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Allahabad High Court

Dr. Rajesh Singh And Another vs State Of U.P. And Another on 20 September, 2024

Author: Saurabh Shyam Shamshery

Bench: Saurabh Shyam Shamshery





HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
 
 



 
AFR
 
Neutral Citation No. - 2024:AHC:153197
 
Judgment Reserved on 11.9.2024
 
Delivered on 20.9.2024  
 
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD  
 
Court No. - 74
 

 
Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 600 of 2020
 

 
Applicant :- Dr. Rajesh Singh And Another
 
Through:- Ajeet Kumar Singh,Vijendra Kumar Rai  
 
Vs. 
 
Opposite Party :- State of U.P. and Another
 
Through:-  Bhagwan Singh Yadav,G.A.
 

 
CORAM:- HON'BLE SAURABH SHYAM  SHAMSHERY,J.

1. Heard Sri Ajeet Kumar Singh, learned counsel for Applicants, Sri Bhagwan Singh Yadav, learned counsel for Opposite Party No.2/Complainant/informant and Sri Om Prakash Mishra, learned Additional Government Advocate.

FACTUAL MATRIX

2. Applicants are Doctor Couple. Applicant no.1 is a Surgeon, whereas applicant no.2 is a Gynecologist. They are practising at their hospital namely Singh Life Care Hospital Ltd, Rajepur, Disrict-Ghazipur.

3. Complainant (Anandi Singh Yadav) lodged an First Information Report on 19.4.2015 at 10.30 hours, under Sections 147, 302, 323, 395 and 504 I.P.C. alleging that an occurrence took place in the night of 18/19.4.2015 at said hospital wherein applicants along with unknown persons have allegedly caused death of his son. Contents of complaint mentioned in FIR is reproduced hereinafter:-

"प्रार्थी आनन्दी सिंह यादव पुत्र स्व० कान्ता सिंह यादव निवासी ग्रा०पो० पकड़ी थाना रेवतीपुर जिला गाजीपुर का मूल निवासी हूँ हम प्रार्थी ने अपनी पत्नी सुदामी देवी को दिनांक 14.04.2015 को शाम लगभग 4 बजे सिंह हास्पिटल जमानियों रोड गाजीपुर में भर्ती कराया था। लगभग करीब 8 बजे रात्री को मेरी पत्नी का आंत का आपरेशन हुआ उसके बाद उसका दवा इलाज चल रहा था और पानी चढ़ रहा था दिनांक 18.04.2015 को रात्रि में लगभग 12-1.00 बजे बोतल का पानी खत्म हो गया तो वहां बैठे मेरी पुत्री बसन्ती देवी मेरा भतीजा संदीप व मेरा पुत्र राजेश यादव उर्फ अनूप जो अपने माँ का देख भाल कर रहा था वह डा० राजेश सिंह को बुलाने गया। तब वही पर डा० राजेश सिंह व उनकी पत्नी डा० अनुपमा सिंह ने मेरे लड़के को गाली गलौज देते हुए जान से मारने की नीयत से उसे मारपीट रहे थे तब आवाज सुनकर मेरी पुत्री बसन्ती देवी व भतीजा संदीप दौड़ करके गये तो देखा कि डा० पति पत्नी व उनके तीन स्टाप कमरें के अन्दर मारपीट रहे थे इतना मारे कि उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी उसके बाद मेरे भाई राजेश यादव के पास 50000 रू० था उसे भी छीन लिये है उसके बाद हमकों भी मारे पीटे तथा गाली गलौज किये। "

4. Post mortem of deceased was conduced on 19.4.2015 at about 4.30 P.M. whereupon 24 Ante Mortem injuries were found and it was opined that cause of death was 'Coma and Haemorrhagic shock as a result of Ante-Mortem Injuries'. For reference Ante-Mortem Injuries' are mentioned hereinafter:

" Antemortem Injuries:-
1. LACERATED WOUND 4 CM X 1 CM X BONE DEEP OVER RIGHT SIDE OF HEAD, 4 CM ABOVE RIGHT EAR OPENING, AFTER DISSECTION RIGHT FRONTAL & PARIETAL BONE ARE FRACTURED.
2. LACERATED WOUND 9 CM X 5 CM X BONE DEEP AROUND RIGHT EAR WITH AVULSION OF RIGHT EAR PINNA.
3. ABRADED CONTUSION 16 CM X 5 CM OVER RIGHT SIDE OF FACE, EXTANDING FROM FORE-HEAD TO FRONT OF RIGHT EAR.
4. ABRASION 5 CM X 3 CM OVER NECK, JUST BELOW ENJURY NO.-2.
5. LACERATED WOUND 5 CM X 6 CM X BONE DEEP AROUND LEFT EAR WITH AVULSION OF LEFT EAR PINNA.
6. ABRADED CONTUSION 7.5CM X 3 CM OVER JUST MEDIAL TO INJURY NO-5.
7. ABRADED CONTUSION 2 CM X 1 CM OVER RIGHT SIDE OF CHIN.
8. ABRADED CONTUSION 2.5 CM X 1 CM OVER LEFT SIDE OF CHIN.
9. ABRADED CONTUSION 9 CM X 4.6 CM OVER FRONT OF RIGHT SHOULDER AND ABRASION 2.4CM X 1 CM OVER BACK OF RIGHT SHOULDER.
10. ABRADED CONTUSION 3 CM X 1.5 CM AT UPPER END OF XIPHISTERNUM.
11. ABRADED CONTUSION 6 CM X 2.3 CM OVER TOP OF LEFT SHOULDER.
12. MULTIPLE ABRASIONS MARKS IN AREA OF 8 CM X 6 CM OVER DORSAL ASPECT OF LEFT PALM.
13. ABRASION 6 CM X 4.5 CM OVER POSTERIOR ASPECT OF LUMBER REGION. 11 CM BELOW LEFT LOWER END OF SCAPULA.
14. ABRASION 5 CM X 4.2 CM OVER POSTERIOR ASPECT OF RIGHT ELBOW JOINT.
15. ABRASION 19.5 CM X 9.3 CM OVER RIGHT SCAPULAR REGION.
16. ABRASION 8 CM X 4 CM OVER RIGHT SIDE OF BACK, 3 CM BELOW & ANTERIOR TO INJURY NO.-15.
17. ABRASION 17 CM X 6.2 CM OVER RIGHT LOWER BACK, 8 CM ABOVE & POSTERIOR TO RIGHT ANTERIOR SUPERIOR ILIAC SPINE.
18. ABRADED CONTUSION 8 CM X 5 CM OVER DORSAL ASPECT OF RIGHT PALM INCLUDING RIGHT INDEX FINGER.
19. MULTIPLE ABRADED CONTUSION IN AREA OF 7 CM X 5 CM OVER POSTERIOR ASPECT OF LEFT ELBOW JOINT INCLUDING UPPER END OF LEFT FORE-ARM.
20. ABRASION 4 CM X 3.4 CM OVER POSTERIOR ASPECT OF LEFT ELBOW JOINT.
21. ABRASION 2.6 CM X 1.5 CM JUST BELOW RIGHT PATELA.
22. LACERATED WOUND 1.5 CM X 1 CM X MUSCLE DEEP OVER LEFT LEG, 4 CM BELOW LEFT PATELA.
23. CRUSHED INJURY 23 CM X 6.5 CM OVER MEDIAL ASPECT OF LEFT FOOT, UNDERLYING BONE EXPOSED.
24. ABRASION 2 CM X 1 CM OVER DORSAL ASPECT OF RIGHT FOOT, 1 CM BELOW SECOND TOE."

5. On basis of referred F.I.R., investigation was conducted. Investigating Officer recorded statement of the complainant (Anandi Singh Yadav) and alleged witnesses Basanti Devi (daughter of complainant) and Sandeep Yadav (nephew of complainant). Anandi Singh Yadav and Basanti Devi have recorded similar version as recorded in F.I.R. and claimed that they were eye witnesses to occurrence. Sandeep Yadav has also claimed to be an eye witness, but his version was different to other alleged eye witness (Anandi Singh Yadav and Basanti Devi) that there was a struggle between deceased and attendants of a patient who was being attended by Doctor and Hospital's staff at the hospital at relevant time. Staff of Hospital intervened and forced deceased to go outside the gate of hospital, where he met with a road accident near the hospital and died. His dead body was found on stretcher at hospital. Statement of Sandeep Yadav is reproduced hereinafter:

"बयान संदीप यादव पुत्र स्व० बच्चन निवासी पकड़ी थाना रेवतीपुर जनपद गाजीपुर से पूछने पर बता रहे है कि हमारी चाची सुदामी देवी दिनांक 14.4.15 को उपचार हेतु भर्ती हुई थी सिंह लाइफ केयर हास्पिटल जमनिया मोड़ में उसी दिन उसके आंत का आपरेशन हुआ था तथा हमारी बहन संगीता यादव भी अस्पताल में भर्ती थी हमारे चाची का दवा इलाज चल रहा था तथा पानी चढ़ रहा था दिनांक 18.4.15 की रात्रि हमारी चाची को चढ़ रहा पानी का बोतल समय करीब 1 बजे रात्रि खत्म हो गया हमारा चचेरा भाई राजेश यादव उर्फ अनूप डाक्टर को बुलाने गया तभी रात्रि में प्रमिला नामक रोगी अस्पताल में आई जिसे डाक्टर व अस्पताल के कर्मचारी मिलकर कमरा नं0 202 में शिफ्ट कराये तभी प्रमिला के परिजन से हमारे भाई का कहासुनी व लड़ाई झगड़ा व हाथापाई हो गई तथा अस्पताल के कर्मचारी (1) राम शक्ति प्रजापति पुत्र तेल्हू राम प्रजापति निवासी गौरा पी०एस० सुहवल जनपद गाजीपुर (2) शबिर जमील पुत्र अशिफ जमील निवासी अन्धऊ थाना कोतवाली गाजीपुर (3) अन्जुम अंसारी पुत्र मन्जूर अली निवासी गोरा बाजार थाना कोतवाली गाजीपुर स्थाई पता सुखपुरा थाना शेखपुरा जनपद बलिया मौजूद थे लड़ाई झगड़ा व शोर शराबा मैं तथा मेरी चचेरी बसन्ती देवी बाहर निकले तो देखा कि हमारे भाई राजेश यादव उर्फ अनूप को अस्पताल के तीनो कर्मचारी मिलकर गाली गलौज करते हुए धक्का देते हुए अस्पताल के गेट से बाहर कर दिये मैं तथा मेरी बहन बसन्ती माँ के पास ऊपर चले आये थोड़ी देर बाद समय करीब 2.30 बजे अस्पताल के नीचे से शोर हुआ कि एक आदमी का एक्सीडेंट हो गया है जिस पर मैं नीचे उतरकर देखा तो हमारे चचेरे भाई राजेश यादव उर्फ अनूप का शव सड़क की दूसरी पट्टी पर पड़ा था तथा काफी खून बहा था तभी हमारे भाई को स्टैचर पर शव लादकर अस्पताल पर परिसर में लाया गया जहाँ अस्पताल के कर्मचारी ने देखकर बताया कि मृत्यु हो गई है। जिसकी सूचना हमारी बहन बसन्ती द्वारा जरिये मोबाइल चाच श्री आनन्दी सिंह यादव को दी गई। थोड़ी देर बाद मौके पर पुलिस आ गई तथा शव को जिला अस्पताल अपने साथ ले गये।

6. During investigation, the Investigation Officer has also recorded statements of staff of the hospital. Statement of Smt. Chinta Devi, a cleaner working at the hospital was recorded. Statement of Gandhi Singh was also recorded, who was at hospital for treatment of his relative. Similarly, statement of Arvind Yadav was also recorded who was also present at the hospital for treatment of his wife. Their statements are reproduced hereafter:

"बयान गवाह श्रीमती चिन्ता देवी पत्नी गुड्डू निवासिनी कबुतरी पी०एस० नोनहरा जिला गाजीपुर से घटना के सम्बन्ध में पूछने पर बता रही है कि साहब मैं सिंह केयर हास्पिटल अस्पताल में झाडू पोछा का काम निरन्तर करती रहती हूँ शाम 7.00 से सुबह 8.00 बजे तक जब नया मरीज अस्पताल में रात्रि के समय आया जिनका नाम नहीं जानती हूँ उसके साथ दो आदमी थे मैनें बोला कि उसकी सहायता करके उसको ऊपर चढ़ा तो ऊपर जाने पर जैसे ही उसके रूम के अन्दर ले जाया गया वैसे मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव सामने वाला रूम से दौड़कर आया और मरीज और उसके परिजन मारपीट करने लगा तब मैनें नये मरीज के परिजन से कहा कि आप लोग कैसा मरीज लेकर आये है जिसमें झगड़ा झंझट हो रहा है इतने में मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव ने.....को लात से मार दिया और उसे लात से दबाने का प्रयास किया मैंने विरोध किया तो उसने मेरा भी झोटा (बाल) पकड़ लिया और थप्पड़ से मारा तब मैनें चिल्लाई मेरी आवाज सुनकर अस्पताल के स्टाफ आये और मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव को पकड़ कर नीचे हाल में टी०बी० वाला हाल में बैठा दिये वहाँ भी मृतक काफी हल्ला गुल्ला करने लगा जिसके कारण सभी लोग परेशान हो गये हास्पिटल के लोग कहने लगे कि वह परेशान कर रहा है इसे बाहर बैठाओ तभी अस्पताल के स्टाफ मृतक के परिजन के सहयोग से अस्पताल के बाहर कैन्टीन में तख्त पर बैठा दिये कुछ देर तक लेटा रहा फिर जगा बोला कि मेरी माँ से भेट करा दो मृतक की माँ का अस्पताल में आपरेशन हुआ था उस वक्त मृतक के साथ शायद उसकी भाभी व बहनोई थे जब भेट करने के लिए वहाँ उपस्थित लोग उसे ले गये तो मृतक अपने बहनोई को भी गाली गुप्ता देने लगा बहनोई उसके व्यवहार को देखकर डर गया और कुछ दूर पर खड़ा हो गया कुछ समय बाद मृतक शान्त हुआ और अचानक सबको झटकते हुए खड़ा होकर टहलने लगा और तेज गति से टहलते हुए अस्पताल के सामने स्थित मुख्य मार्ग पर घूमने लगा तभी उत्तर की दिशा से एक ट्रक वाला ट्रक लेकर आया और धक्का मार दिया ट्रक वाला मृतक को बचाने का काफी प्रयास किया धक्का मारते देख मौजूद लोग दौड़कर मृतक के पास पहुँचे जहाँ पर सड़क के पास मृतक मरा पड़ा था। उठाकर लेकर अस्पताल के ठीक सामने पेड़ के पास स्ट्रैचर पर लाकर मृतक को रखा गया जो बाते थी मैनें आपको साहब बता दिया यही मेरा बयान है।
प्रश्न- विवेचक क्या सिंह अस्पताल के डाक्टर व स्टाफ द्वारा राजेश यादव के पैसा छीना गया था।
उत्तर- गवाह - नहीं पैसा नहीं छीना गया था।
प्रश्न- विवेचक - क्या मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप के साथ मारपीट करने में आरोपी डा० राजेश सिंह व डा० अनुपमा सिंह थी।
उत्तर- गवाह नहीं, नहीं साहब उस वक्त तो डाक्टर साहब लोग अपने कमरे में सो रहे थे।
प्रश्न- विवेचक- जब घटना प्रारम्भ हुआ उस समय क्या समय था।
उत्तर- गवाह- साहब दिनांक 18.04.15 की रात्रि की घटना है समय मैं नहीं देख पाई थी अन्दाजा लग रहा था कि 2.30 बज रहा होगा।
प्रश्न- विवेचक- जिस समय नया मरीज आया था और मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव झगड़ा कर रहा था उस वक्त आपने अस्पताल के स्टाफ के कौन कौन आये थे।
उत्तर- गवाह साहब जब मैं अस्पताल में चिल्लाई तो अस्पताल के स्टाफ राम शक्ति प्रजापति, शबीर जमील व अब्दुल अन्सारी आयी और मृतक के साथ अऩ्त तक रहे।"
"बयान गवाह-गाँधी सिंह पुत्र अजीब सिंह निवासी ताड़ीघाट थाना सुहवल जिला गाजीपुर उम्र 27 वर्ष से बदरियाफ्त घटना का खुलासा करते हुए बता रहा है कि साहब मैं अपनी भाभी देवेन्ती देवी को लेकर दि० 16.4.15 से सिंह अस्पताल गाजीपुर में भर्ती हूँ दिनांक 18.4.15 को रात्रि में मै अस्पताल में मौजूद था अस्पताल में व अस्पताल के सामने प्रकाश की व्यवस्था काफी अच्छी थी रात्रि में करीब दो बजे के ऊपर अस्पताल में मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव काफी जोर-2 से शोर कर रहा था क्या बोल रहा था कि मेरा कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है ऊपर से दौड़कर नीचे हाल में गया और पुनः हाल से ऊपर आया और तेज तेज आवाज में गाली गुप्ता किसी को दे रहा था तभी स्टाफ के कर्मचारी रामशक्त्ति प्रजापति, शब्बीर, जमील, अब्दुल अन्सारी व मृतक के परिवार के भाई बहनोई आकर मृतक के ऊपर से नीचे ले आये। वहाँ कुर्सी पर बैठाया गया लेकिन मृतक वहाँ भी हल्ला गुल्ला कर रहा था जिसके कारण अस्पताल के लोग परेशान हो रहे थे तब मृतक को सभी लोग पकड़कर अस्पताल के बाहर केन्टीन में ले गये जहाँ तख्ता पर बैठाया गया। मृतक कुछ देर तक शान्त रहा फिर अचानक उठकर झटकें से अपने को छोड़कर अस्पताल के सामने तेज गति से टहलने लगा टहलते हुए अस्पताल के सामने मुख्य रोड पर चला गया। तभी उत्तर की तरफ से आ रही ट्रक ने धक्का मार दिया और मृतक सड़क की दूसरी पटरी पर गिर गया। सब लोग चिल्लाने लगे और हम लोग मृतक को उठाकर अस्पताल के सामने स्थित पेड़ के नीचे स्ट्रैचर पर रक्खे उस समय मृतक की मृत्यु हो चुकी थी मृतक को जिस ट्रक ने धक्का मारा वह काफी सामान लदा था और 10 टायरा ट्रक थी मैं शुरू से लेकर अन्त तक मौके पर रहा हूँ मैं घटना का चश्मदीद गवाह हूँ, जो बाते थी मैने आपको बता दिया यही मेरा बयान है।
प्रश्न- विवेचक-क्या मृतक राजेश यादव को विश्वस्वरूप लाल के डाक्टर राजेश सिंह व अनुपमा सिंह ने मारापीटा था।
उत्तर- गवाह, नहीं साहब ये लोग मौके पर नहीं थे इन लोगों द्वारा मारपीट की बात झूठी है।
प्रश्न- विवेचक-क्या अस्पताल के कर्मचारियों ने मृतक को मारा पीटा था।
उत्तर- गवाह- साहब रामशक्ति प्रजापति, शबीर जमील, अब्दुल अन्सारी ने मृतक को पकड़ा था मृतक को शान्त कराने के लिए इन लोगों ने डाटा फटकारा था।
प्रश्न- विवेचक-क्या डा० व स्टाफ द्वारा मृतक राजेश यादव से पैसा छीना गया था।
उत्तर- गवाह, नहीं पैसा नहीं छीना गया था।
बयान गवाह अरविन्द यादव पुत्र राजेन्द्र सिंह यादव निवासी खिदराबाद पी०एस० कोतवाली गाजीपुर से बदरियाफ्त करने पर बता रहे है कि साहब मेरी औरत मंजू यादव की तबियत खराब थी मैने अपनी औरत को सिंह अस्पताल जमीनिया मोड़ पी०एस० कोतवाली गाजीपुर में भर्ती किया था मैं दि० 18.4.15 को रात्रि में अस्पताल में ही था तो मैंने देखा कि अस्पताल मे चिल्लाहट हो रही थी मौके पर हाल में जाकर देखा तो मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव को अस्पताल के स्टाफ राम शक्ति प्रजापति, शबीर जमील, अब्दुल अन्सारी व मृतक के परिजन मृतक को कुर्सी पर बैठाये है। और मृतक जोर जोर से चिल्ला रहा था तभी सभी लोग मृतक को अस्पताल से बाहर कैन्टीन में ले जाकर बैठाये कुछ देर में पता चला कि मृतक राजेश यादव का एक्सीडेन्ट हो गया। जो बात थी मैने आपको बता दिया, यही मेरा बयान है।
प्रश्न विवेचक- मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव का एक्सीडेंट कहाँ हुआ।
उत्तर गवाह- साहब सिंह अस्पताल के सामने मुख्य सड़क पर हुआ।
प्रश्न विवेचक- जब एक्सीडेन्ट की घटना हुई उस समय क्या समय रहा होगा।
उत्तर गवाह- करीब 3 बजे रात्रि का समय था।"

7. Investigating Officer also recorded statements of Doctors who have conducted postmortem of deceased and their statements are also reproduced hereinafter;

"बयान डाक्टर-डा० कमलेश कुमार भास्कर पुत्र श्री नन्द लाल राम निवासी र्बो पी०एस० फूलपुर जनपद वाराणसी हाल पता सदर अस्पताल गाजीपुर से पूछने पर बता रहे है कि दिनांक 19.4.15 को मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव पुत्र आनन्दी सिंह यादव निवासी पकड़ी पी०एस० रेवतीपुर गाजीपुर का पोस्टमार्टम का सदस्य था जो मृतक का पी०एम० नं० 176/15 है। मैनें तीन डाक्टर के पैनल से जो मेरे साथ डॉ० पंकज कुमार पी०एच०सी० सादात गाजीपुर व डा० उमेश कुमार पी०एच०सी० मोहम्मदाबाद गाजीपुर थे हम डाक्टरो के पैनल से मृतक उपरोक्त का पोस्टमार्टम दि० 19.4.15 को 15.50 पर प्रारम्भ किया गया और समाप्त 16.30 पर हुआ मृतक के शरीर पर कुल 24 चोटे पाई गई सभी चोटों Ante Mortem Injuries थी यह चोटो इस तरह की है वाहन दुर्घटना में ज्यादा सम्भावित है। मृत्यु का कारण Coma एवं रक्तस्त्राव पाया गया मृत्यु का समय पूछने पर बताया कि पोस्टमार्टम के समय शरीर पर अकडन मौजूद थी जो पूरे 12 घंटे में शरीर में होती है तथा अगले 12 घण्टे तक मौजूद रहती है। निश्चित समय नहीं बताया जा सकता है। मृत्यु करीब एक के अन्दर का था इस प्रकार डाक्टर कमलेश कुमार भास्कर ने अपना बयान दर्ज कराया जो अंकित किया गया।
बयान डाक्टर - उमेश कुमार चिकित्साधिकारी सा०स्वा० केन्द्र जनपद गाजीपुर पुल श्री रामनन्द प्रसाद में दिनांक 19.4.15 को मेरी डियूटी सदर अस्पताल गाजीपुर में पी०एम० लगी थी तीन डाक्टरो के पैनल से मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव पुत्र आनन्दी सिंह यादव के पोस्टमार्टम में था। मृतक के शरीर पर कुल 24 चोटे थी जिसका पी०एम० नं0 176/15 मृतक के शरीर पर चोटे किसी दुर्घटना वाहन की सम्भावना है। शरीर पर लगी चोटें Ante-mortem थी मत्यु का कारण कौमा और हमेरेजिक शोक था मौत का समय करीब एक दिन के अन्दर का था मै तथा डाक्टर कमलेश कुमार भास्कर व डाक्टर पंकज कुमार मेंडिकल आफीसर सादात सहित गये रिपोर्ट तैयार किया गया। यही मेरा ब्यान है।
बयान डाक्टर -पंकज कुमार मेडिकल आफिसर पी०एच०सी० सादात जनपद गाजीपुर से पूछने पर बता रहे है कि दिनांक 19.4.15 को मेरी डियूटी डा० के०के० भास्कर व डा० उमेश कुमार के साथ मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव के पोस्टमार्टम हेतु ड्यूटी स्थ० थी हम तीनों डाक्टर के पैनल से मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव का पी०एम० रिपोर्ट तैयार किया गया था। मृतक के शरीर पर कुल 24 चोटें थी जिसका पी०एम० नं0 176/15 मृतक के शरीर पर सभी चोटे Ante Mortem थी मौत का कारण कौमा हेमेरजिक शोक था मौत का समय करीब एक दिन के अन्दर का था। हम सभी डाक्टर जिसकी पी०एम० रिपोर्ट तैयार किया गया है। पी०एम० रिपोर्ट पर मेरे हस्ताक्षर है यही मेरा बयान है।"

