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Lok Sabha Debates

Regarding Electoral Reforms-Laid. on 11 February, 2021

Seventeenth Loksabha an> Title: Regarding electoral reforms-laid.

श्री पी. पी. चौधरी (पाली) :मैं चुनाव सुधार विषय पर कुछ सुझाव प्रस्तुत करना चाहूंगा ।

देश में प्रत्येक स्थान पर कई बार चुनाव होते हैं, जिन पर प्रत्याशियों द्वारा भारी मात्रा में धन तो खर्च किया जाता ही है, इसके अतिरिक्त सरकार तथा चुनाव आयोग का भी चुनाव सम्पन्न कराने के दौरान काफी खर्चा हो जाता है । चुनाव प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है । प्रायः यह देखने में आता है कि प्रत्येक चुनाव के लिए अलग-अलग वोटर लिस्ट बनती है । किसी-किसी लिस्ट में स्थानीय व्यक्ति जो कई वर्षों से उसी जगह वोट देता आया है, उसके पास फोटो पहचान पत्र मौजूद है, उसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाता है । मेरा मानना है कि वोटर लिस्ट परमानेन्ट होनी चाहिए । जब तक किसी व्यक्ति की मृत्यु ना हो जाए या परिवार का कोई सदस्य वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए 18 वर्ष की आयु का न हो जाए, तब तक वोटर लिस्ट से नाम हटाया या जोड़ा नहीं जाना चाहिए ।

एक अनुमान के अनुसार देश में लगभग 80 करोड़ मतदाता हैं, जिसमें से 22 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते । मेरा इस संबंध में सुझाव है कि सभी मतदाताओं को वोट देना कम्पलसरी किया जाना चाहिए ।

वोटर आई.डी. कार्ड के क्षेत्र में कुछ राज्यों ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन कुछ राज्य अभी भी पीछे हैं । एक राष्ट्रीय अभियान चलाकर सभी मतदाताओं के वोटर आई.डी. कार्ड बन जाने चाहिए । इससे फर्जी मतदान पर अंकुश लगेगा एवं स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव हो सकेंगे ।

देश के प्रत्येक स्थान पर कुल 5 से भी अधिक बार चुनाव किए जाते हैं । हर चुनाव के पहले आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है, जिसके कारण क्षेत्रीय विकास से संबंधित सभी कार्य पर रोक लग जाती है, जिससे आम नागरिक परेशान हो जाता है । आम नागरिकों में भी मताधिकार का बार-बार प्रयोग होने के कारण मताधिकार के प्रति रुचि कम हो जाती है, जिसके कारण कम वोटिंग होती है । सरकार को भी चुनाव हेतु कई बार कर्मचारी, मशीनरी एवं सुरक्षा की व्यवस्था करनी पड़ती है, जो कि अपने आपमें बहुत खर्चीला है । अतः मेरा सुझाव है कि देश के प्रत्येक राज्य में सभी प्रमुख चुनाव एक साथ कराए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए ।