Lok Sabha Debates
Regarding Constitution (Amendment) Bill, 1999 Regarding Reservation Of Seats ... on 6 May, 2003
11.03 hrs. Title: Regarding Constitution (Amendment) Bill, 1999 regarding reservation of seats for women.
श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, हम नहीं चाहते कि सदन में किसी तरह का व्यवधान डाला जाये। अब सदन के माननीय सदस्य विश्वास करें या न करें लेकिन …( व्यवधान)मैं एक शांतप्रिय एवं अनुशासित सदस्य हूं और किसी तरह की कोई अशांति नहीं चाहता। हम इस सदन के सभी माननीय सदस्यों की भावनाएं यहां व्यक्त कर रहे हैं। हम महिला आरक्षण बिल के खिलाफ नहीं हैं। …( व्यवधान)आप कुछ भी कहते रहिए लेकिन जरा अपने दिल से पूछिये। हमें पता है कि आप क्या चाहते हैं इसलिए ज्यादा बहस मत कीजिए।
हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हम महिला आरक्षण के सबसे ज्यादा प्रबल समर्थक हैं लेकिन वर्तमान विधेयक के स्वरूप के हम खिलाफ हैं। अगर यही विधेयक संशोधित होकर आये तो हम इसका सबसे पहले समर्थन करने वालों में से होंगे। इस विधेयक के बारे में हमारी पहले भी यही राय थी कि हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ने में जिन वर्गों का सबसे ज्यादा समर्थन और भूमिका रही है, आज उनको इस विधेयक के माध्यम से वंचित किया जा रहा है, जैसे किसान हैं, वह चाहे किसी भी जाति का किसान हो, मध्यम वर्ग के लोग हैं, उन्होंने आजादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा भूमिका निभाई है, जोखिम उठाया है। आज भी हिन्दुस्तान की सीमा की रक्षा करने वाले यही मध्यम वर्ग के लोग हैं, यही किसान हैं, यही मजदूर हैं।
आज हम चाहते हैं कि इस विधेयक में पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक या दलित वर्ग की महिलाओं का अलग से आरक्षण हो। उसके साथ-साथ हम यह भी चाहते हैं कि किसानों के लिए भी आरक्षण हो, चाहे वह किसी भी जाति का हो। इनमें बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपर कॉस्ट के हो सकते हैं, ऊंची जाति के हो सकते हैं, लेकिन वे किसान हैं। साधारण परिवार के वे लोग गांवों में बसे हुए हैं। उनकी महिलाओं को इस बिल केे माध्यम से वंचित किया जा रहा है। इस तरह समाज के बहुत बड़े समूह, कम से कम ८५ या ९० फीसदी लोगों को इस विधेयक के द्वारा लाभ से एक साजिश के तहत वंचित कर दिया। दूसरी तरफ रोटेशन इतना खतरनाक है कि जनप्रतनधि और मतदाता का जो रिश्ता होता है, वह सिर्फ क्षेत्र प्रेम ही नहीं, क्षेत्र प्रेम तो होता ही है, लेकिन मैं अनुभव करता हूं कि मतदाता और जनप्रतनधि का रिश्ता जितना गहरा और गर्म होता है, उतना किसी और का नहीं होता। मतदाता चाहते हैं कि हमारे प्रतनधि हमारी आंखों के सामने रहें और हम व्यस्त होते हुए भी चाहते हैं कि अपने मतदाता के बीच जाएं। आप सब लोग भी यही चाहते हैं। अब यह गहरा रिश्ता भी खत्म हो जाएगा। अगर रोटेशन होगा तो आज जो चुनकर आएगा, वह सोचेगा कि हमें अगले साल इस क्षेत्र में नहीं रहना है। वह जनता के सारे काम छोड़ देगा, जनता का कोई काम नहीं करेगा। इससे जनता की उपेक्षा होगी क्योंकि वह क्षेत्र के विकास में रूचि नहीं लेगा।
इस विधेयक में एक नहीं, बहुत सारी खामियां हैं। इसलिए हमारी राय थी कि आज जो विधेयक आना है, उसे संशोधित करके लाया जाए। माननीय प्रधान मंत्री जी से हमारी बहुत सी बातें हुईं। हम नहीं कहेंगे कि यहां उनकी क्या राय है। प्रधान मंत्री जी की राय भी हमसे बहुत मिलती-जुलती हो सकती है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री आज लगता है कि काफी जिद में आ गई हैं, मैंने जैसे कार्य मंत्रणा समति में उनका रुख देखा, लेकिन एक दिन ऐसा भी था जब वह भी हमारी राय से सहमत थीं। चाहे सत्तापक्ष के सदस्य हों या विपक्ष के सदस्य हों, सब अनुशासन से बंधे हुए हैं। आज पूरे सदन की सारी शुभकामनाएं हमारे साथ हैं पूरा सदन हमें मौन समर्थन कर रहा है। इसलिए हम चाहते हैं कि आप इस विधेयक को वापिस लीजिए। हम फिर कहना चाहते हैं कि हम इसे मानेंगे, हमने फैसला किया था कि पार्टियों को कोटा सुनिश्चित किया जाए जो इसका पालन न करे उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए। हम दस फीसदी तक सीमित नहीं रहेंगे. हम दस फीसदी से आगे बढ़ सकते हैं यदि पार्टियों पर कोटा छोडा जाए ।…( व्यवधान)
श्रीमती श्यामा सिंह (औरंगाबाद, बिहार) : रोटेशन होना चाहिए।…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव :हमसे कोई बहन नाराज न हो जाए, रोटेशन होगा तो बहन, आपका अता-पता भी नहीं चलेगा। रोटेशन इतना खतरनाक है कि उससे आपके लिए भी खतरा है। इसलिए लोकतंत्र, जो जनता की शक्ति से चलता है, जो असली जनशक्ति है, लोकतंत्र में जनशक्ति सर्वोपरि है, उसकी इस विधेयक के माध्यम से उपेक्षा होने जा रही है, पूरे लोकतंत्र की उपेक्षा होने जा रही है। इससे समाज में गैर-बराबरी और बढेगी, असंतोष और फैलेगा। इस तरह का विधेयक लाने की क्या जरूरत थी? संशोधित विधेयक पर चर्चा हो। हमने प्रयास किया था और उसमें आम सहमति बना रहे थे तथा उसमें सफल भी हो गए थे। हम चाहते हैं कि इस विधेयक का स्वरूप ऐसा बने जिसमें सबका समर्थन मिले और पूरे सदन की एक राय बने। महोदय, आपने इराक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में जो भूमिका निभाई थी और सबको एक कर दिया था वही मौका फिर आ गया है, आप ऐसी महत्वपूर्ण भूमिका फिर निभा सकते हैं और वर्तमान विधेयक को वापिस करवा कर, संशोधित विधेयक लाएं। हम उसका पुरजोर समर्थन करेंगे वर्ना हमारी मजबूरी है, आज हमें माफ कर दीजिए। हम देश के ९५ फीसदी उपेक्षित, वंचित, आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों, जिनके परिवार की महिलाएं इस विधेयक के माध्यम से वंचिंत होने जा रही हैं उनके लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। हो सकता है कि उसमें हमारे और हमारे साथियों का आचरण अशोभनीय हो जाए। उसे आप माफ कर दीजिए, हमारी आपसे यही प्रार्थना है।