State Consumer Disputes Redressal Commission
Bank Of Baroda vs Hemant Kumar Darolia on 25 September, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1773/2016 (Arisen out of Order Dated 09/08/2016 in Case No. C/582/2013 of District Kanpur Nagar) 1. Bank Of Baroda Through its Branch Manager Generalganj Branch Vardan Market Generalganj Kanpur Nagar ...........Appellant(s) Versus 1. Hemant Kumar Darolia S/O Sri Bhagwati Prasad R/O House No. 56/35 Shatranji Mohal Kanpur ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT For the Appellant: For the Respondent: Dated : 25 Sep 2017 Final Order / Judgement राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन ऊ अपील संख्या-1773/2016 (सुरक्षित) (जिला उपभोक्ता फोरम, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या 582/2013 में पारित आदेश दिनांक 09.08.2016 के विरूद्ध) Bank of Baroda, through its Branch Manager, Generalganj Branch Vardan Market, Generalganj, Kanpur Nagar. .................अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बनाम 1.
Hemant Kumar Darolia, son of Bhagwati Prasad resident of House No. 56/35, Shatranji Mohal Kanpur.
2. National Insurance Company, Bhatiya Complex, 124/1 C-Block, Govind Nagar, Kanpur Nagar through its Branch Manager.
.................प्रत्यर्थीगण/परिवादी एवं विपक्षी सं02 समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री हरि प्रसाद श्रीवास्तव, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी सं01 की ओर से उपस्थित : श्री टी0एच0 नकवी, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी सं02 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक: 09.11.2017 मा0 न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय परिवाद संख्या-582/2013 हेमन्त कुमार डारोलिया बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा जनरलगंज एवं नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, कानपुर नगर द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 09.08.2016 के विरूद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत राज्य -2- आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
''उपरोक्त कारणों से परिवादी का प्रस्तुत परिवाद विपक्षी सं0-1 के विरूद्ध आंशिक रूप से इस आशय से स्वीकार किया जाता है कि प्रस्तुत निर्णय पारित करने के 30 दिन के अंदर विपक्षी सं0-1 बैंक ऑफ बड़ौदा, परिवादी को एकमुश्त धनराशि रू0 50,000.00 तथा क्षतिपूर्ति के रूप में रू0 25000.00 अदा करे।
विपक्षी सं0-2 बीमा कंपनी की सेवा में कोई कमी न कारित किये जाने के कारण विपक्षी सं0-2 को प्रस्तुत परिवाद से अवमुक्त किया जाता है।'' जिला फोरम के निर्णय व आदेश से क्षुब्ध होकर परिवाद के विपक्षी संख्या-1 बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह अपील प्रस्तुत की है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री हरि प्रसाद श्रीवास्तव और प्रत्यर्थी संख्या-1 की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री टी0एच0 नकवी उपस्थित आए हैं। प्रत्यर्थी संख्या-2 की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है।
मैंने अपीलार्थी और प्रत्यर्थी संख्या-1 के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।-3-
अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्त सुसंगत तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्तुत किया है कि उसका खाता अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ऑफ बड़ौदा के यहॉं है, जिसका नं0 27280100000982 है।
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ऑफ बड़ौदा प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी के बीमा एजेंट के रूप में कार्य करता है और दोनों विपक्षीगण का आपस में टाईअप है और इसी टाईअप के क्रम में अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक मेडीक्लेम कराने वालों का प्रीमियम एकत्रित करके प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी के यहॉं भुगतान कर बीमा पालिसी प्रदान करते हैं। अत: अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक की सलाह पर प्रत्यर्थी/परिवादी ने उसके यहॉं दिनांक 03.10.2012 को मेडीक्लेम पालिसी की औपचारिकतायें पूरी कर दिनांक 03.10.2012 को ही चेक संख्या-000017 दिनांक 03.10.2012 3393/-रू0 का प्रस्तुत किया। तब अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने उसे विश्वास दिलाया कि 1-2 दिन में उसे मेडीक्लेम पालिसी प्रदान कर दी जाएगी।
