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Lok Sabha Debates

Need To Open More Procurement Centres For Paddy In The Country. on 7 December, 2012

> Title: Need to open more procurement centres for paddy in the country.

       

MADAM SPEAKER: Now, we will take Zero-Hour matters.

 

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): अध्यक्ष महोदया, मैं आपका अत्यंत आभारी हूं कि आपने मुझे एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल को सदन में उठाने का मौका दिया। देश के किसानों के पास दो ही महत्वपूर्ण कैश क्राप हैं, धान और गेहूं। इनकी आमदनी से किसान अपनी बेटी के हाथ पीले करता है, अपने बच्चों की तालीम के लिए स्कूल-कालेज की फीस देता है और अपने बूढ़े माँ-बाप की बीमारी की तीमारदारी के लिए उन्हें मेडिकल कालेज लेकर जाता है। इस समय उत्तर प्रदेश में धान की फसल हो गई है, अगर वह खेतों से खाली नहीं होगी तो निश्चित तौर पर किसानों के सामने अगली बुवाई का संकट पैदा हो जाएगा। ज्यादातर किसान छोटी होल्डिंग के हैं। स्थिति यह है कि धान की फसल कट रही है और किसानों को मजबूर होकर बिचौलियों को बेचना पड़ रहा है। मैंने इस बारे में नेता जी मुलायम सिंह जी से भी बात की थी। हमारे प्रदेश में स्थिति यह हो रही है कि आज धान को किसान कृषि क्रय केन्द्रों पर तो वहां यह कहकर उसे लौटाया जा रहा है कि इसमें नमी है। केन्द्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1250 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन किसान को मजबूर होकर बिचौलियों के हाथ में 900-950 रुपए प्रति क्विंटल अपने उत्पाद को बेचने पर बाध्य हो रहा है, जबकि उसके उत्पादन में उसकी लागत काफी आती है, क्योंकि उसे पानी, बिजली, डीजल, खाद, कीटनाशक सबका इंतजाम करना पड़ता है। जो समर्थन मूल्य केन्द्र सरकार ने धान के लिए निर्धारित किया है 1250 रुपए, स्वाभाविक है कि वह इस बात की गारंटी है कि किसान अपने धान को इस मूल्य पर बेचेगा, लेकिन किसान को वह मूल्य नहीं मिल रहा है। इससे ज्वलंत और महत्वपूर्ण बात दूसरी नहीं हो सकती। हम वेलफेयर स्टेट के रूप में किसानों के हितों की बात करते हैं तो दूसरी तरफ राइस मिलों द्वारा लेवी का चावल लिया जाता था, आज लेवी का भी कोटा निर्धारित कर दिया गया है।

 जिसके नाते धान की खरीद बंद पड़ी और मैं समझता हूं कि इससे किसानों के लिए बहुत संकट की घड़ी है। उनको समर्थन मूल्य नहीं मिलता है जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है। अगर किसान को उसका लागत मूल्य नहीं मिलेगा तो किसान कैसे जीवित रहेगा। किसान को प्रति क्विंटल धान पैदा करने के लिए उसे खाद, उन्नतशील बीज, पेस्टीसाइड की जरूरत होती है। आज पेस्टीसाइड और खाद भी ब्लैक में मिलता है, यूरिया भी ब्लैक में मिलता है, एनपीके भी ब्लैक में मिलता है और उन्नतशील बीज भी महंगा होता जा रहा है, सिंचाई की लागत भी बढ़ती जा रही है, पम्पिंग सेट का किराया भी बढ़ता जा रहा है, तो किसान की लागत बढ़ती जा रही है जिसके कारण 1250 रुपये समर्थन मूल्य भी कम है। इसलिए मैं उस पर बोनस की भी मांग करता हूं क्योंकि हम लोग यहां किसानों के लिए चुनकर आये हैं और 80 प्रतिशत किसान गांवों में रहता है। यह राजनैतिक विषय नहीं है, चाहे सत्ता पक्ष में बैठे हों या प्रतिपक्ष में बैठे हों, किसानों की चिंता सभी को है।

          माननीय मुलायम सिंह जी मुख्यमंत्री थे और मैं ऐसे विषयों को वहां उठाता था और वे किसानों के लिए खड़े होकर किसान हित में कहते थे कि हम करेंगे। आज किसान के लिए कोई सुरक्षा नहीं है आज वह अपना धान कहीं नहीं बेच पा रहा है, न उसे समर्थन मूल्य मिल रहा है, इसलिए उसे बिचौलियों को अपना धान बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अध्यक्ष महोदया, यह गंभीर मामला है, अविलम्बनीय है, लोक-महत्व का है, तात्कालिक है, ज्वलंत समस्या है, इसलिए इस सवाल पर आप सरकार का ध्यान आकृष्ट करके किसानों के धान की खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित करें। अगर केन्द्र को लगता है कि नमी है तो किसान के धान के मूल्य में एक-दो रुपये की कटौती कर ली जाए। पंजाब में खरीद हो चुकी है, हरियाणा में खरीद का काम खत्म हो चुका है लेकिन हमारा किसान मंडियों में नहीं पहुंच पा रहा है, किसान की खरीद नहीं हो रही है। हम आपसे मांग करते हैं कि कृषि मंत्री जी इस बात को सुनिश्चित करें कि अगर धान में नमी है तो कुछ कटौती कर ले जिससे उसे अपना धान 900 रुपये में न बेचना पड़े।

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अध्यक्ष महोदया, जगदम्बिका पाल जी ने जो सवाल उठाया है, वह अत्यंत ही गंभीर समस्या है। यह सच है कि आज धान के किसान पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर हैं। ऐसा कभी नहीं देखा गया था कि जो लेवी का चावल आता है वह केन्द्रीय सरकार के केन्द्रों पर रिजैक्ट हो रहा है। जब वह रिजैक्ट हो रहा है तो आप बता दीजिए कि कौन धान खरीदेगा। यह इसका मूल कारण है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा लेकिन उस पर अभी तक कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए केन्द्र सरकार इस चीज को देखे कि यह सब कुछ अधिकारियों के स्तर पर हो रहा है यह कहां से हो रहा है। किसके आदेश से हो रहा है। थोड़ी बहुत धान में कमी हो सकती है, नमी हो सकती है तो आप एक रुपया या पचास पैसे काटते थे और धान खरीदा जाता था लेकिन अब तो कोई धान ले ही नहीं रहा है। यह कभी नहीं हुआ कि खरीदारी बंद कर दी गयी है। आज धान तोलने वाले कांटे बंद हैं, कोई खरीदार नहीं हैं। खरीदार तो केन्द्र सरकार है, पर उसने रिजैक्ट कर दिया है, वह धान लेने को तैयार नहीं हो रही है, इसके लिए जिम्मेदार केन्द्र सरकार है। इसके लिए बिहार सरकार या यूपी सरकार जिम्मेदार नहीं है। हमें यह लगता है कि इसके पीछे किसानों के खिलाफ कोई साजिश है, उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत यह कोई साजिश है। इसलिए अध्यक्ष महोदया, आप इसमें हस्तक्षेप करें।

 श्री गणेश सिंह (सतना): मैडम, एफसीआई क्या कर रही है?...( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, इसलिए हमारी आपसे अपील है कि आप हस्तक्षेप करें। यह मामला यू.पी. का ही नहीं बिहार का भी है।...( व्यवधान) यह क्या कारण है कि यू.पी. का चावल ही रिजेक्ट किया जा रहा है? जब चावल रिजेक्ट होगा तो कौन खरीददारी करेगा?...( व्यवधान) इसका यह कारण है।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : लालू जी, क्या आप भी इससे संबंधित बोलना चाहते हैं?

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद (सारण): अध्यक्ष महोदया, समर्थन मूल्य अपनी जगह पर है। बिचौलिया धान को लूट रहे हैं। सरकार खरीद नहीं रही है। इंफीरियर क्वॉलिटी और नमी का बहाना है और न सरकार के पास कोई गोदाम हैं और न ही खरीददार हैं। हमारे यहां की स्पीकर साहिबा भी बिहार से हैं। धान की खरीद क्यों नहीं हो रही है?...( व्यवधान) किसान को क्यों लूटा जा रहा है? चाहे कोई भी सरकार दोषी हो, धान की खरीद होनी चाहिए और यह लूट नहीं होनी चाहिए।...( व्यवधान) पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान इतनी महंगी खाद और बीज खरीदकर खेती करते हैं और बिचौलिये सारा धान लेकर चले जा रहे हैं।...( व्यवधान) किसान को पैसा नहीं मिलेगा तो गांवों में पैसा कैसे जाएगा?...( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : आप रिजेक्शन वाली बात क्यों नहीं कर रहे हैं?...( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदया, आप अपने प्रभाव और पद का इस्तेमाल करके सरकार को निदेश दीजिए कि बिहार और यू.पी. के किसानों के धान की खरीद हो।...( व्यवधान) किसान की लूट हो रही है।...( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): मैडम, इस पर सरकार की तरफ से जवाब आना चाहिए।...( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): मैडम, ...( व्यवधान) हम बोलने के लिए खड़े हो गये हैं। पहले हम सवाल करेंगे तभी तो जवाब आएगा।...( व्यवधान) हमें बोलने दीजिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ज़ीरो ऑवर में आप सरकार को जवाब देने के लिए कैसे कह सकते हैं?

…( व्यवधान)

   

  12.12 hrs.   At this stage Shri Shailendra Kumar, Shri Neeraj Shekhar, Shri Lalu Prasad and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.

   

अध्यक्ष महोदया : शाहनवाज जी, आप बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  मैडम, मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं। जिस तरह से बिहार में टैक्स के जरिए बिहार सरकार खरीद रही है लेकिन आज बिहार के अंदर एफसीआई कोई खरीद नहीं कर रही है। मैडम, चाहे आपका सासाराम हो या हमारा भागलपुर हो, बगल में गुंडका हो या झारखंड हो, ...( व्यवधान) जिस तरह से धान की खेती बिहार में होती है, एफसीआई जानबूझकर बिहार की उपेक्षा कर रही है।...( व्यवधान) बिहार के अंदर धान की खरीद होनी चाहिए।...( व्यवधान) हमारे किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है।...( व्यवधान) कृषि के क्षेत्र में बिहार ने तरक्की की है, बिहार ने अपना उत्पादन बढ़ाया है।...( व्यवधान) लेकिन बिहार में धान की खरीद नहीं हो रही है। यह कोई तरीका नहीं है।...( व्यवधान) जब हम किसान का विषय उठा रहे हैं तो आप लोग डिस्टर्ब कर रहे हैं।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप सब अपने अपने स्थानों पर वापस जाइए।

…( व्यवधान)

  12.13 hrs.     At this stage Shri Shailendra Kumar, Shri Neeraj Shekhar, Shri Lalu Prasad and some other hon. Members went back to their seats.

 

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  हमारी बात तो पूरी होने दीजिए।...( व्यवधान) जब आप बोल रहे थे तो हम नहीं बोल रहे थे।...( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार : इस पर नेता, सदन को जवाब देना चाहिए।...( व्यवधान)

   

THE MINISTER OF FINANCE (SHRI P. CHIDAMBARAM): Madam Speaker, I share the concern of the hon. Members. Our farmers are growing more paddy year after year. They are offering more paddy to the Central pool; FCI has been directed to purchase the paddy that is offered. But senior leaders, the hon. Members have pointed out that there are deficiencies in purchasing. … (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव :  बिहार और यू.पी. का धान रिजेक्ट क्यों कर रहे हैं?...( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : हरियाणा और पंजाब से लेकर ही सारे गोदाम भर दिये गये हैं।...( व्यवधान)

SHRI P. CHIDAMBARAM: I understood. I am answering it. … (Interruptions) I am answering it. … (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया: ठीक है, अब आप जवाब सुन लीजिए। वह कुछ कह रहे हैं। उनकी बात सुन लीजिए। अभी आप सभी कह रहे थे कि उनसे बुलवाइए। अब जब वह बोल रहे हैं तो उनकी बात आप सुन नहीं रहे हैं। आप उनकी बात सुन लीजिए।

…( व्यवधान)

SHRI P. CHIDAMBARAM: I am answering it. … (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : आप उनका जवाब सुन लीजिए। वे कुछ कह रहे हैं। अभी कह रहे थे कि उनसे बुलवाइए और अब वे बोल रहे हैं तो सुनिए।

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : महोदया, इसे ध्यानाकर्षण में कन्वर्ट कीजिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है, सुन लीजिए।

…( व्यवधान)

SHRI P. CHIDAMBARAM: Madam, they have pointed out various deficiencies like not enough purchasing centers, not purchasing enough paddy, rejecting paddy on the ground of not meeting the standards and not enough storages.  These are the deficiencies that they are pointing out.  I take note of these deficiencies.  I will convey it to the Minister concerned and we will call a meeting of the State Governments and officers concerned and try to remove these deficiencies as early as possible.

MADAM SPEAKER: Shri P. Karunakaran.

… (Interruptions)

श्री शैलेन्द्र कुमार : इसमें राज्य सरकार की बात नहीं है। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब क्या करें? ये क्या कर रहे हैं?

…( व्यवधान)

श्री राकेश सचान (फतेहपुर): माननीय मंत्री जी उधर बैठे हुए हैं। ...( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : इसे ध्यानाकर्षण करवा दीजिए।

अध्यक्ष महोदया : चर्चा कराएंगे, आप नोटिस दीजिए। आप क्या कर रहे हैं?

…( व्यवधान)

  12.16 hrs.   At this stage Shri Lalu Prasad, Shri Shailendra Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.

 

MADAM SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 2.00 p.m. 12.17 hrs The Lok Sabha then adjourned till Fourteen of the Clock.

       

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): उपाध्यक्ष महोदय, हम सब लोग चाहते हैं कि सदन चले। आपके सामने हम अपनी बात कहने में लंबा समय नहीं लेंगे। इसको पढ़ देंगे कि आज किसानों की क्या हालत है। किसानों का चावल ले लिया गया है, एफसीआई के अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया है। बाद में उसको रिजेक्ट कर दिया गया है। वहां पर कोई भी राशन मालिक चावल को खरीदने के लिए तैयार नहीं है। उत्तर प्रदेश के पूरे के पूरे गोदाम बाहर से चावल ला कर भर दिए गए हैं। वह चावल चाहे हरयाणा का हो, चाहे पंजाब का हो चाहे किसी और प्रदेश का हो। अब उत्तर प्रदेश का चावल है या बिहार का भी चावल है, तो वह कहां जाएगा? इसीलिए इससे संबंधित हालात को दो-तीन मिनट में पढ़ के हम अपनी बात समाप्त करते हैं। भाषण देने में तो समय लगेगा।

          महोदय, अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश में चावल मिलों द्वारा धान खरीद वर्तमान में एकदम धीमी हो गयी है। चावल मिलों में जाने पर मिल मालिकों द्वारा यह कहा जाता है कि उनके पास धान खरीद के लिए पर्याप्त पैसा व बोरे हैं, समझ लीजिये पैसा भी है, बोरे भी हैं, किन्तु इस वर्ष भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में डैमेज के नाम पर उनका चावल लगातार रिजेक्ट किया जा रहा है। इसके कारण वह धान खरीद में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम के स्टाफ से यह पता लगता है कि उनके सैंकड़ों अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय खाद्य निगम मुख्यालय द्वारा कठोर कार्यवाही करने एवं जांच बिठा दिये जाने के कारण उनकी नौकरी न चली जाये, इस डर से उनके द्वारा तमाम तरह की कमियां/आपत्तियां लगाकर चावल रिजेक्ट किया जा रहा है।

          महोदय, वास्तविकता यह है कि वर्ष 2011-12 में उत्तर प्रदेश में खरीदे गये धान के सापेक्ष भारतीय खाद्य निगम को चावल की डिलीवरी किये जाने के बाद दोबारा उच्च स्तरीय चेकिंग के कारण 90 हजार मीट्रिक टन चावल भारतीय खाद्य निगम द्वारा एक बार स्वीकार किये जाने के बाद रिजेक्ट किया गया है।...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप भी उनका समर्थन कर दीजिए।

श्री मुलायम सिंह यादव : हमारी बात सुन लीजिए, आप सबके बोलने के लिए जानकारी हो जायेगी। मैं आपसे यह कह रहा था कि 90 हजार मीट्रिक टन चावल भारतीय खाद्य निगम द्वारा एक बार स्वीकार किये जाने के बाद रिजेक्ट किया गया, पहले स्वीकार कर लिया और बाद में रिजेक्ट कर दिया। उक्त चावल का मूल्य लगभग 168 करोड़ रूपया है। एक बार स्वीकारने के बाद पुनः जांच कर रिजेक्ट चावल की यह मात्रा पूरे देश में सबसे अधिक है।

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य, क्या यह मैटर बहुत लंबा है?

श्री मुलायम सिंह यादव : नहीं, हम बहुत ज्यादा समय नहीं लेंगे। दो-तीन मिनट में हो जायेगा, यह बहुत गम्भीर मामला है।

          भारत सरकार भी यह मानती है, इसके बावजूद आपके चावल मिलर्स ने पूरी मात्रा रिप्लेस कर दी, जबकि ऐसा किसी भी प्रदेश में नहीं हुआ है।

          महोदय, इतना ही नहीं शत-प्रतिशत चावल रिप्लेस करने के बावजूद भी भारतीय खाद्य निगम मुख्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश में तैनात भारतीय खाद्य निगम के सैंकड़ों अधिकारियों/कर्मचारियों पर कठोर जांच बिठा दी है। लगभग 224 अधिकारियों/कर्मचारियों को मेजर/माइनर पैनल्टी के अन्तर्गत चार्जशीट दे दी गयी है, जिससे इन सबकी नौकरी खतरे में पड़ गयी है। उक्त अधिकारियों में श्रेणी एक के अधिकारी, भारतीय खाद्य निगम के एरिया मैनेजरों के साथ-साथ, टी0ए0, ए0जी0एम0 (क्यू0सी0) आदि सम्मिलित हैं। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में भारतीय खाद्य निगम के तत्कालीन वरिष्ठतम् अधिकारी, सामान्य प्रबन्धक, भारतीय खाद्य निगम को भी स्थानान्तरित कर उन्हें भी मेजर पैनल्टी के अन्तर्गत चार्जशीट दिया गया है। इसी तरह क्वालिटी कंट्रोल हेतु उत्तर प्रदेश में भारतीय खाद्य निगम के वरिष्ठतम् अधिकारी तत्कालीन डिप्टी जी0एम0 (क्वालिटी कंट्रोल) को भी स्थानान्तरित कर उनको भी मेजर पैनल्टी की चार्जशीट दी गयी है। इन कार्यवाहियों के कारण भारतीय खाद्य निगम के लखनऊ मुख्यालय से लेकर जिलों में डिपो तक के कर्मचारियों में इतना डर एवं भय व्याप्त हो गया है कि वह किसी भी स्थिति में गत वर्षों की भांति तैयार चावल की डिलीवरी लेने के लिए तैयार नहीं हैं एवं दोबारा सुपर चेक में संभावित कार्यवाही से बचने के लिए येन-केन प्रकारेण चावल रिजेक्ट कर रहे हैं। इसके कारण पूरे प्रदेश में धान की सरकारी एवं लैवी खरीद लगभग ठप्प हो गयी है, जबकि इस वर्ष सरकारी केन्द्रों पर पैसे, बोरे एवं अन्य सुविधायें पूरी तरह उपलब्ध हैं। बोरा भी है और पैसा भी है।

          पिछले वर्ष का सी0एम0आर0 लगभग दो लाख मीट्रिक टन तथा लैवी चावल लगभग पांच लाख मीट्रिक टन भी भारत सरकार से समय बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद भी भारतीय खाद्य निगम द्वारा उन्हीं कारणों से रिजेक्ट करते हुए नहीं लिया जा रहा है।

          इसके अतिरिक्त इस वर्ष अब तक सरकारी खरीद लगभग 3.25 लाख मीट्रिक टन हुई है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम द्वारा मात्र 12,500 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी ली गयी है। जबकि गत वर्ष इस समय तक लगभग 1.13 लाख मीट्रिक टन सी0एम0आर0 की डिलीवरी ली गयी थी। इसी तरह इस वर्ष चावल मिलों द्वारा कुल 5.83 लाख मीट्रिक टन लैवी हेतु धान खरीदा गया है, परन्तु मात्र 4600 मीट्रिक टन लैवी चावल ही भारतीय खाद्य निगम द्वारा लिया गया है।  जबकि गत वर्ष इस समय तक 1.60 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी ले ली गई थी। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भारत सरकार के वरिष्ठतम अधिकारियों से इस बारे में कई बार अनुरोध किया गया परंतु उसके सकारात्मक परिणाम नहीं निकले। प्रदेश सरकार द्वारा अनुमान्य डैमेज के मानक तीन प्रतिशत से चार प्रतिशत किये जाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया। यह भी अनुरोध किया गया कि यदि शिथिलीकरण कर उक्त अनुरोध स्वीकार योग्य पाया नहीं जाता है तो पूरे राज्य के तीन प्रतिशत मानक को एक प्रतिशत वैल्यू कट के आधार पर शिथिल करने पर विचार किया जाए। आपसे करबद्ध निवेदन है कि वैल्यू कट के साथ नई नहीं, बल्कि किसानों के हित में बिना वैल्यू कट ही पंजाब की तरह एक प्रतिशत डैमेज भारत सरकार से अनुमान्य कराने हेतु आप अपने स्तर से कार्रवाई करने की कृपा करें। ...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय :

 
श्री हुकुम सिंह,     श्री राकेश सचान,   ड़ा. विनय कुमार पाण्डेय,    प्रो. शेख सैदुल हक़ का नाम श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा उठाए गए मामले के साथ संबद्ध किया जाता है।
    श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर):   उपाध्यक्ष महोदय, प्रमुख विपक्षी पार्टी के नाते मैं बोल रहा था और उस समय हाउस एडजर्न हुआ। वही विषय है। भारतीय जनता पार्टी मुख्य विपक्षी दल को को इस पर मौका मिलना चाहिए। ...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप संक्षेप में बोलिए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  उपाध्यक्ष जी, मैं मुलायम सिंह जी की बात से अपने को संबद्ध नहीं करता हूँ। यह सही है कि इस देश में किसानों की जो हालत है, जहाँ बिहार और यूपी में बड़ी तादाद में धान होता है और किसान जहाँ बाढ़ और सुखाड़ का सामना करते हैं, वहाँ पर आज़ादी के 60 साल बाद एफ.सी.आई. बनी, लेकिन एफ.सी.आई का जो मकसद था, वह पूरा नहीं हुआ है। कभी बिहार की बैल्ट में बाढ़ आती है तो बाढ़ से फसल खराब होती है और अगर बाढ़ नहीं आती है तो एफ.सी.आई. की ज़्यादतियों की वजह से उसका जो धान पैदा होता है, उसका मूल्य उसे नहीं मिलता है। एफसीआई जहाँ खरीदती है, 10 करोड़ की आबादी बिहार में है लेकिन अनुपात के हिसाब से बिहार में एफसीआई की खरीद का एवरेज बहुत कम है। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि ऐसे तो हमारी बिहार सरकार और बगल में जो झारखंड प्रदेश है, वहाँ भी टैक्स के ज़रिये यह खरीदारी होती है, लेकिन जो जिम्मेदारी भारत सरकार की है, वह दायित्व भारत सरकार सही से नहीं निभा रही है। जिसकी वजह से किसानों को जो समर्थन मूल्य मिलना चाहिए, जो समर्थन मूल्य अन्य राज्यों में मिल जाता है ...( व्यवधान) श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): आपने कितना खरीदा है?
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :   सब हमने ही खरीदा है। ...( व्यवधान) यह तो किसानों की बात है।
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य, उधर मत देखिए, इधर देखिये। उनको देखकर नहीं बोलिये। नज़र मत लगाइए, उधर मत देखिये।  …( व्यवधान)  उपाध्यक्ष महोदय, मैं उधर नहीं देख रहा हूँ। माशाअल्लाह, आपसे नज़र हट भी नहीं रही है, मैं इधर-उधर देख भी नहीं रहा हूँ।           मध्य प्रदेश में जिस प्रकार वहाँ की सरकार ने 50 रुपये प्रति क्विंटल इंसैन्टिव देकर किसानों ने जितना पैदा किया, उतना धान खरीदा। इसी तरह छत्तीसगढ़ गवर्नमैंट ने खरीदा है, बिहार सरकार खरीद रही है, झारखंड सरकार खरीद रही है। लेकिन जो ज़िम्मेदारी भारत सरकार की थी, फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया कब तक गोदाम बनाएगा? आज यूपी और बिहार के धान को रिजैक्ट कर दिया जाता है। जब भारत सरकार उसको कमतर मान रही है तो कल क्या वॉलमार्ट आकर हमारा धान खरीदेगा? श्री मुलायम सिंह यादव : जबकि हमारा धान अच्छा है।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :   जी हाँ, हमारा धान अच्छा है। लेकिन अच्छे धान को भी भारत सरकार बुरा बता देती है। इसलिए हम लोग गुज़ारिश कर रहे हैं कि जब सरकार इस निगाह से देख रही है तो वॉलमार्ट आकर हमारा क्या धान खरीदेगा, किसानों का क्या भला होगा? ...( व्यवधान) मेरा तो माइक ही बंद हो गया। उपाध्यक्ष महोदय :  आपका माइक काम कर रहा है, हम आपकी बात सुन रहे हैं।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  उपाध्यक्ष जी, मैं भागलपुर से आता हूँ। बड़ी तादाद में वहाँ पर धान पैदा होता है। पूरा दियारा का बैल्ट, पैंती का बैल्ट, कहलगाँव का बैल्ट धान पैदा करता है लेकिन हमारे किसान वह धान लेकर बैठे रहते हैं, कोई खरीददार नहीं मिलता है। मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहता हूँ कि यूपी, बिहार तथा झारखंड में बड़ी आबादी रहती है। इन राज्यों के साथ उपेक्षा हुई है। हम तो विशेष राज्य का दर्जा मांग रहे हैं कि हम लोगों की उपेक्षा हुई है। हम समुद्र के किनारे बसे हुए राज्य नहीं हैं। हमारे पास जो भी ताकत है, वह खेती है और खेती में भी जब किसान अपने दम पर पैदा करेंगे और सरकार उनको कोई सुविधा नहीं देगी, उसको खरीद का मूल्य नहीं मिलेगा, एफसीआई वहाँ पर गोदाम नहीं बनाएगी, तो क्या होगा? क्या यह सही नहीं है कि यूपी, बिहार और झारखंड में सबसे कम गोदाम बनाए गए हैं, एफसीआई का सबसे कम ध्यान इन राज्यों पर है। मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहता हूँ कि सरकार तुंत घोषणा करे कि इन राज्यों के किसानों का भी माल वह खरीदेगी और इनकी जो उपेक्षा हुई है, इनके साथ जो नाइंसाफी हुई है, उसको इंसाफ में बदलेगी, यही दर्द मैं आपके सामने रख रहा हूँ । जो दर्द है, वहां के किसान त्राहि-त्राहि मचा रहे हैं, जो भी सवाल है, वह बिहार सरकार अपने दम पर कर रही है।...( व्यवधान) लेकिन केन्द्र सरकार के द्वारा उपेक्षा की जा रही है। पूरा प्रदेश परेशान है। हम लोग क्षेत्र में जाते हैं, क्षेत्र के किसान परेशान हैं, कभी भी सरकार सिर्फ आश्वासन दे देगी। सरकार के फ्लोर पर सिर्फ आश्वासन मिलता है, काम नहीं होता है। जब सरकार यहां वचन दे देती है, फिर वचन से मुढ़ जाती है।...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप सरकार से क्या चाहते हैं, वह बताइए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : उपाध्यक्ष जी, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं कि सरकार सिर्फ वचन नहीं दे, बल्कि अभी से योजना बनाकर यहां घोषणा करे कि कितने गोडाउन बनेंगे, कब बनेंगे, कितनी राशि मिलेगी और किसान का जो दर्द है, वह सरकार के कान तक कब पहुंचेगा? यही मैं अनुरोध करना चाहता हूं।...( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER:  Now, the House will take up Item No.11.
… (Interruptions)
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): महोदय, सभी को एक-एक मिनट बोलने दीजिए।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप लोग अपने को सम्बद्ध कर दीजिए।
…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): महोदय, यह गंभीर विषय है। किसानों में हा-हा कार मचा हुआ है।...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : विषय तो आ चुका है।
…( व्यवधान)
THE MINISTER OF FINANCE (SHRI P. CHIDAMBARAM):  Mr. Deputy-Speaker, Sir, I said in the morning that I share the concern of the hon. Members and I would convey it to the Minister concerned.… (Interruptions)  Shri Lalu ji has said about it in the morning. In the morning itself, it was over.… (Interruptions) उपाध्यक्ष महोदय : दो सदस्य बोल चुके हैं।
…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, किसानों में हा-हाकार मचा हुआ है। हम लोगों को भी बोलने के लिए एक-एक मिनट दे दीजिए। कृपा कीजिए महोदय।...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : पहले भी बोला गया था। सुबह भी इस संबंध में चर्चा हुई थी, कुछ बातें रह गई थीं, जो कि मुलायम सिंह जी ने रखी हैं। इनका भाषण पूरा नहीं हुआ था, जो इन्होंने बोला है। इस विषय पर पार्लियामेंट में चर्चा हो चुकी है, फिर बार-बार वही चर्चा करने से क्या फायदा है? इस तरह से हाउस नहीं चल पाएगा। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : अभी लैजिस्लेटिव बिज़नेस बाकी पड़ा हुआ है।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI P. CHIDAMBARAM: We cannot have a debate on this.… (Interruptions)
AN HON. MEMBER:  Let the reply come.… (Interruptions)
SHRI P. CHIDAMBARAM:  I said in the morning that I share the concern of the hon. Members.… (Interruptions) डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : ऐसे नहीं चलेगा, आप हमारी बात भी सुन लीजिए।...( व्यवधान)
SHRI P. CHIDAMBARAM: You cannot come and  speak whenever you like to speak. Shri Lalu ji has spoken. Sir, please tell him that Shri Lalu ji has spoken in the morning. उपाध्यक्ष महोदय : लालू जी बोल चुके हैं और कितने सदस्य बोलेंगे?
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपके नेता लालू जी बोल चुके हैं।
…( व्यवधान)
SHRI P. CHIDAMBARAM: Dr Raghuvansh Prasad Singh, Shri Lalu ji spoke in the morning.… (Interruptions) उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी ने जवाब दे दिया है, अब आप बैठ जाइए। यह विचार कर रहे हैं। कोई जरूरी है कि हर आदमी बोले। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी ने जवाब दे दिया है।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप लोग कृपया बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : जो सवाल दोनों ने उठाया था और जो सवाल ज़ीरो ऑवर में उठा था, उसका जवाब मंत्री जी ने दे दिया है। उस मंत्री जी को पहुंचा देंगे और उस विभाग के मंत्री जी काम करेंगे। इसलिए जवाब मंत्री जी ने दे दिया है। …( व्यवधान)
  SHRI P. CHIDAMBARAM: Sir, every Member cannot speak on every subject. I have already assured the House that the feelings of the Members would be conveyed to the Minister concerned.… (Interruptions) The Minister will be requested to take a meeting of the State Government officials, the FCI officials and even  Members of Parliament in the area. We will try to remove all the deficiencies to the farmers so that the farmers do not suffer.… (Interruptions) I understand the Minister had already held a meeting this morning. He will hold further meetings to resolve the problem. I do not think everybody would need to speak on every subject. … (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER:  Hon. Minister.
SHRI P. CHIDAMBARAM: Sir, I beg to move the Enforcement of Security Interests and Recovery of Debt Laws Bill…. (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER:  He has already replied to it.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी ने जवाब दे दिया है। आप लोग बैठ जाइए। जरूरी नहीं है कि सभी सदस्य बोलें।
…( व्यवधान)
SHRI P. CHIDAMBARAM: The Chair has called me. I have already said that I share the concern of the hon. Members.…(Interruptions) Can every Member speak on every subject?… (Interruptions)   उपाध्यक्ष महोदय : आप लोग कृपा करके बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : जो सवाल दोनों माननीय सदस्यों ने उठाया था और ज़ीरो आवर में भी उठा था, उसका जवाब मंत्री जी ने दे दिया है। उसे मंत्री जी को पहुंचा देंगे। उस विभाग के मंत्री जी काम करेंगे। उन्होंने जवाब दे दिया। …( व्यवधान)
14.30 hrs The Lok Sabha re-assembled at Thirty Minutes past Fourteen of the Clock.
 

(Shri P.C. Chacko in the Chair)   SUBMISSION BY MEMBERS Re: Need to open more procurement centres for paddy in the country- Contd.

   

14.30¼  hrs.   At this stage, Shri Shailendra Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.

MR. CHAIRMAN : Go back to your seats.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: All the party leaders have participated in this discussion and the Minister has given a detailed reply.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: ‘Zero Hour’ submission cannot be made into a discussion.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Mulayam Singh ji, the Minister has given a detailed reply that the matter will be brought to the notice of the concerned Minister and a conference will be called and action will be taken. More than this, nothing can be taken.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please go back to your seats.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: We cannot go like this.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now discussion on Item 11, Shri Dushyant Singh.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please go back to your seats.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Mulayam Singh ji raised this issue.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: The hon. Minister is on his way, I am told. In another 10 minutes the Minister will be here.  Please allow the other Item to be taken up.  As soon as the Minister comes, he will reply.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: This is not right.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now, please go back to your seats.  The Minister has come.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please resume your seats.  The hon. Minister is here.

… (Interruptions)

14.34 hrs At this stage, Shri Shailendra Kumar and some other hon. Members went back to their seats.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: See, this is a ‘Zero Hour’ submission and we cannot expect the Government to come with the ready reply.  But at the same time, this being a very important issue raised from all sides of the House, I asked the hon. Minister to give a reply to this. You please listen to that.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: We cannot allow any discussion at this stage. Please take your seat.

… (Interruptions)

 MR. CHAIRMAN: Mr. Ram Chandra Dome, Please take your seat.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please take your seat.

… (Interruptions)

   

THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF CONSUMER AFFAIRS, FOOD AND PUBLIC DISTRIBUTION (PROF. K.V. THOMAS): Sir, I was in the other House, in Rajya Sabha, and sitting there. I just came to know that Mulayam Singh ji has raised this issue.  Mulayam Singh ji had called me a few days back and a delegation came to me.  We had a detailed discussion.  We are sending a high level team to UP. … (Interruptions)

SHRI SYED SHAHNAWAZ HUSSAIN (BHAGALPUR):  Why not in Bihar?… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN:  Shahnawaz ji, let him complete then you can speak. 

… (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: I am starting with UP and then come to Bihar. Please give me some time. … (Interruptions) I can answer one by one. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please take your seats.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Mr. Ram Chandra Dome, Please take your seat. Let the Minister to explain.  Please do not disturb him.

… (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: If you allow me, I will answer one by one.  I am prepared to answer all the questions. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Hon. Minister, Mr. Mulayam Singh Yadav ji, Lalu Prasad Yadav ji, Shahnawaz Hussain ji and many hon. Members have raised this issue.   Please mention those States and what you are going to do.

PROF. K.V. THOMAS: I will answer all the questions one by one.  As it is a procurement season, fortunately we have got the highest production in the country. Highest procurement is going on. It is a serious issue. 

          A few days back, Mulayam Singh ji called me over the phone at night.  He sent a high level team of MPs.  They had come and met me day before yesterday and today also.  After our discussions, we have decided first to check the quality.  In quality we cannot compromise.  To check the quality, we are sending a team today itself to UP.  The team has been approved by the UP Government also.  Secondly, there will be a discussion on Monday with all the senior officers of UP and our senior officers have to find out the mechanism for procurement.  As you know, the procurement is taking place in every part of the country.  We will find out the solution.  We have been deputing more FCI staff, specially, quality control staff, to UP so that this issue can be settled.

          Then, when this Session is over, our senior Secretary will be going to UP.  He will discuss with the UP officers and find out a solution. Finally, if there is something remains then I myself will go to UP and discuss with the Chief Minister and find out the solution. … (Interruptions)

          Now, I am coming to Bihar. The hon. Chief Minister was here. He met  Agricultural Minister and me also.  We have had a threadbare discussion on this issue.  All the problems have been discussed.  Solutions will be found out very soon.  Our senior secretaries will be going to Bihar and they will find out a solution.  What I could understand is that the hon. Chief Minister was satisfied with that. This discussion took place about two days back.