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): अध्यक्ष महोदय, यह कोई साधारण विधेयक नहीं है, संविधान में संशोधन करने वाला विधेयक है। ११वीं लोक सभा से इसकी शुरूआत हुई और इस पर बड़ा भारी विवाद है, सभी दलों के बीच आपस में बड़े भारी मतभेद हैं। डा. लोहिया ने कहा था, नर-नारी में समता हो, बराबरी का अधिकार हो। आरक्षण का प्रावधान वंचित लोगों के लिए है। जो महिलाएं ऐसे ही जीतकर आ जाती हैं, उनके लिए आरक्षण का क्या प्रावधान होना चाहिए। इस देश में तो प्रधान मंत्री भी महिला रह चुकी हैं और इस रीजन में पाकिस्तान की प्रधान मंत्री, लंका की प्रधान मंत्री और बंगलादेश की प्रधान मंत्री भी महिला हैं।
इस देश में भी ६-७ पार्टीज ऐसी हैं जिनमें महिला प्रधान हैं। श्रीमती सोनिया गांधी कांग्रेस की प्रधान हैं। कुमारी ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की प्रधान हैं। इसी तरह कुमारी जयललिता जी भी हैं। बिहार में हमारी मुख्य मंत्री महिला हैं। यू.पी. की मुख्य मंत्री मायावती जी भी महिला हैं। जहां बिना आरक्षण के ही महिला प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री बन रही हों, वहां उनके लिए आरक्षण की क्या जरूरत है ? आरक्षण की उन लोगों को जरूरत है जो लोग साधारणत: चुनाव में नहीं आ पाते हैं। महिलाओं के लिए डा. लोहिया कहा करते थे कि दो तरह का वर्ग है। एक वर्ग देवियों का है लेकिन उससे ज्यादा बड़ी संख्या दासियों की है जो असल में वंचित और शोषित हैं। एससीएसटी की महिलाएं, अल्पसंख्यक, पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति की महिलाओं को आज आरक्षण की जरुरत है। महिलाओं के नाम पर इन वंचित, शोषित महिलाओं का हक मारने का काम आपकी अध्यक्षता में नहीं होने देना चाहिए, यह सवाल मैं उठाना चाहता हूं।
श्रीमती गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में यह कमेटी बनी थी। उसने क्लॉज २ में जो अनुशंसा की है, उस पर विचार होना चाहिए। जो वंचित, शोषित महिलाएं हैं, दासी वर्ग की महिलाएं, पत्थर तोड़ने वाली महिलाएं तथा गांव की महिलाएं हैं जो साधारणत: चुनाव में जीतकर नहीं आ पाती हैं, उनको आरक्षण की जरुरत है। लेकिन यह तो महिला के नाम पर हिस्सा मारी के सिवा और कुछ नहीं हो सकता। इसीलिए माननीय सदस्यों की भावना है कि जो वंचित शोषित महिलाएं हैं, उनके लिए आरक्षण का प्रावधान हो, उनको विशेष अवसर दिये जाएं, वंचितों को आरक्षण दिया जाए। ऐसे नहीं कि जो धोखाधड़ी और सीट कब्जा करने तथा घुमाफिरा कर महिला के नाम पर सीट कब्जा करने, राजनीति पर कब्जा करने का षडयंत्र चल रहा है, उसका हम भंडाफोड़ करना चाहते हैं। इसीलिए प्रधान मंत्री ने बार-बार आश्वस्त किया कि हम आम सहमति से राज चलाना चाहते हैं। इस तरह के संविधान संशोधन के लिए कंसेंसस बनाने का प्रयत्न भी किया गया। एक बार बैठक भी हुई ताकि कुछ आम सहमति का रास्ता निकले। चुनाव आयोग ने भी रास्ता सुझाया, महिलाओं के संगठन ने भी रास्ता सुझाया, मुलायम सिंह यादव जी ने बराबर बातचीत के जरिए रास्ता सुझाया कि इस पर आम सहमति निकालने का प्रयत्न होना चाहिए लेकिन बिना आम सहमति के इस सैशन के अंतिम चरण में महिला के नाम पर जो राजनीति हो रही है, इसीलिए उस राजनीति का हम भंडाफोड़ करना चाहते हैं।
अंत में, मैं कहना चाहता हूं कि हम लोग विपक्षी दल हैं। विपक्षी दल परस्पर एक राय से विचार करते हैं लेकिन बाकी इस मसले में हम नहीं जानते कि क्या पेच है जो ये सभी लोग एक ही बात करते जा रहे हैं और इसमें भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी भी साथ हो गए हैं, इसीलिए उसका हम भंडाफोड़ करना चाहते हैं कि यह क्या खेल है, इसमें क्या पेच है और क्या तिकड़म है कि जहां अनेक चीजों में विपक्षी एकता की हम बात करते हैं और विपक्षी एकता होने लगती है तो भाजपा कांग्रेस का तालमेल कैसे हो जाता है? अनेक वर्गों के रिप्रेजेंटेटिव्स को लाभ मिलने जा रहा है, इसीलिए इस देश के दबे हुए, वंचित और शोषित लोग सावधान हो जाओ, इस छल से सावधान हो जाओ तथा इस छल का भंडाफोड़ करने की जरूरत है। इसके लिए हम लोग सदन के अंदर और सदन के बाहर भी,…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अब आप समाप्त करिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : आत्मा की पुकार भी इसमें है।…( व्यवधान)एनडीए क्या है? एनडीए की विपक्ष से आम सहमति बनाने की कोशिश होती। एनडीए के घटकों में आपस में क्या हाल हैं ? समता पार्टी के भाई क्या बोल रहे हैं?
