Lok Sabha Debates
Further Discussion Regarding Increasing Atrocities On Women Raised By Shrimati ... on 27 July, 1998
Title: Further discussion regarding increasing atrocities on women raised by Shrimati Geeta Mukherjee on 23rd July, 1998. (Speech Unfinished) 15.57 hrs. MR. SPEAKER: The House shall now take up Item No.13. Dr. Prabha Thakur to continue.
डॉ. प्रभा ठाकुर (अजमेर): अध्यक्ष महोदय, पिछले शुक़वार को महिलाओं पर उत्पीड़न से संबंधित विषय पर चर्चा चल रही थी, परन्तु अन्य गैर सरकारी कार्य व्यवहार होने के कारण मुझे रोक दिया गया था और आज उसी चर्चा को जहां से मैने छोड़ा था, उससे आगे मुझे बोलने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं। महिलाओं के शोषण, उत्पीड़न और अत्याचार के बारे में बात करते हुए आज हम यह सभी जानते हैं कि यह एक बड़े दुख और अफसोस का विषय है कि जितनी शिक्षा बढ़ती जा रही है और वभिन्न क्षेत्रों में विकास होता जा रहा है, कहने को तो देश विकास और प्रगति कर रहा है, लेकिन महिलाओं के ऊपर आज अत्याचार हो रहे हैं, चाहे वे दहेज-हत्या संबंधी हों, चाहे वे बलात्कार संबंधी हो और चाहे यौन शोषण को लेकर हों। इनमें भी उसी गति से, बल्िक उससे भी अधिक २१ प्रतिशत, लगातार प्रतिवर्ष बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके लिए मुझे मोटे रूप से तीन कारण समझ में आते हैं पहला, महिलायें आर्िथक रूप से कमजोर होती है; दूसरा, शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं और तीसरा, रूढ़िवादी संस्कारों से ग्रस्त होती हैं। ये संस्कार उन्हें यह सोचने के लिए मजबूर करते हैं कि उनके पति तो परमेश्वर हैं और परिवार में ही स्त्री को रहना चाहिए। परिवार ही उनका घर है और घर में रहने से उनकी इज्जत है। इस तरह की बातें भी समाज में शोषण के लिए विवश करती हैं। मोटे तौर पर अगर हम स्त्री के शोषण के बारे में बात करें, चिन्ता करें, महसूस करें, तो ये तीन बातें - आर्िथक शोषण, मानसिक शोषण और दैहिक शोषण - समझ में आती हैं। स्त्रियां अधिकांश रूप से आर्िथक रूप से कमजोर होती हैं। संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष महोदय, आज के बीजनेस में आइटम नम्बर १५ में लिखा है -
"Shri Bhubaneswar Kalita, Shri Samar Chowdhary to raise a discussion regarding situation in North-Eastern region due to insurgency." इसे चार बजे लिया जाएगा। मेरी निवेदन है कि इसको परसों तक पोस्टपोन कर दिया जाए, कयोंकि वीमैन एट्रोसिटीज पर कई माननीय सदस्यों ने बोलना है। आज शायद ही माननीय होम मनिस्टर जवाब दे पायें और अभी पांच बजे कैबिनेट की मीटिंग है। मेरी प्रार्थना है कि इसे पांच बजे तक चलायें और उसके बाद कल कन्टीन्यू करें। उसके बाद बीड़ी कर्मकार कल्याण विधेयक पांच बजे ले लें और उसको कन्टीन्यू करा दें। यह मेरा सुझाव है।
16.00 hrs. MR. SPEAKER: Is it the sense of the House that Item No.15 of today's List of Business be deferred till the day after tomorrow?
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
MR. SPEAKER: Item No. 15 of today's List of Business is deferred till the day after tomorrow.
Now, I would request Dr. Prabha Thakur to continue her speech. डॉ. प्रभा ठाकुर : अध्यक्ष महोदय, मोटे तौर पर स्त्रियों के शोषण को हम तीन भागों में रख सकते हैं। जब तक स्त्रियों को आर्िथक रूप से सशकत नहीं बनाया जाएगा, ऐसे कानून नहीं बनाये जायेंगे, ऐसी व्यवस्था नहीं की जाएगी ... (व्यवधान) महोदय, मैं महिलाओं के बारे में कुछ कह रही हूं। जब तक स्त्रियों को आर्िथक रूप से मजबूत नहीं बनाया जाएगा, तब तक समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। वीमैन-लिब की हम देश में बात कहते हैं, इस स्िथति में वीमेन-लिब की कल्पना भी पूरी नहीं हो सकती है। स्त्रियों को आर्िथक आजादी दिलाना सरकार का दायित्व है और इस संसद का दायित्व है। ऐसे नियम, कानून और अधिकार सुनश्िचत किए जाने चाहिए कि महिलायें आर्िथक रूप से सक्षम हो सकें। शिक्षा की दृष्िट से भी महिलाओं को समर्थ किया जाना चाहिए। इसके लिए गांवों तक महिलाओं के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए कि जहां तक लड़की पढ़ना चाहे, उसको वहां तक पढ़ने के अवसर मिल सकें। कोई भी माता-पिता यह साहस नहीं कर पाता है कि गांव से बाहर जाकर दूसरी जगहों पर लड़कियां पढ़ सकें। हमें यह देखना चाहिए कि जो लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं, उन्हें किस प्रकार शिक्षा सुविधा मिले। बजट में भी महिलाओं की शिक्षा के लिए सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, इससे कमजोर, शोषित गांव में रहने वाली लड़कियां वंचित न रहें। लड़कियों को जितनी शिक्षा मिलेगी, उतनी ही वे रूढ़िवादी संस्कारों से बाहर आयेंगी और आर्िथक रूप से आत्म-निर्भर होने की दिशा में उन्हें मार्ग मिलेगा। यह सत्य है कि समाज में लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का ेदिखा रही हैं और लड़कों से आगे बढ़कर ही हैं। हर क्षेत्र में स्त्रियों ने प्रमाणित किया है कि वे पूरी योग्यता के साथ और कार्यकुशलता के साथ कार्य कर रही हैं और सक्षम हैं। उनको अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि वे आर्िथक रूप से सक्षम हो सकें।
16.02hrs. (Shri K. Yerrannaidu in the Chair) गांधी जी ने कहा था कि एक पुरुष यदि शक्षित होता है, तो एक व्यकित शक्षित होता है और यदि एक स्त्री शक्षित होती है, तो एक पूरा परिवार शक्षित होता है। मैं कहना चाहूंगी कि श्रमिक महिलाओं की दुर्दशा है, उन्हें कानून में प्रावधान होने के बावजूद भी पुरुषों के बराबर मजदूरी नहीं मिलती है। उनकी गरीबी और अशिक्षा का नजायज फायदा उठाते हुए उनका शोषण किया जाता है। उनका देह शोषण किया जाता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है कि काम करने के स्थान पर महिलाओं का शोषण न हो। इसके दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन यह कड़वी सच्चाई है कि इन गरीब या श्रमिक महिलाओं को इस दिशा निर्देश का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मैं कहना चाहती हूं कि गांवों की अशक्षित महिलाओं को आर्िथक रूप से मजबूत बनाने के लिए, उन्हें स्वावलम्बी बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाए। उन्हें हाथ के काम सिखाए जायें, ताकि वे हाथ के रोजगार आरम्भ कर सकें और अपनी आजीविका चला सकें। साथ ही जब उनके सामने कोई कठिन परस्िथति आए और अपना जीवन अकेले जीना पड़े, तो वे आर्िथक रूप से लाचार न हों और मजबूर न होना पड़े। आर्िथक रूप से सक्षम करने की बात मैं इसलिए कह रही हूं, कयोंकि स्ृाष्िट में स्त्री और पुरूष जीवन गाड़ी के दो पहियों के समान हैं। इन दोनों पहियों पर ही परिवार की गाड़ी चलती है। यदि इस गाड़ी में एक पहिया पूरी तरह सबल हो, सशकत हो और एक पहिया कमजोर हो, तो गाड़ी कैसे चल सकती है। यदि गाड़ी घसीटते हुए चलेगी, तो काम नहीं चल सकेगा । मैं इस बात को सदन में कहना चाहती हूं कि इस देश में स्त्रियों की आर्िथक स्िथति कमजोर है और दबी हुई है। उसके बारे में एक विचार यह भी होना चाहिए कि जिस तरह सदन में महिलाओं को आरक्षण देने के विषय में विचार हुआ, उसी तरह इस वर्ग को अगर आप ऐसे आरक्षण देते हैं तो चंद महिलाओं को आरक्षण मिलता है। मैं यह सुझाव देना चाहूंगी कि महिलाओं को नौकरियों में भी आरक्षण दिया जाए। नौकरियों में उनका आरक्षण सुनश्िचत करने के लिए विचार किया जाए ताकि देश की लाखों-करोड़ों महिलाएं लाभान्िवत हों और उन्हें आर्िथक रूप से आत्मनिर्भर होने का, अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिले, इस तरह उन्हें एक सहयोग मिल सकेगा। इस प्रश्न पर भी सदन में विचार होना चाहिए कि महिलाएं केवल लोकसभा या राज्यसभा में ही नहीं बल्िक नौकरियों में भी उन्हें आरक्षण दिया जाए। मानसिक रूप से जिस तरह महिलाओं का शोषण होता है, उसकी स्िथति किसी से छिपी हुई नहीं है। महोदय, जय शंकर प्रसाद जी महा कवि हुए हैं। उन्होंने लिखा है- "नारी तुम केवल श्रद्धा हो," लेकिन आज हम स्त्री को केवल ग्लोरीफाई करके, महिमा मंडित करके, उसे देवी शकित कह कर बहला-फुसला नहीं सकते। हकीकत यह है कि जो स्त्री आज समाज में परित्यकता है, विधवा है, नि:संतान है, कमजोर है या उपेक्षित है, उसकी समाज में कया स्िथति है वह किसी से छिपी नहीं है। उन्हें सीमित राशि में ग्ृाहस्थी का बोझ ढोना है, अपनी संतान को पाल-पोस कर बड़ा करना है, सारे परिवार का उत्तरदायित्व निभाना है, घर में आने वाले सभी लोगों का मान-सम्मान रखना है। वह सुबह से शाम तक काम करती है, बल्िक कई जगह महिलाएं दोहरा उत्तरदायित्व निभा रही हैं।
16.08 hrs. (Shri Raghuvansh Prasad Singh in the Chair) गांवों में भी स्त्रियां पुरूषों के बराबर कंधे से कंधा मिला कर कृषि के क्षेत्र में काम करके बराबर योगदान दे रही हैं। शहरों में अनेक स्त्रियां नौकरी करके कमा कर लाती हैं और घर परिवार का दायित्व भी संभाल रही हैं। इन तमाम स्िथतियों के वाबजूद उनकी वास्तविक स्िथति यह है कि उसे कई तरह से दबाया जाता है। आज भी गांवों में ये शोषित होती हैं। कमजोर वर्ग की स्त्रियों को निर्वस्त्र घुमाए जाने के हादसे हमारे सामने आते रहते हैं। जिस तरह यह विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर हमारे सामने आया है, इसने केवल इस देश की महिलाओं को मानसिक उत्पीड़न ही दिया है, कयोंकि जिस तरह इस पर चर्चा हुई और सत्ता पक्ष में बैठे लोगों ने विपक्ष के ऊपर इसकी जिम्मेदारी डाल कर अपने हाथ धो लिये, जैसे इनका दायित्व पूरा हो गया और अब विपक्ष का दायित्व है कि वह महिला विधेयक सर्वसम्मति से पारित कराए या उसे पेश कराए। इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि सत्ता पक्ष की इसके पीछे इच्छाशकित नहीं है, कयोंकि अगर इच्छाशकित होती तो ऐसी कोई वजह नहीं थी कि यहबिल यहां पेश न होता। हमारे कांग्रेस नेता, माननीय राजीव गांधी जी की इच्छाशकित थी, इसलिए नगर परिषदों और पंचायतों से संबंधित बिल लागू भी हो गया।
... (व्यवधान) सभापति महोदय : आप बैठ जाइए, जब आपको मौका मिलेगा तब आप बोलिएगा। डॉ. प्रभा ठाकुर : मैं आपको बताना चाहती हूं कि यह जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की होती है, सरकार में बैठे लोगों की होती है। वह जिम्मेदारी दूसरों पर डाल कर उससे मुंह मोड़ लेना, इसका मतलब है कि उसके पीछे कोई गंभीरता नहीं है। मैं महिलाओं से कह रही हूं, मैं उन्हीं की बात कर रही हूं। मैंने विधेयक को देखा, पूरे देश ने देखा और प्रेस ने भी देखा कि ऊधर से महिलाएं समर्थन दे रही हैं।
... (व्यवधान) मैं निवेदन करना चाहती हूं कि यदि सरकार की इसके लिए गंभीर इच्छाशकित और नीयत है तो जो सदन की और जनता की भावना है उसके अनुरूप कमजोर वगर्ों को भी उसमें उचित प्रतनधित्व दिया जाए। सोनिया गांधी जी की जो चिन्ता है, उसके अनुरूप महिलाओं की और सदन की भावना को ध्यान में रखते हुए महिला विधेयक को भी इस आश्वासन के साथ लाएं, हम उसे समर्थन देने के लिए तैयार हैं।
... (व्यवधान) मैं यह कहती हूं क ... (व्यवधान) मान्यवर, मैं महिलाओं के मानसिक उत्पीड़न के सवाल पर ही बात कर रही हूं। उसमें मैं सदन का पूरा सहयोग चाहती हूं।
... (व्यवधान) श्रीमती भावना कर्दम दवे (सुरेन्द्रनगर): सभापति जी, पचास साल तक कांग्रेस ने महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए हम यह बिल लाए हैं। डॉ. प्रभा ठाकुर : मैं स्त्रियों के मानसिक उत्पीड़न के संबंध में बात कर रही थी।
... (व्यवधान) महिलाएं सब समझती हैं, वे अब अनजान नहीं हैं। मैं महिलाओं के दैहिक शोषण की बात कर रही थी। चाहे राजस्थान हो या कोई और प्रदेश, हमारे लिए यह दुर्भाग्य और चिंता की बात है कि राजस्थान जिसे वीर भूमि कहा जाता है वहां भाजपा के ९ वर्ष के शासन में जिस तरह से महिलाओं के शोषण में, अनाचार में, उत्पीड़न में, बलात्कार में, दहेज हत्या में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है वह हमारे लिए शर्म का विषय है।
