Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Resolution Regarding Formulation Of An Action Plan To ... on 15 March, 2013
> Title: Further discussion on the resolution regarding formulation of an Action Plan to rehabilitate persons displaced from Pakistan, moved by Shri Arjun Meghwal on 17August, 2012 (Resolution Negatived).
श्री राजेन्द्र अग्रवाल (मेरठ): सभापति महोदया, लगभग तीन महीने पूर्व 14 दिसम्बर को इस संकल्प पर चर्चा हो रही थी। मैं एक बार पुनः इस संकल्प को दोहराना चाहता हूं - पाकिस्तान से भारत में प्रवास करने वाले और देश के विभिन्न भागों में बसे व्यक्तियों के समक्ष आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह सभा सरकार से आग्रह करती है कि वह उन्हें नागरिकता प्रदान करने के लिए तत्काल कदम उठाए और उन्हें देश के अन्य नागरिकों को उपलब्ध करायी जा रही सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करे।
महोदया, इस संकल्प पर बोलते समय मैंने सदन के ध्यान में इस बात को लाने का प्रयास किया था कि पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं के संबंध में पाकिस्तान सरकार जो कहती है और पाकिस्तान की सरकार उनके साथ जो व्यवहार करती है, उसमें बड़ा भारी फर्क है। मैंने यह बात बताने की कोशिश की थी कि यदि हम कहे पर विश्वास करेंगे और जो वहां हो रहा है, उसकी तरफ ध्यान नहीं देंगे तो हम वहां के हिन्दुओं के प्रति न्याय नहीं कर सकते। मैं समझता हूं कि इसके अनेक उदाहरण हैं, विभिन्न पत्रिकाओं के माध्यम से जो कुछ मानवाधिकार संगठन, जो पाकिस्तान के अंदर कार्य करते हैं, हालांकि उनकी आवाज बड़ी दबी हुई रहती है, उन्होंने विभिन्न पत्रिकाओं के माध्यम से जो उल्लेख किए हैं, उनमें भी इस बात की पर्याप्त चर्चा है कि पाकिस्तान के अंदर हिन्दुओं की स्थिति बहुत खराब है। उनको किसी भी प्रकार की आजादी नहीं है।
महोदया, मुम्बई में सेन्टर फोर ह्यूमन राइट्स स्टडीज़ एण्ड अवेयरनेस नामक संगठन काम करता है। उसने इसका व्यापक अध्ययन किया है। उसका निष्कर्ष यह है कि सामान्यत सम्पूर्ण पाकिस्तान के आम आदमी के अंदर इस प्रकार की भावना बैठायी गयी है, विभिन्न माध्यमों से, शिक्षा के माध्यम से, भाषणों के माध्यम से, संविधान में संशोधन के माध्यम से, ज्यूडिशियरी के माध्यम से, जो वहां का परसैप्शन है, वह यह है कि हिन्दुस्तान हमारा नंबर एक शत्रु देश है। हिन्दुओं का एक मात्र घर यदि कोई बचता है, तो वह हिन्दुस्तान बचता है, इसलिए हिन्दुओं के प्रति शत्रु भाव को लेकर वह व्यवहार करते हैं। मैं समझता हूं कि आज भी हमने जो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है, वह इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान कुछ भी कहता है, वहां के नेता कुछ भी कहते हैं, कितनी भी सदाश्यता उनका स्वागत करने में हम दिखाते हैं, उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं, परंतु उसके तौर-तरीके में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं आता। मैं समझता हूं कि पिछले दिनों की जो घटनाएं हैं, वह इसकी पुष्टि करती हैं।
महोदया, यदि मैं संक्षेप में वर्णन करूं तो हिंदुओं के खिलाफ जो वातावरण वहां है, उसके परिणामस्वरूप वहां महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। रिंकल कुमारी, आशा कुमारी के प्रकरण विश्व विख्यात है, इसे सभी लोग जानते हैं। मैं इंडिया टुडे का एक लेख आपको पढ़ कर सुनाना चाहता हूं। अप्रैल, 2011 को एक व्यक्ति श्री मेहरचंद यहां आए थे। वे अपने साथ लगभग 135 डिब्बे ले कर आए थे, जिनमें उन हिंदू लोगों की राख थी, जो वहां मरे थे, ताकि उनकी राख को यहां गंगा जी में प्रवाहित कर सकें। उन्होंने एक बात कही कि मेरी पत्नी वर्ष 2009 में केंसर से मर गई और अपने पीछे दो बेटियां छोड़ गई। पत्नी की मृत्यु के बाद एक सुबह मैंने पाया कि मेरी छोटी बेटी जो उस समय 16 साल की थी, वह गायब है। पूछताछ करने पर मुझे बताया गया कि वह अपने से उम्र में काफी बड़े गुंडे के साथ भाग गई है। वह रातों-रात इस्लाम धर्म में धर्मांतरित हो गई। कुछ बुजुर्गों के हस्तक्षेप से मुझे उससे मिलने की इजाजत दी गई। वह रोते हुए मेरी छाती से चिपक गई। मुझे बिलकुल विश्वास नहीं था कि वह भाग गई है। वह गुंडा मेरी बेटी पर नज़र रख रहा था। मैंने बड़ी बेटी की शादी समय रहते कर दी थी और छोटी बेटी अभी बच्ची थी। काश मुझमें साहस होता और मैं अपनी बेटी के लिए लड़ पाता। स्थानीय पुलिस ने इसमें मेरी कोई सहायता नहीं की।
सभापति महोदया, ऐसे अनेक प्रसंग हैं जिनको ठीक से पढ़ पाना भी संभव नहीं हैं औऱ जिनको सुनकर भी दिल दहलता है। इसी प्रकार से वहां हिन्दुओं के रीति-रिवाज हैं यानी यदि उनका कोई रिश्तेदार या कोई उनका परिवार में मरता है तो वे शवदाह नहीं कर सकते। किसी त्यौहार पर कोई शोभायात्रा नहीं निकाल सकते। पूजन नहीं कर सकते। यानी यह स्थिति वहां पर हैं। आर्थिक दृष्टि से भी ऐसे अनेक उदाहरण हैं। मैं उनको कोट करके अक्षरश: नहीं कहना चाहता हूं क्योंकि जो लोग वहां से भागकर आए हुए हैं, उन्होंने बताया कि हम छोटा-मोटा काम करते थे। जो उनके मुस्लिम ग्राहक थे, उन्होंने यह सोचकर कि यह तो हिन्दू है, इसलिए इसका रुपया वापस देने का कोई लाभ नहीं है। उन्होंने उसका पैसा देना बंद कर दिया और उनकी पूंजी समाप्त हो गई और वे लुट-पिटकर भारत आ गये। यानी आर्थिक दृष्टि से, सामाजिक दृष्टि से और धार्मिक दृष्टि से सब प्रकार से हिन्दुओं का उत्पीड़न वहां पर हो रहा है। दुनिया के अंदर मानवाधिकार संगठन हैं। हम स्वयं यानी भारत मानवाधिकारों के लिए बहुत लड़ता है। यदि किसी को कुछ संकट होता है तो हमारे प्रधान मंत्री जी को कई बार रात को नींद भी नहीं आती है। अच्छी बात है। इतना संवेदनशील होना चाहिए परंतु यह हैरत है कि हिन्दुओं की इस दशा के प्रति सरकार संवेदनशील क्यों नहीं होती? वहां जो हिन्दू हैं, मानवाधिकार यानी उनको जीवन का अधिकार नहीं है, विचारों की आज़ादी नहीं है, सम्पत्ति का अधिकार नहीं है और यहां तक कि न्याय प्राप्त करने की भी उनको छूट नहीं है, जैसे मैंने अभी एक प्रकरण में दो लड़कियों का जिक्र किया था। जो उनके प्रकरण से प्रकट होता है।
सभापति महोदया, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनाईटेड नेशन्स ने रिफ्यूजी की एक परिभाषा दी है। मैं उस परिभाषा को पढ़ना चाहता हूं। इस परिभाषा में कहा गया है:
“Refugees are people who are forced to flee from their countries because of threats to their life linked to their race, religion, nationality, membership of a particular social group, or political opinion.” यह यूनाईटेड नेशन्स के द्वारा दी गई शरणार्थी की परिभाषा है। मैं नहीं समझ पाता कि यह परिभाषा पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं पर लागू होती है या नहीं होती है लेकिन वे सरेआम उनको शरणार्थी मानने को तैयार नहीं हैं। यह सरकार उनके किसी भी सुख-दुख को समझने को तैयार नहीं है जबकि मैं इससे भी आगे जाकर एक बात और कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान के अंदर रहने वाले हिन्दू ये वो लोग हैं जो देश के विभाजन के समय हमारे नेतृत्व पर भरोसा करके वहां पर रह गये थे। उनका कोई अपराध नहीं है। बाद में जो नेहरू लियाकत समझौता हुआ और जो सारी बातें हुईं, उनके ऊपर भरोसा करके वो वहां पर रहे और यदि वे अपनी मूलभूमि के अंदर आना चाहते हैं तो शरणार्थी के नाते भी जो अन्तर्राष्ट्रीय परिभाषा है और मानवीय कर्तव्य के नाते भी तथा हमारे नेताओं के द्वारा दिये हुए वादे के अनुसार भी उनको सम्मान पूर्वक इस देश के अंदर जगह दी जानी चाहिए। ऐसा मेरा आपसे बहुत विनम्र आग्रह है।
मैंने प्रारम्भ में ही कहा कि आखिर हम पाकिस्तान के व्यवहार को क्यों नहीं देखते? उसके कथन पर क्यों भरोसा करते हैं? मुझे लगता है कि कहीं हमारी सोच में वोट-बैंक की राजनीति घुसी हुई है। मैं बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि हम हिन्दुस्तान में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल हिन्दुस्तानी क्यों नहीं समझते? भारतीय क्यों नहीं समझते?
अभी अफज़ल गुरु का मसला हुआ। पहले हम उनको फांसी नहीं दे रहे थे। फिर हमने फांसी दे दी। वोट-बैंक के हिसाब से हमने अफज़ल गुरु को मुस्लिम माना। हम उसको केवल यह मानते कि उसने हमारे देश के प्रति अपराध किया है और नियम के अनुसार, कानून के अनुसार उसको उसके अपराध के लिए जो सजा होनी चाहिए, वह उसको मिलनी चाहिए। हम क्योंकि हिन्दुस्तान के नागरिक को हिन्दू या मुसलमान मानते हैं, हम क्योंकि वोट पर निगाह रखकर अपने फैसले रखते हैं और क्योंकि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की चिंता करके हम वोट-बैंक में कोई वृद्धि नहीं कर सकते, संभवत: केवल इस कारण से पाकिस्तान का हिन्दू उपेक्षित है और उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जब तक सरकार इस तरफ ध्यान नहीं देगी और जब तक हम अपनी मौलिक सोच को नहीं बदलेंगे कि एक तुष्टिकरण के लिए, एक वोट-बैंक की राजनीति के लिए ही हम किसी खास वर्ग की चिंता न करें, बल्कि यह सोचकर कि किसी खास वर्ग को भी हमारी तरह तकलीफ होती है, ऐसा सोचें। यह कैसे मान लिया गया कि यदि अफज़ल गुरु को फांसी दी गई तो सारा मुसलमान तबका नाराज हो जाएगा? यह बात सच नहीं है। कुछ लोग होंगे। ऐसे लोग सब जगह होते हैं। जब राजनीति या राजनीतिक निर्णय इस तरह के दबाव में होते हैं तो वोट बैंक की राजनीति के परिणामस्वरूप उन लोगों की चिंता भी नहीं कर पाते जिनकी चिंता करना हमारा कर्तव्य है।
महोदया, यही कारण है कि चाहे अंतर्राष्ट्रीय मंच ही क्यों न हो, हमने इस विषय को नहीं उठाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, वूमेन राइट्स संगठन में कभी पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की दशा का संज्ञान ही नहीं लिया है क्योंकि हमने कभी मामला उठाया ही नहीं है। जबकि उनके लिए इन सब समस्याओं का बहुत ही फिटस्ट केस है, जिसका अध्ययन करना चाहिए, हस्तक्षेप करना चाहिए लेकिन हमने कभी कोशिश ही नहीं की है। सार्क में पाकिस्तान भी है, हमने कभी इस मुद्दे को वहां नहीं उठाया। जैसा कि मैंने प्रारंभ में कहा कि मानवाधिकार के नाते हमारी जिम्मेदारी बनती है हमारे नेतृत्व का भरोसा करके यदि वे आना चाहते हैं, उनकी चिंता करें। वहां के गृह मंत्री ने कह दिया कि वीज़ा गलत जारी किया गया। इस तरह की स्थिति में न वीज़ा दिया जाएगा और न सुख चैन से रहने दिया जाएगा तो उनकी चिंता कौन करेगा? हम इस बात को उठाएं, यह हमारी जिम्मेदारी है। अगर हम इन विषयों को उठाएंगे तो अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी इसका संज्ञान लेंगे तभी इस समस्या का हल होगा।
महोदया, मैं कुल मिलाकर सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस विषय की गंभीरता को समझे। पाकिस्तान में हिंदुओं को शरणार्थी के नाते जो वहां से भागकर आए हैं, उन्हें उचित रूप से नागरिकता प्रदान करें। इसके साथ यह भी कहना चाहता हूं कि यदि वे सुरक्षित नहीं हैं तो उन्हें किसी भी तरीके से सुरक्षित जीवन दिया जाए।
प्रो. सौगत राय (दमदम): माननीय सभापति महोदया, मैं अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लाए गए प्रस्ताव का समर्थन करता हूं। मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूं, इसलिए नहीं कि मैं बीजेपी का समर्थन करता हूं बल्कि इसलिए कि उन्होंने संसद में अपने क्षेत्र की समस्या को बहुत धीरजपूर्वक रेज़ किया है। यह हमारे लिए सीखने की बात है कि कैसे अपने क्षेत्र की समस्या के विषय को उठाया जाता है। मुझ से पहले माननीय सदस्य बीजेपी के बोले हैं। मैं उनसे पूरी तरह सहमत नहीं हूं क्योंकि उन्होंने बहुत से डिवाइसिव इश्यू उठाए हैं। अफजल गुरु, इसके साथ क्या ताल्लुक है? उन्होंने फिर वोट बैंक की बात की। मैं समझता हूं कि इस तरह की बातें करने से समस्या हल नहीं होती है। मेरे ख्याल से यह समस्या मानवीय समस्या है।