लेकिन जो असली वंचित समाज के लोग है, उनको जब तक आरक्षण का प्रावधान नहीं होगा, तब तक इस विधेयक की सार्थकता सिद्ध नहीं होगी। हम लोगों को कहा जाता है कि हम महिला विरोधी हैं। प्रधान मंत्री जी की शादी नहीं हुई, वे महिला विरोधी हैं या हम लोग हैं। हमने दो-दो महिलाओं को मुख्य मंत्री बनाया है। इसलिए हम इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे। सरकार को चाहिए कि वह कंसेंसस बनाने का प्रयत्न करो और अनुसूचित जाति, जनजाति, दलित वर्ग, पिछड़ी जाति तथा अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए भी इस विधेयक में आरक्षण की व्यवस्था करे।…( व्यवधान) उसके बिना इस विधेयक को यहां न पेश किया जाए और राजनीति का नाश होने से बचाया जाए।
अध्यक्ष महोदय : मैं सदन को बताना चाहता हूं कि इस विषय पर भी मेरे पास कई नोटिसेज आए हैं।
श्री मुलायम सिंह यादव : यह महत्वपूर्ण विषय है इसलिए हर पक्ष की राय आनी चाहिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : रामदास जी, मैं आपको भी इजाजत दूंगा, अभी आप बैठिए। मुलायम सिंह जी, मैं इस विषय पर चर्चा बंद नहीं कर रहा हूं। लेकिन सदन की राय मालूम होनी चाहिए। इस विषय पर मेरे पास कई नोटिसेज हैं और लोगों ने बोलने की इच्छा प्रकट की है कि इस पर चर्चा होनी चाहिए। मैं इतना ही चाहता था कि अभी जो विषय हमारे सामने नहीं है, जब संविधान संशोधन विधेयक सदन में आएगा, उस समय इस पर चर्चा होती तो अच्छा होता, लेकिन अब चूंकि चर्चा शुरू हो गई है इसलिए मैं तीन-चार सदस्यों को, जिन्होंने बोलने की इच्छा प्रकट की है, उनको इजाजत दूंगा। उसके बाद संसदीय कार्य मंत्री जी भी इस पर अपनी बात रखेंगी।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज) : अध्यक्ष महोदय, मैं यही कहना चाहती हूं, जैसा आपने कहा है कि इस सदन को संचालित करने का एक बुनियादी नियम है। जो मोशन सदन के सामने होता है, उस पर पहले चर्चा होती है। जिस समय महिला आरक्षण विधेयक आए, उस समय उसके गुण-दोषों पर जितनी चर्चा करना चाहें, विस्तृत चर्चा करना चाहें, वह कर सकते हैं। इस समय प्रश्न काल के समय उस पर चर्चा करने के कोई मायने नहीं हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : देखिए, जब मुलायम सिंह जी और रघुवंश प्रसाद जी बोल रहे थे तो सबने उन्हें शांति से सुना था इसलिए आप लोग बैठिए। सुषमा जी की राय आपको सुननी पड़ेगी, चाहे आपको अच्छी लगे या न लगे, क्योंकि उनका भी द्ृष्टिकोण है। मैं जो कह रहा था, वही बात सुषमा स्वराज जी ने कही है। लेकिन जिन चार-पांच सदस्यों का नोटिस मेरे पास आया है, मैं उनको बोलने की इजाजत दूंगा।
श्री चन्द्रकांत खैरे।
श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी महिला होने के कारण यह बिल यहां लेकर आई हैं। मैं सुषमा दीदी की बहुत इज्जत करता हूं, उनको मान देता हूं और उनका आदर करता हूं। लेकिन मैं उनको कहना चाहता हूं कि बहुत जल्दी में यह विधेयक लाया गया है। एन.डी.ए. के पार्टनर्स से भी इस बारे में नहीं पूछा गया, उसका जो मुझे दुख है, वह मैं यहां व्यक्त करता हूं। शिव सेना महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। लेकिन आरक्षण कैसे होना चाहिए, इस बारे में शिव सेना प्रमुख आदरणीय बाल साहब ठाकरे ने बार-बार कहा है। इसी कारण हमारी पार्टी ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन दिया था, जिसमें यह मांग की गई थी कि आरक्षण पार्टी बेस पर होना चाहिए। पार्टी तय करे कि किस महिला को हम सीट का आरक्षण देंगे। शिव सेना में सुषमा जी से भी ज्यादा कर्मठ महिलाएं हैं। उनको आगे लाने के लिए निर्वाचन क्षेत्र महिला रिजर्व नहीं होंगे तो वे कहां जाएंगी। इसलिए पार्टी को तय करना चाहिए कि किस महिला को आरक्षण देना है। चुनाव आयोग के साथ जब सभी राजनीतिक दलों की मीटिंग हुई थी, उस समय भी यह विषय सामने आया था। चुनाव आयोग ने भी सुझाव दिया था कि ठीक है महिलाओं को आरक्षण देना चाहिए और यह पार्टी बेस पर होना चाहिए। उसके बाद प्रधान मंत्री जी के साथ भी सभी राजनीतिक दलों की मीटिंग हुई थी। उस समय हमारे आदरणीय मित्र मल्होत्रा जी ने भी इसका समर्थन किया था।
श्री शरद पवार (बारामती): आपका समर्थन किया था ! श्री चन्द्रकांत खैरे : श्री मल्होत्रा जी ने हमारी भूमिका का समर्थन किया था। उस वक्त मुलायम सिंह जी ने पूछा था कि भारतीय जनता पार्टी की भूमिका है या किसकी है, तो इन्होंने प्रधान मंत्री जी की मीटिंग में कहा था कि भारतीय जनता पार्टी की भूमिका है।