... (व्यवधान) इसमें चाहे राजस्थान हो, दिल्ली हो, उत्तर प्रदेशहो, बिहार हो, हिमाचल हो ... (व्यवधान) मैं केलव समस्या ही नहीं रख रही हूं, साथ में कुछ समाधान भी बताना चाहती हूं। श्रीमती भावना कर्दम दवे : राजस्थान में तो सी.बी.आई, की इंकवारी की डिमांड की गयी है, मध्य प्रदेश में तो कुछ नहीं किया है। आप किसी एक क्षेत्र के बारे में मत कहिये, राजनीति को बीच में मत लाइये, महिलाओं की ही बात कीजिए। डॉ. प्रभा ठाकुर : मैं महिलाओं की ही बात कर रही हूं। चाहे राजस्थान का भंवरी देवी कांड हो, जे.सी.बोस कांड हो या नीलू राणा कांड रहा हो जिसमें बलात्कार के बाद हत्या की गयी। उसमें पुलिस के अधिकारियों का कया रवैया रहा है? जो जांच अधिकारी है है वह कहता है कि वह लड़की ही चरित्रहीन थी, वह लड़की रात को घर से बाहर कयों निकली? यह तो वहां के जांच अधिकारी की बात है। मैं इस सदन में कहना चाहती हूं और ग्ृाह मंत्री जी की उपस्िथति में कहना चाहती हूं कि कया कार्ण है कि ऐसे हादसे समाप्त होने के बजाए, कम होने के बजाए बढ़ते ही जा रहे हैं। कारण साफ है कि ऐसे तमाम हादसों में, मैं राजस्थान की बात कर रही हूं, इनमें बी.जे.पी. राजनेताओं के रिश्तेदार, कहीं विधायक ... (व्यवधान) यह मैं नहीं कह रही हूं, सभापति जी, यह सच्चाई है।
... (व्यवधान) श्रीमती भावना कर्दम दवे : आप राजनीति मत करिये, आप ऐसी बातों में पड़ेंगे तो ... (व्यवधान) सभापति महोदय : आप शांत रहिये। डॉ. प्रभा ठाकुर : मीडिया ऐसे तमाम घटनाओं को समाज के सामने लाया है। मैं पूछना चाहती हूं कि इन तमाम घटनाओं की पुनराव्ृात्ित कयों हो रही है? यह इसलिए हो रही है कयोंकि जांच अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता है, उनसे जवाब-तलब नहीं किया जाता है बल्िक उन्हें और तरककी दे दी जाती है। आप आंकड़े मंगवाकर देख लीजिए। चाहे राजस्थान हो, दिल्ली हो, उत्तर प्रदेश हो या और कोई राज्य हो कि कितने प्रतिशत दोषियों को सजा हुई है। पांच-दस प्रतिशत दोषियों को भी सजा नहीं होती है। इसीलिए अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और उन्हें लगता है कि हम तो धन-बल से, सत्ता-बल से और राजबल से छूट जाएंगे तथा मिलीभगत से मुकत हो जाएंगे। इसीलिए उनका हौसला बढ़ता है और ऐसी स्िथतियां पैदा हो जाती हैं। पुलिस वालों और अधिकारियों से जवाब-तलब के बजाए उन्हें पुरूस्कृत किया जाता है, लाभदायक पदों पर पद-स्थापित किया जाता है। मैं यह कहना चाहती हूं कि महिलाओं के अपमान का, दैहिक शोषण का मामला चाहे कहीं भी हो, वह किसी एक प्रदेश का मामला नहीं होता।वह पूरे देश का मामला है, पूरी स्त्री जाति के सम्मान का मामला है। उसे इस दृष्िट से देखा जाये। सभापति महोदय, अंत में इतना ही कहूंगी कि स्त्री जाति को मजबूत करने के लिये और उनको पूरा संरक्षण देने के लिये केवल सदन में अपनी बात कहकर अपना दायित्व पूरा न कर लें, संविधान में संशोधन करके, विधेयक या कानून बनाकर हम अपनी जिम्मदारी से मुकत न हो जायें बल्िक यह देखें कि पीड़ित महिलाओं को कानून से न्याय मिल रहा है या नहीं? जब तक महिलाओं को कानून का लाभ नहीं मिलेगा, संरक्षण नहीं मिलेगा और जब कहा जाता है कि कानून में सुई के बराबर छेद हो तो हाथी निकल जाता है, इस छेद को बंद करने के लिये आप कया कर रहे हैं ताकि ये गुनाह के हाथी न निकलने पाये ,इसके लिये कया कार्यवाही करेंगे। नारी देवी नहीं, केवल शकित नहीं, वह अर्दधांगिनी है, उसे आधा अधिकार मिलना चाहिये। हम इस देश की ५० प्रतिशत आबादी हैं, हमें आधा अधिकार मिलना चाहिये, पति की आधी सम्पत्ित का हिस्सा मिलना चाहिये। हमें आधी हिस्सेदारी चाहिये और नौकरियों में आरक्षण मिले तथा शिक्षा में उन्नति मिले, यही हमारी मांग है। धन्यवाद।
"> कुमारी ममता बनर्जी (कलकत्ता दक्षिण) : सभापति महोदय, इस सदन में नियम १९३ के अधीन महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित चर्चा आई है, मैं उसका समर्थन करती हूं। यह बात सच है कि महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित चर्चा इस सदन में पहली बार नहीं आई, इसके पहले भी चर्चा हर साल होती आई है। हम लोग चर्चा इसलिये करते हैं कि उस पर कुछ कार्यवाही हो लेकिन तकदीर में जो है, वही होता है। इसके पहले दो बड़े लीडर्स ने भाषण दिये हैं जो राजनीति से ऊपर उठकर थे। मै भी चाहती हूं कि इसमें राजनीति को शामिल नहीं करना चाहिये। यह दुख की बात है कि जब देश में चुनाव होते हैं तो बड़ी बड़ी पार्िटयां महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण दिये जाने का वायदा करती हैं और वोट मांगती हैं लेकिन यहां आने पर वे महिला बिल को इंट्रोडयूस नहीं होने देते।
This is an unfortunate thing. मुझे इस हाउस में २-४ दिन देखने का मौका मिला है।
Only the women Members have supported this Bill. Though I am not a feminist..(Interruptions)Let me talk please. There are only a few Members श्री सुरेन्द्र सिंह (भिवानी): हमने तो बहुत सपोर्ट किया था। कुमारी ममता बनर्जी : इसलिये बिल इंट्रोडयूस नहीं होने दिया। अगर बिल इट्रोडयूस होने से पहले इसका यह फेट है तो बाद में कया होगा। यदि आप बिल पास नहीं होने देना चाहते हैं तो इसको डस्टबिन में फैंक दिया।
Women's Reservation Bill is a commitment made in our manifestoes. आप बिल में ३३ प्रतिशत रिज़र्वेशन कैसे देंगे? आप पब्िलक को भड़काते हैं और आम जनता से झूठा वायदा करके वोट लेते हैं।
It is an unparliamentary word. I should not say this. I withdraw this word. I should not have misled the people. जनता को भड़काते हैं कि वोट दो और यहां पर आपने वुमैन्स बिल इंट्रोडयूस नहीं होने दिया। यह सच है कि बी.जे.पी. की वुमैन एम.पीज़ ने मुझ सपोर्ट किया, महिला बिल को लाया गया लेकिन दुख की बात है क This was an understanding between the BJP and the Congress Party that this Bill will be passed. The Left would not support this fully. After that, your Chief Minister said that he was in favour of providing reservation to OBCs [also. He also said that. I should not mislead the House.
Secondly, between the Congress Party and the BJP there was an understanding that they would support this Bill. After that what happened? Those people ditched us; they ditched the women of the country. I would like to know, why. Everybody laughed. (Interruptions) डा. प्रभा ठाकुर (अजमेर) : हम इसका प्रतिवाद करते हैं। यह बिल्कुल गलत बात कही जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को सपोर्ट किया था।
KUMARI MAMATA BANERJEE : It was not introduced. We wanted that the Bill should be introduced. But we are sorry that it was not introduced. कया यह बिल हाउस में इस तरह से पेश नहीं हो सकता है?
In a democracy if there is an understanding you want a consensus in some matters like this Women's Reservation Bill. We are happy to see that the BJP and the Congress are together along with the Left Front also and the AIADMK and the TDP, all other allies. Everybody said, `Let it be introduced'. लेकिन कया हुआ? बाद में सात-आठ दिन जाने के बाद बार-बार निर्णय बदले गए और इस बिल को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया। इस बिल में जहां तक पिछड़ी जातियों और माइनॉरिटीज़ को शामिल करने की बात है, मैं उससे सहमत हूं, लेकिन अगर इसमें आप ओबीसी और माइनॉरिटीज़ को इनकलूड भी कर दें तो भी विपक्ष के लोग इसको नहीं मानेंगे। इसलिए मैं एक बात कहती हूं कि मैं तो जनरल साइड से हूं। ...
I am not a feminist. (Interruptions)
Madam, you have spoken. डा. प्रभा ठाकुर (अजमेर) : हम आपकी बात से सहमत हैं।
... (व्यवधान) सभापति महोदय : बीच में मत बोलिये।
KUMARI MAMATA BANERJEE : We supported it; we fully supported it.
SHRI P.C. CHACKO (IDUKKI): If you are sincere why do you not dictate to the Government? (Interruptions) डा.प्रभा ठाकुर : हम आपके साथ हैं। हम भी सपोर्ट करते हैं।
... (व्यवधान)
KUMARI MAMATA BANERJEE: Mr. Chairman, we have seen the atrocities. I do not support their view sometimes. But this time we fully support them. But this time we supported this Mahila Bill. This is a parliamentary democracy. Between the Congress Party and the BJP there is an understanding. If I am wrong the Home Minister should clarify. They said that they are agreeable, that the Bill as it was should be introduced. अगर उसमें अमेंडमेंट लाने हैं तो वह डिसकशन के बाद हो सकता है, लेकिन एक देश के लिए यह आश्चर्य की बात है कि ५० साल की आज़ादी के बाद भी महिलाओं की यह हालत है। मैं फॆमनिस्ट नहीं हूं और सभी लोगों की तरककी की बात करती हूं, लेकिन हमने देखा है कि महिलाएं अच्छा काम कर सकती हैं। पंचायत और म्यूनसिपैलिटीज़ में महिलाओं के लिए ३३ प्रतिशत रिज़र्वेशन हुआ है जिसमें महिलाएं अच्छा काम कर रही हैं। यह बात सच है कि महिलाएं ही महिलाओं से ईर्षया करती हैं लेकिन कोई महिला यह नहीं चाहेगी कि महिलाएं आगे न बढ़ें। यह भी इसमें कुछ दिककत है।
... (व्यवधान) श्रीमती उषा मीणा (सवाई माधोपुर) : आप ये कैसे कह रही हैं कि महिलाएं ही महिलाओं को नहीं चाहती हैं?
... (व्यवधान)
KUMARI MAMATA BANERJEE : This is our fundamental right. Do not disturb me like this. I am speaking from my heart. Let me speak. Then I will tell you.
SHRI P.C. CHACKO : This is Parliament. If you are yielding you say so. Otherwise, you speak.
KUMARI MAMATA BANERJEE : I know. I have listened to her carefully.
KUMARI MAMATA BANERJEE : I did not interrupt her.
SHRI P.C. CHACKO : You are also a party to ditch this Bill. Please understand that. Why do you get angry?
KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, it is good that they are unhappy.... (Interruptions) सभापति महोदय : श्री चाको, बैठे-बैठे मत बोलिये। यह ठीक नहीं है। कुमारी ममता बनर्जी : जब हम लोग मीटिंग करने के लिए बैठे तो कहते हैं क both of them have not agreed and that is why this Bill could not be introduced. बंग्लादेश में भी ३० प्रतिशत सीटें रिज़र्व हैं। कुछ अफ्रीकन देशों में तथा कुछ अन्य देशों में भी है।
... (व्यवधान) अट्रॉसिटीज़ के बारे में बाद में आएगा। आपको सुनना चाहिए।
... (व्यवधान) श्रीमती भावना कर्दम दवे : यह भी तो अत्याचार है कि यहां महिलाओं से संबंधित बिल पर महिलाओं का इतना अपमान हुआ और आप लोग ध्ृातराष्ट्र की तरह देखते रहे। ... (व्यवधान) कुमारी ममता बनर्जी : महिला बिल को लाने के लिए संसद में इतना हंगामा हुआ जिससे देश में यह संदेश गया कि ये लोग महिला बिल को नहीं लाना चाहते। मैं एक घटना बताती हूं। यह बात सच है कि अगर हमने इस बिल में ओबीसी और माइनॉरिटीज़ को भी शामिल कर लिया होता, तो भी ये लोग बिल नहीं लाने देंगे। मैं एक जगह बैठकर बात कर रही थी। एक एकस-एम.पी. ने मुझे कहा कि महिला बिला लाने से हमारे घर में आग लग जाएगी। हमारी बहू, बेटी और बीवी में से किसको हम टिकट देंगे? हमने कहा कि कया आप घर से बाहर की किसी महिला को टिकट नहीं दे सकते? कया ऐसे लोग बिल लाने देंगे? लेकिन कुछ मामलों में हममें सहमति होनी चाहिए जिससे हमारे देश के लोगों में एक संदेश जाए। अगर महिला बिल का इस सत्र में एक बार इंट्रोडकशन नहीं हुआ तो बिल को इंट्रोडयूस करना सरकार की भी ज़िम्मेदारी है।
Let it be defeated. What is wrong in that? Let this Bill be introduced in the Parliament and then everybody will be exposed as to who is going to support and who is not going to support. Sir, they are talking about atrocities and they cannot introduce the Bill. So, I ask the Government that the Bill should be introduced in this Session itself, in this Golden Jubilee year, before the 50th year of Independence is completed.
AN HON. MEMBER: Otherwise you withdraw your support from the Government.
