Lok Sabha Debates
Regarding Problems Being Faced By Farmers Particularly In Bihar And The Minimum ... on 28 November, 2000
Title: Regarding problems being faced by farmers particularly in Bihar and the minimum support price to be paid to the farmers.
12.05 hrs. MR. SPEAKER: Now, the House will take up the ‘Zero Hour’.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: At first we will take up the farmers’ issue and then flood.
… (Interruptions)
श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : अध्यक्ष महोदय, किसानों को मनिमम सपोर्ट प्राइस नहीं मिल रहा है। उनकी धान और मक्का को कोई आधे दाम पर भी नहीं पूछ रहा है। सरकार ने इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया है। मैं स्पेसीफिक उदाहरण देता हूं कि बिहार में सन् १९९७-९८ में एफ.सी.आई. ने १२३ क्रय केन्द्र खोले थे लेकिन इस साल अभी तक एक भी क्रय केन्द्र नहीं खुला है। एक छटांक अनाज भी किसानों से नहीं खरीदा गया है इसलिए किसान सड़कों पर उतर रहे हैं। वहां रास्ता जाम हो रहा है। अनाज को लोग जला रहे हैं। किसानों का बड़ा भारी आंदोलन होने जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि पंजाब के किसानों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वैसा व्यवहार देश भर के किसानों के साथ क्यों नहीं हो रहा है ? इसलिए किसानों का भविष्य खतरे में है। उनकी अगली खेती मारी जायेगी। इस पर सरकार को एक स्पेसीफिक वक्तव्य देना चाहिए। देश के तमाम किसान केरल से लेकर जम्मू तक के किसान जैसे बथुआ, कोकोनेट, तिलहन, दलहन, गेहूं, आलू, फूलगोभी, फल और सब्जी पैदा करने वाले सभी तरह के किसान तबाह हैं। उसके लिए सदन की एक समति बनाई जाये जिससे किसानों की समस्या का समाधान हो सके। मैं कहना चाहता हूं कि इन दो सवालों पर सरकार स्पष्ट रूप से बताये क्योंकि बिहार में धान और मक्का का किसान त्राहि-त्राहि कर रहा है। वहां आंदोलन शुरू हो गया है, रास्ता जाम हो रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि एफ.सी.आई. इस साल कितने क्रय केन्द्र खोलने वाली है ? वहां कागज-पर्चा आदि टांग देते हैं लेकिन बैंक क्रेडिट कार्ड नहीं देता। राज्य सरकारों के पास पूंजी नहीं है कि वे किसानों का अनाज खरीद सके इसलिए एफ.सी.आई. का जो काम है, वह उनको ही करना पड़ेगा। चारों तरफ अनाज रखा हुआ है। इन्होंने पी.डी.एस. को समाप्त कर दिया है। …( व्यवधान) लाखों टन अनाज एफ.सी.आई. के गोदाम में रखा हुआ है। …( व्यवधान) मेरा कहना है कि उसे आप तुरंत खाली करायें। यही मेरी प्रार्थना है।
MR. SPEAKER: Other Members have also to speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Madhavrao Scindia, you can speak before the Minister.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Rajesh Ranjan.
श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा (कनारा) : अध्यक्ष महोदय, परसों जब मोशन आया था तब इन्होंने वोट नहीं दिया था। …( व्यवधान) फिर आज क्यों यह बात कर रहे हैं। …( व्यवधान) They voted against the Motion which we brought here. When we brought the Motion on the other day they did not support it. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Yesterday there was a meeting.
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Our Members also were there. … (Interruptions) You must give an opportunity to the principal Opposition.
MR. SPEAKER: Yesterday they had given the notice. Yesterday we had a meeting. We decided that something has to be discussed.
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Shri Priya Ranjan Dasmunsi should have been informed about it. We are the principal Opposition Party. We had brought the Adjournment Motion. You must give us the first chance. You are calling others.
MR. SPEAKER: That is not the problem. Yesterday we had a meeting with the leaders. Shri Priya Ranjan Dasmunsi was also present.
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Why are you not giving us an opportunity?
MR. SPEAKER: I am calling you. I am giving a chance to you.
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : We have the largest number; we have l20 Members of Parliament.
MR. SPEAKER: I called his name.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Madhavrao Scindia, yesterday we had a meeting with the leaders and others. It was decided that about the farmers’ issue somebody should raise the matter. Some hon. Members have given notices today also. I will call you after them.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): You were so kind!.
Sir, you will allow other Members to speak including myself. Then, the hon. Minister will react. I think, Shri Rajesh Ranjan will speak definitely. … (Interruptions)
MR.SPEAKER: I am calling Shri Madhavrao Scindia. Shri Rajesh Ranjan to speak.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : But, first, you give a chance to the principal Opposition Party. … (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : This is not fair. … (Interruptions)
You said that Shri Raghuvansh Prasad Singh should speak first. After that we must get our turn. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is Zero Hour. Those who have given the notices, I am calling them. I am also calling you, please.
… (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Please consider what was decided yesterday. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please cooperate with the Chair.
… (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Sir, we have to be called on Party lines. We are 150 MPs sitting on this side. … (Interruptions)
MR.SPEAKER: That is not the good practice.
… (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : That has to be respected. … (Interruptions) The numbers have to be respected. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am also calling you after Shri Rajesh Ranjan.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : It is the established practice of the House that the principal Opposition Party should be given the highest importance. … (Interruptions) Sir, how can you ignore that thing? … (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Please go as per the convention. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have called another Member.
… (Interruptions)
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (पूर्णिया) : लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था सदन है और यहां देश के किसानों के सवाल को लेकर बहस हो रही है। इस देश का किसान देश की रीढ़ है और उसके बावजूद वह आत्महत्या करने पर उतारू है। आंध्रा प्रदेश हो या केरल, कई प्रदेशों में किसानों ने अपने सवाल को लेकर आत्महत्या की है। पंजाब में भी किसानों ने अपने सवाल को लेकर आत्महत्या की है। उसी में बिहार एक ऐसी जगह पर खड़ा है, एक तरफ बिहार का बंटवारा किया गया और दूसरी तरफ ३७ जिले जो बिहार में बचे हैं, बिहार में २७ जिले बाढ़ और सुखाड़ की चपेट में बर्बाद हो गए हैं। किसानों के पास सही रूप से अनाज उपजाने की कोई क्षमता नहीं रह गई है, किसान सम्पूर्ण रूप से अनाज उपजाने की ताकत नहीं रखता। जो किसान अनाज उपजाता है, उसे लेने वाली बिहार में आज कोई मंडी नहीं है। गुलाब बाग एक मंडी है जहां दो किसानों ने आत्महत्या कर ली। वे अपना अनाज लेकर गुलाब बाग मंडी गए थे। जब उनका अनाज नहीं बिका तो उन्होंने वहां आत्महत्या कर ली। सुबह उनकी लाश पाई गई। एफ.सी.आई. और नैफेड कहते हैं कि जब तक हमें ६७ प्रतिशत नहीं मिलेगा तब तक वहां का अनाज नहीं लेंगे, हमारे पास अनाज रखने की कोई व्यवस्था नहीं है जबकि बिहार में किसान मात्र ६४ प्रतिशत देने के लिए तैयार है और दूसरी तरफ १३ रुपये २० पैसे में खरीदारी के लिए तैयार है। मिल ३० रुपये से ३५ रुपये में खरीदने के लिए तैयार है। एफ.सी.आई. और नैफेड कहते हैं कि जब तक सरकार ३० रुपये से ३५ रुपये नहीं करेगी, तब तक हम किसानों का अनाज नहीं खरीदेंगे। शांता कुमार जी और नीतीश कुमार जी का बयान आया है कि बिहार में कई क्रय केन्द्र खुलेंगे। लेकिन आज तक न तो वहां एफ.सी.आई. अनाज लेने को तैयार है और न ही क्रय केन्द्र खुले हैं। मंत्रियों का इस तरह का बयान बार-बार आने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।
अभी हमारे मित्र पंजाब के बारे में कह रहे थे। किसानों के साथ आज से नहीं हमेशा से ज्यादती की गई है। एक तरफ कुछ लोगों को अपनी पूंजी जमा करने की पूरी ताकत दी गई है और दूसरी तरफ किसानों को एक दायरे में रखा गया है। आज किसान सबसे ज्यादा उपेक्षित है। बिहार का किसान मौत के कगार पर खड़ा है। यहां मंत्री महोदय बैठे हैं। वहां कब तक क्रय केन्द्र खोले जाएंगे, यह तय हो और पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर सरकार हमें कोई कर्ज दे रही है या नहीं, यह भी तय हो। बिहार का किसान टैक्स देकर बर्बाद हो रहा है। बिहार और सुखाड़ से बिहार का किसान बर्बाद हो गया है इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से चाहता हूं कि सरकार बिहार के किसानों का ऋण माफ करे। मैं और ऋण की बात नहीं करता लेकिन कृषि ऋण सरकार माफ करे।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी आ गए हैं। अब आप समाप्त कीजिए।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : शांता कुमार जी यहां बैठे हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमने मनिस्टर साहब को भी बुलाया है, आप बैठिये। आप एक-एक करके बोलिये। हम आपको भी बुलाएंगे।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : बिहार के किसानों के ऋण माफ होंगे कि नहीं?
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये, आपकी समस्या का समाधान करेंगे।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. This is Zero Hour. Please try to understand.
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मेरा आग्रह है कि सदन की एक समति देश के स्तर पर जाये, जिसमें कुछ किसान भी हों।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइये।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : सदन की कमेटी एक सप्ताह के लिए देश भर में किसानों की समस्या के लिए जाये। इसके लिए एक आयोग बनाया जाये, ताकि किसानों के सवाल को लेकर लड़ाई लड़ी जा सके। हमें मंत्री जी का बयान चाहिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह ठीक बात नहीं है, आप क्या बात कर रहे हैं। हम दूसरे मैम्बर्स को भी बुला रहे हैं, आप बैठिये। मंत्री जी भी बयान देंगे।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions) … * * Not Recorded MR. SPEAKER: This is not the way to raise matters during Zero Hour. Please understand that there are other Members also who want to raise their matters and I have to give chance to them also. You are always fighting with the Chair. What purpose does it serve?
… (Interruptions)
श्री रघुनाथ झा : हम कहां फाइट कर रहे हैं। बिहार जल रहा है। किसानों का सवाल है, हम उसके प्रतनधि बनकर यहां बैठने के लिए आये हैं, हम उनके सवाल को भी यहां नहीं रख सकते क्या? आज देश के सारे किसान परेशान हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हाउस में एक प्रोसीजर है। यहां प्रोसीजर के बारे में समझना चाहिए। प्रोसीजर के अनुसार उठने से पहले चेयर की परमीशन भी लेनी चाहिए। किसी समस्या के समाधान के लिए पहले चेयर की परमीशन लेनी चाहिए। आप बैठ जाइये, प्लीज।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Madhavrao Scindia is saying.
(Interruptions) … * श्री माधवराव सिंधिया : अध्यक्ष महोदय, आज देश भर के किसानों की हालत दिन प्रतदिन दयनीय होती जा रही है और किसान इतना पीड़ित है कि जगह-जगह से, प्रदेशों से आत्महत्याओं की रिपोर्टें आ रही हैं। वे इस बात का स्पष्ट संकेत देती हैं कि इस सरकार की जो कृषि नीति है, किसानों के प्रति जो इनका रवैया है, वह पूरी तरह से गलत है। ( यवधान) इस मामले में हमें पूरी तरह से परिवर्तन लाना होगा, चूंकि कृषि इस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की बुनियाद है। इस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था अगर हम सुधारना चाहेंगे तो पहले यह आवश्यक है कि हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास हो, हमारे किसान समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ें, अडिग हों, यह अत्यन्त आवश्यक है, अनिवार्य है। अगर हमारे किसान की यह हालत रही तो निश्चित ही देश का भविष्य भी अंधकार में पड़ेगा। एक तरफ तो फर्टिलाइजर, डीजल आदि, इन सब के भाव, इन सब की लागत बढ़ती जा रही है और दूसरी तरफ किसान को अपने उत्पादन का जो भाव मिल रहा है, वह दिन प्रतदिन गिरता जा रहा है। बिहार से जो अभी रिपोर्टें आ रही हैं, उससे बहुत भयंकर चिन्ता होती है। उससे * Not recorded एक बहुत गम्भीर स्थिति वहां उत्पन्न होती जा रही है और निश्चित रूप से मैं सोचता हूं कि वहां आगे कानून और व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। साथ ही साथ हमारे किसान की जो हालत है, उसमें उसको आत्महत्या के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं मिलेगा और इसकी रिपोर्ट वहां से भी आनी शुरू हो जाएंगी। अभी पंजाब और हरियाणा में भी इस बात की जानकारी मिली है कि प्रोक्यूरमेंट बन्द कर दिया गया है, रोक दिया गया है।
मनिमम सपोर्ट प्राइस भी नहीं दिया गया है और बहाना क्या इस्तेमाल किया गया है कि धान की जो क्वॉलिटी है, वह पंजाब और हरियाणा में पर्याप्त नहीं है तथा जो चाहते हैं, उसके मुताबिक नहीं है जबकि पंजाब यूनिवर्सिटी ने इस बात का बारीकी से निरीक्षण किया और इस बात को पूर्ण तरह से गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्तर और क्वॉलिटी पंजाब और हरियाणा में बहुत उम्दा है और इसका प्रोक्योरमेंट होना चाहिए। यही हालत अब बिहार मे हो रही है। यही स्थिति वहां उत्पन्न होने वाली है। हम इस सरकार को सावधान कर देना चाहते हैं क्योंकि आज मनिमम सपोर्ट प्राइस नहीं मिलने के कारण किसान मजबूर होता जा रहा है तथा मनिमम सपोर्ट प्राइस के नीचे धान बेच रहा है। प्रोक्योरमेंट केन्द्र के बारे में रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने जो कहा कि प्रोक्योरमेंट केन्द्र झारखंड और बिहार में जल्दी से जल्दी खोले जायें ताकि प्रोक्योरमेंट मनिमम सपोर्ट प्राइस पर प्रारम्भ किया जा सके और किसान को भी इस दिशा में कुछ राहत मिले अन्यथा धान पूरी तरह से सड़ना शुरु हो जाएगा और किसान सड़क पर आता जाएगा। मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं।…( व्यवधान) इस बारे में हमने एडजर्नमेंट मोशन, काम रोको प्रस्ताव भी मूव किया था औऱ अभी भी सरकार इस बारे में वक्तव्य नही दे रही है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please understand that this is an important subject. If you want to discuss matters in the House in this way, it is very difficult to take up the Zero hour everyday.
… (Interruptions)
श्री माधवराव सिंधिया : मुझे अपनी बात समाप्त कर लेने दीजिए।…( व्यवधान) जो जवाब माननीय कृषि मंत्री जी ने दिया, वह संतोषजनक नहीं था। आज आपके अनाज के भंडार भरे हुए हैं। क्यों भरे हुए हैं? सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जो मूल्य थे, वह इस सरकार ने ६० प्रतिशत से लेकर ८० प्रतिशत तक बढ़ा दिये चाहे वह गेहूं हो या चावल हो। जो उपभोक्ता हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, वे इस गेहूं तथा चावल को नहीं खरीद पा रहे हैं। इसीलिए आपके गोडाउन भरे हुए हैं और गरीब जनता में त्राहि-त्राहि मची हुई है। दूसरी तरफ जो जानकारी मिली है कि आप इसी गेहूं और चावल के निर्यात की व्यवस्था कर रहे हैं। इसके पीछे भी कई अफवाहें हैं कि कोई बड़ी डील होने वाली है। मैं इसके ऊपर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगा रहा हूं लेकिन यह अफवाह बाजार में है कि गेहूं और चावल जो एफसीआई के गोडाउन में भरे हुए हैं, उनकी बिक्री विदेशों में होने वाली है। उसके पीछे एक बड़ी साजिश है, एक बड़ा षडयंत्र है और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगने शुरु हो रहे हैं।…( व्यवधान)
SHRI K. FRANCIS GEORGE (IDUKKI): Sir, all of us have given notices. Please give us also a chance to raise important matters. … (Interruptions)
श्री माधवराव सिंधिया : अब वस्तुस्थिति क्या है, यह हम जानना चाहते हैं।…( व्यवधान)
उत्तर प्रदेश, बिहार औऱ दूसरे प्रदेशों में भी जो धान की खेती होती है, हम चाहते हैं कि वहां प्रोक्योरमेंट के केन्द्र जल्दी से जल्दी खोले जायें और यहां जो कमेटी की बात की गई है कि पार्लियामेंट में एक इंस्टीटयूशनेलाइज्ड कमेटी बने ताकि समय-समय पर जब किसान को परेशानी होती है तो वह पार्लियामेंट की कमेटी तत्काल माननीय मंत्री जी के साथ बैठकर, उनकी सलाह लेकर उस मामले को देखे और सही निर्णय पर पहुंचे। इस बारे में हम रघुवंश प्रसाद सिंह जी के साथ हैं। किसान के पक्ष में जो काम रोको प्रस्ताव हमने मूव किया था, उसी का क्रम आगे चल रहा है और हम चाहते हैं कि जब तक हमें संतुष्ट न किया जाये, तब तक इस बात को हम पार्लियामेंट के अंदर भी उठाते रहेंगे और कांग्रेस पार्लियामेंट के बाहर भी इस बात को उठाएगी। हम चाहते हैं कि माननीय मंत्री जी इस बारे में वक्तव्य दें और यह कमेटी पार्लियामेंट में स्थापित हो।
श्री रघुनाथ झा : अध्यक्ष जी, आज जो ज्वलंत सवाल इस सदन में रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने उठाया है, वह किसी पार्टी विशेष का सवाल नहीं है। वह समूचे राष्ट्र का और विशेषकर बिहार के किसानों से संबंधित सवाल है। बिहार के किसान आज जल रहे हैं। आज उनके सामने एक भुखमरी की स्थिति है। उनको दवा नहीं मिल रही है, उनके बच्चों की पढ़ाई बंद हो रही है, उनको खाद और बीज खरीदने में परेशानी हो रही है। भारत सरकार ने धान और मक्के की कीमत का जो सपोर्ट प्राइस तय किया है, वह किसानों को नहीं मिल रहा है। आज किसान को ३०० रुपये में विवश होकर अपना अनाज बेचना पड़ रहा है, उसको कोई खरीदना वाला नहीं है। बार-बार सरकार की तरफ से घोषणा की गई है लेकिन फिर भी सरकार एक भी एफसीआई का केन्द्र नहीं खोल सकी है।
महोदय, हम आज स्पष्ट रूप से सदन में मांग करना चाहते हैं, कहा जाता है कि राज्य सरकारों को लिखा गया है कि वे भी अपना क्रय केन्द्र खोल सकते हैं। बिहार की वित्तीय स्थिति के बारे में किसी को पता नहीं है। बिहार की सरकार चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती है। इसलिए हम गृह मंत्री जी और फूड मनिस्टर से कहना चाहते हैं कि अगर आप बिहार के किसानों को बचाना चाहते हैं तो उनके जन-जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए, अन्यथा इसके भयंकर परिणाम होंगे।…( व्यवधान) हम इसका विद्रोह करने के लिए विवश होंगे।…( व्यवधान) इसलिए हमारा आपसे पुन: आग्रह है कि आप इस तरफ विशेष ध्यान दें।…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी (छपरा) : महोदय, किसानों की समस्या पर विस्तृत चर्चा हुई है। आज प्रोक्योरमेंट के संदर्भ में जो पीडा हमारे बिहार के सांसदगण जता रहे थे, इसमें मैं एक छोटे से विषय पर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। जब रघुवंश जी केन्द्र सरकार में मंत्री थे,…( व्यवधान) बिहार में ६४,००० टन धान का उत्पादन होता था।…( व्यवधान) २४,००० टन धान का क्रय किया और आज वह धान बिहार की मंडियों में सड़ रहा है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing should go on record, except Shri Rudy’s speech.