महोदया, आप जानते ही हैं कि देश का बंटवारा हुआ, बंगाल का बंटवारा हुआ और पंजाब का बंटवारा हुआ। पंजाब में जनसंख्या का एक्सचेंज हुआ जबकि बंगाल में नहीं हुआ और बहुत से हिंदू ईस्ट पाकिस्तान में रह गए। अभी भी बांग्ला देश में 90 लाख के करीब हिंदू हैं। कुछ ऐसे हिस्से थे जो पूरे पाकिस्तान में चले गए। ऐसा ही एक हिस्सा सिंध है, आडवानी जी जहां से आते हैं, कराची से और एक एरिया बहावलपुर एरिया है। सिंध का बंटवारा नहीं हुआ था इसलिए पूरा सिंध चला गया और यहां के लोग दिल्ली, मुम्बई में आए और अब ज्यादातर सिंधी लोग कपड़े का व्यापार करते हैं। मेघवाल जी ने जिस सवाल पर सबका ध्यान आकर्षित किया वह बहुत ही गरीब लोगों के बारे में है। भील और मेघावाल एससी लोग हैं। ये लोग लेजिटिमेट वीज़ा लेकर हिन्दुस्तान आए थे। ये पाकिस्तान नागरिक जरूर थे लेकिन यहां आकर वापस नहीं जाना चाहते थे। यह बात सही है कि पाकिस्तान में बहुत फंडामेंटलिस्ट लोग हैं। पाकिस्तान में जो हिंदू बचे थे उन पर बहुत जुल्म हुए। इंडिया टुडे में ‘हिन्दूज इन पाकिस्तान’ बहुत बड़ा आर्टिकल निकला कि कैसे अत्याचार होता है। ये लोग वापस नहीं जाना चाहते थे, इनकी संख्या ज्यादा नहीं है। करीब 17,000 लोग खास तौर से जोधपुर में ट्रंजिट कैंप में रहते हैं।
मेघवाल जी के प्रस्ताव के मूल सवाल के अनुसार वह चाहते हैं कि इसे नॉर्मलाइज किया जाए। हमारे प्रांत में जो प्रॉब्लम थी, उसमें हम लाखों लोग इधर आये और वहां हमने कट ऑफ डेट 1971 रखी थी। बंगलादेश के जन्म तक हम कहते हैं कि 1971 कट ऑफ डेट है, लेकिन लोगों का आना-जाना बंद करना मुश्किल है, हमारा पोरस बार्डर है, इसलिए हम लोगों को आने से रोक नहीं सकते। लेकिन अभी भी हम बंगाल या आसाम में कानून के जरिये ठोस रास्ता निकाल सकते हैं। लेकिन जो बचे हुए 17 हजार लोग हैं, उनमें मैंने सुना है कि भील और मेघवाल में से कुछ लोग जम्मू-कश्मीर में रहते हैं। ये सब हिन्दू हैं, शेडय़ूल्ड कास्ट हैं और नागरिक अधिकार की प्रार्थना करते हैं। मैं समझता हूं कि जब श्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन जी जवाब देंगे, वह एक मानवीय दृष्टिकोण वाले आदमी हैं और वे सोच-विचार कर इन लोगों की समस्या का निराकरण करने की कोशिश करेंगे।
यहां यूनाइटेड नेशंस कंवैन्शन वगैरह के बारे में बताया गया, मैं उसके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता, क्योंकि रिफ्यूजीज की समस्या बहुत बड़ी समस्या है। बांगलादेश में रोहिंग्या लोग भागकर आये हैं, वे मुसलमान हैं, जो म्यांमार में रहते हैं, वही लोग आते हैं। रिलीजियस परसीक्यूशन के लिए एक मुल्क से दूसरे मुल्क में जाना एक पुरानी परम्परा है और यूनाइटेड नेशंस हाईकमिश्नर फॉर रिफ्यूजी हर साल एक रिपोर्ट पब्लिश करते हैं कि कितने ऐसे रिफ्यूजीज रिलीजियस परसीक्यूशन के लिए आये हैं। मैं उसके डिटेल में जाना नहीं चाहता। श्री अर्जुनराम मेघवाल जी बीकानेर से सांसद है और ये लोग जोधपुर में अधिक संख्या में रह रहे हैं, क्योंकि जोधपुर एक बड़ा शहर है। आप जैसलमेर जाइये, वह भी बार्डर है, वहां भी जोधपुर से जाना पड़ता है। यदि बीकानेर जाओ तो भी जोधपुर से जाना पड़ता है। जोधपुर के आसपास ये लोग बसे हुए हैं। मैं समझता हूं कि ह्यूमेनिटेरियन दृष्टिकोण से इस समस्या का निदान किया जाए और मुठ्ठी भर लोगों को हिंदुस्तान में नागरिक अधिकार दिया जाए।
इन बातों के साथ मैं मेघवाल जी के प्रस्ताव का राजनीतिक दृष्टिकोण या वोट बैंक के कारण से नहीं, बल्कि ह्यूमेनिटेरियन दृष्टिकोण से समर्थन करता हूं।
श्री महेन्द्रसिंह पी. चौहाण (साबरकांठा): महोदया, श्री अर्जुन मेघवाल जी जो प्रस्ताव लेकर आये हैं कि पाकिस्तान से भारत में प्रवास करने वाले और देश के विभिन्न भागों में ऐसे व्यक्तियों के समक्ष आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह सभा आग्रह करती है कि उन्हें नागरिकता प्रदान करने हेतु तत्काल कदम उठाया जाए और उन्हें देश के अन्य नागरिकों के समान अन्य सुविधाएं मुहैया कराये जाने के लिए सरकार योजना तैयार करे। ऐसा जो प्रस्ताव मेघवाल जी लेकर आये हैं, उसके लिए मैं उनका अभिनन्दन करता हूं और समर्थन देता हूं।
आजादी के समय हमारा देश एक अखंड हिंदुस्तान था। लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे देश का पश्चिम पाकिस्तान, पूर्व पाकिस्तान और भारत तीन भागों में बंटवारा हो गया। तब ऐसा माना जाता था कि जो जहां चाहता है, वह वहां रह सकता है। तब बहुत से लोग पश्चिम पाकिस्तान से भारत आये, बहुत से लोग पूर्वी पाकिस्तान से आये, लेकिन उस वक्त हजारों की संख्या में कत्ल हुए। जिनके कारण हमारी आजादी का जश्न दुखद बन गया। आजादी के समय पाकिस्तान में 75 लाख हिंदू थे, लेकिन आज सिर्फ 18 लाख बचे हैं। आज पाकिस्तान की आबादी 17 करोड़ है, इसमें पहले 27 प्रतिशत हिन्दू थे, लेकिन अब सिर्फ दो प्रतिशत ही बचे हैं। पाकिस्तान से हिंदुओं का बढ़ता पलायन एक गम्भीर चिंता का विषय है। हमारे हिन्दू वहां से क्यों पलायन कर रहे हैं? वे अपनी करोड़ों की संपत्ति छोड़ कर पाकिस्तान से हिंदुस्तान आ रहे हैं। वे अपनी मर्ज़ी से नहीं आ रहे हैं, बल्कि मज़बूरी में हिंदुस्तान आ रहे हैं। उनकी संपत्ति को लूटा जा रहा है। लड़कियों को किडनैप कर के ले जाते हैं और मुस्लिम युवकों के साथ उनकी शादी करवा देते हैं। महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। उनके कारोबार को बंद कर देते हैं। इतना प्रताड़ित करते हैं कि उसकी वजह से वहां बसे हिंदू लोग भारत आ रहे हैं। पाकिस्तान की सरकार उनको आने के लिए वीज़ा नहीं देती है। इसलिए वह तीर्थ यात्रा के नाम पर कि हम तीर्थ यात्रा के लिए जा रहे हैं, हमें जाने दीजिए, तब वे अपनी करोड़ों की संपत्ति छोड़ कर हमारे देश में आते हैं। आने के बाद वे अपना दुख हमारे सामने व्यक्त करते हैं कि वहां पर हमारी कोई सलामती नहीं है। ...( व्यवधान)
MADAM CHAIRMAN : The time allotted for the discussion on this Resolution is over. If the House agrees, the time may be extended by one hour, including for the Minister’s reply.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes, Madam.
MADAM CHAIRMAN: The time for the discussion on the Resolution is extended by one hour.
श्री महेन्द्रसिंह पी. चौहाण: हिंदूओं को वहां सुरक्षा नहीं मिल रही है। उनको लूटा जाता है। उनके साथ जबरदस्ती की जाती है। महिलाओं के साथ भी बलात्कार किया जाता है। इन सब मुसीबतों की वजह से जब हिंदू हिंदुस्तान में आ जाते हैं, तो उनको संरक्षण मिलना चाहिए। जो हिंदू पाकिस्तान से आते हैं, वे ज्यादातर राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर के आस-पास आ कर बसते हैं। पहले वे हमारे देशवासी थे, हमारे भाई हैं, हमारे बंधु हैं। हमारी मांग है कि उनको नागरिकों का अधिकार मिलना चाहिए और इस भूमि पर उनको रहने की सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। ऐसे परिवारों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करनी चाहिए ताकि वे सही ढंग से रह सकें।
श्री सतपाल महाराज (गढ़वाल): सभापति महोदया, मैं मेघवाल जी के रेज़लूशन के समर्थन में खड़ा हुआ हूँ। हमारे देश में सद्भावना और सौहार्द का वातावरण रहा है। हमारे देश ने दुनिया को आश्रय दिया है। हमारे ऋषियों की यह प्राथाना रही है कि -
“सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित् दुखभाग् भवेत। ” यहां सब की मंगल कामना की गई है। त्रेता युग में जब जनकपुरी में भीषण अकाल पड़ा, तब वहां की जनता अयोध्या में आ कर बसी। अयोध्यावासियों ने उनको आश्रय दिया। भारत ने तिब्बतियों को अश्रय दिया। जिस समय लंका अशांत था, लंका के निवासियों को, तमिल भाइयों को भारत के पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने भारत के अंदर आश्रय दिया। नेपाल में भी जब कठिन दौर चला तब नेपालियों को भी भारत ने आश्रय दिया। पाकिस्तान में वर्ष 2008 में 160, 2009 में 104, 2010 में 373, 2011 में 478 और अप्रैल, 2012 में 370 हिंदुओं को मार डाला गया। हाल ही में 9 जनवरी 2013 को पाकिस्तानी रेंजर दो भारतीय सैनियों के सिर काट कर अपने साथ ले गए। इस प्रकार का एक घिनौना वातावरण बना हुआ है। मैं समझता हूँ कि पाकिस्तान के हमारे हिंदू भाइयों को निश्चित रूप से भारत में शरण मिलनी चाहिए।
हिंदू शब्द का उद्गम सिंधू शब्द से हुआ है। सिंधू घाटी के अंदर रहने वाले लोग, क्योंकि फ़ारसी के अंदर ‘स’ को ‘ह’ बोला जाता है, इसलिए सिंधू का न कह कर के उनको हिंदू कहा गया। हमारे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की जो सभ्यता है, उसका भी उत्खलन होना चाहिए। जिससे हम सब को यह पता चले कि हमारी सभ्यता कितनी पुरानी है। जिस समय हड़प्पा की सभ्यता पनप रही थी, उस समय हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता से कपड़े बन कर मित्र के फ़ैरों के लिए जाया करते थे।
16.00 hrs. इसी प्रकार से जब हमारी सभ्यता चरम सीमा पर थी, तब मेसोपोटामिया की सभ्यता पनप रही थी। इतनी प्राचीन सभ्यता के वासी हम लोग हैं, तो ऐसे लोगों को भारत में निश्चित रूप से शरण मिलनी चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यचाद ज्ञापित करता हूं।
MADAM CHAIRMAN: The next speaker is Shri Ashok Tanwar. You would be allowed to speak only for two minutes.
श्री अशोक तँवर (सिरसा): महोदया, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। मैं अपने आपको हमारे साथी अर्जुन राम मेघवाल जी के बिल के साथ सम्बद्ध करता हूं और साथ ही साथ उसके ऊपर ज्यादा चर्चा न करते हुए केवल एक बात कहना चाहता हूं। मेरी कांस्टीच्युंसी जो सिरसा संसदीय क्षेत्र है, जब पाकिस्तान का हिंदुस्तान से विभाजन हुआ और करीब-करीब जो 30 से 35 प्रतिशत आबादी जो वहां से माइग्रेट होकर आयी, उनके तो बहुत सारे ज्वलंत मुद्दे हैं, मैं समझता हूं कि उनकी चर्चा बहुत से माननीय सदस्यों ने की है। इसके साथ-साथ हमारे कुछ साथी ऐसे हैं, जैसे सिरसा जिले में एक अलनाबाद तहसील है, जहां करीब 66 परिवार वर्ष 1992 में आये। आज भी उनकी नागरिकता का एक बहुत बड़ा मुद्दा है। पहले उनका वैलिड वीजा होगा, फिर उसके बाद केन्द्र में मामला आएगा, मैं आपके माध्यम से सदन से यही आग्रह करना चाहता हूं...( व्यवधान) इसीलिए अर्जुन जी, मैंने अपने आपको आपके साथ सम्बद्ध किया है, ताकि जल्दी से जल्दी इसके ऊपर कार्रवाई हो, ताकि इनको हम अधिकार दे सकें और आने वाले समय में इनको हिंदुस्तान की नागरिकता के माध्यम से ज्यादा सुविधायें प्रदान कर सकें।
MADAM CHAIRMAN: Thank you.
Now, the hon. Minister to reply to the discussion.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HOME AFFAIRS (SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN): Madam, I am deeply grateful to the hon. Members of this august House who have actively participated on the Resolution moved by Shri Arjun Meghwal for the formulation of an action plan to rehabilitate persons displaced from Pakistan.
Altogether, 14 hon. Members have taken part in the discussion, and I thank each one of them. I place on record my deep appreciation for their valuable suggestions and observations. I have carefully listened to the speeches made by each Member, and I have taken note of all the important points raised by the Members. I once again thank them for their valuable suggestions and observations.
I fully share the sentiments expressed by the hon. Members of this august House. Now, I may try to reply to almost all the important points raised by the hon. Members. I wish to take up the key issues one by one.
A very important issue has been raised by Shri Meghwal relating to the rehabilitation of displaced Hindu families presently coming from Pakistan. It is worthwhile to mention that in order to solve the massive problem of mass influx of displaced persons from the erstwhile West Pakistan -- as a result of partition in 1947 and to rehabilitate them -- the Government of India, during 1950's, had taken a series of measures by enacting a series of Acts. As the major works of claims, compensation and also rehabilitation, more or less, had been completed by 1970, the Central Government repealed all these Acts in 2005. At present, we do not have any Act in this connection because this august House has repealed all these Acts.
I would like to state that the Central Government has been very sensitive to the issues faced by the Pakistan nationals who migrated to India at various point of time. For instance, it has been decided that the cases of the Pakistan nationals who entered India prior to 31.12.2004 would be processed on a case to case basis, and if an applicant files an Affidavit before the authority prescribed under Rule 38 of the Citizenship Rules, 2009, that is, the Collector, District Magistrate and Deputy-Commissioner, it may be accepted in lieu of the Renunciation Certificate. The State Governments and UTs concerned have been duly requested to deal with these matters as per instructions given by the Ministry of Home Affairs. In fact, the Ministry has also stipulated a Standard Operating Procedure for dealing with foreign nationals who claim to be refugees. The gist of the procedure is as follows:
(i) The version of the foreign national making such claim will be carefully examined by the concerned FRRO/FRO. The FRRO/FRO will recommend the matter to the Ministry of Home Affairs (MHA) for grant of Long-Term Visa within thirty-days from the date of claim by the foreigner provided it is found that prima facie the claim is justified on the grounds of a well-founded fear of persecution on account of race, religion, sex, nationality, ethnic identity, membership of a particular social group or a political opinion.
(ii) MHA will consider all the inputs including the report of FRRO/FRO as well as inputs of the Ministry of External Affairs (MEA) and arrive at a decision on Long-Term Visa with validity up to one year from the date of issue. Details of cases in which Long-Term Visa is ordered will be shared by the MHA with MEA.
(iii) The Long-Term Visa for such foreigners will be renewed every year for a maximum of five years at the level of the FRRO/FRO concerned based on assessment of the conduct of the foreigner and security implications. In case of any adverse report is arrived at, the MHA will be immediately taking appropriate action in this connection.
(iv) During such period of stay in India, the foreigner national will be allowed to take up any employment in the private sector or undertake studies in any academic institution in our country.
(v) No such foreigner will be deported without the permission or specific clearance of the MHA.
(vi) No person who is an economic immigrant will be entitled to the benefits of these guidelines.
Another important issue has been raised by Shri Meghwal and other Members relating to rehabilitation of West Pakistan refugees of 1947 who have settled down in Jammu & Kashmir (J&K). The hon. MPs -- during the course of the debate -- have highlighted various grievances and demands of West Pakistan refugees of 1947 who have settled in the State of Jammu & Kashmir.
In the wake of Pakistan aggression in Jammu and Kashmir in 1947, about 4,745 families have migrated from the then West Pakistan and were settled in Jammu, Kathua and Rajouri Districts of Jammu Division. After their migration, some of these families occupied Government land and evacuee property land. The State Government, in fact, allowed them to retain up to 8 acres per family of irrigated land or 12 acres of un-irrigated land subject to certain conditions.
The West Pakistan refugees settled in Jammu & Kashmir are not permanent residents of the State in terms of Jammu & Kashmir Constitution. Consequently, they do not enjoy the benefits that other residents of the States are entitled to. These West Pakistan refugees of 1947 are very much the citizens of India as they have the right to cast their vote in Parliament elections.
The Government of India has requested the State Government from time to time to confer the benefits of State subject on West Pakistan refugees and to consider the issue of Permanent Resident Certificate to these refugees. The matter is under the domain of the J& K administration, and as all of you are aware that we cannot directly intervene in the matter of J&K because J&K enjoys special status in view of Article 370 of our Constitution.
In order to mitigate the problems of West Pakistan refugees, the hon. Prime Minister announced a package for J&K in 2008. The package provides for concession to children and grandchildren of West Pakistan refugees settled in J&K in matters of admission in technical and educational institutions approved by the All India Council of Technical Education (AICTE). The All India Council of Technical Education (AICTE) has issued guidelines for creating necessary provisions in this connection. The State Government of J&K has also been advised to cover the West Pakistan refugees under various Centrally-sponsored schemes that are being implemented in the State of J&K. This Ministry has advised the Credit Guarantee Trust for Micro and Small Enterprises to impress upon the member lending institutions such as public sector banks located in the State of Jammu and Kashmir to extend credit facility to West Pakistan refugees under the Credit Guarantee Scheme.
Another important question has been raised by hon. Members relating to permission to Pakistani nationals residing in border areas to visit the West of National Highway-15 in Rajasthan. I think, Madam, you have also raised this issue the other day. The Government has examined the request for grant of permission to Pakistani nationals residing in the border areas to visit the West of National Highway-15 in Rajasthan. As you know, Madam, it falls in the protected area. On security considerations, it has not been possible to grant such blanket permission to the Pak nationals to visit that area. However, such requests of Pakistani nationals received through the State Government of Rajasthan are examined on a case to case basis in consultation with security agencies for grant of requisite permission.
Madam, another important issue has been raised, that is, delegation of power to the District Collectors in the States of Gujarat and Rajasthan for grant of Indian Citizenship to Pakistan nationals. This is a very important issue which has been raised by some Members. The powers to grant Indian Citizenship to nationals of Pakistan belonging to minority Hindu community were delegated to the Collectors of Kutch, Patan, Banaskantha, Ahmedabad of Gujarat and Barmer and Jaisalmer of Rajasthan in 2004 for one year to grant citizenship to Pak nationals of minority community staying in the border districts of Rajasthan and Gujarat as a special case. This delegation was extended up to 2007 on year to year basis. Such powers were not delegated to any other State. Sufficient time was given to these two States to decide such pending cases.
Madam, I may mention that some of the cases were received by the Ministry of Home Affairs where Indian Citizenship was granted to Pak nationals without renunciation of Pak nationality which may result in dual nationality. This is against our Constitution. Such lapses have security implications also. You are fully aware of that.
The provisions of applying for Indian Citizenship continue to be available as per provisions of Citizenship Act of 1955. Normally, the Central Government takes about four months in processing cases and issuing acceptance letter in consultation with security agencies. In order to make the procedure simpler, faster and transparent, the Home Ministry has decided to introduce what is called online submission of application for grant of citizenship with effect from 1.12.2001.
Another important issue has been raised about the fee structure. A reasonable fee of Rs. 5,500 was prescribed for citizenship under Section 5 (1) (a) of Citizenship Act, 1955 in 2005. This is a one-time payment for acquiring Indian Citizenship. We consider it to be quite reasonable.
Another very important issue, that is, permission to go to other cities in India for livelihood, work permit, marriage, death or any other important work was raised by the hon. Members. I am extremely happy to inform the House that Pakistan nationals staying in India on long-term visa are permitted to engage in employment of purely private in nature. Similarly, children of such Pak nationals are also permitted to take admissions in schools, colleges and universities subject to usual conditions prescribed for foreign nationals in this regard. On security considerations, it may not be possible to grant blanket permission to visit other cities. However, Pakistani nationals on long-term visa can get requisite permission for visiting other places through the State Government concerned.
Madam, a very important issue has been raised by almost all the hon. Members, that is, the condition of the Hindu minorities who are living in Pakistan.
As such, I cannot give any assurance on that. The issue has been taken up by the Government of India from time to time with Pakistan Administration. Through diplomatic channel alone, we can take up that issue. Right now, I can tell you that much.
Madam, coming to the question of deportation of Pakistani nationals belonging to Minority communities in Pakistan, again I would like to say that this issue will be taken up at the level of Pakistan Government through diplomatic channel by the Government of India.
I am happy to reassure that till the proposal for grant of a long term visa is under consideration, Pakistani nationals will not be deported to Pakistan.
I would like to reiterate that the Government of India is very sensitive to the issue related to the welfare of all foreign nationals in India including Hindu Pak nationals who deserve support and attention subject to the laws of the land and policies of the Indian Government.
I once again thank hon. Arjun Meghwalji, Madanlal Sharmaji, your honour Shrimati Sumitra Mahajan, T.K.S. Elangovan Ji, Shri B. Mahtab, Dr. Baliram, Dr. Mirza Mehboob Beg, Shri Choudhary Lal Singh, Shri Kabindra Purkayastha, Shri S.D. Shariq, Rajendra Agrawal Ji, Prof. Saugata Roy, Shri Mahendrasinh Chauhan, Shri Satpal Maharaj and Shri Ashok Tanwar for their contribution. Everybody has contributed a great deal to this live discussion. I thank everyone for their contributions and for their suggestion/observations.
In view of these facts stated by me, I earnestly request the hon. Member MeghwalJi to withdraw his resolution.
श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): पाकिस्तान में जो हिन्दू परेशान हो रहे हैं, उनको भी भूख लगी है, उनकी भी चिन्ता करें और उसके बाद घर जाने की सोचें। ये सब हमारे साथी हैं, ये इस चर्चा में यहां बैठे हैं, इसलिए मैं इनको भी बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
सभापति महोदया, मैं अभी मंत्री जी का जवाब बहुत सावधानी से सुन रहा था। ये काफी मेहनत करके आए हैं, आम जैसे कोई मंत्री रिप्लाई देता है, उस तरह से इनका रिप्लाई नहीं था। आपने काफी मेहनत करके रिप्लाई दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद दूंगा। लेकिन मेरे चार-पांच प्वाइंट ऐसे थे, जिनको आपने बहुत ढंग से एड्रेस नहीं किया। मेरे सिर्फ पांच प्वाइंट्स हैं। मेरे जो राजस्थान के साथी बैठे हैं, इन्हें सब पता है। ऐसा नहीं है कि राजस्थान के चीफ मिनिस्टर इस समस्या से वाकिफ़ नहीं हैं। मैं इसलिए कहना चाहता हूं, सौगत राय जी चले गए, जौधपुर मे ही ट्रंज़िट स्टेशन है। राजस्थान की सरकार ने भी कुछ रिकोमेंडेशन की है। मेरा यह कहना था कि पहले यह पता लगाइए कि कितने पाकिस्तानी नागरिक राजस्थान में रह रहे हैं, क्या उसका कोई सर्वे कराएंगे? इसका आपने कोई जवाब नहीं दिया। राजस्थान के अलावा वे गुजरात में कितने रह रहे हैं? सभापति जी आप स्वयं जहां से आते हैं, इन्दौर में कितने रह रहे हैं? भारत के अन्य भागों में वे कितने रह रहे हैं और वे क्यों रह रहे हैं, वे क्यों नहीं वापस जाना चाहते हैं? इसका सर्वे करा के एक लिस्ट बनाते, उसका इसमें आपने कोई जवाब नहीं दिया।
दूसरा मेरा इश्यू बड़ा महत्वपूर्ण और मार्मिक था। उसका सारांश यह था कि नेशनल कमिशन फोर जस्टिस एंड पीस की अध्यक्षता में जो रिपोर्ट आई, उस रिपोर्ट ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए, उसमें यह लिखा हुआ था कि पाकिस्तान में हिन्दुओं की न जिन्दगी सुरक्षित है, न इज्जत। आप इसमें चिन्ता नहीं करेंगे। खाली यह कह देने से, they are Pakistani nationals. It is not sufficient Minister Sir. ये वे लोग हैं, इनकी कोई गलती नहीं है। जब देश के टुकड़े हुए, तब वे वहां रह गए। मैं उनको अच्छी तरह से जानता हूं, कई लोगों से मैं मिला हूं। मेघवाल, भील, चारण, राजपूत और सिंधी समाज के भी वे लोग हैं।
मैं उनसे मिला हूं, वे कहते हैं कि हमारा क्या कसूर था। मेघवाल और भील तो यह कहते हैं कि हम मजदूरी करने के लिए बहावलपुर गये हुए थे और जब डिवीज़न हुआ, हम डिवाइड हुए तो हमें कहा गया कि आप यहां रहो, कोई प्रोब्लम नहीं है। अभी राजेन्द्र अग्रवाल जी सही कह रहे थे, नेहरू-लियाकत समझौता हुआ, बोले कि आपको कोई तकलीफ नहीं देंगे, आप यहां पाकिस्तान में आराम से जिंदगी बसर कर सकते हैं। आज उनकी हालत क्या है, आज हालत यह है कि वे किसी के यहां काम करते हैं तो उनको कहते हैं कि आप को मजदूरी नहीं दी जाएगी तो वे कहते हैं कि क्या दोगे, वे कहते हैं कि खाली खाना खाओ और गुजर-बसर करो। क्या आदमी खाली खाना खाने के लिए वहां रहेगा? उसकी क्या गलती थी? मैंने रेवेन्यू रिकॉर्ड देखा है, एज़ ए डी एम भी देखा है और उसमें अगर आप तीन पीढ़ियां पहले जाओगे तो वे लोग यहीं के रहने वाले थे, हमारे बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी, जोधपुर, यहां के रहने वाले लोग थे। वे मजदूरी करने के लिए वहां बहावलपुर चले गये और उस समय जब इनको कहा कि आपको कोई तकलीफ नहीं होगी, यहां रहिये तो वे वहां रह गये। उनकी क्या गलती है? आज वे तकलीफ में हैं।
ये लोग कोई भगोड़े नहीं हैं, वे कोई भाग कर नहीं आ रहे हैं। ये वे लोग हैं, जो पासपोर्ट से आ रहे हैं, वीज़ा से आ रहे हैं, कोई रामदेव जी के दर्शन करने आ रहा है, कोई हिंगलाज़ माता के दर्शन करने आ रहे हैं, ये वे लोग हैं। अभी कुम्भ में मेला हुआ तो वे कुम्भ में स्नान करने के लिए आये, ये वे लोग हैं। वे जोधपुर, जहां से हमारे मुख्यमंत्री जी आते हैं, वह उनका गृह जिला है। वहां वे ट्रंजिट कर रहे हैं और वहां ट्रंजिट कर रहे हैं तो जो जोधपुर की जनता है, सभापति जी, मैं आपके माध्यम से जोधपुर की जनता का भी धन्यवाद करना चाहता हूं कि वह इतने लोगों का प्रबन्ध कर रही है। वहां टेंट लगा हुआ है, उनको खाना खिला रहे हैं, उनके रहने की, नहाने की, धोने की व्यवस्था की जा रही है। अभी मेरे ठीक सामने अशोक तंवर साहब बैठे हैं, एलनाबाद के डिस्ट्रिक्ट कलैक्टर और एस.पी. साहब ने उनको धमकाया, वे कई सालों से वहां एलनाबाद में रह रहे थे तो वहां पर एक लोक सीमांत संगठन के हिन्दू सिंह सोढ़ा हैं, उन्होंने कहा कि आपको डरने की जरूरत नहीं है, आप यहां जोधपुर आ जाइये। एलनाबाद से भी 100-125 लोग जोधपुर में बैठे हैं, वहां शरण लिए हुए हैं। जब कोई प्राइवेट आदमी शरण दे रहा है, वहां प्राइवेटली जोधपुर के लोग उनको शरण देने के लिए मैनेज कर रहे हैं तो भारत सरकार उन लोगों को शरण क्यों नहीं दे सकती, मेरा यह यक्ष प्रश्न, सभापति जी, आपके माध्यम से मंत्री जी से है। Why can you not do it when the private people are doing it?
मंत्री जी, यह कोई साधारण इश्यू नहीं है, यह बहुत गम्भीर विषय है। मेरा यह कहना है कि आप पांच बिन्दुओं के बारे में तो कम से कम मुझे आश्वासन तो देते, आपने मेरे से अपील कर दी कि आप इसको विथड्रा करिये। कभी-कभी सरकार को यह सोचना चाहिए कि जब कोई गम्भीर विषय एक प्राइवेट रैजोल्यूशन के नाते कोई एक मैम्बर लाता है तो सरकार को गम्भीरता से उस पर विचार करना चाहिए। आपने अपने जवाब में कहा, हम यह क्या मांग रहे हैं, हम चार-पांच चीजें मांग रहे हैं कि इनको शरणार्थी का दर्जा दे दिया जाये। आप उनको रिफ्यूजी स्टेटस क्यों नहीं दे सकते, I cannot understand it! वे लोग अनडिवाइडिड फैमिली के ही लोग हैं और वे डिवाइड होने के बाद वहां चले गये या वहां रह गए। उनके पुरखे देखोगे तो उनके पुरखों की यहां जमीनें हैं। गोपाल सिंह जी शेखावत मेरे साथी हैं, यहां बैठे हैं, इनके कई रिलेटिव मुझे ओसियां में मिले थे, उन्होंने कहा कि ये चारण समाज के लोग वहां चले गये, उनके दादा यहां रहते थे। आप अगर रेवेन्यू रिकार्ड देखोगे तो इनके दादा और उनके दादा मेल खाते हैं। फिर आप उनको रिफ्यूजी स्टेटस क्यों नहीं दे सकते? मेरा आपसे कहना है कि उनको शरणार्थी का दर्जा क्यों नहीं दे सकते, उस पर आपने कोई जवाब नहीं दिया।
दूसरा मेरा यह पाइंट था कि सिटीज़नशिप क्यों नहीं दे सकते, वे वहां नहीं जाना चाहते। मंत्री जी, आपको पता है, मैंने प्रयास किया, हमारी भारतीय जनता पार्टी ने प्रयास किया। हमारी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वहां गये, मैं यहां इस मंच से कहना चाहता हूं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री वहां गये और कांग्रेस पार्टी के लोग भी वहां गये। उन्होंने सब ने समझाया, उन्होंने कहा कि हम नहीं जाएंगे, क्योंकि, हमारी बहन-बेटी वहां सुरक्षित नहीं हैं। हम पाकिस्तान वापस नहीं जाएंगे, हम मर जाएंगे, लेकिन वहां नहीं जाएंगे। अगर वे नहीं जाएंगे ,तो क्या जीने का अधिकार उन्हें नहीं मिलेगा? क्या हम जबरदस्ती उन्हें वहां भेजेंगे कि आप मरने के लिए पाकिस्तान जाइए?
महोदय, यह बात ठीक नहीं है। जब मैं उनसे जाकर मिला तो बहुत मार्मिक पीड़ा होती है, उसमें बच्चे भी हैं, महिलाएं भी हैं, छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। ये जो एलनाबाद से आये हैं, उनके तो साथ में बच्चे हैं, उनको एलनाबाद से खदेड़ दिया गया, अगर जोधपुर वाले सुरक्षा करने वाले नहीं हों, शरणार्थी शिविर चलाने वाले नहीं हों तो वे कहां जायेंगे? मेरी दूसरी बात यह थी कि आप उन्हें नागरिकता क्यों नहीं दे सकते और यह अधिकार आप डीएम को क्यों नहीं दे सकते? आपने कहा कि वर्ष 2004 से वर्ष 2007 तक हमने डीएम को अधिकार दिया था, तो आपने इसकी प्रक्रिया को इतना जटिल क्यों रखा? अब तक कुछ नागरिकताएं मिलीं हैं, तो कुछ और भी ले लेते। अब ये जो लोग आये हैं, ज्यादातर रिंकल केस के बाद आये हैं। यह जो रिंकल केस हुआ, उससे आए हैं, ये हमने नहीं बुलाये हैं। आप यह समझ रहे होंगे कि हम उन्हें बुला रहे होंगे, नहीं। रिंकल केस के बाद एक वातावरण बना, अंतर्राष्ट्रीय ह्यूमन राइट संगठन सक्रिय हुए और पाकिस्तान में माइनेरिटीज, जो हिन्दू वहां रह रहे हैं और ऐसा नहीं है कि वहां सिर्फ हिन्दू परेशान है, वहां पारसी भी परेशान है, वहां ईसाई भी परेशान है। मंत्री जी, वहां ईसाई भी परेशान है। ...( व्यवधान) जितने भी पाकिस्तान में माइनेरिटीज हैं, वे सब परेशान हैं।...( व्यवधान) सतपाल महाराज जी आप सही कह रहे हैं, मैंने तो पहले ही बोला है कि वहां क्रिश्चन भी परेशान हैं।...( व्यवधान) जोशी जी, मुस्लिम कम परेशान हैं। ...( व्यवधान) यादव साहब, आप तो राजस्थान के प्रभारी हो, आप एक बार जोधपुर जाकर तो देखो कि उनकी हालत क्या है? ज्योति जी, शायद आप तो जोधपुर गये होंगे...( व्यवधान) नहीं, नहीं, बाकी लोग इतने परेशान नहीं हैं, ये वाकई में बहुत परेशान है और इनकी परेशानी हमें मानवीय आधार पर हल करनी चाहिए। मेरी यह बात समझ में नहीं आती कि इसकी पॉवर आप डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को क्यों नहीं दे सकते? आपकी मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के लोग कहते हैं कि नो, नो, नो वी कैन नॉट डेलिगेट इट, क्यों भाई? डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पहले नागरिकता देते थे। जो एमएचए ने रूल्स और रेग्युलेशन बनाये हैं, ये उसी के तहत तो देंगे। एमएचए रूल बनाता है तो बन्दूक का लाइसेंस डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट देता है, वह बन्दूक लेकर किसी को मार भी सकता है, फिर भी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पर आप रिलाई करते हो। नागरिकता देने की पॉवर आप डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को नहीं दे सकते, नागरिकता देने के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को पॉवर क्यों नहीं दे सकते? मेरा यह कहना है। आप कह रहे हैं कि हमने वर्ष 2004 में दिया, वर्ष 2007 में दिया, अब नहीं देंगे, इसका आपने कोई आश्वासन नहीं दिया।
आपने फीस बढ़ायी। आपने फीस किसके लिए बढ़ायी? ये पाकिस्तान से भागे हुए लोग हैं। ये जबरदस्ती यहां आ गये या कोई आतंकवादी हैं, कोई अनरेस्ट फैला रहे हैं या कोई अव्यवस्था फैला रहे हैं, ऐसा नहीं है।...( व्यवधान) वे बढ़ी हुई फीस नहीं दे सकते हैं। ये अधिकतर वीकर सैक्शन ऑफ दी सोसायटी के लोग हैं। अब जो वहां पाकिस्तान में रह गये हैं, ये वह लोग हैं। आपने बहुत फीस बढ़ा दी है। यह सुझाव, सलाह आपको किसने दी? आप कम से कम फीस तो वापस ले लो, जो पुरानी फीस है, उसमें बात कर लो। आज अगर एक फैमिली में पांच लोग हैं, तो उनको लाख, सवा लाख रूपये फीस देनी पड़ती है, उनके पास फीस नहीं है। मैं उनसे मिला था कि आपको इस फीस में क्या प्रॉब्लम है, तो उन्होंने कहा कि हम तो वैसे ही बेघर है, हमारे पास कोई घर नहीं है। हम अगर नागरिकता भी लेने जायें तो डेढ़ लाख रूपये कहां से लायेंगे तो हम फार्म भी नहीं भर सकते। मंत्री जी, आप थोड़ा मानवीय आधार पर सोचिये। मंत्री जी आप बहुत अच्छे आदमी हैं। मैं एक बार आपसे मिला हूं, आपमें मानवीय आधार पर सैंसिबल सोच है तो फिर आप इस मामले में क्यों नहीं सोच रहे हो? आपको किसी ने ऐसा कह दिया है कि ऐसा मत सोचो तो आप ज्यादा उन पर डिपेंड मत रहो, आप अपने विवेक के आधार पर निर्णय करो। अभी इन्होंने क्या किया, जब यह बिन्दु हमने यहां उठाया, इसके बाद इस्लामाबाद में एक एक्शन हुआ। क्या हुआ, भारतीय दूतावास, यह तो आपका ही है, विदेश मंत्रालय के लोग यहां बैठे होंगे...( व्यवधान) यह सरकार का है, मेरा तो है ही, सबका है। मैंने गलती मान ली है, इनको नागरिकता दिला दो तो आप जो कहोगे, वह हम मानेंगे। ...