Lok Sabha Debates
Combined Discussion On The Resolution Regarding 3 Rd Report Of The Railway ... on 7 March, 2013
> Title: Combined discussion on the resolution regarding 3rd Report of the Railway Convention Committee; Budget (Railway) 2013-14; Demands for Grants in respect of Budget (Railways) 2013-14; Suplementary Demands for Grants in respect of Budget (Railways) 2012-13 and Demands for Excess Grants in respect of Budget (Railways) for 2010-11 (Discussion not concluded).
MR. CHAIRMAN : Now the House shall take up Item Nos. 12 to 16 together. Hon. Railway Minister may move the Resolution.
THE MINISTER OF RAILWAYS (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): Sir, I beg to move the following Resolution:-
“That this House approves the recommendations contained in Paras 73, 74, 75, 76, 77, 79, 80, 81 and 82 of the Third Report of the Railway Convention Committee (2009), appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues, etc., which was presented in both the Houses of Parliament on 18th May, 2012.” MR.CHAIRMAN: Motions moved:
“That this House approves the recommendations contained in Paras 73, 74, 75, 76, 77, 79, 80, 81 and 82 of the Third Report of the Railway Convention Committee (2009), appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues, etc., which was presented in both the Houses of Parliament on 18th May, 2012.” “That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2014 in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.” “That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2013, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 3, 8, 9, 10, 13 and 16.” “That the respective excess sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to make good the excess on the respective grants during the year ended on the 31st day of March, 2011, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 3 to 8 and 10 to 13.” Shri Anurag Thakur to speak.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर, हि.प्र.): सभापति महोदय, रेल बजट पर चर्चा करने के लिए हमारी पार्टी की ओर से हमारी नेता सुषमा जी ने मुझे चर्चा प्रारम्भ करने का मौका दिया है जिसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। आज़ादी के समय से पहले रेल का बजट आम बजट से अलग प्रस्तुत किया जाता रहा है। विलियम ऑकवर्थ के नाम से एक व्यक्ति को अंग्रेजों ने रेलवे कमेटी का अध्यक्ष बनाया था और विलियम ऑकवर्थ ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसे ऑकवर्थ रिपोर्ट के नाम से जाना जाता था। उस रिपोर्ट में प्रस्ताव रखा गया कि सैपरेशन कंवेंशन 1924 के तहत रेलवे का अलग से बजट प्रस्तुत किया जाए। आज 7 मार्च 2013 हो गई है। लगभग 90 वर्ष बीत गये हैं। लेकिन हम आज भी लगभग उसी प्रथा पर चले आ रहे हैं। मेरे मन में एक प्रश्न उठता है कि क्या 90 वर्षों के बाद भी हमें अंग्रेजों की दी हुई प्रथा पर चलना चाहिए? मैं मानता हूं कि रेलवे बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन क्या यह खाद्य सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण है? क्या यह कृषि से ज्यादा महत्वपूर्ण है? क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण है? मैं भी मानता हूं कि रेलवे बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन क्या कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है? इस बात का उत्तर मेरे पास नहीं है कि क्या अब भी अलग से इसका रेलवे बजट प्रस्तुत करना चाहिए? लेकिन सदन में उपस्थित सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी बुद्धिजीवियों के सामने मैं इस प्रश्न को रखता हूं। शायद उनके पास कोई उत्तर हो।
16.14 hrs (Mr. Deputy Speaker in the Chair) मैं अपनी चर्चा को प्रारम्भ करने से पहले यह कहना चाहूंगा कि सर्विस सैक्टर्स में अगर सबसे बड़ा सैक्टर कोई है तो वह शायद रेलवे है जहां पर 14 लाख लोग काम करते हैं और जहां प्रतिदिन दो करोड़ लोग रेल के माध्यम से देश के एक कोने से दूसरे कोने पर पहुंचते हैं। इसलिए जब हम किसी सर्विसेज के बारे में सोचते हैं तो कुछ मापदंडों को लेकर हमें उसका मूल्यांकन करना चाहिए। मैं रेल बजट का मूल्यांकन करने के लिए पांच मापदंडों पर बात करूंगा - सेवा प्रभार, सुरक्षा, गुणवत्ता, रफ्तार और जीवन क्षमता यानी सर्विस चार्जिस, सेफ्टी, स्पीड और सस्टेनेबिलिटी। मैं इन पांच मापदंडों को अपने वक्तव्य की बुनियाद बनाना चाहता हूं। मैं सबसे पहले सर्विस चार्जिस के बारे में कहूंगा। वर्तमान रेल मंत्री जी से पहले जो भी रेल मंत्री रहे हैं, चाहे लालू जी रहे हैं, जिस तरह से लालू जी इंद्रजाल बुना करते थे, आंकड़ों का हेरफेर करते रहे थे, यही प्रथा 2004 से चली आई और आज तक वही आंकड़ों का हेरफेर बंसल जी करते चले आ रहे हैं। पवन जी ने कह दिया कि मैंने रेल किराया नहीं बढ़ाया है जबकि सच्चाई यह है कि शायद 15 वर्षों के बाद कांग्रेस पार्टी के पास यह मंत्रालय आया और जैसे ही यह मंत्रालय आया इन्होंने बजट का इंतजार भी नहीं किया और 21 फीसदी किराया बढा दिया। इनकी सरकार ने किराया बढ़ाया जिससे आम आदमी की कमर टूट जाएगी। शायद बजट में उन्हें कहते हुए थोड़ी सी भी झिझक नहीं हुई कि 21 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया गया है। यह तो प्रत्यक्ष तौर पर बढ़ाया गया और अप्रत्यक्ष तौर पर जो बढ़ाया वह फ्रेट चार्जिस हैं। माल भाड़ा 5.8 प्रतिशत बढ़ाया। इसके बाद कहा गया कि इसका कोई प्रभाव आम आदमी पर नही पड़ेगा। मैं बताना चाहता हूं कि फ्रेट चार्जिस का प्रभाव कैसे पड़ता है। आप कुल मिलाकर देखें कि खाद, यूरिया ट्रेन से आएगा तो किसानों पर इसका बोझ पड़ेगा और बाद में इसका बोझ आम आदमी पर ही पड़ेगा। खाद्य पदार्थों की बात करें, जब इन पर माल भाड़ा बढ़ेगा तो उसका बोझ भी आम आदमी की जेब पर ही पड़ेगा। मैं सीमेंट और स्टील की बात करना चाहता हूं, एक तरफ सरकार कहती है कि घर बनाइए और दूसरी तरफ माल भाड़ा बढ़ाकर उनकी जेब से पैसा निकाल लेती है। आपने कोल की बात कही, बिजली के दाम दिल्ली सरकार ने जिस तरह से बढ़ाए हैं उसके कारण लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। इसके बाद दाम और बढ़ेंगे। जब आपका मन यहीं नहीं भरा तो आपने कह दिया कि हम टेरिफ बोर्ड का गठन करेंगे। आपने तो वही बात कर दी जो पी.सी. चिदंबरम जी करते हैं, वो किसी पीसी सरकार से कम नहीं, जादूगर से कम नहीं, बाजीगर से कम नहीं। आप आंकड़ों से खेलते हो, इंद्रजाल बिछाते हो ताकि आम आदमी को समझ न आए कि रेट बढ़ते कहां से हैं।
महोदय, पेट्रोल और डीजल के दाम हर दूसरे महीने बढ़ जाते हैं। पिछले दो वर्षों में 24 बार दाम बढ़े हैं। आप कहते हैं कि हमारी सरकार ने दाम नहीं बढ़ाया पेट्रोल कंपनियों ने बढ़ाया है। बैंक की ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वित्त मंत्री जी कहते हैं कि हमने नहीं बढ़ाई हैं आरबीआई ने बढ़ाई हैं। इसी तरह अगले एक वर्ष जब दाम बढ़ेंगे तो रेल मंत्री जी कहेंगे मैंने नहीं बढ़ाए ये तो टेरिफ बोर्ड ने बढ़ाए हैं। आप भलीभांति जानते हैं कि आम आदमी की जेब से पैसा कैसे निकाला जाता है। आप वोट लेना भी जानते हैं, उनका पैसा निकालना भी जानते हैं। आम आदमी की कमर कैसे तोड़ी जाए, यह आपकी सरकार जानती है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 21 प्रतिशत किराया और साढ़े पांच फीसदी से ज्यादा माल भाड़ा बढ़ाने के बाद जो कसर रह गई थी और जिसकी शुरुआत लालू जी ने की थी उसे बंसल जी, आपने भी नहीं रोका। चाहे सप्लीमेंटरी चार्जिस सुपरफास्ट ट्रेन्स के लिए हों, चाहे रिजर्वेशन फीस हो, कैंसलेशन चार्जिस हों या क्लर्केज चार्जिस हों, इसके अलावा तत्काल चार्जिस में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। आपने भाषण में कहा - Passenger fares earning target is Rs.42,210 crore in the year 2013-14, an increase of 30 per cent. 30 प्रतिशत आमदनी रेल यात्री किराए से बढ़ेगी लेकिन ट्रेफिक केवल 5.6 प्रतिशत बढ़ेगा। यह कैसे बढ़ेगा? दाम बढ़ेंगे तो आमदनी भी बढ़ेगी। आपने सीधा नहीं कहा बल्कि किताबों में लिखकर भेज दिया। आपने सीधे तौर पर 21 प्रतिशत दाम बढ़ाए, साढ़े पांच प्रतिशत माल भाड़े के बढ़ाए और बाकी तत्काल चार्जिस आदि के बढ़ाए। तत्काल के नाम पर एक दिन पहले टिकट मिले तो मैं मान लूं, 70 फीसदी टिकटें खिड़की पर देते हैं और 30 परसेंट टिकटों का कोटा रोक देते हैं और छः महीने पहले तत्काल टिकट बेच देते हैं। क्या आपने दुनिया भर में कहीं सुना है कि तत्काल टिकट छः महीने पहले बिकती है? मान लीजिए आपको दिल्ली से लुधियाना जाना है और वह ट्रेन मुम्बई से पठानकोट जा रही है तो आपको मुम्बई से पठानकोट तक का किराया देना पड़ेगा और तत्काल के चार्जिस अलग से देने पड़ेंगे।
यह आम आदमी के साथ सरेआम लूट है। क्या उसके हिस्से की टिकटें उसे नहीं मिलनी चाहिए। 30 परसैन्ट टिकटें आप तत्काल में रोककर रखते हैं और फिर कहते हैं कि हमने दाम नहीं बढ़ाये। यह इंद्रजाल नहीं तो और क्या है, यह आप लोगों की बाजीगरी है।
आपने फ्रेट एडजस्टमैन्ट कम्पोनेन्ट की बात कही। आप खुद ही कहते हैं कि साल में दो-तीन बार किराया-भाड़ा बढ़ जाया करेगा। अगर ये सब होना है तो आम आदमी अंदाजा लगा सकता है कि यह सरकार आम आदमी के नाम पर वोट मांगती है और अगले तथा पिछले दरवाजे से उसे लूटती भी है। उसी माल भाड़े से ग्रेन्स, पल्सेज, ग्राउंडनट ऑयल, यूरिया आदि सब कुछ जाता है, इन पर इसका असर पड़ेगा। क्या रेलवे की माली हालत खराब है? आपने आपरेटिंग रेश्यो की बात कही। आपरेटिंग रेश्यो एनडीए के समय 91 प्रतिशत था, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों में यह क्या है, 2009-2010 में 95.3 प्रतिशत, 2010-2011 में 94.6 प्रतिशत और 2011-12 में 94.9 प्रतिशत यानी 95 प्रतिशत के लगभग आपरेटिंग रेश्यो है। यह हालत कैसे हुई। लालू जी अपने शुरू-शुरू के भाषण में कहा करते थे, यह रेल नहीं एक जर्सी गाय है, जिसका आज तक दूध नहीं निकाला गया। फिर कुछ वर्षों के बाद उन्होंने कहा कि मैंने बहुत दूध निकाल लिया है। क्या यह सचाई है? उसके बाद ममता जी आईं तो उन्होंने कह दिया कि इनके आंकड़े फर्जी थे, इस पर व्हाइट पेपर आना चाहिए. उन्होंने एक नई दिशा पकड़ ली। पिछले पांच वर्षों में इस देश ने पांच नये रेल मंत्री देखे हैं। यह हमारे देश की हालत है और रेलवे की हालत मैं आपके सामने रख ही रहा हूं। जब इनसे एक प्रश्न में पूछा गया कि क्या आप बाकी दुनिया के सिस्टम को स्टडी करते हो? मैंने इकोनोमिस्ट में एक आर्टिकल पढ़ा था कि 1931 में वर्ल्ड वार -1 और वर्ल्ड वार -2 के दौरान जर्मन रेलवे की जो हालत खराब हुई, उसकी वजह से उन्होंने 120 मिलियन डालर का भारी लॉस सहा। लेकिन आज उनकी यह हालत है कि लगभग दो बिलियन पैसेंजर्स प्रति वर्ष उनके माध्यम से सफर करते हैं। उन्हें वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज दी गई हैं, उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाया है। क्या आपकी सरकार के नाम पर कोई पैसा लगाने के लिए तैयार है। क्या आपने इंफ्रास्ट्रक्चर में कुछ पैसा खर्च किया है कि आज से बीस वर्षों के बाद हम कह सकें कि हमारी रेलवे की क्वालिटी बहुत अच्छी होगी। लेकिन जब आपसे प्रश्न पूछा गया तो आपने उत्तर में कहा - The information on operating ratio of railway systems in other countries is neither compiled nor maintained in this Ministry. आप सीखने के लिए तैयार नहीं है। यह हमारे देश की रेल की हालत है। अगर पूरी व्यवस्था की बात की जाए तो मैंने कहा था कि मैं कुछ विषयों पर अपनी बात रखूंगा, अभी मैंने केवल पैसेंजर्स के किराये, भाड़े और सर्विस चार्जेज की बात की है।
महोदय, सेफ्टी भी एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन जो आंकड़े आपके सामने आयेंगे, उन्हें सुनकर आप भी परेशान हो जायेंगे। मंत्री जी ने अपने भाषण में जो कहा, उस पर सब लोगों ने बड़ी मेजें थपथपाई। There has been a significant reduction in the incidence of rail accidents. Even though the volume of passengers and freight traffic has increased manifold, the number of consequential train accidents per million train kms. has decreased from 0.41 in 2003-04 to 0.13 at the end of 2011-12. मुझे कई बार सुनकर हैरानी होती है और दुख भी होता है, जब मैं मंत्री जी की ओर देखता हूं तो लगता नहीं कि इनमें मानवता नहीं होगी। एक देश का रेल मंत्री आंकड़ों में कहता है कि पहले दुर्घटनाएं 0.41 होती थीं, अब 0.13 रह गई हैं। क्या एक आम आदमी के जीवन की कीमत आपके लिए कुछ महत्व नहीं रखती है। क्या यह आंकड़ों का हेर-फेर नहीं है? आपने फिर से इंद्रजाल बिछाया है। पैसेंजर ट्रेन्स और फ्रेट ट्रेन्स के किलोमीटर्स जोड़कर आप आंकड़े फज करके उसे नीचे ले आये। अगर यह सचाई है तो दुर्भाग्यपूर्ण है। परंतु कड़वा सच यह भी है कि आपने जो आंकड़ों में हेर-फेर किया, उसके बावजूद मैं आपको कुछ आंकड़े बताता हूं, जो आपने प्रश्न के उत्तर में दिये थे, उन्हें मैं इस सदन के सामने रखना चाहूंगा। सबसे ज्यादा मौंते अनमैंड लैवल क्रॉसिंग्स के कारण होती हैं।
उपाध्यक्ष महोदय, सन् 2011-12 में 14611 लोगों की जानें गई हैं। सन् 2012-13 के पहले छह महीने में, केवल सितंबर तक 15,934 लोगों की जानें गई हैं। मात्र छह महीनों में एक साल की तुलना में लगभग 1300 जानें ज्यादा गई हैं। क्या आपके पास इस बात का उत्तर है, कोई तर्क है? आप घुमा-फिरा कर अपने लिए केवल तालियां बजवाना चाहते हैं, मेज थपथपाना चाहते हैं। लेकिन जिन लोगों की जानें जाती हैं, उनके बारे में आपकी कोई सोच नहीं है। वैसे हम आपसे कोई ज़्यादा उम्मीद भी नहीं करते हैं। इसलिए किसी ने दो लाइनें कही हैं मैं वह पढ़ कर सुनाना चाहता हूँ -
“ तुम और वफ़ा करोगे, यह मैं मानता नहीं। उसको फ़रेब दो, जो तुम्हें जानता नहीं।” यह देश आपको जान चुका है। लालू जी के समय से ले कर अब नौ वर्षों में जो आपकी सरकारों ने किया है, वह केवल आम आदमी को ठगा है। आंकड़ों का हेर-फेर किया है और रेलवे को घाटे की ओर ले जाते चले जा रहे हैं। मैं यहां पर एक बात और कहना चाहता हूँ कि आपने दो-दो कमेटियां बनाई हैं - एक सैम पित्रोदा की और दूसरी अनिल काकोदकर की। उन्होंने कुछ रिकमंडेशंस दी हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि मुंबई की जो सब-अर्बन रेलवे लाइन है, उसके आस-पास लगभग छह हज़ार लोगों की मौंतें होती हैं। वे भी अनमैंड रेलवे क्रॉसिंग्स के कारण होती हैं। ट्रेनों में जगह न होने के कारण जहां बहुत सारे लोग ऊपर चढ़ते हैं, कोई दरवाज़े के बाहर लटकता है, कोई गाड़ी के ऊपर बैठता है, जिनको जगह नहीं मिलती है, वे लोग या तो टक्कर के कारण या बाहर लटकने के कारण गिर कर मर जाते हैं। सच्चाई यह भी है कि जो 64 हज़ार किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क है, वह कई ऐसे क्षेत्रों से हो कर गुज़रता है, जिसके आस-पास कई घनी आबादी वाली बस्तियां हैं, झुग्गी-झोंपड़ियां हैं। उनके लिए कोई और चारा नहीं है, बल्कि उन रेल पटरियों के ऊपर से क्रॉस कर के उन्हें इधर-उधर जाना पड़ता है और अधिकतर लोग वहां पर मर जाते हैं। आपने अपने आंकड़ों में कहा है कि लगभग 17,000 हज़ार अनमैंड लैवल क्रॉसिंग्स इस देश में हैं। आप खुद ही कहते हैं कि सैंट्रल रोड फण्ड से केवल 1100 करोड़ रूपये हमें मिलते हैं, जब कि आपको 5000 करोड़ रूपये की आवश्यकता है। इसका मतलब अगले दस-बीस सालों के लिए यही आंकड़े आते रहेंगे, 15-20 हज़ार लोग प्रति वर्ष इन रेल दुर्घटनाओं में मारे जाते रहेंगे। आप क्या करने वाले हैं? अनिल काकोडकर ने उसी कमेटी में कहा है कि “Trespassing occurs because of lack of barricading, fencing and lack of adequate number of pedestrian over-bridges.” हमारे देश में अगर इन सब की कमी है तो आप क्या करने जा रहे हैं और कितने कम समय में करने जा रहे हैं? उन्होंने सेफ्टी सेस लगाने की बात कही है। क्या आप सेफ्टी सेस लगाने जा रहे हैं? आप अपने उत्तर में यह ज़रूर बताएं क्योंकि यह बात भी आपने आम आदमी से ज़रूर छुपाई है। आपने अपना जो रेवन्यु दिखाया है, उसमें कहीं न कहीं सेफ्टी फण्ड के नाम पर लगभग दो हज़ार करोड़ रूपये आप इस साल रेज़ करने वाले हैं। इसका मतलब है कि आप यह भी आम आदमी की जेब से निकालने वाले हैं। यह आपके ही एन्युअल प्लॉन के पेज 22 के पॉइंट नंबर 72 में लिखा हुआ है।
उपाध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि लगभग दो करोड़ लोग प्रति वर्ष इण्डियन रेलवेज़ के माध्यम से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाते हैं। उनकी जान को भी ये लोग खतरे में डालते हैं। उसकी कभी चर्चा नहीं करते हैं। डेढ़ लाख से ज़्यादा वैकेंसीज़ केवल सुरक्षा सैक्टर में खाली छोड़ी हुई हैं। आप समझ सकते हैं कि आम आदमी की जो रक्षा और सुरक्षा करनी चाहिए, उसको ले कर रेल मंत्री गंभीर नहीं हैं। 31 मार्च, 2001 को रेलवे के कुल कर्मचारी थे 15,12,530 और 31 मार्च, 2009 को कम हो कर 13,800 रह गए। आज क्या स्थिति है, वह आप जानते हैं। उससे भी कई लाख कम हो गए हैं। कुल मिला कर केंद्र सरकार के पांच प्रमुख विभागों के जो कर्मचारी थे, वे 38 लाख से कम हो कर 30 लाख रह गए हैं। आपकी सरकार में बेरोजगारी बढ़ी है। आम आदमी की सुरक्षा पर भी आपने एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। जो आपने डेढ़ लाख पोस्ट्स भरने की बात कही, पिछले नौ वर्षों में आपने कितनी पोस्ट्स भरीं जो आप एक वर्ष में डेढ़ लाख पोस्ट्स भर देंगे। आपकी सरकार के पास पैसा है नहीं, आपके कहने के बावजूद कोई पीपीपी मॉडल में नहीं आता है। आप कहते हैं कि आपने आरपीएफ में दस परसेंट वीमेन के लिए सीट्स रिजर्व रखी हैं, केवल दस प्रतिशत, संसद में हम 33 प्रतिशत महिलाओं को लाने की बात करते हैं और आप रेलवे में केवल दस प्रतिशत पोस्ट्स भरने की बात करते हैं। आपकी ही रिपोर्ट में कहा गया है कि forty per cent consequential and 60 per cent fatalities are accounted for by level crossings. मैं बार-बार उसी बात पर इसलिए आ रहा हूं कि इसके लिए आपके पास उपाय क्या है? सर, मेरे पास कुछ है, क्या मैं इसे एक मिनट में यहां दिखा सकता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय : नहीं।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : पवन जी, यह मेरे पास एक मिनट का वीडियो है। मैं मंत्री जी को इसके बाद इसे दे सकता हूं। उन्हीं ट्रैक के नीचे जो आपका सीमेंट का ब्लॉक लगा होता है, उसके अंदर एक छोटा सा जेनरेटर फिक्स हो जाता है। स्लीपर निकालना है, उसकी जगह दूसरा लगाना है, काइनेटिक एनर्जी से इलेक्ट्रिकल एनर्जी बनती है और वह बैटरी में स्टोर हो जाती है, जो उसे मैंड या अनमैंड क्रासिंग तक ले जाएगी और आपको बिजली के कनेक्शन की जरूरत नहीं है। यह जो आपने सोलर का प्रयोग किया और विंड मिल की आप बात करते हैं, ये दोनों फेल हो गयी हैं। आप आरडीएसओ से पता कर सकते हैं, जहां आपने सोलर के पैनल लगाए थे, दूसरे दिन वे मिट्टी से भर जाते हैं, उसके लिए आपको उतनी मैनपॉवर और रखनी पड़ेगी। अगर इन्हीं ट्रैक्स पर आप यह काइनेटिक एनर्जी का उपकरण लगाते हैं तो न आपको खर्च करना पड़ेगा और दो सौ मैंड या अनमैंड क्रासिंग्स के ऊपर आपको केवल एक यूनिट बनाना पड़ेगा, जो आपके जीएसएम आपरेटर्स के माध्यम से सीधा चल सकता है और आपके लाखों, करोड़ों रूपए बच सकते हैं। यह मैं आपको इसके बाद देने के लिए तैयार हूं।
मैं यहां आपकी केवल आलोचना करने के लिए खड़ा नहीं हुआ। देश में हमारा सहयोग कैसे हो सकता है, विपक्ष की भूमिका हम सकारात्मक तौर पर कैसे निभायें, उसमें मैं अपनी ओर से प्रयास कर रहा हूं। सेफ्टी ऑफ ब्रिजेज की बात की जाये, देश में लगभग 36,700 पुल ऐसे हैं, जो आजादी से पहले के बने हुए हैं। वे सौ साल पुराने हैं। आज उनकी स्थिति क्या है? दिल्ली और मुंबई से महत्वपूर्ण लिंक देश के लिए क्या होगा, उसकी हालत क्या है? भैरवगढ़ ब्रिज, जो रतलाम में है, उसे आज से आठ साल पहले डिस्ट्रेस्ट कह दिया गया। उस पर आपकी सरकार ने क्या कार्रवाई की, आठ वर्ष में कुछ नहीं किया। कह दिया कि पैसे की कमी है, इसलिए उस पर काम शुरू नहीं हो पाया। यह 330 मीटर का ब्रिज है, अगर यह टूट जाये तो जो 50 ट्रेन प्रतिदिन जाती हैं, इसका मतलब है कि वे 50 ट्रेन रोज की आनी जानी बंद हो जायेंगी। यानी कि रेलवे इंजन में जो ड्राइवर है, वह लगभग आधा घंटा पहले ट्रेन की स्पीड कम कर लेता है, उसे दस किलोमीटर की रफ्तार पर लाकर पुल पर से गुजरता है और आधा घंटा बाद फिर उसकी रफ्तार बढ़ाता है। आप सोच सकते हैं कि इससे कितना नुकसान होता होगा, कितनी बिजली, कितना डीजल, कितनी बाकी खपत होती होगी? जितना समय का नुकसान होता है, उससे ज्यादा नुकसान होता होगा, लेकिन मंत्री महोदय ने कह दिया कि हमारे पास पैसों की कमी है, यह हो नहीं सकता। जिस दिन टूट जायेगा तो ट्रेन बंद हो जायेगी या फिर जिस दिन हजारों लोगों की जान चली जायेगी तो आप फोटो खिंचवाने के लिए हाथ में चैक लेकर उनके परिवारों के पास चले जायेंगे, लेकिन पहले कोई कदम नहीं उठायेंगे। यह इस देश का दुर्भाग्य है कि आपने 50 वर्षों तक राज किया है और यह रेलवे की स्थिति कर दी है।
I wish to ask the Minister a very specific question and it is related to the safety of passengers. Are these bridges tested for by non-destructive techniques like ultrasonic, acoustic emission, strain gauging and radar, under water inspections, mapping unknown foundations, testing the foundations of bridges, fatigue life and the residual life assessment techniques? If so, how many times and how regularly? कृपया करके इसका उत्तर जरूर दें क्योंकि यह आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा की चिन्ता या रेल के स्वास्थ्य की चिन्ता यदि किसी ने की थी, मैं सुरक्षा और स्वास्थ्य को साथ में इसलिए जोड़ रहा हूं कि इस बारे में किसी व्यक्ति ने सोचा था तो देश के केवल एक प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सोचा था, जिन्होंने रेल सेफ्टी फंड बनाया था और 17 हजार करोड़ रूपये दिये थे। अगर रेल आज ज्यादा ढुलाई कर सकती है, ज्यादा बोझ ले जा सकती है तो नीतीश कुमार जी उस समय रेल मंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 17 हजार करोड़ रूपये दिये थे, जिसके लिए हम उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
कई एम्बीशियस प्रोजैक्ट्स की शुरूआत उस समय की गई और नेशनल रेल विकास परियोजना की बात की गई। इसके अंतर्गत जितने प्रोजैक्ट्स चले हैं, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि उनकी स्थिति आज की तारीख में क्या है। यशवंत सिन्हा जी ने मुझे अभी-अभी बताया था कि हज़ारीबाग को जोड़ने वाली लाइन के बारे के बारे में कहा गया था कि उसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। मैं जानना चाहता हूँ कि वह जल्द कितना जल्द होता है, कृपा करके यह भी बताइए क्योंकि इस पर मैं बहुत जल्दी आने वाला हूँ। 1975 में जो रेल लाइनें बनानी शुरू हुईं, 40 वर्ष हो गए लेकिन 347 प्रोजैक्ट्स आज भी पैन्डिंग हैं। इनसे ज्यादा उम्मीद मत कीजिए। अगले वर्ष हमारी सरकार आएगी, शायद तब बनकर तैयार होंगी। इनसे हम ज़्यादा उम्मीद नहीं कर सकते। मैं क्वालिटी और गुणवत्ता पर आना चाहता हूँ। माननीय मंत्री जी छलांग लगाने से पहले ही धराशायी हो गए। इन्होंने आसमान की तरफ नहीं देखा, ये ज़मीन से जुड़े रह गए। इन्होंने अपने वक्तव्य में पॉइंट 8, पेज नंबर 3 पर कहा है :
Point No. 8 of page 3 says: “The number of passenger trains has increased from 8897 in 2001-02 to 12,335 in 2011-12. Yet, the losses on these operations continue to mount, increasing from Rs. 4,955 crore in 2001-02 to Rs. 22,500 crore in 2011-12 and is estimated to be Rs. 24,600 crore in 2012-13.” आगे सुनने वाली बात है।
“This has also resulted in deterioration of services extended to our esteemed passengers.” इन्होंने खुद माना है कि सर्विसेज़ और गिरी हैं। दूसरी ओर आप कहते हैं कि हम आई.एस.ओ. सर्टिफिकेशन की बात करते हैं। आपको आई.एस.ओ. सर्टिफिकेशन की ज़रूरत नहीं है। यहाँ जितने सांसद बैठे हैं, इनमें से 90 प्रतिशत लोग ट्रेन के माध्यम से अपनी कांस्टीटय़ूंसी जाते हैं, शुक्रवार को जाते हैं, सोमवार को फिर आते हैं। इनसे पूछ लीजिए कि क्या सर्विसेज़ सुधरी हैं या खराब हुई हैं। बद से बदतर हुई हैं। ...( व्यवधान) इनको काहे की सर्टिफिकेशन चाहिए, हाउस सर्टिफिकेशन दे देगा। चूहे और कॉक्रोच मिलते हैं। आज यह हालत है। मैं मंत्री जी को भी कितना कोसूँ, इनके पास तो अभी-अभी मंत्रालय आया है। लेकिन आम आदमी की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी पैसेंजर फेयर बढ़ाकर और रेल फ्रेट बढ़ाकर। देखिए, चर्चा शुरू हो गई जब गुणवत्ता की बात आई। हमारे सांसद कितने गंभीर हैं गुणवत्ता को लेकर, क्योंकि ये आपकी तरह किसी अनुभूति की बात नहीं करते, ये अपने एक्सपीरियेन्स की बात करते हैं जो आम नागरिक की तरह ये ट्रेन में सफर करके करते हैं। मंत्री जी चंडीगढ़ से आते हैं, वह बहुत पॉश इलाका है। इसलिए उन्होंने अनुभूति की बात की कि वहाँ पर वाई-फाई होगा। ...( व्यवधान) वहाँ पर जहाज़ की कमी न रहे, वे इसका प्रयास कर रहे हैं। आम आदमी के नाम पर कांग्रेस केवल वोट मांगती है लेकिन आम आदमी सैकेन्ड क्लास के डिब्बे में सफर कैसे करता है, शौचालयों की स्थिति क्या है, उसके लिए खाने की सुविधा क्या है, उसके बैड की सुविधा क्या है? और तो और, मैं उस वास्तुकार की ढूँढ़ में हूँ जिसने ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी डिज़ाइन की थी। मुझे एक बार एक बुज़ुर्ग ने कहा कि बेटा क्या ऊपर की सीट ले लोगे? ऊपर चढ़ना कितना मुश्किल है? यह हमारे जैसे नौजवानों के लिए मुश्किल है तो आम बुज़ुर्ग और महिलाएँ ऊपर वाली सीट पर कैसे चढ़ेंगे? क्या उस डिज़ाइन को चेन्ज करने के बारे में आपने कभी सोचा है? गुणवत्ता की बात पर तो आपने पहले ही घुटने टेक दिये हैं। मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि गुणवत्ता की बात अपने डिपार्टमैंट से शुरू होती है। आपने अपने शुरुआती भाषण में कहा कि 14 लाख कर्मचारियों के बल पर हम भारतीय रेल को बुलंदियों पर ले जाएँगे लेकिन उनको दो साल बाद जब वर्दी देने की बात आती है, तो आप उनको बिलो क्वालिटी की वर्दी देते हैं। वे आंदोलन करते हैं। वे कोई डिज़ाइनर वर्दी नहीं मांगते। केवल आपने अपनी किताबों में जो लिखा है कि ब्रांडेड कपड़ा देंगे, यदि आपकी सरकार वह देने में भी सक्षम नहीं है तो आपसे क्या उम्मीद की जा सकती है कि आप आम ग्राहक को क्या देंगे?
खाने की बात कही गई। कभी खाने में कॉक्रोच निकलता है, कभी चूहा निकलता है, कभी लंबे बाल निकलते हैं। यह तो रेलवे के खाने की हालत है। इस देश की हालत क्या होगी, वह देश जान सकता है। ट्रेन में सफर करने वाला कहीं न कहीं यह सोचता है कि मैं थोड़े पैसे और खर्च कर लूं तो शायद मैं हवाई जहाज से सफर कर सकता हूं, क्योंकि एयरलाइंस बहुत आ गयी हैं।
टायलेट्स की मैंने बात कही। इनके एक मंत्री अपना प्वाइंट स्कोर करने के लिए देश भर में कहते हैं कि बायो टायलेट्स, ग्रीन टायलेट्स या इको टायलेट्स होने चहिए। लेकिन आपके इस बजट में इस पर कोई चर्चा ही नहीं की गयी है कि कितने समय के अंदर आप ट्रेनों में बायो या इको टायलेट्स देंगे। हम देश को खुले शौच से मुक्त करने की बात करते हैं, निर्मल ग्राम की बात करते हैं, लेकिन आज तक आप ट्रेन्स में ही यह नहीं कर पाए हैं। इससे बड़ा देश का दुर्भाग्य क्या होगा। आप आम आदमी की बात करते हैं, लेकिन आप फर्स्ट एसी के टायलेट्स को जाकर देखिए, उनमें जाकर हालत खराब हो जाती है।
जहां तक चादर और तकिए की बात है। मेरे पास फोटोग्राफ्स हैं, जो मैं पवन जी को दिखाऊंगा। ऐसे तकिए और चादर मिलते हैं कि वह मैले होते हैं, मुश्क मारते हैं। कम्बल से मुश्क आती है। आप यह बाकी सांसदों से पूछिए। इसलिए मैं अपने साथ हमेशा सफर के दौरान चादर साथ लेकर जाता हूं। यदि फर्स्ट एसी की यह हालत है तो सैकेंड और थर्ड एसी की क्या हालत होगी? लेकिन आप जर्मनी, फ्रांस और चीन की ट्रेन से तुलना करना चाहते हैं। इस पर मैं दो लाइनें पढ़ना चाहता हूं-
“छुपती नहीं है जो तेरे जहां की हालत है, यहां तो सांस लेना भी बड़ी जिसारत है।” आपने यह हालत रेलवे की कर रखी है कि आम आदमी भी शायद उसमें सफर करने से तंग आ गया है। लेकिन दुर्भाग्य है कि आपका एकाधिकार है, इसलिए आम आदमी के पास कोई रास्ता बचा भी नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि जिस तरह से हमारा रोड नेटवर्क बढ़ा है, अटल जी ने उसकी कल्पना की थी और आज बढ़िया नेशनल हाइवे बने हैं, जिससे वोल्वो बसों में कई लोग सफर करते हैं। लेकिन रेल से कन्नी काटते हैं। इसीलिए आपका फ्रेट में और पैसेंजर में शेयर कम हुआ है। यह बहुत चिंता का विषय है और इस पर आपको चिंता करने की आवश्यकता है।
आपने अनुभूति की बात कही है कि आप कैसी अनुभूति करना चाहते हैं। वहां एक कॉफी मशीन लगी होगी, एक टीवी लगाया होगा। आप अमीर आदमी की पार्टी की तरह बात करते हैं, लेकिन वोट के समय आपको आम आदमी की याद आ जाती है। क्या आपको बजट के समय आम आदमी याद नहीं आया, जब आपने 21 प्रतिशत रेल किराया बढ़ाया, जब आपने फ्रेट बढ़ाए, जब तत्काल चार्जिज़ बढ़ा दिए और क्लैरिकल चार्जिज़ से लेकर सभी चार्जिज़ बढ़ा दिए। आपने पिछले रास्ते से और अगले रास्ते से उसकी जेब से पैसा निकाला, तब शायद आपको आम आदमी की याद नहीं आयी। अनुभूति या एक्सपीरियंस, लेकिन आम आदमी क्या चाहता है, आपने उस पर नहीं सोचा। आपने चंडीगढ़ के अमीर को कैसी अनुभूति हो, आपने अपनी कन्स्टीटय़ूंसी वाले के लिए सोचा है कि किस तरह से उसको लैदर की सीटें दें, कॉफी दें, बढ़िया सर्विस हो रही हो। एयर होस्टेस की तरह एक महिला वहां आकर परोस रही हो। लेकिन गरीब आदमी की आपने इसमें चिंता नहीं की है। मैं आशा करता हूं कि आप गरीब आदमी की भी चिंता करेंगे।
अगला विषय भी बहुत महत्वपूर्ण है। इन्होंने तत्काल चार्जिज़ स्लीपर में 75 रुपये से बढ़ा कर 90 रुपये कर दिए हैं, एसी थ्री टियर में दो सौ रुपये से बढ़ा कर ढाई सौ रुपये कर दिए हैं, एसी टू टियर में दो सौ से बढ़ाकर तीन सौ कर दिए हैं। इसके अलावा पूरा रेल किराया तो यह एक कोने से दूसरे कोने का लेते ही हैं। आम आदमी को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। सप्लीमेंटरी चार्जिज़ भी इन्होंने बढ़ाए हैं, 20 से 30, 30 से 45 और 50 से 75 कर दिए हैं। रिज़र्वेशन फीस इन्होंने एसी थ्री टियर के लिए 25 से बढ़ा कर 40 कर दी है, एसी फर्स्ट के लिए 35 से 60 कर दी है और इसी तरह से बाकी भी चार्जिज़ इन्होंने बढ़ाए हैं।
अगला विषय भी बहुत महत्वपूर्ण है, जो स्पीड से जुड़ा हुआ है। लालू जी ने जो कलाकारी की, उसमें आप भी पीछे नहीं रहे। जो इंद्रजाल वह बिछाया करते थे, वह आपने भी बिछाया है। मैं उसमें से निकल कर जनता के सामने आंकड़े देना चाहता हूं। आपने दाम बढ़ा दिए ट्रेनों का नाम सुपरफास्ट रख कर। उनकी कैटेगिरी बदल देते हैं, जिससे आम आदमी को किराया ज्यादा देना पड़ता है। उसके बाद तत्काल में तीस परसेंट सीटें रिजर्व करके उसको फिर से लूटने का प्रयास करते हैं।
जब स्पीड की बात आती है तो सुपरफास्ट ट्रेन जो कहीं से सुपर नहीं है और न ही फास्ट है, न उसमें सुपर वाली कोई बात है, न कोई फास्ट वाली बात है लेकिन आप ने सुपरफास्ट ट्रेनों की कैटेगरी कर दी। उनकी कितनी स्पीड है? यह 50 किमी/घंटा है। यह एक अखबार में छपा है कि ट्रेनों की स्पीड फ्रांस में 320 किमी/घंटा, चीन में 300 किमी/घंटा, बेल्जियम में 300 किमी/घंटा, जापान में 300 किमी/घंटा, जर्मनी में 300 किमी/घंटा और भारत में औसतन 90 किमी/घंटा है। यह हालत है भारतीय रेल की। आप कहां की कल्पना कर रहे हैं? आप किस रफ्तार की बात कर रहे हैं? आपकी फ्रेट ट्रेन औसतन 25 किमी/घंटा की गति से भागती है जबकि दुनिया भर की ट्रेन 300 किमी/घंटा की गति से भागती है।
सर, ट्रेनों की स्पीड को मैं पंक्चुअलिटी के साथ जोड़ना चाहूंगा। यह जो आपके अधिकारीगण यहां बैठे हैं। ये भी कमाल के हैं। ये कह देते हैं कि एक कोने से शुरू होकर ट्रेन दूसरे कोने पर खत्म होती है। ये उसका टाइम कैलकुलेट कर लेते हैं कि यहां से शुरू हुई, इस कोने पर इतने समय पर पहुंचेगी और उस में चार-पांच घंटे का समय ज्यादा रख लेते हैं ताकि इंटरमीडिएट स्टेशन पर जो लेट होती है, उस समय को आखिर में पूरा कर लिया जाए। अगर पंक्चुअलिटी देखनी है तो इंटरमीडिएट स्टेशन पर आपकी ट्रेन कब, कितने समय में पहुंचती है, आप कृपया इसके आंकड़े सदन को दीजिए। तब पता चलेगा कि भारतीय रेल की क्या हालत है। यह जो आप चार-चार घंटे का गैप बीच में डालते हैं, इस में बिजली की खपत ज्यादा होती है, डीज़ल की खपत ज्यादा होती है, आम आदमी के समय का ज्यादा नुकसान होता है और आप को अपनी मैनपावर पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। आप को अपनी इफिशिएंसी बढ़ानी है तो आप को अपनी पंक्चुअलिटी में सुधार करना होगा। इस बात को मैं बल देकर कहना चाहता हूं।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जब अंग्रेज छोड़ कर गए थे तो उस समय लगभग 55,000 किलो मीटर रेल ट्रैक बने हुए थे। पिछले पैंसठ वर्षों में आप केवल उसे 63,000 किलो मीटर तक पहुंचा पाए हैं। वैगन्स भी पहले से कम हो गए हैं। पहले दो लाख पांच हजार वैगन थे, अब दो लाख चार हजार वैगन रह गए। ट्रेनों की स्पीड भी नहीं बढ़ी। आपके रेल ट्रैक भी कम रफ्तार से बन रहे हैं। आपके वैगन्स भी पहले से कम हो गए हैं। इस से पता चलता है कि आज की तारीख में भारतीय रेल की क्या स्थिति है। आप के आंकड़ों से ही सब पता चल जाता है।
ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए आपकी सरकार क्या कर रही है क्योंकि आपके सरकार की रफ्तार भी बड़ी धीमी है। आपने स्वयं इस में आंकड़े दिए हैं। आप ने आंकड़े दिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपैन्सन में 700 किलो मीटर की नयी लाइन्स का टारगेट था। उसे कम कर के आपने इस वर्ष 470 किलो मीटर कर दिया। क्या यह सच्चाई है? आप ने खुद अपने भाषण में कहा -
“The target of 700 km of new lines in the current year had to be scaled down to 470 km due to inadequate resources.” मंत्री जी, रेल बजट पर चर्चा हो रही है। जो नयी लाइन है, उस को आप ने 700 किलो मीटर से कम कर के 470 किलो मीटर कर दिया। जो गेज कंवर्जन था, वह भी आप ने इस वर्ष पैसों के अभाव में, धन के अभाव में 800 किलो मीटर से कम कर के 575 किलो मीटर कर दिया। यह तो इस सरकार की हालत है। देश आगे बढ़ने की बजाय पीछे की ओर भाग रहा है। इसीलिए मैंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी का धन्यवाद करो जिन के समय में देश में प्रतिदिन तेरह किलो मीटर नेशनल हाईवे बना करते थे। वह आप की सरकार में आ कर दो किलो मीटर प्रतिदिन रह गए। हमारे समय में 17,000 करोड़ रुपये रेल सेफ्टी फण्ड में दिए गए ताकि रेल नेटवर्क को स्ट्रेंथेन किया जाए। आप के समय में वह किलो मीटर भी कम हो गए। मैं कई बार सोचता हूं कि अटल जी नहीं होते तो इस देश की क्या हालत होती। आप इस की हालत को बद से बदतर करते जा रहे हैं।
मैं आगे जिस विषय पर आ रहा हूं वह इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है कि वह सस्टैनिबिलिटी के साथ, जीवन क्षमता के साथ जुड़ा हुआ है। रेलवे की सस्टैनिबिलिटी बहुत महत्वपूर्ण है। कोई भी सेवा नेक इरादों से जीवन क्षमता हासिल नहीं करती, बल्कि उसे इफिशिएंट और वाएबल होना पड़ता है। रेलवे को इफिशिएंट और वाएबल बनाने के लिए आप क्या करने जा रहे हैं, यह भी मैं आप से जानना चाहता हूं। आपकी इंटेंशंस तो मुझे बहुत सही नज़र नहीं आती। यूपीए-टू में देखें तो पहले दिन से टू-जी स्पेक्ट्रम, कॉमन वेल्थ गेम, कोल घोटाला और अब हेलिकॉप्टर घोटाला है। घोटाले पर घोटाला है। आप की सोच घोटालों वाली है तो आप आगे कहां बढ़ने वाले हैं?