8. During investigation, a report of Sanyukt Nideshak Rajya Chikitsa Vidhi Visheshagya, Uttar Pradesh dated 24.4.2015 was also taken on record and same is reproduced hereinafter:

"कृपया अपने पत्र सं० वाचक/पु०अ०- 10/2015 जिस पर आपके हस्ताक्षर के नीचे 21.04.15 तिथि अंकित है जबकि पत्र के ऊपर फरवरी 08 2015 लिखा हुआ है, का संदर्भ ग्रहण करें जिसमें मृतक राजेश यादव पुत्र आनंदी यादव की मृत्यु के सम्बन्ध में बिन्दुवार विशेषज्ञ राय की अपेक्षा की गयी है। संलग्न प्रपत्रों तथा फोटोग्राफ का मेरे द्वारा सम्यक अध्ययन किया गया तथा प्रेषित वीडियो सी०डी० को बारीकी से देखा गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुल24 चोटें वर्णित है जिनमें से19 चोटें Abrasion/Abraded contusion (रगड़ा एवं छिला हुआ घाव / नीलगू निशान के साथ रगडा एवं छिला हुआ घाव) है, कुल 04 Laceration (फटा हुआ धाव) है तथा 01 (चोट सं० 23) Crushed Injury (कुचला हुआ धाव) वर्णित है। सारी की सारी चोटें मृत्यु पूर्व की आयी हुई हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला, महानगर, लखनऊ से वस्त्रों की जाथ रिपोर्ट सं० 80-PHY-2015 दिनांकितः 23.04.2015 आज दिनाक 24.04.15 को पैरोकार सिपाही द्वारा उपलब्ध करा दिया गया है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा जांच रिपोर्ट में कुल 04 अदद वस्त्रों का विचरण है जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में केवल 03 वस्त्रों का ही बंडल बनाये जाने का उल्लेख है।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला, महानगर, लखनऊ की जांच रिपोर्ट में प्रदर्श P-1 से चिन्हित वस्त्र जो कि मृतक की पैन्ट है पर पीछे के भाग पर तथा आगे दोनों पैरों वाले भागों पर घुटने के आस-पास मिट्टी जैसे रगड़ के चिन्हों की उपस्थिति का दृष्टिगोचर होना लिखा गया है।
आप द्वारा वांछित बिन्दुवार अभिमत निम्नवत है-
बिन्दु सं० 1- प्रथम दृष्टया पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वर्णित चोटें किसी तेज गति वाहन की चपेट में आकर कुचले जाने एवं रगड़ खाने के फलस्वरूप आयी हुई प्रतीत होती है।
बिन्दु सं० 2- क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वर्णित सारी चोटें antemortem है अतः मृत्यु के पश्चात सड़क पर फेंके जाने से उपरोक्त चोटें आने की संभावना नहीं है।
बिन्दु सं० 3- दुर्घटना के पूर्व मारे पीटे जाने के विषय में स्पष्ट अभिमत दे पाना संभव नहीं है उसके लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयानों इत्यादि के आधार पर विवेचना करना न्याय संगत होगा।"

9. During investigation, some orders were passed by learned Chief Judicial Magistrate, Ghazipur therefore, the Superintendent of Police,Ghazipur vide order dated 16.5.2015 constituted a 'Special Investigation Team' (SIT), comprising of four officers. Said order is reproduced hereinafter:

"आदेश थाना कोतवाली पर पंजीकृत मु0अ0सं0 429/15 धारा 147, 302, 323, 504, 395 भादवि की विवेचना हेतु जांच दल (एस०आई०टी०) गठित की जाती है। जिसके सदस्य निम्नवत होगे-
1- श्री श्रीप्रकाश दुबे प्रभारी निरीक्षक कोतवाली गाजीपुर।
2- उ०नि० श्री राजेश त्रिपाठी थाना कोतवाली गाजीपुर।
3- उ०नि० श्री प्रकाश त्रिपाठी थाना कोतवाली गाजीपुर 4- श्री विवेक कुमार वैज्ञानिक फील्ड यूनिट पुलिस लाइन गाजीपुर।
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली उपरोक्त अभियोग के मुख्य विवेचक होंगे एवं अन्य 02 उपनिरीक्षक सहायक विवेचक होंगे। दोनो सहायक विवेचक अपने अपने रोजनामचा खास किता कर मुख्य विवेचक को प्रेषित करेंगे। मुख्य विवेचक अपने रोजनामचा खास में सहायक विवेचक द्वारा किता किये गये रोजनामचा खास का विवरण भी लिखेगे। तत्पश्चात रोजनामचा खास क्षेत्राधिकारी नगर को प्रेषित की जायेगी। श्री विवेक कुमार वैज्ञानिक फील्ड युनिट विवेचना में सहयोग प्रदान करेंगे।
पुलिस अधीक्षक गाजीपुर। "

10. Subsequently, the Special Investigation Team took over the investigation and recorded mazid statement of above referred complainant and witnesses. During investigation, some questions were also asked from witnesses being loosely termed as cross-examination. Statements recorded by Special Investigation Team are as follows:-

मजीद बयान/पूछतांछ वादी श्री आनन्दी सिंह यादव पुत्र श्री कान्ता यादवः-
मैं गोरखपुर में जल निगम में फील्ड कर्मी हूं मेरी पत्नी श्रीमती सुरामी देवी के आतों का आपरेशन होना था जिसको 14.4.15 में सिंह हास्पिटल जमानिया रोड आपरेशन पर भर्ती कराया मै दिनांक 16.4.15 को अस्पताल आया था जहां बैंक आफ बड़ोदरा से निकाले गये 25 हजार रूपये व अपने पास से 15 हजार रूपया अर्थात कुल 40 हजार रुपये अपने लडके राजेश यादव को दिये जिसमें 14 हजार रूपये फीस के रूप में जमा किये लगभग एक से डेढ़ हजार रूपये प्रतिदिन का खर्चा था मेरी पुत्री बसन्ती ने 18/19.4.15 की रात साढ़े तीन चार बजे के आस पास बताया कि डा० राजेश व डा० अनुपमा और उनके स्टाफ द्वारा मेरे लड़‌के राजेश यादव को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के नाम पर गाली गलोज देकर मारपीट कर मार डाले यह घटना मेरी लड़की बसन्ती व भतीजा संदीप के सामने हुई और हमको भी मारे और लाश बाहर फेंक दी और उसके पास से 50 हजार रूपये छीन लिये इस सूचना पर मैं अपने गांव पकड़ी से कुछ लोगों के साथ एक चार पहिया गाड़ी से सिंह हास्पिटल के पास आया जहां मेरे लड़के राजेश की लाश अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर रखी थी यही मेरा बयान है।
पूछ तांछ - वादी मुकदमा से मुकदमें के विषय में निम्न प्रश्न किये जा रहे है-
प्रश्न- क्या घटना के समय आप स्वयं मौजूद थे?
उत्तर- नही मैं लड़की बसनती के फोन करने पर आया।
प्रश्न- क्या आपने अपने सामने मारपीट होते देखी या पैसा छीनने की घटना देखी?
उत्तर- नहीं मैं मोके पर था ही नहीं इसलिये मैने कोई घटना नही देखी जैसा कि लड़की बसन्ती ने बताया वही लिखवाया।
प्रश्न' क्या आप अस्पताल में कही खून बिखरा हुआ देखे थे।
उत्तर- नही प्रश्न- आप की लड़की बसन्ती ने यह सूचना किस प्रकार दी थी।
उत्तर- मेरी लड़की बसन्ती ने घटना की सूचना मुझे मोबाइल के माध्यम से दी थी।
प्रतिपरीक्षण (क्रास इक्जामिनेशन) प्रश्न- प्रथम सूचना सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से प्रतीत होता है कि आपके सामने यह घटना घटी है। मगर आप द्वारा यह बताया गया है कि आप मौके पर मौजूद नहीं थे फिर भी इतने स्पष्ट घटना का विवरण प्रथम सूचना रिपोर्ट में कैसे आया।
उत्तर- मेरी बड़की बसन्ती ने जो बताया वही मैने लिखवा दिया।
प्रश्न- आप से किसी ने मारपीट की उत्तर-नही मुझसे किसी ने मारपीट नही की।
प्रश्न- आप ने अपने बयान में कुल 40 हजार रूपयों का ब्यौरा दिया है जिसमें 14 हजार रूपये आपरेशन की फीस जमा हो गयी थी तथा प्रति दिन के एक से डेढ हजार रूपये खर्चा कुल पांच से सात हजार खर्चे की बात बताई। इस प्रकार लगभग 20 हजार रूपया तो खर्च हो गया 20 हजार रूपया बचा फिर आपने प्रथम सूचना रिपोर्ट में 50 हजार रूपये छीनने की बात क्यो लिखा है।
उत्तर- लड़की की तलाशी लेने पर उसके पास पैसे नही थे इसलिये मुझको लगा कि इन लोगों ने पैसे छीन लिये होंगे इस आशंका पर मैंने पैसा छीनने वाली बात लिखाई थी।
प्रश्न- मगर आपने तो 50 हजार रूपये छीनने की बात बताई है जबकि 50 हजार रूपये थे ही नही जैसा आप ने बताया रूपये तो 40 हजार ही थे।
उत्तर- हां मैंने लिखवा दिया था।
प्रश्न- आपने बताया मौके पर आकर उपर अपनी पत्नी के कमरे तक गये थे और बसन्ती के अनुसार एक कमरे में बन्द करके राजेश यादव को मारपीट कर मार डाला तो फिर कही खून के निशान होने चाहिये मगर आप बता रहे है कि खून अस्पताल में कही नही दिखा ऐसा कैसे हुआ?
उत्तर- हां हमें खून कही नही दिखा।
प्रश्न- बसन्ती ने किस चीज से अभि०गण द्वारा राजेश को मारपीट करना बताया।
उत्तर- राड और सरिया से मारना बताया।
मजीद बयान/पूछताछ चश्मदीद साक्षी श्रीमती बसन्ती देवीः-
दिनांक 18.04.15 को रात्रि में अपनी माँ सुदामी देवी की देखभाल के लिए सिंह हास्पिटल में थी। मेरी चचेरी बहन संगीता देवी भी आपरेशन के लिए इसी अस्पताल में और उसकी कमरा नं0 210 में मौजूद थी उस रात अपने कमरे में मैं स्वयं मेरा भाई राजेश यादव व संगीता का पति श्रीरामपाल, संगीता की माँ मंजू देवी व दोनों मरीज, सुदामी देवी व संगीता सो रहे थे, मेरा चचेरा भाई संदीप नीचे वाले तल्ले पर टी०वी० वाले हाल में बेंच पर सो रहा था, रात करीब 1 बजे मेरी माँ की ग्लूकोज की बोतल खत्म हो गयी थी, जिसको बदलवाने के लिए मैं वही नजदीक बैठे कम्पाउंडर से कहने गई थी, जब वह नही आया तो थोड़ी देर बाद मेरा भाई राजेश यादव उसे बुलाने गया, वहाँ राजेश से गाली गलौज व मारपीट होने लगा शोर सुनकर मैं बाहर गई तो डाक्टर राजेश व अनुपमा समेत 9 लोग मेरे भाई को हाँथ से मार पीट रहे थे, मेरे मना करने पर मुझे भी मारा व धक्का दे दिया, जिससे मै। सीढ़ियों से नीचे गिर गयी और गश खा गई। तब वह लोग राजेश को पकड़कर नीचे वाले कमरे में ले ग, और दरवाजा बन्द कर लिए मैं अपनी माँ के कमरे में चली आयी कुछ देर बाद मैं फिर नीचे गई तो गेट की तरफ से आते हुए एक स्टाफ ने बताया कि राजेश का एक्सीडेन्ट हो गया, मैने देखा तो उसकी लाश बाहर स्ट्रेचर पर पेड़ के नीचे रखी थी।
पूँछ-ताछ :- चश्मदीद साक्षी से घटना के सम्बन्ध में निम्न प्रश्न पूछे जा रहे है।
प्रश्न- राजेश यादव को कितने लोग मारपीट कर रहे थे?
उत्तर- 9 लोग मारपीट रहे थे।
प्रश्न- जब आप ग्लूकोज की बोतल चढ़वाने के लिए कहने गयी थी तो वहाँ कितने लोग मौजूद थे?
उत्तर-देर रात्रि का समय था। अकेला कम्पाउन्डर मौजूद था।
प्रश्न- राजेश यादव आपसे कितनी देर बाद बोतल बदलवाने की बात करने गया था?
उत्तर- बस थोड़ी ही देर बाद गया था।
प्रश्न- 9 लोगों में क्या डा० राजेश व डा० अनुपमा सिंह भी थी, तथा किस चीज से मारपीट हो रही थी?
उत्तर- डा० राजेश पति, पत्नी थे, व कुल मिलाकर 9 लोग थे जिसमें 06 लोग मुँह बाँधे हुए थे, फिर बताया कि डा० राजेश व अनुपमा को नही पहचानती हूँ। फिर बताया कि वह दोनों नहीं थे, यह भी बताया कि सब लोग हाँथों से मार रहे थे व गाली दे रहे थे।
प्रश्न- आपको धक्का देकर इन 9 लोगों ने सीढ़ी से नीचे गिरा दिया तो क्या आपको कोई चोट नहीं आयी ?
उत्तर- नही मुझे चोट नही आयी।
प्रश्न- क्या किसी को पैसे छीनते हुए जो राजेश के पास थे आपने देखा?
उत्तर- मैने नहीं देखा। चूँकि उनके पास पैसे नहीं मिले इसलिए बात बताई थी।
प्रश्न- जिस कमरे में राजेश को बन्द करके 9 लोगों द्वारा मारा जा रहा था, स्वयं आपके मुताबिक उसे वही पर मार दिया गया, तो क्या कमरे से बाहर कोई शोर शराबा या आवाजे आ रही थी?
उत्तर- नहीं कोई आवाज नही आ रही थी।
प्रश्न- आप का भाई संदीप यादव वही पास में लेटा था, उसको क्या आपने जगाया था, ऊपर जाकर अपने बहनोई राम पाल को ये बाते बताई थी ?
उत्तर-मैने संदीप को नही जगाया। तथा, ऊपर जाकर राम पाल को बताया तो वो रो रहा थावो नीचे नहीं गया।
रश्न- जब आप दुबारा नीचे गयी तो क्या कहीं फर्श पर या कमरें में कोई खून के निशान या लाठी, सरिया, डंडा मौजूद मिले?
उत्तर- नही कोई खून का निशान लाठी, डंडा या सरिया नहीं मिला।
प्रश्न- आपको किसने बताया कि राजेश का एक्सीडेन्ट हो गया ?
उत्तर- मुझे एक स्टाफ ने बताया था। मैं उसे जानती नहीं हूँ।
प्रश्न- क्या जहाँ एक्सीडेन्ट के बाद राजेश की लाश सडक पर थी वह जगह आप ने देखी?
उत्तर- हॉ वह जगह देखी।
प्रश्न- आपने अपने पिता को फोन कर क्या बताया?
उत्तर-मैने बताया था कि डाक्टर वगैरह ने राजेश यादव को कमरे में बन्दकर दिया था।
उपरोक्त प्रश्नोउत्तर व बयानों में कुछ भिन्नता होने के कारण प्रति परीक्षण किया जा रहा है।
प्रतिपरीक्षण (Cross examination) प्रश्न- जब आप कम्पाउन्डर को बोतल बदवाने के लिए बुलाने गई थी तब कम्पाउन्डर अकेला था, थोड़ी देर बाद जब राजेश यादव बोतल बदलने के लिए बुलाने गया तो वहाँ पर आपके मुताबिक 9 लोग मौजूद थे, अचानक और 8 लोग कहाँ से आ गये?
उत्तर- मुझे नहीं पता मगर 9 लोग थे। जिसमें 06 लोग मुँह बाँधे थे।
प्रश्न- रात्रि में 01 बजे कोई लोग मुँह क्यों बाँधे थे?
उत्तर- मुझे नही पता, मगर 06 लोग मुँह बाँधे थे।
प्रश्न- आप ने बताया कि डा० राजेश सिंह वहाँ पर मारपीट में अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। फिर बताया कि पहचानती नहीं हूँ, फिर बताया कि वह दोनों पति-पत्नी नहीं थे। सही क्या है?
उत्तर- सही यह है कि डा० राजेश व उनकी पत्नी वहाँ नहीं थे।
प्रश्न- आपने बताया कि मार पीट करने वालों ने आपको भी मारा पीटा व धक्का देकर सीढ़ी से नीचे गिरा दिया, फिर आपको चोट क्यों नही आयी है?
उत्तर- नहीं मालूम चुप रही।
प्रश्न- यदि 09 लोग किसी व्यक्ति को कमरे में बन्द कर मारे-पीटेगे तो अन्दर का शोर बाहर क्यों नही सुनाई देगा?
उत्तर- मैं वहीं सीढ़ियों से ऊपर चली आयी थी, इसलिए शोर नहीं सुना।
प्रश्न- आपका भाई संदीप नीचे, राजेश यादव को बन्द किये जाने वाले कमरे के पास में सोया था, बताने के लिए उसे क्यों नही जगाया ?
उत्तर- खामोश रही।
प्रश्न- आप सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे में आयी, वहाँ आपका बहनोई राम पाल व उसकी चाची मंजू भी मौजूद थी उन्हें लेकर राजेश को बचाने क्यों नही गई?
उत्तर- मैं उनको लेकर बचाने नही गई। राम पाल खुद रो रहा था।
प्रश्न- रामपाल क्यों रो रहा था?
उत्तर- पता नहीं।
प्रश्न- आपने अपने पिता को कमरे में राजेश यादव को बन्द करने की बात बताई? जबकि आपके पिता का कथन है कि आपने उसको लाठी, सरिया व डंडा से मार मार कर मार डालने की बात बताई? सही क्या है?
उत्तर- मैने अपने पिता को कमरे में बन्द करने की बात बताई थी वह पता नहीं कैसे कह रहे है कि सरिया लाठी डंडे से राजेश यादव को मार डालने की बात मैने बताई है।
मजीद बयान/पूछताछ चश्मदीद साक्षी श्री संदीप कुमार यादव पुत्र स्व० शिववचन सिंह यादव:- मैं राजेश यादव के चाचा का लड़का हूँ मेरी सगी बहन संगीता पत्नी रामपाल निवासी मोहम्मदपुर लतीफ उर्फ उत्तमपुर थाना करीमुद्दीनपुर जनपद गाजीपुर का सिंह हास्पिटल में दिनांक 17.04.15 को ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था, तथा उसी कमरा नं0 210 में जहाँ पर मेरी चाची सुदामी देवी भर्ती थी, मेरी बहन भी उसी कमरे में मौजूद थी। 18/19.04.15 की रात में खाना-पीना के बाद राजेश, बसन्ती, मेरी माँ, मंजू देवी व बहनोई रामपाल, दोनों मरीजो सुदामी देवी व संगीता के साथ ऊपर कमरा नं0 210 में सोये थे मैं नीचे टी०वी० वाले हाल में बेंच पर सो गया था, रात में बसन्ती देवी के रोने की आवाज सुनकर मैं अचानक जगा तो सीधे ऊपर अपनी बहन के पास जाकर उसका हाल लिया तुरन्त नीचे आया तो गेट के सामने बसन्ती ने रोते-रोते बाहर की ओर इशारा किया तो मैने देखा कि मेरे चचेरे भाई राजेश यादव का शव खून से लथपथ स्ट्रेचर पर रखा हुआ था, मैं देखकर बेहोश हो गया उसके बाद मुझे कुछ नही मालूम मुझे जब होश आया तब मैं अपने घर गाँव पकड़ी में था। मुझे घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेरे सामने किसी तरह की कोई मारपीट गाली गलौज पैसा छीनने जैसी घटना नही हुई न ही कोई शोर शराबा नही सुना राजेश कैसे मारा यह मुझे नही पता राजेश यादव की लाश मैने सड़क पर नही स्ट्रेचर पर देखा, डा० राजेश व अनुपमा सिंह को मैं नही जानता इसके अलावा मैने कुछ भी नही देखा।
पूछ-ताछ :- प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार चश्मदीद साक्षी से निम्न प्रश्न पूछे जा रहे हैं।
प्रश्न- क्या आपने किसी को मारपीट करते देखा था?
उत्तर- नही मैने किसी को मारपीट करते नहीं देखा था।
प्रश्न- क्या आपने राजेश यादव को किसी के द्वारा कमरे में बन्द कर मारपीट करते हुए देखा था?
उत्तर- नहीं, मैने किसी को राजेश से मारपीट करते हुए नहीं देखा था क्योंकि मैं उस समय सो रहा था।
प्रश्न- जहाँ पर आप सोये थे उसी के सामने कमरे में राजेश को बन्द करके मारने पीटने एवं गाली गलौज करने की घटना बसन्ती द्वारा बतायी जा रही है? क्या आपने ऐसी घटना देखी या शोर सुना है?
उत्तर- नहीं, मैने ऐसी कोई घटना, न तो देखी और न सुनी है।
प्रश्न- जब आपने राजेश यादव का शव देखा तो शव कहाँ था?
उत्तर- मैने राजेश यादव का शव कैन्टीन के पास पेड़ के नीचे स्ट्रेचर पर देखा था। मैं शव देखते ही बेहोश हो गया था, इसके अलावा मैं कुछ नही जानता।
प्रति परीक्षण (Cross Examination) प्रश्न- प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि आपके सामने यह घटना हुई है? परन्तु आप द्वारा घटना की जानकारी होने से इंकार किया जा रहा है?
उत्तर- चूँकि मै खाना खाने के बाद नीचे टी०वी० वाले हाल में आकर बेन्च पर लेटकर सो गया था, मुझे किसी प्रकार की मार-पीट, गाली-गलौज व शोर शराबा नही सुनाई पड़ा।
प्रश्न- क्या आप डा० राजेश सिंह व डा० अनुपमा सिंह को जानते पहचानते है। उनके द्वारा मारपीट करते हुए देखा है?
उत्तर- नहीं मैने डाक्टर व डाक्टरनी को नही पहचानता न ही मैने डा० राजेश व डा० अनुपमा सिंह को मारपीट गाली गलौज करते हुए देखा है।
प्रश्न- जहाँ आप सोये थे आपको किसी प्रकार के झगड़ा झंझट का आभास हुआ था।
उत्तर-नही मुझे इस प्रकार का कोई आभास नहीं हुआ था।
प्रश्न- आपको राजेश की मृत्यु के बारे में कब और कैसे जानकारी हुई?
उत्तर- बसन्ती के रोने की आवाज सुनकर मेरी नींद खुली उस समय रात के लगभग ढाई, तीन बजे थे, सबसे पहले में ऊपर जाकर अपनी बहन संगीता का हाल जाना वहाँ सब ठीक पाने पर सीढ़ियों से नीचे आया तो बसन्ती बाहर की ओर इशारा करके राजेश के शव को दिखाया था। मैं शव देखकर बेहोश हो गया, मैं कुछ नही जानता।
प्रश्न- जगने के बाद जब आप सीढ़ियों से ऊपर गये और अपनी बहन संगीता को देखने के उपरान्त वापस आये तो कहीं पर खून के निशान दिखाई पड़े।
उत्तर- नहीं।"

11. The SIT also recorded statements of Smt. Chinta Devi (Cleaner at hospital), Ram Dular (attendant of a patient), Ram Kumar Yadav (Guard at Hospital) and Dr. Majharuddin working at the Hospital. Their statements are mentioned hereinafter:-

"मजीद बयान साक्षी मौका- श्रीमती चिन्ता देवी पत्नी गुड्डू नि० कहोतरी याना पिरनो जनपद गाजीपुर ने बदरियाफ्‌त मजीद पूछ तांछ में बताया कि मैं सिंह हास्पिटल में दायी का काम करती हूं तथा झाडू पोंछा लगाती हूँ दिनांक 18.4.15 की रात्रि में इमर्जेंसी में एक मरीज आया था उसके साथ दो तीन आदमी और एक लेडीज थी उनको उपर 202 नम्बर के कमरे में शिफ्ट करना था कमरे में स्ट्रेचर से लाने के लिये गार्ड कुवर व मेरे साथ उसके घर के लोग थे जब उस मरीज को स्ट्रेचर से बेड पर शिफ्ट करना था तब राजेश अचानक अन्दर आ गया और उक्त मरीज के अटेन्डेन्ट को थप्पड़ मारे और मुझे भी मारा तब राजेश की बहन मां और बहनोई उसको पकड़ कर कमरे के बाहर ले गये साथ में स्टाफ के लोग शाबिर भी ये नीचे तक ले गये वहां से फिर उनको झटक कर राजेश उपर आ गया और हमारे साथ कौन है कौन है बार बार चिल्ला रहा था शोर शराबा करने लगा व मारपीट पर आमादा था तब स्टाफ के अन्सारी शक्ति शाबिर व उसके घर वाले उसको पकड़ कर टी०वी० वाले हाल में ले गये वहां डाक्टर मजहर भी थे ज्यादा शोर करने के कारण उसको गेट के बाहर कैन्टीन पड़ी चौकी/तख्ता पर बैठा दिया उसने अपने बहनोई को भी एक आध थप्पड़ मारा था गेट के बाहर उसका बहनोई भाभी व चाची तथा मैं मौजूद थी एक दो लोग और थे मैं नहीं जानती बार बार राजेश चिल्ला रहा था कौन है हमारे साथ हमारे साथ कोई नही है इसी दौरान उसका भाई पानी पीने चला गया था बहनोई थोड़ा दूर था राजेश उठकर टहलने लगा और गेट तक पहुंच गया वहां से तेजी से सड़क पर गया सोहवल के तरफ से एक ट्रक आ रहा था उसको देखकर राजेश हाथ उठा उठा कर साले रूक जाओ साले रूक जाओ की तब तक घर वाले या कोई पास में आये तब तक ट्रक से उसका एक्सीडेन्ट हो गया फिर उसको सभी लोग स्ट्रैचर पर लादकर अस्पताल के बाहर पेड़ के नीचे सड़क की तरफ सिर करके लिटा दिये। राजेश रोज रात को नही रूकता था। इतने दिनो में एक दिन और रूके हुए देखा था घटना वाली रात उसकी बहन बार बार कह रही थी कि मेरे भाई को क्या हो गया है जहां तक ग्लूकोज के बोतल भी खत्म होने की बात है तो वह नही हुई थी क्योकि कुछ ही देर पहले मैने मरीज से हाल चाल पूछा था और बोतल भरी देखी थी जब वह चिल्ला रहा था उसके मुंह से शराब की कुछ महक भी आ रही थी। डाक्टर राजेश व डा० अनुपमा सिंह एक्सीडेन्ट होने के बाद खबर देने पर नीचे आये अस्पताल के अन्दर किसी ने कोई मारपीट या लड़ाई झगड़ा नही किया।
पूछतांछ- मौके की साक्षी से निम्न प्रश्न किये जा रहे है-
प्रश्न- मृतक की बहन बसन्ती यह कह रही है कि ग्लोकोज की बोतल बदलने को लेकर विवाद हुआ था और राजेश से अस्पताल के स्टाफ द्वारा मारपीट की गयी?
उत्तर- यह बात गलत है कि रात में अस्पताल में जिस स्टाफ की डियुटी लगती है ग्लूकोज का बोतल सही समय से बदलने की जिम्मेदारी होती है। मैने देखा था ग्लूकोज की बोतल नही खाली हुआ था न ही किसी स्टाफ ने राजेश से मारपीट की थी।
प्रश्न- जब राजेश उपर जोर जोर से शोर मचा कर हल्ला कर रहा था तब अस्पताल के स्टाफ केबिन किन लोगों द्वारा उसे नीचे लाया गया था?
उत्तर- राजेश जब शोर शराबा व हंगामा कर रहा था तब उसकी बहन व परिवार के लोग यह कह रहे थे कि इसे बचा लो नहीं तो कूद जायेगा जिस पर उसका बहनोई भाई एवं अन्य मरीजो के साथ आये लोगों द्वारा अस्पताल के स्टाफ के अन्सारी शक्ति शबिर द्वारा टी०वी० वाले हाल में ले जाया गया किन्तु वह मान नहीं रहा था बार बार चिल्ला कर शोर शराबा मचा रहा था जिस पर डाक्टर मजहर ने उसे गेट से बाहर करने को कहा या जिस पर उसके भाई बहनोई चाची व एक दो लोग और ले जाकर कैंटीन में चौकी पर बैठा दिये थे।
प्रश्न- क्या आपने राजेश का ट्रक से एक्सीडेन्ट होते हुये देखा था?
उत्तर- हां ट्रक सोहवल की तरफ से आ रहा था तथा सड़क की बायी पटरी पर राजेश का टक्कर लगने से एक्सीडेंट हो गया था।
प्रश्न- क्या आपने ट्रक का नम्बर देखा था?
उत्तर- हम लोग दौड़े लेकिन नही देख पाये।
प्रश्न- क्या राजेश यादव के साथ अस्पताल स्टाफ द्वारा मारपीट व गाली गलौज की घटना की गयी थी।
उत्तर- नही राजेश के साथ आफिस अस्पताल स्टाफ द्वारा मारपीट गाली गलौच की घटना नही की गयी थी। डा० राजेश व अनुपमा सिंह एक्सीडेंट के बाद नीचे आये।
प्रश्न- मृतक राजेन्द्र यादव को पकड़कर कैन्टीन में ले जाने वाले कौन कौन थे?
उत्तर- मृतक की बहन के कहने पर उसका भाई चाची बहनोई एवं अस्पताल के आप मरीजो के अटेन्डेन्ट जिनमें गांधी एवं अन्य जनता के लोग थे।
प्रश्न- जब हाथा पाई हुई तो डाक्टर डाक्टरनी कहा थे?
उत्तर- जब हाथा पाई हुई तो डाक्टर डाक्टरनी उपर अपने आवास पर थे। उन्हे तीन बजे मालूम हुआ बनारस गये थे इसलिये सो गये कान्ड के बाद डाक्टर नीचे आये।
बयान साक्षी- श्री राम दुलार बिन्द पुत्र केरा बिन्द नि० ग्राम सकरा थाना कोतवाली गाजीपुर ने बदरियाफ्त पूछने पर बताया कि दिनांक 18.4.15 को रात्रि में अपने भाभी प्रमिला को सिंह हास्पिटल में दिखने ले गया था जहां उनको एडमिट कराया था कमरा में मरीज को लाने पर एक आदमी अन्दर आया था व धक्का मुक्की करने लगा जिसको उसके घर के लोग व एक दो और लोग ने पकड़ कर बाहर ले गये थे उसके बाद मैं अपने मरीज के पास ही रहा मैने कोई घटना नही देखी। मैंने अपना कमरा बंद कर लिया था। मेरी मां प्यारी देवी भी मेरे साथ थी।
पूछतांछ साक्षी राम दुलार से दिनांक 18/19.4.15 की रात के घटना के सम्बंध में निम्न प्रश्न किये जा रहे है-
प्रश्न- आप 18/19.4.15 की रात में अपनी भाभी को कितने बजे सिंह हास्पिटल भर्ती करने को लेकर आये थे?
उत्तर- मैं अपनी भाभी को रात 12 बजे रात के मध्य सिंह अस्पताल में इलाज हेतु लाया था।
प्रश्न- क्या आपने अस्पताल में शोर शराबा या मारपीट की घटना सुनी या देखी थी ?
उत्तर- मेरी भाभी परमिला को जब रूम में बेड पर लिटाया जा रहा था तभी एक आदमी कमरे के अन्दर आया था और धक्का मुक्की करने लगा था। जिसे उसके घर परिवार वालो ने एवं एक दो और लोग थे जो पकड़कर बाहर ले गये थे।
प्रश्न- क्या आप के सामने मारपीट या रूपये छीनने की घटना हुई थी?
उत्तर- नही यह बात गलत है।
प्रतिपरीक्षण (कास इक्जामिनेशन)-
प्रश्न- जब अपनी भाभी परमिला को हास्पिअल में भर्ती कराने ले आये थे तो उस समय आपकी मां कहा थी?
उत्तर- मेरी मां भी मेरे साथ ही मौजूद थी।
प्रश्न- क्या धक्का मुक्की आपकी मां के सामने हुआ था ?
उत्तर- हां जिस व्यक्ति ने धक्का मुक्की की थी उसे उसके परिवार वाले मेरी मां के सामने पकड़ कर बाहर ले गये थे।"

बयान साक्षी मौका- श्री राम कुवर यादव पुत्र राम अधार यादव- निवासी ग्राम सोहवल थाना कोतवाली जनपद गाजीपुर मो० नं० 96716564340 ने बदरियाफ्त पूछ तांछ पर बता रहे है कि मैं सिंह हास्पिटल में लगभग ढाई वर्ष से गार्ड की नौकरी करता हूं 3800 रूपये मुझे यहां से मिलता है घटना दिनांक 18/19.4.15 की रात्रि लगभग 2.00 बजे की है। इमरजेन्सी में एक मरीज आयी उसे 202 नं० कमरे में शिफ्‌ट करने हेतु चिन्ता देवी के साथ मैं भी गया था वह बेड मरीजो के लिये लगा रही थी इसी दौरान एक लड़का कौन हमारे साथ है बार बार बोल रहा था उसे पकड़ कर तमाम लोग जिनमें उसकी चाची बहन बहनोई भाई व अटेन्डेन्ट नीचे लाये जिनको झटका देकर वह फिर अन्दर तीसरी मंजिल पर चला गया फिर दूसरी मंजिल पर आया और शोर करने लगा उसके बहन व बहनोई कह रहे थे कि इसको पकड़ लो दिमाग खराब हो गया है हम लोगों को भी मारा है बवाल कर देगा छत से कूद जायेगा तब उसको पकड़ कर शाविर शक्ति अब्दुल अन्सारी मैं व उसके घर के लोग नीचे ले आये नीचे भी वहां शोर कर रहा था तो डाक्टर ने कहा इसे गेट के बाहर बैठा दो इस पर उसको गेट के बाहर कैन्टीन के पास पड़ी चौकी पर बैठा दिया गया। बाकी मरीजो के अटेन्डेन्ट बाहर आ गये थे वह चौकी पर बार बार हाथ मार रहा था और हमारे साथ कौन है हमारा कोई नही है यह कहकर चिल्ला रहा था। डाक्टर मजहर ने कहा कि सब लोग अन्दर आ जाओ तो राजेश के चाची बहनोई भाई चिन्ता देवी व ताडीघाट का एक अटेन्डेन्ट को छोड़कर बाकी सभी लोग अन्दर आ गये और दरवाजा बन्द कर लिये। कुछ देर बाद अब्दुल ने मुझे बताया कि चलो बाहर एक्सीडेन्ट हो गया है। उस समय हम टी०वी० वाले हाल में ये फिर बाहर आकर अब्दुल शक्ति व अन्य लोगों के साथ उसकी लाश को स्ट्रैचर पर सिंह हास्पिटल के सामने रख दिया। डा० राजेश सिंह के बुलाया तब वह नीचे आये मृतक के साथ मारपीट छिनैती या इस तरह की बात नही हुई थी। वह दिमागी रूप से कुछ परेशान था।।

पूछ तांछ- मौके के साक्षी से निम्नांकित प्रश्न किये जा रहे है-

प्रश्न- जब आप इमरजेन्सी मरीज को लेकर शिफ्ट करने के लिये उपर कमरा नं0 202 में गये थे उस समय 202 के कमरे में कौन कौन लोग मौजूद थे?

उत्तर- उस समय उस कमरे में मरीज जो बेहोशी हालत में थी। उसका देवर उसकी सास चिन्ता देवी मैं गया कुछ मरीजो के अटेन्डेन्ट मौजूद थे।

प्रश्न- जब राजेश उस कमरे में आया तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी लग रही थी तथा वह बार बार कह कर शोर मचा रहा था ?

उत्तर- जब वह कमरा सं० 202 में घुसा तथा लोगों से धक्का मुक्की करने लगा तथा तेजी से हाथ फेक रहा था तथा तेजी से शोर मचाते हुये बोल रहा था कि मेरे साथ कौन है मेरे साथ कोई नही है। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नही लग रही थी वह असामान्य था।

प्रश्न- कमरे से पकड़ कर कौन कौन लोग उसे नीचे ले गये थे?

उत्तर- कमरे से उसके परिवार में उसकी चाची बहनोई उसकी बहन ताड़ी घाट का अटेन्डेन्ट जिसका नाम गांधी था व अस्पताल के स्टाफ शाबिर शक्ति अन्सारी व अन्य लोग ले गये थे। मैं भी पीछे पीछे था।

प्रश्न- क्या नीचे टी० वी० वाले हाल में पहुंचने के बाद यह पुनः वापस उपर भाग आया था?

उत्तर हां वह फिर नीचे वाले हाल से मौका पाकर हो हल्ला करते हुये पुनः उपर भाग आया था जिसे सभी लोग मिलकर पुनः वापस नीचे ले आये तथा डा० मजहर अली के कहने पर उसे बाहर कैन्टीन में तख्त पर बैठा दिया गया। जहां पर उसकी चाची भाई बहनोई व ताड़ी घाट का अटेन्डेन्ट व अन्य लोग बाहर रह गये बाकी को अन्दर करके मैं भी अन्दर आ गया तथा अपने सामान्य काम में लग गया।

प्रश्न- क्या इस घटना की सूचना डाक्टर साहब को कब दी गयी। राजेश को डा० राजेश व डा० अनुपमा सिंह व अन्य स्टाफ द्वारा मारा पीटा गया था?

उत्तर- डा० राजेश डा० अनुपमा सिंह से या अस्पताल स्टाफ द्वारा राजेश सिंह से मारपीट व गाली गलौज की घटना नही की गयी थी।

प्रश्न- आपको राजेश की मृत्यु के बारे में कैसे जानकारी हुई?

उत्तर- करीब 3.00 बजे अब्दुल असारी ने मुझे बताया कि राजेश की अस्पताल के सामने एक्सीडेन्ट से मृत्यु हो गयी।

प्रतिपरीक्षण-कास इक्जामिनेशन-

प्रश्न- क्या राजेश यादव की शारीरिक व मानसिक स्थिति सामान्य प्रकृति की नही थी ?

उत्तर- नही वह रह रहकर आक्रमक एवं असामान्य व उत्तेजित हो जाता था।

प्रश्न- क्या राजेश के साथ अस्पताल स्टाफ द्वारा मारपीट या छिनोती की घटना की गयी थी ?

उत्तर- नही मैं पूरे हंगामा के दौरान साथ में राजेश के था। मारपीट व छिनैती की कोई घटना नही हुई थी।

प्रश्न- आप डाक्टर साहब को सूचना दिये थे या नही। क्या राजेश को उपर से नीचे आने में मदद की डाक्टर साहब कब नीचे आये थे।

उत्तर- डाक्टर साहब को सूचना डा० मजहर द्वारा दी गयी थी। राजेश को कोई चोट उपर से नीचे आने में नही आयी थी। डाक्टर साहब एक्सीडेंट की घटना के बाद नीचे आये थे। एक्सीडेन्ट ट्रक से होना बताया गया है।

प्रश्न- क्या जीने पर कही खून के निशान साक्ष्य दिखाई दिया ?

उत्तर- सीढी या कही पर अस्पताल परिसर में कही खून या खून का धब्बा नही दिखाई पड़ा।

बयान गवाह- श्री मजह‌रूददर्दीन पुत्र मसीउद्दीन सिद्दीकी निवासी बरबरहना थाना कोतवाली जनपद गाजीपुर ने बदरियाफ्त पूछने पर बताया कि मैं बी०ए०एम०एस० डाक्टर हूं वर्ष 2010 से सिंह हास्पिटल गाजीपुर में कार्यरत हूँ। दिनांक 18.4.15 की रात में 2.00, 2.30 बजे के बीच इमर्जेन्सी आयी थी उसका ट्रीटमेंट करके व भर्ती करके मैं इमरजेन्सी के बगल में कमरे में आराम कर रहा था कि अचानक बाहर शोर सुना और एक आदमी हमारे स्टाफ का है वह चिल्ला रहा था जिसको पकड़े हुये गार्ड कुवर, साबिर व उसके अभिभावक ला रहे थे। एक बार वह फिर छुड़ाकर उपर भाग गया पुनः जब उसे पकड़कर लाये तो मैने कहा कि इसको बाहर के टीन में बैठा दो वहां सम्भवतः उसकी चाची थी जिसने उसके चेहरे पर पानी के छीटे मारे वह लड़का कुछ मेन्टल लग रहा था उसके साथ में उसका जीजा संदीप व कुछ और अटेन्डेन्ट थे जब वह उपर भागा था तो उसकी चाची कह रही थी कि भैया इसको पकड़ लो वरना यह उपर से नीचे कुद जायेगा। गांधी का नाम का एक अटेन्डेन्ट व पेट्रोल टेंकी सौरा बाजार में एक व्यक्ति पेट्रोल भरता है वह भी एक मरीज का अटेन्डेन्ट था ने भी पूरी घटना देखी है। संदीप ने उसे बताया कि डा० साहब राजेश चौकी पर बैठा था फिर कहने लगा और टहलते टहलते तेजी से सड़क की तरफ भागा और ट्रक से लड़ गया। यह लड़का प्रतिदिन अस्पताल में नहीं रूकता था जिसे नहीं लग रहा था बल्कि मेंटल लग रहा था। रात में बोतल बंद करने का काम उपर फसीकर पर साकिर देख रहे थे तथा नीचे वाले पर शक्ति देख रहे थे। उसके साथ किसी के द्वारा कोई मारपीट या ऐसी घटना नही हुई। डा० राजेश सिंह को शक्ति प्रमिला सिंह कमरे से बुलाने गया था। एक्सीडेन्ट के बाद जब उसको स्ट्रैचर पर रख दिया गया था। तब डा० साहब नीचे आये।

पूछतांछ साक्षी से पूछ तांछ के क्रम में निम्न प्रश्न किये जाते है-

प्रश्न- जब राजेश यादव चिल्ला कर शोर मचा रहा था तो क्या आपके पास इस बात कोई प्रमाण है?

उत्तर-हां मैने उस समय अपने मोबाइल से राजेश यादव के आवाज को आडियो रिकार्डिंग वीडीओ रिकार्डिंग की थी।

प्रश्न- क्या राजेश यादव को अस्पताल स्टाफ द्वारा मारा पीटा गया था?

उत्तर- नहीं उसकी दिमागी हालत असामान्य थी कोई घटना अस्पताल में इलाज के दौरान मरीजो के साथ न कर दे इसलिये उसे अस्पताल के गेट के बाहर कराया गया था।

प्रश्न- राजेश की मृत्यु कैसे हुई थी?

उत्तर- लोगों के बताने के अनुसार राजेश की मृत्यु ट्रक से एक्सीडेन्ट में हुई थी।

प्रश्न- राजेश का शव स्ट्रेचर पर कैसे आया?

