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Lok Sabha Debates

Need For Clarification For Inclusion Of ''Naik'' Caste Of Rajasthan Listed Under ... on 10 March, 2015

Sixteenth Loksabha an> title: Need for clarification for inclusion of 'Naik' caste of Rajasthan listed under both Scheduled Castes and Scheduled Tribes.

श्रीगजेन्द्र सिंहशेखावत (जोधपुर) : अध्यक्ष महोदया, एक बहुत पिछड़ी हुई गरीब जाति नायक राजस्थान में निवास करती है। मैं उनके 60 सालों के दर्द को आपके साथ बांटना चाहता हूं। इसलिए आपका थोड़ा सा समय का संरक्षण चाहता हूं। पौराणिक रूप से जो नाग, निषाद, यक्ष प्रजाति के लोग हैं, उस प्रजाति से यह जाति आती है और ऑस्ट्रेलाइट प्रजाति की अन्य जातियां भील, गरासिया, कोल में से एक नायक जाति भी है। इन सारी जातियों को भारत सरकार की अनुसूची में एसटी के अंतर्गत दर्ज किया गया है। नायक समाज के लोगों की संस्कृति, रीति-रिवाज, पहनावा, परिधान सब कुछ एसटी के अनुरूप है। भारत सरकार के ट्राइबल डिपार्टमैंट ने वर्ष 2003 में एक डौक्यूमैंट्री बनाई थी जिसमें नायक जाति को एसटी की जाति मानते हुए प्रदर्शित किया था। इसके अतिरिक्त राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी वर्ष 2008 के अपने एक फैसले में इसे एसटी जाति के अंतर्गत माना था। इसके साथ ही 1871 के क्रिमिनल जनजातियों के एक्ट में भी इस जाति को क्रिमिनल जनजाति मानते हुए उसके अधीन रखा गया था।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत सरकार का जब गजट नोटिफिकेशन हुआ, जब राजस्थान की अनुसूची  बनाई गई, उस अनुसूची में इस समाज को 57वें नंबर पर रखा गया, इसे एस.टी. का दर्ज किया गया। इस जाति को एस.सी. में भी 10वें नंबर पर दर्ज किया गया, इस कारण उहापोह की स्थिति बन गई। कुछ स्थानों पर इस समाज के लोगों को एस.टी. का सर्टिफिकेट दिया जाता है जबकि कुछ स्थान पर एस.सी. का सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, एक ही परिवार के सदस्य को एक ही स्थान पर कभी एस.सी. और कभी एस.टी. का सर्टिफिकेट दिया जाता है। वस्तुतः यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि जब इंग्लिश और हिन्दी में गजट का नोटिफिकेशन छापा गया, हिन्दी में तो नायक लिखा हुआ है, लेकिन अंग्रेजी वर्जन जब लिखा गया तब स्पेलिंग में NAYAKA  दर्ज कर दिया गया, जबकि नायका नाम की कोई जाति ऐसी नहीं है। अनेक बार भारत सरकार और राजस्थान सरकार के बीच इस बारे में स्पष्टीकरण हुआ है और इस स्थिति को ठीक करने के लिए वार्ता हुई है। अनेक बार इसके लिए प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए गए हैं। लेकिन उहापोह की स्थिति आज भी विद्यमान है। जिस कारण अत्यंत ही गरीब और पिछड़ी जाति के लोग जो छोटे-छोटे घरों में बहुत ही गरीबी की स्थिति में रहते हैं। उनको उनका जायज हक नहीं मिल पा रहा है। मैं आपके माध्यम से सदन और सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूं। इन लाखों गरीब लोगों के दर्द को समझते हुए इस दिशा में तुरंत निर्णय होना चाहिए।

         धन्यवाद। 

माननीयअध्यक्ष :  श्री देवजी एम. पटेल को श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।