State Consumer Disputes Redressal Commission
H D F C Bank Ltd vs Manish Kumar Uttam on 19 August, 2015
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2008/1717 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District ) 1. H D F C Bank Ltd a ...........Appellant(s) Versus 1. Manish Kumar Uttam a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER For the Appellant: For the Respondent: ORDER
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक अपील सं0-१७१७/२००८ (जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद सं0-१५१/२००८ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक २०-०६-२००८ के विरूद्ध) एच.डी.एफ.सी. बैंक लिमिटेड, द्वारा स्टेट हैड लीगल, १७/४-ए, निखलेश पैलेस, प्रथम तल, अशोक मार्ग, लखनऊ।
.............अपीलार्थी/विपक्षी सं0-१.
बनाम
१. मनीष कुमार उत्तम पुत्र श्री राम चन्द्र गौतम, निवासी १२७/४४, डब्ल्यू-१, साकेत नगर, निकट दीप टॉकीज, कानपुर नगर। ............. प्रत्यर्थी/परिवादी।
२. एम0 ए0 एसोसिएट्स द्वारा आनन्द मिश्रा, १०९/३८४, राम कृष्ण नगर, कानपुर नगर।
.............प्रत्यर्थी/विपक्षी सं0-२.
समक्ष:-
१- मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य।
२- मा0 श्री राज कमल गुप्ता, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री कृष्ण कुमार राय विद्वान अधिवक्ता के सहयोगी श्री निशांत शुक्ला विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0-१ की ओर से उपस्थित : श्री आलोक सिन्हा विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0-२ की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। दिनांक :- २५-०२-२०१६. मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी , पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद सं0-१५१/२००८ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक २०-०६-२००८ के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने फाइनेंस सेंट्यूरियन बैंक आफ पंजाब, अशोक नगर, लखनऊ से ६,९०,०००/- रू० ऋण प्राप्त करके ट्रक क्रय किया था। ऋण का भुगतान ३५ किश्तों में किया जाना था। ऋण की सम्पूर्ण धनराशि से अधिक धनराशि की अदायगी के बाबजूद उसका ट्रक जबरदस्ती खींच लिया गया तथा बेच दिया गया। अत: जमा की गयी धनराशि को मय ब्याज वापस दिलाये जाने एवं क्षतिपूर्ति -२- दिलाये जाने हेतु परिवाद जिला मंच के समक्ष योजित किया गया। प्रश्नगत निर्णय द्वारा परिवाद स्वीकार करते हुए अपीलार्थी एवं प्रत्यर्थी सं0-२ को निर्देशित किया गया कि वे संयुक्त एवं प्रथक रूप से निर्णय के दिनांक से ३० दिन के अन्दर रू० ५,३५,५००/- वाहन के खींचने की तिथि से १२ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करें व क्षतिपूर्ति में रू० ५०,०००/- भी अदा करें। यह भी आदेशित किया गया कि निर्धारित अवधि में आदेशित धनराशि का भुगतान न करने पर सम्पूर्ण धनराशि पर १८ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज देय होगा। इस निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
हमने अपीलार्थी बैंक की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री कृष्ण कुमार राय के सहयोगी श्री निशांत शुक्ला एवं प्रत्यर्थी/परिवादी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आलोक सिन्हा के तर्क सुने। पत्रावली का अवलोकन किया। प्रत्यर्थी सं0-२ की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
अपीलार्थी का यह कथन है कि मूल प्रत्यर्थी सं0-१ फाइनेंस सेंट्यूरियन बैंक आफ पंजाब अब एच.डी.एफ.सी. बैंक लिमिटेड में समाहित हो गया है। प्रश्नगत निर्णय दिनांकित २०-०६-२००८ को पारित किया गया, जिसके विरूद्ध यह अपील दिनांक ०८-०९-२००८ को योजित की गयी। अपील के प्रस्तुतीकरण में हुए विलम्ब को क्षमा किए जाने हेतु अपीलार्थी की ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के समर्थन में श्री अमित मिश्रा स्टेट हैड (लीगल) यू.पी., एच.डी.एफ.