Lok Sabha Debates
Introduction Of Scheduled Castes, Scheduled Tribes & Other Backward Classes ... on 25 November, 2005
Title: Introduction of Scheduled Castes, Scheduled Tribes & Other Backward Classes (Reservation in Services & Educational Institutions) Bill, 2005.
SCHEDULED CASTES, SCHEDULED TRIBES AND OTHER BACKWARD CLASSES (RESERVATION IN SERVICES AND EDUCATIONAL INSTITUTIONS) BILL SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): I beg to move for leave to introduce a Bill to provide for reservation in favour of Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Classes in services and educational institutions under the Central Government.
MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is:
"That leave be granted to introduce a Bill to provide for reservation in favour of Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Classes in services and educational institutions under the Central Government."
The motion was adopted.
SHRI A. KRISHNASWAMY: Sir, I introduce the Bill.
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(q/1610/jr-kmr) उपाध्यक्ष महोदय : इस बिल पर बहस के लिए जो समय निर्धारित था, वह खत्म हो गया है। अगर माननीय सदस्य चाहें तो एक घंटे का समय इस बिल के लिए एक्सटेंड कर दें।
कई माननीय सदस्य : ठीक है।
उपाध्यक्ष महोदय : अब मैं श्री शैलेन्द्र कुमार जी को इस बिल पर बोलने का मौका दे रहा हूं।१६१० बजे श्री शैलन्द्र कुमार (चायल) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे संविधान (संशोधन) विधेयक, २००४ (नए अनुच्छेद ४७क का अंत:स्थापन) पर बोलने का मौका दिया। मैं अपने साथी सुधाकर रेड्डी जी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने सदन एक अच्छा बिल पेश किया है। मैं इसके समर्थन में अपनी बात कहना चाहूंगा।
१६११ बजे (डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय पीठासीन हुए) सभापति महोदय, आम आदमी के लिए जो मूलभूत अधिकार हैं, उनमें स्वास्थ्य भी एक है। लेकिन स्वास्थ्य के अधिकार से आज हमारे देश में आम आदमी वंचित है। देश को आजाद हुए ५० वर्ष से ऊपर हो गए हैं, लेकिन फिर भी हम स्वास्थ्य से सम्बन्धित सुविधाओं को आम जनता तक नहीं पहुंचा सके हैं। यह बात सत्य है कि देश को समृद्धि में शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण स्थान होता है। आज सभी राज्यों की जो अपनी आधारभूत चकित्सा सुविधा है, उसके अलावा इस विधेयक में भी यह बात कही गई है कि प्रत्येक क्षेत्र के स्तर पर हम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना करेंगे। मैं थोड़ी देर के लिए माननीय सदस्यों का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में देखें, खासकर जो ग्रामीण इलाकों से चुनकर आते हैं, वहां चाहे ब्लाक स्तर पर हो या पंचायत स्तर पर हो, जहां भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, उसकी हालत बहुत दयनीय है। मुझे याद है मेरे क्षेत्र में एक उच्च स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। वहां जो मशीन लगाई गई है, मेरे खयाल से एक या दो बार उद्घाटन के अवसर पर ही उसका उपयोग हुआ होगा, बाकी के समय में वह बंद पड़ी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जो स्वास्थ्य सुविधाओं की तो कमी है ही, साथ ही जो ट्रेंड डाक्टर्स हैं, जो एम.बी.बी.एस. हैं, वे भी गांव में नहीं रहना चाहते, वे शहरों में रहते हैं। आप सब जानते हैं कि शहर से गांव की दूरी कम से कम ५०-६० किलोमीटर तो होती ही है। इसलिए कोई भी डाक्टर देहात में रहना पसंद नहीं करता। देहात में अगर हम एक्सपर्ट डाक्टर्स को रखना चाहें, तो उनके लिए और उनके बच्चों के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन हम उन्हें वे सुविधाएं नहीं दे पा रहे हैं, जिससे वे गांव में रहने के लिए आकर्षित हो सकें और स्वास्थ्य मिशन को आगे बढ़ाया जा सके।
दूसरी चिंता का विषय है कि हिन्दुस्तान में चाहे शहरों मलिन बस्ती हो या गांवों की स्थिति जो है, खासकर जनजातीय क्षेत्रों की, दूर-सुदूर वनों के क्षेत्रों में जाकर देखें, वहां स्वास्थ्य की स्थिति बहुत दयनीय है और आम लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में मुश्किल हो रही है। मुझे दुख होता है कि इसी सदन में पहले हम लोगों ने तय किया था कि जनसंख्या नियंत्रण पर चर्चा होगी और सदन करीब एक महीना चला था, लेकिन उस पूरे सत्र में इस विषय पर चर्चा नहीं हो पाई। आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या की है। इस ओर भी हमें विशेष तौर से ध्यान देना होगा।
(r/1615/har/spr) दूसरी बात, सरकारी अस्पतालों की स्थिति के बारे में आज सभी जानते हैं। वहां पर अच्छी-अच्छी मशीनें तो हैं लेकिन वे खराब पड़ी रहती हैं। सरकारी डाक्टर्स निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं, और अपने नर्सिंग होम्स चला रहे हैं जहां वे मरीजों को बुलाकर महंगी-महंगी दवाएं दे रहे हैं, जिससे अमीर लोगों का इलाज तो हो जाता है लेकिन गरीब आदमी का इलाज नहीं हो पाता है और वह सरकारी अस्पताल की दवाइयों से वंचित रह जाता है।
आज सरकारी अस्पतालों की स्थिति बहुत खराब है और वहां पर्याप्त मात्रा में कर्मचारियों की संख्या नहीं है जबकि मरीजों की संख्या बढ़ती जाती है। हम अपने अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति विमुख हैं। अस्पतालों में स्ट्राइक होती है, मरीज मर रहा हो लेकिन उनका नारा रहता है कि " हमारी मांगें पूरी हों चाहे कोई मजबूरी हो" । अस्पतालों की स्थिति बहुत दयनीय है और गंभीर से गंभीर बीमारी से मरीज मरता रहता है लेकिन उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता है। इसलिए सरकारी अस्पतालों में सरकारी कर्मचारियों की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए।
माननीय संदीप जी ने कहा कि पूरे हिंदुस्तान में स्वास्थ्य के क्षेत्र में केरल की कोई तुलना नहीं हो सकती है। हिंदुस्तान के कोने-कोने में जो अस्पताल हैं वहां केरल की पढ़ी-लिखी नर्सेज और डाक्टर्स पूरी ईमानदारी के साथ अस्पतालों को चला रहे हैं। अस्पतालों की और ज्यादा व्यवस्था सभी राज्यों में होनी चाहिए जिससे वहां की प्रशक्षित नर्सेज और डाक्टर्स पूरे हिंदुस्तान के कोने-कोने में भेजे जा सकें। यह देखने की आज जरुरत है।
मैं दवाओं के बारे में भी कहना चाहूंगा कि दवाओं की इन अस्पतालों में आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए जोकि आज किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। हमारे जैसे जनप्रतनधियों के पास जब कोई मरीज आ जाता है जिसके पास पर्ची बनाने तक के पैसे नहीं होते हैं, आने-जाने का किराया नहीं होता है तो हम लोग अपनी जेब से पैसा देते हैं और अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट को लिखते हैं कि इसका इलाज सही तरीके से हो और इसको अस्पताल की तरफ से दवा मिले और इसको अस्पताल में भर्ती किया जाए। लेकिन यह हो हमेशा हो नहीं पाता है। अगर डाक्टर्स देखते भी हैं तो मरीज को बाहर से लाने के लिए महंगी-महंगी दवाएं लिख देते हैं जबकि उन गरीब आदमियों का इलाज अस्पताल द्वारा दी गयी दवाओं से होना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। इस ओर भी हमें ध्यान देना होगा।
निजी अस्पतालों में इतना ज्यादा खर्च आता है कि वहां गरीब आदमी जा नहीं पाता है और केवल अमीर आदमियों का ही इलाज ये निजी अस्पताल करते हैं। गांव की हालत बहुत बुरी हैं। वहां पर केवल आरएमपी, जिन्हें हम झोला-छाप डाक्टर्स कहते हैं वहीं मरीजों को देखते हैं जोकि विशेषज्ञ नहीं होते हैं। इसलिए उन्हें पता नहीं होता है कि कौनसी सूई किस बीमारी में लगानी होती है जिससे कभी-कभी मरीज को और कष्टों का सामना करना पड़ जाता है और उसका सही तरीके से इलाज नहीं हो पाता है। यह जो अधनियम आया है इसमें एक हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की बात कही गयी है। मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी को और सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए कि जो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हमारे ग्रामीण स्तर पर खुले हैं उनमें दवाइयों की अच्छी व्यवस्था, प्रशक्षित डाक्टरों की व्यवस्था होनी चाहिए। इस विधेयक में जो धारणा है कि प्राथमिक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की जाए, वह एक अच्छी बात होगी। हमारे संविधान के मूल अधिकारों में अधिकार दिया गया है कि मूलभूत सुविधाएं सभी को, प्रत्येक नागरिक को दी जानी चाहिए। मैं माननीय मंत्री जी को, प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि देश के १७ राज्यों में ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन चलाये जा रहे हैं। प्राथमिक रूप से इन मिशनों को चलाने की बात कही गयी है और मैं इसके लिए सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा। आठ हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था इसमें की गयी है। मेरा निवेदन है कि इनको और बढ़ाकर, अन्य राज्यों में भी इस व्यवस्था को शुरू किया जाए ताकि आम व्यक्ति को यह सुविधा मिल सके।
(s1/1620/sr-cp) जहां तक आंकड़ों की बात है, आज स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत १२९वें स्थान पर पहुंच गया है, यह बहुत चिंता का विषय है। जब देश आजाद हुआ था, तब हमने एक सपना सजोया था कि मूलभूत सुविधा, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा, हम प्रत्येक नागरिक को दे सकें, लेकिन आज स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत १२९वें स्थान पर है। यह बहुत चिंता का विषय है। इस विषय पर सरकार को विचार करना चाहिए।
आज नयी-नयी बीमारियां सामने आ रही हैं। हेपेटाइटिस एक बहुत ही भयंकर बीमारी है, यह एड़्स से भी ज्यादा गंभीर बीमारी है। अभी हमारे देश में पोलियों उन्मूलन के लिए काम किया जा रहा है। पोलियो उन्मूलन के लिए गांव के स्तर पर प्रचार-प्रसार के जरिए अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि हम देश को वर्ष २००८ तक पोलियो मुक्त कर देंगे। मैं कहना चाहूंगा कि हेपेटाइटिस बी और सी के टीकाकरण के लिए भी सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि हिंदुस्तान के जो भी बच्चे और जवान हैं, उनको हेपेटाइटिस का मुफ्त टीका लग सके, ताकि हिंदुस्तान एक स्वस्थ्य हिंदुस्तान बन सके। हमारी सरकार और माननीय मंत्री भारत को दुनिया का महत्वपूर्ण् स्वास्थ्य केंद्र बनाने की बात सोच रहे हैं, वह भी तभी पूरा हो पाएगा।
मैं कहना चाहूंगा कि कुष्ठ रोग के क्षेत्र में हमने पर्याप्त मात्रा में कंट्रोल किया है और उस पर काबू पा लिया है, लेकिन साथ ही साथ समाज की मानसिकता को भी बदलने की जरूरत है। समाज की मानसिकता बदलेगी, तभी इसका पूरा लाभ मिलेगा। हमारे पोलियोग्रस्त विकलांग भाइयों या कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए हमें आगे आना होगा। हमारे देश में एड्स या अन्य गंभीर बीमारियों के जो मरीज हैं, उनके प्रति समाज के तमाम व्यक्तियों की जिम्मेदारी होती है, उनको समाज के प्रति सजग रहना चाहिए और उन्हें ऐसा प्यार दें, ताकि वे यह महसूस कर सकें कि हम हिंदुस्तान के एक अच्छे नागरिक हैं। मैं आंकड़ों की बारे में बताना चाहूंगा। मैं दो-तीन प्वाइंट कहकर अपनी बात को समाप्त कर दूंगा। हमारे देश में रोजाना चार सौ गर्भवती महिलाएं दम तोड़ती हैं। आज चाहें तो देख सकते हैं कि दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में जो गरीब महिलाएं रहती हैं, जो लेबर का काम करती हैं, वे आज भी एनीमिया की बीमारी से ग्रस्त हैं। एनीमिया के कारण तमाम महिलाओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। आज जरूरत इस बात की है कि अगर हम ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान न चला पाएं, तो कम से कम जो दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली गरीब महिलाएं हैं, जिनके स्वास्थ्य के लिए तमाम व्यवस्थाएं हैं, लेकिन हम उन्हें नहीं कर पा रहे हैं, उस ओर अभियान चलाकर ध्यान दें।
जन स्वास्थ्य रक्षक के बारे में पहले भी सदन में बात हो चुकी है। हमारे समाजवादी चिंतक स्वर्गीय राज नारायण जी ने गांव के स्तर पर एक जन स्वास्थ्य रक्षक की नियुक्ति की थी। आज उनकी स्थिति बहुत खराब है। मैं चाहूंगा कि सरकार इस ओर भी ध्यान दे, ताकि जो पहले से जन स्वास्थ्य रक्षक नियुक्त हैं, उन्हें गांव में भेजकर, उनकी सेवाएं ली जा सकें।
मैं इन्हीं शब्दों के साथ इस विधेयक का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
(इति) १६२४ बजे डॉ. सत्यनारायण जटिया (उज्जैन) : माननीय सभापति जी, निश्चित रूप से श्री सुर्वतम सुधाकर रेड्डी जी ने संविधान में यह संशोधन लाकर संविधान के अनुच्छेद ४७ में संवर्धन करने के लिए प्रस्ताव दिया है। देश की आजादी के बाद स्वास्थ्य के प्रति जो सजगता का भाव है, उसका अभाव रहा होगा, ऐसा कहना ठीक नहीं है। लेकिन जिस गति से इसका विस्तार होना चाहिए, स्वास्थ्य के बारे में जो संरक्षा और सुरक्षा के उपाय किए जाने चाहिए, जिसे हेल्थ कांशस कहते हैं, ऐसा करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में हम सफल नहीं हुए। आज ऐसा लगता है कि "" बंदी जीवन के बंधन बदले कारागार वही है, बदल गया कुछ लोगों का जीवन, आंसू पीने वालों का परिवार वही है। "
(t/1625/am-kkd) गांवों में शिक्षा और चकित्सा की सुविधा नहीं है, अर्थात गांवों को विकास करने के जो अवसर और आयाम मिलने चाहिए, उसके लिए जितने प्रयास किए जाने चाहिए थे वे हो नहीं पाए हैं। अभी भी पानी की शुद्धता के बारे में कोई कह नहीं सकता कि उसे शुद्ध पानी मिलता है। नदियों के किनारे गांव बसते हैं। अगर नदियों का पानी शुद्ध नहीं है तो उसके शुद्धिकरण के संयंत्र लगने चाहिए। इस पर अतरिक्त खर्च होता है। वहां के स्थानीय निकाय इस दिशा में प्रयास नहीं करते हैं। उनके पास पीने के पानी को शुद्ध करने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। पहली बार शुद्ध वायु और पानी देने की शुरूआत हुई थी। गांवों में शुद्ध वायु मिलना सम्भव है लेकिन वहां शुद्ध पानी का अभाव है। पहली बात यह है कि पहले शुद्ध पानी का प्रबन्ध करना चाहिए। शुद्ध पानी उपलब्ध हो जाए तो बहुत सारी बीमारियों से बचा जा सकता है। पानी को शुद्ध और विकसित करने के लिए कोई बता सकता है कि पानी को शुद्ध करने के लिए क्या किया जा सकता है? पानी को शुद्ध करने के लिए कोई साधन नहीं हैं। कई जगह पानी को शुद्ध करने के उपाय किए गए लेकिन पानी इतना गहरा चला गया है कि पानी मिलता नहीं है चाहे राजस्थान हो, मध्य प्रदेश हो या दूसरा कोई स्थान हो। पानी का लैवल नीचे जा रहा है। पानी के बाद जरूरी चीज शुद्ध वायु और शुद्ध परिवेश है।
आज अस्पताल गांवों तक पहुंच नहीं रहे हैं। गांवों की पहुंच अस्पतालों तक हो जाए, ऐसा कोई प्रबन्ध होना चाहिए। हम जैसे दूर संचार के क्षेत्र में आगे बढ़े हैं क्या इस क्षेत्र में ऐसा करना संभव नहीं है? जो लोग मुश्किलों में आ जाते हैं, हम उनको मुश्किलों से निकाल नहीं पाते हैं। आज भी ऐसे गांव हैं, जहां रास्ते न बनने से लोगों को बहुत मुश्किल होती है। गांवों में नदियों और नालों की वजह से वहां के लोग अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच नहीं पाते हैं। यह एक विषय नहीं है। इसके साथ संबद्ध कई विषय हैं। इनके साथ देश का सवार्ंगीण विकास जुड़ा है। अगर हम मनुष्य के बारे में विचार करें तो सबसे जरूरी चीज शरीर ही है। पहला सुख निरोगी का है। उसके बाद दूसरी चीजें आती हैं। शरीर निरोग कैसे रहे? मंद बुद्धि और आत्मा, क्या ऐसा मनुष्य के बारे में माना जाए? अच्छे और स्वस्थ शरीर में अच्छे विचार आते हैं। अच्छे विचारों को साकार करने के लिए अच्छे समाज की जरूरत होती है। अच्छे स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र बनता है। हम ऐसी कोई व्यवस्था करेंगे तो देश का विकास होगा। हम कहते हैं कि वहां कोई जाता नहीं है लेकिन क्या वहां जाने लायक कोई रास्ता है?
हमने प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की। सरकार चाहेगी कि और गांवों तक पहुंच बने। जब तक गांवों तक पहुंच नहीं बनेगी, तब तक यह बात बनने वाली नहीं है। गांवों तक पहुंच बनेगी तो गांवों के लोग शहर तक भी आ जाएंगे। जन स्वास्थ्य रक्षक की बात कही जाती है। हमने इसकी अस्थायी व्यवस्था की है - चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में हो या पंचायत के क्षेत्र में हो। सामान्य आदमी को अगर ज्वर आ रहा है या कहीं दर्द हो रहा है, इसके निवारण के लिए सामान्य औषधि होती है लेकिन वे औषधियां मंहगी होती जा रहा हैं। एक जमाने में वे बहुत सस्ती होती थीं। जो औषधियां आम आदमी आम बीमारियों के लिए यूज करते हैं, उनके दामों को कम रखना चाहिए और वे सब जगह सुलभ हो जाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
सभापति महोदय, आप स्वंय एक डॉक्टर हैं। आपको चकित्सा के कारण जो प्रसद्धि मिली है, वह सब को मालूम है। सामान्य लोगों की मांग के अनुसार वे दवाइयां उन्हें उपलब्ध हो जाएं तो अच्छा होगा। यह अलग बात है कि जो डॉक्टर विशेषज्ञ नहीं हैं, वे गांवों में इस प्रकार का उपचार कर देते हैं कि कई केस बिगड़ जाते हैं जिससे बहुत मुश्किल होती है। यह बहुत बड़ी बात है जिसे पूरा किया जाना चाहिए। संविधान के संशोधन के बारे में कहा गया है कि the State shall set up one primary health centre in every village with all medical facilities. इसमें मूल बात कह दी गई है। आर्टिकल ४७ में कहा गया है कि duty of the State to raise the level of nutrition and the standard of living and to improve public health. तीन बातें कही गई हैं - एक बात कही गई कि न्यूटि्रशन मिलना चाहिए। पौष्टिक आहार खाने के लिए कितनी कैलोरीज चाहिए, इसका अन्दाज शहरों के लोगों को भी नहीं हो रहा है।
(u/1630/skb-vp ) तो उसे न्यूट्रीशन किस प्रकार उपलब्ध होना चाहिये, उसे क्या खाना है, उसे क्या पीना है, उसके लिये यह सब हो सकेगा। इस प्रकार के प्रचार की आवश्यकता है। दूसरा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग के लैवल के लिये मुश्किल है। वह कहां रहता है- ऐसे लोग बस्ती में रहते हैं जहां साफ-सुथरी जगह नहीं है। उसे स्टैंडर्ड मेनटेन करने के लिये ठीक खाना होगा, उसके लिये इन्दिरा आवास लगा हुआ है लेकिन गरीब लोगों के लिये ऐसी जगह होती है जहां किसी का क्लेम नहीं होता है, वह जगह पूर्ण रुप से असुविधाजनक होती है। वहां निश्चित रूप से अस्वास्थ्यकर वातावरण होता है। गरीब लोगों के लिये ठीक ढंग से स्वास्थ्य सुविधायें होनी चाहिये लेकिन प्रामाणिक रूप से उसके लिये रोटी, कपड़ा और मकान मिल जायें जिससे उसका गुज़ारा हो सके। स्वस्थ वातावरण में उसका स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग आदि जरूरी चीज़ें हैं। लेकिन वह कहां रहता है, क्या खाता है और क्या कमाता है, इन सब चीजों के लिए एक लम्बा समय लगने वाला है। जन सामान्य के लिये स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध करा देना, समाज में एक व्यक्ति के लिये कुछ न कुछ उपलब्ध करा दें जिससे उसका स्वास्थ्य ठीक ढंग से रह सके। बहुत सी बीमारियों के उपचार करना जिसमें सरकार द्वारा उसे मदद मिलती है लेकिन उसे प्राप्त करने में उसे कितनी मुश्किल होती है। यदि हम स्वास्थ्य के लिये सहायता हेतु कुछ फंड्स मांगने जाते हैं तो उसके लिये चीफ मनिस्टर सहायता फंड, प्राइम मनिस्टर सहायता फंड बने हुये हैं लेकिन उन से उसे कितनी मदद मिलती है। चाहे कितनी भी गम्भीर बीमारी हो और उसपर उसका एक लाख रुपया खर्च होने वाला हो, उसे केवल २५ हजार रुपये से ज्यादा नहीं मिल पाता है। इस छोटी सी राशि से कुछ होने वाला नहीं है। यदि उसे मैडिकल सहायता देनी ही है तो मैडिकल बिल पूरा का पूरा दिया जाना चाहिये। मोटे तौर पर एक आम आदमी, जो हम तय कर रहे हैं, निश्चित रूप से जब हमने बाबा साहेब अम्बेडकर स्वास्थ्य योजना शुरु की थी तो उसकी जानकारी संसद सदस्यों तक पहुंचाने का काम किया है लेकिन यह लोगों तक पहुंच जाये और उसका लाभ उठाने के लिये जो कुछ करने की जरूरत हो, करना चाहिये। गरीब और अनुसूचित जाति के लोगों और कमजोर वर्गों के लोगों के स्वास्थ्य के बारे में हमें रियायत देनी होगी। इसके लिये हम लोगों को बेसिक हैल्थ सैंटर्स स्थापित करने चाहिये जिससे आम पब्लिक को मैडिकल सहायता उपलब्ध हो सके। इसे मनिमम तो करना ही चाहिये। इन सब के लिये उसे १००० करोड़ रुपये की जरूरत होने वाली है। मेरा प्रश्न है कि यह १००० करोड़ रुपया कहां से आयेगा? इसके लिये सरकार क्या उपाय करने वाली है? इसके लिये राज्य सरकारों से कहा जाना चाहिये कि क्या वह अनुदान देने वाली हैं जो ८० प्रतिशत और २० प्रतिशत के अनुपात में होगा। राज्य सरकारें मोबाइल अस्पताल चलाये। इसके चलने की स्थिति में सुधार होना चाहिये। गांव में रहने के लिये किसी प्रकार का मकान नहीं है, परिवेश नहीं है। उसके बच्चे पढ़ना चाहें तो सुविधा नहीं है। अगर डाक्टर है तो वह भी अपने बच्चों को डाक्टर बनाना चाहेगा तो उसके लिये सुविधा नहीं है। अगर मोटे तौर पर इन सारी परिस्थितियों पर सवार्ंगीण विचार करके कोई योजना बनायी जाये तो हम बना सकते हैं। अगर टुकड़े-टुकड़े में हम लोग करेंगे तो उस लक्ष्य को प्राप्त करने में मुश्किल होगी। ऐसे पिछड़े और दुर्गम क्षेत्र हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधायें पहुंचाने का काम करना चाहिये। ऐसे क्षेत्र इन सुविधाओं से वंचित हैं, और लोग मजबूरी में रह रहे हैं। गन्दी बस्ती कोई नहीं होती, लेकिन जो रह रहे हैं, उनकी मजबूरी है। यह हर शहर में मिलती है। आज देखिये दिल्ली में भी कई ऐसी बस्तियां हैं। मैट्रोपैलिटन सिटीज़ में लोग रोजगार के लिये आ रहे हैं, इसलिये यह संख्या बढ़ती जा रही है। उन्हें सिर छुपाने के लिये जगह नहीं मिलती। इसलिये इन लोगों के बारे में सोचने की जरूरत है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिये हम चाहेंगे कि प्रारम्भ से लेकर अंत तक अर्थात् बच्ची के विकास के लिये मां का विकसित होना जरूरी है। एक अच्छी मां एक अच्छी बच्ची को जन्म दे सकती है, एक अच्छी महिला अच्छे शिक्षण के बारे में सजग रह सकती है। वहां से शुरुआत करके कि कहीं बच्ची को कोई बीमारी तो नहीं, पोलियो तो नहीं,. आज कल जो नाना प्रकार की बीमारियां आ रही हैं, उससे निदान का क्या उपाय हो सकता है, उसके लिये एक अभियान चलाना चाहिये।
(w1/1635/bks-rk) क्योंकि जो आबादी हमें मिल गई है, यह हमारी एक बड़ी शक्ति है और संयोग की बात यह है कि आज हम ४७वें संविधान संशोधन की बात कर रहे हैं, हमारा जो संविधान बना है, निश्चित रूप से कल २६ नवम्बर, १९४९ को इसके आत्मार्पित होने का काम हुआ है और उसमें कहा गया है -
हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा इसके समस्त नागरिकों को, यानी हम किसी भी नागरिक को नहीं छोड़ेंगे, प्रत्येक नागरिक सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए द्ृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख २६ नवम्बर, १९४९ ई. (मति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
अब इसमें जो कहा गया है कि हम इस संविधान को अंगीकृत, अधनियमित और आत्मार्पित करते हैं। हम स्वयं इस संविधान को स्वीकार करते हैं। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार से कोई डिस्क्रिमिनेशन, कोई विभेद किसी के साथ नहीं होगा। इसलिए किसी के साथ कोई विभेद न हो, उसके लिए सबसे बड़ी जरूरत है कि मनुष्य को उसके शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, स्वस्थ उपाय करने के लिए जो-जो भी सुविधाएं हम उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं, सर्वोच्च प्राथमिकता देकर उन्हें उपलब्ध कराने के उपाय करें तो बहुत अच्छा होगा। इसलिए आज इस अवसर पर मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि श्री रेड्डी जी जो प्रस्ताव सदन में लाये हैं, उसमें किस तरह से दुर्गम क्षेत्रों और ऐसे क्षेत्रों में जहां इंसानी जिंदगी जीना बड़ा मुश्किल हो रहा है, वहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
सभापति महोदय, अभी मध्य प्रदेश राज्य में हमने दीनदयाल चकित्सा योजना की शुरूआत की है। उसमें अनुसूचित जाति और गरीब लोगों के लिए चकित्सा की सुविधा देने का काम शुरू किया गया है। ऐसी अन्यान्य योजनाओं के माध्यम से हमें लोगों को सहायता पहुंचाने का काम करना चाहिए। इसलिए आज इस अवसर पर मैं आपके प्रति धन्यवाद देना चाहूंगा और इस उम्मीद के साथ यह कहते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा -
सर्वे भवन्तु सुखिन्, सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद दुख भाग्भवेत।
सभी सुखी हों, सभी निरोग, कोई न पावे दुख शोक। इस विश्वास के साथ मैं कहना चाहता हूं कि सरकार इसमें आगे आकर जिन लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंची है, उन तक ये सुविधाएं पहुंचाई जाएं। जो लोग अपने सामान्य अधिकारों के बारे में नही जानते हैं, यदि उन लोगों तक इस सहायता को पहुंचाने का काम करेंगे तो जरूर उन लोगों का कल्याण होगा। इसलिए जो प्रस्ताव सदन में आया है मैं उसका समर्थन करता हूं। धन्यवाद।
(इति) (x/1640/hcb/rc) SHRI A.K.S. VIJAYAN (NAGAPATTINAM): *Hon. Chairman, at the outset, I wish to state that food, clothing and shelter are basic needs of the people. With all these, primary health care and medical facilities have also become essential things in the modern era. Now, I have got an opportunity to speak on this Constitution Amendment Bill which emphasises the need for proper medicare, especially in rural areas. I thank the Chair for giving me an opportunity to speak on behalf of Dravida Munnetra Kazhagam.
We have established a Republic after winning Independence. We the people have become our own rulers. We have evolved a Constitution and have given that unto ourselves. The Constitution spells out clearly the duties of both the Government and the governed, that is, the citizens. In Article 47, in the Directive Principles of the State Policy, it has been stated that the State shall endeavour to provide public health facilities to all. The same Constitution while demarcating responsibilities states that health care comes in the State List. Though it has been entrusted with the State Governments, many of the State Governments have miserably failed on this score. That is one reason why our esteemed colleague Sri S. Sudhakar Reddy has moved this Constitution Amendment Bill to insert a new Clause 47A in the Constitution.
It is seen in many of the villages that doctors do not reside in villages. In many other villages, we do not find primary health centres. In certain other villages, even if doctors and health centres are there, adequate medicine and staff are not available. It is deplorable that the public health system has not developed in commensurate with the growing population even after almost six decades of Independence. This has led to a sporadic rise in number of hospitals run by commercial-minded people. The squeeze the public. The poor are driven to their * Original in Tamil wit's end as they cannot pay exorbitant fees. They go to quacks and patronise them at the cost of their precious lives. . This is a social problem. We must put an end to it. The poor both in the rural areas and the urban centres must get adequate health facilities. The Constitution Amendment Bill we do consider now stresses on the need to take health care facilities to all the people. The Bill spells out that every village must be provided with primary health care facility with adequate staff and medicine with properly trained doctors. The Bill seeks to stress that the Governments of the day must take upon themselves as their fundamental duty. Shri Sudhakar Reddy's Bill lay emphasise on this prevalent need.
The Union Government evolves several plans and schemes. It has vision. It has a mind and heart but not adequate funds to meet the goal. At the same time, we find several State Governments are quite unmindful of this duty. In many States, we find the vacant posts in the health sector are left unfilled for decades. Primary health centres in the rural areas are inadequate. Trained doctors, trained nurses and even essential medicines are not there. Important vaccines are not available most of the time. Rabbis vaccine has become a rarity now. In Tamil Nadu, we witness this pathetic situation. Hence, Tamil Nadu is driven to the list of backward States in this area of performance.
My constituency was hit hard by Tsunami. While rebuilding the villages, primary health care centres must be established thereby strengthening the health care system there. National Health Policy, 2002 states that adequate medical facilities must be provided to women, especially when they are in the family way. Pre-natal and post-natal care is necessary. During pregnancy, periodical medical check-up is necessary because healthy citizens make the healthy nation. When our leader Dr. Kalaignar was in Government, through his Government, he extended needed medical relief and also financial help National Health Policy seeks to evolve ways and means to ensure proper training, medicare and medicines to pregnant women to build a healthy nation. People from the poorest of the poor families and downtrodden sections of the society must get health facilities and it is a challenge before us.
During the Tenth Five Year Plan period the fund allocation is a mere Rs.23,096 crores. Of this, maintenance of hospitals and health centres will get Rs.12,069 crores. When we have a look at GDP and the percentage distribution, the allocation to the Health Ministry is negligible. Dr. Anbumani Ramadoss, our Health Minister hailing from Tamil Nadu can strengthen the health care system provided his hands are strengthened with additional fund allocation. Thanking the Chair and the esteemed colleague, Shri Sudhakar Reddy who has moved this Bill, let me conclude.
With these words, let me conclude my speech.
(ends) १६४३ बजे श्री विजय कृष्ण (बाढ़) : सभापति महोदय, मैं माननीय सदस्य श्री सुधाकर रेड्डी का आभार प्रकट करता हूं कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक उन्होंने सदन में प्रस्तुत किया। आज़ादी के इतने वर्षों बाद इस विधेयक की आवश्यकता पड़ी है। यह बात सही है कि हमारे देश में आज़ादी के बाद कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन केन्द्र और राज्यों के स्तर पर जो प्रगति और जागरूकता शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आनी चाहिए थी, वह नहीं आ पाई, चाहे किसी का राज रहा हो। आज आज़ादी के इतने वर्षों बाद हम इस देश में बहस कर रहे हैं कि प्रत्येक गाँव में एक अस्पताल सुसज्जित हो। इससे शर्मनाक बात कोई दूसरी नहीं हो सकती। जो लोग आज सामाजिक और राजनीतिक जीवन में हैं और जो नीतियां बनाने का काम करते हैं, व्यवस्थापिका सभाओं में रहते हैं, उनके लिए यह बड़ी भारी चुनौती है कि वर्षों बाद आज हम इस विषय पर बहस कर रहे हैं। सम्यक विकास की बात दीक्षित जी तथा कई आदरणीय साथियों ने की है कि इनफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सड़क, पानी और बिजली आदि की व्यवस्था भी ठीक होनी चाहिए। उसी से जुड़ा हुआ स्वास्थ्य है।
(y1/1645/ind-snb) किसी गांव में सड़क नहीं है, पीने का पानी शुद्ध नहीं है, बिजली भी नहीं है। अगर यहां स्वास्थ्य का काम करना भी चाहेंगे तो पूरे संसाधन मौजूद नहीं हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान के इलाकों में जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं और इसके नीचे एडिशनल स्वास्थ्य केंद्र तथा स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें सप्ताह में दो दिन भी डाक्टर्स के जाने की व्यवस्था नहीं है। सिर्फ प्रशक्षित दाई और कम्पाउंडर वहां रहते हैं। किसी-किसी जगह पर सप्ताह में तीन दिन डाक्टर जाते हैं, लेकिन जरूरी सामान के अभाव में वे भी सही ढंग से काम नहीं कर पाते हैं। ब्लाक स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। पंचायत स्तर पर भी कुछ नहीं किया गया है। कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई है, लेकिन गांवों में झोलाछाप डाक्टर अभी भी बैठे हैं। स्वास्थ्य केंद्र गांवों में भी होने चाहिए, इस बारे में हम बात कर रहे हैं। आज हम अपने बच्चों को आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और डाक्टर बनाना चाहते हैं। आज गांवों में डाक्टर्स के रहने के लिए भवन नहीं है। कहीं जाने के लिए रास्ता नहीं है और कई गांवों में रहने का वातावरण ठीक नहीं है। कोई डाक्टर वहां नहीं रहना चाहेगा। मैं उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के हजारों गांवों के बारे में जानता हूं और बिहार के बारे में तो मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। एक डाक्टर ने कहा कि मेरा ज्यादा से ज्यादा क्या होगा। आप मुझे सस्पेंड ही तो करा सकते हैं। मैं बाद में फिर से बहाल हो जाऊंगा। नीचे की व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिए हम जितना खर्च कर रहे हैं, उसका सही उपयोग होना चाहिए। बुनियादी तौर पर यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है कि बीहड़ इलाकों में जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों के अंदर पहुंचना मुश्किल है, इन क्षेत्रों में यह काम किसी तरह से करना चाहिए। वहां डाक्टरों के रहने की व्यवस्था, वहां सड़कों की सुविधा है या नहीं और सामयिक विकास की दिशा में ज्यादा ध्यान देना होगा। इन बीहड़ इलाकों में गर्भवती महिलाएं प्रसव वेदना से छटपटाती रहती हैं, रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं लेकिन रास्ता सही न होने के कारण तथा दूसरी सुविधाएं समय पर न मिलने के कारण ब्लाक के स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाती हैं। इन लोगों को सामान्य सुविधाएं तक नहीं मिल पाती हैं। सामान्य बीमारी के समय और प्राकृतिक हादसे के समय ये केंद्र ज्यादा मजबूती से काम कर सकते हैं। इन सेवाओं से स्वास्थ्य केंद्रों को ज्यादा से ज्यादा सुसज्जित करना चाहिए।
बाढ़ के समय डायरिया और कोलेरा बड़े पैमाने पर फैलता है। पीने के खराब पानी के बारे में अभी हमारे साथी चर्चा कर रहे थे कि १५ से २० किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। आने-जाने की कोई सवारी नहीं होती और कहीं-कहीं तो सड़कें भी नहीं हैं। कहीं नाव से भी जाना पड़ता है। डायरिया, कोलेरा तथा प्रसव से छटपटाती महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए समुचित प्रबंध होना चाहिए। इन बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराने हेतु हमें ध्यान देना चाहिए। आपने जो निचली इकाई बना रखी है, जो उप-स्वास्थ्य केंद्र हैं, वहां पर कुछ नहीं है। वहां सिर्फ एक प्रशक्षित दाई और एक कम्पाउंडर होता है। दवाई की कोई व्यवस्था वहां नहीं है।
(z/1650/rpm/ru) महोदय, वहां कुछ नहीं है, न दवा है और स्वास्थ्य के नाम पर न कोई और सुविधा। स्वास्थ्य मंत्री जी बहुत उत्साह के साथ काम कर रहे हैं और कई क्षेत्रों में अच्छा काम हुआ है, जैसे-कुष्ठ रोग की समाप्ति, एड्स के प्रति जागरुकता तथा काला-अजार से होने वाली मौतों में कमी आदि। मैं अच्छे कामों की सराहना करता हूं, लेकिन एड्स के प्रति जागरुकता के नाम पर वॉलंट्री आर्गेनाइजेशन बहुत पैसा लूट रही हैं। स्वास्थ्य विभाग, एड्स जागरुकता के नाम पर पैसों की लूट का अड्डा बना हुआ है। कोई भी वालंट्री आर्गेनाइजेशन आए, दख्र्वास्त दे, उसे धन आबंटित कर दिया जाता है और वह पैसा लूटकर चली जाती है। इसलिए स्वास्थ्य मंत्री जी को इस विषय में सावधानी भी बरतनी चाहिए। बहुत बड़ी संख्या में वॉलंट्री आर्गेनाइजेशन ने स्वास्थ्य के नाम पर, स्वास्थ्य विभाग को लूट का अड्डा बना रखा है। मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि यदि इतना पैसा ग्रामीण क्षेत्रों में साधारण ऑपरेशन की व्यवस्था करने पर, वहां डॉक्टर मौजूद रहें, दवाएं उपलब्ध रहें, इस पर व्यय कर दें और ये सब काम कर दिए जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्र के लिए चकित्सा के मामले में बहुत बड़ा काम होगा।
महोदय, हमें संविधान ने जीने का अधिकार दिया है। इस सरकार को नागरिकों से जीने का अधिकार छीनने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन आप गांवों में चकित्सा की सुविधा उपलब्ध न करा के, देश के लोगों को, जीने के अधिकार से वंचित कर रहे हैं। आप देश की जनता को जीने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते। चकित्सा की व्यवस्था करना आपका दायित्व है। इसमें देश के लोगों का कोई कसूर नहीं है। इसलिए आपको इन सब बातों पर ध्यान देना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में, नीचे की इकाइयों में चकित्सा की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए।
महोदय, देश में आयुर्वेद एवं होम्योपैथ पद्धति से चकित्सा की नीचे की इकाइयों में कोई व्यवस्था नहीं है। अभी शैलेन्द्र सिंह जी ने स्वास्थ्य रक्षक सेवकों की बात कही। आयुर्वेद एवं होम्योपैथ की व्यवस्था बड़े-बड़े अस्पतालों में तो ठीक है। बड़े अस्पतालों के स्तर पर दोनों की अलग-अलग चकित्सा की व्यवस्था है, लेकिन यह सुविधा केवल विशेषज्ञ स्तर पर है। ऐसी व्यवस्था नीचे की इकाइयों में भी हो, जहां मरीज आयुर्वेद एवं होम्योपैथ पद्धति से चकित्सा करा सकें। हम अभी तक छोटी यूनिटों में इन दोनों पद्धतियों से चकित्सा की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। इसलिए इस दिशा में काम करना है और हमें देखना है कि हम छोटी यूनिटों में इन पद्धतियों से चकित्सा की कितनी व्यवस्था कर सकते हैं। ये सब बातें बहुत जरूरी हैं और हमें इन पर ध्यान देना चाहिए।
महोदय, आज आदमी अपनी औसत उम्र भी नहीं जी रहा है। चकित्सा के अभाव में लोग रोज कुत्ते-बिल्ली की तरह मर रहे हैं। देश के नागरिकों के लिए औसत उम्र जीने के लिए जो स्थितियां होनी चाहिए, वे नहीं हैं, जबकि इसके लिए सरकार का सांवैधानिक दायित्व है। रोजाना लोग मर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में इन मरने वाले आदमियों को जिंदा रखने हेतु क्या उपाय है ? आजादी के इतने वर्षों के बाद, देश में इतने वर्षों में चाहे किसी भी पार्टी की सरकारें रही हों, आज तक हम आदमी को स्वस्थ जीवन का अधिकार नहीं दे सके हैं। हम केवल थीसिस और एंटी थीसिस की बात करते हैं। हम गांधी जी के अनुसार अंतिम व्यक्ति को जो सुविधा देना चाहते हैं, वह आज तक नहीं दे सके हैं। आज गांधी जी के कहे अनुसार समाज के अंतिम व्यक्ति को हम सुख-सुविधाएं नहीं पहुंचा सके हैं। आज समाज का अंतिम व्यक्ति कराह रहा है। मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे स्वास्थ्य केन्द्र, एडीशनल स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्रों को दुरुस्त किया जाना चाहिए ताकि रोज-रोज की कठिनाइयों से लोगों को निजात मिल सके और प्रसव सुविधा के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं न मर सकें।
महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ में अपनी बात समाप्त करता हूं। आपने मुझे समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।
(इति) 1654 hours SHRI T.K. HAMZA (MANJERI): Sir, I am supporting the Amendment Bill moved by my friend regarding insertion of new article 47A of the Constitution.
Article 47 of the Constitution, to a certain extent, guarantees public health to the people of the country. More than 55 years have lapsed since Independence. Yet no improvement is seen in our locality in this regard. Therefore, such an amendment is required to compel the Government to do something as per the Constitution itself for the improvement of the health situation in the country.
The present position of the Government hospitals is very very bad in our country. There is no adequate staff and there are no medicines available at all. Supply of important medicines is lacking. Thus, it is a very good chance for the private agencies to operate in the field. Private hospitals are coming up umpteen in number.
(a2/1655/rbn/sb) But the position is that private hospitals are exploiting the people. Even poor and illiterate people are going to private hospitals, but they are being exploited the most. So, this kind of exploitation by the private hospitals must be stopped by introducing good Government hospitals in our country. When we go to the villages, we see the condition is very pitiable. We cannot even imagine the condition of the people who are living in villages and hill areas. They are suffering the most due to lack of good health care. Comparing to other States the position in Kerala is better to a certain extent. But even in Kerala we are having only one primary health centre at block level, not at village level. Seven or eight villages constitute a block. There is only one primary health centre at the block level. It is quite insufficient to look after the health of the people. So far, the situation has not improved in Kerala. So, my humble submission is that we have to protect the interests of the people by doing something in the health sector.
Hon. Minister in the Budget Session of 2005 stated that the Government has approved the National Rural Health Mission as a Comprehensive Rural Health Care Programme to provide an integrated health care services to the people. But I understand that necessary steps have not been taken to implement the Programme. This Programme must be implemented vigorously without any delay so that people can get good health care services. If this Amendment is accepted, then it is the constitutional duty of the Government to do something in this field. Simply passing a Resolution or simply making an enactment is not sufficient. If the Constitution is amended, then it is mandatory for the Government to do something. So, I request that this Amendment may kindly be accepted. Thank you.
(ends) 1658 hours SHRI BRAHMANANDA PANDA (JAGATSINGHPUR): Mr. Chairman, Sir, I am supporting the Bill moved by hon. Member, Shri S. Sudhakar Reddy. It is said on the floor of this august House that we are fighting for the cause of poor and dalits. But poor people who are residing in rural areas are deprived of getting even minimum health care facilities. I represent the State of Orissa where people who are residing in tribal and interior parts are passing their days in misery. They never get any health care facilities, which is the minimum facility as stated and guaranteed under the Indian Constitution. My humble submission is that it is the State where 47.13 lakh people are living below the poverty line. In the State people are predominantly Scheduled Castes and Scheduled Tribes. In interior parts of Koraput the mortality rate is very high. When children die, the so-called doctors are not able to diagnose the reasons. In most of the areas there is neither primary health centres nor public health centres. In some areas though there are hospitals, there are no doctors to attend to the patients.
(b2/1700/mks-mkg) I was not in this politics. For the first time, I entered into politics because I was a lawyer. On one occasion when I was passing through my Constituency, I found that even pregnant ladies are not being attended to by these doctors. On query, I found that there is a hospital but there is no doctor to attend to pregnant ladies. When we use very sweet words and very nice words to improve the health condition of the poor and the dalit, if those females are really deprived of getting minimum facilities, in such state of affairs can we feel proud that we are dreaming of a prosperous India? Is the guarantee that has been provided under the Indian Constitution really respected in spirit?
In that respect, I would like to humbly submit that this is the highest House of the country where the real grievances of the people are raised and ventilated. After the super-cyclone in my Jagatsinghpur Parliamentary Constituency, I found that the cases of cancer, white patches, cardiac trouble, and malaria were mounting up. There is absolutely no facility to avail the treatment. In interior parts like Erasama, Kakatpur and Balikuda, which are nearby the sea area, in those areas the people have to cover about 50 kilometres to avail the treatment in a hospital. Those areas are really not accessible. In such circumstances, I humbly submit, Sir, that unless mobile health facilities are provided in those areas, it is difficult on the part of those poor people to avail the basic amenities, that is, the health facility. There is a saying in Oriya that "Swasthya is Sampadda". But we find that the minimum basic needs of the people are never attended to.
In this regard, I would like to submit before this hon. House that the poorest of the poor people are neglected. Their minimum comforts are never looked into. I, therefore, humbly submit that adequate funds, adequate training centres, mobile facilities and doctors must be provided in those health centres. Actually, one doctor should be there to attend a patient. Nowadays, there is a slogan that we are all for the poor and the dalit. But I find that only the rich, the rich men, are availing themselves the facilities by going to nursing homes. The doctors are now engaged in private practices. They never attend to the poor patients. Medicines are not available. There is no facility to avail the treatment. Suppose, a patient suffers from diabetes, which is a very costly treatment, he is not able to avail himself the research. He is not able to go to a laboratory to avail the facilities. I had been to a village where I found that a poor man was suffering from diabetes and the local doctor did not attend him. After my intervention when I brought the matter to the notice of the Collector and the local Tehsildar, the doctor attended him and some minimum treatment was given to him as a result of which he recovered.
(c2/1705/brv-mm) So, in this respect, I would like to urge upon the hon. Health Minister that since Orissa is a very backward State and most of the people there live in below the poverty line level, special attention should be given to the health sector. Recently, in the Navrangpur area, it has come out in different newspapers and media saying that the family planning operation was a great failure. Though family planning operation was done twice yet it was not successful. So, if this is happening in a democratic set up of our country when the people are all anxious for a prosperous India, I humbly submit that the dream of a prosperous India can only be fulfilled if minimum facilities are not available to the poor and the dalits. So far as the State of Orissa is concerned, since the death mortality is very high as far as malaria is concerned, it has become a constant threat to the people of the State. I actually do not know what concrete measures the Government of India is taking to overcome such an alarming situation. In such circumstances, I would appeal to the august House and also to the hon. Minister of Health that special attention should be given to the health sector. Unless priority is given, unless the minimum requirement that has been guaranteed under the Indian Constitution is given, I think the real sweetness of our dream will never come true and the benefits will not reach the poor and the dalits.
With these words, I would like to thank you for giving me an opportunity to speak on this subject.
(ends) १७०७ बजे श्री मनोरंजन भक्त (अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह) : सभापति जी, माननीय सदस्य श्री सुधाकर रेड्डी जी ने जो संविधान संशोधन का प्रस्ताव सदन के सामने प्रस्तुत किया है, मैं उसका प्रिंसीपली समर्थन करता हूं। यह कहना कि पूरे देश के अंदर पचास सालों में इस विषय पर कोई काम नहीं हुआ है, मैं इस बात को नहीं मानता हूं। मैं मानता हूं कि बहुत सारे काम हुए हैं और बहुत से काम होने अभी बाकी हैं। जो काम बाकी हैं, उनको हम कैसे पूरा कर सकते हैं उसके लिए हमको सोच-विचार करके काम करना है। संविधान संशोधन करने से यह समस्या हल हो जाएगी, मैं ऐसा नहीं मानता हूं। अभी जितने प्राइमरी हेल्थ सैन्टर्स हैं, वे केन्द्र सरकार की स्कीम्स के अंतर्गत हैं, जिन्हें राज्य सरकार लागू करती है। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और केन्द्र का भी विषय है। अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह के मिशन बनाकर, अलग-अलग कार्यक्रम बनाकर हम उसके निवारण की कोशिश करते हैं। यदि इस द्ृष्टि से देखें, तो नेशनल हेल्थ पालिसी को रिव्यू करने की आवश्यकता है। जितनी जल्दी यह रिव्यू हो सके उतना ही अच्छा होगा। इसमें हम "हेल्थ फार आल" को किस तरह से कार्यान्वित कर सकते हैं, इस बात को देखते हुए हमें विचार करना होगा। हमारे मंत्री जी योग्य हैं और काम भी करना चाहते हैं। इन्हें सब कुछ मालूम है।
१७०९ बजे(श्री गरिधर गमांग पीठासीन हुए) मैं इनकी प्रशंसा करता हूं। मैं उनको यह बताना चाहता हूं आज देश में प्राइमरी हेल्थ सैन्टर्स की क्या हालत है? वहां एक डॉक्टर और दो नर्स हैं, जबकि वहां कम से कम आठ नर्स होनी चाहिए। वहां स्टाफ पर्याप्त मात्रा में नहीं है। एक सैन्टर पर कम से कम तीन-चार सौ मरीज आता है, लेकिन वहां एक ही डॉक्टर होता है। इस तरह से जो कमी है, उस कमी को दूर करने की आवश्यकता है। किन-किन चीजों की कमी है, उनको देखने की आवश्यकता है। यदि सभी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना चाहते हैं तो हमें इस कमी को दूर करना होगा, नहीं तो यह समस्या दूर नहीं हो सकती है।
(d2/1710/nsh-akb) दूसरी बात, एक शिकायत है कि दवाइयां नहीं हैं। हम केन्द्र शासित इलाके से आते हैं। हमारे यहां ज्यादा शिकायत नहीं है लेकिन बाकी प्रदेशों में बहुत ज्यादा शिकायत है कि वहां दवाइयां नहीं हैं। हमें भी सीजीएचएस की सुविधा प्राप्त है। ऐसा कहा जाता है कि यहां सस्ती दवाइयां हैं, जो ठीक नहीं हैं, आप खरीद लें तो वे अच्छी हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है, मंत्री जी इसकी जांच करवाकर देखें। यदि इसमें कोई सच्चाई है, तो उसे ठीक किया जाए।
नेशनल इलनेस फण्ड, जो बीपीएल के लोगों के लिए, जिन्हें बड़ी बीमारी होने पर स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए सहायता मिलती है, उसकी रकम इतनी कम है कि उससे कुछ नहीं होता है। मैं कहना चाहता हूं कि अगर आप बिलो पावरटी लाइन के लोगों को सुविधा देना चाहते हैं तो फण्ड एलोकेशन को बढ़ाया जाना चाहिए जिससे आने वाले समय में उनको लाभ हो।
केन्द्र और राज्यों के एक साथ बैठने की जरूरत है क्योकि ऐसा देखा गया है कि आप जो पैसा देते हैं, वह कहीं-कहीं खर्च नहीं हो पाता है। ऐसा सुनने में आता है कि किसी-किसी जगह विकास के काम में पैसा खर्च नहीं होता और वापस आ जाता है। मैंने यह भी सुना है कि इस बारे में जांच करने के लिए एक कैबिनेट कमेटी बनी है। हमें यह भी सोचना चाहिए कि जहां हम तीस करोड़ की आबादी से एक सौ दस करोड़ की आबादी तक पहुंच गए हैं, हमारे साथी ने जनसंख्या पालिसी के संबंध में कहा है, यह बात बिलकुल सही है कि आज इस देश में जितनी जनसंख्या है, उसके जरिए…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN (SHRI GIRIDHAR GAMANG): I have to make an announcement. Hon. Members, the extended time allotted for this Bill is over. Now, there are eight Members to speak on this Bill. If the House agrees, the time may be extended by one hour for this Bill.
SHRI K.S. RAO (ELURU): The time may be extended for this Bill up to 6 o’ clock.
MR. CHAIRMAN: All right.
श्री मनोरंजन भक्त (अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह) : मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि पहला काम कन्सॉलिडेशन का होना चाहिए। जहां काम में डिफेक्ट है, स्टाफ की कमी है, उसे पूरा करने की जरूरत है। कई जगहों पर सब-सैन्टर्स नहीं हैं। अगर उन जगहों पर स्टाफ को थोड़ा स्ट्रेन्दन किया जाए तो इससे भी लाभ होगा। हमारे देश में पैसे वाले लोगों के लिए इलाज की कमी नहीं है, इलाज की कमी गांव में रहने वाले गरीब तबकों और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए है। अगर इस स्थिति को सही करना चाहते हैं तो मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि जितना जल्दी संभव हो, सभी स्वास्थ्य मंत्रियों की एक मीटिंग बुलाएं और नयी हेल्थ पालिसी लाएं। इसमें हम हेल्थ फार आल भी कर सकते हैं।
मैं एक सुझाव देना चाहता हूं कि गरीब तबके के लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी बनायी जाए। अगर हर जगह ५० हजार रूपये तक की हेल्थ इंश्योरेंस रहेगी तो उससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुविधा होगी।
(e2/1715/rjs-rs) हैल्थ ऐश्योरेंस करने से उन्हें लाभ हो सकता है। मैं एक ही बात कहकर समाप्त करूंगा क्योंकि मुझे बहुत अधिक बातें नहीं कहनी हैं। जो दूर-दराज के इलाके हैं, बैकवर्ड इलाके हैं, नार्थ ईस्ट, अंडमान और लक्षद्वीप आदि के इलाके हैं, वहां मेडिकल स्पेशलाइज्ड ट्रीटमैंट का कोई अरेंजमैंट नहीं है। एक-एक आदमी को इलाज के लिए २५-५० हजार रुपये लेकर चेन्नई, हैदराबाद या कोलकाता जाना पड़ता है। यह बहुत मुश्किल की बात है। इन सब दूर-दराज के इलाकों में आपको इलाज के लिए स्पेशल बंदोबस्त करना चाहिए क्योंकि सामाजिक न्याय तभी होगा जब सब इलाकों के लोगों की देखभाल सही ढंग से होगी। मैं इतना कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं। आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
(इति) १७१६ बजे श्री पुन्नू लाल मोहले (बिलासपुर) : सभापति महोदय, प्राथमिक चकित्सा संबंधी बिल, जो रेड्डी जी द्वारा पेश किया गया है, मैं उसका समर्थन करता हूं। पहले जमाने में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय चलता था जिसमें चकित्सा के क्षेत्र में डिप्लोमा डिग्री दी जाती थी। वह कोर्स तीन वर्ष का था लेकिन आज उस कोर्स को बंद कर दिया गया है। मेरा कहना है कि इस कोर्स को पुन: लागू किया जाये क्योंकि ग्रामीण विकास में ऐसे कार्यक्रम नहीं होने से आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डाक्टर वहां नहीं रहते। पहले गांव में वैद्य नाड़ी देखकर लोगों का इलाज करते थे। छोटी-मोटी बीमारियां, जैसे चोट लगना, पेट फूलना या आंख में कुछ पड़ जाना आदि के लिए वे दवाई देते थे तो लोग ठीक हो जाते थे। वहां के लोग सुई नहीं लगाते थे। गांव में आयुर्वेदिक चकित्सा को मान्यता दी जाती थी लेकिन आज वह मान्यता समाप्त हो गयी है। हमारा कहना है कि आयुर्वेदिक चकित्सा को पुन: मान्यता प्रदान करने की आवश्यकता है। आज जो बीआईएमएस या एमबीबीएस डाक्टर्स हैं, वे सुई लगा देते हैं या बोतल चढ़ा देते हैं। इससे कई कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। वहां डाक्टर्स तथा चकित्सा के पर्याप्त उपकरण नहीं रहने से इलाज में कमी होती है। कभी-कभार कम्पाउंडर मरीज को गलत सुई लगा देता है जिससे मरीज सीरियस हो जाता है। इसी तरह गांवों में सीरियस बीमारी के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती।
गांव में प्राथमिक चकित्सा की आवश्यकता क्यों है, इसके उदाहरणस्वरूप मैं बताना चाहूंगा कि गांव में एक व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया लेकिन वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में न कुत्ते के इलाज का इंजेक्शन है और न ही फ्रिज है। वह व्यक्ति भौंकते-भौंकते हुए मर जाता है। इसी तरह किसी को सांप या बिच्छु ने काट लिया तो तात्कालिक इलाज न मिलने से उसका जहर उसके शरीर में फैल जाता है और जहर फैलने से वह आदमी मर जाता है। गांव में मलेरि़या और फाइलेरिया की बीमारी भी होती है। गांव में फाइलेरिया की दवाई भी आवश्यक है। इसी तरह टीबी की बीमारी है। कई बीमारियों के लिए खून पेशाब के जांच की जरूरत है लेकिन उनकी जांच करने के लिए वहां कोई व्यवस्था नहीं है। अगर गांव में पूरी तरह से प्राथमिक उपचार नहीं होगा, तो गांव के लोग क्या करेंगे ? गांव में १०-२० किलोमीटर दूर तर रोड नहीं है। वहां आवागमन की सुविधा नहीं है। ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास साइकिल है। शहरों में लोगों के पास मोटर साइकिल, जीप और कार वगैरह हैं, जिनमें जाकर लोग अपना इलाज कराते हैं लेकिन गांव में लोग ऐसे ही जाते हैं। अगर मरीज ज्यादा बीमार है तो उसे पलंग पर ले जाते हैं। प्रसव के समय महिला को कहीं ले जाने की व्यवस्था नहीं है। उस समय उसे नर्स की आवश्यकता होती है लेकिन वह भी वहां नहीं होती। गांव में दाई द्वारा प्रसव करवाया जाता है परन्तु कभी-कभी दाई के इलाज से महिला के शरीर में गड़बड़ी हो जाती है। इस तरह कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए शासन को उपाय करना चाहिए। प्राथमिक चकित्सा केन्द्र में दवाइयां नगण्य होती हैं। एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ५०-१०० गांव में होता है, जहां १० या १५ हजार रुपये की दवाइयां होती हैं, जो साल भर के लिए होती हैं लेकिन वहां मरीज इतने होते हैं कि वे दवाइयां केवल एक महीने के लिए ही पर्याप्त होती हैं। वे लोग साल भर क्या करें ? वहां जांच के लिए एक्सरे मशीनें नहीं हैं। अगर किसी की किडनी की जांच करनी है तो जांच करने की मशीन नहीं है। इसी तरह किसी आदमी को टीबी है तो उसकी मशीन नहीं है। जब तक गांव में पूरी तरह प्राथमिक उपचार नहीं होगा, लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी तब तक कुछ नहीं होगा। लोगों में बीमारियां बढ़ती ही रहेंगी। गांव में पीने के पानी की व्यवस्था है लेकिन वह पानी साफ नहीं है। गांव में कभी मलेरिया होता है तो कभी हैजे की शिकायत हो जाती है। गांव में तालाब है लेकिन तालाब में डालने के लिए दवाई की आवश्यकता है।
(f2/1720/asa/lh) गांवों में जो नलकूप लगे हुए हैं, उनमें भी समय-समय पर दवाई डालने की आवश्यकता है। गांवों में लोगों को छोटी-मोटी बीमारियां ज्यादा होती हैं जिनसे निपटने के लिए और उपचार के लिए गांव में डॉक्टर्स, नर्स और कम्पाउंडर का होना आवश्यक है। गांवों के अस्पतालों में दवाइयों की मात्रा बढ़ाई जाए और पुरानी चकित्सा पद्धति को लागू किया जाए। बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतर लोग शहरों की ओर जाते हैं लेकिन हमारा निवेदन है कि गांवों में एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टर्स की जरूरत है लेकिन गांवों में ऐसे कोई डॉक्टर्स नहीं हैं। एक गांव से दूसरे गांव के बीच में पांच कि.मी. तक के अन्तराल में आयुर्वेदिक डॉक्टर होना चाहिए तथा छोटी जनसंख्या वाले गांव में दो कि.मी. या एक कि.मी. के अन्तराल पर डॉक्टर का होना बहुत ही आवश्यक है जिससे ग्रामीण लोगों को बीमारियों के उपचार में किसी तरह की असुविधा न हो।
गांव में अधिकतर मेहनतकश लोग हैं, किसान लोग हैं और उन्हें ज्यादातर छोटी-मोटी बीमारियां होती हैं, चाहे वह खराब पानी पीने से हो या गांव में चूंकि ज्यादा अच्छा फल-फूल नहीं मिलता है, वे कई बार कम कीमत पर खराब फल-फूल खरीदकर खा लेते हैं जिससे उनको बीमारियां हो जाती हैं। इसीलिए मेरा निवेदन है कि वहां इस दिशा में उचित प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। गांवों में लोग तम्बाकू इत्यादि खाते रहते हैं जिससे वे कई बार केंसर से ग्रसित हो जाते हैं। इस दिशा में भी गांव में एक शिक्षक की आवश्यकता है जो उनको इस बारे में समझाए। गांवों में पंचायत स्तर पर भी उनको इस बारे में बताया जाना चाहिए।
इसीलिए मेरा निवेदन है कि गांव में छोटी-छोटी बीमारियों को रोकने के लिए प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। इसलिए मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूं और मेरा निवेदन है कि सरकार इस पर ध्यान दे तथा इसके लिए अधिक बजट दे। पिछली बार सरकार ने इस बारे में कहा था। सरकार इसे जल्दी से जल्दी राज्य सरकारों को दे जिससे राज्य सरकार इसे लागू करें। इन्हीं शब्दों के साथ ही मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।
(ड्ढदड्ड) १७२२ ण्द्ृद्वद्ध च्ङ .ख़्. एग़्ङएघ्घ्एग़् (ङछङ): च्त्द्ध, ठ्ठ ध्ड्ढद्ध ण्ठ्ठद्रद्र ण्ठ्ठ ढद्धत्ड्ढदड्ड, च्ण्द्धत् च्द्वद्धठ्ठध्ठ्ठद्धठ्ठ च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्ध ङड्ढड्डड्ड ण्ठ्ठ डद्धद्ृद्वण् ण्त् द्ृदत्द्वत्द्ृद (एड्ढदड्डड्ढद) व्त्थ्थ् ढद्ृद्ध द्रद्धद्ृध्त्ड्डत्द ठ्ठ दड्ढध्र ठ्ठद्धत्हथ्ड्ढ ड ध्रण्त्हण् ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ण्ड्ढठ्ठण् हठ्ठद्धड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठड्ढद हठ्ठद्धड्ढ द्ृढ. ड्ढ ध्रठ्ठद द्ृदड्ढ ठ्ठड्डड्ढद्दद्वठ्ठड्ढथ् ढठ्ठहत्थ्त्ठ्ठड्ढड्ड ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हड्ढदद्धड्ढ ढद्ृद्ध ड्ढध्ड्ढद्ध ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ त्द द्ृद्वद्ध हद्ृद्वदद्ध.
