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Lok Sabha Debates

The Speaker Made References To The Passing Away Of Shri Kameshwar Paswan, Member ... on 26 July, 2018

Sixteenth Loksabha an> Title: The Speaker made references to the passing away of Shri Kameshwar Paswan, member of the 11th Lok Sabha; Sh. Pandurang Pundlik, member of the 9th, 10th and 11th Lok Sabhas; and Shri Raj Narain Passi, Member of the 10th, 12th and 13th Lok Sabhas.

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, मुझे तीन पूर्व सदस्यों सर्वश्री कामेश्वर पासवान, पांडुरंग पुंडलिक फुंडकर और राज नारायण पासी के दु:खद निधन के बारे में सभा को सूचित करना है।

          श्री कामेश्वर पासवान बिहार के नवादा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से ग्यारहवीं लोक सभा के सदस्य थे।

          इससे पूर्व, श्री पासवान दो बार बिहार विधान सभा के सदस्य रहे और वर्ष 1977 से 1979 तक बिहार सरकार में कल्याण मंत्री के रूप में सेवाएँ दीं। वह वर्ष 1990 से 1996 तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे।

          अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ता, श्री पासवान ने समाज के कमजोर और वंचितों के उत्थान के लिए कार्य किया।

          श्री कामेश्वर पासवान का निधन 77 वर्ष की आयु में 28 मई, 2018 को पटना, बिहार में हुआ।

          श्री पांडुरंग पुंडलिक फुंडकर महाराष्ट्र के अकोला संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से नौवीं, दसवीं और ग्यारहवीं लोक सभा के सदस्य थे।

          श्री फुंडकर वर्तमान महाराष्ट्र सरकार में कृषि और बागवानी मंत्री थे। इससे पूर्व, वह दो बार महाराष्ट्र विधान सभा के सदस्य और तीन बार महाराष्ट्र विधान परिषद् के सदस्य भी रहे।

          श्री पांडुरंग पुंडलिक फुंडकर जी का निधन 67 वर्ष की आयु में 31 मई, 2018 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ।

          श्री राज नारायण पासी उत्तर प्रदेश के बांसगांव संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से दसवीं, बारहवीं और तेरहवीं लोक सभा के सदस्य रहे थे।

          श्री राज नारायण पासी का निधन 69 वर्ष की आयु में 19 जुलाई, 2018 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ।

          हम अपने पूर्व साथियों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। मुझे विश्वास है कि शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने में यह सभा मेरे साथ है।

          अब यह सभा दिवंगत आत्माओं के सम्मान में कुछ देर मौन रहेगी।

11 01 hrs              The Members then stood in silence for a short while     HON. SPEAKER: Question Hour.

          Question No. 121 -        Shri Ravneet Singh.  

…( व्यवधान)  

माननीय अध्यक्ष : बैठिए, मुझे मालूम है। प्रश्न काल के बाद यह 12 बजे होगा।   

…( व्यवधान)  

माननीय अध्यक्ष : श्री खड़गे जी, कौन-सी बड़ी बात हो गई?  

…( व्यवधान)  

माननीय अध्यक्ष : बारह बजे, अभी नहीं।  

…( व्यवधान)  

माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए। अभी नहीं, क्वेश्चन आवर के बाद।  

…( व्यवधान)  

माननीय अध्यक्ष : खड़गे, जी कौन सी बड़ी बात हो गई?   

…( व्यवधान)  

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : मैडम, रिज़र्वेशन ऑन एस.सी., एस.टी.।   …( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : हां, मुझे मालूम है। उसके बारे में सरकार ने आदेश निकाला हुआ है। बारह बजे, अभी नहीं। आई एम सॉरी।

          श्री रवनीत सिंह। प्रश्न पूछिए।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Nothing will go on record.

…(Interruptions)…*   HON. SPEAKER: After Question Hour means after Question Hour.

 

11 05 hrs ORAL ANSWERS TO QUESTIONS HON. SPEAKER: Question No. 121.

(Q. 121) श्री रवनीत सिंह : थैंक यू, स्पीकर महोदया । मैं खास तौर पर पंजाब और लुधियाना की बात करूंगा। पंजाब और लुधियाना नॉर्थ इंडिया का टैक्सटाइल हब है। We are the leaders in export and manufacturing of woolen garments. पंजाब से जितना एक्सपोर्ट होता है, उसमें 40 परसेंट हिस्सा लुधियाना डालता है। जितने भी मेजर मैन्युफैक्चरर्स हैं, चाहे वे इंटरनेश्नल ब्रांड्स हों, जिनमें मार्क स्पेनसर की बात की जाए, ज़ारा की बात की जाए या एच एण्ड एम की बात की जाए। खास तौर पर जो हमारे ब्रांड्स हैं, उनमें ओसवाल आप जानते हैं, मॉन्टी कार्लो आप जानते हैं, प्रिंगल जानते हैं, ड्यूक जानते हैं, वर्धमान जानते हैं। आप ये बड़े से बड़े ब्रांड्स जानते हैं। मैं निफ्ट की बात करने जा रहा हूं। खास तौर पर जो डिज़ाइनर ब्रांड्स हैं, उनमें हर साल नए डिज़ाइंस तैयार होते हैं। उनका अरबों रुपये का बिज़नेस होता है। वहां पर डिज़ाइनर्स की जो हाई पेड जॉब्स हैं, उनके लिए हमें निफ्ट मुंबई, कोलकाता और दिल्ली से डिग्री लेने वाले स्टूडेंट्स लाने पड़ते हैं। यह अच्छी बात है। पंजाब में जो मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे छोटी मशीनों पर काम करते हैं और छोटी नौकरियां करते हैं। हमें वहां होने वाले डिज़ाइनिंग के काम के लिए बाहर से क्यों लोगों को लाना पड़ता है? आप वहां निफ्ट का कोई कॉलेज या सेंटर कयों नहीं खोलते हैं, ताकि वहां के स्टूडेंट्स को और पूरे पंजाब को फायदा हो सके?

श्री अजय टम्टा : महोदया, माननीय सदस्य जी ने बहुत अच्छी बात कही कि पंजाब के लुधियाना का विशेष रूप से जो टैक्‍सटाइल उत्पादन है, वह पूरे देश-दुनिया में है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे डिज़ाइनर्स उपलब्ध करवाने के लिए वहां निफ्ट की शुरुआत की जाए।

          महोदया, मैं माननीय सदस्य जी को जानकारी देना चाहूंगा कि 5 मई, 2010 से लगातार पंजाब की सरकार वहां निफ्ट खोलने के लिए हमारे बी.ओ.जी., जो कि बोर्ड ऑफ गवर्नेंस है, उसके साथ लगातार पत्र व्यवहार कर रही है। एन.आई.आई.एफ.टी. इंस्टीट्यूट मोहाली, लुधियाना और जालंधर में स्थापित हैं। राज्य सरकार द्वारा इसे निफ्ट से संचालित करने के प्रस्ताव पर कई बार चर्चा हुई। बी.ओ.जी. की नई गाइडलाइन दिनांक 4.9.2012 से प्रारंभ हुई है। उसके अनुसार राज्य से प्रस्ताव की मांग की गई है और उस ओर प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में भी इस पर काफी चर्चा हुई है। पूर्व के सूचना एवं प्रसारण मंत्री जी द्वारा और आपके टाइम पर भी ये सारी चीज़ें रही हैं। मैं बताना चाहूंगा कि बी.ओ.जी. की कुछ गाइडलाइंस हैं। बी.ओ.जी. एक ऑटोनॉमस बॉडी है। उसी को इस पर कार्यवाही करनी होती है।

माननीय  अध्यक्ष : सैकेंड सप्लीमेंटरी।

श्री रवनीत सिंह : स्पीकर महोदया, मंत्री जी ने जो जवाब दिया है, उसमें इन्होंने कहा है कि इसको फ्रीज़ कर दिया गया। आपने फ्रीज़ करने वाली जो बात कही, वे तीन साल भी पूरे हो चुके हैं। इन्होंने अपने आंसर में जो दूसरी बात कही है, उससे मुझे दुख हुआ। इन्होंने यह कहा कि पंजाब में फैकल्टी नहीं है और वहां ब्रांड इक्विटी है।

