Lok Sabha Debates
Discussion On The Motion Of Thanks On The President'S Address Moved By Shri Ajit ... on 3 March, 2008
> Title: Discussion on the motion of thanlks on the President's Address moved by Shri Ajit Jogi and seconded by Shrimati Krishna Tirath.
14.33¼ hrs. MR. DEPUTY SPEAKEER: Now, we shall take up item no. 15 – Motion of Thanks on the President’s Address. Shri Ajit Jogi.
SHRI AJIT JOGI (MAHASAMUND): Sir, with your permission, I move the following:
“That an Address be presented to the President in the following terms:--
‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which she has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 25, 2008’.” यह महज इत्तफाक ही नहीं, मात्र एक सुखद संयोग ही नहीं है कि जिस महामहिम के अभिभाषण को हम आधार ले रहे हैं, यह देश के इतिहास में पहला ऐसा अभिभाषण है जो एक महिला ने महामहिम राष्ट्रपति के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें इसकी प्रतिछवि स्पष्ट दिखती है। जैसे मां अपने परिवार, अपने कुटुम्ब की परवाह करती है, चिंता करती है, उसी तरह से एक ममतामयी मां की तरह महामहिम राष्ट्रपति ने माननीय प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की नेतृत्व वाली सरकार के माध्यम से, श्रीमती सोनिया गांधी, सर्वोच्च नेता, यूपीए प्रेजीडेंट के माध्यम से पूरे भारत के हर वर्ग की पूरी चिंता करते हुए सबके लिए प्रावधान किया है।[r19] यदि मैं सही शब्दों में कहूं, सारांश में कहूं तो यह अभिभाषण ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की श्रेणी में आता है। जब महामहिम यह अभिभाषण दे रही थीं, तब सैन्ट्रल हाल के मुख्य द्वार की तरफ मेरा ध्यान बार-बार जा रहा था। क्योंकि हमारे सैंट्रल हाल के मुख्य द्वार पर हमारे फाउंडिंग फादर्स ने, हमारे संविधान निर्माताओं ने बहुत सोच-समझकर ऋग्वेद का श्लोक लिखाया है। वह श्लोक है -
अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम् उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।
मैं-मैं और तू-तू, ऐसा कहने वाला बहुत ही संकुचित विचारधारा का होता है। परंतु जो पूरी वसुधा को, पूरे भारत को, पूरे देश को अपने कुटुम्ब की तरह मानता है, वही सही अर्थों में उदार चरित्र का होता है, वही सही भारतीय होता है और यही धारणा महामहिम राष्ट्रपति के इस अभिभाषण में पूरी तरह से है। मैं बिना किसी को आघात पहुंचाए यह कहना चाहता हूं कि ‘अयं निज: परो वेति’ की धारणा कि मैं, मैं हूं और तुम, तुम हो। अभी इसके पहले ऐसी भावना की चर्चा चल रही थी। मैं हिन्दू हूं, तुम मुसलमान हो, मैं हिन्दू हूं; तुम सिख हो; तुम ईसाई हो; मैं ऊंचा हूं, तुम नीचे हो; मैं अगड़ा हूं, तुम पिछड़ा हो; मैं बड़ा हूं, तुम छोटे हो; ऐसी संकुचित भावना वाले लोग भी हमारे बीच में हैं। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary, please.
… (Interruptions)
श्री अजीत जोगी : हमारे संसद का मुख्य द्वार और राष्ट्रपति महोदया का अभिभाषण हमें याद दिला रहा है। यह बात मैं नहीं कह रहा हूं...( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : यह भी बोलिये कि हिन्दी राष्ट्र भाषा का बहुत सम्मान हुआ।...( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : चौबे जी, इसीलिए तो मैं हिन्दी मे बोल रहा हूं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Choubeyji, please sit down. Let him speak. Please do not disturb.
… (Interruptions)
श्री अजीत जोगी : सबका सम्मान हो रहा है और ऐसी संकुचित विचारधारा वालों को मैं केवल यह स्मरण दिला रहा हूं कि यह अभिभाषण वसुधैव कुटुम्बकम् का अभिभाषण है। यह मैं, मैं और तू, तू का अभिभाषण नहीं है। दो लोगों को तोड़ने का अभिभाषण नहीं है, यह लोगों को जोङने वालों का अभिभाषण है। जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े, मनुष्य को मनुष्य से जोड़े, जो जीव को निर्जीव से जोड़े, जैसे हमारे महामहिम डा.राधाकृष्णन ने हिन्दू धर्म की परिभाषा देते हुए कहा -
“That which integrates is dharma;that which disintegrates is adharma.” जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है, हिन्दू को मुसलमान से, हिन्दू को सिख से, गरीब से अमीर को जो जोड़ता है, वह धर्म है और जो तोड़ता है, वह अधर्म है। हमारे महामहिम का वही अभिभाषण सबको जोड़कर, सबको एक ही धागे में पिरोकर, सारे मोतियों को एक ही धागे में बांधकर हमारे सामने प्रस्तुत किया गया है। मैं महामहिम को समग्र अभिभाषण के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
उपाध्यक्ष जी, इस अभिभाषण में जिनकी बात हम इतने दिनों तक अपनी इस संसद में करते रहे और संसद चली भी नहीं। चाहे बात उस गरीब वर्ग या किसानों की हो, चाहे भारत निर्माण की बात हो, जो शहर और गांव के बीच की दूरी को पाटता हो, तीन करोड़ लोगों को रोजाना रोजगार देकर एन.आर.ई.जी.पी.के माध्यम से ग्रामीण असंगठित मजदूरों के हित करने की बात हो[b20] । ये सारी बातें इस अभिभाषण में सन्निहित हैं। आपको ऐसा कोई वर्ग नहीं मिलेगा जिसके बारे में इस अभिभाषण में पूरी व्यवस्था करने का प्रयास न किया गया हो। भारत गांवों में बसता है। हमारी 75 प्रतिशत से 80 प्रतिशत आबादी गांवों में है। गांवों में किसान रहता है, गांवों में मजदूर रहता है, गांवों का किसान कितना आहत है, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं। कितनी यातनाएं सहकर, कितनी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद हम सबका पेट भरने के लिए मेहनत-मजदूरी में किसान लगा हुआ है। यह बात मैं बड़े दर्द के साथ कहना चाहता हूं कि ऐसा पहली बार हुआ है और देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसान की सच्चे अर्थों में चिंता की गई है और जैसा हमने अपने बजट में सुना, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के बाद जो हमारे वित्त मंत्री जी ने बजट प्रस्तुत किया, उसमें 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज किसानों का माफ किया गया है। यह ऐतिहासिक है, यह क्रंतिकारी है और यह पहली बार हुआ है।
मुझे याद है कि जब हम चुनाव प्रचार में निकलते थे, उपाध्यक्ष जी, मैं टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहता परंतु सच है, इसीलिए बोल रहा हूं। दीवारों पर हम लिखा हुआ पढ़ते थे, हर चुनाव प्रचार में मैंने पढ़ा कि भारतीय जनता पार्टी का कहना था कि हर किसान का हर कर्जा माफ। लेकिन आपने ऐसा कर्ज माफ नहीं किया। आज भारत के किसान को अगर किसी ने आगे बढ़ाया है, भारत के किसान को अगर पहली बार किसी ने हिम्मत दी है तो वह हमारी सरकार द्वारा किसानों के साठ हजार करोड़ रुपये के कर्जा माफ करके दी गई है। गांवों में रहने वाला किसान...( व्यवधान) सरकार ने 60 हजार करोड़ रुपये का किसानों का कर्ज माफ किया है।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing should be recorded.
(Interruptions)* … उपाध्यक्ष महोदय : आडवाणी जी ने अभी बोलना है।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Please take your seat.
… (Interruptions)
SHRI KIRIP CHALIHA (GUWAHATI): Why do you not allow the hon. Member to speak? … (Interruptions)
* Not recorded MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing is going on record. Please sit down.
(Interruptions)* … उपाध्यक्ष महोदय : इसके बाद आडवाणी जी ने अभी बोलना है।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing is going on record. Please take your seat.
(Interruptions)* … उपाध्यक्ष महोदय : मेरी एक बात सुन लें। श्री जोगी जी के बाद श्रीमती कृष्णा तीरथ बोलेंगी और उसके बाद आडवाणी जी को जो कुछ कहना होगा, वह खुद कहेंगे।
…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions)* … MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Jogi, please continue.
Shri Goyal, you should also go to your seat.
श्री अजीत जोगी : उपाध्यक्ष जी, मैं समझ सकता हूं कि देश के 8 लाख गांवों में रहने वाले किसानों को ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Goyal, nothing is going on record. Please sit down.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : कर्ज माफी से कितनी खुशी हुई है और गांव के लोगों ने भी खुशी मनाई है। यदि कुछ लोगों को 60 हजार करोड़ रुपय़े के कर्ज माफी से खुशी नहीं हो रही है तो हम उन्हें समझ लेंगे। यदि इन लोगों को कोई आपत्ति है या कोई तकलीफ है तो देश समझ रहा है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि गांव में रहने वाले किसानों की आबादी के बाद दूसरी सब से बड़ी आबादी मजदूरों की है। ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के 3 करोड़ मजदूरों को प्रतिदिन रोज़गार देने की व्यवस्था हमने राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के माध्यम से की है। जो योजना पहले देश के केवल आधे जिलों के लिये लागू थी, हमारे युवा हृदय * Not recorded सम्राट् राहुल जी ने इसके लिये पहल की थी, यह योजना देश के पूरे 596 जिलों के लिये लागू की गई है। इस के लिये हम अपनी नेता श्रीमती सोनिया और युवा हृदय सम्राट राहुल जी को धन्यवाद देते हैं कि यह योजना देश के पूरे 596 जिलों के लिये लागू कर दी गई है। अब मजदूरों का अधिकार बन गया है और मजदूरी लेना भीख मांगना नहीं है। आज मजदूर अपने अधिकार के साथ मजदूरी मांग सकते हैं और प्रतिवर्ष उसे 100 दिन तक का रोज़गार देना होगा।
उपाध्यक्ष जी, मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि इस अच्छी योजना के कार्यान्वयन के लिये उसे प्रदेश सरकारों पर छोड़ दिया गया है। ऐसी बहुत सी राज्य सरकारें हैं, जिनका मैं नाम नहीं लेना चाहता। अगर मैंने नाम लिया तो ये लोग फिर खड़े हो जायेंगे। ऐसी बहुत सी राज्य सरकारें हैं जिन्होंने इस योजना के पैसे का भंय़कर दुरुपयोग किया है। मैं अपने राज्य के कांकेर जिले के बारे में जानता हूं जहां राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी य़ोजना के पैसे से 100 करोड़ रुपये की कीटनाशक दवायें खरीदी गई हैं। यह पैसा मजदूरों के लिये था, जहां मजदूरों को उनके पसीने का पैसा देना था, कुछ राज्य सरकारें भंयकर रूप से भ्रष्टाचार कर रही हैं। हमारे वर्मा साहब तो गुजरात की बात कह रहे हैं...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Varma, please sit down.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF INFORMATION AND BROADCASTING (SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI): Sir, I would like to submit that when a mover moves the Motion, normally, unless there is something serious, nobody interrupts. Again, they will start their speeches and we will listen to them patiently. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb. [s21] श्री अजीत जोगी : एक से एक अच्छी योजनाओं का इसमें उल्लेख किया गया है। यदि मैं उनकी पुनरावृत्ति सारांश में कर रहा हूँ तो यह बताने के लिए कर रहा हूँ कि यह सरकार डॉ. मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व की सरकार, गठबंधन की सरकार जो हमारी सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी जी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन पर चलती है, यह सरकार किस तरह से इन योजनाओं के माध्यम से समाज के, भारत के हर वर्ग की पूरी तरह से देखभाल कर रही है, उनके हितों में काम कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में लीजिए, आज जब हम एक महाशक्ति के रूप में उभरकर आ रहे हैं, जब बार-बार लोग कहते हैं कि भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या भारत के लिए एक अभिशाप है तो उसी तस्वीर में रोशनी की एक किरण दिखती है जब सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से ऐसे लोगों को, ऐसी बढ़ती हुई आबादी को हम शिक्षित कर रहे हैं, स्किल्ड कर रहे हैं जिससे वे हमारे ऊपर बार नहीं बनेंगे।They will not be a liability to us. They will be assets for us. They will not only serve this nation, but they will serve the entire humanity all over the world. इस तरह से सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत हम पहली बार अपने बच्चों को उनके सपने साकार करने का अवसर दे रहे हैं। मुझे याद है जब राजीव जी प्रधान मंत्री थे और अमेरिका गए थे तो उन्होंने एक वाक्य कहा था - “I am young, and I too have a dream.” मैं नौजवान हूँ और मेरा भी एक सपना है। ऐसा ही सपना आज देश का हर बच्चा देखता है और उसके सपने को साकार करने के लिए, उसके हाथ में अगर कोई हथियार देना चाहिए तो वह शिक्षा का हथियार है। मैं इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त करना चाहता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में पहली बार तीनों स्तरों पर हमें संतुलन दिख रहा है। स्कूल के स्तर पर, सैकेन्ड्री एजुकेशन के स्तर पर और हायर एजुकेशन के स्तर पर बराबर ज़ोर देकर हमारे राष्ट्र की भावी पीढ़ी को सुदृढ़ बनाने के लिए, हमारे राष्ट्र की भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाने के लिए कोशिश की जा रही है। Martin Luther King said that : “I have a dream.” राजीव जी ने कहा था कि - “I am young, and I too have a dream.” तो आज भारत का बच्चा बच्चा कह रहा है कि “I have a dream.” मेरा भी सपना है, मेरा भी ख्वाब है, मैं उसको साकार करना चाहता हूँ। मैं महामहिम राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देता हूँ, उनकी सरकार को धन्यवाद देता हूँ कि पहली बार हमने अपने बच्चों को उनका सपना साकार करने के लिए ऐसे अवसर दिये हैं।
महोदय, हमारे देश की स्थिति को देखते हुए किसानों की बात मैंने चालू की थी। मैं उसी बात पर आगे जोड़ते हुए कहना चाहूंगा कि किसानों को सस्ते दर पर पर्याप्त कर्ज़ मिले, इस दिशा में यूपीए की सरकार ने सबसे पहले प्रभावकारी कदम उठाए हैं। जैसे आंकड़े बताते हैं कि 2007-08 में दो करोड़ पच्चीस हजार रूपये का ऋण किसानों को बैंकों के माध्यम से दिया गया। 60 हजार करोड़ रुपये का ऋण हम माफ कर रहे हैं और प्रति वर्ष दो लाख पच्चीस हज़ार का ऋण उनको दे रहे हैं। किसानों के लिए जो व्यवस्था की जा रही है, मैं मानता हूँ कि किसान अब भी दुखी हैं। मैं मानता हूँ कि किसान जो चाह रहा है, शायद उतना हम उसके लिए नहीं कर पा रहे हैं। पर मैं यह भी मानता हूँ कि पहली बार भारत के किसानों के लिए इतना ठोस और कारगर कदम उठाया गया है। आप देख रहे हैं कि पहली बार यह हुआ है कि गेहूँ की एमएसपी, धान की एमएसपी बहुत अधिक बढ़ाई गई है। 1000 रुपये प्रति क्विंटल गेहूँ का भाव किया गया है। ...( व्यवधान)
SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): Sir, it is not part of the President’s Address. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Harin Pathak, please do not disturb the hon. Member.
… (Interruptions)
श्री अजीत जोगी : मैं याद दिलाना चाहता हूं जब एनडीए की सरकार थी। इसे टिप्पणी न मानिए, एक यथार्थ की तरफ स्मरण दिला रहा हूँ। आपके छः सालों में जितनी एमएसपी में वृद्धि नहीं हुई थी, उतनी हम प्रत्येक वर्ष में गेहूँ और धान के भावों में वृद्धि कर रहे हैं। [h22] किसानों के बारे में हमारी जो चिन्ता एवं दुख है, मैं उसे परिलक्षित कर रहा हूं।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded except the speech of Shri Ajit Jogi.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : मैं गांवों के किसानों की बात कह रहा हूं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 11वीं पंचवर्षीय योजना में पहली बार 25 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: आपकी जब बोलने की बारी आएगी तब आप अपनी बात कहना।
श्री अजीत जोगी : आप सब हमारे पुराने मित्र हैं। ...( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक : ये सब बातें प्रेसीडेंट एड्रेस में नहीं हैं।...( व्यवधान) किसानों के कर्जों की बात प्रेसीडेंट एड्रेस में नहीं है।...( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : आप मुझे बताइए कि कौन सी बात नहीं है, मैं अभी आपको पढ़ कर सुनाता हूं। ...( व्यवधान) मैं प्रेसीडेंट एड्रेस से ही बोल रहा हूं। आप बताइए कि कौन सी बात इसमें नहीं है। आपने इसे ठीक से पढ़ा नहीं है। आप इतने अच्छे अभिभाषण को पढ़ नहीं पाए, मुझे इसका दुख है। कृषि और सिंचाई के लिए आबंटन में वृद्धि करने का आश्वासन हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस अभिभाषण में दिया है और उसी के अनुसार 10वीं पंचवर्षीय योजना में, जो करीब 46-47 हजार करोड़ का प्रावधान सिंचाई के लिए था, वह 11वीं पंचवर्षीय योजना में महामहिम राष्ट्रपति जी के इस अभिभाषण में यह बात कही गई है कि 46 हजार करोड़ से बढ़ा कर एक लाख चालीस हजार करोड़ रुपए 11वीं पंचवर्षीय योजना में सिंचाई के लिए करेंगे।
* Not recorded उपाध्यक्ष महोदय, हम सब को इस बात का दुख है, हमारे आदरणीय स्पीकर महोदय ने नागपुर में कहा कि यदि इस देश का किसान आत्महत्या कर रहा है तो यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात है। ये सारे कदम किसान के ऊपर से भार कम करने के लिए उठाए गए हैं, परन्तु मैं एक बात कहना चाहूंगा।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing will be recorded except the speech of Shri Ajit Jogi.
. (Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन से निवेदन करना चाहता हूं कि इसके पीछे कुछ अन्य पहलू हैं, जिन पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए। हमें, हमारी सरकार और आप सब को मिल कर विचार करना चाहिए। मेरी समझ में नहीं आता कि क्या कारण है कि हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र का किसान तथा हमारे जो समृद्ध राज्य हैं, वहां के किसानों ने ज्यादा संख्या में आत्महत्याएं कीं? क्या कारण है कि छत्तीसगढ़, उड़ीसा और गरीब प्रदेशों के किसानों ने इतनी ज्यादा तादाद में आत्महत्याएं नहीं की हैं, इसके बारे में हमें सोचना पड़ेगा। यह संख्या समृद्ध देशों में इतनी क्यों बढ़ी हुई है, पिछड़े एवं जो गरीब प्रदेश हैं, वहां इस पर नियंत्रण क्यों है, यह हम सब के लिए विचार का विषय है।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस बात से सहमत हूं कि यह एक राष्ट्रीय समस्या है। किसान का दुख एवं दर्द हम सब के लिए एक बड़ी समस्या है। मैंने खुद अपने जीवन में, अपनी जिन्दगी के पहले दस-पन्द्रह साल खेती की है, हल चलाया है, इसलिए मैं जानता हूं कि किसान जितनी मेहनत करता है, जितना पसीना बहाता है, जितना इस देश को, हमें और आपको देता है, उसके बदले में हम उसे नहीं दे पाते। इसलिए मैं इस बात को बार-बार कहना चाहूंगा कि यदि कर्ज माफी की गई है तो हमने किसान के ऊपर, हमारी सरकार ने कोई एहसान नहीं किया है। हम किसान के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हो सकते। किसान का जो कर्ज हमारे और देश के ऊपर है, जो हमारा अन्नदाता है, किसान के उस ऋण से हम कभी भी उऋण नहीं हो सकते। 60 हजार करोड़ की जो कर्ज माफी की गई है, यह केवल उस किसान को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए की गई है ताकि वह एक बार फिर नये सिरे से, कमर कस कर आगे बढ़े, इसके लिए प्रावधान किया गया है।[rep23] महोदय, मेरे बाद के वक्ता बहुत से अन्य विषयों पर भी बोलेंगे, लेकिन मैं एक-दो बातों पर जोर देकर कहना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों के लिए जो विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं, उसका उल्लेख मैं करना चाहता हूं। 30 लाख अनुसूचित जाति के बच्चों को * Not recorded स्कॉलरशिप देने के लिए 900 करोड़ और 10 लाख अनुसूचित जनजातियों के बच्चों को स्कॉलरशिप देने के लिए 225 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि राष्ट्रपति जी ने इस अभिभाषण में यह घोषणा भी की है कि देश का पहला आदिवासी विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्थापित किया जाएगा, जहां आदिवासी संस्कृति, आदिवासियों का रहन-सहन, उनकी समस्याएं, उनकी मौलिक बातों इत्यादि पर अन्वेषण किया जाएगा, अध्ययन किया जाएगा। मुझे इस बात पर गर्व है कि अमरकंटक, जहां यह विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है, वह मेरा जन्मस्थान भी है। मुझे प्रसन्नता है कि छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित पवित्र स्थान, जहां मां नर्मदा का उद्गम स्थल है, वहां यह विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है और आदिवासियों के विकास के लिए, उनकी संस्कृति को बनाए रखने के लिए यह बहुत ही दूरगामी कदम होगा।
महोदय, कुछ दिनों पहले हमने इसी सदन में आदिवासी बिल पास किया था। पहली बार आदिवासियों को, न केवल आदिवासियों को बल्कि जंगल में रहने वाले गैर आदिवासियों को, जो जंगल की जमीन पर पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं, उनको उस जमीन पर खेती का अधिकार नहीं मिला हुआ था, लेकिन हम सभी ने मिलकर, इस सदन ने मिलकर उनको यह अधिकार दिया है। मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि लड़ाई चल रही है, एक तरफ आदिवासी और दूसरी तरफ शेर की। ट्राइबल वर्सिज़ शेर की लड़ाई का नाम इसे दिया गया है। हमारे पर्यावरण के विशेषज्ञ इस ट्राइबल एक्ट का पुरजोर विरोध करते रहे हैं। आज भी इस एक्ट को न्यायालय में चुनौती दी गई है। मैं चाहता हूं कि उनकी इस गलतफहमी को दूर किया जाना चाहिए कि जंगल में रहने वाले आदिवासी और गैर आदिवासी पर्यावरण विरोधी होते हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस देश में पर्यावरण और शेरों को बचाने में सबसे बड़ा योगदान इस देश के आदिवासियों का है। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में लिखा है कि हमारे देश में एक राजा ने 1500 शेरों का शिकार किया था। लेकिन आज पूरे देश में केवल 1400 शेर ही हैं। शेरों को मारने वाले आदिवासी नहीं हैं। शेरों को मारने वाले दूसरे लोग हैं। हम लोग जंगल से प्यार करते हैं, हम लोग पर्यावरण से प्यार करते हैं। आपने हमें ट्राइबल एक्ट के माध्यम से अधिकार दिया है, मैं इसके लिए महामहिम राष्ट्रपति जी को कोटि-कोटि धन्यवाद देता हूं।
महोदय, एक नया कानून बनाने का वादा भी राष्ट्रपति जी ने इस अभिभाषण में किया है। रिहेबिलिटेशन एण्ड रिलीफ बिल, 2007 इस संसद में लाया जाएगा। इसकी पीड़ा वही लोग समझ सकते हैं, जो अपने घर से उजड़ जाते हैं[r24] । जो उजाड़ा जाता है, वह गरीब है और हम लोगों का दुर्भाग्य है, विशेषकर आदिवासियों का दुर्भाग्य है कि सारी बड़ी योजनाएं अब आदिवासी इलाकों में बन रही हैं, चाहे सिंचाई का बड़ा बांध हो, चाहे पावर प्लांट हो, चाहे कोयले की खदानें हों, लोहे की खदानें हों, अगर कोई उजड़ेगा तो आदिवासी उजड़ेगा। उसके लिए क्या व्यवस्था होती है, यह आप और हम सबसे छिपा हुआ नहीं है। इसलिए मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने अपने अभिभाषण में यह वायदा किया है और डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार इस वायदे को पूरा करने जा रही है कि अब जो इस तरह से उजड़ेगा, जो आदिवासी इस तरह से उजड़ेगा, उसके पुनर्स्थापन की सही और सच्ची व्यवस्था की जायेगी।
मुझे याद है, जब मैं सीधी जिले में कलैक्टर था, एक बूढ़ा आदिवासी मेरे पास तीन कागज लेकर आया। पहले कागज में उसने वह पत्र दिखाया, जब वहां रिहन्द बांध बन रहा था तो उसको वहां से हटाया गया, वह पट्टा लेकर आया कि इसका मुझे अभी तक कम्पेंसेशन नहीं मिला है। वह दूसरी जगह जाकर बस गया, वहां पर फिर कोयले की खदान खुल गई, वहां से फिर उसको हटाया गया, वह कागज भी उसने मुझे दिखाया और तीसरी बार, जब मैं वहां कलैक्टर था, उस समय उसने मुझे बताया कि अब यहां पर सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन बन रहा है। तीसरी बार मुझे मेरी जिंदगी में हटाया जा रहा है और मुझे कोई पर्याप्त कम्पेंसेशन नहीं दिया गया है, मेरी कोई व्यवस्था नहीं की गई है, मेरा परिवार उजड़ गया। यह केवल एक आदिवासी की कहानी नहीं है। जहां भी हम योजनाएं बना रहे हैं, उनके साथ ऐसा ही हो रहा है, इसलिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिल, बहुत ही महत्वपूर्ण कानून हमारे सामने प्रस्तुत है।
एक और पहलू, जिस पर मैं विशेषकर बोलना चाहता हूं, महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में अल्पसंख्यकों की बात की है, अक्लियत की बात की है, सच्चर समिति की रिपोर्ट की बात की है। जिस किसी ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पढ़ी है, उसके लिए वह रिपोर्ट आई ओपनर है, आंखें खोल देने वाली बातें उसमें लिखी गई हैं कि किस तरह का नारकीय जीवन इस देश के अल्पसंख्यक व्यतीत कर रहे हैं।...( व्यवधान) आपको बार-बार तकलीफ हो जाती है।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपको किसी ने एलाऊ किया है क्या? कृपया डिस्टर्ब न करें।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : अल्पसंख्यकों के साथ कहां क्या हुआ, यह बोलकर मैं आपको फिर से खड़े होने का अवसर नहीं देना चाहता।
मैं आपसे केवल यह कहना चाहता हूं कि जिस किसी ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट नहीं पढ़ी है, मेरा निवेदन है कि उसको पढ़कर अक्लियत की इस देश में क्या सच्चाई है, इससे अपने आपको वाकिफ करना चाहिए, अपने आपको इसका ज्ञान कराना चाहिए। हमारे देश में इन्दिरा जी ने 15 सूत्री कार्यक्रम अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया था। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में एक नये 15 सूत्री कार्यक्रम का उल्लेख किया है, जो हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने अल्पसंख्यकों के लिए बनाया है। एक ऐसा वर्ग, जिसके लिए अब इतना विशेष ध्यान देने का प्रावधान इस अभिभाषण में कहने पर दिया गया है, 800 करोड़ रुपये प्रोफेशनल एजुकेशन की अल्पसंख्यकों को स्कालरशिप्स, अल्पसंख्यकों को 3500 करोड़ रुपया पोस्ट और प्री मैट्रिक स्कालरशिप्स और 3780 करोड़ रुपया 80 चुनिन्दा जिलों में, जहां पर अल्पसंख्यकों की आबादी ज्यादा है, उसके लिए दिया जा रहा है। कुल मिलाकर आठ हजार करोड़ रुपये के प्रावधान का राष्ट्रपति जी ने अपने इस अभिभाषण में उल्लेख किया है कि अल्पसंख्यकों को आगे बढ़ाने के लिए किया जायेगा। कुछ लोग कहते हैं कि यह तुष्टीकरण है। उनके लिए यह कहते हैं कि कांग्रेस की सरकार, यू.पी.ए. की सरकार इसलिए कर रही है, क्योंकि वह मुसलमानों का, अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण कर रही है। मैं करबद्ध निवेदन करना चाहता हूं कि इस वर्ग की जितनी त्रासदी है, इस वर्ग के ऊपर जितनी कठिनाइयां हैं, वे बहुत ज्यादा हैं। मैं तो यहां तक कहना चाहता हूं,[R25] हालांकि मैं उस वर्ग से आता हूं, इस देश में एससी-एसटी जितनी तकलीफ सहता है, उससे ज्यादा शायद जो हमारे देश का अल्पसंख्यक है, अकलियत है, वह सहता है। इसलिए उनके लिए जो आठ हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया जा रहा है, उसके लिए मैं विशेष रूप से राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देना चाहता हूं और यह बात कहना चाहूंगा और अपने दिल से कहना चाहूंगा कि यह तुष्टीकरण नहीं है, जो इतने पीछे रह गया है, जो दौड़ में हमसे इतना पिछड़ गया है ...( व्यवधान) जो इतना गरीब रह गया है, जो इतना शोषित रह गया है ...( व्यवधान) उसके लिए अगर विशेष ध्यान दिया जाता है ...( व्यवधान) तो यह तुष्टीकरण नहीं है। यह तुष्टीकरण बिल्कुल नहीं है। यह उनकी जायज मांग पूर्ति है। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपका नाम रिकार्ड में नहीं जा रहा है।
…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : जो इस देश में राज रहा, उन्होंने इस देश में शासन किया, उनकी हालत यहां तक पहुंची है, तो उसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है, सब अपने गिरेबान में झांककर देखें। गुजरात में क्या किया? अयोध्या में क्या किया? ...( व्यवधान)
* Not recorded MR. DEPUTY-SPEAKER : Please maintain silence. Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : महोदय, इस तरह की घृणा की भावना फैलाकर, इन लोगों को समाज से अलग रखकर, इस धर्म के बारे में गलत जानकारी देकर यह कहा जाता है, मैं कोई धर्म की बात नहीं कहना चाहता था, चूंकि यह कहा जाता है इसलिए कह रहा हूं, हमारे ये साथी कहते हैं ...( व्यवधान)
SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI) : May I intervene, Sir?
MR. DEPUTY-SPEAKER : This is not the time to intervene.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record.
(Interruptions)* … उपाध्यक्ष महोदय : मैंने उनको अलाउ नहीं किया है, झा जी आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री हरिन पाठक : आपने 48 साल शासन किया। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record. Please maintain silence.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : अब मुझसे मत कहलवाइए, मुझे यह कहने के लिए मजबूर न किया जाए कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार हुआ? यह देखने के लिए हमें गुजरात में जाना पड़ेगा। अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार हुआ, यह आपके शासन काल में अयोध्या में हुआ। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : सब बोलूंगा, सुनने का धीरज तो रखिए। सब कुछ खोलकर बताउंगा, आप की एक-एक करतूत बताउंगा। ...( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : भागलपुर में जो हुआ, वह भी बताइएगा। ...( व्यवधान)
* Not recorded MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री अजीत जोगी : हम आपका कहना मानेंगे और जरूर कहेंगे। ...( व्यवधान)
श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : जो माइनेरिटी वेल-बींग के लिए पैसा भेजा है, उसका सबसे अच्छा इस्तेमाल गुजरात में हुआ है। क्या यह गलत है? क्या यह रिपोर्ट नहीं निकली है? ...( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : बिल्कुल गलत है। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing will go on record.
(Interruptions) *… [p26] MR. DEPUTY-SPEAKER : Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Vermaji, please sit down.
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप यहां जिस तरह टिप्पणी कर रहे हैं, वह रिकार्ड में नहीं जा रही है। अगर आप चाहते हैं कि हाउस तरीके से चले तो इस तरह मत कीजिए। इस तरफ से माननीय सदस्यों ने बोलना है, आडवाणी जी ने बोलना है, और माननीय सदस्यों ने भी बोलना है। यदि आप इसी तरह शोर जारी रखेंगे तो जब आपकी तरफ से सदस्य बोलेंगे तो how will it be possible for me to control these people? इसलिए मैं चाहूंगा कि आप शान्ति रखें, खड़े होकर बोलने और शोर करने की कृपा मत कीजिए।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मैं इसलिए उन्हें रोक रहा हूं। आप कृपा करके उन्हें बोलने दें।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : उपाध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। थोड़ी-बहुत टोका-टाकी अच्छी लगती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा छेड़छाड़ अच्छी नहीं होती।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप भी सही तरीके से अपनी स्पीच जारी रखें।
…( व्यवधान)
* Not recorded श्री अजीत जोगी : मैं आपसे यही निवेदन कर रहा हूं कि इसे तुष्टीकरण कहकर इस तरह से इस पहल का अपमान न किया जाए। मैंने जब मुस्लिम, मुसलमान शब्द कह दिया तो न जाने क्यों इतनी ज्यादा प्रतिक्रिया हो जाती है।...( व्यवधान) एक बड़ी गलतफहमी इस धर्म के बारे में फैलाई जाती है। इसलिए मैं इसी सिलसिले में वह बात जरूर कहना चाहता हूं।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : You should also confine to the President’s Address.
SHRI AJIT JOGI : Sir, I am confining to the President’s Address. I am just saying that when we talk of Sachar Committee Report; when we talk of 15-Point Programme; when we talk of Muslim minority; when we talk of Christian minority; and when we talk of Sikh minority, certain section of the society gets unnecessarily agitated. They keep propagating these things which are totally untrue and false. That is why, I wish to say that we should be very clear. There is no religion in the world which teaches us to hate each other. That holds true for this great and modern religion called Islam. That is why, there is need to understand Islam. My Muslim brothers are here and they know when a Muslim prays what does he say. बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम, ला इलाहा इल्लल्लाह, अलहम्दु लिल्लाहि, रब्बिल आलमीन। ...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर) : आपने जो ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ा है, उसके बाद मोहम्मदुर रसूल अल्लाह होता है।...( व्यवधान) आपने गलत पढ़ा है।...( व्यवधान) आपको इस तरह पढ़ने का राइट नहीं है।...( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : राइट है बिल्कुल। I challenge you.
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आप गलत नहीं पढ़ सकते।...( व्यवधान)
15.19 hrs. (Shri Mohan Singh in the Chair) सभापति महोदय : ठीक है, करैक्शन हो जाएगा।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : मैं आपको चुनौती देता हूं।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please take your seats. It will be corrected.
श्री अजीत जोगी : उपाध्यक्ष महोदय, यदि आप अनुमति देंगे तो मैं अभी 25 आयतें पढ़कर सुनाता हूं।...( व्यवधान) आप बिल्कुल गलत कह रहे हैं।...( व्यवधान) आप अकेले हाफिज़ नहीं हैं, मैं भी हाफिज हूं। मैंने कुराने पाक पढ़ी है। मुझे कुराने पाक को समझकर पढ़ना आता है। मैं यह तकलीफ के साथ कह रहा हूं कि कुराने पाक दुनिया की वह किताब है जो सबसे ज्यादा पढ़ी जाती है लेकिन सबसे कम समझी जाती है। मैंने उसे समझकर पढ़ा है और अगर आप कभी मेरे साथ बैठेंगे, मैं आपके पुराने घर में रह रहा हूं।[N27] आप मेरे पास कभी आ जाइये। मैं आपको पूरी कुरान-ए-पाक पढ़कर सुना दूंगा। ...( व्यवधान) मैं आपको इसका मतलब बता दूं। ...( व्यवधान)
सभापति महोद : जोगी जी, आप अपनी बात कहिये। आप विवाद से आगे बढ़िये।
…( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मेरा कहना है कि अरबी में अगर एक वर्ड से खुदा जुदा होता है।...( व्यवधान) अगर आप अरबी नहीं जानते, तो राजनीतिक बात कहिये। ...( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : हम अरबी जानते हैं।...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर) : आप बहुत बड़े पीर नहीं हैं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपने अपनी आपत्ति उठा दी है।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : हम आपके बराबर आलीन नहीं हैं परन्तु हमने भी कुरान-ए-पाक को पढ़ा है और समझने के लिए पढ़ा है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : निजी बात लिखी नहीं जाती है।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : मैं केवल यह कह रहा हूं कि जब मुसलमान दुआ मांगता है, तो रब ओ आलमीन कहता है। कोई मुसलमान दुआ मांगते समय यह नहीं कहता कि रब उल मुसलमीन यानी है मेरे प्रभु, है मेरे परमेश्वर, है मेरे अल्लाह, है मेरे खुदा, आप केवल मुसलमानों के रब हैं। ऐसा कहकर मुसलमान दुआ नहीं करता। मुसलमान भी दुआ करता है, तो कहता है कि रब उल आलमीन यानी आप पूरे आलम के रब हैं।
आप हिन्दु, मुसलमान, सिख और ईसाई के भी रब हैं। ऐसा कहकर मुसलमान दुआ करता है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि इसे आप गलत मत समझिये। यह तृष्टिकरण नहीं है, यह जरूरी है। अगर हमें समाज में बराबरी लानी है, समाज से आतंकवाद खत्म करना है, मैं उस तरफ नहीं जाना चाह रहा था, लेकिन इस मूल में जाना पड़ेगा। सामाजिक न्याय करना पड़ेगा। हमको यह सामाजिक दूरी दूर करनी पड़ेगी तब जाकर एक समरसता का समाज बनेगा।
इस अभिभाषण में जैसी हम सबकी अपेक्षा थी, पहली बार इतना बड़ा महिला सशक्तिकरण हमने भारत में देखा है। हमारी राष्ट्रपति महिला हैं, हमारी यूपीए की चेयरपर्सन महिला हैं। इसलिए महिलाओं के लिए जितना कुछ किया जाना चाहिए, उन सबका प्रावधान, वायदा और आश्वासन इस अभिभाषण में दिया गया है। महिला, माता, मातृ शक्ति हमारे समाज की धूरी हैं। पूरा परिवार गृहिणी के इर्द-गिर्द घूमता है। इसलिए आप देखेंगे कि महिलाओं के लिए जितने कानून अभी तक भारत में थे, जिनमें जेंडर के आधार पर भेदभाव किया जाता था, यूपीए की सरकार ने महामहिम के अभिभाषण में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि जेंडर भेद करने वाले सभी कानूनों को बदला गया है और महिला और पुरूष को एक जैसा अधिकार है। इस अभिभाषण में इसका उल्लेख किया गया है कि दोनों को बराबर का अधिकार दिया जा रहा है।
सभापति महोदय : जोगी जी, अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए क्योंकि आपकी पार्टी के काफी लोग बोलने वाले हैं।
…( व्यवधान)
श्री अजीत जोगी : अगर आपकी अनुमति हो, तो मैं थोड़ा सा और बोल लूं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप दो-चार मिनट और बोल लीजिए।
श्री अजीत जोगी : इस देश में पांच लाख सैल्फ हैल्प ग्रुप्स महिलाओं के चल रहे है। मैं यह कहता हूं कि महिलाओं को उनकी ऊर्जा, शक्ति और योग्यता का पूरा उपयोग करने का अवसर प्रदान करने के लिए सैल्फ हैल्प गुप्स बहुत बड़ा, सशक्त और अच्छा माध्यम है। मैं इसे दोहराकर कहना चाहता हूं क्योंकि यही बात अभिभाषण में बार-बार दोहराई गयी है।
महोदय, एक विशेष बात, जिसका उल्लेख इस अभिभाषण के कई खंडिकाओं में किया गया है, वह हमारी आंतरिक सुरक्षा के बारे में है। मैं आतंरिक सुरक्षा के, बाहरी सुरक्षा के अन्य पहलुओं पर नहीं बोलना चाहता, क्योंकि आपने कहा कि अब मुझे अपना भाषण समेट लेना चाहिए। परन्तु आंतरिक सुरक्षा के एक पहलू पर मैं जरूर बोलना चाहता हूं जिससे मेरा पूरा प्रदेश प्रभावित है, पूरा भारत प्रभावित है। जिसे हम नक्सलवाद का नाम देते हैं। रेड कारीडोर जो नेपाल से लेकर आंध्र प्रदेश तक पूरे देश को दो भागों में विभक्त कर रहा है, मैं मानता हूं कि राष्ट्र के सामने आतंरिक सुरक्षा के मामले में सबसे बड़ी समस्या के रूप में घूर कर हमें देख रहा है। इस समस्या का हल केवल बंदूक से नहीं होगा, इस समस्या का हल केवल लॉ एण्ड ऑर्डर के माध्यम से नहीं होगा, इस समस्या का हल केवल पैरामिलीटरी फोर्सेज भेजने से नहीं होगा, हमें यह समझना होगा कि इस समस्या का हल तभी होगा जब हम तीनों मोर्चों पर यह लड़ाई लड़ें। सबसे बड़ी लड़ाई सामाजिक-आर्थिक मोर्चे पर लड़ना होगा। जब तक इन आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी बनी रहेगी, शोषण बना रहेगा, बेरोजगारी बनी रहेगी, अन्याय बना रहेगा और अत्याचार होता रहेगा तो आज जो समस्या नक्सलवाद के रूप में पनपी है, वह कल किसी अन्य वाद के नाम से आएगी,लेकिन समस्या अवश्य पैदा होगी। इसलिए सबसे पहला क्षेत्र जिसकी ओर ध्यान देना चाहिए वह सामाजिक और आर्थिक विकास का क्षेत्र है। दूसरा क्षेत्र लॉ एण्ड ऑर्डर का है। आज नक्सलवाद को केवल किसी एक राज्य की समस्या के रूप में कोई नहीं देख रहा है। आज यह एक राष्ट्रीय समस्या के रूप में उभरकर सामने आई है और इसे एक राष्ट्रीय समस्या के रूप में देखने की आवश्यकता है। आध्र प्रदेश में जहां पर श्री राजशेखर रेड्डी जी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, वहां इस समस्या का हल निकालने के लिए पहले उन्होंने बातचीत के माध्यम से कोशिश की और जब बातचीत विफल हो गयी तो उन्होंने अपने तरीके से इस समस्या पर नियत्रण किया है। मैं आंध्र प्रदेश को बधाई देना चाहता हूँ कि वहां नक्सलवाद बहुत सीमित हो गया है। दूसरे प्रदेशों को भी उनसे सीख लेनी चाहिए। छत्तीसगढ़, जो मेरा प्रदेश है, वहां वर्तमान सरकार से पूर्व जब मैं मुख्यमंत्री था, उस जमाने में नक्सलवाद की समस्या हमारे प्रदेश के उड़ीसा, आध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से लगने वाले बार्डर्स तक सीमित थी। लेकिन आज यह पूरा प्रदेश नक्सलवाद से प्रभावित हो गया है। प्रदेश की राजधानी रायपुर में नक्सलवादी पकड़े जा रहे हैं। मैं किसी का नाम लेकर बुराई नहीं करना चाहता हूँ, लेकिन जिस तरह से नक्सलवाद बढ़ा और पनपा है, वह इस बात का प्रमाण है कि वहां की सरकार जिस दृष्टि से इस समस्या को देख रही है, वह सही नहीं है। जब तक सामाजिक-आर्थिक न्याय नहीं होगा, राजनीतिक पहल नहीं होगी, कानून-व्यवस्था का इंतजाम नहीं होगा, नक्सलवाद की समस्या का अंत नहीं हो सकता है।
मैं एक विशेष बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि छत्तीसगढ़ में जो एक आंदोलन चल रहा है, जिसे सल्वा जुडूम का नाम दिया गया है, इसका अर्थ होता है सभी को साथ लेकर शांति बनाने का प्रयास करना। कागजों पर यह शब्द बहुत अच्छा लगता है, अगर नक्सलवाद के खात्मे के लिए सभी को साथ लेकर प्रयास हो तो इससे बेहतर और कोई बात नहीं हो सकती है, लेकिन धरातल पर इसका जो स्वरूप आया, वह बहुत भयंकर है। मैं सरकारी आंकड़े देकर यह बताना चाहता हूँ कि वहां 700 गांवों में कोई निवासी नहीं रह गया है, ये गांव पूरी तरह से उजड़ गए हैं, इन सभी 70,000 लोगों को विभिन्न कैम्प्स में रखा गया है। आदिवासी कैम्पों में रहने के आदी नहीं हैं। आदिवासी वह होता है जिसका जमीन पर सबसे पहला अधिकार था, सबसे पहला अधिकार है और सबसे पहला अधिकार बना रहेगा, उस आदिवासी को विस्थापित करके, उसको उसकी जमीन से उखाड़कर, उसके गांव से उठाकर कैम्प में रखा गया और उनको नारकीय जीवन जीने के लिए विवश किया जा रहा है। वहां उनकी संस्कृति नहीं पनप सकती है। उनके शादी-ब्याह नहीं हो रहे हैं क्योंकि जब तक हम लोग एक दूसरे के घर-बार न देख लें, शादी-ब्याह नहीं करते हैं।[R28] शादी-ब्याह बंद हो गए हैं। हमारी संस्कृति नष्ट हो रही है। कैम्पों में शिक्षा का प्रबंध नहीं है। कैम्पों में स्वास्थ्य का प्रबंध नहीं है। कोई आंगनवाड़ी नहीं है, कोई प्राइमरी, सेकंडरी और हाई स्कूल नहीं है। क्या हम चाहते हैं कि इन 700 गांवों के लोग शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित हो जाएं? जब चाहें नक्सलवादी इन कैम्पों को साफ टार्गेट मानकर हमला करते हैं और 100-200 या 400 लोगों को मार देते हैं।
मैं अंत में एक छोटी सी बात कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। कुछ दिन पहले इस एरिया का एक आदिवासी किसी काम के बारे में मेरे से मिलने आया। मैं उस समय टेबल पर भोजन कर रहा था। वह मेरी पहचान का एक अनपढ़ व्यक्ति था और हमारी मित्रता थी। मैंने उसे वहीं बुलाकर कहा कि आओ तुम भी भोजन कर लो। आज भोजन में मछली बनी हुई है, जो कि शबरी नदी की है और तुम तो उस नदी के किनारे रहते हो इसलिए तुम्हारी मनपसंद की चीज है। इस पर उसने कहा कि हमारे गांव ने फैसला किया है कि हम मछली नहीं खाएंगे। मैंने पूछा कि आखिर ऐसा फैसला आप लोगों ने क्यों लिया, तो उसने कहा कि शबरी नदी में इतने निर्दोष आदिवासी लोगों के शव फेंके गए हैं कि अब वहां की मछलियों को खाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। सलवा जुड़ूम के चलते यह सब काम हुआ है और हम लोगों से नक्सलवादियों से मुकाबला करने के लिए कहा जा रहा है। आप ही बताएं कि एक तीर और धनुष वाले का ए.के. 47 का मुकाबला कैसे हो सकता है और जिनके पास हथियार नहीं है, उनसे कह रहे हैं कि तुम मोर्टार का मुकाबला करो। वहां इस तरह की रोज घोषणाएं होती हैं। कभी कुछ बताया जाता है और कभी कुछ नहीं बताया जाता है। इसलिए उस आदिवासी भाई ने कहा कि हमारी नदी में इतने शव फेंके जा चुके हैं कि हम गांव वालों ने फैसला किया है कि उस नदी की मछलियां नहीं खाएंगे। इस तरह से वहां नरसंहार हो रहा है।
मैं सदन के माध्यम से सभी से निवेदन करना चाहता हूं कि यह किसी पार्टी का सवाल नहीं है, हम सबको मिलकर आदिवासियों के नरसंहार को रोकना चाहिए। कैम्पों में जो भ्रष्टाचार चल रहा है, उसे दूर किया जाए।
मैं उपसंहार के रूप में केवल यही कहना चाहता हूं कि कोई भी सरकार इस बात से नहीं आंकी जाती कि वह आंकड़ों से आंकी जाए। बहुत पैसा खर्च करने से भी नहीं आंकी जाती, बहुत सी योजनाएं बनाकर नहीं आंकी जाती। सरकार इस बात से आंकी जाती है कि उसने अपने नागरिकों को कैसे अवसर दिए हैं, कैसा वातावरण बनाकर दिया है औक उन्हें अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास करने के लिए कितनी मदद की है। इसलिए मैं यह कहना चाहूंगा कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस अभिभाषण के माध्यम से उस वातावरण को निर्मित किया है, वह परिस्थितियां बनाई हैं, उस तरह का आश्वासन दिया है, उस तरह का परिदृश्य प्रस्तुत किया है, जिसमें इस देश के नागरिक अपने व्यक्तित्व का सर्वोत्तम विकास कर सकें।
ऐसे अच्छे अभिभाषण के लिए जो समग्र रूप से समाज के सब वर्गों पर ध्यान दे रहा है, मैं महामहिम राष्ट्रपति को धन्यवाद देता हूं और उनकी इस सरकार को अंत में केवल इतना कहना चाहूंगा कि आपने बहुत काम किया है, पर बहुत करना बाकी है।
सितारों से आगे ज़हां और भी है अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं तू शाहीन है, परवाज़ है काम तेरा तेरे सामने आसमाँ और भी हैं।
आपके सामने बहुत बड़ा आसमान है, उस पर चलें।
मैं इतना ही कहना चाहूंगा।
श्रीमती कृष्णा तीरथ (करोल बाग): सभापति जी, मैं आपको धन्यवाद देती हैं कि आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया। हमारे साथी अजित जोगी जी ने अपने भाषण में सरकार के सारे पहलुओं पर और बहुत अच्छे ताने-बाने के साथ देश के हर वर्ग के व्यक्ति की भावना को यहां रखने की कोशिश की है।
बजट सत्र के शुरू में महामहिम राष्ट्रपति ने 25 फरवरी को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में जो अभिभाषण दिया था, उस पर उन्हें धन्यवाद देने के प्रस्ताव को अजित जोगी जी ने सदन में रखा और मैं उसे सेकंड करने के लिए खड़ी हुई हूं। मैं बताना चाहती हूं कि हमारी भारत सरकार ने जो तरक्की और उन्नति की है, जिसके चलते स्वतंत्र भारत में हम लोग चाहे महिलाएं हों या पुरूष, आज गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश का चाहे मजदूर हो, चाहे नौजवान हो या बुजुर्ग हो, हर व्यक्ति अपने को खुशहाल महसूस करता है।[R29] मुझे इतिहास के पन्नों को देखने पर सुगंध आती है और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज सुनाई देती है। उन्होंने सपना देखा था कि आजादी के बाद हमारे देश की स्थिति क्या होगी? जिन्होंने देश के प्रति, अपने आपको कुर्बान किया, अपने को फांसी पर लटकवाया, ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों को मैं नमन् करते हुए, सरकार का जो काम रहा है, उसके बारे में कहना चाहूंगी।
जब देश आजाद हुआ तो पंडित जवाहर लाल जी नेहरू ने देश के नाम अपने संदेश में भारत के नव-निर्माण की बात कही। देश में उस समय सुई बनाने तक की क्षमता नहीं थी, लेकिन पंडित नेहरू जी के आह्वान देश के मजदूरों, नौजवानों और किसानों को आगे बढ़ाया। आज देश ने तरक्की की है और जहां देश में सुई तक नहीं बनती थी आज आसमान में उड़ने वाला हवाई-जहाज, समुद्र के नीचे चलने वाली पनडुब्बी और सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की जो तरक्की हुई है वह किसी से छिपी नहीं है।
अभी सामने से एक साथी बोल रहे थे कि आपने 50 साल में क्या किया? मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि हमने नहीं किया तो किसने किया? क्या आप 10 साल में देश को प्रगति पर लाए? दस साल में आपने क्या किया वह मैं आपको बताती हूं। आपने देश को साप्रदायिक ताकतों में बांटना चाहा। कभी जिन्ना की मजार पर जाकर कसीदे पढ़ते हैं कि वे धर्म-निरपेक्ष थे। साप्रदायिक ताकतों को धर्म-निरपेक्ष कहा जाए और जिस जिन्ना ने लाखों हिंदुओं और मुसलमानों की लाशों पर खड़े होकर पाकिस्तान का मुखिया बनने का ऐलान किया था, उसने हमारे देश के दो टुकड़े कर दिये थे। ... (व्यवधान) * सभापति महोदय : यह शब्द कार्यवाही में नहीं जाएगा।
