State Consumer Disputes Redressal Commission
L.I.C. Of India vs Rita Devi on 3 October, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/411/2018 ( Date of Filing : 05 Mar 2018 ) (Arisen out of Order Dated 30/01/2018 in Case No. C/149/2015 of District Jaunpur) 1. L.I.C. Of India Lucknow ...........Appellant(s) Versus 1. Rita Devi Jaunpur ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER PRESENT: Dated : 03 Oct 2024 Final Order / Judgement (सुरक्षित) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ अपील संख्या-411/2018 (जिला उपभोक्ता आयोग, जौनपुर द्वारा परिवाद संख्या-149/2015 में पारित निणय/आदेश दिनांक 30.01.2018 के विरूद्ध) 1.
लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इण्डिया, ब्रांच आफिस-1, उमरपुर हरिबंधनपुर मछलीशहर रोड, फैजबाग, जौनपुर द्वारा ब्रांच मैनेजर।
2. मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इण्डिया, ब्रांच आफिस-1, उमरपुर हरिबंधनपुर मछलीशहर रोड, फैजबाग, जौनपुर।
3. सिनियर डिवीजनल मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इण्डिया, डिविजनल आफिस, जीवन प्रकाश, पोस्ट बैग नं0-1155बी, 12/120, गौरीगंज, भेलूपुर, वाराणसी।
द्वारा डिप्टी सेक्रेटरी, एल.आई.सी. आफ इण्डिया, जोनल आफिस (लीगल सेल), हजरतगंज, लखनऊ।
अपीलार्थीगण/विपक्षीगण बनाम रीता देवी पत्नी स्व0 संजय कुमार यादव, निवासिनी मौजा देहजुरी, पोस्ट सिकरारा, जिला जौनपुर।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी समक्ष:-
1. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री संजय जायसवाल। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री राजेन्द्र कुमार यादव। दिनांक: 03.10.2024 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
1. परिवाद संख्या-149/2015, रीता देवी बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम तथा दो अन्य में विद्वान जिला आयोग, जौनपुर द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 30.01.2018 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई अपील पर अपीलार्थीगण तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्तागण को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
2. विद्वान जिला आयोग ने परिवादिनी के पति श्री संजय कुमार यादव के पक्ष में जारी दो बीमा पालिसियों पर बीमाधारक की मृत्यु के पश्चात क्रमश: बीमा राशि अंकन 5,00,000/-रू0 तथा अंकन 50,000/-रू0 प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए गए परिवाद को स्वीकार करते हुए उपरोक्त धनराशि अदा करने के लिए आदेशित किया है।
3. परिवाद के तथ्यों के अनुसार परिवादिनी के पति द्वारा चार बीमा पालिसी प्राप्त की गई थी, जिनका विवरण निम्न प्रकार है :-
'' 1. पालिसी संख्या-281196303 बीमित राशि अंकन 1,00,000/-रू0 दिनांकित 28.9.1994.
2. पालिसी संख्या-282467281 बीमित राशि अंकन 2,00,000/-रू0 दिनांकित 10.8.2004.
3. पालिसी संख्या-283426427 बीमित राशि अंकन 50,000/-रू0 दिनांकित 28.2.2005.
4. पालिसी संख्या-284705595 बीमित राशि अंकन 5,00,000/-रू0 दिनांकित 22.11.2005.''
4. उपरोक्त चारों बीमा पालिसियों का प्रीमियम नियमित रूप से अदा किया जाता रहा है। बीमाधारक के सीने में बाईं तरफ अचानक दर्द हुआ और दिनांक 7.2.2006 को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। परिवादिनी नामिनी है, इसलिए बीमा क्लेम प्रस्तुत किया गया। बीमा निगम द्वारा केवल एक बीमा पालिसी संख्या-281196303 दिनांकित 28.9.1994 के लिए अंकन 1,73,530/-रू0 का भुगतान किया गया। शेष तीन बीमा पालिसियों के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया।
5. बीमा निगम का कथन है कि बीमा पालिसी संख्या-283426427 बीमाधारक की मृत्यु के समय कालातीत थी, इस पालिसी का प्रथम प्रीमियम अगस्त 2005 में देय था, इसके बाद दिनांक 7.2.2006 को बीमाधारक की मृत्यु हुई है। यह पालिसी दिनांक 28.2.2005 को ली गई थी, जिसका प्रथम प्रीमियम अगस्त 2005 में देय था। बीमाधारक की मृत्यु दिनांक 7.2.2006 को हुई है, इसलिए यह पालिसी रद्द कर दी गई, इसके बाद यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि दिनांक 18.8.2005 से दिनांक 16.9.2005 तक चिकित्सीय अर्जित अवकाश प्राप्त किया गया था। चिकित्सीय अवकाश के तुरन्त पश्चात बीमाधारक ने दिनांक 22.11.2005 को अपनी बीमारी एवं चिकित्सा के तथ्य को छिपाते हुए पालिसी संख्या-284705595 बीमा पालिसी अंकन 5,00,000/-रू0 की प्राप्त की, जिसके तुरन्त पश्चात बीमाधारक की मृत्यु हो गई और गहन जांच के पश्चात यह तथ्य उजागर हुआ कि बीमाधारक द्वारा बीमारी के तथ्य को छिपाते हुए धोखा देकर पालिसी प्राप्त की गई थी।
6. पक्षकारों की साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात विद्वान जिला आयोग द्वारा उपरोक्त वर्णित निर्णय/आदेश पारित किया गया।
7. इस निर्णय/आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गई है कि पालिसी संख्या-281196303 की बीमा राशि अंकन 1,73,530/-रू0 का भुगतान दिनांक 18.7.2006 को कर दिया गया है। शेष पालिसियों के संबंध में क्लेम भुगतान का कोई अनुरोध नहीं किया गया न ही औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। परिवादिनी द्वारा परिवाद संख्या-153/2010 विद्वान जिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसका निस्तारण दिनांक 27.11.2012 को किया और क्लेम फार्म प्रस्तुत करने का आदेश पारित किया तथा बीमा निगम को क्लेम के निस्तारण के लिए आदेशित किया, इसके बाद दिनांक 27.12.2012 को क्लेम फार्म प्रस्तुत किया गया, जो बीमा पालिसी संख्या-283426427 एवं पालिसी संख्या-284705595 के संबंध में क्रमश: 50,000/-रू0 तथा अंकन 5,00,000/-रू0 के लिए था। बीमा क्लेम इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि प्रथम पालिसी, जो अंकन 50,000/-रू0 के लिए थी, वह कालातीत थी और दूसरी जो अंकन 5,00,000/-रू0 के लिए थी, वह बीमारी के तथ्य को छिपाते हुए प्राप्त की गई थी। आगे यह भी कथन किया गया कि पालिसी संख्या-282467281 के लिए भुगतान अंकन 2,10,018/-रू0 दिनांक 22.11.2014 को भुगतान किया जा चुका है। इस प्रकार इस अपील के विनिश्चय के लिए केवल दो विनिश्चायक बिन्दु उत्पन्न होते हैं :-
1. प्रथमत: यह कि क्या पालिसी संख्या-283426427 कालातीत हो चुकी थी ?
2. द्वितीयत: यह कि क्या पालिसी संख्या-284705595 बीमारी के तथ्य को छिपाते हुए प्राप्त की गई ?
8. अनेक्जर सं0-18 पर पालिसी संख्या-283426427, जो अंकन 50,000/-रू0 के लिए है, का विवरण मौजूद है, इस विवरण के अनुसार इस पालिसी पर प्रीमियम प्राप्त होने का कोई उल्लेख नहीं है। परिवाद पत्र में चार बीमा पालिसियां प्राप्त करने का कथन है, परन्तु प्रीमियम भुगतान का विवरण वर्णित नहीं है। परिवाद पत्र में कहीं पर भी उल्लेख नहीं किया गया कि इस पालिसी के लिए प्रीमियम का भुगतान किस माध्यम से किया गया। विद्वान जिला आयोग ने भी प्रीमियम के भुगतान के संबंध में अपने निर्णय में कोई उल्लेख नहीं किया है। इस पीठ के समक्ष भी इस पालिसी पर प्रीमियम के भुगतान के संबंध में कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए यह पालिसी कालातीत थी, इस पालिसी पर कोई भी बीमा क्लेम देय नहीं है। पालिसी संख्या-284705595 के संबंध में एक अवधि तक, जिसका उल्लेख ऊपर किया गया है, चिकित्सीय अवकाश लेने एवं भर्ती होकर इलाज कराने का कथन किया गया है, परन्तु इलाज से संबंधित कोई दस्तावेज पत्रावली पर माजूद नहीं है, इसलिए अंकन 5,00,000/-रू0 के भुगतान के संबंध में दिया गया आदेश विधिसम्मत है। तदनुसार प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार होने योग्य है।
आदेश
9. प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 30.01.2018 इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि बीमा पालिसी संख्या-283426427, बीमित धनराशि अंकन 50,000/-रू0 के संबंध में पारित आदेश अपास्त किया जाता है तथा पालिसी संख्या-284705595, बीमित धनराशि अंकन 5,00,000/-रू0 के संबंध में पारित आदेश पुष्ट किया जाता है। शेष निर्णय/आदेश यथावत् रहेगा।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY] MEMBER