Lok Sabha Debates
Discussion On The Financial Health Of Indian Airlines And Air India And Purchase ... on 17 December, 1999
Title: Discussion on the Financial Health of Indian Airlines and Air India and purchase of Aircraft. Raised by Shri Kirit Somaiya and points arising out of answers given by the Minister of Civil Aviation on 09.12.1999 to starred question Nos. 161 and 177 respectively.
17.32 hours MR. CHAIRMAN: The House will now take up the Half-an-hour discussion. Shri Kirit Somaiya.
श्री किरीट सोमैया (मुम्बई उत्तर-पूर्व) : सभापति महोदय, इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया की वर्िकंग के बारे में आधे घंटे की चर्चा पर मैं बोलने जा रहा हूं। एक सप्ताह पहले इस सदन में जो चर्चा हुई इन दोनों एयरलाइन्स की आर्िथक परस्िथति के बारे में, उसमें महत्व के कुछ बिन्दु उठाए गए। उसमें सबसे पहला महत्व का मुद्दा यह रहा कि जब तक डोमेस्िटक ओपन स्काइ एयर पॉलिसी नहीं थी, तब तक मोनोपोली थी और उस मोनोपोली के कारण इंडियन एयरलाइन्स १९९३-९४ तक प्रॉफिट में थी। लेकिन एक बार जब ओपन एयर स्काइ पॉलिसी घोषित हो गई और प्राइवेट एयरलाइन्स ने हमारे यहां प्रवेश किया तो कंपीटीशन के कारण, थोड़ी इनइफेकिटवनेस के कारण, ओवरस्टाफ के कारण और पूअर मैनेजमेंट के कारण इंडियन एयरलाइन्स का घाटा बढ़ता गया। १९९३-९४ में २५८ करोड़ से लेकर १९९५-९६ में १०९ करोड़ का घाटा हुआ। मैं माननीय मंत्री महोदय से यही प्रार्थना करना चाहूंगा कि इंडियन एयरलाइन्स या एयर इंडिया का जो लॉस हुआ है, उसके कारण वह सदन को बताएं। एयर इंडिया की परस्िथति उससे अलग नहीं है। एयर इंडिया का घाटा १९९५-९६ से २७२ करोड़ से लेकर हर साल बढ़ते-बढ़ते १९९८-९९ में १७४ करोड़ हो गया। उसका कारण यही है कि इंडियन एयरलाइन्स की मोनोपोली थी , लेकिन बाहर के देशों में जाने के लिए बाहर की एयरलाइन्स भी यहां उपलब्ध थी और हमारी एयरलाइन्स उनसे कंपीटीशन नहीं कर पा रही थीं। कया उसमें सुधार करने का शासन प्रयत्न करेगा? २२ हजार लोगों का स्टाफ है। मुझे तो यह सुनकर ताज्जुब हुआ कि वायुदूत की सेवाएं बंद कर दी गई, उसके बदले में एलाइंस एयर शुरू की गई। वायुदूत के एक हजार कर्मचारियों को अकोमोडेट करने के लिए एलाइंस एयर का नाम दिया गया। एलाइंस एयर ने ७४० कर्मचारी रखे। लेकिन ७४० मे से सिर्फ ४० कर्मचारी इंडियन एयरलाइंस, एयर इंडिया या वायुदूत की डेपुटेशन पर रखे। सात सौ कर्मचारी टोटली बाहर से लिये गये हैं। कया इसके बारे में चर्चा होगी? इसके कया कारण हैं। मेरे सहयोगी साथी मित्र श्री राजीव जी ने उस दिन बहुत डीटेल में बताया कि सात सौ लोग कौन हैं, ये किसके रिलेटिव्ज हैं, इन्हें कौन से आधार पर कांट्रैकट दिया गया है, कौन से आधार पर इस प्रकार के नये-नये इम्पलायमैंट नये-नये लोगों को दिये गये हैं। एक ओर जो वायुदूत के एक हजार कर्मचारी हैं, वे ऐसे के ऐसे बैठे हैं, उनके पास काम नहीं है। उन्हें हम सरकारी दामाद की तरह पैसा दे रहे हैं, तनख्वाहें दे रहे हैं और दूसरी ओर सात सौ का नया स्टाफ है। इस परस्िथति में कया होगा, लॉस बढ़ेगा। सभापति महोदय, मैं एक और परस्िथति की तरफ ध्यान दिलाना चाहूंगा। एयर इंडिया, इंडियन एयरलाइंस होटल कारपोरेशन चलाते हैं। सैन्टूर होटल चलाते हैं। मुझे समझ में नहीं आता है कि होटल चलाने का काम सरकार कब बंद करेगी। सरकार का काम होटल चलाना नहीं है। कभी हम इस बारे में निर्णय लेंगे या नहीं। हमने कल और आज डिसइंवैस्टमैंट पॉलिसी पर चर्चा की। हम कोर सैकटर की इंडस्ट्रीज को बेच रहे हैं और जो हमारे गले में फंदा पड़ा हुआ है उससे छुटकारा पाने की हम हिम्मत नहीं कर रहे हैं। मैं माननीय मंत्री जी से कहूंगा कि आज नहीं तो कभी न कभी हमें इस विषय पर सोचना चाहिए। होटल चलाना हमारा काम नहीं है। होटल्स भी इसी प्रकार ओवर स्टाफ हैं। उन्हें इतनी प्राइम प्रोपर्टीज सरकार से मुफत में फ्री ऑफ चार्ज मिलती है। उन्हें लैंड की कीमत नहीं देनी पड़ती है। जबकि प्राइवेट होटल्स फाइव स्टार से लेकर सबको उन्हें इतनी लैंड रीयल ऐस्टेट के प्राइस देने के बावजूदThey are able to compete with Centaur or other hotels. इसके बारे में विचार करने की अत्यंत आवश्यकता है। मैं मानता हूं कि कोर सैकटर में सरकार का इनवोल्वमैंट होना चाहिए। लेकिन अनेक बार यह रीजन दिया जाता है कि इंडियन एयरलाइंस के ऊपर सोशल कमिटमैंट है। उन्हें कई ऐसे रूटस चलाने पड़ते हैं जो ग्रामीण भागों के इंटरनल पार्टस में पड़ते हैं। लेकिन एयर इंडिया के ऊपर कोई दबाव नहीं हैI can understand if it is the case of Indian Airlines, but what happened to Air India? इसके लिए जो रीजन्स दिये जाते हैं, इस प्रकार के जो सभी कारण हैं, उसमें कुछ दम दिखायी नहीं देता है। वास्तव में इसके लिए केलकर कमेटी अपाइंट की गई थी। केलकर कमेटी ने रिपोर्ट दी कि दो हजार करोड़ और नये डालो। यह पैसा कहां से आयेगा, कौन लायेगा, कब आयेगा, नये एयरक़ाफटस कहां से आयेंगे। एक ओर हमारी सविल एवियशन मनिस्ट्री कहती है कि दो हजार करोड़ नये लायेंगे, एक हजार करोड़ लायेंगे, हमने केन्द्र सरकार को कहा है। दूसरी ओर से केन्द्र सरकार का दूसरा अंग फाइनेन्स मनिस्ट्री कहती है,They say that they are not going to give even a single paisa. कया इस बारे में कोई कलैरिटी आयेगी? जो बीमार कंपनी हैं उन्हें कौन पैसा देगा, बाजार में कर्जा भी नहीं मिलेगा। अगर वह आयेंगे तो उसके शेयर भी कोई सब्सक़ाइब नहीं करेगा। एक ओर हम कहते हैं कि ३६४ करोड़ हमें इकिवटी कैपिटल बढ़ाने के लिए सैंट्रल गवर्नमैंट ने अनुमति दी है और दूसरी ओर सैंट्रल गवर्नमैंट का चौथे दिन एनाउंसमैंट फाइनैन्स मनिस्ट्री से आता हैHe says that he is not going to share even a single paisa. एक ओर हम कहते हैं कि इंडियन एयरलाइंस के विमान पुराने हो गये हैं। एलाइंस एयर के जो १२-१४ प्लेन्स हैं, वे कहां से लिये हुए हैं, उनमें से कौन सा प्लेन कब बैठ जाता है और कौन सा प्लेन कब चलता है, पता नहीं चलता है। दूसरी ओर हम कहते हैं कि कम्पीट करे। मैं वास्तव में एक ऐसा सुझाव देना चाहता हूं कि इसकी टोटली रीप्लानिंग होनी चाहिए। आज हम जब डिसइंवैस्टमैंट के जमाने में जा रहे हैं, प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैंCan the Government not think about a joint venture with some professionally efficient company? कया इसके बारे में सरकार के पास ऑफर्स आये हैं। फिर चाहे वह ब्रटिस एयरवेज हो, ब्रिटेन की कम्पनी हो या कोई अन्य कम्पनी हो, सरकार इस बारे में खुले दिल से विचार करे, ओपन बडिंग मंगाये और प्रोफेशनल मैनेजमैंट लाये। आज एयर में जब हम कम्िपटीशन के जमाने में जायेंगे तो हमें टोटली ओपन करना पड़ेगा। सभापति महोदय, जब हम टोटल खुला आकाश कर देंगे, उस समय एयर इंडिया के जो आज पांच रुपए मिल रहे होंगे, तो उस समय ५० पैसे भी नहीं मिलेंगे।You have to choose the appropriate time. अगर जाइंट वैंचर में काम करना है, कलैबोरेशन करना है, तो अभी करें। यदि दो-तीन साल के बाद करेंगे, तो वे बोलेंगे-Why? It is a dead elephant. उस समय हमें आज से भी ज्यादा लॉस होगा। यदि आज १२०० करोड़ रुपए का एकयुमुलेटेड लॉस को सहन कर के एयर इंडिया नया प्लान लाने की बात करती है, तो कुछ सालों के बाद तो कोई बात भी नहीं करेगा। सभापति महोदय, एक रिप्लाई दिया गया कि कया सेंट्रल वजिलेंस कमीशन ने एयर इंडिया को यह कहा था कOnly the lowest bidder should be allowed. एयर इंडिया ने दूसरे बिडर के साथ बातचीत चालू की थी या नहीं, जवाब बहुत गोलमोल मिला कि हम सेंट्रल वजिलेंस कमीशन का आदेश मान रहे हैं।Have you started a dialogue with the other bidder? Why have you started a dialogue? Why did you not accept the lowest bidder. हो सकता है कि लोएस्ट बिडर दूसरी कंपनी के प्रपोजल ज्यादा अट्रैकिटव हों। इसलिए मेरी आपके माध्यम से प्रार्थना है कि एयर इंडिया और इंडियन एयर लाइन्स का एलाइंस होना चाहिए। इस बारे में सोचना चाहिए। जब आप अन्य देशों की तुलना करते हैं तो एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स चूंकि लॉस में जाती हैं इसलिए तुलना में हम पाते हैं कि प्राईवेट एयर लाइन्स बहुत मुनाफे में चल रही हैं। जैट एयरवेज जो प्राईवेट है काफी मुनाफा कमा रही है और जो एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस हैं जिनकी बैकिंग काफी मजबूत है, जिनको भारत सरकार सपोर्ट कर रही है उनमें लास है। सर, मैं अन्त में इतनी ही प्रार्थना करूंगा कि इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया की आर्िथक हैल्थ सुधारने के लिए यह आवश्यक है कि इनको मिलाया जाए कयोंकि ये देश की अर्थ व्यवस्था पर बहुत बोझ है। इसलिए इनकी दशा सुधारने के लिए शासन पुनर्िवचार करे, यही मेरी प्रार्थना है।"