          मैडम, पंजाबी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। मैं अगर लुधियाना जैसे शहर की बात करूं, तो मर्सिडीज़ अगर कहीं सब से ज्यादा बिकती है, तो वह लुधियाना है। जब मारूति आई, तो वह भी सब से ज्यादा लुधियाना में आई थी।…(व्यवधान) आपने ये आंसर दिया कि वहां ब्रांड इक्विटी है। आप क्या समझते हैं कि पंजाबियों को ब्रांड के बारे में नहीं पता? दुनिया में सब से बड़ा जो नाम है, वह पंजाबियों का नाम है। इसके बारे में मंत्री जी बताएं। मैं मंत्री जी को लगातार तीन पत्र लिख चुका हूं। स्पीकर महोदया, मैं हाउस में आपके सामने यह कहना चाहता हूं कि मुझे उनमें से एक भी पत्र भी जवाब आज तक नहीं आया।

आप ब्रांड इक्विटी की अपनी बात पर माफी मांगिए कि पंजाबियों को वहां इस चीज़ की कमी है। आप वहां निफ्ट शुरू करने का भरोसा दीजिए। आप स्टेट गवर्न्मेंट से जो चाहते हैं, वह वैसा करने के लिए तैयार है, क्योंकि दस साल निकल गए हैं। मैं पिछली बार आनंदपुर साहब से एम.पी. था। वहां भी मैंने बार-बार इस विषय के बारे में कोशिश की थी। आज मैं लुधियाना से एम.पी. हूं और वहां से कोशिश कर रहा हूं। …(व्यवधान) मंत्री जी, आप इसका कुछ तसल्लीबख्श जवाब दीजिए। बड़े मंत्री जी को यहां होना चाहिए था, लेकिन वे नहीं हैं। अकेला यह जवाब तो मेरे पास आ गया। आप इससे आगे भी बढ़ें। वहां सारे इंटरनेश्नल ब्रांड्स बनते हैं। …(व्यवधान)

श्री अजय टम्टा : माननीय सदस्य ने अपनी भावनाओं को बताया और पत्र के जवाब में भी मैं आपको सम्माननीय रूप में कहना चाहता हूं कि ऐसा हुआ नहीं है। यदि आप ‘निफ्ट’ के बारे में कह रहे हैं तो आपके पत्र का भी संज्ञान लिया गया होगा, क्योंकि ये सारी चीजें बी.ओ.जी. के माध्यम से ही होता है और चूंकि ‘निफ्ट’ 1986 से देश के अंदर प्रारम्भ हुआ और निफ्ट को 2006 में एक्ट में लाया गया। चूंकि देश भर में 16 संस्थान निफ्ट के परिसर हैं, जिनमें 450 योग्य फैकल्टीज भी हैं और 11040 छात्र, छात्रएं उनमें अध्ययन करते हैं और 23 हजार युवा उससे बाहर निकले हैं।

          माननीय सदस्य को मैं फिर दोबारा बताना चाहूंगा चूंकि बी.ओ.जी. एक स्वतंत्र बॉडी है और उसके माध्यम से ही हम उसको संचालित कर सकते हैं। राज्य सरकार के द्वारा इसमें पत्रों के द्वारा हमने उनको अवगत भी कराया है। मैं अवगत कराना चाहता हूं कि वह राज्य सरकार के माध्यम से उस पर विचार करके अपने प्रस्ताव को बी.ओ.जी. में भेजें। हम भी आपके पत्रों का संज्ञान बी.ओ.जी. को देंगे, ऐसा मैं आपको विश्वास दिलाता हूं।

 

(Q.122) SHRI T.G. VENKATESH BABU : Madam Speaker, I would like to know from the hon. Minister through you as to whether the Government has allocated exclusive funds to various villages, Town Panchayats, Municipalities and City Corporations in the country and set any targets for the construction of community toilets to achieve ODF status by 2023. If so, I want to know the details of the funds sanctioned to various villages, Town Panchayats, Municipalities and Corporations of Tamil Nadu in the last three years.

ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री तथा खान मंत्री (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) : अध्यक्ष महोदया, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और स्वच्छ भारत मिशन शहरी ये दो भागों में विभक्त है। स्वच्छ भारत मिशन को पेयजल स्वच्छता मंत्रालय संचालित करता है और स्वच्छ भारत मिशन शहरी को अर्बन मिनिस्ट्री संचालित करती है। नई सरकार बनने के बाद लगातार यह कोशिश की जा रही है कि स्वच्छ भारत के मिशन के माध्यम से पूरे देश में स्वच्छता का प्रतिशत लगातार बढ़े और मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि 2014 में देश में स्वच्छता का प्रतिशत 38.7 प्रतिशत था, जो आज बढ़कर 88.42 प्रतिशत हो गया है। इसके साथ ही 19 राज्य ओडीएफ हो चुके हैं। 418 जिले, 4088 से अधिक ब्लाक्स, 1,77,780 ग्राम पंचायतें और 4,0,1925 गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में पैसे की कोई कमी नहीं है। तमिलनाडु सहित सभी राज्यों में समय-समय पर पैसा दिया जाता है और वह पैसा अभी भी राज्यों के पास अवशेष है।

          मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि वह स्वच्छ भारत मिशन के काम को आगे बढाएं, जब भी पैसे की आवश्यकता होगी, उनके राज्य को और देश में कहीं भी पैसे की कमी आने नहीं दी जाएगी।

SHRI T.G. VENKATESH BABU : Madam, I would like to know from the hon. Minister about the total amount spent by the Government in the last three years for publicity campaigns and advertisements in TV and print media to promote and create awareness on the importance of using toilets to achieve ODF status and also about the total amount contributed by the various profit-making PSUs and private companies in the last three years.

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: महोदया, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में यह प्रयत्न किया गया है कि सामुदायिक भावनाओं को जाग्रत किया जाए और जो लोग इस आंदोलन में समर्थन करना चाहते हैं, मदद करना चाहते हैं, कारपोरेट क्षेत्र के लोग और पीएसयूज और बाकी अन्य संस्थाएं सरकार सबका सहयोग ले रही है और लगातार इस काम को आगे बढ़ाने का प्रयत्न कर रही है।

          आईईसी के माध्यम से सरकार की कोशिश है कि सूचना के जितने प्रकार के भी साधन हैं, चाहे वह इलैक्ट्रिॉनिक मीडिया हो, प्रिंट मीडिया हो या समुदाय को जागरुक करने की अन्य प्रकार की पहलें हों, स्वच्छता प्रेरक खड़ा करने की, स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि जैसे कार्यक्रम आयोजित करने और गांवों-गांवों में जागृति लाने के लिए जो भी विषय हो सकते हैं, उन सभी विषयों के माध्मय से हम कोशिश कर रहे हैं ‍कि स्वच्छता के लिए सब लोग जागृत हों और स्वच्छता को स्वभाव में लाएं, जिससे कि आने वाले कल में हमारा देश पूरी तरह स्वच्छ हो सके, सुंदर हो सके, साफ हो सके और गंदगी के कारण जो बीमारियां होती हैं, उनके प्रतिशत को हम घटाने में सफल हो सकें।

