Rajasthan High Court - Jaipur
Smt. Priya Saini W/O Shri Ravi Saini vs State Of Rajasthan on 19 February, 2021
Author: Satish Kumar Sharma
Bench: Satish Kumar Sharma
HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN
BENCH AT JAIPUR
S.B. Criminal Miscellaneous Application No. 258/2020
in
S.B. Criminal Misc. Petition NO. 3670/2020
1. Smt. Priya Saini W/o Shri Ravi Saini, Aged About 23
Years, R/o Maliyon Ki Dhani, Jaysinghpura Khor, Tehsil
Jaipur, District Jaipur, At Present R/o Plot No. 173, T-
Plant Colony Kalwar Road, Hathoj Jaipur, Rajasthan.
2. Mukesh Saini S/o Shri Ramnaryan Saini, Aged About
27 Years, R/o Plot No. 173, T-Plant Colony Kalwar
Road, Hathoj Jaipur, Rajasthan.
----Petitioners
Versus
1. State Of Rajasthan, Through P.p.
2. Director General Of Police, Rajasthan, Police Head
Quarter, Jaipur.
3. The Station House Officer, Police Station Kardhani,
Jaipur West, Jaipur.
4. Mr. Ravi Saini S/o Shri Kailash Chand Saini, R/o Dhani
Khilatiya, Gram Nangal Jaisa Bohra, Police Station
Karghani, District Jaipur.
5. Mr. Kailash Saini S/o Shri Bodu Ram, R/o Dhani
Khilatiya, Gram Nangal Jaisa Bohra, Police Station
Karghani, District Jaipur.
6. Mr. Indraraj Saini S/o Shri Shrawan Lal, R/o Dhani
Khilatiya, Gram Nangal Jaisa Bohra, Police Station
Karghani, District Jaipur.
7. Mr. Suresh Saini S/o Shri Galka Ram, R/o Ganesh
Nagar, 4Th Sitawali Phatak, Benar Road, Jaipur.
----Respondents
For Petitioner(s) : Mr. Narendra Singh Hada
For Respondent(s) : Mr. Ramesh Chodhary, PP
(Downloaded on 19/02/2021 at 09:55:33 PM)
(2 of 3) [CRLMA-258/2020]
HON'BLE MR. JUSTICE SATISH KUMAR SHARMA
Order
19/02/2021
धारा 482 दण्ड प्रकरक्रिरिया ा सया संसंह संहिहिता ा कता के हित संहिहित प्र प्रसहितप्रस्तुहित एा कलत एकलपुत एकलपीठ दाया संठ दांडडा क कांडिक विकांडिक विध रियाचिा का ा सया संखरिया 3670/2020 में त एकलपाररहित आदता केश ठ दांडदनाया संा क 03.09.2020 ा कता के त एकलपप्रस्तुनांडिक वि्वललोा कन संहिता केहितप्रस्तु रिय संहि कांडिक विकांडिक विध प्राार्वना त एकलपत्र मपत्र मूल रियाचिा का ा कता के प्राईांडिक विता केट प्रईवेट प्रतरियारेट प्रत्यर्थी रक्रिम 4 लगारियहित 7 ा की ओर ा सता के त एकलपता केश का करिया गरिया संहि।।
संहिमनता के कांडिक विदान अधधांडिक विकहिता प्राारेट प्रत्यर्थीगण ा की ब संहिा स ा सप्रस्तुनुत एकलपी हितारा त एकलपत्राांडिक विलुत एकलपी ा का अांडिक विललोा कन का करिया।
कांडिक विदान अधधांडिक विकहिता प्राारेट प्रत्यर्थीगण ा की दलुत एकलपीलें संहिदलीलें हैं का क मपत्र मूल रियाचिा का ा की रियािुत एकलपी ी याची पप्ररिया ा स।नुत एकलपी प्राारेट प्रत्यर्थी-प्रईवेट प्रतरियारेट प्रत्यर्थी रकांडिक वि ा स।नुत एकलपी ा की कांडिक विांडिक विासंह संहिहिता त एकलपईवेट प्रतनुत एकलपी संहि। ी है जलो कबना हितलाा क तलाक ललरियता के रियािुत एकलपी मप्रस्तुा कता केश ा स।नुत एकलपी ा कता के ा साार अांडिक वि।ध रूत एकलप ा सता के र संहि र संहिुत एकलपी संहि।। दलोननों रियािुत एकलपीगण ा कता के ा सया संबया संध अांडिक वि।ध संहिलोनता के ा कता के ा कारण ांडिक विता के का का सुत एकलपी प्रा कार ा का त एकलपप्रस्तुतलाक लला स ा सया संरक्षण प्राप्रापहित ा करनता के ा कता के अधधा कारुत एकलपी न संहिकारी नहीं संहिदलीलें हैं , ी याची परर भीुत एकलपी उन् संहिें मपत्र मूल रियाचिा का में त एकलपाररहित आदता केश ठ दांडदनाया संा क 03.09.20 ा कता के दारा त एकलपप्रस्तुतलाक लला स ा सया संरक्षण प्रदान ा करनता के ा कता के आदता केश त एकलपाररहित का करियता के गरियता के संहिदलीलें हैं, जी है जा सा कता के रियािुत एकलपीगण अधधा कारुत एकलपी न संहिकारी नहीं संहिदलीलें हैं। अहित: मपत्र मूल रियाचिा का में त एकलपाररहित त एकलपपत्र मूांडिक वि्वांडिक विहितेट प्रत्यर्थी आदता केश ठ दांडदनाया संा क 03.09.20 ा कलो ांडिक विाी याची पत एकलपा स तलाक ललरिया ी है जाना आांडिक विशरिया क संहि।। उन् संहिनोंनता के अत एकलपनता के ा समार्वन में कनमन न्रियाी याची परिया क दृ दृषटान्हित त एकलपता केश का करियता के-