* Not recorded श्रीमती कृष्णा तीरथ : मैं लियाकत अली की बात करती हूं कि उन्होंने हिंदुस्तान नाम दिया लेकिन कुछ मुंगेरी लालों ने उसे हिंदुस्थान कर दिया, हिदुओं का स्थान। नहीं, यह हिंद जिसे हम जयहिंद कहते हैं, हिंद महासागर की बात करते हैं, हम हिंद के रहने वाले हिंदीभाषी लोग, जिसमें हिंदी राष्ट्र-भाषा है, उस हिंदुस्तान को जानते हैं।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस देश में चलने वाली सरकार के तहत जो काम किये हैं मैं उसका विवरण बताना चाहती हूं। हमारे देश में हर व्यक्ति को क्या चाहिए? चाहे वह गरीब है, किसान है, मजदूर है, महिला है, किसी भी वर्ग का है, किसी भी भाषा का बोलने वाला है, किसी भी जाति या धर्म को मानने वाला है या किसी भी प्रांत में रहने वाला है, उस व्यक्ति के लिए भारत का संविधान सर्वोच्च है। भारत के संविधान में हमें अधिकार मिले हैं और हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने अधिकार मांगते हैं। चाहे दलित वर्ग है, शोषित वर्ग है, पीड़ित वर्ग है, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग है, चाहे माइनोरिटीज के लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हैं, बौद्ध हैं, जैन हैं, वे अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं कि वे भारतीय हैं और उन्होंने भारत में जन्म लिया है और जानते हैं कि इस भारत में मुझे तमाम अधिकार हैं। पहला अधिकार हमारा स्वास्थ्य पर है। जो मां हमें जन्म देती है उसका स्वास्थ्य ठीक होना चाहिए, बच्चों का स्वास्थ्य ठीक होना चाहिए, उसे संपूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उसके बाद उसका रोजगार, उसका घर होना चाहिए और उसे देश में बनने वाले कायदे-कानूनों पता तभी चलेगा, जब वह शिक्षित बनेगा।
बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के द्वारा लिखे संविधान में महिलाओं को बराबर का अधिकार दिया गया है। हमारी राष्ट्र-मां इंदिरा गांधी जी ने महिलाओं की जब ऐसी स्थिति देखी कि वे पौष्टिक आहार गरीबी के कारण नहीं खा सकती हैं तो आईसीडीएस की स्कीम शुरू हुई, जिसके तहत उस मां को कौन सा संतुलित आहार मिले, जिससे उसके खून में कोई कमी न हो। सन् 1975 में इसी संसद से आईसीडीएस की बात शुरू हुई। उसके बाद देश के कोने-कोने में चाहे वह महिला गांव में रहती है, शहरों में रहती है या झुग्गी-कलस्टर में रहती है।[r30] सभापति महोदय, किसी भी छोटे-से-छोटे घर में रहने वाली महिला को देश की सरकार द्वारा खाने को पौष्टिक आहार दिया जाता है। जन्म लेने के बाद बच्चे का पूरा शारीरिक विकास हो, खाने को अच्छा भोजन मिले, जो दूध पिलाने वाली माताएं हैं, उनके लिए भी पैसे का प्रावधान किया गया है। ये सब काम हिंदुस्तान की हमारी सरकार ने किए हैं। आप अगर सड़कों में इन विषयों के बारे में मुकाबला करना चाहें, तो हम तैयार हैं। मैं कहना चाहती हूं कि राष्ट्रपति जी ने जो कहा कि गरीब दलितों के लिए नवोदय स्कूल बने। अभी कुछ माननीय सदस्यों ने कहा कि जोगी जी अभिभाषण में से नहीं पढ़ रहे हैं। आप अभिभाषण को पढ़िए। हर चीज को पिन प्वायंट किया है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे कृषि का क्षेत्र हो, चाहे मजदूरों का क्षेत्र हो, चाहे इंडस्ट्री का क्षेत्र हो, चाहे गांवों को सड़कों के द्वारा शहरों से जोड़ने की बात हो, चाहे हवाई अड्डे बनाने की बात हो, चाहे रेलवे स्टेशन बनाने की बात हो, चाहे बिजली की बात हो, हर चीज़ के बारे में कहा गया है। हमने बिजली क्षेत्र में क्या तरक्की की है, यह मैं आपको अभी प्वायंट पर आ कर बताऊंगी। अनेकों-अनेक योजनाएं हमारी सरकार ने आज जनता को दी हैं। देश का बच्चा-बच्चा, हर औरत, हर आदमी देश के वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट से खुश है और यह कहने के लिए तैयार है कि वे इस यूपीए की सरकार में, जिसकी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी हैं और प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह हैं, के नेतृत्व में खुश हैं। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश के नवनिर्माण की बात कही थी, नवनिर्माण को भारत के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में हमारी यूपीए की सरकार ले कर आई, क्योंकि हम जानते हैं कि इतिहास हमारे भविष्य की कुंजी है। अगर हमें अपने देश के भविष्य को उज्जवल बनना है, तो हमें अपने बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाना होगा। इसी संदर्भ में कहना चाहूंगी कि जब हम बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाएंगे, तो उन्हें अख्तियार देना होगा। स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी ने 18 साल के नौजवान को वोट का अधिकार दे कर, नौजवानों की अपनी सरकार में भागीदारी स्थापित करने की बात कही थी। राहुल जी ने आज उसी बात को आगे बढ़ाते हुए देश की तरक्की में नौजवानों को योगदान देने की बात कही है। हमारी यूपीए की चेयरपरसन श्रीमती सोनिया गांधी जी ने महिलाओं को विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा सशक्त करने की योजनाएं बनाई हैं। वे सभी आपके सामने आएंगी।
भारत कृषि प्रधान क्षेत्र है। गांवों के हर क्षेत्र में विकास हुआ है। कृषि भूमि विवाद या अन्य विवादों को निपटाने के लिए किसानों को कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए हमारे मंत्री जी ने विलेज कोर्ट्स का निर्माण किया है। यह काम आपकी सोच से बहुत परे था। कभी आपने यह काम नहीं किया कि लोगों को गांवों से बाहर न जाना पड़े और उन्हें वहीं जल्दी न्याय मिल जाए। हमने हर व्यक्ति को न्याय मिलने की बात कही है। कृषि ऋण माफ करने के लिए आप बार-बार कहते हैं। कृषि ऋण समाप्त कर दिया, इसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन फिर भी महंगाई बढ़ रही है। कृषि ऋण इस लिए माफ किया है, क्योंकि हमारे देश का किसान गौरव से जी सके और इस देश के लिए अच्छा अनाज, दाल-सब्जियां, फल पैदा कर सके और जब वह फल सब्जियां मार्केट में ज्यादा होंगी, तो दाम अपने आप कम हो जाएंगे। हमने बीपीएल, एपीएल इसीलिए शुरू की थी। हमारी राज्य सभा की एक सदस्या हैं, जो कुछ दिन के लिए वर्ष 1998 से पहले मुख्यमंत्री बनी थीं। आपको याद होगा कि उस समय सब्जियों के क्या दाम थे। मैं केवल एक बात याद दिलाना चाहती हूं कि सौ रुपए किलो नमक मिला था। हमारी मैमोरी बहुत कम है, लेकिन मेरे दिमाग में फीड है। आपके साथी जो बड़े-बड़े सरमाएदार हैं, व्यापारी हैं, उन्होंने नमक का स्टॉक कर लिया था। हमारे देश का गरीब आदमी नमक खाने के लिए भी मोहताज हो गया था। आप उन दिनों को क्यों भूलते हैं, उन दिनों को याद रखना चाहिए। प्याज और आलू की बात मैंने छोड़ दी है, सिर्फ नमक के बारे में आपको याद दिलाना चाहती हूं। उन दिनों लोग नमक भी नहीं खा सकते थे।
हम लोगों ने स्वर्ण जयंती रोजगार योजना शुरू की है। उसमें हमने गांवों की बात कही है। कृषि ऋण माफ किया। ग्रामीण स्वरोजगार योजना हम लेकर आए।[R31] हमने स्वर्ण जयन्ती रोजगार योजना शुरू की है। इसमें सैल्फ हैल्प ग्रुप बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जिस में अधिकतर महिलाएं हैं। महिला जब शिक्षित होती है और इस तरह से कार्यक्रम करती है तो लगता है कि देश आगे तरक्की की ओर बढ़ रहा है। एक शिक्षित महिला अकेली शिक्षित नहीं है, वह अपने पीछे पूरे परिवार को शिक्षित करती है, आने वाला बच्चा जो कल देश का भावी नागरिक होगा, अगर वह उसे शिक्षित करती है तो इसका मतलब यह है कि देश तरक्की कर रहा है। उस महिला में इतनी शक्ति है कि वह घर, बाहर, राजनीति और इकॉनमी आदि का सारा भार संभाल कर देश को आगे बढ़ाती है। ऐसी महिलाएं देश में बड़े गौरव के साथ इस अभिभाषण और बजट का स्वागत कर रही है। महिलाओं को रोजगार ऑर्गेनाइज्ड और अनऑर्गेनाइज्ड सैक्टर में मिले हैं। हमने होटल इंडस्ट्री को आगे बढ़ा कर, रोजगार देने की बात कही है लेकिन मेरे साथी जो एनडीए सरकार में थे, उन्होंने कई होटल निजी लोगों के हाथ में अपने लाभ के लिए कौड़ियों के भाव बेच दिए। दिल्ली में शंगरिला होटल इसका उदाहरण है जिसे 14 करोड़ रुपए में बेचा गया। इन्होंने जयपुर, उदयपुर, मुम्बई और मदुरै में कितने ही होटल निजी लोगों के हाथ बेच दिये। यह स्वदेशी की बात करते हैं। देश हमारा है। हमने अपने स्वतंत्रता सेनानियों को, पूर्वजों को फांसी के फंदे पर चढ़ते देखा। आज हम आजाद भारत में आजादी की बड़ी सांस ले रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे लोग भी थे जिन के इतिहास के काले पन्नों में नाम हैं। उन्होंने देश के स्वतंत्रता सेनानियों की शिकायत करके, मुखबरी करके, उनको फांसी के फंदे पर लटका दिया। भारत की धरती का सीना चीर कर देखो तो उनका खून आज भी उबल-उबल करके कह रहा है कि देश के नौजवानों, यह देश आपका है, गरीबों का है, महिलाओं का है, किसानों का है, मजदूरों का है, यह देश उनका है जो देश की पूजा करते हैं, जो देश की मिट्टी से प्यार करते हैं, जो जयहिन्द का नारा लगाते हैं। ऐसा देश जहां हिन्दू, मुस्लिम सिख, ईसाई सब मिल कर रहना चाहते हैं।
हमने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम बनाया, सर्व शिक्षा अभियान चलाया। शिक्षा के बजट पर होने वाले खर्च को बढ़ाया गया। उसे 7.68 परसेंट से बढ़ा कर 11वीं पंचवर्षीय योजना में 19 परसेंट अधिक किया गया। आप सोच लीजिए कि हमारा शिक्षा को बढ़ावा देने का क्या मतलब है? हम जानते हैं कि देश की जड़ कहां है, हम देश की कैसे तरक्की करेंगे, कैसे सशक्त करेंगे, कैसे नई पीढ़ी को आगे बढ़ाएंगे, कैसे सैंकिंड लीडरशिप शुरू करेंगे? मिड-डे मिल देने के बारे में हम चिंतित हैं क्योंकि इससे दो लाभ हैं - एक तो वे गरीब बच्चे जिन को पौष्टिक आहार नहीं मिलता है, उन्हें इसके द्वारा पौष्टिक आहार मिलें जिससे वे स्वस्थ रहें, दूसरा, इसके मिलने से गरीब बच्चे स्कूल में पढ़ने के लिए आएं और शिक्षा ग्रहण करें। हमने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की है। इसमें लाखों के तादाद में जो महिलाएं काम करती हैं, लोगों को स्वास्थ्य के बारे में बताती हैं, हमारे बच्चों को कैसा होना चाहिए, महिलाओं का स्वास्थ्य कैसा होना चाहिए, कब उनको कौन सी दवाएं लेनी चाहिए, कौन सा टीकाकरण होना चाहिए, ये चीजें हम ‘आशा` के माध्यम से उनको बताते हैं। आंगनवाड़ी वर्कर्स भी हमारे गांवों में काम करती हैं।
पंचायतों में 33 परसेंट महिलाओं को आरक्षण देना राजीव जी का सपना था जिसे उन्होंने पूरा किया। उन्होंने पंचायती राज शुरू किया। आज पंचायतों और लोकल बॉडीज में 33 परसेंट महिलाएं हैं। राजीव जी जो आज हमारे बीच नहीं हैं, वह एक नया रास्ता दिखा कर गए हैं, हमें उस मंजिल की ओर पहुंचना है जिससे हम देश को आगे बढ़ा सकें और देश का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख सकें, ऐसे हमने कार्यक्रम बनाए हैं। 18 साल की बात मैंने पहले की। सूचना के अधिकार का अधिनियम हमारी सरकार ने बनाया है। किसानों को हर प्रकार से मदद मिले और उन्हें मजबूत किया जाए, इसलिए 60 हजार करोड़ रुपए का ऋण माफ किया गया।[a32] 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत हमारी योजना गेहूं, चावल और दालों का उत्पाद 8, 10 और 2 मिलियन टन करने की है जिससे हर व्यक्ति को कम दामों में अनाज दे सकें। मुझे वर्ष 1989 का वह दिन भी याद है जब पूरे देश में इतना सूखा पड़ा था जितना कि पिछले 100 वर्षों में भी नहीं पड़ा होगा, तब राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री थे और तब भी ऐसे मंचों से चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि अगर एक भी आदमी भूख से मरा हो तो हम उसके लिए जो काम कर सकें, करने के लिए तैयार हैं लेकिन तब एक भी व्यक्ति सूखे में भूख से नहीं मरा था। आप इतिहास में जाइए, मेरे दिमाग के कंप्यूटर में बहुत सी चीजें हैं, मैं कभी भी बोल सकती हूं आप तो समय की बात कर रहे हैं। कृषि, सिंचाई, जल संसाधनों तथा बाढ़ प्रबंधन को उचित करने के लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना में 1,38,548 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो पहले 46,131 करोड़ रुपए था। आप देखिए जनता के पैसे को जनता के विकास में लगाया है क्योंकि हम इसे जनता के विकास में लगाना चाहते हैं। शिक्षा सभी को मिले, एससी, एसटी, ओबीसी को एमपावर करने के लिए सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है। अनुसूचित जातियों के लगभग 30 लाख बच्चों को 900 करोड़ रुपए से अधिक तथा अनुसूचित जनजातियों के दस लाख बच्चों को 225 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया है। अनुसूचित जनजातियों के बारे में जोगी जी ने बहुत अच्छी बात कही कि जल, जमीन और जंगल पर जनजातियों का अधिकार होना चाहिए। राजीव गांधी राष्ट्रीय अद्यतावृत्ति में एससी और एसटीज़ को विशेष कोचिंग दी जानी चाहिए। एसटीज़ को वन, जंगल और जल अधिकार होना चाहिए, ऐसा मेरा मानना है।
महोदय, और तो और अनऑर्गेनाइज्ड सैक्टर में जो मजदूर काम करते हैं या मकान बनाते हैं, इनके लिए सामाजिक सुरक्षा विधेयक, 2007 प्रस्तुत किया गया है। इन परिवारों को 30,000 रुपए की स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्रदान की जाती है और उनके लिए बोनस का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन को बढ़ाया है। आईसीडीएस, आंगनवाड़ी में काम करने वाली महिलाओं को 1000 रुपए से 1500 रुपए का प्रावधान किया है। श्रमिकों का बोनस को बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रतिमाह किया है। भवन निर्माण ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को भी बोनस दिया जाए, इनको पात्र बनाया गया है क्योंकि हम ठेकेदारी प्रथा नहीं चाहते हैं। अभी ग्राम न्यायालय खोलने का बिल लाया गया है। प्रधानमंत्री के 15सूत्री कार्यक्रम का लक्ष्य पूरा करना है, एससी, एसटीज़ के लिए करोड़ों रुपए का बजट रखा है। इसके बाद छात्रवृत्ति की बात है, उन्हें आगे बढ़ाने की बात है ताकि एससी, एसटीज़ के लोगों को देश में ही नहीं विदेश में भी शिक्षा मिले। शायद बहुत लोगों का मालूम नहीं होगा कि हमारे देश में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग विदेश में दाखिला लेते हैं इसके लिए चाहे 10, 15 या 20 लाख या जितना भी पैसा लगे उसे हमारी सरकार ने देने के लिए कानून बनाया है। मैं संसद् के माध्यम से कहना चाहती हूं कि जो बच्चे होनहार हैं, वे विदेशों में दाखिला लें, विदेशों में जाएं और भारत सरकार उनका तमाम खर्चा वहन करेगी ताकि उन्हें बाहर शिक्षा दिलाकर वापिस बुलाकर लाभ उठाएगी। महिलाओं को सशक्त करने के लिए और स्त्रियों का साक्षर बनाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन लक्ष्य बनाया गया है। महिलाओं की पूर्ण समानता के लिए कानून बनाने में हम सब साथ आएं, ऐसा मेरा कहना है। सरकार दहेज, कन्या, शिशु हत्या, कन्या भ्रूण हत्या, मानव तस्करी संबंधी कानूनों को कड़ाई से लागू करने के लिए, लिंग भेद रहित भारत बनाने के लिए कटिबद्ध है। ग्रामीणों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिले इसके लिए 1.38 लाख उपकेन्द्र, 3947 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 540 जिला अस्पतालों में संसाधन देकर बढ़ाया गया है। हमारे गावों में लगभग आशा में 5 लाख पूर्ण स्वास्थ्यकर्त्ता कार्यरत हैं, हमने इनको लोगों की भलाई के लिए आगे किया है। भारत निर्माण में सड़कों द्वारा ग्रामों को जोड़ा जाए और उनके लिए बिजली, टेलिफोन, मकान का प्रबंध किया जाए। ग्रामीण और निर्धनों के लिए 40 लाख मकान बनाए गए हैं और 2 लाख बस्तियों में पानी की योजना पहुंचाई गई है।[r33] मैं एक बात कहना चाहती हूं कि इंडिया शाइनिंग, एक करोड़ मकान बनेंगे, लेकिन एक मकान भी नहीं बना, चालीस लाख मकान हमने बनाकर दिये हैं। जल, विद्युत, ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा सहित ऊर्जा के सभी स्रोतों के विकास के लिए निवेश को बढ़ा दिया गया है, इसी से देश का चौतरफा विकास हुआ है। देश में श्री राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रोद्योगिकी संस्थान स्थापित किया गया, ताकि पेट्रोलियम क्षेत्र में तकनीकी कार्मिक शक्ति को बढ़ावा मिले, ऐसे कार्य हमने किये हैं। भारत के सभी रेलवे स्टेशन आधुनिक हों, यह हमारा प्रयास है। इसका रिजल्ट अच्छा हो। हमारे हवाई अड्डे भी आधुनिकीकरण के उदाहरण हैं। इस वर्ष बंगलौर और हैदराबाद में नये अतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया है। नई दिल्ली तथा अन्य महानगरो में टर्मिनल का निर्माण कार्य चल रहा है। नॉर्थ ईस्ट सहित देश के विभिन्न भागों को हवाई मार्ग से जोड़ें, ऐसा सम्पर्क बढ़ाया गया है। हमने कुछ नहीं छोड़ा है। प्रिंट मीडिया, दूरदर्शन में, मनोरंजन और फिल्मों के क्षेत्र में, भारतीय मनोरंजन मीडिया उद्योग में भारी वृद्धि हो रही है और इसमें भारी संख्या में हमारी बच्चियों और बच्चों को रोजगार मिल रहा है। मैं हमारे मंत्री जी, श्री प्रियरंजन दासमुंशी जी को मुबारकवाद देती हूं, जिन्होंने इस क्षेत्र में रोजगार की कमी को पूरा किया है।
सभापति महोदय : आप वित्त मंत्री जी के भाषण का हिन्दी अनुवाद बोल रही हैं। अब आप समाप्त कीजिए।
श्रीमती कृष्णा तीरथ : मैं अपनी बात बता रही हूं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म दिवस अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया गया। यह हमारे लिए गौरव की बात होनी चाहिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने हमारे देश को एकता और अखंडता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि हमें जातिविहीन समाज चाहिए, ऐसे जातिविहीन समाज के लिए जो 15 सूत्री कार्यक्रम डा. मनमोहन सिंह जी ने दिया है,, उसे हम लागू करने के लिए तैयार हैं और देश को एक सूत्र में बांधने के लिए तैयार हैं। हमारी सरकार विश्व स्तर पर सहयोग देती और लेती है। विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय वार्ता फलदायी रही है। भारत, रूस और चीन की जो हमारी मंत्रियों की त्रिपक्षीय वार्ता फलदायी रही है। यही नहीं इब्सा समिट, 2007 अक्टूबर में, जिसमें डा. मनमोहन सिंह जी ने प्रधान मंत्री के रूप में पार्टिसिपेट किया, मैं खुद वहां मौजूद थी, उसमें भारत का नाम बहुत इज्जत और मान-सम्मान के साथ लिया गया और भारत को यह बताया गया कि भारत किसी से कम नहीं है। हम किसी से पिछड़े नहीं है। यहीं नहीं आज विश्व के इस महान लोकतंत्र भारत तो दुनिया अधिक आशाओं और आकांक्षाओं की नजर से देख रही है। एक स्वतंत्र समाज खुली अर्थव्यवस्था के ढांचे में है। हम लोग इस देश से आतंकवाद का खात्मा कर देना चाहते हैं।
सभापति महोदय : अब आप समाप्त कीजिए, आपकी बातें आ गई हैं।
श्रीमती कृष्णा तीरथ : हम आतंकवाद के खिलाफ जाना चाहते हैं, क्योंकि पिछली बार जब एन.डी.ए. की सरकार थी तो इसी संसद में आतंकवादी घुस आये थे। इसलिए हम चाहते हैं कि हम आतंकवाद को एबोलिश कर दें। हमारा देश आतंकवाद मुक्त हो। कोई किसी से डरे नहीं, कोई बिछुड़े नहीं और हम चाहते हैं कि हमारा देश प्रगति की दिशा में काम करता चला जाए। बल्कि हमारे देश में रहने वाले जो बुद्धिजीवी लोग हैं, जो जानते हैं कि इस देश को कौन आगे बढ़ा सकता है, हमारी उनसे प्रार्थना है कि किस तरह से देश को कौन आगे बढ़ायेगा, बुद्धिजीवी अपनी बुद्धि के हिसाब से देखें कि कौन सी ऐसी सरकार है जो हमें आगे ले जा सकती है और हमारे देश का विकास कर सकती है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं सभापति महोदय का धन्यवाद करना चाहती हूं कि आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया।
MR. CHAIRMAN : Motion moved:
“That an Address be presented to the President in the following terms:--
‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which she has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 25, 2008’.” Hon. Members, whose amendments to the Motion of Thanks have been circulated, may, if they desire to move their amendments, send slips at the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the amendments they would like to move. Those amendments only will be treated as moved.
A list showing the serial numbers of amendments treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the Officer at the Table immediately[b34] .
16.00 hrs. श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : मान्यवर सभापति महोदय, मैं पहले सोचता था कि मैं कल बोलूंगा, आज मेरे एक और सहयोगी बोलने वाले थे, लेकिन बाद में मुझे कहा गया कि मैं ही बोलूँ। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ कि मैं बहुत आभारी हूँ प्रधान मंत्री जी का कि उनको जैसे ही संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि मैं आज बोलूँगा तो आप स्वयं यहां आए। मुझे प्रसन्नता है कि मैं अपने विचार आपके सामने ही रखूँगा।
हमारे संविधान में अनुच्छेद 87 के अनुसार प्रति वर्ष के आरंभ में राष्ट्रपति दोनों सदनों को संबोधित करेंगे - या तो चुनाव के बाद करेंगे, या हर वर्ष के आरंभ में करेंगे। शुरू में संविधान जब बना था तो उसमें हर अधिवेशन में बोलते थे। एक साल तो वह व्यवस्था चली और राजेन्द्र बाबू एक साल में तीन बार बोले। बाद में उसमें संशोधन किया गया और यह व्यवस्था की गई कि चुनाव के बाद अवश्य बोलेंगे, लेकिन प्रति वर्ष पहले सत्र में बोलेंगे। इसके कारण कभी कभी तो ऐसा हुआ है कि दो बार राष्ट्रपति बोले हों - एक बार नए साल में और एक बार चुनाव के तुंत बाद। मैं इस बात का ज़िक्र इसलिए कर रहा हूँ कि प्रधान मंत्री जी इस बात का अहसास करते होंगे कि गत अगस्त के बाद से लगातार यह चर्चा चलती रही है कि आम चुनाव कब होगा। सामान्यतः आपका कार्यकाल मई, 2009 तक है लेकिन मैं अपनी बात आरंभ करते ही यह बात कहूँगा कि इस बात की पूरी संभावना है कि राष्ट्रपति का यह अभिभाषण, जिस पर आज सदन चर्चा कर रहा है, इस सरकार के कार्यकाल में उनका अंतिम भाषण हो। इसकी संभावना है। ...( व्यवधान) मैं यह बात वैसे ही नहीं कह रहा हूँ। बहुत सारी बातें जो सामान्यतः अभिभाषण में होनी चाहिए थीं, वे आज मंत्री जी के वक्तव्य में आई हैं। सामान्यतः ये बातें उसमें होनी चाहिए थीं। हमेशा लिखा जाता है कि पिछले साल में अमुक विदेश मंत्री आए, अमुक-अमुक प्रधान मंत्री आए, विदेशों से संबंध ऐसे रहे, वैसे रहे। बहुत सारी बातें जो आज सदन के नेता ने अपने प्रातःकाल के वक्तव्य में कहीं, सामान्यतः वे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में होती हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण में वे बातें नहीं लिखी गईं जो आज उन्होंने आईएईए के बारे में अपने वक्तव्य में कहीं। अन्यथा वे इसमें आतीं और सदन को पता लगता। यह सरकार की व्यवस्था है कि उसमें उन बातों को शामिल करे, लेकिन उसके कारण भी मुझे लगा और संभव है कि सरकार के मन में कल्पना यह है कि चुनाव 2009 में न करके 2008 में करे या यह कल्पना है कि 2009 में भी करे तो भी अभिभाषण करने की जरूरत फिर से न पड़े। यह तो अनुमान की बात है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं कहूँगा कि जोगी जी ने जो राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद का प्रस्ताव रखा है और जिसका कृष्णा तीरथ जी ने समर्थन किया है, परंपरा यही है कि अगर कोई सरकार प्रस्ताव का विरोध नहीं करती तो मोशन ऑफ थैंक्स का विरोध नहीं होता। मोशन ऑफ थैंक्स का कोई विरोध नहीं करता। अधिक से अधिक उस पर संशोधन दिये जाते हैं कि हम आपकी बात से सहमत हैं, किन्तु हमें खेद है कि इस अभिभाषण में अमुक-अमुक बात नहीं है। हम समर्थन करते हैं राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देने में, विरोध नहीं करते, लेकिन हमें इस बात का खेद है कि आपने इसका उल्लेख ही नहीं किया है कि पिछले साल में कितने किसानों ने आत्महत्याएं कीं। कोई कहेगा कि हमने बजट में इतना कुछ दे दिया, लेकिन उससे आत्महत्या की बात और उसके जो गंभीर अर्थ हैं, एक साल में हज़ारों लोगों ने आत्महत्याएं कीं। [h35] पता नहीं किसी ने गिनती की है या नहीं, लेकिन पिछले कुछ सालों में 16 हजार लोग थे। पिछले साल राधाकृष्ण समिति का गठन किया गया था -Expert Group on Agricultural Indebtedness. उसमें जो बातें कही गई हैं कि अगर कोई एक व्यक्ति आत्महत्या करता है तो उसका अर्थ यह नहीं समझना चाहिए कि वही दुखी है।
“A combination of growing risk factors among the farming community triggers suicides. It is indicative of a larger socio-economic malice. This implies that for every farmer who has committed suicide, there are many more in distress.” यह महत्व की बात है कि अगर एक किसान आत्महत्या करता है, इसका मतलब कई गुना अधिक किसान परेशानी एवं तकलीफ में हैं। वे परेशानी स्वयं महसूस कर रहे हैं, चाहे वे आत्महत्या न कर रहे हों। कुछ लोग कहते हैं कि यह गलत किया है, मैं नहीं मानता हूं कि गलत किया है। किसानों की ऐसी स्थिति हो गई थी कि उन्हें कर्ज से मुक्ति देना उचित है। मैं उसका विरोध नहीं करता हूं, लेकिन क्या वास्तव में जो कर्ज के कारण आत्महत्या करते थे, उन्हें मुक्ति मिलेगी। वैसे इसकी चर्चा बजट में अलग होगी, लेकिन इसका उल्लेख बार-बार किया गया है कि किसान को हमने 60 हजार करोड़ रुपए दिए। प्रधानमंत्री जी स्वयं वित्त मंत्री रहे हैं, हमने वित्त मंत्री जी से यह अपेक्षा जरूर की थी कि वे जब 60 हजार करोड़ रुपए की बात कहेंगे तो हमें यह भी बताएं कि जब इतना कर्ज बैंक माफ कर देगी, तब उसकी व्यवस्था बजट में क्यों नहीं है? यह उन्होंने नहीं बताया। अखबारों में हम बाद में पढ़ते हैं कि बांड्स इश्यु किए जाएंगे जो तीन साल में बैंकों को दिए जाएंगे। मैंने कल यह बात एक पत्रकार से सुनी, जो टेलीविजन में काम करता है तो मुझे आश्चर्य हुआ। वित्त मंत्री जी से जब यह बात पूछी गई कि इसका प्रबंध नहीं है, इसका प्रबंध कैसे करेंगे तो उन्होंने कहा कि मुझे जो कहना होगा,वह मैं संसद में कहूंगा। फिर उस पर इतनी कहा-सुनी हुई कि वित्त मंत्री जी उसे छोड़ कर चले गए। उन्हें बाद में बताया गया कि यह तो लाइव प्रोग्राम चल रहा था। ये जो चीजें हैं, इसके कारण मुझे इतना कहना है कि आज यह उचित होगा कि प्रधानमंत्री जी सदन को अवगत करवा दें कि इसकी व्यवस्था करने का आपका क्या विचार है? यह कोई नहीं कहेगा कि किसानों को राहत नहीं मिले, उन्हें राहत जरूर मिलनी चाहिए और खास करके ऐसी स्थिति में जब किसान इतनी बड़ी संख्या में आत्महत्या कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जो किसान आत्महत्या करते हैं, जो स्माल एंड मार्जिनल फार्मर्स बहुत तकलीफ में हैं, वे बैंकों से उधार नहीं लेते।
“The dependency of marginal and small farmers was more on non-institutional agencies than of larger farmers. The marginal farmers had to depend more on private moneylenders.” सभापति महोदय : श्रीमती कृष्णा तीरथ जी की कुछ भी बात रिकार्ड में नहीं जाएगा।
.........( व्यवधान)* श्री लाल कृष्ण आडवाणी : 29 तारीख को जब बजट पेश हुआ तो कुछ प्रदेशों से मुझे फोन आया, जो इस विषय में जानकार हैं उन्होंने कहा कि हमारे यहां बैंकों से कर्ज लेने वाले लोगों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं है, क्योंकि ज्यादातर किसान मनीलैंडर्स से लोन लेते हैं।...( व्यवधान)[rep36] यहां सदन में जब मोशन ऑफ थैंक्स पेश किया गया और उसमें किसानों की सहायता का उल्लेख किया गया तो मुझे लगा कि इस पर मुझे प्रधानमंत्री जी से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि सरकार के मन में क्या है? पहली बात जो मैंने कही कि आज जो किसानों की हालत है, उसमें उन्हें कर्ज से राहत देना सर्वथा उचित है। यह गलत नहीं है। लेकिन यह सहायता उन्हीं को मिलनी चाहिए, जिनको इसकी आवश्यकता है। मनी लैंडर से कर्ज लेने वालों को यह सहायता नहीं मिल सकेगी, जो कि सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं।
महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि किसान केवल कर्ज के कारण आत्महत्या नहीं करते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है “In addition to agricultural prices ……” एग्रीकल्चर प्राइसिज़ के कारण कर्ज लेता है। लेकिन जो आत्महत्याएं हो रही हैं, उसके बारे में लिखा है -
“It is because in addition to agricultural prices, the farmer is burdened with rising costs of meeting basic needs like education of children and family healthcare. As a result, there has been pervasive distress among the farming community.” अर्थात, महंगाई का योगदान किसानों की इस स्थिति में कम नहीं है। मैं कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुका हूं कि आम आदमी के नाम पर जीती हुई इस सरकार ने सबसे ज्यादा तकलीफ किसी को दी है तो * Not recorded वह आम औरत को दी है। आम आदमी को तो दी ही है। आम औरत फैमिली बजट के साथ डील करती है और उसका बजट बिगड़ गया है। हर चीज महंगी हो गई है। खाद्य पदार्थ महंगे हो गए हैं, बच्चों की पढ़ाई महंगी हुई है। ये सभी चीजें ऐसी हैं...( व्यवधान) जब आप बोल रही थीं, उस समय मैं एक बार भी नहीं बोला था।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप इनको सुनिए। आप जो कुछ कह रहे हैं, कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है। इसलिए टोकाटोकी करने से कोई फायदा नहीं है।
...( व्यवधान)* श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, मैं समझता हूं कि यदि पिछले चार सालों में जिस समस्या ने समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर वर्ग और ग्रामीण जनता को परेशान किया है, तो वह महंगाई है। महंगाई के बारे में राष्ट्रपति के अभिभाषण में बहुत ही हिम्मत के साथ पैराग्राफ चार में कहा गया है “It will continue to be the endeavour of my Government to sustain growth ….. ” ज्यादा प्रयत्न ग्रोथ को सस्टैन करने पर है।
“…. While keeping prices under check. My Government has endeavoured to insulate the Indian consumer from these global inflationary trends.” मैं समझता हूं कि यह पैराग्राफ या इस तरह का स्टेटमेन्ट वर्ष 2004-05 में उपयुक्त होता,Till the ultimate year of this Government तब भी कहें कि हम प्रयत्न करेंगे - ग्रोथ बढ़ाते जाएंगे, लेकिन कीमतें रूकी रहें - मुझे इस पर आपत्ति है।This is not the time for this kind of statement for the future. कहते हैं कि हमने पिछले चार साल में इसे बांधे रखा है और दुनिया भर के इन्फलेशनरी ट्रैंड को हमने यहां प्रभावित नहीं होने दिया है। मैं इसे इस सरकार की सबसे बड़ी विफलता मानता हूं failure to control inflation and I feel कि फूड स्टफ्स की कीमत और बढ़ेगी, जिसके कारण आम आदमी और परेशान होगा[r37] ।
जब हमको अन्दर की सूचना मिलती है, जितनी भी मिलती है, उसके आधार पर कहते हैं कि यह भी एक फैक्टर है, जिसके कारण शायद चुनाव जल्दी हो जायें। हो जायें, कोई आपत्ति नहीं। आम जनता को यू.पी.ए. के चार साल का असैसमेंट करने का, निर्णय देने का मौका मिलेगा। उन्होंने पहले एन.डी.ए. के 6 * Not recorded साल का शासन देखा और अब चार साल यू.पी.ए. का भी देखा, उसके आधार पर फैसला करने का मौका मिलेगा, हमको कोई आपत्ति नहीं। हम उनमें से नहीं हैं जो यह कहें कि तुमने अगर यह नहीं किया तो हम सपोर्ट विथड्रा कर लेंगे। यह हमारी स्थिति भी नहीं है। लेकिन हम देख रहे हैं कि अगस्त से लेकर जो लगातार चलता रहा है कि अगर यह हो गया, जो स्टेटमेंट आज हो गया है, हमारे सदन के नेता ने जिसको रखा था, वह यह है कि हम तो आगे बढ़ रहे हैं और हम तो जितना पहुंचे हैं, इतना पहुंचे हैं और थोड़े दिन में कम्पलीट कर लेंगे, जिसको जो करना है, करे। मैं समझता हूं कि इधर के लोग सुबह उनका उत्तर सुन रहे होंगे। हमें किसी स्थिति में कोई दिक्कत नहीं। मैं तो केवल देश में राजनैतिक क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहे, इसको ठीक नहीं मानता। मैं मानता हूं कि अगस्त, 2007 तक हम सब लोगों के मन में निश्चित था कि चुनाव 2009 में होंगे, लेकिन अचानक पिछले 5-6 महीनों में रोज़ एकाध स्टेटमेंट ऐसा आता है, जिसके कारण अनिश्चितता बढ़ती है। अनिश्चितता बढ़ती है तो अस्थिरता बढ़ती है और अस्थिर सरकार अपने शासन के साथ कभी भी न्याय नहीं कर सकती।
इस अभिभाषण में भी इस बात का गर्व किया गया है कि हमारी ग्रोथ रेट 9 परसेंट हो गई। कुछ लोग इस पर आपत्ति कर सकते हैं, लेकिन कम से कम मैं और मेरी पार्टी इसका विरोध नहीं करते। बहुत खुशी की बात है, हमारे लिए भी गर्व की बात है, अगर देश में 9 परसेंट जी.डी.पी. ग्रोथ है। बात यह है कि इसी स्थान पर तब जो विपक्ष की नेता थीं, जब हमारे वित्त मंत्री ने एक बार कह दिया था कि आठ परसेंट जी.डी.पी. ग्रोथ तो उस पर उन्होंने टिप्पणी की थी कि मुंगेरी लाल के हसीन सपने साकार नहीं होने हैं, लेकिन वे साकार हुए। आज भी मैं कहता हूं कि 9 परसेंट ही नहीं, ग्रोथ रेट 10 परसेंट हो सकती है और होनी चाहिए। टू डिजिट डी.जी.पी. ग्रोथ होनी चाहिए। अलबत्ता मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि यह जो ग्रोथ हो रही है, यह इन्क्लूसिव ग्रोथ है। इस बार भी इन्क्लूसिव शब्द का फिर से प्रयोग किया गया, जो इस अभिभाषण में भी है। मेरे मित्र पत्रकार एम.जे. अकबर हैं, उन्होंने पिछले दिनों बहुत अच्छी तरह से कहा। उन्होंने कहा है कि The kind of unequal economic growth that we are witnessing in India shows that there has been waterfall for a small minority and there are not even a few drops of water for the thirsty majority. कुछ लोग एम.जे. अकबर की बात से सहमत नहीं होंगे, लेकिन मैं एक और व्यक्ति को कोट करूंगा, जिसकी अभी कुछ दिन पहले कुछ अखबारों में हैडलाइन बनी है, Twenty richest Indians today earn more than 30 crore poorest Indians. यह किसने कहा? यह श्री विमल जालान, फोर्मर गवर्नर ऑफ दि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और दूसरे सदन के सम्माननीय सदस्य ने कहा। इसको कोई इन्क्लूसिव ग्रोथ नहीं कह सकता।
आरम्भ के वर्षों की मुझे याद है, मैं पत्रकार हुआ करता था, ऊपर बैठता था। डॉ. राम मनोहर लोहिया ने एक बात शुरू की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति हिन्दुस्तान का आज तीन आने ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : 27 करोड़।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : उन्होंने तीन आने कहा। आप लोहिया जी के भक्त हैं, मैं तो पत्रकार के नाते ही उन्हें जानता था। जब उन्होंने तीन आने कहा था तो इतनी बड़ी बहस हुई थी। जब प्लानिंग कमीशन ने 15 आने कहा है, तीन आने बनाम 15 आने पर एक दिन बहस हुयी थी और आज आज लगता है कि बीस कुबेर और 30 करोड़ गरीब। ...( व्यवधान) उनके साथी कौन-कौन हैं, यह सब जानते हैं, वह सब जानते हैं। ...( व्यवधान) मैं उनको दोष नहीं दे रहा हूं, जो 20 कुबेर धनी हैं, उनमें से एकाध के लिए मेरे मन में बहुत आदर है क्योंकि सारी दुनिया में उनका नाम हुआ है और दुनिया के बाकी देशों में भी जाकर वे अपना नाम करें, इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है, अलग-अलग लोग हैं। लेकिन यह व्यवस्था की बात है और कम से कम इन्क्लूजिव ग्रोथ का दावा मत करिए, इन्क्लूजिव ग्रोथ अभी नहीं हुयी है। हम भी उसके कारण भुगत चुके हैं, कहीं पर आ गया - इंडिया शाइनिंग, तो उसके कारण हमें नुकसान हुआ। हम इंडिया राइजिंग कहते तो गलती नहीं होती और आज भी इंडिया राइजिंग है, मैं इसका विरोध नहीं करता हूं। मैं चाहता हूं कि यह आगे बढ़े।
अगर देश की प्रगति होती है, तो उसमें सभी को खुशी होती है, हम कोई उससे अलग नहीं हैं। लेकिन देश की प्रगति इन्क्लूजिव हो, सब लोग उसमें समाविष्ट हों, यह जरूरी है। अगर आज ऐसा नहीं है, उसको भी कह दें कि ऐसा है और बहुत ठीक हो रहा है, हमको इस बात पर भी सोचना चाहिए कि बिना सोचे-विचारे अगर हम व्यवस्था किए बिना कुछ कदम उठाएंगे, तो उसका इन्फ्लेशनरी असर भी होता है और इन्फ्लेशनरी असर यदि होगा, तो सबको भुगतना पड़ेगा। इसीलिए मैंने महंगाई की बात कही, इन्क्लूजिव ग्रोथ की बात कही और मैं कहना चाहता हूं कि विरोध कोई मोशन आफ थैंक्स का नहीं करता है, लेकिन यह कहता है कि इसमें यह चीज नहीं है, यह चीज नहीं है और यह चीज नहीं है।
राष्ट्रपति जी के बारे में मुझे कुछ कहना नहीं है, चूंकि बहुत से लोगों ने, वे महिला राष्ट्रपति हैं, इसका उल्लेख किया। मैं इतना ही कहूंगा कि यह अपेक्षा जरूर थी कि इस बार कम से कम जो एकमात्र चीज कामन मिनिमम प्रोग्राम में इस एलायंस ने महिलाओं के बारे में लिखी, और कोई चीज नहीं लिखी कि इन्फेंट मोर्टेलिटी खत्म होनी चाहिए और प्रेगनेंसी में मोर्टेलिटी खत्म होनी चाहिए, इन्फैंटेसाइट जो होता है, उसे खत्म करना चाहिए, बाकी महिलाओं की समसस्याओं का उल्लेख नहीं था, लेकिन एक का उल्लेख था कि हम उनको रिप्रेजेंटेशन देंगे, हम उनको विधानसभाओं और संसद में रिप्रेजेंटेशन देंगे।
THE MINISTER OF STATE IN THE DEPARTMENT OF COMMERCE, MINISTRY OF COMMERCE AND INDUSTRY (SHRI JAIRAM RAMESH): There are three pages on women’s welfare in the National Common Minimum Programme. The hon. Leader of the Opposition have read the National Common Minimum Programme.
SHRI L.K. ADVANI : I stand corrected. … (Interruptions) वह भी होगा, लेकिन यह भी लिखा है कि हम उनको लेजिस्लेचर्स में एक तिहाई रिप्रेजेंटेशन देंगे। उसके लिए लगातार कहा जाता रहा है।
श्री जयराम रमेश : आप पूरी बात करिए, सेलेक्टिव कोटेशन मत करिए।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैंने मान लिया। I do not stand on prestige issue when the core issue was: Why has it not been done? Why Rashtrapatiji bhashan been silent on that? … (Interruptions) इसके बारे में क्यों नहीं कहा? हमारी तरफ से लगातार कहा गया कि एक प्रपोजल है, जो हम लाए थे, जिसे हम कार्यान्वित नहीं कर सके। दो बार बिल इंट्रोडय़ूस किया, लेकिन जो लोग उसका विरोध करते थे और उन विरोध करने वालों में बहुत सारे आपके साथ हैं। उन्होंने हाथ से फिजिकली छीनकर हमें नहीं करने दिया। हमारे दोनों लॉ मिनिस्टर थे, वे उसे नहीं कर सके। कांस्टीटय़ूशनल अमेंडमेंट बिल शोर-शराबे में पास नहीं हो सकता। यह संसदीय कार्यमंत्री जी भी जानते हैं। इसीलिए बाद में जब इलेक्शन कमीशन ने प्रपोजल दिया कि instead of amending the Constitution to provide for women’s reservation, why not make it mandatory for political parties to give a certain percentage to women when they put up their candidates? यह मैं मानता हूं कि इस तरीके से वह उद्देश्य पूरा नहीं होगा, जो ओरिजनल उद्देश्य की कल्पना थी, लेकिन फिर भी बहुत बढ़ोत्तरी होगी। बहुत बढ़ोत्तरी होने के साथ-साथ एक एडवांटेज होगा कि it can be done by simply amending the Representation of People’s Act.
दूसरा, उसमें चूंकि रोटेशन का प्रिंसिपल नहीं आएगा, [p38] [MSOffice39] The concern of the representatives for their constituencies should not be undermined. इसीलिए हमने कहा कि हम उसके लिए भी तैयार हैं। दोनों प्रपोज़ल्स में से जिस पर भी सरकारी पक्ष और कैबिनेट सहमत हो, हम उसके लिए तैयार हैं, लेकिन आना जरूर चाहिए। महिलाओं के साथ आपने वचन दिया, हमने वचन दिया, इसीलिए मैं आज फिर से प्रधान मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि जिस तरीके से भी आप करना चाहें, वह ओरिजनल प्रपोजल था या इलैक्शन कमिशन का प्रपोजल, दोनों में से जिस पर भी आप सहमति करवा सकें, देखें।...( व्यवधान)
मैं दूसरी बात करूंगा जिसका उल्लेख मैंने आज सुबह शुरू किया था जब यहां से विरोध हुआ था और मैंने संक्षेप में अपनी बात कही थी, वह यह था कि इस सरकार ने आंध्र में एक यह आइडिया दिया कि हम तेलंगाना राज्य बनाएंगे। श्री जयराम रमेश को याद होगा कि आपके कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में क्या लिखा है। मैंने आज भी पढ़ा है। उसमें लिखा था कि हम इसके पक्ष में हैं।...( व्यवधान)
SHRI JAIRAM RAMESH : Again, you are not quoting it properly. The exact wording is that we would search for a consensus, after appropriate consultations and cooperation of all the parties. But there was no explicit commitment.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : वह कनसैन्सस रूलिंग पार्टी, जिसने टीआरएस को जन्म दिया और अपने साथ-साथ मिलाकर चलाया कि हम दोनों सहमत हैं, उसके बाद भी कनसैन्सस नहीं है, यह कैसे कह सकते हैं। आज आपने उन्हें कम्पैल किया कि वे यहां से इस्तीफा देकर जाएं।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपकी बात लिखी नहीं जा रही है।
...( व्यवधान)* SHRI L.K. ADVANI : I am not yielding. मैंने जयराम रमेश जी को यील्ड किया क्योंकि he was precise; he was right when he said that, उसमें कनसैन्सस की बात थी। लेकिन उस कनसैन्सस की बात के पीछे...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
* Not recorded श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इसलिए मेरा कहना यह है कि आज आपने अपनी कही हुई बात को एक तरफ रखकर अपने साथियों को, जो इतने सालों तक आपके साथ एलायंस पार्टनर थे और संसद के मैम्बर्स थे, उन सबको निकलने के लिए मजबूर किया, जोकि आज तक कभी नहीं हुआ। हिन्दुस्तान के साठ साल के संसद के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि वे सदन में खड़े होकर, अपनी बात कहकर इस्तीफा दें और स्पीकर महोदय उन्हें कहें कि ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
SHRI L.K. ADVANI : I am not yielding. … (Interruptions) I am not yielding. … (Interruptions) I am not yielding. … (Interruptions)
सभापति महोदय : आपकी बात हो गई है। कुछ भी नहीं लिखा जा रहा है।
...(व्यवधान) * सभापति महोदय : रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है।
…( व्यवधान) * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : हिन्दुस्तान के अलग-अलग भागों में अलग-अलग राज्यों की मांग होती रही है। मुझे इस बात की खुशी है कि जिन तीन मांगों का हमने समर्थन किया - झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ - हमें जब अवसर आया तो हमने उस पर एक ही शर्त लगाई...( व्यवधान)[N40] सभापति महोदय : रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है।
...( व्यवधान)* सभापति महोदय : आप उनको बोलने दीजिए। आप अपने नेता को तो बोलने दीजिए। आप अपने नेता को क्यों डिस्टर्ब कर रहे हैं?
…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : जब वे ऐसा कर रहे हैं, तो ये क्या करें? वे लोग बीच में टोक रहे हैं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : वे तो चाह रहे हैं कि आप बोलने न पायें। उन्हीं की इच्छा ये पूरी कर रहे हैं।
…( व्यवधान)
* Not recorded श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं कह रहा हूं कि एक अच्छा तरीका हमने निकाला कि वह केवल क्षेत्रीय मांग न हो। ...( व्यवधान) लेकिन जिस प्रदेश में वह क्षेत्र है, उस प्रदेश की विधान सभा भी अगर उसे एंडोर्स करती है, तो हम उसे कार्यान्वित करेंगे। हमने जैसे ही इन तीनों प्रदेशों, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने, इन तीन मांगों की पुष्टि की, हमने उसे कार्यान्वित कर दिया। मुझे खुशी है कि पूरे सदन ने सर्वसम्मति से इसे पारित किया। ...( व्यवधान) ख्र् ठ्ठथ्र् ददृद्य् त्ड्ढथ्ड्डत्दश्र् द्य्दृ न्र्दृद्व.ह्ल (ख्र्दय्ड्ढद्धद्धद्वद्रय्त्दृदद्म्) सभापति महोदय : आप बैठिये। आप क्यों हल्ला कर रहे हैं।
…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं इसके साथ और भी जोड़ दूं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है इसलिए आप बैठ जाइये।
...( व्यवधान)* सभापति महोदय : मिस्टर गोयल, रिकार्ड में कुछ भी नहीं जा रहा है। आप शांति बनाये रखिये।
…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं चाहूंगा कि वूमैन्स बिल के बारे में, तेलंगाना के बारे में प्रधान मंत्री जी स्थिति स्पष्ट करें कि सरकार क्या चाहती है और क्या अपेक्षा करती है? मैं यह मानता हूं कि कभी-कभी हमारे जो एलायंस पार्टनर्स होते हैं, कोलिएशन पार्टनर्स होते हैं, उनका ध्यान रखना पड़ता है। अब हमारी पार्टी बेशक विदर्भ के पक्ष में हों, लेकिन हमारे एलायंस पार्टनर्स पक्ष में नहीं हैं, यह भी स्थिति हो सकती है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप शांत रहिये। कुछ भी रिकार्ड नही होगा।
...(व्यवधान) * सभापति महोदय : आठवले जी, आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
* Not recorded श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं प्रधान मंत्री जी की उपस्थिति में एक विषय और लूंगा। मैं मानता हूं कि जैसे महंगाई एक बहुत बड़ी विफलता इस सरकार की रही है वैसे ही आंतरिक सुरक्षा के मामले में भी इस सरकार की बहुत बड़ी विफलता रही है। वर्ष 2004 के बाद देश में आतंकवाद की जितनी घटनाएं हुई हैं, ...( व्यवधान) हमारी संसद के ऊपर हमला हुआ। ...( व्यवधान) संसद पर हमला करने वाले जो पांचों आतंकवादी थे, वे यहीं पर मार दिये गये। ...( व्यवधान) हमारे नौ सुरक्षा कर्मी उस आंतकवाद को रोकने में मारे गये। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : रिकार्ड में कुछ भी नहीं जा रहा है।
...(व्यवधान) * सभापति महोदय: आप लोग बैठ जाइये।
…( व्यवधान)[MSOffice41] श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, मैंने स्वयं प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा कि मुंबई में जो सीरियल ब्लास्ट्स हुए थे, जिनमें सात लोकल ट्रेन्स में सात बम विस्फोट एक साथ हुए थे, क्या कारण है कि उसमें जो अपराधी थे, वे आज तक पकड़े नहीं गए हैं? क्या कारण है कि वर्ष 2004 से लेकर अब तक जो मेजर घटनाएं हुईं, जैसे वाराणसी और अयोध्या में मंदिरों पर हमले, मालेगांव की घटना, दिल्ली, हैदराबाद, इम्फाल और बंगलौर की घटनाएं,...( व्यवधान)
सभापति महोदय : बैठ जाइए, कोई बात लिखी नहीं जा रही है।
...(व्यवधान) * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, मैं चाहूंगा कि प्रधानमंत्री जी अपने उत्तर में, अब तक जो इंवेस्टीगेशन्स हुई हैं, जिन लोगों पर प्रॉसीक्युशन हुई है उसका भी विवरण दें। वर्ष 2004 से अब तक की घटनाएं, चाहे वह मालेगांव की घटना हो, हैदराबाद और बंगलौर की घटनाएं हों, उन सभी के बारे में जानकारी दें।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप लोग बैठ जाइए, कोई बात लिखी नहीं जा रही है।
...(व्यवधान) * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, अफजल के बारे में कोर्ट ने जो निर्णय दिया, उसका अभी तक आदर क्यों नहीं हुआ है। ...( व्यवधान) अगर कोई क्लेमेंसी पेटीशन पेंडिंग है, तो वह कब तक पेंडिंग रहेगी?...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कोई बात लिखी नहीं जा रही है।
...(व्यवधान) * * Not recorded श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए श्री अजीत जोगी जी ने अमरकंटक में बनाई जा रही नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी का स्वागत किया। उसका नाम इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी रखा गया है। इसमें जितने प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं या आरम्भ किए गए हैं, उनके नाम इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी, इंदिरा गांधी नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम, राजीव गांधी फेलोशिप, राजीव गांधी इंस्टीटय़ूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्युवल मिशन रखे गए हैं।...( व्यवधान) प्रधानमंत्री जी मैं आपको संबोधित कर रहा हूँ। प्रधानमंत्री जी, हिंदुस्तान में बहुत बड़े-बड़े महापुरूष हुए हैं, जैसे सरदार पटेल, जय प्रकाश नारायण, डा0राम मनोहर लोहिया, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अन्ना दुरई, मोरारजी देसाई जैसे महापुरूष हुए हैं, आप जिनके साथ काम करते थे नरसिंह राव जी जैसे, फिर क्या कारण है कि एक ही परिवार के लोग इसमें आते हैं...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कृपया आप बैठ जाएं। रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है। यह सारा हंगामा रिकार्ड में नहीं जा रहा है।
...(व्यवधान) * सभापति महोदय : मैंने कहा है कि आप जो भी कह रहे हैं, वह रिकार्ड में नहीं जा रहा है। आपको जब मौका मिलेगा, तब आप अपनी बात कहें।
...(व्यवधान) * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैंने जो टिप्पणियां की हैं, वे प्रमुख रूप से इस कारण की हैं कि प्रधान मंत्री जी स्वयं यहां उपस्थित हैं...( व्यवधान)
सभापति महोदय : मैंने कहा है कि रिकार्ड में कुछ भी नहीं जा रहा है इसलिए आप बैठ जाएं।
...(व्यवधान) * THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CHEMICALS AND FERTILIZERS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI B.K. HANDIQUE): Sir, this is objectionable. What he is saying is an insult to a national leader… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR (BANGALORE SOUTH): You should be ashamed about it… (Interruptions) There is no name from the North-Eastern region… (Interruptions)
* Not recorded सभापति महोदय : रिकार्ड में कुछ नहीं जाएगा।
...(व्यवधान) * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इन्होंने विलम्ब से सूचना मिलने पर भी ये यहां आए, उसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं और इस धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है।
...(व्यवधान) * सभापति महोदय : आप परेशान न हों, सदन की कार्यवाही समुचित रूप से चलने दें इसलिए कृपया बैठ जाएं।
* Not recorded मोहम्मद सलीम : धन्यवाद, सभापति जी। संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति जी ने जो अभिभाषण दिया था, उस पर धन्यवाद प्रस्ताव श्री अजित जोगी ने सदन में पेश किया है और श्रीमती कृष्णा तीरथ ने उसका समर्थन किया है। धन्यवाद ज्ञापित प्रस्ताव के ऊपर तर्क होना जरूरी है, लेकिन यहां जिस तरह की बहस हो रही है और जो लांछन लगाए जा रहे हैं, उसके लिए हमारी अपनी दुविधा है। प्रतिपक्ष के नेता ने भी अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि जब संसद में राष्ट्रपति जी अभिभाषण देते हैं तो उस अभिभाषण को लेकर, उस बात को लेकर और उस गरिमा को लेकर कोई बहस नहीं होती। सब लोग मिलकर धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। लेकिन वह अभिभाषण हमें एक अवसर प्रदान करता है कि सरकार की मंशा क्या है, सरकार की बैलेंसशीट क्या है, उस पर हम चर्चा करें।[R42] इसलिए धन्यवाद का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। यह कोई चुनावी बहस नहीं है और चुनावी मैदान भी नहीं है। लेकिन जो बैलेंस-शीट प्रस्तुत की जा रही है उसमें यह सवाल इसलिए आ रहा है, क्योंकि ऐसा लगता है कि यह भाषण चुनावी तो नहीं है। संसद के समक्ष महामहिम राष्ट्रपति जी का यह पहला अभिभाषण था लेकिन उसके साथ-साथ इस प्रस्ताव के ऊपर दोनों तरफ से चुनावी वातावरण आ गया। प्रतिपक्ष के माननीय नेता जब यह कहते हैं कि हमें लगता है कि 6 महीने या 8 महीने में चुनाव हो जाएंगे, तो मैं समझता हूं कि जब से यूपीए सरकार आई है तब से ये लोग 6 महीने का रिन्युवल करते आ रहे हैं और “हम आस लगाए बैठे हैं” वाला गीत सुना रहे हैं। पहले कहते थे कि ज्योतिषियों से संपर्क किया गया है, उससे पता चल रहा है लेकिन अब कहते हैं कि भाषण पढ़कर समझ रहे हैं कि चुनाव आने वाला है। ...( व्यवधान) माननीय आडवाणी जी की बात के अलावा आप किसी की बात सुनते नहीं हैं। मैं समझता हूं कि यूपीए सरकार के पास अवसर था कि जिन मुद्दों के ऊपर यूपीए सरकार बनी और कॉमन-मिनिमम-प्रोग्राम दोनों तरफ से रैफर किया गया, उसी के आधार पर क्या बैलेंस-शीट प्रस्तुत करते हैं, यह होना चाहिए। सरकार का चौथा साल है और नयी उम्मीद जगाने से ज्यादा, जो किरण सरकार बनने पर लोगों ने देखी थी और सन् 2004 में जो उम्मीद पैदा की गयी थी वह कहां तक सरकार के काम के अनुसार कारगार हुई, उसका नतीजा क्या आया, अभिभाषण में ऐसा होता तो मैं समझता हूं कि वह सही बैलेंस-शीट होती।
अभिभाषण में ग्रोथ और रीज़नल बैलेंस की बात कही गयी और वह कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में भी है। लेकिन जो छवि दी गयी वह बैलेंस्ड छवि नहीं है। हम अभी चर्चा में सुन रहे हैं और एक यूफोरिया भी तैयार हो रहा है, ग्रोथ की कहानी भी सुनाई जा रही है और वह छवि इस अभिभाषण में भी है। इस अभिभाषण में कहा गया है कि हमारी अर्थ-नीति किस तरह प्रगति की ओर अग्रसर है। एक तरफ जब शाइनिंग-इंडिया की छवि दी गयी तो दूसरी तरफ जो सफरिंग-इंडिय़ा है उसकी छवि भी आती तभी बैलेंस-शीट पूरी होती। वामपंथी होने के नाते मैं समझता हूं कि इस देश में डॉलर की इन्कम के तहत 48 बिलियनेअर तैयार हुए हैं। सरकार का कर्तव्य है कि जो 78 फीसदी लोग 20 रुपये से कम इन्कम के ऊपर अपना खर्च चलाते हैं, उनकी भी फिक्र सरकार को होनी चाहिए, तभी वह बैलेंस-शीट पूरी होती है। दोनों पहलू लोगों के सामने आने चाहिए। मुझे अफसोस है कि चार-पांच साल में आपका फील-गुड फैक्टर फील बैड हो रहा है। अक्सर ऐसा होता है कि सरकार को फील-गुड फैक्टर आता है, और विपक्ष का फील बैड होता है, अच्छी बात है।
सभापति जी, अभिभाषण में जिन पहलुओं को रखा गया है मैं कुछ बातें उनके बारे में कहूंगा। देश की जनता के सामने महंगाई है, मुद्रास्फीति है, बेरोजगारी है, गरीबी है और उसके लिए किसानों के बीच, कृषि क्षेत्र में जो परेशानियां हैं, जिनकी वजह से लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं, तो जब हम संसद में चर्चा कर रहे हैं और देश के 100 करोड़ लोगों की समस्याओं को सामने रखकर भाषण देकर कोई प्रस्ताव प्रस्तुत करें, तभी सही बात होगी। हमारे देश के 70 प्रतिशत लोगों की स्थिति आज क्या है, उसका भी जायजा राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में हमारे सामने आनी चाहिए थी। सिर्फ 20 प्रतिशत की जय-जयकार नहीं होनी चाहिए। इसीलिए हम कहना चाहते हैं कि स्पष्ट रूप से हमारे सामने छवि नहीं आई है। बात ही बात में दोनों तरफ से बजट के प्रावधान की बात आ गई है। मैं समझता हूं कि जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ताव आता है, उसमें लोक सभा में बजट वाला प्रावधान नहीं लाने से अच्छा होता। चूंकि अभिभाषण में ही इतनी सारी बातें हैं, जिन पर चर्चा करने से सारा समय समाप्त हो जाएगा, हालांकि बजट पर अलग से बहस होगी, लेकिन जब प्रस्ताव का पुरःस्थापन करने वाले या समर्थन करने वाले और परोक्ष रूप से प्रतिपक्ष के नेता भी बजट वाला सवाल ले आते हैं या कर्जा माफी का सवाल ले आते हैं, इसका मतलब है कि उनके अनुसार अभिभाषण में इतने मुद्दे नहीं हैं, जिन्हें लेकर चर्चा की जा सके। लेकिन इस अभिभाषण में इतने मुद्दे हैं, हम इसकी सराहना करते हैं। जो विरोध की बात कही गई, विकास की बात कही गई, वे सभी बातें मैनडेट हैं और उन बातों को दोहराया गया है, हम इसकी सराहना करते हैं। लेकिन 11वीं पंचवर्षीय योजना में इंक्लूसिव ग्रोथ के लिए ये-ये प्रावधान किए गए, ये यूपीए सरकार के लिए उपलब्धि नहीं हैं। " बाबा मरिए तो बैल बटिएं नहीं " इंक्लूसिव ग्रोथ के लिए वर्ष मई, 2004 से लेकर 2007 या फरवरी 2008 तक क्या स्थिति हुई, उसमें हम कहां-कहां सफल हुए और नेशनल कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में हमारा जो मैनडेट है, उसे देखना पड़ेगा। बेशक हमें गौरव है कि हमारे देश को प्रथम महिला राष्ट्रपति मिली और सर्वोच्च कक्ष के संयुक्त अधिवेशन में महिला राष्ट्रपति ने संबोधित किया। इसकी हम सराहना करते हैं।
16.53 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में महिलाओं के चेप्टर में पहला शब्द यह लिखा गया था कि लोक सभा और विधान सभा में महिलाओं के आरक्षण के लिए यूपीए सरकार बिल ले कर आएगी। मैं पढ़ कर सुनना चाहता हूं, विमेन-चाइल्ड सैक्शन में यह बात लिखी हुई है कि the UPA Government will take the lead to introduce legislation for one-third reservation – it is mentioned very specifically:
“The UPA Government will take the lead to introduce legislation for one-third reservation – it is mentioned very specifically – in Vidhan Sabhas and in Lok Sabha. Legislation on domestic violence and against gender discrimination will be enacted. ” जैसे लेजिस्लेशन ऑन डामेस्टिक वायलेंस लाया गया, हम उसका स्वागत करते हैं। समर्थक के रूप में हमें गौरवान्वित महसूस करना चाहिए, लेकिन हम अफसोस भी जाहिर करते हैं और मांग भी करते हैं कि जो उसकी पहली लाइन थी कि -
“We will take the lead to introduce legislation for one-third reservation for women in Vidhan Sabhas and in Lok Sabha. ” जब अमरीका से आकर रोबर्ट गेट्स बोलते हैं कि “Time is ticking” तो हम सरकार का समर्थन करने वाले वामपंथी यह नहीं कह सकते हैं कि यूपीए सरकार तो पांच साल से बनी है और न्यूक्लियर डील के लिए टाइम टिकिंग हो रहा है, उसके लिए फिकरमंद है, लेकिन महिलाओं के आरक्षण के लिए बिल लाने के लिए Time is also ticking. उसके लिए भी थोड़ी फिक्र होना चाहिए, कोशिश होनी चाहिए, जो कि कमिटिड है। It is because the Government, under the leadership of Dr. Manmohan Singh, was constituted and has taken oath on the basis of the Common Minimum Programme. … (Interruptions)
MR. SPEAKER : The oath is taken under the Constitution.
