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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Motion Moved By Shri Nitish Kumar On 4Th June, 1998 ... on 9 June, 1998

nt> Type of Debate: BUDGET (RAILWAYS) Title: Further discussion on the motion moved by Shri Nitish Kumar on 4th June, 1998 regarding consideration of Status Paper on Railways; General discussion on the Budget (Railways),1998-99; Demands for Excess Grants No.8,12,13 and 14 in respect of the Budget (Railways) for 1995-96 (Voted). Shri Nitish Kumar replied to the combined debate. Motion under Consideration - Adopted.

12.26 hrs रेल मंत्री (श्री नीतीश कुमार ): अध्यक्ष महोदय, रेल बजट पर हुई सामान्य चर्चा में और इसके साथ ही सदन के पटल पर रखे गए भारतीय रेलों के संबंध में स्टेटस पेपर पर करीब १०८ माननीय सदस्यों ने भाग लिया और कुल २० घंटे २९ मिनट चर्चा हो चुकी है। जिन माननीय सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया, सबसे पहले मैं उन सबका आभार व्यकत करना चाहता हूं। उन्होंने स्टेटस पेपर और रेल बजट की सामान्य चर्चा में हिस्सा लिया और दिलचस्पी दिखाई। बजट प्रस्ताव जो रखे गए हैं उसी पर यह सामान्य चर्चा है। इसके बाद डिमान्ड फार ग्रान्टस पर रेलों से संबंधित संसदीय स्थायी समति विचार करेगी और फिर डिमान्डस पर इस सदन में मतदान जुलाई माह में संभव हो पायेगा । बजट पर सामान्य चर्चा हुई और इसके साथ-साथ १९९५-९६ वर्ष में जो कुछ ज्यादा खर्च हुए थे उसके एप्रोप्रिएशन के संबंध में एक प्रस्ताव रखा गया था, उस पर भी चर्चा हुई है। स्टेटस पेपर हमने रखा कि रेल की स्िथति पर रेल के सामने कया चुनौतियां हैं और रेल की कया समस्याएं और सीमा हैं। हर व्यकित की अपेक्षा रेल से है और जिन माननीय सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया और जो सदस्य हिस्सा नहीं ले सके, उन सब लोगों की कुछ न कुछ अपेक्षाएं हैं। कया उन अपेक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है। भारतीय रेलों की आर्िथक स्िथति कया है और इस पर किस प्रकार का बोझ है और किन चुनौती भरे माहोल में इसको आपरेट करना पड़ता है। इन तमाम बातों की जानकारी तमाम माननीय सदस्यों को है। हमने स्टेटस पेपर तैयार करके इस पर चर्चा करना मुनासिब समझा और इसी तरह दूसरे सदन में भी इस पर चर्चा हुई। मैं चाहूंगा कि सदन के बाहर भी चर्चा हो और जो आज रेल के सामने चुनौतियां हैं और जो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं उन पर सहमति बने तो उसी के आधार पर रेलों का संचालन हो सके । आज भारतीय रेल की स्िथति ऐसा होती चली जा रही है कि जो ओन गोईंग प्रोजेकटस हैं और जिनको हाथ में लिया जा चुका है, अगर उन प्रोजेकटस को जिसमें नयी रेल लाईनों और गेज कनर्वसन तथा विद्युतिकरण के प्रोजेकटस को मिला लें तो ३५ हजार करोड़ से अधिक की धनराशि के प्रोजेकटस हैं जिनको कह सकते हैं कि पेन्िडंग प्रोजेकटस हैं। उनको पूरा करने के लिए रेल के पास धन कहां है। इस बार बजट में पिछले साल की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ाया है। अंतरिम बजट के स्तर पर योजना का आकार हमने ८३०० करोड़ रूपए का इंडिकेट किया था लेकिन उसको बढ़ाकर ९५०० करोड़ रुपए का योजना आकार तय किया गया। केन्द्र सरकार ने पिछले साल की तुलना में ज्यादा बजटीय समर्थन दिया है और इसके अलावा सेवा-निव्ृात्ित की उम्र बढ़ा दी गई है। उसके चलते पेंशन में कम भुगतान करने की जवाबदेही है। उसके चलते भी पेंशन मद में जितना प्रावधान करना हमारे लिए आवश्यक था, उससे कम करने का प्रावधान करने की जरूरत पड़ी। इन सबको मिलाकर ९५०० करोड़ का योजना आकार तय कर पाए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आकार है। हमने इस प्रकार का बजट  बनाया कि नयी योजनाओं को न लें। हमारा आग्रह है कि जो पुरानी योजनाएं चल रही हैं उन योजनाओं को पूरा करने का प्रयास किया जाए। हमारे पास इतने संसाधन उपलब्ध नहीं हैं कि नयी योजनाओं का भार डालते चले जाएं, इसका भी ख्याल रखा है। हमने नयी सेवाएं चालू करने की बजाए यह मुनासिब समझा कि जो सेवाएं हैं उनको कंसोलिडेट कियाजाए और उसमें व्ृाद्धि लाई जाए। इसलिए हमने कई नई ट्रेन चलाई हैं जिनका उल्लेख मैंने बजट भाषण में किया है।

