Lok Sabha Debates
Shri Arjun Ram Meghwal Called The Attention Of The Minister Of Health And Family ... on 30 November, 2012
> Title: Shri Arjun Ram Meghwal called the attention of the Minister of Heatlth and Family Welfare to the situation arising out of spread of Dengue and Chikungunya in the Country and steps taken by the Government in this regard.
श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर) : महोदया, मैं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
“ देश में डेंगू और चिकुनगुनिया के बढ़ते मामलों से उत्पन्न स्थिति और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदम। ” THE MINISTER OF HEALTH AND FAMILY WELFARE (SHRI GHULAM NABI AZAD): The outbreak of Dengue and Chikungunya in different parts of the country is a major public health challenge. This is being effectively addressed and dealt with by the State Governments with necessary support and guidance by the Central Government under the National Vector Borne Disease Control Programme.
As the hon. Members are already aware, Dengue is an outbreak prone viral disease transmitted by Aedes mosquitoes. Aedes aegypti is the primary vector. Aedes albopictos is the secondary vector. The spread of Dengue infection has shown an increase in recent years due to various man-made and environmental factors leading to proliferation of Aedes mosquito breeding sites, both in urban and rural areas. The dimension of the problem can be gauged by the number of cases and deaths. In 2012, up to 15th November, a total of 35,066 cases with 216 deaths have been reported. The case fatality rate however has remained low at 0.6%.
Chikungunya is a debilitating illness also caused by bite of infected aedes mosquito. Unlike Dengue, Chikungunya is non-fatal. The reasons for the outbreak of Chikungunya and Dengue are the same. The total number of Chikungunya suspected cases has declined. In 2012, upto 15th November, the total number of reported suspect cases is 14227.
As on date, there is no vaccine or drug available for prevention of Dengue and Chikungunya. Treatment of Dengue and Chikungunya is mainly symptomatic. In severe cases of Dengue, blood/ platelet transfusion may be required.
The Ministry had prepared a long term action plan in January 2007, for prevention and control of Dengue and Chikungunya in the country and this was circulated to all the States for implementation. Thereafter, in May 2011, the situation was reviewed and a mid-term plan for Dengue and Chikungunya was approved by Committee of Secretaries and circulated to the States for implementation. The strategy of the mid-term plan includes among others, entomological surveillance, Vector Control, Case management, Laboratory diagnosis and Clinical management.
Under the National Vector Borne Diseases Control Programme, the Government of India provides technical, financial and diagnostic assistance to the States. Diagnostic assistance includes laboratory support in Sentinel Surveillance Hospitals, linking with Apex Referral Hospitals and providing ELISA based Antibody Dengue Kits (IgM) free of cost as also financial support for antigen (NSI) test kits. The disease situation in the country is regularly monitored by NVBDCP through reports received from the States, field visits by Officers from NVBDCP and review at higher levels. The Union Health Secretary had written to all Chief Secretaries on 26th March, 2012, drawing their attention to take timely action for prevention and control of vector-borne diseases and effective control activities during the inter-epidemic period. I have myself, written to the hon. Chief Ministers on 31st May, 2012 emphasising the need to reduce the occurrence of vector-borne diseases and for timely and effective prevention and control measures by the State Governments and local authorities before outbreak. I have personally reviewed the situation with State Health Ministers and Senior Officers of Delhi, Haryana, Uttar Pradesh and Mayors and Municipal Commissioners of Delhi on 8th October, 2012 and also with the State Health Ministers and Senior Officers of Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Karnataka, Kerala and Puducherry at Chennai on 12th October, 2012. During the review meetings, it was emphasized that States and local bodies must take effective action for eliminating the mosquito breeding by source reduction, use of larvicides and personal protective measures.
During the Eleventh Five Year Plan, a total of Rs. 1946 crore was spent on the National Vector Borne Disease Control Programme which includes allocations for Dengue and Chikungunya also.
The Central Government will continue to provide technical and financial assistance for preventing the outbreak of Dengue and Chikungunya. We hope and trust that all State Governments will continue with various preventive and control measures so that the number of cases and mortality due to Dengue is minimised. I also take this opportunity to appeal to every citizen of the country to actively participate and cooperate with the Government in the fight against Dengue and Chikungunya by preventing breeding of mosquitoes in water collections found in desert coolers, tyres, cans, pots, vessels, coconut shells, water containers and other receptacles.
श्री अर्जुन राम मेघवाल : धन्यवाद अध्यक्ष जी, आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विषय पर, कॉलिंग अटेन्शन पर बोलने की अनुमति दी।
अध्यक्ष जी, मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा है कि हम इसको हेल्थ चैलेंज के रूप में ले रहे हैं।
दूसरा, अभी मंत्री जी जिक्र कर रहे थे कि हम एक लॉग टर्म एक्शन प्लान बना रहे हैं। मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि डेंगू और मलेरिया के बारे में इस सदन के 42 सदस्यों ने प्रश्न लगाए। इससे भी आपको लगता होगा कि इसके लिए माननीय सदस्य कितने गंभीर हैं। कई एमपीज़ को डेंगू का मच्छर डंक मार चुका है।...( व्यवधान) रमन डेका जी बैठे हैं, आगरा के एमपी रामशंकर जी बैठे हैं। ...( व्यवधान) हरसिमरत कौर जी भी बैठी हैं। ...( व्यवधान) कई लोगों को चिकनगुनिया हुआ और वे अभी तक ठीक नहीं हुए।...( व्यवधान)
मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि 23 नवम्बर, 2012 के अतारांकित प्रश्न संख्या 356, जो डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से संबंधित था, उस पर मंत्री जी ने जो जवाब दिया, अभी जो स्टेटमैंट दी और मीडिया में जो संख्या आ रही है, उनमें बहुत फर्क है। मैं पहले यह जानना चाहता हूं कि डेंगू और चिकनगुनिया कहां-कहां फैला है और कितने लोग मरे हैं? मंत्री जी कह रहे हैं कि 15 नवम्बर, 2012 तक 35,066 मामले सामने आए हैं और 216 लोगों की मौत हो चुकी है। मीडिया में कई दिनों से आ रहा है कि सिर्फ दिल्ली में डेंगू से मरने वाले लोगों की संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। एक हजार और 216 के आंकड़े में बहुत अंतर है, दो-चार का फर्क हो तब भी समझ में आता है। मंत्री जी, आप इतना फर्क क्यों रखते हैं, यह मैं जानना चाहता हूं।
डेंगू एडिस एलबोपिकटस नाम के एक मच्छर की प्रजाति से फैलता है। यह प्रजाति भी दो तरह की हो गई है - एक एडिस एजिपटाई और दूसरा एडिस एलबोपिकटस नाम का मच्छर हो गया। इन दोनों में यह फर्क है कि एक घर के अंदर काटता है और दूसरा घूमते हुए लोगों को भी काट सकता है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, इनके नैशनल अभियान के टैक्नीकल स्टाफ हमें बताते हैं। इसलिए जब एक नामी फिल्म निर्माता को डेंगू काट गया तो बहुत हल्ला मचा, लेकिन एमपीज को काट गया तो ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया गया। फिल्म निर्माता की डैथ डेंगू के मच्छर काटने से हुई, आपने तब भी ध्यान दिया, तो यह अच्छी बात है। आपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार करके इस हाउस का भी ध्यान आकर्षित किया। यह बहुत गंभीर समस्या है। यह मच्छर पेड़-पौधों, टायर, डैजर्ट कूलर आदि के साफ पानी में रहता है।...( व्यवधान) यह सफाई पसन्द मच्छर है। अगर यह चिकनगुनिया में कन्वर्ट हो गया तो व्यक्ति छ: महीने तक हिल ही नहीं सकता। यह इतनी खतरनाक बीमारी है और यह कह रहे हैं कि हम इसे कंट्रोल कर रहे हैं। अगर कोई सरकार मच्छर ही नहीं मार सकती तो भ्रष्टाचार पर कंट्रोल करना बहुत बड़ी बात है। भ्रष्टाचार तो आजकल बड़ा मच्छर हो गया है। ...( व्यवधान) 16 डिग्री तापमान होने पर एडिस प्रजाति के मेल मच्छर प्रजनन नहीं कर पाते, इस कारण फीमेल मच्छर से अंडे नहीं होते। अत: सरकार के मंत्री सिर्फ 16 डिग्री तापमान का इंतजार कर रहे हैं। इनकी मच्छर मारने की कार्यवाही कहीं नहीं दिखती। आप दिल्ली नगर निगम से पूछिए। मैं बीकानेर संसदीय क्षेत्र से आता हूं। वहां भी डेंगू के मरीज बहुत हो गए हैं। बिहार में हो गए, सब जगह हो गए हैं।
मंत्री जी अपनी स्टेटमैंट में जिक्र कर रहे थे कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में नेशनल वैक्टर बॉर्न डिज़ीस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत 1946 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि 1946 करोड़ में से डेंगू और चिकनगुनिया के इलाज के लिए कितने पैसे दिये गये? हो सकता है कि अधिकारियों की तनख्वाह भी उसमें सम्मिलित हो, हो सकता है कि जो वे टीए, डीए लेते हैं, वह भी उसमें सम्मिलित हो। 1946 करोड़ रुपये की राशि बहुत मिनिमम है। मंत्री जी, दिल्ली में ही डेंगू से हजार लोग मर गये हैं और आप कह रहे हैं कि हम बहुत बड़ा प्रोग्राम लेकर आ रहे हैं।
अध्यक्ष महोदया, मेरा आपके माध्यम से कहना है कि इनका एंटी लार्वा प्रोग्राम और डोमेस्टिक ब्रीडिंग चैकर्स, जो दवा डालने के लिए होता है, उनकी प्रोग्रैस भी ठीक नहीं है। मैं एक बड़ा खुलासा कर रहा हूं। मंत्री जी, शायद आपको जानकारी होगी कि अभी एक सेमीनार हुआ था। जब आपके लोगों ने कहा कि इसे कंट्रोल करो तो सेमिनार में कंट्रोल करने वाले लोगों ने कहा कि हमारे पास टेक्नीकल स्टॉफ नहीं है। अभी दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया को कंट्रोल के लिए एक सेमीनार हुआ था। मंत्री जी, हो सकता है कि आप उसमें गये होंगे। उस सेमिनार में टेक्नीकल स्टॉफ और जो इसे देखते हैं, उन्होंने कहा कि हम चिकनगुनिया और डेंगू को कंट्रोल नहीं कर सकते। हम कैसे इसके साथ जी सकते हैं, इसका कोई समाधान ढूंढ़ना चाहिए। आप यह कह रहे हैं कि हम डेंगू और चिकनगुनिया के लिए एक लाँग टर्म पालिसी ला रहे हैं और आपके विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार में यह प्रस्ताव पास होता है कि हम डेंगू और चिकनगुनिया के साथ जी कैसे सकते हैं क्योंकि वह घर में भी काटता है और बाहर घूमते हुए भी काटता है। मच्छर दो तरह के हो गये हैं। मेरा यह कहना है कि जब आपका इस तरह का टेक्नीकल सेमिनार था, तो वहां लाँग टर्म एक्शन प्लान, हैल्थ चैलेंज की बात आपने क्यों नहीं की? अगर सेमिनार में इस तरह की बात हुई है, तो आपने इस बारे में क्या किया, यह मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं।
माननीय मंत्री जी, मैं आपको कुछ सुझाव देना चाहता हूं। आपके यहां नेशनल वैक्टर बॉर्न डिजीस को कंट्रोल करने का जो प्रोग्राम चल रहा है, उसमें टेक्नीकल स्टॉफ की बहुत कमी हो गयी है। पता नहीं आपको जानकारी है या नहीं। बहुत लोग रिटायर हो गये हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए कोई स्टॉफ नहीं है। जब यह बीमारी बीकानेर की वॉल सिटी की चारदीवारी में ज्यादा फैली तो मैंने उनके डायरेक्टर को चिट्ठी लिखी कि आप एक टीम भेजिये। टीम भेजने कि लिए इनके पास स्टॉफ नहीं है। इसलिए जयपुर में जो इसे देखते हैं, उनको कहते हैं कि आप जाइये और जयपुर वाले फिर किसी और टीम को कह देते हैं। यहां से कोई टीम नहीं जाती ब किसी तरह का छिड़काव वगैरह नहीं हो पाता। वे लोगों को जाकर समझाते हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया को हम कंट्रोल नहीं कर सकते। यह तो फैलेगा ही। जब इस तरह की बातें आती हैं, तो आपको चिंता होनी चाहिए कि क्यों इस तरह की बातें आपका टेक्नीकल स्टॉफ भी करता है। मैं यह कह रहा हूं कि आपने जो लाँग टर्म एक्शन प्लान बनाया है, उसके तहत क्या आप टेक्नीकल स्टॉफ की नियुक्ति करेंगे? यह मेरा पहला सुझाव भी है और प्रश्न भी है । ...( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): आप ज्यादा मत बोलिये, नहीं तो डेंगू का मच्छर काट जायेगा। ...( व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल : डेंगू मच्छर मुझे काटेगा, यह तो पता नहीं, लेकिन संजय जी, अभी किसी नए नेता को आपके किसी नेता ने उसे पूछा कि क्या आप मच्छर हैं? पत्रकारों ने कहा कि आप मच्छर हैं, तो उसने जवाब में कहा कि मैं डेंगू का मच्छर हूं। यह आपकी जानकारी में होना चाहिए। ...( व्यवधान)
वह डेंगू का मच्छर शायद आपको ही काटने वाला है। ...( व्यवधान) इनको डेंगू वाला मच्छर काट सकता है। ...( व्यवधान) आप टाइम बाउंड मेनर में टेक्नीकल स्टॉफ की नियुक्ति करें। एक उच्चस्तरीय मौनीटरिंग कमेटी का गठन किया जाना चाहिए, जो सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग से निरंतर रिपोर्ट प्राप्त करे। नागरिकों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। मच्छरों की रोकथाम में लोगों को जागरुक करना चाहिए। अभी मैं इसका कहीं बोर्ड नहीं देखता हूं। आप पेपर में ऐड दे सकते हो। पेपर में सरकार की उपलब्धियों के बड़े-बड़े ऐड आते हैं जिनमें तरह-तरह की फोटो लगी रहती हैं। जो फोटो एलीजिबल नहीं होती, वह भी लगी रहती है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया को कंट्रोल करने के लिए आप नागरिकों को जागरुक करने के लिए किसी तरह का ऐड नहीं दे रहे। आप सिर्फ 1946 करोड़ रुपये से पूरे देश में डेंगू और चिकनगुनिया को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो यह संभव नहीं है। इसलिए आप जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जागरुक कीजिए कि कहां-कहां ये मच्छर फैल सकते हैं, किस तरह से फैलते हैं, कैसे हम कंट्रोल कर सकते हैं। आप उनको यह मत समझाइए कि हम चिकनगुनिया और डेंगू के साथ कैसे रह सकते हैं, उसको कंट्रोल करने की कोशिश कीजिए। गांवों में चौपालो, नुक्कड़ नाटकों और दूरदर्शन पर विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से आम जन को मौसमी बीमारियों के प्रति जागरूक कीजिए। प्रभावित इलाकों में केन्द्र सरकार द्वारा वेक्टर-बोर्न डिजीज की एक्सपर्ट टीम का दौरा होना चाहिए। अगर आपके पास यह टीम रेगुलर नहीं है, तो आप इसे हायर कर सकते हैं, आउटसोर्स कर सकते हैं, कांट्रैक्ट पर ले सकते हैं, लेकिन आप टीम भेजिए। इसमें अगर आपको एफडीआई चाहिए, तो ले लीजिए। आल रिटेल सेक्टर में एफडीआई मत लाइए, लेकिन अगर इसमें एफडीआई चाहिए, तो ले लीजिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप चेयर को एड्रेस कीजिए।
श्री अर्जुन राम मेघवाल : मैं कहना चाहता हूं कि आप गांव की चौपाल के माध्यम से, नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से, दूरदर्शन पर, रेडियो के माध्यम से आप इसकी प्रॉपर प्रचार-प्रसार कीजिए, एड दीजिए और लोगों को जागरूक कीजिए कि कैसे हम इस पर कंट्रोल कर सकते हैं, आप अपनी आदतें कैसे ठीक कर सकते हैं जिससे यह मच्छर आपको ज्यादा काटें नहीं। डेंगू और चिकनगुनिया उन्मूलन अभियान देश भर में वर्ष-पर्यन्त चलना चाहिए। जब बरसात होती है और जब लगता है कि मलेरिया फैल रहा है, साथ में डेंगू भी आ सकता है, चिकनगुनिया इसका एक बाय-प्रोडक्ट है, तो आप इसको उससे जोड़ देते हैं कि मौसमी बीमारी है और आप मौसम ठीक होने का इंतजार करते हैं। आपके एक्सपर्ट्स कहते हैं कि 16 डिग्री टेंपरेचर होगा, तो यह ऑटोमैटिक मर जाएगा। लेकिन जब यह मच्छर डंक मार देता है, उस व्यक्ति की तकलीफ जानिए। यहां रमन डेका साहब बैठे हैं, वह मुझे सुबह ही कह रहे थे कि मुझे जब डेंगू ने खाया, तो मैं एक साल में ठीक हुआ। जब मलेरिया वाला मच्छर काटता है, तो व्यक्ति तीन-चार दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन डेंगू वाला मच्छर कई तरह की तकलीफ पैदा करता है । अगर एक साल में कोई एमपी ठीक होता है, तो सामान्य आदमी, आम आदमी जिसकी आप बात करते हो, अगर उसको डेंगू हो जाए, तो उसकी पूरी जिंदगी खराब हो सकती है। इसलिए इसे साधारण रूप में मत लीजिए, यह सदन भी आज इस पर इसीलिए चर्चा कर रहा है। डेंगू का अब तक कोई टीका नहीं बनाया गया है, इसके लिए लोग कई वर्षों से प्रयासरत हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है। अतः डेंगू के टीके के लिए मजबूती से अध्ययन और शोध करना होगा। इस अध्ययन और शोध में आप एफडीआई ला सकते हैं, हम आपका समर्थन करेंगे। लेकिन आप रिटेल में एफडीआई मत लाइए।...( व्यवधान)
श्री गुलाम नबी आज़ाद : एफडीआई वाले भी इसमें कुछ नहीं कर पाए हैं।
श्री अर्जुन राम मेघवाल : फिर रिटेल में क्यों ला रहे हैं? इसका मतलब यह है कि आप भी मान रहे हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया के साथ जीना सीखना पड़ेगा।...( व्यवधान) जैसे आपके टेक्नीकल सेमिनार में चर्चा हुई थी।
अध्यक्ष महोदया : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए। आपके सब स्पष्टीकरण प्रश्न आ चुके हैं।
श्री अर्जुन राम मेघवाल : मैडम, यह विषय बहुत गंभीर है। सदन में आपने इसकी अनुमति दी, इसके लिए हम धन्यवाद देते हैं। मंत्री जी इसको हल्के में न लें क्योंकि इस मच्छर के एक बार काटने के बाद यह छः-आठ महीने तक बहुत परेशान करता है, इससे जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है, कई तरह की दूसरी बीमारियां फैलनी लग जाती हैं। इसलिए मैं आपके माध्यम से पुनः मंत्री जी को कहता हूं कि इसको हल्के में लेने की जरूरत नहीं है, इसको कंट्रोल करने की जरूरत है। अगर आपको इसमें एफडीआई भी लानी पड़े, तो इसमें हम आपके साथ हैं, लेकिन रिटेल सेक्टर में एफडीआई मत लाइए।
महोदया, आपने मुझे बोलने के लिए अवसर दिया, उसके लिए आपको धन्यवाद देता हूं।
अध्यक्ष महोदया : इस क्रम में अगले वक्ता श्री शैलेन्द्र कुमार जी हैं, लेकिन डॉ. काकोली घोष दस्तिदार जी का निवेदन आया है कि उन्हें पहले बुलवा दें, मैंने निर्णय लिया है। वे कलकत्ता जाना चाहती हैं, वहां पर अपने विवाह की वर्षगांठ मनाने के लिए, इसलिए मैं उन्हें मना नहीं कर सकती हूं। मैं उनको अपनी शुभकामनाएं भी देती हूं।
अब आप बोलिए।
डॉ. काकोली घोष दस्तिदार (बारासात): माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपकी आभारी हूं कि आपने मुझे श्री शैलेन्द्र कुमार जी से पहले बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं उनकी भी शुक्रगुजार हूं और आपने इस अति गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने का मौका दिया है।
This is a very very important issue. As the Junior Minister in the Health Department has placed the records in the upper House two-three days back, it is alarming to note that till the month of November there have been reported cases of dengue to the extent of 35,000 and 216 people have already lost their lives in the country. This disease has no treatment. This dengue has no vaccine. If we put this question to this hon. House as to who is ruling this country गलतफहमी में मत रहिये, यह देश हम नहीं चला रहे हैं, यह देश Aedes aegypti or Aedes albopictus और कहीं-कहीं Anopheles भी चल रहा है और इस बार 216 people have not been killed. 216 is the death toll this year and it has been rising over the past three years. In 2010 it was 110; in 2011 it was 169; and this year only till the month of November we have lost 216 people. My heart really goes out to those families for no fault of theirs. It is totally a question of neglect on the part of this Government.
At the same time, I would like to congratulate the Government of West Bengal where the Health Minister in-charge is Hon’ble Chief Minister Ms. Mamata Banerjee. The least number of cases of the disease recorded has been in West Bengal – only 80 cases in Kolkata and 9 death has occurred in West Bengal because the Government has taken serious steps. This is a recorded version of the Government. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what she is saying.
(Interruptions)* … DR. KAKOLI GHOSH DASTIDAR :Nine death has taken place. Only 80 cases have been reported. The Government has taken immediate steps to sanction money, no doubt from the NRHM. Rs.16 lakh to the Kolkata Municipal Corporation; Rs.3 lakh each to the municipalities of Siliguri, Howrah, Asansol and Rs.75,000 each to 40 other municipalities to cause awareness and prevent the disease. The only way to stop this disease is by prevention of the mosquitoes from spreading. To prevent the growth of the mosquitoes, larvicide has to be used.
The most important point is that for this particular incident, for this particular calamity the onus lies not only with the Health Ministry. It has to be a coordinated effort of other Ministries also. The effect of global warming has caused insufficient rainfall in certain places at odd times. Yesterday there was a little bit of rainfall in Delhi. In the last two months we have seen in different States a little bit of rainfall occurring. It is not enough to wash away the larvae. But it is enough to cause stagnation of water in which the larvae is growing. So, the Ministry of Environment is involved here.
On the other hand, the Urban Development Ministry is also involved. The JNNURM was formed for making drains and sewage system throughout the country up to the mark, so that the people who are living not only in the urban slums, but the poorer people towards the rural areas also get proper drainage. That money has not been used properly and that Ministry also has to be brought in here because this discoordinated urbanization is resulting in clogging of the big drains. In my constituency Barasat I know that the huge drain which was supposed to carry the sewage of Barasat town is clogged by urbanization and slum dwellers are sitting on the drain. This is supposed to carry the sewage to the Vidyadhari river, but it is stagnating. So, the larvae is getting a chance to grow in that water. The Urban Development Ministry also has to be brought in. The Health Ministry should form a different task force and bring in the Ministries of Environment and Urban Development. To cause the larvicide to be effective, proper awareness and proper spraying of insecticides have to be done. The World Health Organisation has to be taken into confidence because they have projects in which they will help our country; they will help whichever country appears before them, so that they will send technical teams who will guide us as to how the larvicide function can be made more effective.
Previously, some 50 years back, a kind of fish, the gappi fish, used to be let lose in these drains, which would take up the larva. Now-a-days, no such project is being taken up.
The prevention of this disease lies in the larvicide, lies in the awareness and lies in the formation of a task force, like they have done in West Bengal, in which different other Ministries cooperate and coordinate so that these people, the common man, who are not aware of the disease, can be made aware. Everybody is not versed in medical science. So, it has to be made known to them when the mosquito is biting and that this particular mosquito bites during the day. This is an aggressive biter. It bites during the early morning and towards the sunset time. So, people have to be made aware of the fact that at this particular time of the day, they have to be careful so that they do not get bitten by the mosquito at that time. This kind of awareness programme will have to be taken forward.