MD. SALIM : The basis of this Government is to fulfil the aspirations of the people as enumerated in the Common Minimum Programme. The mandate is here. What we stress is “common” and “minimum” rather than devoting the time on “un-common” issues and “maximum” programme. Let us fulfil the “minimum” mandate which we have taken upon ourselves. That is what we demand. अगर उसमें ज्यादा एनर्जी खर्च होती, तो मैं समझता कि हमारे लिए, देश के लिए, पूरे विश्व के लिए एक ऐतिहासिक कदम होता। मैं अभी भी समझता हूं और अभी भी समय है, बजट सत्र के अंदर ही इस चरण में या दूसरे चरण में, महिला आरक्षण बिल लाया जाए इस संबंध में जो कुछ ऐतिहासिक भाषण में होना चाहिए था, वह उसमें नहीं है। [R43] जो कॉमन मीनिमम प्रोग्राम में मैंडेट है, वह राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में नहीं है, जो कॉमन मीनिमम प्रोग्राम में मैंडेट नहीं है, वह राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में है - इसीलिए हमारे लिए दुविधा हो जाती है।
वूमैन एंड चिन्ड्रन के अन्तर्गत बच्चों के अधिकार के बारे में बात कही है। फैमिली हैल्थ सर्वे के जब आंकड़े निकलते हैं, तो हमें अफसोस होता है कि देश में 70 फीसदी बच्चे एनिमिक हैं। हम कौन से ग्रोथ की बात कर रहे हैं? 21वीं सदी में भारत में 70 फीसदी बच्चे एनिमिक हों, यह दुख की बात है। बच्चे जिन को हम देवता मानते हैं, उनके बारे में हम चिंतित नहीं है। हम आसमान के तारे छूने जा रहे हैं, लेकिन बच्चों की शक्ल में जो तारे जमीन पर उतर आए हैं, उनके लिए पौष्टिक आहार का इंतजाम नहीं कर पाए हैं। इससे कोई ग्रोथ स्टोरी नहीं बन सकती। आसमान के तारों से ज्यादा, जमीन के तारों पर सरकार नजर रखे। आज बच्चों की बहुत दयनीय स्थिति है। महिलाएं और बच्चे कुपोषण के शिकार हैं और पिछले एक दशक में इनकी संख्या बढ़ी है। मैं एनडीए या यूपीए सरकार की बात नहीं कर रहा है लेकिन ऐसी महिलाओं और बच्चों की संख्या बढ़ी है, सरकारी आंकड़ा यह बता रहा है। एक तरफ ग्रोथ बढ़ रही है और दूसरी तरफ बच्चों और महिलाओं में कुपोषण बढ़ रहा है। सरकार की जिम्मेदारी इन दोनों को मिलाने की है। किस तरह हम ग्रोथ को टारगेट करें जिससे हम चुनौती से निपट सकें। इसे करने के लिए कॉमन मीनिमम प्रोग्राम में आईसीडीएस के यूनिवर्सलाइजेशन की और इसे पांच साल में पूरा करने की बात थी। सरकार हर साल एक रफ्तार से आगे बढ़ रही है जिस की मैं सराहना करता हूं। मैं इसमें बजट का मामला नहीं लाऊंगा क्योंकि बजट पर डिसकशन के समय इसे रेज करूंगा लेकिन अब भी यूनिवर्सलाइजेशन नहीं हो पाया। यह आखिरी साल है जिस में आपको इसे करने का मौका मिला था। अभिभाषण में अगर यह बात होती कि 31 मार्च, 2009 के अन्दर यूनिवर्सलाइजेशन ऑफ आईसीडीएस के टारगेट को एचीव कर लेंगे, इससे हम दोनों हाथ से ताली बजाते और कहते कि जो मैंडेट है, उसके लिए काम किया, कुछ-कुछ आगे बढ़े। आपने हर साल प्रावधान बढ़ाया है लेकिन वह काफी नहीं है। उस मैंडेट को पूरा करना चाहिए।
पीडीएस को मजबूत करने की भी बात है। कॉमन मीनिमम प्रोग्राम में लिखा है -
“The UPA Government will strengthen the Public Distribution System – PDS – particularly in the poorest and backward blocks of the country and also involve women’s and ex-servicemen’s cooperatives in its management.” यह मई 2004 का प्रावधान है। हम अभिभाषण में यह बात सुनना चाहते थे कि आपने इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है। हम यह नहीं सुनना चाह रहे हैं कि इसे 11वीं पंचवर्षीय योजना में लिखा गया है। मैं समझता हूं कि इसके विपरीत कुछ काम हुए हैं। किसानों को राहत देने के लिए बेशक कर्ज माफी एक बड़ा काम है लेकिन यह भी जरूरी था कि पहले यह काम करते जिससे आत्महत्या की कतार पर रोक लग सकती थी। अगर हम आगे प्रोक्योरमैंट मैसिव नहीं करेंगे और प्रोक्योरमैंट कारगिल जैसी मल्टी नैशनल कम्पनी को देंगे, आईटीसी जैसी इंडियन मल्टीनैशनल कम्पनी को देंगे, जो मांगने पर हिसाब तक नहीं देना चाहती कि कितना चावल, गेहू उनके गोदाम में पड़ा है, कितना प्रोक्योर किया है? हम प्रोक्योरमैंट की बात इसलिए करते हैं कि वह डबल-ऐज्ड है। जैसे ही फसल आती है, उस समय मीनिमम सपोर्ट प्राइज से प्रक्योर करते हैं तो छोटे किसानों को राहत मिलती है और दूसरी तरफ फूड सिक्योरटी भी एश्योर करते हैं। अगर हम प्रोक्योरमेंट को ढीला करते हैं और समझते हैं कि प्राइवेट सैक्टर इसका ध्यान रखेगा तो इसका लाभ नहीं मिलता। जो उदारीकरण की नीति 1991 से देश में चलायी गई है, उसका नतीजा क्या हुआ, कहां का गेहूं और चावल कहां गया, उसका सरकार के पास भी कोई हिसाब नहीं है।[a44] आज के दिन यहां जो पेपर सभापटल पर रखे गए हैं उसमं कहा गया है कि हम कानून में संशोधन कर रहे हैं ताकि कितना चावल और गेहूं कहां गया, इसके बारे में कंपनी से पूछें तो वह बताए। लेकिन वे कंपनियां नहीं बता रही हैं, आईटीसी कंपनी नहीं बता रही हैं। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में जो बातें थी, ऐसी बात नहीं है कि वे पूरी नहीं हुईं लेकिन उनके विपरीत काम हुआ जिसकी वजह से लोगों का फूड इनटेक घटा है, अवेलिबिल्टी कम हुई है। हम महंगाई के बारे में तमाम बातें नहीं कहेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री जी अर्थशास्त्री हैं। जब मैं राज्य सभा का सदस्य था तब मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। लेकिन पहले कहा गया कि फूड इनटेक कम रहा है, चूंकि आज कहा जा रहा है कि महंगाई क्यों बढ़ रही है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ गई है। मैं अर्ली 90 में इंटरनेशनल मैगजीन देख रहा था उसमें ऑस्ट्रेलियन मैगजीन में कार्टून था। It is not a new world order. It is a new wheat order. जो अमेरिका और वर्ल्ड बैंक उस कार्टून में कह रहे थे। Too much money is chasing. यह गेहूं का नया ऑर्डर है। मैं 1991 के ऑस्ट्रेलियन मैगजीन के कार्टून की बात कह रहा हूं जिसका हमारे दिमाग में बहुत गहरा असर पड़ा था और इसे हमने अपनी मैगजीन में रिप्रोडय़ूज भी किया था। लेकिन हर बार इस किस्म की व्याख्या दी जा रही है, पहले कहा गया वामपंथी क्यों चीखते हैं कि सीरियल अवेलेबिलिटी कम है, दाल और चावल कम मिल रहा है, इनको मालूम नहीं है कि उदारीकरण से लोगों की अवस्था में परिवर्तन हो गया है, जो न्यू मिडल क्लास 20 करोड़ मार्किट की बात करते हैं वे पीज़ा खाते हैं, वे पेटीज़ खाते हैं, फास्ट फूड खाते हैं, वे विम्पीज़ में लाइन लगाते हैं, आप गेहूं चावल का हिसाब क्यों करते हो, वह तो कम ही जाएगा, लेकिन गेहूं चावल की अवेलेबिलिटी कम होने का मतलब यह नहीं है कि विकास घट गया बल्कि विकास अच्छा हो गया, तब यह व्याख्या दी गई। लेकिन अब क्या व्याख्या दी जा रही है कि लोगों के पास ज्यादा पैसा हो जाने से जब यह पैसा मार्किट में रश करता है तो ज्यादा पैसा होने से कमोडिटी की कीमत बढ़ रही है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि एसेंशियल कमोडिटी की बात कर रहे हैं, उन गरीब लोगों की बात कर रहे हैं जो बारह या बीस रुपए से अपना संसार चला रहे हैं। उसके पास इतना पैसा नहीं आया है कि वे चेज करें। जो बिलिनेयर्स हैं वे सड़क पर गेहूं और चावल के लिए लाइन नहीं लगाते हैं, जिनके पास पैसे हैं वे इस कमोडिटी को चेज नहीं कर रहे हैं, वे कमोडिटी को कन्ज्यूमर की हैसियत से नहीं बल्कि होर्डिंग के लिए, गोदाम में रखने के लिए चेज कर रहे हैं। एनडीए सरकार ने आने के पहले दिन से ही पहला काम एसेंशियल कमोडिटी एक्ट को तब्दील करने का किया था ताकि होर्डर्स को राहत मिल जाए, वे दूध, मक्खन, मलाई, घी देकर बनाएं और जय सिया राम हो गया, काम होने पर बोलें, इस तरह से उनका काम पूरा कर दिया। लेकिन मैं उनको नहीं कहूंगा, मैं आपको कहूंगा कि किस तरह से चार साल में इस स्थिति से निपटें? अगर आजादी के साठ साल बाद 21वीं सदी में लोग रात को खाना नहीं खाकर सोते हैं और बच्चे कुपोषण झेलते हैं तो फिर हम किस तरफ जा रहे हैं? इस तरह से डिस्पेरिटी बढ़ रही है, हमारा अरमान बहुत दिन से था और अब प्रतिपक्ष के नेता आडवाणी जी से सुना और उन्होंने कोट भी किया, विमल जलान जी को भी कोट किया और एम. जे. अकबर को भी कोट किया कि डिस्पेरिटी बढ़ रही है। उन्होंने इस उम्र में इतने दिनों बाद एक चश्मा उतारकर दूसरा पहनने की कोशिश तो की। डिस्पेरिटी की बात कही गई, इनइक्वेलिटी बढ़ रही है। हमारे सामने मामला महाराष्ट्रियन-गैर महाराष्ट्रियन, मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान का नहीं है, मामला यह है कि इनइक्वेलिटी की खाई बढ़ रही है। हमने जो नियो लिब्ररल पॉलिसी ली है इससे बेशक पिछले 17 साल से उद्योग में कुछ फायदा हुआ है, हमारे इफ्रास्ट्रक्चर में फायदा हुआ है, शहरों में चकाचौंध हुई है, हम बहुत किस्म की गाड़ियों के मॉडल देख रहे हैं, एयर कंडीशन गरीब रथ भी चला रहे हैं।[r45] जो लोग एक्सक्लूसिव पोलिटिक्स करते हैं, जो यह कहते हैं कि यह हमारे जैसा नहीं है, पीपल नॉट लाइक अस, ये हमारी तरह भजन नहीं करते, हमारी तरह प्रार्थना नहीं करते, ये हमारी तरह लिबास नहीं पहनते। चाहे कोई भी हो, चाहे वह मुस्लिम फंडामैन्टलिस्ट हो, चाहे हिन्दू कम्युनल हो, क्रिश्चियन कम्युनल हो, उन लोगों की थ्योरी पोलिटिक्स में एक्सक्लूशन होती है। इससे अलग, उससे अलग, यह ऐसा नहीं, यह वैसा नहीं, अपने समाज के अंदर भी यह व्यवहार करते हैं। लेकिन यू,पी.ए. सरकार एक नई उम्मीद लेकर बनीं कि हम सबको साथ लेकर चलेंगे, हम सबको साथ जोड़ लेंगे, सियासत में जोड़ेंगे, समाज में जोड़ेंगे और आर्थिक रुप से विस्तार के काम में भी उन्हें जोड़ना पड़ेगा। यह इनक्लूशन, ग्रोथ विद इक्युटी होगा, ग्रोथ अलोन जो 15 साल से इस देश में या पूरे विश्व में कहा गया, वह हमें संतुष्ट नहीं कर सकता। वह एक लम्बे खम्बे जैसा होता है। इंजीनियरिंग में, कंस्ट्रक्शन में अगर एकाध खम्बा खड़ा कर देते हैं, वह बहुत टिकाऊ नहीं होता है। पिरामिड टिक गया, क्योंकि इंजीनियरिंग की बेसिक यूनिट ट्राइएंगल होता है। उसे सपोर्ट करने के लिए जब ट्राइएंगल बनाते हैं तो वह फिर टिक जाता है, पिरामिड इसी तरह का होता है। हमें ग्रोथ की कहानी सुनाने वाले लोगों को समझना चाहिए कि इनक्लूसिव ग्रोथ का मतलब है, अगर ग्रोथ थोड़ी नीचे भी हो जाए तो वह ट्राइएंगल के रूप में होनी चाहिए, उसकी बेस लाइन बढ़नी चाहिए, इक्युटी में ज्यादातर हिस्सों को वह छू रहा है या नहीं, यह 20-25 लोगों के लिए नहीं होना चाहिए। उसके बाद क्वालिटी ऑफ लाइफ इनक्रीज करनी चाहिए, ताकि वह ग्रोथ को जाकर छू सके या ग्रोथ उसकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को छू सके। If this triangle is not there, then growth with equity with the development of the quality of life of our common people will not be possible. तब यह सस्टेनेबल होगा। वरना हम सस्टेनेबल ग्रोथ नहीं कर पा रहे हैं। दो डिजिट्स ग्रोथ क्या है। हम अचीव कर सकते हैं। अभी भी अगर ग्रोथ इंजीनियरिंग में हम सबको नहीं जोड़ पाये हैं, सबको उसमें नहीं ले पा रहे हैं। हम 7 से 9 परसैन्ट ग्रोथ की बात कर रहे हैं। अगर हम बाकी हिस्सों को जोड़ सकते हैं, उसकी इनर्जी को और उसे भी अगर हम हमकदम बना सकते हैं, इसमें शामिल कर सकते हैं तो फिर हम यह अचीव कर सकते हैं और आसानी से कर सकते हैं। यू.पी.ए. सरकार का हम वामपंथी इसलिए समर्थन कर रहे हैं कि प्रथम एक्सक्लूसिव पोलिटिक्स नहीं होनी चाहिए, दूसरा एक्सक्लूसिव इकोनोमी नहीं होनी चाहिए, इनक्लूसिव होना चाहिए, साथ में लेकर चलना पड़ेगा। हम अगर आलोचना भी कर रहे हैं तो इसी कारण कर रहे हैं और उस आलोचना की एक लाइन भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के बाहर नहीं है, बल्कि आलोचना उस वक्त होती है तो जब कॉमन या मिनिमम से हटकर बात हो रही है। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के आखिर में एक पैराग्राफ है. इस पैराग्राफ का हैडिंग है - ‘ए फाइनल वर्ड’ । अक्सर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम कोटेड होते हैं, फाइनल वर्ड कोटेड नहीं होते हैं। This is a Common Minimum Programme for the UPA Government. It is, by no means, a comprehensive agenda. It is a starting point. I emphasise these words. That highlights the main priorities, policies and programmes. The UPA is committed to the implementation of the CMP. This CMP is the foundation for another CMP - collective maximum performance. So, at the end of the fourth year and the beginning of the fifth year, what do we desire, not to remind you of the common minimum provision made in the Common Minimum Programme? We should find out the basis of the common maximum performance. हम अगर इसकी बैलेंस शीट लेते हैं तो हम यह उम्मीद करते हैं कि मैक्सिमम परफॉर्मेन्स स्टार्टिंग प्वाइंट से क्या हुए। I am reminding you of the Common Minimum Programme to show you the starting point. But, you should have silenced us saying that that was in 2004-2005. This is the common maximum performance card. This is what we have achieved. We had started in 2004 and continued in 2005, 2006 and 2007. This is 2008 and this is the report card. तब इस अभिभाषण को हम कहते हैं कि यह समावेशी विकास है। आज हम यह कह रहे हैं कि हम समावेशी विकास की ओर यात्रा शुरू कर रहे हैं। इसलिए जो यूफोरिया तैयार की जा रही है, हर एक मामले में आप देखें। जैसे सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में क्या था, मै कोट नहीं करूंगा, चूंकि समय कम है। उसमें था कि हम एक कमीशन बनायेंगे, जो जांच करेगा और क्या स्थिति है, देखेगा। सरकार की जो पोलिटिकल कमिटमैन्ट रहती है, वह इस सरकार की भी है, मैं उसे मानता हूं तो वह स्थिति का जायजा लेगी, उसके बाद कुछ कारगर कदम उठायेगी और उसके बाद कुछ नतीजा निकलेगा। जस्टिस राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में मार्च, 2005 में कमेटी बनी, मई, 2004 में सरकार बनी और मार्च, 2005 में कमेटी बनी[b46] । जून 2006 में रिपोर्ट देने की बात थी, नवंबर 2006 में रिपोर्ट दी, दिसंबर 2006 में रिपोर्ट पार्लियामैंट में पेश की गई। वर्ष 2007 चला गया, आप उसको हर सैशन में लिस्ट के आखिर में डाल देते हैं लेकिन आज तक हम उसको यहां पर चर्चा में नहीं लाए। "उम्रदराज मांगकर लाए थे चार दिन, दो आरज़ू में कट गए दो इंतज़ार में। "
MR. SPEAKER: That was on the List. The hon. Members did not find time to discuss it.
मोहम्मद सलीम : लेकिन क्या हुआ? एक तरफ तुष्टिकरण की बात करते हैं कि देखो सब मिल गया। सच्चर कमेटी रिपोर्ट को मैं अंडरमाइन नहीं कर रहा हूँ। लेकिन वह कोई प्रैस्क्रिप्शन नहीं है और वह कोई बीमारी भी नहीं है। कुछ लोग समझ रहे हैं कि वह बीमारी है, कुछ लोग समझ रहे हैं कि यह प्रैस्क्रिप्शन है, सब कुछ दे दिया गया। वह एक डायग्नॉस्टिक रिपोर्ट है। क्या हालत है माइनारिटीज़ की, हमने कहा कि इसका ब्लड टैस्ट कर दो, ब्लड प्रैशर देख दो, शुगर देख दो और वह रिपोर्ट आपके सामने लाकर डाल दी गई कि इतने दिनों से जैसे आप समझ रहे थे कि बहुत तुष्टीकरण हुआ, बहुत अपीज़मैंट हुआ, आज़ादी के बाद सब कुछ मुसलमानों को मिल गया, ऐसा नहीं है। बल्कि उनकी हालत और बिगड़ गई है और स्थिति दयनीय हो गई है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उसके अनुसार काम करे। सरकार ने मई 2007 में इस विषय को कैबिनेट चर्चा में लिया। मैंने घोषणा सुन ली। संसदीय कार्य मंत्री जो सूचना प्रसारण मंत्री भी हैं, उन्होंने बाहर आकर कहा कि हम यह करेंगे। अगस्त 2007 में माइनारिटीज़ अफेयर्स मिनिस्टर आकर दिया Follow-up action to be taken, not the Action Taken Report. पहली बार इंडियन पार्लियामैंट में एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं आई। The Government is contemplating the follow-up action which was placed. जो मई में प्रैस रिलीज़ थी, अगस्त में फॉलो अप एक्शन टु बी टेकन भी वही थी। आज बजट में भी वही बात कही जा रही है। पिछले साल मैंने बजट के अगले दिन इंडियन एक्सप्रैस देखा। उसमें लिखा था - Minorities got a big deal. चूंकि घोषणा हो गई इसलिए बिग डील! पिछले साल बजट में कहा गया 500 करोड़ रुपये माइनारिटीज़ वैलफेयर के लिए दिये गये पूरे डिपार्टमैंट का खर्चा - कैपिटल आउटले। रिवाइज्ड में खामोशी से उसको 350 करोड़ कर दिया गया। वह घोषणा नहीं होती है, वह बात अभिभाषण में नहीं आती है। 500 करोड़ रुपये की घोषणा हो गई, अखबारों में हैडलाइन्स आ गईं, रिवीज़न में 350 करोड़ हो गया। मैं चैलेन्ज करके कहता हूं कि 31 मार्च के बाद जो एक्चुअल रिपोर्ट आएगी, वह 200 से 250 करोड़ रुपये होगी। फिर इस बार की घोषणा में आप 1000 करोड़ कर दो। लालकिले से आप बोल दो और अखबार कहेंगे बिग डील। आप कहेंगे चलो बहुत हो गया, तुष्टीकरण हो गया, सबको बहुत मिल गया। तो ये बेचारे मुसलमानों की हालत सैंडविच की तरह हो रही है। एक तरफ आर्ग्यूमैंट है कि बहुत कुछ दिया जा रहा है और दूसरी तरफ से बहुत कुछ दिखाया जा रहा है लेकिन मिल नहीं रहा है। फिर मैं अगर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पढ़कर सुनाऊं तो उसमें प्रोफैशनल एजुकेशन, टैक्निकल एजुकेशन, शिक्षा, रोज़गार, उसकी बढ़ोतरी के लिए, कोई टोकनिज़्म के लिए नहीं कि चंद उलेमाओं और मौलानाओं को बुलाएं, एक ट्रेडीशनल फोटो हो जाए, आप कुछ कहें कि हमने कुछ कब्रिस्तान दे दिया, कुछ वक्फ दे दिया, कुछ हज कर दिया। नहीं। 21वीं शताब्दी के विकासशील देश जो विकसित होना चाह रहे हैं, उसके आधुनिक नागरिक के रूप में उसको आधुनिक शिक्षा चाहिए, तकनीकी शिक्षा चाहिए, उसको रोज़गार के आधुनिक साधन चाहिए। वह बुनकर होकर जी नहीं पा रहा है, खेती में जी नहीं पा रहा है। इसलिए उसको मॉडर्न प्रोफैशन के लायक बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। सच्चर कमेटी ने आंख में अंगुली देकर वह बात गिना दी है। हम इसे पोलिटिकल कंट्रोवर्सियल एजेन्डा बना रहे हैं। हम इसे इलेक्शन का एजेन्डा बना रहे हैं। This way or that way. उससे हालत और भी खराब होगी। फिर कभी एक रिपोर्ट आएगी। मैं इसलिए कह रहा हूँ कि the title of this Committee was, you must be remembering, ‘Prime Minister’s High Level Committee’. Mr. Prime Minister, I urge upon you that your prestige is also at stake.यह सच्चर कमेटी कोई पार्लियामैंट्री कमेटी नहीं थी, दूसरी कोई एक्ज़ीक्यूटिव कमेटी नहीं थी, “It was Prime Minister’s High Level Committee.” हाइ लैवल कमेटी की जो रिपोर्ट आई है, लोग उसके बाद देखेंगे कि How the Prime Minister has taken the initiative? Fifteen per cent priority sector lending अभिभाषण में है। अभिभाषण में यह बात है कि प्रायारिटी सैक्टर लैन्डिंग जो 40 प्रतिशत प्राथमिकता के आधार पर दी जाती है वीकर सैक्शंस के लिए, वह माइनारिटीज़ को 15 प्रतिशत मिलनी चाहिए। इतनी दी जा रही है, लेकिन बजट अभिभाषण में उसका जिक्र नहीं है। मैं एक शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं कि किस तरह से झांसा दिया गया। [h47] हां बजट भाषण में कहा गया कि हमने बैंक की शाखाएं खोल दी हैं तथा और भी शाखाएं खोल देंगे, लेकिन राष्ट्रपति जी के अभिभाषण की अवमानना हो रही है। कहीं भी प्रोग्राम में 15 परसैंट नहीं है। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में है कि सरकार प्रायरटी सैक्टर में 15 फीसदी वीकर सैक्शन में माइनोरिटीज़ के लिए लोन देगी। अगर 15 प्रतिशत को 40 प्रतिशत के अंदर देते हैं तो सौ प्रतिशत में कितने होते हैं, छ: प्रतिशत। देश में 13 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, उनमें छ: प्रतिशत वीकर सैक्शन के लोगों को लोन मिलना चाहिए या नहीं? नहीं तो उनका विकास कैसे होगा, वे कारोबार कैसे करेंगे? यह आजादी के बाद स्कवीज़ हो गया है, उसे आपको फिर से खोल देना है। लेकिन आपका वित्त मंत्रालय, बैंकिंग डिपार्टमेंट, रिजर्व बैंक नहीं चाहते। मेरे पास पी.एम. कार्यालय की चिट्ठी है। वित्त मंत्रालय के दफ्तर से खत के बाद खत वित्त मंत्रालय को लिखे गए, अभिभाषण तो अभी आया। पिछले साल मैंने सिफारिश की थी कि सन् 2007 में 15 प्रतिशत प्रायोरिटी सैक्टर की लैंडिंग माइनोरिटीस के लिए दी जाए, वे छोटे-मोटे कारोबार करेंगे। आप देखेंगे कि इस देश में मुसलमान होटल चलाते हैं, लेकिन वे टू स्टार, थ्री स्टार एवं फाइव स्टार होटल्स नहीं हैं। वे गैराज चलाते हैं, वह ट्रंसपोर्ट कम्पनी नहीं है। वे ड्राइवर, खलासी हैं लेकिन उनके पास बस लाइनर्स नहीं है, इसलिए वे स्कीवज़ हो गए हैं। उन्हें अगर यह क्रेडिट दिया जाएगा तो उनके पास जो हुनर एवं दिमाग है, उसे वे काम में लगाएंगे और अपग्रेड करेंगे, उससे वह अच्छा काम करेंगे। अगर उन्हें लोन मिलेगा तो उससे वे आधुनिक उपकरण खरीदेंगे। वे लोन लेंगे, कोई भीख नहीं। बलराज साहनी जी की एक फिल्म गर्म हवा थी, जो आजादी के बाद बनी थी, उसमें यह शॉट था। मुझे याद है कि वह एस.एम. सथ्यु की फिल्म थी। पार्टिशन के समय बलराज साहनी जी काम कर रहे थे, उनका जूतों का अच्छा कारोबार था। कर्फ्यु लग गया, पार्टिशन हो गया और देश का बंटवारा हो गया। झगड़ा हो गया, लेकिन उन्होंने कहा कि वे हिन्दुस्तान में ही रहेंगे। कानपुर के एक व्यवसायी मुस्लिम करेक्टर अदा कर रहे थे। वे बैंक में गए, वहां उन्होंने कहा कि आइए, समोसा खाइए, चाय पीजिए, पुराने कारोबारी हैं। उन्होंने कहा कि हम अच्छा काम समझते हैं, आर्डर हमारे पास है, लेकिन काम बंद है, आप अगर कुछ कर्ज दे देंगे तो हम फिर से काम शुरू कर देंगे। फिर मैनेजर कहता है कि आप इधर रहेंगे या पाकिस्तान जाएंगे? यह तो हमें मालूम नहीं है। श्री सथ्यू ने उसे बड़ी संवेदनशीलता के साथ डील किया। बलराज साहनी जी बहुत पावरफुल एक्टर थे। वे वहां से वापस निकले, उनके गेट के सामने एक शॉट ज़ूम करके सिर्फ बलराज साहनी का चेहरा देख पाए। आजादी के 60 साल बाद भी वह चेहरा बदला नहीं है। क्रेडिट स्कवीज़ हो गए। यूपीए सरकार से यही उम्मीद थी, इनक्लुसिव ग्रोथ का यही मतलब है कि उसे ओपन कर देना पड़ेगा। आप अर्थशास्त्री, फार्मर गर्वनर, रिजर्व बैंक, फार्मर वित्त मंत्री प्रधानमंत्री के रूप में लिख रहे हैं और वह मान्यता नहीं हो रही है। अगर मान्यता होती तो जब इस बजट को चुनावी भाषण बोला जा रहा था तो उस बजट में वित्त मंत्री जी के भाषण में मैं यह सुनता कि वहां इस अभिभाषण का वहां पर इको होता कि हमने घोषणा कर दी है, अगले साल 15 प्रतिशत प्रायोरिटी सैक्टर में माइनोरिटीस को लोन मिलेगा, लेकिन यह नहीं है। Please take this as a challenge, Mr. Prime Minister. This is the minimum programme. हम इतनी मिनिमम बात अपनी सरकार में बोल रहे हैं, उसके बाद यह सरकार नहीं चलेगी। आप वामपंथियों को लांछन देते हैं, वामपंथी सरकार यह काम करने नहीं देती, वामपंथी मिनिमम प्रोग्राम के बाहर जो कार्यक्रम हैं, उन पर हम रोक लगा रहे हैं, लेकिन मिनिमम प्रोग्राम के अंदर जो कार्यक्रम है, प्राइम मिनिस्टर की जो हाई पावर कमेटी डिसीजन लेती है, जो प्राइम मिनिस्टर के आफिस में चिट्ठी लिखी है और उस पर अगर फाइनेंस मिनिस्ट्री यह कहती है कि हम यह नहीं करेंगे तो किस के ऊपर वह लांछन होगा? हम बहुत सारी बातें बजट पर कह सकते हैं, जब चर्चा होगी तो तब हम कहेंगे, लेकिन वह एक टोकनज़िम नहीं है। Some concrete step, no communal agenda and no communal overture. यह सेंटीमेंटल इमोशनल इश्यु भी नहीं है। Some concrete hard economy, educational issues. जो काम करेंगे, सोशली, इकोनोमिकली, एजुकेशनली एडवांस करने में मदद करेंगे। इक्वल लेवल प्लेइंग ग्राउंड देंगे, इक्वल फुटिंग पर मॉडर्न इंडिया में अच्छे नागरिक हो सकेंगे। उसके लिए आपको काम करना पड़ेगा। Even for that, time is ticking out. You have to take this as a challenge. ये सिर्फ धर्म के दृष्टिकोण से अल्पसंख्यक का मामला नहीं है, भाषा की दृष्टि से अलंपसंख्यक की भी समस्या है। It is the kind of economy that they are pursuing. Migration is taking place worldwide. It has to take place. Internal migration is taking place.[h48] गांव से शहर की ओर पलायन हो रहा है। इस जगह पर हम अगर यह पाते हैं कि जो हमारी आलीशान मुंबई नगरी है, उसके बारे में इसी यूपीए सरकार के तीन साल पहले के बजट में यह कहा गया है कि हम इसे एक ग्लोबल फाइनेंशियल सेन्टर बनाना चाहते हैं। उस समय कहा गया था कि टोक्यो और लंदन के बीच एक फाइनेशियल सेंटर होना चाहिए, जो कि मुंबई ही हो सकता है। मैं कलकत्ता को रिप्रेजेंट करता हूँ। आजादी के बाद डेलीबरेटली रीजनल इम्बैलेंस क्रिएट करने के लिए कलकत्ता से स्टेट बैंक का हेडक्वार्टर ले जाया गया, बड़ी कंपनियों के हेडक्वटर्स वहां से ले जाए गए, क्योंकि उस समय हमारी लुक वेस्ट पॉलिसी थी। हम चूंकि मिडिल ईस्ट को सर्व करना चाहते थे, अमेरिकन मार्केट में जाना चाहते थे, पोस्ट सेकण्ड वर्ल्ड वार में सिनैरियो ऐसा था कि हमारी इकोनॉमी वेस्ट-बाउण्ड थी। अब हम लुक ईस्ट की बात कह रहे हैं, लेकिन हम फिर पैट्रोनाइज कर रहे हैं। राष्ट्रपति के भाषण में कहा गया है कि रीजनल इंबैलेंस को दूर करना पड़ेगा। हमने इसे दूर करने के लिए बैकवर्ड रीजन फंड बनाया है, कुछ लागत लगाई है जिसकी हम सराहना करते हैं। आजादी के बाद बहुत दिनों तक जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर देखा नहीं गया था, उनके लिए कुछ योजनाएं दी गयी हैं। इस तरह इन बैकवर्ड रीजन्स को खुश करने की कोशिश की गयी। लेकिन क्या इतनी कोशिश की गयी है कि हम पांच साल बाद जाकर यह दिखा सकें कि पहले हम यहां पर थे, अब वहां पहुंच गए हैं। अगर लोगों ने इन्टरनल माइग्रेशन किया, तो वह उनका संवैधानिक अधिकार है। वहां पर राजनेता बनकर भड़काऊ भाषण देंगे, लोगों को मारा जाएगा, हाथ काटा जाएगा, बिहार के हैं, उत्तर प्रदेश या उत्तर भारत के हैं, यह कहा जाएगा और उन्हें वापस किया जाएगा, तो ऐसे में गेहूं के साथ-साथ घुन भी पिस जाएगा। बंगाल के 27,000 कारीगर जो जेम्स एण्ड ज्वैलरी में काम करते थे, वे भी पिछले एक महीने में वापस मिदनापुर जिले में चले गए। साठ-सत्तर के दशक में यह समझा गया था कि ऐसी बात लेफ्ट को थोड़ा टाइट कर देगी, ट्रेड यूनियन मूवमेंट बहुत मिलिटेंट है, इसे थोड़ा खत्म कर देगा मुंबई से। आज की यह घटना उसकी धरोहर है। जब वर्ल्ड के साथ इंटीग्रेट करने की बात करते हैं, Then, you think globally in the field of economy; and you think locally, parochially in the field of politics and society. यह 21वीं सदी की एक बड़ी चुनौती है। यदि हम वैश्विक तौर पर Ethnic, linguistic, religious issues एड्रैस नहीं करेंगे, बढ़ावा देंगे अथवा सौदेबाजी करेंगे, जैसा कि मुम्बई में हुआ है। यह गलत हुआ है। यूपीए सरकार से मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी। हमारे कॉमन मिनीमम प्रोग्राम में यह है कि हम ऐसी सभी ताकतों से Communal, fundamentalist, parochial, obscurantist…. जो सर उठाने की कोशिश करेगी, उससे हम निपटेंगे। फिर आपकी सरकार ने मुम्बई में क्यों नहीं किया? केन्द्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश क्यों नहीं दिया? आपके गृह मंत्री वहां क्यों नहीं गए, जबकि वे महाराष्ट्र से ही आते हैं। इस सब पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया? यदि इस तरह की घटनाओं पर एक्शन नहीं लिया जाता है तो वह धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। मैं कोलकता से आता हूं, that is also a cosmopolitan city with minorities and Bengali-speaking persons. बिहार, उड़ीसा, राजस्थान, यूपी, गुजरात और पंजाब के लोग वहां हैं और यह फLा की बात है। इकॉनमी के इंजन को चलाने के लिए सभी प्रकार के लोगों की आवश्यकता होती है। यदि इस तरह से होगा तो यह फिर एक राज्य से दूसरे राज्य में होगा और यह बढ़ता जाएगा। इसलिए कॉमन मिनीमम प्रोग्राम के इंट्रोडक्शन में ही यह है और I have again to remind you. I would quote it. It says:
“To preserve, protect and promote social harmony -- communal harmony नहीं --- and to enforce the law without fear or favour to deal with all obscurantist and fundamentalist elements, who seek to disturb social amity and peace. ” लेकिन मुम्बई में जो कुछ हुआ है, क्या वह इससे मैच करता है। मैं लेफ्ट की तरफ से बोलते हुए कोई नुक्ताचीनी नहीं कर रहा हूं[r49] । हमने इस सरकार का चार साल से समर्थन किया और करेंगे, लेकिन किस आधार के ऊपर खरा उतरना चाहिए, कौन इसे करेगा, कोई यार्डस्टिक तो होना चाहिए। CMP यह यार्डस्टिक है। यह मैं पढ़ रहा हूं, यह स्थिति हो रही है। यह हमारे लिए है, आगे अलग बात थी कि हमने कुछ लिख दिया, कुछ पढ़ दिया, कुछ बोल दिया और बाद में फिर पांच साल बाद देखा जायेगा, लेकिन जब लैफ्ट इस गवर्नमेंट को सपोर्ट कर रही है तो हम यह चाहेंगे कि आपने जो लिखा, आपने जो सही किया, आपने जो वायदा किया, वह निभाना पड़ेगा।
इसी के साथ इण्टरनल सिक्योरिटी का मामला है। मैं पोलिटिकल पाइंट्स की बात नहीं कर रहा हूं ...( व्यवधान)
श्री थावरचन्द गेहलोत (शाजापुर): जो वायदा किया, वह किसको मालूम है।
मोहम्मद सलीम : मैं इसीलिए तो याद दिला रहा हूं। इण्टरनल सिक्योरिटी की बात प्रतिपक्ष के नेता ने भी कही है। आन्तरिक सुरक्षा का जो मामला है, बेशक उसमें कुछ सुधार हुआ है। हम जब कश्मीर की तरफ देखते हैं, कुछ सुधार हुआ है। नोर्थ ईस्ट में कुछ न कुछ घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार प्रयास में भी है। आपको ऐसी शक्तियों को पनपने से रोकना पड़ेगा, कुछ सख्ती से समझौता करने से अपने लालच को संभालना पड़ेगा कि हम फिर से ऐसी किसी शक्ति को पोलिटिकल प्रेस्टीज दे दें और इक्वल पैडस्टल पर लाकर बिठा दें और फिर वह देश विरोधी, राष्ट्र विरोधी छोटे-मोटे चुनावी फायदे के लिए काम कर लें। नोर्थ ईस्ट में ऐसा ही हुआ, कश्मीर में ऐसा ही हुआ। वर्षों से ऐसे खेल खेलने से बाद फिर वे खून की होली खेले।...( व्यवधान) हां, बंगाल में भी हुआ। बंगाल में नन्दीग्राम हमारे लिए एक मिसाल है। वर्ष 2007 में इसके लिए बहुत ... * हमें सुननी पड़ी। मैं अभी नन्दीग्राम के बारे में कह रहा हूं। आप जानते हैं कि जो माओविस्ट के लीडर्स पकड़े गये, नवम्बर में झारखण्ड में यादव और फरवरी में बंगाल में अभी हमारे यहां सोमेन पकड़े गये। क्या डाक्यूमेंट्स निकल रहे हैं, क्या इन्फोर्मेशंस निकल रही हैं। झारखण्ड, बंगाल, बिहार के एरिया कमाण्डर पकड़े जा रहे हैं, उनकी पाकेट में मेनस्ट्रीम पार्टी, जो एन.डी.ए. की अभी भी मैम्बर हैं, तृणमूल कांग्रेस का खत मिल रहा है। वे अपने बयान में बोल रहे हैं कि हमें बुलाया गया था, हम लोगों ने लोगों को भेजा है, हमने ट्रेनिंग दी है। ऐसे लोग भी पकड़े गये हैं, जो कहते हैं कि हम वहां औजार लेकर गये थे और वहां लड़े ए.के.47 से हैं। पूरे देश के अन्दर माओविस्ट के बारे में आपने कहा, जो इण्टरनल सिक्योरिटी कांफ्रेंस हुई थी, It is a greatest challenge. और उसी माओविस्ट के बंगाल के एक नम्बर लीडर, जो स्टेट के सैक्रेटरी जनरल हैं, वे पकड़े गये हैं।
श्री संतोष गंगवार (बरेली): वे एन.डी.ए. में कहां हैं, वे कांग्रेस के साथ हैं। यह कहने में आपको डर लग रहा है क्या? आपको हमसे ज्यादा जानकारी है।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER : He has not yielded. Please sit down.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : अच्छी बात है। चलो, ठीक है। I stand corrected. दिक्कत यह है कि वह एक माया है। आप समझ रहे हो, आपके साथ है और आप समझ रहे हो, आपके साथ है।
* Not recorded.
MR. SPEAKER : Mr. Salim, two more hon. Members of your Party have sent names. You may take time, but other Members’ time will be reduced.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : मैं यह कह रहा हूं कि सिर्फ उनको क्यों बदनाम करें, सब बड़ी-बड़ी पार्टियां और आडवाणी जी क्या दो बार नन्दीग्राम नहीं गये? दांतेवाड़ा में कितनी बार गये? दांतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ में माओविस्ट इलाका है, वहां बी.जे.पी. की सरकार है। अभी अजीत जोगी जी बोल रहे थे कि 44 हजार हैक्टेयर जमीन में फसल नहीं उगी, खेती नहीं हुई, दांतेवाड़ा जिले के 70 हजार किसान सिर्फ कैद में नहीं हैं...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइये। ऐसा मत करिये।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : Do not record. The hon. Member has not yielded.
(Interruptions)* … मोहम्मद सलीम : वहां से उनका पलायन हुआ है, यह सरकारी आंकड़ा है। महाराष्ट्र में, आध्र प्रदेश में, उड़ीसा से लोग सलवा जुड़ूम के नाम पर भागे हैं।...( व्यवधान) मैं बार-बार कह रहा हूं कि माओविस्ट थ्रेट को आप नैरो पोलिटिकल मामले से मत देखिये। हम तो नहीं छिपा रहे, आप क्यों छिपा रहे हैं। दांतेवाड़ा में ऐसा क्यों नहीं हुआ। अगर चुनौती है और आप स्वीकार नहीं करोगे, सच्चाई को नहीं देखेंगे तो स्वीकार कैसे करेंगे। उसे छिपाकर क्या होगा। पहले इसे बहुत दिन तक छिपाकर रखा गया। हम तो बोल रहे हैं कि यह गलत है। आध्र प्रदेश में पी.डब्ल्यू.जी. वाया छत्तीसगढ़ बंगाल के बोर्डर में, झारखंड के बोर्डर में, उड़ीसा के बोर्डर में या छत्तीसगढ़ के कोरीडोर को इस्तेमाल करके वहां पनपाया। आज वे उसे बंगाल में और उड़ीसा में एक्सपोर्ट कर रहे हैं।[R50] यह तो सबका मामला है।
श्री बृज किशोर त्रिपाठी (पुरी) : नेपाल में तो ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Md. Salim, if you want to yield, then sit down. Otherwise, it will not be recorded.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please continue. Your time is getting over.
… (Interruptions)
* Not recorded मोहम्मद सलीम : लगता है, पालिटिकल साइंस फिर से पढ़ना पड़ेगा। नेपाल के माओइस्ट और झारखंड तथा उड़ीसा के माओइस्ट एक नहीं हैं। ...( व्यवधान)
श्री बृज किशोर त्रिपाठी : आपसे ज्यादा पढ़ा है।
मोहम्मद सलीम : आप केवल झंडे का रंग देखकर कह दें कि एनडीए में चले गए। ...( व्यवधान) आपको राजनीति शास्त्र देखना पड़ेगा। ...( व्यवधान)
श्री बृज किशोर त्रिपाठी : आप जैसे पैंडुलम नहीं हैं।
मोहम्मद सलीम : इंटरनल सिक्योरिटी के बारे में बार-बार कह रहे हैं, प्रधानमंत्री जी आप भी पार्टी के मंत्रियों और नेताओं को रोकिए, इक्का-दुक्का का ही फायदा होगा, ज्यादा नहीं होगा। आप पैंडुलम की बात कह रहे हैं, झारखंड में जो पार्टी का नेता पकड़ा गया, जो डाक्यूमेंटेड है, पुलिस के सामने वे बोले हैं, ऐसे मंत्री उसको इस्तेमाल किए हैं, जो बीजेपी सरकार में थे और अभी मधु कौड़ा जी की सरकार में भी हैं, वह डाक्यूमेंटेड हैं। वह पुलिस के सामने बयान दे रहे हैं, उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। मैं कह रहा हूं कि नंदीग्राम में भी इसी तरह है, बड़ी परेशानी है, लार्जर ईश्यू है, लेकिन माओइस्ट इस तरह के ईश्यू को इस्तेमाल करके, इस तरह से जो फंडामेंटलिस्ट फोर्स है, जो टेररिस्ट फोर्स है, ऐसे वातावरण का इस्तेमाल करते हैं। अगर हम उस चुनौती को नहीं समझते हैं, तो बड़ी परेशानी होगी। ...( व्यवधान)
श्री अधीर चौधरी (बरहामपुर, पश्चिम बंगाल) : सलीम साहब, जो 14 किसान मारे गए, क्या वे माओइस्ट थे? जवाब दीजिए। ...( व्यवधान)
मोहम्मद सलीम : जो बात बोले नहीं हैं, जो हम नहीं बोल रहे हैं, वह क्यों बोल रहे हैं?
श्री अधीर चौधरी : वे माओइस्ट हैं या नहीं? ...( व्यवधान)
मोहम्मद सलीम : हम तो उनको किसान बोल रहे हैं। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Chowdhury, this is not right.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : जितनो को कत्ल किया, वे क्या-क्या थे, आप जिनको मारे अपने हाथ से गोलियां चलाकर, उनका क्या हुआ? ...( व्यवधान) *… श्री अधीर चौधरी : …* * Not recorded.
MR. SPEAKER: This will be deleted.
मोहम्मद सलीम : यह सैंपल है। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Chowdhury, I do not permit such language. This is not right. That will be deleted.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: What is going on?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Md. Salim, will you please address the Chair?
MD. SALIM : Sir, this is disgusting. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Will you address the Chair?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Md. Salim, will you address the Chair? Your time is getting exhausted.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Lahiri, please sit down. Let him conclude.
… (Interruptions)
MD. SALIM : I wanted to see whether there are guts in any of the Congress leader or their Minister to face such a … * in their ranks. Let there be. Are there any guts in any of the Ministers or the Congress leaders to face such a …. I have the guts. I can face him. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Md. Salim, you come to the President’s Address.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I call the next speaker.
MD. SALIM : Unless this is taken care of, I will not speak. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is expunged. What are you doing? I have expunged it.
… (Interruptions)
* Not recorded.
MR. SPEAKER: Shri Lahiri, you are speaking without my permission.
(Interruptions)* … MR. SPEAKER: You are speaking without my permission.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. You are defying the Chair. Shri Lahiri, you are defying the Chair.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CHEMICALS AND FERTILIZERS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI B.K. HANDIQUE): Your Member of Parliament is competent enough to protect himself. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are asking somebody to do something. You are defying the Chair.
(Interruptions)* … MR. SPEAKER: Do not record one word.
(Interruptions)* … MR. SPEAKER: Md. Salim, you have concluded your speech. Shri Ramesh Dube.
MD. SALIM : Sir, I have not concluded.
MR. SPEAKER: Why are you yielding?
MD. SALIM : Sir, if some hon. Member says that …(Interruptions) * MR. SPEAKER: You address the Chair. I shall deal with that.
