Lok Sabha Debates
Discussion On The Madhya Pradesh Reorganisation Bill, 2000. (Bill Passed) on 31 July, 2000
Title: Discussion on the Madhya Pradesh Reorganisation Bill, 2000. (Bill Passed) गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी) : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं:
"""" कि विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के पुनर्गठन और उससे संबंधित विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक पर विचार किया जाये।""""
मैं एक महत्वपूर्ण विधेयक संसद के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करने जा रहा हूं। बहुत वर्ष पहले राज्यों का पुनर्गठन हुआ था और उस राज्य पुनर्गठन के परिणामस्वरूप कुछ राज्य ऐसे थे जो आकार में इतने बड़े थे कि पूरे प्रदेश का संतुलित विकास नहीं हो सका। वहां पर मांग बनी रही और उस मांग को ध्यान में रखकर वहां की विधानसभा ने सिफारिश की थी कि यह अलग राज्य बनाया जाये अर्थात् यह मांग केवल उस हिस्से की जनता की मांग नहीं है लेकिन हम पूरे के पूरे प्रदेश के लोग उसका प्रतनधि मानते हैं कि अगर छत्तीसगढ़ बन जाये, उत्तरांचल बन जाये, अगर झारखंड बन जाये तो हमारे प्रदेश का और उस क्षेत्र का भी भला होगा।
अध्यक्ष जी, हमने अपने घोषणा पत्र में यह बात लिखी थी और चुनाव के पहले जनता को वचन दिया था कि जब भी हमारी सरकार बनेगी तो १९९४ में मध्य प्रदेश विधानसभा में पारित किये इस प्रस्ताव को पूरा करेगी कि छत्तीसगढ़ नाम का एक अलग राज्य बनाया जाये। महामहिम राष्ट्रपति जी ने जब २५ अक्तूबर, १९९९ को संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया था, तब उन्होंने अपने वक्तव्य में इस बात का जिक्र किया था कि यह सरकार छत्तीसगढ़, उत्तरांचल और वनांचल राज्यों के निर्माण की दिशा में कदम उठायेगी। इस हेतु मैंने गत २५ जुलाई को सदन की अनुमति से छत्तीसगढ़ राज्य वाला विधेयक प्रस्तुत किया था जिसे आज विचारार्थ प्रस्तुत करने जा रहा हूं। इस विधेयक पर अभी तो मैं ज्यादा नहीं कहूंगा लेकिन आपकी बातें सुनकर उसका उत्तर देते हुये कुछ बातों पर बल दूंगा।
इस समय तो मैं तथ्यों के रूप में इतना ही बताना चाहूंगा कि मध्य प्रदेश के १६ जिलों का यह छत्तीसगढ़ राज्य बनेगा। आज जो मध्य प्रदेश के जिले हैं, उनमें से १६ जिले इस छत्तीसगढ़ राज्य का अंग होंगे और जनसंख्या की द्ृष्टि से एक चौथाई से अधिक जनसंख्या इस प्रदेश में होगी। लेकिन इसके स्वरूप की एक विशेषता है कि अधिकांश जो वनवासी क्षेत्र हैं, वे इस प्रदेश में आते हैं। अगर मैं आंकड़ों की बात करूं तो इस समय कुल मिलाकर पूरे मध्य प्रदेश की जनसंख्या ६६१ लाख है जिसमें से छत्तीसगढ़ में १७६ लाख होंगे। इसमें से ७८ लाख वनवासी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के होंगे। इसीलिए इस नये प्रस्ताव का जो स्वरूप होगा वह एक प्रकार से वशिष्ट होगा, इस बात को ध्यान में रखकर वहां की प्रदेश की जनता को भी और हम सबको भी लगा कि इनकी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए और इतने बड़े राज्य में उनकी जो उपेक्षा होती रही है, वह समाप्त हो और इस क्षेत्र का भी संतुलित विकास हो, इस उद्देश्य से यह आपके सामने प्रस्तुत किया गया है। अध्यक्ष जी, इस समय मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है। मैं धन्यवाद जरूर दूंगा कि सदन ने पिछले सप्ताह इन तीनों विधेयकों को पेश होने दिया, अपने-अपने उनके मतभेद हैं कहीं-कहीं पर। छत्तीसगढ़ के बारे में तो बहुत कम मतभेद हैं, व्यावहारिक रूप से हैं ही नहीं। यहां तक कि एक संशोधन भी प्रस्तुत किया है तो मैंने देखा है कि वहां के जो दो प्रमुख राजनीतिक दल हैं, कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी, इन दोनों के प्रतनधियों ने मिलकर एक संशोधन दिया है। मुझे नहीं लगता कि उसमें कोई दिक्कत आएगी क्योंकि वह व्यावहारिक है, लेकिन बाकी जो दो प्रस्ताव हैं जिनमें थोड़े-थोड़े मतभेद होते हुए भी मोटे तौर पर सब लोगों ने जिस प्रकार से उनका स्वागत किया है, उसके कारण उन क्षेत्रों की जनता इस सदन के प्रति बहुत-बहुत आभारी रहेगी, हमेशा कृतज्ञ रहेगी क्योंकि उनकी दशाब्दियों की रही एक आस पूरी होने वाली है।
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : २०,००० आदिवासी इसके विरोध में आज दिल्ली की सड़कों पर हैं।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मुझे इस सबकी जानकारी है। मैं उस विवाद में नहीं जाना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि इस मामले में कम से कम विवाद हो तो अच्छा है। इस समय तो मैं छत्तीसगढ़ विधेयक को सदन के सामने विचारार्थ प्रस्तुत करता हूं और मुझे उम्मीद है कि सदन सर्वसम्मति से इसे स्वीकार करेगा।
MR. SPEAKER: Motion moved:
"That the Bill to provide for the reorganisation of the existing State of Madhya Pradesh and for matters connected therewith, be taken into consideration. "
MR. SPEAKER: Amendment No. 1. Shri Varkala Radhakrishnan, are you moving your amendment?
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): I beg to move:
"That the Bill be circulated for the purpose of eliciting opinion thereon by the 29th December, 2000 " (1) अध्यक्ष महोदय : अमेण्डमेंट नंबर २, रघुवंश प्रसाद सिंह क्या आप मूव कर रहे हैं?
डॉ.रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : मैं प्रस्ताव करता हूं :
" कि विधेयक को उस पर १० नवम्बर, २००० तक राय जानने के प्रयोजनार्थ परिचालित किया जाए। " (2) MR. SPEAKER: Amendment No.3 - Shri Basudeb Acharia, Shri Swadesh Chakraborty, and Shri Hannan Mollah.
SHRI SWADESH CHAKRABORTY (HOWRAH): I beg to move:
"That the Bill be circulated for the purpose of eliciting opinion thereon by the 15th November, 2000. " (3) MR. SPEAKER: Amendment No. 4 - Shri Basudeb Acharia, Shri Swadesh Chakraborty, and Shri Hannan Mollah.
SHRI SWADESH CHAKRABORTY (HOWRAH): I beg to move:
"That the Bill to provide for the reorganisation of the existing State of Madhya Pradesh and for matters connected therewith, be referred to a Select Committee consisting of 9 Members, namely:--
Shri Lal Krishna Advani Shri Ajoy Chakraborty Shri Sanat Kumar Mandal Shri Rupchand Pal Shri Amar Roypradhan Dr. Raghuvansh Prasad Singh Shri Hannan Mollah Shri Swadesh Chakraborty; and Shri Basudeb Acharia with instructions to report by the 1st day of the first week of the Budget Session, 2001. " (4) MR. SPEAKER: Now, Shri Shyamacharan Shukla.
श्री श्यामाचरण शुक्ल ( महासमुन्द) : अध्यक्ष महोदय, हमारी द्ृष्टि से आज एक बड़ा ऐतिहासिक दिन है क्योंकि हमारे पूर्वी मध्य प्रदेश का जो हिस्सा प्राचीन समय में दंडकारण्य और दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था, भारत गणराज्य को नयी ताकत और नयी चमक देने के लिए आज तैयार हो रहा है। वैसे हमें इस नये राज्य के बनने का बहुत हर्ष है और मन बहुत प्रसन्न हो रहा है। थोड़ी कसक और थोड़ा दर्द इस बात का भी है कि हमारे बहुत से पुराने साथी छूट रहे हैं, बहुत से इलाके छूट रहे हैं जो हमारे साथ पिछले ४४ साल तक रहे। लेकिन यह ऐतिहासिक प्रक्रिया है और ऐसा होना लाजिमी था। हमारे इस इलाके में जब अंग्रेजी राज था तब भयंकर गरीबी थी। यह इलाका ऐसा है जहां के लोग वन उपज के ऊपर निर्भर रहते थे या फिर जो एक फसल होती थी, पानी गिरता था, रेतीली जमीन, जल्दी सूखने वाली जमीन में हर दो-तीन साल बाद दुष्काल पड़ा करता था। धान और चावल के कोई दाम नहीं मिला करते थे। वह भयंकर गरीबी का इलाका था। उस जमाने में भी जहां गेहूं होता था, कपास होता था, जो काली मिट्टी के इलाके थे, वे फिर भी सम्पन्न थे लेकिन छत्तीसगढ़ बहुत गरीब था। बर्माराईज आता था और इसलिये किसान को चावल का कोई दाम नहीं मिलता था । आजादी के बाद बहुत कुछ हुआ। पहले १० वर्षों में जब नागपुर राजधानी थी तब छत्तीसगढ़ में एक भी सरकारी कालेज नहीं था। वहां तमाम इंजीनियरिंग कालेज, संस्कृत कालेज, आयुर्वेदिक कालेज आदि इंस्टीटयूशन्स खुले। सिंचाई के लिए बांध बने। भिलाई में इस्पात का कारखाना खुला। कोरबा में हसदू बांध बना। भिलाई इस्पात कारखाने के आने से चारों ओर स्टील बेस्ड इंडस्ट्री का विकास होना शुरू हुआ। रोलिंग मील और स्टील कास्िंटग के तमाम कारखाने आने शुरू हुए। साथ ही साथ नये भारत में जो नीतियां थीं, उनकी वजह से किसानों को धान के सही दाम मिलने लगे। हरित क्रांति का जमाना आने पर जो सिंचाई के भाग थे, सिंचित इलाके थे, वहां कुछ सम्पन्नता दिखाई देने लगी। नये मध्य प्रदेश में भोपाल राजधानी बनने के बाद काफी काम हुआ लेकिन पिछले दो दशकों से न मालूम क्या वजह थी कि सारा विकास थम गया। १९७५-७६ में जो सिंचाई योजनायें अधूरी थीं, वे आज तक १५१८ hrs. (Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair) अधूरी हैं। वहां कोई काम नहीं होता । किसी प्रकार से विकास के कामों में ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से यह सामान्य बात होने लगी कि अगर विकास होना है तो अलग प्रदेश जब बनेगा तभी यह संभव है अन्यथा यह जो उपेक्षा हो रही है, दुर्लक्ष्य हो रहा है, यह बंद नहीं हो पायेगा। प्रारंभिक दिनों में कांग्रेस पार्टी ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में भी इसे शामिल किया गया कि हम अलग राज्य बनायेंगे। इसी वजह से हमने १९९४ में विधान सभा में इसका प्रस्ताव भी पारित किया। हमारे साथियों ने जो आज सामने बैठे हैं, लोक सभा के चुनाव के वक्त इस मुद्दे को अपनाया। इस तरह से सर्वमान्य यह मांग हो गई। हम सबको बहुत संतोष है कि आज वह मांग पूरी होने जा रही है। इसमें श्रेय की स्पर्धा की जरूरत नहीं है क्योंकि वैसे तो यह श्रेय मध्य प्रदेश की जनता और खासकर छत्तीसगढ़ की जनता का है जिसकी वजह से आज यह नया राज्य स्थापित होने जा रहा है। …( व्यवधान) यह जरूर है कि हमारे आदिवासी भाइयों में कुछ ऐसी भावना है कि उनका इलाका दो टुकड़ों में बंट रहा है जो पुराना गोंडवाना कहलाता था।
उसके आस-पास के जिलों की तरफ से भी मांग उठती है कि हमें छत्तीसगढ में शामिल किया जाए। बालाघाट, शहडोल और सीधी तक के लोग ऐसा कहते हैं। लेकिन आज इन मामलों में पड़ने की जरूरत नहीं है क्योंकि उड़ीसा के पश्चिमी जिले से भी मांग उठती है। वहां पर एक आंदोलन चलता है जो महाकौशल आंदोलन कहलाता है क्योंकि ये इलाका दक्षिण कौशल था, वह महाकौशल यानी ओल्ड सी.पी.एंड बरार का हिन्दी बोलने वाला इलाका था। उड़ीसा के जो जिले लगे हुए हैं, वहां भी यह मांग उठती है कि हमें पूर्वी घाट से दूर जो पहाड़ हैं, उनको पार करके समुद्र किनारे जाने में दिक्कत है। हमें छत्तीसगढ़ के साथ सब तरह की सहूलियत है। सम्बलपुर वगैरह की भाषा भी छत्तीसगढ़ बोलने वाली है। अंग्रेजी राज में तो रायपुर, बिलासपुर जिले के ये सब हिस्से भी थे। लेकिन इस तरह से हमें आज छत्तीसगढ़ के राज के निर्माण को उलझाना नहीं है। हम चाहते हैं कि पहले राज बन जाए और उसके बाद हमारे देश की द्ृष्टि से उसमें जो भी इजाफा करना है, उसे और बढ़ाना है, वे बातें बाद में ली जा सकती हैं। हम सबके लिए यह भी बहुत संतोष की बात है कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में बहुत बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके संस्कार आज भी ऐसे हैं कि वहां जात-पात का कोई ज्यादा झगड़ा नहीं है। वहां आदिवासी, गैर-आदिवासी का झगड़ा भी नहीं है, पिछड़े और अगड़े वर्ग का कोई झगड़ा नहीं है। वहां विधान सभा में ऐसे लोग चुनकर आते हैं जिनकी जाति का एक भी वोटर नहीं होता, केवल एक या दो घर होते हैं। लोक सभा में चुनकर आ जाते हैं और विधान सभा में भी चुनकर आ जाते हैं। यह हम सबके लिए बहुत ज्यादा संतोष और गौरव की बात है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत्तीसगढ़ के लोग बहुत शांतप्रिय हैं, वहां लड़ाई-झगड़े नहीं होते। आज केयुग में सबसे बड़ा गुण यह है कि अगर विकास होना है, हमारे देश को ताकत देनी है, हमारे देश का एक इलाका आर्थिक और हर द्ृष्टि से बहुत समृद्ध हो जाए, विकसित हो जाए, उसके लिए शांति और आपसी सहयोग की जरूरत होती है और वह वहां पूरी तरह से है। हम चाहते हैं कि आगे भी वह उसी प्रकार बनी रहे। पश्चिमी बंगाल में आज भी इस प्रकार का वातावरण है जहां जात-पात का कुछ ज्यादा झगड़ा नहीं होता, उसी तरह हमारे यहां भी है। सी.पी.एंड बरार के पुराने हिस्से में आज भी खण्डवा से रायगढ़ तक इसी तरह का वातावरण है। इसलिए हम सबको पूरा विश्वास है कि अब यह राज्य जरूर बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ सकेगा। लेकिन सवार्ंगीण विकास करने के लिए नए राज्य को बहुत सारी मदद की जरूरत पड़ेगी। पहले राजधानी बनाने के लिए कम से कम २००० करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को उदारमना होकर देने चाहिए और पूरे क्षेत्र के जो इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है, और बहुत सी कमियां हैं, उनके लिए कम से कम ८०००-१०,००० करोड़ रुपेय का प्रोवीजन होना चाहिए। २००० करोड़ रुपये राजधानी के लिए और ८००० करोड़ रुपये अतरिक्त देंगे तब जाकर सही विकास के रास्ते पर हमारा छत्तीसगढ़ राज्य आगे बढ़ सकेगा। जो विधेयक आया है, उसमें स्वागत योग्य बात यह है कि उसमें आपने हाई कोर्ट का भी प्रावधान किया है जो पहले नहीं किया गया था। यह हम सबके लिए बहुत संतोष की बात है। लेकिन इसमें जो एक खामी है, इसमें इलैक्टि्रसिटी बोर्ड के बारे में ठीक से प्रावधान नहीं किए गए हैं। ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहे, इसके बारे में कोई धारा, सैक्शन और आर्टिकल नहीं है जबकि १९५६ में जो राज्य विभाजन का कानून पार्लियामेंट में आया था, मध्य प्रदेश रीआर्गनाइजेशन ऐक्ट, १९५६ की धारा १०६ और १०७ में जो प्रावधान थे, मैं समझता हूं कि सुओ-मोटो हमारे मंत्री जी को स्वयं उन दोनों धाराओं को इसमें शामिल करना चाहिए क्योंकि हम केवल रहमो-करम पर नहीं रहना चाहते कि नए राज्य के लोग या केन्द्र सरकार हमारी मदद करे। आज जो बिजली का प्रवाह हो रहा है, वह एकाएक बंद हो जाए। उसे रोकने के लिए जरूरी है कि इस तरह का एक आर्टिकल जैसे धारा १०६ और १०७ में प्रावधान था, रीऑर्गनाइजेशन एक्ट, १९५६ में, उसे हमें लाना चाहिए।
धारा १०६ कहती है :
"Provisions as to certain State Electricity Boards and apportionment of their assets and liabilities The State Electricity Board constituted under the Electricity (Supply) Act, 1948, for any of the existing States of Bombay, Madhya Pradesh and Saurashtra shall as from the appointed day continue to function in those areas in respect of which it was functioning immediately before that day, subject to the provisions of this section and to such directions as may from time to time be issued by the Central Government. "
"Continuance of arrangements in regard to generation and supply of electric power and supply of water.