“The path to hell is laid with good intentions.” आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, रेलवे की स्थिति बद से बदत्तर होती चली जा रही है। ये आंकड़े जब मैं आपको आगे बताऊंगा तो आपको पता चल जाएगा। पहले जब लालू जी रेल मंत्री बने तो उन्हें बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीस में भाषण देने के लिए बुलाया गया। वे अपने समय में कहते थे कि 25 हजार करोड़ तक का प्रोफिट हो गया और पवन जी के आते-आते उस समय तक वह सारा प्रोफिट चला गया। ममता जी जब आईं तो उन्होंने आते ही यूपीए-टू में कहा कि इसके फाइनेंसेस पर वाइट पेपर लाना चाहिए। मुझे नहीं पता चलता कि लालू जी वह कमाई कहां करके गए। क्या वह सच्चाई नहीं, वह केवल इन्द्रजाल बुना गया था। आंकड़ों का हेर-फेर था। आज वे असली आंकड़े सामने आते हैं। ममता जी आईं तो लालू जी से अलग राय लेकर चल पड़ीं। उन्होंने कहा कि मॉल्स, रेस्टोरेंट, 17 मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग इंस्टीटय़ूट्स बनाएंगे। ऑप्टीकल फाइबर बिछाएंगे, इंडोर स्टेडियम बनाएंगे। बसुमती साहित्य मंदिर को टेकओवर करेंगे और प्रिंटिंग प्रैस भी बनाएंगे। मुझे समझ में नहीं आता कि इस सरकार की मानसिकता क्या है। कोर इश्यु से हट कर हम नोन कोर इश्युस की बात करते हैं। हमारा कोर इश्यु क्या है कि रेलवे लाइंस को और स्ट्रेंथन्ड कैसे करना है, आम आदमी को सुरक्षा की दृष्टि से समय पर कैसे पहुंचाना है। स्वच्छता कैसे हो, अच्छा खाना कैसे मिले, इसके लिए प्रधानमंत्री जी जो कहते थे, वह मुझे आज तक कहीं नजर नहीं आता। शायद पवन बंसल जी की अनुभूति में वह नजर आए, लेकिन वह गिने-चुने एक करोड़ कमाने वाले व्यक्ति हैं, उनके लिए वह होगी, हम जैसे गरीबों के लिए नहीं है। वाइट पेपर जो आया, उसके बाद आगे जो आंकड़े हैं, आज फ्रेट ट्रेंस की क्या हालत है। हमारा शेयर आजादी के समय लगभग 85 प्रतिशत फ्रेट ट्रेंस का था। 85 प्रतिशत देश का जो भाड़ा उठाती थी, माल उठाती थी, उसे माल गाड़ियां उठा कर लेकर जाती थी। आज यह स्थिति है कि आपकी फ्रेट ट्रेंस का शेयर केवल 36 प्रतिशत रह गया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। दुनियाभर में कहा जाता है और पांडेय जी की कमेटी जो 1960 में बनी थी, उन्होंने कहा था कि 70 फीसदी शेयर रहना चाहिए। आप वह शेयर कम करके 36 फीसदी पर ले आए। रोड नेटवर्क का शेयर 57 प्रतिशत हो गया है। ये 57 प्रतिशत क्यों हुआ, क्योंकि अटल जी ने बढ़िया नेशनल हाईवे देश के लिए बना कर दिया। चाइना में ट्रेन का जो फ्रेट का हिस्सा है, वह लगभग 47 प्रतिशत है, यूनाइटेड स्टेट्स में 48 प्रतिशत है। दुनियाभर के देशों में पच्चास प्रतिशत से कम कहीं नहीं होता, केवल भारत में 36 प्रतिशत है। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है कि जो फ्रेट से हम कमाते है, वह हमारी आमदनी 70 फीसदी है। रेलवे का रेवेन्यू, जहां से निशिकांत दुबे जी और यशवंत सिन्हा जी आते हैं, झारखंड जैसा राज्य शायद आपको सबसे ज्यादा रेवेन्यू देता होगा, लेकिन उनके राज्य में आप उतना पैसा खर्च नहीं करते।
उड़ीसा से आपकी कमाई होती है, लेकिन आप 14 हजार करोड़ के बदले चार हजार करोड़ भी वहां पर खर्च करने के लिए तैयार नहीं होते। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से आपकी कमाई होती है, वहां पर भी आप उतना खर्च नहीं करते। आप केवल कांग्रेस शासित राज्यों तक सीमित होकर रह गए, इसीलिए लोगों ने कहा था कि रायबरेली और कांग्रेस का बजट होकर रह गया है, ये रेल मंत्री पूरे देश के रेल मंत्री नहीं बन पाए। आपको निकलना पड़ेगा, अपनी सोच बड़ी करनी होगी।
मैं आपको केवल इतना कहना चाहता हूं कि क्या आपने अपनी सोच बदली है? एक हजार टन से कम वाला जो फ्रेट सैक्टर है, क्या उसके लिए आपने कुछ सोचा है? कंटेनराइजेशन की जो बात की जाती है, क्या आपकी सरकार उस सैक्टर को पकड़ने के लिए सोचती है? आज भी 50 से 60 बोगी की ट्रेन में कई बोगिस ऐसी होती हैं, जो खाली रहती हैं। क्या आप उसमें दूसरे सैक्टर्स का सामान लाद कर ले जाना चाहेंगे ताकि आपका ये जो 36 प्रतिशत पर आया है, इसको बढ़ा कर हम वापिस 50 प्रतिशत पर ले सकें। आपको इसके ऊपर प्रयास करना चाहिए।
मैं यहां पर कोच रेशनलाइजेशन की बात करना चाहता हूं, जिसके ऊपर आपको विचार करना चाहिए। बहुत सारे मुख्य मंत्रियों ने यह बात कही है कि आपको इस दिशा में बढ़ना चाहिए ताकि आपका जो पोर्टफोलियो है, उसमें बदलाव हो सके। आप केवल मिनरल, कोल, सीमेंट और स्टील तक अपने आपको सीमित न रखें, बल्कि बाकी इंडस्ट्रीस को भी आप रेलवे पर लें। यह मैं इसलिए कहना चाहता हूं, क्योंकि आम आदमी जो एक ट्रक पर माल भरता है, पहले लोडिंग होती है, फिर स्टेशन पर ऑफलोडिंग होती है, उसके बाद फिर ट्रेन पर ऑनलोडिंग होती है। फिर जाकर ऑफलोडिंग होती है और ट्रक में भरकर पोर्ट पर सामान जाता है। आज उन्होंने सोचा है कि बार-बार लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च क्यों सहन किया जाए, ट्रक पर ही माल लादकर भेजते हैं, क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने इस देश में बहुत बढ़िया नेशनल हाइवेज बनाकर दे दिए थे। इसलिए आपके कंपटीटर के रूप में रोड नेटवर्क आज पहले ही है।
महोदय, मैं यहां पर लिंकेज की बात करना चाहता हूं। आपको हाई डेंसिटी नेटवर्क वाले एरियाज को चिन्हित करना होगा, चार मेट्रोज, टियर वन सिटीज, जहां पर मैक्सिमम ट्रैफिक है, वहां के नेटवर्क की आप डबलिंग कीजिए, थर्ड लाइन बिछाइए, चौथी लाइन बिछाइए, ताकि वहां से आपकी कमायी ज्यादा हो सके। आप बैकवर्ड एरियाज की ओर भी ध्यान दीजिए। जैसे मैं हिमाचल प्रदेश से आता हूं, 65 वर्षों में केवल 44 किलोमीटर रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश में बनी है। अंग्रेज ज्यादा बना गए थे, अपनी सरकारों ने कम बनायी है। उत्तराखंड में रेलवे लाइन नहीं है, झारखंड में नहीं है, जहां से सबसे ज्यादा आपका रेवेन्यू आता है। उड़ीसा, राजस्थान, नार्थ-ईस्ट की बात मैं करना चाहता हूं, पर बाकी देश का भी आप देखिए।
लास्ट माइल लिंकेज की आपने बात कही है, लेकिन आपके बजट में देखा जाए तो आपने कहीं यह नहीं कहा कि हम इस योजना को अगले दो वर्षों के अंदर पूरा कर लेंगे, लास्ट माइल लिंकेज के लिए पैसा देंगे, इससे हमारा इतना रेवेन्यू बढ़ेगा, यह सोच भी आपके बजट में कहीं नजर नहीं आती है। वर्ष 1975 से 347 रेलवे लाइन आपने चलायी हैं, जो पेंडिंग हैं, उन पर भी आपका कहीं कोई विचार देखने को नहीं मिलता है। केवल आपने कहा है कि इसे पूरा करेंगे, लेकिन आपने उनके लिए पूरा पैसा नहीं दिया है।
माननीय मंत्री जी, आपने पीपीपी मॉडल के माध्यम से 1 लाख करोड़ जुटाने की बात 12वीं पंचवर्षीय योजना में कही है। यह अपने आप में हास्यास्पद लगता है। आपकी सरकार की क्रेडिबिलिटी हाशिए पर है। ...* इसीलिए वर्ष 2007 से 2012 में आप मात्र आठ हजार करोड़ रूपए बाजार से उठा पाए हैं। आप एक लाख करोड़ रूपए पीपीपी मॉडल के माध्यम से उठाने की बात करते हैं, यह कहां से आएगा? यह मैं इसलिए कहना चाहता हूं, क्योंकि न ही यह संभव है और यूपीए के रहते हुए कभी संभव नहीं होगा। हां, अगली बार जब एनडीए की सरकार बनेगी, तो निश्चित तौर पर इस पर पैसा भी आएगा और यह प्रोजेक्ट भी हम पूरा करेंगे।
आपने रेल टूरिज्म की बात कही है। मैं हिमाचल प्रदेश से आता हूं, जहां आबादी साठ लाख की है, लेकिन एक करोड़ अस्सी लाख टूरिस्ट्स एक वर्ष में आते हैं। आपकी इस पूरी योजना में हिमाचल का कहीं नाम ही नहीं आता है। चंडीगढ़ से दो घंटे की दूरी पर शिमला है। अंग्रेज रेल शिमला तक ले गए थे, लेकिन आपकी सरकार में पिछले तीन वर्षों में एक नया इंजन या एक नया डिब्बा भी लगाने का प्रयास भी नहीं किया गया। उस नैरो गेज को ब्रॉड गेज करने की बात आपने नहीं कही। पठानकोट से जोगिन्दरनगर तक रेलवे लाइन अंग्रेज ले गए थे, लेकिन आपकी सरकार उसमें एक नया डिब्बा तक नहीं जोड़ पायी। उस पर नयी ट्रेन नहीं शुरू कर पायी। नैरो गेज को ब्रॉड गेज नहीं कर पायी। आप रेल टूरिज्म की बात करते हैं, लेकिन आपके बजट में रेल टूरिज्म के नाम पर केवल दिखावा है, छलावा है और कुछ नहीं है। टूरिज्म क्षेत्र की आपने घोर अनदेखी की है। रेल टूरिज्म से हम कोई उम्मीद भी नहीं करते हैं। नेशनल इंपोर्टेंस की प्रोजेक्ट्स की बात पर आपने बड़े गुणगान किए। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया संक्षेप कीजिए।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : महोदय, तीन-प्वाइंट कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे की बात करते हैं, आपने भनुपली, बिलासपुर, मनाली, लेह रेलवे लाइन की बात कही। आदरणीय प्रधानमंत्री जी मनमोहन सिंह के साथ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ...( व्यवधान) बंसल जी, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जुड़ा हुआ मामला है। मैं आपके केवल दो मिनट लूंगा। ...( व्यवधान) यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। ...( व्यवधान)
रेल मंत्री (पवन कुमार बंसल) : यह रेलवे से संबंधित है।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मुझे पता है कि यह सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी सदन में उपस्थित हैं।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उस समय के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल जी ने हिमाचल प्रदेश से जुड़ी भनुपली, बिलासपुर, मनाली, लेह रेलवे लाइन की बात कही। प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2008 के शुरूआत में कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुयी रेलवे लाइन है। इसे राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया जाएगा। पिछले चार बजट में उसकी केवल चर्चा की जाती है और इस बार भी रेल मंत्री जी ने कहा कि मैं इसको पर्स्यू करूंगा, केवल पर्स्यू करने की बात की जाती है, उसको बनाने की बात कहीं नहीं की जाती। इसके लिए बजट में क्या प्रावधान किया गया, उसकी बात कहीं नहीं की जाती है। इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप जब उत्तर दें, तो भनुपली, बिलासपुर, मनाली, लेह रेलवे लाइन को राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व से नेशनल इंपोर्टेंस का घोषित करें।
17.00 hrs उसका काम-काज शीघ्र शुरू कराएं। उसके लिए जो प्रावधान किया गया है उसको दिया जाए।...( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : कई बार आपने मेरा नाम लिया है। मैं अनुपस्थित था। हम पता भी कर लेंगे, मुझे बोलना भी है। आप नौजवान हैं। आप थोड़ा पढ़ने-लिखने का काम करिए। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : उन्होंने नाम लिया तो कोई बुरा नहीं किया है। बहुत लोगों का नाम लिया जाता है।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : लालू जी जब आपका मौका आएगा तो आप बोलिएगा।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : ये रेल मंत्री बोले हैं।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप को बुलाएंगे तो आप बोलिएगा।
…( व्यवधान)
श्री भूदेव चौधरी (जमुई): आप रेल मंत्री थे तो रेल मंत्री का नाम लिया जाएगा। इसमें क्या कठिनाई है। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप शांत रहिए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप मंत्री थे। इसलिए इन्होंने आप का नाम लिया है।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : उपाध्यक्ष जी, मुझे लगता है कि लालू जी आज भी अपने आप को रेल मंत्री समझते हैं। उस समय उन्होंने बजट प्रस्तुत किया था। उसके बाद वर्ष 2008-09 में सुषमा जी राज्य सभा में बोली थीं उन्होंने इनके भाषण का जो तार-तार किया था, मैं वह भाषण पढ़ चुका हूं। इन्होंने जो इंद्रजाल बुना था। सुषमा जी ने इनका असली चेहरा देश को दिखाया था। उसकी कुछ बातें मैंने यहां पर की। जिस तरह मेरी नेता ने इनके भाषण को तार-तार किया, मैं उस तरह का भाषण नहीं दे सकता हूं। उस भाषण को बाकी सदस्यों को जरूर पढ़ना चाहिए। क्योंकि लालू जी बदलाव करने में माहिर हैं।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप अपनी बात समाप्त करें।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : उसे देश जान गया है। व्हाइट पेपर जो उस समय लाए थे। ...( व्यवधान) आप वर्ष 2008-09 का भाषण देखिए। वे आंकड़े अपने-आप में सब बताते हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : श्री अनुराग सिंह ठाकुर के अलावा किसी और की बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।
...( व्यवधान)* श्री अनुराग सिंह ठाकुर : वर्ष 2005-06 में डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की बात प्रधान मंत्री जी ने लालकिले पर की कि हम डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाएंगे, इस्टर्न एण्ड वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर । आज आठ वर्ष बीत गए हैं, उस पर आज तक एक ईंट तक नहीं लगी है। यह देश का दुर्भाग्य है कि यूपीए सत्ता में है। लालू जी आपके समय में केवल लालकिले से घोषणा की जाती है और आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की हालत है।...( व्यवधान)
कृपया मंत्री जी बताएं कि डेडीकेट फ्रेट कॉरिडोर पर आगे देश कब तक देख पाएगा कि कब तक वह बने? कैग की रिपोर्ट में कहा गया है। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप अपनी बात समाप्त करिए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपने दो मिनट समय मांगा, अब पांच मिनट हो गया।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : देश का अगर कोई भ्रष्ट सरकारी विभाग है तो वह रेलवेज है। वर्ष 2011 में 8805 करप्शन के केसेज आए, इससे पता चलता है कि आप आम आदमी को रेल किराया बढ़ा कर भी लूटते हो, पिछले दरवाजे से भी लूटते हो, तत्काल चार्जेज बढ़ाकर भी लूटते हो और ट्रेनों को सुपरफास्ट बना कर भी लूटते हो, करप्शन के माध्यम से भी लूटते हो। आपकी सरकार केवल देश में लूट करने के लिए आई है, आम आदमी को सुविधा देने के लिए नहीं आई है। आप ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव की बात करते हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : आप ने केवल दो मिनट बोला।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप कितने समय तक बोलिएगा।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मुझे 45 मिनट बोलना है। 40 मिनट हो गया है। मैं 5 मिनट और बोलूंगा। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : समय हो गया। घड़ी सामने है।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैं यहां पर कहना चाहूंगा कि हिमाचल में जो 45 प्रतिशत खेती जिस जमीन पर होती है, वहां पर सेब पैदा किए जाते हैं। हमारे यहां जो खेती होती है उसमें लगभग 80 प्रतिशत खेती फलों की होती है। उसको दिल्ली की मंडी तक लाने के लिए लगभग 30 घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। आपने उसके लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया। आप एफडीआई रिटेल की बात करते हैं लेकिन क्या कोई एफडीआई में आकर रेलवे लाइन बिछाएगा, वह आपको बिछानी पड़ेगी। अगर किसानों के लिए काम करना है तो कृपया रेलवे लाइन बिछाइए। आपने वर्ष 1975 के बाद जो 347 प्रोजेक्ट्स बचे हुए हैं उनकी बात कही। उनमें नंगल, उन्ना, तलवाड़ा रेलवे लिंक, पिछले 32 वर्षों से यह चल रहा है जो आज तक पूरा नहीं हुआ। केवल 44 किलोमीटर रेलवे लाइन बनी है। 35 किलोमीटर रेलवे लाइन आज भी बनना बाकी है। आप के बजट में उसके लिए भी कुछ प्रावधान नहीं किया गया है। आप कितने किलोमीटर रेलवे लाइन इस वर्ष बनाने वाले हैं?
भनुपली, बिलासपुर, मनाली-लेह रेलवे लाइन की नेशनल इम्पार्टेंस है। आपने कहा मेरे प्रदेश से जुड़ी हुई है। ममता जी कह गई थीं कि साढ़े छ: सौ करोड़ रुपये देंगे, लेकिन हमें एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ। आपने 22 नई रेलवे लाइन की बात कही। मुझे प्रसन्नता हुई कि मेरे भाई निशिकांत जी को एक लाइन मिली है। आपने मात्र दस-दस लाख रुपये दिए। दस लाख रुपये में तो आजकल बस नहीं आती, रेलवे लाइन कहां से बनेगी।...( व्यवधान) अटल जी की सरकार ने बद्दी में इंडस्ट्री दी थी, फाइनैंशियल पैकेज दिया था, इंडस्ट्रियल पैकेज दिया था, आपकी सरकार ने आकर वापिस ले लिया। आपने रेलवे लिंक भी नहीं दिया। शिमला के सांसद कश्यप जी यहां बैठे हैं। इन्होंने हरिद्वार से जोड़ने के लिए दो लाइनों की मांग उठाई थी। आपने वह तक नहीं की। आपकी सरकार ने हिमाचल प्रदेश को दिया क्या है। केवल भेदभाव किया है। मैं इस पर आपके लिए दो लाइनें कहना चाहूंगा--
गजब किया तेरे वादे पे ऐतवार किया नौ साल कयामत का इंतजार किया।
आप नौ सालों तक केवल वायदे करते रहे और आज आपने एक बार फिर कयामत ढाई है।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप कितना समय और लेंगे?
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैं समाप्त कर रहा हूं।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप समाप्त नहीं कर रहे हैं, इसीलिए हमें बोलना पड़ रहा है।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मंत्री जी ने अपने भाषण में कहा मेरा मंत्रालय, मेरी कौन्सटीटूंसी। यह एक सांसद के तौर पर मैं कह सकता हूं कि मुझे हमीरपुर लोक सभा क्षेत्र के लोगों ने चुना है। मुझे हिमाचल की बात करनी है। मंत्री जी, आप चंडीगढ़ से चुनकर आते हैं। हो सकता है कि आपको देश के कोने-कोने से लोगों ने वोट नहीं दिया, लेकिन आप देश के रेल मंत्री हैं। आपको मेरा मंत्रालय, मेरी कौन्सटीटूंसी, मेरा राज्य या केवल कांग्रेस शासित राज्य है, कांग्रेस के सांसदों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आप रायबरेली तक सीमित होकर रह गए। आप देश के रेल मंत्री हैं, देश की बात करते कि फ्रेट में अपना शेयर कैसे बढ़ाना है, ट्रेन के किलोमीटर कैसे ज्यादा बढ़ाने हैं। रेलवे में इकोनॉमिक वॉयबिलिटी के साथ-साथ सोशल वॉयबिलिटी भी जुड़ी है। अगर इकोनॉमिकली वॉयबल होगा तो सोशली वॉयबल होगा। इसलिए मैं रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि फ्रेट पर ज्यादा ध्यान दीजिए और आम आदमी की सुविधाओं पर भी बात कीजिए। आपने पैसैंजर्स किराए में जो 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, उसे वापिस लीजिए। मैं मांग करता हूं कि रेलवे में आम आदमी को जो अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए, कृपया करके उनकी ओर विचार कीजिए। अगर सही अनुभूति होगी तो आम आदमी को वह रेल सुविधाएं देकर होगी जिसकी वह अपेक्षा करता है। केवल गिने-चुने करोड़पतियों को वह अनुभूति न हो। आपने आम आदमी से वोट लिया है, उनकी अनदेखी न कीजिए। केवल इन बातों को कहकर मैं अपनी नेता सुषमा जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मुझे रेल बजट पर चर्चा प्रारंभ करने का मौका दिया।
उपाध्यक्ष महोदय : जो माननीय सदस्य आपना भाषण ले करना चाहते हैं, वे सभा पटल पर रख दें।
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे वर्ष 2013-14 के माननीय रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत रेल बजट के समर्थन में बोलने की अनुमति दी। आज बहुत जिम्मेदारी के साथ माननीय युवा साथी, जिन्होंने रेल बजट इनीशिएट किया, उन्होंने कहा कि आज एक परम्परा पड़ गई है कि रेल बजट को अलग से प्रस्तुत किया जाता है। मैं समझता हूं कि अगर बिना हिमालय, बिना गंगा के भारत की कल्पना नहीं की जाती, तो बिना भारतीय रेल के भी भारत की कल्पना नहीं हो सकती, क्योंकि हिन्दुस्तान का हर व्यक्ति जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक रहता है, उसमें दो करोड़ लोगों का घर प्रतिदिन रेल होता है। वे अपने घर से किसी गंतव्य स्थान पर जाने के लिए यात्रा करता है। वह कहीं न कहीं, कन्याकुमारी से कश्मीर तक, एक राज्य से दूसरे राज्य में यात्रा करता है, तो जब लोग घरों में सोते हैं, तो उस समय भारतीय रेल करोड़ों लोगों को लेकर कन्याकुमारी से कश्मीर तक, कोलकाता से त्रिवेन्द्रम तक या पूरी से हिमालय तक, चारों तरफ एक दूसरे को ले जाने का प्रयास करती है।
17.10 hrs (Shri Francisco Cosme Sardinha in the Chair) आज रेल देश की लाइफ लाइन है, मुख्य धारा है। आज 12335 ट्रेनों के द्वारा 2 करोड़ यात्रियों को प्रतिदिन रेल, जो देश की जीवन रेखा बन चुकी है, ले जाती है। भारतीय रेल का विश्व में चौथा स्थान है। आज इस मुकाम पर भारतीय रेल ने अपने को पहुंचाया है। आज उस रेल बजट में हमारा एक युवा साथी यह कहे, अगर बजटरी सपोर्ट बढ़ाने की बात करते, इंटरनल रिसोर्सेज की बात करते, मार्केट बॉरोइंग की बात करते, पीपीपी में किस तरह से पैसा आयेगा, इसकी बात करते, तो मैं समझता कि एक युवा साथी के मन में चिंता है कि किस तरीके से भारत की रेल हिन्दुस्तान की जनता के लिए सार्थक हो सके, उसकी उपयोगिता हो सके, उसकी उपदेयता हो सके या उसकी प्रासंगिकता हो सके।
आज देश में 14 लाख रेल परिवार हैं। वह किस प्रतिबद्धता से रात के दो बजे भी सिंग्नल देता है, हर गेट पर गेटमैन खड़ा रहता है। यह कहना बहुत आसान है कि दुर्घटनाएं हो रही हैं या दुर्घटनाओं में सुरक्षा होनी चाहिए। लेकिन उन रेल परिवार के लोगों की प्रतिबद्धता, उनकी कार्य संस्कृति आदि की तारीफ करनी चाहिए। मैं कहूंगा कि आज उत्तर में बारामूला से, दक्षिण की कन्याकुमारी से, पश्चिम की द्वारिका से और पूर्व में लिडो तक अगर किसी ने जोड़ा है, तो इस भारतीय रेल ने देश को जोड़ा है, जो एक दूसरे की तरफ जोड़ने की बात करती है।
मैं अपने युवा साथी से कह सकता हूं कि शायद इस रेल मंत्रालय के, जो उन्होंने अपने प्रारंभिक इंट्रोडक्ट्री स्पीच में कही कि इस रेल मंत्रालय को क्यों अलग कर दिया गया? इसका बजट जनरल बजट के साथ आना चाहिए था। वास्तविकता यह है --
देश की रगों में दौड़ती है रेल, देश के हर अंग को जोड़ती है रेल, धर्म, जात-पात नहीं जानती है रेल, छोटे-बड़े सभी को अपनाती और अपना मानती है रेल।
आज चाहे कोई छोटा आदमी हो, कोई बड़ा आदमी हो, कोई गरीब हो, आम आदमी हो, ए.सी फर्स्ट क्लास में चलने वाला हो या स्लीपर क्लास में चलने वाला हो, वही ट्रेन उनको उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाती है।
मान्यवर, किस तरीके के आंकड़े प्रस्तुत किये गये? जिस तरह से लालू यादव जी के लिए कहा गया कि लालू यादव जी ने इन्द्रजाल दिया। वही बात हमारे रेल मंत्री जी के लिए कही। कम से कम कोई बजट इनीशियेट करे, ठीक है, मैं संसदीय परम्परा की उस परिभाषा में नहीं जाता हूं, लेकिन भारत का रेल बजट प्रस्तुत हो और उस रेल बजट के लिए कहा जाये कि यह इन्द्रजाल है, मायाजाल है, मैं समझता हूं कि यह भारत की सर्वोच्च संस्था, इस सदन के लिए कदाचित ऐसे शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है, समीचीन नहीं है।
मैं एक बात और करना चाहता हूं। उन्होंने सबसे पहले कहा कि आज कांग्रेस यूपीए सरकार में आपरेटिंग रेशियो सबसे ज्यादा हो गया है, जबकि यह कांग्रेस यूपीए सरकार में बहुत कम था। मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि वर्ष 2004 तक भारतीय जनता पार्टी, एनडीए की सरकार थी। वर्ष 2002-03 में 92.3 परसेंट आपरेटिंग रेशियो था। यह मैं उनको करैक्ट करना चाहता हूं। वर्ष 2003-04 में वह आपरेटिंग रेशियो 92.1 परसेंट था। वर्ष 2004-05 में जब तक उनकी सरकार थी, वह 91 परसेंट हुआ। उनको जानकारी होनी चाहिए, मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि वर्ष 2004 के बाद इस देश में जिस दिन से कांग्रेस यूपीए की सरकार आयी है, उसने इस देश के भारतीय रेल के आपरेटिंग रेशियो को कम किया है, यह मैं जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं। वर्ष 2004-05 में जो 91.0 परसेंट था, वह 2005-06 में 83.7 परसेंट हो गया। वर्ष 2006-07 में 78.7 परसेंट हो गया। वर्ष 2007-08 में 75.9 परसेंट हो गया। मैं हर साल को नहीं पढ़ना चाहता हूं, लेकिन मैं वर्ष 2012-13 और 2013-14 के भी जिसे परिचालन कास्ट कहते हैं, क्योंकि जब तक आपरेटिंग रेशियो कम नहीं होगा, तब तक सरप्लस नहीं बढ़ेगा। जब तक भारतीय रेलवे के पास परिचालन कास्ट, हम सौ रुपये कमायेंगे, 91 रुपये परिचालन पर खर्च कर देंगे, एक्सपेंडीचर पर खर्च कर देंगे, गाड़ी चलाने पर खर्च कर देंगे, तो स्वाभाविक है कि न तो नयी रेल बन सकती है, न डबलीकरण हो सकता है, न कन्वर्जन हो सकता है, न इलैक्ट्रीफिकेशन हो सकता है, कोई काम नहीं हो सकता। यह बात समझना चाहिए।
मैं कहना चाहता हूँ कि आज वर्ष 2012-13 में वह ऑपरेटिंग रेशियो घटकर 88.8 पर्सेंट था। इस पर मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ कि उन्होंने वर्ष 2013-14 में इस ऑपरेटिंग रेशियो को 88.8 से घटाकर 87.8 पर्सेंट करने का लक्ष्य रखा है। मैं निश्चित तौर से बधाई देना चाहूँगा कि इनके मन में इस बात का एक संकल्प है कि हमको इस भारतीय रेल के परिचालन के रेशियो को कम करना है। आज कहा कि एक्सीडेंट बढ़ रहे हैं, बहुत ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके आँकड़े दे रहे हैं। मेरे पास भी दुर्घटनाओं की संख्याएं हैं। आज मैं जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि वर्ष 2003-04 में भारतीय जनता पार्टी-एनडीए की सरकार थी, उस समय 325 कांसिक्वेंशियल ट्रेन एक्सीडेंट्स हुए थे। ये मेरे आँकड़े नहीं हैं, बीआरएस के रिसर्च के आँकड़े हैं। वर्ष 2004-05 में उसी तरीके से और आज जहाँ भारतीय जनता पार्टी-एनडीए में एक साल में 325 रेल की दुर्घटनाएं हुई थीं, वह घटकर वर्ष 2012-13 में मात्र 92 रह गई हैं। मैं इसके लिए निश्चित तौर पर भारतीय रेल परिवार को और मंत्री जी को बधाई देना चाहूँगा। मैं इस पर संतुष्ट नहीं हूँ। मैं चाहूँगा कि जिस दिन ये रेल एक्सीडेंट्स ज़ीरो पर पहुंच जाएंगे, उस दिन हमें संतोष होगा। यह नहीं कि भारतीय जनता पार्टी-एनडीए में 325 ट्रेन एक्सीडेंट्स हुए और आज 92 है, तो हम इस पर संतोष करें । लेकिन, मैं स्वाभाविक रूप से कहूँगा कि आज इसका लक्ष्य है, आखिर माननीय रेल मंत्री जी ने क्या कहा, इस बार सबसे ज्यादा उन्होंने फोकस किया है, चाहे काकोदकर कमेटी की रिपोर्ट हो, चाहे पित्रोदा की रिपोर्ट हो, मॉडर्नाइजेशन और सेफ्टी के लिए उन्होंने संरक्षा पर सबसे पहले डिस्ट्रेस पुलों की बात कर रहे हैं। इतने पुल पड़े हुए हैं, जिन पुलों को बदलना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी-एनडीए में कोई इस तरह के पुल, जो जर्जर हो गए हों, किसी समय जानलेवा हो सकते थे, कितने पुल बनाए गए। इस बार के बजट में 17 ऐसे पुलों को चिन्हित करके, जो सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, वे कभी भी टूट सकते हैं और वे जानलेवा हो सकते हैं, उसे कांग्रेस-यूपीए की सरकार ने बदलने का काम किया है। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Mr. Ganesh Singh, please do not disturb, now.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of Mr. Jagdambika Pal.
(Interruptions) …* श्री जगदम्बिका पाल : आपको तो कुछ-न-कुछ कहना है। मैं कहता हूँ कि कितना इनिशिएट करने वाला व्यक्ति कहे कि यह बजट केवल रायबरेली का बजट है, यह बजट केवल कांग्रेस शासित राज्यों का बजट है, निश्चित तौर से इस सदन से केवल देश को गुमराह करने की बात है। मैं समझता हूं कि इसी सदन में पिछले कुछ वर्षों से हम भी बैठे हैं, हमारे सभी दल के साथी बैठे हैं, जब पिछले दिनों भी बजट प्रस्तुत किया जाता था, तो कहा जाता था कि यह बंगाल का बजट है। उसके पहले जब प्रस्तुत किया जाता था, तो कहा जाता था कि यह बिहार का बजट है। लेकिन आज यह बजट पढ़ लें, तो निश्चित तौर पर कहेंगे कि किसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय नेता का राष्ट्रीय सोच में यह राष्ट्रीय बजट प्रस्तुत है, जो देश के हर हिस्सों को जोड़ने वाला है।
मान्यवर, यह मैं केवल भाषणों से नहीं कहना चाहता हूँ कि यह देश का बजट है। मैं इसको निश्चित तौर से जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूँ कि यह देश का बजट है। ...( व्यवधान) मेरी बात सुनिए। यह हम नहीं कहते थे, आप नहीं कहते थे। यह भारतीय जनता पार्टी-एनडीए के लोग कहते थे, जो आज भी लालू जी को इंद्रजाल की बात कर रहे हैं, मैं उनकी बात कर रहा हूँ। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please do not disturb him.
