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Lok Sabha Debates

Sarva Shiksha Abhiyan. on 11 May, 2005

> Title: Sarva Shiksha Abhiyan.

 

17.29 hrs   HALF-AN-HOUR DISCUSSION    Sarva Shiksha Abhiyan   MR. CHAIRMAN : Now, I am taking Item No. 23, Half-an-Hour Discussion - Shri Ravi Prakash Verma.

 

श्री रवि प्रकाश वर्मा (खीरी) :सभापति महोदय, हम आपका थोड़ा संरक्षण भी चाहेंगे, चूंकि यह सर्वशिक्षा अभियान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। ªÉc ÉÊcxnÖºiÉÉxÉ BÉEÉÒ iÉBÉEnÉÒ® ¤ÉnãÉxÉä ´ÉÉãÉÉ |ÉÉäOÉÉàÉ cè*[i54]  यदि आपको इस विषय पर थोड़ा अधिक समय देना पड़े, तो आप कृपया थोड़ा ध्यान रखें। ... ( व्यवधान) 

डॉ. राम चन्द्र डोम (बीरभूम) : महोदय, शिक्षा का मुद्दा, जनसंख्या वृद्धि से जुड़ा हुआ है, जो बहुत महत्वपूर्ण है ।…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : सुमन जी भी पापुलेशन पर बोल रहे हैं। यह चर्चा आगे भी चलेगी, लेकिन अभी आधे घण्टे की चर्चा का समय है।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : महोदय, दिनांक २१ मार्च, २००५ को लोक सभा में तारांकित प्रश्न संख्या २६१ पूछा गया था, जिसमें शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए आपने आधे घंटे की चर्चा को स्वीकार किया है, जिसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं। महोदय, सर्वशिक्षा अभियान की शुरूआत वर्ष २००१ में की गई थी। तब से इसका क्रियान्वयन आधे-अधूरे मन से किया जा रहा है। इस बात का पता इससे लगता है कि इसकी पहली बैठक माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में २१ फरवरी, २००५ को चार साल के बाद बुलाई गई। इसमें जो एंरोलमेंट है और जो ड्रॉपआउट है उसके हिसाब से हम शत-प्रतिश एंरोलमेंट नहीं करा पा रहे हैं। आज ड्रॉपआउट्स ५० प्रतिशत लड़कों के मामले में और ५८ प्रतिशत लड़कियों के मामले में है, इस पर चिंता व्यक्त की गई है। यूपीए सरकार ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में बच्चों और शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धत्ता जाहिर की है और कुछ संदर्भ में उनका अनुपालन करने का प्रयास भी किया गया है, जैसे कि देश की जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का प्रयास किया गया है, एजुकेशन सेस दो प्रतिशत लगाया गया है। इससे बहुत फर्क पड़ेगा। इसके लिए मैं सरकार की सराहना भी करना चाहता हूं। लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में सर्वशिक्षा अभियान पर हिंदुस्तान की नौकरशाही हावी हो गई है। सर्वशिक्षा अभियान जैसे महत्वपूर्ण एजेंडे को बिना किसी सुनिश्चित कार्य योजना के आगे बढ़ाने का क्या मतलब है, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। एक रेगयुलर एक्शन प्लान उसके लिए बनना चाहिए था। यह एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसमें व्यापक स्तर पर चुने हुए प्रतनधितयों तथा जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, लेकिन कार्यशैली में पारदर्शिता के अभाव के कारण यह अवसर हाथ से निकल गया है। वर्ष २००२ में संसद में संविधान संशोधन के माध्यम से शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दे दिया गया था, लेकिन आज तक सरकार आवश्यक शिक्षा अधनियम बिल नहीं ला पाई है। उस दिन मैं माननीय मंत्री जी की बात सुन रहा था। बहस में उन्होंने कहा था कि हम इसे लाने नहीं जा रहे हैं। मुझे लगता है कि यह चिंता का विषय है। आखिर ऐसी क्या चीज है जो इसे लाने से रोक रही है। मुझे साफ-साफ दिखाई पड़ रहा है कि कहीं न कहीं इच्छा शक्ति कमजोर पड़ रही है। भारत में जीरो से चौदह वर्ष की आयु के लगभग ४४ प्रतिशत लोग हैं। वर्ष १९५० में जब संविधान को अंगीकार किया गया था तब सभी को बराबर का दर्जा दिया गया था । बच्चे भी इसमें बराबर के नागरिक हैं और उन्हें भी बराबर के अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन आज हालत यह है कि हम इस ४४ प्रतिशत आबादी के ऊपर २.३३ प्रतिशत ही भारत सरकार के बजट का खर्च कर पा रहे हैं। यह कहां का न्याय है?

वर्ष १९७४ में भारत सरकार ने चिल्ड्रन्स पालिसी बनाई थी। उस पालिसी के माध्यम से बच्चों को सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधन का दर्जा दिया गया था। क्या यही तरीका है अपने राष्ट्रीय संसाधन को ट्रीट करने का? आज हालत यह है कि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से लगभग साढ़े तीन करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। इससे दुगुने से ज्यादा बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। इनमें से दो तिहाई से भी ज्यादा बालिकाएं हैं। मुझे लगता है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी। यह हालत हमारे हिंदुस्तान के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन की है। अभी तक हालत यह है कि जितनी जरूरत है, उतने विद्यालय नहीं खोले जा सके हैं। लाखों की तादाद में शिक्षकों का अभाव है और जो मौजूद हैं उनकी योग्यता और कार्यकुशलता पर भी प्रश्न चिहन खड़े किए जा रहे हैं । उनकी स्किल की अपग्रेडेशन होगी या नहीं होगी । हालत यह है कि पांच-पांच साल बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन उसके बावजूद भी पढ़ाई-लिखाई के बेसिक्स भी ग्रहण नहीं कर पाए हैं। यह चिंता का विषय है।

महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में, चाहे पंचायत के स्तर पर आप करा पाएं, रेजिडेंशियल स्कूल खोलने चाहिए और मैं बताना चाहता हूं कि जो अधिकतम नौकरियां में, जो ड्रॉपआउट केसिस हैं, वे लड़कियों के हैं या अल्पसंख्यक समुदाय, दलित, भाषायी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। मेरा आपसे अनुरोध है कि इन समुदायों में से ही ज्यादा से ज्यादा भर्ती किया जाए। मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा मौका महिलाओं को मिलना चाहिए क्योंकि वे इस मामले में ज्यादा सिंसियर होती हैंै[MSOffice55] ।

मैं प्राइमरी एजुकेशन के बारे में बताना चाहता हूं। हम सब जानते हैं कि परिवार एक बेसिक इंस्टीटयूट है जो व्यक्ति को संस्कार देता है। महिलाओं में वह इंस्िंटक्ट होती है। उनको शेयर मिलना चाहिए। साथ ही लाखों की तादाद में शिक्षकों की जो कमी है, उसे भरने का भी ख्याल रखें ताकि जो कमजोर तबके हैं, जिनको आरक्षण मिलता रहा है, उनको इस बात का अवसर दें।

सबसे दुविधाजनक स्थिति यह है कि हम अपने ही ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा खड़ा नहीं कर पाए हैं। इस महत्वपूर्ण अभियान में संसाधनों का दुरुपयोग सामने आने लगा है। मैं माननीय सांसद की बात सुन रहा था। वे बता रहे थे कि जिन गांवों में बिजली नहीं है, बुनियादी ढांचा नहीं है, उन गांवों में सोनी का टीवी रख दिया गया है। इससे पता लगता है कि किस तरह रुपये खर्च हो रहे हैं। उनका उपयोग सामने आ रहा है या नहीं, इन बातों पर गौर करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि इसमें अधिकतम पारदर्शिता अपनाते हुए और सबसे ज्यादा भागीदारी लेते हुए, जहां, जैसी जरूरत है, वैसी संवेदनशीलता के साथ इस प्रोग्राम को लागू कराने की जरूरत है।

आपने एजुकेशन सैस लगाया था, उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। मैं अपने बजट भाषण में भी आपको इस बात के लिए कह चुका हूं। आपने सन् २००४-०५ में करीब ५०१० करोड़ रुपये आवंटित किए थे और सन् २००५-०६ के बजट ऐस्टीमेट में ११,२१९ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि बजट जो रिलीज़ होता है, भारत सरकार का टाइम बाउंड रिलीज़ करने का जो मकैनिज़्म है, उससे उसे मुक्त करवा दीजिए। सारा बजट एकमुश्त चला जाना चाहिए ताकि उसका सही तरीके से इस्तेमाल हो सके।

आपने जो एजुकेशन सैस लगाया था, उसे ऐडीशनैलिटी में इस्तेमाल करें। वह ऐडीशनल फंड है, जो आपको मिला है। आपको परम्परागत रूप से जो पैसा मिल रहा था, जो आपके प्लान में था, उसे आगे बढ़ाते रहें। आपको बहुत ज्यादा रुपये की जरूरत है।…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : अब आप कनक्लूड कीजिए।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : तापस मजूमदार कमेटी ने एक लाख ४६ हजार करोड़ रुपये की रिकमैंडेशन की थी। आपने तय किया है कि हमें २०१० तक सारे बच्चों को स्कूल भेजना है और जैंडर पैरिटी स्थापित करनी है। हर बच्चे को अपने पैरों पर खड़ा करना है। उसके लिए बहुत ज्यादा संसाधनों की जरूरत है। हम जिन समस्याओं पर रोजमर्रा चर्चा करते हैं, जैसे अभी आबादी बढ़ने के बारे में चर्चा हो रही थी, या अनइम्प्लॉयमैंट जैसी बहुत सी दूसरी समस्याएं हैं, उनकी जड़ में कहीं न कहीं अशिक्षा है। मुझे लगता है कि यह हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा पाप है, जिसे हम बहुत दिनों से ढो रहे हैं और उसे दूर नहीं कर सके हैं।

मुझे आशा है कि आपके नेतृत्व में हम इन लक्ष्यों पर पहुंच सकेंगे और जो सबसे कीमती लक्ष्य सर्व शिक्षा अभियान का है, उसे प्राप्त कर सकेंगे।

एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल जो ऐड्रैस नहीं हुआ, वह बाल श्रम का है। जो ड्रॉप-आउट केसेज़ हैं या पढ़ने नहीं जा पा रहे हैं, उसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण चाइल्ड लेबर का है। आज हिन्दुस्तान में, जैसा रिकार्ड में है, १२.६ मलियन, यानी सवा करोड़ के आस-पास चाइल्ड लेबर्स हैं। एक्चुअल फिगर्स शायद इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। कभी-कभी लोग रैगुलर के बजाए इररैगुलर या बिना पैसे के काम करते हैं। इसे देखने की जरूरत है। अगर हम पूरे सर्वशिक्षा अभियान में बाल श्रम के मामले को साथ ऐड्रैस करेंगे, इसकी समग्रता को देखते हुए इसे सर्वशिक्षा अभियान में जोड़ेंगे, तब फर्क पड़ेगा।

जैंडर डिसपैरिटी बहुत बड़ा कारण है। आप देखें आज भी जो लड़कियों ऐनरोलमैंट करा रही हैं, लड़कों के मुकाबले उनका ऐनरोलमैंट लगभग आधे से थोड़ा ज्यादा होगा। यह चिन्ता का विषय है। जो ड्राप-आउट हो रही हैं, वह दो-तिहाई है। मुझे लगता है कि जैंडर डिसपैरिटी का ईशू बहुत बड़ा है। डकार फ्रेमवर्क में, जिसमें भारत signatory है, उसमें हमारा कमिटमैंट है कि इसे पूरा करेंगे।

मैं एक बार फिर कहना चाहता हूं कि लड़कियों के एनरोलमैंट से पूरे समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में बहुत दूरगामी परिणाम होने वाले हैं। इसलिए इसे बहुत संवेदनशीलता के साथ अख्तियार करना जरूरी है।

