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Lok Sabha Debates

Discussion Regarding Recent Political Developments In The State Of Uttar ... on 28 November, 2002

NT> 14.16 hrs.  Title: Discussion regarding recent political developments in the state of Uttar Pradesh raised by Shri Mulayam Singh Yadav on 26 November, 2002 (continued – concluded.) MR. SPEAKER: Matters under Rule 377 is over. Now, the hon. Deputy Prime Minister will reply to discussion which took place on the 26th November, 2002.

उप प्रधान मंत्री तथा गृह मंत्रालय के प्रभारी (श्री लालकृष्ण आडवाणी): अध्यक्ष महोदय, श्री मुलायम सिंह जी ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक घटनाओं के संदर्भ में एक चर्चा आरम्भ की थी जिसमें उत्तर प्रदेश के कई सदस्यों ने भाग लिया। कुछ और प्रमुख दलों के नेताओं ने भी भाग लिया लेकिन मैं इस बात को स्वीकार करूंगा कि उत्तर प्रदेश के सदस्य जब बोल रहे थे, चाहे विपक्ष से बोल रहे थे या सरकारी पक्ष से बोल रहे थे तो स्वाभाविक रूप से उत्तर प्रदेश में जो शासन चल रहा है, उस शासन के गुण-दोषों की मीमांसा में काफी लग गये। कुछ लोगों ने तो प्रदेश के पुराने राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि सामान्यत: संसद में हम प्रदेशों की जब चर्चा करते हैं और खासकर जिन प्रदेशों में कोई राष्ट्रपति शासन नहीं है और वहां पर कोई चुनी हुई सरकार है, वहां पर व्यवस्थित एक विधान सभा है तो वहां की सरकारों के गुण-दोषों की मीमांसा हम नहीं करते। यह सरकार अच्छी चल रही है, सरकार खराब चल रही है, सरकार ऐसा कर रही है, सरकार वैसा कर रही है। लेकिन उस दिन चर्चा मैंने काफी देर सुनी थी। पूरे समय तो नहीं सुनी थी लेकिन काफी देर सुनी थी और उसमें मैंने देखा कि स्वाभाविक था कि उस ओर के सदस्य और हमारी ओर के सदस्य इस बात को प्रमाणित करने पर लगे हुए थे कि बहुत खराब चल रही है या बहुत अच्छी चल रही है। संसद की चिंता अगर किसी पहलू पर हो सकती है, प्रदेश की राजनीतिक गतवधियों के बारे में तो संविधान के संदर्भ में हो सकती है कि भई, संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया जा रहा है, संविधान की कुछेक परम्पराओं की अवहेलना की जा रही है। इसकी चिंता हमें करनी चाहिए और इस नाते कुल मिलाकर जितने सदस्य बोले, उन्होंने उसका भी उल्लेख किया। उस तरफ से भी किया और इस तरफ से भी किया। हमारी तरफ से तो हमारे वधि राज्य मंत्री रवि शंकर जी भी बोले। मैं समझता हूं कि उत्तर देते हुए मैं अपने को केवल संवैधानिक पहलू पर सीमित करूंगा। मैं सरकार की मीमांसा नहीं करूंगा। सचमुच जैसे मुलायम सिंह जी कह रहे थे कि अमुक-अमुक बात के कारण भारतीय जनता पार्टी के लोग ही परेशान हैं कि उनकी साख पर असर पड़ रहा है। मुझे लगा कि जैसे मानो मेरी चिंता को वे व्यक्त कर रहे हैं। मैं सार्वजनिक रूप से भी उस पर बोल चुका हूं। ऐसा नहीं है कि नहीं बोल चुका हूं। मैं कोई आज की सरकार के बारे