उत्तर- राजेश के परिजन व अटेन्डेन्ट द्वारा स्ट्रेचर पर रखकर कैन्टीन के बगल में पेड़ के नीचे रखा गया था। मुझे सूचना मिली तो मैने देखा कि उसकी मृत्यु हो चुकी थी।

इसके पश्चात साक्षी से प्रतिपरीक्षण किया जा रहा है।

प्रतिपरीक्षण (कास इक्जामिनेशन)-

प्रश्न- जब राजेश को उपर के कमरे से पकड़कर नीचे लाया जा रहा था तो क्या उसके साथ मारपीट व गाली गलौज किया गया था।

उत्तर- नही प्रश्न- क्या उक्त हंगामे के दौरान डा० राजेश सिंह या डा० अनुपमा सिंह भी मौजूद थे।

उत्तर- नही मेै रात्रि कालीन डियुटी में था। डा० राजेश के द्वारा हंगामा करने के दौरान डाक्टर व डाक्टरनी साहिबा नीचे नही आये थे। एक्सीडेन्ट में मृत्यु की सूचना के बाद डाक्टर साहब नीचे आये थे।

डा० मजहर के मोबाइल से फोरेन्सिक एक्सपर्ट के माध्यम से आडियो वीडियो रिकार्ड की गयी उसका सी०डी० तैयार किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। श्री विवेक कुमार द्वारा सी०डी० तैयार किया गया। जो कब्जा पुलिस में लिया गया। अस्पताल में भीड थी साक्षी/परिजनों के माध्यम से अकब से की जायेगी। साक्षीगणों को बाद हिदायत मुनासिब रूकसत किया गया।"

12. The SIT also recorded statements of Gandhi Singh (attendant of a patient), Mulayam Singh (a relative of deceased), Smt. Manju Devi, (a relative of deceased), Smt. Shakuntala (relative of a patient), Sri Pankaj Kumar (relative of a patient), Sri Arvind Singh (relative of a patient). Their statements are mentioned hereinafter:

"बयान साक्षी मौका- श्री गांधी सिंह पुत्र श्री अजीत सिंह निवासी ग्राम ताड़ीघाट थाना सुहावल जनपद गाजीपुर मो० नं० 8423470471 बदरियाफ्त पूछतांछ में बता रहे है कि मेरी मां के बच्चे दानी का आपरेशन था जो नीचे वाले फ्लोर पर एडमिट थी रात के लगभग दो ढाई बजे मैं डाक्टर को ग्लूकोज का बोतल चढ़वाने के लिये ले गया रात की डियुटी वाले डाक्टर आये तभी उपर शोर होने लगा तो डाक्टर ने कहा कि चलो चलकर देखते है। तब मैं साथ गया तो वह लड़का इमरजेन्सी के सामने एक मरीज व उसके घर वालो से मारपीट कर रहा था तथा मेरे साथ कौन है व मोदी को गन्दी गन्दी गालिया दे रहा था। वहां से उसको पकड़ कर मैं डाक्टर उसके घर वाले बहनोई बहन चाची नीचे लाये नीचे से झटका देकर चिल्लाता हुआ फिर भाग गया था तो डाक्टर ने कहा कि उसे बाहर चौकी पर बैठाइये दुबारा मैं उसकी बहन नही आयी थी उसका बहनोई भाई चाची व एक आध लोग बाहर थे बाकी लोग अन्दर चले गये वहां पर भी चौकी पर तेज हाथ मारकर चिल्ला रहा था बहनोई के साथ काफी गाली गलोज किया जिससे बहनाई भी दूर हट गया मैं उसका एक हाथ पकड़े था उसने कहा कि मुझे छोड़ो तो मैने उसे छोड़ दिया फिर में पड़ोस में लगे नल पर मुह धोने लगा इतनी देर में यह तेज दौड़ता हुआ सड़क की तरफ गया उसकी चाची चिल्लाई कि कोई मेरे बच्चे को पकड़ लो तब तक सोरवल की तरफ से आने वाले ट्रक से जबरदस्ती टकरा गया ट्रक का एक चक्का उसके उपर चढ़ते हुये सड़क के नीचे उतर गया। उपर से नीचे आते समय चौकी पर बैठाते समय तक उसके शरीर में की कोई चोट नही थी वह लड़का पूरी तरह से मेन्टल लग रहा था। हम लोग उसकी स्ट्रेचर पर सिंह हास्पिटल के बाहर पेड़ के नीचे लिटा दिये थे। जो देखा था बता दिया।
इसके पश्चात घटना के चश्मदीद साक्षी से पूछ तांछ की जा रही है।
पूछतांछ साक्षी से निम्न प्रश्न किये जा रहे है-
प्रश्न- क्या जिस ट्रक ने राजेश को टक्कर मारा था आपने देखा है।
उत्तर- हां देखा था लेकिन नम्बर नहीं पढ़ पाया क्योकि भोर में अंधेरा था यदि बाइक होती तो पीछा कर निश्चित पकड़ लेता।
प्रश्न- जब राजेश को ऊपर से नीचे लाया गया था तो क्या उसके शरीर में कोई चोटे थी।
उत्तर- नहीं ऊपर से नीचे लाते समय चौकी पर बैठाते समय उसके शरीर में कोई चोट नहीं थी।
प्रश्न- क्या हंगामा और शोर शराबा के दौरान डाक्टर राजेश सिंह व डा० अनुपमा सिंह नीचे थे।
उत्तर- नहीं एक्सीडेंट के बाद डाक्टर नीचे आये थे।
प्रतिपरीक्षण-
प्रश्न- क्या राजेश को ऊपर से नीचे लाने में अस्पताल स्टाफ द्वारा मारपीट गाली गलौज की गयी थी तथा डाक्ट दम्पत्ति भी शामिल थे।
उत्तर- नहीं राजेश को नीचे लाते समय मारपीट नहीं की गयी थी।
प्रश्न- क्या राजेश को सीढी से ऊपर से नीचे लाते समय सीढी पर या अस्पताल परिसर में खून के धब्बे पाये गये।
उत्तर- अस्पताल परिसर में कही खून का धब्बा मैने नहीं देखा।
बादहू कार्यवाही उपरोक्त साक्षी रामपाल उर्फ मुलायम भी मौजूद है। बयान लिया जा रहा है।
बयान साक्षी मौका- मुलायम उर्फ रामपाल पुत्र श्री बहादुर सिंह यादव निवासी ग्राम मोहम्मदपुर लालीमय (अरायपुर) थाना करीमुद्दीनपुर जनपद गाजीपुर ने बदरियाफ्त पूछने पर बताया कि मैं मृतक राकेश का चचेरा बहनोई हूँ। संदीप मेरा साला है पत्नी संगीता को डिलवरी आपरेशन से सिंह हास्पिटल में हुई थी घटना के दिन उस कमरे में मैं राजेश बसन्ती सुदामी देवी संगीता व मंजू देवी (सास) और संदीप नीचे वाले हाल में सोये थे। अचानक ढाई बजे के आस पास बाहर शोर हुआ तो राजेश बाहर चिल्ला रहा था मेरा कोई नही है और साथ कौन है गाली गलोज व हल्ला गुल्ला कर रहा था। जो मेरे कमरे के सामने मरीज आयी थी उसी से कुछ झगड़ा हुआ या मेरी सास व संदीप और कुछ लोग उसको पकड़ कर नीचे ले गये। वहां से फिर भागा दुबारा जब पकड़ कर ले गये तब मैं पीछे पीछे गया था अस्पताल के बाहर चौकी पर बैठा था वह मुझको भी गाली दिया तो मैं दूर हट गया एक लड़का जो उसका बाह पकड़े था वह भी दूर हट गया राजेश यादव बार बार मेरे साथ कौन है एवं मोदी को गाली दे रहा था और हाथ पटक रहा था जब वह चौकी पर बैठा था उस समय तक उसे कोई चोट नहीं आयी थी। अचानक वह उठा और सड़क की तरफ भागा मैं सड़क तक नही गया दो मिनट बाद पता चला वह ट्रक से टकरा गया ट्रक जाते हुये मैने देखा था। लेकिन नम्बर नही देख पाया अस्पताल या नीचे मैने डाक्टर राजेश डा० अनुपमा को नही देखा यह पूछने पर कि क्या ग्लूकोज की बोतल को बदलने को लेकर विवाद हुआ था तो बताया कि यह मेरी जानकारी में नहीं है। जो जनता था बता दिया इसके पश्चात वादी से निम्न प्रकार पूछ तांछ की जा रही है।
पूछतांछ-
प्रश्न- क्या राजेश ने तुम्हे भी गाली दिया था? हाथा पायी की थी?
उत्तर- हां मुझसे भी हाथा पाई व गाली गलोज किया था।
प्रश्न- राजेश क्यो शोर कर रहा था और क्या कह रहा था?
उत्तर-वह सनक गया था हमें लगता है तथा बार बार कह रहा था कि मेरा कोई नही है और कौन मेरे साथ है।
प्रश्न- क्या राजेश से हास्पिटल स्टाफ द्वारा मारपीट व पैसा छीना गया है। और आपकी जानकारी में है।
उत्तर- नही यह बात गलत है कि राजेश से असपताल स्टाफ द्वारा न तो मारपीट की थी न ही पैसा छीना गया है।
प्रतिपरीक्षण कास इक्जामिनेशन-
प्रश्न- डाक्टर जहरु‌द्दीन द्वारा दिनांक 18/19.4.15 की रात को राजेश यादव के साथ बतमौर वीडियो रिकार्ड किया गया था इसे एवं आई०डी० के माध्यम से लेकर साक्षी मुलायम उर्फ रामपाल घटना के चश्मदीद साक्षी गांधी सिंह को सुनवाया व दिखाया गया तो और पूछा गया कि क्या यह आवाज राजेश यादव की है।
उत्तर- उक्त वीडियो आडियो रिकार्ड सुनने के बाद कहा गया कि यह आवाज राजेश यादव की है किन्तु चित्र इतना धुधला है कि समझ में नहीं आ रहा है। तो इस रिकार्ड में यह आवाज साफ है कि कौन है मेरा, इस प्रकार की आवाज कई बार आयी है।
वास्ते बयान गवाह नंजू देवी मौजूद है महिला 3०नि० ममता के मौजूदगी में बयान लिया जा रहा है।
बयान गवाह- श्रीमती मंजू देवी पत्नी शिव वचन यादव निवासी ग्राम पकड़ी थाना रेवतीपुर जनपद गाजीपुर ने बदरियाफ्त पूछने पर बताया कि दिनांक 18/19.4.15 को रात पुत्री संगीता के आपरेशन के कारण अस्पताल, सिंह हास्पिटल में रूकी थी वहां पर मेरे दामाद रामपाल लड़की संगीता भतीजा राजेश यादव थे तभी वसंती व सुदामी देवी अस्पताल के कमरा नं० 210 में थे। बसन्ती की बुआ उपर वाले कमरे में थे संदीप नीचे वाले तल पर लेटा था रात को अचानक आवाज सुनी राजेश तेज तेज चिल्ला रहा था कि मेरे साथ कौन है कौन है मेरे साथ तब मैंने कहा कि बेटा हम है तेरे साथ फिर सभी लोग पकड़कर उसे नीचे ले गये नीचे मैने डाक्टर से कहा कि इसको सोने वाली सुई लगा दो सुई नही लगाई। राजेश को बाहर चौकी पर बैठा दिया हम चार पांच लोग बाहर थे चौकी पर बैठाते समय तक उसको कोई चोट नही थी वह बहुत तेज चिल्ला रहा था चौकी पर हाथ पटक रहा था मेरा दामाद मैं व एक लड़का और जिसे गांधी कहते है व मेरा लड़का संदीप व एक दो अन्य लोग भी नीचे मौजूद थे कि अचानक राजेश, तेजी से दौड़ता व चिल्लाता हुआ सड़क के तरफ भागा मैने कहा कोई मेरे बच्चे को पकड़ तो मगर तब तक वह गाड़ी से लड़ चुका था गाड़ी से लड़ते मैने नहीं देखा क्योकि मैं थोड़ा पीछे था। फिर उसको उठाकर पेड़ के नीचे रखा। मैने डाक्टर राजेश को नही देखा इसके अलावा अन्य कोई उल्लेखनीय तथ्य नही बताया।
बयान साक्षी- श्रीमती शकुन्तला राय पत्नी लल्लन राय नि० हरपुर थाना मोहम्मदाबाद जनपद गाजीपुर ने बदरियाफ्त पूछतांछ में बताया कि अपनी लड़की काजल को उल्टी दस्त हो रहे थे इसलिये दिनांक 18.4.15 को इलाज हेतु सिंह हास्पिटल में भर्ती कराया था जहां कई मरीज भर्ती हुई थी उसी के बगल वाला कमरा मेरा था उसके सामने वाले कमरे से एक लड़का निकल कर नये मरीज व उसके घर वालो से मारपीट करने लगा हमारे साथ कौन है बहुत तेज बोल रहा था फिर उसके बहन बहनोई चाची भाई व कम्पाउन्डर पकड़ कर नीचे ले गये वह लड़का एक बार फिर चिल्लाता हुआ मोदी को गाली देता हुआ व मेरे साथ कौन है बोलता हुआ उपर आया ये लोग फिर पकड़ कर ले गये मेरी लडकी रह गयी थी इसलिये मैं नीचे नही गयी थी बाद में पता चला कि वह लड़का ट्रक से टकरा कर मर गया।
इसके अलावा अन्य कोई मुफीद बात नही बता पायी। बयान साक्षी अंकित किया गया।
बयान साक्षी- श्री पंकज कुमार गुप्ता पुत्र प्रेमचन्द्र गुप्ता नि० रूई मण्डी थाना कोतवाली गाजीपुर मो०नं० 8090280238 बदरियाफ्त पूछ तांछ से बता रहे हैं कि सिंह अस्पताल के पास मेरा ढाबा है। उस रात देर होने की वजह से मैं वही था। लगभग 3.00, 3.30 बजे मैं बर्तन धोकर दुकान बन्द करने जा रहा था कि अस्पताल के तरफ से एक लड़का भागता हुआ और तेज तेज सड़क पर चिल्लाता हुआ आया और उसको एक बडी वाली डी०सी०एम० जो लकडी के कलर की थी और उस पर माल लदा था तथा टिन रबर पड़ा था से टकरा गया मैंने टकराते हुवे अपने आंखो से देखा फिर कुछ लोग पीछे से आये और बोलने लगे लड़का मर गया जो मुझे जानकारी थी आपको बता दिया ट्रक का नम्बर ट्रक के स्पीड ज्यादे होने के कारण नही देख पाया।
बयान गवाह- श्री अरविन्द सिंह यादव पुत्र श्री रमीन्द्र सिंह यादव नि० लोकपापुर थाना कोतवाली गाजीपुर मो0नं 09598577754 बदरियाफ्त पूछने पर कहा कि मेरी पत्नी मंजू देवी के ट्यूमर का आपरेशन सिंह हास्पिटल में हुआ था मैं अपनी पत्नी को कमरा नं0 102 में लेकर था 18/19.4.15 की रात समय करीब 3.00 बजे की बात है काफी शोर हो रहा था मैं उपर गया तो एक व्यक्ति को उसके घर वाले पकड़े थे वह उन्हें झटक रहा था उसको लेकर सब नीचे आये फिर झटका देकर वह उपर चला गया उपर से पकड़ कर फिर नीचे लाया गया वह चिल्लाता रहा था कि मेरे साथ कौन है कौन है मोदी की ऐसी की तैसी तेज तेज बोल रहा था। गालियां दे रहा था जिसे बाहर निकलवा कर कैन्टीन की चौकी पर बैठवा दिया चौकी पर हाथ मार रहा था बाहर इसके बहनोई भाभी व चाची एवं गांधी नाम का लड़का थे हम लोग अन्दर से दरवाजा बन्द किये व जीने पर खड़े हो गये तभी 5 मिनट बाद बाहर शोर हुआ कि वह ट्रक से लड़ कर मर गया हम लोग बाहर गये तथा डेड बाडी स्ट्रेचर पर लादकर पेड़ के नीचे रख दिये। पकड़ते समय व बाहर जाते समय उसने अपने बहनोई व अन्य लोगों को झापड भी मारा था जब उसको अस्पताल के बाहर लाया गया था उस समय उसके चेहरे या शरीर पर कोई चोट नही था। डा० राजेश सिंह इस सारी घटना के बाद सूचना देने पर वापस आये।"

13. On basis of their investigation, the Special Investigation Team prepared a Report dated 18.5.2015, that investigation in regard to a vehicle allegedly involved in occurrence was required. The Special Investigation Team further submitted a Report dated 19.5.2015 that a Lie Detector Test of Sandeep Singh and Gandhi Singh and Narco Test of Basanti Devi and Chinta Devi was required and accordingly permission was sought. The report was submitted before the Chief Judicial Magistrate, Ghazipur under Section 169 Cr.P.C. to release co-accused from jail, since no offence was made out against them. Relevant part of said report is mentioned hereinafter:

"श्रीमान जी अब तक की विवेचना एवं संकलित साक्ष्य से अभियोग की प्रथम सूचना रिपोर्ट मात्र अनुमान एवं जोड़ तोड पर आधारित है जिसका वास्तविक घटना से कोई सम्बंध नहीं है प्रथम सूचना रिपोर्ट में वादी द्वारा घटना के सम्बंध में दो चश्मदीद साक्षी अंकित करोय है चश्मदीद साक्षी गणों के बयानों में प्रथम सूचना रिपोर्ट के अंकित तथ्यों से व परस्पर विरोधाभास एवं भिन्नता है वादी मुकदमा आनन्दी यादव द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट में मोके पर मोजूद होना अंकित कराया है किन्तु अपने वीडियो ग्राफी बयान में यह बताया है कि मैंने घटना को अपनी पुत्री बसन्ती देवी के बताने के आधार पर लिखा हुआ है इस प्रकार अभियोग के वादी को कथित घटना स्थल पर मोजूदगी प्रमाणित नही हुई जिसकी पुष्टि उसकी पुत्री घटना के चश्मदीद साक्षी बसन्ती देवी द्वारा भी की गयी है, पथम सूचना रिपोर्ट में अंकित तथ्य डकैती हत्या का अपराध पर्चा नं0 8 दिनांक 28 कृ4.15 में तरमी अन्तर्गत धारा 147, 323, 504, 209, 279/304 ए भादवि के अपराध नव गठित विशेष जांच दल की गहन विवेचना से प्रमाणित नही होती है अपितु समस्त संकलित साक्ष्यों से जो घटना कम प्रमाणित होता है वह इस प्रकार है। मृतक राजेश यादव घटना के दिन साक्षी गांधी मुलायम उर्फ रामपाल मंजू देवी एवं पंकज कुमार गुप्ता के बयानों के अनुसार काफी उत्तेजित था। श्रीमती परमिला एवं परमिला को मारपीट की जिसके अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की वजह से सड़क की ओर भागते हुये साखी चित्ता देवी एवं साक्षी गांधी सिंह द्वारा देखा गया तथा ट्रक से टकराते हुये स्वतंत्र साक्षी पंकज कुमार गुप्ता द्वारा देखा गया है।
अतः इस मुकदमें से अभी तक की विवेचना से किसी का संदोष भावना से (मेलाफाइड इन्टेन्शन) से कम माना प्रमाणित नही होता है इस मुकदमें में ग्राम जेल में निरुद्ध रामशक्ति प्रजापति पुत्र टेल्हू राम प्रजापति नि०ग्राम गौरा थाना सोहवल गाजीपुर शाबिर जमील पुत्र आसिफ जमील नि० ग्राम अन्धऊ थाना कोतवाली अब्दुल अन्सारी पुत्र मंजूर अली नि० गौरा बाजार थाना कोतवाली गाजीपुर के विरूद्ध कोई साक्ष्य नही पाया गया गवाह आनन्दी सिंह व बसन्ती के द्वारा मृतक राजेश यादव को कमरा नं0 202 एवं 2010 के बाहर हुई मारपीट से सीडियो के द्वारा नीचे जाना प्रमाणित होता है एवं उसके बाद हाट में बैठाये जाने पर वहां पर भी मृतक के द्वारा शोर शराबा मचाये जाने पर कुछ लोगों द्वारा बाहर कैन्टील पर बैठाये जाने की बात प्रमाणित होती है अतः इन तीनो व्यक्तियों के नाम राम शकित प्रजापति शाबिर जमील व अब्दुल अन्सारी के द्वारा किसी संज्ञेय अपराध का कारित होना नही पाया जाता है अतः मा० न्या० में धारा169 सी०आर०पी०सी० की रिपोर्ट आशय से प्रेषित की जा रही है उपरोक्त तीनो व्यक्तियों को रिहा करने सम्बंधी आदेश पारित करने की कृपा करें।
वर्तमान विवेचना से अभी तक की विवेचना से एफ०आई०आर० वादी एफ०आई० आर के अनुसार घटना क्रम के चश्मदीद साक्षी सतोष संदीप के बयानों में रखे उसकी के बयानों में अत्यन्त प्रमुख विरोधाभास है जिसके की वीडियो रिकार्डिंग पर भी साक्ष्य उपलब्ध है चूकि मुकदमा उपरोकत हत्या एवं डकैती जैसे महत्वपूर्ण धाराओं में पंजीकृत कराया गया था एवं एफ०आई०आर० के अनुसार इस घटना क्रम के चश्मदीद साक्षी में उपलब्ध है परन्तु एस०आइ।०टी० द्वारा निष्पादित की गई गहन विवेचना से सम्पूर्ण घटना द्वारा मात्र तथ्यों को तोड़ मरोड कर पेश किया जाना पाया गया एवं दुर्भावना `स किसी अपराध का किया जाना नही पाया गया अतः विवेचना को प्रचलित रखते हुये एफ०आई०आर० वादी आनन्दी यादव एफ०आई०आर० के अनुसार दो चश्मदीद साक्षी बसतीक संदीप यादव लाई डिटेक्टर रखे एनालिसिस टेस्ट कराये जाने की प्रबल आवश्यकता है ताकि सरमाव्य प्रेषण को अन्तिम रूप दिया जा सके।
अभी तक की समस्त विवेचना से कुछ साक्षी ऐसी भी प्रकाश में आये है जिनके अनुसार उन्होने समस्त घटना कम को देखा है इन साक्षियों के बयान आपस में मेल खाते हैं इनमें प्रमुख रूप से चिन्ता देवी गांधी सिंह पुत्र अजीत सिंह नि० ताड़ी घाट थाना सोहवल गाजीपुर पंकज गुप्ता पुत्र रविन्द्र गुप्ता नि० रूई मण्डी थाना कोतवाली गाजीपुर 3- मंजू देवी पत्नी शिव वचन यादव निवासी पकड़ी थाना रेवतीपुर गाजीपुर 4- रामपाल यादव पुत्र बहादुर सिंह यादव निवासी मोहम्मदपुर थाना करीमुद्दीनपुर गाजीपुर 5'- राम कुमार यादव पुत्र राम अधार यादव निवासी पी०एस० सोहवल गाजीपुर 6- अरविन्द यादव पुत्र रवीन्द्र यादव वि० लोकबाजुर थाना कोतवाली है इन साक्षियों में सबसे प्रमुख साक्षी चिन्ता देवी पत्नी गुड्डू निवासी कठोतरी थाना नोलहरा गाजीपुर एवं गांधी सिंह की भी लाई डिटेक्टर टेस्ट एवं नार्को एनालिसिसे टेस्ट कराये जाने की आवश्यकता प्रतीत होता है जिससे यह तसदीक हो सके क्या वास्तव में उपरोक्त घटना हत्या एवं डकैती जैसी संगीन घटना न होकर मात्र एक्सीडेन्ट की थी।
अतः मान० न्या० से निवेदन है कि मुकदमा वादी डाक्टरी-श्रीमती बसन्ती देवी संदीप यादव गांधी सिंह व चिन्ता देवी की लाइ डिटेक्टर रखे नार्को एनालिसिस टेस्ट कराये जाने की अनुमति दी जाये। मुकदमें की विवेचना प्रचलित है।"

14. Vidhi Vigyan Prayogshsala, Uttar Pradesh Mahanagar, Lucknow submitted a report on 11.6.2015 in regard to Crime Scene Recreation, which is mentioned hereinafter:

"दिनांक 30.05.15 को उक्त विषयक संदर्भित मामले के घटनास्थल पुनर्सरचना के द्वारा घटनास्थल के निरीक्षण / परीक्षण के क्रम में निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला उ० प्र०, लखनऊ के आदेशानुसार दिनाक 27.05.15 के अनुपालन में विधि विज्ञान प्रयोगशाला उ० प्र० लखनऊ की टीम जिसमें डा० एस० के०रावत संयुक्त निदेशक श्री श्याम सुन्दर वैज्ञानिक अधिकारी, श्री अजय शुक्ला ज्येष्ठ वैज्ञानिक सहायक, श्री अरुण कुमार शुक्ला फोटोग्राफर तथा प्रभारी फील्ड यूनिट वाराणसी श्री अवधेश कुमार तिवारी एवं प्रभारी फील्ड यूनिट गाजीपुर, श्री विवेक कुमार की संयुक्त टीम द्वारा उक्त घटनास्थल का निरीक्षण किया गया।
उक्त घटनास्थल की पहचान क्षेत्राधिकारी नगर श्री कमल किशोर विवेचक उ०नि० श्री श्रीप्रकाश दुबे निरीक्षक उ०नि० श्री राजेश त्रिपाठी एवं उ०नि० श्री प्रकाश त्रिपाठी द्वारा करायी गयी तथा आवश्यक फोटोग्राफस् प्रयोगशाला के फोटोग्रॉफ द्वारा लिये गये ।
इस घटना के अंतर्गत विवेचक द्वारा घटना के विषय में अवगत कराया गया कि उक्त घटना में दिनांक 18/19.05.2015 की रात्रि को तथाकथित मृतक राजेश यादव अपनी मां का इलाज उक्त हास्पिटल में करा रहा था जहां रात के समय उसकी मां को लगी ड्रिप की बोतल संम्भवतः समाप्ति पर थी जिसको बदलने के लिये राजेश यादव बार्ड ब्वाय के पास गया था कि उसके एवं वार्ड ब्याय के बीच मारपीट होना बताया गया था कि तथा वार्ड ब्वाय व अन्य के द्वारा मृतक को हास्पिटल के प्रथम तल से पकड़ कर हास्पिटल के गेट पर बनी कैंटीन में लाया गया था जहां पर पुनः वाद विवाद हुआ और मृतक द्वारा हाथ छुड़ाकर अचानक सड़क की ओर भागना, एवं हाइवे पर गाजीपुर की ओर आ रहे ट्रक की ओर हाथ देना और इसके उपरान्त सामने से आ रहे तथाकथित ट्रक/बडा मेटाडोर जैसे वाहन से टकरा गया ।
इस घटना के लिये कपडे की डमी ली गयी जिसमें भूसा भरा गया तथा इस घटना में संयुक्त टीम द्वारा विवेचक द्वारा बताये गये स्थानों का निरीक्षण / परीक्षण किया गया तथा हास्पिटल के कमरे एवं बरामदा आदि स्थानों की फोटोग्राफी करायी गयी तथा स्पाट टेस्ट किये गये थे तत्पश्चात टीम द्वारा हाइवे पर पुर्नसंरचना विधि से घटना को दोहराने का प्रयास किया गया ।
इस घटना के विवेचक द्वारा उपलब्ध कराये गये फोटोग्राफ, नक्शानजरी, एफ०आई०आर०, पोस्टमार्टम की वीडियो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा इस घटना के पुर्नसंरचना के लिये गये फोटोग्राफस का अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से (विभिन्न रिपोर्टी के सापेक्ष) तुलनात्मक अध्ययन वैज्ञानिक विधि से किया गया जिससे यह निष्कर्ष निकला कि मृतक की मृत्यु उक्त तथाकथित दुर्घटना के फलस्वरुप होने की सम्भावना प्रतीत होती है। "

15. In pursuance of application, permission was granted and two witnesses namely Gandhi Singh and Chinta Devi were voluntarily subjected to Lie Detection Test as well as Narco Test, wherein some relevant questions were asked and their answers were also given other two witnesses did not respond to test. Relevant part of both reports i.e. LIE DETECTION (POLYGRAPH TEST) REPORT are mentioned hereinafter:

'श्रीमती चिन्ता देवी का पालीग्राफ परीक्षण दि० 02.06.15 को किया गया। परीक्षण के दौरान केस से संबंधित प्रश्न पूछे गये। रेलीवेन्ट प्रश्व व उनके जवाब निम्न हैः-
क्रम स० विषय उत्तर 1 क्या तुमने डा० राजेश सिंह को अपनी पत्नी व स्टाफ के साथ राजेश यादव को मारते देखा था?
नहीं 2 क्या राजेश यादव को स्वयं दौडकर ट्रक से भिड़ते हुये तुमने देखा था?
हाँ 3 क्या राजेश के एक्सीडेन्ट के समय उसके परिवार वाले अस्पताल के बाहर मौजूद थे?
हाँ 4 क्या घटना की रात राजेश की माँ को ग्लूकोज चढ़ रहा था?
नहीं निषकर्ष- पालीग्राफ परीक्षण व पालीग्राफ विश्लेषण के उपरांत चश्मदीद साक्षी श्रीमती चिन्ता देवी के संबंध में निम्न विचार बनाये गयेः-
पालीग्राफ टेस्ट के पीक्स का विश्लेषण व मूल्यांकन के आधार पर (i) से (iv) तक पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में चश्मदीद साक्षी श्रीमती चिन्ता देवी सच बोल रहीं है।
श्री गांधी सिंह का पालीग्राफ परीक्षण दि० 03.06.2015 को किया गया। परीक्षण के दौरान केस से संबंधित प्रश्न पूछे गये। रेलीवेन्ट प्रश्न व उनके जवाब निम्न हैः-
क्रम स० विषय उत्तर 1 क्या तुमने डा० राजेश सिंह को अपनी पत्नी व स्टाफ के साथ राजेश यादव को मारते देखा था?
नहीं 2 क्या आपने उस रात राजेश यादव को रोड पर गाडी से टकराते देखा?
हाँ 3 क्या घटना वाले दिन राजेश यादव अस्पताल में कुछ लोगो के साथ लड़ाई कर शोर मचा रहा था?
हाँ 4 क्या किसी डर से तुम घटना से सम्बन्धित कुछ जानकारी छिपा रहे हो?
नहीं निष्कर्ष- पालीग्राफ परीक्षण व पालीग्राफ विश्लेषण के उपरांत चश्मदीद साक्षी श्री गाँधी सिंह के संबंध में निम्न विचार बनाये गयेः-
पालीग्राफ टेस्ट के पीक्स का विश्लेषण व मूल्यांकन के आधार पर (i) से (iv) तक पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में चश्मदीद साक्षी श्री गाँधी सिंह सच बोल रहीं है।

16. Smt. Chinta Devi and Gandhi Singh have undergone NARCO Analysis Test. They were asked about 34 and 28 questions respectively. For reference, entire report are being mentioned hereinafter:

"चिन्ता देवीः-
प्रश्न 1-तुम्हारा नाम क्या है ?
उत्तर- चिन्ता देवी प्रश्न 2-तुम कहाँ नौकरी करती हो ?
उत्तर-सिंह हास्पिटल, जामुनियों रोड प्रश्न 3-तुम्हारी ड्यूटी कितने घन्टे की होती है ?
उत्तर-सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक कभी कभी नाइट ड्यूटी भी लगती है प्रश्न 4-क्या तुम राजेश यादव को जानती हो ?
उत्तर- हॉ प्रश्न 5 उसका कौन सा रिस्तेदार एडमिट था?
उत्तर-उसकी माँ का आपरेशन हुआ था प्रश्न 6 वह क्या करने आता था ?
उत्तर-वह खाना देकर चला जाता था प्रश्न - 7 तुम्हारे अलावा कितनी दाईयों और नर्से है ?
उत्तर-तीन दाईया और पाँच छः नर्से है प्रश्न -8 जिस दिन यह घटना हुई थी तुम्हारी कहाँ ड्यूटी थी उत्तर-रात में प्रश्न-9 तुम्हे घटना की दिनॉक याद है ?
उत्तर- जी नहीं प्रश्न- क्या हुआ था ?
उत्तर- एक मरीज इमरजेन्सी में आयी थी हम उसको सुताने गयी थी तो वो उसको मारे पीटे लगा दो थप्पड़ हमको भी मारें हम डर के कोने सट गयी प्रश्न -10 किसने ट्राली पर लात रखी ?
उत्तर- राजेश यादव ने पालीगाफ टेस्ट प्रश्न- क्या राजेश के ऐक्सीडेन्ट के समय उसके परिवार वाले अस्पताल के बाहर मौजूद थे ?
उत्तर- हॉ प्रश्न -11 फिर तुमने क्या किया ?
उत्तर- तब सब लोग आ गये बहन चाची भाई कहन लगे हमारा भाई है प्रश्न 12 राजेश की माँ को उस दिन ग्लूकोज चढ़ रहा था उत्तर- जी नहीं?
पालीगाफ टेस्ट प्रश्न - क्या घटना की रात राजेश की माँ को ग्लूकोस चढ रहा था।
उत्तर- नहीं।
प्रश्न -13 मारपीट के समय क्या चिल्ला रहा था उत्तर- कुछ नही पकड़ कर ले जाया गया धक्का मारकर बहन को कुछ दूर पर खड़ा हो गया सब स्टाफ दुवारे जाकर बैठा दिया प्रश्न -14 क्या डाक्टर राजेश सिह व्र स्टाफ के आदमियों ने राजेश को मारा पीटा था?
उत्तर- नहीं पालीग्राफ टेस्ट प्रश्न- क्या तुमने डा० राजेश सिंह को अपनी पत्नी व स्टाफ के साथ राजेश यादव को मारते हुये देखा था।
उत्तर- नहीं।
प्रश्न -15 बड़े डाक्टर और पत्नी तब कहाँ थे?
उत्तर - ऊपर प्रश्न -16 डा० राजेश को नीचे कौन लाये ?
उत्तर- शक्ति मजहर फोन करके डाक्टर साहब को बुलवाये ।
प्रश्न-17 राजेश कैसे मरा ?
उत्तर- ट्रक से लडकर।
प्रश्न-18 तुम कहाँ थी ?
उत्तर- गेट पर फुलवारी में पानी दे रही थी।
प्रश्न-19 किसी ने धक्का दे दिया ?
पालीगाफ टेस्ट प्रश्न- क्या राजेश यादव को स्वयं दौड कर ट्रक से मिडते हुये तुमने देखा था।
उत्तर - हॉ उत्तर19- नहीं खुद से जाकर ट्रक के आगे कूद गया ट्रक वाले बहुत बचाये पर वह कूद गया ट्रक मारकर चली गयी प्रश्न20 उसको कोई चोट लगी थी ?
उत्तर- नहीं प्रश्न 21 तुमने आँखों से देखा ?
उत्तर- हॉ सब कुछ देखा चाची बोल रही थी कि हमार बाबू को पकडो प्रश्न 22 सब लोग के बाबू को दौड कर पकडा नहीं ?
उत्तर-पकडने गये थे, भाग कर लड गये।
प्रश्न 23 राजेश को सडक से उठाकर कौन लोग लाये थे?
उत्तर- सब लोग लाये थे कि दवा-दवा चला देंगे प्रश्न 24 क्या स्टाफ के किसी कर्मचारी ने उसका कोई पैसा छीना था?
उत्तर- नहीं।
प्रश्न 25- डा० व उसकी पत्नी कब उतर कर आये?
उत्तर- 5 बजे प्रश्न 26 राजेश कहां मरा?
उत्तर- रोड पर प्रश्न 27 किसने बताया?
उत्तर- आँखो से देखा प्रश्न 28 उसकी बहन कहां थी?
उत्तर- अपनी माँ के पास वह बाद में आयी। उसने एक्सीडेंट नहीं देखा।
प्रश्न 29- उसको किसने बताया।
उत्तर- चाचा का लडका संदीप ने।
प्रश्न 30- उस समय गांधी बाहर था, उसने देखा है?
उत्तर- हाँ प्रश्न 31- बसंती देवी का अस्पताल वालों से कोई सम्बन्ध था?
उत्तर- नहीं।
प्रश्न 32- राजेश अंदर क्या शोर मचा रहा था?
उत्तर- हमारे साथ कोई नहीं है, कोई नहीं है।
प्रश्न 33- क्या वह नशे में था?
उत्तर- हमका नहीं मालूम।
प्रश्न 34- क्या बहन ग्लूकोस की बोतल बदलने के लिये स्टाफ को कहने आयी थी?
उत्तर- नहीं।
निष्कर्ष- पालीग्राफ टेस्ट व नारको परीक्षण के दौरान पूछे गये प्रश्नो के उत्तर में कोई भिन्नता नहीं पायी गयी।
गाँधी सिंहः-
प्रश्न 1- तुम्हारा नाम क्या है ?
उत्तर- गाँधी प्रश्न 2-तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है ?
उत्तर-अजीत सिंह प्रश्न 3-तुम लोग कितने भाई बहन हो ?
उत्तर-3 भाई 1 बहन प्रश्न 4-तुमने कितनी पढाई की है।' उत्तर- हाईस्कूल पास प्रश्न 5 इस समय तुम क्या काम कर रहे हो।
उत्तर-बडे पापा के लडके भीम सिंह उनके साथ मिट्टी का काम कर रहे हैं गोमती नगर, लखनऊ में।
प्रश्न 6 तुम सिंह अस्पताल क्यों गये थे ?
उत्तर-मम्मी का बच्चेदानी का आप्रेशन हुआ था।
प्रश्न 7 कितने दिन अस्पताल में रहीं ?
उत्तर-करीब एक हफ्ता।
प्रश्न 8 किस रूम में थी ?
उत्तर-नीचे प्रश्न-9 राजेश यादव कौन था, 18 तारीख की रात को क्या हुआ ?
उत्तर-मैने उसे ढाई बजे उपर चिल्लाते हुये देखा उस समय शक्ति सर मेरी मम्मी को ग्लूकोज चढाने आये थे मैं और शक्ति सर उपर गये उस समय व चिल्ला रहा था उसको नीचे लाये वह फिर दूसरी तरफ से उपर चला गया उसको फिर उपर से नीचे लाये।
पालीग्राफ टेस्ट प्रश्न- क्या घटना वाले दिन राजेश यादव अस्पताल में कुछ लोगों के साथ लडाई कर शोर मचा रहा था.
उत्तर-हॉ प्रश्न-10 नीचे किस-किसने उतारा ?
उत्तर- हम थे उसका जीजा उसका भाई डा० शक्ति और उसकी चाची फिर उसको कैन्टीन ले गये मैंने उसका हांथ पकडा हुआ था।
पालीग्राफ टेस्ट प्रश्न- क्या तुमने डा० राजेश सिंह को अपनी पत्नी व स्टाफ के साथ राजेश यादव को मारते हुये देखा था।
उत्तर- नहीं।
प्रश्न-11 उसका हांथ क्यों पकड़ा था।
उत्तर-लग रहा था कि उसका दिमाग डिस्टर्ब है उसकी मम्मी बोली कोई मेरे बच्चे को पकड लो मैने उसको कैन्टीन में लिटाया वह अपने जीजा को गाली देने लगा मैं मुह धोने चला गया वह अचानक उठा और रोड की तरफ दौड कर चला गया मोदी जी को गाली दे रहा था।
प्रश्न -12 और क्या बोल रहा था।
उत्तर- मेरे साथ कौन है।
प्रश्न 13 कैन्टीन में क्या उसके उपर पानी की छीटे भी डाली थी उत्तर- नही कुछ नहीं वह अपने आप शान्त हो गया वह दो तीन मिनट बैठा फिर अचानक उठा और गाली देते हुये रोड की तरफ दौड गया उधर से ट्क आ गया फिर वह जबरदस्ती ट्क से एक्सीडेन्ट कर गया।
पालीग्राफ टेस्ट प्रश्न-क्या तुमने उस रात राजेश यादव को रोड पर गाडी से टकराते देखा था।
उत्तर- हाँ प्रश्न -14 क्या तुमने देखा उत्तर- हॉ उसकी चाची कह रह थी कि मेरे बच्चे को कोई बचा ले मैं दौड कर गया तब तक एक्सीडेन्ट हो चुका था यह ट्क से लड़ चुका था।
प्रश्न -15 कौन से रंग की ट्क थी उत्तर - लाल रंग की बडी ट्क थी डेस्ट्रा रोड के उस तरफ थी।
प्रश्न 16 किसी ने उसे पकडा नहीं।
उत्तर - वह ट्क देखकर जबरदस्ती दूसरे साइड चला गया उस समय हम उसकी चाची, जीजा शक्ती सर को बुला कर लाये फिर वह स्ट्रेचर मंगवाकर उसपर लदवाये वह बाहर ही एक्सपायर कर गया।
प्रश्न 17 क्या उस समय उसकी बहन बंसती देवी वहाँ थी।
उत्तर- उस समय उसकी बहन बंसती देवी वहाँ नहीं थी वह उपर थी बाद में बाहर आयी बोलने लगी मैं ताला डलवा दूगीं।
प्रश्न18 क्या डा० सहाब व उनकी वायफ नीचे उतर कर आये थे ?
उत्तर- हॉ डा० तब आये जब प्रशासन आ गयी थी उनकी पत्नी नहीं आई वह तो उस बच्चे का चेहरा भी नहीं देखी थी।
प्रश्न19 रोड से उसको कौन उठाकर लाया था ?
उत्तर- हम उसका जीजा उसका भाई शक्ती सर और दो स्टाफ वाले ।
प्रश्न20 उसकी जेब में पैसे थे ?
उत्तर- एक भी नहीं जब हम उपर गये थे तो देखा जो इमरजेन्सी में आये थे उनसे लडाई कर रहा था मेरे साथ कौन है यही बात चिल्ला रहा था, मोदी जी को गाली दे रहा था।
प्रश्न 21 उसकी बहन कब आई ?
उत्तर-जब उसकी मृत्यु हो गयी तब आई थी।
प्रश्न 22 उसके पिता जी कब आये ?
उत्तर- उस समय नहीं आये उसके बाद आये होगें मुझे पता नहीं।
प्रश्न 23 तुम किसी के कहने पर तो ऐसा नहीं कह रहे हो उत्तर-जी नहीं।
प्रश्न24 तुमने आँखों से देखा उत्तर-मेरी आँखों के सामने ही यह घटना घटी थी।
प्रश्न 25 क्या बहन को गलत काम करते हुये देखकर उसको गुस्सा आया था।
उत्तर-ऐसा तो कुछ नहीं था।
प्रश्न 26 तुमने ट्क का नम्बर देखा था।
उत्तर-नाइट का समय था नम्बर नहीं देखा था।
प्रश्न 27 क्या ट्क उस पर चढ गई थी।
उत्तर - चढी तो नहीं थी पर उसको आगे वाले हिस्से से चोट लगी थी शायद उसको बम्पर बोलते हैं। जब पलटा तो उसका पिछला चक्का उसके कान पर चढ़ गया था फिर वह ट्क निकल गया।
प्रश्न 28 यह तुमने देखा था।
उत्तर- बिल्कुल।
पालीग्राफ टेस्ट प्रश्न- क्या किसी डर से तुम घटना से सम्बंधित कोई जानकारी छिपा रहे हो, उत्तर- नहीं।
निष्कर्ष- पालीग्राफ टेस्ट व नारको टेस्ट परीक्षण के दौरान पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में कोई भिन्नता नहीं पायी गयी ।"

17. After above referred investigation was completed, the Investigating Officer submitted a Final Report on 16.5.2015 that it was not a case of culpable homicide, rather deceased died due to a road accident. Final Report in its entirety is reproduced hereinafter.

"निवेदन है कि मुकदमा उपरोक्त दिनांक 19.04.2015 को थाना स्थानीय पर पंजीकृत हुआ विवेचना मुझ प्रभारी निरीक्षक स्वयं ग्रहण किया धारा 161 सी०आर०पी०सी में वादी श्री आनन्दी सिंह यादव श्रीमती बसन्ती व संदीप यादव का बयान अंकित किया गया मृतक राजेश यादव की बाडी का पोस्ट मार्टम 3 डाक्टरो की टीम से मय वीडियो ग्राफी के द्वारा कराया गया तथा पोस्ट मार्टम से पूर्व मृतक के शरीर पर आयी चोटो का फोटो ग्राफ कराया गया जो संलग्न सी०डी० किये गये प्रथम दृष्टया 03 आरोपीगण राम शक्त्ति प्रजापति, शाबिर जमील एवं अंसारी का नाम आया जिन्हें दिनांक 25.4.15 को गिरफ्‌तार किया गया घटना के सम्बध में उसकी प्रमाणिकता हेतु अपर निदेशक चिकित्सा एवं विधि विशेषज्ञ ऐश बाग लखनऊ को मृतक के पी०एम०आर० पोस्ट मार्टम रिपोर्ट पंचायत नामा की प्रति और मृतक के कपड़ो की जांच की एफ०एस०एल० रिपोर्ट से मृतक की मृत्यु को किसी तेजगति के वाहन से टकराने के कारण आयी चोटो से मृत्यु होना पाया गया सभी चोटे एन्टीमार्टम इंजरी से आयी है। एफ०एस०एल० की दिनांक 28.4.15 को आयी रिपोर्ट के आधार पर अभियोग की धारा 147, 323, 504, 109, 279, 304 ए आई०पी०सी० में तरमीम किया गया। दिनांक 16.5.15 को अभियोग की गहन विवेचना एवं व्याख्या वेषण हेतु एस०आई०टी० टीम का गठन किया गया। दिनांक 16.5.15 को वादी श्री आनन्दी सिंह यादव का मजीद बयान, श्रीमती बसन्ती व संदीप यादव का मजीद बयान लिया गया। पूरे बयान की वीडियो ग्राफी व प्रतिपरीक्षण (क्रास इक्जामिनेशन) कराया गया एवं घटना के सम्बंध में मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण कराया गया तथा स्वतंत्र साक्षियों का बयान 18.5.15 को लिया गया जिनमें श्रीमती चिन्ता देवी, राम कुमार, गांधी सिंह व अन्य के वीडियो ग्राफिक बयान कराये गये तथा घटना का स्थलीय निरीक्षण एवं क्रास इक्जामिनेशन किया गया उक्त बयानों एवं संकलित साक्ष्य के परिशीलन से अभियुक्तगणों के विरूद्ध कोई साक्ष्य नही पाया गया जिन्हें न्यायिक अभिरक्षा से अवमुक्त करने हेतु न्यायालय सी०जे०एम० को 169 सी०आर०पी०सी० की रिपोर्ट दी गई। तथा मा० न्यायालय से एफ०आई०आर० के साक्षी आनन्दी सिंह यादव व श्रीमती बसन्ती देवी व संदीप सिंह एवं घटना के स्वतंत्र एवं चश्मदीद साक्षी श्रीमती चिन्ता देवी व गांधी सिंह का सुसंगत साक्ष्य संकलन की कार्यवाही के दृष्टिकोण से लाईडिटेक्टर टेस्ट व नार्को एनालिसिस परीक्षण हेतु प्रत्यावेदन किया गया था मा० न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर व गवाहों की सहमति पर श्रीमती चिन्ता देवी व गांधी सिंह का नार्को टेस्ट कराया गया एफ०आई०आर० के गवाह श्री आनन्दी सिंह यादव व श्रीमती बसन्ती देवी, विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी घटना की पुष्टि नही होती है। मृतक के शरीर पर आयी चोट वाहन दुर्घटना में आना पाई गई है के बयान से हत्या व 50 हजार रूपये लूटे जाने के कोई साक्ष्य नही पाये गये है न ही घटना के संदर्भ में किसी के द्वारा दुष्प्रेरित किये जाने की बात पाई गई। अभियोग की विवेचना में अभियुक्त गणों के विरूद्ध कोई साक्ष्य न होने के कारण अन्तिम रिपोर्ट प्रंषित की जा रही है। स्वीकृत करने की कृपा करें। वाहन की तलाश सजारी है। तथा वाहन की तलाश की विवेचना जरिये एस०सी०डी० से प्रेषित होगी।"

18. The Complainant has filed a Protest Petition to oppose the final report. Learned Chief Judicial Magistrate, Ghazipur considered final report as well as protest petition and vide order dated 26.6.2015 rejected the outcome of final report and summoned the applicants and four other accused under Sections 147, 323, 504 and 302 I.P.C. Impugned order in its entirety is reproduced hereinafter.

"26.6.2015 थाना कोतवाली, गाजीपुर की तरफ से मु०अ०सं० 429 / 2015 में अन्तिम आख्या संख्या-72/ 2015 प्रेषित की गयी है।
दर्ज रजिस्टर हो।
अन्तिम रिपोर्ट के साथ संलग्न की गयी केस डायरी व उसके साथ संलग्न किये गये प्रपत्रों पोस्ट मार्टम रिपोर्ट व विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट आदि का अवलोकन किया गया।
प्रस्तुत प्रकरण में प्रथम सूचना रिपोर्ट दिनांक 19.4.2015 को अन्तर्गत धारा 147,302, 323, 395 व 504 भा०दं०सं० के तहत अभियुक्तगण डॉ० राजेश सिंह व डॉ० अनुपमा सिंह के विरूद्ध पंजीकृत की गयी। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार मृतक राजेश यादव की मां का ईलाज सिंह हास्पीटल में चल रहा था। दिनांक 18.4.2015 को रात में करीब 12-01 बजे बोतल का पानी खत्म हो गया तो मृतक डॉक्टर को बुलाने गया। डॉ० राजेश सिंह व उनकी पत्नी डॉ० अनुपमा सिंह व तीन अन्य ने मृतक के साथ गाली गलौज करते हुये जान से मारने की नियत से उसे इतना मारे पीटे कि मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गयी। डॉ० राजेश सिंह व डॉ० अनुपमा सिंह के अतिरिक्त तीन व्यक्तियों को अज्ञात के रूप में दिखाया गया। दौरान विवेचना अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, साबिर जमिल व अब्दुल अंसारी को प्रकाश में आना बताया गया तथा उन्हें उपरोक्त प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। तभी से ये तीनों अभियुक्तगण न्यायिक अभिरक्षा में हैं। दौरान विवेचना विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रकरण को हत्या न मानकर दुर्घटना होने की दिशा में विवेचना करते हुये कारागार में निरूद्ध उपरोक्त अभियुक्तगण का रिमाण्ड अन्तर्गत धारा 147, 323, 504, 109, 279 व 304ए. भा०दं०सं० में तरमीम किये जाने हेतु प्रार्थनापत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिस पर न्यायालय द्वारा दिनांक 02.5.2015 को विवेचक द्वारा उस दिनांक तक की गयी विवेचना के आधार पर संकलित किये गये साक्ष्यों के आधार पर विवेचक का तरमीमी प्रार्थनापत्र निरस्त किया गया, क्योंकि विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रकरण में हत्या की जगह दुर्घटना से संबंधित कोई भी विश्वसनीय साक्ष्य संकलित नहीं किया गया था। तत्पश्चात् विवेचक द्वारा दिनांक 21.5.2015 को प्रार्थनापत्र अन्तर्गत धारा 169 दं०प्र०सं० प्रस्तुत करते हुये कारागार में निरूद्ध अभियुक्तगण को रिहा किये जाने हेतु प्रस्तुत किया गया, लेकिन विवेचक द्वारा धारा 169दं०प्र०सं० के प्रार्थनापत्र. के साथ प्रस्तुत की गयी केस डायरी एवं साक्षियों के बयान, रिकार्डिंग से संबंधित सी०डी० आदि के आधार पर प्रार्थनापत्र अन्तर्गत धारा 169दं०प्र०सं० स्वीकार किये जाने योग्य न होने के कारण दिनांक 22.5.2015 को निरस्त किया गया, आज पुनः विवेचक द्वारा इस प्रकरण में अन्तिम आख्या प्रस्तुत की गयी है। विवेचक द्वारा प्रस्तुत की गयी केस डायरी के साथ मृतक का पोस्टमार्टम रिपोर्ट दि0 19.4.2015 संलग्न है, जो मेडिकल आफिसर पोस्टमार्टम हाउस गाजीपुर के द्वारा हस्ताक्षरित है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु पूर्व की कुल 24 चोटें मृतक के शरीर पर आनी बतायी गयी हैं, जिनमें से 19चोटें Abrasion बतायी गयी हैं तथा मात्र चोट संख्या 23 ही Crushed Injury (कुचला हुआ घाव) बतायी गयी है तथा मृतक को पसलियों तथा उसके उदर (Abdomin) में कोई भी आंतरिक चोट नहीं बतायी गयी है तथा चोट कारित करने की रीति निश्चित नहीं किये जाने का तथ्य अभिलिखित किया गया। सामान्यतः दुर्घटना होने पर 24 चोटों में से मात्र एक ही चोट कुचली हुयी (Crushed Injury) नहीं हो सकती बल्कि ज्यादातर चोटे कुचली हुयीं चोट होनी। इस चाहिये प्रकार पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रथम दृष्टया विवेचक द्वारा विवचनोपरान्त निकाले गये निष्कर्ष का समर्थन नहीं करती है, बल्कि प्रथम सूचना रिपोर्ट के कथानक की ओर इशारा करती है।
विवेचक द्वारा साक्षी चिंता देवी व गांधी सिंह का Lie Ditection परीक्षण कराया गया है, जब कि मुकदमा वादी व प्रत्यक्षदर्शी साक्षी बसन्ती देवी व संदीप का Lie Ditection/Narco Test नहीं कराया गया है। जिसका कारण उनके द्वारा परीक्षण हेतु उपस्थित न होने का आधार बताया गया है. जब कि उक्त साक्षीगण द्वारा अपनी बीमारी का आधार लिखते हुये विवेचक से समय लिये जाने के बावत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया है। Lie Detection/Narco Test में पूछे जानेवाला विधि विज्ञान प्रशोगशाला को मुख्य प्रश्न यह बताया गया है कि क्या अभियुक्त उक्त संदर्भित अभियोग में शामिल था, जब कि विवेचना हेतु मुख्य प्रश्न यह था कि क्या प्रथम सूचना रिपोर्ट में किये गये कथन सत्य है या नहीं? इसके अतिरिक्त चिन्ता देवी ने नाकों परीक्षण के प्रश्न संख्या 18 के उत्तर में कहा है कि वह गेट पर फुलवारी में पानी दे रही थी, जब कि घटना रात के 01-02 बजे के करीब की बतायी गयी है। सामान्यतः रात में फुलवारी में पानी देना स्वाभाविक नहीं लगता है। मृतक के सन्दर्भ में प्रश्न संख्या 20 यह पूछा गया है कि उसको कोई चोट लगी थी. जिसके जवाब में उसने उत्तर दिया है कि नहीं। यह जवाब भी सत्य प्रतीत नहीं होता है। यदि ट्रक से दुर्घटना होगी तो चोट निश्चित रूप से आयेगी।
इसके अतिरिक्त विधि विज्ञान प्रयेगशाला-लखनऊ की आख्या दि023.4.2015 के अनुसार पैण्ट कपड़ा प्रदर्श पी-1 के पीछे के भाग पर तथा आगे दोनों पैर वाले भाग पर घुटने के आसपास मि‌ट्टी जैसे रगड़ के चिन्हों की पुष्टि दृष्टिगोचर हुयी, परन्तु इन सभी कपड़ों पर अथवा इस पर कोई टायर जैसे चिन्ह / कांच जैसे टुकड़ों आदि की पुष्टि दृष्टिगोचर नहीं हुयी अंकित की गयी है। सामान्यतः सड़क पर मिट्टी नहीं होती बल्की कंकरीट या तारकोल आदि के चिन्ह हो सकते हैं। कपड़ों पर टायर का कोई निशान न होने का भी इस रिपोर्ट में वर्णित किया गया है।
विवेचक द्वारा धारा 161 दं०प्र०सं० के तहत साक्षीगण से न केवल प्रश्नोत्तर के रूप में कथन पूछा गया है बल्कि उनसे Cross Examination (प्रति परीक्षण) भी किया गया है। प्रतिपरीक्षण का प्राविधान पैरा 161 दं०प्र०सं० या पैरा 109 पुलिस रेगुलेशन ऐक्ट में नहीं दिया गया है। विवेचक द्वारा विवेचना प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित कथनों के आधार पर न करके प्रकरण में हत्या के स्थान पर दुर्घटना साबित करने की दिशा में की गयी है। जब कि पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला दुर्घटना का प्रतीत नहीं होता है। धारा 161 दं०प्र०सं० के तहत विवेचक द्वारा मुकदमा वादी आनन्दी यादव का कथन तथा प्रत्यक्षदर्शी साक्षी बसन्ती देवी का कथन अभिलिखित किया गया है। बसन्ती देवी के कथन के अनुसार दिनांक 18.4.2015 को रात्रि में करीब 01 बजे मां को चढ़ते पानी की बोतल खत्म हो रही थी। हमारे भाई राजेश यादव डाक्टर को बुलाने गये तो डाक्टर व उनके स्टाफ के लोगों से कहासुनी व हाथापायी होने लगी। लड़ाई झगडे का शोरगुल सुनकर मैं कमरे से बाहर गयी तो देखा कि डाक्टर राजेश अपने स्टाफ के लोगों द्वारा हमारे भाई को गाली गुप्ता व मार पीट रहे हैं। मैं तथा मेरे भाई संदीप नीचे पहुचे तो स्टाफ के लोग मेरे भाई को नीचे कमरे में बन्द कर दिये थे तब मैं व मेरा चचेरा भाई अपनी मां के पास चले आये। करीब एक-डेढ़ बजे राजेश यादव उर्फ अनूप की लाश सड़क के दूसरी पटरी पर पड़ी थी। इसीतरह का कथन इस साक्षी ने केस डायरी के पर्चा संख्या-9ब दि० 16.5.2015 पर भी किया है।
अन्तिम रिपोर्ट के साथ संलग्न केस डायरी एवं अन्य प्रपत्रों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि अभियुक्तगण डॉ० राजेश सिंह, डॉ० अनुपमा सिंह, रामशक्ति प्रजापति, साबिर जमील व अब्दुल अंसारी के विरूद्ध धारा 147, 323, 504, 302 भा०दं०सं० के तहत विचारण किये जाने हेतु पर्याप्त सामग्री पत्रावली पर उपलब्ध है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मै०इण्डिया कैरेट प्रा०लि० प्रति-कर्नाटक राज्य, ए ०आई०आर० 1989 (एस०सी०) पेज-885 में व्यवस्था दी है कि :-
CriminalP.C.(1974), Ss.
190(1(b)173(2)200,202-Cognizance of offence Power of Magistrate-He can take cognizance of offence even if police report is to the effect that no case was made out-Need not follow procedure laid down in Ss. 200,202.
ए०सी०अग्रवाल प्रति-मु० रामकली, ए०आई०आर० 1968, एस०सी० पेज-01 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि धारा 190 (1 बी) दं०प्र०सं० के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष यदि संज्ञेय प्रकृति का अपराध लाया जाता है तो वह उस पर संज्ञान लेने के लिये बाध्य हैं।
ए०आई०आर०-2012, एस०सी०, पेज 1774, भूषण एवं अन्य प्रति-दिल्ली राज्य के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि धारा 190दं०प्र०सं० के तहत मजिस्ट्रेट को न्यायिक विवेक का प्रयोग करना होता है। इस स्तर पर मजिस्ट्रेट का यह समाधान होना चाहिये कि क्या विचारण के लिये पर्याप्त आधार है? इस स्तर पर इस बात की आवश्यकता नहीं होती है कि क्या दोषसिद्धि के लिये पर्याप्त आधार है। दोषसिद्धि के बावत पर्याप्त साक्ष्य का निर्धारण विचारण के समय किया जाना है।
ए०आई०आर०-2013, एस०सी०, पेज 1590, गंभीर सिंह आर. डेकर प्रति फाल्गुन भाई चीमन भाई पटेल व अन्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि संज्ञान के स्तर पर अपराध की सत्यता के बारे में विचार नहीं किया जाना है।
माननीय उच्चतम् न्यायालय की उपरोक्त विधि व्यवस्थाओं के प्रकाश में अन्तिम आख्या के साथ संलग्न केस डायरी व अन्य प्रपत्रों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया अभियुक्तगण के विरूद्ध विचारण हेतु पत्रावली पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, इसलिये पुलिस थाना कोतवाली, गाजीपुर की तरफ से प्रस्तुत की गयी अन्तिम रिपोर्ट संख्या 72/ 2015 निरस्त किये जाने योग्य है।
विवेचक द्वारा सभी स्वाभाविक तथ्यों को विवेचित नहीं किया गया, इसलिये विवेचक एवं उनके पर्यवेक्षण अधिकारी की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।
आदेश थाना कोतवाली, गाजीपुर द्वारा उपरोक्त अपराध संख्या में प्रस्तुत अन्तिम रिर्पोट संख्या-72/ 2015 निरस्त की जाती है। अभियुक्तगण डॉ० राजेश सिंह, डॉ० अनुपमा सिंह, रामशक्ति प्रजापति, साविर जमील व अब्दुल अंसारी के विरूद्ध अन्तर्गत धारा 147, 323, 504 व 302 भा०दं०सं० विचारण किये जाने हेतु अपराध का संज्ञान अन्तर्गत धारा 190(1)(b) लिया जाता है। अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, साविर जमील व अब्दुल अंसारी कारागार में हैं, उनका वारण्ट अन्तर्गत धारा २०9 दं०प्र०सं० परिवर्तित किया जाय तथा अभियुक्तगण डॉ० राजेश सिंह व डॉ० अनुपमा सिंह को विचारण हेतु समन किया जाता है।
पत्रावली दिनांक 22.7.2015 को पेश हो। सभी संबंधित तदनुसार सूचित हों। आदेश की प्रति प्रमुख सचिव (गृह) उ०प्र०शासन व डी०जी०पी० को सूचनार्थ व आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित हो।"

19. The applicants and other accused being aggrieved by aforesaid order, filed a Revision Petition.

20. Aforesaid Revision Petition was dismissed vide order dated 9.12.2019. Relevant part of same is reproduced hereinafter.

"8- पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्ता द्वारा सर्व प्रथम यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि विद्वान अवर न्यायालय द्वारा प्रश्नगत आदेश दिनाकित 26.06.2015 को पारित करने में गम्भीर रूप से विधिक त्रुटि कारित की गयी है तथा उन्हें संज्ञान लिये जाने का अधिकार प्राप्त नहीं है। इस सम्बन्ध में सर्व प्रथम इस विषय पर चर्चा किया जाना समीचीन प्रतीत होता है कि किसी भी प्रकरण में विवेचक द्वारा दं० प्र० सं० की धारा 173 के अन्तर्गत अन्तिम आख्या प्रस्तुत किये जाने के उपरान्त मजिस्ट्रेट के पास क्या विकल्प उपलब्ध होता है? दं० प्र० सं० की धारा 190 (1) (ख) में मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान लिये जाने के सम्बन्ध में उनके अधिकार का उल्लेख किया गया है। उक्त प्रावधान के अनुसार किसी भी प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को यह अधिकार प्राप्त है कि यह ऐसे तथ्यों के बारे में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अपराध का संज्ञान ले सकता है।
9- प्रस्तुत मामले में विवेचक द्वारा विवेचनोपरान्त यह अभिमत प्रकट किया गया था कि प्रस्तुत मामले में किसी भी अपराध का होना नहीं पाया जाता है परन्तु विद्वान अवर न्यायालय द्वारा विवेचक के अभिमत को निरस्त करते हुये न केवल प्रकरण का संज्ञान लिया गया बल्कि पुनरीक्षणकर्ता / अभियुक्तगण को विचारण हेतु आहूत भी किया गया। पखाण्डों एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं एक अन्य, 2002 (1) जे० आई० सी० 104 (इलाहाबाद) के वाद में माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया कि अन्तिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर, मजिस्ट्रेट के पास निम्नलिखित चार अनुक्रम उपलब्ध हैं-
1. He may agreeing with the conclusions arrived at by the police, accept the report and drop the proceedings. But before so doing, he shall give an opportunity of hearing to the complainant; or
2. He may take cognizance under Section 190 (1) (b) and issue process straight way to the accused without being bound by the conclusions of the investigating agency, where he is satisfied that upon the facts discovered or unearthed by the police, there is sufficient ground to proceed; or
3. He may, order further investigation, if he is satisfied that the investigation was made in a perfunctory manner; or
4. He may, without issuing process or dropping the proceedings decide to take cognizance under Section 190(1) (a) upon the original complaint or protest petition treating the same as complaint and proceed to act under Sections 200 and 202, Cr.P.C. and there after decide whether complaint should be dismissed or process should be issued.
10. अतः उपरोर्क से यह स्पष्ट है कि मजिस्ट्रेट को यह पूर्ण अधिकार है कि किसी भी अन्तिम आख्या को स्वीकार करें अथवा नहीं। अतः जहां तक पुनरीक्षण कर्ता/अभियुक्तगण द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त तर्क का सम्बन्ध है, यह स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। प्रस्तुत मामले में विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अपने क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत ही अन्तिम आख्या संख्या 72/2015 को निरस्त कर प्रकरण का संज्ञान लिया गया है।
11- अग्रेतर न्यायालय के समक्ष विचाराणीय बिन्दु यह है कि क्या विद्वान अवर न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षणकर्ता / अभियुक्तगण को विचारण हेतु आहुत किये जाने के सम्बन्ध में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध था अथवा नहीं? इस सम्बन्ध में विद्वान अवर न्यायालय द्वारा प्रश्नगत आदेश दिनांकित 26.06.2015 में प्रमुख रूप से इस तथ्य का उल्लेख किया गया है कि मृतक श्री राजेश यादव के शरीर पर कुल 24 चोटें आना दर्शित हैं, जिसमें से 19 चोटें अब्रेजन (Abrasion) बतायी गयी है तथा मात्र चोट संख्या 23 ही क्रस्ड (Crushed) इन्जरी (कुचला हुआ घाव) बताया गया है। इसी प्रकार इस तथ्य पर भी किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं है कि मृतक राजेश यादव की मां व परिवादी श्री आनन्दी यादव की पत्नी श्रीमती सुदामी देवी का सिंह लाईफ केयर हास्पीटल में ईलाज चल रहा था तथा उनकी आंत का आपरेशन किया गया था। ऐसे में कथित घटना के समय मृतक की कथित घटना स्थल पर मौजूदगी से इन्कार नहीं किया जा सकता। इस सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि एक व्यक्ति की मां का ईलाज किसी अस्पताल में चल रहा हो तो उसका बेटा अपनी मां के पास मौजूद न हो। अतः पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर मृतक की मौजूदगी को कथित घटना स्थल के आस पास से खण्डित कर दिया जाय।
12- अग्रेतर पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रस्तुत मामले में साक्षियों का नार्काोइनेलिसिस टेस्ट भी कराया गया जिससे इस तथ्य की पुष्टि होती है कि पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण द्वारा किसी भी प्रकार की कोई घटित घटना नहीं की गयी। इस सम्बन्ध में न्यायालय का अभिमत है कि इस तथ्य का विश्लेषण साक्ष्योपरान्त ही सम्भव है कि किस साक्षी का साक्ष्य ग्राह्य है अथवा नहीं परन्तु इस सम्बनध में इस न्यायालय का अभिमत है कि सामान्य तौर पर नार्कोइनेलिसिस अभियुक्तगण का कराया जाता है परन्तु प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रस्तुत मामले में नार्कोइनेलिसिस टेस्ट कुछ ऐसे साक्षियों का कराया गया, जो कि पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण संख्या 01 व 02 के अस्पताल के कर्मचारी हैं तथा विद्वान अवर न्यायालय द्वारा यह उचित ही अभिमत प्रकट किया गया है कि जब कथित घटना अत्यन्त रात्रि की बतायी गयी है तो यह कहां सम्भव है कि कोई महिला रात्रि में फुलवारी में पानी दे रही हो। अतः पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त तर्क भी स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है।
13- पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह सुझाव दिये जाने का प्रयास किया गया कि मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप यादव की मृत्यु किसी दुर्घटनावश हुई है तथा उनके द्वारा पुनरीक्षण याचिका के पैरा-07 में यह सुझाव दिया गया है कि मृतक की मृत्यु किसी तेज गति वाहन के चपेट में आने के कारण हो सकती है। परन्तु पुनरीक्षण याचिका के पैरा 5 लगायत 7 एवं 12 स्वयं में विरोधाभाषी प्रतीत होते हैं, क्योंकि पैरा 12 में पुनरीक्षणकर्ता / अभियुक्तगण द्वारा यह अभिकथन किया गया है कि "सभी ने यह बताया कि मृतक राजेश यादव बहुत अधिक उत्तेजित (Hyper Active) था तथा जोरों से चिल्ला तथा भाग रहा था तथा शोर मचा रहा था' परन्तु पुनरीक्षणकर्ता / अभियुक्तगण द्वारा यह नहीं बताया गया है कि मृतक राजेश यादव किस कारण से उत्तेजित (Hyper Active), तथा जोर से चिल्ला रहा था तथा उन्हें यह कैसे ज्ञात हुआ कि मृतक राजेश यादव उत्तेजित था?
14- दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 397 के अन्तर्गत पुनरीक्षण याचिका के निस्तारण के समय पुनरीक्षण न्यायालय को केवल प्रश्नगत् आदेश की शुद्धता, वैधता एवं औचित्य के बारे में निर्धारण करना होता है। इसके अतिरिक्त पुनरीक्षण याचिका के निस्तारण के समय वाद के समस्त तथ्यों / साक्ष्यों के मूल्यांकन की अपेक्षा नहीं होती है। पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण द्वारा अनेकानेक ऐसे तथ्य प्रस्तुत किय गये है, जिनके सम्बन्ध में अभिमत केवल साक्ष्योपरान्त ही प्रस्तुत किया जा सकता है। इस स्तर पर किसी भी साक्ष्य के मूल्यांकन किये जाने की अपेक्षा नहीं होती है।
15- अतः उपरोक्त विवेचना के आधार पर स्पष्ट है कि विद्वान अवर न्यायालय को यह अधिकार प्राप्त था कि वे विवेचक द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिमत को न केवल अस्वीकार करें बल्कि उनके पास पूर्ण रूप से यह क्षेत्राधिकार भी प्राप्त था कि वे प्रकरण का संज्ञान लेवें । पत्रावली पर प्रथम दृष्टया इस सम्बन्ध में पर्याप्त साक्ष्य है कि पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण को विचारण हेतु आहूत किया जाय। मृतक राजेश यादव की मौके पर उपस्थिति से किसी भी पक्ष द्वारा इन्कार नहीं किया गया है। इसी प्रकार उसकी पोस्टमार्टम आख्या में उसे कुल 24 चोटें आना दर्शित हैं। इस तथ्य का निर्धारण साक्ष्योपरान्त ही सम्भव है कि उसकी मृत्यु कैसे हुई ?
16- अतः उपरोक्त विवेचना के आधार पर पुनरीक्षणकर्ता/अभियुक्तगण इस तथ्य को सबित करने में पूर्णतया विफल रहे हैं कि विद्वान अवर न्यायालय द्वारा पारित केन्द्रीय आदेश दिनांक 26.06.2015 त्रुटिपूर्ण है। विवेचनोपरान्त न्यायालय का अभिमत है कि विद्वान अवर न्यायालय द्वारा पारित आदेश विधि सम्मत है, जिसमें किसी प्रकार से हस्तक्षप किये जाने की आवश्यकता नहीं है। तदनुसार पुनरीक्षण याचिका निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश 17- पुनरीक्षण याचिका तदनुसार निरस्त की जाती है।
18- विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गाजीपुर द्वारा पारित प्रश्नगत् आदेश दिनांक 26.06.2015 की पुष्टि की जाती है। इस निर्णय की एक प्रति के साथ विद्वान अवर न्यायालय की मूल पत्रावली अविलम्ब वापस भेजी जाय।
19- पुनरीक्षणकर्ता/ अभियुक्तगण को निर्देशित किया जाता है कि वे एक सप्ताह के अन्दर विद्वान अवर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होवे। उनके उपस्थित न होने की दशा में विद्वान अवर न्यायालय को यह पूर्ण अधिकार प्राप्त होगा कि वे अभियुक्तगण की उपस्थिति के सम्बन्ध में विधिक रूप से प्रोसेस जारी करें। "

21. Above referred orders are impugned in the present application.

22. During investigation, the learned Chief Judicial Magistrate has passed few orders pointing out certain illegalities, rejected prayer to release co-accused under Section 169 Cr.P.C. and has passed some directions also. Orders dated 2.5.2015, 8.5.2015, 21.5.2015, 22.5.2015 and 4.6.2015 being relevant are reproduced hereinafter: The orders are part of counter affidavit.

"02.05.2015 विवेचक / प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली, गाजीपुर श्री प्रकाश दूबे की तरफ से प्रार्थनापत्र इस कथन के साथ प्रस्तुत किया गया कि मु.अ.सं. 423/15 धारा 147, 302, 323, 395, व 504 भा.दं.सं. में अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जीमल व अब्दुल अंसारी जो न्यायिक अभिरक्षा में दिनांक 20.4.15 से जिला कारागार में निरुद्व है। उक्त मुकदमे में धारा 147, 323, 504, 109ए 279 व 304 ए भा.दं.सं. मे तरमीम किया गया है। उपरोक्त आधार पर प्रार्थना की गयी है कि अभियुक्तगण को धारा 147 323, 504, 109, 279, व 304ए. भा०दं०सं० में तलब कर रिमाण्ड बनाया जाय।
विवेचक के उपरोक्त प्रार्थनापत्र पर विवेचक व विद्वान अभियोजन अधिकारी को सुना गया एवं उसकी तरफ से प्रस्तुत की गयी केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, धारा 174 दं०प्र०सं० के तहत की गयी कानूनी जांच की रिपोर्ट तथा राज्य चिकित्सा विधि विशेषज्ञ की आख्या आदि का अवलोकन किया गया।
प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार मृतक राजेश यादव उर्फ अनूप की मां का ईलाज सिंह हास्पीटल में चल रहा था। कि 13.4.15 को रात में करीब 12-01 बजे बोतल का पानी खत्म हो गया तो मृतक डा० राजेश सिंह को बुलाने गया डाक्टर राजेश सिंह व उनकी पत्नी डॉ० अनुपमा सिंह व तीन अन्य ने मृतक के साथ गाली गलौज करते हुये जान से मारने की नियत से उसे मारा पीटा। उसे इतना मारे पीटे कि उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी।
इस घटना की प्रत्यक्ष साक्षी मृतक की बहन बसन्ती देवी व चचेरा भाई संदीप बताये गये हैं। विवेचक द्वारा मुकदमा वादी आनन्दी यादव का कथन अन्तर्गत धारा 161 दं०प्र०सं० अभिलिखित किया गया, जिसके अनुसार पानी का बोतल लगाने की बात को लेकर राजेश यादव उर्फ अनूप को डॉ० राजेश सिंह व उनकी पत्नी अनुपमा सिंह व स्टाफ के लोग मेरे लड़के को गाली गुप्ता देते हुये मारने पीटने लगे। मार पीट की आवाज सुनकर हमारी लड़की बसन्ती देवी व भतीजा संदीप दौड़कर आये तो देखे कि डाक्टर, उनकी पत्नी व उनके तीन स्टाफ सभी मिलकर राजेश यादव को मार पीट रहे थे। उसे इत्तना मारे कि उसकी मौत हो गयी।
विवेचक द्वारा बसन्ती देवी का बयान भी अन्तर्गत धारा 161 दं०प्र०सं० अभिलिखित किया गया, जिसके अनुसार दिनांक 18.4.15 को रात्रि में करीव 01 बजे मां को चढ़ते पानी की बोतल खत्म हो रही थी। हमारे भाई राजेश यादव डाक्टर को बुलाने गये तो डाक्टर व उनके स्टाफ के लोगों से कहासुनी व हाथापायी होने लगी। लड़ाई झगडा का शोर गुल सुनकर मैं कमरे से बाहर गयी तो देखा कि डाक्टर राजेश अपने स्टाफ के लोगों द्वारा हमारे भाई को गाली गुप्ता व मारपीट रहे है। मैं तथा मेरे भाई संदीप नीचे पहुंचे तो स्टाफ के लोग मेरे भाई को नीचे कमरे मे बन्द कर दिये थे तव मैं मेरा चचेरा भाई अपनी मां के पास चले आये। करीब एक डेढ़ बजे राजेश यादव उर्फ अनपू की लाश सड़क के दूसरी पटरी पर पड़ी थी।
विवेचक का केस डायरी के पर्चा संख्या 02 के अनुसार कथन है कि मृतक अस्पताल के सामने टहलने लगा तभी एक ट्रक वाला ट्रक लेकर आया और धक्का मार दिया और मृतक की मृत्यु हो गयी लेकिन विवेचक द्वारा तथाकथित ट्रक / वाहन का कोई रजिस्ट्रेशन नम्बर नहीं बताया गया है और न ही वाहन चालक या वाहन स्वामी का ही नाम बताया गया है। यहां तक कि घटना के दिनांक 18/19.4.15 से लेकर अबतक उनके द्वारा तथाकथित ट्रक या चालक या उसके स्वामी को बरामद / तलाश करने के संबंध में क्या कार्यवाही की गयीं, केस डायरी के पर्चा संख्या 01 से लेकर 08 तक में इस बात का कोई जिक नहीं है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में अभियुक्तगण राम शक्ति प्रजापति, साबिर जमील व अब्दुल अन्सारी जो कि कारागार में निरूद्ध हैं, अस्पताल के कर्मचारी बताये गये हैं. वे वाहन विशेष / ट्रक के स्वामी या चालक नहीं हैं, इसलिये उन पर धारा 304ए भा०द०सं० के तहत विवेचक महोदय किस प्रकार अभियोग को तरमीम करना चाहते हैं, यह सामान्य प्रज्ञावान व्यक्ति के समझ से परे प्रतीत होता है।
विवेचक द्वारा विधि विशेषज्ञ की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, वह रिपोर्ट विचारण के दौरान साक्ष्य के स्तर पर विचारणीय होगी। विवेचक के उपरोक्त तरमीमी की प्रार्थना को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक महोदय अभियुक्तगण को सदोष लाभ पहुँचाने के आशय से अभियोग को धारा 302 भा०दं०सं० से धारा 304ए. भा०दं०सं० में तरमीम कराना चाहते हैं, जिसकी विधि अनुज्ञा नहीं देती है, इसलिये विवेचक का उपरोक्त तरमीमी प्रार्थनापत्र स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है।
तदनुसार तरमीमी प्रार्थनापत्र निरस्त किया जाता है।
इस आदेश की एकप्रति पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को इस आशय से प्रेषित की जाय कि वह प्रस्तुत प्रकरण की विवेचना वर्तमान विवेचक श्री प्रकाश दूबे के अलावा किसी अन्य विवेचक से कराया जाना सुनिश्चित करें, ताकि न्याय की मन्शा पूरी हो सके। अभियुक्तगण को पहले से ही दिनांक 08.5.2015 तक रिमाण्ड स्वीकृत है। अतः अभियुक्तगण दिनांक 08.5.2015 को जेल से पुनः तलब हों।
08.05.2015- विवेचक श्री प्रकाश दूबे की तरफ से प्रार्थनापत्र इस अनुरोध के साथ दिया गया है कि अभियुक्तगण अब्दुल अंसारी, शाबिर जमील व रामशक्ति प्रजापति का रिमाण्ड अन्तर्गत धारा 147, 323, 504, 109, 279 व 304.ए. भा०दं०सं० में परिवर्तित करने की कृपा करें।
प्रार्थना पत्र पर विवेचक एवं विद्वान अभियोजन अधिकारी को सुना गया एवं पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया गया।
पत्रावली के अवलोकन से विदित होता है कि इस न्यायालय द्वारा दिनांक 02.5.15 को विस्तृत आदेश पारित करते हुये अभियुक्तगण का रिमाण्ड अन्तर्गत धारा 147,323,504,109,279, व 304ए भा०दं०सं० में तरमीमी के बावत विवेचक का प्रार्थनापत्र निरस्त किया गया तथा अभियुक्तगण का रिमाण्ड अर्गत धारा 147, 302, 323, 395 व 504 भा०दं०सं० में रखा गया। न्यायालय द्वारा पारित आदेश दि 2.5.15 को किसी भी वरिष्ठ न्यायालय द्वारा निररत या परिवर्तित नहीं किया गया है, साथ ही साथ विवेचक द्वारा भी तथाकथित ट्रक / वाहन को भी बरामद नहीं किया गया है और न ही तथाकथित वाहन के चालक या स्वामी आदि को ही गिरफ्तार किया गया है। न्यायालय के पूर्व में विस्तृत आदेश पारित किये जाने के बावजूद भी विवेेचक द्वारा पुनः प्रार्थना पत्र बिना किन्ही नयें तथ्यों के विस्तृत किया गया है, जो किसी भी प्रकार से उचित या विधिक नहीं है। दिनांक 02.05.2015 को इस न्यायालय द्वारा यह भी आदेश पारित किया गया था कि विवेचक अभियुक्तगण को सदोष लाभ पहुंचाने के आशय से अभियोग को धारा 302 भा०दं०सं० से 304ए, भा०दं०सं० में तरमीम करना चाहते है, जिसकी विधि अनुज्ञा नहीं देती है तथा उक्त आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को भी इस आशय से प्रेषित की गयी थी कि वह प्रस्तुत प्रकरण की विवेचना वर्तमान विवेचक श्री प्रकाश दुबे के अलावा किसी अन्य विवेचक से कराया जाना सुनिश्चित करें, ताकि न्याय की मन्शा पूरी हो सके। बावजूद इसके वर्तमान विवेचक ही इस प्रकरण की विवेचना कर रहे है और उन्ही की तरफ से आज पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया है।
अतः आयुक्त वाराणसी पुलिस महानिदेशक वाराणसी एवं जिलाधिकारी गाजीपुर, को इस आदेश की एक एक प्रति अावश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाय तथा उपरोक्त दोनो आदेश की एक-एक प्रति माननीय जनपद न्यायाधीश-गाजीपुर को सूचनार्थ प्रेषित की जाये तथा पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को इस बावत लिखा जाय कि वह इस न्यायालय द्वारा दिनांक 02.05.2015 को पारित किये गये आदेश की प्रति प्रेषित की गयी थी, उसके संबंध में उनके द्वारा क्या कार्यवाही की गयी है? न्यायालय को आगामी नियत तिथि तक अवगत करावें तथा अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जमील व अब्दुल अंसारी का रिमाण्ड मु०अ०सं० 429/15, धारा 302,323,395,504 व 147 भा०दं०सं० को आगामी तिथि 21.05.15 तक स्वीकार किया जाता है। तद्नुसार विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र दि० 08.05.15 निरस्त किये जाते है।"

21.05.2015 विवेचक श्री प्रकाश दूबे कोतवाली गाजीपुर की तरफ से प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 169 द०प्र०सं०, मु०अ०स० 429/15. धारा 147, 302 323, 395 में 504 भा०द०सं० में अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जमील व अब्दुल अन्सारी, जो जिला कारागार में निरुद्ध है को रिहा करने हेतु प्रस्तुत किया गया है। विवेचक की तरफ से केस डायरी के साथ बयान रिकार्ड करने की सी०डी०/डी०वी०डी० भी प्रस्तुत की गयी है तथा मुकादमा वादी की तरफ से प्रार्थना पत्र मय स्वयं का शपथपत्र एवं बसन्ती देवी व पंचरत्नी देवी का प्रस्तुत किया गया है। अतः केस डायरी में अंकित किये गये बयानों की सी०डी०/डी०वी०डी० को भी देखा जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

अतः विवेचक को निर्देशित किया जाता है कि वह कल दिनांक 22.05.2015 को प्रातः बजे 11.00 बजे उक्त सी०डी०/डी०वी०डी० को प्ले कराकर दिखाया जाना सुनिश्चित करें ताकि विवेचक के प्रार्थना पत्र के सम्बन्ध में विधिनुसार आदेश पारित किया जा सके। अभियुक्तगण उपरोक्त का रिमाण्ड पूर्व की भांति ही कल दिनांक 22.05.2015 तक के लिये स्वीकृत किया जाता है। अतः अभियुक्तगण दिनांक 22.05.2015 को पुनः जेल से तलब हो।

22.05.2015 विवेचक श्री प्रकाश दूबे, कोतवाली गाजीपुर को तरफ से प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 169 दं०प्र०सं०, मु०अ०सं० 429/15. धारा 147, 302 323. 395 व 504 भा०दं०सं० से सम्बन्धित केस डायरी एवं मुकदमा वादी आनन्दी यादव की तरफ से प्रस्तुत किये गये प्रार्थना पत्र दिनांकित 21.05.2015, शपथपत्र, बसन्ती देवी पुत्र आनन्दी सिंह यादव का शपथ पत्र, पंचरत्नी देवी पत्नी श्यामलाल की तरफ से प्रस्तुत किये गये शपथपत्रों एवं विवेचक द्वारा आनन्दी सिंह यादव, बसन्ती देवी, सन्दीप यादव ,चिन्ता देवी एवं गांधी सिंह के लाई डिटेक्टर व नारको इनलाइसिस टेस्ट कराये जाने के बाबत प्रस्तुत किये गये प्रार्थना पत्र व साक्षियों के बयान रिकार्डिंग से संबंधित सी०डी०/ डी०वी०डी० को प्ले कराकर अवलोकन किया गया।

केस डायरी के पर्चा नं० 9ब दिनांकित 16.05.2015 पर मुकदमा वादी आनन्दी सिंह यादव का कथन अंकित किया गया है, जिसमें अंकित है कि मेरी पुत्री बसन्ती ने दिनांक 18/19.04.2015 की रात 3:30 से 4:00 बजे के आस-पास बताया कि डा० राजेश व डा० अनुपमा व उनके स्टाफ द्वारा मेरे लड़के राजेश यादव को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के नाम पर गाली-गलौज देकर, मारपीट कर मार डाले। यह घटना मेरी लड़की बसन्ती व भतीजा सन्दीप के सामने हुई। इसी पर्चे पर घटना की चश्मदीद साक्षी श्रीमती बसन्ती देवी का बयान अंकित किया गया है, कि थोड़ी देर बाद मेरा भाई राजेश यादव उसे बुलाने गया वहां राजेश से गाली-गलौज व मारपीट होने लगी। शोर सुनकर मै बाहर गयी तो डा० राजेश व अनुपमा समेत 9 लोग मेरे भाई को हाथ से मारपीट रहे थे। मेरे मना करने पर मुझे भी मारा व धक्का दे दिया जिससे मैं सीढियों से नीचे गिर गयी व गश खा गयी तब यह लोग राजेश को पकड़कर नीचे वाले कमरे में गये और दरवाजा बन्द कर लिये। मै अपनी मा के कमरे में चली आयी। कुछ देर बाद मै फिर नीचे गयी तो गेट की तरफ से आते हुए स्टाफ ने बताया कि राजेश का एक्सीडेण्ट हो गया मैने देखा तो उसकी लाश बाहर स्ट्रैचर पर पेड़ के नीचे रखी थी।

मुकदमा वादी की तरफ से प्रार्थना पत्र दिनांकित 21.05.2015 प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि मेरे तथा मेरी लड़की बसन्ती देवी बहन पंचरत्नी देवी, सुदामा देवी के शपथपत्र पर विश्वास करते हुए मेरे लड़के राजेश यादव की हत्या से सम्बन्धित मुकदमें में नामित डा० दम्पत्ति व घटना में शामिल सिंह लाइफ केयर हास्पिटल के आधा दर्जन कर्मचारियों की शिनाख्त कराकर दण्डित किया जाये। मुकदमा वादी की तरफ से प्रस्तुत किये गये स्वयं के शपथपत्र, घटना की प्रत्यक्ष साक्षी बसन्ती देवी व पंचरत्नी देवी पत्नी श्यामलाल ने अपने-अपने शपथपत्र में प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटना के बाबत किये गये कंथन का समर्थन किया है। यहा यह उल्लेखनीय है कि यदि साक्षीगण के धारा 161 दं०प्र०सं० के तहत लिये गये बयानों में विरोधाभास आता है तो सही निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये विवेचक को धारा 164 दं०प्र०सं० के तहत आनन्दी सिंह यादव, बसन्ती देवी, सन्दीप यादव, पंचरत्नी देवी आदि के बयान कराने चाहिये थे लेकिन विवेचक के द्वारा धारा 164 दं०प्र०सं० के तहत बयान अभिलिखित नहीं कराये गये हैं और न ही इस हेतु उनके द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करके इस दिशा में काई प्रयास किया गया है, जबकि उनके द्वारा उक्त साक्षागण का लाई डिटेक्टर व नारको टेस्ट कराये जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि विवेचक, विवेचना से सम्बन्धित लाई डिटेक्टर/नारको टेस्ट आदि से सम्बन्धित समस्त कार्यवाही को विधिमुसार कराये जाने हेतु स्वतन्त्र है। अभी विवेचक अपनी उपरोक्त विवेचना के आधार पर कोई अन्तिम निष्कर्ष नहीं निकाल पाये हैं क्योंकि उनके द्वारा साक्षीगण के धारा 161 दं०प्र०सं० के बयानों में विरोधाभास होने के बावजूद धारा 164 दं०प्र०सं० के तहत बयान नाहीं कराये गये हैं। साथ ही साथ अभी उन्हें लाई डिटेक्टर/नारको टेस्ट भी कराना है, इसलिये विवेचक की तरफ से प्रस्तुत किया गया प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 169 दं०प्र०सं० इस स्तर पर अभी पोषणीय नहीं है।

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा शाकिरी बासु बनाम स्टेट आफ यू०पी० व अन्य 2008 (60) ए.सी.सी. पृष्ठ 689(एस०सी०) में यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है कि " Section 156(3) provides for a check by the Magistrate on the police performing its duties under Chapter VII Cr.P.C. in cases where the Magistrate finds that the police has not done its duty of investigating the case at all, or has not done it satisfactorily, he can issue a direction to the police to do the investigation properly, and can monitor the same." if the Magistrate is satisfied that a proper investigation has not been done, or is not done by the police. Section 156(3) Cr.P.C. though briefly worded, in our opinion, is very wide and it will include all such incidental powers as are necessary for ensuring a proper investigation.

यूनियन आफ इण्डिया बनाम प्रकाश पी०हिन्दूजा व अन्य 2003 (47) ए०सी०सी० पृष्ठ 433 (एस०सी०) में माननीय उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि " if the Magistrate on an application under Section 156(3), Cr.P.C. is satisfied that proper investigation has not been done, or is not being done by the Officer-in-Charge of the concerned police station, he can certainly direct the officer in charge of the police station to make a proper investigation and can further monitor the same (though he should not himself investigate)."

इसी प्रकार का अभिमत माननीय उच्चतम न्यायालय ने अभिनन्दन झा बनाम दिनेश मिश्रा ए०आई०आर० 1968 पृष्ठ 117 एवं ललिता कुमार बनाम गवर्नमेण्ट ऑफ यू०पी० 2012 (1) एरा०सी० Cr.R. पृष्ट 575 एस०सी में भी व्यक्त किया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय की उपरोक्त विधिव्यवस्थाओं के आलोक में विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रकरण में दौरान विवेचना प्रस्तुत किया गया प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 169 दं०प्र०सं० स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार निरस्त किया जाता है तथा विवेचक से अपेक्षा की जाती है कि यह माननीय उच्चतम न्यायालय की उपरोक्त विधि व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए विधिनुसार विवेचना करेंगे तथा नियमानुसार धारा 164 दं०प्र०सं० एवं लाईडिटेक्टर / नारको टेस्ट की कार्यवाही अमल में लायेंगे। कारागार में निरुद्ध अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जमील व अब्दुल अन्सारी का रिगाण्ड पूर्ववत दिनांक 04.06.2015 तक जारी रहेगा।

04.06.2015 विवेचक श्री प्रकाश दूबे, थाना कोतवाली, गाजीपुर द्वारा मु०अ०सं० 429/15. धारा 147, 302, 323, 395 व 504 भा०दं०सं० में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है कि अब तक विवेचना से अभियुक्त्तराण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जमील व अब्दुल अंंसारी के विरूद्ध कोई साक्ष्य नहीं पाया गया, विवेचना प्रचलित है। विवेचना में वैज्ञानिक विधि लाई डिटेक्टर व नारको एनाल्सिस टेस्ट आदि कराये जा रहे हैं. साक्ष्य मिलने पर कार्यवाही की जायेगी। प्रार्थना पत्र के साथ मात्र पर्चा नं० 14 दिनांकित 04.06.2015 प्रस्तुत किया गया है। अन्य कोई पर्चा प्रस्तुत नहीं किया गया है, न ही स्वयं विवेचक उपस्थित हुए है। इस प्रकरण में दिनांकित 22.05.2015 को विस्तृत आदेश पारित करते हुए विवेचक द्वारा प्रस्तुत किया गया प्रार्थना पत्र अन्तर्गत 169 दं०प्र०स० निरस्त किया गया तथा अभियुक्तगण उपरोक्त का रिमाण्ड आज दिनांक 04.06.2015 तक स्वीकृत किया गया था। दिनांक 22.05.2015 से अब तक की गयी विवेचना से विवेचक द्वारा न्यायालय को अवगत नहीं कराया गया है।

अतः अभियुक्तगण रामशक्ति प्रजापति, शाबिर जमील व अब्दुल अन्सारी का रिमाण्ड आदेश दिनांकित 22.05.2015 के अनुक्रम में ही दिनांक 17.06.2015 तक स्वीकृत किया जाता है।

23. Submissions on behalf of applicants.

(i) Sri. Ajeet Kumar Singh, learned Advocate for the applicants submitted that a detailed and fair investigation was conducted. Initially by the police and subsequently by a Special Investigation Team. In order to verify statements given by alleged eye witnesses, their Lie Detection Test as well as Narco Test was also conducted. During investigation, a crime scene was also recreated. One of the alleged eye witnesses i.e. nephew of the complainant (Sandeep Yadav) has stated in his statement recorded under Section 161 Cr.P.C. and later on before Special Investigation Team that initially some dispute arose between deceased and attendants of other patients, which was intervened by staff of the hospital. Thereafter deceased was taken outside the hospital and left alone. Thereafter deceased died due to an accident.
(ii) During investigation, staff of the hospital and attendants of different patients have also narrated same version and report of their Lie Detection Test as well as Narco Test also verified their stand in respect of initial commotion and later on of an accidental death. Involvement of applicants (Doctor Couple) was absolutely denied, that they came to place of occurrence after deceased died due to an accident.
(iii) Learned counsel for the applicants further submitted that after a fair and detailed investigation, a final report was submitted. Learned Magistrate has not arrived at a conclusion that on the basis of evidence collected during investigation, there was a prima facie evidence against the present applicants and other accused that they have committed an offence of murder of son of complainant. No reference was made in regard to evidence about role of Doctor Couple. Learned Trial Court has pointed out various lacunas in the investigation as well as in contents of questions asked during lie detection test as well in Narco Test whereas for making an opinion all questions and their respective replies were required to be considered and not a part of it.
(iv) Learned counsel for the applicants also referred expert opinion in regard to ante-mortem injuries suffered by deceased as well as he also referred statement of the Doctors, who have conducted postmortem that it could be a case of an accidental death and not a case of homicide.
(v) Learned counsel for the applicants further submitted that in case learned Magistrate was not satisfied by manner of investigation, instead of taking cognizance and summoning the applicants, other options available that he ought to have either pass a direction for further investigation or to treat the protest petition as a complaint and proceed to conduct an inquiry himself as provided under Sections 200 and 202 Cr.P.C.
(vi) Learned counsel for the applicants further submitted that learned Trial Court has picked few questions and answers of scientific investigation to arrive at a conclusion that it was case of homicide and not of an accidental death. Correct approach ought to be to have considered all questions and their answers. Presence of an eye witness (Smt. Chinta Devi) was disputed only on basis of a reply to question that she was giving water in garden, on ground that it was late night, without appreciating that she was on night duty and garden was inside the hospital as well as other replies could not be ignored specifically in regard to role of applicants (Doctor Couples), that they came down from their residence after death on a phone call of a Doctor.
(vii) The learned Court also submitted that judgments relied by learned Chief Judicial Magistrate are distinguishable on facts and law that in present case a thorough investigation was conducted and a final report was submitted and in order to reject such nature of final report and to take cognizance could be done only after careful appreciation of entire material on record and with a reason as to why outcome of final report was liable to be rejected and on the basis of such material, there were sufficient grounds to proceed.