KUMARI MAMATA BANERJEE : We will not withdraw our support because our support is a firm support. We are not going to ditch the people. We are here because we have got the people's mandate. आम जनता ने जो मैनडेट दिया है, उसके आधार पर हम सरकार में हैं। इसलिए पीपल्स मैनडेट के साथ अन्याय करना हमें नहीं आता है और न हम करेंगे। इसलिए हम सरकार को सपोर्ट करते रहेंगे लेकिन सरकार को वायदा करना चाहिए कि यह बिल सरकार जल्दी से जल्दी लाएगी। आज महिलाओं पर अत्याचार होते हैं यह सच है। हमारे देश में बहुत से कानून हैं लेकिन उनका ठीक से पालन नहीं हो रहा है। हमारे देश में अधिकतर कानून १५० वर्ष पुराने हैं। अगर हम उनको नहीं बदलेंगे, अगर उन कानूनों में संशोधन नहीं करेंगे तो न्याय मिलने में देर होगी और Justice delayed means justice denied. There are so many laws in our country. मैं भी ग्ृाह संबंधी स्थायी समति की सदस्य थी जिसमें हमने क़मिनल प्रोसीजर कोड में संशोधन करने का काम किया था। महिला पर जो अत्याचार होता है उसमें सी.आर.पी.सी. अमेंडमेंट बिल के अनुसार कंविकशन ठीक से नहीं होता है, इम्प्रिजनमेंट ठीक से नहीं होता है। रेप केस के बाद according to medical science, they have to be tested within 72 hours. लेकिन ऐसा नहीं होता है, जिसकी वजह से कोई सबूत नहीं मिल पाता है। चूंकि वे डरती हैं और ऐसा करने वालों को कोई न कोई पोलिटीकल पार्टीज शैल्टर देती हैं। मैं सभी पोलिटीकल पार्टीज से कहती हूं कि ऐसे लोगों को शरण मत दीजिए, जो रेप केस से जुड़े हुए हैं, जो महिलाओं पर अत्याचार करते हैं, बच्चों पर अत्याचार करते हैं, पोलिटीकल पार्टीज को उनकी मदद नहीं देनी चाहिए। सरकार को सी.आर.पी.सी. से संबंधित एक कानून सदन में पास करना चाहिए। सी.आर.पी.सी. अमेंडमेंट बिल में एक-एक कानून की हमें जांच-पड़ताल करके हम लोगों ने अमेंडमेंट किया था, कयोंकि अगर किसी रेप केस के ७२ घंटे के बाद मैडिकल टैस्ट होता है तो उसका कोई सबूत नहीं रहेगा। हमारे देश में कया होता है। हमारे राज्य में एक महिला पर अत्याचार हुआ था, उसका नाम चंपोला सरदार है, वह एक आदिवासी महिला है। लेकिन २२ रोज के बाद अगर मैडिकल टैस्ट होता है भले सबूत को फ्रीज में रख दें, लेकिन अगर ७२ घंटे लोड शैडिंग में वह फ्रीज रहेगा तो उसमें आटोमैटिकली फंगस पड़ जायेगी और उससे कुछ भी सबूत नहीं मिलेगा। हमारे देश में कानून है, उसका इस्तेमाल करने के लिए स्टेट मशीनरी है, लोकल मशीनरी है, अगर वह मशीनरी राजनीति से जुड़ी हुई है तो वह मशीनरी कभी भी महिला को न्याय नहीं दे सकती है। ....( Interruptions) It may be Central Government machinery. It may be State Government machinery. ....(Interruptions) They do not know medical science. After 72 hours, there is no value of evidence. इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि वीमेन पर अत्याचार होने के बाद एवीडेंस ठीक से हुआ है या नहीं, यह देखना जरूरी है। जब महिला पर अत्याचार होता है तो उसकी मर्यादा छिन्न-भिन्न होती है। उसके बाद पब्िलकली कहते हैं कि यह झूठी कहानी है। सभापति महोदय : आप कंकलूड कीजिए। कुमारी ममता बनर्जी :सर, मुझे तीन-चार मिनट ही दिये हैं, बाकी समय तो उन लोगों ने ले लिया।
... (व्यवधान) कया आप चाहते हैं कि मैं न बोलूं। सभापति महोदय : सबके बोलने का समय निर्धारित है, आपको १५ मिनट से अधिक होने जा रहे हैं। कुमारी ममता बनर्जी : १५ मिनट में से १० मिनट तो अपोजीशन वालों ने ले लिये। उनका समय काटकर मुझे दे दीजिए।
... (व्यवधान) मैं होम मनिस्टर साहब से विनती करना चाहती हूं कि हमारे यहां चंपोला सरदार नाम की एक महिला को पहले रेप किया गया, उसको बेइज्जत किया गया, लेकिन बोलते हैं कि कुछ नहीं हुआ है, सब झूठा है। लेकिन उसका मैडिकल टैस्ट २२ दिन के बाद हुआ। मैं इसके बारे में सी.बी.आई. जांच की मांग करती हूं। एक शबीरन बेगम का केस हुआ है। हम लोग महिला रिजर्वेशन चाहते हैं लेकिन म्युनसिपेलिटी में पंचायत में महिला रिजर्वेशन मिला है, उस महिला को नेकिड करके परेड कराई गई फिर महिला रिजर्वेशन की कया इज्जत रह गई। शबीरन बेगम के केस के बारे में बताना चाहती हूं कि वह एकस पार्टी हुआ था। पंचायत चुनाव में वह टी.एम.सी. की कैंन्डीडेट थी, उसकी नेकिड करके परेड कराई गई थी। शमदाद बेगम, दामजुर, हावड़ा, उसके बाल काटकर नंगा करके घुमाया गया था, मैं उसकी भी सी.बी.आई. द्वारा जांच करने की मांग करती हूं। सबीलन बेगम, विष्णुपुर पुलिस स्टेशन, साउथ २४, परगना डिस्टि्रकट, उसका रेप करके मर्डर किया गया था।
... (व्यवधान)
SHRI AJAY CHAKRABORTY (BASIRHAT): She is making a totally wrong and untrue statement.
KUMARI MAMATA BANERJEE : If this is not correct, I am ready to tender my resignation and if this is correct, are they ready to resign? सभापति महोदय, जो सबीलन बेगम है।
She has been raped. She has been murdered. मैं इसकी भी सी.बी.आई. द्वारा जांच की मांग करती हूं। इसके साथ ही यह भी कहना चाहती हूं कि चाहे राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र या कोई भी राज्य हो, हम लोग चाहते हैं कि जो निम्न वर्ग के लोग है, जो वीकर सैकशंस हैं, ऐसा कानून बने कि उनकी कोई बेइज्जती न कर सके, महिलाएं इज्जत के साथ रहें, इज्जत के साथ लड़ सकें। वीमेन एट्रोसिटीज के बारे में मैं भी कहना चाहती हूं कि महिलाओं के साथ जो रेप होते हैं तथा जो रेप करता है, वह महिलाओं को डराता है। इसलिए ऐसे केसिज की ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्टस होनी चाहिए। सभापति महोदय, बहुत सारी महिलाएं हैं जो खुली अदालत में गवाही नहीं देना चाहती हैं। इसलिए मेरा एक सुझाव है कि ऐसे केसेस के लिए स्पेशल कोर्ट बनने चाहिए और उनमें इन-कैमरा केसेस की सुनवाई हो, तभी महिलाएं अपने साथ हुई ज्यादती का सुबूत दे सकती हैं। आज महिलाओं का इंटैरोगेशन होता है, क़ास एग्जामिनेशन होता है और ईवटीजिंग होता है। महोदय, हमारे देश में बहुत सारे बेरोजगार नौजवान हैं। हर नौजवान खराब नहीं होता है, लेकिन जो समाज के बड़े-बड़े दादा हैं, वे समाज के नौजवानों को भड़काते हैं। आज देश में बेरोजगारी की समस्या, ड़ग एडिकशन की समस्या बहुत बढ़ रही है और इसमें बेरोजगार नौजवान भी फंसते जा रहे हैं। आज हमारे देश में बेरोजगारी कैंसर के माफिक बढ़ती जा रही है। इनके ऊपर काबू पाने के लिए सोश्यल जस्िटस का कार्य प्रायर्टी पर करना चाहिए और यूथ एकटीविटीज बढ़नी चाहिए तब कहीं ईवटीजिंग की घटनाओं में कमी आएगी और महिलाओं को इससे राहत मिलेगी।
So the atrocities on women are nothing new. It has been there in the past and it is still continuing now. What has happened to the fate of women's Bill. Most of the political parties have been promising reservations for women in their manifesto. After 50 years of independence it would have been an appropriate step to provide reservation to women in Assemblies and Parliament so that they become a part of decision making in legislature. Women so far have been confined to domestic background only. Although in the background they have been instrumental in promoting social development, helping in mobilishing resources and increasing production. But these actions have and never been highlighted or appreciated. Now when the decision to provide one third reservation to women has been considered so as to give them equal opportunity like their male counterpart in decision making, it was scuttled and not allowed even to introduce in the House. Women play an important role in their family. They look after the family. Today my male colleagues have been discharging their duties here so nicely because their wives have been looking after the family. Moreover the village women do so much work in farming, livestock keeping and off farm activity. That is how they help in our productive activity. But these roles are never taken into account. It is a matter of shame and regret that the decision to provide one-third reservations to women in Assemblies and Lok Sabha has been scuttled by the male chauvinists in the name of OBCs and minorities. Women have been functioning well in Panchayat. Then why this move to high-jack the women's Bill providing reservation? I strongly appeal to the Government to introduce the Bill and keep their promise to provide one-third reservation to women. All these years women were not allowed to participate in any activity. They were confined to the four walls of the house and kept busy in household activities only. Their contribution to society has never been evaluated or acknowledged. Today we are only one women here to represent one crore women. So immediately the women's Bill must be introduced so that the dichotomy between appearance and reality must be exposed. People must know who is for it and who is against. The message must be clear. So my earnest request is, the women's Bill must be introduced without further delay. I do not want to mention whether the BJP, the Congress or the CPM are for the Bill or against the Bill. I do not want to mention any party. But I earnestly request to introduce the Bill without further delay.