श्री पशुपति नाथ सिंह : आदरणीय अध्यक्षा जी, अभी मंत्री जी ने विस्तार से उत्तर भी दिया है और स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत, दोनों की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है, उसमें इन्होंने कहा है कि खास कर बच्चों की मृत्यु दर कम हुई है। इसके लिए मैं इनको बधाई दूंगा। यह जो स्वच्छ भारत और शौच मुक्त भारत का अभियान चालू है, जिसके तहत काम भी बहुत अच्छा हो रहा है और इससे सामाजिक विषमता को भी दूर किया जा रहा है। जिनके घरों में शौचालय होता था, वे बड़े आदमी माने जाते थे, जिनके पक्के मकान होते थे, वे बड़े आदमी गिने जाते थे, जिनके घरों में गैस का चूल्हा होता था, वे बड़े आदमी गिने जाते थे। इस सामाजिक विषमता को दूर करने में मोदी सरकार ने काफी सफलता पाई है। महोदया, जितने शौचालय बन रहे हैं, उनमें दो प्रकार के शौचालय हैं। एक तो घरो में बन रहे हैं, जो निजी शौचालय होते हैं और दूसरे प्रकार के शौचालय, सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं। लेकिन दोनों में बाधा है, जिसकी वजह से लोग शौचालय बनने के बाद भी शौचालय का उपयोग नहीं करते हैं। उसमें बाधा पानी की है। उसके लिए समुचित व्यवस्था करने के लिए कौन से उपाय सरकार करेगी, क्या आकलन सरकार ने किया है कि पानी के अभाव में शौचालय बनने के बाद भी उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं।

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर : महोदया, माननीय सदस्य की चिंता अपनी जगह ठीक है और सरकार उसके लिए प्रयत्नशील भी है। गांवों में जल की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता हो, यह भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों की प्रतिबद्धता है। मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को यह बताना चाहता हॅूं कि जिस प्रकार से शौचालय बनाने का काम पूरे देश में तेज़ी के साथ चल रहा है, उसी प्रकार से उनका उपयोग होना चाहिए। हम निर्माण के प्रति जितने सजग हैं, उतने ही उपयोग के प्रति सजग हैं। उपयोग हो, इसके लिए लगातार आईईसी के माध्यम से मंत्रालय, राज्य सरकार और जिला प्रशासन यह प्रयास करता रहता है। अभी हम लोगों ने जो स्टडी कराई थी, उसके अनुसार 93 प्रतिशत शौचालय ऐसे हैं, जिनका उपयोग हो रहा है और बाकी जो शेष हैं, उन पर हम काम कर रहे हैं। लेकिन पानी की उपलब्धता हो, यह भी जरूरी बात है। दूसरा, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हॅूं और माननीय सदस्य ने भी यह बात कही है कि बच्चों की मृत्यु दर में कमी आ रही है। गंदगी के कारण जो बीमारियां फैलती थीं, जैसे डायरिया होता था या बाकी जो बीमारियां होती थीं। माननीय सदस्य ने पूछा था, यूनिसेफ का एक हवाला दिया था, उनकी स्टडी के अनुसार एक लाख से अधिक बच्चे मृत्यु में समा जाते हैं। अभी डब्ल्यू.एच.ओ. की एक स्टडी आई है। अभी कुछ दिन में वह स्टडी प्रकट होने वाली है।

          महोदया, मैं आपके माध्यम से देश को बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2017-18 तक इस प्रकार की मृत्यु में लगभग 75 हजार डेथ्स कम हुई हैं। जब वर्ष 2019 में स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य पूरा होगा तब एक लाख 22 हजार डेथ्स कम होंगी, ऐसा अनुमान डब्ल्यू.एच.ओ. की स्टडी में है।

श्री विनायक भाऊराव राऊत  : महोदया, आपने मुझे प्रश्न पूछने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। ओ.डी.एफ. स्कीम यानी शौच मुक्त योजना को हम मराठी में हागणदारी मुक्त योजना कहते हैं। इस योजना के अन्तर्गत पूरे देश में मेरे संसदीय क्षेत्र के सिंधुदुर्ग जिले का प्रथम नामांकन हुआ और प्रधान मंत्री आदरणीय मोदी साहब के हाथों से सिंधुदुर्ग जिले को सम्मान प्रदान किया गया। इससे समस्या यह हुई कि इस जिले के शौच मुक्त घोषित हो जाने के बाद, शौचालय बनाने के लिए जो निधि दी जाती है, जो आर्थिक सहायता दी जाती है, वह बंद हो जाती है। हमारे जिले में हर वर्ष अनुमति लेकर कम से कम 800 से 1,000 तक नये घर बनते हैं। भाइयों का आपस में बंटवारा होता है तो उनके नये घर बनते हैं। जहाँ ऐसे नये घर बनते हैं, अगर वहाँ शौचालय बनाना हो तो उसे आर्थिक सहायता नहीं मिलती है।

          महोदया, मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से विनती करता हूँ और प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि शौच मुक्त जिला जाहिर होने के बावजूद भी, अगर उस जिले में अनुमति लेकर घर बनाए जाते हैं तो उन्हें इस योजना के अन्तर्गत आर्थिक सहायता मिलने का क्या आप कोई प्रबन्ध करेंगे?

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर : महोदया, माननीय सदस्य का प्रश्न उनके क्षेत्र के हिसाब से है, लेकिन मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को यह अवगत कराना चाहता हूँ कि स्वच्छता व्यवहार और स्वभाव परिवर्तन का विषय है। स्वच्छता के लिए जो राशि दी जाती है, वह एक तौर से प्रोत्साहन राशि है। इस प्रोत्साहन की हमेशा एक सीमा रहती है। आदर्श स्थिति तो यह होनी चाहिए कि एक बार समुदाय जागृत हो गया और उसने पूरे जिले को ओ.डी.एफ. किया तो जागृति इतनी आ जानी चाहिए कि जब नया मकान बन रहा है तो उसमें शौचालय खुद-ब-खुद बनाने का प्रयत्न लोगों को करना चाहिए।

DR. RATNA DE (NAG) : Thank you Madam. It is pertinent to point out here that out of 20 districts in our West Bengal, 14 districts have been declared ODF districts, and out of 38,000 villages, 33,525 villages have been declared Open Defecation Free villages with the active initiatives of our Chief Minister.  Madam, through you I would like to ask the hon. Minister, whether the Ministry has tried to find out the impact of the programme on the health of people ever since the programme came into being? Have the toilets built been disabled-friendly? If yes, what are the details there of.

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर : महोदया, मैं माननीय सदस्या को बताना चाहता हूँ कि जब कोई गाँव, जिला या राज्य खुले में शौच से मुक्त होता है तो उसकी अपनी एक प्रक्रिया है। पहले गाँव अपने आपको घोषित करता है, उसके बाद उसकी जाँच की जाती है और उसके बाद वह ओ.डी.एफ. माना जाता है। इसी प्रक्रिया को जिला और राज्य भी करते हैं। इसके साथ ही साथ पेयजल स्वच्छता मंत्रालय अपनी ओर से थर्ड पार्टी स्टडी भी कराता है और उसकी पूरी तरह जाँच कराता है।

श्री अधीर रंजन चौधरी : महोदया, आपको और शायद हमारे सारे साथियों को इसकी जानकारी होगी कि हिन्दुस्तान में फ्लैगशिप प्रोग्राम की निगरानी रखने के लिए, देखभाल करने के लिए केन्द्र की सरकार ने पहले विजिलेंस एंड मानिटरिंग कमेटी बनाई थी। वर्ष 2016 से इसके नए अवतार के रूप में इसका नाम दिशा हो चुका है।

अपने डिस्ट्रिक्ट मुर्शिदाबाद से सबसे सीनियर एमपी होने के नाते मैं वर्ष 2012 से वहां की ‘दिशा’ कमेटी का चेयरमैन हूँ, लेकिन आज तक वहाँ मीटिंग नहीं बुलायी गयी है।…(व्यवधान)  मैं सभी साथियों से आग्रह करता हूँ।…(व्यवधान)  वहाँ जब एक डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने मीटिंग बुलाने की हिम्मत दिखायी, तो दूसरे दिन ही उसका तबादला कर दिया गया।…(व्यवधान) हम लोग पार्लियामेंट में आकर आम लोगों की आवाज़ उठाते हैं, लेकिन हमारे जैसे एमपी खुद उससे वंचित हो रहे हैं।…(व्यवधान)  बंगाल में जो सरकार चल रही है, वह तानाशाही की सरकार चल रही है, इसलिए बंगाल में कोई लोकतंत्र नहीं है।…(व्यवधान)  वहाँ एक एमपी की हैसियत क्या है, …(व्यवधान)  ‘दिशा’ कमेटी के चेयरमैन होने के नाते उसकी देखभाल करने का जो अधिकार है, उसे वह मौका नहीं दिया जाता है।…(व्यवधान)

