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State Consumer Disputes Redressal Commission

U P Shakari Gram Vikas Bank vs Bhagwati Prasad on 28 January, 2022

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2000/2363  ( Date of Filing : 02 Nov 2000 )  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. U P Shakari Gram Vikas Bank  a ...........Appellant(s)   Versus      1. Bhagwati Prasad  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT            PRESENT:      Dated : 28 Jan 2022    	     Final Order / Judgement    

 

 

 

 

 मौखिक

 

 

 

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद  प्रतितोष  आयोग, उ0प्र0 लखनऊ

 

 

 

 

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम/आयोग, कुशीनगर द्वारा परिवाद संख्‍या  225  सन 1998   में पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 22.07.1999 के विरूद्ध)

 

 

 

 अपील 2363 संख्‍या 2000

 

 

 

उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0, शाखा पडरौना, जिला कुशीनगर द्वारा सीनियर मैनेजर  ।

 

                                         .......अपीलार्थी/प्रत्‍यर्थी

 

 

 

-बनाम-

 

 

 

1.

  श्री भगवती प्रसाद पुत्र श्री राम आधार निवासी टेढ़ी पोस्‍ट सिंगहा, जिला कुशीनगर।

2.  श्री वीरेन्‍द्र पाठक पुत्र श्री जोगेन्‍द्र पाठक, निवासी ग्राम नेवाज छपरा, पत्रालय पिपरा बाजार जिला कुशीनगर ।

. .........प्रत्‍यर्थी/परिवादी   समक्ष : -

 
मा0   न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष ।
मा0 डा0 आभा, गुप्‍ता सदस्‍य ।
   
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता  -  श्री हेमराज मिश्रा।
प्रत्‍यर्थी  की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता  -   श्री आर0के0 मिश्रा ।

 

 

 

 दिनांक : -  28.01.2022

 

 

 

 मा0    डा0 आभा गुप्‍ता, सदस्‍य  द्वारा उद्घोषित

 

 

 

 निर्णय

 

      प्रस्‍तुत अपील, जिला उपभोक्‍ता फोरम/आयोग, कुशीनगर द्वारा परिवाद संख्‍या  225  सन 1998   में पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 22.07.1999 के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में, परिवादी का कथन है कि उसने बकरा-बकरी क्रय करने हेतु 08,000.00 रू0 का ऋण उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0 पड़रौना, जिला कुशीनगर से स्‍वीकृत कराया था लेकिन विपक्षीगण ने मिलीभगत से ऋण की स्‍वीकृत धनराशि उसके नाम से निकाल ली और उसे ऋण से क्रय/प्राप्‍त  करने वाले बकरा-बकरी उपलब्‍ध नहीं कराए।
        जिला मंच के समक्ष विपक्षी/अपीलार्थी संख्‍या 02 श्री वीरेन्‍द्र पाठक ने अपना वादोत्‍तर प्रस्‍तुत कर उल्लिखित किया उसके द्वारा परिवादी/शिकायकर्ता को बकरा-बकरी की सप्‍लाई की गयी है, लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा चेक की धनराशि बैंक से निकाल ली गयी और बकरा-बकरी की कीमत उसे नहीं दी गयी है।
      विद्वान जिला आयोग, कुशीनगर ने अपने विवेच्‍य निर्णय में यह अवधारित करते हुए कि '' ऋण की धनराशि के बावत मिले चेक का इण्‍डोर्स परिवादी ने डीलर श्री वीरेन्‍द्र सिंह के नाम करा दिया था, इसलिए चेक की धनराशि शिकायतकर्ता/परिवादी को प्राप्‍त नहीं हो सकती थी। ऐसा लगता है कि उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक का पला-पलाया डीलर वीरेन्‍द्र पाठक है और उसकी मिलीभगत से कार्यवाही सम्‍पादित हुयी है। न कोई बकरी दी गयी न बकरा दिया गया। पैसा अवश्‍य भगवती प्रसाद के नाम से बैंक से ले लिया गया, जिसे वीरेन्‍द्र पाठक ने प्राप्‍त किया है। बैंक के कैशियर ने भी इसकी तस्‍दीक की है। चेक पर वीरेन्‍द्र पाठक के जो हस्‍ताक्षर है, वह उसे मान्‍य हैं। दूसरा हस्‍ताक्षर जो उस पर चेक को कैश कराते वक्‍त कराया गया, जिसे देखने से वह वीरेन्‍द्र पाठक का ही प्रतीत होता है। कोआपरेटिव बैंक का रजिस्‍टर देखने से पता चलता है कि वीरेन्‍द्र पाठक बकरियों की सप्‍लाई का कार्य करता है। बैंक के माध्‍यम से यह कार्य चारा घोटाला किस्‍त का उसके द्वारा किया गया है और शिकायतकर्ता को बकरी सप्‍लाई नहीं की है और न ही वीरेन्‍द्र पाठक वैयक्तिगत रूप से फोरम के समक्ष बुलाने पर उपस्थित ही हुआ और उसके अधिवक्‍ता भी किनारा कर गए '' आदेश पारित किया कि '' शिकायत उपरोक्‍त के अनुसार निर्णीत की जाती है तथा विपक्षीगण को निर्देशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को 8000.00 रू0 मय उपरोक्‍तानुसार सूद व हर्जे-खर्चे के अदा कर अपनी सेवा की कमी को दूर करे अन्‍यथा उनके विरूद्ध दफा-27 की कार्यवाही की जा सकती है, जिसके तहत तीन साल तक की सजा का प्राविधान तो है ही, प्राविधान 10,000.00 रू0 जुर्माने का भी है। '' मेरे द्वारा समस्‍त तथ्‍यों को दृष्टिगत रखते हुए तथा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍तागण को सुनने के उपरांत यह पाया गया कि विद्वान जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय पूर्णत: विधिक एवं तथ्‍यों पर निर्धारित है जिसमें किसी हस्‍तक्षेप की कोई गुन्‍जाइश नहीं है और न ही ऐसा कोई तथ्‍य अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा उल्लिखित किया गया कि विद्वान जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय में किस प्रकार की अवैधानिकता है।
परिणामत: प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।
आदेश   अपील निरस्‍त की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
 
(न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)                           (डा0 आभा गुप्‍ता)

 

       अध्‍यक्ष                                               सदस्‍य 

 

 

 

सुबोल श्रीवास्‍तव

 

 पी0ए0(कोर्ट नं0-1)

 

 

 

 

 

 

 

              [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]  PRESIDENT