We have many laws for safeguarding the women. But inspite of so many laws to safeguard the interest of women, women have been subjected to atrocities. This is because the lasw have not been properly implemented. The rate of sexual harassment for working women has become alarming. That is why a law was passed to curb this menace. But the law has failed to protect the working women. So mere legislation is not the answer to curb any social evil. According to Hindu Marriage Act, no male is allowed to marry for the second time. But second marriage is not uncommon. The wronged wife runs from pillar to post without any justice. She has to prove to the court the authenticity of her husband's second marriage. The husband escapes punishment because of loopholes in the law. It becomes all the more difficult for the village women to seek any legal help. Most of them are not aware of the source of assistance or legal advice for their harassment. So they go on enduring the mental pressure of desertion, ill treatment and harassment. Thus it is urgent to create public awareness for the removal of social evil. Women must be trained to become self reliant. Self reliance will create self confidence and they will be able to fight the injustice. In comparison to boys, girls in the villages contribute a lot for the maintenance of the family. Most of the boys are addicted to something or other. They misuse their earning. But the girls contribute their earnings and helop financially. So if they are given more scope for job and earn more they can help their family to a large extent. So it is necessary to explore more avenues for the girl to achieve self reliance and there should be more job reservation for the girls so that they can help their family in many ways.
The price of essential commodities has been sky rocketed. The brunt of this phenomenal rise has to be borne by the women because they look after the family. This burnt has been causing mental pressure on women. But nobody thinks the hardship she has to undergo for maintaining the family.
MR. CHAIRMAN : Please conclude, I shall call the next member.
SHRIMATI SANDHYA BAURI : Sir, please give me some more time. I have some more points to mention. Since there is paucity of time, I shall be brief. सभापति महोदय : आप कैसे खड़े हो गये? श्री रामानन्द सिंह (सतना): इस पर हम लोग भी बोलना चाहते हैं। यह बात रिकार्ड में न जाये कि इस चर्चा पर पुरुषों ने भाग नहीं लिया या पुरुष एकदम महिला विरोधी हैं। हम लोग भी इस विषय पर, जो हमारा अपना दिमाग है, वे भी कुछ कहना चाहते हैं। सभापति महोदय : बोलने पर कहां रोक है? जिन माननीय सदस्यों का पार्टी की ओर से नाम है, उनको क़मशः बुलाया जायेगा। श्री रामानन्द सिंह (सतना): उसमें मेरा नाम है। बी.जे.पी. की सूची में मेरा नाम है। सभापति महोदय : नाम है तो मौका मिलेगा।
SHRIMATI SANDHYA BAURI : Sir, the rate of infant death is increasing day day. The infant death is 74 out of every thousand and the rate of maternity death is 570 out of one lakh. We want healthy child but we are not able to provide food or anything for prenatal care. So the rate both in infant and maternity death is increasing. (Interruptions)
So the Government must have some scheme for the mothers to be self reliant so that she can give birth to a healthy child and bring it up also as a healthy child.
Sir, the most important thing I bring to your notice is the allegation and the charge about the rape incidence of a village woman in my State is totally untrue and fabricated. This was a political motive to garner vote and it was possible because the alleged victime comes from a tribal family and of a weaker section of society. I strongly condemn the move by some person to use the adivasi and Scheduled Caste women to fulfil their selfish motive of vote catching and indulging in political gimmick. I strongly condemn and protest against this dirty move by some person. An ordinary village SC woman has been used to gain some votes. This dirty move must be condemned. Sir, I thank you for giving me an opportunity to participate in the discussion.