          माननीय मंत्री जी, आपने जो चिट्ठी भेजी है, ‘दिशा’ कमेटी के लिए एक डेटाबेस सप्ताह मनाने की बात कही गई थी, …(व्यवधान)  लेकिन हम वहाँ कैसे सप्ताह मना सकते हैं? …(व्यवधान)  आप चेयरमैन को चिट्ठी लिखते हैं, लेकिन पिछले छह सालों से चेयरमैन कोई भी  मीटिंग नहीं बुला सकते हैं, …(व्यवधान)  मैं आप की चिट्ठी का कैसे सम्मान कर सकता हूँ? …(व्यवधान)

          मेरा एक दूसरा सवाल है। मंत्री जी, मेरा सवाल यह है कि आप जितनी सफलता की बात कर रहे हैं, आप जितनी कामयाबी की बात कर रहे हैं, पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी कह रही है कि आपकी कामायाबी का जो ब्यौरा है, वह सही नहीं है। पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी यह भी कह रही है कि स्वच्छता मिशन लेथार्जिक है। वह यह भी कह रही है कि 15 हजार करोड़ रुपये ऐसे ही पड़े हुए हैं।…(व्यवधान) मैं कहना चाहता हूँ कि एक सवाल तथा एक अधिकार की बात है, ये दो मुद्दे हैं।…(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदया, अधीर रंजन जी की पीड़ा अपनी जगह सही है और वह मुझसे भी एक बार मिले थे। मैंने भी कोशिश की थी कि इस पीड़ा को कम किया जाए, लेकिन मैं आपके माध्यम से पूरे सदन को बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2014 के बाद जब ‘दिशा’ कमेटी का  गठन किया गया, तो उसमें अनेक और विभाग सम्मिलित किए गए और यह कोशिश की गई कि हमारे सभी सांसद केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं की अपने-अपने क्षेत्र में ठीक प्रकार से निगरानी तथा मॉनिटरिंग करें।

          माननीय अध्यक्ष महोदया, मैंने सभी माननीय मुख्य मंत्रीगण को भी पत्र लिखा। हमारे सेक्रेटरी ने सभी चीफ सेक्रेटरी को बार-आग्रह किया। मैं सभी  माननीय सदस्यों को भी हमेशा पत्र लिखता रहता हूँ कि इस काम को और त्वरित गति से बढ़ाया जाए। पिछले दिनों 25 से लेकर 29 तक हम लोगों ने ‘दिशा’ कमेटी के लिए एक सप्ताह आयोजित किया, उसकी चिट्ठी भी सभी सांसद गण को भेजी गई। एक दिन 28 तारीख को इसी विषय को लेकर पूरे राज्यों के सचिवों को बुलाया और उनके साथ इसका डिसकशन किया।  उस दिन यानी 28 तारीख को जितनी बैठकें हो रही थी, सभी जिलों में माननीय सांसदों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करके बात की। लेकिन उसके बावजूद भी कहीं-कहीं अभी ऐसी स्थिति आ रही है, लेकिन मैं अधीर रंजन जी की बात से पूरी तरह  सहमत हूँ। मैं माननीय मुख्य मंत्री जी से भी आग्रह करूँगा कि उनके क्षेत्र में इस कमेटी की बैठक कलेक्टर आयोजित करें और उनकी समस्या का समाधान करें।

          दूसरा, जो माननीय सदस्य ने कहा है कि स्टैंडिंग कमेटी कहती है कि सारी उपलब्धियाँ ठीक नहीं हैं। मैं उनको यह कहना चाहता हूँ कि राजनीतिक क्षेत्र में कोई भी बात सभा में कही जा सकती है और आमतौर पर कही जाती रही है, लेकिन जब हम सदन में बैठते हैं तो सदन में जो आँकड़ा होता है, वह राज्य, जिला प्रशासन तथा केन्द्र द्वारा एक तरह से प्रमाणित आँकड़ा होता है। उसको झुठलाने की कोशिश राजनीति के स्तर पर नहीं होनी चाहिए। अगर स्वच्छता जैसे कार्यक्रम को संचालित करने में आपको लगता है कि कहीं रिक्तता तथा अभाव है, कहीं काम करने की कमज़ोरी है, तो स्टैंडिंग कमेटी या माननीय सदस्य हमको अवगत कराएंगे।हम उस गैप को भरने की पूरी ईमानदारी के साथ कोशिश करेंगे।

          दूसरा, मैं आपके माध्यम से अधीर रंजन जी को कहना चाहता हूं कि मैं उनकी पीड़ा का निराकरण करने की कोशिश करूंगा ही, लेकिन उनकी पीड़ा का निराकरण करने में हमारे माननीय खड़गे जी और सौगत राय जी, ये दोनों ज्यादा मददगार हो सकते हैं। इनके सामने भी वह अपनी गुहार करें, तो ठीक है। …( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : श्री शरद त्रिपाठी । शार्ट क्‍वैश्‍चन, आंसर खूब अच्छे हो गए।

श्री शरद त्रिपाठी  : अध्यक्ष महोदया, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे अनुपूरक प्रश्न पूछने का अवसर दिया। मैं आपके माध्यम से सबसे पहले अपने माननीय मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी को बधाई दूंगा कि भारत में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज, जो अक्टूबर, 2014 में 38 परसेंट था, वह जुलाई, 2018 में 88 प्रतिशत बढ़कर आज देश के स्वच्छता अभियान में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

          एक माननीय सदस्य के द्वारा यह विषय आया कि बहुत सारे शौचालय पानी के अभाव में संचालित नहीं हो पा रहे हैं। स्वच्छता अभियान का सबसे बड़ा असर पड़ा है कि बच्चों की मृत्युदर कम हुई है और यूनीसेफ ने 2015 के अपने आंकड़े में भी इसको दर्शाया है कि बच्चे जो निमोनिया और दस्त से मरते थे, स्वच्छता अभियान से उसमें बहुत तेजी से दिन-प्रतिदिन गिरावट आ रही है। मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से यह जानना चाहूंगा कि क्या प्रदेश सरकारों से कोई एक समन्वय बना करके, जैसे हमारे ही प्रदेश में माननीय विधायक लोगों को यह अवसर है कि वह अपने आधार पर बहुत सारी जगहों पर इंडिया मार्का हैंडपंप लगवा सकते हैं, तो क्या माननीय मंत्री जी हम सांसदों को भी प्रदेश सरकारों से समन्वय बना करके कोई ऐसा अधिकार देंगे कि हम लोग भी इंडिया मार्का हैंडपंप लगवा सकें, जिससे शौचालय भी निर्बाध गति से चले और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की समस्या का भी निराकरण हो?

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदया, पेयजल राज्य का विषय है। राष्ट्रीय पेयजल ग्रामीण योजना के अंतर्गत केन्द्र सरकार राज्यों को सहायता करती है और राज्य सरकारें कोशिश करती हैं कि केन्द्र की जो योजना है, उसका भी लाभ लें और साथ ही वे अपने बजट का पैसा भी पेयजल के लिए लगाती हैं। मैं समझता हूं कि जो शरद जी ने कहा, वह समस्या है। राज्य सरकार के साथ इस मामले में हम मुख्य मंत्री जी से बात भी करेंगे कि इस दिशा में और त्वरित गति से कार्रवाई हो।

                                                                                               

(Q. 123) श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा : स्पीकर मैडम, पहले तो मैं अपनी सरकार को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने आजादी के बाद पहली बार उन क्षेत्रों को, जो वंचित पड़े थे, गांव और गरीब को प्राथमिकता थी। दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना गांवों के बिजलीकरण के लिए आई। पंजाब में 40 वर्ष पहले ही बिजलीकरण हो गया था। जो यह नई योजना है, इसमें रीस्ट्रक्चरिंग के लिए, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, पंजाब को पैसा दिया गया। मैडम, यह कहा जाता है कि जो परिवार में अच्छा बच्चा होता है, उसे मां-बाप ज्यादा इंसेंटिव देते हैं, मगर पंजाब के केस में ऐसा नहीं हुआ। 700 करोड़ रुपये की योजना हमने पंजाब की ओर से भेजी थी, मगर 250 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। माननीय मंत्री जी ने मुझे पंजाब में योजनाओं की यह लिस्ट दी है। उसमें एचीवमेंट किसी एक की भी नहीं, केवल 11 केवी लाइन की दी है, बाकी किसी की एचीवमेंट की कोई फिगर नहीं दी। इसका क्या कारण है? मैं यह जानना चाहता हूं। 40 वर्ष पहले पंजाब में बिजलीकरण का जो काम हुआ, उसको देखते हुए देश की सेंटर किटी में इसका ज्यादा हिस्सा होना चाहिए। जितने का प्लान भेजा था, कम से कम वह पैसे तो देने चाहिए थे। यह क्या बात है?

माननीय अध्यक्ष : आपका प्रश्न हो गया है। शार्ट में पूछिए।

श्री आर. के. सिंह : अध्यक्ष महोदया, हमने पंजाब को चार सौ करोड़ रुपये की योजना दी हैं । 251.99 लाख रुपये की योजना हमने नई योजना के अंतर्गत स्वीकृत की है।

इसके अतिरिक्त पुरानी योजना में 149 करोड़ रुपये अनस्पेंट राशि थी, हमने उसका भी उपयोग करने की अनुमति दी है। यह सही है कि इन योजनओं के क्रियान्वयन में प्रगति नहीं हुई है। इसका कारण यह है कि पंजाब सरकार द्वारा कार्य का ठेका, जो वर्क एलॉट किया गया, वह बहुत लेट किया गया। टेंडर एलॉट होते-होते दिसम्बर, 2017 हो गया, इसी कारण प्रगति बहुत कम है। जितनी प्रगति हुई है हमने उतना ही लिखा है। जहां प्रगति नहीं दिखायी गई है, वहां प्रगति नहीं हुई है, प्रगति बहुत धीमी है। पंजाब सरकार ने और राशि की मांग नहीं की है। अगर पंजाब सरकार किसी काम के लिए और राशि की मांग करेगी तो हम उस  पर विचार करेंगे।

श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा : अध्यक्ष महोदया, माननीय मंत्री जी ने अस्पेंट का जो फिगर दिया है, वह गलत है। 149 करोड़ करोड़ रुपये है जबकि इसमें 250 करोड़ रुपये हैं।

श्री आर. के. सिंह : महोदया,  250 करोड़ रुपये नई योजना के लिए स्वीकृत किये थे और 149 करोड़ रुपये अनस्पेंट है, उसको भी स्वीकृत कर दिया, कुल मिला कर 400 करोड़ रुपये है।

श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा : अध्यक्ष महोदया, मंत्री जी ने कहा कि पंजाब ने और राशि नहीं मांगी। मुझे जानकारी है और मुझे अच्छी तरह मालूम है कि 700 करोड़ रुपये का प्रोपोजल भेजी थी, जिसमें 250 करोड़ रुपये मिले। मेरा एरिया किनारे का क्षेत्र है। पंजाब का बहुत सारा एरिया हिल एरिया से जुड़ा है। पहले किनारे के क्षेत्र में 24 घंटे लाइट मिलती थी। नई सरकार आने के बाद वहां शॉर्टेज आने लगी। सबसे पहले किनारे के एरिया को कट लगाते है। गांवों की लाइट से अलग करने के लिए एक अलग से प्रपोजल भेजी है, उसके लिए पैसे की जरूरत है। काम स्लो हो रहा है, माननीय मंत्री जी ने भी इसे माना है। इस काम को कैसे तेज किया जाए, जिससे लोगों की मुश्किलें दूर हो पाएं।

श्री आर. के. सिंह : अध्यक्ष महोदया, वाकई कार्य धीमी गति से हो रहा है। हम लोग राज्यों सरकारों के साथ प्रत्येक दो महीने में चर्चा करते हैं कि कैसे काम की गति तेज हो। मैं पुन: पंजाब सरकार से वार्ता करूंगा कि वे काम की गति में तेजी लाएं क्योंकि हम काम राज्य सरकारों के माध्यम से ही कराते हैं।

          हमने माननीय सदस्य के क्षेत्र के लिए भी राशि स्वीकृत की है। चार सौ करोड़ रुपये की राशि पंजाब सरकार से विचार विमर्श के बाद ही स्वीकृत हुई। जिन योजनाओं की उनको जरूरत थी, उसी के लिए स्वीकृत किया गया । मैं पुन: दोहराता हूं कि पंजाब सरकार ने उसके बाद और राशि की मांग नहीं की है। अगर वे और राशि की मांग करेंगे तो हम लोग जरूर विचार करेंगे। काम की गति तेज हो, इसके लिए राज्य सरकार से पुन: बात करेंगे। काम की गति धीमी है।

SHRI KALIKESH N. SINGH DEO : Madam, the question I wish to ask applies as much to Punjab as it does to the entire nation. The definition of electrification of a village is, 10 per cent of the households in the village being electrified, as it stands today. When you say that the entire nation has been electrified, every village has been electrified, just electrifying 10 per cent of the entire nation does not meet the sufficient criteria. The World Bank still assesses that almost 20 crore people in the country still live without access to electricity, and almost another 30-40 crore live with access to electricity which is insufficient or intermittent. There is a lot to be done. My question to you is this. Does the Government have any plan or policy which will address these deficiencies in the long-term? Thank you.

श्री आर. के. सिंह  : अध्यक्ष महोदया, जहां तक ग्रामीण विद्युतीकरण की बात है, माननीय सदस्य ने जो डेफिनेशन दिया है, वह सही है कि गांव में दस प्रतिशत और पब्लिक बिल्डिंग इलेक्ट्रिफाइड हो जाती है तो उसे विद्युतीकृत माना जाता है। जितने गांवों की सूची राज्य सरकारों ने भेजी थी, उन सभी के विद्युतीकरण के लिए हमने राशि दी। राज्य सरकारों ने हमें प्रतिवेदित किया कि वे सब गांव विद्युतीकृत हो गए। हम इतने पर नहीं रुके, हमारा लक्ष्य है कि हर घर तक रोशनी पहुंचाएं। 

  माननीय अध्यक्ष महोदया, जहां तक ग्रामीण विद्युतीकरण की बात है, माननीय सदस्य ने जो डेफिनेशन दी है, वह सही है कि अगर गांव में दस प्रतिशत घर कवर हो जाते हैं, पब्लिक बिल्डिंग्स कनैक्ट हो जाती हैं तो गांव को विद्युतीकृत माना जाता है। राज्य सरकारों ने हमें जितने गांवों की सूची भेजी थी, हमने उन सभी के विद्युतीकरण के लिए राशि दी है और राज्य सरकारों ने हमें प्रतिवेदित किया कि सब गांव विद्युतीकृत हो गए। हम इतने पर ही नहीं रुके हैं, हमारा लक्ष्य है कि हर एक घर तक रोशनी पहुंचाएं। इसके लिए सौभाग्य योजना स्वीकृत की गई है। हमने इसे 10-11 अक्टूबर को आरंभ किया था। अभी तक हम 92 लाख घरों को विद्युतीकृत कर चुके हैं। 31 मार्च, 2019 तक हम सभी घरों को विद्युतीकृत कर देंगे।

राज्य सरकारों ने हमें सूचना भेजी कि तीन करोड़ 80 लाख घर विद्युतीकृत नहीं हुए हैं। हम 31 मार्च तक इन्हें विद्युतीकृत करने का लक्ष्य रखते हैं। हम प्रयास करेंगे कि इन्कलूडिड ओडिशा दिसम्बर तक इसे पूरा कर लें। बाकी जितने भी घर बचे हैं, उन्हें दिसम्बर तक पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। हम 92 लाख घर कर चुके हैं और इनको भी कर देंगे।

श्रीमती रंजीत रंजन :  माननीय अध्यक्ष जी, यह बिजली से जुड़ा हुआ मामला है। मैं आपसे बिहार के बारे में कहना चाहती हूं, यहां मीटर रीडिंग में बहुत ज्यादा खामियां हैं, एक तो इसे प्राइवेटाइज कर दिया गया है। जिसका 200 रुपए का बिल होना चाहिए उसका 2000 रुपए आता है, जिसका 500 रुपए होना चाहिए उसका 5000 रुपए आता है। इसका संशोधन करने के ‍बजाय उन लोगों पर केस कर दिया जाता है, एफआईआर कर दी जाती है। वे जनप्रतिनिधि के पास भागते फिरते हैं। उनको फाइन भी देना पड़ता है। सरकार ने इसके लिए क्या प्रावधान किया है?

          बिहार में कितने प्रतिशत बिजली का काम बाकी है? जहां ऑलरेडी बिजली थी, तारों के जीर्णोद्धार के लिए ठेके दिए गए थे, वहां भी बहुत खामियां हैं। मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से पूछना चाहती हूं कि इसका कितने प्रतिशत काम बाकी है?

श्री आर. के. सिंह: माननीय अध्यक्ष जी, हमने जो योजना स्वीकृत की है, पहला बिंदु मीटरिंग के बारे में है। दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के अंतर्गत हम मीटर खरीदने के लिए भी राज्य सरकारों को राशि दे रहे हैं। माननीय सदस्या ने जो कहा है, बिल्कुल सही है कि मीटर रीडिंग में खामियां हैं। मीटर रीडिंग समय पर नहीं होती है। हमारी राज्य सरकारों से बैठकें होती हैं, उसमें यह चर्चा होती है। कहीं-कहीं तो बिल तीन-छ: महीने बाद जाते हैं। हमने इसके लिए राज्य सरकारों से कहा है कि इसके लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लें और इसके लिए भी राशि दे रहे हैं।

          हमने राज्य सरकारों से कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स की ओर जाएं, इसके लिए भी हम राशि दे रहे हैं। इसके अंतर्गत मीटर रीडिंग की जरूरत नहीं होगी। कभी  मीटर रीडर रीडिंग करने जाता है और कभी नहीं जाता है। इन मीटर्स की सहायता से कन्ज्यूमर्स देख सकेंगे कि जो राशि क्रेडिट की गई है, अगर वह खत्म हो रही है तो उसे पुन: राशि मोबाइल से रिचार्ज कर सकेंगे। इससे गरीबों को भी लाभ होगा क्योंकि अगर गरीब के पास 100 रुपए हैं तो वह 100 रुपए का रिचार्ज करेगा और अगर 50 रुपए हैं तो 50 रुपए का रिचार्ज करेगा। अगर मीटर रीडर तीन महीने तक नहीं आया, अगर आया तो अनाप-शनाप लिख दिया, तो क्या समस्या नहीं होगी? यह समस्या है, यह बिहार में ही नहीं अन्य जगहों पर भी है। इससे यह समस्या समाप्त हो जाएगी। हम राज्य सरकारों से इस बारे में बात कर रहे हैं।

          जहां तक गुणवत्ता का सवाल उठा है, इसके बारे में हम राज्य सरकारों से चर्चा करते रहते हैं। हमने प्रोजैक्ट मैनेजमेंट एजेंसी की बहाली के लिए राज्य सरकारों को राशि दी है। इसका काम है कि हर काम की चैकिंग करे। इसके अलावा एक अलग से ऑडिट सिस्टम रखा है। हमारी टीम्स भी जाती हैं, रिपोर्ट भेजती हैं और इसे हम राज्य सरकारों को भेजते हैं ‍कि यहां समुचित ढंग से काम नहीं हुआ है, इसे आप कराएं।

श्री उदय प्रताप सिंह :  माननीय अध्यक्ष जी, मैं सबसे पहले मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं कि ऊर्जा विभाग लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है। विद्युत विभाग में निर्माण कार्यों पर क्वालिटी और गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लगता रहता है, जबकि भारत सरकार राज्यों को राशि देती है। ग्रामीण विकास विभाग ने एक सैंट्रल मॉनिटर्स बनाए हैं, उनका प्रयोग बहुत सफल रहा है।

          मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि क्या विद्युत विभाग ग्रामीण विकास विभाग की तरह सैंट्रल मॉनिटर्स एपाइंट करेगी जो बिजली विभाग में होने वाले काम और भारत सरकार ऐडेड स्कीम्स की सीधे यहां से मानिटरिंग कर सके?

श्री आर. के. सिंह: मैडम, हम लोगों ने यह व्यवस्था की है और एक क्वालिटी एश्योरेंस मैकेनिज्म आरईसी में रखा है। उसके अंतर्गत इंसपेक्टर्स यहां से जाकर इंसपेक्शन करते हैं और जहां-जहां खामियां होती हैं, उनको राज्य सरकार के ध्यान में लाते हैं कि इन खामियों को दुरुस्त करने की आवश्यकता है। कहां पर कितनी खामियां मिलीं और उनमें से कितनी खामियां दुरुस्त हुई हैं, इसके बारे में प्रतिवेदन मेरे पास है। इसके अलावा हमने मंत्रालय में आठ टीम्स बनाई हैं, जहां कोई विशेष शिकायत आती है तो हम मंत्रालय से भी टीम भेजते हैं और उसकी जांच कराते हैं। अगर कहीं पर गड़बड़ी पाई जाती है तो उसे राज्य सरकारों के ध्यान में लाते हैं। राज्य सरकारों की अपनी टीम्स अलग हैं।…(व्यवधान)

 

(Q. 124) श्री संजय धोत्रे : अध्यक्ष महोदया, भारतमाला परियोजना एक बहुत महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें सभी जिलों के बीच माल ढुलाई हेतु इनफॉर्मेटिव इनपुट एवं हमारे पोर्ट्स की कनेक्टिविटी के लिए सभी जिलों में से रास्ते बन रहे हैं, उनके कारण हमारा व्यापार, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बढ़ने वाला है। मुझे ऐसा लगता है कि पहली बार इस देश में करीब 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपये की यह योजना बनी है, यह भी एक रिकॉर्ड है। इसके लिए मैं माननीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी का अभिनन्दन करता हूं, बधाई देता हूं और मुझे ऐसा लगता है कि सारा सदन मेरी भावना से सहमत होगा।

          अध्यक्ष महोदया, महाराष्ट्र में पोर्ट्स कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स पार्क को बढ़ावा देने हेतु 28 में से तीन रिंग रोड्स और 44 में से 12 इकोनोमिक कॉरीडोर्स महाराष्ट्र से गुजर रहे हैं। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी पूछना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में अभी तक कितना काम हुआ है और बाकी काम कब तक होगा?

श्री नितिन गडकरी: अध्यक्षमहोदया, स्वाधीनताके बाद देशके इतिहास मेंभारतमाला केरूप में यहजो प्रोजेक्टमंजूर हुआ है, इसमें 84 हजार किलोमीटरनेशनल हाइवेज का हम विकास कर रहे हैं। इसमें लगभग साढ़े सात लाख करोड़ रुपये की इनवेस्टमेंट होने की संभावना है। इसमें 550 जिलों को फोर-वे नेशनल हाइवेज से जोड़ने की बात है,जिसमें नॉर्थ-ईस्ट को प्रायरिटी दी गई है। इसके कारण दस करोड़ मैन डेज इम्प्लायमेंट जेनरेट होगा और कंस्ट्रक्शन फेज में 22 मिलियन परमानेंट जॉब्स क्रिएट होंगी। हम इस प्रोजेक्ट में दो फेजेज में काम कर रहे हैं। मैं बताना चाहूंगा कि इसे सेलेक्ट करते समय, हमने गुजरात के भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट की मदद लेकर बॉर्डर रेट, ट्रैफिक डेन्सिटी, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट, इकोनोमिक कॉरीडोर, बैकवर्ड एरिया, ट्राइबल एरिया आदि सभी चीजों का अध्ययन किया है। ऐसा करते समय, फर्स्ट फेज में 24,800 किलोमीटर लेंथ को एड्रेस करने का हमने निर्णय लिया है। इसकी कॉस्ट 3 लाख 85 हजार करोड़ रुपये है और एनएचडीपी का जो 10 हजार किलोमीटर बैलेंस था, उसे भी जोड़कर 34,800 किलोमीटर फर्स्ट फेज में लिया गया है। इसकी कीमत 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपये है। मैं सदन को इस बात का विश्वास दिलाना चाहता हूं कि इस पर हम लगातार काफी गति से काम कर रहे हैं। इसमें अभी तक करीब 3500 किलोमीटर और एक लाख 44 हजार करोड़ रुपये के कामों का शुभारम्भ हुआ है।  इस साल मार्च तक हम करीब 5 लाख करोड़ रुपये के काम और करीब 20 हजार किलोमीटर तक के काम की शुरुआत करेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। एक लाख 44 हजार करोड़ रुपये के काम आलरेडी शुरू हो चुके हैं और बाकी कामों की भी शुरुआत होगी।

          जहां तक महाराष्ट्र का सवाल है, महाराष्ट्रके बारे मेंअलग से जानकारीअभी मेरे पासनहीं है, लेकिनमहाराष्ट्र में980 किलोमीटरके काम की शुरुआत हुई है। सबसे महत्वपूर्ण चीज, जिसे इस सदन में बताते हुए मुझे खुशी हो रही है, जैसे दिल्ली से मुंबई कॉरीडोर है,हम नया ग्रीन हाइवे बना रहे हैं, वह नया ग्रीन हाइवे बैकवर्ड एरिया से जा रहा है। यह दिल्ली से शुरू होकर जयपुर रिंग रोड के पास जाएगा, जयपुर रिंग रोड से अलवर जाएगा।

यह अलवर से झबुआ, रतलाम से हो कर बड़ोदरा जाएगा। राजस्थान, हरियाण, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के बैकवर्ड एरिया,  इसके कारण हम दिल्ली से मुंबई एक्सप्रेस हाईवे बनाते तो हमारी लैंड एक्विजिशन कॉस्ट प्रति हेक्टेयर साढ़े सात लाख रुपये होती, पर बैकवर्ड एरिया को सेलेक्ट करने कारण हमारी कॉस्ट, हम दिल्ली-मुंबई के बीच जो हाईवे बना रहे हैं, इसमें 16 हजार करोड़ रुपये लैंड एक्विजिशन में बच गई है। मध्य प्रदेश का बैकवर्ड एरिया झबुआ, रतलाम, राजस्थान में अलवर और हरियाणा के बैकवर्ड एरिया से यह गुजरेगा। …(व्यवधान)

          मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है ‍कि दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के एक लाख करोड़ रुपये में से 44 हजार करोड़ रुपए बड़ोदरा से मुंबई के लिए है औरि 44 हजार करोड़ रुपये के कार्य का भी शुभारंभ हो गया है। अब उसका भूमि पूजन करना है। हम कोशिश करेंगे कि यह इस साल दिसम्बर तक हो जाए। हम मुंबई से कोचिन जाने के लिए नया रोड तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, इससे दो सौ किलोमीटर दूरी बचेगी। ‘भारतमाला’ में यह जोड़ा गया है कि कहां से कितना ट्रैफिक जाता है, कैसे दूरी कम होती है, इसके लिए क्या होगा? …(व्यवधान) हम उसको कन्याकुमारी तक जोड़ेंगे।

          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि ‘भारतमाला’ में काफी प्रोजैक्ट्स लिए गए है। मैं सबसे अच्छी बात बैकवर्ड एरिया, राजस्थान के लिए कहूंगा कि 17 जगहों पर एयर स्ट्रिप बनाई जा रही है – रोड कम एयर स्ट्रिप। जहां हवाई जहाज भी उतर सकता है। जहां तीन सौ किलोमीटर दूरी तक हवाई अड्डा नहीं है, वहां हम रोड का ट्रैफिक बंद करके, जैसे रेलवे का फाटक होता है, हवाई जहाज उतरेगा और चला जाएगा तो रोड ट्रैफिक शुरू हो जाएगा। जब मैं यह बात कहता हूं तो लोगों को लगता है कि यह एक सपना है, विश्वास रखना कठिन है। मैं इस सदन में जिम्मेदारी के साथ बता रहा हूं कि मैं जो बात बता रहा हूं, वह एक-एक बात हो कर रहेगी, निश्चित रूप से होगी और  निश्चित रूप से उससे देश की तस्वीर बदलेगी।

श्री संजय धोत्रे : अध्यक्ष महोदया, नेशनल हाईवे, भारतमाला प्रोजैक्ट के जो काम होते हैं, इसमें बहुत सारा मैटेरियल लगता है। उसमें सैंड, गिट्टी एवं अन्य मैटे‍रियल लगता है। नितिन जी की अभिनव कल्पना से महाराष्ट्र में जलयुक्त शिवार का काम चल रहा है, उसमें बड़ी अच्छी तरह से उसका इस्तेमाल किया है, उसके कारण वाटर कंजरवेशन और वाटर स्टोरेज भी बढ़ गया है। यह मैटेरियल दूर-दराज से आता है, इसके कारण हमारे स्टेट हाईवे, जिले और गांव की सड़कों पर जो हेवी ड्यूटी ट्रक्स वगैरह चलते हैं, उससे रोड खराब होते हैं, उसका काम बाद में नहीं होता है।

          मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि पांच लाख, 35 हजार करोड़ रुपये का प्रोजैक्ट है तो थोड़ा उसके लिए प्रोविजन हो जाए तो हमारे रोड्स ठीक हो जाएंगे।

श्री नितिन गडकरी :  अध्यक्ष महोदया, सम्मानीय सदस्य जो कह रहे हैं, प्रोजैक्ट में वह प्रोविजन नहीं है। स्टेट के रोड वैसे भी खराब हैं। वे एनएचआई  के कारण थोड़ी-बहुत खराब हो सकते हैं, लेकिन वह केवल हमारे कारण खराब हुई है, ऐसी बात सच नहीं है। स्टेट का काम विलेज और डिस्ट्रिक्ट रोड्स को ठीक करना। यदि एक-दो जगह हमारे काम के कारण खराबी हुई है, अगर ऐसा वे मेरे ध्यान में लाएंगे तो सरकार रोड को रिपेयर करने के बारे में पॉजिटिव्ली सोचेगी, पर बेसिकली हमारी जिम्मेदारी नहीं है।

SHRI RAHUL SHEWALE : The Mumbai-Pune Expressway was made fully operational in 2002. But no one thought that it would face traffic congestion in just over a decade. Similar problems are being faced by the other existing national highways across the country.

          So, I would like to know from the hon. Minister as to what steps have been taken by his Ministry under his ambitious Bharat Mala project to address the issue of futuristic growth of traffic and congestion and thus to make highways congestion free for longer periods.

श्री नितिन गडकरी : महोदया, माननीय सदस्य ने सही बात कही है कि ट्रैफिक डेनसिटी बढ़ रही है। इस वजह से दो लेन को चार लेन में, चार लेन को छह लेन, छह लेन को आठ लेन और आठ लेन को एक्सप्रेस हाइवे में बदलने की जरूरत है। सरकार की अप्रोच थी कि कोई नेशनल हाइवे जाहिर नहीं करना है। इसके लिए हमने 96 हजार किलोमीटर सड़क की लेंथ को 2 लाख किलोमीटर ले जाने का तय किया। मुझे समझ नहीं आता कि हमारे ब्यूरोक्रेट्रिक सिस्टम में इसके प्रति बड़ा रेसिस्टेंस है, जबकि पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं, डेढ़ लाख लोग मर जाते हैं। आटोमोबाइल की 22 परसेंट की ग्रोथ है और एनएच बढ़ाने के लिए बड़ा रिजर्वेशन है। जो-जो माननीय सांसद मुझसे मिले हैं और उन्होंने जो-जो बात कही, मैंने उनके एरिया की ट्रैफिक डेनसिटी को स्टडी करके एनएच घोषित किया है और अभी तक 1 लाख 70 हजार किलोमीटर सड़क बना चुके हैं, जिसमें 50 हजार किलोमीटर प्रिंसिपल हाइवे है और बाकी हमने एनएच कन्‍वर्ट किया है।

          महोदया, एक बात यह महत्वपूर्ण है कि जहां 10 हजार पीसीयूज़ का ट्रैफिक है, वहां चार लेन कर रहे हैं। जहां पीसीयूज़ ट्रैफिक 20 हजार के ऊपर है, वहां छह लेन कर रहे हैं। देश में 12 एक्सप्रेस हाइवे बना रहे हैं। एक्सप्रेस हाइवे एक्सेस कंट्रोल, जैसे दिल्ली-मेरठ 14 लेन का हाइवे बनाया है। संसद की कार्यवाही को कवर करने वाले जो पत्रकार वहां रहते हैं, मुझे कहते हैं कि पहले दो घंटे का समय आने के लिए लगता था, अब वहां 20 मिनट का समय लगता है। अब दिल्ली से मेरठ कुल 40 मिनट का समय अगली फरवरी तक लगेगा। हम 30 हजार किलोमीटर की रोड को 4 लेन में कन्‍वर्ट कर रहे हैं और कुछ जगह 6 लेन कर रहे हैं। हमारी प्राब्लम यही है कि इसके लिए मैटीरियल लगता है, एनवायर्नमेंट मिनिस्ट्री द्वारा फारेस्ट की क्लियरेंस चाहिए होती है, बैंकों से फाइनेंस चाहिए होता है। इस वजह से इसमें दिक्कत आती है और अगर यह दिक्कत दूर हुई तो इस काम में तेजी आ सकती है और जैसे-जैसे ट्रैफिक डेनसिटी बढ़ेगी, हम लेंथ बढ़ाएंगे। जैसा एनएच का नेटवर्क है, वैसे मेट्रो सिटी को एक्सप्रेस हाइवे से बैंगलूरू से चेन्नई, बैंगलूरू से हैदराबाद, बैंगलूरू से विजयवाड़ा, विजयवाड़ा से  चेन्नई,  नागपुर  से  हैदराबाद,  मुम्बई  से  दिल्ली,  दिल्ली  से  कटरा  आदि।…( व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी : आपने बंगाल के लिए क्या किया है?

श्री नितिन गडकरी : बंगाल में भी होगा, लेकिन वहां आप लैंड एक्विजिशन करने में मदद कीजिए।

          महोदया, मुझे  लगता  है  कि  इस  काम  को  करने  में  और  गति आएगी। …( व्यवधान)

श्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया : अध्यक्ष महोदया, क्या हमें बोलने का मौका नहीं मिलेगा? हमारा बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। …( व्यवधान)

माननीय  अध्यक्ष : आपकी पार्टी के सदस्य का नाम लिया है। हर विषय में आप नेता लोग आगे मत आइए।

…( व्यवधान)

SHRI VINCENT H. PALA : Thank you, Madam. … (Interruptions) The Minister has said that 2,000 kms. road is being considered along the international border. … (Interruptions)

          In my State of Meghalaya, we have 480 kms. of international border. … (Interruptions) After construction of fencing over there, the people in the border areas have been sandwiched as they cannot go to Bangladesh, and at the same time they cannot go to Meghalaya also.  … (Interruptions) We have big villages that need to be connected by roads. … (Interruptions)

          Will the Minister consider connecting those villages through the Bharatmala Project? He had stated that 14 lanes have been constructed on a stretch of 980 kms. I need only 50 kms. These villages in the border areas have been sandwiched because of construction of border fencing, and they do not have road connectivity in summer. Will the Minister consider this as a special case? Though it is a State road, I would request him to give special fund for the international border to connect these villages with rest of India.

श्री नितिन गडकरी : महोदया, गांवों को जोड़ने का काम हमसे जुड़ा नहीं है। ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य सरकार को देता है, उससे यह काम होता है। इंटरनेशनल लेवल पर मेघालय का छह हजार करोड़ रुपये का लोन हमने मंजूर किया है, जो म्यंमार तक जा रहा है। नेपाल, भूटान, इंडिया और बांग्लादेश को जोड़ने के लिए एडीबी ने 24 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए हैं, जिनमें कुछ ब्रिजेज भी हैं। मेघालय, त्रिपुरा और विशेष रूप से नार्थ ईस्ट को हमने प्राथमिकता दी है। मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पहली बार देश में तय हुआ कि नार्थ-ईस्ट पर विशेष ध्यान देना है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि देश के इतिहास में पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के हाइवेज़, रोड़ नार्थ-ईस्ट के लिए मंजूर किए हैं और 45 हजार करोड़ रुपये के काम शुरू हो चुके हैं। …( व्यवधान) आप शांत रहिए, आपने 50 साल में ब्रह्मपुत्र में जितने ब्रिज नहीं बनाए हैं, हमारी सरकार वहां पांच ब्रिजेज बना रही है। मुझे लगता है कि इसमें  नार्थ-ईस्ट को प्राथमिकता मिलेगा। …( व्यवधान)

माननीय  अध्यक्ष : भूरिया जी, आपके यहां से ‘भारत माला’ जा रही है। प्रश्न काल का समय समाप्त होने जा रहा है, आप एक मिनट में अपनी बात रखिए।

…( व्यवधान)

श्री कांति लाल भूरिया  : महोदया, माननीय मंत्री जी जो कह रहे हैं, वह सुनने में अच्छा लग रहा है। वह मेरे क्षेत्र से गुजर रही है, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है। मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि मैं सदन में धरना दे चुका हूं। इंदौर-अहमदाबाद रोड़ 50 किलोमीटर सिंगल रोड़ ही है। वहां 200-300 लोगों की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ है। आपने कहा था कि छह महीने में इस काम को पूरा करेंगे, आज एक साल हो गया है और वहां काम भी शुरू नहीं हुआ है।

          मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि इस रोड का काम कब तक पूरा हो पाएगा?

12 00 hrs श्री नितिन गडकरी : माननीय अध्यक्ष महोदया, मैंने एक बात साफ कही है कि आपके यहाँ से एलाइनमेंट जा रही है। आपके यहाँ काम शुरू हो गया है, मैंने यह दावा नहीं किया है। दिल्ली से मुम्बई लेन में केवल वड़ोदरा टू मुम्बई लेन के लिए 44 हजार करोड़ रुपये के कांट्रैक्ट्स अवार्ड हुए, मैंने केवल इतना ही कहा। अभी आपके यहाँ काम शुरू नहीं हो सकता है, उसमें अभी समय लगेगा।

          मैं आपसे इतना ही कहना चाहता हूँ कि दिसम्बर के अंत तक, यह मैं पक्का आश्वासन नहीं दे रहा हूँ, लेकिन शायद दिसम्बर के अंत तक आपके यहाँ की एलाइनमेंट पक्की करके और टेंडर करके काम शुरू करने का हमारा प्रयास होगा। हम कोशिश करेंगे कि हमारे इसी रेज़ीम में आपके यहाँ का काम शुरू हो जाए।

          जो अहमदाबाद की रोड है, उसके बारे में स्पीकर महोदया आपको भी पता है, आपके यहाँ भी यह समस्या आयी थी। आपने तीन बार कांट्रैक्टर्स  की मीटिंग बुलायी थी। वह प्रॉब्लम अब सॉल्व हो गयी है। वही कांट्रैक्टर इनके यहाँ है। वह बैंकरप्ट हो गया है। उसके पास पैसे नहीं हैं। एनएचएआई से 50 प्रतिशत पैसे लेकर हम उस काम को कर रहे हैं। उसमें बैंकों का एनओसी चाहिए। कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम्स हैं। यह एक बहुत ही कॉम्पलीकेटेड केस बन गया है, फिर भी मैं उनको विश्वास दिलाता हूँ कि इस संबंध में मार्ग निकालकर काम पूरा किया जाएगा।

माननीय अध्यक्ष : मगर उस एरिया को भी कवर करना बहुत जरूरी है। यह बात सही है।