श्री मुलायम सिंह यादव : यह सही बोल रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय : इस पार्टी के लोग हर समय सही बोलते हैं।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, your this particular observation should not go on record.
श्री चन्द्रकांत खैरे : यह बिल बहुत जल्दीबाजी में सदन में लाया जा रहा है। बिजनैस एडवाइडरी कमेटी में गत सप्ताह जो विषय तय हुए थे और संसदीय कार्य मंत्री जी ने उस कार्य की सदन से मन्जूरी भी ले ली है। उसके बावजूद भी बिजनैस एडवाइजरी कमेटी की कल मीटिंग बुलाई गई, जबकि पांच दिन के बिजनैस की सभागृह ने मान्यता दे दी थी। महिला विधेयक के बारे में किसी से पूछा नहीं गया। मैं कहना चाहता हूं कि किसके दबाव के नीचे यह सरकार काम कर रही है - आदरणीय सोनिया जी व आदरणीय सोमनाथ चैटर्जी जी के। वे दोनों भी आज सदन में उपस्थित नहीं है। क्या उनके दबाव के नीचे आप काम कर रहे हैं? मैं पूछना चाहता हूं कि आप यह बिल क्यों लाना चाहते हैं? राम मन्दिर के मुद्दे पर या हिन्दुत्व के मुद्दे पर क्या यह लोग हमें सपोर्ट करेंगे?शिवसेना पिछले १९ सालों से आपके साथ हैं, लेकिन हमसे बिना पूछे यह बिल सदन में लाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि महिला आरक्षण पार्टीवाइज होना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो कार्यशील महिलायें आगे आयेंगी, सामाजिक काम करने वाली महिलायें आगे आयेंगी। इसलिए हम आपके माध्यम से सरकार से विनती करना चाहते हैं कि जल्दीबाजी में यह बिल मत लाइए। बिल का प्रारूप-स्वरूप बदल दीजिए और अगले सत्र में इसको पेश करिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, महिला आरक्षण विधेयक के संबंध में हम सदन में चर्चा कर रहे हैं। हम महिला आरक्षण के विरोध में नहीं है। मैं एक बात कहना चाहता हूं कि तीन वर्षों से महिला आरक्षण के संबंध में इस देश में जोरों से चर्चा चल रही है और इस सदन में भी चर्चा हुई है लेकिन हंगामे के बीच बिल पर चर्चा नहीं हो सकी है। यदि मेरी जानकारी सही है, तो मुझे एक कैबिनेट के मंत्री ने बताया है, मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं, कोई बैठक हुई थी, जिसमें यह तय हुआ था…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वे कौन सी पार्टी के कैबिनेट मनिस्टर हैं?
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही कहा है कि मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं। …( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, this is very important. It appears that the Cabinet Ministers of NDA Government divulge Cabinet secrets to their colleagues.
श्री प्रभुनाथ सिंह : प्रियरंजन दासमुंशी जी, मैं कैबिनेट की मीटिंग की बात नहीं कह रहा हूं। पहले आप मेरी बात सुनिए, उसको समझिए, क्योंकि आपकी समझदारी थोड़ी कम हो चुकी है। मैं बताना चाहता हूं कि उस बैठक में यह तय हुआ था कि दल के आधार पर पार्टियों में आरक्षण महिलाओं का हो और उस पर सहमति भी बन रही थी। इस देश में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में हमारे उप-प्रधानमंत्री जी जाने जाते हैं। मैं उनसे एक भावनात्मक निवेदन करना चाहता हूं। उपप्रधान मंत्री जी वह भावनात्मक निवेदन यह है कि विचारों में कभी-कभी भिन्नता होने के कारण सार्वजनिक रूप से हो सकता है कि हमारे जैसे लोग कुछ बोल देते हों, लेकिन सदन में आपके सहयोगी होने के नाते जब कभी भी आवश्यकता पड़ी है, तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों से आगे हम लोगों ने सीना तानकर सरकार के पक्ष में खड़े होने का काम किया है। कल भी उस भूमिका को निभाने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन आज जो चर्चा चल रही है कि कांग्रेस से बात हो गई है, तो कांग्रेस से बात करके आप सदन में इस बिल को तो पास कर सकते हैं, लेकिन मैं एक बात बताना चाहता हूं कि हम *…आपसे एक मित्रवत् रिश्ते का निर्वहन करते हुए आपको सहयोग देने के लिए तैयार है, …* यह रिश्ता बराबर चलने वाला नहीं है।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I strongly object to this. … (Interruptions) The Member must apologise for making that remark. … (Interruptiossns) *Expunged as ordered by the Chair.
Sir, he must apologise.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I will expunge those words from the record.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: मैं उन शब्दों को रिकॉर्ड से निकाल रहा हूं।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have removed those words from the record.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Sir, he is in the habit of using such a language. This is his attitude towards women!… (Interruptions)
Mr. Speaker, Sir, he must apologise for his comments… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Those comments of him are not on record at all.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: आज हम एक महत्वपूर्ण विषय पर बहस कर रहे हैं। मैं चाहता हूं कि ऐसी बहस में शब्दों का अच्छे तरीके से प्रयोग किया जाए। इसमें किसी की भावना को दुख पहुंचाने की जरूरत नहीं है। मैं प्रभुनाथ सिंह जी से कहूंगा कि मैंने उनके वे शब्द रिकार्ड से निकाल दिए हैं। अब वह आगे अपने विचार रखें।
…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : This is Parliament, and this Member is habitual offender to talk in this language all the time. He should apologise for his comments… (Interruptions)
PROF. A.K. PREMAJAM (BADAGARA): Sir, he must apologise… (Interruptions)
MR. SPEAKER: There are no such words on record. Those words have been expunged by me.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : मैं उपप्रधान मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि कुमारी ममता बनर्जी बराबर सदन में बंगाल की चर्चा करती हैं और आपके सहयोगी तथा भारतीय जनता पार्टी के लोग सदन में हमेशा बिहार की चर्चा करते हैं, फिर क्यों नहीं, आपने एक बार कांग्रेस के साथ मिल कर दोनों राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा दिया? आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि वे इसमें आपको सहयोग नहीं दे सकते। आपके साथ सहयोग करने के लिए हमारे जैसे लोग और देवेन्द्र प्रसाद जैसे लोग आपके कदम से कदम मिलाने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं लेकिन आप हमें विश्वास में लिए बिना आज इस बिल को ला रहे हैं। मैं आपसे निवेदन करूंगा कि आप पहले अपने सभी सहयोगी दलों के सदस्यों के साथ बैठ कर, एक बार इस मुद्दे पर बहस करवा लीजिए। हम चाहते हैं कि पहले अपनी भावना आपके सामने रख दें। मैं उपप्रधान मंत्री जी को बिना किसी का नाम लिए बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के २५ से ३० सदस्यों ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे कहा कि हम लोग किसी तरह प्रधान मंत्री और उपप्रधान मंत्री जी के पास उनकी भावना पहुंचा दें। कांग्रेस के ९९ परसैंट लोग इस बिल के खिलाफ हैं। मेरी इस बारे में कई लोगों से बात हुई है।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : No, Sir. He should not compare his party and his mentality with our party… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Dasmunsi, you will also get a chance.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि इसमें सभी सांसदों को अपनी भावना रखने की स्वतंत्रता मिले। मेरा विनम्र निवेदन है कि आप एक बार गठबंधन के सभी सदस्यों को बैठा कर, उनकी भावना जान लीजिए, उसके बाद इस बिल को लाइए और तब तक के लिए इस बिल को वापस ले लीजिए। मैं खास तौर पर व्यक्तिगत तौर पर उपप्रधान मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं और मुझे विश्वास भी है कि वह हमारा निवेदन स्वीकार करेंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): Sir, this Bill is now the property of the House.… (Interruptions)… Let the House vote and decide. Nobody can withdraw the Bill unless it is voted upon in the House because it is the property of the House now.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, महिला आरक्षण बिल एक संविधान संशोधन विधेयक है, यह ठीक बात है। जैसा माननीय संसदीय कार्य मंत्री महोदया ने कहा कि यह एक परम्परा है, क्या यह परम्परा नहीं है कि संविधान संशोधन विधेयक पर सभी दलों को विश्वास में लिया जाता है? आपने १९९९ से अभी तक केवल रिहर्सल किया। सभी दलों को विश्वास में नहीं लिया, यहां तक कि अपने घटक दलों को भी विश्वास में नहीं लिया गया। मैं कहना चाहता हूं कि यदि संविधान संशोधन विधेयक पर सभी दलों की सहमति नहीं है, सदन बंटा हुआ है तो ऐसे क्षण इस विधेयक की दुर्गति क्यों की जा रही है। इस विधेयक पर यदि सत्ता पक्ष और ऑपोजिशन की नीयत साफ है, लेकिन वामपंथी भाई बीच में लटपटाए हैं ...( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): कहां लटपटाए हैं?...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: अध्यक्ष जी, श्री मुलायम सिंह जी यहां बैठे हुये हैं। ये लोग बिल पास करने के लिये लटपटाये हुये हैं, मेरा मतलब चटपटाये हुये हैं। मैं इस बात को साफ तौर पर बताना चाहता हूं कि मैने शिव सेना पार्टी की भावना देखी है, श्री प्रभुनाथ सिंह जी की भावना यहां आई, मैं कल यहां नहीं था, आज ही बाहर से आया हूं, मैं इस बात की चुनौती देता हूं कि पहले घटक दलों में इसकी परीक्षा हो जाये कि कितने लोग इस बिल का समर्थन करना चाहते हैं । हम महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, हम इसके पुरजोर समर्थन में हैं लेकिन इस बिल का जो वर्तमान स्वरूप है, उसे हम कतई स्वीकार करने के लिये तैयार नहीं हैं, चाहे कुछ हो जाये। इस बिल के वर्तमान स्वरूप में महिलाओं के लिये १८० सीटें आरक्षित रखने का प्रस्ताव किया गया है लेकिन हमारा प्रस्ताव है कि पहले, संसद का जो ढांचा है, उसमें बदलाव किया जाये। मैं यह मौलिक सवाल उठा रहा हूं। चूंकि आज यह ऐतिहासिक क्षण है, … *हम सही कह रहे हैं?
श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा (कनारा) : अध्यक्ष जी, यह बात गलत है। …( व्यवधान)
* Expunged as ordered by the Chair.
अध्यक्ष महोदय : यह रिकार्ड में नहीं जायेगा। Shrimati Margaret Alva, I totally agree with you.
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : श्री यादव जी, आप भाषा का उपयोग ठीक तरीके से करें। अब आप समाप्त कीजिये।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: अध्यक्ष महोदय, ग्रामीण अंचल की जो महिलायें खेती करती हैं, खेतिहर मजदूर हैं, हम लोगों के लिये अन्न पैदा करती हैं, उनके लिये क्या गारंटी है कि ५० प्रतिशत आरक्षण मिलेगा या कुल ३३ प्रतिशत आरक्षण में से २५ प्रतिशत उन्हें दिया जायेगा? केवल एन.आर.आई. महिलाओं को आरक्षण न दिया जाये। मैं इस बारे में कोई बात छिपाना नहीं चाहता हूं। यदि भावना को आहत किया जाता है तो निश्चित तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षण किया जाये लेकिन बिल के वर्तमान स्वरूप में आरक्षण न दिया जाये, बिल के वर्तमान स्वरूप के ढांचे को बिना बदले न किया जाये और इस बिल को वापस लिया जाये। जब तक वर्तमान स्वरूप को नहीं बदला जाता, तब तक इस बिल को लाने का कोई औचित्य नहीं है…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ऐसे विषय पर इतना बड़ा भाषण करने की जरूरत नहीं है। आप अपनी बात समाप्त कीजिये।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: अध्यक्ष महोदय, बी.जे.पी., कांग्रेस और सीपीएम - इन तीनों का संबंध कभी नहीं हुआ…( व्यवधान)यह क्या खेल है? लगता है कि अंदर ही अंदर बहुत बड़ा खेल हो रहा है। एक नया संविधान बन रहा है। इस देश के पढ़े-लिखे लोग समझ रहे हैं कि १८० सीटें किसलिये रिजर्व की जा रही हैं? मंडल कमीशन का मामला तो घोषित था लेकिन यह आरक्षण का मामला अघोषित है। मैं यह बात स्पष्ट कहना चाहता हूं।
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : अध्यक्ष जी, महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिये, इसमे कोई दो राय नहीं होनी चाहिये। आप जानते हैं कि बाबा साहेब अम्बेडकर ने हिन्दूकोड बिल लाकर यह प्रस्ताव किया था कि देश की आबादी की ५० प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिये। इसलिये हमारी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के विधेयक का विरोध नहीं कर रही है। मगर हमारी पार्टी का कहना है कि हमारी पार्टी पिछले चार साल से महिलाओं को रिजर्वेशन देने की बात कर रही है।…( व्यवधान)
श्री शिवाजी माने (हिंगोली): आपकी पार्टी का क्या चुनाव चिन्ह है और आपकी पार्टी क्या है?…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इनकी पार्टी ऑल इंडिया पार्टी है।
श्री रामदास आठवले :अध्यक्ष महोदय, मेरा केवल इतना ही कहना है कि..
श्री प्रकाश परांजपे (ठाणे): अध्यक्ष जी, इनकी और श्री शरद पवार की पार्टी की भूमिका एक ही है। श्री पवार की पार्टी का निशान घड़ी है लेकिन इनका निशान क्या है? इनकी खुद की कोई पार्टी ही नहीं है।…( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले :मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि जिस तरह श्री पवार और हमारी पार्टी की एक ही भूमिका है, क्या बी.जे.पी. और आपकी भूमिका एक है?