          Now, I come to West Bengal.  I just have the information about the problem of West Bengal.  We are sending our officers to West Bengal.  Even last year also, hon. Members know, I sent a team. … (Interruptions) 

MR. CHAIRMAN: Silence please.

… (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: Last year also, we had been discussing this issue with the hon. Members.

PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Yes, I myself was there.

PROF. K.V. THOMAS: I discussed with him.  The problem is this.  In this season or in the last season, this is the best production. The production has happened at such a higher level.  The MSP has been raised.  The States are announcing bonus.  As a result, the private trade, which has been procuring about 40 per cent, in not in the field.  The Government is procuring more than 47 per cent.  Usually, Government procures only 25 per cent.  You should talk with Chidambaram ji on this issue.  There is an unending procurement so we have to find out a solution.  Last season, we had procured 80 million tonnes but what we needed was only 55 million tonnes.   But we have allowed export.  Export is going on from the Central Pool.  Export is done by the private people.  For export also, there is a subsidy component; you have to find out the subsidy component. 

          As regards OMSS, usually every year we release about 20 lakh tonnes or 25 lakh tonnes.  Already 30 lakh tonnes have been released, and 70 lakh tonnes are to be released now. Sir, what I am saying is that there is a huge subsidy.  … (Interruptions)

          Coming to West Bengal, the hon. Members from West Bengal know that last year we had sent a team and it discussed with the State Government; and if there is any problem in procurement, we will solve it.  They have just started procurement in West Bengal.  They are doing a good job.  Whatever assistance is needed from our side, we will give.

          Coming to Odisha also, … (Interruptions)

DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR):  Many farmers have committed suicide. … (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: That is a different issue. … (Interruptions) I am coming to Orissa.  I want to assure every State that … (Interruptions)

DR. RAM CHANDRA DOME : More than hundred farmers have committed suicide. … (Interruptions)

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PERSONNEL, PUBLIC GRIEVANCES AND PENSIONS AND MINISTER OF STATE IN THE PRIME MINISTER’S OFFICE (SHRI V. NARAYANASAMY): Do not bring your Bengal politics here. … (Interruptions)  He is telling that the farmers are committing suicide in West Bengal.  The Trinamool Congress MPs should deny it. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Dome, allow the hon. Minister to complete his speech.   

… (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: Sir, as far as Odisha and other producing States are concerned, we are … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: He has given a detailed reply.  You should be satisfied with that.  Please take your seat.

… (Interruptions)

PROF. K.V. THOMAS: For every State, there is production.  We will monitor the situation.  Whatever assistance is needed for FCI, that will be given.  There would not be any dearth of that. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now, we have a very detailed reply from the Minister. 

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now, it cannot go on like this.

… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): जो राइस खरीदा जा चुका है, उसे दोबारा रिजेक्ट कैसे कर दिया? पहले तो उसे स्वीकार कर लिया, कोई कमी नहीं पायी गयी और अब उसी चावल को रिजेक्ट कर दिया है।  वहां पर कोई भी अनाज मिल मालिक धान खरीदने के लिए तैयार ही नहीं है। ...( व्यवधान)

PROF. K.V. THOMAS: Shri Mulayam Singh ji, today morning I discussed with your senior Members of Parliament and this issue was sorted out. So, our team is going today itself. But we should also understand that there cannot be any compromise on quality. 

श्री मुलायम सिंह यादव : आप समाधान कब तक कर लेंगे? 

PROF. K.V. THOMAS:  I am sending the team and the members of that team are acceptable to you.  I suggested the team members and they are also acceptable to you.  … (Interruptions)

PROF. SAUGATA ROY : Mr. Chairman, Sir, I would like to seek one clarification from the hon. Minister. 

          Sir, I am happy that the hon. Minister has come forward and tried to assuage the feelings of the Members of all sides of this House, who are agitated about the procurement of rice in the country.  West Bengal is the first in rice production in the whole country.

          I would like to put only one question.  Dr. Kakoli Ghosh Dastidar and myself just spoke to the West Bengal Food Minister to find out whether there was any problem in procurement.  Shri Mulayam Singh mentioned about the problem in Uttar Pradesh that FCI was rejecting it on the basis of quality, too much moisture. That problem is not there in West Bengal but there is a general demand – FCI is paying Rs.1,250 per quintal – for raising this price to Rs.1,350 per quintal. Would the hon. Food Minister kindly consider that?  That is the only question.  There are no other questions. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: That has already been replied.

          Now, we are moving to item no. 11.  Shri Dushyant Singh.

… (Interruptions)

 MR. CHAIRMAN: Prof. Saugata Roy, price revision cannot be announced by the hon. Minister here. You know that.

… (Interruptions)

PROF. SAUGATA ROY : Mr. Minister, I pray you to consider this. … (Interruptions)

 

MR. CHAIRMAN: They are discussing it with the State Government. Please take your seat.

… (Interruptions)

डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी (भुवनेश्वर):  ओडिसा में बंपर क्राप है। जो खरीद की थी ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Now, we are moving to item no. 11.  Shri Dushyant Singh.