MD. SALIM : On this assurance only, I continue.[SS51] श्री संतोष गंगवार : आप चाहे कुछ भी कहें, आप इतने वर्षों से सरकार में रहे तो सारे गलत काम दूसरे लोगों ने किए और आपने कुछ नहीं किया।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Santosh Gangwar, please do not do that. You are a senior Member.
Mr. Salim, please conclude. Your time is over.
* Not recorded.
मोहम्मद सलीम : इसी तरह इंटरनल सिक्युरिटी में जो टैरेरिज़्म का मामला है, वह भी एक बड़ा थ्रेट है। हम देखते हैं कि जो भी खतरनाक वाक्या हुए हैं, मैं उन्हें दोहराना नहीं चाहता। इसी सदन में जब इंटरनल सिक्युरिटी के बारे में डिबेट हुई थी, तब हमने कहा था कि एक भी सुराग नहीं मिला, कनक्लूज़न नहीं हुआ। उसकी सही इन्वैस्टीगेशन होनी चाहिए थी। लेकिन उससे पहले ऐलान हो जाता है, कुछ संगठनों का नाम बोल दिया जाता है, पुलिस कहती है कि हमने कुछ लोगों को पकड़ लिया और उसके बाद देखा जाता है कि कहीं नहीं है, चाहे वह मालेगांव हो या कहीं भी हो। अभी तमिलनाडु में तेनकासी में एक ब्लास्ट किया गया। तमिलनाडु पुलिस...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Salim, you address the Chair.
मोहम्मद सलीम : महोदय, I congratulate the Tamil Nadu Police. उन्होंने इन्वैस्टीगेट किया कि किस तरह से बम ब्लास्ट किए गए और हिन्दु मुन्नानी ऑफिस में और बाद में पुलिस ने इन्वैस्टीगेट करके निकाला कि खुद हिन्दु मुन्नानी के कार्यकर्ताओं ने वहां बम ब्लास्ट करवाए और वहां टोपी रखकर गए। उसके बाद अखबारों में पहले दिन आ गया कि मुसलमानों ने किया। जब ऐसा नजरिया हो रहा है, मैं यह नहीं कहता कि कोई गलती नहीं हुई, लेकिन उसकी सही इन्वैस्टीगेशन होनी चाहिए। पहले से कोई प्री-कन्सीव नोशन नहीं होना चाहिए।
मैं अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के बारे में कहूंगा, अभिभाषण में भी सही कहा गया कि हम सब देशों के साथ संबंध चाहते हैं। लेकिन खुद यूपीए सरकार जानती है कि न्यूक्लियर डील के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। मेकेनिज्म है, बातचीत चल रही है, आईएईए में बातचीत चल रही है। विदेश मंत्री जी का आज का बयान और अभिभाषण में भी फिर वही कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के बाहर है, सरकार के कार्यक्रम के बाहर है। जब तक सरकार फैसला नहीं करती है, इस मामले को नहीं छेड़ना ही अच्छा है। चूंकि राबर्ट गेट्स से लेकर एक के बाद एक सिनेटर्स आ रहे हैं, रोज़ाना थ्रेट किया जा रहा है, अल्टीमेटम दिया जा रहा है, इस जगह हम समझते हैं कि सरकार को अपना नजरिया स्पष्ट करना चाहिए कि हम अभी किस स्थिति में हैं।
आखिर में मैं दो बातें कहना चाहता हूं कि इजराइल जिस तरह से गाज़ा में हमले कर रहा है ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Salim, you had better conclude now. Your Party’s time is exhausted.
मोहम्मद सलीम : इंटरनैशनल फोरम में हमारी एक अपनी जिम्मेदारी है। सिर्फ यह कह देना कि हम फिलिस्तीनियों के साथ हैं, इतना कहना काफी नहीं होगा, इज़राइल का जो मामला है, उसे हमें कनडैम करना चाहिए, उसके बजाए हम उसके स्पाई सेटेलाइट को महाकाश में भेज रहे हैं, किसी ज्ञानवर्धन के लिए नहीं बल्कि स्पाइंग के लिए, यह अफसोसनाक है। यह भी यूपीए सरकार के मैनडेट से बाहर ओवर स्टैपिंग है। मैं समझता हूं कि इज़राइल से जिस तरह से ग्रोइंग इंगेजमैंट हो रहा है, वह हमारे देश के लिए भी सही नहीं है और हमारे देश की इंटरनैशनल स्टैंडिग के लिए भी सही नहीं है। इसी तरह से कोसोवो का मामला भी है। चूंकि भारत एक मल्टीलिंगुअल कंट्री है, युगोस्लाविया हमारा पुराना दोस्त था। जिस तरह से नेटो फौजें वहां पहुंचीं और कोसोवो ने अपनी आजादी डिक्लेयर कर दी, भारत सरकार को इससे समझना चाहिए, हमारे यहां भी इनसर्जैंसी है, हमारे यहां भी कुछ लोग अलग-अलग रहना चाहते हैं। इसकी टेंडैंसी बढ़ रही है। अमरीका, ब्रिटेन और जर्मनी मिलकर देश का विघटन कर रहे हैं, वॉलकनाइजेशन कर रहे हैं, भारत को कम से कम अपने सामने आइना रखकर इस पर विचार करना चाहिए, निर्णय लेना चाहिए और एक ठोस कदम उठाकर कहना चाहिए। यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम अपनी बात को, समझ को अपने राजनीतिक दर्शन पर नहीं बोल पाएंगे तो हम जानना चाहते हैं कि हम किसके डर से नहीं बोल पा रहे हैं।
आखिर में मैं कहना चाहता हूं कि बोल, अब भी लब तेरे आज़ाद हैं।
श्री रमेश दूबे (मिर्ज़ापुर) : अध्यक्ष महोदय, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए कहना चाहता हूं कि जब महामहिम राष्ट्रपति महोदया बोल रही थीं, मैं पहली बार उनका अभिभाषण सुन रहा था, मैं भाव विभोर हो उठा था। उनके भाषण में भारत के गरीब, अमीर, किसान, मजदूर सभी की समस्याओं का दर्शन हो रहा था। जहां तक सामूहिक ग्रोथ की जो बात यहां कही जा रही हैं, मेरे साथी ने कहा, प्रतिपक्ष के नेता ने भी कहा, मैं उनसे करीब-करीब सहमत हूं। अमीर अमीर हो रहा है, गरीब गरीब हो रहा है। अभी यहां बीस कुबेर लोगों का उदाहरण दिया गया। अगर यह इस तरह बढ़ता रहेगा तो एक दिन निश्चित तौर से हम इन बड़े कुबेरों के हाथों में रह जाएंगे और उन्हीं के माध्यम से सारी सत्ता और शासन यहां चलता रहेगा, मुझे ऐसा लग रहा है।[N52] अभी मुम्बई के बारे में हमारे एक साथी ने चर्चा की थी। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि वह बहुत ही खराब घटना थी। उसका जितना विरोध किया जाये, उतना ही कम है। लेकिन जब यह घटना घट रही थी, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग मारे जा रहे थे, उस समय केन्द्र सरकार के राज्य गृह मंत्री और दूसरे मंत्री वहां भोजपुरी फिल्म का अवार्ड बांट रहे थे। हजारों पुलिस वालों की व्यवस्था लगाकर वह अवार्ड बांट रहे थे। उनके मन में यह तक नहीं आया कि वे अस्पताल में भर्ती लोगों को जाकर देखते या उन लोगों के बारे में दो शब्द बोलते। लेकिन वे वहां न बोलकर यहां दिल्ली में आकर प्रैस कांफ्रेस करते हैं, इस बात का हमें बहुत दर्द है। केन्द्र सरकार के लोग आयें और ऐसे मौकों पर चर्चा न करें, यह बड़ी दुखद बात थी।
महोदय, प्रतिपक्ष के नेता ने यहां पर कुछ संस्थानों के नाम का उद्धरण किया जैसे पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी आदि। सभी नेताओं के बारे में हम लोगों के मन में बड़ा सम्मान है।
17.41 hrs. (Shrimati Krishna Tirath in the Chair) उन संस्थानों को जो नाम दिया गया है, उसमें हम लोगों का कहीं कोई विरोध नहीं है। हम उसका समर्थन करते हैं। लेकिन ऐसे संस्थानों का नाम देते समय एक बात का ख्याल रखना चाहिए कि समाज परिवर्तन के लिए जिन संतों ने काम किया है चाहे महात्मा फूले हों, साहू जी महाराज हों या सावित्री भाई फूले हों, उन लोगों के नाम भी संस्थानों को दिये जाने चाहिए ताकि उनके बारे में भी लोगों की यदाशत बनी रहे। महामहिम राष्ट्रपति जी ने किसानों के दर्द को समझा और उनके दिशा-निर्देश पर किसानों का कर्ज माफ हुआ, यह सराहनीय बात है। मैं इसका समर्थन करते हुए कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश के विकास को नजरअंदाज किया गया है। उत्तर प्रदेश की माननीय मुख्यमंत्री बहन मायावती जी ने वहां के विकास के लिए 88 हजार करोड़ रुपए का पैकेज मांगा था, लेकिन आज तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया और न ही उस बारे में कोई बात की गयी। कई जगहों पर उत्तर प्रदेश के विकास का अनदेखा किया गया है, फिर भी हम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण प्रस्ताव पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं।
सभापति महोदया : श्री बी.मेहताब--अनुपस्थित।
श्री अजय चक्रवर्ती-अनुपस्थित।
श्री आलोक कुमार मेहता।
श्री आलोक कुमार मेहता (समस्तीपुर): सभापति महोदया, मैं राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं उन्हें अपनी ओर से और अपनी पार्टी की ओर से धन्यवाद देता हूं क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में इन्क्लूसिव ग्रोथ यानी समावेशी विकास के संदर्भ में विस्तारपूर्वक एक चित्र प्रस्तुत करने का काम किया। सबसे पहले उन्हें मैं बधाई देता हूं कि इस देश की प्रथम नागरिक, वह भी महिला ने पहली बार राष्ट्रपति महोदय के रूप में सदन के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए देश के इन्क्लूसिव ग्रोथ के नक्शे को यहां पर रखा। भारत निर्माण राष्ट्रीय ग्रामीण योजना, सर्वशिक्षा अभियान, मध्याह्न भोजन, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन आदि जो मिशन और योजनाएं हैं, जिनको लेकर यूपीए सरकार ने पिछले चार वर्षों में विकास के मामले में एक मील का पत्थर स्थापित किया है, उसका एक चित्र महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में दिखता है। इस चित्र को पिछले चार वर्षों में आम जनता और जनप्रतिनिधियों ने देखा है, उससे यह महसूस होता है कि इस सरकार ने गांव के अंतिम छोर तक बसने वाले लोगों और समाज के अंतिम पंक्ति में बैठने वाले लोगों के साथ न्याय करने की एक कोशिश की है।[MSOffice53] चार वर्षों में 9 प्रतिशत विकास दर देना एक उपलब्धि है। इस वर्ष का रेल बजट और सामान्य बजट आया है। लेकिन हमारे विपक्ष के साथी पता नहीं क्यों देश की प्रथम नागरिक के अभिभाषण में भी अपने आप को संयमित नहीं कर सके और अब सदन में भी उस गरिमा का ख्याल अवश्य रखना चाहिए था क्योंकि यह देश की प्रथम नागरिक का अभिभाषण था। उनके द्वारा टिप्पणी भी सरकार पर नहीं, महामहिम पर की जा रही थी। इस तरह उन्होंने डिग्निटी का प्रदर्शन नहीं किया। यह रिकॉर्ड ग्रोथ रेट देखकर, यह सकल घरेलू उत्पाद की बढ़ती हुई दर देखकर और फिर इस बजट को इलेक्शन बजट का नाम देना, मैं समझ सकता हूँ कि विपक्ष कितना घबराया हुआ है, लेकिन इस घबराहट में महामहिम के अभिभाषण और उन पर कोई टिप्पणी करना मैं समझता हूँ कि न्यायसंगत नहीं है। मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में जो प्रावधान रखे गए हैं, उन प्रावधानों पर और महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में जो बातें कही गयी हैं, उन अधिकांश बातों को बजट के माध्यम से पेश किया गया है और इसमें अगर कुछ कमियां रह गयी हैं तो उनको हम लोग सदन के माध्यम से सामने रखना चाहेंगे जिससे उसमें यथासंभव तब्दीली और सुधार किया जा सके। सबसे पहले मैं महामहिम राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने यह घोषणा की है कि राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना के तहत देश के सभी जिलों को शामिल किया गया है। पूरे देश में इस योजना की जो सफलता है, उसकी ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए, इस योजना के रास्ते में जो बाधाएं आ रही हैं, उन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। योजना को कार्यान्वित करने में राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी होती है और उसके रास्ते में जो बाधाएं आ रही हैं, उनका निराकरण करना भी राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती है। ऐसा नहीं हो सकता है कि सफलता राज्य सरकार के खाते में और असफलता केन्द्र सरकार के खाते में दिखाई जाए। इसलिए ऐसा कुछ प्रावधान होना चाहिए जिससे राज्य सरकारें योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी वहन करें और इन योजनाओं को अच्छी सफलता मिले। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकासस योजना के माध्यम से देश में कृषि पर बहुत जोर देने का संकेत महामहिम राष्ट्रपति जी ने दिया है। मैं कहना चाहता हूँ कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने जो संकेत दिया, उसके लिए इस बजट के माध्यम से सरकार ने 60,000 करोड़ रूपए के कृषि ऋण किसानों के माफ कर दिए हैं। इसके लिए मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूँ। इस सन्दर्भ में, मैं सरकार का ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि गांवों में महाजन होते हैं जिनसे छोटे एवं सीमान्त किसान ऋण लेते हैं। मेरा आग्रह है कि आने वाले दिनों में किसानों द्वारा महाजनों से जो ऋण लिए जाते हैं, उनके रिपेमेन्ट के लिए भी किसानों को अनुमति दी जानी चाहिए। जिन राज्यों में छोटे किसानों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, हमें उम्मीद है कि सरकार के इस कदम के बाद उस दिशा में बहुत सुधार होगा और बहुत हद तक उनकी समस्याओं का समाधान निकलेगा।
हम महामहिम राष्ट्रपति को धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने अपने अभिभाषण में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 66 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए करने की बात कही है। यह खास तौर से असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिकों के लिए एक अच्छा कदम है। मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकार भी इस ओर पहल करेगी उसे बेहतर स्वरूप देने की कोशिश करेगी।
प्रधान मंत्री जी के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के तहत कुल परिव्यय का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए निर्दिष्ट होगा, इस बात का जो आश्वासन दिया है, वह स्वागतयोग्य कदम है। इसके अलावा सच्चर समिति की सिफारिशों के आधार पर 11वीं पंचवर्षीय योजना में 90 अल्पसंख्यक बाहुल्य जिलों के लिए 3,780 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, उसके लिए भी हम महामहिम को धन्यवाद देते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले चार वर्षों में गेंहू पर करीब 50 प्रतिशत बढ़ा है और धान पर 33 प्रतिशत बढ़ा है। यह यूपीए सरकार का बहुत ही सराहनीय कदम था। इससे निश्चित रूप से गेहूं और धान का उत्पादन करने वाले किसानों की स्थिति सुधरी है। लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जिनकी स्थिति खराब है और मैं उसकी ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा। आज से 20 वर्ष पहले आलू का जो मूल्य था, आज भी वही है। महंगाई का शोर करने वाले प्रतिपक्ष के साथियों से भी मैं कहना चाहता हूं कि 20 वर्ष पहले जो जूता 100 रुपए में आता था, वह अब 2,000 रुपए में आता है और हम सब उसे खरीदने के लिए तैयार होते हैं। लेकिन जब खाद्य सामग्री में मूल्य वृद्धि की बात आती है तो उसका बड़ा अंश किसानों को भी जाए, तो इसमें क्या हर्ज है। जब हर जगह मुद्रास्फीति बढ़ने और मूल्य वृद्धि की बात होती है, तो छोटे किसान जो खाद्यान्न पैदा करते हैं, उस पर भी नियंत्रण क्यों किया जाए, उन्हें भी उसका उचित मूल्य मिलना चाहिए। इसके साथ ही साथ हमें यह भी देखना चाहिए समय-समय पर मुद्रास्फीति की जो रफ्तार है, वह अधिक न हो और न ही उससे अधिक मूल्य वृद्धि हो। इस बात का हमें प्रयास करना चाहिए।
भारत निर्माण के बारे में भी महामहिम ने अपने अभिभाषण में जिक्र किया है, जिसके लिए फंड का प्रावधान बजट में किया गया है, वह काबिले तारीफ है। अभी जो रेल बजट पेश किया गया, उसमें 25,000 करोड़ रुपए का लाभ दिखाया गया है और कुलियों को नौकरियां देने तथा भाड़े को कम करने की बात कही गई है। यह देश की जनता के लिए बहुत लाभप्रद है। इस बात के लिए भी मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं।
अब मैं चंद बातें बिहार और उस जैसे पिछड़े राज्यों के बारे में कहना चाहता हूं। बिहार में हमने परमाणु विद्युत इकाई की मांग लम्बे समय से की थी। इस सम्बन्ध में लालू जी के नेतृत्व में हम लोग प्रधान मंत्री जी से भी मिले थे। लेकिन राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में इसका कोई जिक्र नहीं है। हम अपेक्षा करते हैं कि इस बजट में कहीं न कहीं उसे अवश्य स्थान दिया जाएगा। बिहार में मेडिकल कालेज, मैनेजमेंट कालेज, प्रोफेशनल कालेज और इंजीनियरिंग कालेज तथा पोलीटैक्नीक संस्थान की बहुत आवश्यकता है। इसके अभाव में वहां के बच्चे काफी बड़ी तादाद में कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में पढ़ने जाते हैं। वहां पर एक आईआईटी का प्रावधान किया गया है, उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं, लेकिन वहां पर प्रोफेशनल कालेज की भी बहुत आवश्यकता है। [R54] अभी महाराष्ट्र में जो घटनाएं घटीं, उस पर सदन में बहस हुई। मेरा कहना है कि आज राज्यों के सम्यक विकास की आवश्यकता है। क्षेत्रीय बैलेंस की बात भी की गयी है और यह सही भी है। जिन क्षेत्रों को लम्बे समय से उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है और जहां बहुत ज्यादा जनसंख्या है, उनका सम्यक विकास होना चाहिए। देश की आबादी का 8 या 9 प्रतिशत हिस्सा बिहार में बसता है, लेकिन एलोकेशन के मामले में उसे एक-ढेड़ प्रतिशत से ज्यादा पैसा किसी भी सेक्टर में नहीं मिलता है। यह इन्क्लूसिव ग्रोथ का उदाहरण नहीं हो सकता है। जब तक आप बिहार जैसे राज्यों की ग्रोथ के बारे में नहीं सोचेंगे, तब तक आप इन्क्लूसिव ग्रोथ नहीं कर सकते हैं। सरकार किसानों और देश की बड़ी जनसंख्या के ऊपर सहानुभूति रखती है और उसने चौधरी चरणसिंह तथा राममनोहर लोहिया जी की उक्ति पर अमल किया है कि विकास का रास्ता खेत-खलिहानों से होकर गुजरता है। इसके लिए यूपीए सरकार धन्यवाद की पात्र है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने ऐसे संकेत दिये हैं लेकिन मैं इतना अवश्य कहना चाहूंगा कि जब महाराष्ट्र में इस तरह की घटनाएं घट रही हैं तब इन्क्लूसिव ग्रोथ के लिए बिहार जैसे राज्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहां पर बड़े पैमाने पर पब्लिक सेक्टर की इकाइयां लगाई जानी चाहिए और बिहार में भी कोल-इंडिया जैसा पब्लिक सेक्टर का कार्यालय खुलना चाहिए। रिजर्व-बैंक मुम्बई में ही क्यों रहे, दूसरी जगह क्यों नहीं, इस पर भी विचार होना चाहिए। देश को जोड़ने का प्रयास हर तरह से होना चाहिए। हमारे देश में नागरिक किसी भी राज्य में जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है और संविधान में इस बात का प्रावधान है। यदि कोई भी प्रयास देश को तोड़ने का होता है तो हमारा निवेदन पूरे देश के लोगों से है कि इस तरह की बात कहीं भी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र के सभी लोगों की हिस्सेदारी ऐसी बातों में नहीं है और न ही उनकी ऐसी मानसिकता है। जिस धरती ने देश को बड़े-बड़े पुत्र दिये, ऐसी गलत बातों में उनकी भागीदारी नहीं हो सकती है। गलत मानसिकता वाले चंद लोगों का यह गलत प्रयास है। मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में एक वहां एक हारमॉनी बनेगी और इन्क्लूसिव ग्रोथ के तहत देश के सभी भागों को विकसित होने का मौका मिलेगा और इस तरह की स्थितियां वहां पैदा नहीं होंगी।
इन्हीं शब्दों के साथ महामहिम राष्ट्रपति जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): I thank you, Madam Chairperson. I stand here to deliberate on the Motion of Thanks on the President’s Address.
At the outset, I should express that the hon. President has addressed us in this great hall of democracy and has reminded us that the world is watching us with hope and expectation. The question before us today is how to liberate ourselves from poverty, ignorance and disease within the framework of an open society and an open economy. In the decade and a half that India has embraced economic reforms, a curious problem has haunted the country. The problem is as India is growing richer, Indians are growing hungrier. To many, that fact appears to be counter intuitive. How can it be that as income has risen, much needed calories have vanished from the plates of those who need them the most? Economists have not found an answer to it. Why is it that in the last seven years - a period of heady growth - the number of children under five years of age who are malnourished has dropped just by one per cent from 47 per cent to 46 per cent? [r55] 18.00 hrs. MADAM CHAIRMAN : Shri Mahtab, you may please take your seat for a minute.
It is now 6 o’clock. What is the opinion of the House? Shall we continue the discussion?
SHRI PRAHLAD JOSHI : Madam, first you may take up the Zero Hour… (Interruptions)
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CHEMICALS AND FERTILIZERS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI B.K. HANDIQUE): Madam, the Business Advisory Committee has fixed the time for reply to the debate at 12 noon on the 5th of March. So, practically we have just one day left for conclusion of the debate. Now, today if we get at least one more hour then we can accommodate five to six more speakers. So, I would request for extension of one hour.
MADAM CHAIRMAN: So, the time of the House is extended by one hour that is up to 7 o’clock. Thereafter we will see if it is to be further extended or not.
Shri Mahtab, you may now continue.
SHRI B. MAHTAB : This is according to the most recent National Family Health Survey. Recently in a book, “The Republic of Hunger”, Prof. Utsa Patnaik of JNU has written and I quote: “between 1950 and 1991 consumption of foodgrains rose from 152 kg a year to 177 kg per person per year in India. But in 1991 per capita food grains consumption started to drop. By 1998 it fell by 3 kg and in 2003 it was back to almost the 1950 level.” I would like to know the reason behind this. I would like to know whether the Government is going to find out as to what are the reasons for this. Why? This country is rearing to become the third or the fourth largest economy of the world. It is not that it cannot give a poor pregnant woman a glass of milk so that the next generation is not stunted. But the current nature of reforms is, “do not tackle the problem head on”. The reform mentality today is to forget about them because some day or the other percolation might resolve the issue. That is the mindset of the present day Government.
Today, extremely poor Indians number up to 301 million which is just 19 million less than what it was in 1983. At this rate, would it not take 300 years to lift all the people out even the most extreme level of poverty? Another recent report of Shri Arjun Sengupta on labour conditions says that another 50 per cent of India’s people, over 500 million in all, live on less than Rs. 20 a day which though puts them above the official poverty line but leaves them in abject poverty. The recent publication of the Human Development Report by the UN has ranked India at 126th amongst 193 nations. This has occurred despite achievement of around nine per cent growth rate in GDP. It is pertaining to note that while population below poverty line has significantly decreased from 1470 million to 970 million across the world, India’s share of poorest people in the world which was 25 per cent in 1980 has now increased to 39 per cent. The greatest impact of abject poverty and inequality is in India’s rural areas which carry over 60 per cent of India’s population. There is no way our agriculture can support this 60 per cent of our country’s population. What is the Government doing for skilled development in rural areas? Here we are told about inclusive growth in the address of the President’s Address. The amount of investment that is being done is not equitable. The amount of investment that is done in Orissa; the amount of investment that is done in Karnataka or in Kerala is not the same. [R56] Similarly, we have[MSOffice57] discussed here about NREGS, a couple of weeks back, two Reports which have been brought out on programmes targeting the poor The Comptroller and Auditor General’s Report on National Rural Employment Guarantee Scheme (NREG) which states that only 3 per cent of the beneficiaries had access to the promised full 100 days of employment. It is only three per cent! The second Report indicates that though credit to agricultural sector has grown in the last three years, the number of farmers who availed of credit has declined. These are Government Reports. There is also evidence that the small and marginal farmers had no access to credit and that lending by cooperative societies has also decreased. NREGS has failed to check migration. Be it naxalite infested Dantewada of Chattisgarh or comparatively peaceful Paschim Medinipur, only 3.5 per cent of families could get 100 days of employment and this is despite the availability of work. The demand driven nature of the programme instead of the usual targeted approach makes local officials to create limitless corruption for a limited scope of work. Now, all the districts are going to be covered but there is a need to check and to make it conducive for social audit.
Food grains productivity is also of concern and this refers to its availability of food grains in this country. A study has stated, in December, 2007, that the total demand of food grains would increase by 2 per cent in a year in the medium term, despite a slowdown in population growth. Meeting the projected demand for food grains would require 1.86 per cent annual growth of food grains production during the Eleventh Plan. What is our track record? During the last ten years, since 1997-98 to 2006-07, India’s food grain production increased annually by a meagre 0.48 per cent. What would happen? Food prices would skyrocket. Does the Government have any plan to meet the problem? The Budget has already been placed and I am sorry to say that we are in for a major disaster in the near future. The World Development Report, 2008 has warned that unless cereal production increases by 50 per cent by 2030, world wide demand cannot be met. And what is our projection? It is 2 million tonnes by the end of the Eleventh Plan.
In the power sector, it has been repeatedly declared that 80,000 Megawatt of electricity generation be added in the Eleventh Plan. There is a Central Electricity Authority which had estimated the demand will increase from 94,000 Megawatt in 2007 to 1.53 lakh Megawatt in 2012. The projected increase is 60,000 Megawatt. Government has bloated it to 80,000 megawatt. But what is the trend in the power consumption during the last ten years? The Finance Ministry has said:
“The generation of electricity in the country increased at an average annual rate of 5.8 per cent in 1997-2001 and at a rate of 4.7 per cent in 2001-06. ” It is 4.7 per cent between 2001-06. What would be the increase in generation in 2007-2011, if not 4 per cent? The generation in 2006 was 94,000 Megawatt. This will increase only by about 20,000 Megawatt. On what basis is the CEA forecasting an increase of 60,000 Megawatt? Where is the demand? Are we following Latin American countries, Argentina and Columbia who fell into the trap of World Bank and Inter American Development Bank? This is my direct question to the Government.
As we deliberate on the Motion of Thanks on the President’s Address, I would like to refer to Radhakrishna Committee Report. It had made a number of recommendations for increasing the food grains productivity and also to deal with the credit structure in our society. I would refer to only two issues. I would be happy if the Government responds to them. One is about the agricultural indebtedness, which deserves very serious attention, but has been bypassed. The measures recommended by the Committee includes, inclusion of financially excluded sections of the farming community. Loan waiver scheme, which has been touted in this House with such full throttled lung power, does not offer anything for these farmers, who have been left out of the institutional credit facility. What specific steps are being taken in this regard? Second issue is about the recommendation in regard to creating Price Risk Mitigation Fund. It was to compensate farmers in situations of price collapse. I would like to know whether the Government is taking any step that would insulate the farmers from the clutches of moneylenders as well as from the risks of price volatility. There is no mention of it.
I would be failing in my duty if I do not make a mention about the sad incidents that have occurred in Maharashtra. The constitutionally defined image of our country is that of tolerant and liberal India; an India that understands and practises the maxim “Live and let live.” That is being attacked by fringe groups around the country. The Governments, the State as well as the Centre, have capitulated to please one vote bank or the other, which is threatening our collective idea of India. No other nation, which is existing or which had existed, offers, under one flag, as much diversity in terms of language, ethnicity and religion, that too under a democratic, republican constitution, as India does. It is an exceptional experiment that has comfortably lasted other ambitious attempts to create one nation out of many, such as former Soviet Union and Yugoslavia. They have failed. We are still holding our flag high. The founding fathers have created such a Republic because they knew that no monarch can hold such a nation together. The violent street protests against North Indians in Mumbai and other parts of Maharashtra have created panic and there is exodus of toiling people from Maharashtra. Hindi-speaking people are being murdered in Assam. A Minister in West Bengal is threatening a community in that State. Incidents of this nature actually chip away at the very foundation of democratic and republic India.
One is thankful to Shri L.K. Advani who came out in clear terms and said: “No political party should say or do anything that weakens country’s unity or undermines the Constitution.” I am really astonished to find that there is no statement from the hon. Prime Minister or from the Chairperson, UPA condemning these incidents. It is very clear if the embers of exclusionary, xenophobic and sub-nationalist demands are not stamped out as soon as they are spotted, the resulting fire can engulf the whole nation.[MSOffice58] Let us be very clear about it. There should be zero tolerance to such type of parochialism as it has no place in Indian Republic.
At the end, I would only mention one incident which relates to our foreign policy affair. As we deliberate on the Address of the hon. President – the Leader of the House the hon. External Affairs Minister also has made a Statement today – a new nation has been formed. I would like to draw the attention of the House to the peculiar situation that has evolved in this world. A new nation has come into existence despite protests from Russia, China and many European Union Members. Kosovo sets a dangerous precedent in international law. A unilateral declaration of independence has been recognised without an appropriate form of institutional mediation. Kosovo’s two million population of Albanian descent is predominantly Muslim. This has led to uneasiness in many European countries like Spain besides Russia and China who face separatist movement. Russia has 20 autonomous ethnic republics like Chechnya and each of these is like Kosovo. It is bound to encourage separatist tendencies. What is our stand? Are we not affected by this type of fissiparous activities? What is the Government’s reaction to this? Should we say silence is golden? The message is loud and clear that the United States and its Western allies are no longer interested in upholding the time-honoured principle of inviolability of a country’s sovereignty and territorial integrity. Should we believe that they prefer for ethnic self-determination? Should we not say in clear terms that the “Kosovo Precedent” will lead to destabilising consequences? Why are we silent? I do not understand it. Whom are we afraid of? Let us not forget that ours is the last Republic which is multi-lingual, multi-ethnic and has survived all turmoils in the past.
The silence after Kosovo is not only surprising but demonstrates glaringly the weakness of our policy-makers. It is not at all in India’s interest. You may accept the birth of a new nation but the manner in which it has been engineered is really worrisome and shocking. I would conclude by saying one thing.
MADAM CHAIRMAN : Thank you Shri Mahtab. Please conclude now because the time allotted to you is over.
SHRI B. MAHTAB : Thank you, Madam. I will just mention one thing. Some months back, a lecture was delivered to all the hon. Members where we heard about Gosavi Pawar. I am dealing with the suicides of farmers. Today, a news item has been published in the Hindustan Times. If you allow me, I will just read a small paragraph of it.
MADAM CHAIRMAN: Everybody knows about it. Everybody read the newspaper. So, think, you kindly conclude it.
SHRI B. MAHTAB : It is a wife’s predicament. When the Rs.60,0000 crore loan waiver is being trumpeted, I would just mention how a large section of the farmers have been left out. Four crore farmers are going to be benefited. We have heard the Finance Minister say that Rs.60,000 crore is going to be given. Today, the news item has come out that it will not be Rs.60,000 crore but it will be Rs.65,000 crore. But what is the actual indebtedness of farmers in this country? It is Rs. 3.5 lakh crore. Out of that, Rs.60,000 crore or Rs.65,000 crore will be there.
I quote the news item.
“Kamalabai Gosavi Pawar, 46, whose husband, Gosavi, committed suicide on May 8 last year, just 22 days before Prime Minister Manmohan Singh was scheduled to visit their village of Kelzhari in Yavatmal, faces a grim future.
Gosavi needed Rs.65,000 to work in his seven acres. But he owed the bank Rs.50,000…” He got Rs.50,000 from a moneylender, repaid it back to the bank. He was supposed to pay Rs.2500 per month. Today, what is the widow’s condition? A new debt of Rs.65,000 is there. The loan of Rs.50,000 is there. The widow is not entitled to this waivement of credit and loan because she owns seven acres of land. What is her fate? Practically, this waivement, this full-throated talk of release of Rs.60,000 crore is just bypassing the actual farmers who are in turmoil. [R59] [r60] I would only urge upon this Government to take this situation into consideration. I am sorry to mention here that in the President’s Address, though the overall picture of the nation is given, the actual reality of poverty, of food production, of nutrition, of farmers’ suicide is not being tackled to by this Government.
With these words, I thank you.
SHRI AJOY CHAKRABORTY (BASIRHAT): Thank you, Madam Chairperson. The hon. Rashtrapatiji addressed Members of both the Houses in the Central Hall. It was nothing new. It is as usual. Every year, before the Budget Session, hon. Rashtrapatiji delivers the Address before the Members of both the Houses. It is an usual practice as per the Indian Constitution.
This year, same thing happened. It is also an usual practice and custom that all the leading Governments, who are ruling the country, through the mouth of hon. Rashtrapatiji declare some projects and schemes before the nation. The Government is doing and what are the aims and objects of the Government for the people of our country.
Same thing happened this year. The Congress led UPA Government have declared so many projects in the name of different persons -- I am not going to mention all that here – through Rashtrapatiji before the nation.
Same is in the case of Budget. So many farmers have committed suicides in different States. But this year, the hon. Finance Minister, in his Budget Speech, made an announcement for the waiver of the loans of the farmers. How will it be implemented and whether it will be implemented at all. I have 100 per cent doubt.
Same is in the case of the Railway Budget. We have reservations about the Railway Budget, but we are not going into that point. People are guessing, there are serious rumours and we can assume that Congress Party will go for earlier polls. That may be or may not be, we are not bothered about that.
But I am sorry to say that in the Speech of hon. Rashtrapatiji serious and vital matters are totally omitted. One is price rise. Price rise has affected the common people of the country, poor people of the country, and the toiling masses of our country.[r61] If you go to the market, you can see what is the price of wheat, rice, pulses, mustard oil, salt, sugar, kerosene oil, potato, onion and different types of vegetables. Not a single word is uttered in the speech of the hon. Rashtrapatiji as to how the Government would cut down the prices and reduce the price rise. In Rashtrapatiji's bhashan, Food Plaza, Food Security Mission and all these things have been declared. Food Plaza is there in very big cities and towns. Who is going to Food Plaza? Are the common people and the toiling masses of the country going to Food Plaza? They are not going to Food Plaza. The rich people, the upper-middle class people will go to Food Plaza.
They have declared the Food Security Mission but there is a way for the Government, in the hands of the Government, to combat price rise situation through PDS. The Government should take initiative to distribute rice, wheat, salt, sugar, kerosene oil etc. to the common people whether they are BPL or APL. But, on the contrary, the Government is demolishing, is destroying the PDS of the country. The photograph of our Agriculture Minister with Madam Sonia Gandhi and Dr. Manmohan Singh ji isthere everyday on a big page in English and Vernacular language newspapers.
Why is he destroying the PDS? Madam, you know, Kerala, West Bengal and some other States are successfully running the PDS system. Through PDS, common people are getting the essential commodities from the ration shop. But the Government is destroying it. The Government has cut the quota of Kerala and West Bengal. They have reduced the quota of Kerala and West Bengal in the PDS. It is very much shameful. That attitude of the Government should be condemned.
We are very much happy to have a mahila Rashtrapati, but whatever is the reason, she has not uttered a single word about the Women Reservation Bill. The BJP-led NDA Government in the last general election of Parliament in 2004 embedded in their Manifesto that if they come to power, they will bring the Women Reservation Bill and they will try to pass it. That is incorporated in their Manifesto. The Congress also declared the same thing in their Manifesto that they will bring the Women Reservation Bill and pass that Bill in the House. In every Session, the hon. Prime Minister declares that they will pass the Women Reservation Bill in the next Session. When will it be passed? The Government is totally violating the UPA's mandatory Common Minimum Programme.
Now I come to another issue, that is the unemployment problem. Shri Ajit Jogi ji told about hundred days' work, that there is so much corruption going on in this work. I am not going to that point because I have got limited time to speak. But, Madam, as far as hundred days' work is concerned, will any graduate or any post-graduate or any educated youth go for hundred days' work? Will they engage themselves in cutting mud or excavation of pond or cutting or excavation of canal? They would not go for that work.[r62] They are searching for employment in the Central Government and in the State Government. They are searching for employment in schools and colleges as a teacher but all the doors for employment have been closed in the Central Government and in the various State Government of India. What is happening in the Public Sector Banks? What is happening in LIC and GIC? I would like to give my personal experience. In front of my house, there is a branch of SBI. Before this branch had been shifted to the new building, 65 persons were working. After shifting this branch to the new building, only 15 persons are working. So, the number of employees has been reduced after it has been shifted to the new building. In the public sector banks, after the retirement of their employees, the vacancies have not been filled up. After the retirement of their employees in LIC, the vacancies have not been filled up. Similar is the case in the Railways. Every time, Lalu ji is saying: “I will recruit these people and that people.” But it is a misleading statement. There is no recruitment in the Railways. Maybe some gang men or some coolies have been recruited. This is the position in respect of unemployment in the country.
Now, I come to internal security. I am not going into the details of internal security, and what happened in Mumbai, Hyderabad and Bangalore. Everybody is discussing about Naxalism and Maoism. Some States are affected by the activities of naxals and Maoists. Three districts in my State have been badly affected by naxalism. Some naxal leader has been arrested near Kolkata. My distinguished friend, Md. Salim has already mentioned his name and other names. I have heard in the television as to what they said to the Police. One of the naxal leaders has said: “I joined in the Nandigram episode.” He said this in the media. I had also said on different occasions in this House and especially during the discussion on internal security that AK-47, arms and ammunition would not solve the problem of naxalism or Maoism. This comes from the poverty of the people. After 60 years of our Independence, we felt shame as to what happened to the fate of the tribal people. Land reforms should have been done effectively. Otherwise, this problem cannot be solved. We should give land to the tillers and to the downtrodden,. They are suffering a lot and are suffering irreparable loss and injury also. Madam, in the States excepting West Bengal, Kerala, Tripura and in two other States, land reform has not been implemented. A Bill has been passed in the Assembly but that has not been implemented in the root of the land. So, land hunger is one of the causes for Maoism and Naxalism. Shri Ajit Jogi has correctly mentioned as to who are these naxals. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN : Please conclude now. Your time is over.
SHRI AJOY CHAKRABORTY : The tribal people, the Adivasis and a large number of people are joining with the activities of Maoists and Naxalists. Some designing persons, through manipulation, are misleading these tribal people to join with Naxalists and Maoists. It is the duty of the UPA Government and the NDA to see that the States ruled by the Congress or the UPA, and the States ruled by the BJP or NDA partners, are properly and effectively implementing the land reforms and having development work in the remote corner of the village and particularly in the areas where poor and tribal people are living.
MADAM CHAIRMAN: Please conclude now.[h63] SHRI AJOY CHAKRABORTY : Madam, within two minutes, I am concluding my speech.
Another thing, which was not mentioned, is on parochialism and provincialism. But what is happening today in the country? We are proud that we are Indians. Irrespective of the caste, creed or religion, we are carrying the tricolour; we are fighting for the sovereignty and unity of our country, for the unity of our motherland in the battlefield. Our jawans बोर्डर पर खून बहाते हैंfor the unity and sovereignty of our country. But I am sorry to state that some States are severely affected by the parochialism and provincialism. What happened in Maharasthra a few days back, everybody knows. The Government should feel the agoney.
Mumbai, Kolkata, Chennai, Delhi and other big industrial cities are there in our country; and everybody has the right to go and settle down there or for that matter anywhere in the country for their livelihood.
MADAM CHAIRMAN : Mr. Chakraborty, it is already discussed. Please sum up.
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Madam, do not be impatient. I am concluding within two minutes.
MADAM CHAIRMAN: Your time is already over.
SHRI AJOY CHAKRABORTY : No speakers are there in the House now.
MADAM CHAIRMAN: Many speakers are present to speak.
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Why are you so impatient? You had taken so much of time when you were speaking. Now, you are impatient when I am speaking! I would conclude in two minutes. I would keep my words.
Madam, I am very much glad and proud to say that, a good number of citizens from all over the country including Bihar, UP, Uttaranchal, Jharkhand, Orissa and even Andhra Pradesh are coming to my State of West Bengal including Kolkata, other big cities and industrial belts, for their employment, for their livelihood, to earn their bread and butter. Even in my own district, lakhs of people are coming from various parts for their livelihood. They are all our brothers and sisters. But I am very much pained to say as to what is happening in Mumbai, which is the heart of India, the Commercial Capital of India? The Government should take cognizance and take drastic action against the miscreants, whosoever they may be. We saw in the newspapers and TV as to whether there would be arrest or not. That game is going on. But I must say that we must try for the unity and sovereignty of our country at all cost.
Then on the question of minority, I am not going to raise it because you are ringing the bell again and again. My esteemed colleague, Mohd. Salim has correctly said on this point that it is the attitude of the Government.
So many projects and programmes have been declared by the Government through the mouth of hon. Rashtrapatiji. But I am not very much satisfied; rather I am very much disappointed by the speech addressed by the hon. Rashtrapatiji.
MADAM CHAIRMAN: Now, Shri Kharabela Swain.
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Madam, with your permission, may I speak from this seat?
MADAM CHAIRMAN: Sure.
SHRI KHARABELA SWAIN : Thank you.
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE) : Madam, though the hon. Leader of the Opposition has already spoken on behalf of the BJP and the Opposition as a whole, I would repeat it that generally the speech of the President is not opposed. So, I am not opposing it. But as a Member of the Opposition, I would simply try to bring in certain lacunae and other things, which we expect should have been included in the Address of Her Excellency, the President.
While moving the Motion of Thanks, the hon. Member, Shri Ajit Jogi, who had also been the Chief Minister of Chhattisgarh, raised certain very pertinent points about the internal security, specifically naxalism. He said, what is the basic reason for the rise in naxalism in India.[r64] The first point was that it is because of the rural deprivation. There is no school, there is no hospital, there are no roads etc. That is the main reason for which the tribals are taking to naxalism and taking to guns.
Madam, I will say that this is a very very confused mind of Shri Ajit Jogi and I will say that this is the confused mind of the Congress Party and this UPA Government also. Why did the naxals attack Nayagarh district in Orissa? Some 800 to 1,000 people, in vehicles, came and attacked. Whom did they kill? They did not kill any rich person; they did not kill the Collector; they did not kill the SP; rather, they could have killed them. They gheraoed them only; they did not allow them to come out of their homes. But, whom did they kill? They killed the constables, the persons who opposed them because they were taking away some of the tyres from a poor man’s shop.
So, this perception to say that because of the deprivation in the rural areas the naxalism is raising its head is very wrong. The naxalism is succeeding to an extent in India because the States are confused. I also say that about my own State. It had a problem because of which also my Chief Minister probably thought that if he does not take any action against them, nothing will happen. But, probably, he has understood now that unless you go proactive, the naxalites will never, never stop. It is only to capture power through the gun. This is the only thing. That should be properly understood.
The naxals are taking 30 per cent cut from every developmental work in that area from all the contractors. They do not allow the roads to be built there. They do not allow that any Government official should go and stay there. On the one hand, you say that because there is no Government official, no road, no hospital etc. that is why the naxals are taking advantage and on the other hand you do not allow the roads to be built, you do not allow any Government official to stay there. This nation will have to settle its mind. The nation will have to understand as to who are these naxals. The naxals are not the emancipators of proletariats. They are the power-mongers, they are the power-grabbers. Unless we understand this very principle and unless the States join hands along with the Central Government, we are not going to succeed.
I will request that such a leading member of the Congress Party should not be confused and he should not say that this Salva Judum programme is wrong. It is because the naxals have attacked the very poor Adivasis, just to save their lives, it is there. They have run away from their villages and the Government is compelled to keep them in the camps. How can you say that this Salva Judum is wrong? The entire world sees as to who is against whom. These naxals are against these proletariats.
The Congress Party had got also the same problem everywhere. In Andhra Pradesh, when the present Congress Government came to power, they said – we will have talks with them, we will have negotiations with them. They held the talks. While they held the talks, the naxals said – ‘We will also carry the gun right to the meeting place. This gun is an inalienable part of our existence and our body, and wherever we go we carry the gun.’ So, the Chief Minister himself did not come to attend the meeting. The Home Minister came. But he was very scared that these people are carrying the gun right to the meeting place.
I would say that everybody knew it pretty well that during the time of the last election, the Congress Party had a secret understanding with the naxals and they told that if they come to power, they will see that they are set free.’ The same thing happened in Assam. In Assam, the Congress Party had a secret understanding with ULFA and after coming to power, they also held a ceasefire, when the naxals re-organised themselves, they raised money, they recruited more people and they procured more and more arms and ammunition and again waged an attack against this country. [k65] I understand that probably the Congress Party would have understood that pandering to this type of criminals is against the nation.
Now I will come to another point. Take the example of President’s Address. There is another very serious problem in this country. I will quote it from the Telegraph being published from Kolkata. Under no stretch of imagination, you can say that it is a communal paper and it is backing the BJP. It has been published on 12.2.08. It says a very serious thing, that in so many border districts of Assam, Bihar, West Bengal, now the Hindus are leaving the villages because of the fear that these villages have become Muslim-majority villages. How did they become Muslim-majority villages? If it was a Muslim-majority area at the time of Independence, why did it not go to East Pakistan? How did it remain in India? Now, the Muslims have become majority there.
Now our intelligence agencies are saying that the number of madarasas have sprung up in Indo-Nepal border areas, Indo-Bangladesh border areas and Assam-Bangladesh border areas. I am not saying that per se madarasas are against the nation, but the madarasas are being used by Islamic terrorists for hiding their arms and ammunitions and waging war against the State. In Dhubri area of Assam, between 1991 and 2001, the increase in Muslim population is 29.5 per cent and the non-Muslim population increase is 7.1 per cent only. In Goalpara, there is an increase of 31.7 per cent in Muslim population and 14.4 per cent in non-Muslim population. In Hailakandi district, the increase is 27.2 per cent in Muslim population and 13 per cent in non-Muslim population. In Kishanganj area of Bihar, the increase in Muslim population is 35.5 per cent while the figure is 25 per cent in respect of non-Muslim population. In Purnea, the figure is 34.1 per cent for Muslims and 30.8 per cent for non-Muslims.
MADAM CHAIRMAN : Be on the President’s Address only.
SHRI KHARABELA SWAIN : Madam, I am coming to the President’s Address. Now you direct me what to say and then I will say only that much. … (Interruptions) If you do not like what I say, you can guide me, then I would say that much and sit down. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: I am saying that you limit your points. It is good to give them in a crisp manner.
SHRI KHARABELA SWAIN : If you want that the Opposition should speak in a particular manner, a certain manner, you tell me. I will sit down. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: The Opposition’s time is over.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN : My Party’s time is not over. I am the second speaker. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: Please give your points in a crisp manner on President’s Address.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN : Madam, you allow me to speak. Please do not interrupt me. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: I am not interrupting. I am saying that you speak on the President’s Address only.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN : Madam, a Member from a 10-Member Party, in spite of your objection, spoke for about half an hour and you are stopping me just after ten minutes.
Even in Kolkata, the increase in Muslim population is 19 per cent and non-Muslim is 0.7 per cent. What is this Government doing about this? When the border areas of West Bengal, Assam and Nepal are now turning virtually into another Pakistan, what is this Government going to do about it? It is not my report. I have quoted from Telegraph which is not our paper, which does not support our party and our ideology also.
I am happy that Md. Salim is there. He says that when BJP was in power, it went for exclusive politics. … (Interruptions) Please listen to me. I will just read certain things from the Kolkata edition of The Times of India dated 26.2.08. He can say that this is not our paper. What is written in this paper? It reads:
“The Minority Affairs Ministry has graded States on the implementation of nine schemes of a 15-pooint programme, after a review by the Prime Minister. These schemes include those on education, wage employment and skill development and are Centrally funded.[SS66] ” It says, “The Left bastion of West Bengal figures at the bottom of the list while BJP-ruled Rajasthan, Gujarat, Uttarakhand and Orissa have been graded ‘good’, and Madhya Pradesh, Chhattisgarh and Bihar have been termed ‘fair’.” Is it wrong Mr. Salim?
MD. SALIM (CALCUTTA – NORTH EAST): Why are you quoting from the newspapers? Go by the Planning Commission report. The review report is available in Parliament.
MADAM CHAIRMAN : Mr. Swain, please conclude. The time is available up to 7 o’clock only. There are other speakers also.
SHRI KHARABELA SWAIN : If I do not complete today, I will continue tomorrow.
Madam, I do not expect at least you to stop me. I understand the Members on that side saying that.
MADAM CHAIRMAN: Other speakers are also there.
SHRI KHARABELA SWAIN : Other speakers are there but I am the second speaker from my Party.
MADAM CHAIRMAN: You do not obey the Chair.
SHRI KHARABELA SWAIN : The report further says, “Congress States with strong minority presence such as Andhra Pradesh, Delhi, Goa and Jammu & Kashmir have been graded ‘poor’.” MD. SALIM : What is the authenticity of that report? That is not a Government document.
SHRI KHARABELA SWAIN : This is the report given by the Ministry of Minority Affairs. This exposes the difference between the talk and the deed. What they talk and what BJP and NDA practice becomes clear from this. We took the money and we implemented the schemes for the benefit of the minorities and Muslims. But the UPA Governments have not been able to do so. That is a failure on the part of the Government.
I would like to quote another report which appeared in The Economic Times of 11th February, 2008. It quotes the National Sample Survey Organisation and says, “The NSSO’s latest survey says that West Bengal has the maximum number of rural households where members do not get enough food in certain months of the year. The finding of the Survey shows that 10.6 per cent of the rural households in West Bengal did not get enough food during December, January, February, March and April.” This is the achievement of the 30-year rule of the Left Government in that State. They are now giving sermons to the UPA Government at the Centre on how to implement the Common Minimum Programme while this is how their common minimum programme is implemented in their State.
Mr. Ajoy Chakraborty was saying that it is in West Bengal and Kerala that PDS is being utilized in the most proper way. If there is only one State in the entire country in which there was a lot of agitation and unrest against PDS, it is West Bengal. Who were the dealers there? The dealers were CPI(M) leaders. They are MLAs; they are Zila Parishad Members … (Interruptions)
MD. SALIM : What is this, Madam? On what basis is he saying that? What is the source of his information? He cannot make a wild claim like that. This is not West Bengal Assembly or Orissa Assembly. This is Parliament of India. Which document of Government of India substantiates his claim? I challenge him because he is speaking untruths. If he has the courage, let him quote from an authentic report. Is there any Government report based on which he can substantiate this? He is making wild allegations.
SHRI KHARABELA SWAIN : Madam, I will give the evidence, let him sit down.
MD. SALIM : No, I am not a court of law. If you say something, you have to substantiate it.
SHRI KHARABELA SWAIN : I will substantiate it.
Is it not true that the Government of West Bengal passed a new law saying that the people’s representatives in West Bengal cannot become control dealers? Following this agitation, they had passed that resolution. Madam, let him say that it is wrong. I will show you the evidence. I have the evidence with me.
Why did they pass such a resolution? They passed this resolution because those leaders were the control dealers themselves.[KMR67] They were looting. … (Interruptions) I will not tell any such thing in Parliament if I do not know anything. This is how the CPI(M) Government behaves. … (Interruptions)
MD. SALIM : I appreciate the fertility of your mind.
MADAM CHAIRMAN : Shri Swain, sum up your speech. Please address the Chair.
… (Interruptions)
SHRI ADHIR CHOWDHURY : I always stand by the truth. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: Address the Chair now, Shri Swain.
SHRI KHARABELA SWAIN : Now, take the example of the flagship NREGP Programme of the Government. All the reports say that it is the Congress-ruled States who have failed to implement it. It is the States like Rajasthan, Madhra Pradesh, even Bihar, Orissa which are all NDA-ruled States who have implemented the most and they are all very successful. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: You complete your points within two minutes.
SHRI KHARABELA SWAIN : I will give another point. Take the example of Bharat Nirman. In the President’s Address, it has been mentioned and since 2004 this Government is saying that we would provide electricity to all the villages and to all the houses by 2009. This time the hon. Finance Minister himself in his Budget speech said that out of Rs.20,000 crore that are supposed to be given, the Government had given only Rs.5,500 crore in this Budget. How many years will it take to provide electricity to all the villages and to all the areas? The Government can tell me. I am asking the Members from the Left parties. Let them say. … (Interruptions)
MADAM CHAIRMAN: Do not ask them. Address the Chair.
SHRI KHARABELA SWAIN : It has been stated by the Government that it will give electricity by 2009. But it would take another 15 years if we go by what the Government had spent till now on this programme. If this Government remain in power till then, they would be rather lucky because the hon. Finance Minister has said that it helps to be lucky Finance Minister. He is rather lucky because we took the financial reforms; we did the financial groundwork and they are reaping dividend to them. The Government is lucky because there was a NDA Government before it. We did certain good things. Can the Government show us a single strong reformative step it took? The Government is so scared by the Left parties. The Left parties are totally against any development in this world. They are the most retrograde party in this world. The Government was scared of them. Just to remain in power, they do not listen to them and do not go for any reformative Budget. The sooner this Government is thrown out, it is better. Let the nation bring the NDA, which is a very strong alliance, to bring back prosperity to the country. I appeal to all the people of this country to think about it and go for the NDA Government next time.
MADAM CHAIRMAN: Shri Adhir Chowdhury, you can start your speech tomorrow.
Now, we would take up `Special Mentions’.
As we can see, we have still one minute left. Hence, you can start your speech now. Shri Adhir Chowdhury.
SHRI ADHIR CHOWDHURY : Hon. Chairman, I am fortunate enough to get the opportunity to deliberate on the President’s Address, which was piloted by a woman of our country. There is a maxim that `man has sight but woman has insight’. By the dent of that insight, our President had delivered the speech to the nation.
Madam, the keynote of the speech is that this Government is going to build up a society which would be socially inclusive, environmentally sustainable and regionally balanced and the society as such was designed by the architecture of inclusive growth. As you know, the President’s Address is the harbinger of the future plan of a Government. [r68] MADAM CHAIRMAN : Shri Adhir Chowdhury, you may continue tomorrow.
Now, let us take up Special Mentions.