श्री प्रकाश परांजपे : हमारी खुद की आजाद पार्टी है, हमारा निशान अलग है लेकिन आपका कोई निशान नहीं है। आप दूसरों के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : श्री आठवले जी, आप आसन की तरफ देखकर बोलिये।
श्री रामदास आठवले : हमारा इतना ही कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए आपकी सरकार चार साल से विधेयक लाने की कोशिश कर रही है। हमारी मांग है कि इसमें एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज का अंतरभाव करने की आवश्यकता है। कांग्रेस पार्टी से हमारा कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने का आपका प्रयास स्व.श्री राजीव गांधी के समय से चल रहा है। इसमें हम आपसे थोड़ा सा यह आग्रह करते हैं कि विधेयक में एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज का अंतर भाव स्पष्ट कर दीजिए, फिर हम आपको सुनेंगे।
अध्यक्ष महोदय, यहां यह प्रॉब्लम है कि इस विषय में हम भी एक नहीं है, सामने वाले भी एक नहीं है, लेकिन सब कहते हैं कि हमारी सबकी इसे सपोर्ट है। हमारा कहना है कि सुषमा जी, अभी आप पार्लियामैन्ट्री अफेयर्स मनिस्टर है, अगर आप आगे कुछ बनना चाहती हैं तो इसमें एस.सी.,एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज को डालने में आपको क्या प्रॉब्लम है। इसमें एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज में अंतर भाव को स्पष्ट कर दीजिए, उनके लिए ६० परसेन्ट आरक्षण रखकर बाकी लोगों के लिए ४० परसेन्ट रिजर्वेशन कर दीजिए - यही हमारी मांग है। आप इस विषय पर हाउस को डिवाइड करने का प्रयत्न मत कीजिए। आपने देश को डिवाइड करने का प्लान कर दिया है। मगर हम चाहते हैं कि इस विषय में हाउस डिवाइड न हो और सबकी सहमति से इस बिल को पारित करना चाहिए। यदि आप लोग यह काम नहीं करेंगे तो आपका काम आने वाले चुनाव में होने वाला है और सभी महिलाएं आपका विरोध करेंगी। आपकी पार्टी अंदर से सोच रही है कि यह बिल लाने की आवश्यकता है। मगर आप लोग चाहते हैं कि यहां श्री मुलायम सिंह यादव जी द्वारा इसका विरोध करना चाहिए, श्री आठवले द्वारा इसका विरोध करना चाहिए या इन्होंने इसका विरोध करना चाहिए, सही मन से इस बिल को लाने की आपकी इच्छा दिखाई नहीं देती है। आप अपनी पार्टी को बताइये कि इसमें एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज को डालने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। श्री शिवराज पाटील जी, श्री प्रियरंजन दासमुंशी जी और श्री सोमनाथ चटर्जी से और आपसे भी हमारा निवेदन है कि इसमें एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. और माइनोरिटीज को डालने की आवश्यकता है, इतनी ही हमारी मांग है और हमारी पार्टी महिलाओं को रिजर्वेशन देने वाले प्रावधान का सपोर्ट करती है।
SHRI PURNO A. SANGMA (TURA): Mr. Speaker, Sir, I was only confused in the beginning – I was not knowing whether the House was discussing the Motion for Suspension of Question Hour or whether the House had straightaway taken up the discussion on the Women’s Reservation Bill. That is why I wanted a clarification. But now that the hon. Speaker has clarified the position, I have nothing more to say.
SHRI E. AHAMED (MANJERI): Mr. Speaker, Sir, at the outset, I want to make it abundantly clear that our Party is not against reservation for women. But we are not able to accept the Bill in the present form.
On the views expressed by leaders like Shri Mulayam Singh Yadav and others, I want to say that the Government also should give time to listen to the voice of opposition to the Bill as to why we are opposing the Bill. There is no guarantee for adequate or sufficient reservation for women-folk belonging to the backward classes and the minorities. It is the duty of the Government to give representation to all sections of the people.
If I were to take the representation of the minorities, I would say that they are under-represented even in the present House. If it were to be taken on the proportion of the population, I would say that 12.79 per cent of the population belongs to the Muslim community. So, we are eligible to have 70 seats whereas we are only having 32 seats here. … (Interruptions) We are 32 Members including our sister Begum Noor Bano. If you were to take the number of women Members in this House, it is to be 48, whereas there is only one woman member from Muslim community. … (Interruptions) Please allow us to speak. When there is this sort of aggressive mood, it is very difficult in a democracy. You must listen to the views of other people. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please conclude.
… (Interruptions)
SHRI E. AHAMED : Muslim women constitute 6.5 per cent of the country. They are politically not very active. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please conclude. Shri Shivraj Patil to speak now.
… (Interruptions)
SHRI E. AHAMED : Sir, I want to speak only for two minutes. … (Interruptions) Sir, there is no adequate representation for Muslim community in the House. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please conclude. Shri Shivraj Patil to speak now.
… (Interruptions)
SHRI E. AHAMED : Sir, our only wish is this. We want to empower our women. Muslim women also want it. What is the guarantee that you will give for that?
Even out of 77 per cent, we have only 50 per cent of the population. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down. We have not started a debate on the issue. You have made your point clear.
SHRI E. AHAMED : My only humble request is there should be sufficient representation. Muslim women should also have a say in the decision-making process.
MR. SPEAKER: Please sit down now.
… (Interruptions)
SHRI E. AHAMED : Therefore, I would request the hon. Minister and the Government that in a democratic country, we should have some consensus. We cannot push through the Bill like this. We cannot steam-roll it in the House.
MR. SPEAKER: Please sit down. If I have given you an opportunity to speak, it does not mean that you can speak as much as you can.
SHRI E. AHAMED : Thank you very much. I only wanted to express the feelings of the most neglected sections of the people.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): We appreciate your efforts to see that there is an orderly discussion in the House. We do appreciate the sentiments made by many senior Members and other Members in this House. The time to discuss the merit of this Bill is when it is fixed for discussion in the House, that is, today afternoon.
What I am going to say on this is that we stand by the Bill which has been introduced in the House. While saying this, we are in favour of protecting the interests of all weaker sections of the society in the country. At the same time, we are also of the view… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He has a right to speak and he will speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down. प्लीज़ बैठिये। ऐसी क्या बात कही है शिवराज जी ने?
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Shivraj Patil has not said anything to offend you. Please sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : ऐसी कोई बात उन्होंने नहीं कही है, जिसका विरोध होना चाहिए। उन्हें सदन में बोलने का पूरा अधिकार है।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : देखिये, पहले आपको बैठना पड़ेगा। यह ठीक बात नहीं है। उनको बोलने का अधिकार है। उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही है, जिसका आपको दुख हो। प्लीज़ बैठिये। कुँवर अखिलेश जी, आप बैठिये। कांग्रेस लीडर ने ऐसी कोई बात नहीं कही है, जिसका आप विरोध करें।Please sit down. I do not really understand.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He has the right to speak and he will speak.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : उनको भी बोलने का अधिकार है। यह बात ठीक नहीं है।
...( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : My submission is that our Constitution is secular. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Except what Shri Shiv Raj Patil is saying, nothing will go on record.
(Interruptions)* SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): Our Constitution is secular. It should remain secular. We should not do anything to make it non-secular. If it becomes non-secular, casteist… (Interruptions)
११.४४ hrs. (At this stage Shri Dharam Raj Singh Patel and some other hon. Members came and stood near the Table) ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़, आप सभी अपनी-अपनी जगहों पर जाइए।
...( व्यवधान)
* Not Recorded.
MR. SPEAKER: I request you to take your seats.
अध्यक्ष महोदय : आप अपनी-अपनी जगह पर वापस जाएं।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह जी, आप अपनी जगह पर वापस जाइए।
...( व्यवधान)
११४६ hrs. (At this stage Shri Dharam Raj Singh Patel and some other hon. Members sat on the floor near the Table) अध्यक्ष महोदय : मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस बिल पर चर्चा प्रारम्भ होने से पहले, मैं आप लोगों के नेताओं को बुलाऊंगा, लेकिन इसके लिए सदन का काम रोकने की जरूरत नहीं है। मैं आपसे कह रहा हूं कि इस बिल पर चर्चा होने से पहले मैं सभी पार्टियों के नेताओं को अपने चैम्बर में बुलाऊंगा। आप कृपया सदन की कार्यवाही मत रोकिए।
...( व्यवधान)
११.४७ hrs. (At this stage Shri Dharam Raj Singh Patel and some other hon. Members went back to their seats) अध्यक्ष महोदय : कृपया शान्त रहिए।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं चाहता हूं कि सदन का काम ठीक तरह से चले।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let me tell you that it seems that the Bill is becoming more and more controversial. मैं जानता हूं कि इस विषय पर बहुत मतभेद हैं, लेकिन आप यह भी जानते हैं कि किसी भी विषय पर उत्पन्न हुए मतभेदों को चर्चा करने से दूर किया जा सकता है। इस बारे में कोई रास्ता निकल सकता है। इसलिए मुझे पूरा भरोसा है कि इस विषय पर चर्चा होने से कोई न कोई रास्ता निकल सकता है।
...( व्यवधान)
SHRI PRAVIN RASHTRAPAL (PATAN): Mr. Speaker, Sir, from their side when someone speaks, we listen but when somebody speaks from our side, they are disturbing. This is not fair. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : मैं एक बात इस विषय में आपसे कहूंगा कि यह कांस्टीटयूशनल अमेंडमेंट बिल है। इस बिल पर चर्चा करने से पहले मैं सभी नेताओं को अपने चैम्बर में बुलाऊंगा। इस विषय पर हम जरूर विचार करेंगे। लेकिन एक बात आपको सोचनी चाहिए कि लोकतंत्र में हरेक को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। मैंने सबसे छोटी पार्टी होने के बाद भी श्री रामदास आठवले को अपने विचार रखने का अवसर दिया ताकि उनको जो कुछ कहना है, वे इस संबंध में कह सकें। मेरी आपसे रिक्वैस्ट है कि जो कांस्टीटयूशन अमेंडमेंट बिल इस सदन के सामने आ रहा है, वह सायंकाल छ: बजे तक आ जाएगा, उससे पहले मैं सभी पार्टी के नेताओं से कहना चाहता हूं कि आपसे चर्चा करने के बाद, इस समस्या का कुछ हल अवश्य निकलेगा, ऐसा मुझे अभी भी विश्वास है।
श्री धर्म राज सिंह पटेल (फूलपुर) : अध्यक्ष महोदय, तब तक सदन को एडजर्न कर दीजिए।
अध्यक्ष महोदय : सदन को एडजर्न करने की जरूरत नहीं है। इस पर हम विचार कर सकते हैं और कुछ न कुछ रास्ता निकाल सकते हैं। जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक श्री शिवराज पाटिल जी की जो भूमिका है, उसे सदन में प्रकट करने की मैं इजाजत देता हूं। संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा करने से पहले हम यहां माननीय सांसदों के विचार सुन सकते हैं।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Now, please sit down. He is already on his legs. Let him speak. I cannot allow this, because it will create a problem. Let me know what he has to say.
… (Interruptions)
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो): महोदय, अगर छ: बजे बिल आएगा,…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : चतुर्वेदी जी, कृपया आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अगर आप बीच में बोलेंगे तो शिवराज पाटील जी का भाषण रिकार्ड में नहीं जा पाएगा। क्या आप अपना हित भी नहीं समझते हैं?
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let the stand of his Party come before the House.
… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Sir, I am grateful to you, and to the other Members also, for allowing me to speak. I was saying that the weaker sections of the society should be given all help and assistance they deserve in every field. Having said that, I would like to say that the Constitution should not be made non-secular. It would not be proper… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : इसमें इन्होंने क्या गलत बात की है। कृपया आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Sir, it would not be proper to make our Constitution non-secular. If it becomes casteist, it will create more danger than anything else can do.… (Interruptions) Sir, for the last nine years, this Bill has been pending in the House. That is a long time and if more time is required… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He has now gone to the other subject.
… (Interruptions)
श्री मुलायम सिंह यादव :महोदय, यह क्या तरीका है।…( व्यवधान)माननीय सदस्य इस तरह कैसे बोल रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वह आप लोगों पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। कृपया आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : I would like to say that we have waited for nine years and if necessary, they can still … (Interruptions)
११.५२ hrs. (At this stage Shri Raghuraj Singh Shakya and some other hon. Members came and stood near the Table) MR. SPEAKER: All of you, please go back to your seats.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Members should address the Chair.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please go to your seats.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I adjourn the House up to 2 o’ clock.
11.53 hrs. The Lok Sabha then adjourned till 14.00 of the clock.
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