If it appears to the Central Government that the arrangement in regard to the generation or supply of electric power or the supply of water for any area or in regard to the development of any project for such generation or supply has been or is likely to be modified to the disadvantage of that area by the reason of the fact that it has been transferred by the provisions of the Act from the State in which the power stations and other installations for the generation and supply of such power, or the catchment area reservoirs and other works for the supply of water, as the case may be, are located, the Central Government may give such directions as it deems proper to the State Government or other authority concerned for the maintenance, so far as practicable, of the previous arrangement. "
हम लोग देख रहे थे कि अभी कुछ दिनों में जब से वहां पर बिजली की कमी हो रही थी तो मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ में यद्यपि बहुत बड़े-बड़े बिजली पैदा करने वाले, बिजली का संचार करने वाले संयंत्र हैं, सब कुछ वहां है। कोरबा के कोयले से भी एन.टी.पी.सी. के बहुत बड़े-बड़े संयंत्र लगे हैं। मध्य प्रदेश इलैक्टि्रसिटी बोर्ड के भी लगे हैं, लेकिन पावर कट छत्तीसगढ़ में मनमानी होती थी। यद्यपि वहां तमाम भरपूर बिजली पैदा हो रही है, इसलिए यह संभावना है कि आगे जाकर ये कठिनाइयां पैदा हों। इसलिए मैं आपसे यह जरूर आग्रह करूंगा कि आडवाणी जी, एक्ट में यह सुधार जरूर करने की हम सब के ऊपर कृपा करें, अन्यथा बहुत कठिनाइयां हमारे सामने आएंगी। आप जानते हैं कि बिजली का कितना महत्वपूर्ण स्थान आज हमारे जीवन में है।
उसी तरह से जो असेट्स और लायबलिटीज का बंटवारा है, उसमें आपने जो प्रावधान किया है कि जो जमीन जहां पर है, जिसकी लैंड है, वह वहीं पर रह जायेगी और वह उसकी हो जायेगी। लेकिन पिछले ४६ वर्ष में पूरे मध्य प्रदेश की जनता का रुपया बहुत सी ऐसी इमारतों में लगा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के लोगों का करीब-करीब एक तिहाई हिस्सा है। जैसे कि मध्य प्रदेश का विधान सभा भवन भोपाल में है, वहां का सैक्रेटि्रएट, डायरैक्टर्स की जो इमारतें हैं, हैड ऑफ दि डिपार्टमेंट्स की जो इमारतें हैं, रेवेन्यू बोर्ड की जो इमारतें या आफिस ग्वालियर में है और जो आवासीय व्यवस्था है, जो घर भी बने हुए हैं, प्रान्तीय स्तर की जितनी भी संस्थाएं है, उसका बंटवारा, उसका मूल्यांकन करके फिर जैसा आपने यहां पर हमारी आबादी का जो अनुपात है, उस अनुपात के हिसाब से आप उसको हिसाब-किताब के लिए बांट दीजिए, जिससे कि हमारी जनता का जो खून-पसीने की कमाई लगी हुई है, पिछले ४६ वर्षों में, उसका वाजिब हिस्सा नये राज्य को मिल सके, उसके लिए हैड ऑफ दि डिपार्टमेंट, डिप्टी डायरैक्टर, ज्योलोजी एंड माइनिंग का जो रायपुर में आफिस है, उसका हिस्सा भी हमें मिल जायेगा। इस तरह से यदि नहीं किया जायेगा तो केवल जमीन इधर-उधर हो जाने से तो काम नहीं चलेगा और जो मूवेबल असेट्स एंड गुड्स हैं, उसका तो प्रावधान किया गया है, वह ठीक है, लेकिन जो फिक्स्ड असैट्स हैं, जो जमीन के साथ जुड़े हैं, उसका भी बंटवारा सही तरीके से न होने से बहुत भारी नुकसान छत्तीसगढ़ राज्य का होगा, जो बनने वाला है। हमारे इस एक्ट में और पुराने एक्ट में एक थोड़ा सा फर्क और भी है।
वहां सर्विसेज का ऑप्शन होना चाहिए। चाहे आई.ए.एस. हो, चाहे प्रोविंशियल सर्विस हो, कर्मचारी हों या अधिकारी हों, वे किस राज्य में जाना चाहते हैं, वे अपना ऑप्शन दें। यह भी वास्तविकता है कि हरेक को उसकी पसंद की जगह नहीं दी जा सकती। राज्य के बंटवारे में संतुलन नहीं है, धरती में संतुलन नहीं है। छत्तीसगढ़ के लोग सर्विस में कम हैं इसलिए हो सकता है छत्तीसगढ़ में आने वाले कम हों, फिर भी पहले ऑप्शन ले लिया जाए। उसके बाद जो आपके डायरेक्टिव्स हों , उसके तहत काम हो। इसलिए सभी व्यक्तियों से बात करके बंटवारा करें। १९५६ में भी जब नये राज्य बने थे, यही प्रक्रिया अपनाई गई थी। जो महाराष्ट्र में जाना चाहते थे, उन्होंने अपना ऑप्शन दिया और जो नए राज्य में जाना चाहते थे, उन्होंने उसमें अपना ऑप्शन दिया। जो यहां नहीं आना चाहते थे और ऑप्शन नहीं दिया उनको वहीं रहने दिया गया। उस समय समस्या यह थी कि किस तरह उनको अपने राज्य में लें। लेकिन आज वह समस्या नहीं है, केवल बांटने की समस्या है। मैं आशा करता हूं इस ओर गृह मंत्री जी पर्याप्त ध्यान देंगे।
वाटर बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां एक भी ऐसी नदी नहीं है जो छत्तीसगढ़ के कटोरे से पुराने मध्य प्रदेश में बहती हो। सारी नदियां महानदी और शिवनाद में से होकर उड़ीसा की तरफ चली जाती हैं। मध्य प्रदेश, जिसकी राजधानी भोपाल है, उसके हमारी झगड़े की स्थिति इस कारण भी नहीं बनेगी। केवल रिहंद एक छोटी सी नदी है, वह सरगुजा से उत्तर प्रदेश जाती है। बाकी सारी नदियां उड़ीसा जाती हैं। एकाध प्रोजेक्ट हो सकता है मांडला जिले में नर्मदा की शाखा से बांध बनाकर पानी गिराकर बिजली पैदा हो सकती है। सिर्फ एक यह योजना है जो हाथ में ली जा सकती है। इसमें थोड़ा बहुत हमें एक-दूसरे से समझौता करना पड़ेगा। मैं कहना चाहता हूं कि हमारा अलगाव पूरी सद्भावना के साथ हो रहा है, किसी प्रकार की कटुता हमारे और शेष मध्य प्रदेश के बीच पैदा नहीं हुई है । इसलिए हम आशा करते हैं कि इस प्रकार की योजनाओं के लिए अगर भविष्य में जरूरत होगी तो हम उनका सहयोग ले सकते हैं और उन्हें सहयोग दे सकते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज पदार्थों की सम्पदा भारी मिकदार में है। दुनिया का शायद सबसे बड़ा आयरनओर का भंडार यहीं बैलाडीला में है। लाइम स्टोन और डोलोमाइट आदि बहुत सारे खनिज हैं, जिनसे तमाम उद्योग-धंधे चलाने में मदद मिलती है। नदियां ऐसी हैं, कि सिंचाई योजनाओं को अगर हाथ में लिया जाए तो हर खेत में पानी पहुंच सकता है।
१९७५ के बाद केवल वन सुरक्षा कानून के नाम से हमारी बहुत अच्छी योजनाएं रुकी पड़ी हैं, कोई प्रगति नहीं हुई है, क्योंकि केन्द्र ने कानून बना दिया था। यह हमारे पिछड़ेपन की निशानी है। अगर वहां जलाशय बन जाएं तो उनकी नमी से पर्यावरण को जंगलों को फायदा हो सकता है। जल संसाधन बढ़ाने के लिए इससे सम्बन्धित योजनाओं को नहीं रोका जाना चाहिए। यह हमारे पिछड़ेपन का हमारे दिमागी पिछड़ेपन का प्रतीक है। इसलिए इस तरफ भी हम आशा करते हैं कि सरकार ध्यान देगी।
किसानों की गरीबी दूर करने के लिए, हरित क्रांति का लाभ उठाने के लिए हम चाहते हैं कि सिंचाई योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। जो लम्बित योजनाएं हैं, मैंने मुख्य मंत्री रहते हुए जो योजनाएं शुरू की थीं, उन सबको आगे बढ़ाने की जरूरत है, जो कि रुकी हुई हैं। दूसरी बात यह है कि हमें केन्द्र सरकार की ज्यादा मदद की जरूरत होगी।
मैं समझता हूं कि सबसे बड़ी इस देश के लिए जो दुखद बात हुई है, ट्रेजेडी हुई है, इंद्रावती में जो बिजली बनाने की संभावना थी, बोधघाट के नीचे तीन जगह बिजली बनाने की संभावना थी, उस योजना को केवल दिमागी पिछड़ेपन ने पिछले बीस साल से रोककर रखा हुआ है। हम लोगों ने काम शुरु किया था। मैंने १९७२ में मंजूर किया था और १९७३ में बड़ी तेजी से काम शुरु किया था। १५०० मेगावाट मुफ्त में बिजली पैदा होती । वहां से बहुत कम लोगों को हटाना पड़ता और वह नदी बस्तर के पहाड़ के नीचे उतर रही है और आन्ध्रा प्रदेश तक जा रही है तथा चार जगह बिजली एक के बाद एक बार-बार बनती , उसका कोई खर्च भी नहीं आता । उसका हमने कोई उपयोग नहीं होने दिया। अभी थोड़े दिन पहले उड़ीसा को वन सुरक्षा कानून से छुट्टी मिल गई, बहुत बड़ा जलाशय इन्द्रावती के ऊपर बनाया और न केवल जलाशय बनाया बल्कि टनलिंग करके बोगदा बना कर उस पानी को उतारकर बिजली पैदा कर रहे हैं इंद्रावती का पानी कम हो गया और बचा पानी बांध बनाकर एक नाले में डाइवर्ट कर दिया गया। इंद्रावती नदी जो बस गर्मी के दिनों में सूख जाती है, हमारे मध्य प्रदेश के अंदर छत्तीसगढ़ में इंद्रावती पानी के लिए तरसने लगती है, जैसे ही अक्तूबर नवम्बर का महीना निकलता है। ये समस्याएं हैं जिनमें हमें आपकी जरूरत पड़ेगी। अगर छत्तीसगढ़ को राज्य बनाना चाहते हैं, अगर सचमुच छत्तीसगढ़ राज्य हमारे देश का आभूषण बनकर सारे देश को आर्थिक ताकत दे, हर तरह की ताकत दे, उसमें अगर आपकी मदद मिलेगी तो अवश्य ही इन कामों को हम कर सकेंगे। उड़ीसा जितनी पन बिजली पैदा कर रहा है, बोधघाट योजना से हम उतनी बिजली पैदा करके दे सकते हैं बल्कि इस पानी से तीन जगह औऱ भी बिजली पैदा हो जाएगी। जो पानी हम थोड़ी सी बिजली पैदा करने के लिए उडीसा में पानी दूसरी नदी घाटी में ले जा रहे हैं, तो इन बातों के लिए हमें आपकी मदद की जरूरत पड़ेगी। बहुत से उद्योग भिलाई स्टील प्लांट के आसपास बंद हो रहे हैं, रोलिंग मिल्स बिंद हो रही हैं, तमाम बेरोजगारी हो रही है और तेजी के साथ आर्थिक विकास में व्यवधान पैदा हो गया है। उसकी जड़ में जाकर उनके कारणों को ढ़ूढ़ना जरूरी है। छत्तीसगढ़ राज्य की नई सरकार तो करेगी साथ ही साथ हमारी केन्द्रीय सरकार भी पूरी मदद करे तो अच्छा है। भिलाई इस्पात कारखाना के आर्थिक विकास की गति में तेजी आई थी, वह आर्थिक विकास आज अवकुंठित हो गचा है औऱ उसे किस तरह से ठीक किया जाये और फिर उसे आगे कैसे बढ़ाया जाये, इस तरफ ध्यान जरूर दिया जाएगा। हमारे जो संसाधन हैं, उनका लाभ बराबर मिलता रहे, हम ऐसी आशा करते हैं।
जब कोरबा में कोयला खदानों का उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू जी ने १९५३-५४ में किया था, उस समय राज्य सरकार से कहा गया था कि उसे एक तिहाई उसका लाभ दिया जाएगा। हम आशा करते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने पर सरकार उस तरफ ध्यान जरूर देगी। जो कोयला निकलता है, रॉयल्टी के सिवाय मुनाफे में भी हिस्सा दिया जाये तब जाकर पिछड़े राज्यों को सही मदद मिल सकेगी। आडवाणी जी ने कहा कि जहां इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी, एस.सी. और पिछड़े लोग रहते हैं, उस इलाके में जबर्दस्त पोटेंशियल्टीज हैं। छत्तीसगढ राज्य इस देश का सबसे ज्यादा सम्पन्न और सुद्ृढ़ इलाका तथा सारे देश को ताकत देने वाला इलाका बन सकता है, इसलिए इसकी पूरी मदद सरकार करेगी, हम ऐसा आशा करते हैं। आज मध्य प्रदेश का हिस्सा अलग हो रहा है, छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा है, हम वादा करते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी छत्तीसगढ़ राज्य को सारे देश का एक आभूषण बना देंगे, सारे देश को ताकत देंगे, भले ही आज वहां बर्फ पिघलने वाली नदियां न हों लेकिन फिर भी जो संसाधन हैं, उनसे छत्तीसगढ़ राज्य को ऐसा बनाएंगे जिससे सारे देश के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ताकत बन सके।
श्री पुन्नू लाल मोहले (बिलासपुर) : सभापति महोदय, मैं छत्तीसगढ़ी भाषा में बात करूंगा। मैं आडवाणी जी, प्रधान मंत्री जी से और पूरे सदन के माननीय सदस्यों से अनुरोध करता हूं और छत्तीसगढ़ राज्य की तरफ से यहां विनती करता हूं कि हमारा छत्तीसगढ़ राज्य बनाया जाये क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ का विकास होगा। इससे हमारे बच्चों, भाई-बहनों, गरीब तबकों का फायदा हो, विकास हो, उनकी उन्नति हो, ऐसी मैं आशा करता हूं। हमारी सरकार अपने घोषणा पत्र में यह बात लेकर आई थी और एक ही साल के अन्दर में यह करके दिखा दिया। मैं कहना चाहता हूं कि जैसे आम लोंगों में शादी विवाह होता है और एक साल में लड़का-लड़की भी पैदा नहीं होता, लेकिन हमारी सरकार ने एक ही साल में लड़के के बराबर हमारे राज्य को बनाकर दिखा दिया। यह हमारी सरकार की उन्नति है। उन्होंने एक साल में करके दिखा दिया। बिलासपुर में आज रेल जोन एवं रायगढ़, रायपुर टर्मिनल बनाकर दिखा दिया, रेलवे जोन के बाद सड़क स्वीकृति दिया और २००० करोड़ रु. की १२० कि.मी. की सड़क राष्ट्रीय मार्ग दिखा दी। यह हमारी सरकार की उन्नति का रास्ता है।
अब मैं हिन्दी में बोलूंगा। मैं आपको बताना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़ राज्य धान का कटोरा कहलाता है। परन्तु विपक्ष के नेता शुक्ला जी चले गये, अगर वह सुनते तो अच्छा होता। धान नहीं कटोरा बाकी है वह यहां देश के विकास के बारे में बातें करते रहे, मैं बताना चाहता हूं शक्षित बेरोजगार आज रोजगार की तलाश में भटक रहा है। उनको रोजी-रोटी की तलाश है और वह छीना-झपटी के काम में लगा हुआ है। नक्सली समस्या आज बस्तर से लेकर सरगुजा, गवर्धा तक छा गई है। वहां के मुख्य मंत्री जी के रहते कैबिनेट मंत्री जी की हत्या हो जाती है, वहां कृषि का उत्पादन नीचे गिर गया है। ७२ प्रतिशत लोग कृषि से जीवन-यापन करते थे। विद्युत की कमी या सरकार की कमजोरी ने आर्थिक विकास का स्तर दबा दिया। ऐसी परिस्थिति में यहां की सरकार विद्युत तो देना बंद टयूबवैल के खनन के लिए किसानों एवं ग्रामीणों को विद्युत भी नहीं दे रही है, कनैक्शन भी नहीं दे रही है। दाने-दाने के लिये किसान मोहताज हैं। किसान की माली हालत बदतर हो गई है। किसान ऋण से दब चुका है। ऐसी परिस्थति में सरकार ध्यान देने की बजाए मनमाने ढंग से राजकाज में लगी है। इन बातों पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं इस सरकार की आलोचना नहीं करना चाहूंगा क्योंकि सभी लोग छत्तीसगढ़ राज्य बनाना चाहते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़ में राजस्व से तीस प्रतिशत, खनिज से ४० प्रतिशत, वन-संपदा से ३६.४२ प्रतिशत खनिज से ४६ प्रतिशत का लाभ होता रहा परंतु सरकार उस पैसे को कहां देती रही? उदाहरण के लिए कोयले की रॉयल्टी से पिछले पांच-सात वर्षों से ४५० करोड़ रुपये का लाभ होता रहा। अगर मैं दारू के ठेके की (आबकारी) बात करूं तो ५०० करोड़ रुपये का लाभ होता रहा। इतना पैसा छत्तीसगढ़ के विकास में लगा होता तो छत्तीसगढ़ की उन्नति हुई होती। वहां की रोड की हालत देखिए। वहां गड्ढ़े हैं। वहां सिंचाई और किसान के लिए पर्याप्त साधनों की व्यवस्था अपर्याप्त है। शक्षित बेरोजगार भटक रहा है। लोगों में असमंजस की स्थिति है। इस कारण सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाना चाहा है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है। वहां धान की खेती होती है। धान का कटोरा रह गया और धान चला गया। ऐसी परिस्थिति में किसान की माली हालत बदतर हो गई है। मैं सरकार से अनुरोध करना चाहूंगा कि इसके विकास के लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद करे और इस पैकेज को बढ़ाया जाय़े। छत्तीसगढ़ नया राज्य बन रहा है तो नए राज्य को प्रतीक चिन्ह देने की आवश्यकता है, जैसे भारत में मयूर को राष्ट्रीय पक्षी माना जाता है। राष्ट्र का प्रतीक चिन्ह अशोक चक्र माना जाता है, इसी प्रकार छत्तीसगढ़ किसानों का देश है और किसान अधिकतर धान के भरोसे जीवित है तो धान की बाली को यहां के राज्य का प्रतीक चिन्ह माना जाये। सरकार इस ओर विशेष ध्यान दे कि हमारी छत्तीसगढ़ी बोली है। हमारा पूरा देश, समाज, संस्कृति, रहन-सहन, वेषभूषा, हमारा जीवन इसी से संलग्न है।
मैं केन्द्रीय सरकार से मांग करना चाहूंगा, अनुच्छेद ३४७ में प्रावधान है, अगर राष्ट्रपति सहमत हो जायें, तो छत्तीसगढ़ी बोली को भाषा का दर्जा दिया जाए। जिन परिस्थितियों और वातावरण में केन्द्रीय सरकार छत्तीसगढ़ राज्य बनाने जा रही है, मैं मध्य प्रदेश की विधानसभा के कर्णधारों के बारे में कहना चाहूंगा, छत्तीसगढ़ राज्य उपेक्षा, अवहेलना और नगण्य विकास तथा निराशा की कोख से जन्म लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बनने जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य का बंटवारा होने जा रहा है। जब दो भाइयों का बंटवारा होता है और बड़ा भाई चालाक होता है, जो वहां की परिस्थितियों को पहले से ही जानता है, खेती-बाड़ी और अन्य अचल सम्पत्ति को छिपाकर, सारे कर्ज का बोझा छोटे भाई पर लाद देता है। मैं सरकार से मांग करना चाहता हूं कि इस तरह का वातावरण न बनें। आडवाणी जी इस ओर ध्यान दें, छत्तीसगढ़ राज्य को बंटवारे में छोटे भाई को अनदेखा न कर दिया जाए। मध्य प्रदेश में तो वहां की विधान सभा है, विधायकों के ठहरने के लिए जगह है और अन्य प्रकार की सम्पत्ति मध्य प्रदेश में चली जाएगी, ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ में एक कर्सी भी नहीं रहेगी, तो राज्य सरकार के अधिकारी, मुख्य मंत्री और वहां के विधायक तथा अन्य लोग कहां बैठेगे। वहां पानी की व्यवस्था, बिजली की व्यवस्था और विशेष रख-रखाव की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं मांग करना चाहूंगा, नियन्त्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट को माना जाए, कहीं ऐसा न हो कि नए छत्तीसगढ़ राज्य को कर्ज के बोझ से लाद दिया जाए। हमारे यहां की परम्परा है, छोटे भाई को सम्मान के साथ बंटवारे का हिस्सा दिया जाए। हमारी संस्कृति है, अगर छोटा भाई कमाई नहीं कर सकता है, तो छोटे भाई को अधिक हिस्सा भी दिया जाता है। मैं केन्द्रीय सरकार से अनुरोध करना चाहूंगा, इन बातों को अनदेखा न किया जाए। इस बात को माननीय गृह मंत्री जी ने बता दिया है कि वहां अनुसूचित जाति की आबादी अधिक है। पिछले पचास वर्षों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का विकास नहीं हुआ, वे लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उन लोगों की भर्ती के लिए विशेष भर्ती अभियान भी नहीं चलाया गया है। इस तरह उन लोगों के विकास के दरवाजे बन्द कर दिए गए। मैं यह भी कहना चाहूंगा, ऐसी परिस्थिति में मध्य प्रदेश सरकार ने १६ हजार कर्मचारियों को निकाल दिया है। अनुसूचित जाति के कोटे को उन्होंने नगण्य कर दिया है। कई हजार कर्मचारी जो उन्होंने भर्ती किए थे, आर्थिक स्थिति कमजोर दर्शा कर उनको नौकरी से निकाल दिया है। वे लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और इधर-उधर भटक रहे हैं। इसलिए मैं मांग करता हूं कि जनसंख्या के आधार पर राशि का बंटवारा होना चाहिए। वहां की सरकार ने विधान सभा में बजट पेश किया है। नियम और प्रक्रिया के अनुसार तथा वर्तमान जनसंख्या के आधार पर राशि का बंटवारा होना चाहिए। बंटवारा होने की स्थिति में कहीं बजट का पैसा छत्तीसगढ़ को अनदेखा करके अन्य क्षेत्र में न खर्च कर दिया जाए। इस बात की ओर गृह मंत्री जी को ध्यान देना होगा। ग्यारहवें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की है, उस रिपोर्ट में कौन से प्रावधान को सामने रख कर बंटवारा किया गया, यह जानने की आवश्यकता है। कुछ बातों को ध्यान में रखने के लिए मैं केन्द्रीय सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।
मेरा यह कहना है कि मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ राज्य के बंटवारे पर लोक सेवा आयोग के गठन का जिक्र नहीं किया गया है। मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तरह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का गठन किया जाए। छत्तीसगढ़ में रेंजर प्रशिक्षण, थानेदार का प्रशिक्षण सेनटर, टूमर के प्रशिक्षण के केन्द्र अन्य जगह हैं। इंदौर में पीएससी आफिस है, ग्वालियर में एजी आफिस है, कोषालय है, उसकी भी छत्तीसगढ़ राज्य में अलग ढंग से स्थापना की जाए। इस प्रकार से अन्य भी है- जैसे बैंकिंग सेवा बोर्ड है। निगम भी दिया जाए। राज्य परिवहन की बसें खटारा पड़ी हुई हैं, ऐसा न हो कि मध्य प्रदेश खटारा बसों को दे दे और नई बसों को अपने पास रख ले, इस बात को सोचने की आवश्यकता है। इन बातों पर ध्यान दिया जाए।
महोदय, छत्तीसगढ़ के निवासियों के लिए उच्चतम न्यायालय का भी प्रावधान है। मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी में उच्चतम न्यायालय बनने जा रहा है। उच्चतम न्यायालय और राजधानी का नामकरण करते समय बिलासपुर जिला एक बड़ा भाग है, मैं कहना चाहूंगा कि आबोहवा, जलवायु, पीने के पानी की व्यवस्था, पर्याप्त भूमि, आवागमन की सुविधा देखते हुए, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा पिछड़े वर्ग को बढ़ावा देने के द्ृष्टिकोण से बिलासपुर को छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी एवं उच्च न्यायालय का दर्जा प्राप्त होना चाहिए। इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के विकास के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं इसमें कोई अन्य प्रकार की बातें या लफड़े की बात नहीं करना चाहता। जिस तरह किसी भी प्रकार का किसी भी राज्य में सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया जाता है तो सत्ता के विकेन्द्रीकरण के लिये सभी प्रकार के निगम, बोर्ड, कोषालय या उच्चतम न्यायालय आफिस सभी उस जिले के , प्रदेश में बनने चाहिए, जिससे शायद लोगों में सत्ता का विकेन्द्रीकरण हो।
मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि इसमें राज्य गठन के बाद जब छत्रातीसगढ़ एवं जधानी का उच्च न्यायालय का नामकरण करते समय बिलासपुर जिले को प्राथमिकता देने का कष्ट करेंगे। इन सब बातों को बोलते हुए अपने सभी माननीय सदस्यों को, प्रधानमंत्री जी, गठबंधन की सरकार को और गृह मंत्री जी को धन्यवाद देते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं। जयहिन्द, जय भारत, जय छत्तीसगढ़।
SHRI BAJU BAN RIYAN (TRIPURA EAST): Mr. Chairman, Sir, I rise to express my views on this Bill. We do not support the Bill.
