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Lok Sabha Debates

Need To Undertake Gauge Conversion Of Saharsa-Farbesganj Railway Section In ... on 15 March, 2017

Sixteenth Loksabha an> Title: Need to undertake gauge conversion of Saharsa-Farbesganj railway section in Bihar.

 

श्रीमती रंजीत रंजन (सुपौल)ः आजादी के तकरीबन सात दशक बीत जाने के बावजूद सहरसा, सुपौल, मधेपुरा एवं अररिया जिला वासियों को अभी तक बड़ी रेल लाइन की ट्रेन पर सफर करने का सपना साकार नहीं हो सका है। छोटी लाइन की ट्रेनों के सहारे ही इन जिलों के वासियों को आवागमन करना पड़ रहा है। सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड में अब भी अंग्रेजों के जमाने की छोटी लाइन पर चलने वाली ट्रेन का संचालन किया जाता है। जिसमें यात्रा करना काफी कठिनाई भरा साबित होता है। आदम जमाने की इन बोगियों में बिजली, पानी आदि जैसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहीं मात्र छः जोड़ी ट्रेनों का इस रेल खंड मे परिचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों में भेड़ बकरियों की तरह लोग लद कर यात्रा करने के लिए विवश हैं तथा आमान परिवर्तन का शिलान्यास होने के चलते इस रेलखण्ड में मरम्मती का कार्य भी नहीं हो रहा है। इस रेलखंड में सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं है, वहीं ट्रेनों की गति को औसत मात्र 12 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा है। आज के जमाने में जहाँ देश में बुलेट व सेमी बुलेट ट्रेन के परिचालन की बात की जा रही है, वहीं इन जिलों के करीब 40 लाख की आबादी आज भी आधुनिक रेल सेवा से पूरी तरह वंचित है। बड़ी रेल लाइन नहीं बनने से स्थानिय यात्रियों को आज भी दूरगामी ट्रेनों का सफर करने के लिए सहरसा जाना पड़ता है, जहाँ से वे बड़ी रेल लाइन की ट्रेनों की सुविधा प्राप्त कर पाते हैं। बड़ी रेल लाइन का निर्माण नही होने से इन जिलों का व्यवसाय व आर्थिक उन्नति भी बाधित हो रही है। सहरसा-फारविसंगज रेलखण्ड में आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के द्वारा पुनः दूसरी बार सुपौल जिला के निर्मली अनुमंडल मुख्यालय में रेल महासेतु एवं बड़ी रेल लाइन निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया था। केन्द्र सरकार के इस ऐतिहासिक पहल से लोगों में काफी हर्ष का माहौल व्याप्त था। साथ ही लोगों में इस बात की उम्मीदें भी जगी थी कि अब शीघ्र ही उन्हें बड़ी रेल लाइन की ट्रेन पर सफर करने का अवसर प्राप्त होगा। लेकिन विडम्बना है कि आमान परिवर्तन के नाम पर सहरसा-फारविसगंज रेलखण्ड पर 20 जनवरी, 2012 को मेगा ब्लॉक कर सहरसा और सरायगढ़ के बीच ही ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है। इस रेलखण्ड में वर्तमान में पाँच-पाँच डिब्बों की ट्रेन दौड़ायी जा रही है, जो यात्री और इलाके की आबादी के अनुपात में काफी कम है। रेलवे के अधिकारी की उदासीनता का नतीजा है कि शिलान्यास के 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद आमान परिवर्तन का कार्य पूरा नहीं हो सका।

अतः मैं सरकार से माँग करती हूँ कि अविलम्ब सहरसा-फारविसगंज रेलखण्ड का आमान परिवर्तन का कार्य अतिशीघ्र पूरा करवाया जाये ताकि इस इलाके के लोगों को बड़ी रेल लाइन की गाड़ियों की सुविधा मिल सके।