च्त्द्ध, ण्ड्ढ त्द्रद्ृद्धठ्ठदहड्ढ द्ृढ ण्त् ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्त्ड्ढड्ड त्ढ ध्रड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्थ् दद्ृध्र ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ध्रड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृड्डठ्ठ ठ्ठढड्ढद्ध ५८ ड्ढठ्ठद्ध द्ृढ द्ृद्वद्ध ङड्ढद्रद्वडथ्त्ह. ग़्द्ृध्र, द्ृद्धड्ढ ण्ठ्ठद ९४ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड ६८.५ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढ थ्द्ृहठ्ठड्ढड्ड त्द ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ. च्द्ृ, ध्रण्ठ्ठ ठ्ठ ठ्ठड्ड द्रथ्त्ण् त् त्. ग़्त्दड्ढ-ढद्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड ६८.५ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढ थ्द्ृहठ्ठड्ढड्ड त्द ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ. ण्ठ्ठ त् द्ृ ठ्ठ, २७.८ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ थ्त्ध्त्द त्द ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ ड्ढ ण्त् ढठ्ठहत्थ्त्. एद्धद्ृद्वदड्ड ६३ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ थ्त्ध्त्द त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ ठ्ठद्धड्ढ ड्ढत्द ध्ड्ढद्ध द्रठ्ठथ्द्ध ड्ढद्धध्त्हड्ढ द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ. च्द्ृ, ण्त् त् ण्ड्ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ड्ढड्ढद्र त्द त्दड्ड ध्रण्ड्ढद ध्रड्ढ ड्डत्हद्व ण्त् द्ृदत्द्वत्द्ृद (एड्ढदड्डड्ढद) व्त्थ्थ्. च्द्ृ, ध्रड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्थ् ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ड्ढद्धध्ड्ढ द्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ त्द ण्ड्ढ ठ्ठददड्ढद्ध त्द ध्रण्त्हण् त् ध्रठ्ठ द्रद्ृत्दड्ढड्ड द्ृद्व त्द ण्ड्ढ घ्द्धड्ढठ्ठडथ्ड्ढ द्ृढ द्ृद्वद्ध द्ृदत्द्वत्द्ृद, ध्रण्त्हण् ठ्ठ ण्ठ्ठ ड्ढद्दद्वठ्ठथ्त् द्ृढ द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत्त्ड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढड्ड त्द द्धड्ढथ्ठ्ठत्द्ृद द्ृ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्. ज़्ण्ठ्ठ ठ्ठद्धड्ढ ण्ड्ढ त्दड्ड द्ृढ द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत्त्ड्ढ ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्रद्धद्ृध्त्ड्डत्द? च्द्ृ, ध्रड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्द्ृद्वथ्ड्ड ठ्ठड्ढ त् ध्ड्ढद्ध ड्ढद्धत्द्ृद्वथ् ण्ठ्ठ ण्त् त्द्वठ्ठत्द्ृद ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्धड्ढध्ड्ढद्धड्ढड्ड. ड्डद्ृड्ढ दद्ृ ड्ढठ्ठद ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड थ्ड्ढठ्ठड्ड ठ्ठ त्ड्ढद्धठ्ठडथ्ड्ढ थ्त्ढड्ढ त्द ड्ढद्ध द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्. ड्डद्ृ दद्ृ ड्ढठ्ठद ण्ठ्ठ. ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढड्ड ध्रत्ण् द्वढढत्हत्ड्ढद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ डद्व द्वढढत्हत्ड्ढद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ठ्ठथ्द्ृ डड्ढ ठ्ठद्वद्धड्ढड्ड द्ृ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ. ण्ठ्ठ त् ण्ड्ढ त्दड्ढदत्द्ृद द्ृढ ण्त् व्त्थ्थ्.
ण्ड्ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद द्ृड्डठ्ठ त् ण्ठ्ठ ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ण्ठ्ठद्धड्डथ् ठ्ठड्ढद हठ्ठद्धड्ढ द्ृढ. ण्ड्ढत्द्ध त्द्वठ्ठत्द्ृद त् द्ृ त्ड्ढद्धठ्ठडथ्ड्ढ. घ्द्धद्ृडठ्ठडथ् त् ध्रत्थ्थ् डड्ढ डड्ढड्ढद्ध द्ृ ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्ड्ढ थ्त्ध्ड्ढ त्द ठ्ठ त्दड्ड द्ृढ ठ्ठ ण्ड्ढथ्थ् हद्धड्ढठ्ठड्ढड्ड ड द्व.
(२/१७२५/द-द्धद्र) च्द्ृ, ण्त् त्द्वठ्ठत्द्ृद ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्रद्व ठ्ठद ड्ढदड्ड द्ृ. ण्त् ध्रत्थ्थ् त्द्रद्धद्ृध्ड्ढ त्ढ ध्रड्ढ ठ्ठड्ढ ड्ढठ्ठद्वद्धड्ढ थ्त्ड्ढ ण्ड्ढ द्रद्धद्ृद्रद्ृठ्ठथ् द्ृढ ण्ड्ढ व्त्थ्थ् द्वड्ढ. ण्ड्ढद, द्रद्धद्ृडठ्ठडथ् ढद्धद्ृ ण्ड्ढ ग्त्दत्ड्ढद्ध त्ड्डड्ढ ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ठ्ठ ध्रण्ड्ढद्धड्ढ त् ण्ड्ढ द्ृदड्ढ. ण्ठ्ठ त् ण्ड्ढ द्वद्वठ्ठथ् द्दद्वड्ढत्द्ृद ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ध्रत्थ्थ् ठ्ठ. व्द्व ण्ड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्त् द्ृड्डठ्ठ त् ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्रड्ढदड्डत्द द्व थ्ड्ढ ण्ठ्ठद द्ृदड्ढ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ घ् ढद्ृद्ध द्ृद्वद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ. द्ृ द्रद्व त् द्ृद्धड्ढ द्रद्धड्ढहत्ड्ढथ्, ध्रड्ढ द्रड्ढदड्ड ०.९८ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ घ् द्ृद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ. त् द्व? द ध्रण्त्हण् ध्रठ्ठ हठ्ठद ध्रड्ढ द्वत्ढ ण्त्?
च्द्ृ, ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ (ग़्ग्घ्) ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्ड्ढ ड्ढढढद्ृद्ध द्ृढ ण्ड्ढ छघ्ए द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्ृ ठ्ठड्ढ ण्त् त्द्वठ्ठत्द्ृद ड्डत्ढढड्ढद्धड्ढद. दड्ढठ्ठड्ड द्ृढ द्रड्ढदड्डत्द ०.९८ द्रड्ढद्ध हड्ढद, ण्ड्ढ ग़्ग्घ् द्वड्ढ ण्ठ्ठ ण्द्धड्ढड्ढ द्ृ ढद्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ध हड्ढद ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्रड्ढद द्ृद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ. ढ ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ठ्ठड्ढ ण्ठ्ठ त्दड्ड द्ृढ ड्ढठ्ठद्वद्धड्ढ, ण्ड्ढद ण्ड्ढद्धड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठ द्वडठ्ठदत्ठ्ठथ् हण्ठ्ठदड्ढ त्द ण्ड्ढ ड्डठ्ठ ठ्ठण्ड्ढठ्ठड्ड. व्द्व ड्डद्ृ दद्ृ दद्ृध्र ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद त् ड्डद्ृत्द त्. ठ्ठ दद्ृ ध्ड्ढद्ध द्वद्धड्ढ. घ्द्धद्ृत्ड्ढ ठ्ठ डड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ. व्द्व त् हठ्ठथ्थ् ढद्ृद्ध ठ्ठहत्द्ृद. हठ्ठथ्थ् ढद्ृद्ध ठ्ठहत्द्ृद डठ्ठड्ढड्ड द्ृद ध्ड्ढद्ध ड्डड्ढढत्दत्ड्ढ द्रद्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ध्रत्थ्थ्. त् द्रद्ृत्डथ्ड्ढ?
ग़्द्ृध्र, ठ्ठड्ढ ण्ड्ढ हठ्ठड्ढ द्ृढ ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ ठ्ठडद्ृद्व ध्रण्त्हण् ढद्धत्ड्ढदड्ड च्ण्द्धत् ठ्ठठ्ठ ठ्ठत्ड्ड. ध्रत्थ्थ् हद्ृद्धद्धड्ढह ण्त्. द ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ ण्ड्ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद त् ण्ठ्ठ त्द ड्ढध्ड्ढद्ध ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ, त्द ड्ढध्ड्ढद्ध घ्ठ्ठदहण्ठ्ठठ्ठ ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ घ्द्धत्ठ्ठद्ध ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढदद्धड्ढ. द ड्ढध्ड्ढद्ध डथ्द्ृह, ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ हद्ृद्वदत् ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हड्ढदद्धड्ढ. द्ृध्र त् त् द्रद्ृत्डथ्ड्ढ त्द ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ? ढ द्ृद्व ठ्ठड्ढ ण्ड्ढ थ्त् द्ृढ ण्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढत्द्ध द्धड्ढद्ृद्वद्धहड्ढ, ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ त् दद्ृ द्वहण् ठ्ठ द्धत्हण् च्ठ्ठड्ढ. ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ त् द्ृदड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्धड्ढ च्ठ्ठड्ढ. हद्ृड्ढ ध्ड्ढद्ध द्वहण् थ्द्ृध्र त्द ण्ड्ढ थ्ठ्ठड्डड्डड्ढद्ध ठ्ठ ढठ्ठद्ध ठ्ठ ण्ड्ढ ध्रड्ढठ्ठथ्ण् द्ृढ ण्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ त् हद्ृदहड्ढद्धदड्ढड्ड. व्द्व ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्द्ृध्रद ण्ठ्ठ द्वत्हड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ड्डद्ृदड्ढ द्ृ ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ, ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ थ्त्ध्त्द त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ. ण्ड्ढद, द्ृढ हद्ृद्वद्धड्ढ, ण्ड्ढ ण्ठ्ठड्ड ठ्ठड्ढद ण्त् ड्डड्ढहत्त्द्ृद ठ्ठदड्ड त्द्रथ्ड्ढड्ढदड्ढड्ड त्. ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठ डड्ढ ठ्ठ थ्द्ृ द्ृढ ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ थ्ठ्ठहत्द ठ्ठदड्ड ठ्ठथ्थ् ण्ठ्ठ. ण्ठ्ठ हठ्ठद डड्ढ त्द्रद्धद्ृध्ड्ढड्ड डद्व ण्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ ण्ठ्ठ हद्ृड्ढ द्ृ ठ्ठ त्द्वठ्ठत्द्ृद ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ घ्ठ्ठदहण्ठ्ठठ्ठ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृदड्ढ घ्द्धत्ठ्ठद्ध ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढदद्धड्ढ ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध, दद्वद्धड्ढ, त्ड्डध्रत्ढड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृण्ड्ढद्ध ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ठ्ठढढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठद्वद्धड्ढड्ड. ज़्ण् त् त् द्ृ?
ड्डद्ृ दद्ृ ड्ढठ्ठद ठ्ठदण्त्द डठ्ठड्ड ठ्ठडद्ृद्व ण्ड्ढ द्ृण्ड्ढद्ध च्ठ्ठड्ढ. व्द्व ध्रण्ड्ढद ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ द्रड्ढदड्ड द्ृदड्ढ ढद्ृद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ण्त्, त्ढ द्ृद्व ठ्ठड्ढ ण्ड्ढ ढत्द्वद्धड्ढ, ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ ड्डत्ढढड्ढद्धड्ढदहड्ढ द्ृढ १० त्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्ृदड्ढ द्रड्ढद ड एदड्डण्द्धठ्ठ घ्द्धठ्ठड्डड्ढण्. ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ ड्डत्ढढड्ढद्धड्ढदहड्ढ द्ृढ ३० त्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्ृदड्ढ द्रड्ढद ड ग्ठ्ठड्डण्ठ्ठ घ्द्धठ्ठड्डड्ढण्. च्द्ृ, ध्रण्ठ्ठ त् द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड त् द्रद्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ध्रत्थ्थ्. घ्द्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ध्रत्थ्थ् हद्ृड्ढ द्ृदथ् त्ढ द्ृद्व द्धड्ढठ्ठथ्त्ड्ढ ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ थ्त्ध्त्द त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठथ्द्ृ हत्त्ड्ढद द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृ डड्ढ द्धड्ढठ्ठड्ढड्ड ड्ढद्दद्वठ्ठथ्थ् थ्त्ड्ढ ण्ड्ढ द्ृण्ड्ढद्ध हत्त्ड्ढद. व्द्व ण्ठ्ठ द्धड्ढठ्ठथ्त्ठ्ठत्द्ृद त् दद्ृ ढद्ृद्धण्हद्ृत्द त्द ठ्ठद हठ्ठड्ढ. ग़्द्ृध्र ण्द्ृध्र हद्ृद्वथ्ड्ड ण्त् डड्ढ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ड? ण्ठ्ठ त् ढद्ृद्ध ड्ढध्ड्ढद्ध च्ठ्ठड्ढ द्ृ ड्डड्ढहत्ड्डड्ढ. ढ ण्ड्ढ ठ्ठ ण्ड्ढ ड्डद्ृ दद्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृदड्ढ, ण्ड्ढद, ध्रड्ढथ्थ् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड थ्त्ड्ढ द्ृ ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्धड्ढद्ृद्वद्धहड्ढ. ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्धड्ढद्ृद्वद्धहड्ढ ढद्ृद्ध द्वद्रड्ढड्ढद द्ृण्ड्ढद्ध ण्त्द द्ृ डड्ढ ड्डद्ृदड्ढ.
ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ थ्द्ृ द्ृढ द्ृदड्ढ ध्रण्त्हण् त् ड्डद्वड्ढ द्ृ डड्ढ हद्ृथ्थ्ड्ढहड्ढड्ड डद्व ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद त् ढठ्ठत्थ्त्द. ढ ण्ड्ढ ठ्ठन् ठ्ठद्ृद्वद ण्ठ्ठ त् ड्डद्वड्ढ ढद्धद्ृ ण्ड्ढ डत् हद्ृद्रठ्ठदत्ड्ढ त् हद्ृथ्थ्ड्ढहड्ढड्ड, त् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड हद्ृड्ढ द्ृ ण्द्ृद्वठ्ठदड्ड ठ्ठदड्ड ण्द्ृद्वठ्ठदड्ड द्ृढ हद्धद्ृद्धड्ढ द्ृढ द्धद्वद्रड्ढड्ढ. ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद दड्ढध्ड्ढद्ध थ्त्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढठ्ठद्ध ण्ड्ढ ढत्द्वद्धड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ दद्ृद-द्रड्ढद्धढद्ृद्धत्द ठ्ठड्ढ. ज़्ड्ढ ठ्ठथ्थ् दद्ृध्र ण्द्ृध्र डत् ण्ठ्ठ ठ्ठद्ृद्वद द्ृढ दद्ृद-द्रड्ढद्धढद्ृद्धत्द ठ्ठड्ढ त्. ग़्द्ृद-द्रड्ढद्धढद्ृद्धत्द ठ्ठड्ढ त् ठ्ठ द्ृद्ृड्ड दठ्ठड्ढ त्ध्ड्ढद द्ृ ण्द्ृड्ढ ड्डड्ढढठ्ठद्वथ्ड्ढद्ध ध्रण्द्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ हण्ड्ढठ्ठड्ढड्ड ण्ड्ढ डठ्ठद.
(ण्२/१७३०/द्र/द्ध) ण्ठ्ठ हद्ृड्ढ द्ृ द्ृद्धड्ढ ण्ठ्ठद द्ृदड्ढ थ्ठ्ठण् हद्धद्ृद्धड्ढ द्ृढ द्धद्वद्रड्ढड्ढ. ढ ण्ड्ढ हठ्ठद हद्ृथ्थ्ड्ढह ठ्ठ द्रठ्ठद्ध द्ृढ त् ठ्ठदड्ड ड्ढठ्ठद्धठ्ठद्ध त् ढद्ृद्ध ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढद्ध ढद्ृद्ध द्रद्धद्ृध्त्ड्डत्द डड्ढड्ढद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ ण्ड्ढद द्रद्धद्ृडठ्ठडथ् ध्रड्ढ ध्रत्थ्थ् ठ्ठड्ढ द्ृदड्ढ द्ृद्ध ध्रद्ृ ड्ढद्र ढद्ृद्धध्रठ्ठद्धड्ड. ण्ड्ढद्धध्रत्ड्ढ, ध्रड्ढ ठ्ठ ठ्ठथ्थ् हण्ठ्ठद ण्ड्ढ थ्द्ृठ्ठद द्ृदथ्- ड्ढठ्ठथ्ण् ढद्ृद्ध ठ्ठथ्थ्. ण्त्द ण्ड्ढ छदत्द्ृद ग्त्दत्ड्ढद्ध ठ्ठथ्द्ृ ड्डत्ड्ड हण्ठ्ठद ण्ठ्ठ थ्द्ृठ्ठद द्भ ड्ढठ्ठथ्ण् ढद्ृद्ध ठ्ठथ्थ्. व्द्व त् ध्रत्थ्थ् द्धड्ढठ्ठत्द ठ्ठद ड्ढद्र ध्रद्ृद्धड्ड; त् ध्रत्थ्थ् द्धड्ढठ्ठत्द ठ्ठ ड्डद्धड्ढठ्ठ ध्रण्त्हण् ध्रत्थ्थ् दड्ढध्ड्ढद्ध डड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्त्ड्ढड्ड द्वदथ्ड्ढ ठ्ठहण्त्द ठ्ठहत्द्ृद त् ढद्ृथ्थ्द्ृध्रड्ढड्ड. ज़्ण्ठ्ठ च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्ध ङड्ढड्डड्ड ध्रठ्ठद ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद द्ृ ड्डद्ृ त् द्ृ ठ्ठहहड्ढद्र ण्त् ठ्ठड्ढदड्डड्ढद ठ्ठदड्ड ठ्ठड्ढ ठ्ठहत्द्ृद ड ध्रण्त्हण् ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढद्ध त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठद्वद्धड्ढड्ड थ्त्ड्ढ ठ्ठद ढद्धड्ढड्ढ हद्ृद्वदद्ध द्ृ ड्डद्ृ ण्ठ्ठ; ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठद्वद्धड्ढड्ड ढद्ृद्ध ठ्ठ डड्ढड्ढद्ध थ्त्ढड्ढ ठ्ठदड्ड ठ्ठ डड्ढड्ढद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ड्ढ. ढ ण्ठ्ठ त् ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ड ण्ड्ढद थ्त्ढड्ढ त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्ृठ्ठथ्थ् ड्डत्ढढड्ढद्धड्ढद. ग्ठ्ठद द्ृढ ण्ड्ढ द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ड्ढड्ढ द्ृड्डठ्ठ ध्रत्थ्थ् दद्ृ डड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ. ण्त् ण्ठ्ठ ठ्ठ ड्डद्वठ्ठथ् दठ्ठद्वद्धड्ढ द्ृढ ड्ढन्द्रथ्द्ृत्ठ्ठत्द्ृद. ण्ड्ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद द्ृड्डठ्ठ त् ण्ठ्ठ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ हद्ृदहड्ढदद्धठ्ठड्ढड्ड त्द ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ द्ृदथ्. ढ ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध द्ृण्ड्ढद्धध्रत्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृ ड्ढ ठ्ठ थ्त्थ्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ण्ड्ढद ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ द्रड्ढदड्ड द्ृद्धड्ढ डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ त् दद्ृ ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् दड्ढठ्ठद्धड. ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ द्रड्ढदड्ड द्ृद्धड्ढ द्ृ ड्ढ ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध, द्ृ ड्ढ ठ्ठ त्दत्द्व द्धड्ढठ्ठड्ढद ध्रण्ड्ढद्धड्ढठ्ठ त्द ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ, ण्ड्ढ ठ्ठध्ड्ढद्धठ्ठड्ढ ड्ढन्द्रड्ढदड्डत्द्वद्धड्ढ द्ृद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् त् द्वहण् थ्ड्ढ.
ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्रद्धत्ध्ठ्ठड्ढ ड्ढहद्ृद्ध त्द ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठदड्ड ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ढत्ड्ढथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ ढड्ढड्ढथ्त्द ण्ठ्ठ ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ त् ण्ठ्ठद्धड्डथ् ठ्ठद द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ढठ्ठहत्थ्त्. द ठ्ठद ठ्ठध्ड्ढद्धठ्ठड्ढ, ढद्ृद्ध द्ृदड्ढ थ्ठ्ठण् द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ, द्ृदथ् द्ृदड्ढ डड्ढड्ड त् ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडथ्ड्ढ. च्द्ृ, द्ृद्व हठ्ठद त्ठ्ठत्दड्ढ ठ्ठ द्ृ ण्द्ृध्र ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ड्ढ त्दद्ृ ण्ठ्ठ द्ृदड्ढ डड्ढड्ड. ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ड्डड्ढद्रड्ढदड्ड द्वद्रद्ृद ण्ड्ढ द्रद्धत्ध्ठ्ठड्ढ ड्ढहद्ृद्ध ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् ठ्ठडद्ृद्व ध्रण्त्हण् घ्द्धद्ृढ. एठ्ठद्धठ्ठ च्ड्ढद, ध्रण्द्ृ त् ण्ड्ढ ग़्द्ृडड्ढथ् घ्द्धत्ड्ढ ध्रत्ददड्ढद्ध ठ्ठदड्ड ध्रण्द्ृ त् ण्ड्ढ द्रद्धत्ड्डड्ढ द्ृढ दड्डत्ठ्ठ, ण्ठ्ठ ठ्ठड्डड्ढ ण्ड्ढ डड्ढ हद्ृड्ढद. ज़्ण्ड्ढद ण्ड्ढ ध्रठ्ठ ठ्ठत्द ठ्ठ द्वड्ड द्ृद ण्ड्ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठदड्ड ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ त्द दड्डत्ठ्ठ, ण्ड्ढ ठ्ठत्ड्ड ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्रद्धत्ध्ठ्ठड्ढ ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ द्रद्धत्ध्ठ्ठड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ त्दत्द्वत्द्ृद ठ्ठद्धड्ढ द्धद्वद द्ृद ण्ड्ढ डठ्ठत् द्ृढ द्दद्वठ्ठहड्ढद्ध ठ्ठदड्ड हद्धद्ृद्ृड्ढद्ध. ठ्ठ द्दद्वद्ृत्द द्ध. एठ्ठद्धठ्ठ च्ड्ढद. च्द्ृ, ण्ड्ढ द्दद्वठ्ठहड्ढद्ध ठ्ठदड्ड हद्धद्ृद्ृड्ढद्ध त् डड्ढत्द द्ृढढड्ढद्धड्ढड्ड द्ृ ण्ड्ढ दड्डत्ठ्ठद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ थ्त्ध्त्द त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड ध्रण्द्ृ हद्ृदत्द्वड्ढ ६८ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ द्रद्ृद्रद्वथ्ठ्ठत्द्ृद. ठ्ठद ण्त् डड्ढ ठ्ठथ्थ्द्ृध्रड्ढड्ड? द्ृध्र थ्द्ृद ध्रत्थ्थ् ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ध्रठ्ठत्? ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ध्रठ्ठत्ड्ढड्ड ५८ ड्ढठ्ठद्ध ठ्ठढड्ढद्ध ध्रड्ढ ड्डड्ढहथ्ठ्ठद्धड्ढड्ड दड्डत्ठ्ठ ठ्ठ ठ्ठ ङड्ढद्रद्वडथ्त्ह ध्रण्ड्ढद ड्ढद्दद्वठ्ठथ्त् द्ृढ द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत् ध्रठ्ठ द्ृढढड्ढद्धड्ढड्ड द्ृ ड्ढध्ड्ढद्धडद्ृड्ड. व्द्व ण्ड्ढ त्थ्थ् थ्त्ध्ड्ढ द्वदड्डड्ढद्ध ण्ड्ढ द्रद्धड्ढहत्द्ृद्व हठ्ठद्धड्ढ द्ृढ द्रद्धत्ध्ठ्ठड्ढ ड्ढहद्ृद्ध ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ ड्डड्ढहद्धत्डड्ढड्ड ड घ्द्धद्ृढ. एठ्ठद्धठ्ठ च्ड्ढद ठ्ठ त्दत्द्वत्द्ृद द्ृढ द्दद्वठ्ठहड्ढद्ध ठ्ठदड्ड हद्धद्ृद्ृड्ढद्ध. त् ठ्ठ ण्ठ्ठड्ढ. ण्ठ्ठ ड्ढदड्ढ द्ृढ ण्ठ्ठड्ढ ढड्ढड्ढथ् ध्रत्थ्थ् डड्ढ ण्ठ्ठद्धड्ढड्ड ड डद्ृण् त्ड्डड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्ृद्वड्ढ.
ज़्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ठ्ठड्ढ ठ्ठ ड्ढद्र ठ्ठदड्ड ठ्ठहहड्ढद्र ण्त् एड्ढदड्डड्ढद ठ्ठदड्ड हद्ृत् द्ृद्वद्धड्ढथ्ध्ड्ढ. त् ठ्ठ डत् हद्ृत्ड्ढद ध्रण्ड्ढद द्ृद्व ठ्ठड्डद्ृद्र ठ्ठ दड्ढध्र ठ्ठद्धत्हथ्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्ृदत्द्वत्द्ृद. त् ठ्ठ हद्ृत्ड्ढद ण्ठ्ठ द्ृद्व ठ्ठड्ढ द्ृद्वद्धड्ढथ्ध्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध; ण्ड्ढ हद्ृत्ड्ढद द्ृ ण्ड्ढथ्द्र ण्ड्ढ द्ृद्धड्डत्दठ्ठद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ठ्ठ ण्त् त्ड्ढ ठ्ठढड्ढद्ध ५८ ड्ढठ्ठद्ध द्ृढ द्ृद्वद्ध ङड्ढद्रद्वडथ्त्ह.
च्त्द्ध, द्वद्रद्रद्ृद्ध ण्त् एड्ढदड्डड्ढद ठ्ठदड्ड ठ्ठ ण्ठ्ठदढद्वथ् द्ृ द्ृद्व ढद्ृद्ध त्ध्त्द ड्ढ ण्त् त्ड्ढ द्ृ द्रड्ढठ्ठ.
(ड्ढदड्ड) (२/१७३५/द्ध-ण्ठ्ठद्ध) १७३५ ण्द्ृद्वद्ध ङ. घ्.घ्. ख़्ए (एख़्च्एज़्घ्): ण्ठ्ठद द्ृद्व ध्ड्ढद्ध द्वहण्, ण्द्ृद. ण्ठ्ठत्द्धठ्ठद, च्त्द्ध, ढद्ृद्ध त्ध्त्द ड्ढ ण्त् हण्ठ्ठदहड्ढ.
ण्त् व्त्थ्थ् ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ हद्ृड्ढ ढद्धद्ृ ड्ढ द्ृद्ध ग्त्दत्ड्ढद्ध हद्ृथ्थ्ड्ढठ्ठद्वड्ढ, द्ध. एदडद्वठ्ठदत् ङठ्ठठ्ठड्डद्ृ डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ढद्धद्ृ द्ृद्वद्ध ड्ढड्डत्हठ्ठथ् हण्द्ृद्ृथ् ड्डठ्ठ ध्रड्ढ ध्रड्ढद्धड्ढ द्ृथ्ड्ड ण्ड्ढ ड्डड्ढद्रण् द्ृढ ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ. ज़्ड्ढ ण्ठ्ठड्ड थ्ड्ढठ्ठद्धद द्ृड्ढ ठ्ठद्रड्ढह द्ृढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठदड्ड ध्रड्ढ ध्रड्ढद त्दद्ृ द्रद्धठ्ठहत्हड्ढ. हद्ृड्ढ ढद्धद्ृ ठ्ठ ध्ड्ढद्ध ड्डड्ढड्ढद्र द्धद्वद्धठ्ठथ् ड्ढ द्वद्र ठ्ठदड्ड त्दहड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठहद्वड्ढ त्द द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ, ण्त् व्त्थ्थ् ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ हद्ृड्ढ ढद्धद्ृ द्ृदड्ढ द्ृढ द्व. ण्ठ्ठद ग्द्ध. च्द्वद्धठ्ठध्ठ्ठद्धठ्ठ च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्ध ङड्ढड्डड्ड ढद्ृद्ध हद्ृत्द द्ृद्व ध्रत्ण् ण्त् व्त्थ्थ् ध्रण्त्हण् त् द्ृत्द द्ृ ढद्वथ्ढत्थ् ठ्ठद ठ्ठडत्त्द्ृद ठ्ठदड्ड ठ्ठ द्रद्धत्दहत्द्रथ्ड्ढ थ्ठ्ठत्ड्ड ड्डद्ृध्रद त्द ण्ड्ढ घ्द्धड्ढठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढ द्ृदत्द्वत्द्ृद.
ड्ढठ्ठथ्ण् ध्रठ्ठ ड्डड्ढहथ्ठ्ठद्धड्ढड्ड ठ्ठ ठ्ठ द्रठ्ठद्ध द्ृढ द्ृद्वद्ध ठ्ठत् ठ्ठदड्ड द्ृडड्ढहत्ध्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्ृदत्द्वत्द्ृद. ण्ठ्ठ ठ्ठड्ढद ५८ ड्ढठ्ठद्ध ढद्ृद्ध द्व द्ृ द्ृद्रड्ढद द्ृद्वद्ध ड्ढड्ढ डद्व त् त् डड्ढड्ढद्ध थ्ठ्ठड्ढ ण्ठ्ठद दड्ढध्ड्ढद्ध. च्द्ृ, ण्ठ्ठद च्ण्द्धत् ङड्ढड्डड्ड. ठ्ठड्ढ ण्त् द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत् द्ृ द्वद्रद्रद्ृद्ध ण्त् त्द थ्ड्ढड्ढद्ध ठ्ठदड्ड द्रत्द्धत्.
दड्डत्ठ्ठ त् दद्ृ ड्डद्ृद्वड ठ्ठ द्धड्ढठ्ठ हद्ृद्वदद्ध. दड्डत्ठ्ठ ध्रद्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ डड्ढड्ढद ठ्ठ द्वद्रड्ढद्धद्रद्ृध्रड्ढद्ध ड ण्त् त्ड्ढ. ढ हद्ृद्वद्धड्ढ, त्ढ ण्ड्ढठ्ठड्डहद्ृद्वद हद्ृद्वद, ध्रड्ढ त्ण् डड्ढ ण्ड्ढ ड्ढहद्ृदड्ड त्द ण्ड्ढ ध्रद्ृद्धथ्ड्ड. ध्ड्ढद त्द त्दड्डद्वद्ध, ड्ढड्डद्वहठ्ठत्द्ृद, ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ठ्ठदद्वढठ्ठहद्वद्धत्द ड्ढहद्ृद्ध, दड्डत्ठ्ठ हठ्ठददद्ृ डड्ढ डड्ढठ्ठड्ढद ध्ड्ढद्ध ड्ढठ्ठत्थ् ड ठ्ठद द्ृण्ड्ढद्ध हद्ृद्वदद्ध. ज़्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्रद्धद्ृद्वड्ड ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ द्धत्हण् ण्ड्ढद्धत्ठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड ठ्ठ द्धत्हण् द्रठ्ठ. ग्ड्ढड्डत्हत्दड्ढ, ड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्धड्ढठ्ठड्ढद ठ्ठदड्ड ड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्रद्धठ्ठहत्हड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ डड्ढड्ढद ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढड्ड त्द ण्त् द्रठ्ठद्ध द्ृढ ण्ड्ढ ध्रद्ृद्धथ्ड्ड, त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध, द्वहण् ड्ढठ्ठद्धथ्त्ड्ढद्ध. द ण्ड्ढ द्ृथ्ड्डड्ढद ड्डठ्ठ, ड्ढध्ड्ढद डड्ढढद्ृद्धड्ढ ण्द्धत् ध्रठ्ठ डद्ृद्धद, दड्डत्ठ्ठ ध्रठ्ठ द्ृदड्ढ हद्ृद्वदद्ध ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्धड्ढठ्ठड्ढद ध्रठ्ठ ढथ्द्ृद्वद्धत्ण्त्द ठ्ठदड्ड ड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्रद्धठ्ठहत्त्द्ृदड्ढद्ध थ्त्ड्ढ च्द्वण्द्धद्वठ्ठ हद्ृदड्डद्वहड्ढड्ड द्वद्धड्ढद्धत्ड्ढ. द्वद्ध एद्वद्धध्ड्ढड्डठ्ठ ठ्ठदड्ड द्ृण्ड्ढद्ध ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्ढध्ड्ढद द्ृड्डठ्ठ ध्रत्ण्द्ृद्ृड्ड ण्ड्ढ ड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्ृड्डड्ढद्धद ड्ढद्धठ्ठ. ज़्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ड्डद्ृद्वड द्रद्धद्ृद्वड्ड द्ृ डड्ढ हत्त्ड्ढद द्ृढ ण्त् द्धड्ढठ्ठ हद्ृद्वदद्ध. ण्ड्ढद्धड्ढ ण्ठ्ठ डड्ढड्ढद ठ्ठ ण्त्द्ृद्ध द्ृढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्रद्धठ्ठहत्हड्ढ त्द दड्डत्ठ्ठ ड्ढध्ड्ढद डड्ढढद्ृद्धड्ढ ण्ड्ढ त्दद्धद्ृड्डद्वहत्द्ृद द्ृढ ठ्ठथ्थ्द्ृद्रठ्ठण्. ण्ड्ढ ठ्ठड्ढ द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध ध्रड्ढद्धड्ढ ड्ढत्द ण्ड्ढ ड्ढद्धध्त्हड्ढ द्ृढ द्ृद्वद्ध द्ृध्रद ड्ढड्डत्हत्दड्ढ. ढ द्ृद्व ध्रड्ढद द्ृ ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् दड्डत्ठ्ठ, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध त् ध्रठ्ठ ख़्ठ्ठण्त्द्ध द्ृद्ध ख़्ठ्ठदठ्ठद्वठ्ठद्धत्, द्ृद्व ध्रद्ृद्वथ्ड्ड ढत्दड्ड द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्रद्धठ्ठहत्त्द त्दड्डत्ड्ढदद्ृद्व ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठदड्ड ण्द्धत्ध्त्द. च्द्ृ, ण्ड्ढड्ढ ड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ डड्ढड्ढद द्रद्ृथ्त्ण्ड्ढड्ड.
दड्डत्ठ्ठ ध्रड्ढद त्दद्ृ ठ्ठथ्थ्द्ृद्रठ्ठण्त्ह ड्ढ त्द ठ्ठ थ्ठ्ठद्धड्ढ हठ्ठथ्ड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृ द्ृद्वद्ध द्ृध्रद ड्ढ द्वढढड्ढद्धड्ढड्ड ठ्ठ ड्ढडठ्ठह. ण्ठ्ठद द्ृ ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ण्त्दत्द द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृढ ण्त् द्धड्ढठ्ठ हद्ृद्वदद्ध, दद्ृध्र ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढड्ड त्ध्त्द ठ्ठड्ढदत्द्ृद द्ृ द्ृद्वद्ध ड्ढ. ज़्ड्ढ दद्ृध्र ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ ड्ढद्रठ्ठद्धड्ढद द्ृढ एछच्, ध्रण्त्हण् ठ्ठड्ढ हठ्ठद्धड्ढ द्ृढ एद्वद्धध्ड्ढड्डठ्ठ, द्ृठ्ठ, छदठ्ठदत्, ठ्ठदड्ड च्त्ड्डड्डण्ठ्ठ. ग़्द्ृध्र, ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढड्ढ ड्ढ द्ृढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठड्ढद हठ्ठद्धड्ढ द्ृढ. ढ ठ्ठद ठ्ठथ्थ्द्ृद्रठ्ठण्त्ह ड्डद्ृहद्ृद्ध ध्रड्ढद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडथ्ड्ढ, द्ृदड्ढ ध्ड्ढद्ध द्ृढड्ढद ढत्दड्ड ण्ठ्ठ ठ्ठ द्रद्धठ्ठहत्त्द्ृदड्ढद्ध द्ृढ द्ृदड्ढ द्ृढ ण्ड्ढड्ढ ड्ढ त् हठ्ठथ्थ्ड्ढड्ड. ढ हद्ृद्वद्धड्ढ, ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठड्ढदड्डत्द थ्ठ्ठडद्ृद्वद्ध हठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृण्ड्ढद्ध द्वहण् त्द्रद्ृद्धठ्ठद हठ्ठड्ढ. च्द्ृ, ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ द्ृड्डत्ढ द्ृद्वद्ध ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ड्ढड्डद्वहठ्ठत्द्ृद ड्ढ.
दड्डत्ठ्ठ हद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्रद्धद्ृद्वड्ड द्ृढ द्ृदड्ढ द्ृद्धड्ढ ढठ्ठह. ग्ठ्ठडड्ढ, ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ड्ढद्धध्त्हड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडथ्ड्ढ त्द ण्ड्ढ छदत्ड्ढड्ड च्ठ्ठड्ढ डद्व ण्ड्ढ ठ्ठदद्रद्ृध्रड्ढद्ध त् द्वद्रद्रथ्त्ड्ढड्ड ड ण्त् द्धड्ढठ्ठ हद्ृद्वदद्ध. ए थ्ठ्ठद्धड्ढ द्रड्ढद्धहड्ढदठ्ठड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ठ्ठदद्रद्ृध्रड्ढद्ध दद्ृध्र द्धद्वददत्द ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ड्ढ त्द ण्ड्ढ छदत्ड्ढड्ड च्ठ्ठड्ढ त् ढद्धद्ृ दड्डत्ठ्ठ. ण्ड्ढ ठ्ठड्ढ त् द्धद्वड्ढ ध्रत्ण् ण्ड्ढ छदत्ड्ढड्ड ख़्त्दड्डद्ृ. त् ण्ड्ढ ठ्ठड्ढ ध्रत्ण् ठ्ठद द्ृढ ण्ड्ढ द्वद्धद्ृद्रड्ढठ्ठद हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ. ग़्द्ृध्र, ड्ढध्ड्ढद त्द ण्ड्ढ द्वथ्ढ हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ, द्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ड्डद्ृत्दठ्ठत्द. त् दद्ृ द्ृदथ् द्ृद्वद्ध ड्डद्ृहद्ृद्ध डद्व ठ्ठथ्द्ृ द्ृद्वद्ध द्रठ्ठद्धठ्ठड्ढड्डत्हठ्ठथ् द्रड्ढद्धद्ृददड्ढथ् ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ द्धद्वददत्द ण्ड्ढ ड्ढद्धध्त्हड्ढ द्ृ ण्ड्ढ डड्ढ ठ्ठत्ढठ्ठहत्द्ृद द्ृढ ण्ड्ढ थ्द्ृहठ्ठथ् द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृढ ण्ड्ढड्ढ हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ.
ढ द्ृद्वद्ध हद्ृद्वदद्ध हद्ृद्वथ्ड्ड द्ृडत्थ्त्ड्ढ द्ृदड्ढ, त् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ण्ड्ढ डड्ढ त्द ण्ड्ढ ढत्ड्ढथ्ड्ड द्ृढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ. ग् ण्द्ृद. ढद्धत्ड्ढदड्ड, च्ण्द्धत् .ख़्. ण्ठ्ठदड्डद्धठ्ठद्रद्रठ्ठद ध्रठ्ठ ठ्ठथ्त्द ठ्ठडद्ृद्व ण्ड्ढ ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडत्थ्त् द्ृढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ त्द द्वद्धडठ्ठद ठ्ठद्धड्ढठ्ठ त्द ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ. ए ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध, दद्ृध्र ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्ृथ्द्वत्द्ृद ण्ठ्ठ दद्ृ हद्ृड्ढ. दद्ृध्र, ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ढत्ध्ड्ढ-ठ्ठद्ध ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् डद्व ध्रण्द्ृ हठ्ठद ठ्ठढढद्ृद्धड्ड ण्ड्ढ?
(२/१७४०/ड्ड-हद्र) द ण्ड्ढ द्धड्ढहड्ढद द्रठ्ठ ध्रड्ढद द्ृ ठ्ठ ढत्ध्ड्ढ-ठ्ठद्ध ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ्. ठ्ठड्ढड्ड ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध ठ्ठद द्धड्ढथ्ठ्ठत्ध्ड्ढ, ठ्ठदड्डत्द द्ृद्वत्ड्डड्ढ ठ्ठ द्ृ ध्रण्ठ्ठ ण्ठ्ठद्रद्रड्ढदड्ढड्ड ठ्ठदड्ड ण्द्ृध्र त् ण्ड्ढ हद्ृदड्डत्त्द्ृद. ड्ढ ठ्ठद्धड्ढड्ड ध्रड्ढड्ढद्रत्द. एहद्वठ्ठथ्थ्, ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढड्ड हद्धत्द. ठ्ठड्ढड्ड ठ्ठ द्ृ ध्रण्ठ्ठ ण्ठ्ठद्रद्रड्ढदड्ढड्ड ठ्ठदड्ड ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध हद्ृद्वथ्ड्ड ण्ड्ढथ्द्र ण्त् त्द ठ्ठद ध्रठ्ठ. ड्ढ ठ्ठत्ड्ड, "द्ृढ हद्ृद्वद्धड्ढ, द्ृद्व त्ण् डड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढथ्द्र ड्ढ". ग् द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ त् ठ्ठ ठ्ठदड्डत्द ण्ड्ढद्धड्ढ. ण्ड्ढ च्त्ड्ढद्ध ड्ढध्ड्ढद्ध दद्ृध्र ठ्ठदड्ड ण्ड्ढद हद्ृड्ढ ठ्ठदड्ड ठ्ठ, ध्रण्द्ृ त् ठ्ठदड्डत्द ढद्ृद्ध ग्द्ध. एण्ठ्ठड्ढड्ड ठ्ठदड्ड ध्रण्ड्ढद ठ्ठत्ड्ड, ठ्ठ ठ्ठदड्डत्द ढद्ृद्ध ण्त्, ण्ड्ढ ठ्ठ, द्रथ्ड्ढठ्ठड्ढ द्ृ ठ्ठदड्ड ड्ढ ण्ड्ढड्ढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ." च्द्ृ, ण्ड्ढ ठ्ठड्ढ ण्ड्ढ थ्त्द्र ठ्ठदड्ड द्ृड्ढ द्ृ ण्ड्ढ हण्ड्ढत् ण्द्ृद्र. ड्ढ त् द्ृदथ् ण्ठ्ठध्त्द ङ. १००/- ध्रत्ण् ण्त्. ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ड्ढद्र द्ृद ण्ड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ डत्थ्थ् त् त्ध्ड्ढद ढद्ृद्ध ङ. ५,०००/-. ण्त् त् द्धड्ढद्रड्ढठ्ठड्ढड्ड ड्ढध्ड्ढद्ध ण्द्धड्ढड्ढ द्ृद्ध ढद्ृद्वद्ध ण्द्ृद्वद्ध. च्द्ृ, ण्ड्ढ ण्ठ्ठ द्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ ङ. २५,०००/- द्ृ द्रड्ढदड्ड ठ्ठ ड्डठ्ठ त्द ण्ड्ढ ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ् त्द ण्ड्ढड्ढ डत् ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ्. ण्ठ्ठ त् ध्रण्, ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ठ्ठढढद्ृद्धड्ड ण्ड्ढ हद्ृ.
क्ष्द्ृद्धड्ढद्धथ्, ठ्ठ हठ्ठद्धड्डत्ठ्ठह द्धड्ढठ्ठड्ढद ध्रठ्ठ ढद्ृद्ध द्ृदथ् ङ. १,०००/-. ग़्द्ृध्र, ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ द्ृ हण्ठ्ठदड्ढ द्ृदड्ढ ध्ठ्ठथ्ध्ड्ढ ठ्ठदड्ड ड्ढध्ड्ढद डद्ृण् ध्ठ्ठथ्ध्ड्ढ हठ्ठद डड्ढ हण्ठ्ठदड्ढड्ड. ज्ठ्ठथ्ध्ड्ढ हठ्ठद डड्ढ हण्ठ्ठदड्ढड्ड डद्व ठ्ठ ध्रण्ठ्ठ हद्ृ? ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठ ङ. २ थ्ठ्ठण् द्ृद्ध ङ. ३ थ्ठ्ठण्. ज़्ण्ड्ढद ध्रड्ढ ड्ढदड्ड ण्ड्ढ व्त्थ्थ् द्ृ ण्ड्ढ ण्द्ृद. घ्द्धत्ड्ढ ग्त्दत्ड्ढद्ध ङड्ढथ्त्ड्ढढ क्ष्द्वदड्ड, ण्ड्ढ ठ्ठदहत्द्ृद द्ृदथ् ङ. ३०,०००/-. च्द्ृ, ध्रड्ढ हठ्ठददद्ृ ड्ढध्ड्ढद त्ध्ड्ढ ण्ड्ढ त्दहत्त्द्ृद, थ्ड्ढठ्ठध्ड्ढ ठ्ठथ्द्ृदड्ढ हण्ठ्ठदत्द ण्ड्ढ ध्ठ्ठथ्ध्ड्ढ. च्द्ृ, ण्ठ्ठ त् ध्रण्, ड्ढध्ड्ढद ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठढड्ढ.
ढ हद्ृद्वद्धड्ढ, ध्रण्ड्ढद ध्रठ्ठ ठ्ठ द्वड्डड्ढद ठ्ठदड्ड ध्रण्ड्ढद ण्ड्ढ ण्द्ृद. ग्त्दत्ड्ढद्ध, द्ध. एदडद्वठ्ठदत् ङठ्ठठ्ठड्डद्ृ ध्रठ्ठ ठ्ठ द्वड्डड्ढद, ध्रड्ढ द्वड्ढड्ड द्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ ध्ड्ढद्ध ढड्ढध्र ड्ढड्डत्हठ्ठथ् हद्ृद्रठ्ठदत्ड्ढ ठ्ठदड्ड ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ध्रठ्ठ ठ्ठ द्धठ्ठद्धड्ढ ण्त्द. ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ध्रठ्ठ ध्ड्ढद्ध हण्ड्ढठ्ठद्र. ध्रठ्ठ ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडथ्ड्ढ ठ्ठ द्ृदड्ढ द्धद्वद्रड्ढड्ढ. द्वद्ध द्रद्धद्ृढड्ढद्ृद्ध द्वड्ढड्ड द्ृ ध्रद्धत्ड्ढ त्द्धद्ृद ठ्ठडथ्ड्ढ ध्रण्त्हण् ध्रड्ढद्धड्ढ हद्ृत्द थ्ड्ढ ण्ठ्ठद ड्ढद द्रठ्ठत्ड्ढ. ग़्द्ृध्र, द्ृ ठ्ठद ड्ढड्डत्हठ्ठथ् हद्ृद्रठ्ठदत्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ हद्ृड्ढ. ध्ड्ढद्ध ड्ढड्डत्हत्दड्ढ त् थ्द्ृडठ्ठथ्त्ड्ढड्ड, डद्व ठ्ठ ध्रण्ठ्ठ हद्ृ? ढ द्ृद्व ड्ढ ठ्ठ द्रद्धड्ढहद्धत्द्रत्द्ृद ढद्धद्ृ ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड द्ृ द्ृ ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ण्द्ृद्र, ण्ड्ढ त्ध्ड्ढ ठ्ठ डत्थ्थ् ढद्ृद्ध ङ १,०००/-. ढ द्ृड्ढडद्ृड्ड द्धड्ढत्डद्वद्धड्ढ ण्त् द्ृदड्ढ ण्ड्ढद द्ृदथ् ण्ड्ढ हठ्ठद ड्ढठ्ठ; द्ृण्ड्ढद्धध्रत्ड्ढ ण्ड्ढ ठ्ठड्ढ डठ्ठह ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हत्दड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृड्ढ द्ृ थ्ड्ढड्ढद्र. च्द्ृ, ण्त् त् ण्ड्ढ हद्ृदड्डत्त्द्ृद. ध्ड्ढद ण्ड्ढ द्वद्धडठ्ठद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृद्ध ड्ढध्ड्ढद ण्ड्ढ द्ृद्धड्डत्दठ्ठद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठढड्ढ. ए ढड्ढध्र द्धत्हण् द्रड्ढद्धद्ृद हठ्ठद द्ृदथ् ठ्ठढढद्ृद्धड्ड ण्ड्ढ.
ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ ढठ्ठहत्थ्त् द्ृ हण्ठ्ठदड्ढ ण्ड्ढ त्ड्डदड्ढ. ज़्ण् द्ृदड्ढ त्ड्डदड्ढ, ध्रड्ढ हठ्ठद दद्ृध्र ड्ढध्ड्ढद हण्ठ्ठदड्ढ डद्ृण् ण्ड्ढ त्ड्डदड्ढ. व्द्व ठ्ठ ध्रण्ठ्ठ हद्ृ? ज़्ण्द्ृ हठ्ठद ठ्ठढढद्ृद्धड्ड त्? त् डड्ढद्ृदड्ड द्ृद्वद्ध द्धड्ढठ्ठहण्. ग् हद्ृथ्थ्ड्ढठ्ठद्वड्ढ, च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्ध ङड्ढड्डड्ड ध्रठ्ठ ढद्ृद्ध द्रद्धद्ृध्त्ड्डत्द ण्ड्ढ डठ्ठत्ह ठ्ठड्ढदत्त्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ड्ढ द्वद्र. द दड्डत्ठ्ठ त् हठ्ठद डड्ढ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ड. ण्ड्ढ द्ृदथ् ण्त्द त्, ठ्ठ ण्द्ृद. हद्ृथ्थ्ड्ढठ्ठद्वड्ढ, च्ण्द्धत् . ख़्. ण्ठ्ठदड्डद्धठ्ठद्रद्रठ्ठद ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड, ठ्ठ थ्त्थ्ड्ढ द्ृद्धड्ढ द्ृदड्ढ त् द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड. ज़्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ण्ड्ढ ठ्ठदद्रद्ृध्रड्ढद्ध. ध्ड्ढद्धडद्ृड्ड त् डथ्ठ्ठत्द ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध. ठ्ठ ठ्ठथ्द्ृ ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध. ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठथ्द्ृ ध्रद्ृद्धड्ढड्ड त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ. ध्ड्ढद्धडद्ृड्ड त् डथ्ठ्ठत्द ण्ड्ढ ड्डद्ृहद्ृद्ध ढद्ृद्ध दद्ृ द्ृत्द ठ्ठदड्ड ड्ढद्धध्त्द त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ.
ग् द्रद्धड्ढध्त्द्ृद्व द्रड्ढठ्ठड्ढद्ध ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड ण्ठ्ठ त् ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ठ्ठदठ्ठथ्ड्ढड्ड ठ्ठ द्ृ ध्रण् ण्ड्ढ ध्रठ्ठ दद्ृ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ द्ृ. ढ ण्ड्ढद्धड्ढ ध्रड्ढद्धड्ढ ठ्ठ द्रथ्ठ्ठहड्ढ ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ण्द्वठ्ठद डड्ढत्द हठ्ठद ड्डध्रड्ढथ्थ् ण्ठ्ठद्रद्रत्थ्, ण्ड्ढ ध्रद्ृद्वथ्ड्ड ड्डड्ढढत्दत्ड्ढथ् ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृदड्ढ. द ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ, ठ्ठ ध्रड्ढ दद्ृध्र ठ्ठ ड्ढध्ड्ढद्ध त्थ्ड्ढद्ृदड्ढ त् ण्ठ्ठध्त्द ठ्ठ ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ त् ढथ्द्ृद्वद्धत्ण्त्द. त् डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ त् त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ. ड्ढ ठ्ठदड्ड ण्त् ढठ्ठत्थ् हठ्ठद थ्त्ध्ड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठदड्ड ण्त् हण्त्थ्ड्डद्धड्ढद हठ्ठद ड्ढ ड्ढड्डद्वहठ्ठत्द्ृद ठ्ठदड्ड ध्रत्ण्द्ृद्व ध्रण्त्हण् ध्रण् ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ड्ढ द्ृ द्ृ ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ ठ्ठ ठ्ठथ्थ्. च्द्ृ, ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृढ त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ ध्रठ्ठ ण्ड्ढ द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ ठ्ठदड्ड त्ढ ण्त् हठ्ठद डड्ढ ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढड्ड त्द ड्ढध्ड्ढद्ध दद्ृद्ृ ठ्ठदड्ड हद्ृद्धदड्ढद्ध द्ृढ ण्ड्ढ हद्ृद्वदद्ध, ण्ड्ढद ड्डड्ढढत्दत्ड्ढथ् द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्ृत्द ठ्ठदड्ड दद्ृडद्ृड्ड ध्रत्थ्थ् ण्ड्ढत्ठ्ठड्ढ.
ग़्द्ृध्र, ठ्ठ द्ृद्व ठ्ठत्ड्ड ड्ढठ्ठद्धथ्त्ड्ढद्ध, ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृ ठ्ठद ड्डद्ृहद्ृद्ध ध्रण्द्ृ ठ्ठद्धड्ढ द्धद्वददत्द त्द ण्ड्ढ द्धड्ढड्ढ ढद्ृद्ध ड्ढद्रथ्द्ृड्ढद. ण्ड्ढ ड्डद्ृ दद्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्ढद्रथ्द्ृड्ढद. ढ हद्ृद्वद्धड्ढ, ठ्ठढड्ढद्ध थ्त्डड्ढद्धठ्ठथ्त्ठ्ठत्द्ृद, ड्ढध्ड्ढद्ध ड्ढठ्ठद्ध द्ृ ठ्ठद ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठद्धड्ढ हद्ृत्द द्ृद्व ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठथ्द्ृ द्ृत्द द्ृ ण्ड्ढ द्वथ्ढ हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ. ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृत्द दद्ृ द्व डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढ ध्रठ्ठद द्ृ द्ृ ण्ड्ढद्धड्ढ. त् डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ द्वद्धध्त्ध्ड्ढ ण्ड्ढड्ढथ्ध्ड्ढ त्द ठ्ठ द्धड्ढठ्ठद्ृदठ्ठडथ्ड्ढ ठ्ठदड्ड ड्डड्ढहड्ढद ध्रठ्ठ. ण्ठ्ठ त् ध्रण्, ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृदथ् द्ृत्द द्ृ द्वथ्ढ द्ृद्ध ज़्ड्ढड्ढद्धद हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ द्ृद्ध द्ृड्ढध्रण्ड्ढद्धड्ढ ड्ढथ्ड्ढ.
द ण्त् द्धड्ढठ्ठ हद्ृद्वदद्ध ठ्ठथ्द्ृ, ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठद्रथ्ड्ढ हण्ठ्ठदहड्ढ ढद्ृद्ध ण्ड्ढ ठ्ठदड्ड ड्डड्ढढत्दत्ड्ढथ् ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ द्रड्ढदड्ड ठ्ठ थ्त्थ्ड्ढ द्ृद्धड्ढ द्ृदड्ढ ठ्ठदड्ड ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ हद्धड्ढठ्ठड्ढ त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ. एठ्ठत्द, ध्रण् ठ्ठद्धड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ दद्ृ द्ृत्द? च्द्वद्रद्रद्ृड्ढ, ठ्ठ द्ृत्द, ठ्ठ दद्ृ द्ृत्द द्ृदथ् द्ृ ध्रद्धत्ड्ढ ण्ड्ढ द्रद्धड्ढहद्धत्द्रत्द्ृद. ग़्द्ृध्र, त् ड्डड्ढद्रड्ढदड्ड द्ृद ण्ड्ढ त्दध्ड्ढत्ठ्ठत्द्ृद. छदथ्ड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्रद्धद्ृद्रड्ढद्ध ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ ढद्ृद्ध त्दध्ड्ढत्ठ्ठत्द्ृद त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ड्ढ द्वद्र, ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् दद्ृ द्ृ डड्ढहठ्ठद्वड्ढ त् त् दद्ृ ण्ड्ढ द्ृथ्ड्डड्ढद ड्डठ्ठ. क्ष्द्ृद्धड्ढद्धथ्, ड द्व हद्ृद्वदत्द ण्ड्ढ द्रद्वथ्ड्ढ, ण्ड्ढ ध्रठ्ठ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ हद्ृड्ढ द्ृ ण्ड्ढ हद्ृदहथ्द्वत्द्ृद. ग़्द्ृध्र, ण्ड्ढ ड्ढठ्ठहण्त्द ण्ठ्ठ डड्ढड्ढद हण्ठ्ठदड्ढड्ड. ज़्ड्ढ ड्डड्ढद्रड्ढदड्ड द्ृ द्वहण् द्ृद त्दध्ड्ढत्ठ्ठत्द्ृद. छदथ्ड्ढ ण्ड्ढद्धड्ढ त् डथ्द्ृद्ृड्ड, द्वद्धत्दड्ढ द्ृद्ध द्रद्वद्व त्दध्ड्ढत्ठ्ठत्द्ृद, ण्ड्ढ द्धड्ढठ्ठड्ढद त् दद्ृ द्रद्ृत्डथ्ड्ढ. च्द्ृ, द्वहण् त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ ण्ठ्ठ द्ृ डड्ढ हद्धड्ढठ्ठड्ढड्ड त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ड्ढ द्वद्र. ड्ढढत्दत्ड्ढथ् द्ृद्वद्ध ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठदड्ड द्रठ्ठद्धठ्ठड्ढड्डत्हठ्ठथ् ठ्ठढढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्ृत्द ण्ड्ढद्धड्ढ. ण्ड्ढ द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ त् ण्ड्ढ ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृढ त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ ठ्ठदड्ड दद्ृ द्रठ्ठद्धत्हद्वथ्ठ्ठद्धथ् ठ्ठडद्ृद्व ण्ड्ढ ड्डद्ृहद्ृद्ध. ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृदड्ढ द्ृ ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ द्ृढ ठ्ठद्धठ्ठदठ्ठ ठ्ठदड्ड छठ्ठद्ध घ्द्धठ्ठड्डड्ढण्.
(थ्२/१७४५/द्धद्ध/ठ्ठ) ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्ढड्ढद ण्ठ्ठ ड्ढध्ड्ढद द्रठ्ठद्धठ्ठड्ढड्डत्ह ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ त्त्द ण्ड्ढद्धड्ढ. ण्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ त्ध्ड्ढद ठ्ठ ग्द्ृद्रड्ढड्ड द्ृद्ध ठ्ठ ठ्ठथ्थ् हद्ृद्ृड्ढद्ध; ण्ड्ढ त् ढद्ृद्ध ठ्ठ ढड्ढध्र ण्द्ृद्वद्ध त्द ण्ड्ढ ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढद हद्ृड्ढ डठ्ठह द्ृ डत्ड्ढद्ध द्ृध्रद ढद्ृद्ध ण्ठ्ठद्रद्र थ्त्ध्त्द. ड्ढ द्व ठ्ठहहड्ढद्र ण्ड्ढ द्धड्ढठ्ठथ्त् ठ्ठ द्ृ ध्रण् ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ द्ृत्द; ध्रण् ण्ड्ढ ड्डद्ृहद्ृद्ध त् दद्ृ द्ृत्द; ठ्ठदड्ड ध्रण् ण्ड्ढ द्रठ्ठद्धठ्ठड्ढड्डत्ह त् दद्ृ द्ृत्द. ढ त्द्वठ्ठत्द्ृद त् हद्धड्ढठ्ठड्ढड्ड, ड्डड्ढढत्दत्ड्ढथ् ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् द्ृ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ड्ढ ण्ड्ढ डड्ढदड्ढढत्. क्ष्द्ृद्ध ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढड्ढ ण्त्द, हठ्ठद त्दड्ढद्धध्ड्ढदड्ढ ठ्ठदड्ड ठ्ठ ण्ठ्ठ ध्रड्ढ दड्ढड्ढड्ड ण्ड्ढ ढद्वदड्ड ठ्ठदड्ड ध्रड्ढ दड्ढड्ढड्ड ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ्. क्ष्त्द्ध द्ृढ ठ्ठथ्थ्, ड्ढध्ड्ढद्धद्ृदड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ्. व्द्व ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ठ्ठथ्द्ृदड्ढ ध्रत्थ्थ् दद्ृ ण्ड्ढथ्द्र. ण्द्धद्ृद्वण् ण्ड्ढ ध्रत्थ्थ् द्ृ ध्रद्ृद्ध, ध्रड्ढ द्व द्ृडत्थ्त्ड्ढ द्वढढत्हत्ड्ढद द्ृदड्ढ. ण्ड्ढद, च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड व्त्थ्थ् ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठ द्धड्ढठ्ठथ्त्.
ढ हद्ृद्वद्धड्ढ, ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड, ण्त् व्त्थ्थ् ण्द्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ठ्ठहहड्ढद्रड्ढड्ड त्द द्रद्धत्दहत्द्रथ्ड्ढ. ण्त् त् द्ृदड्ढ ण्त्द. ठ्ठ त्थ्थ् द्वदण्ठ्ठद्रद्र डड्ढहठ्ठद्वड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् त् ड्ढध्ड्ढद्धडद्ृड्ड दड्ढड्ढड्ड. ण्ड्ढद्धड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ डड्ढड्ढद द्वहण् द्ृद्धड्ढ द्रठ्ठद्धत्हत्द्रठ्ठत्द्ृद ढद्ृद्ध ण्ड्ढ द्वद्रद्रद्ृद्ध ठ्ठदड्ड ढद्ृद्ध त्द्रथ्ड्ढड्ढदठ्ठत्द्ृद द्ृढ ण्त् व्त्थ्थ्. एदध्रठ्ठ, च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड, द्ृद्व ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्डद्ृदड्ढ ठ्ठ द्ृद्ृड्ड ण्त्द. द्ृद्व ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृद्रड्ढदड्ढड्ड द्ृद्वद्ध ड्ढड्ढ. ज़्ड्ढ ठ्ठड्ढ त् ठ्ठ ठ्ठ हण्ठ्ठथ्थ्ड्ढदड्ढ. द्वद्रद्रद्ृद्ध ण्ड्ढ व्त्थ्थ् ढद्धद्ृ ण्ड्ढठ्ठद्ध. ध्रद्ृद्वथ्ड्ड द्धड्ढद्दद्वड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ ण्द्ृद. ग्ड्ढडड्ढद्ध द्ृ द्वद्रद्रद्ृद्ध.
ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ द्रड्ढहत्ठ्ठथ् ठ्ठद्रद्रड्ढठ्ठथ् द्ृ द्ृद्वद हद्ृथ्थ्ड्ढठ्ठद्वड्ढ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ण्द्ृद. ग्त्दत्ड्ढद्ध, द्ध. ङठ्ठठ्ठड्डद्ृ. ड्ढ द्व ठ्ठड्ढ ण्त् ठ्ठ ठ्ठद द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत् ठ्ठदड्ड डद्धत्द द्ृद्व ठ्ठ व्त्थ्थ् ठ्ठदड्ड ड्ढड्ढ ण्ठ्ठ ड्ढध्ड्ढद्ध दड्डत्ठ्ठद, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ण्ड्ढ थ्त्ध्ड्ढ त्द ठ्ठ द्ृध्रद, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ण्ड्ढ थ्त्ध्ड्ढ त्द ठ्ठ द्धद्वद्धठ्ठथ् ड्ढ द्वद्र, थ्ड्ढ ण्ड्ढ ड्ढ ण्ड्ढ द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड त्दत्द्व ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ. ज़्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढड्ड द्ृद्वद्ध ड्ढहण्दत्द्दद्वड्ढ. ज़्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ध्रत्द्रड्ढड्ड द्ृद्व ण्ड्ढ ठ्ठथ्थ्द्रद्ृन्. ज़्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृत्द द्ृ ध्रत्द्रड्ढ द्ृद्व ण्ड्ढ द्रद्ृथ्त्द्ृ. ज़्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ध्रत्द्रड्ढ द्ृद्व ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ त्दढड्ढहत्द्ृद्व ड्डत्ड्ढठ्ठड्ढ हद्ृध्ड्ढद्धड्ढड्ड द्वदड्डड्ढद्ध ण्ड्ढ त्द्वदत्ठ्ठत्द्ृद हण्ड्ढड्ढ. ठ्ठ द्वद्धड्ढ, ध्रड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ड्डद्ृ ण्ठ्ठ. ध्ड्ढद ण्ड्ढ ड्डत्ड्ढठ्ठड्ढ थ्त्ड्ढ ठ्ठथ्ठ्ठद्धत्ठ्ठ, द्वडड्ढद्धहद्वथ्द्ृत् ठ्ठदड्ड द्ृण्ड्ढद्ध ड्डत्ड्ढठ्ठड्ढ ठ्ठद्धड्ढ डड्ढत्द डद्धद्ृद्वण् ड्डद्ृध्रद. त् ठ्ठथ्द्ृ ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ द्धत्द्र द्ृध्ड्ढद्ध ण्ड्ढ. ठ्ठ द्वद्धड्ढ ध्रड्ढ ध्रत्थ्थ् ध्रत्द. व्द्व, ध्रड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ ण्ड्ढ त्दड्ड ठ्ठदड्ड ध्रड्ढ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ ण्ड्ढ ड्डड्ढड्डत्हठ्ठत्द्ृद द्ृ ठ्ठहहड्ढद्र च्ण्द्धत् ङड्ढड्डड्ड व्त्थ्थ् ठ्ठदड्ड त्द्रथ्ड्ढड्ढद त् त्द द्धद्वड्ढ द्रत्द्धत्.
च्द्वद्रद्रद्ृद्धत्द ण्त् व्त्थ्थ् द्ृदहड्ढ ठ्ठठ्ठत्द ण्ठ्ठद द्ृद्व ध्ड्ढद्ध द्वहण् ढद्ृद्ध त्ध्त्द ड्ढ ठ्ठद द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत्. ण्ठ्ठद द्ृद्व.
(ड्ढदड्ड) १७४७ ण्द्ृद्वद्ध ।१३ घ्ङक्ष्. ग्. ङएग्एएच्च् (घ्ग़्ङङ): ण्ठ्ठद द्ृद्व ग्द्ध. ण्ठ्ठत्द्धठ्ठद, च्त्द्ध, ढद्ृद्ध ण्ड्ढ द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत् त्ध्ड्ढद द्ृ ड्ढ द्ृ द्रड्ढठ्ठ द्ृद ण्त् त्द्रद्ृद्धठ्ठद व्त्थ्थ् द्ृध्ड्ढड्ड ड च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड. ठ्ठथ्द्ृ द्ृत्द द्ृण्ड्ढद्ध ढद्धत्ड्ढदड्ड ध्रण्द्ृ ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठद्रद्रद्धड्ढहत्ठ्ठड्ढड्ड च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड ढद्ृद्ध डद्धत्दत्द ण्त् एड्ढदड्डड्ढद व्त्थ्थ्. ग् द्ृदथ् ढड्ढड्ढथ्त्द त् ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ण्त् व्त्थ्थ् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ हद्ृदड्डत्त्द्ृद द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड ढद्ृद्ध त्द्रद्धद्ृध्त्द ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व द्ृढ ण्ड्ढ हद्ृद्वदद्ध. ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व द्ृढ ठ्ठ हद्ृद्वदत् द्ृद्ध ठ्ठ हत्त्ड्ढद द्ृद्ध ठ्ठ दठ्ठत्द्ृद ड्डड्ढद्रड्ढदड्ड द्वद्रद्ृद ध्ठ्ठद्धत्द्ृद्व ड्डड्ढड्ढद्धत्दठ्ठद. ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ड्ढहद्ृदद्ृत्ह ड्डड्ढड्ढद्धत्दठ्ठद, ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ द्ृहत्ठ्ठथ् ड्डड्ढड्ढद्धत्दठ्ठद, ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ड्ढध्ड्ढद द्रद्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ड्डड्ढड्ढद्धत्दठ्ठद; ठ्ठदड्ड ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठद्धड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्डड्ढड्ढद्धत्दठ्ठद. ख्द्व ड डद्धत्दत्द ठ्ठद ठ्ठड्ढदड्डड्ढद द्ृ ण्ड्ढ त्द्धड्ढहत्ध्ड्ढ घ्द्धत्दहत्द्रथ्ड्ढ द्ृढ च्ठ्ठड्ढ घ्द्ृथ्त्ह, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध त् ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्रद्ृत्डथ्ड्ढ ढद्ृद्ध द्व द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ठ्ठ ण्द्ृथ्त्त्ह ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् त्द ण्ड्ढ हद्ृद्वदद्ध, द्ृद्ध, ठ्ठ च्ण्द्धत् ण्ठ्ठदड्डद्धठ्ठद्रद्रठ्ठद ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ध्रड्ढ द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढ ण्ड्ढ द्रद्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ध्रत्थ्थ् द्ृ ठ्ठद्वड्ढद ण्ड्ढ ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ.
ण्ड्ढ ठ्ठड्ढदड्डड्ढद द्ृध्ड्ढड्ड ड च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड द्ृद्वहण्ड्ढ द्वद्रद्ृद द्ृदथ् द्ृदड्ढ ठ्ठद्रड्ढह द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्, दठ्ठड्ढथ् ण्ड्ढ हद्वद्धठ्ठत्ध्ड्ढ ठ्ठद्रड्ढह द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्. व्द्व ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ द्रद्धद्ृद्ृत्ध्ड्ढ ठ्ठद्रड्ढह द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्, द्रद्धड्ढध्ड्ढदत्ध्ड्ढ ठ्ठद्रड्ढह द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्. दथ् ध्रण्ड्ढद द्ृद्व ठ्ठड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ ण्द्धड्ढड्ढ ठ्ठद्रड्ढह, हठ्ठद ण्ड्ढद्धड्ढ डड्ढ ठ्ठ ढद्वथ्थ्-ढथ्ड्ढड्डड्ढड्ड ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ. ण्ड्ढद्धड्ढढद्ृद्धड्ढ, ध्रण्ड्ढद ध्रड्ढ ठ्ठथ् त्द ड्ढद्ध द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्हठ्ठद्धड्ढ ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद, ध्रड्ढ द्व थ्द्ृद्ृ ठ्ठ ण्ड्ढ दड्ढहड्ढठ्ठद्ध हद्ृदड्डत्त्द्ृद ठ्ठ ध्रड्ढथ्थ् ठ्ठ ण्ड्ढ द्वढढत्हत्ड्ढद हद्ृदड्डत्त्द्ृद द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड ढद्ृद्ध त्. ज़्ण्त्थ्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढड्ढ ध्रत्ण् च्ण्द्धत् च्द्वड्डण्ठ्ठठ्ठद्धठ्ठ ङड्ढड्डड्ड ण्ठ्ठ ण्त् व्त्थ्थ् द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ढद्ृद्ध ण्ड्ढ दड्ढहड्ढठ्ठद्ध हद्ृदड्डत्त्द्ृद ढद्ृद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद, डद्व त् ड्डद्ृड्ढ दद्ृ द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ण्ड्ढ द्वढढत्हत्ड्ढद हद्ृदड्डत्त्द्ृद द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड.
ड्डद्ृ ठ्ठद्धड्ढड्ढ ध्रत्ण् ण्त् द्ृद ण्ड्ढ द्रठ्ठण्ड्ढत्ह हद्ृदड्डत्त्द्ृद द्रद्धड्ढध्ठ्ठत्थ्त्द त्द ण्ड्ढ द्रद्धत्ठ्ठद्ध ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हड्ढदद्धड्ढ. ड्डद्ृ ठ्ठद्धड्ढड्ढ ध्रत्ण् ण्ड्ढ ध्त्ड्ढध्र ण्ठ्ठ ठ्ठडद्ृद्व ३०० द्ृ ४०० त्थ्थ्त्द्ृद द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ ढड्ढड्ढथ्त्द ण्ठ्ठ द्ृद्ृड्ड ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठध्ठ्ठत्थ्ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढ ठ्ठदड्ड द्दद्वठ्ठथ्त्ठ्ठत्ध्ड्ढ ड्ढद्धध्त्हड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ ठ्ठहहड्ढत्डथ्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढ. ण्ड्ढद्धड्ढ त् थ्ठ्ठद्धड्ढ-हठ्ठथ्ड्ढ द्रद्ृध्ड्ढद्ध, त्दद्ृद्धठ्ठदहड्ढ, द्दद्वठ्ठथ्द्ृद्ध, द्वदड्ढद्रथ्द्ृड्ढद, थ्ठ्ठह द्ृढ त्दहद्ृड्ढ, थ्ठ्ठह द्ृढ ड्ढद्रथ्द्ृड्ढद. एथ्थ् ण्ड्ढड्ढ हद्ृदद्धत्डद्वड्ढ द्ृ ण्ड्ढ थ्ठ्ठह द्ृढ द्ृद्ृड्ड ण्ड्ढठ्ठथ्ण् त्द ण्ड्ढ द्ृहत्ड्ढ.
(२/१७५०/ठ्ठद-ड) ए ठ्ठ द्धड्ढद्वथ् द्ृढ ण्त्, ड्डड्ढद्रत्ड्ढ ठ्ठथ्थ् द्ृद्वद्ध ड्ढढढद्ृद्ध ठ्ठ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद त्द ण्ड्ढ थ्ठ्ठ ५८ ड्ढठ्ठद्ध, ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व द्ृढ दड्डत्ठ्ठ द्ृड्डठ्ठ त् थ्द्ृध्रड्ढद्ध ठ्ठ हद्ृद्रठ्ठद्धड्ढड्ड द्ृ ठ्ठ एत्ठ्ठद हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ. ण्ड्ढ ध्ठ्ठथ्द्वड्ढ द्ृढ द्ृड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ त्दड्डत्हठ्ठद्ृद्ध द्ृड्डठ्ठ त् द्वहण् थ्ड्ढ ण्ठ्ठद ध्रण्ठ्ठ त् ध्रठ्ठ २५ ड्ढठ्ठद्ध ठ्ठद्ृ त्द ण्ड्ढ ठ्ठ एत्ठ्ठद हद्ृद्वदद्धत्ड्ढ. ध्ड्ढद द्ृड्डठ्ठ ण्ड्ढ त्दढठ्ठद द्ृद्धठ्ठथ्त् द्धठ्ठड्ढ, ण्ड्ढ ठ्ठड्ढद्धदठ्ठथ् द्ृद्धठ्ठथ्त् द्धठ्ठड्ढ, ण्ड्ढ ड्डड्ढठ्ठण् द्धठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड ध्ठ्ठद्धत्द्ृद्व द्ृण्ड्ढद्ध त्दड्डत्हठ्ठद्ृद्ध द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्धड्ढ थ्ठ्ठत्द ढठ्ठद्ध डड्ढण्त्दड्ड ण्ड्ढ त्थ्थ्ड्ढदत्द्व ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृठ्ठथ् ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्रद्व डड्ढढद्ृद्धड्ढ द्व द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ.
ड्डद्ृ ठ्ठद्धड्ढड्ढ ध्रत्ण् ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढड्ढ ण्त्द, डद्व द्व ड द्रद्धद्ृध्त्ड्डत्द ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ ठ्ठथ्द्ृदड्ढ, ध्रड्ढ ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ द्ृत्द द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ड्ढठ्ठथ्ण् ढद्ृद्ध एथ्थ् द्ृद्ध द्वढढत्हत्ड्ढद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व ढद्ृद्ध ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ. ज़्ण्ठ्ठ ध्रड्ढ द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढ द्ृड्डठ्ठ त् द्ृद्धड्ढ द्ृढ ढद्वदड्डत्द, ध्रण्ठ्ठ ध्रड्ढ द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढ द्ृड्डठ्ठ ठ्ठद्धड्ढ त्ठ्ठत्दठ्ठत्ध्ड्ढ द्रद्ृथ्त्हत्ड्ढ ठ्ठदड्ड द्रद्धद्ृद्धठ्ठड्ढ, द्रद्धठ्ठठ्ठत्ह द्रद्ृथ्त्हड्ढ ठ्ठदड्ड द्रद्धद्ृद्धठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृद्धड्ढ ण्ठ्ठद ठ्ठदण्त्द ड्ढथ्ड्ढ, ध्रड्ढ द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढ ण्ड्ढ द्रद्ृथ्त्त्हठ्ठथ् ध्रत्थ्थ्, ठ्ठ ण्ड्ढ ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड.
द्ृड्डठ्ठ ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ त् द्ृदड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्धड्ढ च्ठ्ठड्ढ ड्ढहद्ृदद्ृत्हठ्ठथ्थ्, डद्व त् त् द्ृदड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्रद्धद्ृद्धड्ढत्ध्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ द्ृहत्ठ्ठथ्थ्. द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ठ्ठ द्वदत्द्दद्वड्ढ द्ृड्डड्ढथ् ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ड्ढहद्ृदद्ृत्ह ठ्ठदड्ड द्ृहत्ठ्ठथ् ढठ्ठहद्ृद्ध हठ्ठद डद्धत्द ठ्ठडद्ृद्व ठ्ठ ध्ड्ढद्ध ण्त्ण् ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व. ण्ड्ढ ज़्द्ृद्धथ्ड्ड ड्ढठ्ठथ्ण् द्धठ्ठदत्ठ्ठत्द्ृद द्ृड्डठ्ठ हत्ड्ढ ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ ठ्ठ ण्ड्ढ हद्ृद्वदद्ध द्ृड्डड्ढथ् द्ृढ ठ्ठ च्ठ्ठड्ढ ध्रण्ड्ढद्धड्ढ ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व त् ध्ड्ढद्ध ण्त्ण्. ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्द्ृध्रद ण्ठ्ठ त् हठ्ठद डड्ढ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ड ण्ठ्ठ त्द ड्ढध्ड्ढद्ध द्रठ्ठदहण्ठ्ठठ्ठ, ण्ड्ढद्धड्ढ त् ठ्ठ घ्द्धत्ठ्ठद्ध ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढदद्धड्ढ ड्ढद्धध्ड्ढड्ड ड द्ृद्ृड्ड द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ. ग़्द्ृध्र ण्त् ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ढद ण्ठ्ठ हद्ृड्ढ दद्ृ ड ठ्ठद ठ्ठड्ढदड्डड्ढद द्ृ ण्ड्ढ द्ृदत्द्वत्द्ृद, डद्व ड द्ृहत्ठ्ठथ् हद्ृत्ड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद, ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध त् ध्रठ्ठ ठ्ठ द्ृदद्धड्ढ () द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद द्ृद्ध ठ्ठ द्ृद्वदत् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद. ण्ड्ढ त्दद्धठ्ठत्दड्ढड्ड द्धद्वण् द्ृढ ख़्ड्ढद्धठ्ठथ्ठ्ठ" हद्वथ्द्वद्धड्ढ त् ण्ठ्ठ ण्ड्ढ ठ्ठदड्ड ढद्ृद्ध द्ृहत्ठ्ठथ् ड्ढद्दद्वत्, ड्ढद्दद्वठ्ठथ्त् द्ृढ द्ृद्रद्रद्ृद्धद्वदत्त्ड्ढ, ध्रण्त्हण् ठ्ठद्धड्ढ ठ्ठथ्थ् दद्ृ द्रद्धठ्ठहत्ड्ढड्ड ड्ढध्ड्ढद ड ण्ड्ढ दड्डत्ठ्ठद द्ृदत्द्वत्द्ृद. त् ठ्ठ च्ठ्ठड्ढ ड त्ड्ढथ्ढ. त् द्रड्ढद्ध ड्ढ ठ्ठ ड्ढद्रठ्ठद्धठ्ठड्ढ च्ठ्ठड्ढ त्द ण्ड्ढ द्ृड्डड्ढथ् द्ृढ द्ृहत्ठ्ठथ् ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद.
ण्ड्ढद्धड्ढढद्ृद्धड्ढ, ड्ढद्धड्ढ हद्ृदत्द्वत्द्ृदठ्ठथ् द्वठ्ठद्धठ्ठदड्ढड्ढ द्ृद्ध ठ्ठड्ढदड्डड्ढद ठ्ठद्धड्ढ दद्ृ द्ृत्द द्ृ डड्ढ द्वढढत्हत्ड्ढद द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ण्ड्ढ द्ृठ्ठथ् द्ृढ ड्ढठ्ठथ्ण् ढद्ृद्ध एथ्थ् त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध. ग्द्ृद्धड्ढ द्ृ, ण्त् ठ्ठड्ढदड्डड्ढद द्ृद्वहण्ड्ढ द्वद्रद्ृद ण्ड्ढ त्द्धड्ढहत्ध्ड्ढ घ्द्धत्दहत्द्रथ्ड्ढ द्ृढ च्ठ्ठड्ढ घ्द्ृथ्त्ह ठ्ठदड्ड दद्ृ ण्ड्ढ क्ष्द्वदड्डठ्ठड्ढदठ्ठथ् ङत्ण्. घ्ड्ढद्धण्ठ्ठद्र त्ढ ण्ड्ढ ण्ठ्ठड्ड डद्धद्ृद्वण् ण्त् ठ्ठड्ढदड्डड्ढद व्त्थ्थ् द्वदड्डड्ढद्ध ण्ड्ढ हठ्ठड्ढद्ृद्ध द्ृढ क्ष्द्वदड्डठ्ठड्ढदठ्ठथ् ङत्ण्, ण्ड्ढद ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ण्ठ्ठड्ड दद्ृ ड्ढहठ्ठद्रड्ढ ड्ढन्हड्ढद्र द्ृ त्द्रथ्ड्ढड्ढद ठ्ठदड्ड द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ डठ्ठत्ह ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ. छदढद्ृद्धद्वदठ्ठड्ढथ्, ण्ड्ढ ण्ठ्ठड्ड डद्धद्ृद्वण् त् द्वदड्डड्ढद्ध ण्ड्ढ त्द्धड्ढहत्ध्ड्ढ घ्द्धत्दहत्द्रथ्ड्ढ द्ृढ च्ठ्ठड्ढ घ्द्ृथ्त्ह ध्रण्त्हण् ठ्ठद्धड्ढ ड्ढद्धड्ढ ध्रत्ण्ढद्वथ् ण्त्दत्द. ण्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ठ्ठ ण्त्द ण्ठ्ठ त् ध्रत्थ्थ् द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ ठ्ठथ्थ् ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ द्ृ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ, डद्व ध्रण्ठ्ठ त् ण्ड्ढ द्वठ्ठद्धठ्ठदड्ढड्ढ ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्रद्धद्ृध्त्ड्डड्ढ? ण्ड्ढद्धड्ढढद्ृद्धड्ढ, त्दड्ढठ्ठड्ड द्ृढ ठ्ठद्रद्रद्धद्ृठ्ठहण्त्द ण्ड्ढ द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ ण्द्धद्ृद्वण् ण्ड्ढ हद्ृदत्द्वत्द्ृदठ्ठथ् द्धद्ृद्वड्ढ, ध्रद्ृद्वथ्ड्ड ढड्ढड्ढथ् ण्ठ्ठ ण्त् द्रद्धद्ृडथ्ड्ढ ण्ठ्ठ द्ृ डड्ढ ठ्ठड्डड्डद्धड्ढड्ढड्ड ड ठ्ठ हद्ृत्ड्ढड्ड द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद. ढ द्ृद्व ठ्ठ ड्ढ ध्रण्ड्ढण्ड्ढद्ध ण्त् हद्ृत्ड्ढद त् ण्ड्ढद्धड्ढ त्द ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद द्ृड्डठ्ठ, ठ्ठदध्रड्ढद्ध ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ "ड्ढ". ण्ड्ढ द्रद्धड्ढड्ढद छघ्ए द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ण्ड्ढठ्ठड्डड्ढड्ड ड द्ध. ग्ठ्ठदद्ृण्ठ्ठद च्त्दण् त् हद्ृत्ड्ढड्ड द्ृ द्ृहत्ठ्ठथ् ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध. द्ृद्व थ्द्ृद्ृ ठ्ठ ण्ड्ढ ध्ठ्ठद्धत्द्ृद्व थ्ड्ढत्थ्ठ्ठत्द्ृद डद्धद्ृद्वण् त्द ण्ड्ढ थ्ठ्ठ १८ द्ृदण्. क्ष्द्ृद्ध ण्ड्ढ ढत्द्ध त्ड्ढ त्द ण्ड्ढ ठ्ठददठ्ठथ् द्ृढ ण्त् हद्ृद्वदद्ध, ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ण्ठ्ठ डद्धद्ृद्वण् ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ङद्वद्धठ्ठथ् द्रथ्द्ृड्ढद द्वठ्ठद्धठ्ठदड्ढड्ढ व्त्थ्थ् ध्रण्त्हण् ड्ढदद्वद्धड्ढ ड्ढद्रथ्द्ृड्ढद ठ्ठ ठ्ठ क्ष्द्वदड्डठ्ठड्ढदठ्ठथ् ङत्ण् ठ्ठदड्ड ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ त्द ड्ढध्ड्ढद्ध ण्द्ृद्वड्ढण्द्ृथ्ड्ड ध्रत्थ्थ् ड्ढ ठ्ठद त्दहद्ृड्ढ. ढ ण्ड्ढ त्दहद्ृड्ढ त् ण्ड्ढद्धड्ढ, दद्वद्धत्त्द्ृद त् ण्ड्ढद्धड्ढ, ढद्ृद्ृड्ड त् ण्ड्ढद्धड्ढ ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ण्त्ड्ढदड्ढ त् ण्ड्ढद्धड्ढ, ठ्ठदड्ड ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठद्व त्द्रद्धद्ृध्ड्ढ ठ्ठद्वद्ृठ्ठत्हठ्ठथ्थ्. ण्ड्ढद्धड्ढढद्ृद्धड्ढ, ण्ड्ढ द्रद्धद्ृद्ृड्ढड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् द्ृढ ण्ड्ढ द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ ड्डड्ढद्रड्ढदड्ड द्वद्रद्ृद ण्ड्ढड्ढ ढठ्ठहद्ृद्ध द्ृद ध्रण्त्हण् ण्ड्ढ द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद त् हद्ृदहड्ढदद्धठ्ठत्द द्ृड्डठ्ठ.
