State Consumer Disputes Redressal Commission
Som Pal vs Dr Archna Sompal on 4 May, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2007/1722 ( Date of Filing : 06 Aug 2007 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Som Pal a ...........Appellant(s) Versus 1. Dr Archna Sompal a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER PRESENT: Dated : 04 May 2022 Final Order / Judgement
मौखिक राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ अपील संख्या 1722 सन 2007 सोमपाल पुत्र शम्भू निवासी ग्राम गढ़ी ताजपुर थाना एवं पोस्ट नागल, जिला सहारनपुर ।
.......अपीलार्थी/परिवादी
-बनाम-
डा0 श्रीमती अर्चना सोमवाल, सोमवाल मैटर्निटी एण्ड चाइल्ड होम, रेलवे रोड, टाउन नागल, पोस्ट खास, जिला सहारनपुर ।
. .........प्रत्यर्थी/विपक्षी समक्ष : -
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य ।
मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - श्री आर0के0 गुप्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - श्री इसार हुसैन । दिनांक:- 04.05.2022 मा0 सदस्य श्री सुशील कुमार द्वारा उद्घोषित निर्णय
उपभोक्ता परिवाद संख्या 194 सन 2005 सोमपाल बनाम डा0 श्रीमती अर्चना सोमवाल में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 03.07.2007 के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गयी है, जो साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दी गयी है।
अपील इन आधारों पर प्रस्तुत की गयी है कि जिला उपभोक्ता मंच ने निर्णय में सही व्याख्या नहीं की है तथा अधिनियम की धारा 14 के प्राविधानों के विपरीत निर्णय पारित किया गया है। विपक्षी डाक्टर द्वारा अपनी योग्यता बी0ए0एम0एस0 दर्शायी गयी है जबकि सर्जरी का कार्य किया गया है जिसके कारण सैप्टिक अर्वासन हो गया। जिला उपभोक्ता मंच ने यह निष्कर्ष अवैधानिक रूप से दिया है कि विपक्षी द्वारा अबार्सन नहीं किया गया है। दिनांक 07.05.2004 के पी0जी0आई0 के पत्र पर गलत निष्कर्ष दिया गया है एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सना नर्सिग होम, नागर शब्द लिखा है। शीट लिखने वाले व्यक्ति ने अर्चना के स्थान पर रचना शब्द गलत लिख दिया है। जिला उपभोक्ता मंच ने मृत्यु प्रमाण पत्र का अवलोकन नहीं किया। मरीज की मृत्यु दिनांक 30.04.2004 को हुयी जबकि पी0जी0आई0 चण्डीगढ़ में उसे 29.04.2004 को भर्ती कराया गया। मृत्यु सैप्टिक अर्बासन के कारण आघात लगना दर्शाया गया है। जिला उपभोक्ता मंच का निष्कर्ष विधि-विरूद्ध है। उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत किया गया परिवाद जिला उपभोक्ता मंच की सहमति के बिना खारिज कराया गया इसलिए दूसरा परिवाद रेस्जुडीकेटा से बाधित है। चूंकि पहला परिवाद गुण-दोष पर निर्णित नहीं हुआ, इसलिए दूसरा परिवाद काल बाधित है। जिला उपभोक्ता मंच ने मात्र कल्पना व सम्भावनाओं के आधार पर निर्णय पारित किया है।
पहले इस बिन्दु पर विचार किया जाता है कि प्रथम परिवाद वापस प्राप्त करने के बाद क्या दूसरा परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है । यह प्रश्न सकारात्मक है । यदि प्रथम परिवाद गुण-दोष पर पारित किया गया है तब समय रहते दूसरा परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है, अत: इस दोष के लिए इस बिन्दु पर विचार करना है कि क्या प्रश्नगत परिवाद संख्या 194/05 जो कि परिवादी द्वारा प्रस्तुत किया गया द्वितीय परिवाद है तथा समय अवधि के अन्तर्गत प्रस्तुत किया गया है। इस परिवाद में वाद-कारण उत्पन्न होने की तिथि उल्लिखित नहीं की गयी है। परन्तु परिवाद-पत्र के अवलोकन से जाहिर होता है कि परिवादी की पत्नी वेदवती का इलाज परिवादी के कथनानुसार विपक्षी के हास्पिटल में चला इसके बाद दिनांक 19.04.2004 को डा0 शोभा जैन को दिखाया गया । वहां पर भी परिवादी की पत्नी का पूर्ण इलाज नहीं हुआ इसलिए दिनांक 30.04.2004 को पी0जी0आई0 चण्डीगढ़ में दिखाया गया । वहां दिनांक 29.04.2004 को परिवादी की पत्नी की मृत्यु हो गयी। इसके बाद द्वितीय परिवाद दिनांक 26.09.2005 को प्रेषित किया गया, इसलिए यह परिवाद समय अवधि के अन्तर्गत है।