श्री जगदम्बिका पाल : रायबरेली में एक व्हील फैक्ट्री दी गई, तो कहा गया यह रायबरेली का बजट है। मैं कहता हूं कि यदि यह रायबरेली का बजट है, तो देश में आज जितने फैक्ट्री और वर्क-शॉप दिये गए हैं, आज कोच मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट सोनीपत, हरियाणा में दिया गया है, आज ग्रीन फील्ड मेन-लाइन इलेक्ट्रीकल मल्टीपल्स यूनिट मैन्यूफैक्चरिंग राजस्थान में दिया गया, मिड-लाइफ रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप आंध्र प्रदेश में दिया गया, पीरियॉडिकल ओवर हॉल बी.जी. वैगन वर्कशॉप बीकानेर, राजस्थान और प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में दिया गया, रिपेयर एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ मोटराइज्ड बोगी मध्य प्रदेश में दिया गया, जहाँ के माननीय गणेश सिंह जी हैं। यह तो कांग्रेस का राज्य नहीं है। वैगन मेन्टेनेन्स वर्कशॉप कालाहांडी, ओडिशा में दिया गया, वहां पर कांग्रेस की सरकार नहीं है। ...( व्यवधान)
आज नीर के छः बॉटलिंग प्लांट दिए गए हैं, जो देश की जनता को चाहिए। हमने एक बॉटलिंग प्लांट विजयवाड़ा, आंध्रप्रदेश में दिया, दूसरा नागपुर, महाराष्ट्र में दिया, तीसरा ललितपुर, उत्तर प्रदेश में दिया, चौथा विलासपुर, छत्तीसगढ़ में दिया जहां हमारी सरकार नहीं है। जयपुर, राजस्थान में दिया, अहमदाबाद, गुजरात में भी दिया, जहां हमारी सरकार नहीं है। अगर इसके बाद भी यह कहें कि यह रायबरेली का बजट है, तो मैं समझते हैं कि जैसे अंधे को हरियाली के सिवाय कुछ दिखता नहीं है, उसी तरीके से लोगों को इस बजट की बातें नहीं दिखती हैं, नहीं तो उनको निश्चित तौर से दिखता कि देश का ऐसा कोई राज्य नहीं है, जिसके लिए इस बजट में कुछ न कुछ परियोजना न दी गयी हो।
महोदय, आज एक यात्री क्या चाहता है? एक यात्री चाहता है कि अगर हम सफर करें, हमें आसानी से टिकट मिल जाए, हमारी सीट आरक्षित हो जाए, जब हम ट्रेन में बैठें तो हमें क्वालिटी फूड मिल जाए, अच्छा बेडरोल मिल जाए, लिनेन मिल जाए। इसकी चर्चा, आलोचना हम करते रहते थे, लेकिन लिनेन और कॉक्रोच की बात क्या केवल आलोचना के लिए है, मैं समझता हूं कि पहली बार उस लिनेन और बेडरोल, जिसमें मुश्कें आती हैं, जिसमें दुर्गन्ध आती है, उसको दूर करने काम माननीय पवन बंसल जी ही कर रहे हैं। हिन्दुस्तान में दस मैकेनाइज्ड लाँड्री स्थापित होंगी, उनमें रेल के ही कपड़े धुले जाएंगे, रेल की बेडरोल्स और लिनेन धुली जाएंगी। दस सुपर मैकेनाइज्ड लाँड्रीज बनाएंगे जिससे देश में ट्रेन्स की गंदी बेडरोल्स की शिकायत होती थी, वह दूर हो सके। हम आज जो आलोचना कर रहे हैं, उसको एड्रेस करने का काम, समाधान करने का काम हम कर रहे हैं।
इसी तरीके से कहा गया कि आईएसओ से क्या होगा। आखिर देश में कोई सर्टिफिकेशन एजेंसी है, आखिर देश में आप किसी को तो मानते हैं कि वह क्वालिटी कंट्रोल करने की एजेंसी है। आईएसओ के बारे में माना जाता है कि अगर किसी चीज पर इसकी स्टैंपिंग है, तो आम आदमी बाजार से उसी चीज को खरीदता है कि इसकी क्वालिटी कंट्रोल होगी क्योंकि इसका सर्टिफिकेशन आईएसओ ने किया है। पहली बार रेल मंत्री जी ने यह इनिशिएटिव लिया है। जिस दिन उन्होंने ओथ ली, उन्होंने सबसे पहले कहा कि मैं भी एक यात्री रहा हूं, मैं भी दिल्ली से हर फ्राइडे को चण्डीगढ़ जाता था, मैंने भी उस ट्रेन में बहुत अनुभव किया है कि ट्रेन्स में क्वालिटी ऑफ फूड ठीक हो, लिनेन और बेडरोल की व्यवस्था ठीक हो। अब रेल के जितने बेस किचन होंगे, उनको आईएसओ से सर्टिफिकेशन कराना होगा, तो निश्चित तौर से उस किचन के बने हुए खाने की गुणवत्ता होगी। यह ठीक है कि हम लोग भी सर्टिफिकेट दे सकते हैं, लेकिन हम को सर्टिफिकेशन की संस्था नहीं हैं कि संसद सदस्य से पूछ लीजिए। आखिर संसद सदस्यों को शिकायतें मिलीं, पैसेंजर्स को शिकायतें मिलीं, तो आज के रेल मंत्री जी ने एक पैसेंजर की तरह अनुभूत किया कि इसमें सुधार करना होगा और खाने की गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्होंने प्रयास किया।
महोदय, जब एक यात्री घर से टिकट लेने के लिए निकलता है और आज ई-टिकटिंग की बात होती है। लोग कहते हैं कि ई-टिकटिंग के लिए कोशिश करते हैं, लेकिन टिकट नहीं मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी तक ई-टिकटिंग करने की क्षमता प्रति मिनट केवल 2000 लोगों की थी, आज उसको तीन गुना कर दिया गया है, आज प्रति मिनट 7200 टिकटिंग हो सकती है जिससे लोग घर बैठकर आसानी से टिकट ले सकते हैं। मैं समझता हूं कि यात्री को जो सबसे पहले बुनियादी सुविधा होनी चाहिए कि उसको टिकट आसानी से मिल जाए, उसके लिए इस बजट में पहली बार इस पर ध्यान दिया गया कि कम से कम एक लाख बीस हजार आदमी एक साथ इसको यूज कर सकते हैं और 7200 लोगों को प्रति मिनट टिकट मिल सकता है। हमारी सरकार और रेल मंत्री जी ने इस बजट में इस ओर ध्यान दिया है कि एक यात्री को कौन सी मूलभूत कठिनाइयां आती हैं, कौन सी बुनियादी कठिनाइयां हैं, जिनके कारण उसे असुविधा होती है, चाहे टिकट की बात हो, आरक्षण की बात हो। आरक्षण के बाद ट्रेन में खाने की बात या लिनेन की बात या बेडरोल की बात हो, मैं समझता हूं कि इन चीजों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गयी है। यह दिखता नहीं है लोगों को, कहते हैं कि इस बजट में कुछ है नहीं। अभी तक दिल्ली में केवल एक एग्जीक्यूटिव लाउंज था। कह दिया गया कि अनुभूति ट्रेन है, अनुभूति बोगी लगेगी और यह बजट केवल करोड़पति लोगों के लिए है। मैं पूछना चाहता हूं कि अगर भारतीय जनता पार्टी की यह धारणा हो कि ट्रेन में कोई अच्छी बोगी लगने से केवल किसी करोड़पति को लाभ होगा, तो हर ट्रेन से फर्स्ट एसी को डिडक्ट कर दिया जाना चाहिए। एसी टू टियर कोच को डिटेक्ट कर देना चाहिए और जनरल स्लीप क्लास कर देना चाहिए कि देश का आम आदमी तब ही उससे लाभान्वित होगा। जब रिसेशन था, हमारी पार्टी ने तब तय किया था कि हमारे सभी सांसद और मंत्री हवाईजहाज के एक्जीक्युटिव क्लास के एंटाइटल हैं, वे इकोनॉमी क्लास में जाएंगे। उस हमने देखा कि हम लोग तो इकोनॉमी क्लास में चलते थे और हमारे ये मित्र एक्जीक्युटिव क्लास में सफर करते थे। इसलिए कथनी और करनी में अंतर होना चाहिए। यह हमने अपनी आंखों से देखा है कि उस समय पूरी दुनिया वैश्विक मंदी से जूझ रही थी। उस समय हमने यह समझा कि हम कटौती करेंगे, मितव्ययिता करेंगे और अगर दुनिया के सामने सस्टेन करना है तो यही कारण था कि हमारी सरकार की, प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी की नीतियां थीं। इसलिए उस समय वैश्विक मंदी के बाद दुनिया में अगर चीन के बाद किसी की जीडीपी दर बढ़ी तो हिन्दुस्तान की रही, भारत ने अपने को सस्टेन किया। निश्चित रूप से इस बात के लिए ये लोग बधाई के पात्र हैं।
आज हमारे साथी ने रेल बजट की आलोचना करते हुए कहा कि अटल जी की सरकार ने यह किया, रेल में उन्होंने यह कर दिया, वह कर दिया। उन्होंने अटल जी के लिए काफी सम्मान जताया, हमारे मन में भी है। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार को भी इस देश में सवा छः साल सत्ता में रहने का मौका मिला। उन्होंने भी छः रेल बजट पेश किए थे। हम और देश की जनता इस बात को जानना चाहती है कि ये जो कह रहे हैं कि एनडीए या भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में यह किया, वह किया और कांग्रेस पार्टी या यूपीए सरकार ने कुछ भी नहीं किया। हम कहना चाहते हैं कि छः रेल बजट जो उन्होंने पेश किए, कोई एक ट्रेन का नाम बता दें, जिसमें जनता बैठना चाहती हो कि यह भारतीय जनता पार्टी या एनडीए सरकार के समय की ट्रेन है।
कांग्रेस पार्टी या यूपीए सरकार ने क्या किया, यह मैं बताना चाहता हूं। सन् 1969 में जब इंदिरा गांधी देश की प्रधान मंत्री थीं, तो उन्होंने सोचा कि हमें दुनिया में अगर भारत को प्रतिस्पर्धा में खड़ा करना है तो रेल में कुछ बदलाव करना होगा। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्होंने राजधानी ट्रेन देश में इंट्रोडय़ूस की। आज इंदिरा जी नहीं हैं, लेकिन आज हर सांसद की ख्वाहिश होती है कि हमारे क्षेत्र से राजधानी ट्रेन गुजरे। सन् 1988 में जब राजधानी ट्रेंस की मांग बढ़ने लगी, तो राजीव गांधी जी ने शताब्दी ट्रेन इंट्रोडय़ूस की, जो देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों से दूसरी राजधानी को जोड़ने का काम करेगी। इसके बाद कांग्रेस पार्टी वाली यूपीए सरकार ने 2010 में दुरोन्तो एक्सप्रेस ट्रेन इंट्रोडय़ूस की। अगर आज पवन बंसल जी ने ट्रेन में एक अनुभूति कोच लगाने की बात कही है, तो देखना भविष्य में मांग उठेगी कि हर ट्रेन में यह कोच लगाया जाए। इस तरह जैसे आज राजधानी, एक्सप्रेस शताब्दी एक्सप्रेस या दुरोन्तो से रेल की पहचान है, वैसे ही अनुभूति से भी रेल की पहचान बनेगी। भारतीय जनता पार्टी वाली एनडीए सरकार में ऐसी कौन सी ट्रेन चली, कोई भी एक ट्रेन का नाम बताएं। इसलिए इस तरह की आलोचना करना ठीक नहीं है।
आज हमारे देश में करोड़ों की संख्या में पर्यटक विदेश से आते हैं, ज्यादातर रेल से सफर करते हैं। वे चाहते हैं कि हम डालर्स में पैसा दें और हमें क्वालिटी आफ जर्नी मिले इसलिए वह अधिक से अधिक पैसा देने के लिए तैयार है। आम आदमी, जिसे सेकंड क्लास में जाना है वह उसमें जाएगा। जिसे स्लीपर क्लास में जाना है, वह स्लीपर क्लास में जाएगा। इसी तरह जिसे एसी या एसी टू और थ्री टियर में जाना है, वह उसमें यात्रा करेगा। देश में कई ऐसे भारतीय हैं और जो बाहर से बुद्धिस्ट पर्यटक आते हों, चाहे यूरोप और अन्य देशों से लोग आते हों, मैं समझता हूं कि उनके आने से अगर अनुभूति कोच को इंट्रोडय़ूस करने की बात कही है, तो यह अपने में एक नया कदम है।
सभापति जी, आप देखें हर जगह ट्रैफिक बढ़ी है, एयर की ट्रैफिक भी बढ़ी है। हमें याद है कि आज से 20 साल पहले दिल्ली से लखनऊ, पटना, रांची, कोलकाता और कोलकाता से रांची, पटना, लखनऊ और दिल्ली एक फ्लाइट थी। हम 110 रुपए में आते-जाते थे। आज 24 फ्लाइट्स हो गई हैं। उसके बावजूद भी इतना ट्रैफिक है कि जगह नहीं मिलती। इसलिए यह कह दिया जाए कि अनुभूति कोच लग जाने से रेल बजट करोड़पतियों का बजट हो गया, जैसे मेरे पूर्व वक्ता ने कहा, यह ठीक नहीं है।
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): कुछ गोरखपुर के लिए बोलिए।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please do not disturb the hon. Member.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* श्री जगदम्बिका पाल: कहा जाता है कि रेल में सुरक्षा होनी चाहिए। मैं समझता हूं कि अगर हमारे माननीय सदस्य ने पढ़ा होता तो पता चलता। आज देश में जो एक्सीडेंट्स होते हैं, उनमें से 60 प्रतिशत अनमैन्ड लेवल क्रासिंग पर होते हैं। जो 40 प्रतिशत हैं वे परिणामी दुर्घटनाएं हैं। दो तरह की दुर्घटनाएं हैं, एक तो जो अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग और दूसरी ट्रेन की हैं। आज 60 परसेंट दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 10,979 समपार पर कोई मैन नहीं है, अन-मैन्ड है, जिसके कारण कभी कोई ट्रॉली निकलती है, कभी कोई बस, कभी कोई मोटर-साईकिल, कभी कोई महिला या व्यक्ति उस गेट से क्रॉस हो रहा है तो वे आये दिन दुर्घटना के शिकार होते हैं। मैं समझता हूं कि यह संकल्प पहली बार दोहराया गया है कि अब भविष्य में कोई समपार या गेट अन-मैन्ड नहीं होगा, यह संकल्प यूपीए की सरकार का है। हम निश्चित तौर से जो 60 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती हैं उन्हें रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं।
आप रेल बजट को देखिये, उसमें किस बात पर फोकस किया गया है। हमने उसमें न्यू रेल लाइन्स को ही फोकस किया है। आज हमने डैडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर को फोकस किया है, मॉड्रनाइजेशन ऑफ स्टेशन को फोकस किया है, इम्प्लीमेंटेशन ऑफ मॉड्रन सिग्नल सिस्टम को फोकस किया है और इलैक्ट्रिफिकेशन ऑफ रूट को फोकस किया है। मान्यवर, इस सदन को गुमराह किया जा रहा है, किस तरह से हमारे माननीय युवा साथी ने कहा कि जो नई रेल लाइन्स थीं उनके टारगेट को माननीय मंत्री जी ने कम कर दिया है, कंवर्जन को कम कर दिया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 700 न्यू लाइन्स का जो टार्गेट था, उसे 500 कर दिया, 470 प्रॉविजनल कहा जबकि टार्गेट 500 का है। मैं उनकी बात को बिल्कुल मानता हूं। गेज कंवर्जन की बात उन्होंने कही कि 800 टार्गेट था, प्रॉविजनल कर दिया 575 और जो वास्तविक है उसे 450 कहा। उन्होंने कहा कि पैसा नहीं है। एक तरफ 2003 से हमने किराया नहीं बढ़ाया, जनवरी में थोड़ा बढ़ाया, लेकिन डीजल के दाम बढ़ने से उसमें केवल 3300 करोड़ रूपये की वृद्धि हुई। वे कह रहे थे कि हम लूटने का काम कर रहे हैं तो हमने उसे रिवाइज्ड भी किया है लेकिन उससे केवल 6600 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। आपकी नई रेल लाइन की बड़ी इच्छा है। लेह तक रेल लाइन चाहते हैं जहां सड़क द्वारा जाना भी मुश्किल है। हम पहली बार मनाली-लेह के लिए जहां 12 महीने बर्फ रहती है रेल चलाना चाहते हैं, माननीय मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में शुरू में अपने दिल की बात कही कि चाहे बर्फ से ढकी ट्रेन हो लेकिन एक मीठी गुनगुनाती हुई सीटी की अवाज के साथ लोगों को लेह तक पहुंचाने का काम हम करेंगे।
कहा गया कि न्यू लाइन्स में गेज कंवर्जन का टार्गेट कम कर दिया, लेकिन जो बुनियादी जरूरत है कि आज रेल लाइन्स के इलैक्ट्रिफिकेशन की मांग होती है, आपने दुनिया से कम्पेयर कर दिया कि हमारी औसत स्पीड 90 किलोमीटर है, लेकिन अगर आप उस 90 किलोमीटर की स्पीड को बढ़ाना चाहते हैं, आप उसे सुपरफास्ट करना चाहते हैं, दुनिया की प्रतिस्पर्धा में अपनी ट्रेन को तेज चलाना चाहते हैं, उसके लिए सबसे पहली आवश्यकता क्या है? वह है उसका विद्युतीकरण, दोहरीकरण और हमारे ट्रेकों पर क्रॉसिंग न हों। अगर दोहरीकरण होगा तो निश्चित तौर से हम अपनी स्पीड को बढ़ा सकेंगे। योगी जी, लखनऊ से गोरखपुर हम 6 घंटे में जाते थे लेकिन जब से डबल लाइन हुई है, एक घंटा समय कम हो गया है। हमने विद्युतीकरण का अपना टार्गेट 1100 किलोमीटर का रखा था, उसका प्रॉविजनल हमने 1200 किलोमीटर किया है। मैं माननीय मंत्री अधीर जी को बधाई देना चाहता हूं कि आपने टार्गेट 1100 से 1300 किलोमीटर किया है।
इसी तरह से आप दोहरीकरण की बात कर रहे हैं। जो उनको समझ में आ रहा था कि जिससे वे आलोचना कर सकते हैं कि न्यू लाइन्स हैं, गेज कंवर्जन है, उसे पढ़कर सुना दिया, अरे नीचे विद्युतीकरण को पढ़कर नहीं सुनाया, दोहरीकरण को नहीं सुनाया। दोहरीकरण का हमारा टार्गेट 700 किलोमीटर था, हमने जो प्रॉविजन किया वह 705 किलोमीटर किया और माननीय रेल मंत्री जी ने उसे बढ़ाकर 750 किलोमीटर किया है। जब हम दोहरीकरण अपने टार्गेट से ज्यादा बढ़ाने जा रहे हैं, विद्युत्तीकरण भी अपनी रेल लाइनों पर टार्गेट से ज्यादा करने जा रहे हैं तो इनके लिए भी तो संसाधन चाहिए। हम अपने संसाधन भी न बढ़ाएं? मैं समझता हूं कि आज इस देश की रेल व्यवस्था जिस स्थिति पर पहुंच रही थी, अगर वही स्थिति चलती तो एक कौलेप्स की स्थिति आ रही थी। जब भारत का इतिहास लिखा जाएगा कि इस रेल को बचाने का काम किसने किया तो लिखा जाएगा कि कांग्रेस यूपीए की सरकार ने किया।
सदन में कहा गया कि पहले दो लाख नौ हजार वैगन पहले थे और इस बार दो लाख चार हजार वैगन हैं। यह किस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं। मैं समझता था कि जैसे पड़ोसियों में मित्रता होती है, वैसे ही हिमाचल और चंडीगढ़ में मित्रता होनी चाहिए थी, लेकिन वह पड़ोसी वाली भावना ही नहीं थी और बजट की बजाय मंत्री जी को ही टार्गेट किया जा रहा था। मैं कहना चाहता हूं कि यदि आंकड़े ही देने थे, तो वे दुरुस्त होने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि पहले दो लाख नौ हजार वैगन थे और अब घटकर दो लाख चार हजार हो गए। आपने ऐसा किस लिटरेचर में पढ़ा? मेरे हाथ में भी बजट है। आज न तो दो लाख नौ हजार है और न ही दो लाख चार हजार है, मैं करेक्ट करना चाहता हूं कि इस समय भारतीय रेल के पास 239321 वैगन हैं। हमारे पास 7793 कोचिज हैं। हमारे पास 4109 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स हैं। इसी तरह से 5197 डीजल लोकोमोटिव्स हैं। मैं समझता हूं कि यह इसलिए कहा गया क्योंकि वे सदन को बताना चाहते थे कि एनडीए के कार्यकाल में अच्छा काम हुआ था। वे सवा छह वर्ष भारतीय रेल के लिए सबसे खराब दिन थे। आप यकीन कीजिए। चाहे वह परिचालन रेश्यो हो, आपरेटिंग रेश्यो हो या गाड़ियों की संख्या हो। इस बात से आप भी सहमत होंगे।...( व्यवधान) योगी जी ने आज बहुत अच्छी और मौलिक बात कही है। नार्थ-ईस्ट रेलवे का हैडक्वार्टर गोरखपुर है। मैं कहता हूं कि माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिए कि कम से कम इस बार के बजट में आप आदर्श रेलवे स्टेशनों की संख्या देखिए। यह कहा गया कि यूपी को कुछ नहीं मिला है। यूपी को 33 ट्रेनें मिली हैं। ललितपुर में एक फैक्टरी बोटलिंग प्लांट की मिली। एक फैक्टरी रायबरेली को मिली। गोरखपुर, महाराजगंज को ट्रेन मिली और पहली बार बुद्धिस्ट सर्किट जो नीतीश जी ने शिलान्यास वर्ष 2002-03 में कर दिया था और आज तक वहां कोई काम नहीं हुआ था, पहली बार उस बुद्धिस्ट सर्किट को गोरखपुर से बरनी-गोंडा जोड़ने का काम, मैं मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि इस बार उन्होंने केवल बुलेट ट्रेन के लिए केवल घोषणाएं नहीं की हैं, बल्कि संकल्प दोहराया है कि जो बात कह रहे हैं, वे वर्ष 2013 के मार्च या अप्रैल तक पूरी होंगी। केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि कोई भी ऐसा राज्य नहीं है, समय की कमी है नहीं तो मैं राज्यवार आपको बताता।
रेल डवलेपमेंट आथोरिटी के लिए एक हजार करोड़ रुपए दे रहे हैं। इसी तरह से दूसरे काम भी हो रहे हैं। चाहे बिहार का बोधगया हो या वाराणसी का सारनाथ हो, चाहे कुशी नगर हो या गोरखपुर हो। गोरखपुर को एक केंद्र बिंदु बनाना होगा। मैं निश्चित तौर से सुझाव देना चाहूंगा कि रेल के जो जोनल हैडक्वार्टर हैं, वहां से राजधानी ट्रेन चलती है, वहां से दुरांतों चलती है, शताब्दी चलती है और अगर आप एनसीआर में देखें चाहे फरीदाबाद हो, गुड़गांव हो, चाहे नोएडा हो, ग्रेटर नोएडा हो, चाहे भिवाड़ी हो, गाजियाबाद हो, सबसे ज्यादा लोग एनसीआर में ईस्टर्न यूपी के लोग हैं। योगी जी ने बिलकुल सही कहा है कि आज वहां से दुरांतो की भी मांग है, राजधानी की भी मांग है, क्योंकि वहां से नेपाल का भी ट्रेफिक है। नेपाल के लाखों लोग जो भी भारत के किसी भी हिस्से में जाते हैं, वे गोरखपुर ही आते हैं। वहां एक रेलयात्री निवास बनाने की भी बहुत जरुरत है। हम यह मांग करेंगे कि निश्चित तौर पर आज जब हम उन दुर्गम स्थानों पर जा रहे हैं जहां के लिए कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी और यह कहा जाए कि भारत की रेल ने क्या किया, मैं समझता हूं कि यह पहली बार भारत की रेल उन हिस्सों में जहां हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारत की रेल जाएगी, वहां रेल जा रही है।
हिमाचल में कितनी दुर्गम पहाड़ियां हैं लेकिन हमने यह संकल्प किया है कि बिलासपुर-मनाली-लेह को पूरा करेंगे। इसी तरह से जम्मू-कश्मीर में जम्मू-पुंछ को वाया अखनूर टेक-अप किया है। उत्तराखंड में टनकपुर-बागेश्वर को किया है। इसी तरह से परशुराम कुंड-रूपई को किया है। हम नागालैंड में जा रहे हैं। हम अरुणाचल में जा रहे हैं और बारामूला में जा रहे हैं। हम देश के उन हिस्सों में जहां आज़ादी के बाद रेल की केवल कल्पना लोगों ने की थी और शायद वहां कोई व्यक्ति कभी दिल्ली या हिन्दुस्तान के चार महानगरों में आता था। तब उसे एहसास होता था कि हम कहीं कुछ करेंगे। आज इस बजट ने देश के उन सभी राज्यों को छुआ है चाहे वह हिमाचल हो, जम्मू-कश्मीर हो, उत्तराखंड हो, नॉर्थ-ईस्ट के स्टेट्स हों और इसके बावजूद भी इसको कहा जाए कि यह कांग्रेस शासित बजट है, यह केवल रायबरेली का बजट है तो ऐसा कहना उपयुक्त नहीं होगा। अगर केवल आलोचना के लिए आलोचना करनी है तो यह उचित नहीं है। अन्यथा देश की जनता यह बात जान गई है और देश की जनता ने जिसमें चाहे संगठन हों, एसोसिएशंस हों या कर्मचारी हों, सभी ने इस बजट की तारीफ की है।
हमने स्टेशंस को भी आइडेंटिफाइ किया है। देश के 104 ऐसे स्टेशंस को आइडेंटिफाइ किया है जहां 10 लाख से अधिक की आबादी हो। तो क्या केवल कांग्रेस शासित राज्यों में ही 10 लाख की पोपुलेशन है? क्या वह कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ या गुजरात नहीं हैं? देश के ऐसे 104 स्टेशंस को हमने आइडेंटिफाइ किया है जहां दस लाख से ज्यादा आबादी हो और वे चाहे रिलीजियस या टय़ूरिस्ट प्वाइंट ऑफ व्यू से महत्व रखते हों। इसमें कोई पक्षपात नहीं किया गया है। अगर आप इस बजट को देखेंगे कि यह पहला बजट है जिसमें न हमने कोई रीजन देखा है और न हमारी सरकार ने कोई क्षेत्रीयता देखी है, अगर कुछ देखा है तो इस देश के हित को देखा है, क्षेत्रीय असंतुलन को देखा है कि हम कैसे रीजनल इम्बैलेंसेज को दूर कर सकें? देश के उन सभी हिस्सों में जो लोगों की आकांक्षाएं हैं, जो इस देश की अपेक्षाएं हैं, उन अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को हम पूरा कर सकें, उस बात को दृष्टिगत रखते हुए इस बजट को प्रस्तुत किया गया है। यह भी कह दिया गया कि बॉयो-टॉयलेट्स बनेंगे। कम से कम हम पहल कर रहे हैं। आज सबसे ज्यादा शिकायतें ट्रेन्स के टॉयलेट्स की होती है कि टॉयलेट्स साफ-सुथरे नहीं होते हैं और बड़े गंदे होते हैं। अगर इस बार यह तय हुआ कि हम बॉयो-टॉयलेट्स बनाएंगे और कम से कम लोगों को एक साफ सुथरा टॉयलेट प्रोवाइड करेंगे तो इस तरह से यात्री सुख- सुविधाओं को बढ़ाने का आखिर और कौन सा तरीका हो सकता है? एक तरफ आप सुरक्षा की बात करते हैं और एक तरफ यात्री सुविधाओं की बात करते हैं। दूसरी तरफ फिसकल डिसिप्लिन की बात करते हैं। मैं समझता हूं कि हमारे प्रधान मंत्री जी अर्थशास्त्री हैं।
हमारे एक नेता एक दिन कह रहे थे कि अर्थशास्त्री से काम नहीं चलेगा, यथार्थशास्त्री बनना पड़ेगा। मैं जानना चाहता हूं कि नेता, प्रतिपक्ष के दल में अगर कोई यथार्थशास्त्री हो कि जो किराया न बढ़ाए, अपने इंटरनल रिसोर्सेज को न बढ़ाए, कोई मार्केट बोरोइंग न करे, पीपीपी न करे या बजटरी सपोर्ट न मिले और इसके बावजूद देश की जनता की आकांक्षाओं को हम पूरा कर देंगे, अगर ऐसा कोई यथार्थशास्त्री उनके यहां हैं तो वे उदाहरण दे दें कि कौन उनके यहां ऐसा यथार्थशास्त्री है?
मैं कहता हूं कि अगर आज जो सबसे पहला संकल्प रेल मंत्री ने दोहराया था कि हम यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाएंगे, उस पर उन्होंने बुनियादी तौर से इस बात के लिए गौर किया कि हमको यात्रियों की सुविधाओं के लिए कटिबद्ध रहना है और उन्होंने चाहे वह बैड-शीट्स हों, बैड-रोल हों या लैनिन्स हों या क्वॉलिटी ऑफ फूड हो या रिजर्वेशन हो। सुरक्षा के विषय में भी उन्होंने जो किया है, वह बहुत सराहनीय है। यह पहली बार नहीं हुआ कि हम इसदेश में स्किल्ड डवलपमेंट का काम करेंगे।
अगर इन्होंने माननीय मंत्री जी का बजट पढ़ा होता तो मालूम होता कि अगरतला कहां है, अलवर कहां है, अंकलेश्वर कहां है, जैस कहां है, चंडीगढ़ कहां है, देहरादून कहां है, दीमापुर कहां है, इम्फाल कहां है, जगदलपुर कहां है, कटिहार कहां है, काजीपेट कहां है, कोल्लम कहां है, कोरापुट कहां है, लमडिंग कहां है, मंगलोर कहां है, मुर्शिदाबाद कहां है, नागपुर कहां है, नहरलागुन कहां है, पठानकोट कहां है, रांची कहां है, रतलाम कहां है, शिमला कहां है, सिरसा कहां है, श्रीनगर कहां है, तिरुचिरापल्ली कहां है। 25 लोकेशन की बात कहते हैं। “हर हाथ को काम और हर खेत को पानी” सवा छः साल रहे, न किसी खेत को पानी दे पाए और न ही किसी हाथ को काम दे पाए। जब हम हर हाथ को काम देने की बात कहते हैं, मनरेगा की बात कहते हैं तो कहा जाता है कि सीएजी रिपोर्ट में कर्ज माफी की बात आई है। मैं कहना चाहता हूं कि हम नीति बनाते हैं और हमारी हमारी नीयत भी रहती है लेकिन अगर इम्पलीमेंटेशन में किसी जिले या बैंक के किसी बाबू ने गलती की तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं बल्कि उस बाबू की होगी। इसीलिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि अगर कहीं किसी निचले स्तर पर किसी ने फायदा लिया तो जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। आप फिर भी आलोचना करेंगे? हमने राइट टू वर्क की जिम्मेदारी ली। यह उसी राइट टू वर्क की श्रृंखला में बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। यह कोई छोटा कदम नहीं है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट का काम मिनिस्ट्री आफ रेलवे करेगी। 25 लोकेशन आइंडेटिफाई की गई हैं जहां लोगों को कौशल विकास होगा।
महोदय, इस बार के बजट में सिकंदराबाद में परियोजना रखी गई। नागपुर में इलैक्ट्रानिक प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण की योजना रखी गई। मैं समझता हूं कि बहुत वर्षों बाद ऐसा बजट आया है जो देश की सौ करोड़ जनता की भावनाओं को प्रतिबिंबित करता है और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बजट है। 12वीं पंचवर्षीय योजना का प्लानिंग कमीशन ने अंतिम रूप से प्रोवीजन किया है और यही सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है क्योंकि 12वीं पंचवर्षीय योजना अगले पांच वर्षों के लिए रोड मैप होती है कि भारतीय रेल की रूपरेखा क्या होगी। माननीय रेल मंत्री जी ने भारतीय रेल की रूपरेखा जिस बुनियाद पर रखी है, उसे पटरी पर लाने के लिए और एक अच्छी दिशा में तीव्रतर चलाने के लिए बात कही है लेकिन यह बिना संसाधन के नहीं हो सकती है। आप एक व्यावहारिक पक्ष की आलोचना कर रहे हैं। मेरा कहना है कि यदि जिम्मेदार प्रतिपक्ष होता तो कहता कि आज पैसेंजर चाहता है कि हम फेयर दे दें क्योंकि उसे सुविधाएं और सुरक्षा चाहिए। आप एक तरफ देश को केवल यह कहना चाहेंगे कि कोई रिसोर्सिस न हों। इसके बावजूद प्लानिंग कमीशन ने 5.19 लाख करोड़ का प्रोवीजन किया है जिसमें 1.94 लाख करोड़ ग्रॉस बजटरी सपोर्ट मिलेगा। हमें आंतरिक संसाधन से 1 लाख पांच हजार करोड़ लेना है, बाजार से उधार 1.20 लाख करोड़ लेना है, पीपीपी के माध्यम से एक लाख करोड़ लेना है। अगर इसी तरह से आलोचना होती रहेगी तो कौन व्यक्ति पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में काम करने आएगा। आज यहां हमारे युवा साथी ने कह दिया कि मनमोहन सिंह जी ने लालकिले से कहा कि कोरिडोर फ्रेट है। आपका कहना है कि कब तक इस आशा और उम्मीद पर पड़े रहेंगे? मेरा कहना है कि केवल देश की जनता के बीच गोबल्स की थ्योरी की तरह से लगातार झूठ बोलना, इसमें उन्हें महारत हासिल है क्योंकि सौ बार एक झूठ बोलते रहेंगे तो कभी वह किसी सैक्शन में सच हो ही जाएगा। उन्हें नहीं मालूम कि इस बार दोनों कोरिडोर की करीब 2800 किलोमीटर लैंड एक्वीजिशन की कार्यवाही पूरी हो गई है। अगर वे देखना चाहते हैं कि कब तक यह दिखाई पड़ेगा तो मैं जिम्मेदारी के साथ कहता हूं हालांकि माननीय मंत्री जी जवाब देंगे तो निश्चित तौर पर सभी माननीय सदस्यों द्वारा कही गई बातों का जवाब देंगे।
लेकिन आज जो देश की जनता को अपने इंट्रोडक्टरी भााण में गुमराह करना चाहते हैं कि जैसे कारीडोर के लिए हमने कुछ किया ही नहीं। हमने 2800 किलोमीटर उस कारीडोर के लिए लैंड एक्युजिशन कर ली है। इस मामले में लैंड एक्युजिशन ही सबसे ज्यादा बुनियादी कार्रवाई होती है, क्योंकि उसमें स्टेट गवर्नमैन्ट का सहयोग होना चाहिए। इसे सीधे रेल मंत्रालय नहीं करता। आज माननीय मंत्री जी ने बुद्धिस्ट सर्किट के लिए हमारे यहां नई रेल लाइन दी है कि बस्ती से सिद्धार्थनगर तक नई रेल लाइन होगी, उसके लिए उन्होंने दस लाख रुपये टोकन मनी दिया है। माननीय सदस्य, निशिकांत जी को धन्यवाद देना चाहिए था, क्योंकि उन्हें भी नई रेल लाइन दी गई है। इसमें उन्होंने अपना-पराया नहीं देखा। मैंने उस दिन पूछा कि आप लोगों ने बजट भााण क्यों नहीं सुना, मैंने शरद यादव जी से पूछा तो उन्होंने कहा कि और लोग खड़े हो गये, लोगों ने हमसे भी कहा कि खड़े हो जाओ। हमने कहा आपका भी काम हुआ। बिहार में दयालु स्टेशन से हाजीपुर...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please do not interrupt. Nothing will go on record.
(Interruptions) … * श्री जगदम्बिका पाल : सभी को मिला है, किसी को समझ में नहीं आया कि हम क्यों खड़े हो रहे हैं और सब खड़े हो गये और बाद में सबको समझ में आया कि शायद ऐसा बजट कभी प्रस्तुत नहीं हुआ। सबको इस बात को एहसास हुआ।...( व्यवधान) मैंने आपसे भी पूछा, माननीय नेता जी से भी पूछा। इसलिए ऐसा नहीं है, आखिर एक बजट जब देश के समक्ष प्रस्तुत हो रहा हो तो उस बजट को पूरा सुन लिया जाए और बजट को सुनने के बाद बोलने का यह अवसर है। माननीय अनुराग ठाकुर ने अपनी पूरी बात एक घंटे से अधिक समय लेकर कही, मैं भी दस-बीस मिनट से अपनी बात कह रहा हूं। इसी तरह से और माननीय सदस्य भी अपनी बात कहेंगे। इस तरह से लोगों को इस बजट का तार-तार करने का पूरा अवसर मिलेगा। लेकिन अगर इस देश में यह नई परम्परा पड़ेगी, हम दुनिया में कहते हैं कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्य बहुत मजबूत हैं, भारत के प्रजातांत्रिक मूल्यों की जड़ें बड़ी गहरी हैं। हमारे यहां प्रजातंत्र बहुत मजबूत हो चुका है। तब फिर क्या रेल बजट के समय इस तरह से हाउस में डिसऑर्डर कर दिया जाए। कभी जनरल बजट जब तत्कालीन वित्त मंत्री, प्रणव मुखर्जी साहब प्रस्तुत करें तो यह जो पार्टी अपने को विद डिफरेंस कहती है कि हम अन्य पार्टियों से भिन्न हैं और अगर वह यह परम्परा डालेगी तो आने वाला देश का इतिहास इन्हें माफ नहीं करेगा, क्योंकि ये लोग लोकतंत्र पर कुठाराघात करने का काम कर रहे हैं। यह सदन है, इस सदन में लोगों को अवसर मिलता है कि वे अपनी बात कह सकें। ठीक है, उन्होंने कुछ बिन्दु उठाये हैं, उन बिन्दुओं का हम जवाब दे रहे हैं, माननीय मंत्री जी जवाब देंगे। इसके अलावा और बातें भी कही जायेंगी, लेकिन यह कहना कि कोई काम नहीं हुआ। जो पहला मेजर सिविल कंस्ट्रक्शन कांट्रैक्ट कानपुर-खुर्जा के बीच में है,...( व्यवधान) मैं आपके कारीडोर की बात कर रहा हूं। आप जिस डेडिकेटिड फ्रेट कारीडोर की बात कर रहे थे, कानपुर से खुर्जा 343 किलोमीटर ...( व्यवधान) यह कोलकाता से शुरू हो रहा है।
प्रो. सौगत राय : दानकुनी से शुरू होता है।
श्री जगदम्बिका पाल : अब हमने 2800 किलोमीटर लैंड एक्वायर की है। आज हम खड़े होकर डेडिकेटिड फ्रेट कारीडोर के बारे में कह सकते हैं। क्योंकि लैंड कई राज्यों से एक्वायर करनी थी। दादा, आप सब राज्यों के एसएलओज. की हालत जानते हो, आप राज्यों के कलक्टर की हालत जानते हो। केन्द्र की परियोजनाओं में आज हमारे यहां केन्द्रीय विद्यालय स्वीकृत पड़ा है, आज ग्रेजुएट नर्सिंग इंस्टीटय़ूट स्वीकृत पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार से जमीन नहीं मिल पा रही है। मैं लगातार नीरज जी और शैलेन्द्र से कहकर प्रयास कर रहा हूं। अब रेल स्वीकृत हो गई है, उसके लिए भी लैंड एक्युजिशन की कार्रवाई आपको ही करनी पड़ेगी। निश्चित तौर से आज 2800 किलोमीटर लैंड एक्वायर हो गई है, उसके बाद 343 किलोमीटर कानपुर-खुर्जा के बीच कांट्रैक्ट भी एवार्ड हो गया है और Construction contract covering up to 1,500 kilometres to be awarded by the end of 2013-14. मतलब मार्च-अप्रैल जो वित्तीय वाऩ के आखिरी महीने होते हैं, उसमें 1500 किलोमीटर कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए जो डेडिकेटिड फ्रेट कारीडोर है, उसका काम एवार्ड हो जायेगा। चूंकि आपने यह सवाल किया था कि यह कब बनेगा, कब तक हम उम्मीदों में रहेंगे, बार-बार इंद्रजाल, मायाजाल जो आप कह रहे थे, कोई इंद्रजाल, मायाजाल नहीं है, यह वास्तविक बात है, जो वास्तविकता के धरातल पर उतरने जा रही है, इसकी आप जानकारी कर लें और मैं समझता हूं कि पूरा देश इस बात को जान जायेगा कि जो बहुत दिनों से लोगों की डेडिकेटिड फ्रेट कारीडोर की परिकल्पना थी, उस 1500 किलोमीटर के डेडिकेटिड फ्रेट कारीडोर का काम 2013-2014 में एवार्ड हो जायेगा, उसके पहले 343 किलोमीटर हो गया। ...( व्यवधान) कह दिया कि सोलर इनर्जी कुछ नहीं है, काम नहीं कर रहा है। 35 रेलवे स्टेशंस पर सोलर पावर का काम कम्पलीट हो गया है। उन 35 स्टेशंस को देखिये, वे सोलर पावर से ही चल रहे हैं। वहां बिजली नहीं चल रही है। एक तरफ हम रिन्युएबल इनर्जी की बात करते हैं, एक तरफ हम सोलर लाइट की बात कर रहे हैं, बिना बिजली खर्च किये हुए, बिना पावर का इस्तेमाल किये हुए अगर हम सोलर के रुप में या सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाकर अपने 450 स्टेशंस रोशन करना चाहते हैं, तो अनुराग आपको खड़े हो कर माननीय मंत्री जी को बधाई देनी चाहिए। यह मत कीजिए कि हर वाक्य में खाली आलोचना ही करें। ...( व्यवधान) आज कह दिया कि आठ हज़ार से 12 हज़ार, मैं समझता हूँ कि आज निश्चित तौर से अगर आठ हज़ार से 12,335 नई ट्रेनें चली हैं। जैसे इस बार भी 66 एक्प्रेस ट्रेनें, पैसेंजर ट्रेनें, मैमु, डैमु आदि इतनी ट्रेनें चल रही हैं तो निश्चित तौर पर उस पर खर्चा बढ़ेगा। दूसरी तरफ हमने ऑपरेटिंग रेश्यो को भी रोका है। अनुराग जी, आप चले गए थे, मैंने आपका ऑपरेटिंग रेश्यो की भी एक्सिडेंट की भी, सारी चीज़ों को बताया है कि आपने जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे, वे आंकड़े बिल्कुल ठीक नहीं थे। इस समय सन् 2012-13 में 88.8 पर्सेंट हो गया और जो इस बार घट कर के 87.8 पर्सेंट रहेगा। ऑपरेटिंग रेश्यो का यह संकल्प है। ...( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : वह 98 प्रतिशत है। ...( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल : नहीं 98 प्रतिशत कहां है? हम यील्ड कर जाएंगे अगर आप खड़े हो कर बता दें। फिर मैं उस वर्ष का बता दूंगा।...( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : यह मंत्री जी की स्पीच में है। मैंने आंकड़े पढ़े थे। सन् 2009-10 में 95.6 प्रतिशत था और सन् 2010-11 में 94.9 प्रतिशत था। अगर मैं गलत हूँ तो मैं अपने शब्द वापस लेने के लिए तैयार हूँ। ये आंकड़े जो रिपोर्ट में कहे गए हैं, मैंने वही पढ़ कर बताए हैं। इन आंकड़ों में एक भी हेर-फेर नहीं हुआ है। ...( व्यवधान) अगर मंत्री जी भी कह दें ...( व्यवधान) यह सरकारी प्रश्न के उत्तर में कहा गया ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, you have made your point clear.
(Interruptions) … श्री जगदम्बिका पाल : हमने यील्ड कर दिया था तो आप खड़े हो गए। ...( व्यवधान) अब आप बैठ जाइए। ...( व्यवधान) सर, इन्होंने कहा कि सन् 2010-11 में 94.6 था और सन् 2011-12 में 94.9 था, यह बिल्कुल सही है। ...( व्यवधान) लेकिन क्या सन् 2010-11 का पढ़ना चाहिए। सन् 2012-13 का भी पढ़ देते। ...( व्यवधान) अब आप बैठ जाइए, परंपरा सीखिए।
MR. CHAIRMAN: Hon. Member, you have made your point clear. Please take your seat now. Nothing more will go on record.
(Interruptions) … * श्री जगदम्बिका पाल : अनुराग जी, अब आप बैठ जाइए। ...( व्यवधान) हम आपके बीच में नहीं खड़े हुए थे। ...( व्यवधान) हमने यील्ड किया तो अब आप बैठ जाइए। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Mr. Pal, you have already spoken for 50 minutes. Please conclude in the next five minutes.
श्री जगदम्बिका पाल : मान्यवर, इसलिए मैं समझता हूँ कि अगर सन् 2012-13 का देखा जाए तो 88.8 प्रतिशत और सन् 2013-14 का 87.8 पर्सेंट है। जैसा हमने कहा कि सन् 2002-03 में जब भाजपा-एनडीए सरकार थी, तब 92.3 पर्सेंट था। सन् 2003-04 में 92.1 पर्सेंट था और सन् 2004-05 में 91 पर्सेंट था। 90 से ऊपर ऑपरेटिंग कॉस्ट थी। ...( व्यवधान)
SHRI ANURAG SINGH THAKUR : That is what I said. When we left it was 91 per cent. What else have I said?
SHRI JAGDAMBIKA PAL : This is the correct figure. Whatever I am saying, I am saying on the record. This is absolutely true. अगर आप कभी-भी इसको गलत कर देंगें तो मैं सदन से माफी मांग लूंगा। मैं जो आंकड़ें दे रहा हूँ, बड़ी जिम्मेदारी के साथ दे रहा हूँ। मैं सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ। मैं देश को गुमराह करने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ। काठ की हाण्डी एक ही बार चढ़ती है, दोबारा नहीं चढ़ने वाली है, चाहे कितनी ही बार देश की जनता को गुमराह करें। ...( व्यवधान) आज सुरक्षा के बारे में कहा गया कि सन् 2001 में प्रति मिलियन किलोमीटर दुर्घटना का जो रेश्यो था, उसे 0.55 से 0.17 किया जाएगा। उसको हमने पूरा कर लिया है। आज उस 12वीं योजना में जैसा मैंने कहा कि अगर अनमैंड लैवल क्रॉसिंग को खत्म कर रहे हैं तो उससे जो 60 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती थीं, वे निश्चित तौर से नहीं होंगी। ये दुर्घटनाएं ज़ीरो हों, उस ज़ीरो डेथ के लिए, सेफ्टी के लिए आज हमने दस साल का एक प्लॉन बनाया है कि सन् 2014 से 2024 तक हमारी सरकार एक कॉर्पोरेट सेफ्टी प्लान बना रही है।
18.00 hrs उस कॉरपोरेट सेफ्टी प्लान में आप निश्चित देखेंगे कि जहां 92 दुर्घटनाएं एक साल में रह गयीं, कहां 325 दुर्घटनाएं इनकी सरकार के कार्यकाल में हुई थीं, निश्चित तौर से दुर्घटनाओं में कमी आएगी, हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे। इस बात की कोशिश करेंगे कि एक-एक व्यक्ति सुरक्षित रहे।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please wind up now.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल: महोदय, मैं बस समाप्त कर रहा हूं।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please sit down for a while.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल : महोदय, हम क्यों बैठ जाएं? मान्यवर, उनको बैठाइए। हम कंक्ल्यूड तो कर लें।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please sit down for a while.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Both of you sit down please.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I said, please sit down. I am giving you time.
… (Interruptions)
SHRI JAGDAMBIKA PAL : I will take only two minutes, with your permission. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I will give you time. Please sit down.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Hon. Members, it is 6 o’clock now, and we have a long list of speakers to speak on Railway Budget. ‘Zero Hour’ matters are also there. If the House agrees, I extend the time of the House till 8 o’clock.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Okay, you may take just two minutes and wind up.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल : महोदय, फिर हमारा भाषण सोमवार के लिए कान्टीन्यू कर दीजिए।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: I said that you may take two minutes and wind up.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल : माननीय सदस्य जो बस्ती के बारे में कह रहे हैं, बस्ती तो पूरी बस्ती है, देश की बस्ती है। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please do not disturb him now.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल : मैं एक बात जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं, कुछ अच्छी बातें आ जाएं, कम से कम इसको गंभीरता से सुन लें।...( व्यवधान)
18.02 hrs (Dr. M. Thambidurai in the Chair) कैबिनेट कमेटी ने इफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक पॉलिसी एप्रूव की है।...( व्यवधान) मैं जिम्मेदारी की बात कह रहा हूं, उसको कम से कम सुन लीजिए, आप लोगों का ज्ञान बढ़ जाएगा।...( व्यवधान)The Cabinet Committee on Infrastructure has approved a policy for participatory models in rail connectivity and capacity augmentation projects; under the policy, there are five models.
MR. CHAIRMAN : Please wind up.
… (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल : अभी तक पीपीपी की बात का केवल उल्लेख होता था, इसीलिए मान्यवर, जो पीपीपी की बात होती थी, उसमें एक टार्गेट रखा जाता था, मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों में हम वह एचीव नहीं कर पाए। इसलिए कि उसकी कोई मारेलिटी नहीं बनती थी, उसके कोई पैरामीटर नहीं बनते थे। हम एक लाख करोड़ का टार्गेट किसी चीज का रख देते थे कि यह पीपीपी में होगा। मैं बस दो मिनट लूंगा।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: You have taken one hour. Please wind up.
SHRI JAGDAMBIKA PAL : You are very kind to me, and you are my good friend.
MR. CHAIRMAN: Please take two minutes and wind up.
SHRI JAGDAMBIKA PAL : Yes, I will take only two minutes. मान्यवर, फाइव मॉडल्स फॉर प्राइवेट पर्टिसिपेशन, जैसे इंक्लूडिंग ज्वाइंट वेंचर, पार्टनरशिप, अब बीओटी भी हम रेलवे में शुरू करने जा रहे हैं कि बिल्ड एंड ऑपरेट एंड ट्रंसफर...( व्यवधान) अब होगा, ...( व्यवधान) कम से कम इस बात को आप देखिए कि यह फर्क आया है।...( व्यवधान) गठबंधन के कुछ धर्म होते हैं।...( व्यवधान) उस गठबंधन के धर्म को हमने निभाया।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Shri Dhananjay Singh.
श्री जगदम्बिका पाल : मैं केवल नार्थ-ईस्ट रेलवे की बात करके अपनी बात समाप्त करूंगा। ...( व्यवधान) मान्यवर, मैं कर्मचारियों के बारे में कहना चाहते हैं कि आज जो पूरे देश की ट्रेनों को लेकर चलते हैं, उसमें रेलवे के ड्राइवर की भूमिका होती है, रेलवे के गार्ड्स की भूमिका होती है, रेलवे के टीटीज की भूमिका होती है। रेलवे के ड्राइवर्स, गार्ड्स को रनिंग स्टाफ की तरफ से ट्रीट किया जाता है, लेकिन टीटीज को रनिंग स्टाफ की तरह से ट्रीट नहीं किया जाता है, क्योंकि आजादी की लड़ाई में वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को लेकर गए, अंग्रेज उनसे नाराज हुए, जबकि पाकिस्तान में फिर से उनको रनिंग स्टाफ के रूप में सुविधाएं मिलने लगी हैं। मैं माननीय मंत्री जी से इस बजट में चाहूंगा, जब वे उत्तर देंगे तो वे टीटी को भी रनिंग स्टॉफ में मानें।...( व्यवधान) अब मैं कुछ ट्रेनों की बात करना चाहता हूं। जैसे आज पैन्ट्री कार वैशाली में है, लेकिन गोरखधाम में नहीं है।...( व्यवधान) माननीय मंत्री जी इस ओर भी ध्यान दें।
MR. CHAIRMAN: Shri Dhananjay Singh, you may start speaking. Your speech will only go on record. His speech will not go on record.
(Interruptions) … * श्री धनंजय सिंह (जौनपुर): महोदय, बहुत डिस्टर्ब हो रहा है।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: If you do not start speaking, your time will get cut. Only Shri Dhananjay Singh’s speech will go on record. Nothing else will go on record.
(Interruptions) …* **SHRI MOHAN JENA (JAJPUR): With much pain and anguish I would like to ventilate my thought on Railway Budget for 2013-14, presented by Hon’ble Minister Shri P. K. Bansal, on 26th February, 2013. This Railway Budget is nothing but a big empty bag for Odisha. I am sorry to mention here that the Railway Budget meant for the whole country should have reflected the hopes and aspirations of people from Cape Camorin to J&K. But to my great dismay, it turned out to be something which reflected a parochial bias.
This seems to be a trend which continues from several previous Railways Ministers also. The Minister who should treat all states in an equitable manner, prefers to be partial to his/her own state. As a result of which a state like Odisha always lags behind and nobody pays any attention to this deprived, backward state.
The Railway Minister is aware about the status of Railway connectivity in Odisha. In pre-independence era, during the British regime, the BNR Company had constructed at least 1200 k.m. of Railway line in Odisha. But after independence, during the last 60 years, the government ruling in Delhi, claiming aloud to be the representative of the ‘Aam Aadmi’ has only constructed 1200 kms of Railway line in Odisha. In other words, had British Govt. not laid Railway lines in Odisha, the Central Govt. probably would have left Odisha untouched by the Railways.
Another case in point is the pathetic rail density in terms of route kilometers of rail line in 1000 square kms., that is only 14.6 kilometer whereas in Bihar it is 35.9 km, in Jharkhand it is 24.3 kms and in West Bengal it is 43.4 kms. The National average of Railway density is 19.13 kms. Due to this continuous negligence of Central Government and the Railway Ministry seven district of Odisha are yet to see a rail line. Out of 23 districts which are connected by rail as per the data, seven districts are connected for namesake only. The most neglected area of Odisha is the infamous undivided K-B-K districts, major portions of these districts remain unconnected for the Railway network.
The Central Government acknowledges these areas as the most backward and announces economic packages for their development. But can it not at least try to connect each district headquarter by the Railways? Without Railways how can an area progress? Railways are the life-line and many parts of Odisha are cut off from that life-line.
India is federal govt. where each and every state is an equal partner. But the government ruling in Delhi is oblivious of its responsibilities. Prior to the presentation of the Railway budget, an all party delegation headed by the Hon’ble Speaker, Odisha Legislative Assembly had met the Railway Minister to inform him about the miserable condition of Railway network in Odisha. Our Chief Minister Shri Naveen Patnaik had personally written to the P.M. requesting him to do justice. But the Railway Budget has come out as a great blow to Odisha. We now feel that as if we do not belong to this federation. This continuous step-motherly attitude has disgusted us. We are not in a mood to tolerate any further. If we analyse the current scenario, the Railways get a formidable revenue from Odisha. But does it spend as generously for the development of Railways in Odisha? For example in the current administrative year, we had demanded 3050 crores budgetary provision for Odisha, but we got only 869 crores, which is not even one third of the demanded amount.
The existing criteria for allotment of funds to different states includes (a) Area of the state (b) population (c) throw forward of a existing project of the state. Since these were unscientific, Govt. of Odisha had placed its request to incorporate some additional criteria. They include the following (a) Existing route length in state per thousand sq. kilometers, (b) contribution of Revenue from the state to the Railway exchequer and (c) special requirement of heavy metal based industries, power plants and port for extensive rail connectivity. My question is why the Ministry of Railway did not deem it fit to adopt these rational criteria? Is the Railway Board superior to the will of the people?
These are some railway lines which are lying pending since decades. For example, the Lanjigarh Road-Junagarh Railway Project. This 56 km stretch was sanctioned in the year 1993-94. But it is yet to be completed. It needs Rs. 227.93 crores. But, in 2013-14, the Railway Ministry has sanctioned only Rs. 5 crores. Similarly the Khurda Road- Bolangir Railway project is of 289 kms. which was sanctioned in the year 1994-95. This line is very vital for connecting coastal Odisha to Western Odisha. The estimated cost of this projuect is 1995.25 crores. But the provision has been made only for 60 crores.
Similarly the port-based Haridaspur-Paradeep Railway line is another important line as it is connecting the steel hub ‘Kalinga Nagar’ at Jajpur district with Paradeep port. Commissioned in the year 1996-97, it is progressing at a snail’s pace. For the completion of the project the anticipated cost is more than 8.3 crores but this year the allotment is only Rs. 72.46 lakhs.
I am listing out many such pending projects awaiting completion. They are :-
1. Angul-Dubri-Sukinda Rd.(90 km)
2. Talcher-Bimlagarch (154kms)
3. Jaleswar-Digha (41kms) etc
4. Bangiriposi-Gorumahishani The re-organisation of East Coast Railway is an urgent need of the area. I am raising this issue continuously. At present E.C. Railway consists of 3 divisions- namely Khurda Road, Sambalpur and Waltair. From the geographical point of view, the Jajpur-Keonjhar Division is a very important one and should be given a new identity as a separate division under the E.C. Railways. Banspani-Badampahar, Bhadrakh-Laxmannath should be merged with East Coast Railways and a new Railway Division should be set up with Headquarters at Jajpur-Keonjhar Road.
The Jajpur-Keonjhar Railway station is the Headquarter Railway station of my constituency and it is the gateway of newly created steel hub at Kalinga Nagar. Since Jajpur and Keonjhar are mineral-rich districts, transportation of minerals takes place for this point. Volume of passengers from this station is also quite heavy. Yet neither Rajdhani nor Duronto or any other important train stops here. The station lacks basic amenities for passengers or cargo-loading facilities. We need at least two Railway over-bridges and two new platforms with shade.
Similarly, the pre-independence era heritage station Dhanmandal is another neglected Railway station of my district. I am from Dhanmandal and it is my birth place. But I am ashamed to mention here that since 2004, I have been trying my best to bring progress to this tiny Railway station, but in vain. The waiting room there functions as a shelter for dog, for the mentally deranged, beggars and maternity home for dogs and cats. There is no provision of sufficient light, water for the toilet and the narrow foot over-bridge in a moribund stage which may collapse any time. At least 4 high level platforms are required for this station. None of the important express trains halts here although it provides road connectivity to the Buddhist Diamond Circuit and to important districts like rural Cuttack and Kendrapada.
I am an optimist. Despite all the negative mindset of Central Government, I believe Odisha cannot be denied its justful demand. I hope good sense will prevail and the mistakes of the Railway Ministry will be corrected and Odisha will get its fair share to develop and prosper.
*SHRI RUDRAMADHAB RAY (KANDHAMAL): Indian Railway plays a vital role in connecting all parts of the country so far as economical and social development are concerned. The Indian Railways is termed as a friend of common men and it has got largest network to connect from North to South and East to West.
Railways being the most important factor of infrastructure which plays a vital role in economic development and rapid social transformation is almost absent in Odisha in comparison to neighbouring states. The fact that approximate rail density (route km. of rail line in 1000 sq. km) in Bihar being 35.9, Jharkhand-24.3, West Bengal-43.4 and Odisha only 14.6 says all as average density all over India level is 19.13. Before Independence, Odisha was having two major rail lines totalling 1200 kms. In last 65 years of Independence, only 1200 kms rail line has been added but no major inter-secting lines have been added. Although Odisha has only 4% of Indian Rails it caters material load of 12% of Indian Railways and gives revenue profit of 10% of Indian Railways. East Coast Railways of Odisha gives Rs. 10,000 crores plus yearly but its rail budget is lowest. In last year, budgetary allocation for Odisha was 714 crores out of which 221 crores has been withdrawn, whereas the State Government’s demand was 2345 crores. The most pathetic scene is that 7 district of Odisha have not seen rail line after 65 years of independence. 289 km long Khurda-Bolangir Rail Line touches 5 districts and passes through the heart of Odisha connects east to west of Odisha state. This is the only source which will eradicate regional imbalance of Odisha state. This rail line was sanctioned in the year 1994-95 but due to lack of enough budgetary allocation the progress is very negligible. From last year’s allocation of Rs. 40 crores, Rs. 17 crores has been withdrawn. Due to negligible allocation, this rail line remains in dream.
Although the Hon. railway Minister promised to complete 36 km in 2012-13 it has not been materialized, the revised estimates of this rail line has become 4 times of the original estimates in 1994-95. There is a lot of public dissatisfaction due to negligence of Railway Minister towards this rail line and people of these five districts will be compelled to go for agitation in future. Hence, I urge upon the Hon. Minister of Railway to allot at least Rs. 200 crores during 2013-14.
Similarly, the Government of India has announced to give priority to socially related railway projects in 12th plan period. In this context, I may mention that Kandhamal District of Odisha is predominated by ST and SC population and economically backward one. The rail line “Berhmapur to Phulbani” has been taken up and detailed survey has been completed. The Kandhamal District being rich in forest growth and having enough scope for eco tourism and tribal tourism, special allocation may given to connect it with Railway lines in the year 2013-14.
Hence, I urge upon the Hon. Railway Minister to allocate Rs. 100 crore to Berhampur-Phulbani new rail line to start with.
*श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला)ः रेल मंत्री जी ने 2013-14 के लिए अपना बजट पेश किया है। इसमें जहां दुविधा व दिक्कतों का जिक्र किया गया है, वहीं सरंक्षा व सुरक्षा का भी खास ध्यान रखने की बात कही गई है। अनुभूति के कोचों को लगाकर लोगों को लाभान्वित करने की बात कही गई है। यात्री किराया भी बढ़ाया गया है। इस बढ़ोत्तरी से आम यात्री को समस्या का सामना तो करना पड़ेगा, परंतु यदि उसी तरह उन्हें रेल में सुविधाएं दी जायें तो उसका बोझ यात्री को बुरा नहीं लगेगा।
मैं हिमाचल प्रदेश की शिमला लोक सभा क्षेत्र से आता हूं। हिमाचल प्रदेश जैसे आपको मालूम है कि एक पहाड़ी प्रदेश है। आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि आजादी के 65 वर्षों में हमारे प्रदेश में रेलवे ने कुल 44 कि.मी. की रेल लाइन में वृद्धि की है, जो भी कुछ हुआ वह अंग्रेज ही करके गए हैं। ऐसी परिस्थितियों में हम कैसे कह सकते हैं कि पहाड़ी राज्यों का ध्यान रखा जा रहा है। आजकल हम अखबारों के माध्यम से पढ़ते हैं कि बॉर्डर स्टेट्स के आसपास चीन में किस प्रकार से रेल लाइन व अन्य आवाजाही के साधनों में बढ़ोत्तरी कर दी है। यह भारत के लिए चिंता का विषय इसलिए ज्यादा है क्योंकि भारत की सरकार इस ओर गंभीरता से कार्य नहीं कर रही है। हमारी बिलासपुर-मनाली-लेह की रेल लाइन को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इस वर्ष हिमाचल प्रदेश को नए मंत्री श्री पवन कुमार बंसल जी से काफी उम्मीदें थीं कि पहली बार इस क्षेत्र से रेल मंत्री मिला है। परन्तु हिमाचल प्रदेश के लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। गत वर्षों में कुछ रेल लाइनों को सर्वेक्षण के लिए रखा गया था उसमें भी आगे कुछ नहीं हुआ। मैं गत कई वर्षों से घनौली-नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला-सुरजपुर-वला अम्ल-पावंटा साहिब-देहरादून रेल लाइन जो कि 267 कि.मी. लम्बी है को तैयार करने के लिए मांग कर रहा हूं। सर्वेक्षण किया गया है, परन्तु इस बजट में आगे के लिए कोई भी फंड का प्रावधान नहीं किया गया है। 2012-13 के लिए 60 लाख 10 हजार रुपए का प्रावधान किया गया था। इसी तरह बद्दी से बिलासपुर के बीच नई लाइन हेतु टोह इंजीनियरी एवं यातायात सर्वेक्षण (50 कि.मी.) के लिए मात्र 1000 रुपए का परिव्यय रखा गया है। इसके साथ-साथ धर्मशाला-पालमपुर (40 कि.मी.) के लिए भी 1000 रुपए का प्रावधान किया गया है। परवाजू-दाड़लाघाट के आद्यतन सर्वेक्षण के लिए 6 लाख 4 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है।
शिमला जो कि हमारे देश का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, को स्किल डेवेलपमेंट के लिए चुना गया है। परन्तु उसको किस प्रकार से अधिक आकर्षक बनाया जा सके उसकी कोई योजना रेल मंत्रालय के पास नहीं है। अतः मेरा आग्रह है कि शिमला, सोलर, बडोरा जहां पर इस लाइन पर एक कि.मी. से लम्बी सुंग है को पर्यटन की दृष्टि से अधिक आकर्षक अन्यान्य सुविधाओं के साथ बनाया जाए।
मैं रेल मंत्री जी के ध्यान में कुछ निम्नलिखित सुझाव व मांगें रख रहा हूं, जिसकी मैं उम्मीद करता हूं कि रेलमंत्री रेल बजट में समायोजित करेंगे-
(क) कालका से हरिद्वार के लिए कोई रेल एक्सटेंड की जाए। (ख) चण्डीगढ़ से कालका तक कुछ और रेलों को एक्सटेंड किया जाए। (ग) कालका रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म का सौन्दर्यीकरण कर उसको पूरी तरह से कवर किया जाए। (घ) कालका-शिमला रेल लाइन को पर्यटन की दृष्टि से अधिक आकर्षक बनाया जाए। (ड.) कालका-शिमला रेल लाइन पर बन्द पड़े सब स्टेशनों को पुनः खोला जाए, खासकर जावली स्टेशन।
महोदय, अतः मेरा सरकार विशेषतौर से रेल मंत्रालय से आग्रह है कि उक्त उठाए गए मामलों को पूरा करें।
*श्रीमती कमला देवी पटले (जांजगीर-चम्पा)ः माननीय रेल मंत्री जी ने रेल बजट में यात्री भाड़ा प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन सरचार्ज के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई की मार रेल मुसाफिरों को दी है। माल भाड़े में पांच फीसदी वृद्धि कर देश में महंगाई को चरम सीमा पर पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रेल टैरिफ प्राधिकरण हर छह महीने में सरचार्ज की समीक्षा कर रेल किराया तय करेगा, जिसका गहरा असर गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा।
महिलाओं, खिलाड़ियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं बेरोजगारों को राहत देने, सफाई और सुधार पर जोर देने के लिए रेल मंत्री जी को बधाई देती हूं, लेकिन ये घोषणाएं धरातल में दिखनी चाहिए।
रेलवे को सर्वाधिक आय देने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के साथ लगातार भेदभाव होता आ रहा है। इस बजट में भी छत्तीसगढ़ की घोर उपेक्षा की गई है। राज्य के माननीय मुख्यमंत्री जी एवं संसद सदस्यों की आवाज नहीं सुनी गई। रेलवे में लगने वाले लोहे के चादर, रेल की पटरी तो छत्तीसगढ़ से आती है, लेकिन रेल आधारित उद्योग की घोषणा छत्तीसगढ़ में नहीं की गई। यहां तक कि बिलासपुर जोन में लगने वाली लगभग 3700 वस्तुओं को अभी भी कोलकाता से ही क्रय किया जा रहा है, जिससे यहां के युवाओं में निराशा हुई है। रेलवे कोच की फैक्टरी छत्तीसगढ़ को दी जानी चाहिए, इस पर माननीय रेल मंत्री जी को आवश्यक कदम उठाना चाहिए।
मेरे संसदीय क्षेत्र के जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन जिसे जिला मुख्यालय स्टेशन का दर्जा रेलवे द्वारा हाल ही दिया गया है, में जिला मुख्यालय के अनुरूप कम से कम साऊथ बिहार गोंडवाना एवं मेल चाम्पा जंक्शन जो औद्योगिक जिला कोरबा के लिए लिंक का काम करता है में गीतांजली, ज्ञानेश्वरी अकलतरा में मेल, बाराद्धार में जनशताब्दी एवं सक्ती में गोंडवाना का स्टॉपेज दिया जाए।
बिलासपुर से रायगढ़ तक तीन रेल लाइनें हैं तथा ये औद्योगिक हब क्षेत्र हैं। इसलिए इनके बीच के सभी पैसेन्जर हाल्ट स्टेशनों, कापन, कोटमीसुनार, जेठा, सारागांव रोड एवं बालपुर में पैदल पुल, पेयजल एवं शौचालयों के साथ-साथ प्रकाश की व्यवस्था, यात्रियों के बैठने के लिए छायादार शेड एवं कुर्सी की व्यवस्था आवश्यक है।
अकलतरा, जांजगीर-नैला, चाम्पा, बाराद्धार एवं सक्ती स्टेशनों के प्लेटफार्मों की लम्बाई बढ़ाई गई है, लेकिन शेड निर्माण नहीं किया गया है जिसमें छाया हेतु शेड निर्माण एवं कुर्सी के साथ-साथ पेयजल की व्यवस्था की जाए।
जांजगीर-नैला एवं चाम्पा के बीच बिरगहनी एवं सक्ती झाराडीह के बीच केरीबंधा में नए पैसेंजर हॉल्ट दिया जाए। कापन पैसेंजर हाल्ट में पूर्ववत् पैसेंजर गाड़ियों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए।
जांजगीर-नैला रेक पाइन्ट को उपयोगी बनाते हुए जांजगीर-नैला, चाम्पा एवं सक्ती स्टेशनों में नःशक्त जनों के लिए ट्रायस्कल ओवर ब्रिज बनाया जाए। असामाजिक तत्वों को ध्यान में रखते हुए जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला में रेलवे चौकी की स्थापना एवं चाम्पा रेलवे थाना में पर्याप्त बल की तैनाती की जाए।
माननीय रेल मंत्री जी कोरबा या रायगढ़ से इलाहाबाद के लिए एक सीधी ट्रेन सुविधा तथा इंटरसिटी एक्सप्रेस को बिलासपुर से रायगढ़ तक बढ़ाते हुए जांजगीर-नैला में ठहराव दिया जाए। बढ़ती हुई भीड़ को देखते हुए जनशताब्दी में अतिरिक्त कोच एवं लोकल ट्रेनों में भी डिब्बे बढ़ाए जाने की जरूरत है।
जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 49 में जांजगीर-नैला एवं चाम्पा के बीच खोखसा समपार सं. 342 एवं चाम्पा यार्ड समपार सं. 337 में ओवर/अंडर ब्रिज का कार्य 15वीं लोक सभा के प्रथम रेल बजट में ही स्वीकृत कर हर बजट में राशि प्रावधान के बाद भी प्रारंभ नहीं हो सका है, शीघ्र प्रारंभ की कार्यवाही की जाए, अकलतरा समपार सं. 355 विगत कई वर्षों से अपूर्ण है, केवल रेलवे का हिस्सा बनना शेष है शीघ्र पूर्ण किया जाए।
जांजगीर-नैला पश्चिम केबिन के पास नैला फाटक, बाराद्धार-जेठा के बीच सक्ररेली फाटक एवं सक्ती झाराडीह के बीच अड़भार फाटक में नए ओवर/अण्डर ब्रिज की स्वीकृति बजट में दी जाए।
*श्री मकनसिंह सोलंकी (खरगौन)ः मैं रेल मंत्री का ध्यान खरगोन-बडवानी, मध्य प्रदेश की ओर दिलाना चाहता हूं। मेरा संसदीय क्षेत्र आदिवासी बहुल क्षेत्र है, लेकिन आज तक किसी भी रेल मंत्री का ध्यान बजट तैयार करते समय मध्य प्रदेश के खरगोन-बडवानी के इन आदिवासियों के विकास की ओर नहीं गया है। लगभग 65 वर्षों तक केन्द्र सरकार की अनेक रेल योजनाएं तैयार हुई है पर हमारे आदिवासियों के कल्याण एवं विकास को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल एवं पिछड़े संसदीय क्षेत्र खरगोन-बडवानी में लगभग 40 लाख आदिवासी लोग रहते हैं, जिन्होंने आजादी के 65 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक रेल नहीं देखी है। यह आदिवासी क्षेत्र रेल मार्ग से पूरी तरह से कटा हुआ है। हमारे मध्य प्रदेश में खण्डवा से धार वाया खरगोन-बडवानी एवं इंदौर से मनमाड़, महाराष्ट्र के लिए नई रेल लाईनों के लिए सर्वे किया जा चुका है। पिछले वर्ष इन दोनों रेल लाईनों को मूल्यांकन के लिए योजना आयोग को भेजा गया था, जिसे योजना आयोग के द्वारा असत्य एवं तथ्यहीन जानकारी के आधार पर निरस्त कर दिया गया। सरकार की इन रेल परियोजनाओं से इस आदिवासी क्षेत्र के विकास में बड़ा योगदान मिलेगा। इस क्षेत्र में उद्योग लगेंगे तो शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे।
मैं मंत्री जी का ध्यान सर्वे रिपोर्ट की ओर आकर्षित करना चाहूंगा। जिसके पेज नम्बर 60 पर मेरे आदिवासी क्षेत्र को आर्थिक रूप से एवं औद्योगिक पिछड़ा नहीं बताया गया है। भारत के राष्ट्रपति महामहिम ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी द्वारा मध्य प्रदेश के बडवानी जिले को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है। साथ ही, इस सर्वे रिपोर्ट में पेज नम्बर 36 पर परियोजना की आय एवं व्यय की गणना करते समय आगामी 11 वर्षों तक मालभाड़े से आय नहीं होना बताया गया है। जबकि मैं मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र की खरगोन एवं सेंधवा मंडियां एशिया की सबसे बड़ी मंडियां हैं तथा बडवानी देश की एकमात्र प्रसिद्ध सौंफ की मंडी है। इन मंडियों का माल देश के अन्य भागों में पहुंचाने के लिए रेल की सख्त आवश्यकता है।
माननीय रेल मंत्री जी मेरे संसदीय क्षेत्र के दोनों जिलों में रेल लाईन बिछ जाने से किसान अपनी उपज को देश के विभिन्न भागों में बेचकर उचित कीमत पा सकेंगे तथा मेरे क्षेत्र में नर्मदा एवं गोई जल परियोजनाओं के स्थापित होने एवं नहरों का जाल बिछ जाने से मेरा संसदीय क्षेत्र खरगोन-बडवानी राष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादन में अग्रणी होगा। स्पष्ट होता है कि सर्वे रिपोर्ट में भाड़े से आय नहीं बताया जाना स्वतः असत्य साबित होता है।
अतः माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि खण्डवा से धार वाया खरगोन-बडवानी (मध्य प्रदेश) एवं इंदौर से मनमाड़ (महाराष्ट्र) नई रेल लाईनों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें ताकि क्षेत्र की गरीब पिछड़ी आदिवासी जनता का विकास हो सके।
*श्रीमती ज्योति धुर्वे (बेतूल)ः मेरे क्षेत्र की महत्वपूर्ण समस्याएं एवं मांगें निम्न हैं जिसमें से निम्नलिखित 8 ट्रेनें जो कि नागपुर से इटारसी के बीच नॉन स्टापेज चलती हैं इन गाड़ियों का बीच में किसी भी स्टेशनों पर स्टापेज नहीं है। यात्रियों का अतिरिक्त भार एवं बेतूल स्टेशन को लगभग 6 करोड़ की मासिक आय होती है । इन ट्रेनों को नागपुर एवं इटारसी के मध्य लगभग एक से दो घंटे अतिरिक्त समय दिया गया है। इन ट्रेनों का बेतूल एवं हरदा स्टापेज करने पर रेलवे को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी एवं ट्रेनों के अतिरिक्त समय में बचत भी होगी। बेतूल रेलवे स्टेशन से सुबह 6.30 से दोपहर 12.30 तक इटारसी की ओर जाने हेतु कोई गाड़ी नहीं है। इसी तरह भोपाल से सुबह 9.30 के बाद शाम 5 बजे तक नागपुर की ओर जाने हेतु कोई गाड़ी भी नहीं है।
क्र.
ट्रेन नम्बर कहां से कहां तक अतिरिक्त समय
1. 12390 डाउन/12389 अप चैन्नई-गया 85 "/80 "
2. 12540 डाउन/12539 अप यशवंतपुर-लखनऊ 90 "/50 "
3. 12688 डाउन/12687 अप चैन्नई-देहरादून/चंडीगढ़ 55 "/60 "
4. 14260 डाउन/14259 अप रामेश्वरम-बनारस 125 "/65 "
5. 15016 डाउन/15015 अप यशवंतपुर-गोरखपुर 120 "/70 "
6. 16318 डाउन/16317 अप कन्याकुमारी-जम्मूतवी 70 "/60 "
7. 166688डाउन/17609अप चैन्नई-जम्मूतवी 70 "/60 "
8. 17610 डाउन/17609 अप पूना-पटना 50 "/75 "
9. कर्नाटक-दिल्ली हरदा स्टापेज
10. संचखण्ड हरदा स्टापेज
11. पुष्पक हरदा स्टापेज
12. नांदेड-अमृतसर हरदा स्टापेज 51253 आमला-छिंदवाड़ा ट्रेनः- इस ट्रेन का आमला में प्रस्थान सुबह 7 बजे होता है।
51254 छिंदवाड़ा-आमला ट्रेनः- इस ट्रेन का आमला में आगमन रात्रि 8 बजे होता है।
ट्रेन नम्बर 51240/51239 आमला-बेतूल शटलः- यह ट्रेन आमला एवं बेतूल के मध्य संचालित होती है इस ट्रेन के रैक को लगभग 9 घंटे बेतूल रोका जाता है। इस समय का सदुपयोग करते हुए इस ट्रेन को आमला से इटारसी के मध्य संचालित करने पर रेलवे को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। साथ ही आम जनता को एक अच्छी सेवा भी मिलेगी एवं रेलवे को अतिरिक्त कर्मचारी/राजस्व की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, हो रही आर्थिक क्षति की पूर्ति होगी।
आमला स्टेशन पर ट्रेन नम्बर 12644/12804/12643/12803 स्वर्णजयंती एक्सप्रेस का स्टॉप दिया जाए, क्योंकि आमला एयरफोर्स का मुख्यालय है एवं भोपाल नागपुर से आवागमन हेतु उपयुक्त समययुक्त गाड़ी होगी।
पूर्व में महानदी एक्सप्रेस, जो बिलासपुर से नागपुर होते हुए भोपाल को जाती थी, के स्थान पर नागपुर-भोपाल इंटरसिटी प्रारंभ की जाए। (यदि भोपाल में तकनीकी दृष्टि से संभव नहीं हो, तो हबीबगंज या सिहोर या बैरागढ़ तक की जाए) 02160/02159 नागपुर‑जबलपुर को दिनांक 31.11.2012 के बाद नियमित किया जाए।
. 06513/06514 बैंगलोर-पटना वाया नरखेड को नियमित किया जाए।
09307/09308 बैंगलोर-इंदौर वाया नरखेड़ को नियमित किया जाए।
नागपुर फास्ट पैसेंजर को टिमहरनी में एक मिनट का हाल्ट /स्टापेज किया जाए।
माननीय मंत्री जी द्वारा रेल बजट में न्यू अमरावती नरखेड़ पैसेंजर को यदि पांडुर्ण, तिगांव, चिचंडा, मुलताई, आमला जंक्शन तक इसे बढ़ायी जाये क्योंकि यहां के लोगों का महाराष्ट्र से 1956 से आज तक लेन‑देन जारी है। अर्थात् इस ट्रेन को प्राथमिकता देते हुए इन्हें यात्री सुविधा प्रदान की जाए।
इंदौर नागपुर को घोड़ाडोंगरी स्टापेज की जाये।
नई रेल लाईन नरखेड से बेतूल, बेतूल से हरदा दी जाए।
*SHRI GANESHRAO NAGORAO DUDHGAONKAR(PARBHANI): I would like to express my gratitude to the railway minister for announcing policy decision of taking survey of doubling the line of Parbhani-Manmad & Secunderabad-Mudkhed-Adilabad.
But I would like to place on the record that Parbhani-Mudkhed railine is used 116% at present & few more trains are announced in this budget 2013-14. The burden of running the trains on this track would increase 140-150% of their capacity which would result in maintenance of track, thereby slowing down the speed & trains running behind the scheduled which would cause time loss & expenses to ex-chequer.
I therefore appeal to your goodself to increase the allocation to the doubling of Parbhani-Mudkhed track of 150 crores in this budget which would complete some part of work.
The detail estimate of the doubling of Parbhani-Mudkhed is submitted to Railway Board.
I further would like to know the status of schemes announced in preceding budgets announced by the railway ministers, about
1) The tertiary level multi-speciality hospital at Purna (Jn) and also request to include Purna (Jn) hospital in pilot project as per the MOU with Ministry of Health.
2) The completion of ‘Adarsh Station’ at Parbhani (Jn), Purna Jn. and Jalna and ‘Modern station’ at Sailu, Partur, Pokharni (Nr.) and Gangakhed. What steps have been taken for the completion of above mentioned projects?
I demand for Pedgaon-Pokharni (Nursingh) bypass to Parbhani (Jn).
With these above developments, I would like to attract your attention to following demand of my region.
1) Akola-Khandwa gauge conversion (MG to BG): I would like to place very earnest demand of people of my region for time bound completion of Akola-Khandwa gauge conversion (MG to BG) within a stipulated time and this programme of gauge conversion is necessary for development of the backward region and to connect this region to North and East India.
2) Parli-Beed-Nagar rail line :To expedite the Parli-Beed-Nagar rail line to increase the connectivity for convenience of the people of my region to Pune and Mumbai.
3) To make the construction of Ultra Modern Diesel/Electric Home Locoshed at Purna(Jn) in Nanded division in South Central Railway I would like to emphasize on the fact hat injustice is done to my region at Purna(Jn) where steam locoshed was located as it was a central place to the MG rail line. I have come to know that such steam locosheds were also present at Kazipeth, Lalaguda, Guntkal, Gutty in South Central Railway but they were subsequently converted in diesel and electric locosheds. On the contrary, the steam locoshed at Puran Jn.,Jalna, Manmad (Jn), Parli(Jn) and Akola were abolished and no new diesel locoshed were erected. This is injustice to this region because these lines are diesel locomotive lines.
The present diesel locoshed(i.e. Kazipeth, Lalaguda, Guntkal and Gutty) are in the zone of electrified lines and far away from the Nanded Division (about 350 km) Following infrastructure facilities available at Purna (Jn)
1. Diesel locoshed.
2. C & W shop
3. Railway Yard
4. Rest house for officers and running room.
5. Railway quarters for employees
6. School
7. Hospital
8. Community Hall Therefore, I request you to consider at least one demand of constructing ultra modern diesel/electric locoshed at Purna (Jn)in Nanded Division.
4) Electrification of Adilabad-Parli-Nashik(Manmad) rail line: I demand Adilabad-Parli-Nashik(Manmad) electrification as this line is commercial line for transportation of coal to thermal power stations.
5) Establishment of Kendriya Vidyalaya at Purna (Jn): As per the MOU with HRD, Kendriya Vidyalaya should be established at Purna (Jn) as ample railway land is available and thousands of railway employees live there.
6) Demand for extension of Miraj-Parli Passenger to Parbhani (Jn) or Purna(Jn): I’m very thankful to Railway Minister for starting some new trains which will certainly benefit to the people of this region. At the same time, for Warkari Sampraday of Marathwada region, Miraj-Parli Passenger should be extended for the convenience of Warkari to go to Pandharpur.
I’m also thankful to Railway Minister for starting Amravati-Pune bi-weekly train but the stoppage is not given at Pokharni (Nr.), Gangakhed and Basmat which is very inconvenient to the people of this region. Therefore, I demand to give stoppage to this train to these railway stations and decrease the time loss and to save valuable time of the passengers. I’m also demanding the extension of Nagarsol-Jalna (DEMU) to Purna (Jn).
7) Upgradation of stations: I attract the kind attention of Hon’ble Minister to the fact that stations of Dhondi, Singnapur, Ukhali (Dist. Parbhani) and Paradgaon (Dist. Jalna) railway stations remain as it is since the establishment of this rail line. I, therefore, request the Hon’ble Railway Minister to create block station to the above railway stations.
8) Vacancies in Nanded Division: May I attract your attention to the fact that there is shortage of running staff in Nanded division and because of this the tremendous stress on the existing running staff in Nanded division. The following vacancies of running staff is in the Nanded division.
1. Loco-Pilot = 77
2. Asst. Loco-Pilot = 83
3. Guard = 52
4. Station Masters = 60 Therefore I request you to fill-up the above vacancies as early as possible.
I request the Hon’ble Railway Minister to create (passenger reservation system facility) PRS to Ghansawangi, Sonpeth, Mantha and Palam, as these taluka places are far away from nearest rail head.
I would like to attract your attention to the fact that the work of ROB near Gangakhed railway station is going very slowly. Kindly expedite the work and at the same time make the provision of ROB at Marathwada Agriculture University, Parbhani, Manwat Road, Sailu and Partur.