Sir, my views and the views of my Party on this Bill is that the problems of the people and the problems of a region cannot be solved by creating new States. This is not the first occasion after Independence when we are going to create new States.
Sir, I hail from the North-Eastern part of India. I have seen how the State of Assam had been fragmented into four different States. The State of Assam was divided into three other States, namely, Arunachal Pradesh, Meghalaya and Manipur. But with this fragmentation, the problems of the people rather than having decreased, has increased. The area has not developed. Not a single industry has been set up there. Not a single development project has been taken up in these areas after the State of Assam was re-organised. It would have been better had they remained with the State of Assam. This is our experience.
Sir, the State of Punjab also has been divided into the States of Himachal Pradesh and Haryana.
I do not believe that an area can be developed just by resorting to reorganisation of States. To develop an area one does not have to reorganise a State, create a State or divide a State. That does not serve the purpose. The Central Government should come forward with plans and programmes with proper economic support to develop the areas that are yet to develop, specially those areas in which people belonging to weaker sections, Scheduled Castes and Scheduled Tribes reside. Such areas are already identified. This is the way in which specific areas can be developed. I do not know why the Government has come forward with this Bill! It may be just to appease some political personalities and parties, or to make them fight with each other to get their powers.
One can see from the Bill that 16 Districts are going to be given to the proposed State of Chattisgarh. Some people from Madhya Pradesh are demanding some Districts or constituencies like Siddhi, Mandala, Shahdol and Balaghat. If these four areas can be included in the proposed State, it will be better.
With the creation of new States, we have to create a new Assembly and identify some new State Councils. As per law, parliamentary and assembly constituencies are identified through a set process of delimitation of constituencies. However, there is no area demarcation for State Councils. At present the State Council of Madhya Pradesh comprises 16 Members. In the proposal now, 11 out of these 16 will remain with Madhya Pradesh and five will go to the proposed State of Chattisgarh. These elected Councilors may all be from Madhya Pradesh area, or some of them may be from the other side. It is not clear. I hope the Government will clear this position.
In the proposal in Clause 9, out of 40 parliamentary segments, only 11 segments will go to Chattisgarh and the rest 29 will remain with Madhya Pradesh. And out of 320 assembly segments, 230 will remain with Madhya Pradesh and 90 will go to the proposed Chattisgarh. When the new Assembly and the new Parliament are formed after the next election, reservation for Scheduled Castes and Scheduled Tribes will not remain as it is now. In the proposal I find that in the next parliamentary and assembly elections, delimitation of constituencies will be done on the basis of the 1971 population census.
1600 hrs. I want to ask the Government as to why this should not be as per 1991 Census. The latest figures available are as per 1991 Census. But here, in the Bill, the proposal is made as per 1971 Census. I do not understand why this is so.
Sir, similarly, whether the residences of the employees serving now there, would be within the proposed new State or within the Madhya Pradesh. State. What will be their future position? In my opinion, they should be allowed to exercise their option in this regard. The employees may be belonging to the State cadre or the national cadre. They should be allowed to exercise their option as to who would like to remain with the Madhya Pradesh Government or with the new formed Government of the new State.
Sir, as per my understanding, after the creation of a new State, the population of the tribal people will be more there, and it may be called as a ‘Tribal State’ also. But as regards its development, etc., it will be quite less than that of the rest of the Madhya Pradesh. Though the proposed Chhatisgarh is rich in the mineral resources, iron ores and other things, but due to -- I may say -- neglect of the previous Governments, it has remained the most undeveloped areas. Earlier, it was being ruled by the party whose representatives are sitting on my right, and for sometimes it was ruled by those who are sitting on my left now. Now, again it is ruled by the party whose representatives are sitting on my right. They did not do anything for the development of Chhatisgarh.
Mr. Chairman, Sir, I have heard that in districts like Bastar, some tribal people are still living without clothes. They are living naked. I do not know whether it is a fact or not. So, I would like to know from the Government as to what the actual position is. If that is correct, who is responsible for that? I do not believe that the plight of the people who are still living naked, will be changed by creation of this new State. It may create even more political chaos.
Now, the Madhya Pradesh Government is being run by the Congress party. After the creation of this new State, out of the proposed 90 MLAs, the party which gets majority will form the new Government. If it is the Congress, they will form the Government, otherwise, it will be somebody else, who gets the majority. In the draft Bill, I have seen the position of Members of Legislative Assemblies and Members of Parliament, and the provision of reservation for the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes. It will remain as it was. This way, two other Bills, namely, reorganisation of the Uttar Pradesh and reorganisation of Bihar have also been introduced in this House.
Sir, this Government is thinking that they would be able to tackle the problem of development of areas by reorganisation of the States. They think that by doing so, the more development would take place.
I do not think so. It will create more problems. It will invite more chaos. This is, I am sure, in the knowledge of the Government.
There are some parts in the North-East demanding the creation of more new States. This demand is from Assam. They are demanding the creation of Bodoland in the border areas of Assam and West Bengal. I do not know what the character of this Bodoland would be – whether it would be outside India or within India. If that would be within India, why should they want a new State?
There is also one Karbi Anglong district. The people of Karbi Anglong are demanding a new State. We can see if we consult history that two States comprising the Khasi and Jaintia hill districts were created under article 244 of the Constitution leading to a situation where there were two States within a State. This was the first case in the history of India when we had a State within a State. They had bestowed some powers also on these States. But ultimately it was seen that their aspiration to create a State within a State did not serve the purpose and in 1971 or 1972 it was reorganised as the State of Meghalaya. The Government had created one more new State – Meghalaya.
After Independence, when India was divided into States, most probably there were less than 25 States. There were, maybe, 20 or 21 States. Now, it is more than 30 if we take Part A, Part B and Part C – the States comprising all the three types – into account. It might be 32 now. We can create some more Chief Ministers, officers and staff. But the problem of that undeveloped area would remain. There would be no change. The view of our party is that the reorganisation of a State would not solve the problem.
We can have some areas under the Sixth Schedule or under some special provision. We can give some autonomy to such areas. We are simultaneously discussing under rule 193 the question of autonomy of the State of Jammu and Kashmir. Within Jammu and Kashmir and within every State, we can find out the areas that have remained undeveloped and give them some autonomy for their development. Under the Sixth Schedule of the Constitution, we have some tribal areas that are autonomous. We have them in Tripura; we have the Karbi Anglong district and we also have some areas in Assam that are under the Sixth Schedule. Similarly, we can give some autonomy to the tribal areas of Madhya Pradesh. So, I suggest that the Government withdraw its proposal for the new State.
We can develop this region by providing some autonomy to the districts that would be part of the new State. We can extend more facilities to them. There is no bar in extending facilities and there is no bar in bringing up industries there. There is no bar to develop that area. If the Government pays special attention to this area, we can solve the problem. I hope, the Government would move in this direction.
SHRI INDRAJIT GUPTA (MIDNAPORE): Mr. Chairman, Sir, I thank you for giving me a few minutes. I had asked for only a few minutes because I am under some physical strain and I do not want to take up much time.
Sir, we are, I think, present at a historic moment. We are witnessing the birth pangs of a new State. We are – I for myself and for my party – fully in support of the proposed new State of Chhattisgarh. One of the main reasons – not the only one – being, as has been already mentioned here, that it is a State dominated by tribal people or tribal population.
The whole question of a separate State is bound up with the whole question of development. It has no meaning for the people of that area – neither separate State nor autonomy nor anything else has any meaning for the people of that State – unless it has something to do with development, that is, development of the economy and development of democracy. If these two things are looked after, then alone, this separate State will have any meaning.
1612 hours (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair ) There is another area, that is the question of autonomy. I am not discussing that now because autonomy may have many meanings; we do not know what is actually meant by autonomy and what is the content of autonomy. A few years ago, we were witnessed to a big agitation and a movement in Kashmir under the slogan of aazadi. People said that they wanted aazadi. What is aazadi, we do not know.
Now, we have the Sarkaria Commission Report which recommended devolution of powers – devolution, particularly of financial powers and financial resources, for most of the States or for all of the States. The history of Jammu & Kashmir – I am not going into that now because there is no time – is very different to the history of most of the other States. We know that. The background is different. That is why, article 370 of the Constitution came into being. India is the homeland of different religions, different cultures, different languages and different problems; it is the homeland of many imbalances and uneven development.
This is what makes all States clamour for more and more devolution of resources and powers. Personally I am happy that this is happening. I have some acquaintance, though not much, with Madhya Pradesh. I am very happy that they are going to get this separate State. It is not a very poor State by the way. Some of the biggest and viable public sector undertakings are situated in Madhya Pradesh. Iron ore mines are there in the district of Bastar. It is a tribal district and probably, I think they have the best quality of iron ore available in the country. Bharat Heavy Electricals is situated there which is a real asset to our country and to our economy. Bharat Aluminium Company is also there. All these things have to be looked after properly and they will certainly add to the viability and to the position or economy of the new State.
I would like to ask one question about which there was no mention in the Mover’s speech. I do not know what the Minister or the Government is thinking about it. I am referring to the terrible tragedy that overtook Bhopal a few years ago from which the people of Bhopal have not yet recovered. I am referring to the leakage of gas. Thousands of people perished in that tragedy. Nothing has happened to that. Nobody was made guilty for it although the people there are of the opinion that the CMD of that American Company should be hauled up for gross negligence. But that also came to nothing. The question of compensation has not yet been solved. Everyday we are reading about it. Different organisations which are carrying on agitations for many years are demanding that proper compensation should be given to the victims of this terrible disaster. Even that has not been done. Now, you are going to have a separate State. Now, Bhopal, I presume would be the Capital not of Chhatisgarh but of the existing Madhya Pradesh. The victims of the tragedy which occurred in the existing Madhya Pradesh are still there. I would like to know what the Government has thought about this. Have they thought anything? I would like to know whether all these thousands of people and their families who will be reading about our debate here and listening to it and hoping that it may bring them some relief and some solace, will actually get any comfort from what we speak here as far as the question of compensation and rehabilitation is concerned.
So, I would like to know the Government’s view about this. I do not know what Shri Shyamacharan Shukla’s view is. He did not mention anything. I think this is the biggest blot on our past history which has international repercussions. I am sure you know about it. Bhopal gas disaster was something which had shaken the conscience of people of not only this country but so many people and organisations in other countries where they are demanding proper compensation and proper fixing of responsibility. It is considered to be a crime.
Apart from that, we are very happy that a new State of Chhatisgarh is being created. I congratulate the Government for having come forward with this Bill. I hope we can all work together and see that the State prospers and becomes a really useful asset to the map of India.
श्री पी.आर. खूंटे (सारंगढ़) : माननीय सभापति महोदय, सर्वप्रथम मैं भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी, देश के गृह मंत्री माननीय श्री लाल कृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन दल की सरकार, भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश नेतृत्व को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा, बधाई देना चाहूंगा कि आजादी के पहले और आजादी के बाद छत्तीसगढ़ एक ऐसा अंचल रहा है जो शोषण का केन्द्र बना रहा है। इसे राजनैतिक शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए हमारे देश के गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी ने छत्तीसगढ़ की जनता के दुख-दर्द को दूर करने के लिए उस क्षेत्र के विकास को, जो वर्षों से धीमी पड़ गयी थी, इसे गति देने के लिए और इस देश में खासकर छत्तीसगढ़ प्रदेश को एक समृद्धिशाली प्रदेश बनाने की दिशा में अलग से राज्निय बनाने का निर्णय लिया है। देश को आजादी मिले लगभग ५३ साल हो गए हैं। इस लम्बी अवधि में अगर कुछ सालों को छोड़ दिया जाए तो मध्य प्रदेश से लेकर केन्द्र में कांग्रंस पार्टी का ही एकछत्र राज्य रहा है। यदि ये ईमानदारी से काम करते तो, जहां तक मैं समझता हूं, आज छत्तीसगढ़ राज्य, वनांचल या उत्तरांचल, बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। खासकर छत्तीसगढ़ अंचल जो अनुसूचित जाति, जनजाति और विकास की द्ृष्टि से देश में सबसे अधिक पिछड़े हुए अंचल के रूप में जाना-पहचाना जाता है, छत्तीसगढ़ में प्रकृति ने भरपूर भंडार दिया है। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। वहां उपजाऊ मिट्टी है, मेहनतकश लोग हैं जो मेहनत से कभी जी नहीं चुराते। वन सम्पदा का छत्तीसगढ़ में भंडार है, खनिज सम्पदा का भी भंडार है।