मैंने पहले भी कहा था, क्योंकि लड़कियों का एनरोलमैंट एक बड़ा ईशू है…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : आप अपने मूल प्रश्न पर आइए।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : जैंडर डिसपैरिटी के ईशू के बारे में आग्रह करना चाहता हूं क टीचर्स के जो ऐप्वाइंटमैंट्स होने हैं, उनमें महिलाओं पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना चाहिए[R56] । विशेष तौर पर जिन तबकों के बच्चे स्कूलिंग से छिटक रहे हैं या बाहर जा रहे हैं, मैं समझता हूं कि इस प्रोग्राम में उनका भी ख्याल रखा जायेगा। उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ा अनुकरणीय कार्य किया गया है। वहां गरीब तबके की जो लड़कियों इंटर पास कर रही है, उनको सरकार ने २० हजार रुपये देने का प्रावधान किया है। मुझे लगता है कि इतना जबरदस्त इन्सेंटिव गरीब, पिछड़े और दलित तबके की नन्हीं बहनों को कहीं नहीं मिला है। मैं खुद उन लड़कियों से मिला हूं। मैंने देखा है कि उनमें इस बात का उत्साह है। इसके अलावा जो आने वाली जनरेशन है, वह मैंटली खुद को इस बात के लिए तैयार कर रही हैं कि इस इन्सेंटिव को प्राप्त करने के लिए हमें आगे बढ़ना है। यह एक अनुकरणीय उदाहरण है जिसे हम आगे बढ़ा सकते हैं।

सच्चाई तो यह है कि हमारे हिन्दुस्तान के जो गरीब, लाचार और मजबूर तबके हैं, उनको शिक्षा के माध्यम से अपनी परिस्थितियां बदलने का अवसर मिला है और उन्होंने उसे बदलकर दिखाया है। यह हमारे-आपके और इस संसद के ऊपर है कि किस तरह से हम उनको ज्यादा से ज्यादा अवसर दें। एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर पायें और उन्हें प्रेरित करते हुए हम साथ ले जायें। मुझे आशा है कि हमारा सर्वशिक्षा अभियान, खाली सर्वशिक्षा अभियान नहीं है बल्कि यह हिन्दुस्तान की तकदीर बदलने वाला अभियान है, हिन्दुस्तान की दूसरी आजादी का अभियान है। मैं आपको इसके लिए बधाई देना चाहता हूं कि आपने एक अच्छी शुरुआत की है।

इसके साथ क्वालिटी एजुकेशन भी एक बहुत बड़ा इश्यू है। क्वालिटी एजुकेशन के मायने खाली उनकी फीस माफ करना नहीं है। उनको उचित और उपयोगी शिक्षा मिले जो जीवन में काम आ सके।उनको गुणवत्तापूर्वक शिक्षा मिले जो उन्हें अच्छा इंसान बना सके, जिन्हें हम लोकतंत्र के लिए तैयार कर सकें। यह हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि ५५-५६ वर्षों के लोकतंत्र में आज तक हम ह्ृदय से लोकतांत्रिक नहीं बन पाये। हम कहीं न कहीं पुरानी सामंती विरासतों को ढो रहे हैं। मुझे लगता है कि हमारी व्यवस्था के अंदर कमियां रही हैं। सर्वशिक्षा अभियान की योजना से हम इस मानसिकता को दूर करने और एक सही किस्म का लोकतंत्र, जो हमारे ह्ृदय से जन्म लेता है, उसे पैदा करने में हमें मदद मिलेगी।

मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि जब हम एजुकेशन फॉर ऑल का प्रोग्राम ले रहे हैं, तो खाली एजुकेशन फॉर ऑल न करके क्वालिटी एजुकेशन फॉर आल का प्रोग्राम लें। इसमें हर बच्चा, चाहे वह लड़की हो या लड़का हो, उसे क्वालिटी एजुकेशन मिले, जिंदगी को एक मकसद मिले, अपने आपको आगे बढ़ाने की मानसिकता हो, इस बात का प्रयास किया जाना चाहिए। गांधी जी की बुनियादी शिक्षा का जो कार्यक्रम था, वह मैंने पढ़ा है। मुझे लगता है कि हमारे हिन्दुस्तान की जो ग्रामीण परिस्थितियां हैं, उन परिस्थितियों में हमें उस कार्यक्रम पर पुनर्विचार करना चाहिए कि किस तरीके से गांधी जी की बुनियादी शिक्षा के कार्यक्रम को प्राथमिक शिक्षा …( व्यवधान) 

सभापति महोदय :   वर्मा जी, अब आप समाप्त कीजिए।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सभापति महोदय, बहुत महत्वपूर्ण इश्यू है।

सभापति महोदय :  आपको बोलते हुए १४-१५ मिनट हो गये हैं। अभी और माननीय सदस्य भी इसमें पार्टीसिपेट करेंगे।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सभापति महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं। …( व्यवधान) 

सभापति महोदय :  इसके भी कुछ नियम हैं। यह आधे घंटे की चर्चा है।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सभापति महोदय, मैं खत्म कर रहा हूं। एक बहुत बड़ा इश्यू …( व्यवधान) 

सभापति महोदय :  वर्मा जी, आप विषय की महत्ता को कम मत कीजिए। आपने बहुत बढि़या ढंग से अपनी बात यहां रखी है।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : एक बहुत बड़ा इश्यू जो मैंने आपके नैशनल कॉमन मनिमम प्रोग्राम में देखा है। …( व्यवधान) 

सभापति महोदय : अगर अब आप बोलेंगे तो विषय की महत्ता घट जायेगी।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : संविधान में संशोधन की जब वकालत हम कर रहे थे, हमने एक बात रखी थी कि शिक्षा की गुणवत्ता, उपयोगिता को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक शिक्षा आयोग की स्थापना की जानी चाहिए। यूपीए सरकार और माननीय सोनिया गांधी जी ने अपने कॉमन प्रोग्राम में इस बात को रखा है जिसकी हम बहुत तारीफ करते हैं। हम चाहते हैं कि जिस तरीके से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इंडीपेंडेंटली फंक्शन कर रहा है, उसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर आप एक शिक्षा आयोग खड़ा करने की मेहरबानी कीजिए जो इंडीपेंडेटली पूरे हिन्दुस्तान में क्वालिटी एजुकेशन दे और जो उपयोगी शिक्षा है, जो व्यक्तित्व निर्माण की शिक्षा है, उसकी गारंटी करें।