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि उसका पुत्र अभिषेक डारोलिया, जो नौकरी के सिलसिले में दिल्ली में था दिनांक 16.10.2012 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना बसंतकुंज दिल्ली में दिनांक 16.10.2012 को ही दर्ज करायी गयी।-4-
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी की बीमा पालिसी नं0 450402/48/12/850000087 है और प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने पत्र दिनांक 22.07.2013 के द्वारा उसे सूचना दी कि उसकी पालिसी प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र की दुर्घटना की तिथि दिनांक 16.10.2012 को प्रभावी नहीं थी। यह पालिसी दिनांक 17.10.2012 से दिनांक 16.10.2013 तक प्रभावी थी। प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने उसे यह भी सूचित किया कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने प्रीमियम की धनराशि दिनांक 17.10.2012 को बीमा कम्पनी को प्राप्त कराया है और इसी आधार पर प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने प्रत्यर्थी/परिवादी का दावा बीमा निरस्त कर दिया है।
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि उसने दिनांक 03.10.2012 को ही अपने मेडीक्लेम पालिसी का फार्म भरा था और उसी दिन प्रीमियम का भुगतान चेक सं0-000017 दिनांकित 03.10.2012 के द्वारा कर दिया था, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक के कर्मचारियों ने लापरवाही करते हुए उक्त चेक का भुगतान प्रत्यर्थी/परिवादी के खाते से दिनांक 15.10.2012 को किया है और प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी को प्रीमियम की धनराशि का भुगतान दिनांक 17.10.2012 को दिया है।
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि विपक्षीगण संख्या-1 और 2 दोनों ने प्रत्यर्थी/परिवादी की सेवा में -5- कमी और लापरवाही की है। अत: उसने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया है।
जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपना लिखित कथन प्रस्तुत कर कहा है कि वास्तव में प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा चेक संख्या-000017 उसे पत्र दिनांक 15.10.2012 के साथ दिया गया है और उसके द्वारा दिनांक 15.10.2012 को ही बैंकर्स चेक संख्या-250329, 3393/-रू0 का प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी को भेज दिया गया है, जो प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी को दिनांक 17.10.2012 को प्राप्त हुआ है।
अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने अपने लिखित कथन में कहा है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने परिवाद पत्र में गलत कथन किया है कि उसने दिनांक 03.10.2012 को प्रश्नगत मेडीक्लेम पालिसी से सम्बन्धित प्रीमियम धनराशि दी थी। लिखित कथन में उसने कहा है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने वास्तविक तथ्यों को छिपाकर गलत कथन के आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया है।
लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने यह भी कहा है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक, प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी का एजेंट है, इसलिए अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक का कोई दायित्व नहीं बनता है।
लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपने पुत्र अभिषेक -6- डारोलिया को चोटहिल होना बताया है, परन्तु उसे परिवाद में पक्षकार नहीं बनाया गया है। अत: परिवाद आवश्यक पक्षकार न बनाए जाने के कारण दोषपूर्ण है।
लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक की ओर से कहा गया है कि मेडीक्लेम पालिसी के प्रस्ताव फार्म के अनुसार पालिसी से 21 वर्ष के नीचे के बच्चे ही कवर होते हैं, जबकि घटना के दिन प्रत्यर्थी/परिवादी के कथित पुत्र अभिषेक डारोलिया की आयु 25 वर्ष होती है। अत: इस आधार पर भी परिवाद खारिज होने योग्य है।
जिला फोरम के समक्ष प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी की ओर से भी लिखित कथन प्रस्तुत किया गया है और कहा गया है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ऑफ बड़ौदा जनरलगंज कानपुर नगर से प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 नेशनल इन्श्योरेन्स कं0लि0 शाखा गोविन्द नगर कानपुर के कार्यालय में दिनांक 17.10.2012 को प्रत्यर्थी/परिवादी की मेडीक्लेम पालिसी के प्रीमियम का ड्राफ्ट प्राप्त कराया गया था और प्रीमियम प्राप्त होने पर दिनांक 17.10.2012 से दिनांक 16.10.2013 तक का जोखिम आवृत्त करते हुए प्रत्यर्थी/परिवादी को मेडीक्लेम पालिसी जारी की गयी थी।
प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने अपने लिखित कथन में कहा है कि ड्राफ्ट प्राप्ति के प्रमाण में डाक रजिस्टर के दिनांक 17.10.2012 के पृष्ठ की छायाप्रति संलग्न है। लिखित -7- कथन में प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने कहा है कि दिनांक 16.10.2012 को प्रत्यर्थी/परिवादी एवं उसके पारिवारिक सदस्यों का जोखिम मेडीक्लेम पालिसी से आवृत्त नहीं था, जबकि प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र को दिनांक 16.10.2012 को इलाज हेतु भर्ती कराया गया था। अत: प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी का प्रश्नगत पालिसी के अन्तर्गत कोई दायित्व नहीं है। अत: प्रत्यर्थी/परिवादी का दावा उचित ढंग से निरस्त किया गया है और इसकी सूचना प्रत्यर्थी/परिवादी को पत्र दिनांक 22.07.2013 के द्वारा दी गयी है।
लिखित कथन में प्रत्यर्थी/विपक्षी सं02 बीमा कम्पनी ने कहा है कि उसने सेवा में कोई कमी नहीं की है। उसे गलत पक्षकार बनाया गया है।
जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के उपरान्त यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपनी प्रश्नगत बीमा पालिसी की प्रीमियम की धनराशि का चेक अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ऑफ बड़ौदा को दिनांक 15.10.2012 को प्राप्त कराया है, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने उसी दिन या दूसरे दिन तक प्रीमियम की धनराशि बीमा कम्पनी को नहीं पहुँचाया है। इस प्रकार उसने अपनी सेवा में कमी की है। इसके साथ ही जिला फोरम ने अपने आक्षेपित निर्णय और आदेश में यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रत्यर्थी/परिवादी अपने पुत्र के इलाज में कथित व्यय अभिलेखों से प्रमाणित नहीं कर -8- सका है। अत: जिला फोरम ने प्रत्यर्थी/परिवादी को 50,000/-रू0 की एकमुश्त धनराशि उसके पुत्र के इलाज हेतु और 25,000/-रू0 क्षतिपूर्ति के लिए दिया जाना उचित माना है और तदनुसार आक्षेपित निर्णय और आदेश उपरोक्त प्रकार से पारित किया है।
अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश साक्ष्य और विधि के विरूद्ध है।
अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की प्रश्नगत बीमा पालिसी के अन्तर्गत प्रत्यर्थी/परिवादी, उसकी पत्नी व दो बच्चे जिनकी आयु 21 वर्ष से कम है आते हैं, परन्तु प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र अभिषेक डारोलिया जिसकी दुर्घटना व इलाज के सम्बन्ध में क्षतिपूर्ति प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा मांगी गयी है, की आयु कथित दुर्घटना की तिथि दिनांक 16.10.2012 को 21 वर्ष से अधिक थी। अत: प्रश्नगत पालिसी के अन्तर्गत प्रत्यर्थी/परिवादी अपने पुत्र अभिषेक डारोलिया की दुर्घटना और इलाज हेतु कोई लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अपने लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक की ओर से इस सम्बन्ध में स्पष्ट कथन जिला फोरम के समक्ष किया गया है, परन्तु जिला फोरम ने इस बिन्दु कि क्या प्रत्यर्थी/परिवादी अपने पुत्र अभिषेक डारोलिया की दुर्घटना और इलाज के सम्बन्ध में प्रश्नगत पालिसी के अन्तर्गत कोई लाभ पाने का अधिकारी है पर विचार किए बिना -9- आक्षेपित निर्णय और आदेश पारित किया है। अत: जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश त्रुटिपूर्ण और विधि विरूद्ध है।