वहां जल रुाोतों का भी भंडार है। छत्तीसगढ़ की धरती में लोहा, कोयला, सीमेंट से लेकर हीरे और सोने का भी भंडार है। उसके बाद भी आज छत्तीसगढ़ की जनता, खासकर वहां के जो मेहनतकश लोग हैं, जो गरीब तबके के लोग हैं, जो वर्षों से वहां हैं। आजादी के पहले तो उनका शोषण होता रहा, आजादी के बाद जो सत्ता में रहे, उनके शोषण का वे केन्द्र रहे। वे भीख का कटोरा लेकर हिन्दुस्तान के कोने-कोने में भटकते हैं। छत्तीसगढ़ की गरीब जनता मजदूरी कमाने के लिए अन्यत्र जाती है। यह उनकी एक नियति सी बन गई है कि केले के छिलके खाने के लिए उनके बच्चे मजबूर होते हैं। इस दर्द ,इस पीड़ा को हमारे जन-जन के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी, हमारे देश के गृह मंत्री माननीय लाल कृष्ण आडवाणी जी और हमारे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी माननीय श्री लखी राम जी अग्रवाल, हमारे आदिवासी नेता श्री नन्द कुमार साय, हमारे रमेश बैस जी, हमारे छत्तीसगढ अंचल के डा. रमन जी, इसके अलावा अनेक छोटे बड़े पार्टी के नेताओं के ध्यान में यह बात आई तो उन्होने इस दर्द को, इस पीड़ा को करीब से समझा, खास कर अपने पौने तीन साल के भाजपा शासन में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री श्री सुन्दर लाल पटवा ने इस बात को भी गम्भीरता से लिया, तब हमारे केन्द्रीय नेतृत्व के ध्यान को भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश ने और खासकर ़छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने आकर्षित किया, तब कहीं जाकर हमारे केन्द्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का निर्णय लिया। इस तरह से काफी समय तक इसके लिए एक आन्दोलन भी चलता रहा।
मुझे कभी-कभी आश्चर्य होता है कि जो लोग कल तक छत्तीसगढ़ के घोर शोषक थे, छत्तीसगढ़ को अपनी राजनैतिक चारागाह बनाकर चरते रहे, वहां वे अपने स्वार्थ की राजनीति करते रहे और कई पीढि़यों के लिए धन जुटाते रहे। वे छत्तीसगढ़ के विकास को गति देने के बजाय वहां की जनता को पीछे धकेलते रहे। आज ऐसे लोग भी छत्तीसगढ़ के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाने लगे। वह इसलिए, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के लिए केन्द्र की अटल गठबंधन सरकार ने निर्णय ले लिया। अब उनके पास इसके सिवा कोई चारा नहीं रह गया, उनकी एक मजबूरी है, छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए समर्थन देना अब उनकी एक मजबूरी है। कल तक कांग्रेस पार्टी के लोग जो छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आन्दोलन करने वाले लोग होते थे, उस आन्दोलन को दबाने का हर सम्भव कोशिश करते थे और उसे दबाने का प्रयास भी होता रहा है, लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिए कमर कसी और छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का निर्णय लिया और इसे राष्ट्रीय एजेण्डा में भी शामिल किया, तब उन नेताओं को लगा कि अब तो भाजपा की गठबंधन सरकार छत्तीसगढ़ राज्य निश्चित रूप से बनाने जा रही है और राज्य निश्चित रूप से बनकर रहेगा तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी के लोग विरोध करेंगे तो छत्तीसगढ़ के शहर से लेकर किसी गांव में घुसने नहीं देंगे। इसी डर से कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के निर्णय का समर्थन किया है। खैर, मैं उनको धन्यवाद देता हूं, देर आयद, दुरुस्त आयद। मैं उनको इसलिए धन्यवाद देता हूं कि आज कम से कम भारतीय जनता पार्टी की सोच के साथ उनकी सोच बदल सकी है। मैंने इसलिए यह कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ की जनता के लिए एक ऐतिहासिक और खुशी का दिन है। आज पूरे छत्तीसगढ़ की जनता लोक सभा की कार्यवाही को न जाने वे किस रूप में देख रही होगी। न जाने किस तरह वहां के लोग आज खुशियां मनाते होंगे। मैं तो इस सदन से, सभी दल को नेताओं से, सभी सम्माननीय सांसदों से आग्रह करना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़ की जनता को सही मायने में अगर उस अंचल को राजनैतिक शोषण से मुक्ति दिलानी है और उस अंचल को एक समृद्धिशाली, शक्तिशाली प्रदेश के रूप में आत्मनिर्भर बनाना है, भारतीय जनता पार्टी और गठबंधन की सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण करने का विधेयक इस लोक सभा में पेश किया है, उसका सर्वानुमति से समर्थन करके एक सुद्ृढ़ प्रदेश बनाने के लिए आशीर्वाद प्रदान करें, यही मेरी आप सबसे प्रार्थना है।
छत्तीसगढ़ में किसी प्रकार की कमी नहीं है। वह राज्य सभी संसाधनों से भरा हुआ है, लेकिन उनका दोहन नहीं हुआ है और ठीक ढंग से उपयोग नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश में कुल राजस्व का ६८ प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ से आता है, जबकि उस क्षेत्र के विकास के लिए उस राजस्व में से केवल १२ प्रतिशत खर्च होता है। बाकी का पैसा अन्यत्र विकास में चला जाता है। इस कारण उस क्षेत्र का पूरा विकास नहीं हो पाया है।
छत्तीसगढ़ पर बोलने के लिए और भी मुद्दे हैं, लेकिन समयाभाव के कारण मैं उनकी चर्चा नहीं करना चाहता। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण को लेकर यह विधेयक सदन में आया है और इसमें सार्वजनिक तौर पर किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है। वहां की जनता में भी विरोध की भाषा नहीं उठ रही है। इसलिए किसी विवादित मुद्दे को नहीं जोड़ा गया है। जो कमी रह गई है इस विधेयक में, उसमें कुछ संशोधन लाकर ऐसा वातावरण प्रस्तुत करने का कष्ट करें जिससे वहां की जनता को लाभ हो सके और देश के हित में भी लाभ हो।
छत्तीसगढ़ राज्य बनाया जा रहा है, इसका अच्छा दूरगामी परिणाम होगा और वह अच्छा निकलेगा। कुछ बंधुओं ने छोटे राज्यों का विरोध किया है, लेकिन जहां-जहां भी छोटे राज्य बने हैं, उसका लाभ वहां के लोगों को मिला है। उदाहरण के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को ही ले लें। जब से इन तीनों प्रदेशों का बंटवारा हुआ, आर्थिक द्ृष्टि से और विकास की द्ृष्टि से यहां की जनता आत्मनिर्भर हुई है। इनको देश में अग्रणी राज्यों के रूप में जाना जाता है।
मेरा निवेदन है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने जा रहा है, लेकिन जिन परिस्थितियों में बनने जा रहा है, क्योंकि उस प्रदेश में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जी मुख्य मंत्री हैं, उनके साढ़े छ: साल के कार्यकाल में जो आर्थिक दशा पर बुरा प्रभाव पड़ा है, उसका असर छत्तीसगढ़ पर न पड़े। मेरा निवेदन है कि इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के पहले कुछ आवश्यक संशोधन भी स्वीकार करें। एक-दो बिंदु हैं जो विधेयक में आए हैं, उन पर मैं अपने विचार रखना चाहूंगा। खंड ३४ में प्रावधान का रूप स्पष्ट होना चाहिए कि कौन से वित्त आयोग के द्वारा राज्य के लिए कल रकम का अंश निर्धारण होगा, क्योंकि ११वें वित्त आयोग की रिपोर्ट आ चुकी है। यह आर्थिक समस्या आज नहीं तो कल जनता के सामने आएगी। इसी तरह से खंड ३७ में उल्लिखित विषयों को तय करने के लिए प्रस्तावित राज्यों की तरह केन्द्र द्वारा शीघ्र ही आयोग का गठन कर देना सामयिक और न्यायोचित भी होगा। खंड ३९ के प्रावधान के अनुसार जनसंख्या के आधार पर, खजानों एवम् बैंकों में अतिशेषों का विभाजन होगा, जनसंख्या का आधार किस सन का होगा, यह भी निर्णय करना उचित होगा। कर्जों के बारे में भी मापदंड निर्धारित करना होगा। बेहतर होगा कि वर्तमान जनगणना को आधान माना जाए। खंड ४४ में लोक ऋणों के लिए नए राज्यों पर बोझ न डाला जाए, क्योंकि वे सभी ऋण पूरे राज्य के लिए व्यय किए गए हैं। मध्य प्रदेश की जनता के ऊपर ३२००० करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ गया है। यह पैसा नहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए खर्च किया गया है, जिसका लाभ छत्तीसगढ़ की जनता को नहीं मिला है। इसलिए मेरा आग्रह है कि इस अनावश्यक खर्च का भार छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वहां की जनता पर न लादा जाए। इस पर एक प्रकार से गम्भीरता से विचार किया जाए।
खंड ६८ के अनुसार तत्काल छत्तीसगढ़ राज्य सेवा गठित हो जाये, साथ ही अखिल भारतीय सविल सेवा में भी छत्तीसगढ़ कैडर का निर्माण कर दिया जाये। सन् १९७३ में छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग गठित करने का भी प्रावधान रखा जाये। यद्यपि इस विधेयक में लोक सभा आयोग को एक ही रखने का उल्लेख है, इसका एक कार्यालय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में किसी भी स्थान पर शुरु किया जाना चाहिए। विद्युत मंडल एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम है, उसको पृथक रूप से छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित करने का भी प्रावधान जोड़ा जाये। रेलवे भर्ती बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर में खोला जाये। मैं धन्यवाद देता हूं कि आपने बहुत ही अल्प समय के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रेलवे जोन, रायगढ़ में रेलवे टर्मिनल, रायपुर में रेल मंडल के गठन की स्वीकृति दी है। इसी प्रकार यह जो राजधानी का सवाल उठ रहा है, मेरा आग्रह है और हालांकि यह केन्द्र औऱ राज्य सरकार का मसला हो सकता है, फिर भी केन्द्र सरकार से मेरा आग्रह है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी का दर्जा रायपुर को ही दिया जाये और खासकर बिलासपुर जो संभाग है, वहां के लिए हाई-कोर्ट का प्रावधान जो इस विधेयक में केन्द्र सरकार लेकर आई है, वह हाई-कोर्ट बिलासपुर में स्थापित किया जाये। यह भारत सरकार से मेरी पुरजोर मांग है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, जनजाति के संख्या के बल को देखते हुए वर्तमान में जो लोक सभा, राज्य सभा और विधान सभा में जो पद आरक्षित हैं, उसमें जनसंख्या के अनुपात में वृद्धि की जाये जिससे वहां के लोगों को समुचित लोक सभा, राज्य सभा और विधान सभा में प्रतनधित्व मिल सके। इसी प्रकार इस छत्तीसगढ़ांचल में मेरे कुछ अन्य जिले के लोग भी छत्तीसगढ़ में शामिल होना चाहते हैं इसलिए मेरा आग्रह है कि खासकर शहडोल, सीधी, मंडलावालाघाट, ढिं़ढ़ोरी, उमरिया को भी छत्तीसगढ़ में शामिल कर दिया जाये। इससे पूरे छत्तीसगढ़ में लोक सभा के १६ और जो वर्तमान विधान सभा के ९० है, उसमें करीब १२० विधान सभा का गठन होगा और अभी जो लोक सभा ११ है, वह १६ लोक सभा के रूप में मान्यता प्राप्त हो जाएंगे। आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए धन्यवाद देता हूं। मैं माननीय गृह मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि इस नये राज्य का दर्जा छत्तीसगढ़ की जनता को दिया है जिसे अभी आज की तारीख में सदन से निवेदन करूंगा कि सर्वानुमति से इस विधेयक को पारित करके एक तश्तरी में छत्तीसगढ़ की जनता को छत्तीसगढ़ राज्य को भेंट करेंगे, इसी विश्वास के साथ मैं अपनी बात को समाप्त कर रहा हूं, जयहिन्द, जयभारत।
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज , उ.प्र) : महोदय, भारतीय जनता पार्टी की सरकार और सरकार में बैठे हुए लोगों का कार्य ही बंटवारा करना, विभाजन करना रह गया है। मुझे अफसोस है विभाजन - बंटवारे के दर्द का एहसास जितना माननीय गृह मंत्री जी आडवाणी जी को है, शायद बंटवारे - विभाजन के दर्द का एहसास इस सदन में उतना बहुत कम लोगों को होगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपने नहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए इंसान इंसान के बीच में बंटवारा किया। हिन्दू, मुसलमान, सिख औऱ ईसाई के बीच में बंटवारा करने का कार्य किया और आज अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश के वभिन्न राज्यों के वभिन्न हिस्सों का बंटवारा करने का कार्य भी कर रही है। माननीय गृह मंत्री जी ने जब यह बिल इंट्रोडयूस किया तो उस वक्त उन्होंने तर्क दिये कि इन राज्यों के बंटवारे से छोटे राज्यों के गठन से उन क्षेत्रों का सवार्ंगीण विकास होगा। में माननीय गृह मंत्री जी के इस तर्क से सहमत नहीं हूं। यदि इस देश के ही छोटे राज्यों की तरफ आप द्ृष्टि उठाकर देखें- नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, आसाम, मेघालय तो इस बात के ज्वलंत प्रमाण हैं कि मात्र छोटे राज्य के गठन से ही उन राज्यों का विकास आज तक संभव नहीं हो पाया है।
आज छत्तीसगढ़, उतरांचल और झारखंड राज्यों का गठन मात्र इसलिए करने जा रहे हैं, क्योंकि विगत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के गठबन्धन को उक्त क्षेत्र में आशातीत सफलता मिली है। उसी सफलता को द्ृष्टि में रखते हुए, सरकार छत्तीसगढ़, झारखन्ड और उत्तरांचल के गठन के विधेयक को सदन में ले आई है। माननीय गृह मंत्री जी ने इन बिलों को इन्ट्रोडयुस करते समय कहा था कि हम राज्य की विधान सभाओं की भावनाओं का आदर करते हुए, इन राज्यों का गठन करने जा रहे हैं। हम मंत्री जी से जानना चाहेंगे, जम्मू-कश्मीर की विधान सभा ने भी दो-तिहाई बहुमत से स्वायत्तता का प्रस्ताव पारित किया है, क्या सरकार स्वायत्ता का प्रस्ताव स्वीकार करेगी ? …( व्यवधान) माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा, यह मेरा विचार है, किसी भी कीमत पर स्वायतत्ता का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और आप जो राज्यों के गठन का कार्य कर रहे हैं, यह देश के विभाजन का कार्य कर रहे हैं। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप आसन की तरफ मुखातिब होकर अपना भाषण करें।
कुंवर अखिलेश सिंह : महोदय, अगर ये बीच में हस्तक्षेप नहीं करते, तो मैं आपकी ही तरफ मुखातिब होकर अपनी बात कह रहा था।
इस प्रस्ताव के पक्ष में आदरणीय श्यामा चरण शुक्ल जी ने अपनी बातें रखीं और तत्काल छत्तीसगढ़ क्षेत्र से हमारे एक माननीय सदस्य ने जिस तरह की बातें उनके परिवार के प्रति कहीं, वे निश्चित तौर पर निन्दनीय है। मैं कहना चाहता हूं, श्री श्यामा चरण शुक्ल जी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी बनाने के लिए दो हजार करोड़ रुपए और वहां के सवार्ंगीण विकास के लिए आठ हजार करोड़ रुपए यानि दस हजार करोड़ रुपए की मांग की है और अभी हमारे माननीय सदस्य ने ३२ हजार करोड़ रुपए की मांग की है। आज की वित्तीय स्थिति में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में नहीं है। होना तो यह चाहिए था कि देश का पैसा उत्पादक मदों पर खर्च हो, लेकिन नियोजन उत्पादकता की तरफ न हो कर अनुत्पादक मदों में नियोजित करने का काम सरकार कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बनाने में दस हजार करोड़ रुपए की मांग माननीय श्यामा चरण शुक्ल जी कर चुके हैं, लेकिन इन दस हजार करोड़ रुपए से न तो छत्तीसगढ़ के लोगों की बेकारी दूर होने वाली है, न भुखमरी दूर होने वाली है, न उनकी शिक्षा की समस्या का समाधान होने वाला है। राज्यों के पुनर्गठन के नाम पर आप देश के छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर नए विवाद पैदा कर रहे हैं। आज देश की राजधानी में इसी मध्य प्रदेश के २० हजार से भी ज्यादा आदिवासी लोग धरना दे रहे हैं, आन्दोलनरत हैं, और मांग कर रहे हैं कि गोंडवाना राज्य बनना चाहिए। अभी बीजेडी दल के नेता और उड़ीसा के मुख्यमंत्री ने धमकी दी है, अगर उड़ीया भाषी क्षेत्रों को हमें नहीं सौंपा, तो सरकार से समर्थन वापस लेने का काम करेंगे। अभी छत्तीसगढ़ी भाषा की मांग इसी सदन के अन्दर हुई है, फिर भोजपुरी भाषा की मांग उठेगी, फिर अवधी भाषा की मांग उठेगी, इससे हमारी राष्ट्र भाषा के समक्ष एक नया खतरा पैदा हो जाएगा। मैं कहना चाहता हूं कि आप अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं। यह देश को तोड़ने की साजिश है। यह देश बहुत बड़ा देश है, कल अगर देश में मांग उठेगी कि देश के विकास के लिए देश को कई हिस्सों में बांट दिया जाए, तो आप देश के बंटवारे को कबूल करेंगे। मैं कहना चाहता हूं कि इस खिलवाड़ को आप बन्द करें। आज भाषा के सवाल पर, जाति के नाम पर, धर्म के नाम पर, जो लोग देश को बांटने की साजिश कर रहे हैं, यह साजिश बन्द होनी चाहिए, तभी इस देश का भला होगा।
इस देश का बंटवारा १४ अगस्त, १९४७ को हुआ और मैं समझता हूं कि बंटवारे की त्रासदी को आज तक भारत और पाकिस्तान झेलने का काम कर रहे हैं और दोनों देश भुगत रहे हैं। साथ ही दुनिया के साम्राज्यवादी देश दोनों देशों को कठपुतली के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं। मैं आपके माध्यम से इतना ही कहना चाहूंगा, छत्तीसगढ़ में जिन जिलों को लेकर आप नया राज्य बनाने जा रहे हैं, उन जिलों के लिए यदि आप दस हजार करोड़ रुपए बराबर-बराबर बांट दें, तो देश के सारे हिस्सों से ज्यादा उन क्षेत्रों का विकास हो जाएगा, लेकिन उसके लिए आप कदम नहीं उठायेंगे।
कल जब उन कर्मचारियों को तनख्वाह देने की समस्या आएगी तो उसकी व्यवस्था कैसे करेंगे। आज ये कहते हैं कि राज्य विधान सभाओं के प्रस्ताव का आदर करते हुए हम बंटवारा कर रहे हैं। आप उत्तर प्रदेश के अंदर जो उत्तराखंड बनाने जा रहे हैं, उसमें ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के लिए भिन्न-भिन्न प्रस्ताव है। आप क्यों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को उत्तराखंड में शामिल करने की बात कर रहे हैं। …( व्यवधान)
महोदय, जब मुलायम सिंह यादव जी के समय उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने वह प्रस्ताव पारित किया था तब देश की वित्तीय स्थिति दूसरी थी, राजनैतिक परिस्थितियां दूसरी थीं लेकिन आज परिस्थितियां दूसरी हैं। …( व्यवधान) क्या हरिद्वार को उत्तराखंड में शामिल करने का उत्तर प्रदेश विधान सभा ने प्रस्ताव पारित किया है। अगर हरिद्वार को उत्तर प्रदेश की विधानसभा ने उत्तराखंड में सम्मिलित करने का प्रस्ताव पारित किया हो तो गृह मंत्री जी उसे सदन के पटल पर प्रस्तुत करें।
आज बिहार में एक करोड़ ७९ लाख करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की बात आ रही है। आज नये-नये विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। मैं गृह मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इन राज्यों के पुनर्गठन का कहीं कोई अंत नहीं है। आज आप तीन राज्यों को देश में बांट रहे हैं, कल दस राज्यों के विभाजन की मांग उठेगी और परसों २० राज्यों की उठेगी। आप जिन राज्यों का गठन कर रहे हो, वहीं के लोग आपकी मांगों से सहमत नहीं हैं, इसका ज्वलंत प्रमाण है। आज गोड़वाना क्षेत्र के २० हजार से ऊपर आदिवासी इसी देश की राजधानी में धरना देकर बैठे हुए हैं। उनकी मांग है कि हमें किसी भी कीमत पर छत्तीसगढ़ राज्य मंजूर नहीं है। आपको कम से कम जनभावनाओं का तो आदर करना चाहिए।
महोदय, मैं अपनी इन बातों के साथ छत्तीसगढ़ राज्य का विरोध करता हूं और मेरी सदन के माध्यम से मांग है कि इस राज्य पुनर्गठन विधेयक को प्रवर समति के सुपुर्द कर दिया जाए।
डा. चरणदास महंत (जांजगीर) : महोदय, मैं गृह मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत पुनर्गठन विधेयक का समर्थन करने के लिए यहां खड़ा हुआ हूं। आज का दिन मेरे लिए परम सौभाग्य का दिन है कि भगवान महावीर, महात्मा गौतम, महात्मा कबीर, बापूगांधी और बाबा घासीदास जी के सपनों के अनुरूप और उन्हीं के अहिंसा और शांति के रास्ते पर चल कर छत्तीसगढ़ की दो करोड़ जनता को आज उनका राज्य मिल रहा है।
महोदय, मैं उन सभी पुण्यात्माओं को स्मरण करना चाहूंगा, जिन्होंने हमें यह अवसर प्रदान किया। उन्हें मैं सबसे पहले नमन करना चाहता हूं। छत्तीसगढ़ का इतिहास क्रांतिकारियों का इतिहास रहा है। अठारवीं, उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में जो विद्रोह हुआ, उसने छत्तीसगढ़ के निवासियों के मन में अस्मिता और उनकी निजता की पहचान कराई। इसलिए छत्तीसगढ़ की मांग आज की नहीं है, १९२४ में सबसे पहले त्रिपुरा कांग्रेस के अधिवेशन में उठा गई थी। छत्तीसगढ़ की मांग १९५३ में राज्य पुनर्गठन आयोग के दौरान उठाई गई थी और इस मांगलिक कार्य को मूर्त रूप देने में सदन में बैठे सांसद सदस्यों के अलावा हमारे उन सभी पूर्वजों, जिनमें मुख्यत: माधवराव जी सप्रे, वीर नारायण सिंह, पं. सुंदरलाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ला, ठा. रामकृष्ण सिंह, ठा. प्यारेलाल सिंह, डा. खूबचंद बघेल, बृजलाल वर्मा, विश्वनाथ तामस्कर, छेदीलाल बैरिस्टर, राघवेन्द्र राव, चंदूलाल चन्द्राकर, बिसाहूदास महंत, केयूर भूषण, लोचन प्रसाद पांडेय, पुरूषोत्तम कौशिक, पवन दीवान, विद्याचरण शुक्ला और दिग्विजय सिंह जी के साथ जिन सांसदों और विधायकों और साथ ही साथ जिन छत्तीसगढ़ महासभा, भ्रातृसंघ, संघर्ष मोर्चा, छत्तीसगढ़ पार्टी, छत्तीसगढ़ मंच, गोड़वाना पार्टी विकास मंच, पिछड़ा वर्ग समाज पार्टी, छत्तीसगढ़ फौज, छत्तीगगढ़ धरना देने वाले सभी सदस्यों ने अहिंसक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करके यह अवसर दिया है, आज मैं सबसे पहले उन सबको नमन करता हूं।
सभापति जी, माननीय बालेश्वर जी के लिए भी मैं अपनी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आज सावन मास की सोमवती अमावस्या है और यह सावन का महीना श्रवण के नाम से, मातृ-पितृ भक्ति के नाम से जाना जाता है। मैं आज बाबा भोले नाथ जी से प्रार्थना करना चाहता हूं कि आज छत्तीसगढ़ के नवयुवकों को भी वे आशीर्वाद दें कि वे भी अपनी छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा श्रवण कुमार की भांति कर सकें।
आज का दिन वहां हरेली के नाम से जाना जाता है और हरेली का त्यौहार वहां मनाया जाता है। आज के दिन छत्तीसगढ़ के किसान अपनी बौनी समाप्त करके कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और उल्लास मनाते हैं। आज इस गौरवशाली सदन में छत्तीसगढ़ का बीज रोपित हुआ है, इसलिए मैं कृषि यंत्रों की बजाए उन सभी महामनाओं की, जिन्होंने हमें यह अवसर प्रदान किया, पूजा करना चाहता हूं और आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अब छत्तीसगढ़ की माटी से समृद्धि के नये पुष्प खिलेंगे।
इस विधेयक की पुरस्थापना के समय और अब भी छोटे-छोटे राज्यों की खिलाफत की जा रही है। मैं उन सभी साथियों का ध्यान " त्रपिटक गणतंत्र " के इस श्लोक की ओर आकृष्ट करना चाहूंगा।
" लघुरपि गणतंत्र: समृद्धि प्राप्य शोभते। दुग्धधारिणी सवत्सा, या संपूज्यते सदा।"
जिस तरह से दूध देने वाली गाय अपने बछड़े सहित सर्वत्र पूजी जाती है उसी तरह से अगर गणतंत्र छोटा औंर समृद्धशाली हो तो वह भी पूजनीय है। छत्तीसगण जो बनेगा वह समृद्धशाली बनेगा। हमारे पास उसकी समृद्धि के सभी मूलभूत अधिकार और साधन हैं। उसको हम नये, समृद्धशाली राज्य के रूप में इस देश के नक्शे में स्थापित करना चाहते हैं। भौगोलिक द्ृष्टि से छत्तीसगढ़ का विस्तार केरल से ६ गुना और हिमाचल प्रदेश से पांच गुना बड़ा है। सभापति महोदय, छत्तीसगढ़ १,३५,१९४ वर्ग कि.मी. में फैला है और इसका भू-भाग मध्य प्रदेश का ३०: ५२ प्रतिशत एवं देश का ४:१४ प्रतिशत स्थान रखता है। इसका भू-भाग पंजाब, असम और वर्तमान हरियाणा से भी बड़ा है।
तीन प्राकृतिक खंडों सतपुड़ा की उच्चसम भूमि भाग, महानदी एवं सहायक नदियों का मध्य भाग एवं बस्तर का पठार, इनमें फैला हुआ है। छत्तीसगढ़ की जनसंख्या १९९१ की जनगणना में १,७६,१४,९२८ है। इसका घनत्व १२७ व्यक्ति प्रति कि.मी. है। कृषि के क्षेत्र में हम ६० प्रतिशत से अधिक भूमि में कृषि करते हैं और ८८ प्रतिशत छत्तीसगढ़ की जनसंख्या कृषि से अपना जीवनयापन करती है जो मध्य प्रदेश का ३३ प्रतिशत है। मध्य प्रदेश की तुलना में हमारा उत्पादन ७९.२५ प्रतिशत और अनाज के उत्पादन में २९.९३ प्रतिशत है जबकि लघु-सिंचित भूमि १९.५ प्रतिशत है। हमने यदि अपनी नदियों का सही उपयोग किया, अपनी सिंचित भूमि को बढ़ाया, तो वह दिन दूर नहीं जब हम एक समृद्ध राज्य आपको दे पायेंगे।
सुप्रसिद्ध डॉ. वंदना सीमा ने छत्तीसगढ़ को केवल धान का कटौरा नहीं कहा है, बल्कि उन्होंने कहा है कि धान की जन्मभूमि छत्तीसगढ़ है और उन्होंने बड़े विश्वास से कहा है कि छत्तीसगढ़ की उन्नत किस्म की धान की प्रजातियां की चोरी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा की जा रही है।
विश्व प्रसिद्ध डा. रिछारिया के अनुसार विश्व में मात्र १२५०० धान की प्रजातियां पाई जाती हैं। मुझे यह कहने में हर्ष है कि उनमें से १०,००० धान की प्रजातियां छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं। वहां सोयाबीन, दलहन, तिलहन भी प्रचुर मात्रा में पैदा होता है। हम एक समृद्व राज्य बनाने की कल्पना कर रहे हैं। वन की द्ृष्टि से मध्य प्रदेश का ४३.८५ प्रतिशत भाग है। छत्तीसगढ़ अच्छे वनों से आच्छादित है। वहां प्रमुख रूप से कीमती लकड़ी जैसे सागौन, साजा, सरई, बीजा पाई जाती है। इससे वहां के वन भरे रहते है। वहां का तेंदु पत्ता गुणवत्ता में सर्वश्रेष्ठ है। वहां बांस के प्रसिद्ध वन हैं। वहां जड़ी बूटियों का अथाह भंडार है। आपको याद होगा कि जब लक्ष्मण जी को बाण लगा था तो गंधमार्दन पर्वत से जड़ी बूटी लाई गई थी। ऐसा मानना है कि वह पर्वत भी छत्तीसगढ़ इलाके में है। आज वह अपार सम्पदा औषधि के रूप में वहां विद्यमान है जिन का दोहन होना बाकी है। यदि वन उपज की बात करें तो वहां गोंद, हर्रा, बहेड़ा, आंवला, चिरौंजी, महुआ पुल, साल, सीड़ की प्रचुरता है। मध्य प्रदेश में बिजली का ३५.६६ प्रतिशत हिस्सा उत्पादित होता हैं जबकि खपत मात्र २३.८६ प्रतिशत है। वहां कोरबा थर्मल पावर प्रोजैक्ट १२४० मेगावाट, हरदेव बांध हाइडल पावर प्रोजैक्ट १२० मेगावाट उत्पादन करने की क्षमता रखता है। हम भविष्य में २६४१ मेगावाट और उत्पादन करने का प्रयास करने जा रहे है। हमारे यहां की नदियों में महानदी, हसदेव, जोंक, खारून, शिवनाथ, अरपा, पैंरी का भविष्य में ठीक से दोहन किया गया तो आने वाले समय में हमारे यहां हाइडल पावर प्रोजैक्ट के माध्यम से से बिजली का उत्पादन होगा और वह एक समृद्धिशाली प्रदेश को जन्म देगा।
छत्तीसगढ़ में खनिज की मात्रा के बारे में बहुत से साथियों ने कहा है कि हम हजारों करोड़ रुपए की राशि मध्य प्रदेश को प्रदान करते हैं। श्यामाचरण शुक्ल जी अपनी बात कहते समय शायद यह कहना भूल गए कि हीरे की खदान हमारे छत्तीसगढ़ में है। वह रायपुर और देवभोग में है। मध्य प्रदेश का १०० प्रतिशत हीरा छत्तीसगढ़ में है। मध्य प्रदेश का १०० प्रतिशत टिन अयस्क, क्वार्ट जाइट, अलेक््जेन्ट्राइट्स छत्तीसगढ़ में है। वहां ५९ परसैंट लौह अयस्क, डोलोमाइट ९९.८५ परसैंट, कोयला ४६.११ परसैंट है। इस प्रकार लगभग २७ मूल्यवान खनिज हमारे छत्तीसगढ़ के भंडार में भरे पड़े हैं। पुरातन संस्कृति और प्रकृति की निकटता ही छत्तीसगढ़ की पूंजी है। मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ छोटा राज्य ही सही, मगर समृद्धशाली राज्य बनेगा।
कुछ साथियों ने इस बिल के इंट्रोडक्शन के समय और आज के दिन भी इस बात को कहा कि पिछले राज्य पुनर्गठन आयोग के समय जब प्रान्तों का बंटवारा हुआ था तो किसी भाषा को लेकर हुआ था। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि उस समय राज्य पुनर्गठन आयोग के विचार में भाषा का जो महत्व था. उसके पीछे दूसरा कारण था। सब यह चाहते थे कि हम अंग्रेजी के आधिपत्य को धीरे-धीरे समाप्त करें। इसलिए हम भाषा के आधार पर राज्य बना रहे थे। हमारी छत्तीसगढ़ भाषा पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में बोली जाती है। यह २०० से ३०० वर्ष पुरानी भाषा है। इसे मान्यता देना जरूरी है। छत्तीसगढ़ के संत कबीर गोरखनाथ जी, धर्मदास और घासीदास जी ने इस भाषा का उपयोग अपनी कविताओं में किया है।
मैं संस्कृति और सभ्यता की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मनुष्य सभ्यता का जन्म स्थान छत्तीसगढ़ माना जाता है। यहां के पहाड़ों में जो चित्रकारियां मिली हैं, वह ५० हजार वर्ष पुरानी हैं।
1700 hrs. ब्राहमी लपि इसी धरती पर हुई। मैं ज्यादा बात तो नहीं कहना चाहता लेकिन आपको याद दिलाना चाहता हूं कि दक्षिण कौशल फिर से कौशल के नाम से जाना जाने वाला यह छत्तीसगढ़ कौशल्या रानी का जन्म स्थान माना जाता है जहां हमारे राजा राम कौशल्या के गर्भ से पैदा हुये। उस रामचन्द्रजी की हम और आप सब पूजा करते हैं। छत्तीसगढ़ के लोग श्री राम चन्द्र जी को अपने भांजे के रूप में मानते हैं। इसलिये छत्तीसगढ़ में भांजा रिश्ता बहुत पवित्र माना जाता है।
श्रींमती जयश्री बनर्जी (जबलपुर): आपने कम से कम राम को तो याद किया।
डा. चरणदास महन्त : राम को तो सभी याद करते हैं। सिर्फ आपने तो ठेका नही लिया है।
माननीय सभापति महोदय, १७४१ से १८१८ तक हम लोग भौंसलों के अधीन रहे और १८१८ से आजादी तक हम लोग अंग्रेंजों के अधीनस्थ रहे। बाद में सी.पी. एंड बरार के अधीन थे। फिर हमारी छटपटाहट जागृत हुई। आप एक शब्द सुनने का प्रयास करें।
यह सारा जिस्म झुककर बोझ से दुहरा हुआ है, हम सजदे में नहीं हैं, आपको धोखा हुआ है।
आज छत्तीसगढ़ राज्य के अभ्युदय का समय आ गया है। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस विधेयक के लिये हमारे अनेक साथियों ने बहुत बड़ा सहयोग प्रदान किया है, उसके लिये मैं इनका बहुत आभार मानता हूं। आजादी के बाद छत्तीसगढ़ क्षेत्र का बहुत बड़ा विकास हुआ है। बापू जी के ग्राम स्वराज्य के सपने को आदरणीय नेहरू जी ने हमारी पंचवर्षीय योजना के माध्यम से कार्यान्वित किया और स्व. इन्दिरा जी ने गरीब क्षेत्रों की उन्नति के लिये उसे सर्वोच्च स्थान दिया। मुझे इस बात को कहने में कोई संकोच नहीं कि स्व. राजीव जी ने इस बात को स्वीकार किया था कि दूरस्थ अंचलों में मात्र १०-१५ प्रतिशत राशि ही पहुंच पाती है। हमारी नेता सोनिया जी ने इस दुख और पीड़ा को समझा है और इसमें सहयोग दिया है। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि जिन्होंने इन आत्माओं की कल्पनाओं के सपनों को साकार होने का अवसर दिया।
सभापति महोदय : आप संत कबीर की परम्पराओं को अच्छी तरह जानते हैं।
अब आप समाप्त कीजिये।
डा. चरणदास महन्त : सभापति महोदय, मैं पहली बार बोल रहा हूं, इसलिये दो मिनट का समय और दीजिये।
सभापति महोदय, छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण होने जा रहा है। श्री जयशंकर प्रसाद ने कहा है:
कर्मयज्ञ से जीवन के सपनों का स्वर्ग मिलेगा, इसी वपिन में मानस की आशा का कुसुम खिलेगा।
हमारे कुछ साथियों ने सीधी, शहडोल, मंडला और बालाघाट जिलों को इसमें शामिल करने की बात कही है लेकिन मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूं। ऐतिहासिक द्ृष्टि से न तो इनका मेल-मिलाप रहा है और न ही इस क्षेत्र के लोग छत्तीसगढ़ के प्रति प्रेम का प्रदर्शन कर सके हैं। इसलिये इन जिलों को छत्तीसगढ़ में न मिलाया जाये। मैं आपसे यह भी बताना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ का निर्माण न किसी धर्म के लिये , न किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिये है, न कुर्सी के लिये है और न किसी राजनैतिक दल के लिये हो रहा है। इस छत्तीसगढ़ का निर्माण उस आदमी के लिये हो रहा है जो जमीन जोतता है, यह छत्तीसगढ़ उस आदमी के लिये हो रहा है, जो फसल उगाता है, उस आदमी के लिये हो रहा है जो फसल काटता है फिर भी अपने परिवार के लालन-पालन से वंचित रह जाता है। इसलिये मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि एक आदमी के श्रम को सम्मान देने के लिये, उसके आर्थिक उत्थान के लिये, उसकी समृद्धि के लिये यह पवित्र सदन समर्पित करे।
सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने के लिये समय दिया, उसके लिये आभार मानता हू और हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि छत्तीसगढ़ की माटी इतनी उर्वरा है कि आने वाले पांच वर्षों में हम भारत में समृद्धिशाली राज्य के रूप में आपके सामने उभरेगें जो सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर होगा। जय हिन्द , जय छत्तीसगढ़।
कुमारी मायावती (अकबरपुर) : माननीय सभापति जी, आज माननीय गृह मंत्री जी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने से संबंधित विधेयक सदन में विचार के लिए प्रस्तुत किया है। मैं आपके माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी को फिर से यह अवगत कराना चाहती हूं कि हमारी पार्टी छोटे राज्यों के खिलाफ नहीं है, बल्कि छोटे राज्यों के पक्ष में है। छत्तीसगढ़ राज्य बनाने से संबंधित जो विधेयक सदन में पास होने जा रहा है, इस विधेयक का मैं अपनी पार्टी की ओर से पुरजोर समर्थन करती हूं और साथ ही यह भी बताना चाहती हूं कि मध्य प्रदेश में जो छत्तीसगढ़ के लोग हैं, वे काफी समय से उपेक्षित रहे हैं। अंग्रेजों के जाने के बाद मध्य् प्रदेश में लम्बे अरसे तक कांग्रेस पार्टी की सरकार रही। कुछ समय के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी रही और आज वहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। लेकिन किसी भी पार्टी के शासनकाल में छत्तीसगढ़ के लोगों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। मैंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र का दौरा किया है। मुझे उस क्षेत्र के बारे में अहसास है कि उस क्षेत्र में खनिजों का भंडार है, भूमि उपजाऊ है और हर प्रकार की फसल वहां पैदा होती है। इसके बावजूद भी उस क्षेत्र की जनता काफी पिछड़ी हुई है, इसका क्या कारण है। इसका कारण यह है कि छत्तीसगढ़ के नाम से जो अब अलग से राज्य बनने जा रहा है, उसमें जिन १६ जिलों को सम्मिलित किया गया है, उनके बारे में मुझे इस बात का एहसास है कि उन जिलों में वैसे तो समाज के हर वर्ग के लोग रहते हैं, लेकिन वहां आदिवासी समाज काफी तादाद में रहता है और आदिवासी समाज के साथ-साथ वहां शेडयूल्ड कास्टस के लोग भी काफी तादाद में रहते हैं और पिछड़े वर्ग के लोग भी काफी तादाद में रहते हैं। ये लोग छत्तीसगढ़ इलाके में खनिजों को निकालने का काम करते हैं तथा हर प्रकार की फसल को तैयार कराने में इन लोगों की काफी अहम् भूमिका होती है। लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार ने ऐसे लोगों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। यही मुख्य वजह थी कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने दुखी होकर वहां आंदोलन शुरू किया कि जब मध्य प्रदेश की सरकार हमारे उपेक्षा कर रही है और हमारे विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है तो फिर हमारा अलग से राज्य बनना चाहिए। इसके लिए छत्तीसगढ़ के लोगों ने लम्बे अरसे तक संघर्ष किया और संघर्ष के बाद यह मामला मध्य प्रदेश की असेम्बली में आया और हमारी पार्टी ने मध्य प्रदेश की असेम्बली में इसका विरोध नहीं किया बल्कि इसका स्वागत किया।
मध्य प्रदेश की असेम्बली में १९९४ में जब यह विधेयक पास हुआ तो हमारी पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया और उसके बाद यह विधेयक केन्द्र सरकार के पास आया। खुशी की बात है कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए इस विधेयक को पास करने में दिलचस्पी दिखाई। इसके लिए मैं केन्द्र सरकार का हार्दिक शुक्रिया अदा करती हूं।
इसके साथ-साथ मैं यह भी निवेदन करती हूं कि जब माननीय गृह मंत्री जी ने इस विधेयक को प्रस्तुत किया तो आपने खुद यह कहा कि छत्तीसगढ़ में जिन १६ जिलों को सम्मिलित कर रहे हैं, उसमें अनुसूचित जाति और जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की संख्या ज्यादा है। आपने भी इस बात को ऐडमिट किया है। मैं समझती हूं कि जब आपने भी इस बात को ऐडमिट किया है तो मेरा आपसे निवेदन है कि वर्तमान जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण कोटा विधान सभा और लोक सभा में आबादी के अनुपात में होना चाहिए। इसकी तरफ आप जरूर ध्यान दें। छत्तीसगढ़ के नाम से जब नये राज्य का गठन होने जा रहा है और जब इस नये राज्य के लिए जो भी बजट का प्रावधान रखा जाएगा और आप सही मायने में चाहते हैं कि उस क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति का विकास हो तो आप इस बात की तरफ भी ध्यान दें कि जब इस नये राज्य का टोटल बजट आएगा तो उसमें से लगभग २१ प्रतिशत कुल बजट की धनराशि अनुसूचित जाति और जनजाति के वैलफेयर पर लगनी चाहिए। जब तक आप इसके लिए अलग से प्रावधान नहीं रखेंगे, मैं समझती हूं कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का विकास नहीं होगा।
सभापति महोदय, मैंने इस विधेयक को पढ़ा तो इसमें पेज ४२ पर आप देखें जो सातवीं अनुसूची है, उसमें सरकारी कंपनियों की सूची और कुछ निगमों का जिक्र किया है। जिसमें क्रम संख्या १५ और १६ में मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा वित्त एवं विकास निगम का प्रावधान है, मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम का प्रावधान है। उसमें कुल २८ निगमों या कंपनियों का या प्राइवेट लमिटेड कंपनियों का जिक्र किया गया है। लेकिन कहीं भी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम का जिक्र नहीं किया गया है। मेरा माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन है कि अनुसूचित जाति के विकास को ध्यान में रखकर, जिस प्रकार मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का प्रावधान है, मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम का प्रावधान है, इसी प्रकार अनुसूचित जाति के विकास को ध्यान में रखकर वहां पर अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम का भी प्रावधान होना चाहिए। इसकी तरफ भी आपको ध्यान देने की काफी जरूरत है।
जब कोई भी नया राज्य बनता है तो नये राज्य में बहुत परेशानियां होती हैं। वैसे मध्य प्रदेश राज्य में भी कुछ समस्याएं उत्पन्न होंगी लेकिन ऐसी स्थिति में आपकी केन्द्र सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि मध्य प्रदेश के जिन १६ जिलों को मिलाकर छत्तीसगढ़ के नाम से अलग राज्य बनाया जा रहा है, मध्य प्रदेश की सरकार फिर उसकी ज्यादा मदद नहीं करेगी।