  इस बार ऐसी स्िथति है कि जो लांग डिस्टेंस और सुपर-फास्ट ट्रेन्स हैं उनमें कोच की संख्या २४ तक बढ़ा देंगे जिससे यात्री उसमें ज्यादा सफर कर पाएंगे और २५ प्रतिशत उनकी यात्री वहन क्षमता में व्ृाद्धि करने की कोशिश की है। जो सामान्य दर्जे के यात्री हैं उनकी असुविधाओं के दूर करने के लिए जो नए डिब्बे तमाम गाड़ियों में लगाए जाएंगे उसमें आधे डिब्बे दूसरी श्रेणी के सामान्य किस्म के डिब्बे लगाए जाएंगे जिससे आम आदमी को सहूलियत हो सके। स्टेटस पेपर के जरिए हमने बता दिया है कि रेल की स्िथति कया होती जा रही है और क़ास सबसिडाईजेशन बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन सालों से कोई ज्यादा यात्री किराए में व्ृाद्धि नहीं की है। लेकिन माल-भाड़े में व्ृाद्धि की जाती रही है। पिछले तीन सालों से शायद राजनैतिक कारणों से यह निर्णय लिया जाता रहा है। कई चुनाव आए और उसको ध्यान में रखकर उस समय की सरकारों ने निर्णय लिया होगा। यात्री किराए में व्ृाद्धि यह सेवा-शुल्क है। हम जो सेवा देते हैं, उसका शुल्क लेते हैं। रेल-गाड़ी आपको दूसरी जगह पहुंचा देती है तो यह सेवा है। जिस तरह रूपए का अवमूल्यन होता है तो अन्य चीजों के दाम बढ़ते हैं। उसके साथ-साथ यात्री भाड़े में भी एडजस्टमेंट होता रहना चाहिए। इसको हर बार राजनैतिक विषय बना दिया जाता है। हर बार माल-भाड़े में व्ृाद्धि कर दी जाती है। जो सामान ढोया जाता है, उसका भार किस पर पड़ता है। आम आदमी पर उसका भार पड़ता है। अप्रत्यक्ष रूप से उसका भार पड़ता है और लोग मंहगाई की मार झेलते हैं। हमने रेल मंत्रालय का काम संभालने के बाद ऐसा महसूस किया कि हम ऐसी सीमा पर पहुंचे हैं कि जहां से माल-भाड़े को बढ़ाना संभव नहीं है कयोंकि तेजी से रेल ट्रेफिक से रोड ट्रेफिक की ओर डाईवर्सन हो रहा है, उसको रोकना होगा। अगर रेलों का चलना है तो जहां से आमदनी होती है, वह जरिया सूख न पाए। अगर वह सूख गया तो आप चाहे जितनी मांग करते रहें तो किसी खास इलाके में नयी रेल लाईनें कैसे चलेंगी और कहां से गेज कनर्वसन होगा और कहां से दोहरीकरण होगा तो जहां से पैसा आता है तो उसका ख्याल रखना होगा। हमने माल-भाड़े में माईनर एडजस्टमेंट किया है। यात्री भाड़े में जो घाटा होता है उसको दूर करने के लिए माल-भाड़े में व्ृाद्धि की जाती रही है। क़ास सबसिडाईजेशन की लमिट २८०० करोड़ पर पहुंच गई है। यह कोई अच्छी स्िथति नहीं है। हमने निर्णय लिया कि ऐसी स्िथति में कोई विकल्प नहीं था। हम सिद्धांत के तौर पर क़ास सबसिडाईजेशन कम करेंगे। माल और यात्री भाड़े को सबसिडाईज न करें, कम से कम करें, इसकी नौबत कम आए तो इस दिशा में हमने एक   प्रयास किया है और बहुत मामूली व्ृाद्धि की है। इस व्ृाद्धि से ४५० करोड़ की आमदनी रेलवे को होगी। पचास किलोमीटर तक ८० प्रतिशत यात्रियों को एक रूपया ज्यादा नहीं देना पड़ेगा। हर चीज का दाम बढ़ रहा है और लोग हर चीज में खर्च करते हैं। लोग पान खाकर थूक देते हैं या बीड़ी-सिगरेट पीकर धुंआ उड़ा देते हैं। जब गाड़ी में चलेंगे तो एक रूपया ज्यादा देना पड़ेगा तो इससे ज्यादा भार नहीं पड़ेगा। लेकिन सिद्धान्त के रूप में इसको प्रतष्िठत किया जाना आवश्यक था। क़ास सबसिडाईजेशन ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता इसलिए हमने उस दिशा में कदम बढ़ाया है। थोड़ी व्ृाद्धि करने के साथ हमने यह प्रयास किया है कि सेवाएं इम्प्रुव करें ।

  इसलिए पिछले साल की तुलना में पैसेंजर एमेनिटीज पर हम लोगों ने ज्यादा खर्च रखा है। इसके अलावा हम २४ कोच की गाड़ियां चलायेंगे और इसी साल हमारा विचार है कि हम कुछ चुनिंदा गाड़ियों में २४ कोच से बढ़ाकर २६ कोच की गाड़िया चलायेंगे। इसके लिए प्लेटफार्म की फैसलिटी की जरूरत पड़ेगी और जो ट्रैफिक फैसलिटी में उनमें सुधार की जरूरत पड़ेगी। इसलिए अन्य वषर्ों की तुलना में बहुत ज्यादा व्ृाद्धि ट्रैफिक सुधार के लिए की गई है। हमने पिछले साल की तुलना में रोलिंग स्टाक, चल स्टाक के लिए चाहे कोच हो, वैगन हो और चाहे लोकोमोटिव्स हों, उनके लिए ज्यादा धनराशि का प्रावधान किया है। सभी माननीय सदस्य संरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। ट्रेक रीन्यूअल होना चाहिए । एक प्रश्न के उत्तर में मैंने इसी सदन में बताया है कि लगभग १० हजार किलोमीटर के लगभग बैकलॉग है, जिस ट्रैक का रीन्यूअल होना चाहिए। ट्रैक रीन्यूअल के लिए पिछले सालों की तुलना में ज्यादा धनराशि की व्यवस्था इस साल की गई है। इस प्रकार से एक सम्यक दृष्िटकोण अपनाते हुए यह बजट प्रस्तुत किया गया है।

  अध्यक्ष महोदय, रेलों के सामने जो समस्याएं है उनको सबको समझना पड़ेगा। हर जगह से मांगें होती है और वे स्वाभाविक मांगें हैं कि रेल लाइने बिछनी चाहिए और जहां रेल लाइनें जाएंगी वहां विकास होगा और हर जगह रेल लाइनों का पहुंचना आवश्यक भी है, जहां भी संभव है वहां रेल लाइनें पहुंचनी चाहिए। जो पिछड़े क्षेत्र हैं वहां का विकास बहुत आवश्यक है। पिछड़े क्षेत्र यदि पिछड़े रह जायेंगे, वहां रेलें नहीं जायेंगी तो वे विकास की दौड़ में पिछड़ते चले जायेंगे। इसलिए पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि वहां रेल लाइनें बिछाई जाएं। लेकिन जब पिछड़ें क्षेत्रों में रेल लाइनें बिछाई जाती हैं तो उनका रेट ऑफ रिटर्न निगेटिव होता है या बहुत कम होता है। उसका पैसा रेल के पास कहां से आयेगा। केन्द्र सरकार जो सामान्य राजस्व से रेलों के लिए पैसा देती है, उस पर रेल डविडेंड अदा करती है और डविडेंड का कया प्रतिशत होगा इसको तय करने के लिए संसद की दोनों सदनों की समति होती है जिसको रेलवे कंवेंशन कमेटी कहा जाता है। वह तय करती है कि कितना डविडेंड हम अदा करेंगे। संसद की संयुकत समति जो तय करती है उतना डविडेंड वह देती है। शुरू से लेकर आज तक जब से भी केन्द्रीय राजस्व से रेल को सहायता मिली है, हर सहायता पर सात प्रतिशत की दर पर आज डविडेंड लिया जा रहा है। हम बाजार से मार्केट बोरोइंग करते हैं, वह बहुत की कास्टली बोरोइंग हैं। १६-१७ प्रतिशत के करीब उसका खर्च आता है। तो कया १६-१७ प्रतिशत देकरके धन खर्च करके जो हम धन की उगाही करते हैं, उस पैसे का वहां पर कया इस्तेमाल हो जहां से रिटर्न आने वाला नहीं है। ये ऐसे मुद्दे हैं जिनको हमने स्टेटस पेपर में उभारा है। इसलिए इन मुद्दों को उभारा है कि सदन को इस पर चर्चा करनी चाहिए। पिछड़े क्षेत्रों का विकास जरूरी है लेकिन उन पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए रेल के भरोसे रहना मुनासिब नहीं होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि स्टेटस पेपर पर एक व्यापक जनमत बने और इस प्रकार के जो इलाकें हैं उन इलाकों के विकास के लिए रेल लाइनें बिछनी चाहिए। लेकिन कम से कम इतनी बातें तो आनी चाहिए कि इस मामले में जो रेल के ऊपर दायिता है कि वह डविडेंड अदा करे कम से कम उससे उसकी मुकित होनी चाहिए। लेकिन ऐसे क्षेत्रों के विकास के लिए और ज्यादा धनराशि की व्यवस्था होनी चाहिए। तो इसके बारे में एक जनमत बनेगा, कांसेंसस बनेगा, सर्वानुमति बनेगी, तभी जाकर इस पर अमल हो सकता है। अध्यक्ष महोदय, कई माननीय सदस्यों ने अपने इलाके के सवालों को उठाया है। मैंने उनके सवालों को गंभीरतापूर्वक सुना है, नोटस भी लिये गये हैं। जिन सवालों को माननीय सदस्यों ने उठाया है उनमें से हर एक पर हम कया-कया कर सकते हैं, कया करने की स्िथति में हैं, उसका विस्त्ृात जवाब हम उनको देंगे। हमारे नार्थ ईस्ट के एक साथी ने सवाल उठाया। नार्थ ईस्ट का जहां तक सवाल है, उनको मैं आश्वस्त करना चाहता हूं, केन्द्र सरकार का यह फैसला है कि जो भी बजटीय सहायता है उसकी दस प्रतिशत की धनराशि का व्यय नार्थ ईस्ट इलाके में होना है। हम उनको आश्वस्त करना चाहते हैं कि इस वादे की पूर्ित होगी। हम इस बार के बजट में जो हमारे पास किलयर्ड प्रोजेकटस थे, उन्हीं पर हम पैसा दे सकते थे। लेकिन जिनमें किलयरेंस नहीं मिला है उस पर हम टोकन प्रोविजन भी कर सकते थे, जो कि हमने किया है। कलीयरेंस लेने के लिए हम कदम बढ़ा रहे हैं और किलयरेंस लेकर जो हम खर्च करने के लिए वचनबद्ध हैं, वह खर्च जरूर किया जायेगा।

  अध्यक्ष महोदय, जम्मू कश्मीर के बारे में सवाल उठाये गये ... (व्यवधान) एक-एक करके सारी बात हो जायेगी, आप मेरी बात सुनिये। जम्मू कश्मीर के हमारे साथी बोल रहे थे। उस पर मैंने इंटरवीन करके इसकी चर्चा की है और भी जो दूसरे प्रोजेकटस के संबंध में चर्चा आई है उसके संबंध में भी हम चर्चा करेंगे कि उनके लिए अधिक से अधिक व्यवस्था हो सके।

  यदि और जरूरत पड़ेगी तो हम प्रयत्न करेंगे कि उनके लिए अधिक से अधिक व्यवस्था हो सके। यदि फिर भी जरूरत पड़ेगी तो हम सदन के समक्ष आयेंगे। लेकिन हम इस सदन से जो उम्मीद करते हैं, जो समर्थन की अपेक्षा रखते हैं, वह यह है कि इन सारे मामलों पर एक दृष्िटकोण अपनाया जाना चाहिए। अब यह नहीं समझ लेना चाहिए कि रेलें जो चाहें सब कुछ कर सकती हैं। रेलों की भी कठिनाइयां है और उन कठिनाइयों के प्रति भी सदन को ध्यान देना होगा और उन कठिनाइयों से उबारने के लिए भी कदम बढ़ाना होगा, हम यह उम्मीद करते हैं। अपनी सीमित संसाधनों से रेलों से जो कुछ भी बन पड़ रहा है वह सेवाएं जारी रख रही है। कई घोषणाएं की गई हैं - जो सीनियर सिटीजन्स हैं, उनको सुविधाएं दी गई हैं। जो बेराजगार युवा वर्ग इंटरव्यू के लिए जायेगा, उसको भी हमने सुविधा प्रदान की है। रेलवे के अंदर जो ओ.बी.सी. एसोसिएशंस हैं, उनको भी रेलवे के स्तर पर मान्यता दी जायेगी। जिस तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग हैं, उनको जिस प्रकार से अपनी बात रखने का अधिकार मिला है, उसी प्रकार से ओ.बी.सी. ग्रुप को भी अधिकार मिलेगा, इसका प्रावधान किया है। यह अधिकार कि उनकी बढ़ोत्तरी कैसे हो, प्रांत लैवल पर यह अधिकार उनको कैसे मिले, इसके बारे में हम सब लोग कदम बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा नियुकित में जो बैकलॉग है उस बैकलॉग को कैसे दूर किया जाए, इसके बारे में भी कदम उठाये जा रहे हैं और इन सब चीजों के बारे में भी चर्चा की है। कुमारी ममता बनर्जी (कलकत्ता दक्षिण) : माइनोरिटीज को भी इंकलूड कर दीजिए। श्री नीतीश कुमार : है, नीचे के लैवल पर, रह जगह रिक़ूटमेंट के लैवल पर उनके लिए व्यवस्था है। रेलवे में पिछले दिनों कुछ कदम उठाये गये हैं। कुछ माननीय सदस्यों ने रेलवे रिक़ूटमेंट को लेकर सवाल भी उठाये। कई प्रकार की शिकायतें सुनने में आ रही थीं। यहां सदन के अंदर भी लोगों ने शिकायतें की थीं, सदन के बाहर भी शिकायतें हो रही थीं। एक चर्चा का विषय बन गया था कि रेलवे में रोजगार देना भी एक रोजगार बन गया है। इसलिए उस स्िथति से मुकित पाने के लिए हमने कुछ निर्णय लिये और कुछ कदम उठाये हैं। उसी निर्णय के तहत रेलवे रिक़ूटमेंट बोर्ड १९ हैं, उसमें दो चेयरमैंन यू.पी.एस.सी. के माध्यम से बहाल हुए थे, उनको छोड़कर बाकी १७, जिनमें १२ गैर सरकारी थे और पांच सरकारी थे, उन लोगों को एक साथ बदलने का फैसला लिया। ... (व्यवधान) आप पूरी बात सुन लीजिए। हम ज्यादा नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन पूरी बात संक्षेप में ही हम रख देना चाहते हैं। हमने उसमें यह प्रयास किया कि इसमें पारदर्िशता आये, इसकी विश्वसनीयता बने। हमें शिकायतें मिलती थीं कि ब्लैंक कापी एग्जामिनेशन हाल में जमा हो जाती है और कंप्यूटर में जाने के पहले उसको भर दिया जाता है। इस तरह से यह धंधा चल रहा था। हम लोगों ने एक नया प्रयोग किया है, अब परीक्षा में जो आंसर शीट दी जायेगी वह कार्बनलैस डुप्लीकेट कापी होगी और जो ऊपर के पेज पर लिखा जायेगा उसका एक दूसरी कापी पर इनप्रिंट आ जायेगा। हम लोगों ने १९ रेलवे रिक़ूटमेंट बोर्ड के ऊपर इनको नियंत्रित करने के लिए उनको दिशा-निर्देश देने के लिए, उनका मार्गदर्शन करने के लिए रेलवे बोर्ड के स्तर पर रेलवे रिक़ूटमेंट कंट्रोल बोर्ड बनाया है। जब एग्जामिनेशन हाल में परीक्षार्थी परीक्षा देगा, परीक्षा देने के बाद वह कापी पर जो भी लिखेगा, वह जितना ऊपर होगा, उतना ही कार्बनलैस डुप्लीकेट कापी पर नीचे अंकित हो जायेगा। नीचे वाली डुप्लीकेट कापी एग्जामिनेशन सैंटर से ही सील्ड कवर में दिल्ली रेलवे रिक़ूटमेंट कंट्रोल बोर्ड के पास आंसर शीट चली आयेगी, ऊपर की ओरिजनल कापी एग्जामिनेशन सैंटर से ही सील्ड कवर में इवेलुएशन सैंटर में जायेगी। वे कापियां रेलवे के चेयरमैन या अधिकारी के घर में नहीं जायेंगी, कयोंकि सारा गोरखधंधा किसी के घर में कापियां जाती थीं, वही से शुरू होता था। श्री ब्रज किशोर त्रिपाठी (पुरी): कवशचन के बारे में कया कर रहे हैं? श्री नीतीश कुमार : कवश्चन तो ऑब्जेकिटव होता है। कवशचन चार प्रकार के होंगे। माननीय सदस्यों को अखबार भी पढ़ना चाहिए और अगर वे चाहें तो चार-पांच पेज की गाइडलाइंस हैं उनको भी पढ़ लें। ऑब्जेकिटव टैस्ट है तो चार सैट कवश्चन पेपर होंगे और अगल-बगल के परीक्षार्िथयों को चार भिन्न किस्म के सैट दिये जायेंगे। ताकि वे कदाचार का प्रयोग न कर सके और इसके बाद भी अगर बड़े पैमाने पर कोई कदाचार होता है तो वजिलेंस के लोग एग्जामिनेशन सैंटर पर नजर रखेंगे। अगर वहां कदाचार हुआ है, अगर अनफेयर मीन्स अडाप्ट किया गया है तो उस सैंटर के एग्जामिनेशन को कैंसिल कर दिया जायेगा, यह निर्णय भी लिया जा चुका है। इस तरह से जिस तरह की बीमारी थी, सोच-समझकर हम लोगों ने उसका इलाज करने की कोशिश की है। लेकिन कहावत है - अलीगढ़ में ताला निकलता है तो साथ-साथ चाभी भी निकलती है। अब हम लोगों ने नया प्रयोग किया है। अब तक जितनी चोरियां, जितनी बेईमानी होती थी, उसका इलाज हमने निकालने की कोशिश की है। आगे यदि कोई धांधली करने की कोशिश करेगा, हम उसका भी यथोचित उपाय निकालने की कोशिश करेंगे। फिर भी, पहले रिक़ूटमेंट के मामले में जैसा वातावरण था, हमने उसमें सुधार लाने की कोशिश की है ताकि रेलवे में मैरिट और सिर्फ मैरिट के आधार पर चयन हो सके। इसके अलावा जो खास वर्ग के लोग हैं, जिन्हें आरक्षण के द्वारा संरक्षा दी गई है, उनके हितों की अवहेलना न हो, उनके हितों को अनदेखा न किया जाए, इसके लिए उन वगर्ों के एक-एक प्रतनधि को हमने इंटरव्यू बोर्ड में रखा है जो उनके हितों की रक्षा के लिए वहां मौजूद रहेगा। रिक़ूटमैंट में ८५ प्रतिशत अंक रटिन टैस्ट के होंगे और १५ परसेंट अंक इंटरव्यू के लिए रखे गए हैं तथा ऐसी व्यवस्था करने की कोशिश की गई है ताकि रिक़ूटमेंट में पारदर्िशता लाकर, विश्वसनीयता लाकर, रेलवे में मैरिट और सिर्फ मैरिट के आधार पर ही नौकरी मिले। यदि इसमें कोई धांधली करने की कोशिश करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा, ऐसा हमने इंतजाम करने की कोशिश की है। इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।

  पर्यावरण के सवाल को लेकर लोगों का चिन्तत होना स्वाभाविक है। पौलिथीन के बढ़ते प्रयोग से लोगों को चिन्ता होती है, जिसके चलते पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है कयोकि पौलिथीन विनष्ट नहीं होता। रेलवे में बड़े पैमाने पर पौलिथीन का प्रयोग हो रहा था, बैडरोल्स भी पौलिथीन मे पैक करके दिए जाते थे जिससे नुकसान होता था। इसलिए हम लोगों ने निर्णय लिया कि रेलवे में पौलिथीन के प्रयोग को कम-से-कम किया जाए, न के बराबर कर दिया जाए, रेलवे में पौलिथीन का प्रयोग न हो, इस संबंध में फैसला लिया जा चुका है। अब रेलों में जितने बैडरोल्स दिए जा रहे हैं, वे कागज मैं पैक करके दिए जाएंगे।

  पहले रेलों में मिट्टी के कुल्हड़ में दही दिया जाता था, उसके बाद पतले प्लास्िटक के गिलास में दिया जाने लगा लेकिन पिछले महीने से हमने प्लास्िटक के गिलासों की विदाई कर दी है और अब दही मिट्टी के कुल्हड में दिया जा रहा है ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। हमने फिर से मिट्टी के कुल्हड का अधिक से अधिक प्रयोग करने का निश्चय किया है। हमारा प्रयास होगा कि चाय भी मिट्टी के कुल्हड में दी जाए। इन सब बातों को मैं इसलिए कहना चाहता हूं कयोंकि बहुत से यात्री वभिन्न वगर्ों के होते हैं, कुछ लोगों के मन में लगता है कि कुल्हड में हम चाय आदि न लें। श्री लालू प्रसाद : इससे कुम्हार लोगों को रोजगार मिलेगा, यह अच्छा काम आपने किया है। श्री नीतीश कुमार : इसीलिए ऐसा कदम उठाया गया है कि अब पतले प्लास्िटक के गिलास के स्थान पर बायो-डिग्रेडेबल मैटरियल का इस्तेमाल किया जाए ताकि पर्यावरण को किसी तरह का खतरा उत्पन्न न हो। श्री लालू प्रसाद : चार गिलास मिलकर एक गिलास बनता था। श्री नीतीश कुमार : इसमे पैसे की बर्बादी के साथ-साथ, यह पर्यावरण को भी प्रदूषित करता था। किसी दूसरे विषय में आप भले ही हमारा विरोध करें, इस मामले में आप हमारा समर्थन कर रहे हैं। श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : हमने इसलिए कहा कयोंकि आप स्वदेशी की बात करते हैं, कुल्हड भी स्वदेशी है और इससे कुम्हार लोगों को रोजगार मिलेगा। श्री नीतीश कुमार : आपने ठीक फरमाया और हम इसीलिए कर रहे हैं। इसके साथ-साथ रेलवे में जितना कपड़ा परचेज किया जाता है, उसके संबंध में निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि अब रेलवे में हैंडलूम का कपड़ा ही इस्तेमाल किया जाए ताकि इससे दस्तकारों को काम मिल सके - ऐसी व्यवस्था हमने की है। ऐसे ही एक-से-एक खूबसूरत शकल में आजकल पत्तल आ रही हैं, हमने निश्चय किया है कि अब पत्तल के दोने का इस्तेमाल करने की तरफ आगे बढ़े ... (व्यवधान) मैं उस पर आ रहा हूं, उसके संबंध में कदम उठाए जा रहे हैं। मेरे ख्याल से प्लास्िटक और पौलिथीन की पर्यावरण से दुश्मनी है, इससे हमारे नेता विरोधी दल को कोई एतराज नहीं होगा। श्री आनन्द मोहन (शिवहर) : रेलों के स्थान पर आप देश में बैलगाडी शुरू करा दीजिए।

... (व्यवधान) श्री नीतीश कुमार : आप अपने पहले के भाषण की याद कीजिए। ऐसा मत करिए कि खिसकते खिसकते उधर ही चले जाएं। आपका इधर आना ज्यादा बेहतर रहेगा। यहां एक सवाल सिकयोरिटी और सेफटी को लेकर उठाया जाता है। सेफटी के मामले में मौडर्नाईजेशन के लिए, अपग्रेडेशन के लिए, सिगनलिंग एंड टेली-कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पहले की तुलना में हमने काफी अधिक धन की व्यवस्था की है। ट्रैक रिन्यूअल के लिए, जैसा मैने पहले कहा कि मानवीय भूलों के चलते आजकल ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं इसलिए ज्यादा से ज्यादा ट्रैक रिन्यूअल तथा ट्रैक मेन्टेनैंस पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। इसके साथ-साथ एम्पलाइज की ट्रेनिग पर भी जोर दिया जाए, उनके लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हो - इस ओर भी हम ध्यान दे रहे हैं। इसके अलावा सिकयोरिटी के मामले में सैबोटेज की चर्चा होती है। सिकयोरिटी ऐसी चिन्ता का विषय है जिसके चलते ट्रेनों में घटनाएं होती हैं, रेलवे ट्रैक पर भी घटनाएं होती हैं जो हम सबके लिए चिन्ता का विषय है। इसे राजनैतिक विषय नहीं बनाया जाना चाहिए कयोंकि यह ऐसा विषय बन गया है जिस पर सभी चन्ितत हैं। इसका समाधान होना चाहिए। अगर कहीं कोई सैबोटियर या मिसक़िएंट अपना काम कर देता है, उससे बदनामी रेलवे की होती है। आज रेलवे के पास कोई अख्त्यार नहीं हैं। रेलवे के पास रेलवे प्रोटैकशन फोर्स है लेकिन उसका दायित्व सिर्फ रेलवे की सम्पत्ित की रक्षा करना है। उनके पास पुलिस के अधिकार नहीं है, वे कोई इन्वैस्टीगेशन नहीं कर सकते, कुछ नहीं कर सकते। यह दायित्व गवर्नमैंट रेलवे पुलिस का है, जिसका ५० प्रतिशत खर्च रेलवे विभाग वहन करता है। उनके साथ हमारी कई मीटिंग होती रहती हैं तथा होम मनिस्ट्री लेवल से भी उन्हें निर्देश दिए जाते हैं। इन सबके बावजूद परस्िथति कुछ बिगड़ती जा रही है जो सब के लिए चिन्ता का विषय है। इस विषय में राज्य सरकारों, रेलवे विभाग और केन्द्रीय सरकार सबको मिलकर कोई फैसला लेना पड़ेगा ताकि रेलों में, पटरियों पर कहीं कोई सैबोटेज कर दे तो उसके संबंध में कया कार्यवाही हो, किस प्रकार रेलवे सम्पत्ित की सुरक्षा की जाए। चलती ट्रेनों में जो अपराध होते हैं, चूंकि आर.पी.एफ. का दायित्व सिर्फ रेलवे सम्पत्ित की सुरक्षा करना है, लेकिन गाड़ी को एस्कौर्ट करने के लिए, गार्ड करने के लिए आर.पी.एफ. का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन अकेले आर.पी.एफ. इस काम को नहीं कर सकती। जी.आर.पी.एफ. की टोली में भी आर.पी.एफ. के जवान होते हैं लेकिन नियंत्रण और नेत्ृात्व जी.आर.पी. के हाथ में रहता है। ऐसी स्िथति में, सुरक्षा के सवाल को लेकर बारबार चिन्ता व्यकत की जा रही है और वह चिन्ता जैन्यूइन है। इस मामले में रेलवे के पास उस ढंग के अधिकार नहीं है, वैसे रेलवे के अधिकारी दौड़-दौड़ कर सब जगह जाते हैं, को-आर्िडनेशन मीटिंग्स भी होती हैं, कभी सूचना प्राप्त करने में कठिनाई होती है लेकिन हर सवाल का जवाब रेलवे को देना पड़ता है। इसलिए स्टेटस पेपर में मैंने इसकी चर्चा की है। अभी नेता विरोधी दल ने कुछ बातें उधर से कहीं, इसीलिए मैं आग्रह करना चाहता हूं कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और दलगत भावना से ऊपर उठकर, सभी को इस दिशा में सोचना होगा अन्यथा क़ाइम करने वाले लोग क़ाइम करते रहेंगे और हम लोग इसी विवाद में पड़े रहेंगे कि यह दायित्व किसका है, कौन इसे ठीक करेगा, कौन कार्यवाही करेगी। इसलिए मैं आपसे अपील करूंगा कि हमें इस सवाल पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।

... (व्यवधान)

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): The Government should bring a Status Paper some time in the next Session. श्री नीतीश कुमार : हम इस पर डिस्कशन के लिए बिल्कुल तैयार हैं, इसीलिए हमने इसे सदन में रखा है। इस सवाल पर अगर अलग से चर्चा होती है तो उसका स्वागत होना चाहिए कि किसके कया अधिकार हों। इसमें रेलवे रनिंग स्टाफ के लोगों को कुछ अधिकार दिए जा सकते हैं। ये तमाम चीजें ऐसी हैं जिनके संबंध में कानून होते हैं लेकिन जब उस पर कोई सर्वानुमति बनेगी तभी किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है। श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) : आर.पी.एफ. की एसोसिएशन का जो सवाल है, उसे भी देखिए। श्री नीतीश कुमार : वह आपका परमानैंट विषय है, उस पर अलग से चर्चा करेंगे। हमारे यहां कुछ राज्य और क्षेत्र ऐसे हैं, कुछ यूनियन टैरिटरी ऐसी हैं जहां अभी तक रेलें नहीं पहुंची हैं। खासकर लक्षयद्वीप से मांग की जाती हैं कि वहां रेलें चलाई जाएं। अंडमान निकोबार तथा सकिकम के लोगो की तरफ से भी ऐसी मांग उठती है। यहां पी.एम. सईद साहब बैठे हैं जो इस सदन के सबसे वरिष्ठ संसद-सदस्यों में से एक हैं। मनोरंजन भकत साहब भी बैठे हैं। उनकी तरफ से भी चर्चा की जाती है। अंडमान में पहले रेल हुआ करती थी लेकिन अब नहीं है। सईद साहब के यहां बच्चों को दिखाने के लिए कि रेल कया होती हैं, टॉय ट्रेन दिखा दी जाती है। हम कोई तारीख तो नहीं बता सकते कि कब तक उनके यहां रेल पहुंच जाएगी लेकिन अंडमान में सर्वे चल रहा है ।

... (व्यवधान) श्री विलास मुत्तेमवार (नागपुर): अंडमान निकोबार के अलावा देश में कई ऐसे जिले और क्षेत्र हैं जहां लोगों ने अभी तक रेलें नहीं देखी हैं, आप उनकी भी बात कीजिए।

  श्री नीतीश कुमार : अभी आइसलैंड की बात हो रही है, इनलैंड की बात हम अभी नहीं कर रहे हैं।

15.00 hrs. श्री नरेश पुगलीया (चन्द्रपुर) : अध्यक्ष महोदय, वह नकसलाइटस अफैकटेड एरिया है।

... (व्यवधान) श्री नीतीश कुमार : अब अध्यक्ष महोदय, हम आइलैंड की बात कर रहे हैं, तो ये इनलैंड पर आ गए हैं। मुत्तेमवार साहब, कया आप नहीं चाहते कि हम आइलैंड के बारे में कुछ बताएं। जो हमारे देश की एकता का एक हिस्सा है, कया हम उस पर कुछ नहीं कहें?

... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, मैं इसके संबंध में कहना चाहता हूं कि हमारी जो बात हुई है और जो उनकी भावना है, उसको ध्यान में रखते हुए हम लोगों ने यह फैसला किया है कि एक ट्रेन के नाम के साथ सकिकम का नाम जोड़ा जाए, एक ट्रेन के साथ लक्षद्वीप का नाम जोड़ा जाए और एक से साथ अंडमान का नाम जोड़ दें। श्री मनोरंजन भकत (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) : अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री महोदय, से अनुरोध है कि अकेला "अंडमान" नहीं बल्िक "अंडमान निकोबार" जोड़ा जाए।

... (व्यवधान) श्री नीतीश कुमार: अध्यक्ष महोदय, निजामुद्दीन-कोच्चीन-मंगला एकसप्रैस का नाम "अंडमान-मंगला एकसप्रैस" करने जा रहे हैं। नई दिल्ली-जलपाईगुड़ी एकसप्रैस का नाम "महानन्दा-सकिकम एकसप्रैस" कर रहे हैं।

... (व्यवधान)

SHRI N.K. PREMCHANDRAN (QUILON): Are these new trains? ....(Interruptions)

SHRI NITISH KUMAR: We are renaming the existing trains. ....(Interruptions)

SHRI N.K. PREMCHANDRAN (QUILON): We are demanding a new train. ....(Interruptions)

SHRI NITISH KUMAR: Let me complete. ....(Interruptions)

SHRI N.K. PREMCHANDRAN (QUILON): He may please announce some new trains. ....(Interruptions) What is the use of it? ....(Interruptions)

SHRI N.N. KRISHNADAS (PALAKKAD): We oppose it. What is the urgent need of renaming ....(Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Krishnadas, please take your seat.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nitishji, please address the Chair, not the Members.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please take your seat.

... (Interruptions) श्री नीतीश कुमार: अध्यक्ष महोदय, जम्मू तवी-उधमपुर-नई दिल्ली चेन्नई एकसप्रैस का नाम "अंडमान-ऊधमपुर" एकसप्रैस कर रहे हैं। इसके अलावा ... (व्यवधान) विलास मुत्तेमवार जी, आपको यह बात कल रात को बतानी चाहिए थी। कल हम दोनों मंत्रियों ने रात को बैठकर सभी माननीय सदस्यों की बातें सुनीं और नोटस लिए, लेकिन कल आपने ये बाते नहीं बताईं। आपने तो नींद भर सो लिया और अब आप यहां पर ये बातें बता रहे हैं।

... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, जो प्रमुख आइलैंडस हैं उनको कंप्यूटराइज्ड रिजर्वेशन देने के बारे में भी हम लोगों ने फैसला किया है। इसके बारे में कार्रवाई भी हो रही है। जो लोकल स्टेशंस हैं उनके साथ टाईअप किया जाएगा और उनके साथ बातचीत की जाएगी। इस फेसलिटी को हम इम्प्रूव करने की कोशिश करेंगे। अध्यक्ष महोदय, बहुत ज्यादा माननीय सदस्यों ने जो सवाल उठाया वह है अनमैंड रेलवे क़ासिंग को मैन्ड किए जाने और रोड ओवर ब्रिज बनाए जाने के बारें में है। जो आज तक की व्यवस्था है उसके अनुसार रेलवे क़ासिंग पर मैनिंग के लिए भी राज्य सरकारों को आगे आना होगा। उनको भी खर्च वहन करना होगा। इसी प्रकार से अगर रोड ओवर ब्रिज बनाना है, तो भी राज्य सरकार को आधा खर्च वहन करना होगा। मांगें आती हैं, लेकिन उनकी कास्ट शेयर करने के प्रस्ताव जो राज्य सरकारों की ओर से आने चाहिए वे नहीं आते हैं या उनको पैसा देने में दिककतें आती हैं। इसलिए इस पर भी हम आपके साथ बात करके सहमति बनाना चाहते हैं। उस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह काम अकेले रेल की सामर्थय नहीं है। इसके बारे में भी हम लोगों को सोचना चाहिए।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करते हुए आपसे आग्रह करूंगा कि जो रेलों की जो मांगें प्रस्तुत की गई हैं, उनको स्वीकार करें और उनको पास करें।

... (व्यवधान) कश्मीर की रेलवे बनाएंगे। कश्मीर के बारे में चर्चा भी हुई है। २४ जून, १९९८ को ग्ृाह मंत्री जी ने कश्मीर में एक बैठक बुलाई है। उस बैठक में रेल के अधिकारी और हम लोग भाग लेने जा रहे हैं।

... (व्यवधान) मैं पश्िचम बंगाल के संबंध में एक बात का उल्लेख करना चाहूंगा, हालांकि पिछले साल से बजट आउटले इस साल ज्यादा है, लेकिन हमें सुश्री ममता बैनर्जी ने मिलकर बताया है और एकलाखी-बलूरघाट-दीघा तथा मैट्रो प्रोजैकट दमदम-दरिया के बारे में बात की है। हम बंगाल के तमाम साथियों को और सुश्री ममता बैनर्जी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि इस मामले में प्रगति के लिए जो भी आवश्यक धनराशि की जरूरत होगी, उसके अनुसार धनराशि दी जाएगी। पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी और मैट्रो सिस्टम के लिए जो भी केन्द्र सरकार को पहल करना है वह करेगी। मेरा आग्रह है कि राज्य सरकार को भी आगे आना चाहिए और उसके हिस्से का जो पैसा बनता है, वह उसे देना चाहिए जिस प्रकार से मैट्रो सिस्टम में हो रहा है, तामिलनाडु में हो रहा है, महाराष्ट्र में हो रहा है, उस प्रकार से राज्य सरकार को अपना हिस्सा देना चाहिए।

... (व्यवधान) श्री शीश राम ओला (झुंझुनू) : अध्यक्ष महोदय, हमारा राजस्थान प्रदेश, मध्य प्रदेश के बाद क्षेत्रफल और आबादी में सबसे बड़ा दूसरा प्रदेश है, लेकिन दूसरे सबसे बड़े प्रान्त के लिए रेलवे की सबसे कम सुविधाएं राजस्थान में हैं और सबसे कम धन दिया गया है। मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि राजस्थान को ज्यादा धन दिया जाए ताकि राजस्थान में रेलवे का कुछ विकास हो सके।

... (व्यवधान)

SHRI NITISH KUMAR: I have already mentioned about the North-Eastern projects. Ten per cent of the budgetary support has to be spent in the North-East...(Interruptions) Let me complete first. Why are you disturbing me? Do you not want projects? Do you just want to interrupt me? Then, I take my seat. What is this?...(Interruptions)

I have already mentioned that steps have already been initiated to take the necessary, requisite clearances for the North-Eastern projects. As soon as we get clearances, we will spend the money on them.

DEMANDS FOR EXCESS GRANTS - RAILWAYS MR. SPEAKER : I shall now put the Demands for Excess Grants (Railways) for 1995-96 to the vote of the House.

The question is:

"That the respective excess sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India to make good the excess on the respective grants during the year ended on the 31st day of March, 1996, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demands Nos. 8, 12, 13 and 14."

The motion was adopted.