रधान मंत्री जी ने कहा है, यह जरूरी है इस देश  में । वोट करना बहुत जरूरी है, जब आप अधिकार मांगते हो, जब अच्छी सड़कें मांगते हों,सुविधाएं मांगते हों, अच्छा एम्स मांगते हो,अच्छा अस्पताल मांगते हो, अच्छा पानी मांगते हो, क्लीन शहर चाहिए, क्लीन देश चाहिए तो आप सब को वोट करना है । क्योंकि इसी वोट के बल पर यह सरकार आई । यह प्रतिशत बढ़ा, इसी वोट के बल पर भिन्न-भिन्न, कोई डॉक्टर है, कोई कलाकार है,कोई संगीतकार है, कोई गायक है, इस मंदिर में देखिए, कितने भिन्न-भिन्न लोग आए हैं, इसी वोट के बल पर । अब नहीं सुनाई देता कि कोई बाहुबली आया है । अब कोई खूनी बैठा है । अरे,जिसने सब की जमीन हथिया ली हो, वह बैठा है । अब कोई लूट कर यहां बैठा है । बड़ा दु:ख होता जब कोई लूटता है,खसोटता है,खून करता है और वह ऐसे बड़े मंदिर में बैठा रहता । भ्रष्टाचार करता और इस मंदिर में बैठता । किस अधिकार से बैठता है? इसीलिए voting should be made compulsory in this country. भारत में जरूरी है । नहीं तो आज गर्व होता, लोग बोलते नहीं, मैंने इसको चुना है । यह गलत काम नहीं करेगा । रवि किशन गलत नहीं करेगा । ये फलाने विधायक गलत नहीं करेंगे,ये सांसद गलत काम नहीं करेंगे और वह विश्वास आपको गलत करने से डरा देता है । इतने वोट आपको मिलते हैं कि आप डर जाते हो कि भाई कलंकित नहीं होना है, कोई गलत काम हमसे न हो जाए । यह पाप नहीं चढ़ना है । जीवन भर लोग उंगली उठाएंगे । क्या लेकर जाओगे,आदमी खाली हाथ जाता है ।

       महोदय, मैं हर व्यक्ति से कहना चाहता हूँ कि सब खाली हाथ ही जाते हैं । हमने कभी यह नहीं सुना कि कोई गाड़ी या बंगला पेट पर बांधकर ऊपर गया है । हमने कभी ऐसा नहीं सुना है । हमने तो देखा है, बनारस में लोग बॉडी से अंगूठी भी घर वाले घी लगाकर निकाल रहे थे कि अंगूठी लेकर कहाँ जाते हो । मालूम पड़ा खींचातानी चल रही थी । यह सत्य है । कुछ नहीं जा रहा है । हाँ, यह सत्य है, लेकिन फिर भी लोग लगे रहते हैं कि लूटो, लूटो,लूटो, लूटो । लूटने में देखो 70 साल लूट डाले । Voting is compulsory. Voting is must. अगर आपको अधिकार चाहिए,महोदय, मैं आपके माध्यम से पूरा देश, जो इस वक्त मुझे सुन रहा है, मैं हाथ जोड़कर सबसे निवेदन करता हूँ कि भइया, आप लोग अधिकार मांगते हैं, मुझसे बातें करते हैं,आपको ये सुविधाएं,फैस‍िलिटी चाहिए, आप सब लोग घर से निकलिए और वोट डालिए । वोटिंग के दिन आप गोवा मत जाइए । वोटिंग के दिन आप सिनेमा मत देखिए । वोटिंग का दिन आपके सिनेमा देखने का नहीं होता है । उस दिन आपकी छुट्टी नहीं होती है । वह छुट्टी का दिन नहीं है । मैं हाथ जोड़कर आपसे ऐसा कह रहा हूँ । यह देश, यह भारत, एक नया भारत, जिसे हमारे प्रधान मंत्री जी देख रहे हैं,उसमें हमें सबका साथ चाहिए । “सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास ।” 130 करोड़ भारतवासियों,हर बिरादरी,हर जाति, हर धर्म का साथ चाहिए और तब यह देश बनेगा । तब हम अमेरिका को सुपर पावर नहीं कहेंगे, हम चाइना को नहीं कहेंगे, हम भारत को कहेंगे ।  Voting is must.

       महोदय, वोटिंग बहुत जरूरी है । उसी वोट के चलते मैं यहाँ खड़ा हूँ । बस इतना ही कहकर मैं अपनी वाणी को विराम देना चाहता हूँ । मैं पूरे देश से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ कि अगर आप देश से उम्मीद करते हो, तो आप सब लोग घर से निकलिए,मतदान कीजिए और इस देश को अद्भुत बनाइए । यह देश सोने की चिड़िया हुआ करता था, जिसको लोगों ने लूट-लूट कर कंगाल बना दिया और यह देश सदियों से लूटा जा रहा है । अब एक अद्भुत प्रधान मंत्री आए हैं, उनका साथ दीजिए, इस सरकार का साथ दीजिए, मतदान कीजिए और आप लोगों की सारी पीड़ाएं खत्म होंगी । आप जो कहते हैं कि हमें यह नहीं मिला,वह नहीं मिला,आप वोटिंग कीजिए और अपने मन का नेता चुनिए । आप किसी को भी चुनिए, किसी भी पार्टी का चुनिए । यह आदमी हमारा बढ़िया है,यह गाँव का अच्छा आदमी है, इसे चुनते हैं । यह बढ़िया आदमी है,यह काम करेगा । जनता को सब पता है । यह पब्लिक है सब जानती है । आप चुनिए और फिर देखिए, कैसे आपके क्षेत्र का विकास नहीं होगा?आप चुनिए और देखिए, कैसे आपका देश अद्भुत नहीं बनेगा? आप चुनिए तो सही,आप मतदान तो कीजिए । आप घर से निकलिए, यह नहीं होना चाहिए कि बाहर धूप है,थोड़ा ठंडा हो जाए तब वोट डालने जाएंगे । ऐसा नहीं होना चाहिए, आप वोट डालने के लिए घर से बाहर निकलिए । आप भोर में ही वोट डालने के लिए निकलिए । पहले मतदान कीजिए । धन्यवाद ।

       महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए इतना समय दिया,मैं इस बिल का समर्थन करता हूँ ।

Voting is must. पूरे देश को मतदान करना जरूरी है ।      

*m0 SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM):  Thank you very much Chairman, Sir, for allowing me to take part in this discussion on the Private Members’ Bill which has been moved By Shri Janardan Singh Sigriwal, that is, the Compulsory Voting Bill, 2019.

       Sir, actually, the discussion, which has taken place in this House today, prompted me to participate.  After hearing, Satyapal Singh ji, Gopal Shetty ji and the recent speaker Ravi Kishan ji, in order to have the compulsory voting, definitely a Constitutional Amendment is required.  This Bill is not sufficient to serve the purpose.  It is because if you want to have compulsory voting, definitely, an amendment to the Constitution is required.  It is required because even the Fundamental Duties which are prescribed in Article 51(A) as well as the Directive Principles of State Policy, in both these chapters – the Directive Principles of State Policy as well as the Fundamental Duties of a citizen – nothing is mentioned about compulsory voting or even encouraging of the voting process or the electoral process. It has not been stated in both the Directive Principles of State policy as well as the Fundamental Duties of a citizen, which is there in Article 51(A) of the Constitution. In such a case, I appreciate the interest and appreciate the way by which the Bill has been drafted and brought in the House as a Private Member’s Bill.  Definitely, that is the reason why we are able to have a discussion on the subject of compulsory voting.

       When we think of the Indian Constitution as well as the parliamentary democratic system prevailing in our country, I am very proud to say that India is the biggest democracy in the world.  The biggest democracy in the world means more than one billion people are participating in the electoral process or the Parliament is representing more than one billion people of this country. 

If we examine the uniqueness of the Indian parliamentary democracy, I came here to the Parliament, in the Lok Sabha in the year 1996 as the 11th Lok Sabha Member.  Only for 13 days, Atal Bihari Vajpayee ji was the Prime Minister of the country.  Immediately after 13 days, a new Government came to power.  The voting on the Confidence Motion could not take place. Before that, Atal ji resigned. Immediately, Deve Gowda ji assumed office as the Prime Minister of this country and Deve Gowda ji remained the Prime Minister for 13 months.  When the Congress withdrew their support from Deve Gowda ji’s Government, I.K. Gujral ji’s Government came to power after 13 months. For six months, Gujral ji’s Government was there in power.  That Government also lost the confidence; that Government also resigned due to various political reasons.  Subsequently, election took place.  Again, Atal Bihari Vajpayee ji came to power in the 12th Lok Sabha. Subsequent to that, that Government was in power only for 13 months; AIADMK had withdrawn their support.  Next election took place and again Atal Bihari Vajpayee ji came to power and continued in office for five years. Again, election took place and for the next two Lok Sabhas, Dr. Manmohan Singh ji was the Prime Minister. The UPA Government was there in power for 10 years.  After 10 years, again election took place and Narendra Modi ji became the Prime Minister.  Subsequently, for the second time, Modi ji’s Government has come to power.

