Legal Document View

Unlock Advanced Research with PRISMAI

- Know your Kanoon - Doc Gen Hub - Counter Argument - Case Predict AI - Talk with IK Doc - ...
Upgrade to Premium
[Cites 0, Cited by 0]

Lok Sabha Debates

Shri Kirit Somaiya Called The Attention Of The Minister Of Power To The Situation ... on 12 December, 2002

NT> 13.04 hrs. Title: Shri Kirit Somaiya called the attention of the Minister of Power to the situation arising due to delay in starting the Dabhol Power Project resulting in increase in powercuts and grid failure in various parts of the country, particularly in Maharashtra and steps taken by the Government.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, the House will take up Item No. 13 -- Calling Attention.

SHRI KIRIT SOMAIYA (MUMBAI NORTH EAST): Sir, I call the attention of the Minister of Power to the following matter of urgent public importance and request that he may make a statement thereon:

"The situation arising due to delay in starting the Dabhol Power Project resulting in increase in power cuts and grid failure in various parts of the country, particularly, in Maharashtra, and steps taken by the Government in regard thereto. "

विद्युत मंत्री (श्री अनन्त गंगाराम गीते) : उपाध्यक्ष महोदय, महाराष्ट्र में दाभोल पावर परियोजना के लिए विद्युत खरीद करार (पीपीए) महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड (एमएसईबी) और दाभोल पावर कं.(डी पी सी) के बीच हुआ। एनरॉन और उसके सहयोगियों द्वारा विशेष प्रयोजनार्थ इस कंपनी की स्थापना की गई थी। परियोजना का चरण-I (७४० मेगावाट) मई, १९९९ में चालू हुआ और यह एम एस ई बी को बिजली आपूर्ति कर रहा था। डी पी सी तथा एम एस ई बी के बीच विवाद के कारण चरण-Iमई, २००१ में बंद हो गया और चरण-II (१४४४ मेगावाट) का निर्माण कार्य आस्थगित हो गया। विद्युत खरीद करार की दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू की है। भारतीय वित्तीय संस्थानों की ओर से इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (आई डी बी आई), जो परियोजना में ऋणदाता के रूप में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं, द्वारा दायर मुकदमे के संबंध में मुम्बई उच्च न्यायालय ने एक कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया है जिसने २.४.२००२ को सम्पत्तियों को अधिकार में ले लिया। कोर्ट रिसीवर ने सुरक्षा तथा सम्पत्ति संरक्षण कार्य मै. पुंज लायड को सौंपे हैं।

         

  कानूनी विवाद के निपटान में लगने वाले अधिक समय और संयंत्र स्थल पर सम्पत्तियों व उपकरणों को नष्ट होने से बचाने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने दाभोल परियोजना की समग्र पुन: संरचना और कानूनी मुद्दों का समाधान लंबित रहने तक अंतरिम आधार पर ओ एंड एम (प्रचालन व अनुरक्षण) ठेकेदार के रूप में नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन के साथ चरण-Iको पुन: आरंभ करने का प्रयास किया है। भारत सरकार द्वारा निम्नांकित प्रयास किए गए हैं:-

(क) महाराष्ट्र सरकार और एम एस ई बी को आई डी बी आई के नेतृत्व में ऋणदाताओं से फेज़-I से विद्युत खरीद की सेवा शर्तों को तय करने की सलाह देना।
(ख) ऋणदाता संस्थाओं को बकाया ऋणों की पुन: संरचना करने और टैरिफ कम करने के लिए अपेक्षित वित्तीय पुन: इंजीनियरी करने की सलाह देना।
(ग) ओ एंड एम ठेकेदार के रूप में ऋणदाताओं की ओर से संयंत्र का प्रचालन करने के लिए एन टी पी सी को प्रेरित करना।
(घ) चरण-Iको पुन: आरंभ करने के लिए एन टी पी सी को आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु उपकरणों के मुख्य़ आपूर्तिकर्ताओं मै. जी ई और ई पी सी (इंजीनियरिंग, प्रापण और निर्माण) ठेकेदार मैसर्स बैकटेल को सलाह प्रदान करना।
(ड़.) ईंधन की लागत में कमी करने की संभावनाएं तलाश करना जिससे कि टैरिफ में कमी लाई जा सके।
(च) संयंत्र (प्लांट) की स्थिति के निरीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए एम एस ई बी, आई डी बी आई, बैकटेल, एनटीपीसी एवं सी ई ए के अधिकारियों की संयुक्त टीम का गठन। उपरोक्त प्रयासों के कारण सभी क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति हासिल हुई है। संयुक्त टीम ने संयंत्र का मुआयना कर इसके सामान्य अनुरक्षण एवं प्रतिरक्षण (प्रिजर्वेशन) कार्यों पर संतोष व्यक्त किया है। हालांकि टीम ने कहा है कि वभिन्न उपस्करों एवं सुविधाओं की आंतरिक स्थिति का आकलन केवल देखकर नहीं किया जा सकता है और इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा व्यापक मूल्यांकन किया जाना आवश्यक होगा। महाराष्ट्र सरकार ने भी एम एस ई बी को दाभोल विद्युत परियोजना चरण-I से ८३% के संयंत्र भार घटक (प्लांट लोड फैक्टर) पर २.८० रु. प्रति यूनिट की दर से विद्युत खरीदने के लिए अनुमति देने के आशय से अपना निर्णय उन्हें ज्ञापित कर दिया है। यह प्रबंध अस्थाई रूप से और एक वर्ष के लिए होगा और तदर्थ होगा तथा इस प्रबंध से एम एस ई बी/महाराष्ट्र सरकार के लंबित मध्यस्थता/न्यायिक/महाराष्ट्र विद्युत वनियामक आयोग संबंधी कार्यवाई में एम एस ई बी/ महाराष्ट्र सरकार के अधिकारों एवं दावा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। महाराष्ट्र सरकार ने यह भी सूचित किया है कि ऊपर बताई गई विद्युत की दर एवं मात्रा एम ई आर सी के अनुमोदन पर निर्भर है। टैरिफ में नाफ्था का मूल्य भी शामिल होगा। आगे उठाए जाने वाले कदमों में निम्निलखित शामिल हैं:-(क) एम एस ई बी एवं ऋणदाताओं को प्रस्तावित अंनतिम टैरिफ के अनुमोदन के लिए महाराष्ट्र विद्युत वनियामक आयोग (एम ई आर सी) के साथ संयुक्त रूप से बातचीत करनी होगी।
(ख) आई डी बी आई के नेतृत्व में ऋणदाताओं को चरण-I को पुन: आरंभ कराने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने हेतु मुंबई उच्च न्यायालय/कोर्ट रिसीवर के पास जाना होगा।
(ग) आई डी बी आई (एन टी पी सी की सहायता से) को जी ई/बेकटेल के तकनीकी कार्यों की गुंजाइश को अंतिम रूप देना होगा और वाणिज्यिक व्यवस्था करनी पड़ेगी।
(घ) आई.डी.बी.आई. को एन.टी.पी.सी. के साथ इसके द्वारा ओ.एंड एम. कांट्रैक्टर के रूप में कार्य करने हेतु वाणिज्यिक व्यवस्था को अंतिम रूप देना होगा।
उपाध्यक्ष महोदय, आज महाराष्ट्र में जो विद्युत की आपूर्ति है, उसका स्पष्टीकरण मैं यहां पर करना चाहता हूं: राज्य के भीतर विद्युत की आपूर्ति व वितरण सम्बन्धित राज्य सरकार/राज्य विद्युत यूटलिटी के क्षेत्राधिकार में आता है। राज्य में वभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को दी जाने वाली विद्युत आपूर्ति की वरीयता का निर्णय राज्य सरकार द्वारा राज्य में वभिन्न रुाोतों से विद्युत की कुल उपलब्धता को द्ृष्टिगत रख कर किया जाता है। अप्रैल से अक्तूबर, २००२ की अवधि के दौरान महाराष्ट्र में ऊर्जा की कमी और व्यस्ततमकालीन कमियां क्रमश: १२.९% और १८.६% थीं। देश के सम्बन्ध में यही आंकड़े क्रमश: ९.३% और १४% हैं। महाराष्ट्र की अधिष्ठापित विद्युत उत्पादन क्षमता १३,१८० मेगावाट है। पश्चिमी क्षेत्र में केन्द्रीय सरकार के विद्युत उत्पादन स्टेशनों से वर्तमान आबंटन २१२५ मेगावाट किया गया है, जिसमें अन्य राज्यों से हस्तांतरित भी शामिल है। इसके अतरिक्त राज्य को पश्चिमी क्षेत्र में केन्द्रीय विद्युत उत्पादन स्टेशनों के अनाबंटित कोटे से ११% , मतलब ८७ मेगावाट, विद्युत आबंटित की गई है।
 