"> श्रीमती आभा महतो (जमशेदपुर) : आदरणीय सभापति महोदय, आपने महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचारों पर बोलने का मुझे मौका दिया, उसके लिए धन्यवाद। आज महिलाओं पर अत्याचार के बारे में जितनी भी संसद में चर्चा हुई, उसमें हमारी बहनें बहुत कुछ बोलीं। महिलाओं पर अत्याचार इतनी अधिक मात्रा में हो रहे हैं कि इस पर अगर हम लोग बहस शुरू करें तो शायद वषर्ों भी कम्पलीट न हो। लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि जो भी आज महिलाओं के प्रति अत्याचार हो रहे हैं, आये दिन हम पेपर में पढ़ते हैं कि इस तरह की घटनाएं दहेज की, बलात्कार की, हत्याओं की महिलाओं के साथ हो रही हैं ... (व्यवधान) अगर हम अपने शिक्षा के स्तर को नहीं बढ़ाएंगे या महिलाओं की शिक्षा की व्यवस्था अच्छी नहीं हो पाएगी तो इस तरह के अत्याचार बढ़ते ही जाएंगे। मैं यह बात कहना चाहती हूं कि आज जो स्िथति है या महिलाओं पर अनेक तरह के अत्याचार जो हो रहे हैं, इसमें महिलाओं को भी अपने आपमें कुछ सुधार लाना होगा। आज के आधुनिक युग में आधुनिक कही जाने वाली हमारे धनाढय परिवार की लड़कियां, जो ज्यादा अमीर हैं और छोटी ड़ैस पहनना अपने समाज की प्रतिष्ठा समझती हैं, यह भी हमारे प्रति अत्याचार को बढ़ावा देने वाली होती हैं, इसलिए पोशाक पर, गन्दे सीरियल या अश्लील सीरियल जो दिखाये जाते हैं, इस पर प्रतिबन्ध होना चाहिए, तभी जाकर समाज में अत्याचार कुछ कम हो पाएंगे। अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी तरफ से एक सुझाव देना चाहती हूं कि आज की तलाकशुदा महिलाओं को जो पांच सौ रुपए दिए जाते हैं, वह आज के युग में बहुत कम हैं और इसलिए उस राशि को पांच हजार रूपया बढ़ाया जाए। महिलाओं के लिए विशेष कानून के बारे में जो हमारी ममता दीदी ने कहा, वह भी लागू होना चाहिए। जब तक हमारे समाज में तंदूर जैसी घटनाएं, मुजफफर नगर की तिराहे जैसी घटनाएं होती रहेंगी तब तक यह समाज कभी सुधरने वाला नहीं है, इसलिए स्वयं को सुधारना है, तब जाकर यह समाज सुधरेगा और महिलाओं पर अत्याचार कम होंगे। मैं इतना ही कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहूंगी।
"> श्रीमती उषा मीणा (सवाई माधोपुर) : सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से बड़ी बहिन गीता बहिन जी को धन्यवाद देती हूं ... (व्यवधान) सभापति महोदय : सभी माननीय सदस्यों का नाम यहां पर हैं जिनके नाम यहां आए हैं। क़म-क़म से मौका मिलेगा। श्रीमती उषा मीणा : सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से हमारी बड़ी बहिन गीता जी को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का प्रस्ताव रखा और साथ ही मैं आपको भी धन्यवाद देती हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। देश को आज़ाद हुए आज पचास साल हो गए परंतु हम महिलाएं इन पचास सालों में भी पूरी तरह से आज़ाद नहीं हो पाई हैं। आजकल अखबारों में आप सभी पढ़ते हैं कि हम महिलाओं पर किस तरह से अत्याचार हो रहे हैं। छ: साल की बच्ची से लेकर नब्बे साल की बूढ़ी महिलाओं पर बलात्कार हो रहे अत्याचारों की जो घटनाएं अखबारों में पढ़ने में आती हैं, जैसे दहेज का मामला है, महिलाओं का दहेज शोषण का मामला है, पूरे भारतवर्ष में हम महिलाओं पर इतने अत्याचार और महिलाओं का इतना शोषण हो रहा है कि उसको यहां संसद में बैठे हुए सभी भाई बहन जानते हैं। हम लोग यहां तीन दिन से इस पर चर्चा कर रहे हैं और मेरे से पूर्व सभी बहिनों तथा भाइयों ने जो सदन में विचार रखे, उने आप लोगों ने सुना। इन लोगों ने वेद और पुराण के समय से पूरा इतिहास बताया कि हमारे भारतवर्ष में महिलाओं को किस रूप में पूजा जाता था परंतु मैं आपके माध्यम से सदन को यह बताना चाहती हूं कि हम महिलाओं को पचास साल में भी आज़ादी नहीं मिली और शायद अगले पचास साल लग जाएंगे तब भी हम हर क्षेत्र में आज़ाद नहीं होंगे। चाहे सामाजिक क्षेत्र हो, आप देख लीजिए कि महिलाओं के प्रति समाज का कैसा रुख है। आधुनिक युग में बच्चा जब मां के पेट में बच्चा होता है तो तीन महीने के बाद ही सोनोग्राफी करा ली जाती है और यदि बच्ची है तो उसका गर्भपात करा लिया जाता है। इस प्रकार की मानसिकता बनी हुई है। एक घर में यदि चार लड़किया हो गई हैं तो पांचवी बार पुत्र प्राप्ित के लिए प्रयास किया जाता है। इस तरह से महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। इसी प्रकार से चार बच्िचयों के पिता को सोचना पड़ता है कि वह अपनी बच्िचयों की शादी किस तरह से करेगा, यह दहेज की समस्या है। मैं आपको राजस्थान का उदाहरण देना चाहूंगी कि कई जगह पैदा होने से पहले ही भ्रूण में स्िथत बच्ची को मार दिया जाता है और कई जगह पैदा होने के बाद मार दिया जाता है, जैसे भरतपुर में सूपा गांव में लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता है । तथा जैसलमेर में भाटी जाति के लोग भी इसी तरह से बच्ची को मार देते हैं। बार-बार गर्भपात कराना महिलाओं पर अत्याचार है और बच्िचयों की हत्या कर देना बहुत बड़ा अपराध है। पूरे देश में बलात्कार की अनेक घटनाएं हो रही हैं। होता है तथा जैसलमेर में भाटी जाति के लोग भी इसी तरह से बच्ची को मार देते हैं। बार-बार गर्भपात कराना महिलाओं पर अत्याचार है और बच्िचयों की हत्या कर देना बहुत बड़ा अपराध है। पूरे देश में बलात्कार की अनेक घटनाएं हो रही हैं।
17.00 hrs. एक दिन में बलात्कार के ३५ मामले दर्ज होते हैं। इसी प्रकार उत्पीड़न और शोषण के २२० मामले दर्ज होते हैं। मैं सदन को जानकारी देना चाहूंगी कि देश में ५१ मिनट में एक बलात्कार, ७ मिनट में एक दंडनीय अपराध और २० मिनट में एक महिला जला दी जाती है। ये सरकारी आंकडे हैं, जो बहुत कुछ असत्य होते हैं और सच्चाई जानें तो कहीं ज्यादा होते हैं। अब मैं आपको राजस्थान और भारत में हो रहे अत्याचारों के बारे में बताना चाहूंगी। पूरे भारत में बलात्कार ३३ प्रतिशत और राजस्थान में ५५ प्रतिशत, पूरे भारत में अपहरण ११ प्रतिशत और राजस्थान में २१.७ प्रतिशत, पूरे भारत में दहेज म्ृात्यु ८.६ प्रतिशत और राजस्थान में १५ प्रतिशत, पूरे भारत में यातनायें १२६.९ प्रतिशत और राजस्थान में ३६४.३ प्रतिशत, पूरे भारत में उत्पीड़न ३१.७ प्रतिशत और राजस्थान में ८३.६ प्रतिशत, यौन उत्पीड़न पूरे भारत में ४१.२ प्रतिशत और राजस्थान में २१.२ प्रतिशत - इस प्रकार कुल अत्याचार पूरे भारत में ५६.२ प्रतिशत और राजस्थान में १०२.