में नहीं बोल रहा हूं। पहले जो हमारी सरकार थी, जब बनी थी तो उसके बारे में भी मैंने बोला था, लेकिन संसद उसके लिए उपयुक्त फोरम नहीं है। आज हमारी चिन्ता ज्यादा इस बात के कारण विशेष है कि जब संविधान के प्रावधान के संदर्भ में वहां के महामहिम राज्यपाल की इस प्रकार की आलोचना की गई, तो मुझे जरूर चिन्ता हुई, क्योंकि मैं मानता हूं कि महामहिम राज्यपाल ने केवल व्यक्तिगत रूप से एक श्रेष्ठ व्यक्ति हैं, प्रामाणिक व्यक्ति हैं। लेकिन मैं यह भी मानता हूं कि वे संविधान का प्रामाणिकता से पालन कर रहे हैं। उसमें उनकी ओर से अभी तक किसी प्रकार का दोष नहीं हुआ है। लेकिन मैं एक बात और कहना चाहूंगा, यहां सदन में कई सदस्यों ने कहा कि उनको निर्देश देना चाहिए कि आप ऐसा करिए या वैसा करिए। इस बात को समझना चाहिए कि आज तक के जितने उच्चतम न्यायालय के प्रोनाउन्समेंट हुए हैं, उनके अनुसार केन्द्रीय सरकार को यह अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह किसी राज्यपाल को निर्देश दे। निर्देश नहीं देना चाहिए। मैं कैसे राज्यपाल को कहूं कि यह ठीक नहीं हो रहा है। हां, वह मुझसे पूछें कि आपकी क्या सलाह है, तो बात अलग है। संविधान को जैसा मैने समझा है और सुप्रीम कोर्ट के प्रोनाउन्समेंट को जैसा मैंने समझा है, सरकार को यह अधिकार प्राप्त नहीं है कि उनको निर्देश दें कि आप ऐसा करो। केवल मात्र कि वे मेरी पार्टी के हैं, इसलिए मैं निर्देश दूं, यह बात ठीक नहीं है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखें, तो १४, १८ और २१ फरवरी, २००२ को मतदान हुए। मतदान के बाद की स्थिति सबको पता है. किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। सबसे बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी रही और कोई कोलीज़न ऐसा नहीं बन पाया, जो बहुमत बना सके। उसमें कोई जल्दबाजी नहीं हुई। राज्यपाल ने सभी को अवसर दिया और कहा कि देखो, कुछ कर सकते हैं, तो करिए। जब वे इस नतीजे पर पहुंचे कि बहुमत नहीं हो रहा है और ऐसी एक वचित्र स्थिति वहां बनीं कि हर एक प्रमुख पार्टी चाहती है कि दूसरी पार्टी न बनें। समाजवादी पार्टी वहां प्रमुख पार्टी रही, लेकिन भारतीय जनता पार्टी वहां कई वर्षों तक रही और पिछली सरकार हमारी ही थी। किसी समय में बसपा का भी शासन रहा। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी विपक्ष की प्रमुख पार्टी रही, चाहे उत्तर प्रदेश में ताकत कम हो गई हो, लेकिन एक प्रमुख पार्टी है। सभी को एक दूसरे के प्रति एलर्जी है, विरोध है, उसके कारण कोई नहीं चाहता था कि दूसरी पार्टी बन जाए। इसीलिए कुछ समय तो कोई सरकार नहीं बनीं। सब ने कोशिश करके देख लिया, लेकिन नहीं बनीं। उसके बाद जिस नतीजे पर पहुंचें, मैं उनको दोष नहीं देता हूं, उन्होंने जो शब्द प्रयोग किए हैं, राज्यपाल ने जो सिफारिश करके भेजा है, उसमें उन्होने कहा है "From the above it is clear that neither any Party nor any coalition is in a position to form and run a stable Government in Uttar Pradesh."