सी. बैंक लि0 का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है। शपथ पत्र में अपील के प्रस्तुतीकरण में हुए विलम्ब का सन्तोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया है। हमारे विचार से जानबूझकर अपील के प्रस्तुतीकरण में विलम्ब नहीं किया गया है। अत: अपील के प्रस्तुतीकरण में हुआ विलम्ब क्षमा किया जाता है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत मामले में अपीलार्थी को जिला मंच द्वारा सुनवाई का अवसर प्रदान न करते हुए प्रश्नगत निर्णय पारित किया गया है। अपीलार्थी पर नोटिस की कोई तामीला नहीं करायी गयी। अपीलार्थी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का कोई अवसर प्रदान न करते हुए परिवाद -३- योजित होने के ०४ माह के अन्दर ही निर्णीत कर दिया गया। अपीलार्थी की ओर से यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत परिवाद में प्रत्यर्थी/परिवादी के कथनानुसार अपीलार्थी द्वारा प्रश्नगत वाहन अपने कब्जे में प्राप्त करके उसे बेच दिया, जबकि वास्तव में न तो प्रश्नगत वाहन अपीलार्थी द्वारा अपने कब्जे में लिया गया और न ही उसे बेचा गया।
प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि नोटिस की तामीला के बाबजूद अपीलार्थी की ओर से कोई उपस्थित न होने के कारण परिवाद का निस्तारण विद्वान जिला मंच द्वारा गुणदोष के आधार पर किया गया। उनके द्वारा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत वाहन के सन्दर्भ में प्रत्यर्थी द्वारा किश्तों का भुगतान एवं अपीलार्थी द्वारा इसा वाहन के कब्जे के सम्बन्ध में साक्ष्य जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत किए गये थे। अपीलार्थी का यह कथन स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है कि प्रश्नगत वाहन उसके द्वारा वापस प्राप्त नहीं किया गया और न ही यह वाहन उसके द्वारा बेचा गया।
प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि अपीलार्थी पर नोटिस की तामीला के सम्बन्ध में मात्र यह उल्लिखित किया गया है कि नोटिस की तामील करायी गयी, किन्तु यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस की तामील किस प्रकार करायी गयी और न ही अधिवक्ता प्रत्यर्थी यह स्पष्ट कर सके कि नोटिस की तामीला अपीलार्थी पर किस प्रकार करायी गयी। परिवाद के अभिकथनों को अस्वीकार करते हुए अपीलार्थी का यह कथन है कि उसके द्वारा प्रश्नगत वाहन वापस प्राप्त नहीं किया गया और न ही यह वाहन उसके द्वारा बेचा गया। अपीलार्थी पर नोटिस की तामील कराये जाने का तथ्य प्रमाणित नहीं हो रहा है।
मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में उचित होगा कि पक्षकारों को जिला मंच के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाय तथा परिवाद का निस्तारण गुणदोष के आधार पर किया जाना सुनिश्चित किया जाय। अत: गुणदोष के आधार पर परिवाद का निस्तारण किए जाने हेतु यह मामला जिला मंच को प्रतिप्रेषित किया जाना न्यायोचित होगा। तद्नुसार जिला मंच का प्रश्नगत निर्णय अपास्त करते हुए -४- अपील स्वीकार किए जाने तथा प्रकरण जिला मंच को प्रतिप्रेषित किए जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत अपील स्वीकार की करते हुए जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद सं0-१५१/२००८ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक २०-०६-२००८ अपास्त किया जाता है और यह मामला सम्बन्धित जिला मंच को प्रतिप्रेषित करते हुए निर्देश दिया जाता है कि जिला मंच प्रश्नगत परिवाद को अपने मूल नम्बर पर पुनर्स्थापित करते हुए एवं उभय पक्ष को साक्ष्य एवं सुनवाई का समुचित अवसर देते हुए परिवाद को विधि अनुसार शीघ्रातिशीघ्र गुणदोष के आधार पर निस्तारित किया जाना सुनिश्चित करें। उभय पक्ष को निर्देशित किया जाता है कि वे दिनांक १२-०४-२०१६ को जिला मंच, कानपुर नगर में उपस्थित होकर अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
उभय पक्ष इस अपील का व्यय-भार अपना-अपना स्वयं वहन करेंगे।
उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्ध करायी जाय।
(उदय शंकर अवस्थी) पीठासीन सदस्य (राज कमल गुप्ता) सदस्य प्रमोद कुमार, वैय0सहा0ग्रेड-१, कोर्ट नं०-५.
[HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta] MEMBER