  एम.एस.ई.बी. के अनुसार राज्य में व्यस्ततमकालीन अवधि के दौरान इसके स्वयं के विद्युत उत्पादन, केन्द्रीय क्षेत्र के हिस्से और सितम्बर, अक्तूबर और नवम्बर, ये २४ नवम्बर, २००२ तक के आंकड़े हैं, माहों के लिए पड़ौसी क्षेत्रों की सहायता से कुल औसत उपलब्धता क्रमश: ९९३४ मेगावाट, १०,७१३ मेगावाट और १०,८६३ मेगावाट थी, जबकि औसत मांग क्रमश: ११,१२९ मेगावाट, १२,२८६ मेगावाट और १२,३१४ मेगावाट थी, जो क्रमश: ११९५ मेगावाट, १५७३ मेगावाट और १४५१ मेगावाट कमी का द्योतक है। एम.एस.ई.बी. ने कमी को पूरा करने के लिए निम्नांकित उपाय किए हैं, जो एम.एस.ई.बी. ने जानकारी दी है, मैं आपके माध्यम से सदन को देना चाहता हूं: ग्रामीण क्षेत्रों में चक्रीय रूप से ४ घंटे के ब्लॉक में ०६०० बजे से २२०० बजे तक १६५० मेगावाट की नियोजित लोड शेडिंग और शहरी क्षेत्रों में चक्रीय रूप से तीन घंटों के ब्लॉक में सुबह ०९०० बजे से १८०० बजे तक ४५० मेगावाट की नियोजित लोड शेडिंग की है। क्रमश: ०.३ सेकेंड और ०.४ सेकेंड विलम्ब के लिए प्रत्येक ४८.२ हर्टर्ज और ४८.० हर्टर्ज फ्रीक्वेंसी पर ३४० मेगावाट का लोड प्राप्त करने के लिए और तत्कालीन रूप में ४७.९ हर्टर्ज पर ४१५ मेगावाट लोड रिलीफ प्राप्त करने के लिए ऑटोमेटिक अंडर फ्रीक्वेंसी लोड शेडिंग कार्यक्रम को लागू किया जा रहा है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों और एक्सप्रैस फीडर वाले उद्योगों को उपरोक्त लोड शेडिंग कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। लोड शेडिंग के अतरिक्त विद्युत आपूर्ति बाधा को न्यूनतम रखा जाता है। लोड शेडिंग अवधि के दौरान उपस्करों का अनुरक्षण किया जाता है, ताकि इस कारण उपभोक्ताओं को कोई बाधा उत्पन्न न हो।१०. महोदय, १०वीं योजना के दौरान ४१,११० मेगावाट क्षमता अभिवृद्धि की विद्युत मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिससे २२,८३२ मेगावाट क्षमता अभिवृद्धि केन्द्रीय क्षेत्र में होगी, ११,१५७ मेगावाट राज्य क्षेत्र में तथा ७,१२१ मेगावाट निजी क्षेत्र में की जानी है। भारत सरकार, विद्युत मंत्रालय ने पश्चिमी क्षेत्र में विद्युत की कमी को दूर करने के लिए निम्नलखित उपाय किए हैं, जिसका महाराष्ट्र भी एक घटक है: पश्चिमी क्षेत्र में दसवीं योजना के दौरान केन्द्रीय क्षेत्र में २४८० मेगावाट क्षमता अभिवृद्धि का प्रस्ताव है। इसमें महाराष्ट्र राज्य भी भागीदार होगा। देश में इस समय उपलब्ध उत्पादन क्षमता के सदुपयोग के लिए एक राज्य व क्षेत्र से दूसरे राज्य व क्षेत्र में विद्युत स्थानांतरण के लिए अंतर क्षेत्रीय पारेषण सम्पर्क तंत्र का सुद्ृढ़ीकरण। २२० के.वी. क्षमता की बुधीपदार- कोरबा प्रोजेक्ट शुरू हो गया है, जिससे पूर्वी क्षेत्र से पश्चिमी क्षेत्र में अतरिक्त विद्युत स्थानांतरित की जा सकेगी। ४०० के.वी. क्षमता की रायपुर- राऊरकेला तक की डबल सर्किट लाइन कार्य पावरग्रिड द्वारा किया जा रहा है। यह डबल लाइन दिसम्बर, २००२/ जनवरी, २००३ तक शुरू हो जाएगी। इस लाइन के शुरू होने पर पूर्वी क्षेत्र से ८००-१००० मेगावाट विद्युत पश्चिमी क्षेत्र को स्थानांतरित किया जाना सुगम हो जाएगा जिसमें महाराष्ट्र की भी भागीदारी होगी। विद्युत आपूर्ति की स्थिति में सुधार तथा पारेषण और वितरण हानियों में कमी लाने के लिए उप पारेषण और वितरण नेटवर्क का सुद्ृढ़ीकरण। इस कार्य के लिए राज्यों को ए पी डी आर पी योजना के तहत धन राशि उपलब्ध कराई जा रही है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने की द्ृष्टि से पुराने और जर्जर उत्पादन इकाइयों का नवीकरण, आधुनिकीकरण और उनका जीवन विस्तार। इन कार्यों के लिए पी एफ सी और आर ई सी द्वारा"त्वरित उत्पादन और आपूर्ति कार्यक्रम"(ए जी एंड एस पी) के तहत पावर यूटलटियों को ब्याज सब्सिडी सहित ऋण उपलब्ध कराई जाएगी। ऊर्जा दक्षता संवर्धन, मांग पक्ष प्रबंधन तथा ऊर्जा संरक्षण संबंधी उपाय किए जाने हेतु सहायता। ११वीं योजना के अंत तक राष्ट्रीय ग्रिड की स्थापना तथा पारेषण प्रणाली का सुद्ृढ़ीकरण ताकि जिन क्षेत्रों / राज्यों में अतिरेक विद्युत है वहां से विद्युत अभाव से ग्रस्त राज्यों को विद्युत स्थानांतरित किया जाना सुगम हो सके।उपाध्यक्ष जी, किरीट सोमैया जी ने जो ध्यानाकर्षण किया है और प्रश्न पूछे हैं, मैंने उन प्रश्नों का यहां विस्तार में उत्तर दिया है।