The virus is changing its genotype very frequently. There are four serotypes and among those four serotypes, there are certain genotypes. They are changing the genotypes and avoiding the treatment. So, some research will have to be taken up by entomologists, and the Ministry will have to take this also into account, to prevent this from becoming an epidemic.
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):अध्यक्ष महोदया, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में मैं श्री अर्जुन मेघवाल, डॉ. काकोली घोष, डॉ. रामचन्द्र डोम और श्री रामा नागेश्वर राव जी को धन्यवाद देता हूं कि बहुत ही महत्वपूर्ण लोकमहत्व के प्रश्न पर नोटिस दिया है। इस चर्चा से अपने को सम्बद्ध करते हुए मैं अपनी बात सदन में रखना चाहता हूं।
आज हम डेंगू और चिकुनगुनिया पर बहस कर रहे हैं, लेकिन मुझे याद है कि सदन में योगी आदित्यनाथ जी ने इससे पहले 193 के तहत भी और कालिंग अटेंशन में चर्चा की थी। इनफ्लाइटिस, दिमागी बुखार और मलेरिया, अगर ये बीमारियां गांव में डिडक्ट न हुईं, डाक्टर ने डाइग्नोज न की तो कहा जाएगा कि वायरल फीवर है। महोदया, मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूंगा कि जो आंकड़े माननीय मंत्री जी ने दिए हैं, वे बहुत गलत हैं। हजारों की संख्या में लोग मरते हैं। एक प्रदेश की बात करें तो हजारों की मौत होती है, लेकिन अगर देश स्तर पर देखा जाए तो मेरे खयाल से प्रति वर्ष करोड़ों लोग मरते हैं। जहां तक बात डेंगू की है, मंत्री जी ने सदन में जो रिपोर्ट पढ़ी है, इन्होंने कहा है कि यह वायरल है और मच्छर के काटने से होता है। यह बात सही है, लेकिन अफसोस की बात है कि डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी होने के कारण हम प्लेटलेट्स मरीज को चढ़ाते हैं, तब मरीज बचता है। आज मैं आपके माध्यम से पूछना चाहूंगा कि केंद्र सरकार ने कौन से प्राइमरी हैल्थ सैंटर या कौन से अस्पताल में इन प्लेटलेट्स और ट्रंसफ्यूजन की उपलब्धता आपने उपलब्ध कराई है। ज्यादातर गरीब इलाकों में प्लेटलेट्स के ट्रंसफ्यूजन की सुविधा नहीं है और इसके अभाव के कारण मेरे खयाल से हजारों की संख्या में लोग मरते हैं। अभी हमारे मित्र मेघवाल जी ने कहा और यह बात भी सत्य है कि अगर यश चौपड़ा जी की मृत्यु डेंगू से न हुई होती, तो इसे कोई संज्ञान में न लेता। अभी एफडीआई की बात कही और हंसी में वह बात चली गई, लेकिन यह बहुत गंभीर मामला है। हम अपने क्षेत्रों में जाते हैं और देखते हैं कि कई लोग अस्पतालों में एडमिट हैं। उन्हें देखने जाते हैं, तो पता चलता है कि उन्हें बुखार आया और वे मर गए। यही कारण है कि डेंगू और चिकनगुनिया की बीमारी है, खास कर उत्तर प्रदेश के जो पूर्वांचल इलाके हैं, चाहे नेपाल हो, बंगलादेश हो या झारखंड, बिहार हो और पूर्वांचल में खास कर इलाहाबाद में कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ आदि तमाम ऐसे इलाके हैं, जहां बड़े पैमाने पर रोगी पाए गए हैं और ज्यादा लोग ग्रसित हुए हैं। अभी मंत्री जी ने तमाम राज्यों की जिम्मेदारी की बात कही है और यह भी कहा है कि राज्यों की जिम्मेदारी है कि इसकी रोकथाम करे। आपको संयुक्त रूप से जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर जब तक संयुक्त रूप से जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं करेगी, तब तक इन रोगों की रोकथाम हम नहीं कर सकते हैं। खासकर जो जागरूकता की बात है, विज्ञापन आप दे देते हैं। विज्ञापन से यह रोग रुकने वाला नहीं है। आज गांव में लोग ये भी नहीं जानते कि डेंगू क्या होता है, चिकनगुनिया क्या होता है? चिकनगुनिया में आप कहते हैं कि दो से पांच दिन तक जोड़ों में दर्द रहता है। लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि हफ्तों हफ्तों तक मरीज बीमार रहता है और आदमी विकलांग तक हो जाता है। यहां रिपोर्ट में आपने बताया है कि चिकनगुनिया से कोई मौत नहीं होती।
मंत्री जी, मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूंगा और आप मेरे साथ चलिए। मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस बीमारी से आदमी मरता भी है और विकलांग भी हो जाता है, उसके जोड़ों में दर्द रहता है और वह तड़प-तड़पकर मरता है। यह स्थिति है। चूंकि आपने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसको हम लोगों ने बड़े ध्यान से पढ़ा है।
दूसरे, मैं जानना चाहूंगा कि यह बीमारी कहां से उत्पन्न हो रही है? हमने आज तक इस बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं की है। हमें इस बारे में जानकारी हासिल करनी होगी औऱ खासकर मैं कहना चाहूंगा कि जो आपने टीके के बारे में कहा कि इस बीमारी के लिए कोई टीका भी नहीं है और न ही अभी तक किसी औषधि का निर्माण हो पाया है। हम इससे कैसे बच पाएंगे क्योंकि आपने जो रिपोर्ट में बताया है कि न तो इसके लिए कोई टीका है और न कोई औषधि है, तो फिर हम कैसे इस रोग की रोकथाम कर पाएंगे? इसलिए अगर आपका जवाब इस प्रकार का आता है तो इस देश का यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि हजारों करोड़ों लोग मर रहे हैं और उस पर सरकार कह रही है कि इसके लिए कोई टीका और औषधि उपलब्ध नहीं है। हम साधारण तौर पर डॉक्टर को दिखाने जाते हैं, डॉक्टर डॉयगनोज करता है और बुखार की दवा देता है। मरीज के जोड़ों में दर्द होता है तो डॉक्टर दर्द की दवा दे देता है लेकिन आप पर्टिकुलर इसके लिए किसी टीका और औषधि का निर्माण अभी तक नहीं कर पाए हैं। यह बड़े दुर्भाग्य की बात है।
जहां तक जो आंकड़े बताये गये हैं, जैसे आपने बताया कि 1946 करोड़ हमने विक्टर और जनरोग नियंत्रण के लिए बजट में प्रावधान किया है। लेकिन आज सवाल इस बात का है और जो सदन में मांग की गई है कि डेंगू और चिकनगुनिया के लिए आपने कितने बजट का प्रावधान किया है? जो आपने 1946 करोड़ रुपये का आंकड़ा दिया है, इसमें से आप डेंगू, चिकनगुनिया, इनसेफलाइटिस, दिमागी बुखार और मलेरिया के लिए अलग प्रावधान करें। आप कहते हैं कि मलेरिया का पूरी तरह से पूरे देश में उन्मूलन हो गया है। लेकिन आज मलेरिया भी बड़े जबर्दस्त तरीके से फैला हुआ है। मलेरिया का उन्मूलन आपने किया है, लेकिन मलेरिया से लोग फिर से बड़ी संख्या में ग्रसित हो रहे हैं। इसलिए इसका बजट ही आप अलग से करें और जहां तक सरकारी आंकड़ों का संबंध है कि डेंगू से 35066 और चिकनगुनिया से 14227 लोग मरे हैं। ये आंकड़े बिल्कुल सरकारी और असत्य हैं। आप अगर हकीकत जानना चाहते हैं और आप खुद गोरखपुर गये हैं।
मुझे याद है, वहां पर आपका दौरा हुआ था। वहां पर आपने देखा होगा कि वहां खासकर जब बाढ़ आती है और बाढ़ जब समाप्त होती है और थोड़ा थोड़ा पानी जब इकट्ठा होता है, तब मेरे ख्याल से ये बीमारियां फैलती हैं। यहां आर.पी.एन.िंसह जी बैठे हुए हैं, पूर्वान्चल से ये चुनकर आते हैं औऱ सम्मानित मंत्री जी भी हैं। आप जानते हैं कि कितने लोग इस बीमारी से मरते हैं? इसलिए मैं चाहता हूं कि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित हो औऱ अन्य माननीय सदस्यों ने भी सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान सरकार को करना चाहिए। मान लीजिए कि विदेशों से भी यदि आपको सहायता लेनी पड़े तो वहां से भी आप सहायता लीजिए। इसके लिए टीका और औषधि भी हैं लेकिन हम अभी तक निजात नहीं कर पाए हैं। आपने आंकड़ों में यह बताया कि हम सब कीट विज्ञानी, निगरानी, विक्टर नियंत्रण, रोग प्रबंधन, प्रयोगशाला निदान और प्रबंधन आदि तमाम व्यवस्था आपने बताई है लेकिन कोई भी इसमें कारगर नहीं हो पा रही है। हमारे तमाम वैज्ञानी और डॉक्टर्स भी इसमें फेल हो गये हैं। इसलिए अगर विदेश से भी आपको सहायता लेनी पड़े तो आप नि:संकोच लीजिए और इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान करके इस रोग से देश को निजात दिलवाएं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि जिन सम्मानित सदस्यों ने इस संबंध में अपने प्रश्न पूछे हैं, उन पर विस्तार से आपका जवाब आना चाहिए।
DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR): Thank you, Madam Speaker. It is an important motion under Calling Attention. Already, several of my colleagues have raised some pertinent questions on the massive outbreak of Dengue and Chikungunya -- the two important and major viral diseases in our country these days.
Madam, the Minister in his statement here has categorically said that the occurrence of this disease is mainly due to various factors -- manmade and environmental factors. I think it has been ascertained correctly. In case of Dengue incidence, as per the figure which has been mentioned for the current year till date, the detected cases are 35,066 and the death toll is 216. It is not a point of any consolation because the death rate is a very high rate of incidence. In many cases, actual reporting is not there. There are many factors which are taken into account to ascertain the disease in the primary incidence. That is why, in many cases, underreporting is always there. Though the case-fatality rate is minimum, we should not be satisfied with our present position.
In this respect, my colleague, Dr. Kakoli Ghosh Dastidar, claimed that no death had taken place in Kolkata or in West Bengal this year. But in the record given by the Ministry of Health of the Government of West Bengal, in the month of September this year, the total number of people affected by Dengue cases 2,033, including Kolkata Metropolitan City, and the death toll is seven. So, it is not that there are zero deaths. This is not the factual position. Though it is underreported, there is a massive outbreak. The cases have not been detected in proper time due to lack of proper investigative facilities at the grass-roots level. I would like to quote from The Statesman, an English Daily, published from Kolkata. They have reported on Dengue on 11th September, 2012. It was reported:
“That the official report from a team sent by the Union Health Ministry to visit West Bengal following an outbreak of Dengue had sought to blame the recurrence of the killer disease in the State, especially in Kolkata, on historical reasons and faulty test reports due to non-availability of updated equipment.” That was their finding. So, there is a lack of coordination and lack of proper investigative facilities.
MADAM SPEAKER: Please ask your clarificatory question. You are not asking the question.
DR. RAM CHANDRA DOME: Madam, I am putting the question. This is an important thing. Lack of coordination among all the stakeholders is a serious problem. Lack of investigative facilities and lack of management facilities were also the there. Underreporting is a major cause.
That is why, my concrete suggestion and observation is that this is an abject failure on the part of the National Vector Borne Diseases Control Programme. We have to appreciate the fact that this Programme is not being implemented effectively. This is the factual position. Whatever lacunae are there, the Government should review them.
MADAM SPEAKER: Please conclude.
DR. RAM CHANDRA DOME : There should be effective implementation of the Programme in coordination with all the stakeholders, and priority should be given for proper preparation in the intermediate period, that is, before the recurrence of the epidemic again. That is most important, but that is also lacking. Hence, that point should be taken into consideration.
So far as treatment is concerned, scientifically, we know that there are no antibiotics to treat the patients. We are helpless there. There is no supportive treatment. But most of the affected patients are our children and infants. And during the case of the fatal cases like Dengue and hemorrhagic fever which is an acute emergency and for acute emergency diseases, there is no treatment.
MADAM SPEAKER: Please conclude now. You are not asking the question. Please ask the question and conclude.
DR. RAM CHANDRA DOME : Within two minutes, I will conclude. So, dedicated and intensive treatment facilities should be there. I want to know whether the Government has made any arrangement to have an intensive facility for the treatment and care of the affected children and infants. At least up to the district level, this facility should be made available. That is necessary. Blood transfer facilities particularly the platelets should reach the affected people. That should be ensured.
The next thing is the corporates. During this kind of emergency, the people are helpless. Proper awareness is not there. With this emergency situation, corporate hospitals are exploiting our people. The poor people are being exploited. So, there is no standard protocol of treatment. So, throughout the country, a standard protocol of treatment of Dengue and Chikungunya and other viral diseases should be there. These protocols should be given down to the district level.
MADAM SPEAKER: Please conclude now.
DR. RAM CHANDRA DOME : One important thing is there Madam. Though the diseases are vector borne yet during the transmission of contaminated blood, we know that malaria can be spread by transmission of contaminated blood with malaria parasite. Similarly, this sort of viruses may be transmitted through contaminated blood or through transmission of blood products. So, this part should be taken care of. With this, I conclude.
श्री नामा नागेश्वर राव :मैडम, डेंगू का इश्यु जितना सीरियस है, रिपोर्ट को देखने के बाद मंत्री जी इस इश्यु को उतना सीरियसली नहीं ले रहे हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, यह बीमारी कोई एक-दो दिन पुरानी नहीं है, इस बीमारी को लगभग दस साल पहले आइडेंटिफाई किया गया था। आइडेंटिफाई करने के बाद अभी रीसेंटली डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 परसैन्ट पापुलेशन में इसके आने का स्कोप है और एशियन कंट्रीज में इंडिया बहुत ज्यादा अफैक्टिड कंट्री है। लेकिन इतने सीरियस इश्यु को मिनिस्टर उतना सीरियसली नहीं ले रहे हैं। इसकी फिगर्स के अनुसार जिस तरह से मिनिस्टर ने अपना स्टेटमैन्ट दिया है, रीसेंटली राज्य सभा में एक प्रश्न पूछा गया था और उस प्रश्न का उत्तर देते हुए मिनिस्टर ने बताया कि 2009 में 15535 डेंगू केसिज को आइडेंटिफाई किया गया था और अभी 15 नवम्बर, 2012 तक 35000 केसिज को आइडेंटिफाई किया गया है। फिगर्स के अनुसार तीन सालों के अंदर यह सौ प्रतिशत से ज्यादा है। मगर 35000 की जो फिगर है, यह टोटल गलत है। हमारे कुलीग ने इस बारे में अभी सब कुछ बताया है। हम विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और आंध्र प्रदेश के खम्मम डिस्ट्रिक्ट को फोकस करना चाहते हैं। खम्मम डिस्ट्रिक्ट में हमारी कांस्टीटुंसी में एक अशवारापेट असैम्बली कांस्टीटुंसी है, उसमें एक चंद्रगोंडा मंडल है, वहां के एक विलेज में छः आदमियों की डैथ हुई है। उस समय उन्हें देखने के लिए मैं वहां गया था। जब मैं वहां गया तो सुबह से लेकर शाम तक गांववालों ने मुझे आने नहीं दिया। वहां हमने खड़े-खड़े डाक्टर्स को बुलाया, खड़े-खड़े ही एनजीओ की वैन्स को बुलाया और रोड्स के ऊपर और स्कूल में पलंग डालकर लोगों का ट्रीटमैन्ट करना पड़ा। यह सब मैं ऐसे ही नहीं बोल रहा हूं। रीसेन्टली हिन्दू पेपर ने हमारे डिस्ट्रिक्ट के बारे में कोट किया है। एक इंडिपेन्डेन्ट आर्गेनाइजेशन ने उसमें सर्वे किया है। उस सर्वे के अनुसार सैंट्रल मलेरिया लेबोरेट्री ने सर्वे करने के बाद बताया कि खम्मम डिस्ट्रिक्ट में इसकी हाइयेस्ट फिगर है।
अभी रीसेंटली जिस तरह से क्वेश्चन का आंसर दिया है, उसमें डिस्ट्रिक्टवाइज़ और स्टेटवाइज़ भी दिया है। मिनिस्टर ने डिस्ट्रिक्टवाइज़ और स्टेटवाइज़ विवरण दिया था, उसमें ऑनरेबल मिनिस्टर ने यह लिखा है कि 216 लोगों की डेथ हुई है। हम ऑनरेबल मिनिस्टर को यह बोलना चाहते हैं कि आप एक टीम को लगा दीजिए, उसमें हमको भी मेंबर एपाइंट कीजिए। आपने ये जो कंट्री का फ़िगर 216 बतायी है, अगर एक डिस्ट्रिक्ट में इससे ज्यादा है तो हमको मेंबर बना कर आप एक हफ्ते में इसकी रिपोर्ट ले लीजिए। हम एक-एक गांव में जाएंगे। गलत रिपोर्ट की वजह से आप लोग इसको उतना सीरियसली नहीं ले रहे हैं। This is the problem. आप लोगों के इतना सीरियसली नहीं लेने की वजह से ही पूरे देश में लाखों लोगों की डेथ हो रही है।
पब्लिक हैल्थ सेंटर्स में कोई दवाई नहीं है। आपने बताया कि पब्लिक हैल्थ सेंटर्स में किट्स फ्रीली सप्लाई हो रही हैं। यह सब पूरी तरह से गलत है। पब्लिक हैल्थ सेंटर्स में कोई भी चीज़ नहीं रहती है। डेंगू को आइडेंटिफाई करने में मिनिमम 5-6 दिन का टाइम लगता है। जब आदमी को फ़ीवर आता है, तो फ़ीवर आने के बाद, उसको डेंगू आइडेंटीफाई करने के लिए काफी लैबोरेट्री टेस्ट करने पड़ते हैं। लेकिन वह फैसलिटी किसी भी गांव में उपलबध नहीं है। बहुत से गांवों में कुछ भी मैडिकल फैसलिटी नहीं हैं।
मैडम, इस तरह से जो गलत रिपोर्ट दी गई है, अभी भी हम आनरेबल मिनिस्टर को यही बोलना चाहते हैं कि हम लोग कुछ भी बोलें, कुछ भी गलत रिपोर्ट्स पार्लियामेंट के अंदर दें, मगर उधर कंट्री वाइड डेंगू की वजह से जो डेथ्स हो रही हैं, उसकी रिस्पांसब्लिटी आपकी सरकार की है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : नामा नागेश्वर राव जी, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : मैडम, मैं एक ही बात बोलना चाहता हूँ। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: You have made your point.
श्री नामा नागेश्वर राव :इस कॉलिंग अटेंशन के बाद आप इसको सीरियसली लीजिए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : नाम नागेश्वर राव जी, आपने बहुत बोल लिया है, अब अपनी बाप समाप्त करें।
श्री नामा नागेश्वर राव :इसको इमिडिएटली सॉल्व करने के लिए आप कंक्रीट साल्युशन क्या दे रहे हैं, आनरेबल मिनिस्टर अपनी स्पीच में क्लियरली यह बता दें? यह बहुत सीरियस डिसीज़ है। उसकी वजह से छोटे बच्चे मर रहे हैं। गरीब लोग अपनी प्रॉपर्टी सेल कर रहे हैं। फार्मर्स एक एकड़-दो एकड़ की अपनी प्रॉपटी सेल कर रहे हैं। आपके पास करेक्ट फिगर नहीं होने की वजह से ऑनरेबल मिनिस्टर आप इसको सीरियसली नहीं ले रहे हैं। पहले करेक्ट फिगर्स मंगवाइए। यह एक तरह से मिसलीड हो रहा है। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please take your seat. Nothing will go on record.
(Interruptions)* … अध्यक्ष महोदया : आपको कैसे बोलने देंगे? आपका नाम लिस्ट में नहीं है।
…( व्यवधान)
SHRI GHULAM NABI AZAD: Hon. Speaker, Madam, at the outset I would like to thank the hon. Members.
श्री शैलेन्द्र कुमार : सर, हिंदी में बोलिए तो अच्छा रहेगा, पूरा देश सुनेगा।
श्री गुलाम नबी आज़ाद : बहुत सारे आंकड़े अंग्रेजी में हैं, इसलिए मैं मिक्स भाषा में बोलता हूँ। श्री अर्जुन राम मेघवाल जी का मैं बहुत धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने इसस चर्चा की शुरूआत की है। डॉ. काकोली घोष दस्तिदार, श्री शैलेन्द्र कुमार, डॉ. रामचन्द्र डोम और श्री नामा नागेश्वर राव जी का भी बहुत धन्यवाद करता हूँ। जो माननीय सदस्य बोल नहीं सके, उनका भी मैं बहुत आदर करता हूँ। ...( व्यवधान) ये अब मरीज़ हैं, मैं तब मरीज़ हुआ था, जब सन् 2003 में आप यहां थे। मैं डेंगू से छह महीने बीमार रहा था। मैं बड़े आदर के साथ माननीय सदस्यों को बताना चाहता हूँ कि इसमें कौन सत्ता में है, कौन नहीं है, हर चीज़ को हम पार्टी लाइन पर नहीं खींचते हैं। आज देश में शायद पहली दफ़ा होगा कि हिंदुस्तान की शायद ही कोई पॉलिटिकल पार्टी है, जो राज्यों में सरकार नहीं चला नहीं रही है। कोई ऐसा हिस्सा नहीं है, जितनी भी यहां सदन में बड़ी-बड़ी पार्टियां हैं, सबकी कहीं न कहीं सरकार है। आखिर हम दोष किसको देते हैं, हम अपने-आपको दोष देते हैं। सभी को यह भी जानकारी है कि स्वास्थ्य स्टेट सब्जेक्ट है। मैं यूपीए गवर्नमेंट को बधाई देना चाहता हूं, कोई क्रेडिट लेने की बात नहीं है, स्टेट सब्जेक्ट होने के बावजूद भी पिछले आठ साल से नेशनल रूरल हेल्थ मिशन में जिस तरह की सहायता राज्य सरकारों को, यह स्टेट सब्जेक्ट था, कोई जरूरी नहीं था, यह सेंटर सब्जेक्ट नहीं है, रेलवे की तरह या फाइनेंस की तरह या फॉरेन अफेयर्स की तरह कि उसी को करना है, इतनी बड़ी राशि 90 हजार करोड़ रूपए अभी आठ सालों में दे दिया और अभी मुझे आशा है कि अगले पांच साल प्लान में तीन गुना राशि और बढ़ेगी। यह भी राज्य सरकारों की सहायता हम यहां से कर रहे हैं।...( व्यवधान)
श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर): मंत्री जी, आप बता दीजिए कि स्वास्थ्य मंत्रालय किसलिए है?
श्री गुलाम नबी आज़ाद : आप बैठिये, मैं बताऊंगा। स्वास्थ्य मंत्रालय इसलिए है कि स्टेट में भी स्वास्थ्य मंत्रालय है। अगर आप यह कहेंगे कि कोई भी स्टेट वाला स्वास्थ्य मंत्रालय बंद करने के लिए तैयार है तो मैं उसे चलाने के लिए तैयार हूं।...( व्यवधान) हमारा काम है, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से स्वास्थ्य के मामले में टेक्निकल सपोर्ट देना। वह टेक्निकल सपोर्ट हैंड्रेड पर्सेंट दे रहे हैं। मैंने पहले ही शुरू में कहा कि इसमें मेरी कांग्रेस की भी सरकार हो सकती है, इनकी हो सकती है या उनकी भी हो सकती है, आप इसे पार्टी लाइंस पर मत लीजिए। मैं यही कह रहा हूं कि इस पर आप पार्टी लाइन से अलग सोचिए। कोई कहता है कि आप क्या कर रहे हैं, मैं कह रहा हूं कि वर्ष 2003 में पहला आदमी था, जिसको डेंगू हो गया। अब मैं क्या यह कहूंगा कि बीजेपी की सरकार उसे पकड़कर लायी? मैं उन पर इल्जाम नहीं लगाता हूं।...( व्यवधान) आप मेरी बात सुनिए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : इस तरह से वह कैसे जवाब देंगे?
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ऑनरेबल मिनिस्टर, आप चेयर को एड्रेस करिए।
…( व्यवधान)
श्री गुलाम नबी आज़ाद : मैं यह बताना चाहता हूं कि इसके लिए दो चीजें हैं और यह कहना भी गलत होगा कि यह सिर्फ हिंदुस्तान में है। मैं बहुत खुश होता कि अगर हमारे साथियों ने थोड़ा और रिसर्च किया होता, जोकि आज इंटरनेट के जरिए करना बहुत आसान है। यह एक ग्लोबल प्रॉब्लम है, यह दुनिया की प्रॉब्लम है। अभी के हिसाब से पचास मिलियन यानी पांच करोड़ डेंगू इन्फेक्शन केसेज सालाना पूरी दुनिया में होते हैं। इसके अलावा साउथ-ईस्ट एशियन देशों में, जो 12 देश हैं, 1.8 बिलियन, हमारा आबादी है 120 करोड़, सिर्फ साउथ-ईस्ट एशियन ममालिक में 180 करोड़ पॉपुलेशन पर डेंगू का रिस्क है। साउथ-वेस्ट रीजन में तकरीबन 75 परसेंट ग्लोबल डिसीज का हिस्सा है। इसके साथ-साथ ही मैं अगर अपनी नेबरिंग कंट्रीज को बताऊंगा, तो उनमें भी बहुत ज्यादा है, मैं उनके आंकड़े नहीं देना चाहता हूं। मैं केवल साउथ-ईस्ट एशिया की बात नहीं करता हूं। Pan-American Health Organizatio ने कहा, जैसे हमारी इधर वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन है, ऐसे ही अमेरिका के तकरीबन तीस देश इसमें हैं। Pan-American Health Organizatio ने कहा है-
“Dengue fever is spread in Americas, and the outbreaks are occurring every three to five years. From 2001 to 2007, in five years, more than 30 countries of America had notified having total of 43,32,731 cases of dengue and 1299 deaths.” मेरे कहने का मतलब है कि दुनिया में जो पान-अमेरिकंस देश हैं, उनमें तीस देश हैं, उनमें भी लाखों केसेज चल रहे हैं और लोग मर रहे हैं।
श्री अर्जुन राम मेघवाल : आप इंडिया की बात कीजिए।
श्री गुलाम नबी आज़ाद : आप भी तो एफडीआई की बात कर रहे हैं, इसलिए मैं आपके लिए बता रहा हूं।...( व्यवधान) आप कह रहे थे, वहां से लाये हैं, वहां से यही लाने की बात कर रहे थे, मुझे नहीं मालूम। आपने हर एक शब्द के बाद एफडीआई का जिक्र किया।
13.00 hrs ...( व्यवधान) मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि तकरीबन सभी एम.पीज़ ने इस बात पर बल दिया कि हिन्दुस्तान बैठा है, यहाँ कुछ नहीं हो रहा है, बाकी देशों में सब कुछ हो रहा है। मैं सदन को यह बताना चाहता हूँ कि दुनिया के किसी भी देश ने इसका कोई वैक्सीन नहीं बनाया, तो एफ.डी.आई. कहाँ से लाएँगे? जब उन्होंने ही नहीं बनाया है तो यहाँ आपको क्या बताकर देंगे? लेकिन यह खुशी की बात है कि एक फ्रैंच फार्मास्यूटिकल कंपनी स्नोफी पास्चर द्वारा फिलीपीन्स, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैण्ड में इसका फेज़-3 का ट्रायल चल रहा है। इसके साथ-साथ लैटिन अमेरिका, मैक्सिको, कोलम्बिया और ब्राज़ील में भी इसका ट्रायल चल रहा है। हमारे देश में भी इसका ट्रायल बंगलौर, लुधियाना, कोलकाता, पुणे और दिल्ली में चल रहा है। इस वक्त दुनिया के सभी रीजन्स में इसका ट्रायल चल रहा है और यदि तीसरे और फास्ट क्लीनिकल ट्रायल में यह पास होगा तो वह दिन दूर नहीं है कि वह वैक्सीन हमें उपलब्ध हो जाएगी। यह भी याद रखें कि आज दुनिया में जो भी वैक्सीन या दवाई बनती है, वह सिर्फ उसी देश तक सीमित नहीं रहती है बल्कि पूरी दुनिया में वह दवाई और वैक्सीन पहुँच जाती है। आज हमारे देश की कंपनियों ने जो दवाइयाँ बनाई हैं, दुनिया के 211 देशों में हमारे देश की फार्मास्यूटिकल कंपनीज़ की दवाइयाँ एक्सपोर्ट होकर जाती हैं। हमारे देश के बने हुए वैक्सीन इस वक्त 150 देशों में जाते हैं। आप इस गलतफ़हमी में मत रहिये कि हमने कोई दवाई नहीं बनाई तो वह दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी। दवाई के मामले में, कैप्स्यूल के मामले में दुनिया के किसी भी कोने में अगर कोई दवाई बनती है तो वह एकदम पूरी दुनिया में उपलब्ध होती है। जहाँ हमारा देश डेंगू और चिकनगुनिया से जूझ रहा है, वहीं पूरी दुनिया भी उससे जूझ रही है, उसकी रोकथाम के लिए प्रयास कर रही है और इसलिए मैंने कहा कि इसमें किसी पार्टी का, किसी व्यक्ति का कोई सवाल नहीं है। इसमें पूरे देश को खड़ा होना चाहिए, ऐसा हम सबको बोलते हैं।
कई माननीय सदस्य कहते हैं कि कोई ऐडवर्टाइज़मैंट नहीं निकलता। माननीय सदस्यों की इत्तला के लिए मैं एक मिनट और इस पर आगे बोलना चाहूँगा ताकि उससे उनको मालूम हो और दोबारा किसी दूसरे प्रश्न में वे इसका उल्लेख न करें, हालांकि शायद वह इससे संबंधित न हो। हमारे मंत्रालय द्वारा जो एडवर्टाइज़मैंट हम पहले पेपरों को देते थे, वह किसी ने एक मिनट भी देखा या नहीं देखा और फेंक दिया, उसके बारे में आप किसी को पूछ भी नहीं सकते हैं कि आपको क्या जानकारी उपलब्ध है। अब पहली बार हमारी मिनिस्ट्री ने तकरीबन 160 करोड़ रुपये, जो एडवर्टाइज़मैंट के लिए थे, उसे अखबारों में देने के बजाय इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री को हमने 60 चैनल्स के लिए दिया है, जिनमें 30 चैनल्स दूरदर्शन के और 30 रेडियो के रीजनल चैनल्स हैं। इनमें तमिल, तेलुगु, मराठी आदि भाषाओं में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक दूरदर्शन के 30 रीजनल चैनल्स हैं और इतने ही रेडियो के रीजनल चैनल्स हैं। इनमें हमने आधे घंटे का प्राइम टाइम खरीदा है। अभी छः महीने इसको चलते हुए हो गए हैं। हमने पूरे देश में, हर स्टेट मे तकरीबन 5500 डॉक्टर्स एम्पैनल किए हैं, उनकी लिस्ट बनाई है और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हमने वहीं के 50 डॉक्टर्स लिए - कोई कैंसर का स्पेशलिस्ट है, कोई वैक्टर बॉर्न डिज़ीज़ेज़ को देखता है, कोई ऑर्थोपिडीशियन है, कोई गाइनिकोलॉजिस्ट है, कोई हर्ट स्पेशलिस्ट है। अभी तक छः महीनों में हमारे 8000 से ज्यादा प्रोग्राम हुए हैं।
मैं अगर इस सदन में किसी एम.पी. से पूछूंगा कि किसी ने देखा है तो क्या उसका जवाब होगा। कितनी रुचि है हमें अपने आप में ही।...( व्यवधान) सुनिए, अभी हम खुलकर बात कर रहे हैं। हम लोग क्रिटीसाइज़ तो करते हैं। छः महीने से यह प्रोग्राम चल रहा है। अब यदि कोई कहेगा कि तेलगु समझ नहीं आती है, तमिल समझ नहीं आती है। अगर नहीं समझ आती है तो यह मेरा कुसूर नहीं है। आपकी भाषा में उस स्टेट का डॉक्टर, हिन्दी वाला हिन्दी में, तमिलनाडु में तमिल में, केरल में मलयालम में बोलता है और असम में असमिया में बोलता है। अब हम खुद भी नहीं देखेंगे तो क्या प्रचार करेंगे? शायद चार-पांच हजार से ज्यादा डॉक्टर अभी तक टेलीविज़न और रेडियो पर पेश हुए हैं। मैं यह बताना चाहता हूं कि सिर्फ वैक्टर बोर्न डिसीज़ जिसमें डेंगू और चिकुनगुनिया हैं, इन्हीं पर चार सौ से ज्यादा प्रोग्राम अभी तक हो चुके हैं। मेरा इस सदन से निवेदन होगा कि हम अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाते हैं, मैं अपने आप से भी पूछता हूं और आप से भी पूछता हूं कि हम कितनी अवेयरनेस मीटिंग्स में, फंक्शन्स में या अपने वर्कर्स को देते हैं। बड़ा सिम्पल सा बचाव है कि अपने लॉन में, अपने आस-पास में पानी जमा मत होने दो। यदि किसी टायर में, बोतल में या गमले में पानी जमा हो गया है तो उसको साफ करो। हम अपने घर में कितना करते हैं, अपने आस-पास कितना करते हैं और अपनी सभाओं में, चाहे कांग्रेस वाले हों या बीजेपी वाले हों या रीज़नल पार्टीज़ वाले हों, हम अगर अपने आप से पूछें...( व्यवधान) माफ़ कीजिए, we should be very frank. अपनी सभाओं में पोलीटिशियन से ज्यादा इनफोर्मेशन जनता में कौन पहुंचा सकता है। मैं नहीं समझ सकता हूं कि जितने हमारे देश के अलग-अलग पार्टीज़ के पोलीटिशयन्स हैं, कोई टेलीविज़न या कोई रेडियो से ज्यादा कोई समाज में जागृति पैदा कर सकते हैं। जब इलैक्शन एनाउन्स होता है तो हम 15 दिन में पूरे हिन्दुस्तान को हिला देते हैं। जिसने वोट नहीं देना होता है उसको भी इतना कनविन्स करते हैं कि वह वोट देने पर मजबूर हो जाता है, लेकिन हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए प्रचार नहीं करते हैं।
मेरा यही निवेदन है कि अगर आप कहोगे कि स्वास्थ्य मंत्रालय से मेरे द्वारा चीफ़ मिनिस्टर्स और हैल्थ मिनिस्टर्स को पत्र लिखने से कोई भी बीमारी ठीक हो जाए, मेरे ख्याल में आज तक सबसे ज्यादा चीफ़ मिनिस्टर्स और हैल्थ मिनिस्टर्स को किसी हैल्थ मिनिस्टर ने चिट्ठियां लिखी होंगी तो वह मैंने लिखी होंगी। हम से ज्यादा रिव्यू मीटिंग भी किसी ने नहीं ली होंगी। लेकिन उससे काम नहीं बनेगा, क्योंकि, यह ऐसा मसला है, जिसमें हम सभी को, सदन को, एम.पीज़. को और देश को खड़ा होना चाहिए।
हमारे कुछ साथियों ने यहां आंकड़े दिए और हमारे वैस्ट बंगाल की एम.पी. ने यह बताया कि वैस्ट बंगाल में कोई केस नहीं है। मैं यह बताना चाहूंगा कि यह सही नहीं है कि वैस्ट बंगाल में कोई केस नहीं है। वैस्ट बंगाल में इस साल करीब छः हज़ार केस हुए और तीन मृत्यु भी हुई हैं, इसलिए कोई भी स्टेट इससे मुक्त नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। मैं वहां गया था और मैंने वहां के मंत्रियों और म्यूनिसिपल कमिश्नर्स के साथ मीटिंग ली। तमिलनाडु में 60, महाराष्ट्र में 59, कर्नाटक में 21, केरल में 13, वैस्ट बंगाल में 9, पंजाब में 15, ओडिशा में 6, मध्य प्रदेश में 6 और दिल्ली में 4 लोगों की मृत्यु हुई है।...( व्यवधान) बाकी राज्यों में दो-तीन-चार या इससे कम है। मैं अर्ज़ करना चाहता हूं कि आपने कहा कि ये जो आंकड़े हैं, ये ग़लत हैं। हमने तमाम राज्य सरकारों को टैस्ट के लिए लैबोरट्रीज़ में करीब दो हज़ार टेस्ट किट दी हैं कि उन लैब्स में यह टेस्ट होंगे।
फिर मैं यह कहूंगा कि भारत सरकार वहां नहीं बैठी है, वहां राज्य सरकार है। जैसा मैंने पहले कहा कि राज्य सरकारें अलग-अलग राजनीतिक दलों की हैं। राज्य सरकारें वहां से टेस्ट करके लेबोरेटरी टेस्ट केस भेजती हैं कि इतने आंकड़ें हैं, जिन्हें डेंगू हुआ है और इतने आदमी मर गए हैं। देश के राज्यों में जो विभिन्न अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें हैं, हम इन आंकड़ों को जमा करने के ा।लए उन्हीं सरकारों पर निर्भर करते हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास कोई ऐसा साधन नहीं है कि हम हर गांव में, हर डिस्पेंसरी या अस्पताल में कोई आदमी बिठाएं और वह ग़्लत आंकड़ें हमें दे। राज्य सरकारों से जो कंपड्ढर्म आंकडे ऐंते हैं, उन्हीं आंकड़ों पर चाहे पार्लियामेंट में मैं जवाब दूं या मेरा कोई दूसरा कुलीग़ दे, हम उन आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। जब ऑपोजीशन वाले सत्ता में होते हैं, आप भी उसी पर निर्भर रहते हैं। लोकतंत्र में हमें उस पर निर्भर रहना पड़ता है और विशेष रूप से जो स्टेट सब्जेक्ट्स हैं, हमें उन पर निर्भर रहना पड़ता है।
आप सभी ने जो चिंता प्रकट की है, उसका मैं पूरा आदर करता हूं और यह अपेक्षा करता हूं कि अभी जो इस्नोफीलिया का थर्ड मेडिकल ट्रायल चल रहा है, वह आ जाए तो जिस तरह से आज हम देश भर में बहुत सारी वैक्सीन देते हैं, जिसकी वज़ह से मृत्यु कम हुई हैं, उसी तरह इससे होने वाली मृत्यु भी कम हो जाएं। उसके साथ-साथ हम टेलीविज़न और रेडियो के जरिए लोगों को समझाने के ा।लए जो अभियान है, उसे जारी रखेंगे। मेरा सभी से यह निवेदन होगा कि हम अपनी सभाओं में न सिर्फ इससे, बल्कि अगर आप चाहें तो मैं हेल्थ के हर सब्जेक्ट पर हिन्दी या अंग्रेजी में तकरीबन हर बीमारी के ा।लए तीन-तीन, चार-चार पन्नों में तैयार कराकर दूंगा। बाकी लोग अपनी-अपनी भाषाओं में अनुवाद करें। आप उसे अपनी कांस्टीटय़ुन्सी में अपनी सभाओं में ज़्नता को हर बीमारी के ा।लए बताइए कि इसके ा।लए क्या प्रिवेंशन है, क्या कंट्रोल है, क्या ट्रीटमेंट है और क्या सुविधाएं सरकार की तरफ से उपलब्ध करायी जाती हैं।
[Placed in Library. See No. LT 7591/15/12] MADAM SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 2.10 pm. 13.12 hrs The Lok Sabha then adjourned till ten minutes past Fourteen of the Clock.
___________ The Lok Sabha re-assembled after Lunch at Twenty Minutes past Fourteen of the Clock.
( Mr. Deputy-Speaker in the Chair)