परिवादी का यह कथन है कि उसने अपनी पत्नी का इलाज डा0 श्रीमती अर्चना सोमवाल, सोमवाल मैटर्निटी एण्ड चाइल्ड होम, रेलवे रोड, टाउन नागल, पोस्ट खास, जिला सहारनपुर से कराया जबकि विपक्षी का कथन है कि परिवादी ने दिनांक 08.03.2004 को या कभी भी अपनी पत्नी को उसके अस्पताल में नहीं दिखाया क्योंकि इलाज के लिए अबार्सन की आवश्यकता नहीं होती । अर्बासन की बात कहना मनगढंत है तथा विपक्षी द्वारा आवेदक की पत्नी का इलाज नहीं किया गया। परिवाद संख्या 231/04 में कमला देवी नर्सिंग होम में डा0 अर्चना जैन द्वारा इलाज किया जाना बताया गया था परन्तु जब परिवादी को ज्ञात हुआ कि इस नाम की कोई डाक्टर कमला देवी नर्सिंग होम में नहीं है तब परिवादी ने उक्त परिवाद खारिज करवा लिया। परिवादी बार-बार अपने कथन को बदल रहा है।
जिला उपभोक्ता मंच ने भी यह निष्कर्ष दोनों पक्षों के साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात दिया है। परिवादी द्वारा जब पर्चा दाखिल किया गया उस पर कोई भी तिथि अंकित नहीं है। इस पर्चे पर लिखी गयी इबारत के संबंध में हस्तलेख विशेषज्ञ की राय भी नही ली गयी है। इस पर्चे पर मरीज का नाम भी अंकित नही है। पर्चे के पृष्ठ भाग पर मरीज का नाम लिखा गया है तथा पर्चे में अर्बासन का कोई जिक्र नही है। पी0जी0आई0 चण्डीगढ़ द्वारा भी परिवादी की पत्नी का आपरेशन रचना नर्सिंग होम में होना अंकित है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी रचना नर्सिंग होम अंकित है जबकि विपक्षी अस्पताल का नाम सोमपाल मैटर्निटी एण्ड चाइल्ड होम है। इस प्रकार समस्त साक्ष्य की विवेचना के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि जब विपक्षी द्वारा परिवादी की पत्नी का इलाज करने का तथ्य ही साबित नहीं है तब लापरवाही का प्रश्न ही नहीं उठता है।
प्रस्तुत अपील के विनिश्चय के लिए प्रथम बिन्दु यह उत्पन्न होता है कि क्या प्रत्यर्थी/विपक्षी डाक्टर श्रीमती अर्चना सोमवाल द्वारा परिवादी की पत्नी का इलाज किया गया। यदि इस प्रश्न का उत्तर सकारात्मक है तब इस पर ही विचार किया जाएगा कि क्या उनके द्वारा इलाज के दौरान लापरवाही बरती गयी।
प्रथम परिवाद की प्रति परिवादी द्वारा इस पीठ के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गयी परन्तु द्वितीय परिवाद में पारित निर्णय से जाहिर होता है कि परिवादी द्वारा प्रथम परिवाद में विपक्षी/प्रत्यर्थी को पक्षकार नही बनाया गया था बल्कि परिवाद संख्या 231/04 कमला देवी नर्सिंग होम में कार्यरत डा0 अर्चना जैन के विरूद्ध परिवाद प्रस्तुत किया गया था । यह अत्यंत मनगढंत एवं विरोधाभाष है कि प्रथम परिवाद कमलादेवी नर्सिंग होम की डाक्टर अर्चना जैन एवं दूसरा परिवाद डाक्टर अर्चना सोमवाल के विरूद्ध दायर करना जाहिर करता है कि परिवादी द्वारा सही तथ्य छिपाए जा रहे हैं और अपनी पत्नी की बीमारी में मृत्यु के बाद प्रतिकर पाने का प्रयास किया जा रहा है।
पत्रावली के संलग्न 01 पर डा0 अर्चना सोमवाल का लेटरपैड उपलब्ध है जिस पर कुछ दवाओं के नाम लिखे गए हैं परन्तु इस पर किसी मरीज का नाम अंकित नहीं है इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह पर्चा परिवादी की पत्नी से संबंधित है। इस पर्चे की पुस्त पर वेदवती का नाम लिखा है। यथार्थ में किसी भी मरीज का नाम सर्व प्रथम अंकित होता है उसके बाद बीमारी अंकित होती है उसके बाद दवाइयां लिखी जाती है जबकि परिवादी के केस में प्रथम पेज पर किसी का नाम अंकित नहीं है और पीछे नाम लिखा गया है। यह नाम किसी के भी द्वारा लिखा जा सकता है । यदि डाक्टर प्रत्यर्थी द्वारा लिखा गया होता तो मरीज का नाम प्रथम विवरण के तौर पर लिखा गया होता ।
अत: जिला उपभोक्ता मंच का निष्कर्ष साक्ष्य पर आधारित है। आवेदक की पत्नी विपक्षी/प्र्रत्यर्थी के अस्पताल में भर्ती नहीं रही इस डाक्टर द्वारा आवेदन की पत्नी का इलाज नहीं किया गया क्योंकि डाक्टर के इलाज से संबंधित फीस अदा करने की कोई रसीद भी परिवादी द्वारा जिला फोरम या इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गयी है। अत: जिला उपभोक्ता मंच के निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। अपील खारिज होने योग्य है।
आदेश अपील खारिज की जाती है ।
अपील व्यय उभय पक्ष पर ।
इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार पक्षकारों को उपलब्ध करायी जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य सुबोल श्रीवास्तव पी0ए0(कोर्ट नं0-2) [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER