Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Demands Of Grants Nos. 1 To 4 Under The Control Of The ... on 14 July, 1998
Title: Further discussion on the Demands of Grants Nos. 1 to 4 under the control of the Ministry of Agriculture and cut motions thereto moved on 10th July, 1998. Cut motions-Negatived Motion for consideration- adopted. TEXT :
17.08 hrs MR. SPEAKER: The House will now take up further discussion and voting on Demand Nos. 1 to 4 relating to the Ministry of Agriculture. As the Hon. Members are aware, guillotine will take place at 1800 hours today.
श्री बलराम जाखड़ (बीकानेर): अध्यक्ष महोदय, पिछले शुक़वार को हमने किसानों की बात शुरू की थी। ... (व्यवधान) श्री आनन्द मोहन (शिवहर) : जाखड़ साहब, आप पहले महिला बिल के बारे में कहिये। ... (व्यवधान) श्री बलराम जाखड़ : आप मेरे पास आइये, मैं आपको बताऊंगा। अध्यक्ष महोदय, उस दिन हम कृषि नीति के बारे में बात कर रहे थे और बात बीच में रह गयी थी। ... (व्यवधान) श्री आनन्द मोहन : आप पहले महिला बिल के बारे में बोलिये।
... (व्यवधान) श्री बलराम जाखड़ : मैं किसानों की बात कर रहा हूं इसलिए आप मुझे बीच में मत टोकिये। ... (व्यवधान)हाउस के सामने आ जायेगा इसलिए आप बैठ जाइये। अध्यक्ष महोदय : यह अच्छी बात नहीं है। श्री बलराम जाखड़ : अध्यक्ष महोदय, हम कृषि नीति की बात कर रहे थे कि किस प्रकार की कृषि नीति है और उस नीति में कया कुछ हो रहा है। हमारे एक माननीय सदस्य ने प्रश्न किया था कि आपने तो बराबरी का दर्जा देने की बात की ... (व्यवधान)इसमें तो टैकस लेने की बात है। लेकिन हमने टैकस रहित करने की बात कही है। ... (व्यवधान)सवाल यह पैदा होता है। ... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : यह अच्छी बात नहीं है।
... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : श्री आनन्द मोहन, आप बैठ जाइये।
Nothing is going on record.
(Interruptions) .* SHRI BALRAM JAKHAR : Sir, you have the power to ask him to leave the House. Why can you not use your power? That is meant to be used. ______________________________________________________________________________ *Not Recorded.
THE MINISTER OF PETROLEUM AND NATURAL GAS (SHRI VAZHAPADY K. RAMAMURTHY): When a Member is continuously disturbing the House, the Speaker has got the power to name him. श्री बलराम जाखड़ : अध्यक्ष महोदय, सवाल यह पैदा होता है।
... (व्यवधान) कृषि नीति में मैंने कहा था कि उसको किस प्रकार से टैकस रहित करें। ... (व्यवधान) I cannot speak like that... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, आप या तो इनको अभी बाहर कीजिए या मुझे बिठा दीजिए। ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, I request you again, please take your seat. (Interruptions)* MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please take your seat. This is not good. (Interruptions)* SHRI BALRAM JAKHAR (BIKANER): Sir, why cannot you ask him to leave the House? ... (Interruptions) ... I want to speak here on behalf of the farmers. (Interruptions)* MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, what is this?
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please withdraw from the House.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please leave the House.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please leave the House.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please leave the House. This is not good. (Interruptions) * MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please withdraw from the House. Otherwise, I will have to call the Marshals. (Interruptions) * ______________________________________________________________________________ *Not Recorded.
MR. SPEAKER: Shri Anand Mohan, please leave the House. Otherwise, I will have to call the Marshals. (Interruptions) * MR. SPEAKER: Marshals, please take Shri Anand Mohan out.
17.18 hrs. (At this stage, Shri Anand Mohan was removed from the House.) संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि उन्होंने इस सदन के बारे में और सभी सदस्यों के बारे में जो गलत शब्द कहे हैं, उन्हें कार्यवाही से निकाल दिया जाए। ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: I had already said, "Nothing is going on record".
_____________________________________________________________________________ *Not Recorded. श्री बलराम जाखड़ (बीकानेर): कृषि नीति की बात हो रही थी। हम कृषि नीति को उद्योग के लिए दर्जा दे रहे थे। ... (व्यवधान)वित्त मंत्री जी आ गए हैं। मैं उनका ध्यान भी आकर्िषत करना चाहता हूं। सवाल इतना था कि कृषि को उद्योग के बराबर का दर्जा दिया जाए लेकिन उसके ऊपर कोई टैकस न लगाया जाए और टैकस लगाने की कोई जरूरत नहीं है कयोंकि वह टैकस लगाने के काबिल नहीं है। ... (व्यवधान) हमने कृषि भूमि पर सीलिंग लगाई है और यह तीन पीढ़ियों से एकदम लग गई है। उसके बाद में अब गांवों में कया हो रहा है, उसे देखने की बात है, इसे समझने की जरूरत है। आज जिस प्रकार से गांव का किसान रह रहा है और गांव में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए जरा ध्यान देने की आवश्यकता है। इस सदन से मैं आज हाथ जोड़कर विनती करना चाहता हूं कि जरा ध्यान से सुने कि किस प्रकार हजारों किसान मरे हैं। अखबारों में जो ५००-७०० की संख्या आ रही है, यह नहीं है। मेरे पास आंकड़े मौजूद हैं, हजारों किसानों ने आत्महत्याएं की हैं, कयोंकि वे ऋण वापस नहीं कर सके, उनकी फसल उजड़ गई और मजबूरी में यह सारा काम हो गया। यह कयों हुआ, यह देखने की बात है। वे किसान कहां से कर देंगे, टैकस देंगे या इन्कम टैकस देंगे? इसीलिए मैंने कृषि नीति में रखा था कि इसमें कोई कैपीटल गेंस टैकस नहीं होगा, कोई इन्कम टैकस नहीं होगा, कोई वैल्थ टैकस नहीं होगा, नथिंग। वे तो रोटी कमाकर देते हैं, सब किसान भाई हिन्दुस्तान के लोगों का, आपका पेट भरते हैं। फिर हमारे कन्धे पर कयों बन्दूक चलाई जाती है, हमारे साथ अन्याय कयों किया जाता है, यह कहने की बात है। आपने आबंटन किया है, कहते हैं कि हमने ५८ प्रतिशत आबंटन ज्यादा किया है, लेकिन उसका कितना पैसा आयेगा, कया होगा, उसको भी जरा सोचने की आवश्यकता है। मैंने एक चिट्ठी लिखी थी, मैं आपको जरा पढ़कर सुनाना चाहता हूं। आपने कहा है कि मैं टैकस नहीं लगाऊंगा, किसानों के प्रति हम हमारा रवैया अख्ितयार करना चाहते हैं।
"The proposed duty on milk and milk products would produce very small revenues in relation to Government's proposed outlays, but it would place a major burden on milk producers. The previous Congress Government and even the United Front Government had kept the processed milk product items out of the excise regime in order to encourage the farmer to produce more and get a better return thereof. This was meant to encourage value addition to agricultural commodities with a view to provide more income to the farmers. It also recognised the major contributions milk producers' cooperatives made in carrying out extension and input supply activities that otherwise would have been the responsibility of the Central and State Governments.
