Lok Sabha Debates
Combined Discussion On Government Resolution Regarding Approval Of ... on 17 February, 2014
an> Titl: Combined discussion on Government Resolution regarding approval of recommendations in 6th Report of the Railway Convention Committee; General Discussion on the Interim Budget (Railways) 2014-15; Demands for Grants Nos. 1 to 16 in respect of Interim Budget (Railways) 2014-15 and Supplementary Demands for Grants in respect of Budget (Railways) 2013-14 (Government Resolution - Adopted).
THE MINISTER OF RAILWAYS AND MINISTER OF SOCIAL JUSTICE AND EMPOWERMENT (SHRI MALLIKARJUN KHARGE): Madam, I beg to move the following Resolution:--
“That this House approves the recommendations contained in Paras 76, 77, 80, 81, 82, 83, 84, 85 and 86 of the Sixth Report of the Railway Convention Committee (2009), appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues, etc., which was presented in both the Houses of Parliament on 8th May, 2013.” MADAM SPEAKER: Motion moved:
“That this House approves the recommendations contained in Paras 76, 77, 80, 81, 82, 83, 84, 85 and 86 of the Sixth Report of the Railway Convention Committee (2009), appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues, etc., which was presented in both the Houses of Parliament on 8th May, 2013.” … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Hon. Members, we will have discussion on the Railways. Kindly go back to your seats. I would request all of you to kindly go back to your seats so that we have peace in the House. Let us not have anything else. It is something very important. Please go back to your seats. Let us have it peacefully. Please go back to your seats so that we have the Discussion on the Railways.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please go back to your seats.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये, रेलवे बजट पर शांतिपूर्वक बहस हो जाएगी तो अच्छा रहेगा, सब लोग शांतिपूर्वक बैठ जाइये।
RESOLUTION RE: APPROVAL OF RECOMMENDATIONS IN SIXTH REPORT OF RAILWAY CONVENTION COMMITTEE .... Contd. INTERIM BUDGET (RAILWAYS), 2014-15 -GENERAL DISCUSSION MADAM SPEAKER: Now, we shall take up Item No.30 to 33.
THE MINISTER OF RAILWAYS AND MINISTER OF SOCIAL JUSTICE AND EMPOWERMENT (SHRI MALLIKARJUN KHARGE): I beg to move for.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Mr. Minister, you have already moved the Resolution.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: We start with Shri Arjun Meghwal.
… (Interruptions)
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Madam Speaker, bring the House to order. … (Interruptions) Hon. Ministers are in the well of the House. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। मेघवाल जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : तम्बिदुरई जी, आप बैठ जाइए। ऐसे मत कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): अध्यक्ष महोदया, बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं रेल मंत्रालय द्वारा सन् 2014-15 के रेल बजट पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ। मैं यह कहना चाहता हूँ कि रेल मंत्रालय ने 13 तारीख को जो अंतरिम बजट पेश किया है, उसमें इन्होंने लिखा है कि माननीय सांसदों के जो प्रतिवेदन थे और विभिन्न संगठनों से जो प्रतिवेदन प्राप्त हुए थे, उसके अनुसार रेलवे बजट को तैयार किया है। मैं यहां कहना चाहता हूँ कि रेल मंत्री जी ने रेल बजट तैयार करते समय विपक्ष के सांसदों की अनदेखी की है। केवल कांग्रेस के सांसदों का ही ध्यान रखा गया है और विपक्ष के सांसदों का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। मैं यहां खड़े हो कर यह कह सकता हूँ। मैंने इनके सामने एक बड़ी मांग रखी थी। मैं बीकानेर से आता हूँ। बीकानेर और बैंगलोर के बीच में कोई रेल सेवा नहीं है। मैंने इनको कहा था कि बैंगलोर के लिए बीकानेर की रेल सेवा होनी चाहिए। उन्होंने उसकी अनदेखी की। इसके अतिरिक्त मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूँ कि बीकानेर से अनूपगढ़ जुड़ा हुआ नहीं है और रक्षा मंत्रालय की यह बहुत बड़ी मांग है कि बीकानेर से अनूपगढ़ जुड़ना चाहिए। उनके जो 14 प्रपोज़ल हैं, वे प्लानिंग कमीशन से भी अप्रूव हो कर आ गए हैं। उसमें सीरियल नंबर 11 पर बीकानेर-अनूपगढ़ न्यू रेलवे लाइन 154 किलोमीटर, 707 करोड़ रूपये का प्रपोज़ल इनके पास पैंडिंग है। फिर भी इन्होंने डिफेंस मिनिस्ट्री की डिमांड को भी इग्नोर किया और मेरी बात को भी इग्नोर किया और जो नई रेल लाइन बीकानेर-अनूपगढ़ की घोषणा होनी चाहिए थी, वह घोषणा इन्होंने नहीं की। इसलिए मैं अपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि रेल मंत्री जी ने जो अंतरिम रेल बजट पेश किया है, यह सिर्फ कांग्रेस के लोगों को खुश करने के लिए किया गया है। विपक्ष के लोगों की कोई डिमांड इन्होंने नहीं मानी है। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्रालय पर यह आरोप लगाना चाहता हूँ।
महोदया, मैं राजस्थान से आता हूँ। मैं यह बजट देख रहा हूँ। इस बजट में पैरा नंबर 18 पर इन्होंने डैडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट की बात कही है। यह फॉरेन फंडेड प्रोजेक्ट है। इसकी प्रायोरिटी होनी चाहिए। रेल मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करने के लिए न तो राजस्थान सरकार से कभी बात की न ही अन्य सरकारों से डिस्कशन किया और इन्होंने कैज़ुअली यह कह दिया कि हम 1000 किलोमीटर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम करेंगे। मैं आपसे यह बताना चाहता हूँ कि डैडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर ईस्ट और वैस्ट, ये दोनों रेलवे के लिए बहुत इंपॉरटेंट हैं। इन्होंने खाली कैज़ुअली मैंशन कर दिया कि हम 1000 किलोमीटर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम करेंगे। मैं यह जानना चाहता हूँ कि यह कब पूरा होगा? इसमें कितना पैसा लगेगा? इसका जिक्र इन्होंने पैरा नम्बर 18 में किया है।...(व्यवधान) खाली कैजुअली अनाउंसमेंट कर देना रेल मंत्रालय का काम नहीं है। ...(व्यवधान) इनको यह बताना चाहिए कि इसमें कितना पैसा लगेगा,...(व्यवधान) यह कब पूरा होगा?...(व्यवधान) मैं यह कहना चाह रहा हूं कि डैडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट रेलवे के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।...(व्यवधान) इनको अलग से मालगाड़ियॉ चलाने का रूट मिलेगा।...(व्यवधान) इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट भी होगा, रेलवे को रेवेन्यू जनरेट होगा, लेकिन इन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है।...(व्यवधान)
महोदया, मैं आपके माध्यम से कहना चाह रहा हूं कि यह इन्होंने कैजुअली अनाउंस कर दिया,...(व्यवधान) इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर भी कोई ध्यान नहीं दिया।...(व्यवधान)
महोदया, दूसरा मैं कहना चाह रहा था कि इन्होंने पीपीपी प्रोजेक्ट में रेलवे के कई प्रोजेक्ट स्वीकृत किये हैं।...(व्यवधान) लेकिन आज तक कितने पीपीपी प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं,...(व्यवधान) कितने पीपीपी प्रोजेक्ट रेलवे ने स्वीकृत किये हैं? कितने प्रोजेक्ट सफल है? इनका भी इन्होंने कोई जिक्र नहीं किया है।...(व्यवधान) मैंने इनको एक सजेशन दिया था कि रेलवे के पास सबसे ज्यादा लैंड अवलेबल है।...(व्यवधान) अगर आप लैंड का प्रॉपर उपयोग करोगे तो रेलवे को बहुत फायदा होगा।...(व्यवधान) मेरा एक सुझाव था कि रेलवे की अधिकतर जमीन पर जो इन्क्रोचमेंट हो रहा है और वह जमीन रेल लाइन के किनारे-किनारे है।...(व्यवधान) अगर ये रतनजोत की खेती (बायोडीजल) रेल लाइन की पटरी के किनारे-किनारे ग्रो करते हैं तो इनको बायोडीजल भी मिलेगा।...(व्यवधान) मैं रतनजोत की खेती की बात कर रहा हूं, जैट्रोफा की बात कर रहा हूं।...(व्यवधान) तो इनको बायोडीजल भी मिलेगा और ग्रीनरी भी होगी।...(व्यवधान) रेलवे लाइन के पास जो जमीन है, उसका इन्क्रोचमेंट भी रूकेगा।...(व्यवधान) इनका जो लैंड बैंक बनाने की घोषणा थी।...(व्यवधान) जब ममता दी मंत्री थीं तो उन्होंने कहा था कि मैं रेलवे में लैंड बैंक क्रिएट करूंगी...(व्यवधान) और रेलवे की लैंड का जो इन्क्रोचमेंट हुआ है, उसे ठीक करेंगे।...(व्यवधान) तो हमने उस समय यह सुझाव दिया था, लेकिन यह आज तक पूरा नहीं हुआ।...(व्यवधान)
महोदया, मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि रेल मंत्रालय द्वारा 587 प्रोजेक्ट घोषित किए हुए हैं।...(व्यवधान) कितने प्रोजेक्ट हैं, मैं मंत्री जी से जानना चाह रहा हूं जो रेल मंत्रालय ने घोषित किए हैं और उनकी क्रियान्विती किस स्तर पर है?...(व्यवधान) इसका जिक्र भी रेल बजट में नहीं किया गया है।...(व्यवधान) मेरा यह कहना है कि खाली कैजुअल इन्होंने इसका अनाउंसमेंट कर दिया और इन्होंने पक्षपात करते हुए...(व्यवधान) जो कांग्रेस के सांसद हैं, उनके प्रपोजल मान लिये गये...(व्यवधान) और हमारे प्रपोजल को इग्नोर कर दिया गया।...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : माननीय सदस्य एक मिनट मेरी बात सुनिये। अर्जुन राम मेघवाल जी, इस समय सदन बहुत अशान्त है और मुझे शान्ति की संभावना नजर नहीं आ रही है, इसलिए आप बाकी का अपना भाषण सभा पटल पर रख दें और अन्य जितने माननीय सदस्य बोलना चाहते हैं।
…( व्यवधान)
* ....* अर्जुन राम मेघवाल: रेलवे पर अनुदान की अंतरिम रेल बजट वर्ष 2014-15 पर मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूँ।
1. आर.यू.बी. व एफ.ओ.बी. का निर्माण मनरेगा से करवाने की पूरे देश की ग्रामीण जनता के लाभ हेतु अंतरिम बजट में स्पष्ट रूप से सम्मिलित करने की व्यवस्था करायें
2. बजट वर्ष 2005-06 में रेल मंत्री ने अनूपगढ़ को श्रीकोलायत से जोड़ने के लिए नई रेल लाईन बिछाने की घोषणा की गई थी जिसकी पालना अभी तक नहीं हुई है। अतः इस बजट में रेल मंत्री द्वारा घोषित रेल लाईन का निर्माण शीघ्र किया जाए जिससे अनूपगढ़ जो सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, बीकानेर मुख्यालय से जुड़ सके। इसके लिए आर्मी की भी मांग है।
3. बीकानेर से अजमेर को रेलवे से जोड़ने हेतु सीधी रेल चालू करने की घोषणा करें।
4. सांसदों की अभिशंषा पर रेलवे आरक्षण केन्द्र की घोषणा की गई थी जिसके लिए मैंने श्री कोलायत, (जिला बीकानेर) में रेलवे आरक्षण केन्द्र स्थापित करने के लिए अभिशंषा की गई थी, उसकी स्थापना की जाये।
12.18 hrs At this stage, Shrimati Botcha Jhansi Lakshmi came and stood on the floor near the Table.
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): महोदया, मुझे कुछ कहना है। ...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : क्या कहना है, बोलिये।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : महोदया, आप स्वयं पीठ से कई बार कह चुकी हैं कि यह 15वीं लोक सभा का अन्तिम सत्र है।...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हां।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : और कोई काम तो इसमें नहीं हो सका, लेकिन कम से कम रेल बजट और सामान्य बजट पर चर्चा हो जाये, इतना तो हम जरूर चाहते हैं।...(व्यवधान) रेल बजट चूंकि सभी सांसदों से बाबस्ता होता है, चुनाव का समय है, अपने-अपने क्षेत्र की बातें यहां सांसद रख सकें, इतना तो इस सत्र में वातावरण पैदा होना चाहिए।...(व्यवधान) लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि यह कैसी सरकार है कि स्वयं सरकार के मंत्री व्यवधान पैदा कर रहे हैं।...(व्यवधान) प्रधानमंत्री जी संसद में बैठें और उनकी कैबिनेट के मंत्री वेल में खड़े हैं।...(व्यवधान) कांग्रेस अध्यक्षा सदन में बैठीं और कांग्रेस के अपने सांसद व्यवधान पैदा कर रहे हैं।...(व्यवधान) इसलिए हम आपसे चाहते हैं,...(व्यवधान) मैं स्वयं कुछ बातें रेल मंत्री को कहना चाहती हूं, अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में कहना चाहती हूं।...(व्यवधान) कम से कम आप इन मंत्रियों को कहिये कि अगर खड़े भी हैं तो चुप तो रहें।...(व्यवधान) मुझे अपनी बात रेल मंत्री से कहनी है।...(व्यवधान) खरगे जी, आप मेरी एक बात सुन लीजिए।...(व्यवधान) मेरे संसदीय क्षेत्र विदिशा में मैंने एक मेमू ट्रेन चलवायी थी।...(व्यवधान) आपके पूर्वाधिकारी जिस समय पवन बंसल जी रेल मंत्री थे, भोपाल से बीना तक वह मेमू ट्रेन चली थी।...(व्यवधान) मुझे लगा था कि मैंने अपने संसदीय क्षेत्र को एक बहुत बड़ा उपहार दिलवाया है। वह ट्रेन डेली पैसेन्जर्स को ले जाती थी और ढाई घंटे में भोपाल से बीना पहुँचनी थी। उस समय मुझे एक पुराना मेमू का रेक दे दिया गया और कहा गया कि एक महीने के अंदर इसको बदल देंगे लेकिन वह रेक आज तक बदला नहीं गया जिसके कारण वह मेमू ट्रेन मेमू की गति से नहीं, बल्कि पैसेंजर ट्रेन की गति से चलती है। मेमू ट्रेन में शौचालय नहीं होता, और यह ट्रेन जो ढाई घंटे में पहुँचनी चाहिए थी, वह पाँच घंटे में पहुँचती है। शौचालय न होने के कारण सारे यात्री परेशान हैं। वे हाथ जोड़कर मुझसे कहते हैं कि मेमू ट्रेन वापस ले लो, हमें हमारी पैसेंजर ट्रेन वापस दे दो। मुझे शर्मिन्दगी से सिर झुकाना पड़ता है। आज यहाँ रेल बजट के समय मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि जो सुविधा हमारे संसदीय क्षेत्र को दी गई थी, एक नया रेक दिलवाकर उस मेमू ट्रेन को चलाइए ताकि जो उपहार दिया था, वह उपहार उन्हें उपहार लगे और जो सुविधा लोगों के लिए असुविधा बन गई है, वह असुविधा न रहे। मेमू का नया रेक दे दीजिए ताकि ढाई घंटे में डेली पैसेंजर भोपाल से बीना पहुँच सकें। कम से कम चार फेरे वह ट्रेन करेगी। हमने कहा था कि यह ट्रेन भोपाल के बजाय होशंगाबाद तक चला दीजिए। आज मैं यहाँ इस अशान्त वातावरण में भी आपसे अनुरोध करती हूँ कि जो मेमू ट्रेन मुझे दी गई थी, उसे मेमू ट्रेन के रूप में ही चलाइए, उसको पैसेंजर में तब्दील मत करिये और जो उपहार मैंने यहाँ के रेल मंत्रालय के माध्यम से दिया था, उस उपहार का लाभ मेरे संसदीय क्षेत्र को मिले, इसका आश्वासन मुझे दीजिए।
एक और छोटी सी मांग मैं करना चाहती हूँ। अमरकंटक एक्सप्रैस अब्दुल्लागंज में रुके, यह मैं बार-बार कह रही हूँ। यह छोटी सी बात है लेकिन हमारे यहाँ के लोगों को इससे बहुत बड़ा लाभ हो जाएगा। ये दो बातें इस अशान्त वातावरण में भी मैं आपसे कह रही हूँ। आप ये दोनों करेंगे - अमरकंटक एक्सप्रैस को अब्दुल्लागंज में रुकवाने का निर्देश करेंगे और मेरी मेमू ट्रेन मेमू के रूप में चलेगी, इसका आश्वासन आप मुझे देने का कष्ट करेंगे तो मुझे लगेगा कि चलिए, ये दो बातें मैंने अपने संसदीय क्षेत्र की आपको कह दीं। मैं चाहती हूँ कि जवाब के समय आप मुझे यह आश्वासन देने की कृपा करें। ...... (Interruptions)
*श्रीमती जयश्रीबेन पटेल (महेसाणा)- रेल सेवा देश के लोगों की लाइफ लाइन कहलाती है पूरे संसार में हमारा रेल इफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में चौथे स्थान पर है। पिछले पाँच वर्षों में 6 रेल मंत्रियों ने कार्यभार संभाला, लेकिन मंत्रालय पर कोई कमांड नहीं आया। कोई ठोस रेल नीति नहीं है, लेकिन रेल राजनीति बजट में दिखाई देती है। 64,305 करोड़ रूपये का सालाना रेल बजट बताता है कि धनराशि संसाधनों की कमी है। 14 लाख रेल कर्मचारियों की सेवा रेल मंत्री पर गर्व करते हैं लेकिन छठे वेतन आयोग के तहत 1 लाख करोड़ का बोझ बताने के बावजूद रेल मंत्रालय की विचलित मानसिकता का प्रदर्शन करती है।
यह रेल बजट चुनावी रेल बजट है। संसद सदस्यों का दबाव बढ़ता है तो सर्वेक्षण को जाहिर करके नीति क्रियान्वयन में कोई प्रगति नहीं होती। माँ-माटी-मानुष की बात की अपेक्षा होती है। सामाजिक पिछड़े इलाकों को विकास की पटरी पर वाणिज्यिक हेतु आगे करके सामान्य प्रजा की उपेक्षा ही की जा रही है।
रेल मंत्री जी ने बजट के तहत नई ट्रेनों का चुनावी तोहफा दिया है साथ ही पूर्वोत्तर एवं धार्मिक स्थल वैष्णों देवी तक रेल सुविधा मुहैया कराने का कदम सराहनीय है, लेकिन इसी तरह भारत के सभी तीर्थ स्थल, पर्यटन स्थल, डैम साइट तक रेल सुविधा पहुँचाने की आवश्यकता है।
आज तक जितने भी बजट पेश किए गए सभी में नई-नई घोषणाएं की गई। बजटों में की जाने वाली पिछली घोषणाएं पूरी नहीं होती और नई आगे आ जाती हैं। रेलवे ने भी कुछ ऐसे ही वादे पिछले साल भी किए थे जिन्हें अभी तक पूरा नहीं किया है, और नई घोषणाओं का एलान कर दिया गया है फिर चाहे नई ट्रेन चलाने का मामला हो या फिर ट्रेक बिछाने का, रेलवे के पास पहले से ही 10 साल आगे की परियोजनाएं पड़ी हैं जो आज तक पूरी नहीं हुई उनके साथ ही और नई घोषणाएं कर दी गई हैं। क्या जनता को इन नई घोषणाओं के पूरा होने की उम्मीद करनी चाहिए?
यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना न होने देने के वादे सिर्फ कागज़ों पर ही रह गए हैं। पिछले 4 वर्षों में विश्व में हुई रेल दुर्घटनाओं का 15 प्रतिशत भारत में हुआ है। हाल ही में कुंभ मेले के तहत इलाहाबाद में हुई रेल दुर्घटना ने सरकारी प्रयासों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
डैडिकेटेड फ्रैट कॉरिडोर की महत्वपूर्ण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। पिछले परियोजनाएं शुरू ही नहीं हुई उनका क्रियान्वयन भी नहीं हुआ है और नई घोषणाएं रेल मंत्री जी करते जा रहे हैं।
पिछले बजट में आई.आई.एम. और एन.आई.डी. के साथ रेलवे कोच डिजाइन और रिसर्च के बार में एमओयू भी हुए थे, लेकिन आज तक इस प्रोजेक्ट में कोई प्रगति नहीं हुई है।
डॉ0 अनिल काकोदकर और सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में बनी सिफारिशों को भी ठीक ढंग से लागू नहीं किया गया है। मालभाड़े से वृद्धि में महंगाई और बढ़ गई है। इस ढुलाई के चलते आम आदमी की धुलाई हो जाएगी। घर बनाने से लेकर रोजमर्रा की चीज़ें और महंगी हो गई। कोयले की ढुलाई बढ़ने से बिजली की दरें भी बढ़ेंगी। मालभाड़े में 5/6 प्रतिशत की वृद्धि परोक्ष रूप में देश के प्रत्येक व्यक्ति पर बोझ डालेगी।
गुजरात में देश की सबसे ज्यादा 1663 किलोमीटर लंबी दरियाई सीमा है, 42 बंदरगाह हैं, देश का 34 प्रतिशत कार्गो कांडला पत्तन से ही हैंडल किया जाता है। कुछ सीमावर्ती इलाकों में रेल परियोजनाएं रफ्तार पकड़ेंगी, लेकिन गुजरात सरकार की बंदरगाहों को जोड़ने की बात न करके गुजरात के साथ अन्याय किया है। इस बजट में औद्योगिक विकास के अनुरूप कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
रेलवे के साथ मनरेगा को जोड़ने की बात और रेलवे इंजीनियरों को ग्राम पंचायत के साथ जोड़ने की बात कितनी सफल होगी। यह एक प्रश्नचिन्ह के समान है। पश्चिम रेलवे का बड़ा हिस्सा गुजरात में आता है, फिर भी अहमदाबाद को पश्चिम रेलवे का मुख्यालय बनाने की बात आज तक लंबित है।
गुजरात को भारत के साथ, उत्तर-दक्षिण के साथ जोड़ने वाली ट्रैनों की सुविधा नहीं मिल पाई है। ओखा-गुवाहाटी ट्रेन को प्रतिदिन चलाने की बात नहीं बन पाई है। छपईया-शिर्डी जैसे धार्मिक स्थलों पर आने-जाने के लिए कोई ट्रेन सुविधा नहीं मिली है।
अहमदाबाद को विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने की बात आज तक लंबित है। अहमदाबाद को एक भी लंबी दूरी की नई ट्रेन नहीं मिल पायी है। गुजरात देश का ग्रोथ इंजन बन गया है, इसके तहत औद्योगिक राज्य बन गया है, जिसके कारण भारत के अन्य राज्यों से मजदूर और मध्यम वर्गीय व्यापारी लोग गुजरात के विभिन्न शहरों में काम-काज के लिए बसते हैं। उनके आवागमन के लिए लंबे अंतर वाली नई ट्रेनों की तथा लंबी दूरी वाली ट्रेनों को शुरू करने और उसको बढ़ावा देने की आवश्यकता है, लेकिन सिर्फ चार पैसेंजर ट्रेनें देकर गुजरात के हाथ में एक झुनझुना पकड़ा दिया है।
र्नार्थ गुजरात के पाटन, पालनपुर, महेसाना से मुंबई और सूरत आने-जाने के लिए रेल सुविधा की मांग की घोर उपेक्षा की गई है। गुजरात में जहां मीटर गेज रेल लाइनें हैं वहाँ पर उनके यातायात के लिए रेलवे कोच और रेल बस की कमी है, इस समस्या को जल्द-से-जल्द हल करने की आवश्यकता है।
अहमदाबाद और मुंबई के बीच कॉरीडोर 491 किलोमीटर हाई-स्पीड रेलवे परियोजना के तहत प्री-फिजीविल्टी का अभ्यास पूर्ण हो गया है। इस परियोजना को जल्द-से-जल्द पूर्ण करने की आवश्यकता है, लेकिन इसमें मंद गति से काम चल रहा है।
महेसाना जो मिल्क, इंडस्ट्रीयल ऑयल सिटी तथा उंझा जो एशिया की सबसे बड़ी मसाला मण्डी है एवं धार्मिक स्थल भी है वहां पूरे भारत भर के लोग बसते हैं। उनके आने-जाने की सुविधा के लिए सभी गाड़ियों के ठहराव के लिए कुछ भी प्रावधान नहीं किए गए। गाँधीनगर जो गुजरात की राजधानी है, उसको कोई रेल सुविधा से संतुष्ट नहीं किया गया।
कड़ी जो कोटन सिटी कहलाती है और बहुचराजी जो बड़ा धार्मिक शक्ति स्थल है वहां आने-जाने के लिए अहमदाबाद से कलोल होकर चाणसमा, रनुज तक ट्रेनों की सुविधा में जो कमी की है उसको फिर से लागू किया जाए, क्योंकि बहुचराजी में मारूति उद्योग जापान की कंपनी के सहयोग से लगाया जा रहा है, इसके लिए भी ट्रेनों की सुविधाएं अति आवश्यक है।
साबरमती रेलवे स्टेशन के अपग्रेडेशन करने की बात आज भी लंबित है तथा अहमदाबाद में ट्राफिक की समस्या आज भी वही की वही है।
एनयूईटी के मुताबिक रेलवे ओवर ब्रिज बनाने की गुजरात की दरख्वास्त आज तक लंबित है। ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी, नई ट्रेनों की शुरूआत करने में गुजरात की सरासर उपेक्षा हुई है।
रेल विकास से वंचित महेसाना से तारंगा, पालनपुर से अम्बाजी, खेडब्रह्मा, आबूरोड नई रेल लाईनें बिछाने का काम आज भी कागजों में ही चल रहा है। कलोल, कड़ी, उंझा, बहुचराजी के आदर्श स्टेशनों के पुराने वायदे भी वायदे ही बनकर रह गए, उनमें आज तक कोई तरक्की नहीं हुई है। रेलवे लाइनों के आमान परिवर्तन के बारे में गुजरात की दरख्वास्तें भी स्वीकार नहीं हुई है।
रेलवे लाइनों के दोहरीकरण में भी गुजरात के साथ अन्याय हुआ है। अहमदाबाद, मुंबई, पुणे को जोड़ने वाली बुलेट ट्रेन का प्राथमिक अभ्यास 2010 में पूर्ण हो गया है, लेकिन आज तक उसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। रेल बजट में वायदे बुलेट की तरह किए जाते हैं, लेकिन वे वायदे- वायदे ही रह गए हैं।
महिलाओं की तादाद को देखते हुए आरपीएफ में महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा अपर्याप्त है। महिलाओं के लिए खास कोचों की सुविधा बढ़ाकर महिला सरोकार रेल मंत्री कर सकते थे, परंतु बजट के दौरान ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया।
गलत पटरी पर रेल बजट, इस बार भी रेल बजट वैसा ही है, जैसा वह हमेशा होता है। वही वायदे,, वही दावें, वही परियोजनाएं और खस्ता हालत से उबरने का कोई ठोस प्रयास इस बजट में दिखाई नहीं देता। सरकार की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है।
भारतीय रेलवे 160 साल पुरानी संस्था है, दिक्कत यह है कि उसकी बहुत सारी नीतियाँ और बहुत सारी तकनीकें भी इतनी ही पुरानी है, इसमें बदलाव का कोई गंभीर प्रयास किसी भी बजट में दिखाई नहीं देता।
इस रेल बजट से रेलवे की खस्ता माली हालत सुधारने और सेवाएं बेहतर करने के लिए खास कदम नहीं उठाए गए हैं। इस रेल बजट में चुनावी आहट दिखाई देती है।
सेफ्टी, सिक्युरिटी और फैसिलिटी में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। शौचालयों की साफ-सफाई और खाने-पीने की शिकायतें आज भी कायम हैं।
खन्ना कमेटी की सिक्युरिटी की सिफारिशों में रेलवे मंत्रालय ने कुछ प्रगति नहीं की हे, किराया बढ़ाकर सफर महंगा कर दिया है।
भारतीय रेल सही ट्रेक पर नहीं चल रही है। यह बजट जनविरोधी है। रेलवे का ऑपरेशन अनुपात क्या है, वह स्पष्ट नहीं है।
सुझाव
1. रेल मंत्रालय को अपनी खस्ता-माली हालत को सुधारने के लिए, बिजली की मांग की आपूर्ति के लिए सौर पैनल रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों पर लगाए जाने चाहिए तथा पानी की आपूर्ति के लिए जल संचय करना चाहिए।
2. इफ्रास्ट्रक्चर सुविधा में बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मॉडल पर रेल मंत्रालय की बाकी बची जमीन पर मॉल, प्राईवेट अस्पताल, स्कूल, कॉलेज को किराए पर आवंटित करके धनराशि इकठ्ठी करनी चाहिए।
3. बाकी बची जमीन पर घास चारा बैंक, बायोडीजल-रतनजोत की खेती करके मुनाफा कमाने की नीति बनानी चाहिए।
4. रेल मंत्रालय अपनी विजन 2020 की नीति के तहत रिसर्च-इनोवेशन सेंटर एवं रेलवे युनिवर्सिटी स्थापित करनी चाहिए। भारी-भरकम कोच के बदले कम वजन वाले नए कोच, नई टैक्नोलॉजी कार्यान्वित करके कोच का वजन घटाना चाहिए जिससे गाड़ी की गति में तेजी आएगी।
5. नेशनल बेस्ट टीचर्स अवार्ड को खास रेल सुविधा मुहैया करानी चाहिए।
6. कॉन्ट्रेक्ट प्रक्रिया में महिलाओं को सफाई में जल-पान की दुकानों में 31 प्रतिशत तक आरक्षण देना चाहिए।
7. रेल पटरी के आस-पास झुग्गी-झोपड़ियों को हटाकर उनको सुविधायुक्त आवास मुहैया कराए जाने चाहिए, जैसा कि पिछले बजट में कहा गया था।
8. गुजरात की वाटर सप्लाई की (पीने और सिंचाई) की परियोजनाओं को जल्द-से-जल्द मंजूरी दी जानी चाहिए।
9. रेल मंत्रालय में बेकार पड़े सामान उनको बेचकर धनराशि मुहैया करानी चाहिए।
10. नमक वेगन के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने खास नई टैक्नोलॉजी और मैटीरियल वाला वैगन बनाने की बात कही है, उसको ध्यान में लाना चाहिए।
11. गुजरात के आर ओ.बी., आर.यू.बी. के लंबित मामले उचित धनराशि देकर जल्द-से-जल्द सुलझाने चाहिये।
12. रेल किराया और माल-भाड़े में वृद्धि के तहत सुझाव देने के लिए खास ऑथोरिटी एजेन्सी बनाने की बात जल्द-से-जल्द क्रियान्वयन में लानी चाहिए तथा पुरानी समितियों की सिफारिशों पर जल्द विचार किया जाना चाहिए।
13. रेल देश का सबसे बड़ा उद्योग है और देश की पहचान भी है तो उनके बारे में जनता को रेल मंत्रालय की अलग से पहचान के लिए यूपीएससी एवं साल्य के पाठय़क्रम में एक विषय शामिल किया जाना चाहिए।
14. रेल मंत्रालय के सभी डिपार्टमेंट में समन्वय की कमी है सब अलग-अलग सोचते हैं उनको एक ही पटरी पर लाने की ज़रूरत है।
15. देश के सभी राज्यों को सामान्य न्याय पर रेल सुविधा मुहैया करानी चाहिए।
16. बड़े रेलवे स्टेशनों पर एम्बुलैंस वाहनों की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए।
*श्री सतपाल महाराज (गढ़वाल) मैं उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र गढ़वाल का प्रतिनिधित्व करता हूँ जो आर्थिक रूप से पिछड़ा है और जिसने हाल ही में भीषण आपदा का दंश झेला हे। रेल मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा संसद में पेश किया गया। अंतरिम रेल बजट आम जनता को राहत पहुँचाने वाला है, माननीय मंत्री जी ने इस बजट में भी किराये में वृद्धि न करके आम आदमी पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ाया, जो सरकार की आम आदमी के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रकट करता है, मैं इस बजट का स्वागत करता हूँ।
सभी वर्गों का समुचित ध्यान रखकर इस बजट को बिना किसी अमीर-गरीब के भेदभाव के बनाया गया है।
मुझे विश्वास ही नहीं अपितु पूरा भरोसा है कि यूपीए अध्यक्षा माननीया श्रीमती सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह एवं देश के युवा नेता श्री राहुल गांधी के नेतृत्व में देश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार व चहुँमुखी विकास होगा और भारत वर्ष के हर नागरिक तक इसका लाभ पहुँचेगा।
उत्तराखण्ड राज्य को दो नई एक्सप्रेस रामनगर-चण्डीगढ़, काठगोदाम से लखनऊ एक्सप्रेस की घोषणा के लिए एवं रामनगर/काठगोदाम से चलने वाली रानीखेत एक्सप्रेस को भगत की कोठी से जैसलमेर तक विस्तार देने के लिए मैं यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी, प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह जी, रेल मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी एवं युवा सांसद श्री राहुल गांधी जी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
उत्तराखण्ड राज्य की टनकपुर-बागेश्वर, रामनगर-चौखुटिया एवं पीरान कलियर शरीफ-हरिद्वार नई लाईनों के निर्माण को भी शीघ्र स्वीकृति मिलनी चाहिए।
125.09 किलोमीटर लम्बी ऋषिकेष-कर्णप्रयाग रेल लाईन के निर्माण के लिए 4 हजार 2 सौ 95वें करोड़ 30 लाख रूपये से स्वीकृत 2010-11 के रेल बजट में हुई थी। जिसके लिए सभी सर्वे पूर्ण हो रेल मंत्रालय द्वारा अनुमोदित कर रेल विकास निगम को कार्य प्रारम्भ करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। चूंकि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है तथा इसके शिलान्यास के समय माननीय रक्षा मंत्री जी ने इसे रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण करार दिया। इस का कार्य पूर्ण होने से उत्तराखण्ड की जनता तो लाभान्वित होगी ही साथ ही पूरे देश व विदेश के पर्यटकों के साथ-साथ हमारी सेनाओं को भी चीन व नेपाल बॉर्डर तक आवागमन व सैन्य साजो-सामान तथा रसद भी तीव्रता से प्राप्त होगी।
हाल ही में उत्तराखण्ड राज्य ने भीषण दैवीय आपदा का दंश झेला है। उत्तराखण्ड राज्य में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं परंतु समुचित यातायात के साधन न होने के कारण यह क्षेत्र आज भी पिछड़ेपन का शिकार है। संपूर्ण प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, इनका भी सदुपयोग यातायात एवं संचार साधनों की उपलब्धता से ही संभव है।
मैंने पूर्व में भी इस सदन को यह जानकारी दी थी कि जब मैं रेल राज्य मंत्री था, तब हम लोगों ने बायलोजिकल टायलेट्स का राष्ट्र हित में रिसर्च प्रारम्भ किया था। इन टायलेट्स के रेल के साथ जुड़ जाने से किसी भी प्रकार की गंदगी रेलवे स्टेशनों पर नहीं फैलेगी और गंदगी एक टैंक के अंदर कंटेन हो जायेगी, जिसे वैक्यूम के जरिए निकाला जा सकता है। रेलवे द्वारा 2500 सवारी डिब्बों में इसे लगवाना सराहनीय कदम है।
आज विश्व के विभिन्न देशों में रेल बहुत तेज रफ्तार से दौड़ रही है। चीन में ही 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी तेज रेल दौड़ रही है। परन्तु हमारी रेल अब भी इस विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्द्धा में बहुत पीछे है। हमारे देश में भी ट्रेनों की रफ्तार बढ़नी चाहिए। इस दिशा में भी माननीय रेल मंत्री जी को ध्यान देना होगा। इससे समय की बचत तो होगी ही साथ ही दूर-दराज के इलाकों में किसी भी आपदा के समय पहुँचने में आसानी हो जायेगी तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रेलवे का वर्चस्व बढ़ेगा।
मैं कुछ अन्य आवश्यक प्रस्तावों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ जो भविष्य में भारतीय रेलवे के अध्याय में एक नया सूत्रपात करेंगे।
जिम कार्बेट नेशनल पार्क का रामनगर प्रवेश द्वार है जहां प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक आते हैं अतः रामनगर से देहरादून तक भी सीधा रेल संपर्क होना चाहिए।
प्रथम श्रेणी ज्वाईंट ए.सी. कोच ट्रेन नं0 (15013/15014) में जो कि भगत की कोठी से रामनगर के बीच चलती है तथा जिसे अब जैसलमेर तक विस्तार दिया गया है में लगवाया जाये।
देहरादून से कानपुर तक एक सीधी ट्रेन भी चलाई जानी चाहिए तथा कानपुर जाने वाली ट्रेनों की गति बढ़ाई जानी चाहिए और फर्स्ट ए.सी. कोच की सुविधा उनमें देनी चाहिए।
गुवाहाटी से हरिद्वार के लिए भी एक सीधी ट्रेन चलाई जानी चाहिए। उत्तराखण्ड से बहुत लोग फौज में है। बार्डर पर तैनाती की वजह से छुट्टी पर आते-जाते समय उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रसिद्ध कामाख्या देवी का मंदिर भी गुवाहाटी में है। उत्तराखण्ड देवभूमि है जिसमें बहुत से तीर्थ हैं। गुवाहाटी से हरिद्वार तक ट्रेन चलने से तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी।
कोटद्वार के लिए दोहरी रेल लाइन होनी चाहिए। हरिद्वार से देहरादून तक भी डबल ट्रेक बनाया जाना चाहिए।
देहरादून से लखनऊ तक शताब्दी गाड़ी से संपर्क दिया जाना चाहिए।
देहरादून से जम्मू तक सीधा रेल संपर्क होना चाहिए।
आई.आर.सी.टी.सी. एवं उत्तराखण्ड सरकार के मध्य टूरिज्म पैकेज होना चाहिए।
पर्यटकों एवं दूर-दराज के क्षेत्रों की जनता की सुविधा के लिए उत्तराखण्ड में ज्यादा आरक्षण केन्द्र खोलने की आवश्यकता है, क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में पूरे वर्ष ही पर्यटकों का आवागमन बना रहता है।
देहरादून से ओखा (गुजरात) तक केवल रविवार को चलने वाली ट्रेन उत्तरांचल एक्सप्रेस (19566) को प्रतिदिन किया जाना चाहिए। इससे गुजरात आने-जाने वाले यात्रियों को बहुत लाभ होगा। साथ ही रेलवे की आय में भी वृद्धि होगी।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रमुख पर्यटक स्थलों तथा तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए देश के प्रमुख तीर्थ स्थानों को आपस में रेल संपर्क से जोड़ा जाये।
जिस प्रकार पैलेस ऑन व्हील्स चलती है, पर्यटक सुबह जाते हैं शाम को गाड़ी में आकर विश्राम करते हैं, उसी प्रकार आगरा स्थित ताजमहल तक ट्रेन चलाई जानी चाहिए।
पर्वतीय राज्यों विशेषकर उत्तराखण्ड राज्य में मूलभूत ढांचे का अभाव है, पेयजल, स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। उत्तराखण्ड राज्य में सड़कों का आभाव है, अधिकांश सड़के क्षतिग्रस्त हैं साथ ही वहाँ वैकल्पिक मार्गों के निर्माण के लिए सरकार को आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।
पर्वतीय राज्यों जैसे उत्तराखण्ड में सिंचाई व्यवस्था का अभाव है। वहां के पानी को स्रोत सूख रहे हैं, इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। उत्तराखण्ड राज्य में 68 प्रतिशत वन हैं, पर्यावरण की दृष्टि से वनों की सुरक्षा के लिए केन्द्र सरकार को विशेष आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
पर्वतीय राज्यों में कृषि, पशु चिकित्सा, स्वास्थ्य, उद्योग, सिंचाई, पेयजल, दूरसंचार, सड़क के लिए मैदानी राज्यों की अपेक्षा अलग से योजना तैयार कर क्रियान्वित की जानी चाहिए। पर्वतीय राज्यों में शिक्षा का भी एक गंभीर विषय है। प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर, तकनीकी, रोज़गारपरक शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को विशेष प्रयास करने चाहिए।
पर्वतीय राज्यों में पर्यटन की आपार संभावनाएं हैं इनके विकास के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उत्तराखण्ड राज्य के विभिन्न जिलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चमोली जिले के देवाल में स्थित लाटू देवता, टिहरी जिले के देवप्रयाग के लोस्तूपट्टी में घंटाकरण देवता, मां चन्द्रबदनी, पौड़ी जिले में डांडा नागराजा और ज्वालपा, रूद्रप्रयाग जिले में काली मठ एवं कार्तिकेय स्वामी आदि ऐसे तीर्थ स्थल हैं जिन्हें धामों की तरह विकसित करने पर तीर्थ पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी एक्ट के तहत जिस प्रकार चंडीगढ़ में 174 रूपये, हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित क्षेत्र में 150 रूपये तथा अंडमान निकोबार में 170 एवं 181 रूपये की दर से पारिश्रमिक का दैनिक भुगतान किया जाता है उसी प्रकार विषम भौगोलिक परिस्थितयों वाले उत्तराखण्ड राज्य में भी महात्मा गांधी नरेगा के तहत भुगतान की दर बढ़ाकर 250 रूपये दैनिक की जानी चाहिए।
सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत शासकीय विद्यालयों के साथ-साथ अशासकीय विद्यालयों को सम्मिलित किया जाना चाहिए। केन्द्र सरकार द्वारा यह अभियान सारे देश में व्यापक रूप से चलाया जा रहा है।
गढ़वाल एवं कुमाऊंनी भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में सम्मिलित कर राष्ट्र भाषा का दर्जा प्रदान करना चाहिए।
राष्ट्र सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए देश में बोर्डर रोड्स का निर्माण शीघ्र करवाना चाहिये। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अनापत्ति प्रमाण-पत्र के निर्गत होने में काफी समय लगता है, ऐसे में बोर्डर रोड्स के निर्माण को प्राथमिकता देकर शीघ्र करवाना चाहिए।
मतदान में पोस्टल बैलेट व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
पर्वतीय राज्यों में हर्बल खेती को प्रोत्साहन देने के लिए व्यापक योजना बनाकर कार्यान्वित की जानी चाहिए।
उत्तराखण्ड राज्य द्वारा विस्थापन एवं पुनर्वास की नीति की घोषणा के अभाव में जनता की परेशानी की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हाल ही में उत्तराखण्ड राज्य में भीषण दैवीय आपदा का दंश झेला है। जिससे भारी संख्या में जान-माल का नुकसान हुआ। इस भारी दैवीय आपदा ने हज़ारों परिवारों को खानाबदोश जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में विस्थापन और पुनर्वास की नीति के अभाव में प्रभावित लोगों के लिए न रहने को घर रहे, न आजीविका के साधन। उत्तराखण्ड के थराली, देवाल, कुलसारी, रिंगवाड़ी, कमेड़ी, भैंसोड़ा, पल्ला, सिमलसैंण पंजाड़ा एवं चुकूम आदि कई ऐसे गांव हैं जिनका पुनर्वास अति आवश्यक है। इन ग्रामों के नागरिक भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। पहाड़ों में दरार आ रही हैं, भूंधसावं हो रहा है लोगों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, इस सर्दी में वे खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर हैं। गांवों में भय के कारण लोग सो नहीं पा रहे हैं। इन क्षेत्रों के नागरिकों का पुनर्वास शीघ्र किया जाना अत्यंत आवश्यक है, परंतु उत्तराखण्ड सरकार द्वारा विस्थापन एवं पुनर्वास की स्पष्ट नीति सार्वजनिक न होने के कारण वहां की जनता त्रस्त है। अभी तक पुनर्वास के लिए भूमि को भी चिन्हित कर उसका सर्वेक्षण भी नहीं करवाया गया है।
ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए साथ ही उन्हें मेडिकल भत्ता व महंगाइ भत्ता मिलना चाहिए।
आशा योजना की महिला कार्यकर्ताओं व एनम के वेतनमान संशोधित कर वृद्धि करनी चाहिए।
एस.एस.बी. प्रशिक्षित गुरिल्लाओं को अग्नि शमन सेवा लगा वनों में लगने वाली आग को रोकने में लगाना चाहिए।
चार धाम यात्रा के साथ-साथ नंदा देवी राज जात के लिए सरकार को विशेष ट्रेन चलवानी चाहिए।
संविदा पर कार्यरत बी.एस.एन.एल. कर्मियों, सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत कार्यरतों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन लाभ प्रदान किया जाना चाहिए।
इसी के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ और पुनः एक बार फिर यूपीए अध्यक्ष माननीया श्रीमती सोनिया गांधी जी, माननीय प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह जी, रेल मंत्री माननीय श्री मल्लिकार्जुन ,खड़गे जी एवं युवा सांसद श्री राहुल गांधी जी को हार्दिक धन्यवाद देता हूं जिन्हें जनसाधारण की भावनाओं का ख्याल रखते हुए इतना अच्छा अंतरिम रेल बजट दिया।
*श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला) भारत के रेल मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा 2014-15 का रेल बजट सभी क्षेत्रों व वर्गों के लिए आज तक का सबसे निराशाभरा व दिशाहीन बजट कहा जा सकता है। हालांकि यह कुल चार महीनों के लिए लेखानुदान के रूप में है तथा 2014-15 के लिए पूरे वर्ष के लिए अनुमानित बजट है।
हिमाचल प्रदेश के लिए तो एक भी रूपये के रूप में किसी परियोजना का जिक्र नहीं है। हालांकि हिमाचल प्रदेश के माननीय सांसदों व सरकार ने विभिन्न योजनाओं के लिए मांग की है, परन्तु उस ओर कोई भी ध्यान न देकर रेल मंत्री ने इस पहाड़ी राज्य के विकास के साथ घोर अन्याय किया है। वैसे तो आज तक हिमाचल प्रदेश में देश स्वतंत्र होने के उपरांत केवल 44 किलोमीटर ही रेल पटरी का निर्माण हुआ है तथापि हर रेल बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए कुछ न कुछ तथा किसी न किसी रूप में रेल द्वारा राशि दी जा रही थी।
मैंने भी 2009 से लगातार कुछ नई रेल पटरियों के निर्माण की मांग मंत्रालय से उठाई है, जिसमें अभी तक घनौली से देहरादून वाया नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला-सूरजपुर-काला अम्ब, पांवटा साहिब का सर्वेक्षण मात्र ही हो पाया है, जो कि वर्ष 2011 में, तब के बजट में प्रावधान किया गया था। परन्तु, उसके लिए निर्माण हेतु रेल मंत्रालय द्वारा कोई भी प्रावधान न कर विशेष तौर पर मेरे शिमला लोक सभा क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय व अनदेखी की है। इसी प्रकार चण्डीगढ़ से बद्दी की रेल लाइन निर्माण के लिए इस रेल बजट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है।
मेरी मांग है कि चण्डीगढ़-बद्दी रेल लाइन के लिए आगामी वर्ष 201415 में बजट प्रावधान ही नहीं अपितु उसे पूर्ण किया जाये ताकि वहां पर औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को लाभ पहुँचे तथा वहां की कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी हो सके। इसी तरह घनौली-देहरादून लाइन के निर्माण हेतु बजट में अधिकाधिक धनराशि का भी प्रावधान किया जाना चाहिए। मेरी मांग है कि मेरे प्रदेश में रेल मंत्रालय द्वारा पहाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ चीन के साथ लगती सीमा के कारण यहां रेल विस्तार की ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। निम्नलिखित नई रेल लाइनों का सर्वेक्षण करना जरूरी है।
1. कालका से बद्दी रेल लाइन।
2. कालका से रोहड़ू तक बड़ी लाइन बिछाना।
3. कालका से रामपुर व किन्नौर क्षेत्र को जोड़ने की अति आवश्यकता है, जिससे देश की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
इसके साथ मैं निम्नलिखित मांगों को पुनः दोहराता हूँ कि मंत्रालय उन्हें गहराई से विचार कर के उन्हें पूर्ण करे, क्योंकि इन्हें मैं 2009 से लगातार मंत्रालय से तथा संसद में उठाता आ रहा हूँ, परन्तु खेद का विषय है कि इस ओर गौर नहीं किया जा रहा है जो कि मेरे प्रदेश के लोगों के साथ घोर अन्याय है-
1. बिलासपुर-लेह वाया मनाली रेल लाईन।
2. भानुपली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेल लाईन।
3. कालका से परवाणू ब्रॉडगेज लाईन का निर्माण शुरू किया जाये जिसका शिलान्यास तत्कालीन रेलमंत्री ने किया भी था, परन्तु वह आज तक पूर्ण नहीं किया गया है।
4. कालका-शिमला लाईन पर रेल कार सेवा को बढ़ाया जाये।
5. शिमला में बनाया गया " मलखू संग्रहालय " को अधिक आकर्षक बनाया जाये।
6. कालका-शिमला लाईन पर कुछ और रेलवे स्टेशनों को पुनः बहाल किया जाये।
7. कालका-शिमला लाईन को पर्यटकों के आकर्षण हेतु योजनाएं बनाई जाये ताकि इस "विश्व धरोहर" का दर्जा प्राप्त लाईन पर विश्व के पर्यटकों का ध्यानाकर्षित किया जा सके।
8. कालका से हरिद्वार के लिए नई रेल सेवा शुरू की जाये।
9. चण्डीगढ़ से कालका को और अधिक सेवा प्रदान की जाये जो रेल सेवा चण्डीगढ़ में टर्मिनेट हो जाती है उन्हें कालका में टर्मिनेट किया जाये।
10. चण्डीगढ़-अज़मेर (गरीब रथ) जो कि सप्ताह में तीन दिन चलती है और चण्डीगढ़ तक चलती है उसे कालका से चलाया जाये ताकि हिमाचल प्रदेश के लोगों को भी उसका लाभ मिल सके।
11. इसी प्रकार लखनऊ से चण्डीगढ़ रेल सेवा को भी कालका तक बढ़ाया जाये, क्योंकि यह रेलगाड़ी सुबह 9.50 बजे पहुँचती है तथा सांय 8.50 बजे वापिस जाती है।
मैं रेल मंत्रालय का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ कि वर्ष 2011 में माननीय मंत्री जी द्वारा बताया गया था कि घनौली-देहरादून लाईन का सर्वेक्षण पूर्ण कर लिया गया है (वाया नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला-सूरजपुर-कालाअम्ब-पांवटा साहिब) और यह बताया गया था कि 186 किलोमीटर लम्बी नई लाईन के निर्माण की लागत (--) 0.40 प्रतिशत प्रतिफल की दर के साथ 3745.62 करोड़ रूपये आएगी, परन्तु यह आश्वासन के साथ कि उक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट की जांच की जा रही हैं- अभी तक कोई भी कार्यवाही नज़र नहीं आ रही है।
अतः मेरा आग्रह है कि रेल मंत्रालय इस ओर ध्यान दे तथा उक्त सभी मांगों पर विचार करके उन पर कार्यवाही करें।
*श्री महेन्द्र सिंह पी. चौहाण (साबरकांठा)- हम सब जानते हैं कि रेलवे विकास की धरोहर है। देश में जहां-जहां से रेलवे गुजरती है वहां-वहां विकास पनपता है।
मेरे संसदीय क्षेत्र साबरकांठा की बात करें तो हमारा क्षेत्र आज भी पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है, क्योंकि रेलवे का ठीक से लाभ न मिलने से आज भी हमारे क्षेत्र में न उद्योगों का विकास हुआ है, न कृषि का, न व्यापार का क्योंकि पूरे क्षेत्र में एक भी रेक पाईंट नहीं है। यात्रियों के लिए न कोई अच्छी रेल सुविधा है, न रेलवे स्टेशनों का विकास हुआ है। हमारे यहां जो रेल सुविधाएं हैं इससे कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
हमारे यहां एकमात्र ब्रॉडगेज रेलवे मोडासा-कपडवंज-नडियाद है, जहां पर चार रेलवे स्टेशन (मोडासा, धनकुटा, बायड डेमाई) स्थापित किये गये हैं। ये चारों रेलवे स्टेशन हॉल्ट स्टेशन है, यानि की "एफ " केटेगरी के हैं। इन रेलवे स्टेशनों पर न बिजली की सुविधा है, न पानी की, न कोई सुरक्षा हेतु गार्ड, न अच्छा प्लेटफार्म। चारों ओर जंगल खड़ा हो गया है। महिला तो क्या कोई अकेला पुरूष भी यहां आने की हिम्मत नहीं कर सकता। सभी स्टेशन शराब, जुआ एवं चोरों का अड्डा बन गये हैं। जब तक इन रेलवे स्टेशनों को अपग्रेडेशन करके पर्याप्त सुविधा नहीं देंगे तब तक कोई यात्री यहां पर आने की हिम्मत नहीं कर पायेगा।
हमारा संसदीय क्षेत्र दो जिलों साबरकांठा तथा अरावली से मिलकर बना हुआ है। इन दोनों जिलों में एक भी रेक पाईंट न होने से पूरा क्षेत्र तकलीफ में है। व्यापारी तथा विशेषकर किसान हैरान-परेशान है। रेक पाईन्ट के अभाव में कृषि के मौसम में जरूरी यूरिया, रासायनिक खाद्य दूसरे क्षेत्रों से सड़क के जरिए आते हैं, जो समय पर तथा सप्रमाण नहीं मिलते हैं। कृषि प्रभावित हो रही है। अतः तत्काल रेक पाईन्ट स्थापित किया जाये।
-- " अहमदाबाद-हिम्मतनगर-उदयपुर " तथा " शामलाजी-मोडासा " रेलवे लाइन का अमान परिवर्तन मंजूर किये पांच साल बीत गये हैं। लेकिन आज तक वित्त के अभाव में काम शुरू नहीं हो पाया। इसलिए तत्काल जरूरी धनराशि उपलब्ध कराके अमान-परिवर्तन का काम शुरू किया जाये।
-- हिम्मतनगर-खेडब्रह्मा रेल लाइन को आबू रोड वाया अंबाजी तक जोड़ने की मांग कई सालों से की जा रही है। इसके लिए जरूरी सर्वे का काम भी पूरा किया गया है, लेकिन इसे स्वीकृत नहीं किया गया है, तो इस काम को तत्काल स्वीकृति दी जाये।
-- हिम्मतनगर-उदयपुर रेलवे लाइन पर स्थापित पुराने रेलवे स्टेशन आज बिल्कुल असंबंधित हो गये हैं। ये रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए उपयोगी नहीं होने से जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है तथा न रेलवे को रेवन्यू मिल रहा है।
-- सभी रेलवे स्टेशनों का रीसर्वे कराके, जो रेलवे स्टेशन अनुपयोगी है उन्हें बंद कराके, गांभोइ, टींटोई, शामलाजी तथा दडेगामडा नए रेलवे स्टेशन स्थापित किये जायें।
*SHRI R. DHRUVANARAYANA (CHAMRAJANAGAR): I would like to take this opportunity to congratulate and convey sincere thanks on behalf of common man to our hon’ble Union Railway Minister Shri Mallikarjun Kharge ji for his commendable effort in presenting a people friendly and pro industry budget.
It is a successful balancing act by which he successfully tried convenience and reach out all corners and all sections of the society to meet their expectations and demands. It became a yet another mile stone budgets of UPA II Government, which always tend to be a growth oriented but not overburdening either common man (passengers) or industry through fare hikes.
Though Kharge ji has spent only 8 months in this ministry but within this short span of time, he has understood both requirements of the Indian Railways and expectations of common man from Railways successfully and in his first attempt itself, he successfully delivered a remarkable budget to meet both the expectations.
Undoubtedly, it is a common man budget. Though there is a demand for resource requirement but our minister cautiously acted and not transferred the burden to the people through fare hike but indeed he committed to provide more people/passenger friendly facilities and acted firmly to make train journeys are more safer.
Indeed he has introduced 72 new trains which connect the country from Kahsmir to Kanyakumari and Goa to Arunachal Pradesh, which inculdes Premium, Express and Passenger trains. He also announced extension 3 trains and frequency of 3 more trains.
He made a path breaking decision to politicize the development of Indian Railways development and made a firm decision to announce the establishment to rail Tariff Authority, which make scientifically assessed decisions to support/advise government in fixing of fares and freight.
During this hour, I would like convey the humble request of my constituency people demands, · Request to provide the DIRECT TRAIN between CHAMARAJANGAR and BANGALORE CITY. Currently there are many trains running between BANGALORE CITY to MYSORE. Requests extend this any one train up to CHAMRAJANAGAR. This will indeed help to students, farmers, and patients to get the access to state capital.
· Request to extend the SHIMOGA to MYSORE or SHARWARD to MYSORE up to CHAMRAJANAGAR. This will help farmers to get the access to larger markets located in North Karnataka to sell their agriculture products.
· The direct train between BANGAORE CITY to CHAMRAJANAGAR and extension of DHARWAD to MYSORE train to CHAMRAJANAGAR will generate good revenue to Indian railways both in terms of passenger revenue and also through freight revenue.
· CHAMRAJANAGAR and its surrounding area is known for good natural resources i.e. Granite. Currently transportation of these granite rocks to Mangalore port of Chennai port is happening through by road. New direct trains will substitute the current transportation mode and help to boost up the growth in this part of region.
Finally with this note once again I would like to congratulate him for his commendable job. Also urge him to kindly consider the demands of my constituency people.
*श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): उत्तर प्रदेश का कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ा है । यहां रेलवे विभाग की तरफ से कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है । लखनऊ इलाहाबाद के बीच मानिकपुर से लेकर कुंडा (बाबूगंज) तक मानवरहित चार फाटकों की अति आवश्यकता है । कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी है । मोर्हरम एवं उर्स मेले के ताजिए ले जाने के कारण दुर्घटनाएं हुई । रेलें ट्रेन लेट होती है लखनऊ, इलाहाबाद के बीच बरई रेलवे क्रंसिंग एवं बाबूगंज, मुण्डा तीन स्थानों पर रेलवे समपार, फ्लाई ओवर ब्रिज बनाए जाए । भरवारी एवं सिराथू जनपद कौशाम्बी के मुख्य स्टेशन हैं इन्हें मानक अनुरूप जनपद का जंक्शन स्टेशन बनाया जाए । साथ ही अच्छी-अच्छी ट्रेनों को ठहराव किया जाए जैसे प्रयागराज, दुंतो एक्सप्रेस, राजधानी ट्रेनों का एवं अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव आवश्यक है । मुबई के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाई जाए । मनौरी, भरवारी, सिराथू स्टेशनों के रेलवे क्रासिंग पर फ्लाई ओवर ब्रिजों का निर्माण जल्दी होना चाहिए । " कौशांबी " संसदीय क्षेत्रों में 2 जनपद आते हैं प्रतापगढ़ एवं कौशाम्बी यहाँ आम, अमरूद, केला, आँवला, सब्जियां अनाज के साथ ही खनन में यमुना का बालू है जिसके लिए कुण्डा बाबूगंज मानिकपुर स्टेशन प्रतापगढ़ एवं कौशाम्बी में सिराथू, भरवारी, मनौरी स्टेशनों के बीच मालगोदाम बना कर ढुलाई समान ले आने तथा ले जाने के लिए " ट्रैक " बनाए जाएं तांकि यहां के उत्पादन किए वस्तुओं को बाहर भेजा जा सके ।
*श्री राकेश सिंह (जबलपुर): मैं अपने संसदीय क्षेत्र जबलपुर तथा महाकौशल क्षेत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना जबलपुर गोंटिया ब्रॉडगेज परियोजना की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं । महोदया, लगातार संघर्षों के उपरांत एनडीए सरकार के समय यह परियोजना स्वीकृत की गई थी । किंतु यूपीए सरकार के गठन के साथ ही इस परियोजना की उपेक्षा प्रारंभ हो गई है । महोदया, 511 करोड़ की यह परियोजना पर्याप्त राशि के आवंटन के अभाव में 1100 करोड़ की हो गई है ।
किंतु इसमें सबसे बड़ी रूकावट यूपीए सरकार के समय केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सिवनी से बालाघाट के बीच में पर्यावरणीय स्वीकृति न देना है । मैं लगातार इस संबंध में रेल मंत्री व संबंधित अधिकारियों से मिल रहा हूं । केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रियों से आग्रह किया है किंतु इसे स्वीकृति नहीं मिली ।
मैं पिछले दिनों माननीय प्रधानमंत्री जी से भी मिला था । उनसे भी आग्रह किया कि कृपया इसमें हस्तक्षेप करें और स्वीकृति प्रदान करें क्योंकि लगभग 650 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं किंतु अभी तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला है । मेरा आपके माध्यम से सरकार से आग्रह है कि कृपया तत्काल इस पर निर्णय कर स्वीकृति प्रदान करे ।
साथ ही मेरे द्वारा मेरे संसदीय क्षेत्र की नई ट्रेनों की मांग जो मैंने रेलमंत्री व चेयरमैन, रेल बोर्ड को दी थी उसमें से भी मात्र एक ट्रेन को स्वीकृति दी गई है । शेष मांगें लंबित हैं ।
मेरा आग्रह है कि यूपीए सरकार मेरे संसदीय क्षेत्र जबलपुर के साथ भेदभाव बंद करे । रेल सुविधाओं हेतु हमें लगातार संघर्ष करना पड़ता है जबकि जबलपुर में पश्चिम-मध्य रेल जोन का मुख्यालय है । यह भी हमें श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा एनडीए सरकार के समय मिला था किंतु केन्द्र सरकार द्वारा इस तरह भेदभाव किया जाता है कि मेरे लंबे समय की मांग के पश्चात् गत रेल बजट में जो जबलपुर-यशंवतपुर ट्रेन प्राप्त हुई उसका शुभारंभ भी जबलपुर से सिर्फ इसलिए नहीं किया गया क्योंकि कोई केन्द्रीय मंत्री जबलपुर आने को तैयार नहीं था । इसलिए तीन दिन पूर्व खाली रेक जबलपुर से बंगलौर भेजा गया है जो दुर्भाग्यपूर्ण है ।
मेरी लगातार मांग के उपरांत दो वर्ष पूर्व जबलपुर से नेनी के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन को स्वीकृति प्रदान की गई थी । मेरा आग्रह है कि इसके लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान नहीं किया गया है । केन्द्र सरकार की इस उपेक्षा से जबलपुर सहित संपूर्ण महाकौशल की जनता में आक्रोश है । इसका परिणाम केन्द्र सरकार को भुगतना पड़ेगा ।
*श्री पन्ना लाल पुनिया (बाराबंकी): रेल बजट 2014-15 का मैं स्वागत करता हूं । यह अंतरिम बजट है । कोई किराया वृद्धि या भाड़ा वृद्धि प्रस्तावित नहीं है । मैं रेल मंत्री जी को बधाई देता हूं कि 68 नई गाड़ियां प्रारंभ की गई है, तीन डीमो तथा 4 मीमो गाड़ियों प्रारंभ की गई है जिससे लोगों को राहत मिलेगी। रेल ट्रैफिक प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है जो स्वागत योग्य है । पूर्वोत्तर क्षेत्र को रेल मार्ग से जोड़ा गया है । वैष्णो देवी मंदिर तक रेल जाएगी, स्वागत योग्य है । नई लाईन,डबलिंग, विद्युतीकरण लक्ष्य से ज्यादा हुआ है ।
बाराबंकी में रेलवे पुल बन रहा है । सहयोग के लिए आभारी हूं । दल सराय पर हाल्ट का निवेदन है जिसे स्वीकार किया जाए ।
मैं रेलवे बजट का स्वागत करता हूं, समर्थन करता हूं ।
*श्री गणेश सिंह (सतना): मेरे संसदीय क्षेत्र सतना के इलाहाबाद- मुंबई रेलमार्ग पर लगातार सतना से मुंबई, राजकोट तथा कोटा राजस्थान के लिए नए रेल यात्री गाड़ी चलाई जाये ।
-उचेहरा से मदारौशल, मुरेही से इंटरसीटी, जैतवारा से रीवा दिल्ली का स्टोपेज दिया जाए।
-रीवा से इंदौर चलनेवाली गाड़ी को प्रतिदिन किया जाये ।
- सतना स्टेशन में टर्मिनल सुविधा उपलब्ध करायी जाये ।
- चितहरा, खुरहा, जैतवारा हाटी, कैसा बगहांरा सकटिया मैहर मदनपुर, धुनबादा , अमददा मुरेही स्टेशनों में यात्री सुविधाएं बढ़ायी जाए ।
*श्री राधे मोहन सिंह (गाज़ीपुर): गाजीपुर शहर में गंगा नदी पर ताड़ीघाट से गाजीपुर के बीच गंगा नदी पर पुल बनवाना जनहित तथा सामरिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है । एक तरफ मुख्य लाइन मुगलसराय हावड़ा को जोड़ेगी तथा पिलदार से मऊ और गोरखपुर तक जोड़ देगी ।
अनुरोध है कि गाजीपुर में गंगा पर रेलवे पुल और गाजीपुर को मऊ को जोड़ा जाए ।
*विजय बहादुर सिंह (हमीरपुर, उ.प्र.): आज रेलवे बजट में बुन्देलखण्ड में झांसी मण्डल (एनसीआर) से मानिकपुर रेलवे लाइन को दोहराकरण और बिजलीकरण की मांग में कुछ नहीं दिया ।
आर राठ, महोवा जालौन और हमीरपुर में बरीपाल के पास रेलवे लाइन को लाने में कुछ भी कदम नहीं उठाए हैं ।
उपरोक्त मांगों को स्वीकृत करें ।
* DR. SANJAY JAISWAL (PASCHIM CHAMPARAN): In my west Champaran Constitutency though Raxaul Adapur line is complete and still it’s not being inaugurated. No new train has been given to Champaran.
*श्री मिथिलेश कुमार (शाहजहांपुर)- मैं सरकार का ध्यान अपने लोकसभा संसदीय क्षेत्र (शाहजहांपुर, उ0प्र0) की कुछ निम्न समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ-
1. मीरापुर कटरा व तिलहर दोनों स्टेशन पर घोर अंधेरा रहता है जिस कारण शाम ढलते ही हजारों महिलाएं उक्त रास्ते से निकलते समय स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। कृपया प्रकाश व्यवस्था तथा सौन्दर्यकरण कराया जाये।
2. तिलहर रेलवे स्टेशन से शाहजहांपुर की ओर तिलहर से निगोही मार्ग वाले फाटक पर (उपरिगामी पुल) का निर्माण कराना।
3. शाहजहांपुर से पीलीभीत छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित कराना आवश्यक है।
4. गाड़ी सं. 12233 (लखनऊ ए.सी. एक्सप्रेस) अप/डाउन का शाहजहांपुर स्टेशन पर ठहराव।
5. गाडी सं. 11271 अप/डाउन का शाहजहांपुर स्टेशन पर ठहराव।
6. गाड़ी सं. 14018/14019 अप/डाउन का सद्भावना एक्सप्रेस को मीरानपुर कट्टा रेलवे स्ठेशन पर ठहराव।
7. गाड़ी सं. 14369 अप/डाउन त्रिवेणी एक्सप्रेस व 13307 (गंगा सतलुज एक्सप्रेस) अप/डाउन का तिलहर स्टेशन पर ठहराव।
8. गाड़ी सं. 15011 अप/डाउन को आन्झी शाहबाद रेलवे स्टेशन पर ठहराव।
*श्री गोरखनाथ पाण्डेय (भदोही): , वर्ष 2013-14 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें (रेल) पर चर्चा में मैं निम्नलिखित मांगें तथा सुझाव देना चाहता हूं । मेरा क्षेत्र भदोही उ0प्र0 की कुछ समस्या तथा मांगें हैं कृपया इन्हें स्वीकृत करने का कष्ट करें ः-
1. वाराणसी-इलाहाबाद वाया ज्ञानपुर रोड़ माधोसिंह दोहरी रेलवे लाइन जो स्वीकृत है, एक साल में पूरी की जाए ।
2. वाराणसी, नई दिल्ली शिवगंगा एक्सप्रेस ट्रेन अप-डाउन ज्ञानपुर रोड़ स्टेशन पर ठहराव कराने की अनुमति प्रदान करें ।
3. कामायनी एक्सप्रेस ट्रेन सुरियाँवा स्टेशन पर अप-डाउन ठहराव करने की व्यवस्था करे ।
4. परसीपुर स्टेशन पर कुछ ट्रेन अप में रूकती है, डाउन में नहीं तथा कुछ डाउन में रूकती है अप में नहीं । उन्हें अप-डाउन तक रोकने की व्यवस्था करे ।
*श्री रामसिंह कस्वां (चुरू)- अंतरिम रेल बजट के संबंध में मैं अपने क्षेत्र की कुछ रेल संबंधी समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं। सीकर-सालासर नोखा, सरदार शहर- हनुमानगढ़, चूरू-तारानगर-नोहर, भिवानी-पिलानी-चूरू, सूरतगढ़-सरदार शहर-तारानगर-सादुलपुर, सरदार शहर-गोगामेड़ी-सिरसा नई रेल लाइन डालने की मांग काफी समय से की जा रही है उक्त लाइनों का सर्वे भी हो चुका है, लेकिन इसके निर्माण के संबंध में कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। इसका बजटीय प्रावधान किया जाए। हिसार से भादरा (राजस्थान) नई रेल लाइन डालने की मांग काफी समय से की जा रही है। यह इस क्षेत्र के लिए महत्वपपूर्ण रेल लाइन होगी। इसके डलने से हरियाणा, राजस्थान के क्षेत्र को बहुत बड़ी रेल सुविधा मिलेगी। उत्तर-पश्चिम रेलवे में सादुलपुर-हनुमानगढ़, रतनगढ़-सरदार शहर, लोहारू-सीकर आमान परिवर्तन का कार्य चालू है, काफी समय से रेलगाड़ियां बंद हैं इस कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए। चूरू-सीकर-जयपुर रेलमार्ग के आमान परिवर्तन की स्वीकृति प्रदान करते हुए बजटीय प्रावधान किया जाए। सादुलपुर-हनुमानगढ़ खण्ड पर नोहर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। प्लेटफार्म नं. 2 की ऊंचाई काफी कम है, सवारियों को उतरते-चढ़ते समय कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है। अतः इस प्लेटफार्म का निर्माण भी पूरी ऊंचाई के साथ किया जाए। इसी तरह भुकरका रेलवे प्लेटफार्म का निर्माण भी पूरी ऊंचाई के साथ किया जाए। इसी खण्ड के तहसील भादरा रेलवे स्टेशन के दक्षिण-पूर्व साइड में सी 64 समपार को बंद कर दिया गया है, इससे शहर के नागरिकों को बहुत भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे लाइन शहर के बीचों-बीच से होकर गुजरती है। अतः उक्त समपार को पूर्व की भांति यथावत पुनः चालू किया जाए या इसके स्थान पर रेलवे अंडरब्रिज का निर्माण किया जाए। रतनगढ़-सरदार शहर आमान परिवर्तन का कार्य चालू है। यह रेल लाइन शहर के मध्य से होकर गुजर रही है, इसे बाहर करने की मांग काफी समय से की जा रही है। मेरी मांग है कि इस रेल लाइन को शहर से बाहर किया जाए। मेरे संसदीय क्षेत्र में काफी स्थानों पर रेल अंडरब्रिज के निर्माण को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। सैंकड़ों वर्षों के कैटोनी रास्ते-खेतों के रास्ते बंद होने जा रहे हैं। मेरी मांग है की इन रास्तों के स्थान पर अंडरब्रिज का निर्माण किया जाए।
जोधपुर-दिल्ली-सराय रोहिल्ला सुपर फास्ट गाड़ी को नियमित करते हुए इसका विस्तार हरिद्वार तक किया जाए जिसकी मांग काफी समय से की जा रही है। रेवाड़ी-बीकानेर साधारण सवारी गाड़ी के चालू करने की मांग काफी समय से की जा रही है, इसे भी चालू किया जाए। बांद्रा-चूरू-हिसार-जम्मूतवी, जैसलमेर-हावड़ा गाड़ी को प्रतिदिन किया जाए। इसके अतिरिक्त भी मैंने व मेरे क्षेत्र के निवासियों ने काफी गाड़ियों के संचालन की मांग की हुई है, संबंधित मंत्री महोदय व अधिकारियों को काफी ज्ञापन भी दिये गये हैं। उन गाड़ियों को भी चालू किया जाए।
पिछले रेल बजट में घोषित जोधपुर-कामाख्या एक्सप्रेस साप्ताहिक को अविलम्ब चालू किया जाए। गजसिंहपुर-पदमपुर-गोलूवाला-रावतसर-गन्धेली-साहवा-तारानगर-ददरेवा-सादुलपुर नई रेल लाइन डालने का सर्वे किया जाये।
*श्री बालकृष्ण खांडेराव शुक्ल (वडोदरा): मैं सरकार से दरख्वास्त करता हूं, कि वड़ोदरा-दिल्ली और वड़ोदरा- मुंबई के लिए नई ट्रेन की सुविधा प्राप्त कराई जाए ।
*SHRI PRASANNA KUMAR PATASANI (BHUBANESWAR): I would to like to mention that no budgetary allocation is made for the state of Odisha. I have been drawing the attention of the House repeatedly pertaining to the only linking railway line Kurda-Bolangir from Khurda to Bolangir. It goes through KBK, the most undeveloped districts of Odisha. This is the only railway line which goes through adivasi areas, backward areas and hilly areas of the state in the country. The congress government is highly neglecting to sanction good sums of amount and ignoring our state, whereas the state is patronizing the railway revenue which is collected from our state worth16,000 crores of rupees per annum to the centre. But the centre is only sanctioning 700 to 800 crore rupees to the state in the railways sector. The centre is totally ignoring us. Nowhere in the country it has happened. Ask the Chief Minister of state. Hon’ble Navin Patnaik who has sanctioned 50% of money from state exchequer for rail development and also free land and is not charging anything to the centre. Despite of that, no money is sanctioned in this budget.
I have been appealing through my submissions, through my talks for the metro which is already approved. But no survey work is started to avoid the traffic congestion. My appeal was for the metro from Choudwaar to Cuttack from Cuttack to Bhubaneshwar, from Bhubaneshwar to Khurda and Jatni, from Jatni to Puri and konark. This metro can promote the tourism and traffic congestion would be avoided in the capital of Odisha, Bhubaneswar. I would like to draw the attention of the Minister to take immediate action on war footing to promote our state and bring it out of economical disaster.
*SHRIMATI POONAM VELJIBHAI JAT (KACHCHH): In my constituency the Kachchh of Gujarat State, the railway line from Bhuj to Naliya has been allocated fund but it has not been released since last three years. The frequency of trains like AC train between Mumbai and Bhuj has to be increased from three days to seven days. The demands for introduction of train from Punjab to Bhuj have not been accepted.
*DR. RATNA DE (HOOGHLY): I would be raising some of important points concerning my State, West Bengal.
New Railway Minister, Shri Mallikarjun Kharge immediately after taking over the reins of the Ministry has hiked the fares of railway passengers by 20%. After that too, there has been efforts to burden the railway passengers. This is unheard of in the annals of history of Railways in the country. As far as I am concerned it is adding salt to injury as poor, needy and downtrodden are already reeling under acute and constant rise in the prices of essential goods, petroleum products.
There has also been efforts to hike fares of Tatkal charges, reservation and cancellation charges. I would urge the hon. Minister to reduce the Tatkal charges.
I have been raising issues of my constituency and my State. West Bengal for over 4 years. Still many grievances are left to be addressed.
More and more trains are required on emergency basis. I have made in my speeches during the discussions on Railway Budget and through my communications to the Railway Minister. I would strongly urge and request the hon. Minister to look into those aspects for early implementation.
More companies of women RPF personnel and another 8 companies should be formed with a view to strengthen the security of women passengers.
Efforts should be made to ensure that 10% RPF vacancies are filled up by women for whom the same is reserved.
Efforts should also be ensured that freedom fighters are taken care of considerably for their sacrifice in the past. When they approach the Railway authorities for renewal of passes, they should be helped out of the way.
More allocations should be made for improving stations in West Bengal.
Railway Minister should consider for setting up of new coach manufacturing and maintenance facilities in West Bengal.
More funds should be allocated to the Railway Safety Fund. Needless to add here that funds available in the said Fund is inadequate.
No efforts should be made to increase the fare of Sleeper Class specifically, as common man travel in this category and more than 80 percent travel in this category.
More and more toilets and waiting halls, benches, etc. in major railways stations and small stations should be constructed for the convenience of railway passengers. To achieve this, no efforts should be made by railways to hike passenger fares in the near future.
I would strongly urge the Railway Minister to give utmost importance and priority to the pending projects and ensuring manned level-crossings across the country and ensure its completion early. There should be no unmanned level-crossings in the country. This should be the singular goal.
*श्रीमती सुमित्रा महाजन (इन्दौर): रेल बजट का मैं सख्त विरोध करती हूं । इसलिए क्यूंकि जो बातें इस रेल बजट में कहीं गयी थी इसकी पूर्ति अभी नहीं हुई । मेरे क्षेत्र में इंदौर- पूना गाड़ी का एक फेरा बढ़ाने की मंजूरी पिछले बजट में दी गयी थी आज तक वह गाड़ी नहीं चलायी गयी । इंदौर पूना गाड़ी का स्टॉप चिचवट में करने की मांग भी मंजूर नहीं हुई ।
रतलाम महू- खंडवा गेज कन्वर्शन की मांग रखते हुये रतलाम, फतेहाबाद के बाद महू तक का कार्य तुंत पूरा करें ।
इंदौर जबलपुर गाड़ियों को रीवा तक बढ़ायें । बातें तो अनेक हैं । पुराने चले प्रोजेक्ट इंदौर दाहोद- को पूरा बजट आवंटित होना , महू तक इलेक्ट्रीफिकेशन, लेकिन इस जानेवाली सरकार से क्या अपेक्षा ।
*SHRIMATI SUPRIYA SULE (BARAMATI): I on behalf of my Party support the Railway Budget. I congratulate Hon. Railway Minister and Railway Board for presenting a progressive yet balanced budget. The Budget has received compliments from various sectors of the society since yesterday and I would like to join the masses.
First of all, I would like to thank the Hon. Minister for making justified provisions for all states and regions of our country. I remember Hon. Members of all the parties from Maharashtra had a meeting with Hon. Prime Minister during last budget session and expressed the urgent need to develop infrastructure in the state. I think, this is a beauty of Parliamentary Democracy where we can express our views, government listens, retrospect and takes necessary measures.
In this budget, may it be newly proposed premium trains, new trains proposed new lines and doublings, Maharashtra has got its due share.
a. Mumbai is better connected to North, South and East through new rail lines which are passing through various parts of Maharashtra.
b. Pune – Howrah AC Express is connecting Manmad and Nagpur, Yashwanpur-Jaipur AC Express is connecting pune to western suburbs of Mumbai at Vasai.
c. I am happy that new lines are proposed to be taken up for surveys, such as Pune–Baramati via Saswad, Jejuri and Moregaon; Pune–Ahmadnagar via Kedgaon Kasti; Miraj-Kawthemahakal - Jath-Bijapur; Karad-Kadegaon-Atpadi-Padharpur.
d. Doubling of Pune-Kolhapur; LaturRoad-Kurduwadi, Parbhani-Parli will be taken up.
While we are talking about new surveys and new doubling proposals, I would like mention the status of existing projects in Pune district which are in progress.
a. Pune-Daund Electrificaiton- Though the work is in progress and scheduled date of completion is in 2015, pace of the actual work does not seem to be matching the schedule. Pune being 7th major metropolitan city in the country and Daund emerging fast as a neighboring city, this project has great importance in overall growth of Maharashtra.
b. Pune and the surrounding area is one of the fastest urbanizing area in our country. More and more people are commuting daily from neighboring cities to Pune for their work There is urgent need for declaration of Pune-Lonawala-Daund-Jejuri as a ‘Suburban zone’.
c. There is increasing demand from people to introduce new Shuttle service between Pune-Jejuri/Nira d. With completion of Phaltan-Lonand Section, a circular train service should be started on Pune-Daund-Baramati-Phaltan-Lonand-Pune route.
e. Survey of Hadapsar-Jejuri New line is complete I urge the ministry to sanction the project and start the work as soon as possible.
f. Pune, Daund and Baramati railway station need basic amenities. Daund station need a new platform. New Foot Over Bridge because of its height and construction is divinding Daund city instead of connecting it. Thus we need ramps at this bridge and opening of the old bridge till this work is done.
g. Jejuri is a major pilgrimage in Maharashtra where billion of common people have faith. According to the reports, there are more than 50 lakh people visit the place every year. The temple has 10 festivals in a year where nearly 5 to 7 lakh people visit the place in a day. These are all common people. Considering this high number of pilgrims and commuters, railway facilities at Jejuri are minimal. Though Jejuri is close to busy railway line very few trains have halt at Jejuri. Jejuri station cannot bear the load of commuters and it need major development work. I urge the Hon. Railway Minister and Railway Board to consider Jejuri for special development project as a pilgrimage.
h. Double track with electrification is needed for Daund-Manmad section. i. Mumbai-Pune is the busiest rail route and Pune-Lonawala local service is also very used service by passengers. The route between Pune and Lonawala needs third track to manage the load of passengers.
Maharashtra has still many projects pending for sanction or work is going on.
a. Pune-Nashik and Mhalshej are long pending demands of people from Maharashtra.
b. Mumbai constitutes one third of total passengers of Indian Railway. MUTP projects, elevated corridors, additional track work need to complete on urgent basis.
c. Kokan Railway is been an ambitious project of Railway. Panvel is emerging as gateway for the Kokan region. But, connectivity of Panvel to Mumbai, Pune and other major cities by direct long distance trains is rare. Thus, we need to relook at routs to connect Konkan to major cities in Maharashtra.
The most fascinating part for me of the budget speech is achievements of Railway ministry in last decade under UPA government.
a. May it be newlines, doubling and electrification or rolling stock acquisition; we set steep targets in 11th five year plan. I feel proud to know that we have surpassed the targets in all the sections. Railway has maintained its identity as major factor development.
b. When a region is connected with railway we share a special bond with nature and people of that region. In this regard, Railway’s achievement to connect Kashmir and North-Eastern states gives us the feeling of coming closer to people of this area.
Rail-People a. I like to congratulate all 14 lakh employees of Indian Railways for these achievement. My sincere thanks to them.
b. Railway has done excellent financial management so as to implement the recommendations of 6th pay commission which reflects as Rs.1 lakh crore in the accounts book.
c. There are more million people who work in rail premises may it be vendor or porter. Situation of porters especially in goods transport. Railway should make sure that porters are provided with basic facilities such as shades, drinking water and sanitation by contractors or employers and to make necessary arrangements for these facilities. Finances a. We all are expecting Railway to provide new lines, more trains especially in our areas. I think the whole house will agree that railway to expand and improve its services. We have shown great financial management in these achievements. Passengers fair has been crucial topic discussion as railway is popularly known for providing low cost travel facilities for common people. And thus, any change in this head becomes headline the same day .... I appreciate the step taken by the Hon. Minister to set Rail Tariff Authority.. as he rightly said, ‘Hamane Chilman me Aag Laga Di’.
b. Demand Management through Dynamic Pricing is an innovative instrument proposed by the Hon. Minister. Though it can’t be application for all trains even in long term, but I’m sure it will be handy in financial management and also to provide exclusive services.
c. I hope that more and more states will come forward to partner with Railway in terms of Cost Sharing Arrangements. Giving priority speedy completion of these projects will help strengthening these partnerships bringing in more projects and joining of new states.
d. High Speedy, Semi High Speed and Dedicated Freight Corridors are the projects we are waiting for. Safety a. Rail accidents are a painful reality. I have been constantly talking about railway safety in my last speeches. We all want to see the recommendations of Kakodkar Committee to be implemented fully before it’s too late.
b. I am happy that Hon. Minister recently promised to make Mumbai’s Railway safer by increasing platform height. There are welcome measures proposed in the budget speech. But commitment in term of considerable budgetary allotment to the special head is absent.
c. We were expecting Rail Safety Council/Commission to be independent and effective body and to be separate from operations as recommended by Kakodkar Committee. Basic amenities to passengers :-
a. In last year’s budget speech Hon. Minister mentioned about use of better technology for e-booking. Passengers have responded positively for passengers friendly initiatives.
b. But, basic amenities at railway stations is still a major challenge for Railway. People want clean and hygienic factors. I urge Railway to take the issue on priority and have special drive for basic amenities.
c. Since I remember, passenger trains have one woman coach. In last decades women are playing larger role in the society. More and more women are active in economic activity and obviously number of female passengers have considerably increased. I urge Railway to consider increasing number of women coach for railway. There can be surveys and we can start from most busy trains where women commute daily for work.
Railway is been successful to bring down its operating ratio under 90% gradually.
Railway is getting technologically advanced and financially stronger. I once again thank millions of people working for glorious Indian Railway and Hon. Railway Minister for leading this major sector effectively.
*श्रीमती दर्शना जरदोश (सूरत) : सूरत रेलवे स्टेशन की साल की 150 करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू को देखते हुए और वर्ल्ड क्लास की घोषणा होने के बाद भी सूरत में डी.आर.एम. ऑफिस एवं सूरत को डिवीजन बनाने की मांग को स्वीकार नहीं किया जाता है तो कृपया इस पर तुंत अमलीकरण किया जाये एवं सूरत स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 के ऊपर कोच इंडीकेटर एवं कोच डिस्पले तुंत लगाया जाये। तदुपरात, सूरत के टूटे-फूटे प्लेटफर्मा नंबर 2 व 3 की तुंत मरम्मत की जाये।
मेरे संसदीय मत क्षेत्र सूरत रेलवे स्टेशन की हर रोज की 50 लाख से ज्यादा आय देने वाला सूरत रेलवे स्टेशन पर, जो देश की वी.वी.आई.पी. ट्रेन कहलाती है, (12951-52/ 12953-54) रूकती हैं, उनके स्टॉपेज के लिये रेलवे बोर्ड अगर पॉलीसी बदल सकता है तो निम्नलिखित संपर्कक्रंति ट्रेनों के लिए भी पॉलीसी में बदलाव करके सूरत में स्टॉपेज देकर सूरत के साथ न्याय करें-
ट्रेन नंबरः(12907-08 बान्द्रा-निजामुद्दीन, 12431-32 तिरूवनन्तपुरम्-निजामुद्दीन, 12217-18 कोचीवली-चण्डीगढ़, 12449-50, मडगांव-निजामुद्दीन) वापी से भरूच के बीच के औद्योगिक विकास को देखते हुए मुंबई की तरह हर आधे घंटे में मेमु या डेमु ट्रेन दौड़ानी चाहिये।
सूरत स्टेशन से ट्रेन एवं यात्री ट्रैफिक कम करने हेतु निम्नलिखत ट्रेने सूरत से शुरू होकर/ सूरत स्टेशन पर आकर पूर्ण होने वाली ताप्ती लाईन की ट्रेनों को उद्यना स्टेशन से शुरू करके वहां ही पूर्ण किया जाये, जिससे कि इन ट्रेनों में जाने वाले यात्रियों को सूरत आना न पड़े और उनका पैसा एवं समय का बचाव हो सके एवं सूरत रेलवे स्टेशन प्रशासन को इन ट्रेनों के कारण ऑपरेटिंग एवं एक्जामिन तथा एडमिनिस्ट्रेशन की जो गंभीर समस्या रहती है वह दूर हो सके एवं उद्यना स्टेशन का विकास और अधिक हो सके।
ट्रेन नंबरः 19047-48/12945-46/59051-52/59013-14/59075-76/59077-78/59025- 26/13425-26/22827-28/19053-54.
सूरत शहर में गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में रहने वालों की भारी जनसंख्या को देखते हुए सूरत-महुवा (19025-26) ट्रेन को सप्ताह में एक दिन के बजाए हर रोज चलाई जाये।
ताप्तीगंगा एक्सप्रेस (12945-46) एवं सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस (19047-48) को भी यात्रियों की अतिशय भारी भीड़ एवं बारह मास प्रतीक्षा की लंबी सूची को देखते हुए सूरत से यह ट्रेन हर रोज चलाई जाये।
मुंबई की लोकल ट्रेन की तरह पश्चिम रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेन एवं सुपर फास्ट ट्रेनों में रात के समय कोच के अंदर अगला स्टेशन कौन-सा आएगा एवं प्लेटफार्म की दिशा का इलैक्ट्रॉनिक डिस्पले एवं माईक की घोषणा कोच के अंदर की जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र में औद्यौगिक दृष्टि से अतिविकसित कीम रेलवे स्टेशन पर लोकशक्ति एक्सप्रेस (19143-44) एवं देहरादून एक्सप्रेस (19020-19) को स्टॉपेज देना चाहिए तथा सायण रेलवे स्टेशन पर गुजरात एक्सप्रेस (19011-12) एवं बलसाड़-दाहोद इन्टरसिटी (12929-30) को स्टॉपेज देना चाहिए।
उत्राण रेलवे स्टेशन पर करंट टिकट की एक और खिड़की खोली जाए एवं एफ.ओ.बी. मंजूर किया जाए तथा ट्रेन नंबर 19011-12, उ19215-19216 को उत्राण पर स्टॉपेज दिया जाये।
गुजरात का विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर जहां बसा हुआ है, वहां से उत्तर भारत की ओर जाने के लिए कोई और ट्रेन की सुविधा नहीं है। अतः यह यात्रा धाम से उत्तर भारत की ओर जोने के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा देनी चाहिए।
गुजरात के सूरत से पश्चिम बंगाल की ओर जाने के लिए सिर्फ 2 ट्रेन हैं वह भी आगे से आती है। अतः सूरत से पश्चिम बंगाल के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा शुरू करनी चाहिए एवं सूरत शहर में उत्तर भारत की जनसंख्या को देखते हुए सूरत से उत्तर भारत के लिए नई ट्रेन जल्द-से-जल्द देनी चाहिए।
बांद्रा-पटना (19049-50) जो सप्ताह में 1 दिन चलती है, उसे उत्तर भारतीयों की जनसंख्या को देखते हुए हर रोज चलाया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल का अधिकतम विस्तार गुजरात में है, इस विषय को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे का मुख्यालय अहमदाबाद में जल्द-से-जल्द दिया जाना चाहिए।
16733-34 जोधपुर-चैन्नई/16125-26 ओखा-रामेश्वरम् हर रोज दौड़ाई जाये।
मुंबई सेन्ट्रल एवं बांद्रा टर्मिनस से निम्नलिखित ट्रेनों में सूरत स्टेशन के लिए यात्री द्वारा करंट टिकट मांगने पर तंत्र द्वारा ऐसा जबाव दिया जाता है कि सूरत रीमोट स्टेशन है और सूरत स्टेशन पर मुंबई से आने वाली कुछ ट्रेनों के आने समय मध्यरात्री का होने की वजह से सूरत ऑड टाइमिंग का स्टेशन है ऐसा कहकर करंट टिकट नहीं दिया जाता है। ट्रेन नंबर 12955, 12903, 12925, 12901, 19005, 12927, तो कृपया इन ट्रेनों में सूरत स्टेशन के लिए करंट टिकट जारी की जाये।
निम्नलिखित ट्रेनों में यात्रियों की मांग को देखते हुए जनरल कोच (बिना आरक्षण वाले कोच ) बढ़ाने चाहिये।
(1) 12929-12930, (2) 12935-12936, (3) 19059-19060, (4) 19113-19114, (5) 19023-19024, (6) 19019-19020, (7) 113-114, (8) 125-126, (9) 177, (10) 175, (11) 249-250, (12) 239-240, (13) 69141-69142.
*डॉ. किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी (अहमदाबाद पश्चिम): इंटरिम रेल बजट में, मैं अपने क्षेत्र अहमदाबाद एवं गुजरात के लिए कुछ मांगें रखता हूँ ।
1. दिल्ली एवं उत्तर भारत की ओर जानेवाली और आनेवाली सभी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को साबरमती रेलवे स्टेशन पर स्टोपेज दिया जाए ।
2. मुंबई एवं दक्षिण भारत जानेवाली एवं आनेवाली सभी एक्सप्रेस तथा सुपरफास्ट ट्रेनों को स्टोपेज मणिनगर रेलवे स्टेशन पर दिया जाए ।
3. साबरमती रेलवे स्टेशन को टर्मिनल स्टेशन घोषित करके विकास किया जाए ।
4. साबरमती रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म रेनोवेट किया जाए तथा पूरी लंबाई का प्लेटफार्म शेड बनाया जाए ।
5. साबरमती रेलवे स्टेशन पर अभी-अभी अहमदाबाद-दिल्ली राजधानी ट्रेनों का स्टोपेज दिया गया है । मेरी मांग है कि राजधानी ट्रेन अहमदाबाद से दिल्ली जाते वक्त प्लेटफार्म नंबर एक पर स्टॉपेज दिया जाए ।
6. साबरमती रेलवे स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाए, जो सभी प्लेटफार्म को जोड़ सके ।
7. साबरमती रेलवे स्टेशन दोनों ओर ईस्ट तथा वेस्ट होने की बजह से मुसाफिरों को आने में असमंजस होता है और कई मुसाफिर ट्रेन मिस करते हैं ।
इसी के लिए मेरा सुझाव है कि साबरमती रेलवे स्टेशन के ईस्ट तथा वेस्ट को नया अधिकारिक रूप से नाम दिया जाए ।
*श्रीमती ज्योति धुर्वे (बेतूल): अपने संसदीय क्षेत्र की गंभीर समस्या का जिक्र करते हुए मैंने कुछ ट्रेनों की ठहराव की मांग की थी जो अत्यंत मेरे क्षेत्रवासियों के लिए अति-आवश्यक है । आपसे विश्वास करती हूं कि माननीय मंत्री जी के द्वारा मेरे इस मांग को पूरा करेंगे, ऐसा आशा करती हूं ।
1. नागपुर से चलकर इंटरसिटी आती है । उसे भोपाल तक आगे करने की मांग करती हूं ।
2. जबलपुर-नागपुर को घोड़ाडोंगरी ठहराव करने की मांग करती हूं ।
3. ताप्ती गंगा को हरदा रूकवाने की मांग करती हूं ।
4. स्वर्णजयंती को आमला रूकवाने की मांग करती हूं ।
5. भूसावल पेंसेजर को टिमरनी में रूकवाने की मांग करती हूं ।
6. आमला शटल को इटारसी तक चलवाने की मांग करती हूं ।
हरदा-बैतूल रेलवे नई लाइन जोड़ने की मांग करती हूं ।
*SHRI GANESHRAO NAGORAO DUDHGAONKAR (PARBHANI):I would like to express my gratitude to the railway minister for announcing policy decision of taking survey of doubling the line of Parbhani-Parli and Latur Road-Kurudwadi.
I also congratulate Hon’ble Railway Minister for the decision of survey of doubling of above rail line as the Hon’ble Railway Minister has best known the ground realities of our region as he is also from our old Hyderabad state. But I would like to place on the record, Parbhani-Mudkhed rail line is used 170% at present & few more trains are announced in this budget. The burden of running the trains on this track would increase of their capacity which would result maintenance of track, thereby slowing down the speed & trains behind the scheduled which would cause time loss & expenses to ex-chequer.
I therefore appeal to increase the allocation (Minimum 50 crore) to the doubling of Parbhani-Mudhkhed track which would complete some part of work.
I further would like to know the status of schemes announced in prescending budgets accounced by then railway ministers, about the completion of ‘Adarsh Station’ at Parbhani (Jn.), Purna (Jn.) and Jalna and ‘Modern station’ at Sailu, Partur’ Pokharni (Nr.) and Gangakhed and what’s step have been undertaken for the completion of above mentioned projects.
I would like to place an very earnest demand of people of my region for time bound completion of Akola-Khandwa gauge conversion (MG to BG) within a stipulated time and this programme of gauge conversion is necessary for development of the backward region and connect this region to North-East India.
There is need to expedite the Parli-Beed-Nagar rail line to increase the connectivity for convenience of people of my region to Pune & Mumbai.
I would like to emphasise on the fact that injustice is done in my region to Purna (Jn.) where steam loco shed was located as it was a central place to then MG rail line. I come to know that such steam loco shed were also present at Kazipeth, Lalaguda, Guntkal, Gutty in South Central Railway but they were subsequently converted in diesel and electric loco shed. On the contrary the steam loco shed at Purna (Jn.), Jalna, Manmad (Jn.), Parli (Jn.) and Akola were abolished and no new diesel loco shed were erracted, this is injustice to this region because these lines are diesel locomotive lines.
The present diesel loco shed (i.e. Kazipeth, Lalaguda, Guntkal and Gutty) are in the zone of electrified lines and far away from the Nanded Division (about 350 km.) Following infrastructure facilities available at Purna (Jn.)
1. Diesel loco shed
2. C & W shop
3. Railway Yard
4. Rest House for officers and running room
5. Railway quarters for employees
6. School
7. Hospital
8. Community Hall Therefore, I would request to consider at least one demand of constructing ultra modern diesel/electric loco shed at Purna (Jn) in Nanded Division.
I demand the Adilabad-Parli and then Nashik (Manmad) electrification as this line is commercial line for transportation of coal to thermal power stations.
As per the MOU with HRD, Kendriya Vidyalaya should be established at Purna (Jn.) as ample railway land is available and thousands of railway employees lived there.
In the last railway budget, Hon’ble Railway Minister has announced the extension of Mumbai-Latur upto Nanded. But I’m pained to inform you that the reason best known to railway administration, the extension is not given to this train up till now. I therefore appeal to Hon’ble Railway Minister that extension to this train should be done as early as possible.
One more train announced in the last railway budget named as ‘Guru Parikrama Express’ is not started yet. I appeal to Hon’ble Railway Minister to look into the matter.
I’m very thankful if Hon’ble Railway Minister has given extension to following trains:
1. Miraj-Parli passenger upto Parbhani (Jn.)
2. Mumbai-Aurangabad Janshatabdi upto Parbhani or Purna (Jn.)
3. Nagarsol-Jalna Demu upto Parbhani or Purna (Jn.) With all the above demands I place before you the earnest demand of the people of my region is that Nanded-Pune express should run daily and one special train should be introduced between Nanded to Mumbai.
I attract the kind attention to the fact that the stations of Dhondi, Singnapur, Ukhali (Dist. Parbhani) and Paradgaon (Dist. Jalna) railway stations remains as it is from establishment of this rail line. I therefore request to Hon’ble railway minister to create block station to the above railway stations.
I request the Hon’ble railway minister to create passenger reservation system facility at the respective post offices PRS to Ghansawangi,, Sonpeth, Mantha and Palam. As these taluka places are far away from nearest rail head.
I would like to attract the attention to the fact that the work of ROB near Gangakhed railway station is going very slowly, kindly expedite the work and at the same time to make the provision of ROB at Marathwada Agriculture University, Parbhani, Manwat Road, Sailu and Partur I would like to attract the attention to the fact the injustice is done with the railway engineers in the allocation of grade pay. They demanding increase in the grade pay minimum upto Rs. 4800. As per the sixth pay commission the gangman, the trackman and the railway engineers are in the same category that is group ‘C’. This is injustice to railway engineers and I therefore appeal to Hon’ble Railway Minister to kindly consider the demand of railway engineers.
*SHRI R.THAMARAISELVAN (DHARMAPURI): I am happy that I was able to bring to the notice of the Government concerning various railway proposals during the last four and a half years concerning my Dharmapuri parliamentary constituency, out of whicha few proposals have been implemented and may proposals which are of great public and national interest concerning the railways as narrated hereinafter are yet to be implemented. Therefore, I take this opportunity at the fag end of the present 15th Lok Sabha, to urge upon the Hon’ble Railway Minister of pay his special attention to the following proposal and take up these projects on an urgent basis.
The Hon’ble Minister has agreed to undertake a survey to update Morappur – Dharmapuri rail line providing about 36 kms and the same was announced in the last railway budget for 2013-14. It comes under my parliamentary constituency. This is the long pending demand of the people living in my constituency. If this project is implemented, the people from the headquarter of Dharmapuri district i.e. Dharmapuri town and surrounding towns will be benefited and it would also generage a lot of resources for the Railways as these routes are highly economically viable because of the geographical structures connecting places of importance with regard to religion, commerce and tourism. As directed, the survey has been completed and the report has been sent to the board in the month of june, 2013. The approximate cost estimated now is at Rs. 226 croe. Therefore, it is requested that further steps may please be taken for the speedy commencement of work on the proposed Morappur –Dharmapuri rail line at the earliest.
There is a strong demand for the stoppage of Train No. 16001/16002 Chennai Central - Palani-Chennai Central at Morappur and Bommidi Railway Stations. Since this train is bound for Palani which is a one of the famous pilgrimage centres in Tamil Nadu, pilgrims from this part of Tamil Nadu are quite high and also people going to the capital of Tamil Nadu. In other words, for both ways there will be a good number of passengers from these two stations and this will prove once the stoppage is provided at above places. Therefore, stoppage may please be provided for the said train at above stations. Moreover, the Southern Railway has already sent a recommendation to the Railway Board for providing stoppage for the said train at above places as per a communication No. T 454/VI/MP/SA dated 24.1.2014 to me by the General Manager, Southern Railway.
At present there is no direct train between Bangalore and Rameswaram which runs via Palacode, Dharmapur, etc. Passenger traffic to these places from one end to another is quite heavy considering the importance of these places. Therefore, introduction of a new train between Bangalore-Rameswaram-Bangalore will help to generate more revenue for the railways as well as benefit several thousands of people who often visit these places. Therefore, it is requested that a new train my please be introduced between Bangalore and Rameswaram-Bangalore with stoppage at Marandahalli, Palacode and Dharmapuri Stations at the earliest.
Expedite construction of following rail over-bridges already sanctioned:-
a) Adhiyaman Kottai Railway Gate falling on the Dharmapuri-Salem National Highway (NH-7)
b) Vennampatti Railway Gate in Dharmapuri town
c) Pennagaram Railway Gate (Kumarasamy Pettai Railway Gate)
d) Papparappatty Railway Gate
e) Chinthalpadi Railway Gate
f) Buddireddipatti Railway Gate There is an urgent need to construct these over bridges at above places. All these places fall under Bangalore Division of South Western Railway and under Salem Division of South Railway. The constructions of these over bridges are very essential as public passing through these gates are finding it very difficult to commute. I would also like to inform you that the soil test for the first four rail over-bridges mentioned in item (a) to (d) has been done and it is a matter now between the railways and the state government to sort out the issues and commence the work at the earliest.
There is also need to construct a manned level crossing at Sivanalli under Salem Division of Southern Railways. In the absence of level crossing at Sivanalli, people from more than 30 villages have to take the risk of their lives by crossing un-manned level crossing.
Railway Station at Morappur is an ancient Railway Station under the control of Salem Division of Southern Railways which falls in my constituency. This Station serves the people who are heading towards Chennai and other parts of the country and the State. Hundreds of people visit the Railway station regularly. Dharmapuri district is the most backward district in the State of Tamil Nadu. Due to this backwardness, the people of this district had to move from Dharmapuri to far away places for their livelihood and for better prosperity. However, the trains which are passing this Morappur Station, do not stop over here i.e. Train No. 3351/3352 Tata Nagar-Alleppey-Tata Nagar-Bokaro Express and 2695/2696 Chennai-Thiruvanathpuram, Chennai Express. A stoppage of said trains should be provided.
Another important Railway Station falling in my district is Bommidi. This station also serves the people of both Dharmapuri and Krishnagiri districts. However, this station does not have stoppage which should be provided for train no. 6381/6382 Mumbai-Kanyakumari Mumbai as well as 7229/7230 Sabari Express running between Thiruvanathpuram to Hyderabad via Tirupati. It is pain and pertinent to mention here that when the Mumbai-Kanyakumari GST Express enters Kerala, it stops at all stations in Kerala, whereas it does not have a stoppage at many important stations in Tamil Nadu.
Stoppage of train intercity running between Bangalore-Ernakulam-Bangalore (12677-12678) and Mysore-Mayiladuthurai—Mysore (16231-16232) at Palacode has been a long pending demand of the people of this area which is one of the biggest taluks in the Dharmapuri District. Palacode is a big commercial centre having sugar mill, etc, for a stoppage of above train at Palacode. Being a big commercial centre, the movement of people from here to many places across the state and other parts of the country is quite high. More-over, passenger traffic to industrial towns like Coimbaotre, Tirupur, etc from here is quite high. Therefore, if a stoppage is allowed for this train at Palacode, both the people and the railways will benefit immensely. Therefore, stoppage at Palacode for this train be provided.
Dharmapuri being close to Bangalore, the capital of Karnataka, passenger traffic to and fro (Dharmapuri-Bangalore-Dharmapuri) is quite high as in the case of traffic to all other state capitals in the country from its neighbouring areas. Presently the said Passenger train only plying between Bangalore-Hospur-Bangalore. If this train is extended upto Dharmapuri, several hundreds of people can travel daily on both sides from Dharmapuri to Bangalore and Bangalore to Dharmapuri. Therefore, this train be extended upto Dharmapuri.
I shall be highly grateful if you could kindly look into it and take immediate action to implement the above much needed railway demands of the people of my constituency at the earliest.
*श्री दिनेश चन्द्र यादव (खगड़िया)- रेल बजट 2014-15 पर मैं अपना कुछ सुझाव देना चाहता हू ।प्रत्येक बजट भाषण में मैंने जिन-जिन समस्याओं को उठाया, उसमें किसी भी समस्याओं का निदान नहीं हुआ। हम समझते हैं कि आज के रेल मंत्री पूरे देश के रेल मंत्री नहीं होते बल्कि वे किसी न किसी राज्य एवं क्षेत्र के रेल मंत्री होते हैं। मंत्री के रूप में जब रेलमंत्री, मंत्री के रूप में शपथ लिए होंगे तो वे कहेंगे कि " मैं सत्यनिष्ठा से एवं बिना राग-द्वेष से अपने दायित्व का निर्वहन करूंगा। "पता नहीं वे सत्यनिष्ठा कितना निभाये, लेकिन राग-द्वेष से वे अपने कर्तव्य को जरूर निभाया। "
बिहार राज्य अत्यंत पिछड़ा राज्य है, उसमें नई कुछ देने की बात तो दूर, पन्द्रहवीं लोकसभा के कार्यकाल से पहले के रेलमंत्री द्वारा जो कुछ भी दिया गया था, वर्तमान व्यवस्था में उसे खत्म करने का प्रयास किया गया। आप देखियेगा कि मधेपुरा में ग्रीनफील्ड विद्युत रेल इंजन विनिर्माण कारखाने की स्थापना की स्वीकृति हुई। यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इस पर रेल को विशेष ध्यान देना चाहिए। इस पर 1960 करोड़ रूपए खर्च होंगे, लेकिन इसमें अभी कोई काम भी नहीं हुआ है। जमीन अधिग्रहण हो गयी, लेकिन जमीन देने वाले को अभी तक पैसे का भुगतान नहीं हुआ, अन्य काम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। उसके साथ देश के दूसरे जगहों पर भी इस तरह के कारखाने की स्वीकृति हुई, जिसमें कई तो पूर्ण भी हो गये, लेकिन मधेपुरा विद्युत रेल इंजन कारखाना का काम शुरू ही नहीं किया गया। सहरसा में एक वाशिंग पिट का निर्माण हो रहा है। हमने बार-बार लोकसभ में एवं परामर्शदात्री समिति की बैठक में भी इसकी चर्चा की है। रेलवे बोर्ड के चैयरमेन साहब ने रूचि भी ली थी। इसकी बात भी आगे बढ़ी। इसमें जो पैसा दिया गया, इसमें जो लिंक लाइन है, सिक लाइन और शेड बनना है, क्रेन उसमें लगना है, वह भी नहीं लग सका।
सहरसा बगाली बाज़ार रेलवे ढाला पर रेल रोड ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति वर्ष 1996 में रेलवे बजट में हुई थी, लेकिन उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वह खटाई में पड़ गया। रेल मंत्रालय तो अपने हिस्से की राशि देना चाहता था, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय अपने हिस्से की राशि नहीं दे रहा था और उसके नक्शे का भी फाइनालाइज नहीं हो रहा था। माननीय सांसद श्री शरद यादव ने मुख्यमंत्री से कहकर सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जो राशि देनी थी वह राशि बिहार सरकार अपने कोष से देने पर सहमति हुई तब जाकर नये सिरे से रेल बजट में उसकी स्वीकृति दी गई और उसका शिलान्यास का कार्यक्रम भी तैयार हो रहा है।
खगड़िया से कुशेश्वर स्थान तक बड़ी रेल लाईन निर्माण की स्वीकृति वर्ष 1996 में हुई थी। राशि के अभाव में उसमें चालीस प्रतिशत भी काम नहीं हुआ।
उसी तरह हसनपुरऱ-सकरी बड़ी रेल लाईन निर्माण की स्वीकृति वर्ष 1996 में ही हुई थी। कुशेश्वर स्थान से सकरी तक कार्य तो कराया गया, लेकिन हसनपुर से कुशेश्वर स्थान के बीच मात्र 35 प्रतिशत ही कार्य अब तक हो सका है। उसमें भी राशि नहीं दी जा रही है।
सहरसा-फारविसंगंज एवं सरायगढ़ सकरी आमान परिवर्तन के कार्य की स्वीकृति वर्ष 2004 में हुई थी। यह रक्षा मंत्रालय का डिपोजिट स्कीम है। रक्षा मंत्रालय ने तो राशि दे दी, लेकिन अब तक वह काम पूरा नहीं किया गया। प्रत्येक रेल बजट में यह जरूर कहा गया कि अगले वर्ष तक इस काम को पूरा करा देंगे। पूरा तब तो कराते जब उसमें राशि दी जाती।
सरायगढ़-निर्मली के बीच कोशी नदी पर कोशी रेल महासेतु का निर्माण अब पूरा तक पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2009 के बजट में कहा गया कि 2010 तक इस काम को पूरा करा देंगे। फिर 2010 के बजट में कहा गया कि इसे वर्ष 2011 तक पूरा करा देंगे। यही सिलसिला चलता रहा, लेकिन आज तक वह काम पूरा नहीं हुआ।
मुंगेर-गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल की 1,383 करोड़ रूपए की योजना है। जो राशि दी गयी, उसमें वर्ष 2011-12 के रेल बजट में ही 31-03-2012 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन काम बिल्कुल नहीं हो रहा था। बिहारी के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने राज्य सरकार के कोष से जब राशि देने की स्वीकृति दी तब उसमें कुछ काम बढ़ सका।
मधेपुरा से पुर्णिंया तक के रेल खण्ड वर्ष 2008 में आयी भयंकर बाढ़ के कारण पूर्ण क्षतिग्रस्त हो गया था। इस रेल खंड के आमान परिवर्तन की स्वीकृति बहुत पहले होने के बावजूद भी आज तक इस रेल खंड का काम पूरा नहीं हो सका। इतने दिनों में मधेपुरा से मुरलीगंज तक के काम ही अब तक पूरा हो सका है, आगे भगवान जाने।
हम एक-दो सर्वेक्षण की बात करना चाहते हैं। बिहारीगंज-सिमरी बख्तियारपुर के बीच रेल लाइन का सर्वेक्षण अद्यतन किया जाना था, पिछड़े बजट में पिछड़े क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजना में इसे सम्मिलित किया गया। उसका अद्यतन सर्वेक्षण नहीं हुआ। कुशेश्वर स्थान से सहरसा तक का सर्वेक्षण होना है, राशि दी गई। उसका सर्वेक्षण नहीं हो रहा है। गोगरी-परवत्ता-डुमरिया के रास्ते महेशखुंट-नारायणपुर का सर्वेक्षण पूर्ण नहीं हो रहा है। बरौनी-हसनपुर, बारास्ता-भगवानपुर और चेरिया बरियापुर के बीच रेल लाइन का जो सर्वेक्षण होना है, वह पूरा नहीं हुआ है।
सिमरी-बख्तियारपुर स्टेशन के बगल में जो रेल का संपर्क सड़क है, आश्वासन था कि उसका निर्माण करेंगे, वह काम नहीं हुआ, उसका निर्माण किया जाना चाहिए। सिमरी-बख्तियारपुर में रेक प्वाइंट का निर्माण होना चाहिए। वहां अतिरिक्त प्लेटफार्म भी होना चाहिए।
हसनपुर स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज का निर्माण होना चाहिए और मानसी-सहरसा रेलवे लाइन का दोहरीकरण होना चाहिए।
मेरी संसदीय क्षेत्र खगड़िया में आर.ओ.बी. का निर्माण शुरू है। हम चाहते हैं कि समय-सीमा के अन्दर वह बन कर तैयार हो।
खगड़िया जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण स्टेशन है। वहां यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
खगड़िया स्टेशन के प्लेटफार्म पर पश्चिम भाग में फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया जाय जिसमें स्टेशन से यात्रियों को बाहरी हिस्से में उतरने का भी सुविधा हो।
स्टेशन की साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। पर्याप्त रोशनी की भी व्यवस्था की जाये। यात्रियों के लिए स्टेशन पर स्वच्छ पेयजल और वाटर कूलर की व्यवस्था कराई जाये।
सहरसा-खगड़िया-हसनपुर रोड-समस्तीपुर के बीच सभी स्टेशनों का प्लेटफार्म बड़ी रेल लाईन के मानक के अनुसार ऊंचा एवं लम्बा नहीं है।
खगड़िया जं0 से पूरब फुटओवर ब्रिज के उत्तरी तरफ टिकट बिक्री काउंटर चालू किया जाये।
सहरसा जं0 पर मात्र दो प्लेटफार्म है। यहाँ अतिरिक्त तीन प्लेटफार्म का निर्माण किया जाए।
सिमरी-बख्तियारपुर में रेक प्वाइंट की सुविधा दी जाए।
सिमरी-बख्तियारपुर स्टेशन पर एक और प्लेटफार्म का निर्माण कराया जाए।
हसनपुर रोड पर फुटओवर ब्रिज का निर्माण कराया जाये।
मानसी-सहरसा रेल लाईन का दोहरीकरण किया जाए।
कोशी एक्सप्रेस (15282-15281) का विस्तार दोरम मधेपुरा तक किया जाए।
समस्तीपुर रेल डिवीजन अन्तर्गत खगड़िया जिला मुख्यालय है, यह "ए क्लास " रेलवे स्टेशन हैं यहाँ निम्न गाड़ियों का ठहराव दिया जाये-
(क)गाड़ी संख्या-12424/12423 गुवाहाटी राजधानी, 12436/12435 और 12236/12235 डिब्रूगढ़ राजधानी, (ख)गाड़ी संख्या-15631/15632 गुवाहाटी- जोधपुर, (ग)गाड़ी संख्या-15715/15716 गरीब नवाज एक्सप्रेस, (घ)गाड़ी संख्या-12501/12502 दिल्ली-गुवाहाटी संपर्क क्रान्ति एक्सप्रेस.
मानसी जंक्शन पर सीमांचल एक्सप्रेस का ठहराव दिया जाये।
समस्तीपुर रेल डीवीजन के हसनपुर रोड स्टेशन पर गाड़ी संख्या 12523/12524 न्यू जलपाइगुड़ी सुपर फास्ट एक्सप्रेस का ठहराव दिया जाये।
सहरसा-समस्तीपुर बाया हसनपुर रोड के बीच रात्रि में पैसेंजर गाड़ी चलाई जाये।
सहरसा से पटना के बीच रात्रि में एक्सप्रेस गाड़ी चलाई जाये।
हरिहरनाथ एक्सप्रेस-आमान परिवर्तन के पूर्व सहरसा से सोनपुर (बाया हसनपुर रोड-समस्तीपुर) तक हरिहरनाथ एक्सप्रेस चलती थी, रेल यात्री को राजधानी पटना जाने में काफी सुविधा थी, उसे पूर्व की तरह पुनः चलाई जाये।
गाड़ी संख्या 12553/12554 नई दिल्ली-बरौनी-वैशाली एक्सप्रेस का विस्तार बरौनी से सहरसा जंक्शन तक किया जाये।
रेल यात्रियों की कठिनाई को देखते हुए सहरसा जंकशन से आने और जाने वाली निम्न गाड़ियों का परिचालन प्रत्येक दिन किया जाये।
(क)गाड़ी संख्या-15283/15284 जानकी एक्सप्रेस (तीन दिन) (ख)गाड़ी संख्या-12203/12204 गरीब रथ एक्सप्रेस (तीन दिन) (ग)गाड़ी संख्या-14603/14604 जनसाधारण एक्सप्रेस (एक दिन) आनन्द विहार से मुजफ्फरपुर गाड़ी संख्या 12211 तथा 12212 गरीब रथ एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाया जाये।
सहरसा से अमृतसर प्रतिदिन चलने वाली जनसेवा एक्सप्रेस के किसी भी डिब्बे के शौचालय के खिड़की में शीशा नहीं लगा है एवं उसमें पानी भी नहीं रहता।
MADAM SPEAKER: Hon. Members, under the prevailing circumstances, it is not possible to continue the discussion. I shall now put the Resolution to the vote of the House.
The question is:
“That this House approves the recommendations contained in Paras 76, 77, 80, 81, 82, 83, 84, 85, and 86 of the Sixth Report of the Railway Convention Committee (2009), appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues, etc., which was presented in both the Houses of Parliament on 8th May, 2013.” The motion was adopted.
DEMANDS FOR GRANTS ON ACCOUNT (RAILWAYS), 2014-15 MADAM SPEAKER : Motion moved:
“That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on Account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2015, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.” MADAM SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants on Account (Railways) for 2014-2015 to the vote of the House.
The question is:
“That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on Account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2015, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.” The motion was adopted.
… (Interruptions)
DEMANDS FOR SUPPLEMENTARY GRANTS (RAILWAYS), 2013-14 MADAM SPEAKER: Motion moved:
“That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2014, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 8, 10, 13, 15 and 16.” MADAM SPEAKER: I shall now put the Supplementary Demands for Grants (Railways) for 2013-2014 to the vote of the House.
The question is:
“That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2014, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 8, 10, 13, 15 and 16.” The motion was adopted.
… (Interruptions)