 इस कारण उन्होंने सिफारिश की "Since no Party is in a majority nor any coalition with majority support has so far emerged which can provide a stable Government nor the list of MLAs supporting the Samajwadi Party has been furnished…."

 आपने कोई लिस्ट फर्निश नहीं की।

"..it is clear that no political party or coalition has been able to demonstrate that they have prima facie majority support to form a stable Government. Thus I am of the view that a situation has arisen in which the Government of the State cannot be carried on in accordance with the provisions of the Constitution. In view of the fact that no Party or coalition is in a position to form the Government, for the time being I recommend that the Legislative Assembly may, for the present, remain in suspended animation."

 उनके इस प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों ने स्वीकार किया और संसद के दोनों सदनों ने कहा कि ठीक है, उसे सस्पेंडेड एनिमेशन में रखिए, इस उम्मीद में कि शायद कुछ पार्टियां इकट्ठी हो जाएं। हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी मिल कर सरकार बना ले, लेकिन हो सकता है कि भाजपा और समाजवादी पार्टी मिल कर बना ले या भाजपा और कांग्रेस मिल कर बना ले।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : भाजपा और कांग्रेस मिल कर नहीं बना सकती, आप ऐसा मत कहिए।…( व्यवधान)कभी कांग्रेस और भाजपा ने मिल कर सरकार नहीं बनाई और न कभी भविष्य में आप ऐसी उम्मीद करिएगा।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी :मैंने हिन्दुस्तान के राजनैतिक उतार-चढ़ाव को १९५२ से लगातार देखा है और मैंने उसका जो अनुभव देखा है, मैं स्वयं उसमें से सीखा हूं। …( व्यवधान)आज माक्र्सवादी पार्टी और हम वैचारिक रूप से एक-दूसरे के बहुत खिलाफ होंगे, लेकिन हम भी एक सरकार में इकट्ठे रहे हैं और उसका कारण मुझे याद है।…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा):बाहर से समर्थन करते हैं।…( व्यवधान)

SHRI L.K. ADVANI: I am not yielding. … (Interruptions)

कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : जब देश का राष्ट्रीय नेतृत्व आपातकाल में जेलों में बंद कर दिया गया था, तब डा. लोहिया के फार्मूले पर जनता पार्टी का गठन हुआ था।…( व्यवधान)उसमें सब इकट्ठे हुए थे।…( व्यवधान)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Shri Advani, Shri Vajpayee and I had the great privilege of being in the same company attending the Prime Minister’s … (Interruptions)

SHRI L.K. ADVANI: Not merely the same company.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : We used to support them from outside.

SHRI L.K. ADVANI: Shri Somnath Chatterjee, you are forgetting that we have been together in the Bihar Government. Do not forget it. … (Interruptions)

इसीलिए मैं कहता हूं। मैं १९५२ को याद करता हूं।…( व्यवधान)मैं यह कह सकता हूं कि कांग्रेस पार्टी जिस स्थिति में आज पहुंची है, आज से २० साल पहले नहीं थी। आज जहां धीरे-धीरे करके पहुंची है, वह उन्हें धीरे-धीरे समझ में आएगा। आज हमारे साथ जितनी पार्टियां हैं, वे आज से दस साल पहले हमें छुने को, स्पर्श करने को तैयार नहीं थीं, not even with a bargepole. मैं आपको यह बात समझा रहा हूं कि किसी के मन में अहंकार नहीं रहना चाहिए। यह जो राजनैतिक अस्पृश्यता है, वह बहुत गलत है। सोमनाथ जी, मुझे याद है, १९६७ में कालीकट में हमारा एक अधिवेशन हुआ था, after the formation of Bihar Government. बिहार सरकार बनी थी, जिसमें माक्र्सवादी पार्टी भी थी।…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य : सीपीआई थी, हम लोग नहीं थे।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी :सीपीआई थी, सीपीआई भी एक माक्र्सवादी पार्टी है।

श्री बसुदेव आचार्य : आप सीपीआई बोलिए, सीपीआई(एम) मत बोलिए।

SHRI L.K. ADVANI: I do not know about … (Interruptions)

आप दोनों पहले एक थे। चीन और रूस का झगड़ा न हुआ होता तो आप दो बनते ही नहीं।…( व्यवधान)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : You are so articulate. You are such a great student of history. Therefore, you should not make such mistakes. We are rectifying your mistakes. CPI was there. I am not denying that. But CPI and CPI(M) had separated by then.

SHRI L.K. ADVANI: I did not use the word CPI(M); I simply said माक्र्सवादी, सीपीआई भी माक्र्सवादी पार्टी है। अब उनकी ताकत घट गई है। आपने उन्हें डिवोर्स, स्वेलो कर लिया है, यह बात अलग है। लेकिन प्रेक्टीकली वह भी माक्र्सवादी पार्टी है। Sir, that is not the issue; the issue at the moment is… (Interruptions)

श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज):आडवाणी जी, कालीकट के बारे में बताइए।… (Interruptions)

कालीकट में क्या हुआ, वह आप बता रहे थे।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : कालीकट में इस आधार पर हमारी आलोचना हुई कि हम सीपीआई से कैसे मिल गये और सरकार में बैठे। पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी उस समय हमारे अध्यक्ष थे। उन्होंने जो भाषण दिया, उसे मैं बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं। उन्होंने कहा कि " भारत की विडम्बना यह है कि सामाजिक क्षेत्र में अस्पृश्यता को बहुत बुरा माना जाता है लेकिन राजनैतिक क्षेत्र में अगर अस्पृश्यता का कोई पालन न करे तो उसे बुरा माना जाता है। आज हम पर आरोप लगाया जा रहा है कि हम माक्र्सवादियों के साथ मिलकर सरकार कैसे चला रहे हैं? यह जो आरोप हम पर लग रहा है यही आरोप लोग दूसरों पर लगा देते हैं कि आप जनसंघ के साथ कैसे मिल गये। मैं अपने लोगों से कहूंगा कि राजनैतिक क्षेत्र में कभी भी अस्पृश्यता का पालन मत करो" । आगे उन्होंने कहा कि"बिहार में आपको कांग्रेस के खिलाफ जनादेश मिला है, उसके कारण आप और माक्र्सवादी दोनों सरकार में हैं। इस बात पर आपको शर्म या संकोच नहीं करना चाहिए"। यह बात सन १९६७ की है।

श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : वह थ्योरी दुबारा इश्टेबलिश कीजिए।

SHRI L.K. ADVANI: Yours will be the first Party to join hands with me.

श्री प्रियरंजन दासमुंशी:कांग्रेस अस्पृश्यता के खिलाफ है लेकिन साम्प्रदायिकता के साथ उसकी लड़ाई शुरु से है। जिस दिन आप वीएचपी के दबाव से मुक्त होंगे, तब हम सोचेंगे।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी : कांग्रेस मुस्लिम-लीग से समझौता कर सकती है, लेकिन बीजेपी से नहीं करेंगे…( व्यवधान)मिजोरम में आपने जो घोषणा-पत्र दिया।…( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी:कांग्रेस ने बहुत आदमी भेजा है।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी : बहुत लोग आ जाएंगे। मेरा आपसे अनुरोध है कि जो रैलीवेंट बातें हैं वे संविधान के प्रावधान और उच्चतम न्यायालय के निर्णय हैं। बोम्मई जजमेंट रैलीवेंट है। सरकार ने स्टेट-सेंटर रिलेशन्स पर सरकारिया कमीशन बनाया था। उसने अपनी सिफारिशें दी हैं। उसमें से कुछ सिफारिशों पर सरकार ने सोच-विचार किया और इंटर-स्टेट कौंसिल ने उनमें से कुछ सिफारिशों को स्वीकार भी किया। ये तीन बातें हैं जिनके आधार पर स्वीकार करना पड़ेगा कि क्या उत्तर प्रदेश में कोई गलती हुई है? बार-बार कुछ सांसदों ने और माननीय मुलायम सिंह जी ने कहा कि अगर कोई भ्रम पैदा हो तो बोम्मई जजमेंट के अनुसार सरकार राज्यपाल को वापस बुला ले। बोम्मई जजमेंट क्या कहता है। वह कहता है कि फ्लोर टैस्ट कब करना चाहिए? जिसने भी इस पर विचार किया है उसने कहा है कि राज्यपाल को कभी यह निर्णय नहीं करना चाहिए, बल्कि निर्णय फ्लोर पर होना चाहिए। इसलिए एक बार फ्लोर पर करने के लिए उन्होंने, जब माननीय मायावती जी की सरकार बनी, तो कहा कि तीन सप्ताह में बहुमत प्रमाणित करो। भारतीय जनता पार्टी, माननीय अजीत सिंह जी की पार्टी और अन्य कुछ पार्टियों ने आपको समर्थन दिया है। उन्होंने प्रमाणित करके दिखा दिया। उसके बाद नार्मल कोर्स में उनके मन में यह था कि ६ महीने से पहले उनको अधिवेशन बुलाना पड़ेगा। पहले अधिवेशन में तो मायावती जी को प्रमाणित करना पड़ा। उसके बाद दूसरा अधिवेशन भी हुआ जिसमें बजट पास हुआ। उसके बाद यह स्थिति पैदा हुई। उनके सामने यह सवाल है कि फ्लोर टैस्ट फिर से करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। बोम्मई जजमेंट में क्या कहा गया है।

"The floor test may be one consideration which the Governor may keep in view but whether or not to resort to it would depend on the prevailing situation."

 SHRI BASU DEB ACHARIA : What is the prevailing situation?

SHRI L.K. ADVANI: The prevailing situation is before the Governor. उस प्रीवेलिंग सिचुएशन का निर्णय सोमनाथ जी, आडवाणी और मुलायम सिंह जी नहीं कर सकते।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: फ्लोर कर सकता है।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : फ्लोर कर सकता है, लेकिन फ्लोर टैस्ट करने की जरूरत है या नहीं, इसका निर्णय कौन करेगा।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: राज्यपाल।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : हां, राज्यपाल करेंगें।

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Will the Governor sit with a calculator and make calculations on a day to day basis?… (Interruptions)आज दो गये, कल तीन गये।

SHRI L.K.ADVANI: No, he will not.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : That is what he is doing. अब सात गये, अब २१० हैं।

SHRI L.K.ADVANI: No. He has not done so.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Is this the way a Governor should behave?… (Interruptions) यह क्या बात है।

कुंवर अखिलेश सिंह: गवर्नर साहब ने इस तरह के वक्तव्य देकर खुद अपनी स्थिति को संदेह के घेरे में लाने का काम किया है।

SHRI L.K.ADVANI: No. He will not do it. He will merely say. मुझे कहा गया है कि जो हमारा सैन्टर-स्टेट रिलेशन कमीशन है, उस कमीशऩ ने कहा है कि अगर आपके पास कन्विन्िंसग एवीडेन्स हो कि उनकी मैज्योरिटी चली गई है तो फिर आप करिये, नहीं तो छ: महीने में…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य : आपका चुनाव तो कन्विन्िंसग नहीं है।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : हां, कन्िंवसिंग शब्द का प्रयोग है, उसमें कोई डाउट नहीं है…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:काउंसिल के बाई-इलैक्शऩ में भाजपा के कैन्डीडेट को कितने वोट मिले, माननीय गृह मंत्री जी इससे बड़ा दूसरा प्रमाण नहीं हो सकता है।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : उत्तर प्रदेश में दुर्भाग्यवश काउंसिल और राज्य सभा के इलैक्शंस में भूतकाल में क्या होता रहा है, इससे कोई अपरचित नहीं है कि किन कारणों से लोग क्रास-वोटिंग करते हैं, कहां से कहां करते हैं, जिसके कारण हमारी सरकार को यह प्रस्ताव भी लाना पड़ा कि राज्य सभा या काउंसिल के चुनाव जो सीक्रेट वोट से होते थे, खुले वोट से होने चाहिए, उन्हें यह प्रस्ताव लाना पड़ा। कांग्रेस पार्टी ने भी कहा हम सहमत हैं। चाहे माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सहमत नहीं है। मैं जानता हूं और इसीलिए यह अभी तक पास नहीं हुआ है।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: कांग्रेस पार्टी आज भी सहमत है, आप पास कराइये।

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): आप पास कराइये, खुला मतदान होना चाहिए।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: आप लाइये, इस पर खुला मतदान होना चाहिए।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : हम लायेंगे, अभी स्टैंडिंग कमेटी में के पास गया हुआ है। स्टैंडिंग कमेटी से आते ही हम यहां ले आयेंगे। यह सरकारिया आयोग की रिकमैंडेशन है -

"If during the period when the Assembly remains prorogued and the Governor receives reliable evidence that the Council of Ministers has lost its majority... "

 कुंवर अखिलेश सिंह:विधान सभा अध्यक्ष के समक्ष ११ विधान सभा सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के लिए भाजपा और बहुजन समाज पार्टी ने याचिका दायर की है। इसके पश्चात सरकार स्वत: ही अल्पमत में आ जाती है। क्योंकि यह हमारा नहीं भाजपा और बसपा का कथन है कि इन ११ विधायकों का उन्हें समर्थन प्राप्त नहीं है, वे इनका समर्थन खो चुके हैं।

MR.SPEAKER: You cannot disturb the Minister from time to time. Every minute if you try to disturb the Minister, I cannot permit that.

Mr. Minister, you can continue your speech.

श्री लालकृष्ण आडवाणी :अगर आपने भी यह दावा न किया होता कि कांग्रेस पार्टी भले ही हमारा समर्थन न करे तो भी २०४ एम.एल.ए. हमारे समर्थन में हैं तो शायद आपकी स्थिति इतनी खराब न होती।

श्री मुलायम सिंह यादव : कांग्रेस पार्टी ने लिखा है। कांग्रेस पार्टी बॉयकाट कर जाए, कहे कि हम समर्थन नहीं करते, वह अलग बात है। २०४ में कांग्रेस पार्टी का भी नाम है। कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या सम्मिलित हैं। इसका अभी तक कांग्रेस पार्टी ने खंडन नहीं किया है।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : यह उनका दोष है। इसका दोष गवर्नर को मत दीजिए, इसका दोष हमें मत दीजिए, दोष देना है तो कांग्रेस पार्टी को दीजिए। जहां तक वहां की बात है, उसके आधार पर राज्यपाल को यह कहने का पूरा अधिकार है कि जो रिकमैंडेंशंस हैं…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :राज्यपाल जी ने स्वयं सूची मांगी। राज्यपाल जी ने एक नहीं, अनेकों बार सूंची के लिए स्वयं हमारे साथियों से कहा कि आप सूची दीजिए। यह सही है कि हम लोगों ने भी कांग्रेस पार्टी को कसौटी पर रखा और इसमें २३ कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को शामिल किया और इस तरह से सब मिलाकर २०४ की सूची हम दे आये। कांग्रेस पार्टी ने अभी तक खंडन नहीं किया है कि २०४ से हम सहमत नहीं है। कांग्रेस पार्टी बैठी है, वह कह दे कि हम सहमत नहीं है।

श्री प्रियरंजन दासमुंशी: आप विधान सभा बुलाने की व्यवस्था कीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी सब साफ हो जायेगा।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : वह व्यवस्था मैं नहीं करूंगा। वह व्यवस्था गवर्नर करेंगे। उस व्यवस्था का आपको भी अधिकार नहीं है।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: आप माननीय राष्ट्रपति जी को सलाह दे सकते हैं। माननीय राष्ट्रपति जी गवर्नर को निर्देशित कर सकते हैं। ऐसा हो सकता है। आपके कहने का तात्पर्य यह होता है कि आप महामहिम राष्ट्रपति जी को सलाह देंगे।

राष्ट्रपति जी उन्हें निर्देशित करेंगे, तात्पर्य उसका यह होता है।

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): गवर्नर को कोई भी सलाह देना बिल्कुल गलत बात है।

अध्यक्ष महोदय : मुझे मालूम है और माननीय मंत्री जी ने शुरू में ही कह दिया है।

SHRI L.K. ADVANI: The Supreme Court had said in the Bommai judgement:

"It is not possible to formulate or comprehend a set of rules for the exercise of this power by the Governor to conduct a floor test. The Governor should be left free to deal with the situation according to his best judgement …"

 Not the judgement of the Home Minister, No. "…according to his best judgement, keeping in view the Constitution and the conventions of the Parliamentary system of Government."

 These are the specific words of the Supreme Court. Whether it is the Supreme Court judgement on Bommai, or whether it is the Sarkaria Commission in respect of Centre-State relations, or whether it is the provision of the Constitution, article १७४ कांस्टीटयूशन का प्रोविज़न तो सबको पता है कि छ: महीने के अंदर-अंदर होना चाहिए लेकिन एक दूसरा प्रोविज़न है आर्टिकल १६३ which is also important. It says:

"If any question arises whether any matter is, or is not, a matter as respects which the Governor is, by or under this Constitution, required to act in his discretion, the decision of the Governor shall not be called in question on the ground that he ought or ought not to have acted in his discretion."

 This is one matter in which it is entirely his discretion whether to direct the Chief Minister or not. Therefore, I feel that the Governor has conducted himself according to the best traditions of the Constitution and norms. Therefore, nothing wrong has been done.

श्री मुलायम सिंह यादव :एक सवाल रह गया है। २०४ की सूची जो दी है उसमें बाकायदा कांग्रेस पार्टी के लीडर राज्यपाल जी के पास गए थे कि विधान सभा बुलाइए और यह सरकार अल्पमत में है। उसके बाद समाजवादी पार्टी भी, अपना दल भी और कल्याण सिंह जी वाली पार्टी, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी और उसके अलावा…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, अब चर्चा समाप्त हो रही है।

श्री मुलायम सिंह यादव : यह तथ्य देश के सामने आना चाहिए। मिलकर २०४ ने मांग की है। …( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:हम लोग पूरी तरह से गृह मंत्री जी के बयान से असंतुष्ट हैं। …( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :२०४ लोगों ने मांग की है कि यह सरकार अल्पमत में है और राज्यपाल के पास बाकायदा सूची है कि २०४ ने मांग ही है, विधान सभा बुलाइए। …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I will have to go to the next item of business. The next item on the Agenda is Item No.15. Shri Basu Deb Acharia.

   

… (Interruptions)

 

अध्यक्ष महोदय : मैं चर्चा समाप्त कर रहा हूँ।

श्री मुलायम सिंह यादव : यदि आप कहते हैं कि राज्यपाल जी मनमानी करेंगे, अगर आप इस पर अड़े हुए हैं तो हम इसको निराधार और असत्य मानते हैं और पूरी तरह से समझ गए हैं कि केन्द्र सरकार का पूरा दबाव है कि राज्यपाल जी विधान सभा न बुलाएं। इसलिए हम विरोध में सदन का बहिष्कार करते हैं।

14.42 hrs.     (At this stage Shri Mulayam Singh Yadav and some other hon. Members left the House) … (Interruptions)

 

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, the Home Minister has deliberately avoided to reply as to what, according to him as Home Minister, should have been done there. He refused to come out with a reply. Therefore, we walk out.

14.43 hrs.     (At this stage, Shri Priya Ranjan Dasmunsi and some other hon. Members left the House.)   MR. SPEAKER: Shri Acharia, please carry on.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, why did the hon. Governor ask Kumari Mayavati to have her majority tested on the floor of the House? Even after calling her to form the Government, he wanted her to prove her majority on the floor of the House because he wanted to be certain … (Interruptions)

MR. SPEAKER: This debate is over, Somnathji. If Shri Acharia does not want to move his Resolution, the next name is that of Shri Ramji Lal Suman.

SHRI BASU DEB ACHARIA : I am moving, Sir.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, after all these things have happened - openly the Members have said that they are not supporting this Government, the Congress party has also informed the Governor – why not another opportunity be given? If the Government has the majority, they will prove it. Therefore, it is clear that the Central Government is misusing the provisions of the Constitution of India and we are totally opposed to this. In protest of this, we walk out.

14.44 hrs     (At this stage, Shri Somnath Chatterjee and some other hon. Members left the House.)   MR. SPEAKER: Hereafter, nothing from the previous debate will go on record.

   

(Interruptions) … *   14.44 hrs.     (At this stage Shri Shriprakash Jaiswal and some other hon. Members left the House)   * Not Recorded