मैं सबसे महत्वपूर्ण चीज आपसे कहना चाहता हूं, जो पहले भी दोहराई गयी है। जो हमारे पंचायती राज संस्थान हैं, जो जन प्रतनधि हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जाना चाहिए। यह कोई सरकार का प्रोग्राम नहीं है, यह तो हिन्दुस्तान की तकदीर बदलने का प्रोग्राम है। इसे जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। मैं इस बात के लिए अपने सहयोगी साथियों से अपील करना चाहता हूं कवे व्यक्तिगत रूप से अपने-अपने क्षेत्र में, अपनी कांस्टीटूएंसी में प्राइमरी एजुकेशन के प्रोग्राम को, सर्वशिक्षा अभियान के प्रोग्राम को साथ लेकर चलें। अब तो संसद के माध्यम से आपको संसाधन भी मिलते हैं। अगर आप उन पर पैसा खर्च करेंगे तो मुझे लगता है कि आपको उस लक्ष्य को प्राप्त करने में आसानी होगी। मुझे आपको अवगत कराते हुए प्रसन्नता है कि मैंने शिक्षा को अपना एजेंडा बनाकर कार्य किया है। मुझे यह बात कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि इसमें क्षेत्र की जनता ने मुझे पूरा सहयोग दिया। हम लोग बड़े पैमाने पर आगे बढ़ रहे हैं। …( व्यवधान) 

सभापति महोदय    वर्मा जी, यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। अभी इस पर और भी माननीय सदस्य बोलने वाले हैं।

...( व्यवधान)

श्री रवि प्रकाश वर्मा : मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि समय बहुत कीमती है[r57] ।

भू-मंडलीकरण की व्यवस्थाएं लागू हो रही है। पूरी इकॉनोमी मार्केट डि्रवन होने जा रही है और अगर हम अपने हिन्दुस्तान के अंदर हर आदमी को मानव संसाधन में कंवर्ट नहीं कर पाए, उसकी प्रोडक्टिविटी को इम्प्रूव नहीं कर पाए तो समय हमें कभी माफ नहीं करेगा। मैं इस चर्चा के माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं और जो कमिया हमारे प्रोग्राम में रह गई हैं,…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : आपके द्वारा उठाए गए इतने महत्वपूर्ण विषय पर अभी सदन के अन्य माननीय सदस्यों को भाग लेना है। इससे विषय की महत्ता और बढ़ेगी।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सर, मैं दो शब्द कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। जो कमियां इसमें रह गई हैं, उनकी तरफ मैंने इशारा किया है और मुझे आशा ही नहीं बल्कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि माननीय मंत्री जी इस अति महत्वपूर्ण प्रोग्राम को एक जन-आंदोलन का रूप देने की मेहरवानी करेंगे। धन्यवाद।

MR. CHAIRMAN: Shri Kishanbhai V. Patel. You can put only questions or only one question. You may put a clarification either.

 

श्री किसनभाई वी.पटेल (बलसाड़) : सभापति महोदय, सर्वशिक्षा अभियान में अधिकांश विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उसका मुख्य कारण जिला और तालुका स्तर पर समन्वय न होने की वजह से है। मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए चुने गए सदस्यों को इस कमेटी में शामिल किया जाए और यह मैनेजिंग कमेटी सरकार द्वारा बनाई जाए। सरकार इसमें क्या करना चाहती है, मैं यही जानना चाहता हूं?

MR. CHAIRMAN: Shri Kharventhan. You put only question.

SHRI S.K. KHARVENTHAN (PALANI): Sir, for monitoring Sarva Shiksha Abhiyan, SSA, certain institutes in all the States throughout the country were recognised and announced. In Tamil Nadu, we are having  very important, valuable and age-old universities. In Tamil Nadu, Department of Education, Alagappa University is one such institute and IIM, Bangalore is included for monitoring. I would request that in all the States, universities available in the State should be recognised as monitoring agencies. In Tamil Nadu also, there are  another universities.  One such Tamil Nadu University which must be recognised for monitoring SSA in Tamil Nadu.

 

श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : सभापति महोदय, सर्वशिक्षा अभियान के संबंध में, माननीय मंत्री जी यहां बैठे हैं, मैं कहना चाहूंगा कि केवल नाम लिखने से सभी साक्षर और हमारा मकसद पूरा नहीं होता है बल्कि हमारे संविधान में उल्लिखित है कि प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य माना जाए। उस संदर्भ में कहना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश के बारे में अभी हमारे सम्मानित साथी रवि प्रकाश वर्मा जी ने कहा कि कन्या विद्या धन योजना चलाई जा रही है और उसका इतना अच्छा रेस्पांस आ रहा है कि २०,००० रुपये लड़की को मिल रहा है और वह बी.ए. तथा एम.ए. करने को अग्रसर हो रही है। अभी उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिक शिक्षा मध्यान्ह पोषाहार एवं छात्रवृत्ति के लिए २१९५ करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता की मांग की है। माननीय मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं। मैं उनसे निवेदन करूंगा कि वह इस राशि को तत्काल रिलीज कर दें क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ५०० करोड़ रुपये प्रतिवर्ष इस पर व्यय कर रही है। १२०० करोड़ रुपये सर्व शिक्षा अभियान में केन्द्र सरकार को उपलब्ध कराने की बात है, मैं चाहूंगा कि तत्काल इस राशि को रिलीज कर दें। जैसा कि मजूमदार समति की संस्तुति के अनुसार न:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा पर होने वाले समस्त अतरिक्त व्यय भार को केन्द्र सरकार वहन करती है। इसलिए मैं चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी इस पर विशेष ध्यान देंगे और इस राशि को तुरंत रिलीज करेंगे।

 

DR. CHINTA MOHAN (TIRUPATI): Sir, our target year is 2010. We are giving some incentives to the poor people and more particularly mid-day meal. Eleven crore poor children are getting mid-day meal in primary schools. The food we are giving is 100 grams of rice or wheat. This is not sufficient for these poor children. At least 150 grams of rice or wheat should be given to them instead of 100 grams of rice or wheat. That goes to say that it comes to 4.5 kilograms of rice or wheat per child from three kilograms of rice or wheat per child. Is there any plan before the Government to increase the quantity of mid-day meal provided to these poor children?

            The second thing is about uniform and free books to the school children. We have got allocation of more than Rs. 5,000 for Sarva Shiksha Abhiyan. Is there any proposal before the Government to help these poor children[reporter58] ?

सभापति महोदय : दो-तीन माननीय सदस्यों की ओर से समय दिए जाने के लिए रिक्वेस्ट्स प्राप्त हुई हैं, लेकिन उनके नाम नहीं आए हैं। इसलिए हम केवल एक क्लैरीफिकेशन के लिए समय देंगे।

SHRI SUNIL KHAN(DURGAPUR) : Sir, my name is there.  There were six Members who participated in the ballot.

MR. CHAIRMAN: No, I would not allow it.  Why are you mentioning it now? You should have given your name earlier.

SHRI SUNIL KHAN : Sir, my name is there.  We have also participated in the ballot.

सभापति महोदय :  आपका नाम बैलेट में तो है लेकिन प्रॉयरिटी में नहीं है। आपको पहले नोटिस देनी चाहिए थी। फिर भी चूंकि यह विषय बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए श्री सुनील खान को, नियम की परधि से बाहर जाते हुए, विशेष अनुमति के रूप में बोलने का समय दिया जाता है। आप केवल एक स्पेसफिक प्रश्न पूछिए।

श्री सुनील खां : महोदय, प्रश्न नहीं पूछना है, बल्कि मैं इस विषय पर कुछ कहना चाहता हूँ।

सभापति महोदय : नहीं-नहीं, हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते हैं। हमें सदन के नियमों के अनुसार ही चलना होगा। यदि आपको प्रश्न पूछना है तो पूछिए अन्यथा हम आपको दिया गया समय समाप्त करके किसी अन्य माननीय सदस्य को बोलने का अवसर दे देंगे।

SHRI SUNIL KHAN : The Sarva Shiksha Abhiyan (SSA) is a welcome step, but there are some lacunae in the Sarva Shiksha Abhiyan.

MR. CHAIRMAN: Mr. Sunil Khan, you can only ask a specific question on this issue.

SHRI SUNIL KHAN : The Sarva Shiksha Abhiyan (SSA) is a welcome step, but there are some lacunae in the Sarva Shiksha Abhiyan.

सभापति महोदय : नहीं-नहीं, कोई भूमिका देने की जरूरत नहीं है, सीधे अपने प्रश्न पर आइए। Please do not go into the background of the issue.  I would only allow you to ask a specific question.

   

SHRI SUNIL KHAN : If the lacunae are not removed, then the SSA would not be fulfilled by the year 2010.  So, I would like to point out the lacunae in it.  The students, who are of the age of five, would go to the schools, but if their parents are not going to the Continuing Education Centres or the Literacy Centres, which have already been stopped by the Literacy Mission, then the objective of the SSA would not be fulfilled.  If the root of illiteracy is not removed, then the literacy movement will not be successful. 

MR. CHAIRMAN: Prof. Basudeb Barman.  Please conclude because I have already called the name of the next speaker.

SHRI SUNIL KHAN : I would like to mention that the para  teachers are engaged for an amount of Rs. 1,000 or Rs. 2,000.  In the same institute, other teachers are getting more. Therefore, I would like to state that if the SSA is to be fulfilled, then the teachers should get the same amount. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the question being asked by Prof. Basudeb Barman.

(Interruptions) …* PROF. BASUDEB BARMAN (MATHURAPUR): Sir, thank you very much for permitting me to put a question.   In the year 1998, the Central Government set up a Committee under the Chairmanship of Professor Tapas Majumdar to estimate the possible expenditure to be incurred to universalise education up to the age of 14 years.  The total estimated amount was Rs. 1,36,922 crore. This amount was suggested for a period of 10 years, that is, from 1998-1999 to 2007-2008, but definitely it will go now till the year 2010.

* Not Recorded.       

My question is whether the Government is contemplating or has contemplated any step for this amount of investment for universalization of primary and secondary education.

 

SHRI PRABODH PANDA(MIDNAPORE) : Sir, the hon. Minister is very much aware that the ICDS workers are involved in the SSA, and they are lakhs in number. They are engaged in the SSA, but they are not getting regularised.  On the other hand, the ICDS officers and supervisors have been regularised.  Lakhs and lakhs of ICDS workers are taking the responsibility of taking care of the children.  Nearly 12 million ICDS workers are working for the children under the SSA, but they are not getting the minimum wages. Are the Union Government or the State Governments contemplating to bring out any programme to ensure that they get at least the minimum wages?

   

श्री राम कृपाल यादव (पटना) : सभापति महोदय, सर्वशिक्षा अभियान पूरे देश में बच्चों को शिक्षा देने के लिए चलाया जा रहा एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। लेकिन देश में अभी भी बहुत से ऐसे प्रदेश हैं जहाँ की आबादी बहुत ज्यादा है लेकिन शिक्षा का स्तर बहुत ही नीचे है। ऐसे चार पांच राज्य हैं, जैसे बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश्, मध्य प्रदेश और राजस्थान*[cmc59]  जिन्हें हम बीमारू राज्य भी कहते हैं। इन राज्यों में शिक्षा का स्तर बढ़े, साक्षरता का रेट बढ़े, उसके लिए क्या सरकार कोई विशेष योजना चलाने का विचार कर रही हैं ? अभी डा. चिंता मोहन जी ने बताया कि बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए, भारत सरकार पूरे देश में उनके लिए भोजन की व्यवस्था करती है। इस योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जब बच्चे स्कूल में पढ़ने के लिए जाते हैं, तो एक-दो घंटे खाने में ही लग जाते हैं और बच्चे खाना खाकर घर चले जाते हैं, फिर शिक्षक भी घर चले जाते हैं। इस तरह से पूरी पढ़ाई नहीं हो पाती। इसलिए इस राशि का उचित व्यय नहीं हो पा रहा है। इसलिए बच्चे स्कूल समय पर जाएं और पढ़ाई के लिए पूरा समय दें, उसके लिए क्या सरकार इस योजना में कोई परिवर्तन करने पर विचार कर रही है ?

श्री राजाराम पाल (बिल्हौर) : सभापति जी, मैंने भी नोटिस दिया है, मुझे भी बोलने का मौका दें।

सभापति महोदय : ऐसा नहीं है। आपने रिक्वेस्ट नहीं दी। मैं विशेष परिस्थिति में उन माननीय सदस्यों को मौका दे रहा हूं, जिनका नाम बैलेट में नहीं आ पाया है।

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : सभापति जी, अर्जुन सिंह जी का सर्व शिक्षा अभियान, इससे भारत देश की बढ़ जाएगी शान।

अर्जुन सिंह जी अगर ज्यादा देंगे ध्यान, तो हर छात्र बनेगा इनका फैन।

एनडीए वालों का नहीं बढ़ेगा ज्ञान।

सभापति महोदय : आप सिर्फ प्रश्न पूछें। यह आधे घंटे की चर्चा है।

   

श्री रामदास आठवले : यूपीए सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान चलाया गया है। यह मंत्री जी ने एक अच्छा कार्यक्रम देश में पेश किया है। सभी बच्चों को शिक्षा देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए शिक्षा का निजीकरण नहीं होना चाहिए। आज देखने में आता है कि मेडिकल कालेजज़ और इंजीनियरिंग कालेजज़ में केपिटेशन फीस लेकर शिक्षा दी जा रही है, जो कि अच्छी बात नहीं है। सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए और ऐसी नीति बनानी चाहिए कि प्राइवेट इंस्टीटयूशंस में केपिटेशन फीस और डोनेशन पर पाबंदी लगे। मंत्री जी अपने जवाब में बताएं कि वह इस सम्बन्ध में क्या करने वाले हैं? जिस तरह से केन्द्रीय विद्यालय चल रहे हैं, उसी तरह से हर संसदीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए भी एक केन्द्रीय विद्यालय होना चाहिए। क्या सरकार इसके लिए कोई योजना बनाने जा रही है ?

श्री राजाराम पाल : मान्यवर, सर्व शिक्षा अभियान सभी बच्चों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मैं कुछ सुझाव इस बारे में देना चाहता हूं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत कई स्कूल्स बाल श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे हैं।

सभापति महोदय : आप केवल प्रश्न पूछें।

   

श्री राजाराम पाल : स्कूल्स में जो मिड डे मील और प्रौढ़ शिक्षा पर पैसा जा रहा है, उसमें से ८०-९० प्रतिशत पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। देश के सबसे बड़े आबादी वाले उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों की बेहतरी के लिए जो पैसा केन्द्रीय सरकार से जाना है, उसे शीघ्र भेजने का सरकार कष्ट करे। उत्तर प्रदेश में १५६५ विद्यालय ऐसे हैं, जहां छत नहीं है। इसलिए इन तमाम विद्यालयों में छत का इंतजाम सरकार को करना SÉÉÉÊcA[R60] ।

18.00 hrs. सभापति महोदय :  सदन का समय समाप्त हो गया है, इसलिए आप सबकी सहमति हो तो इस आइटम के समाप्त होने तक समय बढ़ाया जा सकता है।

कुछ माननीय सदस्य : ठीक है।

सभापति महोदय : श्री रविचन्द्रन।

 

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI (SIVAKASI): Sir, in Tamil Nadu, the name boards of SSA schools are written in Hindi. It is not easy for the public to read those name boards. I would request the Government to put up the name boards in Tamil translated version.

   

DR. RAM CHANDRA DOME : Sir, the Compulsory Education Bill has been enacted in this House for universalisation of education. However, one major lacuna was there in that Bill. The responsibility of zero to five years has been left out. Is the Government thinking of incorporating this segment of zero to five years for imparting compulsory pre-school education?

 

श्री विक्रमभाई अर्जनभाई माडम (जामनगर) : सभापति जी, जो विधवाएं दूसरों के घरों में घरेलू काम करके अपने बच्चों को पढ़ाती हैं, ऐसे बच्चों को कुछ विशेष फैसलिटीज देकर क्या सरकार उनके भविष्य के लिए कुछ करना चाहती है ताकि वे बच्चे भी पढ़-लिखकर अपने भविष्य को संवार सकें और उनको भी नौकरी मिल सके।

 