(Interruptions) …* श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदय, धान के प्रोक्योरमेंट के बारे में जब विषय उठता है तो यह स्पष्ट है कि उसके लिए व्यवस्था होनी चाहिए।…( व्यवधान) राज्य सरकारों को क्रय के लिए अपनी व्यवस्था करनी चाहिए, मंडी बनानी चाहिए।…( व्यवधान) बिहार में कोई भी क्रय करने की व्यवस्था नहीं की गई है।…( व्यवधान)
महोदय, राज्य सरकार को दायित्व से वंचित नहीं रखा जा सकता है। राज्य सरकार इस बीमारी से अपने आपको वंचित रखना चाहती है। राज्य सरकार का भी एक दायित्व है।…( व्यवधान) आज पंजाब क्रय केन्द्रों से अपना धान उठा रहा है और बिहार में एक भी क्रय केन्द्र राज्य सरकार द्वारा स्थापित नहीं हुआ है।…( व्यवधान) महोदय, मंडी में धान रखने की जगह होती है।…( व्यवधान)
PROF. A.K. PREMAJAM (BADAGARA): Sir, I may be permitted to speak.
Thank you very much for this opportunity. Through you, Sir, I would like to bring to the attention of the Central Government the miserable conditions of the farmers in the country, especially the miserable conditions of the coconut farmers in the Kerala State. … (Interruptions)
श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है।
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
* Not Recorded PROF. A.K. PREMAJAM : Sir, how can I speak in this confusion? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: This will not go on record.
PROF. A.K. PREMAJAM : Sir, I wish to bring to the attention of this august House the miserable conditions of the farmers, especially the coconut farmers in Kerala. … (Interruptions)
श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदय, राज्य सरकारों को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।…( व्यवधान) कृषि मंत्री जी ने घोषणा की थी कि अगर राज्य सरकार को क्रय करने में किसी प्रकार की कठिनाई आती है तो उसमें केन्द्र सरकार मदद करेगी।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अब आप समाप्त करें।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : आज बिहार में धान सड़ रहा है, क्योंकि उसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई।…( व्यवधान)
१२२९ hrs. ( इस समय डा. रघुवंश प्रसाद सिंह, श्री राजो सिंह तथा कुछ अन्य माननीय सदस्य आए और सभा पटल के निकट फर्श खड़े हो गए।) … (Interruptions)
MR. SPEAKER: This will not go on record.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing should go on record.
(Interruptions) … * PROF. A.K. PREMAJAM : Sir, thank you for giving me this opportunity. Through you, I would like to bring to the notice of this Government the miserable conditions of the farmers in the country, especially the coconut farmers in the State of Kerala. The farmers in Kerala depend on their coconut crop for their day-to-day existence. … (Interruptions)
*Not recroded MR. SPEAKER: Please go back to your seats.
…( व्यवधान)
१२३१ hrs. ( इस समय श्री डा. रघुवंश प्रसाद सिंह, श्री राजो सिंह तथा कुछ अन्य माननीय सदस्य अपने-अपने स्थानों पर वापस चले गए) MR. SPEAKER: Other Members have also given the notices. Shri Rudy, please take your seat. I have called Prof. A.K. Premajam to speak.
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : अध्यक्ष जी, आप मंत्री जी से जवाब दिलवा दीजिए।
…( व्यवधान) बिहार में तो राष्ट्रपति शासन की जरूरत है, वहां राजनेता लोगों ने सब कुछ किया है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जवाब दिलवा देंगे, लेकिन आप तो बैठ जाइये।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Rudy, you are disturbing the House.