उपाध्यक्ष महोदय : बहुत विस्तार में दे दिया है।
श्री अनंत गंगाराम गीते: बहुत विस्तार में जवाब दिया है। मुझे अपेक्षा है कि इसके बाद और कोई सवाल इस पर उठाने की आवश्यकता नहीं होगी।
श्री किरीट सोमैया: उपाध्यक्ष जी, मंत्री जी ने काफी सुंदर और विस्तृत उत्तर दिया, इसके लिए मैं उनका आभार मानता हूं। मैं उनसे यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि आपके प्रयासों का स्वागत है, लेकिन इसके पश्चात भी राज्य में डाभोल पावर प्रोजेक्ट प्रारम्भ न होने के कारण या बंद होने के कारण या अन्य कारण आपने बताए कि सितम्बर, अक्तूबर और नवम्बर, इन तीन महीनों में जो लोड शैडिंग, पावर शार्टेज है। Power shortage is there and load shedding of 1650 MW per month is planned. यह आपके दिए हुए आंकड़े हैं। महाराष्ट्र में और देश के अन्य भागों में दिन में छ: से आठ घंटे तक बिजली नहीं आती।
श्री शिवाजी माने (हिंगोली): १२ घंटे तक नहीं आती।
श्री किरीट सोमैया: जैसा माननीय सदस्य बता रहे हैं कि इतने घंटे बिजली गुल रहती है। इस वजह से किसान त्रस्त हैं। उद्योगों में भी लेआफ है, इंडस्ट्रीज बंद होने के आसार पैदा हो गए हैं। बिजली की इतनी कमी जो है, उसको हैंडल करने के लिए, टैकल करने के लिए राज्य सरकार क्या करने जा रही है ? आपने चार पन्नों का जवाब बहुत सुंदर ढंग से दिया है, लेकिन हम जानना चाहते हैं, what is the time-bound action programme? यह जो पावर शार्टेज है, उसको दूर करने के लिए केन्द्र सरकार राज्य सरकार के साथ किस प्रकार से, कितने महीनों के अंदर यह समस्या दूर कर लेगी? राज्य सरकार को जो असिसटेंस गाइडेंस, जो मदद केन्द्र सरकार से चाहिए, वह आप दे रहे हैं। राज्य सरकार उसका किस प्रकार से उपयोग करने जा रही है ? मंत्री जी ने पांचवे पैराग्राफ में लिखा है :
Further steps to be taken to involve the following:
उन्होंने ए, बी, सी, डी, बताया। उसमें एम.सी.पी. के बारे में है कि एऩइआरसी से अंतरिम आर्डर लेना पड़ेगा। वह आर्डर कितने दिन में लेंगे और क्या राज्य सरकार ने एऩइआरसी को एप्लाई किया है ? जो लैंडर्स हैं, फाइनेंशिलय इंस्टीटयूशंस हैं, they will have to approach Mumbai High Court. If they have approached it, what is the status? When and how will the problem be sorted out?
इसके साथ ही मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि इसमें और लिखा है कि आईडीबीआई और एनटीपीसी को साथ में मिलकर इसको हैंडल करना पड़ेगा। मैं अंत में पूछना चाहूंगा कि इसमें यह बताया गया: There are more than ten agencies involved. It is the State Government; within the State Government, the Ministry of Power is there; within that, there is MSEB and MERC. Then, in the State Government, the Ministry of Finance is there. In the Government of India also, there are the Ministry of Power and Ministry of Finance. Simultaneously, there are financial institutions. Then there are Enron, the American Company, the Dabhol, the coal companies and so on. There are multiple agencies. My request to the Government isगवर्नमेंट ऑफ इंडिया में कौन सी नोडल मनिस्ट्री या कोई टॉस्क फोर्स या को-आर्डिनेशन के लिए क्या कोई ग्रुप बनाया गया है? उसको कौन हैंडल कर रहा है या कौन हैंडल करेगा?क्या केन्द्र सरकार राज्य सरकार से भी आग्रह कर रही है कि - they should appoint one person and one agency. Due to the involvement of multiple agencies, everyone is passing on the buck to the other one.
अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि ऐसैट्स की मेंटेनेंस के लिए क्या सरकार कोई कार्रवाई करेगी जिसके कारण नैशनल ऐसैट्स वेस्टेज न हो और टैक्स री-स्ट्रक्चरिंग के बारे में सरकार का क्या कोई विचार है?
MR. DEPUTY-SPEAKER: The rule permits only one clarification. But you have asked four or five questions.
श्री सुरेश रामराव जाधव (परभनी) :वह महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : इसीलिए मैंने इन्हें परमिट किया।
 
…( व्यवधान)
 
श्री अनन्त गंगाराम गीते : उपाध्यक्ष महोदय, जो महाराष्ट्र में बिजली की कमी है, उसे राज्य सरकार ने भी कबूल किया है और उस कमी को पूरा करने के लिए किस प्रकार से लोड शैडिंग की जा रही है जिसका जिक्र मैंने अपने उत्तर में यहां पर प्रारम्भ में भी किया है। जो कमी को पूरा करना है, यह राज्य का विषय है, राज्य की जिम्मेदारी है और राज्य सरकार किस प्रकार से इस कमी को पूरा करेगी, इसका जवाब मेरे लिए देना तो संभव नहीं है। मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा कि इस कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार से कोई प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास विद्युत मंत्रालय के पास आते हैं तो निश्चित रूप से उन प्रस्तावों पर गौर किया जाता है और केवल गौर ही नहीं बल्कि निश्चित रूप से राज्य सरकार को सहयोग करना मेरी जिम्मेदारी बनती है और उस जिम्मेदारी को निश्चित रूप से हम निभाएंगे।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, this must be applicable to all the States. The hon. Minister is representing the Union Government. If there is a similar shortage of power in other States and if a proposal comes from such States, then also he should give a response like this. That is my only submission to you.
SHRI KIRIT SOMAIYA : Let him complete and then you may ask your supplementary.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I am only supporting his generosity and the whole approach. I want that it should not only be confined to Maharashtra but it should extend to other States of the country also…… (Interruptions)
SHRI KIRIT SOMAIYA : This Calling Attention is with reference to Dabhol Power Project resulting in power cuts and grid failure.
MR. DEPUTY-SPEAKER: There is a particular reference to Maharashtra in the Calling Attention.
 
… (Interruptions)
 
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : The Union Minister of the Government of India is making a policy statement. He says that due to power shortage if any State Government makes any proposal, he will not only consider it but will also try to see that it is complied. I say that the Union Minister of the Government of India is not representing Maharashtra alone. I want an assurance from him that if such similar things come from other States, he will give the same response. I want this assurance from him…… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Let him complete. In case, this is not included in his reply, then you may speak.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I am thanking the hon. Minister and we need such a Minister…… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Let us hear the Minister now.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): There is acute shortage of power in my State also. All the reservoirs have dried up due to shortage of power. You have also seen it…… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: As a matter of policy, as mentioned by Shri Dasmunsi, hon. Minister will touch the point.
 