*श्री गजानन घ. बाबर (मावल)ः माननीय रेल मंत्री जी द्वारा 2013-14 का बजट पेश किया गया। यह बजट बहुत अधिक उम्मीदों से भरा हुआ था किंतु बजट पूर्ण रूप से नकारात्मक रहा। हम उम्मीद कर रहे थे कि माननीय मंत्री जी द्वारा संतुलित बजट पेश किया जाएगा। किंतु यह बजट पूर्ण रूप से असंतुलित और गुमराह करने वाला बजट है। रेल बजट में पूरे देश का ध्यान न रखकर विशेष तौर से महाराष्ट्र की पूर्ण रूप से अनदेखी की गई है। इस बजट को देश का रेल का बजट न कह कर अमेठी और रायबरेली का रेल बजट कहेंगे, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। सरकार ने यह कह कर कि यात्री किराया नहीं बढ़ाया जा रहा है देश की जनता को गुमराह किया है। एक तरफ तो सरकार यात्री किराया नहीं बढ़ाने की बात कर रही है और दूसरी तरफ तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के साथ ही किराए पर सरचार्ज बढ़ाने की बात करती है और यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि एक दिन में जितने आरक्षित टिकट बनाये जाते है, लगभग उतने ही टिकट रद्द किए जाते हैं। सरकार ने टिकट रद्द करने पर रद्दीकरण चार्ज बढ़ाए दिए हैं। इस बढ़े हुए चार्ज को तुरन्त वापस लिए जाने की आवश्यकता है।
मैं आशा कर रहा था कि मावल संसदीय क्षेत्र के जनता की वर्षों पुरानी मांगों को इस बजट में मंजूर कर लिया जाएगा किंतु इस बार फिर से मावल संसदीय क्षेत्र की जनता को निराशा ही हाथ लगी है। आपके और आपके पूर्व मंत्रियों को संबंधित मांगों को पूरा करने हेतु कई बार मेरे द्वारा पत्रों के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक इन मांगों पर कोई जरूरी एवं उचित निर्णय नहीं लिया गया है।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से रेल बजट 2013-14 के तहत अपने संसदीय क्षेत्र मावल की जनता द्वारा वर्षों पुरानी मांगों को फिर से प्रस्तुत करना चाहता हूं और आशा करता हूं कि रेल बजट 2013-14 का संसद में उत्तर देते वक्त माननीय रेल मंत्री जी इन सभी मांगों को पूरा करने की भी घोषणा करेंगे।
मावल संसदीय क्षेत्र एक नया संसदीय क्षेत्र है तथा यहां रेलवे से संबंधित कई सुविधाओं की आवश्यकता है। मावल संसदीय क्षेत्र में अनेक प्रकार के छोटे एवं बड़े उद्योग हैं और इन उद्योगों को तथा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेलवे द्वारा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दिए जाने की आवश्यकता है।
मावल संसदीय क्षेत्र की रेलवे मांगें निम्नलिखित हैं-
1. कोंकण रत्नागिरी, चिपलून, करजत और पनवेल के बीच नई रेल गाड़ी का आवागमन।
2. वास्को-डी-गामा से पनवेल जो कि बसई, विराट होते हुए 24 डिब्बों की रेल गाड़ी को (उदयपुर एक्सप्रेस) रोजाना चलाया जाए। इससे रेलवे को अच्छी आमदनी भी प्राप्त होगी और गोवा महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश के बीच पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
3. गुरावली जगह, जो कि तितवाली और खाडवाडी के बीच स्थित है पर नया रेलवे स्टेशन स्थापित किए जाने की मांग 1963 से की जा रही है तथा इससे संबंधित से पत्र व्यवहार भी विभाग के साथ होता रहा है और गुरावली एक अधिकतम जनसंख्या वाला क्षेत्र है। अतः यहां पर रेलवे स्टेशन स्थापित करने की कृपा करें।
4. तालेगांव और लोनावाला के बीच एम.आई.डी.सी. का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसके लिए प्रतिदिन इन क्षेत्रों के बीच लगभग 6 हजार श्रमिक आवागमन करते हैं। मेरी मांग है कि इसको देखते हुए तालेगांव और लोनावाला के बीच पैसेंजर ट्रेन रात्रि व दिन में चलाई जाए।
5. ट्रेन न. 1618 का विस्तार करजत से पनवेल के बीच किया जाए।
6. सीएसटी पर परवेल के बीच 13 डिब्बों वाली ईएमयू चलाई जाए और हार्वर लाइन पर 5 मिनट के अंतराल पर चलाई जाए। 12 कोच वाली ईएमयू परवेल बोरीवली हार्वर लाइन पर हर 30 मिनट के अन्तराल पर चलाई जाए और दहानू के बीच हर 60 मिनट के अंतराल पर चलाई जाए।
7. देहरादून एक्सप्रेस 2287/2288, अमृतसर एक्सप्रेस 2483/2489, चंडीगढ़ एक्सप्रेस 2659/2654 तथा गोवा सम्पर्क क्रंति एक्सप्रेस 2449/2450 को रतलाम में ठहराव देने की व्यवस्था की जाए, जिससे क्षेत्रीय जनता को इन रेलगाड़ियों की सुविधा का लाभ मिल सके।
8. पूना से लोनावाला के बीच नए तीसरे ट्रैक की सुविधा दी जाए तो नेशनल हाइवे पर होने वाले अधिक यातायात की कमी होगी एवं स्थानीय जनता को भी इस सुविधा का लाभ होगा।
9. पुणे से कोलकाता तथा दार्जिलिंग, सिक्किम, झारखंड, ओरिस जाने वाली सिर्फ आजाद हिंद एक्सप्रेस एक ही ट्रेन है। इस ट्रेन में बारह माह बहुत भीड़ रहती है। इसलिए पुणे से कोलकाता के बीच राजधानी या दुरन्तो नॉनस्टाप या गरीब रथ ट्रेन शुरू करने की जरूरत है।
10. राजस्थान, गुजरात की ओर यात्री एवं पर्यटकों की बारह महीने बहुत भीड़ रहती है। सिर्फ पुणे से जोधपुर ट्रेन सप्ताह में 1 दिन चलती है। यह ट्रेन पुणे से 3 दिन राजस्थान में 1. जोधपुर, 2. अजमेर के लिए शुरू किए जाने की जरूरत है।
11. पुणे जयपुर हॉलीडे स्पेशल एक साल से चल रही है और अब मार्च तक चलेगी। इस ट्रेन में बहुत भीड़ रहने के कारण हमेशा के लिए चलाई जाने की जरूरत है।
12. ऑन-लाईन ई-टिकट यात्रा करते समय यात्रियों के पास पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राईविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि रखने की आवश्यकता है। लेकिन स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की आयु 18 साल से कम होती है, तो उपरोक्त पहचान पत्र रखना असंभव है। इसलिए ऑन-लाईन ई-टिकट पर यात्रा करते समय विद्यार्थियों के स्कूल कॉलेज पहचान-पत्र पर यात्रा करने की अनुमति देने की आवश्यकता है।
13. सन् 1995 में पूर्व रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश कलमाड़ी जी ने पुणे नासिक रेलवे मार्ग का सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। यह मार्ग जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। अभी चलने वाली पुणे नासिक ट्रेन सुविधाजनक नहीं है। यात्रियों को परेशानी होती है। यह मार्ग शुरू होने तक नासिक गाड़ी के समय तथा मार्ग में परिवर्तन किया जाए। पुणे से नासिक वाया पनवेल चलने वाली ट्रेन को पहुंचने का समय ज्यादा होने के कारण असुविधाजनक है। यह गाड़ी पुणे‑ करली होते हुए कल्याण स्टेशन, नासिक मनमाड तक चलायी जानी चाहिए। नासिक से सुबह और पुणे से रात को छोड़कर सुबह नासिक पहुंचने से यात्रियों को सुविधा होगी।
14. कल्याण आले फाटा नगर बीड परली की मांग गत 25 वर्षों से हो रही है। इस मार्ग का सर्वेक्षण भी नहीं हुआ है। यह मार्ग महाराष्ट्र के लिए अति आवश्यक है।
15. मुम्बई पुणे, पुणे-सोलापुर यात्रा के लिए अलग ट्रेन होने के कारण यात्री का किराया ज्यादा होता है। मुम्बई से सोलापुर एक ही टिकट देने से यात्रियों को सुविधा होगी। मुम्बई से पुणे‑सोलापुर डायरेक्ट ट्रेन इंद्रायणी नाम से गाड़ी चलानी चाहिए।
16. जिस स्थान से यात्रा करनी हो और दूसरे स्थान पर रेलवे टिकट का आरक्षण किया गया, तो रेलवे ज्यादा चार्ज लेती है। वह ज्यादा चार्ज रद्द किया जाना चाहिए।
17. तत्काल कोटा रेलवे के शयनयान आसन संख्या के 30/40 प्रतिशत तक बढाया था। यात्रियों को सर्वमान्य आरक्षण सहजता से उपलब्ध होने के लिए तत्काल कोटा कम करके 10 प्रतिशत तक ही सीमित रखना चाहिए।
18. तत्काल आरक्षण के लिए ज्येष्ठ नागरिक, बच्चे, अपंग, मूक, बधिर, अंधे, कैंसर रोगियों के लिए सामान्य आरक्षण के लिए दी जाने वाली कन्सेशन सुविधा नहीं मिलती है। यह सुविधा तत्काल टिकट आरक्षण करने वालों को भी मिलनी चाहिए। टिकट रद्द करते समय धन वापसी रकम तत्काल जार्च छोड़कर सर्वसाधारण आरक्षण टिकट की तरह मिलनी चाहिए।
19. रेल आरक्षण टिकट पर टीडीआर तथा रेल रिफंड वापसी रसीद से यात्रियों को धन वापसी मिलने में बहुत परेशानी होती है। लेकिन धन वापसी की अर्जी करने पर भी 90 प्रतिशत यात्रियों को धन वापसी नहीं मिलता है। धन वापसी कार्य प्रणाली में सुधार लाने की आवश्यकता है, जिससे कि यात्रियों को आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
20. यात्रा के समय भोजनयान से मिलने वाले खाद्य पदार्थ दर्जाहीन हैं। दाम भी ज्यादा हैं। अच्छा खान-पान मिलने का आश्वासन मिलता है। खाद्य पदार्थों का दर्जा अच्छा होना चाहिए एवं यात्रियों की जानकारी के लिए खाद्य पदार्थ के दाम की सूची हर डिब्बे में दर्शनीय हो जिससे यात्री ठगे नहीं जाए। यात्रियों से ज्यादा दाम मांगने की कोशिश पर बंधन आ जायेगा।
21. जिस ठिकाने से आरक्षण हो और बाद में बोर्डिंग स्टेशन बदला हो तो सुविधा के लिए यात्री को किसी भी स्टेशन से यात्रा करने की अनुमति दी जाए। यात्रा स्टेशन से बोर्डिंग स्टेशन तक का किराया एक बार लिया जाए।
22. माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए सभी स्टेशनों पर शौचालय की व्यवस्था की जाए तथा महाराष्ट्र में चलने वाली प्रत्येक लोकल गाड़ियों में अलग से और अधिकतम महिला आरक्षित डिब्बों को लगाया जाए जिससे महिलाओं को होने वाली कठिनाई दूर हो सके।
23. पूना रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवर ब्रिज पर अत्यधिक आवागमन होने से हमेशा भीड़ एवं दुर्घटना का डर बना रहता है। अतः वहां पर एक अतिरिक्त फुट ओवर ब्रिज बनाने की आवश्यकता है।
24. मुम्बई की तर्ज पर ही पूना में भी स्मार्ट कार्ड सेवा देकर यात्रियों की यात्रा में सुविधा पर ध्यान दिया जाए।
25. केन्द्रीयकृत उद्घोषणा केन्द्र रेल यात्रियों के यात्रा में निश्चित रूप से सुविधा प्रदान करेगा। अतः केन्द्रीयकृत उद्घोषणा केन्द्र बनाने की भी विशेष आवश्यकता है।
26. यात्रियों के हित को ध्यान में रखकर यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ शौचालय /मूत्रालय की व्यवस्था प्रत्येक स्टेशन पर किए जाने की आवश्यकता है।
27. प्रत्येक स्टेशन की स्वच्छता एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है तथा पूना के हर स्टेशन पर बने शेड की मरम्मत की आवश्यकता है। अतः इस पर भी पूरा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
28. पूना के प्रत्येक प्लेटफार्म तथा रेलवे के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक सड़कों की मरम्मत की अति आवश्यकता है। अतः इस पर ध्यान देकर उचित कार्यवाही करने हेतु दिशानिर्देश प्रदान करे।
29. देश के समस्त रेलवे स्टेशनों पर वृद्ध, हृदय रोगी एवं महिलाओं के लिए विशेषरूप से लिफ्ट और एक्सिलेटर लगाए जाने की आवश्यकता है। अतः बजट में इस व्यवस्था का भी प्रावधान करने हेतु उचित कदम उठाने का कष्ट करें।
30. पूना-एर्नाकुलम एक्सप्रेस वाया पनवेल सप्ताह में दो दिन चलती है जोकि कारवार की जनता के लिए पूना आने हेतु एकमात्र रेलगाड़ी है और इसका कारवार में कोई ठहराव नहीं है। यह रेलगाड़ी मार्गों में और फिर मंगलोर में ठहरती है जिसके कारण कारवार के लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतः कारवार के लोगों की परेशानी को दूर करने हेतु पूना-एर्नाकुलम एक्सप्रेस को कारवार रेलवे स्टेशन पर ठहराव देने की आवश्यकता है।
31. मुम्बई से कन्याकुमारी वाया कोंकण रेलवे हॉलीडे स्पेशल रेलगाड़ी चलाए जाने की आवश्यकता है।
32. अगर करजद स्टेशन पर एर्नाकुलम सुपरफास्ट एक्सप्रेस को ठहराव दिया जाता है तो कल्याण और करजद के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को सुगमता होगी। अतः न्यू पूना-एर्नाकुलम सुपरफास्ट एक्सप्रेस को करजद में ठहराव देने की आवश्यकता है।
वर्तमान में पनवेल रेलवे स्टेशन पर पूछताछ और टिकट आरक्षण केन्द्र रात्रि में उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अतः पनवेल रेलवे स्टेशन पर 24 घंटे पूछताछ व टिकट जारी केन्द्र खोले जाने की आवश्यकता है।
पनवेल रेलवे स्टेशन पर स्थानीय टिकट केन्द्र की संख्या कम है जिसके कारण यात्रियों को घंटो तक लम्बी कतारों में खड़े रहना पड़ता है। अतः यहां पर और अधिक स्थानीय यात्रा टिकट केन्द्र खोले जाने की आवश्यकता है।
यात्रियों की संख्या को देखते हुए पनवेल और पूना के बीच करजद होते हुए और अधिक लोकल रेलगाड़ी चलाने की आवश्यकता है।
पनवेल रेलवे स्टेशन पर सिर्फ 30औ प्लेटफार्म की छते ढकी हुई हैं जिसके कारण बरसात और गर्मियों में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अतः यहां के सभी प्लेटफार्म की छतों में शेड लगाए जाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया जाए।
*श्री सोहन पोटाई (कांकेर)ः लोकतंत्र में सभी वयस्कों को मत डालने का अधिकार एवं सभी मनुष्यों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, भोजन व अन्य मूलभूत सुविधा पाने का हक है। इस तरह विकास का हिस्सा आम लोगों तक पहुंचे, यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है।
छत्तीसगढ़ राज्य बने लगभग सवा बारह वर्ष हुआ है। अभी शैशव अवस्था में रहते हुए यह रेलवे से देश को सर्वाधिक राजस्व देने वाला राज्यों में से एक है। लेकिन रेलवे सुविधा राज्य में नगण्य है। आज भी छत्तीसगढ़ के अधिकतर क्षेत्र के लोगों ने रेल के दर्शन नहीं किए हैं।
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य क्षेत्र है। इसके बावजूद विकास के बहुत सारी संभावनाएं हैं। राज्य में लौह अयस्क, कोयला, एल्युमिनियम, अयस्क, लाइम स्टोन एवं खनिज व वन सम्पदा प्रचुर मात्रा में है। इस पर आधारित स्टील, ऊर्जा, सीमेंट आदि उद्योग विशाल संख्या में स्थापित हैं।
रेल सम्पर्क से अधिकांश क्षेत्र अब भी विकास के लिए वंचित हैं। मेरे संसदीय क्षेत्र कांकेर जिला रेल सम्पर्क से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन 2011-12 के बजट में सम्मिलित है, जिनका सर्वे बजट में नहीं है। कृपया बजट में जोड़ने की कृपा करें।
मैं माननीय रेल मंत्री से अनुरोध करता हूं कि नीचे लिखे प्रस्तावों को शामिल किया जाएः-
1. धमतरी नैरोगेज को ब्रॉडगेज में परिवर्तन कर धमतरी से कांकेर-केशकाल, कोण्डागांव-जगदलपुर तक बढ़ाई जाए या दुर्ग-दल्ली के मध्य पोण्डी स्टेशन से कांकेर-केशकाल, कोण्डागांव-जगदलपुर तक जोड़ा जाए।
2. दुर्ग एक्सप्रेस (दुर्ग-दल्ली) का नाम तान्दुला एक्सप्रेस नामकरण किया जाए।
3. नई दिल्ली-बिलासपुर को हावड़ा तक बढ़ाए जाए।
4. दुर्ग-निजामुद्दीन छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रंति एक्सप्रेस को सप्ताह में दो दिन से बढ़ाकर प्रतिदिन किया जाए।
5. दुर्ग से गुवाहाटी तक नई यात्री ट्रेन चलाई जाए।
6. दल्ली राजहरा तक दोहरीकरण किया जाए।
7. दल्ली राजहरा-रायपुर को नियमित कर कोरबा तक विस्तार किया जाए।
8. बालोद में कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केन्द्र की स्थापना दिन भर के लिए की जाए।
9. दल्ली राजहरा-रावधार नई रेल विस्तार के प्रभावितों को नौकरी एवं उचित मुआवजा शीघ्र प्रदान किया जाए।
10. दिल्ली राजहरा-रावघाट नई रेल लाइन पर भानुप्रतापपुर में रेलवे ट्रेक निर्माण किया जाए।
11. धमतरी नगरी, लिखमा उडीसा प्रांत के रायगढ़ तक विस्तार किया जाए।
श्री धनंजय सिंह (जौनपुर): माननीय सभापति जी, आपने मुझे रेल बजट 2013-14 पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ और अपनी पार्टी के नेता को भी बहुत धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर मुझे अपनी राय रखने का अवसर दिया है।
सभापति जी, जब रेल मंत्री जी इस बार बजट प्रस्तुत कर रहे थे तो मुझे लगा कि बहुत लंबे समय के बाद बहुत हो-हल्ला मचा था कि एक बड़े राजनीतिक दल को काफी लंबे अर्से के बाद, करीब 16-17 वर्षों के बाद यह विभाग मिला तो कुछ बेहतर नीतियों के साथ वे सामने आएँगे क्योंकि जब हम बजट प्रस्तुत करते हैं तो सिर्फ लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं करते हैं, सरकार की नीति उसमें परिलक्षित होती है। परंतु इस बजट में मुझे कहीं से भी कोई सरकारी दीर्घकालिक नीति परिलक्षित होती नहीं दिखती है। कम से कम माननीय मंत्री जी से मुझे उम्मीद थी कि कुछ दीर्घकालिक नीतियाँ बनाएँगे, परंतु इस बजट में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। अनुराग जी आश्चर्य प्रकट कर रहे थे, मगर मुझे कोई आश्चर्य नहीं लगा क्योंकि पिछले चार वर्षों से मैं जो बजट देख रहा हूँ, पूर्ववर्ती जो बजट थे, उसी क्रम में माननीय मंत्री जी ने भी यह बजट प्रस्तुत किया है। कोई नई उम्मीद नहीं थी, लेकिन 2009-10 में जब माननीय ममता बनर्जी ने यह बजट प्रस्तुत किया था, उस समय एक विज़न डॉक्यूमैंट 2020 आया था। मुझे लगा कि हमारी जो सरकार है, इसने कहीं न कहीं जापान से कुछ प्रेरणा ली है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान ने 1964 ओलंपिक को टार्गैट में रखकर, जबकि वह आर्थिक मंदी के दौर से भी गुज़र रहा था, द्वितीय विश्वयुद्ध की त्रासदी भी जापान झेल रहा था, उसके बावजूद भी उसने लक्ष्य निर्धारित किया था, अपने रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन्स को लक्ष्य दिया था कि जो 1964 ओलम्पिक आएगा, उसमें हम बुलेट ट्रेन इंट्रोडय़ूस करेंगे और वर्ल्ड बैंक से पैसा लेकर उसने उस लक्ष्य को दस वर्षों के अंदर प्राप्त कर लिया और 1964 के पहले वह लक्ष्य प्राप्त किया। मैं उम्मीद करता था कि विज़न डॉक्यूमैंट 2020 जो है, वह किसी मंत्री विशेष का बजट नहीं होता। बजट एक सरकार का होता है और यूपीए-1 और यूपीए-2 चलाने के बाद यह लगा कि 2020 विज़न डॉक्यूमैंट पर यूपीए की सरकार कुछ न कुछ काम आगे चलकर करेगी। मैं देख रहा हूँ कि पिछले 60-62 वर्षों में नई रेल लाइनें बिछाने का जो लक्ष्य प्राप्त किया था, वह 8000 से 10,000 किलोमीटर ही प्राप्त कर पाए थे लेकिन 2009-10 से 2020 तक इन्होंने निर्धारित किया कि लगभग 25000 किलोमीटर नई रेल लाइनें इस देश में बिछाएँगे और लोगों को, देश की जनता को उसका लाभ देने का काम करेंगे। साथ ही साथ न्यू फ्रेट कॉरीडोर की स्थापना की भी बात कही।
मैं माननीय मंत्री जी से यह ज़रूर जानना चाहूँगा कि क्या विज़न 2020 डॉक्यूमैंट यूपीए का डॉक्यूमैंट नहीं था? जब ये जवाब दें तो ज़रूर इस बात को कहें क्योंकि इस बार इन्होंने सिर्फ 500 किलोमीटर नई रेल लाइनों का लक्ष्य रखा है। अगर नई रेल लाइनों का लक्ष्य प्रत्येक वर्ष इसी हिसाब से 500 किलोमीटर रखेंगे तो 2020 तक जो 25,000 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाने का लक्ष्य आपने रखा है, वह मुझे प्राप्त होता नहीं दिख रहा है। माननीय मंत्री जी ने जो बजट प्रस्तुत किया है, उससे मुझे कहीं ऐसा नहीं लग रहा है कि रेल जिन समस्याओं से जूझ रही है, उन समस्याओं का समाधान इसमें है। बल्कि समस्याएँ और बढ़ रही हैं, क्योंकि एडहॉकिज्म सिस्टम पर हम काम करने लगे हैं। हमने मांग कर दी तो आपने हमारे यहाँ एक रेल चला दी। किसी ने कह दिया कि हमारे यहाँ ट्रैक बिछा दो तो आप वहाँ काम कर देते हैं। कोई एक कंप्रिहैन्सिव या इंटीग्रेटेड पॉलिसी पूरे देश के लिए लाने का काम आप नहीं कर रहे हैं। रेल को लाईफलाईन कहा जाता है। आज तक हमने पूरे देश में कोर नैटवर्किंग नहीं की है, प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टर्स को जोड़ने का काम नहीं किया है। यह काम आज तक हम कंप्लीट नहीं कर पाए हैं। मैं माननीय मंत्री जी से ज़रूर यह कहूँगा कि विज़न 2020 डॉक्यूमैंट पर आप ज़रूर गंभीरता से विचार करें। एडॉप्टीज्म सिस्टम पर आप जो काम कर रहे हैं, उससे हटते हुए जब भी आप कोई नई रेल लाइन बिछाते हैं, जब भी कोई आप ट्रेन बढ़ाते हैं, ट्रेनों का एक्स्टेंशन करते हैं, उसकी फिज़ीबिलीटी रिपोर्ट या कैश बैनीफिटी एनालिसीस करते हैं, कम से कम कोई साइंटीफिक एप्रोच आपकी इस दिशा में होनी चाहिए। मुझे इसमें सरकार के एप्रोच की कमी दिखती है।
महोदय, हमारे यहां माननीय मंत्री जी ने एक ट्रेन को बढ़ा दिया है। मैं जानना चाहता हूं कि जिस तरह से चंडीगढ़ एक्सप्रेस लखनऊ तक चलती थी, उसे आपने बढ़ा दिया है। मैं उदाहरण के तौर पर आपको बता रहा हूं कि एक ट्रेन चंडीगढ़ से लखनऊ तक चलती थी, उसकी डिमांड बनारस तक थी, लेकिन आपने पटना तक उसे बढ़ा दिया है। जब आप ट्रेनों को बढ़ाते हैं, तब कितना लाभ या नुकसान होता है, क्या आप इस पर भी विचार करते हैं? मुझे लगता है कि इस बारे में ज्यादा विचार नहीं किया जाता है। अभी जैसे बार-बार बात उठी कि रायबरेली और चंडीगढ़ का ही यह बजट रहा है, कई ट्रेनें चलाई गई हैं। जैसे रायबरेली और अमेठी को जोड़ने का काम किया है। अमेठी आज की तारीख में नया डिस्ट्रिक्ट बना है, आप उसे जोड़ने का काम कर रहे हैं। मेरा आग्रह है कि जब आप उत्तर देंगे तो बताएं कि पूरे देश को डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टर से कब तक जोड़ने में कामयाब हो सकेंगे?
मेरा एक सुझाव भी है, क्योंकि मैं सिर्फ आलोचना ही नहीं करना चाहता हूं। हमारी जो मेट्रो सिटीज चैन्नई-मुम्बई, चैन्नई-कोलकाता, कोलकाता-दिल्ली और दिल्ली-मुम्बई के बीच में कम से कम आप अलग से ट्रैक्स बिछाने का काम करें। आप लांग टर्म सोच कर रिसर्च विंग को इन्वोलव करते हुए कि पैसेंजर ट्रैक्स अलग हों और गुड्स फ्रेट कोरिडोर आप बना ही रहे हैं, लेकिन साथ-साथ मेट्रो सिटीज के ट्रैक्स हैं, यहां चार-चार ट्रैक्स बनने चाहिए। जिस ट्रैक पर ज्यादा कंजेशन है, उस एरिया की लाइंस को बढ़ाने की आवश्यकता है। मैं उम्मीद करता हूं कि आप इस बारे में जरूर गंभीरता से विचार करते हुए इस दिशा में काम करेंगे।
माननीय मंत्री जी ने एक बात कही थी कि सदन में जो प्रस्ताव मिले, उनका उत्तर दे रहे थे और अपना भाषण पढ़ रहे थे तब मुझे बड़ा कष्ट हुआ कि इन्हें जो प्रस्ताव मिले, केवल उन प्रस्तावों को करने का प्रयास किया और बजट में सम्मिलित करने का काम किया और जो प्रस्ताव इन्हें लेट मिले, उन्हें आगे देखेंगे। मेरे पास कुछ पत्र हैं और मैं आपको जरूर बताऊंगा कि पिछले तीन वर्षों से मैं निरंतर कुछ कार्यों के लिए प्रयास करता रहा कि आप इन कामों को करें। मैंने यह भी कहा कि आप उसकी फिजीबिलिटी देखें और केवल मेरे कहने से ही न करें। मैंने मंत्री जी को कहा था कि मैं जो चीज कह रहा हूं ऐसा नहीं है कि आप उसे करें, मैं इलेक्टोरल लाभ लेने के लिए कोई बात नहीं कह रहा हूं। मैंने मंत्री जी को कहा कि आप देखें कि क्या ये चीजें सही हैं, लेकिन इन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। मेरे पास वर्ष 2009, 2010, 2011, 2012 के पत्र हैं। समय-समय पर मंत्री और मंत्रिमंडल बदलते गए, इसलिए इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते हैं। पहले ममता जी मंत्री थीं। उसके बाद दिनेश जी आए और उसके बाद मुकुल जी आए। हमने आपको भी पत्र दिए, लेकिन उन पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। मैंने यह भी पूछा था कि आपकी ट्रेन स्टोपेज की क्या पालिसी है? मैं आपको उदाहरण देना चाहता हूं कि हमारे यहां तमाम डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टस हैं जहां पचास से साठ लाख लोगों की आबादी है, लेकिन वहां ट्रेनें नहीं रुकती हैं। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं, लखनऊ से बनारस के बीच में एक निहालगढ़ स्टेशन पड़ता है। हो सकता है कि यह आपकी पार्टी के एक बड़े नेता का संसदीय क्षेत्र है। निहालगढ़ में सारी ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन जौनपुर नहीं रुकेंगी, बरेली मण्डल पर नहीं रुकेंगी, बहुत से ऐसे डिस्ट्रिक्ट्स हैं, जिनका मैं नाम कोट नहीं कर सकता हूं, लेकिन निहालगढ़ में सारी ट्रेनें रुकती हैं। आप ऐसा दोहरा मापदण्ड न अपनाएं। आप इस बारे में एक नीति जरूर बनाएं कि कहां ट्रेन रुकनी चाहिए और कहां नहीं रुकनी चाहिए।...( व्यवधान) सर, मुझे लग रहा है कि आप बहुत जल्दी में हैं। मेरा बोलने का समय अभी है। मैं अपनी पार्टी से पहला सदस्य हूं और मैंने अभी बहुत कम समय लिया है। मैंने अभी तक केवल पांच-सात मिनट ही लिए हैं।
MR. CHAIRMAN : You have already taken ten minutes.
श्री धनंजय सिंह : महोदय, मंत्री जी इस बारे में जरूर बताएं कि ट्रेन के स्टॉपेज की आपकी क्या पॉलिसी है? हम लोग बार-बार इसलिए कहते हैं, क्योंकि हमारे ऊपर भी प्रैशर पड़ता है क्योंकि आप छोटे स्टेशन पर तो ट्रेन रोक रहे हैं, लेकिन हमारे यहां नहीं रोक रहे हैं। आप बड़े स्टेशनों पर ट्रेनों को रोकने का काम नहीं करते हैं और छोटे स्टेशनों पर उसे रोकने का काम करते हैं।
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): आप ट्रेनों को जितनी देर आउटर सिग्नल पर रोक देते हैं उतना समय आप स्टेशनों पर दे दीजिए।
श्री धनंजय सिंह : मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आप ने एक नयी ट्रेन चलायी है। दारा सिंह चौहान जी, डॉ. बलिराम और हमारे तमाम साथी सांसदों ने आप से आग्रह किया था। आप ने मऊ से लेकर आनन्द विहार टर्मिनल तक उस ट्रेन को चलाया है। मेरा आप से आग्रह है कि उस ट्रेन को आनन्द विहार टर्मिनल के बजाय नयी दिल्ली स्टेशन तक करेंगे तो वहां के लोगों को लाभ होगा। यह ट्रेन नयी दिल्ली स्टेशन तक आ जाएगी तो बहुत अच्छा रहेगा। मऊ से आज़मगढ़, साहिबगंज, अम्बेडकर नगर, फैज़ाबाद होते हुए वह रूट आती है। इसमें बहुत ज्यादा आबादी रहती है। इस से उन्हें लाभ होगा। वह ट्रेन कहीं से भी घाटे में नहीं रहेगी।
माननीय मंत्री जी से एक आग्रह है कि आप रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट पर ध्यान दें। आज मुल्क बहुत आगे गया है तो वह बगैर रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट के नहीं गया है। आप ने रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट के लिए अपने बजट में महज डेढ़ सौ करोड़ रुपये का प्रोवीजन रखा है। क्या यह उचित है? मैं पिछले तीन-चार सालों का रिकॉर्ड देख रहा था। कभी सौ, कभी डेढ़ सौ, कभी पचास करोड़ रुपये का आप इस में प्रोवीजन रखते हैं। आप एक-एक लाख करोड़ रुपये का बजट सदन के सामने, देश के सामने रखते हैं और रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट के लिए महज सौ-डेढ़ सौ करोड़ रुपये रखते हैं। पिछले वर्ष के बजट में मैं आर.डी.एस.ओ., लखनऊ में देख रहा था। उसमें तेरह करोड़ रुपये है। रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट के बगैर आप कब तक टेक्नॉलोजी को खरीद कर करते रहेंगे? उदाहरण के तौर पर कोलकाता में मेट्रो रेल 1980 के दशक में शुरू हुई। हमारे रेल राज्य मंत्री जी भी पश्चिम बंगाल से हैं। उसके बीस वर्षों के बाद दिल्ली में मेट्रो रेल इंट्रोडय़ूस हुई। इसके बाद भी आप बाहरी टेक्नॉलोजी को खरीद कर काम कर रहे हैं। क्या इन बीस सालों में हम अपने आप को इतना सक्षम नहीं कर पाए कि हम अपनी टेक्नॉलोजी के साथ मेट्रो रेल को ले आ पाते? माननीय मंत्री जी, इस विषय पर आप बहुत गंभीरता से प्रयास करें कि रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट पर जितना काम होगा उतना ही अच्छा है। अभी हमारे जगदम्बिका पाल साहब कह रहे थे कि काठ की हांडी एक बार चढ़ती है। वे भूल गए हैं कि टेक्नॉलोजी अब इतनी बढ़ गयी है कि काठ की हांडी में बार-बार खाने बनाए जा सकते हैं। ...( व्यवधान) महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा। मैंने कहा कि आपको रिसर्च एण्ड डेवलप्मेंट पर ज्यादा पैसा खर्च करने की आवश्यकता है। जो जरूरतें हैं, आप उसे पूरा करने का काम करें। यूपीए-टू ने जो भी विज़न डॉक्यूमेंट दिया है, आप उसे पूरा करें। आपकी आलोचना करना मेरा मकसद नहीं है। मेरा मकसद सिर्फ आप को सुझाव देना है कि आप कुछ बेहतर करें और लम्बी पॉलिसी बनाएं। जिस हिसाब से देश की जनसंख्या बढ़ रही है, मैं कह रहा हूं कि आप वर्ष 2050 तक का टारगेट रखिए। उस समय इस देश की आबादी लगभग डेढ़ सौ करोड़ होगी। हम लोग देखते हैं कि किसी भी ट्रेन में जगह नहीं रहती है, फिर भी हमारा रेल घाटे में रहता है।...( व्यवधान) मैं इस पर बहुत ध्यान नहीं देता हूं कि आप रेल किराया बढाएं, न बढ़ाएं। ...( व्यवधान)
महोदय, रेवेन्यू जेनरेट करने के तमाम तरीकें आप के पास हैं। आप के पास चालीस-बयालीस हजार एकड़ ज़मीन हैं। आप उस ज़मीन को किस तरह से कॉमर्शियल यूज में ला सकते हैं? रेवेन्यू जेनरेट करने के लिए सिर्फ पैसेंजर्स के किराए नहीं बढ़ाए जा सकते। पहले गुड्स कैरेज में ट्रेन का शेयर अकेले 80 प्रतिशत था, आज हमारा शेयर बीस से पच्चीस प्रतिशत है। आप इसे और बढ़ाने का काम करें और ऐसा करें कि कम से कम यह घटे नहीं। अगर इसको आप बढ़ा नहीं सकते हैं तो आप इसे नीचे भी मत लाइए। इस दिशा में आप काम करिए। रोड्स में पॉल्यूशन भी बहुत होता है। आने वाले समय में डीज़ल की बहुत कठिनाइयां हैं। हम देख रहे हैं कि पेट्रोल और पेट्रोलियम पदार्थ खत्म हो रहे हैं। इन सब चीज़ों को देखते हुए आप काम करें।
मैं आप को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। मुझे उम्मीद है कि आप वर्ष 2050 तक अपना अगला लक्ष्य निर्धारित कर के कुछ काम करेंगे।
*श्री विष्णु देव साय (रायगढ़)ः मैं अपने संसदीय क्षेत्र रायगढ़ (छ.ग.) की कुछ रेल सम्बन्धी समस्याओं से माननीय रेल मंत्री जी को अवगत कराना चाहूंगा। दक्षिण पूर्वी मध्य रेलवे के अंतर्गत रायगढ़ लोक सभा क्षेत्र एक आदिवासी एवं पिछड़ा बहुल रहवासी लोक सभा क्षेत्र है। कोयला एवं बॉक्साइट जैसी खनिजी संपदा के परिवहन से रेलवे को विशेष आर्थिक योगदान देने वाले इस क्षेत्र के लोगों की रेल संबंधी मांगों पर ध्यान न दिए जाने से जनता में बेहद नाराजगी है।
15 वर्ष पूर्व लगातार वृहद आन्दोलन के पश्चात् तात्कालिक रेल मंत्री माननीय नीतीश कुमार जी ने दिनांक 14/9/1998 को रायगढ़ में रेल कोचिंग टर्मिनल का शिलान्यास किया था और आऊट ऑफ टर्न पांच करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। राज्य सरकार ने भी तत्काल दस एकड़ जमीन रेलवे को टर्मिनल बनाने हेतु प्रदान की थी। किंतु आज पर्यन्त तक यहां रेल कोचिंग टर्मिनल का निर्माण प्रारंभ नहीं किया गया है। जबकि इन पन्द्रह वर्षों में मेरे द्वारा लगातार मंत्रालय से पत्राचार किया गया है। साथ ही, समय-समय पर, यह मांग माननीय रेल मंत्रीगण के समक्ष रखी जाती रही है। दिनांक 08/2/2012 को तात्कालिक रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी जी ने छत्तीसगढ़ में माननीय मुख्यमंत्री, मंत्रीगण एवं सांसदों के साथ बैठक की थी। वहां भी रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने मंत्री जी के निर्देशानुसार रेल बजट 2012 में रेल टर्मिनल निर्माण को शामिल करने हेतु आश्वस्त किया था। किंतु गत वर्ष के बजट में इसे स्थान नहीं दिया गया और वर्तमान बजट भाषण में भी रायगढ़ रेलवे कोचिंग टर्मिनल का उल्लेख नहीं है। यह अफसोसजनक है।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि उक्त टर्मिनल निर्माण को इस बजट में शामिल करने का कष्ट करें ताकि रायगढ़ क्षेत्र के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो सके।
कोरबा-लोहरदगा रेल मार्ग का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है एवं गत वर्ष रेल बजट में इस प्रस्ताव को शामिल किया गया था। गत वर्ष (2012) के बजट भाषण के अनुसार प्राक्कलन योजना आयोग को भेजा गया था। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य रायगढ़-जशपुर क्षेत्र के लोगों को इस प्रमुख मांग पर यह भरोसा था कि इस बजट भाषण में आवंटन के साथ कार्य प्रारंभ होने का मार्ग प्रशस्त होगा किंतु इस बजट भाषण में कोरबा-लोहरदगा रेल मार्ग को शामिल नहीं किया गया है। मेरा माननीय रेल मंत्री से अनुरोध है कि उक्त रेल मार्ग की स्वीकृति यथाशीघ्र देने का कष्ट करें ताकि अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके।
मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि रायगढ़ स्थित कोतरा रोड़ हाइवे पर स्थित रेलवे क्रासिंग लगातार बार-बार बंद होने से यहां सदैव सड़क जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां रेलवे ओवरब्रिज की मांग वर्षों पुरानी रही है, इसी तरह खरसिया रेलवे स्टेशन के बाईपास क्रमांक-2 में भी ओवरब्रिज निर्माण की आवश्यकता है। अतः इन्हें जल्द से जल्द शुरू करवाकर पूरा करवाया जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र से होकर बहुत से ट्रेनें गुजरती हैं किंतु ठहराव नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। औद्योगिक परिक्षेत्र बन रहे हैं। रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर मैं माननीय रेल मंत्री जी से उनके ठहराव की मांग करता हूं।
(1) ट्रेन नं. 12102-12101 हावडा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी एक्स. रायगढ़ में (2) ट्रेन नं. 12584-12583 पुरी-वलसाड एक्स. रायगढ़ में (3) ट्रेन नं. 14710-14709 पुरी-बीकानेर एक्स. रायगढ़ में (4) ट्रेन नं. 12574-12573 हावडा-साई नगर (शिरडी) रायगढ़ में (5) ट्रेन नं. 17007-17008 सिकन्दराबाद-दरभंगा रायगढ़ में (6) ट्रेन नं. 22846-22845 हरिया-पुणे रायगढ़ में
मैं कुछ अन्य मांगों की ओर भी माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं। इसमें पत्थलगांव, जिला जशपुर में आरक्षण केन्द्र स्वीकृत करने, जशपुर में स्वीकृत आरक्षण केन्द्र में आरक्षण सुविधा प्रारंभ करने, रायगढ़ से चलने वाली गोड़वाना एक्सप्रेस में पेंट्री कार की सुविधा देने एवं 17881 बिलासपुर-तिरुपति एक्सप्रेस को रायगढ़ से चलाए जाने की मांग शामिल है।
श्री दिनेश चन्द्र यादव (खगड़िया): सभापति जी, मैं रेल बजट वर्ष 2013-14 पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। अभी कांग्रेस के माननीय सदस्य जब बोल रहे थे तो वे कह रहे थे कि ऐसा बजट आज तक कभी आया ही नहीं और यह आम लोगों की आकांक्षा का बजट है। पिछले बहुत दिनों से क्षेत्रीय दलों के लोग रेल मंत्री होते थे। लेकिन लम्बी अवधि 17 साल के बाद राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रेल मंत्री हुए। लोगों को उम्मीद थी कि इनकी सोच पूरे देश की होगी, ये पूरे देश के बारे में सोचेंगे। लेकिन जब लोक सभा में बजट आया, मंत्री जी बहुत शालीन हैं, हंस कर सभी सांसदों से बात करते हैं। वैसे यह बात अलग है कि बिहार के जितने सांसद हैं, वे बात कर रहे थे कि रेल मंत्री जी से कोई काम कराया है या नहीं। सभी माननीय सदस्यों ने कहा कि कोई काम हुआ ही नहीं। हमें तीसरी बार लोक सभा में आने का मौका मिला। हम 11वीं और 13वीं में भी लोक सभा के सदस्य थे और 15वीं में भी हैं। रेल बजट में इस तरह का प्रतिकार, विरोध किसी भी रेल मंत्री का आज तक नहीं हुआ था। जब रेल बजट आया तो बिहार के बारे में भी मंत्री जी कुछ सोचते। बिहार को आज तक जो कुछ मिला, जो मिलना चाहिए, इस देश में जो हिस्सेदारी विकास के मामले में है, आबादी की दृष्टि से तो बिहार तीसरे स्थान पर है, लेकिन जब आप रेल को देखेंगे तो उसका स्थान बहुत पीछे चला गया।
सभापति महोदय, फिर भी जो कुछ बिहार को मिला, आज हम उसी पर आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं कि जो कुछ हमें मिला था, वह भी आज पूरा नहीं हो रहा है। इन्होंने इस बजट में लक्ष्य रखा कि सन् 2013-14 में 500 कि.मी. नई रेल लाईनों का निर्माण कराएंगे। उसमें बिहार का एक किलोमीटर भी रेल खंड नहीं है। इन्होंने कहा कि मीटर लाइन और छोटी रेल लाइन, 450 किलोमीटर की बड़ी रेल लाइन में हम निर्माण कराएंगे, उसमें से भी एक किलोमीटर बिहार की नहीं है। ये जो दोहरीकरण 750 किलोमीटर कराएंगे, उसमें से भी बिहार का एक किलोमीटर नहीं है। इसीलिए यह मानने में कोई हर्ज नहीं है, यह हम जरूर कहेंगे कि एक बात अंजाने में होती, लेकिन जिस बात को जान कर इग्नौर किया जाता है, वह बात बहुत गंभीर होती है। इसलिए माननीय रेल मंत्री जी, पता नहीं क्यों, आपकी मंशा थी कि बिहार को बिलकुल हाशिए से भी नीचे निकाल दिया जाए।
हम उदाहरण के लिए कहना चाहते हैं कि बिहार के ही हमारे संसदीय क्षेत्र में सकरी से हसनपुर 1996 में रेल लाइन स्वीकृत हुई थी, उसका निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ, खास करके हसनपुर से कुशेश्वर स्थान। इस बजट में इन्होंने तीस करोड़ रुपए जरूर दिए हैं, पिछली बार भी इन्होंने राशि दी थी, लेकिन काम बहुत धीमी गति से होता है। खगड़िया से कुशेश्वर स्थान, जो 44 किलोमीटर रेल खंड है, 1996 में उसकी स्वीकृति मिली थी। वह रेल लाइन आज तक पूरी नहीं हुई। पिछले रेल बजट भाषण में रेल मंत्री जी ने उल्लेख किया कि खगड़िया से अलौली 22 किलोमीटर को हम 12-13 तक पूरा कर देंगे। उसी रेल खंड के बारे में इस बार भी पदाधिकारी ने इनसे भाषण में बुलवा दिया कि इस रेल लाइन के खगड़िया से बिशनपुर 14 किलोमीटर को 12-13 में पूरा कर देंगे। मतलब, ये बजट सत्र बीतने में हम समझते हैं कि 24 दिन बचे हैं। पता नहीं, किस ने बजट भाषण तैयार करवा दिया और इनसे भी गलत बयानी सदन में करवा दी। अररिया से सुपौल एक रेल लाइन स्वीकृत हुई थी, जिस पर 304 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस बजट में उसमें मात्र एक करोड़ रुपए दिए गए। उसी तरह से आमान परिवर्तन बिहार का है, जो मानसी‑सहरसा‑दौरम‑मधेपुरा‑पूर्णियां तक की है, उसमें से खास करके मधेपुरा से पूर्णियां तक, पिछले बजट में कहा गया कि इनको हम जल्द पूरा करेंगे। इस बजट भाषण में भी है कि मुरलीगंज से बनमंक्खी और बनमंक्खी से मुरलीगंज को 12-13 में पूरा कर देंगे।
वर्ष 2012-13 में अब 24 दिन बचे हैं। हम फिर कहते हैं कि किसने इनको बजट भाषण तैयार करके दे दिया है? उसी इलाके में एक रेलखंड है, सकरी‑लौकहा बाजार‑निर्मली‑सहरसा‑फारबिसगंज, जो रक्षा मंत्रालय की डिपोजिट स्कीम है, इसमें पैसा रक्षा मंत्रालय से मिलना है। यह 355 करोड़ रूपए की योजना है। इसमें पिछले बजट में कहा गया कि सहरसा से सरायगढ़ 51 किलोमीटर को हम वर्ष 2012-13 में पूरा कर लेंगे। उसमें कुछ हुआ ही नहीं। इस बार भी कहा गया कि इसे हम वर्ष 2012-13 में पूरा करेंगे। इन्होंने मात्र 45 करोड़ रूपए दिए और इसे पूरा करने में 99 करोड़ रूपए लगेंगे। जो राशि मिलती है, उसका उपयोग नहीं होता है और जो राशि का उपयोग होना चाहिए, उसके अनुरूप काम भी नहीं होता है।
महोदय, हम बिहार के दो-तीन पुलों का उल्लेख करना चाहते हैं। कोशी महासेतु, जो कोशी नदी में कोशी रेल पुल बनना है। वर्ष 2011-12 के बजट में तत्कालीन रेल मंत्री जी ने कहा था कि 31-03-2012 तक इसे पूरा करेंगे और इस बार भी कहा गया कि इसको 31-03-2013 तक पूरा कर देंगे। इसमें मात्र तीन करोड़ रूपए की राशि दी गयी और अभी भी पचास करोड़ रूपए इसमें देना है। वह राशि नहीं जाएगी तो इसका काम कैसे पूरा होगा? मुंगेर-गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल की 1,363 करोड़ रूपए की योजना है। जो राशि दी गयी, उसमें वर्ष 2011-12 में ही 31-03-2012 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। इस बार रेल मंत्री जी ने वर्ष 2013-14 के बजट भाषण में कहा कि दिसंबर, 2014 तक हम इसे पूरा करेंगे। इसमें अभी भी 1,117 करोड़ रूपए की राशि देनी है। वह अब राशि नहीं देंगे, तो यह कैसे पूरा होगा?