… (Interruptions)
PROF. A.K. PREMAJAM : The cost of production of coconut has gone up very high. With the anti-people and anti-poor policies that this Government is following, the prices of all commodities have come down to the minimum, and the farmers are finding it difficult to sell their products. Throughout the country, the farmers are committing suicide.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down. What is this? Please take your seat.
PROF. A.K. PREMAJAM : It is reliably learnt from the Press that the Costs and Price Commission have advised the Government not to revise the MSP of coconut. Actually, the people sitting in the air-conditioned rooms do not know the truth and the facts that exist at the grass-root level. They do not know as to what is going on in respect of the farmers in Kerala and also in the remaining part of the country. The farmers are starving and they are on the verge of committing suicide in Kerala. The Government of Kerala had requested the Government of India to raise the support price. Now, they are going to stop the fixation of minimum support price. Since this Government is anti-people and anti-farmer, I urge upon the Government to change the policy. They are only paying lip service to the farmers and they do not have any real love for the farmers. So, I urge upon the Government, especially the hon. Minister incharge of this Department to see that the minimum support price for coconut is raised, as per the demand from the Government of Kerala. Thank you. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Madam, please understand that other Members have also given the notices.
… (Interruptions)
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): What about my Adjournment Motion?… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand that they have given notices on problems being faced by the farmers. Please understand the position.
… (Interruptions)
SHRI ANIL BASU : Sir, you have assured us that during ‘Zero Hour’ it will be heard. What about that? … (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद) : अध्यक्ष जी, किसानों को अपनी उपज का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है क्योंकि सरकार के पास गोदामों की कमी है। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य ५१० रुपये रखा था लेकिन किसान को अपना धान २५० रुपये और ३०० रुपये में बेचना पड़ रहा है। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record, except the speech of Shri Ramji Lal Suman.
(Interruptions) … * श्री रामजीलाल सुमन : पंजाब के किसानों के सामने जो समस्या थी उसमें ३५० करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता पंजाब सरकार को दी गयी, जबकि पंजाब के किसानों की स्थिति देश के अन्य राज्यों की तुलना में * Not Recorded बहुत ज्यादा अच्छी है। बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों की स्थिति आज अच्छी नहीं है और आज वहां का किसान परेशान है। मैं आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहूंगा कि सभी राज्यों के किसानों के साथ समान व्यवहार किया जाए। इस बारे में संसद की एक कमेटी बने, जो इस कार्य को देखे, जिससे सभी राज्यों के किसानों की हालत सुधर सके।
उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्री (श्री शांता कुमार) : मान्यवर अध्यक्ष महोदय, मैं बिहार के माननीय सदस्यों से एक बात निवेदन करना चाहता हूं कि किसानों को अपनी उपज का मूल्य नहीं मिले, उनको परेशानी हो - सरकार ऐसा नहीं चाहती है और वह इस समस्या के प्रति सजग है। आपने जो कुछ कहा है और किसानों का दु:ख-दर्द व्यक्त किया है।… (Interruptions)
MR SPEAKER : Nothing will go on record, except the speech of the Minister.
(Interruptions) …* श्री शान्ता कुमार: उसमें हमारी सरकार बिल्कुल आपके साथ है। आप यह बात बिल्कुल मन में न सोचिए कि किसान के बारे में सरकार सोचना नहीं चाहती है या हम इस समस्या का समाधान नहीं करना चाहते। …( व्यवधान) आप सुनिए। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Rajesh Ranjan, are you not interested in the reply of the Minister?
श्री शान्ता कुमार: अध्यक्ष जी, प्रदेश में प्रोक्योरमैंट करने की जो प्रक्रिया है, उसमें राज्य सरकार कहां कितनी उपज हो रही है, उस सीजन से पहले कुछ स्थान तय करके हमें बताती है कि यहां-यहां आप अपने प्रोक्योरमैंट केन्द्र खोल दीजिए। जहां तक बिहार का सम्बन्ध है, बिहार में प्रोक्योरमैंट जहां भी होता है, सारा एफ.सी.आई. स्वयं नहीं करता, राज्य की वभिन्न एजेंसियां हमारे बिहाफ पर करती हैं। आपने पंजाब की चर्चा की। पंजाब में ७० परसैंट से अधिक प्रोक्योरमैंट अन्य एजेंसियां करती हैं। उसे केवल एफ.सी.आई. नहीं करता। जहां तक बिहार का सम्बन्ध है, बिहार में रूरल एग्रीकल्चर प्राइमरी सोसायटी के १५० केन्द्र हैं। उन १५० केन्द्रों को हमने ऑथोराइज कर दिया कि आप हमारे बिहाफ पर वहां प्रोक्योरमैंट करिए।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : उनके पास पैसा नहीं है।…( व्यवधान) * Not Recorded
श्री शान्ता कुमार: बिहार सरकार ने हमें १९ केन्द्र खोलने के लिए कहा था। वह खोल दिए थे। कल हम से कहा कि ३० केन्द्र खोलिए। हमने ३० केन्द्र खोलने का फैसला कर लिया है। मैं इस सदन को आश्वासन दिलाता हूं कि बिहार की सरकार जितने केन्द्र खोलने के लिए कहेगी, हम केन्द्र खोलने के लिए बिल्कुल तैयार हैं, तुरन्त तैयार हैं।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : वे कितने दिन तक खोल दिए जाएंगे। उन्होंने जितने कहे हैं, उतने खोल दीजिए। …( व्यवधान)
श्री शान्ता कुमार: वह हम से कहें। …( व्यवधान)
SHRI S. JAIPAL REDDY (MIRYALGUDA): Sir, the hon. Minister must say something about Andhra Pradesh?
अध्यक्ष महोदय: यह ठीक नहीं है। आप बैठ जाइए।
Mr. Minister, would you say something about Andhra Pradesh also?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Minister, please address the Chair.
श्री शान्ता कुमार: मैंने बैठे-बैठे इस बारे में सोचा और मैंने विभाग से पता किया है कि बिहार में हमारे कितने गोदाम हैं? ( व्यवधान) रघुवंश जी, एक मिनट सुन लीजिए।
SHRI S. JAIPAL REDDY : Mr. Minister, please say something about the State of Andhra Pradesh also.
श्री शान्ता कुमार: बिहार में एफ.सी.आई. के जितने गोदाम हैं, लगभग १२०--१२५ से ज्यादा हमारे गोदाम हैं। वहां कोई रेगुलर मंडी नहीं है जहां लोग लेकर जाएं। यह व्यवस्था एकदम सरकार नहीं कर पाएगी लेकिन बिहार के गरीब किसानों की मदद करने के लिए मैं सदन को आश्वासन दिलाना चाहता हूं …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: मैडम, यह ठीक नहीं हैं। हमें आपकी रनिंग कमैंट्री नहीं चाहिए।
श्री शान्ता कुमार: हम यहां तक जाने के लिए तैयार हैं। हमारे वहां १२०-१२५ गोदाम हैं। हम कोई इंतजार किए बिना यदि सरकार डिमांड करे, हम अपने सभी गोदामों को प्रोक्योरमैंट सैंटर घोषित करने के लिए तैयार हैं। आप लाइए तो सही, आप दीजिए तो सही। …( व्यवधान) जितने सरकार कहेगी, …( व्यवधान)
१९ पहले खोल दिए थे, राज्य सरकार ने ३० कहे, ३० खोलने का आदेश दे दिया है। राज्य सरकार जितने कहेगी, खोलने के लिए तैयार हैं। …( व्यवधान)
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : वे किन दिन में खुल जाएंगे?
श्री शान्ता कुमार: वे तुरन्त खोल देंगे। हम यही कर सकते हैं। राज्य सरकार हमें खोलने के लिए कहती है तो हम खोलने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। एफ.सी.आई. ने १९ पहले खोले। राज्य सरकार ने कहा ३० खोलिए। ३० खोलने के आदेश दे दिए। राज्य सरकार सौ खोलने के लिए कहे, हम सौ खोलने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार कहे तो सही। इसका सारा का सारा इंतजाम राज्य सरकार को करना है। राज्य सरकार जितने केन्द्र खोलने के लिए कहेगी, हम उतने केन्द्र खोलने के लिए बिल्कुल तैयार हैं।
श्री रामजीलाल सुमन : उत्तर प्रदेश का क्या करेंगे?
श्री शान्ता कुमार: मैं वे दो बातें और कहना चाहता हूं जो माधवराव सिंधिया साहब ने कही हैं। उन्होंने एक पंजाब के बारे में कहा। पंजाब सरकार ने, पंजाब के कृषि विभाग ने हमें कहा कि हमारा धान खराब हो गया है।
उनके कहने के बाद टैस्ट किया और साबित होने के बाद कि डैमेज्ड है, तब हमने ८ परसेंट तक प्रोक्योर करने की बात कही लेकिन चावल की क्वालिटी खराब न हो, इसलिये हमने इस बार यह व्यवस्था की है कि यदि ८ परसेंट तक डैमेज्ड लेना है तो चावल की क्वालिटी खराब न हो। इसके अलावा चावल का आउट टर्न रेशो ६७ परसेंट से घटाकर ६४ परसेंट किया ताकि हम चावल बिलकुल ठीक लेंगे और हमने कहा कि हम चावल एक्पोर्ट कर रहे हैं । सिन्धिया जी, आप आरोप लगा रहे हैं। मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि आप अफवाहों के आधार पर ऐसा कहेंगे। क्या आप इन अफवाहों के आधार पर इस सदन में चर्चा करना चाहते हैं? इस प्रकार यह चर्चा नहीं हो सकती…( व्यवधान) .. आपसे मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी। अध्यक्ष जी, सरकार तो साहसिक कदम उठा रही है। हमारे पास गंदम के भंडार भरे पड़े हैं जिसे इस देश को आवश्यकता नही। हम तो एक्सपोर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। होना तो यह चाहिये था कि सिन्धिया जी हमारी सरकार की सराहना करते कि हम एक्पोर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। एक्पोर्ट अभी शुरु नहीं हुआ कि आपने अफवाहों के आधार पर कहना शुरु कर दिया…( व्यवधान) .. कांग्रेस सरकार जिस तरह से करती रही है, वैसा हम नहीं कर रहे हैं। हमारी सरकार ठीक ढंग से काम करेगी। यदि एक्पोर्ट करेंगे तो सही ढंग से करेंगे।
श्री माधवराव सिंधिया : मैंने यह कहा कि यदि इस तरह की अफवाहें फैल रही हैं…( व्यवधान)
मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Now, Shri Sudip Bandyopadhyay.
… (Interruptions)
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): Sir, what about our Adjournment Motion?… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Shri Sudip Bandypadhyay, just a minute.
… (Interruptions)
SHRI ANIL BASU : Sir, we had given notices of Adjournment Motion. You also assured us to give your ruling.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Sudip Bandyopadhyay, please take your seat. Let us first take up the issue of Adjournment Motion.
… (Interruptions)
SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Sir, we have also given notice under Rule 193 about the serious drought and floods situation in different parts of the country.
MR. SPEAKER: We will decide it in the BAC of today.
… (Interruptions)
SHRI S. JAIPAL REDDY : Mr. Speaker, the hon. Minister should say something about the farmers of Andhra Pradesh also.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have called the name of Shri Somnath Chattjerjee.
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, जो बिहार की समस्या है, वही उत्तर प्रदेश की है।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश के किसानों के बारे में कुछ नहीं बताया। इस बारे में जो बिहार की स्थिति है, वहीं उत्तर प्रदेश की भी है।…( व्यवधान).. किसानो का धान नहीं खरीदा जा रही है।
SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, the hon. Minister is silent. What about the farmers’ of Andhra Pradesh?… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Minister would you say something about the farmers of Uttar Pradesh and Andhra Pradesh?
… (Interruptions)
SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, he should say something about Andhra Pradesh also.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.
… (Interruptions)
SHRI ANIL BASU : Sir, the hon. Minister should respond in context of the whole country and not in a piecemeal manner.
श्री शांता कुमार : अध्यक्ष महोदय, आंध्रा प्रदेश के मुख्य मंत्री कुछ मंत्रियों के साथ यहां आये, उनके साथ बैठकर बातचीत हो गई है। उन्होंने जो-जो समस्याएं रखी थीं, लगभग उन सभी समस्याओं का समाधान सरकार ने कर दिया है। ऑफिसर लैवल पर बैठकर बातचीत हो रही है और वे हमसे पूरी तरह से संतुष्ट होकर गये हैं। चावल प्रोक्योरमैंट के बारे में उनकी थोड़ी सी प्रॉब्लम्स हैं। हमने पिछली बार भी ५५ लाख टन चावल आंध्रा प्रदेश को दिया है, इस बार उन्हें लगता है अधिक है, उसके लिए एफ.सी.आई. पूरी तरह से तैयार है, हम उसे पूरी तरह से लेंगे। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, एक बात यहां कही जा रही है जिसे मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं, पिछले साल देश के अंदर हमने ८६.७१ लाख टन पैडी प्रोक्योर की थी। ८६ लाख टन पिछली बार प्रोक्योर की थी और इस बार अभी प्रोक्योरमैंट चल रही है। हम १०२ लाख टन प्रोक्योर कर चुके हैं। हम पिछले सालों से अधिक प्रोक्योरमैंट कर रहे हैं, कम नहीं कर रहे हैं, अधिक प्रोक्योरमैंट चल रही है…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : आप उत्तर प्रदेश के बारे में कहिये। उत्तर प्रदेश के खाद्य मंत्री स्वयं कह चुके हैं कि हम धान नहीं खरीद पा रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री शान्ता कुमार : उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री और सबों से हमारी बात हो गई है उनके यहां समस्या थी, चूंकि धान डैमेज था, उसे भी लैबोरेटरी में टैस्ट करवाकर और जितनी आवश्यकता थी, वहां भी रिलैक्सेशन देकर सरकार कर रही है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : उनका एडजर्नमैंट मोशन है।
…( व्यवधान)
-----------