Lok Sabha Debates
Introduction Of The Constitution (Scheduled Castes) Order (Amendment) Bill, ... on 8 August, 2014
an> Title: Introduction of the Constitution (Scheduled Castes) Order (Amendment) Bill, 2014 (Amendment of Schedule).
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका):महोदय,मैं प्रस्ताव करता हूं कि संविधान (अनुसूचित जातियां)आदेश, 1950 का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुरःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।
HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That leave be granted to introduce a Bill further to amend the Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950.” The motion was adopted.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव :महोदय,मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूं।
*t40 Title: Introduction of the Constitution (Amendment) Bill, 2014 (Amendment of article 243 A).
श्री शैलेश कुमार (भागलुपर):महोदय,मैं प्रस्ताव करता हूं कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुरःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।
HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That leave be granted to introduce a Bill further to amend the Constitution of India.” The motion was adopted.
श्री शैलेश कुमार :महोदय,मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूं।
*t41 Title: Introduction of the constitution (Amendment) Bill, 2014 (Amendment of article 171).
श्री शैलेश कुमार (भागलपुर):महोदय,मैं प्रस्ताव करता हूं कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुरःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।
HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That leave be granted to introduce a Bill further to amend the Constitution of India.” The motion was adopted.
श्री शैलेश कुमार :महोदय,मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूं।
*t42 Title: Introduction of the Constitution (Amendment ) Bill, 2014 (Amendment of Article 39).
SHRI P.P. CHAUDHARY (PALI): Sir, I beg to move for leave to introduce a Bill further to amend the Constitution of India.
HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That leave be granted to introduce a Bill further to amend the Constitution of India.” The motion was adopted.
SHRI P.P. CHAUDHARY : I introduce the Bill.
HON. CHAIRPERSON : Next, item No. 39. Shri Feroze Varun Gandhi – not present. Item No. 41, Shri Baijayant Panda – not present. Item Nos. 42 and 43, Shri Baijayant Panda – not present.
*t43 Title: Further discussion on the motion for consideration of the National Minimim Pension (Guarantee) Bill, 2014 (Bill withdrawn).
HON. CHAIRPERSON: Now, the House will take up item No. 44 – further consideration of the National Minimum Pension (Guarantee) Bill. Shri Arjun Ram Meghwal – not present. Shri Jagdambika Pal.
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): सभापति जी, मैं आपका आभारी हूं कि आदरणीय निशिकांत दुबे जी द्वारा 25 जुलाई को जो एक प्राइवेट मैम्बर बिल प्रस्तुत किया गया, उसके समर्थन मैं आपने मुझे बोलने का समय दिया है। किसी भी वैलफेयर स्टेट की अवधारणा एक सामान्य सिद्धांत के तहत यह होती है कि जिस व्यक्ति ने पूरे जीवन में किसी भी स्वरूप में, किसी भी परिस्थिति में समाज में योगदान दिया है, चाहे वह संगठित क्षेत्र हो, असंगठित क्षेत्र हो, प्राइवेट क्षेत्र हो, गवर्नमेंट सेक्टर हो, स्टेट गवर्नमेंट हो या गवर्नमेंट ऑफ इंडिया हो, उस व्यक्ति ने समाज के लिए, देश के लिए अपना पूरा योगदान जीवन-पर्यन्त दिया है। लेकिन रिटायर होने के बाद जब आदमी पेंशन पर जाता है तो आप सामान्य परिस्थिति में देखें कि प्रायः आज पेंशन पाने वाले लोगों की स्थिति एक विपन्नता की स्थिति है। जिस चुनौतीपूर्ण और कठिनाई की जिंदगी समाज में ये लोग जीते हैं, मैं समझता हूं कि उसको एड्रेस करने वाली दिशा में निशिकांत जी ने एक बहुत अच्छा विधेयक पेश किया है, जिसका पूरा सदन समर्थन करेगा। जिसने अपने जीवन में समाज के लिए योगदान दिया है वह आज रिटायर हो गया तो हम लोगों का यह कर्तव्य बनता है कि उन्हें हम सम्मानपूर्ण जीने के लिए, या समाज के लिए उनके योगदान के परिप्रेक्ष्य में उन्हें भी सम्मानपूर्ण जीने के लिए, स्वास्थ्य के लिए और उनकी रिटायरमेंट के बाद की जो जिंदगी है उसमें वह सम्मान महसूस कर सकें कि जिस समाज में हमने योगदान दिया था उस समाज में उनका स्थान है।
आज जिस तरीके से इसे लेकर आये हैं, मैं समझता हूं कि आज उन परिस्थितियों में एकरूपता नहीं है। आप देखते हैं कि जो ओल्ड-ऐज पेंशन है, विडो-पेंशन है, विकलांग के लिए पेंशन है, इसमें भी राज्यों में भिन्नता है। किसी राज्य में 200 रुपये, किसी राज्य में 500 रुपये, दिल्ली में 1500 रुपये पेंशन है। मैं समझता हूं कि सदन में इस प्राइवेट मैम्बर बिल पर हम विचार करें कि पूरे देश में रिटायरमेंट के बाद कम से कम जो पेंशन है उसमें एक रूपता हो और उसी दिशा का उन्होंने उल्लेख भी किया है और आज की परिस्थिति में 5000 रुपये उन्होंने रिटायर पेंशन भोगियों के लिए रखा है। मैं समझता हूं कि आज भी पेंशनभोगियों के ऊपर भी आश्रित लोग हैं। उनका बच्चा अपंग हो गया या ऐसी पारिवारिक परिस्थितियां हो गयी कि घर में किसी के पास नौकरी नहीं हैं तो ऐसे परिवार उसी पेंशन पर आश्रित रहते हैं।
सभापति जी,आज जो प्राइस इंडेक्सिंग है उसके हिसाब से पांच हजार रुपए रखा है,लेकिन मैं निशिकान्त जी को सुझाव दूंगा कि भविष्य में इस राशि को प्राइस इंडेक्सिंग के साथ जोड़ें। समय-समय पर महंगाई बढ़ती जाए,ऐसी परिस्थिति में आज नहीं तो दस साल बाद यह राशि बहुत कम लगने लग जाएगी। जब हमने पेंशन की योजना शुरू की थी,उस समय दो सौ रुपया वृद्धावस्था पेंशन देते थे,उसके बाद यह राशि पांच सौ रुपए हुई लेकिन आज लगता है कि यह राशि बहुत कम है। यह बहुत अच्छा क़दम है और इसमें बार-बार संशोधन की बात करें या कोई नया प्राइवेट मेम्बर बिल आए इससे अच्छा है कि अभी से इसमें एकरूपता हो और समय-समय पर प्राइस इंडेक्स के साथ जोड़ दिया जाए तो यह समाज के पेंशन भोगियों के लिए कारगर क़दम सिद्ध होगा।
महोदय, 1 मई, 2009 को स्वाबलंबन का आधार बना कर नेशनल पेंशन स्कीम बनाई गई। आज जो नेशनल पेंशन स्कीम लागू हुई,उसमें जो पेंशन फंड रेग्यूलेटरी डेवलपमेंट आथोरिटी है,वह आज भी पेंशन सेक्टर को रेग्यूलेट करने की बात है। उसमें यह भी जोड़ना है कि चाहे प्राइवेट सेक्टर के लोग हों,चाहे अनआर्गेनाइज्ड सेक्टर के लोग हों,जैसे कोई व्यक्ति रिटायर हो गया तो वह चाहे किसी भी सेक्टर से रिटायर हुआ हो,सभी अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। प्राइवेट और असंगठित सेक्टर में उन्हें पेंशन नहीं मिलती है। यह एक बड़ा क़दम है कि कम से कम सभी को इसके अंतर्गत लाने की बात करें कि प्राइवेट सेक्टर में और असंगठित क्षेत्र के लोगों की सेवानिवृति के बाद कैसे उनके भविष्य की चिंता कर सकते हैं,कैसे वे अपने दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं और परिवार के उत्तरदायित्व को कैसे उठा सकते हैं। अगर हम उनके लिए कोई सुरक्षा या अधिकार नहीं देंगे या इसके अंतर्गत लाने का प्रयास नहीं करेंगे तो मैं समझता हूं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। यह किसी भी कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विपरीत होगा। हमारा दायित्व केवल तभी तक के लिए नहीं है जब तक कि वह नौकरी कर रहा है। एक सभ्य समाज में जिस व्यक्ति ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन किया,अपने कर्तव्य का निर्वहन किया और अपनी उपयोगिता समाज में दी,जिसने अपनी सार्थकता समाज के लिए दी और समाज के लोगों के प्रति योगदान दिया और वह योगदान केवल उसकी सर्विस के लिए नहीं है बल्कि वह देश की जीडीपी को बढ़ाने का योगदान है,देश के विकास में योगदान है। उसे रिटायरमेंट के बाद लगता है कि उसे पेंशन नहीं मिल रही है तो वह समझता है कि वह देश पर या समाज पर लायबिलिटी हो गए हैं,अपने ही समाज में जिसमें उसकी कल तक यह उपयोगिता थी,आज रिटायरमेंट के बाद वे समाज पर बोझ हैं,ऐसी परिस्थितियों में यह जो बिल लाया गया है,बहुत सुधारवादी कदम है और इस दिशा में पूरा सदन विचार करेगा। जो नेशनल पेंशन सिस्टम है,उस सिस्टम को अगर इसके साथ जोड़ा जाए,जैसा निशिकांत जी ने कहा है कि नेशनल फंड कारपस बनाया जाए। यह जो अवधारणा है कि जो असंगठित या प्राइवेट सेक्टर है या दूसरे सेक्टर्स हैं,उनमें हमें एकरूपता लानी होगी।
16.00 hrs निश्चित तौर से एक कॉरपस फंड नेशनल पेंशन फंड के लिए लोगों को सुरक्षा दे और लोगों के भविष्य के लिए कम से कम मिनिमम पेंशन की जो गारंटी है,वह हम दे सकें। इस बिल का उद्देश्य यही है कि समाज के हर व्यक्ति को जो समाज में अपना योगदान दे चुका है,उसे एक एज के बाद जब वह रिटायरमेंट की श्रेणी में आता है तो समाज उसकी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे,समाज उसकी देखभाल करे। समाज उसके प्रति अपनी संवेदनशीलता को प्रदर्शित करे। इसलिए स्वाभाविक है कि वह संवेदनशीलता केवल हम शब्दों से या केवल अपनी भावनाओं से व्यक्त नहीं कर सकते हैं बल्कि उसको हम एक पेंशन देकर उसको हम सहारा दे सकते हैं जिससे उसकी अपनी आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति हो सके।
इसलिए जो विधेयक है,इस पर कोई मतभेद नहीं हो सकता और इस पर आज जो उन्होंने बात कही कि आज इस विधेयक के दायरे में हम सरकारी सैक्टर हो या और सैक्टर हों,स्टेट गवर्नमेंट की गारंटी भी है कि रिटायरमेंट होने के बाद पेंशन मिलेगी लेकिन बहुत से ऐसे सैक्टर्स हैं जो कोई गारंटी नहीं देते। आज जो सोशल सैक्टर में है,आखिर इस बिल का जो उद्देश्य है,वह लोगों को एक सोशल सिक्योरिटी देने का है। उस सोशल सिक्योरिटी को प्रदान करने के लिए ऐसे लोग जिनको हम वैल्फेयर स्टेट में समाज कल्याण से और तमाम भारत सरकार की हमारी योजनाओं के आधार पर हम लोगों को पेंशन दे रहे हैं। पेंशन चाहे वह एक 60 साल की उम्र के बाद ओल्ड एज पेंशन हो या चाहे जो विधवाएं हैं,जिनको हम विडोज पेंशन देते हैं या हम डिसएबिल लोगों को पेंशन देते हैं लेकिन इसमें भी जो भारत सरकार देती है,उसमें राज्य सरकार का अपने राज्यों में अलग अलग योगदान होता है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि केन्द्र सरकार के उस पैसे में पूरे देश में,पूरे केन्द्र में एक गाइडलाइन हो कि असम के ओल्डएज में जो पैसा मिलता हो,वही एमाउंट चाहे नॉर्थ-ईस्ट हो या साउथ वैस्ट हो,यानी देश के किसी भी हिस्से में,कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर में रहने वाले किसी भी समाज के उस पेंशनभोगी को चाहे वह प्राइवेट सैक्टर का हो या चाहे भारत सरकार की उन योजनाओं में वह आच्छादित हो,जिनमें हम सामाजिक सुरक्षा के अन्तर्गत पेंशन देने की योजना बना रहे हों या चाहे वह दूसरे सैक्टर का हो। इस सैक्टर में सबसे बड़ा उद्देश्य है कि उस नेशनल पेंशन सिस्टम में जो हमने वर्ष 2003 में इंट्रोडय़ूस किया है,उसके बावजूद भी अगर आज यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है तो मैं समझता हूं कि शायद इस विधेयक के आने के बाद इस पर चर्चा करें,अगर इस पर सरकार विचार करेगी तो निश्चत तौर से पेंशनभोगियों के लिए एक भविष्य में नया अध्याय जुड़ेगा और हम फLा से कह सकते हैं कि इस सदन से हमने देश के उन तमाम बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए,उनकी शिक्षा के लिए,उनके सामाजिक सम्मान के लिए हमने उनको एक हक देने का काम किया है।
*m02 श्री राम कृपाल यादव (पाटलीपुत्र) : माननीय सभापति जी,आपने एक अहम बिल जो माननीय निशिकांत दुबे जी द्वारा प्रस्तावित विधेयक है,उस पर बोलने की मुझे अनुमति प्रदान की है,उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं।
16.04 hrs (Shri Hukmdeo Narayan Yadav in the Chair) देश में संगठित और असंगठित मजदूर हैं। संगठित मजदूरों को तो कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। सरकारी स्तर पर मैं समझता हूं कि जब वे काम करके सेवानिवृत्त होते हैं तो इनके जीवन-यापन के लिए पेंशन की उपलब्धता होती है। लेकिन हमारा देश जो किसानों औऱ मजदूरों का देश है,आम तौर पर उनको सुरक्षा का गारंटी नहीं मिल पाती।
इस देश में गरीबों की संख्या बहुत है जो खेत खलिहान में काम करते हैं। करोड़ों की संख्या में मजदूर हैं,मकान बनाते हैं,जूता-चप्पल सीते हैं,घरों में काम करते हैं,रिक्शा-ठेला चलाते हैं,जिनके श्रम पर हमें गौरव भी होता है और देश का विकास भी होता है। मैं समझता हूं कि कुछ ही संख्या में सरकारी तौर पर संगठित मजदूर हैं,उनको लाभ मिल जाता है। लेकिन इतने सारे लोगों के लिए अभी तक कोई व्यवस्था या प्रावधान नहीं किया गया है। इनके लिए कोई ऐसा बिल नहीं है,कानून नहीं है जिससे वे सेवानिवृत्त होने के बाद जीवन यापन कर सकें। यह बिल बहुत अहम है। मैं चौथी बार लोकसभा में आया हूं,एक बार राज्य सभा में रह चुका हूं,इस तरह से पांचवीं बार आया हूं। मैं समझता हूं कि ऐसे विषयों पर चर्चा होती रही है। 2004 से 2009 तक मैं लोकसभा का मैम्बर था,उस समय भी इसी तरह से सदन में चर्चा हुई थी। उस समय यूपीए सरकार ने कुछ आश्वासन जरूर दिया था,कुछ बिल लाने की बात कही गई थी और मजदूरों के लिए योजना भी लाई थी। लेकिन अभी भी मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पा रही है।
महोदय,आप किसान के बेटे हैं,गरीब के बेटे हैं। सबने देखा है कि खेत खलिहान में काम करने वाले मजदूर अपनी पूरी मेहनत से हमें खिलाते हैं। हमारे देश में 80 से 85 परसेंट लोग किसान हैं। किसान और मजदूरों के बल पर देश जीवित है लेकिन इनके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। आप उनके घरों में जाकर देखिए,एक समय तक वे काम कर लेते हैं,रोजी रोटी परिवार में चल जाती है लेकिन एक समय के बाद जब उनकी जवानी गिरती है,बुढ़ापा आता है उनकी स्थिति देखी नहीं जाती है। मैं यह बात बहुत पीड़ा के साथ कह रहा हूं क्योंकि उनकी स्थिति बहुत दर्दनाक हो जाती है। वे गरीब परिवार से होते हैं,उनके बेटे भी उनका बोझ लेने को तैयार नहीं होते हैं और वे दर-दर की ठोकरें खाते हैं। अब ज्वाइंट फैमिली का कन्सेप्ट धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। जिन्होंने इस देश को इतना बड़ा श्रम दिया,अपनी मेहनत की कमाई से देश की व्यवस्था बनाई,आजकल बेटा मां-बाप को निकाल बाहर कर देता है और वे भिखारी की तरह जिंदगी व्यतीत करते हैं। देश की आर्थिक व्यवस्था कैसी है यह उस देश के किसानों पर निर्भर करती है। अगर एक दिन मजदूर काम न करे तो पूरा देश ठप्प हो जाएगा। इनका ख्याल कीजिए। माननीय मंत्री जी इस पीड़ा का अहसास करते होंगे,वे इसी पीड़ा को देखकर यहां तक पहुंचे हैं। बेचारा मजदूर जो ठेला,रिक्शा,टैम्पो चलाता है,दिन,दोपहर,रात,सुबह मेहनत करता है और थक कर कहीं सड़क के किनारे,झोंपड़ी या खुले आकाश के नीचे सो जाता है। जब तक उसकी जवानी रहती है ठेला,रिक्शा चलाता है,मजदूरी करता है। मजदूर बड़े आलीशान मकान बनाता है। इस देश की व्यवस्था यही है कि जो मकान बनाता है उसके अपने रहने के लिए घर नहीं है। जब वह बूढ़ा हो जाता है,जवानी चली जाती है,उसकी क्या दुर्दशा क्या होती है आपने देखा होगा। माननीय सदस्य जो सदन में आए हैं,बहुत संघर्ष के बाद सदन में आए हैं,उन्होंने गरीबी और फटेहाली को देखा होगा। मजदूर ठेला खींचता है,पसीना बहाता है लेकिन जब वह बुढ़ापे में आता है तब उसकी कोईं पूछ नहीं होती है। इनके लिए न तो अस्पताल में कोई उपयुक्त व्यवस्था है,न रहने की उपयुक्त व्यवस्था है और न ही पहनने की उपयुक्त व्यवस्था है। वह दर-दर की ठोकरें खाता है।
क्या वैसे लोग जिनके मेहनत और पसीने पर हमारा देश विकास कर रहा है,उन फैक्टरियों में काम करने वाले लोग के श्रम पर हमारा देश विकास कर रहा है। आज कांट्रैक्ट बेसिस पर मजदूरों की बहाली हो रही है। आजकल आउटसोर्सिंग हो रही है,यह एक नया फैशन हो रहा है। आउटसोर्स ठेकेदारों के माध्यम से आज मजदूर सरकारी महकमों और सरकारी उपक्रमों में लिये जा रहे हैं। हम लोग विभिन्न कमेटियों के माध्यम से जाते हैं,पूछते हैं कि क्या आपके यहां वेकेन्सी हैं,वे कहते हैं,हां हमारे यहां वेकेन्सी है,फिर आप कैसे काम चलाते हैं,वे कहते हैं कि आउटसोर्स से काम चलाते हैं। आज इसी दिल्ली शहर में मजदूरों का शोषण ठेकेदारों के द्वारा होता है। यूपी और बिहार के मजदूर यहां काम करते हैं। यह जो दिल्ली की रोशनी है,जो चमक है,बड़े-बड़े शहरों की जो चमक है,आप बिहार से आते हैं,अधिकांशतः यहां बिहारी मजदूरों का खून-पसीना लगा हुआ है। उनके दर्द को आपने देखा होगा,आप लम्बे अरसे से मंत्री रहे हैं,सांसद रहे हैं,विधायक रहे हैं,आपको लम्बा अनुभव है। क्या उनकी जिंदगी है,झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले वे कौन लोग हैं। हिंदुस्तान के इतिहास के 67 सालों के बाद अगर कोई व्यक्ति जो भारतीय है,उसको रहने के लिए घर नहीं है,पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है,उसके इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं,पहनने के लिए कोई कपड़ा नहीं है। क्या इसी दिन के लिए हमने आजादी ली थी। हम सब लोगों को शर्म आती है। हिंदुस्तान का बहुत बड़ा तबका,मजदूर तबका,किसान तबका,असंगठित तबके में काम करने वाले लोग,जिनका केवल शोषण और दोहन हो रहा है,उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। क्या हमारी सरकार उनकी जिंदगी का कोई ख्याल नहीं रखेगी,जिनकी ताकत के बल पर हम सब लोग यहां हैं। क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती है,सदन की जिम्मेदारी नहीं बनती है। क्या हमने उनके लिए कुछ सोचा,क्या कोई ऐसा कोई कानून बनाया,हमें इस बारे में सोचना पड़ेगा। जो घरेलू नौकर या दाई होती है,उनका शोषण हो रहा है,जो घरों में काम करने वाले लोग हैं,उनके लिए क्या है। चाइल्ड लेबर को देख लीजिए,गरीबों के बच्चे काम करते हैं। पेट की मार बर्दाश्त नहीं होती,पीठ की मार बर्दाश्त हो सकती है,लेकिन पेट की मार बर्दाश्त नहीं हो सकती है। इस पेट के लिए गरीब मां-बाप अपने बच्चों को भेजते हैं,ताकि दो वक्त की रोटी मिल सके।
आप उत्तर प्रदेश में चले जाइये,जहां से जगदम्बिका पाल जी आते हैं। हमारे बिहार में चले जाइये,वहां इन बच्चों की भरमार लगी होगी। छोटे कारखानों में काम करने वाले बच्चे,कालीन बनाने वाले मजदूर बच्चे,क्या उनकी कोई गारंटी नहीं है। क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती है। क्या उनके पढ़ने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। जो देश का भविष्य हैं। देश के भविष्य के निर्माण में लगे गरीब बच्चों के लिए कानून तो बहुत हैं,लेकिन उन कानूनो का अनुपालन जमीन पर कहां हो रहा है। क्या हो रहा है,गरीबों के बच्चे आज भी काम पर जा रहे हैं। अगर किसी की नजर में आता है तो सरकार उसके खिलाफ कानून कार्रवाई करती है और बच्चों को पुनः अपने घरों में वापस भेजती है। मगर वही बच्चे बेसहारा होकर फिर मजबूरी में इस कारखाने में नहीं तो दूसरे कारखाने में चले जाते हैं। हमने उनकी पीड़ा को नहीं देखा,नहीं समझा। अगर उनके पास दो वक्त की रोटी होती,पढ़ने का साधन होता,वे मजदूर के बेटे हैं,गरीब के बेटे हैं। अगर उनके पास रहने को घर होता तो शायद कोई मां-बाप नहीं चाहेगा कि मेरा बेटा मजदूरी करे,दर-दर की ठोकरें खाये। जो उसके खेलने-खाने का समय था,उस समय वह मजदूरी कर रहा है,ईंटें ढो रहा है। मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है,बिहार में ऐसा हो रहा है और देश में भी ऐसा हो रहा होगा। सरकारी महकमों में चाइल्ड लेबर मंत्री के सामने,मुख्य मंत्री के घर में काम कर रहा है। आंखें बंद हैं,क्या कानून है। हमारी क्या जिंम्मेदारी है। अगर हम जनप्रतिनिधि हैं,हमें जनता ने चुनकर भेजा है तो निश्चित तौर पर करोड़ों लोग जो दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं,गरीब हैं,किसान हैं,मजदूर हैं,ठेले वाले हैं,रिक्शा वाले हैं,टैम्पो वाले हैं। उनके लिए पीने का पानी नहीं है। महोदय,उत्तर भारत के लोग बड़े पैमाने पर संगठन को चलाते हैं। यही गरीब मज़दूर लोग,सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए,समय-समय पर प्रदर्शन करते रहते हैं। उनकी दुर्दशा,यह दो तरह की व्यवस्था है,फाइव स्टार होटलों में चले जाइए। पाव भर पेशाब बहाने के लिए तीन किलो पानी बहाया जाता है। उन बच्चों को,गरीब मज़दूरों को पीने के लिए पानी नहीं हैं। वाह रे! आज़ाद हिंदुस्तान,उस हिंदुस्तान के हम लोग नागरिक हैं,सांसद हैं। क्या हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं है?क्या हम उसके भविष्य की गारंटी नहीं दे सकते हैं?उनकी सुरक्षा नहीं कर सकते हैं?उनके जीने के लिए हम कोई व्यवस्था नहीं कर सकते हैं?इसलिए भी इस तरह के कानून जरूरी हैं। मैं समझता हूँ कि वर्तमान सरकार के माननीय प्रधान मंत्री जी ने गरीबी और फटहाली को देखा है। हम गर्व के साथ कहना चाहते हैं कि गरीब का बेटा हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री बना है। एक पिछड़े परिवार का बेटा प्रधान मंत्री बना है। 66 साल के इतिहास में शायद पहली दफा एक गरीब चाय वाले का बेटा,जिसने दर्द को देखा है,जिसने परेशानी को देखा है,मुझे भरोसा है इस प्रधान मंत्री से और देश के उन गरीबों को जो फटहाली में हैं,गरीबी में हैं,ठेलेवाला है,रिक्शेवाला है,टैंपोवाला है,उन सब लोगों ने मैंडेट दिया है कि इस देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र भाई मोदी बनें। मुझे गौरव है कि देश के करोड़ों लोगों के अरमानों को पूरा करने के लिए ही एनडीए की सरकार कमिटिड है। माननीय मंत्री जी,मुझे भरोसा है कि जब आपका उत्तर आएगा तो निश्चित तौर पर सकारात्मक उत्तर आएगा। इस कानून को बनाने के लिए आप सोचेंगे और करेंगे। वे लोग,जिन्होंने 66 साल की आजादी के बाद सही आजादी नहीं देखी,वह वृद्धा,वे असहाय लोगा,जिनको दद-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं,वे मज़दूर किसान,जिनको यह लगे कि रिटायरमेंट के बाद भी मुझे भी सहारा मिल सकता है। सरकार फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों को तो राशि देती है,पैसा देती है,पेंशन दे रही है। उसी तरह का कोई हैंडसम अमाउंट दे दे तो उसके बाल-बच्चे उसको अगर नहीं भी देखेंगे तो बाप अपने सहारे अपनी पत्नी और अपना गुजारा कर लेगा। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव : सर, मैं समाप्त कर रहा हूँ। मैं उस गरीब की पीड़ा बता रहा हूँ, जिससे आप खुद ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : समय की सीमा भी है।
…( व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव : सर, समय की सीमा तो है लेकिन यह निजी विधेयक है और करोड़ों लोगों की पीड़ा है। उनकी आवाज मैं आपके माध्यम से सरकार तक पहुंचा रहा हूँ। मैं निवेदन कर रहा हूँ। अगर आप उन लोगों को संरक्षण नहीं देंगे तो कौन देगा?
महोदय,मैं जल्द ही अपनी बात समाप्त करूंगा। मैंने उस गरीब की आवाज आपके माध्यम से सरकार तक पहुंचाई है। सरकार के माननीय मंत्री भी उसी गरीबी और फटहाली से निकल कर यहां आए हैं। संघर्ष कर के आए हैं। वर्तमान सरकार पर मुझे भरोसा है। पूर्वर्ती सरकार ने तो केवल भाषण दिया। काम कुछ नहीं किया। 66 साल की आजादी के बाद अधिंकाश तौर पर कांग्रेस पार्टी का शासन था,अगर थोड़ा भी ध्यान देने का काम किया होता तो हिंदुस्तान के मज़दूर की स्थिति दयनीय नहीं होती। परंतु मुझे भरोसा नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में जो वर्तमान सरकार चल रही है,वह कुछ ठोस करेगी,ताकि किसान,मज़दूर,ठेलेवाला,रिक्शावाला,टैंपोवाला,घर में काम करने वाली दाई,छोटे-छोटे बच्चे,उनको जाना नहीं पड़ेगा। शोषण नहीं होगा। बहादुरी के साथ,सम्मान के साथ उनका इलाज होगा। उनके लिए घर होगा,उनके लिए कपड़ा होगा,उनके लिए राशि होगी,यह मुझे विश्वास है। इसी भरोसे के साथ मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूं और पुनः आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करता हूं कि आप निश्चित रूप से कोई कार्रवाई कीजिएगा। इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
*m03 श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला) : महोदय, आपने मुझे राष्ट्रीय न्यूनतम पेंशन गारंटी विधेयक, 2014 जो हमारे बहुत ही सक्रिय सांसद श्री निशिकान्त दुबे जी द्वारा पेश किया गया है पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं कहना चाहता हूँ कि एक बहुत ही अहम विधेयक श्री निशिकान्त दुबे जी के द्वारा पेश किया गया है। मैं समझता हूं कि हम सब लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आज सारे देश में जो हमारे बुजुर्ग हैं या जिन लोगों ने इस देश में काम किया और उसके बाद अपने बुढ़ापे में उनके पास सहायता के लिए कोई पैसा नहीं रहता है,उनके लिए पेंशन एक गारंटी के रूप में,उनकी सोशल सिक्योरिटी के रूप में सरकार इस विधेयक के माध्यम से उनकी सिक्योरिटी तय करे,मैं समझता हूं कि ऐसी इस विधेयक की मंशा है।
देश में सभी पेंशन भोगियों,जिनमें वे व्यक्ति भी शामिल हैं,जिन्होंने असंगठित और निजी क्षेत्र में कार्य किया है,को प्रत्याभूत न्यूनतम पेंशन का संदाय करने और उसमें उससे संबंधित विषयों का उपबंध करने के लिए यह विधेयक है। मैं यह मानता हूँ और हम सब लोग,जो यहाँ जनता के प्रतिनिधि के तौर पर चुनकर आए हैं कि आज इस बात की बहुत जरूरत है कि जो लोग 60 वर्ष की आयु से ऊपर हो जाते हैं,जिनके शरीर में शिथिलता आ जाती है और जिन्होंने लगातार इतने वर्षों तक समाज की सेवा की है,उनको अवश्य ही सोशल सिक्योरिटी उनके बुढ़ापे में मिलनी चाहिए। परन्तु आज हो उलटा रहा है,आज समस्या इस बात की है कि जिन लोगों पर बुढ़ापा आ जाता है,खासकर जो आजकल का नौजवान है,मां-बाप को जब बुढ़ापे में उनकी जरूरत होती है,तो वे उनसे दूर हट जाते हैं। माँ-बाप किस तरह से अपने बच्चों को पालते हैं,गरीब माँ-बाप अपने बच्चों को किस तरह से पालते हैं,लेकिन बुढ़ापे में उनको उनकी सहायता नहीं मिल पाती है। पहले संयुक्त परिवार का प्रचलन था और संयुक्त परिवार में सुख-दुख में सब एक साथ रहते थे। आज समाज में उसकी कमी आ गयी है। इसलिए भी मैं समझता हूं कि अगर सरकार इस प्रकार की कोशिश करे कि 60 वर्ष की आयु के सभी लोगों को ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप एक मिनट रूक जाइये और उसके बाद बोलिएगा।
मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है कि इस विधेयक पर पहले ही तीन घंटे का समय ले लिया गया है। इस प्रकार इस विधेयक पर चर्चा के लिए आबंटित समय लगभग समाप्त हो गया है। चूंकि विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए अभी पांच और सदस्य हैं। सभा को विधेयक पर आगे भी चर्चा के लिए समय बढ़ाना होगा। यदि सभा सहमत हो तो विधेयक पर चर्चा के लिए एक घंटा बढ़ाया जाय।
अनेक माननीय सदस्य : महोदय, ठीक है।
माननीय सभापति : धन्यवाद,एक घंटा बढ़ाया जाता है।
श्री वीरेन्द्र कश्यप : महोदय, मैं यह कह रहा था कि पहले हमारे संयुक्त परिवार में जो सोशल सिक्योरिटी होती थी और खासकर बुढ़ापे में या दुःख-सुख में परिवार के हर सदस्य का दुःख-सुख देखा जाता था,वह आज समाप्त हो गया है। इसलिए मैं समझता हूं कि अगर सरकार इस प्रकार की व्यवस्था करे ताकि वे बुढ़ापे में या खासकर मैं कहना चाहता हूँ कि 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों को,सारे देश में जो भी हमारे 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्ति हैं,उनके लिए अगर पेंशन का प्रावधान होगा तो वह ज्यादा बेहतर होगा। मुझे इस बात की खुशी है कि निशिकान्त जी के द्वारा यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने राष्ट्रीय पेंशन बोर्ड के गठन के बारे में कहा है,यह बात बिल्कुल सही है। अगर ऐसा कोई बोर्ड गठित हो जाता है तो उसमें ये सारे प्रावधान उस बोर्ड के माध्यम से किये जा सकते हैं। इसमें सभी लोगों को,जो पात्र हैं,जिनको इस तरह की सोशल सिक्योरिटी की ज़रूरत है। इस बोर्ड के माध्यम से सरोकार किया जा सकता है। ऐसे व्यक्ति जो असंगठित क्षेत्र या निजी क्षेत्र के नियोजन से सेवानिवृत्त हुए हैं और 60 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है,इस अधिनियम के अधीन न्यूनतम पेंशन प्राप्त नहीं कर रहे हैं,ऐसे व्यक्तियों को भी इसके तहत लाया जाना चाहिए। ऐसे पेंशनभोगी जिनको पांच हजार रुपये से कम मासिक प्राप्त हो रहे हैं,उनको इस बोर्ड के माध्यम से उस अंतर की राशि का संदाय किया जाना उचित होगा। हमारे देश में जिस व्यक्ति की आयु 60 वर्ष से ज्यादा है,वह भी चाहता है कि मेरे जो नाती-पोते हैं,उनके साथ प्यार-मोहब्बत बनी रहे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है,क्योंकि बुढ़ापे में जिस व्यक्ति के पास जेब में चार पैसे नहीं हैं,उसके बच्चे,जिनको मां-बाप ने पाला है,उनको बुढ़ापे में छोड़ देते हैं और अलग रहना पसंद करते हैं। अपने मां-बाप को बुढ़ापे में सहायता नहीं देते हैं। आज उनकी जो दयनीय और निराशाजनक स्थिति है,उनको इससे लाभ मिल सकता है। हमारे मंत्री जी यहां बैठे हैं,जो कि इस बारे में बहुत ही संवेदनशील हैं,मैं यही कहना चाहता हूं कि इस विधेयक को,जिसको निशिकांत दूबे जी लाए हैं,उसका मैं पूरी तरह से समर्थन करता हूं और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी नयी सरकार ग़रीब और दलितों के लिए और खास कर के मज़दूरों और वंचितों के लिए काम करेगी। निशिकांत दूबे जी द्वारा लाए गए इस विधेयक को यह सदन पारित करेगा और आने वाले दिन में हमारे बुजुर्ग और बूढ़े लोग हैं,जिनको पेंशन की ज़रूरत है,वह आने वाले दिनों में इसका लाभ उठाएंगे। इसी के साथ मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूं।
*m04 SHRI P.P. CHAUDHARY (PALI): Mr. Chairman, Sir, I would thank you for affording me an opportunity to participate in the consideration of the important National Minimum Pension (Guarantee) Bill, 2014. I extend my thanks to Shri Nishikant Dubey for his foresightedness for bringing forward this important Bill before this august House.
We know that in our country the 90 per cent sector is unorganized and only the 10 per cent sector is organized sector where the pension scheme is available. Most of the developing countries have introduced the pension system through “pay-as-you-go” pension plans which are usually not funded. But with the passage of time, a lot of adverse trends have been noticed worldwide in the functioning of pension system. In India too, the developments indicate that the employment systems are becoming informal and the organized sector is shrinking. The number of employees are being gradually reduced. The unorganized sectors having smaller establishment and the neglected pensionable population are deprived of pension protection. Hence, an urgent need of introducing pension reforms in India. The potential in our country is so huge. As I have already stated, only 11 per cent of the working population has been covered under one pension scheme or the other. According to 1991 census, the Indian labour force comprised 314 million workers of which 15.2 per cent were regular salaried employees, 53 per cent were self-employed and 31.8 per cent were casual/contract labour. Sir, 53 per cent were self-employed; and 31.8 per cent were casual/contract labour. In absolute numbers, as per the same Census, 11.13 million constituted 23 per cent of the total salaried employees and they were employed in Government jobs. Besides this group, there is a segment of employees in the organised, public and private sectors, who are covered by the Employees Pension Scheme, 1995. This leaves a large labour force in the unorganised sector, and a part of the employees in the organised, public and private sectors, outside the scope of any statutory/mandated pension scheme.
I would like to submit that as of now in our country, 70 per cent population are residing in the rural area. In the rural areas, there is no industrialisation and the entire population is working in the unorganised sector and they don’t have the benefit of any pension scheme.
As far as urban population is concerned, we see that there are a large number of poor who are doing various works but they don’t enjoy the benefit of pension scheme. Now, pension is compared so far as insurance scheme is concerned but it is not helping a lot. Hence, reforms in the sector are required. In our country, pension is compared with the short term investments of banks and other financial institutions by those who have retired with sufficient funds to invest. So far, in our country the interest rates moved upward for the past so many decades. People therefore expected an era of ever increasing interest rates and preferred short term investments. Only recently, interest rates have experienced a downward trend.
The Report of the Malhotra Committee on Reforms in Insurance Sector, submitted in January, 1994 to the Government of India, has also given the reasons for inadequate development of pension provision in our country. My submission is that the Report of the Malhotra Committee is to be taken into consideration and this important Bill is also required to be looked into.
So far as the proposed pension model in India is concerned, the recent initiative of the Government of India appears to indicate that we may follow the World Bank model for pension reforms in India.
As is well known, most individuals are outside the pension scope in India. Unorganised sector workers have no structured social security system. The Insurance Regulatory and Development Authority has submitted a Report on 31st October, 2001 to the Government of India making some timely recommendations for the pension reforms in the unorganised sector. After a prolonged debate on the above mentioned OASIS Report, a lot of thought have emerged on the pension sector reforms.
The desired progress in India could not be achieved in the matter of retirement schemes despite the fact that tax benefits are available for the premiums/contributions paid. Reforms in the pension area are therefore the need of the hour. In a country where approximately 11 per cent of the working population has so far been covered under different pension schemes and where population growth from 1991 to 2016 is estimated to be at 49 per cent, a socio-economic transformation is absolutely needed. It is also expected that the aged population growth during the period may be 107 per cent. The existing system is under a serious pressure for reform measures. Reforms of the existing formal schemes are also necessary and inevitable due to the rising costs, their poor performance, etc. At present, in India, the vast majority of the population does not enjoy the benefit of the old age pension. As far as the Government employees are concerned, their pensions are charged on the Consolidated Fund of India.
In view of the above, I fully support the present Bill and I request that this Bill may be passed by this august House. Thank you very much for affording me an opportunity to speak.
*m05 डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय (चन्दौली) : महोदय,आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विधेयक पर बोलने का अवसर दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। श्री निशिकान्त दुबे जी को मैं धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने इतना महत्वपूर्ण विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। मैं तो इसे मात्र एक विधेयक ही नहीं,इसे एक पवित्र विधेयक की संज्ञा दूंगा,क्योंकि यह ऐसे लोगों की कठिनाइयों के लिए है,जिनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
महोदय,हम जब इन्टरमीडिएट में पढ़ते थे तो नागरिक शास्त्र में बताया जाता था कि सरकार क्या है,सरकार की अवधारणा क्या है?कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मतलब ही सरकार होता है। वास्तव में कल्याणकारी राज्य का सही प्रतिबिम्ब प्रस्तुत करने वाला यह विधेयक है। मैं इस नाते इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करता हूं। मैं आपको एक दृश्य बताना चाहता हूं। मैं उत्तर प्रदेश में जब पंचायत मंत्री था,मैंने अनेक जगह देखा कि पेंशन होल्डर्स की क्या कठिनाइयां हैं तो मैंने उनका एक सम्मेलन बुलाया। उसमें ऐसे परेशान तरीके के लोग आये कि उनके दृश्य को देखकर हम सबकी आंखों में आंसू आ गये। मैं आज आपको बताना चाहता हूं कि आज जो समाज की स्थिति है,मैं किसी की निन्दा या आलोचना के भाव से नहीं कह रहा हूं। समाज में बहुत से ऐसे तबके हैं,जिनके घरों में अगर पेंशन मिलती है,कोई विधवा,विकलांग या वृद्धा पेंशन हो,इन पेंशनों का भी तो आज ऐसा दुर्भाग्य है कि पूरी की पूरी राशि समय से पहुंचती ही नहीं है। उसमें भी नीचे इतने प्रकार का रैकेट है कि कभी-कभी यह दुखद बात है कि 6 महीने व्यक्ति मृतक हो जाता है,फिर 6 महीने जिन्दा हो जाता है। आपको लगेगा कि यह मैं क्या बोल रहा हूं? 6 महीने मृतक का मतलब है कि 6 महीने पेंशन रोककर के दूसरे को जिन्दा करके पेंशन जारी की जाती है और फिर 6 महीने उसको जारी की जाती है। यह एक खराब परिदृश्य है।
दूसरा जो परिदृश्य आता है,मैंने ऐसा सामाजिक जीवन में अनेक बार देखा कि अगर किसी के घर में थोड़ी सी कोई पेंशन आती है,शाम को उसकी बहू उसे रोटी जरूर दे देती है क्योंकि उसके मन पर यह असर रहता है कि इस रोटी में उसकी पेंशन का योगदान है। मैंने कई जगह देखा है कि जिसकी साठ-सत्तर की उम्र हो गयी,जिसकी आय का कोई स्रोत नहीं है,तो अनेक दिन-रात उसकी भूखे पेट रहने और सोने की जिंदगी हो जाती है। इस नाते यह असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण विधेयक है। इसको इस सदन से पारित करने की अपील करते हुए एक छोटा सा सुझाव देना चाहूंगा।
मैं बहुत ज्यादा लंबा नहीं बोलूंगा। मैं हिंदी का विद्यार्था हूं। मैं नया सदस्य हूं, हो सकता है मेरी बात किसी को अन्यथा लगे तो उसे क्षमा करेंगे। हमारे यहां पुनरूक्त दोष साहित्य में कहा जाता है। एक ही बात को बार-बार दोहराना पुनरूक्त दोष काव्य शास्त्र में कहा जाता है। मैं उससे बचने की कोशिश कर रहा हूं। आज क्या हो रहा है? तमाम कंपनियों को कहीं न कहीं यह व्यवस्था दी गयी कि वे अपनी आय का दो-तीन परसेंट विकास मद में लगायें। इसी तरह से ये तमाम फाइव स्टार होटल्स में जितने की झूठन फेंक दी जाती है, जितने का अवशिष्ट खाना फेंक दिया जाता है, उस अपव्यय को रोक दिया जाए।
मेरा दूसरा सुझाव है कि उन पर भी यह दो परसेंट लगा दिया जाए कि इस तरह के असंगठित लोगों के लिए भी आपको सोचना है। इसके साथ ही केंद्र से प्रायोजित बहुत सी ऐसी योजनायें विभिन्न स्तरों की हैं, जिनमें बहुत फिजूलखर्ची होती है, उसको रोक दिया जाए, तो इसके लिए फंड कहीं न कहीं सृजित किया जा सकता है। इस नाते इस विधेयक का मैं पूर्ण समर्थन करता हूं।
हम सबका सौभाग्य है कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने वह गरीबी, वह परेशानी खुद देखी है और जीवन भर उन क्षेत्रों में काम किया है, जहां इस तरह के परिदृश्य होते हैं। हम सबका दूसरा सौभाग्य है कि माननीय श्रम मंत्री जी जो इन चीजों का संज्ञान ले रहे हैं, वह स्वयं एक जमीनी नेता हैं और इन सारी कठिनाइयों को उन्होंने जीवन भर झेला है। इस नाते जो यह विधेयक श्री निशीकांत दुबे जी लाए हैं, इस पर गंभीरता से मनन हो। इसे औपचारिक रूप से लेकर कि यह प्राइवेट मेंबर बिल है, इसे बहस कर दिया और इस विषय को दूसरी दिशा में ले जाने की जगह इस पर गंभीरता से विचार किया जाए। मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इसे कानून की शक्ल देने की जरूरत है। मैं कहूंगा कि इस देश में आधुनिक भारत के सबसे बड़े विचारकों में से एक पंडित दीन दयाल उपाध्याय रहे हैं, जिनका मूल दर्शन ही यही है।
महोदय,मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वह मेरी बातों पर ध्यान दें। जिनका मूल दर्शन ही रहा है -दरिद्र नारायण की सेवा। आज असंगठित लोगों को पेंशन के माध्यम से रोटी का सहारा देना दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा है और दीन दयाल उपाध्याय जी को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी। इस नाते मैं सुझाव देना चाहता हूं कि सदन यह पेंशन योजना "पंडित दीन दयाल उपाध्याय दरिद्र नारायण सेवा पेंशन योजना’के नाम से पास करे ताकि इसके माध्यम से समाज के असंगठित लोगों की बेहतर सेवा हो और सही कल्याणकारी राज्य की स्थापना माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के राज्य में स्थापित हो। मैं यह बात कहते हुए,पुनः दुबे जी के इस विधेयक का समर्थन करता हूं और आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का समय दिया।
*m06 श्रीमती रमा देवी (शिवहर): माननीय सभापति महोदय, आज हमारे माननीय सांसद श्री निशिकांत दुबे जी ने राष्ट्रीय न्यूनतम पेंशन, विधेयक लाया है, समझिए कि पारदर्शिता समझ में आ रही है। जिस तरह की स्थिति समाज में पनप रही है, जिस तरह से गरीब जीने पर बाध्य हैं, अगर उनको पेंशन के माध्यम से कोई स्थान मिल रहा है, तो बहुत बड़ी बात है। हम लोग गांवों में जाते हैं। वृद्धों की परिस्थिति यह है कि उनके बाल-बच्चे बड़े हो गए हैं। वे बाहर कमाने लगे हैं तो उनको कोई पूछता नहीं है। बुढ़ापे में उन्हें खाना देने के लिए उनके घर के लोग तैयार नहीं होते हैं। वे जब अपनी स्थिति बताते हैं तो लगता है कि उनमें बहुत दर्द भरा हुआ है। इस चीज को हम लोग समझते हैं। पेंशन में समरूपता न रहने के कारण, आज बिहार में उनको 200 रूपए पेंशन मिलती है। कहीं उनको 500 रूपए मिलती है और मध्यप्रदेश में शायद उनको 1000 रुपए मिलती है। हम लोग आशा किए हुए थे कि हमारी सरकार बनेगी, हमारे प्रधानमंत्री बनेंगे, वह गरीबों का दुःख दूर करेंगे। उन्होंने गरीबों को बहुत नजदीक से देखा है तो उनकी पेंशन बढ़ायी जाएगी। हम उन्हें तसल्ली भी देते थे। आज जो परिस्थितयां हैं, जिस तरह से गरीब जी रहे हैं, आजादी के बाद इन लोगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। अनाज का जो वितरण होता है, वह गरीबों को नहीं मिल पाता है। उसे अच्छे-अच्छे लोग ले लेते हैं। इसमें सुधार करने की आवश्यकता है। हम लोगों ने गरीबों की परिस्थिति को देखा है कि वे समाज में कैसे जी रहे हैं? उनका जीवन-यापन कैसा है? वे दवा के लिए तरस रहे हैं। उनकी सेवा के लिए कोई तैयार नहीं है। अगर बुढ़ापे में पेंशन मिलेगी तो उनको बहुत बड़ी राहत मिलेगी। कमजोर लोग, किसान जो खेती करते हैं, मजदूर जो मजदूरी करते हैं या मकान और बिल्डिंग बनाते हैं, बहुत-सारे काम उन लोगों के माध्यम से हुए हैं लेकिन बुढ़ापे में उनको देखने वाला कोई नहीं है, इसलिए सरकार को उनकी चिंता करनी चाहिए।
मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि बूढ़ों की जो स्थिति है, इन्हें देखने के बाद ऐसा महसूस होता है कि कैसे इनके लिए कुछ व्यवस्था करा दें। ये पेंशन के लिए फार्म्स भरते हैं तो ये अधिकारी फॉर्म्स कहीं गायब कर देते हैं। हम लोग कई बार साइन कर के उनके फार्म्स को देते हैं। लेकिन वे उनको सुचारू रूप से नहीं चलाते हैं। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की जो स्थिति है, उसे देख कर हम लोगों को बहुत पीड़ा होती है। ऐसा लगता है कि उन्हें जीलाने के लिए हम लोगों को कैसे और क्या-क्या करने होंगे? कभी-कभी तो ऐसा महसूस होता है कि सरकार द्वारा इन्हें पौधा लगाने का जो काम दिया गया है, उसका भी इन्हें पेमेंट नहीं किया है। इन गरीब लोगों का पैसा मारने वाले भी बहुत लोग हैं। मैं बिहार से चुन कर आई हूं। बिहार की स्थिति को देखने के बाद ऐसा लगता है कि हर जगह ऐसी स्थिति है। आजादी के बाद भी इन पर ध्यान नहीं दिया गया है। वोट के समय लल्लू-पच्चू करके इनसे वोट ले लेते हैं। उसके बाद कोई उन्हें पूछने के लिए तैयार नहीं होता। पैंशन के समय अधिकारी उनका हक,हिस्सा काट लेते हैं। उनकी पैंशन में समरूपता होनी चाहिए,गरीब लोगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर उन्हें पैसा मिलता है तो उनके परिवार के लोग भी आदर से दो रोटी खिलाने के लिए तैयार हो जाते हैं। जिस परिस्थिति को हम अपनी आंखों से देखकर आए हैं,उसे बदलने के लिए हमारे माननीय सदस्य बिल लाए हैं। यह बहुत अच्छी चीज है। हम इसके लिए बहुत सोचते हैं,हमारी रातों की नीद उजड़ जाती है। ऐसा कहा गया है -जिसके पैर न फटी बिवाई वह क्या जाने पीड़ पराई। मैं गरीब लोगों की जो स्थिति देखती हूं,ऐसा महसूस होता है कि उन्हें कैसे खिलाया जाए,कैसे उन्हें दवा मिले,अस्पताल में सेवा कैसे मिले। अस्पतालों में भी बैड नहीं मिलता। हम उनके इलाज के लिए चिट्ठी लिखते हैं,लेकिन उन्हें डेट पर डेट मिलती रहती है। यहां हैल्थ मिनिस्टर बैठे हुए हैं। हम कहना चाहेंगे कि अस्पतालों में बैड्स में वृद्धि करना सबसे ज्यादा जरूरी है। गरीब व्यक्ति किसी से कर्ज लेकर आता है,लेकिन उसे अस्पताल में जगह नहीं मिलती। बूढ़ा व्यक्ति सबसे ज्यादा कमजोर और बीमार हो जाता है। इस परिस्थिति को सुधारने के लिए हम सरकार से आग्रह करेंगे। हमारी जो सरकार बनी है,वह गरीब लोगों के लिए ज्यादा चिंतित है। इस आशा और उम्मीद से हम चाहते हैं कि उन लोगों को कम से कम एक हजार रुपये महीना पैंशन मिले जिससे वे अपना जीवन अच्छी तरह चला सकें। उन्हें यह नहीं लगेगा कि हम बूढ़े हो गए हैं। उनके बाल-बच्चे भी उनकी सेवा करेंगे। आजकल जब बच्चे जवान हो जाते हैं तो वे केवल अपने बच्चों के भरण-पोषण में लग जाते हैं,बूढ़े व्यक्ति को कोई नहीं पूछता। जब हम गांव जाते हैं तो देखते हैं कि जिस व्यक्ति ने इतनी मेहनत करके बच्चों को बढ़ा किया है,आज उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। उन्हें इस परिस्थिति से उबारने के लिए हम सरकार से आग्रह करेंगे।
माननीय सदस्य जो बिल लाए हैं,ऐसा लगता है कि यह बहुत जरूरी था। उसे पूरा करने के लिए हम खड़े होकर आज आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्हें इस परिस्थिति से उबारना हमारा धर्म है। हम जनता की सेवा करने के लिए आए हैं तो आवाज उठाना भी हमारा कर्म बनता है।
*m07 श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): सभापति महोदय, मेरे सहयोगी और मित्र निशिकांत दूबे जी नेशनल मिनिमम पैंशन गारंटी बिल लेकर आए हैं। पिछले सप्ताह भी इस सदन में उस पर चर्चा हुई और बड़ी गंभीरता के साथ माननीय सदस्यों ने अपने-अपने विचार दिए। हर वक्ता ने उसकी सराहना भी की। उसके पीछे छिपी भावना ऐसी है जिससे देश के करोड़ों लोगों को लाभ मिल सकता है। जो पिछले 67 वर्षों में नहीं हो पाया, आने वाले समय में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले व्यक्तियों के लिए एक अच्छी सोच, भावना के साथ वे इसे लाए हैं। सबसे पहले मैं अपनी ओर से उनका बहुत-बहुत आभार प्रकट करना चाहता हूं कि कम से कम इस देश के बुजुर्ग और गरीब लोगों के बारे में किसी ने सोचा। प्रसन्नता इस बात की है कि जिस डिपार्टमैंट के माध्यम से यह होना है, उस डिपार्टमैंट के आदरणीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी यहां मौजूद हैं। वे स्वयं जमीनी स्तर से आते हैं। एक बड़े नेता हैं और गरीब लोगों की समस्याओं को जानते हैं। उन्हीं के माध्यम से हम अपनी आवाज देश के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जिन्हें करोड़ों लोगों ने चुनकर एक मजबूत सरकार देकर 16वीं लोक सभा में दुनियाभर में संदेश देने का प्रयास किया है। मुझे आशा है कि यहां जितने भी विचार दिए जाएंगे, माननीय मंत्री जी के माध्यम से प्रधान मंत्री जी तक पहुंचेंगे और इस विषय पर कोई न कोई निर्णय जरूर लिया जाएगा। आखिर नेशनल मिनिमम पैंशन गारंटी बिल क्यों लाया गया। पिछले 67 वर्षों में देश में जितनी भी नीतियां बनती रहीं, वे कभी धर्म, कभी जाति, गरीब, पिछड़े के नाम पर बनती रहीं।
लेकिन इस पैंशन बिल में जो एक महत्वपूर्ण बात कही गयी,वह यह है कि आप किसी जाति,धर्म से हो,अमीर हों या गरीब हो,अगर आप 60 वर्ष से ज्यादा होंगे,तो 5 हजार रूपये प्रति महीने आपको पैंशन मिलेगी। यह इस बिल की सबसे बड़ी खासियत है। इसलिए मैंने कहा कि धर्म,जाति आदि सबसे ऊपर ऊठकर सोचा गया है। यहां पर यूनीवर्सल पैंशन स्कीम की बात की गयी। आखिर भारत में यह लागू क्यों हो? पिछले 67 वर्षों में कांग्रेस के कारण हिन्दुस्तान में जो कुछ घटा है,उससे आज समाज में बहुत बड़ा गैप आ गया है। अमीर अमीर होता चला गया और गरीब गरीब होता चला गया। एक बड़ी खाई पैदा हो गयी। आज अगर आप दिल्ली के किसी पॉश इलाके में जाकर देखिये तो एक-एक घर के बाहर चार-चार सिक्योरिटी गार्ड्स बैठे हैं। अमीर व्यक्ति की रक्षा करने के लिए चार सिक्योरिटी गार्ड हैं,लेकिन एक गरीब आदमी के लिए पैंशन सिक्योरटी बिल लाने के बारे में किसी ने नहीं सोचा। इसे हमारे सहयोगी निशिकांत दूबे जी ने सोचा,इसलिए मैं उनका भी बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं। उन्होंने गरीब की सिक्योरिटी के बारे में सोचा,उनकी पैंशन के बारे में सोचा। यह एक अच्छी शुरुआत है। उन्होंने कम से कम अपने आपको एक हजार रुपये तक न रोक कर पांच हजार रुपये तक सोचा,ताकि गरीब आदमी खुद भी दो वक्त की रोटी खा सके और अपने परिवार को भी दो वक्त की रोटी खिला सके।
सभापति जी,पिछले कई वर्षों से रोटी,कपड़ा और मकान का डायलॉग फिल्मों में तो आता था,लेकिन पार्लियामैंट में भी यही चल रहा है। मैं खुद लोक सभा का तीसरी बार सदस्य बना हूं। अब इस पर कितनी बार चर्चा होगी?कभी रोटी,कपड़ा और मकान की बात खत्म होगी?क्या हम आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने तक ही सीमित रहेंगे?अगर गांव में जायें,तो आज भी सड़क,शिक्षा,स्वास्थ्य की बात की जाती है।
सभापति जी,आप तो कई वर्षों से यहां संसद में हैं। इन विषयों को लेकर,आज भी आपने जिस तरह से किसानों की बात कही,उस समय एक दर्द आपकी बात में नजर आ रहा था। क्या हम इन बातों पर केवल यहां चर्चा ही करेंगे या कोई निर्णय भी लेंगे?आज गरीब बीमार होता है,तो उसका घर,जमीन आदि सब कुछ बिक जाता है। गरीब आदमी कहता है कि मुझे मौत मिल जाये,लेकिन वह बीमार न हो। अब दिक्कत क्या है?वह किसी अस्पताल में जायेगा तो उस बेचारे के इलाज का खर्चा ही लाखों रुपये आता है,तो उसका सब कुछ गिरवी हो जाता है। अगर वह अच्छे परिवार से भी होगा,तो बीपीएल फैमिली में उसका नाम आ जाता है। वह गरीबी रेखा के नीचे पहुंच जाता है। इस देश में 80 प्रतिशत बीमारियां पानी से हैं। देश में पानी की समस्या है और हम आज तक पानी की व्यवस्था नहीं कर पाये। हम देश में पानी की व्यवस्था नहीं कर पाये तो और क्या कर पायेंगे?पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब भारत में हैं। हम उनके लिए दो वक्त की रोटी की व्यवस्था नहीं कर पाये। लेकिन प्लानिंग कमीशन बैठकर यह कर देता है कि 27 रुपये होगा या 32 रुपये होगा। हम कहां पर जी रहे हैं?आखिर हम इतनी बार चुनकर आते हैं,तो क्या हम इसका कोई रास्ता नहीं निकाल सकते?अगर जर्मनी वर्ष 1889 में सोशल सिक्योरिटी ला सकता है,यूएसए वर्ष 1776 में ला सकता है,तो भारत आज वर्ष 2014 में क्यों नहीं कर सकता?क्या सामाजिक सुरक्षा की गारंटी हमें नहीं देनी चाहिए?क्या हिन्दुस्तान की युवा पीढ़ी आज विदेशों में इसलिए नहीं जाती,क्योंकि उनको अपना भविष्य वहां पर सुरक्षित लगता है?वहां पर उनको अपार संभावनाएं लगती हैं,जहां पर उनका भविष्य सुरक्षित भी होगा और उनको एक अच्छा भविष्य भी मिल पायेगा। क्या कहीं न कहीं हम में कमी नहीं रह गयी,हमारे कानून बनाने वालों में वह कमी नहीं रह गयी?आज अगर हम यह सोचें और संविधान का अनुच्छेद 14 यह कहता है कि इक्वैलिटी टू ऑल,यानी सबके लिए एक तरह का दिया जाये,लेकिन सबके लिए एक तरह का कहां से सब कुछ मिल पा रहा है?गरीब के बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही,अच्छे कपड़े नहीं मिल पा रहे,अच्छे खाने की व्यवस्था नहीं मिल पा रही,अच्छा भविष्य नहीं मिल पा रहा,तो हम सब यहां 545 लोग इकट्ठे होकर उसे क्या दे पा रहे हैं,यह प्रश्न चिह्न तो हम सबके ऊपर भी उठता है। आखिर 16 बार लोक सभा में जब-जब यह चर्चा हुई होगी,तो नैशनल मिनिमम पैंशन बिल पहले क्यों नहीं लाया गया,इस तरह का प्रावधान क्यों नहीं किया गया?आखिर इसके लिए कितना पैसा चाहिए--मात्र 50 हजार करोड़ रुपये। इसके लिए मात्र 50 हजार करोड़ रुपया चाहिए। वर्ष 2030 तक लगभग 20 करोड़ से लोग 60 वर्ष से अधिक की उम्र के होंगे। उनको सिर्फ पाँच हजार रुपए महीना देना है। मनरेगा के लिए 30 हजार करोड़ रुपए दे सकते हैं,नेशनल हाइवे के लिए पैसा दे सकते हैं, 18 लाख करोड़ रुपए का बजट पास कर सकते हैं,तो 50 हजार करोड़ रुपये हम नेशनल मिनिमम पेंशन स्कीम के लिए भी दे सकते हैं। इसके लिए सिर्फ इच्छाशक्ति चाहिए। उस गरीब का दर्द देखने वाला चाहिए,उसके दर्द को महसूस करने वाला चाहिए। मुझे लगता है कि माननीय मंत्री जी जब केबिनेट मीटिंग में इसकी चर्चा करेंगे,तो हमारे सहयोगियों की बात रखकर कह पाएंगे कि हाँ,इस देश के लोगों को सिक्यूरिटी हम देंगे,क्योंकि मोदी जी के नेतृत्व में इस देश का हर गरीब आदमी,आम आदमी यह सोचता है कि अब उसका भविष्य सुरक्षित है,लेकिन यह सुरक्षित तब है,जब नेशनल मिनिमम पेंशन स्कीम आएगी। हर वर्ष 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को पाँच हजार रुपए मिलेगा,तो निश्चित तौर पर इसका लाभ भी मिलेगा।
सभापति महोदय,मैं एक निवेदन और करना चाहता हूँ। यदि इन गरीबों को बीपीएल फैमिली में जाने से पहले बचाना है,तो पाँच हजार रुपए महीना देगें,तो दो-ढाई सौ रुपए कट जाएगा और उसकी एक इंश्योरेंस हो जाएगी,तो इससे क्या होगा?इससे यह होगा कि हर व्यक्ति की इस देश में इंश्योरेंस हुई होगी। वह बीमार पड़ेगा,तो उसका खर्चा इंश्योरेंस कंपनी उठाएगी। लाखों लोग सड़क दुर्घटना में मर जाते हैं,लोखों लोग बगैर इलाज के मर जाते हैं,लाखों लोग अस्पताल पहुंचने से पहले खत्म हो जाते हैं,लाखों लोगों को बेड नहीं मिल पाता है। पीजीआई एम्स में लाखों लोग कॉरिडोर में स्ट्रेचर पर पड़े-पड़े खत्म हो जाते हैं। जब यह योजना शुरू हो जाएगी,तो वह खुशी-खुशी ढाई सौ रुपए कटवाएगा,अपना इंश्योरेंस करवाएगा,तो उसका जीवन भी सुरक्षित होगा। यह बात आज एक नौजवान कह रहा है। मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष भी हूँ। मैं आज युवाओं की बजाय इस सदन से अपने बुजुर्गों के लिए कुछ मांगने आया हूँ। इस नेशनल मिनिमम पेंशन स्कीम को लागू करना चाहिए। इस बिल को केवल यहाँ पर चर्चा करके खत्म न किया जाए। मैं आपके माध्यम से आदरणीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी से कहना चाहता हूँ कि इस दर्द को जानिए। आप भी मध्य प्रदेश के हैं। आपकी वहाँ की सरकार ने बहुत अच्छे कार्य किये हैं। श्री शिवराज जी ने वहाँ के किसानों के लिए कमाल का काम किया है। आज चाहें तो आप भी एक छाप यहाँ छोड़कर जा सकते हैं। देश के 20 करोड़ लोगों को एक सुरक्षित भविष्य आप दे सकते हैं। मैं चाहता हूँ कि आप और सरकार इस कार्य को निश्चित तौर पर करें ताकि देश के लोगों को इसका लाभ मिले। आपका बहुत-बहुत आभार। अपनी बात समाप्त करने से श्री निशिकांत दुबे जी को भी एक बार बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और आभार व्यक्त करता हूँ कि वे इस बिल को लेकर आए।
*m08 श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : माननीय सभापति महोदय, माननीय श्री निशिकांत दुबे ने असंगठित मजदूरों से संबंधित विधेयक पर जो चर्चा आरंभ करायी है उस पर पूरे सदन में चर्चा हो रही है। श्रम की प्रतिष्ठा करना ही देश की सबसे बड़ी प्रतिष्ठा है। हम मजदूरी करते हैं, तो हमारी भी प्रतिष्ठा है, हमारी इज्जत है। हम रोजगार करते हैं, तो हमारी इज्जत है। श्रम की प्रतिष्ठा होनी चाहिए। हम खेत में काम करते हैं, हम खलिहान में काम करते हैं, हम रिक्सा चलाते हैं, हम ईंट-भट्ठा पर काम करते हैं, हम पसीना बहाने का काम करते हैं, हम प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं, मशीन से ज्यादा काम इंसान करता है। मशीन तो दबता है, लेकिन इंसान हमेशा काम करता रहता है, इंसान श्रम और पसीना बहाने का काम करता रहता है। बीड़ी मजदूर का पसीना बहता है। आज चाहे खान मजदूर हों, खनिज निकालने वाले मजदूर हों, पहाड़ों और पत्थरों को हाथ से तोड़ने का काम मजदूर करते हैं। उनके हाथों में घाव हो जाता है, उनके हाथों से लहू बहते हैं और हम बैठकर उसे देखते रहते हैं। आज फावड़ा चलाने वाले, कुदाल चलाने वाले मजदूर हैं तथा इस देश में करोड़ों असंगठित मजदूर हैं। ये हमारे बिहार राज्य में भी हैं और दूसरे राज्यों में भी हैं। गरीब-गुरबा लोग हर जगह हैं। हमारी एक मानसिकता बन गयी है, उस मानसिकता से हमें ऊपर उठना पड़ेगा।
17.00 hrs श्रम की प्रतिष्ठा करनी पड़ेगी। इसके साथ ही उनकी भूख को कैसे दूर करेंगे?जब उनकी उम्र बीत जाती है,उनके लिए पेंशन की व्यवस्था नहीं रहती है,उनके लिए कोई सुविधा नहीं है। जब उनके बच्चे जवान हो जाते हैं,उन्हें छोड़ देते हैं,तो वे हाथ पसारे चलते हैं।
17.01 hrs (Shri Arjun Charan Sethiin the Chair) वे जब बीमार पड़ते हैं,उन्हें दवा नहीं मिलती है। जब उनकी असमय मौत होती है,तो उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा नहीं हो पाती है,उन्हें पहनने के लिए कपड़े नहीं मिलते हैं। असंगठित मजदूर की आंखों में हमेशा आंसू रहते हैं। हजारों सालों से आंसू बह रहे हैं,आजादी के इतने वर्षों बाद भी आंसू बह रहे हैं। जो इंसान बैशाखी के भरोसे चल रहा हे,गरीब-गुरबा है,असंगठित मजदूर है,उनके आंसुओं को पोछना और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ना हमारा फर्ज है,इसीलिए पेंशन योजना के तहत हमें उनको पेंशन देनी है। गरीब-गुरबा आज भी तालाब और नदी का पानी पीते हैं। इसलिए हाथ के काम की प्रतिष्ठा होनी चाहिए। यहां पेट से इंसान भूखा रहता है,दिमाग से उसे गुलाम बनाया जाता है। इस दिमाग की गुलामी को हमें देखना पड़ेगा और जो इंसान पेट से भूखा है,उसे हमें विशेष अवसर देना पड़ेगा,यह बात डा.राम मनोहर लोहिया कहा करते थे। बहते हुए आंसुओं को रोकना होगा,दिमाग की गुलामी को खत्म करना होगा और हाथ एवं श्रम की प्रतिष्ठा हमें करनी होगी। इसलिए असंगठित मजदूर के पेट की भूख को खत्म करने के लिए यह कदम जरूरी है। जब असंगठित मजदूर अपनी उम्र में जाते हैं,कभी-कभी यह भी होता है कि उनके पास कफन के पैसे भी नहीं होते हैं। यही मेरे भारत का चित्र है,यही गरीबी है,यही दरिद्रता है,यही असंगठित मजदूरों की परेशानी है,इसलिए आज सभी को सोचना होगा कि भारत में जो भी इंसान हैं,जिनकी उम्र हो जाती है,उस उम्र के बाद उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए,उनकी जीविका चलनी चाहिए। उनको मकान नहीं मिल पाता है,वे आसमान देखते रहते हैं,उनके सामने हजारों परेशानियां रहती हैं। हम गर्व से कहते हैं कि हम हाउस में रहते हैं और हमारा नौकर कहां रहता है,वह आउट-हाउस में रहता है,सर्वेंट क्वार्टर में रहता है। सर्वेंट क्वार्ठर की परम्परा को तोड़ना हमारी जिम्मेदारी है। उसको सर्वेंट क्वार्टर मत कहिए,क्वार्टर कह लीजिए। असंगठित मजदूरों पर जब चर्चा हो रही है,तो असंगठित मजदूर को सम्मानित करना,प्रतिष्ठित करना हमारी जिम्मेदारी है।
"जब तक भूखा इंसान रहेगा,धरती पर तूफान रहेगा।"
यह इन्कलाब चलता रहेगा। यह इन्कलाब तभी बंद होगा,जब असंगठित मजदूरों को सम्मान मिलेगा,उनको दो रोटी मिलेगी,इज्जत के साथ जीने का अधिकार मिलेगा। यह हम सभी का दायित्व है। यह किसी पार्टी या व्यक्ति का सवाल नहीं है कि कौन कितना क्रातिकारी है,असंगठित मजदूरों के लिए संवेदनशील होना हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए आज हमें इस पर सोचना होगा। आज दो भारत बने हुए हैं -एक भारत वह है जो खाते-खाते मरता है,उनको कोई दिक्कत नहीं होती है। उनके पास अपार दौलत है,खाते-खाते मरते हैं। दूसरा भारत वह है जो हाथ पसार कर मरते हैं,खाना उनको नहीं मिलता है। सब कुछ इसी धरती पर रह जाएगा। इसीलिए कहा गया है :
"दौलत दुनिया माल खजाना दुनिया में रह जाएगा।
हाथ पसारे आए बंदा, हाथ पसारे जाएगा। "
असंगठित मजदूरों को सम्मान दीजिए,यह हम सभी की जिम्मेदारी है,इस जिम्मेदारी से हम मुकर नहीं सकते हैं। इसीलिए मेरे मित्र माननीय सदस्य श्री निशिकांत दूबे जी ने जो बिल का प्रारूप यहां प्रस्तुत किया है,उस पर हमें गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। माननीय सदस्य उस इलाके से आते हैं,मेरा और उनका इलाका एक ही है। वहां जंगल में लकड़ी चुनने वाले आदिवासी हैं,दलित हैं,गरीब-गुरबा है,जो हजारों से प्रताड़ित और व्यथित रहे हैं,इसलिए जो सामाजिक मानसिकता है,उसमें भी लोगों का शोषण होता है -ईंट भट्ठों पर मजदूरों के साथ,लकड़ी चुनने वालों के साथ,खेतिहर मजदूरों के साथ,रिक्शा ठेले वालों के साथ अन्याय होता है।
इसलिए आज इस पर हम गम्भीरता से विचार कर रहे हैं और न्याय होना चाहिए,देश में न्याय की धारा चलनी चाहिए,जिससे गरीबों को सम्मान मिल सके। जब तक उनका अपमान होगा,देश बेहतर नहीं होगा। इसलिए हम इनकी लड़ाई लड़ रहे हैं। जो पिछड़े हैं उन्हें आगे बढ़ाएं और जो आगे बढ़े हुए हैं उन्हें थोड़ा कम दें। इसी चीज को ध्यान में रखकर कहा गया था -विशेष सुविधा,विशेष अवसर। मजदूरों को ताकत दें,उन्हें प्रतिष्ठित करें और उनकी जब उम्र बढ़ जाती है तो उनके लिए पेंशन का प्रावधान करें। यह हमारा फर्ज है और सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।
यह सरकार कहती है कि अच्छे दिन आने वाले हैं,तो मैं कहना चाहता हूं कि हमें इस पर चर्चा नहीं,बल्कि इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि जो मजदूर हैं उन्हें सम्मान मिले,समान मजदूरी मिले,जिससे वे सम्मान के साथ जी सकें। हमारे संविधान में भी सबको सम्मान से जीने का हक दिया गया है।
इतना ही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
*m09 DR. MAMTAZ SANGHAMITA (BARDHMAN DURGAPUR): Respected Chairman, Sir, I am very thankful that you have given me a chance to speak. First of all, I must salute my friend, Shri Dube ji, as he has come forward with such a pertinent Bill. We know that in our country more than 90 per cent of workers are in unorganized sector. They have neither the status of workers with fixed wages nor pension when they would be no more in workable condition.
We discussed in the morning about our women folk, who are about 50 per cent of our population, who are in a wretched condition. The same is the case of mass population of labourers, who are in such a wretched condition that we cannot explain in words. That is why I think that this Bill should be properly discussed in the Cabinet and passed in this term only.
First of all, I would say that we have to give status to these workers. We know that there are many sectors where unorganized labourers are employed. My learned friend has explained everything in this regard. In our State of West Bengal we have a large number of unorganized labourers such as handloom workers, jari workers, rickshaw pullers, field labourers, mine labourers, coal field labourers, bidi workers and many others.
In case of women, who are working as bidi workers, I want to say that their condition is still very bad. The male bidi workers are getting more wages than what their female counterparts are getting. I do not know the reason for it. But, this is a fact. I also want to say something about the workers who make envelops. In Bengali we call them thonga people. Most of them are our women workers. Their condition is similar to that of female bidi workers.
People often ask where from this pension would come. I have a few suggestions in this regard. The employers, under whom these workers are employed, should maintain a register and keep a proper record of them. They should also produce this register as and when demanded by the Government authorities. The employers should also be charged with some sort of a tax. This way, the Government can collect some money for the pension of these workers.
Some of my friends, including Shri Anurag Thakur, said about the insurance. That should also be included in this Bill so that from there, that money can come. But I also agree with all other speakers that this Bill, the National Minimum Pension (Guarantee) Bill, should be passed and all those who are 60 and above should get some pension. This will also help in reducing the old-aged beggars in the villages and in the streets of the town.
*m10 हंसराज गंगाराम अहीर (चन्द्रपुर): सभापति जी, माननीय निशिकांत दुबे जी ने जो बिल पेश किया है जिसमें देश में पेंशन-भोगियों के लिए जो पेंशन योजना होनी चाहिए, उसका जिक्र किया है। यह एक अच्छा बिल है, इसका मैं समर्थन करता हूं।
महोदय, देश में बहुत बड़ी संख्या में निजी और असंगठित क्षेत्र में मजदूर काम करते हैं, तथा कुछ सरकारी कंपनियों में भी काम करते हैं, जिन्हें पेंशन बहुत कम मिलती है। यहां पर कोल माइन्स में काम करने वाले और बीड़ी मजदूरों का भी उल्लेख हुआ है। सेल में भी काम करने वाले कंट्रेक्ट लेबर हैं जिनकी पीएफ कटने के बाद भी उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलता है। हमारे पास असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की शिकायतें आती हैं जो पेंशन नहीं पा रहे हैं।
मैं कोल माइन्स के मजदूरों के बारे में आपसे कहूंगा कि देश में जब कोल इंडिया का राष्ट्रीयकरण हुआ था, उसके पहले यह काम निजी क्षेत्र में था और वर्ष 1973 के बाद इस क्षेत्र में काम करने वाले जो मजदूर हैं उन्हें बहुत कम पेंशन मिलती है। मेरे क्षेत्र में ऐसे कई मजदूर हैं जिन्हें 100,150 या फिर 200 रुपये पेंशन मिलती है। राष्ट्रीयकरण के बाद उनका कार्यकाल बहुत कम रहा और इस वजह से उन्हें पेंशन बहुत कम मिलती है। जब 1998 में कोल माइन्स पेंशन स्कीम बनी, तो उनका कार्यकाल कम होने की वजह से तथा उनका पीएफ कम कटने की वजह से पेंशन कम मिलती है। यही बात ईपीएफ पर लागू होती है, जैसे सेल में काम करने वाले मजदूर हैं उनके हाथ में भी 300-400 रुपये पेंशन के आते हैं। जो कंट्रेक्टर लेबर्स हैं उनका पीएफ तो कंपनियां काटती हैं लेकिन उनका एकाउंट नम्बर उन्हें नहीं देती हैं और 3 साल या 4 साल का जब कंट्रेक्ट पूरा हो जाता है तो ये असंगठित रूप में काम करने वाले जो लेबरर्स हैं इन्हें पेंशन के बारे में पता ही नहीं होता है। इस तरह से इसमें भ्रष्टाचार होता है, अतः यह जो बिल आया है इसमें इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि जो कंट्रेक्ट पर मजदूर हैं इनका पीएफ कटने के बाद इन्हें कुछ पेंशन मिले। प्रोविडेंट कमीश्नर के पास करीब-करीब 11 हजार करोड़ रुपये ऐसा है जिसका कोई मालिक नहीं है। मेरी जानकारी है कि सीएमपीएस में 11 हजार करोड़ रुपया पड़ा हुआ है और ऐसे ही कंट्रेक्ट लेबर जो काम बंद होने के बाद से पेंशन से वंचित हैं, उन्हें भी इस बिल के माध्यम से मैं आपसे कहना चाहूंगा कि इस बिल की बहुत जरूरत है।
अतिमहत्वपूर्ण विषय को लेकर जो बिल पेश किया गया है,इस पर सरकार विचार करे। कोल माइंस में कांट्रेक्ट लेबर की संख्या तीन लाख से अधिक है। ये काम करते हैं,इनका पीएफ कटता है,लेकिन इन्हें पेंशन नहीं मिलती है। सेल में हजारों मजदूर हैं,मैं सरकारी क्षेत्र की बात कह रहा हूं तो निजी कम्पनियों में तो इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। इस वजह से करोड़ों की संख्या में असंगठित स्वरूप में काम करने वाले जितने मजदूर भाई हैं,इन्हें पेंशन देने के लिए सरकार को निर्णय लेना पड़ेगा। सौभाग्य से यह जो संकल्प पेश किया गया है इसमें ईपीएप-1995है,उसका ही उल्लेख आ रहा है। मैं कहूंगा कि एक हजार से बढ़ाकर कम से कम पांच हजार किया जाना चाहिए और केवल ईपीएफ से ही नहीं बल्कि सीएमपीएफ से भी जोड़ना चाहिए। जितने भी देश में कांट्रेक्ट लेबर हैं,उनका पीएफ कटता है इनकी संख्या क्या है,इनकी गिनती होनी चाहिए और सभी को कवर किया जाना चाहिए। देश में जो मेहनत करने वाला वर्ग है,जिसके बारे में चिंता प्रकट की है कि 60 वर्ष के बाद उनके जीने के साधन समाप्त हो जाते हैं,उन्हें अगर पेंशन मिल जाती है तो वे बुढ़ापे में अच्छा जीवन जी सकेंगे। मैं सरकार से विनती करता हूं कि इस बिल को महत्व देते हुए विचार करें। मैं निशिकान्त जी को कहना चाहूंगा कि इस बारे में बहुत गहराई से सोचा है और मंत्री जी भी इस विषय पर गंभीरता से सोचें और इस संबंध में सरकारी बिल लाएं।
*m11 श्री शंकर प्रसाद दत्ता (त्रिपुरा पश्चिम): सभापति जी,त्रिपुरा में जो मजदूर वर्ग है,वह पूरा का पूरा असंगठित सेक्टर का है। वहां कोई बड़ा कारखाना नहीं है। मीडिएम साइज फैक्टरी है जहां कुल मिलाकर एक हजार मजदूर काम करते हैं और इसे छोड़कर हमारे राज्य में जो मजदूर वर्ग है लगभग छह लाख मजदूर हैं,जिनमें सारे के सारे अनआर्गेनाइज्ड सेक्टर में हैं। हम लोगों को यही जानकारी है कि हिंदुस्तान में अनआर्गेनाइज्ड सेक्टर 40 करोड़ वर्कर हैं। पूरे वर्कर्स में 93 परसेंट वर्कर्स अनआर्गेनाइज्ड सेक्टर में हैं।and only seven per cent are in the organised sector. आज हमारे मित्रों ने जो बिल लाए हैं और हमारे साथी ने जो बिल लाए हैं,मैं सभी को विनती करूंगा कि यह प्राइवेट मेम्बर बिल आया है,सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह बिल लाए हैं,मेरा विनती होगा कि अगर सरकार गंभीर होती,तो आज यह बिल प्राइवेट मेम्बर बिल नहीं होता बल्कि सरकारी बिल होता। If we sincerely want to do something for the unorganised workers, then a Government Bill must be brought in this House, and for that all the Members of this House should support it.
Our unorganised workers, महोदय,आपको जानकारी है कि हमारे मित्रों ने बताया कि असंगठित क्षेत्र में वर्कर बहुत दुख में काम करते हैं। हमारी मेड सर्वेंट जो घर में काम करती हैं,महीने में उन्हें चार सौ,पांच सौ रुपए से ज्यादा नहीं मिलते हैं। दो-तीन घर में काम करके हजार-डेढ़ हजार रुपया पूरे महीने में कमाते हैं और इतने पैसों में उन्हें पूरा परिवार चलाना पड़ता है। यही बात हमारे जो कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं,हमारा जो बीड़ी वर्कर्स हैं,हमारे रिक्शा चलाने वाले हैं,सभी को इसी दिक्कत में काम करना पड़ता है। महीने में 2-3 हजार से ज्यादा उनको तनख्वाह नहीं मिलती। इसलिए 4-5 आदमी का अगर परिवार है तो वह कैसे चलेगा?जब 60-65 साल का होने के बाद जब उनमें काम करने की ताकत नहीं रहती तो उनका परिवार कैसे चलता है?उनके घर में खाना-पीना,लाने के लिए कोई नहीं होता है तो 60 साल तक जिस आदमी ने काम किया,उनके प्रति देश को भी कुछ करने की जरुरत है। इसके लिए आज जो बिल यहां लाया गया है,उसका हम पुरजोर समर्थन करते हैं और हमारी पार्टी भी उसका पूरा समर्थन करती है। हमारी पार्टी पूरे देश भर में इसी कॉज के लिए काम करती है। सेन्टर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन्स में मैं काम करता था और इस संगठन में जब यूपीए सरकार थी,सिर्फ एक हजार करोड़ रुपया पूरे 40 करोड़ आदमी के लिए रखा गया था तो हमने बताया कि एक आदमी को इस एक हजार करोड़ रुपये में से साल में केवल 25 रुपया मिलेगा। इसके लिए एनडीए सरकार से हमारी विनती है कि आज जो बिल दुबे जी यहां लाए हैं,उस बिल का रूपान्तर करके इसको गवर्नमेंट बिल के रूप में इधर लाया जाए और उसके बाद पास कराने पर हमारे साथी मित्रों ने जो 5000 रुपये की मांग जिससे सभी को पेंशन मिले और हमारे 40 करोड़ असंगठित वर्कर्स के लिए जो 5000 रुपये की मांग हमारे मित्र श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने रखी थी,मैं भी कहना चाहूंगा कि ऐसा एक एक्ट बनाया जाना चाहिए जिसमें पूरे असंगठित वर्कर्स की सिक्योरिटी के लिए,पेंशन के लिए पूरा इंतजाम हो सके। इसी के साथ ही मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
*m12 खान मंत्री, इस्पात मंत्री तथा श्रम और रोज़गार मंत्री (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर): माननीय सभापति जी,आज अशासकीय बिल निशिकांत दुबे जी ने प्रस्तुत किया है,राष्ट्रीय न्यूनतम पेंशन बिल 2014 पर चर्चा हो रही है। निशिकांत जी के अतिरिक्त इस विधेयक पर श्री अधीर रंजन चौधरी,श्री प्रहलाद पटेल जी,श्री सौगत राय जी,श्री भर्तृहरि महताब जी,श्रीमती कविता कलवकुंतला जी,श्री मुल्लापल्ली रामचन्द्रन जी,श्री हुकुम सिंह जी,श्री वाराप्रसाद राव जी,श्री अर्जुन मेघवाल जी,श्री जगदम्बिका पाल जी,श्री रामकृपाल यादव जी,वीरेन्द्र कश्यप जी,श्री पी.पी.चौधरी जी,श्री महेन्द्र नाथ पाण्डेय जी,श्रीमती रमा देवी जी,श्री अनुराग ठाकुर जी,श्री जयप्रकाश नारायण यादव जी,श्री हंसराज जी और सभी माननीय सदस्यों ने इस पर अपने विचार व्यक्त किये हैं। निशिकांत दुबे जी ने जब यह बिल प्रस्तुत किया था तो मैंने उनके भाषण को भी सुना था और उनके भाव को भी समझने का प्रयत्न किया था। निश्चित रूप से निशिकांत जी ने बिल प्रस्तुत करने से पहले मजदूर क्षेत्र का व्यापक दृष्टि से अध्ययन किया और बहुत तैयारी के साथ बिल बनाया और बिल संसद के समक्ष लाए। बिल में मजदूरों एवं गरीबों की समस्याएं भी हैं,उनकी पीड़ा भी है,संवेदना भी है,निराकरण के प्रति उनका भाव भी दिखाई देता है जो उन्होंने अपने भाव के माध्यम से यहां व्यक्त किया है।
इस बिल पर सभी वरिठ सदस्यों ने अपने अनुभव के आधार पर विचार व्यक्त किए हैं। श्रमिक क्षेत्र देश का महत्वपूर्ण और व्यापक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी हैं। संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बहुत से नियम और कानून हैं,पेंशन योजना है और अनेक सुविधाएं भिन्न कानूनों के माध्यम से प्रदत्त की जाती हैं। जहां तक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का प्रश्न है यह बहुत व्यापक है और बड़ी संख्या से जुड़ा हुआ है। संख्या बड़ी है इसलिए चिंता भी बड़ी है। चाहे कृषि का क्षेत्र हो,चाहे घरेलू कामगारों का क्षेत्र हो,चाहे निर्माण का क्षेत्र हो,चाहे हाथ ठेला रिक्शा चलाने वालों का क्षेत्र हो,हर क्षेत्र में असंगठित कामगार काम कर रहा है। प्रवासी मजदूरों का भी विषय आज देश के सामने है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर लोग मजदूरी के लिए प्रवास करते हैं। उनको भी अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। माननीय सदस्यों ने बहुत ही जवाबदारी के साथ कहा कि आजादी को 66 वाऩ व्यतीत हो गए और 66 वााॉ में एक गरीब आदमी को जो न्याय मिलना चाहिए था,वह नहीं मिला। मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि आजादी को लंबा काल खंड बीता है और उसके बावजूद भी बहुत समस्याएं सुरसा की तरह खड़ी हैं जो आज भी निराकरण की बाट जोह रही हैं,इसमें एक श्रमिक,गरीब और किसानी करने वाला वर्ग भी है।
महोदय,मैं सामान्यत कभी इस दृिट से विचार करता हूं तो मुझे लगता है कि आजादी के बाद देश की समस्याओं के निराकरण की दृष्टि से,कानून बनाने की दृष्टि से,निर्देश की दृष्टि से,विकास की दृष्टि से,रोजगार की दृष्टि से,खेती को प्रोत्साहित और संरक्षित करने की दृष्टि से,बड़े कारखाने लगाने की दृष्टि से,छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से जितना संतुलित विचार और समग्र विचार होना चाहिए था,उसका अभाव रहा है। इसके कारण आज देश में बड़ा असंतुलन खड़ा हो गया है। देश में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो 50 लाख रुपए प्रति मास तनख्वाह लेता है और एक व्यक्ति ऐसा भी है जो 500 रुपए तनख्वाह में गुजर करता है। यह असंतुलन बड़ा है और निश्चित रूप से इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। इस वर्ग के लोगों की सामाजिक सुरक्षा,सामाजिक सम्मान,आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना समाज और सरकार का दायित्व है। इस दृष्टि से मैं यह नहीं कहता कि काम नहीं हुआ है,हुआ है,सरकारों ने समय-समय पर कानून भी बनाए हैं और इस दिशा में आगे हाथ बढ़ाने की कोशिश भी की है। लेकिन जब हम असंगठित श्रमिकों के बारे में विचार करते हैं तो निश्चित रूप से हम सबके ध्यान में आता है,चाहे आज एनएसएसओ के आंकड़े ले लो या किसी ट्रेड यूनियन से आंकड़े ले लो,बहुत सी संस्थाएं सर्वे इत्यादि में संलग्न रहती हैं,असंगठित कामगारों की दृष्टि से कोई 43 करोड़ का आंकड़ा बताता है,कोई 47 करोड़ का आंकड़ा बताता है,कोई 37 करोड़ का आंकड़ा बताता है। मैं मंत्री होने के नाते यह बात जवाबदारी के साथ कह सकता हूं कि देश में आज की दिनांक तक असंगठित कामगारों की संख्या का वास्तविक आंकड़ा नहीं है। इसके लिए सीधे-सीधे जो प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए थी,वह नहीं बनाई गई। प्रक्रिया नहीं बनी तो आंकड़ा सामने नहीं है,आंकड़ा नहीं है तो हमें अपना कमांड एरिया नहीं मालूम,कमांड एरिया नहीं मालूम तो हमारी उस पर व्यापक दृष्टि नहीं पड़ती। जब व्यापक दृष्टि नहीं पड़ती है तो उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई योजना कैसे बनेगी। योजना बनती है,योजना में कुछ फंडिंग्स भी होती है। हम सोचते हैं कि वह 47 करोड़ लोगों पर लागू हो जाए। लेकिन अगर योजना का दायरा 47 करोड़ का नहीं है,योजना के लिए बजट 47 करोड़ के लिए नहीं है तो 47 करोड़ लोगों को उसका फायदा कैसे मिलेगा। यह निश्चित रूप से अपूर्णता मुझे दिखाई देती है और इसलिए मुझे लगता है कि आज तो इस विस्तृत क्षेत्र में एक प्रक्रिया बनाना है,जिस प्रक्रिया के माध्यम से हम यह जान सकें कि असंगठित क्षेत्र मे काम करने वाला वह गरीब मजदूर कौन है,जिस मजदूर की चिंता और जिस मजदूर की सुरक्षा और जिस मजदूर का आर्थिक संरक्षण करने के लिए हम सब लोग विचार कर रहे हैं। मैं विभाग में जब इस दृष्टि से निशिकांत जी के बिल पर चर्चा कर रहा था तो मैंने बहुत सारे पक्षों से पूछने की कोशिश की तो सामान्य तौर पर कुछ सर्वे के आंकड़े रहते हैं और उन सर्वे के आंकड़ों के आधार पर यह बात आती है कि इतने मजदूर हमारे यहां हैं। लेकिन वह सर्वे सैम्पल सर्वे ही होता है। सैम्पल सर्वे के कारण एक अंदाज लगाया जा सकता है,कोई वित्तीय साधन की व्यवस्था करनी हो तो की जा सकती है,लेकिन आम व्यक्ति का चिह्नांकन और पहचान नहीं हो सकती। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार की पहली चिंता असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले जो मजदूर हैं,उनकी पहचान करने की होनी चाहिए और उस दृष्टि से सरकार प्रयत्न करेगी,ऐसा मैं आप सबको इस अवसर भरोसा दिलाना चाहता हूं।
दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि पिछली बार जब एनडीए की सरकार यहां थी तो निर्माण के क्षेत्र में भी असंगठित कामगार काम करते थे और उस समय माननीय वाजपेयी जी ने इस बात की चिंता की थी कि निर्माण मजदूरों के लिए कानून बने,उनके लिए फंड की व्यवस्था हो और उनके लिए योजना बने। उस समय वह बनी थी और उसका लाभ आज मिल रहा है। इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से भिन्न-भिन्न राज्य सरकारें भी अपने यहां भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले बोर्डों का गठन करती है,उस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की पहचान करती हैं,उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाती हैं और उन योजनाओं के माध्यम से उनके सरोकारों को चिह्नित करके उनका निराकरण करने का प्रयत्न करती हैं। मुझे प्रसन्नता है कि अभी 2014 तक तो निशिकान्त जी ने बिल के माध्यम से कहा कि पांच हजार रुपये पेंशन होनी चाहिए। सभी सदस्यों ने निशिकांत जी के बिल का समर्थन भी किया। अब जब सभी सदस्य समर्थन कर रहे हैं और मैं ही अकेला विरोध करूं,यह मुझे भी उचित नहीं लगता। लेकिन मैं इसके साथ ही यह कहना चाहता हूं कि हम 2014 में बैठे हैं, 1947 में देश आजाद हुआ। 2014 में यह सुनिश्चित हो पाया,जिस दिन इस संसद में बजट प्रस्तुत हुआ कि न्यूनतम पेंशन इस देश में एक हजार रुपये होगी,यह वित्त मंत्री जी ने अपने भाषण में कहा। जब 2014 में हम संगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए न्यूनतम एक हजार रुपये माहवार पेंशन करने की स्थिति में आ पाये हैं तो हमें अंदाज लगाना चाहिए कि पांच हजार रुपये तक पहुंचने में हमें कितना समय लगेगा। आज यह परिस्थिति है,उसके लिए प्राथमिक रूप से उन्होंने ढाई सौ करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया है। इसलिए मैं माननीय मोदी जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं और माननीय जेटली जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होने श्रम मंत्रालय के उस प्रस्ताव को स्वीकार किया,उसका नोटिफिकेशन हमारे विभाग से चला गया है,कुछ दिन में नोटिफिकेशन हो जायेगा और मजदूरों के हित में जो वेज बढ़ाने का निर्णय है, 15 हजार रुपये तक की तनख्वाह वाले मजदूर उस दायरे में आयेंगे। निश्चित रूप से यह निर्णय भी उसी समय उनके अभिभाषण के दौरान हुआ है। यह मजदूरों को और गरीबों को सम्मान देने वाली बात है। मैं इस अवसर पर एक बात आप सब लोगों के समक्ष कहना चाहता हूं। मैं भी सामान्य तौर पर गरीब और मजदूर क्षेत्र में काम करने वाला कार्यकर्ता रहा हूं। सामान्य तौर पर इस हिंदुस्तान में एक गलती और हुई है,जब भी किसी को सम्मान देने की बात आई है,तो उस सम्मान को हमेशा सरकारों ने भी और राजनेताओं ने भी पैसे से तौलने की कोशिश की है।
अगर किसी गरीब को सम्मान देना है तो पैसा दे कर सम्मान नहीं हो सकता है। अगर किसी मज़दूर को सम्म्मान देना है तो उसको पेंशन दे कर सम्मान नहीं हो सकता है। पेंशन दे कर उसका इलाज कराया जा सकता है। पेंशन दे कर उसको रोटी दी जा सकती है। लेकिन पेंशन के कारण उसको सम्मान नहीं मिल सकता है। इस देश में बहुत सारे ऐसे लोग हैं,जिन्होंने वतन पर अपनी कुर्बानी दी,वतन के लिए मरे,वतन के लिए लड़े और उन्होंने ऐसे तमाम सारे काम किए,जिसके कारण उन्हें सम्मान दिया जाना चाहिए। सम्मान के रूप में उनको पेंशन दी जाती है। मैं आप सब लोगों से कहना चाहता हूँ,हम सब आपने-अपने जिलों में काम करते हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन अगर हम सम्मान की औपचारिकता एक नारियल दे कर पूरी करते हैं और उसी को सम्मान माना जाता है तो मुझे कुछ नहीं कहना है। लेकिन मैं समझता हूँ कि सम्मान को पैसे से नहीं तोला जा सकता है। हमारे प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने यह बात अपने पहले भाषण में कही थी कि सत्यमेव जयते हम बहुत दिनों से कहते रहे हैं,अब श्रममेव जयते का नारा हमें लगाना चाहिए और उस पर चलना चाहिए। जब नरेंद्र मोदी जी ने श्रममेव जयते की बात कही तो निश्चित रूप से सरकार का मंतव्य उस बात से प्रकट भी होता है और सरकार की दिशा आगे चलने की दिखाई भी देती है। अगर किसी श्रमिक को सम्मान देना है,तो सम्मान पेंशन से नहीं होगा,सम्मान सिर्फ उसकी तनख्वाह बढ़ाने से नहीं होगा। उसे पेंशन भी मिलनी चाहिए। उसको तनख्वाह भी मिलनी चाहिए। उसको भत्ते भी मिलने चाहिए। उसके हित लाभ सुरक्षित भी रहने चाहिए। लेकिन जब तक गरीब कामगार को अपने परिवार में,अपने क्षेत्र में,अपने मोहल्ले में अगर बड़े लोग सम्मान देना नहीं सीखेंगे,तब तक उसे सम्मान नहीं मिलेगा। अगर हम किसी गरीब मज़दूर को सम्मान देना चाहते हैं,हम किसी श्रमिक को सम्मान देना चाहते हैं और निश्चित रूप से जब श्रममेव जयते का नारा पूरा करना चाहते हैं तो जरूरत होगी कि घर में काम करने वाली बाई को भी हम जी कह कर पुकारें,हमारा जो ड्राइवर है,दिन-भर अपनी जान जोखिम में डाल कर लंबा रास्ता तय कर के हमारे यातायात को सुगम बनाता है,हम उसको जी कह कर पुकारें,जब हम भोजन करें तो हम उसे अपने साथ बिठा कर भोजन कराएं। जब हम अपने नौकर को,अपने घर में काम करने वाले मज़दूर को बराबरी का सम्मान देंगे,उस दिन इस हिंदुस्तान में इस मज़दूर को कुछ भी जरूरत नहीं पड़ेगी,हर प्रकार का सम्मान उसे मिल जाएगा।
जहां तक पेंशन योजनाओं का सवाल है,निश्चित रूप से एक नहीं बहुत सारी पेंशन योजनाएं इस देश में श्रमिकों के लिए भी हैं,जिनके माध्यम से पेंशन दी जाती है। सेवानिवृत्त लोगों को पेंशन मिलती है। विकलांगों को पेंशन मिलती है। विधवा बहनों को पेंशन मिलती है। बच्चों को पेंशन मिलती है। अनाथों को पेंशन मिलती है। निशक्त लोगों को पेंशन मिलती है। नॉमिनी को पेंशन मिलती है। अभी एक स्वालंबन योजना आई है,उसमें भी पेंशन की बात शुरू हुई है। अगर लोग बचत करना चाहते हैं तो वित्त मंत्री जी ने उस दिन कहा था कि वह एक हज़ार रूपये व्यक्ति के अकाउंट में डालेंगे और व्यक्ति एक हज़ार रूपये अथवा उससे ज्यादा उस अकाउंट में बचत करे। जब उसके काम करने की आयु पूरी होगी,उस समय जो फण्ड क्रिएट होगा,उससे उसकी पेंशन की सुनिश्चितता की जाएगी। इसी प्रकार से असंगठित क्षेत्रों में भी बहुत सारी योजनाएं हैं,जिनके माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों के कल्याण की दृष्टि से बहुत सारे काम किए जाते हैं। चाहे वह आम आदमी बीमा योजना हो,जननी सुरक्षा योजना हो,राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना हो और श्रम विभाग की आरएसवीवाई (राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना)है,यह बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के अंतर्गत 30 हज़ार रूपये तक का हर श्रमिक का इलाज सुनिश्चित करने का काम सरकार करती है। हमारी कोशिश है कि इस योजना के दायरे को हम और बढ़ाएं और व्यापक करें,जिससे कि इस योजना में ज्यादा से ज्यादा लोग कवर हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। इस दृष्टि से भी हम लोगों ने काम करने की कोशिश की है। बीड़ी वर्कर्स हों या माइंस में काम करने वाले वर्कर्स हों,उनके लिए भी अलग-अलग प्रकार के कानून बनाए गए हैं। उनके माध्यम से उनकी सामाजिक,आर्थिक और चिकित्सीय सुरक्षा देने का प्रयत्न भारत सरकार कर रही है।
साथ ही साथ मैं यह भी इस अवसर पर आप सब लोगों के मध्य कहना चाहता हूं कि निश्चित रूप से जो हमारा असंगठित क्षेत्र का कामगार है,यह क्षेत्र बड़ा व्यापक है। मैं समझता हूं कि जब सरकार वर्ष 2008 में कानून लायी थी,तो सरकार ने इसके लिए प्रयास भी किए होंगे और सरकार ने प्रयत्न किए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के माध्यम से वे प्रयत्न होने चाहिए थे,हुए भी होंगे,लेकिन आज तक जितने भी प्रयत्न हुए हैं,मैं उन प्रयत्नों को अपर्याप्त मानता हूं और उन प्रयत्नों को बढ़ाने की आवश्यकता है,ऐसा मुझे लगता है।
कृषि के क्षेत्र में बड़ी मात्रा में ऐसे असंगठित कामगार काम करते हैं,निर्माण के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या है,जो आज चिन्हित नहीं हैं। ठेले,रिक्शे चलाने वाले बड़ी संख्या में हैं और छोटे-छोटे घरेलू कामगारों की बड़ी संख्या है,जिनका चिन्हांकन नहीं हो पाता है। हमारे भर्तृहरि मेहताब जी केरल की एक पेंशन योजना का जिक्र कर रहे थे। मैंने देखा कि वह वर्ष 2009 में शुरू हुयी। 15 हजार लोगों को उसका लाभ मिला। वह एक अच्छी योजना है। निश्चित रूप से अन्य राज्यों में इस प्रकार की योजनाएं हैं,छत्तीसगढ़ में भी है,मध्य प्रदेश में भी हम लोग पेंशन देते हैं। ऐसी योजनाएं अन्य प्रांतों में भी होंगी,जिनकी मुझे जानकारी नहीं है। प्रांत इसके लिए स्वतंत्र हैं,अपनी-अपनी आर्थिक अवस्था को देखते हुए वे इस दिशा में योजना बना सकते हैं। लेकिन मैं इस बात से इंकार नहीं करता कि गरीब मजदूर की सामाजिक सुरक्षा होनी चाहिए,उसकी चिकित्सा व्यवस्था होनी चाहिए और उसको सामाजिक सम्मान मिलना चाहिए। इस दृष्टि से हम सबको सामूहिक प्रयत्न करने की आवश्यकता है।
माननीय सभापति जी,मैं आपके माध्यम से सभी संसद सदस्यों से अनुरोध करना चाहता हूँ,हम सभी लोग जीवंत रूप से अपने-अपने क्षेत्र में काम करते हैं। हमारे क्षेत्र में लगभग 16 से लेकर 22-25 लाख तक मतदाता होते हैं और उसमें एक बड़ी संख्या असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की भी होती है। हम सब लोग भी इसमें अपना योगदान करें और असंगठित क्षेत्र के लोग चिन्हांकित हो जाएंगे तो निश्चित रूप से एक बड़ा काम हो जाएगा। जब एक बड़ा दर्पण दिखने लगेगा और उसमें सरकार जब अपना शीशे में मुँह देखेगी और जब उसे लगेगा कि मुझे इतने बड़े क्षेत्र के लिए कुछ करना है तो सरकार उस दिशा में प्रवृत्त होगी। यह जो अशासकीय बिल निशिकान्त दुबे जी लाए हैं,मैं उनकी भावनाओं का पूरी तरह सम्मान करता हूं,लेकिन आज मैं उनको यह अनुरोध इसलिए करना चाहता हूँ कि कोई भी पेंशन योजना जब सरकार बनाती है,तो सरकार लोकतंत्र में संघीय सरकार होने के कारण राज्य सरकारों के प्रति प्रतिबद्ध है,ट्रेड यूनियंस के प्रति प्रतिबद्ध है,औद्योगिक क्षेत्र में जो लोग उद्योग के क्षेत्र में काम करते हैं,उनका भी कंट्रीब्यूशन इस पेंशन योजना में होता है। सभी स्तरों पर इसकी वार्ता करने की आवश्यकता है,सभी स्तरों पर इसकी सहमति होने की आवश्यकता है। खाली अगर हम कोई बिल पारित कर देंगे और उसके कारण कंट्रीब्यूशन आने लगेगा,पैसा आने लगेगा और पेंशन योजना शुरू हो जाएगी,ऐसा मुझे नहीं लगता है। लोकतंत्र में जो प्रक्रियाएं हैं,उन प्रक्रियों को हम सब लोगों को करना पड़ेगा। इसलिए आज उनका यह जो बिल है,उसके भाव का मैं निश्चित रूप सम्मान करता हूं और माननीय सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से निशिकान्त जी को प्रार्थना करना चाहता हूं कि वह अपना बिल वापस ले लें।
*m13 श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : महोदय,धन्यवाद। मैं सारे राजनीतिक दल और 19 लोग, जिन्होंने इस चर्चा में भाग लिया,अधीर रंजन चौधरी साहब,प्रहलाद सिंह पटेल साहब,सौगत राय साहब,भर्तृहरि महताब साहब,के.कविता जी,मुल्लापल्ली रामचन्द्रन साहब,हुक्मदेव नारायण यादव जी,श्री वाराप्रसाद राव वेलगापल्ली,जगदम्बिका पाल जी,राम कृपाल यादव जी,वीरेन्द्र कश्यप जी,पी.पी. चौधरी जी,महेन्द्र नाथ पाण्डेय जी,रमा देवी जी,हमारे भाई अनुराग सिंह ठाकुर साहब,जय प्रकाश नारायण यादव जी,डॉ संघमिता जी,हंसराज गंगाराम अहीर साहब और शंकर प्रसाद जी,इस सभी के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूँ और विशेष तौर पर माननीय मंत्री जी के बारे में मैं यह कहूँ कि वे इस चिन्ता को देश के सामने लाये और जो बात आज ही अनुराग सिंह जी ने कही कि जाति-पाति,वर्ग,धर्म,सप्रदाय,आरक्षण,साप्रदायिकता इन सबसे ऊपर यह बिल था। इसके लिए मेरा आग्रह था कि सरकार इस चीज को मान ले। सरकार ने कहा है कि इस पर विचार करेंगे।
महोदय,जब इस बिल पर चर्चा शुरू हुई तो मुझे कई पत्र आए,जिससे लगा कि आज भी देश में यह चीजें हैं। मैं उनमें से कुछ पत्रों को यहां पढ़ना चाहूंगा। एक पत्र सिने स्टार एसोसिएशन की तरफ से आया। हम लोग उनकी चकाचौंध को देखते हैं,यह बड़ी दुनिया होती है,लोग उनके ऑटोग्राफ़ लेने के लिए परेशान होते हैं। उनका पत्र है-“दादा साहेब फाल्के का नाम कौन नहीं जानता है। उनकी जद्दोहद,फिल्मों के लिए दिवानगी ने इण्डियन फिल्म इंडस्ट्री को जन्म दिया। उनके नाम पर हर साल हम अवार्ड भी देते हैं। उन्हीं की इस कला की दीवानगी की वजह से हम आज सिनेमा के सौ वर्ष के इतिहास को सेलीब्रेट कर पा रहे हैं। मगर एक सच्चाई यह है कि इंडस्ट्री के लोगों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी महाराष्ट्र सरकार ने उनके परिवार को एक घर भी मुहैया नहीं कराया। ऐसा ही एक और उदाहरण है,ए.के. हंगल साहब न जाने कितनी फिल्मों में अपने हुनर का लौहा मनवाने वाले,वह चमकदार कलाकार जिंदगी के आखिरी मोड़ पर भयंकर अंधेरों में उठते हुए मर गए।” यह एक लम्बी कहानी है,मैं केवल इसकी दो-चार लाइनें पढ़ना चाहता था। माननीय मंत्री जी संयोग से माइन्स के भी मंत्री हैं,सेल के भी मंत्री हैं,स्टील एथॉरिटी के बारे में हंसराज अहीर साहब ने माइनर्स की और स्टील इंडस्ट्री की बात कही। स्टील एथॉरिटी की एम्पलायी यूनियन के चेयरमैन रहे हैं श्री वी.एन. शर्मा साहब। उनका एक लेटर है-“We congratulate you on introducing a forward-looking National Minimum Pension Guarantee Bill, 2014 for the retired persons from unorganized and private sectors in the on-going Session of Parliament.
