Lok Sabha Debates
Regarding Manual Scavenging -Laid. on 15 March, 2021
Seventeenth Loksabha an> Title: Regarding Manual Scavenging -laid.
SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI (NEW DELHI) : Manual scavenging is banned in India but it continues to be practiced. The number of people involved in this practice has decreased since the implementation of the Swachh Bharat Scheme. While this practice has stopped, there is a need to provide some alternate employment opportunities and skilling for effective rehabilitation.
The Government currently offers a financial support of Rs.40,000 for rehabilitation of persons who have left manual scavenging. Moreover, the transfer of the money takes place through middle men. This raises serious concerns as in many instances; the district officials deny the existence of manual scavenging. Denial by government officials makes it harder for victims of manual scavenging to rehabilitate.
Therefore, I request the Government to increase the rehabilitation amount as well as to ensure that this amount reaches the beneficiary through DBT.
*34 Title: Need to include Binhari community of Uttarakhand in the Central List of OBC -laid.
श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह (टिहरी गढ़वाल): मैं केन्द्र सरकार का ध्यान उत्तराखंड के जिला देहरादून विकासखण्ड विकास नगर में छ: राजस्व ग्राम मटोगी, मदरसू, भलेर, पपड़ियान, बातनधार तथा पस्टा में निवासरत बिन्हारी समुदाय की ओर दिलाना चाहती हूँ । मान्यवर बिन्हारी समुदाय अति पिछड़ा समुदाय है जो देहरादून जिले के अन्दर निवासरत है । उत्तराखंड में बिन्हारी समुदाय को ओ.बी.सी. का दर्जा दिया गया है, लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा बिन्हारी समुदाय को ओबीसी में सम्मिलित नहीं किया गया है । उत्तराखंड पिछड़ा आयोग द्वारा प्रदेश सरकार के माध्यम से मार्च, 2015 को सचिव राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को इस सम्बन्ध में लिखा था, परन्तु अभी तक इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार द्वारा कार्रवाई की कोई सूचना बिन्हारी समुदाय या प्रदेश सरकार को नहीं हुई है ।
मेरा केन्द्र सरकार से आग्रह है कि देहरादून जिला के विभिन्न ग्राम सभाओं में निवास करने वाले बिन्हारी समुदाय को केन्द्रीय ओबीसी सूची में शामिल कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें ।
*t35 Title: Need to accord status of central institute to 'Dr. APJ Abdul Kalam Women's Institute of Technology', Darbhanga, Bihar -laid.
श्री गोपाल जी ठाकुर (दरभंगा): डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, दरभंगा (बिहार) महिलाओं को तकनीकी रूप से शिक्षित कर उन्हें सशक्त एवम् प्रबल बनाने का अनवरत प्रयास वर्ष - 2004 से करता आ रहा है । इस संस्थान का उद्घाटन भारतरत्न, प्रख्यात वैज्ञानिक एवम् तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी के कर कमलों से हुआ था लेकिन आज यह संस्थान अपने अस्तित्व को बचाते हुए अपने लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिश करता आ रहा है । महोदय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान दरभंगा के उद्देश्य, लक्ष्य के प्रति समर्पण एवं भूत और वर्तमान की स्थिति एवं माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी के प्राथमिकताओं एवम् नारी सशक्तीकरण योजना जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढाओ के तहत इस संस्थान को केन्द्रीय तकनीकी संस्थान की मान्यता देते हुए इसे अपनाने की कृपा की जाय ताकि संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाते हुए देश एवम् समाज की सेवा करती रहे ।
*t36 Title: Regarding crimes against women in Jharkhand -laid.
SHRI JAYANT SINHA (HAZARIBAGH): The number of cases of crimes against women has been persistently increasing in the state of Jharkhand, making this issue a matter of urgent concern. Recent media reports suggest that in the first 213 days of the year 2020, 1033 cases of rape, 161 cases of dowry deaths, and 16 cases related to witch-hunting were reported.
It is the prerogative of the state government to provide security to the citizens, and engage in grievance redressal. The recent case of gangrape in Dumka district that forced the National Commission of Women to step in is a glaring example of the failure of the state government. It is distressing how the state government has failed in its duty towards ensuring the safety and security of the women of Jharkhand, and handle the law and order situation in the state.
*t37 Title: Need to set up a Textile Park in Meerut, Uttar Pradesh -laid.
श्री राजेन्द्र अग्रवाल (मेरठ): मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हृदय स्थल तथा महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यवसायिक केंद्र है । मेरठ वस्त्र उत्पादन का देश का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जो लगभग तीन लाख स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार देता है । मेरठ के निकटवर्ती अनेक कस्बे एवं नगर भी वस्त्र उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं । मेरठ का वस्त्र बिक्री का बाजार विदेश में सम्मानजनक स्थान रखता है । यहां से मध्य पूर्व तथा नेपाल इत्यादि को जहां कपड़े का निर्यात होता है वही मेरठ में निर्मित कपड़ा पूरे देश में प्रतिस्पर्धी कीमत के कारण बहुत लोकप्रिय है ।
कपड़े के डिजाइन, रंगाई, बुनाई तथा ब्रांडिंग के लिए केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय का बुनकर सेवा केंद्र स्थापित है जहां टैक्सटाइल टेक्नोलॉजी के छात्र तथा बुनकर कपड़े की गुणवत्ता बढ़ाना सीखते हैं । केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत 40 जिलों में कार्य करने वाला खादी ग्रामोद्योग आयोग का कार्यालय भी मेरठ में स्थित है । केंद्र सरकार के वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा सात नए टैक्सटाइल पार्कों की स्थापना की है ।
मेरा सरकार से अनुरोध है कि उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मेरठ में एक नए टैक्सटाइल पार्क की स्थापना करने की कृपा करें ।
*t38 Title: Need to construct foot-overbridge on both sides of platform of Chaudhary Bandh railway station in Dhanbad Railway Division -laid.
श्रीमती अन्नपुर्णा देवी (कोडरमा): पूर्व मध्य रेल के धनबाद रेल मण्डल अन्तर्गत चौधरी बांध रेलवे स्टेशन पर एक दूसरे प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए पैदल पार पुल नहीं होने के चलते रेल यात्रियों को रेलवे लाइन को पैदल ही पार करना पड़ता है जिसके कारण कई बार दुर्घटना हो चुकी है, तथा मानव जीवन की क्षति भी हुई है, चौधरी बाँध रेलवे स्टेशन के स्थानीय रेल यात्रियों के जीवन की सुरक्षा के लिए पैदल पार पुल का निर्माण कराये जाने की नितांत आवश्यकता है । अतः भारत सरकार के रेल मंत्रालय से मेरी मांग है कि जनहित में पूर्व मध्य रेल के धनबाद रेलमण्डल अर्न्तगत चौधरी बांध रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म के दोनों छोर पर पैदल पार पुल (फुट ओवर ब्रिज ) का निर्माण कराये जाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने का कार्य करे ।
*t39 Title: Need to set up a Trauma Centre in Government Medical College, Orai, Uttar Pradesh -laid.
श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा (जालौन): मेरे संसदीय क्षेत्र जालौन गरौठा भोगनीपुर के जिला जालौन में राजकीय मेडिकल कॉलेज है,जहाँ पर घायल होने वाले मरीज़ों को व्यापक आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए ट्रामा सेंटर नहीं है, आज के समय में दुर्घटना में ब्रेन हेम्ब्रेज होने की वजह से दर्दनाक मौत हो जाती है जिसमें उपचार हेतु अनुभवी डॉक्टर और विशेष संसाधनों की जरूरत पड़ती है । अस्पतालों के ट्रामा सेंटर में घायलों को तुरंत इलाज प्रदान करने की सुविधा उपलब्ध होती है, जहाँ पर गंभीर घायलों को रखकर इलाज किया जाता है, इसमें विशेष डॉक्टरों, सर्जन की ड्यूटी लगाई जाती है, जो अच्छे से इलाज करते है, और जान बचाने की पूरी कोशिश करते है | इसीलिए मेरी केंद्र सरकार से मांग है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में एक ट्रामा सेंटर खोलने की कृपा करें जिससे की क्षेत्र की जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े | *t40 Title: Need to install a 1 KW FM Transmitter for operation of FM Radio Station in Tharad city, Gujarat -laid.
श्री परबतभाई सवाभाई पटेल (बनासकांठा): प्रसार भारती निदेशालय द्वारा वर्ष 2015 में 12th प्लान के अंतर्गत गुजरात राज्य में 13 स्थानों पर 1 KW FM ट्रांसमीटर लगाने हेतु अनुमोदन किया गया था और इसमें से एक थराड शहर भी है जो एक विधानसभा क्षेत्र है और मेरे संसदीय क्षेत्र बनासकांठा लोकसभा के अंतगर्त आता है, जहाँ अबतक FM रेडियो स्टेशन का संचालन नहीं हो पाया है I थराड एक पिछड़ा हुआ मजदूर और किसान बहुल क्षेत्र होने के साथ साथ पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है । इस कारण यहाँ रडियो स्टेशन की बहुत सख्त आवश्यकता है । यहाँ FM रेडियो स्टेशन नहीं होने के कारण किसान, मजदूर, विद्यार्थी अनेक आवश्यक जन-साधारण सूचनाओं से वंचित रह जाते है उन्हें आसानी से कोई आवश्यक सूचना नहीं मिल पाती है । FM रेडियो स्टेशन संचार प्रसारण का सबसे सस्ता और सुलभ साधन भी है I मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि उक्त मामले को अपने संज्ञान में लेकर यथाशीघ्र 1 KW FM ट्रांसमीटर का इंस्टालेशन कर जल्द से जल्द FM रेडियो स्टेशन का संचालन करने की कृपा करें ।
*t41 Title: Regarding setting up of a citrus park in Manipur -laid.
DR. R.K. RANJAN (INNER MANIPUR): North-eastern region of India is the CITRUS depository of our country and it is also reported that many Citrus fruits originated from here. So, it enjoys a remarkable position in the genetic resources of the country.
Soil and climatic conditions along with physiographic landscape of the region is highly suitable for faster plant growth and fruit quality.
As many as 17 Citrus species have originated from this region.
Despite favourable genetic diversity and immense potential to raise the quality fruits, we are not doing enough for production, conservation and commercialization of these rare fruits. Climate change, depletion of natural resources, jhumming practices etc., result in genetic erosion and destruction of fruit species.
It is high time for the scientific community, planners and policy makers to think seriously for conservation and commercialization of citrus fruits of the Northeastern region.
Molecular and morphological characterization of the reported germplasm, evaluation and screening against biotic and abiotic stresses should be undertaken to safeguard and improve the existing plants. In the absence of these facilities our citrus genotypes are on the brink of extinction.
Therefore, to conserve and promote our valuable citrus genotypes, I urge upon the Union Government to set-up a CITRUS PARK under the aegis of the CENTRAL AGRICULTURAL UNIVERSITY, IMPHAL with proper funding from the Centre. This Citrus Park in the region will facilitate scientific intervention for conservation, promotion and commercialization of our exotic citrus fruits.
*t42 Title: Regarding shifting of the Divisional Headquarters of postal department from Latur, Maharashtra -laid.
श्री सुधाकर तुकाराम श्रंगरे (लातूर): उस्मानाबाद में किराए के भवन में स्थित होने, लातूर से अधिक राजस्व मिलने तथा लातूर में डाक विभाग का अपना भवन होने के कारण वर्ष 2007 में पोस्टल डिविजन का मुख्यालय उस्मानाबाद से लातूर स्थानान्तरित कर दिया गया था । इस समय यह मुख्यालय लातूर में विभाग के अपने डाक भवन में दूसरी मंजिल पर कार्य कर रहा है । उल्लेखनीय है कि यहां डाक विभाग की 2.5 एकड़ जमीन भी उपलब्ध है जहां विभाग की भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जनता के लिए डाक सेवाओं का विकास और विस्तार किया जा सकता है । मुझे ज्ञात हुआ है कि कतिपय लोग निहित राजनीतिक हितों के कारण इस पोस्टल डिविजन मुख्यालय को लातूर से उस्मानाबाद में स्थानान्तरित करने हेतु दबाव डाल रहे हैं जो विभाग के हित में नहीं है क्योंकि अपने भवन में कार्य करने से विभाग कम से कम खर्च पर अपना कार्यालय चला रहा है । यही नहीं, लातूर में डाक विभाग की 2.5 एकड़ जमीन उपलब्ध होने के कारण यहां भविष्य में डाक सेवाओं का विस्तार ही नहीं अपितु कर्मचारियों के कल्याण के लिए आवासों का निर्माण भी किया जा सकता है । अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि किसी कथित राजनीतिक दबाव में डाक विभाग के डिविजनल मुख्यालय को लातूर से उस्मानाबाद स्थानांतरित नहीं किया जाए । यही नहीं, लातूर में विभाग की खाली पड़ी जमीन पर डाक विभाग का भवन व कर्मचारियों के आवास के निर्माण हेतु आवश्यक धनराशि का आबंटन भी शीघ्रातिशीघ्र किया जाए ।
*t43 Title: Regarding underpass on level crossing no. 196 on Mahesana - Palanpur railway line in Mahesana Parliamentary Constituency, Gujarat -laid.
श्रीमती शारदा अनिल पटेल (महेसाणा): मेरे संसदीय क्षेत्र महेसाणा में महेसाणा-पालनपुर रेलवे लाईन पर स्थित फाटक सं. 193 मौजूद है । फाटक के दोनों तरफ मक्तुपुर से कामली को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता पड़ता है । लेकिन यह रास्ता अंडर पास न होने की वजह से किसी काम का नहीं रहा है । क्योंकि फाटक की पश्चिम दिशा में कामली गॉव के किसानों की जमीनें आई हुई है । किसानों को अपने खेतों में जाने के लिए वाया ब्राहमणवाडा या तो फिर उंझा होकर जाना पड़ता है जिसके चलतें 7 की.मी. का अंतर बढ़ जाता है, अब तो यह एशिया के सबसे बड़े किसान मंडी (ऐ.पी.एम्.सी.) से जुड़ा नवीन मार्केट भी बनने वाला है । अतः मेरी सरकार से गुजारिश है की जल्द से जल्द इस मामले में जरूरी कार्यवाही की जाए ताकि किसानों को आने जाने में हो रही दिक्कतों का समाधान मिल सके ।
*t44 Title: Regarding setting up of National Institute for One Health -laid.
SHRI JADGAMBIKA PAL (DOMARIYAGANJ) : Finance Minister announced setting up of National Institute for One Health. The framework of OH is expansive and thus falls under the domain of various ministries, namely- Ministry of Health and Family Welfare, Ministry of Agriculture an Farmers Welfare, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying, Ministry of Environment, Forest and Climate Change and Ministry of Science and Technology. Thus, it will require an inter-ministerial structure with a funding mechanism to address some of critical policy bottlenecks in implementing OH model for India.
We also need international expertise in a collaborative framework. However, international collaboration for public health research in India involves various permits from various agencies including the Ministry of Health"s HMSC clearance, MoEFCC"s NBA clearance and relevant forest department, panchayat etc. All of these are holding up or delaying important collaborative research.
For a OH framework, we need stakeholders from sectors of public health, veterinary health, social sciences, animal husbandry, forestry, agriculture, wildlife and ecology. I welcome the step taken by the Government and request the Government to look into these concerns.
*t45 Title: Regarding pathetic condition of Circus artists –laid .
SHRI K. MURALEEDHARAN (VADAKARA) : I would like to draw the attention of the Government towards the pathetic situation of the Circus artists. It is a fact that Circus artists are not getting due consideration for their skills either from the Central government or from the state Government. They are the worst sufferers as the circus companies have shut down their business. I, therefore, request the Government to consider the following demands. Give due consideration, as being given to the Sports and cinema, to the Circus. Constitute awards for Circus artists, Reserve 25% of the seats in the Sports Authority of India centre for the children of Circus artists. Set up a scheme to grant circus pension to the circus artists all over India and Set up Health insurance scheme for the circus artists.
*t46 Title: Regarding Blue Economy Policy -laid.
Dr. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM) : I wish to draw the attention of the Honourable Minister of Earth Sciences to the concerns surrounding the recently released draft of the Blue Economy Policy.
Seeking to regulate the marine resources of our country and the allied economy, the Policy is set to have far-reaching implications on the lives of coastal communities. Despite this, only a ten-day period was allowed for inviting suggestions on the Policy. Further, the unavailability of the document in the local vernaculars precluded the Policy benefiting from the inputs of the fisherfolk who are well-versed with the on-ground conditions.
I would, therefore, urge the Minister to release copies in all regional languages, extend the window for seeking comments, undertake consultations with fishing communities and relevant stakeholders, and introduce the Policy only after their recommendations have been incorporated so that a comprehensive Policy can be devised that contributes effectively to the growth of our blue economy.
*t47 Tile: Regarding promotion of bicycle industry -laid.
SHRI RAVNEET SINGH ( LUDHIANA) : India is the second largest producer of bicycles and produces around 1.5 crore bicycles every year. Ludhiana is the bicycle hub of the country. Entire bicycle industry has been badly hit by unfriendly environment and infrastructure for cycling in our cities. Cycling can improve health by mitigating pollution.
The Government must consider slashing GST, particularly on low-end bicycles to make them affordable for all sections of the society. The Government should also focus on developing bicycle lanes and bicycle-friendly road infrastructure. The Government needs to extend its PLI scheme under the Aatmanirbhar Bharat initiative to bicycles, e-bikes and their components to help make the sector globally competitive. Policy initiatives such as subsidy support can also boost bicycle usage in rural areas.
Thus, the Government has to play a more pro-active role through necessary financial allocations and infrastructure development to promote the bicycle industry in the country and, particularly, in Ludhiana.
*t48 Title Regarding import of Tuar (Arhar) dal -laid.
श्री प्रतापराव जाधव (बुलढाणा): केन्द्र सरकार द्वारा तुअर (अरहर) दाल का आयात किए जाने की अनुमति प्रदान किए जाने से देश के अरहर उत्पादन किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है । अरहर दाल उत्पादक किसानों का कहना है कि विगत वर्ष विश्वव्यापी कोविड महामारी के चलते और बिना मौसम की वर्षा से फसलें बुरी तरह से नष्ट हुई है, जिसकी वजह से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई और अभी हाल ही में मेरे संसदीय क्षेत्र बुलढाणा में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी बिना मौसम की भारी ओलावृष्टि से फसलें नष्ट हुई है तथा बीमा कम्पनियां भी किसानों को उनकी नष्ट हुई फसल का मुआवजा नहीं दे पा रही है । दूसरे, राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन के चलते भी किसान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे है और अब केन्द्र सरकार द्वारा तुअर (अरहर) दाल का आयात किए जाने की अनुमति प्रदान किए जाने से उन किसानों की आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो जाएगी, जिन्होंने तुअर की दाल पैदा की है और उनको उनकी तुअर दाल की अच्छी कीमत (6500/- रु. प्रति क्विंटल) भी मिल रही है । अतः यदि तुअर दाल के आयात को तुरन्त प्रतिबंधित नहीं जाता है तो ऐसी स्थिति में उनको उनकी तुअर की दाल की अच्छी कीमत नहीं मिल सकेगी और वे आर्थिक मंदी का शिकार होंगे । अतः किसानों के हित में मेरा अनुरोध है कि तुअर (अरहर) दाल के आयात पर तुरन्त रोक लगाए जाने हेतु निर्देश प्रदान किए जाए, ताकि किसानों को उनकी तुअर दाल की अच्छी कीमत मिल सके । इस संबंध में, मेरा यह भी अनुरोध है कि मई, 2021 तक यह देख लिया जाए कि तुअर (अरहर) दाल का कुल कितना उत्पादन हुआ है और यदि यह मांग के अनुरुप नहीं है तो फिर मई, 2021 के बाद तुअर दाल का आयात किए जाने पर विचार कर लिया जाए, जिससे तुअर दाल उत्पादक किसान लाभान्वित हो सके ।
*t49 Title: Need to extend basic civic amenities to people living in the forest areas in Karakat Parliamentary Constituency, Bihar.
श्री महाबली सिंह (काराकाट): मैं सरकार का ध्यान वनों मे रह रहे आदिवासियो की मूलभूत सुविधाओं के संबंध मे आकर्षित करना चाहता हूँ | मेरे संसदीय क्षेत्र काराकट (बिहार) के अन्तर्गत बिहार के जिला – रोहतास, कैमूर के जंगलो में रहने वाले करीब चार प्रखण्ड - अधैरा, चैनपुर, चेनारी, तिलौथू, नौहटा, के करीब सैकड़ों गाँव के लाखो लोग आज भी पाषाण कालीन सभ्यता जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है | जंगल व पहाड़ों से अच्छे संबंध रखने वाले लोग सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं से आज भी वंचित है | आजादी के 72 साल बीतने के बाद भी जंगलों मे रह रहे गरीब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति के लोगो को स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा व आवास जैसी मूलभूत सुविधाओ से आज भी वंचित है, जानवरों सी जिंदगी जीने को मजबूर है | अत: मै सरकार से मांग करता हॅूं कि बन सेंक्चुअरी नियम मे संशोधन करते हुए उन जंगलों मे रहने वाले लोगो को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा एव मोबाइल सेवा एवं आवास उपलब्ध कराया जाय | *t50 Title: Regarding repair and development of National Highways in Odisha.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Progress of work of several stretches of National Highways in Odisha which has been entrusted to NHAI for up-gradation to four-lane standard under NHDP Phase-III is very slow due to inadequate allocation of funds. Besides, maintenance work of NH in Odisha has been affected due to lack of funds. As all expenditure relating to development and maintenance of National Highways is provided by the MORD & Highways, the quality of NH has deteriorated substantially. Even bridges over river Mahanadi near Cuttack have become vulnerable.
I would urge upon the Government to provide adequate funds for repair, maintenance and development of National Highways with timely allocation of funds.
*t51 Title: Need to provide basic civic amenities in areas inhabited by Scheduled Tribes in Shrawasti Parliamentary Constituency, Uttar Pradesh.
श्री रामशिरोमणी वर्मा (श्रावस्ती): मेरे संसदीय क्षेत्र श्रावस्ती (उत्तर प्रदेश ) के जनपद बलरामपुर एवं श्रावस्ती के विकास खण्ड , पचपेडवा , गैसडी तुलसीपुर , हरैया सतघरवा , सिरसिया, जमुनहा, अनुसूचित जनजति बाहुल्य क्षेत्र है । जनपद बलरामपुर एवं श्रावस्ती के पचपेडवा तथा गैसडी, सिरसिया, जमुनहा में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र ( थारु जनजाति ) के लोग काफी संख्या में निवास करते हैं ,जो भारत नेपाल सीमा से सटा हुआ है । यह क्षेत्र जंगल, पर्वतो तथा नदी नालों से आच्छादित हैं । आवागमन के लिए उपयुक्त सडक नहीं है , एवं नदी नालों पर पुल भी नहीं है । मोबाइल नेटवर्क भी नहीं रहता है ,शिक्षण व्यवस्था भी नहीं है । बिजली की भी समस्या है एवं स्वास्थ्य के लिए अस्पताल की भी व्यवस्था नहीं है । सरकार से मेरी मांग है कि मेरी संसदीय क्षेत्र मे आम जनमानस के हित के लिए जनहित मे यह कार्य कराया जाना अति जरूरी है ।
*t52 Title: Regarding Telangana flagship programme to increase green cover.
SHRI KOTHA PRABHAKAR REDDY (MEDAK) :I would like to bring to kind notice of the House that the Government of Telangana has initiated State flagship programme “Telangana Ku Haritha Haram” to increase the green cover from 24% to 33% of the geographical area.
For this, an amount of Rs. 87.82 crores is required for construction of protection structures like chain link fencing, see through walls etc. meant for protection of forest lands from encroachers. An amount of Rs.4.97 crores is required under 60% of Interest amount for construction of Protection structure like chain link fencing to Yadgarpally RF block meant for protection of forest lands from the encroachment. Further, an amount of Rs.3.00 crores also required under 40% of Interest amount for establishment of monitoring Hall which is essential for monitoring of the large quantity of works, during the year 2020-21 itself which requires a total amount of Rs. 95.79 crs. under CAMPA.
*t53 Title: Need to construct a bridge over Gandak River in Vaishali Parliamentary Constituency, Bihar.
श्रीमती वीणा देवी (वैशाली): मेरे वैशाली संसदीय क्षेत्र में मुजफ्फरपुर जिला के अर्न्तगत चक्की सोहादपुर और फ़तेहाबाद में गंडक नदी पर करीब 1 किलोमीटर का बड़ा पुल निर्माण करने की जरूरत है । यदि ये पुल बन जाये तो मेरे संसदीय क्षेत्र वैशाली से सिवान, छपरा, गोपालगंज की दूरी काफी कम हो जाएगी जिससे लोगो को आने जाने में काफी सुविधा होगी और उनके समय की भी बचत होगी ।
*t54 Title: Regarding pension scheme for employees of Jawahar Navodaya Vidyalayas and Navodaya Vidyalaya Samiti.
SHRI KESINENI SRINIVAS (VIJAYAWADA): Pension is now being accorded to employees of Jawahar Navodaya Vidyalayas and Navodaya Vidyalaya Samiti. The government is slated to invest INR 6000 crores for the purpose and to maintain the fund with Life Insurance Corporation of India.
The biggest problem with this arrangement is that government has to invest a lot of money and the scheme is structured in such a way that if a person dies within a year or two of his/her retirement, the government statutorily forgoes his/her contribution.
An alternative provided by the members of Navodaya Vidyalaya Samiti Staff Association is to regard them as Central Civil Services Pensioners. Herein, the government would not have to invest anything and even would get interests on the corpus received as contribution from employees.
It is on these lines that I request the Minister to look into this matter and grant the Navodaya Vidyalaya Samiti employees a secure future.
___________ …(व्यवधान)
माननीय सभापति : अरविंद जी, यह जीरो ऑवर था । अब वह समाप्त हो गया ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अरविंद जी, आपको अपनी बात कहने का मौका दिया । अब बैठिये । अब प्लीज बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अरविंद जी, प्लीज बैठिए । अब हो गया । All the Karnataka Members, please sit down. Arvind Ji, you also sit down.
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा ।
श्री राम कृपाल यादव जी ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अरविंद जी, अब हो गया । आप बैठिए ।
श्री राम कृपाल यादव जी, आप बोलिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : रेलवे, डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए आज लंच टाइम स्किप होगा । माननीय सदस्य, इसमें अपनी बात कहेंगे ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : राम कृपाल जी, एक मिनट, मेरे को बात करने दीजिए । अरविंद जी, आपकी बात आ गई है । राम कृपाल यादव जी को बोलने दीजिए । आपकी बात रिकार्ड पर आ गई है । वह सब कुछ रिकार्ड पर नहीं है । आप ही की बात रिकार्ड पर है ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपकी बात रिकार्ड पर आ गई है ।
राम कृपाल यादव जी, अब आप बोलिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : उदासी जी, आपको क्या कहना है?
…(व्यवधान)
SHRI S.C. UDASI (HAVERI): Thank you Madam.
HON. CHAIRPERSON: Udasi Ji, please finish within less than one minute.
*t55 Title: Issue regarding disturbances in the border of Karnataka and Maharashtra.
SHRI S.C. UDASI: The hon. MP here wants just to distract and avoid the attention of Maharashtra people with regard to their misrule. They are repeatedly unnecessarily raising this issue which has been resolved long back. Mazhar Report has come in 1964. वर्ष 1964 में उसकी फाइनल रिपोर्ट आ गई । Shiv Sena has compromised Hindutva for the sake of power. Now, they want to raise this MOT issue which is unnecessary and giving an opportunity for disturbances in the border of Karnataka and Maharashtra. Thank you, Madam.
*t56 Title: Association of Hon'ble Members with the issues raised under Matter of Urgent Public Importance.
LIST OF MEMBERS WHO ASSOCIATED THEMSELVES WITH THE ISSUES RAISED UNDER MATTERS OF URGENT PUBLIC IMPORTANCE सदस्य, जिनके द्वारा अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय उठाये गये ।
सदस्य, जिन्होंने उठाए गए विषयों के साथ स्वयं को सम्बद्ध किया ।
Shri Subhash Chandra Baheria Shri C. P. Joshi Shri Ramesh Chander Kaushik Shri C. P. Joshi Shri Narendra Kumar Shri C. P. Joshi Shrimati Jaskaur Meena Shri C. P. Joshi Shri Arvind Sawant Shrimati Supriya Sadanand Sule *t57 Title: Further discussion on the Demand for Grant No. 84 under the control of the Ministry of Railways (Discussion not concluded).
श्री राम कृपाल यादव (पाटलिपुत्र): सभापति महोदया, मैं रेलवे की अनुदान मांगों के समर्थन में अपनी बात कह रहा हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: उदासी जी, अब बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, ये डिस्टर्ब कर रहे हैं ।
माननीय सभापति : आप कान पर लगाइए और अपनी बात कहिए, डिस्टर्बेंस बहुत देर तक नहीं चलेगा ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : राम कृपाल यादव जी, आप मेरी तरफ देखकर अपनी बात कहिए ।
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, मैं आपसे आग्रह कर रहा था । जिस तरह से रेल कर्मियों ने खासकर कोविड समय में सारी चुनौतियों का मुकाबला करते हुए एक उदाहरण पेश किया । मैंने कई बातों का जिक्र किया, उसे आपकी अनुमति से आगे भी जारी रखना चाहता हूं ।
कोविड मरीजों के लिए 215 स्टेशनों को केयर सेंटर के रूप में तब्दील किया गया । इनमें से 85 स्टेशनों को हेल्थ केयर की सुविधा दी गई । देश के विभिन्न शहरों से 4641 श्रमिक ट्रेनें चलाकर तेतालीस लाख लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया गया, यह बहुत बड़ी अचीवमेंट है । दो करोड़ से अधिक लोगों को फूड पैकेट बांटे गए और पचपन हजार लीटर पानी भी बांटा गया, यह बहुत बड़ी अचीवमेंट है । लॉकडाउन के दौरान भारतीय रेल ने बहुत दिनों से लटके हुए लगभग 353 प्रोजेक्ट, जिनमें मेजर पुल और ट्रैक को पूरा किया गया, यात्रियों को सुविधा दी गई और खाना भी बांटा गया । इसके अलावा जो लंबित काम थे, उसको भी अपनी क्षमता को अधिक बढ़ाकर कार्य को पूरा करने का काम किया ।
महोदया, प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने आपदा को अवसर में बदलने की अपील की थी । देशवासियों की जान और जहान की भी चिंता करने का काम किया । वहीं कुछ महानुभाव लोग बैठे हुए हैं जो राजनीतिक गोटी सेंक रहे थे । इस कोविड जैसी आपदा के समय में भी रेल को राजनीति से अलग नहीं रखा, मजाक उड़ा रहे थे, मखौल उड़ाने का काम कर रहे थे । मोदी जी पूरे देश के साथ खड़े थे । भारतीय रेल लोगों की जान और जहान की चिंता करने का काम कर रही थी । कुछ पोलिटीकल पार्टी के लोग रेल गाड़ियां चलाने के लिए लोगों को भड़काने का भी काम कर रहे थे । आजकल राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर गया है । जब कोई आपदा आती है, विपत्ति आती है, हम सभी लोग मिलकर उसका मुकाबला करते हैं । कुछ पोलिटीकल पार्टी और खासकर कांग्रेस पार्टी का धीरे-धीरे अस्तित्व ही खत्म हो रहा है, आने वाले दिन में इसका कोई नामलेवा भी नहीं रहेगा, यह लोगों की नजरों से भी गिरती जा रही है ।
मैं केन्द्र और राज्य सरकारों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं, दोनों सरकारों ने बेहतरीन समन्वय बनाकर कोरोना काल को मजबूती से फेस करने का काम किया । मैं पुन: अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी जिस पर हमें और देश को गर्व है, प्रधानमंत्री और रेल रेल मंत्री के प्रति मैं आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने कितनी कुशलता के साथ कोरोना जैसे संकट से निपटने का काम किया और लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया । यही नहीं, मैं पुन: दिल से सैल्यूट करता हूं, 13 लाख रेलकर्मियों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना कोरोना काल में अभूतपूर्व काम किया । मैं उन्हें सैल्यूट करना चाहता हूं, सलाम करना चाहता हूं ।
हमारी सरकार ने रेल बजट को देश और राज्य के अनुसार राजनीतिक बजट में घोषणा करने का काम नहीं किया और यथार्थ में रेल बजट बनाया । पहले रेल की योजनाएं अटकती थीं, लटकती थीं और भटकती थीं, अब वह सिस्टम खत्म हो गया । माननीय प्रधान मंत्री जी के कुशल नेतृत्व में अब न रेल परियोजनाएं अटक रहीं हैं, न भटक रही हैं, बल्कि इसे जमीन पर उतारने का काम किया जा रहा है ।
इस रेल बजट में राष्ट्रीय रेल योजना की बात कही गई । यह योजना आर्थिक, व्यापारिक और यात्रियों की सुविधा के दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दे रही है । पूर्ववर्ती सरकारों में एक चलन था, मैं पुराना मैम्बर रहा हूं, मैं अच्छे ढंग से जानता हूं । मैं यूपीए में भी रहा हूं, मैं उसके कार्यकाल को भी जानता हूं और अब एनडीए के कार्यकाल को भी जानता हूं । खास तौर से मैं माननीय प्रेधान मंत्री जी के नेतृत्व में 2014 से बनी नई सरकार को भी करीब से जान रहा हूं । पहले अपनी सुविधा के अनुसार लोग रेल परियोजनाओं की घोषणा कर देते थे कि लोगों को लाभ मिले और हमारा वोट बैंक मजबूत हो । इससे होता यह था कि अरबों-खरबों रुपये की योजना घोषित कर दी जाती थी, लेकिन काम नहीं होता था । इसके बाद दूसरे रेल मंत्री की प्राथमिकता अलग हो जाती थी । इस हाल में हजारों-करोड़ों रुपये की योजना पैंडिंग पड़ी रहती थीं । मैं उसी का जिक्र अपने क्षेत्र के बारे में करना चाहता हूं । वर्ष 2007 में यूपीए सरकार के समय जो रेल मंत्री जी थे, मैं भी उसी दल का सदस्य था । उस समय के रेल मंत्री जी से हमने बहुत विनती की, बहुत आवाज उठाई कि बिहटा से औरंगाबाद रेल लाइन बिछाई जाए । इस इलाके में लोगों ने आज तक रेल लाइन देखी ही नहीं है । सरकार ने बात मान ली, सर्वे कराया, सैंक्शन हो गया, सब कुछ हो गया लेकिन राशि नहीं मिली । तत्कालीन रेल मंत्री ने शिलान्यास भी किया । उस समय की लागत 3326 करोड़ रुपये थी । रेल मंत्री जी से आग्रह कर रहा हूं, लेकिन वह कुछ सुन ही नहीं रहे हैं । मैंने कितनी बार आग्रह किया, विनती की, हाथ जोड़े, पैर पकड़े और अब फिर पकड़ रहा हूं । उस सरकार ने गलती की, उस समय पैसा देना चाहिए था, आप उस गलती को सुधार दें तो आपकी बड़ी कृपा होगी । आपने मुझे आश्वासन भी दिया कि आप धैर्य से रहो, मैं इस काम को करूंगा । आप पार्ट-पार्ट करके करवा दीजिए । आप बहुत बोझ उठा रहे हैं, देश के पैमाने पर ऐसी कई योजनाएं हैं, जिसे आप पूरा कर रहे हैं । आप बिहटा-औरंगाबाद लाइन को पूरा कर दीजिए, मैं आपका और माननीय प्रधान मंत्री जी का जिंदगी भर आभारी रहूंगा ।
अब पैंडिंग प्रोजेक्ट का समय निकल गया, अब कोई भी पैंडिंग नहीं है । बिहार और पूरे देश में जितनी पैंडिंग योजनाएं हैं, सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर उन्हें पूरा करने का निर्णय लिया है । माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देश पर कार्यवाही शुरू हो गई । जहां काम नहीं हुआ वहां देश का पैसा बेकार हो गया, लोगों का पैसा लग भी गया और लोगों के काम भी नहीं आ रहा है । अब सरकार ने उस प्रकार की पेंडिंग योजना को बंद कर दिया है । काम प्रारंभ होता हैं, तो काम का अंत भी होता है । उसके लिए हर साल पैसा प्रावधान करने का काम किया जाता है । अब, तो जो भी योजना बन रही है, उसके लिए पूरा पैसा दिया जा रहा है । पिछली सरकारों द्वारा जिस काम को अपनी सुविधा के लिए, अपने फायदे के लिए, अपने वोट बैंक के लिए अधूरा छोड़ दिया गया था, उस काम को भी पूरा करने काम हमारी सरकार कर रही है । इसीलिए, मैं रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं । मुझे पूरा भरोसा है कि आप पूरी मुस्तैदी के साथ इस काम को पूरा करने में योगदान दे रहे हैं । मैं एक उदाहरण और देता हूं । मैं बिहार से हूं, इसलिए बिहार की बात करना मेरे लिए आवश्यक है । प्रधान मंत्री मोदी जी के निर्देश पर माननीय रेल मंत्री जी ने 87 सालों के बाद बिहार के निर्मली क्षेत्र तक रेल निर्माण का काम पूरा किया है । मैं पुन: माननीय प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी को सैल्यूट करना चाहता हूं, जिन्होंने 87 सालों के बाद, न जाने कितनी जेनरेशन निकल गईं, उस सपने को पूरा किया यह हमारी सरकार की काम करने की प्रतिबद्धता और क्षमता है । उस रेल लाइन पर ट्रेन स्पीड से चल रही है । ट्रायल का काम भी हो गया । मार्च, 2020 तक 7,49000 करोड़ की लागत वाली नई लाइन की 189, अमान परिवर्तन के 54 और रेल दोहरीकरण के 270, यानी कुल मिलाकर 513 प्रोजेक्ट्स में से 1,85000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पूरे कर दिए गए हैं । इतने बड़े काम इस सरकार ने किए हैं । 55,000 किलो मीटर के कुल प्रोजेक्ट्स में से 10,000 किलो मीटर के काम पूरे किए गए हैं । यह प्रतिबद्धता है । हम रेल बजट पर पहले से ज्यादा पैसा दे रहे हैं । चूंकि सरकार काम करना चाहती है । मैंने आपको पहले दिन ही कहा था कि रेल लाइफ लाइन है । यह लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है । इसलिए, यह हमारी सरकार की प्राथमिकता है । पेंडिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए, यूपीए के समय में, मैं उसकी तुलना भी करना चाहता हूं, यूपीए के लोग यहां पर बैठे हुए हैं, यूपीए के समय में वर्ष 2009 से 2014 तक 11,527 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जाते थे । हमारी सरकार, जब से आदरणीय और यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी आए, जिनकी विकास के प्रति प्रतिबद्धता है, उसी विकास को हम मुख्य रूप से अमलीजामा पहनाने के काम कर रहे हैं । वर्ष 2009 से वर्ष 2014 तक 11,527 और इस बार वर्ष 2021-22 में 45,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं । इतना बड़ा अंतर है । हम यूपीए सरकार की तुलना में 292 प्रतिशत अधिक की राशि खर्च कर रहे हैं । ये लोग क्या बात करेंगे? इनके पास बोलने के लिए कुछ है क्या? हम लोग बोलते हैं ‘थेथरई में पीएचडी करना’, तो ये विपक्ष के जो लोग हैं, थेथरई में पीएचडी कर रहे हैं । हम इन आंकड़ों के माध्यम से इन लोगों को आईना दिखा रहे हैं । जहां यूपीए सरकार ने वर्ष 2009 से वर्ष 2014 तक 7,599 किलो मीटर के प्रोजेक्ट्स पूरे किए, वहीं हमारी सरकार ने वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक 73 परसेंट से अधिक 13,124 किलो मीटर के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का काम किया है । आजादी के बाद यह एक रेकॉर्ड है । रेल मंत्रालय द्वारा विकास का काम इतनी रफ्तार से किया गया है, जो अपने-आप में एक रेकॉर्ड है । यह है यूपीए सरकार और एनडीए सरकार का अंतर । यह सोच का अंतर है । हम प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं । विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता है ।
माननीय सभापति: आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, इतनी जल्दी, अभी तो मैंने बोलना प्रारंभ ही किया है । मैं पहला वक्ता हूं । अभी सरकार की उपलब्धियों की मैंने शुरुआत की है । प्लीज हेल्प मी । मैं बहुत दिनों के बाद बोल रहा हूं । आपकी कृपा होगी, तभी मैं बोल पाऊंगा ।
माननीय सभापति: राम कृपाल जी, बहुत लंबी लिस्ट है ।
श्री राम कृपाल यादव: सबकी लिस्ट है, लेकिन मैं पहला वक्ता हूं । पार्टी का बहुत समय है । पार्टी का निर्देश होगा, तो मैं बैठ जाऊंगा । मैं पूरे डिटेल में बता रहा हूं । मैं कोई इधर-उधर की बातें नहीं कर रहा हूं । मैं आंकड़ों के साथ बोल रहा हूं ।
असम और नॉर्थ-ईस्ट, हर जगह हमारी सरकार की प्राथमिकता है । हमारे प्रधान मंत्री जी ने ही कहा है कि पूरे देश में जो उपेक्षित और पिछड़े इलाके हैं, हम उनको भी प्राथमिकता के आधार पर विकास से जोड़ने का काम करेंगे । यही कारण है कि असम और नॉर्थ-ईस्ट में यूपीए की सरकार ने वर्ष 2009 से 2014 तक जो काम किया था, वहां प्रतिवर्ष 2,122 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी । वहीं मोदी जी और हमारी सरकार ने वर्ष 2014 से 2020 तक 156 प्रतिशत अधिक राशि दी है । हमने प्रतिवर्ष लगभग 5,488 करोड़ रुपये दिए हैं । यूपीए सरकार की तुलना में हमने 156 प्रतिशत अधिक राशि नॉर्थ-ईस्ट और असम को देने का काम किया है । यह हमारी प्रतिबद्धता है । नॉर्थ-ईस्ट का स्वरूप बदल गया है । सिर्फ रेलवे में ही नहीं, बल्कि हर चीज में किया गया है । कोई जाकर पता करे कि हमने कितना काम किया है । कोई तुलनात्मक अध्ययन कर ले । हमारी छः और सात की यह उपलब्धि है कि हमने नॉर्थ-ईस्ट को मुख्य धारा में लाने का काम किया है । वहां की जनता की नीड थी । हम वोट बैंक के स्तर से काम नहीं करते हैं । हम उससे ऊपर उठकर काम करने का काम करते हैं । यही कारण है कि पूरे देश के पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत अधिक बढ़ा है ।
अब केरल पर आइए । यहां पर केरल के साथी बैठे हैं या नहीं बैठे हैं, मुझे मालूम नहीं है । केरल में यूपीए की सरकार ने वर्ष 2009 से 2014 में प्रतिवर्ष 372 करोड़ रुपये दिए थे । वहीं मोदी सरकार ने वर्ष 2014 से 2020 तक 143 प्रतिशत अधिक राशि खर्च की है । केरल के लिए यह हमारी प्रतिबद्धता है । हम केरल के लिए प्रतिवर्ष लगभग 903 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने का काम कर रहे हैं । केरल में तो हमारी सरकार नहीं है । हम वहां संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हमने कोई भेदभाव नहीं किया है । ये लोग भेदभाव करने वाले लोग थे । कुर्सी पर बैठकर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों ने भेदभाव किया है । जहां वोट मिल रहा है, जिस राज्य में उनकी सरकार है, वहां काम किया और बाकी को छोड़ दिया । यही कारण है कि इन लोगों ने नॉर्थ-ईस्ट और केरल को बर्बाद कर दिया है । इन लोगों ने बंगाल को बर्बाद कर दिया है । अब मैं बंगाल पर भी आता हूं । मैं तमिलनाडु पर भी आता हूं ।
यूपीए सरकार ने तमिलनाडु में वर्ष 2009 से 2014 में प्रतिवर्ष 879 करोड़ रुपये दिए हैं । वहीं मोदी जी की सरकार ने वर्ष 2014 से 2020 तक यूपीए सरकार से 133 प्रतिशत अधिक राशि खर्च करने का काम किया है । हम प्रतिवर्ष लगभग 2,051 करोड़ रुपये की राशि देने का काम कर रहे हैं । पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021-22 में 663 करोड़ रुपये दिए गए हैं । वर्ष 2009 से 2014 में यूपीए सरकार की तुलना में हमने पश्चिम बंगाल से 51 प्रतिशत अधिक राशि खर्च करने का काम किया है । यह हमारी प्रतिबद्धता है । पूरे देश में 8,700 स्टेशन्स हैं । उनमें से 5,961 स्टेशनों पर लोगों की सुविधा के लिए वाई-फाई की सुविधा दी गई है । 774 स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ियां लगाई गई हैं । दानापुर में कभी ऑटोमेटिक सीढ़ियां नहीं थीं । वहां भी इसको दिया गया है । यही नहीं, पूरे देश में चाहे छोटे स्टेशन्स हों, बड़े स्टेशन्स हों, हॉल्ट्स हों, सभी जगहों पर आधुनिकीकरण किया गया है । वहां पानी नहीं था, बिजली नहीं थी, प्लेटफॉर्म नहीं था, उसके शेड नहीं थे, वहां सीढ़ियां नहीं थीं, माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देश पर माननीय रेल मंत्री जी के नेतृत्व में रेल मंत्रालय ने साफ-सफाई में तो ऐतिहासिक काम किया है । आप वहां जाकर देखिए न । आपको पहले की अपेक्षा कितना ज्यादा फर्क नज़र आएगा । …(व्यवधान)
महोदया, 900 स्टेशनों पर लाइटिंग की व्यवस्था की गई है । आपके दिल्ली में स्टेशन होगा न?…(व्यवधान) आप देखिए कि दिल्ली में वर्ल्ड लेवल का स्टेशन बन गया है । किसने किया है? माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी की अगुआई में माननीय रेल मंत्री जी ने इसको करने का काम किया है, इसलिए हम इनको धन्यवाद ज्ञापित करते हैं ।….(व्यवधान) आप भी धन्यवाद दे रही होंगी । …(व्यवधान) बड़े स्टेशनों पर राष्ट्र का संरक्षण किया है । हमने सभी स्टेशनों पर 100-100 मीटर तिरंगा लहरा दिया है । उसकी क्या भव्यता लग रही है । हमारा देश और राष्ट्रीय झंडे के प्रति यह कमिटमेंट है । क्या ये लोग ऐसा कभी करेंगे? क्या इनकी ऐसी सोच थी? इन लोगों ने 60 सालों तक शासन किया । क्या इनकी कभी ऐसी सोच थी? ऐसी सोच ही नहीं थी । लूटो, खाओ, चलते जाओ । इसी वजह से देश बर्बाद हो गया । ये हालात थे । आप अब जाकर देखिए, एयरपोर्ट और स्टेशन में कोई फर्क ही नजर नहीं आता है । हमने किस तरह के हालातों को किस तरह से बदलने का काम किया है । भारतीय रेल में माननीय प्रधान मंत्री जी के कुशल निर्देशन में सुरक्षा और संरक्षण पर काफी जोर दिया गया है । अप्रैल 2019 से लेकर अब तक रेल दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है । एक यात्री का भी नुकसान नहीं हुआ है । वर्ष 2018-19 में 59 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं । हमने सुरक्षा पर काम किया है, जिसकी वजह से वह वर्ष 2020-21 में घटकर मात्र 18 रह गई हैं । आप हर दिन देखते होंगे कि पहले की सरकार ने रेलवे को बिल्कुल भी सीरियस लेने का काम नहीं किया था । इसलिए दुर्घटनाएं बढ़ती जाती थीं । इस पर आज हम सब काम कर रहे हैं । माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देशन में हम डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सुनते आ रहे थे, लेकिन उसके क्या हालात थे, उसको हम सब जानते हैं । जब इन्हें सेवा करने का मौका मिला था तो डीएफसी पर केवल एक किलोमीटर का काम हुआ था । हमने उसको बढ़ाया है और आज उस पर 600 किलोमीटर का काम हुआ है । हमारा गर्व से सीना चौड़ा होता जा रहा है । यह हमारी काम करने की प्रतिबद्धता है । 600 किलोमीटर पर ट्रेन चलनी भी शुरू हो चुकी है और माल ढुलाई का काम भी प्रारंभ कर दिया गया है । डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश की आर्थिक उन्नति के लिए गेम चेंजर साबित होगा । इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे । पूर्वी राज्यों से, पश्चिमी राज्यों से जो पिछड़े हैं, उनकी गतिविधियां बढ़ेंगी । देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बेरोजगारी भी दूर होगी ।
1 मार्च, 2021 तक ब्रॉडगेज लाइन का कुल 64 हजार 689 रूट किलोमीटर में से 42 हजार 859 रूट किलोमीटर, यानी 66.26 प्रतिशत रूट्स का विद्युतीकरण भी हो गया है । यह बहुत तेजी से हो रहा है । दिसम्बर, 2023 तक देश के 100 परसेंट ब्रॉडगेज लाइन्स का विद्युतीकरण हो जाएगा और पर्यावरण प्रदूषण की भी समस्या कम हो जाएगी । यह हमारी प्रतिबद्धता है । अभी हाल में सोनार-बांग्ला की सभी बिजी लाइन्स पूरी तरह से इलैक्ट्रिफाइड हो गई है । हमारी बंगाल के प्रति काम करने की भावना दिख रही है । वर्ष 2030 तक भारतीय रेल शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला रेल नेटवर्क हो जाएगा । इस लक्ष्य को पाने वाला यह दुनिया का पहला रेलवे होगा । हम अभी चौथे स्थान पर हैं । हम पहले नंबर पर आने की कोशिश कर रहे हैं । माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देशन में रेल मंत्री पीयूष गोयल जी 13 लाख कर्मचारी और अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं । इस बार बजट में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर जोर देते हुए थ्री टियर वातानुकूलित डिब्बों के निर्माण की मंजूरी दी गई है । इन डिब्बों को अधिक आरामदेय बनाया गया है, जिसमें सीट्स भी अधिक होंगी और इसी तरह पर्यटन वाले मार्गों पर भी नई एलएचबी विस्टाडोम कोचेस उतारने की योजना पर जोर देने का काम किया गया है । साथ ही उच्च सघनता वाले मार्गों पर शौचालय संरक्षण प्रणाली को लगाने का भी निर्णय लिया गया है । हम हर दृष्टिकोण से देख रहे हैं और काम कर रहे हैं । वित्तीय वर्ष 2021-22 के आम बजट में भारतीय रेल को सर्वाधिक 2.15 लाख करोड़ रुपये का कुल पूंजीगत व्यय आबंटित किया गया है । यह बहुत बड़ा काम है । कोरोना से जूझते हुए हम आबंटित करने का काम कर रहे हैं । चूँकि हम विकास से कहीं पर कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं । पिछले साल की तुलना में 33 परसेंट से अधिक राशि आबंटित करने का काम किया गया है । इसमें 1 लाख 7 हजार तीन सौ करोड़ रुपये की सकल बजटीय सहायता शामिल है । इसके अलावा सरकार ने वर्ष 2030 के लिए राष्ट्रीय रेल योजना की भी घोषणा की है, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगी । इसमें डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के विकास और पटरियों के विद्युतीकरण पर भी जोर देने का काम किया गया है । मैंने नेशनल प्रोजेक्ट्स की चर्चा की है, नॉर्थ ईस्ट और जे.एंड.के. में विशेष तौर पर नेशनल प्रोजेक्ट बनाकर इसमें भी राशि देने का काम किया गया है । एल.एच.बी. कोच प्रोडक्शन, वर्ष 2014-15 में 555 था, यह वर्ष 2019-20 में बढ़कर 6277 हो गया । इससे हमारी कार्यक्षमता देखिए कि हम कितना काम कर रहे हैं । सबसे बड़ी बात यह है ।
मैडम, रायबरेली में एक कोच फैक्टरी प्रारम्भ हुई थी, लेकिन वह एक शो-केस बनकर रह गई । वहां एक भी कोच नहीं बना । …(व्यवधान) मैडम, मैं पांच मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूं । अगर पांच मिनट से ज्यादा समय लगे तो मुझे बैठा दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: राम कृपाल यादव जी, आखिरी मिनट है, इसमें आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, मैं हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं, मैं अपनी बात खत्म कर दूंगा, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है । मैं कन्क्लूड कर रहा हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आपकी बात ठीक है, लेकिन अब समाप्त कीजिए ।
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, मैं बता रहा था कि रायबरेली में जो कोच फैक्टरी खुली थी, वह कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता का क्षेत्र है, लेकिन वहां कुछ भी नहीं हुआ । हमारे प्रधानमंत्री जी वहां देखने के लिए गए थे, हम सब चीजों से ऊपर उठकर काम करते हैं । प्रधानमंत्री जी ने वहां जाने के बाद माननीय रेल मंत्री जी को निर्देशित किया कि इसमें ठीक से काम कराइए । प्रधानमंत्री जी के निर्देश पर माननीय रेल मंत्री जी ने उसमें त्वरित गति से कार्रवाई की । मैं आपको बताना चाहूंगा कि पहले जहां एक भी कोच नहीं बनते थे, अब वहां 1500 कोच बनाने का काम प्रारम्भ किया गया । अभी हाल ही में, दो दिन पहले विदेश में भी वे कोच गए हैं । यह हमारी प्रतिबद्धता है । वर्ष 2018-19 में 605 इलेक्ट्रिकल इंजन बने, वहीं वर्ष 2019-20 में 785 कोच बने । 605 कोच वे बना रहे थे और हम 785 कोच बना रहे हैं । वर्ष 2014-15 में यूपीए सरकार के रिजीम में 2050 डीजल इंजन बने थे, वर्ष 2019-20 में हमने 784 डीजल बनाए । मैं इसकी तुलनात्मक चर्चा कर रहा हूं । वर्ष 2014 के पहले इंटरनेट से 200 टिकट प्रति मिनट बुकिंग करने की क्षमता थी, अब यह बढ़कर 25,000 टिकट प्रति मिनट हो गई है । यह देखिए कि रेल मंत्री जी के मार्ग निर्देशन में कितना बड़ा अचीवमेंट हुआ है । किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए भारतीय रेल ने कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों सहित विभिन्न किसानों के साथ अब तक 41 मार्गों पर किसान रेल का संचालन शुरू किया है । पहली किसान रेल सेवा 7 अगस्त, 2020 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने देवाली, महाराष्ट्र और हमारे क्षेत्र दानापुर, बिहार के बीच हरी झण्डी दिखाने का काम किया । प्रधानमंत्री जी ने 28 दिसम्बर, 2020 को महाराष्ट्र के संगोला और पश्चिम बंगाल के शालीमार के बीच चलने वाली 100वीं किसान रेल सेवा को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया था । इसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करना चाहता हूं । उनकी जो चिन्ता और पीड़ा है कि हर जगह के किसानों को सुविधा मिले, उसमें रेल ने भी सुविधा प्रदान करने का काम किया है । 5 मार्च, 2021 को 355 किसान रेल सेवाएं शुरू की जा चुकी है और एक लाख 11 हजार टन से अधिक माल ढुलाई हो रही है । फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय द्वारा ऑपरेशन ग्रीन्स स्कीम के तहत फल और सब्जियों का किसान रेल ट्रांसपोर्टेशन के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी भी प्रदान करने का काम कर रही है । प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि किसान रेल और किसान उड़ान से बड़े बाजारों तक पहुंचने में छोटे किसानों को मदद मिलेगी । आज यह काम हो रहा है । किसान रेल कहने के लिए सामान ढोने की एक व्यवस्था है, लेकिन उनसे दूर-सुदूर के किसानों को दूसरे राज्यों के बाजारों से जोड़ने का काम किया है । इससे किसानों को लाभ होगा ।…(व्यवधान)
किसान रेल समय सारणी के अनुसार संचालित की जाती है । इनके मार्ग में बाधा न आए, देरी न हो, इसके लिए कड़ी निगरानी होती है । आज मैं जिस ट्रेन से आया हूं, वह आधा घण्टे पहले स्टेशन पर आ गई । पहले जो ट्रेन तीन-चार घण्टे लेट जाती थी, अब आधा घण्टा बिफोर टाइम चल रही है, यह है हमारी कार्यक्षमता और यह हमारी प्रतिबद्धता है । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय रेल मंत्री जी को पुन: धन्यवाद देना चाहता हूं, जिनके मार्ग निर्देशन में यह सब काम हो रहे हैं । भारतीय रेल ने वर्ष 2030 तक अपनी क्षमता संबंधी कमियों को दूर करने तथा माल ढुलाई परिवर्तन में औसत भागीदारी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय रेल योजना बनाई है । इस दीर्घकालीन योजना का उद्देश्य रेल के नेटवर्क की क्षमता, सुविधा और व्यापार में औसत हिस्सेदारी बढ़ाना है । इस रेल योजना के तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं का तय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य है । रेलवे की योजना है कि वर्ष 2030 की मांग से अधिक क्षमता विकसित करने की है । वर्ष 2050 तक जरूरत को पूरा करने में यह सक्षम होगी । साथ ही योजना का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन घटाने और वर्ष 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की औसत हिस्सेदारी को मौजूदा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 45 परसेंट करना है । इसके अलावा मालगाड़ियों की औसत गति को 22 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा ढुलाई में करने का काम करना है ।
महोदया, नए मार्गों के लिए सर्वाधिक 40,932 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की गई है । समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में यह राशि 26,779 करोड़ रुपये व वित्तीय वर्ष 2019-20 में 29,971 करोड़ रुपये थी । इसी प्रकार रेल मार्गों के दोहरीकरण और तिहरीकरण के लिए 26,116 करोड़ रुपये का प्रावधान है । वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 22,231 करोड़ रुपये तथा 2019-20 में 21,545 करोड़ रुपये था । इसके अलावा सुविधाएं विकसित करने के लिए भी है । …(व्यवधान) मैं अपने क्षेत्र की कुछ डिमाण्ड रखना चाहता हूं ।
माननीय सभापति : राम कृपाल जी, अब आप बैठिए ।
श्री राम कृपाल यादव: मैडम, वहां की जनता देख रही है । …(व्यवधान) मेरी तीन, चार डिमाण्ड्स हैं । माननीय मंत्री जी, मैं अपने क्षेत्र की तरफ आपकी निगाह डलवाना चाहता हूं । मेरे क्षेत्र में तारेगना रेलवे क्रॉसिंग पर आपने आरओबी सैंक्शन किया था । वहां काम बंद पड़ा हुआ है, आप उसको तेजी से करवा दीजिए । फुलवारी रेलवे क्रॉसिंग पर आरयूबी का निर्माण कार्य कराना है । वह बहुत व्यस्त जगह है । आपने जो पॉलिसी बनाई है, उसी के अनुसार आरयूबी बनवा दीजिए । दानापुर, बिहटा और तारेगना में प्रीमियम वेटिंग लाउंज बनवा दीजिए । तारेगना और बिहटा स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ी और स्टेशन का सौंदर्यीकरण करवा दीजिए । पुनपुन स्टेशन पर एफओबी, वेटिंग हॉल और सौंदर्यीकरण करवा दीजिए । बिहटा स्टेशन पर विक्रमशिला और ब्रह्मपुत्र मेल का स्टॉपेज करवा दीजिए ।
आपने अभी कोई पॉलिसी स्टार्ट की है । आपने पैसेंजर गाड़ी प्रारम्भ कर दी है । वहां पहले से हॉल्ट तय है । पटना–गया लाइन और पटना-मुगलसराय लाइन में तिनेरी स्टेशन, नीमा स्टेशन पर आपने पैसेंजर को रोकना बंद कर दिया है । वहां पर काफी हंगामा हो रहा है । कल रेल जा रही थी, वहां पर ढेला-लाठी भी चल गई है । इस तिनेरी स्टेशन पर उसका स्टॉपेज करवा दीजिए । वह नया हॉल्ट नहीं है, पहले से ही है । आपने नीमा हॉल्ट पर भी पर बंद कर दिया है । इन सब जगहों पर स्टॉपेज करवा दीजिए ।
मैं इन्हीं चंद शब्दों के साथ आपको तो जरूर धन्यवाद दूंगा । हालांकि, बहुत कुछ छूट गया है, मैं फिर भी आपको धन्यवाद देना चाहता हूं । …(व्यवधान) माननीय यशस्वी प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी दोनों के प्रति मैं अपना आभार व्यक्त करता हूं कि जिस प्रतिबद्धता के साथ आपने रेल के विकास की गति को बढ़ाया है, वह गति आपके नेतृत्व में बढ़ती रहे और आप देश की जनता को सुविधाएं प्रदान करते रहें । रेलवे तो लाइफलाइन है । धन्यवाद ।
माननीय सभापति : जो भी माननीय सदस्य अपना लिखित भाषण देना चाहें, वे सभा पटल पर दे सकते हैं ।
*m02 *SHRI JASBIR SINGH GILL (KHADOOR SAHIB): I thank you, Madam Chairperson, for giving me the opportunity to speak on Demands for Grants under the Control of Ministry of Railways for the year 2021-22.
Madam, I have given the notice to speak in my mother-tongue Punjabi.
This Government says that it can alter an emergency into an opportunity. But, the ground-reality is different. The truth is that this Government is adept in turning a calamity into political opportunism. Ram Gopal ji is a very good speaker. On Hon. President’s Address too, he had given a lengthy speech. There, too, he has eulogised this Government. But, at the fag-end of his speech, he has exposed the reality of the entire situation when he has made a lot of demands regarding his constituency. It proves that no work has been done by the Railways in his constituency. The stark reality stands exposed.
Sir, during Covid times, it was claimed that 215 special trains would be run. But, the facts were different. Hon. Piyush Goyal ji is my dear friend. He is a very nice man. But, his goodness does not go beyond the Delhi borders where farmers of Punjab are agitating. In the last 7 years, not a single kilometre of new railway line has been laid in Punjab. Step-motherly treatment has been meted out to Punjab since 2014. Even today, it is continuing. Even no announcements have been made regarding this. Not a brick has been laid anywhere in Punjab by railways.
Survey work of many trains have been completed. One is from Moga. However just to favour their erstwhile allies, they did not allow new railway lines to be laid on the routes where their allies’ buses were being run. Patti-Ferozepur is an important route where new railway line needs to be laid. One hour worth of travelling time will be reduced. The people of the area, Punjab and the entire country till Mumbai will gain out of it. Punjab Government acquired the land and given it to the railways. Kindly start the work on this route at the earliest.
Sir, Beas-Qadian route is another important route. I am 52 years old now. Even since I was a young man of 22 years, I have been listening that this route will be brought on the railway map. Our floor leader Ravneet Bittu ji is here. We have raised this demand vociferously. The Rajpura sector is another important area that needs to be looked into.
Madam Chairperson, Rail Coach Factory is there in my constituency. Beautiful railway coaches are being manufactured there. These coaches are also being exported to 18 foreign countries and foreign exchange is being earned by the country. The Congress Government under Shri Rajiv Gandhi ji had established it in Punjab during militancy days. It generated employment for the people of Punjab. We gave our fertile land for the rail coach factory. It is running with 105% efficiency and I congratulate the Railway Minister Piyush Goyal ji for this. You are renaming it. What is in the name. Even if it is named after Adani, it should help the people of Punjab.
Madam, I understand that the Government wants to privatise these things. But, it should not be at the cost of our people. If you go to North-Eastern states like Arunachal Pradesh and Meghalaya, the Government wants to improve the railway network. It is ok. Our unfriendly neighbours always cast an evil eye on these states. But, trains to these states pass through states like U.P. Punjab also is a border state. Military movement, passengers and goods, all ply on these routes. So, states like UP and Punjab also should not be neglected. In Mizoram, Nagaland, no railway network is there. Ask the private players to go and start railway network there. Why privatise established lucrative routes?
At first, you made airports at Amritsar etc. But, new airports are coming up in Gujarat and Guwahati. You are privatizing airports too. Same will happen to railway stations. But, we do not want to further enrich Adanis and others who have their offices of 27 floors. We oppose privatization.
Madam Chairperson, we are living through difficult times. Our inimical neighbours do not want us to prosper. Bullet trains are a good initiative. China has taken its Bullet train in Tibet to our borders in North Eastern states. Kindly think how to counter it. Instead of Mumbai and Gujarat, focus your attention there.
Delhi-Amritser and Delhi-Katra are important routes. They are holy centres and tourist-spots. Lakhs of passengers ply daily on these routes from all over India. Further trains are required on these routes.
The BJP leaders are indulging in photo-sessions and eulogising the Government for it’s achievements. Sir, do the needful. You are in the Government for this purpose only. Piyush ji, please pay attention. Amritsar railway station needs to be made to match international standards. International airport is already there.
I will take 2 more minutes. It seems as if Punjab is being penalized for the farmers’ agitation. We are second to none as far as far as patriotism is concerned. Our brave soldiers fight at the borders. Our farmers produce food grains for the entire country. We have done everything for the country. Then, why we are being neglected and targeted.
Punjab is the first state in the world where militancy was stamped out. Please give us our G.S.T. and other dues. Please improve our railway infrastructure. Punjabis will eulogize you. You have the opportunity. Agree to the demands of the farmers. Scrap the Agriculture Bills. The image and stature of the PM will further increase. Thank you. Jai Hind.
*m03 *SHRI JAGDAMBIKA PAL (DOMARIYAGANJ): In line with the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji’s mantra ‘Reform, Perform and Transform’, and his advice that it is better to set a stiff target and seek to achieve it rather than drifting forward without aim, the Ministry of Railways, under the able leadership and guidance of Shri Piyush Goyal Ji, has worked towards ushering in transformational changes across all the areas of its operations and management. Working on this mantra, the Indian Railways have prepared a National Rail Plan for India – 2030. The plan is to create a ‘future ready’ railway system by 2030. This Budget is a step in that direction with an outlay of unprecedented Rs. 1,10,055 crore (of which Rs. 1,07,100 crore is for capital expenditure) which is an annual increase of 25 per cent over 2019-20.
Last year when the COVID-19 pandemic came unannounced, the Indian Railways donned the role of Corona Warrior. The Ministry of Railways arranged an emergency unique train service in coordination with individual State Governments called the Shramik Special Train and the first special train was flagged off on 1st May, 2020. With maximum trains to Uttar Pradesh (1,726) and Bihar (1,627), Shramik Express carried 63.15 lakh passengers to 23 States through 4621 trips between 1st May and 31st August, 2020 in response to the State Government’s requests. The Indian Railways also converted coaches into wards for COVID-19 patients.
This year has been a year of grit and victories for the Indian Railways. The lockdown period was used as an opportunity by the Railways to complete more than 200 critical maintenance projects including massive track maintenance exercise, overhauling the freight business and fast tracking of the ongoing infrastructure projects like Dedicated Freight Corridors, J&K and North-East connectivity and completed over 350 critical and long pending major bridge and track works.
Total goods revenue for the year 2020-21 is Rs. 1,24,184 crore which is an increase of 9.42 per cent as compared to 2019-20. The Net Revenue Surplus is Rs. 2,800 crore for the year 2020-21, which is an increase of 76 per cent as compared to 2019-20. In the post lockdown phase, remarkable revival in Indian Railways’ freight loading has been observed especially in the last five months which shows the economic revival in the country as well as modal shift to Railways. This is due to doubling of average speed of freight trains from 23 kmph to 46 kmph, various tariff and non-tariff measures as well as a first time ever Freight Business Development Portal for online booking of freight. This only proves the words of the hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji that Indian Railways is the growth engine of nation’s Vikas Yatra.
Safety and service in Indian Railways are the foremost priorities of this Government. Indian Railways registered the best ever safety record during 2019-20. Including this year, so far there has been no fatality of any railway passenger in any train accident. The remarkable feat has been achieved for the first time in the year 2019-20 since introduction of Railway System in India 166 years ago in the year 1853. The zero passenger fatalities in the last year is a result of continuous efforts by the Indian Railways to improve safety performance in all respects. Safety being the topmost priority always, the measures undertaken for safety improvement include elimination of manned level crossings, construction of Road over Bridges (ROBs) / Rod under Bridges (RUBs), rehabilitation or bridges, highest ever renewal of rail tracks, highest ever supply of rails during the year from SAIL, effective track maintenance, stringent monitoring of safety aspects, improved training of railway staff, improvements in signalling system, use of modern technology for safety works, switching over to modern and safer LHB coaches in phases from the conventional ICF coaches, etc. To further strengthen this effort, high density network and highly utilised network routes of Indian railways will be provided with an indigenously developed automatic train protection system that eliminates train collision due to human error.
All the above could become possible with inputs in the system in the form of Rashtriya Rail Sanrakshan Kosh introduced in the year 2017-18 with a corpus of Rs. 1 lakh crore to be spent in next five years having annual outlay of Rs. 20,000 crore. With this fund, it has been possible to undertake very critical safety works of urgent nature and results are evident.
A new initiative ‘Meri Saheli’ was launched for instilling a sense of security among women travellers. The main objective is to provide an environment in which women feel safe, secure, and comfortable all along their journey. The initiative has reportedly been successful and has rendered help to women travellers in several instances. The number of passenger trains is being increased in phases post lockdown.
Now, more amenities for passengers at stations have been planned and are being implemented. 893 railway stations are now provided with improved illumination levels similar to airport standards. Better train information display coach guidance system is in place at 673 stations while train indication boards are now commissioned at 1208 stations. 500 railway stations certified for implementation of Environment Management System to ISO: 14001. 96 Foot Over Bridge (FOB) provided in financial year 2020-21 (till December) and 5885 stations have been provided with wifi facilities. Relentless and continuous efforts to provide clean and green transportation to all its stakeholders and commuters has resulted in Indian Railway bagging 13 awards in three prestigious categories of National Energy Conservation Awards (NECA) for the year 2020, organised by the Bureau of Energy Efficiency (BEE), Ministry of Power.
Catering has also been a focus area with compulsory printing of MRP on all food items and use of artificial intelligence to monitor food production in base kitchens for improving quality and hygiene along with services to book meals online and get food delivered on stations. Indian Railways is also playing its part in promoting tourism by designing special trains, routes and coaches for providing a wonderful experience to tourists. Indian Railways has launched completely digitised online Human Resource Management System (HRMS). Human Resource Management Systems (HRMS) is a high thrust project for Indian Railways to leverage improved productivity and employee satisfaction. It is a move to improve efficiency and productivity of railway system and a step towards realising the vision of hon. Prime Minister to transform India into a digitally empowered society and knowledge economy. HRMS is expected to create a big impact on the functioning of all the employees and will make them more tech savvy.
Indian Railways has progressed significantly on path of Atmanirbhar Bharat significantly in 2020. With consistent efforts, import has reduced to less than 1.6 per cent as compared to 5.6 per cent in year 2013-14. A National Monetisation Pipeline of potential infrastructure assets will be launched under which dedicated freight corridor assets of the railways will be monetised as well.
National Projects of Jammu and Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand, and North Eastern region have been allocated highest ever outlay of Rs. 12,985 crore in BE 2021-22 against the RE 2020-21 of Rs. 7535 crore that is an increase of 72 per cent.
Future dedicated freight corridor projects namely East Coast Corridor from Kharagpur to Vijayawada, East-West Corridor from Bhusawal to Kharagpur to Dankuni and North-South Corridor from Itarsi to Vijayawada will be undertaken. Detailed project Reports will be undertaken in the first phase. 100 per cent electrification of broad-gauge routes will be completed by December, 2023. Broad gauge route kilometres (RKM) electrified is expected to reach 46,000 RKM, that is, 72 per cent by end of 2021 from 41,548 RKM on 1st October, 2020.
Therefore, in light of all the points mentioned, I would again like to express my support for the Demands for Grants 2021-22 for the Ministry of Railways.
Lastly, inspired by the lines posed by Ministry of Railways on its YouTube page, I would like to add a few lines on the importance of Indian Railways:-
सभी के सफ़र से रहा है जिसका नाता जो हर यात्रा को आसान बनाता । ।
एक छोर से दूसरे का कराता मेल यात्राओं में जीवन बनकर दौड़ती भारतीय रेल । ।
द्वार पर दस्तक जब आपदा ने लगाया रेलवे ने 63 लाख मजदूरों को अपने घर पहुंचाया । ।
वैक्सीन सैंपल को तेज गति से लाई एक साल में 1102.17 मिलियन टन माल की करी ढुलाई । ।
सभी के सफ़र से रहा है जिसका नाता जो हर यात्रा को आसान बनाता । । । ।
कश्मीर से कन्याकुमारी को मिलाया सरकार ने इसके लिए 1 लाख 10 हजार 55 करोड़ का बजट बनाया । ।
इंफाल से नैनीताल जान माल बचाने में कामयाब हो गई इसलिए कई रेल चलती फिरती अस्पताल हो गई । ।
किसानो को आपदा में जब कोई राह नजर नहीं आई अन्नदाता की फसल लाने के लिए 8 किसान रेल चलाई । ।
आपदा को अवसर की तरफ मोड़ कर लाया आकांक्षा जनपदों में भी नई रेल लाइन के लिए योजनाएं बनाया । । ।
सभी के सफ़र से रहा है जिसका नाता जो हर यात्रा को आसान बनाता । ।
*m04 *डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज): भारतीय रेल अर्थव्यवस्था में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । कृषि उत्पादों को दूरदराज के स्थानों से लेकर शहर में पहुंचना और औद्योगिक विकास में सहायता देना या देश के प्रमुख बंदरागाहों से जोड़ना, यातायात के लिए सबसे सस्ता साधन के साथ-साथ पसंदीदा साधन भी है । भारतीय रेल ने आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, अकाल, भूकंप आदि के समय लोगों के कष्टों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।
कोयला पेट्रोलियम और खनिज पदार्थों जैसे भारी सामानों की ढुलाई में भी रेलवे विशेष रूप से उपयोगी है । आज देश में रेलगाड़ियां पहले के मुकाबले काफी तेजी से चल रही हैं एवं लोगों को जोड़ रही हैं । आज भारतीय रेल विश्व का तीसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है । वर्ष 2019-20 के दौरान रेल ने 1.2 बिलियन टन माल की ढुलाई की तथा 8.1 बिलियन यात्रियों को उनके स्थान तक पहुंचाया है । इस तरह हम कह सकते हैं कि भारतीय रेल विश्व की सबसे बड़ी यात्री तथा चौथी सबसे बड़ी मालवाहक सेवा प्रदान कर रही है ।
मेरा संसदीय क्षेत्र गोपालगंज है । यहां थावे जंक्शन बहुत ही महत्वपूर्ण जंक्शन है । थावे जंक्शन से कुछ ही दूरी पर मां भवानी का मंदिर है, जो पर्यटक स्थल के रूप में काफी विकसित हो चुका है । यहां कई इलाकों से लोग आते हैं, लेकिन थावे जंक्शन गोपालगंज से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता एवं चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण महानगरों के लिए कोई भी सीधी ट्रेन नहीं है । मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों को दूसरे जिलों में जाकर ट्रेन की सेवा लेनी पड़ती है । अतः इस सदन के माध्यम से मेरा यह आग्रह है कि थावे जंक्शन से विभिन्न महानगरों को जोड़ने वाली ट्रेन दी जाए । इसके साथ साथ यह भी आग्रह है कि थावे जंक्शन को आदर्श योजना के तहत विकसित किया जाए तथा यहां पिट लाइन या रेलवे पिट की स्थापना की जाए, ताकि थावे जंक्शन का विकास हो सके । मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों को ट्रेन की सुविधा भी मिल सके ।
भारतीय रेल की वित्तीय स्थिति में सुधार हेतु समय-समय पर कई उपाय किए गए हैं, जिससे रेलवे की स्थिति सुधरी भी है । जैसा कि 25 दिसंबर, 2020 तक भारतीय रेल ने 7, 267 विशेष पार्सल गाड़ियां चलाई हैं, जिनमें से 7,014 गाड़ियां टाइमटेबल सेवाओं के अधीन चलाई गई हैं । लगभग 6.6 लाख टन माल इन सेवाओं के माध्यम से भेजा गया है । मैं यह बात यहां रखना चाहूंगा कि रेलवे का विस्तार एवं विकास आज़ादी के टाइम से ही हो रहा है । नई रेल लाइन बिछाने, यातायात सुविधाओं में विस्तार तथा रेल लाइनों का दोहरीकरण आदि प्रमुख है । वर्ष 2021-22 के केन्द्रीय बजट में रेलवे को कुल योजना पूंजीगत व्यय हेतु अब तक सर्वाधिक 2,15,058 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जो वर्ष 2020-21 (दिसंबर 2020 तक) बजट अनुमानों से 53 प्रतिशत अधिक है ।
केन्द्रीय बजट 2020-21 में किसान रेल सेवाएं चलाए जाने की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य दूध, मांस और मछली सहित शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं और कृषि उत्पादों की ढुलाई के जरिए विपणन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है । रेलवे ने किसान रेल सेवाओं को शुरू करने के लिए कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है, ताकि उस क्षेत्र का विकास रेलवे से हो एवं लोगों को फायदा हो । रेलवे ने अब तक 13 मार्गों पर किसान रेल सेवा शुरू की है । 8 जनवरी, 2021 तक किसान रेलवे की 120 ट्रिप्स हुई हैं, जिनके माध्यम से 34,000 टन मांस की ढुलाई की गई है ।
रेल भारत के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । वर्तमान में रेलवे का विस्तार हर क्षेत्र में जरूरी है, ताकि आम लोग भी रेलवे से जुड़ सकें । इसी के साथ मैं डिमांड्स फॉर ग्रॉन्ट्स फॉर रेलवेज़ को सपोर्ट करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं ।
*m05 श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर पश्चिम): माननीय सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
मुम्बई देश की आर्थिक राजधानी है । अत्यन्त महत्वपूर्ण महानगर होने के कारण आर्थिक रेलवे बजट में मुम्बई की ओर अधिक ध्यान देना आवश्यक है । मेरी कुछ महत्वपूर्ण मांगें हैं, आशा है कि इन मांगों को श्री पीयूष गोयल जी पूरा करेंगे । श्री पीयूष गोयल जी, उनके माता-पिता और उनका पूरा परिवार मुम्बई से वर्षों से जुड़े हैं । सार्वजनिक, सामाजिक और राजकीय क्षेत्र में काम करने वाले इस परिवार को पूरी मुम्बई पहचानती है ।
महाराष्ट्र में राज्य सरकार व स्थानीय स्वराज्य संस्था की जमीन पर झोपड़-पट्टी पुनर्वसन योजना को कार्यान्वित किया जा सका है । आपने भी एक निर्णय लिया था, परन्तु रेलवे की जमीन पर यह योजना शुरू करने हेतु रेलवे विभाग द्वारा राज्य सरकार को अभी तक अनुमति नहीं दी गई है । मेरे संसदीय क्षेत्र में इंदिरा नगर, जोगेश्वरी पूर्व, जय अम्बे वेलफेयर सोसायटी, सोनावाला रोड, गोरेगांव पूर्व, अम्बोली रेलवे गेट उड़ान पुलिया के पास रेलवे की भूमि पर झोपड़-पट्टी पुनर्वसन योजना शुरू करने के लिए राज्य सरकार को अनुमति प्रदान करने के लिए मैं रेल मंत्री जी से विनती करता हूँ ।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अनुक्रमांक 10 -1 के अनुसार केन्द्र सरकार की जमीन पर बसी झुग्गी-झोपड़ियों का पुनर्वसन करना संबंधित मंत्रालयों की जिम्मेदारी है । यह अनुमति रेल मंत्रालय से प्राप्त करना बहुत जरूरी है ।
मेरी विनती को मान देकर दो वर्ष पूर्व अंधेरी से गोरेगांव हार्बर लाइन शुरू की गई है परन्तु गोरेगांव से बोरीवली हार्बर लाइन विस्तारीकरण का कार्य भी निधि के अभाव में अत्यन्त धीमी गति से चल रहा है । मेरी मांग है कि आवश्यक 846 करोड़ रुपए का फण्ड तत्काल रिलीज कर कार्य को गति देनी चाहिए । इसके साथ ही, गोरेगांव से पनवेल हार्बर लाइन रेलवे सेवा शुरू हो सकती है, जो अटकी हुई है ।
सन् 1976 में तत्कालीन साधनों के अनुसार मुम्बई उपनगरीय रेलवे सीमा निश्चित की गई थी । किन्तु वर्तमान में रेलवे परिसर, उदाहरण के तौर पर रामनगर गोरेगांव पूर्व के नागरिकों द्वारा नए मोजयंत्र से जमीन की मोजमाप करने पर दोनों में फर्क दिखाई देता है । अत: मेरी विनती है कि संबंधित रेलवे सीमा निश्चित करने हेतु राज्य सरकार को अनुमति दी जाए और तब तक लैंड रेकॉर्ड एक्ट 1966 सेक्शन 20 (2) के अनुसार रेलवे के नजदीक की भूमि पर बसी किसी भी नागरी बस्तियों को हटाने के आदेश को स्थगित किया जाए ।
मुंबई पश्चिम रेलवे के जोगेश्वरी व राममंदिर रेलवे स्थानक के बीच में 70 एकड़ रेलवे की जमीन खाली पड़ी है । यदि इस जमीन पर रेलवे टर्मिनस बनाया जाता है, तो मुंबई सेंट्रल, दादर एव बांद्रा टर्मिनस पर होने वाली भीड़ कम हो जाएगी व असुविधा को भी कम किया जा सकेगा । मेरी मांग इस टर्मिनस को बनाने की है ।
मुंबई उप-नगरीय रेलवे लाइन से लगती हुई नागरिक बस्तियां हैं । रेलवे गाड़ियों से यातायात के लिए यहां के निवासियों को निरंतर आवाज प्रदूषण का सामना करना पड़ता है । मेरी विनती है कि आवाज प्रदूषण से छुटकारा पाने के लिए रेलवे लाइन के दोनों ओर साउंड प्रूफ बैरियर लगाए जाएं । खुली रेलवे लाइन के कारण कई रेल यात्री और लोग पटरी पार करने के लिए मुंबई उप-नगरीय रेल मार्ग का इस्तेमाल करते हैं और कई बार अपनी जान भी गवां देते हैं, कुछ लोग हमेशा के लिए विकलांग हो जाते हैं ।
अत: इसके बारे में मेरी मांग है और केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि ऐसी दुर्घटनाएं टालने हेतु मुंबई उप-नगरीय रेल मार्ग के दोनों ओर, यानी वीटी से कल्याण तक और चर्चगेट से विरार तक, कुल 122 किलोमीटर तक, रेल पटरी के दोनों ओर अतिशीघ्र दीवार बनाई जाए । हमारी इसके बारे में बहुत सालों से मांग है । रेलवे बोर्ड से भी मैंने यह मांग की है ।
रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड द्वारा सन् 2016 में केटरिंग इन्सपेक्टर (कमर्शियल) भर्ती प्रक्रिया पूरी कर पात्र उम्मीदवारों को आईआरसीटीसी में नियुक्ति के आदेश जारी किए थे, परंतु उन आदेशों का पालन नहीं हो सका । वे पात्र उम्मीदवार आज तक नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं । मेरा सरकार से अनुरोध है कि उन सभी पात्र उम्मीदवारों को आईआरसीटीसी में तत्काल नियुक्ति दी जाए ।
केन्द्र सरकार से प्रस्तावित मुंबई पश्चिम रेलवे की चर्चगेट से विरार एलिवेटिड लाइन को भी शीघ्र गति से शुरू करना जरूरी है । यह प्रपोज़ल भी वहां रेलवे बोर्ड के सामने रख दिया गया है । बांद्रा टर्मिनस, मुंबई से कोंकण रेलवे मार्ग सावंतवाड़ी, मडगांव, वसई व पालघर के लिए विशेष रेलवे गाड़ियां चलती हैं । अगर नायगांव-चुजंद्र से वसई दिवा मार्ग को जोड़ने वाली तीन किलोमीटर की रेलवे लाइन बिछाई जाती है, तो समय के साथ रेलवे का आर्थिक व्यय कम हो सकता है ।
श्रद्धालुओं की मांग है कि मुंबई रेलवे स्थानक से सावंतवाड़ी, मडगांव, शिर्डी, पंढरपुर व शेगांव जैसे धार्मिक स्थलों के लिए नियमित रेलगाड़ी शुरू की जाए । कराड, जिला सातारा से चिपलून जिला रत्नागिरी तक रेल पटरी बिछाने का प्रस्ताव कुछ वर्षों से प्रलंबित है, जिसे तुरंत मंजूरी देकर कार्य को शुरू किया जाए ।
मैं माननीय मंत्री जी से फिर से प्रार्थना करता हूं कि आप ध्यानपूर्वक इस प्रस्ताव के बारे में कन्सर्न्ड रेलवे बोर्ड को आदेश दीजिए और मुंबई वासियों के लिए यह काम कीजिए । मुंबई वासी आपको बहुत चाहते हैं कि श्री पीयूष गोयल जी हमारे मुंबई वासी हैं, वे हमारे लिए कुछ करेंगे ।
जय हिंद, जय महाराष्ट्र ।
*m06 *श्री अजय मिश्र टेनी (खीरी): मैं रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांग का समर्थन करते हुए कहना चाहता हूं कि 2014 के बाद ही रेल सेवा में बड़े व सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, जिनके कारण रेल सेवा में सुविधाएं बढ़ी हैं, तथा गुणवत्ता तथा स्तर में भी परिवर्तन हुआ, उक्त कार्यों व परिणाम हेतु मैं मा. प्रधानमंत्री जी व मा. रेल मंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ तथा भविष्य में सरकार के 2023 तक डीजल इंजन पूरी तरह से हटाने, रेल विश्वविद्यालय व भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने के कार्यक्रम हेतु शुभकामनाएं देते हुए अपने लोकसभा क्षेत्र में 1- लखीमपुर से नई दिल्ली तक रेल सेवा प्रारम्भ करने ।
2- पूर्वोत्तर रेलवे के ओयल रेलवे स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा देने । 3- मैलानी ज. से नानपारा ज. तक 1 जोड़ी और रेल सेवा प्रारम्भ करने । 4- राजापुर (लखीमपुर) NH-730 पर ROB का कार्य शीघ्र शुरू कराने । व 5- राष्ट्रीय दुधवा पार्क (टाइगर रिर्जव तक ) लखनऊ से रेल सेवा पलिया तक नई सेवा प्रारम्भ करने की मांग करता हूँ ।
मैं पुन: रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों का समर्थन करते हुए मा. रेल मंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ ।
*m07 श्री दिलेश्वर कामैत (सुपौल): माननीय सभापति महोदया, वर्ष 2021-22 के लिए रेल मंत्रालय के निर्माणाधीन अनुदानों की मांग पर चर्चा के लिए आपने जो समय दिया, मैं उसके लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं ।
मैं सबसे पहले माननीय प्रधान मंत्री महोदय श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय रेल मंत्री महोदय श्री पीयूष गोयल जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि 86 वर्ष पूर्व, जो 1934 के भूकंप में कोसी का रेल पुल ध्वस्त हुआ था, उसका उद्घाटन कर मिथिला, जो दो भागों में बंटा हुआ था, उसको एक करने का काम किया । कोसी पुल तथा रेलगाड़ी का उद्घाटन कर एक ऐतिहासिक काम किया गया है, जो स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है ।
13.59 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) माननीय सभापति महोदय, मैं अपने संसदीय क्षेत्र सुपौल की मांगों की ओर सदन के माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं । सहरसा वर्तमान राघोपुर से फारबिसगंज तक तथा आसनपुर कूपहा से निर्मली-दरभंगा तक रेलवे का आमान परिवर्तन अभी भी अधूरा है । सहरसा से राघोपुर तथा आसनपुर कूपहा तक अभी भी एक पैसेंजर गाड़ी ही चल रही है । राघोपुर से ललितग्राम तथा आसनपुर कूपहा से निर्मली तक आमान परिवर्तन का काम पूरा हो चुका है । उक्त रेल खंड पर जल्द से जल्द सीआरएस इन्सपैक्शन करवाकर इस रेल खंड पर रेलगाड़ी चलाई जाए ।
14.00 hrs दानापुर से सहरसा तक गाड़ी संख्या 13205, 13206 जनहित एक्सप्रेस तथा नई दिल्ली से सहरसा वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 2554, 2553 चलती है । इन दोनों ट्रेनों का सरायगढ़ तक विस्तार किया जाए, जिससे नेपाल सहित कोसी क्षेत्र की जनता को लाभ मिल सके और यह उस क्षेत्र की जनता की बहुत पुरानी मांग है । अररिया-गलगलिया नई रेल परियोजना तेजी से चल रही है, उसके लिए आपने इस बजट में मात्र एक हजार करोड़ रुपये का आबंटन किया है, जिसके फलस्वरूप इसका काम रुक गया है । इस बजट को रिवाइज किया जाए, जिससे आजादी के बाद पहली बार पिछड़े क्षेत्र के लोगों को रेलगाड़ी देखने का मौका मिल सके । इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन मैंने माननीय रेल मंत्री महोदय को आठ फरवरी को स्वयं मिलकर दिया था और मंत्री जी ने मुझे आश्वासन भी दिया था कि इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके बजट को रिवाइज किया जाएगा ।
अंत में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रेल लाइन जो प्रतापगंज से भीम नगर-बथनाहा 58 किलोमीटर ब्रिटिशकाल में 1934 में भूकम्प के कारण नष्ट हुई थी, वह वैसी की वैसी ही है । इस लाइन को पुन: चालू कर नेपाल के साथ जोड़ा जाए, जिससे सीमावर्ती एवं कोसी क्षेत्र की गरीब जनता को इसका लाभ मिल सके । इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और वर्ष 2021-22 की रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांग का समर्थन करता हूं ।
*m08 *ADV. A.M. ARIFF (ALAPPUZHA): I am thankful for this opportunity to submit my statement on the Demands for Grants under the Ministry of Railways.
At the outset, I express my disappointment as well as disagreement over this Government’s move to privatize the Indian Railways, the largest provider of employment in the public sector in this country.
This Government itself has informed this house that there has been a large scale reduction in the number of posts in Railway over the past three decades. The 16.5 lakh posts came down to 12.4 lakhs in 2019 and even out of it, around 3 lakhs remained un-filled in June 2019.
With the official freeze on recruitment in the aftermath of COVID-19, I am sure the vacancies would have only gone up. By cutting the work force, what the govt. wants is to increase the work load of already existing employees, demoralize and then slowly make its functioning inefficient in the eyes of public and then sell out at cheaper rate to the corporates.
This Government is eager to sell out all the valuable assets of this country built by the efforts of millions of ordinary workers of this country and the Railway is no exception.
The Government has already made its intention clear by announcing the operation of 151 trains in 109 routes by the private sector at an investment of Rs. 30,000 crore.
Railways is the cheapest mode of transport and we all know, what will happen if private sector is given a free hand in running the trains.
Already, the govt. is looting ordinary people in the name of Suvidha specials, festival specials and dynamic fares by charging at exorbitantly high rates compared to normal fares. With the private sector coming in, I am sure, it will get further worsened, with train travel becoming unaffordable to ordinary people.
The freight movement in the country, especially of essential commodities largely depends on the Railways for speedy and economic transport. This is also going to be handed over to private players, who will then get an opportunity to control the prices of these commodities.
Hence, I take this opportunity to request the govt. to withdraw from privatizing the Indian Railways in the larger interest of the common people of this country.
Now I come to the long standing demands from the State of Kerala with regard to the development of Railway facilities. The first and foremost is the establishment of an exclusive Railway Zone to which this govt. has turned a deaf ear till date. The attitude towards projects like Sabari Rail Line, which is in limbo for almost two decades is also not different.
Now, with the Government of Kerala agreeing to share the cost of the Sabari Line, I urge the govt. to take the lead in completing the project in a time bound manner to fulfil the dreams of lakhs of devotees coming to Sabarimala temple from all over the country.
There has been long pending demands for improving the facilities in various Railway station in my parliament constituency including Alappuzha, Cherthala and Karunagapally. Be it related to developing parking space, construction of shelter over platforms and foot-over bridges connecting platforms and reconstruction of connecting roads to railway stations, several promises by the govt. and the railway authorities are yet to be fulfilled. I urge the govt. to allot sufficient funds to improve the facilities in all these railway stations.
Finally, even while disagreeing on this Government’s move to privatize the Railways a cut short its work force, I take this opportunity to thank the Government for its resolve to complete the track doubling in the Ernakulam-Alappuzha sector fully utilizing railway funds and urge this govt. to expedite the work without further delay.
With these words, I conclude. Thank you.
*m09 श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): सभापति जी, रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा करने से पहले मैं एक अलग विषय पर अपनी बात कहना चाहता हूं । रेलवे शहरों, कस्बों को जोड़ने का काम करती है, लेकिन मैं दिलों को जोड़ने की बात करूंगा । आज हम रेल बजट पर चर्चा कर रहे हैं और इस समय कश्मीर के शोपियां में एनकाउंटर चल रहा है, गन फाइट चल रही है, जिसमें एक छोटी-सी बस्ती खाकस्तर हो गई है । मुझे मालूम नहीं है कि अब वहां क्या हालत हैं, क्योंकि मैं सदन में आ गया था । सरकार ने एलओसी और एलएसी पर अमन स्थापित करने की जो शुरूआत की है, मेरी यह इल्तजा है कि इस बात को आगे बढ़ाइए और एक नेगोशिएशन की तरफ ले जाइए ताकि जम्मू-कश्मीर की जो परेशानी है, वह हल हो जाए । पहली जनवरी से मार्च तक करीब 25 की संख्या में हमारे सिक्योरिटी फोर्स के जवानों की जान गई है, पांच सिविलियन्स, 25 लड़कों की 12 गन फाइट्स हुईं । मेरा सरकार से कहना है कि वह शहरों को जोड़ने के साथ दिलों को भी जोड़ने का प्रयास करे ।
महोदय, रेलवे का बजट इस उम्मीद के साथ कि पांच अगस्त से शुरू हुई परेशानी का समाधान करेंगे और जैसे एलओसी तथा एलएसी पर अमन स्थापित किया है, इसे आगे ले जाकर जम्मू-कश्मीर के लिए इंटरनल नेगोशिएशन्स करेंगे और एक्सटर्नल डायलॉग करेंगे ।
महोदय, मेरे पास जो फिगर्स हैं, उनके अनुसार इस बजट में 25 परसेंट की बढ़ोतरी करीब 1 लाख 10 हजार 55 करोड़ रुपये का प्रोविजन बनाया गया है लेकिन यह सिर्फ एक इलाके तक केंद्रित रहा है । जहां तक जम्मू-कश्मीर का ताल्लुक है, जम्मू-कश्मीर को निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला है । यह सिर्फ एक वेलकम है कि आप एक नेशनल रेल प्लान बनाने जा रहे हैं और वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा है लेकिन आपका प्लान ईस्टर्न, ईस्टर्न डीएफसी और ईस्ट कोस्ट कोरिडोर पर केंद्रित रहा है । जम्मू-कश्मीर जो सबसे ज्यादा अटेंशन डिजर्व करता था, वह अटेंशन जम्मू-कश्मीर को इस बजट में नहीं मिला है । हम कब से इंतजार कर रहे हैं और कब से उधमपुर-श्रीनगर रेल लाइन का, बारामूला कुपवाड़ा रेल लाइन का, जम्मू और पूंछ रेलवे लाइन का, काजी कोट पहलगाम का ऐलान किया गया है, कहीं पर सर्वेज हुए हैं, लेकिन बहुत समय से केवल बातें ही की गई हैं । सिर्फ ख्वाब बुने जा रहे हैं । सिर्फ इस बजट की बात नहीं है । इससे पहले भी जो किया जाना चाहिए था, वह हुआ नहीं । इस बजट ने हमें खासतौर पर डिसअपाँइंट किया है । मुझे उम्मीद है कि जब हमारे रेलवे मंत्री जी जवाब देंगे तो वह इस बारे में कुछ ऐलानात करेंगे कि आखिर इसकी क्या वजह है । जम्मू-कश्मीर का एक और खास मुद्दा है, वह मुद्दा नैशनल हाईवे 44 का है । जनाब, साल में 50 परसेंट, लगभग 165 दिनों तक यह बंद रहता है । कोई यातायात नहीं होता है, कोई ट्रांसपोर्ट नहीं होता है । पैसेंजर ट्रांसपोर्ट और माल वगैरह का ट्रांसपोर्ट भी बंद रहता है । कश्मीर में करीब 30 मिलियन मीट्रिक टन के करीब मेवा पैदा होता है, उसकी पैदावार होती है । उस पैदावार को मुल्क की बाकी मंडियों में पहुंचाने के लिए एक मजबूत रेलवे नेटवर्क की जरूरत है । नैशनल हाईवे 44 तो पहले ही बैठा हुआ है । अगर आप रोड के जरिए श्रीनगर आने का प्रयास करेंगे तो आपको पहले से ही यह कन्फर्म करना पड़ेगा कि क्या रोड ऑपरेशनल है या नहीं ? कभी-कभी हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता है । 5 अगस्त के बाद के जो सारे मामलात हैं, वे बताते हैं कि किस तरीके से वहां के टूरिज्म को एक धचका पहुंचा और वहां की तरक्की को धचका पहुंचा । हमें यह उम्मीद थी कि रेलवे बजट में जम्मू-कश्मीर के हवाले से कुछ खास योजनाएं होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।
जनाब, इसी तरह से फ्रीक्वेंसी की बात करते हैं । बारामुला-काजीगुंड, काजीगुंड-बारामुला की एक ट्रेन है, वह भी दो या तीन महीने बाद चालू हुई । शुरुआत के एक साल तक तो वह चालू ही नहीं हुई । अब वह एक बार जाती है तो उसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की जरूरत है । मैंने पहले भी कहा था कि पहलगाम हमारा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है । अमरनाथ यात्रा के हवाले से काजीगुंड और पहलगाम रेलवे लाइन पर ज्यादा फोकस होना चाहिए । मुझे नहीं लगता है कि ऐसा करने में कोई परेशानी है । हमारा सबसे बड़ा पिलग्रिमेज डेस्टिनेशन माता वैष्णो देवी, कटरा है । हम यह उम्मीद करते थे कि यहां के लिए दिल्ली से बुलट ट्रेन निर्माण का ऐलान हो जाएगा । बुलेट ट्रेन की तो बात ही छोड़ दीजिए, आमतौर पर जो श्रद्धालु वहां आते हैं, उनके लिए जो व्यवस्था होनी चाहिए, वह भी वहां नहीं है । मेवे की ढुलाई के लिए रेलवे का जो प्रोविजन है, उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है । हम यह जानना चाहते हैं कि रेलवे मंत्रलय के हवाले से जम्मू-कश्मीर कब तक इंतजार में रहेगा? काफी हद तक इसमें पैश रफत हुई थी और अभी तक इस पैश रफत के बारे में उसको इक्वलाइज नहीं किया जा सका है ।
हमसे कहा गया था कि आपकी जो रिक्रूटमेंट्स हैं, वह सारी लोकल हुईं । 5 अगस्त, 2019 के जो असंवैधानिक फैसले हुए थे, उनको मैं बार-बार कहूंगा और मैं मानता हूं कि वे असंवैधानिक फैसले थे । उसके बाद हमें एक बड़े लॉकडाउन का सामना करना पड़ा । इस लॉकडाउन से हम अभी जूझ ही रहे थे कि कोविड-19 महामारी की परेशानी आ गई । मेवा इंडस्ट्री को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ । टूरिज्म इंडस्ट्री को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ । इन सारे नुकसानों से जम्मू-कश्मीर को जूझना पड़ा, उस पसेमंजर में जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ स्पेशल इंसेंटिव्ज, कुछ स्पेशल प्रोग्राम्स, कुछ स्पेशल प्लान्स देने की जरूरत है । आप ‘खेलो इंडिया खेलो ।’ या फिर वहां पर एक कल्चरल प्रोग्राम आयोजित कर देते हैं । हमने वे सारी चीजें देखी हैं । उनका ग्राउंड पर कोई इम्पैक्ट नहीं होता है । जो समस्याएं हैं, वे वहीं की वहीं हैं । जो मसाईल हैं, वे वहीं के वहीं हैं । जब तक आप जम्मू-कश्मीर का एक सही सूरतेहाल सारे देश के सामने पेश नहीं करेंगे, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे । मैंने अभी आपसे गुजारिश की थी और आपको सूचित किया था कि अभी जब हम बात कर रहे हैं तो शोपियां में एक इनकाउंटर चल रहा है । दो दिन पहले बिजबिहारा में और तीन दिन पहले सोपोर में इनकाउंटर चल रहा था । हम लोग कब तक यह सब देखते रहेंगे । उस रेल का क्या फायदा, जब तक हमारे दिल न जुड़ें, जब तक हमारी समस्याएं हल न हों ।
मैं गुजारिश करूँगा कि खास तौर पर काजीगुंड-पहलगाम के लिए सर्वे या इनिशियल सर्वे जो हुआ है, उसके लिए इंतजामात किए जाएं और काजीगुंड और बारामूला की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाए । खासकर हमें जरूरत है, सारा फोकस होना चाहिए, सारा जोर उधमपुर-बनिहाल रेलवे लाइन पर होना चाहिए ।
मुझे उम्मीद है कि जब हमारे मंत्री जी जवाब देंगे तो ये सारे मामलात, जो जम्मू-कश्मीर को लेकर हैं, इनके बारे में बिल्कुल वाज़ह तौर पर वे कुछ न कुछ एनाउंस करेंगे या हमें एक रूपरेखा देंगे कि कब तक इनका आरम्भ किया जाएगा । थैंक यू ।
*m10 *डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़): आज भारतीय रेलवे वास्तव में भारतीय रेल प्रतीत होती है जब भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक व उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में भी भारतीय रेल अब अछूती नहीं रही । वर्तमान में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी रेल सेवाओं को भी बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ।
तेज गति से लाईनों का दोहरीकरण, विद्युतीकरण जैसे कार्यो को आज रेल मंत्रालय कर रहा है । आज भारत बुलट ट्रेन सुविधा को प्रारंभ करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है । वंदे भारत एक्सप्रेस, गतिमान एक्सप्रैस, तेजस एक्सप्रैस जैसी तीव्र गति की रेल गाड़ियाँ आज चल रही है । आज भारत 12 हजार हॉर्सपॉवर की क्षमता के इंजन का उत्पादन कर रहा है ।
यह सब कार्य और ऐसे अनेक कार्य रेल मंत्रालय द्वारा किये जा रहे हैं, जिनसे भारत में ना सिर्फ उच्च स्तरीय रेल सेवाओं का विस्तार हो रहा है बल्कि विश्व स्तरीय रेल सामग्री निर्माण का कार्य भी आज भारत में हो रहा है ।
अपनी अनूठी पहल किसान रेल जैसी रेल सेवा को शुरू कर रेल मंत्रालय ने ना सिर्फ किसानों के लिए दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी फसल को भेजने के लिए सुविधा पैदा की बल्कि उनकों उनके सामान को बिना खराब हुए ग्राहक तक पहुंचाया जिससे उन किसानों को उचित दाम मिल सका ।
रेलवे ने अपने आप स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली को बनाया जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम हो गई ।
कोविड महामारी के समय रेलवे ने पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए लॉकडाउन खुलने के बाद विशेष गाड़ियों का संचालन भी किया है । भारत में सवारी गाड़ी व माल गाड़ी एक ही पटरी पर दौड़ते थे जिससे पटरियाँ घिरी रहती थी । आज डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर लगभग बनकर तैयार है और जल्द ही उस पर माल गाडियों का आवागमन चालू हो जायेगा । इसके तैयार होते ही माल गाड़ियों की गति बढ़ेगी और खाली पटरियों पर नई रेल चलाने के अवसर भी बनेंगे ।
भारतीय रेलवे ने भारत के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना-2030 तैयार की है । हमारे उद्योगों के लिए परिवहन लागत को कम करना 'मेक इन इंडिया' को समर्थ बनाने का कार्य सराहनीय व प्रगतिशील है । सरकार मेट्रो रेल नेटवर्क के साथ-साथ सिटी बस सेवा के विस्तार के जरिये शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेसदारी को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है । यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हमारी सरकार मजबूत व कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य कर रही है, इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में माननीय रेल मंत्री जी द्वारा किये गये इन सराहनीय कार्यो की मैं सराहना करता हूं और बधाई देता हूं ।
मैं अपने क्षेत्र के विकास हेतु कुछ महत्वपूर्ण विषय उठाना चाहूंगा, जिन्हें सरकार अपनी योजना में शामिल करती है तो बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र का समुचित विकास हो पायेगा ।
छतरपुर जिला औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा होने के कारण यहाँ से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए पलायन करते है छतरपुर जिले में रेलवे सीमेंट स्लीपर बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल जैसे रेत इत्यादि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसके साथ ही छतरपुर के समीप के जिलों में सीमेंट फैक्ट्रीयां भी हैं । इसलिए छतरपुर जिले में इसके लिए इकाई स्थापित कर बहुत ही कम खर्च में रेलवे सीमेंट स्लीपर बनाने का कार्य किया जा सकता है । इससे छतरपुर जिले के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे ।
बुंदेलखण्ड क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मेरे संसदीय क्षेत्र अंतर्गत टीकमगढ़ जिले में रेल डिब्बा बनाने का कारखाना स्थापित किया जाये साथ ही मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए रेलवे का विश्वविद्यालय और रेलवे प्रशिक्षण केन्द्र खोला जाए जिससे मेरे क्षेत्र का शैक्षणिक और औद्योगिक विकास हो सके ।
टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन आदर्श स्टेशन की श्रेणी में है,पर अभी काफी अन्य काम करने की भी जरूरत है । यहां पर प्लेट फार्म नं.-2 और फुट ओवर ब्रिज का निर्माण भी अतिशीघ्र कराए जाने की आवश्यकता है । प्लेटफार्म पर कोच डिस्प्ले बोर्ड बनाया जाना चाहिए इससे यात्रियों को कोच ढूंढने में अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ेगा ।
टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन पर रैक प्वाइंट प्रारंभ कर दिया गया है, इसलिए वहाँ पर रैक लगाने के लिए पृथक से प्लेटफॉर्म और समुचित व्यवस्थाएं भी कराया जाना चाहिए ।
टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन पर पार्सल सुविधा प्रारंभ नहीं है जिसके कारण यहाँ पर आने वाली विभिन्न सामग्रियों को यहाँ से अन्य जगहों पर भेजने एवं लाने के लिए बुकिंग नहीं कराई जा सकती है । आमजन को ले सके और उसी दिन राजधानी भोपाल जा कर वापिस घर लौट सकें ।
मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत बहुप्रतीक्षित दिल्ली रेल सेवा की माँग को पूरा करते हुए रेल मंत्रालय द्वारा कुरूक्षेत्र-खजुराहो एक्सप्रेस रेल सेवा की सुविधा एवं प्रयागराज के लिए रेल सेवा उपलब्ध करा दी गई है, जो कि क्षेत्र की जनता के लिए बहुत ही लाभकारी है, इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का आभार और धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ ।
वर्तमान में छतरपुर पन्ना एवं टीकमगढ़ जिलों से 5-10 स्पेशल बसों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली जाते है,इन बसों में मजदूर वर्ग को1000रू. प्रति व्यक्ति के हिसाब से किराया देना पड़ता है, क्योंकि खजुराहो-कुरूक्षेत्र एक्सप्रेस में आरक्षण हेतु ऑनलाईन सुविधा ही उपलब्ध है , विन्डों टिकिट की व्यवस्था नहीं है । मजदूर वर्ग ऑनलाईन टिकिट लेने में सक्षम नहीं है जिससे उन्हें इस ट्रैन का लाभ नहीं मिल पा रहा है । आपसे अनुरोध है कि खजुराहो-कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस ट्रेन में 4 जनरल श्रेणी के कोच लगाकर खजुराहो, छतरपुर एवं टीकमगढ़ स्टेशन पर विन्डों टिकिट की व्यवस्था प्रांरभ की जाए, जिससे मेरे क्षेत्र के गरीब मजदूर वर्ग इस रेल सेवा का लाभ ले सकें ।
डॉ. अंबेडकरनगर (महू)-प्रयागराज एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14115-14116) सप्ताह में 4 दिन चलाई जा रही है । मेरे क्षेत्र भ्रमण के दौरान एवं लोगों से आए संवाद के अनुसार इसे नियमित करने की माँग की जा रही है । अतः महू-प्रयागराज रेल सेवा को नियमित करने की स्वीकृति प्रदान की जाए ।
डॉ. अंबेडकरनगर (महू)-प्रयागराज एक्सप्रेस एवं खजुराहो भोपाल महामना एक्सप्रेस का ईशा नगर रेलवे स्टेशन पर स्टॉपेज निर्धारित किया जाए । ईशा नगर संसदीय क्षेत्र अंतर्गत छतरपुर जिले की बड़ी पंचायत होने के साथ व्यवसाय का केन्द्र है वहाँ से एवं आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते है किन्तु ईशा नगर स्टेशन पर इन ट्रेनों का स्टॉपेज न होने के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है ।
टीकमगढ़ में खजुराहो ललितपुर पैसेंजर ट्रैन जो कोविड-19 के समय बंद कर दी गई थी उसका संचालन पुनः शुरू किया जाए । अभी यह ट्रैन ललितपुर से खजुराहो के बीच एक फेरा ही करती है, इसके फेरे बढ़ाकर दो फेरों में यह ट्रेन चलाई जाए । दूसरे फेरे में शाम के समय ललितपुर से खजुराहो की ओर का समय रात में लगभग 8.30 रखा जाए । खजुराहो-उदयपुर एक्सप्रेस रेल सेवा का संचालन सप्ताह में 3 दिन टीकमगढ़ छतरपुर स्टेशन से किया जाए जिससे टीकमगढ़ छतरपुर के यात्रीगण इस रेल सेवा से लाभान्वित हो सकें ।
मेरे संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ से वाराणसी और प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखर जी के लिए रेल सेवा की सुविधा प्रदान की जाए एवं इन्दौर से चलकर बीना- सागर- दमोह- कटनी- मानिकपुर होते हुए हावड़ा तक जाने वाली क्षिप्रा एक्सप्रेस को सप्ताह में 4 दिन बीना से ललितपुर– टीकमगढ़- छतरपुर- खजुराहो- महोबा से मानिकपुर होते हुए हावड़ा तक चलाया जाए ।
मेरे संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ छतरपुर से मुंबई तक के लिए रेल सेवा प्रदान की जाए ।
निवाड़ी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नं 2 एवं 3 पर आवागमन के लिए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण कराया जाए एवं निवाड़ी टीकमगढ़ मार्ग पर स्थित रेलवे क्रांसिग पर अंडर ब्रिज बनाया जाना आवश्यक है, क्योंकि निवाड़ी रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए यही एक मात्र रास्ता है । निवाड़ी जिले में ओरछा धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जिसे यूनेस्कों ने विश्व धरोहर की सूची में भी सम्मिलित किया है । ओरछा से निकलने वाली सभी एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज ओरछा रेलवे स्टेशन पर किया जाए ।
खजुराहो-छतरपुर-सागर-भोपाल रेल लाईन का सर्वे कार्य हो चुका है । जांच करवाकर शीघ्र लाइन डलवाने की शुरूआत किया जाना आवश्यक है । हरपालपुर-नौगांव छतरपुर रेल लाइन सर्वे कराकर महाराजा छत्रसाल की छावनी केंद्र धुबेला म्यूजियम से जोड़ने हेतु रेल लाईन का विस्तार किया जाना चाहिए ।
हरपालपुर स्टेशन का निर्माण आजादी के पहले कराया गया था । हरपालपुर स्टेशन पर ट्रैक का विद्युतीकरण का कार्य हो चुका है यहाँ का स्टेशन खप्पर का बना हुआ है इसलिए आधुनिक तकनीकी के साथ नवीन स्टेशन भवन का निर्माण कराया जाना आवश्यक है । हरपालपुर स्टेशन पर 2 नम्बर प्लेटफार्म एवं फुट ओवर ब्रिज बनाया जाये ।
हरपालपुर नगर में जनसुविधा को दृष्टिगत रखते हुए एन.एच पर रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण कराया जाए ।
छतरपुर जिले अंतर्गत सिंहपुर ग्राम में प्रसिद्ध अमर शहीद चरण पादुका नाम से ऐतिहासिक स्थान है जिसे बुन्देलखण्ड का जलियावाला बाग भी कहा जाता है वहाँ पर स्थित डुमरा रेलवे स्टेशन पर वहाँ से निकलने वाली खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति, बुन्देलखण्ड लिंक एक्सप्रेस इत्यादि सभी ट्रेनों का स्टॉपेज किया जाए ।
झांसी से चलकर प्रयागराज होते हुए वाराणसी जाने वाली बुन्देलखंड लिंक एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन सप्ताह में 3 दिन टीकमगढ़ से प्रांरभ कराया जाए ।
खजुराहो कानपुर पैसेंजर का संचालन टीकमगढ़ से प्रारंभ कर वाया छतरपुर खजुराहो किया जाए ।
छतरपुर जिले अंतर्गत हरपालपुर स्टेशन पर रैक प्वाईंट है जो जिला मुख्यालय केन्द्र रेलवे स्टेशन छतरपुर से 55 किमी दूर तथा यहाँ से दूरस्थ गांव 100 किमी तक है । जिससे व्यापारियों को काफी आर्थिक क्षति होती है, छतरपुर स्टेशन पर दूसरा प्लेटफार्म बनकर तैयार हो चुका है, रैक प्वाईंट के लिए पर्याप्त जगह है, इसलिए छतरपुर रेलवे स्टेशन पर रैक प्वाईट स्वीकृत किया जाए साथ ही छतरपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली भोपाल इन्दौर से पार्सल सुविधा प्रांरभ कराई जाए ।
टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में विभिन्न रेल सेवाओं की सौगात एवं जिला मुख्यालय स्टेशन टीकमगढ़ पर रैक प्वाईट की सुविधा विगत दिनों प्रदान की गई इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री एवं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं और अनुरोध करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र की उक्त मांगे भी शीघ्र पूरी की जाएं । धन्यवाद ।
*m11 श्री सुशील कुमार सिंह (औरंगाबाद): महोदय, धन्यवाद ।
महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान माँग पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ । मैं इस माँग के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ । सबसे पहले तो मैं भारतीय रेल का एक छोटा सा परिचय सदन के माध्यम से देश के सामने रखना चाहता हूँ ।
भारतीय रेल 69 हजार रूट किलोमीटर की क्षमता वाला दुनिया का चौथा बड़ा नेटवर्क है । इसके साथ-साथ सालाना एक लाख टन से अधिक माल ढुलाई करने वाले देशों के चुनिन्दा क्लब में भी भारतीय रेल है । इसके अतिरिक्त भारतीय रेल यात्री सेवा के क्षेत्र में जापान के बाद दुनिया में दूसरे नम्बर पर है । भारतीय रेल प्रतिदिन औसतन दो करोड़ लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचाता है । यह भारतीय रेल का एक छोटा सा परिचय है ।
अपने लगभग एक शतक के गौरवशाली सफर में रेलवे ने कई ऊँचाइयों को छुआ है । इस वर्ष हमारे आदरणीय यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में और माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के मार्गदर्शन में रेल के लिए जो डिमांड सदन के सामने रखी गई है, उसके तहत मैं बताना चाहूँगा कि इस वर्ष दो लाख 15 हजार 58 करोड़ रुपये के साथ अब तक के सर्वाधिक योजनागत व्यय, जिसमें अतिरिक्त बजट संबंधी संसाधनों से एक लाख दो हजार 58 करोड़ रुपये, पूंजीगत व्यय आवंटन से एक लाख, सात हजार एक सौ करोड़ रुपये और आंतरिक स्रोतों से सात हजार पाँच सौ करोड़ रुपये शामिल हैं, जो अपने विस्तार की नई उड़ान भरने के लिए व्याकुल है ।
महोदय, प्रतिदिन दो करोड़ लोगों को यात्राएं कराने वाले रेलवे ने खुद बहुत यातनाएं भी सही हैं । अभी तक, वर्ष 2016 से पहले, मैं तो 22 साल से, बीच के कुछ कालखंड को छोड़ दिया जाए, इस सदन का सदस्य रहा हूँ । मैं देखता था कि किस प्रकार रेल बजट की प्रतीक्षा न केवल इस सदन के सदस्यों को, बल्कि देश को होती थी । घोषणाएं बहुत होती थीं, लंबी-चौड़ी घोषणाएं होती थीं, हवा-हवाई घोषणाएं होती थीं । अखबारों में, मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जाता था कि इस राज्य को यह मिला, उस राज्य को यह मिला, यह हुआ, वह हुआ, आदि-आदि, लेकिन जब बात जमीन पर होती थी, बात उनके क्रियान्वयन की होती थी, बात उन योजनाओं के पूरा होने की होती थी तो नतीजा बड़ा निराशाजनक होता था । अब वह बात नहीं है, वह दौर चला गया, वह समय अब बदल गया है । अब घोषणाओं का इंतजार नहीं होता है, बल्कि अब मोदी जी के नेतृत्व में और गोयल जी के सफल संचालन में जमीन पर काम होता है ।
मुझे रेल संबंधी एक समिति की बैठक में भाग लेने का मौका मिला था । जब हम लोगों ने पूछा कि रेलवे की कितनी परियोजाएँ हैं और उनको पूरा करने के लिए धन कितना चाहिए तथा समय कितना लगेगा, तो रेलवे के अधिकरियों ने कहा था कि वर्तमान में जितनी परियोजनाएँ घोषित हैं, उनको पूरा करने के लिए एक नहीं, कई लाख करोड़ रुपये लगेंगे और समय तो हम लोग बता ही नहीं सकते । लेकिन अब वह नहीं होता है । अब घोषणाएँ नहीं होती हैं, काम होता है और समय के अंदर पूरा होता है ।
महोदय, मैंने कहा कि अपने पोलिटिकल एजेंडे को पूरा करने के लिए रेलवे ने बहुत यातनाएँ सहीं । चुनाव जीतने के लिए रेलवे को इक्वीपमेंट के रूप में, हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया गया । मैं इसके कई उदाहरण अभी बताऊँगा । मुझे याद है कि जब मान्यवर अटल जी की सरकार इस देश के अंदर थी, रेलवे में सुरक्षा के लिए, एक्सीडेंट न हो, इसके लिए ट्रेक के मजबूतीकरण के लिए अलग से एक फंड बनाया गया था, जिसे सम्भवत: रेलवे सेफ्टी फंड कहते थे । उसमें लगभग 5 हजार करोड़ रुपये जमा हुए थे । उसके तहत देश भर में रेलवे ट्रेकों को मजबूत करने का काम हुआ । लेकिन उसके बाद क्या हुआ? उसके बाद एक रेल मंत्री बने और रेलवे के इतिहास में पहली बार सम्भवत: ऐसा हुआ होगा कि मालगाड़ियों में ओवरलोडिंग होने लगी । जिस तरह से रोड पर ट्रक्स में ओवरलोडिंग होती है और सड़कें खराब होती हैं, उस तरह से रेलवे में भी ओवरलोडिंग होने लगी । उस पर तुक्का यह कहा गया कि रेलवे मुनाफा कमा रहा है । ट्रेक्स क्षतिग्रस्त हो रहे थे, एक्सीडेंट्स की सम्भावनाएँ बढ़ रही थीं, एक्सीडेंट्स ज्यादा हो रहे थे, इसकी चिंता लोगों को नहीं थी, लोग इसमें वाहवाही लूट रहे थे कि रेलवे मुनाफा कमा रहा है । लेकिन आगे क्या होगा, इसकी चिंता उन लोगों को नहीं थी । इसलिए मैंने कहा कि रेलवे को हथियार बनाया गया, रेलवे का दुरुपयोग किया गया, अपने पोलिटिकल एजेंडे को साधने के लिए । महोदय, यह बात तब की है, जब आज बिहार के मुख्य मंत्री और उस समय देश के रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार जी हुआ करते थे और अटल जी की सरकार थी ।
महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगा कि आज़ादी मिलने के बाद पहला रेल बजट जब श्री जॉन मथाई जी ने आज़ाद भारत का पेश किया था, उस समय कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए मात्र 46.72 करोड़ रुपये रखे गए थे । बाद में यह बढ़ते-बढ़ते वर्ष 2013-14 तक आते-आते 63,363 करोड़ रुपये हुए । 46 करोड़ 72 लाख से वर्ष 2013-14 तक 63,363 करोड़ रुपये तक हुए और आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये आबंटित किए हैं, जो पूरे देश में रेल संरचना के विकास और विस्तार योजनाओं पर व्यय होगा । यह राशि पिछले बजट वर्ष अनुदान की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक है ।
सभापति महोदय, रेलवे बजट को एक अलग तारीख में पेश करने की परम्परा थी । वर्ष 1924 में अंग्रेजों के द्वारा सरकारी राजस्व के प्रमुख अंश के रूप में हुई थी और देश का सकल घरेलू उत्पाद रेलवे से प्राप्त राजस्व पर काफी निर्भर था, तब से रेल बजट को अलग पेश किए जाने की एक परम्परा रही । आज से 22 साल पूर्व जब मैं इस सदन में पहली बार आया और उससे लेकर वर्ष 2016 तक यह परम्परा रही । लेकिन मैं अपने यशस्वी प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उनके नेतृत्व, उनके मार्गदर्शन में इस ब्रिटिश सरकार की परंपरा को, इस उपनिवेशवाद को हमारी सरकार ने समाप्त किया । रेल बजट को अलग नहीं कर के आम बजट के अंदर इसे समाहित किया । इसका अच्छा असर भी हुआ है । इसीलिए आज मैं कह रहा था कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में 53 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है ।
महोदय, वैसे मेरे पास पूरे आंकड़े हैं कि किन-किन प्रदेशों में रेलवे के विकास के लिए, रेल की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए, कितनी-कितनी राशि खर्च हुई, कितनी राशि आवंटित है और कौन-कौन सी परियोजनाएं इसके तहत ली गई हैं । लेकिन शायद आपके पास समय का अभाव होगा, इसलिए उतने विस्तार में मैं जाना नहीं चाहता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हमारे प्रधान मंत्री जी का नारा है कि ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ । इसके तहत किसी भी एक क्षेत्र की रेलवे ने अपनी तरफ से अनदेखी नहीं की है । चाहे वह जम्मू कश्मीर हो, उत्तर पूर्व के राज्य हों, दक्षिण के राज्य हों, पूर्वी या मध्य भारत का राज्य हो, सब तरफ आवश्यकता के अनुसार, बराबरी के भाव के तहत, सम-भाव के तहत, रेलवे ने, जहां जरूरत थी, वहां विकास किया ।
जम्मू-कश्मीर में जम्मू तक पहले ट्रैक हुआ करता था । हम लोग भी वैष्णों माता के दर्शन के लिए जाया करते थे । पहले रेल गाड़ी जम्मू तक ही जाया करती थी । उत्तर-पूर्व के लोगों ने रेलवे का नाम ही सुना होगा, रेलगाड़ी नहीं देखी थी । लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में आज यह सब कुछ संभव हो रहा है । अभी हमारे कामत जी बिहार के संदर्भ में कह रहे थे कि 87 साल पहले वह पुल क्षतिग्रस्त हुआ, जब यहां अंग्रेजों का राज था । मान्यवर, अटल जी ने उसका शिलान्यास किया । अभी-अभी मैं माननीय मंत्री जी पीयूष गोयल जी का आभारी हॅूं कि वहां टेस्टिंग की कार्यवाही पूरी हो गई । गाजे-बाजे के साथ निर्मली स्टेशन पर लोगों ने रेल का स्वागत किया और एक उम्मीद जगी, उम्मीद ही नहीं जगी, अब यह उम्मीद उनको पूरी होती दिख रही है कि अब हम लोग भी रेल की यात्रा कर सकेंगे, जहां जिला मुख्यालय जाने के लिए लोगों को 200 किलोमीटर से अधिक यात्रा करनी पड़ती थी, अब आधे घंटे में अपने जिला मुख्यालय पर वे लोग पहुंच सकेंगे । यह मोदी जी के नेतृत्व और पीयूष गोयल जी के सफल संचालन का परिणाम है ।
महोदय, इसीलिए मैं कहना चाहूंगा कि विस्तार में हर राज्य की योजनाएं मैं यहां नहीं रख सकता, आप घंटी बजा देंगे, लेकिन इतना जरूर कहूंगा ।
महोदय, मैं बंगाल के विषय में कहना चाहूंगा कि बंगाल से एक नहीं, कई-कई रेल मंत्री हुए । अभी तरं वहां की मुख्य मंत्री हैं, और वे भी रेल मंत्री बंगाल से हुईं । उन्होंने कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं कहीं और के लिए नहीं, बंगाल के लिए की । लेकिन उनकी दशा और दुर्दशा क्या है, मैं आपको बताना चाहूंगा । महोदय, एक नहीं, तीन-तीन बड़ी-बड़ी परियोजनों की घोषणा उन्होंने बंगाल के लिए कीं, लेकिन बंगाल के लोगों के साथ भी कितना बड़ा धोखा हुआ, यह मैं उदाहरण के साथ बताना चाहता हॅूं । जबकि हमारी सरकार ने, मैं पहले अपनी सरकार की उपलब्धि बता लूं, उसके बाद मैं उनकी जो कमियां हैं, उनकी भी चर्चा करना चाहूंगा ।
हमारी सरकार ने 6,633 करोड़ रुपये आवंटन के साथ बंगाल में रेल सुविधा बढ़ाने और रेल परियोजनाओं को पूरा करने में सबसे अधिक परिव्यय किया है । सन् 2009 से 14 के बीच बंगाल में आवंटित औसत राशि ढाई गुना है । अभी हमारी सरकार ने जितना पैसा बंगाल मे रेल के विकास के लिए दिया है, वह पूर्ववर्ती सरकार के पांच साल से ढाई गुना अधिक है । महोदय, पश्चिम बंगाल में स्थिति यह है और बड़े आश्चर्य का विषय है और यह आश्चर्य का ही विषय केवल नहीं है, बल्कि निराशा का विषय है कि एक नहीं, तीन-तीन बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई ।
बंगाल से इतने रेल मंत्री होने के बावजूद वहां की कुछ ऐसी परियोजनाएं हैं, जो 45 सालों से लम्बित हैं । इसका कारण इच्छा शक्ति का अभाव, राज्य सरकार के द्वारा जमीन का आवंटन न किया जाना या रेलवे को जमीन मुहैया न किया जाना है, जबकि यह कहा जाता है कि बंगाल में हमने यह किया, वह किया । मैं बताना चाहूंगा कि जिस समय ये घोषणाएं हुई थीं, करीब-करीब उसी समय बिहार में हमारे जिले में, उस समय मैं बारहवीं लोक सभा का सदस्य था और यह इलाका मेरे ही संसदीय क्षेत्र में आता था और मैं वहां का प्रतिनिधित्व कर रहा था । बिहार के औरंगाबाद जिले के नबीनगर में रेलवे ने एक बिजली घर लगाने की घोषणा की । आज स्थिति यह है कि वहां वह परियोजना कब की लग गई, बिजली का उत्पादन हो रहा है । रेलवे को बिजली के साथ-साथ उस थर्मल पावर प्लांट से राजस्व की भी प्राप्ति हो रही है, लेकिन बंगाल में क्या हुआ? बंगाल में आद्रा-पुरुलिया पावर प्रोजेक्ट की घोषणा इसी सदन में हुई । आज वे वहां की मुख्य मंत्री हैं, लेकिन उसका जमीन पर कोई अता-पता नहीं है । इसकी स्थिति क्या है, इसे शायद माननीय मंत्री जी बताएंगे । दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि जलपाईगुड़ी में एक्सल फैक्ट्री की घोषणा हुई । उसका कहीं कोई अता-पता नहीं है कि उसका क्या हुआ । तीसरा उदाहरण मैं बताता हूं, जो बंगाल के लोगों से वादाखिलाफी हुई है, झूठी घोषणाएं हुईं, हवा-हवाई घोषणाएं हुईं । कचरापाड़ा में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से एम.ई.एम.यू. कोचेज के निर्माण की घोषणा अनिश्चित काल से लटकी पड़ी हैं । ये तीन बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुईं । उस समय तो सुनने में बड़ा अच्छा लगा कि बंगाल को यह मिला, बंगाल को वह मिला, दीदी ने यह दिया, वह दिया, लेकिन स्थिति यह है कि उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल के लोगों को ठगा गया । इसी का नतीजा है कि आज बंगाल की स्थिति क्या है, यह देश से छिपा नहीं है ।
महोदय, मैं रेलवे की प्रशंसा करना चाहूंगा ।
माननीय सभापति: अब आप अपनी गाड़ी स्टेशन पर लगाइए ।
श्री सुशील कुमार सिंह: महोदय, समाप्ति से पाँच मिनट पहले कृपया आप मुझे आगाह कर दीजिएगा, ताकि मेरे क्षेत्र से संबंधित जो मांगें हैं, उन्हें रखने में मैं असमर्थ न हो जाऊं ।
महोदय, अब मैं कोविड-19 की चर्चा करना चाहूंगा । कोविड-19 में रेलवे ने ऐतिहासिक काम किया । उस वैश्विक महामारी के समय में जब सारे देश, सारी दुनिया डरी हुई थी, उस समय रेलवे ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी, अपने डॉक्टर्स को लगाया, अपने कोचेज को कोरोना सेन्टर के रूप में विकसित करके लोगों की मदद की । इसके साथ-साथ रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाईं । इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से 63 लाख से अधिक लोग अपने गांव-घर पहुंच सकें, अपने परिवार के लोगों से मिल सकें । 1 मई, 2020 से जब से यह श्रमिक ट्रेनें चलनी शुरू हुईं, अकेले उत्तर प्रदेश के लिए 1,726 ट्रेनें और बिहार के लिए 1,627 ट्रेनें चलाई गईं । 23 राज्यों में 63 लाख से अधिक लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया गया । इसमें मैं यह भी कहना चाहूंगा कि दानापुर रेलवे स्टेशन पर वैसे लोगों के लिए भोजन के कुछ 22 लाख 79 हजार पैकेट्स प्रदान किए गए और 28 लाख 75 हजार पानी की बोतलें मुहैया कराई गईं । इसी तरह, पश्चिम रेल ने भी कम काम नहीं किया । पश्चिम रेल ने आई.आर.सी.टी.सी. के माध्यम से भोजन के लगभग सवा करोड़ पैकेट्स और पानी की करीब डेढ़ करोड़ बोतलें वितरित कीं ।
महोदय, इसी क्रम में मैं बताना चाहूँगा कि मेरे अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन पर उस दौरान 93 गाड़ियाँ आई थी । हर गाड़ी के हरेक यात्री को, जो बाहर से आने वाले लोग थे, उनको मैंने अपनी तरफ से गरम खाने का लंच पैकट और पानी दिया, चाहे वह ट्रेन बारह बजे रात में आई हो, दो बजे रात में आई हो, चार बजे सुबह में आई हो । वहाँ लगभग 60 से 70 हजार लोगों को खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी, चूँकि 93 ट्रेन्स आई थीं, उनके लिए मैंने अपनी तरफ से व्यवस्था की थी ।
अब मैं जरा डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर की तरफ आना चाहता हूँ । यह हमारे इलाके से होकर गुजरता है । अभी हाल में माननीय रेल मंत्री जी ने जो घोषणा की है, उसमें बिहार के औरंगाबाद जिले के सोन नगर से झारखंड के गोमो तक के सेक्शन को पूरा करने के लिए कई हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूँगा । मैं यह बताना चाहूँगा कि वर्ष 2006 में जब यूपीए की सरकार थी तो डेडिकेटेड फ्रेड कोरिडोर योजना स्वीकृत हुई । पहला टेंडर अवार्ड करने में इन लोगों को सात साल लगे । वर्ष 2013 में पहला टेंडर आवंटित हुआ । इनके काम की गति क्या है, यह कैसे काम करते हैं, यह इसी से पता चलता है ।
माननीय सभापति: सुशील जी, आपको बोलते हुए 20 मिनट्स हो चुके हैं । कृपया अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री सुशील कुमार सिंह: मुझे लग रहा है कि अभी पाँच ही मिनट हुए हैं, लेकिन आपका आदेश हमें मान्य होगा । अब हम लोगों को यह उम्मीद है कि मोदी है तो मुमकिन है । अब डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर, चाहे वह दिल्ली से दानकुनी का हो या दिल्ली से मुम्बई का हो, दोनों बहुत जल्द पूरा होंगे और देश के लोगों को माल ढुलाई की सुविधा अच्छी तरह से मिल सकेगी । अभी हाल में एक बड़ा उल्लेखनीय काम हुआ है । पहले मालगाड़ियों की जो स्पीड थी, वह 23 से 24 किलोमीटर प्रति घंटे ही थी । हमारी सरकार ने उस स्पीड को दोगुना किया है । अब वह 46 किलोमीटर प्रति घंटा हुई है । इससे लोगों का सामान कम से कम समय में, यानी आधे समय में ही पहुँचेगा । वह सस्ता भी होगा और खराब भी नहीं होगा । ऐसे ही हमारी सरकार ने किसान रेल भी चलानी शुरू की है, इससे किसान की उपज अच्छे दाम पर दूसरे बाजारों में बिक सकती है । जैसे अहमदाबाद से रेल चली और वह पटना तक आई । अहमदाबाद के लोगों का सामान बिहार और बिहार के लोगों का सामान तथा कृषि उपज गुजरात पहुँचेगा । इससे अच्छा दाम मिलता है । जो चीज यहाँ नहीं मिलती है, अब वह भी मिल जाएगी । इस तरह से यह सुविधा हमारी सरकार ने दी है ।
महोदय, उत्तर-पूर्व तथा जम्मू-कश्मीर के विषय में जो काम हुए हैं, वहाँ के हमारे साथी जब बोलेंगे तो उसमें विस्तार से बात को रखेंगे । चूंकि आपके पास समय की कमी है, लेकिन मैं बिहार के संदर्भ में कुछ बातें आपके समक्ष रखना चाहूँगा ।
महोदय, बिहार में पटना से गुवाहाटी के लिए पहले 12-12 घंटे यात्रा में लगते थे, लेकिन जिस तरह से हाई स्पीड ट्रेन चलाने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है, अब यह दूरी पाँच से छह घंटे में पूरी होगी । उसी तरह पटना से वाराणसी की यात्रा में अभी छह घंटे लगते है । अब मात्र दो घंटे में बिहार के लोग पटना से वाराणसी तक पहुँच सकते हैं । इसके लिए मैं रेल मंत्री जी का बहुत आभारी हूँ । मैं एक-दो और बातें बताना चाहूँगा ।
माननीय सभापति: सुशील जी, आप अपनी बात जल्दी से कनक्लूड कीजिए ।
श्री सुशील कुमार सिंह : महोदय, अब मैं अपनी कांस्टीटूएंसी की बात रखना चाहता हूँ । हमारी कांस्टीटूएंसी में रेलवे का नेटवर्क है । ग्रांड कोरिडोर लाइन के दोनों तरफ हमारी कांस्टीटूएंसी है । जो काम करता है, उसी से उम्मीद होती है, अपेक्षा उसी से रहती है और जो निकम्मा है, उससे लोग अपेक्षा ही नहीं रखते हैं, उम्मीद ही नहीं रखते हैं । मैं माननीय रेल मंत्री जी को यह बताना चाहता हूँ, राम कृपाल जी जब बोल रहे थे तो उन्होंने भी इस बात को बहुत मजबूती से रखा है कि बिहटा से औरंगाबाद लगभग 127 या 123 किलोमीटर की रेल लाइन है । इसकी घोषणा हो गयी, सर्वे हो गयी, उसकी स्वीकृति मिल गयी, लेकिन इसके लिए बजट में काफी कम राशि का उपबंध किया जाता है, जिससे यह काम शुरू नहीं हो पाता है । इस लाइन के लिए इतनी राशि दी जाए कि कम से कम आधी नहीं तो एक-चौथाई तक रेल लाइन बन सके । एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन साल में भी पूरा कर दें, लेकिन इसको प्राथमिकता के आधार पर लें । वहाँ के जिन लोगों ने अभी रेल को केवल देखा है, चढ़े भी हैं, लेकिन उस इलाके से रेल नहीं गुजरती है । वह पिछड़ा इलाका है, गरीब इलाका है, उग्रवादी क्षेत्र है, वहाँ रेल लाइन का निर्माण करना चाहिए ।
दूसरी बात, मैं यह कहना चाहूँगा कि कोरोना के कारण बहुत ट्रेन्स बंद हुई हैं । 13 जोड़ी गाड़ी चलाने का निर्णय लिया गया । जो गाड़ियाँ बंद थीं, अभी हमारे ईसीआर ने इन ट्रेनों को चलाने का निर्णय लिया है । इसमें मंशा तो खराब नहीं होगी, मैं ऐसा नहीं समझता, लेकिन कहीं न कहीं कोई अनदेखी हुई, कोई कमी रही है । दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से लेकर गया तक का जो रेल खंड है ग्रैंड कोड सैक्शन, इन 13 जोड़ी गाड़ियों में इस इलाके के लिए गया से लेकर डीडीयू जंक्शन तक एक गाड़ी भी, जो गाड़ियां चलती थीं, वे शुरू नहीं की गईं । मैं रेल मंत्री जी को कहना चाहूंगा कि हमारे इलाके की जो गाड़ियां ग्रैंड कोड सैक्शन में, जीसी सैक्शन में पहले चलती थीं, उनको चलाया जाना चाहिए ।
महोदय, एक बहुत पुरानी मांग है । औरंगाबाद से देव, मदनपुर, डुमरिया, इमामगंज या बगल के प्रखण्ड बांके बाजार होते हुए चतरा तक रेल लाइन की मांग बहुत पुरानी है । लोग इसके लिए आंदोलन कर रहे हैं । मैं भी इस मांग का समर्थन करता हूं । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इस रेल लाइन के सर्वे की स्वीकृति देकर कम से कम सर्वे का काम शुरू करायें । सर्वे में यदि यह बात सामने आती है कि यहां रेल का निर्माण होना जरूरी है, तो फिर रेल निर्माण का काम होना चाहिए ।
महोदय, बातें तो बहुत थीं, लेकिन आपके पास समय का अभाव है ।
माननीय सभापति: आपको बोलते हुए 26 मिनट हो चुके हैं । सभी माननीय सदस्य समय का ध्यान रखें, क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में माननीय सदस्य इस चर्चा में भाग लेना चाहते हैं ।
श्री सुशील कुमार सिंह: महोदय, एक मिनट और दे दीजिए । महाबोधि एक्सप्रेस गया से दिल्ली के बीच चलती है । अभी वह मात्र 4 दिन ही चल रही है । इससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, बहुत कष्ट हो रहा है । चूंकि अब लोगों ने अपने काम के सिलसिले में आना-जाना शुरू कर दिया है । अभी वह गाड़ी 4 दिन ही चल रही है । लोग हमसे इसकी डिमांड कर रहे हैं कि वह गाड़ी रोज चले । वह गाड़ी 4 दिन चल रही है, लेकिन पहले वह रफीगंज स्टेशन पर रुकती थी, पर अब वहां वह नहीं रुक रही है । वहां वह गाड़ी रुकनी चाहिए । जिन स्टेशनों पर जो गाड़ियां पहले रुकती थीं, वहां उनको रुकना चाहिए ।
मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि हमारे बिहार में 12 हजार हॉर्स पॉवर का बिजली का रेल इंजन बनना शुरू हो गया है । यह अपने आप में एक कीर्तिमान है । यह हमारे बिहार के लिए और साथ ही साथ रेलवे के लिए गर्व का विषय है ।
महोदय मैं अंतिम बात कहकर समाप्त कर रहा हूं ।
“पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है, पर तू जरा भी साथ दे तो और बात है ।
चलने को एक पांव से भी चल रहे हैं लोग, पर दूसरा भी साथ दे तो और बात है ।” *m12 *SHRI DHANUSH M. KUMAR (TENKASI): We need more importance to be given to the Tamil Nadu State and particularly to the Madurai Railway Zone.
In Madurai Railway Zone, doubling of lines is very necessary from Virudnagar to Kollam line.
The train frequency is very less in number. Hardly, we have three trains in a day and at the same time, the connectivity to all other area is also nil except to Chennai.
My Constituency Tenkasi people are expecting a train to Bangalore and also to Coimbatore.
I would request the Railway Ministry to consider these demands.
The facilities in these Railway Stations is almost nil. Please give importance to upgrade the Railway Stations in Madurai Zone.
Along with the above request, I request the Government to provide more passenger trains in the route from Senkottai to Madurai.
*m13 *SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Indian Railways is the third largest network in the world under single management. In 2020-21 financial year, Indian Railways carried 1.2 billion tonnes of freight and 8.1 billion passengers making it the world’s largest passenger carrier and fourth largest freight carrier. The Finance Minister announced a record sum of Rs. 1.10 lakh crore for the Railways, out of which Rs. 1.07 lakh crore is for capital expenditure. Rs. 75,000 crore is from internal resources and over Rs. One lakh crore is from external budgetary resources.
The total proposed capital expenditure for 2021-22 is Rs. 2,15,058 crore. This is an annual increase of 21 per cent over 2019-20. Majority of the capital expenditure will be financed through the budgetary support from the Central Government, that is, 50 per cent followed by extra budgetary resources which is 47 per cent. For the first time since 2015-16, the budgetary support from the Central Government will be higher than the borrowings. Railways will fund only 3 per cent of this capital expenditure from its own resources. It may be noted that Railways’ capability to fund its capital expenditure from its own revenue stream has been declining. Over the years actual capital expenditure has been considerably less than the budget estimates too.
Now-a-days, seldom it is noticed what the Union Budget says about Indian Railways. In 1930, Mumbai-Pune Deccan Queen was started. This is perhaps the only train with an official birthday, that is, on June 1, 1930. Indian Railways have come a long way since 1930, and down the years, several committees have probed the erosion in competitiveness and suggested solutions. In the historical evolution of Railways in India, the emphasis was on passengers, not freight. Geographical parts of the country, important from a freight perspective, were bypassed. Therefore, even towards the end of the 19th Century and the first decade of the 20th Century, Railways did not contribute as much to growth as it did in other countries.
It is a fact that over the years, traffic revenues have been unable to keep pace with the increase in staff costs and pension payments. While the passenger and freight revenues increased by 84.8 per cent from 2010-11 to 2019-20, the staff and pension costs raced ahead at almost double that rate by 157 per cent in the same period. Further, while staff plus pension costs formed 55.7 per cent of the traffic earnings, by 2019-20 they had shot up to 77.5 per cent of the traffic earnings. This despite the fact that there has been a reduction of about one lakh staff on roll during this period. The spike in the staff and pension costs is largely attributable to the implementation of the Central Pay Commission recommendations, a 10-yearly feature. The next, that is, the Eighth Pay Commission is around 2025-26. Therefore, the immediate challenge is to achieve a quantum jump in the revenue, particularly on the freight front and drastic reduction in the number of employees, but this would, in no way, reduce the number of pensioners in the short run. It is in this context that the full commissioning of the two Dedicated Freight Corridors (DFCs) slated to be operational by 2022 assumes great urgency and importance.
The Ministry of Railways has prepared the National Rail Plan, 2030 for augmenting its infrastructure during the 2021-51 period. National Rail Plan is a complete 1,178-page document. Among other things, the National Rail Plan is meant to increase the share of Railways in freight rectifying pre-Independence and post-Independence bias, and develop a capacity that will cater to demand in 2050. This NRP has noted that Railways could be left with a financing gap of over two lakh crore rupees for its capital expenditure projects in the next five years. This relates to the funding gap for projects under the annual work plan of Railways and the National Infrastructure Pipeline. The National Infrastructure Pipeline is a plan of infrastructure projects worth Rs. 102 lakh crore between 2019-20 and 2024-25. The NRP envisages an additional capital expenditure worth Rs. 5.8 lakh crore during 2021-26 period. It may be noted that it would be challenging to fund the projects and envisaged under the NRP from internal resources due to persistently high operating ratio. In 2018-19, India’s operating ratio was 0.59 for freight and 1.92 for passenger traffic. The problem is low passenger fares and artificially high freight rates required to cross subsidize those. Actually, it is worse because freight and passenger trains share common sections of track and passenger trains are given preference over goods trains in getting path. Therefore, the average speed of freight train is 24 km. per hour. During lockdown, there were fewer passenger trains, practically none and average speed of goods trains increased to 40 km. per hour. Dedicated Freight Corridors (DFCs) are meant for this. When average speed increases to say 50 km. per hour, cost will decline and become competitive. Both Western and Eastern Dedicated Freight Corridor should happen. Even after doing this, gaps remain. There are places where one needs new tracks and investments. Yet, I would say it should always be borne in mind that creation of national infrastructure should not be viewed from the narrow prism of return on capital. Railway projects or any infrastructure projects impact the socio-economic conditions for entire population. If the rate of return is taken as the only benchmark, then only business centres will be having rail connectivity and hinterland will be deprived of safe and environmentally advantageous connectivity.
When the idea of constructing railway in India was first started, it was considered that there would be little passenger traffic on account of the poverty of the people and that the chief business would be derived from goods. This is from an essay written in 1905 by NG Priestly, the first Secretary of the Railway Board. Is this the new mind set now? I would say partly yes. There is a slow movement towards it. For security reasons, attempt is made to complete the National projects in Jammu and Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand and North East. National projects have been allocated the highest every outlay of Rs. 12,985 crore in 2021-22 against RE 2020-21 of Rs. 7,535 crore which is an increase of 72 per cent. These projects and other infrastructure and safety works will give a boost to the construction industry, resulting in employment generation. Railway capital spending has a huge multiplier effect on the economy.
Railways have not been able to meet some key physical targets for expansion and modernization in recent years. It has missed its budget targets in all three years between 2017-18 and 2019-20 for construction of new lines and gauge conversion. In 2018-19 and 2019-20, Railways also missed targets for electrification of railway lines. It is noteworthy that Railways aims to achieve 100 per cent electrification of all broad gauge routes by 2023. Is this feasible? Now, I come to some of Odisha-specific issues.
The Centre has allocated Rs. 6,995.50 crore for the development of railway sector in Odisha. It had allocated Rs. 4,373 crore last year. One of the oldest and important projects of the State Khurda Road-Balangir Railway Project has been allocated with Rs. 1,000.50 crore against last year’s Rs. 520 crore, which is an increase of 92.4 per cent. The State had demanded around Rs. 7,200 crore for the development of the railway sector in Odisha.
The funds have been allocated for doubling projects such as Bansapani-Daitari-Tomka-Kakharpura with Rs. 228 crore against Rs. 80 crore, an increase by 185 per cent as compared to last year’s allocation; Brundamal-Jharsuguda fly over with Rs. 20 crore against last year’s Rs. 10 crore; Budhapank-Salagaon with Rs. 215 crore against last year’s Rs. 205 crore, Rourkela-Jharsuguda third line with Rs. 230 crore against last year’s Rs. 170 crore an increase of 35 per cent and Narayangarh-Bhadrak third line for which Rs. 225 crore has been allocated against Rs. 50 crore an increase of 350 per cent.
I have repeatedly drawn the attention of the Government relating to low rail density in Odisha. The rail density that is 15.0 in the State is much lower compared to the national average of 19.0 and that of the adjoining States West Bengal is 43.4 and Jharkhand is 24.3. Hence, there is urgent need for expanding rail network in the State to bring the rail density to the level of the adjoining States. New lines/projects are being demanded by the State for important lines such as Puri-Konark, Bargarh-Naupada, Chakulia-Buramara, Jajpur-Aradi-Dhamra etc. In order to expedite augmentation of rail infrastructure in the State, Government of Odisha has taken many initiatives such as formation of joint ventures/Special Purpose Vehicles (SPVs) jointly with Railway Ministry and other Ministries to undertake new rail lines/corridors, directly financing construction besides offering land free of cost for establishment of new railway projects. Special attention needs to be paid on the successful completion of ongoing projects, sanctioning of new line, station modernisation, introduction of new trains, extension of existing trains, improved passenger amenities at stations, on-board services, establishment of rail-based industries, multi-modal logistics parks etc. There is demand for redevelopment of Puri, Bhadrak, Brahmapur, Cuttack, Jajpur-Keonjhar Road, Khurda Road, Rayagada, Sambalpur, Balasore, Jharsuguda and Rourkela stations to national standards with superior passenger amenities. However, there has been no statement by the Ministry.
Further, I would like to state that Odisha Chief Minister Naveen Patnaik in 2019 had urged Prime Minister Narendra Modi for reorganisation of railways in Odisha after the Centre created a separate zone for Andhra Pradesh. The Railway Ministry had announced bifurcation of Bhubaneswar headquartered East Coast Railway (ECoR) to create South Coast Railways (SCoR) to be headquartered at Visakhapatnam. Chief Minister Mr. Naveen Patnaik also sought the Prime Minister’s intervention to declare three new Railway Divisions at Rourkela, Rayagada and Jajpur to unify railways in Odisha under one administrative zonal headquarters of ECoR, Bhubaneswar. Till such time, the Chief Minister requested not to operationalise the declared SCoR at Visakhapatnam, which has been done without consultation with Odisha. He had been demanding reorganisation of railways in Odisha with three new divisions. Presently, about 70 per cent of Odisha is under the ECoR’s jurisdiction. An efficient and strong rail network with a single administrative structure within the State is necessary to maintain the impetus of growth.
Large tracts of land are lying vacant in and around Cuttack Station which can be utilized for commercial purpose. Specific plan can be carved out and area can be developed which will bring revenue to the Railways.
A separate Railway Budget has passed irrevocably into history. However, the need for a detailed public scrutiny of the affairs of one of the largest undertakings in the country, at least once a year, has not gone away. Take for instance the Operating Ratio, which is broadly the ratio of working expenses to revenues. It has been artificially kept below 100 per cent by making less than required provision for pension payments during 2019-20 and 2020-21. While the official figures of Operating Ratio are 98.36 per cent for 2019-20 and 96.96 per cent for 2020-21, the actual Operating Ratio works out to 114.19 per cent and 131.49 per cent respectively, if the required provision is made for pension payments. Why should the Government indulge in this self-delusional exercise? Technically, the Indian Railways are well and truly in the red. Tinkering with statistics cannot alter that reality. Perhaps for the first time ever, the Indian Railways were unable to adequately provide for the Pension Fund, both for 2019-20 and 2020-21 totalling Rs. 78,119 crore. The Railway Ministry has sought a loan from the Central Exchequer to meet the shortfall. While the under provisioning for 2020-21 can be explained by the shortfall in revenue due to the pandemic, the shortfall amounting to Rs. 27,642 crore even during 2019-20, when there was no COVID-19 should be a cause for serious concern. In fact, the passenger and freight earnings in 2019-20 were less than in 2018-19 indicating that a downslide had started even before the outbreak of COVID-19, probably due to the economic slowdown. Actually, Railway finances are out of whack and COVID-19 has nothing to do with it. It is not as though all this has happened suddenly.
The Railways are in the midst of an unprecedented financial distress and are faced with fundamental organisational issues. This is no time for evasiveness and obfuscation but for clarity and transparency.
With these words, I conclude.
*m14 *SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA (KORAPUT): I would like to put forth my views on Demand for Grants, Railways for the year 2021-22.
Gunupur - Therubali project continues to be in back burner with only Rs.1,000 allocations, various demands ignored, meagre amount sanctioned to Jeypore - Malkangiri/ Nabarangpur, Rayagada Division, no new trains.
Extension of Naupada — Gunupur broad gauge line up to Therubali (79.15 Km) was included in the budget 2017-18 subject to clearance from the Government (NITI Aayog, Cabinet Committee on Economic affairs). As per DPR the cost of the project is approx. Rs 1274 crore with Rate of Return (-) 3.19%. Project being financially unviable, State Government of Odisha has been requested to provide land free of cost and share 50% of the cost of the project.
State Government of Odisha vide letter dated 04.01.2020 has agreed to provide land free of cost. Central Government has written back that the letter from State Government doesn’t mention about sharing 50% of cost of construction but the State Government is arguing that once land is provided free of cost the Rate of Return would now be in the range of 10% and has requested the Central Government to consider approving the project. Unfortunate that this project is just in the backburner with no progress and only Rs. 1,000 was allocated to this project in the current budget. Would request Central Government to not delay further and if required set up a committee to fast track the progress and end dead locks so as to urgently revive the project.
I welcome Jeypore — Nabarangpur Rail Line project but the proposed railway line passes through the heart line of Borigumma town which is going to cause havoc in the lives of hundreds of families directly or indirectly including those who make their livelihood from farming and farm related activities. Besides, the project in its present form is feared to have a negative impact on few existing and upcoming residential colonies and even the existing health centre, market and several schools and the only college of Borigumma. I Would like the Rail Ministry to revisit the Survey in its present form and the proposed land acquisition. The go-ahead for the land acquisition may not be ordered without first addressing adequately the issues by diverting the railway line in its present form and suitably shifting the proposed railway project 5 KM away from the centre of Borigumma town.
There have been multiple discussions on Koraput bypass between District Administration, NH Division officials and Railway officials along with elected representatives for transfer of Railway land for construction of Koraput bypass. The concerns from Railway officials have been addressed and joint inspection conducted on 27 November 2020 and it was concluded that the outer edge of proposed Koraput bypass is not less than 48 meters from the railway boundary of road and 60 meters from the edge of railway quarters. Hence would request Ministry of Railways to kindly expedite the approval for land transfer so that construction of Koraput bypass can be restarted immediately — this is pending for quite some time.
I would like to thank the Government for sanctioning Rayagada Division as part of ECoR restructuring. Unfortunately, it’s almost 2 year and there is hardly any progress on the front. Only Rs. 40 lakh out of required Rs.170 crore has been sanctioned in the current budget. I would request the government to expedite the request and approve the DPR pending with Railway Board at the earliest.
Some other key demands from Undivided Koraput District - New Day time train from Jeypore/ Koraput to Bhubaneswar via Rayagada, Berhampur - New Intercity train from Gunupur to Bhubaneswar/ Bhadrak - Rehabilitation and Reallocation of displaced shop owners in front of Railway Station in Rayagada - Rail Underground passage at KM 121/9 to 121/10 (Near Narigaon, Chatua GP addressing 15+ villages) between Darliput Railway Station and Gorapur Railway Station of Koraput-Vishakhapatnam Rail line. - Rail Underground passage at Musuriaguda near North and Manbar Station in Manbar GP in Koraput — Vishakhapatnam Rail line. - Rail Underground passage at Kerandiguda — Chancharaguda of Bissamcuttack GP in Bissamcuttack Block, Rayagada District - Rail Underground passage at Lataguda of Chattikona GP in Rayagada District - Rail underground passage at Sana Brundabadi of Bhatpur GP in Rayagada District - Rail underground passage near Mile No 308/17 at Majhihalma of Chatikona GP in Rayagada District - Rail over bridge at Muniguda town near level crossing,
Restoration of Train services that were running prior to Covid-19 induced lockdown
- Hirakhand Express (18447-18448)
- Bhubaneswar Bhawanipatna Link Express (18437-18438)
- Koraput (Samaleshwari) Express (18005-18006)
- Rajya Rani Express between Gunupur-Bhubaneswar-Rourkela
- Gunupur-Puri (now converted into express train)
- Gunupur-Visakhapatnam passenger
- Gunupur-Palasa express train
- DMU Vishakhapatnam — Koraput (58537-58538)
- Stoppage at Bissamcuttack for Tirupati Biweekly Express (07481-07482)
- Stoppage at Bissamcuttack and Jemadeipentho for Korba Covid-19 Special (08517-08518)
- Stoppage of Samta Express (02887-02888) and Anantpur Exam Spl (0724307244) at Jemadeipentho
- Stoppage of Samaleshwari Express and Intercity Express at Sikarpai
- All other trains that were running previously to be restored immediately Construction of New Platform and foot over bridge is required at Laxmipur Station, Kakriguma Station, Damanjodi Station and Padua Station. Drinking water facilities are not functioning properly due to lack of maintenance at Laxmipur, Kakriguma, Singaram - these needs to be fixed. Need reservation ticket counters at Tikri, Laxmipur, Damanjodi, Padua, Kakriguma.
Thanks for this opportunity.
*m15 *DR. UMESH G. JADAV (GULBARGA): I would like to put the Demands of my Parliamentary Constituency i.e., Kalaburagi district in Karnataka State.
Railway Division at Kalaburagi – The Union Government had announced the Railway Divisional headquarters in Kalaburagi in 2014 and a detailed project report given approval and the required land allocated to the Indian Railways, the Railway Division still remains a distant dream. At present, the region is served by three railway zones – Central Railways, South Central Railways and South Western Railways and five Divisions – Solapur, Guntakul, Secunderabad, Hyderabad and Hubballi. As the region is divided into various zones and divisions, it is difficult to get train facilities or any other work on priority basis as we have to get approval from various Divisions and zone offices. However, a committee has been set up to give feasibility report on this Division, but still the report is not submitted to the Government.
Request to restore stoppage facility of Express Train at Shahabad Railway Station -
Shahabad is a Taluka Headquarter of Kalaburagi District which lies on Mumbai –Chennai Railway line. It is also an industrial town where industries like ACC Cements, Jaypee Cements, M/s GE Power India Limited and many other Doll Industries and Stone Polishing Industries are functioning.
In a recent development many Express Trains and Intercity Trains stoppage has been withdrawn from the Shahabad Railway Station which is badly affecting the livelihood and functioning of these industries. Therefore, I request you to kindly restore the stoppage of below mentioned trains at this station are as follows:
1. 11019/11020 -- Konark Express
2. 12701/120702 -- Hussain Sagar Express
3. 17319/17320 -- Hubli Secundrabad Express
4. 12163/12164 -- Chennai Express
5. 17031/17032 -- Mumbai Hyderabad Express
6. 16339/16340 -- Mumbai Nagarcoil Express
7. 17203/17204 -- Bhavnagar Kakinada Express
8. 18519/18520 -- Vishakhapatnam Lokmanya Tilak Express I) Extension of existing Trains: -
a) Extension of Train No. 17319/17320 Secundrabad – Hubli train up to Belagavi.
b) Train No. 11051/2 Solapur-Kolhapur Express up to Kalaburgi railway station (rake maintenance can be undertaken at the pit line at Kalaburagi railway station)
c) Train No. 12115/16 Solapur – Mumbai Express up to Kalaburagi.
d) Train No. 12603/4 Chennai – Hyderabad Express up to Kalaburagi (this will provide rail connectivity towards interior Andhra Pradesh and Telangana in the morning hours.) II) Introduction of New Trains: -
a) Kalaburagi – Bengaluru overnight Express via Guntkal, Dharmavaram etc.
b) Kalaburagi – Mumbai overnight Express via Solapur, Pune, etc.
c) Kalaburagi – Aurangabad Express via Bidar, Latur etc.
d) Kalaburagi – Bellari intercity Express
e) Bengaluru – Mumbai Express via Guntkal, Kalaburagi, etc.
f) Kalaburagi to temple town of Kolhapur III) Diversion of Train routes: --
1) The Train No. 16572 Bidar – Yeshwanthpur should be diverted via Kalaburagi to run from Bidar – Kalaburagi – Yeshwanthpur in order to meet the ever-increasing rail traffic from Kalaburagi Railway Station to Bengaluru or a new train should be run on this route.
2) Similarly, train no. 12735 Secundrabad – Yeshwanthpur should be diverted to run from Secundrabad to Kalaburagi and from Kalaburagi to Yeshwanthpur instead of passing through Wadi Railway Station as the distance between Wadi and Kalaburagi can be covered within a short span of time as it helps providing much needed rail facility to the always increasing rail traffic towards Bengaluru, not to think of its diversion to Kalaburagi and back in a short period.
3) The train no. 12691 Rajdhani Express from Bengaluru Station to Nizamuddin which passes through Raichur and Sedam (Kalaburagi District) should be diverted to touch Kalaburagi Railway Station instead of the present route of its by passing from Wadi (Halkatta Railway Station) so as to afford opportunity to travel to Kalaburagi people bound for New Delhi.
IV) Stoppage of Trains: -
1) Arranging Train No. 18519/18520 at Ghanagapur Road is essential because many pilgrims are visiting Ghanagapur temple every day.
2) FOB at station Ghanagapur road and Coach indicator facility.
3) Because of historical temple at Deval Ghanagapur many VIP persons frequently visiting to Ghanagapur, so VIP lounge at Ghanagapur station is required.
V) General Demands: -
1) Providing operator for escalator at Kalaburagi Railway Station to avert any possible accidents.
2) Restoration of the route of Bengaluru – Secundrabad – Vaishno Devi Train to the originally planned route of Bengaluru – Kalaburagi – Vaishno Devi in order to afford pilgrimage to this shrine.
3) Providing the much needed under bridge facility at Shahabad Railway Station considering the fact that more than 6 to 7 thousand people live on the other side of the platform and cross the railway track to reach their homes.
4) Widening of Nilur and Koganoor bridge no. 545/6. Because of installation poles in front of the bridge, causing most inconvenient to pass the tractor, lorry, busses, and four wheelers etc. farmers are suffering with great trouble going to the lands for cultivation. Even after several requests and Rail roko, the problem is still pending since 8 to 10 years action to be taken in this regard by providing widening facility.
With these words, I would like to conclude my speech. Thank you so much.
*m16 SHRI MAGUNTA SREENIVASULU REDDY (ONGOLE): Thank you, Chairman, Sir. I would like to say that it would have been better if the hon. Minister of Railways was present in the House as I will be raising issues concerning the State of Andhra Pradesh.
HON. CHAIRPERSON: Pradhan ji is taking note of it. The hon. Minister will also be coming.
SHRI MAGUNTA SREENIVASULU REDDY: I would have appreciated if he was present in the House when I was speaking on the Demands for Grants.
We are discussing the Demands for Grants under the control of the Ministry of Railways. For the last three to four years, we have been discussing the combined Union Budget involving both the Railway Budget and the General Budget. Earlier, we could not understand what is to be discussed under the Railway Budget. We were able to understand it later. Railway Budget generally involves issues concerning a particular State and its constituencies.
In this Budget, the total revenue expenditure by Railways for the year 2021-22 has been projected at Rs.2,17,460 crore, which is an increase of 12 per cent over the last year. The traffic revenue has also increased by 12 per cent. The total revenue of Railways for the year 2021-22 is projected to be Rs.2,10,000 crore approximately and the capital expenditure is estimated to be just four per cent higher than the Budget Estimates.
Sir, after the COVID pandemic, we need to develop the railway stations. The development of railway lines is also required. Due to the worldwide COVID situation, the whole country was in panic and everything came to a halt. Even the works related to the maintenance of railway lines came to a halt. Under the guidance of the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji and due to the efficiency of the hon. Railway Minister, the works related to the development of railways started again. More capital expenditure is required to revive everything. It has to be provided in the Budget itself.
Now, the passenger traffic is also increasing slowly. During COVID times, train services were stopped totally. Later, some of the trains were introduced for the migrant workers. That was a great boon for the people of the country. I must really appreciate the hon. Railway Minister for starting such trains. At that moment, everything came to a standstill. It was so disturbing to know that the miserable migrant workers had to walk miles and miles. All those things had happened. Really, I must appreciate the hon. Railway Minister for his efforts. During that COVID period, we also used to come to Delhi. At that time, when we were unable to come to Delhi, we used to tell him certain issues concerning our constituency telephonically. He used to take up those issues also over phone itself. Sometimes he used to arrange video calls to connect to all the MPs and by arranging such video calls, he was able to resolve such issues in time. I am grateful to him for that. We must appreciate certain things.
As far as my State of Andhra Pradesh is concerned -- whatever revenues are stated there -- it also contributes a lot for the development of Indian Railways. But the expenditure in that particular area is very low. I would request the hon. Railway Minister to look into the matter and try to resolve this issue expeditiously.
Our Hon. Chief Minister, Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy Garu has appreciated the Budget. He wanted me to thank the Government on his behalf for the Dedicated Freight Corridor Project -- the East Coast Corridor from Kharagpur to Vijayawada and the North-South Corridor from Itarsi to Vijayawada. These corridors are very important for the State of Andhra Pradesh for the movement of goods. These have also been stated earlier in all our meetings.
Now, I come to the main thing. In the Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014, the creation of a separate zone had been decided. It was passed in both the Houses also. I was also a Member of the Lok Sabha at that time. The creation of that special Zone, that is, Visakhapatnam Zone is still hanging on for a very long time. We had anticipated the headquarters at Visakhapatnam comprising Guntur, Guntakal, and Vijayawada divisions. But that is not happening. It has been mentioned in the Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014. There is no development with regard to the South-Coast Railway Zone. That will be beneficial for Andhra Pradesh. Through you, I would like to request the hon. Railway Minister for the implementation of the same.
There are other long pending issues. There is a new line namely Gadwal-Macherla. The work on Vishnupuram (Macherla) – Vinukonda line of 66 km is pending since 2012. The work on Jaggayyapeta Town – Miryalaguda line of 65.9 km is also pending since 2011. The works on Tenali-Repalle double line of 37 km and Mahaboobnagar-Gooty double line of 240 km are also pending for a long time. The work on Dharamvaram – Pakala double line of 227 km is also pending. The work on Singarayakonda – Kanigiri new line of 66.53 km is also pending. It comes under my Parliamentary constituency. I request you to consider all these things. Along with these, the work on Kadapa-Bangalore line is also going on for a long time. The completion has to happen on that line also.
Most importantly, the prestigious Nadikudi-Srikalahasti Railway Line is an alternative line, when floods occur on the main Vijayawada route. That is very much required for the high-level areas. There is no water in upland areas. Not only water can be transported, but passengers can also be benefitted with this railway line.
I would request for certain other things. I will not take much of your time. Sir, actually, to tell you frankly, these projects have to be done as early as possible. Otherwise, everything will get delayed. My sincere request is this and all the Members of this House will also appreciate that Railway underbridges and Railway overbridges have to be constructed at many places. Whenever we request the Railway Ministry, they say that 50 per cent of the contribution has to come from the State Government. Our State of Andhra Pradesh is a newly formed State under the leadership of our Chief Minister Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy Garu. But you must consider this as a special case. These RUBs and ROBs have to be sanctioned with hundred per cent contribution from the Ministry of Railways.
I also want to talk of stoppage of trains. Everybody is asking for stoppage of trains. Even you are also asking for stoppage of trains. It is because in your parliamentary constituency, all the people want to go to other places in the fast trains. The issue of stoppage of trains is also pending for a long time. Our hon. Minister has said that a Committee has to be formed. At least I would request the hon. Railway Minister to form the Committee and try to give new stoppages.
Now, I come to the issue of second-class coaches for every common man. This is not only a pleasant trip but also a livelihood trip for them. Those second-class coaches are being reduced day by day. You are bringing new air-conditioned coaches. I request you that second-class coaches are a very must and that has to be continued. All the physically challenged people also need special coaches.
I must appreciate that, during COVID period Indian Railways under the leadership of hon. Railway Minister Shri Piyush Goyal, people have felt very happy. Even now also, the traffic is going very slow on roads. Earlier people used to go by road. Now, people are coming to the Railway stations.
HON. CHAIRPERSON: Now, please conclude.
SHRI MAGUNTA SREENIVASULU REDDY: Sir, you have given 26 minutes to the previous speaker.
Sir, I am also a senior Member. I am not taking much time. I will conclude in two minutes.
It is a COVID period. You have done wonderful things. I am appreciating the Indian Railways for whatever they have done. But these RUBs, ROBs, stoppage of trains have to be considered immediately because these do not cost much money.
I must tell you that we have a complaint. It is a complaint from all the MPs. Whenever any special thing happens, no invitations come from Railways even in their Parliamentary constituencies. It is a sad thing. It was not there earlier. That has to be corrected by our Ministry itself. So, I request you to convey everything to the Ministry. Our hon. Chief Minister Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy Garu wanted to develop Railway links to many places. Somehow if new Railway lines are developed, then there will be a lot of passenger traffic there.
Not only that, now Kisan Rails have been started. You have started it from Anantapur. I must appreciate that. It is a big thing. All the farmers of that area are very happy. Our Narasaraopet MP is also here. He has been asking for a Kisan Rail for the people of Vijayawada, Guntur and other places. Try to introduce it immediately.
Thank you very much.
*m17 *डॉ. संघमित्रा मौर्य (बदायूं): कोविड-19 महामारी के दौरान भी जब सारी सेवाएं अस्त-व्यस्त थीं, उस दौरान भी रेल मंत्रालय ने आदरणीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जी के दिशा निर्देशन में जो सराहनीय कार्य किया, वह प्रशंसनीय है । चाहे प्रवासी मजदूरों को स्पेशल ट्रेन के माध्यम से उनके गृह जनपद लाने की बात हो या अन्नदाता की चिन्ता करके उसके समाधान करने की बात हो । वर्ष 2021-2022 रेलवे की अनुदान मांग का मैं समर्थन करती हूँ ।
भारतीय रेल प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचाने का कार्य करता है । लेकिन महोदय बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि आजादी के बाद से आज तक हमारी लोकसभा बदायूँ अभी भी रेलवे की सुविधाओं से अछूता है । आज देश और प्रदेश को आदरणीय यशस्वी प्रधानमंत्री जी से बहुत उम्मीद हैं और वो उम्मीद हमारी लोकसभा बदायूँ की सम्मानित जनता को भी है और होनी भी चाहिए । बदायूँ एक ऐतिहासिक जिला है लेकिन आजादी के बाद भी आजाद नही हो पाया इसलिए मैं बदायूँ की जनप्रतिनिधि होने के नाते मा.मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूँगी कि पूर्व में प्रस्तावित बदायूँ को लखनऊ व दिल्ली से सीधे जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देने का कष्ट करें ताकि बदायूँ की जनता बदायूँ से दिल्ली व लखनऊ का सफर आसानी से कर सके । बदायूँ में ज़री-जरदोजी का काम बहुत बड़े स्तर पर होता है जब रेल की सुविधा होगी तो निश्चित रूप से उनके व्यवसाय को भी बढ़ावा मिलेगा एवं यातायात की अच्छी सुविधा के कारण बेरोजगारी भी कम हो सकेगी ।
अत: मैं मा. मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूँगी कि बरेली से दिल्ली, बरेली से लखनऊ जाने वाली ट्रेनों की शुरुआत यदि बदायूँ से हो जाएगी तो बदायूँ भी विकास से जुड़ जाएगा । बदायूँ से ट्रेन प्रारम्भ करने के लिए ज्यादा बजट की भी जरूरत नही है सिर्फ समय में परिवर्तन मात्र से बरेली की ट्रेन को बदायूँ से शुरू करके हम बदायूँ को सीधे विकास से जोड़कर ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे को साकार करते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास पर खरा उतरते हुए, बदायूँ की जनता को भी विकास से जोड़कर विश्वास में लेने में सफल होंगे ।
*m18 *SHRI RAJU BISTA (DARJEELING): Foremost, I pay my humble tributes to former MoS for Railways Late. Suresh Angadi ji. During the COVID crisis, I got to work closely with him. I remain forever grateful to him, for his service to our nation. I am grateful to Hon'ble Prime Minister Narendra Modi ji and Hon'ble Railway Minister Piyush Goyal ji and thank the Indian Railways family for being the lifeline of our people during the COVID crisis.