लेकिन उसमें केन्द्र सरकार की ज्यादा जिम्मेवारी बनती है कि नये राज्य में जो भी दिक्कतें आयें, उन दिक्कतो का समाधान करने की आप कोशिश करें। इसी प्रकार विकास से संबंधित महत्वपूर्ण विभाग हैं, वे नये राज्य में अलग से होने चाहिए। इसके साथ-साथ जो महत्वपूर्ण उपकरण हैं, वे भी अलग से होने चाहिए क्योंकि यदि मध्य प्रदेश के साथ उनका मिक्सअप कर दिया गया तो उस क्षेत्र की काफी उपेक्षा होगी और वहां कंट्रोवर्सी बनी रहेगी। मेरा कहना है कि उनको जो भी सुविधायें मुहैया करानी हैं, उनका अलग से स्पष्टीकरण होना चाहिए ताकि छत्तीसगढ़ के लोगों को कोई दिक्कत न हो। इसके साथ-साथ छत्तीसगढ़ का जो एरिया है, छत्तीसगढ़ के नाम से जो राज्य बनने जा रहा है, वह भौगोलिक द्ृष्टि से काफी फैला हुआ क्षेत्र है। वर्तमान जनगणना के हिसाब से वहां आबादी भी काफी बढ़ चुकी है। इस नये राज्य में आपने ९० विधान सभा सीटों और ११ लोक सभा सीटों का प्रावधान रखा है। यदि वर्तमान जनगणना के आधार पर सोच विचार किया जाए तो मैं समझती हूं कि जनगणना और भौगोलिक क्षेत्र को ध्यान में रखकर विधान सभा और लोक सभा की सीटें बढाई जा सकती हैं जिससे और वर्गों को इसमें फायदा मिल सकता है।
सभापति महोदय, गृह मंत्री जी ने जो विधेयक यहां बहस के लिए रखा है, छत्तीसगढ़ के नाम से जो अलग राज्य बनने जा रहा है, बहुजन समाज पार्टी उसका समर्थन करती है और वह हमेशा छोटे राज्यों की पक्षधर रही है। इस राज्य को बनाने में आगे जो भी दिक्कतें आएंगी, हमारी पार्टी उन दिक्कतों और परेशानियों को हल करने में केन्द्र सरकार का पूरा सहयोग करेगी। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करती हूं।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : सभापति महोदय, मैं सच कहूंगा और सच के सिवा कुछ नहीं कहूंगा और कुछ नहीं छिपाऊंगा। …( व्यवधान) लेकिन बंधुआ मजदूर इससे मुक्त कब होगा यह भी मैं अभी खुलकर बताऊंगा। …( व्यवधान) आदिवासी जंतर-मंतर में आ गए हैं और आपको खोज रहे हैं। २०,००० से ज्यादा की संख्या में आदिवासी यहां आए हुए हैं। वे आपको बता देंगे कि आदिवासी क्या होते हैं, गरीब क्या होते है, वे बता देंगे कि जब आदिवासी एकजुट होता है तब क्या होता है।
सभापति महोदय : रघुवंश जी, आप अपना भाषण दीजिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सभापति जी, मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक के इंट्रोडक्शन के समय माननीय गृह मंत्री जी ने कहा था कि नया राज्य बने, आम तौर से इस पर सहमति है। लेकिन मैं ख्याल करूंगा कि लोग क्या कहना चाहते हैं और लोगों की क्या राय है। लेकिन मैं देख रहा हूं कि गृह मंत्री और यह सरकार अपने वचन से पीछे हट रहे हैं। क्यों झटपट बेचैनी है, क्यों जल्दबाजी है। यह महत्वपूर्ण विधेयक है। केवल महत्वपूर्ण विधेयक ही नहीं, यह संविधान में संशोधन करने वाला विधेयक है। इसे लाने में जल्दबाजी क्यों की गई? सदन साक्षी है कि जब भी साधारण विधेयक आता है तो वह आम तौर से स्टैण्िंडग कमेटी में भेजा जाता है। मेरा कहना है कि इसे भी क्यों नहीं भेजे गया? क्यों जल्दबाजी की गई? राजनीतिक स्वार्थ में आप क्यों इतने अंधे हो गए? राजनीतिक कारण के सिवा कोई औचित्य नहीं है इस विभाजन का। इससे कोई जनहित और फायदा होने वाला नहीं है, न आदिवासियों का, न गरीब का और न किसी का। मैं यह भी साबित करना चाहता हूं कि …( व्यवधान) सभापति जी, हमने संशोधन दिया है कि इसे परिचालित किया जाए। कानून में भी लिखा है कि राष्ट्रपति जी की अनुशंसा फर्मेटिव सदस्यों के बीच बंटनी चाहिए।
अभी तक नहीं बंटी है, कानून देख लीजिए। बुलेटिन में छप गया कि राष्ट्रपति जी की अनुशंसा मिल गई। नहीं, कानून में लिखते हैं कि राष्ट्रपति जी ने जो वर्बल अनुशंसा दी, वह चिट्ठी सदस्यों के बीच बंटनी चाहिए। कानून में है या नहीं, कोई उसे गलत साबित करे।
कहते हैं कि गजट में छपना चाहिए। गजट में क्यों छपना चाहिए? क्या केवल गजट में छपने से कुछ होगा? आप दावा कीजिए कि गजट में छप गया। कितने माननीय सदस्यों ने राष्ट्रपति जी की अनुशंसा देखी है? एक ने भी नहीं देखी। सब लोग बैठ कर सुन रहे हैं। देश में कानून चल रहा है। कह दिया - Ignorance of law is no excuse. आम आदमी कानून नहीं जाने तो उसको माफी नहीं, सजा हो जाएगी लेकिन कोर्ट में जज लोगों ने कहा कि यह माना गया है कि जज कानून नहीं जानते। इस तरह गड़बड़ी चलती है। आप कानून का कितना प्रचार करते हैं। यह गजट में छपना है, लोगों के बीच प्रचारित करना है इसे कितने लोग जानते हैं, कितने लोगों ने गजट पढ़ा है? कानून कितने लोग जानते हैं। जब मल्होत्रा ब्रदर्स किताब छापते हैं तो लोग खरीद कर पढ़ते हैं। आम आदमी क्या जानता है कि संसद में क्या हुआ। बहुत से माननीय सदस्यों को भी नहीं मालूम कि कौन सा जिला कहां गया, अब पता लगा रहे हैं। गौरबाना प्रदेश में आदिवासियों की संस्कृति के हिसाब से वहां मांग है। ये बंटवारे से देश में आग लगवाना चाहते हैं। कहते हैं कि इससे विकास होगा। इससे विकास नहीं होने वाला है। इससे आन्दोलन भड़क रहा है। आज जन्तर-मन्तर में गौरबाना प्रदेश के लोग आए हुए हैं। हमने देखा है, हम भी राजधानी से आए हैं। हमने देखा कि इतने ज्यादा आदिवासी लोग कहां से आ रहे हैं। जब उनसे पूछा कि आप कहां से आ रहे हैं तो वे कहने लगे कि गौरबाना प्रदेश है और हम लेकर रहेंगे। यदि आदिवासियों की आकांक्षा पूरी नहीं हुई तो एक और उग्रवाद बढ़ेगा। ये बंटवारा नहीं कर रहे हैं बल्कि उग्रवाद को न्यौता दे रहे हैं। कहते हैं कि हम आदिवासियों की भलाई करने वाले हैं।
हमारे हाथ में कागज है। एक पिटीशन लिखी है जिसमें सत्तारूढ़ के सदस्य, मैं आज उनका नाम पढ़ूंगा, माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय गृह मंत्री जी से मुलाकात की और कहा कि छत्तीसगढ़ किस कानून के हिसाब से बनाया है, किस नीति के तहत बनाया है। पहले स्टेट्स रीऔर्गनाईजेशन कमीशन में यह तय हुआ था कि भाषा के आधार पर बनाया जाएगा। यह किस आधार पर बना रहे हैं - संस्कृति, सभ्यता, जनसंख्या, विकास के आधार पर केवल राजनैतिक साधन के लिए बना रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों मिल गए हैं, मैं बता रहा हूं। ...(व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : बिहार में तो आपके ही साथ हैं। ...(व्यवधान)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : शहडोल, मंडलावा, बालाघाट संसदीय क्षेत्र को छत्तीसगढ़ में शामिल करने के लिए किया है। उसमें दस्तखत किनके हैं। शहडोल के माननीय सांसद श्री दलपत सिंह परस्ते, क्या हमारी पार्टी के हैं, बिहार के हैं या उधर के हैं। ...(व्यवधान) गृह मंत्री इन्कार करें, लोग इनसे मिले हैं या नहीं। बस्तर क्षेत्र के सांसद, सोहनपट्टा क्षेत्र के सांसद, रामगढ़ क्षेत्र के सांसद, श्री पुन्नू लाल महाले ...(व्यवधान)
श्री ताराचन्द साहू (दुर्ग) : सभापति महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है।
सभापति महोदय : प्वाइंट ऑफ आर्डर नहीं प्वाइंट ऑफ इन्फौर्मेशन हो सकता है।
...(व्यवधान)
श्री ताराचन्द साहू : इन्होंने पिछली बार भी इस पत्र को लेकर सदन को गुमराह किया था, इस बार भी गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।...(व्यवधान)
सभापति महोदय : क्या आपने माननीय सदस्य का नाम लिया है ?
...(व्यवधान)
श्री ताराचन्द साहू : श्री सोहन पोटाई मैं नहीं हूं, वे पीछे बैठे हैं। इसके बाद भी मैं कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के सासंदों का नाम लेकर सदन को गुमराह करने का प्रयास पिछली बार इंट्रोडयूस करते समय किया गया, इस बार भी किया गया है। ...(व्यवधान) मुझे अपनी बात कहने दी जाए। ...(व्यवधान)
सभापति महोदय : आपकी बात दर्ज हो गई है, आप बैठ जाइए। अब आपकी बात प्रोसीडिंग में नहीं लिखी जाएगी।
(Interruptions)* श्री लाल मुनि चौबे (बक्सर) : यह मामला ब्रीच ऑफ प्रविलेज का है। ...(व्यवधान)
सभापति महोदय : माननीय सदस्य चौबे जी, आपको आसन की अनुमति नहीं है, आप बैठ जाइये।…( व्यवधान)
श्री ताराचन्द साहू : मुझे अपनी बात कहने दी जाये। रघुवंश जी भाषण कर रहे थे तो मैं समझता था कि ये कम से कम हिन्दी पढ़ना तो जानते होंगे, पत्र तो पढ़ लें कि उसमें क्या लिखा है।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : कौन है, जो इसे चुनौती दे। आप इसकी जांच करा लें। आप सामने आकर इसकी जांच कराओ, हम इसके लिए तैयार हैं।…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे : आप जब बोलते हैं तो भूल जाते हैं कि बगल में कौन बैठा है।
सभापति महोदय : आप बिना आसन की अनुमति के बोल रहे हैं, आप बैठ जाइये।
श्री लाल मुनी चौबे : आप उनको भूल रहे हैं कि कौन हैं। आप बोलते हैं तो सुनते नहीं हैं कि ये क्या कह रहे हैं। ये अगर गलत तरीके से बात को उठा रहे हैं…( व्यवधान)
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* Not Recorded डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: ये बताने वाले कौन होते हैं? …( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे : आप सीमा से बाहर जा रहे हैं।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सीमा का ज्ञान कराने वाले आप कौन हैं।…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे : आप सीमा से बाहर जा रहे हैं, माननीय सदस्य को कहने दें।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सीमा हमको मालूम है।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपसे जीवन भर सीखना है।
…( व्यवधान)
सभापति महोदय : बंसल जी, आप पुराने सदस्य हैं। माननीय चौबे जी, माननीय सदस्य ने स्वयं अपना प्रतिवाद सदन की प्रोसीडिंग्स में दर्ज करा दिया है। डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने जिन माननीय सदस्य के नाम का उल्लेख किया है, वे सदन के सदस्य हैं और वे अपनी बात कहने में सक्षम हैं। उनको प्रतिवाद करने का पूरा अधिकार है।
श्री लाल मुनी चौबे : मगर उनके प्रतिवाद करते समय ये बैठते नहीं हैं।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप आसन की अनुमति के बिना बोलते हैं, यह अच्छी परम्परा नहीं है। आप बैठ जाइये। रघुवंश प्रसाद सिंह जी के अलावा किसी की बात प्रोसीडिंग्स में दर्ज नहीं की जाये। अब कोई बात दर्ज नहीं हो रही है। माननीय रघुवंश प्रसाद जी की बात को छोड़कर किसी माननीय सदस्य की बात प्रोसीडिंग्स में दर्ज न की जाये।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सभापति महोदय, १७.०५.२००० को माननीय प्रधान मंत्री और माननीय गृह मंत्री से कौन-कौन मिले - श्री जितेन्द्र सिंह, नेता, फग्गन सिंह कुलस्ते, जो भारत सरकार में राज्य मंत्री हैं, नन्द कुमार साय, जो मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं, बलिराम कश्यप सांसद हैं, दलपत सिंह परस्ते सांसद हैं, पुन्नू लाल मोहले सांसद हैं, पी.आर. खुंटे सांसद हैं, विष्णु देव साय सांसद हैं, चन्द्र प्रताप सिंह सांसद हैं, ज्ञान सिंह पूर्व सांसद, गोविन्द राम मीरी, पूर्व सांसद, सन्त कुमार, युवा नेता, आदिवासी विकास परिषद आदि नेताओं ने प्रधान मंत्री से मिलकर प्रस्तावित विधेयक की विसंगतियों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया और सीधी, शहडोल, मंडला, डिंडोरी, बालाघाट जिलों को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ राज्य में जनभावनाओं के अनुरूप मिलाने की मांग की। माननीय गृह मंत्री जी बैठे हैं, ये इन्कार कर दें कि ये लोग उनसे नहीं मिले हैं तो हम मान लेंगे। …( व्यवधान) हम कहां विरोध की बात कर रहे हैं, यह विरोध की बात नहीं है। इन छ: जिलों की जनता की जनभावना है, वहां के आदिवासियों का कहना है कि इन जिलों को छत्तीसगढ़ में रखा जाये, यह उनकी मांग है। हम विरोध की बात नहीं कह रहे हैं, आप बात को समझ नहीं रहे हैं। इतना ही नहीं, मोहन लाल झिकराम पूर्व सांसद हैं, उन्होंने श्रीमती सोनिया गांधी जी को लिखा है कि छ: जिलों को छत्तीसगढ़ में रखा जाये। जगन्नाथ सिंह पूर्व सांसद हैं, उन्होंने माननीय अटल जी को लिखा है, मोती लाल जी माननीय पूर्व सांसद हैं, इन्होंने भी प्रार्थना की है कि इन छ: जिलों को छत्तीसगढ़ में रखा जाये। राधाकिशन मालवीय जी हैं…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप अपनी बात कहिये न। आप इस पर अपने विचार रखिये। जो विषय सामने है, उस पर आप अपने विचार रखिये।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह: यह सरकार वहां की जनभावना के अनुसार काम नहीं कर रही है। वहां के विधायक, वहां के एम.पी. सब लोग आग्रह कर रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं, उनकी बातों को लोग इनकार कर रहे हैं। पचासों विधायकों के हस्ताक्षर हैं। सोहन लाल सामरी, संजीव सहाय…( व्यवधान)
सभापति महोदय : उनका प्रतिवाद वहां की विधान सभा की प्रोसीडिंग में होगा, उसका जिक्र यहां करने की जरूरत नहीं है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : वहां के विधायक भी मांग कर रहे हैं, उनमें कांग्रेस पार्टी के भी हैं। कांग्रेस पार्टी की सांसद श्रीमती गमंग का संशोधन है, कागज में लिखा हुआ है।
श्री पवन कुमार बंसल (चंडीगढ़) : पर्सनल होता है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : मैं कब कह रहा हूं कि पार्टी का है। श्रीमती हेमा गमंग का संशोधन है, १५, १६, १७ और १९ से २३ तक उनका संशोधन है - ऐसा लिखा हुआ है।
सभापति महोदय : रघुवंश बाबू, आप पुराने सदस्य हैं, आप अपनी बात रखें।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : हमें जो कागज मिला है, वह हम कह रहे हैं।
सभापति महोदय : वह तो हो गया, आपने कह दिया।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : कांग्रेस पार्टी की भी एक माननीय सदस्य ने संशोधन दिया है। उधर के भी माननीय सदस्यों ने दिया है।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो) : कांग्रेस पार्टी की माननीय सदस्य ने संशोधन दिया था, वह वापस ले लिया है। अब कोई संशोधन प्रस्तुत नहीं किया है।
सभापति महोदय : बात खत्म हुई, क्योंकि इस पार्टी के सचेतक महोदय कह रहे हैं कि कोई संशोधन नहीं है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : हमें कागज मिला है, उसमें है। क्या बंधुआ मजदूरी खत्म हो गई है, वह इधर भी है।
सभापति महोदय : बहुत हो गया, आप अपनी बात कहें और समाप्त करें।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : आपनी बात कह रहा हूं। हमें कागज मिला है। मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक में सांसद श्रीमती हेमा गमंग ने मांग की है, संशोधन प्रस्तुत किया है कि बीधी, गोलमंडलाघाट छत्तीसगढ़ में रखा जाए। यह लिखा हुआ है, इसको कैसे इनकार कर सकते हैं। माननीय सदस्यों का संशोधन मिलता है, हमें भी मिला है, उसीको कह रहा हूं। यह सरकार राजनीतिक स्वार्थ में अंधे होकर काम कर रही है। कानून को ताक पर रख कर काम कर रही है। यह सरकार वहां की जनभावनाओं का, वहां के माननीय सदस्यों का भी ख्याल नहीं कर रही है। यह सरकार वचन भंग कर रही है। गृह मंत्री जी ने विधेयक के इंट्रोडक्शन के समय कहा था कि हम सबकी राय लेंगे और उनका ख्याल रखेंगे। लेकिन हमारी राय का क्या ख्याल किया, उसके विपरीत कर रहे हैं। आप अपनी पार्टी के लोगों का भी ख्याल करें। उन आदिवासियों का भी ख्याल करें जो मांग कर रहे हैं कि छ: जिले जो कि आदिवासी बाहुल्य हैं, उनको मध्य प्रदेश में क्यों छोड़ रहे हो, हमें भी छत्तीसगढ़ में रखिए।…( व्यवधान) ये लोग जब उस समय यह बन रहा था, इन्होंने नहीं बनने दिया। आदिवासियों को सत्ता में नहीं जाने दिया। इससे आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा और उग्रवाद बढ़ेगा। असम का बंटवारा हुआ, कहते हैं विभाजन होने से विकास होता है।
कौन यह साबित कर सकता है कि विभाजन से विकास होता है? वहां उग्रवाद हुआ है। त्रिपुरा को बांटा गया। वहां के लोगों के हाथ में शासन नहीं गया। वहां उग्रवाद हो रहा है, वहां मार-काट हो रही है। बोडोलैंड रोज बोल रहे हैं, इस तरह से हमने कहा था कि सम्यक विचार करके इस पर होना चाहिए। देश भर में स्टेट री-ऑरगेनाइजेशन कमीशन का गठन होना चाहिए और तब सबकी भावना को देखते हुए एक सम्यक रिपोर्ट आती लेकिन यह मानने वाले नहीं हैं। इसलिए गाड़ी का स्टेयरिंग इन लोगों के हाथ में है। हम पिछली सीट पर बैठे हुए हैं. हम तो यह कहेंगे कि ड्राईवर, ठीक से चलो, बांये तरफ चट्टान है, दांये तरफ खाई है, कहीं एक्सीडेंट न हो जाये। लेकिन पिछली सीट पर बैठे हुए आदमी की बात कोई नहीं सुनेगा तो एक्सीडेंट होगा, सब कोई उसमें जाएगा, देश को उसमें भुगतना पड़ेगा, इसीलिए मैं चेतावनी देता हूं कि जन भावना से खासकर आदिवासी, हरिजन, अनुसूचित जाति, जनजाति की भावना के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए औऱ अपनी पार्टी से पहले बंधुवा मजदूरी खत्म करवाइए। इसमें चौबे जी खड़े हो गये। चौबे जी छब्बे बनना चाहते हैं।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप अपनी बात कहें, दूसरे माननीय सदस्यों के नाम न लें।
…( व्यवधान)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : आदिवासियों की भावनाओं को दबाने की कोशिश हो रही है, इसीलिए सड़क पर लोग आ गये हैं और लड़ाई जारी होगी, गरीब जब उठ खड़ा होगा तो सारा विध्वंस होगा। छत्तीसगढ़ उसका नाम है, चौबीसगढ़ औऱ बारह गढ़ आप लोगों ने कहां छिपाया ? आप लोगों ने छल किया। नाम छत्तीसगढ़ और बारहगढ़ को गायब करा दिया। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप कंक्लूड कीजिए।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : इसीलिए जल का दीप न जल पाएगा, छल का राज न चल पाएगा, यह मैं इस विधेयक के माध्यम से कहना चाहता हूं कि जल में जाने के लिए जाने कौन कहां रहेंगे, वहां लोग सड़क पर आ गये हैं, आंदोलन चलेगा। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप पैनल आफ चेयरमैन भी हैं। बैठ जाइए। सदन की मर्यादा का ख्याल रखिए। सदन में और भी काम हैं, कई और भी माननीय सदस्य बोलेंगे। अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : आप तो मध्य प्रदेश में पानी छुड़ा रहे हैं और पसीना भी छुड़ा देंगे, इसीलिए…( व्यवधान)
श्री कड़िया मुंडा (खूंटी) : बिहार के लिए बचाकर रखिए।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप क्यों टोकाटोकी में फंसते हैं? अपना भाषण समाप्त करिए।
…( व्यवधान)
डा. रधुवंश प्रसाद सिंह : मैं बार-बार कहना चाहता हूं कि आदिवासियों के हित के साथ खिलवाड़ न करिए। संस्कृति, भाषा, रहन-सहन और इतिहास-भूगोल के हिसाब से इन छ: जिलों को वहां के जन प्रतनधियों की मांग के हिसाब से, जनता के समर्थन के हिसाब से इन छ: जिलों को छत्तीसगढ़ में जोड़ा जाना चाहिए, उस पर भी हमारा अमेंडमेंट है। इसलिए बार-बार कह रहे हैं कि इसमें सुधार करिए और देश को चलाने का काम ठीक से करिए, हम बार-बार आपको चेता रहे हैं।