( व्यवधान) यहां इज्यराज सिंह जी भी बैठे हैं, आप जो कहेंगे, हम उसे मानेंगे। मैं कह रहा हूं कि इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास वीजा नहीं दे रहा है। अब जो लोग आ रहे हैं, उन्हें वीजा नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बहुत जटिलताएं पैदा कर दी हैं। डिवाइडेड फैमिली में अगर कोई मेंबर मर जाता है तो भी उन्हें वीजा नहीं देते हैं। कुछ डिवाइडेड फैमिली हो गई , कोई यहां रह गया, कोई पाकिस्तान चला गया। अब कोई कहता है कि मेरे फादर की मृत्यु हो गयी, अपना वह जो भारतीय दूतावास का आदमी है, वह यह कहता है कि किसी राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराकर लाओ कि आपके फादर की डेथ हो गयी है। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स से आप क्या आदेश जारी कराते हैं? वह आदमी कहां से लाएगा? गजटेड ऑफिसर से वेरिफाई कराने के लिए, आप इस तरह की जटिलताएं पैदा मत करिए। जब हम ने यह विषय उठाया तो आपने एक और जटिलता पैदा कर दी। लोग जोधपुर में ही परेशान नहीं हैं बल्कि ऐलनाबाद और इंदौर में भी लोग परेशान है। आपने गुजरात में लाँग टर्म वीजा की बात कही, उनके रोजगार की बात कही। अभी-अभी जोधपुर में एक केस आया, बद्री जी यहां बैठे हैं वे जानते हैं। सनलाइट हॉस्पिटल में सिंध से स्टडी किए हुए कुछ डॉक्टर्स काम करते थे उनको निकाल दिया गया। उनको बोला गया कि आप लोग तो पाकिस्तानी हैं। वे आप के पास भी आए होंगे। ये हमारे सब साथी हमारे समर्थन के लिए बैठे हैं। ये हमारे अगेनस्ट में नहीं है। हमारे साथी हमारे समर्थन में वोट करेंगे। ...( व्यवधान) अभी मंत्री जी ने जे. एंड के. के एक विषय में कहा कि वहां के उस समय के मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि आप जम्मू-कश्मीर में रहिए। हम आपको कोई तकलीफ नहीं आने देंगे। जो जम्मू-कश्मीर से पंजाब आ गए, वे इस देश का प्रधान मंत्री बन सकते हैं। मंत्री जी जो जम्मु-कश्मीर में रह गए उनकी क्या गलती है। आप उनको दो एकड़ लैंड दे रहे हैं। 65 साल में उनकी फैमिली बड़ी हो गई तो वे दो एकड़ लैंड में क्या करेंगे? आपकी क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत उनको लोन भी नहीं मिलता है, वे नागरिक नहीं हैं। आप कौन सी स्कीम के तहत उनको लोन दे रहे हैं, यह मेरी समझ में नहीं आता है। वे नागरिक नहीं हैं। हमारा यह कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी। उस समय के मुख्य मंत्री ने कहा कि आप लोग यहां रहिए, हम आप को सारी सुविधाएं देंगे। वे बेचारे वहां रह गए। लाल सिंह चौधरी जी यहां नहीं हैं वे कहते हैं कि वे एमपी के चुनाव में तो वोट दे सकता है, लेकिन वे एमएलए के चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं। वे चुनाव में खड़े नहीं हो सकते, वोट डाल नहीं सकते हैं, ऐसी काहे कि नागरिकता है? अगर धारा 370 आड़े आती है तो इसमें भी संशोधन करना चाहिए। ह्ल( व्यवधान) सतपाल महाराज जी कह रहे हैं कि वे निकाय के चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं। हमारे सभी साथी सदन में मेरे साथ हैं। सभापति महोदया, आप भी मेरे साथ हैं, मंत्री जी भी साथ हैं तो यह संकल्प क्यों नहीं पास हो रहा है? मेरा यह यक्ष प्रश्न आप के माध्यम से है।
सभापति महोदया: क्या आप यह विद्ड्रा कर रहे हैं?
श्री अर्जुन राम मेघवाल: मंत्री जी कुछ आश्वासन देंगे, तभी विद्ड्रा करूंगा।
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: Meghwalji, all these points that you have raised right now, you had, in fact, raised them on the day when you had moved the Resolution also. I have covered almost all the points in my reply.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: You have covered them but you have not given any assurance to me.
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: What assurance can I give you?
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: I want refugee status for them. Would you give them refugee status?
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: At the moment, we cannot consider that issue at all.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: What is your action plan regarding citizenship?
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: There is absolutely no problem about citizenship. I have made it absolutely clear.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: Can you give this power to the District Magistrate of the concerned District?
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: As of now, there is absolutely no problem regarding citizenship at all for the people who have come from Pakistan.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: You have to give some assurance to me. सतपाल महाराज जी कह रहे हैं कि मैं मंत्री होता तो यह दे देता।ह्ल( व्यवधान)
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: If you have got any specific problem, you can let me know. I will look into that. I will correct it.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: It is not a specific problem but it is a general problem. My point is that you are not giving refugee status to the Pakistani minority which is coming here.
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: We cannot give refugee status.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: You are not providing citizenship. You are providing the citizenship but the process is very complicated.
MADAM CHAIRMAN : You only request him to withdraw.
SHRI MULLAPPALLY RAMACHANDRAN: Meghwalji, with all humility at my command, I would request you to withdraw the Resolution.
MADAM CHAIRMAN: Are you withdrawing the Resolution?
श्री अर्जुन राम मेघवाल: मंत्री जी आप कुछ तो आश्वासन दीजिए तो मैं यह विद्ड्रा कर लूंगा। ह्ल( व्यवधान)
सभापति महोदया : धन्यवाद।
…( व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल: मैं इसे विद्ड्रा कर सकता हूं लेकिन मेरी आत्मा यह एलाउ नहीं कर रही है इसलिए मैं अपनी आत्मा के अनुसार सदन में आचरण करूंगा। ह्ल( व्यवधान)
MADAM CHAIRMAN: The question is:
“Taking into account the problems being faced by the persons migrated from Pakistan to India and settled in various parts of the country, this House urges upon the Government to take immediate steps to grant them citizenship and formulate a time bound action plan to extend them facilities as are available to other citizens of the country.” The motion was negatived.
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