       The reason I am suggesting all this is this.  It is because of the strength of Indian parliamentary democracy, there is transformation of power from one Government to another, that is from Vajpayee ji to Gowda ji, from Gowdaji to Gujral ji, again to Atal Bihari Vajpayee ji, then to Dr. Manmohan Singh ji, and now to the present Government led by Shri Narendra Modi ji in a true democratic process. That is the uniqueness of Indian parliamentary democracy. We have to appreciate that and we are all proud of it because we can examine those Governments or those countries who have obtained freedom along with India; you can very well examine Pakistan. In Pakistan, though they are saying that democracy, democratic system and everything is there, Parliament is there, but they are not even able to survive five years of Government or five years of democratic system.  They are not able to survive, as far as Pakistan is concerned.  About our neighbouring countries, we can very well say that.  The strength of Indian democracy is to be appreciated.  We are all proud of that.  We are all proudly saying that ours is the biggest democracy in the whole world.  So, my suggestion is that we have to strengthen the Indian democratic system. Parliamentary democratic system has to be strengthened. 

       Parliament is the sanctum sanctorum of our democracy.  So, my suggestion is this.  We have to strengthen the parliamentary democratic system of our country.  How to have a healthy democracy?  Definitely, I do appreciate and admit the spirit of the Bill, that is compulsory voting.  That means maximum voting percentage is required to have a healthy democracy.  If participation of people is not there in the electoral process, then what is the meaning of democracy?  Nowadays, election after election, every year, we are seeing a decline in the voting percentage of the electorate.  That means we are not having a healthy democracy.  That is the real meaning of it.  It is because people are not believing in the parliamentary democratic system or the credibility of the democratic system is in question; otherwise people are not aware of the electoral system and the democratic system which is prevailing in our country.

       So, we have to find out the reasons by which why the electoral percentage or the voting percentage is coming down. We have to research and we have to find out the reason why it is so.  It is because the people are losing their confidence in the democratic system.  There are so many defects and laggings in the democratic system which is prevailing in our country.  That is why, people are not very much interested in coming and participating in our country. That is why, people are not very much interested in coming and participating in the electoral process. How can you compel a citizen who is not interested in participating in the electoral process to say that you must compulsorily vote if you want to get any benefit?  That is not democracy. It is because not to vote is also a democratic right of a particular citizen. I am living in India.  That is my right. Right to life and personal liberty guaranteed by Article 21 of the Constitution is the prime Fundamental Right of a citizen. In order to have Right to life and personal liberty, you have to vote means you are imposing conditions on the Fundamental Rights. That can never hold good. That is why, if you want to have maximum participation of the people in the electoral process, we have to rectify the defects in the democratic system prevailing in our country for which we have to do so many things.  I am coming to that.

       If you examine the average voting percent, during the last so many parliament elections, it is between 60 – 65 per cent. That means 35 – 40 per cent of the people are not participating in the electoral process. The average voting percentage is very low. In such a situation, the hon. Member has moved this Private Members’ Bill to have compulsory voting.

       Sir, clause 8 of the Bill is imposing so many punishments. So, we cannot agree with the clause 8. This says:-

“Any person who fails to cast his vote shall be liable to a fine of rupees five hundred, two days of imprisonment, forfeiture of his ration card, be rendered ineligible for contesting any election for a period of ten years from the date of his conviction, be ineligible for allotment of a plot or a house in Government owned organisation, be ineligible to get loan of any kind from any financial institution owned by the Government, be ineligible to any welfare scheme announced by the Government from time to time and forfeit his salary allowance. ”        We cannot agree for this provision in clause 8. That is why, I have stated the clause. I have the right to vote.  At the same time, I am having the right to not to vote.  Compulsory voting means that it is taking away the democratic right of a citizen of the country.  So, we cannot support the proposition of having compulsory voting in our country.
       How can we bring people to the electoral process or to the democratic political process?  We have to bring awareness among the people and in the electorate to participate in the electoral process.  I would like to make some suggestions. Shri Arjun Ram Meghwal has made some observations.
       Meghwal Ji, I would like to draw your attention to this Bill. As he has already stated, instead of penalizing the citizens who have not cast vote in the electoral process, give some incentives to those who have voted in the election.  How can we give an incentive?  We are having an electoral identity card.  Suppose at the time of casting the vote in the polling booth, the voter identity card may be renewed.  We are now going from pillar to post to get the life certificate for the pension. Life certificate has to be produced before the bank or before the authorities concerned for the other social welfare pensions.  So, let all the electoral identity cards be renewed in the electoral polling booth and definitely, that will be a life certificate.  Automatically, that will be an incentive as far as the citizen is concerned to go to the polling booth and to cast his vote.
       Now, he is having an option for voting or to abstain from voting. That option will be there for him. He can very well abstain. Suppose he is not interested in the candidates who have been fielded up by the various political parties, absolutely he is having a democratic right to say that he is not interested in the electoral process or he is abstaining from voting for all these candidates.

17.00 hrs        Why have all the people taken this identity card? It is not with any political interest. It is not for taking part in the electoral process. Even after getting the electoral identity card, why the people are not casting their votes? They have taken the electoral identity card to use it for so many other purposes like for getting ration card, for getting Aadhaar card or for getting the welfare pension. This electoral identity card is one of the material documents by which they will get the benefits from the Government, whether it is the Central Government or the State Government. So, they are not interested in the electoral process. So, let us give some incentive or take some persuasive efforts so as to bring the people to the polling booths so that more electoral participation takes place. This is not compulsory. This is in a way to make the people access the polling booths so that they can cast their votes. If they are not interested in any candidate, they can very well abstain from casting their votes to a particular candidate. That is the suggestion which I would like to make in the discussion on the Compulsory Voting Bill.

       I fully support Shri Gopal Shetty Ji and also Shri Ravi Kishan Ji. Shri Ravi Kishan Ji has already left. This is my second alternative suggestion which I would like to make. If you are making compulsory voting or if you are insisting on compulsory voting, then a Constitutional amendment should be required; that a Government can be formed only if a party or a coalition front is having not less than 51 per cent of the total votes cast. That amendment should also come. Suppose you are making compulsory voting or you are insisting on it through a Bill to have compulsory voting of the electorates, definitely, the political party or the coalition front, which is forming the Government, should have a minimum of 51 per cent of the total votes cast.

Mr. Chairman, Sir, you may be well aware and I also know that in the Eleventh Lok Sabha, Janata Dal, a party, was having only 34 MPs in this House. I was also present. Deve Gowda Ji was the Prime Minister of our country. That is the beauty of the Indian democracy.

डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): प्रेमचन्द्रन साहब, वह तो पार्टी थी । मेरे स्टेट झारखंड में एक निर्दलीय चीफ मिनिस्टर बन गया । अकेला, निर्दलीय,मधु कोड़ा । So, this is the beauty of democracy.

SHRI N. K. PREMACHANDRAN : I am saying that this is the beauty of our parliamentary democracy. Even a single party Member can become the Chief Minister of the State or Prime Minister of the country. I do not disagree with it. It is not because I am a lone Member from my party. But still even a single Member can speak like this. This is also the beauty and strength of our parliamentary democracy.

डॉ. निशिकांत दुबे :इसका मतलब यह है कि आप भी एक दिन प्रधान मंत्री बन सकते हैं ।

SHRI N. K. PREMACHANDRAN : You cannot rule out that chance also. So, my point is, most of the Governments are minority Governments. Even this Government is having 31 per cent of the total votes cast. If we examine, even when a Government is having two-thirds majority, a Government with a total of 51 per cent votes cast is very, very rare in our past experience.

       Another suggestion, which I would like to make, is regarding electoral reforms.  If you want to cure our electoral processes, definitely, electoral reforms are highly required. T.N. Seshan, the former Election Commissioner, who has recently died, made an observation at the time when he took the office of the Election Commission. What was his first observation? His first observation was that corruption begins from the date of filing nomination. So, we have to cure the defects in the electoral process. That is the theme or that is the main thing which is to be required. This Government is having an absolute majority. Even Bharatiya Janata Party is having a simple majority to rule the country, and its Government is there. Definitely, let this be the first or the prime agenda. Drastic structural electoral reforms are the need of the hour so as to strengthen and bring a healthier democratic system. So, I urge upon the Government to bring the electoral reforms.

       Sir, I also want to suggest for the State funding of elections. Why should a candidate have to suffer? Nowadays, it is very difficult for the people who are not rich or are from the common families to meet the electoral expenses. Earlier most of the big houses were supporting the MPs in the House. But today they are directly coming to the House on their own. That is a drastic change which we have now seen. Money is playing a big role, a very important and significant role in the electoral process. That role has to be checked for which State funding of elections is highly required.

       The other point that I want to raise is about the electronic voting system. When we seek for the compulsory voting system, many electronic experts, IT experts throughout the world are suggesting that there are many issues as far electronic voting is concerned. Even the developed countries have all come back to the manual voting. They have already left this practice of voting through electronic voting machines. Why do not India, the biggest democracy in the world, go back to the manual voting so as to have the credibility of the voting system in our country?

       At present, the people have apprehensions whether it is correct or not. They are not fully sure about it. A big cloud of suspicion is there. A number of representations have already been submitted before the Election Commission. There have been a number of allegations made in respect of electronic voting machines. We, the Opposition parties have met the hon. President of India to have manual voting instead of electronic voting in the last 17th Lok Sabha elections in our country. We have also represented before the Election Commission of India. Let us go back to the manual voting system as it is being done in the developed economies in the West.

       The last point that I want to raise before this House is regarding the voting right of Non-Resident Indians. The NRIs is a big community of our country. When we move a Bill for mandatory voting, we cannot ignore them. In my State of Kerala, the deposits from the NRI community is more than Rs.1 lakh crore per year. They are the backbone of Kerala economy. Likewise, it goes for Gujarat. It is true in terms of the most of the States. NRI community interests have to be protected. What is their civil right? Right to voting is their civil right. I fully agree that we have passed a law in this regard in the 16th Lok Sabha. But, unfortunately, that has not been carried so far. I also moved an amendment to have proxy voting at the time of consideration of the Bill. But, unfortunately, that has been rejected. I urge upon the Government to kindly consider to provide a pakka voting right to all the NRIs.

       Sir, they are building the Indian economy. They are backing the Indian economy. They are strengthening the Indian economy. They are outside the country but they still love India. They want to be the citizens of India and that is why they still love India and are coming back to India. So, the NRIs should definitely be given the right to vote so that more electoral participation could be possible so far as Indian democratic system is concerned.

       Therefore, Sir, I am not fully opposing the Bill. There are many good observations also in the Bill. At least, the Bill has given an opportunity to have a detailed threadbare discussion about the electoral process in the country. The penal provisions or even imprisonment in case they do not cast their vote will not hold good. A comprehensive legislation is required for this. I would suggest that let the Government think of having a comprehensive legislation on voting, on the entire electoral process and electoral reforms so that entire political democratic system of our country can be strengthened in a better way. That is the best way by which we can strengthen our democratic system.

       I hope that the Government will think in such a direction. Since you are having the absolute political majority to have such a drastic change in the country, if you are able to abrogate Article 370, if you are able to divide the State of Jammu & Kashmir into two Union Territories, definitely this is a welcome step on the part of the entire political electorate in the country. We would like to have our system to be rectified beyond any corruption. The electoral process shall not be governed by money and muscle power. The poor, the down-trodden working-class representatives should get an opportunity to come to Parliament and to Assemblies. Money should never be the criterion for this. Nowadays, money is controlling the entire election scenario. That has to be rectified only through the electoral reforms. I urge upon the Government for drastic structural reforms.

       With these worlds, I conclude. I once again appreciate the hon. Member for putting such an earnest effort to move this Bill for consideration. Thank you.

   

*m0 PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Sir, I shall be brief in my submission on the Compulsory Voting Bill, 2019. I appreciate the mind of the hon. Member. He wants to make democracy more representative. He wants that more people should participate in voting. For that, he has proposed both carrot and a big stick. He has proposed some punishments - which Mr. Premachandran mentioned - fine, two days’ imprisonment, forfeiture of ration-card and forfeiture of ten days’ salary for Government employees etc. He has also proposed some incentives like giving preference in jobs under the Central Government, giving preference in admission etc. The hon. Member has formulated the Bill with an intention. His intention is that democracy becomes more meaningful. While appreciating that, I still have to oppose the Bill because in democracy, there cannot be any element of coercion. As Mr. Premachandran rightly said, I have a right to vote and I have a right also not to vote. You know that one of the recent amendments made in the electoral process is inclusion of NOTA – none of the above – votes. I may go to vote and I may not vote for any of the candidates listed. I think, it is a good addition to democracy. So, democracy should be absolutely free and without any coercion, without any compulsion.

What is the solution? Mr. Premachandran proposed some incentives. I would say no to them. The solution is that we have to lead a campaign to increase the awareness of the people. Not only the political parties, the Election Commission, the Central Government and the State Governments should also campaign that people should come out and vote. In recent times, Election Commission has done a campaign to inspire people to vote, though it has not been so successful. In some States, polling is as high as 80 per cent and in some other States, polling falls below 50 per cent. It should be our intention that the maximum number of people vote.

       While opposing the Bill, I appreciate the mindset of the hon. Member. I have to mention only two to three things about election. First, we have a majority Government at the Centre. We have seen earlier Governments falling in two or three years. I think that the term of Parliament should be fixed for five years so that there is no incentive for anybody to break a party, to encourage defections. The Tenth Schedule or the anti-defection law was a good step in this direction. I think, if you make the life of the Parliament fixed, then there will be some Government at the Centre because permutations and combinations do take place. We have seen how in Maharashtra, two parties went together to the poll and after the poll, the two parties separated. Those who were in the opposition have joined with one of the parties and now, they trying to form a Government there. That is possible. …(Interruptions) Today or tomorrow, they will form the Government. It is a setback for the ruling party, but what to do? That is politics.

       The other thing I want to mention is that electronic voting machines should be done away with. The opposition parties have repeatedly represented that electronic voting machine is capable of being hacked. That is why, the advanced countries, like America and Germany, have gone back to the ballot process. I do not have faith in the electronic voting machines. They are capable of being manipulated, hacked, manoeuvred etc.   So, I think we should bring a Bill in Parliament for scrapping the electronic voting machine system. Shri Premachandran, as his final point, mentioned that elections can become meaningful only when we can do away with money and muscle power. We have done away with muscle power to a great extent. Introduction of Central Industrial Security Forces during Assembly and Parliamentary elections has removed the fear of booth capturing and forcible voting to a great extent, though not to the fullest extent. But to a great extent, elections have improved. Stories of booth capturing and rigging are less and less today, which is very good for the country.

       Shri Premachandran rightly pointed out that money power is a big problem in our elections. It seems to me some times that people from the middle class and poor class cannot contest elections at all. In some States, I hear, people are spending Rs. 10 crore or Rs. 20 crore and even up to Rs. 60 crore for winning a single Lok Sabha seat. In our State it does not happen. All the parties fight with less money, more or less within the Rs. 70 lakh limit prescribed for the Parliament elections.

       When Shri Jaitley was the Finance Minister he proposed the system of electoral bonds. He brought it during the Budget, in the Finance Bill.  Now, this electoral bond system has become a bone of contention. It is because, it seems in the first tranche of electoral bonds that were sold, which was about Rs. 220 crore, 95 per cent of the money went to the ruling party. This system of electoral bonds is not transparent. You do not know who is giving the money. You only know that some money has been given by some person and it has been deposited in the account of a party in whose name the bond is taken. There have been many complaints. The Reserve Bank earlier objected to this system of electoral bonds. The Election Commission also objected to this system of electoral bonds. But the Government still went through it.

       Four hon. Ministers are present here. I would urge the Government to please do away with these opaque and non-transparent electoral bonds. Common people do not participate in this. Today, I have seen a report which says that rich people love electoral bonds. More than 91 per cent donations were over Rs. 1 crore each. That means it is only the rich, the moneyed people, who want to curry favour with somebody, especially with the ruling party, are giving the money. That is why we have reached a point where we must realise that this electoral bond system is not working. It has set a bad precedent. It has continued to favour the ruling party.

       With these words, I want to thank Shri Sigriwal for having brought this Bill. We should discuss the electoral process in our country in an impartial manner. It is good that the discussion has come up due to his Bill. I would again say that democracy is for a free society. People should be free to vote or not to vote. They should be free to vote for any party or to vote for no party. That is their fundamental right and there should be no interference with that.

       With this, I end my speech. Thank you.

*m0 श्री भागीरथ चौधरी (अजमेर): सभापति महोदय, सदन में अनिवार्य मतदान के लिए जो प्राइवेट बिल आया है, उसके ऊपर आपने मुझे बोलने की इजाजत दी, इसके लिए आपका बहुत-बहुत आभार । वोट देना एक राष्ट्र धर्म के समान है । वोट राष्ट्र का एक कर्तव्य है । वोट देना अनिवार्य है और मतदान एक महादान है । इसके ऊपर अभी कई सांसदों ने विस्तार से कई बातें बताईं । मेरा तो यह मानना है कि जब तक मतदान शत-प्रतिशत नहीं होगा, अभी गुंडे-मवाली की बात चल रही थी, जम्मू-कश्मीर में 9 प्रतिशत मतदान होता है और वहां सांसद और विधायक चुनकर आ जाते  हैं । यह कहां का न्याय है?

मतदान अनिवार्य है । हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है और इस देश में मतदान सबसे बड़ी शक्ति है । कोई भी व्यक्ति पैसे उधार ले लेता है, उधार कोई दे देता है परंतु मत तो उसका मन होता है, तभी वह उसको देता है । मैं  कहूंगा कि बड़ी खुशी की बात है कि वर्ष 2014 में सिद्ध पुरुष हमारे माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी आए, उसके बाद मतदान के प्रति आम जनता में जागरूकता पैदा हुई है । उसका परिणाम निकला कि  गरीब,मजदूर, किसान का भी मतदान के प्रति रुझान बढ़ा है । परंतु दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि जो इस देश में अपने आपको बुद्धिजीवी वर्ग मानते हैं, उनका हर दृष्टि से प्रभाव है परंतु वोट देने जाते समय उनको शर्मिन्दगी महसूस होती है । इसीलिए गुंडे,मवाली कई इस तरह के जन-प्रतिनिधि जीतकर आ जाते हैं । मेरा उस बुद्धिजीवी वर्ग से भी निवेदन है, क्योंकि पूरी दुनिया में हमारे देश की संस्कृति जैसी किसी देश की संस्कृति नहीं है । आज से नहीं,बल्कि अनादिकाल से ही हमारी संस्कृति के बराबर कोई देश नहीं है । हमारे मां-बाप के प्रति, बड़ों के प्रति आदर भाव,छोटों के प्रति प्यार जैसी संस्कृति है, वह दुनिया में कहीं नहीं है । परंतु मैंने यह देखा है कि जो फॉरेन कंट्रीज हैं, उनकी सब बुराइयां हमने ग्रहण कर ली हैं । उनकी अच्छाइयां हम ग्रहण नहीं करना चाहते हैं । हिन्दुस्तान में हर व्यक्ति यह सोचता है कि मैं ही मेरे खानदान में अक्लमंद पैदा हुआ हूं । आने वाली सात पीढ़ी धूर्त पैदा होगी । इसलिए मुझे ही सम्पत्ति इकट्ठा करके जाना है ।

जिस दिन मतदान होता है,जो बुद्धिजीवी हैं, जो पढ़े-लिखे हैं, जब तक उनका मत प्रतिशत नहीं बढ़ेगा,तब तक सही मायने में हमारा देश प्रजातंत्र कहलाने का हक नहीं रखेगा । मैं आज के दिन यही कहना चाहूंगा कि मतदान का प्रतिशत बढ़ना चाहिए और यह भी कहा जाता है कि ‘भय बिन होत न प्रीति’इसलिए कोई न कोई ऐसा सिस्टम डेवलप करना पड़ेगा,जैसे हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी चाह रहे हैं कि सभी मतदान अवश्य करें ।

       हालांकि चुनाव आयोग काफी कुछ कोशिश कर रहा है,परंतु चुनाव आयोग के कर्मचारी या अधिकारी भी तो आखिर इंसान हैं । मैंने देखा है कि चार दिन पहले वोटर लिस्ट में नाम है और ज्यों ही मतदान के दिन हम वोटर लिस्ट को देखते हैं तो पन्ने के पन्ने गायब मिलते हैं । उससे जो मतदान प्रतिशत है, वह काफी गिर जाता है । उसके ऊपर भी हमें पूरी पैनी नज़र रखनी चाहिए ।

       दूसरे, जो सज़ायाफ्ता व्यक्ति है, वह चुनाव नहीं लड़ सकता है तो ऐसा भी प्रावधान होना चाहिए कि जो  गुंडे हैं, उनको भी वोट से कैसे वंचित किया जाए? इसके लिए भी कोई न कोई चिंतन या मनन होना चाहिए । वोट का अधिकार सबको मिलना चाहिए परंतु जिन्होंने कई मर्डर किये हुए हैं, यह देखा गया है कि जेलों के अंदर रहते हुए भी जीतते हैं । इसलिए इसके ऊपर भी चिंतन और मनन होना चाहिए क्योंकि हमारा देश एक बहुत बड़ा प्रजातंत्र है ।

       आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार एक वोट से गई । तब देश और दुनिया को पता लग गया कि मत का क्या महत्व होता है । इसलिए मत देना अनिवार्य है । इसके लिए जितना आप प्रोत्साहन दे सकें, उतना आप प्रोत्साहन दें । मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जो मत नहीं कर रहे हैं, उनके लिए कोई सजा का प्रावधान हो । परंतु जो मत दे रहे हैं, उनको तो प्रोत्साहन दे   दें । उनको कुछ न कुछ इंसेंटिव दें । विधेयक में इस तरह का कुछ प्रावधान लाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा मत प्रतिशत बढ़ सके ।

 

माननीय सभापति :माननीय सदस्य,कृपया एक मिनट के लिए बैठ जाइए ।

       I am to inform the hon. Members that four hours have already been taken for this Bill thus almost exhausting the time allotted for its consideration. As there are eight more Members to take part in the consideration of this Bill, the House has to extend time for further consideration of this Bill. If the House agrees, the time for consideration of this Bill may be extended by one hour.

संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल):  सभापति महोदय,यह बहुत महत्वपूर्ण बहस चल रही है,इसलिए समय बढ़ाना उचित रहेगा ।

माननीय सभापति:माननीय सदस्य,इसका समय एक घंटा बढ़ाया जाता है ।

…(व्यवधान)

माननीय सभापति:अभी हम समय बढ़ाते हैं । बाद में हाउस जैसा कहेगा, वैसा कर लेंगे । अभी एक घंटा समय बढ़ाते हैं । आप बोलिए ।

श्री भागीरथ चौधरी : सभापति महोदय, जिसने गरीबी नहीं देखी है, उसको क्या पता है कि गरीबी क्या चीज होती है । हमारे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री, नरेन्द्र भाई मोदी जी ने,मैं इस पवित्र सदन में कहता हूं कि वह भाग्यशाली व्यक्ति होता है, जिसने ऐसी गरीबी देखी हुई है । वह चाहे मुझे रोटी नसीब हो, मुझे रोटी मिलनी चाहिए और उसको रोटी नसीब नहीं हो, इस तरह की गरीबी देखा हुआ व्यक्ति आगे पहुंचता है, तो वह महान होता है और उसके विचार भी महान होते हैं । नरेन्द्र भाई मोदी जी   का सपना है कि आज इस देश में 130 करोड़ जनता है । लगभग यहां 90 करोड़ वोटर्स हैं । यहां ज्यादा से ज्यादा प्रतिशत में मतदान हो,ताकि जो जनप्रतिनिधि चुन कर आएं, वे आम जनता के विचारों से, उनकी भावनाओं से चुन कर आएं । बागपत से माननीय सांसद, सतपाल सिंह जी चुन कर आए हैं, वह कह रहे थे कि वोट देना कोई जरूरी नहीं है । जब नोटा का  प्रावधान कर दिया तो वोट देने जाना जरूरी है । यह राष्ट्र धर्म है, जो वोट के प्रति उदासीनता रखता है, जो वोट देने ही नहीं जाता है, वह यह सोचता है किहमारा देश विकसित राष्ट्र बने,तो यह कैसे बनेगा?जिसमें इतनी जागृति नहीं है,वोट देने की फुर्सत नहीं है,वोट देने की उसकी इच्छा प्रबल नहीं है, वह चाहता है कि देश आगे बढ़े तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?हम सारी सुविधाएं चाह रहे हैं, हमें ये तभी मिलेंगी,जब आम जनों में वोट देने के प्रति उमंग, उत्साह हो । आज हमें खुशी है कि वर्ष 2014 में 282 सीटें आईं और अब की बार 303 सीटें आईं,यह युवा वर्ग की चेतना है । युवा वर्ग जगा है और उनमें वोट   देने के प्रति प्रबल इच्छा है,उसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी को 303 सीटें आई हैं ।

       सभापति महोदय,मेरा यह मानना है कि कुछ ऐसा होना चाहिए । कश्मीर में 9 प्रतिशत मतदान हुआ, लोग सांसद और विधायक बन गए,यह कहां का न्याय है? चुनाव आयोग को इसके ऊपर कोई न कोई फैसला लाना चाहिए । इसके ऊपर भी सदन में विचार होना चाहिए कि 9 प्रतिशत मतदान हो और वहां से जन प्रतिनिधि चुन कर चले जाएं ।

       अभी हमारे राजस्थान में नगरपालिका के चुनाव था । हमारे लोक सभा क्षेत्र में नसीराबाद आता है । वहां एक वार्ड में 18 वोट्स थें । मैं वहां गया और कहा कि सभी 18 वोट्स पड़ने चाहिए । एक वोट दुबई में था । मैंने कहा कि कुछ भी हो जाए,दुबई वाला वोट आना चाहिए । आप उसको फोन करो । यदि इस देश के प्रति उसकी प्रबल भावना है, तो वह जरूर आएगा । मुझे यह बताते हुए खुशी है कि वह दुबई से वोट देने आया । मुझे बताते हुए यह भी खुशी है कि वे सभी 18 वोट्स भारतीय जनता पार्टी को मिले । हमारा वहां का पार्षद जीता । मैं इस देश के बुद्धिजीवी वर्ग को नमन करता हूं । जब शत-प्रशित बुद्धिजीवी वर्ग मतदान करने लग जाएगा, तो मैं शर्तिया कह रहा हूं कि चाहे इस सदन में हो,प्रदेश की विधान सभा में हो, सरपंच हो या वार्ड मेम्बर हो, जो जन प्रतिनिधि जीतेगा, वह अच्छा होगा । वह लुटेरा नहीं होगा । सभापति महोदय, इसके लिए कोई ऐसा प्रावधान करें । मैं यह तो नहीं कहूँगा कि किसी को पनिशमेंट दें, लेकिन कोई स्कीम लाई जाए । अभी मंत्री जी आ गये हैं । पहले राजा का बेटा राजा बनकर पेट से ही पैदा होता था,लेकिन अब तो मतपेटी से राजा पैदा होता है । इसलिए मत बहुत ही कीमती है । इसका कोई मूल्य नहीं है ।

       मेरा निवेदन है कि चाहे मतदान धीरे-धीरे करें, लेकिन यह अनिवार्य कैसे हो, इसके ऊपर हम सभी को चिन्तन और मनन करना चाहिए । जब शत-प्रतिशत मतदान होने लग जाएगा, तो मैं यह कह सकता हूँ कि यह देश एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा । श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी का यही सपना है कि शत-प्रतिशत मतदान हो ।

       सभापति जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपका आभार ।

 

*m0 कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल (हमीरपुर): माननीय सभापति महोदय, the Compulsory Voting Bill, 2019, जिसे श्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल जी लेकर आए हैं,मैं इसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ ।

       अभी बहुत ही विद्वान माननीय सदस्यों द्वारा बड़े विस्तार से विचार रखे गए,मैं समझता हूँ कि हर बात अनिवार्य है । कुछ लोगों ने इसके समर्थन में बोला और कुछ लोगों ने कहा कि इसे अनिवार्य करना जरूरी नहीं है । अनेक प्रकार की बातें हुईं । लेकिन, मैं अपनी बात इस बात से शुरू करना चाहता हूँ कि जब इतना महत्त्वपूर्ण बिल आया है, तो सर्वप्रथम मेरा यह मत है कि जो नोटा शुरू किया गया है, इसको समाप्त किया जाना चाहिए । व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि नोटा केवल भ्रमित करने का एक साधन है । यह मेरी भावना है कि लोग मतदान स्थल तक जाते हैं और उनका वोट किसी के काम नहीं आता है । इससे लोग व्यंग्य में और अजीब प्रकार की शैली में बातें करते हैं कि हम वोट डालेंगे,तो नोटा का बटन दबाएंगे । मेरा कहने का मतलब यह है कि इससे जो मतदान करने वाले होते हैं, वे भी हतोत्साहित हो जाते हैं ।

       इस पर मैं कोई ज्यादा बात नहीं कहना चाहता हूँ, लेकिन मैं केवल पाँच मिनट में अपनी बात पूरी कर लूँगा ।

       जब देश के नागरिक एक पक्ष में होकर एक साथ चलकर राष्ट्र के नाम पर मतदान करते हैं, तो देश में एक मजबूत सरकार बनती है । जब एक मजबूत सरकार बनती है, तो वह मतदान के कारण बनती है । जब मजबूत सरकार बनती है, तो एक ऐसा प्रधान मंत्री चुनती है कि जब वह इस संसद भवन में प्रवेश करता है, तो इस मन्दिर में मत्था टेककर प्रवेश करता है ।

       मैं यह मानता हूँ, मैं अपनी पार्टी का एक छोटा-सा कार्यकर्ता हूँ । जब मैं विधान सभा का चुनाव लड़ता था, मुझे एक-एक वोट के वैल्यू की जानकारी है । जब मैं 2014 में यहाँ चुनकर आया,तो क्षेत्र की जनता ने राष्ट्र के नाम पर मोदी जी को प्रधान मंत्री बनाने के नाम पर रिकॉर्ड वोटों से मतदान करके मुझे यहाँ जिताकर भेजा । मैं समझता हूँ कि मतदान इतनी ताकत देता है कि उसके आधार पर कोई जनप्रतिनिधि जब यहाँ चुनकर आता है, तो अपनी जिम्मेवारी ज्यादा समझता है । वह ऐसा मानता है कि लोगों ने ताकत के साथ मतदान किया है । जब उस पार्टी का प्रधान मंत्री इस मन्दिर में अपना मत्था टेकता है, तो उससे भी व्यक्ति को एक सम्बल मिलता है कि मुझे ईमानदारी से काम करना है,सुचिता से काम करना है और निष्पक्ष होकर काम करना है ।

       देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए देश के लोगों ने उसी ताकत के साथ मतदान किया । एक ऐसा प्रधान मंत्री चुना, जिसे अपने घर की चिन्ता नहीं है । लेकिन,उन्होंने देश के छह करोड़ बेघर लोगों के घर बनाने के लिए, जब सरकार चलती है, तो ऐसे छह करोड़ लोगों के घर बनने का काम होता है ।

       हमारी माताएँ और बहनें,जिनको जब शौचालय की आवश्यकता पड़ती थी, वे कष्ट में जीती थीं,तो किसी भी प्रधान मंत्री ने इसके लिए नहीं सोचा । अगर देश के बारह करोड़ लोगों को शौचालय मिला है,तो मैं समझता हूँ कि जिन लोगों ने सोच-समझकर राष्ट्र के नाम पर मतदान किया,निष्पक्षता से मतदान किया,जिसके कारण एक मजबूत सरकार बनी,यह उसके कारण हुआ है ।

       वर्तमान में अनेक विषय हैं, मैं उन पर नहीं जाना चाहता हूँ । हो सकता है कि हमारे साथी कहें कि ये योजनाएँ बताने लगे । मैं अनिवार्य मतदान इसलिए कह रहा हूँ,क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी-अपनी आवश्यकताएँ हैं,अपना मन है,अपना भाव है,अपनी पीड़ा और राष्ट्र के प्रति अपना-अपना चिन्तन है । हर व्यक्ति सोचता है कि मैं राष्ट्र को ऐसा देखना चाहता हूँ । कुछ लोग अपने राष्ट्र को दुनिया का सिरमौर देखना चाहते हैं । जब धारा 370 खत्म हुई, तो इस मतदान के कारण ही खत्म हुई । जब धारा 370 को समाप्त किया जाता है, तो दुनिया में जितने भारतीय रहते हैं,उनको लगता है कि हमारे यहाँ जो चूक हुई है,उसको ठीक करने का काम अगर किसी सरकार ने किया है, तो इस सरकार ने किया है । वर्ष 2014 के बाद वर्ष 2019 में भी देश के मतदाताओं ने बड़ी ताकत के साथ यहाँ पर यह सरकार बनाकर भेजी, जिसके कारण देश में 370 जैसी धारा खत्म हुई है । अगर इतना मतदान लोग न करते, लोग पक्षपात करके मतदान करते तो ऐसा न  होता । मैं एक बात और जोड़ना चाहता हूं कि कुछ लोग जाति के आधार पर मतदान करते हैं और जाति के आधार पर पक्षपातपूर्ण काम करने वाले लोगों के दबाव में, उनके प्रलोभन में, जो मतदान करते हैं, उन पर भी कोई न कोई अंकुश लगाने की आवश्यकता है । देश के बहुत से सुदूरवर्ती ऐसे इलाके हैं, जहां हमारे निर्धन भाई-बंधु रहते हैं । हो सकता है कि कुछ आवश्यकताओं के कारण कभी उनका मन बदल जाता हो,यह तो मैं मान सकता हूं, लेकिन मेरा मानना है कि जो जनप्रतिनिधि केवल मतदान के समय देश के मतदाताओं को प्रभावित करने का काम करते हैं,वह इस पवित्र संसद में आने के हकदार नहीं हैं । मैं समझता हूं कि उत्तर प्रदेश की किसी भी विधान सभा में जाने के वे हकदार नहीं हैं ।

महोदय, आज सीग्रीवाल जी यह बिल लेकर आए हैं कि मतदान आवश्यक होना चाहिए ।   हमारे पूर्व के वक्ताओं में हमारे श्री सत्यपाल जी बोल रहे थे कि कुछ गुंडे-माफिया होते हैं, जिनके दबाव में भी मतदान होता है । माफियाओं द्वारा भी कई बार मतदान को प्रभावित करने का काम किया जाता है । मैं इस बात के लिए निर्वाचन आयोग का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि विगत् काफी समय से, जब से मतदाताओं की फोटो लगने लगी और आधार कार्ड से उसका लिंकेज हो गया,फर्जी वोटिंग और माफियाओं द्वारा जो बूथ कैप्चरिंग की जाती थी, उस पर रोक लगी है और निष्पक्ष मतदान हो रहा है । इसी निष्पक्ष मतदान की बदौलत आज देश में अच्छा काम हो रहा है,अच्छी सरकारें आ रही हैं और ठीक प्रकार से सरकारें काम कर रही हैं ।

महोदय, मेरा आपके माध्यम से एक और सुझाव है कि देश में जब भी कुछ लोग भेदभाव और जातीयता के आधार पर काम करते हैं और भोले-भाले मतदाता उनकी बातों में आकर उनको चुनकर उन्हें जनप्रतिनिधि बना देते हैं और उनकी सरकार आ जाती है, तब ऐसे लोग भेदभाव को बढ़ावा देने का काम करते हैं । मैं उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र का रहने वाला हूं । उत्तर प्रदेश में पूर्व में कुछ ऐसे राजनीतिक दल रहे, जिन्होंने जातीयता के बीज बोकर भेदभाव पैदा करके अपनी सरकार बनाने का काम किया और लोगों का मतदान से विश्वास उठ गया । उन्होंने गुंडों, माफियाओं को बढ़ावा दिया और अनेक प्रकार के जो गलत काम होते थे, उनको करने वाले लोगों को बढ़ावा मिला । बूथों पर निष्पक्षता से मतदान नहीं हो पाया, जिसके कारण विपरीत परिणाम आते रहे । जब से निष्पक्ष मतदान शुरू हुआ है, देश में एक अलग तरह से काम हो रहा है । अभी कुछ समय पहले कुंभ मेला हुआ । मैं इस मतदान को कुंभ से भी जोड़ने की बात करता हूं । हमारे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जब कुंभ हुआ और जब देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी वहां पहुंचे तो उस कुंभ में जितने स्वच्छता कर्मी थे, उनको देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई कि इतना साफ-सुथरा स्वच्छ कुंभ हुआ है । इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने उन सफाई कर्मी भाई-बहनों के पैर धोने का काम किया । मेरे संसदीय क्षेत्र के कुछ सफाई कर्मियों के माननीय प्रधान मंत्री जी ने पैर धोए । मैं बताना चाहता हूं कि पिछली बार जब वहां पर उप चुनाव हुए,तो चुनाव के बाद गांव के लोगों,जिनमें जातीयता की बात होती थी,उन्होंने स्वप्रेरणा से एकत्र होकर गांव-गांव जाकर मीटिंग की कि जिसको चाहे उसको वोट करना, लेकिन आप लोग कुंभ से गंगाजल लेकर आए थे, उसे लेकर कम से कम यह शपथ अवश्य लीजिए कि हम कभी जातियों के बीच अंतर नहीं महसूस करेंगे । हम अगर मतदान करेंगे तो निष्पक्षता के आधार पर करेंगे ।

       महोदय, इस कारण से आस-पास के दो-तीन सौ गांवों में जातीयता के कारण से जो दीवार थी, उसको पाटने का काम हुआ । मैं समझता हूं कि मतदान के माध्यम से ही देश को सही दिशा मिल सकती है । जनप्रतिनिधियों के बारे में अनेक प्रकार की बातें होती हैं । कुछ प्रशंसक होते हैं,कुछ आलोचक होते हैं । अलग-अलग विचारधाराओं के लोग होते हैं । अलग-अलग प्रकार की बातें करते हैं और यह प्रजातंत्र की खूबसूरती भी है, लेकिन जनता सब-कुछ जानती है । देश का एक-एक मतदाता एक-एक चीज जानता है कि कौन प्रतिनिधि कैसे काम करेगा,कौन सी सरकार कैसे काम करेगी,कौन सा मुख्य मंत्री या प्रधान मंत्री कैसे काम करेगा? उसी का परिणाम होता है कि जब भी कोई सरकार अच्छा काम करती है तो देश का मतदाता उत्साह के साथ मतदान करना चाहता है । जो भी कम उम्र के मतदाता हैं, वे जब पहली बार मतदान करते हैं तो उनमें बड़ा उत्साह होता है कि हमें मतदान के लिए जाना है । यह बहुत महत्वपूर्ण चीज है । अभी हम लोगों को वर्ष 2019 के इलेक्शन में  कुछ नौजवान लड़के मिले, जो पहली बार मतदान कर रहे थे ।  वहां एक ने मुझ से बोला कि मैं अपना एग्जाम छोड़कर आया हूं । हम लोग भले ही जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेवारी को समझते हैं कि कैरियर का सवाल है, आप अगली बार भी मतदान कर सकते थे, लेकिन उसने बोला कि सांसद जी कम से कम आप यह बात मत बोलिए । आपको बोलने का अधिकार नहीं है । हमारी परीक्षा है और उसके लिए हम दोबारा रिक्वैस्ट कर लेंगे, कुछ भी कर लेंगे, लेकिन पांच साल में एक बार यह पर्व आता है और हम मतदान जरूर करेंगे,क्योंकि हमें पहली बार मौका मिला है । जब देश की युवा पीढ़ी इतने भाव से चुनावों को ले रही है तो मैं समझता हूं कि मतदान निश्चित रूप से अनिवार्य होना चाहिए । हमारे यहां लोगों को जो अपेक्षाएं हैं और जब ताकत के साथ लोग निकलते हैं,एकजुट होकर के,गांव में जो छोटे-छोटे पोलिंग स्टेशंस होते हैं,उन पर आठ-दस गांव, पूरवे और मजरे के लोग जब मतदान करने जाते हैं, उनमें कई लोग बुजुर्ग और वयोवृद्ध होते हैं, उनको हमारे नौजवान लोग बेलगाड़ी,ट्रैक्टर, बाइक वगैरह से या अपने संसाधनों से और अपने खर्च पर ले जाते हैं तो वे यह सिद्ध करते हैं कि हम देश के एक जिम्मेदार नागरिक हैं । इस मतदान में जिस प्रकार का ओपिनियन आया है और उससे फिर देश में सरकार बनी है । जब हमारी युवा पीढ़ी इतने भाव के साथ काम कर रही है, मैं समझता हूं कि मतदान को अनिवार्य करने से कई चीजें बहुत अच्छी होंगी ।

       सभापति महोदय,आप वरिष्ठ हैं और लम्बे समय से संसद में हैं । आप भी इस बात को भली प्रकार से जानते हैं कि कई गांवों में जब हम लोग जाते हैं और जब पार्टी लाइन की बात होती है और दूसरे पक्ष के लोग होते हैं,वे बात करते हैं कि हमारे यहां यह कठिनाई है या वह कठिनाई है तो गांव के लोग ही उनको टोक देते हैं कि तुम तो मत बोलो कम से कम,तुम तो मतदान भी नहीं करते हो और मतदान के दिन यहां आते भी नहीं हो । आज अगर आपको प्रतिनिधि यहां मिल गए हैं तो आपको तो उनको बोलने का अधिकार नहीं है । आज गांवों में यह भी जागरुकता है और लोग इस बात को बोलते हैं । आज सरकार की किसी भी नीति के लिए कोई व्यक्ति मानता है तो बोलता है कि हमने मतदान किया है और हमने अच्छा काम किया है । हमने सरकार चुनी है और सरकार ने जो निर्णय लिए हैं, उनका लाभ आज धीरे-धीरे हर प्रकार से नीचे तक पहुंच रहा है ।

महोदय, अनिवार्य मतदान की बात आज हो रही है । मैंने कहा है कि नोटा को समाप्त किया जाना चाहिए, ऐसा मेरा सुझाव है, बाकी आगे सोचा जाएगा । हमारी सेना और अर्द्धसैनिक बल के लोग हैं,हमारे अप्रवासी भारतीय हैं, हमारे स्टूडेंट्स जो बाहर पढ़ रहे हैं, उन सभी के मतदान का सरकार प्रबंध करती है,इसको भी बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि हमारे देश के जिम्मेदार नागरिक और अपनी ड्यूटी के पाबंद लोगों का भी मन करता है कि वह मतदान करें । फौज और इलेक्शन ड्यूटी के लोग तो मतदान करते हैं । लेकिन कुछ लोग अस्पतालों में एडमिट होते हैं । बहुत से सीनियर लोग होते हैं,उनका मन होता है । मतदान के समय किसी मेडिकल कॉलेज में एडमिट होते हैं तो उनको बड़ी चिंता होती है । लोग फोन करते हैं और बोलते हैं । कई बार लोग मतदान नहीं कर पाते हैं तो उम्मीदवारों को फोन करते हैं कि हम मतदान नहीं कर पा रहे हैं,लेकिन हमारा  आशीर्वाद आपके साथ है और हम आपकी विचारधारा के साथ हैं । उनको भी कुछ ऐसा अधिकार प्राप्त होना चाहिए कि मेडिकल कॉलेज में अगर हमारे वयोवृद्ध लोग बीमार हैं या उनकी देखरेख करने वाले तीमारदार लोग हैं, उनको भी मतदान करने का अवसर मिल सके । हमारे श्रमिक लोग हैं, जिनको घर के भरण-पोषण के लिए बाहर काम करना पड़ता है । बहुत से विद्यार्थी बाहर हैं । हमारे बहुत से ड्राइवर्स हैं और जब मतदान होता है तो हमारे यहां यातायात और आवागमन के साधन में लगे होते हैं । इनकी संख्या छोटी नहीं है,मेरा मानना है कि 50 लाख से अधिक की इनकी आबादी है । जब मतदान होता है तो उससे कई बार वे वंचित रह जाते हैं । हमारे गार्ड्स हैं, जो बैंक या एटीएम में लगे हुए हैं । वे ड्यूटी नहीं छोड़ सकते हैं, उनको भी मतदान का अवसर मिलना चाहिए । बहुत से होटल और रेस्टोरेंट्स में जो कुक और वेटर्स होते हैं, उनको भी अधिकार मिलना चाहिए । इन बातों को गम्भीरता से लेकर कुछ इस प्रकार का प्रयोजन करना चाहिए ताकि जो लोग मतदान करना चाहते हैं, अभी मेरे से पूर्व के वक्ता बता रहे थे कि दुबई से आकर भी लोगों ने वोट दिए हैं । जो लोग स्वप्रेरणा से अपने खर्च पर मतदान करने आते हैं,निश्चित रूप से वे लोग धन्य हैं और देश के ऐसे एक-एक नागरिक को प्रोत्साहित करना चाहिए । ऐसे लोगों को कुछ न कुछ इंसेंटिव मिलना चाहिए । गांव में ब्लॉकवाइज़ एक सूची होनी चाहिए कि जिस गांव के लोगों ने सर्वाधिक प्रतिशत में मतदान किया है, उस गांव में कोई भी योजना पहले आएगी । यह सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास”वाली सरकार है,किसी से कोई भेदभाव होने वाला नहीं है । लेकिन कोई भी चीज अगर कहीं पहुंचनी है तो कम से कम एक कम्पीटिशन की भावना पैदा हो कि इस गांव ने 80 परसेंट मतदान किया था और उस गांव ने 60 परसेंट मतदान किया था । 80 परसेंट मतदान करने वाला इस सुविधा से पहले संतृप्त हो गया और 60 परसेंट वाले का नाम बाद में आएगा तो मैं समझता हूं कि जब कम्पीटिशन का भाव पैदा होगा तो लोग इस बात को लेकर आगे बढ़ेंगे । मैं समझता हूं कि इससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी । जैसे आज हमारे विद्यार्थी,आप देखते हैं कि इतना कंपटीशन है, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 99 पर्सेंट मार्क्स लेने के बाद, बहुत प्रतिभाशाली और मेधावी छात्र,जिनका किसी भी कारण से सिलेक्शन नहीं हो पाता है,लेकिन वे बड़े प्रतिभाशाली लोग होते हैं । मैं समझता हॅूं कि मतदान के लिए यह एक-एक व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है ।

       सभापति महोदय,समय कम है और अभी अनेकों वक्ता बोलने वाले हैं । मैं ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हॅूं । इस विषय पर बोलने के लिए हमारे पूर्व के सभी विद्वान वक्ताओं ने अपने पूरे विषय  रखे हैं,मैं यही बात कह कर अपनी बात को समाप्त करता हॅूं कि जब मतदाता स्वप्रेरणा से जा कर मतदान करता है और बहुत से लोगों की, जनप्रतिनिधियों की सेवाएं भी नहीं होती हैं, वह उनको जानता भी नहीं है, जब लोक सभा में बहुत बड़े क्षेत्र होते हैं, रिमोट एरिया के रहने वाले लोग होते हैं, उनके पास कई जगह सुविधाएं नहीं होती थीं,अब तो टेलिविजन पहुंच गया है,लोगों को जानते हैं, पहले का जमाना ऐसा होता था कि लोग गांवों में संसद सदस्य को जान भी नहीं पाते थे ।

महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि जितने भी लोग मतदान करते हैं उन मतदाताओं को कुछ सुविधा मिल सके और उनको प्रोत्साहन मिल सके । गांवों की सूची बने और ऐसे गांवों के लोगों को सम्मानित किया जाए । हर ब्लॉक में जो हाइएस्ट वोटिंग पर्सेंटेज वाले गांव हों ।

17.46 hrs                       (Hon. Speaker in the Chair) अध्यक्ष महोदय, उन हाइएस्ट वोटिंग पर्सेंटेज वाले गांवों के लिए, सरकारों को कुछ न कुछ, चुनाव आयोग से लिस्ट ले कर, उनको एक न एक कुछ ऐसी सौगात जरूर देनी चाहिए, उनके यहां कोई एक ऐसा सैंटर,ऐसा कोई विद्यालय,ऐसा अस्पताल मिले, ताकि पूरे ब्लॉक को लगे कि अगर इतना मतदान हमने किया होता तो आज यह सुविधा हमारे गांव में होती । ये प्रेरणा सब लोग लेंगे तो अच्छा होगा । मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हॅूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया ।

       धन्यवाद ।

श्री अर्जुन राम मेघवाल :पुष्पेन्द्र जी, आप इसको थोड़ा और इलैबरेट कर के लिख कर दे देना । आपका ही सुझाव अच्छा है । यह सजेशन पॉज़िटिव साइड पर है ।

माननीय अध्यक्ष:माननीय वरिष्ठ एडवोकेट श्री पी.पी. चौधरी जी ।

 

श्री पी. पी. चौधरी (पाली): अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्य ने जो कम्पलसरी वोटिंग बिल पेश किया है,उसको अगर नट शैल में देखा जाए तो खास कर तीन बातें उभर कर आती हैं । Firstly, this Bill requires every elector to vote compulsorily in elections with certain exceptions जैसे बीमार है या कोई अन्य कारण हो गया है । Secondly, it requires the Election Commission to ensure protection and safety of voters and to compile a list of eligible voters who have not cast their votes. Thirdly, the Bill also provides for penal provisions in case of not casting vote and incentives to those, who cast their votes. अगर इसको देखा जाए तो इसमें मिक्स बात है । मैं कहना चाहूंगा कम्पलसरी वोटिंग भारत के संविधान के तहत हो नहीं सकती है । लेकिन इसमें जो सजेशंस आ रहे हैं, वे इलैक्शन कमीशन के लिए भी काम के साबित होंगे । इसमें इलैक्शन रिफॉर्म्स के लिए बहुत अहम मुद्दे सामने आए हैं और भी आगे आएंगे,इसमें और भी वक्ता बताएंगे । जब भारत का संविधान सन् 1950 में लागू हुआ तो एक लोकतंत्र के हिसाब से हम देखते हैं कि डैमोक्रेसी का जो मतलब होता है, for the people, by the people and of the people कुल मिला कर यह है कि जो पीपल की विल है, वह अल्टीमेट है । अगर भारत के संविधान को पूरा का पूरा देखा जाए तो चाहे फंडामेंटल राइट्स हों, चाहे फंडामेंटल ड्यूटीज़ हों,तो जो Will of the people हैं, वो सुप्रीम है और विल ऑफ दी पीपल को हम कम्पलसरी नहीं कर सकते हैं । तो इस तरह की कम्पलसरी वोटिंग के लिए कई तरह के चैलेंज सामने आ सकते हैं । जब भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ और हमारा पूरा का पूरा सिस्टम लोकतंत्र का सिस्टम है,उसमें कहीं भी यह बात नहीं है कि राइट टू वोट जो है, वह संवैधानिक अधिकार है । राइट टू वोट, जो भारत के संविधान के तहत और हमारे इलैक्शन एक्ट के तहत, रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के तहत जो राइट टू वोट है, वह स्टेट्यूटरी राइट है । लेकिन अगर देखा जाए तो फंडामेंटल राइट के साथ-साथ कुछ फंडामेंटल ड्यूटीज़ भी हैं । फंडामेंटल ड्यूटीज़ हमारी ड्यूटी बनती है कि एक देश का लोकतंत्र कैसे मज़बूत हो । इस वजह से हर वोटर के लिए यह होना चाहिए कि कम से कम वह वोट डालने के लिए जाए,क्योंकि भारत के संविधान में रानी हो या मेहतरानी हो, सभी को वोट का अधिकार दिया गया है और इस वोट के अधिकार को उपयोग में लेना चाहिए ।

माननीय अध्यक्ष :आपने क्या बोला,दोबारा रिपीट कीजिए ।

श्री पी. पी. चौधरी : भारत के संविधान के तहत,लोकतंत्र के स्पिरिट और ऑब्जेक्टिव के तहत और हमारे रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के तहत अगर पूरा देखा जाए तो चाहे रानी हो या मेहतरानी हो, सब को वोट का अधिकार है ।…(व्यवधान)

श्री अर्जुन राम मेघवाल:चौधरी साहब,जब कॉन्स्टिट्यूएंट असेम्बली में डिबेट आई थी तो किसी ने कहा कि एक आदमी को यहां एक वोट का अधिकार मत दो । सब को बराबर मत दो । उसमें यह आया था कि जैसे कोई सेठ है, वह एक वोट दे तो उसका एक हजार गिना जाए । कोई सर की उपाधि वाला है । तब डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर साहब का यह कहना था कि एक आदमी को एक ही वोट देने का अधिकार होगा । इक्वल वैल्यू होगी । ‘चाहे रानी हो, चाहे मेहतरानी हो ।’यह उनका क्वोट है ।

श्री पी. पी. चौधरी : मैं उस पॉइंट पर आ रहा हूँ । हमारे जो संविधान निर्माता हैं, बी आर अम्बेडकर साहब, उन्होंने इस बात को लेकर जब कॉन्स्टिट्यूएंट असेम्बली में इस बात पर बहस चली,क्योंकि भारत में एक अपरिपक्व डेमोक्रेसी है । वर्ष 1947 की बात है कि इस तरह का प्रावधान रखा जाए या नहीं रखा जाए । हमारे जो विजनरी थे, संविधान के निर्माता,उनके दिमाग में यह बात थी, क्योंकि वोट के राइट को हम एक ह्‌यूमन राइट कह सकते हैं । ह्‌यूमन राइट में हम यह नहीं कह सकते कि किसी का राइट ज्यादा हो और किसी का कम हो । आज वोट का जो राइट है, हम देखते हैं कि जिस हिसाब से परसेंटेज ऑफ पोलिंग जो है,आज की तारीख में हम देखते हैं कि इलैक्शन कमीशन चाहे विज्ञापन के जरिये, चाहे अवेयरनैस के जरिये,चाहे कॉलेज हो,चाहे स्कूल हो, 25 जनवरी को पूरा का पूरा अवेयरनैस कार्यक्रम करता है । उसकी वजह से निश्चित रूप से वोटिंग परसेंटेज जो इंक्रीज हुई है, उसमें फर्क पड़ा है । इसके साथ-साथ मैं इस बात के लिए भी धन्यवाद दूंगा कि हमारे जो जनप्रतिनिधि हैं, हम देखते हैं कि जो पोलिंग परसेंटेज होती है, चाहे पार्षद का चुनाव हो, चाहे लोएस्ट लेवल पर ग्राम पंचायत में सरपंच का चुनाव हो, वहां पर बॉटम लेवल की जो परसेंटेज है, वह ज्यादा होती है । जो लोक सभा का परसेंटेज है, अगर हम देखें कि चाहे पंचायत लेवल पर हो, चाहे म्यूनिसिपल लेवल पर हो, परसेंटेज ज्यादा होगी । स्टेट लेवल पर उससे थोड़ी कम होगी, लेकिन लोक सभा के लेवल पर देखते हैं तो परसेंटेज कम आती है, क्योंकि इसमें जो पब्लिक रिप्रजेंटेटिव्स हैं, उनका इन्वॉल्वमेंट जो है, उनका वोटर्स के लिए जो परसुएशन है,वह बहुत जबर्दस्त होता है । अब सवाल यह आता है कि इस परसुएशन की वजह से पोलिंग परसेंटेज इनक्रीज होकर,हम कहीं देखते हैं, कहीं-कहीं अवेयरनैस इतना जबर्दस्त है कि 95 परसेंट पोलिंग होती है,कहीं किसी बूथ पर 99 परसेंट पोलिंग होती है । लेकिन कहीं किसी बूथ पर 30 परसेंट होती है । जो यह गैप है, हम उस गैप को कैसे भरें,क्योंकि इसमें इलैक्शन कमीशन का भी रोल होगा । हम इसमें रिफॉर्म किस तरह लेकर आएं,जिससे हमारी पोलिंग परसेंटेज इंक्रीज हो । एक हेल्दी डेमोक्रेसी के लिए, हेल्दी लोकतंत्र के लिए पोलिंग परसेंटेज का इनक्रीज होना बहुत जरूरी है ।

जिस हिसाब से हम देखते हैं कि वर्ष 1951 में जैसे एवरैज पोलिंग परसेंटेज 45 परसेंट थी,लेकिन वह बढ़ते-बढ़ते ज्यों-ज्यों अवेयरनैस आई, एजुकेशन बढ़ी, लिटरेसी बढ़ी, वह परसेंटेज 67 परसेंट हुई । लेकिन अभी भी जो 67 परसेंट है, वह काफी नहीं है । और भी ज्यादा होना चाहिए,क्योंकि अगर कोई वोटिंग नहीं करता है, रिफॉर्म में यह आना चाहिए कि उसका कारण हो?कोई इलनैस हो,कोई कारण हो,लेकिन कम्पलसरी वोटिंग हम नहीं कर सकते । इसके लिए हम इन्सेंटिव का प्रावधान कर सकते हैं । हम आधार में इस तरह की मार्किंग कर सकते हैं, जिस तरह कई डेवलप्ड कंट्रीज में होता है । उनके ड्राइविंग लाइसेंस में,अगर वह डिफॉल्ट करते हैं तो उनके ड्राइविंग लाइसेंस में नेगेटिव मार्किंग होती है । हमने भी यह लॉ बना दिया है और कुछ स्टेज के बाद में उसकी नेगेटिव मार्किंग के आधार पर जैसे ड्राइविंग लाइसेंस कैंसिल होता है,उसमें आधार के जो बेनिफिट्स हैं,गवर्नमेंट के बेनिफिट्स या इन्सेंटिव,उसमें बहुत विचार किया जा सकता है कि इन्सेंटिव के बारे में क्या किया जा सकता है?इसमें इस तरह का रिफॉर्म आना जरूरी है । इसके साथ-साथ मैं यह भी बताना चाहूंगा कि ज‍ब पोलिंग हो जाए तो इसमें कम्पलीट रिसर्च विंग होनी चाहिए । जब हम चाहते हैं कि लोकतंत्र मजबूत हो तो उसमें एक रिसर्च विंग ऐसा हो, जिसमें यह पता लगाएं कि परसेंटेज की पोलिंग जो है, पर्टिक्युलर एरिया में पोलिंग परसेंटेज कम क्यों आई? इस तरह की एक रिसर्च विंग जिला लेवल पर और ब्लॉक लेवल पर हो । उसके आने के बाद उन लोगों से,जो ब्लॉक लेवल पर अधिकारी हैं,उनकी कमेटी बनाकर और इसी तरह से जिला के स्तर पर कमेटी बनाकर पोलिंग परसेंटेज कम होने के कारण आने चाहिए क्योंकि कई जगहों पर हम देखते हैं कि जो ढाणियां हैं,वे दूर-दूर पर हैं, कहीं-कहीं कंसेन्ट्रेशन ज्यादा है तो वहां आपको आधा किलोमीटर,एक किलोमीटर की दूरी पर पोलिंग बूथ मिल जाएगा,लेकिन जहां सात-आठ किलोमीटर की दूरी पर ढाणियां हैं, वहां आपको पोलिंग बूथ नहीं मिलता है । गांव में साधन नहीं हैं, रोड्स नहीं है । इसलिए सवाल यह है कि क्या वहां पर इलेक्शन कमीशन की तरफ से कुछ रिफॉर्म्स आने चाहिए कि पोलिंग परसेंटेज कैसे बढ़ाई जाए? वहां लोग गुस्सा दिखाते हुए भी जाते हैं,वे गरीब होते हुए भी वोट देने जाते हैं ।

हम देखते हैं कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में गांवों में गरीब जनता का योगदान जबर्दस्त है । हम देखते हैं कि यह अपने आपमें एक अनुकरणीय काम है । कई इलाकों में हम देखते हैं कि ढाणियों में लोग दूर-दूर पर बसे होते हैं और वहां जो पोलिंग बूथ हैं,उसका रेडियस 15-20 किलोमीटर होता है । इसके बावजूद भी वहां 95 प्रतिशत पोलिंग होती है । इसका कारण है कि वहां लोगों में एक उत्साह है । वे इसे एक त्यौहार की तरह मनाते हैं,लेकिन यह हर जगह नहीं है । जहां पर 90-95 प्रतिशत पोलिंग होती है,उसका उदाहरण लेकर चुनाव आयोग को पूरे देश में इसके लिए एक अवेयरनेस कैम्पेन चलाना चाहिए कि किस तरह से वहां पर कमजोर लोग होते हुए भी,समाज के अंतिम छोर पर लोग होते हुए भी वे भारत के लोकतंत्र के लिए वोटिंग कर रहे हैं और इसमें उनका सहयोग जबर्दस्त है । इस तरह से,ऐसे बूथ्स,जो ढाणियों से दो किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर हैं तो चुनाव आयोग द्वारा यह व्यवस्था होनी चाहिए कि पोलिंग बूथ्स कम से कम दो किलोमीटर की रेडियस में आ जाएं । गांव में लोगों के पास कोई साधन नहीं होता है,कोई व्हीकल नहीं होता है । वे पैदल चल कर दूर-दूर वोट देने जाते हैं । ऐसी जगहों को चिह्नित किया जाना चाहिए कि अर्बन और रूरल एरियाज के लिए एक ही पैरामीटर्स न हों कि एक बूथ इतनी आबादी पर हों । आबादी के साथ-साथ उनकी दूरी का भी डिटरमिनेशन होना बहुत जरूरी है । अगर आपने इसे आबादी के हिसाब से कर दिया और अगर वही फॉर्मूला आप रूरल एरियाज में ले गए तो अर्बन का फॉर्मूला रूरल एरियाज पर लागू नहीं होना चाहिए । इसलिए आबादी के साथ-साथ उसकी दूरी भी देखी जानी चाहिए । अगर बूथ नजदीक होगा तो लोकंतंत्र में उनके वोट देने की जो मंशा है,वह और भी ज्यादा होगी ।

       हम देखते हैं कि माइग्रेशन भी होते हैं । जब हम विकसित देश की तरफ बढ़ रहे हैं तो हम देखते हैं कि एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में रोजगार के लिए लगातार माइग्रेशन होता रहता है । अगर पोलिंग होती है तो वे लोग अपने रोजगार छोड़ कर वहां नहीं आ सकते । वे प्राइवेट और अन-ऑर्गेनाइज्डसेक्टर में एम्प्लॉयड हैं । सरकारी नौकरी में तो पोलिंग के लिए उन्हें भेज देते हैं,लेकिन जो असंगठित सेक्टर हैं, उनके लिए आज जबकि टेक्नोलॉजी इतनी विकसित हो गयी है तो इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से पोलिंग बूथ्स पर आउटसाइड वोटर्स के लिए कोई ऐसा मैकेनिज्म तैयार कर सकते हैं कि वे वोटर्स उस पोलिंग बूथ पर अपना मत दे सकें । इस तरह की मैकेनिज्म को हम हर शहर में हर जगह कर सकते हैं क्योंकि वोटर्स की लिस्ट तो हम कहीं पर भी किसी का भी देख सकते हैं । फिर क्यों नहीं किसी शहर में हम पोलिंग बूथ बना दें कि उस शहर में दूसरे प्रदेशों के जो माइग्रेटेड लेबर्स हों या वे किसी तरह की बिजनेस में हों या चाहे कोई काम करते हों,मगर वे बाहर से हैं तो उनके लिए उसी शहर में एक स्पेसिफाइड बूथ हो । कम्प्यूटर में उसकी लिस्ट देखकर उन्हें उनके आधार कार्ड या वोटर कार्ड के आधार पर उन्हें वोटिंग की परमिशन दी जाए । अगर इस तरह का मैकेनिज्म किया जाता है तो मेरा मानना है कि पोलिंग परसेंटेज में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी ।

जहां तक कम्पलसरी वोटिंग की बात है तो इस तरह की कम्पलसरी वोटिंग के लिए अगर मान लीजिए कि कोई लेजिटीमेट विजन है तो उसके बाद भी हम इसे नहीं कर सकते क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में साफ लिखा हुआ है - Freedom of Speech and Expression. जहां तक Freedom of Speech and Expression की बात है तो Freedom of Speech has freedom not to speak with respect to any political opinion. फ्रीडम ऑफ स्पीच का मतलब यह भी माना जाना चाहिए कि अगर वह वोट देना न चाहे तो उसे हम इसके लिए कम्पेल नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम उसे परसुएड कर सकते हैं । अगर कोई वोट देना न चाहे तो उसके कई कारण हो सकते हैं क्योंकि यह हो सकता है कि उस क्षेत्र में विकास न हो, कोई खास उम्मीदवार उसे पसन्द न हो,उस क्षेत्र का पूरा का पूरा गांव उसका बहिष्कार कर रहा हो । अगर हम कम्पलसरी वोटिंग कर देते हैं तो मेरा मानना है कि ह्यूमन राइट डिक्लेरेशन के अनुच्छेद 2 का यह उल्लंघन होगा । यह किसी व्यक्ति का अधिकार है - to vote and not to vote.

18.00 hrs        इसलिए भारत के संविधान में इस तरह का प्रावधान नहीं किया गया और इसे कंस्टीट्यूशनल ड्यूटी नहीं मानी गई । कंस्टीट्यूशनल ड्यूटी में यह बात जरूर है कि भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए हम उसको पर्सुएड कर सकते हैं कि वह वोट दें । उसको वोट देने के लिए कम्पल्‍सरी करना अपने आप में एंटी डेमोक्रेटिक होगा ।

माननीय अध्यक्ष:आपका भाषण अगली बार जारी रहेगा ।

श्री पी. पी. चौधरी : अध्यक्ष जी, बहुत-बहुत धन्यवाद ।

माननीय अध्यक्ष:अब सभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 25 नवंबर, 2019 को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है ।

18.01 hrs The Lok Sabha then adjourned  till  Eleven of  the Clock on Monday, November 25, 2019/ Agraqhayana 4, 1941 (Saka)          * The sign + marked above the name of a Member indicates that the Question was actually asked on the floor of the House by that Member.

           

* Not recorded.

* Not recorded.

* Not recorded.

* Not recorded.

* Not recorded.

** Introduced with the recommendation of the President.

** Introduced with the the recommendation of the President.