श्री चन्द्र प्रताप सिंह (सिधी) : सभापति महोदय, मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन विधेयक, २००० का मैं पुरजोर समर्थन करता हूं। छत्तीसगढ़ राज्य पर आज चर्चा हो रही है। निश्चित रूप से मध्य प्रदेश का जो छत्तीसगढ़ क्षेत्र है, वहां की जनता के लिए यह प्रसन्नता और उल्लास का विषय है। छत्तीसगढ़ जनता के लिए आज का दिन सुखद दिन भी है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पर्याप्त वन संपदा और खनिज भंडार के रहते हुए भी उस क्षेत्र में रहने वाले जो वनवासी, गरिवासी हैं, उस क्षेत्र का जो विकास होना चाहिए था, वह समुचित विकास नहीं हुआ है।
केन्द्रीय सरकार द्वारा आदिवासियों के विकास के लिए जो राशि दी जाती रही है, उस राशि का उपयोग अन्दरुणी क्षेत्रों में समुचित रूप से नहीं हुआ है, इस कारण उस क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाया है। छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना को कार्यरूप में परणित किया जा रहा है। इसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को और माननीय गृह मंत्री जी को ह्ृदय से धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं, छत्तीसगढ़ राज्य में सौलह जिले मिलाए गए हैं, लेकिन अधिकांश जिले जिनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों का बाहुल्य है, उनको छोड़ दिया गया है, जैसे शहडोल, सीधी, मंडला और बालघाट आदि। मेरे विचार से इन जिलों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
इतना कहते हुए, मैं इस विधेयक का समर्थन करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूं।
श्री सुन्दर लाल तिवारी (रीवा) : सभापति महोदय, माननीय गृह मत्री जी ने सदन में मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, २००० प्रस्तुत किया है, यह निश्यच ही सराहनीय कदम है और मैं इस कदम का समर्थन करता हूं। हमारा दल इस विधेयक का पूरी शक्ति के साथ समर्थन कर रहा है।
महोदय, छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग लम्बे समय से चली आ रही थी और इस संबंध में कई बार आन्दोलन भी हुए। कई बार आन्दोलन की गति धीमी हुई और तेज हुई तथा वभिन्न दलों के लोगों ने अपनी-अपनी मांगे रखीं, लेकिन सभी लोगों ने पृथक छत्तीसगढ़ की मांग की। मैं एक विशेष पार्टी के बारे में नहीं कहना चाहता हूं। छत्तीगढ़ राज्य की मांग जनभावना से जुड़ी हुई मांग थी, इसमें सभी दलों के लोग शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के लोग भी हैं, भारतीय जनता पार्टी के लोग भी हैं और और दलों के लोग भी हैं। यह जरूर है कि इस मांग की गति कभी धीमी हुई और कभी तेज हुई। वहां जनता एक पृथक राज्य चाहती थी और उनकी परिकल्पना अब पूरी होने जा रही है। इसके लिए केन्द्रीय सरकार, हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री वाजपेयी जी निश्चित रूप से कृतज्ञता के पात्र हैं। इसके लिए हम गृह मंत्री जी को भी धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने यह प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया। इसके साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि प्रस्ताव जरूर माननीय गृह मंत्री जी की ओर से आया है, लेकिन मध्य प्रदेश की कांग्रेस की वर्तमान सरकार और इसके पहले पूर्व की सरकार, जो आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के नेतृत्व में थी, उस सरकार ने भी पूरी ताकत के साथ इस बात का प्रयास किया कि छत्तीसगढ़ राज्य बनें। केन्द्र की मांग को उन्होंने आगे बढ़कर पूरा करने में सहयोग दिया। यहां तक कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी की घोषणा की और उन्होंने इस बात की भी कोशिश की, छत्तीसगढ़ का निर्माण जल्दी से जल्दी हो। मैं अपने प्रदेश के मुख्य मंत्री, श्री दिग्विजय सिंह जी का भी आभारी हूं और यह एक ऐतिहासिक प्रश्न है, चाहे वह मध्य प्रदेश की विधान सभा का मामला हो और चाहे लोकसभा के सदन का मामला है, यह देखा गया है कि छत्तीसगढ़ के मामले में सर्वसम्मति प्रतीत हो रही है।
छुटपुट थोड़ा विरोध हो रहा है लेकिन १९९४ में मध्य प्रदेश की विधान सभा ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया था। उसके बाद मध्य प्रदेश विधान सभा ने १९९८ में सर्वसम्मति से पारित किया और ३० मार्च, २००० को भी मध्य प्रदेश विधान सभा ने पारित किया। महोदय, एक नयी संस्कृति का उदय हुआ। यह जो एक नयी राजनैतिक संस्कृति सर्वसम्मति की उत्पन्न हुई है, जो हमें देखने को मिली है वह इस विधेयक से मिली है। इसलिए इसमें किसी विशेष व्यक्ति के श्रेय का प्रश्न नहीं है कि हम किसी विशेष पार्टी को या किसी विशेष नेता को ज्यादा श्रेय दें। इसमें सीधा सा प्रश्न है कि इसमें सभी लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
महोदय, आडवाणी जी ने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए और वहां की विधान सभा ने जो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया उसे देखते हुए यह विधेयक लाया गया है। यह जो विधेयक लाया गया है इसके लिए मैं पूर्व में भी धन्यवाद दे चुका हूं, लेकिन यहां बहुत सारे वक्ता, लगभग भारतीय जनता पार्टी के दो-दीन वक्ताओं को हमने सुना, जो हमारे साथी हैं, उनकी वाणी, उनके वक्तव्य में विरोध सा दिखाई दिया। वे बोलने लगे कि मध्य प्रदेश में रहने से हमारा विकास नहीं हुआ। मैं उन साथियों से कहना चाहता हं कि हम और आप एक परिवार के सदस्य के रूप में रहे। हमने अगर एक घर में रोटी सूखी खाई तो आपने भी खाई, अगर रोटी में घी लगा हुआ खाया है तो दोनों ने खाया है। आज हर्ष का समय है और इसके साथ इस बात का दुख भी हो रहा है, आज हम एक-दूसरे के बारे में कुछ कहें, यह उचित नहीं होगा, क्योंकि सर्वसम्मत का उदय हुआ है। समूचे मध्य प्रदेश का सदन छत्तीसगढ़ के पक्ष में है, एक अच्छा वातावरण निर्मित हुआ है। हम चाहते हैं कि इस अच्छे वातावरण को और आगे बढ़ाया जाए। अगर हमसे कोई गलती हुई है, मध्य प्रदेश में ४५ वर्षों तक हमारा और आपका योगदान रहा, हम इतने वर्षों तक निरंतर एक साथ उठे-बैठे। हम लोगों ने अच्छे-बुरे सभी तरह के काम किए। हमारी अच्छे काम में भी आपके साथ भागीदार रही और बुरे काम में भी रही। अगर विकास नहीं हुआ है तो उसमें भी आपकी भागीदारी है, लेकिन जैसे श्यामाचरण जी ने कहा कि जो आज मध्य प्रदेश में असेट्स हैं उनका वेल्यूएशन करके उन्हें पैसा दिया जाए। हमारी भावना कतई दूषित नहीं है। अगर हमारे भाई का हिस्सा मध्य प्रदेश के अंदर है तो हम चाहेंगे कि हमारा भाई उसे ले। अगर उन्हें कुछ ऐसा लगता है कि कुछ देने में कमी हो रही है तो आप मांगिए। अगर आप अपने को बड़ा मानते हैं तो आप ले जाइए, छोटे भाई के रूप में देखते हैं तो आप कहिए, आपका हिस्सा आपके घर में पहुंचेगा, क्योंकि हम आपकी उन्नति चाहते हैं। ४५ वर्षों तक हम लोगों ने साथ काम किया है। हमें दुख है और हर्ष भी है, क्योंकि आपकी भावनाओं की और इच्छाओं की आज कद्र हो रही है। आज आप जीत रहे हैं। छत्तीसगढ़ के लोग इस बात के लिए संघर्ष करते चले आए हैं, आज वह लड़ाई आपने जीती है। आज हमारा भाई जब जीता है तो मुझे हर्ष हो रहा है। लेकिन हम इस तरह का वातावरण सदन में निश्चित रूप से नहीं चाहेंगे कि एक छोटी सी श्रेय की भावना को लेकर हम एक-दूसरे के ऊपर कीचड़ उछालें।
महोदय, मैं एक बहुत महत्वपूर्ण बात मंत्री जी से कहना चाहता हूं और इस तरफ मैं आपका विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। आपने जनभावनाओं की बात की है, आपने कहा है कि जिन विधान सभाओं से सर्वसम्मति से प्रस्ताव आए हैं उन प्रदेशों के निर्माण के बारे में हमने बात कही और सोची।
मैं थोड़ा सा आपका ध्यान विंध्य इलाके की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं जो रीवा संसदीय सीट के रूप में जाना जाता है। आजादी के बाद सन १९४८ में विंध्य प्रदेश की स्थापना हुई और विंध्य प्रदेश का स्वरूप अस्तित्व में आया। सन् १९५२ में चुनाव हुए और विंध्य प्रदेश की सरकार बनी और वधिवत सरकार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ी। लेकिन तत्कालीन केन्द्र सरकार के दिमाग में यह बात आई कि बड़े राज्यों का विकास ज्यादा होगा। सन् १९५६ में स्टेट रि-ऑरगेनाइजेशन का जो बिल आया, उसमें मध्य प्रदेश एक राज्य बनाया गया और विंध्य प्रदेश का भी विलय उसमें कर दिया गया। उस समय विंध्य प्रदेश के लोगों ने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी, संघर्ष किया और हजारों की तादाद में लोग जेलों में गये और यहां तक कि श्री अजीज गंगा और चिंताली विंध्य प्रदेश के संघर्ष में शहीद हो गये। लेकिन इस समय जन-भावनाओं का आदर नहीं हुआ और उसका विलय हो गया।
आज पुन: मध्य प्रदेश की असेम्बली ने १० मार्च २००० को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है कि विंध्य प्रदेश की स्थापना की जाये। वह सर्वसम्मति से प्रस्ताव है और वह सरकार के पास और संबंधित व्यक्तियों के पास भी पहुंचाया जाये। जब सर्वसम्मति की बात आई है तो मैं आपका ध्यान उस प्रस्ताव की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं जिसमें मध्य प्रदेश की असेम्बली ने एक अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पास करके केन्द्र सरकार के पास भेजा है। मैं चाहता हूं कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाये क्योंकि आज मध्य प्रदेश के पुनर्गठन का मामला है और बाद में विलम्ब हो जायेगा। इसलिए इस पर आज विचार करने का समय है। मैं चाहूंगा कि माननीय गृह मंत्री जी सदन के अंदर आश्वासन दें। आपने यह बात सही कही है कि जन-भावनाओं को ध्यान में रखते हुए और वहां की असेम्बली के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए राज्यों के विभाजन करने के प्रस्ताव आये हैं। यदि मध्य प्रदेश की असेम्बली ने एक सर्वसम्मत संकल्प पारित करके आपके पास भेजा है तो उसके बारे में भी हम आपकी राय जानना चाहते हैं। वह भी आपकी जिम्मेदारी है। ऐसी स्थिति पैदा न हो कि विंध्य प्रदेश के लोग उग्र रुप धारण कर लें। यह मांग वहां बड़ी तेजी से उठ रही है और यह विंध्य प्रदेश की जनता की भावनाओं से जुड़ी मांग है। अगर आप नहीं चाहते हैं कि गंगा और चिंताली और पैदा हों तो आप निश्चित रूप से इस मांग पर विचार करें - मेरा आपसे यही आग्रह है।
यह जो छत्तीसगढ़ का प्रस्ताव लाया गया है मैं उसका पूर्ण समर्थन करते हुए द्ृढ़ता के साथ यह मांग करता हूं कि विंध्य प्रदेश की स्थापना के बारे में, उसके पुनर्गठन के बारे में आप विचार करें और वहां की असेम्बली ने जो प्रस्ताव पास किया है, उस पर विचार करें।
श्री ताराचंद साहू (दूर्ग) : सभापति जी, छत्तीसगढ़ का विधेयक इस सदन में कुछ समय बाद पारित होने जा रहा है। कुछ माननीय सदस्यों ने विधेयक पेश करते समय भी इसका विरोध किया था और अब भी कर रहे हैं। मैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि यह विधेयक कोई भी अलगाववादी प्रवृत्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि आज के परिप्रेक्ष्य में एक नितांत आर्थिक आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी छोटे राज्यों की समर्थक रही है और उसके तहत ही छत्तीसगढ़ राज्य का विधेयक प्रस्तुत किया गया है। एनडीए की सरकार को, यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी को और द्वितीय लौह पुरुष माननीय एल.के.आडवाणी को, संसद के माननीय सदस्यों को छत्तीसगढ़ की जनता ह्ृदय से धन्यवाद देती है कि इस पर बहस होने के बाद यह प्रस्ताव पारित होने जा रहा है।
मैं प्रधान मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि आप नवजात शिशु के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य को देखें। हम उसे उनकी गोदी में सौंपते हैं। उसका लालन-पालन करना आपका कर्तव्य हैं। उसे अपने पैरों पर खड़ा होने तक, उसकी देखरेख करना एन.डी.ए. सरकार की जिम्मेदारी हो। हम यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि जब हम अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे तो केन्द्र के कोष पर हम भार नहीं होंगे अपितु यह संकल्प के साथ कहने को तैयार हैं केन्द्र के कोष को छत्तीसगढ़ की जनता भरने में सक्षम होगी। ये सारी सम्भावनाएं छत्तीसगढ़ में भरी पड़ी हैं। सब लोगों ने विस्तार से जिक्र किया है कि वहां वन सम्पदा, जल सम्पदा और खनिज सम्पदा है। वहां उपजाऊ धरती है, मेहनती इंसान हैं। इतना सब होने के बाद वहां गरीबी, हताशा, निराशा और उत्पीड़न है। वहां ये सारी बातें हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि छत्तीसगढ़ की जनता हीरे का मूल्य नहीं जानती। देवभोग में हीरे की खदान है। सौ साल से बच्चे उसे पत्थर समझ कर खेलते रहे। बाहर के लोगों ने जब बोरों में भर कर हीरे को ले जाना प्रारम्भ किया तो छत्तीसगढ़ की जनता को याद आया कि यहां हीरे का विशाल भंडार पड़ा है। स्थिति यह आई कि राज्य सरकार को दस किलो मीटर के क्षेत्र को अपने कब्जे में करना पड़ा ताकि उसे सुरक्षित कर सकें। बैलाडीला के लौह अयस्क के बारे में चर्चा हो चुकी है। वहां सारी सम्भावनाएं भरी पड़ी हैं। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य अत्यंत निर्धन और गरीब है। इस बात को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। गरीबी का चित्रण उस समय पीड़ा से भर जाता है जब तीन लड़कियां विवाह न होने के कारण और आर्थिक तंगी के कारण एक साथ पंखों पर लटक कर आत्महत्या कर् लेती हैं। उस मां की दशा का चित्रण कर आप सोचें। जो मां अपने तीन बच्चों को कुंए में फेंक देती है और स्वयं आत्महत्या कर लेती है। आप उस मां के बारे में सोचे जो अपने बच्चे को सल्फाज की गोली खिला देती है। और स्वयं भी खा लेती है। यह स्थिति छत्तीसगढ़ की है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। हम इस स्थिति से उबरना चाहते हैं। इतना होने के बाद भी हमें वहां की सामाजिक समरसता पर गर्व है। बिहार के एक माननीय सदस्य बोल रहे थे। जिस क्षेत्र का मैं प्रतनधित्व करता हूं वहां कश्मीर से कन्याकुमारी, अटक से कटक तक के लोग रहते हैं। जब वे रिटायर होते हैं तो हम उनसे कहते हैं कि आप अपने घर जा रहे हैं। वे हाथ जोड़ कर कहते हैं कि हम अपने घर नहीं जाएंगे। बिहार के लोग वहां बड़ी संख्या में रहते हैं। वे हाथ जोड़ कर और आंखों में आंसू भर कर कहते हें कि हम बिहार की धरती पर नहीं जा सकते। जिस धरती में और जिस छत्तीसगढ़ ने हमारा लालन-पालन किया, इतना प्यार दिया, हम उसे छोड़ कर कैसे जा सकते हैं। हमारे यहां जातीय संघर्ष नहीं होता है। वहां जातीय सदभावना, जातीय सहयोग और सामाजिक समरसता है। यह बिहार नहीं है, आप इस बात का ध्यान रखें।... (व्यवधान) यह विधेयक हमारे लिए सामान्य कागज के पत्ते नहीं है। यह ग्रंथ से भी महान है। सैंकड़ों वर्ष पुराना सपना साकार होने जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ की जनता आनन्दित है। हम किन शब्दों में एन.डी.ए. सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें? हमारे पास शब्द नहीं हैं। जैसा मैंने कहा कि वहां दूर-दूर तक अलगाववाद की भावना का नामो-निशान नहीं। केवल आर्थिक विवशता, आर्थिक मजबूरी है। सरकार जो विधेयक लाई, इसके लिए मैं अपनी ओर से, जन प्रतनधियों की ओर से अत्यंत कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं।
1800 hrs. सभापति महोदय : संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि प्रतिपक्ष के नेताओं द्वारा तय किया गया है कि जब तक विधेयक पर बहस पूरी नहीं होगी, इस सदन का समय बढ़ाया जाता है।
१८०० बजे श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी ( खजुराहो): माननीय सभापति महोदय, मध्य प्रदेश का पुनर्गठन करके एक नया प्रान्त का गठन करने संबंधी छत्तीसगढ़ का प्रस्ताव आज इस सदन के सामने विचारार्थ रखा गया है। मैं आज एक अजीब सी स्थिति में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं। मुझे हार्दिक खुशी इस बात की है कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र के विशाल क्षेत्र के बहुत से लोगों की जनभावनाओं की पूर्ति होने जा रही है। यह हम सब के लिये हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। यह स्वाभाविक है क्योंकि हम सब मानव हैं और हम सब की भावनायें इससे जुड़ी हुई है। हम लोग एक दूसरे के साथ एक लम्बे अरसे तक रहते है तो हमारा रागात्मक ता बढ़ जाता है और भावनात्मक रूप से भी संबंध बढ़ जाता है। जब कभी बिछुड़ने का समय आता है तो थोड़ी सी मन में वेदना भी होती है।
सभापति महोदय, हम आशा करते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हो रहा है, उस क्षेत्र के प्रति हार्दिक हम शुभकामनायें व्यक्त करें। हम आशा करते हैं कि आने वाले समय में इस क्षेत्र का विकास का सपना पूरा हो सकेगा जिसका वे एक लम्बे समय से इंतजार कर रहे हैं, जो उन लोगो का अधिकार है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि सदन में आज वभिन्न पक्षों ने अपने विचार रखे और वहां की सम्पदा, असमानता प्राकृतिक सम्पदा तथा वहां की भावी संभावनाओं के संबंध में अपने विचार रखे। मैं उन सब से अपनी सहमति जोड़ता हूं। साथ ही इतना जरूर कहना चाहता हूं कि जब माननीय गृह मंत्री इस विधेयक का पुर:स्थापन कर रहे थे तो उन्होंने कहा था कि राजनैतिक भावनाओं से ऊपर उठकर समूचे वर्ग के जनमानस द्वारा लाया गया यह विधेयक है। यह कोई राजनीति का विषय नहीं है और इसमें किसी राजनैतिक दल की पाइंट स्कोर करने की नीयत नहीं है।
सभापति महोदय, मैंने अभी कुछ साथियों के विचार सुने और मुझे ऐसा लगा कि शायद कुछ लोग इस बात को भूल गये कि इस छत्तीसगढ़ राज्य के पुनर्गठन की प्रक्रिया की शुरुआत कहां से हुई थी। इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश विधानसभा में हुई थी जब वहां १९९४ में कांग्रेस की सरकार थी, सभी दलों ने मिलकर एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से अनुमोदन करके केन्द्र सरकार को भेजा था कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया जाये।
श्री पुन्नू लाल मोहले : मैं उस समय बी.जे.पी. का वहीं विधायक था और हम लोगों ने भी समर्थन किया था।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : मैंने न तो आपका और न किसी अन्य दल के योगदान को नकारा है और न नकारने की मेरी कोई मंशा है। मैंने केवल इतना ही कहा है कि हम लोगों ने परस्पर कोई पाइंट स्कोर नहीं किय़ा और यदि सदन की एक राय बनी है तभी यह विधेयक यहां आया है। अन्यथा हमारी भावनाओं के अनुरूप नहीं होता। श्री श्यामा चरण शुक्ला छत्तीसगढ़ क्षेत्र के वरिष्ठ लोगों में से हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास के लिये भारी योगदान दिया है। हमारे कई माननीय सदस्यों ने,चाहे उस तरफ के हों या इस तरफ के हों, उन सब का योगदान रहा है फिर भी मैं सोचता हूं कि अभी सफर लम्बा है और विकास की प्रक्रिया आगे ले जाना बाकी है। मैं इस बहस में लम्बा समय नही निकालना चाहता और न मैं लम्बा समय लेना चाहता हूं लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि इस छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की प्रक्रिया एक-दो दिन में या दो-तीन महीने में पूरी नहीं हो पायेगी, इसमें लम्बा समय लगेगा। यह भावना बनी रहे और मध्य प्रदेेश के लोगों का परस्पर सहयोग मिलता रहेगा तो छत्तीसगढ़ राज्य के गठन में सामंजस्य की भावना ही इसका निर्माण है।
