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Lok Sabha Debates

Requests To Bring Two Resolutions To Condemn 1984 Anti-Sikh Riots And To ... on 6 August, 1998

nt> Title: Requests to bring two resolutions to condemn 1984 Anti-Sikh Riots and to celebrate the year 1999 as a Human Rights Day.

प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (पटियाला) : स्पीकर साहब, मैं आपके माध्यम से सरकार से एक अमानवीय घटना की निंदा करने तथा हताहत हुए परिवारों को सहानुभूति देने के लिए एक प्रस्ताव लाये जाने का आग्रह करूंगा और यह भी आग्रह करूंगा कि इस घटना की निंदा की जाए।

MR. SPEAKER: Today being the last day of this Session, I would request the hon. senior Members to kindly accommodate the junior Members. Junior Members can raise their hands, not the senior Members.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: All right, I will call all of you, if all of you are Junior Members.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Jaipal Reddy is not a junior Member.

SHRI S. JAIPAL REDDY I am also a junior Member of this House. Juniority and seniority is a comparative word. ... (Interruptions) You are junior to me and I am junior to Shri Indrajit Gupta. ... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Jaipal Reddy, if the hon. Members say that you are a junior Member, then I will call your name also.

... (Interruptions)

PROF. P.J. KURIEN Mr. Speaker, Sir, you are the most senior Member, everybody is junior to you.

MR. SPEAKER: Personally speaking, I am a very junior Member. प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (पटियाला) : सर, नवम्बर, १९८३ की बात है जब इस देश में एक सम्प्रदाय विशेष का कत्लेआम हुआ। जिसने भी इस अमानवीय घटना को सुना और देखा, हर जिंदादिल तड़पने लगा था और जिस प्रकार से बहू-बेटियों की इज्जत लूटी गई, नन्हें-नन्हें बच्चों और औरतों को गले में टायर डालकर जलाया गया, दिल्ली, कानपुर तथा देश की अन्य सड़कों पर एक सम्प्रदाय का कत्लेआम किया गया। जिन लोगों के हृदय में इंसानियत की आत्मा थी, वे लोग बोले कि यह बहुत ही निन्दनीय घटना है और इसकी जितनी भी निन्दा की जाए, कम है। मुझे इस बात का दुख है कि जो कत्लेआम हुआ था और इंसानियत के साथ दुर्वयवहार हुआ था, उसमें शासन और प्रशासन की शह थी। जब इंसानी आत्मा वाले लोग इस घटना की निन्दा कर रहे थे, उस समय शासन में बैठ हुए कुछ लोग इस घटना का प्रतिकार करने के लिए कह रहे थे। जब बड़ा दरख्त गिरता है तो धरती कांपती है। इस घटना को नि:संदेह १३ वर्ष बीत गये हैं, मगर इसकी टीस, इसकी पीड़ा हमारे हृदय में आज भी है। इसलिए हम चाहते हैं कि इस अमानवीय घटना की निन्दा करने के लिए इस हाउस में प्रस्ताव लाया जाए तथा हताहत परिवारों के साथ सहानुभूति जतलाने के लिए भी प्रस्ताव लाया जाए। जिनके घरवाले नहीं रहे, जिनके पास न खाने के लिए कुछ रहा है और न रहने के लिए मकान रहा है, MR. SPEAKER: No, please. This is Zero Hour. You cannot take more than two minutes.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Prof. Prem Singh Chandumajra, this is not a debate. This is Zero Hour. What is this?

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, please take your seat. प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा स्पीकर साहब, मैं एक मिनट और लूंगा। ऐसे लोगों को कम्पेनसेशन दिलाने के लिए माननीय अदालतों ने यह फैसले दिये हैं कि उनको कम्पेनसेशन के तौर पर तीन-तीन लाख रुपये दिये जाएं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि अब तक उनको कम्पेनसेशन नहीं दिया गया है। मैं समझता हूं कि इस हाउस में एक भी मैम्बर ऐसा नहीं होगा जो इस अमानवीय घटना की निन्दा न करे। इसलिए मेरा आग्रह है कि भारत सरकार की ओर से इस घटना की निन्दा करने का एक प्रस्ताव आये और यहां से कंडोलेन्स मैसेज जाना चाहिए। अध्यक्ष महोदय, आज हिरोशिमा-नागासाकी डे है। हमें १९९९ के साल को हयूमैन राइटस डे, मनुष्य के अधिकार के साल के तौर पर मनाना चाहिए। कयोंकि तीन सौ साल पहले इस देश में खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। जिसके बारे में किसी राइटर ने लिखा है "न कहूं अब की न कहूं तब की, अगर न होते गुरू गोविंद सिह तो सुन्नत होती सबकी"। महोदय, इस देश में तीन सौ साल पहले खालसा पंथ की स्थापना हुई थी, उसका भी दिन मनाया जा रहा है। मैं चाहूंगा कि यह प्रस्ताव भी आना चाहिए कि इस साल को सरकार मनुष्य के अधिकारों के रूप में मनायेगी। अत: मैं आपसे माध्यम से निवेदन करूंगा कि उपरोकत विषयों पर दो प्रस्ताव सरकार की ओर से आने चाहिए। "> "> *m02 "> श्री अजीत जोगी अध्यक्ष महोदय, प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा जी ने जो मामला उठाया है, हम उसका समर्थन करते हैं।"> श्री मनोरंजन भकत (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) : अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा जी ने जिन दो प्रस्तावो का उल्लेख किया है "> "> *m04 "> RAM NAIK : अध्यक्ष महोदय, प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा जी द्वारा प्रस्तुत किए गए दोनों प्रस्ताव बहुत महत्वपूर्ण और अच्छे हैं। इन दोनों के ऊपर सबके साथ विचार-वनिमय करके, आपके नेत्ृात्व में निर्णय हो जाए, तो अच्छा रहेगा। प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा: धन्यवाद सर।