We represent more than one lakh retired employees of SAIL and their spouses, who are facing miserable conditions in the twilight of their lives, simply because the Government of India could not formulate a policy for them due to basic changes in post-retirement benefit policy for Central PSU employees, and the SAIL retirees who are grouped as pre-2007 and post-2007 category retirees.” वह यह कहते हैं कि हम लोगों की स्थिति ऐसी है-“They joined pre-2007 service, in the early 1950s and 1960s, and they are now in their 70s and 80s. There cannot be two opinions that the strong foundation laid by these pioneers in the formative years of 1950s and 1960s, and the commitment, hard work and contribution made by these retirees under very hard times, contributed to make SAIL, the pride of the nation.” लेकिन आज वे अपनी पेंशन के लिए जूझ रहे हैं,लड़ाई कर रहे हैं,उनके लिए हम फार्मूलेट नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण था कि हमने 90-93 परसेंट जो लोग थे,जिनकी स्थिति मैं प्रेमचंद जी की ईदगाह की कुछ लाइनें पढ़ना चाहूंगा जिनकी स्थिति आज भी वैसी ही है कि हामिद पोता है,उसके माँ-बाप की मृत्यु हो चुकी है और वह अपने दादी के पास रहता है। उसकी दादी का नाम अमीना है। उसकी कुछ लाइनें मैं यहां पढ़ना चाहूंगा-“अमीना का दिल कचोट रहा है। गांव के बच्चे अपने-अपने बाप के साथ जा रहे हैं। हामिद का बाप अमीना के सिवा कौन है?क्योंकि कोई नहीं है और दादी बूढ़ी है। उसे कैसे मेले में अकेले जाने दे?उस भीड़-भाड़ में अगर बच्चा खो जाए तो क्या हो?नहीं अमीना,उसे क्यों जाने दे। वह थोड़ी-थोड़ी दूर पर उसे गोद लेगी,लेकिन सेवइयां कौन पकाएगा?वह चाहती है कि वह उसके साथ जाए,लेकिन उसके साथ कोई ऐसा आदमी नहीं है जो उसे साथ ले जाए। पैसा होते तो लौटते-लौटते सब सामग्री जमा कर झटपट बना लेते। यहां तो घंटों चीजें जमा करते लगेंगे,मांग का तो भरोसा ठहरा,उस दिन फहिमन के कपड़े सीये थे,आठ आने पैसे मिले थे,उस अठन्नी को ईमान की तरह बचाती चली आती थी इसी ईद के लिए,लेकिन कल ग्वालन सिर पर सवार हो गई तो क्या करती। हामिद के लिए कुछ नहीं,दो पैसे का दूध ही चाहिए तो अब तो कुल दो आने पैसे बच रहे हैं,तीन पैसे हामिद की जेब में,पांच अमीना के बटुए में,यही तो बिसात है और ईद का त्यौहार है। अल्लाह ही बेड़ा पार लगाएगा। धौबन,नाइन,मेहतरनी और चूड़िहारिन सभी तो आएंगी,सभी को सेवइयां चाहिए। थोड़ा किसी को आंखो नहीं दिखता,किस मुंह से चुराएंगी और मुंह क्यों चुराएं,साल भर का त्यौहार है।” आज भी गांव की स्थिति इस ईदगाह की स्टोरी से अलग नहीं है। यही कारण था कि मैंने कृषक,कृषि,कृषक मजदूरों के लिए,गाय-भैंस चराने वालों के लिए,हस्तशिल्प कारीगर,कालीन मजदूर,लौहार,कुम्हार,सोनार,मछुवारे,चमड़ा उद्योग में काम करने वाले लोगों के लिए,तेन्दुपत्ता चुनने वाले लोगों के लिए,बीड़ी और ईंट मजदूरों के लिए,पत्थर मजदूरों के लिए,मकान बनाने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए,माइग्रेंट्स लेबर्स के लिए और खांडसारी उद्योग में काम करने वाले तथा प्राइवेट लोगों के लिए मैं यह बिल लेकर आया था। मुझे लगता था कि आजादी के 67 साल बाद जिस तरह से सारी पोलिटीकल पार्टियों के सदस्य,चाहे भर्तृहरि महताब साहब हों या कोई अन्य हो,उन्होंने कहा कि विलेज की इकोनोमी अपने आप में डिपेंडेंट हुआ करती थी,काशपीठ से ऊपर,जब वे तकरीर दे रहे थे। जिस तरह से हंसराज अहीर साहब और हमारे मित्र अनुराग सिंह ठाकुर साहब ने कहा,वे युवाओं की बात करते-करते आज बुढ़ों की बात करने के लिए तैयार हुए हैं,क्योंकि इस देश में 18 करोड़, 20 करोड़ लोग 2030 तक बूढ़े हो जाने वाले हैं,उसके लिए सरकार को कुछ न कुछ सोचने की आवश्यकता है। इस तरह से जो हम लगातार आते हैं,जिस तरह से भाषण दे देते हैं -“पल दो पल का साथ है हमारा तुम्हारा,आज यहां हैं कल चले जाएंगे,कल हम रहे या न रहें।” इस तरह की जो केजुअल बातें होती रहती हैं,भाषण होते रहते हैं,चीजें होती रहती हैं। हम आश्वासन देते रहते हैं,उसकी पूर्ति का कोई साधन नहीं हो पाता है। मुझे लगता है कि आज वह समय आ गया है,नरेन्द्र सिंह तोमर साहब,आपने बड़ी अच्छी बात कही। आप भी गांव गरीब किसान मजदूर की बात कर रहे हैं। मैं उन 90 परसैंट लोगों की बात कर रहा हूं। चूंकि नरेन्द्र मोदी साहब भी गांव से आए हैं,चाय बेचते हुए इस देश के प्रधान मंत्री हो गए हैं। पहली बार लोगों को लगा है कि एक गरीब आदमी इस देश का प्रधान मंत्री बना है। एक गरीब आदमी गरीबों की बात सोच रहा है। हमने इस देश में जो आशाएं जगाई हैं,उन आशाओं के लिए सभी 90 परसैंट लोगों के लिए यह बिल था।
आपसे आज भी मेरा आग्रह होगा कि यदि आप मेरी बात मान सकते हैं या सरकार इस बिल को अपने सरकारी बिल के तौर पर ले आए तो मुझे खुशी होगी और मुझे लगेगा कि एक सांसद होने के नाते हमने अपने फर्ज को पूरा किया। हम सभी भाईयों ने कम से कम 16वीं लोक सभा में इतना बड़ा काम किया। यदि आप लाएंगे तो मैं अपने बिल को वापस लेता हूं,इस विश्वास के साथ,कि कल को आप इस पूरे बिल को सरकारी बिल के तौर पर लाएंगे और इस देश में गांव-गरीब-किसान और मजदूर में एक नयी रोशनी का सूत्रपात करेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ जयहिन्द,जयभारत।
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Thank you very much for insisting on your Bill.
HON. CHAIRPERSON : The question is:
“That leave be granted to withdraw the Bill to provide for payment of guaranteed minimum pension to all pensioners including those who have worked in unorganized and private sector in the country and for matters connected therewith.” The motion was adopted.
SHRI NISHIKANT DUBEY (GODDA): Sir, I withdraw the Bill.
*t44 Title: Discussion on the motion for consideration of Central Himalayan States Development Council Bill, 2014 (Discussion not concluded).
HON. CHAIRPERSON: The House will now take up the next Item in the Agenda for discussion. Before I call Dr. Ramesh Pokhriyal to move the Motion for consideration of his Bill, namely the Central Himalayan States Development Council Bill, 2014, the time for discussion of this Bill has to be allotted by the House. If the House agrees, two hours may be allotted for discussion of the Bill.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes, Sir.
HON. CHAIRPERSON: So, two hours are allotted for discussion of this Bill.
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार): सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं -
“कि केन्द्रीय हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पर्वतीय राज्यों के संतुलित एवं चहुंमुखी विकास हेतु विकास योजनाएं और स्कीमें तैयार करने तथा उनके कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए केन्द्रीय हिमालयी राज्य विकास परिषद् नामक एक परिषद् की स्थापना करने तथा उससे संबंधित विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए। ” आदरणीय सभापति जी,वैसे तो हिमालयी राज्यों के लिए एक अलग मंत्रालय बनाये जाने की एक लंबी चर्चा इस सदन में हुई है। इस पर 15 राज्यों के 17-18 माननीय सदस्यों ने अपनी भावनायें व्यक्त की हैं। मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि जो हिमालयी विकास परिषद राज्य का है,जब तक सरकार इसे तय करती है कि वह अलग मंत्रालय का गठन करे तब तक कम से कम एक ऐसी परिषद होनी चाहिए,जो हिमालयी राज्यों की नीति का निर्धारण करे,जो केन्द्र और राज्यों के बीच अन्यंत समन्वय का कार्य करे। क्योंकि वहां की जो नीति हैं,वे बिल्कुल भिन्न नीति होंगी,चाहे वह वन नीति हो,चाहे वह कृषि नीति हो,चाहे वह औद्योगिक नीति हो,चाहे वह खनन की नीति हो,चाहे खनिज की नीति हो,चाहे वह शिक्षा की नीति हो,चाहे वह पयर्टन की नीति हो।
महोदय,आप इस बात से सहमत होंगे कि यह पूरी हिमालयी बेल्ट जो 2,500 किलोमीटर परिक्षेत्र सीमा पर लगी है,इसकी आर्थिक,सामाजिक,भौगोलिक,सब प्रकार की अभिन्न स्थितियां हैं। यह देश की सामरिक दृष्टि से,सामाजिक दृष्टि से,सांस्कृतिक दृष्टि से,आर्थिक दृष्टि से,पर्यावर्णिक दृष्टि से,आध्यात्मिक दृष्टि से,हर दृष्टि से जिस छोर तक भी विचार किया जाये,उस छोर तक यह क्षेत्र इस देश के लिए ही नहीं,पूरी दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वह क्षेत्र है,जो जीवन देता है। यह जीवन देने वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र को धरती का स्वर्ग कहते हैं,तो हमारा सौभाग्य है कि पूरी दुनिया को इस धरती के स्वर्ग में आमंत्रित कर सकते हैं। यहाँ इस क्षेत्र में सैंकड़ों स्विट्जरलैंड बसे हुए हैं,उन क्षेत्रों में समाये हुए हैं। चाहे पयर्टन की नीति का विषय हो,चाहे वन नीति का विषय हो,क्योंकि वन प्राण हैं और मैं समझता हूं कि यह पूरा क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से पूरी दुनिया की पाठशाला है। साठ प्रतिशत से भी अधिक वन क्षेत्र इस हिमालय की बेल्ट में हैं। वे जहां ऑक्सीजन देते हैं,प्राण वायु देते हैं,वहां हिमालय से निकलने वाली ये जल धारायें पूरे एशिया को पानी देती हैं,जीवन देती हैं,तो क्या वहां की जल नीति अलग नहीं होनी चाहिए?वहां की जल नीति अलग होनी चाहिए,वहां की वन नीति अलग होनी चाहिए। वर्तमान में यह क्या हो रहा है?जो वन नीति बन रही है,वह पूरे देश की बन रही है,जो जल नीति बन रही है,वह पूरे देश की बन रही है।
हमें मालूम है कि वह बिल्कुल अलग क्षेत्र है। उसकी भौगोलिक और सामरिक चुनौतियां पूरे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए मैं आपके माध्यम से आग्रह करना चाहता हूं कि हजारों मेगावॉट बिजली को पैदा करने वाला क्षेत्र आज भी अंधेरे की गुमनामी में खोया हुआ है। हजारों मेगावॉट की क्षमता है,मैं सोचता हूं कि असम से लेकर मणिपुर,मिजोरम,त्रिपुरा,नागालैंड,अरूणाचल प्रदेश,हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड,जम्मू और कश्मीर को देखा जाए तो ये हजारों मेगावॉट बिजली पैदा करते हैं और हजारों जल विद्युत परियाजनायें अभी भविष्य की कोख में हैं। ऐसे क्षेत्र के लिए अलग से एक ऊर्जा की नीति होनी चाहिए। कम से कम जो ऊर्जा देता है,वह अंधेरे में तो न भटके। लेकिन आज स्थिति यह है कि वहां के गांव अंधेरे में हैं।
जल के संबंध में कहना चाहता हूं कि जो एशिया को पानी देता है,उसके गांव आज भी प्यासे हैं। तीन-चार-पांच किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिए वे विवश होते हैं। महिलाओं का आधा समय लकड़ी और पानी लाने मे चला जाता है। वन अधिनियम, 1980 और वन जन्तु संरक्षण अधिनियम,दोनों अधिनियमों के कारण अगर देखा जाए तो जो वहां परिस्थितियां हैं,चाहे वह जड़ी-बूटी का व्यवसाय करने वाले लोग थे,चाहे वह लकड़ी पर आधारित काम करने के व्यवसाय में थे,आज उनके गांव उजड़ रहे हैं।
18.00 hrs जड़ी-बूटी तस्करी हो कर चीन में जा रहा है। तस्कर आज भी सक्रिय हैं। लेकिन मेरी कीड़ा-जड़ी और संजीवनी बूटियां जो आसाध्य रोगों को भी साधने की हिम्मत रखते हैं।
HON. CHAIRPERSON : Hon. Member, you can continue your speech next time.
Hon. Members, it is now 6 o’clock and to take up ‘Zero Hour’, we may extend the time of the House by half an hour.
HON. CHAIRPERSON: The House will now take up `Zero Hour’.
*t45 Title: Need to ease restrictions for setting up of new industries in Dhanbad Parliamentary Constituency in Jharkhand.
श्री पशुपति नाथ सिंह (धनबाद) : सभापति महोदय, मैं आपके प्रति आभारी हूं कि आपने सभा में शून्य काल के दौरान अविलंबनीय लोक महत्व का मामला उठाने का अवसर दिया है। केन्द्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मेरे संसदीय क्षेत्र, धनबाद के चार अंचलों में किसी भी प्रकार के नए उद्योग लगाने या फिर पुराने उद्योगों में उत्पादन विस्तार एवं नई मशीनों की स्थापना पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह धनबाद जिला के उद्यमियों और उसमें कार्यरत कामगारों के लिए बहुत दुःख का विषय है। इसी उद्योग से सभी की जीविका चलती है तथा परिवार का भरण-पोषण होता है। धनबाद जिला के अंचलों में बंद पड़े उद्योगों के कारण कामगारों की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय और दुःखद हो चुकी है। मेरे संसदीय क्षेत्र धनबाद में किसी भी प्रकार के नए उद्योग लगाने या पुराने उद्योगों में उत्पादन विस्तार एवं नई मशीनों की स्थापना पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध को हटाए जाने के लिए, मैं केन्द्रीय पर्यावरण और वन मंत्री महोदय से आग्रह करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र धनबाद के सभी उद्यमियों और कामगारों को राहत और रोजगार मिल सके।
*t46 Title: Need to allocate funds for sewerage scheme in Jodhpur city of Rajasthan.
श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (जोधपुर) : सभापति महोदय, धन्यवाद। मैं दो दिन पहले इस सदन में सुदूर पाकिस्तान के बॉर्डर पर रहने वाले अपने लोगों के घर में अंधेरे को मिटाने के लिए जब बात कर रहा था तो मेरे सामने बैठे लोग अपनी महत्वकांक्षा को लेकर इतनी जोर से शोर मचा रहे थे कि मुझे इस सदन में इतनी ऊंची आवाज में बोलना पड़ा जो शायद सदन की मार्यादा के खिलाफ था। मैं इस सदन और आसन दोनों से क्षमा चाहता हूं।
माननीय सभापति महोदय, छोटे शहरों और मध्यम शहरों के ढांचागत परियोजना के विकास के लिए वर्ष 2005 में भारत की सरकार ने एक परियोजना आरंभ की थी, उस योजना के माध्यम से छोटे-छोटे शहरों में सीवर और पेय जल की व्यवस्था करने का प्रावधान किया गया था। जोधपुर शहर, जहां से मैं चुन कर आया हूं, उस शहर में भी सीवरेज की तंत्र को सुधारने के लिए इस परियोजना के तहत 607 करोड़ रुपए का, राजस्थान की सरकार ने अपनी तरफ से जो वहां समिति बनी हुई है, उस वैधानिक समिति के माध्यम से केन्द्र की सरकार को नवम्बर-2013 में एक परियोजना बना कर प्रेषित की थी। जिस परियोजना को दिसम्बर में भारत की सरकार ने अनुमोदित कर दिया था और उस परियोजना में, क्योंकि इस योजना में 80 प्रतिशत अनुदान केन्द्र की सरकार देती है, 10 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार को देना होता है और शेष बचा हुआ 10 प्रतिशत हिस्सा, स्थानीय निकाय को अपने माध्यम से जुटाना होता है, जोधपुर का स्थानीय निकाय अपने स्तर पर अपने फंड का एलोकैशन कर चुका है। राज्य की सरकार ने भी अपना फंड दे दिया है। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपकी मांग क्या है?
श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत : केन्द्र की सरकार का जो स्वीकृत पैसा है, मैं आपके माध्यम से सरकार और सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि केन्द्र की सरकार की जो हिस्सा राशि है उसके प्रथम चरण का 184 करोड़ रुपया स्वीकृत हो चुका है, वह शीघ्र दिलाया जाए ताकि मेरे शहर का सीवर तंत्र और शहर का जो वेस्ट वाटर निकास का जो तंत्र है, वह ठीक किया जा सके।
भारत सरकार की भावना है कि निर्मल भारत का जो अभियान चलाया गया है उस भावना के अनुरूप देश के छोटे-छोटे शहरों में काम हो सके। धन्यवाद।
माननीय सभापति : श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी द्वारा शून्य काल में उठाए गए विषय के साथ *m02 श्री पी.पी.चौधरी अपने-आप को संबद्ध करते हैं।
*t47 Title: Need for formulate a policy to promote traditional handicrafts of border districts of Uttarakhand.
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार): सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान उन सैंकड़ों गांवों की ओर ले जाने की कोशिश कर रहा हूं जो सीमाओं पर हैं और जहां से तेजी से लगातार पलायन हो रहा है। चिन्ता का विषय यह है कि जहां पलायन होगा, राष्ट्र के प्रहरी की तरह सीमाओं पर बसे गांव हैं। यह राष्ट्र के लिए संकट का विषय होगा। उन क्षेत्रों में रहने वाले लोग जो भेड़ पालन करते थे, उनकी आर्थिकी धीरे-धीरे कमजोर होने के कारण सक्षम लोग पलायन कर गए और जिन लोगों के हाथ में कुछ नहीं है, वे पलायन करने पर मजबूर हैं। जो ऊनी भेड़ पालन, बकरी पालन होता था, जो भी कारम रहे होंगे, चाहे वन अधिनियम, चाहे सरकार की खराब नीतियां, वह पूरा क्षेत्र खाली हो रहा है। मैं समझता हूं कि हमारे पारंपरिक कुटीर उद्योग खत्म हो रहे हैं। उन्हं संरक्षित करना चाहिए। उन्हें जड़ी-बूटी से जोड़ना चाहिए। कीड़ा जड़ी जो उस क्षेत्र में मिलती है, वह 6 से 8 लाख रुपये किलो है। सरकार विधिवत तरीके से संजीवनी और कीड़ा जड़ी को उन लोगों के साथ जोड़कर उसका कृषिकरण करते हुए उनकी आर्थिकी को मजबूत करे। इससे दोनों काम होंगे, वे मजबूत होंगे और सीमाओं की रक्षा भी होगी। इसलिए मैं आपके माध्यम से मांग करना चाहता हूं कि चाहे नेपाल का बार्डर हो या तिब्बत-भारत का बार्डर हो, वर्ष 2004 में पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने चीन के प्रधान मंत्री से समझौता किया था और वर्ष 2006 में नाथूला दर्रे को व्यापार के लिए खोल दिया था। मैं यह भी मांग करना चाहता हूं कि इन सीमावर्ती क्षेत्रों से यातायात और व्यापार को खोला जाना चाहिए ताकि वे देश की प्रगति में अपना हिस्सा बखूबी निभा सकें और पलायन से बच सकें।
*t48 Title: Need to provide safe drinking water to workers engaged in tea plantation in Assam.
श्री गौरव गोगोई (कलियाबोर): सभापति महोदय,यह मेरा सौभाग्य है कि आज आप यहां बैठे हैं। जब मैंने पहली बार शपथ ग्रहण की थी,उस वक्त भी आप सभापति के रूप में यहां बैठे थे। मुझे लगता है कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आज आपके सामने जीरो आवर में एक बहुत महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं। पीने के पानी का राष्ट्रीय ग्रामीण प्रोग्राम भारत के गांवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रोग्राम में अलग नियम,कैटेगरीज,क्राइटेरिया हैं। जैसे ग्रामीण क्षेत्र के लिए 60 प्रतिशत का क्राइटेरिया है। केन्द्र सरकार राज्यों को जो राशि देती है,वह क्राइटेरिया उसमें रिफ्लैक्ट होता है। ग्रामीण क्षेत्र के अलावा और भी क्राइटेरिया हैं जैसें शैडयूल्ड कास्ट्स,शैडयूल्ड ट्राइब्स के लिए अलग क्राइटेरिया है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में पीने का पानी बहुत ही महत्वपूर्ण समस्या है। असम और वैस्ट बंगाल में ऐसे बहुत से निजी चाय के बागान हैं जहां लाखों श्रमिक काम करते हैं। असम में लगभग साढ़े तीन लाख और वैस्ट बंगाल में लगभग दस लाख चाय बागान श्रमिक हैं। इन चाय बागान श्रमिकों की मूल समस्या पीने का पानी है। जब चुनाव आया,मोदी चाय का नारा लगा था तब असम के तचाय बागान के बहुत से श्रमिकों ने इस सरकार को अपना समर्थन दिया। अब नारे का समय खत्म और काम करने का समय शुरू होता है।
मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि चाय बागान वर्कर्स के लिए केन्द्र सरकार की स्कीम्स जैसे नैशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम,नैशनल रूरल हैल्थ मिशन और मनरेगा में एक स्पेशल क्राइटीरिया बनाया जाये। इससे चाय बागान श्रमिकों के जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन आयेगा। भारत के स्वाधीन होने के 67 वर्षों बाद भी ये लोग बहुत ही दयनीय हालत में रहते हैं। उनकी दशा देखकर हम सबकी आंखें भर आती हैं। इसलिए हमें उनकी मूल समस्या पीने के पानी पर काम करना चाहिए और एक स्पेशल क्राइटीरिया बनाना चाहिए। यह मेरी आपके माध्यम से सरकार से दरख्वास्त है।
*m02 Kumari Sushmita Dev and *m03 Shri Radhey Shyam Biswas are allowed to associate with the matter raised by Shri Gaurav Gogoi.
*t49 Title: Regarding proposed gauge conversion project from Lumding to Badarpur.
SHRI RADHEY SHYAM BISWAS (KARIMGANJ): Hon. Chairman, Sir, I wish to draw the attention of the Government that the proposed mega block for gauge conversion from Lumding to Badarpur will start from October 1st 2014. So, the only option for all kinds of traffic including carriers of essential commodities will be Badarpur to Jowai via Sonapur and Badarpur to Churaibari via Karimganj NH 8. This will put heavy pressure of traffic on this damaged highway which will create various kinds of problem in that area.
Earlier it was said by the Department that the gauge conversion of the Lumding – Silchar section will be completed by March 2014, but in a newspaper, namely Samayik Prasangha it was published with the reference of the hon. Railway Minister that the gauge conversion will be completed by March 2016. This created confusion among the people because this national project has already been delayed by 16 years and further delay will cause inconvenience.
Under these circumstances, my humble request to the Government is that the mega block should be started but before that the Government has to clarify when it will be completed. If it is delayed, then the damaged road has to be repaired or the incomplete road has to be completed. Otherwise, people of Barak Valley of Assam and other States like Tripura, Mizoram and Manipur will face severe communication problem and for will face food crisis. Moreover, it will bring the area to the halt and the people of these areas will remain disconnected from the rest of the nation.
HON. CHAIRPERSON :
*m02 Kumari Sushmita Dev and *m03 Shri Gaurav Gogoi are allowed to associate with the matter raised by Shri Radhey Shyam Biswas.
*t50 Title: Need to open passenger reservation system counter at Nannilam railway station in Nagapattinam Parliamentary Constituency, Tamil Nadu.
DR. K. GOPAL (NAGAPATTINAM): Mr. Chairman, Sir, thank you. The matter is regarding the need to increase the speed of implementation of the pending railway projects in my constituency, Nagapattinam. There is a major railway line from Tiruvarur to Karaikudi. The running of trains was stopped in 2006 for broad gauge conversion. Up to 2006, the metre gauge trains were running successfully. After that, this route came under broad gauge conversion. After 2006 the tender was called for. The amount sanctioned every year is less than Rs. 10 crore. Because of this amount, the work execution is very slow.
Now, the work has to start from Karaikudi to Tiruvarur. I urge that the conversion process should take place from Tiruvarur itself. In a similar way, the gauge conversion from Thiruthuraipundi to Agasthiapalli near Vedaranyam line is in process for the last thirty years. They have completed only the culverts along the railway line.
I urge upon the Minister of Railways to start the gauge conversion work from Agasthiapalli to Thiruthuraipundi immediately because it will help the salt production in our State, Tamil Nadu, which is in second place. So, the conversion should take place immediately. Long distance trains should cater to the people who are living in and around the line, who have to travel more than 720 miles.
Another long pending work is at level crossing level 48 at Nagapattinam and Karaikal line near Akkaraipatti area. The Akkaraipettai area is a sea-food export zone in my constituency. The export process is on continuously 24 x 7. The gate is almost closed. So, the vans and lorries are stranded both sides in long queues.… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : You have to raise only one issue during the ‘Zero Hour’ and not so many issues. What is your demand?
DR. K. GOPAL : For the convenience of the people, the State Government and the Central Government agreed to construct the over-bridge. The Central Government should sanction the amount and also give permission for the early completion of the over-bridge.
*t51 Title: Regarding withholding of fee sanction for 5000 students of Jammu and Kashmir studying in various colleges in India under Prime Minister’s Special Scholarship Schme.
SHRI TARIQ HAMEED KARRA (SRINAGAR): Mr. Chairman, Sir, taking advantage of the ‘Zero Hour’, I would like to highlight a very grave situation perpetrated by the Ministry of Human Resource Development, Government of India on thousands of poor students hailing from the State of Jammu and Kashmir. The unilateral and arbitrary order passed by the Ministry to withhold the fee amount sanctioned for around 5000 such poor students studying in various colleges in the country under the Prime Minister’s Special Scholarship Scheme has jeopardized their career.
Sir, you would be remembering that the year 2010 witnessed the worst kind of unrest amongst the youth of the Valley when the State Government in the Chair did not hesitate in brutally gunning down 126 unarmed young boys. And in order to evaluate and ascertain the causes and reasons thereof, an Expert Committee was constituted by the then Prime Minister on 18th August, 2010, which recommended opening of new educational vistas within the country by providing the poor students admission in professional and technical courses in different colleges of the country. The Ministry of Human Resource Development was made the nodal Ministry.
Mr. Chairman, Sir, the objective of this Scheme was to provide tuition fees, hostel fees, cost of books and other incidental charges to students belonging to poor families in the trouble-torn areas of Kashmir who, after passing Class-XII or equivalent examination, secure admission in Government colleges and institutions and other select institutions outside the State.
The Scheme was launched with much fanfare in 2011. In the first year, only 38 students availed of the benefits. But in 2012-13, the optimum limit went to 5000. This unilateral withholding of fee amount has caused returning home by quite a number of students. In other cases, parents in an effort to save the career of their children are applying for loans on higher interest rates. Quite a few of them have even sold their ancestral properties.
As such, it is demanded that the Ministry of Human Resource Development may take the call and release the withheld fees for such students as per the stated policy so as to save the career of thousands of poor students.
*t52 Title: Need to expand Coimbatore railway station in Tamil Nadu.
SHRI P. NAGARAJAN (COIMBATORE): Sir, with the blessings of our Leader Puratchithalavi Amma, I raise this important issue.
Sir, Coimbatore is my constituency. Coimbatore is a major manufacturing centre in the country and also showing rapid growth in economic activities. It is the second largest city in Tamil Nadu which is called the Manchester of South India. Coimbatore Junction alone yields Rs.1095 million in a year which is the second highest revenue in Southern Railway.
Sir, my Coimbatore constituency has been totally neglected and even a single project has not been announced for this area in the Railway Budget.
A lot of people from all over the country come to Coimbatore for their business activity and at present the facility at Coimbatore Railway Station is not enough to meet the passengers’ demand. The following projects/trains may be introduced for the development of Coimbatore City. So, I request the hon. Railway Minister through this House to give top priority to complete the following projects:
First, it is the expansion of Combatore Railway Station Platform. Sir, the NTC Mill situated adjacent to Coimbatore Junction has been closed due to some problems and all the machineries and tools have been disposed of. Now, the land is lying vacant and unused. So, the land may be acquired by the Railways to augment the infrastructure facilities for the passengers.
There is no train in the evening from Mettupalayam to Coimbatore. An additional run of passenger train running from Mettupalayam and Coimbatore between 2000 hours and 2030 hours would help. Thank you.
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, I have the names of some Members who want to raise the issues. If they agree, I will give them two minutes and they can address within that time. Then, I am agreeable to allow them.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
*t53 Title: Need to teach correct historical facts about the freedome fighters and martyrs of the country.
*SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR) : Thank you respected Chairman Sir; we all know that if we forget our past history, our existence will be at stake. A nation can grow, can prosper only when it remains aware of its history and also imparts correct historical knowledge to its future generations. Our country was under British imperial rule and people had revolted against the colonial rule through different ways and means. Any opposition to British rule was referred to as terrorism or militancy by the English rulers. Today we are independent. So if today we identify our revolutionaries and freedom fighters as terrorists, it would be shameful. It would be extremely insulting for those who sacrificed their precious lives for the independence of the country. Sir, we can see in many states, including West Bengal that the freedom fighters and martyrs are being sought to be maligned and a wrong signal is being sent to the new generations. You must have heard of Khudiram Bose, Baghajatin, Masterda Surja Sen. Elegy is sang for Khudiram Bose even today; people pay rich tribute to this great soul. Unfortunately, the text books of class VIII depict this revolutionary as a terrorist and the students are made to learn incorrect history in West Bengal. This is gross misrepresentation of facts which threatens our history and culture. Thus I would urge upon the Ministry of HRD through you Sir to consult the State Governments and find a way out to encourage all to teach correct historical facts to the students. People of Bengal are agonised to know that Khudiram Bose is being termed as a terrorist. Thus I request the Central Government to immediately take corrective measures in this regard. With these words, I conclude my speech .
*English translation of the speech originally delivered in Bengali.
*t54 Title: Need to honour brave police officials and personnel in Bihar.
श्री राम कृपाल यादव (पाटलीपुत्र) : सभापति महोदय,मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं कि आपने बहुत ही महत्वपूर्ण लोक महत्व के मामले को उठाने की आपने अनुमति दी है।
महोदय,मैं आपके माध्यम से भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि इस बार बिहार सरकार की लापरवाही के कारण स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को राष्ट्रपति पदक से वंचित होना पड़ेगा। मैं बताना चाहूंगा कि बिहार से बहुत देर से अनुशंसा भेजी राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए,उसकी समय 15 मई तक थी,लेकिन उन्होंने उसके बहुत बाद में अनुशंसा भेजी। कहा जाता है कि बिहार में सुशासन वाली सरकार है,जो अपने जांबाज पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सम्मानित करने की फुर्सत नहीं है। देश के अन्य भागों के पुलिसकर्मियों को जब राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा,वहीं बिहार के जांबाज पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों,जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अच्छे काम किए हैं,वे इस बार राष्ट्रपति पुरस्कार से वंचित रह जाएंगे।
महोदय,मेरा आपके माध्यम से भारत सरकार के गृह मंत्री से निवेदन है कि उनकी लापरवाही को नेगलेक्ट करते हुए,शिथिल करते हुए,वे आपके जांबाज अधिकारी हैं,देश के जांबाज अधिकारी हैं,उनका मनोबल टूट रहा है,उनका मनोबल बढ़ाने के लिए समय-सीमा को समाप्त करते हुए बिहार के पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को राष्ट्रपति पुरस्कार देने की सहमति प्रदान करें। अभी समय है, 15 अगस्त को पुरस्कार दिए जाते हैं।
महोदय,यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है। मैं निवेदन करूंगा कि केन्द्र सरकार इस पर ध्यान दे,बिहार के पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सम्मानित करने के लिए,राष्ट्रपति पुरस्कार देने के लिए अपनी सहमति प्रदान करे।
*m02 श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर) : महोदय, मैं शून्यकाल में श्री राम कृपाल यादव जी द्वारा उठाए गए मुद्दे से स्वयं को सम्बद्ध करता हूं।
*t55 Title: Need to give central assistance to farmers for crop failure due to substand seeds.
प्रो.चिंतामणि मालवीय (उज्जैन) : सभापति महोदय,आपने मुझे महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का अवसर दिया,उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। उज्जैन मेरा संसदीय क्षेत्र है,जो कि मध्य प्रदेश में है। वह सोयाबीन का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। लेकिन इस बार उज्जैन के किसानों पर आपदा आई है और यह प्राकृतिक नहीं,बल्कि मानवीय लालच से पैदा हुई है। कृषि विभाग विपणन संघ व बीज उत्पादक सहकारी और निजी संस्थाओं की मिलीभगत से किसानों को अमानक बीज वितरित किया गया है। इस कारण उज्जैन के किसानों की 60 प्रतिशत फसल बेकार हो गई है और अंकुरित नहीं हो पाई है। कई किसानों की तो 100 प्रतिशत तक फसल बेकार हो गई है। इन नकली बीजों के चलते उज्जैन का किसान बर्बाद हो गया है। अमानक बीजों का रैकेट केवल उज्जैन जिले और सम्भाग में ही नहीं,बल्कि इंदौर के भी कुछ जिलों में फैला है। इसे लेकर कुछ एफआईआर भी हुई है। मैं आपके माध्यम से कृषि मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करते हुए कहना चाहता हूं कि अमानक और नकली बीज से पीड़ित सम्भाग के किसानों के लिए अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्रदान करे। साथ ही एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएं,जो उज्जैन सम्भाग में जाकर जांच करके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे,ताकि किसानों के अरमानों को कुचलने वाले,लूटने वाले लोगों को सजा मिल सके। इसके अलावा एक प्रभावी कानून भी इस संबंध में बनाया जाए।
*t56 Title: Need to improve irrigation system in Madhubani Parliamentary Constituency in Bihar.
श्री हुक्मदेव नारायण यादव (मधुबनी):सभापति महोदय,मैं जिस इलाके से आता हूं,उस मिथिलांचल में मधुबनी और दरभंगा में सुखाड़ से बहुत लोग पीड़ित हैं। एकमात्र वहां सिंचाई का साधन पश्चिमी कोसी नहर है,जिससे सिंचाई करके वे खेती आबाद कर सकते थे। उस पश्चिमी कोसी नहर में साइफन काफी संख्या में टूट गया है,क्योंकि गलत जगह पर सुलिस गेट बना हुआ है। इस कारण खेत तक पानी नहीं जा पाता है। उसके अंदर रेखांकन गलत है इसलिए उस रेखांकन में सुधार किया जाए और सुलिस गेट को सही बनाया जाए,टूटे हुए साइफन की जगह फिर से साइफन बनाया जाए। मधुबनी और दरभंगा की सभी नहरों में भरपूर पानी दिया जाए,जिससे वहां के किसान पानी से लाभ उठा सकें। इसलिए नहरों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए,यही हमारी मांग भारत सरकार के जल संसाधन मंत्री से है और यह भी आग्रह है कि भारत सरकार वहां एक विशेष टीम भेजकर पश्चिमी कोसी नहर के सभी कामों की फिर से समीक्षा करके पुनर्प्राक्कलन बनाया जाए।
*t57 Title: Need to set up AIIMS like medical hospital in sidhi Parliamentary Constituency.
श्रीमती रीती पाठक (सीधी) : सभापति जी,मेरा संसदीय क्षेत्र सीधी जो विन्ध्या में आता है,उसके अंतर्गत सिंगरौली औद्योगिक जगत भी है,जिसे मिनी कोल केपिटल कहते हैं। औद्योगिक नगरी होने के नाते यहां देश के कई राज्यों से लोग रोजगार के लिए आते हैं और आसपास के जिलों में भी कल कारखाने बड़े पैमाने पर हैं। वहां की आबादी भी पर्याप्त है। जनसंख्या के हिसाब से इस क्षेत्र के स्थाई और अस्थाई लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध नहीं हैं,इनका अभाव है। यहां पर आसपास कोई अच्छा अस्पताल नहीं होने के कारण जरूरतमंदों को 300 किलोमीटर दूर मामूली और गम्भीर इलाज के लिए जाना पड़ता है। इन सभी जगहों के केन्द्रीय बिंदु में सीधी लोक सभा क्षेत्र आता है। मैं आपके माध्यम से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जी से आग्रह करती हूं कि यहां कम से कम 1,000 बैड का आधुनिक अस्पताल एम्स की तर्ज पर निर्माण कराने का जनहित में शीघ्र निर्णय लें।
*t58 Title: Regarding flood situation in Kota Parliamentary Constituency.
श्री ओम बिरला (कोटा) : सभापति जी,राजस्थान के हड़ौती सम्भाग में भारी बाढ़ के कारण अनुमानित 15 से 20 लोगों की दुर्घटना से मृत्यु होने का समाचार आया है। इतना ही नहीं,सारे आवागमन के रास्ते बंद हो चुके हैं। लोगों को मूलभूत जरूरतें जैसे सब्जी,दूध और खाने की अन्य चीजों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। रेल मार्ग और सड़क मार्ग भी बंद हो चुका है। खेत पानी से लबालब भरे हुए हैं। लगातार बारिश आने से बाढ़ की खराब हालत है। मेरी केन्द्र सरकार से मांग है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के तहत जिन लोगों की मृत्यु हो गई है,जिनके मकान गिर गए हैं और खेत बर्बाद हो गए हैं,कोटा,बूंदी,बारां,झालावाड़ सम्भाग में तीन-तीन फीट पानी आज भी भरा हुआ है,लाइट बंद है,बच्चे भूख से मर रहे हैं। ऐसी हालत वहां खराब हो रही है। इसलिए तुंरत ही केन्द्र और राज्य सरकार हालात को सुधारें और राष्ट्रीय आपदा कोष के तहत उन्हें सहायता भी दें तथा डिजास्टर टीम वहां पहुंचकर बाढ़ पीड़ित लोगों को बचाने की व्यवस्था भी करे।
HON. CHAIRPERSON : The time of the House is extended by another half-an-hour to accommodate the hon. Members who want to speak.
*t59 Title: Need to open a kendriya Vidyalaya and college for women in Misrikh Parliamentary Constituency.
श्रीमती अंजू बाला (मिश्रिख) : सभापति महोदय, जब हम किसी देश की समृद्धि एवं विकास का अध्ययन करते हैं तो सबसे पहले वहां के नागरिकों द्वारा प्राप्त की जाने वाली शिक्षा तथा उस देश की शिक्षा व्यवस्था पर अवश्य ध्यान केन्द्रित करते हैं। निष्कर्ष यही निकलता है कि जहां जितना ज्ञान, वहां उतना विकास। स्वतंत्र भारत के 67 वर्ष बीत जाने के बाद भी हमारा देश विकास की उस ऊंचाई को नहीं पा सका, जिसकी हम सब को आशा थी। इसका मूल कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था रही है। आज भी हमारे समाज की महिलाओं के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं है। जनसंख्या तो पचास प्रतिशत है, लेकिन सामाजिक दायित्व शतप्रतिशत है, जो बगैर महिला सशक्तिकरण के संभव नहीं है। मेरा कहना इतनी ही है कि महिलाओं को अधिक से अधिक शिक्षा मिलनी चाहिए। मेरे लोक सभा क्षेत्र में पांच विधान सभाएं हैं जहां महिलाओं को स्कूल मिलने चाहिए, महाविद्यालय मिलने चाहिए, वह उनसे वंचित हैं।
हमारे लोक सभा क्षेत्र मिश्रिख में चार तहसीलें हैं, मिश्रिख, संडीला, बिलग्राम, बिल्हौर लेकिन किसी भी तहसील में महिला महाविद्यालय नहीं है न ही कोई केन्द्रीय विद्यालय है। शिक्षा की इस अति गंभीर समस्या को सदन के माध्यम से सरकार के संज्ञान में लाना चाहती हूं तथा मांग करती हूं कि जनहित में मेरे लोक सभा क्षेत्र में तहसील स्तर पर राजकीय महिला महाविद्यालय तथा केन्द्रीय विद्यालय स्थापित कराए जाएं।
*t60 Title: Need to establish Central Food Technological Research Institute (CFTRI) at Koppal in Karnataka.
SHRI KARADI SANGANNA AMARAPPA (KOPPAL): Respected Chairman, Sir, thank you very much for giving me an opportunity to raise an important matter of national interest. I would like to request for establishment of Central Food Technological Research Institute (CFTRI) at Koppal.
India is a nation having prospects in agriculture. About 70 per cent of Indian population resides in villages. The main occupation of people residing in the villages is agriculture and allied services. Food security and food safety is one of the foremost concerns of our country. We have made remarkable provisions in the Budget of the Fiscal 2014-15. An amount of Rs. 100 crore is set aside for Agro-tech Infrastructure Fund.
In this context, through you, I would like to draw the attention of the Minister of Science and Technology, and the Minister of Agriculture towards establishing a Central Food Technological Research Institute (CFTRI) at Koppal, Karnataka. My constituency, Koppal is a huge producer of rice, maize, cotton, pomegranate, grapes, mangoes and several other agricultural products. Pomegranate is cultivated in an area of 14,649 hectares in Karnataka with an annual production of 1.46 lakh tonnes.
HON. CHAIRPERSON: What is your demand?
SHRI KARADI SANGANNA AMARAPPA : My demand is to establish the Central Food Technological Research Institute (CFTRI) at Koppal.
Koppal stands at second place in the field of agricultural production among all the districts in the State of Karnataka. Thank you.
*t61 Title: Need to provide funds for beautification of Varh temple and ghats in Shuker region in Etah Parliamentary Constituency.
श्री राजवीर सिंह (एटा) : सभापति महोदय, आपने मुझे लोक महत्व के मुद्दे पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।
सभापति जी, मेरे निर्वाचन क्षेत्र एटा में दो जिले एटा और कासगंज आते हैं। कासगंज में एक स्थान ऐसा है, जो बहुत महत्वपूर्ण है और इसे शूकर क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। करोड़ों लोगों की मान्यता है कि भगवान विष्णु के अवतार में से एक अवतार भगवार वराह का इसी क्षेत्र में हुआ था। यहां पर भगवान वराह का बहुत बड़ा मंदिर है। यहां हर वर्ष करोड़ों लोग दर्शन करने आते हैं। यहां एक महीना का मेला लगता है, लेकिन यहां किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं होती है। मेरी आपके माध्यम से यह मांग है कि इस शूकर क्षेत्र को, भगवान वराह के मंदिर को पर्यटन के रूप में मान्यता दी जाए और यहां की जो व्यवस्था है नहाने का घाट है, उसको पूर्ण कराने के लिए, सौंदर्यीकरण कराने के लिए पूरे धन की व्यवस्था की जाए, यही मेरी आपके माध्यम से मांग है । धन्यवाद ।
*t62 Title: Need to convert varsh-Gadchiroli and Nagbir-Chanderpur line to broad gauge in Gadchiroli-Chimur Parliamentary Constituency.
श्री अशोक महादेवराव नेते (गढ़चिरोली-चिमुर): सभापति महोदय,आपने मुझे बोलने की अनुमति दी,इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
महोदय,मैं आपके माध्यम से इस सरकार का ध्यान महाराष्ट्र में मेरे संसदीय क्षेत्र गढ़चिरोली-चिमुर,जो कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है। यह देश का सबसे पिछड़ा,आदिवासी बहुल और अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र है। इस क्षेत्र की तरफ मैं सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।
महोदय,महाराष्ट्र राज्य का गढ़चिरोली-चिमुर क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। अविकसित आदिवासी बहुत इलाका है। इस क्षेत्र के कई युवक राष्ट्र की मुख्य धारा से टूटकर समाज विघटक संगठनों से जुड़ कर विकास में बाधा साबित हो रहे हैं।
महोदय,यहां का किसान,व्यापारी,शिक्षित,अशिक्षित,गरीब और अमीर सभी भयभीत हैं और अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नक्सलवाद से प्रभावित इस आदिवासी बहुल एरिया का विकास करके एवं बेरोजगार युवकों को रोज़गार उपलब्ध करवा कर समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
महोदय,मैं यह भी अवगत कराना चाहूंगा कि इस क्षेत्र में ग्रेनाइट,डोलोमाइट,हीरा,पन्ना,मैगनीज,लोहा,कोयला सहित जल एवं वन के रूप में अपार सम्पदा है। लेकिन फिर भी यह क्षेत्र अति पिछड़ा हुआ है। इसका एक प्रमुख कारण है इस क्षेत्र में रेलवे नेटवर्क का कम होना। यदि इस क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क से जोड़ कर या उपलब्घ प्राकृतिक सम्पदा के छोटे-बड़े उद्योग धन्धे स्थापित किए जाएं तो न केवल इस आदिवासी क्षेत्र का विकास होगा,बल्कि नक्सवाद से बुरी तरह प्रभावित इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे। मेरी मांग है कि मंजूर वर्शा-गढ़चिरोली रेलवे लाइन एवं नागबीर-चन्द्रपुर की सिंगल लाइन को ब्रॉड गैज में रूपांतरित करके,मंजूरी देकर अगर शुरू किया जाए।
*t63 Title: Regarding dilapidated condition f NH 80 and NH 84 in Bagalpur and Buxbar in Bihar.
श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर) : सभापति जी, मैं निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।
बिहार के विभिन्न जिलों भागलपुर एवं बक्सर में क्रमशः एनएच 80, एनएच 84 सहित अन्य राष्ट्रीय उच्च पथों की स्थिति जर्जर है। सड़कों की बदहाली के कारण प्रायः प्रतिदिन दुर्घटनाएं घट रही हैं। सैकड़ों घायल तथा दर्जनों लोग मौत के घाट भी उतर चुके हैं। आवागमन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही भागलपुर, बिहार में एनएच 80 स्थित चम्पानाला पुल टूट जाने एवं कहलगांव के पास भैना नदी पर पुल क्षतिग्रस्त हो जाने तथा अंतर्राज्यीय भागलपुर - देवघर मुख्य मार्ग पर (बैजानी ग्राम के पास) पुल टूट जाने से चारों तरफ से आवागमन पूर्णतः ठप्प हो गया है। लाखों लोगों का जीवन दुभर हो गया है। विशेष रूप से विश्व प्रसिद्ध श्रवणी मेला के अवसर पर काँवरिया मेला में देश-विदेश के लाखों काँवरिया तीर्थ यात्रियों को काफी कष्ट उठाना पड़ रहा है।
बिहार के बक्सर में गंगा पुल एवं राजेन्द्र सेतु मोकामा पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। उत्तर प्रदेश सहित देश के कई पूर्वांचल राज्यों से बड़े वाहनों का आवागमन पूर्णतः बाधित है। फलस्वरूप पटना का गांधी सेतु तथा विक्रमशीला सेतु, भागलपुर पर वाहनों का भार अधिक पड़ जाने से दोनों पुलों की स्थिति भी जर्जर होती जा रही है, जिसके कारण कभी भी बड़ी घटनाएं घट सकती हैं। उक्त जगहों पर सड़कों एवं पुलों के क्षतिग्रस्त होने से यातायात दुर्व्यवस्था के कारण रोजगार एवं व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हैं। खाद्य पदार्थ, फल, सब्जी, दूध आदि शहरों में मुहैया नहीं होने के कारण महंगाई बढ़ गई है। रोजगार एवं व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हैं।
अतएव आपके माध्यम से केंद्रीय सरकार के परिवहन मंत्री से आग्रह है कि बिहार के उपरोक्त जर्जर एनएच सड़कों की मरम्मत तथा सभी क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण व विशेष मरम्मत का कार्य शीघ्र सम्पन्न कराएं। जिससे राज्य के इन क्षेत्रों में अंतर्राज्यीय सड़कों का यातायात स्थिति बहाल एवं सुदृढ़ हो सके।
*t64 Title: Need to set up an airport in Thanjavur Parliamentary Constituency.
*SHRI K. PARASURAMAN (THANJAVUR): Hon’ble Chairman Sir, I wish to raise an important issue in this House. I came to know from the newspapers that the Union government is planning to develop 200 low cost airports in Tier II and Tier III towns across the country in next 20 years. The government has identified 50 districts in the first phase of the Project. An airport should be set up in my Thanjavur constituency. Because of this, even the people of adjoining districts like * English translation of the speech originally delivered in Tamil Sivagangai, Nagappatinam, Thiruvarur, etc would also be benefitted. I have already written to the Civil Aviation Minister in this regard. There is an airport in Thanjavur under the control of Indian Air Force and this airport should be improved with commercial connectivity. Itherefore request to setup a low cost airport in Thanjavur.
Moreover, there is heavy traffic between Thanjavur and Nagapattinam in National highway (NH-67). The demand for widening and strengthening of this National highway in the Thanjavur-Nagapattinam stretch has gained momentum. People in large number go on pilgrimage to Velankanni temple and NagoorDargah. I have also written to Minister for Highways and Road Transport in this regard. I, therefore, urge to speed up the expansion and up-gradation work in this National Highway (NH 67).
*t65 Title: Need to lay separate railway line upto Mehrawal railway station in Aligarh Parliamentary Constituency.
श्री सतीश कुमार गौतम (अलीगढ़) : माननीय सभापति जी,आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं अपने संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश के बारे में बताना चाहता हूं कि अलीगढ़ जंक्शन रेल गाड़ी आने जाने में जो सुविदा है,वह दो लाइनों से जुड़ा हुआ स्टेशन है। स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर महरावल तक तीन लाइनें जुड़ी हुई हैं। माल गोदाम बीच में आने की वजह से तीसरी लाइन से अलीगढ़ जंक्शन नहीं जुड़ पा रहा है इसलिए माल गोदाम को महरावल स्टेशन पर स्थापित कर दिया जाए तो अलीगढ़ तीसरी लाइन से जुड़ जाएगा। इस स्टेशन पर माल गोदाम बनाए जाने के लिए लाइनें बिछाने का कार्य हो चुका है,केवल एक किलोमीटर की लाइन बिछाए जाने का कार्य बाकी है जिस कारण रेलवे स्टेशन को इस निवेश का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कार्य के पूर्ण होने से लाखों यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है,वह नहीं करना पड़ेगा। मेरा आपके माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध है कि मेरे संसदीय क्षेत्र अलीगढ़ में माल गोदाम को महरावल स्टेशन तक अतिशीघ्र स्थापित कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश जारी करने का कष्ट करें।
*t66 Title: Need to take steps for relief and rehabilitation of victims of Endosulfan pesticides in Karnataka and Kerala.
KUMARI SHOBHA KARANDLAJE (UDUPI CHIKMAGALUR): Mr. Chairman, Sir, I am raising an urgent matter of public importance.
Endosulfan, which is a dangerous agrichemical pesticide, has poisoned thousands of Indian people over the last five decades. In Karnataka and Kerala, aerial spray of Endosulfan began in 1980s as a measure to control ‘T’ mosquito bug in cashew nut plantation. But the use of Endosulfan has caused physical and mental ailments amongst thousands of children and adults.
Long-term exposure of this pesticide has caused high incidence of central nervous system disorders like cerebral palsy, cancers, body deformations, reproductive disorders, miscarriages, skin problems, infertility, mental retardation and depression. The killer pesticide has been found in food, soil, air and body tissues in almost all parts of our country. High level of pesticide has been found in human blood and breast milk in Karnataka and Kerala.
Recently, in Kasargod, Kerala, parents committed suicide after killing their 15 year old son, an Endosulfan victim. More than 7,000 people have been affected with Endosulfan in Karnataka alone and around 10,000 people have been affected with Endosulfan in Kasargod.
So, on humanitarian grounds, more than 17,000 victims are in need of support, help and financial assistance from the Union Government.
Hence I would request the Union Government especially the Minister of Health to set up a corpus amount for the relief and rehabilitation of these victims, to provide medical facilities for the affected people, and to issue Antyodaya Ration Cards to the affected families. There is also a need of medical examination of genetic defects.
*t67 Title: Need to develop a smart city between Baghpat and Baraut.
डॉ. सत्यपाल सिंह (बागपत) : माननीय सभापति जी,मेरा संसदीय क्षेत्र दिल्ली से 15 किलोमीटर दूर है। यहां से विकास 1500 किलोमीटर दूर है यानी ’दिये तले अंधेरा’ ‘darkness under the lamp’ यहां टूटी हुई सड़कें हैं,सौ साल से ज्यादा पुरानी ट्रेन हैं। यहां पर पैसेंजर ट्रेन चलती हैं। यहां बहुत बेरोजगारी है। यहां कोई इंजीनियरिंग कॉलेज,मेडिकल कॉलेज,स्किल डेवलपमेंट इंस्टीटय़ूट नहीं है इसलिए अपराधिकरण बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। पड़ोस के घर में अगर आग लगती है तो अपने को भी नुकसान होता है,झुलस लगती है। अगर वहां गड़बड़ होती है तो दिल्ली को भी नुकसान होने वाला है,दिल्ली पर बोझ पड़ने वाला है। मैं आपके माध्यम से शहरी विकास मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाई जा रही हैं इसमें से एक स्मार्ट सिटी बागपत और बड़ौत के बीच बनाया जाए। यहां से बागपत 32 कि.मी. तथा बड़ौत केवल 35 किलोमीटर दूर है। यहां बहुत अच्छा पीने का पानी है,शुद्ध वातावरण है। यहां यमुना का किनारा है। इससे दिल्ली को भी फायदा होगा।
*t68 Title: Need to provide better road connectivity in Tiruvannamalai Parliamentary constituency.
*SHRIMATI .R. VANAROJA (TIRUVANNAMALAI): Hon’ble Chairman Sir, I wish to raise an important issue in this House. Even after 67 years of Independence, in my Tiruvannamalai Constituency there is a village without road connectivity. Ariyakunjur in ChengamTaluk of Tiruvannamalai District has no road connectivity. This village is totally out of connectivity. People belonging to Scheduled Castes live in this village. Chinnakalathambadi is a place at at distance of 2 kms from Ariyakunjur and on the other side Arattavadi village in 2 km distance. Road facilities show should be provided to these villages. Hon’ble Chief Minister PuratchithalaiviAmma provides adequate funds on the basis of demands of People’s representatives for providing road connectivity. Since the land on which road has to be laid belongs to Forest Department, there is difficulty in providing road connectivity. People particularly those belonging to Schedule Castes are affected without road facilities. I urge through this House that Union government should grant permission to provide road facilities in the land owned by Forest department.Jamnamathur village is at a distance of 120 kms from Chengam town. This can be reduced upto 33 kms by way of laying road between Panrev and Palaganur for a stretch of 6 kms in forest land. Union government should grant permission for laying of road in the forest land. This can provide road connectivity to Kallathur, Oorkavundalur, Palamarathur, Melsilambadi and PuliyurPanchayats. If Union government grants permission the State government led by Hon’bleAmma would ensure the construction of roads in these areas. I, therefore, urge that for laying of village roads in forest land between Ariyakunjur and Chinnkalathambadi; Ariyakunjur and Arattavadi and Panrev and Palakanur, Union government should come forward to grant permission.
* English translation of the speech originally delivered in Tamil.
*t69 Title: Need to open Kendriya Vidyalaya in Nagaur Parliamentary Constituency in Rajasthan.
श्री सी.आर.चौधरी (नागौर) : परम सम्माननीय सभापति महोदय, सर्वप्रथम मैं आपका हृदय से शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे शून्यकाल में बोलने का समय दिया। मैं नागौर, राजस्थान से आता हूं, नागौर की एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसके बारे में मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं।
इस जिले की जनसंख्या 32 लाख है और नागौर शहर की पापुलेशन 1.4 लाख है। आजादी के बाद से आज तक वहां हर घर में एक सैनिक मिल जायेगा। लेकिन इसके बावजूद भी वहां कोई केन्द्रीय विद्यालय नहीं खुल पाया। अब एक साल से केन्द्रीय विद्यालय खोलने के लिए सिद्धांततः केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। The Government of Rajasthan has allotted 15 acres of land for the Central school but still क्रियान्विति में नहीं आया है। मेरा आपसे अनुरोध है कि जब तक वहां भवन नहीं बने, तब तक राजस्थान सरकार एक स्कूल भवन देने के लिए तैयार है और बाकी वहां सारी सुविधाएं हैं, बच्चे तैयार हैं। लेकिन यहां से एक फॉर्मल आर्डर निकलना है।
इसलिए सभापति महोदय मैं आपके मार्फत केन्द्रीय एचआरडी मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि वह इसी सैशन से इस केन्द्रीय विद्यालय को चालू करें, ताकि बच्चों को और जिले के लोगों को उसका फायदा मिल सके। धन्यवाद।
*t70 Title: Need to provide better facilities in Bulandshaher Parliamentary constituency.
श्री भोला सिंह (बुलंदशहर) : सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से केन्द्र सरकार को अपने लोक सभा संसदीय क्षेत्र बुलंदशहर के बारे में अवगत कराना चाहता हूं। मेरा लोक सभा क्षेत्र बुलंदशहर दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर दूर है और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अंतर्गत यह एनसीआर का एक पार्ट है। लेकिन यह एनसीआर का पार्ट होते हुए जितना दिल्ली के करीब है,उतना ही यह विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है। बुलंदशहर जिला देश का राजधानी दिल्ली के लिए भारी मात्रा में दूध,फल,सब्जियां और अनाज उपलब्ध कराता है। लेकिन विकास के मामले में उतना ही पिछड़ा हुआ है। बुलंदशहर में कोई अच्छे रास्ते नहीं हैं,वहां सारे रास्ते टूटे हुए हैं और कोई भी रेल की सुविधा बुलंदशहर से दिल्ली आने-जाने के लिय़े नहीं है। जबकि हजारों की संख्या में लोग यहां से आते-जाते हैं। कोई भी विकास कार्य जो एनसीआर के अंतर्गत आता है,वह बुलंदशहर लोक सभा क्षेत्र में नहीं है।
अतः मेरा आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से निवेदन है कि जो सारी सुविधाएं एनसीआर रीजन में गाजियाबाद,फरीदाबाद और गुड़गांव के लिए दी जा रही हैं,वे सुविधाएं बुलंदशहर के लिए भी दी जाएं।
HON. CHAIRPERSON : The House stands adjourned to meet on Monday, the 11th August, 2014 at 11 a.m. 18.54 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Monday, August 11, 2014/Shravana 20, 1936 (Saka).
*स्रोतः सीबीएचआई/राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सेवा निदेशालयों से प्राप्त मानसिक स्वास्थ्य स्थिति की रिपोर्ट।
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