Lok Sabha Debates
Prof. Rita Verma Called The Attention Of The Minister Of Coal Regarding Coal Mine ... on 5 August, 2003
ont> 12.04 hrs. CALLING ATTENTION TO MATTER OF URGENT PUBLIC IMPORTANCE Situation Arising out of Coal Mine Accidents in the country ‘particularly in Singareni Colleries Company Ltd. in Andhra Pradesh and Steps taken by the Government in regard thereto Title: Prof. Rita Verma called the attention of the Minister of Coal regarding coal mine accidents in the country, particularly in the Singareni Collieries Company Limited in Andhra Pradesh and steps taken by the Government in regard there to.
प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): अध्यक्ष महोदय, मैं कोयला मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाती हूं और प्रार्थना करती हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
"देश में कोयला खानों, विशेषकर आन्ध्रा प्रदेश की सिगरेनी कोलियरीज़ कंपनी लमिटेड में हुई दुर्घटनाओं से उत्पन्न स्थिति तथा इस संबंध में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की ओर कोयला मंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं।"
कोयला मंत्री (श्री कड़िया मुण्डा) : अध्यक्ष महोदय, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लि. की गोदावरी खानी की ७ एल.ई.पी. खान में १६.६.२००३ को जलप्लावन के कारण १७ श्रमिक डूब गए थे। १६, जून, २००३ को प्रथम पाली में विकास खदानों की सीम संख्या ३ का ऊपरी भाग उसी सीम के निचले भाग के साथ जुड़ गया, जिसे हाईड्रोलिक रेत भराई के संयोजन से खनित किया गया था और उसमें पानी था। इससे ऊपरी भाग के खदान में जलप्लावन हुआ और १७ श्रमिक डूब गए।
इस संबंध में एस.सी.सी.एल. द्वारा प्राथमिक जांच तथा एस.सी.सी.एल. के आंतरिक सुरक्षा संगठन द्वारा विभागीय जांच की गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर एस.सी.सी.एल. प्रबंधन ने श्री जे. नागिया, एजेन्ट, श्री ए. रवि कुमार, प्रबंधक, श्री अब्दुल गफूर, सुरक्षा अधिकारी तथा स्थानापन्न प्रबंधक और श्री पी.पपी रेड्डी, सर्वेयर को पहले ही निलंबित कर दिया गया है।
खान सुरक्षा महानिदेशालय (डी.जी.एम.एस.) द्वारा खान अधनियम, १९५२ के प्रावधानों के अनुसार सांवधिक जांच पहले ही आरंभ कर दी गई है। खान अधनियम, १९५२ के अंतर्गत सरकार द्वारा एक जांच न्यायालय गठित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
मानसून में सतही जल से जलप्लावन के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एस.सी.सी.एल. द्वारा निम्नलखित कदम उठाये जा रहे हैं - डी.जी.एम.एस. के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जलप्लावन के खतरे का आकलन करने के लिए सतह पर तथा भूमि के नीचे, दोनों का मानसून पूर्व सांवधिक जांच सर्वेक्षण किया जाता है। सतही जल से जलप्लावन के संभावित खतरे वाली ७ खानों को निर्दिष्ट किया गया हैं क्योंकि उनकी खदानें गोदावरी नदी अथवा नाले के एच.एफ.एल. के नीचे हैं। सुरक्षा प्रबंध पर स्थायी आदेश नोटिस बोर्डों तथा मुख्य स्थलों पर स्थानीय भाषाओं में प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि श्रमिकों में जागरूकता पैदा की जा सके। बचाव मार्गों को निर्दिष्ट करके उन्हें भूमिगत खदानों में अंकित किया गया है। विशेष दलों द्वारा प्रत्येक प्रचालनशील खान में जांच-सर्वेक्षण नियमित अंतरालों पर किए जा रहे हैं। मानसून के मौसम के दौरान वरिष्ठ अधिकारी विद्यमान प्रबंधों की औचक जांच करते हैं। सन्निकट भारी वर्षों के संबंध में चेतावनी देने और जलाशयों में पानी के अत्यधिक प्रवाह की स्थिति में बाढ़ के दरवाजों को खोलने के समय की सूचना देने के लिए मौसम विभाग एवं केन्द्रीय जल आयोग के साथ सम्पर्क रखा जा रहा है। पर्यवेक्षकों तथा कार्यपालकों को जलप्लावन के खतरे के बारे में बताना तथा इसके प्रति उनमें जागरूकता उत्पन्न करना।सी.आई.एल. में, प्रत्येक मानसून से पहले प्रत्येक खान में पानी के सतह तथा भूमिगत दोनों रुाोतों से जलप्लावन के खतरों की जांच की जाती है तथा उक्त के लिए निवारक उपायों के लिए कार्य-योजना तैयार की जाती है और उसे लागू किया जाता है।
कोल इंडिया लमिटेड ने खानों में जलप्लावन के विरुद्ध रक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की है और निम्नलखित कदम उठाए हैं - जहां-कहीं जलप्लावन का खतरा होता है, पानी से भरी खदानों के बीच बैरियर स्थापित करने के लिए जांच-सह संबंध सर्वेक्षण किए गए हैं। सर्वेक्षण कार्मिकों और सर्वेक्षण उपकरणों की आवश्यकता का आकलन किया गया है और जहां कही अपेक्षित होता है, सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है। खान नक्शों को नेशनल ग्रिड के साथ जोड़ने के कार्य पर जोर दिया गया है और यह कार्य पूर्ण होने वाला है।जहां एस.सी.सी.एल. की जी.डी.के.-७ एल.ई.पी. खान में जलप्लावन के कारण तथा परिस्थितियां जांच के अधीन हैं, वहीं बी.सी.सी.एल. की गजलीटांड तथा बागडिगी खान में हुए जलप्लावन की जांच न्यायालयों द्वारा की जा चुकी है और जांच न्यायालयों की अधिकांश सिफारिशें क्रियान्वयनाधीन हैं।
(Alsoplaced in Library. See No. L.T.7884-A/2003) प्रो. रीता वर्मा : माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी कृपा से मैंने इस सवाल को उठाया है, इसलिए मैं आपका धन्यवाद भी करूंगी और आपका विशेष संरक्षण भी चाहूंगी। मैं माननीय कोयला मंत्री जी से कहूंगी कि वह मंत्री जरूर हैं, लेकिन मंत्री से पहले एक जनप्रतनधि हैं और एक ऐसे राज्य से आते हैं जहां कोयला खदानें बहुत अधिक हैं। इसलिए मंत्री से पहले एक जनप्रतनधि के रूप में सोचें और तब जवाब दें। कोई तथ्य उनके ऊपर आक्षेप नहीं है। कोयला क्षेत्र में इतने दिनों से जो कार्य-प्रणाली चल रही है, उसके ऊपर आक्षेप है और उसकी ओर ध्यान दिलाने के लिए प्रश्न किया जाता है, ऐसा सोचकर आप जवाब दें। हाल ही में जो उन्होंने बताया…( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : मैडम, आप भी कोयला मंत्री थीं।
प्रो. रीता वर्मा : कोयला मंत्री होना एक छोटी सी चीज़ है लेकिन मैं पिछले १३ सालों से कोयला क्षेत्र का प्रतनधित्व कर रही हूँ यह ज्यादा बड़ी चीज़ है। …( व्यवधान)मुझे सौभाग्य मिला है कि मैं कोयला क्षेत्र के लोगों का प्रतनधित्व कर रही हूँ।
अध्यक्ष महोदय : आठवले जी, आप बैठिये। कालिग अटैन्शन मोशन शुरू हो गया है।
...( व्यवधान)
प्रो. रीता वर्मा : यह ऐसी समस्या है जिससे समस्त भारतीय उद्योग, उसमें काम करने वाले लाखों मज़दूर और साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ही प्रतिकूल असर पड़ रहा है। हाल ही में सिंगरेनी कोलियरीज़ में जो एक्सीडेन्ट हुआ, मंत्री जी ने उसके कारण बताए। अगर मैं एक ले मैन की भाषा में कहूँ तो वर्किंग के समय बिना ब्लास्िंटग के बैरियर में एक जगह छेद हो गया, पंक्चर हो गया और उस पंक्चर से बगल की कोलियरी का पानी भरभरा कर अंदर घुस गया। मैं सीधी-सीधी भाषा में यह बता रही हूँ। यह ज़ाहिर है कि पंक्चर बिना ब्लास्िंटग के हो गया, तो वहां की दीवार या बैरियर कितना पतला होगा, यह सोचने की बात है। इसीलिए मैं कहता हूँ कि जो कोयला खदानों के मैप्स हैं, उनकी सही मैपिंग नहीं होती है, सही माइन प्लानिंग नहीं होती है और इसलिए पता नहीं लगता है कि किधर बैरियर कितना कम हो गया, किधर से छेद हो जाएगा, किधर से पानी आ जाएगा। यह इनको पता ही नहीं लगता है। कोयला उद्योग में इस तरह की दुर्घटना कोई नई बात नहीं है। पिछले दस सालों में हम लोग गिनाएं तो हर दो-तीन सालों में भयंकर दुर्घटनाएं होती रही हैं। १९९५ में गजलीकाड की दुर्घटना हुई जिसमें ६४ मज़दूर जल-प्लावित हो गए, उनको जान गँवानी पड़ी। १९९७ में झरिया शहर के नीचे बिना आकलन के ब्लास्िंटग कर दी गई जिससे झरिया शहर में मकान गिरने लगे। जब डर के मारे लोगों ने चिल्लपौं मचाई, जिसमें हम लोग भी थे, तो वह बंद कर दिया गया और उसके बाद दिखाया गया कि वहां तो काम ही नहीं कर रहे थे। पर वहां भी ब्लास्िंटग की गई थी। २००१ में बागडिगी में भयानक हादसा हुआ जिसमें २९ कोयला मज़दूरों की जान चली गई। हम देख रहे हैं कि हर दो-तीन सालों में ये दुर्घटनाएं रिपीट हो रही हैं। आखिर इसका कारण क्या है और जब तक इसके कारणों का निवारण नहीं किया जाएगा, तब तक ये दुर्घटनाएं होती रहेंगे और कोयला मज़दूरों की जान जाती रहेगी। कोयला मज़दूर ही क्या, दूसरे अंडरग्राउंड माइन्स में भी मज़दूरों का जीवन असुरक्षित रहेगा।
अध्यक्ष जी, मैंने ५ मार्च, १९९९ को लोक सभा में कोल माइन प्लानिंग के बारे में एक सवाल उठाया था। मैं एक मिनट आपका संरक्षण चाहूँगी और मैं उस सवाल और उसके जवाब को पढ़ना चाहूंगी कि कितनी ढिठाई से अधिकारी इस सर्वोच्च सदन को गुमराह करने का हौसला दिखाते हैं, कैसे उनकी हिम्मत बढ़ गई है। मेरा प्रश्न था कि --
"The day on which the map of underground mines of BCCL was prepared."
और प्रश्न का दूसरा भाग था --
"The number of times the map of underground mines have been updated so far after the nationalisation of coal industry."
इसका जवाब ज़रा ध्यान से सुना जाए --
"Under the statutory provision of Coal Mines Regulation, a number of maps/plans are required to be maintained for every working underground mine. Such maps/plans are being maintained for every working underground mine of BCCL. Under the statute these maps/plans are required to be updated once in every three months, every quarter. As per information received from BCCL, the statutory plans are updated every quarter for every working mine of BCCL."
यह जवाब ५ मार्च १९९९ को दिया गया था। दो साल से कम समय में वहां बागडिगी का हादसा हो गया। जब यह हादसा हुआ तो अभी कहा जा सकता है कि यह पुरानी बात हो गई, १९९९ की बात है, लेकिन कोई भी दुर्घटना होगी और जब उसकी इनक्वायरी कमेटी की रिपोर्ट आएगी, तभी उसके कारणों पर बहस हो सकती है और उसकी मीमांसा हो सकती है। इसी साल उसकी इनक्वायरी रिपोर्ट आई। मैं उसमें से कुछ उद्धरण करना चाहूँगी। वहां के सीएमडी का बयान था इनक्वायरी कमीशन के सामने --
"He claims success. No fault was detected in the working plan….
MR. SPEAKER: You have to be very brief.
प्रो. रीता वर्मा : मैं बहुत शॉर्ट में कहूंगी। मुझे वैसे भी लंबा भाषण देने की आदत नहीं है। मैं क्वोट करना चाहती हूँ और मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि …( व्यवधान)
श्री कड़िया मुण्डा : प्रो. रीता वर्मा कोयले पर ज्यादा लंबा बोलती हैं।
प्रो. रीता वर्मा : नहीं, मैं बहुत संक्षेप में बोलती हूँ। मुझे ज्यादा लंबा बोलने की आदत नहीं है। जो मैं क्वोट कर रही हूं, वह बागडिगी माइन्स की इनक्वायरी कमीशन की रिपोर्ट है, इसलिए वह पब्लिक डॉक्यूमैन्ट है। सी.एम.डी. का कहना था कि --
"There was no occasion to suspect or cast doubt on the correctness of the plan. He claims that no one had entertained any suspicion on their working. He opines therefore that the accident did not occur due to any failure of management."
महोदय, इसके साथ-साथ मैं बताना चाहूंगी कि एक ही महीने के बाद डी.जी.एम.एस.इन्क्वायरी कमीशन ने जस्टीफाई किया और उन्होंने कहा, मैं बागडिगी की घटना के संबंध में रैलेवेंट पोरशन को कोट करना चाहती हूं-
"It may be recalled that Shri Swapan Adhikari, Director of Mines Safety, Witness No. 55, during his inspection of the colliery, had specifically stated in his report of inspection that he had felt barrier between Bagdigi and Jayrampur Collieries to be doubtful. He had, however, instructed agent of Bagdigi Colliery to prepare a fresh plan after consultation with the management of Jayrampur Colliery. The above suspicions were reason enough for the agent and the concerned officials of Bagdigi colliery management to be alerted and take proper action for preparation of fresh plan. But, strangely enough, the urgency was never felt by them."
अध्यक्ष जी, ये दुर्घटनाएं बार-बार हो रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों में डी.जी.एम.एस. ने झरिया क्षेत्र की छ: माइन्स को असुरक्षित घोषित किया और कई उपाय बताए कि उनको करने के बाद ही माइन्स में काम हो, लेकिन कोलियरी मैनेजमेंट ने उस पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया और पहले की तरह काम करते रहे, लेकिन अन्त में उन खानों में वर्किंग को बन्द करना पड़ा।
अध्यक्ष महोदय, ऐसी स्थिति में जब बागडीगी में यह प्रूव हो गया है कि -
"There has been a serious error and fault in the preparation and maintenance of the working plan and this error was the root cause for deviation in the direction of working and the resultant accident."
मत्री जी का जवाब है कि -
" जहां-कहीं जलप्लावन का खतरा होता है, पानी से भरी खदानों के बीच बैरियर स्थापित करने के लिए जांच-सह संबंध सर्वेक्षण किए गए हैं। खान नक्शों को नेशनल ग्रिड के साथ जोड़ने के कार्य पर जोर दिया गया है.."
मैं मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि खान नक्शे तैयार कैसे हो रहे हैं, क्या इनके पास आज इसकी टैक्नौलौजी है ? मैं बताना चाहती हूं कि इनके पास सिर्फ फिजीकल वैरीफिकेशन को छोड़कर और इसमें भी इन्हें यह पता नहीं लगता है कि बैरीयिर की किस जगह कितनी मोटाई है और कितनी गहराई है, यह पता नहीं लगता है, कोई और टैक्नौलौजी नहीं है। मैं मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि कौन सी टैक्नौलौजी इवाल्व कर रहे हैं जो ये दावे के साथ कह रहे हैं कि मैप अपग्रेड कर दिए गए हैं और सही मैप बना दिए गए हैं और सभी जगह बैरीयर्स की थिकनैस की जानकारी है। मैं पूछना चाहती हूं कि आपने कौन सी टैक्नौलौजी इवाल्व की है, यदि टैक्नौलौजी नहीं है, तो टैक्नौलौजी प्राप्त करने के लिए आप क्या कर रहे हैं और बिना टैक्नौलौजी प्राप्त किए कैसे वे कह रहे हैं कि वे सारे नक्शे सही बना रहे हैं और यदि ऐसा है तो हर बरसात में बार-बार डी.जी.एम.एस. इनकी खदानों को क्यों बन्द कर देता है, पहली बात तो मैं यह पूछना चाहती हूं।
अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात मैं यह जानना चाहती हूं कि मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े हुए इस पहलू पर, मजदूरों की जान बचाने के लिए, देश की सम्पत्ति को कैसे लूटा जा रहा है, मैं इस बारे में बताना चाहती हूं क्योंकि इसके कारण भ्रष्टाचार होता है। खान से कोयला निकालने के दो तरीके हैं। एक है डैवलपमेंट और दूसरा डी-पिलरिंग होता है। डैवलपमेंट में श्रम लगता है, समय लगता है और पैसा खर्च होता है। डी-पिलरिंग में तो फटाफट काम होता है, काट-छांट कर बराबर कर देते हैं और हाई प्रोडक्शन के लिए एवॉर्ड भी ले लेते हैं और बाद में जब सेफ्टी खतरे में पड़ेगी, तब तक तो अधिकारी एवार्ड लेकर, प्रमोशन पाकर वहां से चल ही देंगे। इसलिए डी-पिलरिंग और स्लॉटर माइनिंग की जो प्रथा चल रही है, उसे रोकने के लिए वे क्या कर रहे हैं और जो लोग इसके लिए उत्तरदायी हैं, उनको दंडित करने के लिए वे क्या कार्रवाई कर रहे हैं। सर्वेयर और नीचे के ऑफीसर्स को दंडित करना तो बहुत आसान है, लेकिन मैं कहूंगी कि चेयरमैन के लैवल पर जो इतनी बड़ी भूलें हुई हैं, मैं इन्हें भूलें नहीं कहूंगी, बल्कि अपराध कहूंगी क्योंकि सैक्शन २२ के अन्तर्गत जब माइन बन्द करने के लिए सितम्बर में कह दिया गया था, तो फरवरी तक २४ घंटे माइन में काम क्यों होता रहा। इसलिए यह एक अपराध है। इसके लिए मंत्री जी किसे दंड देने की सोच रहे हैं ? सिर्फ ये दो प्रश्न ही मैं आपसे पूछना चाहती हूं।
श्री कडिया मुण्डा : अध्यक्ष महोदय, एक तो माननीय सदस्या ने विशेषरूप से सिंगरेनी कोलियरीज के बारे में पूछा है। …( व्यवधान)
प्रो. रीता वर्मा : नहीं, मैंने " बागडीगी " कोलियरी के बारे में विशेषरूप से पूछा है।
श्री कडिया मुण्डा : महोदया, आपने एक घंटे भाषण दिया, मैंने पहला ही वाक्य बोला है और आप मुझे टोक रही हैं। कृपया मेरी बात सुन लीजिए। आपने १० वर्षों का आंकड़ा दिया और कहा कि कई जगह इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। इस प्रकार की घटनाएं दो प्रकार से होती हैं। पहली हयूमन ऐरर और दूसरे खानों में प्राकृतिक रूप से गैस बनने के कारण आग लगने से होती हैं।
बागडीगी के संबंध में इन्होंने पूछा है। मैं बताना चाहता हूं कि उस वक्त कोर्ट आफ इन्क्वायरी ने जो रिक्मेंड किया था, उसको अधिकांशत: उसी समय तत्काल लागू किया गया, जो उस समय लागू करने लायक था। बाद में इन्होंने पूछा है कि इनके नक्शे के संबंध में कौन सी तकनीक अपनाई गई है जिससे ठीक-ठीक पता लगाने की बात करते हैं और कौन सा मैथॉड़ अपनाते हैं।
हमारे यहां एक सी.एम.जी.डी.आई.एल. है, जो सर्वे भी करता है और उसकी थिकनैस कितनी है, वे उसका डि्रलिंग के बाद सर्वे करते हैं। डि्रलिंग के बाद उनको जो मिलते हैं, उसके आधार पर वे मार्किंग करते हैं और आगे इस सम्बन्ध में क्या और इसे अधिक ठीक ढंग से किया जाये ताकि इस तरह की घटनाएं न हो सकें, ऐसे कोई उपाय हों। इसमें निश्चित रूप से आगे अच्छी तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस दिशा में हम लोग कुछ सोच रहे हैं कि किस ढंग से हम इसे और ठीक से काम हो सके। एक तो मैं यह कह दूं कि दुर्घटनां नहीं होंगी, यह तो शायद मैं नहीं बोल सकता, परन्तु दुर्घटनाएं कम से कम हों, जान-मान का खतरा कम से कम हो, ऐसी कोई व्यवस्था हो, इस सम्बन्ध में हम चिन्ता कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय : चर्चा तो पूरी हो गई है।
प्रो. रीता वर्मा : एक मिनट, मैं आपका संरक्षण चाहूंगी, क्योंकि मैं मंत्री जी के जवाब से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं। अभी जो इसमें डि्रलिंग की बात कही, वही तो फिजीकल वैरीफिकेशन है। उसके लिए जो हर जगह दीवार में डि्रलिंग करके कैसे पता कर सकते हैं। आपके पास कोई टेक्नोलोजी नहीं है, टेक्नोलोजी इवोल्व करने के लिए आप क्या कर रहे हैं?…( व्यवधान) अध्यक्ष जी, मैं आपका संरक्षण चाहती हूं। मेरा दूसरा सवाल था…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): The former Minister has made an allegation and the present Minister did not reply to her satisfaction. … (Interruptions)
प्रो. रीता वर्मा : प्रियरंजन जी, मैं कोयला क्षेत्र की प्रतनधि हूं और एक मैम्बर हूं। माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपका संरक्षण चाहती हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : देखिये, यह प्रश्नकाल जैसा नहीं होता है। आपको मैंने मौका दिया, आपने अपनी बात रखी, मंत्री जी ने उत्तर दे दिया तो प्रश्न खत्म हो गया।
प्रो. रीता वर्मा : बस १० सैकिण्ड की बात और है। मैं सिर्फ यह चाहती हूं कि जिन लोगों ने लोक सभा को जान-बूझकर गुमराह किया है, इस सर्वोच्च सदन को गुमराह करने की धृष्टता की है, मैं आपसे रिक्वैस्ट करना चाहती हूं कि उन लोगों केखिलाफ सरकार क्या एक्शन ले रही है? मैं आपका संरक्षण चाहती हूं कि आप सरकार को निर्देश दें कि जान-बूझकर जो गलत जवाब लोक सभा को दिया गया है, उसके लिए क्या कार्रवाई मंत्रालय करेगी? इसके सम्बन्ध में जरा उनको निर्देश दिया जाये, मैं आपका इस मामले में संरक्षण चाहती हूं। क्योंकि यह देश का सर्वोच्च सदन है, अगर इसी को बड़े धड़ल्ले के साथ गलत जवाब दिया जाये तो फिर और क्या हो सकता है, इसलिए मैं आपका संरक्षण चाहती हूं। मैं मंत्री जी से यह अनुरोध करना चाहती हूं कि जिन लोगों ने गलत जवाब दिया, उनके खिलाफ आप क्या कार्रवाई कर रहे हैं?…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Speaker, Sir, I seek your indulgence. … (Interruptions) The hon. lady Member very rightly alleged that the Government has misled the House by giving a wrong reply. The Government continues to mislead the House. … (Interruptions) Therefore, while supporting the lady Member, I demand that the Government should react immediately. … (Interruptions)
प्रो. रीता वर्मा : ये गलत बात बोल रहे हैं। मैंने पहले भी कहा कि इसमें मंत्री का कोई कसूर नहीं है, क्योंकि मंत्री को जो तथ्य दिये गये, वही उन्होंने उसका जवाब दिया,लेकिन जिन आफिसर्स ने गलत जवाब दिया, उनको दण्ड मिलना चाहिए।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): ये गलतबयानी कर रहे हैं। फोर्मर कोयला मंत्री वर्तमान मंत्री के खिलाफ आरोप लगा रही हैं, यह बहुत गम्भीर मामला है।…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय, हमारा कार्यस्थगन प्रस्ताव है।
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