The BJP Government which professes the Swadeshi concept is ironically working towards its antithesis."
That is what I am saying.
"The present Budget proposals fail to protect the interests of the Indian farmers, particularly diary farmers, most of whom are landless, marginal and small farmers. The proposal is nothing but Swadeshi bark and Videshi bite. Such a proposal if implemented, would only push up the prices of all packaged products, and apart from hitting the farmers would also hit the small scale units and the common consumers. Products like ghee and butter are consumed not just by the urban elite but also by the lower middle class. Milk powder, which was also to be hit by the new duty, is the main source of milk in the Northeast and other milk-deficit regions. The move would encourage selling of dairy products in loose unbranded form, thereby fuelling such malpractices as adulteration and deterioration in quality. This would also encourage the Inspector Raj that the new Government professes to bring to an end.
That is what I want to say and I will give a living example as to what has happened to the dairy industry. One dairy unit in Baramati daily supplies 3 lakh litres to the NDDB. Today, they have got only 70,000 litres. What will they do with 2,30,000 litres? It is because of the excise duty they are not.... मैं इसी की बात कर रहा हूं, मैं किसानों की बात कर रहा हूं, कयोंकि किसान दूध देते हैं। किसान मर गया तो वह किसे दूध देगा। पिछली दफा एक बार यह हुआ था कि मुंबई की गलियों में दूध बहाया गया था, बाजार में दूध रुला था, ये बैठे हैं, इनसे पूछो। मैं यही कहना चाहता हूं कि ऐसी डयूटी आपने कयों लगाई? आप हमारे साथ कया करना चाहते हैं? ये हमारा गला कयों घोटना चाहते हैं, मैं इतना कहना चाहता हूं। आपने और देखा, इसके मुताल्िलक मैं आपसे कहना चाहता हूं कि कितना आबंटन किया है, किस बात के लिए आबंटन किया है, आप कितना पैसा लगाएंगे? आप हमारी स्िथति देखिये। मैं नहीं कहता, लेकिन आपको तो सोचना चाहिए था। यहां कृषि मंत्री जी, आप बैठे हैं, वित्त मंत्री जी, आप बैठे हैं, गांवों की हालत देखिये, मैं चाहता हूं कि इसके लिए आप सोचें। मैं सोचता हूं कि अभी काफी नहीं हुआ, लेकिन आप कुछ तो सोचें कि हमारी आर्िथक स्िथति कया है, हमारी शिक्षा का स्तर कया है, हमारे पास आवागमन के साधन कया हैं, हमारे पास उत्पादन करने के साधन कया हैं, हम कया करना चाहते हैं? हमारे बच्चे पढ़कर इनका मुकाबला नहीं कर सकते हैं, जो शहर में बैठे हैं, जो ३००० रुपये हर महीने की फीस देते हैं, उनके बच्चों के साथ मेरा बच्चा कैसे मुकाबला करेगा, यह मैं आपसे कहना चाहता हूं। इसलिए आबंटन की आवश्यकता कहां है, हम कितना पैसा इन्वैस्टमेंट कर रहे हैं, उसके लिए मैं आपसे कहना चाहता हूं। उसके बाद मैं आपसे बीज की बात कहना चाहता हूं। अगर पैसा लगाया जाता, तो वे कुछ करते। उत्पादन बढ़ाना है तो किस प्रकार से बढ़ाना है, यह भी देखना चाहिए। अच्छा बीज होगा, तब उसकी रखवाली होगी। उसके बीज के लिए आपने कया किया है, आपने लिखा है, मैं उस दिन भी कह रहा था- ठ Tormentor to affect the farmer'. This is something unheard of. उन्होंने नया सिद्धांत निकाला है। यह देखने की बात है किस तरह से नया बीज निकाला है। उसमें एक साल ही उत्पत्ित होगी और दूसरे साल कुछ भी उत्पादन नहीं होगा। इस प्रकार से कार्य होगा तो किसान कुछ नहीं करेगा। इसलिए किसान को प्रोटेकट करने के लिए कानून बनाया जाए। अगर हम कुछ करना चाहते हैं, सीड जेनरेट सिस्टम हो, इस पर आज ही आप विचार करें, तब बात बनेगी। आपके कृषि विज्ञान केन्द्र बने हुए हैं। आप उनमें किसानों को सिखाएं, उनको शिक्षा दें, तो हमारा किसान दुनिया में इतना बीज पैदा करके दे सकता है कि हम काफी विदेशी मुद्रा कमा सकते हैं, कयोंकि हमारे पास हाथ हैं, बाहर वालों के पास नहीं हैं, उनके यहां लेबर महंगी है और हमारे यहां सस्ती है। अगर दो एकड़ वाला किसान कुछ नहीं कर सकता तो उसको बताया जा सकता है कि तुम यह कर सकते हो। आप यह बात देखें, मैं आपके पास भिजवा दूंगा।
It is a very serious thing which might affect the future of the farming community and the future of the agriculture itself. इसके लिए आपको कुछ करना चाहिए। लेकिन आपने सिंचाई के लिए कितना पैसा आबंटित किया है, यह भी देखने की बात हा। पहले स्प्रिकंलर के लिए अनुदान देते थे, पकका खाला करने के लिए देते थे, उसमें कितना पैसा दिया है, मुझे तो कहीं नजर नहीं आया। इसलिए ऐसा मत करें, वरना उसके बाद इसका कोई इलाज नहीं होगा। कमांड एरिया विकसित करने के लिए कया किया है, मुझे कुछ नजर नहीं आया।
Command Area Development is a basic thing for good agricultural production. उसमें हुआ नहीं है, मैंने अपनी आंखों से देखा है, तजुर्बा करके देखा है कि इंदिरा गांधी कैनाल, जिसे पहले राजस्थान कैनाल कहते थे, उसका लाखों एकड़ एरिया तबाह हो चुका है। वहां वाटरलागिंग हो गया, कयों हो गया, किसी ने नहीं देखा कि जमीन नीचे से पानी सोंख सकती है या नहीं, इसमें जिप्सम है या कोई और दूसरी चीज है जिससे पानी नीचे नहीं जाता है।
All these villages have been devastated. उसके लिए मैंने पहले भी बोला था और आगे के लिए भी कह रहा हूं कि आप ध्यान रखें कि हमें कया करना है। आपने इसके लिए कितना पैसा दिया, मुझ तो बजट में कहीं नजर नहीं आया। आप ७५-९० प्रतिशत कितना देना चाहते हैं किसान को या दूसरे भाइयों को, वह दें और उन्हें बताएं। इसी तरह से कच्छ में नर्मदा जा रही है, उसके लिए पहले से बंदोबस्त करिए, वरना वहां भी सत्यानाश हो जाएगा। अगर ध्यान देंगे तो वहां तिगुनी फसल होगी, खेत लहलहाने लगेंगे, किसान की आमदनी बढ़ेगी और आपको भी बाहर से अनाज मंगाना नहीं पड़ेगा। किसान कयों मरा, अब तो आंखें खुलनी चाहिए, ठीक है पहले नहीं खुलीं। उसकी रिपोर्ट आ चुकी है और हाउस में डिसकस हो चुका है कि किसान कयों आत्महत्या कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश में, कर्नाटक में उसने आत्महत्या की, यही नहीं, हरियाणा और पंजाब में भी मरे हैं। मेरे पास हरियाणा के आंकड़े हैं कि वहां ५५० लोग मरे हैं। मैं आपको फैकटस और फिगर्स दे सकता हूं कि किस गांव में ३२ मरे, किस गांव में २९ मरे और किस गांव में १९ मरे हैं। कयों मरे! इसलिए मरे हैं कि वे पैसा वापस नहीं कर सके, उनकी आमदनी खत्म हो गई और उनको साहूकारों से पैसा लेना पड़ा। हम कया दे रहे हैं, आप आबंटन की बात करते हैं और कितने प्रतिशत ब्याज पर देते हैं। आप उनको पैसा दें, अपने नाबार्ड से कहें, कोआपरेटिव बैंकस से कहें, राष्ट्रीय बैंकस से कहें कि उनको पैसा दें और पैसा बढ़ाइए। आपने देखा होगा कि इंडस्ट्रीज में कितना पैसा लगा हुआ है, कितना पैसा डूब जाता है, कोई पूछता नहीं है। हजारों करोड़ रुपया तबाह हो जाता है, लेकिन हमारे यहां कितना लगता है, यह देखने की बात है। फिर ऊपर से ऐसे कानून बना दिए कि किसान कोआपरेटिव से पैसा ले तो ४० दिन के अंदर न दे तो उसे बंदर की तरह पकड़कर बंद कर देते हैं। वह आज त्राहि-त्राहि कर रहा है इसलिए उसको अधिक से अधिक छः से आठ प्रतिशत ब्याज पर पैसा दें, जबकि उसने ४० से ५० प्रतिशत तक ब्याज पर पैसा लिया हुआ है। चालीस-पचास परसेंट पर रुपया लेकर वह उसको उतार नहीं सकता है। मैं पूछना चाहता हूं, आप ऐसे लोगों को कयों नहीं पकड़ते हैं? ऐसे लोगों के खिलाफ आप कयों कानून नहीं बनाते हैं? जो बीज दिया जाता है, वह भी नॉकस होता है और जो इन्सैकिटसाइड व पैस्िटसाइड सप्लाई किए जाते हैं, वह भी स्फूरियस और एडलट्रेटेड होते हैं, लेकिन ऐसे लोगों को कोई पकड़ने वाला है। किसान मरता है, तो देश मरता है। हमें यहां बैठकर किसानों के लिए काम करना है। हल्ला-गुल्ला करने से काम नहीं होगा और इससे बात भी नहीं बनेगी। किसान रीढ़ की हड्डी है और वह त्राहि-त्राहि कर रहा है। क़ैडिट कार्ड की बात भी आपने कही है, मैं चाहता हूं कि आप उस काम को करें। आपने लिखा है कि करेंगे। आप उसको पूरी लमिट दे दीजिए कि पैसा मिल जाएगा। साथ ही इसके आप अच्छे बीज दे दीजिए। जहां तक एग्रीकल्चर साइंटिस्ट की बात है, वे B.Sc स्टूडेंटस हैं, बेरोजगार हैं, आप ऐसे लोगों को लाइसेंस देकर इन चीजों को बिकवायें। बाजार में बैठे हुए लोगों को पता नहीं होता है कि वे कया बेच रहे हैं, कया नहीं बेच रहे हैं। मैं चाहता हूं कि आप एक स्कवैड बनायें, कानून बनायें, तभी यह काम हो सकता है। महोदय, कोआपरेटिव्स के बारे में भी बात कही गई है। कोआपरेटिव्स बनाकर उनको सहारा दिया जाना चाहिए, लेकिन आपकी कथनी और करनी में अन्तर है। उस दिन वित्त मंत्री जी आप उपस्िथत नहीं थे, मैंने कहा था कि आप जो भी करना चाहते हैं, वही कहिए। ऐसा मत करिए, कहें कुछ और करें कुछ। आपने स्वायत्तता देने की बात भी कही थी कि आप कोआपरेटिव्स को स्वायत्तता देंगे और सरकार की निगरानी भी कम करेंगे तथा सरकारी दबाव भी कम करेंगे ... (व्यवधान)बिल्कुल नहीं हो रहा है, इसीलिए मैं यह बात कह रहा हूं। मैं आपको एक जीता-जागता सबूत देना चाहता हूं। अभी नाफैड का चुनाव होना था, लेकिन फलिम्ज़ी ग्राउन्डस पर उसको पोस्टपोन कर दिया गया। कयों? कयोंकि आपका मनमर्जी का आदमी नहीं आ सकता था। यह कोई तरीका नहीं है और इस तरह से कोआपरेटिव्ज की सहायता कैसे हो सकती है। इससे तो कोआपरेटिव्ज जिन्दा नहीं रहेगी। मैं कहना चाहता हूं कि कोआपरेटिव्ज अपनी शकित से जिन्दा रहना चाहती है और ईमानदार आदमी के चलन से जिन्दा रहेगी। इस क्षेत्र में मिलकर काम करना होगा। हमने कोआपरेटिव्स की नेशनल पालिसी बनाई थी। सोमपाल जी आप उसको लाइए। नेशनल कोआपरेटिव बैंक बनाइए, जिससे किसानों को पैसा मिल सके। पोस्ट हार्वैस्िटंग टैकनोलाजी के बारे में भी कहा गया है। इस बारे में किसान कुछ नहीं जानते हैं। किसानों को सिखाया जाना चाहिए। देश के ७३ प्रतिशत किसान इस बोझ को वहन नहीं कर सकते हैं। आपको इस काम को करना चाहिए। बाहर के मुल्कों में, जैसे अमरीका में १.९९ परसेंट आदमी खेती करते हैं। फ्रान्स, यूरोप, जर्मनी में छ: से सात प्रतिशत लोग खेती करते हैं। जापान में दो से तीन परसेंट खेती करते हैं और हमारे देश में ७४ परसेंट खेती करते हैं। इन लोगों को कौन सीखाएगा। ये लोग नहीं सीखेंगे, तो बेरोजगार हो जायेंगे। मैंने अखबार में पढ़ा कि दिल्ली में रात भर में १३ डाके पड़े। ये ऐसे लोग हैं, जिनके पास कोई धन्धा नहीं है।
We are creating an Army of people who are unemployed, who have got the brain but they cannot find any work. What will they do? They will take up criminal activities. इसलिए पोस्ट हार्वैस्िटंग में कितना पैसा लगाना है, इस बारे में मुझे पता नहीं है। पहले एक हजार करोड़ रुपया फूड प्रोसैसिंग, होर्िटकल्चर में रखा गया था। इस बारे में आप सदन को बताइएगा कि आप कया करना चाहते हैं। एक दूसरी समस्या है, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, फारवर्िडंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। एयरपोर्ट और पोर्टस पर सामान रखने की जगह नहीं है। चीजें जाती हैं और खराब हो जाती हैं। इसका भी बन्दोबस्त आपको करना चाहिए। । युनिवर्िसटी एकसटैंशन सर्िवसेज के बारे में भी आपको देखना चाहिए। उनके और किसानों के बीच कोई रास्ता होना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि इस काम को किस प्रकार कर सकते हैं। महोदय, मैं एक बात और कहना चाहता हूं। दूरदर्शन की मालिक, श्रीमती सुषमा स्वराज जी सदन में नहीं है। मैं उनसे कहना चाहता था कि हमारा उसमें हिस्सा बनता है। शिक्षा देने के लिए अच्छे प्रोग्राम बन सकते हैं। आधा घंटा उसमें लगा दिया जाता तो अच्छा था। वह प्रोग्राम लाइव दिखाए जाएं कि यहां से यह हो सकता है। इसके माध्यम से शिक्षा दी जाए। इस बात को भूलना नहीं है। कहने और करने में अंतर होता है। इसको जरूर दिखाना चाहिए। हम भूमि की भी रक्षा करें और उसकी फर्िटलिटी को सत्यानाश नहीं होने दें। उसके लिए किसान को सिखाना पड़ेगा कि खाद का कया अनुपात हो? यूरिया के बढ़े हुए पैसे वापस लेकर आपने अच्छा किया। आप कोई ऐसा तरीका निकालें जिससे फास्फोरस और पोटेशियम डाल कर उसका अनुपात बराबर कर सकें। उसके लिए आवश्यक है कि हम बायो-फर्िटलाइजर और ग्रीन-मैन्योरिंग की बात करें। हम उन्हें बताए कि यह हो सकता है। हॉर्िटकल्चर के लिए इस बात की आवश्यकता है कि हम देखें कि उसे कैसे बाहर भेजा जाए? पहले देश में एक अंगूर नहीं होता था। हमने यहां अंगूर पैदा किया। आज महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक से ३०० करोड़ रुपए का अंगूर निर्यात होता है। किसान ने इसे पैदा करने की डट कर हिम्मत की। आज स्टेट गवर्नमैंट कहती हैं कि हमारे हलके से बाहर अनाज नहीं जा सकता है। एक साइकिल वाला लुधियाना, मुम्बई, चेन्नई और कलकत्ता अनाज ले जाता है लेकिन हमारा किसान अनाज कयों नहीं ले जा सकता? आप इसके लिए बंदोबस्त करिए। वे रोकने वाले कौन होते हैं? यह गलत बात है। इससे वहां लोगों को सस्ता अनाज मिलेगा और किसान को अच्छा पैसा मिलेगा। इससे दोनों तरफ फायदा होगा।
मुझे स्टोरेज की बात याद आते ही प्याज, आलू और टमाटर के बढ़े हुए दाम याद आ गए। वे आज कयों मंहगे हैं? श्री शकुनी चौधरी (खगड़िया): आप भी कृषि मंत्री रहे हैं।
... (व्यवधान) श्री बलराम जाखड़ : हमने इस बारे में काम किया। आपको पता नहीं है और आपने देखा नहीं।
... (व्यवधान)मैंने नहीं किया तो अब आप ही कर दीजिए।
... (व्यवधान)आप बीच में कयों बोल रहे हैं? आपको कया ज्यादा ज्ञान है?