24. Submissions on behalf of A.G.A. and complainant.

(i) Learned A.G.A. has supported the impugned order that learned Chief Judicial Magistrate has not committed any error to exercise one of the options available in such circumstances. Reason has been assigned in the impugned order, which are legally justified to take cognizance and summon the applicants and other accused by rejecting conclusion of Final Report.
(ii) Learned counsel for the complainant has supported the impugned order and referred orders passed by the Chief Judicial Magistrate that during investigation police has not conducted fair investigation despite orders passed. Investigation conducted by Special Investigation Team was only an eye wash. Questions were not asked properly during scientific tests. There was a repeated attempt to support accused persons. Deceased has suffered as many as 24 injuries and only on ground that injury no.23 was opined to be a crushed injury, it could not be said to be an accidental death, rather nature of other injuries are sufficient to opined that it was a case of homicide. All witnesses even staff of the hospital have stated that a struggle took place between deceased, staff members of the hospital and attendants of other patients. It was not clear that death was caused due to an accident otherwise, dead body of deceased could not be found on a stretcher inside the hospital. Learned counsel referred impugned order that there is no legal error.

25. Now Court proceeds to consider the above referred rival submissions on the basis of records available.

26. In above background, it would be apt to refer few paragraphs of judgments passed by Supreme Court in Rakesh & Anr Vs. State of Uttar Pradesh & Anr (2014) 13 SCC 133, Zunaid Vs. State of U.P. AIR 2023 SC 4550 and Selvi & Ors Vs. State of Karnataka, (2010) 7 SCC 263.

Rakesh (supra) "6. If we are to go back to trace the genesis of the views expressed by this Court in Gopal Vijay Verma [Gopal Vijay Verma v. Bhuneshwar Prasad Sinha, (1982) 3 SCC 510 : 1983 SCC (Cri) 110] , notice must be had of the decision of this Court in H.S. Bains v. State (UT of Chandigarh) [(1980) 4 SCC 631 : 1981 SCC (Cri) 93 : 1980 Cri LJ 1308] wherein it was held that after receipt of the police report under Section 173, the Magistrate has three options: (H.S. Bains case [(1980) 4 SCC 631 : 1981 SCC (Cri) 93 : 1980 Cri LJ 1308] , SCC p. 635, para 6) "6. ... (1) he may decide that there is no sufficient ground for proceeding further and drop action; (2) he may take cognizance of the offence under Section 190(1)(b) on the basis of the police report and issue process; this he may do without being bound in any manner by the conclusion arrived at by the police in their report; (3) he may take cognizance of the offence under Section 190(1)(a) on the basis of the original complaint and proceed to examine upon oath the complainant and his witnesses under Section 200. If he adopts the third alternative, he may hold or direct an inquiry under Section 202 if he thinks fit. Thereafter he may dismiss the complaint or issue process, as the case may be."

The second and third options available to the Magistrate as laid down in H.S. Bains [(1980) 4 SCC 631 : 1981 SCC (Cri) 93 : 1980 Cri LJ 1308] have been referred to and relied upon in subsequent decisions of this Court to approve the action of the Magistrate in accepting the final report and at the same time in proceeding to treat either the police report or the initial complaint as the basis for further action/enquiry in the matter of the allegations levelled therein. Reference in this regard may be made to the decision of this Court in Gangadhar Janardan Mhatre v. State of Maharashtra [(2004) 7 SCC 768 : 2005 SCC (Cri) 404] . The following view may be specifically noted: (SCC pp. 773-74, para 9) "9. ... The Magistrate can ignore the conclusion arrived at by the investigating officer and independently apply his mind to the facts emerging from the investigation and take cognizance of the case, if he thinks fit, exercise his powers under Section 190(1)(b) and direct the issue of process to the accused. The Magistrate is not bound in such a situation to follow the procedure laid down in Sections 200 and 202 of the Code for taking cognizance of a case under Section 190(1)(a) though it is open to him to act under Section 200 or Section 202 also. [See India Carat (P) Ltd. v. State of Karnataka [(1989) 2 SCC 132 : 1989 SCC (Cri) 306] (SCC p. 140, para 16).]"

7. The view expressed by this Court in Gopal Vijay Verma [Gopal Vijay Verma v. Bhuneshwar Prasad Sinha, (1982) 3 SCC 510 : 1983 SCC (Cri) 110] has been followed in Mahesh Chand v. B. Janardhan Reddy [(2003) 1 SCC 734 : 2003 SCC (Cri) 425] and also in a somewhat recent pronouncement in Kishore Kumar Gyanchandani v. G.D. Mehrotra [(2011) 15 SCC 513 : (2012) 4 SCC (Cri) 633] . The clear exposition of law in para 12 of Mahesh Chand [(2003) 1 SCC 734 : 2003 SCC (Cri) 425] which is extracted below would leave no manner of doubt that the answer to the question posed by the High Court is correct.
"12. There cannot be any doubt or dispute that only because the Magistrate has accepted a final report, the same by itself would not stand in his way to take cognizance of the offence on a protest/complaint petition; but the question which is required to be posed and answered would be as to under what circumstances the said power can be exercised."

Zunaid (supra) "11. In view of the above, there remains no shadow of doubt that on the receipt of the police report under Section 173 Cr. P.C., the Magistrate can exercise three options. Firstly, he may decide that there is no sufficient ground for proceeding further and drop action. Secondly, he may take cognizance of the offence under Section 190(1)(b) on the basis of the police report and issue process; and thirdly, he may take cognizance of the offence under Section 190(1)(a) on the basis of the original complaint and proceed to examine upon oath the complainant and his witnesses under Section 200. It may be noted that even in a case where the final report of the police under Section 173 is accepted and the accused persons are discharged, the Magistrate has the power to take cognizance of the offence on a complaint or a Protest Petition on the same or similar allegations even after the acceptance of the final report. As held by this Court in Gopal Vijay Verma v. Bhuneshwar Prasad Sinha2, as followed in B. Chandrika v. Santhosh3, a Magistrate is not debarred from taking cognizance of a complaint merely on the ground that earlier he had declined to take cognizance of the police report. No doubt a Magistrate while exercising his judicial discretion has to apply his mind to the contents of the Protest Petition or the complaint as the case may be."

Selvi (supra) "246. The respondents' position is that the compulsory administration of c the impugned techniques should be permitted at least for investigative purposes, and if the test results lead to the discovery of fresh evidence, then these fruits should be admissible. We have already explained in light of the conjunctive reading of Article 20(3) of the Constitution and Section 27 of the Evidence Act, that if the fact of compulsion is proved, the test results will not be admissible as evidence. However, for the sake of argument, if we were to d agree with the respondents and allow investigators to compel individuals to undergo these tests, it would also affect some of the key components of the "right to fair trial".

(Emphasis supplied)

27. Consideration and Conclusion:

(i) As referred above, after a final report is submitted by the Investigating Officer to a Magistrate, one of the alternatives available with the Magistrate is to take cognizance on the basis of final report and accompanied material submitted by the Investigating Officer, which was adopted in the present case. Consequently, there is no illegality in the process adopted.
(ii) The issue left for consideration is whether on basis of material available with the Final Report, an opinion of the learned Chief Judicial Magistrate, if any, that there is sufficient ground for proceeding is justified or not?
(iii) The Court will also consider, if such material was not sufficient to form an opinion to take cognizance and to summon, the learned Chief Judicial Magistrate ought to have taken recourse of other alternatives i.e. either to pass a direction for further investigation or may treat the protest petition as a Complaint and proceed accordingly in terms of Sections 200 and 202 Cr.P.C.
(iv) On basis of above referred material on record, it is not much under dispute that a detailed investigation was conducted, initially by the police and subsequently by a Special Investigation Team. Scientific Tests i.e Lie Detection Test and Narcon Analysis Test were also conducted and a reasoned opinion was formed that it was not a case of homicide rather, deceased died due to a road accident. Deceased after initial commotion was left outside the hospital by the staff and attendants of patients, where after sometime he rushed to the road and met with an accident.
(v) In case in hand, there is no dispute that a voluntary Lie Detector Test and Narco Analysis was conducted on two witnesses namely (Smt. Chinta Devi and Gandhi Singh), essentially for verifying truth of their respective statements recorded by Investigating Officer and later on by the Special Investigation Team that it was a case of accidental death and not a case of homicide. As held in Selvi (supra), such voluntary tests are permissible during investigation to unearth truth, however, as such it's result would not be admissible in evidence, still it has corroborative value for purpose of filing a Final Report.
(vi) Crux of the arguments of learned counsel for applicants was that material with the final report was not sufficient to reject its outcome and to take cognizance. The Chief Judicial Magistrate has not assigned substantial reasons to reject outcome of final report. Learned Chief Judicial Magistrate has pointed out various lacunas in the investigation, therefore, if he was not satisfied by the investigation, he ought to have adopted other remedies i.e. either to direct further investigation or to treat the protest petition as a complaint and by not adopting such alternatives remedies, impugned order becomes illegal. The evidence collected during detailed investigation has no other outcome, but to file a Final Report. Applicants have no role even in initial commotion and them came down after deceased has died.
(vii) Crux of the arguments of learned counsel for complainant was that since commencement of the investigation, prosecution has not conducted a fair investigation despite various orders were passed by the learned Chief Judicial Magistrate. Investigation was conducted only to make out a case of death by an accident and not to unearth truth, therefore, on basis of statements of witnesses (relatives of deceased) it was a case of homicide, wherein applicants were also involved. Learned Chief Judicial Magistrate has rightly pointed out reasons that investigation was not proper as well as reasons for rejecting outcome of the Final Report.
(viii) I have carefully perused impugned order passed by learned learned Chief Judicial Magistrate, wherein mainly it was observed that:-
(a) Learned Chief Judicial Magistrate took note of observations made in his order passed during investigation that not only an application for amendment in offence from under Section 302 IPC to Section 304-A was rejected but subsequent application under Section 169 Cr.P.C (release of accused when evidence deficient) was also rejected with adverse observations in regard to nature of investigation and conduct of Investigating Officer.
(b) Deceased has received 24 ante-mortem injuries (19 injuries were abrasion, 4 lacerated wounds and one crushed injury). Out of 24 injuries there was only one crushed injury, which could not be possible in a case of accident, rather it indicates manner of occurrence as mentioned in FIR and and statement of complainant and witnesses i.e. relatives of deceased.
(c) Complainant and other relatives of deceased were not gone through lie detection test and narco test on a ground that they remained unavailable for test whereas they have sought a next date that they were unwell.
(d) Presence of Smt. Chinta Devi, (a staff of the hospital) at garden (for watering) at late hours was considered to be doubtful as well as she has stated in reply to question number 20 in Narco Analysis Test that deceased has not received any injury, which could not be possible in a case of accident. No mark of tyre was found on clothes.
(e) Complainant and other relatives were consistent about manner of occurrence as narrated in FIR.
(f) In support of impugned order, the learned Chief Judicial Magistrate has placed reliance on M/s India Carat Pvt. LTD. VS. State Of Karnataka And Another, (1989) 2 Supreme Court Cases; Sri A.C. Aggarwal, Sub- Divisional Magistrate, Delhi And Another VS. Mst. Ram Kali ETC 1967 SCC Online SC 79; Bhushan Kumar And Another Vs. State [NCT Delhi] And Another (2012) 5 SCC 424; Gambhir Singh R. Dekare VS. Falgun Bhai Chimanbhai Patel And Another (2013) 3 SCC 697.
(ix) As referred above, learned Chief Judicial Magistrate has concentrated more on manner of investigation that relevant questions were not asked during Lie Detector Test or Narco Analysis Test. Learned Magistrate has doubted presence of staff of the hospital at garden in late night as well as that only one crushed injury (out of 24 antemortem injuries) could not be sufficient to rule out murder and to make it a case of death by an accident.
(x) The legal position to take cognizance and summoning after a final report, requires reasons either to accept it or reject and to took cognizance and summon or instead to direct for further investigation or treat it as a complainant case. Since in present case, learned Chief Judicial Magistrate while rejecting outcome of the Final Report has taken cognizance on basis of material available alongwith it that there are sufficient material to proceed, therefore, there must be reasons to support, though it may be in brief.
(xi) The Court also takes note of orders passed by learned Chief Judicial Magistrate during investigation that application for amendment of charges from Section 302 I.P.C. to Section 304 I.P.C. was rejected as well as application under Section 169 Cr.P.C. was also rejected, however, since at that stage investigation was still not concluded therefore, there was no error in rejecting an application for amendment of offence and application under Section 169 Cr.P.C. as well as purport of said orders could not be considered to be that entire investigation was not correct nor that entire investigation was an eyewash. In case, investigation was not proper, appropriate direction ought to be passed for further investigation or to consider the protest petition as a complaint case, but same was not adopted.
(xii) I have carefully perused statements of witnesses recorded by the Investigating Officer, later on by the Special Investigation Team as well as questions and their answers in Lie Detector Test and Narco Test and its conclusions. It could be summarised as follows:
(a) Sandeep Yadav, a relative of deceased in his statement recorded under section 161 Cr.P.C has stated that after initial commotion, staff of the hospital accompanied deceased to outside hospital building and after sometime he came to know that deceased has met with an accident. No involvement of doctor couple was disclosed in entire occurrence (para 5 of present judgment). The witness has denied to be an eye witness of occurrence in his statement recorded by SIT. (Para 10 of present judgment).
(b) Gandhi Singh and Arvind Yadav, attendant to different patients have stated in their statements recorded under section 161 CR.P.C which corroborates with above referred statement of Sandeep Yadav. They also stated that it was an accidental death. Gandhi Singh has witnessed accident also. He has specifically denied involvement of doctor couple. (Para 6 of present judgment).
(c). Shrimati Chinta Devi, a worker of the hospital has narrated entire occurrence in her statement recorded under section 161 Cr.P.C that how it commenced and later on deceased met with an accident and died. She has also denied any role of doctor couple in the occurrence and that they were informed about the occurrence after it got over.(Parara 6 of present judgment).
(d). Statements of Smt. Chinta Devi, Gandhi Singh and Arvind Yadav (above referred) were also recorded subsequently by SIT also. (Paras 11 and 12 of present judgement), wherein also they narrated similar version as stated in their respective earlier statements about earlier commotion and later on deceased died due to an accident. Presence and involvement of Doctor Couple was again denied in entire occurrence.
(e). During investigation, the Investigating Officer as well as SIT has recorded statement of other attendants also and they all stated that after initial commotion deceased went outside and met with an accident (para 11 and 12 of present judgment).
(f). Doctors who have conducted postmortem have also not ruled out accidental death in their statements recorded during investigation (para 7 of present judgment) which is also supported by an expert report from Sanyukt Nideshak Rajya Chikitsa Vidhi Visheshagya dated 24.4.2015 that ante-mortem injuries could be received it deceased came in contact with a fast moving vehicle (para 8 of present judgment).
(g) The complainant, (Anandi Singh Yadav) has claimed himself to be an eye witness in FIR as well as in his statement recorded under section 161 Cr.PC (Paras 3 and 5 of present judgment), however in his statement recorded before SIT he has specifically denied to be an eye-witness and that he came to the place of occurrence after death of deceased on an information given by his daughter and stated as informed by her daughter (Basanti Devi) as a hearsay witness. (Para 10 of present judgment).
(h) Dr Zahruddin working at hospital has stated in his statement that he has recorded commotion and accordingly a video audio recording was taken on record and by Forensic Expert a CD was also prepared (Para 11 of present judgment). Said judgment clip was played before a witness Mulayam, (a relative of deceased) who stated that it was a voice of deceased, who repeatedly saying 'Kaun hai Mera' though visuals in video was not very clear (Para 12 of present judgment).
(i) Statements of witnesses also indicate that deceased was violent by his behaviour and was not in his complete sense. Witnesses have stated that his relatives were also requesting to stop him that otherwise he would cause injury to himself, though there is no material in charge-sheet about mental condition of deceased.
(j). Two witnesses (Smt Chinta Devi and Gandhi Singh) have undergone Lie Detection/Polygraphic Test and Narco Analysis Test. (Paras 15 and 16 of present judgment). Both witnesses in their respective Lie Detection/Polygraphic Test Test have specifically stated that they have not seen the Doctor Couple being involved in occurrence as well as both witnesses have witnessed accident also.
(k) Both witnesses have also went through Narco Analysis Test wherein both remain consistent on their earlier statements and replied to specific questions that staff was not involved in commotion. They took deceased at a distance and after sometime deceased went outside and met with an accident. Both have stated that they were eye-witness to accident also. It was also specifically replied that doctor couple was not involved in any manner in entire occurrence.
(l) In aforesaid circumstances only witness who claimed herself as an eye-witness is Basanti Devi (daughter of complainant/sister of deceased). She has not come forward for Lie Detection/Polygraphic Test and for NARCO Analysis Test. Her statement before SIT would be relevant (Para 10 of the judgment). She reiterated that doctor couple and others (in all 9 persons) were assaulting his brother. They confined him in a room. Later on she came to know about death, however, to a specific question whether doctor couple was present, she replied that she did not recognize the Doctor Couple. She also added that they were not present. Relevant question and its answer are mentioned hereinafter:-
"प्रश्न- 9 लोगों में क्या डा० राजेश व डा० अनुपमा सिंह भी थी, तथा किस चीज से मारपीट हो रही थी?
उत्तर- डा० राजेश पति, पत्नी थे, व कुल मिलाकर 9 लोग थे जिसमें 06 लोग मुँह बाँधे हुए थे, फिर बताया कि डा० राजेश व अनुपमा को नही पहचानती हूँ। फिर बताया कि वह दोनों नहीं थे, यह भी बताया कि सब लोग हाँथों से मार रहे थे व गाली दे रहे थे।"

(xiii) It appears to be a case that initially deceased had an altercation with attendant of a patient at Hospital. At relevant time, staff of hospital interfered and asked him to go out and after sometime he was found dead. During investigation, witnesses saw how death occurred, whereas staff of hospital and an attendant of patient has claimed themselves to be an eyewitness that they witnessed entire occurrence that after initial commotion, deceased went outside the hospital, where he died due to an accident with a vehicle. Despite efforts, vehicle was not recovered/identified.

(xiv) Learned Trial Court has pointed out few questions and answers given during Lie Detector Test and Narco Analysis Test to take a view that staff was not present at place of occurrence to witness that it was a case of accident, which was not a correct approach rather entire statement was required to be considered. Only that at late hour at hospital said witness was giving water at garden of hospital, her presence could not be considered to be doubtful. Their statements and answers to various questions asked during investigation including during tests could not be considered to be absolutely false. The Learned Magistrate ought to have considered reports of scientific tests also that they have concluded about truthiness of witnesses.

(xv) To summon is a serious affair and it becomes more serious when summon is issued after rejecting outcome of investigation i.e. a Final Report. The required reasons are missing in impugned order. Entire investigation i.e. by police, by Special Investigation Team along with Scientific Investigation could not be rejected merely for sake of it, rather there must be reasons to reject it however, such reasons are missing in impugned order.

(xvi) In the impugned order, consideration of above referred analysis of statements recorded during investigation and expert reports and scientific investigation is absolutely missing. Summoning order was passed by referring few answers and by commenting on nature of investigation, which is not the required consideration.

(xvii) The Chief Judicial Magistrate has placed reliance on statements of complainant and his daughter however, failed to appreciate that complainant has denied himself to be an eyewitness and his daughter has denied involvement of Doctor Couple in occurrence. She even don't recognize them. On basis of such evidence, summoning order could not legally survive as other material such as evidence of relatives of deceased, staff of hospital, result of scientific test, doctor's statement, expert opinion are sufficient that it was a case of accident and not a case of homicide, such nature of evidence could not be ignored.

(xviii) In A.C Aggarwal (supra) question was to take cognizance on investigation by appropriate persons. In M/s India Carat (supra) legal position as discussed above was approved that "the Magistrate can ignore the conclusion arrived at by the investigating officer and independently apply his mind to the facts emerging from the investigation and take cognizance of the case" i.e. in such case there must be application of mind. In Bhushan Kumar (supra) explicit reasons were not required to mention that cognizance is taken on a charge-sheet, however, same is not applicable when after rejecting a final report, cognizance is taken and summon is issued. Gambhir Singh (supra) was in regard to a complaint case.

28. The outcome of above detailed analysis is that impugned orders are unreasoned for the purpose to take cognizance and to summon, after rejecting outcome of Final Report as well as Revisional Court has also failed to consider it therefore, they are liable to be set-aside.

29. The outcome of above discussion is that there are various legally sustainable evidence that applicants (i.e. a Doctor Couple) was not involved in the entire occurrence as well as it could not be ruled out that deceased died due to an accident, therefore, it is a fit case where inherent power could be invoked and thus impugned orders could not survive qua to the applicants.

30. Now question left to consider whether other accused (Ramshakti Prajapati, Sabbir, Zamil and Abdul Ansari) who are not before this Court, would get benefit of this order or not. I am of opinion that since in this judgment entire investigation is being considered and an opinion is formed, therefore, in the interest of justice and to secure the ends of justice as well said accused are liable to get its benefit. Accordingly, impugned orders dated 9.12.2019 passed by Additional Sessions Judge/Fast Track Court No.1, Ghazipur in Criminal Revision No.193 of 2015 (Dr. Rajesh Singh and others Vs. State of U.P. and another) as well as the order taking cognizance and summoning order dated 26.06.2015 passed by Chief Judicial Magistrate, Ghazipur, in Misc. Criminal Case No. 2257 of 2015 (State Vs. Dr. Rajesh Singh and others) arising out of case crime no.429 of 2015, under Sections 147,323,504,302 I.P.C., Police Station-Kotwali, District Ghazipur as well as entire proceedings arising out of aforesaid case crime number are liable to be quashed and is hereby quashed.

31. The Court is also of considered opinion that by present judgment, the Court could not estop the complainant to pursue the Chief Judicial Magistrate, Ghazipur to choose among the other alternatives as discussed in Rakesh (supra) and Zunaid (supra) and for that the complainant will have liberty to proceed in accordance with law.

32. With aforesaid observation and direction, present application is disposed of.

Order Date :- 20.9.2024 SB (SAURABH SHYAM SHAMSHERY,J)