State Consumer Disputes Redressal Commission
N I A Co vs Baghpat Gas Service on 23 April, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2009/623 ( Date of Filing : 20 Apr 2009 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. N I A Co a ...........Appellant(s) Versus 1. Baghpat Gas Service a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Rajendra Singh PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 23 Apr 2024 Final Order / Judgement (मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ अपील संख्या-623/2009 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, 94 महात्मा गांधी मार्ग, हजरतगंज, लखनऊ द्वारा असिसटेंट मैनेजर बनाम मैसर्स बागपत गैस सर्विस द्वारा प्रोपराइटर कैप्टन डी.पी. सरीन पुत्र बसन्त सिंह सरीन, निवासी 205 सोतीगंज, सिटी मेरठ, फर्म स्थित मेन मार्केट बागपत, जिला बागपत समक्ष:- 1.
माननीय श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
2. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री असित श्रीवास्तव। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री विनीत कुमार। दिनांक : 23.04.2024 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
1. परिवाद संख्या-36/2005, मैसर्स बागपत गैस सर्विस बनाम दि न्यू इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी लि0 तथा एक अन्य में विद्वान जिला आयोग, मेरठ द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 6.3.2009 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी अपील पर अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री असित श्रीवास्तव तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री विनीत कुमार को सुना गया तथा प्रश्नगत प्रश्नगत निर्णय/आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया गया।
-2-2. विद्वान जिला आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए अंकन 1,24,600/-रू0 क्लेम राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश पारित किया है।
3. परिवाद के तथ्यों के अनुसार परिवादी का एक गोदाम है, जिसमें इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड की एजेन्सी संचालित है। उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने के लिए खाली एवं भरे हुए गैस के सिलेण्डर रखे जाते हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए बरगलरी इंश्योरेंस पालिसी अंकन 11,97,000/-रू0 मूल्य की प्राप्त की हुई है। बीमा अवधि के दौरान दिनांक 2/3.12.2003 की रात्रि में 171 खाली गैस सिलेण्डर कीमत 700/-रू0 प्रति सिलेण्डर चोरी हो गए, जिनमें से 6 सिलेण्डर भरे हुए थे तथा दो सिलेण्डरों में 5 किलो गैस मौजूद थी। इनकी कुल कीमत अंकन 1,24,600/-रू0 थी। इस घटना की रिपोर्ट भी दिनांक 3.12.2003 को लिखायी गयी तथा इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड एवं बीमा कंपनी को सूचना दी गयी। बीमा कंपनी द्वारा सर्वेयर की नियुक्ति की गयी। पुलिस द्वारा जांच के पश्चात अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी, परन्तु चोरी की घटना को साबित माना गया। बीमा कंपनी द्वारा क्लेम का भुगतान नहीं किया गया, इसलिए परिवाद प्रस्तुत किया गया।
4. बीमा कंपनी का कथन है कि गैस गोदाम के गेट पर ताला लगा हुआ था, इसलिए चोरी होने का प्रश्न ही नहीं उठता। गोदाम की पिछली दीवार टूटी पायी गयी थी, इसलिए यह कार्य लूट की श्रेणी में नहीं आता। सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर परिवादी क्लेम पाने का अधिकारी नहीं है।
-3-5. दोनों पक्षकारों की साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात विद्वान जिला आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया कि सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में क्षतिपूर्ति निर्धारित की है, जो अंकन 1,24,600/-रू0 होती है। तदनुसार इसी राशि को अदा करने का आदेश विद्वान जिला आयोग ने दिया है।
6. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि सर्वेयर द्वारा चोरी की घटना को संदिग्ध माना गया। दो गार्डों के बयान भिन्न-भिन्न प्रकृति के हैं, इसलिए चोरी की घटना साबित नहीं है। अपीलार्थी, बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत होने पर चोरी की घटना की सत्यता की परख करने के लिए एक इन्वेस्टीगेटर की नियुक्ति की गयी। इन्वेस्टीगेटर श्री आर.के. शर्मा द्वारा यह पाया गया कि गोदाम का सदर एवं ताला मौके पर स्थिर थे और सिलेण्डर बाहर ले जाने का कोई सबूत नहीं था। गोदाम के दो चौकीदारों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखायी गयी थी। विवेचना में चौकीदारों के संबंध में कोई जांच नहीं की गयी। निम्न श्रेणी की विवेचना करते हुए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गयी, जिसके कारण बीमा कंपनी पर अनावश्यक रूप से क्लेम की अदायगी का भार डाल दिया गया। इसी रिपोर्ट को आधार मानते हुए बीमा कंपनी द्वारा बीमा क्लेम नकारने का निष्कर्ष दिया गया। इसके बाद श्री अजय कुमार जैन को सर्वेयर नियुक्त किया गया, उनके द्वारा भी यह निष्कर्ष दिया गया कि चोरी की घटना फर्जी एवं बनावटी है। यथार्थ में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के साथ मूल बयानों की प्रतियां भी संलग्न की -4- गयी हैं। यद्यपि प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि इस रिपोर्ट में क्षति की राशि का आंकलन किया गया है, यह तर्क रिपोर्ट के अनुसार सही प्रतीत नहीं होता। सर्वेयर द्वारा अपनी रिपोर्ट में उस क्षति का आंकलन किया गया है, जो परिवादी द्वारा बतायी गयी है, परन्तु वास्तव में चोरी की घटना घटित होने का कोई सकारात्मक निष्कर्ष नहीं दिया गया है, अपितु श्री आर.के. शर्मा द्वारा दिये गये निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी है और यह पाया गया है कि मौके पर चोरी की कोई घटना घटित नहीं हुई है। क्लेम प्राप्त करने के लिए चोरी की फर्जी घटना बनायी गयी है। ये दोनों रिपोर्ट जिन साक्षीयों के बयान पर तैयार की गयी हैं, उनके द्वारा स्पष्ट रूप से चोरी की घटना से इंकार नहीं किया गया है। गोदाम की पिछली दीवार के टूटे होने तथा इस टूटी दीवार से बदमाशों द्वारा सिलेण्डर ले जाने का कथन उन साक्षीयों द्वारा भी किया गया, जिनके बयान रिपोर्ट के साथ अटैच किये गये हैं। पुलिस द्वारा भी अंतिम रिपोर्ट में चोरी की घटना से इंकार नहीं किया गया है। यद्यपि सिलेण्डरों की बरामदगी नहीं हो सकी है, इसलिए विद्वान जिला आयोग द्वारा दिये गये निष्कर्ष को परिवर्तित करने का कोई उचित आधार प्रतीत नहीं होता। तदनुसार प्रस्तुत अपील निरस्त होने योग्य है।
आदेश
7. प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित सबंधित जिला आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की -5- जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुशील कुमार) (राजेन्द्र सिंह( सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-2 [HON'BLE MR. Rajendra Singh] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] JUDICIAL MEMBER