… (Interruptions)
 
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : In Kerala, there is no water in the reservoirs. All the reservoirs are drying up. The situation is very serious.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Radhakrishnan, you know the rules.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : The situation in Kerala is more serious than what it is in Maharashtra. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Radhakrishnan, you know the rules. In the Calling Attention ….
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : The Calling Attention is not only for Maharashtra. It is for the entire nation. How can you confine it only to Maharashtra? It is applicable to other States as well.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Radhakrishnan, If the situation is so serious, then you should also have given the notice. Now, the Calling Attention is in his name. So, he has brought out the case. Shri Dasmunsi has raised a relevant issue. The hon. Minister is in a mood to answer. Let us hear him.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I should raise my case. … (Interruptions)
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF COMMUNICATIONS AND INFORMATION TECHNOLOGY (SHRI PRAMOD MAHAJAN): He always stands up for technicalities.
MR. DEPUTY-SPEAKER: It is because Shri Radhakrishnan was Speaker of the Kerala Assembly.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I am raising an issue of my State. There the situation is far more serious.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : He has raised a technical issue. I have raised the practical issue.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : In Kerala, no water is available in the reservoirs.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Radhakrishnan, Let me now ask the hon. Minister to give the reply. Will you allow now?
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Maharashtra is not the only State which suffers from this kind of shortage. Kerala is also suffering from this kind of shortage.
श्री अनन्त गंगाराम गीते : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने कई प्रश्न यहां सदन में उपस्थित किए हैं। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र राज्य को बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कमी से छुटकारा पाने के लिए ऊर्चा मंत्रालय का एक सार्वजनिक उपक्रम NTPCहै, जो देशभर में कई प्रोजैक्ट्स चलाते हैं। अलग-अलग राज्यों के लिए प्रोजैक्ट्स NTPC द्वारा चलाए जाते हैं, जिनके माध्यम से ऊर्जा का निर्माण होता है और एक प्रोजैक्ट्स से तीन-चार राज्यों को ऊर्जा दी जाती है। वैस्टर्न रीजन में भी NTPC के प्रोजैक्ट्स हैं। इस संबंध में महाराष्ट्र राज्य की सरकार को एक प्रस्ताव दिया गया था कि इस प्रकार के प्रोजैक्ट्स से लगभग १५०० मेगावाट तक अतरिक्त ऊर्जा आपको दे सकते हैं। लेकिन मैं आपके माध्यम से सदन को जानकारी देना चाहूंगा कि उस संदर्भ में राज्य सरकार से किसी भी प्रकार का उत्तर आज तक नहीं मिला है। माननीय सदस्य श्री दासमुंशी जी ने यहां चिन्ता जताई है कि देश भर के लगभग सभी राज्यों में ऊर्जा की कमी है और हर राज्य इस कमी को महसूस कर रहा है। महोदय, आप इजाजत दें, तो मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य श्री दासमुशीं जी आश्वस्त करना चाहूंगा कि राज्य सरकारों से जो भी सहयोग प्रस्ताव, मदद के प्रस्ताव ऊर्जा मंत्रालय के पास आते हैं, केन्द्रीय सरकार के पास आते हैं, तो निश्चित रूप से जो सहयोग हमें करना है, ऊर्जा मंत्रालय की ओर से सहयोग किया जाएगा।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Radhakrishnan, are you happy now?
श्री अनन्त गंगाराम गीते : महोदय, दाभोल विद्युत परियोजना के संदर्भ में माननीय सदस्य, श्री किरीट सौमैया जी ने कई प्रश्न प्रस्तुत किए हैं। मैं आपके माध्यम से उनके ध्यान में लाना चाहूंगा कि यह विवाद न्यायालय में लम्बित है, महाराष्ट्र वनियामक आयोग के सामने लम्बित है, इसलिए इस पर ज्यादा चर्चा करना उचित नहीं होगा, लेकिन जो कदम इस संबंध में ऊर्जा मंत्रालय को उठाने हैं, भारत सरकार उन कदमों को निश्चित रूप से उठाएगी। जो योगदान और सहयोग करना है, वह निश्चित रूप से किया जाएगा।
MR. DEPUTY-SPEAKER: The House now stands adjourned to meet again at 2.15 p.m. 13.29 hrs.   The Lok Sabha then adjourned for Lunch till fifteen minutes past Fourteen of the Clock.

________________