> प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : मान्यवर सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से यही अनुरोध करना चाहूंगा कि इंडियन एयर लाइन्स और एयर इंडिया, वैसे तो दोनों हमारे देश की बहुत प्रतिष्ठापूर्ण कंपनियां रही हैं और अब इनको हमने लमिटेड भी बना दिया है ताकि धन वगैरह जुड़ सके, लेकिन चाहे हमारे विमान पत्तन की सुविधाएं हों, उड़ानों का मामला हो, चाहे पुराने विमानों का मामला हो, उनके मैंटिनेंस और देखरेख का मामला हो या आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों की भर्ती का मामला हो यानी ओवर स्टाफ का मामला हो, अथवा पूअर मैनेजमेंट वाली बात हो, इन सारी बातों के अंदर आज जब हम विकसित देशों से तुलना करते हैं, तो पाते हैं कि विकसित देशों के विमानों और वहां पर उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं की तुलना में हम आज भी बहुत पीछे हैं। अत: मैं मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि अनेक प्रयास करने के बावजूद भी पिछले वषर्ों में इनकी सारी सुविधा सुधारने के बावजूद भी हम आगे कयों नहीं बढ़ पाए हैं और इसके पीछे मूल कारण कया रहे हैं? कया इनकी जांच करना चाहेंगे और इसी से जुड़ा हुआ सवाल ओवर स्टाफिंग का है। यहां जो कामर्शयल पायलटस हैं, लाइसेंस होल्डर्स हैं और जो इंडियन एयर लाइन्स की नौतरियां छोड़कर जा रहे हैं, उन्हें एयर इंडिया में नौकरी प्रदान कर दी गई, यह जो बैकडोर एंट्री की गई है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और कया उनके खिलाफ कार्रवाई करना चाहेंगे? इन्हीं शब्दों के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि नैशनल डैमोक़ेटिक एलाइंस की सरकार आई है और आज जब वैश्वीकरण, भूमंडलीकरण और खुला बाजार की चर्चाएं हो रही हैं, तो प्राइवेट जो उड़ान कंपनियां हैं, उनके मुकाबले हमारे यहां राष्ट्रीय महत्व और प्रतिष्ठा के मापदंड पूरा करने वाली इंडियन एयर लाइन्स घाटे के अंदर नहीं रहे और लाभ के लिए काम करे, इसके लिए कौन से कदम उठाना चाहेंगे? धन्यवाद।
"> ">श्री राजीव प्रताप रूडी (छपरा) सभापति महोदय, पिछले प्रश्नोत्तर काल के दौरान इस विषय को आधे घंटे की चर्चा में लाया गया है कयोंकि बहुत सारे मुद्दे ऐसे उठ गए जिन पर मंत्री जी का जवाब वांछित था।"> ">उस दिन एलांइस एयर पर चर्चा हुई थीं और माननीय मंत्री जी ने जांच बैठाकर सभी बिन्दुओं पर प्रकाश लाने का आश्वासन दिया था। हमारे मित्र किरीट सौमेया जी ने भी इस विषय में जानकारी लेनी चाही थी।"> ">मैं इस संदर्भ में अधिक कुछ नहीं कहना नहीं चाहूंगा लेकिन इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया की गतवधियों पर चर्चा करना चाहूंगा। साथ-साथ कुछ सवाल आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के सामने रखना चाहूंगा। इस देश में जब हम लोगों ने पब्िलक सैकटर आर्गनाईजेशन्स की शुरुआत की थी, तो हमारा उद्देश्य था कि भारत सरकार ऐसी बड़ी-ब्रड़ी कम्पनियों में पूंजीनिवेश करे और ये कम्पनियां आय अर्िजत करके देश के उस खजाने में जमा करें और इस बिजनेस को कारगर बनायें।"> ">एयर इंडिया की स्थापना के बाद, पिछले ४७ वषर्ों में ३७ वर्ष एयर इंडिया प्रॉफिट करता रहा लेकिन पिछले पांच वर्ष में न जाने कौन से, किस प्रकार के निर्णय लिये गये, या यह हो सकता है कि पिछले १०, १२, १४ वर्ष के शासन में जो निर्णय लिये गये, जिससे कि उसका कॉरपस फंड था, जो उसकी कमाई थी, जो एयर इंडिया में प्रॉफिट का विषय था, वह आहिस्ते-आहिस्ते खत्म होता गया। उदाहरणस्वरूप जब कैरीबियन जैट के लीज का सवाल आया, तो जब इस देश में प्रॉफिटेबल रूटस थे, उस समय वेज लीजिंग करके बहुत सारे कैरीबियन जैटस को इस देश में लाया गया और उसमें कोई एग्िजट कलाज नहीं था कि अगर इस कांट्रेकट को टर्िमनेट करेंगे तो उसका परिणाम कया होगा? जब सरकारें बदली तो उस कांट्रेकट को टर्िमनेट कर दिया गया और एयर इंडिया जो घाटे का विषय पहले ही था, उस पर १०० करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया गया।"> ">ऐसी कई घटनाएं हैं, जो इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के इतिहास में घटती रहीं हैं कयोंकि यह एक ऐसा माहौल है जिसमें सामान्यतः सामाजिक व्यकितयों का हस्तक्षेप नहीं होता। ये दोनों विभाग ऐसे हैं जिसमें प्रशासन वर्ग और कुछ महत्वपूर्ण लोगों की भूमिका होती है। माननीय मंत्री जी आये हैं। इनको एयर इंडिया विरासत में मिला है जो घाटे में है। इनको विरासत में मिला है इंडियन एयरलाइन्स, जो कि विवादों में घिरा है। नश्िचत रूप से जितनी संभावनायें हैं, उनके बीच में वे कार्य करने का प्रयास करेंगे।"> ">सभापति जी, एयर इंडिया ने अपने स्टाफ की आयु सीमा ६० से घटाकर ५८ साल कर दी। यह अच्छा निर्णय था। इसके पश्चात् इंडियन एयरलाइन्स में भी यह प्रस्ताव चल रहा था। मैं समझता हूं कि इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया का ढांचा, एक तरफ बहाली में रोक लगाये, वह ठीक है लेकिन वषर्ों से उसमें प्रमोशन दे-देकर ऊपर का ढांचा भारी हो गया है। जो नीचे का ढांचा है, जहां पर नट-बोल्ट, कुर्सी लगाने, सफाई करने से लेकर जो उसकी मैनटेनैंस के एग्जीकयूटिव कैडर हैं, जो कार्यकर्तता श्रेणी के हैं, उनकी कमी होती जा रही है। इसमें जब तक समन्वय स्थापित नहीं किया जायेगा तब तक किसी भी एयरलाइनन्स को ठीक ढंग से चलाना संभव नहीं होगा। इसमें विशेष बात यह रखना चाहूंगा कि इंडियन एयरलाइन्स के भीतर जो ऊपर का स्ट्रकचर है, उसमें कहीं न कहीं प्रूनिंग की बड़ी आवश्यकता है। मुझे पता चला कि इसमें ३७ डायरेकटर्स हैं कोई डायरेकटर मैडिकल सर्िवसेस है, उसके नीचे मात्र ४० डाकटर हैं और साल भर में लाखों रुपये उनके वेतन पर खर्च किया जाता है। फिर पता चला कि डायरेकटर, पब्िलक ग्रीवैंसेस और इस प्रकार के तमाम डायरेकटर्स हैं - कहीं न कहीं पूरी व्यवस्था में कभी न कभी किसी व्यकित को औब्लाइज करने के लिए उन पदों को क़िएट किया गया।"> ">महोदय, जब प्राइवेट एयरलाइन्स इस देश में आयी, तो लोगों ने हल्ला करना शुरू कर दिया कि कम्पीटिशन बढ़ रहा है। कम्पीटिशन बढ़ा तो दूसरी एयरलाइन्स में पायलटस का वेतन बढ़ा। इस वजह से वे भागे। इस तरह की जब घटना घटी तो इन लोगों ने प्रोडकिटविटी लिंकड इन्सेंटिव क़िएट किया। जितनी तन्खवाह आज मिलती है, उसका दुगना हिस्सा पी.एल.आई. लेकर इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया में जाते हैं। हमें कोई आपत्ित नहीं है कि आप अच्छा काम करके अधिक तन्खवाह लें। लेकिन एक तरफ जब आपकी पूरी व्यवस्था घाटे की चल रही है, तो आप ऐसी योजनाओं को देकर, उस पे पैकेटस को बढ़ाकर कया आप इस देश की अर्थव्यवस्था के साथ न्याय कर रहे हैं? कया यह उचित होगा कि जिस माहौल में आज पूरा परिवेश है, अगर आप अच्छा धन कमाते हैं, अपने कॉर्पस में अच्छा धन लाकर देते हैं, इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया को प्रॉफिट में ले जाते हैं तो नश्िचत रूप से हमारे जैसे लोगों को कोई कठिनाई नहीं है कि आपको अधिक वेतन दिया जाये।"> ">महोदय, मैं एक-दो उदाहरण इसलिए देना चाहूंगा कयोंकि इसमें बहुत सारे मुद्दे हैं। एयर इंडिया का नेट वर्थ एक समय १३७५ करोड़ रुपये था जो आज इरोड होते होते ३०० करोड़ रुपये हो गया। आखिर इस पूरी व्यवस्था में किसी की ऐकाउंटेबलिटी तो होगी। मैं दो-तीन विषय आपके सामने रखना चाहूंगा कयोंकि माननीय मंत्री जी इस पूरे विभाग की परस्िथतियों से आहिस्ते-आहिस्ते अवगत हो रहे हैं। मैं साधारण सी इंडियन एयरलाइंस की कहानी आपको बता दूं। आज से एक महीने पहले एक घटना घटी थी। एक पायलट ने एक जहाज को हैदराबाद में नौ घंटे तक खड़ा रखा।"> ">अगर एक नेता किसी जहाज को रोकता है और उसमें पांच मिनट भी विलंब हो, तो जहाज में बैठे हुए सारे पैसेंजर्स कहते हैं कि नेता के लिए जहाज रोक लिया लेकिन इंडियन एयरलाइन्स के पॉयलट ने हैदराबाद में एक जहाज को नौ घंटे रोके रखा और बंबई से क़ू जाकर उस जहाज को रिलीज़ करता है - कया इस आज़ाद भारत में इस प्रकार की घटनाओं को हम ऐलाउ कर सकते हैं? कया इतना बड़ा जो इस तरह का प्रशासनिक अपव्यय होता है, उसे बर्दाश्त किया जा सकता है? देश के तमाम लोग चाहते हैं कि जितनी ऐसी संस्थाएं हैं, उनकी स्िथति अच्छी और मज़बूत हो।"> एयरपोर्ट पर एक बड़ी अप्रिय घटना हुई जब आठ साल की एक बटिया ऐस्केलेटर में क़श होकर मर गई। मैं पूछना चाहूंगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है? नश्िचत रूप से माननीय मंत्री जी इसके लिए जिम्मेदार हैं, वह व्यवस्था जिम्मेदार है जिन लोगों ने उस बोल्ट को खुला छोड़ा था। इतनी दर्दनाक घटना थी। यह हादसा किसी के साथ भी हो सकता है। पूरे विश्व के पैमाने पर लोग इस घटना को देखते होंगे, टूरिस्टस इस घटना को देखते होंगे, आने वाले लोग इस घटना को देखते होंगे। इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यकितयों को ढूंढना होगा। इस वर्क कल्चर को इम्प्रूव करना होगा, जो निजी संपत्ित को देश की संपत्ित समझकर इस देश के लिए उसे तैयार करें। मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि यह संस्था आपके लिए नयी है। मैंने पिछली बार भी कहा था कि धरती से जुड़े आदमी को आसमान की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन नश्िचत रूप से अंग्रेज़ी की गिट-पिट से हटकर यह विभाग आपको मिला है। आप सदन को अपने साथ लेकर आने वाले दिनों में इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया को पांच वषर्ों की अवधि में देश का सबसे प्रमुख संस्थान बना देंगे।... (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : You cannot make a speech. You can ask a question. I apprise the Member that under the rules, you can ask a question for elucidation of further facts.