एक पुल है पटना से हाजीपुर व पटना के बीच संपर्क लाइनों के साथ गंगा पर पुल,( रेल सह सड़क, पुल) जो 19 किलोमीटर की है। इसके निर्माण पर 1,681 करोड़ रूपए खर्च होंगे और वर्ष 2011-12 के रेल बजट में कहा गया कि हम 31-03-2012 तक इसे पूरा करेंगे और वर्ष 2012-13 के बजट में कहा गया कि 31-03-2013 तक इसे पूरा करेंगे। इसको पूरा करने के लिए अभी भी 639 करोड़ रूपए इसमें देने होंगे। जब राशि दी नहीं जायेगी तो फिर इसका लक्ष्य कौन तय करता है? इस बार आगे के लिए कोई लक्ष्य नहीं है।
महोदय, हम कुछ कारखानों का उल्लेख करना चाहते हैं, खासकर जो कारखाने बिहार में स्वीकृत हुए हैं। रेल के बहुत सारे कलपुर्जे विदेश से मंगाये जाते हैं, लेकिन जो देशी कारखाना है, बिहार में खासकर उसकी बिल्कुल अनदेखी की जा रही है। मधेपुरा में ग्रीनफील्ड विद्युल रेल इंजन विनिर्माण कारखाने की स्थापना की स्वीकृति हुयी। यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इस पर रेल को विशेष ध्यान देना चाहिए। इस पर 1960 करोड़ रूपए खर्च होंगे, लेकिन इसमें अभी कोई काम ही नहीं हुआ है। जमीन अधिग्रहण हो गयी, लेकिन जमीन देने वाले को अभी तक पैसे का भुगतान नहीं हुआ, अन्य काम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। वैसे इस बार के बजट में लगभग 80 करोड़ रूपए दिए गए, लेकिन अभी भी उसमें 1,655 करोड़ रूपए दिए जाने चाहिए। छपरा रेल पहिया कारखाना में काम बहुत आगे बढ़ गया है। मढ़ोरा डीजल इंजन कारखाना में भी 61 करोड़ रूपए देने हैं। सहरसा में एक वाशिंग पिट का निर्माण हो रहा है। हमने बार-बार लोक सभा में परामर्शदात्री समिति की बैठक में भी इसकी चर्चा करते हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन साहब ने रूचि भी ली थी। इसकी बात भी आगे बढ़ी। इसमें जो पैसा दिया गया, इसमें जो लिंक लाइन है, सिक लाइन और शेड बनना है, क्रेन उसमें लगना है, वह भी नहीं लग सका। हरनौत में भी ओवर लोडिंग का काम शुरू हो गया, लेकिन अभी भी उसमें 63 करोड़ रूपए और देने की जरूरत है। ...( व्यवधान) उसका उद्घाटन नहीं हुआ। समपार जो ओवरब्रिज होता है, हम रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और मेंबर इंजीनियरिंग को धन्यवाद देना चाहते हैं, उस समय बंसल साहब मंत्री नहीं थे, खगड़िया में जो ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति हुयी, उसमें काम शुरू हो गया। हम चाहते थे कि उसका शिलान्यास भी हो। एक चलन चल गया है कि जो शिलान्यास होना चाहिए, वह होता नहीं है और कहीं होता भी है तो पदाधिकारी कर लेते हैं। एक हॉल्ट बना सिमरी बख्तियारपुर, सनबरसा ‑BÉESÉc®ÉÒ के बीच में, द्वारका हॉल्ट, डीआरएम ने जाकर उद्घाटन किया और हम लोगों को इसकी कोई जानकारी ही नहीं दी।
सुपौल-थरवितिया के समपार संख्या - 53 पर ओवर ब्रिज के लिए 17 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत थी उसमें मात्र 90 लाख रुपया दिया गया। नरकटियागंज यार्ड में समपार संख्या-22 पर ओवर ब्रिज निर्माण पर 12 करोड़ 66 लाख रुपया लगना है, इस बार मात्र 36 लाख रुपया दिया गया है। नरकटियागंज-हरिनगर समपार पर ओवर ब्रिज का निर्माण 66 करोड़ की लागत से होना है, इसके लिए मात्र 2 करोड़ 21 लाख रुपया दिया गया है। लेकिन राशि का उपयोग जल्द किया जाना चाहिए।
हम एक-दो सर्वेक्षण की बात करना चाहते हैं बिहारीगंज-सिमरी बख्तियारपुर के बीच रेल लाइन का सर्वेक्षण अद्यतन किया जाना था । पिछले बजट में पिछड़े क्षेत्रों को जोड़ने के लिए, सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजना में इसे सम्मिलित किया गया। उसका अद्यतन सर्वेक्षण नहीं हुआ। कुशेश्वर स्थान से सहरसा तक का सर्वेक्षण होना है राशि दी गई। उसका सर्वेक्षण नहीं हो रहा है। गोगरी, परवत्ता, डुमरिया के रास्ते महेशखुंट-नारायणपुर का सर्वेक्षण पूर्ण नहीं हो रहा है। बरौनी-हसनपुर, बारास्ता, भगवानपुर और चेरिया बरियारपुर के बीच रेल लाइन का जो सर्वेक्षण होना है, वह पूरा नहीं हुआ है। सहरसा, खगड़िया, हसनपुर तक बड़ी रेल लाइन बन गई। उनके बीच के जितने स्टेशन हैं, उसका प्लेटफार्म बिलकुल नीचे हैं। बुजुर्ग और बीमार रेलयात्रियों को गाड़ी पर चढ़ने में बहुत दिक्कत होती है। इसलिए उनको ऊंचा किया जाना चाहिए। खगड़िया में एक फुट ओवरब्रिज के बगल में एक टिकट काउंटर था, वह बंद हो गया है उसको चालू किया जाना चाहिए। सहरसा जंक्शन पर मात्र दो प्लेटफार्म हैं, उनके अतिरिक्त तीन प्लेटफार्म का निर्माण होना चाहिए। सिमरी-बख्तियारपुर स्टेशन के बगल में जो रेल का संपर्क सड़क है, आश्वासन था कि उसका निर्माण करेंगे, वह काम नहीं हुआ। सिमरी-बख्तियारपुर में रेक प्वाइंट का निर्माण होना चाहिए। वहां अतिरिक्त प्लेटफार्म होना चाहिए। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please be brief.
श्री दिनेश चन्द्र यादव : हसनपुर स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण होना चाहिए और मानसी-सहरसा रेलवे लाइन का दोहरीकरण होना चाहिए। कोशी एक्सप्रेस जो पटना से सहरसा तक जाती है।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: You may give all these names in writing to the hon. Minister.
श्री दिनेश चन्द्र यादव : माननीय शरद जी के क्षेत्र मधेपुरा तक वह ट्रेन जाती है, मात्र 18 किलोमीटर तक उसका विस्तार करना है। यह कहा गया था कि इसका विस्तार कर देंगे, लेकिन इस बजट में इसका विस्तार नहीं हुआ। खगड़िया स्टेशन “ए” क्लास स्टेशन है। वहां राजधानी ट्रेन का ठहराव होना चाहिए। गुवाहाटी-जोधपुर, गरीबनवाज, दिल्ली-गुवाहाटी संपर्क क्रंति का भी ठहराव वहां होना चाहिए। मानसी जंक्शन पर सीमांचल एक्सप्रेस का ठहराव होना चाहिए। हसनपुर रोड स्टेशन पर न्यू जलपाईगुड़ी सुपरफास्ट एक्सप्रेस का ठहराव होना चाहिए। सहरसा समस्तीपुर के बीच रात्रि में पैसेंजर गाड़ी दी जानी चाहिए। इस बजट में एक गाड़ी दी गई है बनमनखी से समस्तीपुर, लेकिन बड़ी रेल लाइन नहीं बनी। इसे शीघ्र पूरा कर के चलाया जाना चाहिए। एक हरिहरनाथ एक्सप्रेस सहरसा से सोनपुर तक चलती थी, जब बड़ी रेल लाइन बनने लगा तो वह बंद हो गई। उसको फिर से चलाया जाना चाहिए। वैशाली एक्सप्रेस जो दिल्ली से बरौनी तक जाती है उसको सहरसा तक ले जाने की योजना बनानी चाहिए। कुछ गाड़ियां जो साप्ताहिक या सप्ताह में दो दिन चलती है, जैसे जानकी एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस उनको प्रति दिन किया जाना चाहिए। आनंद विहार से मुजफ्फरपुर गरीब रथ चलती है उसको प्रतिदिन किया जाना चाहिए। सहरसा से अमृतसर के बीच जनसेवा एक्सप्रेस चलती है, उसमें मजदूर लोग चढ़ते हैं। आज रेल मंत्री जी जांच करा लें, यह लंबी दूरी की गाड़ी है लेकिन उसके टायलेट में आपको एक भी खिड़की में शीशा नहीं मिलेगा । आप रेल यात्रियों की परेशानियों को देख सकते हैं।
हम निवेदन करना चाहते हैं कि सहरसा स्टेशन की आमदनी एक साल में 166 करोड़ रुपया है लेकिन वहां भी पीपी शेल्टर की कमी है, शुद्ध जल की व्यवस्था नहीं है। यात्री को बैठने की सुविधा नहीं है। रेल लाइन की कमी है। इसके दक्षिण तरफ फुट ओवर ब्रिज होना चाहिए। वहां टिकट काउंटर छः है लेकिन एक टिकट काउंटर खुलता है, जनरल टिकट काउंटर दो खुलते हैं। सभी टिकट काउंटर्स खुलने चाहिए।
एक माननीय सदस्य हमारे भूदेव जी हैं। जमुई जिला मुख्यालय है, हम निवेदन करना चाहते हैं कि हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस, हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस का वहां ठहराव होना चाहिए।
आपने मुझे बोलने का मौका दिया, माननीय मंत्री जी भाषण नहीं सुने, लेकिन रेलवे के पदाधिकारी सुन रहे हैं। उन्होंने पहले भी सहयोग किया है और हम को उम्मीद है कि मेरा जो सुझाव है, उन पर विचार करेंगे।
*श्री वीरेन्द्र कुमारः रेलवे भारत में सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा उपक्रम है। रोजाना 2 करोड़ से ज्यादा लोग रेल से सफर करते हैं। लगभग 14 लाख कर्मचारी रेलवे में कार्य करते हैं। विगत दो वर्षों में रेलवे का विकास बहुत धीमी गति से हुआ है। आधे से अधिक प्रोजेक्ट लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं। वित्त की कमी प्रमुख कारण बताया जा रहा है। नई पटरियों का बिछाना, नए कारखानों का खुलना, नए पुलों का बनना, सब कुछ थम सा गया है। पिछले चार वर्षों में विश्व में हुई रेल दुर्घटनाओं का 15 प्रतिशत भारत में हुआ है। अभी हाल में कुंभ मेले में हुई रेल दुर्घटना ने सरकारी प्रयासों पर फिर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। उल्लेखनीय है कि जब रेल मंत्री एक्सीडेंट का लेवल जीरो प्रतिशत करने का भरोसा जता रहे थे। वहीं दूसरी ओर बिना सुविधाएं बढ़ाये सौ से ज्यादा नई ट्रेनों की घोषणा कर दी। नई नियुक्तियाँ नहीं की जा रही हैं। पिछले 22 साल में रेलवे की पांच लाख पोस्ट सरेंडर हुई हैं। इस स्थिति में जन इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है तब एक्सीडेंट कम कैसे हो सकते हैं। 40 प्रतिशत ट्रेन एक्सीडेंट अनमैन्ड रेलवे फाटकों पर होते हैं। रेलवे फाटकों पर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाने के लिए सड़क निधि से मात्र 1100 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष मिल रहे हैं जबकि आवश्यकता पांच हजार करोड़ रुपए की है। देश में 31,846 फाटक हैं जिनके 13,000 से ज्यादा बिना चौकीदार के हैं। दुर्घटनाओं को रोकने, रेलवे फाटक बनाए जाने को बजट में अनदेखा किया गया है।
माल भाड़े में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि की गई है उसकी भी 6-6 माह में समीक्षा होगी, यानि वर्ष में 2 बार मालभाड़ा बढ़ाया जाएगा। मालभाड़ा वृद्धि से न सिर्फ व्यापारियों और उद्यमियों पर बोझ बढ़ेगा बल्कि आम आदमी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इससे सीधे अनाज, दालें, फल, सब्जियां, कोयला, लौह अयस्क और स्टील, यूरिया, डीजल, मिट्टी का तेल तथा एलपीजी जैसे वस्तुओं की ढुलाई प्रभावित होगी। वह महंगा होगा। कहने को यात्री किराए में बढ़ोत्तरी नहीं की गई लेकिन कई तरह के सरचार्ज लगाने और तत्काल टिकटों का रिजर्वेशन खर्च बढ़ने से यात्री भी सीधे महंगाई के दायरे में आ गए हैं। रेल मंत्रालय ने मुसाफिरों से पैसा वसूलने के लिए कई तरीकों का सहारा लिया है। किंतु अंग्रेजों के समय के जर्जर पुलों के पुनर्निर्माण, सिग्नल व्यवस्था की कमियां दूर करने के संबंध में बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा के संबंध में सरकार उदासीन है। सुरक्षाकर्मी महिलाओं की आठ नई कम्पनियां शुरू करने की घोषणा खोखली है। ऐसी 12 कम्पनियां गठित करने के लिए महिला वाहिनी शुरू करने का दो साल पुराना वादा अभी पूरा नहीं हुआ है। आठ हजार से ज्यादा ट्रेनों और सात हजार स्टेशनो पर 1000 महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करने मात्र से महिलाएं अपने को सुरक्षित कैसे अनुभव करेंगी। रेलवे में सुरक्षा कर्मियों के 17 हजार से ज्यादा खाली पदों को कब भरा जाएगा। सबसे प्रमुख बात यह है कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर राजकीय रेलवे पुलिस (जी.आर.पी.) और रेलवे सुरक्षा बल (आर.पी.एफ.) के बीच जो समस्या है उसका समाधान यह बजट नहीं कर पाया है। स्टेशनों की सुरक्षा का भी कोई स्पष्ट प्रबंध नहीं है। मुम्बई हमले के बाद 202 स्टेशनों पर बेहतर सुरक्षा प्रबंधों के अंतर्गत सीसीटीवी कैमरे, स्कैनर और बम निरोधक दस्तों की व्यवस्था की जानी थी, इस पर एक चौथाई ही काम हुआ है। खुफिया विभाग ने जिन स्टेशनों को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बताया था वहां भी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं किए जा सके हैं।
अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए रेलवे ने पुरानी सैकड़ों परियोजनाओं से हाथ खींच लिया है। रेलवे ने 230 नई रेल लाइनों से हाथ खींचा है और 225 आमान परिवर्तन की लाइनें अधूरी छोड़ दी है। आजादी के 65 वर्षों के बाद भी देश के अनेक हिस्से अभी भी रेल सुविधाओं से वंचित हैं। वहां इस तरह के निर्णयों से घोर निराशा पैदा हुई है। बजट से प्रतीत होता है कि यह रायबरेली, अमेठी एवं चंडीगढ़ के लिए बनाया गया है।
कई प्रोजेक्ट में बजट में पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाने की बात कही है, यह कितनी कारगर होगी भविष्य तय करेगा। किंतु ट्रेनों में भोजन व्यवस्था से लेकर सफाई एवं अन्य सुविधाओं के लिए ठेके प्राईवेट कंपनियों को दिए जाते हैं। मगर इसकी टेडंर प्रक्रिया विवादास्पद रहती है। आज पैसेंजरों से भोजन एवं अन्य सुविधाओं के लिए अच्छे खासे दाम वसूले जाते हैं, किंतु भोजन का स्तर ठीक नहीं रहता। राजधानी एवं शताब्दी एक्सप्रेस के खानों में भी गुणवत्ता का अभाव देखा जाता है। प्लेटफार्मों पर मिलने वाली खाद्य सामग्री के दाम बहुत अधिक होते हैं तथा स्वादहीन होते हैं।
रेलवे की हजारों एकड़ खाली पड़ी जमीन का उपयोग करने की कोई नीति नहीं बनाई जा रही है। उसका कामर्शियल उपयोग तथा यात्रियों की सुविधाओं हेतु सस्ते आवास गृह एवं रेस्टोरेंट सहित माल बनाकर रेलवे की राजस्व आय भी बढ़ायी जा सकती है तथा अतिक्रमण ‑ मुक्त भी किया जा सकता है।
आजादी के 65 साल बाद भी टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र ललितपुर सिंगरोली रेलवे लाइन पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहा है इसमें से ललितपुर से ईसानगर तक रेल पटरियां बिछ गई हैं तथा रास्ते के स्टेशन भी बन गए हैं। ट्रेन से पहले इंजिन एवं 2 डिब्बे फिर इंजिन सहित पांच डिब्बों का ट्रायल भी हो चुका है। सी.आर.एस. इंस्पेक्शन भी लखनऊ से आकर अधिकारियों द्वारा किया जा चुका है। पिछले साल के बजट में झांसी टीकमगढ़ पैसेंजर ट्रेन की घोषणा की गई थी। झांसी स्टेशन पर समय-सारिणी बोर्ड पर ट्रेन नम्बर एवं ट्रेन के आने-जाने का समय भी लिखा गया था। नया रेल बजट आ गया, किंतु ट्रेन नहीं आई अतः पिछली घोषित ट्रेन को शीघ्र ही सप्ताह के अंदर चलवाने की कार्यवाही की जाए। खजुराहो से छतरपुर टीकमगढ़ ललितपुर बीना भोपाल इंटरसिटी ट्रेन चलायी जाए ताकि, बुन्देलखंड के लोगों का प्रदेश की राजधानी भोपाल से सीधा संपर्क जुड़ सके। पूर्व में घोषित खजुराहो छतरपुर सागर भोपाल लाइन के सर्वे का कार्य शीघ्र कराकर रेल लाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता से किया जाए तथा इसमें टीकमगढ़ से शाहगढ़ लाइन का भी सर्वे होकर रेल लाइन जुड़ने से बुन्देलखंड के सम्पूर्ण विकास को गति मिलेगी। निवाड़ी स्टेशन पर खजुराहो उदयपुर एक्सप्रेस एवं तुलसी एक्सप्रेस का ठहराव किया जाना चाहिए। इन ट्रेनों के स्टोपेज से उदयपुर एवं मुम्बई सीधा सम्पर्क जुड़ जाएगा। ओरछा एक महत्वपूर्ण धार्मिक नगरी एवं पर्यटन केन्द्र है। जहां देश विदेश से यात्री एवं पर्यटक बहुत बड़ी संख्या में आते हैं। अतः ओरछा स्टेशन का विस्तार एवं सौन्दर्यीकरण कर एवं सभी एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव किया जाना चाहिए। ओरछा निवाड़ी एवं हरपालपुर स्टेशनों पर प्लेटफार्म नम्बर 2 बनाकर गाड़ियों के अप एंड डाउन ठहराव अलग-अलग प्लेटफार्म पर होने चाहिए। अभी केवल एक ही प्लेटफार्म होने से कई बार प्लेटफार्म पर गाड़ी खड़ी होने की स्थिति में दूसरी पैसेंजर ट्रेन को बीच की लाइन मे खड़ा कर दिया जाता है। पैसेंजर ट्रेन से वृद्ध‑ बुजुर्ग, बच्चे असहज स्थिति में उतरकर ट्रेन के नीचे से झुककर प्लेटफार्म पर आकर बाहर जाते हैं। दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। अतः तीनों ही स्टेशनों पर 2 नम्बर प्लेटफार्म के साथ ही फुटओवर ब्रिज भी बनाए जाने चाहिए। ओरछा नगरी में प्रत्येक पुख नक्षत्र पर लाखों लोगों की भीड़ एकत्र होती है। रेलवे फाटक बंद रहने से गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं। अतः ओरछा स्टेशन के पास स्थित रेलवे फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज बनाना चाहिए। निवाड़ी-टीकमगढ़ झांसी मार्ग पर निवाड़ी स्टेशन के समीप भी रेलवे ओवरब्रिज बनाना चाहिए तथा हरपालपुर जो कि ग्वालियर मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग एन.एच. 76 है, इस पर ट्रकों की लंबी-लंबी 2 लाइनें रुक जाती है। अतः हरपालपुर स्टेशन के पास रेलवे ओवरब्रिज की महती आवश्यकता है, जिसे प्राथमिकता से बनाना चाहिए। निवाड़ी ओरछा हरपालपुर स्टेशनों पर शेड का विस्तार तथा पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए। बुन्देलखंड के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक विकास के लिए यहां पर और नई ट्रेनें चलाने तथा यहां से माल ढुलाई की व्यवस्थाओं को बढ़ाने तथा किसानों की आवश्यकताओं अनुरुप खाद के लिए रैक उपलब्ध कराना चाहिए ताकि समय पर किसानों को खाद यूरिया प्राप्त हो सके।
लोगों में घोर निराशा पैदा करने वाले बजट में 26,000 करोड़ रुपए का घाटा आम आदमी की जेब से पूरा करने में नहीं बल्कि कुशल वित्तीय प्रबंधन द्वारा किया जाना चाहिए तथा बुन्देलखंड जैसे रेल सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रेल सुविधाओं के विस्तार पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। ललितपुर, सिंगरोली रेल लाइनों को ज्यादा राशि आबंटित कर शीघ्र पूरा करना चाहिए।
SHRI SUVENDU ADHIKARI (TAMLUK): Thank you, Sir, for giving me a chance to speak on the Railway Budget. I rise to oppose the Railway Budget placed by our hon. Railway Minister before this House on 26th February.
Sir, in a democratic country, a Government is ‘of the people, by the people, for the people’. In such a country, any Budget should be given a socialistic approach. The Budget must show solidarity with downtrodden common people at large. But the Railway Budget 2013-14 clearly shows that the Government is ‘of the people, by the people but not for the people’. This is a completely anti-people Budget with utter avoidance of social obligation and responsibility in today’s tough situation.
We should not forget that Indian Railways themselves are a big industry to stimulate Indian economy. But the interest of common people has been ignored in this Budget in such a way that the Budget seems telling the common people in the words of the Great Poet Rabindra Nath Tagore:
“Prabhat aji Mudeche akhi Batas pita eteche dhaki Nilaj nil akasho dhaki Nibud meke dilo mele.” It means, ‘Today the morning has closed its eyes, heedless of the insistent calls of the loud east wind and a thick veil has been drawn over the ever-wakeful blue sky.
Sir, the Budget has almost no provision to support all the projects in especially in West Bengal, Assam like States announced by my leader Kumari Mamata Banerjee, the then Railway Minister of our country. The Budget has been strongly rejected and criticized by all sections of people in our country. We cannot deny that India has been walking with a limp under the pressure of inflation for a long time. Price hike has become very painful to us. In spite of this, Railway ticket reservation charges have been increased apart from recent increase in Railway fares to put much pressure to the common people, whereas the then Railway Minister, Kumari Mamata Banerjee, could maintain good financial health of Indian Railways even without increasing any passenger fares in her consecutive three Railway Budgets.
Sir, now I would mention some incidents of deprivation in my State of West Bengal. West Bengal is seriously neglected in this Railway Budget 2013-14. Firstly, there is no mention of even a single word for the new railway line from Nandakumar to Moyna for which survey was completed; from Nandigram to Hijli Pirbaba via Helingham; from Dankuni to Furphura; from Belda to narayangarh in Jangalmahal area; from Bhadutola to Hargram via Lalgarh; from Chandranagar to Bakkhali; from Irphala to Ghatal; from Bongaon to Poramaheshtala; from Bankura to Purulia; and from Joynagar to Durgapur.
Secondly, MEMU services were to be introduced from Jhargram to Purulia, from Midnapore to Jhargram, but there is no mention of these projects in this Budget.
Thirdly, the work for double line from Ghutiarisharif to Canning, from Magrahat to Diamond Harbour was to be undertaken as per the Budget provisions of 2011-12, but I do not know whether the projects will be stopped as no provision is there for these projects in the Budgt 2013-14.
Fourthly, Kolkata Metro is a matter of pride not only to West Bengal but also to our country. So, I feel bad to say that step-mother-like attitude has been shown for Kolkata Metro expansion project in this Railway Budget by the hon. Railway Minister. Mere Rs. 475 crore has been allotted for this mega project against Rs. 6000 crore and Rs. 4000 crore sanctioned in the Railway Budgets for 2011-2012 and 2012-2013 respectively. In fact, it is nothing but to create a bottleneck for such type of meaningful and viable project of Indian Railways.
Fifthly, a ‘Rail Industrial Park’ at Jhellingham in Nandigram area with the collaboration of SAIL and State Government was to be set up. Locomotive coach factories were to be established at Kanchrapara, Dankuni. A coaching terminal and a museum were to be set up at Naihati in the memory of great poet and great author Bankim Chandra Chattopadhyay. But no initiative has been shown in this Railway Budget 2013-2014 for these projects.
Sixthly, it is obviously a pleasure that a DEMU project at Haldia has been completed to the extent of 90 per cent. Hon. MoS, Railways has already visited the site. But only Rs. 10 crore has been sanctioned for the project. Apart from this, no amount has been sanctioned or if it has been sanctioned, it is so negligible for the projects at Kanchrapara, Budgbudg, Buniadpur, Noapara that these projects cannot be made successful.
इतना बड़ा भेदभाव बंगाल के साथ पहले कभी नहीं हुआ था। इस बार माननीय रेल मंत्री जी और कांग्रेस ने यह काम बंगाल के साथ किया है। In this way, there is a long list of deprivation not only for West Bengal but also for Assam, Bihar and the entire North Eastern States of our country. It is a Budget only for Raebareli, only for Amethi, only for Chandigarh and nothing else. The entire country is deprived of in this Budget.
In spite of this, this Union Railway Budget, 2013-2014 has not emphasised on infrastructure development under PPP model. Besides, the interest of ex-servicemen, freedom fighter families, journalists, unemployed youth has been ignored. They have not been given proper weightage in this Budget. The sentiment of the Railway Budget 2013-2014 is not wide enough to cover all the sections, all the States and all the regions of our country. But the Railway Budget as placed by the then Railway Minister, Shrimati Mamata Banerjee was much more prudent and popular with the sense of solidarity for downtrodden and common people.
Sir, considering the present economic situation in our country, 50 per cent people are still living below the poverty line. For that reason, I strongly oppose the Railway Budget, on my party, All India Trinamool Congress. This Railway Budget is not for the common people and downtrodden people. I, on behalf of downtrodden people, would like to offer hon. Union Railway Minister two lines of a Bengali poem written by the great poet Kazi Najrul Islam:
“Tomar kolyan deep jolilo na deep nebha bera deoa gehe.” It means, your blessing lamp has not lighted in dark confined shanty.
I reiterate, on behalf of my party that we wholly oppose this anti-people Railway Budget 2012-2014 placed by UPA-II.
DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR): Thank you, Mr. Chairman, Sir. I rise to oppose the Railway Budget for the year 2013-14. My opposition is not rhetoric. Sir, this year’s Railway Budget has put tremendous burden on the people travelling in trains as well as on the common people, ‘the aam aadmi’ of our country.
Sir, in the last year’s Rail Budget 2012-13, the then Railway Minister Shri Dinesh Trivedi had to sacrifice his job for sincerely stating the truth, the real moribund state of the railways, economy out of populism done by his predecessor, putting the Indian Railways in the intensive care unit. But with the changing of the political equation in the UPA-2 Government, the economic scenario did not change much.
My esteemed colleague Mr. Pawan Kumar Bansal ji tried to break the myth of populism of the past but in a misdirected manner. The UPA-2 Government cannot shirk their responsibility to allow their second largest partner to use the Railways as their zamindari; to use Railway’s money whimsically to gain mere political mileage rather than development of Railways in the last three years. This is resulting nearly a bankrupt condition of the Railways.
During Madam Mamata Banerjee’s tenure, freight charges raised silently at the rate of 21 per cent across the board along with other charges.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go in record.
(Interruptions) …* DR. RAM CHANDRA DOME : This time also, Bansalji has made a false claim that Railways have not increased the fares. Again just two months before the Railway Budget – by passing the Parliament – he has increased the passenger fares by 20 per cent and earned about Rs. 6,600 crore out of the budgeted estimate.
Now, this time, base fares left unchanged but other fees hiked by as much as 100 per cent. Reservation fees raised by up to Rs. 25; supplementary charges for super-fast trains up to Rs. 25; cancellation charges up to Rs. 50; and Tatkal fees up to Rs. 100. That means an extra burden of Rs. 483 crore on the common people. Freight charges across the board hiked almost 6 per cent. Freight rates mopped up to Rs. 4,200 crore. It will cover essential commodities like coal, iron and steel, grains and pulses, urea, diesel, groundnut oil, cooking gas cylinders, etc., leading to further increase in overall inflationary pressure due to its cascading effect.
Sir, the Fuel Adjustment Component was first proposed in the last Budget by the then AITMC Railway Minister. Presently, in this Budget, a proposal has been made under a dynamic FAC, according to which fares and freight rates have to be revised periodically, perhaps, twice a year in keeping with fuel cost along with recent hike. Sir, as you know, very recently diesel prices have been raised Rs. 1.24 per litre. That will also have a cascading effect.
Then, Sir, this Budget proposal talks about the Rail Tariff Authority - it was earlier proposed by the then Railway Minister also – an independent Rail Tariff Authority not under the direct control of the Railway Board and the Railway Ministry which will decide on freight and tariff structure in the future and which will open the way for continuous increase in freight and passenger fares, denying the social responsibility of the Indian Railways.
The Railway Budget has made no serious effort to overcome the financial crisis affecting the Indian Railways. The crises were deliberately created in the past three years by enhancing the number of projects, spending on advertisements, foundation stone laying ceremonies and so-called other populist activities.
Sir, I now come to infrastructure expansion. The Minister has already stated openly that due to severe resource crunch, the achievement of the target for new lines has been scaled down from 700 kms to 470 kms, which is 230 kms short of the target for this year.
Similarly, in gauge conversion, the target was 800 kms. That has been scaled down to 575 kms, which is 225 kms short of the target for this year.
Sir, allocation and acquisition of Railway stock has been scaled down just to reduce the operating ratio. The operating ratio was nearly 95 per cent previously. Now, they have projected it at 87.8 per cent. The point as to how it will be achieved is unconvincing.
New line target has been fixed for 500 kms only. Before our Independence, during the British period, 57,000 kms of Indian Railways were there. But after our Independence, during the last 65 years we have achieved only up to 64,490 kms only. That is our achievement. That is the factual position. If the Railways fix its target in this way, then the remote connectivity of our country is a rare possibility.
Sir, the gauge conversion is only 450 kms. In the Annual Plan outlay for 2013-14, the proposed plan investment is Rs.63,363 crore. The resource mobilisation is from the Gross Budgetary Support of Rs.26,000 crore; the Railways’ share in the Road Safety Fund is Rs.2,000 crore and the internal resource generation is only Rs.14,260 crore. The Minister has to depend on the market borrowing of Rs.15,103 crore and Rs.6,000 crore through PPP route. I must appreciate that the Minister has increased it by 16 per cent for doubling, safety and passenger and staff welfare. We welcome that but the annual plan target does not match with the projected estimate. The annual plan target was not achievable as the PPP has been a failure. Not a single investment has been there through PPP model in the past. It is a clear indication of privatisation of the Indian Railways.
The target for freight has been increased but the target for acquisition of wagons has been reduced by 2000, which would make it difficult to achieve the freight target. It has been done only to reduce the operating ratio to 87.8 per cent.
Similarly, the railway safety and security part also has not been given due attention. There is a serious increase in the number of railway accidents. Thefts, robbery, dragging and even sexual assaults are happening these days.
Sir, how could the target for passenger traffic as well as revenue be met when passenger coach locomotives acquisition plan is scaled down? In this respect, I must express my concern not only about the safety of the passengers but also of the wild animals. Recently, I have noticed that the safety of the wild animals has also been hampered at an alarming level. Particularly, in the NF Railway Station, since 2004 till date, in the Dooars Forest Area of my State, about 39 elephants’ lives have been lost due to struck by the rails. So, some concrete measures are required to be taken for their protection.
MR. CHAIRMAN: Please conclude.
DR. RAM CHANDRA DOME : Sir, I am just concluding.
Sir, there are regional imbalances, which should be drastically minimized. Hundreds of projects, specially in the Eastern and North-Eastern parts of our country have been languishing for years together. These are to be taken up for completion in a time-bound manner with adequate financial allocation. Here, I would give an example. In the North-Frontier Railway, a doubling project stretching about 400 kilometres from Silchar to Lamding viaBadarpur and Agartala to Lamding via Badarpur has been languishing for more than 14 years. This project, if completed, will connect three States – Assam, Tripura and Manipur. I would request the hon. Railway Minister that this project should be given due attention so that it is implemented in a time-bound manner.
Sir, in the end, I would mention one more point. It is regarding recruitment. In the first Railway Budget of the UPA-II in 2009, the then Railway Minister had assured this House that about 10 lakh jobs would be created for the youth along with filling up of the vacancies. Then, our two successive Railway Ministers also promised the same. But no recruitment has been taken place till date. They are only dragging the process for the last three and a half years.
Sir, the present Railway Minister also promises 1.52 lakh recruitment along with clearance of the backlog vacancies of 47,000 cases for the SC/ST and weaker sections of the society.
MR. CHAIRMAN: Dr. Dome, please wind up.
DR. RAM CHANDRA DOME : Yes, Sir. It is a very important point… (Interruptions)
So, I would urge upon the Government to fill up all the vacancies including clearance of all backlogs for the SC/ST/OBC and socially backward and marginalized people In the end, I would make just two suggestions about the projects of my State.
MR. CHAIRMAN: No. Mr. Baijayant Panda, you may start now.
SHRI BAIJAYANT PANDA : Thank Sir, for giving me this opportunity… (Interruptions)
DR. RAM CHANDRA DOME : Sir, the Railway Ministers knows about the ongoing Siuri-Prantik new line work. This project should be taken care of. Then, Sainthia-Kandi new line via Chowrigatcha should also be expedited. The ROB at Lalpool near Bolpur-Santiniketan station should also be taken up immediately.
MR. CHAIRMAN: Dr. Dome, you may give, in writing, about your recommendations, to the Minister. That would be enough.
DR. RAM CHANDRA DOME : Sir, ROBs at Hatzan Bazar level crossing at Siuri should also be taken up… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Mr. Panda, you may continue.
SHRI BAIJAYANT PANDA : Sir, two of us cannot speak at the same time… (Interruptions)
DR. RAM CHANDRA DOME : There should be restoration of train services on the Pandabeswar-Palasthali section immediately… (Interruptions)
SHRI BAIJAYANT PANDA : Sir, I think, they can resolve their differences in Kolkata.
19.00 hrs DR. RAM CHANDRA DOME: The Railway Budget 2013-14 drawn within the neo liberal policy framework has nothing to offer to the people except increased burdens and deterioration in amenities and services. I denounce the Railway Budget and urge upon the Railway Minister to rescind the fare and tariff hike proposals.
With these words, I oppose the Railway Budget… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You are a senior Member. You were a Minister. Please take your seat.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please take your seat. When I am on my legs, you have to sit down, please. I am on my legs.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN: Now, Shri Baijayant Panda.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You are exciting me. When I am on my legs, you have to sit down. First you should know the courtesy.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please listen to me. When I am on my legs, please take your seat. Do not dictate terms.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: The House decided to sit up to eight o’ clock. Whether we take up ‘Zero Hour’ or not, that is left to be decided afterwards. Therefore, let Mr. Panda proceed.
SHRI BAIJAYANT PANDA : Sir, thank you for giving me this opportunity to speak on the Railway Budget.… (Interruptions) Please allow me to speak.
MR. CHAIRMAN: Do not disturb him. Let him speak. Mr. Panda, you continue. Please take your seat. Do not interrupt the House when the debate is going on. You were a senior Minister.
SHRI BAIJAYANT PANDA : Sir, some earlier esteemed colleagues have raised the point about why we are carrying on this colonial tradition of discussing a separate Railway Budget in Parliament. The point is, it is not just that it is a colonial tradition but that the railways are not simply another transport sector. We do not have a budget for airlines here. We do not have a budget for roadways here. The Railways plays a vital role in the development of our nation and the country expects the Railways. It is one of the most vital cogs in the engine of the economy.
So, one of its main purposes is to make sure that the country’s economy develops. Another most important aim is to provide a basic accessibility, basic connectivity to our most deprived citizens. But often when we talk about the regional imbalances that some of my colleagues talked about, we are given a stock reply that the Railways does not have funds. That is why, it is not able to invest in those areas. Unfortunately, I am not a poet unlike some of my colleagues. I cannot recite shayari but as a humble engineer, I will give some statistics. I will give some hard facts from the Ministry of Railways itself to demonstrate that they are not meeting this national objective, and the saddest part is that it is not that the money is not available but they are not using simple common sense and using the money for these purposes.
I will come to that in a moment. One of the excuses given is that regional parties have had Railways portfolio for many years. Ironically, those same regional parties today are complaining that they have not got a good deal in this Budget. I want to point out that there are parts of this country that have got really left out and we were hoping that--perhaps, maybe, this argument was true—now that a so-called national party has the portfolio, we would get fairness and justice. But I will show to you, Sir, that this is not the case and we have been really badly let down.
I will use the example of my home State, Odisha, not because of parochialism but because it demonstrates in a very clear form this negligence, this discrimination and most of all, this lack of common sense where funds are available for these purposes, which are not being done. I want to point out that Odisha’s rail density, that is, the track kilometers per thousand square kilometers of area, is almost 30 per cent below the national average and yet it is surrounded by States from where Railway Ministers have held the portfolio and they have higher national average.
We would expect that special attention should be paid to such areas, particularly because eight districts of the State of Odisha have no railways whatsoever. These are primarily the tribal districts, the adivasi districts, where our most deprived people live and where it is the national objective to build railway line. These are the districts where Maoism and Naxalism are prevalent because our only effort is to curb them with the gun. Although we say that we want to bring development, we are not bringing the most basic development into these districts, which is railways.
Sir, it is the biggest irony that – hon. Railway Minister is here in the House – when one of the most important Members of his party on a visit to Odisha has given an assurance to the adivasis, particularly the adivasis of Odisha, that he would be their sentinel in Delhi; he would be their spy in Delhi, and yet precisely these districts have got almost nothing, close to zero. … (Interruptions)
Sir, my point is that they give us the argument that the money is not there; passenger fares are not being raised because of populist pressure, and we can see that they are losing about almost Rs.25,000 crore per year on the passenger segment, which is made up on the freight segment. In fact, they are charging so much on the freight segment that to some extent some sectors have become unviable but they make a lot of money from their freight. It is the biggest irony. It is these parts of the country, precisely these parts of Odisha, particularly districts like Malkangiri, Koraput and Bolangir, where there are freight opportunities, where there are mineral mines and where there are industrial investments going on. The Railways are aware of it. This is where the Railways make its biggest amount of profit.
The figures of Odisha are with me. They make Rs.14,000 crore per annum of gross earnings. These are the areas, where they are making this kind of money, where there is a social objective because there are adivasis; where there is Maoism and there are all these deprived people. You would expect that in this area, out of Rs.14,000 crore gross earnings, they will put back at least Rs.1,000 crore. My hon. friend from Hamirpur was saying that we should expect Rs.4,000 crore. Sir, the State asked for Rs.3,050 crore but we have got only Rs.800 crore. It is a pittance. So, the reality is that the money is being made in these areas; deprived people live in these areas, but almost a crore of adivasis in these eight districts have no access to the railways. You are making the profit there and you are not reinvesting that profit. So, this is the real tragedy.
I would give you a couple of other examples. We are trying to build connectivity between the western and southern parts, that is, the adivasi part of Odisha. The coastal part, which is more developed, there is a Khurda-Bolangir railway project, which has been going on for so many years that people have forgotten for how many decades it has been going on. This year, they have allocated only three percent of the budget, that is required. So, there is no seriousness in completing any of these crucial projects, which may have such a big impact.