श्री शकुनी चौधरी : शिव प्रसाद जो कि वैज्ञानिक थे, उनको आपने ही निकाला। ... (व्यवधान)
श्री बलराम जाखड़ : मुझे तो यह नाम भी याद नहीं है। आप बहुत ज्ञानी हैं। आप अपना ज्ञान अपने तक सीमित रखें। अगर हमारे पास कोल्ड स्टोरेज हैं तो प्रोसैसिंग हो। इससे हम समतल भाव पर लोगों को वभिन्न चीजें दे सकते हैं। दोनों बातें हमारे साथ हो सकती हैं। हमारी २५ से ३० परसैंट फसल नष्ट हो जाती है कयोंकि हमारे पास प्रीजर्व और प्रोसैस करने के साधन नहीं हैं। हमें ये सारी बातें करनी हैं। हमने एग्रो बिजनस कनसोर्िटयम चलाया था। आप उसे बढ़ावा दीजिए। उसमें किसानों के बच्चों को लगाइए और देखिए कि वे किस तरह काम कर सकते हैं? किस तरीके से उत्पादन हो, वह लोगों तक पहुंचे। खुद भी खाएं, लोगों को भी खिलाएं। इस बात का इंतजाम करना होगा। हमारी बहनें कृषि में लगी रहती हैं। उनको शिक्षा देनी होगी। उनको कृषि में हिस्सेदार बनाना होगा। यह जरूरी बात है। मैं देखता हूं कि गांवों में बहुत सी बहनें काम करती हैं लेकिन उनको ज्ञान नहीं होता। उनको ज्ञान देने के लिए शिक्षा का प्रबन्ध करना होगा। यह सीधी सी बात है। आपने भैंस गाड़ी और ट्रैकटर के पुजर्ों पर एकसाइज डयूटी लगा दी। भगवान के लिए इन्हें बंद किया जाए। इसे छोड़ने की बात हो। कृषि मजदूरों को बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उनसे काम करवा लिया जाता है लेकिन कुछ दिया नहीं जाता। यह हिस्सेदारी भी प्रोडकशन पर निर्भर करती है। अगर आप प्रोडकशन बढ़ाएंगे तो सारा काम ठीक हो जाएगा। यहां रेल मंत्री बैठे नहीं हैं। समय ज्यादा नहीं है। किसान को सुविधा पहुंचाने के लिए काम होता है। मैंने उनको लिखा लेकिन पता नहीं उनके कान तक यह बात कयों नहीं पहुंची? जहां भी नई रेल लाईनें बनाई गई हैं, किसानों के लिये बनाई गई हैं ताकि उनके लिये आवागमन का साधन रहे। वे अपना सामान ले जा सकें लेकिन अफसोस की बात है कि आपने १३ रेलवे स्टेशनों पर बंद कर दिया है कि यह अन-इकनामिकल हो गया है। यदि अन-इकनामिकल हो गया है तो कया किसानों को मारोगे? आखिर आप करना कया चाहते हैं? मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप अनर्गल बातें मत करें, किसान विरोधी काम न करें। किसानों को जीने का हक है। उन्हें भी जीने का साधन चाहिये। अध्यक्ष महोदय, मैंने जो थोड़ा बहुत ज़िक़ किया है, वे इसे समझें और किसानों के लिये जो कुछ कर सकते हैं, करें। मैं समझता हूं कि आपके दिल में थोड़ी भी बात जमेगी तो आप यह काम करेंगे।
श्री राजवीर सिंह (आंवला):माननीय अध्यक्ष महोदय, MR. SPEAKER: There is no time. I have called the Minister.
... (Interruptions) श्री राजवीर सिंह : अध्यक्ष जी, यदि आप मुझे नहीं बुलवाते हैं तो कोई और नहीं बोलना चाहिये, केवल मनिस्टर साहब को ही बोलना चाहिये।
MR. SPEAKER: We have to apply the Guillotine at 6.00 p.m, Shri Rajveer Singh.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand that there is no time.
... (Interruptions) एक माननीय सदस्य: आप हाउस एकसटैंड कर दीजिये। श्री भजनलाल (करनाल) : अध्यक्ष जी, आप हाउस आधा घंटा बढ़ा दें। कृषि का मामला बहुत जरूरी है।
MR. SPEAKER: Please understand that there is no time. Only ten minutes are left.
... (Interruptions) श्री राजवीर सिंह : अध्यक्ष जी.. श्री वीरेन्द्र सिंह (मिर्जापुर): अध्यक्ष जी, कृषि श्रमिकों का जो बिल है, वह बहुत जरूरी है, इस पर चर्चा जरूर होनी चाहिये।"> श्री राजवीर सिंह (आंवला): अध्यक्ष जी, उत्तम खेती, मध्यम बांध निखद चाकरी भीख निदान। यह हमारे एक कृषि कवि ने कहा है। पिछले ५० वषर्ों में हमारे किसानों की हालत इसके उलटी हो गई है। अध्यक्ष जी, हमारे माननीय प्रधानमंत्री और माननीय कृषि मंत्री ने जो बजट प्रस्तुत किया है, उसमें जिस तरीके से सारी व्यवस्था दी है, मुझे लगता है कि उसके हिसाब से ५० वषर्ों के बाद किसान फिर से उत्तम खेती की ओर बढ़ेगा। अभी दो साल पहले एक हम्बल फार्मर प्राईम मनिस्टर हुआ करते थे जो यहां आज शायद नहीं हैं। उनके समय में जो कृषि बजट आया था तो उसमें कृषि में १२ परसेंट की कटौती की गई थी। यहां पर उनके समर्थक बैठे हुये हैं। मगर हमारी सरकार ने, हमारे मंत्रिमंडल ने कृषि पर कितनी राशि बढाई है? कृषि के लिये १८०७ करोड़ रुपये से बढ़ाकर २८५४ करोड़ रुपया कर दिया गया है। कृषि और सहकारिता पर १२५१ करोड़ रुपये से बढ़कर १९४१ करोड़ रुपया कर दिया गया है। इसी प्रकार कृषि अनुसंधान कायर्ों पर ३३१ करोड़ से बढ़ाकर ५३१ करोड़ रुपया कर दिया गया है। मैं आगे भी बताना चाहता हूं लेकिन समय कम है इसलिये.... श्री भूपिन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक): आप आंकड़े मत बतायें, यह बतायें कि कितना बढ़ाया है? श्री राजवीर सिंह : आप बोलने देंगे तभी तो बताऊंगा। मैंने जाखड़ जी को बिलकुल नहीं टोका था मगर मुझे इस बात की खुशी है कि जाखड़ जी ने बिलकुल वहीं भाषण दिया जो किसी समय मैं उसी जगह से दिया करता था। यह बहुत अच्छी बात है। श्री मुरली देवड़ा (मुम्बई दक्षिण): शायद आपका पूरा भाषण इनको याद था। श्री राजवीर सिंह : मैं कृषि मंत्रालय की अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुये माननीय कृषि मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि जो भारतीय कृषि का बीम होना चाहिये। उसमें हर वर्ग का व्यकित कर्ज ले या न ले, सारी फसलों और जानवरों का बीमा कम्पलसरी करना चाहिये। यह सरकार से मेरी मांग है। फर्िटलाइज़र का मामला है। जाखड़ जी ने भी कहा और यह सही है कि यूरिया का अधिक इस्तेमार करने से हमारी खेती अनुपजाऊ होती जा रही है। उस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और किसानों को शक्षित करना चाहिए कि अगर अधिक यूरिया का इस्तेमाल करेंगे तो आपकी खेती खराब हो जाएगी। इसलिए बायो-फर्िटलाइज़र, हरी खेती, गोबर की खाद खेत में देनी चाहिए। पेट्रोलियम मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि अगर आप अच्छी खेती कराना चाहते हैं और आप अन्न की उपज बढ़ाना चाहते हैं तो जो एल.पी.जी कनेकशन आप शहरों में दे रहे हैं, उनको गांवों में दें जिससे गांव के लोग गैस पर रोटी पकाएं और गोबर की खाद बनाकर खेत में डालें। तब कृषि का उत्पादन बढ़ेगा।
... (व्यवधान)मंत्री जी मुझे धन्यवाद दे रहे हैं, मैं उनको धन्यवाद दे रहा हूं। पशुधन विकास के मामले में मैं ध्यान दिलाना चाहता हूं कि हमारे यहां फॉरॆन ब्रीड की बड़ी नकल की जा रही है। विदेशी गायों के बछड़े आसानी से तैयार नहीं होते हैं और वह किसी काम के नहीं होते हैं। उनसे हल नहीं चलता कयोंकि उनके कांटी नहीं होती। इसलिए भारत की जो नस्लें हैं उनको तैयार किया जाए और उनसे अच्छे बैल और बछड़े तैयार किये जाएं जो खेती के काम आएं।
वित्त मंत्री जी ने नाबार्ड को काफी पैसा देने की बात की है जिससे कृषि योजनाओं में सुविधा मिले, लोगों को क़ॆडिट कार्ड मिले, लोग उसके आधार पर जाएं। मैं उसके लिए उनका आभार प्रकट करता हूं किन्तु एक खतरे की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूं। जाखड़ साहब ने कहा कि लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। किसान ने आत्महत्या कयों की है? किसान को किस तरीके से गलत ढंग से आत्महत्या करने के लिए फंसाया गया है, मैं उसकी तरफ कृषि मंत्री जी और वित्त मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। अभी हजार, डेढ़ हजार किसानों ने आत्महत्या की है। अगर नीति को नहीं बदला गया तो लाखों किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे। नाबार्ड ऐसा संगठन है जो मल्टीनेशनल्स से और बड़े व्यापारियों से मिलकर सांठ-गांट करता है। उदाहरण के तौर पर मैं कहना चाहता हूं कि वॆस्टर्न इंडिया मैच कंपनी (विमको) माचिस बनाती है। उसकी सेमल की लकड़ी खत्म हो गई माचिस बनाने के लिए तो उसने पॉपुलर की खेती कराई। नाबार्ड से कर्जा दिलाया गया, एकतरफ़ा ऐग्रीमेंट हुआ। पॉपुलर के पेड़ नहीं खरीदे गए। आज लाखों किसान आर.सी. लिये घूम रहे हैं, हाई कोर्ड जा रहे हैं मगर उनको रिलीफ नहीं मिल रहा है। मैं आग्रह करना चाहता हूं कि इस मामले की सी.बी.आई. से जांच कराई जाए। वहां अंग्रेज़ी में एकतरफा ऐग्रीमेंट हुए और लाखों किसान भुखमरी के कगार पर खड़े हैं। अगर यह होगा तो किसान स्वयं ही आत्महत्या करने पर मजबूर होगा। जो पुरानी सरकारों का पाप है, इससे आप जनता और किसानों को छुटकारा दिलाएं। श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): जिस कंपनी को सुविधा दी गई, उसको वापस करें। श्री राजवीर सिंह : मैं भी यही कह रहा हूं। पॉपुलर का एक पौधा जिसकी कॉस्ट दो रुपया आती थी, ८० रुपया उस कंपनी ने उसका चार्ज लिया। नतीजा यह हुआ कि उसकी खेती भी नहीं खरीदी गई। वह पेड़ जलाने के काम आया और इन्होंने ८० रुपये पेड़ के हिसाब से अरबों रुपया बना लिया और वह कंपनी बंद कर दी। विमको ने व्यवस्था समाप्त कर दी। सारे लोग वापस चले गए। अब किसानों को कोई सुविधा देने वाला नहीं है। यह नाबार्ड ने किया है।
... (व्यवधान)यह पिछली सरकारों की भूल और षडयंत्रों का परिणाम है। मैं चाहूंगा कि मंत्री जी इस पर विशेष ध्यान दें। वित्त मंत्री जी से विशेष आग्रह है कि इस पर कुछ व्यवस्था दें नहीं तो किसान बहुत मजबूर हो जाएगा। अध्यक्ष जी, खेती की सिंचाई के साधनों की व्यवस्था करने के लिए केन्द्र सरकार ने बहुत कुछ किया है। मैं जिस क्षेत्र से चुनकर आता हूं, श्री मुलायम सिंह जी जानते हैं, वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रह चुके हैं, बदायूं जिला से चुनाव जीते हैं, सहसवान से एम.एल.ए. का चुनाव लड़े हैं। पूरा बदायूं जिले में एक इंच भी कैनाल नहीं है और टयूबवैल बनाने के लिए सरकार ने रोक लगा दी है, ग्रे और टार ब्लॉक कर दिये गये हैं, बोरिंग हो नहीं सकती। टयूबवैल बोरिंग करने के लिए सरकार लोन नहीं देती और पानी दो सौ, ढाई सौ फीट नीचे जा रहा है। वहां की हालत के बारे में मैंने पिछली बार भी कहा था, मैं इस बार भी आग्रह कर रहा हूं, यहां बहुत से मंत्री जी बैठे हुए हैं। मेरी एक मांग है कि अगर पूरे बदायूं जिला और पूरे आंवला तहसील की खेती को जिंदा रखना है, वहां के किसानों को जिंदा रखना है, वहां की खेती की उपज को बढ़ाना है तो नरौरा डैम से फर्रूखाबाद तक एक बड़ी कैनाल निकाली जाए। हम रामगंगा और बड़ी गंगा, दो गंगाओं के बीच में रहते हैं, यह इलाका दोनों की बाढ़ के अभिशाप को झेलता है, लेकिन इसको सिंचाई की सुविधा नहीं है।
MR. SPEAKER: Please wind up. The Minister has to give reply. श्री राजवीर सिंह : मैं एक अनुशासित मैम्बर हूं, अगर मैं श्री मुलायम सिंह जी या लालू जी की तरह होता तो बोलता रहता।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not provoke them. श्री राजवीर सिंह : लेकिन मैं अनुशासित सांसद हूं, पार्टी का और आपका डसप्िलन है, इसलिए मैं इन्हीं शब्दों के साथ बजट की अनुदान मांगों का समर्थन करता हूं।
(ends) MR. SPEAKER: Now, the Minister will speak.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: There is no time. At six o'clock, we have to guillotine the demands. श्री ओमप्रकाश (गाज़ीपुर) : अध्यक्ष महोदय, यह विषय बहुत संवेदनशील है तथा देश के जन-जीवन से जुड़ा हुआ है। कृपा करके इस पर अतरिकत समय देकर हमारी बात को सुना जाए। ... (व्यवधान)इस देश में ७६ फीसदी आबादी किसानों की है।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please understand that there is no time. How can I accommodate you? ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, the Minister will speak. कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री सोमपाल): छ: बजे गिलोटिन होना है, आप बोलिये या मत बोलिये। ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please understand that there is no time.
... (Interruptions) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): यह सरकार किसानों की दुश्मन है, यह अपने कारनामों से साबित करे कि यह दुश्मन नहीं है। इसने खाद की कीमत बढ़ाई और बहुत जद्दोजहद के बाद आठ आना प्रति किलो दोबारा से घटाई। ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Raghuvansh Prasad Singh, please understand that there is no time. You are in the panel of Chairmen. ... (Interruptions) प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (पटियाला) : यह दुख की बात है कि आज का सारा दिन वीमेन्स रिजर्वेशन बिल पर विरोधाभास में खत्म हो गया ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please take your seat. Please understand that there is no time. How can I accommodate you? At six o'clock, we have to guillotine the demands. You please understand that. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Raghuvansh Prasad, please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, the Minister will speak.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats. There is no time.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Raghuvansh Prasad Singh, please take your seat.
... (Interruptions)MR. SPEAKER: Now, the Minister will speak.
">SHRI SOMPAL: Mr. Speaker, Sir, I think that we have to make it clear to them that six o'clock is the last hour for this. At six o'clock, guillotine will be applied whether I speak or do not speak. अध्यक्ष महोदय, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जिस प्रकार का घटनाक़म पिछले तीन-चार दिन में सदन में हुआ है, कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषय पर, जिस पर सभी पूरे सदन के सभी पक्षों और दलों ने सहमति दी है, जिसके लिए कहा जाता है कि यह देश की रीढ़ की हड़डी है, उसकी चर्चा इस सदन में नहीं हो पाई। केवल माननीय जाखड़ साहब कुछ समय बोल पाये और जिस चीज की आशा उनसे इस वातावरण में की जाती थी, वे और श्री राजवीर सिंह जी कैसा बोल पाये, यह मैं देख रहा था। केवल पांच मिनट बाकी है। मैं कहना चाहता हूं कि कृषि की नीति, इसके प्रशासन, इसकी प्राथमिकता, इसकी योजनाओं, उनके कार्यान्वयन सबके विषय में पूरे चिंतन और पूरे कार्यक़म में आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है। अध्यक्ष महोदय, जहां तक इस बजट का सवाल है, कयोंकि यह बजट की अनुदान की मांगों पर बहस हो रही है इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि ५८ प्रतिशत की व्ृाद्धि योजना आबंटन में करके हमारी सरकार ने एक रिकार्ड स्थापित किया है। एक वर्ष ऐसा भी था, पिछले से पिछला वर्ष, जिसमें एक गरीब किसान के बेटे के प्रधानमंत्रित्व काल में उससे पिछले वर्ष के अनुपात में १२ प्रतिशत कटौती की गई थी। गरीब किसान के प्रधानमंत्रित्व काल में पिछले वर्ष के बजट के मुकाबले उस साल १२ प्रतिशत कमी कर दी गई। हमने ५८ प्रतिशत योजना व्यय में और ३८ प्रतिशत कुल कृषि आबंटन की मद में व्ृाद्धि की गई है।
... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव : सारा आंकड़ों का जाल है। श्री सोमपाल: बजट आंकड़ों से ही चलता है। बात से नहीं चलता। इसमें हमेशा रकम का ही काम होता है। ऐसा बजट बनाना मुझे मुलायम सिंह जी से सीखना पड़ेगा जिसमें आंकड़े न हों। बजट में तो सारा आंकड़ों का ही काम है। कोई ऐसी नई तरकीब ढूंढ़नी पड़ेगी जिसमें बजट बनाते समय आंकड़ों की जरूरत न पड़े। यही तो आपके साथ दिककत है। अध्यक्ष महोदय, जहां तक जाखड़ साहब ने कृषि ऋण की बात कही, यह बात सर्वमान्य और सर्ववदित है कि भारत की कृषि पूंजी के अभाव से ग्रस्त रही है।
It is a clear-cut case of capital starvation. और उसका उपाय भी यही है कि कैपीटल और पूंजी उसमें ज्यादा लगाई जानी चाहिए।
... (व्यवधान)इतने वरिष्ठ माननीय सांसद से ऐसी आशा नहीं की जाती है कि वे रनिंग कमेंट्री करें। माननीय मुलायम सिंह जी रनिंग कमेंट्री कर रहे हैं। मैं कैसे बोल पाऊंगा। मैं कभी किसी के बीच में नहीं बोलता हूं और न किसी को टोकता हूं। मैं मुलायम सिंह जी का बहुत आदर करता हूं। अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि ५०० करोड़ रुपए की राशि नाबार्ड, राष्ट्रीय कृषि विकास बैंक की पूंजी बढ़ाने के लिए, ग्रामीण आधारभूत ढांचे के कोष में ढाई से तीन हजार करोड़ रुपए किया जाना, अतरिकत सिंचाई का लाभ लेने के लिए १५०० करोड़ रुपए का आबंटन, ग्रामीण क्षेत्रीय विकास बैंक के लिए २६५ करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है। ये सारी चीजें दर्शाती हैं कि हमारी प्रतिबद्धता है और हम ६० प्रतिशत धन ग्रामीण कृषि विकास के आबंटन के लिए प्रतिबद्ध हैं और उस दिशा में हमने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जहां तक कृषि नीति की बात है, डा. जाखड़ ने बहुत महत्वपूर्ण बिन्दु उठाए हैं। डा. जाखड़ बहुत लंबे समय तक मंत्री रहे हैं और उन्होंने जितना भी विलाप और प्रलाप किया, उस सारे का उत्तरदायित्व उनकी ४०-४५ साल तक रही सरकारों का है जिन्होंने इस देश का शासन चलाया और उन्होंने सारी विकृतियां पैदा कर के कृषि को इस स्थान पर ले आईं। आप मुझसे बहुत ताने दे-दे कर पूछ रहे थे कि कितना आबंटन किया है, कितना देंगे मैं बताना चाहता हूं कि अगर योजना के आबंटन की बात करें तो दूसरी पंचवर्षीय योजना के बाद पूरे योजना के संसाधन का जितना आबंटन हुआ उसमें अनुपात के रूप में बराबर गिरावट आई है। सारे आंकड़े देख लीजिए। रीयल टर्मस में गिरावट आती रही है। पूंजी वनिर्माण कम हुआ है।