SHRI RAJIV PRATAP RUDY (CHHAPRA): That is there. What happens is that this issue is an emotional issue. The matter is so important and the hon. Minister also desires that something better should be done in this organisation. So, I would request the hon. Minister that he should take personal initiative in the happenings of the Indian Airlines and Air India and take the House into confidence to improve the services of these Airlines. (ends) MR. CHAIRMAN: Shri Varkala Radhakrishnan, you may kindly be brief so that the hon. Minister may conclude his reply by 6 p.m. SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): The first point I would like to urge upon the hon. Minister is that there is no coordination between Air India and Indian Airlines. They operate in different sections. For example, they operate in the Gulf sector. Both Air India and Airlines operate together with the result that there are a few passengers in a particular flight. That is one point. If they have some prior consultation or discussion about the flight timings, this could be prevented. This is another point.
">Another aspect is that there is mismanagement. Regarding the time schedule, there is no principle followed. I come from Trivandrum. We have an International Airport which is the fourth largest International Airport. On one fine morning, they had cancelled 17 flights all of a sudden without any reason. These 17 flights were operating between Muscat, Baharain, Sharjah, Abu Dhabi and such other cities. These flights were operated with full capacity to my knowledge. But due to some other reasons which I do not know, the flights were cancelled putting the Trivandrum airport to a very difficult situation. Subsequently, when I made enquiries, they told me that there was a loss and so, they had changed the flight timing but without changing the timing, the operation was profitable. All of a sudden, when it was changed, it begins to run on a loss. This is the position. So, there must be some coordination and understanding between Indian Airlines and Air India. It is quite natural that Air India runs on a huge loss because they are operating without any purpose. Take, for example the time schedule. It is most inconvenient for the travelling public. They operate their aircraft in such timings which are very inconvenient for the travelling public, for the office-going people and the business people.
">I can cite a number of instances wherein Air India and the Indian Airlines are operating the scheduled flights without taking into consideration the convenience of the public. Probably, it will result in huge losses. So, I would request the hon. Minister to look into this. Of course, the hon. Minister is new to this field. I would request him to study the entire thing, reschedule all the scheduled flights and also make it a well-managed concern. Now, really the net result is, it is mismanagement for a very long time. So, I would request the hon. Minister to take immediate steps to restore the flights that have been cancelled at the Thiruvananthapuram International Airport and do all that is possible to make the Airport more viable. Thiruvananthapuram is India"s southern-most point. All foreign companies are demanding stop-over at Thiruvananthapuram. But these people do not allow them.
">Regarding the finances of the Indian Airlines and the Air India, the matter should be taken into consideration. I hope the hon. Minister will take a very healthy decision in all these matters.
">With these words, I conclude.
">MR. CHAIRMAN : Now, the hon. Minister has to reply only to the questions raised by the Members under the rules. Only those Members who have given notices are allowed.
">SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Sir, with your permission, I would like to put a straight question...(Interruptions)
">MR. CHAIRMAN: I cannot go against the rules. You may put question in some other form. It is with reference to an accident.
">(Interruptions) ... (Not recorded) ">MR. CHAIRMAN: It is not permitted. What you say is not in reference to the matter under discussion. It is against the rules. Members who have given notices have already put their questions.
">... (Interruptions)
">SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): Sir, why are you discriminating against me? When you have allowed him, why can you not allow me also?...(Interruptions)
">MR. CHAIRMAN: It is a bad precedent. Under the rules, it will not be ">permitted. I have disallowed that question also. It will go against the rules.
">(Interruptions)* ">श्री के.ए. सांगतम (नागालैंड) : मैं नोर्थ ईस्ट के बारे में एक सवाल पूछना चाहता हूं... (व्यवधान)
"> ">MR. CHAIRMAN: In order to do justice, I have disallowed these two questions. I have rendered justice. You can raise it on some other occasion through other devices.
">... (Interruptions)
">MR. CHAIRMAN: These two questions are disallowed. I should not expunge it. You should follow the rules. It is not permitted under the Rules. It will be quoted as a precedent in future. I do not want to create any precedent. It is against the rules. Otherwise, for every discussion, there will be questions put by Members who have not participated in the debate.
">... (Interruptions)
">THE MINISTER OF CIVIL AVIATION (SHRI SHARAD YADAV): I have understood your points...(Interruptions)
">MR. CHAIRMAN: For your information, I read the rule:
">"There shall be no formal motion before the House nor voting. The member who has given notice may make a short statement and the (members who have previously intimated to the Speaker may ask a question for the purpose of further elucidating any matter of fact. Thereafter, the Minister shall reply shortly:)"
">You have not given notice. I cannot violate the rules.
">... (Interruptions)
">MR. CHAIRMAN (SHRI P.H. PANDIYAN): Please cooperate. I disallow the questions put by both the hon. Members. You can meet the Minister later.
">___________________________________________________________________________ ">*Not Recorded.
">18.00 hrs. नागर विमानन मंत्री (श्री शरद यादव): सभापति जी, रूडी जी ने जो बच्ची की घटना वाला मामला उठाया, उसके बारे में मैंने राज्य सभा में विस्तार से बताया था। यहां मैं उसे नहीं रख सका, इसका मुझे अफसोस है। यह जो हादसा हुआ है, इस पर सख्त से सख्त कार्रवाई जो भी हो सकती है, हम करेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। इसके साथ ही हम मुकम्मल इंतजाम भी करने की कोशिश कर रहे हैं। सोमैया जी ने अपनी चर्चा में जितने सवाल उठाए हैं, उन सबका जवाब देना अभी तो कठिन है। इंडियन एयरलाइंस लाभ में रही है। एयर इंडिया भी लगातार दुनिया की बैस्ट एयरलाइंस में मानी जाती रही है। लेकिन दो-तीन कारणों के चलते इन दोनों एयरलाइंस में कुछ दिककतें आईं। आपने जो कारण बताए हैं, वे अपनी जगह हैं। अंत में बोलने वाले माननीय सदस्य ने कर्मचारियों की संख्या के बारे में कहा और यह भी कहा कि हमारे एक जहाज के पीछे ७०० कर्मचारी हैं, जबकि दूसरी एयरलाइंस में अधिकतम २५० कर्मचारी हैं। ५० साल से जो हमारे सरकारी उपक़म बने हुए हैं, उनके लेबर लॉज बने हुए हैं। एयर इंडिया में करीब १८००० कर्मचारी हैं। इनका तत्काल इलाज हमारे हाथ में नहीं है और तुरंत इलाज करना कठिन काम है। रूडी जी ने कर्मचारियों की समस्या के बारे में तो कहा ही, यह भी कहा कि अधिकारियों की भी फौज बढ़ी है। जो पिरामिड होना चाहिए, वह पैरेलल होता जा रहा है, यह भी एक समस्या है। एयर इंडिया की जो वित्तीय स्िथति है, १९९६-९७ में उसे १४ करोड़ रुपए का घाटा हुआ, १९९७-९८ में ४७ करोड़ रुपए का लाभ हुआ, १९९८-९९ में ३८ करोड़ रुपए का लाभ हुआ और १९९९-२००० में, इसमें आधे साल में १४.३ करोड़ रुपए का लाभ हुआ है, मैं सोचता हूं यह आगे भी बढ़ेगा। इंडियन एयरलाइंस में १९८० में एयरबस ३२० आईं, यह नौ महीने के लिए ग्राउंड कर दी गई थी। यह सबसे बड़ा फलीट है। यह फैसला सरकार के द्वारा लिया गया था। उस फैसले से लगभग २०० करोड़ रुपए का घाटा हुआ।"> ">SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Is there any proposal for the merger of these two Corporations - Indian Airlines and Air India? ">श्री शरद यादव: आपकी बात पर आ रहा हूं।"> ">MR. CHAIRMAN: Shri Radhakrishnan, please address the Chair. You should not directly ask from the Minister. You should address the Minister through the Chair. ">श्री शरद यादव : महोदय, इसके दो बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि जो ए-३२० एयर बस इंडियन एयरलाइंस चला रही है। उसमें जो ताकत है वह इसी बस के कारण से है। मैं चन्द्र शेखर जी का शुक़िया अदा करता हूं कि गल्फ में जब वार हुई तो लोग फंस गए। उन्होंने इमर्जेंसी में एक बहुत बड़ा फैसला इन बसों को चलाने का किया और निर्णय लिया कि ईराक और कुवैत में जो यात्री फंसे हुए थे, ए ३२० जो ग्राउंड की गई थी, उन यात्रियों को बड़ी मात्रा में इसी बस से निकालने का काम किया। यह पूरी दुनिया का बड़ा जबरदस्त एयर क़ाफट है और हमारे इंडियन एयरलाइंस को इसी फलीट से ज्यादा ताकत मिली हुई है।">... (व्यवधान)
">ए-३०० हमारे पास नौ हैं, लेकिन वे बूढ़े हो गए हैं। उनकी उम्र २० साल चार महीने हैं। ए-३२० की संख्या ३० हैं। ये ३० बसें जब आप नौ महीने तक खड़ी करेंगे, इसका फैसला चाहे हमारा हो या पुराना हो, मैं मानता हूं कि जो एडमनिस्ट्रेशन और कर्मचारी हैं, इन तमाम चीजों के चलते पब्िलक सैकटर का बुरा हाल हुआ है। जब ग्लोबलाइजेशन शुरु हुआ तो कया हम तैयार थे? ... (व्यवधान) हमें हर तरह से प्रोटेकशन मिला हुआ था। लोगों के पास कोई चारा, कोई रास्ता नहीं था, उन्हीं को इस्तेमाल करना था। इसलिए लोग मजबूरी में इन्हीं चीजों का इस्तेमाल करते थे। लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन और कम्पीटिशन हो गया, तो चाहे ऊपर के आफिसर हों या कर्मचारी हों, उन सब की एफशिएंसी से एक बड़ा भारी पर्दा उठ गया, उनकी पोल खुल गई। अब पर्दा जरूर उठ गया लेकिन कानून वही है, कानूनों में कोई रद्दोबदल नहीं है। हम भर्ती बंद कर सकते हैं लेकिन निकालने की स्िथति नहीं थी। अगर निकालेंगे तो जो थोड़ा-बहुत घाटा चल रहा है वह और बढ़ जाएगा। हमारे पास जो फलीट है वह ए-३०० का नौ है, जो २० साल पुराने हैं, ए-३२० का ३० है, इसकी उम्र आठ वर्ष है, बी-३७७ कुल १२ हैं, जिनकी उम्र १८.४ है और डोनियर तीन हैं लेकिन इसकी उम्र भी १४.२ वर्ष है, यानी हमारे पूरे फलीट की जो एवरेज है, उसकी उम्र १२.९ वर्ष है।"> ">महोदय, एयरबस के ग्राउंड करने से इंडियन एयरलाइंस को जो चोट पहुंची है, जो दिककत आई है वह इसी बात से आई है। दूसरी चीज यह है कि इसमें वायुदूत का मर्जर हो गया, जिसमें १३०० कर्मचारी थे। पहले इसका घाटा लगभग २०० करोड़ का था तथा १५ करोड़ रुपए संचित घाटा था और पर ईयर १५ करोड़ का घाटा और हो रहा था। इसके"> ">कर्मचारी १३०० थे, वे मर्ज हुए, यानी जो एक कम्पनी डूब रही थी उसका जिम्मा भी इंडियन एयरलाइंस पर पड़ा। इसको इसमें मर्ज कर दिया गया और इसे एयर एलाइंस बना दिया गया।"> ">फिर एलाइंस एयर के बारे में जो शिकायत पिछली बार माननीय रूडी साहब ने की थी, उसके बारे में मैंने अपने मंत्रालय में पूरे कागजात, पूरी चीजों की जानकारी ली है। जैसे अभी शिकायत की गयी थी कि वायूदूत के कर्मचारी नहीं बाहर के ज्यादा कर्मचारी लिये गये। इस काम को भी देखने का काम किया गया है। माननीय किरीट सोमैया और माननीय रूडी साहब ने मामला उठाया था तो मैंने अपने मंत्रालय में जाकर सब संबंधित अधिकारियों बुलाया। उसमें भी किसी तरह की गलती होगी तो उसको भी सुधारा जायेगा। अगर माफ करने लायक गलती नहीं होगी तो एकशन भी लिया जायेगा।"> ">इंडियन एयर लाइंस के बारे में जैसा मैंने कहा कि हमें कुछ सोशल ऑब्िलगेशन्स भी निभाने पड़ते हैं। हम ऐसे रूटों पर चलते हैं जैसे काश्मीर है, नार्थ-ईस्ट है। फिर सब सूबों की वित्तीय हालत भी एक सी नहीं है। सब सूबे ऑयल के दाम में और सेल-टैकस में अलग-अलग हैं। आंध्र प्रदेश में बहुत ज्यादा सेल-टैकस है, -आप तो केरल से आते हैं। सूबों की वित्तीय हालत भी खराब है। ऑयल के बारे में भी हमको दिककत आती है।"> ">तीसरी बात जो लोगों ने कही कि मैनेजमेंट में ३७ डायरेकटर्स हैं। नश्िचत तौर पर इंडियन एयरलाइंस में इतने डायरेकटर्स की जरूरत नहीं है। पहले दिन मीटिंग में जब हमने इतनी भीड़ देखी तो महसूस हुआ कि इतनी फौज की जरूरत नहीं है। उसमें कया किया जा सकता है, उसका रास्ता भी मैं इंडियन एयरलाइंस के एमडी और विभाग से चर्चा करके निकालूंगा। नये कर्मचारी तो भर्ती नहीं हो रहे हैं लेकिन इनको भी कैसा कम किया जा सकता है, इस पर विचार होगा। इसके घाटे के बारे में सदस्यों ने विस्तार से बता दिया है, मुझे बताने की जरूरत नहीं है। हम अब घाटे के दौर से बाहर आ गये हैं और अब लाभ के दौर में हैं। अब हमारी कोशिश होगी कि यह लाभ किस तरह से बढ़ता जाये।"> ">टाइम शैडयूल्ड के बारे में भी बोला गया। दोनों ही एयरलाइंस में टाइम की बहुत प्राब्लम है। कुछ तो कम्प्लशंस के कारण है। सोशल ऑब्िलगेशन के चलते हमको जहाजों को दूल के इलाकों में भी चलाना पड़ता है।">... (व्यवधान)
">मैं आपकी बात को मानता हूं कि वे वकत पर चलें, उनकी पूरी शैडयूलिंग हो। यह जो आपने सुझाव दिया है वह माननीय सदस्यों से सलाह-मशविरा करके और सारी चीजों को इकट्ठा करके देखने के बाद सोचा जाएगा। एयर इंडिया के घाटे का बहुत बड़ा कारण यह है कि ए-३२० बस जब ग्राउंड कर दी गयी और गल्फ में इसका इस्तेमाल किया गया, उस समय इंडियन एयरलाइंस को गल्फ का भी बहुत बड़ा हिस्सा दिया गया, जिससे ये लाभ में हो सके। इनका लाभ तो बढ़ा लेकिन एयर इंडिया का प्रौफिट घट गया। हालत बिगड़ी हुई है। इस हालत को सुधारने की बात है।"> ">आपने डिस-इंवेस्टमेंट की बात कही है। अब तो एक विभाग अलग बन गया है। हमारे विभाग में उसकी चर्चा चल रही है। एयर इंडिया में स्ट्रेटेजिक पार्टनर जो हैं उसमें बाहर का कितना प्रतिशत हो, कितना न हो, मैनेजमेंट कितना हो, इस पर चर्चा जारी है। इंडियन एयरलाइंस में भी डिस-इंवेस्टमेंट किस तरह से हो। कयोंकि ये जो दोनों एयरलाइंस हैं वे भारत की सम्पत्ित हैं।"> ">आज ये थोड़ी लड़खड़ाई है। आज दुनिया के बाजार का हमला हुआ है। हमें उस हमले का मुकाबला करना होगा। अब प्राइवेट एअरलाइन्स आ गई हैं। इससे थोड़ा नुकसान हुआ लेकिन लाभ भी हुआ। लाभ यह हुआ कि हमें प्रतिस्पर्धा में खड़ा होना पड़ा। उस कम्पीटिशन में कैसे खड़े हों, इस बाबत भी गम्भीरता से सोच-विचार करना चाहिए। अभी हमें आए दो महीने हुए हैं। हम इसमें लगे हैं। संसद सत्र आने से काम थोड़ा ढीला हुआ है। इंडियन एअरलाइन्स और एअर इंडिया बहुत बड़ा इंस्टीटयूशन है। देश ने बड़ी मेहनत से इन्हें खड़ा किया है। यह कई दिनों तक प्रॉफिट में रहा लेकिन कुछ अर्से से यह घाटे में है। यह कैसे दुरुस्त हो, हमें पूरी ताकत से जोर लगाना है। कैरेबियन जैट का सवाल रूडी साहब उठा रहे थे। कैरेबियन जैट के करार को खारिज किया गया जबकि उसमें खारिज करने वाला कलॉज भी नहीं था। आटा गीला और पानी उसमें गिर गया, वाली बात हुई। हम इस बात को पूरी तरह पास से देख रहे हैं। किसी तरह की कोई दिककत नहीं आएगी। अगर आपके पास कोई खबर हो तो मुझे बताएं। कैरेबियन जैट के मामले को मैं व्यकितगत रूप से देख रहा हूं। मुझे देखकर तकलीफ हुई। जिस दिन से एवार्ड आया है, उस दिन से मैं उसकी तरफ पूरा ध्यान दे रहा हूं। वैसे भी एअर इंडिया की हालत खराब है। कैरेबियन जैट में हमें १०३ करोड़ रुपए का एवार्ड मिल गया है। हमारी कोशिश है कि इस एवार्ड को फिर से कैसे दुरुस्त करें? ए-३२० ग्राउंड कर दी गई। एक वायुदूत उसमें मर्ज कर दी गई। इंडियन एअरलाइन्स जो कि एक स्वस्थ संस्था थी वह बाद में दिककत में पड़ेगी, इस पर विचार-विमर्श करने का काम नहीं हुआ। भारत सरकार की वित्तीय हालत ऐसी नहीं है कि इस पर ज्यादा पैसा खर्च कर सके। यह विभाग थोड़ा नैगलैकिटड है कयोंकि इसका वास्ता वोटों से कम है। नियंत्रण भी थोड़ा बहुत कमजोर रहा है। ग्लैमर्रस जरूर है लेकिन इस पर सरकार का बहुत ऑब्िलगेशन नहीं है। कारगिल से लेकर साइकलोन तक इसने अच्छा काम किया।"> मैं एअर इंडिया के स्वास्थ्य के बारे में कहना नहीं चाहता। वैसे वह बहुत बिगड़ा है। अगर आप चाहें तो मैं उसके बारे में विस्तार से बताऊं। हमने एक हजार करोड़ रुपए की मांग की है। केलकर कमेटी ने सिफारिश की थी कि एक हजार करोड़ रुपया डिसइनवैस्टमैंट के लिए मिलना चाहिए जिससे हम दुनिया के किसी बाजार में जा सकें। एअर इंडिया जो कि एक पुरानी संस्था है, १९५३ से है, उसका इतना बड़ा इन्फ्रास्ट्रकचर है, इतने एस्सेटस हैं, उनका ठीक से इस्तेमाल हो, वह देश के लिए बेहतर व्यवस्था और एअरलाइन्स बन सके जिससे सभी को लाभ हो, हम इस कोशिश में लगे हैं। श्री किरीट सोमैया : कया भारत सरकार ने उससे इंकार कर दिया? श्री शरद यादव : हां, अभी भारत सरकार ने एक-दो बार इन्कार किया। हमारी कोशिश है कि बार-बार उनसे तकाजा करें।... (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : It is only a half-an-hour discussion. It has already taken nearly one hour. The Minister should reply to the questions raised by the three Members. श्री शरद यादव : दरवाजा खटखटाने का काम करना चाहिए।... (व्यवधान) अध्यक्ष जी, रिप्लाई तो मुझे देना था लेकिन समय इतना मिला है जिसमें मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि दोनों की हालत खराब है, उसको सुधारने के लिये कई प्रयास हो रहे हैं। इंडियन एअरलाइन्स थोड़ा रिकवर कर रही है कयोंकि गल्फ का थोड़ा रूट मिला हुआ है, इससे मजबूती मिली हुई है। मैं मानता हूं कि एअर इंडिया में कुछ सुधार की जरूरत है। उसमें कर्मचारियों की भारी संख्या १८ हजार है और इंडियन एअरलाइंस में २२ हजार है। अभी आफिसर्स के आंकड़े नहीं मिले, अगली बार जब फिगर्स मिलेंगी तो बताऊंगा कि जहाज पर कितने आफीसर्स सवार हैं। ये सब दिककतें हैं। माननीय सदस्यों ने जो चिन्ता व्यकत की है, उसके लिये मैं बताना चाहूंगा कि एअरलाइंस ठीक हैं, दुरुस्त हैं। मैं आपके माध्यम से सदन से कहना चाहता हूं कि इस काम को हम मुस्तैदी से कर रहे हैं और जो भी हो सकेगा, वकत से ठीक प्रकार से कर लेंगे। इसके लिये री-शिडयूलिंग कर रहे हैं। इंडियन एअरलाइंस की जो फलीट है, उसका कैसे बेहतर इस्तेमाल करेंगे, इस बारे में आप माननीय सदस्यों के साथ बैठकर जो भी सुझाव मिलेंगे, उससे दुरुस्त करने की कोशिश करेगें। माननीय सदस्यों ने कई बातें पूछी हैं, मैं उनका जवाब नहीं दे सका लेकिन जब कभी भविष्य में वकत मिलेगा तो जवाब देने का काम करूंगा। सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से इतना और कहना चाहूंगा कि ये दोनों पुरानी संस्थायें हैं। ये संस्थायें पुरानी ग्लोरी में आ जायें, यह इस सदन की इच्छा है, इसके लिये हमारे मंत्रालय से प्रयास हो सकेगा, हम प्रयास करेंगे कि उसमें कोई कमी नहीं आयेगी।MR. CHAIRMAN : Now the House stands adjourned to meet again tommorrow at 11 a.m.
18.22 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Monday, December 20, 1999/Agrahayana 29, 1921 (Saka) _________