I will give you another example. My own constituency Kendrapara has been part of a railway plan, which would connect certain of the mining districts with the ports. It will connect certain of the districts, where there are industries –my constituency Kendrapara has no industry – with the ports. This project has been languishing for many years because it has been put in the PPP mode and no money was being put in. This year only seven per cent, that is, Rs.72 crore, has been allocated. If this money had been allocated for this project, this is something that will have given them extremely high returns, just like they are getting from other parts of Odisha and related areas.
They are not taking commonsensical decision of making investment, where there is high return, where it serves the national interest of building infrastructure for industrialisation, for our economic growth and where it serves our deprived people. This is why, when an hon. Member from the Treasury Benches said that we have never seen a budget like this, sadly I have to agree that I have never seen a budget like this! Earlier, I could understand that there were allegations of regional pressures, which is why places like ours got left out. But, when today allegedly national party has the portfolio, we should expect more fair play, we should expect more justice; we should expect commonsense. This is where the Railways would make more money and serve the national purpose. They are not doing it. If I look at the various things the Railways have been trying to do, I expected better.
I have high regard for the hon. Minister, but I expected better from him. While presenting the Railway Budget, he made a point that in the turnaround situation that the Railways is in, the financial situation is better than expected, in the last few months. He made a particular point that the Railways did not present any Supplementary Demands for Grants during 2012-13 either in the Monsoon Session or in the Winter Session. Having said that while presenting the Railway Budget only last week, he has subsequently presented not only a Supplementary Budget of more than Rs. 2,800 crore but also a proposal for excess grants for an earlier year, 2010-11, of more than Rs. 3,000 crore. Allegations are made of jugglery and this is the jugglery. You make a statement on the floor of the House that the Railways are in a better position. This is called fiscal jugglery. Fiscal jugglery can be done by anybody, but I have better expectation when it is represented by people such as the hon. Railway Minster.
My hon. friend, hon. Member from Kalahandi, represents a part of those eight districts where we have got so many tribal people and we do not have railways. Sir, there is a reference to a project in Kalahandi. But if you look back, it is the same project that has been mentioned for the last three years and nothing is happening. Three separate Railway Ministers for the last three years have been mentioning the same project, but it is not getting started. People of India and people of Odisha … (Interruptions)
SHRI BHAKTA CHARAN DAS (KALAHANDI): Sir, the State Government, despite repeated persuasion, is not giving the land.
MR. CHAIRMAN : Let him speak. You can respond to it when your turn comes.
SHRI BAIJAYANT PANDA: Sir, the real point is the allocation made for the project. If you make an allocation of three per cent or seven per cent of the project cost, there is no issue whether land is available or not and it does not make any sense. That is not going to lead to anything.
The point is that some measures have been taken in the Budget on which I want to compliment the hon. Minister. The same argument that I am making for Odisha, you can make it for our border areas also. There has been some effort made and lines extended in the North-Eastern part of the country. I welcome that. Arunachal Pradesh is now part of the railway network, but I want to make a point that KBK districts of Odisha are no less remote than Arunachal Pradesh. Our people are more deprived. I welcome the fact that now priority is being given to Jammu and Kashmir, but I must point out that we have a crore of adivasi people who do not have access to railways. You cannot treat them on a separate basis and say that you are doing a fair and good job. The fact is that we know that the Railways have been facing challenges for the several years, which I talked about, but to overcome these challenges, you cannot go about it in a political manner.
I have now given statistics repeatedly to show how logical investments have been avoided. They are logical because they give you quick returns, they serve the national purpose and they give access, connectivity and mobility to our deprived sections of society. Yet, Sir, you know that certain parts of the country, particularly those areas which one would call VIP areas or VIP constituencies, have been given projects and mentioned in the Budget not once, twice or thrice but four times. This is what sends a signal that you are going to get not justice but a political message and this message does not go down well. It may serve your VIP constituency well, but it will not serve you well in States like Odisha, it will not serve you well in the rest of the country. I would urge upon the hon. Railway Minister to take cognizance of some of these serious grievances and redress them.
श्री चंद्रकांत खैरे (औरंगाबाद): सभापति महोदय, माननीय रेल मंत्री श्री बंसल साहब यहां बैठे हुए हैं, मैं शिव सेना की ओर से उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि उनसे मैं जनवरी के महीने में जाकर मिला था और हमारी मराठवाड़ा की और मेरे क्षेत्र की जो भी समस्या थी, उस समस्या से उनको अवगत कराया था। मुझे लगा कि रेलवे बजट में मराठवाड़ा और महाराष्ट्र के लिए बहुत कुछ मिलेगा और हम लोग पूरी उम्मीद लगाकर बैठे थे लेकिन इस रेल बजट में हमें कुछ भी नहीं मिला है और महाराष्ट्र के सारे सांसद नाराज हो गये। हम महाराष्ट्र के सारे सांसद माननीय प्रधान मंत्री जी के पास भी गये थे और उन्होंने हमें आश्वासन भी दिया था।
महाराष्ट्र सबसे ज्यादा रेवेन्यु , धनराशि देने वाला स्टेट है । महाराष्ट्र पर अन्याय होने लगा तो हमने प्रधानमंत्री जी के सामने अपनी समस्या बताई तो उन्होंने कहा कि मैं रेलवे मंत्री से बात करूंगा। आपने मुम्बई के लिए क्या किया? सिर्फ 72 फेरीज़ लोकल में बढ़ाई। वहां एसी लोकल और एलीवेटिड प्रोजेक्ट के निर्माण की घोषणा की, इससे ज्यादा कुछ नहीं किया। 60-70 लाख लोग मुम्बई की लोकल ट्रेन में अप डाउन करते हैं लेकिन उनके लिए कोई सुविधा और सुरक्षा नहीं है। हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और सांसदों ने डिमांड की कि हमें महाराष्ट्र के लिए ये चाहिए लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। इसके कारण मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और सांसद नाराज हो गए। हम उम्मीद करते हैं कि आप अपने जवाब में इसे शामिल करेंगे।
महोदय, पुणे-नासिक रेल लाइन की बहुत दिनों से डिमांड है। कल्याण और नगर बहुत महत्वपूर्ण रूट है, इसके लिए भी कुछ नहीं किया गया। महाराष्ट्र का यह बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मैंने जो लैटर दिया था लेकिन एक परसेंट ही समाधान हुआ। मनमाड़ से परभणी तक दोहरी लाइन करने की बात हुई थी, यह बात मानी गई। इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। नरसापुर, नगरसोल से ट्रेन डेली कर दी, इसके लिए भी धन्यवाद देता हूं। मेरा कहना है कि हमें जो चाहिए वह तो चाहिए ही है। मराठवाड़ा पहले निजाम में हैदराबाद स्टेट में था इसलिए यह साउथ सैंट्रल रेलवे में हैं। मराठी स्पीकिंग भाग मुम्बई से कलसर है इसलिए इसे सैंट्रल रेलवे में जाना चाहिए। इसका ताल्लुक सैंट्रल रेलवे से है। नांदेड़ डिवीजन धर्माबाद और मुदखेड़ से लेकर सैंट्रल रेलवे में होना चाहिए। इसे साउथ सैंट्रल रेलवे में नहीं होना चाहिए क्योंकि भाषा के हिसाब से मराठी स्पीकिंग एरिया होने के कारण सैंट्रल रेलवे में आना चाहिए। इस संबंध में मंत्रिमंडल में मोशन मूव हुआ है, महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल ने पास कर दिया है और इसे आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने भी पास कर दिया है। मेरी विनती है कि नांदेड़ डिवीजन सैंट्रल रेलवे में किया जाए। इसके लिए आपको कैबिनेट के सामने जाना होगा इसलिए आप इसके लिए तैयारी कीजिए। कई वर्षों से मराठवाड़ा के लोगों की मांग है कि वे साउथ सैंट्रल रेलवे में नहीं सैंट्रल रेलवे में आना चाहते हैं।
महोदय, अभी लालू प्रसाद जी यहां नहीं बैठे हैं। अनुराग जी ने उनका दो-चार बार उल्लेख किया है। मैं भी उल्लेख करना चाहता हूं। सैनिकों की डिमांड थी शोलापुर से जलगांव लाइन होनी चाहिए। प्रमोद जी का डिस्ट्रिक्ट बीड है, यहां अभी तक रेलवे लाइन नहीं है। शोलापुर, तुलजापुर बहुत बड़ा क्षेत्र है, धार्मिक क्षेत्र है। यह लाइन शोलापुर, तुलजापुर, उस्मानाबाद, बीड, पैठन, औरंगाबाद, अजंता, एलोरा जलगांव जानी चाहिए। इसमें टूरिस्ट धार्मिक स्थल आते हैं। हो सकता है किसी ने दूसरे रूट के बारे में कहा हो, मेरी विनती है कि आप इसे प्रेफरेंस दीजिए। लालू जी जब रेल मंत्री थे, तब रेल बजट में यह रूट आया था। आप इसका सर्वे इमीडिएटली कीजिए। दूसरा सर्वे रोटेगांव से पुनतांबा का है। यह पुनतांबा से शिरडी चालू है। इससे साउथ से सीधे शिरडी जा सकते हैं और महाराष्ट्र के लोग सीधा तिरुपति जा सकते हैं। इसलिए रोटेगांव से पुनतांबा को भी आप इसमें इनक्लूड कीजिए। इसमें कुल 30-35 करोड़ रुपये लगने वाले हैं। यह बहुत अच्छा मार्ग है, यह सीधा तिरुपति से शिरडी कनैक्ट हो जायेगा। हमारी कई वर्षों से डिमांड है। साउथ के एम.पीज. ने भी हमें इस बारे में कई बार कहा था।
इसके अलावा मैं कहूंगा कि आज हमें कुछ ट्रेन्स की जरूरत है। मेरा क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारीडोर है, यह बंसल जी को मालूम है। आदरणीय बंसल जी हमारे यहां दो-तीन बार आये हैं। मैंने उन्हें पिछली बार भी कहा था और इस बार भी मैं आपके माध्यम से उनसे विनती करूंगा कि दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारीडोर में संभाजीनगर-औरंगाबाद मेरा क्षेत्र आता है, यहां दिल्ली से औरंगाबाद की एडब्ल्यूबी की राजधानी एक्सप्रैस होनी चाहिए। क्योकि दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारीडोर में सारे बिजनेस और इंडस्ट्रीज आने वाले हैं। इसके अलावा मेरा क्षेत्र अजन्ता-एलोरा एक टूरिस्ट प्लेस है, यह धार्मिक क्षेत्र है, एजूकेशन और इंडस्ट्रियल क्षेत्र होने के कारण आप इसकी घोषणा करेंगे, ऐसी मेरी आपसे विनती है। भले ही आप तीन महीने या छः महीने में घोषणा करें या रेल बजट के उत्तर के भाषण में करें, क्योंकि राजधानी एक्सप्रैस आप वहां देंगे तो दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारीडोर को इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
इसी तरह से अहमदनगर-परली-बीड लाइन का कई बार उद्घाटन हुआ, अभी इस बार पचास करोड़ रुपये रखे गये हैं। पचास करोड़ और दस करोड़ ऐसा कब तक चलेगा। इस तरह से 2025 तक अहमदनगर-बीड-परली ट्रेन नहीं चल सकती। मेरी मंत्री जी से विनती है कि आप इसके लिए कुछ प्रयास कीजिए। आपने मुझसे कहा था कि पैसा नहीं है। आपको पैसे का बंदोबस्त कैसे करना है, वह भी मैं आपको बता दूंगा, हमारे महाराष्ट्र से ही आपको अच्छा पैसा मिल सकता है।
इसके अलावा जालना-खामगांव 165 किलोमीटर की दूरी है। 1990 और 1994 में दो बार इसका सर्वे हुआ, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। यदि आप यह कार्य भी करा देंगे तो वहां के कपास उत्पादकों को बहुत बड़ी हैल्प हो सकती है। हमारे यहां दो-तीन ऐसी ट्रेन्स हैं जिन्हें डेली चलाना चाहिए। जैसे रामेश्वर-ओखा 16734 और 16733 डाउन ट्रेन डेली होनी चाहिए और हैदराबाद-अजमेर भी डेली होनी चाहिए। इसके अलावा हमारे महाराष्ट्र के लोग एक सूत्र में जुड़ना चाहते हैं, जिसमें पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ, कोल्हापुर, औरंगाबाद, संभाजीनगर, नागपुर, शिखरजी, पारसनाथ तक जाने वाली ट्रेन नहीं हैं, यह दीक्षाभूमि के लिए तक जाने वाली लाइन है, मेरा निवेदन है कि इसका भी निर्माण होना चाहिए।
इसके अलावा हमारे यहां औरंगाबाद-मुम्बई या नांदेड़-मुम्बई एक नाइट ट्रेन होनी चाहिए। इन दोनों में से आप कहीं भी एक ट्रेन चलाने की कृपा करें। यदि आप यह ट्रेन चलायेंगे तो यह बहुत प्रोफिटेबल रहेगी। इसके अलावा एक मंत्री जी के द्वारा सिकन्दराबाद-नांदेङ गरीब रथ ट्रेन की जम्मू-तवी तक जाने के लिए घोषणा हुई थी, लेकिन उसके बारे में कुछ नहीं हुआ। कृपया आप इस ट्रेन को चलाने की कृपा करें।
इसके अलावा आदिलाबाद-पुणे लातूर से जाती है, यह ट्रेन वीकली होनी चाहिए। बाद में फिर यह रूटीन में आ जायेगी। नांदेड़ जो नंदीग्राम एक्सप्रैस ट्रेन है, यह आदिलाबाद से जाती है, उसे नागपुर-अकोला तक करने की कृपा करें। इसके अलावा नागपुर-मुम्बई नंदीग्राम एक्सप्रैस की कुछ बोगियां बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि हमारे क्षेत्र मुम्बई से औरंगाबाद एडब्ल्यूबी तक की ट्रेन थी, फिर नंदीग्राम हुई और उसके बाद देवगिरि एक्सप्रैस हुई, फिर बढ़ते-बढ़ते आगे हैदराबाद तक गई। लेकिन हमारे यहां कोटा नहीं बढ़ा। हमारे यहां के पैसेंजर्स को वेटिंग में जाना पड़ता है, खड़े होकर जाना पड़ता है, चूंकि उनका रिजर्वेशन नहीं हो पाता है। इसलिए मैं मंत्री जी से कहूंगा कि नागपुर-मुम्बई जो नंदीग्राम एक्सप्रैस है, उसमें 17 बोगी लगती हैं, मेरा निवेदन है कि इस ट्रेन में 24 बोगी लगनी चाहिए। इसके बाद देवगिरि एक्सप्रैस में 21 बोगी की जगह 24 बोगी करने की कृपा करें। हमारे यहां से जो जनशताब्दी ट्रेन जाती है, उसमें 9 बोगियां हैं, उन्हें बढ़ाकर 17 बोगी किया जाए। नांदेड़ से मुम्बई तपोवन एक्सप्रैस जाती है, उसमें 21 बोगी हैं, उन्हें बढ़ाकर 24 बोगी किया जाए। सचखंड एक्सप्रैस में 22 की जगह 24 बोगी की जाएं।
MR. CHAIRMAN : Please give it in writing.
श्री चंद्रकांत खैरे : सर, वह हमने दिया है, लेकिन आज रिकार्ड में आने दीजिए। अब मैं अपने क्षेत्र की बात करता हूँ। नीतीश कुमार जी ने सन् 2003 में हमारे यहां का मॉडल स्टेशन करने का ऐलान किया था और उसका शिल्यान्यास भी किया था। उसके लिए 15 करोड़ रूपये मिलें तो वह मॉडल स्टेशन पूरा हो जाएगा। मैं एस्टिमेट कमेटी का मेंबर हूँ। एस्टिमेट कमेटी में एक बार सब्जेक्ट निकला। रेलवे बोर्ड ने यह कहा कि वह स्टेशन पूरा हो गया है। तब मैंने उनको फोटोग्राफ दिखाए। अगर आपके ऑफीसर्स इतनी असत्य बातें आपके पास लाते हैं तो उनके ऊपर एक्शन होना चाहिए। आज मैं कहूँगा कि हमारा टूरिस्ट प्लेस है, इंडस्ट्रियल प्लेस है। यह सब होने की वजह से यह मॉडल स्टेशन होना चाहिए। अगर इन्होंने 15 करोड़ रूपये की राशि दी तो निश्चित रूप से हमारा स्टेशन मॉडल स्टेशन हो जाएगा। ये कहते हैं कि पैसा नहीं है। मेरे यहां आपकी दस एकड़ लैण्ड है। वह सैंट्रलाइज़ सिटी में है। पीछे तो आपने टेंडर निकाला था और टेंडर निकालने के बाद में फिर वह कैंसल कर दिया। आज उसके कम से कम 50-60 करोड़ रूपये तक आएंगे। उसमें आप रोटे गांव से पुंतंबा और मेरा मॉडल स्टेशन भी कर सकते हैं। आप कह रहे हैं कि पैसा नहीं तो मेरे यहां से पैसे का निर्माण हो सकता है। ये हमेशा कहते हैं कि पैसा नहीं है तो मैं कहूंगा कि रेलवे की आज 1 लाख 13000 एकड़ लैण्ड पूरे हिंदुस्तान में खाली पड़ी है। आज अर्बन एरिया में दस हज़ार एकड़ लैण्ड पड़ी है। अगर इन्होंने पीपीपी का प्रोजेक्ट प्लॉन किया तो निश्चित रूप से इनके प्रोजेक्ट के कारण जो प्रोजेक्ट पेंडिंग पड़े हैं, वे पूरे हो सकते हैं। दस-दस साल तक सर्वे ही नहीं होता है। मैं कहूंगा कि सर्वे करने के लिए भी आप नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया की तरह सर्वे कीजिए, जो कि जल्दी होता है। अगर सर्वे लेट होगा तो काम भी नहीं होगा। आपको अपना उत्पादन बढ़ाना पड़ेगा। मैंने अपने एरिया की जो ट्रेंस बढ़ाने को कहा है, वे प्रॉफिटेबल ट्रेंस हैं। इसमें रेलवे का लॉस नहीं होने वाला है। मेरी जितनी भी डिमांड हैं - मराठवाड़ और मेरे क्षेत्र शंभाजीनगर-औरंगाबाद की मांग को पूरा कीजिए। आखिर में मैं कहूंगा कि हम लोग मंत्री जी के साथ जापान गए थे। वहां हम बुलेट ट्रेन में बैठे थे जो कि एक दम क्लीन एण्ड टाइडी थी। मैं मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि अगर आप अपने कार्यकाल में जापान जैसी बुलेट ट्रेन चालू करेंगे तो आपका बहुत नाम हो जाएगा।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, काबिल आदमी रेल मंत्री बने हैं, इसलिए इनसे हम ज्यादा अपेक्षा करते हैं। हमारी अपेक्षा है और हम सपना देखते हैं कि देश भर के जिले रेल से जुड़ जाएं। राज्यों की राजधानी, जम्मू-कश्मीर, श्रीनगर सहित, नार्थ-ईस्ट के आठ राज्यों की राजधानी रेल लाइन से जुड़ जाएं, यह सपना हम देखते हैं। वह समय कब आएगा कि हमारे देश के सभी जिले रेल से जुड़ जाएं? श्री वैजयंत पांडा भाषण कर रहे थे कि आठ आदिवासी जिलों का रेल लाइन से कनेक्शन हुआ ही नहीं है। उन्हीं का ही नहीं, देश भर के सभी जिलों को, देश भर के सभी राज्यों की राजधानियों को हम रेल लाइन से जोड़ेंगे। महोदय, अभी के समय में कोई कहता है कि पैसा नहीं है। यह विश्वसनीय बात नहीं है। विल पॉवर की जरूरत है। जो आप चाहेंगे वही होगा। पैसा कहीं कोई विघ्न नहीं होगा। मैं ऐसा भरोसा करता हूँ। कोई कहे कि पैसा नहीं है तो यह विश्वास करने लायक बात नहीं है। इसीलिए यह नक्शा बने।
महोदय, हमारा दूसरा सपना है कि दिल्ली से चेन्नई, दिल्ली से मुंबई, दिल्ली से कोलकाता द्रुत रेलगाड़ी चले। हम नाश्ता करें दिल्ली में और भोजन चेन्नई में करें। नाश्ता करें दिल्ली में और मुंबई में भोजन करें। बंसल जी की ट्रेन में चलकर हम ऐसा करें। हम ऐसा सपना देखते हैं। कोलकाता के श्री अधीर चौधरी जी हैं, मैं चाहता हूं कि यहां नाश्ता हो और भोजन हो कोलकाता में, इस तरह से द्रुत रेलगाड़ी चले, मैं यह सपना देखता हूं। मैं नहीं जानता हूं, फ्रेट कॉरीडोर बन रहा है, क्या बन रहा है, कब यह तेज चलेगी, बुलेट ट्रेन चलेगी, कब चलेगी, हमें लग रहा है कि जो बुलेट ट्रेन तीन-चार सौ किलोमीटर प्रतिघंटा चलती है, लगता था कि वह बहुत झूलती होगी। हम साउथ कोरिया में महामहिम राष्ट्रपति जी कलाम साहब के साथ गए थे। उस बुलेट ट्रेन में तीन-साढ़े तीन सौ किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चले, लेकिन वह हिली भी नहीं। वह ट्रेन हवाई जहाज से कम नहीं है। वैसी ट्रेन यहां चले। पैखाना भी जाकर देखा, वहां कोई गंदगी नहीं थी, हवाई जहाज की तरह उसका टॉयलेट था। अपने यहां भी वैसा ही हो, यहां तो स्टेशन पर खड़ा होना मुश्किल है, प्लेटफार्म पर खड़ा होना मुश्किल है। कहीं भी रेलवे के किसी भी प्लेटफार्म पर जाइए, यदि कोई ट्रेन पहले से वहां लग गयी तो वहां नरक हो जाता है। यह अनुभूति चली है। हम लोग लड़ते थे कि रेल, जेल में क्लास तोड़ो, थर्ड क्लास उसी पर खत्म हुआ। अब एक अनुभूति क्लास हुआ है, हम तो बहुत आश्चर्यचकित हैं। माननीय मंत्री अब हम लोगों को क्या अनुभूति कराना चाहते हैं? थोड़ा सा देश को और जागरूक होने दीजिए, क्या वह अनुभूति रहने देगा?
महोदय, मेरी एक प्रार्थना है। नई दिल्ली जंक्शन से एक संपूर्ण क्रंति ट्रेन शाम को चार या पांच बजे चलती है। वहां जाकर देखें कि लोग ट्रेन में चढ़ने के लिए तीन घंटे पहले से लाइन में लगे हुए हैं। माननीय मंत्री जी वहां जाकर देखें। आप हमारी प्रार्थना स्वीकार करें। एक दिन आप दो से चार के बीच में समय निकालें और प्लेटफार्म पर जाकर देखें कि सिपाही के कब्जे में कितनी लंबी लाइन लगी हुयी है। तीन-चार घंटे तक बाल-बच्चा, जनानी लेकर, दिल्ली से पटना जाने वाली संपूर्ण क्रंति ट्रेन में चढ़ने के लिए लोग खड़े होते हैं, तब आपको कैसे अनुभूति होती है? तब मैं बताऊंगा कि आपकी अनुभूति गाड़ी देखकर हमारी अनुभूति कैसी होती है?
महोदय, हमारी एक प्रार्थना स्वीकार की जाए। संपूर्ण क्रंति ट्रेन को एक बार देखने से समझ में आ जाएगा। चार घंटे तक लोग खड़े रहते हैं, कलेजा फट जाता है, गरीब आदमी उसमें बिस्तर, बस्ता, झोला लेकर, पउती, पटारी लेकर लाइन में लगा हुआ है। वह ट्रेन में चढ़ने के लिए चार-चार घंटे तक लाइन में लगा रहता है। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं होता होगा, जैसा हमने देखा है। एक तरफ अनुभूति हो और उधर एक तरफ सहानुभूति हो, उसका क्या होगा? इसलिए मंत्री महोदय अनुभूति हमको जंचा नहीं, क्या अनुभूति आप हम लोगों को, जनता को कराना चाहते हैं? यही कि एक तरफ बहुत सुविधाभोगी, विलासिता, लग्जूरियस और एक तरफ जरूरत की चीजें भी नहीं हैं, साफ-सुथरा नहीं है, बैठने की व्यवस्था नहीं है। देह से देह चिपक कर बैठे हुए हैं, कोई टॉयलेट जायेगा तो उसके लिए भी जगह नहीं है, ऐसे लोग देह से देह मिलाकर ट्रेन पर चढ़े रहते हैं। ऐसे में क्या अनुभूति होगी, हमको तो खराब अनुभूति हो रही है। अब किस विचार से वह अनुभूति हुई है, किसको नहीं अच्छा लगेगा, हमको ही अनुभूति में बिठा दीजिए, अनुभूति में बिठा देने से हमको खराब थोड़े ही लगेगा। किसी को मीठा अच्छा लगता है, अच्छा खाना सभी को अच्छा लगता है, लेकिन उसी जगह किसी को कुछ नहीं मिलता है। इसीलिए इस पर विचार किया जाये।
महोदय, पटना में एक रेल पुल बन रहा है। सुना कि वह वर्ष 2010 में चालू होगा, उसके बाद सुना कि वर्ष 2011 में चालू होगा, वर्ष 2012 में चालू होगा, अब वह कब चालू होगा, वर्ष 2012 बीत चुका है और अब वर्ष 2013 आ चुका है, वह दिघा रेल पुल है, वह रेल सह सड़क ब्रिज है। इधर दिघा घाट और उधर पहलेजा घाट। वह जो पुल पटना में है, वह महात्मा गांधी सेतू बूढ़ा हो गया है। कब वह बैठ जाएगा, मालूम नहीं। ऐसा ट्रैफिक होता है कि रोज़ महाजाम लगता है। 24 घंटे में 64 गाड़ियाँ वहाँ से गुज़रती हैं और वहाँ रोज़ जाम लगता है। यह पुल बनने का नाम नहीं लेता है। हम लोगों के 500 करोड़ रुपये भी लगे जो सम विकास योजना में स्वीकृत हुए थे। 500 करोड़ रुपये रेलवे को पैसा मिला था। किस कारण से नहीं बना, कब बनेगा, यह हम जानना चाहते हैं।
महोदय, एक भारत वैगन फैक्ट्री मोकामा और मुज़फ़्फ़ररपुर में है। 2008 में इसे रेलवे ने टेकअप किया। पहले वह प्राइवेट कंपनी थी - आर्थर बटलर कंपनी, जो रेल की बोगी बनाती थी। उससे हैवी इंडस्ट्रीज़ विभाग ने ले लिया और उनसे भी रेलवे ने 2008 में ले लिया। वह बढ़िया और लाभ वाली फैक्ट्री है लेकिन पूँजी के बिना 14 महीने से वहाँ के मज़दूरों का वेतन बंद है। वहाँ बैन्ड कंपनी ले गई कोलकाता में, हावड़ा में 2010 में। वहाँ सब ठीक हो गया, वेज सुधार भी हो गया, नई वेज लागू हो गई और नकद मिल रहा है। यहाँ न मॉडर्नाइज़ हुआ और न वेज सुधार हुआ और वह वेज भी 14 महीनों से नहीं मिल रहा है।
महोदय, हमने अखबारों में देखा कि बिहार के जो लोग दिल्ली में रहते हैं, उनके लिए दीवाली, छठ पूजा और दशहरा में घर जाने के लिए 64 नई रेलगाड़ियाँ चलाई जा रही हैं। हमने कहा कि जो यहाँ रहते हैं, उनके पूजा और दीवाली पर जाने के लिए 64 रेलगाड़ियाँ, और जो रेल के लिए मज़दूरी कर रहे हैं, काम कर रहे हैं, उनको 14 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। उनकी दीवाली और छठ पूजा तथा दूसरे त्यौहारों का क्या होगा? क्यों नहीं उनका वेतन मिल रहा है? कब उसका वेतन मिलेगा? एक्ज़ीक्यूटिव डायरैक्टर की एक कमेटी बनी थी और बी.आई.एफ.आर. की भी अनुशंसा है कि इसको पूँजी दी जाए। आई.डी.बी.आई. से पूँजी लेकर उसको चालू किया जाए। यह लाभ का कारखाना है। वहाँ मज़दूरों को मज़दूरी मिले और वह कारखाना चालू हो। जब भी हम मुज़फ़्फ़ररपुर जाते हैं तो वहाँ लोग हमारे पास चले आते हैं और कहते हैं कि नौ आदमी वेतन के बिना मर गए। इसकी गिनती की जाए, जाँच की जाए। उनको 14 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है। यह लाभ का कारखाना है। कब शुरू होगा, क्यों नहीं शुरू हुआ? बैंड कंपनी ठीक हो गई, लेकिन यह भारत वैगन फैक्ट्री मोकामा और मुज़फ़्फ़रपुर क्यों नहीं शुरू हुई? हम चाहते हैं कि माननीय मंत्री जी उसको देखें। हम इसके लिए बराबर सवाल उठा रहे हैं, लिखा-पढ़ी कर रहे हैं। ज़ीरो आवर में भी इस मामले को हमने उठाना चाहा लेकिन कभी लॉटरी में ही नहीं आता है। हमें लगता है कि मज़दूरों का भाग्य ही खराब है। लॉटरी में ही नहीं नंबर नहीं आता है नहीं तो हम पहले ही यह सवाल उठाना चाह रहे थे। संयोग से आज मौका मिल गया।
महोदय, हाजीपुर से सुगौली, छपरा से मुज़फ़्फ़रपुर, मुज़फ़्फ़रपुर से सीतामढ़ी, तीन नई रेल लाईनें बन रही हैं। सरकार ने नेशनल रीहैबिलिटेशन रीसैटलमैंट पॉलिसी 2007 को स्वीकार किया है। उसमें प्रावधान है कि जिन किसानों की ज़मीन ली जाएगी, उनके परिवार के योग्य आदमी को एक नौकरी दी जाएगी। भारत सरकार की कैबिनेट ने उसको स्वीकार किया और उसी में जोड़-घटा कर के अब ला रहे हैं। अभी भारत के संविधान की धारा 73 के मुताबिक वह एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर से लागू है - नेशनल रीहैबिलिटेशन एंड रीसैटलमैंट पॉलिसी, जिसमें यह प्रावधान है कि जिन किसानों की ज़मीन गई है, उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले। वहाँ एक नोटिफिकेशन भी हुआ, एक विज्ञापन निकला कि जिन्हें ज़रूरत है, वे दर्ख्वास्त दें। किसान लोग दौड़ते-दौड़ते परेशान हो गए लेकिन उन्हें अभी तक नौकरी नहीं दी गई। हम चाहते हैं कि माननीय मंत्री जी स्वयं देखें। कानून के जानकार हैं, मशहूर वकील हैं। जिसका वाजिब है, उसका देखें कि कैसे उसको नौकरी मिले। बाबा के नाम से जमीन है। हम लोगों की भी बाबा के नाम से जमीन है और कहते हैं कि पोते को नौकरी नहीं मिलेगी। बाप के नाम से जमीन रहेगी, तभी बेटे को जमीन मिलेगी। यह कौन सा कानून चला रहे हैं? वह भी तो आश्रित है। बेटा आश्रित हुआ, पोता आश्रित नहीं हुआ? इसीलिए सारे कानून को समझ कर देखा जाए।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please wind up.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, हाजीपुर-सिगौली और छपरा-मुजफ्फरपुर दोनों ट्रेनों का वर्ष 2004 में शिलान्यास हुआ। हाजीपुर सिंगरौली का आठ वर्ष हो गए हैं और अब कितने वर्ष इन्हें बनने में लगेंगे। क्या कारण है कि यह नहीं बन रहा है? महोदय, मोदीपुर स्टेशन हमारे इलाके में है, चीनी मिल भी है और बहुत महशूर जगह है लेकिन रेल यात्री लड़ रहे हैं न वहां कोई गाड़ी रुक रही है। जो नई गाड़ी वहां चलती है, उसे रोकने की मांग है। वहां पानी, पाखाना, रेलवे ओवरब्रिज, रेल यात्री संग लड़ रहे हैं।
MR. CHAIRMAN: Okay, Dr. Tarun Mandal.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, हम खत्म कर रहे हैं, अंतिम पंक्ति है।
महोदय, मोदीपुर स्टेशन के विकास के लिए मांग करता हूं। नरियार और पीरापुर बेनीपट्टी स्टेशन हाल्ट है, उसके लिए स्टेशन के दर्जे की मांग है। कांटी में इंटरसिटी, कांटी में थर्मल पावर प्लांट है, वहां इंटरसिटी नहीं रुकती है। लोग मांग करते हैं कि वहां स्टोपेज होना चाहिए। मुजफ्फरपुर से नई दिल्ली वैशाली ट्रेन है और एक सप्तक्रंति ट्रेन है। दुरांतो केवल बिहार से दिल्ली जा रही है। बिहार के लिए कोई दुरांतो नहीं है इसलिए पटना से दिल्ली और हाजीपुर से मुजफ्फरपुर, गोरखपुर होते हुए दिल्ली लाइए। वैशाली एक अच्छी गाड़ी है, उसी तरह की गाड़ी दी जाए। यह वहां के लोगों की मांग है।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Okay, Dr. Tarun Mandal.
…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, मेरी एक अंतिम मांग है।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Okay, you may write and give it to him.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : मेरी माननीय मंत्री जी से हमारी प्रार्थना है कि यहां जो माननीय सदस्य सवाल उठाते हैं, उसका उत्तर आप मुंहजबानी यहां नहीं दे पाएंगे, इसलिए आप लिखित उत्तर सभी माननीय सदस्यों को भेज दें। तभी हम समझेंगे कि रेलवे के सही मंत्री बने हैं। यदि सभी सदस्यों को लिखित मिले तो बहुत अच्छा प्रयोग होगा।
DR. TARUN MANDAL (JAYNAGAR): Mr. Chairman, Sir, I thank you for allowing me to speak on this very important discussion on the Railway Budget.
I cannot support this Railway Budget 2013-2014, because it is anti-people. It is putting heavy burden on the already pressurized common people of India. It has brought out some very undemocratic policies within this Budget, including some hidden agenda, to raise fare and freight in the coming years – whenever the Railway Ministry wants and whatever amount it likes.
My point is that we did expect that this time at least in the Railway Budget there will be no hike in the passenger fare because only in January around 21 per cent railway fare was hiked most undemocratically, by-passing the Parliament by the Railway Ministry. This time also, it camouflaged the whole people of India, by directly not increasing the fare, but by raising the cancellation charge, the clerkage charge, the tatkal charge, the reservation charges in air-conditioned coaches, etc., including almost 50 per cent increase in all classes of superfast trains. So, already the railway fare is much hiked. The Railway Ministry has told that they have not revised the basic passenger fare. But by uttering that, actually it has kept an option open, that any time, it can also raise the passenger fares.
There is another component, Sir, which I should say is the most undemocratic, and that is to create a Railway Tariff Authority which will have the statutory power to increase the railway fare and freight any time and they do not have any obligation to say anything to the Parliament. The freight has been increased to around 6 per cent and another component called the dynamic fuel adjustment component has been added there. By doing that, they can increase the freight any time. We can all understand the cascading effect of it as it will increase the prices of all the essential items of life, increase inflation thereby putting more pressure on common people.
The important point is to raise the revenue. Time and again I have told that if we can eliminate massive corruption, rampant pilferage and huge wastage in Railways, we can save a lot of revenue by economising the expenditure. But the Ministry has not done anything in this regard. If these loopholes are not blocked, so much of revenue will be drained out in this way and ultimately the Railways will fall into further Budget deficit. Chewing the same cud again the Railways will put further pressure on people by hiking the fare and freight.
Regarding passengers’ amenities and safety, I would say that the Railways have not done much. They have made promises without giving any time line which ultimately proved to be hoax like other rituals and that will frustrate the people. The Railway Minister has given some data saying that the number of accidents have been reduced. I would say that there had been severe accidents in different tracks all over India. Nowadays, to get into the train has become a nightmare for any passenger. Improving the conditions of railway tracks, dilapidated coaches, the rakes and monitoring the unhygienic conditions in the railway should be taken up with priority.
To augment the revenue, the Railway Ministry is trying to practically privatise entire railway and following PPP model. We completely oppose it. I would like to say that all the schemes announced by the earlier Ministry, particularly in Eastern India and especially in West Bengal, should be continued and proper funding should also be made in this regard by the Ministry in this Budget.
Sir, Sundarban, which is a world famous heritage site, is a backward area. The State Minister of Railways, Shri Adhir Chowdhury should ensure that the extension project up to Gosaba-Gatkhali-Jharkhali should continue. Doubling work from Ghutiary Sharif to Canning and from Joynagar to Namkhana including Magrahat to Diamond Harbour should continue. Some increment of local train, which is the only lifeline of the people of that backward region, should continue. At least six pairs of local trains should be given.
There is no first-class passenger or express train in my constituency. There is Gangasagar, the known teerth of India in my constituency. I would request the Minister that from Sealdah-Joynagar up to Namkhana at least one pair of fast passenger train should be announced in this Railways Budget as it is urgently required by the people of that area.
With these words I conclude.
*श्री चंदूलाल साहू (महासमंद)ः भारतीय रेल विश्व की दूसरी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है, जो लगभग ढ़ाई करोड़ यात्रियों के प्रतिदिन अपने गंतव्य स्थानों तक ले जाती है। रेल जीवन रेखा बन चुकी है और इस बजट में रेल मंत्री श्री पवन बंसल से यह उम्मीद थी कि वह थोड़ा साहस दिखाकर रेलवे को सुधारों की पटरी पर ले आयेंगे, किंतु निराशा ही हाथ लगी और अफसोस की बात है कि इस बजट में रेलवे का कायाकल्प करने की कोई ठोस योजना पेश करने की बजाय संतुलन साधने की कोशिश की गई। रेल मंत्री के पास कहने को कि किराये में कोई वृद्धि नहीं की गई, जबकि 21 प्रतिशत किराये में तथा 5 प्रतिशत मालभाड़े में वृद्धि तथा अन्य अलग-अलग उपकर लगाए गए हैं। जिससे रेल का सफर महंगा तो हुआ ही, इसके साथ-साथ अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।
रेल मंत्री ने अपने बजट भाषण में कौटिल्य की अर्थनीति का उल्लेख किया है और वित्तीय अनुशासन की बात कही है। किंतु यह भूल गए कि भारतीय रेल जिस कुव्यवस्था का शिकार है उसके मूल में फिजूल खर्ची और साधनों का दुरुपयोग है। अन्यथा जहां रेलवे में पैर रखने की जगह नहीं होती वहां रेल घाटे में जाए यह सोचा भी नहीं जा सकता। विगत दो वर्षों में रेलवे का विकास बहुत धीमी गति से हुआ है, आधे से अधिक प्रोजेक्ट लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए। नयी पटरियों का बिछना, नए कारखानों का खुलना, नए पुलों का बनना सब कुछ थम सा गया है। यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना न होने के वादे कागजों पर ही रह जाते हैं।
भारतीय रेल में 14 लाख कर्मचारी कार्यरत है, 1 लाख पद रिक्त है जिसके भरने के लिए डेढ़ लाख कर्मचारी की नियुक्ति की घोषणा स्वागत योग्य है। किंतु उन कर्मचारियों की कार्य क्षमता एवं उन्हें मिलने वाली सुविधा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही साथ शासकीय रेलवे पुलिस जो राज्य सरकारी कर्मचारी होते हैं, किंतु रेलवे में सेवाएं देते हुए यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, उन्हें रेलवे की किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती। मेरी रेल मंत्री जी से मांग है कि शासकीय पुलिस को परिवार के लिए रेल पास की सुविधा दी जाए।
छत्तीसगढ़ राज्य रेलवे को सबसे ज्यादा आय देने वाला राज्य है किंतु छत्तीसगढ़ राज्य की रेलवे विभाग द्वारा हमेशा उपेक्षा की जाती है। वर्तमान बजट में भी छत्तीसगढ़ राज्य को कुछ नहीं मिला। महासमुंद से बागवाहरा, टिटलागढ़ दोहरीकरण की स्वीकृति मिली है, किंतु रायपुर से धमतरी, अभंनपुर से राजिम तक की दोहरीकरण की मांग लम्बे अर्से से की जा रही है। पूर्व बजट में प्रावधानित है किंतु इस बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया। इसी प्रकार से राजिम से गरीयाबंद मैनपुर देवभोग एवं धर्मजयगढ़ (उड़ीसा) तथा महासमुंद से पिथौरा, बसौना, सरायपाली होते हुए संबलपुर (उड़ीसा) तक नई रेल लाईन की सर्वे हेतु पिछले बजट में प्रावधानित है किंतु इस बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। मेरी मांग है इसे भी जल्द से जल्द पूरा किया जाए। महासमुंद रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ-साथ, मेरी प्रमुख मांग है कि महासमुंद से तुमगांव रोड़ एवं महासमुंद से नदीमोड़ रोड़ तक को रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की स्वीकृति दी जाए। मुझे आशा है कि मंत्री महोदय मेरी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करके इन्हें शीघ्र पूरा करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
श्री माणिकराव होडल्या गावित (नन्दुरबार): माननीय सभापति महोदय, मुझे रेल बजट वर्ष 2013-14 पर बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। सबसे पहले मैं माननीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी, रेल मंत्री एवं वित्त मंत्री जी के नेतृत्व में वर्ष 2013-14 के लिए जो बेहतरीन बजट पेश किया गया है, उसके लिए बधाई देता हूं। हमारे देश की रेलवे महत्वपूर्ण संगठन है। रेल मंत्री जी ने यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाएं की हैं, जिनका हम स्वागत करते हैं। लेकिन इसके अमल के बारे में भी मंत्री जी ध्यान रखें।
सभापति महोदय, मेरी आपके माध्यम से भारत सरकार से प्रार्थना है कि रेल मंत्रालय को ज्यादा से ज्यादा धनराशि दें। हमारे देश में रेल परिवार करीबन 14 लाख है। इनकी दिन-रात की सेवा अच्छी तरह से होने से रेल दुर्घटना में कमी आई है। रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड के सभी अधिकारी और कर्मचारी तथा देशभर में रेल में काम करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मैं धन्यवाद देता हूं। रेलवे की सम्पत्ति राष्ट्र की सम्पत्ति है। इसे संभालने का काम रेलवे देशभर में कर रही है। यात्रियों की कठिनाइयों की तरफ भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। खान-पान सेवा के लिए कंट्रेक्ट दिए गए हैं। कंट्रेक्टर के लोग खाना ठीक से नहीं दे रहे हैं। फूड और ड्रग विभाग से उनका टैस्ट करवाया जाए, ऐसी मैं मांग करता हूं। साफ-सफाई की तरफ अधिक ध्यान देना चाहिए, ऐसी मैं मांग करता हूं।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं कि अभी मेरे क्षेत्र से गुजरने वाली सूरत भुसावल पश्चिम रेलवे पर ऊधना जलगांव 306 किलोमीटर रेलवे लाइन पर दोहरीकरण की मंजूरी 2008-09 में 715 करोड़ रुपए लागत की दी गई। यह दोहरीकरण का काम 2012 तक पूरा कर दिया जाएगा, यह संकल्प रेल मंत्रालय का था। लेकिन अभी तक बहुत सा काम अधूरा है। इस संबंध में सन् 2013-14 के बजट में सिर्फ 270 करोड़ रुपए रखे गए हैं। अभी इस योजना पर 11 सौ करोड़ रुपए की लागत लगने वाली है। बजट की राशि तीन सौ करोड़ रुपए और ज्यादा बढ़ाने की मैं मांग करता हूं। ऊधना जलगांव 306 किलोमीटर सड़क गुजरात राज्य के दो लोक सभा क्षेत्र, महाराष्ट्र के चार लोक सभा क्षेत्र के आम रेल यात्रियों के लिए फायदेमंद होगा। यह दोहरीकरण रेलवे लाइन पूरी होने से गुजरात महाराष्ट्र राज्य से साऊथ को यात्रा करने वाले रेल यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी। इसीलिए मैं रेल मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि 2013-14 के रेल बजट में इस परियोजना के लिए 270 करोड़ रुपए से बढ़ा कर तीन सौ करोड़ रुपए की धनराशि देने की मांग करता हूं। इसके अलावा मनमाड़, इंदौर वाया मालेगांव, धुले, शिरपुर और सेधवा 350 किलोमीटर लम्बी रेल लाइन की परियोजना का प्रस्ताव भारत ने रेल मंत्रालय को भेजा था। इस प्रस्ताव को मूल्यांकन के लिए रेल मंत्री जी ने इसे योजना आयोग को भेजा है। इस परियोजना पर 823 करोड़ रुपए की लागत आने वाली है, जिसमें से 412 करोड़ रुपए महाराष्ट्र सरकार ने व्यय करने का फैसला किया है। इसी परियोजना का फायदा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश राज्य के रेल यात्रियों को होने वाला है। इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को भेजना जरूरी है।
सभापति महोदय, मेरा आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से नम्र निवेदन है कि रेलवे लाइन के लिए जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजने की कृपा करें। इस परियोजना की मंजूरी दें, यही निवेदन है। धुले जिला महाराष्ट्र राज्य में आता है। धुले शहर में महानगरपालिका है और करीबन पांच लाख की आबादी है तथा यह ग्रामीण इलाका भी है। यहां से मुंबई यातायात करने के लिए कोई गाड़ी नहीं है। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है। यहां से 2 सांसद और 11 विधायक हैं। सरकारी अधिकारी, शहरी और ग्रामीण जनता को मुंबई जाना-आना होता है। अभी धुलिया से चालीसगांव तक एक स्थानीय रेलगाड़ी जाती है, उस गाड़ी से मुंबई जाने के लिए चालीसगांव रेलवे स्टेशन तक ही यात्रियों के लिए कई वर्षों से व्यवस्था है। अमृतसर-दादर एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 11057-11058 अप और डाउन गाड़ियां, धुलिया से एक बोगी एसी थर्ड, एक बोगी स्लीपर क्लास, एक बोगी जनरल दादर तक लगायी जाती है, लेकिन अक्टूबर, 2012 से उसे आगे लोकमान्य तिलक कुर्ला स्टेशन कर दिया है। यह गाड़ी पहले पहर में 3.50 पर कुर्ला टर्मिनस पहुंचती है। इस समय कोई टैक्सी, रिक्शा या साधन यात्रियों को नहीं मिलता है, इसलिए इसकी पूरी जांच की जाए और इस गाड़ी को दादर टर्मिनस पर ही रोका जाए।
महोदय, मैं गाड़ियों के ठहराव के संबंध में नम्र निवेदन करता हूं कि गाड़ी संख्या 12655-12656 अहमदाबाद-चेन्नई नवजीवन एक्सप्रेस नवापुर रेलवे स्टेशन पर अप और डाउन गाड़ी का ठहराव मिलने हेतु विनती है। नवापुर मेरा खुद का गांव है, लेकिन वहां पर गाड़ी नहीं रूकती है।
गाड़ी संख्या 29025-29026 सूरत-अमरावती फास्ट पैसेंजर को नवापुर रेलवे स्टेशन पर ठहराव मिलने हेतु विनती करता हूं। आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए धन्यवाद। ...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर) : वहां गाड़ी रूकनी चाहिए, बहुत सीनियर मेंबर हैं, उनका इतना तो ध्यान रखना चाहिए। ...( व्यवधान)
*SHRI P. K. BIJU (ALATHUR): Indian railway is one of the world’s largest railway networks comprising 7,500 stations. It transport 24 million passengers daily and 2.8 million tons of freight daily Indian Railway are not just a means of transport for passengers as the enterprise fulfills social responsibilities as well.
But I fear that railway Budget 2013-14 will make the railways become inaccessible to the common man.
Except for the fact that it was after 17 long years that a Congress minister got to present the Railway Budget, there was nothing particularly unique about the Railway Budget.
Having raised fares a little over a month ago, he was able to spare passengers this time, but has raised the reservation, tatkal, supplementary, cancellation and super fast train charges. Again hiking the price before the presentation of the Budget, out of the parliamentary process, will threaten the very existence of our democracy. It is not a good sign for sector such as railways with social responsibility. Though it is being claimed that passenger tariffs had not been increased, Rs.800 crore had been netted two months ago through periodic revision of tariffs. Moreover, a regulatory commission with powers for periodic revision of tariffs was proposed to be set up. This commission is aping to the deregulation of the diesel and petrol. This will eventually give a free hand to the commission to revise the tariff outside the purview of government. Also, it is evident that, ticket rates would go up with increase in diesel prices and other costs.
Another important area that will have spiraling effects on the life of the common man is the dynamic tariff mechanism for freight to take care of future increases in the price of fuel. It is likely to result in a 5 per cent rise in freight rates from April 1st. It would hit the people harder than the passenger tariffs. Though impact would not be directly felt, it would cause all-round increase in prices.
Again, the promise of a half-yearly fuel price adjustment system is dubious. Against an estimated Rs. 60,100 crore plan for the current year, the Railway pruned it to just over Rs. 52,000 crore. This has been raised to Rs. 63,363 crore for the coming year and the challenge lies in achieving that. The focus of the plan seems to be on doubling of tracks, raising capacity, improving safety and significantly enhancing passenger amenities on trains and at stations are simply an eye wash considering the insufficient funds.
What has happened to what was promised in earlier Railway Budget? For example, we have now been promised that 104 important stations will be singled out for cleanliness. But we were once promised 980 Adarsh stations. What has happened to those? Before raving about PPP, what happened to the ones that were promised earlier? What happened on land, including land acquisition? Have feasibility studies been done? In the present case, one has similar question marks about forged wheel factories, MRMu manufacturing facilities, coach manufacturing units, wagon maintenance workshops and so on, not to speak of the green initiatives. The budget is also silent on filling up of 25 lakh existing vacancies.
Like his predecessors, Hon. Minister Shri Pawan Kumar Bansal could not resist the temptation of announcing a string of new manufacturing units, 67 new express and 27 new passenger trains, in addition to a host of new lines and surveys. Of course, many if not most of these have gone to select constituencies important to the Congress party, and to electorally important states such as Uttar Pradesh, Haryana, Karnataka and Andhra Pradesh. With general election due in 2014, Mr. Bansal has used the Budgetary means at his disposal to signal the onset of campaign season.
The privatization and contact system already implemented will be further intensified through huge Private-Public –Participation, which is nothing but an euphemism for privatization. Railway Minister in his maiden budget speech has envisaged investments of Rs. 1 lakh crore through public private partnership (PPP) projects. Elevated Rail Corridor in Mumbai, parts of the DFC, redevelopment of stations, power generation/energy saving projects, freight terminals are areas proposed for private investment during the 12th Plan period. The Minister gas proposed Bhupdeopur –Raigarh (Mand Colliery) and doubling of Palanpur-Samakhiali section through the PPP route.
All of this is very likely to change with the attempt at privatization and the odds are privatization of Indian Railways will indeed mean higher prices. Railway currently provide connections across the whole country linking even the not-so-profitable areas and represent the true backbone of the Indian economy; people living in less affluent areas are most likely going to be affected by fare hikes when private players come on board with the aim to increase company profits.
Kerala is once again humiliated by the railway budget 2013-14.Being a consumer state, where everything for consumption need to be imported from the other states, Kerala will bear the maximum brunt of freight rate hike. The long standing cries of Kerala have been neglected totally. The coach factory in Palakkad was proposed 50 years ago. But no initiatives have been taken to realize that promise. Kerala would always be at the receiving end and of political conspiracy when comes to matters concerned with railway development. For example, work of three other coach factories has been finished in places such as Kapurthala and Rae Bareli. It clearly shows that Political interests weighed over interests of passengers in such matters. Now, the Minister has proposed a new coach factory at Sonepet while there was only mention of plans to hold discussions with Kerala on the Palakkad coach factory.
Kerala has got no new lines. There is also no proposal for gauge conversion. The proposed line between Palakkad and Muthalamada, was to be completed last year. However, not even preliminary works had been taken up last year. The plight of Sabari railway line is another example. Earlier budget proposals for the up gradation of Thiruvananthapuram, Ernakulam and Calicut railway stations to international standards has also remained on paper. Opening of railway medical college in Trivandrum has also remained a dream for the people of Kerala. Kerala is also annoyed by the condescending attitude of the railway by allotting unhygienic coaches to the state.
In my constituency of Alathur, there are many long standing development needs. The gauge conversion of Palakkad-Pollachi line has been sanctioned and the work has been started since December 2008. As said in the railway budget, the gauge conversion work should be completed within 2009 December. But unfortunately the progress of the work is still pending. The Government should take necessary steps for construction of the Kollengode-Thissur railway line and allot funds. It is also urgent to create a triangular station at Shorannur. Shorannur railway is the life line of people from Malabar region.
Renovation and development of Wadakkanchery railway station, Mulamkunnathukavu railway station, and Vallathol railway station have also been proposed but no action has been taken up. Elevation of Wadakkanchery railway station as Adarsh station is also an urgent development need.
I conclude this speech with strong conviction that the present budget clearly leading to hike in prices of food and other items and indicating total privatization of Indian railway.
*श्री सैयद शाहनवाज हुसैन (भागलपुर): माननीय रेल मंत्री जी ने रेल बजट पेश किया। उनके इस बजट में राजनैतिक संदेश ज्यादा है। जो रेल के लिए संदेश दिया जाना है। हमसे पहले वक्ताओं ने रेल में आयी परेशानियों को गिना दिया है। मैं उन सब बातों को दोहराना नहीं चाहता।
मैं तो यह कहना चाहता हूं कि वर्षों बाद एक रेल मंत्री कांग्रेस पार्टी से आया है तो उसकी सोच भी देशव्यापी होगी। वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक की बात करेगा, किसी एक प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। मगर इस बजट में हम देख रहे हैं इसमें ऐसी सोच नहीं दिखाई देती।
बजट में जनता को धोखा दिया गया है क्योंकि जनवरी में ही यात्री भाड़े में वृद्धि की गई है। बजट में यात्री भाड़ा नहीं बढ़ाकर रिजर्वेशन फीस, स्पलीमेंटरी चार्जेज, तत्काल चार्जेज, क्लर्केज चार्जेज एवं कैंसलेशन चार्जेज में वृद्धि की गई है जो रेल यात्रियों के साथ एक धोखा ही कहा जाएगा। रेल मंत्री ने ईंधन के मूल्य में वृद्धि के नाम पर 5 से 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष टिकट और माल-भाड़े में वृद्धि का प्रस्ताव किया है जो आने वाले समय में जनता पर एक बोझ ही होगा।
रेलवे को राष्ट्र की लाईफ लाईन कहा जाता है परन्तु यह सरकार आम आदमी के हितों को सुरक्षित रखने में विफल रही है।
हर व्यापार का एक नियम होता है, काम बढ़ेगा तो मुनाफा भी बढ़ेगा। अगर यात्री गाड़ियों की संख्या जो 2001-2002 में 8,897 थी और अब बढ़कर 2011-12 में 12,335 हो गई तो यात्रियों की संख्या भी बढ़ी होगी और किराया भी वसूला गया होगा। फिर आपका घाटा जो 2001-02 में 4,955 करोड़ था वह बढ़कर 2011-12 में 22,500 करोड़ कैसे हुआ? कहीं ऐसा तो नहीं कि इसमें भी कोई घोटाला हो।
इसी प्रकार लोहे से लेकर कोयले तक खनिज पदार्थ की अवैध तरीके से खुदाई हुई है, तो निश्चित तौर पर रेल माध्यम से उसे खानों से दूसरे स्थानों तक पहुंचाया गया होगा। इससे भी रेलवे के माल भाड़े में बहुत वृद्धि हुई होगी। परन्तु हम देख रहे हैं कि आपके रेल बजट में माल‑ भाड़े की वसूली उतनी नहीं हुई है जितनी होनी चाहिए थी। एक बार ऐसा लगता है कि इसमें भी कोई घोटाला हुआ होगा।
फिर रेल मंत्री यह कहते हैं कि टैरिफ और नॉन टैरिफ सेक्टर की आय के मामले में वे काफी बदलाव लाएंगे। यह कौन सा बदलाव है? यह तो उनके मस्तिष्क में ही है। इसका खुलासा बजट में नहीं है। क्या माननीय रेल मंत्री कहीं भाड़े में वृद्धि की और योजना तो नहीं बना रहे हैं?
ऐसी चर्चा है कि रेल टैरिफ अथॉरिटी बनाई जाएगी और भाड़े को निश्चित करने के कार्य को आऊटसोर्स कर दिया जाएगा। इससे यह पता चलता है कि सरकार माल भाड़ा वृद्धि की जिम्मेदारी से बचने के लिए यह हथकंडा अपना रही है।
इस बजट में माल‑भाड़ा को 5 से 6 प्रतिशत तक बढ़ाने के कारण देश की माली हालत खराब होगी और मुदास्फीति एवं महंगाई बढ़ेगी और अन्ततः "आम आदमी " ही प्रभावित होगा।
रेलवे एफीसिएनसी (दक्षता) की खूब चर्चा है, परन्तु सत्य यह है कि वर्ष 2011-12 में परिचालन अनुपात जो 95 प्रतिशत था वह 2012-13 में घटकर 88.8 प्रतिशत हो गया है। इसका अर्थ यह हुआ है कि 1997-98 के बाद पहली बार परिचालन अनुपात 90 प्रतिशत से नीचे आ गया है। सच यह है कि 84.9 प्रतिशत की उम्मीद बजट में की गई थी, परन्तु यह 88.8 प्रतिशत रहा। मंत्री जी किस बात का क्रेडिट ले रहे हैं। इसमें मंत्रालय ने कैसी दक्षता हासिल की है? बजट में अनुमानित आय संग्रह के क्षेत्र में 7 हजार करोड़ कम ही आय हुई। यह दक्षता में वृद्धि दिखाता है या वित्तीय बाजीगरी?
कहनी और कथनी में अंतर वायदे वास्तविक उपलब्धि आदर्श स्टेशन 977 621 मॉडर्न स्टेशन 637 614 मॉडल स्टेशन 594 569 ब्रिज 379 98 लेवल क्रॉसिंग्स 200 97 रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन 1200 किमी.
599 किमी.
कोचिज आईसीएफ 1585 1278 आईसीएफ 1634 1347 पिछले बजट में 113 नई ट्रेनों को चलाने की घोषणा हुई परन्तु वास्तविक में 65 ट्रेनें ही चल पाईं।
फर्टिलाइजर्स को ढोने में रेलवे ने 8.93 प्रतिशत निगेटिव ग्रोथ किया है और सीमेंट के मामले में 2.26 प्रतिशत।
मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि रेल पटरियों के दोहरीकरण का काम इस प्लान में केवल 2758 किमी. और गेज बदलने की योजना में केवल 5321 किमी. हुआ है जो 11वीं योजना के लक्ष्य से काफी कम है।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना में 5.19 लाख करोड़ की आवश्यकता है और रेलवे के आन्तरिक स्रोतों से पांच वर्ष में 1.20 लाख करोड़ रुपए जुटाने हैं जो रेल मंत्री के खुद की स्वीकोरोक्ति के अनुसार एक बहुत बड़ी चुनौती है। फिर ये राशि आएगी कहां से, इसका खुलासा तो कीजिए।
इस बजट में यात्री सुरक्षा और संरक्षा पर कुछ खास नहीं कहा गया है। मैं यहां बताता चलूं कि पूर्व रेल मंत्री ने सैमपित्रोदा और डा. अनिल काकोदर समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षित व आधुनिक बनाने को एक रोड मैप तैयार किया लेकिन फंड की समस्या का समाधान किए बिना इस पर अमल करना असंभव है। धन की कमी के कारण रेलवे विद्युतीकरण की 500 से अधिक की परियोजनाएं लंबित हैं। श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार के समय पर एक कॉरपोरेट सेफ्टी फंड और कॉरपोरेट सेफ्टी प्लान बनाया गया था। अब तक इस संबंध में कोई कार्य नहीं हुआ है और इस बजट में इस पर चुप्पी साधी गई है। रेल दुर्घटनाएं और उससे हुई जान माल की हानि गंभीर चिन्ता का विषय है। एक तरफ तो ट्रेन एक्सीडेंट पर मिलियन ट्रेन की रेशों 2003-04 में 0.41 थी। वह घटकर 2011-12 में 0.13 हो गया है। इसके लिए वे अपनी पीठ थपथपाते हैं परन्तु हकीकत यह है कि यह 0.13 का आंकड़ा सैंकड़ों कीमती जानों के गंवाने को दर्शाता है। मैं यहां बता दूं कि 2011-12 में ही रेल दुर्घटना में 156 लोग मारे गए और इस महाकुंभ के अवसर पर रेल फुट ओवरब्रिज टूटने के कारण बड़ी संख्या में जानें गईं।
इस दुर्घटना पर बजट भाषण में "खेद है " कहने से काम नहीं चलने वाला। देश जानना चाहता है कि आप रेलवे में सुरक्षा के लिए कौन से ठोस उपाय करेंगे।
अनिल काकोदर की रिपोर्ट के अनुसार हर वर्ष करीब 15000 लोगों की मौत रेलवे ट्रैक पर ही कट कर होती है। ऐसे में रेल मंत्री ने जो 0.13 प्रतिशत की अनुपात दी है वह भ्रामक है।
आप मानते हैं कि 31486 लेवल क्रॉसिंग में से 13530 लेवल क्रॉसिंग मानव रहित है। आप जानते हैं कि ऐसे लेवल क्रॉसिंग पर अधिकांश दुर्घटनाएं होती हैं और भारी जान-माल का नुकसान होता है। फिर भी आप इनकी चिन्ता नहीं करते और दावा करते हैं कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
रेल मंत्री ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) योजना के माध्यम से एक लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। पीपीपी मॉडल से भारतीय रेल की सूरत बदलने की अभी तक की तमाम कोशिशें विफल रही हैं क्योंकि यूपीए सरकार इस मॉडल के प्रति गंभीर नहीं है। परन्तु सरकार की नीति और लाल-फीताशाही के चलते यह कितना प्रतिशत लक्ष्य हासिल करेगा, यह समय ही बताएगा।
नई हाई-स्पीड ट्रेनों की कोई घोषणा नहीं की गई है जिससे लाजिस्टिक सेक्टर में मायूसी है। फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने से माल भाड़े में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि हो जाएगी और व्यापारी वर्ग प्रभावित होंगे इसका प्रभाव मुद्रास्फीति और महंगाई पर भी होगा।
रेलवे में आज लगातार विद्युतीकरण, गेज कन्वरशन और नई लाईनें बिछाने का काम चलता रहना चाहिए ताकि रेलवे और लाजिस्टिक सेक्टर की दक्षता बढ़ सके। 1500 किलोमीटर डेडीकटिड फ्रेट कॉरीडार बनाने की घोषणा स्वागत योग्य है। ऐसी उम्मीद है कि जो वर्तमान में फ्रेट कॉरीडोर है उस पर भीड़ कम होगी और मालगाड़ियां तेजी से समानों को ढो पाएंगी और अन्ततः देश का आर्थिक विकास होगा।
रेल बजट 2013 से कई राज्यों को फायदा होगा लेकिन इसमें बिहार का ख्याल बिल्कुल नहीं रखा गया है। यह सही है कि बिहार से बहुत सारे रेल मंत्री रहे हैं लेकिन आज भी बिहार में रेल की रोशनी नहीं पहुंची है। इस बजट में बिहार के साथ अन्याय हुआ है।
मैं रेल बजट पर अपने संसदीय क्षेत्र भागलपुर की निम्न कठिनाइयों को रेल मंत्री जी के अवलोकनार्थ व उनको पूरा कराने के उद्देश्य से अपनी मांगों को सभा-पटल पर रख रहा हूं।
मेरे संसदीय क्षेत्र भागलपुर में नौगछिया, थाना बिहपुर, खरीक, नारायणपुर, भागलपुर, जगदीशपुर, घोघा, शिवनारायणपुर को आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित करने के निर्णय के लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं और साथ-साथ दो स्टेशन नौगछिया और भागलपुर में बेहतर यात्री सुविधा बढ़ाने के लिए आग्रह करता हूं।
*श्री अशोक कुमार रावत (मिसरिख): मेरा संसदीय क्षेत्र एक अति पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। मेरे क्षेत्र में कानपुर-बिल्हौर-कन्नौज-फरुखाबाद, रेलवे लाइन जब मीटरगेज थी तो उस समय इस रेलवे लाइन पर लगभग 12 रेलगाड़ियों का आवागमन होता था। लेकिन इस रेलवे लाइन के ब्रॉडगेज में परिवर्तित होने के बाद केवल 7 पैसेन्जर रेलगाड़ियों का ही आवागमन हो रहा है और उनमें भी रेल डिब्बों की संख्या बहुत कम है, जिस कारण रेल यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जहां यात्री रेलगाड़ियों की संख्या में बढोत्तरी की जानी चाहिए थी, वह तो नहीं की गई। लेकिन, मालगाड़ियों की संख्या बढ़ा दी गई है। क्षेत्र की भीड़-भाड़ को ध्यान में रखते हुए यात्री रेलगाड़ियों की संख्या बढ़ाए जाने के साथ-साथ उनमें रेल डिब्बों की संख्या भी बढ़ायी जानी चाहिए। यह रेलवे लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 91 से होकर गुजरती है, जिस कारण रेलवे क्रॉसिंग की संख्या भी अत्यधिक है और रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात अवरुद्ध हो जाता है।
अतः ऐसी स्थिति में मेरा अनुरोध है कि उक्त रेलवे लाइन के साथ-साथ गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग पर आवश्यकतानुसार ऊपरि पुल बनाए जाएं ताकि यातायात अवरुद्ध न हो।
बालामऊ जं. कानपुर रेलमार्ग पर बाममऊ जं. से ढाई किमी की दूरी पर कछौना ब्लॉक, जहां नर्सिंग होम, थाना व अन्य कार्यालय है, रेलवे क्रॉसिंग नं. सी-97 है। इस रेलवे क्रॉसिंग से पैदल यात्रियों के साथ-साथ बस, ट्रक, मोटर साइकिल इत्यादि का आवागमन होता था। लेकिन, जनवरी, 2013 से इस रेलवे क्रॉसिंग को केवल पैदल यात्रियों के लिए ही खोला गया है और अन्य वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। चूंकि, इस मार्ग पर नर्सिंग होम, थाना व अन्य कार्यालय इत्यादि है, इसलिए इस रेलवे क्रॉसिंग को पूर्व की भांति सभी वाहनों इत्यादि के लिए खोला जाए।
मेरे क्षेत्र में रेलवे की काफी सरप्लस भूमि उपलब्ध है तथा मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत केन्द्रीय विद्यालय नहीं है तथा स्वास्थ्य सेवाओं का भी भारी अभाव है। मेरे क्षेत्र के सण्डीला एवं बालामऊ जंक्शन, जनपद हरदोई में रेलवे की सरप्लस भूमि पर अस्पताल व केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना की जाए।
नई शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली-गाजियाबाद-बरेली-हरदोई-लखनऊ होकर चलाई जाए। दिल्ली से नीमषार के बीच रेलगाड़ी चलाई जाए। मेरे क्षेत्र के सण्डीला व बिल्हौर स्टेशन को भी आदर्श स्टेशन के रूप में चयनित किए जाने की आवश्यकता है तथा बालामऊ स्टेशन को अधिक विकसित किए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि यह मेरे संसदीय क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है। इस स्टेशन से गुजरने वाली सभी महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों-लखनऊ मेल, श्रमजीवी एक्सप्रेस सहित अन्य वे रेलगाड़ियां जो वाया कानपुर होकर जाती हैं, का ठहराव दिए जाने के साथ-साथ लोडिंग व अनलोडिंग प्लेटफॉर्म बनाए जाने की आवश्यकता है। बालामऊ में केन्द्रीय कर्मचारियों की काफी संख्या है। लेकिन केन्द्रीय विद्यालय न होने के कारण शिक्षा का अभाव है। यहां पर रेलवे अपनी भूमि पर केन्द्रीय विद्यालय स्थापित करा दें तो सरकारी कर्मचारियों को काफी लाभ होगा।
मेरा अनुरोध है कि आप बालामऊ रेलवे स्टेशन को और अधिक विकसित किए जाने ओर इस संबंध में दिए गए मेरे उपरोक्त सुझावों को स्वीकार किए जाने हेतु निर्देश प्रदान करें।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ है। इसके विकास के लिए यहां पर मेट्रो सवारी डिब्बा कारखाने की स्थापना की जाए।
सेन्टर फॉर रेलवे इन्फार्मेशन सिस्टम के तत्वाधान में मिश्रिख में सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस इन सॉफ्टवेयर खोला जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सण्डीला में पावर प्लांट स्वीकृत हुआ है। रेलवे भी यदि यहां पर गैस आधारित पावर संयंत्र की स्थापना कर दे तो क्षेत्र के विकास में काफी मदद मिलेगी और क्षेत्र का पिछड़ापन भी दूर होगा।
कानपुर से फरुखाबाद रेलवे लाइन, जो नेशनल हाईवे-9 पर स्थित है, पर यातायात का भारी दवाब रहता है। यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं इसलिए यातायात को सुगम बनाए जाने के लिए रेलवे के नीचे से अन्डर ब्रिज का निर्माण कराया जाए। मेरे क्षेत्र के सण्डीला व बिल्हौर में भी यही स्थिति है। वहां पर भी ओवर ब्रिज का निर्माण करवाया जाए।
सण्डीला व बालामऊ में यात्री सुविधाओं में सुधार किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए इन स्टेशनों पर विश्राम कक्षों की एडवांस बुकिंग प्रारम्भ किए जाने के साथ-साथ अन्य यात्री सुविधाएं वरीयता के आधार पर उपलब्ध कराई जाए।
मैं लखनऊ-लखीमपुर-पीलीभीत वाया सीतापुर लाइन व सीतापुर-बहराईच रेल लाइन बिछाने हेतु धन्यवाद व्यक्त करता हूं।
सीतापुर, मेलानी के रास्ते लखनऊ-पीलीभीत के आमान परिवर्तन के लिए मैं माननीया रेल मंत्री जी को बधाई देतु हुए अनुरोध करता हूं कि बिल्हौर से मकनपुर मदारशाह मजार तक नई रेलवे लाइन का सर्वे कराकर शीघ्र रेल लाइन बिछायी जाए।
मैं माननीय रेल मंत्री जी को रोजा-सीतापुर-बड़वल के रेल विद्युतीकरण हेतु आभार व्यक्त करता हूं।
मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश राज्य के मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत नैमिषारण्य एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध चक्र तीर्थ, दधीच कुंड, पाण्डव किला, हनुमानगढ़ी, सुदर्शन चक्र, मां ललिता देवी मंदिर (शक्ति पीठ) जैसे अन्य बहुत से धार्मिक स्थल हैं। चारों धाम की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती है जबतक चक्र तीर्थ में स्नान न करें। साथ ही धार्मिक श्रद्धालु 84 कोस की परिक्रमा भी करते है। जो होलिका दहन के दिन पूरी होती है और उसके बाद होली खेली जाती है। इस परिक्रमा में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यहां पर देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जान लगा रहता है। इन धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है। इसलिए नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र को तीर्थ रेल से जोड़ा जाए तथा पहुंच मार्गों की हालत में सुधार लाने के लिए लागत में 50:50 के अनुपात में भागीदारी के तहत नीमसार को शामिल किया जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर (उ.प्र.) के अंतर्गत मकनपुर, जो कानपुर नगर जिलान्तर्गत आता है, में मदारशाह की विश्व प्रसिद्ध मजार है। यहां पर देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जान लगा रहता है। यह विश्व प्रसिद्ध मजार है और 596 वर्ष पुरानी है। यहां पर प्रतिदिन कई हजार लोग देश-विदेश से दर्शनार्थ आते हैं। यहां पर मई माह में उर्स लगता है, जिसमें कई लाख लोग सम्मिलित होते हैं तथा जनवरी-फरवरी के महीने में एक माह के लिए मेला लगता है। यह एक विश्व प्रसिद्ध मजार है। विश्व प्रसिद्ध इस धार्मिक स्थल को भी तीर्थ रेलवे से जोड़ा जाए।
मैं आपको अवगत कराना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत हरदोई, सीतापुर, नीमसार व सण्डीला रेलवे स्टेशन, बालामऊ जंक्शन अति पिछड़े हुए क्षेत्रों में आते हैं। इन रेलवे स्टेशनों के उन्नयन की आवश्यकता है। यहां पर यात्रियों के आराम, सुविधाओं, आस-पास के परिवेश मे सौन्दर्य में वृद्धि करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत हरदोई अथवा सीतापुर में नवीनतम उन्नत लोको पायलट प्रशिक्षण केन्द्र, उन्नत रेल पथ प्रशिक्षण केन्द्र अथवा बहु विभागीय प्रशिक्षण केन्द्र खोला जाए।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सवारी डिब्बा कारखाना, लोको कारखाना अथवा डीजल मल्टीपल यूनिट कारखाने की स्थापना की जाए।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत किसानों के सुनिश्चित भविष्य के लिए किसान विजन परियोजना के अंतर्गत एक प्रशीतित कंटेनर कारखाना स्थापित किया जाए।
आबिदा एक्सप्रेस रेलगाड़ी कानपुर-बालामऊ-नीमसार वाया शाहजहांपुर से दिल्ली चलती थी। इस रेलगाड़ी को बंद कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र की जनता उपर्युक्त रेलगाड़ी को चलाए जाने हेतु निरंतर मांग कर रही है, लेकिन अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। इस रेलगाड़ी को पुनः प्रारम्भ किया जाए।
मेरा यह भी अनुरोध है कि मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर (उ.प्र.) के अंतर्गत निम्नांकित रेलवे सुविधाएं प्रदान किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
1. ग्वालियर से छपरा जाने वाली रेलगाड़ी का बिल्हौर में ठहराव सुनिश्चित करना।
2. कानपुर-वाराणसी के बीच एक नई जन शताब्दी एक्सप्रेस प्रारम्भ करना।
3. लखनऊ-दिल्ली वाया बरेली होकर एक नई जन शताब्दी एक्सप्रेस चालाया जाना।
4. कानपुर-आगरा वाया झांसी-ग्वालियर होकर एक नई जन शताब्दी एक्सप्रेस प्रारम्भ किया जाना।
5. बिल्हौर से कक्वन मार्ग पर रेलवे पुल का निर्माण किया जाना।
6. लखनऊ-हरदोई मार्ग पर सण्डीला में बेनीगंज मार्ग पर रेलवे पुल का निर्माण किया जाना।
7. मिश्रिख रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यकरण कराए जाने की आवश्यकता।
8. कानपुर-ओरई-झांसी रेलवे मार्ग को दोहरा किए जाने की आवश्यकता।
9. लखनऊ-सीतापुर-मैलानी-पीलीभीत बरेली रेलवे मार्ग का गैज परिवर्तन किए जाने की आवश्कयता।
10. कानपुर-ओरई-झांसी रेलवे मार्ग का विद्युतीकरण किए जाने की आवश्यकता।
11. सीतापुर से नानपारा एवं बालामऊ-कन्नौज नई रेलवे लाइन बिछाए जाने की आवश्यकता।
12. शताब्दी एक्सप्रेस जो दिल्ली से कानपुर तक चलती है, उसको लखनऊ तक बढ़ाए जाने की आवश्यकता।
13. आबिदा एक्सप्रेस जो दिल्ली से कानपुर के बीच चलती है, को वाया बालामऊ, नीमसार, सीतापुर चलाए जाने की आवश्यकता।
14. अरौल मकनपुर स्टेशन, जो कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन से 65 किमी की दूरी पर है, में गाड़ी संख्या 5037 अप व 5038 डाउन का ठहराव दिए जाने की आवश्यकता।
15. मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत मल्लावां, माधौगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म काफी नीचे हैं, जिसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी होती है। अतः प्लेटफार्म को ऊंचा करते हुए सीमेंट की शेड डालवायी जाए।
16. मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत अरवल एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, क्योंकि इस स्टेशन के पास ही मकनपुर में मदारशाह की विश्व प्रसिद्ध मजार है। यहां पर देश की ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जान लगा रहता है। यह विश्व प्रसिद्ध मजार है और 596 वर्ष पुरानी है। यहां पर प्रतिदिन कई हजार लोग देश-विदेश से दशनार्थ आते हैं। यहां पर मई माह में उर्स लगता है, जिसमें कई लाख लोग सम्मिलित होते हैं तथा जनवरी-फरवरी के महीने में एक माह के लिए मेला लगता है। अरवल रेलवे स्टेशन, जो मकरनपुर के पास में ही है, में यात्रियों/श्रद्धालुओं के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। विश्व प्रसिद्ध मदारशाह की दरगाह को दृष्टिगत रखते हुए अरवल रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यकरण करते हुए यहां पर पेयजल, शौचालय, विश्रामालय इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।
17. अरौल-मकनपुर रेलवे स्टेशन पर कालिन्दरी एक्सप्रेस (14723-14724) एवं पवन एक्सप्रेस (15037-15038) का ठहराव दिया जाए।
18. मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सण्डीला में यातायात के भारी दवाब को देखते हुए रेलवे क्रॉसिंग पर ऊपरि पुल बनाया जाए।
19. बिल्हौर में भी यातायात के भारी दवाब को दृष्टिगत रखते हुए रेलवे क्रॉसिंग पर ऊपरि पुल बनाया जाए।
20. चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर, अरौल स्टेशनों पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव है। इन रेलवे स्टेशनों का सौन्दर्यकरण करते हुए वहां पर पेयजल, विद्युत, प्रतीक्षालय आदि की समुचित व्यवस्था करवाई जाए।
21. शिवराजपुर रेलवे स्टेशन से 3 किमी. की दूरी पर क्रॉसिंग न. 43 है, जिससे एक बड़ी संख्या में ट्रैफिक गुजरता है। संभवतः इस क्रॉसिंग को बंद किए जाने की योजना है। इस क्रॉसिंग से गुजरने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए जनहित में यह उचित है कि इसको बंद न किया जाए। इसको यथावत खोला जाए।
22. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख में विश्व प्रसिद्ध नैमिषारण्य के धार्मिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए नीमसार और मिश्रिख रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यकरण किया जाए और यहां पर पेयजल, शौचालय, विश्रामालय इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए और आबिदा एक्सप्रेस का नीमसार रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया जाए।
23. सीतापुर-लखनऊ छोटी रेलवे लाइन है। इसको ब्रॉडग्रज में परिवर्तित किए जाने की विगत काफी समय से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस प्रकरण में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। इस रेलवे लाइन का 2005 में सर्वेक्षण हो चुका है, जो अभी तक लंबित है। सीतापुर मरे संसदीय क्षेत्र का जनपद मुख्यालय है। अब तक इस रेलवे लाइन का निर्माण न होने के कारण क्षेत्र के लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस छोटी रेल लाइन को ब्रॉडग्रेज लाइन में शीघ्र परिवर्तित किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए।
24. जम्मू-तवी से कानपुर सेन्ट्रल रेलगाड़ी न. 12470 (जम्मूतवी एक्सप्रेस) का मल्लावां रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया जाए।
25. सीतापुर-बालामऊ पैसंजर रेलगाड़ी नं. 54335-54336 में वर्तमान में केवल 7 कोच लगे हैं। यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह कोच बहुत कम है। अतः इस पैसेन्जर रेलगाड़ी में कम से कम 3 रेलवे कोच और बढ़ाए जाएं।
26. मैं यह भी अवगत कराना चाहूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर (उ.प्र.) का लगभग् 75 प्रतिशत हिस्सा उत्तर रेलवे के अंतर्गत आता है। लेकिन, मुझे अत्यधिक खेद एवं आश्चर्य है कि जन-प्रतिनिधियों के साथ आयोजित होने वाली उ.रे. की किसी भी बैठक का मुझे आज तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। मैं जानना चाहूंगा कि विगत साढ़े तीन वर्षों के दौरान आज तक स्थानीय जन-प्रतिनिधियों के साथ क्या कोई बैठक आयोजित की गई है? यदि हां तो ये बैठकें कब-कब आयोजित की गई हैं और इनमें मुझे स्थानीय सांसद होने के नाते किन कारणों से नहीं बुलाया गया है?
मैं अनुरोध करता हूं कि मेरे द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
श्री गणेश सिंह (सतना): महोदय, मैं रेल बजट वर्ष 2013-14 को पूरी तरह से अदूरदर्शी तथा निराशाजनक बजट मानता हूं। देश को बड़ी उम्मीद थी कि इस बार 17 वर्ष के बाद कांग्रेस पार्टी के किसी मंत्री को रेल मंत्रालय का दायित्व मिला था। जब यूपीए प्रथम सरकार आयी, तब जो रेल मंत्री थे, वे विश्वस्तरीय रेल बनाने की बात कह रहे थे। कुल्हड़ में चाय पिलायेंगे, खादी को महत्व देंगे, दूध-मट्ठा मिलेगा, लेकिन कुछ हुआ नहीं। जब यूपीए का दूसरा कार्यकाल आया, यूपीए की दूसरी बार सरकार वर्ष 2009 में बनी, तो रेल मंत्री महोदय ने यहां कहा और मां, माटी और मानुष के साथ रेलवे को जोड़ने की बात कही और पहले वाले मंत्री के खिलाफ उन्होंने कहा कि उन्होंने सब आंकड़ों की बाजीगरी की थी। उस पर व्हाईट पेपर उन्होंने लाने की बात की थी। रेलवे की स्थिति वाकई में ठीक नहीं है, यह पूरा देश जानता है। पवन कुमार बंसल जी जब रेल मंत्री बने, चूंकि वे सीनियर मिनिस्टर हैं, लोगों को उम्मीद हुई कि निश्चित तौर पर रेलवे की जो व्यथा है, उससे रेलवे को बाहर निकालने के लिए कुछ न कुछ उपाय करेंगे। दुर्भाग्य है कि जब वे बजट पढ़ रहे थे, पहली बार मैंने देखा, मैं 14वीं लोक सभा में भी था, इस बार भी हूं, लेकिन अभी तक के रेल बजटों में जितना असंतोष भाषण के समय मैंने देखा, वह पवन कुमार बंसल जी के पहले कभी ऐसा नहीं था। उनके सहयोगी दल वेल में आ गए। अपनी सीट से खड़े होकर लगभग सभी सांसद यह कह रहे थे कि यह बजट कैसा बजट है, यह देश का बजट नहीं हो सकता है। जैसा पहले होता था, जहां-जहां के मंत्री होते थे, वहां को प्राथमिकता देते हुए वे जिस तरह से बजट रखते थे, ऐसा लगा कि यह भी उसी तरह का बजट है। उन्होंने इस सदन को ध्यान में न रखते हुए, अपने नेता के बारे में ध्यान रखा। मुझे कोई आपत्ति नहीं है, रायबरेली, अमेठी को सब दे दीजिए, चंडीगढ़ को दे दीजिए। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
MR. CHAIRMAN : Now, it is 8 p.m. So, Shri Ganesh Singh, you may continue your speech later when this item would be taken up.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Now, the House will take up ‘Zero Hour’. If the House agrees we can extend the time of the House till the ‘Zero Hour’ gets over.
SEVERAL HON. MEMBERS: All right.
MR. CHAIRMAN: The time of the House is extended till the ‘Zero Hour’ gets over.
I would request the hon. Members to be very brief. Already it is 8 o’clock.
Dr. Raghuvansh Prasad Singh.