ज़्ड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ठ्ठ ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्दत्ड्ढद्ध ध्रण्द्ृ त् द्ृद्वद, ड्ढदड्ढद्धड्ढत्ह ठ्ठदड्ड हद्ृत्ड्ढड्ड द्ृ ड्ढठ्ठथ्ण् ढद्ृद्ध एथ्थ् त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध. ण्ड्ढ द्रठ्ठद्ध द्ृ ध्रण्त्हण् डड्ढ डड्ढथ्द्ृद ण्ठ्ठ त्ध्ड्ढद ठ्ठ हथ्ठ्ठद्धत्द्ृद हठ्ठथ्थ् ण्ठ्ठ ड्ढध्ड्ढद्ध हत्त्ड्ढद द्ृढ दड्डत्ठ्ठ द्ृड्डठ्ठ ण्द्ृद्वथ्ड्ड ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठ द्वहण् द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ठ्ठ ण्ड्ढ घ्द्धड्ढत्ड्डड्ढद द्ृढ दड्डत्ठ्ठ ण्ठ्ठ. ग़्द्ृ द्ृण्ड्ढद्ध द्रठ्ठद्ध त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड ण्ठ्ठ ण्ड्ढ हद्ृद्ृद ठ्ठद त्द ण्त् हद्ृद्वदद्ध ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ठ्ठहहड्ढत्डथ्ड्ढ द्ृ ठ्ठ द्वहण् द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हठ्ठद्धड्ढ ठ्ठ ण्ड्ढ घ्द्धड्ढत्ड्डड्ढद द्ृढ दड्डत्ठ्ठ, ण्ड्ढ ढत्द्ध हत्त्ड्ढद द्ृढ दड्डत्ठ्ठ, हठ्ठद ण्ठ्ठध्ड्ढ. त् द्ृद्वद्ध द्रठ्ठद्ध, त् त् ण्ड्ढ द्रठ्ठद्ध द्ृ ध्रण्त्हण् ण्ड्ढ ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्दत्ड्ढद्ध डड्ढथ्द्ृद ध्रण्त्हण् ण्ठ्ठ ठ्ठत्ड्ड ण्त्. द्ृद्व हठ्ठद द्धड्ढध्त्ड्ढध्र ण्ड्ढ द्रद्धद्ृद्धड्ढ द्ृढ ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्दत्द्ध त्द ण्ड्ढ थ्ठ्ठ १८ द्ृदण् ठ्ठदड्ड थ्द्ृद्ृ ठ्ठ ण्ड्ढ ध्रठ्ठ त्द ध्रण्त्हण् ण्ड्ढ ण्ठ्ठ डड्ढड्ढद ड्डत्ड्ढत्दठ्ठत्द ण्ड्ढ दद्ृध्रथ्ड्ढड्डड्ढ ठ्ठडद्ृद्व ण्ड्ढठ्ठथ्ण्, ठ्ठद्वड्ढदत्द ण्ड्ढ ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् त्द ण्ड्ढ हद्ृद्वदद्ध. ठ्ठद ठ्ठदद्ृदड्ढ द्वद्रड्ढह ण्ठ्ठ ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ध्रत्ण् ण्ठ्ठ हद्ृत्ड्ढद ध्रत्थ्थ् दद्ृ डड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ण्ड्ढ ड्डड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढद द्ृठ्ठथ् द्ृढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण्?
ड्डद्ृ ढड्ढड्ढथ् ण्ठ्ठ ध्रड्ढ ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ द्ृद्धड्ढ, डद्व ध्रड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ त् ध्रत्ण् ण्त् त्दड्ड द्ृढ ठ्ठ हद्ृत्ड्ढद द्धठ्ठण्ड्ढद्ध ण्ठ्ठद ण्द्धद्ृद्वण् ण्ड्ढ हद्ृदत्द्वत्द्ृदठ्ठथ् द्धद्ृद्वड्ढ. ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद त् द्धद्वद द्ृद ण्ड्ढ द्रद्धड्ढत्ड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ. ण्ड्ढ द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ ण्ठ्ठ हद्ृत्ड्ढड्ड ढद्ृद्ध ठ्ठ दठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् द्ृद्ृड्ढड्ड ग़्द्वद्धत्त्द्ृद्व क्ष्द्ृद्ृड्ड घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ.
(द२/१७५५/ण्-डप) ण्ड्ढ द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ ड्ढदत्द्ृदड्ढड्ड ण्ठ्ठ त् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड त्दहद्धड्ढठ्ठड्ढ ण्ड्ढ ड्ढन्द्रड्ढदड्डत्द्वद्धड्ढ द्ृद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठ ठ्ठ द्रद्धद्ृद्रद्ृद्धत्द्ृद द्ृढ घ् ढद्धद्ृ ध्रद्ृ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृ ण्द्धड्ढड्ढ द्रड्ढद्ध हड्ढद ठ्ठदड्ड दद्ृ द्ृ ढद्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ध हड्ढद, ठ्ठ च्ण्द्धत् ण्ठ्ठदड्डद्धठ्ठद्रद्रठ्ठद ठ्ठत्ड्ड. ज़्ड्ढ ध्रत्थ्थ् ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ढद्ृद्वद्ध द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृदथ् ठ्ठढड्ढद्ध २० ड्ढठ्ठद्ध. क्ष्द्ृद्ध ण्ड्ढ त्ड्ढ डड्ढत्द, ध्रड्ढ ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ ण्ठ्ठद्रद्र त्ढ त् त् त्दहद्धड्ढठ्ठड्ढड्ड ढद्धद्ृ ध्रद्ृ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृ ण्द्धड्ढड्ढ द्रड्ढद्ध हड्ढद. ण्ड्ढ हद्ृत्ड्ढद द्ृ त्दहद्धड्ढठ्ठड्ढ त् ढद्धद्ृ ध्रद्ृ द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृ ण्द्धड्ढड्ढ द्रड्ढद्ध हड्ढद ण्ठ्ठ डड्ढड्ढद ठ्ठड्डड्ढ.
ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ण्ठ्ठ डद्धद्ृद्वण् ठ्ठ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् दद्वद्धठ्ठदहड्ढ च्हण्ड्ढड्ढ ढद्ृद्ध ण्ड्ढ द्रद्ृद्ृद्ध द्रड्ढद्ृद्रथ्ड्ढ. ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद ण्ठ्ठ डद्धद्ृद्वण् ठ्ठ दद्वडड्ढद्ध द्ृढ द्ृण्ड्ढद्ध हण्ड्ढड्ढ ध्रण्त्हण् ध्रद्ृद्वथ्ड्ड हद्ृदद्धत्डद्वड्ढ द्ृ ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् द्ृढ हण्त्थ्ड्डद्धड्ढद ठ्ठदड्ड ध्रद्ृड्ढद. ण्ड्ढद्धड्ढढद्ृद्धड्ढ, ण्ड्ढ द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ ण्ठ्ठ हद्ृत्ड्ढड्ड ण्त्, ठ्ठदड्ड ठ्ठ ठ्ठ ड्ढडड्ढद्ध द्ृढ ण्ड्ढ छघ्ए, हठ्ठद ठ्ठ ण्ठ्ठ ण्त् द्ृध्ड्ढद्धदड्ढद त् त्दहड्ढद्धड्ढ त्द त्द्रथ्ड्ढड्ढदत्द ठ्ठथ्थ् ण्ड्ढ द्रद्धद्ृध्त्त्द्ृद द्ृढ ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् द्ृद्ृद ग्त्दत्द्व घ्द्धद्ृद्धठ्ठड्ढ.
ग्द्ृद्धड्ढ ण्ठ्ठद ठ्ठदण्त्द ड्ढथ्ड्ढ, त्द द्ृद्धड्डड्ढद्ध द्ृ ठ्ठद्वड्ढद ण्ड्ढ ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ त्द ण्ड्ढ द्धद्वद्धठ्ठथ् ठ्ठद्धड्ढठ्ठ, ण्ड्ढ ण्द्ृद. ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्दत्ड्ढद्ध द्ृद ण्ड्ढ ठ्ठड्डध्त्हड्ढ द्ृढ ण्ड्ढ ण्द्ृद. घ्द्धत्ड्ढ ग्त्दत्ड्ढद्ध ण्ठ्ठ त्द्रथ्ड्ढड्ढदड्ढड्ड ठ्ठ दद्ृध्ड्ढथ्, द्वदद्रद्धड्ढहड्ढड्डड्ढदड्ढड्ड च्हण्ड्ढड्ढ, "ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ङद्वद्धठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद". ढ द्ृद्व ण्ठ्ठड्ड द्ृदड्ढ त्दद्ृ ण्ड्ढ ड्डड्ढठ्ठत्थ् द्ृढ ण्त् ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद, ध्रण्ठ्ठड्ढध्ड्ढद्ध द्ृद्व ण्ठ्ठध्ड्ढ द्ृद्वण् त्द ण्ड्ढ एड्ढदड्डड्ढद व्त्थ्थ्, ध्रण्ठ्ठड्ढध्ड्ढद्ध ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ द्ृद्व ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठड्ढड्ड ढद्ृद्ध ठ्ठद्धड्ढ ढद्ृद्वदड्ड त्द ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद घ्द्ृथ्त्ह. ण्ठ्ठ द्ृ ठ्ठ द्धठ्ठड्ढ ढद्ृद्ध त्द्रद्धद्ृध्त्द ठ्ठदड्ड द्धड्ढदण्ड्ढदत्द ण्ड्ढ द्वड-हड्ढदद्धड्ढ. ठ्ठ:
"ठ्ठहण् द्वड-हड्ढदद्धड्ढ ध्रत्थ्थ् ण्ठ्ठध्ड्ढ ठ्ठद द्वदत्ड्ढड्ड ढद्वदड्ड ढद्ृद्ध थ्द्ृहठ्ठथ् ठ्ठहत्द्ृद ठ्ठ ण्ड्ढ द्धठ्ठड्ढ द्ृढ ङ. १०,००० द्रड्ढद्ध ठ्ठददद्व;
च्द्वद्रद्रथ् द्ृढ ड्ढड्ढदत्ठ्ठथ् ड्डद्धद्व, डद्ृण् ठ्ठथ्थ्द्ृद्रठ्ठण्त्ह ठ्ठदड्ड ठ्ठद्वद्धध्ड्ढड्डत्ह, द्ृ ण्ड्ढ द्वड-हड्ढदद्धड्ढ;
द हठ्ठड्ढ द्ृढ ठ्ठड्डड्डत्त्द्ृदठ्ठथ् द्ृद्वथ्ठ्ठ, द्वथ्त्-द्रद्वद्धद्रद्ृड्ढ ध्रद्ृद्धड्ढद्ध ठ्ठदड्ड द्ृण्ड्ढद्ध ध्रत्थ्थ् डड्ढ त्ध्ड्ढद ण्ड्ढ ढद्वदड्ड;"
ज़्त्ण् द्धड्ढठ्ठद्धड्ड द्ृ द्धड्ढदण्ड्ढदत्द द्ृढ घ्द्धत्ठ्ठद्ध ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढदद्धड्ढ, ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद ठ्ठ:
"ण्ड्ढद्धड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ ठ्ठड्डड्ढद्दद्वठ्ठड्ढ ठ्ठदड्ड द्धड्ढद्वथ्ठ्ठद्ध द्वद्रद्रथ् द्ृढ ड्ढड्ढदत्ठ्ठथ् द्दद्वठ्ठथ्त् ड्डद्धद्व ठ्ठदड्ड ड्ढद्दद्वत्द्रड्ढद द्ृ घ्;
घ्द्धद्ृध्त्त्द्ृद द्ृढ २४-ण्द्ृद्वद्ध ड्ढद्धध्त्हड्ढ त्द ५० द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ घ् ड ठ्ठड्डड्डद्धड्ढत्द ण्ड्ढ ण्द्ृद्धठ्ठड्ढ द्ृढ ड्डद्ृहद्ृद्ध, ड्ढद्रड्ढहत्ठ्ठथ्थ् त्द ण्त्ण् ढद्ृहद्व च्ठ्ठड्ढ;
डड्ढद्धध्ठ्ठदहड्ढ द्ृढ ठ्ठदड्डठ्ठद्धड्ड द्धड्ढठ्ठड्ढद द्वत्ड्डड्ढथ्त्दड्ढ ठ्ठदड्ड द्रद्धद्ृद्ृहद्ृथ्;
छद्रद्धठ्ठड्डठ्ठत्द्ृद द्ृढ १०० द्रड्ढद्ध हड्ढद घ् ढद्ृद्ध २४-ण्द्ृद्वद्ध द्धड्ढढड्ढद्धद्धठ्ठथ् ड्ढद्धध्त्हड्ढ;
घ्द्धद्ृध्त्त्द्ृद द्ृढ ठ्ठ ड्ढहद्ृदड्ड ड्डद्ृहद्ृद्ध ठ्ठ घ् थ्ड्ढध्ड्ढथ् -- द्ृदड्ढ ठ्ठथ्ड्ढ ठ्ठदड्ड द्ृदड्ढ ढड्ढठ्ठथ्ड्ढ -- ध्रद्ृद्वथ्ड्ड डड्ढ द्वदड्डड्ढद्धठ्ठड्ढद द्ृद ण्ड्ढ डठ्ठत् द्ृढ ढड्ढथ् दड्ढड्ढड्ड;
ज़्त्ण् द्धड्ढठ्ठद्धड्ड द्ृ ण्ड्ढ हद्ृद्वदत् ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हड्ढदद्धड्ढ, ण्ड्ढद्धड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ द्ृद्रड्ढद्धठ्ठत्द्ृदठ्ठथ्त्ठ्ठत्द्ृद द्ृढ ३,२२२ ड्ढन्त्त्द हद्ृद्वदत् ण्ड्ढठ्ठथ्ण् हड्ढदद्धड्ढ ठ्ठ २४-ण्द्ृद्वद्ध ढत्द्ध द्धड्ढढड्ढद्धद्धठ्ठथ् ण्द्ृद्रत्ठ्ठथ्;
ग़्ड्ढध्र दड्डत्ठ्ठद द्रद्वडथ्त्ह ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ठ्ठदड्डठ्ठद्धड्ड ड्ढत्द दद्ृद्ध ढद्ृद्ध त्दढद्धठ्ठद्धद्वहद्वद्धड्ढ, ठ्ठढढ, ड्ढद्दद्वत्द्रड्ढद, ठ्ठदठ्ठड्ढड्ढद, ड्ढह."
एथ्थ् ण्ठ्ठ द्ृद्व ण्ठ्ठध्ड्ढ ध्रत्ण्ड्ढड्ड ढद्ृद्ध त्द ण्ड्ढ एड्ढदड्डड्ढद व्त्थ्थ् त् ढद्ृद्वदड्ड त्द ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ङद्वद्धठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद. ण्त् व्द्वड्डड्ढ, ण्ठ्ठ त्, २००५-०६ व्द्वड्डड्ढ, ण्ठ्ठ त्दहद्धड्ढठ्ठड्ढड्ड ण्ड्ढ द्ृद्वथ्ठ्ठ द्ृद ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढहद्ृद्ध ड २० द्रड्ढद्ध हड्ढद. ध्रड्ढद द्रड्ढद्ध हड्ढद द्ृढ त्दहद्धड्ढठ्ठड्ढ त्द ण्ड्ढ ण्ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढन्द्रड्ढदड्डत्द्वद्धड्ढ द्ृ ड्ढड्ढ ण्ड्ढ हद्ृत्ड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ङद्वद्धठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद त् दद्ृध्रण्ड्ढद्धड्ढ द्वदण्ड्ढठ्ठद्धड्ड द्ृढ त्द ण्ड्ढ व्द्वड्डड्ढ ण्त्द्ृद्ध द्ृढ दड्डत्ठ्ठ, ठ्ठ ठ्ठद द्रद्ृत्द द्ृढ त्ड्ढ. त्ण्ड्ढड्ढद च्ठ्ठड्ढ ध्रत्थ्थ् डड्ढ डड्ढदड्ढढत्ड्ढड्ड, डद्व ण्ड्ढ ड्ढदत्द्धड्ढ हद्ृद्वदद्ध ध्रत्थ्थ् ण्ठ्ठध्ड्ढ ण्ड्ढ ढद्ृहद्व द्ृढ ण्ड्ढ ग़्ठ्ठत्द्ृदठ्ठथ् ङद्वद्धठ्ठथ् ड्ढठ्ठथ्ण् ग्त्त्द्ृद. ज़्ड्ढ ध्रत्ण् ण्ठ्ठ ण्त् ग्त्त्द्ृद ध्रड्ढद्धड्ढ ठ्ठडथ्ड्ढ द्ृ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढ ठ्ठथ्थ् ण्ठ्ठ त् द्धड्ढद्दद्वत्द्धड्ढड्ड द्ृ डड्ढ ठ्ठहण्त्ड्ढध्ड्ढड्ड.
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(ड्ढदड्ड) १७५९ बजे ।१४ कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : माननीय सभापति महोदय, मैं श्री सुधाकर रेड्डी, माननीय संसद सदस्य का ह्ृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि वह यह अमैन्डमैन्ट ४७(ए) -
"ण्ड्ढ च्ठ्ठड्ढ ण्ठ्ठथ्थ् ड्ढ द्वद्र द्ृदड्ढ घ्द्धत्ठ्ठद्ध ड्ढठ्ठथ्ण् ड्ढदद्धड्ढ त्द ड्ढध्ड्ढद्ध ध्त्थ्थ्ठ्ठड्ढ ध्रत्ण् ठ्ठथ्थ् डठ्ठत्ह ड्ढड्डत्हठ्ठथ् ढठ्ठहत्थ्त्त्ड्ढ."
इस बिल के माध्यम से संसद में लाये हैं। इसके साथ ही मैं उन्हें इस बात के लिए बधाई देता हूं कि यह बिल लाकर उन्होंने एक बहुत अच्छा कार्य ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के लिए किया है। माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी यहां मौजूद हैं। इस सदन के माध्यम से मैं उनसे अनुरोध करना चाहूंगा कि इसे केवल स्टेट तक सीमित न रखें, केन्द्र सरकार भी इस ओर ध्यान दे । मैं पहले भी एम.पी. रहा हूं और तब भी मैंने अपने विचार सदन में रखे थे।
(द्ृ२/१८००/ण्हड/द्ध) मैंने कहा था कि देश में नेशनल पालिसी फॉर हैल्थ केयर लाना काफी आवश्यक है। जैसा कि आपने इसमें लिखा भी है, आपने भारत सरकार की संचित नधि में से करीब १०० करोड़ रुपये का प्रावधान भी इसके लिए रखा है। ह्ल( व्यवधान)
ग्ङ. एङग्एग़् (च्ङ ङएङ एग्एग़्): त् ६ द्र.. दद्ृध्र. द्ृद्व ठ्ठ द्रथ्ड्ढठ्ठड्ढ हद्ृदत्दद्वड्ढ द्ृद्वद्ध द्रड्ढड्ढहण् दड्ढन् त्ड्ढ.
१८०० ण्द्ृद्वद्ध ण्ड्ढ द्ृ च्ठ्ठडण्ठ्ठ ण्ड्ढद ठ्ठड्डद्ृद्वद्धदड्ढड्ड त्थ्थ् थ्ड्ढध्ड्ढद द्ृढ ण्ड्ढ थ्द्ृह द्ृद ग्द्ृदड्डठ्ठ, ग़्द्ृध्ड्ढडड्ढद्ध २८, २००५/एद्धठ्ठण्ठ्ठठ्ठदठ्ठ ७, १९२७ (च्ठ्ठठ्ठ).