जहां तक असेट्स का सवाल है, उनके विभाजन का सवाल है, बंटवारे का सवाल है, ये कुछ ऐसी तकनीकी चीजें हैं जिनके बारे में हम चाहते हैं कि वह सारी प्रक्रिया इतने सहज ढंग से पूरी की जा सके कि जिसमें विवाद के लिए कोई औचित्य, कोई अवसर न बन पाये।
माननीय सभापति जी, अंत में आपको, सदन के सभी माननीय सदस्यों को जिन्होंने छत्तीसगढ़ के गठन के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए उसका पुरजोर समर्थन किया है, उन सबको बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूं और आशा करता हूं कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के जनमानस की जो भावनाएं, इच्छाएं अपेक्षाएं और आकांक्षाएं हैं, नये राज्य से उन अपेक्षाओं की पूर्ति में हम सब लोग योगदान कर सकेंगे। केन्द्र अपने स्तर से योगदान कर सकेगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को अभी लम्बे समय तक एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग और सामंजस्य की भावना से अभी आगे का लम्बा सफर तय करना होगा, ऐसी मैं आशा करता हूं और वहां के निवासियों और उन सभी दलों के लोगों को बधाई देता हू, जिन्होंने दलीय भावना से ऊपर उठकर इसके गठन में अपने सहयोग की भावना को व्यक्त किया है।
सभापति महोदय, प्रधान मंत्री जी यहां नहीं हैं। श्री आडवाणी जी यहां मौजूद हैं, अन्य लोग भी यहां मौजूद हैं। मैं उन सभी को बधाई देता हूं । हालांकि यह कुछ विलम्ब से हुआ है। हम चाहते थे कि यह विधयेक कुछ और जल्दी आता और जल्दी ही हम उस पर निर्णय ले पाते और शायद उसके गठन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी होती, पर जब सही, तब सही, विलम्ब से ही सही, कम से कम छत्तीसगढ़ के गठन की प्रक्रिया आज हम सब लोग मिलकर पूरी करने जा रहे हैं। इसलिए मै उनके प्रति और सभी दलों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। आपने मुझे बोलने का समय दिया उसके लिए मैं आपके प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं।
श्री हरीभाऊ शंकर महाले (मालेगांव) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। सदन में श्री रघुवंश बाबू ने जो यहां सवाल उठाया है उसका मैं कड़ा समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। इस बिल से कई आदिम जातियों के लोग होंगे इधर और उधर, इसका नाम है छत्तीसगढ़।
सभापति महोदय, १९६० में मध्य प्रदेश का बंटवारा हुआ और विदर्भ महाराष्ट्र में चला गया। वहां नामवंत मुख्य मंत्री थे जिनमें कैलाशवासी य़शवंतराव चव्हाण, कन्नमवार जी और वसंतराव नाइक मुख्य थे। ये लोग ११ वर्ष तक विदर्भ से मुख्य मंत्री रहे। १९८० में विदर्भ में चला गया। उस वक्त मैं विधायक था, आदिम जातियों की स्थिति देखने के लिए चला गया। बहन मायावती तब इस गांव का मुझे पता चला। मैं पांव-पांव १५ किलोमीटर उधर चला गया। वहां जाकर क्या देखता हूं कि सारे लोग अध्र्द-नग्न थे। इसलिए मेरा कहना है कि बंटवारे से, राज्य बनने से आदिम जातियों का भला हो जाता है, इसमें मेरा भरोसा नहीं है। माननीय राम नाइक जी को मालूम है, उस वक्त मैंने सवाल खड़ा किया था कि आदिम जातियों के सुधार के लिए ज्यादा पैसा देना चाहिए। मायावती जी ने बोला है कि बजट में दस प्रतिशत समावेश किया, यह उन्होंने बोला है, उन्होंने सच बोला है।
कुमारी मायावती : उत्तर प्रदेश में जब हमारी सरकार थी तो हमने एस.सी. और एस.टी. के डेवलपमैंट के लिए टोटल बजट में २१ प्रतिशत अलग से प्रावधान रखा था।
श्री हरीभाऊ शंकर महाले : यह मायावती जी ने बोला है और उनका सुधार हो गया, बंटवारा हो गया। यह बिल पास हो जायेगा। लेकिन आदिम जातियों के बारे में यह सोचना जरूरी है कि लोक सभा और विधान सभा में जो सीटें हैं, वे कम नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनमें बढ़ौतरी होनी चाहिए। यही मेरी मांग है और इतना ही मेरा कहना है कि बंटवारा तो हो गया लेकिन जो यह ३६ का आंकड़ा है इसे विकास के लिए ६३ का बनना चाहिए, यही मेरी विनती है।
गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी) : माननीय सभापति जी, मैं सबसे पहले आज की चर्चा जिस रूप में हुई है, उसके लिए सदन के सभी दलों और सदस्यों को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। उसके लिए अगर किसी एक व्यक्ति को श्रेय देना चाहिए तो जिन्होंने आज बहस का आरंभ किया विपक्ष की ओर से मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री, वहां के वरिष्ठ नेता और जिनके पिताजी का सहज रूप से उल्लेख आज इस बहस में हो गया, पंडित रविशंकर शुक्ल जी, और उन्होंने जिस प्रकार की एक रचनात्मक शैली की भूमिका बनाई उससे हरेक के मन में जो बात थी, वह प्रकट हुई और कोई यह कह सकता है, किसी ने कहा भी कि यह ऐसा विषय है जिस पर सरकारी पार्टी और प्रमुख विरोधी दल मिल गए, इसलिए ऐसा हो रहा है, लेकिन मुझे इस बात की सबसे ज्यादा खुशी हुई जब केवलमात्र हमारी सरकारी पार्टी नहीं, केवलमात्र प्रमुख विरोधी पार्टी नहीं, लेकिन इस सदन के जो सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और मैं जिस पद पर आज बैठा हूं, वहां के पूर्वाधिकारी और सीपीआई के नेता श्री इंद्रजीत गुप्त ने खड़े होकर कहा कि मैं आज के दिन को ऐतिहासिक दिन मानता हूं क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हो रहा है।
१८११ बजे(उपाध्यक्ष महोदय पीठासन हुए) मुझे बहुत आनन्द हुआ उस समय जब श्री इंद्रजीत गुप्त ने इन शब्दों में इस विधेयक का स्वागत किया। निश्चित रूप से पौने दो करोड़ की जो जनसंख्या है छत्तीसगढ़ की, उनके लिए आज का दिन आनन्द का दिन है, बहुत खुशी का दिन है। हिन्दुस्तान के राज्यों के संदर्भ में भले ही लगता हो कि छत्तीसगढ़ छोटा राज्य है और भले ही बहुत सारे लोगों ने इस बात का स्वागत किया कि छोटे राज्य बन रहे हैं, मायावती जी ने स्वागत किया, और भी कुछ सदस्यों ने कहा कि छोटे राज्य बनना अच्छा है लेकिन दुनिया के देशों को देखा जाए तो पौने दो करोड़ की जनसंख्या कई देशों से ज्यादा है। दुनिया के बहुत सारे देश हैं कि जिनकी कुल जनसंख्या पौने दो करोड़ से कम है और पौने दो करोड़ की जनसंख्या में जब इतनी बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग हैं, पिछड़े वर्ग के लोग हैं तो स्वाभाविक रूप से लगता है कि इस राज्य को गठित करके हम केवलमात्र भारत के नक्शे में एक नया राज्य ही नहीं जोड़ रहे हैं, बल्कि एक बहुत बड़ा वर्ग है जो चाहे जिस कारण से उपेक्षित है, उसकी ओर विशेष ध्यान दे रहे हैं। जो तीन राज्य हम इस सप्ताह में गठित करने जा रहे है, उनमें दो राज्य इसी प्रकार के हैं जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की संख्या काफी है और इसीलिए आज के इस अवसर पर मैं सभी सदस्यों को जिन्होंने इस बहस में भाग लिया, अंत:करण से धन्यवाद देना चाहता हूं।
१८१४ बजे (अध्यक्ष महोदय पीठासीन हुए) अध्यक्ष महोदय, कुछ बातें स्वाभाविक हैं और कहनी भी चाहिए। मुझे जानकारी नहीं थी जो सुन्दर लाल तिवारी जी ने कहा। मैं जाकर देखूंगा क्योंकि उन्होंने मेरा ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि मध्य प्रदेश की विधान सभा ने एक सर्वसम्मत प्रस्ताव स्वीकार करके विन्ध्य प्रदेश की भी मांग की है। ऐसा बताया सुन्दर लाल तिवारी जी ने। …( व्यवधान) वह शासकीय होगा लेकिन सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया है। सरकार ने उस पर क्या टिप्पणी करके भेजा है, मैंने कम से कम देखा नहीं है। आपने ध्यान दिलाया है तो मैं उसको जरूर देखूंगा। जैसे श्यामाचरण जी ने बोलकर आरंभ कर दिया छत्तीसगढ़ी शैली का तो जब छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलने लगे मोहले जी, मैंने सोचा कि पूरा भाषण भी छत्तीसगढ़ी में होता तो किसी को समझने में कोई दिक्कत नहीं होती।
सभी सहज समझ रहे थे लेकिन वे दो चार वाक्य बोलकर फिर नहीं बोले। लेकिन जब महंत जी बोल रहे थे और पूरा छत्तीसगढ़ का इतिहास सुना रहे थे, सब महापुरुषों के नाम ले रहे थे तब कितने गद्गद हो रहे थे, कितने प्रफुल्लित हो रहे थे क्योंकि राज्य बनना और जिस क्षेत्र में हम काम करते रहे हैं खासकर मध्य प्रदेश तो इतना बड़ा है कि उसमें उस छोटे से हिस्से के साथ, छोटे से हिस्से मायने मध्य प्रदेश के आकार की द्ृष्टि से छोटा, वैसे छोटा नहीं है, उसके साथ जो आत्मीयता का भाव होता है, छत्तीसगढ़ के निवासियों को, वह औरों के साथ नहीं हो सकता है। इसलिए छत्तीसगढ़ के लोग जो भी बोलें, चाहे वह महंत जी बोलें या हमारी ओर से जो भी तीन-चार लोग बोले, ताराचन्द साहू तक वह बड़े प्रसन्न थे, बड़े आनंदित थे, बड़े गद्गद थे। इसीलिए उनको कभी-कभी खटकता था कि कोई भी पार्टी या कोई भी सदस्य ऐसे मौके पर विरोध की भाषा क्यों बोल रहा है। मुझे बहुत खुशी होगी, जिन लोगों ने अपनी थोड़ी बहुत विरोध की भाषा बोली भी हो, वह कम से कम जिस समय यह सदन इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, उस समय आइज़ की ध्वनि में अपनी आवाज मिलाकर सर्वसम्मित से इसे पास करे। इससे मुझे बहुत खुशी होगी। इस प्रकार के विधेयक जब भी पारित होते हैं तो उसमें निश्चित रूप से प्रबंध होते हैं क्योंकि कई सदस्यों ने इस बात का जिक्र किया कि जब भी नया राज्य बनता है तब उसमें कठिनाइयां आ सकती हैं। उन कठिनाइयां का हल कैसे होगा? उसके लिए क्या प्रावधान हैं ? केन्द्रीय सरकार की जवाबदारी होनी चाहिए। मैं उनका ध्यान मध्य प्रदेश रिआर्गनाइजेशन बिल के क्लाज ८६ की ओर दिलाना चाहूंगा। ये प्रावधान जितने रिआर्गनाइजेशन्स बिल होते हैं, सबमें होते हैं। उसमें कहा है -
"If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the President may, by order, do anything not inconsistent with such provisions which appear to him to be necessary or expedient for the purpose of removing the difficulty:
Provided that no such order shall be made after the expiry of a period of three years from the appointed day."
अर्थात् राज्य के गठन के बाद भी तीन साल तक केन्द्रीय सरकार को इस बिल के अधीन यह अधिकार होगा कि वह आर्डर के द्वारा किसी कठिनाई को दूर करे और वह कठिनाई ऐसी नहीं होनी चाहिए कि वह बिल की भावना के खिलाफ जाये, किसी प्रावधान के खिलाफ जाये। लेकिन प्रावधान के खिलाफ न जाकर कोई कठिनाई पैदा होती है तो उस कठिनाई को तीन साल के अंदर हल करने का अधिकार आपने केन्द्रीय सरकार को दिया है, राष्ट्रपति को दिया है। आपने जो अधिकार दिया है, उसके द्वारा मैं विश्वास करता हूं कि जब हम इसकी प्रक्रिया आरंभ करेंगे तब उसमें कुछ समय लगेगा। उसमें जो कठिनाई आयेंगी, उनको हम हल कर सकेंगे।
बाकी कुछ बातें श्यामाचरण जी ने कही हैं। पानी के संबंध में भी उन्होंने कहा है। मैं उन्हें जरूर देखूंगा। उसमें जो भी करना आवश्यक होगा, अगर मुझे कोई छोटा-मोटा संशोधन लाने की भी जरूरत पड़ती है, ऐसी कोई महत्वपूर्ण बात है क्योंकि उन्होंने कहा कि पहले जो प्रावधान था, वह ज्यादा अच्छा था, मैं उसको जरूर देखूंगा। मैं चाहूंगा कि इस बार छत्तीसगढ़ का राज्य बनता है जैसा श्यामाचरण जी ने कहा, वह हिन्दुस्तान के नक्शे का एक भूषण बने। वैसे समृद्धि है, उसमें कोई दिक्कत नहीं है। वहां पर जो पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिग्स हैं, उसके बारे में बहुत से लोगों ने जिक्र किया, इंद्रजीत जी ने उनको गिनाया है कि उन सबको ध्यान में रखा जाये तो निश्चित रूप से इस राज्य के बनने के बाद न केवल वहां की जन इच्छा पूरी होगी, बल्कि लोकतंत्रीय इच्छा पूरी होगी इसलिए लोकतंत्र मजबूत होगा। लेकिन साथ-साथ निश्चित रूप से समृद्धि भी आयेगी और विकास भी संतुलित होगा। इन्हीं शब्दों के साथ फिर से सदन को धन्यवाद देते हुए प्रस्ताव करता हूं कि इसको सर्वसम्मति से पास किया जाये ।
MR. SPEAKER: I shall now put amendment No.1 moved by Shri Varkala Radhakrishnan, amendment No.2 moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh, amendment Nos. 3 and 4 moved by Shri Swadesh Chakraborty to the vote of the House.
The amendments Nos. 1,2,3 and 4 were put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That the Bill to provide for the reorganisation of the existing State of Madhya Pradesh and for matters connected therewith, be taken into consideration. "
The motion was adopted.
MR. SPEAKER: The House shall now take up clause-by-clause consideration of the Bill.
"That clause 2 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 2 was added to the Bill.
Clause 3 डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ २, पंक्ति २५, -
"और सरगुजा के स्थान पर सरगुजा, सीधी, शहडोल, मंडला, बालाघाट, डिनडोरी और उमरिया " प्रतिस्थापित किया जाए।(५) MR. SPEAKER: I shall now put amendment No.5 moved by Dr.Raghuvansh Prasad Singh to the vote of the House.
The amendment No. 5 was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That lause 3 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 3 was added to the Bill.
Clauses 4 to 6 were added to the Bill.
Clause 7 डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ ३, पंक्ति ७-
"11 " के स्थान पर "१० " प्रतिस्थापित किया जाए।(६) पृष्ठ ३, पंक्ति ९, -
"5" के स्थान पर "6" प्रतिस्थापित किया जाए।(७) MR. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 6 and 7 moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh to the vote of the House.
The amendmentsNos. 6 and 7 were put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 7 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 7 was added to the Bill.
Clause 8 was added to the Bill.
Clause 9 डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ ३, पंक्ति १५, -
"29 " के स्थान पर "25 " प्रतिस्थापित किया जाए।(८) पृष्ठ ३, पंक्ति १६, -
"11 " के स्थान पर "15" प्रतिस्थापित किया जाए।(९) MR. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 8 and 9 moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh to the vote of the House.
The amendmentsNos. 8 and 9 were put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 9 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 9 was added to the Bill.
Clauses 10 and 11 were added to the Bill.
Clause 12 डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ ३, पंक्ति ३२, -
"90 " के स्थान पर "119" प्रतिस्थापित किया जाए।(१०) पृष्ठ ३, पंक्ति ३३, -
" 230" के स्थान पर "201 " प्रतिस्थापित किया जाए।(११) MR. SPEAKER: I shall now put amendment Nos.10 and 11 moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh to the vote of the House.
The amendmentsNos. 10 and 11 were put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 12 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 12 was added to the Bill.
Clauses 13 to 86 were added to the Bill.
First Schedule डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ २५, -
पंक्ति ९ से १३ में " श्री बालकवि बैरागी और श्रीमती माबेल रिबैलो, जिनकी पदावधि ३० जून, २००४ को समाप्त होगी, ऐसा एक सदस्य जिसे राज्य सभा का सभापति श्री दिलीप कुमार जूदेव और श्री झुमुक लाल भेंडिया में से लाट द्वारा अवधारित करे, छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों में से एक स्थान को भरने के लिए निर्वाचित समझा जाएगा और अन्य चार आसीन सदस्य मध्य प्रदेश राज्य को आबंटित स्थानों मं से चार स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे। "
के स्थान पर " श्री बालकवि बैरागी और श्रीमती माबेल रिबैलो, श्री दिलीप कुमार जूदेव और श्री झुमुक लाल भेंडिया छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे। "
प्रतिस्थापित किया जाए।(12) MR. SPEAKER: I shall now put amendment No.12 moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh to the vote of the House.
The amendment No. 12 was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That First Schedule stand part of the Bill."
The motion was adopted.
First Schedule was added to the Bill.
दूसरी अनुसूची डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
पृष्ठ २७, पंक्ति ३१ के पश्चात् निम्नलखित अंत:स्थापित किया जाए।
"12. सीधी (अनु. जनजाति)-सीधी, देवसर (अनु. जनजाति), सिंगरोली (अनु. जनजाति), धोहनी (अ.ज.जा.), सीधी गोवदबनास, चुरहट।
१३. शहडोल (अ.ज.जा.)-शहडोल, व्यवहारी, जयसिंह नगर, कोटमा (अ.ज.जा.), अनूपपुर (अ.ज.जा.), सोहागपुर, पुष्पराजगढ़ (अ.ज.जा.)।
१४. मण्डला (अ.ज.जा.)-नमनपुर (अ.ज.जा.), मण्डला (अ.ज.जा.), निवास (अ.ज.जा.), उमरिया, नरोजाबाद (अ.ज.जा.), ढ़ींडोती (अ.ज.जा.), बीचीया (अ.ज.जा.), बजाग (अ.ज.जा.)।
१५. बालाघाट-बेहार (अ.ज.जा.), लोजी, किरनापुर, बरासी वीनी, खेरलोजी, बालाघाट, पासवाडा।"(१३)
"पृष्ठ ३३,--
पंक्ति ३३ के पश्चात् निम्नलखित अंत:स्थापित किया जाये:-
९१. देवसर (अ.ज.जा.)
९२. सिंगरौली (अ.ज.जा.) धोहनी गोवदबनास चुरहट सीधी शहडोल व्यवहारी जयसिंह नगर कोटमा (अ.ज.जा.) अनूपपुर (अ.ज.जा.) सुहागपुर पुष्पराजगढ़ (अ.ज.जा.) उमरिया नरोजाबाद (अ.ज.जा.) मंडला (अ.ज.जा.) नानपुर (अ.ज.जा.) निवास (अ.ज.जा.) डिंडोरी (अ.ज.जा.) बचिया(अ.ज.जा.) बजाग (अ.ज.जा.) शाहपुरा बालाघाट बेहार लोजी किरनापुर बारसिवनी खेरलोजी वेहंगी पहसवारा"(१४)
MR. SPEAKER: I shall now put amendments No.13 and No.14 to the vote of the House.
The amendments Nos. 13 and 14 were put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That the Second Schedule stand part of the Bill."
The motion was adopted.
The Second Schedule was added to the Bill.
The Third Schedule was added to the Bill.
The Fourth Schedule was added to the Bill.
The Fifth Schedule was added to the Bill.
The Sixth Schedule was added to the Bill.
The Seventh Schedule was added to the Bill.
The Eighth Schedule was added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
SHRI L.K. ADVANI: I beg to move:
"That the Bill be passed."
MR. SPEAKER: The question is:
"That the Bill be passed."
The motion was adopted.
MR. SPEAKER: The House stands adjourned to meet again tomorrow, the 1st August, 2000 at 11 a.m. 1827 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Tuesday, August 1, 2000/Sravana 10, 1922 (Saka)
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