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State Consumer Disputes Redressal Commission

U P State Handloom Corporation vs Uma Rani Vastralya on 16 March, 2015

  	 Daily Order 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2001/478  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. U P State Handloom Corporation  a ...........Appellant(s)   Versus      1. Uma Rani Vastralya  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:     	    ORDER   

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन ऊ

 

               अपील संख्‍या-478/2001              (मौखिक)

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, कानपुर देहात द्वारा परिवाद संख्‍या-627/1999 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 03-02-2001 के विरूद्ध)

 

यू0पी0 स्‍टेट हैण्‍डलूम कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा मैनेंजिंग डायरेक्‍टर,हथकरघा भवन, जी.टी. रोड़, कानपुरनगर।

 

                                     ..अपीलार्थी/विपक्षी

 

                       बनाम

 

मेसर्स उमा रानी वस्‍त्रालय द्वारा प्रोपराइटर सुबोध कुमार शुक्‍ला ग्राम व पोस्‍ट गनेशपुर, जिला- जालौन।

 

                                     .....प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी

 

समक्ष:- 

 

1.

माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठा0 सदस्‍य।

2. माननीय श्री राज कमल गुप्‍ता, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री आर0के0 गुप्‍ता,विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित   : कोई नहीं।

दिनांक: 22-05-2015 माननीय श्री आर0सी0 चौधरी , पीठासीन सदस्‍य , द्वारा उदघोषित निर्णय      अपीलार्थी ने यह अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम, कानपुर देहात द्वारा परिवाद संख्‍या-627/1999 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 03-02-2001  के विरूद्ध प्रस्‍तुत की है। जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया है:- परिवाद पत्र स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी को आदेश दिया जाता है कि वह इस निर्णय की तिथि से 60 दिन के अन्‍दर परिवादी को रूपया 29,853-00 एवं उस पर दिनांक 17-08-1995 से भुगतान की तिथि तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज परिवादी को भुगतान करें। परिवादी परिवाद व्‍यय के रूप में रूपया 500-00 भी पाने का अधिकारी है।

संक्षेप में केस के तथ्‍य इस प्रकार से है कि परिवादी विपक्षी द्वारा संचालित होकर रिटेलर योजना की पंजीकृत संस्‍था है और विपक्षी द्वारा आपूर्ति किये गये वस्‍त्रों को उपरोक्‍त योजना के नियमों के अनुसार जनता में बेचता है। उसने दिनांक 09-08-1995  को एक पे आर्डर मु0 14,926-50 (2) तथा एक दूसरा पे- आर्डर दिनांक 17-08-1995 को मु0 14,926-50 जो भारतीय स्‍टेट बैंक शाखा कैनाल रोड कानपुर द्वारा निर्गत किया गया था। विपक्षी के यहॉ जनता वस्‍त्रों की आपूर्ति किये जाने हेतु दाखिल किया। विपक्षी द्वारा उपरोक्‍त धनराशि प्राप्‍त करने के बाद परिवादी को आदेशित किया गया कि वह विपक्षी के सम्‍बद्ध शोरूम प्रभारी स्थित निशत सिनेमा के निकट कानपुर से जनता वस्‍त्र माल प्राप्‍त करें। विपक्षी के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किसी वस्‍त्र की आपूर्ति नहीं की गई। परिवादी द्वारा लिखित शिकायत भी की गई, परन्‍तु विपक्षी द्वारा वस्‍त्रों की आपूर्ति नहीं की गई। विपक्षी द्वारा रूपया 29853-00 रूपये प्राप्‍त कर लेने के बाद भी वस्‍त्र की आपूर्ति न करना विपक्षी की सेवा की त्रुटि एवं कमी को प्रमाणित करता है।

     विपक्षी द्वारा जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया है कि परिवादिनी द्वारा कथित धनराशि वस्‍त्र आपूर्ति हेतु विपक्षी के यहॉ जमा किया था, परन्‍तु विपक्षी द्वारा उपरोक्‍त धनराशि का वस्‍त्र परिवादिनी को आपूर्ति कर दिया गया, जिसका बिल नं0 58/12 दिनांकित 17-08-1995 मु0 14926-50  एवं बिल सं0 58/16 दिनांकित 26-08-1995 मु0 14926-50 का है। परिवादिनी उपरोक्‍त धनराशि प्राप्‍त कर चुकी है। अत: परिवादिनी द्वारा प्रस्‍तुत किये गये आपूर्ति आदेश का पूर्ण रूप से आपूर्ति कर दी गई है, जिसे परिवादिनी प्राप्‍त कर चुकी है। परिवादिनी का परिवाद पोषणीय न होने के कारण खारिज होने योग्‍य है। परिवादिनी किसी भी क्षतिपूर्ति को पाने की अधिकारिणी नहीं है।

    (3)

     अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री आर0के0 गुप्‍ता उपस्थित है। प्रत्‍यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता को सुना गया। पत्रावली का अवलोकन किया गया।

     केस के तथ्‍यों परिस्थितियों में हम यह पाते है कि जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा जो निर्णय/आदेश पारित किया गया है, वह सभी अभिलेखों का पूर्णरूप से संज्ञान लेते हुए विस्‍तृत निर्णय पारित किया गया है और सभी साक्ष्‍यों का विधिवत वर्णन किया गया है। केस के तथ्‍यों परिस्थितियों में हम यह पाते है कि जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा पारित निर्णय विधि सम्‍मत् है, उसमें हस्‍तक्षेप किये जाने की कोई गुंजाइश नहीं है और अपीलकर्ता की अपील खारिज किये जाने योग्‍य है।

                            आदेश      अपीलकर्ता की अपील खारिज की जाती है तथा जिला उपभोक्‍ता फोरम,कानपुर देहात द्वारा परिवाद संख्‍या-627/1999 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 03-02-2001 की पुष्टि की जाती है।                                                            

     उभय पक्ष अपना-अपना व्‍यय भार स्‍वयं वहन करें।

   
 (राम चरन चौधरी)                           (राजकमल गुप्‍ता)  

 

  पीठासीन सदस्‍य                                सदस्‍य

 

आर.सी. वर्मा, आशु. कोर्ट नं 5

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

              [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]  MEMBER