५ प्रतिशत हुए । महोदय, इसी सदन में एक मामला उठाया था भवंरी देवी बलात्कार कांड जो भटेरी ग्राम में हुआ। राजस्थान के कोटा जिले में नीलू राणा बलात्कार कांड हुआ। शिवानी जडेजा कांड हुआ और शालिनी शर्मा कांड हुआ। हाल ही में जो बहुत चर्चा में आया कि एक ही लड़की के साथ दो बार बलात्कार किया गया। इस मामले में राजस्थान सरकार ने उस लड़की पर मानसिक तौर पर दबाव डाला, जिसकी वजह से उस लड़की ने कई बार ब्यान बदला। अभी ग्ृाह मंत्री जी बैठे थे, तो हमने राजेश पायलेट जी से कहा कि पूछिए की उसकी स्िथति कया है। सदन में जीरो आवर में उठाए गए मामले पर कहा गया था कि स्िथति से सदन को अवगत करायेंगे, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। यह मामला जब सदन शुरू हुआ था, उस वकत उठाया गया था और आज सदन खत्म हो रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया है। मैं सदन को बताना चाहती हूं, चाहे बलात्कार के मामले हों, चाहे दहेज के मामले हैं, ये मामले दबा दिए जाते हैं, कयोंकि इनमें उच्च अधिकारियों का हाथ होता है, चाहे ये अधिकारी पुलिस के हों, चाहे विधायक हों औरचाहे मंत्रियों के पुत्र हों। इन मामलों में बड़े-बड़े लोगों का हाथ होने की वजह से इन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। जहां तक सती प्रथा की बात है, राजस्थान में सती प्रथा का बहुत पहले से चलन है। १९८५ में देवराला में रूपकुंवर सती हुई थीं। ऐसे बहुत से मामले हैं, जहां उनको जबरदस्ती सती किया जाता है। उन पर मानसिक रूप से और पारिवारिक दबाव डालकर सती होने के लिए मजबूर किया जाता है। कहा जाता है कि तेरा पति तो मर गया, अब तू जीकर कया करेगी और लोग तेरे ऊपर उंगली उठायेंगे। वह अपनी मर्जी से सती नहीं होती है, उसे जबरदस्ती सती कराया जाता है। इस तरह से अभी भी हमारी महिलाओं और बहनों पर अत्याचार हो रहे हैं। यह सही है कि इस बारे में कानून बने हुए हैं, परन्तु ये कानून सही तौर पर लागू नहीं होते हैं। दहेज विरोधी कानून भी हैं, लेकिन किसी न किसी रूप में दहेज लिया जाता है, जबकि दहेज लेने वाला और देने वाला, दोनों, दोषी होते हैं। लेकिन यह कानून केवल कानून ही बन कर रह गया है, उसका पालन नहीं किया जाता है। यही स्िथति बाल विवाह की है। राजस्थान में बाल-विवाह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तथाOBCलोगों में होते हैं। आपने देखा होगा कि छोटे-छोटे बच्चों को थाली में बैठाकर शादी कराई जाती है। इस बारे में आपने अखबारों में भी पढ़ा होगा। छोटे लड़के और लड़की की शादी कर दी जाती है। लड़का बड़ा होकर पढ़ लेता है और लड़की बेचारी खेत में गाय-भैंस चराती रहती है। लड़का आफिसर बनते ही उस लड़की को छोड़ देता है और किसी शहरी लड़की से शादी कर लेता है। इस तरह उसका शोषण होता है। उसे सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाता, केवल नाम मात्र ५०० रुपए का भत्ता दिया जाता है। उससे वह महिला अपना गुजारा कैसे करे। आप कहते हैं कि महिलाओं को समान अधिकार होने चाहिए, उसके पति की सम्पत्ित में भी समान हिस्सा मिलना चाहिए। ऐसे बहुत से मामले हैं जो कि राजस्थान में ही नहीं बल्िक पूरे भारतवर्ष में देखने में आए हैं। महोदय, अभी हमारी बहन ममता जी सही बोल रही थीं कि महिलाओं पर बहुत अत्याचार हो रहे हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। जब महिला रिजर्वेशन की बात चल रही थी तो वह बड़े आक़ोश में बोल रही थीं। मैं उनको केवल यह कहना चाहती थी कि १९९७ में भी महिला बिल आया था, तब हम एक साथ बैठते थे। अब वह उधर चली गई हैं। तब उन्होंने ही इसका विरोध किया था, उमा भारती जी ने भी विरोध किया था। ... (व्यवधान) श्रीमती भावना कर्दम दवे : महिला बिल का विरोध नहीं किया था, बल्िक साथ दिया था। श्रीमती उषा मीणा : आप मेरी बात सुनिए, मैं उसी बात को स्पष्ट कर रही हूं। कांग्रेस भी अभी वही कर रही है जो आपने किया था। कांग्रेस भी ओबीसी और माइनोरिटी के लिए कह रही है कि उसमें संशोधन करिए और बिल पास करा लीजिए। कांग्रेस विरोध नहीं कर रही है।
... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : आप बिल इंट्रोडयूस तो होने देते, आपने तो बिल इंट्रोडयूस भी नहीं होने दिया। श्रीमती उषा मीणा : आप सत्ता में बैठे हैं, आप कयों नहीं इंट्रोडयूस कराते। आप जो बार-बार रिपीट कर रहे हैं, आपने पिछली बार कया किया था, अब की बार आप कांग्रेस पर कयों थोप रहे हैं।
... (व्यवधान) सब महिला बिल की बात करते हैं और महिला बिल को लाने की कोशिश भी करते हैं परन्तु अंदर से कोई भी इसके लिए तैयार नहीं है। हर व्यकित यह सोच रहा है कि अगर महिला बिल आया तो हमारी सीट चली जाएगी। सत्ता पक्ष वाले मन से इस बिल को लाना नहीं चाहते हैं और दूसरी पार्िटयों पर थोप रहे हैं कि वे बिल नहीं आने देते। श्रीमती भावना कर्दम दवे : आप ऐसा मत बोलिए, यह बिलकुल ठीक बात नहीं है। ... (व्यवधान) श्रीमती उषा मीणा : महिला बिल की बात पर मैं बताना चाहती हूं कि हमारे नेता स्व. राजीव जी पंचायती राज बिल में महिला रिजर्वेशन को लाए थे। उन्होंने महिलाओं को आरक्षण दिया था लेकिन इन्हीं लोगों ने उसका विरोध किया था।
... (व्यवधान) श्रीमती भावना कर्दम दवे : आपने हमें सहयोग भी नहीं दिया। महिला बिल के समय सब महिलाएं एकत्रित हुई थीं, उस समय कांग्रेस की एक भी महिला नहीं आई थी। ... (व्यवधान) श्रीमती उषा मीणा : राजीव गांधी जी ने पंचायती राज बिस में महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए रिजर्वेशन दिया था।
... (व्यवधान) सभापति महोदय : पहले से पांच बजे तक बहस चलाने का निश्चय था, उसके बाद बीड़ी मजदूर वाला बिल लेना हे। इसमें सभा की कया राय है? श्री रामानन्द सिंह : महोदय, पहले इसको खत्म कर लें। श्री शैलेन्द्र कुमार : महोदय, इसका समय बढ़ा दिया जाए। श्री राजवीर सिंह (आंवला): महोदय, पहले बीड़ी मजदूर वाला बिल ले लिया जाए, उसके बाद इसको चालू रखा जाए।
... (व्यवधान)
SHRIMATI GEETA MUKHERJEE (PANSKURA): For three days we have been discussing this issue. Since the hon. Minister had to go to the other House, the sitting of the House was extended up to eight o'clock. The hon. Minister can come back again and finish this subject. ... (Interruptions)
SHRI MADHUKAR SIRPOTDAR (MUMBAI NORTH-WEST): The hon. Minister is not there. He is busy. सभापति महोदय : बीड़ी वाला बिल लेने के बाद बहस जारी रहेगी। श्रीमती गीता मुखर्जी : आज ही जारी रहेगी? सभापति महोदय : जो सदस्यों की राय होगी। श्रीमती गीता मुखर्जी : बीड़ी वाला बिल लेने के बाद आज ही बहस जारी रहेगी ना।
... (व्यवधान) ऐसा मत करो। सभापति महोदय : उसमें माननीय सदस्यों की जो राय होगी, वैसा ही किया जाएगा।
SHRIMATI GEETA MUKHERJEE : If the discussion is to be resumed immediately after the introduction of the Bill, the hon. Minister can go ahead with the introduction of the Bill. Otherwise, a message should not go that this House is reluctant even to discuss the atrocities on women.
________