मानव संसाधन विकास मंत्री (श्री अर्जुन सिंह) : आदरणीय सभापति महोदय, यह विषय देश के भविष्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब-करीब सभी दलों के सम्माननीय सदस्यों ने इस विषय पर अपनी चिंता का इज़हार किया है। मैं यह मानकर चलता हूं कि चिंता का इज़हार इस बात का प्रमाण है कि इस योजना के सफल होने में भी वे अपनी भागीदारी चाहते हैं। सिर्फ आलोचना की द्ृष्टि से ये बातें नहीं कही जा रही हैं। सर्व-शिक्षा-अभियान जैसे कुछ कार्यक्रम हैं जिन्हें आंकड़ों के आधार पर सफल नहीं कहा जा सकता है जब तक कि इन अभियानों के लिए एक संकल्प व्यवस्था में न हो। यह संकल्प केवल शासकीय कर्मचारियों में होने से भी काम नहीं चलेगा। उनका तो काम है और वे उसके लिए तनख्वाह पाते हैं। यह संकल्प जब तक सामाजिक स्तर पर, व्यापक रूप से नहीं होगा तब तक ऐसे प्रोग्रामों की सफलता संदिग्ध है। मॉनटिरिंग एक बात है। अब आप मॉनटिरिंग के लिए १० लोगों के ऊपर ५ लोगों को लगा दें तो भी ठीक नहीं है और जिस लेवल पर मॉनटिरिंग महत्व रखती है वह तो ग्रामीण स्तर का लेवल होना चाहिए, जिसमें हमारी पंचायतों के नुमाइंदे, हमारे जन-प्रतनधि हों और जिन्हें समाज के कमजोर वर्ग के अंदर मॉनटिरिंग करने में रुचि हो। ऐसे लोगों को आप जब इसमें संबद्ध करेंगे तो हमें खामियां भी नजर आयेंगी और उनको दूर करने का रास्ता भी निकलेगा। मैं कोई शेखी बघारना नहीं चाहता हूं और न यह कहना चाहता हूं कि जो कुछ होना चाहिए था वह हो गया है। मौलिक रूप से सवाल यह है कि एक व्यापक स्तर पर इस चीज में सम्मलित होने की इच्छा-शक्ति होनी चाहिए और वह प्रशासकों में भी होनी चाहिए, जन-प्रतनधियों में भी होनी चाहिए और सामान्य-जनों में भी होनी SÉÉÉÊcA[r61]  ।ये अभियान उस हद तक सफल होंगे, जब उस अभियान में हमारी रुचि और हमारा स्वयं का जुड़ना होगा। इसे सफल और सरल करने के लिए जो सुझाव अभी दिए गए हैं, मैं उनको बहुत ज्यादा महत्व देता हूं। इस समय मैं अलग-अलग प्रश्नों का, आंकड़ों के साथ, जैसा माननीय सदस्य चाहते हैं, शायद उत्तर नहीं दे सकता लेकिन मैं एक ही निवेदन करना चाहता हूं कि यह अभियान आपकी नजर में सबसे आवश्यक और नितान्त जनहित से जुड़ा अभियान है।

जहां तक माननीय जन प्रतनधि, जिस स्तर पर भी इसमें सम्मिलित होकर मार्गदर्शन देना चाहते हैं अपनी जिम्मेदारी को निभाना चाहते हैं, कृपया इसके लिए समय निकालें। मैंने कोशिश की और आगे भी करूंगा कि यह केवल सरकारी अभियान न रहे, यह अभियान एक जन आन्दोलन का स्वरूप ले। राजीव जी ने जब मिशन मोड की बात की थी उसके पीछे यही उद्देश्य था और मिशन मोड के द्वारा जो कुछ भी काम हुआ, उसके ठोस नतीजे आज हमें देखने को मिल रहे हैं। हम आपसे इतना ही कह सकते हैं कजो धनराशि इकट्ठी की गई है, उसे व्यय करने के मापदंड सुनिश्चित और स्पष्ट हों। उसके जो भी नतीजे निकलें, उनका मूल्यांकन करने की ईमानदारी से कोशिश हो क्योंकि हम अपने को या किसी और को धोखा देकर ऐसा अभियान नहीं चला सकते। जो खामियां हैं, वे स्पष्ट हैं। भ्रष्टाचार का जो अंश है, वह कितनी दूर तक है, यह हम और आप सब जानते हैं, इसलिए यह कहना कि यह अभियान बिल्कुल नहीं चला है, इसमें कोई उम्मीद नहीं है, ऐसा कहना गलत होगा लेकिन यह सौ प्रतिशत सफल हो गया यह कहना और भी गलत होगा। हमें इसके बीच का कोई मूल्यांकन निकालना होगा। जो समतियां बनें, उनमें यदि जन प्रतनधियों, पंचायतों की पूरी-पूरी जिम्मेदारी और भागीदारी होगी तो मेरा ख्याल है कि हम और आप जो कल्पना करते हैं, कुछ हद तक उसमें सफल हो सकेंगे। खास तौर से गल्र्स चाइल्ड की शिक्षा के आंकड़ों को देखते हुए, जो हमें विशेष रूप से कदम उठाने हैं करीब-करीब यह निश्चित हो चुका है कि कौन सीचीजें हैं, जिन की वजह से हम इसमें गति ला सकते हैं? एक तो मुफ्त पढ़ने की किताबें, मैं आठवीं क्लास तक की लड़कियों की बात कर रहा हूं। स्कूलों में सैपरेट टॉयलेट और कम से कम महिला शिक्षक ५० प्रतिशत हों।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : वे ज्यादा होनी चाहिए।

श्री अर्जुन सिंह: ज्यादा करने की बात सोची जा सकती है लेकिन आज की व्यावहारिकता को देखते हुए, नहीं हुई, इसलिए ५० प्रतिशत ही पूरी तरह हो जाए, तो मैं समझता हूं कि वह काफी होगा। शिक्षा के लिए स्पैशल कैम्पस बनें। जो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना की बात है …( व्यवधान)    ब्लॉक तक नहीं, इससे कुछ और नीचे ले जाना चाहिए। वह कम से कम हर पंचायत में नहीं हैं तो कम से कम पिछड़े इलाकों में होना चाहिए। इन्हीं सब चीजों में साधनों की आवश्यकता होगी[R62] । अभी लोगों को ऐसा लगता है कि दो प्रतिशत सेस क्या लग गया, सब पैसा उसी में चला जा रहा है। जो आंकड़े पहले से ही आपको मिले हैं, उनको न भुलाया जा सकता है न छिपाया जा सकता है।…( व्यवधान) 

श्री राजाराम पाल : सभापति महोदय, उत्तर प्रदेश को धन मुहैया करा दें।

श्री अर्जुन सिंह : सभापति महोदय, धन मुहैया करने का फ्रेज तो बहुत अच्छा है लेकिन धन मुहैया होने की सीमा होती है। अब स्टेट्स की जो हालत है, वह हम लोगों से छिपी नहीं है। जिन स्टेट्स में भी यह कोशिश हो रही है और वे जो कुछ कर पा रहे हैं और जिन परिस्थितियों में उन्होंने चेष्टा की है इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। ये जो विषय हैं, उसमें सामूहिक रूप से विचार करके, कुछ अतरिक्त फैसल लेने पड़ सकते हैं और उन फैसलों को लेने में राजनीति से ऊपर उठकर प्रयास करना पड़ेगा।

अब सवाल आता है कि स्कूलों में जिन चीजों का अभाव है, उनको कैसे दूर किया जाए। एनरोलमेंट बढ़ा है और इसके साथ ही साथ जो ड्रॉप आउट््स हुए हैं, उनकी संख्या में कमी हुई है, आंकड़ों के हिसाब से यह स्वीकार करना पड़ता है। लेकिन जितनी इसमें बढ़ोत्तरी होनी चाहिए और जितनी कमी होनी चाहिए, उसका अनुपात ठीक नहीं है। लड़कों को अनुपात में लड़कियों के एनरोलमेंट में बढ़ोत्तरी हुई है, वह बढ़ोत्तरी प्राइमरी लैवल पर ३९ से ८८ तक पहुंच गई है और अपर प्राइमरी लैवल पर १८ से ७८ पहुंच गई है। यह आंकड़े वर्ष १९५०-५१ से लेकर २००२-०३ के बीच के हैं। लड़कियों के क्षेत्र में ड्रॉप आउट रेट नीचे आया है, वर्ष १९६०-६१ के मापदंड में ७०.९ प्रतिशत था और वर्ष २००२-०३ के मापदंड में ३३ प्रतिशत आया है और जेंडर गैप एलमिनेट हुआ है। यह पॉजटिव संकेत है और इन क्षेत्रों में अगर हमारे प्रयास में जरा भी ढीलापन आया तो फिर से ये वहीं पहुंच जाएंगे। पब्लिक एजुकेशन, एक अभियान है, अभी हमारे सांसद ने कहा है और मुझे बहुत खुशी है कि हमारे सांसद लोग इस बात को भी महत्व देते हैं। अक्सर बड़ी-बड़ी योजनाएं ही किसी संसदीय क्षेत्र के विकास की बात नहीं है…( व्यवधान) 

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सभापति महोदय, मैंने इसी को एजेंडा बनाया था और मैं सभी लोगों से अपील कर रहा हूं।…( व्यवधान) 

श्री अर्जुन सिंह : इसीलिए मैं आपको धन्यवाद दे रहा हूं। यह हम सभी लोगों को करना है, अकेले आदमी के करने से यह नहीं होगा…( व्यवधान) 

श्री राजाराम पाल : सभापति महोदय, मैं इससे संबद्ध करता हूं।

श्री अर्जुन सिंह :यह रिएलाइजेशन की बात है। हमारे रिएलाइजेशन का लैवल क्या है, मैं समझता हूं कि सर्वशिक्षा अभियान निश्चय ही एक अच्छा अभियान है लेकिन इसकी सफलता जनमत पर निर्भर है और वह जनमत भी कम से प्रतनधियों के स्तर पर हो। आज की चर्चो और जो चर्चाएं आजकल व्यापक रूप से चल रही हैं, उनसे यह भरोसा बन रहा है कि यह विषय केवल ब्यूरोक्रेसी के जिम्मे नहीं है, इसमें हम भी अपनी भागीदारी करते हैं[p63] । उस दिशा में जितना भी हम कर सकें, उतना ही हम सब को लाभ होगा। मैं माननीय सदस्यों को इतना ही आश्वस्त कर सकता हूं कि इस भावना को हंम उस स्तर पर लाकर खड़ा करें जिसमें हमारी ओर से पूरी कोशिश होगी। जैसे जैसे इस वर्ष के आंकड़ें सामने आयेंगे, जो हमारे प्रयास सामने आयेंगे, आप उन से कन्िंवस होंगे कि हम ने कोशिश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हम सफलता की बात पहले से नहीं कर सकते। मैं माननीय सदस्यों के प्रश्नों की स्पष्टवादिता और सर्ववदित लक्ष्यों को समझ रहा हूं। मेरा कहना है कि आपके विचारों और चिन्ताओं के बीच में हमें आगे का मार्ग निकालना होगा, तभी हम सफल होंगे,यह मैं माननीय सदस्यों को आश्वस्त करना चाहूंगा।

श्री राम कृपाल यादव : बिहार की हालत बीमार जैसी है।

श्री अर्जुन सिंह लेकिन आप बीमारू क्यों कहते हैं?

श्री राम कृपाल यादव : यह सचाई है। बिहार में गरीबी, फटेहाली है। यह पिछड़ा हुआ है। वहां शिक्षा की दर बहुत कम है। इनमें ३५ प्रतिशत आबादी ऐसी है…( व्यवधान) 

सभापति महोदय :  आपकी बात हो गई है, आप डिटेल में क्यों जा रहे हैं?

श्री अर्जुन सिंह :  बीमारू का अहसास होना चाहिये लेकिन बीमारू कोई डिस्िंटकशन नहीं है। यह ध्यान में रखने की जरूरत है।

श्री रवि प्रकाश वर्मा : सभापति जी, कम्पलसरी एजुकेशन बिल की बात माननीय मंत्री जी ने की है, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की बात की है और उन्होंने NCMP में इसे मैंशन किया है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि इसे जल्द से जल्द मैटीरियलाइज करें ताकि हम सब लोगों को ताकत मिले।

सभापति महोदय :  आप बैठिये. माननीय मंत्री जी का जवाब हो चुका है।

SHRI SUNIL KHAN : But what about the Para Teachers?  Para teachers are those teachers who are engaged under the Sarva Shiksha Abhiyan.

सभापति महोदय :  आप बैठिये। आपका भाषण पहले हो चुका है।

SHRI SUNIL KHAN : They are working as teachers.  The other teachers are benefited more than the younger teachers. If the demands of those who work as Para Teachers are not fulfilled, they will not do their work properly. So, the objectives of the Sarva Shiksha Abhiyan will not be fulfilled.

सभापति महोदय : मंत्री जी ने काफीविस्तार से माननीय सदस्यों द्वारा उठाये गये बिन्दुओं का जवाब पहले ही दे दिया है ।

The House stands adjourned to meet at 11 a.m. on 12th May, 2005.

18.18 hr The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Thursday, May 12, 2005/Vaisakha 22, 1927 (Saka).

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