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Lok Sabha Debates

Alleged Interference By The Judiciary In The Jurisdiction Of Prime Minister’S ... on 3 August, 2005

Title: Alleged interference by the judiciary in the jurisdiction of Prime Minister’s Office श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, आज मैं एक अति गंभीर और महत्वपूर्ण विषय जिससे देश में असाधारण स्थिति उत्पन्न हो रही है, उस ओर न केवल सदन बल्कि आपका और केन्द्रीय सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। मंत्रिमंडल में कैसे सदस्य रखे जायें, इसका मानदंड निर्धारण यदि सुप्रीम कोर्ट या न्यायपालिका करने लगेगी तो प्रधान मंत्री के विशेषाधिकार का क्या होगा ?

13.00 hrs. क्या यह न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं है? मैं यह जानना चाहता हूं कि यह जो विषम परिस्थिति पैदा हो रही है जबकि न्यायालय, विधान पालिका तथा कार्य पालिका का कार्यक्षेत्र भारतीय संविधान के तहत अलग-अलग है, बंटवारा किया हुआ है, सुनिश्चित किया हुआ है। इसीलिए मैं जानना चाहता हूं क…( व्यवधान)

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : क्या तेलगी को फाइनेंस मनिस्टर बना दें ? …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: No such interruptions will be allowed.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Mr. Devendra Prasad Yadav, you make your submission.

… (Interruptions)

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : दागी प्रतिपक्ष के नेता का मामला भी सुप्रीम कोर्ट से तय हो जाएगा।…( व्यवधान) इसलिए ऐसा मत बोलिए। विषय बहुत गंभीर है।…( व्यवधान)

__________________________________________________________________ * Not Recorded.

श्री राम कृपाल यादव (पटना) : आप भी घेरे में आ जाइएगा।…( व्यवधान) एक-दूसरे पर आरोप लगाकर अपने महत्व को कम मत कीजिए।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : राम कृपाल जी, आप बैठ जाइए।

देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं ऐसा मानता हूं कि संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय प्रक्रिया तथा परम्परा में प्रत्यक्ष रूप से न्यायपालिका के हस्तक्षेप और कहीं-न-कहीं न्यायपालिका पिछले ६ महीनों से लगातार किसी-न-किसी मुद्दे पर लक्ष्मण रेखा लांघने का काम कर रही है। आखिर इसकी बहस कहां होगी? आप बोल रहे हैं। अध्यक्ष जी, आप संसदीय लोकतंत्र के संरक्षक हैं। इसीलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप संसदीय लोकतंत्र के संरक्षक की हैसियत से इस देश में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधान पालिका अपनी-अपनी सीमाओं में रहेंगी या एक-दूसरे में टकराहट शुरू होगी ? यह बहुत विषम परिस्थिति है। इसीलिए मैं यह सवाल उठा रहा हूं कि यह किसी व्यक्ति और दल से जुड़ा हुआ सवाल नहीं है और आपका इस पर नियमन चाहिए। इस पर केन्द्रीय सरकार का क्या रुख और सरकार का क्या रवैया है? इस पर सभी माननीय सदस्यों और सभी दलों के नेताओं की राय भी आनी चाहिए। यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। मल्होत्रा जी, आपको सूट करता है तो आप बोलते हैं लेकिन क्या होगा यदि ज्यूडशियरी एक्टिविटीज इसी दिशा में चलें तो हम संसदीय कर्तव्य करने वाले नकारा साबित हो जाएंगे। इसका मतलब हम लोग अपना संसदीय कर्तव्य निर्वहन करने में पूर्णत: विफल हैं। इसलिए संविधान की सारी धाराओं के रहते हुए, भारतीय संविधान में सारे प्रावधानों के रहने के बावजूद भी न्यायपालिका का हस्तक्षेप हो रहा है। यह अतिक्रमण है। इसीलिए अध्यक्ष महोदय, मैं आपका विशेष ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं क्योंकि आप न केवल हमारे सदन के विद्वान अध्यक्ष हैं बल्कि आज की तारीख में आप संसदीय लोकतंत्र के महान संरक्षक हैं। इसीलिए क्या संसदीय लोकतंत्र बचेगा या इस में अतिक्रमण होगा? प्रतदिन आप देख रहे होंगे। अब कानून बन रहा है। कहते हैं कि संसद कानून तभी बनाए जब उस पर खर्च का ब्यौरा सरकार स्पष्ट करे। न्यायपालिका के जरिए क्या-क्या अंकुश लगाया जा रहा है? हम सदन में बोलना नहीं चाहते हैं क्योंकि आप रोक देंगे नहीं तो हम समझते हैं कि कुछ माननीय सदस्यों को संसदीय लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लेना चाहिए।…( व्यवधान)

     

MD. SALIM : One former Chief Justice has said that 20 per cent of the Judges are corrupt… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Except the submission of Mr. Devendra Prasad Yadav, nothing will be recorded.

(Interruptions)…* श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : संसदीय लोकतंत्र को महफूज़ रखने के लिए हम लोगों को चाहे कोई भी कुर्बानी देनी पड़े लेकिन इस तरह का संकल्प माननीय संसद सदस्यों के द्वारा लिया जाना चाहिए। संसद में संकल्प पारित होना चाहिए कि हम संसदीय लोकतंत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, हस्तक्षेप और भारतीय संविधान में दिये गये प्रावधानों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस आशय का एक प्रस्ताव संसद में पारित होना चाहिए और इस पर आपका नियमन होना चाहिए। यही मेरी आपसे विनती है कि आप ऐसी विषम परिस्थिति को देखते हुए, आप ऐसी एक्सट्रा-ऑर्डिनरी सिचुएशन जो उत्पन्न हुई है, उस पर आपका नियमन जरूर होना चाहिए।…( व्यवधान)

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : ये जो चाहे सो बोलते रहें, ऐसे नहीं होगा। न्यायपालिका को अपना कार्य करने दें।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए।

SHRI RUPCHAND PAL (HOOGHLY): Sir, while I associate with my colleague Mr. Devendra Prasad Yadav… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Mr. Ram Kripal Yadav, please take your seat. Your statement is not being recorded. Please co-operate with the Chair.

SHRI RAM KRIPAL YADAV : Sir, I co-operate with the Chair.

MR. SPEAKER: You think so, but you do not.

Now, only Mr. Rupchand Pal’s statement will be recorded.