1. Indra Sarma Vs. V.K.V. Sarma (2013) 15 SCC 755
2. Anchi Kumari Vs. State of Rajasthan & Ors.
S.B. Cr. Misc. Petition No. 6602/19 (Rajasthan High Court)
3. Kusum & Anr. Vs. State Of U.P. & Anr.
Writ C No. 53503/2016 Order Date 09.11.2016
Writ C NO. 6681/2020 Order Date 25.02.2020
(Downloaded on 19/02/2021 at 09:55:34 PM)
(3 of 3) [CRLMA-258/2020]
5. Asha Devi & Anr. Vs. State of U.P. & Ors.
Writ C NO. 18743/2020
उकहित दलुत एकलपीलनों ा कता के ा सया संदभी्व में त एकलपत्राांडिक विलुत एकलपी एांडिक विया सं प्र प्रसहितप्रस्तुहित न्रियाी याची परिया क दृ दृषटान्हितनों ा का अांडिक विललोा कन का करिया।
कांडिक विदान अधधांडिक विकहिता प्राारेट प्रत्यर्थीगण दारा प्र प्रसहितप्रस्तुहित न्रियाी याची परिया क दृ दृषटान्हितनों में प्रकहितत एकलपाठ दांडदहित कांडिक विधधा क स्थिकहित ा कता के ा सया संबया संध में कांडिक विांडिक विाद ा की ा कलोई गप्रस्तुया संी है जाईश न संहिकारी नहीं संहि।, लता केका कन मपत्र मूल रियाचिा का में त एकलपाररहित आदता केश ठ दांडदनाया संा क 03.09.20 में रिय संहि प्रसत एकलप दृषट कनदनिर्देश संहि। का क ा सया संबया संधधहित ारानाधधा कारुत एकलपी ा समप्रस्तुचिहित ी है जाया संि ा कता के त एकलपशिाहित रियािुत एकलपीगण ा की ा सप्रस्तुरक्षा ा सप्रस्तुकनचनिश्चिहित ा करनता के ा कता के तलाक ललए कांडिक विधध-अनप्रस्तुा कपत्र मूल आांडिक विशरिया क कनांडिक विारा क ा कारिय्वांडिक विा संहिुत एकलपी ा करेंगता के, ा साार संहिुत एकलपी रिय संहि भीुत एकलपी प्रसत एकलप दृषट ा कर ठ दांडदरिया गरिया संहि। का क रिय संहि आदता केश का का सुत एकलपी प्रा कार ा की दुत एकलपीांडिक विानुत एकलपी और रौी है जदारुत एकलपी ा कारिय्वांडिक विा संहिुत एकलपी में आडता के न संहिकारी नहीं आरियता केगा और ऐा सुत एकलपी ा कारिय्वांडिक विा संहिुत एकलपी कांडिक विधध-अनप्रस्तुा सार ा सया संत एकलपाठ दांडदहित ा की ी है जारियता केगुत एकलपी।
इन प्रसत एकलप दृषट कनदनिर्देशनों ा कता के र संहिहितता के हुए मौी है जदा प्राारेट प्रत्यर्थीगण ा कता के संह संहिहितनों त एकलपर ा कलोई कांडिक वित एकलपरुत एकलपीहित प्रभीाांडिक वि त एकलपडनता के ा की ा सया संभीाांडिक विना न संहिकारी नहीं संहि।। रियठ दांडद रियािुत एकलपीगण ी याची पप्ररिया ा स।नुत एकलपी हितारा मप्रस्तुा कता केश ा स।नुत एकलपी नता के ा कलोई अत एकलपराध ा काररहित का करिया संहि। हितलो उना कता के जिलार ा समप्रस्तुचिहित आत एकलपराधधा क का करियता के ी है जानता के त एकलपर ा कलोई रलोा क न संहिकारी नहीं संहि। , ा साार संहिुत एकलपी रियठ दांडद मौी है जप्रस्तुदा प्राारेट प्रत्यर्थीगण ा कता के का कन् संहिकारी नहीं कांडिक विधधा क अधधा कारनों ा का उं का उललया संघन हुआ संहि। हितलो ांडिक विता के ा समप्रस्तुचिहित दुत एकलपीांडिक विानुत एकलपी/रौी है जदारुत एकलपी ा कारिय्वांडिक विा संहिुत एकलपी ा करनता के ा कलो प्रसांडिक विहितया संत्र संहिदलीलें हैं। ऐा सता के प्रसत एकलप दृषट कनदनिर्देशनों ा कता के र संहिहितता के हुए त एकलपपत्र मूांडिक वि्वांडिक विहितेट प्रत्यर्थी आदता केश ठ दांडदनाया संा क 03.09.20 ा कलो ांडिक विाी याची पत एकलपा स तलाक ललरियता के ी है जानता के ा की ा कलोई आांडिक विशरिया कहिता न संहिकारी नहीं संहि।। तलाक लल संहिाी है जा प्र प्रसहितप्रस्तुहित प्राार्वना त एकलपत्र उत एकलपरलोकहित ा सया संप्रता केक्षण ा कता के ा साार कन प्रसहिताररहित का करिया ी है जाहिता संहि।।
(SATISH KUMAR SHARMA),J Mittal /38 (Downloaded on 19/02/2021 at 09:55:34 PM) Powered by TCPDF (www.tcpdf.org)