something on the Crop Insurance Scheme. There is only one minute left for the Guillotine to be applied.
SHRI SOMPAL: Sir, I have already taken a decision to introduce a Crop Insurance Scheme which will be applicable to the whole of India and all farmers irrespective of the amount, irrespective of landholdings. This historic decision has been taken for the first time and it is being implemented from this very year.
With these words, I conclude my speech.
MR. SPEAKER: I shall now put all the cut motions moved to the Demands for Grants relating to the Ministry of Agriculture to the vote of the House together, unless Shri Basu Deb Acharia desires that any of his cut motions may be put separately.
All the cut motions were put and negatived.
MR. SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants relating to the Ministry of Agriculture to the vote of the House.
The question is:
"That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 1999, in respect of the heads of demands entered in the second column thereof, against Demand Nos.1 to 4 relating to the Ministry of Agriculture."
18.00 hrs. MR. SPEAKER: I shall now put the outstanding Demands for Grants relating to the Ministries/Departments to vote. The question is:
"That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the Fourth column of the Order paper be granted to the President, out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 1999, in respect of the heads of demands entered in the second column thereof against:
Demands Nos. 5 to 28, 30, 31, 33 to 60, 62 to 93, 95, 96, 98.
(1) Demand Nos. 5 and 6 relating to Ministry of Chemicals and Fertilisers. (2) Demand Nos. 7 and 8 relating to Ministry of Civil Aviation and Tourism. (3) Demand Nos. 9 to 11 relating to Ministry of Food and Consumer Affairs. (4) Demand No. 12 relating to Ministry of Coal.
(5) Demand Nos. 13 and 14 relating to Ministry of Commerce.
(6) Demand Nos. 15 and 16 relating to Ministry of Communications. (7) Demand Nos. 17 to 23 relating to Ministry of Defence.
(8) Demand No. 24 relating to Ministry of Environment and Forests. (9) Demand No. 25 relating to Ministry of External Affairs. (10) Demand Nos. 26 to 28, 30, 31, 33 to 38 relating to Ministry of Finance. (11) Demand No. 39 relating to Ministry of Food Processing Industries. (12) Demand Nos. 40 to 42 relating to Ministry of Health and Family Welfare. (13) Demand Nos. 43 to 47 and 99 to 103 relating to Ministry of Home Affairs. (14) Demand Nos. 48 to 51 relating to Ministry of Human Resource Development. (15) Demand Nos. 52 to 55 relating to Ministry of Industry.
(16) Demand Nos. 56 and 57 relating to Ministry of Information and Broadcasting. (17) Demand No. 58 relating to Ministry of Labour.
(18) Demand Nos. 59, 60 and 62 relating to Ministry of Law and Justice. (19) Demand No. 63 relating to Ministry of Mines.
(20) Demand No. 64 relating to Ministry of Non-Conventional Energy Sources. (21) Demand No. 65 relating to Ministry of Parliamentary Affairs. (22) Demand No. 66 relating to Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions. (23) Demand No. 67 relating to Ministry of Petroleum and Natural Gas. (24) Demand Nos. 68 to 70 relating to Ministry of Planning and Programme Implementation. (25) Demand No. 71 relating to Ministry of Power.
(26) Demand Nos. 72 to 74 relating to Ministry of Rural Areas and Employment. (27) Demand Nos. 75 to 77 relating to Ministry of Science and Technology. (28) Demand No. 78 relating to Ministry of Steel.
(29) Demand Nos. 79 to 81 relating to Ministry of Surface Transport. (30) Demand No. 82 relating to Ministry of Textiles.
(31) Demand Nos. 83 to 86 relating to Ministry of Urban Affairs and Employment. (32) Demand No. 87 relating to Ministry of Water Resources. (33) Demand No. 88 relating to Ministry of Welfare.
(34) Demand Nos. 89 and 90 relating to Department of Atomic Energy. (35) Demand No. 91 relating to Department of Electronics.
(36) Demand No. 92 relating to Department of Ocean Development. (37) Demand No. 93 relating to Department of Space.
(38) Demand No. 95 relating to Rajya Sabha.
(39) Demand No. 96 relating to Lok Sabha.
(40) Demand No. 98 relating to Secretariat of the Vice-President."
The motion was adopted.