State Consumer Disputes Redressal Commission
M/S Laxmi Chand vs New India Assurance Co. Ltd. on 13 January, 2015
Daily Order STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2000/2505 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. M/S Laxmi Chand a ...........Appellant(s) Versus 1. New India Assurance Co. Ltd. a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Alok Kumar Bose PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. Smt Balkumari MEMBER For the Appellant: For the Respondent: ORDER
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ।
मौखिक अपील संख्या- 2505 /2000 (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, मुरादाबाद द्वारा परिवाद वाद संख्या-348/1995 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 17-03-1999 के विरूद्ध) M/s Lumxi Chandra Shamboonath, Bajar Gunj, Thakurdwara, Distt. Moradabad, through Proprietor, Sri Sunil Kumar.
अपीलार्थी/परिवादी बनाम Divisional Menager, New India Assurance Co., Court Road, Kaahipur, Distt. Nainital. Manager, State Bank of India, Thakurdwara, Moradabad.
प्रत्यर्थी/विपक्षी 1- अपीलार्थी की ओर से उपस्थित - विद्धान अधिवक्ता श्री अरूण टण्डन 2- प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित - कोई नहीं। समक्ष :- 1- मा0 श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य। 2- मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य। दिनांक : 13-05-2015 मा0 श्री राम चरन चौधरी , पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित:
अपीलार्थी ने यह अपील विद्धान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, मुरादाबाद द्वारा परिवाद वाद संख्या-348/1995 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 17-03-1999 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी है, जिसमें विद्धान जिला मंच द्वारा अलग-अलग निम्न आदेश पारित किया गया है :-
'' जिसमें अध्यक्ष जिला फोरम द्वारा दिनांक 17-03-1999 को परिवाद खारिज किया गया। परिवादी विपक्षी संख्या-1 को आदेश के एक माह के अंदर 200/-रू0 वाद व्यय के रूप में भुगतान करें, तथा सदस्य द्वारा आदेश दिनांकित 15-11-1999 में मा0 अध्यक्ष के मत पर सहमति व्यक्त की गयी तथा तीसरी महिला सदस्य श्रीमती वंदना सहाय द्वारा पारित निर्णय दिनांक 15-11-199 को मा0 अध्यक्ष द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध आदेश पारित किया गया जिसमें मा0 अध्यक्ष द्वारा पारित निर्णय पर असहमति व्यक्त की गयी है और परिवाद खारिज कर दिया गय एवं 200/-रू0 हर्जाना भी समाप्त कर दिया गया, से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
संक्षेप में इस केस के तथ्य इस प्रकार है उसकी विपक्षी संख्या-2 के यहॉं कैश क्रेडिट सीमा 50,000/-रू0 थी और जोखिम के लिए विपक्षी संख्या-2 ने विपक्षी संख्या-1 के यहॉं किराना की दुकान का बीमा कराया और परिवादी के खाते से प्रीमियम का भुगतान कराया। बीमा प्रस्ताव विपक्षी संख्या-1 को विपक्षी संख्या-2 द्वारा भेजा गया। वर्षा के कारण बीमित दुकान में 24,680/-रू0 की क्षति हुई जिसकी सूचना विपक्षी संख्या-1 को विपक्षी संख्या-2 द्वारा दी गयी और क्लेम प्रपत्र तैयार करके विपक्षी संख्या-2 के द्वारा विपक्षी संख्या-1 को भेजा गया। विपक्षी संख्या-1 द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया गया जिसने सर्वे किया और वांछित दस्तावेज प्राप्त किये और परिवादी से कहा कि शीघ्र ही सर्वे रिपोर्ट विपक्षी संख्या-1 को प्रस्तुत कर देगा। परिवादी विपक्षी संख्या-1 व 2 से पूछताछ करता रहा किन्तु कोई सूचना न मिलने पर विपक्षी संख्या-1 को नोटिस दिया, कोई उत्तर नहीं दिया गया। इसलिए परिवाद योजित किया गया।
विपक्षी संख्या-1 ने अपने लिखित कथन में परिवाद पत्र कुछ बातों को स्वीकार किया और कुछ को अस्वीकार किया है और यह कहा कि मुरादाबाद फोरम को परिवाद सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है बल्कि नैनीताल जिला फोरम को परिवाद सुनने का क्षेत्राधिकार है और यह कहा कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे कराया गया और जिसमें मात्र 7199.64 की क्षति होना पाया गया। जिसके संबंध में परिवादी को सूचना दी गयी और परिवादी ने कभी भी स्वीकृत क्लेम भुगतान के संबंध में नहीं दी और न ही औपचारिकताऍं पूर्ण की इसलिए वर्ष 1992 में दावा खण्डित मान लिया गया तथा यह भी कहा गया कि परिवाद कालबाधित है और चलने योगय नहीं है। परिवादी अधिक से अधिक 7199.64 पैसे प्राप्त करनेका अधिकारी है। परिवाद खारिज होने योग्य है।
हमने अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता के तर्क सुने तथा पत्रावली एवं जिला मंच द्वारा पारित निर्णय का अवलोकन किया।
पत्रावली का अवलोकन यह दर्शाता है कि विद्धान जिला मंच द्वारा जो निर्णय एवं आदेश पारित किया गया है उसमें आंशिक संशोधन करते हुए जो 200/-रू0 का हर्जाना लगाया गया है उसे समाप्त किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
आदेश अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जिला मंच मुरादाबाद द्वारा परिवाद वाद संख्या-348/1995 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 17-03-1999 द्वारा जो 200/-रू0 हर्जाना लगाया गया उसे समाप्त किया जाता है। निर्णय के शेष भाग की पुष्टि की जाती है।
( राम चरन चौधरी ) ( बाल कुमारी ) पीठासीन सदस्य सदस्य कोर्ट नं0-5 प्रदीप मिश्रा [HON'BLE MR. Alok Kumar Bose] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. Smt Balkumari] MEMBER