At a time, when everyone had given up on our people, when people from Bengal were left to fend for themselves by an uncaring state government. It was the Indian Railways embodying the mantra of "Sabka Saath, Sabka Vikash, Sabha Viswas” that stepped up and ferried lakhs of workers from various parts of India back home to Bengal. During the COVID crisis, Indian Railways operated more than 4600 Shramik Special Trains. They ferried over 63 Lakh migrant workers, safely back to their homes and family, out of which over 10 Lakh migrant workers were from my state West Bengal.
Going above and beyond their call of duty, Indian Railways converted 5601 Train Coaches to serve as COVID Care Centres. Over 5000 beds in 17 Railway Hospitals were earmarked for COVID care. Not stopping there, the Indian Railways turned COVID crisis into opportunity, I am proud of share that railways generated over 14 Lakh Mandays Employment under PM Garib Kalyan Rozgar Abhiyaan.
Between 1st April 2020 to 30th Nov 2020, more than 4.4 crore tons of food grains were transported by our railways, including • 5.5 lakh PPE kits • 1.5 lakh litres sanitizers and 20 Lakh reusable face-covers Amidst the pandemic, Indian Railways completed 350 major works towards improving safety and speed. For this, I congratulate Hon'ble Piyush Goyal ji and every member of Indian Railways family I am also proud to state that for the 1st time in the history of Indian Railways, there have been Zero Passenger Fatality since April 2019, due to accidents.
Railways' revenue for 2021-21 is estimated at Rs 2,17,460 crore.This is a 12% increase from the revised estimates of 2019-20. In 2021-21, revenue from both freight and passenger traffic is expected to grow by 10%.The total revenue expenditure by Railways for 2021-21 is projected at Rs 2,15,058 crore This is a 21% increase over 2019-20.
Rs 100 lakh crore will be invested on infrastructure over the next five years. This will include projects on modernising railway stations and railway transportation, and logistics and metro warehousing I congratulate the Government for developing a long-term strategic National Rail Plan. This will be a common platform for all future infrastructural, businss and financial planning of the Railways. Total 676 projects worth Rs 14.55 Lakh Cr are part of National Infrastructure Pipeline (NIP) project of Ministry of Railways.
Our Govt is making significant Capital Expenditure towards developing Railway Infrastructure i.e. 2014 – 2020: Rs 6.45 Lakh crores, 1951 – 2014: Rs 4.95 Lakh Crores Our Govt made more investments in past 6-years than the total investments made in 60-years before then.
Indian Railways is the third-largest railway network in the world. During 2019-20, Indian Railways carried 1.2 billion tonnes of freight and 8.1 billion passengers. Making it the world's largest passenger carrier and fourth largest freight carrier. Our Govt introduced 134 new trains including 2 Teajs and 2 Bande Bharat express In order to reduce the ecological footprint, our railways have undertaken - electrification of rail-lines on high priority; 66% of track length has been electrified by November 2020. By 2023, Railways aim to complete electrification of entire broad-gauge network Indian Railways is also investing on generating clean energy.Towards this, pilot project of 1.5MW solar energy plant has been undertaken and ambitious vision of generating 20GW solar power by 2030 To help our commerce in more efficient manner, Railways has developed Dedicated Freight Corridors, I am happy that our state West Bengal will be the hub of these freight corridors.East Coast corridor from Kharagpur to Vijayawada;
East-West Corridor from Bhusaval to Kharagpur to Dankuni, and North-South corridor from Itarsi to Vijayawada.
Focusing on transforming the lives of the farmers, our Government has started 'Kisan Rail. It will build a seamless national cold-supply chain for perishables, including vegetables, fruits, milk, meat, fish; this project will be undertaken in Public-Private-Partnership Mode and it will attract investment, generate employment and increaseincome of our farmers Since coming to power, our Government has focused on connecting North East India.Our Railways has a vision of connecting all NE State capitals by rail by 2023; Rs. 8060 crores have been allocated for the NE Frontier Railways, this includes our Darjeeling-Siliguri-Kalimpong-Dooars region.
Tourism across India is heavily dependent on Railways. In fact in our parts, the most popular children's rhyme दार्जीलिंगको स्यानु रेल छुट्नलाई अब तयारी छ स्यानु स्यानु डिब्बा मा यात्रीहरु भरि छ is dedicated to the Toy Train I am happy to state that Darjeeling Himalayan Railways was the 1st mountain railway in the world to be granted UNESCO World Heritage Status. I am most grateful that Hon'ble Piyush Goyal ji for allocating resources to convert shut-down Kurseong Railway Press to DHR Heritage Museum.I am also happy to state that DHR was the first to be equipped with vista-dome coaches.Indian Railways will introduce indigenously developedVistadome Coaches to boost Tourism sector. This is a prime example of Aatmanirbhar Bharat. These coaches will be operated from Gujarat in the West to North-East, Kashmir, Konkan Railways and Hill Railways. States with tourism, particularly eco-tourism, like West Bengal, Tamil Nadu, Assam, rest of North East, Goa, Himachal and Kerala will be directly benefited, because of this.
I am most thankful to Hon'ble Piyush Goyal ji for allocating Rs 6636 crores – the highest ever railway budget allocation to West Bengal.This budget allocation is 2.5 times the average amount allocated between Budget 2009-2014 even though we have had Railway Ministers from West Bengal in the past.No one has shown as much care towards developing our state as Modi ji's Government.
Currently there are 53 ongoing projects in West Bengal, including new lines, gauge conversion, doubling projects costing Rs 48,275 crore for 4,463 km. I am grateful to Piyush ji for allocating Rs Rs 1100 crore for Sevoke-Rangpo Rail Project. This project will connect our critical border region with mainland train-system. It is a very important from the national security perspective. When completed, this project will have 44km railway track traversing over 19 bridges and 14 tunnels. This line will have five stations, Rangpo, Malli, Teesta Bazar, Riyang, Sevoke.This line will provide much needed boost to tourism in the Darjeeling, Kalimpong, Sikkim and Dooars region. I feel ashamed to report that while Indian Railways has allocated funds to compensate the people living along Sevoke-Rangpo Rail Line, TMC Govt in West Bengal have not yet disbursed the funds to the people.
I am requesting Hon'ble Railway Minister to kindly look into this situation.
Darjeeling Himalayan Railway along with Kalka-Shimla Railway and Nilgiri Mountain Railway and Matheran Hill Railway are specialized meter-gauge trains.These are part of our Heritage.I am requesting Hon'ble Piyush ji to establish a Separate Division for preserving these Heritage Rail Lines, most importantly, these trains require specially trained people to keep them running.
I am requesting the Hon. Minister to kindly give recruitment to those who have completed Apprentice Training with these trains.
Rs 110 crores have been allocated for doubling of rail line between Maynaguri-Gumanihaat in North Bengal This will help the train commute for people living in Alipurduars, Jalpaiguri, Cooch Behar and rest of North East India, who use this route.
I am also grateful to Hon'ble Piyush ji for introducing new stoppages at Siliguri, Bagdogra, Naxalbari, Thakurganj for various regional and national trains. Though we have had Railway Ministers from West Bengal in the past,no one has cared for our state like Modiji's Government There are many projects in Bengal that are pending for over 45-year. Even this year, due to the non-availability of land as many as 34 projects in the state have been delayed.
I am most hopeful that the situation will change, as soon as our party forms the government in Bengal.
In supporting the Request for Grants from the Railways, Hon'ble Finance Minister Nirmala Sitharaman ji has endeavoured to meet the needs of the Indian Railways. She has encouraged them to continue serving our beloved motherland with renewed vigour, Indian Railways will be able to walk the path of progress and development as visualised by our Hon'ble Prime Minister.
I once again thank Piush ji and congratulate him for the efforts he has put in to transform our railways. I commend the budget and whole heartedly support the request for grants of the Railways.
*m19 *श्री मितेषपटेल (बकाभाई) (आनंद): तारापुर जंक्शन, मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है । तारापुर स्टेशन वेस्टर्न रेलवे जोन के वड़ोदरा डिवीजन में आता है जो एक हाल्ट (HG)-2 कटेगरी स्टेशन है । इस स्टेशन पर वर्तमान में 16 ट्रेन्स रुकती हैं, लेकिन अभी तक यह रेलवे बोर्ड द्वारा तय मानकों के अनुरूप हाल्ट कटेगरी सुविधाओं से वंचित है । तारापुर स्टेशन पर न तो प्लेटफार्म है ना ही अन्य सुविधाएं जैसे लाइटिग, पानी, प्रतीक्षालय व्यवस्था, बुकिंग विंडो, आरक्षण सुविधा आदि हाल्ट कटेगरी के अनुरूप है और ना ही भविष्य में इसे हाल्ट कटेगरी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु कोई प्रस्ताव है । क्षेत्र भ्रमण के दौरान जनता ने बार-बार इस स्टेशन पर सुविधाओं कि कमियों से होने वाली कठिनाइयों की तरफ ध्यान दिलाया है ।
कृपया तारापुर स्टेशन के सुंदरीकरण एवं तारापुर-भावनगर रेलवे लाईन की स्वीकृति, खंभात डेमू को अहमदाबाद तक एक्सटेन्सन एवं आनंद-खंभात सेक्शन के दोहरीकरण के लिए अनुदान देने हेतु सूचीबद्ध किया जाय ।
*m20 डॉ. अमर सिंह (फतेहगढ़ साहिब): माननीय सभापति जी, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं ।
रेलवे बजट के तीन हिस्से हैं । एक, गवर्नमेंट सपोर्ट देती है जिसे बजटरी सपोर्ट फ्रॉम गवर्नमेंट कहते हैं । दूसरा, इन्टरनल रिसोर्स होते हैं जो पैसेंजर्स, फ्रेट और कहीं से आते हैं । तीसरा सोर्स एक्सट्रा बजटरी है, जो लोन लेकर काम चलाते हैं ।
अब यहां रेल मंत्री जी हैं या नहीं, लेकिन प्रधान जी नोट कर रहे हैं । जब से यह सरकार आई है, अनफॉरच्युनेटली वर्ष 2015-16 से इन्टरनल रेवेन्यु फॉल कर रहा है । हमें रेलवे स्टैंडिंग कमेटी में जो फिगर्स दी गई हैं, मैं वही पढ़कर बता देता हूं । वर्ष 2015-16 में नैट रेवेन्यु 25,000 करोड़ रुपये था जो वर्ष 2020-21 में सिर्फ 6500 करोड़ रह गया ।
मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि आपकी सरकार में क्या हो रहा है? ऐसा आप क्या कर रहे हैं? इतना जो नेट रेवेन्यू होता था, वह कहां गायब हो गया? कहां चला गया? इस ऑगस्ट हाउस को जरूर बताया जाए कि आपके कार्यकाल में नेट रेवेन्यू क्यों कम हुआ? ये आपके फिगर्स हैं । ये मेरे फिगर्स नहीं हैं । मैं रेलवे स्टैंडिंग कमेटी का मेम्बर हूं, उसमें फिगर्स दी गई हैं ।
मुझे दूसरी बात यह कहनी है कि आप कंटीन्यूअसली एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज बढ़ाए जा रहे हैं । क्या प्लान है? क्या हम प्राइवेट लोगों को हंड्रेड परसेंट दे देंगे । अभी आप डेढ़-दो सौ ट्रेनों की बात कर रहे हैं । लेकिन, जिस हिसाब से उसका एक्स्ट्रा बजटरी रिर्सोसेज, मतलब जो लोन बढ़ रहे हैं, वर्ष 2020-21 में रेलवे ने सवा लाख करोड़ का लोन लिया, इसको रीपे कौन करेगा? इस साल फिर आपने बजट में लाख-करोड़ रख लिया है । इसके बारे में भी मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार का प्लान क्या है? आप प्लान के बारे में बोलें, हाउस में पास करा लें, लेकिन, एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज इतना न बढ़ा दें कि रेलवे अनसस्टेनेबल हो जाए, फिर आप कह दें कि अब इसको चलाना ही पॉसिबल नहीं है । गेम उस तरह की लगती है । यह बहुत अफसोस की बात है ।
तीसरी बात, जो मैं कहना चाहता हूं कि जिसकी सरकार होती है, वह पॉलिसी बनाता है । इसमें कोई शंका वाली बात नहीं है । आपको पॉलिसी बनाने की पॉवर है, आप बनाइए । लेकिन, जिस हिसाब से आप प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं, सारी दुनिया में जो इसका एक्सपीरियंस प्राप्त हुआ है, उसको आपको देखना चाहिए । मेरा निवेदन है कि वर्ल्ड में जहां-कहीं भी हुआ है, उस चीज को हाउस में भी लाकर रखिए । इंग्लैंड ने नाइनटीज में किया था । 25 साल से ज्यादा समय हो गया । आज उनके यहां रेल की क्या हालत है? आप उसको जाकर देख लीजिए । जिन प्राइवेट कंपनियों ने रेल ली थीं, उन्होंने बहुत जगह रेल बंद कर दी । किराये बढ़ गए और अंत में बहुत सारे रूट्स सरकार को चलाने पड़े । आज भी सरकार अपनी सब्सिडी से इंग्लैंड में ट्रेन चला रही है । हम ऐसा क्यों कर रहे हैं? हम कौन-सा मॉडल अपना रहे हैं । आप बुलेट ट्रेन चलाना चाहते हैं, मुझे बुलेट ट्रेन से कोई आपत्ति नहीं है । लेकिन, उसका आपने जो मॉडल बनाया है, अहमदाबाद से मुम्बई तक रोज एक लाख पैसेंजर्स चाहिए । तीन हजार रुपये से ज्यादा किराया होगा, तब वह वॉयबल होगा । जिन तीन-चार मुल्कों ने फास्ट ट्रेन चलाई हैं- फ्रांस, कोरिया और ताइवान, उन तीनों देशों से पूछ लीजिए कि उनका हाल क्या हुआ । वे कहीं भी नहीं चल पाईं । आखिरकार, उनको फिर बजट से ही पैसा देना पड़ेगा । मैं, इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि इन बातों पर अच्छी तरह से डिसकशन नहीं होती है । आज रेलवे बजट का दिन है । आज जब रेल मंत्री जी हाउस में जवाब दें, तो उनको कहना चाहिए कि जो बुलेट ट्रेन चलाना चाहते हैं, वह सेल्फ सस्टेनेबल होगी और गवर्नमेंट की सब्सिडी उसको नहीं दी जाएगी । अगर, उसमें बड़े लोग जाना चाहते हैं, तो उसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी । लेकिन, दुनिया का एक्सपीरियंस उसके खिलाफ है ।
अब हम रेलवेज पर आते हैं । मेरा ख्याल है कि Railways represents the country. आप क्लास-2 स्लीपर डिब्बे में चले जाइए, तो आपको सारा हिन्दुस्तान देखने में मिल जाएगा । कोई मुम्बई नौकरी लेने जा रहा है, कोई दिल्ली जा रहा है, कोई इंटरव्यू के लिए जा रहा है, पंजाब-हरियाणा में बिहार से, ईस्टर्न यू.पी. से मजदूर आ रहे हैं, रेलवे में आप सारा हिन्दुस्तान देख सकते हैं ।
यह चाहिए कि जो बजटरी सपोर्ट है, जो गवर्नमेंट सपोर्ट है, उसको बढ़ाया जाए, पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जाए । कोरोना ने यह प्रूफ किया है कि प्राइवेट हॉस्पिटल्स क्या करते हैं? कितना महंगा इलाज है, लोगों की क्या हालत होती है, हम गवर्नमेंट की ओर जाएं, प्राइवेटाइज़ेशन की ओर न जाएं । अब कोरोना के नाम पर जो कुछ हो रहा है, ट्रेनें कम की जा रही हैं । वैसे पॉलिटिकल मीटिंग्स करनी हैं, तो लाख-लाख लोगों की रैली हो सकती है, लेकिन ट्रेन चलाने में अभी तक नार्मलाइज़ेशन नहीं हो रहा है । आप कब तक कोरोना के नाम पर गरीब लोगों को ट्रेनों के लिए तरसाएंगे? मैं यह मंत्री जी के मुंह से सुनना चाहता हूं । मेरे अपने संसदीय क्षेत्र में, मुझे अफसोस है और मैं यह बात यहां नहीं कहना चाहता था, मैं इस बात पर नहीं बोलना चाहता था । लेकिन कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि फॉर्मर एजिटेशन को लेकर पंजाब को टारगेट किया जा रहा है । मैं यह बात यहां कहना नहीं चाहता था, लेकिन आप हमारी जो ट्रेनें बंद या डाइवर्ट कर रहे हैं, वह तो वही हैं ।
हमारी एक सबसे पवित्र ट्रेन सचखंड एक्सप्रेस है । मंत्री जी, आप तो मुंबई से हैं । सचखंड एक्सप्रेस कहां जाती है? वह अमृतसर से नांदेड़ तक जाती है । उसमें सभी सिख श्रद्धालु जाते हैं । उसको और कहीं कर दिया गया है । उसका सारा रास्ता डायवर्ट कर दिया है । वह ट्रेन किसी के काम के लिए नहीं छोड़ी है । यही नहीं, हमारा एक दूसरा धार्मिक स्थान है, उत्तरांचल में ऋषिकेश के आगे हेमकुंड साहिब है । जो हेमकुंड एक्सप्रेस है, उसका डायवर्जन कर दिया गया है । मुंबई से, आपके शहर से जो सबसे पुरानी ट्रेन है, जिसको फ्रंटियर मेल कहते थे, अमृतसर-मुंबई जो दादर तक जाती है, उसको कहीं और डायवर्ट कर दिया है । हमारा यह कहना है कि पंजाब के साथ यह क्या हो रहा है? आप क्यों हमको टारगेट कर रहे हैं? किसानों ने एजिटेशन किया है, तो आप उनसे बात कीजिए । लेकिन हमारी धार्मिक ट्रेनें, जो हमारी इतनी जरूरी ट्रेन्स हैं, जो फतेहगढ़ साहिब है, उस इलाके में सारा कुछ इधर-उधर कर दिया गया है । मैं पहले भी पार्लियामेंट में यह बोल चुका हूं ।
महोदय, फतेहगढ़ साहिब वह जगह है, जो अमृतसर के बाद सिखों के लिए सबसे पवित्र स्थान है । वहां हमारे दसवें गुरु के दोनों छोटे साहबजादों को औरंगजेब ने नींव में जिंदा चुनवा दिया था । वहां नवंबर-दिसंबर माह में सारे हिन्दुस्तान से 50 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु आते हैं । मुंबई से भी आते हैं, गुजरात से भी आते हैं, राजस्थान से भी आते हैं, सभी जगहों से आते हैं । उस ट्रेन को डायवर्ट करके इधर-उधर कहीं भेज दिया है । मेरा यह कहना है कि उससे भावना खराब होती है । मेरे संसदीय क्षेत्र के लोग मेरे इतने पीछे पड़े हैं कि तुम अपनी सचखंड एक्सप्रेस नहीं बचा सकते हो, तुम अपनी हेमकुंड साहिब एक्सप्रेस नहीं बचा सकते हो । मैं कहां-कहां जवाब दूं । इस तरह का काम न कीजिए ।
सभापति जी, मेरा आपसे निवेदन है कि रेल मंत्रालय से कहिए कि इन ट्रेनों का इस तरह से डायवर्जन न किया जाए, ताकि हम अपने धार्मिक स्थानों से वंचित हो जाएं । मैं अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में कई बार बोल चुका हूं कि मेरा एक रायकोट नामक इलाका है । अगर 20-25 किलोमीटर की रेल लाइन बन जाए, तो वह दिल्ली-मुंबई रेल लाइन से जुड़ जाएगा । मैं मंत्री जी से मिलकर कह चुका हूं । मैं आज फिर कहना चाहता हूं कि रायकोट को रेल लाइन से जोड़ दीजिए । वह बहुत बैकवर्ड इलाका है । रायकोट है, मुल्लांपुर से बरनाला में भी रेल लाइन है । उसको एक कर देंगे, तो यह इलाका तरक्की कर जाएगा । यहां वाईएसआर पार्टी के एक लीडर बोल रहे थे । मैं उनका समर्थन करना चाहता हूं । रेलवे ने जो फैसला लिया है, जो आरओबीज़ और आरयूबीज़ हैं, तो सभी राज्यों की हालत जीएसटी के बाद ऐसी हो गई है । अब वे तन्खाह ही दे दिया करें, तो बहुत बड़ी बात है ।
15.00 hrs इसको 100 परसेंट कीजिए । वर्ष 2017-18 में जब रेलवे बजट को सेन्ट्रल बजट में लेकर गए थे तब बेसिक बात क्या थी? बात यह थी कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया बजटरी सपोर्ट करेगी । आप उस बजटरी सपोर्ट को बढ़ाइए । आप उसको कम मत कीजिए । रेलवे को पब्लिक सर्विस रहने दीजिए । गरीबों की सर्विस रहने दीजिए । इसको मजदूरों की सर्विस रहने दीजिए । इसको ऐसी सर्विस मत बनाइए, जिससे लोग उसमें चढ़ ही न पाएं । मैं इतनी बात कहकर अपना भाषण समाप्त करता हूँ ।
*m21 *SHRI P. R. NATARAJAN (COIMBATORE): I would like to inform that the under mentioned railway facilities to the public or students or business people or pilgrims and tourists of my Coimbatore Constituency are to be included in the Demands for Grants for the year 2020-2021. This issue has been brought to the attention of the Southern Railway Zonal General Manager, Chennai and Divisional Railway Manager, Salem in the past. But, the main demand for overnight train service to Bengaluru and restoration of Coimbatore-Rameshwaram, Coimbatore-Kollam express trains are unattended for more than 10 years. Moreover, Coimbatore was identified under ‘the smart city’ project and developments like the transport facilities to the public are very much needed.
The demand for a new overnight-train service from Coimbatore to Bengaluru is pending from 2007. In the year 2007, the then Honourable Minister of Railways has announced a new overnight train from Coimbatore-Bengaluru for the benefit of business people, office-goers in I.T. Sector, school and college students and ordinary public who are going for work in Bengaluru for their livelihood. The commuters from Bengaluru and Coimbatore and who are depending on the road transport are experiencing much inconvenience as it involves spending of huge amount and time. So, it is a dire need of the Coimbatore-Bengaluru people to have an overnight train facility.
The next demand is related to restoration of train service from Coimbatore-Rameshwaram via Podanur, Pollachi, Madurai and Coimbatore-Kollam via Pollachi, Tirunelveli. In the past, before commissioning of Podanur-Dindigul gauge conversion work, the said trains were being operated via Podanur, Kinathukadavu, Pollachi, Dindigul, Madurai which is the shortest route to the pilgrim, business community of Nilgris, Coimbatore and Southern Districts of Tamil Nadu. Even after the gauge conversion completed and Coimbatore-Madurai train is operated via Podanur, Kinathukadavu and Pollachi, restoration of these trains is not come into operation for the benefit of the public. The reasons for non-operation of these trains in Coimbatore- Pollachi advanced by the railway authorities as not feasible will naturally create a doubt on the functioning of technical authorities who have given approval for this non-feasible gauge conversion work with the budget estimate of Rs. 300 crores. So, an independent enquiry be conducted immediately as to why there was gauge conversion without considering feasibility of introducing new trains and responsible technical/approval authorities be tasked for such incurring of wasteful expenditure which is not beneficial. Serious consideration to be given for conducting an independent enquiry immediately.
The next demand is related to a new Intercity train from Coimbatore to Madurai. In this train route many famous and important temples, tourist centres, vegetable hub at Oddanchatram, wholesale fruit market and tourist centres are available. Business community and unorganised and organised workers/employees/pilgrims from Coimbatore and Nilgris are depending on the costly and time-consuming road transport when compared to the low-cost train fare. So, to suit their convenience and benefits, a day time Intercity trains service is needed which will be a financially viable route and will connect all the southern districts which are having more pilgrimage and tourist centres.
My next demand is related to a direct train from Coimbatore to Nagercoil via Podanur, Kinatththukadavu, Pollachi, Madurai. I would like to point out that there is no direct train service to Nagercoil which is a trade and Tourist Centre is Tamil Nadu. Presently, one passenger train to Nagercoil in the morning and in the night is plying between Coimbatore and Nagercoil. If a direct train from Coimbatore to Nagercoil is introduced via Podanur, Pollachi, Palani and Madurai, it will save more than two hours journey of the commuters of Coimbatore and Nagercoil districts.
Another demand is with regard to a new direct train service from Tirupur to Chennai. Tirupur is known as dollar city across the world and fetching more dollars by means of foreign exchange. So, a new train service from Tirupur to Chennai be introduced and named as "dollar city" as like Cheran Express from Coimbatore and Yercaud Express from Erode.
The next demand is of a direct train from Coimbatore to Chennai Egmore via Podanur, Pollchi, Udamalpet, Palani, Dindigul and Salem. There is no direct train service to Chennai-Egmore in the shortest route of Podanur, Pollachi, Dindigul, Salem to cater the needs of Coimbatore, Pollachi and Dindigul people for their needs. So, one more new train to Chennai-Egmore via Pollachi be introduced for the needs of coconut business and allied agriculture products.
The next point is regarding rakes kept idle at Coimbatore be used for CBE-MDU train service. Conventional rakes used in the Chennai-Coimbatore (12680/12679) express was replaced with the latest LHB rakes. So, these conventional rakes can be used for the Coimbatore-Madurai new train service and operated.
I request the expansion of railway platform for having stoppage of passenger/express trains at Irugur. Irugur is having a railway station in which goods store yard is functioning. It is situated on the Kerala-Tamil Nadu National highways. It is nearer to the Coimbatore International Airport. It is not having sufficient length of platform to the train length. The people are suffering much for their train transport facility. Daily, more than 200 commuters are using this facility. They are travelling in public bus and then catch a train for their journey to reach their work places. So, expansion of platform will only cater the needs of the public of Irugur and nearby villages. So, it shall be considered at the earliest.
I also request the stoppage of following night trains at North Coimbatore railway station – Train No. 12083 (Mayiladuthurai-Coimbatore), Train No. 2266 (Nagercoil-Coimbatore), Train No.12675 (Chennai-Coimbatore), Train No.11013 (Mumbai CST-Coimbatore). The abovesaid trains are crossing without stoppage at the North Coimbatore R.S, which is very inconvenient to the people of R.S. Puram, Saibaba Colony, Gandhipuram and Kavundampalayam area people.
I shall be thankful, if you would kindly consider the abovesaid train facilities required for the people of Coimbatore Constituency and arrange to sanction the new train services which would be beneficial to the business community, traders, pilgrim tourist centres.
Thanking you.
*m22 *श्री सुधाकर तुकाराम श्रंगरे (लातूर) : मैं भारत सरकार द्वारा बजट 2021-22 में पेश की गई रेल मंत्रालय की अनुदानों की मांगों के समर्थन के लिए खड़ा हुआ हूं । हमारी मोदी सरकार ने विगत पांच सालों में रेल परिवहन पर विशेष रूप से जोर दिया है । सरकार ने बजट में रेलवे के लिए सिर्फ पूंजीगत खर्च के लिए 1,07,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जो निश्चय ही रेलवे के त्वरित विकास में सहायक सिद्ध होगा । यह प्रसन्नता का विषय है कि हमारी सरकार ने तय किया है कि वर्ष 2023 तक देश की सभी ब्रॉड गेज लाइनों का विद्युतीकरण कर दिया जाएगा । इससे न केवल डीजल इंजनों से होने वाला प्रदूषण कम होगा, अपितु रेलवे तथा देश के इंधन पर होने वाले भारी भरकम खर्च में भी कमी आएगी । भविष्य के लिए तैयार किए गए देश के लिए नए नेशनल रेल प्लान को वर्ष 2030 तक कार्यान्वित किया जाएगा । इससे पूरे विश्व में हमारा भारतीय रेलवे नई ऊंचाइयां छू सकेगा । इस बजट में भारतीय रेलवे ने सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं तथा स्वच्छ परिवहन उड़ाने के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वह अत्यधिक प्रशंसनीय हैं तथा इसके लिए मैं वित्त मंत्री जी और रेल मंत्री जी का अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की ओर से हार्दिक आभार प्रकट करता हूं ।
भारतीय रेलवे द्वारा किसानों के उत्पाद की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करने के लिए चलाई जा रहीं अनेकों वातानुकूलित डिब्बों वाली किसान रेल से किसानों को अत्यधिक लाभ मिला है और अब उनके शीघ्र खराब होने वाले उत्पाद ढुलाई में देरी के कारण किसान को होने वाले नुकसान में कमी आई है ।
यहां मैं अपने लातूर संसदीय क्षेत्र की कतिपय रेलवे से संबंधित निम्नलिखित समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं:-
लातूर शहर देश के विभिन्न मुख्य शहरों से रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ा है । केवल एक-दो यात्री गाडियां ही यहां से होकर गुजरती है, परन्तु उनके चलने का समय यात्रियों के लिए सुविधाजनक नहीं होने के कारण उनका भी सही ढंग से फायदा नहीं उठाया जा रहा है । जब भी मैं यह मामला उठाता हूं कि यहां से नई रेल गाडियां शुरू की जाएं तो मुझे जवाब दिया जाता है कि लातूर स्टेशन पर पिट लाइन नहीं होने के कारण यहां से नई गाड़ियां शुरू नहीं की जा सकतीं । हालांकि, अब सरकार ने इस लाइन के निर्माण के लिए 14 करोड़ रुपए की धनराशि आबंटित कर दी है, परन्तु अब तक इस का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि लातूर स्टेशन पर पिट लाइन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि यहां से नई रेल सेवाओं का आरंभ किया जाना संभव हो सके । साथ ही साथ मेरा सरकार से यह भी अनुरोध है कि लातूर शहर से देश के विभिन्न मुख्य शहरों के लिए नई यात्री गाडियां चलाई जाएं ।
लातूर रोड रेलवे स्टेशन की स्थिति बहुत ही खराब है तथा यहां यात्री सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है । स्टेशन से बस स्टैंड तक की सड़क की स्थिति बहुत खराब है, जिसके कारण यात्रियों के लिए स्टेशन पहुंचने में अनेक कठिनाई होती है । यही नहीं स्टेशन टायलेट, वेटिंग रूम आदि की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जहां एक ओर स्टेशन पर गंदगी बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर विशेष रूप से महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है । यहां दो नए प्लेटफार्म बनाए जाने की भी अत्यधिक आवश्यकता है । मेरी सरकार से मांग है कि इस स्टेशन को स्मार्ट रेलवे स्टेशन के रूप में बदलने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं ।
साल 2018-19 के दौरान रेलवे बोर्ड ने लातूर रोड से नांदेड तक रेलवे लाइन बिछाने हेतु सर्वेक्षण की अनुमति दी थी । अब तक सर्वेक्षण कार्य पूरा किया जा चुका है तथा इस पर रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट सौंप दी गई है, परन्तु अभी तक रेलवे बोर्ड ने इस पर अपना अंतिम अनुमोदन नहीं दिया है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि उपरोक्त परियोजना का शीघ्रातिशीघ्र अनुमोदन किया जाए तथा इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ।
वर्ष 2013-14 में 186 किलोमीटर कुर्डुवाडी-लातूर रेलवे लाइन का अनुमोदन किया गया था तथा 2015-16 में इसके सर्वेक्षण हेतु धनराशि भी आबंटित की गई थी, परन्तु इसका सर्वेक्षण अभी तक पूरा नहीं किया गया है । सरकार से मेरी मांग है कि इस का सर्वेक्षण शीघ्र पूरा करवा कर इस लाइन के निर्माण हेतु आगे कार्यवाही की जाए ।
सरकार ने तय किया है कि 2022 तक सभी रेल लाईनों का विद्युतीकरण कर दिया जाएगा । हालांकि, मिरज-कुर्डुवाडी-लातूर रेल लाइन के विद्युतीकरण हेतु 2018-19 में टेंडर जारी कर दिए गए थे, परन्तु अभी तक इसका काम पूरा नहीं हुआ है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस लाइन का विद्युतीकरण का कार्य शीघ्र पूरा किया जाए ।
लातूर स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर गाड़ियों के आने व जाने की सूचना देने वाले डिस्पले बोर्ड लगाएं जाएं ।
लातूर कोच फैक्ट्री हरांगुल रेलवे स्टेशन के निकट है । अत: इस स्टेशन का विकास किया जाना अपेक्षित है । साथ ही साथ लातूर स्टेशन से माल शेड को यहां पर स्थानान्तरित किया जाए । हालांकि, यह कार्य अनुमोदित किया जा चुका है, परन्तु अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है ।
लातूर और लातूर रोड स्टेशनों के बीच आस्टा मोड पर नए रेलवे स्टेशन का निर्माण किया जाए ।
LHB coaches should be attached in train No. 22107/8 and 22143/44 and 24 racks should be made available for these trains.
Miraj-Kurduwadi fast passenger train should be extended up to Latur. It had been approved by the then General Manager on 15.1.2019. It should be done immediately.
Two additional sleeper coaches should be attached with train No. 51426 on regular basis. It should also be extended up to Sangli in order to enhance the railway revenue.
While train No. 51425 halts at Murud but on return journey train No. 51426 does not have any halt at Murud. The halt of train No. 51426 at Murud should be provided at the earliest.
A new train from Tirupati-Latur-Tirupati via Gundkal, Mantralaya Road, Gulbarga, Humnabad, Bidar, Latur road & Latur should be introduced.
A new train from Bidar to Jaipur via Latur, Kurduwadi, Pune, Kalyan/Panvel, Vasai road, Surat, Vadodara, Bhawani Mandi, Kota, Sawai Madhopur should be introduced.
Hyderabad/Pune, Amravati/Pune and Kolhapur/Nagpur trains should be run on daily basis. The speed of these trains should also be increased by curtailing loose time. In case these trains are converted into super-fast category, railway income will also be increased.
Train No. 17013/14 Hyderabad-Pune-Hyderabad tri-weekly train should be run on regular basis as provided in the project Resolution 2019 of South Central Railway. The approval of Central Railway is required for running this train on daily basis.
A new rack should be provided for 11404/3 Kolhapur-Nagpur Express to ensure its regular operations.
The weekly train No. 11415/16 Kolhapur-Bidar should be extended up to Hyderabad/Secunderabad.
Train No. 17009/10 Hyderabad Bidar Intercity Express should be extended up to Latur.
Train No. 18519/20 Vishakhapatnam Kurla train should be run via Bidar, Latur Road, Latur, Osmanabad on experimental basis instead of Gulbarga- Solapur route. Reason being 35 trains per week already run on Gulbarga Solapur route.
The second new train from Kolhapur to Dhanbad via Miraj, Pandharpur, Latur, Parli Baijnath, Parbhani, Nanded, Adilabad, Nagpur should be introduced.
New train from Hyderabad to Mumbai via Bidar, Latur and Osmanabad should be introduced.
Akola/Parli train should be extended up to Latur.
Parli to Miraj train should be extended up to Sangli.
मेरा भारतीय रेलवे से अनुरोध है कि मेरे लातूर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की रेलवे से संबंधित उल्लिखित मांगों पर ध्यान देकर उनको पूरा करने के लिए तत्काल कदम उठाया जाए । इन शब्दों के साथ मैं एक बार फिर रेल मंत्रालय की अनुदानों की मांगों का समर्थन करता हूं तथा माननीय वित्त मंत्री जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होने देश में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इतना भारी-भरकम बजट में आबंटन किया ।
*m23 DR. DNV SENTHILKUMAR S. (DHARMAPURI): Vanakkam, Chairperson, Sir. Thank you for giving me this opportunity to speak on the Demands for Grants under the Ministry of Railways.
15.01 hrs (Shri P.V. Midhun Reddy in the Chair) Much was expected from this Government regarding infrastructure and development of railways including laying of new lines, doubling, electrification, freight corridors etc. But, unfortunately, the State of Tamil Nadu has been neglected and due importance has not been given. Not only now, we have been seeing this happen for the past six to seven years that for Tamil Nadu railway works have been neglected and much importance has not been given.
Sir, there are around ten new lines which have been promised already. We would like to know the status. The State has been wating for these ten new lines for a very long, long time. The Chennai-Mahabalipuram-Cuddalore line has been kept in abeyance. We want to know the status of the Tindivanam- Nageri new line project connecting Villupuram, Vellore, Tiruvannamalai, Tiruvallur and Chittoor. The new railway line along ECR between Karaikudi and Kanyakumari via Thoothukudi, Tiruchendur and Rameshwaram will provide an alternative route to Thoothukudi, Tiruchendur, Kudankulam and Kanyakumari. We would also like to know the status of the Karaikudi- Thoothukdui via Ramanathapuram line, the Ramanathapuram-Kanyakumari line, the Tirunelveli-Sankarankovil line, the Viranialur-Nagercoil Chetti Kulam line and the Erode-Palani line.
There are a lot of announcements which mislead the people. The allocation of the Budget especially for Tamil Nadu is very low. The projects are getting inordinate delays due to lack of funds.
There is a big threat of privatisation of corridors by which the tax-payer’s money is being taken to award them to the private players overnight over a platter. There is no sense of any prior announcement that such line is going to be privatised. For example, after COVID-19, we had one line which runs from Mettupalyam to Coonoor, that is, Ooty. Overnight, it was just being privatised and there have been like train hostesses etc. There was a big uproar in Tamil Nadu. Then again, the Government came back and said that this is a trial method which we have given for a private company. So, only after such opposition was voiced, they are going back on such statement. This has to be taken back.
The Government is planning to privatise 13 new routes in Tamil Nadu. Six are originating from Tambaram station. Tambaram station is also being planned to be privatised. I would like to bring to the notice that DMK which is facing election and – we are very confident of coming to power – will oppose it tooth and nail with all our might to save the railways and the lives of employees and common citizens at least in Tamil Nadu.
Sir, regarding my constituency, Dharmapuri, I have been requesting for an elevator, an escalator for a long time. The problem is not lying with us. They say that they only have a certain number of footfalls. But the train which is supposed to stop at platform no. 1, stops at platform no. 2. So, the old people are made to cross the bridge which they are not able to do. We are asking for two things. One, to stop the train at platform no. 1. They say that there will be five-minutes delay, if they stop it at platform no. 1. If you are not able to do that, at least you should provide an alternative of an escalator. They say, ‘Do it from MPLAD funds’ . For two years, the MPLAD fund is not there. What we are requesting is this. It is not our fault. It is the Railway’s fault which is not stopping the train. So, I request the Ministry to consider an elevator at Dharmapuri station. Whenever we go to the Railways, they give a statement saying that the utilisation is in the hands of the State Government and we should get clearance from the State Government.
There is a Railway Over Bridge at Adhiyamankottai in my constituency Dharmapuri where only two blocks have to be constructed. But no work has been done for the last three years. The State Government has finished its work. There are instances of people using that bridge and since two blocks are not there, people have met with fatal accidents and some lives have been lost. I do not know the reason why the Government is not constructing those two blocks of bridge for the last three years.
Then, we need a stoppage at Bommidi so that vegetables of farmers can be transported. This has been a long pending demand. I request the Minister to allow this stoppage. In the past, there had been a train running from Mettur to Chennai and it has been stopped now. I would request the Government to restart the train.
I would like to bring to the notice of the Government another important issue regarding the Dharmapuri-Morappur line which has been pending since long. The Minister of Railways Shri Piyush Goyal flew down to Dharmapuri by helicopter just before 2019 Elections and he laid the foundation stone for this line. The stone just lies there. I have been running from pillar to post to start the work on this line. An amount of Rs. 358 crore was allocated for this line in the Union Budget for the year 2017-18 and the foundation stone was laid in 2019. I met the Divisional Railway Manager, General Manager of the Southern Railways, I met the CEO and the Railway Board Chairman and I met the Minister of State for Railways late Shri Suresh Angadi and also the Railway Minister. I have been going around, but there is no solution to this issue. This line is for 36 kms. In this line, the survey for 28 kms. has been done. I would request the Minister of Railways to quickly finish the survey for the remaining 8 kms. When we approached the District Administration, they said that they are ready to form a Committee. But the Railways is also supposed to form a Committee to do the survey. This 8-kms. long line comes through the town. So, we need an alternate route. The District Administration is ready, but they do not have funds. So, I request the Minister to complete this survey as soon as possible.
With regard to all the 10 lines in Tamil Nadu which I have just mentioned, most of them have been allocated a sum of only Rs. 1,000. With this meagre amount, how can they go ahead with conducting the survey? Let them not do what the DMK requests. But, at least, let the Government complete the works promised by the BJP. Why do they not start those works? That is my question. I do not know where to get an answer for this because I met everybody and the work is not being done. The District Administration says that only if the Railways allot the funds, they can go ahead and conduct the survey. They say that issues like land acquisition and other things are there. Of course, we are very confident that we would come to power in the forthcoming Assembly election in Tamil Nadu and these things will be taken care of. But we request the Railways to give some importance and allocate some funds so that the survey can be completed and the work can be taken up at the earliest.
Sir, we would like to introduce a Pilgrimage Circuit and a Tourist Circuit in Tamil Nadu. Then, we have also made an election promise to introduce metro train in Tiruchy, Madurai and Salem. Last week, the High Court Judge in Chennai made an observation that the cleanliness of the railway coaches has to be improved. There are many rats running around within the coaches and then the blankets and bed sheets are not clean. This observation has been made by the High Court Judge. I hope the Government will take it seriously and take necessary action in this regard.
The common man is affected due to the increase in the rate of platform ticket. This has been increased too much. I demand that this should be rolled back to the previous level so that the common man is not affected.
Coming to the issue of social justice, which is a core principle of DMK, I would like to point out that manual scavenging is a social evil. We have promised to eradicate manual scavenging in Tamil Nadu as soon as we come to power. Whenever we raise the issue of abolition of manual scavenging with the Railways, they just pass on the buck to the contractors. I would urge the Railways to have a keen watch on the contractors and see that no manual scavenging takes place in Railways. If such things happen, the contract should immediately be cancelled because manual scavenging has to be abolished from this country. With so much of inventions of science and technology, there are new methods which many countries are following to eradicate manual scavenging. I hope that the Government would take necessary steps to eradicate manual scavenging in the Railways.
With these words, I thank you for giving me this opportunity.
*m24 *SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): I am thankful for this opportunity to express my views on the Demands for Grants under the Ministry of Railways. The hon. FM has presented railway finances along with the Union Budget and has given Rs. 1.10 lakh crore which is the highest ever, and more appreciable thing is that Rs. 1.07 lakh crore out of this is given for capital expenditure which is pegged at Rs. 2.15 lakh crore. I am confident that the hon. Railway Minister will be able to generate Rs. 7,500 crore from internal resources for capital expenditure, but I need a little clarity that how the Railways is going to pool Rs. 1 lakh crore through extra budgetary resources. I request the hon. Minister to explain this.
I also compliment the hon. Railway Minister for a remarkable recovery of freight business during the last 6-7 months. But this can be further pushed and can give real challenge to road traffic if we are able to increase the average speed of trains to about 60 kmph from the present 30-40 kmph, and also by giving more concessions. I request the hon. Minister, Shri Piyush Goyalji to take this into consideration.
There is no doubt that the Budget 2021-22 gives emphasis on infrastructure, and railways is also following the same path. As a part of this, the hon. FM announced National Rail Plan 2030 for infrastructure development in the coming decade with an estimated expenditure of Rs. 16.7 lakh crore, under which some dedicated freight corridors have been identified. I thank the hon. FM and the Railway Minister for announcing dedicated freight corridors between:
►Vijayawada to Kharagpur and ► North-South Corridor from Vijayawada to Itarsi At the same time, I wish to bring to the notice of the hon. Railway Minister about his Ministry which is silent on new Amaravati railway line announced in 2016 with an estimated cost of Rs. 3,272 crore. It is 106 kms. line from Errupalem-Amaravati-Nambur (57 kms.), Amaravati-Pedakurapadu (24 kms) and Sattenapalli-Narasaraopeta (25 kms). I have been raising this issue on this very floor since 2017. But no allocations were made in 2018 and 2019, and this year, you have given just Rs. 1,000 crore. This indicates the seriousness of the Railways towards the new capital Amaravati. If the recent reports in the media are to be believed, then it looks like the Centre is going to shelf the Amaravati line, citing lack of support from the State Government.
Here I would like to draw your attention to what 13th Schedule to AP Reorganisation Act says. It says and I quote:
"The Central Government shall take measures to establish rapid rail and road connectivity from the new capital of the successor State of Andhra Pradesh to Hyderabad and other important cities of Telangana"
It is a hard fact that in spite of new capital of AP, Amaravati, being located close to Vijayawada and Guntur, it is deprived of rail connectivity and it is precisely the reason why the AP Reorganisation Act mentioned in explicit terms that the Central Government shall take steps to develop rail and road connectivity from new capital to Hyderabad and other important places in Telangana.
So, all I appeal to the hon. Railway Minister is to not neglect our new capital as is being done by the present State Government.
Then I come to the creation of new Railway Zone in the State. It is welcome that the hon. Minister has announced this just before the 2019 general elections, but since then, it is not taking the kind of shape it ought to have been. Secondly, till when is the new RRB going to be set up in Vizag? So, I request the hon. Minister to tell us the present status of new Railway Zone at Vizag and till when this will become fully operational.
I wish to make a few more points relating to my State of AP and request the hon. Minister to kindly look into them seriously and take up and complete the projects on priority basis.
► The Ministry has sanctioned 66 ROBs and 2 RUBs in AP. I wish to know the status of the ROBs and RUBs.
► The present railway bridge at Arundalpet in Guntur is nearly 7 decades old and it is in a dilapidated condition, and the commuters are facing huge traffic congestion on this bridge. So, I request that this ROB be replaced with a new one.
► Tenali-Guntur doubling line with electrification has been taken up to be completed in 18 months but it is still going on at snail's pace. Sir, it is a small project of 24 kms. So, this may kindly be taken up and completed in a fixed timeframe.
► Development of Guntur and new Guntur stations has become really important after making Thullur Mandal as the new capital area of AP. Secondly, Guntur station needs to be given the status of 'capital station' and be provided all necessary facilities.
► Along with these, Mangalagiri station situated between Vijayawada-Guntur should also be developed as it has new AIIMS, new capital and many important offices in its vicinity due to which there will be heavy passenger traffic.
► The survey for Pagidipalli-Guntur railway line was completed long back. In the absence of second line, passengers are facing a lot of problems and delays due to heavy traffic leading to loss of revenue for Railways. So, the hon. Minister may show some generosity on this and sanction the second line.
The next point I wish to make is the proposal relating to complete disinvestment of Container Corporation of India before the end of coming Fiscal Year. Being an entrepreneur, I know corporate management is far better and meticulous than the bureaucratic management. But, now, things are changing, albeit, slowly but steadily. So, I feel, we should not disinvest or privatize any and every public sector blindfold. They are our family’s silver. We have to weigh options, study deep into pros and cons of disinvestment or privatization.
The next point I wish to make is relating to Operation Ratio which is an indicator of what railways is spending and how much it is earning. In 2021-22, OR is pegged at 96.2% when compared to 98.4% in 2019-20. It is reasonably okay during pandemic times. Sir, I was just looking at the 2020-21 figures relating to pension fund. The BE for Pension Fund was Rs. 53,160 crore and this was reduced to Rs. 523 crore at RE stage. So, if appropriation is made as per BE, then the OR would have been 131% in 2020-21. Similarly, there is 60% less appropriation i.e., Rs. 20,708 crore in pension fund in 2019-20 against the BE of Rs. 50,000 crore. If you calculate, OR comes to 114% in 2019-20. The CAG had observed last year that if certain advances in 2019-20 were not included as receipts in 2018-19, the OR would have been 101.77% for 2018-19. So, the hon. Railway Minister has to look into this issue seriously as the entire game of railways is Operating Ratio.
The next point I wish to make is about the fuel expenditure of railways. Sir, you are spending huge 13% on fuel. Your revenue expenditure in 2021-22 is estimated to be Rs. 2.11 lakh crore and if you calculate, it comes to Rs. 27,000 crore on fuel expenses. Sir, you have huge tracts of land lying idle. Why are you not focusing on alternative sources of energy?
You can set up solar plants extensively and bring down your fuel expenses to a bare minimum level. This will help the domestic solar panel manufacturing industry, create employment opportunities and also reduce import of solar panels from China and other countries.
Doctor is a doctor, be it Allopathic doctor or AYUSH doctor. Hon. Minister is aware that AYUSH doctors are working in Railways under Staff Benefit Fund. But I am given to understand that there is discrimination in payment of honorarium to AYUSH and Allopathic doctors. He may kindly look into this and see to it that AYUSH doctors be treated equally with Allopathic doctors in all respects.
Artificial Intelligence is slowly but steadily becoming part of our personal and professional life, and the hon. PM is also pushing hard to use Al in every possible way. Sir, railways is eco-friendly transport system. There is no doubt that the Railways is taking the advantage of digitization in its operational, passenger services and infrastructure areas. Al helps to make rail transportation safer, smarter and more reliable, apart from reducing traffic congestion, analyse travel demands from various quarters and quickly identify risks. The hon. Minister is aware that the PM has recently inaugurated driverless metro on Magenta Line. So, what is his Ministry doing to push in use of Al and what budgetary allocation has been made in 2021-22 for this may kindly be explained.
With these observations, I support the Demands for Grants under the Ministry of Railways. Thank you.
*m25 SHRI ACHYUTANANDA SAMANTA (KANDHAMAL): Hon. Chairperson, Sir, I thank you very much for giving me this opportunity.
I rise to speak on behalf of my party Biju Janata Dal on the Demands for Grants of the Ministry of Railways. We definitely appreciate the allocation of Rs. 1.07 lakh crore for Railways in the Union Budget for the year 2021-22 which was presented by Shrimati Nirmala Sitharaman.
We also applaud the National Rail Plan for India to create a future ready railway system by 2030 and introduction of two new technologies – MetroLite and MetroNeo -- to provide metro services at a much less cost with same experience and convenience in tier-II and tier-III cities. I understand that the year 2020 has been a very tough time for every sector including the railways, but still I would like to raise a few demands.
Sir, Odisha as an industrial hub has immense contribution to the railway revenue of the country. It has been, time and again, pointed out by our hon. Chief Minister, Shri Naveen Patnaik-ji and many of my esteemed colleagues form the Biju Janata Dal here on the floor of this House.
This year, after many demands from the Government of Odisha, we have seen an outlay of nearly Rs. 4,500 crore in the railway budget for the State of Odisha. The Ministry has committed to the construction of several new lines, doubling existing lines, yard and workshop enhancements, computerisation, passenger amenities and safety across the State.
The biggest positive has been the allocation of around Rs. 1,000 crore towards the completion of the Khurda-Bolanagir line, a project that has been in limbo/delayed for several years, and has been the demand of all Odia people from that region. The inordinate delay means that till date, in spite of acquisition of land by the State Government, only 15 kilometres from Bolangir side and 76 kilometres from Khurda side has progressed, which is a low percentage compared to the total distance of 289 kilometres to be constructed. Since this project had commenced from 1994-95, it is high time that this project is taken to its completion so that the local population can be benefited from the connectivity.
In this context, I would like to point out a case of my own Parliamentary Constituency, Kandhamal, which still has little to no connectivity to the main routes in the form of railways. I have previously also requested the hon. Minister regarding the need to connect the nerve centre and the district headquarters of Kandhamal, that is, Phulbani. The closest railhead which is expected to be a part the Khurda-Bolangir line is Puranakatak, which is merely 39 kilometres from Phulbani. The inclusion of a small annexe from Phulbani to Puranakatak will allow many residents of Kandhamal to enjoy rail access to the rest of Odisha and the country. In fact, this annexe can later be smoothly connected to the proposed Talcher-Lanigarh line. So, I would request the hon. Railway Minister to include this annexe construction in the outlay for Odisha as it will benefit the entire District of Kandhamal which is also known as an aspirational district.
Sir, some other very important demands have been missing from the Demands for Grants relating to Ministry of Railways. Key among them are as follows:
1. The wagon factory at Sitalapalli, Ganjam District. The wagon manufacturing unit in Ganjam, for which land has already been earmarked, was announced in the 2012 Budget. The project did not kick-off then. But both the East Coast Railways and the then Minister assured that the project would kick-off once the wagon demand increases post-2019. With railways booming across the country, the construction of the proposed wagon factory at Sitalapalli will be a huge boost to the region.
2. Similarly, about the electric locomotive periodic overhauling workshop in Kalahandi District, the Centre had previously agreed to set up an electric loco periodical overhauling workshop at Kalahandi for which land has been allocated. Again, this year only, a nominal budgetary allocation has been made for this project. Establishing a POH workshop will reduce the pressure on the Railways, which can find an intermediate point like Kalahandi for their maintenance needs.
3. There is a need to expedite the process to introduce passenger trains on the Haridaspur-Paradip line. It has been commissioned for the benefit of people in Kendrapada District. Over 15 goods trains are plying on this route daily. We request the hon. Minister for timely arrangements to introduce passenger trains on the Angul-Sukinda line, which is currently under construction.
4. Some new projects like extension of Nuapada-Gunupur BG rail link up to Theruvalli (79 kilometres), Puri-Konark link (38 kilometres), Bansapani-Barbil (18 kilometres), Jajpur-Keonjhar Road-Dhamra Port via Jajpur/Aradi (95 kilometres), Talcher-Gopalpur (245 kilometres), Paradeep-Dharma (80 kilometres), missing railway links in Mayurbhanj District; Buramara-Chakulia (50 kilometres), Bangiriposhi-Gorumahisani (42 kilometres), Ongoing projects: Khurda Road-Bolangir NBG rail link; Talcher-Bimalagarh (154 kilometres), Jaleswar-Digha (41 kilometres), Jeypore-Nabarangpur (38 kilometres), and Jeypore-Malkangiri (130 kilometres) should be taken up.
Similarly, I would also like bring two new things to the notice of the hon. Minister. On the commemoration of 125th birth anniversary year of Netaji Subhash Chandra Bose, I would like to request the hon. Railway Minister to introduce a new train from Cuttack to Kolkata, from birth-place to work-place of Netaji, in his memory. Similarly, this year, in March, we celebrate the 100 years of the arrival of the Father of Our Nation, Mahatma Gandhi, at the railway station of Cuttack. I request the hon. Minister to transform the Cuttack Railway Station as a model heritage railway station. This will be a befitting tribute to Gandhiji.
Lastly, I wish to put forth some small requests before the hon. Minister and reiterate our Chief Minister’s request of increasing the revenue distribution as well as the budgetary allocation to the State.
Thank you very much, Sir.
*m26 *SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): I make the following submissions: -
Railway related Baramati Constituency demands Daund railway station to be given suburban status under Pune railway division Pune is growing rapidly towards Lonavla, Daund, Saswad and Jejuri areas. People prefer to stay in sub-urban areas due to comparatively cheaper availability of land and residential premises in the suburban areas. In view of this, it has become necessary to declare Pune-Daund section as suburban zone and to provide Suburban services to the commuters from this region under Pune Division.
Requesting a suburban train service on Daund-Pune route Daund Junction is a major stop for passenger trains and is a major freight hub. Daund Jn. Railway station has 5 platforms and 140+ trains pass daily. From this proposed Daund-Pune route, people of Daund and the villages like Patas / Kadethan/Kedgaon / Khutbav / Yevat / Uruli Kanchan / Loni / Manjri / Hadapsar - would benefit.
At present only four shuttle trains operate on this Pune-Daund route. These shuttle trains though useful, they are insufficient in meeting the travel needs of people on this route to access Pune City.
Construct QUADRUPLE TRACK between LONAVALA - PUNE - DAUND section (4 Lanes) The doubling of tracks in Solapur Division between Daund - Manmaad, Daund - Solapur and Kurduwadi - Latur is in process. Once this work gets complete all the traffic strain will automatically come over Daund -Pune section. Also, with work for six laning of Kurkumbh to Hadapsar (NH9) (which at present has 4 lanes) in progress, scope for industrial, residential and commercial develox between Daund to Pune is bound to increase.
In view of this, it has become necessary to construct the QUADRUPLE TRACK between LONAVALA - PUNE - DAUND section (4 Lanes.). Quadrupling can contribute to faster operation of trains. High-speed rail and commuter rail can co-exist in quadruple track without interrupting each other. Also, it is relatively easy to do maintenance and engineering work of tracks.
Introduce MEMU services in between Daund-Lonayla section to the commuters from this region under Pune Division Mainline Electric Multiple Unit (MEMU) with stainless steel coach body has an aerodynamically shaped stainless-steel front-end nose for reduced air resistance, thereby saving in energy. It saves energy consumption up to 35% as compared to conventional EMU and MEMU trains.
Request for establishment of Maharashtra Rail Infrastructure Development Corporation (MRIDC) headquarters in Pune Provide for rehabilitation for residents of Daund labour slum at Vasahat New railway stations at Sahajpur and Kasurdi on Pune-Daund line I request the Ministry to provide for new railway stations at Sahajpur, Kasurdi, which are on the Pune-Daund railway line. This area is known for vibrant industrial activity.
I also request the Government to install used steam engine of the British ear at Daund Junction.
Construction of Foot Over bridges (FOBs) in Patas, Daund Taluka of Baramati constituency The work of Foot Over Bridge (FOB) is at present in the stage of issuing Tender. The Government can expedite the process of constructing Foot Over Bridge (FOB) in Patas, Daund Taluka of my constituency.
Stoppage at Daund railway station and Quota for passengers residing in Baramati, Daund and Bhigwan Trains running on the route between Bangalore and Rajasthan to be given a stop at Daund railway station. Also requesting for separate quota for passengers residing in Baramati, Daund and Bhigwan.
Requesting Centre to provide land opposite Baramati railway station on rent for service road Baramati Municipal Council has proposed to construct a service road from Teen Hatti Chowk to the Court Building in Baramati. However, some part of this road comes under the jurisdiction of Indian Railways. Railway department is asking Baramati Municipal Council to take the said patch of land on lease. But this would cause a huge financial burden on the Municipal Council. Baramati Municipal Council is requesting that the lease should be waived off. Baramati Municipal Council has said that the construction cost, as well as the maintenance cost, shall be paid by them. Requesting you to kindly consider the proposal given by Baramati Municipal Council;
Issue NOC for construction of approach road from Sirsufal village, Gawade Basti to Sonabha Patil Basti at Survey No.17 As the unmanned railway crossing at Sirsufal is closed, it is requested that permission (NOC) may be issued to construct an approach road from Sirsufal village, Gawade Basti to Sonabha Patil Basti at survey no.17 Miscellaneous points for consideration of Railways A. Poor operating efficiency as reflected in very high operating ratio of railways During NDA-I, the operating ratio remained above 95% , reaching as high as 98.4% during 2017-18 Operating ratio indicates an entity's operating expenses as a percentage of its revenue. A higher operating profit hinders an organisation's ability to generate profits.
In 2018/19, operating ratio is still at inefficient levels at 96.2% and is projected to be at 95% in 2019/20.
B. Railway Privatisation Programme- 100 Day Action Plan to privatise Railways In addition to providing wi-fi at all railway stations, installing advanced signalling systems and eliminating all manned level crossings on the golden quadrilateral and diagonals, the action plan also aims to restructure the railways, corporatize railway production units, 'redevelop' 50 railway stations and urge passengers to give up subsidy on train tickets.
PUs and associated workshops are supposed to be clubbed into a new entity called "Indian Railways Rolling Stock Company" under the Ministry of Railways. Starting with the newly set up MCF-Rae Bareli, all PUs are to be taken over by the new entity in a phased manner.
Since all of these units are profit making, trade union leaders argue that there's no need to change their structure and operations.
Railway unions across the country have expressed strong opposition to this action plan, calling it the first step in the complete privatisation of Indian Railways.
C. Privatisation announcement is contradictory to earlier announcements by Union Government - U turn by Central Ministers In speech at Diesel Locomotive Works (DLW) Banaras in 2014, PM Narendra Modi can be heard reassuring his audience that there were rumours of privatisation of railways but they were all lies as he won't ever let it happen. Ironically, DLW Banaras is one of the seven production units being considered for corporatisation.
In April 2017, the then Railway Minister Suresh Prabhu categorically ruled out privatisation underlining the fact that Indian Railways had to meet social obligations to the tune of Rs. 30,000-35,000 crore through subsidies, passenger rates and other concessions.
On 11 June 2018, the new Railway Minister Piyush Goyal who replaced him too reiterated the same saying, ""Let me make it very clear that there are no plans to privatise railways, either now or ever".
As far back as in 2017 itself the Railway Ministry under Suresh Prabhu circulated a draft cabinet note to various ministries seeking their response to handing over 400 railway stations on a 45-year lease to the private sector for redevelopment. After drawing up an unnecessary ambitious plan of redevelopment of railway stations for Rs.1 lakh crore, Piyush Goyal recirculated the note in January 2018 with a modified proposal involving 600 railways stations on a 99-year lease. He did this with the blessings of the PMO despite objection from the Finance Ministry, which wanted the lease period to be restricted to 60 years only.
D. Cost escalation by 131.83% of railway projects - Report by MOSPI The total cost overrun of 205 delayed railway projects is a whopping *2.21 lakh crore. the latest flash report of the Statistics and Programme Implementation Ministry (MOSPI for December 2018 showed. According to the report, the total original cost of these 205 projects was 21,68,116.34 crore up to December 2018. The total anticipated cost of these projects is estimated at 23,89,745.97 crore, which indicates overall cost escalation by 131.83%.
E. Lack of corresponding increase in infrastructure for decongesting lines at railway stations- CAG Report 2018 Decongested line at a station is largely dependent on factors like adequate number and length of platforms and tracks, proper interlinking of tracks, adequate lines for stabling and maintenance of passenger trains and obstacle free movement of trains without any permanent speed restrictions.
But CAG found that the infrastructure such as platforms, washing pit lines and stabling lines at the stations were not augmented according to increase in number of trains handled on audited stations.
Audit reviewed the data of number of trains handled, platforms, washing pit lines and stabling lines in respect of station for March 2007, March 2012 and March 2017. The number of trains originated/ terminated per day increased by 13 per cent (94 trains) in March 2017 in comparison to March 2012. However, in these 11 audited stations, only two pit lines were added during this period and the number of stabling lines remained the same.
Recommendation- Ministry must focus on removing constraints and bottlenecks for ensuring timely arrival and departure of trains to/from the stations- most important indicator of quality of service being provided to passengers.
Nagpur railway station case study by CAG- Nagpur station handles around 122 trains per day with eight platforms. During the last three years one platform has been added to this station. During March 2017, there was en route detention of 3634 minutes in respect of 569 trains between adjacent stations to the Nagpur. 522 trains were detained on platforms at Nagpur station for 6275 minutes over and above their scheduled stoppage time prescribed.
To decongest the Nagpur station, development of Ajni station, was sanctioned during the year 2016- 17, but detailed estimate was yet to be sanctioned (November 2017). The work of extension of platforms No. 4, 5 and 7 for 24 coaches was proposed by Divisional authority of Nagpur Division in the year 2013-14, the same was not included in the Final Works Programme.
F. More than 15% of railway posts are vacant- Standing Committee As on 01, April, 2017, a total of 2,22,509 number of posts out of 14,68,715 (total strength) were lying vacant in all categories ie. 15.2% of total posts are vacant. Further, there are 1,28,942 vacancies out of 7,64,882 sanctioned strength only in Railway safety and maintenance category itself ie. 16.9% of the sanctioned posts.
Filling up vacant posts may not only play a key role in running all Railways smoothly but also enables the working personnel to be relieved of the stress of overwork beyond normal hours G. Spending on women safety As per the data, the corpus transferred to the Public Account for the Nirbhaya Fund up to 2018-19 was Rs 3,600 crore out of which since 2015, the BJP-led central government was only able to release Rs 1,513.40 crore till December 2018 -i e, only 42% of funds released since 2015.
Centre must ensure 100% release of funds from Nirbhaya Fund to respective Ministries, including Railways.
Since there is a huge population in Mumbai, we need to improve the infrastructure and connectivity in the urban and suburban lines. Therefore, more funds should be allocated.
I must thank the Railways for all the help rendered during the lockdown period. I appreciate and thank the entire Railway family for the help given by them.
*m27 श्री तापिर गाव (अरुणाचल पूर्व): सभापति महोदय, मैं यहां रेल मंत्रालय के अनुदान की मांगों से संबंधित बजट के सपोर्ट में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं रेल मंत्रालय एवं मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि आज हिन्दुस्तान का रेलवे दुनिया में नम्बर दो स्थान पर है । मोदी जी और माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में हम भारतवर्ष के रेलवे नेटवर्क को दुनिया में नम्बर वन स्थान पर देखना चाहते हैं ।
आज हम इसी रेलवे से जुड़ गए हैं, किसान रेलवे से जुड़ गए हैं और मैक्सिमम इलेक्ट्रिफिकेशंस ऑफ रेलवे लाइन से जुड़ गए हैं । पैन एलोकेशंस, आप हर साल की तुलना कीजिए, हमें इसे गिनने की जरूरत नहीं है, इसे इतना बढ़ा दिया गया है, मैं पूर्वोत्तर राज्य से चुन कर यहां आया हूं, यहां पर कांग्रेस पार्टी के एक-दो ही माननीय एमपी बचे हैं । भारत की आजादी के 70 सालों बाद, मोदी जी के सत्ता में आने के बाद अरूणाचल प्रदेश रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ा है । आज अरुणाचल प्रदेश के लोग भी रेलवे से जुड़े हुए हैं ।
सभापति महोदय, इस रेलवे के अनुदान की मांगों में अपने क्षेत्र की भी डिमांड फॉर ग्रांट्स के बारे में मैं कहना चाहता हूं । मैं अरूणाचल प्रदेश से चुन कर आया हूं, पूर्वोत्तर राज्यों का एक कैरेक्टरिस्टक्सि है । वहां हिमालय है, वह पवर्तीय इलाका है । जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हिमालय है । माननीय रेलवे मंत्री जी को रेलवे मंत्रालय में तीन चीजों का सर्वेक्षण करके दिया गया है, लेकिन अभी तक वे काम शुरू नहीं हुए हैं ।
मैं इस चीज के बारे में बताना चाहूंगा कि पासीघाट हमारा होमटाउन है । मुरकाँगस्लेक से रोइंग, तेजु, नामसाई, रूफाई सर्वे एंड इंवेस्टिगेशन का काम पूरा हो चुका है । वह रेलवे बोर्ड को दिया गया है, इसको इमीडिएटली लांच किया जाए, ताकि हम रेलवे से और ज्यादा जुड़ सकें । उसके बाद लेखापानी और खारसंग, ये कोल फील्ड एरियाज हैं । लेखापानी से खारसंग रेलवे सर्वे और शायद डीपीआर का काम भी पूरा किया गया होगा, इसको भी मैं देखना चाहता हूं ।
यह वर्ष 2018 में पूरा हुआ है । मार्गेरिटा टू देवमाली, यह सर्वे 2018 में पूरा हुआ है, अभी तक इसका काम आगे बढ़ना तय नहीं हुआ है । शायद इसका डीपीआर सर्वे का काम वर्ष 2018-19 में पूरा हो गया है । मैं रेलवे मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि इसका काम भी शुरू किया जाए । अभी फिलहाल सर्वे चल रहा है ।
Hon. Chairperson Sir, you are fully aware of the situation of India and China. वर्ष 2019 में हमारी सरकार ने मिसामारी यानी कि तेजपुर असम से लेकर तवांग तक रेलवे लाइन से जोड़ने की घोषणा की थी । हमारे काउंटरपार्ट चाइना ने लसार से ट्राई जंक्शन, म्यानमार, इंडिया एंड चाइना, तिब्बत, ईस्टर्न ऑफ इंडिया का रेलवे लाइन से जुड़ना अभी अंडरकंस्ट्रक्शन है । हम अनाउंस करते जाएंगे, रेलवे सर्वे एंड इंवेस्टीगेशन में लगे रहेंगे और हमारा काउंटरपार्ट चाइना लसार से उस कोने तक अभी रेलवे लाइन बिछा रहा है । इसलिए मैं जब भी अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर को रेलवे लाइन से जोड़ने की बात करता हूं, तो वह केवल अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के हित के लिए नहीं है ।
हम वर्ष 1962 में लड़ाई क्यों हार गए थे? हम रेलवे कनेक्टिवटी नहीं होने के कारण यह हार गए थे । हमारी आर्मी, पारामिलिट्री, आर्म्स एम्यूनिशंस टैंक्स सब असम तक ही सीमित थे । अरुणाचल प्रदेश तक सड़कें भी सही नहीं थीं । इसलिए मैं जो भी कहता हूं, यह देश के हित में है । माननीय सभापति जी, मुझे माननीय मंत्री जी की एक ही चीज से डर है । Piyush Goyalji is my good friend; he is a good Economist; and he is a good Chartered Accountant also.
रेलवे में एक क्लॉज़ है । Whenever we propose railway lines, there is a clause which is dangerous for the less populated States in the country. यह इकोनॉमिकली वॉयवल नहीं है । यह एक बहुत बड़े खतरे का कंक्लूजन है ।
माननीय रेल मंत्री जी को मैं यही कहूंगा कि अगर अरुणाचल प्रदेश को रेलवे लाइन से जोड़ा जाता है, तो इकोनॉमिकली वायब्लिटीज़ क्लॉज़ को हटा दीजिए । All the railway projects – whether they are in Jammu and Kashmir, Uttarakhand, Himachal Pradesh, Arunachal Pradesh, Sikkim, Nagaland, Manipur, or Mizoram – they should be in national interest. Hon. Chairperson Sir, if we talk about Doom Dooma to Wakro to Walong, it is a very surprising story. If the hon. Railway Minister goes back to 1907, in the British days, the Britishers proposed to construct road from Doom Dooma in Assam to Rima. Rima is the eastern tri-junction of India, Tibet and Myanmar.
वर्ष 1907 में एक प्रपोज़ल था कि ब्रिटिशर्स वहां तक रास्ता बनाएंगे । काश ब्रिटिशर्स द्वारा इसी रेलवे लाइन का प्रपोज़ल बनाया गया होता । वर्ष 1962 में हिन्दुस्तान जो लड़ाई हार गया था, शायद वह नहीं होता । यह वर्ष 1907 का प्रपोज़ल है । It should be in the railway history.
वर्ष 1907 डूम डूमा टू वालोंग एंड रीमा, परशुराम कुंड हिन्दुओं का एक बहुत बड़ा रिलीजियस इलाका है । यहां मकर संक्रांति में देश भर से लाखों-लाख डिवोटीज़ आते हैं । ये अरुणाचल प्रदेश का नाम नहीं जानते हैं, लेकिन परशुराम कुंड को जानते हैं । इससे जुड़ते हुए हवाई और वालोंग रेलवे कनेक्टिविटी हो, यह देश के हित में है, लेकिन इसमें इकोनॉमिकल वायब्लिटी जीरो है । लेकिन यह हमारे आर्मी, पारा मिलिट्री और सिक्योरिटी गार्ड के लिए यह एक बहुत बड़ा सिक्योर प्वाइंट है । मैं चांगलांग इश्यू इस सदन में हमेशा रेज़ करता हूं । वहां से पास होकर यह रास्ता चाइना बार्डर तक जाएगा । यह डांगरी से रोइंग, डांगरी, तिनसुकिया से आगे असम में एक रेलवे स्टेशन है ।
ऑनरेबल चेयरमैन सर, जिस प्रदेश में रेलवे लाइन नहीं है, वहाँ के मेम्बर को बोलने के लिए ज्यादा टाइम देना चाहिए ।
HON. CHAIRPERSON: You have two more minutes.
श्री तापिर गाव : डांगरी से रोईंग की लाइन 60 किलोमीटर है, इसका सर्वे और इंवेस्टीगेशन बाकी है । तिनसुकिया से पासीघाट की लाइन 300 किलोमीटर है । एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर के सारे प्रोडक्टस यहाँ फुटहिल्स से जाते हैं । यह लाइन भी रेल से जुड़नी चाहिए । इसके साथ, ढलाईबील से सेजुसा, तेजपुर के सामने रेलवे स्टेशंस हैं, वहाँ से सेजुसा के लोगों का सम्पर्क हो जाए । वहाँ से पक्के केसांग, सेपा, सागाली और नाहरलुगन रेलवे लाइन को जोड़ा जा सकता है । इसका सर्वे भी इनवेस्टीगेशन लेवल पर है ।
मैंने मिस्सामारी से तवांग के बारे में कह दिया है । यह एक नेशनल इम्पॉर्टेंस का स्थान है । नॉर्थ लखिमपुर से बामे का सर्वे और इंवेस्टीगेशन तीन साल से चल रहा है । The line is only of 98 kilometres. The survey and investigation are going on for the last three years.मैं चाहता हूँ कि इस लाइन को Silaphatar, Bame, Along, Kamba, Kaujing Tato and Mechukha are in the east line corner. Meezu Kha is the last border area of Arunachal Pradesh, which is strategically placed in the middle of Arunachal Pradesh. इनको जोड़ना चाहिए । …(व्यवधान)
अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि पासीघाट मेरा होम टाउन है । पासीघाट से तूतिंग वाया मारयांग, यिंगकियोंग, पालिंग में लाइन जोड़ी जानी चाहिए क्योंकि ये सभी इम्पॉर्टेंट एरियाज हैं ।
मैं यह भी कहना चाहूंगा कि लेखापानी, मार्घेरीता और विजय नगर को भी रेलवे लाइन से जोड़ा जाना चाहिए । विजय नगर भी उसी ट्रायजंक्शन में है जैसे म्यांमार, चाइना और इंडिया है । आज विजय नगर में सड़क भी नहीं है । वहाँ एक किलो नमक दो सौ रुपए का है । Then, what do we expect for the security of this country? We need not speak of the population inhabited in that area.
आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में हम रेलवे से जुड़े हैं । लेकिन कोरोना जैसी महामारी के कारण three services of Railways have been suspended till today.
नाहरलैगुन से दिल्ली दोनयी पोलो एक्सप्रेस, नाहरलैगुन से गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन और नाहरलैगुन से तिनसुकिया इंटरसिटी एक्सप्रेस, गुवाहाटी से तिनसुकिया, दीमापुर, again it comes back to Naharlagun Intercity Express. ये तीनों रेलवे लाइंस अभी सस्पेंड हैं । अरुणाचल प्रदेश जनवरी से कोरोना फ्री हो चुका है । इसलिए इन रेलवे लाइंस को अब रिस्टोर किया जाना चाहिए ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude. You have taken more than the allotted time.
श्री तापिर गाव : सर, अरुणाचल प्रदेश में रेलवे लाइन नहीं है ।
मैं कहना चाहूंगा कि बिलासपुर-मनाली-लेह एक बहुत ही स्ट्रैटेजिक एरिया है । इस एरिया को भी रेलवेज से जोड़ना चाहिए ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
श्री तापिर गाव: अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर आदि पूर्वोत्तर राज्यों में ऑर्गेनिक फार्मिंग होती है । इसलिए नॉर्थ-ईस्ट से एक रेफ्रिजिरेटेड ट्रेन चलाई जाए । हमेजल सिटी में हम इसकी सुविधा दे सकते हैं । In the real end of my speech, मैं कहना चाहता हूँ कि दीमापुर से कोहिमा लाइन का काम बहुत ही स्लो चल रहा है । जीरिबाम से इम्फाल लाइन was targeted to complete in 2014. अभी भी इसका टारगेट वर्ष 2022 तक है । इसके बाद सिल्चर से आइजोल लाइन का काम भी अभी तक स्लो है ।
इसलिए मैं रेल मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि पूर्वोत्तर राज्यों को नेशनल इंट्रेस्ट में नेशनल प्रोजेक्ट्स के तहत ही लेकर काम किया जाए ।
With these words, I conclude. Thank you.
*m28 *श्री दुलाल चन्द्र गोस्वामी (कटिहार): मैं केन्द्रीय मंत्रालय के रेल बजट वर्ष 2021-22 के लिए नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांग का सर्मथन करता हूँ । और आदरणीय प्रधानमंत्री जी तथा माननीय रेल मंत्री श्री पीयुष गोयल जी को आभार प्रकट करता हूँ ।
मेरा संसदीय क्षेत्र कटिहार जो बिहार राज्य के अन्तर्गत आता है और यह एक आंकाक्षी जिला भी है और कटिहार रेल डिवीजन भी है । महोदय पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे जोन के तहत कटिहार रेल डिवीजन में इलेक्ट्रिक इंजन की मरम्मत एवं इसके रखरखाव तथा इलेक्ट्रिक लोको शेड का निर्माण का विस्तारीकरण के साथ-साथ लोको पायलट के लिए प्रशिक्षण केन्द्र की भी आवश्कता है ।
दूसरा रेलवे लाइन का दोहरीकरण जो अभी तक नही हुआ है वह है कटिहार से कुमेदपुर, कटिहार से मुकरिया, बारसोई जं.से राधिकापुर, कटिहार से जोगबनी तथा कटिहार से तेजनारायनपुर रेल लाइन को दोहरीकरण का मांग करता हूँ । साथ ही कुर्सेला से बिहारीगंज तक नया रेल लाइन का शिलान्यास पूर्ववर्ती रेल मंत्री जी द्वारा भी किया गया था, जो अभी भी लम्बित है और तीसरा कटिहार-कुमेदपुर खण्ड पर केएम-1 (भगवानपुर चौक पर) तथा कटिहार मुकरिया खण्ड पर केएम-2 (छीटाबारी पर)आरओबी के निर्माण का मांग करता हूँ । साथ ही करोना की कमी को देखते हुए लम्बी दूरी का ट्रेन जैसे आम्रपाली एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस, गरीब नवाज एक्सप्रेस, टाटा कटिहार एक्सप्रेस के साथ-साथ यात्री पैसेंजर ट्रेन का भी संचालन किया जाए । महोदय, होली के शुभ अवसर पर होली स्पेशल ट्रेन भी चलाया जाय ताकि महाराष्ट्र, चेन्नई, दिल्ली जैसे राज्यों में रहने वाले गरीब मजदूर एवं प्रवासी कामगार भी बिहार और नार्थ-ईस्ट के अपने प्रदेशों में आ-जा सकें । रेलवे लाईन के कार्य में आशातीत सफलता के लिए मैं एक फिर माननीय रेल मंत्री जी का आभार प्रकट करता हूँ ।
*m29 श्रीमती वीणा देवी (वैशाली): माननीय सभापति महोदय, मैं आपका आभार प्रकट करना चाहती हूं कि आपने मुझे रेलवे की अनुदान की मांगों 2021-22 पर बोलने के लिए समय दिया है ।
महोदय, मैं वैशाली संसदीय क्षेत्र में मुज़फ्फरपुर जिले के अंतर्गत रेलवे से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं की तरफ माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं । ये परियोजनाएं काफी समय से लंबित हैं, जैसे – प्रस्तावित मुज़फ्फरपुर, कांटी, मोतीपुर, साहेबगंज रेल लाइन के सर्वे का काम कराया गया था । इस काम की वास्तविक स्थिति क्या है?
हाजीपुर, वैशाली, सुबोली रेल लाइन वाया साहेबगंज, पारू का काम अधूरा है और कार्य धीमी गति से चल रहा है, जबकि सीतामढ़ी, मुज़फ्फरपुर रेल लाइन और हाजीपुर, सुबोली, वैशाली रेल लाइन का काम एक साथ शुरू हुआ था । सीतामढ़ी रेलवे लाइन शुरू हो चुकी है, लेकिन हाजीपुर, सुबोली रेल लाइन का काम अधूरा है ।
आम गरीब मजदूर लोगों के लिए ट्रेनों में आरक्षित डिब्बे (आरक्षित बोगी) फिर से बहाल किए जाएं, ताकि लोगों को सुविधाएं मिल सकें । प्लेटफॉर्म टिकट का मूल्य बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है, जो कि न्यायसंगत नहीं है । इसे कम करना चाहिए ।
मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करती हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र वैशाली से जुड़ी लंबित रेलवे की परियोजनाओं को जल्दी से जल्दी पूरा कराने की कृपा करें । धन्यवाद ।
*m30 श्री दीपक बैज (बस्तर): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे बजट पर चर्चा करने की अनुमति दी, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय सभापति महोदय, देश के बजट की तरह ही रेलवे का बजट एक महत्वपूर्ण बजट है, क्योंकि रेलवे के माध्यम से पूरे देश में रोजगार का एक बहुत बड़ा साधन है । इसके अलावा देश की सरकार की आय के लिए भी रेलवे बहुत बड़ा साधन है, लेकिन कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन में 23 मार्च, 2020 को पूरे देश में रेलवे को बंद कर दिया गया था । उस समय के असफल लॉकडाउन को पूरे देश ने देखा है ।
माननीय सभापति महोदय, जनता सड़क पर आ गई, लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही थी । सरकार को पता नहीं था कि देश के किस प्रदेश के कितने मज़दूर किस प्रदेश में काम करने के लिए चले गए, देश के अन्य प्रदेशों में या बाहर के देशों में चले गए । इसका सरकार के पास आंकड़ा तक नहीं था । जब पूरी जनता सड़कों पर आ गई, तो सरकार की नींद खुली । मोदी सरकार के निर्णय के बाद सारे मजदूर पैदल चलने लग गए । इसके बाद सारी प्रदेश की सरकारों ने केन्द्र सरकार से कहा कि हमें ट्रेन दीजिए, हमें अपने मजदूरों को लाना है । केन्द्र सरकार ने ट्रेन देने में आनाकानी की कि केन्द्र सरकार के पास यात्रियों को लाने के लिए पैसा नहीं है, उनको देने के लिए किराया नहीं है ।
माननीय सभापति महोदय, मैं अपनी माननीय नेता श्रीमती सोनिया गांधी जी को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने ऐलान किया कि पूरे देश के मजदूरों के लिए किराया कांग्रेस पार्टी देगी । तब आनन-फानन में केन्द्र सरकार सोचने पर मजबूर हुई और केन्द्र सरकार ने कहा कि आधे पैसे वह देगी और आधे पैसे राज्य सरकारें देंगी । मैं निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के हमारे माननीय मुख्य मंत्री श्री भूपेश बघेल जी को धन्यवाद दूंगा, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के मजदूर, जो अन्य प्रदेशों में फंसे थे या अन्य प्रदेशों के मजदूर, जो छत्तीसगढ़ में फंसे थे, उनके लिए किराया, खाना, जूते-चप्पलें, बस, पैसा एवं उनके लिए दवाई की व्यवस्था उन्होंने की ।
सभी मजदूरों को घर भेजने और वापस उनके घर पहुंचाने का काम किया है, इसके लिए मैं हमारे मुख्य मंत्री भूपेश बघेल जी को धन्यवाद देता हूं । जनवरी, 2021 में मेरे द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर माननीय मंत्री जी ने 10 मार्च को दिया । पिछले वर्ष की तुलना में जनवरी, 2021 को 34700 करोड़ रुपये का घाटा रेलवे को हुआ है और बस्तर के जगदलपुर जोन रेलवे स्टेशन को भी 1082 करोड़ रुपये का भी घाटा हुआ है । मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या बस्तर को रेल की जरूरत नहीं है? बस्तर में लोहे का भंडार है । केंद्र सरकार को यहां माइनिंग द्वारा करोड़ों, अरबों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है । एनएमडीसी और एसआर द्वारा खनिज संसाधनों की ट्रांसपोर्टिंग के माध्यम से महीने में तीन सौ करोड़ रुपये केंद्र सरकार को मिल रहे हैं । हमारा लोहा जापान, कोरिया और दूसरे देशों को भेजा जा रहा है, लेकिन बस्तर को क्या मिल रहा है? क्या बस्तर के अमीर धरती के लोग हमेशा गरीब ही रहेंगे? क्या मंत्री जी एक ट्रेन बस्तर के लिए नहीं दे सकते हैं? क्या बस्तर के आदिवासी लोगों को ट्रेन का अधिकार नहीं है? क्या बस्तर का आदिवासी ट्रेन में बैठकर विशाखापट्नम, दिल्ली, रायपुर नहीं जा सकता है? मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि यदि बस्तर को ट्रेन सुविधा नहीं, तो खनिज संसाधन भी नहीं । पिछले समय में हमारे यहां पांच ट्रेनें चलती थीं । जगदलपुर से समलेश्वरी एक्सप्रेस, जगदलपुर से भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस, जगदलपुर से राउरकेला एक्सप्रेस, फिरंदुल-विशाखापट्नम नाइट एक्सप्रेस ट्रेनें बंद हुई हैं । यह बात सही है कि कोरोना काल में ये ट्रेनें बंद हुईं । उस समय पूरे देश में ट्रेनें बंद हुईं, लेकिन आज लॉकडाउन के बाद क्या दूसरी ट्रेनें चालू नहीं की गई हैं? बहुत निवेदन करने के बाद माननीय मंत्री जी ने एक यात्री ट्रेन शुरू की है, जिसके लिए उन्हें धन्यवाद दे रहा हूं । उसमें भी स्पेशल ट्रेन के नाम से 40 प्रतिशत किराया ज्यादा वसूल किया जा रहा है ।
मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि बंद पड़ी चार ट्रेनें जल्द चलाई जाएं, ताकि बस्तर के आदिवासी लोगों को भी रेल सुविधा का लाभ मिल सके । दल्लीराजहरा, रावघाट, जगदलपुर रेल लाइन का पिछले 10 साल से काम चल रहा है । इसके लिए मैंने मंत्री जी से व्यक्तिगत तौर पर चर्चा भी की थी । इस ट्रेन को चलाने में कितना और समय लगेगा? क्या दल्लीराजहरा, रावघाट, जगदलपुर से रायपुर रेल लाइन जुड़ेगी? मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि दल्लीराजहरा रेल लाइन को जल्द से जल्द चालू करें । आज दिल्ली में मेट्रो ट्रेन चल रही है, क्या सरकार बताएगी कि यह किसकी देन है । क्या आपने देश में एक भी मेट्रो ट्रेन चलाई है? आलोचना करने के लिए आपके पास बहुत कुछ है, लेकिन आपने रेलवे का नीजिकरण करने का काम किया, रेलवे को बेचने का काम किया । क्या आपने रेल बनाई है, जिसे आप बेचने का काम कर रहे हैं ।
महोदय, मैं अंत में कहना चाहता हूं कि बस्तर जैसा पिछड़ा, नक्सली क्षेत्र, जंगली क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्र और जो आदिवासी क्षेत्र है, वहां भी रेल सुविधा की आवश्यकता है । माननीय मंत्री जी आपसे निवेदन करता हूं कि हम लोग खनिज संसाधन से भरपूर बस्तर केंद्र सरकार को लाखों, करोड़ों रुपये का राजस्व दे रहे हैं, इसलिए आप बस्तर को रेल सुविधा दीजिए, जो कि बस्तरवासियों का अधिकार है, अन्यथा हम लोग सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे ।
*m31 SHRI LAVU SRIKRISHNA DEVARAYALU (NARASARAOPET): Thank you, Sir, for giving me the opportunity.
First of all, I would like to congratulate the Ministry for three things. The first one is the increase in the speed of the freight trains. In the last few months, it has been increased from almost 25 kms. to 60 kms. I had the opportunity to meet with a lot of traders who are very happy wherein they are getting the freight from places like Bihar and Uttar Pradesh all the way to Andhra Pradesh in less than 24 hours, which is never heard of. So, I would like to congratulate the Ministry.
The second thing is with regard to the Ministry’s idea regarding increase in the speed of the passenger trains as well. We have been seeing that they want to increase it to 180 kmph. It is a good move.
Thirdly, in the last few years, there is a drastic decrease in the accidents that are happening. We have to congratulate the Ministry and all the people concerned who have contributed to make it happen.
But I have some questions regarding the operations and the financial situation of the Railways. Firstly, the operational ratio of the Railways has worsened from 90 per cent in 2012-13 to 96 per cent in 2021-22. This higher operational ratio reflects that the expenses of the Railways have been raising faster than the revenues. I would like to know from the Ministry what is being done to improve the operational ratio so that the financial situation is maintained and as a result the Railways will be financially sustainable for the passengers and the freight traffic.
Secondly, the capital expenditure budgeted for the year 2020-21 is higher than the Budget Estimate for the year 2020-21. However, the question is of the implementation status of the capital expenditure allocation. In 2020-21, there has been under achievement on physical targets of construction of new lines by -40 per cent; gauge conversion by -33 per cent; doubling of lines by -26 per cent; wagons by -17 per cent; and track renewals by -20 per cent. This happened when there was COVID-19 situation across the country and when the tracks were not being used. If you had used this allocated budget well, you would have created lakhs of employment across the country. This is what we have seen in the last one year. I would like to know from the Ministry what is being done to spend the capital expenditure budget of Rs. 2.15 lakh crore effectively in 2020-21 and 2021-22.
Thirdly, the National Rail Plan draft has also estimated that in 2020-21 and 2021-22, Rs. 3.1 lakh crore will be needed for projects under the National Infrastructure Pipeline. I would like to know from the Ministry how they will create the infrastructure where there is a budget allocation shortfall of almost Rs. 1 lakh crore. We are a little happy. I would not say that we are very very happy when it comes to Andhra Pradesh when we heard about freight corridor between Vijayawada and Kharagpur and Vijayawada and Itarsi. If these freight corridors have to see the light of the day, where will the Budget come from because you are already in shortfall by almost Rs. 1 lakh crore.
Now, I will come to the issue of my State, Andhra Pradesh. The Andhra Pradesh Reorganization Act, 2014 had committed that the Ministry will create a new Railway zone in Andhra Pradesh within six months. It has been more than six years since the Bill was passed and the people of Andhra Pradesh are still waiting for the work to begin on the South Coast Railway Zone. Even though this new zone was announced, the creation of Railway Recruitment Board was not announced. Correct me if I am wrong but it is a general practice that a RRB is attached to every Railway Division. But this was ignored in the announcement of the South Coast Railway Zone.
On the one hand, the promises made to Andhra Pradesh have not been fulfilled, on the other hand, the existing Waltair Division is being wound up and one half of it is being merged with Raigarh Division in Odisha. I wish to remind the House that the Waltair Division is one of the highest revenue earning divisions in the country. It is one of the leading revenue earners for the freight. In 2019-20, it even earned revenue close to Rs. 8,200 crore from freight alone. We request the Ministry to work dedicatedly towards fulfilling the commitments made in the Andhra Pradesh Reorganization Act; allocate funds exclusively for the South Coast Railway Zone; and give us a timeline when it will be functional.
We also request that the Waltair Division be retained as it is as it serves the important functions of providing freight services for Andhra Pradesh which also has a lot of major ports.
Coming to the issues concerning our State, I would say that introduction of Kisan Rail is a great move by the Central Government. We have seen its benefits in one of the districts, that is Anantapur in Andhra Pradesh, where it is functioning at its full capacity. But I think there is a need for the Ministry of Agriculture and the Ministry of Railways to coordinate. Coming from a district like Guntur, I know, the major products of that area, that is chillies and turmeric, are not included in that category. Spices are not being included in that category. The benefit is given to only vegetables and pulses and spices are not being included. When I tried to understood what would have been the thought behind it, I understood that even they do not have any idea about it. So, I would request that spices be included in that category.
With regard to Nadikudi – Kalahasti railway line, I would like to say that the work is on for so many years, but it is not being done at a pace at which it should be done. It will give a lot of impetus to growth in the highlands of Andhra Pradesh.
Likewise, Gadwal - Macherla railway line is also very important. It connects Telangana and Andhra Pradesh. The distance is not that much. It is being planned for so many years, I think, for the last 15 or 16 years. But somehow it has not seen the light of the day.
Now, I would like to talk about RUBs and ROBs. I am sure the Ministry is facing this day in and day out. The design of RUBs is a huge issue in our constituencies. Water keeps accumulating in the rainy season. For almost three to four months, no one can pass through that. There is some kind of design flaw. I think the Ministry has to look into it. The ROBs also need to be looked into. The issue with ROBs is that you are asking the State Governments to chip in with 50 per cent of the amount. But most of the municipalities where these ROBs need to come up, do not have this kind of revenue to fund these ROBs.
The other issue is regarding the reduction in the number of stoppages. Please correct me if I am wrong. What I heard from the Railway authorities is that if one cannot get 50 tickets for that specific train in that particular station, the stoppage would not be there. That is what I have been given to understand. Correct me if I am wrong. Most of these stations where these 50 tickets have to be sold do not have that reservation capacity. For example, if a station has reservation for only five tickets, how do you expect 50 tickets to be sold in that station? Eventually, the passenger capacity will be decreased. Eventually, not many people are not boarding the trains at that particular station because adequate reservation facility is not available. So, I hope you will look into it.
Coming to upgradation of Narasaraopet Railway Station in my constituency, I would like to submit that a new district is being formed. I hope the Ministry will look into it so that upgradation of this Station will happen as soon as possible. Along with that, I would like to request that the, upgradation of stations in the Secunderabad – Guntur line, that is Sattenpalli, Piduguralla, Nadikudi, etc. may please be taken up. There is already a plan to upgrade these stations. But it is not happening at the speed at which it is required to happen. Please include Tirupathi also in this upgradation plan. It is a town where a lot of pilgrims come. I hope the Ministry will look into these issues and ensure that everything is taken into consideration and the problems are solved as soon as possible. Thank you very much.
*m32 *श्री चन्देश्वर प्रसाद (जहानाबाद): मैं रेल मंत्रालय के अनुपूरक मांग का समर्थक करता हूँ ।
आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है, जिसके अलग-अलग देशों में भिन्न-भिन्न कारण हैं, बावजूद इसके वित्त मंत्री जी ने रेल मंत्रालय के लिए एक अच्छा बजट दिया है ।यह एक दूरदर्शी बजट है जो रेल की आर्थिक परिस्थितियों के समाधान में सहायता करेगा । मोदी सरकार ने रेलवे की आर्थिक सेहत सुधार दी है. यह हम नहीं बल्कि बजट के आंकड़े बता रहे हैं.
राज्य को नई रेललाइन, आमान परिवर्तन व दोहरीकरण के लिए 5,150 करोड़ मिले हैं । बिहार में रेल के विकास, विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 2021-22 के बजट में नई रेल लाइन, आमान परिवर्तन और दोहरीकरण परियोजनाओं में और गति लाने पर जोर दिया गया है । इसके तहत बजट में राज्य की नई लाइन, आमान परिवर्तन और दोहरीकरण परियोजनाओं के लिए 5,150 करोड़ का आवंटन किया गया है । यह राशि वर्ष 2009 से 2014 के बीच प्रतिवर्ष आवंटित राशि की तुलना में 355 प्रतिशत अधिक है । इसके अलावा वर्ष 2021-22 के बजट में बलिया से आरा तक 65 किलोमीटर नई बड़ी रेल लाइन का सर्वे कार्य भी स्वीकृत किया गया है ।
चालू परियोजनाओं के लिए भी बजट में प्रावधान:वर्तमान में पूर्ण-आंशिक रूप से बिहार राज्य में 74,880करोड़ की लागत वाली 5,267किलोमीटर की नई रेल लाइन, आमान परिवर्तन,दोहरीकरण परियोजनाओं से जुड़े कुल 57रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं । इस कड़ी में 53,650करोड़ की लागत से 2,962किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की 35 परियोजनाएं हैं । 5,422 करोड़ की लागत से 1018किलोमीटर लंबी आमान परिवर्तन की 5परियोजनाएं हैं । साथ ही 15,808करोड़ की लागत से 1287किलोमीटर लंबी दोहरीकरण की 17परियोजनाओं के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है ।
इंफ्रास्ट्रक्चर व सेफ्टी से जुड़े कार्यों के लिए भी बजट में आवंटन:बिहार के लिए रेल अवसंरचना और संरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए औसत बजट आवंटन वर्ष 2009-14के1132 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष से बढ़कर 2014-19 के दौरान 3061 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष रहा । इस प्रकार वर्ष 2009-14की तुलना में 2014-19के मध्य औसत बजट आवंटन 170 प्रतिशत से अधिक है । वर्ष 2019-20 के लिए बिहार के लिए रेल अवसंरचना और संरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए कुल बजट आवंटन 4093 करोड़ रुपए था । यह आवंटन वर्ष 2009-14के बीच आवंटित राशि औसतन 1132करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की तुलना में 262प्रतिशत अधिक है ।
रेल परियोजनाओं के लिए डेडलाइन तय की गयी है यथा :-
मार्च में निर्मली-सरायगढ़ नई लाइन परियोजना (कोसी पूल सहित) 22 किमी; दिसंबर के अंत तक जयनगर-बिजलपुरा आमान परिवर्तन 52किमी,हाजीपुर-बछवारादोहरीकरण72 किमी और कटरिया-करसेला पैच डबलिंग 7किमी ।
पूर्व मध्य रेल की परियोजनाओं के लिए प्रावधान; नई रेल लाइन निर्माण कार्य के लिए करीब 596 करोड़;आमान परिवर्तन कार्यों के लिए 190 करोड़; दोहरीकरण कार्य के लिए 182करोड़ का प्रावधान; सड़क संरक्षा कार्य (उपरी-निचले सड़क पूल) से संबंधित कार्य के लिए 206करोड़ सड़क संरक्षा (समपार)से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए 74 करोड़; ट्रेनों की गति में वृद्धि और समय पालन में सुधार के मद्देनजर ट्रैक नवीनीकरण के लिए 580 करोड़; सोननगर-दानकुनी नई लाइन के लिए 2959 करोड़ का आवंटन यात्री सुविधा के लिए इस बजट में 171करोड़ रूपए का आवंटन;उत्पादन इकाइयों/ कारखानों के लिए 134 करोड़; सिग्नल एवं दूरसंचार संबंधी कार्य के लिए 161 करोडतथा पुल व सड़क पहुंच संबंधी कार्य के लिए 72 करोड़ प्रावधान किया गया है I मैं जहानाबाद संसदीय क्षेत्र में कुछ प्रमुख रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ :
जहानाबाद में अरवल मोर राजा बाजार के पास रेल ओवर ब्रिज का निर्माण कराया जाए ।
जहानाबाद में कारगिल चौक के पास रेल ओवर ब्रिज बनाया जाए ।
जहानाबाद-गया रूट पर कोरोना के कारण रेलगाड़ियों को आवागमन रोका गया परंतु अब तक उन्हें दबारा नही चलाया गया है । उन रेलगाड़ियों का आवागमन पुनः कोरोना से पहले की तरह माना जाना एवं ठहराव बहाल किया जाए ।
जहानाबाद से कोलकाता के बीच पटना-धनबाद-गंगा दामादर एक्सप्रेस (ट्रेन सं. 13329 -13330) को धनबाद की जगह कोलकाता तक विस्तार किया जाए ।
जहानाबाद से दिल्ली के बीच सीधी रेल सेवा देने के उद्देश्य से,महाबोधी एक्सप्रेस को गया की जगह जहानाबाद से आरंभ किया जाए ।
पटना-गया रेलखंड पर टेहटा रेलवे स्टेशन पर पलामू एक्सप्रेस का ठहराव और आरक्षित टिकट काउंटर खुलवाया जाए ।
बिहटा से अनुग्रह नारायण रोड रेल स्टेशन के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन को जल्द बिछाने की व्यवस्था की जाए ।
नालंदा से गया को जोड़ने के लिए50 कि.मी.लंबे इस्लामपुर से मानपुर तक नई रेल लाइन बिछाई जाए ।
पटना-गया रेलखंड पर टेहटा रेलवे स्टेशन पर पटना-हटिया एक्सप्रेस (ट्रेन सं. 08623 -08624) का ठहराव पुनः बहाल किया जाए ।
कुछ वर्ष पूर्व जहानाबाद से पटना एवं गया के लिए लोकल पैसेंजर ट्रेन चलती थी जो बाद में बंद हो गई । उस सेवा को पुनः बहाल किया जाएतथा जहानाबाद रेल स्टेशन का विस्तारिकरण,आधुनिकीकरण एवं सौंदर्यीकरण किया जाए ।
*m33 SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Mr. Chairman, Sir, thank you very much for giving me this opportunity.
ऑनरेबल मिनिस्टर साहब, पहले तो पूरा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एक ही था । जब यह 15वीं लोक सभा में डिवाइड हुआ था, डिवाइड के टाइम पर एक्ट में क्या-क्या प्रॉमिस किये गये थे । हमारे आंध्र प्रदेश के कुलीग ने वह सब अभी बता दिया है । डिमांड फॉर ग्रांट्स को देखने से पता चलता है कि इसमें गवर्नमेंट का बजट सपोर्ट का जो एलोकेशन हुआ है, वह केवल 1.1 लाख करोड़ रुपये का है ।
HON. CHAIRPERSON : I wish you a happy birthday to you.
SHRI NAMA NAGESWARA RAO : Thank you Sir.
HON. CHAIRPERSON: You can have your time today. Please take your time.
SHRI NAMA NAGESWARA RAO : Thank you Sir.
महोदय, हम रेलवे की डिमांड फॉर ग्रांट्स देखे तो 1.1 लाख करोड़ रुपये का बजट एलोकेशन हुआ है । आपका 2.17 लाख करोड़ रुपये रेवेन्यू एक्सपेक्टेशन है और इस गैप को किस तरह से आप फुलफिल करेंगे? आपका मेनली रेलवे को प्राइवेटाइजेशन करना है और ऑलमोस्ट एक लाख करोड़ रुपये का जो गैप है, उस गैप को आप कैसे फुलफिल करेंगे? उसके बारे में थोड़ा डिटेल में बता दीजिए ।
दूसरा, पूरे देश में रेलवे का नेटवर्क इम्प्रूव हो रहा है, इसमें कोई डाउट नहीं है । मगर जिस तरह से इम्प्रूवमेंट हो रहा है, लोगों के एक्सपेक्टेशन के अनुसार रेलवे के नेटवर्क का इम्प्रूवमेंट नहीं हो रहा है । हम पिछले 20 साल का देखें तो पूरा देश एक तरह से रोड नेटवर्किंग और दूसरी तरफ से रेलवे नेटवर्किंग के ऊपर डिपैंड है । वाजपेयी साहब की गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना से रोड नेटवर्किंग में काफी इम्प्रूवमेंट हुआ है, मगर रेलवे नेटवर्क उतना इम्प्रूव नहीं हुआ है । उसके लिए मैं एक छोटा सा एग्जाम्पल देना चाहता हूं । माननीय मिनिस्टर साहब इसको थोड़ा ध्यान से देखें । Bhadrachalam Kovvur रेलवे स्टेशन के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि जब मैं छोटा था, उस समय लोग बोल रहे थे कि इधर से एक Bhadrachalam Kovvur रेलवे स्टेशन जाएगा । भद्राचलम में श्रीराम का मंदिर है । अभी अयोध्या से पहले साउथ इंडिया में भद्राचलम का श्रीराम मंदिर है । उस मंदिर के रेलवे स्टेशन के लिए हमारी पार्टी के एमपीज़ 15वीं लोक सभा में, 16 लोक सभा में और अभी 17वीं लोक सभा में मैं भी कितनी बार बोल चुका हूं, लेकिन उस मंदिर के लिए आप रेलवे लाइन नहीं डाल पाएं । मंत्री जी आप सीनियर आदमी हैं, आप सब कुछ जानते हैं । पैसा कहां से लाना है, आपको सबसे ज्यादा मालूम है । श्रीराम मंदिर के लिए रेलवे लाइन डालने की जिम्मेदारी आपको लेनी पड़ेगी । अभी उसको करना है । श्रीराम मंदिर के लिए रेलवे लाइन डाल दीजिए । हम चालीस साल से बता रहे हैं । उसी तरह से जो Bhadrachalam Kovvur रेलवे लाइन स्टेशन है, उसके बारे में वर्ष 2012 में 15वीं लोक सभा में काफी कुछ बोलने के बाद वह सैंक्शन्ड हुआ है । आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के डिवाइड होने के बाद सिर्फ तेलगांना तक कम्पलीट करने के बाद वह आंध्र प्रदेश को कनेक्ट नहीं कर रहे हैं । जब तक वह रेलवे लाइन आंध्र प्रदेश से कनेक्ट नहीं करेंगे, राजमुंदरी के मेन रेलवे स्टेशन से नहीं जोड़ेंगे, तो उसका कोई यूज नहीं रहेगा । अगर इस तरह से देखें तो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों तेलुगू लोगों के साथ आप थोड़ा अन्याय कर रहे हैं । यह बात मैं हाउस में जबर्दस्ती बोल रहा हूं । कारण क्या है कि जब हम लोगों का स्टेट डिवाइड हुआ था, उस टाइम पर री-ऑर्गेनाइजेश एक्ट में जो-जो प्रॉमिसेज़ किए गए हैं, आंध्र प्रदेश के लिए जो प्रॉमिसेज किए गए, अभी-अभी हमारे कुलीग ने बताया । आपने तेलंगाना के लिए कोच फैक्ट्री का प्रॉमिस किया है । कोच फैक्ट्री का बिल में आया, एक्ट बन गया, वर्ष 2014 से अभी 7 साल हो गए हैं, आपने रिसेंटली रेलवे कोच फैक्ट्री को डिनाई करते हुए एक लैटर दे दिया । जब पार्लियामेंट के अंदर एक्ट बन गया, पार्लियामेंट ने एग्री कर दिया है, गवर्नमेंट जिसको इम्प्लिमेंट करना चाहिए, पार्लियामेंट में एक्ट बनने के बाद अगर वह इम्प्लिमेंट नहीं करेंगे, तो लोगों का विश्वास टूट जाता है । मंत्री साहब मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप रेल कोच फैक्ट्री, काजीपेट में तेलंगाना को दीजिए । उसमें आपने क्लियरली मेन्शन किया है । तेलंगाना के लिए कुछ रेलवे लाइन्स भी मेन्शन की हैं । तेलंगाना के लिए रेल कोच फैक्ट्री भी मेन्शन की है । आप उसको जरूर इम्प्लिमेंट करिए । उसके साथ-साथ तेलंगाना की कुछ रेलवे लाइन्स हैं, उन रेलवे लाइन्स के लिए हमने बहुत बार अप्रोच किया है । उसमें Patancheru - Sangareddy, Vikarabad, Peddapalli – Kazipet, Bhongir, Shankarpalli, Nizamabad, Nizamabad - Nirme Adilabad, Gadwal-Macheria, Bodhan-Bider और Zabiraba से लेकर सिकंदराबाद तक का है । बजट एलोकेशन में हमको इन रेलवे लाइन्स के लिए कुछ नहीं दिया गया है ।
यह तेलंगाना नया स्टेट है । नया स्टेट बनने के टाइम पर जो प्रॉमिसिज़ किए गए थे, उनको फुलफिल करते हुए थोड़ा हमको दे दीजिए । खम्माम हमारा डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर्स है । यह बैकवर्ड एरिया है । खम्माम डिस्ट्रिक्ट में सात असेंबली कॉन्सिटट्यूएंसी एससी, एसटी और बीसी की हैं । यह बहुत बैकवर्ड एरिया है । बैकवर्ड एरियाज के लिए हमने बहुत बार रिप्रेजेंटेशन भी दिया है । उसमें खम्माम रेलवे स्टेशन और प्लेटफॉर्म की लेंथ बढ़ाने के लिए बताया है । वहा टॉयलेट्स बनाने के लिए बताया है । वहां के लिए कैमरा लगाने के लिए बताया है । जब हमने रेलवे स्टेशन इंसपेक्ट किया, उस समय आपके ऑफिसर्स को हमने बोला कि हम अपने एमपीलैड से पैसा दे देंगे, जितने कैमरे की जरूरत है आप लगा दो । इसी बीच हमारा एमपीलैड भी खत्म हो गया । इस साल भी नहीं है और अगले साल में भी नहीं है । वहां कैमरे नहीं है, हमारा रेलवे स्टेशन बहुत इम्पॉर्टेंट है, उस पर थोड़ा ध्यान दे कर, उस काम को पूरा करवा दीजिए ।
उसके साथ-साथ बहुत से ऑनरेबल मेंबर्स ने भी इस हाऊस में बात की है, आगे भी बात करने वाले हैं, वह आरओबी और आरयूबी के बारे में है । साहब, यह बहुत ही इम्पॉर्टेंट है । हम जब भी आपके पास चिट्ठी ले कर आए तो आपने बोला कि स्टेट गवर्मेंट से 50 पर्सेंट फंड दिलवा दो । सर, मेरी रिक्वेस्ट है कि आरओबी और आरयूबी ये सारे टाउन्स के अंदर आ जाते हैं, उसकी वजह से क्या होता है कि जब गेट अगर लग जाता है तो काफी ट्रैफिक जाम होता है, काफी एक्सिडेंट्स होते हैं । मेरी रिक्वेस्ट है कि आप एक पॉलिसी ला कर पूरे देश के आरओबी और आरयूबी दोनों आप सेंट्रल गवर्मेंट के फंड से करवाइए । कम से कम इसको आप कम्पलीट करवाइए ।
हमने अपने कॉन्सिटिट्यूएंसी के बारे में दो-तीन बर रिक्वेस्ट किया था । मधुरी के लिए एक आरओबी की रिक्वेस्ट की थी । उसके लिए कभी भी एक लैटर लिखें तो एक रिप्लाई आ जाता है कि वी आर कंसीडरिंग, लेकिन आप पैसा दे दो । साहब, आप कंसीडर कर के हमसे पैसा पूछते हैं तो वह कंसीडरेशन कैसा होता है? साहब, अभी तो दोनों बगल में बैठे हैं । बहुत खुशी की बात है । फाइनेंस मिनिस्टर और रेलवे मिनिस्टर दोनों बगल में बैठे हैं । ये प्रॉब्लम आप दोनों को मिल कर सॉल्व करनी है । वाजपेयी जी के टाइम में हरेक आदमी पार्टी से ऊपर उठ कर गोल्डन क्वार्डिलेट्रल रोड्स के बारे में बात करता है और गांव के लिए पीएमजीएसवाई की रोड्स की बात करता है । उसी तरह से मोदी जी के टाइम में कम से कम आरओबी और आरयूबी के लिए एक पूरी पॉलिसी बना लीजिए । साहब, बहुत दिक्कत हो रही है । इस पर बहुत से लोगों ने बात की है । हम इधर का उधर का नहीं हैं । यह प्रॉब्लम सभी की है । हम टाउन में जाते हैं तो लोग बोलते हैं कि आप क्या एमपी हैं? क्या आप एक छोटा सा आरओबी और एक छोटा सा आरयूबी नहीं ला सकते हैं? यह रियल फैक्ट है । इतनी एप्लिकेशंस आती हैं । साहब, कम से कम एक पॉलिसी बना कर 100 पर्सेंट आपके पैसे से उसको खत्म करवाइए, ताकि आगे हम आरओबी और आरयूबी के बारे में इधर बात न करें ।
15.58 hrs (Shrimati Rama Devi in the Chair) इसको सपोर्ट करते हुए, मेरी रिक्वेस्ट है कि रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट में जो-जो प्रॉमिसेज दोनों स्टेट्स के लिए, स्पेशली तेलंगाना स्टेट के लिए प्रॉमिसेज किए गए हैं, उनको फुलफिल करने के लिए आपसे एक और दफा रिक्वेस्ट करते हैं । मैडम, आपके माध्यम से हम मिनिस्टर से रिक्वेस्ट कर रहे हैं ताकि उनके रिप्लाई में यह सब पूरा कर के हमारे तेलुगु लोगों को आप यह बोलें कि जो मांगा है, उसमें कुछ दिया है, यह हम आपके मुंह से सुनना चाहते हैं । इसी के साथ-साथ आपको सपोर्ट कर के धन्यवाद करते हैं ।
*m34 *श्री सुभाष चन्द्र बहेड़िया (भीलवाड़ा): पिछले वर्षों में रेलवे ने यात्री सुविधाओं के विकास में नये आयाम स्थापित किये हैं । रेलवे स्टेशन पर स्वच्छ भारत अभियान का परिणाम परिलक्षित होता है स्टेशनो को वाईफाई से जोड़ना हो,नई ट्रेनों का संचालन हो, रेलवे लाईनों का विद्युतीकरण हो,अथवा यात्रियों की सुरक्षा के विषय में रेलवे ने अच्छे प्रयास किये हैं । इस रेल बजट में सरकार नेशनल रेल प्लान लेकर आई है जो 2030 तक रेलवे के सम्पूर्ण एवं समुचित आधारभूत ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण है । दिसम्बर 2023 तक 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य लिया गया है, इससे यात्री सुविधाओं को विकास होगा एवं समय की बचत होगी । बजट में यात्री सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया गया है । अधिक ट्रैफिक वाले रूटों पर सुरक्षा के अधिक उपाय किये गए । उसके तहत मानवीय भूल के कारण होने वाली ट्रेन दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकेगा । सरकार ने माल ढुलाई की लागत कम करने के लिए ईस्ट -वेस्ट कॉरिडोर, ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर बनाये जाने की घोषण की है नार्थ– साउथ कॉरिडोर पर काम तेज गति से चल ही रहा है । इस बजट में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किये गये हैं । पर्यटन वाले रूटों पर आधुनिक कोच लगाये जाने की घोषणा की गई है ।
मैं रेलवे से सम्बन्धित विषय पर आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा । कोविड -19 के चलते यात्री ट्रेनों का संचालन बन्द हुआ था । अब यात्री ट्रेनो को पुनः चालु किया जा रहा है, परन्तु देखने में आया है कि जिन स्टेशनों पर लम्बे समय से इन ट्रेनों का ठहराव होता रहा है वहां ठहराव नहीं हो रहा है उदाहरण के लिए मेरे लोकसभा क्षेत्र के मांडलगढ़ रेलवे स्टेशन (पश्चिम मध्य रेलवे) पर ट्रेन नं. 12963/12964 हजरत निजामुद्दीन उदयपुर ठहराव होता था, परन्तु अब यह ट्रेन वहां नहीं रूक रही है । मैं सदन के माध्यम से मांग करता हूँ कि इसके सहित सभी ट्रेनों का ठहराव पूर्व की भांति स्टेशनों पर यथावत रहे । यह यात्री सुविधाओ एवं संतुष्टि की दृष्टि से अत्यन्त आवश्यक है ।
मैं मेरे लोकसभा क्षेत्र भीलवाड़ा से सम्बन्धित कुछ मांगों की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ जिसमें ट्रेनों का ठहराव जिसकी मैं लम्बे समय से मांग करता रहा हूँ ।
प्रमुख रूप से उ.प. रेलवे में भीलवाड़ा के रायला स्टेशन पर ट्रेन. नं. 14801/14802 इन्दौर जोधपुर, ट्रेन नं. 12991/12992 उदयपुर जयपुर इन्टरसिटी, ट्रेन नं. 19609/19610 जयपुर हरिद्वार एक्सप्रैस का ठहराव कराया जाये ।
पश्चिम मध्य रेलवे में मांडलगढ स्टेशन पर ट्रेन नं.12963/12964हजरत निजामुद्दीन उदयपुर एवं ट्रेन नं. 13424 अजमेर भागलपुर का ठहराव कराया जाए ।
पश्चिम मध्य रेलवे के बरून्दनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म की ऊंचाई बढाई जाए ताकि यात्रियों के उतरने चढ़ने में असुविधा नहीं हो । उदयपुर कोटा के मध्य एक लोकल ट्रेन चलाने की मांग भी करता हूं ।
ट्रेन नं. 29020 मेरठ सिटी मन्दसोर लिंक एक्सप्रेस का ठहराव पश्चिम मध्य रेलवे के बरून्दनी एवं उपरमाल स्टेशन पर कराया जाए ।
ट्रेन नं. 59834 मन्दसोर कोटा पेसेन्जर लोकल ट्रेन है सभी स्टेशनों पर रूकती है, परन्तु उपरमाल स्टेशन पर ठहराव नही है । इस ट्रेन का ठहराव पश्चिम मध्य रेलवे के उपरमाल स्टेशन पर ठहराव कराया जाए ।
राजस्थान में अजमेर से चित्तौड़गढ़ रेलवे लाईन पर मेरे लोकसभा क्षेत्र भीलवाड़ा में हमीरगढ़ स्टेशन के पास लेवल क्रॉसिंग है यहां पर रेलवे अण्डर ब्रिज बनाया जा रहा है । लेवल क्रॉसिंग को भविष्य में बन्द किया जायेगा । रेलवे अण्डर ब्रिज में लगातार पानी भरा रहने से आवाजाही संभव नहीं है । हमीरगढ भीलवाड़ा जिले में एक उपखण्ड मुख्यालय है तथा इसकी आबादी 30 हजार से अधिक है । मैं सदन के माध्यम से मांग करता हूँ कि शीघ्र ही एक रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जाए तथा जब तक आरओबी का निर्माण नही हो तब तक रेलवे फाटक को बन्द नहीं किया जाए ।
एक और नई रेलवे लाईन की मांग, जो कि आजादी से पहले स्वीकृत हुई थी उसे भी मैं सदन के माध्यम से डालने की मांग करना चाहूंगा । यह रेलवे लाईन जयपुर से नाथद्वारा वाया मालपुरा, टोडारायसिंह केकड़ी, शाहपुरा लाम्बिया है । इस पर काम प्रारम्भ हुआ तथा टोडारायसिंह तक लाईन बिछ गई थी आगे भी पटरी के लिए कच्चा ट्रैक बिछा दिया गया परन्तु काम पूरा नहीं हो सका । इसकी अत्यन्त आवश्यकता है ।
भीलवाड़ा जिले में मेमू कोच कारखाना स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने गुलाबपुरा जिला भीलवाड़ा के निकट रूपाहेली ग्राम में रेलवे को भूमि का आबंटन किया था जमीन अभी भी रेलवे के पास है । मैं सदन के माध्यम से मांग करता हूं कि रेलवे के लिए जो आवश्यक है उन कोच/ अथवा हमसफर ट्रेन के कोच या उपकरणों से सम्बन्धित कारखाना लगाया जाये ।
*m35 श्री लल्लू सिंह (फैज़ाबाद): माननीय सभापति महोदया, आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हॅूं ।
भारतीय रेल देश के सार्वजनिक क्षेत्र का एक मुख्य घटक है । यह न केवल देश की मूल संरचनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ जोड़ते हुए देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को कायम रखता है । चाहे आपदा का समय रहा हो, राहत सामग्री पहुंचाने का काम हो, चाहे श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने का विषय हो, चाहे और भी सुविधाएं देने का विषय हो, रेल सदैव उस पर त्वरित गति से काम करता रहा है ।
16.00 hrs देश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की प्रगति में भारतीय रेल की हमेशा एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है और भारतीय रेल ने कुशलतापूर्वक इसका निर्वहन किया है ।
मान्यवर, देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में देश जहां चारों ओर चतुर्मुखी प्रगति कर रहा है,वहीं रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में रेल भी नित नई-नई ऊँचाइयों को छूते हुए नए-नए मानदंड स्थापित करने का काम कर रही है ।
कोरोना महामारी और उसके बाद के आर्थिक संकट के कारण इस वर्ष 2021-22 के बजट पर पूरी दुनिया की निगाह थी, लेकिन जिस प्रकार से माननीय वित्त मंत्री जी ने बजट प्रस्तुत किया, मैं अपनी तरफ से उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं । जिस प्रकार का बजट उन्होंने देश को दिया, वह सराहनीय है और हर व्यक्ति उसकी प्रशंसा कर रहा है ।
वित्त मंत्री जी ने जो बजट पेश किया, उसमें रेलवे के लिए ऐतिहासिक 1,10,055 करोड़ रुपये देने का काम किया है । इसके साथ-साथ 1,07,100 करोड़ रुपये केवल कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए माननीय वित्त मंत्री जी ने दिए हैं । पूरे देश में रेलवे में, पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक, यात्रियों की सुविधा की दृष्टि से, लगातार माननीय रेल मंत्री जी के नेतृत्व में रेलवे के अधिकारी मिल कर बहुत सारे काम कर रहे हैं ।
माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से अपने संसदीय क्षेत्र अयोध्या के बारे में माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या सदियों से आस्था का केन्द्र रही है । अपने अस्तित्व को पाने के लिए जिसे 500 सालों तक संघर्ष करना पड़ा, काँग्रेस और कम्युनिस्टों के कारण प्रभु श्री राम के भव्य मन्दिर निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही थी और राम के अस्तित्व को ही समाप्त करने का काम काँग्रेस के लोग कर रहे थे । कम्युनिस्ट तो दिखाई नहीं पड़ रहे हैं, काँग्रेस भी आखिरी साँस ले रही है, लेकिन 5 अगस्त को जब माननीय प्रधान मंत्री जी अयोध्या गए और जिस प्रकार से उन्होंने प्रभु श्री राम के सामने साष्टांग दण्डवत किया, उस दृश्य को देख कर पूरी दुनिया अभिभूत हो गई और कुछ क्षणों के लिए सबकी साँसें रुक गईं । जिस समय माननीय मोदी जी ने भूमि-पूजन करने का कार्यक्रम किया और ईंट रखने का काम किया, पूज्य साधु-सन्तों ने,माताओं-बहनों ने उनको आशीर्वाद देने का काम किया, आज भव्य राम का मन्दिर बन कर तैयार हो रहा है ।
मान्यवर, रेलवे ने इसी दृष्टि से भविष्य को देखते हुए बाराबंकी से लेकर जफ़राबाद तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण, विद्युतीकरण, इलाहाबाद से लेकर अयोध्या तक रेलवे का विद्युतीकरण, अयोध्या से लेकर कटरा तक रेलवे का विद्युतीकरण करने का काम शुरू कर दिया है और अयोध्या रेलवे स्टेशन का प्रथम चरण 31 जून तक पूरा होने वाला है, यह टारगेट भी दिया गया है । 140 करोड़ रुपये अयोध्या के रेलवे स्टेशन के प्रथम फेज के लिए दिए गए हैं । द्वितीय फेज के लिए डेढ़ लाख वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता है । उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने 90,000 वर्गमीटर जमीन को देने का वादा किया है, जो नजूल की जमीन है, शेष जमीन रेलवे देकर द्वितीय चरण का जो स्टेशन है, उसे पूरा करने का काम करेगा । एक भव्य और सुन्दर स्टेशन रेलवे विभाग बना रहा है और दस प्लेटफॉर्म्स का वह स्टेशन होगा, जहां एक साथ एक लाख लोग उतर और चढ़ सकते हैं । वह सभी प्रकार की सुविधाओं से युक्त होगा ।
मान्यवर, रेल विभाग ने पिछले समय से अब तक अयोध्या में कई काम किए हैं । अयोध्या रेलवे स्टेशन से कोल डिपो हटाकर बिल्हार घाट स्टेशन करने का काम किया है । फैजाबाद स्टेशन से माल गोदाम हटाकर सलारपुर स्टेशन करने का काम किया है । अयोध्या से रामेश्वर तक, जहाँ प्रभु श्रीराम जी ने लंका जाते समय शिवलिंग की स्थापना की थी, वहाँ तक श्रद्धासेतु ट्रेन चलाकर दक्षिण के रामेश्वरम से लेकर अयोध्या तक लोगों को ले आने और ले जाने का काम रेलवे विभाग ने किया है । इन सब कामों के लिए हम पूज्य संतों की तरफ से माननीय मंत्री जी को हार्दिक धन्यवाद देते हैं ।
भविष्य में अयोध्या में कुछ काम होने शेष हैं, जैसे अयोध्या में तीन स्टेशंस हैं- फैजाबाद जंक्शन, अयोध्या रेलवे स्टेशन और अयोध्या हाल्ट । जब से मोदी जी ने भूमि पूजन करके भव्य मंदिर के निर्माण की शुरुआत की है, तब से आज तक 20 से 25 हजार लोग प्रतिदिन दर्शन करने के लिए अयोध्या आते हैं । हमारा मानना है, संतों का मानना है, सबका मानना है कि अयोध्या पूरे देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़ा श्रद्धा का केन्द्र बनकर तैयार होने वाला है । एक लाख व्यक्ति रोज दर्शन करने के लिए अयोध्या आएंगे । हम चाहते हैं, अधिकारियों से भी बात हुई है कि फैजाबाद जंक्शन का भी निर्माण कराया जाए । माननीय योगी जी ने फैजाबाद जंक्शन को अयोध्या कैंट का नाम करने के लिए प्रस्ताव भेजा है । वहाँ जो रामघाट हाल्ट है, उसको स्टेशन का दर्जा दिया जाए, चूंकि वह एन.ई.आर. में है । एन.ई.आर. का एक ही स्टेशन वहाँ है, इसलिए यह प्रस्ताव बोर्ड में आया है कि उसको एन.आर. से जोड़ दिया जाए और स्टेशन का दर्जा दिया जाए । वहाँ जो एक लाख यात्री प्रतिदिन आएंगे, चैत्र रामनवमी परिक्रमा में अभी 30 लाख लोग आते थे, लेकिन आने वाले समय में एक से डेढ़ करोड़ लोग आएंगे । इन तीनों स्टेशनों पर यात्रियों को उनकी सुविधा के अनुसार उतार सकेंगे और उनको ठीक से व्यवस्था देने का काम कर सकेंगे । इसलिए, इन तीनों स्टेशनों को डेवलप करने की आज आवश्यकता है ।
माननीय मंत्री जी से हमारा निवेदन है कि अयोध्या और चित्रकूट का बड़ा आत्मिक संबंध है । प्रभु श्रीराम जब वन को गए थे तो बहुत लंबे काल तक उन्होंने चित्रकूट में वास किया था । जो लोग अयोध्या आना चाहते हैं, वे चित्रकूट भी जाना चाहते हैं और जो चित्रकूट आते हैं, वे अयोध्या जाना चाहते हैं, लेकिन चित्रकूट से अयोध्या की सीधे कोई ट्रेन नहीं है, इसलिए हमने अधिकारियों से आग्रह भी किया था । माननीय मंत्री जी से भी आग्रह है कि अयोध्या से चित्रकूट तक एक इंटरसिटी शीघ्र चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का काम करें ।
माता जानकी जनकपुर की हैं । वहाँ से सीधे ट्रेन अयोध्या तक चले, यह सभी राम भक्तों की इच्छा है । सीतामढ़ी से बीठ्ठा मोड़ शायद 30 किलोमीटर है, उसकी रेलवे लाइन बननी है । इस रेल लाइन को बनाकर अगर वहाँ से सीधे ट्रेन चलाई जाए तो जनकपुर के लोग भी माता जानकी के ससुराल में आकर सुविधापूर्वक दर्शन कर सकते हैं । यह भी आपसे हमारा आग्रह है ।
माननीय मंत्री जी, मुंबई जाने के लिए दो-तीन ट्रेनें हैं । उन ट्रेनों में बहुत भीड़ रहती है । इसलिए हमारा आग्रह है कि जब कोरोना का यह संकट समाप्त हो, तो अयोध्या से प्रतिदिन मुंबई की ट्रेन चलाई जाए । जम्मू-कश्मीर तक जाने के लिए भी एक स्पेशल ट्रेन चलाई जाए । हमारा आपसे यह आग्रह है ।
मान्यवर, अयोध्या, फैजाबाद तक एक ट्रेन चलती है, जिसमें बहुत कबाड़े डिब्बे लगे हुए हैं । इसमें नये कोच लगने की स्वीकृति भी हो गई है, लेकिन आज तक वे नहीं लगे हैं । हमारा आग्रह है कि उनको तुरंत लगाया जाए । आज दिल्ली से अयोध्या दर्शन करने के लिए जो लोग जाते हैं, उनको असुविधा होती है, अयोध्या से दिल्ली आने में असुविधा होती है । आपसे यह आग्रह करते हुए, माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हुए कि उन्होंने दूरदृष्टिता का परिचय देते हुए, अयोध्या रेलवे स्टेशन और फैजाबाद रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम तेजी से कराने का काम किया है और दिसम्बर, 2023 तक उस काम को पूरा करने लिए भी रेलवे के अधिकारियों को डायरेक्शन दी है । इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m36 *SHRIMATI SUMALATHA AMBAREESH (MANDYA): Thanks for allowing me to participate in the discussion on demands for grants of the Indian Railways for the year 2020-2021.
I would like to congratulate the hon. Union Minister for Railways, Shri Piyush Goyal ji for his sincere efforts to make the Indian Railways as world class institution to provide the best service to its passengers. Several important projects including the redevelopment of railway stations, providing lift and escalators, cleanliness, e-ticketing facilities etc., etc. are really commendable. As recently announced by the hon. Railway Minister, all trains passing through Karnataka will only run on electric traction by 2023. The Government has also proposed for suburban railways to the Bengaluru. Railways in the last six years has electrified a track length of 792 km. About 70 new road over bridges (RoBs) and 160 road under bridges (RuBs) have been sanctioned in Karnataka. I am sure all these would help to boost the economic development of the State.
Let me draw the attention of the hon. Minister for Railways to some of very important railway demands of my parliamentary constituency, Mandya in Karnataka.
One of that is about adequate funds for laying of new railway line between Hejjala-Chamarajanagar. I would like to raise a very important issue pertaining to a long pending demand of the people of my region, that is, laying of new railway line between Hejjala-Chamarajanagar.
The railway line was proposed in the railway budget nearly two and a half decades ago. However, still it has seen the light of the day. Sir, I would like to draw the attention of the hon. Railway Minister that this new railway line would be a lifeline for the regions adjacent to Cauvery basin, Malavalli, Halaguu, Kollegala and Kanakapura talukas in the State of Karnataka.
In the absence of even a single railway line, residents particularly, poor labours, traders, college and university students from Mandya, Ramanagara Chamarajanagara and Mysore districts are deprived off the railway facilities Hence, there is an urgent need to have railway line to provide an economic and social upliftment for the people of this region. Even though the Railway is the cheapest mode of transportation, this facility is not available to my people, especially for working classes, those who are working in garments, construction sectors and other industries as daily wagers. They are forced to spend their hard-earned money on other modes of transportation as there is not a single railway line in these parts of the State.
I urge upon the Union Government to consider this new railway line from Hejjala-Chamarajanagar (142 KM), which was shown in the Pink Book No.5 of 1996-97, and treat it as a priority project. I urge upon the Government to take steps to provide adequate funding for the railway project.
Apart from this, there are other demands from the people of my constituency such as construction of RUB in lieu of Level Crossing No.73 in Mandya City and providing escalators and lifts to facilitate passengers especially for senior citizens, women and children at Mandya railway station.
Then, there is another point regarding stoppages of trains. As far as stoppages of various trains connecting my parliamentary constituency, Mandya is concerned, I would like to draw the kind attention of the hon. Railway Minister that Srirangapattna is one of the many historical heritages and religious importance places in our country. Every day tourists not only from within the country but from all parts of world visit here. However, a number of trains have not stoppage in such a significant tourist destination.
Therefore, I would urge upon the hon. Railway Minister to issue immediate directions to the railway authorities concerned to provide stoppages at Srirangapattna without fail. Let me mention the details of the trains. One, T.No.16021/22 Mysuru-Chennai Central-Mysuru Cauvery Daily Express at Srirangapattana. Two, T.No.16219/20 Chamarajanagar-Tirupati Daily Express at Srirangapattana. Three, T.No.16227/28 Mysuru-Talguppa-Mysuru Daily Express at Pandavapura, Byadarahalli, Srirangapattana, Settihalli, Hanakere. Four, T.No.16557/58 Mysuru-Bengaluru City-Mysuru Rajyarani Daily Express at Srirangapattana. Five, T.No.17325/26 Mysuru-Belagavi-Mysuru Vishwamanava Express at Srirangapattana. Six, T.No.56263/64 Mysuru-Bengaluru City-Mysuru Daily Passenger. Seven, there should be stoppage for all Express trains at Maddur except Shatabdi and Humsafar expresses.
I would like to draw the attention of the hon. Railway Minister towards and urgent need of converting tri-weekly train into a daily train service. A train between Bengaluru-Mangalore via Mysuru was introduced on tri-weekly basis. Now, there is a need for providing this service on a daily basis. It is very much necessary to cater the needs of the commuters in these cities and towns.
There is a need for restoration of passenger train services on Bengaluru-Mysuru section. This trains service was available prior to imposition of COVID-19 lockdown in March 2020. So, this train service should be re-introduced to cater to the needs of a large number of people working in unorganised sectors in Bengaluru and surrounding towns. As we all are aware, in the COVID-19 pandemic, livelihood of these sections of people are badly affected. Now there is a need to restore the trains services as it is the only affordable mode of transport for the economically weaker sections of the society.
There is an urgent need for speedy completion of the electrification project of Mysore-HASSAN-Mangalore Section as several towns/ villages in the section fall in the jurisdiction of Mandya parliamentary constituency.
Similarly, there is a need for restoration of season ticket facilities. Though online booking of tickets is also available and the passengers can travel in reserved compartments of the trains, it is not fully booked. At present, in a majority of trains running on Mysuru-Bengaluru section, the percentage of seat occupancy is said to be less than 30 per cent. So, restoration of season ticket facilities would be helpful for commuters on this route.
Then, there is a need for restoration of senior citizen concession in express trains fares. It is for the benefit of the elderly people who need to travel for health check-up, surgeries, specialised treatment in major cities such Bengaluru, Mysore, Hyderabad, Chennai. Delhi etc. With these words, I conclude my speech. Thank you.
*m37 डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क (सम्भल): माननीय सभापति जी, मैं अपने क्षेत्र सम्भल रेलवे का मुद्दा पांच बार हाउस में उठा चुका हूं । मैं पांचवीं बार यहां पर आया हूं, लेकिन आज तक सम्भल को रेलवे लाइन से नहीं जोड़ा गया । मुझे अफसोस है कि एक वक्त में सम्भल राजधानी भी था और मुगलों के पीरियड में सूबा रहा और अब इस वक्त जिला है । इसके बावजूद सम्भल के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है । क्या सम्भल हिंदुस्तान का हिस्सा नहीं है? उत्तर प्रदेश में सम्भल स्थित है और बहुत ही ऐतिहासिक जगह है । ऐसी जगह, जो तिजारत का बहुत बड़ा सेंटर भी है, यहां पहले खंडसारी का काम होता था, अब वह एशिया की मेंथा की सबसे बड़ी मंडी है । हजारों ट्रक वहां से चलते हैं । हमारी सारी तरक्की रुकी हुई है । हम इसे रेलवे लाइन से जोड़ दें, पहले सिर्फ सम्भल तक रेलवे लाइन आती थी, अब वह ट्रेन भी कई सालों से नहीं आ रही है । मैं चाहूंगा कि सम्भल को वाया हसनपुर गजरौला से जोड़ दिया जाए, ताकि सम्भल दिल्ली से जुड़ जाए । इससे गवर्नमेंट को भी बहुत बड़ा फायदा होगा और आवाम, जनता को तो फायदा होगा ही ।
चंदौसी, सम्भल के करीब है और सम्भल जिले में चंदौसी है, वहां जंक्शन है । उस जंक्शन में भी सिर्फ 16 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बनेगा । अगर वह ट्रैक बना दिया जाए, तो हम इधर इलाहाबाद से भी जुड़ जाएंगे और लखनऊ भी आसानी से जा सकेंगे । मैं कहना चाहूंगा कि इसमें गवर्नमेंट लापरवाही कर रही है और आज तक इसे नहीं बनाया गया । हमसे वादा भी किया गया, इसका मुआयना भी हुआ, लेकिन अभी तक इसमें कोई भी काम नहीं हुआ है ।
दूसरा, सम्भल, अनाज और आलू की बहुत बड़ी मंडी है । यहां हजारों ट्रक इधर से उधर जाते हैं । इससे हमारी तरक्की रुकी हुई है । रेलवे न बनने की वजह से सारी जनता का काम रुका हुआ है । संभल से चंदौसी को जोड़ने के लिए केवल सोलह किलोमीटर ट्रैक को जोड़ना पड़ेगा, उसे जोड़ दिया जाए तो संभल इलाहाबाद और दिल्ली से भी जुड़ जाएगा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: श्रीमती अनुप्रिया पटेल जी ।
डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क: सभापति महोदया, अभी थोड़ी देर रुकिए । मैं अभी कुछ कह तो लूं । अभी तो दो मिनट ही हुए हैं, दूसरे लोगों को आपने आधे घंटे तक का समय दिया है ।
माननीय सभापति : आप एक मिनट में अपनी बात समाप्त कीजिए ।
डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क : सभापति महोदया, इस सिलसिले में मैंने कई बार केन्द्र और सूबे के ऑफिसरान के साथ मीटिंग की और उनके नोटिस में भी लाया । उन्होंने मुझसे वायदा भी किया, लेकिन no action has been taken as yet. हमारे साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है? इस मुद्दे पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है, लिहाजा मेरी आपके माध्यम से गवर्नमेंट से गुजारिश है, रेलवे डिपार्टमेंट से भी गुजारिश है कि वह पहली फुर्सत में और टॉप प्रायरिटी पर इस काम को कराए, वरना संभल बहुत पिछड़ जाएगा । संभल एक ऐतिहासिक जगह है । उसके बावजूद भी इसे इग्नोर कर रहे हैं । आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? संभल को चंदौसी से जरूर जोड़ा जाए, संभल को वाया हसनपुर – गजरौला से जोड़ दिया जाए । इससे संभल का रिश्ता दिल्ली से हो जाएगा और संभल तरक्की कर जाएगा । इस हालात में इस मुल्क के अंदर दूसरी जगहों पर बहुत काम हो रहा है, मैं इससे इंकार नहीं करता ।
ڈاکٹر شفیق الرحمٰن برق (سنبھل) : محترم چیرمین صاحب، میں اپنے پارلیمانی حلقہ سنبھل کے لئے پانچ ہاوُس یہاں اٹینڈ کر چکا ہوں، میں پانچویں بار یہاں آیا ہوں، لیکن آج تک سنبھل کو ریلوے لائن سے نہیں جوڑا گیا۔ مجھے افسوس ہے کہ ایک وقت میں سنبھل راجدھانی بھی تھا اور مغلوں کے پیریڈ میں صوبہ رہا اور اب اس وقت ضلع ہے۔ اس کے با وجود سنبھل کے ساتھ سوتیلا برتاوُ کیا جا رہا ہے۔ کیا سنبھل ہندوستان کا حصہ نہیں ہے؟ اتر پردیش میں سنبھل ہےاور بہت ہی تاریخی جگہ ہے۔ ایسی جگہ جو تجارت کا بہت بڑا مرکز بھی ہے، یہاں پہلے کھنڈساری کا کام ہوتا تھا، اب وہ ایشیا کی مینتھا کی سب سے بڑی منڈی ہے۔ ہزاروں ٹرک وہاں سے چلتے ہیں۔ ہماری ساری ترقی رُکی ہوئی ہے۔ اگر ہم اُسے ریلوے لائن سے جوڑ دیں، پہلے صرف سنبھل تک ریلوے لائن آتی تھی، اب وہ ٹرین بھی کئی سالوں سے نہیں آ رہی ہے۔ میں چاہوں گا کہ سنبھل کو وایا حسن پور اور گجرولہ سے جوڑ دیا جائے، تاکہ سنبھل دہلی سے جڑ جائے۔ اس سے سرکار کو بہت بڑا فائدہ ہوگا اور عوام کو تو ہوگا ہی۔ چندوسی سنھل کےقریب ہے، وہاں جنکشن ہے۔ اس جنکشن میں بھی صرف 16 کلو میٹر ریلوے ٹریک بنے گا، اگر وہ ٹریک بنا دیا جائے تو ہم اِدھر الہ آباد سے بھی جُڑ جائیں گے اور لکھنو بھی آسانی سے جا سکیں گے۔ میں کہنا چاہوں گا کہ اس میں سرکار لا پرواہی کر رہی ہے اور آج تک اسے نہیں بنایا گیا۔ ہم سے وعدہ بھی کیا گیا، اس کا معائنہ بھی ہوا، لیکن ابھی تک اس میں کوئی بھی کام نہیں ہوا ہے۔ دوسرا سنبھل میں اناج اور آلو کی بہت بڑی منڈی ہے۔ یہاں ہزاروں ٹرک اِدھر سے اُدھر جاتے ہیں۔ اس سے ہماری ترقی رُکی ہوئی ہے۔ ریلوے نہ بننے کی وجہ سے ساری عوام کا کام رُکا ہوا ہے. سنبھل سے چندوسی کو جوڑنے کے لئے صرف 16 کلومیٹر کا ٹریک کو جوڑنا پڑے گا، اسے جوڑ دیا جائے تو سنبھل الہ آباد اور دہلی سے جُڑ جائے گا۔ چیرمین صاحبہ، ابھی تھوڑی دیر رُکئیے، میں ابھی کچھ کہہ تو لوں۔ ابھی تو 2 منٹ ہی ہوئے ہیں، دوسرے لوگوں کو آپ نے آدھے گھنٹے کا وقت دیا ہے۔ اس سلسلے میں، میں نے کئی بار مرکزی اور صوبے کے افسران کے ساتھ میٹنگ کرکے ان کے نوٹس میں بھی لایا۔ انہوں نے مجھ سے وعدہ بھی کیا۔ لیکن No action has been taken as yet. ہمارے ساتھ ایسا کیوں کیا جا رہا ہے؟ اس مُدعے پر ابھی تک کوئی کام نہیں ہوا ہے، لہٰذا میری آپ کے ذریعہ سے سرکار سے گُزارش ہے، ریلوے ڈیپارٹمنٹ سے گُزارش ہے کہ وہ پہلی فُرصت اور ٹاپ پرائیوریٹی پر اس کام کا کرائیں، ورنہ سنبھل بہت پِچھڑ جائے گا۔ سنبھل ایک تاریخی جگہ ہے۔ اس کے با وجود بھی اسے اِگنور کر رہے ہیں۔ آپ ایسا کیوں کر رہے ہیں۔ سنبھل کو چندوسی سے ضرور جوڑا جائے، سنبھل کو وایا حسن پور اور گجرولہ سے جوڑا جائے۔اس سے سنبھل کا رشتہ دہلی سے ہو جائے گا اور سنبھل ترقی کر جائے گا۔ اس حالات میں اس ملک کے اندردوسری جگہوں پر بہت کام ہو رہا ہے، کام ہوا ہے اور میں اس سے انکار نہیں کرتا۔۔۔ (شکریہ) *m38 SHRIMATI ANUPRIYA PATEL (MIRZAPUR): Thank you, Madam. I rise to speak in support of the Demands for Grants of the Ministry of Railways for the year 2021-22. As I learn, the Railways’ revenue for the year 2021-22 have been estimated at Rs.2,17,460 crore, revenue expenditure at Rs.2,10,899 crore and the capital expenditure at Rs.2,15,058 crore.
Talking about the revenue side first, there are two primary sources of Railways’ revenue. One is the freight traffic, the passenger traffic and the other is miscellaneous sources. In the freight traffic, as we know, most of the revenue comes from the bulk transport of coal, followed by iron ore, cement, food grains and fertilizers. We are largely dependent on the bulk transportation of coal. Slowly and gradually, it is decreasing day by day. So, since the share of coal is coming down, I want to understand from the hon. Minister what exactly we are doing to expand our limited freight basket so that we can increase our revenue.
Secondly, the Railways have been constantly losing the share of the freight traffic to the other modes of transport on account of price competitiveness and the carrying capacity issues. To some extent, a solution has been found by way of the Dedicated Freight Corridors. It is because in India we used to run both the passenger and the freight traffic on the same track. Now, we have Dedicated Freight Corridors. I am glad that the hon. Minister has announced for the East Coast, the East-West, and the North-South Corridors in this year’s Budget.
Another thing is this. Railways have a tendency to utilise the profits earned from the freight traffic to compensate for the losses made in the passenger traffic. Here, what is important to understand is that these are COVID times. Now, we hear about the third wave of COVID and we see a fresh series of lockdowns in certain cities of India. Of course, I agree that the vaccination drive has started and more than two crore people in India have been vaccinated. But what I want to understand from the hon. Minister is this. Are you hopeful that the passenger traffic is going to return to normalcy level in these COVID times? It is because we eventually have to be concerned about the losses that we are making in the passenger traffic which are being compensated by the profits that we make in the freight traffic.
Coming to the revenue expenditure side, which is proposed to be Rs.2,10,899 crore, 45 per cent of it will be spent on staff wages, 26 per cent on pension fund and 13 per cent on fuel and electricity. The allocation to the pension fund is estimated to be Rs.53,000 crore. To the depreciation reserve fund, it has been Rs.800 crore. So, what I wish to point out here is that for the past few consecutive years, the appropriation to the pension fund as well as the depreciation reserve fund has been much lesser than what has been allocated in the Budget.
Especially, if you look at the Depreciation Reserve Fund, it is only Rs.800 crore, which is much lower as compared to the value of the overaged assets which need to be replaced. What I want to understand from the hon. Minister is: are we going to do the same this year also? Are we going to be appropriating less to the pension fund as well as to the Depreciation Reserve Fund?
Putting everything together, the core issue is that the Railways has not been able to generate surplus and that is why we will be sourcing most of the capital expenditure, which we are targeting at Rs.2,15,058 crore, from the budget resources of the Government and the extra budgetary resources, which is not a very favourable situation. The more we rely on our extra budgetary resources, the more the financial situation of the Railways is going to worsen. So, our operating ratio becoming lower is an important issue. Over the past few years, it has remained at more than 90 per cent. That remains the core issue for the Railways to be addressed.
I think these are the core issues which I would like the hon. Minister to answer. With this, I once again support the Demands for Grants of the Ministry of Railways for the year 2021-22. Thank you very much, Madam, for giving me the opportunity.
*m39 श्रीमती रीती पाठक (सीधी): माननीय सभापति जी, मैं केंद्रीय बजट 2021-22 के रेल मंत्रालय की अनुदान की मांगों पर चर्चा के समर्थन में बोलने के लिए खड़ी हुई हूं । मैं सर्वप्रथम माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र भाई मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद करती हूं । मैं रेल मंत्री पीयूष गोयल जी का आभार व्यक्त करती हूं कि कोविड जैसी महामारी के पश्चात् पर्याप्त बजट रेल विभाग को उपलब्ध कराया । मैं माननीय रेल मंत्री जी का राष्ट्रीय स्तर पर रेल विभाग में हुए सकारात्क परिवर्तन और यात्रियों की सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त करती हूं । मैं रेलवे विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने कोरोना संकट काल में आवश्यक वस्तुओं का परिवहन एक स्थान से दूसरे स्थान पर करके आपूर्ति की और कर्तव्यों का विशेष निर्वहन किया ।
मेरी रेल बजट पर बोलने की विशेष रुचि थी और मैंने बहुत ज्यादा आग्रह भी किया था । इसका प्रमुख कारण है कि मेरा संसदीय क्षेत्र रेल विहीन है । इसकी महत्वपूर्ण परियोजना ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन है । यह परियोजना मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों का सपना है । 24 साल पुरानी परियोजना के लिए आज मुझे खड़े होना चाहिए था कि यह पूर्ण हो जाती और आज यहां मैं ट्रेन्स की डिमांड करती । यह हमारा दुर्भाग्य था और मेरे संसदीय क्षेत्र का दुर्भाग्य था कि कांग्रेस सरकार वर्ष 2004 से 2014 तक रही । मेरे संसदीय क्षेत्र से बड़े दिग्गज नेता भी हुए, केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे, फिर भी इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । वर्ष 2014 में माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी की सरकार आई, उस समय तत्कालीन मुख्य सचिव मध्य प्रदेश सहित जिम्मेदार अधिकारियों को कार्य पूर्ण करने के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी द्वारा निर्देशित किया गया ।
महोदया, ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की स्वीकृति वर्ष 1997-98 में हुई थी । इसकी लंबाई 541 किलोमीटर है । उस समय इसकी लागत 827.24 करोड़ रुपये आंकी गई थी । मैं आपको बताना चाहती हूं कि वर्तमान स्थिति में मजदूरी, सामग्री तथा अन्य सामान का मूल्य बढ़ने के कारण परियोजना की लागत वर्तमान 8248.50 करोड़ रुपये हो गई है । मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहती हूं, इस परियोजना की इतनी लागत बढ़ चुकी है और निश्चित रूप से यह सरकार के लिए आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ी हानि है ।
सभापति महोदया, मैं आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने वर्ष 2014 से अब तक प्रतिवर्ष क्रमश: 89 करोड़ रुपये, 375 करोड़ रुपये, 400 करोड़ रुपये, 300.50 करोड़ रुपये, 325 करोड़ रुपये, 380 करोड़ रुपये, 430 करोड़ रुपये और इस बार 366 करोड़ रुपये बजट के लिए आबंटित किये हैं । इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को भी हृदय से धन्यवाद देती हूं । इसके फलस्वरूप, हमारा काम बहुत तीव्र गति से बढ़ा और इस परियोजना को गति मिली । हमारा काम प्रारंभ हुआ । सबसे बड़ी बात यह है कि छूहिया घाटी में बनने वाली एक रेल सुरंग, जिसकी लम्बाई 3338 मीटर है, अपने-आप में एक ऐतिहासिक सुरंग है,वह लगभग पूर्णता की ओर है । इसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी और रेली मंत्री जी को धन्यवाद देती हूं ।
सभापति महोदया, वर्ष 2014 से अब तक जब भी मैंने रेल मंत्रालय से बजट के लिए आग्रह किया है, हमें बजट मिला है । यही कारण है कि हमारी परियोजना तीव्र गति से अग्रसित हुई है । मैं माननीय वित्त मंत्री जी और रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहती हूं कि अभी भी हमें बजट का अभाव हो रहा है, क्योंकि सीधी से सिंगरौली तक अभी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया है । इसके लिए आवश्यक है कि हमें थोड़ा ज्यादा बजट आबंटित करें ।
मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहती हूं कि रिवाइज्ड एस्टीमेट में इस परियोजना के लिए रीवा-सिंगरौली तक प्रमुख रूप से थोड़ा बजट आबंटित करने की कृपा करें, जिससे हमारा सपना पूरा हो सके । इसके साथ मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहती हूं कि इस परियोजना में जिनकी भी भूमि अधिग्रहित की गई है, उन्हें रोजगार देने की विशेष कृपा करें ।
राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (सीधी सिंगरौली मार्ग) में बरिगवां से ओवर ब्रिज बनवाने के लिए मैं माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल जी और हमारे मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी को हृदय से धन्यवाद देती हूं, क्योंकि यह हमारे क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मांग थी ।
सभापति महोदया, इसके साथ ही मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री का विशेष ध्यान अपने क्षेत्र की मांगों के लिए आकृष्ट कराना चाहती हूं । सिंगरौली से कटनी रेलमार्ग के दोहरी विद्युतीकरण हेतु पर्याप्त बजट की बहुत आवश्यकता है । क्योंकि, इस परियोजना से भविष्य के हमारे काफी सपने जुड़े हुए हैं । यह हमारे क्षेत्र की एक ऐसी परियोजना है, जिसके साथ हम आगे नई आने वाली ट्रेनों के लिए डिमांड कर सकते हैं ।
सभापति महोदया, मैं तत्कालीन रेल मंत्री आदरणीय सुरेश प्रभु जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगी और याद करना चाहूंगी, क्योंकि उनकी वजह से ही हमें प्रदेश और देश की राजधानी को जोड़ने के लिए दो-दो ट्रेनों की सौगात प्राप्त हुई थी । लेकिन, अभी हम कठिन काल से गुजरे हैं । कोविड के कारण ये दोनों ट्रेनें बंद हो गई हैं । सिंगरौली से भोपाल जाने वाली ट्रेन, जो कोविड के कारण संचालित नहीं हो पाई है, आदरणीय रेल मंत्री जी उसे शीघ्र संचालित कराने की कृपा करें । सिंगरौली से निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेनें, जो अभी भी कोविड के कारण बंद हैं, उनको संचालित करके दो दिन चलाया जाए और भोपाल वाली ट्रेन को नियमित कराने की कृपा करें ।
सभापति महोदया, छोटी-छोटी मांगें और भी हैं, जिनको मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी के समक्ष रखना चाहूंगी । सिंगरौली से जबलपुर तक के लिए ट्रेन स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन न जाने किस कारण से इसको बंद कर दिया गया । मैं आपसे आग्रह करना चाहती हूं कि इसको शीघ्र संचालित किया जाए । ग्राम-झरोसी, ग्राम पंचायत-रसपुर, जिला-शहडोल में अंडर ब्रिज निर्मित कराया जाए । यह एक ऐसा विषय है, जिसको मैं लगातार पत्राचार के माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी को अवगत कराती आई हूं । मैं आग्रह करती हूं, अभी तो 50 परसेंट राज्य सरकार दे रही है, लेकिन मैं चाहती हूं कि केंद्र सरकार 100 परसेंट देकर शीघ्र इस कार्य को पूरा कराने की कृपा करे । ग्राम पंचायत-धुआडोल, विधान सभा-धोनी में क्रासिंग गेट की आवश्यकता है । मैं आग्रह करती हूं कि ग्राम-जुमगढ़ी में अंडर ब्रिज का निर्माण कराया जाए, क्योंकि यह अति आवश्यक है । वहां के क्षेत्रीय जनों द्वारा बार-बार इस विषय के लिए आग्रह किया गया है । ग्राम पंचायत-सराई, जिला सिंगरौली में मुख्य में रेलवे क्रासिंग की बहुत बड़ी आवश्यकता है । मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराना चाहती हूं कि यहां पर एक ओवर ब्रिज की आवश्यकता है । महुआगांव से सरई पहुंच मार्ग में ग्राम-समूद व भरसेड़ी जिला- सिंगरौली में ओवर ब्रिज की आवश्यकता है ।
माननीय रेल मंत्री जी इस पर अपना ध्यान आकृष्ट करें । पथरौला से वस्तुआ पहुंच मार्ग जिला सीधी में रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरब्रिज का निर्माण कराना अति आवश्यक है । टिकरी से कुसमी पहुंच मार्ग में ग्राम भदौरा जिला सीधी में ओवरब्रिज का निर्माण कराना बहुत जरूरी है । सिंगरौली जिला ग्राम भलुगढ़ और जुवगढ़ में रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरब्रिज का निर्माण कराना अति आवश्यक है ।
सभापति महोदया, मैंने आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह किया है और मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि रेल मंत्री जी मेरे क्षेत्र की इन मांगों पर विशेष ध्यान देंगे । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी और माननीय रेल मंत्री जी का जीवनपर्यन्त आभार व्यक्त करूंगी, यदि मेरे क्षेत्र की इन मांगों पर विशेष ध्यान देकर कृपा बनाई जाए । धन्यवाद, जय हिन्द ।
*m40 *श्री अशोक महादेवराव नेते (गड़चिरोली-चिमुर): मैं, माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी एवं आरदणीया निर्मला सीतारमण जी, माननीय वित्त मंत्री का हृदय से धन्यवाद करना चाहूंगा क्योंकि यह बजट लीक से हटकर दिखाई दिया है, जिसमें लोक-लुभावन घोषणाओं के स्थान पर बजट को कृषि एवं किसानों, गरीब एवं मध्यमवर्गीय लोगों पर केन्द्रित किया गया है । इसमें कोई सन्देह नहीं है कि काफी मुश्किल समय में यह बजट पेश किया गया है तथा इसमें मूलत: आधारभूत संरचना पर जोर दिया गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी ।
यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि देशवासियों ने इस बजट को लेकर बहुत सारी उम्मीदें जताई थीं, जिन्हें परम् श्रद्धेय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने पूरा किया है । यह बजट भारत की वृद्धि पर केंद्रित है और विकास दर में तेजी लाने के लिए पूर्णत: अनुकूल है । यह बजट आत्मनिर्भर भारत के लिए है, इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने रेलवे बजट में प्रावधान किया है कि रेलवे ने पूरे देश में किसान ट्रेन चलाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, जिससे दूध, दही, सब्जियां, फल और मीट जैसी जल्द खराब होने वाली चीजों को पूरे देश में पहुंचाया जा सकेगा । कोल्ड चेन के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रेलवे पहले से ही इस कार्य योजना पर काम कर रहा है । इससे देश के किसानों को काफी लाभ होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में यह भी प्रावधान किया है कि रेलगाड़ियों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने और एयरपोर्ट की तरह रेलवे स्टेशनों का विकास किए जाने हेतु प्रावधान किए हैं तथा 4 रेलवे स्टेशनों का विकास पीपीपी मॉडल पर करने की घोषणा की है, जो स्वागत योग्य है ।
इस बजट में रेल पटरियों के किनारे खाली पड़ी रेलवे की भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बनाने का प्रावधान किया गया है । रेलवे ने इसके लिए 5 हजार हेक्टेयर जमीन की पहचान की है, जहां सोलर प्लांट लगाकर 10 हजार मेगावाट तक विद्युत पैदा की जा सकेगी । यह देशवासियों के लिए प्रसन्नता की बात है ।
इस प्रकार से, माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में एक ऐसे जिम्मेदार समाज देने का संकल्प सामने रखने का प्रयास किया है, जहां समाज के हर वर्ग की बेहतरी का ख्याल रखने की बात हो । इसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं ।
मैंसदन के ध्यान में लाना चाहूंगा कि आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण इन क्षेत्रों का अविकसित होना ही है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करके वहां के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
यह विदित ही है कि महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरौली-चिमूर जनजातीय संसदीय क्षेत्र नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित है । इस क्षेत्र में मैंगनीज, लोहा, अभ्रक, हीरा इत्यादि खनिज पदार्थ प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं । यहां पर खनिज आधारित और अन्य छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करके गरीब आदिवासी लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है । ऐसा करने से आदिवासी युवकों को न केवल रोजगार उपलब्ध होगा बल्कि इस क्षेत्र का विकास भी होगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे ।
इसलिए मेरा संसदीय क्षेत्र गड़चिरौली-चिमुर, जो एक बहुत ही पिछड़ा हुआ आदिवासी बाहुल्य दुर्गम क्षेत्र के अंतर्गत आता है, की रेलवे समस्याओं के निदान हेतु रेलवे बजट में प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है, ताकि इस क्षेत्र का चहुमुखी विकास हो सके और यहां के नवयुवकों को रोजगार सुलभ हो सके तथा वे राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सके :
महाराष्ट्र सरकार ने नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित गडचिरौली आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की वड़सा-गड़चिरौली एवं नागपुर-नागभीड़ रेलवे लाईन से संबंधित प्रकल्पों के शीघ्र कार्यान्वयन हेतु केन्द्र सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया है | महाराष्ट्र सरकार ने नक्सलवाद से प्रभावित इन रेलवे लाईनों के निर्माण कार्य में व्यय होने वाली राशि का 50प्रतिशत हिस्सा केन्द्रीय गृह मंत्रालय, 25 प्रतिशत हिस्सा रेल मंत्रालय एवं 25प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन किए जाने की पहल की है ।
आदिवासी एवं नक्सलवादी क्षेत्र में स्थित वडसागड़चिरौली रलेवे लाईन को वर्ष 2011-12 में स्वीकृत किया गया था, जिसकी दूरी 49•5 कि0मी0है| रेलवे बोर्ड द्वारा इसका संशोधित प्राक्कलन स्वीकृत कर दिया गया है तथा फाईनल लोकेशन सर्वे एवं भू-तकनीकी सर्वे भी पूरा किया जा चुका है । इसी क्षेत्र में स्थित नागपुर-नागभीड़ के आमान परिवर्तन (Gauge Conversion) की दूरी 106कि0मी0है,जिसको2012-13 के बजट भाषण में स्वीकृत किया गया था । इसका भी संशोधित प्राक्कलन विद्युतीकरण के साथ तैयार है । लेकिन,इसके लिए अब तक बजटीय आवंटन का प्रावधान नहीं किया गया है ।
आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण इन क्षेत्रों को अविकसित होना ही है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करके वहां के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
अत: नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र की उपर्युक्त दोनों रेलवे लाइनों के निर्माण के कार्य, जो बहुत ही धीमी गति से चल रहा है को तीव्र गति से पूरा किए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन के आवंटन की व्यवस्था की जाए ताकि इस क्षेत्र का विकास हो सके और इस क्षेत्र को नक्सलवाद की समस्या से निजात मिलकर वहां के युवक देश की मुख्यधारा से जुड़ सके ।
जिला गड़चिरौली में वड़सा एवं जिला गोंदिया में आमगांव महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन हैं । लेकिन रेल लाइन पर ओवर ब्रिज न होने के कारण यातायात काफी समय तक अवरुद्ध रहता है । इन स्टेशनों से महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां होकर गुजरती हैं । यहां के लोगों की विगत काफी समय से रेल लाइन पर ओवर ब्रिज बनाए जाने की मांग की जा रही है । अत: वड़सा एवं आमगांव रेलवे लाइन पर वरीयता के आधार पर ओवर ब्रिज बनाए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का प्रावधान किया जाए ।
गड़चिरौली संसदीय जनजातीय क्षेत्र के अंतर्गत गोंदिया जिले में देवरी-आमगांव विधान सभा क्षेत्र में गोंदिया से आमगांव-सालेकसा-डोंगरगड होते हुए दुर्ग तक डेमो (शटल) रेलगाड़ी और दोपहर में 12 बजे के बाद दो नई रेलगाड़ियां चलाए जाने की मांग विगत काफी समय से की जा रही है । लेकिन अब तक इसको स्वीकार नहीं किया गया है जिस कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है और उनमें क्षोभ व्याप्त है । मैं इस संबंध में पत्राचार के साथ-साथ सदन में भी निवेदन कर चुका हूं ।
अत: जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र को विशेष वरीयता देते हुए गोंदिया से आमगांव-सालेकसा-डोंगरगड होते हुए दुर्ग तक डेमो शटल रेलगाड़ी और दोपहर में 12 बजे के बाद दो नई रेलगाड़ियां चलाए जाने हेतु शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए ताकि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की गरीब जनता को आवागमन में सुविधा हो सके ।
मेरा संसदीय क्षेत्र गड़चिरौली – चिमुर के अंतर्गत गड़चिरोली जिले में केवल एक मात्र ही रेलवे स्टेशन वड़सा में है । यहां के लोगों का वड़सा स्थित रेलवे स्टेशन से ही रेलगाड़ियों में आवागमन होता है । लेकिन वड़सा रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव न होने की वजह से क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है । विगत काफी समय से क्षेत्र के लोगों द्वारा वड़सा रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव दिए जाने की मांग की जा रही है । लेकिन अब तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है । अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र गड़चिरोली जिले के वड़सा स्थित रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव की व्यवस्था की जाए ।
मेरा सरकार से निवेदन है कि गड़चिरोली-चिमूर आदिवासी जिले की उपर्युक्त सभी विकास संबंधी परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए ।
अंत में,मैं प्रस्तुत रेल बजट का पूरजोर समर्थन करते हुए माननीय वित्त मंत्री को हृदय से धन्यवाद देता हूं और साथ ही यह भी विनम्र विनती करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र से संबंधित उपरोक्त सभी रेलवे समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनके निराकरण हेतु बजट में धन का आवंटन हेतु समुचित कदम उठाने की कृपा करेंगी । धन्यवाद ।
*m41 *श्री सी.पी. जोशी (चित्तौड़गढ़): आज देश के वर्ष 2021-22 के बजट के पर मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिये मैं सर्वप्रथम धन्यवाद देना चाहूंगा । मैं साथ ही देश के प्रधानमंत्री जी व देश की वित्त मंत्री महोदया को भी धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने देश के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर इस बजट को देश के समक्ष प्रस्तुत किया है ।
विगत वर्ष देश में कोरोना जैसी महामारी ने देश ही नहीं दुनिया का झकझोर कर रख दिया । विश्व की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था भी कोरोना का सामना करने में असहज महसूस देखी गयी ।
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, जिनके नेतृत्व में देश ने दुनिया के समक्ष इस संकट की घड़ी में चुनौती का सामना कैसे करना है, विश्व को सिखाया, यह दौर काफी गंभीर था, काफी चुनौतीपूर्ण था । इसमें एक तरफ जहाँ लोगों पर अतिरिक्त भार न पड़े यह देखना था तथा दूसरी तरफ रेलवे समेत देश की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा भार न पड़े वह सामंजस्य बनाये रखना था ।
लॉकडाउन की उस घड़ी में, जब सारा देश घरों में बन्द था तब केवल रेलवे ही आवश्यक वस्तुओं के आवागमन का जरिया बना, रेलवे ने अपनी अनवरत सेवाओं को जारी रखा ।
जब से मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार बनी है, यहाँ पर केवल लोक-लुभावने वादे नहीं किये गये, केवल थोथी घोषणाएं नही की गयीं, देश में रेलवे के विकास के लिये जमीनी स्तर पर निर्णय लिये गये, सूक्ष्म से सूक्ष्म बिन्दुओं पर ध्यान दिया गया ।
रेलवे के लिये कैसे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये स्पीड को बढाया जाये, किस प्रकार से यात्रा के दौरान विभिन्न कारणों से नष्ट होने वाले समय की बचत की गयी तथा त्वरित यात्रा का लाभ देशवासियों को मिलने लगा ।
देश में चाहे छोटी छोटी रेल हों या बुलेट ट्रेन सभी के लिये मोदी सरकार में ध्यान दिया गया है ।
वर्तमान बजट 2021-22 की बात करें तो रेलवे के राजस्व वर्ष 2021-22 के लिए रेलवे का राजस्व 2,17,460 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें कि 2019-20 में 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है ।
2021-22 में माल ढुलाई और यात्री यातायात दोनों से राजस्व 2019-20 से अधिक 10 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है । 2020-21 में माल और यात्री यातायात से राजस्व क्रमशः 16 प्रतिशत और बजट अनुमान से 75 प्रतिशत कम होने का अनुमान है ।
व्ययः 2021-22 के लिए रेलवे द्वारा कुल राजस्व व्यय 2,10,899 करोड़ रुपये, 2019-20 में 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का अनुमान है । 2020-21 में, राजस्व व्यय बजट अनुमान से 34 प्रतिशत कम होने का अनुमान है । 2021-22 में, पूंजीगत व्यय 2,15,058 करोड़ रुपये का अनुमान है, 2019-20 में 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि ।
ऑपरेटिंग अनुपातः 2021-22 में, रेलवे का ऑपरेटिंग अनुपात 96.2 प्रतिशत होने का अनुमान है । यह 2019-20 में 98.4 प्रतिशत के ऑपरेटिंग अनुपात से मामूली बेहतर है ।
2021-22 बजट घोषणाएँ बजट 2021-22 में किए गए रेलवे से संबंधित प्रमुख घोषणाओं और प्रस्तावों में शामिल हैं:
बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार की गई है । योजना के तहत, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाएं शुरू की जाएंगी ।
संचालन और रखरखाव के लिए रेलवे समर्पित माल गलियारे की परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करेगा ।
उच्च-घनत्व नेटवर्क और अत्यधिक उपयोग किए गए नेटवर्क मार्गों को स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के साथ प्रदान किया जाएगा जो मानव त्रुटि के कारण ट्रेन की टक्कर को समाप्त करता है ।
एक बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए पर्यटक मार्गों पर उन्नत सुविधाओं वाले कोच पेश किए जाएंगे ।
2020-21 में वित्त कोरोना का प्रभाव रेलवे के आंतरिक राजस्व का 90 प्रतिशत से अधिक माल और यात्री ट्रेनों को चलाने के मूल व्यवसाय से आता है ।
2020-21 में बजट चरण में अनुमानित 1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले, पिछले वर्ष की तुलना में यात्री यातायात की मात्रा में 87 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है ।
राष्ट्रीय लॉकडाउन (मार्च-अप्रैल 2020) के शुरुआती चरण के दौरान, रेलवे की यात्री सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया था । (1) विशेष ट्रेनों की व्यवस्था के साथ कुछ हद तक सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं ।
बंद के दौरान माल ढुलाई सेवा जारी रही । हालांकि, अप्रैल-जून 2020 के दौरान आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के कारण माल ढुलाई सेवाओं की मांग पर भी असर पड़ सकता है । 2020-21 में, माल यातायात की मात्रा पिछले वर्ष (2019-20) की तुलना में 7 प्रतिशत कम होने का अनुमान है । नतीजतन, 2020-21 में, रेलवे का अपना राजस्व बजट अनुमान से 35 प्रतिशत कम होने का अनुमान है । राजस्व व्यय (34 प्रतिशत) में इसी तरह की गिरावट का अनुमान है । इसने ऑपरेटिंग अनुपात को बजट अनुमान (संशोधित चरण में 97 प्रतिशत) के स्तर पर बने रहने में मदद की है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में भी रेलवे ने इतने आयाम स्थापित किये जितने आजादी के बाद से अब तक नहीं हुए, चाहे वह नयी रेल लाईन हो, आमान परिवर्तन हो, विद्युतिकरण हो या दोहरीकरण हो, नये सर्वे कार्य हो, नयी ट्रेनों का प्रारंभ होना हो सभी क्षेत्रों में कार्य हुया है । लेकिन इनके साथ में रेल मंत्री जी से मेरे संसदीय क्षेत्र में रेलवे से संबधित कुछ समस्याओं का ध्यानाकर्षण करना चाहूंगा ।
• प्रतापगढ़ जिला जहाँ मन्दसौर से प्रतापगढ़ एवं प्रतापगढ़ बासंवाडा नयी रेल लाईन का सर्वे हो चुका है, वहां नयी रेल लाईन स्थापित कि जाये क्योंकि यह क्षेत्र पूरा एक टी.एस.पी. वाला क्षेत्र हैं, इसके लिये आर.ओ.आर. पर ध्यान न देकर आगामी वर्षों में इसके लिये होने वाले महत्व तथा राज्य सरकार यदि इसके लिये सहयोग करे तो इस मार्ग पर नवीन रेल लाईन की स्थापना की जा सकती है ।
• नीमच-सिंगोली-रावतभाटा-कोटा मार्ग का सर्वे हो गया है, यहाँ पर रेल लाईन की स्वीकृति की आवश्यकता है ।
• चित्तौडगढ उदयपुर मार्ग का दोहरीकरण किया जाये । वर्तमान में यह मार्ग विद्युतिकरण से जुड़ गया है । चित्तौड से रतलाम दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है तथा चित्तौडगढ से अजमेर मार्ग के दोहरीकरण का कार्य भी स्वीकृत हो गया है, चित्तौडगढ से उदयपुर मार्ग के दोहरीकरण से रेलवे की हाई-स्पीड रेलों को मेवाड़ में दस्तक देगा ।
• उदयपुर-हिम्मतनगर के आमान परिवर्तन कार्य में शिथिलता की वजह से उदयपुर को जो रेलवे से सौगातें मिलनी चाहिये नहीं मिल पा रही है । अतः इस मार्ग को शीघ्रता से पूर्ण किया जाना चाहिये जिससे अहमदाबाद के लिये यह रूट खुल जाये ।
• मावली-बड़ीसादड़ी का आमान परिवर्तन अन्तिम पड़ाव में है । यदि इसके साथ-साथ बडीसादडी नीमच का कार्य भी शीघ्र गति से प्रारंभ हो जाये तो इसका अत्याधिक लाभ मिल पायेगा ।
• अजमेर से चित्तौडगढ होते हुये उदयपुर तक रूट अब विद्युतिकृत हो गया है । अतः दिल्ली से अजमेर आने वाली शताब्दी को चित्तौडगढ होते हुये उदयपुर तक बढ़ाया जा सकता है ।
• इसके साथ ही लॉकडाउन के पश्चात बन्द हो गयी लोकल गाड़ियों को चलाये जाने की भी आवश्यकता है ।
बजट वर्ष 2021-22 के लिये रेल मंत्रालय की अनुदान की मांगो का मैं समर्थन करता हूं । मुझे सदन में बोलने का समय दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।
*m42 *डॉ. एस. टी. हसन (मुरादाबाद): मैं सरकार से निम्न मांगो को रेलमंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं-
मुरादाबाद में गेट न. 8C – Km 1608 जो कि पीपलसाना रेल क्रासिंग व सेहल हाल्ट के बीच में स्थित है इस गेट का अंडर पास बनना अति आवश्यक है ताकि पीपलसाने को बाइपास से जोड़ा जा सके व हजारों लोगों को आवागमन में आसानी हो;
मुरादाबाद से मुम्बई तक सीधी ट्रेन चलाई जाए, यदि दिल्ली में ज्यादा रश है तो अल्टरनेट रूट से यह ट्रेन वाया कासगंज चलाई जा सकती है;
मुरादाबाद कांठ कस्बे में रिजर्वेशन विण्डो को जल्द खुलवाने की मांग करता हूं । कांठ से मेडिकल बैंडेज और कॉटन पूरे देश में सप्लाई की जाती है । रिजर्वेशन विण्डो के आभाव में जनता को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
*m43 श्री रामशिरोमणि वर्मा (श्रावस्ती) : सभापति महोदया, मुझे आपने रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों की चर्चा में बोलने का अवसर प्रदान किया है, उसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं ।
सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान मेरे लोक सभा क्षेत्र श्रावस्ती की तरफ दिलाना चाहूंगा । यह जिला देश के आकांक्षी जिलों में आता है, जो आज भी बहुत ही पिछड़ा हुआ है । आज़ादी के 75 सालों के बाद भी यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि देश की लाइफलाइन कही जाने वाली रेलवे से यह क्षेत्र आज भी अछूता है । श्रावस्ती जो कि एक ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी है और यह भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ा हुआ भी है । यहां भगवान गौतम बुद्ध ने अपने जीवन का सबसे ज्यादा समय बिताया था । विश्व के कई देशों से पर्यटक और बौद्ध धर्म को मानने वाले बौद्ध अनुयायी प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में यहां घूमने आते हैं ।
सभापति महोदया, पिछली सरकार के समय में श्रावस्ती को रेलवे द्वारा जोड़ने हेतु एक नई रेल लाइन परियोजना पास की गई थी, जो कि अभी तक लंबित है । मैं इस सदन के माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि लंबित बहराइच-खलीलाबाद वाया भिनगा-श्रावस्ती-बलरामपुर-उतरौला-डुमरियागंज-मेहदावल और बासी नई रेल लाइन परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है? इस परियोजना के लिए इस बजट में कितना धन आवंटित किया गया है? इसके साथ ही साथ मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध करता हूं कि इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और रेल द्वारा बौद्ध सर्किट से भी इस ऐतिहासिक स्थल को जोड़ा जाए । इसका लाभ न केवल इस क्षेत्र के आस-पास की जनता को होगा, अपितु रेलवे को भी भारी मुनाफा होगा ।
सभापति महोदया, मेरा दूसरा जिला अंबेडकर नगर है । विकास खंड कटेहरी के प्रतापपुर चर्मूखा में जो फैजाबाद रोड से निनामपुर-पिलखावा-आशागड़-चांदपुर होते हुए, अशरफपुर-बरवा को एक पिच रोड गई है । मैंने रेलवे लाइन निनामपुर में एक अंडरपास के लिए इस सदन में भी मुद्दा उठाया था । अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है । जबकि रेलवे के डबल लाइन का कार्य चल रहा है, जिस कारण उस रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया है । इससे कटेहरी मेन रोड पर लोगों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे लोगों में काफी रोष व्याप्त है ।
सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से यह मांग करता हूं कि इस रेलवे लाइन पर एक अंडरपास बनाया जाए, जिससे इस क्षेत्र की जनता और आस-पास के लोगों के समक्ष आने-जाने में कोई समस्या न उत्पन्न हो ।
सभापति महोदया, मेरा लोक सभा क्षेत्र श्रावस्ती है । इस जिले के बलरामपुर विधान सभा गैसड़ी के विकास खंड गैसड़ी, ग्रांम पंचायत डालपुर, बकौली का मजरा भवरिया है, जो कि भाभर नाला एवं बडुई नाला से घिरा हुआ है । उसी गांव के बगल से एक रेलवे लाइन जो तुलसीपुर से बढ़नी को गई है, उस गांव का पूर्ण रूप से रास्ता बंद हो गया है । किसानों का आना-जाना भी दूभर हो गया है । वह वहां गन्ने की खेती भी करते हैं, लेकिन वह पैदल नहीं जा सकते हैं । ऐसी स्थिति में रास्ता बिल्कुल बंद है । कभी-कभी मैंने देखा है । अभी पिछली बार भी मैंने इस सदन में यह मामला उठाया था कि वहां जेसीबी मशीन लगाकर उसकी खुदाई कर दी गई थी । इसके बावजूद भी गांव वाले उस रास्ते को पार करके आने-जाने का काम करते हैं । मैं माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि वहां पर एक रेलवे अंडरपास जरूर बनाया जाए, जिससे उस गांव के लोगों को आने-जाने की सुविधा मिल सके । उस गांव में दूसरा कोई रास्ता नहीं है ।
सभापति महोदया, मेरे लोक सभा क्षेत्र बलरामपुर में कोरोना काल में कई गाड़ियां बंद हो गई थीं, जैसे गोरखपुर से चलकर गोण्डा जाने वाली पैसंजर गाड़ी (मेमो) अभी तक नहीं चलाई गई है । मैं चाहूंगा कि उसे जल्दी से जल्दी चलाया जाए, जिससे आम लोगों को यात्रा करने में सुविधा हो सके । मैं माननीय मंत्री जी मांग करता हूँ कि बलरामपुर शहर में ही फुलवरिया बायपास पर एक समपार फाटक बनाया जाना अति आवश्यक है । वहां पर बायपास बन रहा है । रेलवे देश की लाइफ लाइन है, जिससे देश के गरीब वर्ग, मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा सफर करते हैं ।
सभापति महोदया, कोरोना काल के संकट के दौरान प्रवासी मजदूरों व जरूरतमंदों को उनके घर भेजने में रेलवे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है, जो देश हित में नहीं है । यह आने वाले कुछ सालों में देश की जनता के हित में न होकर कुछ खास लोगों के लिए मुनाफे का साधन बन जाएगा । लोगों से भारी-भरकम किराया वसूला जाएगा, जिससे देश के गरीब, निम्न, मध्यम वर्ग के लोग रेल का सफर करने से वंचित हो जाएंगे ।
सभापति महोदया, मैं आपसे मांग करता हूँ कि इन सब मांगों को माना जाए । यहाँ पर माननीय मंत्री जी बैठे हैं । मैं विशेष तौर पर अपील करूंगा कि मेरा क्षेत्र बहुत पिछड़ा है । मैं निश्चित रूप से आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि मैंने जितनी भी मांगें उठाई हैं, उनको पूरा करने का कष्ट करेंगे ।
*m44 *SHRI D.K. SURESH (BANGALORE RURAL): I am thankful for this opportunity to participate in the discussion on the Demands for Grants of the Indian Railways for the year 2020-2021.
The Indian Railways has so far aimed at inviting private players to run passenger trains on 109 important routes of the Indian Railways. Private entities for undertaking the project will be selected through a two-stage competitive bidding process comprising of Request for Quotation (RFQ) and Request for Proposal (RFP).
Most of the tracks were laid before Independence. The Railway Minister, Shri Piyush Goyal, was categorical in saying that Indian Railways would not be privatised. Only facilities were being upgraded through Public-Private Partnership, he claimed at Indore in January 2020. But in July 2020, the Railway Ministry has moved to open up 109 routes, and 50 railway stations and goods sheds were handed over to private players.
The process was expedited during the lockdown, without too many public consultations or discussions in Parliament.
The Government is arguing that the private players would bring in an investment of Rs. 30,000 crore. Even if they bring in this money and invest, it will certainly come from public sector banks as loan. Once again, it will be public money which will prop up the so-called private investment. My point is : Why can the Railways not borrow the same amount and run the same services?
The Indian Railways already runs exclusive trains like Rajdhani, Duronto and Shatabdi Expresses, and the Palace on Wheels for the tourists. If the Union Government is really keen to run luxury trains for rich passengers, what stops the Indian Railways from doing it? The Government can do it by availing loans or the responsibility of the entire management of Railways can be handed over to the respective State Governments. The State Governments, if they are willing to run the trains and maintain the railway stations, should be given top priority instead of private players.
We had so many examples of our erstwhile kings shouldering the responsibilities of operating trains in their territories, like the Maharajas of Mysore. The erstwhile Kingdom of Mysore established Mysore State Railway for improving rail connectivity soon after the commissioning of Madras Royapuram-Bangalore City railway line in 1879. Though it was very expensive to manage Mysore State Railway, King Chamarajendra Wadiya of 10th decided to lay a new rail from Bangalore to Mysore in 1870.
The 56 kilometres (35 mi) stretch between Bangalore-Channapatna was completed on 1st February 1881, the 37 kilometres (23 mi) Channapatna-Mandya stretch was completed on 20th March 1881 and the final 45 kilometres (28 mi) Mandya-Mysore stretch was completed, and the entire stretch was thrown open to traffic on 25th February 1882. The railway line currently has maximum operating speed of 110km/h (68mph).
The claim that the private players will bring in technology and create jobs is also a dubious claim. Private players with no experience of running trains will actually poach personnel from the Railways. Some foreign companies will be roped in and massive commissions will exchange hands. As elsewhere in the private sector, people at the top in these private companies may earn a higher salary for some time, while others like the hostesses will be made to work for 18 hours for a paltry salary of Rs. 15,000 a month. It is again exploitation of our own people. So, it can be reconsidered.
As many as 15 companies have expressed their interest in running private trains with Indian Railways lending the services of the driver and the guard. Naturally, none of these companies have any experience of running railways.
Another important railway infrastructure project for the State of Karnataka – Bengaluru Suburban Transport – was also highlighted by the Minister’s Budget. The 148 km long Bengaluru Suburban Transport Project would be a game changer if it is implemented at the earliest. The Bengaluru Suburban Rail Network will comprise of four corridors – Kengeri-Whitefield; Neelmangala-Bypanhalli; Heelalige-Devanhalli; and Bangalore-Rajankunte sections. However, the Government is not taking any concrete steps to complete it soon.
As far as railway demands for my Lok Sabha constituency are concerned, around 15 RoBs and RuBs, including Bangalore city Agrahar, SBC-MYS Main Road to printing press/Forest Layout, SBC-MYS Main Road to Ramohalli, SBC-MYS Main Road to Chellagatta, SBC-MYS to Vasanth M/Road, SBC-MYS M/Road to Kempamuthi, SBC-MYS Main Road to Katehalli, SBC-MYS Main Road to Manoharshetty Halli, SBC-MYS Main Road to Devaralli, SBC-MYS Main Road to Komanalli, SBC-MYS Main Road to Mudagere, SBC-MYS Main Road to Koluru at Yarab Nagar, Ramanagar town (near church), Aldenahalli, Samanduru, Marasuru, Iggaluru villages, Krithy Lay out Chandapura in Anekal Taluk and others, are requested, but not a single one is sanctioned. Only one RoB in Channapattana is under progress, but the work is going on at a snail’s pace.
Apart from this, I have also requested for widening of Railway under-bridge (RuB) at Maranayakanahalli, Channena Agrahar, Badaregere, Arvantigepura in Anekal taluk. These are also not considered by the Department.
One more point I would like to mention is that there is a need for establishing a railway station at Kunigal Check Post. The Railway authorities stated that it was not possible due to the height of the railway track on the station. So, I would like to request the hon. Minister that Railway authorities should reconsider this request as it would be beneficial to the farmers and convenient for local community also.
I would also request that while acquiring the lands from small and marginal farmers, the Department should chalk out a plan to make it beneficial for farmers who have only a small piece of land. While acquiring such small pieces of land of the marginal farmers, their voices should be heard and their interests should be protected.
In most of the cases, the Railway Department acquires the land required for the railway project and leave a small piece of one gunta or two guntas with farmers. So, it is not possible for the farmer to continue with agriculture in a small piece of land. In such a situation, both agriculture, and farmer and his family were affected. Therefore, I would like to suggest to the hon. Minister to issue necessary directions to the Railway authorities to look into all these aspects while designing the railway project itself so that no farmer and agriculture is affected in the name of a railway project.
Another important demand pertaining to my constituency is regarding the laying of a new railway line between Hejjala-Chamarajanagar. This issue was raised in the House several times and representations were given to the Railway Ministers. The State Governments also sent their proposals. However, there is no adequate allocation made for this project.
Originally this new railway line was sanctioned on 50:50 cost sharing basis and the Government of Karnataka agreed to provide land free of cost. Now, the issue is that the Union Government has sanctioned various projects on 75:25 cost sharing basis. I mean to say that the Central Government pays the share of 75 per cent and the State Government will expense 25 per cent cost. As far as this new railway line is concerned, the Government of Karnataka has agreed to provide the required land for the project free of cost. However, now-a-days, the prices of the lands are multiplied and it is a big burden on the State Government to bear the land cost and also to share on 50:50 basis the cost of the project.
Therefore, I urge upon the Union Government to look into this very significant issue of the new railway line and reconsider the cost sharing pattern to ease the burden on the State Government. I would also request you to allocate sufficient funds to execute Hejjala-Chamarajanagar railway line at the earliest.
I would also request for the expansion of Namma Metro to outskirts of Bengaluru city to cater to the needs of the people of Bengaluru and the surrounding areas such as Kanakapura road, Hosur road and Devanahalli road etc. So, the Union Government should allocate adequate funds for the expansion of the Metro Rail Project.
With these words, I conclude my speech. Thank you.
*m45 श्री श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल (सतारा): सभापति महोदया, आपने मुझे मेरे क्षेत्र सतारा से उठाए गए कुछ प्रश्नों के बारे में बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ । मेरे सतारा लोक सभा क्षेत्र में पुणे-मिरज-कोंढ़वा डबलिंग और विद्युतीकरण प्रोजेक्ट का तकरीबन 100 किलोमीटर आता है । यह प्रोजेक्ट मेरे क्षेत्र के विकास के लिए निसंदेह महत्वपूर्ण है, लेकिन इस प्रकल्प में विस्तारित रेलवे लाइन के दोतरफा किसान भाइयों को संपादित जमीन का पूरा मुआवजा मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है । इस विस्तारीकरण और विद्युतीकरण प्रकल्प में कागज और जमीनी परिस्थिति में बहुत बड़ा अंतर है । इसमें बड़े पैमाने पर विसंगति है । ब्रिटिश काल में ये लाइन्स बिछाई गई थीं । वर्ष 1967 में ब्रॉडगेज बनाया गया था । उस वक्त बहुत सारी जगहों पर रीअलाइंमेंट किया गया, लेकिन लैंड रिकॉर्ड उस हिसाब से मोडिफाइ नहीं किए गए । उस वक्त भूसंपादन किया गया था या नहीं, इसके कोई ठोस और परिपूर्ण डॉक्यूमेंट्स रेलवे के पास आज उपलब्ध नहीं हैं ।
अब डबलिंग प्रकल्प के लिए प्राइवेट एजेंसी से सर्वे कराया गया है । स्थानीय रेवेन्यू डिपार्टमेंट और लैंड रिकॉर्ड्स विभाग के रिकॉर्ड्स में काफी विसंगति नजर आती है । आने वाले दिनों में जब तक ये तीनों डिपार्टमेंट्स - लैंड रिकॉर्ड, सर्वे डिपार्टमेंट और रेलवे डिपार्टमेंट एक जगह आकर अलाइंमेंट पूरा नहीं करते तब तक रिकॉर्ड अच्छा नहीं हो सकता । इस पूरे मामले में 90-100 किलोमीटर लाइन का कॉम्प्रिहेंसिव जॉइंट सर्वे कराने की आवश्यकता है । इस सर्वे के बाद कितनी भूमि अधिग्रहण और उसके लिए जो कॉम्पेन्सेशन देना पड़ेगा, वह निश्चित हो सकता है । इस सारी प्रक्रिया के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान होना जरूरी है ।
महोदया, इस रेलवे लाइन के दोनों तरफ खेती की जमीनें, गांव, शहर और यातायात के साधन बढ़ गए हैं । इसलिए हर दिन रेलवे लाइन क्रॉस करने की जरूरत पड़ती है । लोगों का जीवन रेलवे लाइन क्रॉस करने से ही उचित तरह से चल सकता है, लेकिन अधिकांश जगहों पर दिए गए अंडरपास बारिश के दिनों में तीन-चार महीने तक पानी से भरे हुए होते हैं और यातायात के लिए बन्द होते हैं । ओवरब्रिज के लिए केवल 50 प्रतिशत रकम रेलवे देती है और इसीलिए जहां भी ये काम शुरू होने वाले हैं, वे शुरू नहीं हो पाते हैं और पक्का काम नहीं हो सकता है । इसलिए ओवरब्रिज और अंडरपास का प्रावधान हो और उनके लिए जितनी रकम चाहिए, उसका प्रावधान करना चाहिए । सतारा के नजदीक कोरेगांव तालुके में एक बोरेगांव-टकले गांव है, जहां अंडरपास की जरूरत है । लोणंद शहर में, जहां ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी पंढरपुर जाती है, वहां भी एक अंडरपास बनाने की जरूरत है । वहां एक सई सोसाइटी है, वहां रेलवे लाइन की दूसरी तरफ कॉलेज और स्कूल हैं, बच्चे उसको क्रॉस करके नहीं जा सकते हैं ।
महोदया, डबलिंग प्रोजेक्ट में जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित हुई है, उन परिवारों के एक सदस्य के लिए अगर नौकरी का प्रावधान हो तो उन लोगों की जिन्दगी अच्छे तरीके से चलेगी । सतारा एक शहर है, जिसके पुलिस स्टेशन की इमारत इतने वर्ष होने के बाद भी बन नहीं रही है । जब मैं वर्ष 1999 में पहली बार चुनकर यहां आया था, तब कराड-चिपलूण रेलवे मार्ग के जमीन का अधिग्रहण किया गया था और भूमिपूजन किया गया था, लेकिन अब तक वह लाइन शुरू नहीं हुई है । बीस-पच्चीस साल पहले जिस लाइन का भूमिपूजन किया गया था, अगर वह लाइन अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है, तो पता नहीं कब उसका काम शुरू होगा । मेरे क्षेत्र की जितनी भी समस्याएं हैं, अगर रेल मंत्री जी उन पर ध्यान दें और उनको सुलझाएं तो मैं उनके प्रति आभारी रहूंगा ।
सभापति महोदया, मुझे बोलने के लिए समय देने पर मैं आपके प्रति मन से आभारी हूं । धन्यवाद ।
*m46 *SHRI GURJEET SINGH AUJLA (AMRITSAR): I thank you, Madam Chairperson for giving me the opportunity to speak on the Demands for Grants for Railways for the year 2021-22.
Hon. Minister Piyush Goyal ji is sitting here. I want to draw his attention towards certain problems pertaining to his ministry. I have listened since morning to the speeches made on this subject by BJP members and NDA allies. They have only eulogized their Government. This is not the way things should go on. We are passing through the period of pandemic Corona. The railway was found lacking in this period. Migrant labourers from poor states do work in Punjab. When Corona pandemic hit us, these hapless labourers were left in the lurch. No special trains were run for them. They were asked to purchase tickets during lockdown period.
I thank Shrimati Sonia Gandhi ji and our Chief Minister Captain Amarinder Singh ji. They came to the rescue of these poor labourers. We provided money to these labourers and made arrangements so that they could return to their native places because these poor labourers work for the welfare of our state.
Our BJP members were saying that all development works were undertaken only after 2014. As if nothing existed before 2014. Let me emphasise that 23 million passengers travel daily via railways. Goods worth 3 million metric tonnes are transported via railways. 12.50 lakh railway employees are there. Do you think that the entire infrastructure was created only after 2014? You should not negate history.
If you are doing good work, good. But, also tell about the work of previous Governments. To negate their achievements is falsehood. Please look into this.
In Punjab, during the farmers’ agitation, Piyush Goyal ji was present in the meetings. We, the MPs, met you. Amritsar is a historic city and a tourist hub. It is a holy place where all of us pay obeisance. People from all over India visit Amritsar. The farmers provide food grains to the entire country. Food grains from Punjab are transported to other states via goods trains. Chemicals and fertilizers come to our state from other states. Lakhs of daily passengers travel by trains daily. However, Hon. Minister Sir, when we went to meet you, your attitude was not friendly and up to the mark. If left much to be desired. You are ruling the country. You should treat everyone with fairness. You should not ignore other states and behave in an unfriendly way.
The farmers’ agitation has been neglected and ignored by you. You have stopped means of transportation like trains. It added to the loss of the Government exchequer. Hon. Minister Sir, you do good work. But, you should be large-hearted. When one is in power, one should have a large heart.
Let me say, if you grant 117 kms track to us in Punjab, our problems will be sorted out. On Batala-Qadian-Tanda route, 30 kms railway track is needed. Garhshankar-Jaijon-Una route needs 10 km railway track. Chandigrah-Rajpura route via Mohali needs 18 kms of tracks. Phillaur – Nawanshahar route needs 20 kms of tracks. Mor Mandi-Talwandi needs 16 kms of railway track. Beas-Qadian route has also been mentioned by my friend and associate MP.
Double lining of tracks from Amritsar to Pathankot is needed as a lot of military movement is there on this route. This is a border area and these are tourist places. Sultanpur Lodhi should be joined via railway track to Goindwal Sahib. We have already celebrated 550th Birth anniversary of Guru Nanak Dev ji. We are going to observe the 400th anniversary of Guru Tegh Bahadur ji too.
Let me say sir that Amritsar is a tourist place and visitors from all over India and world visit this holy city. We do not have direct trains to South India. Only Cochi train runs once a week. Businessmen, passengers and army men, all travel via this train. But, booking in this train is very difficult. So, Amritsar-Hyderabad train should be started. Nanded-Bidar train is also needed. Amritsar-Pune-Goa train should also be introduced. The 12716 Amritsar-Nanded train’s time needs to be changed. It starts in the morning at 5.50 a.m. It reaches Nanded very late in the night. Passengers face a lot of problems there. So, its time should be changed. The 12472 weekly train goes to Hazur Sahib. But, it is weekly. Its booking is full within 3-4 hours. 3 months reservation is there. This train should also be made daily. This train to Hazur Sahib should ply via Tarn Taran, Khadoor Sahib, Beas. It should start one hour early. More pilgrims will be able to visit the holy Hazur Sahib.
On Dera Baba Nanak-Verka-Tarn-Taran-Goindwal-Khadoor Sahib route, a DMU train is the need of the hour. People go to Kartarpur Sahib to pay obeisance. This is a chain of holy places. So, a DMU is needed. We will be obliged. I also urge you, Hon. Minister Sir, that there is an acute shortage of railway staff at Amritsar railway station. At least 200 strong staff is needed there.
The position of taxi and auto-stand here leaves much to be desired. These need to be improved. Amritsar railway workshop is an old workshop. 1550 workers work there. But, they are not provided adequate work. Government also suffers. Work should be given to them. A&B block quarters here are unsafe. New quarters may kindly be built.
Madam Chairperson, please give me more time. Bhandari bridge needs a reconstruction. Lohgarh bridge and other manned railway gates need to be looked into for repairs. Under-pass is also needed at various places. The Patti-Makhu rail link will help reduce 225 km railway line in J&K, Himachal and Punjab and inter- link these states. Amritsar is the backbone of our Majha area of Punjab.
If trains are run on PPP mode, train fares will increase. The fares will match airline fares that will be very costly. So, kindly look into this. Amritsar railway station should be made into an international railway station.
HON. CHAIRPERSON: Please sit down. I have already provided you three extra minutes.
SHRI GURJEET SINGH AUJLA: Madam, Amritsar railway station should be made into an international railway station. In the coming years, if relations with our neighbor improve, then Amritsar can be an international hub. Also, a bullet train should be provided between Amritsar and Delhi.
Thank you.
*m47 *श्री सुमेधानन्द सरस्वती (सीकर): रेल मंत्रालय के अधीन नियंत्रणाधीन अनुदानों की मागों वर्ष 2021-2022 पर हो रही चर्चा में, मैं अपनी बात रखना चाहता हूं । मेरे लोकसभा क्षेत्रवासियों की लम्बे समय से चली आ रही मांग एवं उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संसदीय क्षेत्र सीकर की रेलवे से संबंधित निम्नलिखित मांगों को सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूं ।
सीकर-दिल्ली वाया लुहारु रेलमार्ग पर गाड़ी संख्या- 14021/14022 को नियमित रुप से प्रतिदिन चलाया जाए;
सीकर में पिट/सर्विस स्टेशन बनाया जाए;
गाड़ी संख्या 25631/32 गुवाहाटी बीकानेर सुपरफास्ट का संचालन मार्ग परिवर्तित करते हुए जयपुर से बीकानेर वाया सीकर किया जाए;
गाड़ी संख्या 15631/32 को वाया जयपुर सीकर चुरू के रास्ते चलवाकर इसे रोज चलाया जावें ।
लोकडाउन के बाद बंद सभी ट्रेनों को पुनः चलाया जाए;
खाटु श्याम जी के दर्शन करने दूर दराज से करोड़ो की संख्या में भक्तजन आते है,अतः खाटु श्याम जी को ट्रेनों से जोड़ने हेतु सर्वे करवाकर ट्रेक बनाया जाएI मीटर गेज के समय जो ट्रेने वाया सीकर होते हुये आती-जाती थी, उनको पुनः रिस्टोर कर वाया सीकर होते हुए नियमित चलाया जाए;
सराय रोहिला दिल्ली-रिंगस ट्रेन को जयपुर तक चलाया जाये तथा इसे दैनिक किया जाए;
सीकर-चुरू रेलवे फाटक संख्या-1 तथा फाटक संख्या -2(जगमालपुरा फाटक) के मध्य अण्डर पास बनाया जाए;
मीटर गेज के समय अरावली एक्सप्रेस दिल्ली -अहमदाबाद वाया रिंगस चला करती थी, इसे पुनः वाया सीकर-रिंगस होकर चलाया जावें । मीटर गेज के समय चलने वाली ट्रेनों का पुनः चलाया जाए;
रेवाड़ी फुलेरा वाया रिंगस उपखण्ड पर हरिद्वार, जमुतवी, अहमदाबाद, सुरत, मुम्बई के लिए प्रतिदिन नई ट्रेने चलाई जावें । दिल्ली अजमेर वाया सीकर-रिंगस प्रतिदिन फास्ट पेसेंजर ट्रेन चलाई जाए;
रिंगस रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नं0-1,2 और 3 की लंबाई अधिक है अतः गेट न0-108 आर.ओ.बी. के पास बाहर जाने के लिए गेट बनाया जाए । 13. रिंगस स्टेशन पर गाड़ियों के आगमन एवं प्रस्थान हेतु ट्रेनों की सिंगलिंग व्यवस्था को पुनः जांच कराए ।
रिंगस स्टेशन पर इनक्वायरी ऑफिस, गेट के बाहर अथवा बुकिंग ऑफिस के पास हो ।
रींगस-रेवाड़ी रेल मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक न0 98 सी., पोलादास फाटक 97 सी. से कालिया हनुमान फाटक के मध्य अण्डरपास बनाया जाए;
रींगस होकर जाने वाली बीजी गाड़ियों को नियमित किया जाए ।
विभिन्न अण्डरपासों में पानी भरने की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए;
जनशताब्दी एक्सप्रेस गाडी संख्या 12065एवं12065 एवं 12066का स्टोपेज श्रीमाधोपुर एवं रेनवाल स्टेशन पर किया जाए तथा गाड़ी संख्या 22949और222950, को नियमित किया जाए एवं श्रीमाधोपुर स्टेशन पर रिजर्वेशन खिडकी खुलवाई जायें । तथा पार्सल बुकिंग आफिस एवं ए श्रेणी का वेटिंग रूम बनाया जाए ।
श्रीमाधोपुर रेलवे स्टेशन पर बने फुट ऑवर ब्रिज 3एवं4 को आपस में नहीं जोड़ता है । आप मध्य में जोड़ा जाए;
नीमकाथाना में प्लेट फॉर्म 2 पर टिन भोड का निर्माण किया जाए ।
नीमकाथाना में फाटक संख्या 76 पर आने जाने के लिए अलग-अलग अंडरपास हो तथा फाटक संख्या 76 पर स्थित अंडरपास को चालू करवाया जाए ।
अजमेर-हरिद्वार वाया सीकर-रींगस नई गाड़ी चलायी जाए ।
ढाणी शोभाकाली पोस्ट-रानोली,सीकर में रेलवे लाईन नाकाला पास्ट-रानोली,सीकर में रेलवे लाईन पर पत्थर न0 220/8 पर रेलवे लाईन के नीचे से आने जाने के लिए पुलिया बनायी जाए;
फाटक संख्या 189दासा की ढाणी पर आर.ओ.बी निर्माण किया जाए;
गोरियाँ,धार्मिक स्तर का स्टेशन है । यहां जीणमाता के दर्शन करने दूर दराज से हजारों की सख्या में भक्तजन आते है,इसे ब्लॉक स्टेशन रखने के साथ-साथ सुविधाए बढ़ाई जाए;
चौमू-रींगस,रींगस-पलसाना,पलसाना-सीकर,सीकर-लक्ष्मणगढ़,लक्ष्मणगढ़-फतहपुर के मध्य बड़े वाहनों के लिये एक-एक रेलवे फाटक स्वीकृत करें ।
पहले लगभग स्टेशनों पर आरक्षण का कार्य होता था,जिसे अब बन्द कर दिया गया, उसे पुनः चालू किया जाए;
आरक्षित गाड़ियों के आगमन स्टेशन पर कोच स्थिति दर्शाने वाले इन्डिकेटर लगाये जाए;
यात्री प्रतीक्षालयों की व्यवस्था सुधारी जाये । सीकर एवं रींगस स्टेशनों पर रिटायरिंग रूम बनाये जायें ।
सांसद एच.ओ.कोटा का सरलीकरण किया जायें । जिससे कि कम्पयूटर में एम.पी.का कोड़ डालने के पश्चात टिकट एच.ओ.कोटे से स्वतः ही कन्फर्म हो जाए;
लक्ष्मणगढ़ में बगड़िया बाल निकेतन स्कूल के पास फुट ओवर ब्रिज बनाया जाये । क्योंकि इस विद्यालय में लगभग 1000 छात्र अध्ययनरत हैं ब्रिज नहीं होने पर उन्हे करीब 3 किमी.पैदल चलकर आना पड़ता है ऐसी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है;
इन्दौर-बीकानेर वाया सीकर एवं सीकर-गंगानगर ट्रेन सहित अन्य ट्रेनों का ठहराव पलसाना एवं लक्षमणगढ़ किया जाये तथा लक्ष्मणगढ़ स्टेशन पर रिजर्वेशन खिड्की खुलवाई जावे । लक्ष्मणगढ़ में रेलवे स्टेशन पर ओवर ब्रिज बनाया जाए;
14055/56ब्रह्मपुत्र मेल को दिल्ली से जयपुर तक,वाया सीकर चलाया जाए;
ट्रेन संख्या 74001/4व59728/29 को मर्ज करके दिल्ली सीकर के बीच पैसेंजर गाड़ी चलाई जाए;
दिल्ली-रेवाड़ी से वाया श्रीमाधोपुर रींगस होते हुए जयपुर के लिए नियमित ट्रेन चलाई जावें । 36.नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 12505/12506का विस्तार अजमेर तक किया जाए;
गाड़ी संख्या 19807/19808कोटा-हिसार वाया लुहारू तथा गाड़ी संख्या 19813/19814कोटा हिसार वाया चुरू का स्टोपेच ढहर के बालाजी स्टेशन (जयपुर)पर किया जाए;
राजस्थान में भोखावटी बहुतायात में सैनिकों अनेक लोग पूर्वोत्तर मे बसते है, वहां पर कामाख्या माताजी के श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है एवं अनेक श्रद्धालुओं का शेखावटी में स्थित धार्मिक स्थान खाटूश्यामजी एवं सालासर बालाजी आना-जाना रहता है अत:ट्रेन संख्या 15631/15632जोकि गुहावटी से जयपुर के लिए सप्ताह में दो दिन चलती है, इस ट्रेन को सप्ताह में 5दिन चलाकर इसको वाया रींगस-सीकर होते हुए बीकानेर तक चलाया जाए;
मेरे लोकसभा क्षेत्र सीकर में स्थित धार्मिक स्थान खाटुश्यामजी एवं सालासर बालाजी पर वर्ष भर करोड़ों श्रृद्धालुओं का को सीधे ट्रेनों से जोड़ने हेतु सर्वे करवाकर नई रेल लाइन बिछवाने की कृपा करें ।
सीकर जंक्शन से संबंधित मुख्य समस्याएं सीकर स्टेशन पर ऑफ साईड जाने हेतु पुल नहीं है जिससे रेलवे कर्मचारियों एवं आम जनता को परेशानी होती हैं । अतः आर.ओ.बी.बनाया जाये । सीकर रेलवे स्टेशन के पास स्थित सड़क पुल के सलग्न निर्माण करवाया जाये । यातायात व पार्किग सुविधाओं को तथा शिक्षण संस्थाओं की स्थिति को देखत हुये रेलवे सामुदायिक भवन की तरफ से सैकण्ड एन्ट्री बनाया जाय । सैकण्ड एन्ट्री से स्टेशन मुख्य भवन तक आर.ओ.बी.का निर्माण करवाया जाय । स्टेशन का मुख्य द्वार बहुत छोटा है अतः प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग पर्याप्त चौड़ाई वाले बनाये जाये ।वातानुकूलित प्रतीक्षालयों का निर्माण करवाया जाये । शिक्षण संस्थाओं एवं धार्मिक स्थलों (सालासर,खाटूश्यामजी,जीणमाताजी,शाकम्भरी)पर आने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए पर्याप्त रिटाइरिंग रूम बनाये जायें । दिव्यांग यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाये उपलब्ध करवायें । प्रधान टिकट संग्रहक कार्यालय स्टेशन के मुख्य द्वार के पास बनाया जाये,ताकि आवश्यकता होने पर यात्री सुगमता से पूछताछ एवं अन्य यात्री सुविधाओं के लिए सम्पर्क कर सकें ।
*m48 श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज): सभापति महोदया, मैं सबसे पहले आपको इसलिए हृदय से बधाई देता हूं कि आपने मुझे आम बजट वर्ष 2021-22 की रेलवे की अनुदान मांग पर चर्चा में भाग लेने के लिए मौका दिया है । वित्तीय वर्ष 2021-22 में यह आम बजट रेलवे के लिए एक रिकॉर्ड प्रावधानित बजट है, जो माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देशन में, माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी ने रखा है, इसके लिए भी मैं माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय वित्त मंत्री जी और विशेषकर माननीय रेल मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद और बधाई देता हूं ।
महोदया, रेलवे ने कोरोना जैसी वैश्विक आपदा में देश और देश के श्रमिकों की सेवा की है । रेलवे के पदाधिकारियों ने, खास कर मंत्रालय, रेलवे बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ-साथ सुदूर देहात तक चलने वाली रेल के कर्मियों ने, विशेष कर सफाई कर्मियों ने जिस तरह से अपनी अहम् भूमिका कोरोना वारियर्स के रूप में निभाई है, उसके लिए भी मैं उन पदाधिकारियों और उन कर्मचारियों को हृदय से बधाई देता हूं और हृदय से धन्यवाद देता हूं ।
महोदया, मैं रेल मंत्री जी को विशेषकर इसलिए भी बधाई देना चाहता हूं कि आपने इसमें वर्ष 2021 तक आमूलचूल परिवर्तन किया है । जहां आपने एक तरफ बुलेट ट्रेन की परिकल्पना और संचालन की बात की है, वहीं दूसरी तरफ आप मालवाहक ट्रेनों के लिए एक अलग कॉरिडोर बनाने की दिशा में भी कार्रवाई कर रहे हैं । पहले मालवाहक ट्रेनों की रफ्तार मामूली थी, लेकिन आज आप उनकी रफ्तार को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, उससे बड़ा लाभ मिल रहा है ।
वैसे व्यवसायियों को इससे लाभ मिल रहा है, जो व्यवसायी अपने माल को एक जगह बुक करते थे और उसे गंतव्य स्थान तक जाने में बहुत ही विलंब होता था लेकिन आज वह माल काफी कम समय में पहुंच रहा है । मैं इसके लिए भी माननीय रेल मंत्री जी को हृदय से बधाई देना चाहता हूं ।
माननीय सभापति महोदया, किसान रेल एक चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज है । किसानों के खेतों में जो उपज होती है, खासकर उनकी सब्जियां, उनके यहां के फल-फूल, खासकर बिहार या आपके यहां लीची का फल या आम का फल हो, आलू-प्याज सहित ऐसी सब्जियां जो बिहार में बहुत तादाद में उत्पादित होती हैं, उन्हें देश के सुदूर देहातों में या बड़े शहरों में जाने के लिए जिस तरीके से किसान रेल का संचालन माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देशन में माननीय रेल मंत्री जी ने किया है, उसके लिए मैं पुन: यह कहना चाहता हूं कि यह एक चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज का रूप है । मैं इसके लिए भी बधाई देता हूं । किसानों की आय को दोगुना करने में यह किसान रेल एक मील का पत्थर साबित हो रहा है । मैं उन लोगों को यह कहना चाहता हूं, जो किसान आंदोलन के रूप में छद्म आंदोलन करने की बात कह रहे हैं, छद्म आंदोलन का समर्थन करने का काम कर रहे हैं, लेकिन उन लोगों को यह दिखाई नहीं दे रहा है कि किसानों के हित में इस एक विभाग ने, रेल विभाग ने कितना बड़ा काम करके दिखाया है । इसका किसानों को भरपूर लाभ मिल रहा है । छोटे या बड़े किसानों के माल चाहे कम ही सही, लेकिन वह इसे देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाने का काम कर रहा है ।
यह रेल सिर्फ यात्रियों को नहीं ढोता है, बल्कि माल को भी ढोता है और माल के साथ देश को भी जोड़ता है । यह देश को एक सूत्र में बांधता है । भारतीय रेल भारत के हर क्षेत्र को जोड़ने का काम करती है । मैं इसके लिए माननीय प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं । आज देश का ऐसा कोई कोना नहीं है, जहां आपने रेल नहीं पहुंचायी है, चाहे वह जम्मू-कश्मीर की बात हो या सुदूर पूर्व के क्षेत्र की बात हो, आपने वहां रेल पहुंचाने का काम किया है । अभी कुछ जगहों पर रेल का पहुंचना बाकी है, यह बात हमारे ध्यान में है । बिहार के सीतामढ़ी इत्यादि क्षेत्रों में यह बाकी है, लेकिन मैं माननीय मंत्री जी से इसके लिए भी आग्रह करूंगा कि आप वहां का भी सर्वे करवाएं और जिस तरह से देश के हर कोने में रेल को पहुंचाने का काम कर रहे हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: शिवहर में भी ।
श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल: मैं यह आग्रह करूंगा कि आप शिवहर में भी रेल पहुंचाने का काम करेंगे । मैं आपसे नम्र निवेदन करना चाहता हूं । हमारे ये अन्नदाता किसान भाई चाहे यात्रा की बात हो या अन्न और सामान ढोने की बात हो, वे इसका बड़े पैमाने पर लाभ ले रहे हैं । मैं उन रेल कर्मियों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने कोरोना के समय में खासकर माल गाड़ियों को संचालित और बड़े पैमाने पर एक जगह से दूसरे जगह पर माल ढोने का काम किया है । हम लोग उस समय डरते थे कि कोरोना आ जाएगा, हमें कोरोना हो जाएगा, लेकिन हमारे रेल कर्मियों ने अपने प्लान के अनुसार काम किया, ताकि देश के लोगों को भूखा न रहना पड़े, हम उन्हें खाना पहुंचा सकें । इसमें रेल ने अहम भूमिका अदा की है । मैं उसके लिए भी माननीय रेल मंत्री जी को जिन्होंने माननीय प्रधान मंत्री जी के दिशा-निर्देशन में जिस तरीके से कार्य का संचालन किया है, उसके लिए उन्हें हृदय से बधाई देना चाहता हूं ।
महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के सामने अपने क्षेत्र की कुछ समस्याओं को भी रखना चाहता हूं । इस संबंध में मैं श्री जय प्रकाश नारायण जी की जन्मभूमि छपरा और गांधी जी की कर्मभूमि पूर्वी चंपारण का जिक्र करना चाहता हूं । मैं यह चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी आप इसे भी रेल कॉरिडोर से जोड़ने का काम करें । बिहार में विशेष तौर पर उत्तर बिहार में सारण जिले के सीवान से मेरा संसदीय क्षेत्र शुरू होता है । श्री जय प्रकाश नारायण जी की जन्मभूमि सिताब दियारा छपरा से लगी हुई है । पूर्वी चंपारण जो कि गांधी जी की कर्मभूमि है, इसके बीच में सैंकड़ों पंचायतें और प्रखंडों को इससे जुड़ने का लाभ मिलेगा । इससे लाखों लोगों को यात्रा करने में सुविधा होगी और लाखों हाथों को इससे रोज़गार भी प्राप्त होगा । इसलिए मैं माननीय मंत्री जी से यह आग्रह और निवेदन कर रहा हूं ।
17.00 hrs महोदया, मैं कहना चाहता हूं कि सिवान जंक्शन से धुरौंधा-महाराजगंज-मशरख होते हुए पटना तक एक जोड़ी मेमू ट्रेन चलाई जाए ताकि प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रा करने वाले यात्रियों को, खासकर व्यवसाय करने वाले व्यावसायी भाइयों और बहनों को उसका लाभ मिल सके । आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ ।
छपरा कचहरी से मशरख-महाराजगंज-धुरौंधा होते हुए एक जोड़ी डेमू ट्रेन चलाई जाए । माननीय मंत्री जी से मैं इसके लिए भी आग्रह करता हूँ ।
महोदया, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ । माननीय मंत्री जी, मैं एक मिनट के लिए विशेष रूप से आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ ।
पहले एकमा रेलवे स्टेशन पर पाटलिपुत्रा-लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन गाड़ी नम्बर 2529 और 2530 रुकती थी, लेकिन अभी यह बंद है । जब भी मैं अपने संसदीय क्षेत्र में जाता हूँ, तो वहाँ के लोग इस ट्रेन के बारे में पूछते हैं कि उस ट्रेन का क्या हुआ, वह क्यों नहीं रुक रही है । इसलिए उस ट्रेन का ठहराव एकमा स्टेशन पर पुन: दिया जाए । एकमा हमारे क्षेत्र का एक प्रमुख जंक्शन है । यह मेरे क्षेत्र का मेरूदण्ड है । इसलिए उसके ठहराव के लिए आपकी ओर से निर्देश दिया जाए ।
इसी स्टेशन पर अवध-असम एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 15909 -15910, आम्रपाली एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 15707-15708 के ठहराव के लिए माननीय मंत्री जी की तरफ से आदेश किया जाए, यह मेरा आग्रह है ।
मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान पूर्वोत्तर रेलवे के बनारसी मंडल स्थित शाम कौड़िया रेलवे स्टेशन पर गोरखपुर जंक्शन से पाटलिपुत्रा जंक्शन तक, पाटलिपुत्रा जंक्शन से गोरखपुर जंक्शन तक चलने वाली गाड़ी संख्या 5079 और 5080 के ठहराव के लिए निवेदन कर रहा हूँ ।
महोदया, आपके ध्यान में होगा कि छपरा से मशरख होते हुए ट्रेन जाती है और बीच में आने-जाने के लिए लोगों को कोई सुविधा नहीं है । इसलिए शाम कौड़िया स्टेशन पर इसका ठहराव दिया जाए ।
बनारसी मंडल के राजापट्टी स्टेशन पर गोरखपुर जंक्शन से पाटलिपुत्र जंक्शन तक एवं पाटलिपुत्र जंक्शन से गोरखपुर जंक्शन तक चलने वाली गाड़ी का ठहराव, जो छपरा कचहरी से गोमती नगर एवं गोमती नगर से छपरा कचहरी तक चलने वाली गाड़ी का ठहराव राजापट्टी स्टेशन पर दिया जाए । राजापट्टी कई जिलों का बॉर्डर एरिया है । छपरा, गोपालगंज एवं मुजफ्फरपुर की सीमा इससे लगती है । मैं समझता हूँ कि प्रतिदिन हजारों की तादाद में यात्री और व्यवसायी वहाँ से आते-जाते हैं ।
वाराणसी मंडल के महाराजगंज-मशरख रेल खण्ड पर ग्राम पठेरी-पठेरा के पास बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय महामाया बाबू के नाम पर हाल्ट बनाने के लिए मैं निवेदन करता हूँ । यह निवेदन मैंने पहले भी किया था । आप महामाया बाबू को जानती हैं । उनको पूरा राज्य और देश जानता है । महामाया बाबू जैसे व्यक्ति के नाम पर उस हाल्ट स्टेशन का नामकरण हो जाए, ऐसा मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन कर रहा हूँ ।
छपरा-वाराणसी रेल खण्ड पर मांझी रेलवे स्टेशन के पूरब में ग्राम चैनपुर के समीप भूमिगत आरयूबी का निर्माण कराया जाए । वहाँ के लोगों की यह डिमांड है । इसलिए छपरा को मांझी से जोड़ने के लिए मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन कर रहा हूँ ।
छपरा-वाराणसी रेल खण्ड के दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का कार्य तथा इसी रेल खण्ड पर मांझी में सरयू नदी के ऊपर बन रहे रेल पुल का निर्माण कार्य जल्द-से-जल्द पूरा किया जाए । उस पर काम चल रहा है, लेकिन माननीय मंत्री जी की तरफ से इसके लिए दिशा-निर्देश दिये जाएं, जिससे उस काम में गति आ सके ।
महाराजगंज एवं चैनवां रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की खाली पड़ी जमीनों में रैक का निर्माण किया जाए । मुझे लगता है कि लगभग 50 एकड़ जमीन खाली पड़ा है । आप उसका जो भी उचित उपयोग कर सकें, वह करें । मैं तो कहूंगा कि वहाँ पर एक रेल का रैक सेन्टर बना दिया जाए । पहले वहाँ रैक सेन्टर था ।
वहां के सैकड़ों मजदूरों को उस रैक-सेंटर में काम मिलता था, लेकिन अब वह रैक-सेंटर हट जाने से लोगों को आज काम नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है ।
सभापति महोदया, मैं एक निवेदन और करना चाहता हूं । मैं छपरा जंक्शन का नाम परम पूज्य परमहंस दयाल महाराज जी के नाम पर करने का निवेदन करता हूं । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी और इस सदन का ध्यान इस विषय की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं । परमहंस दयाल महाराज जी इस देश के ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के एक नामी और इस तरह के संत-महात्मा थे, जिनके अनुयायी आज लाखों की तादाद में पूरी दुनिया में फैले हुए हैं । छपरा जंक्शन का नाम परमहंस दयाल महाराज जी के नाम पर रखा जाए, ऐसा मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूं ।
सभापति महोदया, मैं अंत में केवल एक मिनट का आपका समय लूंगा । मैं माननीय मंत्री जी के कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं । मुझे लगता है कि माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देशन में भारतीय रेल पूरी दुनिया में, अमेरिका, जापान और चीन के बाद भारतीय रेल का अपना एक अलग स्थान हो गया है । सर्वाधिक यात्रियों की सेवा करने वाली, माल-वाहन करने वाली और अन्य सुविधाओं को जोड़ने वाली यह रेल है । रेलवे लोगों को रोजगार देने वाली है, लगभग 12.5 लाख से ज्यादा कर्मचारी, अधिकारी रेलवे से रोजगार पा रहे हैं और बहुत से परिवार आज रेलवे के कारण चल रहे हैं ।
आप इसे और गति देने का काम कर रहे हैं, इसलिए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को धन्यवाद करता हूं और बधाई देता हूं । अंत में मैं पुन: निवेदन करूंगा कि मैंने माननीय मंत्री जी से अपने क्षेत्र के बारे में जो निवेदन किया है, उसका वे विशेष ध्यान रखेंगे । आपको बहुत-बहुत धन्यवाद । आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए आपके प्रति मेरा हृदय से आभार । मैं पुन: माननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं, बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m49 *श्री विवेक नारायण शेजवलकर (ग्वालियर): हमारे लोकप्रिय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारे रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी द्वारा वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तुत लोक-कल्याणकारी बजट के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं ।
देश के आर्थिक विकास में भारतीय रेल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है । यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाना, कृषि व अन्य उत्पादों की ढुलाई, उद्योगों के विकास के लिए प्रमुख गतिविधि केंद्रों जैसे पोर्ट आदि को जोड़ना इत्यादि भारतीय रेल की विशेषताएं हैं । आपदा-काल में भी भारतीय रेल ने आमजन को राहत देने हेतु प्रमुख भूमिका का निर्वहन किया है ।
माननीय रेल मंत्री जी ने वर्ष 2021-22 के बजट में नई लाइनों का विस्तार, दोहरीकरण, यातायात सुविधएं, आरओबी एवं आरयूबी सुरक्षा, आधुनिकीकरण व यात्री सुविधाओं का उन्नयन पर विशेष ध्यान रखा है । इस हेतु आवंटित धनराशि 2020-21 के बजट से लगभग डेढ़ गुना है ।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में रेल विकास के लिए बजट में रु 12,985 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष के व्यय से 72 प्रतिशत अधिक है । देश के समग्र विकास के लिए इससे गति मिलेगी ।
वर्षों से लंबित परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु बजट में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं । माल की त्वरित ढुलाई हेतु अनेकों ‘डेडिकेटेड फ्रंट कॉरिडोर DFC’ के लिए प्रावधान किए गए हैं । किसान रेल से किसान लाभान्वित हुए हैं ।
यात्रियों की सुविधा के लिए नए सुविधाजनक कोच विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से पर्यटकों की सुरक्षा व अन्य सुविधाओं का ध्यान रखा गया है । वर्ष 2023 तक शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का भी लक्ष्य रखा गया है ।
‘नेशनल रेल प्लान’ के रूप में भविष्य में अधोसंरचना विकास, आर्थिक व वाणिज्यिक योजना एवं वर्ष 2030 तक की आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु संकल्प किया गया है ।
यह रेल बजट भारतीय रेल सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, इसका विश्वास है ।
माननीय मंत्री जी का ध्यान मैं मेरे लोक सभा क्षेत्र के लिए वरदान सिद्ध होने वाली, झांसी सवाई माधोपुर रेल लाइन, जिसका पूर्व में सर्वे भी किया जा चुका है, के लिए आवश्यक बजट आवंटन करने हेतु आकर्षित करना चाहूंगा । यह रेल लाइन तीन प्रदेशों की राजधानियों को जोड़ेगी । इससे मेरे क्षेत्र के करैरा व पोहरी विधान सभा क्षेत्रों का विकास संभव होगा । इसी क्षेत्र में स्थित ITBP के प्रमुख केंद्र के कारण सामरिक दृष्टि से भी यह रेल लाइन महत्वपूर्ण है ।
पुन: एक बार इस क्रांतिकारी रेल बजट के लिए मैं माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं ।
*m50 *श्री मनोज कोटक (मुम्बई उत्तर-पूर्व): भारतीय रेलवे भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाता रहा है । साथ ही भारत में रहने वाले लोगों के जीवन की भी आवश्यकता बन गया है । पूरी दुनिया और हमारा देश जब गम्भीर महामारी के दौर से गुज़र रहा था तब भी रेलवे अपनी सेवा में जुटा हुआ था । रेलवे ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने और इन वस्तुओं के परिवहन को सुचारू जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं । जैसे खाद्य पदार्थ, दूध, डेरी उत्पाद, कृषि उत्पाद और दवाएं आदि जहाँ भी आवश्यक हुआ वहाँ पहुँचाया गया । रेलवे ने चिकित्सा उपकरण PPE किट, मास्क, दवाओं को भी देश के कोने कोने में समय पर पहुँचाने का काम किया ।
जिस वक्त प्रवासी श्रमिक अपने घर जाना चाह रहे थे, उस समय भी भारतीय रेलवे ने उन श्रमिक भाईयों के लिए विशेष ट्रेन चलाई, जिससे श्रमिक प्रवासी अपने अपने घर सफलतापूर्वक पहुँच सके । राज्य सरकारों ने जिस समय ट्रेन की मांग की, उसी समय उन्हें ट्रेन उपलब्ध कराई गई । इसके लिए माननीय पीयूष गोयल जी बहुत बहुत धन्यवाद के पात्र है । 167 साल के इतिहास में रेलवे को पहली बार अपना संचालन बंद करना पड़ा, परन्तु1 मई से30 अगस्त तक लगभग 4000 स्पेशल ट्रेनें चलाकर लगभग 23 राज्यों के श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया । इसके लिए लगभग 2000 करोड़ को खर्च वहन भी स्वयं रेलवे ने किया । देश की जनता हमेशा रेलवे की ऋणी रहेगी ।
इसके बाद रेलवे ने किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण किसान रेल सेवा शुरू की जिसने तेज गति से और कम लागत पर देश भर में अपनी उपज भेजने में किसानो की मदद की । आज नागपुर का संतरा देश के प्रत्येक कोने में जल्दी और कम लागत पर पहुंच रहा है । रेलवे ने ऐसी व्यवस्था किसानों को प्रदान कर दी है जिसके माध्यम से कम या ज्यादा अपनी उपज सस्ते किराए पर देश के किसी राज्य में भेज सकते हैं । एक बड़ा परिवर्तन भारतीय रेलवे लाया है जिसका पुरे देश ने स्वागत किया है ।
मैं मुम्बई शहर से आता हूँ और मुम्बई की लोकल ट्रेन यहाँ की "लाईफ लाईन" है । यहाँ की लगभग 80 प्रतिशत जनता परिवहन के साधन के रूप में लोकल ट्रेन का उपयोग करती है । मैंने माननीय रेलवे मंत्री जी से निवेदन किया था कि मुम्बई की सभी लोकल ट्रेनों को 15 कोच वाली ट्रेनों में परिवर्तिक किया जाए । वर्तमान समय में अधिकांश ट्रेन 12 कोच वाली हैं, जिसे सेन्ट्रल और वेस्ट्रन रेलवे द्वारा मुम्बई और सबअरबन में चलाया जाता है । इसकी क्षमता3000 यात्रियों की होती है और पीकऑवर में 5500 यात्री सफर करते हैं । यदि 15 कोच वाली लोकल ट्रेन चलेगी तो इसकी क्षमता बढ जाएगी और 4200 यात्री सफर कर पाएंगे । इसके साथ मुम्बई के सभी लोकल प्लेटफॉर्म को 15 कोच वाली ट्रेन चलाने के अनुकूल बनाना होगा और रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर इसके अनुकूल विकसित करने होंगे । मेरा विश्वास है कि माननीय मंत्री इस दिशा में जल्द से जल्द फैसला लेंगे ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में कोंकण क्षेत्र के काफी लोग अपनी जीविका चलाने के लिए रहते हैं । इन लोगो का अपने गांव में आना जाना लगा रहता है । मेरा निवेदन है कि महाराष्ट्र से गोवा के लिए चलने वाली ट्रेन में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए ।
1. महाराष्ट्र-गोवा के मार्ग को पूर्व दोहरीकरण किया जाना चाहिए ताकि इस मार्ग से ट्रेनों की आवाजाही सुचारूरूप से चल सके ।
2. राज्यरानी एक्सप्रेस (11003) में यात्रियों की काफी भीड़ होती है, अतः इस ट्रेन में कोंकणकन्या की तरह 23 कोच जोड़े जाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री सफर कर पाएं । इसी प्रकार जनशताब्दी एक्सप्रेस (12051) में भी कोच की संख्या बढ़ा कर 23 कर दी जाए ।
3. कोंकणकन्या ट्रेन को डबलडेकर ट्रेन बना दिया जाए तो मुम्बई से गोवा और कोंकण जाने वाले यात्रियों का काफी बड़ी राहत होगी ।
एक महत्वपूर्ण विषय की ओर मैं माननीय रेलमंत्री महोदय का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ । आज बहुत सारी मालगाड़ी उत्तर भारत से दक्षिण भारत की ओर जाते हुए मुम्बई सबअरबन में होते हुए जाती हैं ।
यदि कोई रेलवे बाईपास का निर्माण डहाणु-नासिक या नारदान-धुलिया से होकर बनाया जाए तो मुम्बई सबअरबन के लिए काफी उपयोगी होगा । यह उन ट्रेनों के लिए स्थान बना पाएगी जो वास्तविक रूप से मुम्बई से शुरू होती हैं, विशेष रूप से JNPT और अन्य एरिया से होकर चलती है । मुझे आशा है कि इस विषय पर आप अवश्य विचार करेंगे ।
कुछ वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के लातूर जिले में रेलवे ने रेलकोच फैक्ट्री का शिलान्यास किया था जिसमें EMU और मेट्रो के कोच बनाए जाने की योजना है । यह रेल कोच फैक्ट्री कब तक शुरू होगी ताकि बड़ी संख्या में जल्द से जल्द युवाओं को रोजगार मिल सके । साथ ही एक रेल कम्पोनेंट फैक्ट्री जो लोटे परशुराम, रत्नागीरी, कोकण में शिलान्यास रखा गया था, इसका काम कब तक पूरा करने की योजना है?
इस बजट में रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने के लिए रेलवे ने कितने बजट की व्यवस्था की है? विशेष रूप से मुम्बई के स्टेशनो को अपग्रेड करने के लिए सरकार की क्या योजना है? सदन को अवगत कराएं ।
पिछले कुछ वर्षों में मुम्बई की रेलवे सेवा के लिए विस्तार के लिए काफी कार्य किया गया । 2016 में 10,947 करोड़ की MUTP III योजना माननीय प्रधानमंत्री जी के हाथों से शुरू की गई । पुनः बजट 2018-2019 में MUTP-III A के लिए 54,777 करोड़ की व्यवस्था की गई । रेलवे के विकास को अन्य सभी विकास योजनाओं के साथ गति प्रदान करने के लिए मुम्बई, महाराष्ट्र और पूरा देश आपका आभारी रहेगा । इसी के साथ मैं अपना भाषण यहीं समाप्त करता हूँ ।
*m51 श्री सय्यद ईमत्याज ज़लील (औरंगाबाद): सभापति महोदया, जब मंत्री जी ने रेलवे बजट पेश किया था, तो उसके बाद कुछ लोगों ने इसकी प्रशंसा की थी और कुछ लोगों ने इस पर नाराजगी जताई थी ।
माननीय मंत्री जी, मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपके बजट को लेकर मराठवाड़ा के प्रमुख अखबारों की क्या सुर्खियां थी । एक बड़ा अखबार है, जिसने मराठी में इस बारे में लिखा था । इन अखबारों में मराठी में बताया गया है कि रेल बजट से निराशा हुई है । दूसरी हैडलाइन थी, जिसमें मराठी में बताया गया है कि मराठवाड़ा में जितने भी प्रमुख रेल प्रोजेक्ट्स हैं, उनको ठेंगा दिखाया गया है । यह बड़े-बड़े अखबारों की सुर्खियां थीं ।
उसी दिन साउथ सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों ने बड़ी खुशी जाहिर की थी और यह कहा था कि साउथ सेंट्रल रेलवे को बहुत पैसा दिया गया है । मंत्री जी, मैं यह मानता हूं कि आपने साउथ सेंट्रल रेलवे को बहुत ज्यादा पैसा दिया था । आपने साउथ सेंट्रल रेलवे को इस बजट में 6 हजार 798 करोड़ रुपये दिए, लेकिन हमारे हिस्से में जो आया है, अगर मैं आपको उसके आंकड़े बताऊंगा, तो आप भी हैरान हो जाएंगे और शायद आप अपने रेलवे के अधिकारियों से यह पूछेंगे कि इन सांसद ने ये जो आंकड़े बताए हैं, क्या वे सहीं हैं?
नांदेड़ डिवीजन साउथ सेंट्रल रेलवे का सेकेंड हाइयेस्ट प्रॉफिट मेकिंग डिवीजन है । इस डिवीजन को महज 98,75,02,000 रुपये दिए गए हैं । मंत्री जी, मैं इसे फिर से दोहराता हूं, क्योंकि आपको शायद इस पर यकीन नहीं होगा । मुझे भी जब यह बताया गया था, तो मुझे इस पर यकीन नहीं हो रहा था कि नांदेड़ डिवीज़न को सिर्फ 98,75,02,000 रुपये दिए गए हैं । यह टोटल बजट के दो परसेंट से कम है । स्पेसिफिकली, आपके द्वारा साउथ सेंट्रल रेलवे को जो बजट दिया गया है, वह टोटल बजट का 1.45 परसेंट, यानी दो परसेंट से भी कम पैसा नांदेड़ डिवीजन को दिया गया है ।
सभापति महोदया, परभणी-मनमाड रेलवे लाइन पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए बहुत इम्पॉर्टेंट है । इस डबल लाइन के लिए न जाने कितने सालों से हम कोशिश कर रहे हैं । 2013-14 में रेलवे की ब्लू बुक में इसे इन्क्लूड किया गया था । वर्ष 2018 में आरटीआई के एक रिप्लाई से पता चला है कि इसको हमने शेल्फ कर दिया है, जबकि हकीकत यह है कि यह वह सेक्टर है, जहां से रेलवे को 2.5 परसेंट का प्रॉफिट मिलता है । इसका आरओआर प्रॉफिट पॉज़िटिव के अंदर होने के बावजूद भी यह डबल लाइन हमें क्यों नहीं दी जा रही है, यह हमें आज तक समझ में नहीं आ रहा है ।
इस बजट से हमें बड़ी उम्मीद थी कि इस दिशा में आप हमें कुछ न कुछ तो देंगे । दूसरी बात यह है कि आप यह दावा करते हैं कि आपकी सरकार जब से आई है, तब से हजारों किलोमीटर्स की लंबी रेल लाइन्स बिछाई जा रही हैं । औरंगाबाद से चालीसगांव का डिस्टेन्स महज 88 किलोमीटर्स का है । अगर आप अखबारों को उठाकर उनकी सुर्खियां देखेंगे, मेरा आपसे निवेदन है कि आप अपने रेलवे के अधिकारियों से पूछिए कि कितने सालों से इसके लिए कोशिश की जा रही है, कितने सालों से औरंगाबाद से चालीसगांव के बीच की महज 88 किलोमीटर्स की रेल लाइन बनाई जानी शेष है । आज औरंगाबाद में डीएमआईसी – दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आ रहा है ।
समृद्धि लाइन वहां से गुजर रही है, ड्राई पोर्ट जालना में आ रहा है और फ्रेट का बहुत बड़ा बिजनेस आपको मिलने वाला है लेकिन आप महज 88 किलोमीटर की एक लाइन सैंक्शन नहीं कर रहे हैं । तीसरी बात यह है कि औरंगाबाद को मॉडर्न रेलवे स्टेशन के लिए अप्रूव किया था और आज पांच सालों से रेलवे अधिकारी कहते हैं कि अब काम शुरू होने वाला है, अब टेंडर निकलने वाला है । हम आपसे जानना चाहते हैं कि इसका क्या स्टेटस है?
मंत्री जी, हम आपको बताना चाहते हैं कि यदि आप हर फैसला आरओआर के हिसाब से लेंगे, तो मराठवाड़ा को कभी भी इंसाफ मिलने वाला नहीं है, क्योंकि मराठवाड़ा एक ऐसा क्षेत्र है, जो पिछड़ा है । यदि आप हर चीज फायदे और नुकसान के हिसाब से देखेंगे, तो यह जो पिछड़े एरियाज हैं, ये कब आगे बढ़ेंगे? यह कहा नहीं जा सकता है और कब ये आपके नारे सबका साथ, सबका विकास, सबके विश्चास में शामिल होंगे, यह कहा नहीं जा सकता है । औरंगाबाद को नई रेलवे लाइन नहीं मिलती है । बड़ी मेहनत के बाद कोल्हापुर, धनबाद, जहां मराठवाड़ा जैन समाज के लोग थे, इन्होंने 11 साल तक मेहनत की ताकि यह ट्रेन औरंगाबाद से गुजरे, जिससे उनके तीर्थ स्थान झारखंड से जोड़े जा सकें । इसके साथ ही साथ हिंदू और बौद्धिस्ट भाइयों के लिए भी यह बड़े तीर्थस्थलों को जोड़ने वाली ट्रेन है, लेकिन अब 19 फरवरी से एक नोटीफिकेशन जारी हुआ है कि औरंगाबाद और जालना इससे बाहर कर दिये जाएं, क्योंकि ये हमारे लिए फिजीबल नहीं हो रहा है । ये पिछड़े इलाके हैं । यदि आप इन इलाकों की जरूरत पूरी नहीं करेंगे, तो कौन करेगा? हम मांग कर रहे हैं कि औरंगाबाद-अहमदनगर की पूरी लाइन का सर्वे किया जाए । औरंगाबाद को यदि पुणे से जोड़ा जाए, तो विशेषकर जो आईटी सैक्टर में नौजवान काम करते हैं, उन्हें बहुत फायदा मिलेगा ।
जब पीयूष गोयल जी रेल मंत्री बनाए गए थे, तब हम भी बहुत खुश हुए थे । हमें इस बात की खुशी थी कि महाराष्ट्र का सुपुत्र आज इस देश का रेल मंत्री है इसलिए आप कहीं न कहीं मराठवाड़ा के साथ इंसाफ करेंगे, ऐसी उम्मीद हमारे अंदर जगी थी । लेकिन यदि हम आज देखें कि आप साउथ सैंट्रल रेलवे के नांदेड़ डिवीजन को महज 98 करोड़ रुपये देते हैं, तो आप बताएं कि आप और दूसरे रेल मंत्रियों ने, जिन्होंने हमारे क्षेत्र के साथ लगातार नाइंसाफी की है, उनमें और आप में क्या फर्क है? हमने आपसे बहुत उम्मीद लगा रखी है । हम यह कहते हैं कि यदि पीयूष गोयल जी हैं, तो मुमकिन है, लेकिन यह मुमकिन क्यों नहीं हो रहा है कि आप सभी को बांट रहे हैं और हमें नज़रअंदाज कर रहे हैं । पीयूष जी, मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं । बहुत सारे मुद्दे हैं । हमारी बहुत बड़ी-बड़ी मांगें नहीं हैं, लेकिन जिन मांगों के लिए पिछले दस, पन्द्रह, बीस सालों से हम मेहनत कर रहे हैं, उसके लिए रेलवे बोर्ड एक लाइन में लिखकर भेज देता है कि – We have shelved this project. ऐसा क्यों हो रहा है? अगर लोग मांग कर रहे हैं और उनकी यह जायज मांग है, तो मैं आपसे विनती करूंगा कि मराठवाड़ा के जितने भी सांसद हैं, उनकी एक मीटिंग आप मुम्बई में लें और तमाम अधिकारियों के साथ जो-जो आपसे मुमकिन हो सकता है, वह करें । पीयूष जी, औरंगाबाद के अंदर एक बुजुर्ग शख्सियत श्री ओम प्रकाश वर्मा हैं । इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी रेलवे के मुद्दों पर गुजार दी । रेलवे मिनिस्टर्स के पास जाते हैं, साउथ सैंट्रल रेलवे के हैडक्वार्टर जाते हैं, हैदराबाद जाते हैं, नांदेड़ जाते हैं । इनको जो भी पेंशन का पैसा आता है, वह इसी काम में खर्च करते हैं । ये रेलवे के बहुत बड़े एक्टिविस्ट हैं । कुछ महीने पहले वे रेलवे से संबंधित बहुत सारी फाइल्स मेरे पास लाए और कहा कि मैं इतने सालों से मेहनत कर रहा हूं और यह बात समझ में आई कि मराठवाड़ा के लिए आवाज उठाने वाला और मराठवाड़ा के साथ इंसाफ करने वाला कोई नहीं है । उस बुजुर्ग शख्स को इंसाफ दिलाने के लिए मैं आपसे विनती करना चाहता हूं कि ओम प्रकाश वर्मा जैसे एक्टिविस्ट जिन्होंने अपनी जिंदगी रेलवे को बेहतर बनाने के लिए लगा दी है, उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए लगा दी है और मराठवाड़ा की जनता को इंसाफ दिलाने के लिए आप हमारा साथ देंगे, यही उम्मीद हम आपसे रखते हैं ।
*m52 श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): सभापति महोदया, आज सदन में रेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग की अनुदानों की मांग पर चर्चा हो रही है । इस बजट में रेलवे के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपए आबंटित करने की घोषणा वित्त मंत्री जी ने बजट में की थी और बजट में यह भी कहा गया कि भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है, ताकि उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम किया जा सके और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सके । निश्चित तौर पर यदि कोई योजना मूर्त रूप लेती है, तो वह देश के लिए लाभदायक है । मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि एक तरफ तो हम भारत 2030 के लिए राष्ट्रीय रेल याजना तैयार करने की बात करते हैं । दूसरी तरफ वर्षों से जो क्राइटेरिया रेलवे स्टेशनों के विकास के लिए तय किया हुआ है उसमें बदलाव नहीं करने से जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशनों के भी विकास कार्य अधूरे पड़े रहते हैं और उन मानकों में नहीं आने के कारण वहां रेलवे विकास से जुड़ी योजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पाती हैं । मैं माननीय मंत्री जी का इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा ।
सभापति महोदया, अभी रेलवे ने जो पॉलिसी बना रखी है, उसके अनुसार उन राज्यों की रेल परियोजनाओं को स्वीकार नहीं किया जा रहा, जिन्होंने रेल मंत्रालय के साथ जॉइंट वेंचर कंपनी नहीं बना रखी है । ऐसे बहुत से राज्य हैं जिनके आर्थिक संसाधन सीमित हैं । ऐसे में वे ऐसी कम्पनी बनाने में रुचि नहीं ले पा रहे हैं । मेरा आपके माध्यम से रेल मंत्री महोदय से आग्रह है कि वे इस पॉलिसी के बारे में पुनर्विचार करें और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े राज्यों में भी नई परियोजनाओं हेतु फण्ड उपलब्ध करवाएं ताकि उन राज्यों की लम्बे समय से अटकी परियोजनाओं को भी गति मिल सके । हमारा राजस्थान भी ऐसे राज्यो में शामिल है, इसलिए राजस्थान की लंबित रेल योजनाओं के लिए केंद्र बजट जारी करे ।
सभापति महोदया, हमारे देश में रेल एक सेवा के साथ-साथ बहुत बड़ी व्यवस्था का हिस्सा भी है और निश्चित रूप से रेलवे हिंदुस्तान की पूरी संस्कृति को उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक जोड़ती है । गरीब से गरीब व्यक्ति भी रेल में सफर कर सकता है । रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से लेकर नई रेलवे लाइनों की स्वीकृति करने व दोहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए सरकार को मापदंडों में शिथिलता देने की जरूरत है, क्योंकि मंत्री महोदय ने विगत वर्ष 12 व 13 मार्च, 2020 को इस सदन में जब रेल मंत्रालय की अनुदान माँगो पर चर्चा हुई थी, तो मेरे संसदीय क्षेत्र व नागौर जिले के नागौर, मेडता रोड, डेगाना, मकराना, डीडवाना, कूचामन सहित कई स्टेशनों पर दिव्यांगों व बुजुर्गों के लिए एस्कलेटर लगवाने की माँग पर यह जवाब दिया की वहाँ मौजूदा नीति के अनुसार यह हो नहीं सकता, क्योंकि वहाँ यात्री भार प्रतिदिन 25 हजार से कम है ।
सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह मांग करूँगा कि ऐसे मामलों में नियमों में शिथिलता दी जाए ताकि बुजुर्गों व दिव्यांग यात्रियों को राहत मिले । देश की आज़ादी से पूर्व ही देश में रेल सेवा शुरू हो गई थी और आज़ादी के बाद से लेकर अब तक भारतीय रेल के इतिहास पर प्रकाश डालें तो निश्चित तौर पर भारत ने विश्व के टॉप पाँच सबसे बड़े नेटवर्क वाले देशों में स्थान बनाया है । आज यात्री-भार को देखते हुए प्रत्येक ट्रेन में उसकी रवानगी से एक घंटे पूर्व तक ज़्यादा बुकिंग हो जाने की स्थिति में अतिरिक्त कोच लगें, ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसकी माँग मैं माननीय मंत्री जी से करूँगा ।
सभापति महोदया, आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहूँगा कि रेलवे के क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण को लेकर रेलवे में ही कार्यरत कार्मिकों और जनता के मन में बहुत बड़ी शंका है । आप जब इस अनुदान माँगों की बहस का जवाब दें तो यह ज़रूर बताएं कि निजीकरण करने से वर्तमान में रेलवे विभाग के जो पद हैं उनके भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा, रेलवे के क्षेत्र में सरकारी भर्तियों पर क्या फ़र्क पड़ेगा और रेलवे में कई श्रेणी के जो रिक्त पद हैं, उन्हें कब तक भर लिया जाएगा, ताकि देश की जनता इस पर सरकार की मंशा व स्पष्टीकरण जान सके और देश के नौजवानों के भीतर जो उम्मीद की किरण है, वह वापस जग सके ।
सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से यह माँग करूँगा कि नागौर जिले के नागौर, कूचामन,लाडनू, डीडवाना, मकराना, मुंडवा व मेडता रोड स्टेशनों के विकास के लिए वहाँ की आवश्यकता के क्रम में बजट जारी किया जाए । जैसलमेर से बीकानेर, नागौर होते हुए जयपुर जाने वाली ट्रेन संख्या 12467/12468 लीलण एक्सप्रेस का संचालन किया जाए । पुनः एक सवाल के जवाब मे मंत्री जी, आपने मुझे बताया की पूर्व की भाँति नागौर होते हुए चलाया जाएगा, लेकिन अभी तक लीलण एक्सप्रेस चालू नहीं हुई है । अत: इस ट्रेन को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ।
सभापति महोदया, मैं एक-दो मिनट का समय और लूंगा । राजस्थान मे नोखा से सीकर तक नई रेल लाइन का प्रस्ताव 1997-98 के बजट में लाया गया ,उत्तर पश्चिम रेलवे ने वर्ष 2012 में रेलवे बोर्ड को उक्त प्रस्तावित 209 KM लाईन का अपडेटेड सर्वे भेजा, जिस पर माननीय मंत्री जी ध्यान देकर यदि स्वीकृति करेंगे तो बीकानेर, नागौर, चुरु और सीकर जिले के नोखा, श्री डूंगरगढ़, बीदासर, सुजानगढ़, लाडनू, लक्ष्मणगढ़, सहित उक्त जिलों के कई गाँव व सुजानगढ़ क्षेत्र के सांडवा, बीदासर आदि गाँवों के लोगों को रेल लाइन मिल जाएगी । इसके साथ ही साथ सालासर, जो देश का बहुत बड़ा धार्मिक स्थल है, वहां आने-जाने के लिए भी पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और इलाके का विकास होगा ।
सभापति महोदया, मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि यात्री भार के नियमों में शिथिलता देकर मेरे संसदीय क्षेत्र नागौर के कुचामन सिटी, डीडवाना लाडनू, मकराना पर अत्याधुनिक स्टेशन, स्वचालित एस्कलेटर व लिफ्ट लगवाने की स्वीकृति प्रदान करें और साथ ही साथ मेडता रोड, नागौर, मुंडवा व गोटन स्टेशन पर टीन शेड का विस्तार करने तथा मेडता रोड व नागौर सहित उपखण्ड मुख्यालय स्तर के शहरों, कस्बों के रेलवे स्टेशनों पर वीआईपी लॉज बनाए जाएं ।
सभापति महोदया, राजस्थान में धार्मिक व सामरिक दृष्टि को देखते हुए नागौर से फलोदी तक नई रेलवे लाइन व डीडवाना से कूचामन तक रेलवे लाइन की स्वीकृति के लिए मंत्री जी सर्वे प्रस्तावित करवाएं, इसके साथ ही बहुप्रतीक्षित मेडता-पुष्कर रेलवे लाइन को केंद्र अपने स्तर से बजट जारी करके स्वीकृति करे ।
मारवाड़ और मेवाड़ आपस में जुड़ जाए । पुष्कर देश का प्रमुख धार्मिक स्थान है ।
रामदेवरा का मेला जैसलमेर के अंदर भरता है और तेजाजी महाराज का मेला नागौर में भरता है । अगर नागौर रेल लाइन बन जाती है तो निश्चित रूप से बहुत बड़ा संदेश देश के अंदर जाएगा ।
महोदया, नागौर जिले में मेड़ता सिटी से खजवाना मार्ग पर स्थित मेड़ता रोड की रेलवे फाटक संख्या 101 पर रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जाए । बीकानेर से नागौर होते हुए चेन्नई की तरफ नियमित ट्रेन चलाई जाए ।…(व्यवधान) मैं मात्र एक मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ ।
मेरा रेल मंत्री महोदय से आग्रह है कि हम आपको पत्र लिखते हैं, अभी मेरे से पूर्व वक्ता ने भी यह बात कही थी । आप उन पत्रों को रेलवे बोर्ड को भेज देते हैं । हो सकता है कि आपके मन में काम करने की इच्छा हो, लेकिन आप रेलवे बोर्ड की दादागिरी देखिए, उसे उस पत्र पर कार्यवाही करके संबंधित सांसद को जवाब देना चाहिए, लेकिन रेलवे बोर्ड संबंधित सांसद के किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं देता है । मैं मंत्री जी से कहना चाहूँगा कि 99 प्रतिशत पत्रों का हमारे पास जवाब नहीं आता है ।
महोदया, मैं अंत में एक डिमांड और करूँगा कि भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा में मेमू कोच फैक्ट्री की स्थापना की घोषणा हो रखी है । मंत्री जी इस परियोजना को मूर्त रूप देने की घोषणा करें । …(व्यवधान)
मंत्री जी, मेरा एक निवेदन है कि मण्डौर-जयपुर-दिल्ली जो ट्रेन चलती है, वह बहुत पुरानी ट्रेन है, वीर तेजाजी महाराज देश और राजस्थान के बड़े लोक देवता हैं और उन पर किसानों की बहुत आस्था रही है, आप मण्डौर एक्सप्रेस ट्रेन का नाम बदलकर वीर तेजाजी महाराज के नाम पर रखें तो एक अच्छा संदेश पूरे देश और प्रदेश के अंदर जाएगा ।
महोदया, मेरे संसदीय क्षेत्र नागौर के नावा सिटी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संख्या 02981/82, 02997/98 व 04661/62 का ठहराव पुन: शुरू किया जाए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: श्री अरूण साव जी ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल: महोदया, बस इस कागज को पढ़ने दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : बस बहुत हो गया । आपको बोलते हुए 10 मिनट का समय हो गया है ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल: मैं अपनी लास्ट टिप्पणी के बाद बैठ जाता हूँ ।…(व्यवधान) मैं 10 सेकेंड में अपनी बात कहता हूँ ।…(व्यवधान) ट्रेन नंबर 19603/19604 अजमेर-रामेश्वर हमसफर एक्सप्रेस को फिरोजपुर वाया फुलेरा, कुचामन, डेगाना, लाडनू, रतनगढ़, सादुलपुर तक बढ़ाया जाए । ट्रेन संख्या 14623/24 व ट्रेन संख्या 14625/26 का कुचामन पर ठहराव किया जाए ।
मंत्री जी, आप विशेष रूप से जितने भी सांसद इस पर बोले हैं, हम सब वे लोग हैं जो सदन चलाना भी चाहते थे । जब रेल की महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है तो पूरा देश आज टकटकी लगाकर लोक सभा की ओर देख रहा है । आप महत्वपूर्ण घोषणाएं भी उन-उन इलाकों में करेंगे, जहाँ वास्तव में रेल की बहुत बड़ी आवश्यकता है । आप बड़ा मन रखकर, पक्ष-विपक्ष न देखें और हमारी तरफ तो विशेष ध्यान रखें । हम पहले आपकी तरफ ही थे, थोड़ा सा हम इधर साइड में आए हैं, आप हमारा विशेष ध्यान रखें ।…(व्यवधान) मारवाड़ के अंदर और मराठवाड़ा में जो माँग की गई है, जहाँ के आप रहने वाले हैं तो दोनों का विशेष ध्यान रखें । आप घोषणाएं करें । मंत्री जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय सभापति : बस आपकी बात हो गई । अब आप बैठिए । श्री अरूण साव जी, आप बोलिए ।
*m53 श्री अरूण साव (बिलासपुर): महोदया, मैं रेल मंत्रालय की अनुदान माँगों के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ ।
महोदया, पहले गंदगी, बदबू, अव्यवस्था, ट्रेनों की लेट-लतीफी, आए दिन बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं भारतीय रेल की नियति रही है, लेकिन वर्ष 2014 में जब माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी, तब देश और भारतीय रेल की तरक्की का रास्ता खुला । आज पीयूष गोयल जी के सक्षम नेतृत्व में, उनके सबल मार्गदर्शन में आज भारतीय रेल चौतरफा विकास की ओर आगे बढ़ रही है । एक तरफ रेलवे का आधुनिकीकरण हो रहा है, यात्री सुविधाएं बढ़ रही हैं और गंभीर दुर्घटनाओं में एकदम से कमी आई है । आज भारतीय रेल नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है । जीवन रेखा कही जाने वाली भारतीय रेल आज देश के विकास की रेखा के रूप में जानी जा रही है । “आत्मनिर्भर भारत” के निर्माण में आज भारतीय रेल अहम भूमिका का निर्वाह कर रही है । आज लगातार बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं । आज भारतीय रेल 69,214 रूट किलोमीटर के नेटवर्क के साथ दुनिया के चौथे बड़े रेल नेटवर्क के रूप में देखी जा रही है । आज यात्री परिवहन के मामले में दुनिया में जापान के बाद दूसरे नंबर पर भारत का स्थान आता है । माल परिवहन में एक बिलियन टन से अधिक की क्षमता को हासिल करके आज दुनिया में चौथे नंबर पर भारतीय रेल हो गयी है । आज भारतीय रेल के पास 74,003 कोचेज के साथ 60 लाख से अधिक यात्रियों के बैठने की व्यवस्था हो गई है ।
एक लाख 50 हजार से अधिक ब्रिजों का निर्माण आज भारतीय रेल कर चुकी है । भारतीय रेल आज जिस तरह से तेजी से आगे बढ़ रही है, नेशनल रेलवे प्लान की घोषणा के साथ वर्ष 2030 तक जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक बहुत बड़ी योजना लेकर आज भारतीय रेल आई है । मैं यह कह सकता हूं कि आने वाले समय में भारतीय रेल देश की जनता की आकांक्षा और अपेक्षाओं पर खरा उतरने की दिशा में ठोस और मजबूती से काम कर रही है । 60 मिलियन टन खाद्य पदार्थों की लोडिंग कर और 52 मिलियन टन से अधिक फर्टिलाइजर्स का लदान कर जिस तरह से आज भारतीय रेल किसानों की मदद कर रही है, जिस तरह से 41 मार्ग में 344 किसान रेल का संचालन कर एक लाख 11 हजार 718 टन परिवहन कर किसानों की आमदनी दोगुनी करने का प्रधान मंत्री जी ने, माननीय मोदी जी ने जो सपना देखा है, उस सपने को साकार करने की दिशा में आज पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में भारतीय रेल तेजी से आगे बढ़ रही है ।
आज मैं आपसे कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ में भी रेलवे का विकास एवं रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए भारतीय रेल प्राथमिकता के साथ आज काम कर रही है । जिस प्रकार से वर्ष 2021-22 के बजट में अधोसंरचना और संरक्षा संबंधी कार्यों के लिए बजट में कुल 3650 करोड़ रुपये निधि का आबंटन किया है, जो अब तक का रिकार्ड है । इस वर्ष के बजट में ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है । भुसावल से नागपुर होते हुए दनवुनी तक बनने वाला यह फ्रेट कॉरिडोर छत्तीसगढ़ से भी होकर गुजरेगा और क्षेत्र के विकास में एक बड़ा योगदान करने वाला है । छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान में कुल 42,083 करोड़ रुपये के 2900 किलोमीटर के प्रोजेक्ट्स, योजना अनुमोदन तथा क्रियान्यन के विभिन्न स्तरों में चल रहे हैं । इसमें 8 नई रेल लाइन्स, 10 डबलिंग के काम, एक रेल विद्युतीकरण का कार्य सम्मिलित है ।
आज मैं आपसे कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ अलग राज्य का निर्माण अटल जी ने किया । अटल जी ने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए अलग राज्य का दर्जा दिया और अटल जी के इस छत्तीसगढ़ में विकास की नई पहल हुई । दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन, रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन, खरसिया, धरमजयगढ़ कोरबा, गेवरारोड-पेंड्रा रोड नई रेल लाइन, मंदिर हसौद-नया रायपुर केन्द्री नई रेल लाइन परियोजना के कामों में तेजी लाने की आवश्यकता है । मैं माननीय पीयूष गोयल जी से अपेक्षा करूँगा कि अटल जी ने विकास के आधार पर, विकास की दिशा में पिछड़ा होने के कारण छत्तीसगढ़ अलग राज्य का निर्माण किया । आज छत्तीसगढ़ के विकास के लिए जो रेल की योजनाएँ हमारी सरकार ने बनाई हैं, इन योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि हम छत्तीसगढ़ को अटल जी के सपनों का छत्तीसगढ़ बना सके । इसी तरह से डोंगरगढ़ खैरागढ़-कवर्धा-मुंगेली, कटघोरा रेल लाइन, खरसिया-बलौदा बाजार-दुर्ग एवं बरवाडीह चिरमिरी के कामों में भी तेजी लाने की आवश्यकता है, ताकि अटल जी का सपना साकार हो सके ।
मेरे लोक सभा क्षेत्र के अंतर्गत उसलापुर-कोटा बेलगहना, पेंड्रा रोड, बिल्हा, चकरभाठा एवं जयरामनगर स्टेशनों में यात्री सुविधाओं की कमी है । माननीय मंत्री जी बैठे हैं, मैंने इस संबंध में पत्र भी लिखा है, लेकिन आज मैं आपके माध्यम से सदन में यह कहना चाहता हूं कि इन स्टेशनों में यात्री सुविधाओं की कमी है । इसमें यात्री सुविधा बढ़ाने की कृपा करें ।
बिलासपुर जोन भारतीय रेल का कमाऊ पूत है । अधिकतम आय देने वाला बिलासपुर जोन है, इसलिए मैं आपसे अपेक्षा करता हूं कि बिलासपुर के नौजवानों के भी सपने साकार हो सके, उन्हें रोजगार के अवसर मिले, इसलिए बिलासपुर में एक कोच फैक्ट्री की स्थापना हो, ताकि बिलासपुर विकास कर सके । मेरे नौजवान साथियों को रोजगार मिल सके । बिलासपुर की एक बड़ी समस्या है, जिसको लेकर मैं लगातार आपसे भी मिला हूं, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से भी मिला हूं और प्रयास भी करते हैं ।
बुधवारी में एक बड़ा बाजार है । उस बड़े बाजार में लगभग तीन हजार से अधिक दुकानदार रोजगार करते हैं, जिससे तीस हजार से अधिक परिवारों की आजीविका चलती है । लेकिन लंबे समय से रेलवे न तो उनकी दुकानों की लीज का नवीनीकरण कर रही है, न किराया वसूल कर रही है, न वहां पर बिजली और पानी की व्यवस्थाएं कर रही है, जिससे न केवल रेलवे की आय में कमी हो रही है, आय प्राप्त नहीं हो रही है, बल्कि लोगों में भी नाराजगी का एक वातावरण है । मैं आपसे अपेक्षा करता हॅूं कि उसकी समस्या का हमेशा के लिए समाधान हो । भारतीय रेल ने टीएचबी का ठेका देने का काम अभी प्रारंभ किया है, परंतु ठेकेदारों को ट्रेन में कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्रियों के साथ-साथ ठेकेदारों को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । पेंडरा रोड और बिलासपुर के बीच में पेसेंजर ट्रेन अभी नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है । मैं आपसे आग्रह करता हॅूं कि बिलासपुर-पेंडरा रोड के बीच लोकल ट्रेन को प्रारंभ किया जाए ।
मेरे मित्र, कांग्रेस पार्टी के सांसद, दीपक बैस जी बड़ी-बड़ी बातें कह रहे थे । मैं इस सदन में कहना चाहता हॅूं कि छत्तीसगढ़ की उपेक्षा, छत्तीसगढ़ को विकास से दूर रखने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया था । छत्तीसगढ़ का विकास किसी ने किया तो वह भारतीय जनता पार्टी ने किया । चाहे वह अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का मामला हो । छत्तीसगढ़ में उच्च न्यायालय बनाने का मामला हो, बिलासपुर में रेलवे का जोन बनाने का मामला हो, चाहे नेशनल हाइवे का जाल बिछाने का मामला हो, यह सब भारतीय जनता पार्टी ने किया । आज मैं आपसे कहना चाहता हॅूं कि बिलासपुर में, जगदलपुर में हवाई सेवा देने का काम भी किया तो माननीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने किया ।
कोरोना के काल में वे बड़ी-बड़ी बातें बोल रहे थे । मैं आपको बताना चाहता हॅूं कि छत्तीसगढ़ की एक करोड़ 96 लाख जनता को आठ महीने का राशन देने का काम किसी ने किया तो वह नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने किया । मेरी 78 लाख बहनों को 15-15 सौ रुपये उनके जन-धन खातों में डालने का काम किया तो वह मोदी जी की सरकार ने किया । मनरेगा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लाखों मजदूरों को रोजगार देने का काम किया यदि किया है तो वह मोदी जी की सरकार ने किया । कांग्रेस की सरकार जब से छत्तीसगढ़ में बनी है, विकास को अवरुद्ध करने का काम किया है । छत्तीसगढ़ की जनता को कोरोना काल में एक रुपये की भी मदद कांग्रेस पार्टी की सरकार ने नहीं दी है । यह मैं आपसे कहना चाहता हॅूं । आज मोदी जी के मार्गदर्शन में पीयूष गोयल जी के सक्षम नेतृत्व में भारतीय रेल विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है और भारत की अर्थव्यवस्था में अपना भरपूर योगदान देते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ले कर जा रही है ।
आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m54 *श्री ओम पवन राजेनिंबालकर (उस्मानाबाद): मैं सरकार के संज्ञान में अपने संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद की कुछ समस्या रखना चाहता हूं और आशा करता हूं कि सरकार इसमें तुरंत कार्यवाही कर इन समस्याओं का निराकरण करेगी ।
वर्ष 2014लोक सभा चुनाव के बाद माननीय प्रधानमंत्री जी ने सोलापूर–धुले चार लाइन के उद्घाटन समारोह मे सोलापुर-तुलजापुर-उस्मानाबाद रेलवे मार्ग बनाने की बात की थी और आज इस सरकार को 7 साल हो गए हैं, यह रेल मार्ग मंजूर तो हो गया है परंतु इसके लिए आवश्यक बजट का प्रावधान नहीं किया गया है । इस वर्तमान बजट मे इसका कोई संज्ञान नहीं लिया गया,जिसके कारण सरकार की काफ़ी फ़जीहत हो रही है । इस रेल मार्ग को जल्द बनाने के लिये सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए । इस मार्ग का सर्वेक्षण होकर जमीन अधिग्रहण होना जरुरी है तभी इसी रेलमार्ग का आरंभ हो सकता है ।
सोलापूर-तुलजापुर-उस्मानाबाद रेलमार्ग कुल 84.9किमी होने के साथ ही दक्षिण भारत का संपर्क इसी रेल मार्ग से होगा । पूरे देश से नवरात्रों मे हर दिन लगभग 9से10 लाख भक्त तुलजा भवानी के दर्शन के लिए आते हैं । इससे तुलजापुर आने वाले श्रृद्धालुओं को सुविधा होगी, यहाँ से कर्नाटक,आंध्रप्रदेश तथा बाकी राज्यों में यातायात की सुविधा होने के साथ ही कृषि उत्पाद को नया बाजार मिलेगा और उस्मानाबाद जिले के विकास में तथा जनसुविधा में इस रेलमार्ग का बड़ा योगदान रहेगा और पिछडे जिले को मुख्य प्रवाह में लाने एवं रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी ।
अत: मैं सरकार से उम्मीद करता हूँ कि इस रेल मार्ग को जल्द पूरा करने हेतु सोलापूर वाया तुलजापुर उस्मानाबाद रेलमार्ग का प्रत्यक्ष सर्वेक्षण करने और जमीन अधिकग्रहण करने के लिये उचित सहयोग बनायेंगे ।
मैं आशा करता हूँ कि उक्त विषय पर केंद्र सरकार सहकार्य बनाकर इस रेल मार्ग को जल्द से जल्द बनाकर मुझे और मेरे चुनावी क्षेत्र पर कृपाधिष्ठत करे और माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गया वादा पूरा करे ।
रेल ही एक ऐसा माध्यम है जो व्यापार को बढ़ा सकता है और एक स्थान से दूसरे स्थान तक हर यात्री को पहुंचा सकता है । इसी विषय में मैं अपने संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद में रेल विकास के संबंध में कुछ मांगे सरकार के समक्ष रखना चाहता हूं ।
उस्मानाबाद रेलवे की लंबाई को बढ़ाना, मालगाड़ी से आने वाला माल उतारने के लिए प्लेटफार्म का निर्माण करना, यह माल सुरक्षित रखने के लिए प्लेटफार्म के नजदीक शेड का गुड्स शेड निर्माण करना,सुरक्षा के दृष्टि से रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरा लगाना, सुरक्षा रक्षकों को नियुक्त करना,दिव्यांगों के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं का प्रावधान होना, महिलाओं के लिए आवश्यक अलग प्रतीक्षालय,सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन का प्रावधान करना,उस्मानाबाद रेलवे स्टेशन पर सोलरएनर्जी के माध्यम से बिजली की उपलब्धता और स्टेशन पर ओवरब्रिज का निर्माण करना, साथ ही लातूर-पुणे इंटरसिटी एक्सप्रेस शुरू करना,विरार-लातूर मुंबई ट्रेन के लिए जनरल बोगी की संख्या बढ़ाना आवश्यक है । इसके साथ ही मैं सरकार से मांग करता हूँ कि लातूर-मुंबई एक ट्रेन दिन में शुरू की जाए । कोल्हापुर-नागपुर सप्ताह में दो बार चलने वाली ट्रेन का हर दिन चलना आवश्यक है । नई रेल योजना उस्मानाबाद-तुलजापुर-सोलापुर रेल मार्ग के निर्माण हेतु आर्थिक पैकेज की जरूरत है और तत्काल काम शुरू होना नितांत आवश्यक है ।
कलम रोड स्टेशन और ढोकी रोड स्टेशन पर सभी प्रकार की ट्रेनो के लिए स्टॉपेज देने की मांग बहुत समय पहले से जा रही है और इसके लिए आंदोलन भी हुए है । अत: कलम रोड स्टेशन और ढोकी रोड स्टेशन पर सभी प्रकार की ट्रेनो के लिए स्टॉपेज देने की कृपा करें,विशेषकर लातूर-मुंबईएक्सप्रेस का तुरंत स्टोपेज दिया जाए ।
उस्मानाबाद-डोकी हाइवे पर डोकी गांव रेलवे का सिम पर सड़क यात्रा के लिए ओवरब्रिज की अवस्था, डोकी गोवर्धन वाडी गांव रेलवे क्रॉसिंग पर सड़क यातायात के लिए ओवरब्रिज की अवस्था,सभी रेल क्रॉसिंग पोस्ट, सभी आवश्यक सेवाओं के साथ सूचित करना आवश्यक है । लातूर रोड में मंदिर तक रेल मार्ग का निर्माण करना आवश्यक है । स्टेशन पर रेल गाड़ी बहुत ही जरूरी है ।
वर्तमान मे कोल्हापुर से धनबाद वाया उस्मानाबाद रेल शुरू की गई है । यह रेल पहले वाया औरंगाबाद चलती थी, इसको वाया उस्मानाबाद करने से 4 घंटे का समय बचा है और 150 किमी का अंतर कम हुआ है । साथ ही रेलवे को ईंधन मे बचत हुई है । इसी तरह से औरंगाबाद से चलने वाली रेलों को उस्मानाबाद से चलाया जाए,जिससे रेलवे का ईधन बचेगा, समय की बचत भी होगी और लोगों को सुविधा मिलेगी ।
मैं सरकार का ध्यान, भारतीय रेलवे के प्लेटफार्मों पर कार्यरत छोटे खान-पान लाइसेंसीज़ की समस्याओं की ओर दिलाना चाहता हूँ कि लाइसेंसीज़ वेंडर अपने स्टाल, ट्राली,खोमचों पर चाय, शीतल पेय, पकौड़ा,समोसा,स्नैक्स,फल-फ्रूट बेचकर रात-दिन यात्रियों को खान-पान सेवा, रेलवे द्वारा निर्धारित उचित दरों पर उपलब्ध कराते हैं । वहीं रेलवे प्रशासन की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि इनसे जुड़े लाखों परिवारजनों की रोज़ी-रोटी व उचित रहन-सहन स्तर को बनाए रखने के लिए कारगर कदम उठाए जायें ।
कोविड-19महामारी के कारण सभी व्यापारी वर्ग प्रभावित हुये हैं, जो समय के साथ-साथ सरकार द्वारा उठाए गये कदमों से राहत पा गये हैं,परन्तु लाइसेंसीज़ वैन्डरों का मुद्दा रेल प्रशासन के नीतिगत फैसलों से जुड़ा हुआ है । इसमें कुछ बदलाव लाकर व सुधारे गये नियम कानून लागू करके,रेल प्रशासन द्वारा खान-पान लाइसेंसीज़वैन्डरों को जीवन यापन करने हेतु राहत दी जानी चाहिए ।
इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज़ वैलफेयर ऐसोसिएशन द्वारा रेल मंत्रालय को समय-समय पर Memorandum दिए गए हैं । मुझे भी Memorandum की एक प्रति ऐसोसिएशन से प्राप्त हुई है । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि स्वयं ध्यान देकर समस्याओं का समाधान करने की कृपा करें ।
रेल मंत्रालय द्वारा (माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को संज्ञान में लेते हुए) कापरेटिव सोसायटीज़ पार्टनरशिप फर्मों, हिन्दू संयुक्त परिवारों के खान-पान लाइसेंसों के समयबद्ध नवीनीकरण की सहमति प्रकट करते हुए जोनल रेलों को निर्देश जारी किये हैं ।
अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वैलफेयर एसोसिएशन (पंजी.)के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश के साथ माननीय उच्च न्यायालय को स्थानांतरण कर दिया था । माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने एसोसिएशन की रिट पर स्थगन आदेश जारी किया था, जो कि अभी तक विचाराधीन है,जिसमें एसोसिएशन ने अपने सदस्यों की जीविका बचाने हेतु व्यक्तिगत (प्रोप्राइटरशिप)लाइसेंसधारी के लाइसेंस के नवीनीकरण एवं खान-पान नीति 2017 तथा परिपत्र संख्या 22/17से होने वाले भेदभाव को समाप्त करने हेतु न्यायालय की शरण ली हुई है ।
सरकार से अनुरोध है कि सरकार को एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से बात-चीत कर मामले को न्यायालय के बाहर सलझाने के लिए कदम उठा कर एकल वर्ग (प्रोप्राइटर)को राहत देने के साथ-साथ अन्य वर्गों के बीच असमानता को दूर किया जा सकेगा ।
रेलवे की खान-पान नीति 2017 में,रेलवे खान-पान लाइसेंस धारक की मृत्यु हो जाने पर उसके कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस स्थानान्तरित कर दिये जाने का प्रावधान है । परन्तु कानूनी वारिस के नाम का नोमिनेशन लाइसेंसी के जीवत रहते ही दर्ज कराने का प्रावधान नहीं होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर कानूनी कार्यवाही एवं प्रक्रिया के चलते वारिस दफ्तरों के चक्कर लगाता रहता है और लाइसेंस हस्तांतरण में महीनों-महीनों का समय लगता है । अतः नोमिनेशन किया जाना आवश्यक होना चाहिए ।
मैं मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहूँगा कि अनेकों लाइसेंस हस्तांतरण के मामले विभिन्न मण्डलों पर (खासतौर पर दिल्ली मण्डल में)लम्बे समय से लम्बित हैं और वारिस व उनका परिवार,बिना आय साधनों के कष्टमय जीविका चला रहा है । इन सभी लम्बित मामलों को अविलम्ब संज्ञान में लेना आवश्यक है ।
मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता कि जैसा कि वह जानते हैं कि प्लेटफार्मों पर कार्यरत वैन्डर बहुत ही छोटे स्तर के दुकानदार हैं । वे अपनी रोजी-रोटी अर्जन हेतु 24घंटे यात्रियों की तत्परता से सेवा करते हैं । स्टाल, ट्रालियों पर उपलब्ध टेक-अवे(Takeaway) सेवा व खोमचों से यात्रियों को कोचों में दो-चार मिनट के हाल्ट पर गर्मा-गर्म खाद्य पदार्थों की सेवा प्रदान की जाती है । इस वर्ग के वैन्डरों के लिए न तो जी.एस.टी.थोपना उचित है और न ही यह व्यवहारिक रूप से सम्भव है । वैन्डर जी.एस.टी.भुगतान करके कच्चा माल खरीदते हैं, परन्तु रेलवे द्वारा निर्धारित मूल्यों पर यात्रियों से जी.एस.टी.वसूल नहीं होता है । अतः दोहरी मार से बचाने हेतु इन पर जी.एस.टी.समाप्त किया जाए ।
रेलवे द्वारा फ्रेश फ्रूट/फ्रेश फ्रूट जूस लाइसेंसीज़ को कोविड-19में राहत देने के लिए पैक्ड आइटम बेचने की अनुमति गत अगस्त माह में ही दे दी गई थी,परन्तु विभिन्न रेल मण्डलों द्वारा रेल नीर इत्यादि की बिक्री की अनुमति स्टाल,ट्राली एवं खोमचों के माध्यम से अभी तक नहीं दी गई है ।
रेलवे की खान-पान नीति में स्थिर इकाईयों में निविदा स्वीकार नहीं है, क्योकि यह लाभ पर आधारित है,जनहित के लिए नहीं । अतः मेरा सझाव है कि कम से कम स्थिर इकाईयों को निविदा प्रक्रिया के तहत नहीं रखा जाना चाहिए ।
मेरा यह भी मत है कि कैटरिंग पालिसी 2010में चल रही यात्रियों के लिए अच्छे और सस्ते खानपान नीति के नए मसौदे को बहाल किया जाए ।
मैं सरकार से पुरजोर अनुरोध करता हूँ कि गरीब खान-पान एकल / अन्य(Individual / Others) लाइसेंसीज़ की समस्याओं को ऐसोसिएशन द्वारा सरकार को प्रेषित किया गया है,उस पर गम्भीरता पूर्वक विचार कर समाधान करे । इससे सरकार की प्रशंसा होगी तथा एक समान नीति बनाने से भेद-भाव पूर्ण नीति समाप्त होगी ।
धन्यवाद *m55 श्री कृपाल बालाजी तुमाने (रामटेक): सभापति महोदया, आपने मुझे रेलवे की अनुदान की मांगों की चर्चा में भाग लेने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हॅूं ।
भारत के विकास में रेल का योगदान काफी महत्वपूर्ण है । यातायात का एक सबसे विश्वसनीय माध्यम होने के कारण गरीब हो या अमीर हो, सारी जनता रेल के ऊपर निर्भर होती है ।
मेरे रामटेक संसदीय क्षेत्र और नागपुर जिले की कुछ समस्याएं मैं आपके माध्यम से आदरणीय पीयूष गोयल साहब की ओर रखना चाहता हॅूं ।
महोदया, सन् 2018 के रेलवे बजट में रामटेक-खापा रेलवे लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा बजट में की गई थी । उसके बाद आज ढाई-तीन साल होने आ रहे हैं । इसके ऊपर क्या काम हुआ, कितना काम हुआ, इसके बारे में अभी कोई जानकारी बाहर आ नहीं रही है ।
महोदया, मैं आपके माध्यम से आदरणीय मंत्री महोदय से विनती करता हूं कि रामटेक-खापा रेल लाइन का कार्य होना बहुत जरूरी है क्योंकि वहां ‘मॉइल’ का मैंगनीज और इसी तरह से डब्ल्यू.सी.एल. की खदानें होने से इस लाइन की सारी व्यवस्था हो सकती है ।
महोदया, हमारे यहां नागपुर-नागभीड़ नैरो गेज रेल लाइन स्वतंत्रता के समय से चला करती थी । पीयूष जी को मैं धन्यवाद भी देता हूं कि पाँच साल घूमने के बाद उन्होंने उसे पिछली लोक सभा में मंजूर भी कराया था, लेकिन आज उसके ऊपर जो काम हो रहा है, यह तो राज्य सरकार, केन्द्र सरकार और रेल मंत्रालय, केन्द्र सरकार के ज्वायंट वेन्चर का काम है । जो स्पीड उसमें आनी चाहिए, वह नहीं है । उसमें कॉन्ट्रैक्टर्स को तो एक साल का समय दिया गया है, लेकिन इस एक साल का समय तो कोरोना में ही चला गया । लेकिन, उसके बाद उसमें जो भी दिक्कतें आ रही हैं, अगर आपने उसमें व्यक्तिगत स्तर पर रेलवे बोर्ड में एकाध मीटिंग की तो मुझे लगता है कि वह काम एक्सपेडाइट हो पाएगा और नागपुर-नागभीड़ रेल लाइन का काम पूरा हो पाएगा, जिससे कि नागपुर से सीधा गढ़चिरौली, जो हमारा ट्राइबल एरिया है, उसको जोड़ा जा सकता है ।
महोदया, नागपुर से मुम्बई के लिए सेवाग्राम एक्सप्रेस चलती है । मेरा संसदीय क्षेत्र रामटेक भी नागपुर का ग्रामीण क्षेत्र होता है । माननीय मंत्री जी से मेरी मांग है कि अगर इस सेवाग्राम एक्सप्रेस को हमने रामटेक तक एक्सटेंड किया, अगर उसे हमने रामटेक से रोज चलाया तो जो कामठी-रामटेक-कन्हान का लोड है, जिसमें सारे लोगों को 60 किलोमीटर नागपुर आना होता है और फिर वहां से गाड़ी पकड़नी होती है तो मुम्बई जाने वालों को इस ट्रेन के कारण सुविधा हो जाएगी । अगर इस सेवाग्राम एक्सप्रेस का विस्तार वहां तक हुआ तो वहां का काम बहुत सुचारू रूप से चल पाएगा ।
उसी तरह, बुटीबोरी के एक ज्वलंत मुद्दे के बारे में बताना चाहता हूं । शायद इस विषय पर माननीय मंत्री महोदय जल्दी से कुछ आदेश भी दें । वहां पर रेलवे साइडिंग है । आपको मालूम है कि वहां बहुत बड़ा फाइव-स्टार इंडस्ट्रियल एरिया है । वहां की पॉपुलेशन आज डेढ़ से दो लाख हो चुकी है क्योंकि वहां बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज आ रही हैं । वहां की जो रेलवे साइडिंग है, वह आज की तारीख में गांव के अन्दर, शहर के अन्दर आ गई हैं । उसके बाजू में स्कूल है । वहां पर बड़े-बड़े ट्रक चलते हैं । वहां दो बार एक्सीडेंट्स भी हो चुके हैं । अगर रेलवे साइडिंग को आगे-पीछे कर सकते हैं तो उसके बारे में हमें सोचना चाहिए । उसी प्रकार, यहां पर बुटीबोरी में कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज देने की भी जरूरत है । हम सुपरफास्ट ट्रेन्स की स्टॉपेजेज नहीं मांगते हैं, लेकिन जो पैसेंजर ट्रेन्स हैं, जैसे जबलपुर-अमरावती सुपरफास्ट एक्सप्रेस है, गोंदिया-कोल्हापुर महाराष्ट्र एक्सप्रेस है, नागपुर-मुम्बई सेवाग्राम एक्सप्रेस है, हैदराबाद-निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस है, ऐसी जो ट्रेनें हैं, अगर इनकी वहां स्टॉपेजेज दी जाए तो वहां के लोगों को काफी सुविधा होगी ।
उसी तरह, अमरावती से मुम्बई एक ट्रेन चलती है । आप जानते हैं कि नागपुर से लेकर अगर हम नरखेड जाते हैं तो हमें 150 किलोमीटर जाना पड़ता है । अमरावती से मुम्बई तक जाने वाली जो ट्रेन है, अगर उसे नरखेड तक एक्सटेंड कर दें तो नागपुर जिले के सभी लोगों को नागपुर शहर आने के बजाए, 150 किलोमीटर दूर नागपुर आकर फिर ट्रेन पकड़ने का जो मामला होता है, वह रुक जाएगा और वहां के लोगों को काफी सुविधा होगी । इस विषय पर आप जरूर विचार करेंगे, ऐसी मैं प्रार्थना करता हूं ।
*m56 *श्री राहुल कस्वां (चुरू): मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को इन कठिन समय में बजट पेश करने पर हार्दिक बधाई देता हूं । बजट को इस तरह से प्रस्तुत किया गया जिससे भारत के आम आदमी को लाभ होने की संभावना है । आज इस विकट समय में देश को एक ऐसी योजना की आवश्यकता है जो व्यापक हो एवं देश के हर नागरिक को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करें । COVID ने हमें सिखाया है कि रेलवे का कार्य देश के लिए कितना महत्वपूर्ण हैं और किसी को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक है । रेलवे की आधारभूत संरचना का मजबूत होना देश की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने वाले तत्वों में से एक है ।
भारतीय रेलवे पूरे निम्न और उच्च मध्यम वर्गीय क्षेत्रीय के यातायात के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह भारत में प्रचलित यात्रा साधनों के बीच परिवहन का सबसे किफायती साधन है । 1853से भारत में मामूली शुरुआत के साथ,भारतीय रेलवे आज देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के मुख्य वाहन के रूप में उभरा है । भारतीय रेलवे एक श्रम गहन उद्योग है जिसमें 13.6लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं । भारतीय रेलवे भारत में सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है । रोजगार सृजन भारत में विकास योजना के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक रहा है । भारतीय रेलवे रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है ।
सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन में कई अनुकूल विशेषताएं हैं । यह सड़क की तुलना में छह गुना अधिक ऊर्जा कुशल और चार गुना अधिक किफायती है । रेल में पर्यावरणीय क्षति या क्षरण के मामले में सामाजिक लागत काफी कम है । यातायात के तुलनीय स्तरों के लिए सड़क की तुलना में रेल निर्माण लागत लगभग छह गुना कम है । यह एकमात्र प्रमुख परिवहन मोड है जो प्राथमिक ऊर्जा के किसी भी रूप का उपयोग करने में सक्षम है ।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे के लिए 1.10लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि की घोषणा की, जिसमें से 1.07 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए हैं । बजट 2021-22 को पेश करते हुए,सीतारमण ने कोरोनो वायरस लॉकडाउन के दौरान देश भर में आवश्यक सामानों के परिवहन के लिए रेलवे द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की सराहना की ।
भारतीय रेलवे ने भारत के लिए 2030 के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है । यह योजना 2030तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने की है,जो उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करके मेक इन इंडिया को सक्षम करने की रणनीति के मूल में है । यह उम्मीद की जा रही थी कि पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFCऔरWDFC) जून 2022तक चालू हो जाएंगे । निम्नलिखित अतिरिक्त पहल भी प्रस्तावित हैं । ईडीएफसी पर 263 किलोमीटर के सोननगर-गोमो खंड को इस साल ही पीपीपी मोड में लिया जाएगा । 274.3किमी के गोमो-दनकुनी खंड को भी शीघ्र ही लघु उत्तराधिकार में लिया जाएगा । वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे भविष्य में समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं -खड़गपुर से विजयवाड़ा तक ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर, भुसावल से खड़गपुर से दनकुनी और इटारसी से विजयवाड़ा तक नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का निर्माण करेगा । पहले चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की जाएगी ।
पिछले कुछ वर्षों में किए गए सुरक्षा उपायों के परिणाम सामने आए हैं । इस प्रयास को और मजबूत करने के लिए उच्च घनत्व नेटवर्क और अत्यधिक उपयोग किए गए नेटवर्क मार्गों को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन की गई स्वचालित ट्रेन टक्कर प्रणाली प्रदान की जाएगी जो मानव त्रुटि के कारण ट्रेन की मिलीभगत को समाप्त करती है । इसके अलावा COVID-19संक्रमण को ध्यान में रखते हुए उचित उच्च सुरक्षा और स्वच्छता होनी चाहिए और यह भी कि जिन स्थानों पर रेलवे प्रणाली का अभाव है, उन्हें पुनर्गठित किया जाना चाहिए और उचित बुनियादी ढांचे के साथ स्थापित किया जाना चाहिए ।
मेरे लोक सभा क्षेत्र में पिछले पांच सालों में रेलवे के क्षेत्र में अनेक बेहतरीन कार्य हुए हैं । सादुलपुर –हनुमानगढ़ खंड, रतनगढ़– सरदारशहर खंड व चुरू –जयपुर खंड के आमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण किया जा चुका हैं । साथ ही चुरू लोकसभा क्षेत्र से गुजरने वाले प्रत्येक रेल मार्ग को विद्युतीकृत किये जाने हेतु सरकार द्वारा 721करोड़ रूपये का प्रावधान किया और इसका कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा हैं । मुझे यह बताते हुए बहुत ही खुशी हो रही हैं कि रेवाड़ी से चुरू खंड पर विद्युतीकरण कार्य भी पूर्ण हो चूका हैं व सीआरएस का कार्य भी पूरा हो चुका हैं ।
इस बजट में चौकीदार विहीन सभी समपारों को समाप्त करने की घोषणा की गई है, जहां समपार नहीं है,वहां की स्थिति क्या होगी,यह एक विचारणीय प्रश्न है । बीकानेर-दिल्ली रेल लाइन का निर्माण 100वर्ष पूर्व किया गया था, उस समय मानवरहित/मानवसहित रेल समपार की मांग नहीं हुआ करती थी, इस रेल लाइन पर विशेष रूप से मेरे संसदीय क्षेत्र चूरू में इनका भारी अभाव है, 5से10 कि.मी.तक एक भी रेलवे क्रोसिंग नहीं है, जबकि अन्य क्षेत्र में प्रत्येक 1कि.मी.पर रेलवे क्रोसिंग है । इसके अभाव में सैकड़ों वर्षों के ग्रामीण रास्ते एक गाँव से दूसरे गांव व खेतों में जाने के रास्ते बन्द हो गए । भारी वाहनों की बात तो छोड़िये,किसान अपने खेतों में उंटगाड़ा तक नहीं ले जा पा रहा है, किसान अपना खेत छोड़ नहीं सकता,रेलवे क्रोसिंग के अभाव में खेत व गांवों में जा नहीं पा रहा है । जबरन उन्हें अनधिकृत रूप से रेललाइन को पार करना पड़ रहा है । हमेशा उनके जीवन को खतरा बना रहता है । लोहारू-रतनगढ,सादुलपुर-हनुमानगढ,सादुलपुर-झूम्पा,रतनगढ-सरदारशहर,रतनगढ-डेगाना खण्ड पर काफी ऐसे गांव है,जहां गांव का दूसरे गांव से व खेतों से सम्पर्क टूट गया है । यहां रेल अण्डर ब्रिज का निर्माण किया जाए । रेल अण्डर ब्रिज निर्माण के लिए रेल मंत्रालय को अपनी नीति को बदलना होगा । राज्य सरकारों के पास इनके निर्माण के लिए धन ही नहीं है व राज्य सरकार द्वारा अंडर ब्रिज हेतु बजट घोषणा के बाद भी जारी नहीं किया जा रहा हैं । इनका निर्माण रेलवे को करना चाहिए । मेरे क्षेत्र में यह एक विकट संकट पैदा हो गया है । जब तक इन मार्गों पर रेल अण्डर ब्रिज का निर्माण नहीं होगा तब तक रेलवे का सुरक्षा का विजन कैसे पूरा होगा । मेरा सरकार से अनुरोध है कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में RUBका निर्माण करवाया जाए । रेवाड़ी – सादुलपुर खंड पर KM No. 199/5-6 (गुगलवा,बेवड,भेन्सली), 204/6-7 (भोजाण -सरदारपुरा), 229/4-5 (लम्बोर –गगोर), NH 52 - जयपुरिया पट्टा, 257/4-5 (सिरसला हाल्ट स्टेशन), 302/1-2 (मोलीसर छोटा, सुरतपुरा,सेहला), 340/7-8 (राजलदेसर– रतनगढ़)सादुलपुर हनुमानगढ़ खंड पर 68/7-8 (नरहडीया मोहल्ला, सादुलपुर), 166/4-5 (पहाड़सर-ढढाल),154/4-5 (ढ़ीगारला), 115/1-2 (भादरा स्टेशन)हिसार सादुलपुर खंड पर 58/7-8 (NH 52 - लुटाना पूर्ण) आदि स्थानों पर RUBनिर्माण करवाया जावे ।
मेरे लोकसभा क्षेत्र के आमजन द्वारा पिछले काफी समय से रतनगढ-फतेहपुर,सरदारशहर-हनुमानगढ़,गजसिंहपुर-सरदारशहर-तारानगर-राजगढ,सीकर- नोखा मार्गों पर नई रेल लाइन डाले जाने हेतु मांग की जा रही हैं । पूर्व बजट में इन मार्गों के सर्वे किये जाने हेतु काफी बार घोषणा भी की गई है, लेकिन हर बार नेगेटिव RORबताकर इन मार्गों पर लाइन डाले जाने से रेलवे द्वारा मना कर दिया जाता हैं । मेरा सरकार से अनुरोध है कि उक्त सभी मार्ग क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए अत्यंत ही आवश्यक हैं । ये मार्ग आर्थिक व सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक हैं । मेरा अनुरोध है कि सरकार द्वारा ऐसे मार्गों को यात्री सुविधा के विस्तार को देखते हुए नेगेटिवROR की स्थिति में भी लाइन डाले जाने का कार्य किया जाए ताकि यात्रियों को सुविधा मिल सके । इसी प्रकार मैं सरकार से अनुरोध करता हूँ कि जिस तरह से दिल्ली को बीकानेर व चुरू से जोड़ने वाली सभी गाड़ियाँ रेवाड़ी होकर आती हैं इस मार्ग पर अत्यधिक ट्रैफिक होने की वजह से नई गाड़ियों के संचालन में सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं । मेरा इस मामले में सुझाव है कि चुरू से फरुखनगर तक वाया पिलानी लोहारु होते हुए यदि नई रेल लाइन डाली जाती है तो यह एक alternate रूट के तौर पर विकसित होगा व दिल्ली के लिए गाड़ियां चलाने में सुविधा होगी । अतः इस मार्ग का सर्वे भी करवाया जाए । इसी प्रकार हिसार – भादरा नई रेल के लिए सर्वे किया जाए, सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।
इसके साथ-साथ रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण के तहत भी बजट का आवंटन किया जाए और catagory B वC श्रेणी के स्टेशनों पर भी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए । मेरे लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला सुजानगढ़ स्टेशन एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेशन है,देश भर से यात्री सालासर बालाजी के दर्शन करने हेतु यहाँ आते हैं । सालासर धार्मिक आस्था का एक बहुत ही मुख्य केंद्र है और हर वर्ष लाखों की तादाद में यात्री यहाँ पहुँचते हैं । सुजानगढ़ स्टेशन काफी पुराना है व स्टेशन काफी नीचा भी हो गया है । मेरा सरकार से अनुरोध हैं कि सालासर बालाजी जैसे महत्वपूर्ण स्थान को देखते हुए सुजानगढ़ स्टेशन का पूर्ण निर्माण फिर से करते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए । इसके साथ-साथ मेरे लोकसभा क्षेत्र पड़िहारा,छापर और नोहर स्टेशन भी क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्टेशन हैं लेकिन इनकी ऊंचाई अभी भी मीटरगेज के अनुसार ही छोटी हैं, अतः नवीनीकरण कार्यक्रम के तहत इन स्टेशनों को लेते हुए इनकी ऊंचाई उठाने का कार्य किया जाए । पिछले काफी से मेरे लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों द्वारा मांग की जा रही हैं कि category B वC श्रेणी के स्टेशन पर भी रेल कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाया जाए । मेरा सरकार से अनुरोध है कि मेरे लोकसभा क्षेत्र के चुरू, सादुलपुर,रतनगढ़,सुजानगढ़,नोहर व भादरा में रेल कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाये जाए ।
मेरे लोकसभा क्षेत्र में नियमित रूप से अनेक गाड़ियों का संचालन किया जा रहा हैं । यात्री सुविधाओं को देखते हुए कुछ गाड़ियों को चलाया जाना क्षेत्र के लिए अत्यंत ही आवश्यक है । जोधपुर-दिल्ली सराय रोहिल्ला वाया रतनगढ़ गाड़ी सं. 22481/82 का विस्तार हरिद्वार तक किया जाए । जैसलमेर-हावड़ा,बान्द्रा-जम्मू तवी वाया रतनगढ, विवेक एक्सप्रेस,बान्द्रा-हिसार साप्ताहिक गाड़ियों को सप्ताह में तीन-तीन दिन किया जाए । बीकानेर हरिद्वार वाया रतनगढ गाड़ी का संचालन किया जाए ।
सादुलपुर हनुमानगढ़ खंड का कार्य पूर्ण हुए चार वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक इस मार्ग पर एक्सप्रेस गाड़ियों का बहुत ही कम संचालन किया जा रहा है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि हनुमानगढ़ से दिल्ली, श्रीगंगानगर से जयपुर, श्रीगंगानगर से जोधपुर व श्रीगंगानगर से बीकानेर तक इंटरसिटी गाड़ियों का संचालन किया जाए ताकि क्षेत्र के यात्रियों को फायदा मिल सकें ।
अंत में मैं माननीय वित्त मंत्री जी व माननीय प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ और क्षेत्र की जनता की तरफ से आभार व्यक्त करता हूँ ।
*m57 *श्री पी. पी. चौधरी (पाली): कोविड महामारी के दौरान रेलवे द्वारा किये गए प्रयासों को भूलाया नहीं जा सकता । रेल द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों से मजदूरों को अपने घरों तक पहुचाने के साथ-साथ किसानों की उपज को देशभर में पहुचाने के लिए स्पेशल रेल/किसान रेलों का संचालन किया गया ।
मैं सदन को बताना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व रेलवे ने अपने इन्टरनल रिसोर्स के माध्यम से राजस्व खर्चों को कम करने के साथ-साथ पूंजीगत खर्चों को बढ़ाने का कार्य किया है । इस वर्ष रेलवे के लिए आवंटित बजट में पूंजीगत व्यय के पिछले वर्ष के मुकाबले 53 प्रतिशत अधिक है । कोविड के समय रेलवे घाटे में तालमेल के लिए लगभग 80 हजार कराड़ का लोन रेलवे द्वारा लेकर रेलवे में विकास की रफ्तार को बरकरार रखा गया । बीते वर्ष ने रेल मंत्रालय द्वारा जारी आई.पी.ओ.में भी आमजन की अति रूची देखने को मिली ।
अब रेलवे में दूरगामी परिणामों को देखते हुए रेलवे प्लान-2030 बनाया गया है । वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बजट में आमदनी में 10 प्रतिशत बढ़ौत्तरी का आकलन किया गया है ।
अनुदान की मांगों पर चर्चा के साथ-साथ मै संसदीय क्षेत्र पाली के रेल मंत्रालय से सम्बन्धित प्रमुख मांगों के बारे में भी सदन के माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूगां ।
कन्टेनर डिपो व मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क मैं सरकार का ध्यान मारवाड़ जंक्शन की ओर आकर्षित करते हुए बताना चाहूंगा कि उक्त स्टेशन पर कन्टेनर डिपो व मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने की अपार सम्भावनाए है । पश्चिमी राजस्थान में डी.एफ.सी. परियोजना के लिए मारवाड़ जंक्शन अहम भूमिका निभा सकता है । उक्त स्टेशन से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 162 की दूरी मात्र 10 किमी है । राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 162 दिल्ली से अहमदाबाद के रास्ते मुम्बई को जाता है । इस राजमार्ग के माध्यम से पाली सहित जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, बाड़मेर जिलों से सड़क व रेल द्वारा माल वाहन/कन्टेनर आसानी से मारवाड़ जंक्शन पहुंच सकते हैं । पश्चिमी राजस्थान के पाली, जोधपुर, राजसमन्द, बाड़मेर व अजमेर (किशनगढ़) जिलों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में खनिज, पी.ओ.एल., उर्वरक, नमक, सीमेन्ट, कोयला, लोहा, स्टील, मेंहदी, कपड़ा और खाद्यान्न पदार्थों का टांसपोर्ट किया जाता है । सर्व विदित है कि जोधपुर से बहुत अधिक मात्रा में हैण्डीक्राफ्ट का निर्यात होता है, जो कि लगभग 5000 करोड़ प्रतिवर्ष से अधिक है । इसके अतिरिक्त पश्चिमी राजस्थान में दर्जनों सीमेन्ट फेक्ट्रियों के साथ-साथ यहाँ के किसानों को भी कन्टेनर डिपो व लॉजीस्टिक पार्क स्थापित होने से फायदा मिल सकेगा ।
मैं सरकार को यह भी बताना चाहूंगा कि मारवाड़ जंक्शन के निकट हजारों एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध है जिसे बिना अवाप्त किये कन्टेनर डिपो व मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने हेतु आवंटन कराया जा सकता है । मुझे पूर्ण विश्वास है यदि मारवाड़ जंक्श्न पर कन्टेनर डिपो व मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित किये जाते हैं, तो रेलवे के साथ-साथ यहां के उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा ।
वर्तमान में पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजना अन्तर्गत महाराष्ट्र में दो, गुजराज में तीन व राजस्थान में मात्र एक ही लॉजिस्टिक पार्क प्रस्तावित है,जबकि परियोजना की दृष्टि एवं राजस्थान की भौगोलिक स्थिती दोनों के अनुसार ही क्षेत्रफल में राजस्थान सबसे बड़ा है ।
अतः मेरा अनुरोध है कि पश्चिमी राजस्थान के विकास के लिए पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजना के अतन्तर्गत मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर कन्टेनर डिपो व मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करनकी कृपा करें ।
जयपुर-जोधुपर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-25 पर ग्राम भावी में प्रस्तावित रेलवे अण्डर ब्रिज को डबल लेन व शैड से कवर युक्त बनाने हेतु मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करते हुए बताना चाहूगां कि पाली लोकसभा क्षेत्र से होकर गुजरने जयपुर-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-25 पर ग्राम-भावी में रेलवे अण्डर ब्रिज बनना प्रस्तावित है । जनहित में उक्त रेलवे ब्रिज को सिंगल के स्थान पर डबल लेन (आने व जाने के लिए अलग-अलग) बनाया जाना व शैड से कवर करना उचित होगा ।
भावी ग्राम के लगभग सभी निवासियों के खेत रेल लाईन के दूसरी ओर होने से अधिकांश टेक्टर व खेती में काम आने वाली मशीनों एवं वाहनों को रेल लाईन के नीचे से प्रस्तावित अण्डर पास से गुजरना होगा । ट्रेक्टरों मे फसल एवं घास आदी भरी होने की स्थिती में आमने-सामने आ जाने पर काफी कठिनाई एवं ट्रेफिक जाम का सामना करना पड़ेगा ।
इसके अतिरिक्त यहाँ बने अधिकांश अण्डर ब्रिजों में वर्षा के समय जलभराव की स्थिती उत्पन्न हो जाती है । भावी ग्राम में भू-जल स्तर ऊपर होने से ऐसी स्थिती बनी ही रहेगी । इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रस्तावित अण्डर पास को शैड़ लगाकर कवर करना आवश्यक है ।
अन्त में मेरा माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि जयपुर-जोधुपर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-25 पर ग्राम भावी में प्रस्तावित रेलवे अण्डर ब्रिज को डबल लेन व शैड से कवर युक्त बनाने सम्बन्धी निर्देश अधिकारियों को देने की कृपा करें ।
जंवाई बांध स्टेशन पर रैक पॉइन्ट स्वीकृत करने हेतु मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करते हुए बताना चाहूगां कि मेरे संसदीय क्षेत्र पाली के प्रमुख स्टेशनों में से एक जंवाई बांध स्टेशन है । सुमेरपुर शहर की आबादी 50000 से अधिक है व सटे हुए शिवगंज शहर की आबादी 35000 से अधिक है और अगर आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की भी बात करे तो जंवाई बांध स्टेशन के आस-पास के क्षेत्र में लगभग 4 लाख लोग निवास करते हैं ।
सुमेरपुर में आस-पास के क्षेत्र की सबसे बड़ी कृषि मंडी है और लगभग सभी फर्टीलाईजर निर्माताओं के डीलर व नियंत्रण कार्यालय भी सुमेरपुर में है । जंवाई बांध के कमाण्ड ऐरिये में प्रतिवर्ष25-50 खादों की रैक मालगाड़ी की आपूर्ति सड़क परिवहन के माध्यम से की जाती है । सुमेरपुर में रैक नहीं होने के कारण यहाँ खाद व अन्य सामग्री के लिए प्रतिदिन सैकड़ों ट्रको का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्रदूषण और यातायात बढ़ने से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
वर्तमान में रैकों के लिए जंवाई बांध स्टेशन के रेलवे फाटक से फालना की ओर जाने वाले मार्ग पर 2 रेलवे पटरियां स्थाई रूप से बिछी हई है, जिनके साथ प्लेटफार्म बनाकर रैक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है ।
अतः मेरा अनुरोध है कि पाली संसदीय क्षेत्र जंवाई बांध स्टेशन पर रैक पॉइन्ट स्वीकृत करने की कृपा करें ।
ट्रेन सुविधाओं के विस्तार के सम्बन्ध में मैं सरकार का ध्यान मेरे लोकसभा क्षेत्र पाली ही नहीं बल्कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही, नागौर व अन्य जिलों के रहने वाले प्रवासियों की रेल यात्रा की समस्या की और आकर्षित करते हुए बताना चाहूगां कि इन जिलों के लगभग20 लाख से अधिक लोग शिक्षा, व्यापार, नौकरी आदि के लिए सूरत, बैंगलोर, मुम्बई, पूणे, चैन्नई व हैदराबाद जैसे शहरों में रहते हैं । इन लोगों को समय-समय पर अपने घर आना-जाना होता है,जिसके लिए रेल यात्रा ही एक मात्रा उप्युक्त साधन है,लेकिन पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर शहर से इन स्थानों के लिए पर्याप्त रेल सुविधा नहीं है, केवल साप्ताहिक या सप्ताह में दो बार ही रेल इन शहरों से आने-जाने के लिए उपलब्ध है । उक्त ट्रेनों की वेटिंग लिस्ट काफी लम्बी है, दो से तीन महीने बाद का भी टिकट लेने पर वेटिंग ही मिलती है । इस कारण से लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामाना करना पड़ता है ।
अतः माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन है कि इन गणतव्य स्थानों पर आने-जाने की रेल सुविधा के बारे में अध्ययन करवाते हए सम्बन्धित ट्रेनों के फेरे प्रतिदिन के लिए निर्धारित करने का फैसला इस बजट सत्र में करने की कृपा करावें ।
इसी के साथ रेल मंत्रालय के लिए प्रस्तुत मांगों का मैं समर्थन करता हूँ ।
धन्यवाद ।
*m58 श्रीमती रंजनबेन भट्ट (वडोदरा): आदरणीय सभापति महोदया, मैं आपका धन्यवाद करती हूं कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में रेल मंत्रालय के लिए हुई घोषणाओं पर आपने मुझे अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया ।
महोदया, मैं यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के प्रति इस अवसर-प्राप्ति के लिए आभार प्रकट करती हूं । भारतीय रेल देश के विकास के इंजन के रूप में सेवारत है ।
भारतीय रेलवे को राष्ट्र की जीवन रेखा भी कहा जाता है । यह पूरे देश को जोड़ती एक अति विश्वसनीय और सरल-सम्पर्क व्यवस्था है ।
माननीय सभापति जी,मैं अपने संसदीय क्षेत्र के रेलवे विभाग में हुए प्रमुख विकास कार्य की बात भी करना चाहूँगी । मुझे यह बताते हुए गौरव हो रहा है कि मेरे संसदीय क्षेत्र वड़ोदरा के मुख्य स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक- एक को सौर ऊर्जा से संचालित किया गया है ।
माननीय सभापति जी,मैं देश के रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी की आभारी हूँ । हमारे वड़ोदरा स्टेशन को देश के मॉडल रेलवे की सूची में शामिल किया गया है । 17.50करोड़ रुपये की आवंटित धनराशि से हमारे वड़ोदरा का मुख्य रेलवे स्टेशन आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में उसका निर्माण कार्य पूरा हो गया है । इसका इनॉगरेशन करने के लिए भी मैं माननीय मंत्री जी को आमंत्रित करती हूँ । वड़ोदरा देश का48वाँ ऐसा रेलवे स्टेशन है,जहाँ फ्री वाई-फाई इंटरनेट सेवा प्रदान की गई है ।
माननीय सभापति जी,देश में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति कोटि-कोटि आभार प्रकट करती हूँ कि आपने देश की सर्वप्रथम रेलवे यूनिवर्सिटी को हमारे वड़ोदरा लोक सभा में स्थापित और विकसित करने का निर्णय किया । देश की सर्वप्रथम रेलवे यूनिवर्सिटी के आने से वड़ोदरा के शिक्षा नगरी के परिचय में प्रचुर मूल्य वृद्धि हुई है ।
सभापति जी, देशभर के नवनियुक्त रेलवे अधिकारी को अपनी परिवीक्षा काल में प्रशिक्षण तालिम हेतु वड़ोदरा के नेशनल अकादमी ऑफ रेलवे में आना और रहना आवश्यक हो जाता है । पिछले 69 वर्षों से कार्यरत देश की एकमात्र अकादमी यानी नेशनल अकादमी ऑफ इंडियन रेलवे के नवनियुक्त अधिकारी को व्यावसायिक यात्रा का प्रथम पड़ाव वड़ोदरा में करना पड़ता है । इस वक्त इस भव्य संकुल में वर्ष 2017में देश का सर्वप्रथम नेशनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट प्रारंभ हुआ । इस एनआरटीआई शिक्षा भवन का उद्घाटन आदरणीय रेलवे मंत्री पीयूष गोयल जी, गुजरात राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी के कर-कमलों से हुआ था । इस एनआरआईटी में देशभर से आए विद्यार्थी वड़ोदरा की अति प्रतिष्ठित महाराजा साहूजी विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त रूप से बीबीए इन-ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट और बीटेक इन-ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं । देश के भविष्य के लिए ट्रांसपोर्ट प्रोफेशनल का निर्माण हो रहा है ।
सभापति जी, वड़ोदरा लोक सभा सांसद के तौर पर मुझे सदन को बताते हुए अपार गौरव हो रहा है कि देश की सर्वप्रथम बुलेट ट्रेन जो अहमदाबाद-मुम्बई के बीच सेवारत होने वाली है,जिसका प्रमुख स्टॉपेज वड़ोदरा भी है । बुलेट ट्रेन परिचालन के लिए वड़ोदरा को देश का एकमात्र हाईस्पीड ट्रेन का तालिम केन्द्र प्राप्त हुआ है, जहाँ से 3000 से अधिक कर्मयोगी तकनीकी प्रशिक्षण हेतु वड़ोदरा आएंगे ।
सभापति जी, वड़ोदरा की भव्य भूमि हमारे जन प्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कर्मभूमि है । लगभग एक दशक से भी अधिक समय के बाद वड़ोदरा से दूसरे राज्य के लिए एक नई ट्रेन महामना ट्रेन दी गई है । सुसंयोग है कि यह नई ट्रेन आदरणीय प्रधानमंत्री जी की कर्मभूमि को उनकी सेवाभूमि से जोड़ती है । वड़ोदरा से आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सेवा क्षेत्र वाराणसी को जोड़ती देश की दूसरी महामना ट्रेन वड़ोदरा से सेवारत है । इस ट्रेन का लोकार्पण वाराणसी से आदरणीय प्रधानमंत्री के वरदहस्त से हुआ । इसका लोकार्पण आदरणीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और गुजरात के आदरणीय उप-मुख्यमंत्री श्री नितिन भाई पटेल की गरीमामयी उपस्थिति में हुआ ।
सभापति जी, नववर्ष के बाद वड़ोदरा से अहमदाबाद तक दैनिक संकल्प ट्रेन वड़ोदरा को प्राप्त हुई । इसके अलावा, वड़ोदरा से भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवी सबसे लंबी नदी रेवा जो नर्मदा के नाम से प्रसिद्ध है,जैसे वड़ोदरा से मध्य प्रदेश के रीवा तक की साप्ताहिक महामना ट्रेन सेवा का प्रारंभ भी वड़ोदरा से हुआ है । इन सभी यात्री सुविधाओं के लिए मैं रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के प्रति आभार प्रकट करती हूँ ।
सभापति जी, मेरी माँग को ध्यान में रखते हुए माननीय रेल मंत्री के द्वारा मेरे संसदीय लोक सभा क्षेत्र वड़ोदरा के छायापुरी रेलवे स्टेशन को सेटेलाइट रेलवे स्टेशन की स्वीकृति दी जाए । इसकालोकार्पणवर्ष 2019 में तत्कालीनरेलराज्यमंत्रीस्वर्गीयसुरेशअंगडीजीकेवरदहस्तसेकियागयाथा ।
इसके साथ ही, मैंने एक दूसरी मांग भी माननीय मंत्री जी के समक्ष रखी थी । उसको ध्यान में रखते हुए माननीय मंत्री जी के द्वारा मेरे संसदीय मत क्षेत्र वड़ोदरा लोक सभा, प्रतापनगर रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट रेलवे स्टेशन के लिए भी मंत्री जी ने स्वीकृति दी है । इसका निर्माण कार्य प्रगति पर है । इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी का विशेष आभार प्रकट करती हूं । मैं आपको बताना चाहती हूं कि कोरोना वैश्विक महामारी के लॉकडाउन के समय में मेरे संसदीय क्षेत्र वड़ोदरा की रेलवे के द्वारा 52 स्पेशल श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया गया । इसके तहत 61,963 यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग और सभी प्रकार की सुरक्षा के साथ उनके वतन पहुंचाने का भागीरथ कार्य किया गया था । पूरे गुजरात के लिए 562 श्रमिक ट्रेनों का संचालन केंद्र सरकार की ओर से किया गया । करीब 8 लाख 8 हजार से भी ज्यादा श्रमिकों को उनके राज्य, उनके गांव में पहुंचाने का काम हमारी गुजरात सरकार ने किया । भोजन, पानी और सभी व्यवस्थायें हमारी गुजरात सरकार ने की । मैं प्रधान मंत्री जी, सम्पूर्ण रेलवे विभाग और रेलवे के अधिकारियों का, मेरे संसदीय मत क्षेत्र वड़ोदरा की जनता की ओर से हृदयपूर्वक आभार प्रकट करती हूं ।
अभी हाल ही में आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा केवड़िया रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया गया, जो देश के अनेक राज्यों और अन्य देश के पर्यटकों के मुलाकात हेतु आकर्षित कर रहे “स्टेच्यु ऑफ यूनिटी” के पर्यटकों की सुविधा में बढ़ोत्तरी कर रहा है । “स्टेच्यु ऑफ यूनिटी” की मुलाकात हेतु आ रहे पर्यटकों की सुविधा हेतु रेलवे के द्वारा 6 राज्यों में 7 ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया है । इसमें वाराणसी से केवड़िया के लिए महामना एक्सप्रेस, दादर से केवड़िया के लिए दादर-केवड़िया एक्सप्रेस, अहमदाबाद-केवड़िया जनशताब्दी एक्सप्रेस, निजामुद्दीन-केवड़िया संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, केवड़िया-रेवा एक्सप्रेस, चेन्नई-केवड़िया एक्सप्रेस, प्रतापनगर-केवड़िया मेमू ट्रेन्स शामिल हैं ।
आदरणीय सभापति जी, इन विकास कार्यों को केंद्र में रखते हुए यह आम बजट जनआंकाक्षाओं को परिपूर्ण करने वाला सर्वजन हितैषी और सर्वसमावेशी बजट है । अर्थव्यवस्था को नयी गति प्रदान करने वाले संतुलित, प्रगतिशील और पारदर्शी बजट देने के लिए मैं आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी और केंद्र की वर्तमान सरकार का कोटि-कोटि अभिनंदन करते हुए इस आम बजट और रेल बजट, 2021 का पूर्ण रूप से समर्थन करती हूं, धन्यवाद ।
*m59 SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): While discussing the demands for grants for Railways, we all feel some kind of delicacy about it. The unprecedented COVID-19 pandemic has created a lot of obstacles in our ways. We all know that every sector is facing a kind of respiratory problem because of this COVID-19. Nobody can exactly say when this will end and when we can witness a ray of hope. Nobody can say that at this juncture but we have to face the reality. Of course, we all are proud of you. With over 67,580 route kms, ours is the third largest network in the world. In addition, Indian Railways is the world’s largest passenger carrier and fourth largest freight carrier. It is a safe, efficient, and competitive means of transport. Now there are technological advances in Indian Railways. The question before us is how to save Indian Railways from the economic crisis. Ninety per cent of the total revenue is from the budgetary means only.
The expenditure also is rising on one side. So, it is a difficult situation. What we are doing now is damage repair and crisis management. Expenditure on fuel and electricity is also increasing. There are only two ways before us. One is to reduce the expenditure and the other is to develop non-budgetary revenues. With regard to reduction of expenditure, newspapers are reporting that we are going ahead with some moves like freezing new appointments, closure of uneconomic routes, reduction in the manpower, and various other expenditure control methods. We understand the compelling situation of the Government. But while implementing cost-reduction measures we have to be very careful and understand the ground reality.
Coming to generation of non-budgetary income, we can utilise the unutilised land which is in the possession of the Railways. There was a proposal to make this kind of unutilised property for some kind of internal revenue generation.
With regard to Kerala, even before COVID-19 we had problems like floods, etc. Kerala is very backward. We all know that. On the railways side also we were neglected like anything. In my Constituency, Thirunavaya-Guruvayoor railway route and Nanjangud railway line, all these things are long pending. I humbly request the Minister, to take care of these things when we are rebuilding the railways. Similarly, MEMU in Trivandrum-Palakkad Division also may kindly be developed.
One thing I would like to say. Of course, we understand the problem. It is our problem also; the Minister alone cannot solve it. But one thing we have to realise. This privatisation process in the Railways is very dangerous. You are doing this privatization without any limits. Railways is the property of the nation. It is very valuable and very precious. If you blindly hand over this to the private sector, it is very dangerous.
Indian Railways has launched the process of opening up the train operations to private entities on 109 destinations. It has invited tenders, etc., for that. The Railway Board has moved ahead with its long pending plan, setting a tentative schedule for privatisation. Hon. Minister also said that trains like Tejas are also going to be handed over to the private sector. I would like to say that the Minister and the Government should think well and this kind of tendencies should be curbed. We should not do like that. National property is our own property. If you handover everything to the private sector, it would be really a threat for the nation. So, I humbly request the Government to desist from this kind of things. We have to understand the realities.
We are prepared to cooperate with the Government for rebuilding the Railways. We are bound to cooperate with the Government. Instead of criticising the Government, we are prepared to play a constructive role in this. However, the Government should keep our own property and should not hand over this property to private sector like this.
With these words, Madam, I conclude. Thank you very much.
*m60 श्री जुगल किशोर शर्मा (जम्मू): सभापति महोदया, मैं सबसे पहले केन्द्र सरकार का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि इन्होंने पहली बार रेल मंत्रालय को ऐसा बजट दिया है जो आज तक नहीं दिया गया । सबसे पहले मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिनके नेतृत्व में श्री पीयूष गोयल जी ने सभी प्रमुख बातों का ध्यान रखते हुए रेल बजट सदन के समक्ष प्रस्तुत किया है । बजट सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है । लॉकडाउन के दौरान भी रेल चलते रहा और इसकी भूमिका बहुत ही सराहनीय रही है । इसकी सराहना देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी की गई है कि भारतीय रेल ने कोरोना के समय और विशेषकर लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों को घरों तक पहुंचाया है । यह बहुत बड़ी बात है । उस समय यह काम करना बड़ी हिम्मत की बात थी ।
महोदया, पिछले पांच वर्षों में रेल बजट से रेल की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है । देश को इसका भरपूर लाभ प्राप्त हो रहा है । देश के हर नागरिक को रेल की सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं । रेलवे में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी भी हो रही है । रेल पथों का विस्तार हो रहा है । कोरोना की वजह से बहुत सी रेल सेवाएं रोकी गई थीं, अब लोगों की डिमांड है कि इसे शुरू किया जाए जिससे लोगों को होने वाली असुविधाओं से निजात मिले ।
महोदया, पिछले पांच वर्षों में कुछ खास बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे यात्री किराए में बढ़ोत्तरी न होना, ट्रेन में साफ-सफाई की ओर ज्यादा ध्यान देना । खान-पान अच्छा हो, इसके लिए हैल्पलाइन नंबर दिए गए हैं । नए प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं । स्टेशनों का पुनर्विकास इसमें सम्मिलित है । मुझे लगता है कि इस बार का बजट ऐतिहासिक है । इस बजट से जो पूंजी प्राप्त होगी, उससे जम्मू-कश्मीर का भी विकास होगा । यहां मेरे साथ मसूदी जी जम्मू-कश्मीर के बारे में कह रहे थे, शायद उन्होंने इसे पूरी तरह से पढ़ा नहीं है, हम जम्मू से कटरा और कटरा से बनिहाल के रास्ते बारामूला तक सफर वर्ष 2022 तक बड़ी आसानी से कर सकेंगे । देश और दुनिया के पर्यटक इस यात्रा का आनंद ले सकेंगे । जम्मू से कटरा और कटरा से बनिहाल तक रेल लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है । एक बड़ा और ऐतिहासिक पुल कम्पलीट होते ही बनिहाल के रास्ते श्रीनगर और बारामूला तक रेल पहुंच जाएगी । यह राशि अन्य कार्यों के लिए भी इस्तेमाल होगी, इसमें उन्नत रेल संपर्क, बेहतर यात्री सुविधाएं, एस्कलेटर, लिफ्ट, दिव्यांगजनों को सुविधाएं देना, वाईफाई, तीव्रतर रेल यात्रा द्वारा आम जनमानस को लाभान्वित करना शामिल है ।
रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य कई जगह चल रहा है, लेकिन विशेष तौर पर सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अच्छा काम किया जा रहा है । लोगों की सुविधाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सब साधन जुटाए जा रहे हैं । सुरक्षा बलों की तैनाती के अलावा सीसीटीवी कैमरे और नई तकनीक के तहत जो साधन जुटाए जाने चाहिए, उन सब पर विचार करते हुए रेल मंत्रालय माननीय पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में काम कर रहा है ।
हमारे एक मित्र कह रहे थे कि ट्रेन समय से पहले पहुंचती है, इसमें कोई दो राय नहीं है । हम देखते हैं कि जम्मू से दिल्ली आना हो या जाना हो, बीच में स्टेशन पर समय से चलना होता है लेकिन अंतिम स्टेशन पर ट्रेन जल्दी पहुंचती है ।
महोदया, जम्मू स्टेशन का नवीनीकरण हो रहा है । …(व्यवधान)
18.00hrs माननीय सभापति : जुगल किशोर शर्मा जी, एक मिनट रूकिए ।
अभी बहुत सारे माननीय सदस्यगण इस विषय पर बोलना चाहते हैं, यदि सभा की सहमति हो, तो सभा की कार्यवाही 8 बजे तक बढ़ा दी जाए ।
अनेक माननीय सदस्य: मैडम, जी हां ।
माननीय सभापति : ठीक है । जुगल किशोर शर्मा जी, आप बोलिए ।
श्री जुगल किशोर शर्मा : महोदया, मैं कह रहा था कि जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र सरकार ने और रेल मंत्रालय ने बहुत सारे अच्छे काम किए हैं और अभी भी कर रहे हैं । जम्मू रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण इसमें शामिल है । जम्मू रेलवे स्टेशन का एक और एंट्री गेट हो, उसके लिए भी काम चल रहा है । कोरोना के कारण वह थोड़ा मंद गति से आगे बढ़ रहा होगा, लेकिन आने वाले दिनों में वह भी तेज गति से आगे बढ़ेगा, ऐसा मेरा आग्रह भी रहेगा । जम्मू-पुंछ रेलवे लाइन का सर्वे कम्पलीट हो चुका है, यह भी अपने-आप में एक बहुत बड़ी बात है । मेरी मंत्रालय से प्रार्थना रहेगी कि आने वाले बजट में इसके लिए भी प्रावधान रखें कि जम्मू से पुंछ तक रेलवे लाइन बिछाई जाए, ताकि जम्मू से राजौरी के रास्ते होते हुए पुंछ तक जाने का सफर आसान हो जाए । जम्मू से कटरा और अब कटरा से श्रीनगर, जब यह काम कम्प्लीट हो जाएगा, तो मुझे लगता है कि देश और दुनिया के जो यात्री हैं, जब इस पहाड़ी क्षेत्र से होती हुई रेल बनिहाल के रास्ते श्रीनगर और बारामूला तक पहुंचेगा तो लोग उसका भी आनंद प्राप्त करेंगे । इससे टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा ।
18.01 hrs (Dr.(Prof.) Kirit Premjibhai Solanki in the Chair) सभापति महोदय, वंदे भारत जैसी ट्रेन जम्मू से कटरा के लिए दी गई है । वह एक बहुत ही कामयाब ट्रेन है । वह चेयर कार ट्रेन है । लोग आसानी से इस पर सफर करते हैं । यह ट्रेन सारी सुविधाओं से युक्त है । मैं भी अक्सर इसी ट्रेन से आता-जाता हूं । यह ट्रेन छ:, साढ़े छ: घटे में दिल्ली पहुंचा देती है । अब आपने देखा होगा कि यह ट्रेन कटरा तक जा रही है । देश के हर कोने से श्रद्धालु वैष्णो जी के दरबार में हाजिरी लगाने और उनके दर्शन करने के लिए आसानी से वहां पर पहुंच रहे हैं । श्री शक्ति और बाकी ट्रेनें तो हैं ही, लेकिन वंदे भारत ट्रेन का कुछ अलग ही आनंद है । जम्मू में नए प्लेटफॉर्म्स बनाए जा रहे हैं । मैं चाहता हूं कि जल्द से जल्द वे प्लेटफॉर्म्स कम्प्लीट हों । एंट्री गेट बनाने का जो काम है, उसको भी जल्द से जल्द पूरा जाए ।
इसके साथ ही रेल मंत्रालय का जो बजट पेश किया गया है, जिसकी अनुदान की मांगों पर यहां चर्चा हो रही हूं, मैं उसका समर्थन करता हूं । आपने मुझे समय दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m61 *SHRI B. Y. RAGHAVENDRA (SHIMOGA): Thanks for this opportunity to participate in the discussion on Demands for Grant on Railways for the year 2021-2022.
At the outset I express my whole hearted congratulations for the hon. Union Minister for Railways, Shri Piyush Goyalji, for his sincere efforts to make the Indian Railways a world class institution to provide the best service to its passengers. I would also like to congratulate our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modiji, for his valuable guidance and inspiration for overall development of Railways and also progress of the entire country.
Before I speak on Demands of Railways, I feel it is my duty to pay my tribute to late Shri Suresh Angadiji, who was my senior colleague and a kind hearted person. We all miss him a lot. He contributed a lot to the country and also to the Karnataka State as the Railway Minister. So, I pay my tribute to Suresh Angadiji for the exemplary work he has done as a Minister of State for Railways.
We always should appreciate the good works. Our NDA Government deserves credit for all these achievements. As far as Railways is concerned several important projects including the redevelopment of Railway stations, providing lift and escalators, cleanliness, e-ticketing facilities etc. are really commendable. Railway Department has put in great efforts to change the entire scenario of the Indian Railways. We all have seen these achievements.
Now I would like to say a few words on Railways with regard to the State of Karnataka. Let me quote the words of hon. Railway Minister Shri Piyush Goyalji who said : “Both Central and State Governments are seen working together as a team as far as Railways in Karnataka is concerned". This was said by Shri Piyush Goyal ji while launching key Railway projects via video conferencing last week. I am thankful to him for his appreciation of the works going on in Karnataka under the Leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi ji at the Centre and Shri B. S. Yediyurappaji as hon. Chief Minister of Karnataka.
The Budget for 2021-2022 has allocated Rs 3,897 crore, which is nearly five times what was being invested for projects in Karnataka prior to 2014.
All trains passing through Karnataka will only run-on electric traction by 2023 and sanctioning of sub-urban Railways to the Bengaluru. Railways in the last six years has electrified a track length of 792 km., which is 17 times more than the length of track electrified from 2009-2014.
About 70 new Road Over Bridges (RoBs) and 160 Road Under Bridges (RuBs) have been sanctioned in Karnataka since 2014. Above all these, Indian Railways plans to electrify the entire Railway network in Karnataka by 2023. I believe that the Railway projects are expected to prove a catalyst for the entire progress of Karnataka.
Now I would like to bring to the notice of the hon. Railway Minister a few demands of my Parliamentary constituency Shivamogga.
My district Shivamogga is a major district in the Malnad region. In the Union Budget of 2019-2020 the Shimoga Shikaripura-Ranibennura new line was announced. The Government of Karnataka has committed to share 50 per cent cost of construction of this new line and is providing land free of cost. In the Union Budget of 2021-2022, Rs. 100 crore were allotted for this project. Land acquisition is in advanced stage for the first phase of it and land will be handed over to the Railways very soon. It needs to be prioritized as it is a very significant Railway line in my constituency. So, I would request the hon. Minister for Railways to expedite the work to float the tender for this new Railway line at the earliest.
Another point that I would like to mention is with regard to Coaching Depot at Kotegangur in Shivamogga, which has been sanctioned in 2020-2021 Budget. The Government of Karnataka has already started the process of acquiring land for this project free of cost. Railways has already appointed the agency for commencing work of the Coaching Depot. However, the proposal of constructing a terminal Railway station, which is an essential part of the Coaching Depot is yet to be sanctioned by the Railway Board.
On 8th March 2021, Shri B. S. Yediyurappa, hon. Chief Minister of Karnataka has presented the 8th State Budget as Chief Minister of the State. In this Budget, the State has committed to provide Rs. 3,991 crore as State's share for seven ongoing new Railway projects, and in addition to this, Rs. 2,630 crore will be allocated for acquisition of land for these projects. Rs. 850 crores have been earmarked for the Bangalore Suburban Railway project, which is the project taken up jointly by the Ministry of Railways and the Government of Karnataka. Hence, I would humbly request the hon. Minister for Railways to take immediate necessary steps to sanction this work at the earliest.
Shivamogga District is situated in Malnad region, which is well known for its eco-tourism. The Government of Karnataka has come forward to develop the world-famous Jog Falls as an all-weather tourism destination. As the Talaguppa Railway station is the gateway to the world-famous Jog Falls, there is a need to provide better facilities at this Railway station to cater to the needs of both passengers and also from the tourists’ point of view. The cost for it is estimated to be Rs. 160 crore. Once the project is completed, the approximate tourists' footfall is anticipated around ten thousand at Jog Falls per day. This will be a major game changer for the economy of this region. So, I would request the hon. Railway Minister, Shri Piyush Goyal ji, to chalk out a comprehensive plan for redevelopment of the Talaguppa Railway station to attract tourists from around the world.
In the end, I once again would like to place my humble submission to hon. Railway Minister, Shri Piyush Goyal ji, to consider all the demands of my Parliamentary Constituency Shivamogga and take necessary steps to execute the Railway projects at the earliest.
With these words, I conclude my speech. Thank you.
*m62 *श्री कृष्णपालसिंह यादव (गुना): मेरा संसदीय क्षेत्र, रेलवे के दृष्टिकोण से बहुत पिछड़ा हुआ है । संसदीय क्षेत्र गुना के अंतर्गत मेरे गृह जिला अशोक नगर से अगर दिल्ली आना हो तो प्रतिदिन चलने वाली सुपर फास्ट कोई ट्रेन नहीं है । इसके लिए पहले भोपाल या बीना जाना पड़ता है । मेरे संसदीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु रेलवे का महत्वपूर्ण योगदान है । इसके लिए प्रमुख मांगे है:
सवाई माधोपुर-शिवपुरी-झाँसी रेलवे लाइन का दुबारा सर्वे कराकर इस कार्य को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए । मेरे संसदीय क्षेत्र मे जितने भी फाटक है वहाँ पर अण्डर ब्रिज या ओवर ब्रिज बनाया जाए । चंदेरी-पिपरई-ललितपुर रेलवे लाइन का पूर्व में प्राइमरी सर्वे कार्य पूरा हो चुका है लेकिन यहाँ भी अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है । चँदेरी के रास्ते पिपरई और ललितपुर को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर रेल लाइन पर बजट राशि जल्द से आवंटित कर कार्य को शुरू किया जाए । गुना से आरोन सिरोंज, गंजबासोदा (विदिशा) तक 120 किलोमीटर तक रेल लाइन डलवाकर रेल सुविधा प्रारम्भ किए जाने की मांग कई वर्षों से चल रही है । जिसका सर्वे रेल विभाग द्वारा 3-4 बार किया जा चुका है । इस रेलवे लाइन के कार्य को भी जल्द मंजूरी देकर कार्य को शुरू किया जाए । संसदीय क्षेत्र के अशोक नगर जिला मुख्यालय से सीधे दिल्ली आने के लिए कोई भी सुपर फास्ट ट्रेन नहीं है । कृपया अशोक नगर होते हुए दिल्ली के लिए एक सुपर फास्ट ट्रेन की शुरुआत किया जाए । गुना-बीना, गुना-भोपाल, बिना-अशोकनगर-गुना- ग्वालियर, इंदौर-बिना-भोपाल के लिए मेमो ट्रेन शुरू किया जाए ।
*m63 SHRI ANUBHAV MOHANTY (KENDRAPARA): Thank you, Sir. The total outlay for the Railways in the general Budget is Rs.1.10 lakh crore which is a record in itself. I appreciate from the bottom of my heart the hon. Minister Piyush Goyal ji and the hon. Finance Minister Shrimati Nirmala Sitharaman ji. The total capital expenditure outlay includes, highest ever, Rs. 1.07 lakh crore from gross budgetary support, Rs. 7,500 crore from internal resources and over Rs. one lakh crore from external budgetary resources. With a 33 per cent increase in total capital expenditure for 2021-22 over Rs.1.61 lakh crore, according to the revised estimates for 2020-21, the Railways funds will be utilised to boost AtmaNirbhar Bharat Mission and towards completion of vital infrastructure projects, capacity building, passenger amenities and safety enhancement which is a welcome step.
I believe, the difference in the way the nation used to see the railway connectivity before you came into power and now is huge. We believe, this difference will continue to grow. You will keep on taking good steps for the nation and people will be benefited from you.
Coming to the key announcements in the Budget for the Railways, a National Rail Plan for India – 2030 has been prepared for infrastructure development. Railways will monetise Dedicated Freight Corridor assets for operation and maintenance. High density network and highly utilized network routes will be provided with an indigenously developed automatic train protection system that eliminates train collision due to human error which is a wonderful step. It is because accidents are always accidents and you cannot save yourself when it is manually done. When it is automatically done with modern, latest technologies, maybe there are chances that we can save our passengers, save our people, save ourselves from different kinds of accidents and collisions.
The entire nation and this august House knows very well that my Party Biju Janata Dal, headed by hon. Shri Naveen Patnaik, has always supported whenever the Government, whichever Party is in power in the Centre, has taken up really good issues which are beneficial to the common man. We have also not left a single stone unturned to draw the attention of the hon. Minister or the Government towards any lacuna or loophole, which can be bettered, in anything that the Government proposes for the benefit of the people.
I would like to cite certain things which the Government must take care of. Railways have not been able to meet some key physical targets for expansion and modernisation in recent years. It has missed its Budget targets of all the three years between 2017-18 and 2019-20.
I now come to construction of new lines and gauge conversions. In 2018-19 and 2019-20 Railways also missed targets for electrification of railway lines. It is noteworthy that Railways aims to achieve hundred per cent electrification of all broad-gauge routes by 2023. As per the revised estimates for 2020-21, the achievement will be less than the Budget targets on almost all the indicators listed in the Table. I have the Table with me. If you wish, I can share it with the hon. Minister. I am very sure, as efficient Minister, he must be having all the data with him.
While examining the progress of the construction of new lines, the Standing Committee on Railways, 2020 - I was fortunate enough to be a part of it - had observed that downward revision in allocation towards capital expenditure requires reworking of priorities and rescheduling of activities which lead to tardy progress in the construction of new lines.
Over the last few years there has been a decline in the growth of both rail-based freight and passenger traffic. This affects railways earnings from its core business of running freight and passenger trains. In 2021-22 Railways estimates a decline in some of its key revenue earning traffic. For example, coal traffic is estimated to register an annual decrease of five per cent over 2019-2020. Overall freight traffic is estimated to have an annual increase of only one per cent over 2019-2020.
NITI Aayog, in 2018 had highlighted the shortfall in carrying capacity and lack of price competitiveness as some of the reasons for the decline in freight share. It further observed that since passenger and freight traffic trains run on the same tracks, India has not been able to increase speed or capacity in a significant manner. Although the speed and the capacity have increased but not to a significant size compared to global benchmark, which has been our target.
It has also noted that various dedicated freight corridors have been planned by Railways for bringing improvement in facilities for freight. The freight basket is also limited to a few commodities, most of which are bulk in nature. In 2019-20, coal contributed to about 48 per cent of freight revenue. Therefore, any shift in transfer patterns of any of these bulk commodities like coal, cement, iron ore, etc, could affect Railways finances significantly. This must be looked into.
Now, I come to the demands of Odisha. Hon. Piyush ji is very well aware of Odisha’s demands and requirements. He has been very cooperative with all of us, whenever we have met him. He has been very friendly and has always welcomed us as a brother. He has always taken care of the entire nation. I would like to draw his attention towards the demands of Odisha.
The rail density of Odisha, which is 15 km per 1000 sq. km, is much lower compared to the national average of 19 and that of the adjoining States of West Bengal, which is 43.4 and Jharkhand, which is 24.3.
We are not complaining as to why the adjoining States are having so much of rail density but we are concerned about our own State and our own people. We are representing them. We are committed to them to raise their voice and you are there to help us. We request your kind attention on this matter. Hence, there is an urgent need of expanding rail network in the State to bring the rail density to the level of the adjoining States. New lines and projects are being demanded by the State for important lines such as Puri-Konark, Bargarh-Nuapada, Chakulia-Budhamara, Jajpur-Aradi-Dhamra, etc. Now, I come to rail infrastructure. In order to expedite augmentation of rail infrastructure in the State of Odisha, the State Government has taken many initiatives such as formation of joint ventures/Special Purposes Vehicles (SPVs) jointly with the Railway Ministry and other Ministries to undertake new rail lines and corridors, directly financing construction besides offering land free of cost for the establishment of new railway projects. So, special attention needs to be paid on the successful completion of ongoing projects and also on the sanctioning of new lines with modernisation of stations. There should also be introduction of new trains with extension of existing trains and there should be improved passenger amenities in the trains as well as at the stations. There should be an establishment of rail-based industries in Odisha and multi-model logistics parks, etc. The Government of India must provide a backward and forward linkage for the industrial hinterlands of Dhamra, Paradeep and Gopalpur Ports with the Northern and Central hinterlands through a Dedicated Freight Corridor between Visakhapatnam and Kolkata through Odisha in the Union Budget. This is a special request from our side. I hope you will consider it and reply to it.
There has been a demand for redevelopment of Puri, Bhadrak, Brahmapur, Cuttack, Jajpur-Keonjhar Road, Khurda Road, Rayagada, Sambalpur, Balasore, Jharsuguda and Rourkela stations to international standards with superior passenger amenities. Unfortunately, there has been no statement by the Ministry in this regard.
In 2019, our hon. Chief Minister, Shri Naveen Patnaik had urged the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji for reorganisation of Railways in Odisha after the Centre created a separate zone for Andhra Pradesh. The Railway Ministry had announced the bifurcation of Bhubaneswar-headquartered East-Coast Railway to create South Coast Railway to be headquartered at Visakhapatnam. I remember we had visited the hon. Minister, Shri Piyush Goyal Ji then. Although we were assured that this was not going to happen but later it happened and Odisha was not taken into consideration. We were not even informed about it properly. He also sought the intervention of the hon. Prime Minister to declare two new Railway divisions at Rourkela and Jajpur to unify railways in Odisha under one administrative zonal headquarters of East Coast Railway, Bhubaneswar. He had been demanding the reorganisation of Railways in Odisha with three new divisions. Presently, about 70 per cent of Odisha is under East Coast Railway’s jurisdiction. An efficient and strong rail network with a single administrative structure within the State is necessary to maintain the impetus of growth.
I will finish my speech in a few minutes. There has been a demand for drafting Master Plans for the modernisation, expansion, and upgradation of Puri, Jajpur-Keonjhar Road, Bhadrak, Bolangir, Talcher, Baripada, Brahmapur, Meramandali, Bargarh, Belpahar, Rayagada, Athagarh, Angul, Jeypore, Koraput railway stations. That is very much needed. We are celebrating the 75th year of Independence and we are planning to celebrate it so lovingly and wonderfully. I must thank the hon. Prime Minister and all the hon. Chief Ministers of the entire nation for this. At this time also, there are still six districts in Odisha which have not seen railway connectivity till now. It is very shameful thing to know. This had been happening right from the time when the UPA Government was there. Things have started changing when the NDA Government has come into power. But, at the same time, I feel that if the kind of friendly approach and the kind of brotherly and affectionate approach which the Government is showing towards Odisha, would grow a little bit more and in a more expeditious way, then definitely and undoubtedly, those six districts, which have been ignored and deprived of the railway facilities, will start getting benefits out of it. There is a special demand for passenger train connecting Kendrapara, which is my constituency. During the election time also, Shri Piyush Ji had been there. He knows the people there very well. The people of Kendrapara are thankful to him. They are thankful to hon. Chief Minister, Shri Naveen Patnaik because during the last one and a half years, Kendrapara has seen freight cars.
But now, there has been a demand for passenger train. Kendrapara till now has not seen a passenger train and Kendrapara needs to connect with other districts of Odisha and also with other districts of India. The youth of Kendrapara do not want to migrate everywhere. They want to earn their livelihood there itself.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI ANUBHAV MOHANTY : It is their right. We must look into this matter and provide rail connectivity in a stronger and bigger way which is going to generate a lot of revenue for Kendrapara and for the State as well as the nation.
Sir, recently, a huge announcement has been made in Odisha. A big plant of Mittal group is going to come up. An MoU has been signed with the State Government and the people are very much excited and at the same time, if you announce the passenger train as early as possible, we will be obliged to you.
Shri Piyush Ji is not only handling one Ministry but also he is one-man army with so many Ministries and he is handling every Ministry very beautifully and very wonderfully. So, with the same hope, it is a special request to hon. Minister Piyush Ji and also to the hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji to ensure that a passenger train is provided for the people of Kendrapara as early as possible and all the demands that have been made by me and also by Shri Achyutananda Samanta Babu who is first speaker from our Party be fulfilled. Please consider these demands and Odisha will always remember if you really honour all the demands which are quite genuine at its place.
Thank you so much, Jai Jagannath, Bande Utkal Janani, Jai Hind.
*m64 श्री विजय कुमार हांसदाक (राजमहल): धन्यवाद, सभापति महोदय । पिछले कई वर्षों से इन्हीं सब डिमाण्ड्स के साथ मैं लगातार बात करता रहा हूं । मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि मेरा लोक सभा क्षेत्र राजमहल में पाकुड़-साहिबगंज जिला पड़ता है, मालदा और हावड़ा डिवीजन पड़ती है । यहां पर पत्थर, कोयला, चाइना क्ले, माइन्स एंड मिनरल्स की बहुत सारी गाड़ियां चलती हैं । लेकिन पैसेंजर्स ट्रेन के बारे में, मैं नई ट्रेन्स की डिमाण्ड नहीं कर रहा हूं, लेकिन जो पुरानी ट्रेन्स हैं, उनके स्टॉपेज मांग रहा हूं । कई वर्षों से लगातार मैं यह मांग करता आ रहा हूं, लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है,उसकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । रांची जाने के लिए हमारे पास जो वनांचल एक्सप्रेस है, वह आजकल फुल चल रही है, उसमें लोगों को सीट्स नहीं मिलती हैं । इसलिए रांची-कामाख्या एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाया जाना चाहिए । मालदा-जमालपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस का तालझारी स्टेशन पर ठहराव हो,इससे स्टूडेंट्स को बहुत फायदा होगा, क्योंकि वह ट्रेन सवेरे चलती है । हम लोग लगातार इसकी डिमाण्ड करते आ रहे हैं । पाकुड़ स्टेशन पर 1241 शताब्दी एक्सप्रेस, 12516 गुवाहाटी-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस, 12510 गुवाहाटी-बंगलुरू एक्सप्रेस, 12514 गुवाहाटी-सिकन्दराबाद एक्सप्रेस, 3046 सरायघाट एक्सप्रेस, 12378 पदातिक एक्सप्रेस आदि सारी ट्रेन्स ऐसे राज्यों को जोड़ती हैं कि कोई नई ट्रेन दिए जाने से वहां के हमारे पैसेंजर्स को बहुत फायदा होने की संभावना है । मैं इसके बारे में लगातार डिमाण्ड करता आ रहा हूं । कृपया मंत्री महोदय इस पर ध्यान दें । हमारे यहां एक सकरीगली स्टेशन है, जहां पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाने के लिए मैं लगातार चिट्ठी लिखता आ रहा हूं । वहां पर रेलवे लाइन से ठीक सटा हुआ बच्चों का स्कूल है और बच्चों को रेलवे लाइन क्रॉस करनी पड़ती है । हमने लगातार यह डिमाण्ड रखी है कि वहां पर एक फुटओवरब्रिज बनाया जाए, ताकि बच्चों को इतनी खतरनाक रेलवे लाइन क्रॉस करने की जरूरत न पड़े । हमारा माइन्स का एरिया है और ट्रांसपोर्टिंग बहुत होती है, वहां मिर्जाचौकी और बरहरवा, ये दो मेजर ऐसी जगहें हैं, जहां पर हमेशा जाम लगता रहता है और वहां पर आर.ओ.बी. की जरूरत है । इस ओर ध्यान देने की जरूरत है । साथ ही, बरहरवा में अभी आपका एफ.ओ.बी. बना है, वह एफ.ओ.बी. ऐसा बना है कि लोगों को बहुत घूमकर जाना पड़ता है । उसमें हमने यह डिमाण्ड रखी है कि उसके साथ सीढ़ी भी हो । यह हमारे यहां की लगातार आ रही डिमाण्ड है, इसलिए मैं चाहूंगा कि मंत्री महोदय इस पर ध्यान दें ।
इसके साथ ही साथ हमने एक सवाल प्रेजिडेंट स्पीच पर किया था, मुझे लगता है कि जिसका जवाब प्रधान मंत्री जी ने नहीं दिया । प्राइवेटाइजेशन का कार्य जिस गति से चल रहा है, उसके साथ जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा सवाल है । आप प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं, लेकिन उसमें जो जॉब्स का रिज़र्वेशन है, उस पर क्या इफेक्ट पड़ेगा? क्या सरकार का उस ओर ध्यान है और उस पर उनका क्या विचार है, वह भी मैं जानना चाहूंगा? आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m65 DR. R.K. RANJAN (INNER MANIPUR): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me this opportunity to participate in this discussion.
At the outset, I, on behalf of the people of Manipur, would like to express my gratitude and also my happiness to the Ministry of Railways for taking up the Jiribam – Imphal railway project on a faster pace now, After the completion of this project, the State will be properly visible in the railway map of the country. If I remember correctly, this project was initiated in the year 2003 during the first NDA regime at the Centre. However, the implementation of the project started only in the year 2008 as a national project with a cost of Rs. 13,809 crore for construction of a 111-kilometre railway line. We hope that the completion of this railway project and commissioning of this railway line with a majestic world’s tallest rail bridge will certainly attract more domestic and international tourists and also provide manifold economic opportunities to the people of the State. Unfortunately, the completion target for this project has always been extended from 2014 to 2019 and then to 2020 and now to 2022. Frequent extension of completion target has caused manifold loss of time and energy resulting in deprivation of various economic opportunities to the people of Manipur. Moreover, this also has resulted in cost overruns.
It is also a known fact that the project has faced different strategic difficulties during the process of tunnelling and construction. Unstable geological landscape, difficult terrain and social dislocations and discomfort are the main factors for the delay of this project. In addition, security has been another major concern for the workers and engineers working at the ground level of the project.
The transportation of railway construction materials and machinery to the construction sites have been adversely affected due to non-completion of two major bridges across the Barak and Makru rivers. Here, I would also like to draw the kind attention of the hon. Road Transport Minister and request him to complete the construction of these two bridges which were delayed for more than a year. Progress of the railway project has been severely impacted due to this transportation bottleneck.
Despite all these obstacles and difficulties, I earnestly request the Union Minister of Railways for completion of the project by 2022 with strict monitoring and kind personal indulgence. We hope, this time, under the able leadership of the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji and the hon. Railway Minister, Shri Piyush Goyel ji, there would not be any need to extend the completion deadline any further.
Sir, secondly, I would like to inform the Railway Ministry, through you, that the survey work of Imphal to Moreh railway line bordering Myanmar has been completed. For this sector a specific Budget allocation is required to push forward our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji’s `Act East’ policy.
Finally, taking advantage of recently inaugurated 1.9 kilometre long Indo-Bangla border bridge, the MAITRI SETU, in commemoration of the 50th birth anniversary of Bangladesh, we can think of connecting the seaport of Chittagong with Agartala.
A hinterland railway networking may now be developed and expanded linking Agartala with Aizawl, Imphal, Kohima, etc. By doing so, these landlocked areas of the region will be exposed to new economic opportunity provided by a sea port. This dream of a new railway network may also be materialised by providing a separate budgetary provision under the National Rail Plan, 2030.
*m66 *श्री अरूण कुमार सागर (शाहजहाँपुर): हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री आदरणीया निर्मला सीतारमण जी का मैं हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूँ कि एनडीए सरकार द्वारा यह बजट लीक से हटकर दिखायी दिया है, जिसमें लोक-लुभावन घोषणाओं के स्थान पर बजट को कृषि एवं किसानों, गरीब एवं मध्यम वर्गीय लोगों पर केन्द्रित किया गया है तथा समाज के गरीब तबकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में रेलगाड़ियों में यात्रियों को बेहतर सुविधायें देने और एयरपोर्ट की तरह रेलवे स्टेशनों का विकास किये जाने हेतु प्रावधान किये हैं तथा 04रेलवे स्टेशनों का विकास पीपीपी मॉडल पर करने की घोषण की है,जो कि स्वागत योग्य है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में यह भी प्रावधान किया है कि रेलवे ने पूरे देश में किसान ट्रेन चलाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, जिससे दूध, दही,सब्जियां,फल और मीट जैसी जल्द खराब होने वाली चीजों को पूरे देश में पहुंचाया जा सकेगा । कोल्ड चेन के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रेलवे पहले से ही इस कार्य योजना पर काम कर रहा है । इससे देश के किसानों को काफी लाभ होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी ।
इस वित्तीय बजट में रेल पटरियों के किनारे खाली पड़ी रेलवे की भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बनाने का प्रावधान किया गया है । रेलवे ने इसके लिए 5 हजार हेक्टेयर जमीन की पहचान की है, जहां सोलर प्लांट लगाकर 10 हजार मेगावाट तक विद्युत पैदा की जा सकेगी । यह देशवासियों के लिए प्रसन्नता की बात है ।
इस प्रकार से माननीय वित्त मंत्री जी ने रेलव बजट में एक ऐसे जिम्मेदार समाज देने का संकल्प सामने रखने का प्रयास किया है, जहां समाज के हर वर्ग की बेहतरी का ख्याल रखने की बात हो । इसके लिए मैं उनका हृदय से कोटि-कोटि अभिनन्दन करता हूँ ।
मैं माननीय वित्तमंत्री जी द्वारा प्रस्तुत वित्त बजट का हृदय से पुरजोर समर्थन करते हुए सदन का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र जनपद शाहजहाँपुर,उ0प्र0की प्रमुख समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए निवेदन करना चाहता हूँ कि :
जनपद शाहजहाँपुर,उ0प्र0की नगर विधानसभा में गर्रा फाटक से मोहल्ला ककरा होते हुए शाहबाजनगर तक,मोहल्ला बाला तिराही से मोहल्ला केरूगंज, हुसैनपुरा,बिजलीपुरा,इस्लामिया इण्टर कॉलेज के पीछे से होते हुए इन्द्रानगर कालोनी तक रेल लाइन बिछी हुई थी, जिस पर पिछले 40 वर्षों से ट्रेनों का आवागमन बंद हो गया है । ट्रेनों का आवागमन बंद होने के कारण अधिकांश भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है । रेलवे की भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे से भूमि को बचाने हेतु वैकल्पिक योजना के रूप में यदि रेलवे की भूमि पर रोड़ निर्माण हो जाता है तो रेलवे की उक्त भूमि को अवैध कब्जे से बचाया जा सकता है । नगर निगम शाहजहाँपुर उक्त बंद पड़ी रेलवे लाइनों के दोनों ट्रैक पर सी0सी0मार्ग/कोलतार का मार्ग बनवाना चाहता है, रोड़ निर्माण से उक्त जमीन का मालिकाना हक रेलवे का ही रहेगा तथा क्षेत्रवासियों को शहर में बढ़ रही जाम की समस्या से निजात मिलेगा तथा रेलवे की भूमि को अवैध कब्जा से बचाया जा सकेगा । अतः मेरा आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त समस्या को दृष्टिगत रखते हुए उक्त रेलवे लाइन पर रोड़ निर्माण हेतु नगर निगम शाहजहाँपुर को स्वीकृति प्रदान करवाएं ।
मेरे संसदीय क्षेत्र जनपद शाहजहाँपुर से क्षेत्र के तमाम ग्रामों शाहबाजनगर नई बस्ती, निबाड़ी,घूरखेड़ा,घुसगवां,कपेड़,कटैया आदि ग्रामों के लिये रेलवे स्टेशन शाहबाजनगर के उत्तर समपार से लेपन मार्ग गुजरता है । मीटरगेज से ब्राडगेज में परिवर्तन पर पहले मार्ग बन्द किया गया फिर बाद में जनता के अनुरोध पर मरम्मत कर खोल दिया गया । इसके बाद भूमिगामी पुल बनाने के पश्चात् उक्त फाटकयुक्त समपार को पूर्ण रूप से बन्द कर दिया गया है, जिससे क्षेत्रीयजन काफी त्रस्त हैं एवं उनके सामने संकट उत्पन्न हो गया है । भूमिगामी पुल से सैकड़ों वाहन व जनता को आवागमन में कठिनाई उत्पन्न हो रही है । गन्ना व अनाज लाने व ले जाने में 8-10किमी0की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है । रेल एवं राजमार्ग दोनों ही लोकहित के कार्य हैं,परन्तु समपारयुक्त उक्त मार्ग एकमात्र होने के कारण अत्यन्त महत्वपूर्ण व उपयोगी एवं सुरक्षित है । इस सम्बन्ध में क्षेत्रीय जनता द्वारा पूर्व में भी अनुरोध किये जा चुके हैं । अतः जनहित में मैं चाहूँगा कि आप इस ओर विशेष ध्यान देते हुये लोकहित के सम्मान व सार्वजनिक हित में शाहजहाँपुर –शाहबाजनगर,घुसगवां लेपित मार्ग पर समपार को पूर्ववत् आवागमन हेतु पूर्ववत रखने (खुलवाने)हेतु सम्बन्धित अधिकारी को आदेशित करें,जिससे क्षेत्र की जनता को सुविधा हो सके ।
मेरे संसदीय क्षेत्र जनपद शाहजहाँपुर,उ0प्र0के रेलवे स्टेशन की स्थिति अत्यंत ही जर्जर है, जिसका पुनर्निमाण कार्य होना अत्यंत आवश्यक है, अतः जनहित में मैं चाहूँगा कि रेलवे स्टेशन के विकास एवं जरूरी सुविधाओं के दृष्टिगत निम्न सुविधाएँ उपलब्ध करवाने की कृपा करें :
यात्रियों की सुविधाओं हेतु रेलवे स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियों का निर्माण कार्य । रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 1, 2 व 3 पर वाटर कूलरों की संख्या बढ़ायी जाए एवं प्लेटफार्म संख्या 4 व5 पर वाटर कूलर लगाया जाए तथा यात्री शेड की व्यवस्था की जाए । रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 2 व3 का फर्श का पुननिर्माण कर ऊँचा कराया जाए । रेलवे स्टेशन पर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए यात्रियों की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए एक अतिरिक्त फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य । रेलवे स्टेशन पर कोच गाइडेंस सिस्टम की सुविधा उपलब्ध कराई जाए । गाड़ी संख्या 54075/54076जो कि दिल्ली से सीतापुर तक चलती थी वर्तमान समय में दिल्ली से बरेली तक ही चल रही है । इस ट्रेन को पुनः दिल्ली सेसीतापुर तक चलाया जाए । गाड़ी संख्या 64221/64222शाहजहाँपुर- लखनऊ मेमो ट्रेन का पुनः संचालन कराया जाए जो कि वर्तमान समय में बन्द चल रही है । गाड़ी संख्या 54377/54378बरेली से प्रयाग तक चलती थी परन्तु वर्तमान समय में यह गाड़ी लखनऊ से प्रयाग तक चल रही है । इसका पुनः संचालन बरेली से प्रयाग तक किया जाए ।
गाड़ी संख्या 14315/14316इण्टरसिटी एक्सप्रेस जो कि बरेली से नई दिल्ली तक चलती है को शाहजहाँपुर से नई दिल्ली तक चलाने की व्यवस्था की जाए । जनपद शाहजहाँपुर के कटरा एवं तिलहर रेलवे स्टेशन की स्थिति अत्यंत ही जर्जर है, जिसकासौन्दर्यीकरण का कार्य करवाया जाए तथा पेयजल की व्यस्था हेतु वाटर कूलर लगवाए जाएं ।
अंत में, मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा सदन में प्रस्तुत रेलवे बजट का पुरजोर समर्थन करता हूँ और यह भी निवेदन करता हूँ कि मेरे संसदीय क्षेत्र जनपद शाहजहाँपुर के सर्वांगीण विकास हेतु उपरोक्त सभी रेलवे समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए केन्द्रीय बजट से धन का आबंटन करने की कृपा करें ।
*m67 *श्री अशोक कुमार रावत (मिश्रिख): हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री आदरणीय निर्मला सीतारमण जी का मैं हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूं, क्योंकि एन0डी0ए0 सरकार द्वारा यह बजट लीक से हटकर दिखायी दिया है, जिसमें लोक-लुभावन घोषणाओं के स्थान पर बजट को कृषि एवं किसानों, गरीब एवं मध्यम वर्गीय लोगों पर केन्द्रित किया गया है तथा समाज के गरीब तबकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है ।
इस वित्तीय बजट में रेल पटरियों के किनारे खाली पड़ी रेलवे की भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बनाने का प्रावधान किया गया है । रेलवे ने इसके लिए 5 हजार हेक्टेयर जमीन की पहचान की है, जहां सोलर प्लांट लगार 10 हजार मेगावाट तक विद्युत पैदा की जा सकेगी । यह देशवासियों के लिए प्रसन्नता की बात है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में यह भी प्रावधान किया है कि रेलवे ने पूरे देश में किसान ट्रेन चलाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, जिससे दूध, दही,सब्जियां,फल और मीट जैसी जल्द खराब होने वाली चीजों को पूरे देश में पहुंचाया जा सकेगा । कोल्ड चेन के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रेलवे पहले से ही इस कार्य योजना पर काम कर रहा है । इससे देश के किसानों को काफी लाभ होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में रेलगाड़ियों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने और एयरपोर्ट की तरह रेलवे स्टेशनों का विकास किए जाने हेतु प्रावधान किए हैं तथा 4 रेलवे स्टेशनों का विकास पीपीपी मॉडल पर करने की घोषाणा की है, जो स्वागत योग्य है ।
इस प्रकार से माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में एक ऐसे जिम्मेदार समाज देने का संकल्प सामने रखने का प्रयास किया है, जहां समाज के हर वर्ग की बेहतरी का ख्याल रखने की बात हो । इसके लिए मैं उनका हृदय से कोटि-कोटि अभिनंदन करता हूं ।
मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का हृदय से पुरजोर समर्थन करते हुए सदन का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर की प्रमुख समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए निवेदन करना चाहूंगा कि मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत संडीला रेलवे स्टेशन के नजदीक 3 अदद समपार (एलसी)अर्थात247, 248, 249 हैं । राज्य सरकार के साथ लागत भागदीरी आधार पर ये सभी एलसी ऊपरी सड़क पुल(आरओबी/अंडर पास) के प्रतिस्थापन के लिए अर्हक हैं, क्योंकि इन एलसी का यातायात घनत्व एक लाख गाड़ी वाहन इकाई (टीवीयू)से अधिक है । लेकिन, रेलवे के चैनज नं0 247, 248, 249 कासिंग सण्डीला, जनपद हरदोई में अंडरपास या ब्रिज की एन0ओ0सी0नहीं मिल पा रही है । अतः चैनज नं0 248 पर अंडरपास और चैनज नं0 249 पर ब्रिज एवं चैनज नं0 248 तथा 249के पास साइड साइड में पर्याप्त जगह है और इस जगह से रोउ देकर चैनज नं0 249 पर ब्रिज बनाए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं कि संडीला में रेलवे ओवर ब्रिज की स्थापना किए जाने हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है तथा राज्य सरकार ने भी इस संबंध में समस्त औपचारिकताएं पूरी कर ली है । लेकिन, अब तक निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका है । अत: निवेदन है कि स्वीकृत किए गए उक्त रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारम्भ किया जाए ।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बिल्हौर एवं कछोना नगरपालिका/नगर पंचायत हैं तथा बालामऊ एक प्रमुख जंक्शन है । इन क्षेत्रों से निकलने वाली रेलवे लाईन कॉसिंग पर भारी यातायात होने के कारण कई कई घंटों तक ट्रैफिक अवरूद्ध रहता है, जिस कारण लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है । यहां के लोगों की पिछले काफी समय से रेलवे कासिंग पर ओवर ब्रिज अथवा अंडर पास बनाए जाने की मांग की जा रही है,लेकिन अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है,जिस कारण उनमें भारी रोष व्याप्त है ।
विगत14वीं एवं 15वीं लोक सभा के कार्यकाल के दौरान भी अपने संसदीय क्षेत्र के उपरोक्त बिल्हौर, कछोना,चौबेपुर एवं शिवराजपुर में रेलवे कॉसिंग पर ओवर ब्रिज/अंडरपास बनाए जाने हेतु लोक सभा के विभिन्न नियमों के अन्तर्गत सरकार से मांग की गई थी, लेकिन उस समय की सरकार ने मेरे क्षेत्र की इस प्रमुख समस्या के निराकरण हेतु कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए । अतः पुनः अनुरोध है कि उक्त स्थलों पर आरओबी/अंडर पास के निर्माण हेतु शीघ्र कार्यवाही की जाए ।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बालामऊ स्टेशन को पूर्व में आदर्श स्टेशन के रूप में चयनित किया जा चुका है । यहां पर रेलवे व केन्द्र सरकार के कार्यालयों एवं बैंकों के कर्मचारियों की काफी संख्या है । लेकिन केन्द्रीय विद्यालय न होने के कारण बेहतर शिक्षा का अभाव है । अतः रेलवे व केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान किए जाने के लिए बालामऊ में रेलवे की भूमि पर केन्द्रीय विद्यालय स्थापित किया जाए ।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सण्डीला एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है । इस रेलवे स्टेशन से क्षेत्र की अनेकों महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों का आवागमन होता है तथा नैमिषारण्य,जो कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, के श्रद्धालु भी इसी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरते हैं । सण्डीला एक औद्योगिक क्षेत्र भी है । मेरे क्षेत्र की जनता द्वारा इस रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यकरण कराए जाने की मांग विगत काफी समय से की जा रही है । अतः सण्डीला रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां,माधौगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म काफी नीचे हैं,जिसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी होती है । अतः प्लेटफॉर्म को ऊंचा करते हुए सीमेंट की शेड डालवायी जाये और अरौल-मकनपुर रेलवे स्टेशन पर कालिन्दरी एक्सप्रेस (14723-14724)एवं पवन एक्सप्रेस (15037-15038)का ठहराव दिया जाए ।
अंत में, मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा सदन में प्रस्तुत रेलवे बजट का पुरजोर समर्थन करता हूं और यह भी निवेदन करता हूं कि मेरा संसदीय क्षेत्र, जो अनुसूचित बाहुल्य एक अति पिछड़ा हुआ क्षेत्र है, के सर्वांगीण विकास हेतु उपरोक्त सभी रेलवे समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए केन्द्रीय बजट में धन का आवंटन करने की कृपा की जाए ।
*m68 श्री श्याम सिंह यादव (जौनपुर): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । यह बड़ा अनफॉर्चूनेट है कि अभी माननीय मंत्री जी यहां बैठे थे और जैसे ही मैं बोलने के लिए खड़ा हुआ, वैसे ही वह यहां से उठ कर चले गए । यह मेरे लिए और जौनपुर के लिए बड़ा अनफॉर्चूनेट है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : नहीं, नहीं, वह अभी आएंगे । आप अपनी बात कहें ।
…(व्यवधान)
श्री श्याम सिंह यादव : महोदय, वह आएंगे, ठीक है, लेकिन वह यहां इस समय होते तो अच्छा होता । …(व्यवधान) सिराज-ए-हिंद जौनपुर के लोगों ने मुझे अपना नुमाइंदा चुन कर यहां भेजा है । रेलवे मिनिस्ट्री ने जौनपुर के लोगों को कुछ फैसिलिटीज दी हैं कि जौनपुर के चारों तरफ रेलवे लाइनों का एक जाल बिछा दिया गया है, चाहे जौनपुर से मिर्जापुर हो, जौनपुर से इलाहाबाद हो, जौनपुर से बनारस हो, जौनपुर से लखनऊ हो, लेकिन किसी भी रेलवे लाइन पर एक भी फ्लाईओवर नहीं बना है । एक फ्लाईओवर जौनपुर से मिर्जापुर रोड पर बन रहा है, वह भी घोंघे की चाल से बन रहा है । मैं रेलवे विभाग से कहना चाहता हूं कि जितनी फैसिलिटीज आप जौनपुर के लोगों को रेल लाइन बिछा कर दे रहे हैं, उससे ज्यादा आप उनको तकलीफ दे रहे हैं, क्योंकि हर रेलवे लाइन पर, हर क्रॉसिंग पर, एक-एक घंटे, डेढ़-डेढ़ घंटे तक सभी गाड़िया खड़ी रहती हैं और लंबा जाम लगता है । कभी-कभी ऐसी स्थिति होती है कि मरीज तड़प कर अपना दम तोड़ देता है और वह अस्पताल नहीं पहुंच पाता है । मैं सबसे पहले माननीय मंत्री जी से कहता हूं कि कृपा करके प्राथमिकता के आधार पर जौनपुर से बाहर जाने वाली तमाम रेलवे लाइनों पर फ्लाईओवर बनवाएं । यह ऐसा है, जैसे आप भूखे आदमी को खाना खिलाते हैं, तो उसमें मिर्च ज्यादा डाल देते हैं, जौनपुर के लोगों के साथ यह उसी तरह का सल्लुक है ।
मैं दूसरी बात यह कहना चाहता हूं कि जौनपुर सिटी और जंक्शन से बहुत गाड़ियां पास होती हैं, अकाल तख्त एक्सप्रेस, उपासना एक्सप्रेस, मुजफ्फरनगर-अम्बाला-कुंभ-गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, पटना-मथुरा-अमृतसर-जालियांवाला बाग, उदयपुर, हमसफर एक्सप्रेस, जम्मूतवी, जनसाधारण, सियालदह एक्सप्रेस, सुहेलदेव एक्सप्रेस आदि-आदि । ये सभी गाड़ियां हमारे जौनपुर के सीने को चीर कर गुजरती हैं, लेकिन एक भी गाड़ी वहां नहीं रुकती है । मैंने कई बार माननीय मंत्री जी से अनुरोध किया है कि वहां दो-चार ट्रेन्स का जौनपुर सिटी पर हॉल्ट कर दें । वहां से 60 किलोमीटर की दूरी पर एक तरफ बनारस है, दूसरी तरफ सुल्तानपुर 80 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां हॉल्ट होता है । जौनपुर के लोग बहुत ज्यादा तादाद में इन गाड़ियों का उपयोग करते हैं, जिनको बनारस और सुल्तानपुर जा कर पकड़ना पड़ता है ।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि कम से कम दो-चार गाड़ियों का हॉल्ट जौनपुर सिटी पर करवाएं । जब गाड़ियां इतनी स्पीड से जौनपुर सिटी से गुजरती हैं, तो बड़े दया भाव से, बड़े हिकारत से, अब क्या-क्या कहूं, मिक्स्ड फिलिंग होती है । जब हम लोग स्टेशन पर होते हैं, तो धूल उड़ाती हुई स्पीड से गाड़ी वहां से चली जाती है । वे वहां खड़ी नहीं होती हैं, जौनपुर के लोग उसे पकड़ नहीं पाते हैं । जैसे कारवां गुजर गया और गुबार देखते रहे । धूल उड़ाती हुई गाड़ी हमारे सीने को चीरते हुई चली जा रही है, लेकिन वहां खड़ी नहीं हो रही है ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि कम से कम वहां महत्वपूर्ण दो-चार गाड़ियों का हॉल्ट होना चाहिए । माननीय प्रधान मंत्री जी बुलेट ट्रेन बनवा रहे हैं । यह गुजरात से महाराष्ट्र तक चलेगी । मुझे बुलेट ट्रेन पर कोई एतराज नहीं है । वे बुलेट ट्रेन भी बनवा सकते हैं, हवाई ट्रेन भी बनवा सकते हैं और माननीय प्रधान मंत्री जी ऐसी भी ट्रेन बनवा सकते हैं, जो हवा में उड़े और दिखाई न दे, ऐसी भी ट्रेन बनवा सकते हैं ।…(व्यवधान) मुझे उनकी प्रतिभा पर कोई शंका नहीं है । लेकिन सबसे पहले क्या करना चाहिए? सबसे पहले ट्रेनों में सफाई होनी चाहिए । प्लेटफार्म पर पैसेंजर एमिनीटीज़ को बढ़ावा देना चाहिए । पहले ट्रेन छोटी होती थी । अब बहुत बड़ी-बड़ी ट्रेन आती है । कोचेज़ की पोजिशन का डिस्प्ले हर प्लेटफार्म पर नहीं लगता है । मान लीजिए कि कोई बूढ़ा है, कोई डिसएबल्ड है, कोई बीमार है और गलती से कहीं और खड़ा है । ट्रेन एक मिनट के लिए रुकती है, जौनपुर में जो इक्का-दुक्का ट्रेन रुकती है, वह उन्हें पकड़ नहीं पाता है । कई बार उनकी ट्रेन छूट जाती है । कई बार उनके परिवार के सदस्य छूट जाते हैं । मेरा यह कहना है कि आप पहले पैसेंजर एमिनीटीज़ को बढ़ाएं । बुलेट ट्रेन चलाने से पहले आपके पास खजाने में जो भी थोड़ा-बुहत पैसा है, उससे पैसेंजर एमिनीटीज़ को बढ़ाइए ।
सभी स्टेशनों पर लाउड स्पीकर होता है, उससे अनाउंसमेंट होती है । माननीय मंत्री जी को उसकी क्वालिटी को जानना और समझना चाहिए । मुझे ऐसा लगता है कि उस अनाउंसमेंट को हर व्यक्ति समझ नहीं पाता है । लोग एक-दूसरे से पूछते हैं कि क्या बोला गया है? उस लाउड स्पीकर की क्वालिटी को बढ़ाना चाहिए ।
हम लोगों ने स्वच्छ भारत का नारा दिया है और स्वच्छता पर बहुत जोर दिया जा रहा है । लेकिन हिन्दुस्तान में अगर कोई ऑर्गेनाइजेशन सफाई के नाम पर धब्बा लगा रहा है, तो वह रेल विभाग है । आप देख लीजिए शहरों में स्टेशनों पर, ट्रैक के किनारे कितना प्लास्टिक, कूड़ा-कचरा फैला होता है । माननीय मंत्री जी को यहां की सफाई पर ध्यान देकर स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना चाहिए ।
माननीय सभापति : आप कृपया अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री श्याम सिंह यादव : महोदय, मैं बस एक मिनट में समाप्त कर रहा हूं । इसके अलावा मैं यह कहना चाहता हूं कि जौनपुर के अलावा खेतासराय, शाहगंज और मुंगड़ा बादशाहपुर है, वहां की ट्रेन लाइनों पर भी फ्लाईओवर बनना चाहिए । जौनपुर से इलाहाबाद के लिए केवल एक पैसेंजर ट्रेन है । यह आज से 50 वर्षों से पहले से है । जब से मैं पैदा हुआ हूं, स्कूल जा रहा हूं, तब से जानता हूं । सुबह चलती है, तो इलाहाबाद तक 100 किलोमीटर चलने में पूरा दिन ले लेती है । मेरी यह मांग है कि जौनपुर से इलाहाबाद के लिए कुछ ट्रेन्स चलाई जाएं ।
माननीय सभापति : आप कृपया समाप्त कीजिए ।
श्री श्याम सिंह यादव : महोदय, मैं बस एक मिनट में समाप्त कर रहा हूं । इसके अलावा मैं यह कहना चाहता हूं कि जौनपुर से लखनऊ के लिए एक वरुणा एक्सप्रेस के अलावा कोई ऐसी ट्रेन नहीं है, जिससे लखनऊ जाकर काम करके वापस आया जाए । मैं जौनपुर से इलाहाबाद और जौनपुर से लखनऊ नई ट्रेन चलाने की मांग कर रहा हूं ।
मैं एक बात यह भी कहना चाहता हूं कि पूरे देश में रेलवे ट्रैक के किनारे फैली हुई जो नजूल जमीन है, रेलवे के पास यह जमीन सबसे ज्यादा है । स्टेशंस के बीच में इन जमीनों पर लोगों का कब्जा होता जा रहा है । इसका सदुपयोग हो सकता है । रेलवे ट्रैक के किनारे जहां नजूल भूमि की चौड़ाई 40 से 50 मीटर तक है, मैं समझता हूं कि 10 क्या 50 सालों में भी अगर रेल विभाग ट्रैक बनाएगा, तो उसकी चौड़ाई 10-20 मीटर होगी । उस जमीन को ईडब्ल्यूएस मकान बनाने में प्रयोग करना चाहिए, जिससे गरीबों का कल्याण हो सके । मैं और भी बहुत कुछ कहना चाहता था, लेकिन आपने मुझे इतना बोलने का अवसर दिया, आपका धन्यवाद ।
*m69 *श्री सुनील कुमार सोनी (रायपुर): छत्तीसगढ़ राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य का अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत है । ग्रामीण लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि एवं मजदूरी पर ही आधारित रहता है । चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास कृषि क्षेत्रफल की भूमि कम होने के कारण से छत्तीसगढ़ के मजदूर अपनी आजीविका हेतु दूसरे राज्य की ओर रोजगार के अवसर हेतु जाते हैं । आज संपूर्ण भारत वर्ष में छत्तीसगढ़ के मेहनतकश मजदूर अपनी मजदूरी का लोहा मनाये हुए हैं ।
विगत दिनों कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन आदि ऐतिहासिक कदम के कारण से मजदूर वर्ग अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने पैतृक घर की ओर आने के लिए अग्रसर हुए हैं । मजदूरों की इन भावनाओं को ध्यान रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय रेल मंत्री जी ने छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर, जो अन्य राज्यों में अपनी आजीविका के लिए कार्यरत थे, को सुरक्षित अपने पैतृक ग्राम भेजने हेतु विशेष ट्रेन सुविधा मुहैया कराई, जिससे की कोविड महामारी जैसी आपात स्थिति में भी छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर सकुशल अपने पैतृक गांव आ सकें । इस हेतु मैं माननीय प्रधानमंत्री जी तथा माननीय रेलमंत्री जी को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करता हूं ।
छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है । यहाँ भिलाई स्टील प्लांट जैसे भारत के अग्रणी प्लांट भी हैं । इसके अलावा दल्ली राजहरा, बचेली आदि क्षेत्रों में कोयले का प्रचुर भंडार उपलब्ध है । इन प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु यातायात के साधनों की अत्यंत आवश्यकता है । इस हेतु पर्याप्त रेल सुविधाएं रहना आवश्यक है । चूंकि यह क्षेत्र औद्योगिक, व्यवसायिक के साथ-साथ कृषि क्षेत्र भी है । अतः मेरा आपसे निवेदन है कि छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में रेल का विस्तार किया जाए, जिसके अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेल के अंतर्गत मांग को प्राथमिकता देते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जाए ।
छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर से दिल्ली, मुंबई, हावड़ा हेतु सुपर फास्ट ट्रेनों की आवश्यकता है । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रेलवे का सुपर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने सहित कोरबा-विशाखापटनम लिंक एक्सप्रेस गाड़ी नंबर 18517 (अप) तथा गाड़ी नंबर 18518 (डाउन), बिलासपुर से इतवारी सुरपरफास्ट ट्रेन का स्टापेज भिलाई पावरहाऊस, दुर्ग जम्मूतवी का स्टापेज तिल्दा रेलवे स्टेशन में दिए जाने, बिलासपुर-गोवा, नई सुपरफास्ट ट्रेन चलाने, रायपुर से बलौदाबाजार नई रेल लाईन जो बिलाईगढ़, कसडोल होते हुए रायगढ़ तक होगी । एक स्थानीय लोकल ट्रेन, रायपुर-टिटलागढ़ प्रारंभ होने से महासमुंद, बागबाहरा, टिटलागढ़, काटाभांजी, उड़ीसा से आने वाले व्यापारियों एवं यात्रियों को लाभ मिलेगा और रेलवे को भी राजस्व लाभ होगा ।
माननीय रेल मंत्री जी से मैं आग्रह करता हूं कि इन विभिन्न मांगों के साथ यदि आपके प्रयास से मुंबई-हावड़ा, दूरंतो एक्सप्रेस स्टॉपेज छत्तीसगढ़ की रायपुर राजधानी को मिलता है तो रेल की आमदनी बढ़ने के साथ यात्रियों को अनेक दूरस्थ यात्राओं का लाभ मिलेगा । यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में रेलवे मंत्रालय द्वारा सर्वे भी किया जा चुका है । मेरा आग्रह है इस संबंध में आपके माध्यम से प्रयास हो ।
*m70 श्री बिद्युत बरन महतो (जमशेदपुर): माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2021-22 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्राणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा तथा मतदान पर अपनी बात रखने के लिए आपने मुझे अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपको हृदय से धन्यवाद देता हूँ ।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री भाई नरेन्द्र मोदी जी और माननीय रेल मंत्री आदरणीय पीयूष गोयल जी, वित्त मंत्री आदरणीय निर्मला सीतारमण जी को मैं हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण चारों दिशाओं में रेल नेटवर्क को आगे ले जाने के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने की जरूरत महसूस की और इस बजट में उसे लाया गया ।
महोदय, यह बजट अपने आप में एक ऐतिहासिक बजट है । आपने देखा होगा कि इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है । रेलवे ने कोविड-19 जैसे भयावह महामारी के बावजूद देश के गरीबों को उनके गंतव्य स्थानों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया ।
मैं आपको बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2021-22 के बजट में रेलवे के लिए लगभग एक लाख दस हजार करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की गई है, जो रेलवे को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा ।
भारतीय रेल 67,580 किलोमीटर से भी अधिक दूरी के साथ विश्व में तीसरे स्थान पर है । वित्त वर्ष 2020 में भारतीय रेल ने 1.2 बिलियन टन माल और 8.1 बिलियन यात्रियों का वहन किया है । रेलवे के पास इस वर्ष 2 लाख 15 हजार 58 करोड़ रुपए के साथ अब तक का सर्वाधिक योजनागत पूंजी व्यय, जिसमें आम बजट में आबंटित किए गए आंतरिक स्रोतों से 7 हजार 5 सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त बजट सैंक्शन होने से लगभग 1 लाख 2 हजार 25 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय आबंटन में 17.100 करोड़ रुपए शामिल हैं । प्रस्तावित बजट 2021-22 में पूंजीगत व्यय के तहत 54.16 करोड़ रुपए पिछले वर्ष 2020-21 के बजट की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है ।
महोदय, आबंटित धनराशि से आत्मनिर्भर भारत को बल मिलेगा और इस धनराशि का सदुपयोग महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को पूरा करने, यात्रियों को सुविधा प्रदान करने, सुरक्षा-क्षमता के निर्माण में किया जाएगा ।
महोदय, मैं झारखण्ड प्रदेश से आता हूँ । अमीर राज्य की गरीब जनता, खासकर रेल कनेक्टिविटी के मामले में हम बहुत ही गरीब हैं । यदि आप देखें, तो लोहा, कोयला, तांबा, मैंगनीज, बॉक्साइट से लेकर सोना तक झारखण्ड में है । यहाँ सीकेपी, धनबाद, आसनसोल, अदरा और हावड़ा डिवीज़न हैं । हम लोग देखते हैं कि 42 प्रतिशत टैक्स झारखण्ड से आता है, लेकिन रेल कनेक्टिविटी और यात्रियों की सुविधा के मामले में हम लोग बहुत गरीब हैं ।
अब मैं असली बातों पर आता हूँ । झारखण्ड बिहार से अलग हुआ है । बिहार की बहुत बड़ी आबादी झारखण्ड में रहती है । हम लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि टाटानगर से तीन तीन ट्रेन्स चलती हैं, ये टाटानगर-दानापुर ट्रेन संख्या 18183-18184, साउथ बिहार एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 13287 और पटना-बिलासपुर ट्रेन संख्या 22844 हैं । ये सारी ट्रेन्स दानापुर तक जाती हैं । हम चाहते हैं कि माननीय मंत्री श्री राजकुमार सिंह और माननीय मंत्री श्री अश्विनी चौबे जी जो आरा और बक्सर से हैं । ये तीनों ट्रेन्स वहां रात को ठहरें और सुबह पुन: चलें । जो लोग टाटानगर से पटना जाते हैं, उन्हें दानापुर और बक्सर पहुंचते-पहुंचते शाम के सात-आठ बज जाते हैं, उनके लिए ट्रेन की सुविधा दी जाए, जिसके लिए हम बरसों से मांग उठा रहे हैं । मैं खुद लगभग पांच-छ: सालों से मांग उठा रहा हूं । अगर यह बन जाए, तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी ।
मैं साथ-साथ कुछ नई रेल लाइन्स की मांग आपके समक्ष रखना चाहूंगा । इन रेल लाइन्स का सर्वे हो चुका है । मैं इनके बारे में आपके समक्ष जानकारी रखना चाहूंगा । चांडिल-बोडाम रेल हमारे माननीय सांसद श्री संजय सेठ जी के लोक सभा क्षेत्र से शुरू होती है । यह मेरे लोक सभा क्षेत्र होते हुए पुरलिया होते हुए, झाडग्राम लोक सभा, लगभग चार लोक सभा क्षेत्रों को टच करते हुए निकलती है । इस नई रेल लाइन का सर्वे बहुत पहले, लगभग पांच साल पहले हो चुका है, लेकिन अब तक उस पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है ।
मैं आपके माध्यम से निवेदन करता हूं कि इन तीनों महत्वपूर्ण रेल लाइनों पर कार्य शुरू किया जाए । लोग बरसों से, आजादी के बाद से इन रेलवे लाइनों की मांग कर रहे हैं । इसके साथ-साथ झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले के अंतर्गत चाकुलिया प्रखंड के बुडामारा से बहरागोड़ा होते हुए बांगरीपीसी (ओडीशा) तक रेलवे लाइन का टेंडर होना था, लेकिन अभी तक टेंडर नहीं हो पाया है । इसका टेंडर कराया जाए । इसी के साथ कांड्रा-नामकुल रेल लाइन के सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो गया है । इसको भी चालू किया जाए । टाटा बादामपहाड़ रेल खंड पर रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जाए । अगर इसका दोहरीकरण कर के क्योंझर से भुवनेश्वर जोड़ा जाए, तो हम लोगों को साढ़े तीन या चार घंटे की सुविधा होगी, बचत होगी ।
चतरा से हमारे माननीय सांसद महोदय, सुनील जी यहां बैठे हैं । वहां आजादी से पहले एक रेल लाइन की मांग हो रही है । 80 सालों से लंबित बरवाडीह-चिरीमीरी रेल लाइन को पूरा करने से कोलकाता से मुंबई की दूरी 350 किलोमीटर कम हो जाएगी । यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है । हमारे सांसद महोदय सुनील जी ने कई बार सदन में इस बात का माननीय मंत्री जी से भी आग्रह किया था । जल्द से जल्द इसको पूरा किया जाए, क्योंकि आज देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी हैं । हमारे पीयूष गोयल जी को दानवीर के रूप में जाना जाता है । उनकी देखरेख में निश्चित रूप से यह काम बहुत जल्द शुरू हो जाएगा, इसका हमें पूरा विश्वास है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री बिद्युत बरन महतो : सभापति महोदय, मैंने अभी तो शुरू ही किया है । …(व्यवधान) हमारे झारखंड से एक ही आदमी बोल रहा है । इसी तरह चतरा-गया रेल लाइन भी 20 सालों से लंबित है । वह पूरा नक्सल इलाका है । श्री विष्णु दयाल राम जी वहां के पूर्व डीजीपी हैं । ये भी लगातार अपने क्षेत्र की बात उठाते रहे हैं । गया-डुमरिया वाया शेरघाटी-डाल्टेनगंज रेल लाइन निर्माण का कार्य बरसों से लंबित है । इसका कारण है कि राशि के अभाव के चलते यह रेल लाइन चालू नहीं हो पा रही है, ऐसा हम लोगों को पता चला है । चतरा और पलामू पूरी तरह से नक्सल इफेक्टेड इलाके हैं और इनको अगर रेल लाइन से जोड़कर लोगों को सुविधा दी जाए, तो निश्चित रूप से लोग मुख्य धारा से जुड़ने का काम करेंगे, ऐसा हमारा पूरा विश्वास है । इसी के साथ श्री पशुपति नाथ सिंह जी, जो धनबाद से सांसद हैं, उनकी एक बहुत पुरानी मांग है, जो धनबाद से गिरिडीह रेल लाइन की है । यह लगभग 50-60 किलोमीटर है । वह काफी दिनों से पेंडिंग पड़ी हुई है । हमारी एक मात्र महिला सांसद, जो कोडरमा से आती हैं, वे श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जी हैं । …(व्यवधान) नवादा से गिरिडीह, गया, सतगांवा, गांवा, तिसरी तक नई रेल लाइन का काम पेंडिंग है । इसका सर्वे हो गया है । तारापीठ, जो कि बंगाल में एक सिद्धपीठ है, वहां बाबाधाम-देवघर होते हुए हजारीबाग-कोडरमा-गिरिडीह होते हुए एक नई ट्रेन की इन्होंने मांग की है ।
महोदय, हम बहुत दिनों से चाकुलिया-धलमुनगढ़ के बीच बड़कला में एक हॉल्ट के निर्माण की मांग कर रहे हैं । मेरे लोक सभा क्षेत्र में तीन आरओबी पास हुए हैं । एक टाटानगर-खड़गपुर के पास चाकुलिया में है । दूसरा आरओबी टाटानगर-खड़गपुर रेल खंड से गोविंदुपर में है और तीसरा आरओबी सालगाझड़ी एवं गोविंदपुर रेलवे स्टेशन के बीच बारीगोड़ा में स्वीकृत है । ये तीनों आरओबी पास हैं, लेकिन अभी तक राज्य सरकार का सहयोग न मिलने के कारण ये अभी तक पेंडिंग पड़े हुए हैं ।
महोदय, जमशेदपुर एक प्रकार से मिनी भारत है । यहां एयरपोर्ट की कोई कनेक्टिविटी नहीं है । यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए लोग रहते हैं । यहां ट्रेन भी बंद कर दी गई है । मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि सारी ट्रेनें अविलम्ब चलाई जाएं । टाटा एलएपी ट्रेन सिर्फ एक दिन चलती है । जमशेदपुर के लोगों को इस वजह से काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । इस ट्रेन को सप्ताह में तीन दिन चलाया जाए । हावड़ा-कुर्ला इस्पात एक्सप्रेस को भी पुन: शुरू किया जाए । इसके साथ-साथ शालीमार-गोरखपुर ट्रेन का फेरा भी तीन दिन बढ़ाया जाए । टाटा नगर से जय नगर, बिहार ट्रेन चल रही थी, उसे बंद कर दिया गया था । इस ट्रेन को भी चालू किया जाए । टाटा भागलपुर ट्रेन की टाइमिंग खराब थी । डेढ़ बजे रात को भागलपुर से चलती थी, उसे भी बंद कर दिया गया है । उस ट्रेन को भी पुन: चालू किया जाए । पुरुषोत्तम एक्सप्रेस करीब 22 घंटे दिल्ली में रहती है । इस ट्रेन का एक्सटेंशन करके जयपुर तक बढ़ा दिया जाए, तो उस क्षेत्र के लिए काफी अच्छा होगा । महोदय, मेरा पूरा क्षेत्र ट्राइबल है और लोकल ट्रेन बंद हो जाने के कारण मजदूर आज भुखमरी की कगार पर हैं । मेदनापुर-पुरलिया होते हुए लोकल ट्रेन यथाशीघ्र शुरू की जाए । झारग्राम धनबाद ट्रेन को शुरू किया जाए । टाटा चाकुलिया मेमो ट्रेन को शुरू किया जाए । इसके साथ रांची के बड़काखाना मेमो को पुन: शुरू किया जाए । मंत्री जी बहुत उदार हैं, दानवीर हैं, हम चाहते हैं कि गोवा के लिए सुपर फास्ट ट्रेन दी जाए । टाटा काठपाड़ी होते हुए बेंगलुरू के लिए ट्रेन दी जाए क्योंकि वहां विद्यार्थी पढ़ने के लिए और लोग रोजगार के लिए तथा ट्रीटमेंट के लिए भी जाते हैं, यहां के लिए भी ट्रेन दी जाए । आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं ।
*m71 *SHRI Y. DEVENDRAPPA (BELLARY): I express my whole-hearted congratulations for the hon. Union Minister for Railways Shri Piyush Goyal ji for his sincere efforts for all-round development of the Indian Railways.
The Union Budget 2021-2022 has opened the floodgates of funds for the development of infrastructure of Railways. The Budget also proposes to complete 57 pending projects. The highest ever capital expenditure plan of Rs. 1,15,058 crore, comprising of Rs. 1,07,100 crore as Budgetary support is announced. The remaining funds will be arranged from internal and Extra Budgetary Resources. Out of the total Budget, Rs. 40,932 crore has been allocated for new lines, which is an increase of more than 56 per cent comparing to last year. Around Rs. 5,263 crore is allocated for traffic facilities, which is also an increase of 156 per cent over the last year’s Budget and Rs. 26,116 crore is allocated for doubling of railway lines in the country. Around Rs. 7,122 crore is earmarked for new Road Over Bridge and Road Under Bridges. ROBs/RUBs will help to replace a number of level crossings. It will certainly help to reduce the number of accidents. As of now, level crossings are a source of accidents. This will not only improve the Railways’ safety record but also very vital for the convenience of the public. It facilitates the people passing across the railway lines in cities and other areas.
Another important railway infrastructure project for the State of Karnataka is that Bengaluru Suburban Transport was also given emphasis in the Budget. The 148 km-long Bengaluru Suburban Transport project would be a game changer if it is implemented at the earliest. The Bengaluru Suburban rail network will comprise of four corridors, Kengeri – Whitefield, Neelmangala – Bypanahalli, Heelalige – Devanhalli and Bangalore – Rajankunte sections.
While presenting his eighth Budget to the State of Karnataka on 8th March, 2021, hon. Chief Minister Shri B.S. Yediyurappa allocated Rs. 3,991 crore as State’s share against seven new railway projects at an estimated cost of Rs. 7,984 crore on 50:50 cost sharing basis with the Railway Ministry. An amount of Rs. 813 crore has been allotted for doubling Yeshwanthpur-Channasandra and Byrappannahalli-Hosur railway lines which are expected to be completed by 2023.
I would like to draw the attention of the hon. Railway Minister to some important railway demands of my Bellary district.
Hubballi Railway Station in Karnataka State was named after Pujya Siddaroodha Swami ji. So, I request the Government that the railway station of Bellari should be upgraded and named after Shri Sharana Sakkare Karadisha.
Bellary is one of the fastest growing cities in Karnataka. There is an urgent need for a railway line between Bellary and Bengaluru via Raidurga. This railway line would meet the demands of the general public, farmers and traders.
Thank you.
*m72 श्री गिरीश भालचन्द्र बापट (पुणे): सभापति जी, मैं रेल मंत्री पीयूष जी, अनुराग जी और हमारे सब के नेता मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि बहुत अच्छा बजट उनके नेतृत्व में पेश हुआ है । रेलवे जैसा बड़ा विभाग देश में चलाना कोई आसान काम नहीं है । लगभग 7400 रेलवे स्टेशन्स, दो करोड़ 30 लाख लोगों का यातायात का साधन और 14-15 लाख कर्मचारियों के साथ पूरे देश में ट्रेन चलाना बहुत मुश्किल काम है, लेकिन बहुत यशस्विता से यह काम चल रहा है, इसके लिए पीयूष गोयल जी और अनुराग जी आपको भी धन्यवाद देता हूं क्योंकि बजट में नई-नई स्कीम और प्रावधान करना, ये काम आपने किया है । यह सबसे अनोखा बजट रहा, जिसकी पूरे देश में चर्चा हुई । किसान रेल के बारे में यह बहुत अच्छा प्रयास रेल विभाग की तरफ से किया गया, जिससे किसानों का बहुत फायदा हो रहा है और उनका माल इधर से उधर देश के कोने-कोने में पहुंचाने में सुविधा हुई है, इसलिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और इस बजट में केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान करने का फैसला हुआ है, वह भी किसानों के लिए फायदे की बात है ।
महोदय, मैं अपनी कुछ बातें मराठी में कहूंगा, लेकिन मैं फिर से सरकार को धन्यवाद देता हूं कि एक अच्छा काम देश की जनता के लिए किया गया है और सभी देशवासी इसका स्वागत कर रहे हैं ।
मैं पूना का प्रतिनिधित्व करता हूं और पूना एक ऐसा शहर है जहां पूरे देश से लोग शिक्षा, आईटी सेक्टर, मेडिकल एजुकेशन, इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आदि में काम कर रहे हैं । सबके लिए पूना में स्थान है । पूना और महाराष्ट्र की प्रगति हो रही है, क्योंकि देश के कोने-कोने से लोग पूना में आकर ठहरे हैं । मैं इन आंकड़ों में नहीं जाना चाहता कि दोहरीकरण कितना हुआ है या इलेक्ट्रिफिकेशन कितना हुआ है । रेल पहले इलेक्ट्रिफिकेशन में 1.7 किलोमीटर प्रतिदिन थी, लेकिन बाद में 8.2 किलोमीटर हो गई है । अभी एक नए प्रोग्राम में वर्ष 2024 तक 28 हजार 143 किलोमीटर होने वाली है, जिसमें से 7 हजार किलोमीटर का काम पूरा भी हो गया है । चाहे वह ब्रॉडगेज का विषय हो, चाहे वह नए रेलवे स्टेशन को डेवलप करने का विषय हो, किसान रेल हो, हर एक चीज में रेलवे की जो प्रगति हो रही है, वह देश के विकास के लिए बहुत बढ़िया और अच्छी बात है ।
सभापति महोदय, जैसा कि मैंने पूना के बारे में बोला, सब सांसद यह मांग करते हैं कि हमारे यहां रेलवे लाइन होनी चाहिए, ट्रेनें आनी चाहिए, जानी चाहिए और स्टेशन होने चाहिए क्योंकि यातायात के लिए यह जरूरी है । लैंड एक्वीजीशन की जो प्रॉब्लम है, वह स्टेट से भी रिलेटेड है । जितनी जल्दी और अच्छी प्लानिंग के साथ-साथ फॉलोअप केंद्र सरकार द्वारा हो रहा है, उतना ज्यादा ध्यान राज्य सरकारों द्वारा नहीं दिया जाता है, क्योंकि उनके बजट में उनको 50 परसेंट से ज्यादा पैसा देना पड़ता है । महाराष्ट्र शासन का मैं इस बार अभिनन्दन करना चाहता हूं, चाहे वह किसी भी पार्टी का शासन हो । बहुत सालों से हमारी मांग थी कि पूना-नासिक जहां त्रयम्बकेश्वर मंदिर है, जहां बहुत सारे धार्मिक स्थल हैं, वहां आने-जाने में लोगों को तकलीफ होती थी । पुणे-मुंबई, मुंबई-नासिक एक ट्राइएंगल है, लेकिन नासिक-पुणे और पुणे-नासिक रेल नहीं थी । उसका प्रावधान किया गया है और स्टेट गवर्नमेंट ने भी काफी रुपया लैंड एक्वीजीशन के लिए दिया है । यह काम जो अभी सर्वे तक है, अगर शुरू हो गया तो व्यापार वृद्धि के लिए और लोगों के यातायात के लिए काफी अच्छा होगा ।
सभापति महोदय, मैं एक और बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि पूना बहुत पुराना स्टेशन है । बहुत सारे लोग रोजगार के लिए पूना में आते हैं । उनको वापस जाने में तकलीफ होती है । अत: लाँग डिस्टेंस की ज्यादा गाड़ियां, जैसे पूना-राजस्थान, पूना-बिहार-पटना, पूना-गुजरात आदि को पूना से जरूर चालू करना चाहिए । खासकर राजस्थान, जहां जयपुर, जोधपुर, रायपुर हैं, यहां के लोग बहुत बड़ी संख्या में आते हैं । उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए । पूना तो अब हार्ट ऑफ द सिटी में आ गया है । पूना की आबादी 50-60 लाख से ज्यादा है । पूना स्टेशन से कितनी ट्रेनें जाती हैं, लेकिन वहां पार्किंग की भी जगह नहीं है । रेलवे के पास बहुत बड़ी जगह है, जहां अतिक्रमण होता रहता है, स्लम बनते रहते हैं और बाद में कोर्ट-कानून के चक्कर में वह जगह नहीं मिलती है । अत: उसकी कॉमर्शियल वायबिलिटी क्या है, यह देखकर उस जगह का ज्यादा से ज्यादा उपयोग होना चाहिए । हर एक स्टेट स्लम के संबंध में नई-नई स्कीम्स बना रही हैं । पूना रेलवे स्टेशन में पार्किंग की बहुत बड़ी प्रॉब्लम है, इसलिए मल्टीस्टोरी पार्किंग का भी कुछ प्लान पूना शहर के लिए करना चाहिए । लोनावला-दौंड, वाया पूना जो लोकल है, वहां 100 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में कम से कम 25 लाख कामगार लोग काम करते हैं और आते-जाते रहते हैं । उनको कोई सुविधा नहीं मिली है । अत: एक डेडिकेटेड लाइन लोनावला से दौंड तक होनी चाहिए, जो कि मेरी मांग है । पूना-नासिक का काम भी पूरा होना चाहिए । मैं एक बात याद दिलाना चाहता हूँ । जब हम पूना से, यहाँ सतारा के सांसद थे, मुझे अंगड़ी साहब की याद आ रही है, उन्होंने उसके बारे में मीटिंग ली थी ।
मंत्री महोदय, मैं दोहराना चाहता हूँ कि सुरेश अंगड़ी जी ने इसके बारे में बहुत सारी मीटिंग्स लीं । उनका एक स्वप्न था कि पूना-बेलगाम 6 घंटे में पहुँच जाएं और उसके लिए एक ट्रेन शुरू हो जाए । उसके लिए उन्होंने प्रयास भी किया था, लेकिन काम अधूरा रहा है । वे अपने एक सहयोगी थे, मंत्री थे, अच्छे कार्यकर्ता थे, उनकी जो एक इच्छा थी, उसे पूरा करने के लिए पूना-बेलगाम की ट्रेन जल्दी से जल्दी शुरू होनी चाहिए, ऐसा मुझे लगता है । मैं दो पॉइंट कहकर अपना भाषण समाप्त करना चाहता हूँ । ऐसा लगता है कि पीयूष जैसा एक डायनेमिक लीडर और उनका साथ देने वाले अनुराग जी हों, ये सब मोदी जी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं । बहुत सारे सांसदों ने यहाँ अभी भाषण किया है, अपने-अपने विचार रखे हैं । हम जब अपने एरिया में जाते हैं तो रेलवे अधिकारियों को हमारा ज्यादा से ज्यादा सहयोग लेना चाहिए, हमारा पार्टिसिपेशन होना चाहिए । एक कमेटी बनी, उसका चेयरमैन हो गया, मेंबर हो गया, काम खत्म हो गया । इतनी सारी समस्याएं उनको हैं, लेकिन लोकप्रतिनिधि का साथ लेकर उन प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने की आदत थोड़ी सी कम है । सभी रिस्पांसबिलिटी अपने ऊपर लेते हैं और 5-5, 10-10 सालों तक काम पूरा नहीं होता है । मुझे लगता है कि जो कमेटी होती है, उसे थोड़ा ज्यादा अधिकार देना चाहिए । 6 महीने के बाद एक मीटिंग होती है । अगर एक-दो महीने में मीटिंग हो तो जो लोकल प्रॉब्लम्स हैं, जमीन अधिग्रहण की समस्याएं हैं, अन्य समस्याएं हैं, राज्य सरकार से जुड़ी हुई समस्याएं हैं, उन सभी समस्याओं को हम सॉल्व कर सकते हैं । मुझे लगता है कि इस पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है । मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में, जैसे अमेरिका के लिए बोलते हैं कि वहाँ के रोड्स अच्छे हैं, गडकरी साहब हमेशा ऐसा बोलते हैं, ऐसे ही रेलवे रत्नवाहिनी है, रेलवे हो चाहे नेशनल हाइवे हो । अभी हमारी आबादी लगातार बढ़ रही है, हमारा 130 करोड़ का देश हो गया है, लेकिन बहुत सालों से रेलवे जिस परसेंटेज में बढ़नी चाहिए, उतना नहीं बढ़ी थी । इसलिए चाहे वह शिक्षा हो, चाहे यातायात हो, चाहे इंडस्ट्री की डेवलपमेंट हो ।
माननीय सभापति : कृपया आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री गिरीश भालचन्द्र बापट : मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त करता हूँ । चाहे किसान हो, इन सबके लिए यह रत्नवाहिनी है । यह सशक्त होनी चाहिए । इसका काम जल्दी से जल्दी होना चाहिए । मैं माँग कर रहा हूँ कि सरकार इसके बारे में और कुछ सोचे ।
माननीय सभापति : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्री गिरीश भालचन्द्र बापट : राजस्थान के लिए एक ट्रेन शुरू होनी चाहिए, जयपुर और जोधपुर के लिए ट्रेन शुरू होनी चाहिए, ऐसी मेरी माँग है । दौंड एक जंक्शन है, वहाँ भी डेवलपमेंट की जरूरत है, ऐसा मुझे लगता है । पुणे-नासिक रेल लाइन प्राथमिकता के आधार पर चालू होनी चाहिए । अगर यह चालू हो गई तो महाराष्ट्र में बहुत फर्क पड़ने वाला है ।
माननीय सभापति : गिरीश जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्री गिरीश भालचन्द्र बापट : इसलिए मैं माँग करता हूँ कि पूना के बारे में अधिक ध्यान देकर, अधिक निधि उपलब्ध कराकर रेलवे के माध्यम से हमारे देश और महाराष्ट्र की प्रगति करने के लिए रेलवे का योगदान होगा । हमारे मित्र और मंत्री पीयूष जी आज हमारी बातों को सुन रहे होंगे । वे बहुत अच्छी तरह से काम करते हैं । मैं उनको भी शुभकामनाएं देता हूँ । काम के लिए पैसा कम पड़ा तो अनुराग जी भी सबकी मदद करते हैं । मैं उनको भी धन्यवाद देता हूँ । अब मैं अपना भाषण समाप्त करता हूँ । जय हिन्द, जय महाराष्ट्र ।
*m73 *श्री विष्णु दयाल राम (पलामू): सामान्य बजट के साथ ही रेलवें बजट माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमण जी के द्वारा 1 फरवरी को 2021 को संसद में पेश किया गया ।
इससे पहले कि मैं Demand for Grant on Railways पर अपनी बात रखू मैं माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल एवं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूँ,उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने जिस कुशलता के साथ लाखों की तायदाद में प्रवासी मजदूरों को एक स्थान से दूसरे तक पहुंचाने का कार्य किया वह अपने आप में अद्धितीय है । इतना ही नहीं जब कोरोना अपने उच्चतम शिखर पर था तब अस्पतालों की संख्या को देखते हुए रेलवे ने अपने कोचों में चिकित्सा से युक्त सारी सुविधाओं को उपलब्ध कराया ताकि अस्पतालों की संख्या में बेड की कमी होने पर मरीजों का इलाज इन रेल कोचों में किया जा सके ।
अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन और सरकारी वित्त के लिहाज से 2020-21एक नॉन स्टैंडर्ड वर्ष था । विदित है कि वर्ष 2020-21 के बजट में कुल पूंजीगत व्यय 1,61,042करोड़ रुपये था । प्रस्तावित बजट 2021-22 में पूंजीगत व्यय 2,15,058करोड़ रुपये है, जो बजट प्रस्ताव 2020-21से33 प्रतिशत अधिक है । इस वर्ष 2,15,058 करोड़ रुपये का अब तक सर्वाधिक योजनागत पूंजी व्यय है, जिसमें आम बजट में आवंटित किए गए आंतरिक स्रोत से 7,500 करोड़ रुपये, अतिरिक्त बजट संबंधी संसाधनों से 1,00,258करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय आवंटन से 1,07,100करोड़ रुपये शामिल शामिल हैं । बजट 2021-22 में भारतीय रेलवे के लिए 1,10,055 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड व्यय को प्रस्तावित किया गया है, जिसमें1,07,100 करोड़ रुपये पूजीगत व्यय के लिए हैं । कुल बजट आवंटन 37,050 करोड़ रुपये है, जो वित्त वर्ष 2020-21के बजट के मुकाबले 53 प्रतिशत अधिक है । कोविड-19 महामारी के बावजूद,यह भारतीय रेलवे में अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के स्तर पर की जा रही प्रगति का उल्लेखनीय संकेत है । भारतीय रेलवे पूंजीगत व्यय में की गई इस वृद्धि के साथ संपूर्ण भारतीय अर्थव्यवस्था का चालक के तौर पर नेतृत्व करेगी । वार्षिक योजना 2021-22 में मुख्य रूप से बुनियादी ढांचागत विकास, क्षमता वृद्धि, टर्मिनल सुविधाओं के विकास, ट्रेनों की गति में वृद्धि, सिग्नल प्रणाली, यात्रियों/उपयोगकर्ताओं संबंधी सुविधाओं में सुधार, अंडरपास/पुलों संबंधी सुरक्षा कार्यों सहित विभिन्न गतिविधियों पर जोर दिया गया है । 2021-22में निम्नलिखित योजनागत श्रेणियों में अब तक का सर्वाधिक आवंटन किया गया है:
(करोड़ में) योजना बजट अनुमान 2020-21 बजट अनुमान 2021-22 नई रेल लाइने 26971 40932 रेल लाइनों का दोहरीकरण 21545 26116 ट्रैफिक सुविधाएं 2058 5263 आरओबी/आरयूबी 6204 7122 जम्मू और कश्मीर,हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में अब तक का सर्वाधिक 12,985करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2020-21के7535 करोड़ रुपये के आवंटन की तुलना में 72फीसदी अधिक है । DFCCIL (Dedicated Freight Corridor Corporation of India Ltd.) के लिए 16,086 करोड़ रुपये, NHSRCL (National High Speed Rail Corporation Ltd.) के लिए 14,000 करोड़ रुपये और KMRCL (Kolkata Metro Rail Corporation Ltd.) के लिए 900 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ PSU/JV/SPV (Special Purpose Vehicle) में निवेश के लिए 37,270करोड़ रुपये का जीबीएस आवंटन किया गया है । निम्नलिखित सारणी में बजट अनुमान 2021-22और बजट अनुमान 2020-21के तुलनात्मक विवरण को स्रोत के आधार पर दर्शाया गया है ।
(करोड़ में) स्रोत बजट अनुमान 2020-21 कुल बजट समर्थन 70250 आंतरिक स्रोत 7500 बजट संबंधी अतिरिक्त स्रोत 83292 कुल पूंजीगत व्यय 161042 रेलवे ने लॉकडाउन अवधि का उपयोग200 से अधिक महत्वपूर्ण रखरखाव संबंधी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक अवसर के रूप में किया । इनमें बड़े पैमाने पर रेल पटरियों का रखरखाव, फ्रेट बिज़नेस संबंधी योजनाओं पर काम करना और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जम्मू और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी आदि जैसी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को तीव्र गति से आगे बढ़ाना शामिल हैं । लॉकडाउन के बाद, विशेष रूप से पिछले 5महीनों में भारतीय रेलवे की फ्रेट परियोजनाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जो देश में आर्थिक पुनरुत्थान के साथ-साथ रेलवे में हुए बदलावों को दर्शाता है । ऐसा माल गाड़ियों की औसत गति को 23किमी प्रतिघंटा से बढ़ाकर 46 किमी प्रतिघंटा करने, विभिन्न टैरिफ और गैरटैरिफ उपायों को करने के साथ-साथ ऑनलाइन बुकिंग के लिए पहली बार “फ्रेट बिजनेस डेवलपमेंट पोर्टल” को शुरू करने से हुआ ।पिछले वर्ष की तुलना में यह वित्त वर्ष अधिक माल बुकिंग के साथ खत्म होने की संभावना है । यह उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे ने भारत-2030के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (एनआरपी)तैयार की है । यह भविष्य में रेलवे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए होगा, जिसके तहत रेलवे में वर्ष 2030 तक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा, जो वर्ष 2050 तक रेलवे संबंधी सभी ज़रूरतों और मांगों को पूरा करने में सक्षम होगा । वर्ष 2030 तक मांग और आवश्यक क्षमता वृद्धि की पहचान करने वाली एनआरपी अर्थव्यवस्था की लॉजिस्टिक लागत को कम करने के अपने अंतिम लक्ष्य के साथ वर्ष 2050 तक भारतीय रेलवे के मॉडल शेयर को पुनः 45 प्रतिशत तक पहुंचाने पर भी ध्यान केन्द्रित करती है । बजट में यह घोषणा की गई है कि वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी)और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जून 2022 तक शुरू होने की उम्मीद है । साथ ही वित्त मंत्री ने निम्नलिखित अतिरिक्त पहल को लागू करने का प्रस्ताव भी रखा हैः
1. वर्ष2021-22 में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सोननगर गोमोह सेक्शन (263.7किमी)को पीपीपी मोड में लिया जाएगा । इसके बाद 274.3 किमी के गोमोह-दनकुनी सेक्शन को पीपीपी मोड में लिया जाएगा ।
2. खड़गपुर से विजयवाड़ा तक ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर, भुसावल से खड़गपुर और दुनकुनी तक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और इटारसी से विजयवाड़ा तक नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर नामक भविष्य की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं को शुरू किया जाएगा । पहले चरण में इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी ।
3. ब्रॉड-गेज मार्गों के शत प्रतिशत विद्युतीकरण के कार्य को दिसंबर 2023तक पूरा किया जाएगा । यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने के उद्देश्य से बजट में यात्री ट्रेनों के लिए सुंदर डिजाइन वाले विस्ता डोम एलएचबी कोच देने का प्रस्ताव किया गया है । वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेलवे के उच्च घनत्व नेटवर्क और अत्यधिक उपयोग होने वाले मार्गों पर स्वदेश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं । यह प्रणाली मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं की आशंका को कम करती है ।
यह अच्छी बात है कि सरकार ने मानवरहित लेवल कासिंग को बंद करने का निर्णय लिया जो स्वागत योग्य कदम है । परंतु मेरा अनुरोध है बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के (RUB याROB के निर्माण के)एकाएकRailway Crossing को बंद कर देने से ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । अगर मै अपने संसदीय क्षेत्र पलामू (झारखण्ड)की ही बात करूँ तो ऐसे कई Railway Crossing है जिनको बंद कर दिए जाने के कारण गाँव नदी के दो छोर बनकर रह गए है,यें रेलवे कासिंग जैसे डाली,पंजरीकला,लालगढ,कजरात नावाडीह, तोलरा(मल्लाह टोली), अहिरपुरवा ईत्यादि ऐसे कांसिंग है जिनके बंद हो जाने से ग्रामीणों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । मैं सिर्फ उससे उत्पन्न व्यवहारिक कठिनाईयों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं और जनता की कठिनाईयों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जनता की समस्या का निदान चाहता हूँ । इस संबंध में मेरा एक सुझाव है कि Unmanned Railway Crossing के स्थल पर या उसके अगल बगल के स्थान पर जहाँ पर भी संभव हो L.H.S.का निर्माण कराकर समस्या का समाधान बहुत हद तक किया जा सकता है जिससे जनता की यातायात में उत्पन्न समस्या का समाधान हो सके । जबतक वैकल्पिक व्यवस्था (RUBयाROB का निर्माण) नहीं कर लिया जाता,तबतक पूर्व की भाँति Railway Crossing से यातायात को चालू रखा जाए ।
साथ ही मेरे संसदीय क्षेत्र पलामू से संबंधित कुछ अन्य माँगें भी हैं जिसे मै संक्षेप मे रखना चाहता हूँ वैश्विक महामारी कोविड-19के कारण विभिन्न स्थानों से पलामू संसदीय क्षेत्र के विभिन्न स्टेशनों से होकर चलने वाली ट्रेनों का परिचालन किया जाय । वर्तमान समय में कोविड-19से हालात सामान्य होने पर काफी संख्या में लोगों का आवागमन चालू है लेकिन ट्रेनों का परिचालन नहीं होने से लोगों को सुचारू रूप से आवागमन करने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । जो निम्नलिखित है:
1.ट्रेन सं0 18635/18636 रांची-सासाराम इंटरसिटी एक्स0
2. ट्रेन सं0 18009/18010 संतरागाछी एक्स0
3. ट्रेन सं0 19413/19414 कोलकाता-अहमदाबाद एक्स0
4. ट्रेन सं0 12873/12874 हटिया-आनंद बिहार झारखण्ड एक्स0
5.ट्रेन सं0 18611/18612 रांची-वाराणसी इंटरसिटी एक्स0
6. ट्रेन सं0 18631/18632 रांची-अजमेर गरीब नवाज एक्स0
7. ट्रेन सं0 18613/18614 रांची-चोपन इंटरसिटी एक्स0 पैसेंजर ट्रेनें
1.ट्रेन सं0 53351/53352 बरवाडीह-चुनार पैसेंजर
2.ट्रेन सं0 53611/53612 बरवाडीह-डिहरी पैसेंजर
3.ट्रेन सं0 63557/63558 बरकाकाना-वाराणसी मेमु पैसेंजर
4.ट्रेन सं0 53357/53358 बरकाकाना-डिहरी पैसेंजर
5.ट्रेन सं0 53343/53344 गोमो चोपन पैसेंजर
6.ट्रेन सं0 53349/53350 बरवाडीह-डिहरी पैसेंजर नई दिल्ली-रॉची राजधानी एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाया जाय । रफीगंज से होते हुए डालटनगंज तक बड़ी लाइन बनाने की ओर शीघ्र ध्यान दिया जाए । 12877/12878 रांची नई दिल्ली गरीब रथ वाया बरकाकाना-डालटनगंज होकर सप्ताह में तीन दिन चलता है, उसे प्रतिदिन चलायी जाय एव उक्त ट्रेन गरीब रथ के अलाग जंक्शन पर दो मिनट के ठहराव भी दिया जाय । ज्ञातव्य हो कि मेरे संसदीय क्षेत्र पलामू के सौ से अधिक संख्या में छात्र/छात्राए अलीगढ़ विश्वविद्यालय में अध्ययनरत है । यदि गरीब रथ का दो मिनट का ठहराव अलीगढ़ जंक्शन पर दे दिया जाता है तो उन्हें बहुत सुविधा होगी । रांची चोपन एक्सप्रेस ट्रेन सं0-18613/18614को वाया लोहरदगा होकर प्रतिदिन चलाने एवं प्रस्तावित समय सारणी-(चोपन से प्रस्थान 6:00बजे सुबह, रांची आगमन 10:45 बजे दिन में, रांची से प्रस्थान 18:00बजे शाम, चोपन आगमन 22:45 बजे रात्रि) में परिवर्तन की जाय, साथ ही इस ट्रेन का सप्ताह में तीन दिन बरकाकाना होकर चलती है,उसे प्रतिदिन वाया टोरी लोहरदगा होकर चलायी जाय । 18311/18611इटरासटा एक्सप्रेस जो रांची से वाराणसी तक चलती है उसे गोरखपुर तक विस्तार किया जाय । 11447/11448 हावड़ा जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस प्रतिदिन का विस्तार मुंबई तक किया जाय । 12453/12454 रांची नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस जो सप्ताह में दो दिन चलती है,उसमें डालटनगंज में रिजर्वेशन का कोटा बढ़ाया जाय । 13025/13026 हावडा भोपाल एक्सप्रेस साप्ताहिक जो कि धनबाद चन्द्रपुरा लाइन बंद होने के कारण बंद कर दिया गया था, उसे पुनः चालू करवायी जाय,क्योंकि धनबाद चन्द्रपुरा लाइन फिर से चालू हो गयी है । 18631/18632 रांची अजमेर गरीब नवाज साप्ताहिक एक्सप्रेस का ठहराव बनस्थली निवाई में किया जाय,क्योंकि इधर की बहुत बच्चियाँ वहां पढ़ाई करती है, जिनको जयपुर से वापस जाना पड़ता है । पलामू एक्सप्रेस का रजहरा, करकटा एवं कजरात नावाडीह स्टेशनों पर ठहराव दिया जाय । ट्रेन संख्या 14372/14371 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)का रांची तक विस्तार किया जाय । ट्रेन सं0-14372/14371 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)बरवाडीह चोपन तक चलती है तथा चोपन में त्रिवेणी एक्सप्रेस से जुड़ कर लखनउ,बरेली होते हुए टनकपुर तक जाती एवं आती है । विदित है कि यह ट्रेन सं0-14372 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)चोपन से सुबह 05.57बजे खुलती है तथा रेणुकूट, बिन्ढमगंज,नगर उटारी, रमुना,मेराल ग्राम, गढ़वा,रेहला(गढ़वा रोड़), डालटनगंज होते हुए बरवाडीह सुबह 10.30बजे पहुचती है । यह ट्रेन बरवाडीह यार्ड में ही खड़ी रहती है तथा दूसरे दिन 13.00बजे बरवाडीह से चोपन के लिए अप त्रिवेणी लिंक 14371 के रूप में खुलती है । यदि इस ट्रेन 14372 का विस्तार बरवाडीह से आगे लातेहार,टोरी(चंदवा)होते हुए लोहरदगा के रास्ते रांची तक कर दिया जाए, तो इस क्षेत्र पलामू, गढ़वा,लातेहार के लोगों को अपनी राजधानी रांची के लिए एक और ट्रेन सुविधा का लाभ मिल जाएगा । पुनः इस ट्रेन को 14371 त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस के रूप में रांची से सुबह खोला जाए, तो इस रैक का सबसे बेहतर सदुपयोग होगा । इसको चलान क लिए रेलवे को भी चोपन से रांची वाया लोहरदगा एक्सट्रा मैन पावर की आवश्यकता नही होगी ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि रेलवे परिचालन अनुपात को सुधारने एवं ट्रेनों की punctuality में और सुधार करने की आवश्यकता है । अंत में मैं रेलवे संबंधी मॉग का अनुमोदन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूँ ।
धन्यवाद,जय हिन्द ।
*m74 *श्रीमती अन्नपुर्णा देवी (कोडरमा): मैं रेलवे के लिए अनुदान की मांग के समर्थन में खड़ी हुई हूँ | पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारतीय रेलवे को कोविड संबंधी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ा । कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए यात्री सेवाओं को बंद करना पड़ा । हालाँकि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने राष्ट्रीय स्तर पर ज़रूरी उत्पादों और सेवाओं की सप्लाई चालू रखी और लाखों प्रवासियों को उनके गंतव्य तक भी पहुंचाया । यह देश के लोगों के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी,माननीय रेल मंत्री जी के कुशल प्रबंधन का ही परिणाम है कि कोरोना महामारी के दौरान आम जनता तथा वर्तमान बजट में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड 1,10,055 करोड़ रुपये के परिव्यय को स्वीकृत किया गया है जिसमें से 1,07,100 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश के लिए दिए जाएंगे । भारतीय रेलवे ने इंडिया - 2030 के लिए राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है । इसके जरिए भारतीय रेल प्रणाली को 2030 तक भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया जाएगा । केंद्र सरकार द्वारा 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने में उद्योग जगत की सहायता के लिए मालढुलाई की लागत में कमी लाई जाएगी । जून, 2022 तक पश्चिमी समर्पित मालढुलाई गलियारा (डीएफसी) और पूर्वी समर्पित मालढुलाई गलियारे की शुरुआत हो जाएगी ।
पूर्वी माल ढुलाई गलियारे के सोननगर - गोमोह खंड (263.7 किलोमीटर) को सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत 2021-22 तक शुरु किये जाने का प्रस्ताव दिया गया | 274.3 किलोमीटर का गोमोह -दनकुनी खंड भी कुछ समय के बाद प्रारंभ हो जाएगा । भविष्य के लिए समर्पित कई मालढुलाई गलियारे शुरु होंगे ।
दिसंबर, 2023 तक ब्रॉडगेज रेलमार्गों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण कर दिया जाएगा । 2021 के अंत तक 72 प्रतिशत लगभग 46 हजार ब्रॉडगेज रुट किलोमीटर - आरकेएम के विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा । पहली अक्टूबर, 2020 तक 41,548 ब्रॉडगेज रुट किलोमीटर का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है ।
केन्द्र सरकार ने रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कई उपायों की घोषणा की है :
देश में पर्यटन वाले रेल मार्गों पर यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त विस्टा डोम एलएचबी कोच को रेलगाड़ियों में लगाया जाएगा ।
अत्यधिक व्यस्त और अधिक प्रयोग किए जाने वाले रेलमार्गों पर यात्रियों को सुविधा प्रदान करने तथा रेल दुर्घटनाओं में न्यूनतम मानवीय हानि के लिए स्वदेश में विकसित रेल सुरक्षा प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा ।
कोविड चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेल ने28 फरवरी को पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक संचयी रूप से अधिक माल लोडिंग का कार्य किया । लोडिंग, आय तथा गति ककी दृष्टि से फरवरी, 2021 में माल ढुलाई के आंकडे ऊपर रहे हैं । कुल 5 मिलियन टन से अधिक की लोडिंग की गई । 28 फरवरी, 2021 को भारतीय रेल ने इस वर्ष के लिए 1102.17 मिलियन टन माल लोडिंग का काम किया जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के 1102.1 मिलियन टन से अधिक है । मासिक आधार पर भारतीय रेल ने 28 फरवरी, 2021 तक 112.25 मिलियन टन की लोडिंग की जो कि पिछले वर्ष की28 फरवरी के 102.21 मिलियन टन की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है । दैनिक आधार पर28 फरवरी, 2021 को भारतीय रेल ने5.23 मिलियन टन की लोडिंग की जो कि पिछले वर्ष की28 फरवरी के 3.83 मिलियन टन की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है ।
मालगाड़ियों की औसत गति फरवरी, 2021 में प्रति घंटे 46.09 किलोमीटर रही । पिछले वर्ष के इसी महीने में माल गाड़ियों की गति 23.01 किलोमीटर प्रति घंटे थी । 28 फरवरी को मालगाड़ियों की औसत गति 47.51 किलोमीटर प्रति घंटे थी । पिछले वर्ष इसी तिथि को मालगाड़ियों की औसत गति 23.17 किलोमीटर प्रति घंटे थी । यह दोगुनी गति से अधिक है ।
फरवरी, 2021 में भारतीय रेल ने माल ढुलाई से 11096.89 करोड़ रुपए की आय अर्जित की । यह पिछले वर्ष की समान अवधि की 10305.02 करोड़ रुपए की आय से 7.7 प्रतिशत अधिक है । भारतीय रेल ने28 फरवरी, 2021 को माल ढुलाई से 509.44 करोड़ रुपए की आय की । पिछले वर्ष इसी दिन 378.56 करोड़ रुपए की आय हुई थी । इस तरह इसमें 34 प्रतिशत का इजाफा हुआ । माल ढुलाई को आकर्षक बनाने के लिए भारतीय रेल में अनेक रियायतें और डिस्काउंट दिए जा रहे हैं । रेल के माल ढुलाई व्यवसाय में जोन तथा मंडलों में बिजनेस डेवलपमेंट यूनिटों के उभरने, उद्योग तथा लॉजिस्टिक सेवा प्रदाताओं से निरंतर संवाद और तेज गति के कारण मजबूती मिली है ।
भारतीय रेल ने कोविड-19 को अवसर मानते हुए अपनी चौतरफा सक्षमता में सुधार का कार्य किया है । गहन निगरानी, बेहतर प्रबंधन और सभी हितधारकों के साथ संपर्क से यह निश्चित हुआ है कि अब सभी परियोजना स्थलों पर काम अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है । भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन अवधि का उपयोग कर 200 से अधिक महत्वपूर्ण रख-रखाव संबंधी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक अवसर के रूप में कार्य किया । इनमें बड़े पैमाने पर रेल पटरियों का रख-रखाव, फ्रेट बिज़नेस संबंधी योजनाओं पर काम करना और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जम्मू और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी आदि जैसी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को तीव्र गति से आगे बढ़ाना शामिल हैं । लॉकडाउन के बाद, विशेष रूप से पिछले 5 महीनों में भारतीय रेलवे की फ्रेट परियोजनाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जो देश में आर्थिक पुनरुत्थान के साथ-साथ रेलवे में हए बदलावों को दर्शाता है । ऐसा माल गाड़ियों की औसत गति को 23 किमी प्रतिघंटा से बढ़ाकर 46 किमी प्रतिघंटा करने, विभिन्न टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को करने के साथ-साथ ऑनलाइन बुकिंग के लिए पहली बार “फ्रेट बिजनेस डेवलपमेंट पोर्टल" को शुरू करने से हुआ । पिछले वर्ष की तुलना में यह वित्त वर्ष अधिक माल बुकिंग के साथ खत्म होने की सभावना है ।
यह उल्लेखनीय कि भारतीय रेलवे ने भारत-2030के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (एनआरपी)तैयार की है । यह भविष्य में रेलवे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए होगा, जिसके तहत रेलवे में वर्ष 2030 तक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा, जो वर्ष 2050 तक रेलवे संबंधी सभी ज़रूरतों और मांगों को पूरा करने में सक्षम होगा । वर्ष 2030 तक मांग और आवश्यक क्षमता वृद्धि की पहचान करने वाली एनआरपी अर्थव्यवस्था की लॉजिस्टिक लागत को कम करने के अपने अंतिम लक्ष्य के साथ वर्ष 2050 तक भारतीय रेलवे के मॉडल शेयर को पुनः 45 प्रतिशत तक पहुंचाने पर भी ध्यान केन्द्रित करती है ।
बजट में यह घोषणा की गई है कि वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी)और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जून, 2022 तक शुरू होने की उम्मीद है । साथ ही वित्त मंत्री ने निम्नलिखित अतिरिक्त पहल को लागू करने का प्रस्ताव भी रखा है ।
वर्ष2021-22 में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सोननगर-गोमोह सेक्शन (263.7किमी)को पीपीपी मोड में लिया जाएगा । इसके बाद 274.3 किमी के गोमोह-दनकुनी सेक्शन को पीपीपी मोड में लिया जाएगा ।
ब्रॉड-गेज मार्गों के शत प्रतिशत विद्युतीकरण के कार्य को दिसंबर, 2023 तक पूरा किया जाएगा । वर्ष 2021 के अंत तक ब्रॉड गेज मार्ग किलोमीटर (आरकेएम)विद्युतीकरण के 46,000 आरकेएम अर्थात् 72 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है,जो01 अक्टूबर, 2020 को 41,548 आरकेएम था ।
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने के उद्देश्य से बजट में यात्री ट्रेनों के लिए सुंदर डिजाइन वाले विस्ता डोम एलएचबी कोच देने का प्रस्ताव किया गया है । वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेलवे के उच्च घनत्व नेटवर्क और अत्यधिक उपयोग होने वाले मार्गों पर स्वदेश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं । यह प्रणाली मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं की आशंका को कम करती है ।
अंत में मैं संसदीय क्षेत्र कोडरमा के अंतर्गत रेलवे से सम्बंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मांगो की ओर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगी । संसदीय क्षेत्र कोडरमा के अधीन मुख्य रूप से नई रेल गाड़ी, नई रेलवे लाइन,हाल्ट का निर्माण,हाल्ट रेलवे स्टेशन को स्थायी रूप से नियमित स्टेशन बनाए जाने की मांग के साथ कई आरओबी तथा फूटओवर ब्रिज का निर्माण कराये जाने की आवश्यकता है जो निम्न है :
गाड़ी का ठहराव - पूर्व मध्य रेल के धनबाद रेल मंडल के निम्न स्टेशनों पर मेल/एक्सप्रेस गाडियों का ठहराव दिए जाने की आवश्यकता है । कोडरमा रेलवे स्टेशन पर सियालदह राजधानी एक्सप्रेस चौधरी बांध स्टेशन पर मुंबई मेल इंटरसिटी शर्मा टांड स्टेशन पर जम्मूतवी सियालदह एक्सप्रेस परसाबाद एवं चौबे स्टेशन पर पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का स्थायी ठहराव दिया जाय । कोडरमा से महेशमुंडा रेल लाईन पर स्थित न्यू गिरिडीह एवं महेशमुंडा के बीच दिघिया खूर्द रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली सभी गाडियों का ठहराव दिघिया खुर्द रेलवे स्टेशन पर दिया जाय ।
धनबाद रेल मण्डल के चिचाकी रेलवे स्टेशन के समीप चिरुआ दरगाह है,जहां पर देश भर के लोग उर्श मेला में भाग लेने के लिए आते हैं । इस स्टेशन पर हटिया पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा सियालदह जम्मूतवी एक्सप्रेस का ठहराव ।
नई रेलगाड़ी चलाये जाने की आवश्यकता - गिरिडीह से वाया जमुआ, राजधनवार, कोबाड, नवाडीह, महेशपुर, कोडरमा, टाउनकोडरमा जंक्शन, बरही, पदमा, कटकमसांडी, हजारीबाग टाउन, चरही, बरकाकाना, रामगढ़, होते हुए रांची तक नई रेल लाइन का निर्माण हुआ है । वर्तमान में नाम मात्र की एक पैसेंजर गाड़ी ही चलायी जा रही है । अभी तक इस रेल खंड पर कोई भी मेल एक्सप्रेस गाड़ी नहीं चलायी जा रही है । इस क्षेत्र के निवासियों की मांग है कि नई रेल लाइन पर गिरिडीह से राँची के बीच प्रतिदिन कम से कम दो जोड़ी मेल एक्सप्रेस गाड़ियों का परिचालन प्रारम्भ कराया जाय ।
निम्न रेल मार्गो पर नई रेलगाड़ी चलायी जाय -
1) कोडरमा से जसीडीह वाया गिरिडीह -पैसेन्जर ट्रेन
2) कोडरमा से रामपुर हाट वाया गिरिडीह तथा जसीडीह - एक्सप्रेस ट्रेन ।
3) जसीडीह से दिल्ली वाया कोडरमा - एक्सप्रेस ट्रेन
4) कोडरमा से हावड़ा वाया गिरिडीह तथा जसीडीह - एक्सप्रेस ट्रेन
5) जसीडीह से सूरत वाया गिरिडीह तथा कोडरमा- एक्सप्रेस ट्रेन रेलवे हाल्ट का निर्माण - कोडरमा से गिरिडीह रेल खंड पर स्थित सिजुआ, रेम्बा तथा झारखण्ड धाम पर रेलवे हाल्ट का निर्माण कराये जाने की आवश्यकता है | *m75 श्री शंकर लालवानी (इन्दौर): महोदय, धन्यवाद ।
महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में बहुत ही शानदार और जानदार बजट पेश किया गया है । मैं माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय पीयूष गोयल जी को भी धन्यवाद देता हूँ । मैं माननीय रेल मंत्री जी के ध्यान में इन्दौर की कुछ बातें लाना चाहता हूँ । इन्दौर-मनमाड़ रेल लाइन की वर्षों से बात हो रही है । सर्वे का काम भी प्रारम्भ हुआ था, लेकिन इस बार बजट में प्रावधान नहीं किया गया है । मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ ।
इन्दौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट में काम प्रारम्भ हुआ था, काम लगातार चल भी रहा था, लेकिन इस बार जो अभी इस बजट में आया है, हमारी जानकारी में आया है कि इसको होल्ड पर रखा गया है । मेरा ऐसा मानना है कि इन्दौर-दाहोद बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, इसको होल्ड पर न रखा जाए और इसमें काम प्रारम्भ किया जाए ।
इन्दौर-खंडवा-अकोला में गेज कन्वर्जन का काम है, इसमें तेजी आनी चाहिए । पिछले 25 वर्षों में तीन बार इसका सर्वे हुआ है । मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि इस बार इसके लिए 260 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है ।
19.00hrs लेकिन ग्रेडिंग को लेकर अभी भी इश्यु है, रेलवे बोर्ड में प्रकरण लंबित है । मैं चाहता हूं कि उसका शीघ्र निराकरण होना चाहिए । इंदौर-देवास-उज्जैन में डबलिंग का काम करना है, देवास और उज्जैन के बीच में लगभग पूर्णत: की ओर है, लेकिन देवास और इंदौर के बीच में जो डबलिंग का काम है, वह शीघ्र पूरा होना चाहिए । क्योंकि होता यह है कि सभी गाड़ियां जो आती हैं, मैं भी स्वयं जब जाता हूं तो उज्जैन में उतर जाता हूं और उसके बाद इंदौर जाता हूं । उज्जैन से इंदौर जाने के लिए एक घंटे का रास्ता है, दो-ढाई घंटे लगते हैं, क्योंकि वह सिंगल ट्रेक है, उसे डबल होना चाहिए । मुझे लगता है कि उसमें भी काम तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए ।
कोरोना के समय अधिकांश ट्रेनें बंद हो गई थीं, उनमें से कुछ ट्रेनें चालू हुई हैं । जो बची हुई ट्रेनें हैं, मुझे लगता है कि वे शीघ्र चालू होनी चाहिए । इंदौर-जयपुर लिंक एक्सप्रेस भी चालू होना चाहिए । इंदौर से गांधी नगर जो एक्सप्रेस ट्रेन चलती है, उसको माउंट आबू रोड तक बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि प्रजापति ब्रह्मकुमारी सेंटर तक जो लोग जाना चाहते हैं, उसका फायदा उनको मिल पाएगा । इंदौर से मुम्बई और इंदौर से दिल्ली सुपर एक्सप्रेस ट्रेन प्रारम्भ होनी चाहिए, इसकी मांग लम्बे समय से हो रही है । इंदौर से मुम्बई जाने वाली बुलेट ट्रेन के लिए एक सर्वे होना चाहिए, क्योंकि उसमें ट्रैफिक का बहुत लोड है । आने वाले समय में बुलेट ट्रेन के लिए सर्वे इंदौर से मुम्बई के लिए होना चाहिए । इंदौर-महु-देवास-उज्जैन के लिए लोकल ट्रेन चलाई जानी चाहिए, क्योंकि वहां लोकल पैसेंजरों का काफी लोड है, जो बसों के माध्यम से आते-जाते हैं । उनके लिए लोकल ट्रेन चलनी चाहिए ।
पाँच रेलवे ओवरब्रिजेज की मांग इंदौर के लिए हम लम्बे समय से कर रहे हैं । राजेन्द्र नगर, रेती मंडी, इंदौर, मांगलिया के पास में, चन्द्रावती गंज में, लक्ष्मी बाई रेलवे स्टेशन के पास में और केसर बाग रोड पर रेलवे ओवर ब्रिज की मांग हम लम्बे समय से कर रहे हैं । मुझे लगता है कि माननीय मंत्री जी इस ओर ध्यान देंगे और हमारी समस्या को शीघ्र दूर करेंगे । धन्यवाद । जय हिंद, जय भारत ।
*m76 SHRI ANURAG SHARMA (JHANSI): Hon. Chairman, Sir, I rise in support of the Railway Budget. Indian Railways is the fourth largest rail network in the world with 1.23 million employees. Today, I would like to take this opportunity to congratulate the hon. Railway Minister and the hon. Prime Minister especially for running Shramik Trains in my area. I come from Bundelkhand in Jhansi and Lalitpur. मेरे यहां साढ़े चार लाख से ज्यादा माइग्रेंट भाई आए थे । मैं विशेष रूप से मंत्री जी का धन्यवाद करते हुए यह कहना चाहूंगा कि मैंने उनसे आठ ट्रेनों के लिए रिक्वेस्ट की थीं । पहली बार मैंने भारत सरकार में ऐसे मंत्री जी देखे हैं, जिन्होंने रात के एक-एक बजे तक हमको फोन करके हमारे लिए ट्रेनें लगाईं और एक नहीं आठ ट्रेनें मेरे एरिया में लगाईं । इसलिए मैं मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूं और मैं रिकार्ड पर कहना चाहता हूं कि वे आठों श्रमिक स्पेशल ट्रेनें दिन-रात चलीं, जब तक मेरे यहां साढ़े चार लाख लोग अपने घर यूपी में नहीं पहुंच गए । पूरी झांसी, ललितपुर की जनता की ओर से मंत्री जी का बहुत-बहुत आभार ।
सर, इस साल विशेष रूप से मैं यह भी कहना चाहूंगा कि एक भी बड़ा हादसा रेल का नहीं हुआ, नहीं तो पिछले सालों में हम हमेशा रेल दुर्घटना के बारे में सुनते थे । कई सैकड़ों लोगों की जानें जाती थीं, कई सैकड़ों लोग इंजर्ड होते थे । जब से यह मोदी सरकार आई है, तब से हमारे रेलवे को बहुत महत्वपूर्ण बजट दिया गया है और उसके लिए प्रधान मंत्री जी का, आदरणीय वित्त मंत्री जी को मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं ।
सर, हमारे क्षेत्र में कुछ चीजें रह गई हैं । मेरे क्षेत्र के लिए वैसे तो कंप्लेंट ऐसी नहीं है, मेरे क्षेत्र को तो बहुत सारी चीजें मिली हैं । आज प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी की कृपा से 273 किलोमीटर 3677 करोड़ रुपये में झांसी-मथुरा की तीसरी लाइन मेरे यहां डल रही है । झांसी-बीना की भी तीसरी लाइन 192 किलोमीटर की 2000 करोड़ रुपये में, झांसी-कानपुर का 206 किलोमीटर का डबलिंग वर्क भी 2200 करोड़ रुपये में हो रहा है और झांसी-मानिकपुर-भीमसेन का 411 किलोमीटर का काम हो रहा है । झांसी शहर का जो आर्थिक वजूद है, वह पूरा का पूरा रेलवे पर निर्धारित है । अगर रेलवे नहीं हो तो बहुत सारे लोगों ने झांसी का नाम कभी सुना भी नहीं होता । आज हमको कुछ और चीजों के लिए रेलवे से मांग करनी है । मेरे यहां आदरणीय प्रधान मंत्री जी आए थे, उन्होंने हमारे यहां एक नई फैक्ट्री लगाने का एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट अनाउंस किया था, जिसमें 450 करोड़ रुपये का रेल कोच नवीकरण का कारखाना लगना था, जिसकी फाउंडेशन लेइंग सेरेमनी भी हो गई थी और आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने की थी । इसका कार्य भी थोड़ा सा शुरू हुआ था, इसके लिए सारी जमीन, सारी परमिशन्स हमको मिल गई थीं । परंतु इस साल कोविड के चलते इस कारखाने को रोक दिया गया है, क्योंकि इस बार तकरीबन दस हजार करोड़ रुपये का सैंक्शन सिर्फ उत्तर प्रदेश को रेलवे बजट में मिला है । मैं आशा करता हॅूं कि यह कारखाना शुरू हो जाए । अगर हमारे यहां एम्पलॉयमेंट जनरेशन कोई करता है तो वह रेलवे के माध्यम से ही होता है । दूसरा, झांसी के बीच में ही, क्योंकि झांसी-लखनऊ जो मार्ग है, उसकी डब्लिंग हो रही है और आज 80 ट्रेनें चलती हैं, वे बढ़ कर एक साल के अंदर 130 होने वाली हैं । जो रेलवे क्रासिंग है, झांसी-ग्वालियर रोड, जो झांसी का प्रमुख मार्ग है, वह अक्सर बंद रहता है और शहर के अंदर डेढ़-दो घंटे का जाम लगने लग गया है । इस बार हमारे आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी ने हमको रेल ओवर ब्रिज सैंक्शन कर दिया है । मेरा माननीय मंत्री जी से यही आग्रह है कि अगर रेलवे मंत्रालय उसको जल्दी से जल्दी पास कर दे तो एक या दो साल के अंदर हम उस ब्रिज को बना लेंगे, नहीं तो शहर की बहुत दुर्गति हो जाएगी ।
झांसी में जो गुड्स शेड है, वह शहरों के बीचोंबीच है । रेलवे के पास बहुत जमीन है, अगर हम कोशिश करें तो उसको बाहर शिफ्ट कर सकते हैं ।
सर, तीसरी एक चीज़ यही कहनी थी कि झांसी और ललितपुर यूपी के आखरी छोर पर हैं । हमको हर काम के लिए लखनऊ जाना पड़ता है । हमारे पास ललितपुर से कोई ऐसी ट्रेन नहीं है, जिससे लोग सुबह लखनऊ जाएं, दिनभर काम करें और रात को वापस आ जाएं । झांसी से जरूर एक ट्रेन ऐसी चलती है, जिसको इंटरसिटी एक्सप्रेस कहते हैं । अगर उसका एक्सटेंशन ललितपुर तक हो जाए, इनफैक्ट पूरे देश में ही सारी स्टेट कैपिटल्स को अपने लास्ट डिस्ट्रिक्ट्स से जोड़ने की यह मांग है कि सारे स्टेट कैपिटल्स को अपनी लास्ट डिस्ट्रिक्ट्स से जोड़ा जाए । कोई जनशताब्दी या संपर्क क्राति एक्सप्रेस ऐसी ट्रेनों से तो लोगों को जिनको स्टेट कैपिटल्स में जाना पड़ता है, चाहे लखनऊ जा रहे हैं, हाईकोर्ट के काम से या अपने किसी और काम से तो उसमें बहुत मदद हो जाएगी । उसके लिए हमको एक छोटी सी चीज की जरूरत है । वहां पर एक पिट स्टॉप बनाने की जरूरत होगी । उसके लिए रेलवे के पास वहां जमीन है । उसका भी हम निरीक्षण कर चुके हैं । अगर माननीय मंत्री जी उस पर थोड़ी सी निगाह डालेंगे तो इंटरसिटी एक्सप्रेस अगर शुरू हो जाएगी और आज ललितपुर एक बहुत बड़ा पर्यटन स्थल बन सकता है, क्योंकि हमारे यहां बहुत बड़े-बड़े जैन मंदिर हैं ।
हमने एक और मांग पहले भी मंत्री जी के सामने रखी थी कि देवगढ़ नाम से एक जगह है, धौरा रेलवे स्टेशन है, देवगढ़ बहुत पुराना पर्यटक स्थल भी है, बहुत प्राचीन मंदिर है । अगर उसका नाम देवगढ़ रेलवे स्टेशन कर दिया जाए तो वह एक बहुत बड़ी मदद हो जाएगी ।
सर, मैं एक अंतिम बात कहना चाहूंगा कि हमारे वहां नॉर्थ सेंट्रल रेलवे है, जिसका हेडक्वॉर्टर प्रयागराज में है । आज के जमाने में उसका जो रेलवे ट्रेनिंग सेंटर है, वह चंडीगढ़ में है । मेरा आग्रह यह है कि नॉर्थ-सेंट्रल रेलवे का ट्रेनिंग सेंटर चंडीगढ़ में नहीं होना चाहिए । अगर हमारे बच्चे, हमारे लोगों को ट्रेन करना है तो वह ट्रेनिंग सेंटर झांसी शिफ्ट कर दिया जाए । चंडीगढ़ में उसका रहने का कोई मतलब नहीं है ।
सर, मैं इतनी ही बातें कहना चाहता था । आपने मुझे पर्याप्त समय दिया, उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m77 श्री अनिल फिरोजिया (उज्जैन): सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान की मांगों पर बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हॅूं । माननीय सभापति जी, मैं सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधान मंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी, हमारे रेल मंत्री पीयूष गोयल जी और अनुराग ठाकुर जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हॅूं, जिन्होंने वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया ।
महोदय, यह बजट इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है कि यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट है । जिस प्रकार अन्य देशों की अपेक्षा भारत कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को मात दे कर उसके बाद आर्थिक संकट की समस्या को देखते हुए, जिस प्रकार से यह बजट पेश हुआ है, यह वास्तव में बहुत ही महत्वपूर्ण बजट है । इसमें माननीय रेल मंत्री जी ने 1,01,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया । उन्होंने रेल को एक ऐसा विजन प्लान दिया, जिससे रेलवे के आधुनिक विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो गई है ।
माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने मेरे संसदीय क्षेत्र में पूरे पश्चिम रेल के अधिकारी, कर्मचारी का ट्रेनिंग सेन्टर देकर उज्जैन को एक नई सौगात दी है । मैं इसलिए भी आपका धन्यवाद करना चाहूंगा कि उज्जैन-फतेहाबाद के बीच गेज परिवर्तन का काम पूरा हो गया है । मैं आपको उज्जैन आमंत्रित करता हूं कि आप उज्जैन पधारें और ट्रेनिंग सेन्टर का भी भूमि पूजन करें । उज्जैन-फतेहाबाद रेलवे ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर उसका भी शुभारम्भ करें ।
माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से विनम्र निवेदन और आग्रह करता हूं कि उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ लगने वाला है, जो हर बारह सालों में उज्जैन में होता है । माननीय रेल मंत्री जी ने इलाहाबाद में कुम्भ के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये का एक विशेष पैकेज दिया था और माननीय मंत्री जी की आस्था बाबा महाकाल में भी खूब है, वह दिल का रिश्ता है । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि उज्जैन रेलवे स्टेशन के आस-पास के जिले के जो भी रेलवे स्टेशन हैं, उनके लिए एक विशेष पैकेज उपलब्ध कराएं, जिससे सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों-करोड़ दर्शनार्थियों को सुविधा उपलब्ध हो सकेगी ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से इसके लिए विशेष पैकेज की मांग करता हूं । इसके साथ ही, मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि वर्ष 2016 में जब मेरे आग्रह पर उज्जैन आए थे, तब आपने इन्दौर-पुरी हमसफर एक्सप्रेस की घोषणा की थी और आपने उसे प्रारम्भ किया, लेकिन कोरोना काल के कारण उसे रोक दिया गया है । उसे जल्द से जल्द चलाया जाए । इसी तरह, अजमेर-रामेश्वरम हमसफर एक्सप्रेस को फिर से शुरू किया जाए ।
महोदय, सांसदों की मांग से उज्जैन-चित्तौड़गढ़ के बीच वाया नागदा-खाचरौद होकर ट्रेन शुरू की जाए । मेरे लोक सभा क्षेत्र उज्जैन के नागदा-खाचरौद, माहिदपुर रोड और आलोट में कई ट्रेनों के स्टॉपेज बंद कर दिए गए हैं । इन सभी ट्रेनों के स्टॉपेजेज को पुनर्बहाल किया जाए, ताकि जनता को हम पहले जैसी ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध करा दें । आपने लोकल ट्रेनों का संचालन किया, इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं ।
सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह कर रहा हूं कि आपने जो स्टॉपेजेज बंद किए हैं, इससे जनता को यह लगता है कि हमारा सांसद नाकारा है । वे हमें टोकते हैं और हमें रोज पिंच कर रहे हैं । मेरा आपसे कहना है कि हम इतनी मेहनत कर रहे हैं ।
माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को एक आभार और देता हूं कि माननीय मंत्री जी 18-18, 19-19 घंटे काम करते हैं । मैंने आपसे सम्पर्क करने की कोशिश की, पर आप लगातार मीटिंग में रहे । यह बात सही है कि आप रात को एक-एक, दो-दो बजे तक काम करते हैं, लेकिन मेरा विनम्र निवेदन है कि हमारी ट्रेनों के स्टॉपेजेज को फिर से चालू करें ।
माननीय सभापति : अब कृपया समाप्त करें ।
श्री अनिल फिरोजिया : सभापति जी, बड़ी मुश्किल से मुझे बोलने का समय मिला है । मैं थोड़ी-सी मांग कर रहा हूं । अपने शरीर के हिसाब से मैं मांग नहीं कर रहा हूं । मैं तो छोटी-छोटी मांग कर रहा हूं ।
माननीय सभापति : माननीय सदस्य, अभी बहुत से माननीय सदस्यों को बोलना है । कृपया आप कंक्लूड कीजिए ।
श्री अनिल फिरोजिया : सभापति जी, मैं बहुत ही छोटी-छोटी माँगे कर रहा हूँ । हमारे माननीय मंत्री जी बड़े दयालु है और महाकाल में आपकी आस्था भी है । आप बाबा महाकाल की ये ट्रेनें चालू करें । इसके लिए मेरा आपसे निवेदन है । आपने राजधानी एक्सप्रेस का भी स्टॉपेज रोक दिया है, उसको भी आप प्रारंभ कर दें । चूंकि माननीय केन्द्रीय मंत्री जी, श्री महेन्द्र सिंह जी और हम सभी सांसद उसी ट्रेन से दिल्ली आते हैं । वह ट्रेन हमारे लिए और जनता के लिए भी सुविधाजनक है । कृपया करके इस ट्रेन का स्टॉपेज प्रारंभ करें ।
सभापति जी, माननीय मंत्री जी आपके माध्यम से हमें आशीर्वाद देंगे कि हमारी ट्रेनों की स्टॉपेज चालू हो । मैं इस बजट के लिए अपना समर्थन व्यक्त करता हूँ । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m78 श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश (सूरत): सभापति जी, आज मैं रेल बजट के समर्थन में बोलने के लिए खड़ी हुई हूँ । माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में निर्मला जी एवं पीयूष जी ने बहुत ही अच्छा बजट दिया है । आज मैं इसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ी हुई हूँ ।
वैसे तो कोरोना की स्थिति में जिस तरह से सभी रेलवे कर्मचारियों ने काम किया है, अपनी सेवाएं दी हैं, उसके लिए मैं उनको धन्यवाद देती हूँ । अगर कहीं से सबसे ज्यादा श्रमिक ट्रेन चली है तो वह सूरत से चली है । 900 से ज्यादा ट्रेन्स से लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में पहुँचाया गया । इसके लिए मैं पीयूष जी का धन्यवाद करती हूँ । गुजरात में कल ही एक आँकड़ा आया कि केवड़िया के अंदर सरदार जी की प्रतिमा को विजिट करने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 50 लाख तक पहुँच गई है । प्रधानमंत्री जी ने एक साथ छह राज्यों से जोड़ने के लिए जो कार्यक्रम किया था, वह सबसे अच्छा है । वैसे गुजरात के सभी क्षेत्र में जो टूरिस्ट प्लेसेज हैं, वहाँ अच्छी तरह की कनेक्टिविटी है । बुलेट ट्रेन का काम भी बहुत अच्छे तरीके से चल रहा है । तेजस ट्रेन के लिए भी पीपीपी मॉडल पर हम सब ने काफी तैयारी की है ।
महोदय, सूरत स्मार्ट सिटी के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ा फास्ट ग्रोइंग सिटी है । इसके हिसाब से सबसे ज्यादा 300 करोड़ रुपये से ज्यादा रेवेन्यू देने वाला शहर है । मैं मुम्बई से अलग डीआरएम ऑफिस की माँग नहीं कर रही हूँ । पीयूष जी देख रहे हैं, लेकिन मैं समझती हूँ कि हमारे जितने भी इश्यूज हैं, उनके लिए अगर सूरत को न्याय मिले तो बहुत अच्छा होगा । यहाँ पर डेढ़ सौ से ज्यादा ट्रेन्स रूकती हैं और 4 से 5 पाँच लाख लोग रोजाना बाहर से सूरत आते-जाते रहते हैं । उन्होंने अपना ढाँचा बदला है, उनकी गति बदली है, सुरक्षा के लिए जो व्यवस्था की गई है, स्वच्छता के लिए व्यवस्था की है और सभी चीजों का मापदंड बहुत ही अच्छे से चल रहा है । मुझे लगता है कि अभी यह समय आया है कि सभी सांसदों की माँग के हिसाब से कुछ न कुछ ट्रेनों की कनेक्टिविटी दी जाए । सौराष्ट्र से जुड़े हुए 500 लग्जरी हररोज सूरत से महुवा के लिए चलती है । अब तक पाँच से छह रेल मंत्री के सामने हम तीनों सांसदों ने मिलकर यह डिमांड की है कि सुरत में मिनी सौराष्ट्र कहे जाने वाला विस्तार सौराष्ट्र के लोगों की माँग है कि जो सुरत-महुवा सप्ताहिक ट्रेन 12945-46 है, वह सुरत-महुवा के बीच चलाई जाती है, उसको हररोज चलाया जाए । इस ट्रेन का समय परिवर्तन करके रात्रि में चलाया जाए । इससे लोगों को आने-जाने में आसानी होगी । इससे अच्छा रेवेन्यू भी मिलेगा । यह मेरी सबसे पुरानी माँग है ।
जिस प्रकार से महत्वपूर्ण ट्रेन जैसे राजधानी एक्सप्रेस तथा अगस्त क्रांति ट्रेन सूरत में रूकती है, उसी तरह से आठ संपर्कक्रांति ट्रेन, 12 दूरंतो एक्सप्रेस जिसका नंबर मैं नहीं गिनती हूँ, उसके पुराने नियमों में बदलाव करके उनको चलाया जाए । सूरत में वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनने जा रहा है । इन सभी ट्रेनों का वहाँ पर ठहराव दिया जाए । माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी अगले महीने गांधीनगर स्टेशन का उद्घाटन करने जा रहे हैं । उसी तरह सूरत का भी एक टेंडर निकला हुआ है, जो सबसे बड़ा स्टेशन बनने जा रहा है । उसमें काफी बदलाव भी किया गया है । उसका काम भी जल्द से जल्द शुरू हो जाए तो सूरत के लिए काफी अच्छा रहेगा ।
मुम्बई से सुबह चलकर और दोपहर अमदाबाद पहुँच कर दो घंटे प्लेटफार्म पर पड़ी रहने वाली मुम्बई-अहमदाबाद शताब्दी को भी सुविधा के लिए गांधीनगर तक पहुँचाया जाए । पिछले 50 साल से सूरत के यात्रियों की माँग को लेकर 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की रेवेन्यू देने वाले सूरत स्टेशन से अहमदाबाद होकर गांधीनगर के लिए कोई भी ट्रेन नहीं है । हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत ट्रेन चलाये जाने की भी हमारी विनती है । चार्ट बनने के बाद करेंट रिजर्वेशन से ली हुई डिस्काउंट वाली टिकट को कन्फर्म करने के बजाय कई महीनों पहले पूरे पैसे देकर खरीदी हुई आरएसी वाले यात्रियों की टिकट कन्फर्म किए जाने की मैं विनती करती हूं ।
सूरत के मेरे मतक्षेत्र कोसाड से कृभको के लिए जो इंडस्ट्रियल बेल्ट है, वहां के लिए भी रेल लाइन जाती है । इसमें दिन में एक या दो बार कृभको की गुड्स ट्रेन जाती है । अगर इसी ट्रैक का उपयोग करके कोसाड से ओलपाड, जहांगीपुरा होकर हजीरा तक हर घंटे के बाद मेमू ट्रेन चलाई जाए तो गांव के लोगों के लिए भी काफी सुविधा रहेगी ।
दो स्टेशनों के बीच में कई ट्रेनों का रनिंग टाइम पुराना ही चल रहा है । ट्रेनों की स्पीड बढ़ चुकी है, परंतु टाइमटेबल में बदलाव न होने के कारण मेरे पास 30 से ज्यादा ट्रेन हैं, जिनके रनिंग टाइम में बदलाव करने से सफर का समय कम होगा, ट्रैक खाली मिलेगा और रेलवे का पैसा भी बचेगा । सूरत-उधना, वापी-नवसारी में पिछले दो महीनों से वाटर वेंडिंग मशीन बंद होने से यात्री पानी की बोतल खरीदने के लिए मजबूर हो गए हैं । यह मशीन भी चालू करवाई जाए । वहां एक लिफ्ट लगाई गई है, क्योंकि एकमात्र सूरत शहर है, जो फर्स्ट फ्लोर पर बनाया हुआ है, तो उसके लिए एस्केलेटर और लिफ्ट की सुविधा भी कराई जाए, जो बार-बार मेंटीनेंस मांगती रहती है ।
सूरत के पास अठवागेट, उधना आरक्षण केंद्रों में स्टाफ की कमी की वजह से रेवेन्यू की भी कमी हो रही है । अत: इन आरक्षण केंद्रों पर भी जरूरी महकमे को मंजूरी दी जाए । पूरे साल में 4 करोड़ रुपये से ज्यादा अर्निंग देने वाले वड़ोदरा डिवीजन के कीम स्टेशन एवं उत्राण स्टेशन को सुविधा प्रदान करें । कीम स्टेशन की जनसंख्या को देखते हुए वहां कई ट्रेनों के स्टॉपेज हैं, जिनके नंबर मैंने लिखे हुए हैं । वड़ोदरा स्टेशन के उत्राण स्टेशन पर भी दो ट्रेनों का स्टॉपेज दिया जाए ।
वड़ोदरा डिवीजन के कीम स्टेशन पर 30 से ज्यादा ट्रेनें खड़ी रहती हैं । वहां कोच इंडीकेटर डिसप्ले नहीं है । वहां यह सुविधा भी मुहैया कराई जाए । इस तरह से मेरी जो भी ट्रेन की मांगें हैं, वह मैं लिखकर दे देती हूं । पीयूष जी ने और मंत्रालय ने सूरत को काफी दिया है । यह इंपोर्टेंट भी है । मैं घूम-फिर एक बात के ऊपर आती हूं कि महुआ वाली ट्रेन हमें जल्द से जल्द मिलनी चाहिए ।
*m79 श्री रमेश चन्द्र माझी (नबरंगपुर): चेयरमैन सर, आज सदन में रेलवे बजट के बारे में डिस्कशन हो रहा है । ओडिशा में 30 जिले हैं । वहां 30 में से 7 जिलों में रेलवे प्रोजेक्ट नहीं हैं । मेरा संसदीय क्षेत्र नबरंगपुर है । वहां नबरंगपुर और मलकानगिरी दो जिले हैं । नबरंगपुर और मलकानगिरी जिले एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स हैं, नक्सल अफेक्टेड हैं, ट्राइबल सब-प्लान एरिया हैं । जहां 14 पर्सेंट से ज्यादा आरओआर होता है, रेट ऑफ रिटर्न होता है, वहां रेलवे प्रोजेक्ट होता है । इन दो प्रोजेक्ट्स के लिए सर्वे हुआ था, जिसमें 1 पर्सेंट से कम आरओआर निकला था, इसीलिए स्टेट गवर्नमेंट ओडिशा के सम्माननीय मुख्यमंत्री नवीन पटनायक महोदय जी के नेतृत्व में वर्ष 2016 में एक एमओयू हुआ था । यह एमओयू जयपोर, नबरंगपुर, मलकानगिरी, जयपोर-नबरंगपुर और जयपोर-मलकानगिरी के लिए हुआ था । इसमें जयपोर-नबरंगपुर के 38 किलोमीटर के लिए अभी 600 करोड़ रुपये की रिक्वायरमेंट है । उसके लिए वहां अभी 10 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान है । जयपोर-मलकानगिरी के लिए 130 किलोमीटर का जो रेलवे प्रोजेक्ट होना है, उसमें 2,500 करोड़ रुपये बजट की रिक्वायरमेंट है, वहां इसके लिए इस बजट में 28 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ है ।
मेरी दरख्वास्त है कि जयपोर-नबरंगपुर और जयपोर-मलकानगिरी के लिए, ये दो नक्सल अफेक्टेड डिस्ट्रिक्ट्स हैं, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स हैं, इन डिस्ट्रिक्ट्स के लिए ज्यादा से ज्यादा अनुदान दीजिए । दो प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक प्रावधान कैसे किया जाए, इसके लिए मैं रेलवे विभाग से अनुरोध करता हूं, धन्यवाद ।
*m80 श्री प्रदीप कुमार सिंह (अररिया): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांगों की चर्चा पर बोलने का अवसर दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । मैं गरिमामयी सदन के समक्ष रेल बजट पर कुछ कहना चाहता हूं । मैं सबसे पहले माननीय प्रधानमंत्री जी, रेल मंत्री जी और वित्त मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं । माननीय पीयूष गोयल जी ने प्रमुख बातों का ध्यान रखते हुए भारतीय रेल बजट प्रस्तुत किया है । यह बजट सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है । पिछले पांच वर्षों में कुछ खास बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे यात्री किराये में बढ़ोत्तरी न होना, साफ-सफाई, खान-पान, हेल्पलाइन नम्बर, नए प्लेटफार्म और स्टेशनों का पुनर्विकास इत्यादि सम्मिलित है ।
महोदय, यद्यपि समय का अभाव है, फिर भी मैं अपने क्षेत्र के विषय में कुछ कहना चाहूंगा । मैं अररिया लोक सभा क्षेत्र से आता हूं । यह बिहार- नेपाल बार्डर पर है और पश्चिम बंगाल से सटा हुआ है । हमारे यहां से दिल्ली आने के लिए मात्र दो ट्रेन चलती हैं, एक ट्रेन सीमांचल एक्सप्रेस है और दूसरी ट्रेन जोगबनी से कोलकाता चलती है । जोगबनी नेपाल बार्डर पर अवस्थित है और नेपाल से हमारा रिश्ता रोटी-बेटी का है । पर्यटन की दृष्टि से भी वहां से कोई अच्छी ट्रेन नहीं है । उस ट्रेन में खान-पान की भी व्यवस्था नहीं है । अट्ठाइस - तीस घंटे तक लोगों को भूखा आना पड़ता है । जोगबनी से कोलकाता वाली ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलती है ।
मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि वह ट्रेन लगातार चले । हमारे यहां सुपौल से अररिया और अररिया से गलगलिया के लिए पिछली बार कुछ राशि का आबंटन किया गया था । दोनों तरफ से बीस-बाइस किलोमीटर के लिए टेंडर भी हुआ है और काम हो रहा है । लेकिन इस बार उसमें पैसे की कमी है ।
मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि इसके लिए धन मुहैया कराया जाए और उस काम को पूर्ण कराया जाए । सहरसा से फारबिसगंज की छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तन किया जा रहा है । यह काम बहुत धीमी गति से चल रहा है, इस बार उसको फाइनल होना था, उसमें भी राशि की कमी है ।
मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि धन मुहैया कराया जाए ताकि वह परियोजना समय से पूरी हो सके । मैं सरकार और माननीय मंत्री जी से बहुत बातें नहीं कहना चाहता हूं । आम्रपाली एक्सप्रेस कटिहार से अमृतसर तक चलती है और कटिहार में ग्यारह घंटे तक खड़ी रहती है । अगर उस ट्रेन को 110 किलोमीटर पीछे जोगबनी से कर दिया जाए और आम्रपाली एक्सप्रेस को जोगबनी से अमृतसर के लिए चलाया जाए ।
महोदय, बिहार की राजधानी पटना है । अनेक कामों से लोगों के पटना आना-जाना पड़ता है । पटना के लिए कोई ट्रेन नहीं है, इंटरसिटी एक्सप्रेस सुबह पांच बजे चलती है । अगर उसको सात बजे से करके 105 किलोमीटर पीछे जोगबनी से चलाया जाए तो वहां के लोगों के लिए भी आसानी हो जाएगी । बनारस भारत की सांस्कृतिक राजधानी है । हम नेपाल सीमा से आते हैं । लोग अनेक काम करने, संस्कार करने और घूमने-फिरने के लिए बनारस आते हैं ।
मैं सीधे मांग करता हूं कि जोगबनी से बनारस के लिए एक नई ट्रेन चलाई जाए ताकि लोग अनेक अनुष्ठानों, संस्कारों और घूमने-फिरने के लिए आ सकें । हमारे बगल में पूर्णिया जिला है । जब लालू जी रेल मंत्री थी तब जलालगढ़ से किशनगंज के लिए एक रेल लाइन का शिलान्यास करके एक करोड़ रुपये दिए थे, वह परियोजना अभी बंद है । मैं चाहूंगा कि उस परियोजना को भी लेने का काम करना चाहिए और उसको भी चालू करना चाहिए । वह क्षेत्र बहुत पिछड़ा है । मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि जो भी पुरानी योजनाएं हैं, जैसे सुपौल से अररिया, अररिया से गलगरिया को जल्दी चालू कराया जाए । कटिहार से जोगबनी दोहरीकरण किया जाए और बिजली वाली लाईन को चालू किया जाए ।
जोगबनी नेपाल के बॉर्डर पर है । मैं मांग करना चाहता हूं कि विद्युतीकरण करके इसे चालू किया जाए । जलालगढ़ में साफ-सफाई करने के लिए पिट लाइन है, यहां से ट्रेन घुमाने में आसानी हो इसकी सुविधा की जाए ।
जोगबनी और बथना दो प्वाइंट हैं, इन दोनों पर पिट लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए ।
*m81 डॉ. भारती प्रवीण पवार (दिन्डोरी): माननीय सभापति जी, आपने मुझे डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करती हूं । मैं रेल बजट वर्ष 2021-22 का समर्थन करती हूं । मैं देश के लोकप्रिय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का आभार व्यक्त करती हूं कि किसानों के लिए किसान रेल के माध्यम से कृषि उपज की आवाजाही के लिए अच्छी सुविधा उपलब्ध कराई है । रेल से जाने वाली कृषि उपज पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलने से किसान और व्यापारियों को काफी लाभ मिल रहा है ।
19.31 hrs (Shri Bhartruhari Mahtab in the Chair) महोदय, मैं आदरणीय मंत्री महोदय का आभार व्यक्त करती हूं कि मध्य रेल से चलने वाली मुम्बई से दिल्ली राजधानी एक्सप्रैस जो पहले हफ्ते में चार बार चलती थी, अब हर रोज चल रही है । इस वजह से नासिक से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को सुविधा हो रही है ।
दिन्डोरी और नासिक जिले से बड़े पैमाने पर अच्छी मात्रा में अंगूर और प्याज का निर्यात बांग्लादेश में होता है । किसानों और व्यापारियों की मांग समय-समय पर रहती है । मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी अनुरोध है कि नासिक से बांग्लादेश के लिए विशेष रेल या वैगन का प्रावधान हो सके तो इससे उनको बहुत लाभ होगा ।
महोदय, नासिक के नानगांव स्टेशन पर मुम्बई जाने वाले यात्री हों या पास धारक हों, इनकी संख्या बहुत है । कोविड के कारण स्पेशल ट्रेन्स चल रही हैं लेकिन एक भी ट्रेन नानगांव स्टेशन पर रुक नहीं पा रही है, इसके कारण यात्रियों को असुविधा हो रही है । मेरी विनती है कि माननीय मंत्री महोदय इस समस्या का जल्दी निराकरण करें ।
नासिक से बड़ी संख्या में यात्री तिरुपति और अजमेर दर्शन के लिए जाते हैं । मेरा निवेदन है कि नासिक से तिरुपति और अजमेर के लिए स्पेशल नई ट्रेन की सुविधा दी जाए ।
आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभार व्यक्त करती हूं । धन्यवाद ।
*m82 डॉ. (प्रो.) किरिट प्रेमजीभाई सोलंकी (अहमदाबाद पश्चिम): माननीय सभापति जी, मैं आपका बहुत आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे जनरल बजट में रेलवे पर डिमांड् फॉर ग्रांट्स पर बोलने की अनुमति दी । मैं इसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । कोरोना महामारी के बावजूद इतना बेहतरीन बजट दिया, इसके लिए मैं यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, वित्त मंत्री जी और रेल मंत्री जी का बहुत आभार व्यक्त करता हूं और अभिनंदन करता हूं ।
जहां तक इस बजट में रेलवे का सवाल है, इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश किया गया है । भारतीय रेल में चाहे गेज कन्वर्जन की बात हो, इलैक्ट्रिफिकेशन की बात हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर डैवलप करने की बात हो, इसके लिए मैं यशस्वी रेल मंत्री पीयूष गोयल जी का आभार व्यक्त करता हूं और उनका अभिनंदन करता हूं ।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन का काम हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री जी ने अहमदाबाद से मुम्बई के लिए शुरू किया है । उसका काम शुरू भी हो गया है । मगर, इसमें कहीं न कहीं सियासत आ रही है । हमारा संघीय ढांचा है । अलग-अलग पक्षों की सरकार हो सकती है, मगर, जहां रचनात्मक काम होता है, जहां पॉजिटिव वर्क होता है, मैं समझता हूं कि उसमें कोई विरोध नहीं करना चाहिए । मैं महाराष्ट्र सरकार से अपील करता हूं कि उसमें को-ऑपरेशन करे । जब भारत की पहली बुलेट ट्रेन शुरू होगी, तो उसका यश सिर्फ भारत सरकार को नहीं मिलेगा, बल्कि भारत के सभी राज्यों को मिलेगा और भारत के सभी लोगों को मिलेगा । मैं उनसे गुहार करता हूं कि वे उसमें सहकार दें ।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, जो सरदार वल्लभ भाई पटेल का सबसे बड़ी स्टैच्यू है, जिसको प्रधान मंत्री जी ने बनवाया है और अभी भी कुछ समय पहले प्रधान मंत्री जी ने देश के अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग दिशा से एट ट्रेन शुरू करवाई थी । उसके बाद वहां जिस प्रकार से पैसेंजरों की संख्या में वृद्धि हुई है, उसके लिए मैं रेलवे मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी का बहुत-बहुत आभारी हूं । मैं विशेष आभारी इसलिए हूं, क्योंकि गुजरात की एक बार की कैपिटल पाटन थी, जो उत्तर गुजरात में है । पाटन से भीलड़ी तक जो रेलमार्ग था, वह करीब 51 किलो मीटर था और भीलड़ी से आगे उत्तर भारत तक रेलवे लाइन थी । वर्ष 1955 से करीब 70 सालों से उसके लिए मांग की जाती थी । मैं प्रधान मंत्री जी और भारत सरकार के रेल मंत्रालय का आभार व्यक्त करता हूं कि पाटन-भीलड़ी रेल लाइन का काम अब शुरू हो गया है । वहां पटरी भी बिछाई गई है । मैं मंत्री जी से मांग करता हूं कि वहां ट्रेन की आवाजाही शुरू कराएं । जोधपुर जाने के लिए आज जो आबू रोड से ट्रेन जाती है, उससे 80 किलोमीटर की दूरी का अंतर कम होता है और करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा समय की बचत भी होती है । मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि वे इस रेल लाइन को संचालित कराएं ।
मैं उत्तर गुजरात से आता हूं और चनस्मा मेरा नेटिव प्लेस है । चनस्मा से रधनपुर में 65 किलो मीटर का अंतर है । रधनपुर से आगे कच्छ तक रेल लाइन है । मैं श्री पीयूष गोयल जी से विनम्र निवेदन करता हूं कि उस 65 किलो मीटर की रेल लाइन को जोड़ा जाए । ऐसे तो वहां चनस्मा, कम्बोई से हरीश तक करीबन 35 किलो मीटर तक रेल लाइन थी । वहां पटरी भी थी, उसको निकाल दी गई है । वहां लैंड एक्विजिशन का कोई बड़ा मामला नहीं है । अगर, यह नई रेल लाइन शुरू होती है, तो फ्यूचर में कभी, चूंकि पाकिस्तान एक सेंसेटिव इंटरनेशनल बॉर्डर है, वहां हमें एक नई रेल लाइन मिलेगी । उत्तर गुजरात में, मैं पीयूष जी का हृदय से बहुत आभार व्यक्त करता हूं, मैं उनसे पर्सनली मिला था । वहां से रनुच, चनस्मा, बहुचरा जी से कटोसन, कड़ी से लेकर कलोल की जो गेज कंवर्जन का काम बहुत धीमी गति से चलता था । उन्होंने इस काम में हस्तक्षेप किया और गुजरात सरकार ने करीब 790 करोड़ रुपये की राशि का योगदान दिया । मैं इसके लिए गुजरात सरकार और भारत सरकार का आभार व्यक्त करता हूं, लेकिन इसे कटोसन तक किया है । एक्चुअली रेल लाइन कड़ी-कटोसन और कलोल थी, अगर उसमें जोड़ दिया जाए तो बेहतरीन रहेगा ।
जहां तक राजधानी ट्रेन का सवाल है । हमने बहुत प्रयत्न से अहमदाबाद–दिल्ली राजधानी ट्रेन में साबरमती रेलवे स्टेशन पर स्टॉपेज दिलवाया था । साबरमती रेलवे स्टेशन पर करीब 90 परसेंट से ज्यादा पैसेजर्स वहां उतरते थे । वहां बोर्डिंग करने वाले 70 परसेंट से ज्यादा थे । अभी कोरोना के चलते उस स्टॉपेज को बंद कर दिया गया है । मेरा मंत्री जी से स्पेशल रिक्वेस्ट है कि उस स्टॉपेज को शुरू किया जाए । अहमदाबाद में बहुत सारा रेलवे क्रासिंग है, अहमदाबाद एक मैट्रो सिटी बना है । रेलवे की एक मंशा व्यक्त की है कि हम अहमदाबाद को क्रासिंग फ्री बनाना चाहते हैं । इसके लिए मैं रेल मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं, उस काम में तेजी लायी जाए । कलोल में एक ओवर ब्रिज का काम है, वह बहुत समय से लंबित है । मेरी विनती है कि वहां उस काम को स्पीड-अप किया जाए ताकि लोगों को तकलीफ न हो । पाटन से मुंबई के लिए एक सीधी ट्रेन शुरू करने के लिए वहां के लोगों की बहुत लंबे समय से मांग है ।
मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि वह ट्रेन शुरू की जाए । आपने मुझे बोलने के लिए अवसर दिया, मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं ।
*m83 डॉ. जयसिधेश्वर शिवाचार्य स्वामीजी (शोलापुर) : सभापति महोदय जी, आपने मुझे रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर बोलने के लिए अवसर प्रदान किया है, उसके लिए मैं आपके प्रति बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं ।
महोदय, भारतीय रेल सेवा संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध रेल सेवा है । मुंबई की जो लोकल ट्रेन है, वहां की जनता की सही मायने में जो यह सुविधा है, उसे रक्तवाहिनी के रूप में जाना जाता है । उसी तरह संपूर्ण भारतवर्ष में जो ट्रेन्स चलती हैं, यह सही मायने में भारतवासियों की रक्तवाहिनी ही है । इससे यह स्पष्ट होता है । मैं इस संदर्भ में सबसे पहले भारत के मान्यवर प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और अर्थ मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर जी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं । आपने शोलापुर जिले के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार तक किसान रेल की शुरुआत करके किसानों के जीवन को आर्थिक रूप से मजबूत करने का एक बहुत बड़ा कदम उठाया है । रेल मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए अभियान से अनेक किसानों को सुविधा मिलने के कारण उनका जीवन स्तर बदल गया है । आप रेल मंत्री के रूप में जो कार्य कर रहे हैं, वह सही मायने में बहुत ही प्रशंसनीय हैं, यह सिद्ध हो चुका है ।
महोदय, मैं मेरे संसदीय शोलापुर के विषय के बारे में माननीय रेल मंत्री जी के सामने कुछ प्रस्तुत करना चाहता हूं । मुंबई से हैदराबाद के लिए स्पीड ट्रेन की शुरूआत करने के लिए रेल मंत्रालय की एक योजना है । इस संदर्भ में रेल विभाग के द्वारा पूना तक सर्वेक्षण किया जा चुका है और अभी आगे का सर्वेक्षण चल रहा है । इसलिए जो स्पीड ट्रेन है, उसको शोलापुर में ठहराव देने की मांग शोलापुर के विविध संगठनों द्वारा की जा रही है । अतः मैं आपसे नम्रपूर्वक निवेदन करता हूं कि मुंबई-हैदराबाद बुलेट ट्रेन का ठहराव शोलापुर में दिया जाए ।
महोदय, बेंगलुरु से दिल्ली तक एक ट्रेन चलती है, उसे कर्नाटक एक्सप्रेस (के के एक्सप्रेस) के रूप में जाना जाता है । वह शोलापुर होकर दिल्ली आती है । अब तक शोलापुर से दिल्ली के लिए कोई भी विमान सेवा प्राप्त नहीं हो सकी है । शोलापुर या बीजापुर से कहिए या उस्मानाबाद-तुलजापुर के समीप के क्षेत्र के जो लोग हैं, अगर वे दिल्ली आना चाहते हैं, तो सिर्फ एक ही ट्रेन है, जो कि कर्नाटक एक्सप्रेस है । इस कर्नाटक एक्सप्रेस में तीन से चार महीनों तक रिज़र्वेशन प्राप्त नहीं होता है । अतः मैं माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि शोलापुर से दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन को इंट्रोड्यूज़ किया जाए ।
महोदय, शोलापुर और मुंबई का जो यह सफर है, वह करीब-करीब 440 किलोमीटर का है । यहां से कई यात्री रोज़ ही यात्रा करते हैं । एक ट्रेन रात में 10 बजकर 40 मिनट पर चलती है, जो कि सिद्धेश्वर एक्सप्रेस है, जो सुबह साढ़े पांच या छः बजे तक वहां पहुंच जाती है । बशर्ते शोलापुर से मुंबई जाने के लिए या मुंबई से शोलापुर आने के लिए स्पीड ट्रेन की कोई भी सुविधा नहीं है । यदि शोलापुर से निकला हुआ कोई यात्री मुंबई के अपने सभी कार्यक्रम समाप्त करके रात को फिर शोलापुर में आकर रुकना चाहता है, तो उसके लिए ट्रेन की कोई सुविधा नहीं है ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कि शोलापुर से मुंबई और मुंबई से शोलापुर तक एक वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत की जाए । मैं आपके समक्ष हृदयपूर्वक अपनी बात को रखना चाहता हूं और आपसे निवेदन करना चाहता हूं ।
महोदय, शोलापुर और हुदगी के पश्चात् एक अक्कलकोट रेलवे स्टेशन पड़ता है । वहां से कर्नाटक की बाउंड्री बहुत सटी हुई है । वहां से अक्कलकोट के स्वामी समर्थ को जाने वाले या ज्योर के काशी विश्ववेश्वर ज्योतिर्लिंग को जाने वाले या हैदराबाद की जो दरगाह है, वहां जाने वाले…(व्यवधान) महोदय, मैं बस एक मिनट में अपनी समाप्त कर दूंगा ।
गुलबर्गा, बीजापुर और सोलापुर से आने वाले लोग अक्कलकोट रोड उतरना चाहते हैं, लेकिन वहां पर सिर्फ एक ही ट्रेन रुकती है । दो पैसेंजर रुकती हैं, एक मेल रुकती है और एक जनता ट्रेन रुकती है । अत: मैं आपके माध्यम से पीयूष गोयल जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि *“Sir, Basava express train is very important network to connect commuters from Gulbarga, Bijapur, Solapur and surrounding areas. Therefore I request the hon’ble minister to issue direction to the authorites concerned that Basava express train should be stopped at Akkalkot railway station.”* बसवा एक्सप्रेस ट्रेन का अक्कलकोट रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया जाए । सोलापुर से सटकर एक छोटा सा स्टेशन टिकेकरवाड़ी है । उसके बगल में पहले जो गुड्स शेड था, उसको टर्मिनल के रूप में परिवर्तित किया जाए । यह मेरा आपके माध्यम से पीयूष गोयल जी से निवेदन है । आपने मुझे बोलने के लिए अवसर दिया, उसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ ।
*m84 श्रीमती रमा देवी (शिवहर): सभापति महोदय जी, यह गर्व की बात है कि भारतीय रेलवे 67 हजार 580 किलोमीटर से भी अधिक रूट के साथ विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है । वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारतीय रेल ने 1.2 बिलियन टन माल को ढोने एवं 8.1 बिलियन यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया है, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा यात्री वाहक तथा विश्व का चौथा सबसे बड़ा माल वाहक बनाता है और इन सबके लिए रेल पटरियों, पुलों, सिग्नलिंग और दूर संचार जैसी विभिन्न प्रणालियों को चुस्त-दुरूस्त रखने का कार्य पूरा किया है । कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी रेलवे नेटवर्क में जो रिफॉर्म किया गया है, विस्तार किया गया है, वह काफी सराहनीय है । यह सब माननीय प्रधानमंत्री जी एंव रेल मंत्री जी की दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण ही सम्भव हो पाया है । माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने रेलवे में निवेश को जोरदार तरीके से बढ़ाया है ताकि, मौजूदा सुविधाओं को बनाये रखने के साथ उनकी बढ़ती आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके । इसी को ध्यान में रखते हुए माननीय वित्त मंत्री जी ने रेलवे को 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि आवंटित करने की घोषणा मौजूदा बजट में की है, जिसमें से 1 लाख 7 हजार करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए है । मोदी सरकार ने वर्ष 2030 तक रेलवे प्रणाली को भविष्य के हिसाब से तैयार करने की जो योजना बनाई है, वह सरकार की दूरगामी सोच को दर्शाता है, ताकि उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करने के साथ मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सके ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान लम्बित रेल परियोजनाओं के प्रति आकृष्ट कराना चाहती हूं कि बिहार कि दर्जनों नई रेल लाइन परियोजनाएं वर्षों से लम्बित हैं, जिसमें मेरे क्षेत्र के अंतर्गत सीतामढी से भाया शिवहर होते हुए बापूधाम मोतिहारी रेल लाइन परियोजना भी शामिल है । मां जानकी की जन्म स्थली सीतामढ़ी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की कर्मभूमि मोतिहारी जैसे ऐतिहासिक स्टेशनों को भाया शिवहर से जोड़ने वाली 77 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण का कार्य पूरा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि, शिवहर जिला रेल लाइन से अछूता है तथा सीतामढी जिला सरकार द्वारा आकांक्षी जिला घोषित है । आने वाले वर्षों में रेलवे की क्षमता का विस्तार दिसम्बर 2023 तक बड़ी लाइन खंड के सौ फीसदी विद्युतीकरण कार्य से होगा, जिसमें मेरे संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाले दरभंगा-सीतामढ़ी-नरकटियागंज रेलखंड भी शामिल हैं । जहां दरभंगा-सीतामढ़ी के बीच विद्युतीकरण कार्यों का ट्रायल पूर्ण हो चुका है तथा सीतामढ़ी-रक्सौल के बीच कार्य तीव्र गति से चल है । इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूं ।
महोदय, यह बजट रेलवे के भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है । इसमें समय पर काम पूरा करने, समयपालन, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, यात्रियों को बेहतर सेवाएं दिए जाने की ओर ध्यान दिया गया है । मेरी माननीय रेल मंत्री जी से मांग है कि मेरे संसदीय क्षेत्र अंतर्गत पूर्व मध्य रेलवे जोन के वर्ष 2013-14 की परियोजना एल.सी. 56, बरसोनी-सीतामढ़ी के बीच अधूरे आर.ओ.बी. का निर्माण कार्य रेलवे बोर्ड से प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में लम्बित है । माननीय रेल मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि पूर्व मध्य रेलवे जोन अंतर्गत एल.सी. 56, बरसोनी-सीतामढ़ी के बीच आर.ओ.बी. निर्माण कार्य हेतु अपने स्तर से स्वीकृति प्रदान करें, जिससे वर्षों से लम्बित परियोजना का क्रियान्वयन सम्भव हो सके । मैं यह कहना चाहती हूं कि घोड़ासहन आदर्श रेलवे स्टेशन के पूर्वी समपार फाटक 12सी, जो मुख्य बाजार पर स्थित है, जनहित में वहां भी आर.ओ.बी. या अंडरपास का निर्माण कराया जाए । इसके लिए मैं पूर्व में भी मांग कर चुकी हूं । जनता की व्यापक मांग पर,मेरे क्षेत्र के दरभंगा-सीतामढ़ी-नरकटियागंज रेलवे खण्ड पर स्थित घोड़ासहन और रीगा स्टेशन से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेन्स का ठहराव वहां सुनिश्चित कराया जाए ।
सभापति महोदय, मां जानकी की प्राकट्यस्थली होने के कारण सीतामढ़ी का पौराणिक इतिहास है, फिर भी यह क्षेत्र दो दशक से अधिक समय से रेलवे द्वारा उपेक्षित रहा है । सीतामढ़ी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने की आवश्यकता है । माननीय रेल मंत्री जी से मेरी मांग है कि ट्रेन संख्या 02557/02558 सप्तक्रांति एक्सप्रेस, 03419/03420 जनसेवा एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 05215/05216, ट्रेन संख्या 01061/01062 पवन एक्सप्रेस एवं ट्रेन संख्या02565/02566 बिहार सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस का परिचालय वाया सीतामढ़ी सुनिश्चित कराया जाए । सीतामढ़ी एवं रीगा में ऑटोमैटिक वाशिंग प्लांट बनाया जाए । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय सभापति : धन्यवाद, रमा देवी जी । आप जब वक्तव्य दे रही हैं, बैल बजाना मुझे अच्छा नहीं लगता, लेकिन क्या करें आठ बजे तक हमें यह डिसकशन खत्म करना है । अभी हमारे सामने पांच अन्य माननीय सांसद बोलने वाले हैं । मैं सबसे निवेदन करूंगा कि दो-दो मिनट्स में आप अपनी डिमाण्ड्स रख दें । माननीय मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, वे उसे नोट कर लेंगे और आपकी डिमाण्ड्स रिकॉर्ड पर आ जाएंगी ।
*m85 *SHRI UNMESH BHAIYYASAHEB PATIL (JALGAON): I support the Demand for Grants relating to the Ministry of Railways. I congratulate our hon. Railway Minister, Shri Piyush Goyal, for successfully turning around the operation and finances of the Indian Railways through his hard work under the visionary leadership of our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji.
The budget for this year has been increased to Rs. 1.10 lakh crore from Rs. 72,000 crore in the previous budget. Measures have been taken from time to time to improve the financial position of the railways. Regarding losses to railways, operating cost is a very often cited factor. This factor stretches across all the zones of railways. In the wake of the Covid-19, operation of all the passenger trains was stopped due to lockdown. The operating losses to the railways across all zones amount to Rs. 36,9903.82 crores as compared to last year.
It may, however, be noted that to ensure that the supply of essential commodities throughout the country is not disrupted, the Indian Railways introduced parcel special train services during Covid times. Shramik specials were organized in a mission mode to move migrant workers, pilgrims and students stranded in various States during the lockdown. Starting from 1st May to 31st August, 2020, 4,621 Shramik Specials had been operated as per the demands of the State Governments.
The time-tabled parcel special train services were continued even when the passenger trains were restored. Till 25th December 2020, the Indian Railways had operated 7,267 parcel special trains, out of which 7,014 had the time-tabled services. Approximately 6.6 lakh tonnes of consignments were transported through these services.
The Indian Railways accord the highest priority to railways safety and it has been taking various measures on a continuous basis to prevent accidents and to enhance safety. As a result, the number of train accidents has come down from 104 in 2016-17 to 55 in 2019-20 despite a substantial increase in the traffic volume carried by the Indian Railways during the same period.
I would now like to draw the attention of the Hon'ble Minister towards the local demands from my Jalgaon Parliamentary Constituency. There are many commuters who commute daily to Surat and they have to hire private vehicles or buses which a common man cannot afford. So, to meet their demand, Nandurbar-Pune and Surat-Pune trains should be started. This will actually serve the Nandurbar, Amalner, Dharangaon, Jalgaon and Chalisgaon stations and will ease the mode of travelling from Amalner, Dharangaon and Pachora. An escalator and a lift facility at Chalisgaon and Pachora Stations should be provided. Dharangaon & Amalner railway stations should be started immediately and the inconvenience caused to the passengers should be removed by providing a railway parking facility on the north side of Chalisgaon railway station.
Survey of Chalisgaon-Aurangabad line was done in 2017-18 and the report was submitted to the Railway Board, but the ROR was (-) 2.23%. A survey of this railway line should be done once again. I assure you that the ROR will be a positive step.
Deolali-Bhusawal Shuttle Service, Bhusawal-Mumbai Passenger, Dhule-Chalisgaon Passenger Train, Pachora-Jamner PJ Passenger Train and Bhusawal to Surat Passenger Train, which are closed due to lockdown, should be started Immediately and a general travel should be made available to the general public.
The Chalisgaon-Dhule Passenger Train goes to Pune and Mumbai. Bogies of Maharashtra Express and Amritsar Express have been closed today for the convenience of passengers coming from Dhule district. However, the service of these bogies should be resumed till a new train is arranged from here. Also, a new Dhule-Pune Express Train (Dhule-Chalisgaon-Kalyan-Pune) should be started from Dhule so that the passengers of Dhule district can benefit more. The inconvenience caused by the closure of bogies for Dhule-Chalisgaon Passenger Train will not be there.
Renovation of Chalisgaon Railway Ticket booking office should be done. The extension of windows should be done and the first-class unique waiting rooms should be made.
Left arm is needed for the citizens of Pimprala area near Jalgaon railway station and a sky walk near Brahman Sabha and Tehsildar office in Jalgaon city is very much needed which will benefit lakhs of city dwellers.
The underpass made under British era near Hirapur railway station is currently under the road that is used frequently. When water is retained there, it becomes difficult for citizens to move around.
Manmad-Secunderabad Ajanta Express has a big halt at Manmad and it should be started as Bhusawal-Secunderabad Ajanta Express at Nandgaon, and Chalisgaon and stops like Pachora and Jalgaon should be provided.
There is Girna River which is a perennial river near Jamda railway station and a large railway land is also available in the area of Jamda station. Many issues, including demands, have been corresponded to your office from time to time for cooperation.
As Jalgaon is a hub of plastic carpets, Kisan Rail should be provided as an extra freight train from Jalgaon Railway station for the convenience of plastic carpet industry.
Regarding Central Railway, Bhusawal-Chalisgao-Manmad, Pachora-Jamner, Dhule-Chalisgaon, the development work at the mentioned corridor should be considered.
माननीय सभापति : श्री रामचरण बोहरा ।
*m86 श्री रामचरण बोहरा (जयपुर): सभापति महोदय, मैं रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी एवं वित्त मंत्री जी के प्रति तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं और साथ ही माननीय रेल मंत्री जी के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरे संसदीय क्षेत्र जयपुर में अभूतपूर्व परिवर्तन करके, रेलवे के विकास की एक नई गंगा बहाई है ।
महोदय, केन्द्रीय बजट 2020-21 में किसान रेल सेवाओं को संचालित करने की घोषणा की गई है । 8 जनवरी, 2021 को 34,000 टन से अधिक माल को वहन करते हुए, किसान रेल के 120 दौरे हुए, जो एक स्वागतयोग्य कदम है ।
सभापति महोदय, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जून, 2022 तक चालू होने की उम्मीद है । मैं समझता हूं कि इसके चालू होने पर देश की अथव्यवस्था में भारी वृद्धि होगी और निश्चित रूप से औद्योगिक जगत को लाभ मिलेगा ।
सभापति महोदय, मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय वित्त मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने ‘नया भारत, नई रेल’ संबंधी नई पहल की शुरुआत की है,जिससे यात्रियों को अधिक सुविधाएं मिलेंगी ।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं और साथ ही, कुछ मांगों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा । पिछले रेल बजट में जयपुर से सवाई माधोपुर लाइन के दोहरीकरण के लिए 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन यह दोहरीकरण का कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है । जल्दी ही इस दोहरीकरण के काम को शुरू कराया जाए । इसके साथ ही दुर्गापुरा-सांगानेर के बीच में कल्याणपुरा फाटक संख्या 73 पर यात्री वाहन भार को देखते हुए एवं शहर के बीचों-बीच होने के कारण आरओबी या आरयूबी में परिवर्तित करने की आवश्यकता है ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जयपुर डिग्गी मालपुरा रोड पर रेलवे अण्डरपास संख्या 74 की चौड़ाई और ऊंचाई कम है । इससे आए दिन काफी जाम लगा रहता है और एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है । मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जयपुर-सवाई माधोपुर का जो दोहरीकरण हो रहा है, इसके साथ-साथ इस फाटक संख्या 74 की चौड़ाई और ऊंचाई भी बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके । शहर में रेलवे लाइन के साथ-साथ काफी बाउण्ड्रीवाल बन चुकी हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर अभी बाउण्ड्रीवाल नहीं बनी है । इससे मवेशी वगैरह के आने-जाने के कारण एक्सीडेंट का जोन बना रहता है । इसमें जो बाउण्ड्रीवाल बाकी रह गई हैं, उनको भी पूरा कराने की आवश्यकता है ।
सांगानेर विश्वस्तरीय रंगाई-छपाई के नाम से प्रसिद्ध है । यहां पर सांगानेर स्टेशन काफी अविकसित है । इसको विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि यहां पर एक्सप्रेस ट्रेन को भी ठहराया जा सके । इससे यहां के व्यापारियों को लाभ मिलेगा । जगतपुरा, खातीपुरा, सांगानेर, कनकपुरा, ढेहर के बालाजी स्टेशनों पर एस्केलेटर्स, लिफ्ट और प्लेटफार्म्स पर शेल्टर का प्रावधान करने की आवश्यकता है ।
माननीय सभापति : रामचरण जी, आप अपनी बात खत्म कीजिए ।
श्री रामचरण बोहरा : सर, मैं अपनी बात दो मिनट में खत्म कर रहा हूं । सांगानेर में सेकेण्ड एंट्री की आवश्यकता है । यहां पर सेकेण्ड एंट्री हो जाएगी तो आवागमन में काफी ठीक रहेगा । जयपुर के आस-पास विद्युतीकरण के कारण यहां डीएमयू, ईएमयू का संचालन कराया जाए, ताकि यहां पर दैनिक आवागमन के लिए यात्रियों को लाभ मिलेगा ।
मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा और मैंने वर्ष 2014 से लेकर अब तक कई बार निवेदन किया है कि जयपुर से शिरडी, जो हमारा तीर्थस्थल है और जयपुर से हजारों लोग वहां पर हर महीने जाते रहते हैं तो जयपुर से शिरडी डायरेक्ट ट्रेन चलाने की आवश्यकता है । मैं आपसे आग्रह करूंगा कि जल्द ही इसका भी काम करें । जो जयपुर से डबल डेकर दिल्ली आती थी, वह कोरोना के कारण बंद हो गई थी, इसको जल्द ही फिर से चालू कराया जाए, ताकि लोगों को आने-जाने की सुविधा मिल सके ।
मैं मंत्री जी से यह भी आग्रह करूंगा कि जयपुर-दिल्ली के बीच में एक फास्ट ट्रेन चलाई जाए, वन्दे भारत एक्सप्रेस चलाई जाए । आपने इसके लिए आश्वस्त किया था तो जल्द ही वन्दे भारत ट्रेन चलाई जाए, ताकि जयपुर को एक नई सौगात मिल सके । …(व्यवधान) जोधपुर से दिल्ली मंडोर एक्सप्रेस चलती है । इस ट्रेन का नाम, जो पश्चिमी राजस्थान है, पश्चिमी राजस्थान में लोक देवता हमारे वीर तेजा जी हैं । अगर वीर तेजा जी का नाम भी मंडोर एक्सप्रेस के साथ जोड़ दिया जाए तो इससे वेस्टर्न राजस्थान के लोगों का मनोबल बढ़ेगा ।
माननीय सभापति : आप करीब 7-8 मिनट बोल चुके हैं ।
श्री रामचरण बोहरा : सर, मैं एक बात और कहना चाहूंगा । आपने खातीपुरा में रेल कोच मेन्टेनेंस का गत बजट में प्रावधान किया था, लेकिन अभी वह चालू नहीं हुआ है । अगर इस कोच मेन्टेनेंस को चालू कर देंगे तो लोगों को रोजगार मिलेगा और जयपुर के लिए नई सौगात होगी । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*m87 SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO (BOLANGIR): Thank you, Sir for giving me the opportunity to participate in this discussion on the Demands for Grants under the Ministry of Railways. I rise to fully support it. I would like to thank our visionary hon. Prime Minister and our hon. Railway Minister for their generous budgetary allocation for Odisha, which is 60 per cent higher than the last financial year. This proves the Government’s commitment towards early completion of projects and the statement that no progress will be hindered due to paucity of funds.
I will come straight to the subject. I am grateful for the budgetary allocation of Rs. 1000.50 crore for the Balangir-Khurda Railway line. I will be remiss in my duties if I do not convey the long-standing demands of the people of my constituency.
20.00hrs These are as follows. The first and foremost is development of 750 acres of Railway land which has been lying idle for the last 75 years. Last year, the hon. Minister had been kind enough to initiate the process of starting a manufacturing park.
माननीय सभापति : संगीता जी, एक मिनट रूकिए । सदन का समय 8 बजे तक के लिए बढ़ा था । हम सदन का समय सिर्फ 15 मिनट और बढ़ा रहे हैं । मैडम, आपके लिए 15 मिनट का समय नहीं है, बल्कि और चार माननीय सांसद हैं, जो दो-दो मिनट में अपनी बात कहेंगे । अगर हाउस एग्री करे तो हम सदन का समय 8.15 बजे तक बढ़ाएं ।
कई माननीय सदस्य : हां ।
माननीय सभापति : ओके, सदन का समय 8.15 बजे तक बढ़ाया जाता है ।
संगीता जी, आप कन्टीन्यू कीजिए ।
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO : Last year, I had spoken to the hon. Minister. He had said that he would be interested in setting up a manufacturing park on the lines of the manufacturing park in Nagpur. Since it is a zero Industry district, this would really go a long way in solving the problem of mass migration of labour in my constituency.
Sir, the budgetary allocation for the new Railway line from Bolangir to Nuapada via Patnagarh is another very important project. Coming to Restoration of the Howrah-Titlagarh Ispat Express which was functioning before the lockdown, I am requesting to the restoration of the Ispat Express and Samleshwari Express plus the extension of Ispat Express up to Kantabanji.
Extension of Jammu-Tawi Express from Sambalpur up to Titlagarh, extension of Sambalpur-Puri Intercity Express upto Bolangir, extension of Bhubaneswar-Balangir Intercity Express upto Titlagarh, extension of Banaras-Sambalpur Express upto Titlagarh and increasing the frequency of the Hirakud Express from three days to seven days, increasing the frequency of Samata Express from five days to seven days, stoppage of the Ispat Express at Degaon Railway Station at Bolangir, stoppage of Samleshwari Express at Loisinga Railway Station and the stoppage of Durg-Puri Express at both Degaon and Loisinga Railway Stations are some of my demands.
I want to thank the hon. Prime Minister and hon. Minister for Railways once again for their generosity and I am sure that under their visionary leadership, the aspirations of the people of my constituency will be fulfilled.
*m88 श्रीमती संध्या राय (भिंड): सभापति महोदय, मैं देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी को धन्यवाद देती हूं, मैं सम्माननीय वित्त मंत्री जी, श्रीमती सीतारमण जी को धन्यवाद देती हूं । मैं रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देती हूं, मैं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर जी को धन्यवाद देती हूं । मैं रेल बजट का समर्थन करती हूं । मैं ज्यादा कुछ न कहते हुए यही कहूंगी कि लगातार पूरे देश में रेलवे स्टेशनों का सौंदर्यीकरण हो रहा है, उसमें हमारा मुरैना स्टेशन, ग्वालियर, भिंड, दतिया, सभी जगहों पर लगातार सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है । इसके लिए मैं रेल मंत्री पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देती हूं । हमारे लोक सभा क्षेत्र के दोनों जिले दतिया और भिंड बहुत पिछड़े हुए हैं । अभी तक भिंड जिले में डीजल से ट्रेन चलती है । वहां विद्युतीकरण का काम चालू हुआ है, उसके लिए मैं उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं । मैं यही मांग करती हूं कि भिंड जिले में रेलों की कनेक्टिविटी कम है, चूंकि अभी तक वहां ट्रेन्स डीजल से चलती हैं, लेकिन जब वहां विद्युतीकरण हो जाएगा, तो भिंड जिले को और रोड्स से जोड़ा जाए । आप समझ सकते हैं कि जो चम्बल संभाग है, उसका भिंड जिला, सबसे ज्यादा जो देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैं, जो अपने देश के लिए सबसे ज्यादा बलिदान देते हैं, भिंड जिले के जो हमारे फौजी भाई हैं, उनको ट्रेनों का लाभ मिले । इसलिए जब भिंड जिले में काम हो जाए, तो मैं आपसे निवेदन करूंगी कि भिंड के लिए भोपाल से भी और ट्रेन्स बढ़ाई जाएं, वहां के लिए दिल्ली से भी ट्रेन्स बढ़ाई जाएं, जिससे कि उनको लाभ मिले ।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से मांग करती हूं कि दतिया जिला मां पीताम्बरी की नगरी है । वहां पहले काफी ट्रेन्स रूकती थीं, लेकिन कोरोना की वजह से कई ट्रेनों का स्टॉपेज रोक दिया गया है । दतिया जिले में कई ट्रेन्स हैं, जैसे मंगला एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस आदि । इन तीन-चार ट्रेन्स को वहां पर रोका जाना चाहिए । दिल्ली से हर शनिवार वहां दर्शन के लिए कई लोग जाते हैं । उन्हें इन ट्रेनों का लाभ मिलना चाहिए । दतिया जिले में दो छोटे-छोटे स्टेशंस है, इनमें से एक बसई स्टेशन है, जो कि बहुत ही दूर है । वहां पहले उत्कल एक्सप्रेस रुकती थी, उसका स्टॉपेज फिर से किया जाना चाहिए । दतिया जिले में दूसरा स्टेशन सोनागीर है । वहां पर ट्रेनों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए । भिंड और दतिया जिलों के स्टेशंस का और सौंदर्यीकरण होना चाहिए, क्योंकि ये दोनों पिछड़े जिले हैं । यहां बहुत सी कमियां हैं । मेरी यह मांग है कि इन दोनों जिलों को पिछड़े जिलों में जोड़ा जाना चाहिए । महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं ।
*m89 डॉ. ढालसिंह बिसेन (बालाघाट): सभापति महोदय, आपका बहुत धन्यवाद कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है । इसी के साथ मैं माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय रेल मंत्री जी तथा अंगड़ी जी का भी स्मरण करना चाहूंगा, जिनकी वजह से मेरे जिले में रेल के विस्तार के लिए राशि मिलने से काम प्रारंभ हुआ । मैं श्री अनुराग ठाकुर जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं ।
सभापति महोदय, मैं मध्य प्रदेश की ओर से गोयल जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि जो बजट बहुत पहले वर्ष 2009 से 2014 के बीच में हमें केवल 690 करोड़ रुपये के लगभग मिलता था, यह पिछले दो वर्षों से करीब 7,900 करोड़ रुपये और इस बार 7,700 करोड़ रुपये मिला है । इसकी वजह से हमें छोटी रेल लाईन का काम पूरा करने का अवसर मिला । मैं जिस बालाघाट, सिवनी जिले से आता हूं । वहां पर कान्हा और पेंच नेशनल पार्क है । यहां अंग्रेजों के समय से पहले की रेल थी । यह सवा सौ साल पुरानी थी । इसके कंवर्शन का काम प्रारंभ किया गया, लेकिन यह पिछले कार्यकालों में पूरा नहीं हो पाया था । श्री गोयल जी के कार्यकाल में जब राशि ज्यादा मिली, तो नयनपुर से बालाघाट की रेल लाइन बनकर तैयार हुई । तब हमारा बालाघाट और गोंदिया मार्ग प्रारंभ हुआ । मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं । इस बजट में आपने सिवनी और कटंगी मार्ग के सर्वे को जोड़ा है, मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि वहां पहले 90 किलोमीटर का मार्ग बताकर उसे फिजिबल नहीं बताया गया था । मैं यह कहना चाहता हूं कि वह केवल 50 किलोमीटर है । आपने उसे बजट में जोड़ा है और आप उसे पूर्णता की ओर ले जाएंगे । इसी के साथ नयनपुर से छिंदवाड़ा रेल मार्ग बहुत ही जल्द करीब तीन महीनों में पूरा हो जाएगा । आने वाले समय में वह रेल लाईन भी शुरू हो जाएगी, तो बालाघाट से नयनपुर, भोपाल और गोंदिया से जबलपुर तथा दिल्ली के लिए भी मार्ग प्रशस्त होगा । अभी वर्तमान में दो रेल लाइन्स प्रारंभ की गई हैं, जिसके कारण रीवा से नागपुर तक लोगों का आवागमन जुड़ गया । इससे उत्तर और दक्षिण के बीच की दूरी 275 किलोमीटर कम हो गई है ।
मैं दो-तीन मांगें और रखना चाहता हूं । बालाघाट जिला छत्तीसगढ़ से लगा हुआ है, जिससे कई लोग रायपुर में नौकरी करते हैं, वहां बस गए हैं । उनके लिए जबलपुर से बालाघाट वाया गोंदिया होकर रायपुर के लिए ट्रेन चलाई जाए और गोंदिया से सीधा बालाघाट होकर जबलपुर से दिल्ली आने के लिए भी सुपरफास्ट ट्रेन मिल जाए, तो हमें बहुत ही सुविधा मिलेगी । अभी हमें जबलपुर या नागपुर जाकर ट्रेन पकड़नी होती है । इसके अतिरिक्त एक लंबित मार्ग है । मैं यह समझ सकता हूं कि दिक्कत तो है । हमारे देश के एक पूर्व प्रधान मंत्री श्री नरसिंह राव जी थे । वे रामटेक से सांसद हुआ करते थे । रामटेक से गोटेगांव तक का सर्वे किया गया था । इसे फिजिबल नहीं बताते हुए, इसका काम रोक दिया गया है । अगर यह रेल मार्ग बनता है, तो हमें जबलपुर से नागपुर तक के लिए सीधी रेल सेवा मिलेगी । हमारे यात्रियों को पेंच नेशनल पार्क में आने के लिए सुविधा मिलेगी । इसलिए इस मार्ग का पुन: सर्वे करवाकर, इसे स्वीकृति दिलाने का काम करें । इस समय बालाघाट में चार-पांच ओवर ब्रिज को मध्य प्रदेश सरकार ने अनुमति दे दी है । हमें भारत सरकार से केवल एक ब्रिज की स्वीकृति है ।
माननीय सभापति : आप बैठ जाइए ।
श्री संजय सेठ (राँची): माननीय सभापति महोदय, देश की आजादी के बाद यह पहला बजट है, जिसमें रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है वरना पुरानी रेल की पटरियों पर नई-नई रेल चलाने के लिए लगातार घोषणाएं होती रहती थीं । पिछले पाँच-छ: दशक में हमने वह समय भी देखा है कि रेल मंत्री अपने क्षेत्र की जनता को खुश करने के लिए घोषणा कर देते थे । लेकिन रेल पाँच साल नहीं चलती थी । आज तक जितनी भी रेल चलाने की घोषणाएं हुईं, वे नहीं चलीं । लेकिन आज हम कह सकते हैं कि बोझ बढ़ता गया और दुर्घटनाएं होती गईं ।
माननीय सभापति: आप अपनी डिमांड्स रख दीजिए ।
श्री संजय सेठ : सर, मैं इस सत्र में पहली बार बोल रहा हूँ । मैं कहना चाहता हूँ कि रेलवे के लिए लाया गया बजट रेलवे को नई गति प्रदान करेगा और भारतीय रेल भी दुनिया की विकसित देशों की रेलों की तरह तेज रफ़्तार से दौड़ेगी । यह रफ्तार न सिर्फ रेलवे की होगी, बल्कि यह देश के विकास की रफ्तार होगी । इस बजट में, मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और आदरणीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी के कुशल कार्यशैली को सैल्यूट करता हूँ । रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश अंगड़ी जी आज हमारे बीच नहीं रहे । मैं उनको नमन करते हुए रेलवे के प्रति उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करता हूँ ।
रेलवे ने इस नए बजट में विकास की एक नई रेखा खींची है और जो ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है, वह भविष्य में सुखद यात्रा कराने वाला है । इस बजट में किसानों के लिए किसान रेल का प्रावधान है, पर्यटन के लिए विस्टा ड्रोम ट्रेन का प्रावधान है । आज से पहले ट्रेन का मतलब सिर्फ पैसेंजर ट्रेन और माल ढोने के लिए गाड़ी ही समझी जाती थी । अब हमने रेलवे को एक नया विस्तार दिया है । निश्चित रूप से इसके लिए वर्तमान सरकार धन्यवाद की पात्र है ।
माननीय सभापति: आपका धन्यवाद ।
श्री संजय सेठ: इस बजट को लेकर मैं अपने क्षेत्र की कुछ चर्चा करना चाहता हूँ । मुझे यह कहते हुए गर्व है कि पूरे भारतवर्ष में सबसे ज्यादा राजस्व झारखण्ड देता है । मेरे क्षेत्र के तहत राँची रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट जैसा सुन्दर दिखता है, मैं इसके लिए सरकार को धन्यवाद देना चाहूँगा ।
माननीय सभापति: आपका जो वक्तव्य और डिमांड्स हैं, उन्हें लिखकर मंत्री जी के पास भेज दीजिए । अब आप बैठ जाइए ।
*m90 *DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): I wish to say a few words on the Demands for Grants for 2021-22. Last year was very challenging with the onset of COVID-19, floods and earthquakes. During the lockdown when the entire country was disturbed due to their placements away from their homes, Indian Railways had played a very important role by taking people from their workplaces to their native places.
When during the Lockdown, all the businesses were at standstill, yet the Railway Minister has formulated schemes and programmes in such a way that all aspects were covered. Many trains were started during the lockdown to take people from different parts of the country to their homes. Two such trains were started from my constituency to take the students, who were stuck in Akkalkuwa block of my constituency. Table.
I will demand that the trains, which were running between Sura-Bhusawal line via Nandurbar were temporarily stopped during COVID-19 lockdown, should be restarted so that passengers can travel from Nandurbar to different parts of the country.
Trains which were running to Mumbai from different parts of the country via Nandurbar railway station should be resumed at the earliest so that it will become feasible for travelling to Mumbai and other parts of the country.
Statue of Unity is gaining lot of importance and it is located close to my constituency. I would like to demand for a new railway line between Nandurbar and Kevadia, which will connect Kevadia through both the Western and Central Railways I would like to demand for a new railway train between Nandurbar and Pune as many students in Nandurbar, which is a tribal district, don’t have many educational institutions to pursue education. At present, they travel to Pune for education.
I wholeheartedly support the Railway Budget for 2021-22, and thank the hon. Prime Minister, Shri Modi ji, hon. Railway Minister, Shri Piyush Goyal ji for all-inclusive budget and I expect that our hon. Railway Minister will accept the demands of my constituency.
*m91 श्रीमती कविता सिंह (सिवान): माननीय सभापति जी, मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीमारमण जी, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देती हूँ कि आज मुझे रेल बजट के पक्ष में बोलने का शुभ अवसर प्रदान हुआ है । इसके साथ ही साथ, मैं अपने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का भी धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने मुझे सिवान जिले की आवाज को उठाने का अवसर दिया । इस सदन के माध्यम से मैं अपने संसदीय क्षेत्र की बातों को रखना चाहती हूँ ।
महोदय, मैं उस क्षेत्र से आती हूँ, जो देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी की धरती है । आज वह धरती अन्य सुविधाओं से वंचित है । रेलवे के क्षेत्र में जो सुविधाएं इस क्षेत्र को मिलनी चाहिए थीं, वे आज तक नहीं मिली हैं ।
मैं मांग करना चाहती हूँ कि सिवान जिले में कोई भी राजधानी ट्रेन का परिचालन नहीं है, लेकिन यह अन्य जिलों में है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगी कि सिवान जिले से भी राजधानी ट्रेन का परिचालन हो ताकि वहाँ के यात्रियों को सुविधा मिल सके । इसके साथ-साथ, मैं कहना चाहती हूँ कि लखनऊ-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का ठहराव मैरवा में सुनिश्चित किया जाए । इसके साथ-साथ सिवान रेलवे स्टेशन का नाम भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद के नाम पर किया जाए । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूँगी कि इन बातों का संज्ञान लिया जाए । सारण, सिवान और गोपालगंज को जोड़ने वाली लखनऊ-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का ठहराव दीघा हाल्ट पर कराया जाए ।
माननीय सभापति: श्रीमती कविता जी, आप अपनी डिमांड्स लिखकर मंत्री जी के पास भेज दीजिए ।
*m92 श्री जनार्दन मिश्र (रीवा): माननीय सभापति महोदय, हमारे रीवा जिले में बहुत काम हुए हैं । वर्ष 1956 में विन्ध्य प्रदेश के मर्जर के समय ललितपुर से सिंगरौली रेलवे लाइन की डिमांड आई थी । यह मर्जर में शर्त थी, लेकिन यह कभी नहीं हुआ । अभी वर्तमान में केन्द्र सरकार ने इस काम को पूरा करने के लिए रीवा से सिंगरौली का काम शुरू किया है । अभी रीवा से केवड़िया के लिए नई ट्रेन चलाई गई है । रीवा से नागपुर ट्रेन का परिचालन हो रहा है ।
लेकिन सब कुछ होने के बावजूद रीवा के लोग पूछते हैं कि सब कुछ कर रहे हो, लेकिन रीवा से मुम्बई के लिए ट्रेन कब दिलवाओगे? माननीय मंत्री जी, रीवा से मुम्बई के लिए एक नई ट्रेन चलाई जाए । रीवा से मिर्जापुर वाया हनुमना नई रेलवे लाइन के सर्वे का काम पूरा हो चुका है । अगर यह रेलवे लाइन बन गई, तो रीवा से इलाहाबाद और सतना के लिए लगभग सौ किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी । इससे माल ढुलाई में भी काफी सुविधा होगी । इसके साथ-साथ, कोरोना के समय डभौरा रेलवे स्टेशन से क्षिप्रा और कामायनी एक्सप्रेस ट्रेन्स के स्टॉपेज बंद हुए हैं, मेरा निवेदन है कि इन ट्रेन्स के स्टॉपेज को पुन: बहाल किया जाए ।
इसके साथ ही साथ कोरोना के समय डबहअुरा रेलवे स्टेशन, छिपरा और कामायनी स्टेशन्स पर ट्रेनों के जो स्टॉपेज़ बंद हुए हैं, मेरा अनुरोध है कि इन स्टॉपेजेज़ को फिर से प्रारंभ किया जाए ।
अंत में, मैं अपनी उपरोक्त मांगों के बाद माननीय रेल मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने रीवा से केवड़िया को जोड़ा है । इसके लिए मैं उन्हे बार-बार धन्यवाद देता हूं ।
मैं इस अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं । धन्यवाद ।
माननीय सभापति: श्री जनार्दन मिश्र जी के वक्तव्य के साथ, the discussion on Demands for Grants of Railways has been completed. Reply will be given tomorrow.
सभा की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 16 मार्च, 2021 को प्रात: 11 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है ।
20.16 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Tuesday, March 16, 2021/ Phalguna 25, 1942(Saka).
________ * The sign + marked above the name of a Member indicates that the Question was actually asked on the floor of the House by that Member.
* Available in Master copy of the Debate, placed in Library.
* Introduced with the recommendation of the President.
** Introduced with the recommendation of the President.
* English translation of the speech originally delivered in Punjabi * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * English translation of the speech originally delivered in Punjabi * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table *....* English translation of this part of the speech originally delivered in Kannada.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table