प्रत्यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश साक्ष्य और विधि के अनुकूल है और उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों से यह प्रमाणित है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा मेडीक्लेम पालिसी की प्रीमियम की धनराशि जमा करने पर उसे बीमा कम्पनी को समय से भेजने में चूक की है और विलम्ब से भेजा है, जिससे प्रत्यर्थी/परिवादी की पालिसी दिनांक 17.10.2012 से प्रभावी हुई है।
प्रत्यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम के निर्णय में हस्तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है।
मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।
बहस के दौरान अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत बीमा पालिसी के प्रपोजल फार्म की फोटो प्रति दिखायी गयी है, जो अपील की पत्रावली के पृष्ठ 47 पर संलग्न है। इस फोटो प्रति से प्रत्यर्थी/परिवादी ने इंकार नहीं किया है। पालिसी के इस प्रपोजल फार्म में Details of the person to be covered के सामने Self+Spouse+2 Children below 21 years अंकित है और इस प्रपोजल फार्म में प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र अभिषेक डारोलिया की जन्म तिथि 03.09.1987 अंकित है।-10-
यह प्रपोजल फार्म दिनांक 03.10.2012 को प्रत्यर्थी/परिवादी ने भरना परिवाद पत्र में अभिकथित किया है। इस प्रकार इस प्रपोजल फार्म के आधार पर यह जाहिर होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र अभिषेक डारोलिया की आयु प्रश्नगत पालिसी का प्रस्ताव भरने के समय 21 वर्ष से अधिक थी। अत: वह प्रश्नगत पालिसी के प्रपोजल फार्म में अंकित शर्त के अनुसार पालिसी का लाभार्थी नहीं हो सकता है, परन्तु इस सन्दर्भ में जिला फोरम ने अपने निर्णय में कोई विचार नहीं किया है और कोई निष्कर्ष अंकित नहीं किया है।
उपरोक्त विवेचना और ऊपर निकाले गए निष्कर्ष से यह स्पष्ट है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक ने प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा बीमा पालिसी की जमा प्रीमियम धनराशि बीमा कम्पनी को विलम्ब से भेजा है और अपने दायित्व के निर्वहन में चूक की है, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक की इस चूक के लिए प्रतिकर व क्षतिपूर्ति के निर्धारण हेतु यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि क्या प्रश्नगत पालिसी के अन्तर्गत प्रत्यर्थी/परिवादी का पुत्र अभिषेक डारोलिया लाभार्थी है? अत: उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर मैं इस मत का हूँ कि प्रकरण जिला फोरम को इस निर्देश के साथ प्रत्यावर्तित किया जाए कि वह इस बिन्दु पर उभय पक्ष को साक्ष्य और सुनवाई का अवसर देकर विचार करे और अपना निष्कर्ष अंकित करे कि क्या प्रत्यर्थी/परिवादी का पुत्र अभिषेक डारोलिया प्रत्यर्थी/परिवादी की प्रश्नगत बीमा पालिसी का लाभार्थी है और उसके बाद प्रतिकर व क्षतिपूर्ति की धनराशि का निर्धारण -11- कर पुन: विधि के अनुसार अन्तिम निर्णय और आदेश पारित करे।
उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर अपील स्वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश मात्र प्रतिकर व क्षतिपूर्ति की धनराशि के सम्बन्ध में अपास्त किया जाता है तथा प्रकरण जिला फोरम को इस निर्देश के साथ प्रत्यावर्तित किया जाता है कि वह इस बिन्दु पर कि क्या प्रत्यर्थी/परिवादी की प्रश्नगत बीमा पालिसी का लाभार्थी प्रत्यर्थी/परिवादी का पुत्र अभिषेक डारोलिया है, पर विचार कर अपना निष्कर्ष अंकित करे और तदनुसार अपीलार्थी/विपक्षी सं01 बैंक द्वारा देय प्रतिकर व क्षतिपूर्ति की धनराशि का पुन: निर्धारण करते हुए विधि के अनुसार अन्तिम निर्णय और आदेश पारित करे।
उभय पक्ष जिला फोरम के समक्ष दिनांक 15.12.2017 को उपस्थित हों।
अपील में उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
अपीलार्थी द्वारा धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत जमा धनराशि 25,000/-रू0 अर्जित ब्याज सहित जिला फोरम को इस निर्देश के साथ प्रेषित की जाए कि वह इस धनराशि का निस्तारण परिवाद में पारित अन्तिम निर्णय और आदेश के अनुसार सुनिश्चित करेगा।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) अध्यक्ष जितेन्द्र आशु0 कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT